Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 15 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 132

पारस

"क्या मतलब है तुम्हारा हम कितने दिनों बाद मिल रहे है और तुम कहती हो बहकना नहीं पता है हमने ने आपको कितना याद क्या भूरिया"

"Sultaan..aap मेरी बात का गलत मतलब न निकले बात ये है क आज हे मेरा महीना शुरू हुआ है बहक गयी तो आपको पूरा खुश नहीं कर पाऊँगी"

ये कह कर भूरिया अपने ज़ेहन पर इतराते हुए मुस्कुराती है

Sultan:acha तो ये बात है मेरी जान आज रात मुझे आप क साथ सोने की चाहत थी पर

Hooriya:sultan घबराये नहीं में नाज़ को भेज दूंगी आपके तो 4 बीवीए है

Sultan:Biwia तो है पर जो तुम में है वो मज़ा किसी और में नहीं

Hooriya:man me)Jhuti तसल्ली किसी और को देना सुल्तान में सब सच जान चुकी हु

Hooriya:Aap जल्दी से सेहतमंद हो जाये उसके बाद में आपको हर तरह से खुश कर दूंगी

Sultand:aap की दवा रही तो में बहुत जल्द पहले जैसा तगड़ा हो जाऊंगा

Hooriya:ijazat हो तो में जाओ

Sultand:Jaaye मल्लिका आप आराम करे

Hooriya:aap कहे तो जाते हुए नाज़ या रज़िया को भेज दू आपके पास

Sultan:nahi रहने दो में मुस्कान को खबर भेजवा दूंगा आप जाये

Hooriya:Man me)Muskan को क्यू नहीं बुलाओगे आखिर कच्ची केलिए हे तोडना पसंद है आपको

भूरिया सुल्तान क हुजरे से चलते हुए अपने हुजरे क तरफ बढ़ती है और तेज़ कदमो से अपने हुजरे में पहुंच कर सबसे पहले अपना दरवाज़ा लगाती है और अपने बिस्तर पर पेट क बल सो जाती है

Hooriya:man me)Ae खुदा ये मैंने क्या किया अपने हे शौहर को नज़दीक आने से शोहबत करने से मन कर di....Nahi ऐसा करना ठीक है जब सुल्तान मुझसे मुहब्बत करते हे नहीं में मोती भद्दी हु बूढी हु तो क्यू मैं उन पर बोझ दू करे ऐयाशिया वो अपने तीनो बीइओ क साथ

भूरिया ये सोचते हुए रोने लग जाती है महीनो से सुल्तान कींतेज़ार में अपने ज़िन्दगी गुज़र रही भूरिया को लग रहा था जैसे उसका सब कुछ छीन गया हो अब उसे सुल्तान से मजबूरन दूरी बनानी पद रही थी

Hooriya:man me)ye कैसा इम्तेहान है में किसी को बता भी नहीं सकती कुछ कर भी नहीं सकती"

भूरिया सुल्तान क गले लगने से और छेड़ छार से गरम हो गयी थी भूरिया कही महीनो से चुदाई नहीं थी और आज सुल्तान से मिल कर उसकी आग भड़क जाती है

भूरिया मन me)Haaye अब क्या करू पहले एक हफ्ते में तो एक बार तो सुल्तान से मेरा मिलाप हो जाता था अब अपने इस आग को कैसे शांत karu,Mere गुस्से होने से मेरा हे नुकसान है सुल्तान तो दुसरो बीइओ से तो मज़े ले हे रहे है हाय ये गंदे ख़यालात में नाहा लेती हु शायद कुछ सुकून मिल जाये

भूरिया उठ कर नहाने चली जाती है फिर एक नया सूट बदलती है और अपने बाल जो लम्बे घने नितम्ब को छू रहे थे उसे सूखने लगती है

भूरिया मन me)haaye ये सूट भी उतना हे कैसा हुआ है मैंने दर्ज़ी से कहा था में जैसा पहनती हु ढीला ढला जिसमे हर अंग छुपे वैसा सिलने फिर भी अब ये शमशेर भी मुझे ऐसे ताड़ता है जैसे खा जायेगा अब पता नहीं उसके दिमाग में क्या चल रहा है पर मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा

तभी दासी की आवाज़ आती है

"मल्लिका जहाँ शहज़ादे शमशेर आये है"

Hooriya:Theek है में आई

भूरिया जा कर दरवाज़ा खोलती है और उसकी चुन्नी जो रेशमी था फिसल कर गिर जाती है



शमशेर अपने माँ को कैसे हुए सूट में देख सोचते है

"वह अम्मी जान आज जान हे लोगी क्या"

Hooriya:man me)Ye शमशेर पागल तो नहीं हो रहा

भूरिया को हल्का गुस्सा आजाता है और वो अपने चुनना को उठती है और शमशेर अब भी अपने माँ को खाने जाने वाली नज़र से देखता रहता है

Hooriya:Kya हुआ

Shamshera:Kya ..क्या हुआ

Hooriya:Bolo कुछ ऐसे हे बूट बने खड़े रहोगे ..क्या काम है

Shamshera:Q में बिना काम क अपनी अम्मी से मिलने नहीं आसक्त हु

Hooriya:aisi बात नहीं वो में अपने बाल सूखा रही थी खुले हे है बांधने हे जा रही थी तुम आगये

Shamshera:Q माँ एक बीटा अपने माँ क बाल देख नहीं सकता आज पहली बार तो इन खूबसूरत ज़ुल्फो को देखा हु

Hooriya:Sultan क अलावा एक तुम हे हो जिसने मेरे ज़ुल्फ़ को देखा है

Shamshera:pata है अम्मी जान आप हमेशा निक़ाब में लिपटी रहोगी तो आप की ख़ूबसूरती को कौन देख पायेगा

भूरिया तुनक कर दूर जा कर बैठ जाती है और एक उदास चेहरे से अपने बेटे से खफा होते हुए कहती है

"बीटा तुमने दर्ज़ी से कह कर मेरे कपडे इतने तंग सिल्वा दिए अब मुझे बहुत उलझन होती है इन कपड़ो में"

"अम्मी जान आप को किसने कहा मेरे कहने पैर दरजी खला ने ऐसा क्या"

"सुनो बीटा तुम्हारी माँ हु में मुझे न समझाओ तो बेहतर होगा ये नए ज़माने क कपडे मुझे नहीं पसंद ये बहुत कासी हुई है सब"

"अम्मी जान आप इन लिबास में बहुत ज़्यादा खूबसूरत लग रही हो इतनी खूबसूरत क पारी भी अआप्की खूबसूरती देख जल जाये"

"बास करो तारीफों की पुल्ल हे बंधे जा रहे हो"

Shamshera:ab अम्मी क्या करू जो तारीफ क क़ाबिल हो तारीफ उसी की होती है वैसे आप बहुत चमक रही हो इस सूट में

भूरिया क आखो में टारे दिखने लगते है और वो अपने बेटे क तारीफों को क़ुबूल कर लेती है

hooriya:man me)Ek ये है जो तारीफ कए नहीं रुकता और सुल्तान ने तो मेरे नए लिबास पर गौर तक नहीं क्या ..जब वो मुझपे गौर नहीं करते डिल से तो लिबास के फ़र्क़ उन्हें कहा दिखेगा

Hooriya:Shukria बीटा ..लगता है तुम अब तारीफ करना सीख हे गए हो तो अपने बीवी को खुश रखने में परेशानी नहीं होगी तुम्हे

Shamshera:Me कई दफः कहा मुझे कोई शादी नहीं करनी

Hooriya:q नहीं करनी उम्र जा रही है अब नहीं करोगे तो कब करोगे बताओ कैसी बीवी चाहिए तुम्हे

Shamshera:Jaisi चाहिए मिलेगी नहीं

Hooriya:Bolo हम तुम्हारे लये वैसे हे लाएंगे

Shamshera:Ab क्या कहु ..समझ लीजिये एक पारी हो जो दुन्या क तमाम परिओ से खूबसूरत हो और उसका डिल उस से भी ज़्यादा खूबसूरत

शमशेर अपने माँ को ऊपर से निचे तक एक प्यार भरी अंदाज़ में देखते हुए कहता है

Hooriya:shayar साहब ये बाते किताबो में हे अछि लगती है

Shamshera:man me)Waise मेरे डिल की पारी सिर्फ आप हो अम्मी जाएं

Shamshera:Waise अब्बा जान आपको बुलाये थे बहुत जल्दी आगये

Hooriya:badmash..Wo तो बास ऐसे हे मिलने क लये बुलाये थे

Shamshera:To मैंने तो नहीं कहा कुछ और काम क लये बुलाये थे

भूरिया उठ कर अपने हाथो से धीरे से शमशेर क हाथो पैर मरती है शमशेर साढ़े 6 फिट का ुचा लम्बा जवान था भूरिया 5.9 की थी इसलिए वो पूरी कोशिश की पर शमशेर कर गर्दन तक नहीं पहुंच पाई

Hooriya:chhorungi नहीं

शमशेर अपने आप को और ुचा करते हुए खड़ा हो जाता है

Shamshera:ammi जान शेर क मुँह में हाथ मत डालो बहार नहीं निकल पाओगी फिर

Hooriya:mai भी शेरनी हु ..तुम्हारा मुँह नहीं बचेगा

शमशेर भूरिया का हाथ हटा कर दूर हो रहा था और भूरिया अपने पूरी कोशिश कए जा रही थी

कुछ देर बाद भूरिया थक कर बैठ जाती है और शमशेर हस्ता हुआ

"ठीक है अम्मी जान में जा रहा हु बाजार अगर कहो तो कुछ फल ले आओ बहुत कमज़ोर हो गए हो आप"

Hooriya:Bada आया शेर

शमशेर निकल कर चला जाता है सोचते हुए

"अम्मी जान वह अब्बू की हुजरे में रुकी नहीं इसका मतलब साफ़ है वो अब्बू से दूर जा रही है अब मुझे इसी मौके का फायदा उठाना होगा"

इधर भूरिया थकने क वजह से लेट जाती है



Hooriya:man me)Shamshera कैसे मेरे ग़म को भुला देता है और ख़ुशी में तब्दील कर देता है बास इसकी कुछ आदते ठीक हो जाये तो मेरा बीटा सबसे ाचा सुल्तान बनेगा पारस का और पूरी दुन्या पैर अपनी हुकूमत करेगा

ये सोच कर भूरिया मुस्कुराने लगती है

Hooriya:man me)Bazar कह कर गया है पर जायेगा तो कोठे पर हे पता नहीं इसकी ये आदत कब sudhregi..Shayad एहि वजह है क उसकी नज़र मुझ पर भी ताड़ती रहती है क्यू क वो हमेशा वो नशे की सुरूर में होता है

गहतराष्ट्रा

शाम को पूजा क बाद सब खुश थे राज परिवार इसलिए खुश था क्यू क अब गहतराष्ट्रा का उत्तराधिखारी जो राज्य की सेवा करेगा और गहतराष्ट्रा को आगे बढ़ाएगा उसकी नीव महाराज बलदेव और उनकी पत्नी महारानी देवरानी रख दी थी ,पुरे परिवार क आशीर्वाद और राज्य्वासिओ क स्नेह से महाराज बलदेव अपने राज्य क वंश क लये पूरी तैयारी कर ली थी अब गहतराष्ट्रा का हर मनुष्य अपने महाराज और महारानी पर आस लगाए बैठे थे

बलदेव अपने सेनापति सोमनाथ से कह कर अपने स्नान करने निर्णय करते है

Baldev:Somnath आज हम राजघाट पर स्नान करने जायेंगे

Somnath:Jo आगया महाराज हम दूध से आपके स्नान का प्रबंध कर देते है

Baldev:Theek है जाओ और कमला को भेज दो

राज सिंहासन पर बैठा बलदेव अपने सेनापति को आदेश देते हुए कहता है कुछ देर प्रतीक्षा करने क बाद कमला राज्य सभा में उपस्थित होती है

Kamla:Maharaj की जय हो

Baldev:Aao कमला

Kamla:Maharaj आपने मुझे याद क्या

Baldev:kamla हाँ हम अभी राज घाट पर दूध स्नान करने जा रहे है में चाहता हु क आप महारानी देवरानी क दूध स्नान की व्यवस्था करे

Kamla:ati उत्तम maharaj..Mai अति शुह्रा सब प्रबंध कर dungi..aagya महाराज

Baldev:Jaa सकते हो

कमला चली जाती है और राज सभा से निकल कर महल क मुख्या द्वार में प्रवेश करती है और हर तरफ देवरानी को ढूंढ़ने लगती है तभी रसोई से देवरानी की आवाज़ सुनाई पड़ती है और कमला उस तरफ मुद जाती है

kamla:Maharani आप क्या कर रहे ह

Devrani:Kamla वो महाराज बलदेव का मन पसंद पकवान बनवा रही hu..raadha पनीर की सब्ज़ी भी तैयार करो

Kamla:Maharani आप यहाँ रसोई में काम कर रही है तो महाराज क लये तैयार कौन होगा

Devrani:kya कह रही हो कमला में समझी नहीं

तभी वह षुरूश्ती आजाती है और बीच में बोल पड़ती है

Shurushti:Maharani आप नयी नवेली दुल्हन हो ऊपर से आज से आपके जीवन की नहीं शुरुवात करने है हमारे राज्य क वंसज क लये (मुस्कुराते hue)Khoob म्हणत करनी है महाराज क साथ

Kamla:Han महारानी मुझे महाराज ने काम सौंपा है वो चाहते है क आप आज दूध से स्नान कर क उनके लये तैयार हो जाओ

Devrani:Kamini kamla..har समय तुम्हारे मस्तिष्क में यही घूमता रहता है

Kamla:Maharani जी आपके लाडले बीटा उफ़ आपके पति राज घाट जा रहे थे दूध स्नान करने और हमे आपके स्नान करवाने की ज़िम्मेदारी सौंपी है

Shurushti:Adbhutt विचार है मेरे पुत्र बलदेव का ,दूध से स्नान करना शुभ मन जाता है

अब देवरानी भी समझ गयी थी क कमला कोई मज़ाक नहीं कर रही है

Kamla:Chaliye महारानी आपका काम यहाँ नहीं

Shurushti:aap तो जाइये बहुरानी हमारे बेटे का साथ दीजिये इस राज्य का उत्तराधिकारी हमे दीजिये ,दूधो नहाओगी तो हे पुतो पहलाज

ये सुन देवरानी लज्जा जाती है और उसके छूट में जैसी चींटी रेंग गयी हो अपने सास की बात सुन क



Devrani:Theek है सासु माँ जैसी आपकी मर्ज़ी

Shurushti:Marzi तो ऐसे बोल रही है जैसे खुद मेरे बेटे की संतान नहीं चाहती हो

ये सुन कर तीनो हसने लगते है कुछ देर बाद कमला क साथ देवरानी ऊपर अपने कक्षा में चली जाती है जहाँ स्नान गृह में तैयारी होती है दूध स्नान का

उधर सेनापति सोमनाथ भी राज घाट पर सैनिको को पहरा बढ़ा देता है और सब कुछ प्रबंध कर क वापस लौट ता है महाराज क पास लौट ता है

Somnath:Maharaj चलिए राजघाट पैर तैयारी हो चुकी

Baldev:Avashya सेनापति चलो

सोमनाथ क साथ बलदेव राज घाट जो महल क आगे उद्यान क पास था वह दोनों घोड़ो से बैठ कर पहुंचते है ,वह पहुंच कर बलदेव घोड़े से उतरता है और सेनापति घोड़े को ले कर एक वृक्ष से बाँध देता है कुछ खड़े सैनिक वह पर खड़े महाराज का स्वागत करते है

Sainik:Maharaj की जय हो ..

महाराज की जय हो

घाट जंगल से घिरा हुआ था चारो ओरे से दीवार थे बीचे बड़े बड़े दो नहर निकल रहे थे जो पानी का श्रोत tha.maharaj बलदेव सबसे पहले अपने तलवार को अलग करते हुए रखते है और एक सैनिक दोनों हाथो से तलवार ले लेता है फिर अपने आभूषण को एक एक कर निकलते है फिर अपने वस्त्र निकल कर महाराज एक धोती में हे रह जाते है

Somnath:aaap जा कर स्थान पर बैठ जाये महाराज

Baldev:Theek है सेनापति

बलदेव जा कर सीडीओ से उतारते हुए एक जगह पर बैठ जाता है और फिर सारे सैनिक इकठे हो कर बलदेव क ऊपर दूध की बारिश कर देते है छोटे बाल्टी से दूध को उढेल देते और बालड़ेव अपना आँख बंद कए नाहा रहा था

थोड़ी देर बाद नाहा कर बलदेव फिर से वस्त्र धारण करता है और वापस अपने सेनापति और सैनिको क साथ महल की ओरे अपने घोड़े पे बैठ कर आने लगता है

उधर कमला देवरानी को ले कर उसके कक्षा में जाती है और उसे दूध से नहलाती है फिर थोड़ी देर बाद देवरानी तैयार हो जाती है



Kamla:ati सुन्दर लग रही हो महारानी मुझे लगता है महाराज आप की सुंदरता देख कही आज हे खता न खोल दे

Devrani:dhatt..besharam मई भी तो यही चाहती हु क मेरे गॉड में जल्द से जल्द किलकरिअ गूंजे हमारे प्रेम की

Kamla:bass आप ऐसे हे महाराज बलदेव को खुश रखते रहिये बहुत जल्द हमे खुशखबरी सुनने को मिल जाएगी

Devrani:ab तू जा kamla..or हाँ मेरे सैय्या बीटा को भेज देना

Kamla:avashya महारानी और हाँ अब वो जड़ी बूटी भूल कर भी न खाना जिसे से गर्भ नहीं रुकता

Devrani:Mujhe पागल समझी हो जाओ अब

Devrani:man me)Meri कोख मेरे बेटे की बीज अपने अंदर लेने क लये तड़प रही है

Kamla:man me)bhut खुजली है तुझे महारानी अपने बेटे से छुड़वाने की अब तो उसका बीज को बोयेगी और बचा बी जानेगी छिनाल है पक्की

कमला निचे चली जाती है कुछ देर में सब भोजन करने बैठ जाते है पर बलदेव का अब तक कोई अत पता नहीं था

राजपाल क साथ देवराज बद्री और श्याम बैठे रात का भोजन कर रहे थे और पास कड़ी षुरूश्ती सबको भोजन पड़ोस रही थी

Devraj:Rajpal जी अब मैंने मन बना लय है क अब मुझे कुबेरी वापस लौट जाना चाहिए

Rajpal:par अभी कुछ दिन हे हुए है वह की प्रजा इतनी जल्दी आपको महाराज नहीं मानी तो

Devraj:Bass अब सुल्तान मेरे वाहिद का फरमान है मुझे वह रहना है और कुबेरी को एक ाचा राज्य बनाना है राजा रतन सिंह ने कुबेरी को नरक बना दया था

Rajpal:Ishwar आपके हर ीचा पूरी करे

Badri:Maharaj आपकी आज्ञा हो तो हम भी अपने अपने राज्य लौट जाये

Shyam:Han महाराज हमारा परिवार हमारी प्रतीक्षा कर रहे होंगे

Shurushti:ary बच्चो इतनी जल्दी क्या वैसे भी तुम्हे कौन सा जा कर अपने राज्य को संभालना है

तभी बलदेव वह पहुंच जाता है और सबकी बाते सुन कर

Baldev:Kiske राज्य सँभालने की बात चल रही है

राजपाल सहित सब अपने आसान से उठ खड़े होते है

rajpal:aaiye महाराज

Baldev:baith जाइये आप सब ..पिता जी ये सब की कोई ास्वश्यक्ता नहीं आप सब हमे ह्रदय से से सम्मान करे बास इतना छटा हु

Shurushti:Beta बलदेव ये तुम्हारे नए साला साहब तो जाना हे चाहते है और साथ हे ये दोनों युवराज भी अपने राज्य लौटना चाहते है

Baldev:Q साले साहब अपने बहिन क ससुराल आपका मन नहीं लगता कोई कमी तो नहीं हो रही हमारी ओरे से

देवराज सर झुकाये बैठा था एक बार वो राजपाल को देखता है दोनों असमंजस क स्थिति में थे

Devraj:Wo महाराज बलदेव जी कोई कमी तो नहीं आपके ओरे से पर कुबेरी पहुंच कर एक नए राष्ट्र की नीव रखनी है

Devraj:man me)Kabhi मां जी कहता था आज साला कह रहा है

Baldev:achi सोच है ..उस ऐय्याश रतन सिंह क राज्य में शांति बानी रहेगी इस पर संदेह है मुझे और रही मेरे मित्रो की बात की बात तो वो जा सकते है

Devraj:To राजपाल जी कल हे हम निकल जायेंगे

Baldev:saale साहब हमने ने आपको जाने की आज्ञा नहीं दी आप अपने बहिन देवरानी से अनुमति ले लीजिये पहले

Devraj:jaisa आप कहे

Rajpal:aao भोजन करो खड़े हे रहोगे बीटा

Badri:han आओ भोजन करो

Shurushti:aap सब रहने दीजिये ..बीटा बलदेव जाओ बहु देवरानी तुम्हारी प्रतीक्षा में है

बलदेव दो कदम चलते हुए आगे बढ़ता है फिर पीछे मुद कर सबको एक टाक देखते हुए

"हमारा भोजन ऊपर होगा"

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 133

गहतराष्ट्रा

Devraj:To राजपाल जी कल हे हम निकल जायेंगे

Baldev:saale साहब हमने ने आपको जाने की आज्ञा नहीं दी आप अपने बहिन देवरानी से अनुमति ले लीजिये पहले

Devraj:jaisa आप कहे

Rajpal:aao भोजन करो खड़े हे रहोगे बीटा

Badri:han आओ भोजन करो

Shurushti:aap सब रहने दीजिये ..बीटा बलदेव जाओ बहु देवरानी तुम्हारी प्रतीक्षा में है

बलदेव दो कदम चलते हुए आगे बढ़ता है फिर पीछे मुद कर सबको एक टाक देखते हुए

"हमारा भोजन ऊपर होगा"

ये सुन कर षुरूश्ती मुस्कुराने लगती है साथ हे बद्री और श्याम एक दूजे को देख कर आँख मार कर इशारा करते है पर साथ बैठे राजा राजपाल एक बुझे हुए मैं से देवराज की ओरे देखता hai,Rajpal क चेहरे पर साफ़ आत्मा ग्लानि और अपने पति धर्म नहीं निभा पाने का दुःख था

Devraj:man me)Ab दुखी हो कर क्या होगा राजपाल जब चिड़िया चुग गई खेत

Devraj:Khaiye महाराज क्या सोचने लग गए

Rajpal:Kuch नहीं खाइये आप भी तो रुके हुए है

Devraj:man me)agar आप ठीक होते राजपाल तो आज मेरी बहिन अपने बेटे से कभी विवाह करने पैर विवश नहीं होती

Rajpal:Man me)Meri हे कमी थी जिसके कारन आज मेरे पत्नी मेरे साथ न हो कर अपने बेटे का बिस्तर गर्म कर रही है ,कितने सुन्दर और नाज़ुक थी जब मई उसे ब्याह कर लाया था

तभी राजपाल अपने दांत टेल अपनी ऊँगली कहते समय दबा लेता है और उसकी आह निकल जाती है

shurushti:Kya हुआ महाराज किस सोच में डूबे है भोजन पैर ध्यान दीजिये

ये कह कर षुरूश्ती मुस्कुरा देती है क्यू क वो जानती है क राजा राजपाल को अपनी पत्नी छीन जाने का दुःख था

षुरूश्ती क साथ साथ बद्री और श्याम भी मज़े लेते हुए मुस्कुराते है

बलदेव भी धीरे कदमो से चलते हुए अपने पत्नी देवरानी क पास जाने लगता है ऊपर पहुंच कर कक्षा क दरवाज़े पे खत खटता है

Devrani:Kaun..

Baldev:Mai बलदेव आपका पति

मुसकुराते हुए कहता है

Devrani:achha आई जी महाराज

देवरानी जल्दी से दौर कर अपने पिया का नाम सुनते हे दौर कर दरवाज़ा खोलती है

Baldev:'devrani कोई और भी आता है क्या रात में यहाँ जो पूछ रही हो कौन

देवरानी बलदेव को अंदर लेते हुए दरवाज़ा बंद करती है

Devrani:Kisi अन्य पुरुष में इतनी हिम्मत कहा जो महारानी देवरानी को आँख उठा क देखे और कक्षा में आने की तो बात दूर है

Baldev:Achha जी देवरानी आज तो खूब फब्ब रही हो इस पारम्परिक वस्त्र में

Devrani:wo बास आपके लये हे सजी हु पति देव

Baldev:Ghodi लग रही हो



देवरानी एक तुक अपने पति उर्फ़ बेटे को देखते रह जाती है और अपने प्रसंशा सुन कर अत्यधिक प्रसन्न होती है

Devrani:ab जिसका पति घोडा हो उसके लये तो घोड़ी की हे आवश्यकता होगी na..aap कुछ खाएंगे पीयेंगे

Baldev:Jiske पत्नी आपके जैसी घोड़ी रानी माँ उसे खाने की क्या आवश्यकता वैसे भी आज तो हमे आपको न सिर्फ खुश करना है छोड़ क आज तो आपके ऐसा पेलना है क आप क कोख मेरे बीज से भर जाये और तुम अति शीघ्र गर्भवती हो जाओ मेरी रंडी

Devrani:Chi कितने गंदे है आप पति परमेश्वर अपने पत्नी को कोई ऐसे शब्द कहता है

Baldev:Q देवरानी अपने बेटे क लैंड का वीर्य बीज अपने छूट में नहीं लोगी अपने कोख में अपने बेटे का बीज नहीं रखोगी और मेरे बचे को जन्म नहीं डोज

Devrani:Han में अब आपकी पत्नी हु माँ नहीं अब तो में आपके बचे जानूँगी हे

Baldev:To मेरी जान मेरी माँ हुई न तुम मेरी रांड अपने बेटे की रांड

और बलदेव मुस्कराने लगता है

Devrani:dhatt पागल घोड़े रुकिए में आपके लिए दूध लाती हु

देवरानी जा कर दूध लाती है तब तक बलदेव पलंग पर बैठ जाता है दूध का गिलास लेते हुए

Baldev:'devrani तुम्हारा निर्त्य देखे हुए बहुत समय हुआ आज निर्त्य करो हमारे लये

Devrani:par महाराज

Baldev:'devrani..maine कहा न तुम अपना पत्नी धर्म निभाओ आज तुम्हारे लटके मटकते गांड और दूध को देखना है

Devrani:Jo आज्ञा महाराज मेरे पति देव



देवरानी थोड़े दूरी पर कड़ी हो कर निर्त्य शुरू करती है और अपने दोनों हाथ उठा कर मुस्कुराती है



देवरानी दूसरे मुद्रा में कड़ी हो जाती है जिसे देख कर बलदेव अपने दूध को गटकते हुए

Baldev:saali तेज़ी दिखा ज़रा

देवरानी अब तेज़ी से नाचने लगती है



देवरानी अपने आखो को मटकती है फिर अपने दूधिया पेट को हिला कर अपने पति को अपने प्रेम में अपने शरीर से जलवा दिखती है

देवरानी अब अपने एक ऊँगली अपने मुलायम गाल पर रख नखरा दिखते हुए अपने दोनों बड़े मम्मो को हिलती है



दोनों मम्मी को यु सुर्र में हिलता देख बलदेव से रहा नहीं जाता है और वो अपने लौड़े पे हाथ फेरने लगता है

"आह माँ क्या रूप पाया तुमने"

Devrani:man me)Tumhe तो अपना दीवाना बना हे चुकी अब मेरे शरीर क लये तुम पागल न हो जाओ मेरे पति देव बलदेव अभी दिखतु हु तुम्हे अपने रूप और इस जिस्म का कमल



बलदेव अब दूध का गिलास रख कर बड़े गौर से अपने माँ क जिस्म को देख रहा था और एक हाथ उसके लैंड पर जमा हुआ था



Baldev:uff माँ ये तेरा तराशा हुआ शरीर कौन कहेगा तुम 37 साल की हो क्या जवानी चढ़ी है इस घोड़ी पैर

बलदेव धीरे धीरे फुसफुसाता हज



देवरानी जोश में आकर अपने दूध और गांड को ज़ोर ज़ोर से हिला कर गोल घूमने लगती है

बलदेव अपना लैंड सहलाता हुआ अपने माँ क पास आता है और उसके थिरकते हुए गांड को सहला कर उसे अपने बाहो में भर लेता है देवरानी की सांस ऊपर निचे हो रही थी

बलदेव अपने लैंड को देवरानी से घिसते हुए

Baldev:Raani माँ देखो आपके पति का लौड़ा कितना अकड़ गया आपके निर्त्य देख क

Devrani:uh यह मेरे पतिदेव मेरे जीवन में आपको सदैव आपको हर सुख दू एहि चाहूंगी

देवरानी अपनी सांस सँभालते हुए कहती है

Baldev:tumhare कमर क लचक हाय तुम किसी अप्सरा से काम नहीं हो

Devrani:Dhanyad जी आप कहे तो और नाचू

Baldev:Bass मेरी रानी अब मेरा लौड़ा तेरे बुर में नाचेगा

Devrani:aaj बहुत बहकी बहकी बाते कर रहे है आप

Baldev:Aaj तुम्हारे छूट क धागे खोल दूंगा और गांड क पत् मेरी छिनाल आज में तेरे संग गन्दी बात हे करूँगा तुम्हे बुरा तो नहीं लगेगा न

देवरानी झट से बैठ जाती है और बलदेव क पेअर पकड़ लेती है

devrani:Pati देव ये जीवन आपकी है आपकी दासी हु मुझे क्यू लगेगा आपका कोई काम बुरा

Baldev:aajao ऊपर मेरी रानी तुम्हारी जगह मेरे हृदय में है

बलदेव ऊपर उठता है और देवरानी को अपने गले लगा लेता है

devrani:Maharaj आप चाहे तो मुझे वैश्य कहे या रखैल और ये बात भी सत्य हु में रंडी हु तो सिर्फ आपकी



देवरानी ये कह कर बलदेव क होठो को चुम लेती है बलदेव लगातार अपने माँ को हे देखे जा रहा था उसके आखो में एक छुडासी स्त्री को वो देख सकता था जो जीवन भर प्यार क लये तदपि है

Baldev:Teri हर प्यास में मिटा दूंगा मेरी रानी माँ



बलदेव अपने होठो को देवरानी क होठो से लगा देता है और दोनों एक दूसरे क होठो को चूसने लग जाते है

बलदेव देवरानी से चिपक जाता है और अपने हाथ पीछे ले जा कर अपने माँ क गांड को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगता है बदले में देवरानी भी अपना छूट बलदेव क लैंड से ज़ोर ज़ोर से घिसती है

"आह राजा बीटा आह ऐसे हे मेरे राजा"

बलदेव धीरे धीरे देवरानी क आभूषण निकलने लगता है और देवरानी भी अपने पति को नंगा करने लगती है

बलदेव अब निचे देवरानी क घाघरे में हाथ दाल कर निचे खींचता है



देवरानी को निचे से नंगी कर क बलदेव अब उसे अपनी गॉड में उठा लेता है और बिस्तर पर ले जा कर पटक देता है

अब बलदेव तेज़ी से देवरानी को नग्न करना शुरू करता है साथ हे देवरानी भी बलदेव क धोती खींच कर अलग कर देती है कुछ हे देर में दोनों एक डैम नग्न अवस्था में होते है बलदेव देवरानी को अपने गॉड में ले कर बिस्तर पर पलटने लगता है

"आह रानी माँ आज तेरे छूट क परखच्चे उदा दूंगा "

"हम्म आह उदा दो राजा "

"झुक्क जा मेरी कुटिया "



देवरानी झुक जाती है और बलदेव अपने माँ क दोनों बड़े गांड को हाथो में जकड लेता है

"आह माँ इतने बड़े मटके जैसे गांड को कैसे संभालती हो उफ़ कितने मुलायम है ये आह माँ"

"आह उठ ाः राजा बीटा ये आपकी पत्नी क हे गांड है हह उठ उफ़ राजा और दबाओ मेरी गांड "

"माँ तेरे छूट से पानी रिस रहा है ाः उफ़ ये देखो मेरा ऊँगली में तेरे छूट का पानी लग गया कुटिया आह तू किसी रंडी से भी नशीली है देवरानी आह"

बलदेव देवरानी को झुकाये उसके गांड को छेरते हुए छूट में अपनी एक ऊँगली घुसा कर अंदर बहार कर रहा था

"आह राजा उफ़ ाः ऊऊऊओ आआह उह्ह्ह ाः उह्ह्ह ाः राजा ाः उठ"



"आह साली तेरी छूट अंदर किसी भट्टी की तरह जल रही है आह इस छूट में तो घोड़े का लैंड भी चला जाये रांड देवरानी"

"घोड़े का न सही राजा मेरे पतिदेव क लौड़े से मेरी छूट की गर्मी शांत हो जाएगी आह उठ उफ़"

बलदेव अपने माँ क गांड को दबाते हुए देवरानी क होठो को चूमता है और एक हाथ से देवरानी क दूध को दबाते हुए

"रंडी तेरे दूध लटकते हुए किसी गाय क थान से काम नहीं लगते मेरे कुटिया "



"आह मेरे पति उठ ाः राजा आप अपने घोड़े जैसे लैंड को तो देखिये वो किसी सामान्य स्त्री में घुस जाये तो मर जाएगी बेचारी आह उठ"

"इसलिए तो तेरी जैसी घोड़ी पटाया हु देवरानी जो मेरे लौड़े को आराम से अपने तीनो छेड़ो में निगल जाये ाः मेरा लौड़ा ले रंडी अपने मुँह में"

देवरानी फाटक से पलंग से निचे उतर कर बैठ जाती है और बलदेव खड़े हो कर अपने माँ क सर को पकड़ता है देवरानी अपना मुँह खोलती है बलदेव एक धक्के से अपना लैंड देवरानी क मुँह में पेल देता hai,devrani अपने हाथ से लैंड पकड़ते हुए बलदेव क लैंड



को आगे पीछे अपने मुँह में लिए चूसने लगती है

"ाः रानी माँ मेरी रंडी माँ ऐसे चुसो ाः उह्ह्ह "

"यह उम् उम् ाः उम् गल्प गल्प गल्प गल्प गल्प गल्प यह उम्म्म आह उम् ममममः गल्प गल्प गल्प"

"आह छिनाल ऐसे हे साली तेरे मुँह में मेरा लौड़ा पिघलने लगता है आह ुहम्म ऐसे हे मेरी छिनाल "

"आह ुहममम ाः गल्प गल्प गल्प गप्प गल्प गल्प गल्प उठ आआ ुहहममम उम्मम्मम"

बलदेव का लैंड हल्का हल्का पानी छोर रहा था जिसे देवरानी अपने जीभा से चटकारे लेते हुए कहती है

कुछ देर ऐसी हे चूसै क बाद बलदेव अपना लैंड खींचता है और देवरानी को धक्का देते हुए बिस्तर पर लिटा देता है

"आह लेट जा रंडी अब तेरे छूट को चाटूँगा में "

"आह चाट लीजिये जी छूट मेरी कब से पानी टपका रही है आपके लौड़े क लिए"

बलदेव निचे बैठ कर अपने माँ क छूट



पर तिरछा हो कर अपने दोनों होठो में भर लेता है और जीभा को नोखिला बनाते हुए छूट को अपने होठो से और भगानसिसक को अपने जीभा से चाटने लगता है ऐसे चाटने से ऐसे आवाज़ आने लगती है जैसे कुत्ता किसी कुटिया क छूट को अपने बड़े जीभा से चाट रहा है

"आह राजा मेरी योनि आआह मेरे भगनशे में ाः उफ़ न खुरेदो ाः ाः में मर्डर गयी उफ़"

"तेरी छूट कितनी पानी छोर रही है कुटिया ाचा हुआ में तुझे पता क पेल दया नहीं तो तू पक्का किसी कुत्ते से पिलवा लेती है "

ये कह कर बलदेव फिर से छूट को मुँह में भर्र लेता है कुछ देर ऐसे हे छूट चूसै क बाद बलदेव उठ कर देवरानी क साथ लेट जाता है देवरानी अपने हाथ से अपने बेटे का लौड़ा पकड़ लेती है और उसे अपने करीब खींच लेती है बलदेव देवरानी क मम्मो को चूसने चाटने लगता है निचे देवरानी अपने पति क लैंड को पाकर कर अपने छूट पर घिसती रहती है

"आह राजा अब पेल दो न "

"रंडी पेलुँगा लेकिन मेरी एक बात मन नई होगी"

"आह उफ़ राजा बोलो न आपके पत्नी सब त्याग देगी"

"मुझे आज अपने घोड़ी की गांड फाड़नी है"

देवरानी एक डैम गरम हो गयी थी उसे न कुछ सूझ रहा वो बलदेव क लौड़े को अपने छूट का द्वार दिखते हुए

"उफ़ राजा पेल दो अब अपनी पत्नी को मार लेना गांड भी"

"Phachhhh"Se बलदेव एक हल्का धक्का देता है और बलदेव क 9 इंच का लैंड का टोपा पनियाई बुर में घुस जाता है देवरानी आँख बंद कर क अपने हाथ बलदेव क सीने पर घुमा रही थी और बलदेव क आखो में देख रही थी बलदेव क आखो में एक तूफ़ान दिख रहा था बलदेव अपने माँ क आखो हवस देख रहा था देवरानी जैसे अपने आखो से मिन्नत कर रही थी दाल दो मेरे छूट में अपना लैंड बलदेव

"आह ये ले मेरी रानी "

"खछ "से पूरा लौड़ा पेल देता है देवरानी अपने आखे बंद कए अपने छूट में खंजर सी गरम लोहे सा लौड़ा महसूस करती है

"ाः हे भगवान् आह मर्डर गयी में राजा"



बलदेव अपना लौड़ा निकल कर अपने माँ क एक टांग उठा कर घप्प घप्प पेलने लगता है

"ये ले माँ अपने पति का लौड़ा बोल बनेगी न मेरे बचे की माँ आह ये ले"

"उफ़ हाँ ाः आह आह यह ाः हैं ाः बनूँगी "

"अब तो कभी नहीं खायेगी उस वैध की जड़ी बूटी ये ले खछ से इस बार बच्चेदानी तक पेल देता है"

"आह राजा यह ाः अब 10 बच्चे भी जन्म दे दू तुम्हारे तो भी उस जड़ी बूटी को हाथ नहीं लगाउंगी पेल क जितना बच्चे चाहे उतना पैदा करो जितना दम्म है उतने बार मुझे पेट से कर दो आह उठ उफ़ में कभी न नहीं कहूँगी अब "

"आह ये ले माँ आज देवराज और राजपाल का मुँह बिगड़ा हुआ था लगता है अंदर अंदर हे वो न चाहते हो क हमारा बचा हो"

"ाः यह ाः ोयी माँ

मेरे राजा राजपाल की पत्नी छीन गई और तेरे माँ को तुन्हे साला बना दया डिल तो जलेगा हे उनका पर हमे क्या ाः ऐसे हे पेलो ाः उफ़"

करवट लेते हुए चुड़ते हुए थक जाती है देवरानी

"आह पति देव आह राजा रुक जाओ "

बलदेव रुक जाता है देवरानी झट से अपने गांड फैलाये छूट खोले झुक जाती है बलदेव बिना समय गवाए अपने लैंड को छूट में खछ से उतार देता है



देवरानी क दोनों हाथो को पकड़ पीछे की ओरे खींचे किसी घोड़ी की तरह बलदेव अपने माँ को घपाघप पेलने लगता hai,Devrani छूट पैर लैंड की मार से चिल्लाने और सिसकने लगती hi

"ाः हाय मेरे राजा बीटा ाः और छोड़ो अपनी माँ को अपनी पत्नी को आह यह ाः उठ उफ़ महाराज आह छोड़ो अपने पत्नी महारानी की ाः यह ाः यह घप्प घप्प और पनियाई छूट में लौड़ा घुसे पहच पहच की आवाज़ पुरके कक्षा में गूंज रही थी

देवरानी का कमर अब दुखने लगता है और वो धारण से बिस्तर पर गिरती है जिस से देवरानी क हाथो की चुरिअ और पायल की छानकर से पूरा कक्षा चुडिमै हो जाता है

"ाः मेरी रानी मेरी माँ थक्क गयी क्या मेरी छिनाल सीधा लेट जा देवरानी आअज अपना बीज से तेरे कोख भर क रहूँगा"

देवरानी सीधे हो कर अपने टांग को फैला देती है और बलदेव क आखो में देखते हुए

"पेल लीजिये अपने रंडी पत्नी को बीटा"

इतना सुन न था बलदेव देवरानी क दोनों टैंगो को उठा कर खछ से अपना हुल्लाबी लौड़ा अपने माँ क छूट में पेल देता है



"ये ले मेरी रंडी माँ ..मेरी पत्नी ..मेरी रखैल ..मेरी छिनाल ....खा मेरा लौड़ा ाः रंडी तेरे इस हाथो पे मेहँदी बहुत जांच रही है""

"आआह राजा मेरे पति देव जब इतना ाः उफ्फ्फ जब इतना प्यार करने वाला पति है ाः उफ्फ्फ आह तो मेहँदी का रंग गहरा होना हे था ायः और ज़ोर से पेलो उफ्फ्फ ाः में ाआअह में गयी उफ्फ्फ आआह और ज़ोर से पेलो ाःह मुझे तुमने रंडी बना हे दया ाः मेरे राजा"

"ाः माँ ये ले बहुत घूंघट करती थी सब से ाः उफ़ ये ले मेरा लौड़ा गाछ से अंदर घुस जाता है अब तू मेरी छिनाल है मेरे लौड़े क बिना तेरी छूट रह नहीं सकती पूरी रंडी अभी बानी नहीं है शर्म और लाज अब भी तेरे अंदर छिपा है ाः ये खा मेरा लौड़ा गाछ से पेलते हुए आआह ये ले"

"Aaaaaaaaaaaaaah रआआआआज़ा में गयी जी ाआअह मेरी छूट पाहानी छोर रही है जी आआआआआह उफ्फ्फ ाआअह उम्म्म ाआअह आआआ ऐसे हे हम्म ाः"

बलदेव धापा धप अपने माँ क रसीली छूट में घाछे लगते हुए पेले जाता है देवरानी अपनी आखे बंद कए झरे जा रही थी

बलदेव का लौड़ा हर धक्के में देवरानी क छूट क आखिरी भाग को छू कर देवरानी क कोख क मुहाने को खोल रहा था बलदेव अपने पूरी ताक़त लगाए पेले जा रहा हर धक्के में देवरानी 5 इंच ऊपर खसक जाती देवरानी अपने दोनों हाथो से बिस्तर पकड़ती पर जैसे हे बलदेव का धक्का लगता वो ऊपर को हो जाती पुरे कक्षा में चुदाई क ध्वनिया गूंज रही थी तभी बलदेव दो धक्के इतने ज़ोर से मारता है क देवरानी अपने आखे फाड़े अपने सर को उठा लेती hai"aaaah में मर्डर गयी जी आआह न न रुको"

बलदेव फिर से वैसे हे ज़ोर दर बल का इश्तेमाल कर क छूट को छल्ली करता है क्र तभी बलदेव

अपने आखो को हल्का बंद करते हुए

"आआह माआ ये ले मेरा बेइज्ज तेरी कोख में छिनाल मेरी पत्नी बनेगी न मेरे बचे की माँ रंडी बोल घप्प से पेल देता है पूरा लौड़ा "

"देवरानी एक बार आखे खोल देखती है और समझ जाती है बलदेव अब झड़ने वाला

"ाः राजा दाल दे अपनी रंडी माँ क छूट में अपना बीज भर्र दे मेरी छूट अपने हुल्लाबी लौड़ा क रॉस बना ले मुझे अपने बचे की माँ आए उठ कर दे मुझे पेट से मेरे राजा बीटा उर्फ़ मेरे पति देव "

बलदेव धक्का लगते हुए झड़ने लगता है हर्र धक्के में बलदेव का लौड़ा देवरानी क छूट पार कर देवरानी क बच्चेदानी पे दस्तक दे रहा था और हर धक्के में बलदेव का लौड़ा एक धार वीर्य अपनी माँ क बच्चेदानी में प्रवेश कर रहा था

देवरानी अपने बेटे क वीर्य अपने बच्चेदानी में घुसते महसूस कर रही थी इसी सोच क उसका अपना बीटा अपना जिस्म का पूरा लावा अपना बीज अपने माँ क अंदर उढेल रहा है उसकी छूट फिर से झड़ने लगती है बलदेव अब पूरा देवरानी क ऊपर आजाता है पर अब भी धक्के मार रहा था और उसका लैंड अब बी भरी मात्रा में वीर्य अपने माँ क कोख में उढेल रहा था

देवरानी अपने बेटे क गले लग जाती है और अपने बेटे क पीठ को सहलाती है कभी उसके बाल को

"भर्र दे मेरे बच्चेदानी को मेरे पतिदेव हमे इस राष्ट्र का उत्तराधिकारी देना है ाः उठ उफ़ राजा "

देवरानी भी झड़ती है बलदेव अब एक धक्का लगा कर देवरानी क ऊपर हे लेट जाता है और बलदेव क लौड़ा टोपा अब भी अपने माँ क बच्चेदानी में फसा है और बलदेव क लौड़े से आखिरी बुँदे गई रही है

"ाः मेरी पत्नी रानी माँ आअज तो तेरे छूट मार कर मज़ा आगया आह ुहम्म"

अपने माँ को चूमने चाटने लगता है फिर अपने माँ क मम्मो को मुँह में भर कर चूसने लगता है

"आह उफ़ राजा आपने आज मुझे न तो एक माँ की तरह छोड़ा न हे पत्नी की तरह"

"आह माँ तो कैसे छोड़ा तुझे बता"

"तुमने आअज मुझे एक रंडी बना दया"

ये सुन कर देवरानी क आखो में देख मुस्कुराता है जवाब में वो भी मुस्कुरा देती hai..Baldev अब अपने लैंड को खींचता है छूट क मुहाने से लैंड का टोपा जैसे बहार निकलता है फक्क से आवाज़ आती है और देवरानी की सिसक निकल जाती है दर्द से

बलदेव देवरानी क बगल में लेट जाता है और अपने साँसे भरते हुए

"कैसा लगा मेरी रानी को "

देवरानी अपने बेटे का हाथ अपने दोनों हाथो में रख कर

"महाराज अति आनंदमयी अति सम्भोग में इतना मज़ा है मुझे इसका ज्ञात नहीं था परन्तु जब से आपसे विवाह हुआ है में तृप्त हो गयी हु आनंद इतना आया जी क्या कहु अपने मुँह से मेरी खुली हुई योनि को देखिये ज़रा कैसे अभी भी अपने मुँह खोले आपके लिंगा को याद कर रही है"

"मुझे भी अपने पत्नी को छोड़ क इतना सुख मिलता है जो मुझे गहतराष्ट्रा का महाराज बनते समय भी प्राप्त नहीं हुआ में तो भाग्यशाली हु जो तुम्हारी जितनी कामुक स्त्री मेरी पत्नी है ..कभी कभी तो सोचता हु क राजा राजपाल ने कैसे आपको वर्षो तक प्यासा रखा आपसे दूर रहा वैसे इसमें भी मेरा हे लाभ हुआ सचमे मुझे राजपाल का धन्यवाद् करना चाहिए"

"महाराज राजपाल षुरूश्ती क बहकावे में आकर मेरा जीवन नरक बना दी थी पर भगवन ने आपको मेरा जीवनसाथी बना कर मेरा जीवन स्वर्ग बन गया"

"देवरानी राजपाल अब भी अंदर से हमे पूर्ण रूप से स्वीकार नहीं कर पाया है मज़ा तो तब आएगा जब वो मेरे बच्चो की किलकारी तुम्हारी गॉड में सुनेगा और हमारे बचे उसे दादा जी कह कर पुकारेंगे"

"हाँ मज़ा तो बहुत आएगा जब मेरे पहले पति को मेरे नए पति क वीर्य से जन्म बचे उस तुच्छ राजपाल को दादा कहेंगे पर कही न कही उस गिरगिट जैसे राजपाल से हमे सतर्क रहना होगा"

बलदेव एक हाथ देवरानी का पकड़ कर अपने लैंड पर रख देता है और देवरानी उसे सहलाने लगती है

"महाराज मुझे तो शमशेर की भी चिंता होती है कैसे वो हूर इ जहाँ को अपनी बनाएगा जिसके नाख़ून तक छुपे होते है और राज्य क्या परिवार में भी उन्हें कोई उनके पेअर हाथ क नाख़ून तक नहीं dekhe..aapko पता है जी वो गुलशाह शमशेर क चाचा वो भी मल्लिका जहाँ भूरिया को पाने की हर संभव कोशिश करेगा"

"शमशेर ने न बास हमारी जान हे नहीं बचाई पर हमारी मदद कर हमे एक दूसरे से मिलवाया है रही बात भूरिया मौसी को पटाने की तो शमशेर बड़ा उस्ताद है चालबाज़ी में वैसे भी जब तुम जैसी स्त्री जो हमेशा घूँघट कए रहती थी लाज से अपना मुँह सब से छुपाती और हमेशा भगवन की श्रद्धा में लीं होती थी जब एक घूँघट वाली पैट सकती है तो एक हिजाब वाली क्यू नहीं पटेगी"

"धत्त्त मेरा डिल तो तुमने चुरा लिया tha..Han जी भूरिया दीदी ने भी हमारा साथ दया नहीं तो शायद राजपाल हमे फ़ासी दे देता हमे"

"आह रानी ज़ोर से हिलाओ न मेरा लौड़ा अचे से ुहम्म आह"

देवरानी अपनी मुठी में बलदेव क लौड़े को ले कर आगे पीछे कर रही थी

"माँ हमसे जब भी शमशेर मदद मांगे हम करेंगे"

बलदेव ये कहते हुए देवरानी क निचे आता है देवरानी क गांड पर चूमते हुए

"मेरी रानी आज फिर से तेरी गांड मारने का अवसर प्राप्त हुआ है"

बलदेव देवरानी क गांड में एक ऊँगली करता है



फिर अपने मुँह में गांड क छेड़ को पाकर चूसने लगता है

"उफ़ ाः राजा मेरे गुदा में कोई तेल लगा लो नहीं तो फट जाएगी पिछली बरी की चोट से अब तक नहीं उभरी है"

"उफ़ माँ तेरे गांड को मेरे लैंड की आदि बना लो एक बार हे दी उसमे हे डरने लगी हो "

"महाराज आपको तो पता है कितना उपचार हुआ एक बार आपसे गांड मरवाई तो"

बलदेव गांड को चाट चाट कर भीगा डेटा है

"देवरानी अब इस गांड क लये तो राजपाल को अलग से धन्यवाद देना चाहूंगा जो मेरी लिए कुवारी छोर दया उसने"

बलदेव थोड़ा अपने लैंड क टोपे पर थूक लगता है और देवरानी को घुटने क बल लिटा कर अपना लौड़ा अपने माँ क गांड में घुसाने लगता है

"उफ्फ्फ राजा धीरे से डालिये न ..क्या कहोगे अपने पिता को कैसे ाः करोगे धन्यवाद्"

"बलदेव टॉपर को धीरे से धकेलता हु गांड में घुसा देता है

"ाआअह बलदेव जी उफ्फ्फ राजा आआआह कितना मोटा घुंडा है आपके लौड़े का मेरी गांड चौड़ी हो गयी"

"ाः माँ तेरी गांड कितनी कासी हुई है ..आह मई अपने पिता कहूंगा धन्यवाद् पिता जी जी माँ की गांड नहीं मारी आपने "

गाछ से बलदेव एक करारा धक्का मारता है और लैंड आधा गांड में परवेश कर जाता है

"आआह आऐ ुयी माआआ हे भगवन उफ़ राआजा गांड तोड़ दया मेरी आआह उठ"

"आह रानी इतनी मोती गोल मटोल इतनी बड़ी गांड शायद हे किसी की होगी ाः ये ले"

खछ से एक करारा धक्का मारता है और पूरा लौड़ा अपने माँ क गांड में घुसा देता है

"aaaaaaaaaaaaah राजा आआह मई आआह हे भगवान ाः मर्डर न जाओ में कही उफ़ aaaaaaaaaah आआआह आआआह न राजा ना आआह ाआअह उठ"

बलदेव अब दोनों गांड क पतों पैट हाथ रखता है और धक्के लगाना शुरू कर देता है



पीछे से गांड मारते हुए बलदेव क दोनों जांघ देवरानी क गांड से ठप्प ठप्प टकरा जाते और पुरे कक्षा में ऐसी आवाज़ गूंजती जैसे किसी को कोई बेदर्दी से थप्पड़ मारे जा रहा हो

"ाः माँ ये ले मेरा लौड़ा बहुत तरसा हु तेरी हिलती चूतड़ देख कर खा मेरा लौड़ा मेरी रंडी"

कुछ देर झुका कर पेलते हुए देवरानी क घुटने जवाब देने लगते है और वो

"ाः राजा उफ्फ्फ आआह मेरे घुटने"

"माँ मेरे ऊपर आजा"

"बलदेव लेट जाता है और अपने माँ को ऊपर लिए हुए अपने माँ क गांड में फिर से लैंड खछ से एक बार में हे पेल देता है

"उफ़ ाः राजा ाः ुहम्म आआआआह नहीं ाः हाँ राजा जी"



बलदेव अपने लैंड को ऊपर उठाते हुए धक्के अपने माँ क गांड की जड़ तक पेलने लग जाता है देवरानी ऐसी भीषण गांड चुदाई से दर्द में चीखती चिल्लाती है पर बलदेव रुकने का नाम नहीं लेता है देवरानी क आखो से ासु क धरा बाह रही थी अब वो चिल्लाना बंद कर हर दर्द में आराम तलाशने लगी

कुछ देर बाद देवरानी को बलदेव फिर से झुका देता है और धक्काम पेली शुरू कर देता है उठ ाः चुरिओ और पायल की खनक पुरे कक्षा में गूंजती रहती है



"ाः में में गया उफ्फ्फ आआह "

बलदेव देवरानी क गांड क जड़ तक अपना लौड़ा घुसाए रुक जाता है देवरानी किसी आधे कटे मुर्गे की तरह अपना सर छटपटा रही थी

"आआह राजा उफ़ तेरा गधा विरया आआह ऐसा लग रहा है मेरी गांड से होते हुए मेरे पेट में जा रहा हो"

आआआह उम्म्म ाआअह मा क्या गांड है तेरी आआह उम्म्म ाः मज़ा आगया

बलदेव पूरा लैंड झाड़ कर "Kapp"se अपना लौड़ा बहार खींचता है किसी बोतल की ढक्कन खुली हो ऐसी ध्वनि देवरानी क कान में गूंजती है देवरानी पास्ट हो कर अपने पेअर फैलाये आखे बंद कए थी इस गांड चुदाई में असीमानद मिला था उस से वो कई बात झड़ी थी

बलदेव देवरानी क बगल में ले काट देवरानी को पुचकारने क्र दुलारने लग जाता है

"देवरानी आखे तो खोलो "

"जी बोलिये न "

"मेरी पत्नी को लगता है बहुत दर्द हो रहा है "

"पीड़ा तो होरहा है दर्द हो रहा है पर ये दर्द क लये हे तो बरसो तरसी हु मई आह"

देवरानी बलदेव से चिमट जाती है दोनों एक दूसरे को चूमते है

"महाराज मुझे कुछ पूछना था आपसे"

"पूछिए देवरानी"

"महाराज में भगवन से मांगी थी क अगर हमारा विवाह हो जाये सब सही हो जाये तो में गरीबो का उधर करुँगी अब भगवन ने मेरी सुन ली तो मुझे अपने प्रजा क लये दरबार लगाना है जहा मैं उनके दुःख को सुनु और उनके मदद करू"

"वह देवरानी ये तो बहुत अछि बात है एक महारानी क सारे गन है तुम में "

"और पत्नी क"

"पत्नी क तो हद्द से ज़्यादा गन है"

दोनों हस्ते है बलदेव अपने पत्नी को जनता दरबार लगाने की अनुमति दे देता है उस रात दो बार और देवरानी की छूट को बलदेव अपने लैंड से नापता है और उसमे अपने बीज छोर कर पुरे कोख को लबालब भर्र देता है इस आस में क उसकी माँ देवरानी जल्द से जल्द उसके बचे की माँ बन जाये.
 
अपडेट 134

गहतराष्ट्रा

रात भर्र की चुदाई क बाद बलदेव और देवरानी सुबह देर तक अपने बिस्तर पर एक दूसरे को बहो में भरे सो रहे थे तभी दोनों कानो में मंदिर की घंटी बजने की आवाज़ आती है और देवरानी सबसे पहले उठ क बैठ जाती है

"हे भगवन बहुत देर हो गयी आज सूर्य नमस्कार भी नहीं की पूजा में लगता है सब आगये होंगे"

Devrani:Aji सुनिए न ..उठिये na...Maharaj..Uthiye न ..

Baldev:Hmm..kya हुआ सोने दो देवरानी

देवरानी अपने शरीर से अपने बेटे क भरी भरकम शरीर को दोनों हाथो से ठेलते हुए अलग करती है

"उफ़ ये तो घोड़े की तरह मेरे ऊपर सटे है हिलने से नहीं हिलते"

Devrani:aap सोते रहिये निचे पूजा में जाना होगा

Baldev:Hmm..ah क्या कह रही हो तुम

Devrani:Hey भगवन आज कल में पूजा भी नहीं कर पारहि हु में स्नान कर लेती हु और जाती हु

देवरानी झट से स्नानघर में घुस जाती है और फट से दरवाज़ा बंद करती है जिस से खट्ट से बलदेव की नीं छू मंतर हो जाती है

Baldev:Saali नींद तोड़ di..Vivah क बाद से हे ये तो रात में सोने नहीं देती और सुबह में उठा देती है

बलदेव भिनभिनाते हुए अपने माँ को कहता है पर तब तक देवरानी स्नान करने लगती है और बलदेव की नहीं सुन पति बलदेव उठ कर बैठ जाता है और योग आसान में बैठ कर योग करने लगता है कुछ देर बाद देवरानी अपने बालो को सूखते हुए नंगी हे आती है



Devrani:Maharaj आप योग करने बैठ गए चलिए जल्दी स्नान कर लीजिये

बलदेव अपने माँ को नग्न अवस्था में देख अपने लैंड पर हाथ फेरते हुए

"देवरानी तुम माल लग रही हो एक बार पेल लू "

"उफ़ आप भी न निचे सब हमारी प्रतीक्षा कर रहे होंगे क्या सोचेंगे वो "

"क्या सोचेंगे जब देर रात पेलम पेले खेलोगी तो सुबह उठना तो आसान नहीं रही बात राज परिवार की तो वो जानते है क हमारे विवाह क अभी कितने दिन हुए हे है हम समय पर कैसे उठेंगे"

"ठीक है महाराज आपके कहने का अर्थ है मेरे कारन रात में हम सो नहीं पते और आपका क्या जो भोर तक आप मेरे ऊपर चढ़े थे और आपका वो निचे क महाराज वो तो जैसे कभी थकते हे नहीं और आप कहते है मेरे कारन आपकी नींद नहीं पूरी होती"

"देवरानी एक बात बोल दिया तो क्या हुआ "

"महाराज आज से में अपने समय पर सो जाउंगी ठीक है देखती हु आप कब सोते है पता चल जायेगा कौन किसको जगा क रखता hai......Theek है आपको तो भगवन की पड़ी हे नहीं में हे जाती हु पूजा कर लेती हु"

देवरानी झट पैट अपने साड़ी पहन कर कक्षा से निचे उतर जाती है और बलदेव मुँह देखते रह जाता है

"देवरानी बहुत गर्मी है तुममे अभी अचे से पेली नहीं गयी हो जल्द हे गर्मी शांत कर दूंगा"

बलदेव अपने माँ क जोश और नखरे देखते हुए मुस्कुराते है और स्नान करने चला जाता है

निचे देवरानी जाती है देखती है सब महल क बीचो बीच खड़े थे षुरूश्ती सबसे आगे भजन गए रही थी और पीछे पीछे सब उसका साथ दे रहे थे देवरानी भी जा कर कड़ी हो जाती है देवरानी को जल्दबाज़ी से नीचे आते देख रानी षुरूश्ती और राजमाता जीविका मुस्कुरा देती hai..thode देर बाद पूजा सम्पन होता है ,रानी षुरूश्ती सबको प्रसाद बाँट टी है देवरानी जीविका क पास जाती है और पेअर छूटे हुए "शुभ प्रभात राज माता "

Devrani:Wo राज माता में समय पर न आ सकीय आँख हे नहीं खुली ..वो

देवरानी हकला कर अपने गलती का अहसास कर अपने दादी सास को कहती है तभी पीछे से आरही षुरूश्ती देवरानी की बात सुन कर

Shurushti:Ye लो प्रसाद महारानी देवरानी ,क्या बात हो रही है

Jeevika:Maharani आप से हमने पूछा क आप देरी से क्यू आई पूजा में

devrani:fir भी राजमाता सबको समय पर पूजा में आना अनिवार्य है न

Shurushti:Bahu रानी आप अभी नयी नवेली दुल्हन हो अआप तो अपने पति की पूजा में समय व्यतीत करे ये पूजा हम पर छोर दे वैसे भी जीवन भर तो आपने हे इस महल क पूजा घर को संभाला hai..waise हम समझ सकते है रात में नहीं सोने क बाद सुबह जल्दी उठना आसान नहीं होती प्रिये

देवरानी अपना सर झुकाये शर्मा रही थी और षुरूश्ती और जीविका देवरानी क मासूमियत पर हसने लगती है

Shurushti:Waise कहा है आपके पति देव

तभी बलदेव सीडीओ से उतरता हुआ आता है

Shurushti:Lo ग आगया मेरा बीटा

Jeevika:Or देवरानी का पति देव बाल्ड देव

इस बार जीविका चुटकी लेते हुए हस्ती है जिसका साथ षुरूश्ती भी देती है बलदेव आकर बारी बारी से सब क पेअर छूटा है और आशीर्वाद लेता है षुरूश्ती उसे भी प्रसाद देती है और सब परसाद कहते है तभी राजपाल कहता है

Rajpal:Shurushti आज बद्री और श्याम अपने अपने राज्य वापस जा रहे है उनके लये कुछ उपहार हमारे ओरे से दे देना और देवराज जी आपके जाने का निर्णय लिया आपने

Badri:shyam चलो हमे अपने तैयारी करनी चाहिए

Shyam:Han चलो बद्री

बद्री और श्याम अपने कक्षा में चले जाते है

देवराज राजपाल को देखते हुए अपने बहिन देवरानी क पास जाता है और अपने बहिन क आखो में देख फिर बलदेव को देखता है फिर अपने बहिन को देखते हुए

Devraj:Behna अब हमे आज्ञा दे दो हमे अति शीघ्र कुबेरी राज्य जाना होगा

Devrani:Bhaiya अभी कितने दिन हे हुए है आपको यहाँ आये अभी तो ढंग से बात भी नहीं कर पाए हम dono..kitne बरसो बाद तो हम मिले है

Devraj:Meri बहाना परिस्थितियों क अनुकूल कार्य करना चाहिए मई समझ सकता हु आपने बरसो मेरी प्रतीक्षा की न तो पिता जी आपसे मिलने आये न हे हम परन्तु देवरानी मेरी बहिन तुम सदैव मेरे हृदय में थी और रहोगी

देवरानी अपने भाई की बात सुन आखे भर्र आती है और उसके ायखो से ासु छलक पड़ते है देवराज भी अपने बहाना को देख रुका नहीं जाता और उसके आखे भी भर्र आती है

देवराज अपने आप पर काबू पाते हुए अपने चेहरे पर मुस्कराहट लेट हुए कहता है

Devraj:Meri बहिन रो क्यू रही हो पिता जी की मृत्यु क बाद अब तुम हे तो मेरी एक अपनी हो इस संसार me...rowo मत पिता जी भी यही चाहते थे क तुम हमेशा हस्ती रहो हमेशा खुश raho..tum खुश तो हो न मेरी बहिन?

दो भाई बहिन क प्रेम को देख कड़ी जीविका और षुरूश्ती भी रो पड़ते है

देवरानी अपने चेहरे पर मुस्कान लेट हुए

"भैया मई बहुत खुश हु इतना खुश जितना कभी नहीं हुई ये सब आपके मदद से हे संभव हो पाया है ..अभी मेरे विवाह क कितने दिन हुए हे है और आप जा रहे hai..mai तो कहती हु आप कुछ दिन और रुकते में अआप्को अपने हाथो से अचे अचे पकवान खिलाती"

"नहीं बहाना कुबेरी राज्य में लोग बौखलाए हुए है सुल्तान का आदेश है में वह जा कर राजा रतन क जासूसों को राज्य से ख़त्म करू और वह अपना राज्य स्थापित करू वह राजा रतन सिंह ने प्रजा को बहुत सताया है मई वह की प्रजा को सम्मान दिलाऊंगा"

"भैया मई तो सुनी थी सुल्तान ये भी चाहते है क राजा रतन की पत्नियों से आपका विवाह हो जाये आप कहते है न आप का कोई नहीं मेरे सिवा तो अआप उन दोनों को अपना लीजिए और अपना घर भसाइये ये राज्य और सोना सब मोह माया है"

"शायद तुम ठीक कह रही हो पर रुक्मणि और सुखमनी राजा रतन क क़ातिल से भला क्यू विवाह करेगी मैंने उनसे जबरदस्ती नहीं कर सकता "

"भैया मुझे पता है आपके गन देख वो दोनों मोहित हो जाएँगी और आपका परिवार बढ़ जायेगा"

"देवरानी वो तो वैसे भी बढ़ेगा बास जल्दी से तुम हमे खुशखबरी सुना दो फिर हमे भी मां मां कहने वाले हो जायेंगे"

देवराज हस्ते हुए ये कहता है और बलदेव की ओरे देख एक आँख मार देता hai,,Baldev मुस्कुराते हुए देवरानी को देखता है जो शरमाते हुए अपने सर को निचे कए अपने नाख़ून से ज़मीन कुरेदने लगती है

Baldev:Saale साहब आप मां बन जायेंगे इसकी ज़िम्मेदारी हमारी है..

ये सुन कर राजपाल का जैसे खून खौल उठ ता है और दबे मन से मुँह फेरते हुए कहता है

"देवराज जी आइये में घोड़ो को देखता हु "

ये कहते हुए राजपाल वह से महल से बहार जाता है राजपाल क जाते हे वह पर कड़ी षुरूश्ती ज़ोर से है पड़ती है जिसे देख जीविका और देवराज ठहाका लगा कर है पड़ते है

Shurushti:Hone वाले दादा लगता है लज्जा गए

ये सब देख कर बलदेव देवरानी को प्यार से देखता है और देवरानी मुस्कुरा कर अपने आप से हे नज़रे चुराने लगते है

Jeevika:Chaliye आप सब बाते कीजिये में जा कर आराम karu..uff मेरा पेअर

Shurushti:Maa जी चलिए में आपको छोर दू

षुरूश्ती जीविका को ले कर अपने कक्षा में चली जाती है

Devrani:Bhaiya आप चलिए ऊपर आपको कुछ नाश्ता करवा दू

Baldev:Q जी हमे कुछ नहीं मिलेगा मेरी देवरानी

देवरानी बिना बलदेव को देखे हुए चलते हुए ऊपर जाने लगती है देवराज को समझते देर नहीं लगती क दोनों पति पत्नी में कुछ खत पैट हुई है और वो बलदेव से कहता है

"आप भी चलिए महाराज बलदेव"

Baldev:Theek है जब आप कह रहे तो जाते है वैसे हमे पूछता कौन है

तीनो सीडीओ से चढ़ते हुए ऊपर कक्षा में पहुंचते है देवरानी झट से दरवाज़ा खोलती है और अपने भाई क साथ कक्षा में परवेश करती है वैसे हे होश उड़ जाते है देवराज और देवरानी चौखट पर हे रुक जाते है क्यू क सामने का नज़ारा हे कुछ ऐसा था

देवरानी क रात की ब्राज़िएर और जांघिए पलंग पर फेकि हुई थी इश्तेमाल किया हुआ जांघिए पर साफ़ देवरानी क छूट का पानी अब तक साफ़ साफ़ दिख रहा था जिसे देख एक बरी तो देवराज झन्ना क रह गया



Devrani:man me)Hey भगवन ये क्या हो गया भैया ने मेरी जांघिए और ब्राज़िएर देख लये

देवरानी को कुछ समझ नहीं अत क वो क्या करे तभी वो अपने भाई देवराज की ओरे देखती है तो पति है वो अपना सर दूसरी तरफ मोर लय है देवराज को जैसे अहसास होता है क उसके आखो क सामने उसके छोटी बहिन क अंतर्वस्त्र है वो अंदर सिहर उठ ता है और जैसे हे देवराज जांघिए पर दाग देखता है उसे समझते देर नहीं लगता क ये कौन सा दाग है उसे लज्जा आजाती है और वो दूसरी ओरे मुँह कर लेता है

देवरानी मौके का फायदा उठा कर दौर कर अपने बिस्तर से अपने जांघिए और ब्राज़िएर उठा टी है और अपने गद्दे से उठा क दबा देती है

अब सामने बलदेव मूरत बने देख रहा था जिसे देवरानी गुर्रा कर एक शिकायत भरे अंदाज़ से देखती है



Devrani:man me)Ye पति तो बन गए पर अब भी लापरवाही करते है अब सब कुछ का ध्यान में हे राखु

बलदेव अपने आखे फाड़े देखता है जैसे कहने की कोशिश कर रहा हो मेरी क्या गलती hai.Devraj हलकी खासी करता है देवरानी हड़बड़ाते हुए

"आइये न भैया बैठिये "

देवरानी की बात सुन कर देवराज जा कर बैठ जाता है बलदेव अब भी खड़ा था

देवरानी जा कर नाश्ता का सामान ले आती है

devraj:aap भी आइये महाराज बैठिये

बलदेव भी बैठ जाता है देवरानी की नज़र जब भी मिलती तो वो गुस्से से बलदेव को देखती

Devraj:ary इतना करने की क्या आवश्यकता थी देवरानी इतने लड्डू मिठाईया जलेबी काजू बादाम कौन खायेगा इतना

Devrani:Bhaiya ये सब में कब से आपको खिलाना चाहती थी ये सब मेरे विवाह का बचा हुआ है और बादाम काजू तो भूरिया दीदी ने वह से आँचल में दया था

देवराज अपने बहिन क डिल में अपने प्रेम भाव देख प्रसन्न हो जाता है

Devraj:Itna में अकेले कैसे खा पाउँगा आप खाइये न महाराज

देवराज बलदेव को पूछते हुए कहता है

Devrani:Itna तो ये बिना पानी का जातक जाये

देवरानी चुटकी लेते हुए अपने पति को छेरते हुए अपने भाई से कहती है

Devraj:Devrani क्या हुआ तुम दोनों एक दूसरे से बात क्यू नहीं कर रहे

Devrani:nahi ऐसा कुछ नहीं है भैया हमारा कोई झगड़ा नहीं है

Devraj:Kahi अभी हुई घटना को ले कर तो तुम गुस्सा तो नहीं हो देवरानी वैसे वस्त्र हे तो है

Baldev:Han साले साहब वस्त्र हे है न

Devrani:Aap तो चुप हे रहिये

बलदेव को दांत ते हुए कहती है बलदेव खामोश हो जाती है

Devraj:Devrani मेरी बहिन मई तुम दोनों को खुश देखना चाहता हु ऐसे लड़ाई करोगे तो हम मां कैसे बनेंगे

देवराज ये कह है देता है और माहौल को सामान्य करने की कोशिश करता है

Baldev:Aap अपने बहिन को समझाइये गुस्सा इनके नाक पर होता है महारानी क

Devraj:Maharaj बलदेव अब ये आपकी पत्नी है तो महारानी तो सच में गुस्से वाली होती है इनके क्रोध में भी मेरी बहिन का प्रेम छुपा है

Baldev:Mai जनता हु आपकी बहिन मुझे बहुत प्रेम करती है और आप को तो पता हे है मई देवरानी क लये प्राण भी दे सकता हु परन्तु मुझे एक बात समझ नहीं आती

Devraj:Kaun सी बात महाराज

Baldev:Yahi क आपके बहिन से विवाह क बाद भी आप मुझे जीजा जी नहीं कहते और महाराज कहते है

देवरानी तो मारे लज्जा क गड़े जा रही थी वो अपने आखो से इशारा करती है न कहो बलदेव ऐसा पर बलदेव कहा मान ने वाला था

Baldev:mujhe कोई जीजा नहीं कहना वाला

और बनावटी मायूसी दिखता है

देवराज बास बूट बने सुन रहा था उसे समझ नहीं आरहा था क आखिर बलदेव क इस बात का जवाब क्या दे एक हिसाब से तो बलदेव सही कह रहा था अपने साला को जीजा बोलने क लये पर दूसरी ओरे वो ये भी जनता था क बलदेव उसका भांजा भी है जो कुछ दिन पहले हे देवरानी से विवाह क्या है

असमंजस की स्थिति में देख देवरानी चुप्पी तोड़ती है और अपने भैया को बचने क लये कहती है

Devrani:Chhoriye न भैया को नाश्ता करने दीजिये

तभी देवराज को पता नहीं क्या सूझता है और वो देवरानी को देखता है फिर बलदेव की ओरे देख कर देवरानी से कहते है

Devraj:Jeeja जी सही कह रहे है

बलदेव गड्ड गड्ड महसूस करता है अपने आपको और उसके होठो पे मुस्कान आजाती है

देवरानी का तो मनो हाल ऐसा था क उसे एक ओरे लज्जा भी आरही थी दूसरी ओरे अपने भाई से अपने रिश्ते की स्वीकृति से वो बहुत खुश हो जाती है

Devraj:Ab भाई जीजा हो हमारे तो कहने में क्या हर्ज़ है

Devrani:Dhanywad भैया



देवरानी अपने हाथ जोड़े अपने भैया का धन्यवाद् करती है

"भैया हमारे रिश्ते को स्वीकार कर लये में आपकी जीवन भर आभारी रहूंगी"

Baldev:Han देवरानी तुमने ठीक कहा हम दोनों आप क आभारी है

Devraj:ary अब आप दोनों क सिवाय मेरा कौन है इस संसार में परिवार हो आप दोनों और में तो यही चाहता हु क दोनों सदैव खुश raho,phalo फूलो

बलदेव और देवरानी दोनों उठ ते है और देवराज क पेअर एक साथ छू कर कहते है

"हमे आशीर्वाद दें "

devraj:Sada खुश रहो

Baldev:Saale साहब एक बार और कहिये न जीजा जी मुझे

Devraj:Ji मेरे बलदेव जीजा जी

Baldev:kahiye मेरे बहिन देवरानी क पति बलदेव मेरे जीजा जी

Devraj:Mere बहिन देवरानी क पति बलदेव मेरे जीजा जी है अब भांजा नहीं

ये कह कर देवराज ज़ोर से हस्ता है और बलदेव क गले लग जाता है

देवरानी दोनों को खुश देख कर मुस्कुराने लगती है

Devrani:Ab दोनों साले बहनोई की मस्ती हो गयी है तो नाश्ता पर ध्यान दीजिये..

देवरानी मन me)aakhir बलदेव ने अपने मां से जीजा जी बुलवा हे लय क्या बदला लय है मेरे राजा बीटा ने ,हमारी खुशिओ की किसी की नज़र न लगे भगवन

ये सोचते हुए देवरानी अपने आखे बंद कर ईश्वर का धन्यवाद करने लगती है

तभी देवराज अपने बहिन से कहता है

"क्या हुआ देवरानी "

"कुछ नहीं भैया बास वो"

तीनो इसी प्रकार हसी मज़ाक करते हुए अपना समय बीतते है और आख़िरकार वो समय भी आजाता है जब देवराज क साथ बद्री और श्याम राजमहल से दूर जाने क लये घोड़ो पर सवार हो जाता है

Badri:Hum जा रहे है बलदेव मेरे मित्र पर जब कभी भी हमारी आवश्यकता हो हमे याद करना

Devraj:Devrani मेरी बहिन जब में दुबारा औ तो मेरे कानो में मां मां कहने वाला हो जाना चाहिए

Badri:Han बलदेव और हमे चाचा चाचा कहने वाला

Shyam:Ji भाबी देवरानी हम अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकते बलदेव क पुत्र को खिलने क लये

Devrani:dhattt..

Baldev:Avashya !!

बलदेव देवरानी की ओरे देख मुस्कुराता है देवरानी फिर लज्जा जाती है षुरूश्ती जीविका और राजपाल भी मुस्कुराने लगते है

बद्री श्याम और देवराज अपने घोड़ो को दौड़ते है और कुछ हे देर में सब क आखो से ओझल हो जाते है

Devrani:Ye बद्री और श्याम भैया क साथ हे जायेंगे क्या

Baldev:Nahi देवरानी आगे जा कर साले साहब कुबेरी और बद्री श्याम मेवाड़ और उज्जैन अपने अपने राज्यों में चले जायेंगे

Devrani:theek है चलिए

सब महल में वापस आ जाते है

पारस

पिछली रात जब सुल्तान ने भूरिया को अपने हुजरे में बुलाया अपने साथ रात बिताने क लये तो भूरिया चालाकी से अपने महीना शुरू है का बहाना बना कर सुल्तान से बच आई पर रात भर्र तड़पती रही अपने बदन को गीले कपडे से पोछती रही पर उसकी जवानी ठण्ड होने का नाम नहीं ले रही thi.paras में एक नयी सुबह होती है

राज दरबार में जाने क लये भूरिया अपने नए वस्त्रो में से एक काफटाण निकल कर पहनती है और अपने कक्षा से निकल कर राज दरबार की ओरे जाने लगती शमशेर राज दरबार क रास्ते में जैसे भूरिया का हे इंतज़ार कर रहा हो वो भूरिया को देखते हे

Shamshera:Subah बखैर अम्मी जान



शमशेर भूरिया को ऊपर से निचे तक देखता है भूरिया इस वक़्त एक बेहद खूबसूरत नक़्क़ाशी कए हुए लिबास में थी जो उसके भर हुए जिस्म को और भरा भूरा दिखा रही थी

Hooriya:Subah बखैर शहज़ादे यहाँ क्या कर रहे हो दरबार में गए नहीं

Shmshera:wo बास कुछ काम था शिफा खाना में हकीम से गुफ्तुगू करनी थी

Hooriya:theek है में जाती हु तुम आओ

भूरिया अपने बेटे से ज़्यादा न बात करते हुए आगे बढ़ जाती है भूरिया क मन में जो संदेह था उसपर शमशेर की आखे जैसे मुहर लगा दी तहज

Hooriya:man me)Ye क्यू कर रहा है ऐसा क्या वो बलदेव की राह पर चल रहा है एक तरफ तो मुझे गम से निकल रहा है जो सुल्तान ने मुझे दया दूसरी तरफ इसकी आखे मुझे घिन्न आती है ये सोचते हुए भी क्या यही वजह है वो मेरे लये ऐसे लिबास बनवाया



भूरिया क दाहिने कदम रखने से उसके बड़े भरी गांड बाए को झुक जाते और बाय कदम रखने से उसका दाहिना गांड तंग लिबास में किसी मटके की तरह निकल कर सामने आजाता



देवरानी कुछ कदम चलती है और शमशेर को तो जैसे स्वर्ग मिल गया वो बास अपने अम्मी को गांड को खा जाने वाली नज़र से देख रहा था

शमशेर मम me)Meri मेहबूबा मेरी अम्मी जान कब आप मेरी सुल्ताना मेरी बीवी मेरी शरीक इ हयात बनोगी

शमशेर का लैंड तन्न जाता है भूरिया को देख हे रहा था

भूरिया जाते हुए सोचती है

"ऐसा लगता है शमशेर मुझे अब भी घूर रहा है"

भूरिया अचानक से पलट टी है और भूरिया की नज़र सीधे अपने बेटे क पाजामे की ओरे जाता है जो साफ़ साफ़ बता रहा था क शमशेर का लैंड खड़ा है भूरिया को देखते हे शमशेर चारो ओरे अपनी गर्दन घुमा कर अनजान बन ने की कोशिश करता है

भूरिया तेज़ी से आगे बढ़ने लगती है

Hooriya:man में) ये किस गुनाह में मुलव्विस होते जा रहे हो शमशेर कही ये तुम्हारी मौत का सबब न बन जाये और में भी तुम्हे मुआफ नहीं कर पाउ

राज दरबार में सुल्तान मेरे वाहिद और सुल्तान दास्ताँ बैठे अपने परजा की बाते सुन रहे थे लोग अपने दुःख ले कर आते और सुल्तान उन्हें चुटकिओ में हल कर देते सुल्तान इस बात से अनजान थे क उनके खुद क भाई गुल शाह षड़यंत्र कर रहा है तख्ता पलटने क लये और भूरिया को अपनी हमराह बनाने क लये

पारस महल क मुख्या द्वार पर छान पाशा चीनी लूटेरो क साथ आता है पर छान पाशा को एक सिपाही रोकते हुए

Sipahi:Pasha ये अनजान लोग कौन है लगता है कोई गैर मुल्की है

छान pasha:Ye हमारे मेहमान है सिपाही

Sipahi:par हमे ऐसे किसी मेहमान को आने की खबर नहीं दी गयी आप इन्हे महल क अंदर नहीं ले जा सकते

छान pasha:Khamosh... ये हमारे दोस्त ताज़िर है ये चीन से खासतौर पैर हमारे सुल्तान क कहने पर आये है इनसे हम तिज़ारत करेंगे और महल में सोने की अम्बार लगा देंगे हम

Sipaahi:par छान पाशा बिना सुल्तान क खबर क

छान पाशा गुस्सा होते हुए कहता है

"सिपाही लगता है तुम्हे आज हे हमारे सुल्तान क हाथो शहीद होना है जो हम से ज़ुबानदर्ज़ी कर रहे हो"

Sipaahi:muaf कर दे छान पाशा

छान पाशा अपने साथ आये लूटेरो क साथ महल क मुख्या द्वार में प्रवेश कर लेता है

शुंग जो उन लूटेरो का सरदार था

Shungu:Chan पाशा तुम्हारे जितना बेवक़ूफ़ शख्स मैंने नहीं देखा तुम दिन हमे यहाँ ला कर हमारे जान जोखिम में दाल रहे हो और अपनी भी

छान paasha:Tum लूटेरे हो शुंग तुम्हे ज़ेहन का सही इश्तेमाल नहीं पता तुम अगर रात में यहाँ आते तो ज़िंदा बच क नहीं जाते ये कोई और महल नहीं ये सुल्तान मेरे वाहिद जिनका पूरी दुन्या पे हुकूमत है उनका महल है

shungu:Theek है ज़हनी आदमी ज़्यादा बात न करो और हमे हर रास्ते का सुल्तान क हुजरे की बारे में बताओ कितने सिपाही होते है

छान pasha:Sipaahi इतने है क तुम 10 हज़ार सिपाही आओ तो भी इस महल क अंदर तुम्हे हमारे सिपाही कभी घुसने न दे और तुम तो मुठी भर्र हो

shungu:Chan पाशा हमने बड़े बड़े किलो से सोना लूट लाये और लोग हमारा कुछ नहीं बिगड़ सके

छान pasha:Islye तो तुम्हे ये काम सौंपा है चालबाज़ शुंग ..हमे यहाँ किसी भी तरह की झड़प या जुंग नहीं करनी हमारा काम सिर्फ सुल्तान को मौत की नींद सुलाना है

Shungu:Bhut जल्द सुल्तान का नाम बास इस दुन्या में रह जायेगा

छान pasha:isi में तुम्हारी भलाई है shungu..ab मुझे पारस का वज़ीर इ आज़म और गुल शाह को सुल्तान इ आज़म सुल्तान इ जहाँ बन ने से कोई नहीं रोक सकता

Shungu:par जो सिपाही हमे रोका था उसका क्या

छान pasha:Uski फ़िक़र मत करो उसके मुँह खुलने से पहले वो चुप हो जायेगा

शुंग एक मुस्कराहट क साथ छान पाशा क दिमाग को दाद देता है फिर दोनों मिल कर पुरे महल का जायज़ा लेते है

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 135

पारस

छान पाशा महल की हर जानकारी शुंग को देता है और दोनों मिल कर सुल्तान मेरे वाहिद को मारने की पूरी तैयारी करते है

छान pasha:Tum तीर से मारो या तलवार से या फिर ज़हर से पर सुल्तान मेरे वाहिद को जल्द से जल्द मौत की नींद सुला दो

Shungu:Pasha ऐसा कोई काम नहीं जो शुंग ने लय और पूरा नहीं क्या हो आपका काम जल्द हे अंजाम तक पहुंच जायेगा



शुंग मन में) मई बास सुल्तान को मार दू फिर जो सोना मुझे मिलेगा उस से में अपनी रियासत कायम करूँगा

Pasha:Theek है शुंग अब में दरबार में जा रहा हु तुम जा सकते हो

ये कह कर पाशा राज दरबार की ओरे बढ़ता है जहा पर सुल्तान मेरे वाहिद बीच की सिंहासन पैर बैठे थे और उनके दये और बाये ओरे गुल शाह उनके भाई और उनके पिता सुल्तान दास्ताँ बैठे थे

Sultan:Chan पाशा तुम कहा थे

छान पाशा जैसे हे अपने कुर्सी पर बैठने को होता है मेरे वाहिद उसे पूछता है

छान पाशा थोड़ा हड़बड़ाते हुए

छान pasha:Sultan किसी काम से हम देरी हो गयी

छान पाशा को फास्ट हुआ देख गुल शाह बोल पड़ता है

गुल shah:Bhaijaan वो मैंने हे सरहद पर सिपाहीओं से कुछ खबर ले कर जाने को कहा था

सुल्तान एक बार अपने भाई को देखता है फिर छान पाशा को देखते हुए अपने हाथ से उसे बैठने का इशारा करता है छान पाशा मुस्कुराते हुए गुल शाह को देखता है और गुल शाह इशारे से पूछता है काम हुआ छान पाशा अपने आखो को निचे करते हुए इशारे में उसे काम हो गया कहता है और अपने कुर्सी पर बैठ जाता hai,Shaan क साथ बैठा शमशेर अपने सपने में खोया था और बार बार उसे अपने माँ का गदराया बदन और उसका भोला चेहरा याद आरहा था दरबार में चल रहे बात पर शमशेर का एक ज़रा सा ध्यान नहीं था

उधर परदे क पीछे महल की साड़ी औरते थी जिसमे सैकड़ो सुल्तान की हरम की लौंडिया थी जो सुल्तान को खुश रखती थी और साथ हे उनके बीवीए और बेटिओ क साथ उनके माँ थी

Naaz:Hooriya बाजी आज कल अआप्के अंदाज़ बहुत अलग हो गए पहले से लगता है सुल्तान क आने से आप और निखार गयी हो

Hooriya:Hargiz नहीं नाज़

Naaz:aap पर ये पोषक बेहद खूबसूरत लग रहे है कसम से सुल्तान क तो मज़े हे मज़े hai..aap पहले तो अपने नखुन तक हिजाब में छुपाई रहती थी और बहुत ढीले हिजाब पहनती थी

Hooriya:man me)Naaz अब वो सुल्तान मेरे नाम क हमसफ़र रहे उनके नज़र में अब तो में मोती भद्दी और बूढी हो गयी हु

Naaz:kya सोच रहे है भूरिया बजी कही सुल्तान की याद तो नहीं aarahi.aayegi हे वैसे सबसे ज़्यादा अगर कोई सुल्तान से मुहब्बत करता है तो वो है आप

Hooriya:man me)ab उस डिल को सुल्तान ने खुद चकनाचूर कर दया है नाज़ जो मई किसी को बता नहीं सकती

Naaz:waise आप खुश तो होंगी सुल्तान क ऐलान से मल्लिका जहाँ

Hooriya:Kaisa ऐलान

Naaz:yahi क अगला सल्तनत का सुल्तान शहज़ादे शमशेर होंगे

Hooriya:Q नाज़ आप खुश नहीं सुल्तान क ऐलान से?

भूरिया समझती थी क नाज़ अपने पुत्र शान को सुल्तान बनाना चाहती है

Naaz:Q नहीं सुल्तान का फैसला हे आखिरी फैसला है अगर वो चाहते है क सल्तनत को शमशेर अचे से संभल सकते है तो हमे कैसा गुरेज़ होगा भला

Hooriya:Bhut अछि बात है मई भी खुश हु क मेरा बीटा सुल्तान बनेगा

भूरिया जैसे अपने बेटे को शमशेर को याद करती है उसके डिल में कुछ दिनों से शमशेर की हरकत याद आती है कैसे वो उसे घूरता होता है

Hooriya:man me)Shamshera अगर तुम्हारे डिल में थोड़ी भी गन्दगी मेरे लये हुई तो सोच लेना तुम्हे इस बड़े गुनाह की सजा ज़रूर मिलेगी

थोड़ी देर बाद सभा ख़त्म होती है और सब उठ कर जाने लगते है भूरिया भी अपने कक्षा में आती है खाना कहती है और एक पतला सा आरामदायक लिबास पहन कर अपने बिस्तर पर लेट जाती है तभी उसके आखो क सामने मधु माखी दिखाई देता

Hooriya:ye क्या madhumakhi...kaneez

बहार से दोनों दसिया अंदर आती ह

dasi:ji हुक्म मल्लिका इ जहाँ

Hooriya:ye मधुमखी पता नहीं कहा से आज्ञा जाओ कुछ लाओ इसे मारने क लये

दोनों दसिया बहार जाती है और इधर उधर देखते हुए सोचने लगती है क क्या करे

तभी उनके नज़र बहार से आते हुए शमशेर पैर पड़ती है शमशेर उन्हें परेशां देख कर रुक जाता है

Shamshera:kya हुआ तुम इतने परेशां क्यू हो

Dasi:wo कुछ मधुमखिअ मल्लिका इ जहाँ क हुजरे में घूम रहे है

शमशेर ये सुन कर घबराते हुए

"सुनो कनीज़ों शफाखाने जाओ और मधुमखिओ को भगाने की दवा ले आओ जिस स धुवा करने से वो भाग जाते है हो न हो मधुमखिओ ने आसपास छत्ता बना लये हो तब तक मई देखता हु

दसिया वह से चली जाती है और शमशेर अपने माँ क कक्षा की ओरे बढ़ता है भूरिया दीवार पे देखती है मधुमखिअ बैठी थी वो एक डंडा उठती है और मधुमखी पर चला देती है उतने में शमशेर अंदर आजाता है और वो देखता है उसकी अम्मी भूरिया मधुमखिओ को मार रही है

शमशेर की नज़र अपने अम्मी जान क पिछवाड़े पे जाती है तो शमशेर क मुँह खुल जाते है और वो देखता रह जाता है



भूरिया क बड़े दोनों गांड किसी मटके की तरह एक दूसरे से टकरा रहे थे भूरिया जब भी हिलती उसके दोनों भारी चुतर एक ऐडा से हिलते

Shamshera:man me)Ammi जान डिल तो कर रहा है अभी इन बड़े तरबूज़े जैसे गांड को आपकी कमीज उठा क पेल दू ..है अम्मी जान कब आएगा वो दिन

शमशेर पाने लैंड पर हाथ फेरते हुए सोचता है और उसके साँसे भरी होती है जिसे भूरिया सुन लेती है

भूरिया एक झटके में मुड़ती है और उसके नैन अपने पुत्र शमशेर से मिल जाते है जो उसे किसी आशिक़ की तरह देख रहा था

भूरिया कुछ दिनों से अपने आप को घूरे जाने से परेशां थी और उसको समझते देर नहीं लगती क उसका बीटा उसके बड़े गांड को घूर रहा था न जाने कब से

भूरिया का गुस्सा फुट पड़ता है

Hooriya:Shamshera.. ये क्या बेहूदा हरकत है

शमशेर जैसे डरते हुए अपने माँ की ुचि आवाज़ से अपने सपनो से बहार आता है

Shamshera:Ammi जान क क क्या हुआ

Hooriya:Tum क्या अब सारे नियम क़ानून भूल गए किसी औरत क हुजरे में उसके बिना इजाज़त आयना तुम जैसे बहादु शहज़ादे पैर सोभा नहीं देता शमशेर

Shamshera:par अम्मी जान वो..

Hooriya:Bass करो शमशेर और निकल जाओ मेरे हुजरे से शायद तुम भूल गए मई सुल्ताना भी हु पारस सल्तनत की ..आइंदा ऐसी गलती नहीं करना

भूरिया पूछना चाहती थी क आखिर वो ऐसे उसके बदन को क्यू घूरता है पर वो अपने आप पर काबू करते हुए शमशेर को दूसरे हिसाब से सबक़ सीखना चाहती थी

शमशेर को अपने अम्मी से ये उम्मीद नहीं थी और वो अपने अम्मी क सामने अपना सर झुकाये

"हमे मुआफ कर दीजिये मल्लिका इ जहाँ"

शमशेर वह से निकल जाता है और भूरिया अपना भरी वजूद को लिए बिस्तर पैर लेट जाती है और उसके आखो में ासु आजाता है

Hooriya:man me)Kya करू मई कैसे इस शमशेर को रोकू अगर किसी को इस बात की पता चला तो सुल्तान तो शमशेर को उसी वक़्त गर्दन उसके धार से जुड़ा कर denge,aakhir क्यू कर रहा है शमशेर ऐसा क्या ये नशाखोरी और कोठे पैर ऐसयाशी करने क वजह से बिगड़ गया है या कही ये गहतराष्ट्रा क युवराज बलदेव की तरह मुहब्बत करने लगा है ..या खुदा मई ये क्या सोच रही हु पर अब मुझे कुछ न कुछ हल निकलना होगा चुप रहने से ये आगे बढ़ता जायेगा

तभी भूरिया क कानो में दसियो की आवाज़ गूंजती है

"मल्लिका इ जहाँ हम आगये"

भूरिया गुस्से से पागल हो जाती है और शमशेर क अंदर आजाने की कुसूरवाद दसियो को समझते हुए

"तुम दोनों को मैंने एक काम दया था उसमे भी तुम लापरवाही की जाओ मेरे हुजरे से बहार"

इस से पहले दसिया आयकर अंदर आये भूरिया उन्हें दांत कर भगा देती ह

Dasi:Gustakhi मुआफ करे मल्लिका जहाँ

दसिया बहार आती है और आपस में बात करती है

Dasi1:Ary ये मल्लिका जहाँ को इतना गुस्सा तो तभी आता है जब कोई उनके बदन को बुरी नज़र से देखता है

Dasi2:ab पता नहीं क्या बात है जो मल्लिका हमसे खफा हो गई खैर हमे क्या

दोनों दसिया बात ख़त्म करती है ये कहते हुए क उन्हें क्या लेना देना भूरिया की गुस्से की वजह क्या है इन्हे क्या पता था क मल्लिका इ जहाँ भूरिया क करारी जवानी को उसके बेटे ने हे देख लय है बल्कि देखा हे नहीं शमशेर ने अपने आखो से अपनी माँ को एक पतले से लिबास में देख जवानी का रसपान कर लय था

उधर शमशेर अपने कक्षा में जाता है और गुस्से में अपने कक्षा का दरवाज़ा लगा कर अपने अलमारी से शराब की बोतल निकलते हुए अपने गिलास में रखता है और गाठ गाठ पी जाता है पूरी बोतल ख़त्म कर देता hai..shamshera अब खली बोतल को गुस्से पे उठता है और उसे खली प् कर अपने साथ कए गए बर्ताव पर बोतल को ज़ोर से दिवार पे दे मरता है बोतल टूट कर बिखर जाते है

शमशेर मन me)aakhir अम्मी कैसे मेरे साथ ऐसा बर्ताव कर सकती है मई उन्हें इतना प्यार करता हु क मई उन्हें कुछ कर नहीं सकता किसी और ने मेरे साथ ऐसा क्या होता तो आज में उसकी जान ले लेता आखिर कब तक तड़पुं अम्मी आपके प्यार में क्या मुझे मेरी मोहब्बत पाने का हक़ nahi..aur क्या हुआ अगर में आपके बदन को थोड़ा और करीब से देख लिया ...अम्मी जान एक दिन आप क बदन को मसल कर रख दूंगा आपकी जवानी आप के मोठे गांड को अपने लौड़े से पेल कर फाड़ दूंगा आपकी छूट को छोड़ क सुजा दूंगा आप लाख छिपा लो मुझसे अपनी जवानी लाख मुझसे दूर होने की कोशिश कर lo...ab वक़्त आगया है मुझे आपको अपने डिल का हाल अपने मुहब्बत आप से बयां करनी होगा अब मेरे पास और कोई रास्ता नहीं..

गहतराष्ट्रा

दोपहर में देवराज और बद्री श्याम क जाने क पश्चात देवरानी अपने जनता दरबार में चली आती है जहाँ पर स्त्रीयो की भीड़ थी देवरानी क जाते हे सब "महरानी देवरानी की जय ho"ki जयकारा लगाने लगते है देवरानी अपने राष्ट्र को औरतो को देख मुस्कुराते हुए जा कर राज गद्दी पर बैठ टी hi



देवरानी एक पेअर मोड़ती है दूसरे पेअर को निचे रखते हुए तक लगा कर बैठ जाती है अब तक वह पर कड़ी हर स्त्री महरानी की जय जय कार कर रही थी

देवरानी अपना एक हाथ ऊपर उठा कर सब को चुप होने का आदेश देती है सब खामोश हो जाते है

Devrani:Mai महारानी देवरानी आप सब स्त्रीयो का स्वागत करती हु आप सब भली भाँती जानती है इस दरबार का उद्देश्य बास इतना नहीं क हम आप से अपनी जैकारा करवाए परन्तु हमारा उद्देश्य ये है क राज्य क हर स्त्री इस राष्ट्र की नीव है और आप सभी अपने पति को हे नहीं संभालती पर मेरा मन न है आप अपने घरो को संभालती है और आप सब का घर मिला कर गहतराष्ट्रा राज्य बनता hai,Mujhe परसन्नता होगी आपके घर का हर दुःख दूर हो ऐसे हम गहतराष्ट्रा का उज्जवल भविष्य की नीव रख सके आप सब का परिवार हमारा परिवार है और हम सब का परिवार एक है.

वह पर बैठे साड़ी स्त्री अपने महारानी की बात पर ताली बजाते है और जैकारा लगाने लगते है

Devrani:Ab आप सब एक एक कर क हम से अपने मांग रख सकते है अपना दुःख साँझा कर सकते है

उसमे से एक स्त्री महारानी क करीब आती है और हाथ जोड़े कहती है

"महारानी में बड़ी दुखिया हु मेरे पास खेत है जिसमे से बहुत काम अनाज होता है और इस वर्षा बरसा न होने क कारन वो भी नहीं हुआ मेरे बच्चे दो समय की रोटी को तरस रहे है हम पर कृपा करे"

Devrani:To कब तक तुम्हारे खेतो में फसल होंगे

Stree:Maharani अगले फसल में कुछ महीने बाकी है तब तक मेरे बचे भूक से मर जायेंगे

Devrani:Theek है जब तक अगला फसल तुम्हारा काट नहीं जाता राज भंडार से तुम्हारे लये अनाज मुहैया कराया जायेगा

स्त्री क आखो में ासु आजाते है और वो हाथ जोड़ कर

"महारानी आपका लाख लाख धन्यवाद् ..महारानी देवरानी की जय हो"

ऐसे हे संध्या हो जाती है और एक एक कर सब स्त्री अपना दुःख देवरानी से बताती है और देवरानी सबकी मदद करती है संध्या होते हे देवरानी अपने गद्दी से उठ टी है और सब देवरानी जयकारा करते देवरानी वापस अपने महल आती है और सीधे ऊपर अपने कक्षा में चली जाती है और नहाने क लये घुस जाती है

इधर संध्या में बलदेव अपने सैनिको क साथ अभ्यास कर रहा था फिर उसके बाद व्यायाम करता है और अपने पसीने से भीगे बदन और वस्त्र क साथ महल में प्रवेश करता है अंदर आ कर सीधा वो अपने कक्षा क दरवाज़े पे हाथ लगता है की देवरानी की आवाज़ आती है

Devrani:Kaun है ? रुक जाओ ?

Baldev:Mai हु आपका पतिदेव

Devrani:aajaiye जी मुझे लगा..

बलदेव दरवाज़ा खोलते हुए अंदर घुसता है और सामने का नज़ारा कुछ ऐसा था



देवरानी नहाने क बाद अपना साड़ी पहन रही थी अभी तक उसका ऊपरी भाग नग्न था बिना ब्लाउज क और साड़ी पहन बांधते हुए उसके दोनों वक्ष इठलाते हुए हिल रहे थे

बलदेव दरवाज़ा बंद करता है अपने माँ को ऐसे हाल में देख और मुस्कुराते हुए

Baldev:Q देवरानी आप क कक्षा में कोई और भी आता है क्या

बलदेव मज़ाक करते हुए पूछता है

देवरानी अपने साड़ी क पल्लू को सही करते हुए

"अभी तक तो कोई नहीं आता आगे का पता नहीं"

देवरानी मंद मंद मुस्कुराती है

Baldev:Jis दिन कोई आगया उस दिन प्रलय आजायेगा याद रखना

Devrani:ary प्रभु आप तो क्रोधित हो गए में तो मज़ाक की मेरे पतिदेव आप क सिवा मुझे कोई देखे भी ये गवारा नहीं

Baldev:acha जी वैसे आपके ये दोनों चुचिअ लग रहा दूध से भर्र गयी हो पहले से बहुत बड़ी लग रही है

बलदेव अपने गुस्से को काबू कर लेता है और मुस्कुराते हुए कहता है

देवरानी झट से अपना ब्राज़िएर उठा क पहन लेती है

Devrani:Aap को तो बास मौक़ा मिलना चाहिए

Baldev:chhupa कहे रही हो

Devrani:jaiye और नहाइये पहले इतनी दुर्गन्ध आरही है

Baldev:Saali मेरे शरीर क पानी से दुर्गन्ध ाआरही है और लैंड क पानी को तो बड़े चौ से पी जाती हु

देवरानी ये सुन कर मुस्कुराते हुए लज्जा जाती है और अपना ब्लाउज पहन ने लगती है

देवरानी: आप भी ना.. जाइये स्नान कर लीजिये

Baldev:theek है में नाहा कर आता हु तब बता ता हु तुम्हे

Devrani:Theek है तब तक में योग कर लू

बलदेव अंदर घुस जाता है स्नान घर में उसे देवरानी क अंतर्वस्त्र फेके हुए दीखते है देवरानी क कच्ची पर साफ़ साफ़ उसके छूट क पानी क धब्बे दिख रहे थे

बलदेव मन me)Ye माँ भी न कितनी बदल गयी है अपने अंतर्वस्त्र को थोड़ा भी नहीं छुपाती एक समय था जब माँ अंतर्वस्त्र क्या अपना पेटीकोट भी मुझसे छुपा क रखती थी अब मेरे सामने हे वस्त्र बदलती है अपने चुचिओ को हिला हिला k..mera जीवन हे धन्य हो गया है जब से माँ से विवाह हुआ है

बलदेव कुछ देर में स्नान करता है और बहार निकलता है और अपने परिधान पहन कर तैयार होता है देवरानी अब भी आसान में बैठ योग कर रही थी बलदेव कुछ देर बैठ देवरानी को निहारते हुए उसके सुंदरता में जैसे खो जाता है

देवरानी थोड़ी देर बाद अपने आखे खोल कर देखती है

"आप थकते नहीं क्या मुझे निहारने से "

"देवरानी तुमको में जीवन भर्र बैठ क देखु तो भी काम है "

Devrani:Han इसलिए तो आपको ध्यान नहीं रहता कहा पर क्या रखा है

Baldev:mai समझा नहीं

Devrani:aap की गलती क वजह से सुबह में भैया ने मेरे अंतर वस्त्र देख लये

Baldev:apni गलती को मुझपे न थोपो

Devrani:han जी मई हे थोपती हु इसलिए आप सुबह के कह रहे थे में आपको रात में सोने नहीं देती

Baldev:to तुमने भी तो कह दया था क तुम मेरी वजह से जागती हो और आज हम समय पर सोयेंगे और रही बात तुम्हारी कच्ची और ब्राज़िएर देखने की बात तो तुम हे अपने भैया को कक्षा में लाइ थी मई नहीं और जब तुम उतार कर फेक कर गयी थी यहाँ तो तुमने क्यू नहीं छुपाई अपनी जांघिए और ब्राज़िएर

बलदेव गुस्से से कहता है "ठीक है आज क बाद हम कोई चुदाई नहीं करेंगे रात में और सही समय पर सो जायेंगे"

Devrani:Han रात भर्र पेलते रहते हो मेरे छूट में अपना लैंड डाले तो में कैसे सोउ सही समय पर इसलिए सही समय पर नहीं उठ सकीय और जल्दबाज़ी में पूजा करने चली गई अपने कच्ची जांघिए छोर कर पर आप तो देरी से आये थे आप अगर उठा क रख दिए होते तो मेरी वीर्य से भरी कच्ची भैया न देख pate..aur तुम्हे क्या है पूजा तो करते नहीं हो कभी..

ये कह कर देवरानी रुआंसी हो जाती है और उठ कर जाने लगती है

बलदेव देखता है बात आगे बढ़ गयी और देवरानी क हाथ को पकड़ लेता है

Devrani:rok क्यू रहे जाने दीजिये मुझे जाना है

Baldev:nahi जाने दूंगा

Devrani:mujhe आप से कोई बात नहीं करनी

Baldev:par मुझे करनी है

Devrani:mai आप की हु हे कौन

देवरानी दुखहि मन से कहती है

बलदेव अब उठ खड़ा होता है और अपने माँ को मानाने क लये ठीक देवरानी क पीछे खड़ा हो कर

Baldev:Raani माँ आप मेरी पत्नी हो में आपका पति

Devrani:bhala कोई ऐसे ज़ोर से दन्त ता है अपने पत्नी को

बलदेव देवरानी को बहो में भरते हुए उसके कानो में सरगोशी करते हुए कहता है

"देवरानी मुझे क्षमा कर दो मई क्रोधित हो गया था"

देवरानी अपने पति दुवारा मुआफी मांगने पर पिघल जाती है और पलट कर बलदेव क गले लग जाती है

Baldev:Raani माँ आप पर क्रोध नहीं आया आपने जब कहा आज से हम सही समय पर सोयेंगे इसलिए क्रोध आया बोलो मई अपने प्यारी पत्नी को प्यार नहीं करूँगा तो जीवित रह पाउँगा

देवरानी अपने बाहो को कस्ते हुए बलदेव से कहती है

"आप ये नहीं पूछेंगे क मुझे रोना क्यू आया"

"बताओ मेरी रानी को आया गुच्छा"

देवरानी एक मुस्कराहट से हस्ते हुए एक छठा बलदेव क चौड़े सीने पर मारती है

"हँ तोतले"

Devrani:pata है मेरा डिल टूट गया जब आपने कहा आज क बाद हम चुदाई नहीं करेंगे

बलदेव देवरानी क बालो को सहलाते हुए कहता है

"देवरानी तुम मेरी बात को पूरा नहीं सुनी मई ऐसा कभी नहीं कह सकता मैंने तो कहा "हम आज से रात में चुदाई नहीं करेंगे"

Devrani:Hmm तो ऐसा कहा आपने

Baldev:Han देवरानी इसका अर्थ ये नहीं क हम दिन में चुदाई नहीं करेंगे

Devrani:mujhe लगा..

Baldev:Devrani मेरी पत्नी में भले अपने नयी नवेली दुल्हन को बिना चोदे बिना पेले कैसे रह सकता हु

Devrani:hmmm

Baldev:aur रही बात राज परिवार की तो तुम्हे पता है सब जानते है हम देर रात तक चुदाई करते है इसलिए सुबह पूजा में नहीं पहुंच सकते

Devrani:par भैया क्या सोच रहे होंगे

Baldev:saale साहब ने तो कहा हे था क वस्त्र हे तो है तुम्हे उन्होंने अपने गॉड में खिलाया है वो कभी बुरा नहीं मानेगे तुम्हारे अंतर्वस्त्र देख कर

Devrani:par मेरी जंघई कितनी गन्दी थी

Baldev:wo गन्दी नहीं थी आपके मीठे वीर्य से भरी थी जो आपके योनि ने मेरे लौड़ा को याद करते हुए बहाई थी

Devrani:pata नहीं क्या सोचे होंगे वो

Baldev:Yahi सोचे होंगे क उनकी बहिन की छूट पानी बहुत छोरती है इसलिए तो उनका जीजा बलदेव उनके बहिन से विवाह कर क उनके बहिन की छूट की गर्मी निकल रहा है अपने बड़े लौड़े से

देवरानी एक मुक्का बलदेव क कंधे पे मरती है और लज्जते हुए अपना मुँह लम्बे चौड़े काट काठी बलदेव क सीने में छुपा लेती है

Devrani:dhatt बेशरम..

तभी दरवाज़े पे किसी की आहात सुनाई देती है

Baldev:kaun ?

बहार कमला कड़ी थी

Kamla:maharaj अआप दोनों भोजन कहा करेंगे यहाँ लौ या निचे

Kamla:man me)Devrani और बलदेव का लैंड और छूट तो जैसे थकता हे नहीं दिन रात पेलम पाली कर रहे है

Baldev:Hum निचे आजायेंगे आज साथ में हे भोजन करेंगे

Kamla:theek है महाराज

ये कह कर कमला चली जाती है

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 136

गहतराष्ट्रा

देवरानी एक मुक्का बलदेव क कंधे पे मरती है और लज्जते हुए अपना मुँह लम्बे चौड़े काट काठी बलदेव क सीने में छुपा लेती है

Devrani:dhatt बेशरम..

तभी दरवाज़े पे किसी की आहात सुनाई देती है

Baldev:kaun ?

बहार कमला कड़ी थी

Kamla:maharaj अआप दोनों भोजन कहा करेंगे यहाँ लौ या निचे

Kamla:man me)Devrani और बलदेव का लैंड और छूट तो जैसे थकता हे नहीं दिन रात पेलम पाली कर रहे है

Baldev:Hum निचे आजायेंगे आज साथ में हे भोजन करेंगे

Kamla:theek है महाराज

ये कह कर कमला चली जाती है

देवरानी अब भी अपने पुत्र क आलिंगन में बंधी हुई थी देवरानी का मन बिलकुल भी नहीं कर रहा था क वो अपने बेटे को अपने से दूर करे

Baldev:Devrani..Aji कहा खो गए चलना नहीं है निचे

Devrani:hmm चलना है

Baldev:to ऐसे हे पकडे रहोगी तो कैसे जायेंगे हम

देवरानी लज्जा कर मुस्कुराते हुए अपना हाथ अपने बेटे क चाट पर मारती है पर कुछ बोलती नहीं

Baldev:Chale अब निचे रानी माँ

Devrani:Baldev जी

Baldev:kahiye मेरी पत्नी जी

Devrani:aap मुझे कभी छोड़ोगे तो नहीं

Baldev:Kabhi नहीं

बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क माथे को चूमता है फिर दोनों निचे आने लगते है निचे सब भोजन करने क लये बैठे थे राजा राजपाल रानी षुरूश्ती और रानी जीविका

कमला और राधा खाना पड़ोस रही थी बलदेव देवरानी को आते देख

Shurushti:aaao बीटा आओ बहु हम सब आप दोनों का हे प्रतीक्षा कर रहे रहे

बलदेव और देवरानी अपने आसान पर बैठ जाते है और सब भोजन करने लगते है

Shurushti:Raj माता आपको पता है महारानी देवरानी की प्रसंसा पुरे गहतराष्ट्रा में हो रही है

Jeevika:kya हुआ ऐसा षुरूश्ती

Shurushti:Rajmata ..महारानी आज राज्य क हर दुखिया गरीब वंचित स्त्री की मदद क लये दरबार रखा था और मैंने सुना है पुरे गहतराष्ट्रा में केवल महारानी देवरानी क चर्चे हो रहे है

जीविका महारानी देवरानी को देखते हुए मुस्कुराती है

Jeevika:Sach मच हमारी बहु देवी है देवी इतनी दयावान है क पूछो मत

Shurushti:Han राजमाता महारानी का ये कदम सराहनीय है

बलदेव मुस्कुराता हुआ देवरानी को देखता है जो मुस्कुराते हुए खाना खा रही थी बलदेव अपनी पत्नी को बड़े प्यार से देखता है ौड कहता है

Baldev:Aakhir पत्नी किसकी है दादी माँ

ये सुन कर सब है पड़ते है पर राजपाल बिना किसी भाव क अपने भोजन में लगा हुआ था

Jeevika:Han मेरे पोते की पसंद है भला कैसे न गन वाली हो मेरी पौत्र बहु

Baldev:Daadi माँ देवरानी में वो सारे गन है जो एक महारानी में होने चाहिए

Jeevika:Baldev अब तो बास मुझे अपने पर दादी बन ने का सौभाग्य प्राप्त हो जाये फिर में चैन से मर jau..kitna प्यारा और कितना शक्तिशाली होगा मेरा पर पोता मई तो कहती हु मेरा परपोता पूर्ण संसार पर राज करेगा

Devrani:Rajmata आपका आशीर्वाद रहेगा तो अवश्य हमारा पुत्र अपने राज्य का हे नहीं पुरे भारत का उच्चतम कोटि का योद्धा होगा

Baldev:Hum उसे बनाएंगे महारानी हमारे बचे गहतराष्ट्रा की मिटटी पर पालेंगे बढ़ेंगे और एक दिन हमारा नाम हमारा ध्वज पुरे भारतवर्ष में प्रसंशा का केंद्र बनेगा क्यू पिता जी?

बलदेव अपने पिता को चुप प् कर खुद टोकता है राजपाल हड़बड़ाते हुए उत्तर देता है

Rajpal:Q नहीं beta..ab मेरा पोता बलदेव की तरह बलशाली और अपनी माता देवरानी की तरह बुद्धिमान होगा तो अवश्य भारत में उनसे अच्छा कोई राजा न होगा

बलदेव और देवरानी मुस्कुराते हुए एक दूसरे को देखते है दोनों समझ रहे थे क राजपाल ने ये बात अपने सीने पर पठार रख कर कही है

कुछ देर में बलदेव अपना भोजन कर क उठ ता है और देखता है देवरानी अब भी बैठी थी

Baldev:Chalo देवरानी सोने का समय हो गया

Devrani:Maharaj आप जाइये न मई सासु माँ और दादी मा क पेअर दबा कर आती हु

षुरूश्ती एक बड़े भरे निगाह से अपने बहु को देखते है देवरानी को

Shurushti:Bahu देवरानी ये क्या कह रही हो आप तो गहतराष्ट्रा की महारानी हो आप पर ये सोभा नहीं देगा

Devrani:Kya सासु माँ मई भी तो चाहती हु क मई अपने बहु धर्म निभा लू पहले में आपकी पुत्र की पत्नी हु बाद में महारानी

Shurushti:Bahu रानी तुमने कह दया है तो किसी और दिन सेवा कर लेना अभी जाओ अपने पति की सेवा करो

Jeevika:Han बहु तुम जाओ रही बात मेरी तो षुरूश्ती मेरे पेअर दबा देगी तुम जाओ

Devrani:theek है जब आप लोग कह रहे है तो मई सो जाती हु जा कर

Shurushti:Bahu रानी इतनी जल्दी क्या सो jaogi..maine तो कहा जाओ अपने पति की सेवा करो

षुरूश्ती मुस्कुराते हुए देवरानी की टांग खींचती है और देवरानी भी अपने पहले पति राजपाल क सामने ऐसी बात सुन कर लज्जा जाती है और अपना सर निचे कए हुए उठ जाती है

Devrani:Ji सासु माँ

Shurushti:lo बहु रानी शर्मा गयी मेरे कहने का अर्थ है मेरे बेटे बलदेव क पेअर दबा देना व्यायाम कर क थक जाता है

Devrani:Ji सासु माँ

राजपाल खाने पे से उठ जाता है और षुरूश्ती को अपने कक्षा में आने का कह कर जाने लगता है बलदेव भी सीडीओ पैर चढ़ने लगता है और देवरानी उसके पीछे पीछे आने लगती है

ये देख कर षुरूश्ती और जीविका मुस्कुराती है

Jeevika:Bahu मैंने कभी इस बात की कल्पना भी नहीं की थी क देवरानी एक दिन मेरे पोते की पत्नी बन जाएगी

Shurushti:han राजमाता देवरानी हे आपके वंश बलदेव को जन्म दी और अब बलदेव क वंश को भी जन्म देगी बड़े शुऎभगयवती है जो जीवन में इतना प्रेम और स्नेह प् रही है बलदेव से एक मई हु

Jeevika:Kya कहा षुरूश्ती

Jeevika:Kuch नहीं माँ जी चलिए आपके कक्षा में छोर दू

कमला और राधा अपना काम निपटा कर महल से अपने घर चली जाती है ऊपर देवरानी कक्षा में पहुंच कर एक चूरन जो वैध जी ने दया था वो उठा कर कहती है फिर दूध क गिलास में कुछ जड़ी बुटी मिला कर बलदेव क पास जाती है

Baldev:Devrani इसमें वो जड़ी बूटी मिलाया क नहीं

देवरानी: जी सैय्या जी लीजिये दूध पीजिये

देवरानी झुक कर गिलास देती है



देवरानी जानबूझ क अपना पल्लू गिरा लेती है और ब्लाउज से भरी मम्मी बलदेव क सामने थे

devrani:lijiye न पीजिये न

बलदेव देवरानी क हाथ से दूध ले कर हाथ को सहलाते हुए कहता है

"मेरी रांड लगता है तुझे गाय का दूध नहीं अपना दूध पिलाना है"

देवरानी कड़ी होती है अपना पल्लू सही करते हुए

" आह राजा जी मई भी तो गाय हु "

"तुम तो मेरी रांड हो निजी रांड "

"नहीं जी सैय्या बालम में आपकी निजी गाय हु पर इस गाय क दूध नहीं भरते"

"उफ़ ाः मेरी गाय जब ये सांड तुम पैर चढ़ेगा और तेरे बच्चेदानी में बचा ठहरेगा तभी तो तेरी चुकी दूध से भरेगी मेरी गाय"

"ाः राजा यह तो चढ़ जाओ न अपनी गाय पर और पेल क भर दो मेरी कोख"

बलदेव दूध पीते हुए गिलास को मेज पर रखता है और देवरानी को खींच कर अपने गॉड में ले लेता है

"तू कोई मामूली गे नहीं है तू तो जर्सी गाय है तू इतनी आसानी से पेट से नहीं होएगी जब तक खूब हुमच कर तेरे छूट को ढीला कर ढेर सारा माल तेरे बच्चेदानी में उढेल न दू"



बलदेव अपने माँ क भरी मम्मो को ब्लाउज क ऊपर से सहलाना शुरू कर देता है

"ाः यह ाः मा इतने भर्री छत्ती है जब इसमें दूध आएंगे तो दो बाल्टी से काम नहीं निकलगी"

"धत्त आप भी न इतना दूध तो गाय को भी नहीं निकलती "

देवरानी उठ कड़ी होती है

बलदेव उठ कर अपने माँ को पीछे से



अपने बहो में भर अपने माँ क मखमली पेट पर घूमने लग्गे देवरानी अपना आँख बंद क्या अपने बेटे द्वारा मर्दन का मज़ा ले रहे thi.baldev देवरानी को घूमता है और अपने माँ क चेहरे को ज़ोर ज़ोर से चूमने लगता है



"ाः जी धीरे राजा उठ ाआअह उम् आआह िस्ष्ह आआह राजा "

"आह माँ मुझे अपने छूट में अपना लौड़ा पेल लेने दो मेरा लौड़ा फटा जा रहा है"

"ाः राजा छूट का दरवाज़ा आपका हमेशा क लये खुला है पेल लो "

बलदेव अपनी माँ क साड़ी को खींचता है



देवरानी क साड़ी को खींचते हुए खोलने लगता है

"रानी माँ तेरी गुफा में जाने क लये मेरा शेर दहाड़ रहा है"

बलदेव तुरंत अपने माँ को नंगा कर देता है और अपने माँ क गले लग कर खूब ज़ोर से अपने माँ क होठो से अपने हिस्से का रास चूस कर पीने लगता है

"आह रानी माँ कितने रसीले है आपके ये होठ आह यह"

"गल्प गलप्प्प गलप्प्प हुम्म्म्मम्म अहम्म्म्म्म ह्म्म्मम्म गल्प गल्प गल्प गल्प गल्प गल्प ममममः"

बलदेव अपने धोती उतारते हुए अपने माँ को खींचते हुए

"आजा रानी अपने राजा का लैंड पकड़ ले "

देवरानी मुस्कुराते हुए अपने बेटे का लैंड हाथ में लेती है और आगे पीछे करने लगती हज



"ाः मा ाः उफ्फ्फ मेरा लैंड आह हम्म्म उठ आआह रानी माँ मेरी पत्नी आआह मेरा लैंड"

"हम्म्म क्या बड़ा लैंड है मेरे राजा बेटे उर्फ़ मेरे पति देव का आह उठ हम्म्म"

बलदेव अपने माँ को दीवार से सत्ता देता है और उसके दोनों मम्मो को पकड़ अपने हाथो से उसकी मर्दन करता है



"आह राजा अभी इसमें दूध नहीं है आह "

"रानी माँ इसमें दूध भर दूंगा में तुम्हे पेट से कर क हम्म आह क्या बड़ी छाती है तेरी देवरानी"

देवरानी तेज़ी से निचे बैठ जाती है और बिना समय गवाए अपने बेटे का लैंड पकड़ कर मुँह में लेती है चूसने लग जाती है

"ायः मा राजनै मा ाः उह्ह्ह आआह देवरानी"



बलदेव अपने माँ द्वारा लैंड चूसे जाने से एक डैम गरम हो जाता है देवरानी अब पहले से बहुत खुल गयी थी बलदेव भी अब अपने माँ को कड़ी करता है और देवरानी का एक टांग उठता है देवरानी समझते हुए अपना एक हाथ कुर्सी पर रख लेती है बलदेव अपना लौड़ा देवरानी क छूट पर रगड़ता है और एक हे झटके में पेल देता है



"ाः आआआआह अअअअअ उठ आआआआह आआह राजा एक बी ाः एक हे बार में पेल डाई ाः उठ ाः"

बलदेव बिना कुछ कहे अपने माँ क छूट में घप्प घप्प पेले का रहा था पुरे कक्षा में दोनों माँ बेटे क चुदाई की आवाज़े गूंज रही थी देवरानी अपने माँ को बिना रुके पेले जा रहा था

"आहा उह्ह्ह ाआअह राजा आआह ऐसे हे पेलो ाः मेरी छूट ाः उठ ाआअह faaaaaaaaaaad दया आआह मेरी छूट ाः राजा ज़ोर से आआह और ज़ोर से कीजिये आआह बना दीजिये मुझे अपने बचे की मा ाः"

कुछ देर ऐसे छोड़ने क बाद देवरानी का पेअर उठाये हुए दुःख जाता है और वो पेअर सीधा करने की सोचती है तभी बलदेव धक्का देते हुए देवर से लगा कर अपने माँ क छूट में पीछे से पेल देता है

"ाः ये ले मेरा लौड़ा देवरानी तेरी पूरी प्यास बुझा दूंगा साड़ी गर्मी निकल दूंगा मेरी महारानी"

"ाः राजा मेरे महाराजा आआह ऐसे हे पेलो ाः उठ ाआअह मई गयी यह aaaaaaaaaaaaaaaaaaasaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa यह आआआआ"



देवरानी क छूट से रस छूटने लगता है और बलदेव अपने गति से अपने माँ को दीवार क सहारे लगाए पेले जा रहा था कुछ देर ऐसे हे पेलने क बाद देवरानी को अपने बाहो में भर्र कर उठा लेता है देवरानी अपने आखे बंद कए हुए बेहोशी क हालत में थी बलदेव उसे बीएड पर फेक देता है और अपने माँ को दोनों टांगो को उठा कर "घप्प" से अपना लौड़ा गीले छूट में डालता है वैसे हे देवरानी अपने आखे खोलते है और उसके आँख फटा फटा का फटा रह जाता है देवरानी क बच्चेदानी तक बलदेव का लौड़ा इस बार घुस गया था



"ाः राजा उफ़ आआह राजा आआआह ुहममम आआह दया करो मुझपे आआह अआप्की पत्नी हु आआआआह उह्ह्ह आआआह ाआअह ाआअह ुह्ह्ह्ह आआआआह आआह मेरा पेट फट जायेगा ाअहाः राजा दया कर दो अपनी माँ समझ कर हे बलदेव क झटके से पूरा पलंग चर्र चर्र की आवाज़ से निकल जाता है और देवरानी की चुडिओ और पायल क छानकर से बलदेव का जोश और बढ़ जाता है और कस कस क अपने माँ क कोख तक अपने लैंड को पेले जा रहा था

बलदेव अब तूफानी अंदाज़ से अपने माँ क छूट में पेलने लगा अब वो झड़ने वाला हे था क उसकी मा "aaaaaaaaaaah आआआआह राजा में गयी आआह उफ्फ्फ"

देवरानी दूसरी बार झाड़ जाती है देवरानी अब लगा रहे झटको की तड़प बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसके हाथ बलदेव क हाथ को मारने लगते है

"आआह आह दया करो ाः उफ़ छोरो मुझे ायः राजा आआह छोरो"

देवरानी अपने बेटे को अपने से दूर हटाने की कोशिश करता है पर साढ़े 6 फिट क लम्बे चोदे मर्द क सामने देवरानी क हाथ क चोट का कोई असर नहीं था देवरानी अपने बेटे क हाथ को खींचते है और ज़ोर से अपने मुँह में भर्र लेती है सीधे तरफ से कोहनी क निचे हाथ पर अपने दांत से अपने से मांस को पकड़ लेती है और चूसने लगती बलदेव बेतहाशा छोड़ते हुए पसीने से तरबतर हुआ था देवरानी क बगल में बी पसीने बह रहे थे बलदेव अब पूरी तरह से देवरानी क ऊपर लेता था देवरानी अब भी बलदेव क हाथ को अपने मुँह में लये हुए दांत से चबा रही थी बलदेव अपने माँ क हरकत से अपनी माँ की ठुकाई नहीं रोकता और वो देवरानी क कंधे पैर अपने होठो को बीच रख कर दांत गदा देता है और चूसने लगता है बलदेव क हर धक्के का साथ देवरानी निचे से अपने गांड को उठा कर करती है फच्च फच लैंड छूट में घुस रहा था और बलदेव क मांसल जांघ ठप्प ठप्प देवरानी क गांड से टकरा रहे थे कक्षा में चुडिओ और पायल क छनक क साथ देवरानी क छूट से निकलने वाले पानी क महक बिखर रही थी फिर से एक बहार देवरानी एक चीख निकालते हुए झड़ती है और ज़ोर से अपने बेटे को दांत काट लेती है बलदेव भी अपने माँ क कंधो पर हर जगह चूसने काटने लगता है और बलदेव भी ज़ोर से

आआआह भरते हुए अपना वीर्य अपने माँ की कोख में भरने लगता है

"aaaaaaaaaaaaaaah mAaaAAaaaaaaaaaAaas ये ले मेरा beeeeeeeeeeeeeeeeej बन जा मेरी बच्चे की मायआ aaaaaaaaaah उम्म्म "

"आआआह राजा हम्म्म कितना गरम पानी है तेरा ाआअह उम्मम्मम मेरे पेट में गरम गरम महसूस हो रहा है आआआह"

दोनों कुछ देर तक एक दूसरे क पानी को अपने अंदर महसूस करते है बलदेव अपने माँ क ऊपर कुछ देर लेता रहता है फिर बगल में लेट जाता है और हफ्ते हुए

"रानी माँ उठ ाआअह मज़ा आगया साली आज तुझे छोड़ क"

देवरानी मुस्कुराते हुए हलाकि उसका बदन दर्द से तड़प रहा था फिर बी अपने बेटे क सर पर हाथ फेरने लगती है इसी तरह रात में तीन बजे तक दोनों माँ बेटे चुदाई करते है फिर सो जाते है

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 137

पारस

पिछली दिन हुई घटना भूरिया रात भर्र सोचती है कैसे शमशेर क अंदर बदलाव आरहा है क्या इस बदलाव का कारन देवरानी और बलदेव है क्या उन्हें देखने क वजह से उसके डिल में ये बाते पैदा हुई क्या ये खुद भूरिया की गलती है जो उसने अपने बेटे क मैं की मानते हुए उसके बनवाये गए पोषक पहन ने लगी कब से शमशेर ऐसा सोच रहा है मेरे बारे me,pure रात मंथन करती है पर बिना किसी निष्कर्ष पर निकले रट हुए उसे नींद आजाती hai.subah जब वो उठ थी है तो उसे अंदड़ हे अंदर कमज़ोरी महसूस होती है शायद ये रात खाना नहीं खाने क वजह से हुआ है भूरिया मेज पर रखे जग से पानी ढाल कर पीती है फिर से पलंग पर लेट जाती है



Hooriya:man में )ये कैसी आजमाइएश है मेरी मेरा शौहर पहले हे मुझे अपने डिल से निकल दया था अब बीटा भी ऐसा कर रहा है ये वही शमशेर है जिसने मुझे सुल्तान क ग़म से बहार निकला था और में सुल्तान की हर बात को नीम की तरह पी गयी अब क्या करू मई मुझसे तो साफ़ साफ़ पूछा भी नहीं जाता शमशेर से आखिर पुछु भी कैसे क्या कहु मेरे ऊपर गन्दी निगाह क्यू डालता है क्या वो मान जायेगा उफ़ क्या करू में आज क पहले इतना बेबस कभी महसूस नहीं की मई कही न कही उसके दिमाग में बलदेव और देवरानी क रिश्ते का बुरा असर होगा उसे अंदाज़ा नहीं वो कितना बड़ा गुनाह कर रहा है अपने अम्मी को गलत नज़रिये से देख kar,mujhe खुल कर उसे समझा कर ये सब रोकने क लये कहना होगा इस से पहले की देर हो जाये

भूरिया उठ टी है अपने बिस्तर से और अपने दासी को ाआवाज़ लगाती है

Hooriya:kaneez

Dasi:Hukm मल्लिका जहाँ ,सुबह खैर आप बेहद खूबसूरत लग रही है मल्लिका हमेशा की तरह

Hooriya:subah खैर ,शुकरिअ कनीज़

एक मुस्कराहट क साथ भूरिया जवाब देती है



भूरिया क उठे दोनों पहाड़ो नुमा दूध को देख दासी का मन भी ललचा जाता है

Dasi:Hukm कीजिये मल्लिका जहाँ

Hooriya:'dasi हमारे पुराने हिजाब और काफटाण कहा है

Dasi:Gustakhi मुआफ मल्लिका पर मैंने वो सब धुलाई में दया है मुझे लगा क आप अब नए पोषक हे पहनेंगे

दासी सर झुकाये कड़ी होती है और भूरिया मानव गुस्से से लाल हो जाती है

Hooriya:Bina पूछे तुम मेरे कपडे कैसे हुजरे से बहार ले जा सकती हु कनीज़

दासी अब भी अपने मुँह दबाये चुप चाप कड़ी थी

Hooriya:Acha सुनो ..जा कर शहज़ादे शमशेर को खबर दे दो उन्हें याद कए हम

Dasi:Jo हुक्म मल्लिका इ जहाँ

भूरिया मन me)aaj क लये बास इन तंग पोषक पहन लेती हु पर अब में ऐसे पोषक बिलकुल भी नहीं पहन सकती जिसमे मेरे कटाव साफ़ दिखे शमशेर को रोकने का यही रास्ता है

भूरिया स्नान घर में घुस जाती है और नाहा कर अपने लिए एक ढीला ढला बुरखा देखने लगती है पर उसे सब नए कशीदे वाले और रेशमी कपडे हे दीखते है आखिर कार वो एक काले रंग का बुरखा निकल कर अपने भरी भरकम जिस्म को छुपा लेती है

Hooriya:uff ये भी तो उतना हे तंग है खैर ये ज़्यादा कैसा नहीं है और रंगीन नहीं है तो एहि पहन कर शमशेर क सामने आना ठीक होगा

तभी दासी हुजरे क दरवाज़े पे खड़े हो कर

"मल्लिका इ जहाँ आप से मिलने गुल शाह साहब आये है "

भूरिया अपने सर को ढकते हुए अचे से अपने को छुपाये

"भेज दो उन्हें अंदर "

गुल शाह अंदर आता है और भूरिया को देख



उसके आखे चमक जाती है

गुल shah:man me)Hoor इ जहाँ बहुत जल्द तुम मेरी बीवी बन जाओगी जैसे हे सुल्तान इस दुन्या से अलविदा कहेगा

भूरिया आगे चलते हुए सोफे क पास जाने लगती है और पीछे मुद कर देखती है



Hooriya:man me)Gul शाह कब तक ललचाओगे अपने आप को कहती हु शादी कर लो तो नहीं

भूरिया सोफे पैर बैठ जाती है और सामने क सोफे पैर गुल शाह बैठ जाता है

Hooriya:Kahiye गुल शाह जी कैसे याद क्या

गुल shah:upar से निचे तक भूरिया को देखता है और फिर कहता है

"भाबी साहिबा हम तो बास आपके याद में हे होते है वो अलग बात है आपसे मुलाक़ात नहीं हो पति"

Hooriya:To आप शादी कर लीजिये न आपको भी याद करने वाली मिल जाएगी

Gulshah:man me)Bhut जल्द तुम हे मेरी बीवी बनोगी जान इ जहाँ भूरिया

Gulshah:Bhabi अब कोई अछि लड़की मिली तब तो

Hooriya:Aap भी न ..आप सुल्तान क छोटे भाई है भला आपको क्या दुस्वारी होगी एक ख्वातून ढूंढ़ने में

Gulshah:par भाबी जान मुझे कोई पसंद हे नहीं आती कोई मिले अआप जैसी तो आअज हे निकाह कर लू

Hooriya:man me)Kamine बदनीयती तो तेरे डिल में तब से है जब से मई शादी कर क मिश्रा से पारस आई हु सुल्तान क साथ

Hooriya:Tab तो आपको मिलने से रही देवर जी

तभी दरवाज़े पर शमशेर आजाता है

"अम्मी जाएं अआपने याद क्या था हमे"

Hooriya:aajao बीटा

शमशेर अंदर आता है देखता है उसका चाचा भी बैठा है शमशेर झुक कर

"सलाम चाचा जान ..सलाम अम्मी जान"

गुल shah:man me)Kuch दिनों में तुम मुझे अब्बू जान कहोगे जब में तुम्हारी माँ को अपनी बीवी बना लूंगा बीटा शमशेर

शमशेर जा कर एक सोफे पर बैठ जाता है

Shamshera:Kya बाते हो रही है चाचा जान

Hooriya:wo बास सल्तनत की बात

भूरिया बात को छुपाते हुए कहती है

गुल शाह मन me)Hooriya बेगम अभी से मेरे बात को छुपाने लगी ..ये तो बैठ गयी कैसे इसे उठाऊ क इसके बड़े गांड क दीगर हो

Hooriya:kya सोच रहे है गुल शाह जी

गुल shah:Bhabi जान क्या मुझे एक गिलास पानी मिलेगा आपके प्यारे हाथो से

Hooriya:zarur में अभी लाइ

भूरिया उठ टी है और पानी जग से निकल कर ग्लास में डालते हुए झुक जाती है गुल शाह की ठरक से भरी नज़र भूरिया क बड़े गांड का जायज़ा लेने लगती है जिसे सामने बैठा देख शमशेर जो उस से भी बड़ा ठरकी था ाआसानी से समझ जाता है और उसका खून खौल उठ ता है



भूरिया झुके हुए पीछे देख कर मुस्कुराते हुए

गुल shah:meri प्यास मिटा दीजिये भाबी जी

Hooriya:abhi पिलाती हु पानी रुक जाइये

गुल शाह दो माने क साथ भूरिया क जवानी को आखो से पी रहा था शमशेर से भी रहा नहीं जाता है अपनी अम्मी को झुका हुआ देख उसका लैंड भी खड़ा हो जाता है वो अपने आप पर काबू करते हुए बैठा था और साथ हे उसे अपने ठरकी चाचा पर गुस्सा बहुत आता है

गुल शाह पानी पीटा है और भूरिया को घूरते हुए

"भाबी जान आपके हाथो क पानी में भी मिठास है "

Hooriya:hatiye आप भी न देवर जी

गुल शाह :ठीक है भाबी जान किसी काम से बहार जा रहा हु

गुल शाह :मन में )सुल्तान को अपने रास्ते से हटा कर राज गद्दी पर भी बैठूंगा और तुम्हे अपने लौड़े पे भी बिठाऊंगा मेरी जान भूरिया

Hooriya:theek है जैसा आपको ठीक लगे

गुल shah:duwa में याद रखिये

भूरिया भी कड़ी हो जाती है और गुल शाह धीरे कदमो से बहार चला जाता है और भूरिया कड़ी कड़ी मुस्कुरा रही थी



भूरिया जैसे हे देखती है गुल शाह दरवाज़े से बहार चला गया वो शमशेर को हे देखती है जो उसे घुरा जा रहा था भूरिया मन में गुस्सा को दबाते हुए

Shamshera:man me)Uff ामी क बड़े दूध और गांड इस बुरखे में कहर ध रहे है कब मई इन्हे अपनी बना कर इनकी करारी जवानी क मज़े लूटूँगा

Hooriya:kya हुआ शमशेर ऐसे क्यू मुँह लटकाये हुए ho(apne दांत पीसते हुए गुस्सा को दबा लेती है)

शमशेर :अम्मी जान मुझे आपकी बाते बिलकुल अछि नहीं लगी

Hooriya:kaun सी बाते

Shamshera:wahi जो आप चाचा जान से कह रही थी

Hooriya:mai समझी नहीं बीटा

Shamshera:ammi जान आप कोई छोटी बची नहीं जो आप को चाचा जान की दो माने की बात समझ नहीं पाए

Hooriya:aisa कुछ गलत तो नहीं कहा उसने

शमशेर गुस्से से उठ ता है और अपने मियां से तलवार निकल कर

Shamshera:Ammi जान मई इस गुल शाह को जान से मार दूंगा मेरे सामने हे ये आपसे पानी लेते वक़्त छेड़खानी क्या और आपको घूरे जा रहा रहा

Hooriya:khamosh हो जाओ शमशेर बहार आवाज़ जाएगी इधर आओ

भूरिया शमशेर को खींचते हुए अपने खास हुजरे में ले जाती है जहाँ भूरिया का पलंग लगा हुआ था

Hooriya:ab बोलो क्या मसला है तुम क्यू आग बबूला हो रहे हो

Shamshera:ammi जान मई इस गुल शाह का सर कलम कर दूंगा ये आपको गन्दी नियत से देख रहा था आप क्यू इस बात को नज़र अंदाज़ कर रही हो कही आप भी गुलशाह से मुहब्बत तो नहीं करने लगी

भूरिया की आखे फटी की फटी रह जाती है और शमशेर को एक टाक देखते हुए उसके पास जाती है और उसके गाल पर एक थप्पड़ रशीद कर देती है

Hooriya:behaya तेरे जुबां से ये बात निकली कैसे क मई गुल शाह से मुहब्बत करती हु मई हूर इ जहाँ हु गुल शाह पर तो थुकु भी नहीं

Shamshera:par में नहीं चाहता क वो आपको ऐसे आज क बाद कभी भी घूरे

Hooriya:Shamsherra तुम ये बात कह रहे हो हद्द है क्या तुम नहीं घूरे मुझे ?

Shamshera:ammi जाएं

Hooriya:Na मत कहना बेग़ैरत गुलशाह क जाने क बाद भी तुम मुझे खा जाने वाली नज़र से देख रहे थे बोलो क्यू तुम्हे शर्म नहीं आई क्या?

Shamshera:Ammi ऐसा नहीं है

Hooriya:makkar इंसान मुझे पता था तुम में इतनी हिम्मत नहीं क अपनी गलती क़ुबूल कर लो अरे बदबख्त वो तो मेरा देवर है उसका तो हक़ है मुझसे मज़ाक करने का

Shamshera:ammi जान क्या हुआ अगर में अपनी अम्मी को देख रहा था क्या ये हक़ सिर्फ गुल शाह को है

भूरिया इस बार इतना गुस्सा होती है क उसके आखो में खून दिखने लगा था

Hooriya:Badbakht मुझे पता था तुम एक निहायत हे घटिये इंसान हो शमशेर आज हे नहीं तुम कई दिनों से मुझे घूरते हो मेरे आगे से पीछे से हर तरफ से ,तुमने मुझे नए लिबास बनवाया ताके तुम अपने गन्दी निगार मेरे जिस्म को अचे से देख सके, क्या मेरी यही तरबियत थी तुमको बोलो शैतान जब इतना जवानी का जोश चढ़ा है तो शादी क्यू नहीं करते क्यू मन करते हो शादी करने से ..तुम इतने नीच होंगे मैंने ख्वाब में भी नहीं सोचा था बोलो अब भी नामर्द शमशेर क तुम मुझे नहीं घूरते मुझपर गन्दी नज़र नहीं डालते मैंने अपना बीटा खो dya..Shamshera मई तुम्हारे कोठे की वैश्य नहीं जो तुम मुझे घूरो ..नामर्द जुर्म कर क क़ुबूल नहीं करते

अपने आप को नामर्द कहे जाने से शमशेर बौखला जाता है और भूरिया को गुस्से से देखते हुए

Shamshera:Bassss कारु अम्मी मई एक मर्द हु नामर्द नहीं हाँ में क़ुबूल करता हु मैं आपको घूरता हु पता है क्यू ..क्यू क मई आपसे शदीद मुहब्बत करने लगा हु और आपको अपनी हमनवा हमबिस्तर बना न चाहता हु मई आपको वो हर ख़ुशी देना चाहता हु जो सुल्तान ने आपको नहीं दया मुझे पता है अब्बा जान आपको नापसंद करते है डिल से

भूरिया जो अब तक गुस्से से भड़की हुई थी वो एक डैम खामोश हो जाती है और उसके पेअर और हाथ कैंप रहे थे वो एक ताक शमशेर को देखते हुए आखो से ासु टपकाये जा रही

शमशेर भी जोश में आकर तो सब कुछ बोल देता है पर उसे जब इस बात का अहसास होता है वो अपने आखे बंद कर लेता है

भूरिया आखो से ासु टपकाये जा रही थी तभी उसने अपने कमर पर फसे हुए खंजर पर हाथ लगाई और आँख बंद कए शमशेर को देखते हुए अपने खंजर को निकल कर चिल्लाई

Hooriya:yaaaa मई तुम्हे जान से मार दूंगी

शमशेर को ये उम्मीद नहीं थी वो भूरिया से दूर हटने की कोशिश करता तब तक भूरिया एक मेज पर अपने पेअर रख कर ऊपर से शमशेर क गर्दन पर खंजर लगा देती है

Shamshera:ammi जान फेंक दो इसे

Hooriya:tujh जैसे शैतान को जीने का कोई हक़ नहीं तुम मेरा बीटा नहीं हो सकते अब तुम्हे जीने का कोई हक़ नहीं बहुत गुनाह कर लिए तुमने तुम्हारे गुनाह कोठो तक थे तभी मुझे तुम्हारी अय्याशी रोकनी थी

शमशेर मौक़ा देखते हुए भूरिया क हाथ पर झटका देता है और खंजर उसके हाथ से दूर जा कर गिरता है

भूरिया खंजर की ओरे जाती है तो शमशेर हाथ पकड़ कर

"अम्मी जान "

"कम्बख्त तुमने हाथ कैसे लगाया मुझे में तुम्हारे हाथ कटवा दूंगी"

"अम्मी जान आप मुझे मारना चाहती है न जान से पर मेरे मर जाने से जो सच है वो झूट में तब्दील नहीं हो जायेगा"

भूरिया अब खंजर की ओरे जाने की कोशिश नहीं करती है और अपने आखो से ासु बहते हुए शमशेर को देख रही थी फिर अचानक से उसके मन में एक उबाल उठ ता है है

"चतत्त" छत्त" छत्त"

भूरिया अब दोनों हाथो से कभी दाए कभी बाए गाल पर शमशेर क थप्पड़ मारने लगती है

Hooriya:tumne ज़रा भी नहीं सोचा तुम कितना बड़ा गुनाह कर रहे हो अपने अम्मी क लये ऐसा सोच रहे हो

छत्त कर एक थप्पड़ जड़ देती है

शमशेर कभी दये घूम जाता कभी बाए और चुप चाप मार खाये जा रहा था

Hooriya:tumhe अंदाज़ा नहीं में मल्लिका इ जहाँ हु सुल्तान की बीवी हु एक इशारे में तुम्हारा सर धार से जुड़ा होगा ..तुम उन कोठो पर जाते हुए वैश्यों क कहने सीखने पर तो नहीं बहक गए ..

छत्त छत्त फिर से थप्पड़ मरते हुए

Hooriya:bolo शैतान क्या तुमने बलदेव देवरानी क रिश्ते को देखते हुए ये सब सोचा क्या ..कह दो शमशेर ये सच नहीं कह दो मई कोई ख्वाब देख रही हु

भूरिया थप्पड़ मरते हुए फिर से पूछती है

Shamshera:Ammi जान चाहे मुझे जान से मार दो पर हकीकत यही है क मई आपसे बेइंतेहा मुहब्बत करता हु और करता रहूँगा

भूरिया अब रट चिल्लाते हुए अब बुरी तरह थक गयी थी अब उसके हाथ थक जाते है और वो रट हुए ासु टपकते हुए

"निकल जाओ शमशेर मेरे सामने से दूर चले जाओ कभी मुझे अपना चेहरा नहीं दिखाना अगर तुम्हारी जगह कोई और होता तो उसे अभी सुल्तान को कह कर मौत क नींद सुला देती"

शमशेर अपने अम्मी को देखते हुए दरवाज़े क तरफ बढ़ता है और फिर मुद कर

Shamshera:ammi जान मेरे कोठो पर जाने की वजह भी आप ho,mai आपकी याद मिटने क लये हे वैश्य क पास जाता हु

भूरिया और ज़ोर ज़ोर से रोने लग जाती है ये सुन कर

शमशेर का गाल लाल हो चूका था मार खाने से और वो इस वक़्त हालत को देखते हुए वह से जाना ठीक समझता है और अपने चेहरे पर रुमाल लपेट कर हुजरे से बहार चला जाता है भूरिया जा कर दरवाज़ा बंद करती है और बिस्तर पर बैठ कर रोने लगती है

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 138

पारस

शमशेर अपने अम्मी को देखते हुए दरवाज़े क तरफ बढ़ता है और फिर मुद कर

Shamshera:ammi जान मेरे कोठो पर जाने की वजह भी आप ho,mai आपकी याद मिटने क लये हे वैश्य क पास जाता हु

भूरिया और ज़ोर ज़ोर से रोने लग जाती है ये सुन कर

शमशेर का गाल लाल हो चूका था मार खाने से और वो इस वक़्त हालत को देखते हुए वह से जाना ठीक समझता है और अपने चेहरे पर रुमाल लपेट कर हुजरे से बहार चला जाता है भूरिया जा कर दरवाज़ा बंद करती है और बिस्तर पर बैठ कर रोने लगती है

भूरिया रट हुए सोच में डूब जाती है

"या खुदा ये कैसा इम्तेहान है मेरा बीटा मेरी आखो का तारा हे मुझसे मुहब्बत करता और मेरे साथ हम बिस्तर होने क लये बेताब है क्या करू कैसे इसके दिमाग क गंदे ख्याल मिटाओ कैसे समझौ क ये कितना बड़ा गुनाह है कैसे बताऊ क मई अपनी जान तो दे सकती हु पर उसका खवाब कभी सच नहीं हो सकता अगर शमशेर क जगह किसी और ने मुझसे अपनी मुहब्बत का इज़हार क्या होता तो अब तक मेरे ससुर से क्र उसका सर कलम करवा दी होती पर क्या करू में कैसे मई मेरे हे बेटे को मौत क घात उतार du..nahi नहीं कैसे में जिस को 9 महीने अपने कोख में राखी इतनी अरमान से पाला पोषा उसे कैसे जान से मार सकती hu..usko कैसे सीधे रास्ते पर लौ ये ज़रूर बलदेव देवरानी को देख गलत अपने दिमाग में भर्र लय है

भूरिया का बदन बदन टूट रहा था भूरिया उठ कर पानी पीती है और फिर बिस्तर पर लेट जाती hai...udhar शमशेर सीधा अपने हुजरे में जाता है और एआईने क सामने खड़े हो कर अपने आप को देखता है

शमशेर का दोनों गाल टमाटर की तरह लाल हो चुके थे भूरिया क भरी हाथो क थप्पड़ से शमशेर अपने गाल पर हाथ फेरते है

"auch"uska गाल जल रहा था वो अपने गाल पर पानी मारता है और महल से बहार आ कर अपने घोड़ो को खोलता है और घोड़े पैर बैठ पारस बाजार की ओरे दौरान लगता है

पारस क बाजार पहुंच कर शमशेर मैखाने में घुस जाता है शमशेर को देखते हे मैखाने में लोग खड़े हो जाते है और मैखाने का मालिक आ कर

"शहज़ादे खुशामदीद आअज आप दिनन में"

shamshera:Sab मेरा मुँह क्यू देख रहे हो अपना काम karo..q मई दिन में नहीं आ सकता

मैखाने का मालिक सबको इशारे से बैठने को कहता है और शमशेर को ऊपर कोठे पैर ले जाता है

"शहज़ादे अभी तो कोई नाचने वाली नहीं आई है "

Shamshera:Hamare पीने का इंतेज़ाम करो

कुछ देर में शमशेर क सामने शराब पेश क्या जाता है और शमशेर अपने माँ की हर बात सोचने लगता है

"अम्मी जान तुमने मुझे नामर्द कहा तुमने मुझे शैतान कहा और मेरे गालो को लाल कर दया आखिर मेरा जुर्म क्या था बास इतना है न क मई आपसे मुहब्बत किया आपको अपने डिल से प्यार क्या आप को क्या दया उस सुल्तान ने आप उस सुल्तान से मुहब्बत करती हो जिसके पास 4 बीवीए और सैकड़ो लौन्डिए है जो उसके जिस्म की प्यास बुझा देते है आप को वो कभी मुहब्बत नहीं क्या आपको लगता है आप जानते हुए क सुल्तान ने कैसे आपकी बुराई मुस्कान बेगम क सामने की अब भी तुम उस झूठे मुहब्बत में रहना चाहती हो तो ठीक है मारो सुल्तान की मुहब्बत में बनती रहो बेवक़ूफ़ अब मुझे कुछ नहीं लेना देना "

शमशेर शराब उठा कर गत्त गत्त पीने लगता है यु हे शाम तक शमशेर नशे में डूबा रहता है और मैखाने में हे होता है शाम होते हे कोठे पे रेशमा आजाती है और शमशेर को देख

Reshma:Aaj लगता है शहज़ादे को रेशमा की याद दिनन में हे आगयी

शमशेर चुप चाप रहता है और अपने शराब पीने में मग्न होता है

Reshma:man me)Ye क्या आज पहली बार शहज़ादे दिनन में मैखाने में और नशे में धुत है मेरे तरफ देख भी नहीं रहे ज़रूर कोई बात है अभी पता करती हु

रेशमा शमशेर क करीब आती है और उसके साथ चिपक कर बैठ जाती है

Reshma:Mere शहंशाह मेरे जिस्म की खुसबू सूंघो देखो मेरा जिस्म भी अब आपको देखते हे जल उठ टी है इसकी तपिश ठंडी क्र दो

शमशेर रेशमा की तरफ देखता है और अपने कंधे से एक धक्का देता है रेशमा दो कदम जा कर गिरती है अब 6.3 उचाई का लम्बा ुचा जवान जो अभी महज़ 25 साल का था उसके ताक़तवर कंधो क सामने रेशमा औरत क्या ठहरती

Shamshera:Randi जा किसी और से छुड़ा ले मेरा मैं नहीं आज

Reshma:man me)zarur इसका डिल टूटा है इसलिए मेरे जैसी हसीना को भी ये दूर कर रहा है

Reshma:Ab शहज़ादे आप क जितना दम्म किसी और में कहा आइये आपको अपनी इस गरम जिस्म से आपका ग़म मिटा दू

Shamshera:man me)Reshma मेरी प्यास सिर्फ मेरी अम्मी बुझा सकती थी पर वो शायद कभी मुमकिन नहीं

Shamshera:Reshma तुम्हे सोना चंडी जो चाहिए मुझसे मांग लो में दे दूंगा

Reshma:lagta है शहज़ादे ये डिल का मामला है

रेशमा मुस्कुराते हुए कहती है और शमशेर हाँ न कुछ नहीं कहता और अपने शराब पीने में लगा होता है

Reshma:Kaun है वो बदनसीब मेहबूबा आपकी जिसने आप जैसे मर्द को तड़पा रही है ,आप की मर्दानगी की दीवानी जब रेशमा जैसी वैश्य हो गयी फिर कैसे कोई आप को रुला सकता है आप ने ज़रूर उसे अपना मर्दानगी की छाप अभी तक उसके जिस्म पैर नहीं छोरी होगी

Shamshera:Khabardar reshma..apni हद्द मत भूलो नहीं तो ..

Reshma:nahi तो क्या शहज़ादे जान से मार डोज और kya..shehzade में बस आपकी मदद करना चाहती हु आप बताइये वो कौन मेहबूबा है आपकी

Shamshera:man me)Reshma तुम मुझे भूरिया की याद दिला रही हो जबकि में उसे भुलाने क लये पी रहा हु

शमशेर एक झटके से उठ ता है और रेशमा को झटक कर बहार जाने लगता है

रेशमा खड़े हुए बास शमशेर को देखते रहती है

Reshma:Aaj पहली बार हुआ है ऐसा जब शमशेर बिना मुझे चोदे यहाँ से गए ज़रुरु कोई बड़ी बात है पर शमशेर जैसे शहज़ादे जो पारस क अगले सुल्तान हो उसे कौन लड़की मन कर सकती है या डिल दुख सकती है खैर मुझे क्या

शमशेर बहार निकलता है तो मैखाने क लोग उसे तहखाने क रास्ते से उसे अपने घोड़े तक छोर आते है शमशेर किसी भी तरह घोड़े पैर सवार होता है और महल की ओरे जाने लगता hai.mahal पहुंच कर वो सीधा अपने कक्षा में घुसता है और दरवाज़ा बंद करते हुए बिस्तर पर लेट कर सो जाता है

उधर भूरिया भी रट हुए कब सोती है उसे पता नहीं चलता शाम में वो उठ टी है जा कर पहले स्नान करती है फिर अपने बिस्तर पर जा कर लेट जाती है भूरिया अपने बेटे की हरकत क वजह से बहुत परेशां हुई थी और उसके सर में दर्द होने लगता है भूरिया जैसे कड़ी होती है उसके दोनों घुटने में दर्द महसूस होता है

Hooriya:man me)uff ये घुटने का दर्द भी न जाने कब तक मेरा पीछा करेगा

भूरिया को बोलने का भी डिल नहीं कर रहा था वो अपने दोनों हाथो से दो बार ताली बजती है और अंदर एक दासी आजाती है

Dasi:Hukm मल्लिका जहाँ

Hooriya:kaneez मेरे घुटनो में और मेरे सर में दर्द हो रहा है मालिश कर दो

dasi:aap कहे तो हकीम को बुला लाये मल्लिका जहाँ

Hooriya:ary नहीं नहीं में ठीक हु बास दर्द हो रहा है तुम शफाखाने जा कर हकीम से कहे मुताबिक़ मेरे घुटनो की मालिश कर दो

Dasi:Jo हुक्म मल्लिका

दासी चली जाती है और महल क शिफा खाने में जाने लगती है तभी नाज़ उसे देखती है

Naaz:kya हुआ कनीज़ सब खैरियत तो है इतनी तेज़ी से कहा जा रही हो

Dasi:Jo वो मल्लिका जहाँ को दर्द है सर में और घुटनो में शिफखाने जा कर उनके लिए मालिश क लये कोई दवा लेने जा रही थी

Naaz:Kya भूरिया बाजी की ताब्यात ठीक नहीं

Dasi:ji पर उन्होंने हकीम बुलाने क लये मन कर दया है बास मालिश करने कहा

Naaz:theek है तुम जाओ जब तक में देखती हु

नाज़ अपने हुजरे में आती है जहाँ पर उसका बीटा शान और बेटी समां कुछ खेल रहे थे

Naaz:Tum दोनों खाना खा लेना मेरा इंतज़ार मत करना

Shaan:ammi जान क्या हुआ आप इतने परेशां क्यू है

Naaz:beta वो तुम्हारी बड़ी अम्मी की ताब्यात नासाज़ है इसलिए उनको देखने जा रही हु तो शायद वक़्त लग जाये

Sama:mai भी चलती हु अम्मी जान

Naaz:theek है बेटी चलो

नाज़ अपने बेटी समां क साथ भूरिया क कक्षा की ओरे आने लगती है तभी

Sama:ammi जान आप कहे तो रज़िया अम्मी को भी बोल दू

Naaz:theek है बेटी जाओ उनसे भी कह दो

नाज़ भूरिया की कक्षा की ओरे जाने लगती है और समां रज़िया जो सुल्तान की तीसरी बीवी थी उसके कक्षा में जाती है

Sama:Razia अम्मी क्या में अंदर आ सकती हु

Razia:aaa जाओ बेटी

समां अंदर आती है तो देखती है रज़िया क साथ साथ उसकी छोटी अम्मी यानि क मुस्कान बेगम भी थी

Sama:salam रज़िया अम्मी ,सलाम छोटी अम्मी

razia:kya हुआ समां तुम परेशां नज़र आरही हो

Sama:Razia अम्मी वो मल्लिका जहाँ की ताब्यात शायद ठीक नहीं इसलिए अम्मी वह गयी है मई सोची आपको भी बता दू

Razia:kya..kya हुआ भूरिया बाजी को

Sama:pata नहीं पर अम्मी कह रही थी उनकी ताब्यात ठीक नहीं

तभी सुल्तान की सबसे छोटी बीवी मुस्कान बोल पड़ती है

Muskan:Hona क्या है वही हमेशा की तरह उम्र का तकाजा घुटनो में दर्द होगा

Sama:man me)Kamini ऐसे कह रही है जैसे ये हमेशा जवान रहेगी अपनी जवानी पे इतना भी नहीं इतराना चाहिए

Razia:Muskan बेगम ऐसा नहीं कहते हमे बाजी भूरिया को देखने जाना चाहिए

तभी वह पर रज़िया की बेटी महनूर आजाती है जो सुल्तान की सबसे छोटी बेटी थी और घर में भी सब से छोटी थी

Mahnoor:Ammi जान में भी जाउंगी बड़ी अम्मी को देखने

Razia:Nahi तुम यही रुको महनूर और अपनी पढाई करो

Mahnoor:Sama baaji..ammi को समझाए न वो मुझे अब भी छोटी बची समझती है अब में बड़ी हो गयी हु देखिये अब मेरी लम्बाई भी अम्मी क बराबर है

समां है देती है और महनूर को सर पैर हाथ फेरते हुए

Sama:razia अम्मी महनूर सच में अब बड़ी हो रही है बची नहीं रही अब

Razia:Han अपने बहिन की तरफदारी क्यू नहीं करोगी बास इसकी लम्बाई बढ़ गयी है

समां महनूर को गौर से देखती है उसके नज़र महनूर क संतरे से जैसे मम्मो पर पड़ती है

Sama:man me)Waise महनूर क संतरे अब गोल हो चुके है लम्बाई हे नहीं बढ़ी बस

Sama:razia अम्मी जाने दीजिये न

Razia:theek है महनूर पर आने क बाद फिर तुम्हे पढाई करनी होगी

Mahnoor:theek है अम्मी

Muskan:Ab में जाती हु रज़िया बाजी मुझे सुल्तान ने बुलाया था

razia:theek है मुस्कान बेगम

मुस्कान बेगम निकल कर सुल्तान क कक्षा की ओरे बढ़ जाती है और रज़िया समां और महनूर क साथ भूरिया बेगम की ओरे जाने लगती है

उधर भूरिया क पास नाज़ पहुँचती है

Naaz:Kya हुआ बाजी मई सुनी ताब्यात आपकी नासाज़ है

Hooriya:nahi ज़्यादा कुछ नहीं

भूरिया लेती होती है और नाज़ क आने से अपने बिस्तर से उठने की कोशिश करती है पर घुटनो क दर्द क वजह से उठना मुश्किल हो रहा था

naaz:aap लेते रहिये बाजी

तभी दासी अपने हाथ तेल और गरम पानी साथ हे सूती कपडा ले आती है

Naaz:Kaneez तुम बाजी क घुटनो की मालिश कर दो में इनके सर पे पट्टी करती हु

नाज़ जैसे हे भूरिया क सर पर हाथ लगाती है उसका हाथ जल उठ ता है

Naaz:baaji आपको तो बुखार है

भूरिया चुप रहती है नाज़ पट्टी करने लगती है ठन्डे पानी से और दासी काफ्तान को उठाये घुटनो की मालिश करती है

नाज़ घुटनो और भूरिया क मांसल पेअर तगड़े टांगो को देख सोचती है

naaz:man me)Inke पेअर इतने मांसल और मजबूत मोठे ताज़े होते हुए भी कमज़ोरी कैसे और बाजी की ताब्यात भी ख़राब होती रहती है हमेशा

Naaz:aap हकीम को क्यू नहीं दिखती है आपकी सेहत में तो कही से कोई कमी नहीं फिर आपकी ताब्यात क्यू ख़राब होते रहती है

Hooriya:ab उम्र हो गयी अब ये सब तो झेलना हे होता है इस उम्र में

Naaz:aap कौन सी बूढी हो गयी हो बाजी बास 45 साल की तो हो आज भी आप पैर नौजवान सूली चढ़ जाते है ..आपकी जवानी ढलने वाली में से नहीं

भूरिया ये सुनते हे अपने बेटे शमशेर की कही हुई बात उसके कानो में गूंजती हज

Hooriya:man me)Ab दूसरे मेरे दीवाने जब तक हुए तब तक तो मई उन्हें सजा देती रही पर अब तो खुद का बीटा मुझे बुरी निगाह से देखता है

तभी वह पर रज़िया बेगम क साथ समां और महनूर आजाती है और आकर भूरिया को सलाम कर तीनो बैठ टी है

Razia:baaji आप ठीक तो है न

naaz:inka बदन तप रहा है बुखार से

razia:fir आप ने हकीम को क्यू नहीं बुलवाया

Hooriya:Nahi मई ठीक हु कुछ देर में ठीक हो जाउंगी

Sama:nahi बड़ी अम्मी किसी भी तरह का जोखिम लेना ठीक नहीं

Hooriya:meri बेटी में ठीक हु

Sama:nahi सुनो कनीज़ तुम जाओ और हकीम साहिबा को बुला लाओ तब तक मई अम्मी क पेअर की मालिश कर दू

Mahnoor:mai भी कर दू मालिश समां बाजी

समां मुस्कुराते हुए

"हाँ आजाओ छोटी अब तुम मालिश करने क लायक हो गयी हो"

Hooriya:meri बच्चीओ रहने दो

समां और महनूर भूरिया का एक एक पेअर पकड़ कर मालिश करने लगती है

Naaz:dekhiye बाजी आप कहती थी आपको बेटी न होने का मलाल है देखिये ये दोनों कैसे आपकी खिदमत कर रही है

Hooriya:Naaz बेगम भले से समां तुम्हारे कोख की औलाद है और महनूर रज़िया की कोख की पर इन दोनों को हमेशा अपने बेटिओ जैसा माना है

Razia:aapko बेटी नहीं है ऐसा आप कभी मत सोचना हमारी बेश्या हम से पहले आपके खिदमत क लये आपको मिलेंगी

Hooriya:bhut बहुत शुकरिअ नाज़ बेगम और रज़िया बेगम तुम दोनों मेरी सौतन नहीं मेरी बहाने हो वैसे ये मुस्कान बेगम कहा है

Razia:wo आएगी आप से मिलने सुल्तान क पास है वो

Sama:man me)Badi अम्मी यहाँ मुस्कान को अपनी बहिन समझ रही है और वो हमारे साथ न आकर अब्बा जान क पास गयी

मुस्कान बेगम सुल्तान मेरे वाहिद की आखिरी पत्नी थी जो क सुल्तान से आधे उम्र की थी यही वजह थी मुस्कान अपने जिस्म की जाल में सुल्तान को फसाये रखती थी पर अब तक मुस्कान को कोई बचा नहीं था जिसका मलाल था और इस वजह से अपनी सौतनों से वो जलती थी

मुस्कान बेगम सुल्तान मेरे वाहिद क साथ थी मुस्कान क जाते हे सुल्तान ने उसे अपने बाहो में भर्र लय और चूमने लगा था

Sultan:aane में देर लगा दी आपने मेरी पारी

Muskan:Han वो आपकी मल्लिका जहाँ बीमार जो है सब उसे देखने जा रहे थे

Sultan:achha तो मेरी जान नहीं गयी भूरिया को देखने

Muskan:ab मल्लिका जहाँ बूढी हुई उसकी ताब्यात रोज़ हे ख़राब होती है

सुल्तान हस्ते हुए

"तुम तो जैसे मल्लिका जहाँ को देखना पसंद नहीं करती मुस्कान "

मुस्कान रूठ जाती है सुल्तान क चंगुल से छूट कर बैठ जाती है

"क्यू सुल्तान आपको तो बहुत पसंद है न भूरिया उसके भरी भरकम बदन में क्या मज़ा मिलता है"

"हाहाहाहा मुस्कान तुम तो रूठ गयी मेरी जान मुझे तो तुम्हारी कच्ची जवानी पसंद है इधर आओ भूरिया तो वाक़ई एक बूढी और बीमार माल है"

सुल्तान अपने बीवी मुस्कान बेगम को प्यार कर रहे थे उधर उनके पिता सुल्तान दास्ताँ अपने कक्षा में अपनी बेगम क साथ बातचीत कर रहे रहे

सुल्तान dastan:Afsana बेगम पता नहीं क्यू मेरा डिल घबरा रहा है

Afsana:kya हुआ सुल्तान आप ऐसा क्यू कह रहे है

सुल्तान dastan:mujhe लग रहा है जैसे हमारा सल्तनत बिखर जायेगा और हमारे अपने हम से दूर हो रहे है अब सबकी राय एक नहीं ऐसे वक़्त में हे दुश्मन हम पर हावी होता है

Afsana:Aap फिक्र नहीं करे मुझे पता है आप सुल्तान मेरे वाहिद और गुल शाह क आपसी तकरार का डर सत्ता रहा है

Dastan:Han बेगम आपने सही समझा मुझे लगता है सुल्तान मेरे वाहिद की ज़िद्द कही गुल शाह को तख्ता पलट पर मजबूर न कर दे

Afsana:aap क्या चाहते है

Dastan:Begam मई भी यही चाहता हु क शहज़ादे शान पारस की सल्तनत क लये मुनासिब सुल्तान होंगे पर मेरे वाहिद शमशेर को हे सुल्तान बनाना चाहते है और फैसला भी सुना दया

Afsana:ab हमे क्या करना चाहिए

dastan:Meri बायत अब तक गुल शाह ने मानी है और कभी अपने भाई क खिलाफ कोई चाल नहीं चली मई गुल शाह को समझाऊंगा और ज़रूरत पड़े तो मुझे खुद शमशेर से बात करना होगी

Afsana:theek अब ज़्यादा सोचिये मत सो जाइये

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 139

पारस

भूरिया अपने कक्षा में बिस्तर पर लेती थी और उसके दाए बाए उसकी सौतने बैठी थी नाज़ और रज़िया वही भूरिया क पेअर की मालिश नाज़ और रज़िया की बेटी समां और महनूर कर रही थी तभी दासी हकीम साहिबा जो महल क राज परिवार का खास कर इलाज करती थी उनको ले कर आती है

Naaz:aayiye हकीम साहिबा

Hakeema:Kya हुआ मल्लिका जहाँ को कब से उनकी तबियत बिगड़ी

Naaz:aaj दिनन तक तो ठीक थी

Dasi:Ji वो मल्लिका शाम होने से पहले हे मुझे िल्टेलाह की

हकीम भूरिया का हाथ पकड़ कर जांच करने लगती है

Hakeema:Ghabrane की ज़रूरत नहीं बदन में कुछ पानी कमी है जिस वजह से सर दर्द और बुखार चढ़ गया है मई कुछ जड़ी बूटी देती हु उन्हें खिलाये और हाँ मल्लिका जहाँ आप किसी चीज़ की फिक्र नहीं करे ज़्यादा सोचने से आपकी हालत और बिगड़ सकती है

Naaz:Baaji क्यू सोचेंगी कुछ उनको कोई दिक्कत होगी तब तो वैसे इनके घुटने का दर्द हमेशा होने की क्या वजह है हकीम साहिबा

Hakeema:khair नाज़ बेगम में आप से कुछ गुफ्तुगू अकेले में करना चाहूंगी

Naaz:zaruru हकीम

नाज़ क साथ हकीम हुजरे से बहार आती है और नाज़ हकीम को देख

Naaz:ab आप कह सकती है हकीम साहिबा

hakeema:dekhiye में वह सब क सामने नहीं बात करना चाहती थी क्यू क वह बच्चे भी मौजूद थे और ये बात ऐसी है जो मई मल्लिका क सबसे खास और करीबी से हे कर सकती हु

Naaz:aakhir ऐसी क्या बात है हकीम

Hakeema:Mujhe पता है आप मल्लिका इ जहाँ क सबसे करीब है इस महल में आप दोनों बहाने जैसी है

Naaz:han दुरुस्त कहा तुमने

Hakeema:aap पूछ रही थी न क आखिर अचे सेहत होने क बावजूद क्यू मल्लिका क घुटनो में दर्द और बुखार आजाता है

Naaz:Ji आप बताये क्या वजह है इसकी

हकीम इधर उधर देखती है फिर नाज़ क और नज़दीक जा कर धीरे से कहती है

hakeema:Naaz बेगम उनकी उम्र 45 की हो गयी है और कुछ अर्शे से ये हालत पेश आरहे है मल्लिका क साथ उसकी वजह जेन्सी तालुकात का नहीं बन न है

Naaz:aise कैसे मुमकिन है

Hakeema:Mumkin है ये उम्र में आ कर जेन्सी ख्वाहिशात बढ़ जाती है और मल्लिका जहाँ अपने ज़ेहन पर ज़ोर देती है सोचती ज़्यादा है और उन्हें जेन्सी लज्जत नहीं मिल पाने क वजह से उनके बदन की गर्मी ज़्यादा बढ़ जाती है और मेरा अंदाज़ा है वो अपने हाथ इश्तेमाल करती अपने आप को शांत करने क लये जिस वजह से उनकी अंदरूनी कमज़ोरी बढ़ रही है और उनके घुटनो में दर्द रहता है

Naaz:Shayad तुम ठीक कह रही हो बीते कई साल से सुल्तान जंगो में मशरूफ होते है और हम सब उनकी बीवीए छटपटा क रह जाती है और वो लौन्डिओ क साथ जुंग पैर निकल जाते है

Hakeema:Gustakhi मुआफ हो पर ये बात महल में किसी को कानो कान नहीं मालूम हो नहीं तो मल्लिका इ जहाँ मुझे जान से मार देगी

Naaz:Aap बेफिक्र रहे में भूरिया बाजी से खुद इस बाबत बात करुँगी

हकीम वह से चली जाती है और नाज़ खड़े हो कर सोचने लगती है

"भूरिया तुम चाहे कितना भी छुपा लो क सुल्तान अब मुस्कान पैर मेहरबान है और हम दोनों को खासकर पूछता तक नहीं पर एहि हकीकत है आप को में बताउंगी ये साड़ी बात ताके आपको पता चले क एक औरत को ज़िन्दगी में हर ऐशो आराम से ज़्यादा उसके शौहर की मुहब्बत की ज़रूरत होती है"

नाज़ वापस भूरिया क हुजरे में आती है

Hooriya:kya हुआ क्या कहा हकीम ने

Naaz:kuch नहीं वो आपको वक़्त पर खाना खाने की हिदायत दी आप काफी कमज़ोर हो गयी है और हाँ आप अपने सोच क समुन्दर से बहार आइये मल्लिका जहाँ

Hooriya:man me)Kaise औ नाज़ जब मेरा बीटा खुद मुझसे मुहब्बत करने लगा है और मेरे पर उसके गंदे निगाह है

नाज़ और रज़िया देर रात तक भूरिया क साथ रहते है जब भूरिया का बुखार उतरता है तो हुरिये कहती है

"आप लोग जाये सो जाये"

Naaz:Aise कैसे हम आपको छोर क जा सकते है

Razia:ji बाजी हम यही रहेंगे

Hooriya:nahi रज़िया जाओ और महनूर को सुलाओ छोटी बची है वो अभी उसकी ताब्यात ख़राब हो जाएगी

Mahnoor:badi अम्मी में आपके लये पूरी रात जाग सकती हु और वैसे में अब बची नहीं रही

Sama:Han महनूर बूढी हो गयी है

mahnoor:badi अम्मी देखिये समां बाजी मुझे छेरते रहते है

भूरिया मुस्कुरा कर

"बचो जाओ अब आराम कर"

Naaz:baaji पर

Hooriya:ab मेरी बात मानो जाओ

Naaz:theek है हम चलते है

Razia:theek है बाजी में भी चलती हु महनूर को भी सुलाना हज

sama:aap लोग जाये मुझे नहीं जाना मेरी बड़ी अम्मी को छोर क चाहे मुझे कोई फांसी दे दे

Hooriya:theek है समां तुम रुक जाओ बाकि लोग जा सकते है

मुस्कुराते हुए कहती है

नाज़ रज़िया और महनूर अपने अपने हुजरे में चले जाते है और समां वही पलंग पर लेट जाती है

Sama:Badi अम्मी आपको पता है मुझे शायरी बहुत पसंद है

Hooriya:achha तो कैसे शायरी मेरी बेटी को पसंद है

Sama:muhabat वाले

Hooriy:acha

भूरिया बुझे मन से कहती है

Sama:Ji बड़ी अम्मी मुहब्बत क अफ़साने डिल ो दिमाग को ताज़ा कर डेरे है और मुहब्बत का सोच कर रूह को एक पुरसुकून अहसास होता है

Hooriya:Hmm

भूरिया क ज़ेहन में शमशेर का चेहरा दीखता है कैसे वो अपने इज़हारे मुहब्बत क्या

Sama:badi अम्मी आपको पता है मई शायर लिखती भी हु

Hooriya:ary वह किनके मुहब्बत पर तुम शायर लिखती हो

Sama:badi अम्मी अब ये तो नहीं पता मई किसके लिए लिखती हु पर मुझे इतना पता है वो मेरे ख्वाबो का शेह्ज़ादा है हो सकता है मेरे शौहर हो

Hooriya:acha तो अभी से शौहर क ख्वाब में खोयी हो लगता है मेरी बची अब बड़ी हो गयी ,तुम्हारी शादी करवानी होगी

Sama:kitabo के पढ़ी हु बड़ी अम्मी मुहब्बत हर सरहद को पार कर देता है और जब एक बार कोई इश्क़ का आदि हो जाये तो समझिये वो अपने आशिक़ क लये हद से गुज़र जाते है

Hooriya:man me)Shayad यही हाल शमशेर का है वो अपने हाडे भूल गया और मुझसे इश्क़ करने चला था वो तो एक हवसी शख्स है आज यहाँ नहीं तो वह अपनी हवस मिटा लेगा

समां अपने मन की बाते करती जाती है और भूरिया सुनती रहती है और बार बार उसे शमशेर की याद आरही थी उधर शमशेर नशे में चूर हो कर जा कर सो जाता है

सुबह जब भूरिया की आँख खोलती है तो अपने बगल में समां को नहीं पति है भूरिया अब बहुत बेहतर महसूस कर रही थी भूरिया देश को आवाज़ लगाती है

Dasi:hukm मल्लिका ..अब आप कैसा महसूस कर रही है

Hooriya:Me अब बेहतर महसूस कर रही हु सुनो तुमने मेरे पुराने कपडे मंगवाए धुलाई से ?

Dasi:Ji मल्लिका आपके पुराने सब कपडे आ कर रखे हुए hai.aapke लिए नाश्ता क्या बनवा दू मल्लिका?

Hooriya:theek hai..nashte में कुछ नहीं बास कुछ ताज़े फल ले आना

Dasi:jo हुक्म मल्लिका

भूरिया बिस्तर से उठ ते हुए एक अंगड़ाई लेती है और नहाने चली जाती है नहाने क बाद वो एक बहुत हे ढीला ढाला निक़ाब जो वो पहले पहना करती थी वो निकल कर पहन लेती है

भूरिया अपने नाख़ून तक निक़ाब से छुपा लेती है और अपने हुजरे से बहार निकल कर नाज़ से मिलने जाती है



थोड़ी देर बाद वो नाज़ क कक्षा क सामने आती है और नाज़ भूरिया को देख उठ कड़ी होती है

Naaz:Hooriya बहाजी ये क्या

भूरिया अंदर आती है और सोफे पर बैठ जाती है

Hooriya:kya नाज़

Naaz:Baaji आप ने तो नए कपडे और निक़ाब सिलवाए थे जो इतने दिनों से पहन रहे थे फिर ये क्यू पहन लिए पुराण

Hooriya:bass मेरा डिल क्या पहन लिया

Naaz:Baaji पर आप नए कपड़ो में बहुत अछि लगती थी आपको अब किस बात की दर है

Hooriya:tumhara मतलब

Naaz:Yahi क शमशेर ने तो कह दया था क आपको जो आँख उठा कर देखेगा उसके पुरे खंडन को क़त्ल कर डाई जायेंगे

Hooriya:naaz मुझे कैसे हुए कपड़ो में सुकून नहीं मिलता

Hooriya:man me)ab तुम्हे क्या बताऊ नाज़ वो तंग कपडे हे मेरे और शमशेर क बीच दरार का काम क्या वो मेरे बदन पर न गौर करता न मेरी मुहब्बत में या कही हवस में पागल होता

Naaz:ab आपकी मर्ज़ी मल्लिका जहाँ आप कुछ भी पहने आप जैसी खूबसूरती किसी और में कहा आप तो मिश्रा की हसीना हो

Hooriya:bass बास कल रात तुमने मेरा बहुत ख्याल रखा उसके लिए शुकरिअ

Naaz:baaji इसमें शुकरिअ की क्या बात है आप मेरी बड़ी बहिन हो

Naaz:man me)Baaji आप भी जानती है शमशेर सुल्तान बन ने क क़ाबिल नहीं अब आप हे मेरे बेटे शान को सुल्तान क तख़्त तक ले जाओगी

Naaz:lijiye बाजी ये अखरोट खाइये

Hooriya:nahi नहीं बहुत गरम होता है ये

Naaz:baaji आप भी तो गरम है

Hooriya:waise एक बात तुमने नहीं बताया नाज़

naaz:kaun सी बात बाजी

hooriya:wahi कल हकीम ने तुम्हे कुछ अकेले में बताया था

Naaz:ab वो बात कुछ ऐसी है क आपको बुरा लग जाये

Hooriya:tum मेरी छोटी बहिन हो बोलो बेझिजक

naaz:pehle वडा करो आप न तो उस हकीम पर न हम पैर गुस्सा करोगी

Hooriya:hum वादा करते है

naaz:baaji वो हकीम कही आपके अंदर कमज़ोरी आपके जेन्सी ख्वाहिशात न पूरा होने क वजह से है

Hooriya:ye क्या बकवास कर रही हो

Naaz:ab जो उसने कहा वही कह रही हु

hooriya:tum तो बहुत देर तक बात करती रही बास यही बात

Naaz:baaji वो मुझे पुरे मशील बताई किस वजह से आप को िश वजह से घुटनो में दर्द और बुखार होता है आप थोड़ा काम सोचा करे कल भी आप का सर दर्द ज़्यादा सोचने क वजह से हुआ

भूरिया सच सुन कर सककी बक्की रह जाती है फिर भी अपने बात छुपाये हु

Hooriya:nahi ऐसा न नहीं हे

Hooriya:man me)Ab कैसे बताऊ क ये बात कड़वा सच है क मई सालो से सुल्तान क लिए तदपि हु शादी क बाद जो खुशीअ मिली वो ख़ुशी सुल्तान की दूसरी शादी क बाद मिल नहीं पाई

इधर भूरिया और नाज़ दरबार में जाने की तैयारी कर रहे थे उधर शमशेर अपने हुजरे में सो रहा था उसकी आखे खुलती है वो अपने आप को आज पहली बार अकेला तनहा और कमज़ोर महसूस कर रहा था वो तैयार होता है और दरबार की ओरे जाने लगता है दरबार पहुंच कर देखता है सब पहले हे वह बैठे हुए थे और शमशेर इस बार भी बहुत देर कर दया था आने में

Sultan:Shamshera..ye क्या आने का वक़्त है

Dastan:beta मेरे ये तो शमशेर की पुराणी आदत है पहली दफा तो आया नहीं है ये देर

शमशेर जा कर अपने भाई शहज़ादे शान क बगल में कुर्सी पर बैठ ता है शान शमशेर क चेहरे को देख

Shaan:bhaijaan आपकी आखे लाल है पूरी

Shamshera:han वो..

Shaan:samajh गए भाई

(धीरे से शमशेर क कण में "लगता है रात भर्र आप किसी क साथ बिताये")

Shamshera:nahi शान ऐसा नहीं

Sultan:aaj का दरबार शुरू क्या जाए

छान pasha:Jo हुक्म सुल्तान

इधर दरबार में पारस क हर मसले पर गुफ्तुगू शुरू हो जाती है और उधर भूरिया और नाज़ आकर औरतो क दरबार में जो सत्ता हुआ था सिर्फ एक परदे से दो भाग में बता गया था वह बैठ कर सब सुल्तान क अधीन बैठे थे

Sultan:chan पाशा जो हिस्सा हमने गरीबो में बंटवारा क लये कहा था कुबेरी का सोना वो तुमने किया

छान pasha:Ji सुल्तान पारस क हर एक गरीब को और सिपाहीओं को हमने कुबेरी क खजाने क हिस्से से बराबर बाँट क दे दिया

Sultan:bhut अचे छान पाशा ऐसे हमारे सिपाही हमेशा हमारे साथ बाहरी हमलो क लये तैयार रहेंगे

छान pasha:Sab बहुत खुश हुए सुल्तान आपकी ये दरियादिली से

Dastan:Beta मेरे अब कौन से हमले की तैयारी कर रहे हो मेरी मानो तो पहले अपने सेहत पर ध्यान दो

मेरे wahid:abba जान आराम हराम है और आप भी तो चाहते है हमारा सल्तनत और आगे बढे

Dastan:han बीटा पर तुम मौत क मुँह से निकले नहीं तो राजा रतन सिंह की तीर पुरे सल्तनत पर भरी पद सकती थी

Sultan.abba जान ऐसी कोई तीर हे नहीं बानी जो सुल्तान की जान ले सके

Dastan:kya कहा हकीम ने आपका घाव कब ठीक होगा

Sultan:abba जान घाव भर रहा है ये ज़हर बहुत अजीब किस्म की है जिसका काट पाना बहुत मुश्किल था वैसे मेरा मन भी एक बार कह दया था क अब में बच नहीं पहुँगा पर में बच गया हहहह

Dastan:Mere शेर हो तुम मेरे वाहिद लेकिन मई चाहता हु पुरे साल जंग पे न रह कर कुछ वक़्त अपने बीवी बचो क साथ बिताओ

Sultan:aapki राय ठीक हो सकती है लेकिन जो इस वक़्त बेहद ज़रूरी है क हम हिन्द में और क़िले फ़तेह करे और वह क ख़ज़ानों से हम अपना खज़ाना भर्र ले

गुल shah:Bhai आपने ठीक कहा

गुल shah:man me)Ab तुम हिन्द फ़तेह करने क लये ज़िंदा नहीं रहोगे सुल्तान मेरे वाहिद

कुछ देर बाद दरबार ख़त्म होती है और सुल्तान और शहज़ादे अपने अपने हुजरे की ओरे चले जाते है सुल्तान छान पाशा से एक और जुंग की तैयारी करने क लये कहता है शमशेर उठ कर सोचते हुए अपने अम्मी क हुजरे क तरफ जाता है पर वह अभी तक उसकी अम्मी नहीं आई थी थोड़ी देर वही खड़ा होता उतने में उसकी अम्मी वह से चल कर आती है जिसे देख कर हैरान होता है

Shamshera:man me)ye अम्मी ने फिर पुराने कपडे पहन लिए लगता है मेरी नज़रो से बचने का थान लय हो

भूरिया शमशेर को देख कर नहीं रूकती और अपने हुजरे में घुस जाती है

Shamshera:ammi जान अम्मी जान

कहते हुए भूरिया क पीछे जाता है

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 140

कुछ देर बाद दरबार ख़त्म होती है और सुल्तान और शहज़ादे अपने अपने हुजरे की ओरे चले जाते है सुल्तान छान पाशा से एक और जुंग की तैयारी करने क लये कहता है शमशेर उठ कर सोचते हुए अपने अम्मी क हुजरे क तरफ जाता है पर वह अभी तक उसकी अम्मी नहीं आई थी थोड़ी देर वही खड़ा होता उतने में उसकी अम्मी वह से चल कर आती है जिसे देख कर हैरान होता है

Shamshera:man me)ye अम्मी ने फिर पुराने कपडे पहन लिए लगता है मेरी नज़रो से बचने का थान लय हो

भूरिया शमशेर को देख कर नहीं रूकती और अपने हुजरे में घुस जाती है

Shamshera:ammi जान अम्मी जान

कहते हुए भूरिया क पीछे जाता है

शमशेर अपने अम्मी क पीछे खड़ा था और भूरिया अपना पीठ कर शमशेर क पुकारने पर रुक जाती है

Shamshera:ammi जान कनीज़ ने बताया आपकी ताब्यात ठीक नहीं

Hooriya:Meri ताब्यात से तुम्हे कुछ लेना देना नहीं होना चाहिए अब से

Shamshera:ammi जान

hooriya:Marr गयी तुम्हारी अम्मी ..ख़बरदार अपने गंदे ज़ुबा से मुझे पुकारा तो

भूरिया ये कह कर शमशेर की ओरे पलट टी है तो शमशेर क लाल हुए आखो को देखती है

Shamshera:Ammi जान आप मुझे समझ नहीं पा रही है मई आपका डिल दुखाना नहीं चाहता था मैंने अपने डिल पे काबू न रहा

Hooriya:khamosh हो जाओ शैतान वो तो शुक्र मनाओ मैंने इसकी शिकायत तुम्हे बाप या दादा से नहीं की नहीं तो क़ानून क मुताबिक़ अब तक तुम फांसी क फंडो पर लटके होते

Shamshera:meri नियत में सिर्फ आपकी मुहब्बत है में सिर्फ आपको खुश देखना चाहता हु

Hooriya:tumhari नियत ऐसी है जिस से गन्दी नाली क कीड़े की भी नहीं होंगे बास करो और आज से बात करने की ज़ुर्रत मत करना हवसी आदमी

Shamshera:agar मेरे वजह से आपका डिल दुख तो मुझे मुआफ कर दे पर मुझे एक हवसी आदमी न कहे

Hooriya:wah अब तुम मुझे समझाओगे मुझे क्या लफ्ज़ तुझ जैसे गंदे आदमी से करनी है तुम्हारे ये लाल आखे बता रही है कल तुम फिर से किसी कोठे पे ऐयाशी कर क आये हो

Shamshera:ammi जान

Hooriya:ab ये न कहना तुम तो जानते हे नहीं शराब किसे कहते है और वैश्य kise..jaao किसी कोठे पैर और अपने हवस mitaao..mujhe नहीं पता था तुम्हारा हवस इतना आगे बढ़ जायेगा क तुम अपनी अम्मी पैर हे बुरी नज़र रखने लगोगे

शमशेर अपना सर झुकाये खड़ा था उसे समझ नहीं आरहा था क क्या करे भूरिया का भी कहना ठीक हे था इसलिए शमशेर जवाब देने में असमर्थ था

Hooriya:nikal जा यहाँ से हवसी आदमी

शमशेर का डिल चकना चूर हो गया था उसे बहुत गुस्सा आरहा था साथ हे उसके अम्मी की कही हुई हर बात उसके डिल पैर खंजर की तरह चुभ रही थी

शमशेर घूम कर भूरिया क हुजरे से बहार जाने लगता है

Hooriya:nikal जा हवसी इंसान आज से मेरे हुजरे में भी कदम मत रखना

शमशेर सीधा महल से बहार निकलता है सामने उसे शान टहलते हुए नज़र आता है शान की नज़र जैसे शमशेर पर पड़ती है वो शमशेर क पास आता है

Shaan:kya हुआ भाईजान आप कही जा रहे है

Shamshera:Han भाई बास थोड़ा सैर सपाटा कर लू

Shaan:ab भाईजान आप तो कल क सुल्तान है अब आपको मेरे हिसाब से पारस में ज़्यादा रहना ाचा होता आखिर जासूसी कर क आप पारस क एवं क मसाइल हल नहीं कर सकते

Shamshera:Shaan अब तुम मुझे सिखाओगे क मुझे क्या करना चाहिए रही बात जासूसी की तो में इस शहर से उस शहर घूमता हु अपने मर्ज़ी से नहीं सुल्तान क हुक्म पर वो चाहते है पारस क लये हमारे दुश्मनो पैर नज़र रखने क लये तुम अभी बचे हो शान

Shaan:ab आपकी मर्ज़ी पर कुछ आदतें पर अगर आप गौर करे तो आप एक अचे सुल्तान बन सकते है

Shamshera:Sipahio मेरा घोडा तैयार karo..aur शान तुम जा कर हुजरे में आराम करो पारस की सल्तनत को कैसे संभालना है मुझे पता है

शान क पास दो सिपाही घोडा ले कर आते है और शमशेर घोड़े पर बैठ कर अपने घोड़े को पारस बाजार की ओरे चला जाता है बाजार पहुंच कर खुफ़िआ रास्ते से मैखाने की तरफ चलते हुए शमशेर अपने अड्डे पर पहुंच जाता है फिर से शराब ले कर बैठ जाता है और नशे में डूब जाता है दिनन भर्र शराब क नशे में धुत्त होता रात होते हे वो कोठे पैर चला जाता है और वह दूर से ए हुए राजाओ क सामने कई हसीनाएं अपने जिस्म का नंगा नाच शुरू कर देती है शमशेर भी देर रात तक बैठा शराब और शबाब क लुत्फ़ उठा रहा था आखिर कार देर रात सब हसीनाओ की बोली लगाई जाती है तब शमशेर उठ कर जाने लगता है तभी रेशमा उसका हाथ पकड़ कर

"कहा चले मेरे शाह"

Shamshera:Chhoro रेशमा मुझे महल लौटना है

Reshma:Q आज मेरी बोली नहीं लगाओगे

Shamshera:Mera मैं नहीं हाँ रेशमा मुझे जाना है

Reshma:aaj कल लगता है तुम्हारा शेर कही किसी से मुहब्बत कर बैठा है जो उसे रेशमा जैसी हिरणी का गोश्त नहीं खाना है

shamshera:reshma फ़ालतू बाटे करना छोर दो

Reshma:Kaun है वो हसीना जिसने मेरे बादशाह की दिन का चैन और रातो की नींद ख़राब कर दी है

शमशेर ये बात सुनते हे उसके डिल धड़क उठ ता है और उसके आखो क सामने में भूरिया की तस्वीर आजाती है

रेशमा आकर शमशेर क गले लग जाती है और तभी उसके पेट पर शमशेर का लैंड का अहसास होता है

reshma:aaaha हसीना की याद में आपका हथियार तो सलामी दे रहा है शहज़ादे लगता है आपके ख्वाबो की शहज़ादी हुस्न की मल्लिका हो

शमशेर को छुपा चाप देख कर रेशमा उसे ले कर एक कमरे में जाने लगती है और शमशेर भी चलने लगता है

shamshera:man me)Wo हुस्न पारी है और सच में वो मल्लिका है वो मल्लिका इ जहाँ है

रेशमा अब तक शमशेर को अपने बाहो में लिए एक कमरे में ाआजाति है और दरवाज़ा लगा कर शमशेर को बहो में बार क उसको चूमने लगती है

Reshma:mujhe प्यार करो शहज़ादे भुला दो अपना ग़म मुझे अपनी मेहबूबा समझ क प्यार करो

रेशमा शमशेर का पाजाम खसका देती है और निचे बैठ क शमशेर का लैंड जो 9 इंच का था उसे हाथो में भर क

"हायस कैसे कोई इतने मोठे और लम्बे लौड़ा को मन कर सकती है"

रेशमा अपने मुँह में लैंड का टोपा ले कर चूसने लगती है और देखते हे देखते आधा लौड़ा अपने मुँह में ले कर चूसने लगती है

Shamshera:aah ाः हम्म

शमशेर क आखो में उसकी अम्मी भूरिया बसी थी और बार बार उसका खोबसूरर चेहरा उसके सामने आजाता है तभी शमशेर की कही हुई बात उसके कान में गूंजती है

"हवसी इंसान हो तुम शमशेर"

शमशेर को गुस्सा आता है और वो अपने निचे बैठी रेशमा को पकड़ते हुए कड़ी करता है और रेशमा को झुका देता है

reshma:ary मुझे कपडे तो उतरने दीजिये

शमशेर अपने दोनों हाथो से रेशमा का पजामा पकड़ charrrrrrrrrrrr से फाड़ देता है अंदर रेशमा की छूट खुल कर आजाती है रेशमा भी शमशेर क इस रूप को देख डर जाती है

shamshera:han में हवसी हु

शमशेर अपने लौड़े को छूट पर लगा एक करारा धक्का मारता है और लौड़ा छूट की फाड़ते हुए जड़ तक समां जाता है और रेशमी की एक दर्द भरी चीख निकल जाती है

"aaaaaaaaaaaaaaaah aaaaAaaaaaaaaaaaaah शहज़ादे "

शमशेर घपाघप अपना लैंड अंदर बहार डालते रहता है

reshma:aap का लैंड पहली बार इतना कड़ा हुआ है लगता है आपकी मेहबूबा सच में बहुत खूबसूरत जिस्म की मल्लिका है

मल्लिका शब्द सुनते हे फिर से शमशेर का लैंड एक झटका मारता है और शमशेर क आखो क सामने उसके अम्मी की खूबसूरत जिस्म आ जाता है

इधर भूरिया अपने महल में सोई थी क अचानक उसकी आँख खुलती है वो एक बुरा सपना देखि थी वो उठ कर बैठ टी है उसका गाला सुख रहा था वो उठ का पानी पीती है और उठ कर अपना काफ्तान पहन कर अपने दासी को ाववाज़ देती है दो दासी दिन में भूरिया क हुजरे क सामने होती थी और जब वो चली जाती तो दूसरे दो आजाती

Hooriya:kaneez ..क्या सो रहे हो तुम दोनों

कनीज़ जो खड़े खड़े नींद खींच रही थी भूरिया बहार आती है और दोनों को नींद में देख

Hooriya:Lagta है इन दोनों को इनके नौकरी से हटाना होगा

भूरिया कुछ देर सोचती है पर उनको उठती नहीं है और खुद अपने हुजरे क बहार चली जाती और शमशेर क हुजरे क पास जा कर उसके हुजरे क सामने कड़ी दासी से

Hooriya:kaneez

Dasi:Hukm मल्लिका जहाँ

Hooriya:Ye शमशेर कहा है

Dasi:Shehezade अभी तक महल नहीं लौटे

Hooriya:theek है

Dasi:aapko कुछ चाहिए मलिका जहाँ

Hooriya:kuch नहीं तुम अपना काम करो

भूरिया वापस अपने हुजरे में आती है और अपना काफटाण उतार कर अपने बिस्तर पर लेट कर

Hooriya:man me)Ye शमशेर मिटा रहा होगा किसी कोठे पे जहाँ तक मुझे पता है ये किसी रेशमा क पीछे पागल है और कहता है मुझसे इश्क़ करता है हवसी इंसान को इश्क़ का मतलब नहीं पता

भूरिया फिर से अपने बेटे क बारे में सोचते हुए सो जाती है उधर शमशेर रात भर अपने पसंदीदा वैश्य क साथ रंग रलिया मन रहा था और सुबह तक रेशमा की चुदाई करता है रेशमा थक हार कर सो जाती है और शमशेर उठ कर पेशाब करने क लये जाता है तभी सामने उसे तीन लोग जो विदेशी थी और देखने में भद्दी शकल क लग रहे थे वो दिखाई देते है जो मैखाने क मालिक से कह रहे थे

"आप क पारस की लड़कीअ बहुत खूबसूरत होती है आज उनका रस निचोड़ कर मज़ा आया"

और सब है देते है तभी उनमे से एक कहता है

"आप हमे खाना भी दे दें हमने अपने जिस्म की भूक मिटा ली काम से काम हमारे लोगो क लये खाना हे ले जाते है"

और फिर से सब हसने लगते है

मैखाने का malik:aap सब निचे जाइये आपको खाना गरम करवा क मिल जायेगा लेकिन हाँ अपने सोने क सिक्के हमे देते जाइये

शमशेर वही पर दीवार की ओट में आकर सब दबे पाँव सुन और देखता है

Shamshera:man me)Dikhne में तो चीनी लग रहे है और ये बात कर रहे है क और साथी भी है इनके य

तभी वो लोग कुछ सोने क सिक्के निकालते हुए देते है जिनको हाथ में ले कर मैखाने का मालिक ये क्या इतने अजीब ो गरीब सिक्के

उनमे से एक आदमी कहता है

"अब हम 10 मुल्को में जाते है वह अपना सामान बेचते है तो ..

मैखाने का malik:Theek है आप जाये

वो सब चले जाते है तभी शमशेर मैखाने क मालिक क पास आता है और वो शमशेर को देखते हुए

"शहज़ादे आप अभी तक यही है आप कहे तो आपके लिए अलग से बिस्तर लगवा दू"

Shamshera:nahi नहीं तुम ये बताओ ये तीनो कौन थे और कब से आरहे है

मैखाने का malik:Shehzade ये लोग ताज़िर है और यहाँ कुछ दो तीन दिन से आरहे है

Shamshera:theek है आप जाइये में आता हु

मैखाने का malik:kya हुआ शहज़ादे कहा जा रहे आप

shamshera:tezarar करने का वक़्त आगया है

शमशेर जल्दी से अपने मुँह पर एक कपडे से ढकते हुए मैखाने क बहार आने लगता है

Shamshera:abhi पता चल जायेगा ये चीनी पारस में क्या कर रहे है

शमशेर देखता है वो तीनो अपने घोड़ो पैर बैठ जाने लगते है शमशेर उन्हें जाने देता है जैसे हे वो दूर होते है शमशेर अपना घोडा दौड़ता है उनके पीछे बाज़ार पार करते हुए वो तीनो पहाड़ो की तरफ घोडा मरते है उनमे से एक पीछे घूम कर देखता है तभी शमशेर घोड़े से उतर कर अपने घोड़े की नाल ठीक करने लगता है वो तीनो पहाड़ी की ओरे निकल जाते है जैसे हे वो दूर जाते है शमशेर अपने घोड़े पे सवार हो कर पहाड़ी की ओरे अपने घोड़े को दौड़ने लगता है पहाड़ तक पहुंच कर तीनो घोड़े उतर जाते है और इधर उधर देखते है शमशेर अपने घोड़े को एक झड़ी क पीछे रोक देता है जब वो तीनो को ये यक़ीन हो जाता है क उनके पीछे कोई नहीं आया वो तीनो एक गुफा की ओरे चल देते है

शमशेर वही अपने घोड़ो को बांध देता है और झाड़िओ में छुपते हुए उनके पीछे जाने लगता है तीनो गुफा में पहुंचते है जहा पर मसल जल रही थी शमशेर गुफा क कोने पर एक पेड़ क पीछे छुप जाता है वो तीनो बाते करने लगते है

पहला aadmi:Aaj तो मज़ा आगया बहुत दिनों बाद चुदाई किया पारसी माल क क्या कहने

आदमी 2:ः अगर कहो तो एक दो हम उठा ले चले

आदम 1:क्या करेंगे हम इन्हे उठा क

aadmi2:Ary भाई चुदाई करेंगे और जब इनकी छूट ढीली हो जाएगी तो चीन क किसी बाजार में बेच देंगे

शमशेर जो खड़ा सुन रहा था

अपने मन में "मुझे अंदाज़ा था ये चीनी लूटेरे हे है "

aadmi3:Chup करो तुम दोनों में तुम दोनों क कहने पर सरदार शुंग से बिना पूछे मैखाने गया और तुम दोनों लड़की उठाने की बाटे क्र रहे हो जो काम हमे दिया गया है हम वो काम करेंगे

Admi2:Han हमे सुल्तान को जल्द से जल्द मारना है ताके हमे खूब सारा सोना मिले पारसी ख़ज़ाने से

ये सुनते हे शमशेर की आखे बड़ी हो जाती है

aadmi3:Chup करो किसी को कानो कान खबर नहीं होनी चाहिए ये बात क महल से हमारा कौन साथ दे रहा है अगर उसका ज़ुबान पे नाम भी लिया तो शुंग सरदार क हाथो बचोगे नहीं

admi1:haan ठीक कहते हो मुझे तो भूक लग गई चुदाई कर कर क थोड़ा कुछ खा लू

और तीनो हसने लगते है

shamshera:man me)Yaani क महल का हे कोई शख्श है जो सुल्तान को ख़त्म करना चाहता है कौन हो सकता है वो अगर में इन लोगो को जान से भी मार दू तो ये नहीं बताएँगे क सुल्तान को कौन मरना चाहता है और ये मर गए तो इनका सरदार शुंग होशियार हो जायेगा और वो भी जो महल में रह कर ये खेल रहा है मुझे इनके खेल का पर्दाफाश करना होगा

शमशेर दबे पाँव झाड़िओ क पीछे से अपने घोड़े तक पहुँचता है और अपने घोड़े पे सवार हो कर वापस मैखाने आजाता है

मैखाने आकर सबसे पहले वो ऊपर कोठे पैर जाता है जहा रेशमा सो रही थी फिर वो शराब एक ग्लास में ढाल कर पीते हु

Shamshera:Ye चीनीओं ने पूरा नशा उतार दया अब मुझे नींद भी नहीं आएगी

Shamshera:man me)Sultan पर हमला हो सकता है पर मई उन्हें कैसे बताऊ कौन हो सकता है जो सुल्तान की जान लेना छह रहा हो मेरी नींद से सर दुःख रहा है

Shamshera:so जाता हु उठ कर महल जाऊँगा

शमशेर वही पर रेशमा क बगल में लेट जाता है और अपनी आखे बंद करता है तो फिर से उसे अपनी अम्मी की कही हुई बात उसके कानो में गूंजती है

Shamshera:mujhe महल जाना होगा

शमशेर बहार निकलता है और अपने घोड़े से महल की ओरे जाने लगता है महल पहुंच कर सबसे पहले जा कर नाहटा है और अपने कपडे बदल कर अपने अब्बा सुल्तान मेरे वाहिद क कक्षा की ओरे जाने लगता है

शमशेर दरवाज़े पे खड़े हो कर

"अब्बा जान"

दरवाज़े पे पीट ते हुए आवाज़ देते है कुछ देर आवाज़ देने क बाद अंदर सुल्तान की आँख खुलती है सुल्तान अपनी छोटी बीवी मुस्कान बेगम क साथ बिस्तर में थे

Sultan:itna सवेरे कौन आगया ..मुस्कानं बेगम उठो

muskan:sone दीजिये सुल्तान एक तो रात में देरी से सोई

Sultan:lagta है शमशेर आया है उठो जल्दी ज़रूर कोई बात होगी

muskan:ary ये क्या वक़्त है बात करने का वो खुद तो रात भर आवारागर्दी करता है और दिन भर सोता है आ गया इस वक़्त

सुल्तान उठ कर अपने कपडे पहनता है और मुस्कान भी गुस्से से अपने कपडे ठीक करती है

Sultan:jao मुस्कान बेगम जा कर दरवाज़ा खोलो

muskan:theek है सुल्तान आप कीजिये अपने बेटे से बात में चली

मुस्कान उठ कर दरवाज़ा खोलती है और सामने शमशेर को देख जैसे दर जाती है उसके लाल आँख और उसके मुँह से शराब की बदबू

मुस्कान अपने नाक बंद करते हुए

"शहज़ादे आप ने क्या बेहूदा हाल बना रखा है अपना इसलिए कहती हु आप शादी कर लें"

ये कहते हुए मुस्कान चली जाती है और शमशेर उसकी बात अनसुना करते हुए आता है

Shamshera:salam अब्बा जान

Sultan:bolo शमशेर ऐसी क्या ज़रूरी बात है जो तुम इस हाल में अपने बाप क सामने आये हो

Shamshera:muaaf कीजिये अब्बा जान पर बात हे कुछ ऐसी है जिस वजह से मजबूरन आना हुआ

Sultan:batao क्या बात है

शमशेर पूरी बात सुल्तान को बता देता है

Sultan:to कोई मुझे मरवाना चाहता है और शुंग से हाहाहाहा

shamshera:aap जानते है उसे

sultan:han बीटा चीन का सबसे ताक़तवर लूटेरा है शुंग क तलवार में इतनी धार नहीं क सुल्तान मेरे वाहिद को ख़त्म कर दे

Shamshera:han अब हमे कैसे भी कर क इस शुंग को जान से मारना होगा

Sultan:Han और साथ हे उसका भी पता करना होगा जो मेरी फिरौती एक अड़ने से लूटेरो को दे दी हाहाहाहाहा

Shamshera:aap है रहे है मई तो ख़ौफ़ज़दा हु

sultan:beta तुम्हारे बाप को जब कुबेरी क राजा रतन सिंह की तीर नहीं मार सकीय तो ये मामूली लूटेरे हहहह

shamshera:dushman को कमज़ोर नहीं समझना चाहिए अब्बा जान हमे जल्द से जल्द इसका हल करना होगा

sultan:mere बचे आओ गले लग जाओ तुम्हे मेरी कितनी फिक्र है असल मायने में तुम सुल्तान बन ने क लायक हो

सुल्तान शमशेर क गले लगते हुए

Sultan:shamshera थोड़ा काम पिया करो

शमशेर शर्म से अपना सर झुकाये खड़ा रहता है

sultan:waise तुम्हारी छोटी अम्मी मुस्कान ने सही कहा अब तुम्हे शादी कर लेनी चाहिए

Shamshera:nahi अब्बा जान शादी करने का सही वक़्त नहीं

Sultan:tum होने वाले सुल्तान हो बोलना अगर तुम्हे कोई पसंद अजय तो भी वैसे भी मुझ से ज़्यादा दुन्या तुम घूमते हो

Shamshera:man me)Abba जान जिनसे में मुहब्बत करता हु जिनको अपनी ज़िन्दगी बना न चाहता हु उसका नाम भी ले लिया तो शायद आप अभी मेरी जान ले लें

Sultan:jaao बीटा और सो जाओ रात भर क जगे हो में देखता हु

shamshera:theek है जैसा आपका हुक्म

शमशेर अपने हुजरे में जाता है और लेट जाता है और उसे फिर से उसकी अम्मी भूरिया याद आरही थी वो काफी थका था कुछ देर में गहरी नींद में चला जाता है

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 141

पारस

Sultan:tum होने वाले सुल्तान हो बोलना अगर तुम्हे कोई पसंद अजय तो भी वैसे भी मुझ से ज़्यादा दुन्या तुम घूमते हो

Shamshera:man me)Abba जान जिनसे में मुहब्बत करता हु जिनको अपनी ज़िन्दगी बना न चाहता हु उसका नाम भी ले लिया तो शायद आप अभी मेरी जान ले लें

Sultan:jaao बीटा और सो जाओ रात भर क जगे हो में देखता हु

shamshera:theek है जैसा आपका हुक्म

शमशेर अपने हुजरे में जाता है और लेट जाता है और उसे फिर से उसकी अम्मी भूरिया याद आरही थी वो काफी थका था कुछ देर में गहरी नींद में चला जाता है

इधर सुल्तान मेरे वाहिद अपने हुजरे में सोच रहा था क आखिर कौन है जो उसकी जान लेना चाहता hai,sultan उठ कर थोड़ी देर बागीचे में टहलता है फिर वापस आकर सुल्तान स्नानघर में जाता है और नाहा धो कर अपना नाश्ता कर क अपने दरबार में जाने लगता है दरबार में पहुंचते हे वह सारे मंत्री गैन खड़े हो कर सुल्तान का स्वागत करते है सुल्तान जा कर अपने गद्दी पैर बैठ जाता है और अपने हाथो क इशारे से सबको बैठने को कहता है सब निचे बैठ जाते है

Sultan:man me)abhi मुझे किसी को पता नहीं चलने देना है क महल में साजिश हो रही है नहीं तो मेरा दुश्मन होशियार हो जायेगा मुझे उसे उसकी हे जाल में फ़साना होगा

Sultan:chan पाशा आज का दरबार शुरू किया जाए

छान pasha:Jo हुक्म सुल्तान

गुल shah:man me)aaj का आखिरी दिन होगा मेरे वाहिद तुम्हारा क्यू क अब सुल्तान बन ने की बरी मेरी है

सुल्तान अपने मंत्रीओ से हर मसले पैर बात करने लग जाते है

छान pasha:Sultan आज हे महाराज देवराज का आदमी खबर ले कर आया क वो गहतराष्ट्रा से कुबेरी लौट आये है

Sultan:Kuberi में अब कैसा माहौल है

छान pasha:Sultan महाराज देवराज बहुत जल्द हे कुबेरी वासिओ को इन्साफ बलबूते अपना कायल कर लेंगे और सब उनको अपना राजा मन लेंगे क्यू क वह पर गरीबो को राजा रतन सिंह ने बहुत सताया है

Sultan:Meri ख्वाइश है क राजा रतन सिंह की बीइओ से देवराज शादी कर ले

सुल्तान dastan:beta ये तो गलत है किसी से ज़ोर ज़बरदस्ती करना

Sultan:abba जान मैंने ये नहीं कहा मई चाहता हु क रतन सिंह की बीविया मान जाये और देवराज क साथ घर बसा ले इसी में उनकी भलाई है

उधड़ परदे क पीछे औरतो क दरबार में भूरिया की सास अफसाना खातून भूरिया की ताब्यात ख़राब थी सुन कर उसे अपने पास बुलाती है

अफसाना :बेटी भूरिया आप की ताब्यात कैसी है अब

Hooriya:theek है अम्मी जान



Afsana:Beti तू बहुत कमज़ोर लग रही है खाने पीने पर ध्यान दो

Hooriya:ji ज़रूर अम्मी जान

Afsana:Beti जब से तू मेरे बेटे सुल्तान मेरे वाहिद से शादी कर क आई है तब से में तुझे अपने बहु नहीं बेटी समझी हु फिर भी तुमने मुझे तक खबर पहुंचना गवारा नहीं समझा

Hooriya:ammi जान मई भी तो आपको अपनी माँ मानती हु इसलिए तो आपको बेवजह परेशां नहीं करना चाहती थी

Afsana:beti आज जो ये सल्तनत हमारे पास है जो आज मेरा बीटा आधी दुन्या पर हुकूमत कर रहा है वो सब तेरी दुवाओ क बदौलत beti..tumhare आने से पहले हमारे पास था हे kya..hum परेशां हो जायेंगे लेकिन तुम्हे परेशां नहीं होने देंगे हूर इ जहाँ

Hooriya:man me)Islye तो अम्मी जाएं वो दूसरी तीसरी फिर चौथी शादी कर लिए और मुझे अकेला छोर दया अब तो में सुल्तान को भद्दी मोती और बूढी लगने लगी हु

Hooriya:Shukria अम्मी जान आइंदा आपको बता दया करुँगी

तभी वह पर नाज़ आजाती है और मुस्कुराते हुए

Naaaz:ammi जान मुझे मल्लिका इ जहाँ की एक और शिकायत करनी है

afsana:kaho बेटी नाज़ क्या बात है

Naaz:Ammi जान कुछ दिनों तक तो भूरिया बाजी नए नए पोषक पहन रही थी अब ये कल परसो से तो ये वापस पुराने झोला जैसे पोषक पहन रही है इन्हे बताये ये ने लिबास में कितनी खूबसूरत लग रही थी

Afsana:Ye बात सच है नए लिबास में तो बहुत ज़्यादा हे खूबसूरत लगती थी भूरिया

Hooriya:ammi जान वो नए लिबास काफी कैसे हुए है और उसमे मेरे बदन का भी अंदाज़ा साफ़ पता चलता है

naaz:Lijiye अम्मी जान भूरिया बाजी कौन सा महल क बहार जाती है जो गैर मर्द उन्हें देखे और वैसे भी शहज़ादे शमशेर ने तो कह हे दया था क जो भूरिया बजी को आँख उठा कर देखेगा उसकी क्या सजा होगी तब से तो कोई देखना तो दूर जहा भूरिया बाजी जाती है वह पर एक मर्द नहीं दीखता

Afsana:ye बात भी सही है भूरिया अब पहले जैसे तो नहीं आपको कोई घूर रहा हो और क़त्ल हो रहा है तो थोड़े कैसे हुए लिबास पहन लेने में क्या बुराई है

Hooriya:bass अम्मी सोचूंगी इस बारे में पर हमेशा से ढीले ढले कपडे पहन ने की आदत है इसलिए

Naaz:Hooriya बाजी नाख़ून को भी धक् क रखना पसंद करती है इनका बास चले तो आखो पर भी पट्टी बांध क चले

ये कह कर नाज़ हस्ती है और साथ अफसाना भी है देती है

Naaz:Lagta है शमशेर आज भी दरबार में नहीं आये

Hooriya:hmm बाजी कही हॉग

Naaz:kya बाजी आप को उस पर लगाम लगाने की ज़रूरत है दो दिन से वो गायब है अब आपको तो पता हे है वो कहा होते है

Hooriya:man me)Kaha होगा ..होगा किसी वैश्य क पास अपने हवस की आग ठंडी कर रहा hoga..mai तो उस से बात करना गवारा नहीं मई क्या समझौ उसे

Afsana:Hooriya हमे लगता है शहज़ादे शमशेर की अब शादी कर देनी चाहिए उम्र हुई अब

Hooriya:Ji जी आप सही कह रही हो

Naaz:to कब करोगी उसकी शादी बाजी जल्दी से बहु ले आओ

Hooriya:Wo इंकार है नाज़

afsana:Beti भूरिया तुम उसे मनाओ मुझे उम्मीद है वो तुम्हारी बात कभी नहीं कटेगा

दुपहर में शमशेर उठता है और अपने आप को तैयार कर क अपने पिता सुल्तान मेरे वाहिद से मिलने जाता है

Sultan:aaao बीटा मेरे शेर

Shamshera:aap ठीक तो है न अब्बा जान

Sultan:bilkul आओ बैठो

Shamshera:abba जान मई चाहता हु क आप जब तक ये गुथी नहीं सुलझ जाती तब तक आप महल से बहार नहीं जाए

Sultan:hmm शायद तुम ठीक कहते हो

Shamshera:abba जान क्या आपको किसी पैर शक है

sultan:Ab तक तो कुछ समझ नहीं आया है पर बहुत जल्द हम दुश्मन की साजिश नाकाम कर देंगे हम्म बीटा तुम्हारी वफादारी और म्हणत से में बहुत खुश हु तुम न होते तो शायद दुश्मन क साजिश का हमे पता नहीं चलता मुझे बहुत फख्र है तुमपर

इधर बाप बेटे साजिश को पहचानने में लगे थे और उधर छान पाशा अपने घोड़ो को दौड़ाये पारस से दूर पहाड़ो क तरफ जा रहा था हलकी सूरज की रौशनी थी अँधेरा धीरे धीरे छ रहा था छान पाशा अपने घोड़े को पुराण की ओरे दौरा रहा था और सूर्य की किरणे छान पाशा अपने पीछे छोरता आगे बढ़ रहा था छान पाशा गुफा क पास जा कर अपने घोड़ो को रोकता है और उतर कर गुफा में जाता है

Shungu:aaaao छान पाशा

छान pasha:hmm शुंग तैयारी कैसी चल रही है

Shungu:hamari तैयारी पूरी हुई पर

छान pasha:kya?

Shungu:Hume काम से पहले अपनी आधी रक़म चाहिए

छान pasha:tumhe मुझपे भरोषा नहीं

shungu:hahaha भरोषा जब तुम अपने सुल्तान का क़त्ल करवा सकते हो तो तुम कुछ भी कर सकते हो छान पाशा

छान pasha:theek है में 500 सोने क सिक्के तुम्हे देता हु ला कर

shungu:nahi

छान पाशा शुंग का मुँह देखता है

shungu:hume 2500 सोने क सिक्के अभी दो और 2500 सोने क सिक्के काम क बाद

छान pasha:ye तो तुम बड़ा मुँह खोल रहे हो शुंग

Shungu:kaam भी तो बड़ा है छान pasha..kya तुम नहीं चाहते क पारस अगले वज़ीर आज़म तुम बनो

छान pasha:agar में तुम्हारी बात नहीं मनु तो

Shungu:agar तुमने चालाकी की तो महल में तुम्हे और तुम्हारे उस्ताद गुल शाह को मई अपने आखो क सामने ज़िल्लत की मौत मरता हुआ देखूंगा

छान pasha:shungu तुम्हारी ये himmat..mat भूलो क तुम एक मामूली लूटेरा है चीनी लूटेरे

Shungu:ab आगे तुम्हारी मर्ज़ी तुम्हे रक़म ऐडा करनी है या नहीं

छान pasha:theek है बदबख्त में अभी लाया

छान पाशा जा कर सोने की सिक्के ला कर दे देता है

छान pasha:Ab खुश हो

Shungu:Chan पाशा अपने उस्ताद को कह दो कल सुबह सुल्तान अपने बगीचे में टहलने तो अपने दो पैरो पे जायेगा पर उसे वापस लेन क लये 4 लोग लगेंगे

छान पाशा मुस्कुराता है और शुंग को खुश हो कर देखते हुए

छान pasha:theek है में चलता हु पर चाहे तुम अपनी जान दे दो हमारा नाम तुम्हारा आदमी नहीं लेगा नहीं तो

Shungu:hum लूटेरे ज़रूर है है पर अपने वसूलो क पक्के है हम मर जायेंगे पर तुम या तुम्हारे उस्ताद गुल शाह का नाम नहीं उगलेंगे

छान पाशा गुफा से निकल कर चला जाता है

शुंग अपने आदमीओ को समझाता है कैसे हमला करना है और सुल्तान को सुबह सवेरे हे मौत क घाट उतर देना है

छान पाशा महल पहुँचता है और सीधा अपने उस्ताद गुल शाह क कक्षा में जाता है

गुल shah:aao छान पाशा कहो क्या खुसखबरी है

छान pasha:Aapko कैसे अहसास हुआ खुशखबरी का उस्ताद

Gulshah:tumhare चेहरे की मुस्कराहट हे बता रही है तुम कोई अछि खबर ले कर आये हो

छान pasha:maan लय आप उस्ताद ho..baat ये है शुंग कल सवेरे हमला करेगा

Gulshah:tab तो हमे सवेरे जाग जाना होगा ताके हम सुल्तान की जान बचा पाए

छान पाशा हैरान होते हुए गुल शाह को देखता है और गुल शाह छान पाशा का चेहरा देख ज़ोर से है पड़ता है

Gulshah:Chan पाशा इसलिए ताके हम सुल्तान को मरते हुए देख सके अपने आखो से

गुलशाह गुस्से में कहता है

छान पाशा अब है पड़ता है और साथ हे गुल शाह भी है देता है

शमशेर रात में अपने हुजरे में चहल कदमी कर रहा था

Shamshera:man me)aaaj रात मुझे होशियार रहना होगा अगर साजिश करने वाले महल क है तो ये भी हो सकता है अब्बा जान पर हमला kare..un लोगो की बातो से ये लगता है जैसे हमला की आखिरी तैयारी में हो और मुझे लगता है वो हमला कभी भी कर सकते है

शमशेर अपने तलवार पास रखा उठा लेता है और उसको मियां से खींच कर अपने तलवार की धार पर हाथ लगते हुए

Shamshera:Un लूटेरो को में इसी तलवार से मौत का मज़ा चखाउंगा और किसी भी तरह महल में साजिश करने वाले का पर्दाफाश करूँगा उस चीनी लूटेरा शुंग को पकड़ क

तो बे कॉन्टिनोएड
 
Back
Top