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पारस
"क्या मतलब है तुम्हारा हम कितने दिनों बाद मिल रहे है और तुम कहती हो बहकना नहीं पता है हमने ने आपको कितना याद क्या भूरिया"
"Sultaan..aap मेरी बात का गलत मतलब न निकले बात ये है क आज हे मेरा महीना शुरू हुआ है बहक गयी तो आपको पूरा खुश नहीं कर पाऊँगी"
ये कह कर भूरिया अपने ज़ेहन पर इतराते हुए मुस्कुराती है
Sultan:acha तो ये बात है मेरी जान आज रात मुझे आप क साथ सोने की चाहत थी पर
Hooriya:sultan घबराये नहीं में नाज़ को भेज दूंगी आपके तो 4 बीवीए है
Sultan:Biwia तो है पर जो तुम में है वो मज़ा किसी और में नहीं
Hooriya:man me)Jhuti तसल्ली किसी और को देना सुल्तान में सब सच जान चुकी हु
Hooriya:Aap जल्दी से सेहतमंद हो जाये उसके बाद में आपको हर तरह से खुश कर दूंगी
Sultand:aap की दवा रही तो में बहुत जल्द पहले जैसा तगड़ा हो जाऊंगा
Hooriya:ijazat हो तो में जाओ
Sultand:Jaaye मल्लिका आप आराम करे
Hooriya:aap कहे तो जाते हुए नाज़ या रज़िया को भेज दू आपके पास
Sultan:nahi रहने दो में मुस्कान को खबर भेजवा दूंगा आप जाये
Hooriya:Man me)Muskan को क्यू नहीं बुलाओगे आखिर कच्ची केलिए हे तोडना पसंद है आपको
भूरिया सुल्तान क हुजरे से चलते हुए अपने हुजरे क तरफ बढ़ती है और तेज़ कदमो से अपने हुजरे में पहुंच कर सबसे पहले अपना दरवाज़ा लगाती है और अपने बिस्तर पर पेट क बल सो जाती है
Hooriya:man me)Ae खुदा ये मैंने क्या किया अपने हे शौहर को नज़दीक आने से शोहबत करने से मन कर di....Nahi ऐसा करना ठीक है जब सुल्तान मुझसे मुहब्बत करते हे नहीं में मोती भद्दी हु बूढी हु तो क्यू मैं उन पर बोझ दू करे ऐयाशिया वो अपने तीनो बीइओ क साथ
भूरिया ये सोचते हुए रोने लग जाती है महीनो से सुल्तान कींतेज़ार में अपने ज़िन्दगी गुज़र रही भूरिया को लग रहा था जैसे उसका सब कुछ छीन गया हो अब उसे सुल्तान से मजबूरन दूरी बनानी पद रही थी
Hooriya:man me)ye कैसा इम्तेहान है में किसी को बता भी नहीं सकती कुछ कर भी नहीं सकती"
भूरिया सुल्तान क गले लगने से और छेड़ छार से गरम हो गयी थी भूरिया कही महीनो से चुदाई नहीं थी और आज सुल्तान से मिल कर उसकी आग भड़क जाती है
भूरिया मन me)Haaye अब क्या करू पहले एक हफ्ते में तो एक बार तो सुल्तान से मेरा मिलाप हो जाता था अब अपने इस आग को कैसे शांत karu,Mere गुस्से होने से मेरा हे नुकसान है सुल्तान तो दुसरो बीइओ से तो मज़े ले हे रहे है हाय ये गंदे ख़यालात में नाहा लेती हु शायद कुछ सुकून मिल जाये
भूरिया उठ कर नहाने चली जाती है फिर एक नया सूट बदलती है और अपने बाल जो लम्बे घने नितम्ब को छू रहे थे उसे सूखने लगती है
भूरिया मन me)haaye ये सूट भी उतना हे कैसा हुआ है मैंने दर्ज़ी से कहा था में जैसा पहनती हु ढीला ढला जिसमे हर अंग छुपे वैसा सिलने फिर भी अब ये शमशेर भी मुझे ऐसे ताड़ता है जैसे खा जायेगा अब पता नहीं उसके दिमाग में क्या चल रहा है पर मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा
तभी दासी की आवाज़ आती है
"मल्लिका जहाँ शहज़ादे शमशेर आये है"
Hooriya:Theek है में आई
भूरिया जा कर दरवाज़ा खोलती है और उसकी चुन्नी जो रेशमी था फिसल कर गिर जाती है
शमशेर अपने माँ को कैसे हुए सूट में देख सोचते है
"वह अम्मी जान आज जान हे लोगी क्या"
Hooriya:man me)Ye शमशेर पागल तो नहीं हो रहा
भूरिया को हल्का गुस्सा आजाता है और वो अपने चुनना को उठती है और शमशेर अब भी अपने माँ को खाने जाने वाली नज़र से देखता रहता है
Hooriya:Kya हुआ
Shamshera:Kya ..क्या हुआ
Hooriya:Bolo कुछ ऐसे हे बूट बने खड़े रहोगे ..क्या काम है
Shamshera:Q में बिना काम क अपनी अम्मी से मिलने नहीं आसक्त हु
Hooriya:aisi बात नहीं वो में अपने बाल सूखा रही थी खुले हे है बांधने हे जा रही थी तुम आगये
Shamshera:Q माँ एक बीटा अपने माँ क बाल देख नहीं सकता आज पहली बार तो इन खूबसूरत ज़ुल्फो को देखा हु
Hooriya:Sultan क अलावा एक तुम हे हो जिसने मेरे ज़ुल्फ़ को देखा है
Shamshera
ata है अम्मी जान आप हमेशा निक़ाब में लिपटी रहोगी तो आप की ख़ूबसूरती को कौन देख पायेगा
भूरिया तुनक कर दूर जा कर बैठ जाती है और एक उदास चेहरे से अपने बेटे से खफा होते हुए कहती है
"बीटा तुमने दर्ज़ी से कह कर मेरे कपडे इतने तंग सिल्वा दिए अब मुझे बहुत उलझन होती है इन कपड़ो में"
"अम्मी जान आप को किसने कहा मेरे कहने पैर दरजी खला ने ऐसा क्या"
"सुनो बीटा तुम्हारी माँ हु में मुझे न समझाओ तो बेहतर होगा ये नए ज़माने क कपडे मुझे नहीं पसंद ये बहुत कासी हुई है सब"
"अम्मी जान आप इन लिबास में बहुत ज़्यादा खूबसूरत लग रही हो इतनी खूबसूरत क पारी भी अआप्की खूबसूरती देख जल जाये"
"बास करो तारीफों की पुल्ल हे बंधे जा रहे हो"
Shamshera:ab अम्मी क्या करू जो तारीफ क क़ाबिल हो तारीफ उसी की होती है वैसे आप बहुत चमक रही हो इस सूट में
भूरिया क आखो में टारे दिखने लगते है और वो अपने बेटे क तारीफों को क़ुबूल कर लेती है
hooriya:man me)Ek ये है जो तारीफ कए नहीं रुकता और सुल्तान ने तो मेरे नए लिबास पर गौर तक नहीं क्या ..जब वो मुझपे गौर नहीं करते डिल से तो लिबास के फ़र्क़ उन्हें कहा दिखेगा
Hooriya:Shukria बीटा ..लगता है तुम अब तारीफ करना सीख हे गए हो तो अपने बीवी को खुश रखने में परेशानी नहीं होगी तुम्हे
Shamshera:Me कई दफः कहा मुझे कोई शादी नहीं करनी
Hooriya:q नहीं करनी उम्र जा रही है अब नहीं करोगे तो कब करोगे बताओ कैसी बीवी चाहिए तुम्हे
Shamshera:Jaisi चाहिए मिलेगी नहीं
Hooriya:Bolo हम तुम्हारे लये वैसे हे लाएंगे
Shamshera:Ab क्या कहु ..समझ लीजिये एक पारी हो जो दुन्या क तमाम परिओ से खूबसूरत हो और उसका डिल उस से भी ज़्यादा खूबसूरत
शमशेर अपने माँ को ऊपर से निचे तक एक प्यार भरी अंदाज़ में देखते हुए कहता है
Hooriya:shayar साहब ये बाते किताबो में हे अछि लगती है
Shamshera:man me)Waise मेरे डिल की पारी सिर्फ आप हो अम्मी जाएं
Shamshera:Waise अब्बा जान आपको बुलाये थे बहुत जल्दी आगये
Hooriya:badmash..Wo तो बास ऐसे हे मिलने क लये बुलाये थे
Shamshera:To मैंने तो नहीं कहा कुछ और काम क लये बुलाये थे
भूरिया उठ कर अपने हाथो से धीरे से शमशेर क हाथो पैर मरती है शमशेर साढ़े 6 फिट का ुचा लम्बा जवान था भूरिया 5.9 की थी इसलिए वो पूरी कोशिश की पर शमशेर कर गर्दन तक नहीं पहुंच पाई
Hooriya:chhorungi नहीं
शमशेर अपने आप को और ुचा करते हुए खड़ा हो जाता है
Shamshera:ammi जान शेर क मुँह में हाथ मत डालो बहार नहीं निकल पाओगी फिर
Hooriya:mai भी शेरनी हु ..तुम्हारा मुँह नहीं बचेगा
शमशेर भूरिया का हाथ हटा कर दूर हो रहा था और भूरिया अपने पूरी कोशिश कए जा रही थी
कुछ देर बाद भूरिया थक कर बैठ जाती है और शमशेर हस्ता हुआ
"ठीक है अम्मी जान में जा रहा हु बाजार अगर कहो तो कुछ फल ले आओ बहुत कमज़ोर हो गए हो आप"
Hooriya:Bada आया शेर
शमशेर निकल कर चला जाता है सोचते हुए
"अम्मी जान वह अब्बू की हुजरे में रुकी नहीं इसका मतलब साफ़ है वो अब्बू से दूर जा रही है अब मुझे इसी मौके का फायदा उठाना होगा"
इधर भूरिया थकने क वजह से लेट जाती है
Hooriya:man me)Shamshera कैसे मेरे ग़म को भुला देता है और ख़ुशी में तब्दील कर देता है बास इसकी कुछ आदते ठीक हो जाये तो मेरा बीटा सबसे ाचा सुल्तान बनेगा पारस का और पूरी दुन्या पैर अपनी हुकूमत करेगा
ये सोच कर भूरिया मुस्कुराने लगती है
Hooriya:man me)Bazar कह कर गया है पर जायेगा तो कोठे पर हे पता नहीं इसकी ये आदत कब sudhregi..Shayad एहि वजह है क उसकी नज़र मुझ पर भी ताड़ती रहती है क्यू क वो हमेशा वो नशे की सुरूर में होता है
गहतराष्ट्रा
शाम को पूजा क बाद सब खुश थे राज परिवार इसलिए खुश था क्यू क अब गहतराष्ट्रा का उत्तराधिखारी जो राज्य की सेवा करेगा और गहतराष्ट्रा को आगे बढ़ाएगा उसकी नीव महाराज बलदेव और उनकी पत्नी महारानी देवरानी रख दी थी ,पुरे परिवार क आशीर्वाद और राज्य्वासिओ क स्नेह से महाराज बलदेव अपने राज्य क वंश क लये पूरी तैयारी कर ली थी अब गहतराष्ट्रा का हर मनुष्य अपने महाराज और महारानी पर आस लगाए बैठे थे
बलदेव अपने सेनापति सोमनाथ से कह कर अपने स्नान करने निर्णय करते है
Baldev:Somnath आज हम राजघाट पर स्नान करने जायेंगे
Somnath:Jo आगया महाराज हम दूध से आपके स्नान का प्रबंध कर देते है
Baldev:Theek है जाओ और कमला को भेज दो
राज सिंहासन पर बैठा बलदेव अपने सेनापति को आदेश देते हुए कहता है कुछ देर प्रतीक्षा करने क बाद कमला राज्य सभा में उपस्थित होती है
Kamla:Maharaj की जय हो
Baldev:Aao कमला
Kamla:Maharaj आपने मुझे याद क्या
Baldev:kamla हाँ हम अभी राज घाट पर दूध स्नान करने जा रहे है में चाहता हु क आप महारानी देवरानी क दूध स्नान की व्यवस्था करे
Kamla:ati उत्तम maharaj..Mai अति शुह्रा सब प्रबंध कर dungi..aagya महाराज
Baldev:Jaa सकते हो
कमला चली जाती है और राज सभा से निकल कर महल क मुख्या द्वार में प्रवेश करती है और हर तरफ देवरानी को ढूंढ़ने लगती है तभी रसोई से देवरानी की आवाज़ सुनाई पड़ती है और कमला उस तरफ मुद जाती है
kamla:Maharani आप क्या कर रहे ह
Devrani:Kamla वो महाराज बलदेव का मन पसंद पकवान बनवा रही hu..raadha पनीर की सब्ज़ी भी तैयार करो
Kamla:Maharani आप यहाँ रसोई में काम कर रही है तो महाराज क लये तैयार कौन होगा
Devrani:kya कह रही हो कमला में समझी नहीं
तभी वह षुरूश्ती आजाती है और बीच में बोल पड़ती है
Shurushti:Maharani आप नयी नवेली दुल्हन हो ऊपर से आज से आपके जीवन की नहीं शुरुवात करने है हमारे राज्य क वंसज क लये (मुस्कुराते hue)Khoob म्हणत करनी है महाराज क साथ
Kamla:Han महारानी मुझे महाराज ने काम सौंपा है वो चाहते है क आप आज दूध से स्नान कर क उनके लये तैयार हो जाओ
Devrani:Kamini kamla..har समय तुम्हारे मस्तिष्क में यही घूमता रहता है
Kamla:Maharani जी आपके लाडले बीटा उफ़ आपके पति राज घाट जा रहे थे दूध स्नान करने और हमे आपके स्नान करवाने की ज़िम्मेदारी सौंपी है
Shurushti:Adbhutt विचार है मेरे पुत्र बलदेव का ,दूध से स्नान करना शुभ मन जाता है
अब देवरानी भी समझ गयी थी क कमला कोई मज़ाक नहीं कर रही है
Kamla:Chaliye महारानी आपका काम यहाँ नहीं
Shurushti:aap तो जाइये बहुरानी हमारे बेटे का साथ दीजिये इस राज्य का उत्तराधिकारी हमे दीजिये ,दूधो नहाओगी तो हे पुतो पहलाज
ये सुन देवरानी लज्जा जाती है और उसके छूट में जैसी चींटी रेंग गयी हो अपने सास की बात सुन क
Devrani:Theek है सासु माँ जैसी आपकी मर्ज़ी
Shurushti:Marzi तो ऐसे बोल रही है जैसे खुद मेरे बेटे की संतान नहीं चाहती हो
ये सुन कर तीनो हसने लगते है कुछ देर बाद कमला क साथ देवरानी ऊपर अपने कक्षा में चली जाती है जहाँ स्नान गृह में तैयारी होती है दूध स्नान का
उधर सेनापति सोमनाथ भी राज घाट पर सैनिको को पहरा बढ़ा देता है और सब कुछ प्रबंध कर क वापस लौट ता है महाराज क पास लौट ता है
Somnath:Maharaj चलिए राजघाट पैर तैयारी हो चुकी
Baldev:Avashya सेनापति चलो
सोमनाथ क साथ बलदेव राज घाट जो महल क आगे उद्यान क पास था वह दोनों घोड़ो से बैठ कर पहुंचते है ,वह पहुंच कर बलदेव घोड़े से उतरता है और सेनापति घोड़े को ले कर एक वृक्ष से बाँध देता है कुछ खड़े सैनिक वह पर खड़े महाराज का स्वागत करते है
Sainik:Maharaj की जय हो ..
महाराज की जय हो
घाट जंगल से घिरा हुआ था चारो ओरे से दीवार थे बीचे बड़े बड़े दो नहर निकल रहे थे जो पानी का श्रोत tha.maharaj बलदेव सबसे पहले अपने तलवार को अलग करते हुए रखते है और एक सैनिक दोनों हाथो से तलवार ले लेता है फिर अपने आभूषण को एक एक कर निकलते है फिर अपने वस्त्र निकल कर महाराज एक धोती में हे रह जाते है
Somnath:aaap जा कर स्थान पर बैठ जाये महाराज
Baldev:Theek है सेनापति
बलदेव जा कर सीडीओ से उतारते हुए एक जगह पर बैठ जाता है और फिर सारे सैनिक इकठे हो कर बलदेव क ऊपर दूध की बारिश कर देते है छोटे बाल्टी से दूध को उढेल देते और बालड़ेव अपना आँख बंद कए नाहा रहा था
थोड़ी देर बाद नाहा कर बलदेव फिर से वस्त्र धारण करता है और वापस अपने सेनापति और सैनिको क साथ महल की ओरे अपने घोड़े पे बैठ कर आने लगता है
उधर कमला देवरानी को ले कर उसके कक्षा में जाती है और उसे दूध से नहलाती है फिर थोड़ी देर बाद देवरानी तैयार हो जाती है
Kamla:ati सुन्दर लग रही हो महारानी मुझे लगता है महाराज आप की सुंदरता देख कही आज हे खता न खोल दे
Devrani:dhatt..besharam मई भी तो यही चाहती हु क मेरे गॉड में जल्द से जल्द किलकरिअ गूंजे हमारे प्रेम की
Kamla:bass आप ऐसे हे महाराज बलदेव को खुश रखते रहिये बहुत जल्द हमे खुशखबरी सुनने को मिल जाएगी
Devrani:ab तू जा kamla..or हाँ मेरे सैय्या बीटा को भेज देना
Kamla:avashya महारानी और हाँ अब वो जड़ी बूटी भूल कर भी न खाना जिसे से गर्भ नहीं रुकता
Devrani:Mujhe पागल समझी हो जाओ अब
Devrani:man me)Meri कोख मेरे बेटे की बीज अपने अंदर लेने क लये तड़प रही है
Kamla:man me)bhut खुजली है तुझे महारानी अपने बेटे से छुड़वाने की अब तो उसका बीज को बोयेगी और बचा बी जानेगी छिनाल है पक्की
कमला निचे चली जाती है कुछ देर में सब भोजन करने बैठ जाते है पर बलदेव का अब तक कोई अत पता नहीं था
राजपाल क साथ देवराज बद्री और श्याम बैठे रात का भोजन कर रहे थे और पास कड़ी षुरूश्ती सबको भोजन पड़ोस रही थी
Devraj:Rajpal जी अब मैंने मन बना लय है क अब मुझे कुबेरी वापस लौट जाना चाहिए
Rajpal
ar अभी कुछ दिन हे हुए है वह की प्रजा इतनी जल्दी आपको महाराज नहीं मानी तो
Devraj:Bass अब सुल्तान मेरे वाहिद का फरमान है मुझे वह रहना है और कुबेरी को एक ाचा राज्य बनाना है राजा रतन सिंह ने कुबेरी को नरक बना दया था
Rajpal:Ishwar आपके हर ीचा पूरी करे
Badri:Maharaj आपकी आज्ञा हो तो हम भी अपने अपने राज्य लौट जाये
Shyam:Han महाराज हमारा परिवार हमारी प्रतीक्षा कर रहे होंगे
Shurushti:ary बच्चो इतनी जल्दी क्या वैसे भी तुम्हे कौन सा जा कर अपने राज्य को संभालना है
तभी बलदेव वह पहुंच जाता है और सबकी बाते सुन कर
Baldev:Kiske राज्य सँभालने की बात चल रही है
राजपाल सहित सब अपने आसान से उठ खड़े होते है
rajpal:aaiye महाराज
Baldev:baith जाइये आप सब ..पिता जी ये सब की कोई ास्वश्यक्ता नहीं आप सब हमे ह्रदय से से सम्मान करे बास इतना छटा हु
Shurushti:Beta बलदेव ये तुम्हारे नए साला साहब तो जाना हे चाहते है और साथ हे ये दोनों युवराज भी अपने राज्य लौटना चाहते है
Baldev:Q साले साहब अपने बहिन क ससुराल आपका मन नहीं लगता कोई कमी तो नहीं हो रही हमारी ओरे से
देवराज सर झुकाये बैठा था एक बार वो राजपाल को देखता है दोनों असमंजस क स्थिति में थे
Devraj:Wo महाराज बलदेव जी कोई कमी तो नहीं आपके ओरे से पर कुबेरी पहुंच कर एक नए राष्ट्र की नीव रखनी है
Devraj:man me)Kabhi मां जी कहता था आज साला कह रहा है
Baldev:achi सोच है ..उस ऐय्याश रतन सिंह क राज्य में शांति बानी रहेगी इस पर संदेह है मुझे और रही मेरे मित्रो की बात की बात तो वो जा सकते है
Devraj:To राजपाल जी कल हे हम निकल जायेंगे
Baldev:saale साहब हमने ने आपको जाने की आज्ञा नहीं दी आप अपने बहिन देवरानी से अनुमति ले लीजिये पहले
Devraj:jaisa आप कहे
Rajpal:aao भोजन करो खड़े हे रहोगे बीटा
Badri:han आओ भोजन करो
Shurushti:aap सब रहने दीजिये ..बीटा बलदेव जाओ बहु देवरानी तुम्हारी प्रतीक्षा में है
बलदेव दो कदम चलते हुए आगे बढ़ता है फिर पीछे मुद कर सबको एक टाक देखते हुए
"हमारा भोजन ऊपर होगा"
तो बे कॉन्टिनोएड..
पारस
"क्या मतलब है तुम्हारा हम कितने दिनों बाद मिल रहे है और तुम कहती हो बहकना नहीं पता है हमने ने आपको कितना याद क्या भूरिया"
"Sultaan..aap मेरी बात का गलत मतलब न निकले बात ये है क आज हे मेरा महीना शुरू हुआ है बहक गयी तो आपको पूरा खुश नहीं कर पाऊँगी"
ये कह कर भूरिया अपने ज़ेहन पर इतराते हुए मुस्कुराती है
Sultan:acha तो ये बात है मेरी जान आज रात मुझे आप क साथ सोने की चाहत थी पर
Hooriya:sultan घबराये नहीं में नाज़ को भेज दूंगी आपके तो 4 बीवीए है
Sultan:Biwia तो है पर जो तुम में है वो मज़ा किसी और में नहीं
Hooriya:man me)Jhuti तसल्ली किसी और को देना सुल्तान में सब सच जान चुकी हु
Hooriya:Aap जल्दी से सेहतमंद हो जाये उसके बाद में आपको हर तरह से खुश कर दूंगी
Sultand:aap की दवा रही तो में बहुत जल्द पहले जैसा तगड़ा हो जाऊंगा
Hooriya:ijazat हो तो में जाओ
Sultand:Jaaye मल्लिका आप आराम करे
Hooriya:aap कहे तो जाते हुए नाज़ या रज़िया को भेज दू आपके पास
Sultan:nahi रहने दो में मुस्कान को खबर भेजवा दूंगा आप जाये
Hooriya:Man me)Muskan को क्यू नहीं बुलाओगे आखिर कच्ची केलिए हे तोडना पसंद है आपको
भूरिया सुल्तान क हुजरे से चलते हुए अपने हुजरे क तरफ बढ़ती है और तेज़ कदमो से अपने हुजरे में पहुंच कर सबसे पहले अपना दरवाज़ा लगाती है और अपने बिस्तर पर पेट क बल सो जाती है
Hooriya:man me)Ae खुदा ये मैंने क्या किया अपने हे शौहर को नज़दीक आने से शोहबत करने से मन कर di....Nahi ऐसा करना ठीक है जब सुल्तान मुझसे मुहब्बत करते हे नहीं में मोती भद्दी हु बूढी हु तो क्यू मैं उन पर बोझ दू करे ऐयाशिया वो अपने तीनो बीइओ क साथ
भूरिया ये सोचते हुए रोने लग जाती है महीनो से सुल्तान कींतेज़ार में अपने ज़िन्दगी गुज़र रही भूरिया को लग रहा था जैसे उसका सब कुछ छीन गया हो अब उसे सुल्तान से मजबूरन दूरी बनानी पद रही थी
Hooriya:man me)ye कैसा इम्तेहान है में किसी को बता भी नहीं सकती कुछ कर भी नहीं सकती"
भूरिया सुल्तान क गले लगने से और छेड़ छार से गरम हो गयी थी भूरिया कही महीनो से चुदाई नहीं थी और आज सुल्तान से मिल कर उसकी आग भड़क जाती है
भूरिया मन me)Haaye अब क्या करू पहले एक हफ्ते में तो एक बार तो सुल्तान से मेरा मिलाप हो जाता था अब अपने इस आग को कैसे शांत karu,Mere गुस्से होने से मेरा हे नुकसान है सुल्तान तो दुसरो बीइओ से तो मज़े ले हे रहे है हाय ये गंदे ख़यालात में नाहा लेती हु शायद कुछ सुकून मिल जाये
भूरिया उठ कर नहाने चली जाती है फिर एक नया सूट बदलती है और अपने बाल जो लम्बे घने नितम्ब को छू रहे थे उसे सूखने लगती है
भूरिया मन me)haaye ये सूट भी उतना हे कैसा हुआ है मैंने दर्ज़ी से कहा था में जैसा पहनती हु ढीला ढला जिसमे हर अंग छुपे वैसा सिलने फिर भी अब ये शमशेर भी मुझे ऐसे ताड़ता है जैसे खा जायेगा अब पता नहीं उसके दिमाग में क्या चल रहा है पर मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा
तभी दासी की आवाज़ आती है
"मल्लिका जहाँ शहज़ादे शमशेर आये है"
Hooriya:Theek है में आई
भूरिया जा कर दरवाज़ा खोलती है और उसकी चुन्नी जो रेशमी था फिसल कर गिर जाती है
शमशेर अपने माँ को कैसे हुए सूट में देख सोचते है
"वह अम्मी जान आज जान हे लोगी क्या"
Hooriya:man me)Ye शमशेर पागल तो नहीं हो रहा
भूरिया को हल्का गुस्सा आजाता है और वो अपने चुनना को उठती है और शमशेर अब भी अपने माँ को खाने जाने वाली नज़र से देखता रहता है
Hooriya:Kya हुआ
Shamshera:Kya ..क्या हुआ
Hooriya:Bolo कुछ ऐसे हे बूट बने खड़े रहोगे ..क्या काम है
Shamshera:Q में बिना काम क अपनी अम्मी से मिलने नहीं आसक्त हु
Hooriya:aisi बात नहीं वो में अपने बाल सूखा रही थी खुले हे है बांधने हे जा रही थी तुम आगये
Shamshera:Q माँ एक बीटा अपने माँ क बाल देख नहीं सकता आज पहली बार तो इन खूबसूरत ज़ुल्फो को देखा हु
Hooriya:Sultan क अलावा एक तुम हे हो जिसने मेरे ज़ुल्फ़ को देखा है
Shamshera
भूरिया तुनक कर दूर जा कर बैठ जाती है और एक उदास चेहरे से अपने बेटे से खफा होते हुए कहती है
"बीटा तुमने दर्ज़ी से कह कर मेरे कपडे इतने तंग सिल्वा दिए अब मुझे बहुत उलझन होती है इन कपड़ो में"
"अम्मी जान आप को किसने कहा मेरे कहने पैर दरजी खला ने ऐसा क्या"
"सुनो बीटा तुम्हारी माँ हु में मुझे न समझाओ तो बेहतर होगा ये नए ज़माने क कपडे मुझे नहीं पसंद ये बहुत कासी हुई है सब"
"अम्मी जान आप इन लिबास में बहुत ज़्यादा खूबसूरत लग रही हो इतनी खूबसूरत क पारी भी अआप्की खूबसूरती देख जल जाये"
"बास करो तारीफों की पुल्ल हे बंधे जा रहे हो"
Shamshera:ab अम्मी क्या करू जो तारीफ क क़ाबिल हो तारीफ उसी की होती है वैसे आप बहुत चमक रही हो इस सूट में
भूरिया क आखो में टारे दिखने लगते है और वो अपने बेटे क तारीफों को क़ुबूल कर लेती है
hooriya:man me)Ek ये है जो तारीफ कए नहीं रुकता और सुल्तान ने तो मेरे नए लिबास पर गौर तक नहीं क्या ..जब वो मुझपे गौर नहीं करते डिल से तो लिबास के फ़र्क़ उन्हें कहा दिखेगा
Hooriya:Shukria बीटा ..लगता है तुम अब तारीफ करना सीख हे गए हो तो अपने बीवी को खुश रखने में परेशानी नहीं होगी तुम्हे
Shamshera:Me कई दफः कहा मुझे कोई शादी नहीं करनी
Hooriya:q नहीं करनी उम्र जा रही है अब नहीं करोगे तो कब करोगे बताओ कैसी बीवी चाहिए तुम्हे
Shamshera:Jaisi चाहिए मिलेगी नहीं
Hooriya:Bolo हम तुम्हारे लये वैसे हे लाएंगे
Shamshera:Ab क्या कहु ..समझ लीजिये एक पारी हो जो दुन्या क तमाम परिओ से खूबसूरत हो और उसका डिल उस से भी ज़्यादा खूबसूरत
शमशेर अपने माँ को ऊपर से निचे तक एक प्यार भरी अंदाज़ में देखते हुए कहता है
Hooriya:shayar साहब ये बाते किताबो में हे अछि लगती है
Shamshera:man me)Waise मेरे डिल की पारी सिर्फ आप हो अम्मी जाएं
Shamshera:Waise अब्बा जान आपको बुलाये थे बहुत जल्दी आगये
Hooriya:badmash..Wo तो बास ऐसे हे मिलने क लये बुलाये थे
Shamshera:To मैंने तो नहीं कहा कुछ और काम क लये बुलाये थे
भूरिया उठ कर अपने हाथो से धीरे से शमशेर क हाथो पैर मरती है शमशेर साढ़े 6 फिट का ुचा लम्बा जवान था भूरिया 5.9 की थी इसलिए वो पूरी कोशिश की पर शमशेर कर गर्दन तक नहीं पहुंच पाई
Hooriya:chhorungi नहीं
शमशेर अपने आप को और ुचा करते हुए खड़ा हो जाता है
Shamshera:ammi जान शेर क मुँह में हाथ मत डालो बहार नहीं निकल पाओगी फिर
Hooriya:mai भी शेरनी हु ..तुम्हारा मुँह नहीं बचेगा
शमशेर भूरिया का हाथ हटा कर दूर हो रहा था और भूरिया अपने पूरी कोशिश कए जा रही थी
कुछ देर बाद भूरिया थक कर बैठ जाती है और शमशेर हस्ता हुआ
"ठीक है अम्मी जान में जा रहा हु बाजार अगर कहो तो कुछ फल ले आओ बहुत कमज़ोर हो गए हो आप"
Hooriya:Bada आया शेर
शमशेर निकल कर चला जाता है सोचते हुए
"अम्मी जान वह अब्बू की हुजरे में रुकी नहीं इसका मतलब साफ़ है वो अब्बू से दूर जा रही है अब मुझे इसी मौके का फायदा उठाना होगा"
इधर भूरिया थकने क वजह से लेट जाती है
Hooriya:man me)Shamshera कैसे मेरे ग़म को भुला देता है और ख़ुशी में तब्दील कर देता है बास इसकी कुछ आदते ठीक हो जाये तो मेरा बीटा सबसे ाचा सुल्तान बनेगा पारस का और पूरी दुन्या पैर अपनी हुकूमत करेगा
ये सोच कर भूरिया मुस्कुराने लगती है
Hooriya:man me)Bazar कह कर गया है पर जायेगा तो कोठे पर हे पता नहीं इसकी ये आदत कब sudhregi..Shayad एहि वजह है क उसकी नज़र मुझ पर भी ताड़ती रहती है क्यू क वो हमेशा वो नशे की सुरूर में होता है
गहतराष्ट्रा
शाम को पूजा क बाद सब खुश थे राज परिवार इसलिए खुश था क्यू क अब गहतराष्ट्रा का उत्तराधिखारी जो राज्य की सेवा करेगा और गहतराष्ट्रा को आगे बढ़ाएगा उसकी नीव महाराज बलदेव और उनकी पत्नी महारानी देवरानी रख दी थी ,पुरे परिवार क आशीर्वाद और राज्य्वासिओ क स्नेह से महाराज बलदेव अपने राज्य क वंश क लये पूरी तैयारी कर ली थी अब गहतराष्ट्रा का हर मनुष्य अपने महाराज और महारानी पर आस लगाए बैठे थे
बलदेव अपने सेनापति सोमनाथ से कह कर अपने स्नान करने निर्णय करते है
Baldev:Somnath आज हम राजघाट पर स्नान करने जायेंगे
Somnath:Jo आगया महाराज हम दूध से आपके स्नान का प्रबंध कर देते है
Baldev:Theek है जाओ और कमला को भेज दो
राज सिंहासन पर बैठा बलदेव अपने सेनापति को आदेश देते हुए कहता है कुछ देर प्रतीक्षा करने क बाद कमला राज्य सभा में उपस्थित होती है
Kamla:Maharaj की जय हो
Baldev:Aao कमला
Kamla:Maharaj आपने मुझे याद क्या
Baldev:kamla हाँ हम अभी राज घाट पर दूध स्नान करने जा रहे है में चाहता हु क आप महारानी देवरानी क दूध स्नान की व्यवस्था करे
Kamla:ati उत्तम maharaj..Mai अति शुह्रा सब प्रबंध कर dungi..aagya महाराज
Baldev:Jaa सकते हो
कमला चली जाती है और राज सभा से निकल कर महल क मुख्या द्वार में प्रवेश करती है और हर तरफ देवरानी को ढूंढ़ने लगती है तभी रसोई से देवरानी की आवाज़ सुनाई पड़ती है और कमला उस तरफ मुद जाती है
kamla:Maharani आप क्या कर रहे ह
Devrani:Kamla वो महाराज बलदेव का मन पसंद पकवान बनवा रही hu..raadha पनीर की सब्ज़ी भी तैयार करो
Kamla:Maharani आप यहाँ रसोई में काम कर रही है तो महाराज क लये तैयार कौन होगा
Devrani:kya कह रही हो कमला में समझी नहीं
तभी वह षुरूश्ती आजाती है और बीच में बोल पड़ती है
Shurushti:Maharani आप नयी नवेली दुल्हन हो ऊपर से आज से आपके जीवन की नहीं शुरुवात करने है हमारे राज्य क वंसज क लये (मुस्कुराते hue)Khoob म्हणत करनी है महाराज क साथ
Kamla:Han महारानी मुझे महाराज ने काम सौंपा है वो चाहते है क आप आज दूध से स्नान कर क उनके लये तैयार हो जाओ
Devrani:Kamini kamla..har समय तुम्हारे मस्तिष्क में यही घूमता रहता है
Kamla:Maharani जी आपके लाडले बीटा उफ़ आपके पति राज घाट जा रहे थे दूध स्नान करने और हमे आपके स्नान करवाने की ज़िम्मेदारी सौंपी है
Shurushti:Adbhutt विचार है मेरे पुत्र बलदेव का ,दूध से स्नान करना शुभ मन जाता है
अब देवरानी भी समझ गयी थी क कमला कोई मज़ाक नहीं कर रही है
Kamla:Chaliye महारानी आपका काम यहाँ नहीं
Shurushti:aap तो जाइये बहुरानी हमारे बेटे का साथ दीजिये इस राज्य का उत्तराधिकारी हमे दीजिये ,दूधो नहाओगी तो हे पुतो पहलाज
ये सुन देवरानी लज्जा जाती है और उसके छूट में जैसी चींटी रेंग गयी हो अपने सास की बात सुन क
Devrani:Theek है सासु माँ जैसी आपकी मर्ज़ी
Shurushti:Marzi तो ऐसे बोल रही है जैसे खुद मेरे बेटे की संतान नहीं चाहती हो
ये सुन कर तीनो हसने लगते है कुछ देर बाद कमला क साथ देवरानी ऊपर अपने कक्षा में चली जाती है जहाँ स्नान गृह में तैयारी होती है दूध स्नान का
उधर सेनापति सोमनाथ भी राज घाट पर सैनिको को पहरा बढ़ा देता है और सब कुछ प्रबंध कर क वापस लौट ता है महाराज क पास लौट ता है
Somnath:Maharaj चलिए राजघाट पैर तैयारी हो चुकी
Baldev:Avashya सेनापति चलो
सोमनाथ क साथ बलदेव राज घाट जो महल क आगे उद्यान क पास था वह दोनों घोड़ो से बैठ कर पहुंचते है ,वह पहुंच कर बलदेव घोड़े से उतरता है और सेनापति घोड़े को ले कर एक वृक्ष से बाँध देता है कुछ खड़े सैनिक वह पर खड़े महाराज का स्वागत करते है
Sainik:Maharaj की जय हो ..
महाराज की जय हो
घाट जंगल से घिरा हुआ था चारो ओरे से दीवार थे बीचे बड़े बड़े दो नहर निकल रहे थे जो पानी का श्रोत tha.maharaj बलदेव सबसे पहले अपने तलवार को अलग करते हुए रखते है और एक सैनिक दोनों हाथो से तलवार ले लेता है फिर अपने आभूषण को एक एक कर निकलते है फिर अपने वस्त्र निकल कर महाराज एक धोती में हे रह जाते है
Somnath:aaap जा कर स्थान पर बैठ जाये महाराज
Baldev:Theek है सेनापति
बलदेव जा कर सीडीओ से उतारते हुए एक जगह पर बैठ जाता है और फिर सारे सैनिक इकठे हो कर बलदेव क ऊपर दूध की बारिश कर देते है छोटे बाल्टी से दूध को उढेल देते और बालड़ेव अपना आँख बंद कए नाहा रहा था
थोड़ी देर बाद नाहा कर बलदेव फिर से वस्त्र धारण करता है और वापस अपने सेनापति और सैनिको क साथ महल की ओरे अपने घोड़े पे बैठ कर आने लगता है
उधर कमला देवरानी को ले कर उसके कक्षा में जाती है और उसे दूध से नहलाती है फिर थोड़ी देर बाद देवरानी तैयार हो जाती है
Kamla:ati सुन्दर लग रही हो महारानी मुझे लगता है महाराज आप की सुंदरता देख कही आज हे खता न खोल दे
Devrani:dhatt..besharam मई भी तो यही चाहती हु क मेरे गॉड में जल्द से जल्द किलकरिअ गूंजे हमारे प्रेम की
Kamla:bass आप ऐसे हे महाराज बलदेव को खुश रखते रहिये बहुत जल्द हमे खुशखबरी सुनने को मिल जाएगी
Devrani:ab तू जा kamla..or हाँ मेरे सैय्या बीटा को भेज देना
Kamla:avashya महारानी और हाँ अब वो जड़ी बूटी भूल कर भी न खाना जिसे से गर्भ नहीं रुकता
Devrani:Mujhe पागल समझी हो जाओ अब
Devrani:man me)Meri कोख मेरे बेटे की बीज अपने अंदर लेने क लये तड़प रही है
Kamla:man me)bhut खुजली है तुझे महारानी अपने बेटे से छुड़वाने की अब तो उसका बीज को बोयेगी और बचा बी जानेगी छिनाल है पक्की
कमला निचे चली जाती है कुछ देर में सब भोजन करने बैठ जाते है पर बलदेव का अब तक कोई अत पता नहीं था
राजपाल क साथ देवराज बद्री और श्याम बैठे रात का भोजन कर रहे थे और पास कड़ी षुरूश्ती सबको भोजन पड़ोस रही थी
Devraj:Rajpal जी अब मैंने मन बना लय है क अब मुझे कुबेरी वापस लौट जाना चाहिए
Rajpal
Devraj:Bass अब सुल्तान मेरे वाहिद का फरमान है मुझे वह रहना है और कुबेरी को एक ाचा राज्य बनाना है राजा रतन सिंह ने कुबेरी को नरक बना दया था
Rajpal:Ishwar आपके हर ीचा पूरी करे
Badri:Maharaj आपकी आज्ञा हो तो हम भी अपने अपने राज्य लौट जाये
Shyam:Han महाराज हमारा परिवार हमारी प्रतीक्षा कर रहे होंगे
Shurushti:ary बच्चो इतनी जल्दी क्या वैसे भी तुम्हे कौन सा जा कर अपने राज्य को संभालना है
तभी बलदेव वह पहुंच जाता है और सबकी बाते सुन कर
Baldev:Kiske राज्य सँभालने की बात चल रही है
राजपाल सहित सब अपने आसान से उठ खड़े होते है
rajpal:aaiye महाराज
Baldev:baith जाइये आप सब ..पिता जी ये सब की कोई ास्वश्यक्ता नहीं आप सब हमे ह्रदय से से सम्मान करे बास इतना छटा हु
Shurushti:Beta बलदेव ये तुम्हारे नए साला साहब तो जाना हे चाहते है और साथ हे ये दोनों युवराज भी अपने राज्य लौटना चाहते है
Baldev:Q साले साहब अपने बहिन क ससुराल आपका मन नहीं लगता कोई कमी तो नहीं हो रही हमारी ओरे से
देवराज सर झुकाये बैठा था एक बार वो राजपाल को देखता है दोनों असमंजस क स्थिति में थे
Devraj:Wo महाराज बलदेव जी कोई कमी तो नहीं आपके ओरे से पर कुबेरी पहुंच कर एक नए राष्ट्र की नीव रखनी है
Devraj:man me)Kabhi मां जी कहता था आज साला कह रहा है
Baldev:achi सोच है ..उस ऐय्याश रतन सिंह क राज्य में शांति बानी रहेगी इस पर संदेह है मुझे और रही मेरे मित्रो की बात की बात तो वो जा सकते है
Devraj:To राजपाल जी कल हे हम निकल जायेंगे
Baldev:saale साहब हमने ने आपको जाने की आज्ञा नहीं दी आप अपने बहिन देवरानी से अनुमति ले लीजिये पहले
Devraj:jaisa आप कहे
Rajpal:aao भोजन करो खड़े हे रहोगे बीटा
Badri:han आओ भोजन करो
Shurushti:aap सब रहने दीजिये ..बीटा बलदेव जाओ बहु देवरानी तुम्हारी प्रतीक्षा में है
बलदेव दो कदम चलते हुए आगे बढ़ता है फिर पीछे मुद कर सबको एक टाक देखते हुए
"हमारा भोजन ऊपर होगा"
तो बे कॉन्टिनोएड..