Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 13 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 112

Hooriya:Aap जाइये महारानी देवरानी अपना खाना खाये

Devrani:deedi आप भी चलिए खाना खा लीजिये

Hooriya:nahi देवरानी मई सुल्तान को खिला कर खाउंगी

Devrani;,oho इतना pyar,kahi सुल्तान को कुछ और खिलने का तो नहीं सोच रही है आप

Hooriya:chup कर ..जाओ आप खाना खाओ में तैयार हो जाती हु

Devrani:han अचे से तैयार होना क पहले से घायल सुल्तान फिर से घायल हो जाएँ

Hooriya:Tumhe तो जवान शौहर मिलते हे बोली बदल गयी

Devrani:dedi आप भी na..waise एक बात पुछु

Hooriya:han देवरानी पूछो

Devrani:Bura मत मानिये पर आपका देवर आप पे डोरे डेल जा रहा था और आप उनके डोरे से बचते हुए जा रही थी

भूरिया ये बात सुन कर शर्मा जाती है

Hooriya:ab क्या करू देवरानी ये आज की बात नहीं है जब से शादी कर क आई हु तब से गुल शाह की नियत दुरुस्त नहीं

Devrani:aap क़यामत जो लगती हो वैसे गुलशाह की पत्नी कहा है

Hooriya:usne शादी नहीं की

Devrani:kahi आप क..

Hooriya:nahi नहीं ऐसा कुछ नहीं है हरम में बहुत से है लड़कीअ रखा है उसने मिश्रा में

Devrani:par उन लड़कीओ में वो बात कहा जो आप में है मल्लिका इ जहाँ आप सुल्ताना हो

Hooriya:bass कर तारीफे

Devrani:Waise ये शमशेर नज़र नहीं आरहा

भूरिया ये सुनते हे अपने चेहरे पर सिकन ले आती है

Hooriya:kaha जायेगा ... वही अपने पुराने अड्डे पे ..मैखाने

Devrani:sharab की लत उसकी बुरी है

Hooriya:sirf शराब नहीं कोठे पे भी जाता है है

Devrani:aap उसे समझती क्यू नहीं क ये सब करने से उसके आगे जीवन में विवाह क बाद बुरा असर पड़ेगा

Hooriya:maine तो समझा समझा क थक गयी hu..use नहीं पता उसके इस रवैये से उसको राज गद्दी मिलना मुश्किल हो सकता है

Devrani:man me)ab बेचारा आप से जी जान से प्यार करता है आप प्यार दे दो कही नहीं जायेगा

Hooriya:kya कहा

Devrani:kuch नहीं में ये कह रही हु क आप उसको अचे से समझाइये

Hooriya:Behan मैं और सुल्तान कब से उसे शादी करने कह रहे है 25 साल की उम्र हुई शमशेर की पर वो है क मानता हे नहीं अब तो हमने बोलना हे छोर्र दया है

Devrani:man me)ab बेचारा क्या शादी करे जब डिल आपको दे दया है मुझे लगता है गुल शाह भी आप की मुहब्बत क वजह से हे शादी नहीं की

Devrani:maan जायेगा आज न कल अचे से मनाइये

Hooriya:ab देखो में शमशेर क बचो को देख पति हु क नहीं..

Devrani:hooriya दीदी अभी तो आप जवान है..

Hooriya:matlab..

Devrani:mera मतलब है आप इतनी बूढी तो नहीं हुई आज न कल शमशेर मान जायेगा और शादी करेगा हे

Devrani:man me)aap मां जाओ मल्लिका इ जहाँ तो वो आपको 9 क्या 6 महीने में अपना बचा आपके गॉड के दाल देगा आपको रगड़ क

Hooriya:han अब देखो छोरो तुम जाओ आराम करो में तैयार हो जाती हु

Devrani:ji दीदी आप ख्याल रखे अपना

देवरानी अपने हुजरे में आजाती है जहा पर देवरानी क रहने का इंतेज़ाम था और भूरिया सुल्तान से मिलने की तैयारी में जुट जाती है

इधर रात में हकीम साहब सुल्तान क जख्म की पट्टी बदलने क लये महल के आते है साथ में देवराज भी आते है और सुल्तान की पटी को बदल दी जाती है

हकीम sahab:ab पट्टी मैंने बदल दी सुल्तान अब आप आराम करे

Devraj:Hakeem साहब सुधर हुआ क नहीं कुछ

Hakeem:Maharaj पहले से सुधर है जड़ी बूटी जो हमने दया था उसका असर तो हो रहा है पर धीरे धीरे

Devraj:theek है आप जाये हकीम साहब

हकीम सुल्तान क हुजरे से निकल कर चला जाता है

Devraj:ye शमशेर नज़र नहीं आरहे है

Sultan:Bhai अब लड़का जवान है कही पर रात गुज़र रहा होगा किसी हसीना क साथ

Devraj:par ये तो गलत है सुल्तान आपकी सोच है अगला सुल्तान शमशेर बने पर जनता क्या शमशेर को स्वीकार karegi,janta तो शहज़ादे शान को हे चुनेगी

Sultan,devraj ji..sultan मेरे वाहिद है जनता नहीं मई जिसे चुनूंगा वो अगला सुल्तान होगा

Devraj:theek है जैसी आपकी मर्ज़ी

Sultan:mujhe कुछ शराब पिलाओ

Devraj:par आपके स्वस्थ क लये ठीक नहीं है

Sultan:Mujhe पता है मेरा वक़्त आगया है ..मुझे पी लेने दो

Devraj:aisa नहीं है सुल्तान आप ठीक हो रहे है

sultan:tab तो मुझे शराब पीना हे चाहिए

सुल्तान ताली बजता है दो दसिआ आजाती है

"हुकम मेरे सुल्तान"

Sultan:Mere लये जाम बनाओ

कुछ देर में दसिआ जाम बनाने लगती है और बना कर सुल्तान क सामने पेश कर देती है

Sultan:Ab तुम जा सकते हो

दसिआ बहार चली जाती है

Devraj:zyada नहीं पिए सुल्तान

sultan:uff हो देवराज जी आप भी न ये तो दवा का काम करेगी

सुल्तान जातक कर पीने लगता है

Sultan:aaj का जाम इस शाम क नाम ,आप भी लीजिये देवराज जी

Devraj:nahi मई पीऊंगा नहीं

Sultan:waise आपकी बहिन क बारात कब आ रही है देवराज जी

devraj:abhi तक तो कोई सन्देश नहीं मिला

Sultan:dekhte है कब हमारे बहिन देवरानी की विदाई होती hai..vidai पर तो में और पीऊंगा

Devraj:aap भी न सुल्तान ..वैसे सुल्तान क्या मैंने सही निर्णय लिया

Sultan:kitni बार कहु देवराज जी आपने सही निर्णय लिया है आप सोचिये मत ज़्यादा

Devraj,devrani को भी प्रेम करना हे था तो अपने हे बेटे से कोई और होता तो मुझे ज़रा भी दुःख नहीं होता

Sultan:ab आप एक ृत्त ले कर हे बैठ गए

devraj:Ab क्या करू सुल्तान मेरी बहिन और मेरा अपना भांजा पति पत्नी बन गए और में कुछ कर नहीं सका में लोगो को क्या जवाब दूंगा

सुल्तान अपने जाम को गटकते हुए नशे में धुत हुए जा रहे थे

Sultan,dev राज जी आप न में थक गया समझा क आपको उन दोनों एक दूसरे को पसंद कर रहे है तो करने दीजिये

Devraj:baat पसंद की नहीं बात रिश्ते की है

Sultan:chup करो यार जाम का मज़ा कीर किरा कर दया

देवराज ये सुन कर उसके अंदर एक जोश जाग जट्टी है और अपने होठो को हिम्मत कर क हल्का गुस्सा में बोलता है

Devraj:Sultan मेरे बहिन और भांजे की शादी है तो आप कह रहे उनकी इच्छा है तो ठीक क्या आपके साथ ऐसा हो तो ?

गुस्से में आकर देवराज सुल्तान को जवाब दे देता है

sultan:Ary देवराज जी आप तो गुस्सा हो गए..

सुल्तान फिर अपने जाम को अपने गले से अंदर निगलता है

Devraj:aapne उत्तर नहीं दया

sultan:kis बात का

Devraj:agar मेरे जगह पर आप होते यानि क अगर मल्लिका इ जहाँ भूरिया और शहज़ादे शमशेर अगर एक होने की बात करे तो

सुल्तान ये बात सुनते हे अपने आखे बड़ी कर लेता है और गुस्से से पागल हो जाता है पर फिर उसके आखो क सामने वो दृश्य आता है जब जब देवराज ने सुल्तान को मरने से बचाया

Sultan.devraj ji...(garaz कर)

आप की जगह कोई और होता तो में उसकी ज़बान खींच लेता

Devraj:Sultan मैंने सिर्फ कहा है पूछा है क क्या आप वैसे हे सोचते जैसे अभी सोच रहे है अगर उस स्तिथि में होते तो

सुल्तान क ऊपर नशा चढ़ा चूका था और देवराज क इस सवाल पर थका लगते हुए हसने लगता है

Sultan:hahahaha देवराज जी मेरे भाई हो तुम ये मुमकिन हे नहीं हहहह मल्लिका इ जहाँ भूरिया मर्डर जाएगी पर ऐसा सोचेगी भी नहीं

Devraj:Mujhe पता है मल्लिका जहाँ जैसी सटी सावित्री कोई नहीं पर फिर भी मान लीजिये

Sultan:hahahahaha तुम तो इस बेवकूफाना सवाल क पीछे हे पद गए तो सुनो शायद में दोनों को मार देता या दोनों को मन मर्जीअ करने देता जो वो चाहते पर मई अभी नहीं बता सकता हु क में क्या करता

सुल्तान नशे में भी गुस्सा दिखते हुए सुल्तान पर गरजते हुए कहते है

Sultan:Apne सवाल का जवाब मिल गया ?

Devraj:ji मिल गया सुल्तान आप लेट जाये अगर पी लिए हो तो

Sultan:Mere भाई शुकरिअ मेरी फिक्र करने क लये वैसे तुम दोनों को जान से नहीं मार सकते अब तुम्हे उन दोनों क रिश्ते क मंज़ूर करना क सिवा कोई चारा नहीं

Devraj:shayad अआप ठीक कह रहे है उनका पाप उनके सर

Sultan:ab आप जा सकते है

devraj:jo आज्ञा सुल्तान

देवराज सुल्तान क हुजरे से निकल कर अपने हुजरे में चला जाता है और सुल्तान गुस्स्से से तिलमिला कर उठ खड़ा होता है पर जैसे हे वो उठ कर दोनों टैंगो पैर खड़ा होता है उसे बहुत ज़ोर कर दर्द उसके पीठ क नीचे कमर में होती है सुल्तान सामने रखे गिलास को उठा ता है और ज़ोर से दीवार में दे मरता है

"अअअअअही"

Sultan:Is देवराज ने ऐसा सवाल कर दया क मेरा नशा हे उतर गया

तभी दासी आती है

Dasi:gustakhi मुआफ सुल्तान आप ठीक तो है न..

Sultan:han मई ठीक हु

दासी: आप कहे तो मल्लिका इ जहाँ को आपके खिदमत क लये बुला लू

सुल्तान कुछ सोचने लगते है और कुछ देर बाद

Sultan:Muskan बेगम कहा है?

Dasi:riwaz क हिसाब से सुल्तान आज आपकी खिदमत क लये मल्लिका भूरिया को आना होगा क्यू क वो आपकी पहली बीवी है

Sultan:Riwaz हहह सुनो दासी मेरा मन ठीक नहीं है जाओ और मेरी मुस्कान बेगम को दावत दो आने की

Dasi:par सुल्तान हक़ तो पहले दिन का पहले बीवी का होता है

Sultan:gustaaakhi..dasi मेरी बात समझ नहीं आती क्या?

Dasi:Jaisi आपकी मर्ज़ी सुल्तान..

Sultan:dafa

दासी सुल्तान क हुजरे से निकल कर जाती है और सुल्तान की सबसे छोटी बेगम मुस्कान को खबर देती है क सुल्तान को आपकी ज़रूरत है कुछ देर में में मुस्कान तैयार हो कर सुल्तान क हुजरे में पेश होती है



Muskan:Salam sultan..aapne याद क्या

Sultan:Ji आइये मेरे मेहबूबा मुस्कान बेगम

मुस्कान अंदर आकर सुल्तान क बिस्तर पर कोने पर बैठ जाती है

Muskan:aap ठीक तो है न सुल्तान

Sultan:bas आप क दवा का असर है

Muskan:sab कहते है भूरिया बाजी क दवा का असर है आप मुझे बेहला रहे है

Sultan:uff हो छोरो सब क्या कहते है मई कहता हु मेरी प्यारी मुस्कान कितनी अच्छी है

Muskan:ab हूर जहाँ से प्यारी में कब से हो गयी

सुल्तान मुस्कान को अपने तरफ खींचते हुए चिपका क अपने होठो को उसके कानो को चाटने लगता है

इधर भूरिया तैयार हो कर रसोई से दूध लेती है और सुल्तान क हुजरे क आगे आकर अंदर जाने लगती है तभी दासी हाथ आगे कर क रोक देती है

Dasi:Gustakhi मुआफ हो मल्लिका इ जहाँ पर अंदर सुल्तान क साथ कोई है

Hooriya:ye क्या गुस्ताखी है अंजाम तुम्हे पता है इसका

Dasi:anjaam पता है मल्लिका जहाँ पर अभी सुल्तान क साथ अभी उनकी बीवी मौजूद है और सुल्तान क नियम क मुताबिक़ किसी और को दाखिल नहीं होने दे सकती ह

ये सुनते हे क सुल्तान क साथ कोई और औरत है अंदर भूरिया काँप जाती है और कुछ देर क लये चुप हो जाती है दासी कड़ी हुई अपने सर को झुके थी और गुज़ारिश कर रही थी वापस चले जाने क लये

भूरिया अपने दर्द को दबा कर अपने लैब खोलती है

Hooriya:andar कौन है ?

Dasi:andar मुस्कान बेगम है मल्लिका इ जहाँ

Hooriya:tumhe पता है न क में सुल्तान की पहली बीवी हु और रिवाज़ है पहला दिन सुल्तान क साथ बिताने का मेरा और मेरा हे हक़ है

Dasi:ji मुझे मालूम है मल्लिका मैंने सुल्तान से गुज़ारिश की क आपको बुला लू पर वो गुस्सा हो गए और मुस्कान बेगम को बुलाने की ज़िद्द करने लगे मैंने उन्हें बताया भी क आज क दिन तो हमेशा आप आती है पर मने नहीं

ये सुन कर भूरिया अपना होश खो बैठ टी है और उसके अपने हक़ खो जाने का दुःख इतना हुआ क उसके आखो से ासु टपक गए

Hooriya:man me)ya खुदा मुझे क्या किस्मत दी इतना सबर की इतनी दवा की सुल्तान क वापसी की वो शख्स मेरा हक़ मार क दूसरे बीवी क साथ अय्याशी कर रहा hai..Maine क्या क्या सपने देख लये थे

Dasi:aap ठीक तो है न मल्लिका इ जहाँ

Hooriya:Theek है कनीज़ कोई बात नहीं पर मुझे अंदर का नज़ारा देख लेने दो

Dasi:par सुल्तान ने सख्त मन क्या है

Hooriya:Sultan को ये बात पता नहीं चलेगी तुम बास मुझे इन्हे देख लेने दो बदले में तुम चाहे जो कुछ ले लो

Hooriya:man में) कही हो न हो मुस्कान को किसी और काम क लये बुलाये हो ग़लतफहमी में मुझे नफरत की बीज नहीं बोनी चाहिए एक बहार देख लेना चाहिए

Hooriya:bolo कनीज़ क्या चाहिए तुम्हे

दासी क मन में लालच आजाती है और वो भूरिया क गले हार को देखते हुए

Dasi:Mallika इ जहाँ आप कहती है तो अंदर जाये पर जल्दी से वापस आजाये वैसे छोटी मुँह बड़ी बात मुझे आपका ये हार बहुत दिनों से पसंद है

भूरिया दासी की बात समझते हुए अपने हाथ ऊपर कर क हार खींचती है और मोतिओं से लड़ी हार दासी को दे देती है

Hooriya:ye लो हार तुम्हारा में अभी आई

भूरिया अपने हाथ में दूध का गिलास लाइ थी उसे कुछ सोचते हुए दासी को हे देना का फैसला करती है

Hooriya:aisa करो ये दूध का गिलास है इसे भी सम्भालो

Dasi:ji ज़रूर मल्लिका इ जहाँ

भूरिया दबे पाँव सुल्तान क आलिशान हुजरे में घुस जाती है और हुजरे में अँधेरा देखा एक परदे क पीछे छुप जाती है जहा से पलंग का नज़ारा पूरा देख उसके आखो से ासु छलक जाते है

परदे क पीछे कड़ी भूरिया देखती है सुल्तान पलंग पर लेते है और मुस्कान बेगम उनके ऊपर अपने बदन को घास रही है

भूरिया का कलेजा फैट जाता है और उसके मुँह से रोने की सिसकी निकलती उस से से पहले भूरिया अपने मुँह को अपने हाथो से धक् लेती है और उसके आखो से ासु अब भी बह रहे थे ,पलंग पर सुल्तान है रहे थे और साथ में मुस्कान बेगम भी अपने बदन को रगड़ रही थी सुल्तान से

"आह सुल्तान आप 60 साल क होने वाले है फिर भी आपमें कितनी गर्मी है आह इतना गरम बदन"

"आह इधर आ उम् अब तुम्हारी जैसी गरम जवानी मेरे बदन को गरम नहीं तो ठंडा करेगी मुस्कान बेगम"

सुल्तान अब धीरे धीरे मुस्कान क कपडे को उतारने लगते है और उसके दूध को पकड़ कर हाथ से दबाते हुए अपने होठ उसके दूध की घुंडी को अपने मुँह में ले कर चूसने लगता है

"ाः सुल्तान आराम से "

सुल्तान दूध को चूसना छोर ज़ोर ज़ोर से दबाना शुरू कर देता है

Muskan:Sultan क्या मई आपको इतना पसंद हु

Sultan:Muskan तुम मेरे बूढ़े लैंड में भी जान फूक देती हु

Muskan:nahi आप झूट बोल रहे ho..kya में भूरिया बाजी से भी ज़्यादा खूबसूरत हु

Sultan:Tum मेरी सबसे प्यारी बीवी हो इसलिए तो तुम से शादी की

Muskan:nahi आप मुझसे ज़्यादा तो भूरिया को प्यार करते है वो आपकी पहली बीवी है इसलिए तो आपने उन्हें सुल्ताना बनाया

Sultan:Maine नहीं अब घर क हर अफ़राद ये चाहता था क वो मल्लिका इ जहाँ बने सुल्ताना बने तो ताज पहना दया गया वर्ण उसमे वो बात कहा जो तुम में है मेरी जान ..इधर आओ मेरे लैंड को पकड़ो

ये सुनते हे भूरिया क आखो से ासु फुट फुट क गिरने लगते है वो वापस जाने हे वाली थी पर वो ये बात सुन कर रुक जाती है वही परदे क पीछे अपने शौहर और अपनी सौतन की बाते सुन ने लगती है

Muskan:acha सुल्तान आप मुझे खुश कर रहे है बेहला रहे है

Sultan:Muskan तुम तो मेरी जवान बेगम हो सिर्फ 35 साल की हो इसलिए तो में तुम्हे इतना वक़्त देता हु

Muskan:han आप मुझ से 25 -30 साल बड़े हो पर फिर भी मुझे ऐसा लगता है भूरिया मुझसे ज़्यादा खूबसूरत हसीं है उसके लिए तो नौजवान से बूढ़े तक क़तल हो जाते है सिर्फ निक़ाब में देखने क लिए

सुल्तान एक हाथ से मुस्कान क दूध जो माध्यम आकर क थे और सुल्तान क पुरे हाथो में ायजा रहे थे उन्हें पकड़ते हुए दबाता है और दूसरे हाथ से मुस्कान बेगम क गांड को दबा देता है

"ाः सुल्तान धीरे"

"मुस्कान आपके ये छोटे संतरे जो मेरे हाथ में आजाते है इनको चूसने में जो मज़ा है वो कही नहीं और आपके ये छोटे गोलाकार गांड आह क्या कहना"

"सब तो कहते है में पतली हु मेरे बदन में खाना नहीं लगता "

"मुस्कान बेगम आप का बदन ऐसा है क इसे याद कर क हिन्द में बहुत तरसा हु मई"

"क्या ये सच है सुल्तान"

"हाँ बेगम "

"क्या आपको भूरिया की याद नहीं आई "

"अब भूरिया की जवानी को तो मैंने चूस कर ढीला कर दया अब वो पहले जैसी नहीं रही "

ये सुनते हे भूरिया अपने मुँह पर हाथ रख कर सिसक कर रोने लगती है

Sultan:Hooriya अब बूढी और बहुत भरी हो गयी है जिस तरह से तुम मेरे ऊपर हो अगर वो आजाये तो मेरी जान अभी निकल जाये

ये सुन कर मुस्कान बेगम क होठो पर मुस्कान आजाती है

और उधर भूरिया अपने आखे फाडे रोये जा रही थी

Sultan:Hooriya को में अब गॉड में भी नहीं उठा सकता इतनी भरी हो गयी है उसके गांड इतने बड़े है क दोनों हाथो से पकड़ो तो हाथो में नहीं आते उसके चुचिअ इतनी बड़ी हो गयी क उसके पेट तक नाभि तक लटकती है और एक हाथ में चुकी ले कर दबाना भी मुश्किल है ..मोती हो गयी है बूढी भूरिया..

भूरिया ये सुन कर रट हुए अपने निक़ाब क कपडे से अपने मुँह पोछती है

Hooriya:man me)Sultan आपके लिए मई हर रोज़ तरसी आपके लिए रोज़ दवा की आपके सल्तनत को संभाली और आप याद मुस्कान को कए ..में बूढी हो गयी मोती हो gayi..itni क आप संभाल नहीं सकते

ये सोच कर भूरिया और रोने लगती है

Muskan:Oh तो मेरी काम लम्बाई है और पतली हु और मेरे दूध छोटे है और चुतर आपके हाथ में समां जाते है इसलिए मुझे पसंद करते hai..mujhe इन बातो क लये तो राणीअ हस्ती है क मेरे अंदर हुस्न नहीं

Sultan:mujhe कमसीन केलिए पसंद hai..Hooriya जैसी भरी भरकम बूढी नहीं

परदे क पीछे कड़ी भूरिया से अब सांस लेना भी मुश्किल होते जा रहा था अब कुछ समय वो और रूकती तो सुल्तान क सामने जा कर पूछती क वो ऐसा क्यू बोल रहे है

भूरिया दबे पाँव अपने ासु पोछते हुए बहार आजाती है जहा पर उसे दासी मिलती है अपने आसुओ को पोछते हुए

Hooriya:kaneez इस बात की भनक भी नहीं लगनी चाहिए और इस दूध को ले जा कर फेक देना

भूरिया वह से दौरना शुरू करती है और सीधे अपने हुजरे में जा कर रूकती है और अपने देश को मन कर देती है अंदर आने से जब तक वो न कहे अपने हुजरे का दरवाज़ा बंद करती है और अपने निक़ाब को उतार कर फेकते हुए

"आआआए "

भूरिया अपने निक़ाब क बाद अपने अंदर पहने हुए काफ्तान को उतार कर फेकने लगती है और धीरे धीरे अपने जवानी को छुपाये हुए लिबास को उतार कर ब्राज़िएर और जांघिए में आए जाती है रट हुए सिसकते हुए अपने पलंग पर पेट क बल लेट जाती है और तकिए से अपना मुँह धक् कर रोने लगती है और सुल्तान की कही हुई हर बात को याद करने लगती है

Hooriya:man me)Kya में इतनी मोती इतनी भद्दी हो गयी हु क्या अब में बूढी हो गयी हु क्या मेरे अंदर वो बात नहीं रही जो पहले थी

भूरिया ये सोचते हुए रट हुए सिसकते हुए आईने क सामने जाती है और अपने आपको देखती है



Hooriya:han में मोती हो गयी हु मेरे दूध हद्द से ज़्यादा बढ़ गए है और लटक गए है



"सुल्तान ठीक कहते है अब में बूढी हो गयी हु अब मेरे अंदर कोई बात नहीं"

और फुट कर रोने लगती है



"ये मेरे पेट बहार निकल गए है मेरे जाँघे चुतर इतनी भरी हो गयी है"



"सुल्तान सही कहते है में पीछे से भी इतनी भद्दी और मोती हो गयी है भला मुझे सुल्तान क्यू पसंद करेंगे जब उनके हरम में एक से एक कच्ची काली है"

और दौड़ कर रट हुए फिर से अपने पलंग पर जा कर रट हुए उल्टा लेट जाती है

"सुल्तान आपको मैंने अपने जान से भी ज़्यादा चाहा आपकी हर मन मानी बर्दाश्त की इसका सिला आपने अपने बूढी बीवी की बुराई कर क निकल दी"

"सुल्तान आपको में दिन रात याद की पूरी ज़िन्दगी हर जुंग में आपकी सलामती की दवा की पर आप मुझे नहीं मुस्कान बेगम को याद कए आपने मेरा दिल चकनाचूर कर दया सुल्तान आप मेरे डिल क भी सुल्तान थे पर आपने मेरे सौतन से मेरी बुराई कर क मेरा प्यार अपनी इज़्ज़त आपने खो दिया सुल्तान"

भूरिया रोये जा रही थी और उसके आसुओ क धरा बह रही थी जो अब पुरे तकिये को गिला कर दी थी

"सुल्तान आप चाहहते तो

मेरी खामिआ मुझसे कहते पर आप को तो कच्ची काली हे पसंद है "

रट हुए आधी रात हो जाती है पर भूरिया क आखो से नींद गायब थी उसे खुद भी पता नहीं चलता उसे कब नींद आई और वो थक कर नींद क आग़ोश में चली जाती है

गहतराष्ट्रा

गहतराष्ट्रा में ख़ुशी का माहौल था आज पुरे दिन की बारात की तैयारी क बाद सब अपने अपने कक्षा में आराम कर रहे थे बद्री और श्याम रुक गए थे क्यू क सुबह हे बरात पारस की ओरे जाने वाली थी बलदेव की बारात

बलदेव अपने कक्षा में अपने मित्रो बद्री और श्याम संग हसी मज़ाक कर रहे थे और उधर राजपाल अपने कक्षा में लेते हुए सोच रहे थे तभी राजपाल क दरवाज़े पे किसी की आवाज़ आई

Jeevika:beta राजपाल सो गए क्या

राजपाल उठ खड़ा होता है और अपने कक्षा क दरवाज़े पे आकर

Rajpal:maa आप इतनी रात गए सब ठीक तो है

Jeevika:mujhe तुम्हारी चिंता खाये जा रही थी तुम ठीक तो हो

Rajpal:maa में ठीक हु आये अंदर

जीविका अंदर आकर एक कुर्सी पर बैठ जाती है और राजपाल पलंग पर जा कर

jeevika:beta नींद नहीं आरही क्या ,सो जाते कल सुबह बरात भी जाना है पारस

Rajpal:maa आप भली भांति मेरी प्रस्थिति समझती है भले हे में आपके कहने अनुसार बलदेव और उसके माँ क रिश्ते को मान लय और कल बारात जा कर विवाह में सम्मिलित में भी हो जाऊंगा पर आप हे सोचे एक पति अपने पुत्र और अपने पत्नी की विवाह क पक्ष में कैसे रह सकता है

Jeevika:beta तुम इतना मत सोचो ..इस समय अपनी जान की सोचो बलदेव ने पहले हे तुम्हारी सजा फांसी सुना दी पर भगवन ने मेरी सुन ली और तुम क़ैद से आज़ाद हो गए

Rajpal:Beta ऐसी आज़ादी का क्या जब मुझे पुरे जीवन इस महल में एक ऐसे बाप की तरह जीना होगा जो अपने बेटे और अपनी पत्नी का विवाह करवा रहा है

Jeevika:beta बुरा मत मान न पर शायद तुम्हारी हे गलती थी जिसके वजह से देवरानी जैसी सटी सावित्री अपने पुत्र से रिश्ता जोड़ी ,,मई नहीं चाहती क मेरा बीटा पुराणी बातो को ले कर दुखी रहे तुम्हारे पास तुम्हारी पत्नी षुरूश्ती है अभी भी मई तो यही कहूँगी क अब षुरूश्ती को ऐसा खुश रखो क उसके पेअर नहीं डगमगाए

Rajpal:han माँ शायद तुम सही कह रही हो

Jeevika:to समय व्यर्थ न करो और पुराणी बातो को भूलते हुए षुरूश्ती को क्षमा कर दो उसने भी बलदेव का साथ परिस्थिति को देखते हुए दी

Rajpal:man me)maine उसके लिए देवरानी को पूरी जीवन ठुकराता रहा और वो अपने जान बचने क उपहार में अपने पति क विरुद्धा हो गयी मुझे ये उम्मीद नहीं थी षुरूश्ती से क वो बलदेव और देवरानी क रिश्ते को अपना लेगी

Jeevika:socho मत में जा कर षुरूश्ती को अंदर भेजती हु उसे सम्भालो नहीं तो कही वो भी हाथ से न बेहाथ हो जाये

इतना कह कर जीविका अपने बहु षुरूश्ती से मिलने जाती है और हर बात समझा कर अपने पति की सेवा करने क लये और पुराणी बातो को भूल कर एक नए जीवन का शुरुवात राजपाल और षुरूश्ती करे इस बात पर ज़ोर देते हुए षुरूश्ती को अपने बेटे राजा राजपाल क कक्षा में भेज देती है और खुद अपने कक्षा में जा कर सो जाती hai,shurushti जैसे राजपाल क कक्षा क दरवाज़े पैर पहुँचती है तो उसके पेअर कांपने लगते है और बीते दिनों क दृश्य उसके आखो क सामने आजाते है कैसे वो पहले सेनापति सोमनाथ से चूड़ी थी फिर उसके बाद पिछले रात तो शमशेर ने भी षुरूश्ती को पेल दया था ये सरे दृश्य उसके आखो क सामने आते हे षुरूश्ती को घबराहट होने लगती है

Shurushti:man me)Beete दिनों मुझे सेनापति ने फसा कर जबरदस्ती छोड़ा और पिछले रात तो शहज़ादे शमशेर ने मुझे निचोड़ क रख दया ये बात अगर जिस दिन राजा राजपाल को कही पता चल जाये to..nahi नहीं राजा राजपाल को कौन बताएगा में ऐसा होने नहीं दूंगी

षुरूश्ती अपने लरजते कांपते होठो से अपने पति राजपाल को आवाज़ लगाती है "महाराज क्या में अंदर आजौ"

राजा राजपाल जो अपने बीते हुए दिन याद कर रहा था अचानक आवाज़ सुनते हे अपने सोच से निकलता है

"आजाओ षुरूश्ती"

Rajpal:man me)Maaa ठीक कह रही है मेरी जीवन अब षुरूश्ती हे सफल कर सकती है मुझे उसे क्षमा कर क एक नए जीवन की शुरुवात करनी चाहिए

षुरूश्ती अपने कांपते पेअर से धीरे चलते हुए राजा राजपाल क सामने कड़ी हो जाती है रेशमी लिबास में 48 वर्षीया छोटे कद काठी की महिला षुरूश्ती क भारी दूध और भरा बदन पारम्परिक रेशमी वस्त्र में गज़ब ध रही थी

Shurushti:Namaskar महाराज

Rajpal:Darwaza बंद कर क आओ बैठो

षुरूश्ती मुद कर दरवाज़ा बंद करने जाती है और उसके भरी गांड को राजपाल देख रहा था जो पहले से भरी लग रहे थे

Rajpal:Waise पहले से तुम बदल गयी हो

Shurushti:Wo कैसे महाराज में वैसी हे हु आपकी पहली पत्नी षुरूश्ती जैसे पहले थी वो तो मई बलदेव का साथ सिर्फ इसलिए दी क वो मेरी हे नहीं गहतराष्ट्रा की बहुत साडी स्त्रीयो की इज़्ज़त लूटने से बचा lya..aapko बुरा लगा हो क मैंने बलदेव और देवरानी को उनके रिश्ते को अपना लय हो तो क्षमा कर दे

Rajpal:Mai वो सब भूल गया और में चाहता हु क तुम भी सब भूल जाओ षुरूश्ती ,मई तो ये कह रहा था क तुम बदल गयी हो पहले से ज़्यादा खिली खिली लग रही हो

Shurushti:man me)Pehle से zyada..me पेलने से ज़्यादा खिली हु जो आप कभी ठीक से नहीं कर पाए

Rajpal:tumhara बदन और भर्र गया है षुरूश्ती रानी

Shurushti:Han जो है सब आपका हे है महाराज

Shurushti:man me)ab क्या बताऊ महाराज सेनापति ने अपने 7 इंच लैंड से और शमशेर ने 9 इंच लैंड से मेरी खोख तक खोल दया कल रात अगर एक दो बार और में शमशेर से चुद जाती तो शायद में भी बचे की माँ बन जाती गर्भवती हो कर

Rajpal:man me)Kya में इतना गया गुज़रा हु क अपने पत्नी को संभल नहीं पाया और वो अपने बेटे से ब्याह कर ली

राजपाल षुरूश्ती को ऊपर से निचे तक ताड़ता है और अपने हाथ से षुरूश्ती को अपनी ओरे खींच कर अपने गॉड में बिठा लेता है

"ाः जाओ रानी मेरे गोद में बैठो"

"आह महाराज आराम से "

"महारानी षुरूश्ती क्या आपको लगता है क मई इतना कमज़ोर मर्द हु क मेरी पत्नी भी अपने बेटे से विवाह कर ली"

"कौन कहा महाराज आपसे ऐसा ये गलत है"

"क्या में नामर्द हु षुरूश्ती"

"नहीं महाराज आप में कोई कमी नहीं आप मेरे जीवन क पहले प्यार हो "

राजा राजपाल क अंदर एक ज्वाला जल रही थी देवरानी क भागने क वजह से और वो देवरानी को याद कर क अंदर से क्रोधित हो जाता राजा राजपाल ने षुरूश्ती को गॉड में बैठा कर अपने बाहो में घेर लिया और जकड कर अपने लैंड को षुरूश्ती क गांड पे दबाने लगा

"आह"

"क्या हुआ शुरुहस्ती"

"महाराज कुछ नहीं""

और मुस्कुरा देती है

षुरूश्ती भी अपने गांड को धीरे धीरे हिला कर राजपाल क लैंड को खड़ा करने लगती है राजपाल आगे झुक कर पहले षुरूश्ती क छाती क ऊपर लगे छोटे से ब्लाउज को उतार फेकता है और षुरूश्ती क भरी मम्मी बहार लटक जाते है राजपाल अपने दोनों हाथो से दोनों मम्मो को पकड़ निचोड़ने लगता है "ाः महाराज dheere"shuruhsti की सिसक बढ़ जाती है राजपाल उसके होठो को अपने होठ में ले कर चूसने लगता है और थोड़ी देर चूसने क बाद षुरूश्ती को बिस्तर पर लिटा देता है और खुद उसके ऊपर लेट जाता है और षुरूश्ती को बेतहासा चूमने चाटने लगता है

"ाः महाराज ाः"

राजा राजपाल अब बारी बारी से षुरूश्ती क भरी मम्मो को पकड़ क चुस्त है और अपने मुँह में रख कर दांत से ज़ोर से काटने लगता है

Shurushti:aaah महाराआआअआज नहीं काटे नाहीईई

Rajpal:man me)me दिखता हु में कैसा मर्द हु

राजपाल षुरूश्ती को निचे से भी नंगा कर देता है और षुरूश्ती क दोनों पेअर खोलते हे उसके नज़र षुरूश्ती क छूट क खड़े पे पड़ता है जो पहले से ज़्यादा फैला और गोल लग रहा था जैसे किसी ने षुरूश्ती क छूट में कोई मोती चीज़ घुसा क राखी हो बहुत देर तक

rajpal:man me)shurushti की छूट तो इतनी गोल और मोती नहीं थी क्या षुरूश्ती ने किसी से शारीरिक सम्बन्ध बनाया होगा !

Rajpal:Shurushti रानी आपके छूट तो पहले से ज़्यादा खुले और इसका छेड़ तो बड़ा लग रहा है

Shurushti:man me)ab महाराज कैसे बताऊ शमशेर ने अपने 9 इंच मुसल से इस छूट को भोसड़ा बना दया

Shurushti:wo महाराज आपने हे क्या है ये हाल इसका

राजपाल अपने एक ऊँगली डालता है तो आसानी से घुस जाता है फिर दो ऊँगली डालता है छूट में वो भी आसानी से घुस जाता है और षुरूश्ती क मुँह से छू नहीं निकलती

Rajpal:shurushti पहले तो एक ऊँगली डालने से तुम चिल्ला देती थी पर अब दो ऊँगली डालने पर भी कुछ दर्द नहीं हुआ तुमको

Shurushti:man me)Ab महाराज इस छूट ने 9 इंच का लम्बाई और 3 इंच का मोटाई का शमशेर का मुसल हुल्लाबी लौड़ा निगल लय तो अब ये आप क ऊँगली से क्या आप क लौड़े से भी मई नहीं चिल्लाओ

Shurushti:maharaj दर्द तो बहुत हो रहा है पर आज बहुत दिनों बाद मुझे ये सुख मिल रहा है इसलिए आनंद ले रही हो दर्द को सेह कर

षुरूश्ती बड़े चालाकी से अपने हर बात को छुपा रही थी राजा राजपाल क अंदर ज्वाला बढ़ी थी अपने पत्नी क भागने का और वो अंदर से गुस्सा भी था

Rajpal:aaja षुरूश्ती अब मेरे लौड़े को खड़ा कर

षुरूश्ती राजपाल को लिटा कर खुद उसके निचे बैठ गल्प कर क पूरा 4 इंच का लौड़ा पुरे मुँह में निगल जाती है और चबा चबा कर चूसने लगती है

Rajpal:aah तुमने तो पूरा हे मुँह में ले लय

Shurushti:man me)is मुँह में शमशेर का 9 इंच का लौड़ा ले लय तो नहीं ये तो आसान है

षुरूश्ती खूब चौ से चूसते है और धीरे धीरे लैंड अकड़ जाता है और खड़ा होता है राजपाल उठ खड़ा होता है और षुरूश्ती को पटक कर

Rajpal:ab तुम्हारे छूट का भोसड़ा बनता हु

षुरूश्ती क छूट पर अपना लैंड फसाये जैसे झुकता है तो छूट बिना रोक टोक क पूरा 4 इंच का लौड़ा अंदर जातक जाती है राजपाल अंदर पेलता है पर उसे अंदर छूट की कोई दीवार लैंड पैर महसूस नहीं होता उसे लगता है जैसे किसी खली घर में लैंड घुस गया है.

राजपाल षुरूश्ती क पेअर मोड़ कर धक्के लगाना शुरू करता है पर हर धक्के क बाद न तो षुरूश्ती चीख रही थी और न उसके लैंड पर कुछ महसूस हो रहा तह

rajpal:man me)aisa क्यू लग रहा है जैसे में छूट नहीं कही खली जगह पर धक्के मार रहा हु इतनी ढीली और छूट में इतनी जगह कैसे बानी षुरूश्ती क

अभी 5 मिंट हे हुए थे क राजपाल पानी छोर देता है

षुरूश्ती अब जैसे हे गरम होने लगी थी क उसके छूट में कुछ बुँदे गिरती हुई महसूस की

Shurushti:man me)hey भगवन ऐसा पति दया क पत्नी क गरम होने से पहले हे पानी छोर दया इसने

राजपाल हाँफते हुए बिस्तर पर गिर जाता है

Shurushti:aap ने तो मुझे अधूरा छोर दया आप कहते तो में ऊपर निचे बैठ कर करती आप की इतनी म्हणत करने की उम्र नहीं अब आप 57 वर्ष क हो गए

Rajpal:Shurushti तुम शायद ठीक कह रही हो अब मेरा समय नहीं रहा ,,अब से में इस बात पर ध्यान दूंगा क में धक्के लगा कर नहीं ठाकु और तुम करो बैठ कर ऊपर निचे मेरे लिंग पे तो हम थोड़ी देर और टिक जाते

Shurushti:man me)maharaj आप का समय तो कभी था हे नहीं आपने तो कभी छोड़ा हे नहीं ढंग से मुझे ..अगर में शमशेर से नहीं चूड़ी होती तो जीवन में कभी मालूम हे नहीं पड़ता क असली चुदाई क्या होती है

राजपाल कुछ देर में थक्क क चूर हो जाता है और अपने आखे बंद कए सो जाता है और रानी षुरूश्ती अपने छूट में ऊँगली कर थोड़े देर में झाड़ जाती है और अपने डिल को मार कर सो जाती है

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 113

Shurushti:man me)hey भगवन ऐसा पति दया क पत्नी क गरम होने से पहले हे पानी छोर दया इसने

राजपाल हाँफते हुए बिस्तर पर गिर जाता है

Shurushti:aap ने तो मुझे अधूरा छोर दया आप कहते तो में ऊपर निचे बैठ कर करती आप की इतनी म्हणत करने की उम्र नहीं अब आप 57 वर्ष क हो गए

Rajpal:Shurushti तुम शायद ठीक कह रही हो अब मेरा समय नहीं रहा ,,अब से में इस बात पर ध्यान दूंगा क में धक्के लगा कर नहीं ठाकु और तुम करो बैठ कर ऊपर निचे मेरे लिंग पे तो हम थोड़ी देर और टिक जाते

Shurushti:man me)maharaj आप का समय तो कभी था हे नहीं आपने तो कभी छोड़ा हे नहीं ढंग से मुझे ..अगर में शमशेर से नहीं चूड़ी होती तो जीवन में कभी मालूम हे नहीं पड़ता क असली चुदाई क्या होती है

राजपाल कुछ देर में थक्क क चूर हो जाता है और अपने आखे बंद कए सो जाता है और रानी षुरूश्ती अपने छूट में ऊँगली कर थोड़े देर में झाड़ जाती है और अपने डिल को मार कर सो जाती है

अब आगे...

गहतराष्ट्रा में एक नयी सुबह होती hai,pure गहतराष्ट्रा में ख़ुशी का माहौल था क्यू क आज बलदेव की बरात जाने वाली थी अपनी माँ देवरानी को ब्याह कर लानी बलदेव सुबह उठ कर तैयार होने लगता है साथ हे उसके दोनों मित्र बद्री और श्याम भी ख़ुशी ख़ुशी अपने तैयारी में जुट जाते hai,Raja राजपाल भी बुझे मन से सुबह उठ कर स्नान करता है और अपने बेटे की बरात जाने क लये तैयारी करने लगता hai.ghar की औरते रानी षुरूश्ती और जीविका कमला और राधा से पूजा की तैयारी करवा रही होती है और हर जगह फूलो की महक से वातावरण खुशगवार बना था बहार सेनापति सोमनाथ रथ को फूलो से सजा रहे थे और कई सैनिक सेनापति क साथ घोड़ों को फुलो से सजा रहे थे

Senapati:Bhaio हर घोडा और रथ पुरे फूलो से सजा होना चाहिए जो देखे समझ जाये महाराज बलदेव विवाह करने जा रहे है

Sainik:jo आज्ञा सेनापति हम सब भी सज्ज धज्ज क जायेंगे और और अपने अश्व को भी सजा कर ले जायेंगे

Sainik2:hum तो ऐसा सजायेंगे की पारस वाले हमे देखते रह जायेंगे

सेनापति ये सुन कर मुस्कुरा उठा और सैनिकों को काम समझा कर वह से जाने लगता है

Sainik1:kya कलियुग आयग्य है भाई

Sainik2:mai समझा नहीं

Sainik1:budhu..idhar आओ कान पास लाओ बता ता हु

sainik2:darpok तो तुम हो अब कहो

sainik1:Bhai आज से 18 साल पहले महारानी देवरानी राजा राजपाल की जोरू बन क आई थी और आज वही महारानी देवरानी राजा राजपाल क बेटे की पत्नी बन कर आएगी

Sainik2:han संजोग से इस बार भी गहतराष्ट्रा देवरानी बहु बन क आएगी पर पति बदल कर

sainik1:Baldev तो किस्मत का धनि है

कान में फुसफुसाते हुए कहता hai..sanjyog नहीं है कुछ

Sainik2:wo कैसे भाई

sainik1:Maharani देवरानी जैसी सुन्दर और गठीले शरीर की महिला को अपनी पत्नी बना लय और अब देवरानी का भाई भी अनुमति दे डाई अपने भांजा को अपने बहिन को ले कर सोने का

ये सुन कर दूसरा सैनिक है पड़ता है

Sainik1:daant मत दिखाओ बुद्धू किसी से कहना मत नहीं तो महाराज बलदेव मुझे जान से मार देंगे

Sainik2:maine किसी से कहा तो मेरी जान भी कहा बचेगी वैसे राजा राजपाल मान गए ठीक कए नहीं तो दोनों माँ बीटा भाग कर कही और अपना जीवन जीते पर छोड़ते नहीं एक दूसरे को

sainik1:ab जिस्म की प्यास है दोनों की मिटा रहे है हमे kya..Karne दो जो ये राज परिवार करता है हमे तो अपनी नौकरी और दो रोटी से मतलब है

sainik2:han भाई तुम सही कहते हो चलो अपना काम करते है

सैनिक अपने काम में लग जाते है अंदर परिधान पहन कर बलदेव तैयार होजाता है और तभी उसके कक्षा में षुरूश्ती आती है

Shurushti:tayyar हो गए दूल्हे राजा

बलदेव शर्मा जाता है और धीरे से

Baldev:ji बड़ी माँ

षुरूश्ती ऊपर से निचे बलदेव को देखती है और देख कर

Shurushti:kisi की नज़र नहीं लगे मेरे बचे को मेरी बहु तो तुम्हे देख कर अपना आप खो बैठेगी

Baldev:badi माँ आप भी न

Shurushti:chalo बहार चलो बीटा पूजा की तैयारी हो चुकी है और फिर बरात निकलने का समय भी हो गया है

बलदेव उठ खड़ा होता है

Baldev:maa आप खुश तो है न इस विवाह से

Shurushti:ary मेरा बीटा भला एक माँ अपने बेटे से खुश कैसे नहीं होगी जो देवरानी जैसी बहु को राजपरिवार की बहु बना रहा है

Baldev:maa वो बात नहीं कह रहा हु mai..me ये जानना चाहता हु क्या आप खुश है क मई अपने माँ देवरानी से विवाह किया हु और अब देवरानी क भाई से उसे जीत कर लाने जा रहा हु

Shurushti:tum भी न baldev..Devrani पहले मेरी सौतन थी और अब मेरी बहु हो गयी hai..mujhe दुःख क्यू होगा ..उल्टा अब राजा राजपाल मुझे हे समय देंगे ज़्यादा

षुरूश्ती हस्ते हुए अपना वाकया पूरा करती है

Baldev:Badi माँ देवरानी और में हम दोनों यही चाहते है क हम से हमारा परिवार दूर न हो और हम दोनों क प्यार को आप सब स्वीकार करे

Shurushti:mera भोला बीटा तुम जाओ और उस देवराज से मेरी बहु को जीत कर लाओ दिखा दो क तुम्हारे पास इतनी शक्ति है क तुम देवरानी को संभल सकते ho..chalo आओ मुझे बाकी क रसम भी पूरी करनी है

ये कह षुरूश्ती जल्दबाज़ी के बहार जाती है

और बलदेव खड़ा अभी अभी षुरूश्ती क कहे हुए बात पर मुस्कुराता रहता है

Baldev:man में) क्या दिन है आज का में दूल्हा बना हु और अपनी दुल्हन लेन जा रहा हु जो मेरी माँ है शायद में इस संसार का सबसे भाग्यशाली हु

बलदेव अपने सोच में खोया हे था क क अचानक से उसके कान में

"बलदेव ो बलदेव"

बलदेव अपने सपने से बहार आता है तो देखता है सामने बद्री और श्याम खड़े थे

Badri:kaha खोये हो दूल्हे राजा कही रानी की याद तो नहीं आरही

Shyam:ab भाई दूल्हा अपनी दुल्हन क सपने नहीं देखेगा तो किसके देखेगा

Baldev:arey तुम दोनों न सुधरोगे नहीं चलो बहार सब हमारी प्रतीक्षा कर रहे है

तीनो बलदेव क कक्षा से बहार आते है सीडीओ से उतर कर निचे आने लगते है तो देखते है महल क बीचो बीच पूजा कर रही षुरूश्ती और राज माता जीविका दिखाई पड़ती है और साथ में कई महिलाये थी ,तीनो जा कर पूजा में बैठ जाते है तभी सामने से अपने कक्षा से निकल कर राजा राजपाल आरहे थे और वो अपने परिवार को इकठे देख कर समझ जाता है क बारात जाने से पहले की रसम चल रही hai.rajpal अपने बेटे की ब्याह क बारात की तैयारी देख कर खुश न हो कर कंपनी लगते है और उसका शरीर ठंडा पद जाता है

Jeevika:beta राजपाल वह क्यू खड़े हो आजाओ

राजपाल अपने मन को मरते हुए अपने माँ क कहे अनुसार जा कर सब क साथ बैठ जाता है थोड़े देर बाद पूजा कार्यक्रम ख़त्म होता है और सब बारी बारी से बलदेव की आरती उतारते है और वह बैठी हर महिला महाराज बलदेव को शुभकामनाये देती है और प्राथना करती है क बलदेव अपने पत्नी को सही सलामत वापस गहतराष्ट्रा ले आये

षुरूश्ती अब थाली ले कर कड़ी हो कर बलदेव क माथे पर तिलक लगाती है और बलदेव अपने बड़ी माँ क सामने झुक कर सम्मान देता है और फिर षुरूश्ती क पेअर छूटा है

Shurushti:jeete रहो बीटा ..भगवन तुम्हारा ब्याह अचे से करवा दे और तुम अपने पत्नी महारानी देवरानी को एक बार फिर पत्नी बना कर गहतराष्ट्रा ले आओ

Jeevika:shurushti हैट जाओ बहु में भी अपने बेटे जैसे पोता बलदेव की नज़र उतर लू

जीविका थाली ले कर तिलक लगाती है और अपने पोते का नज़र उतरने लगती है बलदेव झट से अपने दादी क पेअर छूने क लये झुकता है

jeevika:Uth जा बीटा बलदेव मेरे बचे

जीविका क आखो से ासु बह रहे थे जिसे बलदेव उठ ते हे देख लेता है

Baldev:Dadi माँ आप रो क्यू रही है

Jeevika:beta बलदेव मेरा पोता मेरी बहु को लेन जा रहा है ये तो ख़ुशी क ासु है मेरे लाल

जीविका अपने बहो को फैला देती है और बलदेव अपने दादी से गले लग जाता है

Baldev:dadi आप रोये नहीं में सही सलामत महारानी देवरानी को जीत कर इस राजपरिवार की बहु बना कर लौटूंगा पारस से

Jeevika:mere लाल मेरे चिराग तू एकलौता है जिस से उम्मीद है मेरे राजवंश बढंने की भगवन करे तो विजयी रहे और हर परीक्षा में सफल हो

बलदेव जीविका को कंधे से पकड़ कर

Baldev:Raj माता मैंने देवरानी माँ से प्रेम क्या और इसके लये जीवन में मुझे कितनी भी परीक्षा देनी पड़े में पीछे नहीं हटूंगा

Jeevika:dekho सब सच्चा प्रेमी ऐसा होता है

षुरूश्ती हस्ते हुए

"और सच्ची प्रेमिका देवरानी जैसी "

Kamla:Maharaj बलदेव और महारानी देवरानी पति पत्नी क रूप में बहुत अचे लगते है

ये सुन कर वह पर कड़ी सभी महिलाये हसने लगती है और बलदेव का पिता लज्जा से मारा जा रहा था उसके माथे पे पसीने की बुँदे देख सकते थे

Jeevika:ja बीटा अपने पिता से आशीर्वाद ले

बलदेव अपने पिता क पास जाता ही राजपाल असमंजस की स्तिथि में सिर्फ सुन रहा था उसके होठ मानव सिल्ल गए थे

Baldev:Pita जी

आगे बढ़ कर अपने पिता को गले लगा लेता है पर राज पल कुछ समय क लये अपने हाथ सीधा हे रखता है

Baldev:dhanywad पिता जी आपने मुझे और माँ देवरानी क रिश्ते को स्वीकार कर मुझे बहुत बड़ा उपहार दया है मई इसके बदले आपको क्या दू आप कहिये

राजपाल बुझे हुए मन से अपने बेटे बलदेव क पीट पर हाथ रख कर

Rajpal:beta हर बाप का सपना होता है अपनी बहु चाँद सी सुन्दर लाने की अगर मेरे बेटे को देवरानी पसंद है तो मई अपने वंश क लये ये बलिदान तो दे हे सकता हु

राजपाल ये कहते हुए अपने माँ जीविका की ओरे देखता है और जीविका अपने बेटे को ऐसी बात करते हुए देख मुस्कुराती है और हौसला बढाती है इशारे से

Jeevika:beta बलदेव अपने पिता क पेअर छुओ और आशीर्वाद लो

बलदेव निचे झुक कर अपने बाप क पेअर को छूटा है

Rajpal:khush रहो बीटा

Jeevika:ab तुम दोनों बाप बेटे यही समय व्यर्थ करोगे क मेरी पोते की दुल्हन को लेन भी जाओगे

ये सुन कर वह पर सब हसने लगते है

Baldev:Badri ..शयाम चलो अब हमे निकलना चाहिए क्यू पिता जी?

Rajpal:Han बीटा हमे जल्दी निकलना चाहिए पारस क लये

Baldev:Badri सेनापति से कहो हमारा रथ तैयार करे

Badri:Me अभी आया सब देख क

Jeevika:beta इधर आ मुकुट तो पहना दू

बलदेव अपना सर झुकता है और जीविका मुकुट बलदेव क सर पर पहना देती है

सब महाराज बलदेव की जय जय कर कर रहे थे कुछ देर में बद्री और सेनापति सोमनाथ वापस आते है और बलदेव क साथ साडी महिलाये पीछे चलनी लगती है और कई महिलाये गीत गाने लगती है रथ में बलदेव बद्री और श्याम क साथ सवार हो जाता है आगे घोड़े पे सेना पति सोमनाथ और राजा राजपाल बैठ जाते है और पीछे बाराती और कुछ सैनिकों का गट अपने सवारी पे सवार हो जाते है और इन सबको को घेरे हुए हज़ारो की संख्या में गहतराष्ट्रा की जनता "महाराज बलदेव की जय ho"k जय जय कार कर रही थी

Rajpal:Aage बढ़ो सेनापति

सेनापति ज़ोर से चिल्लाता है

"हम पारस क लये निकल रहे है गहतराष्ट्रा वासिओ"

एक सैनिक बिगुल बजता है और धीरे धीरे आगे से घोड़ो पर सवार सोमनाथ और राजपाल क साथ सैनिक धीमी गति से आगे बढ़ने लगते है पीछे रथ चला रहा सैनिक को भी बद्री आगे बढ़ने को कहता है और वो भी अपने चाबुक चलते हुए आगे बढ़ने लगते है.

धीरे धीरे लगभग 500 लोगो की बाराती गहतराष्ट्रा क महल से दूर निकल जाते है और महल क सामने कड़ी जीविका और षुरूश्ती क साथ कमला और रथ जब तक कड़ी रहती है तब तक उनके आखो से सब ओझल न हो जाते है

बलदेव अपने पिता और मित्रो संग अपने ससुराल अपने पत्नी अपनी माँ को लेन क लये एक लम्बे सफर पैर निकल जाता है.

पारस

उधर गहतराष्ट्रा से सवेरे बरात निकल गयी थी और इधर पारस में देवराज बरटीओ क भोजन और विवाह की तैयारी में जुट जाता है सुबह उठ ते he.mahal क बहार मंडप की तैयारी में जुट जाता hai.kuch देर में सुल्तान दास्ताँ महल से बहार आते है और देवराज को काम करते हुए पते है

Dastan:Devraj जी आप क्यू परेशां हो रहे है शहज़ादे शान को कह देते वो इंतेज़ाम कर देता

Devraj:ab सुल्तान जी मेरे बहिन का विवाह है में नहीं करूँगा काम तो कौन करेगा

dastan:hamare पास हज़ारो नौकर चाकर है वो कब काम आएंगे देवराज जी

Devraj:ab में भी कुछ खास नहीं कर रहा वो बास बरटीओ क बैठने का मंडप बंधवा रहा था

Dastan:waise हमने आपके भांजे बलदेव से लड़ने क लये पहलवान का इंतेज़ाम कर लय है

Devraj:kya बात है कौन है वो

Dastan:Wo बहुत भरी पहलवान है 8 फ़ीट कद का सांड है पुरे पारस से ले कर मिश्रा तक उसका सांई नहीं

Devraj:uska नाम क्या है सुल्तान

Dastan:Uska नाम है "दिलशेर पाशा"

Devraj:han नाम तो सुना है कही ये वही पहलवान तो नहीं जो रोम में रोमनिओ क पहलवान को एक ग़ुस्से में जान से मार दया था

Dastan:han ये वही खुखार पहलवान है जिसको हराना मुश्किल हे नहीं नामुमकिन है

Devraj:aapne उसको चुन कर ाचा क्या सुल्तान

Dastan:waise अगर बलदेव हार जाते है दिलशेर से तो ?तो क्या विवाह से पीछे हैट जायेंगे

Devraj:Sultan जी जहा तक मुझे लगता है बलदेव अपने माँ क लये अपनी जान भी दे सकता है वो इतना प्यार करता है और मुझे लगता है क वो जीत जायेगा और मेरी बहिन का जीवन जो सालो से बिखर गया है वो सवार जाये

Sultan:aapki सोच तो अछि hai..waise अगले सुल्तान का ऐलान होने वाला है ऐसा मेरे वाहिद कहा है

Devraj:ab तो वो आप बाप बेटे समझे क अगला सुल्तान कौन होगा पर जहा तक मुझे लगता है सुल्तान मेरे वाहिद ..युवराज शमशेर को हे चुनेंगे

सुल्तान dastan:mera बीटा मेरे वाहिद पागल हो गया है उसे पता है शमशेर एक शराबी कबाबी है वो पूरी दुन्या में अपनी हुकूमत नहीं फैला सकता

Devraj:kshama कीजिये सुल्तान दास्ताँ जी पर इस विषय पर आप अपने बेटे सुल्तान मेरे वाहिद से बात कर लीजिये ये आप का निजी मामला है

Sultan:aap ठीक कहते है देवराज जी आप काम करवाए

सुल्तान दास्ताँ वह से चले आते है महल में और अपने हुजरे में जा कर आराम करने लगता है सुबह सवेरे देवरानी भी उठ गयी थी और सज्ज सवार कर भूरिया का इंतज़ार करने लगती है

Devrani:kab से बैठी हु दीदी आती हे नहीं मुझे उन से बहुत साड़ी बात करनी है

कुछ देर यु हे इंतज़ार करने क बाद देवरानी उठ कड़ी होती है और हुरिया क हुजरे की ओरे चली जाती है और हुजरे क सामने कड़ी देश को देख रुक जाती है

Devrani:dasi ये मल्लिका इ जहाँ कहा है सुबह से नज़र नहीं आई

dasi:wo तो अपने आप को अंदर कक्षा में बंद की है रात से अभी तक बहार नहीं आई

देवरानी चयनित होते हुए

Devrani:man me)aisa क्या हो गया जो अचानक से भूरिया दीदी घर में बंद है

Devrani:me देखती हु क्या हुआ है उनको

dasi:Muaaf कीजिये महारानी देवरानी पर मल्लिका इ जहाँ ने किसी को भी अंदर आने से मन क्या है

Devrani:Tumhari इतनी हिम्मत dasi..wo मेरे दीदी है वो अंदर शायद दुखी है इसलिए उन्होंने अपने आप को बंद रखा है मुझे रोको मत नहीं तो..

दासी डर जाती

dasi:muaaf कीजिये महारानी

देवरानी हुजरे क दरवाज़े क पास आकर दरवाज़े को धक्का देती है पर वो अंदर से बंद था

रात को रट हुए भूरिया सो गयी थी और सुबह जब से उठी तब से सुल्तान क कहे हुए बात को याद कर क रोये जा रही थी तभी दरवाज़े पर थक थकने की आवाज़ आती है

"दीदी ो दीदी ..मल्लिका ीजाहाँ"

रोटी सुबुक्ती हुई लेती भूरिया दरवाज़े की ओरे देखती है और वो इतनी होश में नहीं थी क समझ पति क कौन आवज़ दे रहा है आख़िरकार थोड़े देर बाद भूरिया समझ जाती है ये आवज़ देवरानी का है

भूरिया अपने हाथो से अपने आसुओ को पोछती है

"हाँ देवरानी कहो क्या हुआ"

"दीदी अआप दरवाज़ा खोलिये"

"में कुछ कर रही हु देवरानी"

भूरिया बहाने बनाते हुए कहती है जिसे देवरानी समझ जाती है

"दीदी आप जब तक दरवाज़ा नहीं खोलोगी तब तक में नहीं जाउंगी"

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 114

देवरानी हुजरे क दरवाज़े क पास आकर दरवाज़े को धक्का देती है पर वो अंदर से बंद था

रात को रट हुए भूरिया सो गयी थी और सुबह जब से उठी तब से सुल्तान क कहे हुए बात को याद कर क रोये जा रही थी तभी दरवाज़े पर थक थकने की आवाज़ आती है

"दीदी ो दीदी ..मल्लिका ीजाहाँ"

रोटी सुबुक्ती हुई लेती भूरिया दरवाज़े की ओरे देखती है और वो इतनी होश में नहीं थी क समझ पति क कौन आवज़ दे रहा है आख़िरकार थोड़े देर बाद भूरिया समझ जाती है ये आवज़ देवरानी का है

भूरिया अपने हाथो से अपने आसुओ को पोछती है

"हाँ देवरानी कहो क्या हुआ"

"दीदी अआप दरवाज़ा खोलिये"

"में कुछ कर रही हु देवरानी"

भूरिया बहाने बनाते हुए कहती है जिसे देवरानी समझ जाती है

"दीदी आप जब तक दरवाज़ा नहीं खोलोगी तब तक में नहीं जाउंगी"

Hooriya:man me)mujhe रट हुए देख ली देवरानी तो सवाल करेगी और रोने की वजह पूछेगी और में अपने शौहर क बारे में शिकायत कैसे कर सकती

भूरिया कुछ देर तक सोचती है और देवरानी अब तक दरवाज़ा खोलने का रत लगा रही थी भूरिया कुछ सोचते हुए अपना बड़ा झब्बे जैसा नक़ाब उठा कर पहन लेती है और अपने चेहरे को भी पर्दा कर लेती है



भूरिया जा कर धीरे से दरवाज़ा खोलती है दरवाज़ा खुलते हे देवरानी भूरिया को यु परदे में देख ॉयस्चरतचकित होती है

Devrani:deedi क्या हुआ आपको आप इतना समय क्यू ली दरवाज़ा खोलने क लये

भूरिया थोड़े देर तक चुप हे रहती है फिर अपने भरी गले को साफ़ करते हुए कहती है

Hooriya:wo में इबादत के मशरूफ थी तो कुछ सुनाई नै दया

Devrani:wo सब तो ठीक है पर आपने अपना सुन्दर मुखर क्यू छुपा रखा है

Hooriya:wo बास तैयार हो कर दरबार में जाने का सोच रही थी

Devrani:man me)Baate बदल रही है ज़रूर कुछ दाल में कला है

Devrani:aapki आवाज़ इतनी भरी क्यू है

Hooriya:bolo न देवरानी क्या बात है आओ बैठो

Devrani:mai बैठ जाउंगी पहले मेरे प्रश्न का उत्तर दीजिये आप

Hooriya:wo बास थोड़ी ताब्यात ठीक नहीं

ये कह कर भूरिया अपने पलंग पर जा कर बैठ जाती है और देवरानी उसके पीछे चलते हुए भूरिया क पास में हे बैठ जाती है



devrani:didi आप अपने चेहरे से निक़ाब हटाए

Hooriya:abhi मुझे बहार हे जाना है बोलो न देवरानी तुम भी ज़िद्द करने लगती हो जो काम है वो बताओ

Deedi:aapki दासी ने बताया आप कल रात से अंदर हे है न खायी न पेयी क्या बात है आपको कोई दुःख है

Hooriya:nahi नहीं पगली भला मल्लिका इ जहाँ जो पूरी दुन्या क आधे हिस्से पे राज करती है सुल्ताना को किस चीज़ की कमी होगी जो दुखी होगी

Devrani:deedi आप छुपा रही है मन क आप सुल्ताना है आधे संसार पर आपकी हुकूमत है पर आप भी तो एक मनुष्य है

भूरिया क पास अब कोई चारा नहीं था देवरानी क ज़िद्द क आगे और वो अपने चेहरे क निक़ाब से अपने ासु पोछते हुए निक़ाब उतारती है देवरानी की नज़र भूरिया क फूले हुए आँख पर पड़ते हे देख कर समझ जाती है भूरिया बहुत देर से रो रही थी

Devrani:deedi आप क आखे सूजी हुई है जो आप पक्का रात भर रोई है

Hooriya:nahi नहीं वो तो बास

devrani:aap मुझे अपने बहिन मानती हो और छहपै रही हो मुझसे अगर आप नहीं मानती हो तो कोई बात नहीं में अभी चली जाती हु

ये सुन कर भूरिया बेबस हो जाती है क्यू क देवरानी को वो अपने डिल से छोटी बहिन मानती है

भूरिया को कल रात कही हुई सुल्तान की हर बात याद आती है और उसके आखो से ासु छलक उठ ते है और वो ज़ोर से रट हुए देवरानी क गले लग जाती है

Hooriya:Devrani मुझे अब नहीं जीना मेरी बहना

फुट कर रोटी हुई मल्लिका हूर इ जहाँ को देवरानी अपने हाथ से सहलाते हुए

Devrani:kya हुआ दीदी अआप तो लाखो गरीबो क अन्न डाटा हो आप को ऐसी क्या कमी हो गयी जो आप ऐसा कह रही हो

Hooriya:mat पूछो देवरानी मुझे अपने आप से नफरत हो गयी है अब में बहुत भद्दी और मोती बूढी हो गयी हु

भूरिया रट हुए अपने डिल की ाआवाज़ देवरानी क सामने बयां कर देती है

Devrani:hey भगवन दीदी आप क्या कह रही है अभी आप से गुस्ताखी करने क जुर्म में एक क़त्ल हो गया जो बेचारा पहले से आपके हुस्न का आशिक़ था

Hooriya:puri दुन्या मुझे पसंद करे पर मेरा शौहर नहीं करे तो मेरा जी कर क्या फायदा मेरी बहना

देवरानी बात समझ जाती है क ज़रूर कुछ न कुछ सुल्तान मेरे वाहिद से भूरिया की अन्न बन्न हुई है जिस वजह से भूरिया परेशां हल है

Devrani:aap घबराये नहीं मई हु न आपकी बहिन आप रोये नहीं में सब ठीक कर दूंगी

भूरिया अपने आखो से ासु पोछते हुए

Hooriya:kya तुम सच कह रही हो बहिन

Devrani:han आप का दुःख मेरा दुःख है बहिन आप मुझे विस्तार से बताये क आखिर हुआ क्या

भूरिया अब रोना बंद कर देती है और सीधा बैठ जाती है और देवरानी क आखो में देख कर बहुत हिम्मत जूता कर अपने पति की शिकायत आज ज़िन्दगी में पहली बार करने जा रही थी

Hooriya:Devrani रिवाज़ है क पहली बीवी सुल्तान क हुजरे में पहले दिन रात गुजारेगी पर कल रात जब में पहुँचू तो वह..

Devrani:kya हुआ वह ..

Hooriya:waha मुस्कान बेगम पहले से मौजूद थी

Devrani:acha वो सुल्तान की सबसे छोटी बीवी

Hooriya:han wahi..mujhe इस बात का दर्द नहीं हुआ क मेरे जगह पर मुस्कान बेगम सुल्तान क साथ रात बीते बल्कि इस वजह से हुई जो सुल्तान ने कही मेरे बारे में

यी कहते हुए भूरिया क आखो से ासु फिर से बहने लगते है और देवरानी आगे बढ़ कर भूरिया क आखो को साफ़ करते हुए

Devrani:aap डिल खोल कर बताइए आपका डिल कुछ हल्का हो जायेगा

Hooriya:Sultan हुजरे में मुस्कान क साथ एक बिस्तर पर थे और दोनों मिल कर मेरी बुराई कर रहे थे

Devrani:kya सुल्तान तो आपसे बहुत प्रेम करते है न

Hooriya:ye सुल्तान और बादशाह कभी किसी से मुहब्बत नहीं कर सकते ये तो जिस्म क भूके होते hai,maine तो दिन रात सुल्तान की हुकूमत में अपनी ज़िन्दगी गुज़ार दी और उसका मुझे ये सिला मिला

Devrani:deedi डिल छोटा नहीं करते

Hooriya:Sahi कह रही हु बहिन इतनी मुहब्बत क्या मैंने सुल्तान से में कभी ख्वाब में भी सोच नहीं सकती थी सुल्तान मेरे लिए ऐसे अलफ़ाज़ इश्तेमाल करेंगे

Devrani:kya क्या कह रहे थे सुल्तान

भूरिया: क्या कहेंगे मुस्कान बेगम क जिस्म से खेलते हुए मेरे जिस्म की बुराई कर रहे रहे ..कह रहे रहे में अब बूढी हो गयी हु ..बहुत मोती हो गयी बहुत भरी हो गयी hu..ab वो मुझे वो गॉड में भी नहीं उठा सकते अगर मई उनके ऊपर आगे तो उनकी जान चली जाएगी और तो और उनको तो मुझे देख कर मुझ से जिस्मानी मिलाप करने का भी डिल नहीं करता ..

ये कह कर फिर भूरिया रोने लगती है और अपना सर देवरानी क कंधे पर रख कर सिसकने लगती है

Devrani:deedi सुल्तान ऐसा कहेंगे अआप क बारे में आप जैसी सुन्दर स्त्री जो डिल से भी इतनी सुन्दर है और दिन रत अपने पति क लये प्राथना करती है ..ये तो आशम्भव सा लग रहा है

Hooriya:mera डिल तोड़ दया सुल्तान ने में जख्मी हु देवरानी

Devrani:jo भगवन करता है अचे क लये करता है आप दुखी न हो सच सामने आगया जो बरसो से छुपा था

Hooriya:fir ये झूटी शान क्यू मुझे क्यू बनाया सुल्ताना और क्यू कहते फिरते है क मई उनकी पहली बीवी हु और वो मुझे सब से ज़्यादा मानते है ..शातिर कही क सुल्तान क्या मुँह दिखाओगे खुदा क सामने

devrani:didi आप इस बात क लये जीना कैसे छोर सकती है क्या आप सिर्फ सुल्तान क लये जी सकती है

hooriya:jab मेरा शौहर हे मुझे नापसंद करता hai..mai तो कभी सुल्तान को कभी किसी और औरत से जमा करने क लये नहीं रोका फिर वो कह रहे थे " मुस्कान जो बात तुम में है वो बात मोती बूढी भूरिया में नहीं उसको तो चूस चूका हु में अब उसमे कुछ नहीं मुझे तो कच्ची केलिए पसंद है"

Devrani:aap भूल जाये क आपने कुछ सुना दीदी

Hooriya:ab सुल्तान को काम उम्र की कच्ची केलिए पसंद है मई नहीं

Devrani:Deedi आपको मेरी कसम आप रोना बंद कीजिये ..दासी

दासी बहार से अंदर आती है

Devrani:Mallika इ जहाँ क लये खाना लाओ ..और मेरे कक्षा में गरम पानी भी भिजवा देना

Hooriya:rehne दो बहिन मुझे खाने का मन नहीं

Devrani:dasi जितना कहा उतना करो

Dasi:Ji महारानी

दासी चली जाती है हूर इ जहाँ का खाना लाने

देवरानी मुस्कुरा कर

Devrani:deedi आप को खुश रहना होगा अगर आप टूट गयी तो हम सब का क्या होगा ..आप सोची है में आपको अपनी बहिन मानती हु आप दुखी रही तो में कैसे खुश रह सकती हु ..आप अपने बेटे शमशेर का सोचिये अगर आप नहीं होगी तो उसका क्या होगा कितना चाहता है वो आपको और आप तो सुल्ताना भी है आपको राज पात भी संभालना है आप को हिम्मत करनी है दीदी

Hooriya:tum शायद ठीक कह रही हो बहना

Devrani:abhi आपको मई अपने सुहागरात क किस्से सुनती हु आपको गरम कर दूंगी

भूरिया ये बात सुन कर शर्मा जाती है

Hooriya:dhatt बदमाश कही ki..tu तो है हे बेशर्म

Devrani:ab आपको क्या बताऊ दीदी मेरे सामने से तो सुहागरात क पल ओझल हे नहीं होते रह रह क बलदेव जी याद आते है

भूरिया हस्स देती है

Hooriya:ab अपने बेटे को अपना शौहर बना ली है तो क्या करेगी तू बेशरम

Devrani:ab प्यार और जुंग में सब जाएज़ है मुहतरमा

Hooriya:bhut उर्दू झरने लगी हो

Devrani:bass आपके सोहबत का असर है श्रीमती हूर इ जहाँ

तभी दासी आजाती है और थाली में खाना मेज़ पर रख देती है

dasi:Maharani देवरानी जी आपका गरम पानी आपके हुजरे में रख दी हु

Devrani:dhanywad दासी

दासी चली जाती है और देवरानी खाना भूरिया को खिलने लगती है

थोड़े देर में हे भूरिया अब अपने हाथ से खाने लगती है

Devrani:ab आपका मन हल्का हो गया न दीदी

Hooriya:kya हल्का होगा देवरानी ..जिस सुल्तान क लये में 6 महीने तो कभी साल भर मिलान क लये तरसी वो सुल्तान मुझे इस नज़रिये से देखता है अब तो में ज़िंदा लाश हु बास

भूरिया कुछ देर में खाना ख़त्म करती है

Devrani:ary दीदी मेरा पानी ठंडा हो जायेगा

hooriya:ary हाँ मई तो पूछना भूल हे गयी ये गरम पानी पीती हो क्या तुम

देवरानी सवाल सुन कर अपना सर निचे झुका लेती है और अपने होठ अपने दन्त से दबा कर

"दीदी वो सिकाई क लये"

Hooriya:kaisi सिकाई क्या हुआ है तुम्हे

devrani:sooj गयी है पूरी निचे से

भूरिया जैसे समझती है उसके आखे बड़ी हो जाती है

Hooriya:kya में सही समझ रही हु देवरानी

devrani:ji हाँ आपके जीजा बलदेव ने मेरी योनि सुजा दी है जो सेक रही हु रोज़ नहीं तो अगले सुहागरात में मेरी जान हे ले लेंगे वो

Hooriya:baap रे बाप इतना बेरहम है तुम्हारा बीटा

Devrani:beta नहीं पति है अब वो

hooriya:han बलदेव दिखने में तो सीधा लगता है

devrani:dikhne में सीधा है पर उसका सामान तो 9 इंच मोटा है और तीन इंच चौड़ा है मेरी तो आधी जान निकल देता है वो

भूरिया का ये सुन कर मुँह खुला का खुला रह जाता है

देवरानी इतराते हुए

"दीदी मुँह बंद कीजिये नहीं तो मच्छर चला जायेगा"

Hooriya:mujhe तो तुम्हारे बातो पैर यक़ीन नहीं हो रहा है

Devrani:deeedi अब बलदेव 6 फ़ीट 3 इंच का है तो उसके हिसाब से..

ये कह कर देवरान उठ कड़ी होती है और शर्मा कर

Hooriya:me तो सोची भी नहीं थी क वो इतना बड़ा हो सकता है

devrani:fir आपने असली मिलान का सहवास का मज़ा हे नहीं लिया कभी

Hooriya:dhatt पगली

Devrani:mere बलदेव जितना शक्तिशाली कोई नहीं उस मामले में

भूरिया क मुँह से अचानक से निकल जाता है

"शमशेर भी तो 6 फ़ीट 3 इंच का है"

इस बार देवरानी चौंक जाती है

"बड़ा अपने बेटे का लम्बाई का ध्यान रखती है अप्प"

Hooriya:ary पगली मेरे कहने का मतलब वो भी बलदेव से काम ताक़तवर नहीं है तुमने कहा न बलदेव जैसा कोई नहीं

devrani:man me)Ek बार शमशेर को मिल गयी तुम तो दीदी तुम्हारे छूट की धज्जिया उदा देगा शमशेर है बड़ा बेशरम

Devrani:waise में जाती हु दीदी

देवरानी उठ क चलने लगती है और दरवाज़े पे कड़ी हो कर मुद कर भूरिया क आखो में देख कर

"वैसे भूरिया दीदी आप पाप पुण्य क चक्कर में जीवन में असल प्रेम सुख से हमेशा वंचित हे रहोगी"

भूरिया सुनते हे पुरे बदन में सरसराहट महसूस करती है और जब तक उसके मुँह से

"क्या मतलब देवरानी"

निकला तब तक देवरानी जा चुकी थी और भूरिया सोच में डूब जाती है

Hooriya:man me)kya सच में मई पाप पुण्य गुनाह क चक्कर में ज़िन्दगी जीना भूल गयी हु

उधर देवरानी जा कर अपने कक्षा में अपने छूट की सिकाई करती है गरम पानी से और कुछ देर बाद अपने कक्षा से बहार निकल कर बहार जाने लगती hai.tabhi भूरिया की सौतन नास बेगम मिल जाती है

Naaz:ary महारानी आप बहार क्यू जा रही हो

Devrani:bass ऐसे हे कक्षा में रह कर डिल घबरा रहा है अकेले

Naaz:maharani जी आपकी शादी होने वाली है आपको अभी गैर मर्द क सामने चाहे वो घर क हे हो नहीं निकलना चाहिए

Devrani:han पर मुझे कुछ काम था युवराज शमशेर से

Naaz:kaisa काम में कह दूंगी शमशेर से आप बताये

Devrani:man me)ab इसे कैसे बताऊ क शमशेर क पास ाचा मौक़ा है अपनी माँ को अपने करीब लेन का

Devrani:wo कुछ गहतराष्ट्रा से जुडी बात है इसलिए अकेले में करनी थी कृपया कर क वो मिले तो भेज दीजिये

Naaz:theek है महारानी आप आराम कीजिये में कनीज़ से खबर भेजवा कर आपके पास उसे भेज देती पर याद रहे आखिरी बार उसके बाद आप शादी तक किसी गैर मर्द से नहीं मिलेगी

Devrani:theek है बाबा

देवरानी घूम कर अपने कक्षा में जाने लगती है



नाज़ घूर कर देवरानी क पिछवाड़े को देख कर

Naz:man me)Kya बड़े गांड है इसके

नाज़ आगे निकल जाती है और देवरानी वापस अपने कक्षा में आजाती है थोड़ी देर हे बैठी थी शमशेर दरवाज़े पैर थक थका ता है

"देवरानी खला आपने बुलाया "

"आजाये युवराज"

"सलाम खला उर्फ़ भाबी जान"

ये सुन कर देवरानी मुस्कुरा देती है

Shamshera:kahiye क्या हुक्म है मेरी खला उर्फ़ भाबी का

Devrani:tumhare लिए एक खुशखबरी है

Shamshera:kaisi खुशखबरी

Devrani:ab सोचो क्या हो सकती है

Shamshera:shayad बलदेव क आने की?

devrani:nahi जो तुम्हे सबसे प्यारी है

shamshera:ammi जान की?

devrani:sahi समझे

shamshera:aisa क्या हो गया

devrani:aapki अम्मी जान हूर इ जहाँ बहुत दुखी थी जब में गयी और सुल्तान पर गुस्सा

देवरानी पूरी बात शमशेर को बता देती है और शमशेर को अपने माँ की बुराई सुल्तान दुवारा करने पर गुस्सा आरहा रहा था और दूसरे तरफ एक आस भी जग गयी मन में अपना प्यार अपने माँ क डिल में डालने की

Devrani:ab तुम समझ सकते हो क्या कहना चाहती हु

Shamshera:han मेरे पास मौक़ा है अपने प्यार से अम्मी जान क डिल को जीतने का

devrani:tum तो बहुत तेज़ हो पर धीरे धीरे चलना कही फिसल न जाओ मल्लिका इ जहाँ को पटाने क चक्कर में

Shamshera:mai कोई कच्चा खिलाडी नहीं हु

devrani:beta ये प्रेम का खेल है कोई जुंग या जासूसी नहीं जो तुम आसानी से जीत जाओगे

Shamshera:to आप बताये में क्या करू

devrani:pehle तो दीदी बहुत परेशां है बीते दिन उन्हें कोई घर कर देख रहा था और उनसे बदतमीज़ी की जिसका अंजाम उस व्यक्ति को जान से हाथ धो कर देनी पड़ी

Shamshera:aap कहना क्या चाहती हो

Devrani:deedi भूरिया बहुत बंधी हुई hai..hamesha निक़ाब में रहना अपने ऊँगली तक को सब से छुपा कर रखती hai..sabse पहला काम उनके अंदर आज क समय अनुसार वस्त्र पहन न सजना सवर्ण सिखाओ

Shamshera:dusra क्या काम करना होगा?

Devrani:unhe कोई राज्य में बुरी नज़र से नहीं देखे इसका भी ख्याल रखना होगा

Shamshera:theek है ..तीसरा?

Devrani:unhe विश्वास दिलाओ क वो मोती और भद्दी नहीं और उनकी उम्र अभी ख़त्म नहीं हुई

Shamshera:chautha?

Devrani:ab चौथा तो तुम्हारे ऊपर है क तुम अपने प्यार का अहसास कैसे दिलाते हो ,तुम्हे इस बात का ध्यान रखना होगा क तुम्हारी छवि स्त्री क सामने अछि हो

shamshera:matlab?

devrani:tum जानते हो तुम्हारी अम्मी जानती है तुम्हारे बुरे आदते शराब पीना ,कोठे पर जाना ये सब कोई भी स्त्री ऐसे पुरुष को पसंद नहीं कर सकती जो हर जगह मुँह मरता हो

Shamshera:uff इतना सब कुछ करना होगा ..पर मेरी आदते तो ऐसी हो गयी है क छोर पाना मुश्किल है

devrani:ab तुम्हे मल्लिका इ जहाँ को पाना है तो कुर्बानिया तो देनी हे होगी

Shamshera:theek है आपका शुकरिअ खला जान आपका ये अहसान में कभी नहीं भूलूंगा देखते है मेरे नसीब में क्या hai..waqt हो गया है दरबार में जाने का सब इंतज़ार कर रहे होंगे

दरबार लग चुकी थी सुल्तान मेरे वाहिद सिंहासन पर बैठे सब की चिंता और राष्ट्र हिट में मंत्रीओ क साथ बैठ कर बाते कर रहे थे

सुल्तान मेरे वाहिद क साथ देवराज और सुल्तान दास्ताँ भी बैठे थे और उनके साथ उनका छोटा बीटा शहज़ादे शान भी बैठे थे और अपने बाप और अपने चाचा गुल शाह की बाते सुन रहे थे

तभी शमशेर आ धमकता है

सुल्तान dastan:hamesha की तरह देरी से आये हो शहज़ादे शमशेर

सुल्तान मेरे wahid:baith जाओ जा क शमशेर

इधर परदे क पीछे औरतो की दरबार लगी थी जिसमे भूरिया क साथ सुल्तान मेरे वाहिद की माँ अफसाना बेगम और भूरिया क तीनो सौतने और दोनों बेश्या समां और महनूर थी इनसब क साथ देवरानी भी बैठ अफसाना बेगम जो औरतो क मसले हल कर रही थी सब उन्हें सुन रहे थे बारी बारी से औरते अपने दुःख अपने परेशानी बता रही थी

थोड़ी देर ऐसे हे दरबार चलता है और आखिर कर जितने लोग पारस से मदद क लये आये थे सब को उनका हल मिल जाता है और धीरे धीरे भीड़ काम होने लगती है

सुल्तान मेरे wahid:aaj का दरबार बर्खास्त क्या जाता है

Shamshera:abba जान मुझे कुछ कहना है

सुल्तान मेरे वाहिद :इजाज़त है

Shamshera:Paras वासिओ मेरे अज़ीज़ भइओ और बहनो में आप सब से दरखास्त करता हु और ऐलान भी क आअज और अभी क बाद जिस किसी जे ने मल्लिका जहाँ हूर इ जहाँ पारस की सुल्ताना को आँख उठा कर भी देखा तो सिर्फ उसका हे गर्दन हे नहीं...

उसके पुरे खानदान का क़त्ल कर दया jayega..Jis किसी को को अपने खंडन से मुहब्बत नहीं होगी वो मेरी अम्मी जान को आँख उठा कर देख ले

Gulshah:man me)ab तुम्हारी अम्मी है हे इतनी हसीं क सब की नज़र चली जाती hai..ab क्या मुझे और मेरे खंडन को भी क़त्ल करोगे shamshera..hooriya को देखे बिना तो मुझे नींद नहीं आती

दरबार ख़त्म कर दी जाती है और सारे मंत्री उठ कर जाने लगते है

भूरिया अपने बेटे को बूट बानी हुई परदे क पीछे से देखते रहती है फिर उठ कर अपने हुजरे में चली जाती है कुछ देर में शमशेर भी उठ कर दरबार से बाहर निकल कर अपने अम्मी क हुजरे क तरफ चल देता है

"अम्मी जान क्या में आजौ"

"आजाओ बीटा "

भूरिया क चाँद से मुखड़े को देख कर शमशेर क डिल से एक ठानी आह निकलती है

"सलाम अम्मी जान"

"सलाम बीटा"

Hooriya:baitho बीटा कहा रहते हो आज कल दिखाई नहीं देते

Shamshera:man me)ab कैसे कहु आपकी याद में दिन रात कोठे पर रणदीव की ठुकाई करता हु

शमशेर बैठ ते हु

"वो अम्मी जान वक़्त नहीं मिलता शादी का पूरा इंतेज़ाम करना होता है"

Hooriya:ab तुम कब शादी करोगे बीटा मेरी तमन्ना कब पूरी होगी

Shamshera:man me)jab तुम हाँ कह दो मेरी जान भूरिया तुम से शादी कर लूंगा में

Hooriya:ab तुम 25 साल क हो गए शादी कर लो

शमशेर ताली बजता है और दो कनीज सामने आती है

"हुकुम मेरे शहज़ादे"

Shamshera:Kaneej आप जाए और जल्द से जल्द दर्ज़ी खला को भेजिए

Hooriya:tum हमेशा बात पलट देते हो शादी क बात होते हे

Shamshera:ammi जान बास आप जैसी खूबसूरत कोई मिल जाये फिर कर लूंगा

Hooriya:mai और खूबसूरत बीटा अब तो में बूढी हो गयी

Shamshera:koi कम्बख्त होगा बेवक़ूफ़ जो आपको बूढी कहेगा

hooriya:man me)wo कम्बख्त तुम्हारा बाप सुल्तान मेरे वाहिद है

Hooriya:jhoot

इठलाते हुए कहती है

Shamshera:aapke लये तो लोग क़त्ल हो जाते है

Hooriya:han तुमने क्यू ये ऐलान क्या क मेरे तरफ आँख उठा कर देखने वाले क खानदान को क़त्ल कर दूंगा

Shamshera:q क लोग सुधर नहीं rahe..aap वाक़ई बहुत खूबसूरत हो अम्मी जान



शमशेर अपने माँ क हाथ को चुम लेता है

Hooriya:par ये दरजी को क्यू बुलाया तुमने

तभी सामने से दरजी आजाती है

Darji:shehzade आपने याद क्या

Shamshera:aaye दरजी खला आपसे काम है

Darji:ji शहज़ादे में तो काम हे राज घराने का कपडा सिलना है और क्या कर सकती हु में

Shamshera:bass यही काम करना है अब भी आपको

Darji:kiske कपडे सिलने है

shamshera:meri अम्मी जान क

Hooriya:par शमशेर मेरे पास पहले से बहुत कपडे है

Shamshera:ammi जान आपको और घुट घुट क नहीं जीना है आपको आज क ज़माने क हिसाब से कपडे पहन ने चाहिए

hooriya:par शमशेर

Shamshera:par वॉर कुछ नहीं

Shamshera:darji खला अम्मी जान का नाप ले lijiye..or आअज क ज़माने क हिसाब से Abaya,Niqab,hijab,sameez शलवार, और काफटाण सब सील दीजिये दस दस जोड़े और सब अम्मी क नाप का होना चाहिए इतना झुब्बा जैसा ढीला नहीं

Hooriya:par बीटा ये सब गलत है लोग क्या कहेंगे

Shamshera:aap बेहद खूबसूरत लगोगी ammi..ab में जा रहा हु दरजी खला आप नाप ले लीजिये

darji:ji ज़रूर शहज़ादे अब में इनके नाप ले लू ऐसे कपडे सिलूँगी क लोग कहेंगे क किसी कारीगर में सिले है

शमशेर बहार चला जाता है और दरजी खला भूरिया को खड़ा कर क नाप लेने लगती है..

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 115

Shamshera:darji खला अम्मी जान का नाप ले lijiye..or आअज क ज़माने क हिसाब से Abaya,Niqab,hijab,sameez शलवार, और काफटाण सब सील दीजिये दस दस जोड़े और सब अम्मी क नाप का होना चाहिए इतना झुब्बा जैसा ढीला नहीं

Hooriya:par बीटा ये सब गलत है लोग क्या कहेंगे

Shamshera:aap बेहद खूबसूरत लगोगी ammi..ab में जा रहा हु दरजी खला आप नाप ले लीजिये

darji:ji ज़रूर शहज़ादे अब में इनके नाप ले लू ऐसे कपडे सिलूँगी क लोग कहेंगे क किसी कारीगर में सिले है

शमशेर बहार चला जाता है और दरजी खला भूरिया को खड़ा कर क नाप लेने लगती है..

अपने नाप को पैन पे उतारते हुए दरजी कहती है

darji:Mallika आपका बीटा तो आपके बदन क हिसाब का कपडे सिलने को कहा है पर आप तो हमेशा ढीला ढला पहनती हो

Hooriya..darji खला आप तो जानती हो इतना ढीला पहन ने से लोग मुझ पे गन्दी नज़र डालते है कैसा हुआ पहन ने पे क्या होगा

Darji:waise मल्लिका इ जहाँ मैंने शहज़ादे का ऐलान सुनी उन्होंने तो आप पैर बुरी नज़र डालने वाले क पुरे खंडन को क़त्ल का हुक्म दे दया है

Hooriya:han अब बीटा है मेरा खून तो खौलेगा हे उसका मेरे ऊपर कोई बुरी नज़र डेल

darji:par मल्लिका अब मुझे नहीं लगता किसी मर्द की हिम्मत होगी आपको घूरने ki..aap चाहे तो ये ढीला ढाला झुब्बा छोर कर आज क ज़माने क हिसाब से कैसा हुआ कपडा सिल्वा लें

Hooriya:nahi खला आप शमशेर की बात बिलकुल नहीं मने मुझे दर लगता है कैसा हुआ कपडा पहन ने में आप तो ढीला हे नाप लीजिये

darji:Jaisi आपकी मर्ज़ी मल्लिका इ जहाँ

थोड़े देर में दरजी खला भूरिया माप ले कर चली जाती है जैसे हे वो हुजरे से बहार निकलती है सामने शमशेर बैठा दरजी का हे इंतज़ार कर रहा था

दरजी पर नज़र पड़ते हे शमशेर भाग कर आता है

Shamshera..darji खला एक इल्तिज़ा थी आपसे

darji:kya शहज़ादे

Shamshera:aapko अम्मी क लये चुस्त और उनके बदन से सटे हुए Kaftan,,,Burkha...niqab..hijab और काफ्तान सिलना है और है समीज़ शलवार भी जैसा हिंदुस्तान में पहनते है

Darji:par मल्लिका तो नहीं चाहती वो बहुत डर्टी है

Shamshera:aap मेरा काम कर दीजिये आपसे गुज़ारिश है बदले में आप जो चाहे मांग ले

शमशेर झट से अपने गले में से बेशकीमती हार उतार कर दर्ज़ी को देता है

Shamshera:mujhe पता है अम्मी चुस्त कपडे नहीं पहन न चाहती पर हमे उनका दर हटाना है उनके डिल से

दरजी हार को जल्दी से अपने कपडे में छुपा लेती है

Darji:aapka काम हो जायेगा शहज़ादे

Shamshera..or हाँ ऊपर और निचे से ज़्यादा चुस्त हो

darji:zarur शहज़ादे बास में समझ गयी ..

ये कह कर दरजी खला चली जाती है और शमशेर खड़ा मुस्कुरा रहा था और अपनी पहली कामयाबी पर खुश हो रहा था

शमशेर फिर से भूरिया क हुजरे में जाता है

"अम्मी जान "

"आओ बीटा"

"आपने खाना खाया क नहीं"

"क्या बात है आज मेरी फिक्र बहुत हो रही है"

"फिक्र तो रोज़ होती है पर पूछता नहीं हु"

"तो आज चाँद कहा से निकला "

"बास कही से निकला हो बास ये समझ जाये क चाँद भी आप को देख कर शर्मा जाये आप इतने हसीं हो "

"चुप कर वैसे ये नए अंदाज़ क कपडे सिलने क लये क्यू कह रहे थे तुम दरजी खला को वो भी चुस्त"

"अम्मी जान आप सुल्ताना हो सुल्ताना की मल्लिका हो आप को किसी से डरने की ज़रूरत नहीं लोग आपसे डरते है"

"वो सब तो ठीक है पर इस उम्र में ये सब शोभा नहीं देता"

"माँ मुझे पता है आप श्रृंगार करना चाहती हो सजना सवर्ण चाहती हु पर लोगो क बुरी नज़र क वजह से कर नहीं पति"

"ऐसा नहीं है बीटा"

"ऐसा हे है अम्मी जान आज से जो आँख उठाया आपके तरफ उसका पूरा खंडन मेरे हाथो क़त्ल होगा आप खुल कर जी लीजिये जैसे आपको सजना सवर्ण है वैसे सवारिये "

ये बात भूरिया क आखो में देख कर शमशेर कहता है और भूरिया एक टाक शमशेर को देखे जा रही

shamshera:theek है मई जाता हु अम्मी जान जब भी कोई ज़रूरत हो तो याद कर लें

शमशेर हुजरे से बहार चला जाता है और भूरिया एक टाक देखती रहती है और शमशेर क कहे हुए बात उसके मन में जैसे चुभ गयी थी और उसके बरसो पुराणी तमन्ना जो उसने डिल में दबाई थी उसको ताज़ा कर दया था शमशेर ने

देवराज का साथ सब देते है और सुबह से शाम तक लोग शादी क मंडप और बाराती की तैयारी में लगा देते है शाम होने तक वो मैदान भी तैयार कर लिया जाता है जहा पर बलदेव की भिड़ंत दिलशेर से होनी थी

रात में खाना खा कर सब अपने अपने कक्षा में आराम करने चले जाते है और देवरानी अपने बेटे बलदेव को याद करते हुए सो जाती है और भूरिया देवरानी की दिन में कही हुई बातो को बार बार सोच कर मंथन कर रही थी और हार दार कर सो जाती है बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचे

पारस में एक नयी सुबह होती और इस सुबह गहतराष्ट्रा से आरही बारात पारस क सीमा में घुस रही थी पारस का सीमा पार करते हे सन्देश सुल्तान मेरे वाहिद तक पहुंच ीाता है क बलदेव बारात ले कर पारस आरहा है

सुल्तान मेरे wahid..devraj जी कहा हो अआप

देवराज जो किसी काम में लगा था सुल्तान की आवाज़ सुन कर आता है

मेरे wahid:Suna नहीं आपने बलदेव की बारात पारस में आचुकी अब कुछ देर में हे वो महल तक आजायेगी

Devraj:kya ..वो लोग आगये बहुत जल्दी पहुंच गए

मेरे wahid:barati का इंतेज़ाम सब कुछ हो गया है जा उनके नाश्ते खाना का

देवराज :सब कुछ हो गया है बास वो पहुंचे तो

मेरे wahid:devraj जी बाराती क खातिर दरी में कोई कमी नहीं होनी चाहिए

devraj:to बलदेव की भिड़ंत दिलशेर से आज हे करवा दे ?

मेरे wahid:ab वो लम्बे सफर से आरहे है बलदेव को अगर आज लड़ना है तो आज लड़ ले हमे क्या फ़र्क़ पड़ता है

Devraj:theek है सुल्तान उस से पूछ लूंगा आने पर यदि वो आराम करना चाहे तो वो आराम करने क बाद लड़ सकता है

आज पुरे पारस में ख़ुशी का माहौल था देवराज ने अपने बहिन क शादी का बहुत अचे से इंतेज़ाम क्या था करता भी क्यू न आज देवरानी की दूसरी शादी होने जाने थी और पहली शादी राजा राजपाल से करवा कर देवराज बहुत पचता रहा था

उधर बलदेव अपने बरात ले कर पारस की सीमा को पार कर क महल की ओरे बढ़ रहा था



रथ में बैठा बद्री और श्याम क साथ बलदेव अपने शादी अपने माँ से वो भी दूसरी बार होने पर बहुत खुश था

Badri:bhai अब तो हम तुम्हारे ससुराल आगये भाबी को ले कर आज हे चले जायेंगे

Shyam:q भाई एक दिन रुकने में क्या जाता है पारस कौन सा हम रोज़ रोज़ आएंगे

badri:jaldi से भाबी को ले कर जायेंगे तब तो जल्दी सुहागरात होगा हमारे दूल्हे राजा का भी तो ख्याल करो

Baldev:chup करो यार badri..or श्याम तुम भी न हम 500 लोग आये है बाराती हमे आज क आज सब काम ख़त्म कर क गहतराष्ट्रा वापस लौटना है

shyam:par मेरी ीचा थी थोड़ा घूम लेता

Badri:tum बचे हे रहोगे

Baldev:ab मेरा ससुराल है पारस आना जाना तो लगा हे रहेगा फिर कभी घूम लेना श्याम

shyam:han वो सब तो ठीक है पर पता नहीं कौन से पहलवान से तुम्हारा सामना होता है बलदेव

badri:shyam पहलवान कोई हो हमारे बलदेव सिंह क सामने कोई नहीं टिक सकता खास कर क जब यहाँ प्रेमिका का मामला है

ये सुन कर श्याम और बलदेव दोनों है पड़ते है

Baldev:tum सही कह रहे हो में अपने जान देवरानी क लये किसी को भी हरा सकता hu..me पूरी दुन्या से लड़ लू अपनी माँ को पाने क लये ये तो सिर्फ एक पहलवान है

Badri:lagta है हम महल क करीब आगये

Baldev:thoda धीरे चलो

रथ धीमे गति से महल की ओरे बढ़ने लगता है

इधर महल क अंदर भूरिया देवरानी क कक्षा में आती है

Hooriya:meri बहना तैयार हो जाओ तुम्हारे सनम आगये है

देवरानी खुसी क मरे उठ कड़ी होती है

devrani:kya बलदेव आगये

Hooriya:han घर क सरे मर्द मैदान में इकठे हुए है जहा पर बलदेव और दिलशेर पाशा लड़ेंगे

Devrani:deedi मुझे बहुत डर लग रहा है भगवन करे मेरा बलदेव जीत जाये

Hooriya:hausla रखो अगर तुम्हारा प्यार सच्चा है तो ज़रूर बलदेव जीत कर आएगा और तुम्हे अपना बना लेगा

Devrani:to क्या हम नहीं देख सकते है मैदान जा कर

Hooriya:nahi हम औरते महल क ऊपर से खिड़की से हे देख सकते है

Devrani:theek है चलो ऊपर चले दीदी

Hooriya:bhut जल्दी है अपने आशिक़ को देखने की

Devrani:deedi आप भी न

भूरिया और देवरानी महल क पहले मंज़िल पे चली जाती है और उस हुजरे में जा कर खिड़की क पास जा कर कुर्सी लगा कर बैठ जाती है जहा से मैदान साफ़ नज़र आरहा था

कुछ देर में हे दोनों देखते है घोड़ो और रथ महल की ओरे आने लगते है और कुछ पारसी सैनिक बरटीओ को कुर्सिओं पर बैठने क लये कहते फिर अचानक से देवरानी की नज़र राजा राजपाल पर जाती है

Devrani:man me)Hey भगवन राजपाल भी आया है क्या ये मान गया ये कुछ गड़बड़ न कर दे

Hooriya:kya हुआ क्यों घबरा रही हो

devrani:wo काले घोड़े से उतरे वो मेरे पहले पति राजा राजपाल है

Hooriya:kya?

भूरिया का मुँह खुला का खुला रह जाता है तभी एक रथ महल क ठीक सामने आकर रूकती है और सबसे पहले उसमे से श्याम बहार निकलता है फिर बद्री बहार आता है

Hooriya:to क्या राजपाल तुम्हारे और बलदेव क रिश्ते को मंज़ूरी दे दी

devrani:shayad बलदेव ने मन लय ho..deedi वो देखो बद्री और श्याम उतरे रथ से शायद बलदेव भी इसमें हे है पर वो बहार क्यू नहीं आरहे है

Hooriya:badi बेसबर बन रही ho..or इज़्ज़त से बोल रही हो बलदेव का नाम

devrani:ab तो वो मेरे पति है मेरे जीवन है उनको कैसे इज़्ज़त नहीं दू

hooriya:tumne सब कुछ दे हे दया तो इज़्ज़त क्यू न दो

भूरिया हसी मज़ाक करते हुए तना मरती है

देवरानी तना समझते हु

devrani:aapko किसने रोका है आप भी फ़िदा हो जाओ किसी पे भी और कर लो अपने आशिके की तम्मन्ना पूरी

hooriya:taubah..wo देखो देवराज जी शहज़ादे शान आगये रथ क पास

देवराज रथ क पास जा कर

"आईये महाराज बलदेव जी पारस में आपका स्वागत है"

बलदेव अब रथ से बहार निकलता है जो ऊपर से निचे तक सजा धजा था

Baldev:Maharaj देवराज जी अब तो ये मेरा ससुराल है

Devraj:Pehle आप हमारे पहलवान को हराइये फिर हमारी बहिन आपकी हुई भांजे उसके पहले कोई रिश्ता नहीं

Baldev:mama जी आप बहुत कठोर डिल क हो दो प्यार करने वालो को परीक्षा ले रहे हो पर कोई बात नहीं इस परीक्षा में भी मई सफल हो कर आपकी बहिन को अपना बना लूंगा

Devraj:Wo तो समय हे बताएगा महाराज बलदेव

Shan:salam महाराज बालड़ेव

baldev:pranam शहज़ादे

Devraj:aayie

देवरानी एक टाक अपने पति उर्फ़ बेटे को देखते रहती है

Hooriya:ab तो नज़र झपकाओ मेरी रानी कितना देखोगी

devrani:bass बलदेव जी को जितना देखो और देखने का डिल नहीं करता कितना भाग्यशाली हु में ऐसे नौजवान को अपना पति बना क

उधर देवराज और शहज़ादे शान क साथ बलदेव बद्री और श्याम जा रहे थे रस्ते में राजा राजपाल और सेनापति सोमनाथ मिल जाते है

देवराज क सामने राजपाल हाथ जोड़ कर लज्जा कर प्रणाम करता है

Rajpal:paranam देवराज जी

Devraj:rajpal जी प्रणाम आने में कोई समस्या तो नहीं हुई

Rajpal:nahi

Devraj:man me)agar तुम सही होते राजपाल तो आज मेरी बहिन का ब्याह मुझे अपने भांजे से हे नहीं करनी पड़ती

सेनापति somnath:ab कैसे समस्या हो सकती है जब साथ सोमनाथ था

Devraj:chaliye मैदान की ओरे

Baldev:han चलिए

Devraj:waise बलदेव आप चाहो तो शाम तक या कल हमारे पहलवान से मुक़ाबला रख सकते हो थके हुए होंगे

Baldev:Mama जी मेरा नाम बलदेव सिंह है में थकने क बाद भी दस को पछाड़ सकता हु पहलवानी में मेरे चिंता न कीजिये

देवराज सबको ले कर मैदान की ओरे जाता है जहा पर ुचि कुर्सी पर सुल्तान मेरे वाहिद और सुल्तान दास्ताँ बलदेव और उसके पिता का स्वागत करते है और बैठने क लये स्थान देते है

मेरे wahid:to बलदेव हमारा पहलवान तैयार है क्या आप अभी मुक़ाबला करना चाहोगे

Rajpal:hamare बेटे को किसी तैयारी की आवश्यकता नहीं

Devraj:man me)islye तुम्हारी पत्नी को तुमसे छीन लय तुम्हारे बेटे ने बेशर्म राजपाल

Dastan:waise राजपाल जी आपका बीटा है बहुत हिम्मतवाला हमने बहुत चर्चे सुने है

चारो तरफ से मैदान क लोग इकठे थे बहुत से पारस क दूर दर्ज से आये हुए लोग और बहुत से लोग जो गहतराष्ट्रा से बाराती में आये थे सब मिल कर शोर मचने लगते है

कोई बलदेव बलदेव चिल्ला रहा होता है कोई दिलशेर दिलशेर सब अपने पसंदीदा पहलवान को बुला रहा था तभी बीच मैदान में 8 फ़ीट का ुचा लम्बा और चौड़ा जवान एक हुंकार भर क आता है और अपने छाती को ज़ोर से पीटने लगता है

पूरी भीड़ चिलाने लगती है और इतने भयानक और लम्बे चौड़े इंसान जो किसी रक्षक सा लग रहा था उसे देख क सब "दिलशेर Dilsher"chillaane लगते है

Devraj:Baldev जाओ हमारा पहलवान तैयार है शिकार करने क लये ..

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 116

Rajpal:hamare बेटे को किसी तैयारी की आवश्यकता नहीं

Devraj:man me)islye तुम्हारी पत्नी को तुमसे छीन लय तुम्हारे बेटे ने बेशर्म राजपाल

Dastan:waise राजपाल जी आपका बीटा है बहुत हिम्मतवाला हमने बहुत चर्चे सुने है

चारो तरफ से मैदान क लोग इकठे थे बहुत से पारस क दूर दर्ज से आये हुए लोग और बहुत से लोग जो गहतराष्ट्रा से बाराती में आये थे सब मिल कर शोर मचने लगते है

कोई बलदेव बलदेव चिल्ला रहा होता है कोई दिलशेर दिलशेर सब अपने पसंदीदा पहलवान को बुला रहा था तभी बीच मैदान में 8 फ़ीट का ुचा लम्बा और चौड़ा जवान एक हुंकार भर क आता है और अपने छाती को ज़ोर से पीटने लगता है

पूरी भीड़ चिलाने लगती है और इतने भयानक और लम्बे चौड़े इंसान जो किसी रक्षक सा लग रहा था उसे देख क सब "दिलशेर Dilsher"chillaane लगते है

Devraj:Baldev जाओ हमारा पहलवान तैयार है शिकार करने क लये

बलदेव उठ खड़ा होता है और अपने ऊपर का परिधान निचे उतर कर रख देता है और देवराज क आखो में देख कर

Baldev:Mama जी कौन किसका शिकार करेगा ये तो समय हे बताएगा वैसे देवरानी हर हाल में मेरी थी मेरी हे रहेगी

मेरे wahid:Ye शमशेर कहा रह गया

Dastan:Hamesha की तरह वो वक़्त पर नहीं आता

बलदेव आकर अपने बाप राजपाल क पेअर छूटा है

Baldev:pita जी आशीर्वाद दीजिये

Rajpal:vijayi भाव

बलदेव चल कर जाने लगता है तभी सामने से शमशेर आता हुआ दिखाई देता है

Baldev:Shamshera फिर से देर कर दिन

Shamshera:janab अभी तो आप 8 फ़ीट क दिलशेर को मुक़ाबला कीजिये हमारा छोड़िये

Baldev:Jeetna बलदेव की आदत है

शमशेर बलदेव से गले लग कर

"शाबाश मेरे शेर हिम्मत तो है तुम में अगर तुम कहो तो दिलशेर को कुछ रक़म दे कर तुम्हारी जीत पक्की कर दू "

Baldev:Nahi शमशेर भाई ऐसा वो करते है जिन्हे खुद पर भरोषा नहीं होता

Shamshera:soch लो दिलशेर पाशा बहुत खूंखार पहलवान है और देखो आधे से ज़्यादा लोग दिलशेर दिलशेर चिल्ला रहे है क्यू क वो आज तक कोई पहलवानी हरा नहीं

Baldev:Shamshera मेरी चिंता न करो अब बास देखते जाओ ये बलदेव सिंह राजपूत कैसे इस दिलशेर पाशा की खटिआ कड़ी करता है

शमशेर आकर अपने बाप और दादा क साथ बैठ जाता है और उधर बलदेव मैदान में उतर कर सबसे पहले मिटटी को चुम कर और थोड़ी मिटटी उठा कर अपने माथे पे रगड़ता है

Baldev:hey धरती माँ अपने पुत्र की लाज रख लेना .



6.3 की लम्बाई और चौड़ा सीना वाला बलदेव भी किसी पहलवान से काम नहीं था और अपने 18वे साल में हे अपनी पहलवानी और युधा रणनीति से पुरे हिन्द में नाम कमा लय था

बलदेव धीरे से मैदान में चलते हुए बीच में जाने लगता है जहा पर दिलशेर खड़ा था चारो ओरे से इतने शोर थे मानव कान फट जाये और अधिकतर लोग दिलशेर दिलशेर कह कर चिल्ला रहे the,baldev को देखते हे दिलशेर हसने लगता है जिसे देख बलदेव क चेहरे का रंग उड़ जाता है

Baldev:sahi में ये बहुत भयवा है

Dilsher:ahhahahahaha ये बच्चा मुझसे लड़ेगा हाहाहा तुझे तो में चुटकिओ के मसल दू दूद पीते बचे

दिलशेर अपने बड़ी आखे बलदेव क तरफ झुक कर आखो में ाअखे दाल कर कहता है बलदेव क ऊपर दिलशेर की परछाई पद रही थी और उसके लम्बे और मोठे शरीर क सामने बलदेव बचा हे लग रहा था

बलदेव अपनी आखे बंद करता है और उसे मुस्कुराती हुई देवरानी दिखाई पड़ती है



Baldev:man me)meri प्यारी माँ मेरे सपनो की रानी तुझे पाने क लये तुझे जीवन भर अपनी पत्नी बना कर रखने क लये मुझे इस कहकर जानवर को हराना पड़ेगा ..शक्ति दे माँ

बलदेव अब अपनी आखे खोलता है और इस बार दिलशेर बलदेव क आखो के जलती ज्वाला को देख कर सेहम जाता है

Baldev:Dilsher आज तू बलदेव सिंह से टकराने जा रहा बलदेव सिंह यानि क गहतराष्ट्रा का महाराजा और महाराज बलदेव अपने महारानी को पाने क लये तुझे क्या तुझ जैसे 10 पहलवान को हरा दे

दिलशेर फिर से हस्ता है

"ये कुछ ज़्यादा नहीं हो गया बच्चू "

Baldev:kuch समय में पता चल जायेगा कौन बचा है और कौन बाप

Dilsher:thodi देर में हे धूल छठा दूंगा तुझे बलदेव छोटे

दिलशेर अचानक से अपना हाथ आगे बढ़ता है और अपने बड़े पंजो से बलदेव क गर्दन को पकड़ लेता है और उसे ऊपर एक हाथ से उठा लेता है

Dilsher:hahahahahha बातो से सब कुछ नहीं होता

इधर देवरानी का डिल घबराने लगता है

devrani:hey भगवन दीदी क्या होगा अब

shamshera:kaha था क दिलशेर को खरीद लेते है पर बलदेव जी अपने माँ क प्यार में पागल हे हुए पड़े है

दिलशेर अपने एक हाथ से बलदेव को उठा कर दूर फेक देता है और बलदेव मैदान क आखिर में लोट ते हुए गिर जाता है

"आह यह "अपने गले को ठीक करते हुए बलदेव ज़ोर ज़ोर से सांस लेने लगता है

Dilsher:me तो बच्चा समझ क छोर देता पर आज तेरी लाश चीक कौवी को खिलाऊंगा बड़बोले बलदेव सिंह

दिलशेर लेते हुए बलदेव की तरफ बढ़ने लगता है इधर महफ़िल में बैठे देवराज ये देख कर खुश हो रहा था

Devraj:aapko क्या लगता है राजपाल जी आपका बीटा तो अभी से पास्ट हो gaya..mere बहिन का रिश्ता पाना इतना आसान नहीं

Rajpal:abhi तो खेल शुरू हुआ है देवराज जी

Devraj:dekhte है

इधर खिड़की में बैठी देवरानी क पास घर की साडी औरते आजाती है और देवरानी अपने आँख बंद कए

Devrani:man me)hey भगवन मेरे बलदेव को किसी भी तरह से इस दिलशेर से बचा ले मेरे बलदेव को इतनी शक्ति दे भगवन को वो जीत ले ये जुंग और मुझे भी

देवरानी आखे बंद की थी उधर दिलशेर बलदेव क पास जाता है और अपना भरी पेअर उठा कर बलदेव क छाती पर रख देता है

"क्या हुआ बलदेव सिंह निकल गयी सब हेकड़ी बड़ा आया मुझे धूल चाटने वाला "

दिलशेर एक लात पीठ पर मारता है और बलदेव

खिसक कर दूर जाता है

Baldev:aaaah आए

Dilsher:hahahahahahaha में दिलशेर हु मुझ से जीतना मुश्किल हे नहीं नामुमकिन है



बलदेव तभी खड़ा होता है और अपने बाजु पैर लगे पत्ते को खोल देता है और गुस्से से दिलशेर को देखते हु

"दिलशेर में बलदेव सिंह हु गहतराष्ट्रा का महाराज और में पारस आया हु तो अपनी महारानी देवरानी को जीत कर हे जाऊँगा"

बलदेव दौड़ते हुए जाता है और निचे से फिसल कर दिलशेर क पर पर अपने पेअर से प्रहार करता है दिलशेर अपने हाथ निचे ले जाता तब तक बलदेव दौड़ कर दूसरी तरफ भाग जाता है

"मई इधर हु दिलशेर कहा ढूंढ रहे हो"

बलदेव एक बार फिर तेज़ दौड़ता है और लेट ते हुए फिसल कर दोनों पेअर को दिलशेर क पेअर पर मारता है दिलशेर न तो झुक प् रहा था और न हे बलदेव की तेज़ी से दौड़ का सामना कर रहा था बलदेव बिजली क रफ़्तार से मार कर मैदान क दूसरे कोने में पहुंच जाता

Baldev:man me)ab तेरी कमज़ोरी हे तुझे पराजित करेगी दिलशेर पाशा

बलदेव भागता हुआ जाता है और दोनों पैरो से उठा कर दिलशेर को उठा कर दूर पटक देता है



बलदेव पास रखे भला को उठा कर सीधा निशाना दिलशेर पाशा क पेअर पर मरता है और दिलशेर पाशा क पेअर में भला घुस जाता है और सीधा चित हो कर गिर जाता है

बलदेव दौड़ कर जाता और उसके पेअर पर प्रहार करने लगता है और दिलशेर पाशा जिसकी कमज़ोरी पेअर थी जो अपने वजन को उठाने में नाकाम हो जाती है और पेअर घायल हो जाने पर दर्द से चिल्लाने लग्गता है

इधर खिड़की में बैठी भूरिया देख खुश होती है और देवरानी अब भी हाथ जोड़े भगवन से प्राथना करने में लीं थी

Hooriya:aakhe खोलो देवरानी अपना बलदेव जीत रहा है

Devrani:man me)dhanywad भगवन

देवरानी आखे खोलती है तो देखती है बलदेव लेते हुए दिलशेर को लात और ग़ुस्से से मार रहा है

Baldev:ab बोल दिलशेर कौन बचा है

बलदेव दिलशेर का दया पेअर घुटना से ले कर मोड़ देता है और उल्टा मोड़ते हे हड्डी "फट" से टूट जाती है

वैसे हे बलदेव दूसरे पेअर को भी घुटने से मोड़ देता है और उसके दूसरे पेअर की हड्डी भी बलदेव तोड़ देता है पूरा मैदान अब शांत था सब लोग सिर्फ दिलशेर पाशा की चीखे सुन रहे थे

Baldev:Dilsher पाशा कभी भी किसी को बचा नहीं समझना चाहिए अगर तू मेरी जगह पर होता तो मेरी जान ले लेता पर में तुझे नहीं मरूंगा पर तू जीवन भर याद करेगा क तू किसी बलदेव से लड़ा था

पूरा लोग जो चारो ओरे से मैदान में बैठ कर देख रहे थे सब शांत थे

Baldev:Bhaio में यानि क बलदेव सिंह गहतराष्ट्रा का महाराज आज मई अपने पत्नी देवरानी को अपने साथ ले जाने आया हु और अपने दुल्हन को ले कर हे जाऊंगा

पूरी भीड़ बलदेव की जय जय कार करने लगती है

"बलदेव बलदेव की जय"

बलदेव निचे झुक कर मट्टी को चूमता है

"धरती माँ तूने मेरी लाज रख ली"

उधर भूरिया देवरानी से कहती है

Hooriya:devrani तुझे सच में बहुत बहादुर पति मिला है

देवरानी शर्मा जाती है



Devrani:man me)Beta बलदेव तू हे मेरे मर्द बन ने क क़ाबिल है और कोई नहीं

बलदेव मैदान में से बहार आता है और दो सैनिक दिलशेर को उठाने लगते है

बलदेव सबसे पहले आकर अपने बाप राजपाल क पेअर छूटा है

राजपाल खड़ा हो कर अपने बेटे क सर पर हाथ फेरता है

rajpal:Devraj जी आप ने देख लय न मेरा बीटा का डैम

Gulshah:taubah राजपाल अब आज से ये तेरी बीवी को दिन रात पलेगा उसी दम्म से

Devraj:shabash भांजे

baldev:mama जी

बलदेव झुक कर देवराज क पेअर छूटा है

Baldev:waise अब तो आप संतुष्ट है देवराज मां क आपकी बहिन को में संभल सकता हु

devraj:han बलदेव अब मुझे कोई शंका नहीं क तुम मेरे बहिन को अपने जान से बढ़कर चाहोगे

Baldev:to चलिए अब में अपनी रानी से ब्याह करूँगा

shamshera:mubarak हो मेरे भाई

बलदेव सब से गले मिलता है और अपने परिधान उठा कर

Baldev:to मां जी कहा पर सात फेरे लेने है

Devraj:aap सब चलिए पास में हे मंडप है

Baldev:pandit जजी तो है न

Devraj:sab इंतेज़ाम है

baldev:agar नहीं है तो कहिये हम वह से ले कर आये है साले साहब

ये सुन कर वह पर खड़े सब हसने लगते है

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 117

Baldev:waise अब तो आप संतुष्ट है देवराज मां क आपकी बहिन को में संभल सकता हु

devraj:han बलदेव अब मुझे कोई शंका नहीं क तुम मेरे बहिन को अपने जान से बढ़कर चाहोगे

Baldev:to चलिए अब में अपनी रानी से ब्याह करूँगा

shamshera:mubarak हो मेरे भाई

बलदेव सब से गले मिलता है और अपने परिधान उठा कर

Baldev:to मां जी कहा पर सात फेरे लेने है

Devraj:aap सब चलिए पास में हे मंडप है

Baldev:pandit जजी तो है न

Devraj:sab इंतेज़ाम है

baldev:agar नहीं है तो कहिये हम वह से ले कर आये है साले साहब

ये सुन कर वह पर खड़े सब हसने लगते है

Devraj:Nahi मैंने सब वयवस्था क्या हु

Baldev:theeek है तो शुभ काम में विलम्ब कैसे

बलदेव अपने परिधान वापस पहनते हुए देवराज क साथ मंडप में जाने लगते है उसके पीछे बद्री और श्याम चले जा रहे रहे

सुल्तान मेरे वाहिद को शहज़ादे शान कंधे क सहारे दे कर ला रहे थे गुलशाह और शमशेर उनके पीछे चल रहे थे और साथ हे सुल्तान दास्ताँ भी मंडप की तरफ बढ़ते है सब आपस में बाते कर रहे थे और सब बलदेव की बहादुरी की तारीफ करते हुए थक नहीं रहे थे

इधर देवरानी को भूरिया कहती है क वो भी जा कर तैयार हो जाये और भूरिया तैयार हो कर देवरानी का इंतज़ार करने लगती है

मंडप में पहुंचते हे बलदेव पंडित जी से मिल कर उनके बताये हुए स्थान पर बैठ जाता है और बाकी सब लोग चारो ओरे खड़े हो जाते है पंडित जी अपने पूजा की तैयारी शुरू कर देते

Pandit:Jazmaan कन्या को बुलाइये

Baldev:Mama जी बुलाये अपनी बहिन को देरी हो रही है

बलदेव को देख सुल्तान मेरे वाहिद मुस्कुराता है

मेरे wahid:Bhai बलदेव जैसा दिलेर ज़ेहनी इंसान आज तक नहीं देखा वाक़ई महाराज बलदेव इज़्ज़त करने क लायक है

Rajpal:aakhir मेरा बीटा है न

ये सुन कर सब मंद मंद मुस्कुराते है

Devraj:dasi देखना देवरानी आरही क नहीं

Baldev:mama जी जल्दी अपने बहिन को भेजिए मुझसे रहा नहीं जा raha..pita जी आप हे बोलिये न कुछ

राजपाल और देवराज दोनों क हे रोंगटे काँप जाते है बलदेव की बात सुन कर

Rajpal:thoda धैर्य रखो बीटा फेरे तो लेने हे है

Baldev:pita जी हमे संध्या से पहले वापस गहतराष्ट्रा लौटना है

मेरे wahid:ye क्या महाराज बलदेव हमे काम से काम एक दिन मेहमान नवाज़ी का मौक़ा दीजिये

Baldev:aap स्वस्थ हो जाये तो में अपने पत्नी देवरानी साथ फिर आऊंगा अब तो ये मेरा ससुराल है

मेरे wahid:zarur आप जब चाहे दोनों पति पत्नी आसक्ति है देवगढ़ जाने में आप लोगो को खतरा है पर आप सब यहाँ रुक सकते है

Gulshah:man me)Meer वाहिद भाई जब इनके जाती इनके कुनबे क लोगो को पता चलेगा क हमने माँ बीटा का ब्याह करवाया है तो देवगढ़ वाले हमे छोड़ेंगे नहीं

ये सब बाते सब आपस में कर रहे थे तभी सामने से भूरिया देवरानी को ले कर आरही थी भूरिया ने निक़ाब पहना हुआ था और देवरानी ने घूँघट क्या हुआ था और धीरे धीरे चलते हुए दोनों मंडप की ओरे आते है

शमशेर अपने अम्मी भूरिया को ऊपर से निचे तक निक़ाब में ढाका देख

shamshera:man me)Ammi जान आप कब मेरे लये ऐसी दुल्हन बन कर शादी क जोड़ो में आओगी..

सब की नज़र अब भूरिया और देवरानी की तरफ थी इनदोनो क पीछे समां नाज़ रज़िया और मुसक्कअं भी चल रही थी पर लगभग पूरी भीड़ भूरिया और देवरानी क जिस्म को नाप रही थी जहा देवरानी लम्बी ुचे कद की छरहरी बदन की मालकिन थी वही भूरिया थोड़ी भरी और लम्बाई में भूरिया से एक इंच काम थी पर दोनों परदे में भी चलते हुए क़यामत ध रहे थे

बलदेव लगातार अपने माँ क धीरे कदमो को देख रहा था

Baldev:Pandit जी ये हमारी दूसरी शादी है

Pandit:kya कह रहे है जजमान

baldev:ji पंडित जी अभी कुछ दिनों पहले हे हमने फेरे लये है इसलिए जल्दी कीजियेगा

भूरिया अब देवरानी को ला कर बलदेव क पास बैठा देती है और औरतो का झुण्ड परदे क पीछे से शादी देख रहे थे वही मर्द चारो ओरे खड़े थे जिसमे बहुत से मर्द गहतराष्ट्रा से आये थे और कई मर्द पारस से आये थे माँ बेटे की शादी देखने

पंडित जी मंत्र का उच्चारण शुरू कर देते है और कुछ देर बाद देवराज को इशारा करते है

Devraj:ji पंडित जी

pandit:var और वधु को बंधन में बांधिए

Devraj:ji पंडित जी

देवराज अपने बहिन देवरानी का पल्लू ले कर बलदेव क गमछे से बांध देता है जिसे देख बलदेव और देवरानी दोनों मुस्कुराती है और उधर राजा राजपाल क माथे पे पसीने क बुँदे आरहे थे

Rajpal:man me)bhagwan मुझे क्षमा कर देना में मजबूरन इस पाप का साथ दे रहा हु और अपनी पत्नी का विवाह का विवाह अपने पुत्र से होने दे रहा हु क्या करू में मजबूर हु

Devraj:man me)Hey प्रभु क्षमा करना मामा हो कर भांजे का विवाह उसके माँ से करवा रहा हु क्या करू विवाह तो ये लोग पहले हे कर चुके थे मेरे पास दूसरा कोई चारा नहीं

थोड़ी देर मंत्र जाप करने क बाद पंडित जी कहते है

"अब आप दोनों खड़े हो जाये और वधु आगे और वर पीछे चले"

देवरानी आगे होती है तो बलदेव क हाथ से उसका हाथ टकरा जाता है और बलदेव उसका हाथ पकड़ लेता है



Pandit:ab वधु आएगी चलेगी और वर पीछे

देवरानी अग्नि क समक्ष अपने बेटे बलदेव सिंह क साथ फेरे लेने लगती है तीन फेरे होने पर

Pandit:ab वर आगे चलेगा और वधु पीछे



बलदेव अब आगे चलते हुए चार फेरे साथ में लेते है इन दोनों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था पर देवराज और राजपाल की हालत हर फेरे पूरा होने ख़राब हो रही थी और पसीने क बुँदे इनके माथे से टपकने लगते है राजपाल का आँख लाल हो चूका था पर अपने आप पर काबू करने की कोशिश कर रहा था पूरी

सतो फेरा होने क बाद दोनों बैठ ते है

पंडित क कहने पर दोनों एक दूसरे को माला पहनते है और सब टालिए बजाते है सिर्फ राजपाल और देवराज का छोर कर



बलदेव देवरानी क हाथ को ले कर पंडित बताये हुए विधि पूरी करने लगता है और पंडित अपने जाप कर रहे थे थोड़ी देर बाद

पंडित ji:Sindurdan कीजिये

बलदेव घूम कर अपने मां को देखता है तो पता है देवराज पसीने से लत पैट है

Baldev:mama जी सिंदूर

देवराज निचे झुक कर झट से सिंदूर ढूंढ़ता है और बलदेव क हाथ में पकड़ता है बलदेव धन्यवाद कहता है मुस्कुरा कर जिसका जवाब देवराज आखे झपका कर देता है

Pandit:Sindur दान कीजिये

Baldev:dekhiye मेरी पत्नी पहले से मंगल सूत्र पहनी है इसलिए मंगल सूत्र तो नहीं पहनाउंगा पर सिंदूर लगाने से पहले मेरी कुछ मांग है मेरी पत्नी से

Pandit:theek है आप मांग सकते है

बलदेव देवरानी क आखो में देख

Baldev:Paas आओ

देवरानी इशारे से पूछती है क्या चाहिए

बलदेव देवरानी क कान पर अपना मुँह रख कर

baldev:"Devrani माँ गांड डौगी सुहागरात पे तो सिंदूर पहनाउंगा नहीं तो नहीं बोलो डौगी ?"

देवराज और राजपाल सुन ने की कोशिश कर रहे थे पर फुफुसाते हुए बलदेव की बात समझ नहीं पते

देवरानी अपना थूक गटकते हुए

devrani:man me)Iski हिम्मत तो देखो सबके बीच मेरे भाई और अपने पिता क सामने एक तो मेरे से शादी भी कर रहा है और ऊपर से मेरी गुदा मरणा चाहता है

Baldev:Bolo हाँ या न

Pandit:beti जो है बोलो समय निकल रहा है

Baldev:han या न

देवरानी चारो ओरे देखती है उसकी नज़र अपने भाई पर जाती जो पसीने से तर बतात था और फिर उसकी नज़र राजा राजपाल पर जाती है और उसको परेशां देख कर

Devrani:man me)raja राजपाल में इस तरह हे परेशां हुआ करती थी जब तुम षुरूश्ती क साथ सोते मुझे छोर कर

देवरानी एक बार बलदेव की आखो में देखती है और उसे उसकी आखो में एक चिंगारी नज़र आती है

Devrani:Han

Baldev:han क्या ?

देवरानी अब लजजा कर मुस्कुरा देती है

Devrani:jo तुम चाहते हो दूंगी

ये सुन कर सब अंदेशा लगाने लगते है क आखिर बलदेव क्या माँगा होगा पर पंडित जी सिंदूरदान पर ज़ोर दे रहे थे

बलदेव सिंदूर ले कर देवरानी का मांग टिका



उठा कर सिंदूर देवरानी क मांग में भर देता है देवरानी को अपनी पहली शादी जब पारस में 18 वर्ष पहले हुई थी और उसके बाद जो दुःख सहा वो याद आजाता है और कैसे उसके बेटे या कहो पति बलदेव ने उसे सहारा दया

देवरानी क आखो से ासु गिरने लगते है अपने दिन याद कर क फिर पंडित जी एक दूसरे को वादा करवाता है कभी न साथ छोड़ने का हर घडी हर पल एक दूसरे क साथ निभाने का दोनों शपथ लेते है

Pandit:ab दोनों खड़े हो जाईये

देवरानी और बलदेव जैसे हे खड़े होते है



देवरानी झुक कर बलदेव क पेअर पर बैठ जाती और अपने दोनों हाथ अपने बेटे क पेअर पर रख देती है

Baldev:utho मेरी रानी देवरानी तुम्हारी जगह पैरो में नहीं डिल में है

बलदेव उठता है देवरानी को फिर दोनों मिल कर देवराज क पास जाते है दोनों एक साथ झुक कर देवराज का पेअर छूटे है

Devraj:dudho नहाओ पुतो फलो

देवराज जबरदस्ती मुस्कुराते हुए दोनों क सर पर हाथ फेरता है फिर बलदेव आगे बढ़ कर अपने पिता राजा राजपाल क पास जाता है पर देवरानी राजपाल क पास नहीं जा रहिंथी

Baldev:Devrani अपने ससुर से तो आशीर्वाद ले लो

बलदेव झुक कर अपने बाप का पेअर छूटा है

Rajpal:dudho नहाओ पुतो फलो

तभी देवरानी भी आगे बढ़ कर पेअर छूने क लये होती है तभी राजपाल अपने पेअर खींच लेता है

rajpal:Nahi bahu..Dudho नहाओ पुतो फलो

देवरानी भी उठ जाती है और सीधे औरतो क हुजूम में जा कर पहले भूरिया से फिर बारी बारी से सब से गले मिलते है

बद्री और श्याम बलदेव से आकर गले मिलते है और शादी की मुबारक बाद देते है

Baldev:dhanywad मित्रो

Badri:ab पत्नी हो गयी तो हमे मत भूल जाना

Baldev:nahi यार

shyam:waise अब तुम्हे अपने पत्नी पर ज़्यादा ध्यान देना होगा इस बद्री पर काम

तभी शमशेर आता है और बलदेव से गले लग कर

"मुबारक हो तुमको शादी मेरे भाई"

Baldev:dhanywad

बलदेव से गले मिल कर धीरे से शमशेर कण में कहता है

"तेरा हुआ अब मेरा क्या होगा"

Baldev:dhairya से काम लो सब मिल जायेगा

देवराज सेना से कह कर बरटीओ क खाना शुरू करवाता है

Baldev:Mama जी हम शाम तक गहतराष्ट्रा क लये निकल जायेंगे

Devraj:par एक दिन तो रुकते कुछ आराम कर क यात्रा करना ाचा होता

Baldev:hum शाम तक यही है वैसे भी आपको भी हमारे साथ जाना है

Devraj:par सुल्तान का स्वस्थ ठीक नहीं

baldev:shayad आप भूल रहे साला साहब क आप अपनी बहिन क सुहागरात का सेज़ खुद सजायेंगे आपने वडा क्या था

ये सुन कर सब है पड़ते है

Devraj:han हाँ मुझे याद है

मेरे wahid:Devraj जी आपके जीजा तेज़ है भूलने वालो में से नहीं मेरी फिक्र मत कीजिये आप गहतराष्ट्रा जाये

इधर भूरिया देवरानी को ले कर वापस महल में आजाती है

Devrani:dhanywad दीदी

hooriya:pagli तेरी ख़ुशी में हमारी ख़ुशी है हम देवगढ़ वासिओ को ये खबर नहीं होने देंगे क उनकी राजकुमारी की ब्याह उनके हे पुत्र से हुई है वो भी सुहाग रत बाद

Devrani:baldev तो कह रहे थे संध्या तक हम गहतराष्ट्रा चले जायेंगे में आपको बहुत याद करुँगी..

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 118

baldev:shayad आप भूल रहे साला साहब क आप अपनी बहिन क सुहागरात का सेज़ खुद सजायेंगे आपने वडा क्या था

ये सुन कर सब है पड़ते है

Devraj:han हाँ मुझे याद है

मेरे wahid:.Devraj जी आपके जीजा तेज़ है भूलने वालो में से नहीं मेरी फिक्र मत कीजिये आप गहतराष्ट्रा जाये

इधर भूरिया देवरानी को ले कर वापस महल में आजाती है

Devrani:dhanywad दीदी

hooriya:pagli तेरी ख़ुशी में हमारी ख़ुशी है हम देवगढ़ वासिओ को ये खबर नहीं होने देंगे क उनकी राजकुमारी की ब्याह उनके हे पुत्र से हुई है वो भी सुहाग रत बाद

Devrani:baldev तो कह रहे थे संध्या तक हम गहतराष्ट्रा चले जायेंगे में आपको बहुत याद करुँगी

Hooriya:Me भी याद करुँगी तुम्हे मेरी बहिन

Devrani:theek है दीदी में अपने कक्षा में जाती हु और जाने की तैयारी करती हु आप थोड़ा गरम पानी भेजवा दीजियेगा

ये कह कर देवरानी मुस्कुराती है

Hooriya:dusre सुहागरात की तैयारी वैसे फिर से सूज जाएगी तो सेकने का क्या फायदा

Devrani:ab कुछ तो आराम मिलेगा न दीदी आपको क्या पता अपने योनि सूज़ने का मज़ा क्या होता है कभी आपने इतना जबरदस्त लिंग देखा हे नहीं

Hooriya:bass बास मुझे देखना भी नहीं इतना ज़ालिम वो बास तुम हे दर्द सहो इतना मेरे बस की बात नहीं

Devrani:theek है दीदी में जाती हु

Hooriya:theek है जाओ में कनीज़ से पानी गरम भेजवा देती हु

देवरानी अपने कक्षा में चली जाती है और भूरिया कनीज़ को बुला कर गरम पानी देवरानी को देने क लये कह देती है

इधर महल क बहार बरटीओ को खाना खिलाया जा रहा था और शाही महल में दस्तरखान लगाया गया था दूल्हे क क लये

Devraj:Chaliye दूल्हे राजा दस्तरखान तैयार है

मेरे wahid:han चलिए महाराज बलदेव हमारे दस्तरखान की शान का अन्दाज़ा आपको भी लगेगा

Baldev:chaliye सुल्तान

बलदेव क साथ बद्री और श्याम भी चलने लगते और महल क अंदर एक आलिशान हुजरे में मेज़ क चारो ओरे कुर्सी लगी हुई थी और पुरे मेज़ पर अनेक फल और खाना लगा हुआ था

सुल्तान dastan:aaye दूल्हे राजा बैठे कुर्सी पैर

Baldev:waise हम भोजन ज़मीन पर बैठ कर खाना पसंद करते है पर बात ससुराल की है तो खा लेंगे

ये सुन कर श्याम और बद्री है देते है और सब बैठ कर खाना खाने लगते है कुछ देर बाद खाना खाने क baad,Baldev अपने रथ को तैयार करने क लये कहता hai,rath तैयार होता है धीरे धीरे सरे बाराती अपने अपने घोड़ो पर सवार हो जाते है और रथ क पास सुल्तान मेरे वाहिद क परिवार क साथ बलदेव और देवराज खड़े थे

Badri:Bhabi को बोलिये जल्दी आने संध्या होने वाली है

Shyam:thoda सबर करो

मेरे wahid:Kaneez..Mallika इ जहाँ से कहो दुल्हन को जल्दी लाये

कनीज़ जा कर मलिका को खबर देती है और कुछ देर बाद हे भूरिया क साथ देवरानी घूँघट कए रथ क तरफ आने लगती है

मेरे wahid:Rajpal जी

Rajpal:ji सुल्तान

मेरे wahid:aaj महारानी देवरानी की दूसरी शादी थी मैं नहीं चाहूंगा क ससुराल में कोई तकलीफ हो

Rajpal:ji ज़रुरु सुल्तान इस बात का ख्याल रखा जायेगा

Devraj:Rajpal जी में चाहता हु पुराणी बातो को भूल कर मेरी बहिन को अआप अपने बहु क रूप में स्वीकार ले और हमेशा खुश रखे

राजपाल अपने हे पत्नी को अपने बहु स्वीकार करने के लये बांध गया था और न चाहते हुए भी

Rajpal:Aap आस्वस्थ रहे मेरी हे गलती क कारन दूसरा विवाह हुआ अब में इस बात का ख्याल रखूँगा क देवरानी खुश रहे

Devraj:Devrani को खुश तो बलदेव रख लेगा राजपाल जी उसकी चिंता मत कीजिये बास मेरी बहिन को कीसी तरफ की तकलीफ न हो

Devraj:man me)Jab पत्नी थी तम्हारी तो खुश रख हे नहीं पाए तुम राजपाल जिस कारन आज दूसरा विवाह विवस हो कर करना पड़ा देवरानी को

उतने में देवरानी रथ क नज़दीक आजाती है और भूरिया से गले लग कर रोने लगती है

Hooriya:rote नहीं मेरी बची तुम पराये घर थोड़े जा रही हो अपने पति क यहाँ जा रही हो

भूरिया क साथ महल की साडी औरते देवरानी से गले मिलती है और फिर देवरानी घूंघट ताने रथ में बैठ जाती है

Rajpal:Beta तुम भी रथ में बैठ जाओ

Shamshera:idhar आए यार शादी करते हुए दोस्ती भूल गया

बलदेव शमशेर से गले लगता है

शमशेर धीरे से कान में फुसफुसाता है

"खूब मज़े करना खला क साथ"

तो बलदेव भी धीरे से कहता है

"तुम भी म्हणत करो फल की चिंता कए बिना"

दोनों अलग होते है और बलदेव रथ में जा कर बैठ जाता है

rajpal:Somnath तुम कुछ सैनिकों क साथ आगे बढ़ो दूल्हा दुल्हन का रथ बीच में चलेगा ..बद्री और श्याम तुम मेरे साथ रथ क दये बाये रहोगे

राजा राजपाल घोड़े पैर सवार हो कर रथ क आगे चलने लगता है और रथ क दये बाये बद्री और श्याम चलने लगते है

Devraj:sultan आप अपना ख्याल रखिये में जल्द वापस आऊंगा

मेरे wahid:thek है में चाहता हु आप कुबेरी संभाले

Devraj:theek है तो के चलता हु

प्रणाम

मेरे wahid:salamat रहो देवराज जी

देवराज अपना घोडा रथ क पीछे ले कर चलने लगता है और पीछे से सैनिक चलने लगता है अब धीरे धीरे आगे से सैनिक बढे है और बीचे में रथ और पीछे से भी सैनिक पारस से गहतराष्ट्रा की ओरे निकल रहे थे

थोड़े देर में हे सुल्तान क परिवार क आखो से बाराती ओझल हो जाते है और सब कोई अंदर महल में आजाते है

सूर्यास्त का समय था और सेना क साथ बलदेव अपने दुल्हन को अपने रथ जो चारो ओरे से कपडे से घिरा था लिए पारस क सीमा को पार कर रहा था

देवरानी बलदेव क बगल में बैठ मुस्कुराये जा रही थी और बलदेव भी जब भी देवरानी को देखता मुस्कुरा देता आखिर कर देवरानी चुप्प तोड़ती है

Devrani:ye क्या महाराज चारो ओरे से से सिपाही

Baldev:ab में कभ नहीं चाहूंगा क मेरी रानी को कोई खरोच भी आये इसलिए दये और बाये बद्री और श्याम है पीछे सेल साहब देवराज है और आगे आप क ससुर या पूर्व पति राजपाल है

Devrani:dhatt आप भी न ाचा मज़ाक कर लेते है

Baldev:pati तो आपका हे न हु महारानी देवरानी

Devrani:ab तो सूर्यास्त हो चूका अँधेरा हो गाय है पर्दा लगा दीजिये न

Baldev:parda लगा कर कुछ दिखाना है

बलदेव झटसे दोनों तरफ क रथ का पर्दा लगा देता है

devrani:nahi बहार अँधेरा है

बलदेव रथ में रखा लैंटर्न को जलाता है और रथ में उजाला हो जाता है

baldev:ab ठीक है मेरी रानी

देवरानी अपना पल्लू निचे खिसका कर

"गर्मी बहुत है महाराज "



जैसे हे देवरानी अपने पल्लू को हटती है बड़े पपीते सामने आजाते है बलदेव क आखे फटी की फटी रह जाती है देवरानी अपने होठ काट ते हुए

"क्या हुआ महाराज ऐसे क्या टुकुर टुकुर देख रहे है"

"तुम्हारी साडी गर्मी निकल दूंगा माँ"

"धीरे धीरे बोलो कोई सुन लेगा "

"सुन लेने दो में अपने रानी माँ से बात कर रहा हु मेरी पत्नी से कौन से बात करता है पति"

"फिर भी कुछ तो शर्म करो हमारे अगल बगल में बद्री और श्याम भी है "

"माँ तुम्हारे इतने बड़े बड़े थान देख कर रहा नहीं जा रहा "

"तो कौन रुकने क लये कह रहा है"

"माँ मेरी रानी माँ "

बलदेव देवरानी से गले लग जाता है

"कैसा लग रहा है मेरी पत्नी बन कर जा रही हो ससुराल अपने"

"मुझे आज मेरा सपना पूरा होता हुआ नज़र आरहा है अपने प्रेमी संग ब्याह और अपने ससुराल जाने का"

"पर मेरा सपना तो सुहागरात को पूरा होगा आपके मटके जैसे गांड को फोड़ क"

"छी गंदे"

बलदेव रथ में हे देवरानी को हल्का लिटा देता है और चुम कर उसके भरी मम्मी को दबाने लगता है



"यह ाः ाः राजा महल पहुंचने तक तो धैर्य रखो"

"रानी इन बड़े आम को देख कर चूसने का मन कर रहा है "



"आज राजा चूस लेना परन्तु महल तो पहुंचे हम आह "

Baldev:jhuti..aisa कह रही हो जैसे तुम नहीं चाहती थी क में तुम्हे रगड़ू इसलिए तो तुमने पर्दा लगवाया

ये सुन कर देवरानी लज्जा कर अपने होठ काट ते हुए अपना सर झुका लेती है

"पर आह धीरे मेरे राजा ाः उम्म्म में तो इतने दिन हर घडी अपने राजा को याद की तुम्हारी तरह थोड़ी हु"

"में भी हर पल अपनी रानी को मसलने का सोच रहा था "

"सिर्फ शरीर का सोच रहे थे और कुछ नहीं"

देवरानी अपना पल्लू झड़ते हुए बलदेव से अलग हो जाती है और सीधा बैठ जाती है

"आर्य रे मेरी रानी तो गुस्सा हो गयी "

"गुस्सा नहीं हु तो क्या हु"

"तुम्हे ऐसा लगता है देवरानी क में केवल तुम्हारे शरीर से प्रेम करता हु"

"मुझे नहीं लगता है मेरा बलदेव मेरा राजा बीटा कभी मुझे धोका देगा मेरी आत्मा से प्रेम है तुमको मेरे राजा"

ऐसे हे बाते करते हुए सफर कर रहे होते है पुरे दो दिन बाद बलदेव अपनी दुल्हन को ले कर पहुंच जाता है गहतराष्ट्रा जहा पर स्वागत करने क लये पहले से लोग महल क भीड़ लगाए हुए थे

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 119

"तुम्हे ऐसा लगता है देवरानी क में केवल तुम्हारे शरीर से प्रेम करता हु"

"मुझे नहीं लगता है मेरा बलदेव मेरा राजा बीटा कभी मुझे धोका देगा मेरी आत्मा से प्रेम है तुमको मेरे राजा"

ऐसे हे बाते करते हुए सफर कर रहे होते है पुरे दो दिन बाद बलदेव अपनी दुल्हन को ले कर पहुंच जाता है गहतराष्ट्रा जहा पर स्वागत करने क लये पहले से लोग महल क सामने भीड़ लगाए हुए थे

षुरूश्ती अपने हाथ में पूजा की थाली लिए कड़ी थी साथ हे जीविका क साथ कमला और राधा थी वही थोड़ी दूर पैर वैध जी खड़े थे

सैनिक अपने घोड़ो को रोकते हुए बांधने क लये दूसरी ओरे ले जा रहे थे सबसे पहले राजा राजपाल अपना घोडा महल क सामने रोकता है उसके साथ हे बद्री और श्याम भी अपने घोड़े से कूदते हुए उतारते है

Badri:rath रोक दो

रथ चला रहा सैनिक रथ रोक देता है और रथ क पीछे चल रहे देवराज भी अपने घोड़े से उतारते है और एक सैनिक आकर उनके घोड़े की लगाम पकड़ कर ले जाता है

देवराज राजपाल बद्री और श्याम महल क मुख्या दुवार की ओरे बढ़ते है

और चारो मिल कर अपने घर वालो को प्रणाम करते है

Shurushti:meri बहु कहा है

Rajpal:rath में है जाओ उन दोनों को ले आओ

बद्री और श्याम भी महल क अंदर चले जाते है

षुरूश्ती जीविका कमला और राधा कुछ औरतो क साथ मिल कर रथ तक जाते है

Shurushti:Beta बलदेव आओ बीटा

बलदेव अपने माँ की ओरे मुस्कुरा कर

"देवरानी तुम्हारा ससुराल आगया चलो"

"ाजी आप उतरिये मुझे घूँघट कर क उतरना होगा"

बलदेव पर्दा हटा कर रथ से उतरता है

"प्रणाम दादी माँ प्रणाम बड़ी माँ"

बलदेव बारी बारी से अपने बड़ी माँ और दादी क पेअर छूटा है और आशीर्वाद लेता है

jeevika:hamari बहु कहा है

षुरूश्ती रथ क अंदर झाकते हुए

"आजाओ बहु"

षुरूश्ती अपना हाथ आगे बढ़ाते है और देवरानी हाथ पकड़ कर धीरे से अपने मुँह को ढकते हुए घूँघट कर क उतरती है रथ से और अपने दोनों हाथ जोड़ कर

"प्रणाम सासु माँ"

षुरूश्ती क पेअर छूती है

फिर आगे बढ़ कर जीविका क पेअर छूती

है

"प्रणाम दादी माँ"

"दूधो नहाओ पुतो फलो"

जीविका आशीर्वाद देते हुए कहती है

षुरूश्ती और कमला हाथ पकड़ कर साडी औरतो क साथ देवरानी को महल की ओरे ले जाने लगती है महल क मुख्या दुवार पर पहुंच कर

shurushti:ruko बहु देवरानी गृह प्रवेश की रसम पूरी करने दे

shurushti:kamla जा कलश और कुमकुम की थाली ले आओ

कमला अंदर जाती है तब तक षुरूश्ती आरती उतरने लगती है

shurushti:bahu घूँघट खोल दो यहाँ कोई गैर मर्द नहीं है साडी औरते है

devrani:mujhe शर्म आरही है

षुरूश्ती खुद से घूँघट ऊपर उठा देती है

shurushti:aay है मेरी बलदेव की दुल्हन को किसी की नज़र न लगे

Jeevika:meri पोते की दुल्हन चाँद से प्यारी है

कमला तभी कलश में चावल लये और कम कम की थाली ले कर आजाती है

षुरूश्ती कैलाश को निचे रखते हुए

Shurushti:devrani बहु अपने दाहिने पेअर से कलश को महल क अंदर ठेलो

Devrani:ji सासु माँ



Shurushti:andar की तरफ पेअर से धकेलो



देवरानी कलश को पेअर से धकेल कर चावल अंदर गिरा देती है

shurushti:kamla कुमकुम की थाली लाना

षुरूश्ती गिरे हुए चावल को इकठा कर क अलग थाली में रख लेती है तब तक कमला कुमकुम से भरी थाली लाती है

shurushti:bahu इसमें अपने दोनों पेअर रखो और फिर अपना दाहिना पेअर घर क अंदर पहले रखो

देवरानी अपने दोनों पेअर थाली में रखती है



और फिर अपना दाहिना पेअर घर क अंदर पहले रखती है और चलते हुए घर प्रवेश करती है बलदेव खड़ा मुस्कुरा रहा था और देवरानी अंदर से घबराई हुई थी क्यू क ये दूसरा गृह प्रवेश था पर पति दूसरा था .पूजा घर में जा कर पूजा शुरू होता है और साड़ी रस्मे पूरी होते होते शाम हो जाती है

शाम में जा कर महिलाओ की भीड़ ख़त्म होती है और देवरानी अपने कक्षा यानि क ऊपर वाले कक्षा में जो बलदेव का कक्षा था उसके बैठी थी और बलदेव निचे अपने मित्र बद्री और श्याम क साथ बात चीत कर रहा था और उधर राजपाल अपने कक्षा में बैठा देवराज कुबेरी राज्य को कैसे संभाला जाये इसपर विचार विमर्श कर रहा था

इधर षुरूश्ती कमला और राधा से रसोई में भोजन बनवा रही

Shurushti:ache दुल्हन क लये खीर बनाना मत भुला कमला

Kamla:nahi भूलूंगी हर पकवान बनेगा आज तो

षुरूश्ती चलते हुए अपने सास जीविका क क कक्षा में पहुंच जाती है

Shurushti:saasu माँ

Jeevika:aao षुरूश्ती कहो क्या बात

saas:aap खुश तो है न माँ

Jeevika:bhala में कैसे न खुश राहु मेरे वंश को बढ़ने वाला बलदेव ब्याह कर वंश बढ़ने वाली लाया है मुझे और कुछ नहीं चाहिए

Shurushti:Maa जी आप कहे तो देवरानी को आज से हे बर्तन छुवा दे ऐसे भी कौन सी नयी है इस घर में

Jeevika:theek है तो रसम क अनुसार अगर कुछ बनवाना है तो बनवा लो

Shurushti:mai सोच रही थी ज़्यादा कुछ नहीं बास खीर बनवा लू नयी बहु से

jeevika:ye ाचा रहेगा कोई रसम बाकि नहीं रहेगा सब आज हे ख़त्म

Shurushti:theek है माजी में एक बार महारानी से पूछ लेती हु

षुरूश्ती फिर सीढ़ी से होते हुए बलदेव क कक्षा में जाती है और देवरानी को बिस्तर पर बैठे हुए गहरी सोच में डूबी पाती है

Shurushti:bahu ो बहु

देवरानी झट से उठ कड़ी होती है

Devrani:aaye न

Shurushti:Maharani देवरानी मेरी बहु मेरी और आपकी दादी सास का कहना था क आज नयी बहु से कुछ रसोई में बनवा ले

Devrani:ji में बना दूंगी आप बोलिये क्या बनाऊ

Shurushti:me समझ सकती मेरी बहु रानी क तुम थकी हुई होगी और रात में मेरा बीटा और थका देगा तुम्हे तो बास थोड़ी से खीर बना दो टेक हम सबको नए बहु क हाथो का कुछ खाने को मिल जाये

devrani:q नहीं में अभी जाती हु सासु माँ

devrani:waise वो कहा है दिखे नहीं ?

Shurushti:wo कौन

devrani:pati देव जी आपका सुपुत्र

Shurushti:wo अपने मित्रो संग बैठ गप्पे मार रहा है ..धैर्य रखो रात को वो यही होगा

षुरूश्ती ये कह कर मुस्काती है जिसे देख अपने आखे निचे कर लज्जा जाती है और चलते हुए

Devrani:me जाती हु खीर भी बना न है

कमला को देख देवरानी चुपचाप कड़ी रहती है

kamla:aaye महारानी देवरानी शुभ मुहरत रसोई का आज हे करना है क्या

Devrani:han कमला अब सासु माँ और दादी सास दोनों का कहना है आज हे में खीर बना लू

Kamla:bass कुछ देर में सरे पकवान होजाते है तो आप खीर बना लीजिये

कुछ देर तक कमला से देवरानी अपने शादी की बात करती है फिर कमला रसोई से बहार निकलती है और अपने दूसरे कामो में लग जाती है तभी बलदेव बद्री और श्याम से बात कर क कक्षा से बहार निकलता है तो कमला को इशारे से पूछता है क देवरानी कहा है कमला इशारे से बता देती है रसोई में है

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 120

devrani:pati देव जी आपका सुपुत्र

Shurushti:wo अपने मित्रो संग बैठ गप्पे मार रहा है ..धैर्य रखो रात को वो यही होगा

षुरूश्ती ये कह कर मुस्काती है जिसे देख अपने आखे निचे कर लज्जा जाती है और चलते हुए

Devrani:me जाती हु खीर भी बना न है

कमला को देख देवरानी चुपचाप कड़ी रहती है

kamla:aaye महारानी देवरानी शुभ मुहरत रसोई का आज हे करना है क्या

Devrani:han कमला अब सासु माँ और दादी सास दोनों का कहना है आज हे में खीर बना लू

Kamla:bass कुछ देर में सरे पकवान होजाते है तो आप खीर बना लीजिये

कुछ देर तक कमला से देवरानी अपने शादी की बात करती है फिर कमला रसोई से बहार निकलती है और अपने दूसरे कामो में लग जाती है तभी बलदेव बद्री और श्याम से बात कर क कक्षा से बहार निकलता है तो कमला को इशारे से पूछता है क देवरानी कहा है कमला इशारे से बता देती है रसोई में है



बलदेव कमला की बात समझते हुए रसोई क तरफ जाता है और अंदर देखता है उसकी माँ कुछ बना रही थी

देवरानी खीर बनाने क लये दूध और चावल निकलने लगती है



बलदेव की नज़र देवरानी क दो मटके जैसी बड़ी गोल गांड पर पड़ती है जो चलने से थिरक रही थी

Baldev:man me)aah माँ यही दोनों मटके जैसी गांड पे तो तेरा बीटा तुझपे फ़िदा हुआ था

तभी देवरानी को महसूस होता है क दरवाज़े पे कोई खड़ा है और उसे सामने एक ुचि लम्बी चौड़ी परछाई दिखती है जिसे देख वो मन में मुस्कुराती है

Devrani:man me)Pagal प्रेमी मेरी गांड देख रहा है आज तो मेरे गुदा की तो अपने मुसल से धजिया उदा देगी

देवरानी अपने साड़ी का पल्लू अपने कमर पर कस लेती है जिस से देवरानी का मोटा गांड



बलदेव अचे से देख प् रहा था बलदेव देवरानी क हिलते चुतर देख कर एक अलग हे दुन्या में चला जाता है और एकाएक उसका हाथ उसके लौड़े पर चला जाता है और सहलाने लगता है

देवरानी से रहा नहीं जाता है और वो मुद कर



देखती है और पति है बलदेव अपने लैंड को हाथ में लिए अपनी आखे बंद कए सहला रहा था इस बात से बेखबर क उसकी माँ उसकी चोरी पकड़ ली देवरानी को समझ नहीं आता क वो क्या करे तो वो अपना गाला साफ़ करते हुए हल्का खासी करती है बलदेव जैसे सपने से जगता है और सामने देखता है देवरानी मुस्कुराते हुए अपने आखे दिखा रही थी

Devrani:kya आप भी न कोई देख लेगा तो

Baldev:to क्या हो जायेगा में अपनी पत्नी की सुंदरता देख कर मज़े कर रहा हु

devrani:mujhe पता है आप क्या देख रहे थे

बलदेव रसोई में अंदर घुस जाता है और देवरानी को पीछे से पकड़ लेता है

"हाँ में तुम्हारी ये मोती बड़ी गांड को हिलते हुए देख रहा था मेरी रानी माँ"

"धत्त बेशरम"

उधर देवराज राजपाल क कक्षा से बहार निकल कर अतिथि गृह में जा रहा था तभी उसे कुछ आवाज़े सुनाई देती है जो रसोई से आरही थी

देवराज रुक जाता है और सुनता है

"हटिये न बलदेव जी रात में कर लीजिये न जो दिल करे"

"नहीं मुझे अपने पत्नी की गांड अभी मारनी है"

"आप भी न अभी यहाँ कोई भी आ सकता है आप जाईये"

बलदेव देवरानी क गांड पर चटक से एक थप्पड़ मारता है जिसे सुन देवराज खड़ा खड़ा काँप जाता है

देवराज फिर से सुन ने लगता है

"देवरानी मेरी रानी आज तेरी कुवारी गांड का उद्घाटन करूँगा वो भी तेरे भाई क सजाये हुए सेज़ पर तेरे भाई क बिछाये हुए चादर पर"

"हाँ राजा खोल देना अपनी माँ की गांड कुवारी गांड बहा देना खून जैसी छूट से बहाया था मेरे भाई को हे दूंगी में सुबह धोने क लये "

"ये मेरा बदला होगा तुम्हारे भाई से उसने मुझे छठा मारा था जब में तुम्हारा रिश्ता उस से माँगा अब देवराज सेल को समझ में आएगा जब उसके बहिन की दिन रात गांड मरूंगा"

इतना सुन न था देवराज अपने कान पर दोनों हाथ रख कर महल क बहार चले जाता है

Devraj:man me)meri बहिन की कुवारी गांड मेरा भांजा आज तोड़ेगा ची के क्या सोच रहा हु क्या वो मेरी बहिन की पीछे से मरेगा कौन निकल देगा क्यू क मेने उसे थप्पड़ मारा हे भगवन क्या सोच रहा हु

देवराज महल से बहार चला जाता है इधर रसोई में बलदेव देवरानी क गांड क दरार में अपना खड़ा लैंड सताए खड़ा था

तभी जीविका की आवाज़ आई

Jeevika:bahu devran..ii खीर बन गयी क्या

देवरानी से बलदेव दूर होता है

"ाजी छोड़िये न आपकी दादी देख लेगी "

बलदेव छोर कर रसोई क दरवाज़े पैर चला जाता है

"रात को तो में इस मटके जैसे पिछवाड़े के छितरे उदा दूंगा"



देवरानी अपने दोनों हाथ बांध कर

"बलदेव आप भी न थोड़ा तो धैर्य रखिये"

Baldev:theek है बाबा आप तैयार हो कर आये

बलदेव चला जाता है और देवरानी खीर बनाने में लग जाती है .षुरूश्ती देवरानी को अपने हाथ से थोड़ा खीर खिलाती है और दूध ले कर जाने क लये कहती है

Shurushti:ab दूध और खीर ले कर जाओ बहु ऊपर में बलदेव को भेजती हु अपने सुहागरात पैर ध्यान दो घर का काम कमला और राधा कर लेगी वो दोनों देरी से जाएगी आज

Devrani:jaisa अआप कहे सासु माँ

षुरूश्ती शर्मा जाती है और बलदेव को देखने बद्री और श्याम क कक्षा में जाती है

बलदेव और बद्री श्याम गप्पे मार रहे रहे

Baldev:aaye बड़े माँ

Shurushti:badi माँ क बचे आज तेरी सुहागरात है तू तहा पैर क्या कर रहा है

Baldev:ab मेरी रानी माँ से तो आप खीर बनवा रही हो तो में कैसे मनौ सुहागरात

shurushti:Theek है तो जा मेरा बीटा ऊपर मैंने तेरे दुल्हन को ऊपर भेज दया है और कमला से कह कर कक्षा भी सजवा दया है

Badri:han जाओ भाई ऐसा मौक़ा बार बार नहीं मिलता

बलदेव उठने को होता है क बद्री उसका कुरता पकड़ लेता है

baldev:chhoro भाई

Badri:me कहा पकड़ा हु

और बद्री अपना हाथ से कुरता छोर देता है पर इस बार श्याम पकड़ लेता है

Baldev:shyam तुम भी छोरो भी

Shurushti:chhoro बच्चो मेरे बेटे को आज उसका सुहागरात है

बद्री और shyam:Theek है जाने दया तुम्हे बलदेव मज़े करो मौसी क साथ

और सब है पड़ते है

बलदेव जाता है ऊपर और अपने कक्षा में घुसते हे उसके नक् में मनमोहक गुलाब और चमेली की खुशु आती पूरा कक्षा गुलाब और चमेली से सजा हुआ था



और पुरे कक्षा में मोमबत्ती और दिए जल रहे थे देवरानी बीचो बीच बैठी थी



बलदेव देवरानी को बैठी देख सबसे पहले दरवाज़ा लगता है जैसे दरवाज़ा की कड़ी लगता है देवरानी का डिल धड़कता है

बलदेव धीरे धीरे आकर पलंग पर बैठ ता है

"इस चाँद से मुखड़े को क्यू छुपाई हो रानी माँ"

"इस मुखड़े क देखने क मुँह दिखाई लगेगी"

"ाचा जी दूसरी सुहागरात में भी नखरे आपके काम नहीं है महारानी देवरानी जी"

"मुँह दिखाई डोज क्या बलदेव जी वो कहो"

"रानी माँ जो चाहो मांग लो "

"ठीक है में मांगती हु उस से पहले देख लो में बहुत लगन से सजी हु अपने साजन क लये "

बलदेव धीरे से देवरानी माँ क पास बैठ कर धीरे से घूँघट उठा ता है

"भगवन ने तुम्हे फुर्सत में बनाया होगा माँ चाँद भी शर्मा जाये आपको देख क"

"चुप कीजिये आप भी पति देव जी आप बढ़ा चढ़ा कर कह रहे है"

"नहीं देवरानी ये सत्य है तुम्हारी जैसी सुन्दर मैंने आज तक कोई स्त्री नहीं देखि"

"अब मेरी ीचा क्या है वो तो सुन लो"

"हाँ बोलिये रानी माँ क्या चाहती है"

देवरानी अपने बेटे का हाथ पकड़ कर अपने हाथ में लेते हुए

"आप से बहुत सारा प्यार और जीवन भर का साथ"

"भला कोई ये भी मांगता है ये तो ऐसे भी तुम्हे मिलने वाला है माँ"

"बीटा मुझे एक सुन्दर सुशील और शक्तिशाली अपने जैसा मेरे बलदेव का रूप का बीटा चाहिए"

ये कह कर लज्जा कर देवरानी बलदेव क बहो को पकड़ कर गले लग जाती है

"उसके लये तो बहुत म्हणत करनी पड़ेगी "

ये कह कर बलदेव मुस्कुराते हुए देवरानी को अपने बहो में घेर लेता है

"में सब क लये तैयार हु मेरे राजा"

"तो आज का वादा याद है न आपकी आज में क्या मारूंगा "

"हाँ मुझे याद है"

इधर कमला और राधा मिल कर रात का खाना निकलती है और राजपाल क साथ देवराज और बद्री और श्याम बैठे थे खाने पर साथ हे जीविका भी बैठी थी

कमला राधा और षुरूश्ती सब खाना ला कर रख रही थी

Rajpal:bhai बलदेव नज़र नहीं आरहा

Devraj:han उसने खाना खाया क नहीं

Shurushti:aji आप भी न महाराज वो दुल्हन क साथ ऊपर है

rajpal:ek बार पूछ तो लेते खाना खा कर सोना चाहिए

Shurushti:aisa कीजिये आप हे जाये और पूछ लीजिये खायेगा या नहीं

राजपाल सोच में पद जाता है क वो कैसे जाये

Shurushti:ab आप सोच क्या रहे है आप बाप है आपकी बात मान कर आ भी जायेगा कमला की बात पर कही नहीं आये

Devraj:rajpal जी आप देखिये पूछ कर

राजपाल क पास अब कोई चारा नहीं था जाने क सिवा वो उठ कर जाने लगता है सीडीओ पर चढ़ने लगता है

इधर देवरानी बलदेव क बहो से आज़ाद होते हुए उठ कड़ी होती है और दूध मेज़ पर से लाने चली जाती है पीछे से बलदेव भी जाता है और देवरानी को पीछे से पकड़ कर जकड लेता है

"क्या हुआ जी छोरिया न आपके लये दूध और खीर लेन क लये उठी हु भाग नहीं रही हु"

"आज कितना भी भागो में इनके अंदर अपना लैंड पेल क रहूँगा"

बलदेव चटक से देवरानी क भरी चुतर पर छठा मरता है फिर दोनों हाथो को निचे ले जा कर ज़ोर से मसलता है

इधर दरवाज़े क बहार जैसे हे राजपाल पहुँचता है बलदेव क कक्षा से देवरानी की सिसकने की आवाज़ आती है और राजपाल वही खड़ा हो कर सुन ने लगता है

"अऔच राजा कितना ज़ोर से मरते हो"

"आह रानी आपके गांड क दोनों पैट दो तरबूज़े जैसे है जिन्हे देख कर मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता है"

"उसे लौड़ा नहीं उसे तो मुसल लैंड कहते है "

"अच्छा मेरी माँ अब लैंड और लौड़ा मुसल शब्द का अर्थ भी समझ गयी"

"अब जब से तुम्हारे साथ सम्बन्ध बने है मुझे तभी पता चला असली लिंग क्या होता है"

"क्यों तुम्हारे पहले पति का लिंग नहीं था क्या असली"

ये कह कर बलदेव हस्ता है

"पर वो छोटा था किसी काम का नहीं था"

"तो मेरा लौड़ा कितना काम का कितना तक पहुंच पता है आपकी छूट में मेरी रानी माँ"

"जहा तक तुम्हारा लैंड पहुंच पता है बीटा वह तक तो तेरे बाप का हाथ भी नहीं पहुंचे"

ये सुन कर राजपाल अपने आखे बंद कर लेता है और उसके आखो से दो ासु क बुँदे टपक पड़ती है

बलदेव दरवाज़ा क पास खड़े मेज़ क पास देवरानी क गांड को दबा कर अपना लैंड उसके गांड पर चिपकाये खड़ा था

"माँ आज में तुम्हारी गांड का ुधघटन इसी मुसल लौड़ा से करूँगा एक चीज़ तो मेरे लये तुम्हारे पहले पति ने छोर दी "

"राजपाल मेरे छूट नहीं मार पाया कभी ढंग से उस नामर्द से मेरी गांड मारना कभी पार नाह लगता"

"राजपाल का धन्यवाद् कैसे करू मेरे लये मेरी माँ की कुवारी गांड छोड़ने क लये"

"मेरी गांड मार कर धन्यवाद कर दो राजपाल का"

ये कह कर देवरानी हसने लगती है और बलदेव ठहाका दे कर हसने लगता है

राजपाल क बास की बात नहीं थी क इतना सुन ने क बाद वो अपने बीटा बलदेव को आवज़ लगाए खाना खाने क लये वो चुपचाप अपने आसुओ को पोछते हुए धीरे धीरे सीडीओ से निचे उतर कर आजाता है

shurushti:kya हुआ महाराज क्या बोलै बलदेव

rajpal:man me)ab क्या कहु मेरी पत्नी की गांड मेरा बीटा आज उद्घाटन करेगा और मुझे नामर्द कह कर दोनों मज़े कर रहे है

Rajpal:wo दरवाज़ा थक थकाया पर वो उठे नहीं शायद सो गए हो

तभी देवराज को हिचकी होती है और बद्री उसे पानी बढ़ता है

Shurushti:theek है उन दोनों को सोने दीजिये जब वो उठेगा तो आएगा खाने आप लोग शुरू कीजिये

Devraj:han हम लोग भोजन कर लेते है

इधर सब भोजन करना शुरू कर देते है उधर बलदेव देवरानी क हाथो से दूध पीटा है और फिर देवरानी को अपने गॉड में उठा लेता है



देवरानी को बिस्तर पर लिटा क बलदेव देवरानी क ऊपर छ जाता है और सबसे पहले देवरानी क होठो को अपने होठो के ले कर चूसने लगता है

"गलपपपप गलप्प्प गलपपपप गलपपपपप गलप्प

गलप्प्प ुहम्म्म्म अहम्म्म्म्म गलप्प्प गलप्प"

बलदेव अपनी माँ को लिटा कर धीरे उसके संगमरमरी बदन को चूमने लगता है



Devrani:aaah राजा ुहम्म्म्म

Baldev:aah माँ ये गांड तुम्हारे आह ुम्हहि

"माँ तुम्हारे वक्ष और ये गांड मुझे पागल कर देते है"



"आह राजा खा ले तेरे हे है आह"

बलदेव देवरानी को कड़ी कर देता है और पीछे से देवरानी की गांड में अपना लैंड फसाये हुए



"माँ मुझे तुम्हारे गांड का निर्त्य देखना है गांड मरने से पहले आपकी"

"आह राजा मेरी ऐसे हे मार लो न निर्त्य क्यू "

"माँ तुम्हे पसंद भी है गांड मटकाओ न मेरे लिए"

"आह में कोई कोठे की रंडी नहीं हु जो मुजरा करुँगी"

"पर तुम मेरी रंडी हो माँ तुम्हे नचा पड़ेगा तभी पेलुँगा में नहीं तो नहीं पेलुँगा"

बलदेव जा कर पलंग पर बैठ जाता है

"ठीक है राजा बीटा जैसी तेरी मर्ज़ी"

देवरानी अपने साड़ी को हल्का सा उठा कर अपने



गान को हिलटते हुए बलदेव को मुद कर देखती है

"हाय माँ क्या गांड है तुम्हारे"



"माँ पेटीकोट और जांघिए निकल कर सिर्फ साड़ी में अपने गांड मटकाओ इन्हे मटकती हुई गांड पे तो फ़िदा हु में"

देवरानी अपना पेटीकोट खींचती है और साथ में जांघिए भी फिर अपने गांड को थिरकने लगती है



Baldev:aah माँ ुहममम आआह क्या ख़रबूज़े जैसे गांड है

बलदेव अपने लैंड को हाथ में लिए मुथया रहा था



"माँ तुम तो किसी रंडी से भी ाचा निर्त्य करती हो तुम्हारी गांड क जलवे देख कर तो बूढ़ा भी जवान हो जाये "

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 121

"माँ तुम तो किसी रंडी से भी ाचा निर्त्य करती हो तुम्हारी गांड क जलवे देख कर तो बूढ़ा भी जवान हो जाये "

बलदेव से रहा नहीं जाता है और देवरानी को पीछे से जकड लेता है और निचे बैठ ते हुए पीठ सहलाने लगता है



पीठ को अपने हाथो से सहलाते हुए बलदेव अपने माँ क पतली कमर पर हाथ फिरता है फिर उसके निचे अपने पसंदीदा गांड तक हाथ ले जाता है और सहलाता है

"ाः उफ्फ्फ राजा बीटा ाः "

साड़ी निचे खिसकते हुए बलदेव देवरानी क गांड क ऊपरी हिस्से को पकड़ लेता है



और अपने हाथो से मसलने लगता है और देवरानी अपने आखे बंद कए सिसक रही थी

"क्या मोती और खूबसूरत गांड है आह मज़ा आगया तुमसे ब्याह कर क"



दोनों हाथो से दोनों चुतर को मसलते हुए बलदेव अपने माँ को कहता है और उसकी माँ आखे बंद कए हुए अपने बेटे दुवारा अपने चुतर को सहलाने का मज़ा ले रही थी

बलदेव अब साड़ी ऊपर करता है और फिर से देवरानी को पलंग पर ले जा कर पटक देता है

baldev:ab मरूंगा रानी तेरी गांड मेरी माँ मेरी पत्नी



बलदेव अपने माँ क मोती जांघो को चूमता हुआ ऊपर आरहा था और उसके भरी मम्मी जो क़ैद थे ब्राज़िएर में उसके ऊपर ाकरण करता है

बलदेव अपने माँ क ब्राज़िएर आज्ञा को खोल कर बड़े मम्मी को आज़ाद कर देता है और अपने बड़े पंजो में मसल कर रख देता है



"ाः राजा धीरे "

"आह माँ इसे चूस चूस कर खा जाऊंगा"



"आह खा जाओ बीटा ये तेरे हे है ाः ुहममम"

"आह माँ ये कितने बड़े थान है तेरे "



"गलप्प गलप्प गलप्प ुहममम ाअहंम क्या आम है तेरे मेरी रांड मेरी माँ"

"आह चूस ले ये आम बेटे पी ले रस इन आम का"



बलदेव जांघिए खींच कर अपने माँ क बड़े गांड से अलग कर देता है और अपने माँ क गांड को चूमने चाटने लगता है और देवरानी आँख बंद किये सिसकने लगती है



"माँ इस गांड ने हे मुझे तुम्हारा दीवाना बनाया था जब भी तुम चलती थी मेरे धड़कन रुक जाते थे "

"आह उफ़ राजा क्यू अब नहीं रुकते धड़कन मेरे गांड देख क"

"ऐसा करो माँ चलो न जैसे तुम साड़ी मी अपने गांड मटका कर मुझे अपना दीवाना बनाई "

बलदेव देवरानी को छोरता है और देवरानी पलंग पर सीढ़ी होते हुए कड़ी होती है

"अच्छा राजा में चलती हु देखती हु तुम्हारे धड़कन बंद होती हैं या नहीं"

देवरानी एक ऐडा से उठ कर अपने भरी मटके जैसे गांड मटकते हुए चलने लगती है



बलदेव अपने माँ क मटकते गांड को देखते हुए अपने वस्त्र खोल कर नंगा हो जाता है और देवरानी वापस घूम कर आती है तो बलदेव देवरानी को खींच कर अपने बाजु में समेत लेता है

"आजा गांड की रानी तेरी गांड मरुनाज आजा"



"आह राजा उफ़ ाः उतना बड़ा लैंड इतने छोटे छेड़ में कैसे डालोगे "

"वो मेरा काम है तेरे गांड की सील तोडना कैसे है चिंता मत करो"

"आह राजा महारानी देवरानी की गांड को छोड़णा इतना आसान नहीं"

"रानी झुक जाओ पहले तुम्हारी छूट मरूंगा फिर तुम्हारी गांड की ढक्कन खोलूंगा"

देवरानी अपना बाद आगाँद बलदेव क तरफ कर क झुकती है और बलदेव ताबड़तोड़ थप्पड़ मारने लगता है"

"आह राजा आआह ाः धीरे धीरे राजा"

चटक चटक थप्पड़ की बरसात कर देता है बलदेव और अपने लैंड पर थूक लगा कर देवरानी की छूट के पेल देता "khachh"se देवरानी क छूट में 9 इंच ला खड़ा 3इंच का मोटा लौड़ा घुसेड़ देता है

"आऐ माआ मररररर गयी उफ्फ्फ राजा कितना बड़ा मोटा है मेरी छूट क जड़ तक पहुंच गया ाः राजा"

बलदेव धक्के पेलने लगता है और देवरानी आँख बंद कए हुए सिसक रही थी

"यह अराजजा धीरे उम्मा ाः आआआ आआ आह राजा"

बलदेव गांड पैर थप्पड़ मरते हुए छूट छोड़ने लगता है

"क्या गांड है माँ जैसे दो तबला हो वैसे बज रहे है आह ये ले मेरा लौड़ा "हुमच क फेर से लौड़ा अंदर पेलता है थोड़ी देर ऐसे हे पेलते रहने क बाद बलदेव निचे लेट जाता है और देवरानी को अपने ऊपर ले कर छूट में लैंड आगे पीछे करने लगता है

बलदेव निचे से धक्के मार रहा था और एक हाथ से देवरानी क भरी दूध को पकड़ क मसल रहा था थोड़े देर की पेले से देवरानी क छूट से पानी छोर देती है

"आआ अअअअअ आई में गयी aaaaaaaaaaah राहाजा हां ॉरंटमंम टीज़ धक्के मारो ाः भर्र दो अपने मा क छूट को आआह"

देवरानी क छूट क पानी से बलदेव का लौड़ा पूरा भीग जाता है बलदेव देवरानी को अब उल्टा लिटा ता है और उसके गांड को झुका कर अपना मुँह उसके गांड क छेड़ पर लगा देता है



बलदेव अपने जीभा से देवरानी क गांड को खदेड़ने लगता है और बलदेव देवरानी क गांड को चाटने लगता है

"आह राजा क्या कर रहे हो गन्दी जगह है वो"

"ये मेरे लये सबसे कीमती जगह है मेरी सबसे प्यारी जगह है तुम्हारी गांड माँ"

"बीटा उफ्फ्फ ाः ऐसे हे खा तेरे बाप राज पल ने तो इसे कभी छुआ तक नहीं"

"मेरे बाप क नसीब में नहीं था इतना अछि गांड मरना ये मेरे नसीब का माल है इसे में पहलूँगा"

"आह राजा पेल ले "

बलदेव अब उठ खड़ा होता है और अपना गीला लैंड जो देवरानी क छूट क रस से गीला होचुका था उसको हाथ में ले कर मुठियाता है और देवरानी क गांड को दो ऊँगली से फैलता है

"माँ मैंने न जाने कितने राते इस गांड क सपने देखे है ाः आज जा का इस गांड में लैंड पेलना नसीब हुआ है"

"तुम महारानी देवरानी की गांड मार रहे हो किस्मत क धनि हो पति देव आह बीटा जी"

बलदेव देवरानी क गांड क छेड़ पर अपने



लैंड को सत्ता ता है देवरानी अपने हाथ से अपना चुतर फैलाती है है और धीरे से लैंड का टोपा अंदर खिसक जाता है

बलदेव अपना आँख बंद कर एक लम्बी सांस लेता है "आआआआह मा"

देवरानी को ऐसा लग रहा था जैसे उसके गांड क छेड़ फटी गयी "उफ्फ्फ राजा "ायकः बंद कए हुए आने वाले पल का सोच कर हे डर रही थी

"उफ्फ्फ ाआअह राजा पूरा नहीं जा पायेगा इतने में मुझे दर्द हो रहा है"

"पूरा जायेगा और खूब मरूंगा भी तेरी गांड मेरी माँ "

बलदेव आखे खोलते हुए सुकून क साथ लैंड को थोड़ा गांड क छेद में हे हिलता है

"आह रानी कितनी कासी हुई गांड है मेरी माँ तेरी गान आह"

"आह राजा उफ्फ्फ मेरी जान न चली जाये पूरा न डालो बहुत दुःख रहा है"

बलदेव हल्का लौड़ा बहार खींचता है और टोपा अंदर हे रहने देता है



फिर दुबारा गांड में दम्म लगाकर लैंड पेलता है इस बार ाआधे से ज़्यादा लैंड देवरानी क गांड में घुस जाता है

"अअअअअअअ यह आआआआह राजायआ में मर्डर गयी "

देवरानी से रहा नहीं जाता है और अपने हाथ से अपने दोनों चुतर को फैलते हुए सिसक रही थी

बलदेव अब अपने लैंड को अआधा गांड में घुससये सीधा खड़ा होता है और पूरा लैंड अंदर तेल देता है



"aaaaaaaaaaaaah उफ्फ्फ राजा नहीं ाबहुई नही नाआहिये रजा आआह देवरानी क आखो में से ासु टपक पड़ते है इतना दर्द होता है बलदेव अपना लैंड पूरा घुसा दया था देवरानी अपना हाथ पीछे ले जा कर बलदेव को रोकने की पूरी कोशिश करती है पर अब तक बलदेव का पूरा 9 इंच का लैंड अंदर था और देवरानी रोये जा रही थी उसके आसुओ से तकिए गीला हो चूका था ..बलदेव देवरानी क ऊपर लेट जाता है है और धीरे धीरे चूमने लगता है देवरानी क गर्दन पर फिर देवरानी क कान क नीचे

"क्या हुआ मेरी रानी माँ को"

"आह राजा बहुत दुःख रहा है निकल लो ना ाः"

"माँ अब जो इतनी मुश्किल से अंदर गया है कैसे निकल लू"

"बीटा किसी और दिन कर लेना आज रहने दो ाः "

"किसी और दिन में भी उतना हे दुखेगा माँ बास आज बर्दाश्त कर लो थोड़े देर बाद तुम्हे मज़ा हे आने वाला है "

"झटके न मरना बीटा में मर्डर न जाऊ तुम्हारे घोड़े जैसे लैंड की मार से"

"माँ तुमने 9 इंच का लैंड ले ली हु किसी और की स्त्री की बास की बायत नहीं थी धक्के भी सेह लोगी बस्स्स अपनी गांड और ढीलो करो "

"आह माँ तुम्हारी गांड भी बहुत गरम और कासी हुई है ाः माँ मुझे कब अपना प्यार की निशानी मेरा बचा डौगी"

"आह बीटा मैंने तुमसे एक बात छुपाई बुरा नहीं मानोगे तो बताऊ"

"माँ बताओ न भला में आपके बात का बुरा मान सकता हु "

"बीटा वो में अभी माँ नहीं बन सकती"

"पर क्यू तुम तो खुद चाहती हो में तुम्हे पेट से करू और बचा दू"

"बीटा में चाहती हु क मेरे होने वाले को कोई तकलीफ नहीं हो इसलिए आपकी दादी माँ जीविका और आपके पिता राजपाल जब तक हमे बचे पैदा करने की अनुमति नहीं दे में नहीं करुँगी"

"पर माँ मैंने तो बहुत बीज तुम्हारे खोख में छोरा है पिछले सुहागरात में भी "

"वो मैंने वैध जी की जड़ी खा ली थी तब भी आज भी बचा नहीं ठहरेगा बुरा मत मान न "

"क्या माँ मई सोचा था हमारे पहले मिलाप का बचा होगा पर कोई बात नहीं में आपकी बात समझ सकता हु मेरी प्यारी रंडी माँ"

बलदेव अंदर से गुस्सा होता है पर वो अपने माँ को तकलीफ नहीं देना चाहता इसलिए गुस्सा को पी जाता है

बलदेव देवरानी क बगल में लेट जाता है और अपने लौड़े को देवरानी की गांड में अंदर बहार करने लगता है



"आह राजा ाः मेरी गांड फाड़ डोज आज तुम बीटा ाः "

"ये ले मेरा लैंड अपनी गांड में रंडी"



"ाः राजा ाः बीटा धीरे धीरे बीटा ाः में मर्डर गयी उफ़ कितना बड़ा लैंड है तेरा ाः फाड़ देगा तू मेरी गांड आज"

"मा तूने इस गांड को मटका क मेरे डिल का चैन चुराई है इस गांड को में फाड़ क रख दूंगा इसका बदला तो लूंगा में इस प्यारी से मोती सी गांड से"



देवरानी क ऊपर आकर अब अचे से ताबड़तोड़ लैंड पेलने लगता है

"रंडी मेरे पहले सुहागरात का बीज बर्बाद कर दी नहीं तो तुम पेट से हो जाती"

बलदेव गुस्से में था अंदर से और अपना दम्म लगा कर ज़ोर से धक्के मारने लगा



Devrani:aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahaaaaaaaaaaaaaaaaaah aaaaaaaaaaaaaaah aaaaaaaaaah aaaaaaaaaah aaaaaaaaaaaaaaaaaaaah aaaaaaaaaah naheeeeeeeeeee aaaaaaaaaaaah नाहीईईए aaaaaaaaaaah नही हे bhagwaaaaaaaaaaaaaaaaaaan

इतना ज़ोर से चिल्लाती है क निचे खाना खाये बैठे राजपाल और देवराज तक साफ़ साफ़ आवाज़ सुनाई देती है राजपाल षुरूश्ती की ओरे देखता है और षुरूश्ती मुस्कुराते हुए

"महाराज में देखती हु क्या हुआ "

Shurushti:kamla ऐसा करो तुम चली जाओ अगर कोई बात नहीं हो तो वापस चली आना रुकना मत आज उनका सुहागरात है

Kamla:man me)hua क्या होगा गांड तोड़ रहा होगा बलदेव अपने माँ का

kamla:ji में अभी आई

कमला सीडीओ से चढ़ कर ऊपर बलदेव क कक्षा क सामने आकर

"महारानी आप ठीक तो है न "

Baldev:maa इस कमल को बोलो जाने नहीं तो मेरे हाथो मरी जाएगी

Devrani:kamla तुम जाआआआ ाः

kamla:man me)khub पेलवाओ अपने बेटे से लौड़ा भी तो मुसल जैसा है पुरे महल को सर पैर उठा रखा है इतना चिल्ला रही है

Kamla:maharani आवज़ आपकी निचे तक जा रही थोड़ा संभल क

बलदेव फिर धक्के पेलने लगता है

"ाः कमला ठीक है जाओ में समझ गयी उफ़ आआह"

देवरानी थोड़ा ताक़त लगा कर कहती है और चली जाती है

Baldev:maa थोड़ा काम चिल्लाओ निचे तक आवाज़ चली गयी

Devrani:ab तुम अपना 9 इंच का मुसल से ऐसे धुवादर अपने माँ की गांड मरोगे तो कैसे न चिल्लाओ बहुत दुःख रहा है

उधर कमला सीडीओ से उतर कर जाती है इधर बलदेव फिर से अपना लौड़ा लिए हाथ में अपने माँ क गांड क छेड़ में दाल देता है



"आह राजा में मर्डर गयी ाआअह राजा धीरे नहीं में अपने को चिल्लाने से रोक नहीं पाऊँगी"



बलदेव झुका कर धीरे धीरे पेलने लगता है

"ाः उफ़ राजा ऐसे हे ाः क्या तगड़ा लैंड है"

"माँ अब मज़ा ाअरहा है न अपने बेटे का लैंड गांड में ले कर"

"आह है राजा आह"

अब बलदेव निचे लेट जाता है और निचे से अपने माँ क गांड में लैंड घुसा देता है और ताबड़तोड़ लैंड पेलने लगता है

Baldev:ye ले मेरा लैंड रंडी माँ तेरी गांड की गुफा में मेरा लैंड हे चाहिए था ये ले

घापा है घापा है इतने ज़ोर से लैंड पेलता है



देवरानी से बर्दाश्त नाह होता है और 9 इंच क लैंड को अपने गांड क धक्के से चिल्ला उठ टी है

"आआआआआह haaaaaaaaaaye aaaaaaaaaah राजा उफ़ फड़ आआआआह हे आआह"

चिल्लाता देख बलदेव अपने गति धीरे कर देता है

"माँ निचे सब बैठे है मत चिल्लाओ "

"बीटा मुझे बहुत दर्द हो रहा है मेरा गांड फैट जायेगा ाः क्या बताऊ मुझ से सहन नहीं होता"



बलदेव अब देवरानी को पूरा झुका कर धीरे धीरे देवरानी क गांड में झड़ने लगता है

Baldev:le रंडी अपने बेटे क लैंड का पानी अपनी गांड में

देवरानी पूरा 9 इंच का लैंड अपने गांड में लिए कटी मुर्गी की तरह छटपटा रही थी और साथ हे अब उसके गांड में गरम बलदेव का वीर्य जाते हे एक अलग से रहत महसूस होती है जैसे कीसी ने गरम तवे पे पानी दाल दया हो

देवरानी अपना आँख बंद कए बलदेव क लैंड क पानी क एक के बून्द को मज़े से अपने अंदर जाते हुए महसूस कर रही थी

Devrani:man me)hey भगवन क्या पति दया है कभी कभी ऐसा लगता है जान हे लेलेगा

उधर कमला सीडीओ से निचे उतरती है और सबसे कहती है

"कोई बात नहीं वो महारानी देवरानी छिपकली देख कर दर गयी थी "

तभी एक बार फिर चिल्लाती हुई देवरानी की चीख सुनाई पड़ती है

Shurushti:aap लोग अपना भोजन कीजिये वो छिपकली क वजह से डर रही है बहु रानी

देवराज और राजपाल अपना भोजन कर रहे थे पर बद्री क चेहरे पर मुस्कराहट फैली हुई थी

उधर बलदेव एक एक बून्द अपने माँ क गांड में दाल देता है और अपना लौड़ा गांड से खींचता है "फक्क" कर क आवाज़ आती है और देवरानी अपना आँख बंद कए लेट जाती है

बलदेव अपने वस्त्र पहनता है

देवरानी थोड़े देर बाद महसूस करती है है क उसके गांड की हड्डी बहुत तेज़ दुःख रही है और उसके आखो से ासु गिरने लगते है

Baldev:kya हुआ माँ अब क्यू रो रही हो

Devrani:Beta पीछे की हड्डी दुःख रही है जल्दी कमला को भेजो

Baldev:maa ज़्यादा दुःख रही है क्या

devrani:han बेटा आह मुझे बोलै भी नहीं जा रहा

बलदेव अपने वस्त्र जल्दबाज़ी में पहन कर भागता है

devrani:ary बीटा अपने पसीने तो पॉच क जा सब देखेंगे तो क्या सोचेंगे

ये देवरानी कहती तब तक बलदेव कक्षा से बहार निकल चूका था

Devrani:man me)sab यही सोचेंगे अपने माँ पैर म्हणत कर क आरहा है

बलदेव निचे अत है तो देखता है सब भोजन कर रहे है बद्री और श्याम अब भी खा रहा था पर राजपाल और देवराज ने अपना भोजन कर लये थे

बलदेव निचे आकर

"कमला ज़रा देखना तुम्हारी महारानी बुला रही है"

Devraj:aao बलदेव भोजन करो

Rajpal:aao बीटा हम बास उठ ने वाले थे

Baldev:mujhe भूक तो बहुत लगी है

बलदेव का हाथ राधा दासी धुलती है

राजपाल देवराज बद्री और श्याम क साथ षुरूश्ती भी देख रही थी क बलदेव पसीने से तरबतर है और सब मंद मंद मुस्कुरा रहे थे

Baldev:lao बड़ी माँ मुझे बहुत भूक लगी है

Shurushti:han मेरे मेहनती बेटे को में डिल भर क खाना खिलाऊंगी..

तो बे कॉन्टिनोएड
 
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