Desi Sex Kahani - Maharani Devrani - Page 16 - SexBaba
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Desi Sex Kahani - Maharani Devrani

अपडेट 142

पारस

Shamshera:man me)aaaj रात मुझे होशियार रहना होगा अगर साजिश करने वाले महल क है तो ये भी हो सकता है अब्बा जान पर हमला kare..un लोगो की बातो से ये लगता है जैसे हमला की आखिरी तैयारी में हो और मुझे लगता है वो हमला कभी भी कर सकते है

शमशेर अपने तलवार पास रखा उठा लेता है और उसको मियां से खींच कर अपने तलवार की धार पर हाथ लगते हुए

Shamshera:Un लूटेरो को में इसी तलवार से मौत का मज़ा चखाउंगा और किसी भी तरह महल में साजिश करने वाले का पर्दाफाश करूँगा उस चीनी लूटेरा शुंग को पकड़ क

रात भर्र शमशेर कच्ची नींद में सोता है और सुबह सवेरे उठ कर तैयार होता है और महल का जायज़ा लेने लगता है महल क हर शक्श पर नज़र टिकाये सबकी गतिविधिओ पर पैनी नज़र रखता है महल क चारो ओरे घूम कर कोने कोने की तलाशी लेने क बाद हर सिपाहीओं को मुश्तैद रखने क लये कहता है

उधर सुल्तान मेरे वाहिद सो कर उठ ते है और तैयार हो कर रोज़ की तरह बगीचे में टहलने क लये निकलते है सुल्तान अपने हुजरे से निकल कर महल क बहार जा हे रहे थे क रास्ते में उन्हें भूरिया कही जाते हुए दिखती है

Sultan:Mallika इ जहाँ...

भूरिया पलट कर देखती है और सुल्तान को पाकर उनके पास आकर कड़ी होती है

hooriya:Subah खैर सुल्तान

Sultan:subah खैर मल्लिका जहाँ आज इतनी सवेरे आप कहा जा रही है

Hooriya:Ji वो मई महनूर को सुबह सुबह उठ कर पद्धति हु तो वही रज़िया क हुजरे में जा रही थी

Sultan:Wah भूरिया आप अपने सौतन की बेटी क लये इतनी म्हणत कर रही हो इतना तो कोई औरत नहीं क्र सकती इसलिए तुम्हारे जैसी नेक कोई नहीं

Hooriya:Sultan आपकी औलाद मेरी भी औलाद है वैसे भी महनूर और समां दोनों मुझे अपनी माँ से बढ़कर मानती है

Sultan:waise आज कल आप हमसे मिलना भूल गयी हु आपके वादा का क्या हुआ

Hooriya:wo..wo सुल्तान आप तो जानते है अब इस उम्र में सब हिसाब उल्टा हो जाता है में मजबूर हु नहीं तो में बहुत तदपि हु आपके लिए

Sultan:theek है तो चलो आज साथ टहल आते है

Hooriya:kaha जा रहे है आप टहलने

Sultan:bass बगीचे क तरफ से वैसे भी इतना तो हक़ बनता हे है हमारा अपनी बीवी पर

भूरिया हस्ते हुए कहती है

"ठीक है सुल्तान चलिए "

भूरिया और सुल्तान बात करते हुए महल क बहार निकलते है दोनों देखते है सामने शमशेर सिपाहीओं से कुछ बात चीत कर रहा है सुल्तान और भूरिया आगे बढ़ते है जैसे हे शमशेर का नज़र पड़ता है

अपने माँ बाप पर

Shamshera:jao सिपाही और जो बताया है उस पर अमल करना

शमशेर अपने माँ क नज़दीक आकर

Shamshera:Subah खैर अम्मी जान अब्बू जान

Sultan:Subah खैर मेरे शेर

भूरिया शमशेर को बिना बोले अपना चेहरा घुमा लेती है जिसे देख शमशेर का मुँह उतर जाता है

Hooriya:chaliye सुल्तान बगीचे की ओरे टहल लेते है

सुल्तान अपने बेटे को देखता है शमशेर अपने दोनों आखो से हाँ कहता है और सुल्तान समझ जाता है क वो अपने बेटे क निगरानी में सुरक्षित है

sultan:chaliye मल्लिका जहाँ

सुल्तान और भूरिया बगीचे की ओरे धीरे धीरे जाने लगते है और शमशेर खड़ा अपने माँ बाप को जाते हुए देख रहा था

Sultan:hamara बीटा कितना बड़ा हो गया देखते हे देखते

Hooriya:man me)Han इतना बड़ा क वो अब आपकी बीवी को हे आपसे छीन न चाहता है

भूरिया पीछे मुड़ती है तो देखती है शमशेर भी उनके पीछे धीरे चलते हुए आरहा था

भूरिया की नज़र जैसे हे शमशेर से मिलती है शमशेर उसे प्यार भरी निगाहो से देखता है और भूरिया सेहम कर वापस आगे देखते हुए

hooriya:Han सुल्तान आपका बीटा बहुत बड़ा हो गया है

Hooriya:man me)Kaise जलन हो रही है शमशेर को जैसे मई उसकी अम्मी नहीं उसकी मेहबूबा हु

भूरिया सुल्तान का हाथ अपने हाथ से पकड़ लेती है और मुस्कुराती हुई एक बार फिर मुद कर पीछे देखती है इस बार तो शमशेर का उतरा हुआ चेहरा देख कर भूरिया की हसी छूट जाती है

Shamshera:man me)Bhut दर्द दे रही हो अम्मी जान अपने आशिके को ु तड़पा कर आपको मज़ा आरहा है

शमशेर अब छुप छुप क अपने माँ बाप क पीछे चल रहा था

Hooriya:ab आप का जख्म कैसा है सुल्तान

सुल्तान रुक जाता है और भूरिया क तरफ मुँह कर क

Sultan:ab ठीक है

तभी सुल्तान की नज़र ऊपर एक विशाल वृक्ष पर पड़ती है सामने एक पेड़ पर एक सिपाही अपने धनुष ताने बैठा था जैसे हे उसकी नज़र सुल्तान से मिलती है

sultan:Sipaahio यहाँ घुशपैठिये है

सुल्तान ऊपर देखते हुए भागने लगता है और ऊपर से चीनी लूटेरे जो इंतज़ार में थे सुल्तान क वो तीरो की बारिश कर देते है सुल्तान चिल्लाते हुए भागता है

और शमशेर भी उसी वक़्त अपनी तलवार निकले भागता है शमशेर देखता है उसके अब्बा दौर कर एक पत्थर क पीछे जा छुपे थे और भूरिया वही बेच में अचानक हमले से कड़ी हो गयी थी शमशेर भागते हुए आटा है और अपने अम्मी को अपने बाहो क घेरे में ले लेता है तीरंदाज़ तीर चलना नहीं छोड़ते

Sultan:bhaaaaago भूरिया अपने आप को छुपाओ

तभी शमशेर जो अपने माँ भूरिया को बाहो में लिए अपने तलवार से तीरो को अपने से दूर और इधर से उधर बचने की कोशिश कर रहा था पीच क वृक्ष से कुछ तीरंदाज शमशेर क पीठ पर दो तीर मार देते है जो सीधा शमशेर क पीठ में घुसता है

shamshera:aaaaaaaaaaaaaaaah

Hooriya:naheeeeee

भूरिया अपने कमर क पास से चाकू निकल कर उस तीरंदाज क ऊपर फेकती है और उसके सीने में घुसते हे वो पेड़ से गिर जाता है शमशेर धीरे धीरे अपनी माँ का ढल बना हुआ पठार की ओरे बढ़ रहा था shamshera:ammi अआप मेरे पीछे आओ सिपाहो कहा मर्डर गए ..

शमशेर अपनी अम्मी को अपने पीछे लेता है तभी सामने से शमशेर क सीने में दो तीर आए कर लगता है

Hooriya:naheeee नाहीये

भूरिया चिल्ला कर रोने लगती है

शमशेर अब तक भूरिया को एक बड़े पठार क पीछे ले अत है और उसे बैठा देता है

Shamshera:ammi आप यही रहिये

वो तीरंदाज़ अब तक पेड़ से उतर चुके थे और सुल्तान जो क निहत्ता था उसके ओरे जाने लगते है

Hooriya:naheeee बीटा तुम मत जाओ तुम बहुत घायल हो नही

Shamshera:ammi जाएं वो अब्बा जान को मार देंगे छोरो मुझे

शमशेर हाथ झटक कर अपने तलवार बहार निकलता है और उन सब में से एक को अपने खंजर फेक क्र मारता है

Shamshera:Pehle मुझ से तो सामना करो नामर्दो

शमशेर छह रहा था क कैसे भी कर क सुल्तान क ऊपर से उनका ध्यान हेट

शमशेर की बात सुन कर वो सब हसने लगते है और उनमे से कुछ अपनी तलवार निकले शमशेर क ऊपर हमला करते है शमशेर जिसके बदन में अभी चार तीर लगी हुई थी फिर भी वो उनसे लड़ने लगता है और अपने तलवारबाज़ी से तीनो को मार देता है तभी पारसी सैनिक आजाते है और शमशेर का साथ देने लगते है सुल्तान को शमशेर अपना तलवार देता है

"ये लीजिये अब्बा जान "

ये कह कर शमशेर गिर जाता है

भूरिया जो बड़े पठार क पीछे से सब देख रही थी शमशेर क गिरते हे भाग कर आती है

Hooriya:shamshera उठो बीटा ..तुम्हे कुछ नहीं हो सकता

Shamshera:ammi जाएं

शमशेर अपनी हलकी आखो को खोलते हुए

Hooriya:han मेरे लाल ..तुम क्यू मेरी जान बचने क लये खुद की जान जोखिम में दाल दिए क्यू मेरे बेटे

Shamshera:ammi जान मई आप से तहे डिल से मुहब्बत करता हु में मर कर भी आपो हे याद करूँगा

ये कह कर शमशेर अपनी आखे बंद कर लेता है

Hooriya:Naheeee मेरा मेरा बचा कोई मेरे बेटे को उठाओ

ज़ोर से रट हुए भूरिया चिल्ला रही थी

सुल्तान अब भी दुश्मनो से मुक़ाबला कर रहा था

Hoooriya:sultaaan कोई मेरे बचे को बचाओ

तभी एक पारसी सिपाही कहता है

"सुल्तान आप जाइये शहज़ादे को ले कर महल वो घायल है हम देख लेंगे इनको"

सुल्तान शमशेर क पास आता है शमशेर दर्द क मारे कहर रहा था सुल्तान और एक सैनिक मिल कर शमशेर को महल की ओरे ले जाते है महल क पास जा कर सुल्तान और सिपाहीओं को हमले की जगह मदद क लिए भेजता है

Sultan:hakeem को बुलाओ

हकीम साहब बहार आते है

हकीम:4 तीर लगे है इनको जल्दी से शिफा खाने ले चलिए

Hooriya:hakeem साहब मेरा बीटा उसे कुछ नहीं होना चाहिए

रट हुए चिल्लाते है

Hakeem:mallika अब दवा कीजिये हालत बहुत नाज़ुक है

शमशेर को उठा कर शिफ़ाकहना में ले जा कर लिटा दया जाता है और हकीम तीरो को शमशेर क बदन से निकलने लगते है

गुल शाह हंगामा सुन कर बहार आता है और वो खुश होते हुए

Gulshah:man me)lagta है सुल्तान का काम तमाम हो गया

गुल शाह बहार आता है तो देखता है क भूरिया रो रही है शफाखाने क सामने

गुल shah:Man me)Hooriya बेगम आप को रोने की ज़रूरत नहीं आपके संगमरमरी बदन की प्यास में बुझाया करूँगा सुल्तान से ज़्यादा प्यार करूँगा

गुल शाह भूरिया क पास आटा है और भूरिया को देख अपने आखो में ासु लाते हुए

गुल shah:bhabi जान किसने हमला क्या आखिर किसकी दुश्मनी थी सुल्तान से

भूरिया गुल शाह को देखते है रट हुए

गुल शाह अपने भाबी भूरिया क सर को अपने सीने में लगा लेता है

गुल shah:mar रोइये भाबी जान ये वक़्त रोने का नहीं है

तभी सामने क शिफ़ाख़ाना से सुल्तान बहार निकलता है जिसे देख कर गुल शाह क आखे बड़ी हो जाती है

गुल shah:man me)Ye तो सही सलामत है ये कैसे मुमकिन है फिर भूरिया रो क्यू रही है

गुल शाह अपने भाई को देख अपने भाबी से दूर होते हुए

Gulshah:bhabi क्या हुआ आप रो क्यू रही है इतना

Hooriya:wo अंदर मेरा बीटा

फिर रोने लगती है

Gulshah:man me)to ये शमशेर ने सब पर पानी फेर दया चलो बाप नहीं तो बीटा सही

तभी सुल्तान गुल शाह क सामने आजाता है

गुल shah:Bhaijaan ये कैसे हुआ इतनी सवेरे कैसे हमला हुआ

Sultan:hamlawar कभी बोल क नहीं आते

तभी एक सिपाही आता है

Sipaahi:Sultan हमने सब हमलावर को मार गिराए और उनकी पहचान भी हो गयी है वो चीनी है

Sultan:theek है तुम जाओ

गुल shah:bhai जान ये चीनी हम पर क्यू हमला करना चाहते थे

Sultan:Hum पर नहीं उनका निशाना में था गुल शाह

Sultan:Hooriya चलिए आप अंदर बैठए रोना बंद करें

Hooriya:nahi पर वो शमशेर ..

Sultan:use कुछ नहीं होगा शेरा है शमशेर

सुल्तान भूरिया को ले कर अपने हुजरे में जाता है

Sultan:aap रोना बंद कीजिये मल्लिका इ जहाँ

Hooriya:mera बीटा मेरी वजह से मौत क मुँह में है ये सब मेरी गलती है

फिर रोने लगती है

तभी वह Naaz,Razia,muskan तीनो सुल्तान की बीवीए और समां और महनूर दोनों बेश्या भी आजाती है

Naaz:Baaji चुप करें आप का हे बीटा नहीं शमशेर हमारा बीटा भी है

Razia:han बाजी बिलकुल ठीक कह रही है

Hooriya:naaz रैज़ा ये सब मेरी गलती की वजह से हुआ

सुल्तान वह से उठ कर बहार आजाते है

Sama:Badi अम्मी भाईजान को कुछ नहीं होगा आप रोना बंद करें

तभी अफसाना खातून आजाती है और अपने बहु को अपने गले से लगते हुए

Afsana:pota हमारा शेर है तीर की क्या मज़ाल जो उसे मार दे बास अब होश में आओ

Afsana:Mahnoor गिलास में पानी लाओ

महनूर पानी देती है और अफसाना अपने हाथो से पानी पिलाती है भूरिया को

उधर सुल्तान शिफखाने क तरफ जाते है तो सामने उनके पिता सुल्तान दास्ताँ खड़े थे साथ हे शहज़ादे शान और गुल शाह

Shaan:abba जान ये कैसे हुआ

सुल्तान अपने हाथ उठा कर

"bass..tum कहा थे सो रहे थे शान"

शान चुप हे रहना बेहतर समझता है

Dastan:ye चीनी लूटेरे हमारे महल में कैसे घुस सकते है

Sultan:abba जान आप हमारे साथ आइये

सुल्तान अपने पिता क साथ थोड़ी दुरी पर जाते है गुल शाह और शान से

Sultan:Abba जान इन मामूली लूटेरो में इतनी हिम्मत और समझ बुझ नहीं क हमारे महल तक पहुंच सके

Dastan:beta तुम कहना क्या छह रहे हो

Sultan:Inki मदद करने वाला कोई हमारा अपना है जिन्होंने महल में आने का रास्ता बताया

dastan:kya..

सुल्तान दास्ताँ का मुँह खुला का खुला रह जाता है

गुल शाह अपने बाप और भाई को हे देख रहा था

गुलशाह मन me)Lagta है सुल्तान को शक हो गया है क ये हमला किसी की मदद से हुआ है

Gulshah:Shaan तुम यही रहो में ज़रा उन हमलावर को देख कर छान बीन करता हु

Shaan:Ji चाचा जाएं

गुल शाह महल क बहार निकलता है और एक सिपाही को भेज कर छान पाशा को बुलवाता है

गुल शाह बगीचे की ओरे जाता है और हमलावरों की लाश को देखते हुए पलट पलट कर सबको देखता है

गुल shah:shungu नहीं है इसमें

तभी छान पाशा आता है

गुल shah:zara इधर आओ छान पाशा

छान पाशा को एक तरफ ले कर जाता है और एक थप्पड़ छान पाशा क गाल पर रख देता है

गुल shah:Ye क्या बेवकूफी है छान पाशा कैसे एक छोटा सा काम तुम नहीं कर सकते

छान pasha:Ustaad वो

गुल shah:chup एक डैम तुम्हे पता है सुल्तान को शक हो गया है

छान pasha:Ustaad मैंने तो हमेशा सुल्तान को अकेले टहलते देखा था सुबह इसलिए

गुल shah:ye कैसे मुमकिन है फिर क आज शमशेर भी इतनी सुबह आगया जो कभी दुपहर से पहले नहीं उठ ता

छान pasha:Ustaad अब हम क्या करे

गुल shah:tum शुंग से मिलो और उसे कहो अब कोई हमला न करे और कुछ दिन तक पारस में किसी को दिखाई नहीं दे और न पारस छोर क जाये

छान pasha:kya शुंग नहीं था इन सब में

गुल shah:nahi शुंग नहीं था मैंने लाशो को देखा हु

छान पाशा वह से चला जाता है

इधर शिफ़ाख़ाना में शमशेर लेता था और हकीम इलाज कर रहा था कुछ तीन घंटो बाद शमशेर की आँख खुलती है जिसे देख हकीम खुश होता है

Hakeem:Suno शहज़ादे क लिए इन जड़ी बूटीओ को पीस कर दवा बना कर पिलाओ

हकीम क साथी अपने म्हणत से ज़हर की काट क लये दवा बना कर शमशेर क पास लेट है

शमशेर अपने आखे धीरे से खोलता है तो हकीम और उनके साथी से घिरा पता है

hakeem:ab आप ठीक हो जायेंगे शहज़ादे ..लाओ वो दवा में पीला देता हु

Shamshera:Hakeem..Mujhe नहीं पीना दवा

Hakeema:shehzade ये आपके जिस्म में ज़हर नहीं फैलने देगा

shamshera:Mujhe नहीं पीना पहले मुझे अम्मी जान से मिलना है अकेले में

हकीम अपने साथिओ क साथ बहार आता है और सामने सुल्तान को देख

Hakeem:mallika जहाँ कहा है

Sultan:shaan जाओ अपनी बड़ी अम्मी को बुलाओ

उधर हुजरे में भूरिया अब शांत हो चुकी थी पर अब भी उसके आखो से ासु टपक रहे थे

Hooriya:man me)Kaise शमशेर बेहोश होने से पहले तक मुझे कहता रहा क वो मुझसे मुहब्बत करता है ...क्या सच में वो बेपनाह मुझसे मुहब्बत करने लगा है एक औरत की तरह मुझे मुहब्बत करता hai..kya यही वजह है क उसने अपने सीने में तीर खा लिए मेरी जान बचने क lye..ye क्या पागलपन है शमशेर

तभी शान की आवाज़ आती है

Shaan:Shamshera को होश आगया है और वो आपसे मिलना चाहता है बड़ी अम्मी

भूरिया अपने हाथो से ासु पोछते हुए कड़ी होती है और बेबाक अपने हुजरे से निकल कर दौड़ने लगती है पीछे से रज़िया और नाज़ भी आने लगते है

भूरिया बहार आती है देखती है सुल्तान और हकीम बात कर रहे थे

Hooriya:hakeem साहब कैसा है मेरा बीटा

रट हुए सिसकते हुए कहती है

Hakeem:Mallika जहाँ उनको होश तो आज्ञा है पर उनके जिस्म में ज़हर फ़ैल गया है और उनके ज़ख्म भी गहरे है अभी हम कुछ कह नहीं सकते

Hooriya:kya कह रहे हो तुम हकीम मेरे बेटे को कुछ नहीं हो सकता

Hakeem:hum पूरी कोशिश करेंगे मल्लिका अभी हम उन्हें दवा पिलाने की कोशिश क्र रहे है पर वो नहीं पी रहे है और ज़िद्द क्र रहे है क आपसे मिलना है

भूरिया हकीम क चेहरे पर देखती है और बेसुध हे शिफा खाने में घुस जाती है

Hakeem:aap सब नहीं जाये शहज़ादे अकेले में बात करना चाहते है

सब बहार हे रुक जाते है

भूरिया अंदर जाती है तो शमशेर क जख्मो पर पट्टी बंधी थी और वो लेता था

भूरिया शमशेर क पास जा कर कड़ी होती है और शमशेर को देखते हुए

Hooriya:man me)aaakhir क्यू अपने जान में जोखिम में दाल डाई तुम चल जाने देते मेरे सीने में तीर क्यू अपना सीना छल्ली कर लये तुम शमशेर ..तुम नहीं जानते मेरा तुम्हारे सिवा कोई नहीं अगर तुम्हे कुछ हो जायेगा तो में किसके भरोसे जीऊँगी

Hooriya:shamshera ..

थूक गटकते हुए अपने बेटे को पुकारती है शमशेर धीरे अपने आधी आँख खोल कर अपने अम्मी को देखता है

भूरिया अपने बेटे क पास जा कर अपने बेटे का हाथ अपने हाथ में ले कर

Hooriya:kya हुआ मेरे बचे तुम दवा खा लो तुम बिलकुल ठीक हो जाओगे मेरे लाल मेरे शहज़ादे

Shamshera:am अम्मी..

Hooriya:han बोलो मेरी जान कहो न सुन रही है तुम्हारी अम्मी

Shamshera:ammi में दवा नहीं पीऊंगा मुझे मर जाना हे बेहतर

भूरिया आखो में ासु लिए रट हुए

Hooria:aakhir ऐसा क्यू कह रहे हो

Shamshera:ammi जान जब आप मुझे और मेरी मुहब्बत को हवस का नाम देती है तो मुझे लगता है मेरा जी कर कोई फायदा नहीं

Hooriya:tum कहना क्या चाहते हो

Shamshera:aap मेरी मुहब्बत को हवस न समझो बास और मेरी मुहब्बत को सच्ची मोहब्बत मानो ये बात क़ुबूल करो में दवा खा लूंगा

भूरिया रट हुए अपने बेटे का हाथ अपने हाथ में लेते हुए

Hooriya:Me क़ुबूल करती हु क मेरे बेटे का मुहब्बत हवस नहीं तुम्हारी मुहब्बत सच्ची मुहब्बत है

शमशेर अपने अम्मी को देखता है और हल्का मुस्कुराता है और उसकी आखे बंद होने लगती है

Hooriya:hakeeeeeeeem साहाआआआअब

हकीम और उनके साथी दौड़ कर अंदर आते है

Hooriya:'dekhiye ये आखे बंद कर रहा है अपनी ..

रट हुए कहती है

hakeem:wo दवाई दो मुझे

हमीम शमशेर क सर को हाथो में लिए

Hakeem:ab तो पी जाइये शहज़ादे

शमशेर अपने लैब खोलता है और हकीम वो दवाई पीला देता है

शमशेर फिर से बेहोश हो जाता है

Hooriya:ye क्या हो रहा है हकीम साहब

Hakeem:fiqr मत कीजिये बेहोश हुए है थोड़ी देर में होश आजायेगा दवाई का असर जैसे होगा

भूरिया चैन का सास लेती है और बहार आती है

हकीम भी बहार आता है सबको बताता है क अब शमशेर खतरे से बहार है पर अभी भी उनके ऊपर ध्यान देने की ज़रूरत है

dastan:Theek है बच्चो अब तुम सब जाओ और कुछ खा लो मई यही पर हु

Hooriya:abba जान आप जाये में रूकती हु

Sultan:theek है आप दोनों हे रुक जाये हम सब चलते hai..aap लोग जाइये Naaz..razia और मुस्कान शान इन्हे ले जाओ

सब अपने अपने हुजरे में चले जाते है भूरिया और सुल्तान दास्ताँ शफाखाने क सामने रुकते है

Sultan:man me)Ye गुल शाह कहा है ?

Sultan:aap दोनों यही रहे में आता हु

ये कह कर सुल्तान महल से बहार निकलता है और इधर उधर गुल शाह को देखने लगता है

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट 143

पारस

हकीम भी बहार आता है सबको बताता है क अब शमशेर खतरे से बहार है पर अभी भी उनके ऊपर ध्यान देने की ज़रूरत है

dastan:Theek है बच्चो अब तुम सब जाओ और कुछ खा लो मई यही पर हु

Hooriya:abba जान आप जाये में रूकती हु

Sultan:theek है आप दोनों हे रुक जाये हम सब चलते hai..aap लोग जाइये Naaz..razia और मुस्कान शान इन्हे ले जाओ

सब अपने अपने हुजरे में चले जाते है भूरिया और सुल्तान दास्ताँ शफाखाने क सामने रुकते है

Sultan:man me)Ye गुल शाह कहा है ?

Sultan:aap दोनों यही रहे में आता हु

ये कह कर सुल्तान महल से बहार निकलता है और इधर उधर गुल शाह को देखने लगता है

Sultan:man me)pata नहीं क्यू मुझे इस गुल शाह क चेहरे से बगावत की बू आती है

सुल्तान वापस अपने हुजरे में जाता है और एक कुर्सी पर बैठ क एक खत लिखने लगता है थोड़ी देर बाद खत को मोड़ कर अपने सबसे खास सिपाही को बुलाता है

Sultan:Sipahi

सिपाही कक्षा में अंदर आता है और सुल्तान क हाथ में एक खत देखता है

Sultan:Suno इस मखटूब को हमारे खास जासूस तक पंहुचा दो उस से कहना इसका जवाब हमे जल्द से जल्द चाहिए और हाँ इसकी खबर किसी को कानो कण न हो

Sipahi:jo हुक्म सुल्तान ऐसा हे होगा

सिपाही वो खत ले कर चला जाता है

Sultan:Man me)Ab मेरे जासूस तुम और तुम्हारे घटिया दोस्त छान पाशा क हर कदम का हाल मुझे बताएँगे गुल शाह और अगर ये चाल तुम्हारी निकली तो गुलशाह तुम्हे में तड़पा तड़पा क मारूंगा

इधर भूरिया अब भी शफाखाने क बहार अपने ससुर सुल्तान दास्ताँ क साथ बैठी थी तभी वह नाज़ आजाती है

Naaz:Baaji आप सुबह से भुकी है दुपहर का खाना भी नहीं खाया ऐसे भी आपकी ताब्यात ठीक नहीं चलिए कुछ खा लीजिये

Hooriya:naaz पर में कैसे जा सकती हु

Dastan:beti तुम जाओ अब हमारा पोता खतरे से बहार है और में हु न यहाँ ध्यान रखने क लये महल का हर शक्श शमशेर को चाहता है

Hooriya:theek है अब्बा जान में जाती हु आप शमशेर का ख्याल रखिये

भूरिया नाज़ क साथ नाज़ क हुजरे में आजाती है जहा पैर नाज़ की बेटी समां भी थी

Naaz:Beti समां बड़ी अम्मी क लिए खाना लगाओ

sama:ji अम्मी अभी लगाई

Hooriya:Ye क्या नाज़ समां से क्यू काम करवा रही हो कनीज़ कर लेगी

Sama:badi अम्मी आप की खिदमत करने का मौक़ा मिल रहा है मेरी खुशनसीबी है बास आप मुझे दुवाओ में से नवाज़े सुनी हु आपने जो दवा मांगी सल्तनत क लये वो सब पूरी हुई है

Hooriya:Han मेरी बेटी जब में शादी क्र क आई थी हमारा बहुत छोटा सा सल्तनत था आज हम आधी दुन्या में क़ाबिज़ है

Naaz:Zarur बाजी और खुदा ने चाहा तो आपके बेटे और पोते पूरी दुन्या पर हुकूमत करेंगे

भूरिया खाने क लये बैठ जाती है और खाने लगती है

hooriya:han नाज़ सुल्तान का एक सपना है क वो दिल्ली पैर हुकूमत करे

Naaz:Bass आप सुल्तान का साथ दीजिये एक दिन वो भी मुमकिन है

Hooriya:abhi तो में चाहती हु मेरा बीटा शमशेर ठीक हो जाये

Naaz:Han वो आपसे कितनी मुहब्बत करता है..

इतना हे कही थी नाज़ ने क भूरिया को एक ठसका लगता है और वो खास्ती है

Naaz:aap ठीक तो है न बाजी

समां पानी दो बड़ी अम्मी को

समां पानी देती है और भूरिया पीती है

Naaz:sach में अआप्को जान पे खेल क्र बचा लिया शमशेर ने बीटा हो तो ऐसा

Hooriya:man me)Wo बीटा मुझे अपने माशूका समझ कर बचाया है उसकी मुहब्बत वो मुहब्बत नहीं जो हर बीटा अपनी माँ से करता है

Hooriya:Aap ठीक कह रही हो नाज़ बेगम मेरा शमशेर शेर है अगर वो न होता वह तो में आज ज़िंदा नहीं होती

naaz:Kaisi बाते कर रहे हो बाजी

तभी वह रज़िया अपने बेटी महनूर क साथ आजाती है

razia:Kya बाते चल रही है

Hooriya:aao रज़िया बेगम

Razia:ab कैसे है शहज़ादे शमशेर

Hooriya:ab वो खतरे से बहार है

razia:ye तो बहुत ख़ुशी की बात है पर ये हमला का ताज़्ज़ुब है

Hooriya:han पता नहीं क्यू ये चीनी हम पर हमला कए

Naaz:pata चला है क ये चीन क लूटेरे है जो चोरी करते लूटपाट करते है

Hooriya:naaz पर उनका मक़सद आज बिलकुल भी चोरी का नहीं था वो मेरे और सुल्तान पर अंधाधुन तीरो की बारिश कर रहे थे

Naaz:par ऐसा क्यू करना चाहते है वो लोग

Hooriya:man me)ab पता नहीं कौन हमारे जान लेना चाहता है और क्या फायदा होगा

भूरिया खा कर उठ जाती है और तीनो सौतन अब बैठे बाते करने लगती है

Hooriya:Ye मुस्कान बेगम कहा है

Razia:wo अपने हुजरे में हे है

Naaz:us मुस्कान को तो हमारे ग़म से कुछ मतलब नहीं बास अपने सजने सवारने में लगी रहती है

Hooriya:man me)Sultan को जो कायल करना है उसे अपने जिस्म से उसने हे सुल्तान को मुझ से दूर कर दया

Hooriya:Jaane दो अभी मुस्कान की इतनी उम्र नहीं हुई क वो हर दुःख को गहराई से समझ सके

Razia:aap ठीक कहती है बजी

ऐसे हे रात हो जाती है रात में सब अपने अपने कक्षा में थे और शमशेर अब भी हकीम क पास था भूरिया क पास उसका रात का खाना आता है

Kaneez:khana खा लीजिये मल्लिका नहीं तो ठंडा हो जायेगा

ये कह कर कनीज़ जाती है और भूरिया आकर खाने बैठी हे थी क उसके आखो सामने आज सुबह क मंज़र दौड़ जाते है कैसे बहादुरी से शमशेर ने अपने सीने पर तीर ले लिया पर भूरिया को आंच नहीं आने दी

Hooriya:man me)Naaz सही कह रही थी वो मुझे अपने जान से बढ़ कर चाहता है और मैंने उसे कितना जलील क्या कितना मारा पर वो उफ़ तक नहीं क्या ऊपर से मेरी जान बचा कर मुझ पैर अहसान कर दया शमशेर ne..kaise वो मुझे बेहोश होने से पहले कहा क वो मुझे मुहब्बत करता है ऐसे हाल में जब इंसान मर रहा हो वो झूट नहीं बोलता वो फिर दवाई नहीं खा रहा था और आखिरकार अपने ज़िद्द से उसने मनवा हे लय क उसका प्यार सच्चा hai..par मई क्या उस वक़्त उस से बहस करती में जानती हु वो कितना ज़िद्दी है वो दवाई खाये बिना मर्डर jata..kya सिर्फ में उसकी जान बचने क लये उसकी मुहब्बत को सच मानी या वाक़ई में मान ली क वो मुझसे सच्ची मुहब्बत करता है जैसे कोई मर्द एक औरत से करता है ..छी में ये क्या सोच रही हु ..नाज़ भी तो कह रही थी क वो मुझसे बहुत मुहब्बत करता पर वो तो एक बीटा का मुहब्बत हे देखि उसे अंदाज़ा नहीं क वो कौन सी चाहत अपने डिल में बन रहा hai..han ये सच है क वो मुझे अपनी हवस नहीं बनाना चाहता और मुझे अपने मेहबूबा की नज़र से बेपनाह मुहब्बत करता है

भूरिया का बदन ये सोचते हे काँप जाता है और वो अपने दोनों हाथो से अपने मुँह पर रख कर सहलाते हुए

Hooriya:Ya खुदा ये मई क्या सोच रही हु

Hooriya:man me)Shamshera अगर मुझसे अपनी मुहब्बत समझता है अपनी माशूका समझता है तो क्या वो रिश्ता क़ायम करना चाहता है नहीं nahee..aisa नहीं हो सकता ये नहीं होने दूंगी में ..पर अगर में शमशेर को नहीं मिली तो कही वो कुछ उल्टा सीधा न क्र baithe..uski ज़िन्दगी तो ख़राब हो जाएगी शायद इसलिए वो शादी नहीं करना चाहता है मई कितनी बेवक़ूफ़ थी अब तक समझ नहीं सकीय ..क्या करू में क्या न करू अब तो सुल्तान भी मेरे नहीं है और मुझे उन्होंने डिल से उतार दया है किसको बताऊ अपना हालत कैसे में इस गुनाह से शमशेर को बहार निकलू

भूरिया ये सोचते हुए उठ टी है और उठ कर महल क शफाखाने की तरफ जाने लगती है शिफा खाना क दरवाज़े पे जा कर

Hooriya:Hakeem साहब

Hakeem:Aaiye मल्लिका

भूरिया अंदर आती है और अपने बेटे को लेता हुआ पति है वो बड़े प्यार से देखते हुए हकीम से पूछती है

Hooriya:ab कैसा है शमशेर

Hakeem:Unpar दवाई का अच्छा असर हुआ है होश में है वो

भूरिया चलते हुए अपने बेटे क पास जाती है और उसे देख कर

Hooriya:beta..

शमशेर अपनी आखे खोलता है

Hooriya:tu बिलकुल फिक्र न करो मेरे लाल हकीम साहब ने कहा है तुम अब बहुत जल्द ठीक हो जाओगे

शमशेर अपना एक हाथ उठा कर भूरिया क तरफ बढ़ता है और भूरिया अपना हाथ उसके हाथ पैर रख कर

shamshera:ammi जान ये मेरे लिए एक नै ज़िन्दगी है में चाहता हु क में जल्दी ठीक हो कर आपके हर दुःख को आपके ज़िन्दगी से दूर कर दू

Hooriya:beta..Pehle तुम ठीक तो हो जाओ दुसरो की फिक्र न करो अपनी सोचो

Shamshera:ammi जान जब अपनी ख्वाहिशे पूरी न हो तो दुसरो की हे खुश रखना चाहिए

भूरिया समझ जाती है शमशेर की ख्वाइश क्या है और वो भूरिया से क्या चाहता है

भूरिया बात पलट ते हुए कहती है

Hooriya:Meri तो दवा है तुम्हारी हर ख्वाइश पूरी हो बीटा तुम अगले सुल्तान हो तुम्हे जो चीज़ चाहिए मिलेगी

Shamshera:Mujhe आपका साथ चाहिए और कुछ नहीं

Hooriya:man me)Ye क्या ख्वाइश है बीटा तुम मुझे मजबूर कर रहे हो

Hooriya:me हमेशा साथ थी और साथ हे रहूंगी

भूरिया शमशेर की बात चालाकी से जवाब देते हुए कहती है

Shamshera:man me)Aap का साथ एक मेहबूबा की तरह चाहिए आप वाक़ई बहुत तेज़ औरत हो

भूरिया अपने हाथ से धीरे से शमशेर का भरी हाथ हटती है और मुद कर जाने लगती है भूरिया अभी शफाखाने क कमरे से बहार हे निकली थी क पीछे से हकीम की आवाज़ आई

Hakeem:mallika जहाँ

भूरिया मुद कर देखती है और रुक जाती है

Hakeem:Wo आपसे कुछ बात करनी ठु

Hooriya:ji कहिये हकीम साहब

Hakeem:shehzade ठीक हो जायेंगे पर एक बात है जो शायद उन्हें परेशां करे

Hooriya:kya कह रहे है हकीम साहब साफ़ साफ़ कहिये

Hakeem:aap को तो पता होगा क शहज़ादे शमशेर शराब शराब क आदि है

Hooriya:ji हाँ वो आपकी बात ठीक है

Hakeem:Mallika उनके ाअंत अब पहले जैसी नहीं रही ज़हर क जाने क बाद से अब कमज़ोरी आगयी है जो शायद कभी ठीक न हो या सालो साल लग जाये

Hooriya:kya फिर क्या करे हम हकीम कुछ तो इलाज होगा

hakeem:ilaaj कुछ नहीं है ाःतय्त रखना होगा नहीं तो अंदर का जिगर ख़राब हो सकता है जो जान लेवा है

Hooriya:kya ाःतय्त हकीम साहब

Hakeem:ab उन्हें शराब और शबाब दोनों बंद करना होगा नहीं तो उनकी अंदरूनी कमज़ोरी उनके ज़िन्दगी बर्बाद कर देगी अब आप हे शहज़ादे को समझा सकती है हमारे अंदर तो वो हिम्मत नहीं

भूरिया आँख बड़े कए हकीम को देखे जा रही थी और कुछ सोचते हुए

hooriya:aapki बात में समझ गयी शमशेर क ठीक होते हे मई उसे समझाऊंगा पर तब तक आप उसके ज़िम्मेदारी आपके सर

Hakeem:Mallika हम दिन रात एक कर देंगे शहज़ादे को सेहतमंद बनाने में

Hooriya:Me शुक्रगुज़ार रहूंगी आपकी ज़िन्दगी भर्र

ये कह कर भूरिया अपने हुजरे क तरफ जाने लगती है और हकीम वही खड़ा हो कर सोचने लगता है

Hakeem:man me)Shehzade इस उम्र में शराब और वैश्यों क चक्कर में अपनी ज़िन्दगी बर्बाद कर रहे है ..कभी कभी मुझे यक़ीन नहीं होता क वो मल्लिका जहाँ हूरजहाँ का बीटा है हूरजहाँ क जैसी परेहज़गार औरत जिसके नाख़ून तक किसी गैर मर्द नहीं देखे उनका बीटा इतना ऐय्याश कैसे हो सकता है

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 144

पारस

आअज शमशेर को जख्मी हुए 4 दिन हो गए थे और उसकी हालत पहले से बहुत अछि हो गयी थी पर वो अब भी शफाखाने में था हकीम की देख रेख में शमशेर को ठीक करने क लये पिछले 4 दिनों के हकीम साहब ने बहुत म्हणत की थी और अब शमशेर क जिस्म से ज़हर निकल चूका था पर जख्म अब भी हरे थे शमशेर अपने बिस्तर से उठते हुए कहता है

"हकीम साहब आअज तो में अपने हुजरे में जा सकता हु आपने कहा था आज का मई यहाँ मेरा आखिरी दिन होगा"

शमशेर अपने कोहनी पर बल दे कर ऊपर को उठ ता है क्यू क उसके पीठ पर भी दो तीर लगी थी

Hakeem:Ruk जाये शहज़ादे में आपकी मदद करता हु

Shamshera:Hakeem साहब अब में इतना भी कमज़ोर नहीं हु

Hakeem:mujhe पता है आप बब्बर शेर है नहीं तो 4 तीर लगने क बाद बहुत काम लोग बच पाते है और आपने तो दुश्मनो को ऐसी हाल में भी सामना क्या

shamshera:ab मेरी अम्मी की जान खतरे में थी तो मई कैसे नहीं जोखिम उठता

Hakeem:aap अपने अम्मी से ऐसे हे मुहब्बत करते रहे और वो भी तो आपको बहुत चाहती है पिछले 3 दिनों से रात भर जग कर गुज़ारा मल्लिका जहाँ ने और आधी रात आकर आपको देख कर जाती

Shamshera:man me)Islye तो में चाहता हु की अम्मी की हर ख्वाइश पूरी कर दू अब्बा जान नहीं कर पाए पर उन्हें तो जैसे इस ज़माने की पड़ी है

शमशेर अब उठ खड़ा होता है और हकीम साहब क पास जा कर उनके हाथ को पकड़ क

"आप का बहुत शुकरिअ आपने मेरी जान बचा ली "

Hakeem:ab भला मुझे अपनी जान प्यारी नहीं अगर आपको कुछ हो जाता तो आपकी अम्मी मुझे जान से मार देती

ये कह कर हकीम हसने लगता है और उसका साथ देते हुए शमशेर भी हसने लगता है

Shamshera:theek है हकीम साहब मई अब अपने हुजरे में चला

Hakeem:Ab थोड़ी देर रुक जाइये आपके अम्मी को मैंने खबर दे दी है वो आपको आपके हुजरे में ले जाएँगी

Shamshera:Hakeem साहब मेरे पैरो में कोई परेशानी नहीं जो मई चल नहीं सकता

Hakeem:wo सब ठीक है पर मई कुछ दवाइया दूंगा आपके अम्मी को जो आप को वक़्त पर खिला दया करेंगी

Shamshera:theek है हकीम साहब आपकी बात मान लेते है

Hakeem:Shehzade मुझे पता है मई अगर आपको कह भी दू वक़्त पर दवा खाने पर आप नहीं खाएंगे बचपन से जनता हु मई आपको

शमशेर ये सुन कर मुस्कुराते हुए

"हकीम साहब अब बच्चा नहीं हु जो आपकी बात न मनु"

तभी भूरिया दरवाज़े से अंदर आती है जो एक काले रंग क निक़ाब जो क बहुत हे ढीला था हाथो में दस्ताना लगाए आती है जिसे देख हकीम सर झुका कर मल्लिका इ जहाँ का इस्तेकबाल करता है

Hooriya:kya बाते चल रही है हकीम साहब

Hakeem:wo शहज़ादे कह रहे थे क अब वो बच्चे नहीं रहे जो मेरी बात न मने और दवाई वक़्त पर नहीं खाये

भूरिया एक बार शमशेर को देखती है और हकीम साहब को देख कर कहती है शिकायतने अंदाज़ से

"हाँ बहुत बड़े हो गए है ये"

Hakeem:Nahi मल्लिका इ जहाँ बच्चा कितना भी बड़ा हो जाये माँ बाप क सामने तो बचा हे होता है न

Shamshera:man me)Mujhe अब बचा समझना छोर दो अम्मी जान आपसे जब से इश्क़ हुआ तब से मई बचा नहीं रहा

Hakeem:Han आपको मल्लिका में कुछ दवाइए देता हो जिसे शहज़ादे को वक़्त पर खिलाये नहीं तो जख्म ठीक नहीं होंगे और परेशानी बढ़ सकती है क्यू क 4 जख्म है

इतने में सुल्तान मेरे वाहिद आजाते है और सब सुल्तान क सामने सर झुका कर खड़े हो जाते है

Sultan:shamshera अब कैसे हो

Shamshera:ab बिलकुल ठीक आपके सामने चल फिर प् रहा हु बास थोड़ा जख्म में दर्द रहता है

Sultan:Theek हो जायेगा मेरे शेर कुछ दिन महल में रहो दुश्मनो का भरोसा नहीं

Shamshera:abba जान में चाहता हु क आप भी कही न जाये जब तक में ठीक नहीं हो जाता

सुल्तान सर को हामी भरते हुए हिलता है

Sultan:Hooriya ..शमशेर का पूरा ध्यान रखना कोई तकलीफ नहीं हो मेरे बेटे को

Hooriya:Ji सुल्तान आप बेफिक्र रहे शमशेर हमारा भी बीटा है

Sultan:theek है में जाता हु

सुल्तान वह से चला जाता है और भूरिया शमशेर की ओरे देख कर उसके आखो में देखती है तो शमशेर भी अपने माँ क आखो में खो सा जाता है

Hooriya:ab यही रहना है क चलना है?

Shamshera:Ji ी वो चलिए अम्मी

भूरिया अपने दासी को बुलवा कर साडी दवाइया उठवा लेती है और शमशेर क साथ शमशेर क हुजरे में आने लगती है शमशेर हुजरे में आकर भूरिया का हाथ पकड़ कर

Shamshera:ammi जान हकीम साहब ने कहा आप तीन दिनों से रात में सोये नहीं मेरे खातिर आपको बहुत शुकरिअ

भूरिया मुस्कुराती है उतने में अचानक से शमशेर अपने अम्मी का हाथ



अपने हाथ में लेता है और चुम लेता है भूरिया जब तक समझती शमशेर ने उसके हाथ को चुम लिया था वो झटके से हाथ पीछे खींचती है

Shamshera:ammi जान मई आपसे बहुत मुहब्बत करता हु हद्द से ज़्यादा इतना मुहब्बत मेरे सिवा आज तक आप से कोई नहीं किया यहाँ तक अब्बा जान भी नहीं

भूरिया आगे पीछे देखती है और डरते हुए

"ये क्या कह रहे हो तुम"

Shamshera:Kya हुआ अम्मी जान आप ऐसे दर रही है जैसे आपको पता हे नहीं ये बात और आपने हे तो तो उस दिन मेरे प्यार को क़ुबूल क्या था फिर आप क्यू दर रही हो

Hooriya:Hosh में आओ shamshera..Mai उस दिन सिर्फ ये क़ुबूल की थी तुम्हारा प्यार हवस नहीं है सच्ची मुहब्बत hai...maine तुमसे ये नहीं बोली थी क मई तुमसे मुहब्बत करती हु

Shamshera:acha तो आपने ये मान लिया क मेरा प्यार सच्चा है पर आप मुझसे नफरत करती हो

Hooriya:Shamshera मैंने ऐसा तो नहीं कहा मई तुमसे मुहब्बत करती हु पर एक बेटे की तरह समझे और कुछ मेरे से उम्मीद मत करना

Shamshera:Kya कमी है मुझमे जो आप..

इतने में नाज़ की आवाज़ आती है

"क्या बाते हो रही है बाजी"

बहार से नाज़ रज़िया मुस्कान क साथ समां और महनूर भी आई थी सब क सब एक साथ आते देख भूरिया क पसीने छूट जाते कही किसी ने सुन तो नहीं लिया तभी वो सब अंदर आकर शमशेर का हाल पूछने लगते है

Shamshera:aap सब का शुकरिअ आप सब मुझे देखने आये

Sama:aap जल्दी से ठीक हो जाइये भाईजान फिर आपकी शादी करवा देंगे

Shamshera:man me)Apne बड़ी अम्मी को मन लो शादी तो मई आज कर लू

Naaz:sama ठीक कह रही है शमशेर अब आप को शादी कर लेनी चाहिए ज़िन्दगी का कुछ भरोसा नहीं होता

Shamshera:Ab कोई लड़की शादी करने क लिए तैयार हो तब तो मई करू

naaz:kya बात है काम से काम तुम चाहते तो हो

Sama:Bhaijaan आप इतने लम्बे ुचे हो और इतने खूबसूरत आपको तो कोई भी लड़की अपना शौहर बनाना चाहेगी मान न तो दूर

शमशेर भूरिया क तरफ देखता है

Shamshera:kya सच में ये मुमकिन है समां

भूरिया अपने तरफ शमशेर की नज़र और उसकी बात काटे की तरह चुभती है

Hooriya:man me)Is शमशेर का तो डिल करता है खून कर दू पर कैसे अपने उस बेटे को सजा दू जो मुझे जान से ज़्यादा चाहता है अब तो मेरी जान भी इसके ऊपर क़र्ज़ है

Sama:Han भाईजान आपके नज़र में कोई शहज़ादी है तो बताये

शमशेर फिर भूरिया को ताड़ते हुए अपने आखो को भरपूर अपने अम्मी को देखता है और कहता है

"समां मेरी नज़र में तो है एक शहज़ादी जो तुम्हारी भाबी बन ने क लायक है लेकिन वो मुझे देखती तक नहीं "

Sama:bhaijaan आप उसे डिल का हाल बताये और न माने तो मुझे बताइये मई आपकी मदद करुँगी

naaz:chup करो दोनों अपनों से बड़ो क सामने तुम दोनों जो मन में आये शुरू हो जाते हो

Razia:ab हमे शमशेर को आराम करने देना चाहिए

Muskan:Theek कहा रज़िया बाजी अब हम चलते है

Hooriya:theek है मई भी चलती हु

भूरिया एक टाक अपने बेटे शमशेर की ओरे देखती है और बुझे हुए चेहरे को देख शमशेर आखो से जैसे भूरिया को न जाने क लये कहता है पर भूरिया जैसे नाराज़ हो ऐसा चेहरा बनाये अपने सौतनों क साथ बहार चली जाती है अब शमशेर अकेला हे अपने हुजरे में था

Shamshera:man me)ammi जान आप उदास क्यू होती हो मई तो आपको हमेशा खुश रखना चाहता हु

इधर छान पाशा शुंग क पास जाता है और उसे कुछ दिन तक किसी भी हमले से ख़बरदार कर देता है और उसे छुप कर रहने क लिए कह देता है सुल्तान अपने दरबार में सिंहसँ पर बैठे थे और अपने मंत्री गैन से बात कर रहे थे

sultan:Chan पाशा क्या कुछ पता चला इन लूटेरो का

छान pasha:Hum पुरे पारस में तलाश कर रहे है जहाँपनाह जल्द हे इनके गिरोह सारे लोग गिरफ्तार होंगे

Dastan:Chan पाशा तुम्हारे रहते हुए महल क दीवारों को पार कर मामूली लूटेरे कैसे आसक्ति है ये मुमकिन नहीं

छान pasha:Aap कहना क्या चाहते है

Sultan:Yahi क हमारे पहरेदारी अब कमज़ोर हो गयी है हमारे सिपाहीओं को जमा करो और उन्हें बताओ अगर किसी भी तरह का कोई हमला महल में होता है तो अच्छा नहीं होगा

छान pasha:Jo हुक्म सुल्तान

गुल shah:Bhaijaan हमलावर चाहे कितना भी शातिर क्यू न हो हमारे हाथो से बच कर नहीं जा पायेगा हमने अपने सरहदों पर सिपाहीओं को नज़र रखने क लिए कह दया है

Sultan:Gul शाह क़ातिल कितना भी शातिर हो सुराग तो छोर हे जाता है

सुल्तान गुल शाह क आखो में घूरते हुए कहता है

गुल shah:man me)Sultan तुम कितना भी कुछ कर लो हमलावरों का सुराग नहीं ढूंढ सकोगे

ऐसे हे हर मुद्दे पैर सुल्तान अपनी राय सभा क सामने रखते है और कई घंटो तक सुल्तान अपने दरबार में हर मुद्दे पर बातचीत करते है उसके बाद सभा ख़त्म होती है और सब अपने अपने हुजरे में जाते hai,dekhte हे देखते रात हो जाती है और महल में दसिया सभी को खाना पहुंचने लगती है रात में सुल्तान अपने खाने पैर अपने पिता सुल्तान दास्ताँ को न्योता देते है और दोनों बैठ कर खाना खा रहे थे

Sultan:Abba जान मई आपको इस हमले पैर बात करने क लिए बुलाया है

dastan:Han कहो बीटा तुम्हे क्या लगता है कौन हो सकता है जो तुम्हारी जान मारने क फ़िराक़ में है

Sultan:Abba जान वो जो भी है पर में इतना जनता हु क महल क दीवारों को पार करना बिना अंदुरनी मदद क नामुमकिन है

Dastan:Mujhe तो समझ नहीं आता क्यू क अगर ये हमला तुमसे गद्दी छीन ने क लये क्या हो तो वो तो होगा हे नहीं क्यू क तुमने पहले हे शहज़ादे शमशेर को अगला सुल्तान होने का ऐलान कर दया है

Sultan:Wahi तो मुझे समझ नहीं आता आखिर मेरे मौत से क्या फायदा होगा और कौन है वो शख्श

Dastan:Beta हम बिना सबूत क ये बात दरबार में कह भी नहीं सकते क्यू क कोई मानेगा नहीं

Sultan:abba जान अगर उनका मक़सद मेरी जान लेना है तो वो ज़रूर मुझ पर फिर से हमला करेंगे और इसी बीच हमे सबूत जमा करने होंगे

Dastan:theek कहते हो बीटा

इधर भूरिया अपने कक्षा में लेती थी और सोच में खोयी थी कैसे उसकी ज़िन्दगी में तब्दीली आरही है और कैसे शमशेर ने उसकी जान बचा कर उसके ऊपर अहसान क्या और फिर आज सब क सामने में हे उसे छेड़ रहा था

Hooriya:man me)Shamshera मुझ पर जान छिड़कता और उसने ये साबित भी कर दया जब मेरे ऊपर तीर की बौछार हो रहा था तो सुल्तान जो मेरे शौहर है वो मुझे छोर कर भाग गए और शमशेर ने मुझे अपने जाल पर खेल कर बचाया नहीं तो आज में ज़िंदा नहीं hoti...ek शौहर है जो मुझे मुसीबत में अकेला छोर कर भाग गया और मेरी कोई अहमियत हे नहीं उसको अगर अहमियत होती तो वो भी शमशेर की तरह ढाल बन कर अपने सीने पर तीर ले लेता मेरी जान बचता ..माना क शमशेर की मुहब्बत सच्ची है जिसे में हवस समझ बैठी थी पर है तो पागलपन हे उसे अंदाज़ा भी नहीं है वो कितना बड़ा गुनाह कर रहा है और तो और आज कैसे मौक़ा प् कर मेरा हाथ चुम लिया और कहने लगा मैंने उसको क़ुबूल कर लिया ..धत्त बेशरम है उसे लगा जैसे में भी उस से करने लगी hu..ya खुदा में क्या सोच रही हु ..वो भले हे मुझ से मुहब्बत करता है इसका मतलब ये नहीं क में उसकी मन मानी करने दू वो तो है बेशरम सबके सामने मुझे घूरे जा रहा था कैसे कह रहा था समां को क वो उसकी भाबी तो है पर मानती nahi..Dimag ख़राब हुआ है या कहु तो इश्क़ में पागल हुआ है अभी उसके पास जाना था दवा खिलने कही उल्टा सीधा न क्र दे अब तो दर लगने लगा है अपने हे बेटे से उसकी नज़रो से पर क्या करू अगर में देख रेख नहीं करुँगी तो कौन करेगा ..जाती हु ..क्या करू जाओ क nahi..ab वो आज जख्मी भी तो मेरी वजह से है जाती हु पर बास उसको अपने से दूर रखूंगी

भूरिया अपने मन में लाख प्रसन लिए अपने बिस्तर से उठ टी है और आईएनए क सामने जा कर अपना निक़ाब जो क ढीला ढला था उसे ठीक करती है और अपने हाथो के दस्ताने पहन लेती है और चेहरे को ढकते हुए अपने आप को ऊपर से निचे तक देखती है

Hooriya:Man me)Isme से तो मेरे जिस्म का एक हिस्सा भी नहीं दिख रहा है और न कोई अहसास कर सकता है इतना ढीला निक़ाब है फिर भी शमशेर मुझे घूरते रहता है

भूरिया अपने आप हे ये सोचते हुए उसके होठो पैर मुस्कान फ़ैल जाती है और उसके होठो से बास ये लफ्ज़ निकलता है

"कमीना"

भूरिया सीधा अपने हुजरे से शमशेर क हुजरे क तरफ जाती है और हुजरे क दरवाज़े पैर पहुँचती है तो देखती है शमशेर किसी गहरी सोच में डूबा है

Shamshera:Man me)Kasam से ये अम्मी को पटना तो जासूसी करने से भी बड़ा काम है लगता है दिन में मेरे बातो से अम्मी को बुरा लगा इस लिए वो नहीं और शायद आये हे न ab..ab क्या करू में कैसे उन्हें samjhau..yaar ये बलदेव तो कहता था लगे रहो पैट जाएगी पर ये तो दाना भी नहीं डालती

तभी दरवाज़े पैर कड़ी भूरिया हल्का खासी करती है और शमशेर अपने नज़र उठा कर देखता है तो सामने भूरिया कड़ी थी शमशेर क आखो में तारे चमक जाते है और वो अपने आप को ठीक करते हुए ऐसे तैयारी करने लगता है जैसे चिड़िआ खुद उसके जाल में फसने आई है

Shamshera:aaa ाआइये अम्मी जान आप कड़ी क्यू है

भूरिया अंदर आते हुए अपने निक़ाब क अंदर मुस्कुरा रही थी अपने बेटे क इस अवश्था पर

भूरिया आकर दूर एक सोफे पर बैठ जाती है और शमशेर को देखते हुए

Hooriya:tumne दवाई खाया शहज़ादे

Shamshera:ammi जान आप काम से काम अपने चेहरे से तो ये निक़ाब हटा ले बोलने में तकलीफ होती होगी

भूरिया शमशेर को देखती है जो किसी बचे की तरह अपने अम्मी से इल्तिजा कर रहा था वो मुस्कुरा देती है



भूरिया एक ऐडा से अपने चेहरे को खोलती है और अपने मुस्कान को छुपाते हुए एक सांस लेते हुए अपने बेटे को बिना किसी भाव क देखते हुए

"अब बस्स्स ..मेरी बहुत फिक्र है तुम्हे"

shamshera:ammi जान अब आपकी फिक्र नहीं तो किसकी करू

Hooriya:han इसलिए तुम सब क सामने मेरी खिल्ली उदा रहे थे आज दिन में

Shamshera:ammi जान आप की खिल्ली कब उदय मई

Hooriya:Mai सब समझती हु कैसे तुम समां से फ़ुज़ूल बाटे कर रहे रहे

Shamshera:acha जी पर मई तो अपने होने वाली शहज़ादी क बारे में समां से बताया आपको क्यू लगता है क वो शहज़ादी आप हो?

ये कह कर शमशेर हसने लगता है और भूरिया थोड़ा गुस्सा हो कर

Hooriya:Chup करो बेशरम अगर किसी को भनक भी हो गयी तुम्हारे इस गुनाह का तो सुल्तान तुम्हे एक पल गवाए बिना जान से मार देंगे

शमशेर भूरिया क आखो में देखते हुए "अम्मी जान मई मर मिटने को तैयार हु"

Hooriya:ye पागल पैन अपने तक रखो मुझे कोई परेशानी नहीं अगर तुम उल्टा सीधा कुछ बोले तो में

Shamshera:to क्या ??

Hooriya:to में कुछ नहीं जानती में कुछ भी कर दूंगी पर में तुम्हारे इन गुनाहो को बढ़ावा नहीं दूंगी समझे कान खोल कर सुन लो तुम्हारे जो ख्वाब है उसे ख्वाब तक हे रखो तो बेहतर hoga.mai जान देना गवारा करुँगी पर..

शमशेर देखता है भूरिया अभी गुस्से से लाल हो रही है और ये सही वक़्त नहीं है क वो उसे अपने डिल की बात अपने अरमान बताये

Shamshera:man me)Aise नहीं होगा अम्मी जान में समझ गया ये घी सीढ़ी ऊँगली से नहीं निकलने वाली

Shamshera:Achha अम्मी जान बास आपको शिकायत का मौक़ा नहीं मिलेगा

Hooriya:theek है चलो दवा खा लो अब

भूरिया दवा खिला कर वापस जाने क लये होती है तभी उसे हकीम साहब की कही हुई बात उसे याद आती है क कैसे हकीम साहब ने शमशेर को शराब और शबाब से दूर रहने को कहा है

Hooriya:beta मेरी एक और गुज़ारिश है तुमसे अगर तुम सच में मुहब्बत करते हो तो तुम मानोगे वर्ण नहीं

Shamshera:ammi आप क लिए जान भी हाज़िर है बताये

Hooriya:Mai चाहती हु क अब तुम मैखाने जाना बंद कर दो और तुम्हारी हर वो गलत आदत बंद कर दो जिस से तुम्हारा सेहत बर्बाद हो jayega..hakeem साहब कह रहे थे अगर अभी नहीं सम्भले तो देर हो जाएगी

Shamshera:Mujhe कुछ नहीं होगा अम्मी जान आप तो जानते है हकीम साहब ये बहुत पहले से कह रहे है

Hooriya:Seedha कह दो क तुमको नहीं मान नई मेरी baat..aur कहते हो बड़ी मुहब्बत करता हु

भूरिया शमशेर को चिढ़ाते हुए कहती है जिस से शमशेर जोश में आजाता है और बिना सोचे समझे

Shamshera:theek है अम्मी जान में आज क बाद मैखाने जाना मुजरा देखना सब बंद कर दूंगा पर बदले में मुझे क्या मिलेगा

Hooriya:Badle में तुम हर बीमारी से मेहफ़ूज़ रहोगे

Shamshera:nahi मुझे कुछ और चाहिए

भूरिया अपने आखे बड़ी करते हुए हल्का गुर्राते हुए शमशेर को देख

Hooriya:ulta सीधा सोचना भी मत नहीं तो..

शमशेर हल्का मुस्कुराते हुए

Shamshera:ammi जान आप बहुत जल्दी दर जाती हो मुझे अपने मुहब्बत क बदले में आपकी मुहब्बत नहीं चाहिए पर आप को मेरी दोस्त बन न पड़ेगा

Hooriya:Pagal हो में तुम्हारी अम्मी हु दोस्ती करना है तो किसी और से करो में तो तुम्हे मानती हु और अपने बेटे की भलाई हे चाहती हु

Shamshera:nahi मुझे आप अपना दोस्त बनाओ जिस से में और आप दूसरे से अपना दुःख दर्द बता सके इसमें भी आपको गुनाह लगता hai?to ठीक है फिर मई नहीं छोड़ूंगा शराब और नहीं छोड़ूंगा कोठे पैर जाना

Hooriya:man me)abhi इसे बुरी आदत से बचाना ज़रूरी है नहीं तो इसे कोई बीमारी हो गयी तो हकीम साहब ने कहा है अब नहीं रोका तो बहुत महंगा पड़ेगा और वैसे भी दोस्त हे बनूँगी न बेचारे ने जान पर खेल कर मेरी जान बचाई इतना तो कर हे सकती हु

भूरिया थोड़ी देर सोचती है और पता नहीं उसके डिल में क्या आता है वो कहती है

"ठीक है मुझे मंज़ूर है पर आज क बाद जिस दिन तुमने अपना वादा तोडा समझो हमारी दोस्ती ख़त्म"

shamshera:ab मुझे किसी शराब कबाब की ज़रूरत नहीं जब आप जैसी खूबसूरत हसीना मेरी दोस्त है

Hooriya:acha दोस्ती कर क तुम ये फज़ूल बाटे करना चाहते हो

Shamshera:ab अम्मी अपने दोस्त की तारीफ़ भी करना गुनाह है क्या

Hooriya:badmash अब में जाती हु शब्बा खैर

shamshera:shabba खैर

भूरिया दरवाज़े से निकल कर जाने लगती है और सोचती है "एक मौक़ा नहीं छोरता ज़रूर इसके शातिर दिमाग में कुछ है"

इधर शमशेर अपने बिस्तर पर लेट कर मुस्कुरा रहा था

Shamshera:man me)Aaj दोस्त बानी हो कल मेहबूबा बनोगी और एक न एक दिन मेरे बीवी भूरिया बेगम

ये सोच कर हे शमशेर का लैंड खड़ा हो जाता है जिसे वो बिस्तर में आगे पीछे घिसने लगता है और अपने अम्मी क यादो में हे वो नींद क आग़ोश में चला जाता है.
 
अपडेट 145

पारस

पारस में एक नयी सुबह होती है अब भूरिया को पाने क लये शमशेर ने दोस्ती से शुरुवात कर दया था भूरिया भी मान चुकी थी उसका बीटा उस से सच्ची मुहब्बत कर्त है पर वो किसी भी हाल में अपने बेटे से किसी भी तरह का तालुक बनाने क लये राज़ी नहीं थी उधर सुल्तान हमलावरों की छानबीन में लगा हुआ था और गुल शाह सुल्तान को मारने क फ़िराक में लगा हुआ था और जल्द से जल्द सुल्तान को मार क उसकी बीवी भूरिया से खुद शादी करना चाहता था भूरिया की हे दीवानगी थी जो गुल शाह ने आज तक शादी नहीं की थी

शमशेर अपने हुजरे में सोया था और अचानक उसे कुछ गीला महसूस होता है और उसकी आखे खुल जाती है शमशेर अपने पजामा पर देखता है जो गीला था

Shamshera:uff मेरा लैंड तो पानी छोर रहा है

शमशेर अपने खड़े लैंड को बिस्तर पर रगड़ते हुए अपने आखे बंद करता है

Shamshera:Aah अम्मी जान कब मुझे अपना आशिक़ बनाओगी अपना उफ़ आपके क़ातिल बड़े बड़े दूध ाः और ज़ालिम बड़ी गांड तो मेरे हे जान हे लेता है तुम जब भी चलती हु

शमशेर कई दिनों से कोठे पर नहीं गया था तो बिना चुदाई क उसके लैंड में अलग हे अकड़न पैदा हो गया था शमशेर अपने मन को समझते हुए उठ ता है और और नाहा धो कर तैयार होने लगता है

उधर भूरिया की आँख खुलती है और उसके सामने कल की बाते याद आती है कैसे शमशेर उसे कह रहा था क वो कितनी मुहब्बत करता है

Hooriya:man me)Ek सुल्तान है जो मुझे पसंद नहीं करते और ये पागल शमशेर मुहब्बत करता है मुझसे आखिर क्या है मेरे अंदर जो मुझसे हे इश्क़ हुआ उसे

भूरिया भी स्नान घर में घुस जाती है और नाहा धो कर तैयार होती है तभी भूरिया का नाश्ता आजाता है वो नाश्ता कर क सोचने लगती है

Hooriya:kya karu..ye शमशेर तो रात मुझे अपनी दोस्त बना लिया उसके खुरफ़टी दिमाग में क्या चल रहा है पता नहीं डिल तो कहता है शमशेर का मुँह नहीं देखु कभी जैसी उसकी सोच हो गयी मुझे हे अपनी मेहबूबा समझ कर इश्क़ कर रहा है अपने माँ से कैसे कोई इश्क़ कर सकता है पर मई मजबूर हु एक तो पहले मई उसे जान से बढ़कर मानती थी और अब तो उसने मेरी जान बचा कर मुझ पर अहसान सा कर दया hai..Kya करू ..एक बार ठीक हो जाये शमशेर फिर इसे अचे से दांत कर मुझे इस तरह से घूरना भी बंद करवा दूंगी तब तक मुझे उसके गुनाहो को नज़रअंदाज़ करना होगा

भूरिया कड़ी होती है और अपने आपको अचे से आईने में देखती है और अपने आप को ठीक करते हुए शमशेर क हुजरे क लिए निकल जाती है भूरिया दरवाज़े पर पहुंच कर

"क्या मई अंदर आ सकती हु बीटा"

अंदर से शमशेर की आवाज़ आती है

"अम्मी जान आपको कब से इजाज़त की ज़रूरत ाँ पड़ी आ जाये"

भूरिया अंदर जाती है देखती है शमशेर तैयार हो कर अपने आप पर इतर छिरक रहा था

Hooriya:Kya बात है मेरा बीटा आज बहुत खुशबू लगा रहा है

शमशेर एक नज़र अपने अम्मी को देखता है और उसके आखे उस पर गड जाती है



शमशेर देखता है उसकी माँ क बड़े दूध और उसकी बड़ी गांड निक़ाब फाड़ कर आने को तैयार थे भूरिया क लाख छुपाने पर भी वो पता चल जा रहे थे

Shamshera:man me)ammi जान आपके ये क़ातिल चूचिया और ज़ालिम गांड आह क्या कहने इतने बड़े तो पुरे पारस में किसी क नहीं होंगे

Hooriya:Kya हुआ शमशेर..

Shamshera:wo अम्मी जान अब खुशबू लगा रहा हु क कोई हसीना काम से काम इस नाचीज़ को देख तो ले

Hooriya:Mera बीटा इतना खूबसूरत नौजवान है तुम कहो तो दुन्या सबसे खूबसूरत शहज़ादी से तुम्हारी शादी करवाउंगी और कोई मेरे बेटे को मन कर दे ऐसा हो हे नहीं सकता

Shamshera:Aisa नहीं है अम्मी jaan..mai बहुत बुरा हु मैंने सारे गलत काम कर लिए अपने ज़िन्दगी में अगर मुझे कोई लड़की घटिया कह कर इंकार कर दे तो भी मुझे बुरा नहीं लगेगा और वैसे भी मुझे शादी नहीं करनी

भूरिया जा कर हकीम का दवा उठाये शमशेर क तरफ आती है

"लो खा लो नहीं तो भूल जाओगे थोड़ी सी जान नहीं आई शेर बन ने लगे शादी नहीं करनी"

शमशेर भूरिया से दवा ले कर खता है और फिर भूरिया क आखो में देख कर

"अम्मी जान नहीं कहा तो नहीं करनी"

भूरिया ये सुन कर हसने लगती है और शमशेर से मज़ाकिया अंदाज़ में कहती है

"उल्लू अभी मन कर रहे हो न कुछ दिन बाद खुद कहोगे लड़की ढूंढ़ने क लये"

Shamshera:ammi जान ..आप माने या न माने पर मेरे डिल में कोई और नहीं बस सकती और न हे किसी क साथ में ज़िन्दगी गुज़र सकता इसलिए मई किसी को धोका न दूंगा न अपने आपको न किसी लड़की को

भूरिया शमशेर की बात सुन कर दांग रह जाती है और उसके मुँह में अल्फ़ाज़ हे नहीं था कुछ कहने क लिए इसलिए वो शमशेर से इतना कहती है

"ये क्या पागलपन है"

शमशेर भूरिया क आखो में देखते हुए बहुत हे दुखे मन से कहता है

"अम्मी जान ये पागलपन नहीं मुहब्बत hai...Muhabbat और मेरे डिल की रानी सिर्फ आप थी आप हो और आप रहोगी चाहे आप मुझे फांसी पे लटका दे तब भी मेरा डिल सिर्फ एक नाम पुकारेगा वो आपका होगा"

शमशेर ये कहते हुए आखो में ासु आ जाते है और उसकी आखे हलकी लाल सी हो जाती है वही भूरिया सुध बुध खो कर बैठी थी उसके लाख समझने क बाद उसका बीटा मान ने को तैयार नहीं था क ये गलत है भूरिया शमशेर को पालक झपकाए बिना देखते हुए हुजरे से बहार जाने लगती है अभी दो कदम हे जाती है क शमशेर उसका हाथ पकड़ लेता है

"अम्मी जान मुझ से दूर चली जाओगी पर मेरी मुहब्बत तो हवा बन कर आपके साथ साये की तरह रहेगा"

भूरिया पलट कर शमशेर को निदारर बन कर कहती है

"शमशेर मैंने तुम्हे पहले भी समझाया था तुम ये ख्वाब समझ कर भूल जाओ और तुमने वादा क्या था तुम मुझसे उम्मीद नहीं रखोगे"

"अम्मी जान मई आप से कुछ नहीं माँगा पर क्या एक दोस्त अपने दोस्त से डिल की बात भी नहीं रख सकता इसका मतलब है आपने मुझ से झूटी दोस्ती की"

शमशेर शिकायत भरे अंदाज़ से अपने मुँह को भूरिया क तरफ से मोड़ लेता है

Hooriya:Nahi नहीं मई झूट कभी नहीं बोलती में सच में तुम्हे दोस्त मानी हु इसमें कोई शक नहीं

Shamshera:to फिर आप गुस्सा क्यू हो रही हो मई नहीं मानता आप सच बोली थी आप झूट बोली बस मेरा डिल रखने क लये

Hooriya:nahi ऐसा नहीं है

Shamshera:aisa हे है

शमशेर रुआँसा मुँह बनाकर जा कर दूर सोफे पर बैठ जाता है

Hooriya:uff अब तुम्हे कैसे समझौ क ये सच है क हम अब दोस्त है पर माँ बीटा भी है

Shamshera:Mai नहीं मानता आप मुझे अपना दोस्त मानती हो अगर मानती हो तो साबित करो

Hooriya:Ab में कैसे साबित करू शमशेर अब तुम ज़्यादा बचो की तरह हरकत कर रहे हो

Shamshera:Achha एक रास्ता है आप मेरी कोई बात मानोगी तब जा कर मई यक़ीन करूँगा

Hooriya:theek है पर कुछ उल्टा सीधा नहीं कहना समझे

भूरिया अपने ऊँगली दिखा कर अपने आखो को घूमते हुए शमशेर से पूछती है

Shamshera:man me)aaye हाय तीखी मिर्ची तुम्हे पेलने का मज़ा हे अलग होगा मल्लिका इ जहाँ

Hooriya:kya सोच रहे हो बताओ क्या बात कहना चाहते हो

Shamshera:Ammi जान अब मेरी सोच तो अपनी है जो सोचु

Hooriya:aise कैसे जो सोचु उल्टा सीधा मत सोचना खास कर मेरे लिए

भूरिया शमशेर को डरते हुए कहती है और ऐसे गुस्से में तिलमिलाने से उसके बड़े दूध कभी दये तो कभी बाये हिल रहे थे जिसे देख कर

Shamshera:man me)aaye हाय ये क़ातिल चुचिअ तो निक़ाब में से भी केहर ध रहे है डिल तो कर रहा है यही पटक कर नोच खो इन चुचिओ को

Shamshera:ammi जान आप भी न आप क लये में गलत सोच सकता हु भला वो तो में ये सोच रहा हु क aapko...han आपको पहले की तरह नए लिबास पहन ने होंगे जो मैंने सिलवाए थे आपके लिए

Shamshera:man me)Aapke बड़े दूध और गांड उन तंग लिबासो में देख कर मेरा लौड़ा तो छूट फाड़ने को तैयार हो जाता है अम्मी जान

Hooriya:nahi nahi..ab मई उन कपड़ो की नहीं पहन सकती वो बहुत कैसे हुए है और मेरे नाप क नहीं है

Shamshera:To फिर जाओ आप मई समझ गया आप झूट बोल रही थी

Hooriya:chup करो ऐसा नहीं पर में अब वो सब नहीं पहन सकती वैसे भी मेरे रंग बिरंगे पहन ने क उम्र नहीं रही

Shamshera:ammi जान कहना भी मत उम्र नहीं रही बास आप बहाना बना रही हो आप दोस्त नहीं हो बात ख़त्म

भूरिया गुर्रा कर शमशेर को देखती है और कुछ सोचते हुए

Hooriya:theek है मई मान लेती हु पर तुम्हे भी एक वादा करना होगा

Shamshera:kahiye अम्मी जान

Hooriya:Tumhari गन्दी नज़र दूर रहेगी हमेशा

Shamshera:theek है मुझे मंज़ूर है

shamshera:man me)Bhut चालक बनती हु तुम कितना भी बचने की कोशिश कर लो में तो तुम्हे अपने निचे लिटा कर रहूँगा मल्लिका इ जहाँ उर्फ़ भूरिया सुल्ताना

Hooriya:man में) बड़े चालक बनते हो सोच रहे हो मौक़ा मिल जायेगा मुझे तंग कपड़ो में देखने का पर में भी मिश्रा की शहज़ादी हु और पारस की सुल्ताना मुझसे सियासत सीखनी होगी तुम्हे

भूरिया कुछ देर बात कर क शमशेर क हुजरे से जाने को उठ टी है और दरवाज़े पैर जाते हुए शमशेर अपनी आखे फाड़े अपनी माँ क बड़े गांड को घर रहा था



भूरिया बड़े बड़े गांड दाए बाए झटके खा रहे थे जैसे वो एक दूसरे से लड़ रहे हो शमशेर बेतहाशा देखे जा रहा था

Shamshera:man me)Ammi जान आपके गांड में लैंड डालूंगा तो कितना मज़ा आएगा मेरी रानी मेरी मेहबूबा भूरिया

भूरिया को अचानक पता नहीं किया सूझता है वो मुड़ती है तो देखती है शमशेर की नज़र उसके गांड को खा जाने वाली नज़र से देख रही है



भूरिया अपने आखो पैर विश्वास नहीं कर पा रही थी उसका खुद का बीटा उसे ऐसी गन्दी नज़र से देख रहा था वो भी उसके सामने बिना डरे भूरिया अपने आखो को बड़े करते हुए कुछ बोलने को सोचती है तभी शमशेर बोल पड़ता है

"अम्मी जान आज क बाद ये झोले जैसे निक़ाब पहन न बंद कर दीजिये आज क बाद अब से सिर्फ आप खूबसूरत लिबास में चाहिए"

ये कह शमशेर मुस्कुराता है और भूरिया तुनक कर अपना मुँह फेरती है और तेज़ी में जाने लगती है जिस से शमशेर को और ाचा नज़ारा मिलता है भूरिया क बड़े गांड अब ऐसे रगड़ खा रहे थे जैसे एक दूसरे को छल देंगे

Shamshera."ammi जान आप क चाल न ख़राब करदी आपके इस गांड को पेल क तो मेरा नाम शमशेर नहीं"

भूरिया जाते हुए सोचती है

"ये शमशेर तो मेरे देखने क बाद भी नहीं बंद क्या घूरना ऐसा घर रहा था जैसे खा jayega..Kitna भी कोशिश कर लो शमशेर ये भूरिया तुम्हे खाने क्या चखने को भी नसीब नहीं होगी"

इतना सोचते हे उसके चेहरे पर एक मुस्कान फ़ैल जाती है

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 146

कुबेरी राज्य

कुबेरी जो कुछ दिनों पहले एक अत्याचारी राजा राजा रतन सिंह का राज था आज सुल्तान मेरे वाहिद और देवराज ने मिल कर कब्ज़ा कर लिया था और राजा देवराज ने अपने हाथो से रतन सिंह को मार दिया tha,Sultan ने कुबेरी राज्य का आधा सोना देवराज क लये छोर दया और आधा सोना अपने साथ वापस पारस ले gaye,Devraj की सम्मान सुल्तान मेरे वाहिद बहुत करते थे और उनके कहे अनुसार राजा देवराज अब कुबेरी राज्य क नए महाराज बने सुल्तान की एक और चाहत थी क देवराज अब शादी कर ले और अपना घर बसाये और इसका वडा भी देवराज ने सुल्तान को कर दया था पर सुल्तान क कहे अनुसार महाराज देवराज का विवाह राजा रतन सिंह की पत्निया रानी रुक्मणि और सुखमनी जो दोनों बहने थी उनसे होनी थी पर वो दोनों अपने पति क क़ातिल से विवाह करने क लिए अभी तक राज़ी नहीं हुई थी

सिंहासन पर विराजमान महाराज देवराज अपने मंत्रीओ से बैठ कर अपनी रणनीति बना रहे थे और सब बड़े गौर देवराज की बात सुन रहे थे

Devraj:Kya हमारा सन्देश पारस क सुल्तान तक पहुंच गया

Sainik:Ji महाराज अब तक हमारे संदेशवाहक ने उस सन्देश पत्र को सुल्तान मेरे वाहिद तक पंहुचा डाई होंगे

Devraj:Han सुल्तान क कहे अनुसार बहुत जल्द कुबेरी वासी हमारे विरोध को छोर कर हमारे अनुयायी बन जायेंगे

Mantri:Maharaj अब हम राष्ट्रवासिओ को तो हमारे साथ कर लेंगे किन्तु एक और संकट है

Devraj:kaisi संकट ?

Mantri:wo सुल्तान ने तो कहा था क आप अब राजा रतन सिंह की पत्निओ को अपनी पत्नी बना ले

ये कहते हुए मंत्री खासी करता है

Devraj:Meri बात सब सुन ले रानी रुक्मणि और रानी सुखमनी को किसी प्रकार का भेदभाव या दुवय्वहार करना अनुचित होगा रही बात विवाह की तो में तब तक उनसे विवाह करना नहीं चाहूंगा जब तक वो दोनों खुद अपने तन मन से इस बंधन में बांधना न छह रहे हो

Mantri:Maharaj पर वो तो हमारे सिपाहीओं से किसी शत्रु की तरह बर्ताव करती है हो सकता है आने वाले समय में ये हमारी संकट न बढ़ा दे महाराज

Devraj:Kisi को कोई संकट नहीं आएगा वो दोनों स्त्री है और हम कब स्त्रीयो से भयभीत होने lag?Smaran रहे हमारी संस्कृति स्टीयो की सम्मान करना सीखते है

देवराज अपने सिंहासन से उठ था है और वह पर बैठे सब खड़े हो जाते है और एक सैनिक जयकारा लगाने लगता है

"महाराज देवराज की " "जय"

देवराज अपने सिंहासन से उठ कर धीरे कदमो से चलते हुए सीधा रानी रुक्मणि और रानी सुखमनी क कक्षा में पहुंचते है

Devraj:Raani मई महाराज देवराज क्या अंदर आ सकता हु

रानी rukmani:Aaiye

रानी रुक्मणि और सुखमनी उठ कर कड़ी हो जाती है और गुस्से से देवराज को देखने लगती है

Devraj:Pranam राणिओ

Rukmani:Aap को लज्जा नहीं आयति महाराज देवराज ,पहले आप हमारे पति की हत्या करते हो और फिर हम से हे विवाह रचाने का स्वप्न देख रहे हो

Sukhmani:Ary आप तो इतने गिर्र गए क आप क सैनिक आकर हमे आप से विवाह करने पैर विवश करते है

Rukmani:aap अपने कान खोल कर सुन लें महाराजा देवराज आप हमारे पति महाराज रतन सिंह की हत्या कर क कुबेरी राज्य को अपना लिए परन्तु हम दोनों से विवाह करने का स्वप्न देखना भी बंद कर दें

Sukhmani:Maharaj देवराज हम अपने ह्रदय से कभी भी अपने पति क हत्यारे से विवाह करने का सोच भी नहीं सकते हाँ आप हमारे साथ ज़बरदस्ती..

Devraj:Raani sukhmani..Aapko ज्ञात नहीं मई देवराज हु और मेरे राखत क कण कण में हमारे माता पिता का संस्कार hai..mai यहाँ आपसे भेट करने हेतु आया था और रही बात विवाह की तो में सुल्तान क कहे अनुसार आप दोनों से विवाह कर प्रस्ताव रखा था और जब तक आप दोनों न चाहे विवाह न करे हमे कोई आपत्ति नहीं

Rukmani:Maharaj आप और संस्कार की बाते कर रहे है हाहाहाहा हम ने सुना है आपकी बहिन महारानी देवरानी ने अपने पुत्र महाराज बलदेव से हे विवाह कर लिया है

ये सुन कर दोनों बहने हसने लगती है और देवराज का मुँह उतर जाता है और वो एक लम्बी सांस लेते हुए

Devraj:Ranio मेरी बहिन देवरानी किसी देवी सम्मान है और में मेरी बहिन की जितना पहले आदर और सम्मान करता उतना आज भी करता हु आप एक स्त्री हो कर एक दूसरे की परिस्थिति जाने बिना उनका मज़ाक बना रही ho..aap दोनों चाहे जो कहे आज क पश्चात आप दोनों से कोई नहीं कहेगा विवाह क लये और आपके सम्मान में कोई कमी नहीं आएगी आप को हम और हमारी सेना किसी रानी से भी अधिक सम्मान करेंगे aapki..aur हाँ मुझे आप दोनों क पति की मृत्यु का निसंदेह दुःख है परन्तु मुझे एक ऐसे राजा जिसने मेरे बहिन देवरानी क साथ ज़बरदस्ती करने का प्रयास क्या अवं कुबेरी की प्रजा क ऊपर बरसो अत्याचार क्या मुझे राजा रतन सिंह को मारने का कोई पश्चाताप नहीं है

ये कह देवराज अपने आखो को रुक्मणि और सुखमनी को क्रोधित होते हुए देखता है और मुद कर कक्षा से बहार चला जाता है

Rukmani'dekha रुक्मणि ..दूसरे पापी है और इसकी बहिन जो अपने हे पुत्र क साथ राते रंगीन कर रही है वो किन्ही परस्थितिओ में की

Sukhmani:Rukmanai हाहाहा परिस्थति तो में समझती हु देवरानी अपने पति से संतुष्ट नहीं थी तो अपनी खुजली अपने पुत्र से हे मिटा रही है

Sukhmani:Han कुछ सैनिक बात कर रहे थे देवराज ने स्वयं देवरानी को गर्भवती भाव का आशीर्वाद दिया है

Rukmani:han देवराज चाहते है वो फिर से मां बने पर इस बार अपने भांजे क दुवारा हे उसकी बहिन बचा जन्म दे कर अपने भाई को मां बनाएगी हहहह

ये कह कर दोनों हसने लगते है और पुरे कक्षा में रुक्मणि और सुखमनी की हसी गूँज रही थी

गहतराष्ट्रा

रात क भीषण चुदाई क बाद नंगी हे देवरानी अपने पुत्र क साथ बिस्तर पर सोई थी बलदेव अपने माँ को बाहो में कैसा था और देवरानी अपने सर को अपने बेटे क बलिष्ट कंधे पैर राखी चैन की साँसे ले रही थी तभी उनके कानो में ढोल पीटने की आवाज़ आती है और दोनों अपने आखे धीरे धीरे खोलते है देखते है कक्षा क अंदर परदे को भेदती हुई सूर्य की किरणे अंदर आरही है देवरानी और बलदेव अब पूरी आखे खोल एक दूसरे को देख रहे थे देवरानी क बाल खुले हुए थे और उसके आखो में एक कामुमकता झलक रही आखो क निचे हल्का सा कालापन आगया था जो रात को बलदेव की जबरदस्त चुदाई का असर था होठो की लाली गायब थी जैसे बलदेव ने होठो से पूरा रस चूस क्र पी गया हो

बलदेव अपने कामुक माँ को इस तरह पूर्ण नग्न अवस्था में अपनी गॉड में पाकर उसके कामुक मुख को देखते हे अपने हाथ से उसके बाल को उसके चेहरे से हटाता है और अपने होठ को देवरानी क होठो क तरफ धीरे से ले जाता है देवरानी अपनी आखो से अपने बेटे को इस प्रकार अपने आप को ताड़ने से खो सी जाती है और उसके दोनों होठ खुल जाते है और वो खुले मुँह क साथ बलदेव का स्वागत करने क लये अपनी आँख बंद करती है

देवरानी जैसे आँख बंद करती है उसे ख्याल आता है बहुत देर हो गई है और वो अचानक से उठ ते हुए

"छोड़िये न आज तो सूरज सर क ऊपर आगया हे भगवन आज तो पूजा भी छूट गया"

"देवरानी अब तो दुपहर हो गया है लगभग अब क्या करना है तुम्हे पूजा तो सब क्र लिए होंगे"

"आप भी naa..Ab पूजा में नहीं गयी तो काम से काम अब तो निचे जाऊ सासु माँ क्या सोचेंगी अब तक सो रही हु मई "

देवरानी अपने बाल को सवारते हुए निचे उतर टी है और अपने पैरो पर जैसे कड़ी होती है उसके छूट में एक दर्द उठ ता है "आआह"

"क्या हुआ रानी "

देवरानी धीरे से चलते हुए बलदेव को घूरते हुए आईने क सामने जाती है और अपने आप को देखती है वो इस समय ऐसी लग रही थी क कोई अँधा भी सूंघ क बता दे क देवरानी की ज़बरदस्त ठुकाई हुई है उसके नज़र सबसे पहले छूट पर पड़ते है और उसके सुज़े हुए छूट की दीवारों को देख आश्चर्यचकित होते हुए अपने चेहरे पर देखती है और उसका नज़र अपने कंधो पर बलदेव द्वारा कटा हुआ निशान नज़र आता है वो अपने बाल को हटती है तो उसके गर्दन से ले कर कंधे तक बलदेव ने काट का निशान छोर दया था

देवरानी बलदेव को घूरती है और कहती है

"ये देखिये आपने क्या kiya..log क्या सोचेंगे"

देवरानी अपने भरी गांड को हिलाते हुए दोनों पेअर पटकती है

"ये तो साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे है अब भला लोग पूछेंगे तो क्या बताउंगी"

"मेरी रानी बता देना मैंने किया"

"बुद्धू पर मई कैसे कहूँगी मुझसे पूछेंगे क्यू तो"

"मेरी रानी माँ अब पत्नी तुम मेरी हो तो क्या में दुसरो को पेलुँगा आपको पेलता हु ये सबको पता है अब प्रेमी प्रेमिका मिलान करते है सम्भोग करते है तो ये सब होता है तुम देखो मेर हाथ पर काट ली हो "

"मुझे क्षमा कर दीजिये महाराज"

बलदेव क कोहनी क निचे देवरानी बहुत बुरा कटा था और वो मासूम सा चेहरा बना कर अपने बीटा से कहती है

"देवरानी तुम मेरी पत्नी हो क्षमा की क्या बात है आपकी बड़ी गांड देखो डिल कर रहा है इनके कच्चा चबा जाऊ"

"धत्त बेशरम में जाती हु स्नान करने मुझे जल्दी से निचे जाना होगा आज पूजा भी नहीं कर पाई"

"रानी माँ अब से आप केवल अपने पति की पूजा करो रात भर मेरे लौड़े की मालिश अपने छूट से करो जब तक तुम पेट से नहीं हो जाओ उसके बाद जीवन भर पड़ा है पूजा पथ क लये"

"महाराज मई भी तो यही चाहती हु परन्तु घर में राज परिवार क्या सोचेंगे मेरे बारे में "

"यही सोचेंगे क हमारी महारानी देवरानी बड़ी चुड़क्कड़ माल है दिन रात अपने बेटे का लौड़ा अपने छूट में लिए सोई रहती है"

बलदेव ये कह कर अपने लौड़े पर हाथ लगा कर सहलाता है और देवरानी अपने आखो को निचे करते हुए शरमते हुए

"धत्त्त"

और दौर कर स्नान घर में घुस जाती है

बलदेव वापस अपने बिस्तर पर लेट जाता है

"हाय मेरी छम्मक छल्लो रानी माँ"

ये कह कर उल्टा लेट कर अपने बदन को ऐठता है "आआह"

"ये साली देवरानी की चुदाई कर क तो पूरा बदन टूट रहा है"

बलदेव फिर से आखे बंद करता है और उसे नींद आजाती hai,thodi देर बाद देवरानी स्नान कर क निकलती है और अपने पति को सोता देख

"ाजी सुनते है"

"ाजी सुनिए सो गए क्या"

बलदेव को हिला कर देखती है तो वो नींद में था देवरानी अपने पति क लैंड पर नज़र जाता है तो देखती है बलदेव का लौड़ा सोते हुए सिकुड़ सा गया है

"देखो कितना भोला बन रहा है रात में तो किसी सांप की तरह मेरे बच्चेदानी तक घुस कर हुंकार रहा tha..bahrupiye कही क"

ये कह कर देवरानी मुस्कुराती है और अपने बेटे क लैंड को देखते देखते हे अपने वस्त्र पहन कर तैयार हो जाती है और जाते हुए अपने बेटे क ऊपर चादर दाल देती है और कक्षा से निकल कर सीडीओ से निचे उतरती है ,निचे षुरूश्ती कमला और राधा बैठी थी और महारानी देवरानी अपने धीरे कदमो से निचे उतर रही thi,sabki नज़र देवरानी पर थी

Shurushti:aaiye महारानी देवरानी

shurushti:man me)Kya बाला की सुन्दर लग रही है महारानी इसके अंग अंग में एक चमक आगयी है हर अंग एक लचक खा रहे ऐसा लग रहा है जैसे साक्छरत काम देवी हो उफ़ बलदेव ने लगता है रात भर्र पेला है इसे

Kamla:man me)Aakhir गदराई माल अपने बेटे से रात भर्र अपने छूट की आग ठंडी कर मस्तानी चल से लचकते मटकते हुए आहे गयी और कहती थी पाप है अब देखो कितनी खुश है बलदेव से ब्याह कर क अपने पुत्र की इतना सेवा की है रात भर चमकेगी हे

Radha:man me)wah क्या सुन्दर लग रही है महारानी



देवरानी अपनी साड़ी लहराते हुए षुरूश्ती क सामने आती है और प्रणाम करती है तीनो अब तक देवरानी को हे घूरे जा रही थी

Devrani:Saau माँ आप सब कब से मुझे हे निहारते जा रहे है क्या बात है

Shurushti:Ab हमारी माहरणी देवरानी इतनी सुन्दर और सुशील लग रही है क हमारी नज़र हे नहीं हैट रही है

Devrani:Kya सासु माँ आप भी न

Kamla:Sahi में महारानी आप एक अप्सरा लग रही हो

Shurushti:Meri बहु कितनी सुन्दर विवाह क बाद लगने लगी है क्या खा रही हो

Kamla:man me)Devrani अपने बेटे का लैंड खा रही है और यही कारन है इनके निखार का

Devrani:Ab सब महाराज बलदेव की कृपा है वो मुझे एक पत्नी क रूप में हमेशा खुश रखते है जिसके फलस्वरूप मुझे कोई चिंता नहीं और में खुश रहती हु

Shurushti:Hum सब अपने महारानी को सदिआव इसी प्रकार खुश देखना चाहते है

Kamla:man me)Ab देवरानी दिन रात मोटा और लम्बा बलेव का केला कहती है तो कहेगी हे न बलदेव उसे खुश रखता है

Devrani:Kshama कीजिये वो आज सुबह जल्दी सो कर उठ नहीं पाई

देवरानी हिचकिचाते हुए अपने सौतन बानी सास को कहती है

Shurushti:Koi बात नहीं है हम इस बात से भली बहती परिचित है क आप दोनों क विवाह तो अभी अभी हुई है इसलिए पहले अपने पत्नी धर्म निभाओ ,कुछ दिनों बाद जब पुराणी हो जाओगी तो सवेरे उठ कर पूजा पथ करना

Devrani:Ji सासु माँ ..मई देखती हु रसोई में क्या सब बन रहा है

ये कह कर देवरानी रसोई में घुसने लगती है और उसके सर से पल्लू खिसक जाता है और पीछे कड़ी षुरूश्ती क आखो क सामने देवरानी क कंधो पर काट क निशान दिख जाते है

Shurushti:Bahu रानी ये तुम्हारे कंधे पर क्या निशान है

देवरानी घबरा कर मुड़ती है और उसे समझ आगया था क वो किस निशान क बारे में बात कर रही है

Shurushti:kamla तुम काम करो

Devrani:wo वो ..

देवरानी अपना सर झुकाये लज्जाने लगती है

Shurushti:Theek है ठीक hai..par थोड़ा छुपा लेना ..

ये कह कर षुरूश्ती मुस्कुराती है और देवरानी तेज़ कदमो से रसोई में जाने लगती है और उसके भरपूर बड़े बड़े चुतर एक दूसरे से टकराते हुए उछाल रहे थे

Shurushti:man me)Devrani बहुत भाग्यशाली है जो इतना दमदार बीटा मिला देवरानी की गांड को तो खोल कर रख दिया बलदेव ने

ऐसे हे भोजन का समय होता है और सब भोजन करने क लिए आजाते है कमला और राधा भोजन पड़ोसती है और राजमाता जीविका महाराज राजपाल रानी षुरूश्ती अपने आसान पर बैठी थी जब क देवरानी कमला और राधा से भोजन लगवा रही थी

Jeevika:Bahu देवरानी आजाओ बैठ जाओ ये दोनों कर लेंगे

Devrani:Ji राजमाता आ

Devrani:man me)Ye बलदेव अभी तक नहीं आये रात भर्र तो मेरी योनि को छोड़ते नहीं लगे रहते है तो थकावट तो होगी he..ab वो भी क्या करे मेरी छूट की खुजली हे तो मिटते है और उनका लैंड भी तो शांत नहीं होता थोड़ी देर में

तभी बलदेव सीडीओ से उतर कर आता है और सब को हाथ जोड़ कर परनाम करता है सबसे पहले अपने दादी जीविका क पास जाता है उनके पेअर छू कर

"दादी माँ "

फिर जा कर अपने पिता राजपाल क पेअर को छूटे hu"pita जी महाराज"

Rajpal:sada खुश रहो

Shurushti:ab बैठ जाओ बीटा सुबह से भूके हो

Rajpal:kya हुआ सुबह से भूके क्यू हो बलदेव

बलदेव अपने आसान पर बैठते हुए

"वो पिता जी महाराज सुबह पूरा बदन अकड़ रहा था तो"

Shurushti:Aajaiye महारानी जी आप भी

Devrani:ji आई

देवरानी भी आकर बलदेव क सामने आकर बैठ जाती है

Rajpal:Beta पर सुबह में उठ कर कुछ जलपान कर क सो जाते

Jeevika:han पोता बलदेव तुम्हारे पिता सही कह रहे है सुबह सवेरे खली पेट नहीं रहते और देवरानी अब तो आपको मेरे पोते का ख्याल रखना है नहीं तो कमज़ोर हो जायेगा

Baldev:Han दादी माँ देवरानी मुझे सुबह में नहीं खिलाती और भाग कर निचे आजाती है

बलदेव देवरानी क बड़े दूध को घूरते हुए कहता है उसका इशारा देवरानी समझ जाती है और अपने पल्लू से अपने बड़े दूध को ढकने की कोशिश करती है और मुस्कुराते हुए

Devrani:Ji दादी माँ आप ठीक कह रही है में अब से ध्यान दूंगी ये सुबह में खा ले कुछ

राजपाल भोजन कर रहा था तभी उसकी नज़र बलदेव क हाथ पर कटे हुए निशान पर पड़ती है जो कल देवरानी ने चुड़ते समय दी थी

Rajpal:beta ये तुम्हारे हाथ में क्या हुआ है

Baldev:pita जी वो युधा अभ्यास में चोट लगा था

Rajpal:par ये तो काटने क निशान लग रहे है

षुरूश्ती राजपाल को देखती है और आँख बड़ा करते हुए चुप रहने को कहती है और अपने आखो से इशारे से देवरानी की ओरे देखते हुए अपना सर हिलती है जिसे राजपाल को समझते देर नहीं लगती

Rajpal:Beta थोड़ा संभल कर अभ्यास किये करो

Shurushti:Maharaj अब आपका पुत्र बचा नहीं है जोश में अभ्यास करने पर ऐसा हो जाता है

षुरूश्ती की बातो को देवरानी सुन रही थी और लज्जा कर अपने सर को निचे करते हुए खाने लगती है

Rajpal:man me)Shurushti क इशारे को यदि मई समझ प् रहा हु तो ये देवरानी ने बलदेव क हाथ कटा है क्या ये सम्भोग करते हुए

राजपाल ये सोचते हुए अपने सर को झटकता है देखता है षुरूश्ती राजमाता जीविका को देख कर मुस्कुरा रही थी जवाब में जीविका भी अपने बेटे क नादानी पर है रही थी तभी षुरूश्ती अपने हाथ को अपने गर्दन पर रखती है और जीविका को देख देवरानी की ओरे इशारे करती है

jeevika:man me)Ye देवरानी को देखने क लये क्यू कह रही है

षुरूश्ती फिर से इशारा करती है जीविका देवरानी को देखती है पर उसे कुछ समझ नहीं आता फिर वो षुरूश्ती को देखती है षुरूश्ती इस बार अपने हाथ को हरदान पैर सहलाते हुए देवरानी की ओरे कोहनी से इशारा करती है

जीविका समझ जाती है और तुरंत देवरानी क सर क निचे जो पल्लू गिरा था उसके हटने का इंतज़ार करती है और जैसे हे वो खाने क हल्का सा झुकती है उसके पल्लू उसके गर्दन से हैट जाते है और उसके गले पर बलदेव क काट क निशान देख कर दांग रह जाती है और षुरूश्ती को देखती है

षुरूश्ती जीविका को देख कर मंद मंद मुस्कुराते हुए अपने भाव को उठा कर जैसे कह रही हो "देखो राज माता आपके पोते बलदेव और बहु देवरानी क कारनामे"

जीविका भी हस्ते हुए अपने खाने पे ध्यान देती है पर इन सब क बीच देवरानी अपने दादी सास और सास की आँख मिचोली को अचे समझ जाती है और अपना पल्लू ठीक करती है तभी राजपाल की भी नज़र देवरानी क गर्दन पर पड़ती है और उसके रोंगटे खड़े हो जाते है

Rajpal:man me)Kisi पशु की तरह नोच लिया है देवरानी को तो बलदेव ने

राजपाल उठ कर जाने लगता है अब उसे खाना भी ाचा नहीं लग रहा था

Rajpal:Baldev बहार सेना गृह में मिलो सीमा की गतिविधिओ पैर बात करनी है

baldev:ji पिता जी महाराज हम आते है

कुछ देर में बलदेव भी उठ कर अपने पिता से मिलने चला जाता है और महल में देवरानी महल की साफ़ सफाई करवाने क बाद कमला को बुला कर कहती है क वो आज राज दरबार नहीं लगाएगी वो थकी है और कमला जा कर ये ऐलान करवा देती है क आज महारानी देवरानी सभा नहीं करेंगी

सांध्य होने वाली थी बलदेव सीमा पर अपने सैनिको से गहतराष्ट्रा की सीमा पर काम सौंप कर महल की ओरे आने लगता है घोड़ो को दौड़ते हुए

"आह चल घोड़े जल्दी दौर मेरी रानी माँ मेरी प्रतीक्षा कर रही होगी"

महल पहुंच कर बलदेव घोड़े से उतरता है और अंदर जाता है देखता है उसकी माँ उसकी बड़ी माँ षुरूश्ती बैठ कर गप्पे लगा रही थी वो अपने माँ को देखता है और आयने का इशारा दे कर सीडीओ से चढ़ कर ऊपर अपने कक्षा में जाने लगता है

Devrani:Saasu माँ में आई थोड़ा

Shurushti:Han जाओ बहु मेरा बीटा थक क आया है पेअर दबा दो

Devrani:Ji बास अभी गई अभी आई फिर पूजा भी तो है संध्या की

Shurushti:Hmm बहु जाओ अब देर न करो मेरा पुत्र की थकन मिटा दो अपना सुन्दर मुखर दिखा कर

देवरानी ये सुन कर मुस्कुराती है और उठ कर अपने बड़ी गांड को मस्ती में हिलाते हुए ऊपर जाने लगती है और वही सोफे पैर बैठी षुरूश्ती बस देवरानी की गदराई अल्ल्हार जवानी देख कर दांग थी

देवरानी ऊपर पहुँचती हैं वैसे हे बलदेव उसका हाथ पकड़ कर खींच लेता है और उसके कमर को पकड़ क अपने से चिपका लेता है जिस पैर देवरानी छिहुक उठ टी है

"ाः उफ्फ्फ"

"रानी तेरे इस बड़े गांड और इन गोल गोल नारियल जैसे थान को दिन भर्र यद् क्या"

बलदेव अपने एक हाथ से देवरानी क गांड को और एक हाथ से देवरानी क दूध को पकड़ मसलने लगता है और देवरानी क आखो में देखते हुए

"क्या माल लग रही हो देवरानी तुम्हारे होठ पर लाली जब लगी होती है तो तुम्हारे ये पंखुरे जैसे होठ "

आगे बढ़ कर बलदेव अपने माँ क होठो को अपने होठ के भर्र लेता है और देवरानी बलदेव क आखो में देखते हुए मदहोश होते चली जाती है

बलदेव बेतहाशा अपने माँ क सुर्ख होठ को अपने होठ में लिए चुस्त है और तभी देवरानी अपना मुँह पीछे हटा लेती है

"पति देव जी अब आप स्नान कर लीजिये आप का शरीर पसीने से तर है "

"क्यू मेरी रानी को मेरे पसीने से दुर्गन्ध आरही है "

"हाँ राजा थोड़ा थोड़ा"

बलदेव देवरानी क कमर को दोनों हाथो से जकड लेता है और गांड पैर हाथ रख कर दोनों हाथो से अपने माँ को थोड़ा ऊपर उठा देता है

"क्यू मेरी रानी को मेरे पसीने वाला लैंड नहीं चाइये अपने छूट में में तो दिन भर तुम्हे हे याद कर रहा था खोलो न छूट अपनी "

"ाः उफ्फ्फ राजा आप स्नान कर लीजिये न "

"नहीं रानी अब में तुम्हे अभी खड़े खड़े छोडूंगा देखो लैंड मेरा तुम्हारे छूट क प्यास में कितना कड़ा हो गया है"

बलदेव देवरानी का हाथ पकड़ क अपने लैंड पर रख देता है और उसे देवरानी अपने हाथो से न चाहते हुए भी सहलाती है

"पति देव जी आपका हथियार तो सच में तैयार है अपने प्रेमिका योनि में हाहाकार मचने क लये परन्तु स्नान कर लीजिये पूजा बाद आप जैम क छोड़ लीजियेगा अपने पत्नी को"

"नहीं मेरी रानी में अभी छोडूंगा अपनी माल को अपनी रानी माँ को"

बलदेव देवरानी को धकेलते हुए दीवार से लगता है और उल्टा घुमा कर सारी उठाने लगता है देवरानी अब तक समझ नहीं पा रही थी

"उफ़ राजा क्या कर रहे है ऐसे तो"

"सुसस्षः मेरी रंडी माँ क्षमा करना मेरी रानी माँ में तुझे खड़े खड़े पेलुँगा मेरा बीटा चाहिए न तेरी कोख में?"

"हां आह राजा"

बलदेव सारी को उठाते हुए देवरानी क कमर तक कर देता है और देवरानी क हाथ में साड़ी थमा देता है अब देवरानी की मटके जैसे गांड एक काली चड्डी में कहर ध रही थी बलदेव चटक से देवरानी क गांड पर थप्पड़ मारता है फिर मारता हे जाता है

"ाः राजा नहीं उठ आआह "

बलदेव एक हाथ से देवरानी क गर्दन को पकड़ कर दीवार पैर दबाता है और अपनी एक ऊँगली जांघिए क ऊपर से देवरानी क गांड में घुसता है और बलदेव अपनी एक ऊँगली इतनी ताक़त से अंदर बहार करता है क उसमे छेड़ हो जाता है और बलदेव उस छेड़ में ऊँगली फसा कर ज़ोर से खींचता है और चररररररर से जांघिए फैट कर दो हिस्सों में बात जाती है देवरानी की गांड थप्पड़ से लाल हो गए थे

"उफ़ रानी गांड है क दोनों मटके है "

"आज राजा कितना बेदर्द हो ाः "

बलदेव अपने धोती को खींचते हुए खोल देता है और अपने एक हाथ से अपने लैंड को पकड़ते हुए आगे पीछे करता है और दूसरे हाथ से देवरानी क गर्दन को दीवार पर सताए रहता hai.baldev अब अपनी माँ क गांड पर लैंड से मारता है और गांड को पकड़ कर देवरानी को थोड़ा सा झुकता है जिस से उसकी छूट क फूले हुए दाने किसी पावरोटी की तरह फ़ैल जाती है बलदेव अपना लौड़ा छूट क मुहाने पर रख एक ज़ोर का धक्का मारता है और अपने एक हाथ से देवरानी क गले को पीछे से दबा लेता है

"Khachh"Kr क लौड़ा अंदर फस्स जाता है छूट क और देवरानी "ाआअह मर्डर gayi"kah क चिल्लाती है और बलदेव अब निचे से अपने लैंड को ऊपर की ओरे तेज़ गति से धक्के मारने लगता है

"उठ ाः आह ओह्ह यह ाः उठ आह राजा आह उठ"

बलदेव आगे बढ़ कर देवरानी क गर्दन को चूमते हुए ऊपर जाता है और उसके होठ को चूसने लगता है और निचे से और तगड़े धक्के मारने लगता है छूट और लैंड की मिलाप से पानी छूट से बह कर निचे ज़मीन पर गिर रहा था और बलदेव ज़ोर दर धक्को से अपने माँ क बच्चेदानी तक ज़राब दे रहा था तभी दोनों क कान में गूंजता है

"महारानी जी आजाओ पूजा का समय हो गया है"

ये षुरूश्ती की आवाज़ थी

"आह राजा आह रुक जाओ न आह सुबह भी पूजा नहीं की थी ाः उठ आह में विनती करती हो महाराज मुझे जाने दो न आपकी दासी आप से रात भर छुड़वा लेगी परन्तु अभी सासु माँ क्या सोचेगी "

बलदेव सब सुन रहा था पर धक्का मारना रोकता नहीं और फिर पक्क से अपना लैंड बहार खींचता है देवरानी एक लम्बा सास लेती है और निचे झुक कर अपने फाटे हुए जांघिए को देख कर उठती है और अपने छूट को जल्दबाज़ी में पोछते हुए जाने लगती है

"रानी माँ छोर तो दया हु परन्तु रात में किसी रांड की तरह वस्त्र धारण करना साड़ी घागरे में हे रहती हो ये नहीं क पति क लिए कुछ ाचा पहने"

"देवरानी आपकी पत्नी आज आपके लिए आपकी कहे अनुसार किसी रंडी वैश्य की तरह सजेगी "

मुस्कुराकर अपने बाल ठीक करते हुए देवरानी निचे जाने लगती है और बलदेव अपने माँ की मटकती हुई गांड देखता है और फिर अपने खड़े लैंड को देखता है जो उसकी माँ क छूट क पानी से पूरा गिला था और लैंड से उसके माँ क योनि का वीर्य टपक रहा था

Baldev:Meri माँ तुम्हे पत्नी बना कर तो मैंने जीवन का सबसे ाचा काम क्या मेरी रंडी माँ कामुक माँ मेरे होने वाले बचे की मा

ये कह कर बलदेव मुस्कुराता है

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 147

गहतराष्ट्रा

"रानी माँ छोर तो दया हु परन्तु रात में किसी रांड की तरह वस्त्र धारण करना साड़ी घागरे में हे रहती हो ये नहीं क पति क लिए कुछ ाचा पहने"

"देवरानी आपकी पत्नी आज आपके लिए आपकी कहे अनुसार किसी रंडी वैश्य की तरह सजेगी "

मुस्कुराकर अपने बाल ठीक करते हुए देवरानी निचे जाने लगती है और बलदेव अपने माँ की मटकती हुई गांड देखता है और फिर अपने खड़े लैंड को देखता है जो उसकी माँ क छूट क पानी से पूरा गिला था और लैंड से उसके माँ क योनि का वीर्य टपक रहा था

Baldev:Meri माँ तुम्हे पत्नी बना कर तो मैंने जीवन का सबसे ाचा काम क्या मेरी रंडी माँ कामुक माँ मेरे होने वाले बचे की मा

ये कह कर बलदेव मुस्कुराता है और स्नान करने लये स्नान गृह में घुस जाता है उधर देवरानी तेज़ी से चलते हुए निचे उतरती है अभी थोड़ी देर पहले उसके छूट में उसके बेटे का लैंड अंदर बहार जा रहा था और अभी किसी सटी सावित्री की तरह अपने सास क कहने पर पूजा क लये दौरि आरही थी देवरानी जब से बलदेव से जब से माँ बीटा से एक प्रेमी प्रेमिका बने थे तब से बलदेव की मसलने से और जाम क पेले से देवरानी जो पहले छरहरे बदन की थी उसके गांड एक गोलाकार में फूलते जा रहे थे और उसके उन्नत दूध भी पहले से ज़्यादा बड़ी हो गयी थी देख क कोई भी कह दे क देवरानी दिन रत पेलवाती है ऐसे हे जवानी को लिए किसी रैंड की तरह चलते हुए निचे उतर रही थी और उसके चुडिओ क खनक और पायल क छनक से निचे खड़े सब लोग उसे हे देखने लगते है देवरानी अपना सर झुकाये अपने पल्लू को ठीक करते हुए अपने बड़े मम्मो को छुपाते हुए पूजा घर में आजाती है और सब एक साथ पूजा करने लगते है

थोड़ी देर बाद पूजा ख़त्म होती है और षुरूश्ती देवरानी को देख मुस्कुराती है और पूजा की थाली उसके ओरे बढ़ा देती है

"लो बहु आज प्रसाद तुम बाँट दो"

"अवश्य सासु माँ"

देवरानी आगे बढ़ती है और षुरूश्ती क पास आती है और षुरूश्ती उसे आते हुए देखती है तभी देवरानी जहा पर कड़ी होती है वह पर उसे ज़मीन पर कुछ पानी जैसा दिकहि पड़ता है

Shurushti:Baldev कहा है महारानी देवरानी

Devrani:wo वो स्नान कर रहे होंगे

Shurushti:achha ठीक है आप प्रसाद बाँट दीजिये

ये कह कर षुरूश्ती वह पर आती है और देवरानी जहा पर कड़ी थी वह पर कुछ पानी गिरा हुआ पति है और षुरूश्ती उसे गौर से निहारने लगती है

हुआ ये था जब देवरानी को बलदेव छोड़ रहा था तो उसकी छूट लबलबा क पानी छोर रही थी और वो आने से पहले अपने जांघिए से जल्दबाज़ी में अपने छूट को पोची पर उसके छूट से पानी निकलना बंद नहीं हुआ और बिना जांघिए की कड़ी देवरानी क छूट से उसका छूट का पानी कुछ बुँदे सीधे ज़मीन पर जा गिरी जिसे षुरूश्ती गौर से देखते हुए

Shurushti:man me)Ye तो गधा कुछ है कही ये देवरानी की योनि का पानी तो नहीं और वो कह रही थी बलदेव स्नान करने गया है इसका अर्थ ये है क बलदेव अपने माँ को छोड़ रहा था और वो बीच में हे भाग आई और उसके योनि से पानी टपक पड़ा उफ़ दोनों माँ बेटे ने तो पति पत्नी को भी हरा दया

षुरूश्ती ये सोचते हुए अपने कक्षा में चली जाती है इधर देवरानी सबको परसाद बनती और थोड़ी देर बाद हे रात क भोजन की तैयारी करने लगी .रसोई में कमला और देवरानी काम कर रही थी

Kamla:Maharani आप रहने दीजिये में कर लुंगी

Devrani:Nahi कमला तुम्हे तो पता है न वो मेरे हाथ का हे कहते है

Kamla:kaun वो ?

कमला हस्ते हुए अनजान बनते हुए पूछती है

Devrani:Kamla तू भी न और कौन तेरे जीजा ji?Ab समझी

देवरानी एक मुस्कान बिखेर देती है

Kamla:Kaun से जीजा

Devrani:Kamini तू न मानेगी मई मेरे पति महाराज बलदेव सिंह जी की बात कर रही हु

Kamla:acha महारानी महाराज बलदेव तो आपके पुत्र है न पति कब बन गए

देवरानी एक कलछी उठा लेती है और कमला को मारने क लिए उठती है

"कामिनी कमला हमने सात फेरे लिए थे तो तू कहा थी वैध जी से मारा रही थी "

Kamla:Haay महारानी धीरे बोलिये कोई सुन न ले आप तो खुलेआम अपने बेटे से रंगरलिया मन रही है मेरे और वैध क सम्बन्ध का कोई सुन लिया तो..

Devrani:Han तो फिर कभी मेरे पति को कुछ उल्टा न कहना तुमको में बहिन मानती हु किसी और की हिम्मत नहीं मुझे इस प्रकार कहे

Kamla:Maharani में तो मज़ाक कर रही हु वैसे अपने पति क लये बड़ा प्रेम उमड़ रहा है एक शब्द नहीं सुन सकती

Devrani:Han कमला वो मुझसे इतना प्रेम जो करते है तो मेरा भी दायित्व बनता है क अपना पत्नी धर्म पालन करू

Kamla:aaye हाय इसलिए तो मोटा गयी हो महारानी विवाह का पानी लग गया है

Devrani:Hmm कहा मोती हु वैसी हे तो हु

Kamla:nahi महारानी अब आप तो मुझसे मालिश भी नहीं करवाती पहले से ज़्यादा स्वस्थ हो

Devrani:Kamla अब पति देव इतना खुश रखते है और खाने पीने का भी ध्यान देते है तो इसलिए शायद वजन बढ़ गया थोड़ा

Kamla:Haha महारानी ये बास खाने पीने से नहीं ये तो आपके बेटे क दिन रात की ठुकाई क वजह से है उफ़ आपके पति क

Devrani:kamini कुछ भी बोलती है

Kamla:Waise महारानी आप को 18 वर्षो से दुखी देखती आई हु पर अब आप को इतना खुश देख कर मुझे बहुत ाचा लगता है अब भगवन वो दिन भी दिखला दे जब मई आप क बच्चो को इस महल में खिलाओ और उसको आपकी और आपके पति की प्रेम कहानी सुनौ

Devrani:bhakk तू भी न बहुत दूर तक सोच लेती हो

Kamla:Sharmao न महारानी जी बताओ न कब मिलेगा मुझे आपके बचे गॉड में खिलने

देवरानी लज्जा जाती है और अपने एक हाथ को अपने बच्चेदानी क ऊपर से पेट को सहला कर "भगवन ने चाहा कमला तो बहुत जल्द मेरा कोख हरा हो जायेगा"

Kamla:ab महाराज जोट क पानी पता रहे है तो हरियाली तो होगी न

कमला ये कह कर हस्ती है और देवरानी क मुँह से बास

"bhakk"nikalta है और वो भी हसने लगती है

Devrani:Sun न कमला मुझे न उन्होंने आज अचे से सजने क लये कहा है तो में जाओ

Kamla:aay है क्यू नहीं महारानी आप साजिये अपने सजना क लये हम संभल लेंगे

Devrani:theek है मई जाती हु और कह देना कोई पूछे तो की मेरी तबियत ठीक नहीं

और देवरानी जाने लगती है और पीछे पलट कर

"Kamla..Sajni अपने सजना बलदेव की हु तो सजूंगी किसके लिए"

ये कह कर देवरानी आँख मार लेती hi और कमला अपने मुँह पर हाथ रख कर मुँह फाड़ लेती है

देवरानी अपने कक्षा में जाती है और अपने आप को नाहा धो कर तैयार करने में जुट जाती है कुछ देर बाद रात का भोजन का समय होता है और निचे सब बैठ कर भोजन करने लगते है तभी जीविका पूछती है

Jeevika:Kamla ये महारानी देवरानी नहीं है आज

Shurushti:Maa जी कमला ने बताया क वो महारानी की ताब्यात ठीक नहीं

Jeevika:Baldev तुम्हे तो अपनी पत्नी की चिंता हे नहीं उसके साथ में भोजन करना था

Baldev:Shaayd आप ठीक कह रही हो rajmata..Kamla महारानी क लये और हमारे लये भोजन मेरे कक्षा में पंहुचा दो

Kamla:Maharaj मैंने पहले हे रख दिए है

Baldev:Aagya दीजिये में देखता हु देवरानी का क्या हाल है

Rajpal:aagya है बीटा जाओ और बहु को भोजन करवाओ यदि कोई बात हो तो वैध जी को बुला लाना

Baldev:Ji पिता जी

बलदेव उठ कर अपने कक्षा की ओरे जाने लगता है और कमला कड़ी बलदेव को देख कर

Kamla:man me)Hey भगवन इतना लम्बा चौड़ा बलदेव देवरानी की छूट की धज्जिया हे उदा देगा बलदेव को क्या पता उसकी माँ अपने बेटे से छोड़ने क लये सज सवार कर प्रतीक्षा कर रही है

बलदेव ऊपर जाता है और अपने कक्षा क दरवाज़े को बंद पता है

Baldev:man me)Ye आज दरवाज़ा क्यू की है देवरानी ने रोज़ तो खुला रहता है

Baldev:Maharani devrani..Maharani devrani..Kaha हो देवरानी दरवाज़ा खोलो ?

तभी दरवाज़ा खुलता है और देवरानी मुस्कुराते हुए उसके सामने कड़ी हो जाती है बलदेव देवरानी को देख बास रुक कर देखता जाता है



देवरानी ने ब्लाउज क नाम पर एक अपने वक्ष क आकर का ब्राज़िएर पहना था और निचे एक धोती जो उसके घुटने तक थी देवरानी क सुन्दर घुटने क ऊपर उसके मांसल जांघ और उसके कमर पर एक खास तरह का कमर बंद था धोती से पल्लू एक पतला सा लिया था और उसके दोनों वक्षो को प्रदर्शित कर रहा था

Baldev:Maharani

बलदेव अपने माँ क आखो में देखते हुए बास इतना कहता है जिसे देख देवरानी मुस्कुराती है और मटक कर पलंग क तरफ चलने लगती है बलदेव तेज़ी से दरवाज़ा की छिट्किली लगता है और देवरानी क पीछे जाते हुए

Baldev:Maharani निचे तो कह रहे थे आप की ताब्यात ठीक नहीं

महारानी मुड़ती है और बलदेव क आखो में देखते हुए

"महाराज मैंने झूठा बोलै आपके लिए तैयार होना था न आप भूल गए"

Baldev:Maharani आप इस वस्त्र में बाला की सुन्दर लग रही हो किसी अप्सरा की तरह

Devrani:Ab अप्सरा हो गयी झूठे

बलदेव अपने सर से अपना मुकुट उतारकर एक तरफ रख देता है और घुटनो क बल बैठ जाता है अपने माँ क सामने

Devrani:maharaj ये क्या कर रहे है

Baldev:Maharani जब आप मेरा पेअर छू सकती हो तो क्या एक पति अपने पत्नी की सुंदरता क आगे घुटने नहीं तक सकता

देवरानी बलदेव क पास आकर बलदेव क आखो में देखती है उसे अपने बेटे क आखो में सिर्फ प्रेम झलक रहा tha,Baldev अपना एक हाथ ऊपर उठता है और देवरानी क हाथ क तरफ बढ़ता है

Baldev:priye

देवरानी अपना हाथ आगे करती है और बलदेव उसे पकड़ लेता है

Devrani:Ji मेरे पति परमेश्वर बताइये मई कैसे अपने पति देव की सेवा करू आज्ञा दीजिये महाराज

Baldev:Aapki सुंदरता तो मनमोहिनी है आप से एक विनती है मेरी अप्सरा

Devrani:Ji कहिये मेरे पतिदेव बलदेव

Baldev:aaj मुझे आप से जी भर कर क प्रेम करना है

Devrani:Kewal प्रेम करना है मेरे प्रेमी को?

देवरानी अपने बेटे क आखो में देखते हुए कहती है

Baldev:Prem करना है और आप की रात भर्र चुदाई करूँगा अप्सरा

Devrani:Chod दीजिये मुझे मेरे पति देव आपके लिए तो में तड़पती रहती हु जितना चाहे पेल लीजिये अपनी पत्नी को मई मन नहीं करुँगी मेरे अचे पति देव

देवरानी अपने बेटे क आखो में देखते हुए उसके हाथो को पकड़ कर ऊपर उठती है

Baldev:Maharani देवरानी

देवरानी को अपने बाहो में भर्र लेता है और देवरानी भी कस कर अपने बेटे से चिपट जाती है

Devrani:man me)Kitna चाहता है मेरा बीटा मुझे सच में मैंने पिछले जन्म में कुछ पुण्य किये होंगे जो इस जन्म में बलदेव ने मुझे अपनी पत्नी बना कर हर सुख से अवगत कराया नहीं तो मुझे कभी मालूम नहीं होता क पति कैसे प्रेम करते है वास्तव में अपने पत्निओ को

बलदेव अपने हाथो से देवरानी क सर पर लगा मुकुट को पकड़ कर हटाता है और उसे एक तरफ रखते हुए फिर से देवरानी से गले लग जाता है

"ाः मेरी रानी माँ आपके वक्ष कितने सुन्दर लग रहे है इस चोली में आपके दूध क आकर क हे है"

"आह राजा आपके लिए हे खास कर मेने ऐसे वस्त्र सिलवाया था आपकी पत्नी आपके लये कुछ भी कर सकती है महाराज"

बलदेव देवरानी क सर को पकड़ कर देवरानी क आखो में देखता है और फिर उसके होठ पकड़ कर चूसने लगता है

गलप्प्प गलप्प गलप्प ह्म्म्मम्म मममहहह सलूरर्पपपपप गलप्प्प गलप्प गलप्प गलप्प्प गलप्प गलप्प हम्म्म्म यह ाः हम्म्म गल्प गल्प गलप्प मममम

बलदेव अपने हाथो को पीछे ले जा कर अपने माँ क बड़े गांड को ज़ोर से भींच लेता है और दबाने लगता है

थोड़ी देर तक अपनी माँ क होठो को चूसने क बाद दोनों क सांस फूलने लगते है तब दोनों एक दूसरे को छोड़ते है और दोनों एक दूसरे क गर्दन पर और पुरे चेहरे पर चूमने चाटने लगते है

"आह मा मैंने जैसा कहा था वैसी हे तैयार हुई हो आज ाः ुहममम"

बलदेव निचे से अपने एक पेअर को उठा कर देवरानी क पेअर को घुटने से ले कर निचे तक सहलाने लगता है

"आह हम्म रानी तुमने तो निचे भी आधा पहना है ऊपर भी आधा आह किसी रंडी की तरह लग रही हो"

बलदेव थोड़ा पीछे हैट कर दोनों बड़े दूध को हाथ में ले कर दबाते हुए कहता है

"ाः राजा आपने हे तो कहा था किसी रंडी की तरह तैयार होने ाः ुहम्म"

बलदेव निचे बैठ जाता है और देवरानी क पेअर को चूमते हुए ऊपर आता है और देवरानी को जांघ को चाटने लगता है

और देवरानी सिसकने लगती है

"देवरानी अगर तुम इतने छोटे धोती में बहार चली जाओ तो "

"आह राजा क्या होगा"

बलदेव ऊपर आता है और छोटे से चोली में क़ैद दोनों बड़े मम्मो को पकड़

"रानी तेरी गांड तेरी जांघ धोती में तो पुरे दिखाई दे रहे है और तेरे बड़े बड़े आम जैसे वक्ष पर सिर्फ ये आधा कपडा है ऐसे तुझे देख कर पुरुष क्या कुत्ता भी छोड़ने क लये तड़प जाये"

बलदेव देवरानी को चूमते हुए बिस्तर पर ले कर गिर जाता है देवरानी अपने बेटे क निचे लेती थी और उसके हाथ बलदेव क पीठ पर चल रहे थे बलदेव भी अपने माँ देवरानी क गरम शरीर से अपने शरीर को खूब मसल रहा था

"ाः रानी तेरी छूट छोड़ छोड़ क सुजा दूंगा मेरी रंडी आज किसी रंडी की तरह सजी है जैसे अपने ग्राहक को रिझाने आई है"

देवरानी अपना हाथ निचे से बलदेव क खड़े लैंड को पकड़ कर अपने हाथ में ले कर

"ाः राजा आपका लैंड लोहे जैसा कड़ा है ये रंडी का ग्राहक बास आप हो मेरे राजा बलदेव में बास अपने एक हे ग्राहक को रिझाऊंगी और सिर्फ उसी से छोडूंगी छोड़िये मुझे मेरे ग्राहक छोड़ लीजिये अपने रंडी को आह"

बलदेव देवरानी क चोली को खींच कर फेक देता है और उसके नंगे मम्मी उछाल कर बहार आजाते है बलदेव दोनों मम्मो को बारी बारी से पकड़ कर चूसते कहते हुए देवरानी की धोती पकड़ कर खींच देता है और देवरानी पुरनी नंगी थी बलदेव पूरा देवरानी क ऊपर लेट कर अपने शरीर से अपने माँ को घिस रहा था जिस से देवरानी गरम हो जाती है और वो अपने बेटे को बहो में भर्र कर बिस्तर पर पलट जाती है और अब बलदेव निचे और देवरानी ऊपर थी

"ाः राजा मुझे आपके वस्त्र उतार लेने दीजिये राजा आपके चौड़े छाती"

देवरानी बलदेव को ऊपर से नंगा कर देती है और लगातार अपने बेटे क छाती को चूमने लगती है बलदेव अपने दोनों हाथो से देवरानी क दूध को दबा रहा था और उसके निप्पल जो अब कड़क हो गए थे उनके अपने उंगलिओ में फसा कर खेल रहा था देवरानी अपने बेटे क लैंड को अपने गांड पर महसूस करती है और वो अपने गांड को गोल गोल घुमा कर लैंड को अपने गांड क दर्द में फसा लेती है

"आहे राजा अपने धोती उतर दीजिये मेरे छूट में जाना चाहता है आपका लैंड"

ये कह कर ठीक छूट क छेड़ पर अपने बेटे क टोपे को टिकती है

"आह रानी मा ाः"

बलदेव नशे में अपने आखे बंद करता है देवरानी झट से धोती खोल कर बिस्तर से निचे फेकती है और अपने छूट को बलदेव क मुँह पर रख कर लेट जाती है जिस से बलदेव का लैंड सीधे उसके मुँह क पास ाआजाता है

"ाः राजा चुसो मेरी छूट को खा जाओ मेरे भगानसा को"

कामुकता से भरी देवरानी सिसकते हुए आग्रह करती है और बलदेव आखे खोलते हे अपने माँ क छूट पर चूमते हुए अपने जीभह छूट क डेन से खेलने लगता है देवरानी दूसरी और अपने बेटे क लैंड को ले कर ऊपर से निचे तक अपने हाथ से टटोलते हुए सेहला रही थी

"आह राजा ऐसे हे चुसो मेरी छूट हम्म्म आह आपका लौड़ा कितना बड़ा और मोटा है"

"आह रानी चुसो मेरा लौड़ा मुँह में लो मेरी रानी माँ"

बलदेव अपना मुँह छूट पर से हटते हुए एक ऊँगली डालते हुए कहता है

"आह राजा उफ्फ्फ आहे"

देवरानी अपने जीभ से छेरते हुए बलदेव का 9 इंच का लौड़ा अपने मुँह में आधा लिए हुए चूसने लगती है बलदेव अपने माँ क छूट में एक ऊँगली किये हुए खूब ज़ोर ज़ोर से अपने माँ क छूट को कहते जा रहा था तभी उसे कुछ सूझता है और वो अपने माँ को हल्का सा पकड़ क एक ऊपर की ओरे अपने लैंड से धक्का देता है जिसका परिणाम ये होता है क पूरा लौड़ा हलक तक देवरानी क मुँह में घुस जाता है

"अहह यह आ उठ आह"

बलदेव अपनी ताक़त से देवरानी को हिलने नहीं देता है और देवरानी अपने मुँह को दूर करने की भरपूर कोशिश करती है

देवरानी की आखो में ासु आजाते है और उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगती है तभी बलदेव पक्क की आवाज़ से लैंड को खींचता है और अपनी कमर को बिस्तर पर टिका देता है

"ाः राजा मार देंगे क्या"

"आह रानी पूरा मुँह में ले क्र चुसो "

अब देवरानी पूरी कोशिश करती है और पुरे लौड़े को मुँह में ले कर चुस्ती है और उधर बलदेव अब दो ऊँगली अपनी माँ क छूट में पेल देता है और अपने माँ क छूट क भग्नसे को छूट क दानो को कभी चाट ता कभी अपनी जीभा से खेलता कभी चुस्त दोनों की सिसकी पुरे कक्षा में गूँज रही थी देवरानी अब उठती है और बलदेव क लैंड पर अपने बड़े मटको जैसे गांड को रख कर अपने छूट क दरार में अपने बेटे क लैंड को घस्ने लगती है

"उठ ाआअह देवराआणि तुम्हारी छूट कितनी गरम है "

"ाः उठ राजा आपका लौड़ा तो लोहे जैसा खड़ा है ाः आज में इस घोड़े जैसे लौड़े की सवारी करुँगी "

"ाः देवरानी अपना छूट में घुसा लो मेरा लैंड"

देवरानी अपने हाथ से लौड़े पे हाथ फेरते हुए छूट पर निशाना लगाती है और खछः से निचे बैठती है जिससे बलदेव क बड़े मोठे टोपा अंदर घुस जाता है

"उठ ाः देवरानी "

देवरानी अपने आखे बंद किये हुए अपने दोनों टांगो को बलदेव क कमर क इर्द गिर्द रख कर अपने गांड को धीरे धीरे निचे करती है और बलदेव का 9 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा लौड़ा किसी तलवार की तरह देवरानी क छूट में अंदर जाने लगता है "ाआअह उह्ह्ह आपका लौड़ा कितना तगड़ा है आह मए मर्डर गयी आहे"

"आआह देवरानी और निचे आह"

देवरानी अब अपने बेटे का पूरा लैंड अपने छूट में लिए उसके ऊपर बैठ गयी थी दोनों माँ बेटे आँख बंद किये हुए एक दूसरे क छूट और लैंड की गर्मी का अहसास कर रहे थे दोनों हे लज्जत की एक अलग हे दुन्या में पहुंच गए थे देवरानी क छूट में बलदेव का लैंड एक हुंकार मरता हुआ हिलता है और वो अपने आखे खोल कर थोड़ा ऊपर उठती है फिर लैंड पर बैठ जाती है जिस से लैंड छूट में अंदर बहार होरहा था अब देवरानी अपने गति बढ़ाते हुए अपने बेटे क लौड़े को छूट में लेते हुए उछाल रही थी और दोनों मारे उत्तेजना क सिसकते जा रहे थे

"ुह्ह्ह्ह आआआआह रानी मेरी राणदीाआह मेरी रानी मा उफ़ और तेज़ उछलो खा लो मेरा लौड़ा मेरी रंडी पत्नी "

"उह्ह्ह ाः आह आआह ाः आपका लौड़ा किसी तलवार की तरह मेरे छूट को फ़ायद रहा है महाराज ाः ाः उठ ाः "

ठप्प ठप्प की आवाज़ गूंज रही थी साथ में देवरानी की चुडिओ और पायल की आवाज़ से पूरा कक्षा का दृश्य कामुक बन रहा था थोड़ी देर ऐसे हे अपने बेटे क ऊपर कूदते हुए देवरानी थक्क जाती है और थक कर अपने बेटे क लैंड पर बैठ जाती है जिसे बलदेव देख कर

"क्यू थक्क गए मेरी रांड ायजा मेरी रांड तुझे कुटिया बना कर छोड़ू"

"छी महाराज आप भी ना "

"रंग छी मत कर कुटिआ बन तेरी छूट की कुटाई करता हु बहार सब क सामने तो सटी सावित्री बनती है अपना मुँह नहीं दिखती किसी को पल्लू से ढके रखती है और अभी छी कर रही है अपने बेटे क लौड़ा अपने छूट में ले कर"

बलदेव झट्ट से उठ ता है और देवरानी क गांड पर थप्पड़ मारता है और देवरानी कुटिया बन जाती है

"ाः राजा बन गयी आपकी रांड कुटिया अपने पति क लिए अब आप मेरे बेटे नहीं है ाः पेल लीजिये अपने कुटिआ को"

बलदेव लैंड अपने हाथ में लेते हुए देवरानी क गांड पर थप्पड़ मारते हुए देवरानी क गांड में अपना लैंड लगा कर हल्का सा धक्का मारता है और देवरानी क गांड में अपना टोपा घुसा देता है

"aaaaaaaaaaaaaaaaah नाहीईई वह क्यू घुसा डाई"

बलदेव खछ से गांड में से अपना लैंड खींचता है

"रानी अब तेरी गांड में आसानी से लैंड चला जाता है"

"यह आपने हे गांड पेल क्र बड़ी कर दी ाः उठ"

तभी बलदेव लौड़े को एक हे झटके में पीछे से देवरानी को झुकाये पेल देता है और पूरी छूट लैंड से भर्र जाती है पर लैंड अब भी हल्का बहार था

"आआआआआह राजआआआ में मर्डर गयी आआआआआह में सबसे पल्लू करती हु और करती रहूंगी में सिर्फ अपने पति क लये रांड हु पुरे संसार क लये नहीं पति महोदय"

तभी बलदेव एक करारा धक्का मारता है और लैंड पक्क्क कर देवरानी क छूट क आखिरी परदे को खोलते हुए बच्चेदानी में घुस जाता है और देवरानी क आँख बड़े हो जाते है और उसका बदन ैथ जाता है

थोड़ी देर ऐसी हे रुकते हुए बलदेव घापा है अपने माँ क छूट को फाड़ता हुआ अपना लौड़ा बच्चेदानी तक घुसा रहा था और देवरानी ज़ोर ज़ोर से सांस लेते हुए हांफती रहती है हर धक्के पैर बलदेव का मज़बूत जाँघे देवरानी क बड़े गांड से टकराता और ठप्प्प ठप्प की आवाज़ आती लौड़ा छूट में घुसता पछ पाछह आवाज़ आती और देवरानी हर धक्के से हिलती और उसकी चुड़िआ खान खान बजती और पायल छान छान देवरानी और बलदेव दोनों हर धक्के में सिसककते उह्ह्ह आआआह की आवाज़ निकलते ऐसे हे आधा घंटे तक जझुका कर पेलते रहा एयर देवरानी इस बीच कई बार झाड़ गयी पर बलदेव अब तक नहीं झाड़ा था

"ाः रानी मा ये ले ाः ये खा मेरा लौड़ा ाः देवरानी तेरी छूट कितना पानी छोरती है"

"ाः राजा ऐसे हे ठोकते रहो मेरी छूट आह बहुत तरसी थी ये छूट आपने इसकी प्यास बुझा दी राजा और छोड़ो ाः"

"ाआअह आआह देवरानी आआह मेरा वीर्य निकलने वाला है आयग्य दीजिये आआह आपके बच्चेदानी में गिरा दू अपना वीर्य बोलिये रानी माँ बना दू आपको अपने बचे की माँ "

"ाः राजा अब आप मेरे पति हो बीटा नहीं ाः ऐसे हे पेलो अंदर बच्चेदानी को भर दो अपने वीर्य बन जाओ मेरे कोख में पलने वाले बचे क पिता ाः यह उम्म्म"

बलदेव अपने शरीर की ताक़त समेत कर पूरी जाएं लगा कर हुमच हुमच कर पेलते हुए झड़ने लगता है और अपना बीज अपने मा क कोख में गिराने लगता है

"आआह मा aaaaaaaaaaah में गया ाआअह तुम्हारी छूट मेरा लैंड चूस रही है पूरा बीज उढेल रहा है मेरा लैंड आपके छूट में रानी माँ ाआअह devraaaaaaaaaaaaani"

"आआआअह्ह उम्म्म्म राजा में अपने बेटे का बीज जो मेरा पतिदेव है अपने कोख में महसूस कर रही हु आआआह कितना वीर्य है महाराज अआप्का लौड़ा तो अब तक पानी छोर रहा है आआह भर्र दीजिये अपने पत्नी माँ क छूट को अपने वीर्य से बन जाइये मेरे बचे क बाप ाआअह ुहम्म"

आखिरी पालो में दोनों शांत होते है और देवरानी भी अब आखे बंद क्र लेती है और बलदेव भी और दोनों इस पल का आनंद लेते रहते है थोड़ी देर बाद बलदेव आँख खोलता है जब एक एक बून्द देवरानी की कोख में अपना वीर्य गिरा देता है "pakk"ki आवज़ से लैंड छूट से बहार निकलता है और देवरानी थक कर लेटने को होती है तो बलदेव रोकते हुए

"देवरानी आप कुछ देर ऐसे हे रहे नहीं तो आपकी कोख में भरा वीर्य छलक कर बहार आजायेगा थोड़ी देर में जब वो अंदर अपने जगह पर चिपक जायेगा तो हिलना"

देवरानी वैसे हे बलदेव की बात मान कर कुटिया बानी रहती है और बलदेव बिस्तर पर लेट कर मुस्कुराते हुए देखता है अपनी माँ को

"देवरानी आपने कभी सोचा था कभी आप मेरे सामने यु कुटिआ बन कर झुकी रहोगी छोड़ने क बाद"

"आह राजा मुझे क्या मेरे आत्मा को भी इसका ज्ञान नहीं था क एक दिन आप मेरे अचे पतिदेव बनोगे और आपके सामने में यु नग्न अवस्था में कुटिया बन कर रहूंगी"

ये कह कर देवरानी लज्जा जाती है बलदेव हाथ आगे बढ़ा कर

"इधर आए मेरी कुटिया अबतक मेरा वीर्य तेरे कोख में अंदर तक चला गया होगा अब बहार नहीं निकेगा"

बलदेव देवरानी को खींच कर अपने बाहो में ले लेता है

"रानी माँ हमने अपने प्रेम क लये बहुत शंघर्ष क्या है जिसका परिणाम हे है क आज में गहतराष्ट्रा का महाराजा और आप मेरी पत्नी और महारानी हो"

देवरानी अपने बेटे से सात कर अपने एक टांग को बलदेव क ऊपर रख कर

"हाँ जी महाराज अब हम दोनों की इच्छानुसार जीवन जीने से हमे कोई नहीं रोक सकता और जैसे हे बचे हो जायेंगे हमारा परिवार पूर्ण हो जायेगा महाराज"

"तुम ठीक कहती हो देवरानी हमारे पुत्र गहतराष्ट्रा राज्य को आगे बढ़ाएंगे और हमारे राज्य की खुशहाली क लये सब कुछ करेंगे"

"जी महाराज मई मृत्यु से पहले अपने बचो फूलता फलता देखना चाहती हु "

"देवरानी ऐसा क्यू कह रही हो अभी तुम्हारी आयु हे 37वर्ष की है भगवन ने चाहा तो तुम हमारे पोते पोशण को भी देखोगी"

"महाराज पर क्या हमारे पुत्र अवं पुत्री हमारी असलियत जान कर हम से दूर न हो जाए क्या हमे उन्हें बताना होगा क उनके माता पिता का पहले का रिश्ता क्या था"

"महारानी हमारे बचे हमारी बात समझेंगे और उनके माता पिता क प्रेम कहानी सुन कर वो हमारा सम्मान आदर और भी ज़्यादा करेंगे आप निश्चिन्त रहे"

महारानी देवरानी अपने बेटे क कंधे पर सर रख कर सोने लगती है और बलदेव भी अपने माँ क डिल की धड़कन को सुनते हुए अपने डिल से लगाए दोनों नंगे हे सो जाते है

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 148

पारस

पारस में सूरज अपनी आखिरी साँसे ले रहा था शाम तेज़ी से सूरज की रौशनी को फीका कर रहे थी वही हाल पारस की मल्लिका इ जहाँ का था अभी अपने कक्षा में बैठी सुबह की बातो को सोच रही थी कैसे मल्लिका हूर इ जहाँ जो सल्तनत की सुल्ताना थी वो अपने हे बेटे क बातो में फस्स गयी थी भूरिया तो अपने बेटे का शराब और शबाब छुड़ाना चाहती थी क्यू क हकीम साहब ने कह दया था क अगर घायल शमशेर अपने बुरी आदतों पर काबू न रखे तो उसे जान का खतरा है पर भूरिया को क्या पता था क उसका बीटा इस बात को मान ने क लये भूरिया को अपना दोस्त बन ने की शर्त रख देगा और तो और शमशेर ने अपने अम्मी जान को तंग लिबास पहनने क लये भी राज़ी कर लय था भूरिया ये सब सोचते हे पुरे जिस्म में झुरझुरी उठती है क कैसे शमशेर मुझे किसी खा जाने वाले नज़र से देखता है और खुल्लम खुल्ला अपने प्यार का इज़हार करता hai,Hooriya कही न कही अपने आप पर नाज़ भी होता है और वो अपने आप को



आईएनए में देख कर एक दबी हुई मुस्कान देती है भूरिया सोते वक़्त पहनने वाले सूट में गज़ब की माल लग रही थी उसके भरी भरकम दूध कपडे फाड़ क बहार आने को तैयार थे

Hooriya:man me)Ya खुदा ये कैसी आजमाइश है मेरा बीटा हे मुझसे इश्क़ करता है और अब में मजबूर हु उसकी जान बचने क लये उस की दोस्ती भी क़ुबूल कर ली ,दोस्ती तो ठीक है कैसे में ये जानते हुए क मेरा बीटा मुझे एक औरत क नज़र से देखता है उसके सामने तंग लिबास में जाउंगी ऐसे ढीले निक़ाब में तो वो मुझे ताड़ता है तंग लिबास में तो वो मेरे इन भरी भरकम बदन को इसलिए शमशेर ने मेरे लिए तंग कपडे सिलवाए the...kamina

भूरिया ये सोचते हुए फिर से एक बार मुस्कुरा पड़ती है और उठ कर अपने जिस्म पर एक ढीली ढली बड़ी निक़ाब दाल लेती है

Hooriya:man me)Agar शमशेर की बात नहीं मानी तो वो कोठे पैर जायेगा शराब पियेगा और उसका जख्म नासूर बन कर उसकी जान ले लेगी जो शक्श अपने जान पैर खेल कर मेरी जान बचाया और खुद को आज मौत क मुँह में दाल लय भला उसे मई कैसे मरते हुए छोर दू और वैसे भी उसने वादा क्या है क वो इश्क़ मुहब्बत की बाते नहीं बनाएगा तो ठीक है कल में उसकी बात मानूंगी इसके बदले वो मेरी बात मानेगा

भूरिया अपने भरी जिस्म को उठा कर शमशेर क कक्षा क तरफ बढ़ जाती है उसके भरी भरकम गांड हवा में किसी तैराक की तरह तैर रहे थे और हर कदम पैर गोते लगा रहे थे भूरिया क बड़े दूध कैसे हुए ब्राज़िएर में भी किसी गेंद की तरह दये बाये हो रहे थे तभी भूरिया अपने पति सुल्तान मेरे वाहिद क कक्षा दे गुज़रती है और भूरिया सोचती है

"सुल्तान तो बास मुझसे इतने सालो से धोका देते आये दुन्या क सामने मुझे पहली बीवी और सुल्ताना बना दया पर डिल में कभी मुहब्बत नहीं रही यही वजह है सुल्तान ने मेरे बाद 3 और शादीअ की क्यू क उसे तो कच्ची केलिए पसंद है और सुल्तान तो मुझे बूढी मोती बदसूरत समझते है"

ये सोचते हुए भूरिया का डिल भरी हो जाता है और वो शमशेर क कक्षा की ओरे बढ़ते जाती है

Hooriya:man me)Kaise जाउंगी शमशेर क सामने पता नहीं वो क्या महसूस करे वो तो एक मौका नहीं चुकता अपनी मुहब्बत की इज़हार करने से वैसे मैंने भी तो उसके इश्क़ को सच्चा मान लय है और मनु भी कैसे नहीं मरने जैसे हाल में भी शमशेर मुझसे इश्क़ की क़रार कर रहा था

भूरिया अब शमशेर क कक्षा क आगे आकर हल्का हफ्ते हुए खड़े हो जाती है और उसके पेअर डगमगा जाते है उसके हिम्मत नहीं हो रही थी आगे बढ़ने की तभी दरवाज़े पे कड़ी दो देश में से एक कहती है

"मल्लिकाजहं वो अंदर सुल्तान आये हुए है शहज़ादे से मिलने "

Hooriya:Sultan इस वक़्त..

भूरिया हैरत में थी और शायद उसके कपकपी बन होने की वजह एहि थी क उसका बीटा अपने बाप क साथ है और वो कोई हरकत नहीं करेगा पर एक औरत का मन शायद दुखी था

Dasi:Ji वो शहज़ादे का हाल पूछने आये है

hooriya:Theek है कनीज़

भूरिया ये कह कर अंदर घुसती है और देखती है शमशेर और सुल्तान बैठ कर बातचीत कर रहे थे

Hooriya:Salam सुल्तान

Sultan:aaiye मल्लिका जहाँ आप इस वक़्त यहाँ

Hooriya:man me)Zuban में मल्लिका और डिल से तो तुम मुझे भद्दी मोती बूढी औरत मानते हो सुल्तान

Shamshera:Salam अम्मी जान

शमशेर एक आस भरी नज़र से देख कर हलकी मायूसी क साथ अपने अम्मी को देखता है पर भूरिया अपने नज़र सुल्तान क तरफ रखे हुए

Hooriya:Ji सुल्तान वो तो में शमशेर को दवाई खिलने आई थी पर आप इस वक़्त

भूरिया सवालिया नज़रो से देखते हुए पूछती है

Sultan:Q मोहतरमा आप अपने बेटे की खिदमत क लये आसक्ति है तो क्या मई नहीं आसक्त मई भी तो बाप हु

Hooriya:Ha हाँ क्यू नही

भूरिया कक्षा में अपने बेटे क लये दवाई ढूंढ़ने लगती है और शमशेर को देते हुए

Hooriya:Sultan आपको तो पता है न कितना भुलक्कड़ है आपका शेह्ज़ादा ..लो दवा खाओ बीटा

शमशेर को दवा पानी देती है शमशेर दवा खता है

Hooriya:Theek है आप बाप बेटे अपने गुफ्तुगू जारी रखिये में चलती हु

भूरिया कनखियों से शमशेर को देखती है और उसके उतरे हुए चेहरे को देख समझ जाती

भूरिया अंदर हे अंदर मुस्कुराते हुए कक्षा से बहार जाने लगती है

Hooriya:man me)Kaise किसी ललचाई बन्दर की तरह देख रहा है शमशेर भीगी बिल्ली बन गया बाप क सामने सब छेड़खानी निकल गयी और कहता है कह दो सुल्तान से क मई तुमसे मुहब्बत करता हु हहह बड़ा आया ..

शमशेर अपने माँ क मतवाली चाल को देख कर अंदर हे अंदर आहे भरता है और अपने बाप क सामने हे सोचता है

shamshera:man me)Kaise नज़रअंदाज़ कर क जा रही हो अपने आशिक़ को भूरिया मेरी जान और मटकाओ इन बड़े बड़े गांड को इन्हे पेल पेल क तुम्हारी चीख न निकल दी तो मेरा नाम शमशेर नहीं अम्मी जान

Sultan:Kaha खो गए शमशेर

शमशेर नींद से जागते हुए अपने बाप को देखते हुए

Shamshera:Wo अब्बू जान मई शुंग का सोच रहा था कैसे हाथ आएगा वो

Shamshera:man me)Ab आप को कैसे बताऊ अब्बू जान क आप ने अम्मी की बुराई कर क वो भी उनके सौतन से मेरा काम आसान कर दया है बहुत जल्द आपकी बीवी मल्लिका इ जहाँ मेरी बेगम बनेगी और उसे दिन रात प्यार करूँगा में

Sultan:Han बीटा मैंने पूरी कोशिश कर ली पर शुंग का नमो निशान नहीं मिला अगर शुंग ज़िंदा हमे मिल जाये तो तुम पर हमला करवाने का पर्दाफाश हो जायेगा जो हमारे बीच रह कर हमसे दुश्मनी कर रहा है उसके मंसूबा का पता लगाना बेहद ज़रूरी है

Shamshera:Abba जान आपको क्या लगता है कौन हो सकता है वो शक्श जिसे आपको मार कर फायदा होगा आपको किसके ऊपर शक है

Sultan:Gul Shah..Mujhe उसकी नियत शुरू हे ठीक नहीं लगती उसके डिल में ख्वाइश तो थी क वो सल्तनत का सुल्तान बने पर वो बन नहीं पाया ऐसे में वो शायद कोई रंजिश रच रहा हो

Shamshera:Aisa कैसे मुमकिन है अब्बा जान आपने तो पहले हे मुझे अगला सुल्तान होने का ऐलान कर दया है फिर उनका फायदा कैसे होगा अगरचे वो मुझे भी रस्ते से हटा दे तो भी शहज़ादे शान मेरी जगह सुल्तान बनेंगे न की वो

Sultan:Tumhari बात सही है ये गुथी तभी सुलझेगी जब शुंग हमे मिल जाये वैसे गुल शाह क अलावा कोई और नहीं जो सुल्तान की गद्दी लालच रखता हो

Shamshera:man me)Agar आप की बात सही है अब्बा जान तो मुझे गुल शाह को जान से मरने की दो वजह मिल गई (Ek)Gul शाह की बुरी नज़र मेरी अम्मी जान पैर है जिसे मई अपनी बेगम बनाऊंगा और गुल शाह हाथ माल्टा रह जायेगा (Dusri)Gul शाह अगर सुल्तान बन ने का ख्वाब देख रहा है तो मेरे होते हुए वो सुल्तान नहीं बन पायेगा

Shamshera:Abba जान अगर चाचा गुल शाह बगावत कर रहे है तो इसका अंजाम उनको भुगतना पड़ेगा

Sultan:Shehzade अभी तो अपने सेहत पर ध्यान दो उसके बाद हम देखेंगे

Shamshera:Bass कुछ दिनों की बात है जख्म भरते हे में पारस का चप्पा चप्पा छान मरूंगा और उस लूटेरे शुंग को अपने गिरफ्त में ले लूंगा और बाघी जो भी निकला उसका सर अपने हाथो से कलम करूँगा

Sultan:theek है शहज़ादे अब हम चलते है मुस्कान बेगम इंतज़ार कर रही होगी

Shamshera:Ji अब्बा जान जाइये

सुल्तान झुक कर अपनने बेटे की सर को चूमता है और बहार जाने लगता है

shamshera:Man me)Abba जान हर बेगम क साथ रत गुज़र लेना पर मेरी अम्मी जान भूरिया क साथ नहीं क्यू क अब में भूरिया को मेरे अलावा किसी गैर मर्द क आग़ोश में बर्दाश्त नहीं कर सकता

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 149

पारस

Sultan:theek है शहज़ादे अब हम चलते है मुस्कान बेगम इंतज़ार कर रही होगी

Shamshera:Ji अब्बा जान जाइये

सुल्तान झुक कर अपनने बेटे की सर को चूमता है और बहार जाने लगता है

shamshera:Man me)Abba जान हर बेगम क साथ रत गुज़र लेना पर मेरी अम्मी जान भूरिया क साथ नहीं क्यू क अब में भूरिया को मेरे अलावा किसी गैर मर्द क आग़ोश में बर्दाश्त नहीं कर सकता

शमशेर ये सोचते हुए बिस्तत पर लेट जाता है उसे कब नींद आती है उसे पता नहीं चलता कुछ हे देर में वो अपनी अम्मी क ख्वाबो में था.

रात बीत जाती है सुबह की हलचल और सूरज की तपिश शमशेर की आखे खोलती है शमशेर अपने आखे खोलते हुए "क्या मज़ेदार ख्वाब था अम्मी जान की ठुकाई कर लिया ख्वाब में हे sahi"Shamshera उठ क खड़ा होता है और नहाने धोने क लये चला जाता है उधर भूरिया भी उठ जाती है और नाहा धो कर अपने कपडे पहन ने क लये उठाने लगती है तभी उसे ध्यान आता है क शमशेर ने उसे सख्त हिदायत दी है क वो पुराने कपडे नहीं पहने भूरिया एक नए लिबास की ओरे हाथ ले जाती है पर उसके हाथ काँप रहे थे क्यू क वो आज अपने बेटे क ज़िद्द आगे बेबस हो गयी थी और ऐसा लिबास पहन ने जा रही थी जिससे उसका हुस्न उसका बीटा साफ़ साफ़ देख लेगा

Hooriya:man me)Ya खुदा मुझे बहकने मत देना ये में अपने बेटे की बुरी लत्त छुड़ाने क लये कर रही हु और कुछ नहीं है मेरे मन में

भूरिया ऐसे हे नए लिबास में अपने आप को तैयार करती है और फिर कड़ी हो कर शमशेर क कक्षा की ओरे जाने लगती है

Hooriya:man me)Itni ज़िद्द तो कभी शमशेर क अब्बा भी नहीं किये न ज़ोर डाई क में ऐसे लिबास पहनू

कुछ हे देर में भूरिया शमशेर क कक्षा क सामने थे जिसके दरवाज़े पे दो दसिआ कड़ी थी वो दोनों भूरिया को लगातार देखे जा रही थी भूरिया उन्हें अनदेखा कर क अंदर जाती है

Dasi1:Dekha तुमने मल्लिका ेजहाँ क रंग हे बदल गए है कल तक ढीले वाले लिबास में अपने हर बदन को छुपाती थी

Dasi2:Han अब देखो कैसे बड़ा गांड को मटकाये चल रही है और दूध तो किसी पहाड़ जैसे है

Dasi1:susshh चुप कर किसी ने सुन लय तो फांसी हो जाएगी

अंदर भूरिया पहुंचते हे

Hooriya:andar आजौ बीटा

शमशेर अंदर बैठा फल खा रहा था अपने अम्मी की आवाज़ सुनते हे

"आइये अम्मी जान आपको कब से इजाज़त की डरकर होगयी"

भूरिया अंदर आते हुए

"जब बीटा बड़ा हो जाये तो माँ को बिना पूछे अंदर आना गुनाह है "

शमशेर अपने अम्मी को देख उठ खड़ा होता है और उसके हाथ में जो सेब था वो गिर जाता है भूरिया बाला की खूबसूरत लग रही थी अपने बेटे की इस रवैये पर भूरिया खुश हो या गुस्सा समझ नहीं आता वो बास अपने चेहरे पर न बिना ख़ुशी ग़म क अंदर आटे रहती है और हर कदम को अपने आखो से शमशेर भूरिया को पी रहा था उसके भरी भरकम बदन को देख शमशेर लैंड कड़ा हो जाता है भूरिया क बदन पर थोड़ी चर्बी छायी थी पर अब भी उसके कमर की बनावट ख़राब नहीं हुई थी जिसके वजह से उसके बड़े भरी दूध कहर ध हे रहे थे ऊपर से पीछे को निकली गांड भी लरजते हुए हिल रही थी भूरिया अपने आप को समेटे और अपने बदन को न हिलने की पूरी कोशिश की पर सब बेकार था आख़िरकार शमशेर क आगे आकर कड़ी होती है

Hooriya:muh देखता रहेगा या कुछ बोलेगा भी

Shamshera:Salam अम्मी जान

शमशेर अपने आखे बड़ी कए हुए कहता है

Hooriya:Tumne दवा खाई

Shamshera:Dawa खा ली

Hooriya:Hosh में आओ

अपने हाथो से शमशेर क सीने पे एक हल्का मुक्का मरती है अंदर हे अंदर भूरिया को एक अजीब सी ख़ुशी मिल रही थी वो जानती थी क शमशेर उसे एक औरत की नज़र से देखता है और बेइंतेहा मुहब्बत करता है

Shamshera:ammi जान जिसके पास आप हो उसे दवा की क्या ज़रूरत

Hooriya:Mat करो बीटा तुम्हे अंदाज़ा नहीं तुम गुनाह क्यू कमा रहे हो अपने आप पर काबू नहीं तुम्हे ..तुम्हारी बात मानी इसका मतलब ये नहीं

Shamshera:Ammi जान आपके ाअखे किसी झील से भी गहरी और खूबसूरत है आपके होठो की लाली गुलाब से भी खूबसूरत है आपकी आवाज़ किसी कोयल से भी मीठी है अआप एक पारी हो अम्मी जान एक हूर पारी

Hooriya:Beta ये सब कहने का हक़ सिर्फ तुम्हारे अब्बा का है



लज्जते हुए हल्का मुस्कुराते हुए अपने बेटे को भूरिया समझती है पर अंदर हे अंदर पहली बार ऐसी तारीफ सुन कर भूरिया का डिल भी तेज़ रफ़्तार से धड़कने लगा था

Shamshera:aap सुल्तान की बात हे मत करो आप उनको हक़ दे रही हो जो आपको मरता हुआ छोर भागा और में जो आपके ढाल बन कर आपकी जान बचाई मेरा कोई हक़ nahi..me आपसे बेइंतेहा मुहब्बत करता हु आपको किसी नाज़ुक पारी जैसा रखूँगा आपको कभी दुखी नहीं करूँगा हमेशा अपने पास रखूँगा अम्मी जान मेरे प्यार को क़ुबूल कर लो

Hooriya:chup कर बस्स्स शमशेर में तुम्हारी हर बात मानती हु क तुम सुधर जाओ और बुरी आदतों क वजह से अपने ज़िन्दगी न ख़राब करो पर तुम्हारी गन्दी नज़र अब भी मेरे पैर है में जा रही हु

भूरिया को जाने का डिल बिलकुल भी नहीं था पर वो ऊपर क मन से धमकी देते हुए आगे बढ़ती है

Shamshera:ammi जान रुक जाओ

Hooriya:tumhe पता है में तुमपे रेहम कर रही हु किसी और ने ये गुस्ताखी की होती तो सर कलम कर देती

Shamshera:achha बाबा मुआफ कर दो रुक जाओ अब से न कहूंगा अपनी डिल की बाते

भूरिया रुक जाती है और आगे बढ़ कर शमशेर का दवाई निकल कर खिलने लगती है शमशेर लगातार कभी अपने अम्मी क दूध तो कभी उनके भरी चर्बीदार चुतरो को घूरता पता नहीं क्यू आज भूरिया ये समझ कर भी अनजान बन रही थी और हलकी मुस्कान उसके चेहरे पर फ़ैल रही थी जिसे वो छुपाने की कोशिश कर रही थी कही न कही भूरिया अपने बेटे की दीवानगी को उसके मुहब्बत को सच्चा मान ली थी

Shamshera:ammi जान अब तो गुस्सा नहीं है हमारी पारस की मल्लिका इ जहाँ

Hooriya:Ji नहीं पर शहज़ादे से मल्लिका जहाँ चाहती है क अपने माँ का अहतराम करे

Shamshera:aapke इन ज़ालिमों ने और क़ातिलों ने मुझे मजबूर कर दया था

शमशेर अपने अम्मी क गांड और फिर दूध पर नज़र डालते हुए कहता है

भूरिया अपने दूध और गांड को घूरता प् कर शमशेर को बड़ी आखे दिखते हुए

Hooriya:kya ज़ालिम और क्या क़ातिल हाँ

भूरिया अनजान बनते हुए पूछती है

Shamshera:ammi जान आपके ज़ालिम जुबां और क़ातिल ऐडा

शमशेर फिर से भूरिया क गांड को फिर दूध को देखता है

Hooriya:man में )कमीने पता है तुम मेरे जिस्म क पीछे क हिस्से को ज़ालिम कह रहे हो और आगे क हिस्से को क़ातिल

भूरिया ये सोच कर सुर्ख लाल हो जाती है और शमशेर क तरफ पीठ कर क आईने में अपने आपको देखती है और अपने लाल चेहरे को देख सर झुका लेती है

शमशेर: "ये आईएनए क्या दे सकेंगे तुम्हारी सख्सियत की खबर"

"कभी मेरे आखो से पूछो

कितने लाजवाब हो तुम"

भूरिया बिना पालते दरवाज़े की ओरे बढ़ती है अपने तेज़ धड़कनो क साथ आगे बढ़ रही थी शमशेर लगातार अपने माँ क गांड को देख रहा था और उसके मुँह से फुट पड़ता है

Shamshera:Kya माल हो तुम

शमशेर ये कह कर अपने अम्मी जान क मोठे भरी हुई गांड की रगड़ देख कर अपने लैंड को मसल देता है भूरिया वही रूकती है कुछ देर सोच कर मुड़ती है और बनावटी गुस्सा दिखा क

Hooriya:Kya कहा बद्तमीज़

शमशेर मुस्कुराता है और कहता है

"मैंने कहा कमाल हो तुम आपने क्या सुना अम्मी जान"

शमशेर की चालाकी पर हल्का मुस्कुरा देती है भूरिया और अपने हाथ आगे बढ़ा कर मुठी बंद कर खोल शमशेर की ओरे फेकती है और कहती है

"Luchha"aur मुद कर जाने लगती है शमशेर खड़ा हो कर फिर अपने लैंड मसलने लगता है

"अम्मी जान ये लुच्चा आपके इस गांड में एक दिन अपना लम्बा लौड़ा दाल कर आपके गांड की थिरकन को मिटाएगा



कैसे हुए काळा हिजाब में भूरिया क गांड क पते में आपस में टकरा कर रगड़ खा रही थी और शमशेर खड़ा अपना लौड़ा मसल रहा था कुछ हे पालो में भूरिया तेज़ी से शमशेर क आखो क सामने से ओझल हो जाती है

shamshera:Lagta है मैंने प्यार की पहली सीढ़ी चढ़ चूका हु अम्मी जान अब पहले की तरह गुस्सा नहीं हो रही है और शायद मेरे जज़्बात समझने लगी है

ये सोच कर हे शमशेर का लैंड खड़ा हो जाता है क अब बहुत जल्द उसकी माँ उसकी मेहबूबा होगी उधर भूरिया अपने कक्षा में पहुंच कर लम्बी साँसे लेने लगती है और पानी का गिलास उठा कर पीने लगती है

"ये क्या हो रहा है मुझे मेरा बदन आग की तरह क्यू जल रहा है उफ़ कही ये शमशेर क कहे हुए बातो का "

Hooriya:man me)Uff मेरी ज़ुबान भी न कोई सुन लिया तो ये शमशेर मेरी तारीफ करता है तो मुझे क्यू एक अजीब अहसास होता है कही में उसके प्यार को क़ुबूल तो नहीं कर ली नहीं नहीं में उसकी अम्मी हु ऐसा नहीं हो सकता वैसे वो डिल ो जान से मुहब्बत करता है मुझसे ऐसी तारीफ तो कभी इसके बाप ने भी नहीं की मेरी क्या में इतनी खूबसूरत हु

तभी भूरिया क कान में गूंजती है

"भाबी जान आजाये हम"

Hooriya:aajaiye गुल शाह

गुल शाह अंदर आते हे अपने भाबी को सलाम करता है और उसके नज़र अपने भाबी क बदले हुए लिबास पर पड़ती है



गुल शाह लगातार भूरिया को देखते जाता है अपने आप को घूरता प् कर भूरिया अपना हिजाब से अपने चेहरे को ढकने हे वाली थी क

गुल shah:Bhabi जान रहने दीजिये ऐसे हे आप बाला की खूबसूरत लग रही हो

Hooriya:Gul साहब आपसे हमने कई दफा कहा आप शादी कर लीजिये अब तो उम्र बीत गयी आपकी कब तक ु दुसरो की बीइओ को देख गुज़ारा करेंगे

गुल shah:Bhabi जान दुसरो की बीवी को कैसे अपनी बनाना है ये बखूबी जनता है गुल शाह पर

Hooriya:Kya बक रहे हो गुल शाह तमीज में रहो

गुल शाह अपने आँख फाड़े तेज़ी से भूरिया क तरफ आता है और भूरिया को घूर कर ऊपर से उसके बड़े दूध को खाने जाने वाली नज़र से देखते हुए उसके छूट वाली जगह पर नज़र टिकाये

Hooriya:Gul शाह तुमने शराब पी राखी है सुबह सुबह में सुल्तान से शिकायत कर दूंगी ऐसी हरकत करने से पहले तुम्हे दस बार सोचना चाहिए था

गुल shah:chup कर मल्लिका जहाँ की बची अपनी फरमान मुझे न सुना तुम्हे पता है मई तुमसे कितना प्यार करता जब से तुम मेरे वाहिद से शादी कर क आए हो तब से आज तक में हर रात तुझे अपने बाहो में लेने क सपने देखता हु अब बहुत जल्द तुझे दिन रत पटक कर तेरे जवानी की हर एक बून्द रस निचोड़ क पी जाऊंगा इतना ठोकूंगा तुम्हे अपनी बीवी बना क तुम निहाल हो जाओगी

भूरिया क आखो में खून दौर जाता है और वो इतने गुस्से में आजाती है जैसे अभी गुल शाह का क़त्ल कर दे

Hooriya:Gustaakh तेरा ये ख्वाब हमेशा ख्वाब हे रहेगा नीच इंसान

गुल shah:Ye नए लिबास में बदन क कटाव क़यामत ध रहे है मेरी रानी भूरिया

गुल शाह आगे जा कर भूरिया का हाथ पकड़ लेता है जिसको भूरिया को उम्मीद नहीं थी और वो पीछे हटने की कोशिश करती है पर गुलशाह एक शैतानी हसी क साथ भूरिया क हथेली को मसल कर अपने ओरे खींच रहा था

गुल shah:haha मेरा भी सर कलम करवाएगी क्या जैसे तूने कई दीवानो को करवा दी बास इस जुर्म में की वो तुम्हे निहार रहे थे तेरे भरी बदन क दीवाने थे और आज कल तो लिबास भी ऐसे पहनने लगी किसको अपना आशिक़ बना ली हो जो अपने नाख़ून तक छुपाने वाली मल्लिका जहाँ आज ऐसे लिबास में

भूरिया का एक हाथ खली था वो अपने बाए हाथ से दीवार क तरफ करते हुए वह पर रखे तलवार खींच लेती है और सीधा गुल शाह क गर्दन पैर रख देती है

Hooriya:Thu है तुझ जैसे देवर पर जो अपने भाबी क लये ऐसे सोच रखता hai..Gustakh तेरे गर्दन यही उतार दूंगी में मल्लिका इ जहाँ भूरिया हु कोई मामूली औरत नहीं

गुल शाह घुटने क बल बैठ ते जाता है और भूरिया तलवार क नोख पर गुल शाह को घुटनो क बल बैठने पर मजबूर होती है

Hooriya:Bol कंकभकत तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझे छूने की

गुल shah:a ा तुम मेरी जान ले लो पर में तुमसे सच्ची मुहब्बत करता हु

Hooriya:thu है तेरे जैसे इंसान पर जो मुहब्बत को बदनाम करता है जिसे तुम मुहब्बत कह रहे हो वो हवस है गुल शाह तुम नशे में आकर मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की बद्ज़ात

Gulshah:Han मई नशे में हु पर भाबी जान ये सच है क में आपका दीवाना तब हे हो गया था जब आपको पहली बार देखा था आप क वजह से हे में आज तक शादी नहीं क्या और ये सब बताने की हिम्मत मेरी नहीं हुई आज तक पर आज में शराब का सहारा ले कर अपने डिल की बात कहने आया था

भूरिया एक लात गुल शाह को मरती है और वो गिर्र जाता है

Hooriya:Tum नशे में हो इसलिए आखिरी बार गलती मुआफ की पर आइंदा मेरे तरफ नज़र भी उठाई तो अंजाम बुरा होगा

गुल शाह ज़मीन पर लेता हुआ था और भूरिया अपने आँख लाल कए हुए उसे देख रही थी

गुल shah:Bhabi जान ये बेअदबी मुझे ज़िन्दगी भर याद रहेगी

Hooriya:bhaag जा यहाँ से तुझे ख्याल कैसे आया क में अपने शौहर सुल्तान मेरे वाहिद क रहते हुए कभी तुझे घास भी डालूंगी

गुल शाह उठ कर भागने लगता है और भूरिया तलवार ले कर वही बिस्तर पर बैठ जाती है

Hooriya:man me)ye गुल शाह ने आख़िरकार अपने डिल की गन्दगी बयां कर hi दी पता नहीं क्या करेगा आगे शमशेर को batau..nahi nahi..wo तो गुल शाह को जान से मार देगा और वो जोश में कही ये न सबको बता दे क वो मुझसे सच्चा प्यार करता है तब तो हम दोनों मरे जायेंगे ..इस बात को यही ख़त्म करती हु आगे देखते है अगर कुछ उल्टा सीधा क्या तो सुल्तान से हे बात करना होगा शमशेर से छुपा क उफ़ मेरे ज़िन्दगी में ऐसे ऐसे मोरे आएंगे मैंने सोचा न था

तभी नाज़ आजाती है

Naaz:Hooriya बाजी चलिए दरबार लगने का वक़्त हो गया है

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट 150

गुल शाह उठ कर भागने लगता है और भूरिया तलवार ले कर वही बिस्तर पर बैठ जाती है

Hooriya:man me)ye गुल शाह ने आख़िरकार अपने डिल की गन्दगी बयां कर hi दी पता नहीं क्या करेगा आगे शमशेर को batau..nahi nahi..wo तो गुल शाह को जान से मार देगा और वो जोश में कही ये न सबको बता दे क वो मुझसे सच्चा प्यार करता है तब तो हम दोनों मरे जायेंगे ..इस बात को यही ख़त्म करती हु आगे देखते है अगर कुछ उल्टा सीधा क्या तो सुल्तान से हे बात करना होगा शमशेर से छुपा क उफ़ मेरे ज़िन्दगी में ऐसे ऐसे मोरे आएंगे मैंने सोचा न था

तभी नाज़ आजाती है

Naaz:Hooriya बाजी चलिए दरबार लगने का वक़्त हो गया है

भूरिया अपने तलवार को रखती है और अभी गुल शाह से हाथ बही होने पर उसके माथे पर पसीने क बुँदे आगे थी उसे भूरिया अपने हाथो से पोछते हुए

"बास आगे नाज़ बेगम"

भूरिया अपने निक़ाब को ठीक करते हुए बहार आने लगती है तभी सामने से नाज़ भी आती दिखती है नाज़ अपने बड़ी सौतन को सलाम करती है

"मल्लिका इ जहाँ सुल्ताना हूरजहाँ काफी देर लगाती है सजने में और आज तो क़यामत लग रही है"

"चुप कीजिये नाज़ बेगम आप तो एक मौक़ा नहीं चूकते"

"भूरिया बाजी अगर में मर्द होती तो मौक़ा को हाथ से जाने न देती वैसे आज तो आप पर ये लिबास गज़ब लग रहा है आपके पहनावे में सुधर आया है"

भूरिया और नाज़ दोनों दरबार की ओरे चलते हुए बाते क्र रही थी

hooriya:man me)Ab क्या बताऊ नाज़ तुम्हे इस लिबास को पहननाने वाला शमशेर है और उसने मुझे इस निक़ाब में देख अपने आखो की सिकाई भी कर ली मेरी जिस्म क उभारो को देख मेरे डिल में ऐसी मोहब्बत की चिंगारी जला दया है जो हर एक कुंवारी लड़की क डिल में जलता है जब पहली बार उस से कोई मुहब्बत की फर्याद करता है हाय ये में क्या सोच रही हु नहीं नहीं ची में कितनी गन्दी हु

Naaz:Kya हुआ भूरिया बाजी कही आज सुल्तान क पास सोने की आज की बरी तो नहीं और उसके हे सपने संजो रही हो

hooriya:man me)Hafte में एक बार सुल्तान अपने साथ सुलाते है और जिस्म की आग बुझाते है कुंवारी थी तो सोचती थी क शादी क बाद हर रात रंगीन होगी

Hooriya:nahi नाज़ आज कल मेरे महीने में बदलाव हो गए जिस वजह से कोई ऐसी वैसी हरकत करना मुनासिब नहीं

Naaz:kahi उम्मीद से तो न हो गयी आप ?

hooriya:dhatt पगली इस उम्र में मई माँ कहा बन पाऊँगी

hooriya:man me)Chahat तो मेरी भी थी क तुम्हारी तरह सुल्तान मुझे भी एक बेटी दे समां जैसी पर ऐसा हुआ नहीं ..6 महीने से तदपि हु सुल्तान क साथ सोने क लये पर अब जब सुल्तान की सोच ज़ाहिर हो गयी मेरे लये तो डिल न करता सुल्तान का मुँह बी देखु

Naaz:Hooriya बाजी आप एक डैम खोयी खोयी लग रही है ऐसा तो तभी होता है जब इंसान इश्क़ में होता है आपके गाल गुलाबी बी वैसे हे हो रहे है

Hooriya:man me)Nahi नहीं ये सच नहीं हो सकता ऐसे कैसे में इश्क़ में पद सकती हु वो भी अपने बेटे से ..भूरिया तुम अपने आप को झूट न बोलो शमशेर की मुहब्बत देख तुम्हे भी तरस आगे इसलिए तुम्हे अब उसकी मुहब्बत की बाते अछि लगने लगी है और तुम अंदर हे अंदर प्यार करने लगी हो शमशेर से अपने बेटे से ..नही नहीं

hooriya:nahi

भूरिया मन में सोचते हुए अपने लैब से नहीं निकलती है जिसे सुन कर नाज़ हैरान हो जाती है

naaz:kya हुआ बाजी आप नहीं नहीं क्यू क्र रही

hooriya:kuch नहीं चलो अब हम दरबार पहुंच गए

दोनों दरबार में पहुंच कर अपने अपने कुर्सी पर बैठ जाते है उधर शमशेर अपने हुजरे में था और तैयार हो कर दौरा दरबार की ओरे आ रहा था

shamshera:aaj फिर देर हो गया अब्बा जान छोड़ेंगे नहीं

शमशेर तेज़ी से चलते हुए जैसे हे समां क हुजरे क सामने से गुज़रता है उसे सामने से समां बहार आती दिखती है और वो सलाम करती है

sama:bhaijaan कहा भागे जा रहे है

shamshera:Sama दरबार में वक़्त पर नहीं पहुंचने से दांत पड़ती में चलता हु

sama:aaj में चहु तो आपको दांत खाने से बचा सकती हु बास आप मेरे साथ चले पर में आप क जैसे घोड़ो की तरह न चल सकती

shamshera:Theek है में धीरे धीरे चलता हु

समां और शमशेर चहल कदमी करते हुए दरबार की ओरे बढ़ रहे थे

Shamshera:Sama तू हे मेरी बहिन है जो मेरा ख्याल रखती है

sama:aur आप तो हम से बात भी नहीं करते कहती हु शादी कर लें भाबी आजायेगी तो आप सही वक़्त पर हर काम करने लगोगे

Shamshera:bhaaabi हम्म्म

sama:aaap क चेहरे से तो लग रहा है क आपने देख रखी है कोई भाईजान

Shamshera:Tum कब से शायरी से मुहब्बत पर बात करने लगी तुम तो पढ़ने पर ध्यान दो

समां ये सुन कर कड़ी हो जाती है और अपना मुँह बना कर शमशेर को देखती है

Shamshera:kya हुआ क्यू रुक गई अब

Sama:Me नहीं जाउंगी आप मुझे अपना नहीं मानते अपनी बहिन मानते तो ु न डांटते

Shamshera:Sama क्या बचपना है चलो हमे देरी होरही है सुल्तान नाराज़ होंगे

Sama:pehle हमे बताये हमारी भाबी क बारे में

shamshera:to तुम नहीं मानोगी?

Sama:aaj तक मानी हु बिना अपनी बात मनवाये अपने प्यारे भाई से

शमशेर मुस्कुराते हुए

Shamshera:Theek है पर ये बात राज़ रहे ..मई किसी हसीना को डिल दे बैठा हु और जल्द से जल्द उसे आपकी भाबी बनाना चाहता हु

समां अब शमशेर क साथ दरबार की ओरे चलने लगी थी शमशेर की बात सुन कर बहुत खुश होती है

sama:To छुपे रुस्तम हमारे भाबी को हम से छुपा क रखना चाहते थे बताओ उनका नाम क्या है कैसी दिखती है कहा की शहज़ादी है

Shamshera:Hmm वो थोड़ी सी मोती है और शहज़ादी नहीं वो रानी है

Sama:moti ?

Shamshera:Han तुम्हारी तरह

Sama:Raani है शहज़ादी नहीं ? बिना राजा क

Shamshera:me हु न उसका राजा

Sama:mujhe कुछ समझ न आरहा है

Shamshera:Man me)ab तुम्हे क्या बताऊ समां तुम्हारी होने वाली भाबी सुल्ताना भूरिया है मेरी अम्मी है जिसके गद्देदार जिस्म का दीवाना हुआ में उनके मोती मोती दूध को पीने क लये तड़प रहा हु उनके मोती गांड में अपना लैंड दबा क हर रात सोने की तमन्ना है कैसे बताऊ तुम्हे क तुम्हारी भाबी कोई और नहीं तुम्हारी बड़ी अम्मी मल्लिका ेजहाँ भूरिया है

Sama:Boliye भाईजान किस सेहर में मिल गयी आपको ये

Shamshera:wo में अपने ननिहाल मिश्रा गया था तो दिखी थी

Sama:to कब तक आप शादी करेंगे भाईजान

shamshera:Bhut जल्द बास दवा करो वो मेरी बात मान ले

sama:Bhaijaan भला कोई पारस क होने वाले सुल्तान को न कैसे बोल सकता है

shamshera:man me)Bhut जल्द भूरिया मेरे बाहो में होगी और रोज़ मेरे लौड़ा ले कर इसी महल में सोयेगी उसकी खलीज मिटा दूंगा ऐसा क वो अपने सौहार मेरे वाहिद को भूल कर मुझे अपना सौहार मान लेगी

Shamshera:Ab बात ऐसी है क आपकी होने वाली भाबी बहुत ज़िद्दी है और एक मग़रूर हसीना है

Sama:acha भाईजान क्या सच्चे में मेरे होने वाली भाबी इतनी हसीं है क्या नाम है उनका ?

shamshera:Hoor..Pari है वो बास इतना समझ लो मेरी आखो की नींद ख़राब क्र दी है उसने जब से देखा है चैन से सो नहीं पाया हु

शमशेर क ज़ुबान पर तो एक बार अपनी अम्मी का नाम आजाता है पर वो बात पलट देता है

Sama:sach में आप उनसे इतनी मुहब्बत करते है मुझे उम्मीद है क वो मान जाएगी और जल्द से जल्द आपकी शादी हो और मेरे भतीजे भतीजी हो और में उनको खिलौ

shamshera:Han समां में उसे सच्चे डिल से चाहता हु उसे पाने क लये पूरी दुन्या से लड़ना पड़े तो लडूंगा पर उसकी दमन अपने मुहब्बत क खुशिओ से भर दूंगा और रही हमारे बचे खिलने की तो तब तक तुम बैठी नहीं रहोगी तुम्हारी शादी भी हो जाएगी

sama:kya भाईजान में नहीं करुँगी शादी वादी

दोनों ऐसे हे बाते करते हुए दरबार तक पहुंच चुके थे शमशेर समां से अपनी मुहब्बत की बात अपने डिल की रानी भूरिया क बारे में सोच कर और अपने होने वाले बचो की सोच कर उसके रोंगटे खड़े हो गए ,दोनों दरबार पहुंच जाते है और समां जो शमशेर की सौतेली बहिन थी वो औरतो क दरबार में चली जाती है शमशेर खड़े हो कर एक बार अपने अम्मी भूरिया को देखता है जो औरतो क बीच एक ुचे बड़े कुर्सी पर बैठी थी

shamshera:man me)ammi जान कब बनोगी मेरे बचो की अम्मी जान कब जानोगी मेरे बेटे बेटी क्या माल लग रही हो मेरी मल्लिका इ जहाँ भूरिया



भूरिया अपने आप को देखता प् कर शमशेर की ओरे देखती और उसे सोच में डूबा देख कुछ देर देखती है पर शमशेर तो अपने नज़रे हटाने का नाम नहीं ले रहा था आख़िरकार भूरिया शर्मा कर अपने आखो को निचे कर लेती है और उसके चेहरे पर एक छोटी सी मुस्कराहट फ़ैल जाती है

Hooriya:man me)Ye कितना बेशरम होते जा रहा है दिन बा दिन अब सबके सामने मुझे घूर रहा है अपने अम्मी को पारस की सुल्ताना को एक ज़रा सा दर नहीं पर मुझे पहले जैसे गुस्सा क्यू नहीं आरहा उफ्फ्फ

भूरिया अपने सर को हाथ से पकड़ती है और शमशेर मुस्कुराता हुआ मर्दो क दरबार में चला जाता है दोनों तरफ से मंत्री बैठे थे और सामने सिंहासन पर शमशेर क पिता और पारस क सुल्तान मेरे वाहिद बैठे the,shamshera जा कर सबसे सलाम करता है और अपने आसान पर जा कर बैठ जाता है

Sultan:Shamshera क्या..

Shamshera:Muaaf कीजिये अब्बा जान वो समां क वजह से देरी हो गई..

sultan:Bete मेरी बात तो सुनो हम महल पर हुए हमला क सुराग क बारे में जान न चाहते है

Shamshera:Sultan वो हमने पारस का चप्पा चप्पा छान मारा पर शुंग और उनके साथिओ का कोई अत पता nahi..jaha तक मुझे अंदेशा है हमला करवाने वाले इस बात को जानते है क शुंग क पारस जाने क हर दरवाज़े को हमने बंद कर दया है

Sultan:Tum ठीक कहते हो शहज़ादे पर हमे किसी भी क़ीमत पर शुंग चाहिए

छान pasha:jahan पनाह हमारे सिपाही दिन रात निगरानी में है शुंग का यहाँ से बच क जाना नामुमकिन है

छान पाशा ये कह कर गुल शाह की ओरे देखता है और एक इशारा करता है बदले में गुल शाह भी इशारा करता है

Sultan:Chan पाशा ऐसा हे होना चाहिए

इधर शमशेर का डिल दरबार में नहीं लग रहा था और वो बार बार परदे क पीछे बैठे अपने अम्मी को देखने की कोशिश कर रहा था और भूरिया जालीदार परदे से ये धुंदला धुंदला देख प् रही थी क उसका बीटा उसे देखने क लये तड़प रहा है और भूरिया को समझ नहीं आरहा था क वो इस बात से खुश हो क गुस्सा हो

Naaz:Hooriya बाजी कहा खो गयी

Hooriya:Kahi नहीं

Naaz:acha तो अगले सवाली को बुलाये

Hooriya:Han नाज़ क्यू नहीं

तभी एक औरत रट हुए दरबार में आती है

Aurat:Sultana भूरिया हमे इन्साफ चाहिए

Hooriya:batao क्या बात है

Aurat:Sultana मेरे शौहर सुल्तान मेरे वाहिद क साथ जुंग पर हिन्द गए थे और उन्होंने लड़ते हुए अपनी जान गवा दी पर आज तक हमारी मदद क लये कुछ नहीं मिला मेरे छोटे छोटे बचे है क्या में उन्हें भूका मर दू जो घर में था वो सब ख़त्म हो गया है

Hooriya:pehli बात हमने हर सिपाही क घर उनके जीत का हिस्सा बटवा दया था पर अगर आप को नहीं मिला तो ज़रूर इसमें किसी की कोताही हुई होगी हम अपने लोगो को अपने बचो को कभी भी भूके नहीं मार सकते आप को आपका हक़ मिल जायेगा और आपके बचे की ज़िम्मेदारी हमारी hai...kaneej इन्हे ले जाओ इनके मानगो को पूरा करो और इनको मदद नहीं मिलने क पीछे किसका हाथ है वो मुझे आज हे पता चलना चाहिए

kaneej:Ji सुल्ताना जैसा आपका हुक्म है वैसा हे होगा

वो औरत कनीज क साथ चली जाती है रट हुए अपने ासु पोछते हुए

aurat:Sultana आप सच में मल्लिका इ जहाँ है आप हे हमारी मालिक है आपका डिल बहुत बड़ा है खुदा आपकी हर ख्वाइश पूरी करे

Hooriya:shukria आप जाये

Naaz:aur कोई है तो आजाओ

एक औरत और आती है और घुटने क बल बैठ क रोने लगती है

Hooriya:roye नहीं बताये क्या मसला है

Aurat:Sultana क्या सिर्फ खाने से हे हो जाता है हमारे घर गोधूम तो पहुंच गया पर मेरी बेटी जवान है उसकी शादी क लये एक सिक्का नहीं है मेरे शौहर कुछ वक़्त पहले जंग में गए थे अब तक उनका ये भी पता न चला क वो ज़िंदा है या

Hooriya:Theek है आपकी बेटी हमारी बेटी है इसकी शादी का पूरा खर्च हम देंगे ..कनीज़ इन्हे ले जाओ और इनके बेटी की शादी का इंतेज़ाम करो

Aurat:aapka लाख लाख शुकरिअ सुल्ताना..

Hooriya:Ye दरबार में खास कर आप ख्वातून की बात सुन ने क लये हे लगाया जाता क्यू अम्मी जान

afsana:Han भूरिया बेगम कई वर्षो तक मैंने औरतो क अदालत को संभाला पर जब से तुम शादी कर क आई सुल्तान से तब से मेरे कंधो का भोज हल्का कर दया और इतने अचे से काम संभल ली मेरी बहु नहीं तुम मेरी बेटी हो

वह पर बैठे हर औरत मुस्कुरा कर भूरिया को देखती है और सब मल्लिका जहाँ ज़िंदाबाद एक साथ कहती है दो तीन बार कहने क बाद सब चुप हो जाती है अचानक भूरिया का निगाह परदे क पीछे बैठे शमशेर पर जाती जो उसके तरफ हे देख रहा था

hooriya:man me)Apne बाप क सामने मुझे घूर रहा है ये अपनी जान और अब मेरी भी जान ये खतरे में दाल रहा है कैसे समझौ इसे

तो बे कॉन्टिनोएड..
 
अपडेट 151

वह पर बैठे हर औरत मुस्कुरा कर भूरिया को देखती है और सब मल्लिका जहाँ ज़िंदाबाद एक साथ कहती है दो तीन बार कहने क बाद सब चुप हो जाती है अचानक भूरिया का निगाह परदे क पीछे बैठे शमशेर पर जाती जो उसके तरफ हे देख रहा था

hooriya:man me)Apne बाप क सामने मुझे घूर रहा है ये अपनी जान और अब मेरी भी जान ये खतरे में दाल रहा है कैसे समझौ इसे

शमशेर इस बार परदे क पीछे से देख लेता है क उसकी अम्मी भी उसे देख रही है और वो बहुत खुश होता है उसके डिल में एक अजीब तरह की ख़ुशी हुई थी जिसे वो आज ज़िन्दगी में पहली बार महसूस कर रहा था आज उसे ये अहसास हो रहा था जैसे ज़िन्दगी में उसे वो सब मिलने वाला था जिसकी ख्वाइश उसे हमेशा से थी और भूरिया का देखना हे शमशेर क बदन में एक झनझनाहट पैदा क्र दी थी

shamshera:man me)Ammi जान आप मुझे घूर रही हो इसका मतलब मैंने आपके डिल में अपनी मुहब्बत का छाप छोर दया हु और आप भी मुझसे एक दीवानी की तरह चाहने की पहली सीढ़ी पर कदम रख दया है बहुत जल्द आप मेरी बाहो में होगी मेरी अम्मी जान

ये सोचते हुए शमशेर मुस्कुराता है और तभी सुल्तान मेरे वाहिद उसे देख क आवाज़ लगते है

"शहज़ादे"

"शहज़ादे"

शमशेर जैसे नींद से जगता है और अपने बाप क बुलाने पर हड़बड़ाते हुए

"जी सुल्तान हुकम"

"शहज़ादे यु मुस्कुराये जा रहे हो आखिर क्या सोचे जा रहे ho,Tumne बताया नहीं क हमारी शुंग को पकड़ने की चल कैसी है"

"सुल्तान वो में ..वो में शुंग को अपने चुंगल में महसूस कर प् रहा आपकी चाल बहुत दुरुस्त है अब्बा जान"

Shamshera:man me)ab अब्बा जान कैसे बताऊ क मुझे शुंग से ज़्यादा अम्मी को हासिल करना है

Sultan:Theek है अब हम चलते है

सुल्तान उठ खड़े होते है उन्हें देख सब उठ क खड़े हो जाते है सुल्तान चलते हुए अपने हुजरे क तरफ जाने लगते है और कुछ देर में सब लोग दरबार से चले जाते है

उधर भूरिया और उसकी सौतने भी अपने अपने हुजरे में चली जाती है भूरिया अपने हुजरे में पहुंच कर दरवाज़ा बंद करती है और बिस्तर पर लेट जाती है जैसे हे वो तकिये पर अपना सर रखती है और आखे बंद करती है उसके सामने शमशेर का चेहरा आजाता है जो मुस्कुरा रहा था हुरिअ करवट लेती है और फिर आखे बंद क्र सोने की कोशिश करती है एक बार फिर शमशेर नज़र आता है और कहता है "अम्मी जान आप से मुहब्बत करता हु me"Hooriya उठ कर बैठती है और ज़ोर ज़ोर से हांफने लगती है और गिलास उठा कर पानी पीती है

भूरिया सोचती है "क्या हो रहा है ये मेरे साथ बार बार मुझे शमशेर क्यू दिखाई दे रहा है क्या मुझे भी उस से प्यार हो गया है ..नहीं ऐसा नहीं हो सकता मई कैसे उसके प्यार को क़ुबूल क्र सकती हु वो मुझे अपनी बीवी की तरह की मुहब्बत करता है भला में अपने हे बेटे को अपना मर्द कैसे क़ुबूल क्र सकती हु पारर अगर मेरे डिल ने उसके मुहब्बत को क़ुबूल न किया तो क्यू मुझे सिर्फ वही दिख रहा है उफ़ में क्या करू "

भूरिया अपने जज़्बात को संभालती है पर उसे रह रह कर वो सब सामने आ रहा था जो पिछले कुछ दिनों से बीती थी पहले शमशेर का ये कहना क वो भूरिया को एक औरत की नज़र से देखता है फिर भूरिया पर जाएं लेवा हमला होता है फिर शमशेर उसे बचता और शमशेर बुरी तरह जख्मी हो जाता है भूरिया को बचने में शमशेर भूरिया से ज़िद्द कर क अपने मुहब्बत को भूरिया से सच्चा मुहब्बत मैंने क लये मजबूर करता है जो अब तक शमशेर क मुहब्बत को अब तक भूरिया सिर्फ हवस मान रही थी भूरिया इन सब बातो में खोई रहती है उसे याद आता है कैसे शमशेर ने उसे अपनी दोस्त बना लय जब भूरिया ने शमशेर को मन क्या वेश्याओं क पास जाने और दारू पीने से

hooriya:man me)aur में पागल उसके जाल में फस्ती गयी उस से दोस्ती कर ली फिर उसके बनवाये पोषक पहन रही हु क्या शमशेर की बात मान न महज़ एक इत्तेफ़ाक़ था मेरे लये या में सच में उसकी तरफ माइल हो रही hu..Kaise नहीं हु आज तक किसी ने मेरे सामने मुहब्बत का इज़हार भी तो नहीं क्या उफ़ में कैसे कश्मकश में फस्स गयी हु

ऐसे हे शाम होती है दिन भर भूरिया और शमशेर एक दूसरे क बारे में हे सोच रहे थे रात का खाना खाने क बाद भूरिया नाहा धो कर तैयार होती है और एक खूबसूरत काफटाण पहनती है अभी आगे बढ़ती उस से पहले वो एक कदम पीछे हैट कर इतर उठा कर जो गुलाब का था अपने बदन पर छिड़कती है अपने आप को शीशे में देख अपने कदम अपने हुजरे से बहार निकलती है दोनों दसिआ जो दरवाज़े क बहार कड़ी थी दोनों क मुँह खुले क खुले रहते है

kaneez:Gustakhi मुआफ मल्लिकाजहं आप बाला की खूबसूरत लग रही है

सुल्ताना Hooriya:Shukria कनीज़

भूरिया मुस्कुरा कर शमशेर क हुजरे में जाने लगती है और उनके मटकते हुए गांड को देख दोनों कनीज़ मुस्कुरा रही थी

भूरिया शमशेर क हुजरे क आगे आकर कड़ी होती है

Hooriya:Kya में अंदर आजौ शहज़ादे शमशेर

शमशेर जो सतरंज ले कर अपने चल में गुमशुदा था अचानक से अपनी अम्मी की आवाज़ सुन कर खुश होता है

Shamshera:Aajaiye अम्मी जाएं

भूरिया अंदर आती है और शमशेर अपने माँ क तरसे हुए संगमरमरी बदन को देखता रह जाता है उसके खूबसूरत चेहरे में खो जाता है



भूरिया का भरी बदन कैसे हुए काफटाण से बहार आने को आतुर था भूरिया अपने कमर पर हाथ रख अपने बेटे को देख रही थी भूरिया क काफटाण क सामने का भाग खुला था जिस से उसके अंदर क कासी हुई पाजामे में उसके राण नज़र आरहे थे शमशेर तो बास बिना पालक झपकाए अपने अम्मी की ख़ूबसूरती में खो गया था आखरी कर भूरिया से रहा न जाता है

Hooriya:Beta क्या हुआ ऐसे क्या बूट बने खड़े हो

Shamshera:ammi जान

"आखे खुदा ने दी है तो देखेंगे हुस्न इ यार"

"कब तक निक़ाब रुख से उठाई न जाएगी"

Hooriya:khwab देख रहे हो समशेरा निक़ाब उठाना तो दूर मेरे करीब आने का भी हिम्मत मत करना

Shamshera:man me)Mallika इ जहाँ हूरजहाँ एक दिन में आपके निक़ाब उठा कर आपकी पेले नहीं की तो मेरा नाम शमशेर नहीं

शमशेर उठ कर खड़ा होता है पर वो भूल गया था उसका लैंड भी खड़ा है और उसके पाजामे क ऊपर अपनी पूरी आकर बनाये हुआ है आधा अकड़ा हुआ लैंड साफ़ उठा हुआ दिख रहा था

शमशेर भूरिया क पास चल क्र आरहा था और उसका लैंड भी हिल रहा था भूरिया की नज़र सीधे उसके बेटे क उठे हुए हिस्से पे जाती है और उसे अहसास हो जाता है

hooriya:man me)Uff ये क्या शमशेर अपने उसको संभल नहीं प् रहा

भूरिया ये देखते हे पीछे घूम जाती है



भूरिया क मोठे मोठे गोआल पहाड़ो जैसे गांड शमशेर क सामने आजाते है

Hooriya:Shamshera ये क्या बदतमीज़ी है शेर ो शायरी कब से करने लगे तुम और अपने आप पर काबू नहीं तुम्हे में कब से यार हो गई तुम्हारी

शमशेर भूरिया क पलट जाने पर कुछ सोचता है और वो अपने कमीनी दिमाग से तुरंत समझ जाता है भूरिया शर्मा रही है शमशेर अपने आप पर नज़र डालता है और अपना खड़ा लैंड देख चौंक जाता है

Shamshera:man me)Uff ये क्या अम्मी इस लये दर गई

शमशेर झट से अपना कपडा ठीक करता है और सामने कुर्सी पर बैठ जाता है

Shamshera:Kya हुआ अम्मी जान आप हे तो मेरी दोस्त बानी थी अब दोस्त यार एक हे तो होता hai..ab आप इतनी खूबसूरत हो भला कैसे न देखु आपको ..आप बैठ जाये अम्मी जान

hooriya:Chhi अम्मी भी कहते हो फिर हुस्न देखते हो यार कहते ho..me जा रही हु तुमने वादा क्या था छेड़ोगे नहीं और गलत बात नहीं करोगे

shamshera:ammi जान आजाओ बैठ जाओ में गलत कुछ नहीं करूँगा

hooriya:apni हाल देखो अपनी अम्मी क सामने ऐसे की तुम्हे शर्म नहीं अति

Shamshera:Kuch नहीं है अम्मी आप क्या कह रही हो मुझे समझ नहीं आरहा

भूरिया अचानक से हल्का मुड़ती है और शमशेर को बैठा प् कर सीधे शमशेर क आखो में देखती है जिसमे उसे शरारत साफ़ नज़र आरहा था

Shamshera:Kya बात क्र रही हो अम्मी में समझा नहीं

Shamshera:man me)ammi जान आपके इन भरी गांड और हिलते दूध देख अगर लैंड आपके आशिक़ शमशेर का न खड़ा होगा तो किसका होगा

Hooriya:chup करो तेज़ बन रहे हो

shamshera:aaiye अम्मी जान बैठे

Hooriya:mujhe नहीं बैठना लुच्चे लफंगे क पास में दवा खिला दू फिर चली जाउंगी

भूरिया शमशेर का दवाई ले कर उसके पास जाती है और खिला देती है इस दरम्यान भूरिया को शमशेर खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था

Shamshera:ammi जान आप जाओ उस से पहले एक बात बता दू वो समां मुझे मिली थी और पूछ रही थी मई कब शादी करूंगा तो मैंने कह दया क में किसी से इश्क़ करता हु

भूरिया जो जाने वाली थी उसके आँख बड़े हो जाते है

Hooriya:kya बकवास कर रहे हो क्या कहा तुमने उसे

Shamshera:Mujhse नाम पूछने लगी

hooriya:firr तुमने क्या बताया ?

(भूरिया सामने सोफे पर हैरत से बैठते हुए अपने बेटे से पूछती है)

Shamshera:Wahi जो बताना चाहिए था मैंने कहा

"मेरे मेहबूब को जिस din,janab देखोगे,"

"होश उड़ जायेंगे जब बेनक़ाब देखोगे"

"नूर पर एक आफताब देखोगे"

"रात तो रात rahi,din में भी ख्वाब देखोगे"

Hooriya:Tum पागल हो गए हो शहज़ादे तुम्हारा इलाज करवाना होगा बताओ आखिर तुमने क्या बता दया समां को

Hooriya:man me)Benaqab मुझे देखने की ख्वाइश तुम्हारी कभी पूरी नहीं होगी छी कैसे सोचता है इतनी गन्दी बाटे

Shamshera:wahi जो हकीकत है

भूरिया उठ कर सोफे पर रखा तकिया उठती है और ज़ोर से शमशेर को दे मरती है

Shamshera:uff अम्मी ये क्या

Hooriya:tum सच में पागल हो मरना है तुमको शमशेर

Shamshera:aapke बिना जी भी तो नहीं पाउँगा मई

Hooriya:mazak मत करो क्या सच में तुमने वो सब बता दया समां को

भूरिया गुस्से से लाल हो रही थी

Shamshera:kal तक तो आप हे धमकी दे रही थी सुल्तान से बताने की आज आप चाहती हो में न बताऊ किसी को क में आप से इश्क़ करता हु आपके ख़ूबसूरती पर फ़िदा हु आप क जवानी का दीवाना hu..kahi इस दीवाने क प्यार में तो नहीं पद गयी मल्लिका इ जहाँ

Hooriya:bakwas बंद करो में जा रही हु

Shamshera:ammi जान मैंने कुछ नहीं बताया हमारे बारे में

भूरिया जा रही थी रुक जाती है

"मुआफ कीजिये शहज़ादे शमशेर हमारे बारे में नहीं आप क दिमाग क ख्याली पुलाव क बारे में और रही तुमसे प्यार की बात ख्वाबो में भी मत सोचना"

Shamshera:wo तो वक़्त बताएगा अम्मी जान

भूरिया तेज़ी से चलते हुए बहार जा रही थी और उसके मोठे मोठे गांड को देख शमशेर से रहा न जाता वो अपने आधे खड़े लैंड पर हाथ रख देता है वैसे हे भूरिया मुड़ती है और शमशेर कुर्सी पर बैठा अपना हाथ से लम्बे सख्त लौड़े को मसल रहा था कपडे क ऊपर से शमशेर क ायकः बड़े हो जाता है और वो ाड़करी करते हुए अपने जांघ पर खुजली करने लगता है

भूरिया वापस मुड़ती है और तेज़ी में बहार जाती है

hooriya:man me)Kamina कैसे उसे पकड़ कर सहला रहा है शर्म हाय नहीं

Shamshera:ammi जान इस लौड़े से मुँह फेर रही हु एक दिन इसे लौड़े क लये सजोगी सरोगी..

तो बे कॉन्टिनोएड
 
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