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पारस
Shamshera:man me)aaaj रात मुझे होशियार रहना होगा अगर साजिश करने वाले महल क है तो ये भी हो सकता है अब्बा जान पर हमला kare..un लोगो की बातो से ये लगता है जैसे हमला की आखिरी तैयारी में हो और मुझे लगता है वो हमला कभी भी कर सकते है
शमशेर अपने तलवार पास रखा उठा लेता है और उसको मियां से खींच कर अपने तलवार की धार पर हाथ लगते हुए
Shamshera:Un लूटेरो को में इसी तलवार से मौत का मज़ा चखाउंगा और किसी भी तरह महल में साजिश करने वाले का पर्दाफाश करूँगा उस चीनी लूटेरा शुंग को पकड़ क
रात भर्र शमशेर कच्ची नींद में सोता है और सुबह सवेरे उठ कर तैयार होता है और महल का जायज़ा लेने लगता है महल क हर शक्श पर नज़र टिकाये सबकी गतिविधिओ पर पैनी नज़र रखता है महल क चारो ओरे घूम कर कोने कोने की तलाशी लेने क बाद हर सिपाहीओं को मुश्तैद रखने क लये कहता है
उधर सुल्तान मेरे वाहिद सो कर उठ ते है और तैयार हो कर रोज़ की तरह बगीचे में टहलने क लये निकलते है सुल्तान अपने हुजरे से निकल कर महल क बहार जा हे रहे थे क रास्ते में उन्हें भूरिया कही जाते हुए दिखती है
Sultan:Mallika इ जहाँ...
भूरिया पलट कर देखती है और सुल्तान को पाकर उनके पास आकर कड़ी होती है
hooriya:Subah खैर सुल्तान
Sultan:subah खैर मल्लिका जहाँ आज इतनी सवेरे आप कहा जा रही है
Hooriya:Ji वो मई महनूर को सुबह सुबह उठ कर पद्धति हु तो वही रज़िया क हुजरे में जा रही थी
Sultan:Wah भूरिया आप अपने सौतन की बेटी क लये इतनी म्हणत कर रही हो इतना तो कोई औरत नहीं क्र सकती इसलिए तुम्हारे जैसी नेक कोई नहीं
Hooriya:Sultan आपकी औलाद मेरी भी औलाद है वैसे भी महनूर और समां दोनों मुझे अपनी माँ से बढ़कर मानती है
Sultan:waise आज कल आप हमसे मिलना भूल गयी हु आपके वादा का क्या हुआ
Hooriya:wo..wo सुल्तान आप तो जानते है अब इस उम्र में सब हिसाब उल्टा हो जाता है में मजबूर हु नहीं तो में बहुत तदपि हु आपके लिए
Sultan:theek है तो चलो आज साथ टहल आते है
Hooriya:kaha जा रहे है आप टहलने
Sultan:bass बगीचे क तरफ से वैसे भी इतना तो हक़ बनता हे है हमारा अपनी बीवी पर
भूरिया हस्ते हुए कहती है
"ठीक है सुल्तान चलिए "
भूरिया और सुल्तान बात करते हुए महल क बहार निकलते है दोनों देखते है सामने शमशेर सिपाहीओं से कुछ बात चीत कर रहा है सुल्तान और भूरिया आगे बढ़ते है जैसे हे शमशेर का नज़र पड़ता है
अपने माँ बाप पर
Shamshera:jao सिपाही और जो बताया है उस पर अमल करना
शमशेर अपने माँ क नज़दीक आकर
Shamshera:Subah खैर अम्मी जान अब्बू जान
Sultan:Subah खैर मेरे शेर
भूरिया शमशेर को बिना बोले अपना चेहरा घुमा लेती है जिसे देख शमशेर का मुँह उतर जाता है
Hooriya:chaliye सुल्तान बगीचे की ओरे टहल लेते है
सुल्तान अपने बेटे को देखता है शमशेर अपने दोनों आखो से हाँ कहता है और सुल्तान समझ जाता है क वो अपने बेटे क निगरानी में सुरक्षित है
sultan:chaliye मल्लिका जहाँ
सुल्तान और भूरिया बगीचे की ओरे धीरे धीरे जाने लगते है और शमशेर खड़ा अपने माँ बाप को जाते हुए देख रहा था
Sultan:hamara बीटा कितना बड़ा हो गया देखते हे देखते
Hooriya:man me)Han इतना बड़ा क वो अब आपकी बीवी को हे आपसे छीन न चाहता है
भूरिया पीछे मुड़ती है तो देखती है शमशेर भी उनके पीछे धीरे चलते हुए आरहा था
भूरिया की नज़र जैसे हे शमशेर से मिलती है शमशेर उसे प्यार भरी निगाहो से देखता है और भूरिया सेहम कर वापस आगे देखते हुए
hooriya:Han सुल्तान आपका बीटा बहुत बड़ा हो गया है
Hooriya:man me)Kaise जलन हो रही है शमशेर को जैसे मई उसकी अम्मी नहीं उसकी मेहबूबा हु
भूरिया सुल्तान का हाथ अपने हाथ से पकड़ लेती है और मुस्कुराती हुई एक बार फिर मुद कर पीछे देखती है इस बार तो शमशेर का उतरा हुआ चेहरा देख कर भूरिया की हसी छूट जाती है
Shamshera:man me)Bhut दर्द दे रही हो अम्मी जान अपने आशिके को ु तड़पा कर आपको मज़ा आरहा है
शमशेर अब छुप छुप क अपने माँ बाप क पीछे चल रहा था
Hooriya:ab आप का जख्म कैसा है सुल्तान
सुल्तान रुक जाता है और भूरिया क तरफ मुँह कर क
Sultan:ab ठीक है
तभी सुल्तान की नज़र ऊपर एक विशाल वृक्ष पर पड़ती है सामने एक पेड़ पर एक सिपाही अपने धनुष ताने बैठा था जैसे हे उसकी नज़र सुल्तान से मिलती है
sultan:Sipaahio यहाँ घुशपैठिये है
सुल्तान ऊपर देखते हुए भागने लगता है और ऊपर से चीनी लूटेरे जो इंतज़ार में थे सुल्तान क वो तीरो की बारिश कर देते है सुल्तान चिल्लाते हुए भागता है
और शमशेर भी उसी वक़्त अपनी तलवार निकले भागता है शमशेर देखता है उसके अब्बा दौर कर एक पत्थर क पीछे जा छुपे थे और भूरिया वही बेच में अचानक हमले से कड़ी हो गयी थी शमशेर भागते हुए आटा है और अपने अम्मी को अपने बाहो क घेरे में ले लेता है तीरंदाज़ तीर चलना नहीं छोड़ते
Sultan:bhaaaaago भूरिया अपने आप को छुपाओ
तभी शमशेर जो अपने माँ भूरिया को बाहो में लिए अपने तलवार से तीरो को अपने से दूर और इधर से उधर बचने की कोशिश कर रहा था पीच क वृक्ष से कुछ तीरंदाज शमशेर क पीठ पर दो तीर मार देते है जो सीधा शमशेर क पीठ में घुसता है
shamshera:aaaaaaaaaaaaaaaah
Hooriya:naheeeeee
भूरिया अपने कमर क पास से चाकू निकल कर उस तीरंदाज क ऊपर फेकती है और उसके सीने में घुसते हे वो पेड़ से गिर जाता है शमशेर धीरे धीरे अपनी माँ का ढल बना हुआ पठार की ओरे बढ़ रहा था shamshera:ammi अआप मेरे पीछे आओ सिपाहो कहा मर्डर गए ..
शमशेर अपनी अम्मी को अपने पीछे लेता है तभी सामने से शमशेर क सीने में दो तीर आए कर लगता है
Hooriya:naheeee नाहीये
भूरिया चिल्ला कर रोने लगती है
शमशेर अब तक भूरिया को एक बड़े पठार क पीछे ले अत है और उसे बैठा देता है
Shamshera:ammi आप यही रहिये
वो तीरंदाज़ अब तक पेड़ से उतर चुके थे और सुल्तान जो क निहत्ता था उसके ओरे जाने लगते है
Hooriya:naheeee बीटा तुम मत जाओ तुम बहुत घायल हो नही
Shamshera:ammi जाएं वो अब्बा जान को मार देंगे छोरो मुझे
शमशेर हाथ झटक कर अपने तलवार बहार निकलता है और उन सब में से एक को अपने खंजर फेक क्र मारता है
Shamshera
ehle मुझ से तो सामना करो नामर्दो
शमशेर छह रहा था क कैसे भी कर क सुल्तान क ऊपर से उनका ध्यान हेट
शमशेर की बात सुन कर वो सब हसने लगते है और उनमे से कुछ अपनी तलवार निकले शमशेर क ऊपर हमला करते है शमशेर जिसके बदन में अभी चार तीर लगी हुई थी फिर भी वो उनसे लड़ने लगता है और अपने तलवारबाज़ी से तीनो को मार देता है तभी पारसी सैनिक आजाते है और शमशेर का साथ देने लगते है सुल्तान को शमशेर अपना तलवार देता है
"ये लीजिये अब्बा जान "
ये कह कर शमशेर गिर जाता है
भूरिया जो बड़े पठार क पीछे से सब देख रही थी शमशेर क गिरते हे भाग कर आती है
Hooriya:shamshera उठो बीटा ..तुम्हे कुछ नहीं हो सकता
Shamshera:ammi जाएं
शमशेर अपनी हलकी आखो को खोलते हुए
Hooriya:han मेरे लाल ..तुम क्यू मेरी जान बचने क लये खुद की जान जोखिम में दाल दिए क्यू मेरे बेटे
Shamshera:ammi जान मई आप से तहे डिल से मुहब्बत करता हु में मर कर भी आपो हे याद करूँगा
ये कह कर शमशेर अपनी आखे बंद कर लेता है
Hooriya:Naheeee मेरा मेरा बचा कोई मेरे बेटे को उठाओ
ज़ोर से रट हुए भूरिया चिल्ला रही थी
सुल्तान अब भी दुश्मनो से मुक़ाबला कर रहा था
Hoooriya:sultaaan कोई मेरे बचे को बचाओ
तभी एक पारसी सिपाही कहता है
"सुल्तान आप जाइये शहज़ादे को ले कर महल वो घायल है हम देख लेंगे इनको"
सुल्तान शमशेर क पास आता है शमशेर दर्द क मारे कहर रहा था सुल्तान और एक सैनिक मिल कर शमशेर को महल की ओरे ले जाते है महल क पास जा कर सुल्तान और सिपाहीओं को हमले की जगह मदद क लिए भेजता है
Sultan:hakeem को बुलाओ
हकीम साहब बहार आते है
हकीम:4 तीर लगे है इनको जल्दी से शिफा खाने ले चलिए
Hooriya:hakeem साहब मेरा बीटा उसे कुछ नहीं होना चाहिए
रट हुए चिल्लाते है
Hakeem:mallika अब दवा कीजिये हालत बहुत नाज़ुक है
शमशेर को उठा कर शिफ़ाकहना में ले जा कर लिटा दया जाता है और हकीम तीरो को शमशेर क बदन से निकलने लगते है
गुल शाह हंगामा सुन कर बहार आता है और वो खुश होते हुए
Gulshah:man me)lagta है सुल्तान का काम तमाम हो गया
गुल शाह बहार आता है तो देखता है क भूरिया रो रही है शफाखाने क सामने
गुल shah:Man me)Hooriya बेगम आप को रोने की ज़रूरत नहीं आपके संगमरमरी बदन की प्यास में बुझाया करूँगा सुल्तान से ज़्यादा प्यार करूँगा
गुल शाह भूरिया क पास आटा है और भूरिया को देख अपने आखो में ासु लाते हुए
गुल shah:bhabi जान किसने हमला क्या आखिर किसकी दुश्मनी थी सुल्तान से
भूरिया गुल शाह को देखते है रट हुए
गुल शाह अपने भाबी भूरिया क सर को अपने सीने में लगा लेता है
गुल shah:mar रोइये भाबी जान ये वक़्त रोने का नहीं है
तभी सामने क शिफ़ाख़ाना से सुल्तान बहार निकलता है जिसे देख कर गुल शाह क आखे बड़ी हो जाती है
गुल shah:man me)Ye तो सही सलामत है ये कैसे मुमकिन है फिर भूरिया रो क्यू रही है
गुल शाह अपने भाई को देख अपने भाबी से दूर होते हुए
Gulshah:bhabi क्या हुआ आप रो क्यू रही है इतना
Hooriya:wo अंदर मेरा बीटा
फिर रोने लगती है
Gulshah:man me)to ये शमशेर ने सब पर पानी फेर दया चलो बाप नहीं तो बीटा सही
तभी सुल्तान गुल शाह क सामने आजाता है
गुल shah:Bhaijaan ये कैसे हुआ इतनी सवेरे कैसे हमला हुआ
Sultan:hamlawar कभी बोल क नहीं आते
तभी एक सिपाही आता है
Sipaahi:Sultan हमने सब हमलावर को मार गिराए और उनकी पहचान भी हो गयी है वो चीनी है
Sultan:theek है तुम जाओ
गुल shah:bhai जान ये चीनी हम पर क्यू हमला करना चाहते थे
Sultan:Hum पर नहीं उनका निशाना में था गुल शाह
Sultan:Hooriya चलिए आप अंदर बैठए रोना बंद करें
Hooriya:nahi पर वो शमशेर ..
Sultan:use कुछ नहीं होगा शेरा है शमशेर
सुल्तान भूरिया को ले कर अपने हुजरे में जाता है
Sultan:aap रोना बंद कीजिये मल्लिका इ जहाँ
Hooriya:mera बीटा मेरी वजह से मौत क मुँह में है ये सब मेरी गलती है
फिर रोने लगती है
तभी वह Naaz,Razia,muskan तीनो सुल्तान की बीवीए और समां और महनूर दोनों बेश्या भी आजाती है
Naaz:Baaji चुप करें आप का हे बीटा नहीं शमशेर हमारा बीटा भी है
Razia:han बाजी बिलकुल ठीक कह रही है
Hooriya:naaz रैज़ा ये सब मेरी गलती की वजह से हुआ
सुल्तान वह से उठ कर बहार आजाते है
Sama:Badi अम्मी भाईजान को कुछ नहीं होगा आप रोना बंद करें
तभी अफसाना खातून आजाती है और अपने बहु को अपने गले से लगते हुए
Afsana
ota हमारा शेर है तीर की क्या मज़ाल जो उसे मार दे बास अब होश में आओ
Afsana:Mahnoor गिलास में पानी लाओ
महनूर पानी देती है और अफसाना अपने हाथो से पानी पिलाती है भूरिया को
उधर सुल्तान शिफखाने क तरफ जाते है तो सामने उनके पिता सुल्तान दास्ताँ खड़े थे साथ हे शहज़ादे शान और गुल शाह
Shaan:abba जान ये कैसे हुआ
सुल्तान अपने हाथ उठा कर
"bass..tum कहा थे सो रहे थे शान"
शान चुप हे रहना बेहतर समझता है
Dastan:ye चीनी लूटेरे हमारे महल में कैसे घुस सकते है
Sultan:abba जान आप हमारे साथ आइये
सुल्तान अपने पिता क साथ थोड़ी दुरी पर जाते है गुल शाह और शान से
Sultan:Abba जान इन मामूली लूटेरो में इतनी हिम्मत और समझ बुझ नहीं क हमारे महल तक पहुंच सके
Dastan:beta तुम कहना क्या छह रहे हो
Sultan:Inki मदद करने वाला कोई हमारा अपना है जिन्होंने महल में आने का रास्ता बताया
dastan:kya..
सुल्तान दास्ताँ का मुँह खुला का खुला रह जाता है
गुल शाह अपने बाप और भाई को हे देख रहा था
गुलशाह मन me)Lagta है सुल्तान को शक हो गया है क ये हमला किसी की मदद से हुआ है
Gulshah:Shaan तुम यही रहो में ज़रा उन हमलावर को देख कर छान बीन करता हु
Shaan:Ji चाचा जाएं
गुल शाह महल क बहार निकलता है और एक सिपाही को भेज कर छान पाशा को बुलवाता है
गुल शाह बगीचे की ओरे जाता है और हमलावरों की लाश को देखते हुए पलट पलट कर सबको देखता है
गुल shah:shungu नहीं है इसमें
तभी छान पाशा आता है
गुल shah:zara इधर आओ छान पाशा
छान पाशा को एक तरफ ले कर जाता है और एक थप्पड़ छान पाशा क गाल पर रख देता है
गुल shah:Ye क्या बेवकूफी है छान पाशा कैसे एक छोटा सा काम तुम नहीं कर सकते
छान pasha:Ustaad वो
गुल shah:chup एक डैम तुम्हे पता है सुल्तान को शक हो गया है
छान pasha:Ustaad मैंने तो हमेशा सुल्तान को अकेले टहलते देखा था सुबह इसलिए
गुल shah:ye कैसे मुमकिन है फिर क आज शमशेर भी इतनी सुबह आगया जो कभी दुपहर से पहले नहीं उठ ता
छान pasha:Ustaad अब हम क्या करे
गुल shah:tum शुंग से मिलो और उसे कहो अब कोई हमला न करे और कुछ दिन तक पारस में किसी को दिखाई नहीं दे और न पारस छोर क जाये
छान pasha:kya शुंग नहीं था इन सब में
गुल shah:nahi शुंग नहीं था मैंने लाशो को देखा हु
छान पाशा वह से चला जाता है
इधर शिफ़ाख़ाना में शमशेर लेता था और हकीम इलाज कर रहा था कुछ तीन घंटो बाद शमशेर की आँख खुलती है जिसे देख हकीम खुश होता है
Hakeem:Suno शहज़ादे क लिए इन जड़ी बूटीओ को पीस कर दवा बना कर पिलाओ
हकीम क साथी अपने म्हणत से ज़हर की काट क लये दवा बना कर शमशेर क पास लेट है
शमशेर अपने आखे धीरे से खोलता है तो हकीम और उनके साथी से घिरा पता है
hakeem:ab आप ठीक हो जायेंगे शहज़ादे ..लाओ वो दवा में पीला देता हु
Shamshera:Hakeem..Mujhe नहीं पीना दवा
Hakeema:shehzade ये आपके जिस्म में ज़हर नहीं फैलने देगा
shamshera:Mujhe नहीं पीना पहले मुझे अम्मी जान से मिलना है अकेले में
हकीम अपने साथिओ क साथ बहार आता है और सामने सुल्तान को देख
Hakeem:mallika जहाँ कहा है
Sultan:shaan जाओ अपनी बड़ी अम्मी को बुलाओ
उधर हुजरे में भूरिया अब शांत हो चुकी थी पर अब भी उसके आखो से ासु टपक रहे थे
Hooriya:man me)Kaise शमशेर बेहोश होने से पहले तक मुझे कहता रहा क वो मुझसे मुहब्बत करता है ...क्या सच में वो बेपनाह मुझसे मुहब्बत करने लगा है एक औरत की तरह मुझे मुहब्बत करता hai..kya यही वजह है क उसने अपने सीने में तीर खा लिए मेरी जान बचने क lye..ye क्या पागलपन है शमशेर
तभी शान की आवाज़ आती है
Shaan:Shamshera को होश आगया है और वो आपसे मिलना चाहता है बड़ी अम्मी
भूरिया अपने हाथो से ासु पोछते हुए कड़ी होती है और बेबाक अपने हुजरे से निकल कर दौड़ने लगती है पीछे से रज़िया और नाज़ भी आने लगते है
भूरिया बहार आती है देखती है सुल्तान और हकीम बात कर रहे थे
Hooriya:hakeem साहब कैसा है मेरा बीटा
रट हुए सिसकते हुए कहती है
Hakeem:Mallika जहाँ उनको होश तो आज्ञा है पर उनके जिस्म में ज़हर फ़ैल गया है और उनके ज़ख्म भी गहरे है अभी हम कुछ कह नहीं सकते
Hooriya:kya कह रहे हो तुम हकीम मेरे बेटे को कुछ नहीं हो सकता
Hakeem:hum पूरी कोशिश करेंगे मल्लिका अभी हम उन्हें दवा पिलाने की कोशिश क्र रहे है पर वो नहीं पी रहे है और ज़िद्द क्र रहे है क आपसे मिलना है
भूरिया हकीम क चेहरे पर देखती है और बेसुध हे शिफा खाने में घुस जाती है
Hakeem:aap सब नहीं जाये शहज़ादे अकेले में बात करना चाहते है
सब बहार हे रुक जाते है
भूरिया अंदर जाती है तो शमशेर क जख्मो पर पट्टी बंधी थी और वो लेता था
भूरिया शमशेर क पास जा कर कड़ी होती है और शमशेर को देखते हुए
Hooriya:man me)aaakhir क्यू अपने जान में जोखिम में दाल डाई तुम चल जाने देते मेरे सीने में तीर क्यू अपना सीना छल्ली कर लये तुम शमशेर ..तुम नहीं जानते मेरा तुम्हारे सिवा कोई नहीं अगर तुम्हे कुछ हो जायेगा तो में किसके भरोसे जीऊँगी
Hooriya:shamshera ..
थूक गटकते हुए अपने बेटे को पुकारती है शमशेर धीरे अपने आधी आँख खोल कर अपने अम्मी को देखता है
भूरिया अपने बेटे क पास जा कर अपने बेटे का हाथ अपने हाथ में ले कर
Hooriya:kya हुआ मेरे बचे तुम दवा खा लो तुम बिलकुल ठीक हो जाओगे मेरे लाल मेरे शहज़ादे
Shamshera:am अम्मी..
Hooriya:han बोलो मेरी जान कहो न सुन रही है तुम्हारी अम्मी
Shamshera:ammi में दवा नहीं पीऊंगा मुझे मर जाना हे बेहतर
भूरिया आखो में ासु लिए रट हुए
Hooria:aakhir ऐसा क्यू कह रहे हो
Shamshera:ammi जान जब आप मुझे और मेरी मुहब्बत को हवस का नाम देती है तो मुझे लगता है मेरा जी कर कोई फायदा नहीं
Hooriya:tum कहना क्या चाहते हो
Shamshera:aap मेरी मुहब्बत को हवस न समझो बास और मेरी मुहब्बत को सच्ची मोहब्बत मानो ये बात क़ुबूल करो में दवा खा लूंगा
भूरिया रट हुए अपने बेटे का हाथ अपने हाथ में लेते हुए
Hooriya:Me क़ुबूल करती हु क मेरे बेटे का मुहब्बत हवस नहीं तुम्हारी मुहब्बत सच्ची मुहब्बत है
शमशेर अपने अम्मी को देखता है और हल्का मुस्कुराता है और उसकी आखे बंद होने लगती है
Hooriya:hakeeeeeeeem साहाआआआअब
हकीम और उनके साथी दौड़ कर अंदर आते है
Hooriya:'dekhiye ये आखे बंद कर रहा है अपनी ..
रट हुए कहती है
hakeem:wo दवाई दो मुझे
हमीम शमशेर क सर को हाथो में लिए
Hakeem:ab तो पी जाइये शहज़ादे
शमशेर अपने लैब खोलता है और हकीम वो दवाई पीला देता है
शमशेर फिर से बेहोश हो जाता है
Hooriya:ye क्या हो रहा है हकीम साहब
Hakeem:fiqr मत कीजिये बेहोश हुए है थोड़ी देर में होश आजायेगा दवाई का असर जैसे होगा
भूरिया चैन का सास लेती है और बहार आती है
हकीम भी बहार आता है सबको बताता है क अब शमशेर खतरे से बहार है पर अभी भी उनके ऊपर ध्यान देने की ज़रूरत है
dastan:Theek है बच्चो अब तुम सब जाओ और कुछ खा लो मई यही पर हु
Hooriya:abba जान आप जाये में रूकती हु
Sultan:theek है आप दोनों हे रुक जाये हम सब चलते hai..aap लोग जाइये Naaz..razia और मुस्कान शान इन्हे ले जाओ
सब अपने अपने हुजरे में चले जाते है भूरिया और सुल्तान दास्ताँ शफाखाने क सामने रुकते है
Sultan:man me)Ye गुल शाह कहा है ?
Sultan:aap दोनों यही रहे में आता हु
ये कह कर सुल्तान महल से बहार निकलता है और इधर उधर गुल शाह को देखने लगता है
तो बे कॉन्टिनोएड...
पारस
Shamshera:man me)aaaj रात मुझे होशियार रहना होगा अगर साजिश करने वाले महल क है तो ये भी हो सकता है अब्बा जान पर हमला kare..un लोगो की बातो से ये लगता है जैसे हमला की आखिरी तैयारी में हो और मुझे लगता है वो हमला कभी भी कर सकते है
शमशेर अपने तलवार पास रखा उठा लेता है और उसको मियां से खींच कर अपने तलवार की धार पर हाथ लगते हुए
Shamshera:Un लूटेरो को में इसी तलवार से मौत का मज़ा चखाउंगा और किसी भी तरह महल में साजिश करने वाले का पर्दाफाश करूँगा उस चीनी लूटेरा शुंग को पकड़ क
रात भर्र शमशेर कच्ची नींद में सोता है और सुबह सवेरे उठ कर तैयार होता है और महल का जायज़ा लेने लगता है महल क हर शक्श पर नज़र टिकाये सबकी गतिविधिओ पर पैनी नज़र रखता है महल क चारो ओरे घूम कर कोने कोने की तलाशी लेने क बाद हर सिपाहीओं को मुश्तैद रखने क लये कहता है
उधर सुल्तान मेरे वाहिद सो कर उठ ते है और तैयार हो कर रोज़ की तरह बगीचे में टहलने क लये निकलते है सुल्तान अपने हुजरे से निकल कर महल क बहार जा हे रहे थे क रास्ते में उन्हें भूरिया कही जाते हुए दिखती है
Sultan:Mallika इ जहाँ...
भूरिया पलट कर देखती है और सुल्तान को पाकर उनके पास आकर कड़ी होती है
hooriya:Subah खैर सुल्तान
Sultan:subah खैर मल्लिका जहाँ आज इतनी सवेरे आप कहा जा रही है
Hooriya:Ji वो मई महनूर को सुबह सुबह उठ कर पद्धति हु तो वही रज़िया क हुजरे में जा रही थी
Sultan:Wah भूरिया आप अपने सौतन की बेटी क लये इतनी म्हणत कर रही हो इतना तो कोई औरत नहीं क्र सकती इसलिए तुम्हारे जैसी नेक कोई नहीं
Hooriya:Sultan आपकी औलाद मेरी भी औलाद है वैसे भी महनूर और समां दोनों मुझे अपनी माँ से बढ़कर मानती है
Sultan:waise आज कल आप हमसे मिलना भूल गयी हु आपके वादा का क्या हुआ
Hooriya:wo..wo सुल्तान आप तो जानते है अब इस उम्र में सब हिसाब उल्टा हो जाता है में मजबूर हु नहीं तो में बहुत तदपि हु आपके लिए
Sultan:theek है तो चलो आज साथ टहल आते है
Hooriya:kaha जा रहे है आप टहलने
Sultan:bass बगीचे क तरफ से वैसे भी इतना तो हक़ बनता हे है हमारा अपनी बीवी पर
भूरिया हस्ते हुए कहती है
"ठीक है सुल्तान चलिए "
भूरिया और सुल्तान बात करते हुए महल क बहार निकलते है दोनों देखते है सामने शमशेर सिपाहीओं से कुछ बात चीत कर रहा है सुल्तान और भूरिया आगे बढ़ते है जैसे हे शमशेर का नज़र पड़ता है
अपने माँ बाप पर
Shamshera:jao सिपाही और जो बताया है उस पर अमल करना
शमशेर अपने माँ क नज़दीक आकर
Shamshera:Subah खैर अम्मी जान अब्बू जान
Sultan:Subah खैर मेरे शेर
भूरिया शमशेर को बिना बोले अपना चेहरा घुमा लेती है जिसे देख शमशेर का मुँह उतर जाता है
Hooriya:chaliye सुल्तान बगीचे की ओरे टहल लेते है
सुल्तान अपने बेटे को देखता है शमशेर अपने दोनों आखो से हाँ कहता है और सुल्तान समझ जाता है क वो अपने बेटे क निगरानी में सुरक्षित है
sultan:chaliye मल्लिका जहाँ
सुल्तान और भूरिया बगीचे की ओरे धीरे धीरे जाने लगते है और शमशेर खड़ा अपने माँ बाप को जाते हुए देख रहा था
Sultan:hamara बीटा कितना बड़ा हो गया देखते हे देखते
Hooriya:man me)Han इतना बड़ा क वो अब आपकी बीवी को हे आपसे छीन न चाहता है
भूरिया पीछे मुड़ती है तो देखती है शमशेर भी उनके पीछे धीरे चलते हुए आरहा था
भूरिया की नज़र जैसे हे शमशेर से मिलती है शमशेर उसे प्यार भरी निगाहो से देखता है और भूरिया सेहम कर वापस आगे देखते हुए
hooriya:Han सुल्तान आपका बीटा बहुत बड़ा हो गया है
Hooriya:man me)Kaise जलन हो रही है शमशेर को जैसे मई उसकी अम्मी नहीं उसकी मेहबूबा हु
भूरिया सुल्तान का हाथ अपने हाथ से पकड़ लेती है और मुस्कुराती हुई एक बार फिर मुद कर पीछे देखती है इस बार तो शमशेर का उतरा हुआ चेहरा देख कर भूरिया की हसी छूट जाती है
Shamshera:man me)Bhut दर्द दे रही हो अम्मी जान अपने आशिके को ु तड़पा कर आपको मज़ा आरहा है
शमशेर अब छुप छुप क अपने माँ बाप क पीछे चल रहा था
Hooriya:ab आप का जख्म कैसा है सुल्तान
सुल्तान रुक जाता है और भूरिया क तरफ मुँह कर क
Sultan:ab ठीक है
तभी सुल्तान की नज़र ऊपर एक विशाल वृक्ष पर पड़ती है सामने एक पेड़ पर एक सिपाही अपने धनुष ताने बैठा था जैसे हे उसकी नज़र सुल्तान से मिलती है
sultan:Sipaahio यहाँ घुशपैठिये है
सुल्तान ऊपर देखते हुए भागने लगता है और ऊपर से चीनी लूटेरे जो इंतज़ार में थे सुल्तान क वो तीरो की बारिश कर देते है सुल्तान चिल्लाते हुए भागता है
और शमशेर भी उसी वक़्त अपनी तलवार निकले भागता है शमशेर देखता है उसके अब्बा दौर कर एक पत्थर क पीछे जा छुपे थे और भूरिया वही बेच में अचानक हमले से कड़ी हो गयी थी शमशेर भागते हुए आटा है और अपने अम्मी को अपने बाहो क घेरे में ले लेता है तीरंदाज़ तीर चलना नहीं छोड़ते
Sultan:bhaaaaago भूरिया अपने आप को छुपाओ
तभी शमशेर जो अपने माँ भूरिया को बाहो में लिए अपने तलवार से तीरो को अपने से दूर और इधर से उधर बचने की कोशिश कर रहा था पीच क वृक्ष से कुछ तीरंदाज शमशेर क पीठ पर दो तीर मार देते है जो सीधा शमशेर क पीठ में घुसता है
shamshera:aaaaaaaaaaaaaaaah
Hooriya:naheeeeee
भूरिया अपने कमर क पास से चाकू निकल कर उस तीरंदाज क ऊपर फेकती है और उसके सीने में घुसते हे वो पेड़ से गिर जाता है शमशेर धीरे धीरे अपनी माँ का ढल बना हुआ पठार की ओरे बढ़ रहा था shamshera:ammi अआप मेरे पीछे आओ सिपाहो कहा मर्डर गए ..
शमशेर अपनी अम्मी को अपने पीछे लेता है तभी सामने से शमशेर क सीने में दो तीर आए कर लगता है
Hooriya:naheeee नाहीये
भूरिया चिल्ला कर रोने लगती है
शमशेर अब तक भूरिया को एक बड़े पठार क पीछे ले अत है और उसे बैठा देता है
Shamshera:ammi आप यही रहिये
वो तीरंदाज़ अब तक पेड़ से उतर चुके थे और सुल्तान जो क निहत्ता था उसके ओरे जाने लगते है
Hooriya:naheeee बीटा तुम मत जाओ तुम बहुत घायल हो नही
Shamshera:ammi जाएं वो अब्बा जान को मार देंगे छोरो मुझे
शमशेर हाथ झटक कर अपने तलवार बहार निकलता है और उन सब में से एक को अपने खंजर फेक क्र मारता है
Shamshera
शमशेर छह रहा था क कैसे भी कर क सुल्तान क ऊपर से उनका ध्यान हेट
शमशेर की बात सुन कर वो सब हसने लगते है और उनमे से कुछ अपनी तलवार निकले शमशेर क ऊपर हमला करते है शमशेर जिसके बदन में अभी चार तीर लगी हुई थी फिर भी वो उनसे लड़ने लगता है और अपने तलवारबाज़ी से तीनो को मार देता है तभी पारसी सैनिक आजाते है और शमशेर का साथ देने लगते है सुल्तान को शमशेर अपना तलवार देता है
"ये लीजिये अब्बा जान "
ये कह कर शमशेर गिर जाता है
भूरिया जो बड़े पठार क पीछे से सब देख रही थी शमशेर क गिरते हे भाग कर आती है
Hooriya:shamshera उठो बीटा ..तुम्हे कुछ नहीं हो सकता
Shamshera:ammi जाएं
शमशेर अपनी हलकी आखो को खोलते हुए
Hooriya:han मेरे लाल ..तुम क्यू मेरी जान बचने क लये खुद की जान जोखिम में दाल दिए क्यू मेरे बेटे
Shamshera:ammi जान मई आप से तहे डिल से मुहब्बत करता हु में मर कर भी आपो हे याद करूँगा
ये कह कर शमशेर अपनी आखे बंद कर लेता है
Hooriya:Naheeee मेरा मेरा बचा कोई मेरे बेटे को उठाओ
ज़ोर से रट हुए भूरिया चिल्ला रही थी
सुल्तान अब भी दुश्मनो से मुक़ाबला कर रहा था
Hoooriya:sultaaan कोई मेरे बचे को बचाओ
तभी एक पारसी सिपाही कहता है
"सुल्तान आप जाइये शहज़ादे को ले कर महल वो घायल है हम देख लेंगे इनको"
सुल्तान शमशेर क पास आता है शमशेर दर्द क मारे कहर रहा था सुल्तान और एक सैनिक मिल कर शमशेर को महल की ओरे ले जाते है महल क पास जा कर सुल्तान और सिपाहीओं को हमले की जगह मदद क लिए भेजता है
Sultan:hakeem को बुलाओ
हकीम साहब बहार आते है
हकीम:4 तीर लगे है इनको जल्दी से शिफा खाने ले चलिए
Hooriya:hakeem साहब मेरा बीटा उसे कुछ नहीं होना चाहिए
रट हुए चिल्लाते है
Hakeem:mallika अब दवा कीजिये हालत बहुत नाज़ुक है
शमशेर को उठा कर शिफ़ाकहना में ले जा कर लिटा दया जाता है और हकीम तीरो को शमशेर क बदन से निकलने लगते है
गुल शाह हंगामा सुन कर बहार आता है और वो खुश होते हुए
Gulshah:man me)lagta है सुल्तान का काम तमाम हो गया
गुल शाह बहार आता है तो देखता है क भूरिया रो रही है शफाखाने क सामने
गुल shah:Man me)Hooriya बेगम आप को रोने की ज़रूरत नहीं आपके संगमरमरी बदन की प्यास में बुझाया करूँगा सुल्तान से ज़्यादा प्यार करूँगा
गुल शाह भूरिया क पास आटा है और भूरिया को देख अपने आखो में ासु लाते हुए
गुल shah:bhabi जान किसने हमला क्या आखिर किसकी दुश्मनी थी सुल्तान से
भूरिया गुल शाह को देखते है रट हुए
गुल शाह अपने भाबी भूरिया क सर को अपने सीने में लगा लेता है
गुल shah:mar रोइये भाबी जान ये वक़्त रोने का नहीं है
तभी सामने क शिफ़ाख़ाना से सुल्तान बहार निकलता है जिसे देख कर गुल शाह क आखे बड़ी हो जाती है
गुल shah:man me)Ye तो सही सलामत है ये कैसे मुमकिन है फिर भूरिया रो क्यू रही है
गुल शाह अपने भाई को देख अपने भाबी से दूर होते हुए
Gulshah:bhabi क्या हुआ आप रो क्यू रही है इतना
Hooriya:wo अंदर मेरा बीटा
फिर रोने लगती है
Gulshah:man me)to ये शमशेर ने सब पर पानी फेर दया चलो बाप नहीं तो बीटा सही
तभी सुल्तान गुल शाह क सामने आजाता है
गुल shah:Bhaijaan ये कैसे हुआ इतनी सवेरे कैसे हमला हुआ
Sultan:hamlawar कभी बोल क नहीं आते
तभी एक सिपाही आता है
Sipaahi:Sultan हमने सब हमलावर को मार गिराए और उनकी पहचान भी हो गयी है वो चीनी है
Sultan:theek है तुम जाओ
गुल shah:bhai जान ये चीनी हम पर क्यू हमला करना चाहते थे
Sultan:Hum पर नहीं उनका निशाना में था गुल शाह
Sultan:Hooriya चलिए आप अंदर बैठए रोना बंद करें
Hooriya:nahi पर वो शमशेर ..
Sultan:use कुछ नहीं होगा शेरा है शमशेर
सुल्तान भूरिया को ले कर अपने हुजरे में जाता है
Sultan:aap रोना बंद कीजिये मल्लिका इ जहाँ
Hooriya:mera बीटा मेरी वजह से मौत क मुँह में है ये सब मेरी गलती है
फिर रोने लगती है
तभी वह Naaz,Razia,muskan तीनो सुल्तान की बीवीए और समां और महनूर दोनों बेश्या भी आजाती है
Naaz:Baaji चुप करें आप का हे बीटा नहीं शमशेर हमारा बीटा भी है
Razia:han बाजी बिलकुल ठीक कह रही है
Hooriya:naaz रैज़ा ये सब मेरी गलती की वजह से हुआ
सुल्तान वह से उठ कर बहार आजाते है
Sama:Badi अम्मी भाईजान को कुछ नहीं होगा आप रोना बंद करें
तभी अफसाना खातून आजाती है और अपने बहु को अपने गले से लगते हुए
Afsana
Afsana:Mahnoor गिलास में पानी लाओ
महनूर पानी देती है और अफसाना अपने हाथो से पानी पिलाती है भूरिया को
उधर सुल्तान शिफखाने क तरफ जाते है तो सामने उनके पिता सुल्तान दास्ताँ खड़े थे साथ हे शहज़ादे शान और गुल शाह
Shaan:abba जान ये कैसे हुआ
सुल्तान अपने हाथ उठा कर
"bass..tum कहा थे सो रहे थे शान"
शान चुप हे रहना बेहतर समझता है
Dastan:ye चीनी लूटेरे हमारे महल में कैसे घुस सकते है
Sultan:abba जान आप हमारे साथ आइये
सुल्तान अपने पिता क साथ थोड़ी दुरी पर जाते है गुल शाह और शान से
Sultan:Abba जान इन मामूली लूटेरो में इतनी हिम्मत और समझ बुझ नहीं क हमारे महल तक पहुंच सके
Dastan:beta तुम कहना क्या छह रहे हो
Sultan:Inki मदद करने वाला कोई हमारा अपना है जिन्होंने महल में आने का रास्ता बताया
dastan:kya..
सुल्तान दास्ताँ का मुँह खुला का खुला रह जाता है
गुल शाह अपने बाप और भाई को हे देख रहा था
गुलशाह मन me)Lagta है सुल्तान को शक हो गया है क ये हमला किसी की मदद से हुआ है
Gulshah:Shaan तुम यही रहो में ज़रा उन हमलावर को देख कर छान बीन करता हु
Shaan:Ji चाचा जाएं
गुल शाह महल क बहार निकलता है और एक सिपाही को भेज कर छान पाशा को बुलवाता है
गुल शाह बगीचे की ओरे जाता है और हमलावरों की लाश को देखते हुए पलट पलट कर सबको देखता है
गुल shah:shungu नहीं है इसमें
तभी छान पाशा आता है
गुल shah:zara इधर आओ छान पाशा
छान पाशा को एक तरफ ले कर जाता है और एक थप्पड़ छान पाशा क गाल पर रख देता है
गुल shah:Ye क्या बेवकूफी है छान पाशा कैसे एक छोटा सा काम तुम नहीं कर सकते
छान pasha:Ustaad वो
गुल shah:chup एक डैम तुम्हे पता है सुल्तान को शक हो गया है
छान pasha:Ustaad मैंने तो हमेशा सुल्तान को अकेले टहलते देखा था सुबह इसलिए
गुल shah:ye कैसे मुमकिन है फिर क आज शमशेर भी इतनी सुबह आगया जो कभी दुपहर से पहले नहीं उठ ता
छान pasha:Ustaad अब हम क्या करे
गुल shah:tum शुंग से मिलो और उसे कहो अब कोई हमला न करे और कुछ दिन तक पारस में किसी को दिखाई नहीं दे और न पारस छोर क जाये
छान pasha:kya शुंग नहीं था इन सब में
गुल shah:nahi शुंग नहीं था मैंने लाशो को देखा हु
छान पाशा वह से चला जाता है
इधर शिफ़ाख़ाना में शमशेर लेता था और हकीम इलाज कर रहा था कुछ तीन घंटो बाद शमशेर की आँख खुलती है जिसे देख हकीम खुश होता है
Hakeem:Suno शहज़ादे क लिए इन जड़ी बूटीओ को पीस कर दवा बना कर पिलाओ
हकीम क साथी अपने म्हणत से ज़हर की काट क लये दवा बना कर शमशेर क पास लेट है
शमशेर अपने आखे धीरे से खोलता है तो हकीम और उनके साथी से घिरा पता है
hakeem:ab आप ठीक हो जायेंगे शहज़ादे ..लाओ वो दवा में पीला देता हु
Shamshera:Hakeem..Mujhe नहीं पीना दवा
Hakeema:shehzade ये आपके जिस्म में ज़हर नहीं फैलने देगा
shamshera:Mujhe नहीं पीना पहले मुझे अम्मी जान से मिलना है अकेले में
हकीम अपने साथिओ क साथ बहार आता है और सामने सुल्तान को देख
Hakeem:mallika जहाँ कहा है
Sultan:shaan जाओ अपनी बड़ी अम्मी को बुलाओ
उधर हुजरे में भूरिया अब शांत हो चुकी थी पर अब भी उसके आखो से ासु टपक रहे थे
Hooriya:man me)Kaise शमशेर बेहोश होने से पहले तक मुझे कहता रहा क वो मुझसे मुहब्बत करता है ...क्या सच में वो बेपनाह मुझसे मुहब्बत करने लगा है एक औरत की तरह मुझे मुहब्बत करता hai..kya यही वजह है क उसने अपने सीने में तीर खा लिए मेरी जान बचने क lye..ye क्या पागलपन है शमशेर
तभी शान की आवाज़ आती है
Shaan:Shamshera को होश आगया है और वो आपसे मिलना चाहता है बड़ी अम्मी
भूरिया अपने हाथो से ासु पोछते हुए कड़ी होती है और बेबाक अपने हुजरे से निकल कर दौड़ने लगती है पीछे से रज़िया और नाज़ भी आने लगते है
भूरिया बहार आती है देखती है सुल्तान और हकीम बात कर रहे थे
Hooriya:hakeem साहब कैसा है मेरा बीटा
रट हुए सिसकते हुए कहती है
Hakeem:Mallika जहाँ उनको होश तो आज्ञा है पर उनके जिस्म में ज़हर फ़ैल गया है और उनके ज़ख्म भी गहरे है अभी हम कुछ कह नहीं सकते
Hooriya:kya कह रहे हो तुम हकीम मेरे बेटे को कुछ नहीं हो सकता
Hakeem:hum पूरी कोशिश करेंगे मल्लिका अभी हम उन्हें दवा पिलाने की कोशिश क्र रहे है पर वो नहीं पी रहे है और ज़िद्द क्र रहे है क आपसे मिलना है
भूरिया हकीम क चेहरे पर देखती है और बेसुध हे शिफा खाने में घुस जाती है
Hakeem:aap सब नहीं जाये शहज़ादे अकेले में बात करना चाहते है
सब बहार हे रुक जाते है
भूरिया अंदर जाती है तो शमशेर क जख्मो पर पट्टी बंधी थी और वो लेता था
भूरिया शमशेर क पास जा कर कड़ी होती है और शमशेर को देखते हुए
Hooriya:man me)aaakhir क्यू अपने जान में जोखिम में दाल डाई तुम चल जाने देते मेरे सीने में तीर क्यू अपना सीना छल्ली कर लये तुम शमशेर ..तुम नहीं जानते मेरा तुम्हारे सिवा कोई नहीं अगर तुम्हे कुछ हो जायेगा तो में किसके भरोसे जीऊँगी
Hooriya:shamshera ..
थूक गटकते हुए अपने बेटे को पुकारती है शमशेर धीरे अपने आधी आँख खोल कर अपने अम्मी को देखता है
भूरिया अपने बेटे क पास जा कर अपने बेटे का हाथ अपने हाथ में ले कर
Hooriya:kya हुआ मेरे बचे तुम दवा खा लो तुम बिलकुल ठीक हो जाओगे मेरे लाल मेरे शहज़ादे
Shamshera:am अम्मी..
Hooriya:han बोलो मेरी जान कहो न सुन रही है तुम्हारी अम्मी
Shamshera:ammi में दवा नहीं पीऊंगा मुझे मर जाना हे बेहतर
भूरिया आखो में ासु लिए रट हुए
Hooria:aakhir ऐसा क्यू कह रहे हो
Shamshera:ammi जान जब आप मुझे और मेरी मुहब्बत को हवस का नाम देती है तो मुझे लगता है मेरा जी कर कोई फायदा नहीं
Hooriya:tum कहना क्या चाहते हो
Shamshera:aap मेरी मुहब्बत को हवस न समझो बास और मेरी मुहब्बत को सच्ची मोहब्बत मानो ये बात क़ुबूल करो में दवा खा लूंगा
भूरिया रट हुए अपने बेटे का हाथ अपने हाथ में लेते हुए
Hooriya:Me क़ुबूल करती हु क मेरे बेटे का मुहब्बत हवस नहीं तुम्हारी मुहब्बत सच्ची मुहब्बत है
शमशेर अपने अम्मी को देखता है और हल्का मुस्कुराता है और उसकी आखे बंद होने लगती है
Hooriya:hakeeeeeeeem साहाआआआअब
हकीम और उनके साथी दौड़ कर अंदर आते है
Hooriya:'dekhiye ये आखे बंद कर रहा है अपनी ..
रट हुए कहती है
hakeem:wo दवाई दो मुझे
हमीम शमशेर क सर को हाथो में लिए
Hakeem:ab तो पी जाइये शहज़ादे
शमशेर अपने लैब खोलता है और हकीम वो दवाई पीला देता है
शमशेर फिर से बेहोश हो जाता है
Hooriya:ye क्या हो रहा है हकीम साहब
Hakeem:fiqr मत कीजिये बेहोश हुए है थोड़ी देर में होश आजायेगा दवाई का असर जैसे होगा
भूरिया चैन का सास लेती है और बहार आती है
हकीम भी बहार आता है सबको बताता है क अब शमशेर खतरे से बहार है पर अभी भी उनके ऊपर ध्यान देने की ज़रूरत है
dastan:Theek है बच्चो अब तुम सब जाओ और कुछ खा लो मई यही पर हु
Hooriya:abba जान आप जाये में रूकती हु
Sultan:theek है आप दोनों हे रुक जाये हम सब चलते hai..aap लोग जाइये Naaz..razia और मुस्कान शान इन्हे ले जाओ
सब अपने अपने हुजरे में चले जाते है भूरिया और सुल्तान दास्ताँ शफाखाने क सामने रुकते है
Sultan:man me)Ye गुल शाह कहा है ?
Sultan:aap दोनों यही रहे में आता हु
ये कह कर सुल्तान महल से बहार निकलता है और इधर उधर गुल शाह को देखने लगता है
तो बे कॉन्टिनोएड...