गारियों में कुछ वर्जना भी होती है जैसे इन्सेस्ट वाले रिश्ते भाई बहन के तो जोड़ के जरूर गारी गायी जाती है , यानी दूल्हे की बिना उसकी बहिन या माँ को जोड़े या समधन की गारी,दूल्हे के मामा को जोड़ के या दुल्हन के ससुर को जोड़ ,लेकिन कभी भी और मेरा मतलब किसी भी मौके पर,... पिता के साथ पुत्री को जोड़ के गाली नहीं दी जाती,...
और हर मौके पे , बच्चे के पैदा होने पे, सोहर में भी जच्चा, जो नवजात की माँ होती है उसके मायके में सोहर में, उसकी ननदों की हाल चाल अच्छे से ली जाती है,... ननद, देवर सास सब की खूब अच्छे से मायके के मर्दों से जोड़ के,
मेरी कहानी सोलहवां सावन की शुरुआत है ऐसे सोहर से होती है, हाईस्कूल में पढ़ने वाली ननद, भाभी के साथ भाभी के मायके आयी है साथ में उसका नवजात भतीजा, भाभी का छोटा सा मुन्ना, और कहानी की शुरुआत ही इस सोहर के साथ,
दिल खोल के मांगो ननदी जो मांगों सो दूंगी, ...
दिल खोल के मांगो ननदी जो मांगों सो दूंगी, ...
सैंया जिन मांगों ननदी, सैंया जिन मांगों ननदी,
सैयां जिन मांगो, ननदी, सैयां जिन मांगो, ननदी, सेज का सिंगार रे,
अरे, सैयां के बदले, अरे, सैयां के बदले, भैया दूंगी,...
कई सोहर उस कहानी के शुरू में ही हैं जिसमें ननद का रिश्ता भाभी के भाइयों से जोड़ा गया है , और एक चौपाया भी,... गारियो में गदहा, घोडा, कुत्ता सबका नाम आता है ,
Erotica - सोलवां सावन
सोलहवां सावन - भाभी के गाँव में एक किशोरी ननद , सावन का महीना ,... आगे हर फुहार तन मन सब भिगो देगी।
exforum.live
और सोहर के अलावा छोटे बच्चे को तेल लगाते समय चिढ़ाते समय , ननद, सास को जरूर घसीटा जाता है , सोलहवां सावन में वो भी
आटा पाटा दही क लाटा
मुन्ने की बुआ क लहंगा फाटा,
शादी में तो हर रस्म में,... मेरी एक कहानी जो बाद में शादी के लड्डू के नाम से कई फोरम में छपी उसमें तो करीब करीब हर रस्म के गाने लेकिन उसमें भी नन्दोई को जीजा को जरूर
अब ये सब रस्में, गाने जब गायब होते जा रहे हों तो मेरी कहानियां एक छोटी सी कोशिश हैं उन्हें याद करने की