Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 11 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 95

सुहागरात 1 बजे

देवरानी बलदेव को लिटा देती है और अपने हाथ में तेल ले कर बलदेव क लौड़े को अपने हाथ में ले कर ऊपर निचे कर लौड़े की मालिश करने लगती है

"ाः माँ ुआह"

"कितना बड़ा है ये तेल लगने पर तो और भयानक लग रहा है"

"माँ ये सिर्फ आपके लिए है यह"

देवरानी अपने दोनों हाथो से बलदेव क 9 इंच लम्बे और 3 इंच मोठे लौड़े को सरसों क तेल से मालिश कर रही थी और अपने नए पति क लौड़े को देख उसे अंदर हे अंदर गर्व हो रहा था

"में कितनी धनि हु राजा क मुझे इतना मज़बूत हथियार वाला पति मिला"

"माँ ये हथियार हे है जो आपके छूट की आग बुझा सकता है"

इतना सुनते हे देवरानी लैंड छोर सीधा लेट जाती है

"आजा न फिर आग बुझा दे मेरी राजा

बलदेव उठ ता है और उसका लौड़ा तेल में सना हुआ इठला रहा था जिसे लगातार एक तक लगाए देवरानी देख रही थी

"ये कभी थकता है क नहीं बीटा "

"अब जिसकी माँ तेरे जैसी माल हो उसका लौड़ा कभी थकेगा क्या"

बलदेव निचे बैठते हुए देवरानी क जांघो को पकड़ कर फैलता है और अपने तरफ खींच कर देवरानी क ायखो में देख

"माँ पेल दू आपको"

"हाँ पेल दो राजा"

और देवरानी आखे बंद कर लेती है

बलदेव अपना लौड़ा एक हाथ से छूट क मुहाने पे रखता है और एक धक्का मारता है

"पछहः "से पूरा लौड़ा एक बार में अंदर दाल देता है

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"aaaaaaaaaaah रआआआज़ाअ"

इस बार देवरानी इतना ज़ोर से चिल्लाई थी क बगल क कक्षा में बंधे राजा राजपाल जो सो चूका था कुर्सी पर बैठा बैठा उसकी आखे खुल जाती है

राजपाल अपने हाथो को आगे पीछे रस्सी से आज़ाद होने की कोशिश करता है पर रस्सी टास से मास्स नहीं होती वो अपना सर झुकाये अपने आपको कोस रहा था

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Rajpal:man me)Ye मेरी हे गलती का नतीजा है क आज में यहाँ बंधा हु और मेरी पत्नी क साथ मेरा बीटा सुहागरात मन रहा है

राजपाल को अपनी गलती का ाशस हो रहा था और उसका दुःख से भर गया था

फिर से देवरानी की एक चीख आती है

"आआआआह राजा"

"ये ले रानी मेरा लौड़ा"

घप्प से लौड़ा निकल कर दुबारा जड़ तक बलदेव पैंडेटा है

पुरे कक्षा में अब तेल में साणे छूट और लौड़े की आवाज़ "पाछह पाछह pachh"aarahi थी ऐसा लग रहा था क कोई बड़ी मछली पानी में डूबकी लगा रही है जैसे हे बलदेव का लौड़ा देवरानी क छूट में घुसता है

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"माँ ये ले मेरा लौड़ा आह बहुत तरसी थी न तू लौड़े क लये"

"आह राजा ऐसे हे आह हां मेरे बरसो की प्राथना भगवन ने सुन ली और तुम मेरे पति बन गए ाआअह "

थोड़े देर ऐसे हे छोड़ने क बाद बलदेव देवरानी को झुका देता है और फिर लगातार धक्के मारने लगता है

"आह राजा आआह ऐसे कौन पेलता है आह ऐसे हे राजा आराम से ाः"

"रानी माँ तुम मेरी पत्नी हो अब में जितना भी पेलू जैसे भी पेलू तुमको पेलवाना पड़ेगा "

बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क गर्दन में हाथ लगता है

"बोल पेलवायेगी न जैसे में चहु वैसे"

"आह हां ाः है राजा आप मेरे पति हो आपकी हर बात मानूंगी"

ये सुनते हे बलदेव एक करदा धक्का मारता है

"aaaaaaaaaaaaah राजआआआ"

इस बार इतनी ज़ोर से चिल्लाती है देवरानी क उसकी आवाज़ रात क अँधेरे में पुरे महल में गूंज जाती है

"पछ पछ खछ क साथ चुडिओ और पायल की आवाज़ बलदेव सुन कर मज़े क समुन्दर में गोते लगा रहा था"

बलदेव अब खुद बैठ जाता है और देवरानी को अपने लौड़े पैर बैठा देता है

देवरानी अपना बड़ा गांड आगे पीछे करते हुए अपने बेटे का लैंड ले रही थी

बलदेव जैम कर हर आसान में देवरानी की छूट खोलता है पिछले दो घंटे में देवरानी क छूट की धज्जिया उदा देता है बलदेव और देवरानी कई बार झाड़ जाती है पर बलदेव एक बार भी नहीं झाड़ता है

"राजा जी आज झाड़ोगे क नहीं "

"माँ इतनी जल्दी क्या है इस बंजर ज़मीन को हरा भरा करना है क नहीं"

घप्प से फिर अपना लौड़ा पेल देता है

"आआह राजा करना है ाः आराम से"

बलदेव अपना हाथ उठा कर ज़ोर से थप्पड़ मारता है देवरानी क गांड पर जिस की आवाज़ पुरे कक्षा में गूँज रही थी

"ाः मार हे डालोगे बीटा"

बलदेव अब देवरानी को फिर से सीधा लिटा देता है और पहच पहच कर तेल से साणे हुए छूट जिसमे से अब देवरानी क छूट क पानी और बलदेव क वीर्य का मिश्रण बह रहा रहा दोनों टैंगो को उठा क घापा है चुदाई करने लगता है कुछ देर ऐसे हे भीषण चुदाई क बाद बलदेव क लौड़े से वीर्य निकलने वाला होता है और बलदेव देवरानी क भरी मम्मो को अपने हाथो में दबाये देवरानी क ऊपर पूरा लेट जाता है देवरानी आगे हाथ बढ़ा कर

"आ जा मेरा बच्चा"

"phachh"se पिचकारी छूट टी है और देवरानी क साथ साथ बलदेव भी ाअखे बंद कर लेता है

"ाः मा ाआअह मेरे लैंड को दबोच कर पानी निकल रही है तुम्हारी छूट आह"

"ाः बीटा ाः तर कर दे अपने पत्नी अपनी माँ का बुर अपने वीर्य से बरसो से सुखी थी हम्म"

दस मिंट तक दोनों एक दूसरे में समाये रहते है और देवरानी अपने छूट को सिकोड़ कर बलदेव क लौड़े क एक एक बून्द वीर्य को अपने अंदर महसूस करते हुए ले रही रही और बलदेव भी इतना ज़्यादा झाड़ा

"ाः माँ"

बलदेव देवरानी क ऊपर से हैट कर बगल में गिर जाता है और लम्बी लम्बी साँसे लेने लगता है

देवरानी अपने छूट को देखती जिसका हाल देख उसे हैरानी होती है चुटी का छेड़ अब पहले से ज़्यादा बड़ा हो गया था और वो छेड़ खुला का खुला हो जिसे बलदेव क भरी लौड़े ने खोल कर रख दया था और छूट बेचारी दर क मरे बंद नहीं हो रही थी छूट से दोनों क प्रेम मिलान का मिश्रण वीर्य और छूट क दीवारे छिलने पर हल्का खून भी वीर्य क साथ छूट से होते हुए जांघो से होते हुए बिस्तर पर गिर रहे थे

"हे भगवन कितना पानी छोरा पूरा बिस्तर गिला हो रहा है"

"यह माँ अब ऐसी बंजर ज़मीन को ऐसे हे जोटा जाता है नहीं तो इसमें पौधे कैसे लगेंगे"

"राजा जी आपके हल ने मेरे ज़मीन को कुंवा बना दिया है"

Baldev:man me)Meri रानी तुम्हे पता हे नहीं क तुम्हारी हर चीख तुम्हारे नपुंसक पहले पति राजपाल सुन रहा है आज उसे पता चल रहा होगा क एक स्त्री को शारीरिक सुख देना क्या होता है

देवरानी बलदेव को देख

"राजा जी क्या सोच रहे हो में अछि तो लगी न"

बलदेव अपना हाथ बढ़ा कर देवरानी का सर अपने कंधे पैर लेते हुए

"अछि नहीं होती तो आज मेरी बाँहों में नहीं होती"

"राजा जी मेरे कहने का अर्थ ये था क मेरे शरीर को भोग कर सम्भोग कर कैसा लगा कही कोई कमी"

"हट पगली तुम्हे ज्ञात नहीं है क तुम्हारा ये मादक शरीर कितना मज़ा देता है और तेरे जैसी चुड़ककर माल मुझे कभी ढूंढ़ने से नहीं मिलती"

"ाचा इतना पसंद आई में"

बलदेव देवरानी को अपने ओरे खींच कर उसके भरी मम्मो को हाथ में ले कर

"मेरी रानी तेरे छूट में इतनी आग है और तेरा अंग अंग इतना मादक है क में तो चाहता हु मेरे हर जनम में तुम हे पत्नी बन"

"न बाबा न तुमने एक रात में मुझे अधमरा कर दिया सात जनम में नहीं चाहिए ऐसा पति"

बलदेव ये सुन कर मायूस हो जाता है

"ठीक है तो जाओ अगले जनम में किसी और छुड़वा लेना पर इस जनम में तो में जीवन भर अपने लौड़े पैर हे बिठाये रखूँगा"

देवरानी आगे बढ़ कर बलदेव क माथे को चुम कर

"अरे रे मेरा राजा गुस्सा हो गया पगलू में तो मज़ाक की अगर ऐसा होता तो में रात भर तुम्हारी निचे लेते तुम्हारे मुसल की मार न सेहती"

बलदेव देवरानी को अपने बहो में ले कर

"आह है माँ तो में भी तो मज़ाक हे कर रहा था मुझे पता है तुम सिर्फ मेरी दीवानी हु"

"हाँ देखो न दीवानी क योनि का क्या हाल क्या तूने और इस मुसल ने"

देवरानी देखती है बलदेव क लैंड को जो अब छोटा हो गया था

"कहा माँ देखो कितना प्यारा है आपका मुसल और छोटा भी"

बलदेव हस्ते हुए अपने सोये हुए लैंड पर इशारा करते हुए कहता है

"चुप करो अब जा कर ये शांत हुआ मेरी धज्जिया उदा कर आराम कर रहे है लिंग महाराज इसे तो में छोड़ूंगी नहीं"

"तो माँ रोका किसने है मत छोरो"

"बीटा इस मुसल ने मुझे थका दया और खुद सो रहा है"

"माँ तुम्हारे जैसी भरी भरकम को इतने घंटो से छोड़ रहा है थकना तो स्वाभाविक है"

देवरानी उठ कर बैठ जाती है

"इस से बदला लुंगी में मेरी योनि का हाल बेहाल कर दया इसे सोने नहीं दूंगी"

"माँ तो जगा दो इसको पर उसके बाद ये शेर उठ गया तो सोच लेना क्या होगा"

देवरानी उठ कर बैठ जाती है और सबसे पहले कपडा उठा कर अपने छूट को पोछती है फिर बलदेव क पैरो को बीच बैठ कर उसी कपडे से बलदेव क लौड़े को साफ़ करती है

"देखो कैसे भोला बना है जैसे कुछ किया हे न हो ये"

देवरानी बलदेव क लैंड को हाथ में ले लेती है और दूसरे हाथ से बलदेव क गोते को पकड़ लेती है

"आह माँ"

"क्यू दर्द हुआ मेरे राजा को"

"आह माँ आराम से पकड़ो"

देवरानी अपना हाथ का मुठी बना कर बलदेव क लौड़े क चमड़े को आगे पीछे करने लगती है और बलदेव अपने आखे बंद कए आहे भर रहा था

"आह माँ उसे मत सताओ नहीं तो उठ गया तो तुम्हारी खैर नहीं"

"देख लुंगी में भी कोई कच्ची खिलाडी नहीं"

देवरानी बलदेव क लैंड को दोनों हाथ से पकड़ कर मालिश कर रही थी फिर निचे झुक कर अपने दोनों बड़े पपीता को लैंड क ऊपर झुका कर मसलती है

"देखो मेरे दूध छूने पर हे इसका नस फूल रहा ह जैसे सांप हो दूध पीना है"

"माँ ये सांप तुम्हे इतना पलेगा क तुम्हारे इन बड़े पपीता में दूध भर जायेंगे"

"हट बड़ा आया सो रहा है लल्लू जैसा"

बलदेव ये सुनते हे देवरानी का सर पकड़ लेता है और अपना लौड़े क तरफ दबाता है

"ले मुँह में अभी बताता हु ये लल्लू क्या कर सकता है"

देवरानी का सर बलदेव दबाये रहता है जब तक देवरानी अपने होठ खोल कर लौड़ा अपने मुँह में नहीं ले लेती लौड़ा सिकुड़ क छोटे होने क कारन देवरानी क मुँह में पूरा समां जाता है

"चुसो इसे आह यह"

बलदेव अपने आखे बंद कर लेता है

देवरानी किसी आम को चूस रही हो ऐसे चूसते हुए बलदेव क लौड़े से हल्का वीर्य आ रहा था उसे पी रही थी

थोड़े देर ऐसे हे चूसने पर देवरानी क सांस फूलने लगते है और वो अपना मुँह उठती है और पक्क की ाआवाज़ से लौड़ा बहार आता है देवरानी क मुँह से वीर्य और थूक का मिश्रण टपक रहा था और वही लौड़े पे भी देवरानी क लगे थूक से लौड़े में थोड़ी अकड़न आगयी थी

"आह राजा इसे में पूरा मुँह में ले ली थी "

"माँ वो ये सोया है इसलिए तुमने ऐसा कर लिया नहीं तो खड़ा हो जाये तो तुम नहीं ले पाओगी"

"बीटा ये में पहली बार कर रही हु धीरे धीर सीख जाउंगी"

"सीख लो देवरानी क्यू क तेरे पति का लौड़ा तुझे पूरा मुँह में लेना है रोज़ समझी"

"जी महराज मेरे पति देव"

देवरानी निचे झुक कर एक हाथ में फिर लैंड पकड़ लेती है और एक हाथ से बलदेव क जांघ पर हाथ फेरते हुए अपने नाख़ून से रगड़ते हुए फिर से बलदेव को गरम करने लगती है बलदेव पीठ क बल लेते हुए

Baldev:man me)randi कहती है थक गयी हु पर अब भी इसका मन नहीं भरा फिर इसको ठुकाई करवानी है

"आह माँ "

"उठ जा मेरे शेर "

फिर से घप्प से अपने होठो क बीच बलदेव क लौड़े को अपने मुँह में भर्र लेती है फिर धीरे से अपने जीभ को लैंड क टोपे पर फिरने लगती है

"ाचा म्हणत कर रही हो देवरानी"

"अब ये तो पति धर्म है इस महराज ने भी तो मुझ पर कड़ी म्हणत की है"

कुछ देर ु हे चूसने चाटने क बाद देवरानी देखती है बलदेव का लौड़ा सर उठा रहा है देवरानी झट से अपना एक दूध बलदेव क लौड़े पर रगड़ने लगती है दूसरे हाथ से बलदेव का हाथ पकड़ कर अपने दूसरे दूध पर रख मुस्कुराती है

Baldev:man me)kaise मुस्कुरा रही है साली जैसे खज़ाना मिल गया हो अभी पेल कर इसकी प्यास बुझाता हु

बलदेव देवरानी क दूध को दबा रहा था और देवरानी फिर झुक कर अपना जीभ निकल कर बलदेव क लैंड को चाटने लगती है बलदेव अब फिर से गरम हो जाता है और उसका लैंड अब धीरे धीरे पूरा अकड़ने लगता है देखते हे देखते लौड़ा फिर पुरे 9 इंच का हो जाता है

"बीटा ये कुछ ज़्यादा मोटा लग रहा है पहले से"

"मेरी जान अब ये कुंवारा नहीं रहा तेरे छूट क पानी ने इसे फुला दया "

"चल हट"

बलदेव देवरानी का सर पकड़ कर अपने लौड़े पर धक्का मारता है और इस बार लौड़ा देवरानी क हलक तक जाता है

"ाः ले रानी मेरा पूरा लैंड अपने मुँह में"

"आह गलप्प ुहममम."

"क्या हुआ देवरानी बहुत शेरनी बन रही थी अब लो पूरा मुँह में"

ये कह कर बलदेव झट से उठ ता है और देवरानी को पटक कर उसके ऊपर चढ़ जाता है

"क्यू मेरी रानी की प्यास नहीं बुझी"

"सच कहु तो सुकून मिला है पर बरसो की प्यास अब भी नाह बुझी"

"में बुझाऊंगा तेरी प्यास मेरी रानी माँ"

और देवरानी क ऊपर पूरा लेट जाता है और अपना लौड़ा छूट पर रगने लगता है और अपने दोनों हाथो में बड़े मम्मो को पकड़ कर दबोच देवरानी क होठो को चूसने लगता है

गलपपपप गलप्प गलप्सलूरप्प हम्म गलप्प

गलप्प्प गलप्प्प गलप्प

थोड़े देर ऐसे हे चूसने क बाद बलदेव पीछे की ओरे हैट कर देवरानी क दोनों टैंगो को फैलता है और देवनी क छूट में अपने दो ऊँगली दाल देता है

"आह राजा"

बलदेव अपने ऊँगली अंदर बहार कर रहा था और देवरानी सिसकी ले रही थी कुछ देर ु हे ऊँगली पेले से देवरानी की छूट फिर पानी छोड़ने लगती है

"माँ तू तो फिर से गीली हो गयी"

"अब बेटे को फिर से पेलना है तो माँ को तो गीला होना हे पड़ेगा "

"साली बड़ी चुड़ककर है तू"

ये कहते हुए देवरानी क छूट को अपने लौड़े क सामने लगता है और फिर देवरानी की ोर्रे झुकते हुए देवरानी क छूट पर लौड़ा हस्ते हुए अपने एक हाथ से छूट क मुहाने पर अपना मोटा सोपारा रख एक धक्का मारता "है

"आह राजा"

बलदेव अब दोनों हाथ आगे बढ़ा कर देवरानी क छूट में अपना टोपा फसाये ऊपर की ओरे चढ़ता है और इस बार "surrrr"se चिकनाहट क साथ छूट में पूरा लौड़ा घुस जाता है

देवरानी अपने आँख बंद कर लेती है

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"क्या हुआ माँ इस बार चिल्लाई नहीं"

"आह राजा तूने पूरा एक बरी में घुसा दया दर्द इतना हो रहा क्या बताऊ"

बलदेव अब लैंड पीछे खींचता है और इसबार एक ज़ोरदार धक्का मारता है

"ाआअह राजा आराम से"

"यह माँ तेरी छूट कितनी कासी है आह"

फिर है से खींच कर लौड़ा पेल देता है और देवरानी चीख मारती है

कुछ धीरे धक्के मारने क बाद बलदेव

"घपपप घपपपप घपपप "

ज़ोर दर धक्को की बारिश कर देता है देवरानी कराह उठ टी है पर बलदेव बिना कोई चिंता कए हुए देवरानी को पेले जा रहा था कुछ देर बाद पेलते हुए बलदेव देवरानी को अपने बाहो में लिए पलट जाता है और खुद पीठ क बल आजाता है और देवरानी को ऊपर ले लेता है देवरानी समझते हुए बलदेव क जांघो पर हाथ रख बलदेव क लौड़े पे बैठ जाती है और ऊपर निचे हो कर अपने बेटे क लैंड को ज़द तक अपने छूट में समेत रही थी

"ाः मा ऐसे कूदो अपने बेटे क लैंड पे आह माँ तुम सच में रति से काम नहीं आह ऐस हे और ज़ोर से"

"आह राजा बीटा मुझे ऐसा लग रहा है जैसे में किसी छुरी को अपने योनि के ले रही ये तुम्हारा मुसल मेरे बचे दानी को चीयर रहा है आआह राजा ऐसे हे पेलो"

कुछ देर ऐसे हे छोड़ने पर देवरानी थक जाती है और बलदेव को समझते देर नहीं लगती वो उठता है और देवरानी को अपने बहो में भर कर पलंग से निचे ले आता है और देवरानी क एक पेअर को कुर्सी पर रखता है और दूसरा पेअर ज़मीन पर था एक पेअर

कुर्सी पर रखने से पीछे से देवरानी की छूट खुल जाती है बलदेव खड़े खड़े अपना बड़ा लौड़ा देवरानी क छूट में पीछे से दाल देता है और आगे से देवरानी क दूध को अपने हाथो में भर खेलने लगता है

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"घप्प घपपप घपपप घपपप"

पछ पछ की आवाज़ चुडिओ और पायलो की छानकर से फिर गूंज उठ टी है

"आह माँ ऐसे खड़े खड़े छोड़ने में तुमको मज़ा है"

"मुझे भी ाचा लग रहा है जी"

"माँ जब भी में तुमको देखता था पहले डिल करता था ऐसे हे खड़े खड़े पीछे से पेल दू आह आज ऐसे पेल कर सपना पूरा हो गया"

"आह राजा में भी सपने में नहीं सोची थी क में कभी सम्भोग का मज़ा ले पाउंगी और मान बैठी थी जीवन भर जलती रहूंगी अपने शरीर आह क गर्मी से और मर जाउंगी"

"ाः माँ मेरे रहते हुए मेरी पत्नी मेरी प्यारी प्यासी रहे ऐसा में होने नहीं दूंगा"

बलदेव अपना गांड पीछे केर क ज़ोरदार धक्का मारता है

"आआह ाआअह बीटा तेरी पत्नी क साथ माँ भी हु तेरी आआह आराम से कर ाः हे भगवन ाः कुछ तो दया कर"

घप्प घपपप पछ पांच बलदेह देवरानी क गले में हाथ डाले पेलते रहता है और देवरानी चिल्लाती रहती है

.तभी बलदेव क कान में कुछ सुनाई पड़ता है

"ाःराजए आह ऐसे हे ाः माँ ाः

"स

बलदेव झटका देना धीरे करते हुए

"देवरानी चुप रहना किसी की आवाज़ आई"

देवरानी अपना मुँह बंद करती है और बबलदेव धीरे धीरे से पांच पांच कर क छोड़ रहा था अपने माँ को

देवरानी भी ध्यान लगा कर सुनती है

"कूऊह कुह"

देवरानी मुस्कुरा क

"बीटा ये कोयल की आवाज़ है ."

"हाँ माँ तुम सही कह रही हो"

"राजा जी एक बात आप भूल गए "

"क्या बात मेरी रानी जी"

"सुबह हो गयी है घडी की ओरे देखो 6 बज गए है"

बलदेव मुस्कुराता है और देवरानी को अपने गॉड में उठा कर फिर बिस्तर पर ले अत है

"मेरी पत्नी मेरी रानी शायद आप भूल गई क आज दुपहर आज आपका पति आपका बीटा आपकी ठुकाई करेगा ऐसा राजमहल में सबको सुचना दे कर आया है"

ये सुनते हे देवरानी शर्मा कर बलदेव क सीने में अपना मुँह छुपा लेती है और अंदर हे अंदर मुस्कुरा रही थी जिसे देख कर बलदेव भी मुस्कुरा देता है

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 96

सुहागरात सुबह 6 बजे

Devrani,"Subah हो गयी है घडी की ओरे देखिये 6 बज गए है"

बलदेव मुस्कुराता है और देवरानी को अपने गॉड में उठा कर फिर बिस्तर पर ले अत है

"मेरी पत्नी मेरी रानी शायद आप भूल गई क आज दुपहर तक आज आपका पति आपका बीटा आपकी ठुकाई करेगा ऐसा राजमहल में सबको सुचना दे कर आया है"

ये सुनते हे देवरानी शर्मा कर बलदेव क सीने में अपना मुँह छुपा लेती है और अंदर हे अंदर मुस्कुरा रही थी जिसे देख कर बलदेव भी मुस्कुरा देता है

"क्यू रानी शर्मा रही हो नहीं चाहिए और प्यार अपने बेटे का"

देवरानी बलदेव क गले लगे हुए अपने नाख़ून बलदेव क पीठ पर चुभा देती है

Baldev:uh यह साली"

बलदेव देवरानी को बिस्तर पर पटक देता है

Devrani:heheh यह राजा

बलदेव पास रखा तेल उठा लेता है और देवरानी को फिर से सरसो क तेल से देवरानी क मादक शरीर पर उढेल देता है

"साली तेरे छूट में भी काम खुजली नहीं है मेरी रानी माँ"

"भूल गया में तेरी माँ भी हु तो तुमसे काम नहीं हु घोड़े"

"क्या कहा तूने"

"घोडा"

और देवरानी है देती है

बलदेव देवरानी क ऊपर चढ़ जाता है

"अभी बताता हु "

"बता दो मन किसने क्या है"

"ये ले मेरी रानी"

बलदेव अपना बड़ा लौड़ा जो हथोड़े सा कड़ा था और तेल लगने पर गरम लोहे सा दाहक रहा था देवरानी क बड़े पपीता क बीच घिस रहे थे

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देवरानी आहे भरते हुए अपने दूध पर लगे तेल को मॉल रही थी और बलदेव अपने लौड़े को पकडे आगे पीछे अपने माँ क दूध क बीच लौड़ा फसाये अपने माँ क भरो मम्मो को छोड़ रहा था

"आआह मा कितने मुलायम और रसीले वक्ष है आआप्के ाः"

"आह बीटा इसलिए ये तेरा साप मेरे वक्षो को घिस क अपना बिल बनाने का प्रयास कर रहा है"

"आह माँ तुम्हारे इस भरी वक्षो को हिलते हुए देख बहुत तड़पा हु इस छोड़ कर हे मेरा लौड़ा ठंडा होगा आह इन दोनों ने मेरे लैंड को बहुत परेशां क्या है"

"आह राजा ऐसा है क्या तो ले आआह इसे रगड़ दू सब गुस्सा थूक देगा ये हथोड़ा"

देवरानी बलदेव को पीछे धकेलती है खुद अपने हाथो में भारी मम्मो को दबाये अपने बेटे का लैंड अपने वक्षो क बीच दबाये घिसने लगती है और ऊपर निचे करने लगती है

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"ाः मा ाः ऐसे हे माँ किसी क छूट छोड़ने में इतना मज़ा नहीं आये जितना तेरे ये वक्षो को छोड़ने में आरहे है

"ाः राजा छोड़ न रात से सुबह हो गयी और तेरा ये वीर सोने का नाम नहीं ले रहा आह"

"तेरे जैसी माल क होते हुए ये सो जाये ऐसा हो नहीं सकता"

ये कहते हुए बलदेव देवरानी को धक्का दे कर लिटा देता है और अपना लौड़ा देवरानी क छूट पर रखता है देवरानी अपने पेअर खोल लेती है

बलदेव बिना समय गवाए

"खछः se"apna लौड़ा अपने माँ क छूट में घुसा देता है

"ाः राजा"

देवरानी क छूट पर ये करारा प्रहार था जिसे आहे भर क दर्द बर्दाश्त कर लेती है और बलदेव अपने गति से लौड़ा आगे पीछे करने लगता है

"ाः राज आआ आआह रआआआज़ाअ आअहाह"

"घपपपप घपपपप घपपप घपपप घप्प"

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"आआह राजा तूने तो अपने माँ क अंग अंग खोल क रख दया राजाआं हां ऐसे हे राजा आआह मेरे राजकुमार मेरे पति देव ाः ऐसे "

"ाः मा तेरी जवानी का मज़ा किसी ने लूटा नहीं कभी तेरी जवानी तो दिन रात मज़ा लेने क हे बानी यह ये ले"

"घपपपपप घपपप पाछह pachh"Ki आवाज़ क साथ चुडिओ और पायल की आवाज़ गूंज रही थी"

"माँ तुम खुश तो हो न मुझ से ब्याह रचा क आह ये ले "

"आह धीरे आह राजा तुझ जैसा पति पाकर में धन्य हो गयी ाः ऐसे हे आह"

"आह माँ ये ले आह लगता है तेरी मुनिया पानी छोर रही है ाः बहुत प्यासी थी न तेरी मुनिया"

"हाँ राजा बहुत तदपि ाः है बहुत तरसी है बहुत बरसो तक ाकल रहा इस धरती पर मुनिया सालो की प्यासी थी अब इसका सच्चा रखवाला मिल गया है जो इसे हमेशा हरा भरा रखेगा"

बलदेव ये सुन कर जोश में आजाता है क्र और ज़ोर से धक्के लगाने लगता है

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"ाआअह आए अअअअअ नहीं आआआह में मर्डर गयी ाआअह रुकक्क ओह्ह्ह्ह ाः धीरे राजा नहीं ाआअह ओह जानवर ाआअह आराम से"

देवरानी को धक्के लगते हुए बलदेव देवरानी क गांड पर थप्पड़ मार रहा था और देवरानी दर्द और प्यार दोनों मिश्रण एक नए प्रकार क सुख प् रही जिसका उसने कभी सोचा भी नहीं था

"ाः रानी क्या हुआ फैट गयी छूट आह ये ले "ghappp"aaah क्यू लौड़ा निकाल दू आह "घप्प""

"आह राआजाएआ यह दर्द्द हो रहा है पेट में आआह हर धक्के से ाः राजा ऐसा में कभी नहीं चूड़ी आआह ऐसे हे करते रहो मत निकालो भले में कहु मेरी इस योनि ने बहुत पानी बहाये है एक मज़बूत लिंग की याद में"

"ाः माँ इस छूट की गमी न झाड़ दी तो मेरा नाम बलदेव नहीं बहुत परेशां करती थी न मेरी माँ को"

"हैं आह राजा"

"माँ पलट जाओ पीछे से पेल लू अब "

देवरानी ये सुनते हे पतिव्रता पत्नी की तरह बात मानते हुए घोड़ी बन जाती है"

"घोड़ी बन जा माँ"

"बन गयी न घोड़ी"

"हाँ अब तेरा घोडा तेरा बीटा तुझे पीछे से पलेगा"

"आह राजा घोड़ी तैयार है पेल ले"

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बलदेव देवरानी क दोनों मोठे गांड हाथ में पकड़ कर दबोच लेता है है

"ाः माँ इन मटको जैसे गांड को जब तू मटकती थी तो मेरे डिल रुक जाता था"

बलदेव अपना लौड़ा अपने माँ क गांड क दरारों में फसा कर आगे पीछे करने लगता है

"ाः राजा ऐसा लग रहा है क मैंने ये सब सपने में देखि हु अहम उम्म्म"

"क्या देखि हो देवरानी सपने में बोलो"

"आह राजा जब हमारा प्रेम आरम्भ हे हुआ था शायद तब मेरे सपने में एक हाथ कथा जवान आया और मुझे ऐसे हे भोग रहा था जैसे तुम कर रहे हो और अंतिम में जा कर जब उसका चेहरा दिखा तो वो तुम थे"

"आह रानी तो मेरे प्रेम में पद कर मेरे से हे चूड़ी थी सपने में "

"हैं राजा और तब ये मुनिया बहुत परेशां की थी".

"मेरी पत्नी जी आप अपना खज़ाना हमे कब लूटने डौगी किले को तो छोड़ लिया खज़ाना भी लूटने दो जिसे आज तक छू नहीं पाया"

"आह राजा जी अब तो हम जीवन भर साथ हे रहेंगे इतने उतावले क्यू हो रहे हो में पूरी आपके हु"

"आह माँ मुझे तुम्हारे इन मटको जैसे गांड ने बहुत सताया है में इसे खोद क अपने हिस्से का पानी पीना चाहता हु इस मटके को फोड़"

"राजा जी क्षमा करे मुझे मन तो नहीं करना चाहिए अपने पति को पर अगर आज आपने मेरे पीछे किया तो में मर जाउंगी इतनी थकी हु में "

"आह चलो कोई नहीं रानी आज रात में तुम्हारी गांड क छक्के छुरा दूंगा आअज छूट की आग ठंडी कर दू"

ये कहते हुए बलदेव अपना लौड़ा देवरानी क छूट क मुहाने पर रखता है

"ाः माँ छूट कितना गरम हो रहा है आह पीछे आओ ाः ले लो अपने बेटे का मुसल"

देवरानी पीछे अपने गांड को करती है

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"ाः राजा लोहे जैसा लौड़ा है आआप्का ाः"

पीछे जाते हुए देवरानी अपने छूट में लौड़ा लेने लगी और फिर एक बार कक्षा में फच्च पाछह की आवाज़ गूंजने लगी और बलदेव ताबड़तोड़ झटके मारना शुरू कर दिया

"ाआअह माआ ये ले "ghappp"aaaah मायआ मेरी पत्नी आआआह ये ले "घप्प"

"आह राजा ऐसे हे ाः मेरे पेट में चुभ रहा है तुम्हारा मुसल हाय आआह में मर्डर गयी"

कुछ देर ु हे पेलने क बाद देवरानी झड़ने लगती है

"आआह आआआआह गयी में रआआआआजआआआ aaaaaaaaaaaah ओह्ह्ह्हह aaAaaaaaaah"

देवरानी चिल्लाते हुए आखे बंद किये झाड़ रही थी और बलदेव झटके मारे जा रहा था कुछ देर में अपने बदन को ैथ ते हुए पूरी झाड़ जाती है

"ाः राजा मेरे घुटने दुःख गए ाः आराम से "

"ाः माँ तुम्हारे छूट ने पूरा पानी मेरे लौड़े पे छोड़ दया आह"

"आह राजा यह"

बलदेव देखता है उसकी माँ क घुटने अब काँप रहे थे और देवरानी अपने भरी भरकम बदन झुके झुके लिए थक गयी थी

बलदेव "satttt"se अपना लौड़ा खींचता है और बिस्तर पर लेट जाता है

"माँ आजाओ मेरे ऊपर "

देवरानी झट से ऊपर चढ़ जाती है और खड़े लैंड पर अपने छूट क मुहाने पर रख बैठ जाती है

"आआह मायआ ाः मेरी रानी तुम कितने कामुक स्त्री हो "

"ाः राजा सिर्फ और सिर्फ मेरे पति क लये हु "

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देवरानी अपने बड़े गांड को ऊपर ले कर अपने बेटे क लौड़े पर पटकती है और बलदेव आहे भरते हुए अपने माँ क छूट क मज़े ले रहा था

"ाः मा ऐसे हे ाआअह मज़ा आगया क्या कासी हुई छूट है आआह"

कुछ देर ऊपर निचे करते हुए देवरानी अब धीरे उठक बैठक करने लगी और लम्बी साँसे भर्र रही थी जिसे बलदेव गौर से देख रहा था

तभी कुछ गिरने की आवाज़ आती है और दोनों का ध्यान भांग होता है देवरानी और बलदेव दोनों रुक कर ध्यान से सुनते है तभी एक आवाज़ आती है

"ो राधा कहा मर्डर गयी रसोई में आ नाश्ता की तैयारी करनी है"

Devrani:Kamla है

Baldev:Kya आवाज़ थी ये

Devrani:ary मेरे राजा चिंता क्यों करते हो बर्तन गिरने की आवाज़ थी ये कमला और राधा फिर आपस में लड़ रहे होंगे

बलदेव हाथ आगे बढ़ा कर देवरानी क गांड पकड़ कर निचे से करारा झटका मारता है

"आह राजा"

"उनलोगो को रसोई का काम करने दो मुझे मेरी रानी का काम करने दो"

"हट बेशर्म"

कह कर देवरानी निचे हाथ ले जा कर लौड़ा को अपने छूट से निकलते हुए उठ टी है

पर जैसे बलदेव क लैंड का सुपर आता है छूट में सुपर फस्स जाता है

"ाः ये क्या ये तो निकलने का नाम नहीं ले रहा है"

"माँ इसे आपके मुनिया से प्यार हो गया है और आपकी मुनिया भी इसे नहीं छोर रही है बैठ जाओ वापस"

"अपने मुन्ना को समझाओ मुझे सोच जाना है"

"ाचा तो ऐसा कहो न ऊपर उठाओ छूट का मुँह छोटा होने क कारन फास गया है"

देवरानी ऊपर उठती है और बलदेव निचे से खींचता है

"slurppl"se लैंड का सोपारा बहार अत है और छूट से ढेर सारा पानी निचे गिरता है

"माँ जल्दी आना"

"बीटा सुबह हो गयी है कमला कभी भी आ सकती है नाश्ता ले कर और मेरा शरीर पूरा तेल में डूबा है नाहा लेती हु"

"मा मई भी चालू साथ में"

"में तुरंत आती हु मेरे राजा "

"और इसका क्या कुछ करो"

"ये तो दिन रत खड़ा रहिएगा तो अब हर काम बंद कर दू इन महाशय क लये "

और देवरानी हसने लगती है जिसे देख बलदेव मुस्कुरा देता है

देवरानी शौच कर क स्नान करने क लये स्नान गृह में घुस जाती है और बलदेव चित पड़ा अपने और माँ क बीच बीती रात चुदाई क दृश्य को सोच मन हे मन गड गड हो रहा था उसे पता नहीं क्या सूझता है उठ खड़ा हो जाता है और देकता है स्नानगृह का दरवाज़ा खुला है

Baldev:man me)Maa अब दरवाज़ा खुला रख कर नाहा रही है तो मेरी क्या गलती

बलदेव झक कर देखता है

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देवरानी अपने धुन में नाहा रही थी और उसके बड़े मोठे दूध हिल रहे थे

"आह माँ नहाते हुए अप्सरा लग रही ho"Ye कह कर बलदेव स्नानघर में जाने लगता है देवरानी चलने की आवाज़ सुनते हे समझ जाती है और उसके मुँह से अपने आप निकल पड़ता है

"रुक जाइये न जी आती हु न में बहार"

पर बलदेव कहा सुन ने वाला था वो अंदर घुस जाता है और देवरांनी को भीगी हुई देख कर लैंड उसका और तन्न जाता है ..बलदेव और देवरानी की नज़रे नहीं मिलती है

"मुझे पता था आप नहीं मानोगे"

"देवरानी जब पता है तो पूछो मत मेरी जान"

बलदेव आएगी बढ़ कर देवरानी क भीगे वक्षो को पकड़ कर साबुन लगा कर झाग

कर क दबाने लगता है

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"आह राजा आप न नटखट हो"

"देवरानी अब हम पति पत्नी है और हम आज से साथ में हे नहाएंगे "

"जैसा आपकी आज्ञा महाराज बलदेव"

"महारानी देवरानी अब मेरे इस शेर को शांत कर दो"

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"महाराज कितना बड़ा है ये कितना कड़ा है मेरे हाथ में नहीं आरहे है"

देवरानी बलदेव का लौड़ा अपने हाथ में लिए हुए हिलाते हुए कहती है..

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 97

"देवरानी अब हम पति पत्नी है और हम आज से साथ में हे नहाएंगे "

"जैसा आपकी आज्ञा महाराज बलदेव"

"महारानी देवरानी अब मेरे इस शेर को शांत कर दो"

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"महाराज कितना बड़ा है ये कितना कड़ा है मेरे हाथ में नहीं आरहे है"

देवरानी बलदेव का लौड़ा अपने हाथ में लिए हुए हिलाते हुए कहती है

"रानी तुम्हारे छूट क उपयुक्त है मेरा लौड़ा मेरी रानी माँ"

देवरानी खूब तेज़ी से अपने हाथ को आगे पीछे करते हुए बलदेव क हुल्लाबी लौड़े को हिला रही थी

"बीटा अब चले जाओ न पलंग पैर में आती हु वह कर लेना"

"अहम माँ तेरी जैसी माल को छोड़ कर जाने का डिल नहीं करता आह"

बलदेव अपना आँख बंद करते हुए कहता है

"पर बीटा अभी तो बहुत समय है तुम मुझे 12 बजे से पहले कहा छोड़ने वाले हो"

ये कहते हुए देवरानी बलदेव क लैंड को ज़ोर से भींच लेती है

"आह साली रुक "

बलदेव मुद कर देवरानी को धकेलते हुए दीवार से चिपका देता है

"उफ्फ्फ बीटा यह नहीं"

"क्या नहीं मेरी माल माँ?"

बलदेव ये कहते हुए अपना लौड़ा देवरानी क छूट पर घास देता है

"बीटा आह ओह ाः"

"क्या अब तुम्हे प्यार भी नहीं करू माता"

"आह करो ुहहममम आआआआह ुहममम बीटा"

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बलदेव भीगी हुई अपने नशीली महारानी देवरानी को अपने गॉड में भर कर अपना मोटा लौड़ा अपने माँ क छूट पर हस्ते हुए उसके रसीले होठो को चुम रहा था

"गलललललपपपपपपप ुहमममममममम अह्ह्ह्हहववउम्म्म्म आआ गलपपपपप गपपपप गलप्प्प उम्म्म्म ाआअह"

"आह माआ ओह "

"गलपपपप उफ्फ्फ बीटा ाआअह उम्मम्मम

उम्मम्मम गलप्प"

दोने एक दूसरे को चूमते चाट ते रहते है कुछ देर यु हे चूसै क बाद बलदेव अपने माँ महारानी देवरानी को पलट देता है और पीछे से एक ज़ोरदार धक्का मारता है

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पानी से भीगी रसीली छूट अंदर से भी पनियाई थी और बलदेव क लौड़े को "सलूररप्प" कर क पूरा निगल लेती है

"आआआह बेत्ततत्तआआआआ"

"उफ्फ्फ हाय ोूह ोुआआआ

हम्म्म ाः"

हर धक्के में देवरानी चिल्लाती और उसके दोनों वक्ष एक ऐडा से हिल रहे थे

"कैसा लगा रानी मेरा लौड़ा हम ये ले"

पछ से फिर से अपना लौड़ा तेज़ी से अंदर बहार करने लगता है

"ाः मत पूछह कितना आनंद आरहा है मेरे राजा बीटा आह हम्म ाः "

"हम्म "phachh"ye ले माँ तेरे जैसी माल को छोड़ कर में धन्य होगया मेरी पत्नी आज से रोज़ स्नान हम साथ करेंगे"

बलदेव देवरानी से वार्तालाप करते हुए अपने माँ की छूट को चोदे जा रहा था

कुछ देर ऐसे हे एक आसान में चुदाई चलती रहती है

"उफ़ आआह बीटा में थक्क गयी ाः ओह्ह्ह "

बलदेव एक ज़ोर का धक्का छूट में पेलता है और रुक जाता है

"माँ तू क्या सच में थक्क गयी छोर du..chala जाओ bahar..tum स्नान कर लो"

देवरानी पीछे मुड़ती है और बलदेव को मुस्कुरा क देखती है

"बहुत चिंता करने लगे हो एक हे रात में इतना बदलाव"

बलदेव लैंड हल्का बहार खींचते हुए फिर से धीरे से पेलते हुए कहता है

"माँ रात से पहले तुम मेरी माँ थी और इस सुबह से तुम मेरी माँ क साथ पत्नी

भी हो"

"तो ये बात है मेरे पति देव जी"

और हल्का झुक कर मुस्कुराते हुए अपने बड़े ख़रबूज़े से गांड को बलदे क लौड़े पैर मरती है

"हाँ जी मेरी पत्नी देवी जी"

बलदेव मुस्कुरा कर कहता है

"मेरे पतिदेव को भला में कभी न कह सकती हु में तो सौभाग्यवती हु जो आप जैसा पति मिला वैसे में खड़े खड़े थकी हु"

"मेरी रानी मुझे पता है पीछे 18 साल की प्यासी छूट इतनी जल्दी नहीं थक सकती झुक्क जाओ मेरी रानी मेरी माँ"

"ाः आजा मेरे राजा"

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देवरानी अपना एक हाथ आगे टिकाये झुक जाती है अपने बेटे क लये और बलदेव देवरानी का दूसरा हाथ पकड़ कर "खछःह "से लौड़ा पेल देता है खींच क

देवरानी क बड़े पपीता मानव गेंद की तरह उछाल जाते है

"ाआअह राजाआआ अअअअअ अम्मम्म आआह".

"रानी तेरी पूरी गर्मी उतायआर दूंगा में ुहम्म "घप्प" ये ले

"आह राजा में भी तो यही चाहती हु उतार दे तू पूरी गर्मी "

"तू सच में बहुत गरम माल है गहतराष्ट्रा में तेरे जैसी तगड़ी माल कोई नहीं होगी"

"आह उठ राजा और तेरे जैसा तगड़ा घोडा कोई नहीं जो मुझ जैसी माल को संभल लय आह"

पांच पांच की आवाज़ गूंज रही थी और झुकाये हुए अनगिनत धक्को की बारिश कर रहा था बलदेव अपने माँ को ,देवरानी भी निहाल हो गयी थी सालो बाद चुदाई थी पर बलदेव जैसा राजपाल भी नहीं छोड़ा था कभी उसे आज देवरानी अपने निर्णय पर गर्व महसूस हो रहा था अपने बेटे को पति बना कर.

आधा घंटे से खड़े खड़े छोड़ने पर बलदेव की रफ़्तार अब धीमी होती जा रही थी जिस बाद का अंदाज़ा देवरानी लगा लेती है

"बीटा अब मुझे घुड़सवारी करनी है "

बलदेव अपने माँ की ये बात सुनते हे स्नानघर में हे पीच हो कर लेट जाता है

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देवरानी पीछे होते हुए बलदेव का लैंड अपने छूट में लिए हुए बलदेव क ऊपर आजाती है बलदेव अपना सर दीवार पे टिकाये अपने आखे बंद कए माँ दुवारा अपने लौड़े की छूट से मालिश का मज़ा ले रहा था

देवरानी छूट को गोल गोल घुमा कर अपने बेटे क लौड़े को जड़ तक निगल गयी थी जिस से उसके छूट में हलचल शुरू हो जाती है

"ाः राजा ाः कीटनाआ बड़ा लौड़ा है आआआह उम्"

"मा ाः ऐसे हे आह आ"

"बीटा में गयी ाः आह"

बलदेव अपना हाथ आएगी बढ़ता है और देवरानी क बड़े पपीता को मसलने लगता है और देवरानी का उन्माद और वासना क मारे ज़ोर से सीसकने लगती है और झड़ने लगती है

"aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhaaaaaaaaaaa aoooooooooaaaaaaaaaaaaa मई gayyyyyyyyiiiiiiiiiiiiii ाआअह ुह्ह्हह्ह"

बलदेव अब ज़ोर से धक्का मारता है और एक हाथ से देवरानी क छूट क दाना को सहलाता है

देवरानी का छूट पानी बहाये जा रहा था देवरानी अपने बेटे क ऊपर ऐसे हे लेती रहती है और बलदेव का लौड़ा अब भी खड़ा था

दोनों माँ बेटे की लम्बी साँसे चल रही थी कुछ देर यु हे लेते रहने क बाद सांस संभालती है

Devrani:hey भगवन ये अब तक खड़ा है

Baldev:sab वैध जी क जड़ी बूटी का असर है

"राजा जी अब स्नान कर लेते है मुझे भूक लग गई"

"माँ जब तक कमला नाश्ता नहीं लती तुम मेरा लौड़ा कहती रहो"

"हॉट बदमाश"

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 98

सुबह 8:30

Devrani:hey भगवन ये अब तक खड़ा है

Baldev:sab वैध जी क जड़ी बूटी का असर है

"राजा जी अब स्नान कर लेते है मुझे भूक लग गई"

"माँ जब तक कमला नाश्ता नहीं लती तुम मेरा लौड़ा कहती रहो"

"हॉट बदमाश"

बलदेव जल्दी से स्नान कर क बहार निकल जाता है देवरानी चैन का सांस लेती है और अपने अंग को रगड़ कर नहाने लगती है

Devrani:man में) उफ़ ये बलदेव भी न एक पल नहीं छोरता मुझे रात भर में भी मन नहीं भरा

देवरानी मुस्कुरा रही थी और अपने छूट को रगड़ रही थी और जैसे हे उसकी नज़र निचे ान फुले हुए पाव रोटी सी उभरी छूट पर जाती है

Devrani:hey भगवन ये kya..kitni फूल गयी है और लाल हो गयी है मेरी योनि



"उफ़ मार मार क सुजा दया यह हथोड़े जैसा लौड़ा भी तो है मेरे बेटे नहीं मेरे पति देव का"

देवरानी क दिमाग में बलदेव का खड़ा लैंड दिखाई देता है और देवरानी क छूट में फिर से रिसाव शुरू हो जाता है

"है कलमुही इतनी कूटने क बाद भी ासु बहा रही है छोड़ने क लये "

देवरानी धीरे से बड्बाबड़ाते हुए अपने ऊपर पानी दाल रही थी

"कमला सही कहती थी मेरे बारे में ,में हु हे छिनाल "

ये कह कर अपने आप पर बुरी तरह शर्मा जाती है "

"हे भगवन में क्या सोच रही हु आज तो मेरी मन्नत पूरा हुआ है भगवन ने मुझे और बलदेव का मिलाप करवा दया और हम दोनों हर संकट से बच gaye,mujhe उपवास रखने है और चारो धाम की यात्रा करनी है और गरीबो को पलना है "

ये सोच कर महारानी देवरानी गहरे सोच में डूब जाती है

"हे भगवन मुझे शक्ति दे क में ये सब पूरा कर सकू "

तभी बलदेव की आवाज़ उसके कानो में गूंजती है

" माँ आजाओ ू राआणि माँ "

देवरानी नींद से जागती है आवाज़ सुन कर इस से पहले देवरानी कुछ जवाब देती

Baldev:Devraaaaani दो बार बुलाया सुनती नहीं हो तुम

बलदेव थोड़ा चिढ़ते हुए पलंग पर अपने खड़े लैंड को अपने हाथ से सहलाना छोर कर कहता है

Devrani:aaaai बीटा बास थोड़ी देर और मेरे राजा

Baldev:mujhe लगा सो तो नहीं गयी

Devrani:Aati हु जी

Baldev:Theek है

बलदेव फिर से अपने लैंड को हाथ में ले कर रात में अपने माँ की चुदाई को यद् कर क खुश हो रहा था

Baldev:man में) भगवन आज का दिन मेरे लये बहुत महत्तव रखता है आज मेरा घर बस गया और मेरी सपनो की रानी मेरी माँ आज से मेरी पत्नी hai..bhagwan मुझे यक़ीन नहीं हो रहा पारस की रानी और गहतराष्ट्रा की महारानी देवरानी मेरी सगी माँ रात भर मुझसे इसी बिस्तर पर चूड़ी hai..ab तो बास मुझे माँ को खुश रखना है और माँ को गर्भवती कर अपने नन्हे मुन्ने बच्चो को देखना है

तभी थक्क कर क दरवाज़ा खुलता है और देवरानी बहार निकलती है स्नान घर से

देवरानी एक ओढ़नी को अपने ऊपर बंधी थी



झीनी सी ओढ़नी में उसके भरी बदन को साफ़ साफ़ देखा जा सकता tha,bhari मम्मी चलते हुए कूद रहे थे और निचे से ओढ़नी छोटी होने क कारन देवरानी का मखमली पेट और छूट क बाल भी दिख रहे थे

Devrani:kya हुआ जी

बलदेव हाड़बते हुए

Baldev:ku कुछ नही

देवरानी मुस्कुराती है बलदेव का हाल समझते हुए उसके पास आने लगती है

Devrani:to क्यू बुला रहे थे थोड़ा तो धैर्य रखे महाराज

और एक क़ातिल मुस्कान देती है

बलदेव उठ कर बैठ जाता है

Baldev:wo आप बहुत देर लगाए मेरी रानी माँ नहाने में

देवरानी वही पलंग पर अपने भरी गांड को उठा कर गद्दे से चिपका देती है

और अपना सर झुका क

देवरानी: वो जी रात का तेल का चिप चिपपण जा नहीं रहा था

बलदेव मुस्कुरा देता है

Baldev:sirf तेल का चिपचिपा या कुछ और का भी?

देवरानी गुस्सा का नाटक करते हुए अपने आखे फाड़ कर देखती है

devrani:aap ने हे तो क्या है मेरे राजा बीटा ऐसा लस्सा लगाया क शरीर में से निकलने का नाम नहीं ले रहा था

Baldev:acha तो मेरी वजह से हुआ और तुमने जो अपने लस्सी से क्या वो मुझे गन्दा ..

Devrani:kya ? में गन्दा की तुम्हे ?

देवरानी गुस्सा हो जाती है

Baldev:han क्या

Devrani:chup रहिये आप राजा आपने तो मेरे अंदर तक ऐसा अपना पानी उढ़ेला है ऐसा लग रहा है मेरे पुरे शरीर में पानी चल रहा है

बलदेव ये सुनकर देवरानी को अपने बहो में खींचता है

Baldev:Rani में तो यही चाहता हु क तुम जल्दी से हमारे बचे की माँ बन जाओ जिसके साथ में खेल सकू मेरे प्यार की निशानी हो

ये कह कर बलदेव देवरानी को सीने से लगा लेता है

Devrani:man में) बलदेव में तुमसे बिना पूछे वो जड़ी बूटी खा ली हु जिस से तुम मेरे अंदर कितना भी पानी छोर दो में माँ नहीं बनूँगी ..मुझे मुआफ कर दो बीटा ..पर में अभी माँ नहीं बन सकती

Baldev:kya हुआ माँ क्या सोच रही हो क्या तुम्हे नहीं चाहिए हमारा नन्हा सा मुन्ना सा बचा

देवरानी बात पलट ते हुए

"बीटा में महारानी देवरानी हु तुम इतने भी बड़े शेर नहीं क मुझे एक रात में गर्भवती कर दो"

ये सुन कर बलदेव देवरानी को दबोच लेता है

"तो रानी अब देख कैसे में तेरे छूट को अपने पानी से लबालब भर देता हु"

devrani:aah राजा तुम्हारा तो लिंग घुसता है तो निकलने का नाम नहीं लेता

Baldev:apni छूट से पूछो माँ जो पानी छोर कर मेरे लैंड को चिपका लेती है और बहार नहीं निकलने देती

बलदेव अपने होठ को देवरानी क होठ से मिला देता है और दोनों एक दूसरे को चूसने लगते है

"गलप्प्प गलप्प्प गलप्प्प गलप्प ुहम्म्म्म उम्म्म्म ाः उम्म्म आह उम् गलपपपप गलप्प"

ाः राजा ल"

"माँ ये क्यों ओढ़ कर आयी हो स्नान घर से ये पहन कर भी तो नंगी हे दिख रही हो "

"तुमने शर्म धो दया बलदेव मैंने नहीं"

"अच्छा जी"

बलदेव आगे बढ़ कर चुन्नी क ऊपर से देवरानी क पपीता को दबाने लगता है और झटके में उतार कर फेक देता है

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Baldev:uhmm क्या भरी गोल पपीते जैसे मम्मी है तेरे मेरी माँ अब बेशर्मी दिखता हु साली

Devrani:ahh ुहम्म आआह राजा गाली नहीं ाः

Baldev:chup साली

एक थप्पड़ गांड पर मारता है

Devrani:aaaah मर्डर गयी

Baldev:abhi थप्पड़ मारा है गांड मारूंगा तो क्या करोगी

Devrani:nahi दूंगी

baldev:kaise नहीं देगी तू मेरी पत्नी है और तेरे इस लटकते मटके जैसे गांड ने हे तो दीवाना बनाया है मुझे

ये कह कर बलदेव एक ऊँगली देवरानी को हल्का उठा कर अपनी ऊँगली गांड क छेड़ पैर रख कर सहलाने लगता है

devrani:ishhh उम्म्म वह नहीं वह तो राजपाल छुआ भी नहीं कभी

Baldev:Rajpal मेरे बाप ने बास यही ाचा काम क्या क मेरे लये ये प्यारी गांड कुवारी छोर दया उफ़ क्या मखमली मुलायम गांड है

झट से बलदेव हल्का सा एक ऊँगली दाल देता है

devrani:aaaaaaaaaaaaaaaah नाहीये

बलदेव देखता है देवरानी क आखो में ासु थे वो ऊँगली बहार निकलने वाला हे था क देवरानी अपने हाथ से बलदेव क हाथ को झटकती है

"मत करो बलदेव मुझे क्षमा करो आज "

"क्यू माँ मेरा सुहागरात अधूरा होगा बिना आपकी गांड मारे "

"बीटा मेरे पे उपकार कर दे मई तुझे मन नहीं करती पर में रात भर चुद क थक गयी हु अभी तुमने पीछे से क्या तो में मर हे जाउंगी"

और देवरानी अपने आखो से निकले कुछ बूंदो को हाथो से पोछती है

बलदेव समझते हुए देवरानी क ऊपर आजाता है और गले लग जाता है

"मेरी रानी आज छोर देता हु पर ये मत सोचना में गांड नहीं मरूंगा तेरी ..समझी माँ"

"हाँ बीटा मुझे परवाह नहीं मेरा हर अंग तेरा है में खुद चाहती हु क मेरे पीछे से डालो तुम और मेरे पिछवाड़े क हर खुजली दूर कर दो पर आअज नहीं"

"ज़रूर दूर कर दूंगा खुजली तुम्हारे पिछवाड़े क पर तुम एक ऊँगली घुसने से रो दी लौड़ा घुसने से क्या होगा"

"सूखा नहीं दाल पाओगे बीटा गुदा में जगह हे कितनी होती है"

"उसकी तुम फ़िक्र मत करो मेरी रानी माँ वो कैसे करना है कर लूंगा में अभी आओ मेरे लैंड को शांत करो"

बलदेव देवरानी को चूमने चाटने लगता है और आगे बढ़ कर देवरानी को अपने गॉड में नंगी उठा कर खड़ा हो जाता है और पछ से खड़े खड़े छूट में लैंड पूरा पेल देता है

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घप्प घप्प पछ पछ की आवाज़ पुरे कक्षा में गूंज रही थी और गहतराष्ट्रा की महारानी अपने पुत्र अपने बेटे बलदेव क गॉड में बैठी चुद रही थी

"ाः ाः बीटा आआह उम्म्म ाः आए बीटा आह"

"उम् मा ये ले"

"कहा आआह राजा जी आआह ुहममम आआह "

कुछ देर यु हे छोड़ने क बाद बलदेव अपनी माँ को निचे घुटने क बॉल बिठा देता है पास रखे टेबल पैर

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पीछे से हाथ बढ़ा कर दोनों जांघो को फैलता है और दोनों हाथो को पकड़ कर एक झटका मरता है

"ये ले मेरी घोड़ी अपने घोड़े का लौड़ा"

धारधार धक्के पेलने लगता है छूट में

"उफ्फ्फ बीटा है मर्डर गयी में ाः राजा उफ़".

"ाः मेरी माँ मेरी पत्नी ले आह"

ठप्प्प ठप्प की आवाज़ पुरे कक्षा में गूँज रही थी और चाप चाप की आवाज़ लौड़ा पनियाये छूट में घुसने पर आरही थी

देवरानी क पायल और चुडिओ की खनक और पछ पांच लौड़े और छूट की मिलान और चुतर पर ठुकरि पर फट फट की आवाज़ खूब ज़ोर से आरही थी

इधर निचे कमला उठ जाती है सवेरे और दोनों प्रेमी जोड़े पति पत्नी या माँ बेटे क लये नाश्ता बना कर जल्दबाज़ी में आरही थी सीढ़ी से चढ़ कर जैसे हे वो ऊपर पहुँचती है उसे हलके सिसकने की और थप थप पांच पांच की आवाज़े आने लगती है

Kamla:man में) हेय दय्या सुबह क 10 बजने वाले है देवरानी अब तक चुद रही है लगता है

कमला एक हाथ में नास्ते का प्लेट रख दरवाज़े क पास पहुँचती है पहले तो वो पास वाले कक्षा क खिड़की से अंदर देखती है तो राजपाल कुर्सी से बंधा पड़ा था और अपने सर झुकाये सो रहा था

Kamla:haay कही ये राजपाल अपने पत्नी की चीखे सुन कर मर तो नहीं गया हो डिल क दौरे से ..दौरा भी क्यू ना पड़े जब खुद का बीटा हे रात भर पटक कर अपने माँ को छोड़ रहा है बाप को बगल क कक्षा में बाँध कर ..अब राजपाल को पता चलेगा क एक स्त्री की शक्ति क्या होती है ..सब इसी राजपाल की गलती है

तभी कमला सुनती है

"ाआअह राजा जी ाः जी और ज़ोर से आह"

kamla:lo ग अब महारानी छिनाल थी ये तो पता था पर इतनी बड़ी छिनाल निकलेगी नहीं पता था

कमला दरवाज़ा थक थकती है और अपना एक कान दरवाज़ा पर लगा कर सुनती है

बलदेव अंदर अपने माँ को झुकाये तेज़ी से पेल रहा था

"ये ले मेरी पत्नी मेरी रानी माँ खा मेरा लौड़ा"

"ाः राजा उफ़ आह उनममम ाः ोू"

Kamla:ab क्या करू ..आवाज़ लगाती हु

"महारानी ..महाराज.."

दो तीन बार जब कमला आवाज़ देती है तब जा कर देवरानी को सुनाई पड़ता पर बलदेव तो अब भी अपने माँ क छूट की सेवा में लगा था

Devrani:uhh ममम ाः राजा जी बहार कोई है

Baldev:uhh आम ये ले ..कौन है

बलदेव अपनी गति धीमी करते हुए

देवरानी दरवाज़ा क तरफ इशारा करती है

"महारानी ..महाराज सुबह हो गयी उठे नहीं"

बलदेव महारानी की ओरे देख मुस्कुराता है और अपना लौड़ा देवरानी की छूट से खींचता है

लौड़ा बहार निकलते हे "तक्क" की आवाज़ आती है मानव बहुत पुराने बोतल से ढक्कन खोली हो

kamla:man me)hay दय्या कही लैंड महाराज क टोपा निकलने की आवाज़ तो नहीं थी

देवरानी भी ये आवज़ सुन्नी थी और वो बस बलदेव को निहार रही थी और उसके चेहरे पर एक क़ातिल मुस्कान क साथ हसी छूट जाती है

Baldev:haso मत देवरानी जाओ कमला से नाश्ता ले लो

देवरानी झुकी हुई चुद रही थी वो सीधे पास्ट हो कर लेट जाती है

"न बाबा अब तो मुझे उठने की हिम्मत नहीं है तुम्हारा मुसल इस मुनिअ से ऐसे निकली तक्क से जैसे बहुत छोटी ओखली में फास्सी थी"

"ठीक है कुछ पहन लो"

"में कुछ ओढ़ लेती हु बीटा जी तुम पूरा दरवाज़ा मत खोलना नहीं तो तुम्हारी माँ तुम्हारी दुल्हन देख लेगी कमला"

"ठीक है मई खोलता हु दरवाज़ा"

देवरानी झट से पास रखा जालीदार ओढ़नी अपने ऊपर ओढ़ लेती है



बलदेव कपडे पहन कर दरवाज़ा खोलता है

तो सामने कमला मुस्कुराते हुए एक बड़े थाली में नाश्ता लये कड़ी थी ..बलदेव पूरा दरवाज़ा नहीं खोलता पर कमला अपने कनखियों से अंदर देख लेती है

Kamla:man में) महारानी तो पास्ट हो कर सो रही है

kamla:maharaj कब से कड़ी हु में

Baldev:wo हम गहरी नींद में थे कमला उठ नहीं पाए

kamla:hmm आप दोनों क लये नाश्ता 10 बजने वाला है देरी हो गयी मुझे

(मन me:ghapa है पेल रहे थे महारानी को और कह रहे हो सो रहे थे )

Baldev:hmm ाचा

Kamla:han महाराज वो आपकी आखे लाल भी है

Baldev:han वो अभी उठा हु न

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 99

सुबह 10:30 बजे

kamla:hmm आप दोनों क लये नाश्ता 10 बजने वाला है देरी हो गयी मुझे

(मन me:ghapa है पेल रहे थे महारानी को और कह रहे हो सो रहे थे )

Baldev:hmm ाचा

Kamla:han महाराज वो आपकी आखे लाल भी है

Baldev:han वो अभी उठा हु न

Kamla:man में) मुझे न सिखाओ बलदेव ये आखे रात भर जागने से लाल है

Baldev:kya सोच रही हो कमला लाओ इधर

Kamla:o ो कुछ नहीं महाराज वो महारानी कैसी है जैसा चाहा था वैसी पत्नी मिली और सुहागरात..

ये कह कर कमला रुक जाती है

Baldev:kamla..Tumhari महारानी भी ठीक है सो रही है और मेरी पत्नी मैंने जैसा सोचा था उस से कही ज़्यादा अछि मिली hai..ab तुम जाओ लाओ नाश्ता

Kamla:han अब खजाना मिल गया माँ का तो सिपाही का क्या काम हहह

कमला नाश्ते की थाली को बलदेव को हाथ में देती है और अपनी गांड मटकते हुए बड़बड़ाते हुए चलने लगती है

"जाओ जाओ दिन रात बनाओ अपनी माँ क साथ सुहागरात जैसे मुझे नहीं पता क देवरानी अंदर लेती सोने का नाटक कर रही थी और अपने बेटे क आने का इंतज़ार कर रही है"

कमला ये बड्बाबड़ाते हुए सीडीओ से उतर रही थी और बलदेव थाली को ले कर अपने पेअर से दरवाज़ा सत्ता देता है

"ये कमला भी न "

Baldev:man me)waise बेचारी कमला ने मेरी बहुते मदद की जिसके वजह से आज में अपने माँ को दुल्हन बना पाया

और मुस्कुरा कर टेबल पर थाली रख कर दरवाज़ा लगता है

देवरानी झट से आखे खोलती है

"माँ उठो नाश्ता कर लो "

"बीटा मुझे हिला भी नहीं जा रहा उफ़ अंग अंग टूट गया"

बलदेव अपने माँ जैसी भरी भरकम माल को छोड़ कर पास्ट कर दया था जिस से वो अपने आप पर गर्व महसूस कर रहा था

बलदेव मुस्कुराता हुआ

"माता श्री या मेरी पत्नी जी आप को में अपने हाथो से खिला दू"

बलदेव देवरानी की ओरे बढ़ता है देवरानी अब भी लेती थी



Baldev:suniye न जी

देवरानी अपनी ओरे बलदेव को अत देख

devrani:aah कितना दर्द है

देवरानी अपने पेअर खेचते हुए दर्द से कराह कर अपने सर को पीछे ले कर अपने हाथ से अपना मुँह धक् लेती है

बलदेव पलंग क पास आकर खड़ा हो जाता है

Baldev:rani माँ आखे खोलिये आपका पति आपको आज से अपने हाथ से खिलायेगा

Devrani:ahmm यह

बलदेव पलंग पर बैठ जाता है और मुँह अपने हाथ छुपाई देवरानी का सर उठा कर अपने जांघ पर रख लेता है

"क्या हुआ मेरी माँ मेरी पत्नी को"

"कुछ नहीं यह"

"बोलो न जान दर्द ज़्यादा हो रहा है"

"नहीं राजा जी रहने दीजिये एक स्त्री इतना दर्द तो उठा टी हे है"

"सच कहो देवरानी क्यू क आज से हम सिर्फ माँ बीटा नहीं पति पत्नी भी है और तुम्हारा दुःख मेरा दुःख है "

"महाराज आपको ज्ञात नहीं ये दर्द यह पीड़ा एक स्त्री को कितना सुख देती है और में तो बरसो तदपि हु इस दर्द क लये "

"बास तुम्हारी एहि समझदारी पे मेरा डिल आगया मेरी रानी तुम से बेहतर मेरी कोई पत्नी नहीं बन सकती"

देवरानी ये सुन कर मुस्कुरा देती है

"सच कह रहे हो राजा"

"हाँ देवरानी इसलिए तो झटपट तुम्हे माँ से पत्नी बना लय "

देवरानी सब दर्द भूल जाती है और बलदेव से गले लग जाती है बलदेव उसे उठा लेता है अपने मजबूत कलाई में थामे उसे टेबल पर लता है

"देखना बीटा कभी ये प्यार अपने पत्नी क लये काम न हो"

"माता जी अब तुम्हारे जीवन में सिर्फ प्यार हे प्यार मिलेगा"

देवरानी है कर

"तब तो बहुत जल्द मुझे इस दर्द की आदि हो जनि चाहिए"

बलदेव कुर्सी पर बैठ जाता है और अपने माँ को अपने गॉड के बिठा लेता है और सबसे पहले बलदेव अपने माँ को पहला निवाला खिलता है

फिर देवरानी अपने पति को अपने बेटे को खिलाती है

"बीटा मुझे अलग बैठ जाने दो भरी हु थक जाओगे"

"माँ जब छोटा था तुम अपनी हर ख़ुशी त्याग कर मेरे सहारे कुत्ते राजपाल को झेला अब से में तुम्हारा भर उठाऊंगा"

"ाचा इतना वीर हो गया है क गहतराष्ट्रा की महारानी पारस की रानी का भर उठा लेगा"

"माँ वो तो अपनी मुनिअ से पूछो क मेरा लौड़ा कितना वीर है"

"चुप पगले"

"ाचा माँ तुमने कभी सोचा था एक दिन नंगे बेटे क लैंड पर बैठ कर नाश्ता खाओगी"

"मैं तो नहीं सोची क्या तुम सोचे थे ?"

"भला मई कैसे सोच सकता हु में तो सोचने क लये भी डरता था तुम्हारे जितनी पूजा पथ करने वाली संस्कारी ..अपने वसूल और सिद्धांत पर चलने वाली स्त्री ऐसी स्त्री जिसे ससुराल क लोग देवी सामान मानते हो .."

"बास बास बास बालक तुम तो सोचे हे नहीं तो प्रेम में कैसे पड़े अपने माँ क"

"माँ पहले तो तुम्हारी मटकती जवानी और जब मुझे अहसास हुआ क तुमने कितना बलिदान दया है कितना सहा है"

"ाचा राजा जी"

"हाँ जी रानी जी"

"माँ ये ओढ़नी फेक दो अब मुझे दूध पीना है"

"चल हट"

"अब मेरा नाश्ता से मन भर्र गया"

बलदेव झटके से देवरानी की ओढ़नी को खींच खोल देता है

"बड़े उतावले हो रहे हो राजा जी खाओ पीओ नहीं तो इतनी म्हणत करोगे कैसे"

बलदेव देवरानी को खींच क अपने लौड़े पर बिठा लेता है

"अब इतनी संस्कारी पत्नी मिली है में तो धन्य हो गया तुम्हारी भक्ति हे मेरी शक्ति है भगवन करे हम कभी अलग न हो"

"यह राजा हाँ राजा बीटा ..आज तो में पूजा भी नहीं की.."

"माँ आज में आपकी पूजा कर रहा हु आप कल से करना "

बलदेव टेबल पर रखा शहद या मध् को उठा लय

"आर्य क्या कर रहे हो जी"

बलदेव शहद का डिब्बा उठा कर देवरानी क मम्मो पर उढेल देता है



देवरानी क मम्मी भीग जाते है मध् से

devrani:beta ये मध् खाने क लये है व्यर्थ न करो ..एना व्यर्थ करना पाप है

Baldev:meri माँ कितनी भोली हो मई ये एक बन द्व्यर्थ नहीं करूँगा मेरी रानी

देवरानी इस से पहले समझ क भाग पति बलदेव अपने माँ क थान में छोभा लगा देता है

"सलरपप "

"आह मा ुहममम"

चाटने लगता है



"ुहम्म आह आआह बीटा"

"आह माँ ये मध् से तो तुम्हारे दूध की मिठास और ज़्यादा बढ़ गयी मेरी रानी"

तो बे कॉन्टिनोएड
 
चालू रहेगा भाई

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भाई मोबाइल चलने लायक काम करने लगा है जुगाड़ से ..अभी रिपेयर करवाना है

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सब होगा बीआरओ अआप सब की हर मांग कहानी में जब फिट बैठेगी तब आएगी

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अपडेट 100 ा

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"ुहम्म आह आआह बीटा"

"आह माँ ये मध् से तो तुम्हारे दूध की मिठास और ज़्यादा बढ़ गयी मेरी रानी"

"अहह राजा उठ ओढ़नी क्यू खींच दी आह"

"क्यू माँ उम् आह क्या चुकी है"

"बीटा दोपहर होने को आया मुझे शर्म आती है"

महारानी देवरानी मुस्कुरा क सर अपने बेटे क कंधे में छुपा ली

"माँ अब तुम मेरी पत्नी हो रात भर तो छोड़ा हु पटक क तब शर्म नहीं"

"मुझे पता था तुम ये कहोगे .यह आह वो रात थी अभी पूरा उजाला है"

"ुम माँ मेरा बस चले तो बीच मैदान में तुम्हे छोड़ू और सबको बता दू क तुम काम देवी रति की अवतार हो "

"उफ़ बीटा कुछ भी मत कहो आह"

"सही कह रहा हु कोई जाने या न जाने में तो तेरे अंग अंग का दीवाना हो गया हु देवरानी और तेरे अंग अंग की पूजा करूँगा जीवन भर"

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युवराज बलदेव माँ को लिटाये उसके मम्मो को दबाते हुए आम की तरह चूसने लगता है और महारानी देवरानी भरी दुपहरी सिसक रही थी

"माँ ये कितने स्वादिष्ट लग रहे है ुहम्म "

"आह में अभी नहायी थी तुमने फिर से मध् लगा दया आह"

"माँ तुमने छूट को रगड़ क धोया था क नहीं"

"आह हआ धोयी थी उफ़ "

"रुक अभी बताता हु मेरी रानी"

बलदेव हाथ बढ़ा कर मध् क डिब्बे को उठा कर निचे देवरानी क छूट पैर उढेल देता है



"उफ़ बलदेव ुम क्यू बर्बाद कर रहे हो"

"माँ ये मध् खुशनसीब है जो आपके छूट पर ठहरने को मिला अब आपके छूट क चाट कर आपकी छूट की मिठास का आनंद लूंगा"

बलदेव अपने होठ पर जीभ फेरते हुए निचे बैठ जाता है और अपने माँ क छूट पर टूट पड़ता है

"बलदेव आह नहीं ज़ोर से मैट बीटा ..आह राजा जी धीरे में ज़ोर से चिल्ला दूंगी ाः नहीं कोई सुन लेगा मत पति देव जी न न ाआअह ाः ओह्ह आआहा आआआआआ"

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"सुन लेने दो माआ ाः ुहम्म ुहममम आह अहह सबको पता है महाराज बलदेव अपनी माँ बानी पत्नी क साथ सुहागरात क बाद सुहाग दिन मन रहे है"

"उठ आह राजा आआह आआआआह ोीीी हे भगवन िष्ठ मेरी योनि को खा हे जाओगे ाः राजा"

"रानी माँ बहुत स्वादिष्ट है आपकी छूट क रास क साथ मिश्रित मध् का मज़ा उम् अब मुझे सुबह शाम ऐसे हे खाना है"

"आआह उम्म्म दुलारे बेटे ाः पागल aaaaaaaaaaaa ोोोू ुह्ह्हह्ह आआह मेरी योनि छोरो बलदेव जी आपकी दादी सुन लेगी"

"रानी माँ मेरी दादी यानि आपकी दादी सास और आपकी पुराणी सास को पता है क उनका पोता गहतराष्ट्रा क भविष्य क लय गहतराष्ट्रा को वारिस देने क लये म्हणत कर रहा है अपने माँ पर "

बलदेव ये कहते हुए खड़ा हो जाता है और अपने लैंड पर मध् उढेल देता है और अपने आखो से इशारे से अपने माँ को पलंग से उठ कर आकर लैंड मुँह में लेने को कहता है

महारानी देवरानी अपने बेटे बलदेव की बात समझते हुए मुस्कुराती है और शहद से भीगे लैंड की ओरे बढ़ जाती है

"पति देव जी में इतना ज़ोर से चिल्ला रही थी कही आपके पिता जी मेरे ससुर सुन लेते तो "

ये कहते हुए देवरानी अपने भरी भरकम शरीर को लिए अपने मोती थानों को लताये आने लगती है

बलदेव ये सुनते हे है पड़ता है

Baldev:man me)ab माँ को क्या बताऊ क उनका पहला पति मेरे पिता अभी उनके बगल क कक्षा में बंधे है और रात में सोये नहीं होंगे आपकी चीखे सुन क

Baldev:Maa तुम्हारे पहले पति और मेरे पिता जो तुम्हारे ससुर उनको भी पता है क उनका बीटा अपनी माँ पर कितना म्हणत आखिर उनके वंश को आगे भी तो बढ़ाना है

devrani:kya वो मानेंगे हमारे बचे क लये

Baldev:ab कोई नहीं चाहेगा क उनका वंश आगे नहीं बढे

devrani:man me)mujhe क्षमा कर देना बलदेव मेरे पति में वो जड़ी बूटी खा ली हु जिस से आज तुम कितने भी म्हणत कर लो में पेट से नहीं हो सकती

Baldev:kya सोचने लगी माँ वैसे भी हमे अपने बचे पैदा करने क लये किसी और की चाहत से नहीं लेना देना

"बड़ा आया पैदा करने वाला"

"क्यू तुम्हे नहीं करना अपना बचा पैदा"

"करना है न"

बलदेव ये कहते हे आगे होता है देवरानी घुटने क बल बैठ कर अपना मुँह खोलती है

बलदेव हाथ बढ़ा कर झट से मध् भरा लैंड अपनी माँ क मुँह में ठूस देता है

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"गलपपपप गलप्प्प गलप्प्प ुहम्म्म्म यह गलप्प्प गलप्प्प गलप्प आआह उम्मम्मम यह उम्मम्मम्म"

देवरानी खूब चुस्की ले कर मध् को चाट कर अपने बेटे क लैंड को चुस्ती है.
 
अपडेट 100

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"ुहम्म आह आआह बीटा"

"आह माँ ये मध् से तो तुम्हारे दूध की मिठास और ज़्यादा बढ़ गयी मेरी रानी"

"अहह राजा उठ ओढ़नी क्यू खींच दी आह"

"क्यू माँ उम् आह क्या चुकी है"

"बीटा दोपहर होने को आया मुझे शर्म आती है"

महारानी देवरानी मुस्कुरा क सर अपने बेटे क कंधे में छुपा ली

"माँ अब तुम मेरी पत्नी हो रात भर तो छोड़ा हु पटक क तब शर्म नहीं"

"मुझे पता था तुम ये कहोगे .यह आह वो रात थी अभी पूरा उजाला है"

"ुम माँ मेरा बस चले तो बीच मैदान में तुम्हे छोड़ू और सबको बता दू क तुम काम देवी रति की अवतार हो "

"उफ़ बीटा कुछ भी मत कहो आह"

"सही कह रहा हु कोई जाने या न जाने में तो तेरे अंग अंग का दीवाना हो गया हु देवरानी और तेरे अंग अंग की पूजा करूँगा जीवन भर"

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युवराज बलदेव माँ को लिटाये उसके मम्मो को दबाते हुए आम की तरह चूसने लगता है और महारानी देवरानी भरी दुपहरी सिसक रही थी

"माँ ये कितने स्वादिष्ट लग रहे है ुहम्म "

"आह में अभी नहायी थी तुमने फिर से मध् लगा दया आह"

"माँ तुमने छूट को रगड़ क धोया था क नहीं"

"आह हआ धोयी थी उफ़ "

"रुक अभी बताता हु मेरी रानी"

बलदेव हाथ बढ़ा कर मध् क डिब्बे को उठा कर निचे देवरानी क छूट पैर उढेल देता है



"उफ़ बलदेव ुम क्यू बर्बाद कर रहे हो"

"माँ ये मध् खुशनसीब है जो आपके छूट पर ठहरने को मिला अब आपके छूट क चाट कर आपकी छूट की मिठास का आनंद लूंगा"

बलदेव अपने होठ पर जीभ फेरते हुए निचे बैठ जाता है और अपने माँ क छूट पर टूट पड़ता है

"बलदेव आह नहीं ज़ोर से मैट बीटा ..आह राजा जी धीरे में ज़ोर से चिल्ला दूंगी ाः नहीं कोई सुन लेगा मत पति देव जी न न ाआअह ाः ओह्ह आआहा आआआआआ"

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"सुन लेने दो माआ ाः ुहम्म ुहममम आह अहह सबको पता है महाराज बलदेव अपनी माँ बानी पत्नी क साथ सुहागरात क बाद सुहाग दिन मन रहे है"

"उठ आह राजा आआह आआआआह ोीीी हे भगवन िष्ठ मेरी योनि को खा हे जाओगे ाः राजा"

"रानी माँ बहुत स्वादिष्ट है आपकी छूट क रास क साथ मिश्रित मध् का मज़ा उम् अब मुझे सुबह शाम ऐसे हे खाना है"

"आआह उम्म्म दुलारे बेटे ाः पागल aaaaaaaaaaaa ोोोू ुह्ह्हह्ह आआह मेरी योनि छोरो बलदेव जी आपकी दादी सुन लेगी"

"रानी माँ मेरी दादी यानि आपकी दादी सास और आपकी पुराणी सास को पता है क उनका पोता गहतराष्ट्रा क भविष्य क लय गहतराष्ट्रा को वारिस देने क लये म्हणत कर रहा है अपने माँ पर "

बलदेव ये कहते हुए खड़ा हो जाता है और अपने लैंड पर मध् उढेल देता है और अपने आखो से इशारे से अपने माँ को पलंग से उठ कर आकर लैंड मुँह में लेने को कहता है

महारानी देवरानी अपने बेटे बलदेव की बात समझते हुए मुस्कुराती है और शहद से भीगे लैंड की ओरे बढ़ जाती है

"पति देव जी में इतना ज़ोर से चिल्ला रही थी कही आपके पिता जी मेरे ससुर सुन लेते तो "

ये कहते हुए देवरानी अपने भरी भरकम शरीर को लिए अपने मोती थानों को लताये आने लगती है

बलदेव ये सुनते हे है पड़ता है

Baldev:man me)ab माँ को क्या बताऊ क उनका पहला पति मेरे पिता अभी उनके बगल क कक्षा में बंधे है और रात में सोये नहीं होंगे आपकी चीखे सुन क

Baldev:Maa तुम्हारे पहले पति और मेरे पिता जो तुम्हारे ससुर उनको भी पता है क उनका बीटा अपनी माँ पर कितना म्हणत आखिर उनके वंश को आगे भी तो बढ़ाना है

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Baldev:ab कोई नहीं चाहेगा क उनका वंश आगे नहीं बढे

devrani:man me)mujhe क्षमा कर देना बलदेव मेरे पति में वो जड़ी बूटी खा ली हु जिस से आज तुम कितने भी म्हणत कर लो में पेट से नहीं हो सकती

Baldev:kya सोचने लगी माँ वैसे भी हमे अपने बचे पैदा करने क लये किसी और की चाहत से नहीं लेना देना

"बड़ा आया पैदा करने वाला"

"क्यू तुम्हे नहीं करना अपना बचा पैदा"

"करना है न"

बलदेव ये कहते हे आगे होता है देवरानी घुटने क बल बैठ कर अपना मुँह खोलती है

बलदेव हाथ बढ़ा कर झट से मध् भरा लैंड अपनी माँ क मुँह में ठूस देता है

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"गलपपपप गलप्प्प गलप्प्प ुहम्म्म्म यह गलप्प्प गलप्प्प गलप्प आआह उम्मम्मम यह उम्मम्मम्म"

देवरानी खूब चुस्की ले कर मध् को चाट कर अपने बेटे क लैंड को चुस्ती है.

"गलपपपप गलप्प्प गलप्प्प ुहम्म्म्म यह गलप्प्प गलप्प्प गलप्प आआह उम्मम्मम यह उम्मम्मम्म"

देवरानी खूब चुस्की ले कर मध् को चाट कर अपने बेटे क लैंड का स्वाद ले रही थी

"आह माँ ऐसे हे चुसो उफ़ ाः ऐसे हे "

कुछ देर क लैंड चूसै से बलदेव का लौड़ा बहुत ज़्यादा अकड़ जाता है और वो काम क अग्नि में जल रहा था

"आजा मेरी छम्मक चलो तुझे पेलू ऊपर बैठ"

बलदेव देवरानी को पकड़ कर टेबल पर लिटा देता है और और देवरानी क दोनों पेअर को कैची बना कर निचे से छूट को खोल देता है और एक झटके में घप्प से लैंड पेल देता है

"ाः जजी माअररर गयी aaaaaaaaaah"

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बलदेव बिना किसी दया क अपनी का को घपाघप पेल रहा था पर इस बार चिल्लाने से बगल क कक्षा में बंधा बलदेव का बाप राजा राजपाल जो रट हुए सो गया था उसकी आखे खुल जाती है और अपने बंधे हाथो को खूब खोलने की कोशिश करता है

"हे भगवन इस वैश्य देवरानी को हे मेरी पत्नी बनाया तूने जो अपने बेटे से ऐसी नीच हरकत कर रही है"

ये कह कर राजा राजपाल बहुत क्रोधित हो रहा था तभी उसके कान में एक आवाज़ आई

"ाः उफ़ धीर्रे से छोड़ो बीटा "

ये सुनते हे राजा राजपाल क आखो से ासु टपक जाते है और वो अपने आखे बंद कर लेता है

टेबल पर लिटाये धक्को की बारिश करता हुआ अपने माँ को छोड़ रहा था ये जानते हुए क बगल में उसके बाप तक ये आवाज़ जा रही होगी

"आह माँ मेरी रांड ाः तुझे तो जितना छोड़ू उतना काम है आह ये ले"

"ाआअह उह्ह्ह मारर गयी आराम से छोड़ो बीटा"

कुछ देर ऐसे हे छोड़ने क बाद बलदेव देवरानी को अपने बाहो में उठा लेता है

और खच कर क फिर से लौड़ा पेल देता है

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"उम्म्म अहंम आआह राजा आआआह"

"आह मा ले और ले अपने बेटे का लौड़ा ाः तेरा छूट फाड़ दूंगा माँ अपने बचे की माँ बनाऊंगा ाः यह"

"आह आआआआई आआह फच्च ाआअह राजा ुहम्म आआआ आआह ुयी माआ मर्डर गयी बेताआए"

खूब धक्के मारने क बाद जैसे हे बलदेव का पानी निकलने वाला होता है देवरानी को निचे उतरता है और खुद सोफे पर बैठ जाता है

"आजा माँ ऊपर से सवारी कर अपने घोड़े की"

देवरानी दोनों टैंगो को फैलाये लैंड पर बैठ जाती है

"आह राजा लौड़ा है क लोहा "

"कूदो माँ अपने घोड़े पे"

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देवरानी सोफे का कोना पकड़ कर ऊपर निचे हो रही थी और बलदेव निचे से धक्के लगा रहा था

"माँ नहाने क बाद तुम्हारे शरीर की सुगंध और मन मोहित कर देती है लाजवाब हो तुम मेरी पत्नी"

"आह राजा उफ़ आआह तुम्हारे लये है सब"

और खूब म्हणत से ऊपर निचे हो रही थी

कुछ देर ऐसे हे छोड़ने क बाद देवरानी थकने लगती है तो बलदेव एक दो धक्के लगता है और देवरानी को खड़े होने का इशारा करता है देवरानी उठ क कड़ी हो जाती है

बलदेव उठ कर अपने हाथ में लैंड ले कर हिलने लगता है जैसे हे देवरानी इस बात को समझती हैं क बलदेव लैंड का पानी चोर देगा वो झट से घुटने क बल बैठ कर

"बीटा इसे व्यर्थ न करो बहुत कीमती है"

बलदेव अब हिलाते हुए अपने लौड़े से अपने माँ क मुँह पर मलाई फ़ैलाने लगता है

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"आह माँ ुहम्म aaaaaaaaaah मेरी रंडी माँ लो पी लो"

देवरानी आखे बंद कए अपने बेटे क अमृत को पीने लगती है

"ुहममम आह ुहम्म सलूरपप्पे"

पूरा चाट जाती है

बलदेव अपने लैंड का पूरा पानी छोर कर पलंग पर चला जाता है और लेट कर लम्बी सांसे लेने लगता है पर देवरानी अब भी अपने चेहरे पे लगा अपने बेटे का वीर्य को ऊँगली से पॉच पॉच कर चाट रही थी

बलदेव जैसे हे सामने का नज़ारा देखता है तो उसके होठो पर मुस्कान फ़ैल जाती है और देवरानी की नज़र बलदेव से मिलते हे देवरानी शर्मा जाती है और भाग कर पलंग पर आकर चादर ओढ़ कर अपने आप को छुपाने की कोशिश करने लगती है

"मा क्या हुआ क्यू शर्मा रही हो"

"माँ हु शरमाओगी हे न"

"हमने सात फेरे लिए है पत्नी भी तो हो देवरानी"

"माँ हु पत्नी हु रंडी तो नहीं हु न जो नहीं शर्माओ और वैसे भी ये हमारी पहली रात थी "

"रंडी हो"

बलदेव अचानक से जवाब देता है जिसे सुन

देवरानी अपने आखे बड़े करते हुए

"क्या कहा तुमने"

"तुम रंडी हो देवरानी मेरी माँ पर सिर्फ अपने बेटे की सिर्फ मेरी"

देवरानी ये सुन कर मुस्कुरा देती है

"बीटा अब तो सूरज सर क ऊपर आया अभी तक मन नहीं भरा मेरे से"

बलदेव की नज़र घडी पर जाती है

"माँ अभी तो 11 हे बजे है अभी तो एक घंटा है

बलदेव खसक कर माँ क पास जाना चाहता है पर उसकी माँ उसके सीने में पेअर रख कर रोक देती और अपने दोनों कोमल गोर पेअर को अपने बेटे क लैंड को सहलाने लगती है

दोनों पेअर क बीच में सोया हुआ लैंड देवरानी क प्यार से फिर से जागने लगता है

"माँ तुम तो पक्की रंडी हो "

"चुप कर कौन सा में हर किसी से चुदती फिरती हु"

"वो तो में कभी होने भी नहीं दूंगा तुम सिर्फ मेरी हो देवरानी पर ये कहा से सीखा"

"भोले पति देव जी सब कामसूत्र क पुष्तक का कमल है"

"ाचा पत्नी जी "

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देवरानी अब बैठ कर पेअर क साथ साथ हाथ से अपने बेटे क लैंड को मुठियाने लगते है

और जैसे हे देखती है बलदेव का लैंड अब चुदाई क लये तैयार है अपने बेटे को चिढ़ाने क लये भागती है और चादर से अपने आप को धक् कर

"अब और नहीं जी में थक्क गयी"

"साली लैंड खड़ा कर क अब और नहीं में 12 बजे से पहले किसी भी हाल पर नहीं छोड़ने वाला"

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बलदेव चादर क अंदर घुस जाता है और अपने हाथ में लैंड लिए हुए छूट पर रगड़ने लगता है

"रात भर जी भर्र क चुदाई तो शर्म नहीं आई रंडी और दिन में शर्म आने लगी "

"उठ आह राजा"

देवरानी क छूट में लैंड पेल देता है बलदेव

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"ाः ाः अअअअअ अअअअअ ा अअअअअ आआ आ राजा आआ आआ"

बलदेव हुमच हुमच क पेलने लगता है और कुछ देर में हे चादर दोनों क ऊपर से हैट जाती है

बलदेव एक थप्पड़ गांड पर मारता है और देवरानी समझते हुए गांड को निकल कर झुक जाती है

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"आह उठ राजा आआह उम्म्म"

देवरानी क गांड पर छतो की बारिश करते हुए खूब ज़ोर ज़ोर से पेलते हुए अपने माँ क बड़े हिलते थान को भी बीच बीच में दबा रहा था

देवरानी की अब हालत चुड़ते हुए ख़राब हो गयी थी बलदेव झट से बैठ जाता है और अपने ऊपर अपने माँ को बिठा लेता है

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बलदेव अपने हाथ में थोड़ा थूक लगा कर लैंड पर लगता है और देवरानी अपने दोनों पैरो क बीच में बलदेव क ाअण्ड को पकड़ लेती है

"अब छोड़ो बीटा"

"आह माँ ये ले"

बलदेव धक्के मारने लगता है निचे से

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बलदेव अपने माँ को निचे से धक्के मरते हुए उसके होठो को चूमने लगता है

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गलप्प गलप्प्प गलप्प गलप्प्प ुहम्म्म्म आह उनमम गलपपपप गलप्प्प गलप्प गलप्प

दोनों माँ बीटा एक दूसरे में समाये एक दूसरे क होठो को चूस रहे थे

"ाः राजा अब में गयी आआआह "

बलदेव देवरानी को लिटा देता है और खड़े हो कर देवरानी को पलंग पर लिटाये छोड़ने लगता है

हर झटके में देवरानी क पायल की छान छान की आवाज़ आरही थी और चुडिओ की खनक कक्षा में एक कामुक दृश्य बना रहा था

"माँ कैसा लग रहा है "

"आह ाः उठ मेरा होने वाला है ाआअह"

"थोड़ी देर और रुक जाओ आआह मा"

बलदेव धक्के लगा रहा था और देवरानी झड़ने लगती है

"aaaaaaaaaaaaaah ाआअह और ज़ोर से छोड़ो आआआआह बीटा मेरे raaaaaaaaaaajaa आआआआ उफ़ ाः में गयी ाआअह मेरे पति मेरे कोख में उढेल दो सारा वीर्य मेरे महाराजा आऐ उफ़"

ऐसी चीखे सुन कर अपनी रफ़्तार बढ़ा

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देता है बलदेव देवरानी की चूड़ी और पायल खूब खनक रही थी बलदेव भी झड़ने लगता है

"ाः मेरी पत्नी आआआआ माआआआ तेरी छूट मेरा लौड़ा दबोच क मेरा पानी खींच रही है ाआअह माआ रानी मा तेरे कोख में मेरे बीज मेरे बचे की बीज हमारे बचे की बीज जा रही है ाः"

बलदेव और देवरानी दोनों आखे बंद कए झड़ते रहते है कुछ देर बाद दोनों पास्ट हो कर बिस्तर पर लेट जाते है

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देवरानी अपने साथ बलदेव को भी चादर ओढ़ा लेती है और दोनों अपने साँसों पर काबू पाने लगते है तभी बलदेव की नज़र घडी पर जाती है

11:45

"माँ अब भी 15 मिनट्स बाकि है 12 बजने में"

"बीटा मेरे तो 12 बज गए घडी का छोरो"

देवरानी सहलाते हुए अपने बेटे को कहती है

"कोई बात नहीं माँ आओ मेरे समीप कैसी रही सुहागरात महारानी देवरानी की मुझसे कोई चूक तो नहीं हुई न"

"बलदेव जी आपने तो मुझे अपनी देववाणी बना लय है एक रात में आप ये बताये आपकी पत्नी से कोई कमी तो नहीं रही न"

"कैसी बात करती हो माँ देवरानी में तो अपनी माँ को पत्नी क रूप में पाकर धन्य होगया और मुझे विश्वास है हमारे आने वाली पीढ़ी अत्यंत बलवान और बहादुर होगी"

"आपको कैसे पता जी"

"देवरानी जी हमारी कठिन परिश्रम से उत्तम और महाबली का हे जनम होगा"

"अआप्की आखे लाल होरही है बलदेव जी"

"आपकी भी आखे चढ़ी सी लग रही है देवरानी माँ"

"हाँ बीटा हम दोनों को सोना चाहिए"

"माँ मुझे विश्वास नहीं हो रहा है क में आपको पिछले 18 घंटे से छोड़ रहा हु गहतराष्ट्रा की महारानी पारस की रानी देवरानी को जिसके पतिव्रता की कसमे खाई जाती थी गहतराष्ट्रा में हर दुःख झेल कर अपने अपना घर नहीं टूटने नहीं दिया"

"हाँ अब मुझे सुख झेल कर रहना है दुःख बहुत झेल लिया"

बलदेव अपनी आलिंगन में ले कर

"आज से मेरी पत्नी माँ को मेरी देवरानी को पूरा गहतराष्ट्रा मेरी पत्नी मानेगा मेरा बाप भी मेरी दादी भी जो इसके बीच आया उसका सर धार से अलग कर दूंगा"

देवरानी खुश हो जाती है और बलदेव क माथे पे चुम कर उठ कड़ी होती है

"अब में अपने वस्त्र पहन लू नहीं तो तुम सोने नहीं डोज"

देवरानी क लये कुछ कपडे कमला ने ऊपर बलदेव क कक्षा में रखवा दया था .देवरानी वस्त्र निकल कर सबसे पहले अपना ब्राज़िएर निकलती है

ब्राज़िएर को अपने बड़े दूध में फसा कर

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दोनों वक्षो में फसा कर अपने कंधे को ऊपर ब्राज़िएर फसा लेती hai.bistar पर लेता बलदेव ये गौर से देख रहा है

देवरानी :अब क्या टुकुर टुकुर टाक रहे हो अब क्या इरादा है

Baldev:kuch नहीं अपनी जान को देख नहीं सकता

देवरानी फिर अपनी जांघिए को निकलती है और अपने पैरो में दाल कर ऊपर खींचती है

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देवरानी की बड़ी गांड लचकती हुई जांघिए में फस्स जाती है

Devrani:Raja जी आप अपनी जान को तो देख रहे हो पर आपको कुछ दिखा हे नहीं

Baldev:kya मतलब देवरानी

Devrani:yahi क तुमने क्या हाल क्या है मेरे शरीर को काट क और अपने गर्दन क तरफ इशारा करती है

Baldev:acha जी तो ये तो प्यार की निशानी है

Devrani:par मुझे बहार भी जाना है घर में और लोग है



बलदेव अपने माँ क करीब जाता है और पीठ पीछे कर क खड़ा हो जाता है

Baldev:devrani वो तो मैंने क्या और ये किसने क्या

देवरानी देखती है बलदेव क पुरे पीठ पर देवरानी क नाख़ून क निशान थे

देवरानी अपने हाथ से पीठ को सहलाते हुए



Devrani:mujhe क्षमा कर दीजिये महाराज

Baldev:koi बात नवी देवरानी पति पत्नी क बीच ये सब होता है तुम घर वालो का मत सोचो वो सब समझते है ये कब होता है

Devrani:theek है महाराज आप भी अपना वस्त्र पहन ले

Baldev:jo आज्ञा महारानी देवरानी

बलदेव झट से अपने वस्त्र उठा कर पहन ने लगता है देवरानी भी अपना पेटीकोट पहन लेती है और ब्लाउज उठा कर पहन ने लगती है

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बलदेव अपने वस्त्र पहन रहा था पर बार बार उसकी नज़र अपने माँ पर रुक जाती



देवरानी जैसे घूमती है देखती है बलदेव निचे क वस्त्र पहन उसे निहार रहा है

Devrani:man me)kya गठीला शरीर है मेरे पति महाराज का ..घोडा कही का

और उसके चेहरे से हसी छूट जाती है

Devrani:aapko क्या हुआ वस्त्र पहन लीजिये न

देवरानी अपने ब्लाउज क बटन लगते हुए कहती है

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Baldev:Pehan रहा हु रानी माँ ऐसे भी महल में सब निचे हे होंगे ऊपर कोई नहीं आता बिना हमारे आदेश क

Devrani:maharaj गहतराष्ट्रा में हर तरफ शोर होगया है युवराज बलदेव अपनी माँ रानी देवरानी से ब्याह कर लिए hai,maa बेटे ब्याह कर सात फेरे लये है जनता क आक्रोश को शांत करना hoga..islye मई जनता सभा बुला कर अपनी बात रखूंगी

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देवरानी अपने साड़ी को लपेट ते हुए कहती है बलदेव भी देख रहा था देवरानी अपने मखमली पेट को निहारते देख

devrani:boliye महाराज

बलदेव :हाँ ठीक है महारानी जैइसी आपकी इच्छा

कुछ देर में दोनों अपने आप को एक राजा और रानी की तरह तैयार कर लेते है

baldev:aap यहाँ सो जाये मई निचे जा कर सोता हु आप क रहते हुए मई सो नहीं पाउँगा

देवरानी जैसे हे बिस्तर पर देखती है

Devrani:yaha पर



बलदेव देखता है बिस्तर पर खून और उनके काम रस से भरा है वो बास चुप हो जाता है

Baldev:wo आप कमला से कह कर ..

देवरानी मुस्कुराती है और कहती है

"महाराज बलदेव आपका पानी मेरे अंदर अब भी समुन्दर क लहर की तरह बह रहा है चादर पे है तो क्या हुआ में सो जाउंगी"

बलदेव समजह जाता है फिर भी मजाक करते हुए

"कहा तैर रहा है मेरा पानी"

"आपको जैसे नहीं पता महाराज"

बलदेव देवरानी क पास आकर उसके पेट पैर छूटे हुए

"यहाँ आपकी कोख में माँ"

"नहीं महाराज आपका वीर्य मेरे नस नस में बह रहा है"

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Baldev:acha रानी माँ

Devrani:han बीटा

Baldev:jald से जल्द मुझे खुशखबरी दो

Devrani:bhut जल्द दूंगी

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महाराज बलदेव देवरानी की होठो को अपने होठो में रख गलपपपप गलपपपपप

गलप्प्प सलरपपपप

चूसने लगते है

थोड़े देर में चूस कर

Baldev:ab आप सो जाये संध्या में मिलते है

Devrani:jo आज्ञा महाराज जो आज्ञा पति देव

बलदेव कक्षा से निकल कर बहार चला जाता है और देवरानी अपना कक्षा बंद कर बिस्तर पर हसीं लम्हो को याद कर जैसे लेट टी है वैसे हे 18 घंटो की चुदाई क थकान से गहरी नींद में चली जाती है.
 
अपडेट 101

गहतराष्ट्रा

दुपहर 12 बजे क बाद

Baldev:ab आप सो जाये संध्या में मिलते है

Devrani:jo आज्ञा महाराज जो आज्ञा पति देव

बलदेव कक्षा से निकल कर बहार चला जाता है और देवरानी अपना कक्षा बंद कर बिस्तर पर हसीं लम्हो को याद कर जैसे लेट टी है वैसे हे 18 घंटो की चुदाई क थकान से गहरी नींद में चली जाती है.



बलदेव अपने माँ को सोने क लये छोर कक्षा से बहार अत है सब से पहले वो सीढ़ी से उतारते समय अपने कक्षा क बगल क खिड़की पर जाता है तो देखता है उसका बाप राजा राजपाल तड़प रहा है बंधा हुआ

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"पिता जी आपने जैसे माँ क जीवन क साथ खेला है उसका दंड अवश्य मिलेगा ,मेरे और माँ क मिलान करने नहीं दे रहा था ये बूढ़ा अब कैसे तड़प रहा है अपनी पत्नी की चुदाई की चीखे सुन कर ..पिता जी अब वो आपकी बहु है और अब तो मैंने अपना बीज भी देवरानी क कोख में छोर दया हु अब तड़पने की बरी तुम्हारी है राजा राजपाल"

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बलदेव अपने आप से बात करते हुए मुद कर सीडीओ से उतर कर निचे जाने लगता है तभी सामने उसे उसकी बड़ी माँ षुरूश्ती पूजा की थाली लिए आती दिखाई पड़ती है

बलदेव तुरंत जा कर

"प्रणाम बड़ी माँ"

अपने बड़ी माँ क पेअर छूटा है

Shurusti:Jeete रहो बीटा ..कैसा रहा सुहागरात मेरे बेटे का और पत्नी कैसी लगी..

Baldev:maa आप भी न

Shurushti:mujhe पता है क तुम्हारी माँ हे अब तुम्हारी पत्नी है और वो तुम्हे पूरा खुश रखने की कोशिश करेगी

Baldev:badi माँ आप भी न..

Shurushti:chal छोर जाने दे शर्माता बहुत है ये ले मिठाई खा

Baldev:abhi प्रसाद खिला रही हो

तभी सामने से कमला और शमशेर आते दिखाई पड़ते है

Kamla:kya महारानी हमे भी प्रसाद दीजिये

आज तो ख़ुशी का माहौल है

शमशेर मुस्कुराता हुआ आता है और बलदेव से गले लग जाता है

Shamshera:Mere शेर खला देवरानी ज़्यादा परेशां तो नहीं की न

Baldev:mere भाई अब तो खला न कहो अब तो मैंने तुम्हारे खला क साथ सुहागरात मन लिया उस हिसाब से तो में तुम्हारा खलु होगया

Shamshera:chal हट बड़ा आया मेरा खलु बन ने वो तो मेरी ज़बान पैर खला बैठा है

तभी बीच में षुरूश्ती कहती है

shurushti:theek है तो आप लोग बात कीजिये में जाती हु

शमशेर निगाहे उठा कर देखता है षुरूश्ती को ऊपर से निचे तक तो उसके दिमाग में रात की षुरूश्ती की चुदाई याद आजाती है कैसे उसने बलदेव क बड़ी माँ को मौक़ा मिलते हे पेल दया था और रात को कमला ने भी रात को देख लय था

Kamla:Rani षुरूश्ती प्रसाद तो दे दीजिये कहा चली

मन me.:)sharma रही है रंडी युवराज शमशेर से नज़र मिलाने में रात में चूड़ी जो है जैम क

षुरूश्ती अपने हाथ का थाली कमला क हाथ में रख कर जल्दी से भागने की कोशिश करती है

Shamshera:rani षुरूश्ती जी सबको बाँट रहे है मेरा मुँह कब मीठा करवाइयेगा

शमशेर ये कह कर अपने होठ हलके से दबाता है षुरूश्ती को देख क

षुरूश्ती का तो मनो काटो तो खून नहीं वो बास इतना कहती है

"आप भी थाली में से खा ले युवराज"

Baldev:par माँ आज इतनी देरी से पूजा

Kamla:wo रानी षुरूश्ती उठी नहीं होगी

षुरूश्ती को अंदर हे अंदर गुस्सा आरहा था वो कैसे बताये क रात में शमशेर क लम्बे मोठे लौड़े ने उसकी जीवन भर की खुमारी निकल दी जिस वजह से वो देरी से उठी

Kamla:waise आज महारानी देवरानी ने पूजा सुबह नहीं क्या तो इतनी देरी हो गयी

Shurushti:Han मई सोची अभी वो तो नयी दुल्हन है तो मई हे ये जिम्मेदारी उठा लू

Baldev:hum बहुत प्रसन्न हुए बड़ी माँ

Kamla:man me)pehle सेना पति सोमनाथ चुदवाती थी अब महल में रुके अतिथि युवराज शमशेर भी ठुकवा रही है

Baldev:dadi कहा है बड़ी माँ

Shurushti:wo अपने कक्षा में है

Baldev:theek है हम उनसे मिल लेते है शमशेर तुम भी आओ

बलदेव और शमशेर दोनों जीविका क कक्षा में जाते है शमशेर पहले हे रुक जाता है और बलदेव पलंग पर जा कर सबसे पहले अपने दादी क पेअर छूटा है

Jeevika:khush रहो बीटा

Baldev:kaisi हो आप दादी ..वैध जी आपका उपचार ठीक सेकर हे रहे है न

Jeevika:ab जिसका बीटा कारावास में बंद हो वो माँ कैसे खुश रह सकती है

Baldev:to क्या आप मेरे शादी से खुश नहीं है और माँ क जीवन में ख़ुशी लौटी है उस से भी खुश नहीं हो ?

Jeevika:nahi ऐसा नहीं है तुम तो मेरे पोते हो एकलौते चिराग हो

Baldev:to आप खुश हो इस रिश्ते से

Jeevika:Shayad

बलदेव उठ खड़ा होता है और शमशेर को

"चलो शमशेर "

शमशेर और बलदेव बहार आते है

Shamshera:kya हुआ भाई इतनी जल्दी मिलाप ख़त्म दादी से

Baldev:dadi ने अब भी पुरे मन से मेरे और माँ क रिश्ते को स्वीकार नहीं क्या है

Shamshera:bhai बलदेव महारानी जीविका का बीटा क़ैद है उनको दुःख तो होगा हे वैसे भी रिश्ते को क़ुबूल करे या न करे तुम तो सुहाग रत मन हे लिए मेरा तो अपनी मेहबूबा को देखना दुश्वार है

Baldev:bhut याद आरही है क्या भूरिया मौसी की

Shamshera:yaad नहीं आती

वो हमेशा मेरे दिलो ो दिमाग में छायी है

Baldev:shamshera जी अपने डिल को सम्भालो क्यू क आपकी अम्मी हूर इ जहाँ कोई आम स्त्री नहीं मल्लिका जहाँ है और उनके नाख़ून तक आज तक किसी ने नहीं देखा

Shamshera:mujhe पता है मेरा बाप मीर वाहिद जो अफ़ग़ान से लेकर अरब और मिश्रा से लेकर फ्रांस तक राज करता है उनकी बीवी को पाना आसान नहीं

Baldev:or ऊपर से वो तुम्हारी खुद की अम्मी है ,मई तो यही कहूंगा क धैर्य रखो मेरी तरह तुम्हे भी अपना प्यार मिलेगा

Shamshera:par कब .? पता नहीं कीस हाल में होगी मेरी अम्मी जाएं मेरे डिल की रानी



पारस

पारस का आलिशान महल आज तैयारी में जूता था वजह ये थी क सुल्तान मेरे वाहिद जिनका पूरी दुन्या पर हुकूमत थी उनके खंडन वाले आज अरब से वापस आरहे थे इसलिए पारस में हर जगह ज़ोरो शोरो से तैयारी की जा रही थी

दोपहर का समय था लश्कर क साथ पारस की महल की ओरे घोड़ो पर बैठे सबसे आगे सुल्तान मीर वाहिद क pita,shamshera क दादा



सुल्तान दास्ताँ उम्र लगभग 70 पर

उनके साथ वाले घोड़े पे बैठी थी उनकी पत्नी सुल्ताना अफसाना खातून उम्र लगभग 60 साल



शमशेर क दादा दादी क पीछे शमशेर क चाचा और सुल्तान मेरे वाहिद क छोटे भाई



सुल्तान मेरे वाहिद क छोटे भाई गुल शाह

उम्र लगभग 50 साल अब तक इनकी शादी नहीं हुई

इन सब क पीछे औरतो का काफिला था और सबसे आगे सुल्तान मेरे वाहिद की दूसरी पत्नी जो पारसी थी



नाज़ उम्र लगभग 40 वर्ष और उनके साथ नाज़ क दो बचे एक बीटा

शान उम्र 20 साल



शान क साथ थी उसकी 18 वर्षीया बहिन



18 साल की बहिन समा जो शान की अपनी शमशेर की सौतेली बहिन थी

उनके पीछे थी मेरे वाहिद की तीसरी बीवी



उम्र 38 वर्ष नाम रज़िया ,रज़िया अफगानी थी और सुल्तान मेरे वाहिद और रज़िया की एक बेटी थी माह नूर जो समां से 3 साल छोटी थी

सबसे आखिर में सुल्तान मेरे वाहिद की सबसे छोटी पत्नी थी जिनका कोई संतान नहीं था



नाम मुस्कान उम्र 35 वर्ष
 
अपडेट 102

पारस

आज महीनो बाद सुल्तान मेरे वाहिद का परिवार एक लम्बी यात्रा क बाद पारस पहुंचे थे आज महल फिर से भरने वाला tha,Sultan मेरे वाहिद की पहली पत्नी हूर इ जहाँ या भूरिया अकेले थी महल में जब से शमशेर उनका बीटा और उनके पति मेरे वाहिद गहतराष्ट्रा और कुबेरी पर अपने कट्टर दुश्मन बादशाह शाहज़ेब से युधा करने गए the.Hooriya क पति मेरे वाहिद क साथ उनके मित्र देवराज थे जिन्होंने अपने बहिन देवरानी क अपमान का बदला कुबेरी क राजा रतन सिंह को जान से मर कर लेट है और मेरे वाहिद देवराज क साथ कुबेरी को बादशाह शाहज़ेब क हाथो से छीन लेता है साथ हे कुबेरी का राजा रतन का भी अंत होता है पर इस युधा में सुल्तान मेरे वाहिद बुरी तरह जख्मी हो जाते है

इधर बलदेव और उसकी माँ देवरानी को प्रेम हो जाता है जिसके वजह से उनको महल से भागना पड़ता है पर इसी बीच बादशाह शाहज़ेब गहतराष्ट्रा पैर कब्ज़ा कर लेता है दादी जीविका बलदेव से मदद मांगती है तो बलदेव बदले में अपनी माँ से विवाह का प्रस्ताव रखता है सभी गाओ क मुख्या इस बात पर सहमत होजाते है और हज़ारो बेटी बहु को बचने क लये बलदेव का प्रस्ताव स्वीकार कर लेते है फिर बलदेव और शमशेर मिल कर दिल्ली की सेना को धूल छठा देती है और बलदेव अपना रैया जीत ते हे अपने पिता को क़ैद कर माँ से विवाह करता है और फिर सुहागरात मनाता है

बहुत बड़े आलिशान महल क सामने घोड़े आकर रुकते है और एक एक कर क सब घोड़े से उतारते है और महल क सैनिक सब घोड़ो को ले कर दूसरी ओरे ले जा क बांधने लगते है

मेरे वाहिद क पिता सुल्तान दास्ताँ क साथ उनकी पत्नी अफसाना चल रही थी

सुल्तान dastan:Begum अफसाना आज बहुत दिनों बाद अपने महल आकर बहुत ख़ुशी हुई

Afsana:Ji हाँ ऐसा लग रहा है जैसे हम अर्शे बाद आये है

तभी पीछे चल रहे सुल्तान दास्ताँ क छोटे बेटे और मेरे वाहिद क छोटे भाई गुल शाह सामने अपने कदम बढ़ा कर

गुल shah:abba जान क्या हमने आपको मिश्रा में या अरब में कोई तकलीफ दी

Dastan:beta गुल हमने ये तो नहीं कहा

Afsana:beta गुल शाह जितने मेरे वाहिद हमारे लये अज़ीज़ है उतने हे तुम बास बात ये है क पारस में हमने अपनी जवानी निकल दी तो और कही मन नहीं लगता

Dastan:Beta गुल शाह भले हे मेरे वाहिद सुल्तान इ आज़म है और पूरी दुन्या पैर उसकी हुकूमत है पर फिर भी तुम दोनों हमारे लिए बराबर ho,tum दोनों ने हे म्हणत कर क ये सल्तनत बनाई है

Gulshah:man me)Abba जाएं अगर आप ये बात महसूस करते तो आज पुरे दुन्या पे मेरे वाहिद का राज नहीं होता काम से काम आधे सल्तनत पर मेरा हक़ था

तभी साथ चल रहा गुलशाह का भतीजा शान बोल पड़ता है

Shaan:Chacha गुल की बात कभी अब्बा नहीं टालते आप दोनों की मेहेरबानी है क हमारी पूरी दुन्या में सल्तनत फैली

Gulshah:Beta शान ये सब अब्बा की म्हणत का फल है हम दोनों भाई तो बस पूरी दुन्या में जुंग करते है हुक्म तो हमारे अब्बा सुल्तान दास्ताँ की होती है

ये सुन कर सब हसने लगते है

इधर औरतो का हुजूम में आगे आगे

रानी नाज़ मेरे वाहिद की दूसरी पत्नी

और नाज़ की बेटी समा

मेरे वाहिद की तीसरी पत्नी उनके साथ रानी रज़िया और

रज़िया की बेटी महनूर

और सबसे पीछे इठलाते हुए चल रही थी अरबी मूल की

मेरे वाहिद की चौथी पत्नी रानी मुस्कान

महल क एक लम्बे रस्ते से चलते हुए सब महल में प्रवेश कर रहे थे दोनों तरफ से लोग फूलो की बारिश कर क राज परिवार का स्वागत क्या जा रहा था

सुल्तान दास्तान सामने राजगद्दी देख कर रुक जाता है सिंहासन क दोनों तरफ से बैठे मंत्री उठ खड़े होते है

सुल्तान दास्ताँ अपने पत्नी अफसाना की ओरे इशारा करता है और अपने छोटे बेटे गुल शाह और पोते शान क साथ राज गद्दी की ओरे बढ़ता है

अफसाना अपने बहुओ और पॉश क साथ राजदरबार से सटे परदे क पीछे हराम में चली जाती है

मंत्रीगण एक साथ

"सुल्तान दास्ताँ का इक़बाल बुलंद हो"

दास्ताँ सबको सलाम करता है और अपने हाथ से इशारा कर क सबको बैठने को कहता है

Dastan:dosto में समझता हु पारस मेरे बेटे मेरे वाहिद क जुंग में जाने क बाद वैसा हे है जैसा पहले था

mantri1:Sultan मेरे वाहिद जाने क बाद आप सब क गैबने में मल्लिका इ जहाँ ने सियासत बखूबी संभाला और पारस में अपने इंसाफ से उन्होंने लोगो क बीच मुक़ाबला बना लिया

Mantri2:ji हाँ सुल्ताना कहिये आप तो पुरे दुन्या क लोग अपने परेशानी ले कर आते और मल्लिका इ जहाँ चुटकिओ में उनका हक़ दे कर इंसाफ करती rehi,Mallika भूरिया क क्या कहने आज तक पारस में उनके हाथ या पेअर क नाख़ून तक नहीं देखा ऐसी बापर्दा खातून है

Mantri3:Mallika भूरिया जितनी परहज़गार इज़्ज़तदार कोई नहीं

सुल्तान दास्ताँ खुश होते हुए

सुल्तान dastan:Dosto हम तीनो क्यू खड़े है पता है आपसबको ?

सब एक sath:nahi नहीं

Dastan:q क इस तख़्त पर सबसे पहले बैठने का रिवाज़ सुल्तान या सुल्ताना का है और बेटी जैसी बहु होरिया का है मेरे बेटे मेरे वाहिद क गैबने में

Gulshah:aapne ठीक कहा अब्बा जान

Shaan:kaneez ..जाओ और मेरी बड़ी अम्मी सुल्ताना भूरिया को हमारी खबर दो

Gulshah:waise भाबी जान कहा है?

Kaneez:Gustakhi muaf..Mallika इ जहाँ जब अपने काम से फ़ारिग़ होती है तो इबादत में लग जाती है और जुंग में जीत होने की दवा करती रहती है

Dastan:Dekha बेटे गुल शाह पोते शान ,आज जो हमारे पास इतनी बड़ी सल्तनत है दुन्या क एक कोने से दूसरे कोने तक हुकूमत कुछ नहीं था पर जब मेरे वाहिद की शादी हुई भूरिया क दुवाओ को असर हुआ और आज देखो

कनीज़ जल्दी से जाती है और मल्लिका इ जहाँ हूर इ जहाँ को बुलाने क लये हुजरे में चली जाती है

भूरिया सुनते हे अपने निक़ाब संभालती हुई ख़ुशी से बिना देर गवाए आने लगती है

राज दरबार क अंदर घुसती है पूरा दरबार उठ खड़ा होता है

"सुल्ताना भूरिया का इक़बाल बुलंद हो

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Dastan:aao बेटी

भूरिया सबको सलाम करती है

Dastaan:shukria बेटी तुमने हमारे नहीं होते हुए बखूबी संभाला

Hooriya:abba जान ये तो मेरी खुशनसीबी थी आप सब baithe..baitho बीटा शान

Gulshah:bhabi जान और मई

Hooriya:aap भी बैठे

ये कह कर सुल्तान मेरे वाहिद क तख़्त पर बैठी और सब बैठने लगे

Hooriya:beta शान तुम्हारी बहिन समां कहा है और मेरी छोटी behane,naaz,razia और मुस्कान और हम सब की गुड़िया महनूर

shaan:sab परदे क पीछे औरतो क दरबार में है

Hooriya:abba जान अब आप आगये है तो आप सियासत संभाले मुझे घर सँभालने दें .में दरबार आपको सौंपती hu..or वैसे भी मुझे सुल्ताना कहलाना पसंद नहीं मलिका जहाँ हे ठीक हु

dastan:Jaisi आपकी मर्ज़ी बेटी भूरिया

मुस्कुराते हुए कहता है

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भूरिया उठ क जाने लगती है और पास में लगी एक परदे क पीछे औरतो क खेमे में जिसमे काम से काम 100 राणीअ थी हराम की जिसे मेरे वाहिद ने अपने शारीरिक सुख पाने क लये रखा था .मेरे वाहिद की तीनो बीवीए और दोनों बेश्या राजगदद्दी पर बैठी थी भूरिया को देखते हे सब सलाम करने लगे और गले मिल कर हाल पूछने लग..

तो बे कॉन्टिनोएड
 
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