Incest पहाडी मौसम - Page 2 - SexBaba
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Incest पहाडी मौसम

सोनू सूरज को अच्छी तरह से जानता था उसके व्यक्तित्व से भी अच्छी तरह से वाकिफ था,,, इसीलिए तो औरतों के प्रति उसकी शर्म को देखकर वह आने वाले समय के बारे में उसे आगाह कर रहा था,,,, लेकिन सोनू किस तरह की बातों को सुनकर सूरज के तन-बदन में बहुत ही उम्मादक हलचल होने लगी थी जिसके चलते उसका लंड खड़ा हो चुका था,,, और जिस तरह से उसने बयान किया था कि अगर किसी भी औरत ने उसे चोदने के लिए अपने साथ ले गई तो आखिर में क्या होगा,,, सोनू के मुंह से अपने लिए औरत के साथ की निष्फलता के बारे में सुनकर सूरज को गुस्सा तो आया था लेकिन उसके मुंह से सुनी हुई बात उसे बेहद उत्तेजित कर गई थी हालांकि वह इस तरह की बातों में बिल्कुल भी रुचि नहीं रखता था लेकिन सोनू उसका खास मित्र था,,, इसीलिए वह सोनू की बात को ध्यान से सुन भी रहा था और उसकी बातों का आनंद भी ले रहा था,,,,।

आखिरकार सूरज जब गुस्सा होकर वहां से जाने लगा तो सोनू तालाब के दूसरे छोर पर एक खूबसूरत औरत को घनी झाड़ियां की तरफ जाते हुए देख लिया था वह लपक कर सूरज का हाथ पकड़ लिया और उसे अपने साथ चलने के लिए कहा अब तक सूरज को नहीं मालूम था कि वह कहां ले चलने के लिए बोल रहा है लेकिन दोस्त होने के नाते वह उसके साथ चलने लगा,,, सोनू का यह नित्य कर्म था वह हमेशा औरतों की ताक झांक में लगा रहता था,,, कब कैसे औरत का कौन सा अंग उसे नजर आ जाए इसी में वह रुचि लिया करता था और इसीलिए घंटे कहीं भी बैठकर औरतों का इंतजार करता था खास करके इसी जगह पर जहां से औरतों का गुजरना होता था सोच के लिए,,, क्योंकि यही एक ऐसा पल होता है जब सोनू चोरी छुपे औरत के अंगों को अपनी आंखों से देख कर अपने हाथ से ही अपना लंड हिला कर अपनी गर्मी शांत करने की कोशिश करता था,,,, सही मायने में देखा जाए तो सोनू का चरित्र कुछ ठीक नहीं था और वह यह काम गांव के और भी दूसरे हमारा लड़कों के साथ मिलकर किया करता था लेकिन ज्यादातर उसे अकेले में ही मजा आता था लेकिन आज वह सूरज को भी इस काम में शामिल करने की सोच लिया था इसीलिए तो वह उसका हाथ पकड़ कर आगे आगे चलने लगा,,,।

देख आराम से चल बिल्कुल भी शोर मत करना और बात तो मुझे बिल्कुल भी मत करना जैसा मैं कह रहा हूं वैसा ही करना फिर देखना तुझे कैसा नजारा दिखाता हूं,,,,(सोनू इस तरह से सूरज का हाथ पकड़े आगे आगे धीरे-धीरे कदम रखते हुए बढ़ रहा था)

बता तो सही कहां लेकर चल रहा है,,,?

जहन्नुम में नहीं लेकर जा रहा हूं मैं तुझे स्वर्ग का आनंद लेने के लिए लिए जा रहा हूं देखना तुझे इतना मजा आएगा कि रोज मेरे साथ इस तरह से चला आएगा,,,।

तेरी बातें मुझे कुछ समझ में नहीं आती हमेशा उल्टा-सुलता काम करते रहता है,,,

उल्टा-सुलता काम करते रहता हूं तभी तो मजा लूट रहा हूं तेरी तरह होता तो पागल हो जाता,,,,

चल रहने दे मुझे इस तरह का काम नहीं करना है मैं अपने आप में ही खुश हूं,,,

तभी तो कहता हूं समय रहते कुछ सीख ले वरना शादी के बाद जो मैंने कहा हूं ना वैसा ही होगा लात मार के औरत चली जाएगी किसी दूसरे के पास फिर बजाते रहना गुनगुना,,,, अब कुछ बोलना नहीं,,,,।

(इतना कहने के साथ ही सोनू सूरज का हाथ पकड़ कर धीरे-धीरे कदम रखने लगा क्योंकि वह दोनों जहां से गुजर रहे थे वहां पर पेड़ की सूखी पत्तियां ढेर सारी बिजी हुई थी जिसकी वजह से उसे पर पैर रखने से उसमें आवाज उत्पन्न हो रही थी और ऐसा होने से दूसरी तरफ की औरत का ध्यान उन दोनों की तरफ जा सकता था और ऐसा होने नहीं देना चाहता था सोनू इसलिए बहुत ही संभलकर कदम रखने के लिए इशारे में ही सोनू ने सूरज को बोल दिया था,,,, अब तक सूरज को सोनू उसे कहां ले जा रहा है इस बारे में कोई खास खबर नहीं थी बस वह उसका हाथ पकड़े पीछे-पीछे चला जा रहा था,,,,और दूसरी तरफ वह औरत इस बात से बेखबर की उसके पीछे दो जवान लड़के चले आ रहे हैं वह अपनी ही धुन में झाड़ियों में चली जा रही थी,,,।

थोड़ी देर बाद वह औरत घनी झाड़ियों के बीच पहुंचकर वहां रुक गई,,,, और उसे इस तरह से रुकते देखकर सोनू भी खुद को और सूरज को घनी झाड़ियां के पीछे छुपा लिया था और उसे रोकने के लिए बोला था वह औरत गांव की ही थी लेकिन सूरज उसे पहचान नहीं पा रहा था लेकिन सोनू उसे अच्छी तरह से जानता था और वह जानता था कि इस समय वह औरत यहां पर जरूर आती है इसलिए वह यहीं पर हमेशा रुक कर उसका इंतजार किया करता था,,,,

यहां पर करना क्या है,,,?(सूरज आश्चर्य जताते हुए बोला)

सईईईईई,,,(उंगली को अपने होंठ पर रखकर उसे शांत रहने का इशारा करते हुए सोनू धीरे से बोला,,,) तुझे करना कुछ नहीं है बस देखना है इसलिए कुछ बोल मत ,,,,(सोनू का इशारा पाकर सूरज की एकदम खामोश हो गया वह भी उसे औरत की तरफ देखने लगा लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यहां होने क्या वाला है इसलिए धीरे से बोला)

अरे इतना तो बता उस औरत के पीछे क्यों मुझे लेकर आया है,,,,

तू सवाल बहुत पुछता है तुझे कह रहा हूं सिर्फ देखने के लिए थोड़ी देर में तुझे सब पता चल जाएगा कि मैं तुझे यहां किस लिए लेकर आया हूं,,,,।

(सोनू कि ईस तरह की बात सुनकर सूरज फिर से खामोश हो गया और वह भी झाड़ियों के पीछे छुपकर उसे औरत की तरफ देखने लगा क्योंकि उन दोनों की तरफ पीठ करके खड़ी थी,,,, उसका चेहरा नहीं दिख रहा है था इसलिए सूरज उसे पहचान नहीं पा रहा था,,,,,, सोनू के साथ-साथ सूरज का दील भी जोरों से धड़क रहा था सोनू का दिल तो उत्तेजना के मारे धड़क रहा था क्योंकि वह जानता था कि कुछ भी देर में क्या होने वाला है लेकिन सूरज का दिल थोड़ी घबराहट की वजह से धड़क रहा था क्योंकि उसे नहीं मालूम था कि यहां वह क्या कर रहा है और वह भी एक औरत को चोरी चुपके देख कर होने क्या वाला है,,,,।

सोनू और सूरज दोनों झाड़ियों के पीछे छुप कर उसे औरत की क्रियाकलाप को देख रहे थे,,, और वह औरत घनी झाड़ियां के बीच खड़ी होकर इधर-उधर देख रही थी अब तक सूरज ने उसे औरत का चेहरा नहीं देख पाया था इसलिए वह नहीं जानता था कि वह औरत कौन है लेकिन इतना तो जानता ही था कि जो कोई भी है उसके गांव की ही है,,,, कुछ देर तक वह औरत इधर-उधर चारों तरफ नजर घुमा कर पूरी तसल्ली कर लेने के बाद अपने दोनों हाथों को अपनी जांघों तक की साड़ी को हल्के से पकड़ ली,,, और यह देखकर सोनू का दिल जोरो से धड़कने लगा और जिस तरह से वह औरत ने अपने दोनों हाथ को दोनों तरफ करके साड़ी को पकड़ कर रखी थी थोड़ा-थोड़ा सूरज को भी अंदाजा होने लगा कि वह औरत क्या करने वाली है इसलिए उसका भी दिल बड़े जोरों से धड़कने लगा,,,, और उन दोनों की आंखों के सामने वह औरत धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगी और इस बीच वह चारों तरफ नजर घुमा कर देख भी ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन वह कहां जानती थी कि ठीक उसके पीछे घनी झाड़ियों में दो जवान लड़के उसकी हर एक हरकत पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं,,,, उस औरत को धीरे-धीरे साड़ी को ऊपर की तरफ उठता देख कर सोनू एकदम से खुश होता हुआ बोला,,,।

अब आएगा असली मजा अब देखना सूरज तू पागल हो जाएगा इस नजारे को देखकर,,,,

तेरी बातें मुझे कुछ समझ में नहीं आ रही है,,,

सब कुछ समझ में आ जाएगा ,,, बस तू देखता जा,,,।

(अब सूरज का भी दिल बड़े जोरों से धड़कने लगा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने वह औरत अपनी साड़ी को घुटनों तक उठा दी थी इतना तो वह समझ ही गया था कि वह औरत क्या करने वाली है आज तक सूरज में औरत के इस क्रियाकलाप को अपनी आंखों से कभी नहीं देखा था,,,, और ना ही इस तरह के नजारे को देखने की कभी उसने कोशिश भी किया था और ना ही कभी उत्सुक था लेकिन आज जो कुछ भी हो रहा था उसके साथ पहली बार हो रहा था इसलिए उसके मन में अजीब सी बेचैनी हो रही थी देखते ही देखते वह औरत अपनी साड़ी को मोटी मोटी जांघों तक उठा दी थी,,, घुटनों तक तो ठीक था उसे औरत की मोटी मोटी चिकनी गोरी जांघों को देखकर सूरज के बदले में उत्तेजना का असर होने लगा उसकी दोनों टांगों के बीच लटक रहे हथियार में अजीब सी हलचल होने लगी क्योंकि आज तक उसने औरत का यह रूप नहीं देखा था आज उसकी मोती मोती जांघों को देखकर उसकी आंखें चमक रही थी सोनू के लिए तो यह रोज का था ,, ।)

यार सूरज यह औरत क्या करने जा रही है,,,(सूरज उत्सुकता दिखाते हुए बोला)

अबे साले अगर मैं सब कुछ बता दूंगा तो देखने में मजा नहीं आएगा इसलिए तो सिर्फ अपनी आंखों से देखता रहे,,,,।

(सोनू का जवाब सुनकर सूरज फिर खामोश हो गया और अपनी नजरों को उसे औरत की क्रियाकलाप पर एकदम से गड़ा दिया हालांकि सूरज को इस तरह का नजारा देखने की रुचि तो बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन बढ़ती उम्र के साथ-साथ उसके बदन में इस तरह के नजारे को देखकर अजीब सी हरकत हो रही थी क्योंकि वह भी पूरी तरह से जवान हो चुका था औरत का हल्का सा नंगा बदन देखकर भी कोई भी जवान लड़के का लंड खड़ा हो जाता है,,, और इस प्राकृतिक असर से सूरज भी बाकात नहीं था,,,, झाड़ियां के बीज खड़ी उसे औरत को तो अंदाजा भी नहीं था कि उसके क्रियाकलाप को दो जवान लड़के अपनी आंखों से देख कर उत्तेजित हो रहे हैं वह तो अपने ही धुन में थी उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी लेकिन वह चारों तरफ नजर घूमा कर पूरी तरह से तसल्ली कर लेने के बाद ही बैठना चाहती थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि कोई उसे इस हालत में देखें वैसे भी गांव की औरतों में शर्म हया कुछ ज्यादा ही कूट-कूट कर भरी होती है,,,,।

अभी तक उसे औरत की साड़ी केवल मोंटी मोटी जांघों तक पहुंची थी और वह चारों तरफ नजर घूमा कर आखिरी बार तसल्ली कर लेना चाहती थी,,, और जब उसे इस बात की तसल्ली हो गई की कोई उसे देख नहीं रहा है तो वह धीरे से अपनी साड़ी का आखिरी पर्दा उठाते हुए उसे कमर तक ले गई और कमर तक साड़ी ले जाने के बाद जो नजर सूरज की आंखों के सामने नजर आया उसे देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई वह कभी सोच नहीं सकता था कि वह इस तरह के नजारे को कभी अपनी खुली आंखों से देख पाएगा,,,,।

आश्चर्य से सूरज का मुंह खुला का खुला रह गया था और आंखें फटी की फटी रह गई थी आज पहली बार सूरज अपनी आंखों के सामने किसी औरत की नंगी गांड को देख रहा था और वह भी बहुत खूबसूरत गोरी गोरी गोल गोल तरबूज की तरह अब तक भले ही साड़ी के ऊपर से सूरज ने इस बात का एहसास किया था औरतों के नितंबों के बारे में लेकिन आज पहली बार अपनी आंखों से एक नंगी गांड के दर्शन कर रहा था और पहली बार उसके भूगोल के बारे में अवगत हुआ था इसीलिए वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था उसे औरत की नंगी गांड देखकर उसकी आंखों में चमक नजर आ रही थी गांड की दोनों आंखों के बीच की पतली दरार उसे किसी पहाड़ों के बीच गिरने वाले झरने से काम नहीं लग रही थी,,,, सूरज से कुछ बोला नहीं जा रहा था वह बस फटी आंखों से अपनी आंखों के सामने के नजारे को देख रहा था,,, पहली बार वह किसी औरत के अंग से रूबरू हो रहा था और वह भी औरत की खूबसूरती में चार चांद लगाते उसके गोल-गोल नितंबों से,,,,, सूरज कुछ बोलना नहीं चाह रहा था लेकिन अनजाने में ही उसके मुंह से निकला,,,

बाप रे,,,,,(इतना कह कर वह खामोश हो गया लेकिन उसकी यह बात सुनकर सोनू उसकी तरफ देखता हुआ बोला,,,)

हो गया ना पागल मैं कह रहा था ना तुझे स्वर्ग का नजारा दिखाऊंगा,,,, पहली बार देख रहा है ना यह सब,,,,

सच में पहली बार देख रहा हूं,,,,।

(सूरज के तो पलक नहीं झक रही थी वह एक तक उसे नजारे को देख रहा था सामने खड़ी औरत अपनी नंगी गांड पर दोनों हथेली रखकर हल्के से खुजलाने लगी यह देखकर सूरज के तन बदन में अजीब सी लहर उठने लगी उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका है जिसे वह पजामे के ऊपर से टटोल कर कर देख रहा था,,, और पहली बार उसे अपने लंड को पजामे के ऊपर से पकड़ने में भी अच्छा लगा,,,, उसे औरत का अपनी नंगी गांड दिखाने का प्रदर्शन केवल कुछ क्षण का ही था लेकिन इतने में ही सूरज पूरी तरह से दीवाना हो गया था वह पागल हो गया था औरत की पहली बार नंगी कहां देख कर उसे इस बात का एहसास हुआ था कि औरत वाकई में अंदर से कितनी खूबसूरत होती है और वह औरत जल्दी से बैठ गई थी पेशाब करने के लिए,,,, हालांकि बैठने के बाद उसकी नंगी गोरी की कहां कुछ खास नजर नहीं आ रही थी लेकिन तभी सूरज ने एक मधुर कहानी पर गौर किया जो उसके कानों तक बड़े आराम से पहुंच रही थी उसे आवाज को सुनकर धीरे से सूरज ने सोनू से बोला,,,)

यार यह आवाज कैसी है,,,!(सूरज के सवाल में भोलापन था सोनू इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि सूरज को इस आवाज के बारे में भी ज्यादा कुछ खबर नहीं होगी इसलिए वह मुस्कुराता हुआ बोला,,,)

तुझे नहीं पता वह औरत पेशाब कर रही है और उसकी बुर से पेशाब की धार बाहर निकल रही है जिसकी वजह से उसकी बुर से सिटी की आवाज आ रही है,,,,।

(औरत के इस सहज क्रिया के बारे में सुनना और देखना सूरज के लिए बिल्कुल नया था इसलिए उसके बदन में एक अजीब सी लहर उठ रही थी पहली बार उसे इस बात का ज्ञान हो रहा था कि औरत जब पेशाब करती है थी उसकी बुर से इस तरह की सिटी की आवाज आती है हालांकि अभी तक सूरज ने औरत की बुर के दर्शन नहीं किए थे वैसे तो गांड के दर्शन भी नहीं किए थे लेकिन आज सोनू की मेहरबानी सेवा औरत की नंगी गांड के दर्शन कर चुका था और इसे देखकर वह पागल हो चुका था तो बुर देखने के बाद उसकी क्या हालत होती इस बारे में सोच कर ही उसका पसीना छूट रहा था,,,)

बाप रे मैं तो यह सब जानता ही नहीं था,,,,

इसीलिए तो कहता हूं कुछ सीख ले इसलिए तुझे जबरदस्ती यहां लेकर आया हूं ताकि मेरा नाम मिट्टी में ना मिला दे कि सोनू का दोस्त होने पर भी उसे कुछ नहीं मालूम था,,,,।

(उसे औरत की बुर से निकल रही सिटी की आवाज अभी तक दोनों के कानों में गूंज रही थी,,,,,, तभी सूरज के कानों में कुछ और आवाज आने लगी वह सोनू की तरफ देखा तो हक्का-बक्का रह गया उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि सोनू इस तरह की हरकत करेगा वहां सोनू की दोनों टांगों के बीच देखा तो उसकी हालत खराब हो गई सोनू बैठे-बैठे ही अपने लंड को पजामे से बाहर निकाल कर उसे हिलाना शुरू कर दिया था,,,, सोनू की यह हरकत उसकी है क्रियाकलाप सूरज के तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर गई वह पागलों की तरह कभी झाड़ियां की तरफ देखा तो कभी सोनू की तरफ देखा सोनू अपने खड़े लंड को जोर-जोर से हिला रहा था और ऐसा लग रहा था कि जैसे बुरे से निकलने वाली सिटी की आवाज में पूरी तरह से मदहोश हो चुका है,,,, सूरज से रहा नहीं गया और वह बोला,,,/)

यह क्या कर रहा है सूरज,,,,

मजा ले रहा हूं मेरे दोस्त,,,,(इतना कहते हुए सोनू जोर-जोर से अपने लंड को मुठिया रहा था और तभी वह औरत पेशाब करने के बाद तुरंत खड़ी हो गई और खड़ी होने के बाद भी सूरज उसकी नंगी को देखकर पागल हो गया और वह पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को दबा दिया,,,, पेशाब करने के बाद वह औरत हल्के से अपनी दोनों टांगों को खोलकर अपनी पेटीकोट से ही अपनी बुर वाली दरार को साफ करने लगी हालांकि इतनी दूर से सूरज को उसे औरत की बुरे तो नजर नहीं आ रही थी बस हल्की-हल्की गुलाबी रंग का हल्का सा हुआ हिस्सा नजर आ रहा था जो की गांड के गोरे रंग से हल्का दबा हुआ था,,,,, सूरज इस नजारे का और ज्यादा आनंद ले पाता इससे पहले ही उसे औरत ने अपनी साड़ी को कमर से नीचे गिरा दी और एक खूबसूरत उन मादक दृश्य पर पर्दा गिर गयाऔर तभी वह देखा कि सोनू के लंड से तेज पिचकारी निकाली और वह जोर-जोर से अपने लगा हालांकि एक जवान लड़का होने के बावजूद भी सूरज को इस बात का ज्ञान नहीं था कि और दो के लंड से यह क्या निकलता है,,,,, और वह औरत पेशाब करने के बाद वापस होने लगी तो उसका चेहरा देखकर सूरज को एकदम झटका सा लगा और वह बोला,,,)

बाप रे यह तो तेरी चाची है,,,,

जानता हूं,,,,(गहरी सांस लेते हुए सोनू अपने लंड को वापस पजामे में डाल दिया,,, सोनू की बात सुनकर सूरज एकदम आश्चर्यचकित हो गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि अपनी ही चाची को किस तरह से चोरी छिपे देखकर इस तरह की गंदी हरकत सोनू करता है,,, )

यह तो मेरे रोज का है कोई अनजाने में मैं उसे औरत के पीछे-पीछे थोड़ी आया था मैं जानता था कि वह मेरी चाची है लेकिन देखा नहीं कितनी खूबसूरत गांड है मेरी चाची की एक बार चोदने को मिल जाए तो मजा आ जाए,,,,।

(सोनू किस तरह की बातों को सुनकर सूरज एकदम हैरान था वह नजर उठा कर उस औरत की तरफ देखा तो वह दूसरी तरफ से जा चुकी थी और वह एकदम हैरान होते हुए बोला,,,)

सोनू तुझे शर्म नहीं आती अपनी चाची के बारे में इस तरह की बात करते हुए,,,,

तभी तो मैं कहता हूं सूरज तू एकदम पागल है,,,, इसमें क्या हो गया अगर अपनी चाची को देखता हूं तो तू नहीं जानता मैं अपनी चाची को चुदवाते हुए भी देख चुका हूं तभी से मेरा मन चाची को चोदने को करता है,,,,

लेकिन सोनू वह तेरे घर की है,,,

अरे पागल घर की औरतों को इस तरह से देखने में जो सुख मिलता है वह सुख कहीं नहीं मिलता कसम से मैं तो दिन रात चाची को चोदने की फिराक में रहता हूं लेकिन मेरे हाथ नहीं लगती इतना जबरदस्ती दोनों टांगें खोलकर चुदवाती है कि पूछो मत,,,, मैं चाहता हूं तुझे यह सब सुनकर थोड़ा अजीब लग रहा है लेकिन मेरी तरह अगर तू भी अपने घर पर ध्यान देने लगेगा ना तुझे भी सब कुछ अच्छा लगने लगेगा,,,

अपनी मां को भी इसी तरह से देखता है,,,,

एक बार अनजाने में देख लिया था ,,, रात को पेशाब करने के लिए उठा तो मां के कमरे से कुछ अजीब सी आवाज आ रही थी मैं खिड़की से अंदर देखा तो देख कर दंग रह गया,,,

क्या देखा,,,?

मैंने देखा कि पिताजी खटिया पर एकदम नंगे लेते हैं और अपने लंड को हिला रहे हैं और मां धीरे-धीरे अपने कपड़े उतार कर नंगी हो रही है और थोड़ी देर में मेरी मां पूरी तरह से नंगी भी हो गई लेकिन वह खटिया पर मेरे पिताजी के पास जाती उससे पहले भी लालटेन बुझा दी,,,,,(इतना कहकर सोनू हंसने लगा और उसे आश्चर्य से देखकर सूरज बोला,,,)

पक्का मादरचोद है तू,,,,

मेरे साथ रहेगा तो तू भी बन जाएगा,,,, चल अब यहां रुकने से कोई फायदा नहीं है,,,।
 
, सोनू ने जो कुछ भी सूरज को दिखाया था उसे देखकर सूरज के मन में हलचल सी मचने लगी थी सूरज ने आज तक इस तरह के दृश्य को कभी अपनी आंखों से देखा नहीं था और ना ही कभी देखने की कोशिश किया था क्योंकि उसे इन सब से कोई वास्ता नहीं था वह अपने आप को ही सब चीजों से दूर ही रखना चाहता था लेकिन सोनु उसका बहुत ही खास मित्र था जिसके कहने पर वह उसके पीछे-पीछे चल दिया था,,,,,, और जब वह झाड़ियों के पीछे लेकर गया और वहां से जो नजर उसने दिखाया उसे देखकर तो सूरज के होश उड़ गए थे सोनू ने उसे एक खूबसूरत औरत की बड़ी-बड़ी गांड के दर्शन कराए थे और वह औरत कोई और नहीं बल्कि उसकी चाची ही थी यह जानकर तो सूरज और ज्यादा हैरान हो गया,,,।

सूरज कभी सोचा नहीं था कि वह इस तरह से किसी औरत को नंगी देखेगा और वह भी चोरी छुपे जहां एक तरफ उसके बदन में इस तरह के नजारे को देखकर सिरहन से दौड़ रही थी वहीं दूसरी तरफ,,, उसे इस बात का डर भी था कि कहीं कोई उसे देख ना ले,,,,, कुछ देर के लिए एक औरत की नंगी गांड को देखकर और खास करके उसे पेशाब करती हुई देखकर सूरज का भी लंड खड़ा हो गया था,,, लेकिन आज तक उसने अपने लंड को मुठिया कर अपनी गर्म जवानी का रस बाहर नहीं निकला था लेकिन इसके विपरीत सोनू उसकी आंखों के सामने ही अपनी चाची की नंगी गांड देखकर अपना लंड हिला कर अपना पानी निकाल दिया था यह सब सूरज के लिए बिल्कुल नया था,,, और तो और सूरज के लिए यह भी हैरान कर देने वाला था कि वह खुद अपनी मां की चुदाई देख चुका था अपने पिताजी के साथ जो कि इस बारे में कभी सूरज सपने भी सोच नहीं सकता था लेकिन सोनू बेझिझक बेशर्मी की सारी हद पार करते हुए उसे सब कुछ बता दिया था,,,।

वहां से तो सूरज अपने घर पर आ चुका था लेकिन सोनू ने जो कुछ दिखाया था जो कुछ बताया था वह उसके दिमाग में एकदम घर कर गया था और से इस बात का भी एहसास हो गया था कि औरत को नंगी अवस्था देखने में कितना मजा आता है यह उसका पहला अनुभव था और पहला अनुभव में वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था,,,, इसके बाद से वह कभी कभार अपनी मां को देखने की कोशिश करता था लेकिन कभी उसे ऐसा मौका नहीं मिला जब वह अपनी मां को नग्न अवस्था में या अर्ध नग्न अवस्था में देख सके,,, हालांकि अब उसे अपनी मां की खूबसूरत बदन के अंगों का उभार समझ में आने लगा था अपनी मां की कमर पर कई हुई साड़ी के अंदर नितंबों की गोलाई का आभास उसे होने लगा था लेकिन जल्द ही वह अपने मां पर काबू कर लिया था क्योंकि वह जानता था जो कुछ भी वह कर रहा है वह गलत है इसलिए अपना मन वहां किसी और चीज में लगाकर अपने मन से इन सब बातों को निकालने की कोशिश करता था और लगभग लगभग वह इन सब बातों से आजाद भी हो चुका था,,,,।

ऐसे ही एक दिन वहां खेतों की तरफ जा रहा था तो एक तरफ मुखिया के खेतों में काम चल रहा था वही बड़े से पेड़ के नीचे मुखिया की बीवी बैठी हुई थी,,, वैसे तो सूरज मुखिया की बीवी को ठीक से जानता नहीं था बस एक दो बार ही मुलाकात हुई थी और इतना ही जानता था कि वह मुखिया की बीवी है और एक दिन रात को भी उसकी मुलाकात खेतों पर हुई थी जब वह अपने पिताजी को ढूंढते हुए खेत पर चला गया था और गन्ने के खेत में उसके पिताजी और मुखिया की बीवी कम कर रहे थे लेकिन सूरज को इस बात का जरा भी भनक तक नहीं लगा था कि गन्ने के खेत में रात के समय उसके पिताजी एक खूबसूरत औरत के साथ क्या कर रहे हैं बात आई गई हो गई थी लेकिन यहां पर अपने रास्ते से गुजरते हुए वह मुखिया की बीवी को देखकर आदर पूर्वक नमस्कार किया उसके इस व्यवहार से मुखिया की बीवी भी खुश हुई,,, और वह मुस्कुराते हुए बोली,,,।

खुश रहो यहां कहां जा रहे हो,,,

कहीं नहीं बस ऐसे ही घूमने के लिए निकल गया था,,,

तुम तो भोले के लड़के हो ना उस दिन रात को जो खेत पर मिले थे,,,,( रात को खेत पर मिलने का जिक्र करते हुए मुखिया की बीवी इधर-उधर देखकर बोल रही थी कि कहीं कोई सुन तो नहीं रहा है लेकिन उसकी इस सतर्कता को सूरज समझ नहीं पाया था और मुस्कुराते हुए बोला,,,)

हां वह मेरे पिताजी है,,,,

बहुत मेहनती है तुम्हारे पिताजी,,,, तभी तो खेतों की जिम्मेदारी मैं तुम्हारे पिताजी को शौप दी हूं,,,।

(जवाब में सूरज कुछ बोला नहीं बस खामोश खड़ा रहा सूरज के चेहरे पर बहुत ज्यादा ही भोलापन था जो की पहली मुलाकात में ही मुखिया की बीवी उससे काफी आकर्षित हुई थी क्योंकि का बदन काफी गठीला और हट्टा कट्टा था,,,, मुखिया की बीवी की नजर में सूरज को देखकर वासना साफ नजर आ रही थी लेकिन औरतों की नियत और नजरियों को पहचानने की क्षमता सूरज में बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए मुखिया की बीवी के नजर को पहचान नहीं पा रहा था,,,, कुछ देर खामोश रहने के बाद सूरज बोला,,)

ठीक है मालकिन में अब चलता हूं,,,,

अरे कहां जा रहे हो,,,(मुखिया की बीवी इतना कहते हुए एक बार फिर से चारों तरफ नजर घूमर देखने लगी लेकिन कोई भी उसकी तरफ नहीं देख रहा था सारे मजदूर खेतों का काम कर रहे थे वह केवल अकेले ही सूरज के साथ बड़े से पेड़ के नीचे बैठी हुई थी)

कहीं नहीं बस ऐसे ही घूमते रहूंगा,,,,

कोई काम नहीं है तो यह बाल्टी और लोटा लेकर मेरे साथ चलो,,,, मै ईसे उठा नहीं पा रही हुं क्योंकि मेरी कलाई मैं थोड़ा दर्द है,,,।

(सूरज को भला इसमें क्या दिक्कत हो सकती थी इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोला)

ठीक है मालकिन,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज बाल्टी को उठा लिया जिसमें थोड़ा पानी भरा हुआ था और लोटा भी उसमें था जिसे मुखिया की बीवी पास में रखी हुई थी पानी पीने के लिए लेकिन अब उसके मन में कुछ और चल रहा था,,, और सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) लेकिन चलना कहां है,,?

चल मैं बताती हूं,,,(इतना कहने के साथ ही मुखिया की बीवी अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और एक बार फिर से अपने चारों तरफ देखकर पास की ही छोटी सी पगडंडी के ऊपर चलने लगी जिसके दोनों तरफ खेत थे,,,, और उसके पीछे-पीछे सूरज चलने लगा,,,, मुखिया की बीवी खेली खाई थी उसे मर्दों को अपनी तरफ आकर्षित करने का हुनर अच्छी तरह से मालूम था और इस समय वह इस अपने अनोखे हुनर को सूरज के ऊपर आजमाना चाहती थी इसलिए चलते समय उसकी चाल में एक मादकता भरने लगी थी उसकी चाल में एक लक थी वह इस तरह से अपने पैर को ऊंचे नीचे पगडंडियों पर रखती की उसके नितंबों का उभार कुछ ज्यादा ही बाहर की तरफ निकल जाता था और ना चाहते हुए भी सूरज का ध्यान उसकी कमर के नीचे मटके जैसे नितंबों पर पड़ ही जाती थी जिस पर से वह अपना ध्यान बड़ी मुश्किल से हटाया था लेकिन आज मुखिया की बीवी एक बार फिर से उसके ध्यान को उसकी तपस्या को भंग करने में लगी हुई थी,,, मुखिया की बीवी अच्छी तरह से जानती थी कि वह जिस तरह से चल रही है पीछे चल रहे किसी भी मर्द का ध्यान उसकी गांड पर जरुर पड़ेगा और दुनिया में कोई ऐसा मर्द नहीं है जब औरत की मदमस्त कर देने वाली चाल और उसकी बड़ी-बड़ी गांड को देखकर आकर्षित न हो और जिसमें सूरज भी अछूता नहीं था सूरज भी बार-बार अपनी नजर को इधर-उधर घूमाकर अपना ध्यान हटाने की कोशिश करने के बावजूद भी उसकी नजर बार-बार मुखिया की बीवी की बड़ी-बड़ी गांड पर चली ही जा रही थी और वैसे भी वह अपनी कमर पर साड़ी को कुछ ज्यादा ही कस के बाद ही हुई थी जिसकी वजह से नितंबों का उभार एकदम साफ झलक रहा था,,,, जो कि साड़ी के अंदर होने के बावजूद भी नितंबों का कटाव एकदम साफ झलक रहा था जो की सूरज की आंखों में आकर्षण के साथ-साथ मादकता भी भर रहा था,,,,।

कुछ देर तक दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी कुछ दूरी पर जाने के बाद खेतों के बीच बड़ी-बड़ी झाड़ियां और लहराने खेत की वजह से पगडंडी ढकने लगी थी,,,, और जिस जगह से दोनों गुजर रहे थे दूर-दूर तक किसी को दिखाई भी नहीं दे रहा था और ऐसे में मुखिया की बीवी अपनी चाल को आजमाने की कोशिश करने लगी और मौका देखकर फिसलने का नाटक की और पीछे की तरफ गिरने को हुई ठीक उसके पीछे चल रहा सूरज मुखिया की बीवी के पैर फिसलते हुए देखकर उसे गिरता हुआ देखकर एकदम से बाल्टी को वहीं पर छोड़ दिया और पीछे से उसे लपक लिया लेकिन लपकने की वजह से उसके दोनों हाथ उसे संभालने की कोशिश करते-करते उसके दोनों चूचियों पर आकर जम गए और वह मुखिया की बीवी को संभालने में अनजाने में ही अपनी हथेलियां का दबाव मुखिया की बीवी की चूचियों पर बढ़ा दिया और ऐसे में अनजाने में ही उसके हाथ बटेर लग गए थे,,,, अनजाने में ही वहां मुखिया की बीवी की चूची को दबा दिया था जिसका एहसास उसे तब हुआ जब वहां मुखिया की बीवी के साथ-साथ खुद नीचे जमीन पर बैठ गया था और मुखिया की बीवी उसकी गोद में आ गई थी और ऐसे हालात में जब उसने अपने हाथों की स्थिति पर गौर किया तो एकदम से हैरान रह गया,,,,। उसकी दोनों हथेली ब्लाउज के ऊपर से ही मुखिया की बीवी की चूची पर एकदम दबाव बनाए हुए थे और तब जाकर सूरज किस बात का एहसास हुआ की कठोर दिखने वाली चूंचियां अंदर से वाकई में कितनी रुई की तरह नरम-नरम होती है,,,,। पल भर में ही सूरज उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो चुका था उसका लंड एकदम से खड़ा हो चुका था जो की खड़ा होने के साथ ही वह मुखिया की बीवी की पीठ पर गड़ने भी लगा था,,, और जिसकी चुभन मुखिया की बीवी को अपनी पीठ पर बराबर हो रही थी,,,, खेली खाई मुखिया की बीवी को समझते देर नहीं लगी कि उसकी पीठ पर कौन सी चीज चुभ रही है वह एकदम से उत्साहित हो गई,,,,, वह पीठ पर चुभन से ही अंदाजा लगा ली थी कि सूरज का लंड कितना दमदार है,,,, उसका मन उसे पकड़ने को हो रहा था,,, जिसके लिए वह जुगाड़ बना रही थी और वह अपना हाथ पीछे लाने की जैसे ही सोची सूरज अपने आप को संभालते हुए मुखिया की बीवी को सहारा देकर उठाने लगा लेकिन सहारा देने से पहले,,, मुखिया की बीवी की चूची को दबाने की लालच को हो वह अपने अंदर दबा नहीं पाया और उसे संभाल कर उठाते हुए वहां उसकी बड़ी-बड़ी चूची पर अपनी हथेली का दबाव बढ़ाकर उसकी चूची दबाने का सुख प्राप्त कर लिया,,, और उसकी इस हरकत का एहसास मुखिया की बीवी को अच्छी तरह से हो गया और वह मन ही मन मुस्कुराने लगी,,,, सूरज मुखिया की बीवी को सहारा देकर खड़ी करते हुए बोला,,,।

अच्छा हुआ मालकिन मैं तुम्हारे पीछे था वरना तुम गिर जाती और चोट लग जाती,,, थोड़ा आराम से चला करो,,,

संभाल कर ही चल रही थी अचानक पैर फिसल गया और सच में अच्छा हुआ कि तू मेरे पीछे था वरना वाकई में मुझे चोट लग जाती,,,,,(इतना कहने के साथ ही मुखिया की बीवी चलने लगी और पीछे सूरज वापस बाल्टी को हाथ में लेकर पीछे-पीछे चलने लगा,,, लेकिन अचानक जो कुछ भी हुआ था वह सब उसके बदन में जवानी की गर्मी पैदा कर दिया था मुखिया की बीवी की चुचियों की नरमाहट उसके नरम अंग को कड़क कर दिया था,,,,,,, और ऐसा भी पहली बार हुआ था कि जब वह किसी खूबसूरत औरत को अपनी बाहों में लिया था भले ही उसे गिरने से बचाने के लिए और उसे सहारा देकर उठाने के लिए लेकिन फिर भी इससे वह मुंह नहीं मोड सकता था कि एक खूबसूरत जवान औरत उसकी बाहों में थी,,,, नितंबों का घेराव वह अपने लंड पर बड़े अच्छे से महसूस कर पाया था,,,,।

वह ज्यादा कुछ सोच पाता इससे पहले ही वहां घने खेतों के बीच हेड पंप के करीब पहुंच चुका था और उसके पास में ही एक घास की बनी हुई झोपड़ी भी थी,,,,,, हेड पंप के पास पहुंचकर सूरज को इतना तो अंदाजा लग गया था की मुखिया की बीवी यहां क्या करने आई है लेकिन फिर भी वह पूछ बैठा,,,।

यहां क्या करने के लिए आई हो मालकिन,,,,

अरे बेवकूफ इतना भी नहीं समझता नहाने के लिए आई हूं और क्या,,,,!

लेकिन नहाने के लिए तो मुझे क्यों लेकर आई,,,,

नल चलाने के लिए तुझे बोली तो थी कि मेरी कलाई में थोड़ा दर्द है ना तुम्हें बाल्टी उठा सकती हूं ना ही हैंडपंप चला सकती हूं,,,,(मुखिया की बीवी सूरज की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली,,,,)

ठीक है मालकिन कोई बात नहीं,,,,

(सूरज की बात सुनकर मुखिया की बीवी मुस्कुराते हुए एक तक सूरज के खूबसूरत चेहरे की तरफ देखे जा रही थी और अपने मन में सोच रही थी कि इसकी जगह गांव का कोई दूसरा जवान लड़का होता तो शायद उसके यहां लाने के मतलब को और उसके रास्ते में गिर जाने के मतलब को अच्छी तरह से समझ जाता और उसे पल का वह भरपूर फायदा उठा लेता,,,, वैसे तो सूरज ने भी हल्का सा फायदा उठाने की कोशिश किया था लेकिन इतना तो उसे समझ में आ ही गया था कि सूरज अभी इस खेल में पूरी तरह से नादान है उसे इस तरह से मुस्कुराता हुआ देखकर सूरज बोला,,,,)

ऐसे क्यों मुस्कुरा रही हो मालकिन,,,

मैं इसलिए मुस्कुरा रही हूं कि तू बहुत भोला है,,,, जहां एक तरफ तेरा बाप इतना चालाक और इस मामले में इतना ज्यादा अनुभव वाला है वही तो एकदम नादान है,,,

किस मामले में मालकिन,,,(सूरज आश्चर्य जताते हुए बोला)

कुछ नहीं धीरे-धीरे तुझे सब मालूम पड़ जाएगा,,, अब जल्दी से नल चला,,,,, मुझे नहाना है,,,,,।

(इतना सुनते ही,,, सूरज बाल्टी को हेड पंप के नीचे रखकर चलाना शुरु कर दिया और मुखिया की बीवी इधर-उधर नजर घूमर कुछ देख रही थी या तो फिर कुछ ढूंढ रही थी इसलिए सूरज बोला,,,)

क्या हुआ,,,?

अरे मैं तो अपने कपड़े लाना ही भूल गई,,,

ओहहहह अब क्या करोगी मालकिन रहने दो बाद में नहा लेना,,,,

नहीं नहीं मुझे बहुत गर्मी लग रही है और इतनी दूर आई हुं तो नहा कर ही जाऊंगी,,,,, मैं अपने कपड़े उतार कर रख देती हुं बाद में उसे पहन लूंगी,,,,

(इतना सुनते ही सूरज का दिल जोरो से धड़कने लगा उसके कहने का मतलब साफ था और सूरज की आंखों के सामने अपने कपड़े उतारना चाहती थी और इसीलिए सूरज के बदन में अजीब सी सुरसुराहट होने लगी थी वह भी अपने मन में यही सब सो रहा था की मुखिया की बीवी तुरंत अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी यह देखकर सूरज एकदम से शक पका गया और बोला,,,,)

ममममम, मालकिन मेरे सामने,,,,

तो क्या हुआ तू तो मेरे बेटे जैसा है लेकिन मेरी तरफ देखना नहीं,,,,,(मुखिया की बीवी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि दुनिया में ऐसा भला कौन सा मर्द होगा जो आंखों के सामने इतना खूबसूरत दृश्य दिखाई दे रहा हो और वह अपनी नजरों को घूमा कर कहीं और देख रहा हो,,,, मुखिया की बीवी की बात सुनते ही वह अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा दिया,,,, उसकी हरकत को देखकर मुखिया की बीवी मन ही मन में मुस्कुराने लगी और अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी वह अपनी जवानी को सूरज को दिखाना चाहती थी और देखते ही देखते वह अपने ब्लाउज के सारे बटन खोलकर अपने ब्लाउज के दोनों पल्लू को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे उतारने की स्थिति में सूरज से बोली,,,,)

अब नल तो चला,,,,(और इतना सुनते ही सूरज नजर घुमा कर हेंड पंप की तरफ देखने की कोशिश करने लगा लेकिन उसकी नजर सीधे मुखिया की बीवी की छतिया पर चली गई और वह कमर के ऊपर पूरी तरह से निर्वस्त्र थी ब्लाउज के दोनों पट खुले हुए थे और उसकी दोनों चूचियां एकदम खरबूजे का आकार ली हुई एकदम साफ नजर आ रही थी जिस पर नजर पडते ही सूरज की नजर एकदम से गड़ गई और वह पागलों की तरह मुखिया की बीवी की चूची को देखने लगा,,,,, सूरज की प्यासी नजरों को देखकर मुखिया की बीवी मन ही मन प्रसन्न होने लगी क्योंकि यही सब तो वह दिखाना चाहती थी मुखिया की बीवी उसे बिल्कुल भी मन नहीं की बल्कि उसकी आंखों के सामने ही अपना ब्लाउज उतार कर उसे एक तरफ रख दिया और अपनी साड़ी को खोलने लगी बस उसका ध्यान थोड़ा हटाने के लिए वह बोली,,,)

Mukhiya ki bibi blouse ka button kholti huyi





अरे नल तो चला,,,(इतना सुनते ही जैसे वह होश में आया होगा तुरंत हेड पंप चलाना शुरु कर दिया और मुखिया की बीवी अपनी साड़ी उतार कर एक तरफ रख दी वह अपनी जवानी का जलवा सूरज पर गिर रही थी और सूरज चारों खाने चित हुआ जा रहा था पहली बार वह किसी औरत की चूचियों के दर्शन किया था,,,, और पहली बार चूचियों को देखकर वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था उसके दोस्त सोनू ने तो औरत की नंगी गांड दिखाकर उसके होश उड़ा ही दिया था लेकिन आज मुखिया की बीवी ने,,, अपनी मदद मस्त चूचियों के दर्शन करा कर उसे इस बात का एहसास कर रहे थे कि वह पूरी तरह से जवान हो चुका है लंड का तनाव बढ़ता ही जा रहा था,,,,,।

वैसे तो खुली नजरों से मुखिया की बीवी की तरफ देखने में सूरज की हिम्मत नहीं हो रही थी लेकिन चोर नजरों से वह लगातार मुखिया की बीवी की तरफ देख रहा था मुखिया की बीवी अब तक खड़ी होकर अपने कपड़े उतार रही थी लेकिन वहां सूरज को कुछ और दिखाना चाहती थी इसलिए हैंडपंप के करीब घुटनों के बल बैठकर वह अपने पेटिकोट की डोरी को खोलना शुरू कर दी और यह देखकर सूरज की हालत और ज्यादा पतली होने लगी उसे ऐसा लग रहा था की मुखिया की बीवी अपना पेटीकोट भी उतार कर पूरी तरह से नंगी होकर उसकी आंखों के सामने ना आएगी लेकिन पहली बार में ही वह इतना बड़ा धमाका नहीं करना चाहती थी इसलिए वहां पेटिकोट की डोरी को खोलकर कमर पर उसके कसाव को कम करने लगी और उसे आगे की तरफ से पकड़कर,,, उसे और ढीली करने के लिए आगे की तरफ खींची ऐसा हुआ जानबूझकर कर रही थी क्योंकि वह उसे अपनी बुर के दर्शन कराना चाहती थी,,,, लेकिन सूरज को मुखिया की बीवी की बुरे नहीं बल्कि बुर के ऊपर के घने बाल नजर आए जिसे देखकर वह एकदम से दंग रह गया,,,, टांगों के बीच उगे हुए वह बोल सूरज के लिए किसी आश्चर्य से कब नहीं थे क्योंकि वह कभी सोच भी नहीं सकता था कि औरत के उसे अंग पर इतने सारे बाल उगते हैं उसने तो केवल कल्पना भर किया था की दोनों टांगों के बीच की वह स्थिति कैसी होगी और वह भी उसके कल्पना के पार था उसने औरतों की दोनों टांगों के बीच के अंग के बारे में सही कल्पना नहीं किया था और ना ही उसे पर कभी बाल के बारे में कल्पना किया था इसलिए वह दंग रह गया था,,,, जिस तरह से सूरज उसकी तरफ देख रहा था मुखिया की बीवी को ऐसा ही लगा कि जैसे वह उसे अपनी बुर दिखने में कामयाब हो गई है और वह पेटीकोट को अपनी छाती तक लाकर अपनी दोनों चूचियों को देखते हुए पेटिकोट की डोरी को बीच में बांध दी लेकिन फिर भी उसकी आधी चुचीया एकदम साफ नजर आ रही थी,,,।

Mukhiya ki bibi





मुखिया की बीवी के द्वारा अंग प्रदर्शन और उसे देखकर आकर्षित होने की प्रक्रिया के दौरान पानी की बाल्टी पूरी तरह से भर चुकी थी और नीचे पानी छलक रहा था जिसे देखकर सूरज बोला,,,

नहाईए मालकिन पानी बह रहा है,,,

हममम,,,(और इतना कहने के साथ ही बाल्टी में से लोटा भर कर पानी को अपने ऊपर डालने लगी और देखते ही देखे उसका खूबसूरत बदन पानी से तरबतर हो गया वह पूरी तरह से भीग गई और भीगने की वजह से उसकी पेटीकोट भी उसके बदन से एकदम से चिपक गई जिसमें से चुचीया एकदम साफ नजर आने लगी और उत्तेजना के मारे चूचियों की शोभा बढ़ा रहे छुहारे के दाने एकदम कड़क होकर पेटिकोट के ऊपर नजर आने लगे जिसे देखकर सूरज का दिल जोरो से धड़कने लगा,,,, मुखिया की बीवी खेली खाई औरत थी वह सूरज की मनो स्थिति को अच्छी तरह से समझ रही थी,,,,, वह जानती थी कि सूरज इस खेल में पूरी तरह से नादान है,,, अगर वह पहली बार में उसके साथ संबंध बनाती है तो वह सफल नहीं हो पाएगा और उसकी प्यास भी अधूरी रह जाएगी इसलिए वह सूरज को अपनी जवानी के जाल में पूरी तरह से फांस लेना चाहती थी,,, ताकि उसे तैयार करके उससे खुलकर मजा ले सके,,,।

Mukhiya ki bibi





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सूरज के सामने वह खुलकर नहा रही थी वह जानती थी कि भीगने की वजह से उसकी पेटिकोट पूरी तरह से उसके बदन से चिपक गई थी जिससे उसका अंग अंग एकदम साफ झलक रहा था और वह अपने अंगों को इसी तरह से दिखाना भी चाहती थी,,, सूरज की हालात पूरी तरह से खराब हो चुकी थी उसके पजामे में तंबू बना हुआ था जिसे तिरछी नजरों से देखकर खुद मुखिया की बीवी मस्त हुई जा रही थी,,,, वह अपनी अनुभवी आंखों से इतना तो भांप ली थी कि सूरज के पैजामे में टॉप का गोल है लेकिन उसे आजमाना था कि वह कैसे और किस तरह से दुश्मन पर हमला करने के लिए तैयार है कहीं ऐसा ना हो कि युद्ध के बीच में ही उसका तोप गोला फोड़ने से पहले ही दग जाए और जहां दुश्मन को अपने हमले से ढेर करना हो वही खुद ढेर हो जाए,,,,।

मुखिया की बीवी नहा चुकी थी और वहां नहा कर एकदम से खड़ी हो गई थी और एक बार फिर से वह अपने नितंबो का आकार दिखाने के लिए सूरज की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई और नीचे झुक कर अपना ब्लाउज उठने लगी और ऐसा करने पर उसकी भारी भरकम गोल-गोल गांड एकदम से भीगे हुए पेटीकोट में एकदम साफ नजर आने लगी जो कि एकदम चमक रही थी,,,, सूरज से रहा नहीं गया और वह पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को दबा दिया,,,,, तभी मुखिया की बीवी को जैसे कुछ याद आया हो और वह तुरंत सूरज से बोली,,,,।

सूरज मुझे लगता है की झोपड़ी में मैं अपना पेटिकोट रखी हुई हूं जाकर देख तो है कि नहीं,,,,

(इतना सुनते ही सूरज झोपड़ी की तरफ गया और झोपड़ी में प्रवेश करके इधर-उधर देखने लगा वहां पर वाकई में मुखिया की बीवी के कपड़े रखे हुए थे लेकिन पेटिकोट के साथ-साथ उसकी साड़ी भी रखी हुई थी वह पेटीकोट को हाथ में लेकर बाहर आया और मुखिया की बीवी से बोला)

मालकिन वहां तो तुम्हारी साड़ी भी रखी हुई है,,,,

हां लेकिन वह गंदी है,,,,(बहुत चालाकी से मुखिया की बीवी बात को घुमा दी थी और सूरज के हाथ से पेटीकोट को ले ली थी,,,, सूरज जानबूझकर ठीक उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया था ताकि वह ठीक से मुखिया की बीवी को देख सके मुखिया की बीवी भी जानबूझकर उसकी तरफ पीठ करके खड़ी थी,,, वह पेटिकोट को अपने गले में डालकर भीगी हुई पेटिकोट की डोरी को खोलने लगी और डोरी को खोलकर उसे धीरे से नीचे की तरफ सरकाने लगी,,,, हालांकि अभी भी उसकी पेटिकोट गले में ही थी वह गली पेटीकोट को धीरे-धीरे अपने बदन से नीचे की तरफ ले जा रही थी और देखते-देखते वह अपनी पेटीकोट को कमर तक लेकर आ गई थी सूरज का दिल जोरो से धड़क रहा था,,,, उसकी आंखों के सामने एकदम मादकता भरा दृश्य नजर आ रहा था,,,,, और देखते ही देखते मुखिया की बीवी जानबूझकर अपनी गीली पेटीकोट को एकदम से खींचकर उसे अपनी गोरी गोरी गांड के नीचे से करते हुए उसे अपने पैरों में गिरा दी और सूरज को मुखिया की बीवी की खूबसूरत गोरी गोरी गांड एकदम नंगी देखने का मौका मिल गया और वहां मुखिया की बीवी की नशीली गांड देखकर पूरी तरह से पागल हो गया,,,, इस बात की तसल्ली करने के लिए की सूरज उसकी तरफ देख रहा है कि नहीं मुखिया की बीवी नजर को तिरछी करके सूरज की तरफ देखी तो सूरज को अपनी गांड की तरफ ही देखा हुआ पाकर वह मन ही मन एकदम से प्रसन्न हो गई और गले में अटकी हुई पेटीकोट को नीचे करके वह अपने नंगे बदन को ढंक ली और पेटिकोट की डोरी को बांध ली,,,, वही नीचे पड़े ब्लाउज को उठाकर वह पहनने लगी और थोड़ी ही देर में वह अपने कपड़े पहन कर पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी,,,, तभी एक मजदूर दौड़ता हुआ आया और बोला,,,,।

मालकिन,,, आपको मालिक ढूंढ रहे हैं,,,,

ठीक है चलो मैं आ रही हूं,,,,(इतना सुनकर वह खेत में काम करने वाला मजदूर चला गया और मुखिया की बीवी अपने मन में सोचने लगी कि अच्छा हुआ कि वहां सूरज के साथ संबंध नहीं बनाई वरना उसका मजदूर उसे देख लेता तो गजब हो जाता,,,,, तभी सूरज को खुश करने के लिए मुखिया की बीवी बोली,,,,,।

सूरज उसे तरफ देखो कद्दू के खेत है उसमें से दो चार कद्दू तोड़कर अपने घर ले जाना और सब्जी बनाकर खाना,,,,।

(इतना सुनते ही सूरज एकदम से खुश हो गया और तुरंत बगल वाले खेत की तरफ गया और दो-चार कद्दू तोड़कर ले आया लेकिन कद्दू को तोड़ते समय वह अपने मन में यही सोच रहा था कि कद्दू से भी बेहतरीन तो मालकिन के खरबूजे हैं और उसके बड़े-बड़े तरबूज,,, और अपने मन में ही इस तरह की बात करते हुए वह मुखिया की बीवी के पास आ गया और मुखिया की बीवी मुस्कुराते हुए आगे आगे चलने लगी और सूरज पीछे-पीछे,,,, चलते चलते मुखिया की बीवी बोली,,,)

जब भी बुलाऊं चले आना,,,, और इसी तरह से घर के लिए सब्जी फल लेते जाना,,,,

ठीक है मालकिन,,,,,।
 
सूरज ने जो आज नजर देखा था उसके बारे में कभी उसने कल्पना भी नहीं किया था अद्भुत और अकल्पनीय नजारे को देखकर वह पूरी तरह से बदहवास हो चुका था,,, अब तक वह औरतों से दूर ही भगत था औरतों के प्रति उसका कोई आकर्षण नहीं था वह बहुत सीधा-साधा ही था लेकिन कुछ ही दिनों में जिस तरह के नजारे उसने अपनी आंखों से देखा था उसे देखकर उसके मन में भी कुछ-कुछ होना शुरू हो गया था उसका बहुत ही खास दोस्त ने यह शुरुआत किया था अपनी ही चाची की नंगी गांड और उसे पेशाब करता हुआ दिखाकर उसे पूरी तरह से मदहोश बना दिया था और उसे पर से चार बोतलों का नशा मुखिया की बीवी ने अपनी जवानी के दर्शन करा कर उसे करा दिया था,,,,।





औरतों की खूबसूरती से सूरज को किसी भी प्रकार का वास्ता नहीं था लेकिन पहली बार उसे इस बात का एहसास हुआ की औरतें वाकई में बहुत खूबसूरत होती है और कपड़े उतारने के बाद तो उनकी खूबसूरती में चार चांद लग जाता है कभी सपने में भी नहीं सोचा था की मुखिया की बीवी उसे अपने खूबसूरत बदन के दर्शन करवाएगी,,,,,,,,, सूरज देखकर हैरान था वाकई में मुखिया की बीवी का भजन सूरज की तरह चमक रहा था उसका हर एक अंग ऐसा लग रहा था कि जैसे हाथों से तराशा गया हो,,, मुखिया की बीवी के नंगे बदन के दर्शन करके सूरज एक शब्द नहीं बोल पाया था,,,, और जाते-जाते मुखिया की बीवी उसे दो चार कद्दू लेने के लिए बोली जब बुलाए तब आ जाने के लिए भी निमंत्रण दे दी थी और इस निमंत्रण से सूरज काफी खुश नजर आ रहा था,,, और खुश होता भी तो क्यों नहीं आखिरकार एक मर्द को क्या चाहिए जो चाहिए सब कुछ मुखिया की बीवी के पास था लेकिन उसका उपयोग करना अभी सूरज नहीं जानता था इसलिए केवल देख लेने मात्र से ही वह काफी खुश नसीब अपने आप को वह समझ रहा था,,,।





कद्दू लेकर वह घर पहुंचा तो उसकी मां भी बहुत खुश हुई क्योंकि आज पहली बार सूरज घर पर सब्जी लेकर आया था और वह भी अपने खेतों की नहीं बल्की मुखिया की बीवी के खेतों की,,, लेकिन भोली-भाली सुनैना इस बात से अनजान थी कि मुखिया की बीवी सूरज पर क्यों इतनी मेहरबान हुई थी,,, एक औरत होने के बावजूद भी वह औरत के मन को नहीं समझ पाई थी वह तो खुशी-खुशी कद्दू की सब्जी और गरमा गरम रोटी पका कर सबको परोस दी थी,,, सूरज धीरे-धीरे रोटियां तोड़ रहा था और कद्दू की सब्जी रोटी में लेकर खा रहा था,,, लेकिन उसकी मां खाने में बिल्कुल भी नहीं लग रहा था गोल-गोल कद्दू की शक्ल में उसे मुखिया की बीवी की गदराई हुई चूचियां नजर आ रही थी,,,, पूरी तरह से जवान हो चुका सूरज पहली बार औरत की जिस्म को देखकर पागल हो गया था,,,,,, यहां तक की रात को सोते समय भी उसकी आंखों में नींद नहीं थी वह रात भर करवट बदलते रह गया था उसे सब कुछ किसी सपने की तरह उसकी आंखों के सामने दिखाई दे रहा था,,,।

मुखिया की बीवी का आगे आगे चलना और आगे आगे चलने की वजह से कई हुई साड़ी में उसके उभरे हुए नितंबों का उभार नजर आना और उसका जान पूछ कर गांड मटका कर चलना पहली बार अपनी आंखों के सामने मटकती हुई गांड को देखकर सूरज पूरी तरह से चारों खाने चित हो गया था उसका ध्यान पूरी तरह से मुखिया की बीवी की गांड पर ही टिका हुआ था और उसका गिरना और गिरते समय उसे संभालने के चक्कर में अपने दोनों हाथों को उसकी चूचियों पर रख देना यह सब कुछ अद्भुत था सूरज के लिए इस तरह के ख्याल उसके बदन में उत्तेजना का संचार पैदा कर रहे थे उसे सब कुछ याद था नहाते समय उसका कपड़ा उतारना,,,, उसकी नंगी गांड और सूरज इस बात से तो और ज्यादा हैरान था कि उसकी दोनों टांगों के बीच वाली जगह पर ढेर सारे बाल थे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि औरत की दोनों टांगों के बीच इतने सारे बाल क्यों होते हैं यही सब सोता हुआ वह अनजाने में ही अपने हाथ को पजामे में डालकर अपने खड़े लंड को पकड़ लिया था,,, और से जोर-जोर से दबा रहा था तभी उसे याद आया कि अपनी चाची को पेशाब करता हुआ दिखाई समय उसका दोस्त अपने लंड को बाहर निकाल कर जोर-जोर से हिला रहा था और हिलाने के बाद उसमें से न जाने कैसा सफेद पानी निकला था यह सब सूरज के लिए बिल्कुल अद्भुत था और यही सब याद करके वह अपने लंड को जोर-जोर से दबा रहा था हालांकि हिला नहीं रहा था लेकिन दबाने में जो उसे मजा आ रहा था उससे उसका मन बहक रहा था,,,,।





तभी उसके हाथों में उसके झांठ के बालों का एहसास होने लगा और तभी उसे इस बात का अनुमान हुआ कि जिस तरह से उसके अंग पर ढेर सारे बाल उगे हुए हैं इस तरह से औरतों के अंग पर भी इस जगह पर ढेर सारे बाल उगते होंगे,,, सूरज अपनी आंखों से मुखिया की बीवी के हर एक अंग को ज्यादा देर के लिए नहीं लेकिन कुछ क्षण के लिए ही देख चुका था लेकिन अभी तक उसने मुखिया की बीवी की बुर को नहीं देखा था सूरज औरत के देंह से अनजान होने के बावजूद भी इतना तो जानता ही था की औरत की दोनों टांगों के बीच वाले अंग को बुर कहा जाता है, , भले ही उसने अब तक अपनी खुली आंखों से एक औरत की खुली बुर को नंगी बुर को ना देखा हो उसके भौगोलिक स्थिति उसके आकार से बिल्कुल अनजान हो लेकिन फिर भी उसे अंग के बारे में जानने की उत्सुकता उसकी अब बढ़ने लगी थी,,,, यही सब सोते हुए कब उसकी आंख लग गई उसे पता ही नहीं चला,,,,।

सुबह उठकर कुछ देर के लिए वह सारी घटनाओं को भूलकर एकदम सहज हो गया था,,,वह खेतों की तरफ जाने के लिए अपनी बिस्तर पर से उठकर खड़ा हो गया बाहर आंगन में झाड़ू लगाने की आवाज आ रही थी वह धीरे से अपनी आंखों को मलता हुआ,,,, अांगन मैं आ गया और वहीं पास में पड़ी बाल्टी में से लोटा भर कर पानी निकाल कर उसे पीने लगा,,, पानी पीते हुए अपना मुंह साफ करके गरारा करते हुए जैसे ही वह अपनी मुंह से सामने की तरफ निकला तो उसकी नजर अपनी मां पर पड़ गई जो की झुक कर झाड़ू लगा रही थी हालांकि ऐसा नजारा हुआ पहले भी देख चुका था लेकिन अपने दोस्त की चाची और मुखिया की बीवी के अंगों को देखकर अब औरत को देखने का नजरिया उसका बदलता जा रहा था अपनी आंखों के सामने अपनी मां को छुपा कर झाड़ू लगाता हुआ देख कर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई उसकी आंखें एकदम से अपनी मां के ब्लाउज में स्थिर हो गई जो की सुबह-सुबह वह भी थोड़ा नींद में थी इसलिए ब्लाउज के ऊपर के दो बटन बंद करना भूल गई थी और ऐसे हालात में उसकी यादें से ज्यादा चूचियां ब्लाउज में से बाहर आने के लिए आतुर नजर आ रही थी ऐसा लग रहा था की जवानी से भरी हुई गगरी छलक रही हो,,,, सूरज को यह नजारा बेहद मदहोश कर देने वाला लग रहा था वह पहली बार अपनी मां को गंदी नजरिए से देख रहा था पहली बार उसकी अध खुली ब्लाउज में से उसकी चूचियों को झांक रहा था,,,। इस नजारे को देखकर उत्तेजित अवस्था में उसका लंड तनने लगा,,, वह धीरे-धीरे खड़ा हो रहा था,,, और देखते ही देखते वक्त कब पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया सूरज को पता ही नहीं चला और जब उसे इस बात का एहसास हुआ तो वह एकदम से शर्मिंदा हो गया और तुरंत वहां से चला गया,,,।





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सूरज मुखिया की बीवी से मिलने के लिए बेचैन हो गया एक तरह से मुखिया की बीवी ने अपनी जवानी के दर्शन करा कर उसे पर पूरी तरह से अपनी जवानी का जादू चला दी थी और वह पूरी तरह से मुखिया की बीवी के आकर्षण में बंध चुका था,,, और उससे मिलने के लिए वह उसी जगह पर चला गया जहां पर उसकी मुलाकात हुई थी और उसकी किस्मत अच्छी थी कि उसी जगह पर मुखिया की बीवी उसे मिल भी गई लेकिन वहां पर मुखिया भी बैठा हुआ था वहां पहुंचते ही सूरज ने मुखिया को नमस्कार किया और मुखिया की बीवी को भी नमस्कार किया मुखिया की बीवी सूरज को देखते ही एकदम से प्रसन्न हो गई,,, उसकी प्रसन्नता जायज थी क्योंकि अपनी जवानी का जलवा दिखा कर जिस तरह का असर उसने सूरज के बदन में उत्पन्न की थी उसके चलते उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और खड़े लंड को पजामे में तंबू की शक्ल में देखकर अनुभव से भरी हुई मुखिया की बीवी समझ गई थी कि सूरज के पास हथियार काफी दमदार है,,,।

अरे सूरज तु यहां,,,,

की मालकिन ऐसे ही टहल रहा था तो,,,,(सूरज की बात सुनकर उसकी तरफ गौर से देखते हुए मुखिया बोला)

यह लड़का कौन है,,,?

अरे यह तो अपने भोला का लड़का है एकदम जवान हो गया है,,,,(मुखिया की बीवी के मुंह से जवान शब्द सुनकर सूरज एकदम गदगद हो गया)

अच्छा तो तू भोला का लड़का है उसी की तरह है एकदम हट्टा कट्टा,,,,,,,

(मुखिया की बात सुनकर सूरज कुछ बोल नहीं रहा था बल्कि नजर नीचे करके मन ही मन में खुश हो रहा था,,,, सूरज मुखिया को गौर से देख चुका था और समझ चुका था कि उसकी बीवी में और मुखिया में उम्र का कितना फर्क है मुखिया एक तरफ पूरी तरह से बुढ़ापे की ओर अग्रेसर था वहीं दूसरी तरफ उसकी बीवी जवानी से लबालब भरी जा रही थी,,,, सूरज अभी यही सब सो रहा था कि तभी,,,, कहीं से वहां दो लड़कियां गई एकदम जवान,,,, वह दोनों एकदम मुखिया की बीवी के पास में आकर खड़ी हो गई सूरज तो कुछ समझ ही नहीं पाया लेकिन तभी उसमें से एक बोली,,,)

मां मुझे,,, बेर खाने हैं,,,,

मां मुझे भी,,,,

अरे अब मैं तुम दोनों को कहां से बैर खिलाऊ जाकर बगीचे में से तोड़कर खा ली होती,,,

नहीं हमसे बेर टूटा नहीं है उसमें बहुत कांटे होते हैं इसलिए तुम ही तोड़ कर हमें दो,,,,(दोनों लड़कियां एक साथ जीद करते हुए बोली,,, सूरज समझ गया था कि यह दोनों मुखिया की लड़कियां जो की काफी खूबसूरत और जवान थी सूरज उन्हें भी बड़े गौर से देख रहा था,,, क्योंकि अब और तो और लड़कियों को देखने का नजरिया उसका बदला चुका था इसलिए उन दोनों लड़कियों में सूरज जवानी तलाश रहा था जो कि वह दोनों पूरी तरह से जवानी से भरी हुई थी बिल्कुल अपनी मां की तरह ही,,, उन दोनों की जीद देखकर मुखिया की बीवी बोली,,,)

तुम दोनों की आदत खराब होती जा रही है इतना जिद करती हो कि मेरा तो सर दुखने लगता है आप कुछ कहते क्यों नहीं,,,?

अब मैं क्या कहूं तुम ही ने तो लाड प्यार में दोनों को बिगाड़ रखा है,,,,,,(मुखिया की बात से ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपने जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहा हो,,,,)

अच्छा तुम दोनों जाओ मैं तुम दोनों के लिए बेर लेकर आऊंगी,,,

नहीं नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं चलेगा हमें अभी बैर खाना है चाहे जैसे भी,,,,

(मुखिया की बीवी दोनों की चीज देखकर परेशान हो रही थी और गुस्सा भी हो रही थी लेकिन वह कुछ कर सकने की स्थिति में नहीं थी क्योंकि वहां अपनी दोनों बेटियों की जीद को अच्छी तरह से जानती थी,,,, और यह भी अच्छी तरह से जानती थी कि यह जीद भी उसके ही लाड प्यार का नतीजा था,,,,)

अब मैं तुम दोनों को कैसे समझाऊं तुम दोनों तो समझने को तैयार ही नहीं हो अरे थोड़ी तो समझदार बनो अब पूरी तरह से जवान हो चुकी हो कुछ ही साल में तुम दोनों की शादी हो जाएगी और शादी के बाद भी तुम दोनों ससुराल में जाकर इसी तरह की जीद करोगी तो हम दोनों का नाम खराब हो जाएगा की मां-बाप ने कुछ सिखाया ही नहीं,,,

वाह मां तुम तो बात को कहां से कहां लेकर जा रही हो भला बेर खाने से ससुराल जाने का क्या संबंध है,,,,

कुछ संबंध नहीं है मेरी मां,,,(दोनों के सामने परेशान होकर हाथ जोड़ते हुए मुखिया की बीवी बोली सूरज भी देख रहा था कि दोनों लड़कियां कुछ ज्यादा ही जीद्दी थी,,,, कुछ देर तक सूरज खड़े होकर उन दोनों लड़कियों के नखरे देखता रहा और फिर मुखिया की बीवी से बोला,,,)

आप कहो तो मालकिन में बैर तोड़ कर दे दु,,,।

(वैसे तो मुखिया की बीवी सूरज को देखकर बहुत खुश हुई थी और उसके मन में नहाते समय जो कुछ भी उसने की थी एक बार फिर से उसे दोहराने का मन कर रहा था लेकिन इस समय वह ऐसा करने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि उसके साथ उसका पति था ,,, और उसकी जवान दोनों लड़कियां भी थी इसलिए मन मसोस कर सूरज की बात सुनने के बाद वह बोली,,,)

ले जा तू दोनों को बेर खिला दे नहीं तो यह दोनों मुझे पागल कर देंगी,,,,

ठीक है मालकिन,,,,

लेकिन वह सब्जी के पीछे वाले बगीचे में से तोड़ना वहां के बेर मीठे है,,,

ठीक है मालकिन,,,,(इतना कहकर सूरज उन दोनों से बोला)

चलो मेरे साथ,,,(और इतना कहकर आगे आगे चलने लगा और दोनों लड़कियां खुश होकर पीछे-पीछे चलने लगी,,,, देखते ही देखते तीनों धीरे-धीरे कुछ दूरी पर पहुंच गए पर दोनों लड़कियां आपस में फुसफुसाते हुए चल रही थी,,,)

तू पूछ,,,

नहीं नहीं तू पूछ,,,,

मुझे शर्म आ रही है तू ही पूछना,,,,

(दोनों की बातें आगे चल रहा है सूरज सुन रहा था इसलिए वह खुद ही बोल पड़ा))

अरे क्या पूछने की बात चल रही है,,,,

कककक,, कुछ नहीं हम दोनों जानना चाहते थे कि तुम्हारा नाम क्या है,,,,

मेरा नाम,,,,(मुस्कुराते हुए)

हां तुम्हारा नाम,,,,

सूरज,,,,,

वोहह,,, अच्छा नाम है,,,,

और तुम्हारा,,,(आगे आगे चलते हुए पीछे मुड़कर देखते हुए सूरज बोला)

मेरा नाम शालू है,,,

और मेरा नीलू,,,,

वाह तुम दोनों का नाम तो बहुत खूबसूरत है,,,

सही ना सब लोग यही कहते हैं कि हम दोनों का नाम बहुत खूबसूरत है और हम दोनों के नाम के साथ-साथ हम दोनों भी बहुत खूबसूरत है,,,

हां यह बात तो है तुम दोनों का नाम जितना खूबसूरत है उससे भी कहीं ज्यादा तुम दोनों खूबसूरत हो अच्छा यह बताओ कि तुम दोनों में से बड़ी कौन है,,,(सूरज बिना रुके आगे-आगे चलते हुए दोनों से सवाल जवाब कर रहा था)

मैं बड़ी हूं,,, नीलू से 1 साल बड़ी,,,,,(वह एकदम से च हकते हुए जवाब दी,,,)

ओहहहह ,,, तुम बड़ी हो मतलब की नीलू तुमसे छोटी है,,,, लेकिन देखा जाए तो तुम दोनों में कुछ ज्यादा फर्क नहीं है,,,,,(ऐसा सूरज दोनों की चूचियों की तरफ देखकर बोल रहा था,,,

हां सब लोग यही कहते हैं बस हम दोनों में यही फर्क है कि मैं कुछ ज्यादा ही बोलती हूं और ये,,(नीलू की तरफ इशारा करते हुए) मुझसे थोड़ा कम बोलती है,,,

हां वह तो दिखाई दे रहा है,,,(बार-बार ना चाहते हुए भी सूरज की नजर दोनों लड़कियों की चूचियों की तरफ चली जा रही थी जो कि उसकी मां की तरह कुछ ज्यादा बड़ी तो नहीं थी लेकिन कश्मीरी सेव की तरह एकदम गोल थी,,, उनमें से एक सलवार कमीज पहनी थी और एक फ्रोक पहनी थी,,,, मतलब की बड़ी वाली शालू जो थी वह सलवार कमीज पहनी थी और छोटी नीलू फ्रॉक पहनी हुई थी और दोनों की खूबसूरती दोनों के कपड़ों से एकदम साफ झलक रही थी थोड़ी ही देर में वह तीनों बैर के बगीचे के पास पहुंच गए थे,,, जॉकी हर एक पेड़ में बड़े-बड़े बैर लदे हुए थे,,,, और यह सब देख कर दोनों बहने एकदम खुश हो गई,,,)
 
सूरज ने मुखिया की दोनों लड़कियों की जीद को अपनी आंखों से देख चुका था,,,, बार-बार मुखिया की बीवी के समझाने के बावजूद भी वह दोनों बिल्कुल भी मानने को तैयार नहीं थी और इसी जीत के कारण सूरज को बैर खिलाने के लिए उन दोनों लड़कियों को साथ में ले जाना पड़ा वैसे यह कोई,,, सूरज के लिए बेकार का काम नहीं था क्योंकि औरतों को देखने का नजरिया जिस तरह से सूरज का बदला था उसे देखते हुए उसकी आंखों के सामने दो-दो खूबसूरत जवान लड़कियां थी जो की पूरी तरह से भरे हुए बदन की थी,,,, अपने दोस्त सोनू और मुखिया की बीवी के नंगे बदन को देखकर जितना भी उसने सीखा था उसे देखते हुए बार-बार सूरज की नजर दोनों लड़कियों की छाती और उसके नितंबों पर जा रही थी जो कि वाकई में जानलेवा हुस्न से भरी हुई थी,,,।

देखते ही देखते सूरज बैर के बगीचे तक पहुंच चुका था और बातों ही बातों में वह दोनों लड़कियों का नाम भी जान गया था बड़ी वाली का नाम शालू था और छोटी वाली का नीलू नाम था,,,, वैसे भी सूरज को अब नाम से कोई लेना-देना नहीं था वह औरतों को उनके जिस्म से आंकना शुरू कर दिया था,,, क्योंकि सुबह-सुबह ही वह अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर पूरी तरह से मस्त हो चुका था झाड़ू लगाते समय उसकी मां की चूचियां ब्लाउज फाड़ कर बाहर आने के लिए आतुर थी और यह नजारा देखकर सूरज का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था,,, और इस नजारे के चलते सूरज मुखिया की बीवी के पास आया था ताकि मुखिया की बीवी के अंगों का प्रदर्शन वह अपनी आंखों से देख सके लेकिन मुखिया को भी मौजूद देखकर,,, सूरज के अरमानों पर ठंडा पानी गिर गया था लेकिन मुखिया की दोनों लड़कियों को बैर खिलाने के लिए बगीचे में ले जाने में ही सूरज पूरी तरह से मत हुआ जा रहा था,,,

दैया रे दैया यहां तो बहुत सारे बर हैं छोटे बड़े पके हुए कच्चे,,,,(शालू चारों तरफ नजर घुमा कर देखते हुए बोली)

यह बैर का बगीचा है,,, वैसे भी यह सब मुखिया जी का ही है जितना चाहे उतना खा सकती हो,,,(सूरज शालू के खूबसूरत चेहरे की तरफ देखते हुए बोला,,, अपनी बड़ी बहन की और में सुर मिलाते हुए नीलू भी बोली,,,)

सच कह रही हो दीदी मेरा तो देख कर ही पेट भर गया,,,, वैसे भी हम दोनों पहली बार इस जगह पर आ रहे हैं ना,,,

हां तो सच कह रही है नीलू,,,, मां हम दोनों को यहां कहां लेकर आती है यह तो आज हम दोनों जबरदस्ती घर से निकल कर आए हैं,,,,

तुम दोनों तो ऐसा लगता है कि बेर खाने की दीवानी हो,,,,

हां तुम सच कह रहे हो सूरज,,,, हम दोनों बहनों को बेर बहुत अच्छे लगते हैं,,,,

(शालू एकदम से खुश होते हुए बोली तो,,, शालू की बात सुनकर सूरज अपने मन में ही बोला,,, तुम दोनों बहनों को बेर पसंद है लेकिन मुझे बुर पसंद है लेकिन न जाने कब दर्शन होंगे,,,)

तुम दोनों रुको मैं तोड़कर देता हूं वरना कांटा लग गया तो गजब हो जाएगा,,,, संभलकर नीलू तुम जहां खड़ी हो वहां ढेर सारे कांटे हैं,,,

(सूरज की बात सुनते ही नीलू और शालू दोनों नीचे जमीन की तरफ देखने लगी जो कि वाकई में जहां तहां पेड़ से कांटे गिरे हुए थे,,,, वह दोनों अब अपने पैर को संभाल कर रखने लगी,,,)

अच्छा हुआ तुम बता दिए वरना अभी तो पैर में कांटा चुभ जाता,,,,(नीलू अपने पैरों को संभाल कर जमीन पर रखते हुए बोली)

अच्छा तुम दोनों आराम से खड़ी रहो मैं ऊपर चढ़कर बर तोड़कर नीचे गिरता हूं तुम दोनों आराम से उठाना ज्यादा इधर-उधर भागोगी तो कांटा लग जाएगा फिर मुझे मत कहना,,,,

लेकिन कहीं तुम्हें पेड़ पर चढ़ते समय लग गया तो,,,

नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा मैं तो आए दिन पेड़ पर चढ़ता रहता हूं,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज धीरे-धीरे एक बैर के पेड़ पर चढ़ने लगा उस पर बड़े-बड़े फल लगे हुए थे,,,,, देखते ही देखते सूरज पेड़ पर चढ़ गया था वैसे तो बेर के पेड़ को ज्यादा बड़े नहीं होते लेकिन सबर कर चढ़ना बहुत जरूरी होता है क्योंकि पेड़ में कांटे ही काटे रहते हैं,,,, और सूरज अच्छी सी जगह देखकर अपने पैर को टिककर बड़े से टहनी पर बैठ गया और बोला,,,)

तुम शालु वह बड़ी वाली लकड़ी देना तो,,,,

कौन सी ऐ वाली,,,,,,(एक बड़ी सी लकड़ी की तरफ हाथ बढ़ाते हुए बोली,,,)

हां वही वाली,,,,,,,

(और शालू उसे लकड़ी को उठाकर सूरज के हाथों में पकड़ा दी और सूरज बड़े-बड़े बेर पर लकड़ी मारकर उसे नीचे गिरने लगा और देखते ही देखते ढेर सारे बेर नीचे गिरने लगे शालू ने तुरंत अपनी कमीज को हाथों से पकड़ कर आगे की तरफ करके उसमें सारे बैर को उठाकर भरने लगी और पेड़ से गिरने वाले बैर को उसमें गिराने लगी,,,,,,, सूरज को दोनों जवान लड़कियों का साथ बड़ा अच्छा लग रहा था सूरज पेड़ के ऊपर से दोनों को देख रहा था दोनों की हठखेलियों को देख रहा था दोनों की हरकतों को देख रहा था,,,, सूरज की नजर भी अब औरतों के अंगों पर पड़ने लगी थी ऊपर पेड़ पर बैठे होने की वजह से नीचे खड़ी शालू और नीलू दोनों की कुर्ती में से ऊपर की तरफ से दोनों की चूचियां झलक रही थी हालांकि है नजारा कुछ क्षण तक का ही होता था लेकिन इतने में ही सूरज पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था,,, सूरज जानबूझकर दोनों लड़कियों को अपने ठीक नीचे आकर बैर उठाने के लिए बोलना था और वह दोनों लड़कियां ठीक उसके नीचे आकर बर उठती थी और पेड़ से गिरने वाली वर को अपने कपड़ों में ले भी लेती थी लेकिन जिस तरह की हरकत चालू कर रही थी उसी तरह की हरकत नीलू भी कर रही थी वह भी अपनी फ्रॉक को आगे से उठाकर बैर को उसमें गिरने दे रही थी लेकिन उसकी इस हरकत की वजह से,,, सूरज का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था क्योंकि शालू का तो ठीक लेकिन नीलू भी शालू की तरह ही अपना फ्रॉक ऊपर उठाकर बैर उसमें पेड़ से गिरने वाले बैर को इकट्ठा कर रही थी और उसकी हरकत पर सूरज को पूरा यकीन था कि वह कमर के नीचे पूरी तरह से नंगी हो जाती होगी उसकी रसीली बुर एकदम साफ दिखती होगी,,, और इसी के बारे में सोच कर उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था,,,।)

नीलू अच्छे से थोड़ा संभल कर नहीं तो कांटा चुभ जाएगा,,,

तुम चिंता मत करो कुछ नहीं होगा,,,(और ऐसा कहते हुए नीलू और उसकी बहन शालू दोनों खिलखिला कर हंसते हुए बेर को खा भी रहे थे और उसे इकट्ठा भी कर रहे थे,,,, बगीचे में पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था केवल उन दोनों बहनों की ही आवाज आ रही थी दूर-दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था और ऐसे अकेलेपन में दो जवान लड़कियों का साथ पाकर सूरज का उत्तेजित होना लाजिमी था वैसे भी वह कुछ दिनों में जिस तरह के नजारे को अपनी आंखों से देखा था उसे देखकर वह औरतों के अंगों के बारे में कल्पना करने लगता था,,,,।

सूरज ने मुखिया की बीवी के अंगों को तो अपनी आंखों से देख चुका था और साथ ही सोनू की चाची की नंगी गांड और उसे पेशाब करता हुआ देख चुका था इसलिए वह शालू और नीलू दोनों के नंगे बदन की कल्पना करके मस्त हुआ जा रहा था वह अपने मन में यही सोच रहा था कि जब मन इतनी खूबसूरत और खूबसूरत बदन वाली है उसके आगे इतनी खूबसूरत है तो उसकी लड़की कितनी खूबसूरत होगी,,,, वह अपने मन में कल्पना करता था कि शालू और नीलू की दोनों चूचियां कैसी दिखती होगी उन दोनों की गांड हालांकि उनकी मां की तरह बड़ी तो नहीं थी,,, लेकिन देखने में तरबूज की तरह गोल-गोल नजर आ रही थी सूरज तो उन दोनों के बारे में कल्पना करके ही पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था उसका लंड अकड़ कर दर्द करने लगा था जिसे सूरज बार-बार अपने हाथों से पजामे के ऊपर से दबा दे रहा था,,,,।

सूरज काफी बैर नीचे गिरा चुका था लेकिन फिर भी ऊपर पेड़ पर बैठकर जानबूझकर इधर लकड़ी पीट रहा था क्योंकि ऊपर खड़े होने की वजह से कुर्ती में से झांकती हुई ऊपर से उन दोनों की चूचियां एकदम साफ दिख रही थी कभी-कभी तो सूरज को उन दोनों की चूचियों के बीच की किसमिस का दाना एकदम साफ नजर आने लगता था और उसे देखकर सूरज के मुंह में पानी आ जाता था और इसी लालच की वजह से वह ऊपर बैठा हुआ था लेकिन जिस तरह से नीलू ने अपनी फ्रॉक को उठाई हुई थी उसकी बुर जरूर नजर आती होगी और इसी लालच की वजह से वह नीचे उतरना चाहता था इसलिए वह बोला,,,)

इतना तो काफी है ना तुम दोनों के लिए,,,

हां हां बहुत हो गया है अब बस करो नीचे आ जाओ,,,,

(शालू की बात सुनते ही सूरज का दिल जोरों से धड़कने लगा वह जल्द से जल्द नीलू की बुर के दर्शन कर लेना चाहता था वह बुर की भूगोल से वाकिफ हो जाना चाहता था क्योंकि अब तक सूरज ने केवल औरतों की बुर के बारे में सिर्फ सुना था उसे अपनी आंखों से देखा नहीं था इसीलिए उसकी उत्सुकता कुछ ज्यादा ही थी बुर को देखने के लिए,,,, इसलिए वह जल्दी से पेड़ से नीचे उतरने लगा लेकिन तब तक नीलू अपनी फ्रॉक में इकट्ठा किए हुए बैर को शालू के कमीज जिसमें वह खुद ढेर सारे बेर इकट्ठा की थी उसमें डाल दी,,,,,, और नीलू को इस तरह से करता हुआ वह पेड़ से उतरने से पहले ही देख लिया था इसलिए उसका मन एकदम से उदास हो गया वह मन ही मन थोड़ा गुस्सा भी होने लगा,,,, लेकिन कर भी क्या सकता था वह नीलू पर तो अपना गुस्सा दिखा नहीं सकता था उसे ऐसा तो नहीं कह सकता था कि थोड़ी देर और बैर को फ्रॉक में उठाकर नहीं रख सकती थी,,,,,।

खैर इतनी मेहनत करने के बाद उसके हाथ निराशा ही लगी थी वह पेड़ से नीचे उतर गया था,,,।

अब क्या करना है,,,,

रुक जाओ थोड़ी देर यहीं पर थोड़ा खा लेते हैं फिर घर जाकर खाएंगे तुम भी लो,,,(इतना कहते हुए शालू अपने हाथ में एक बड़ा सा बैर लेकर सूरज की तरफ आगे बढ़ाने लगी वैसे तो सूरज को बैर इतने पसंद नहीं थे लेकिन शालू को वह इनकार नहीं कर पाया और अपना हाथ आगे बढ़कर उसके हाथ से बेर को लेने लगा लेकिन ऐसा करने से शालू के नरम नरम उंगलियों का स्पर्श उसके हाथों पर होने लगा,,, और पहली बार किसी जवान लड़की के हाथों का स्पर्श उसकी उंगलियों से हो रहा था जिसकी वजह से उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी वैसे तो उसकी खुद की बहन एकदम जवान थी जिसका स्पर्श उसे हमेशा ही होता रहता था लेकिन तब उसके मन में औरतों के प्रति इतना आकर्षक नहीं था इसलिए उसे समय अपनी बहन का स्पर्श उसके लिए कोई मायने नहीं रखता था लेकिन अब तो उसकी मां पूरी तरह से बदल चुका था वह औरतों की तरफ जवान लड़कियों की तरफ पूरी तरह से आकर्षित होने लगा था इसलिए इस समय शालू की उंगलियों का स्पर्श उसे बेहद लुभावना और आनंदित कर देने वाला लग रहा था,,,, वह भी बैर खाना शुरू कर दिया और तिरछी नजर से नीलू की फ्रॉक की तरफ देख रहा था जो कि उसकी फ्रॉक घुटनों तक थी और घुटनों के नीचे की मांसल पिंडलियों को देखकर उसके लंड में ठुनकी आना शुरू हो गई,,, क्योंकि मांसल पिंडलियों को देखकर ही नीलू के गदरा६ बदन का जायजा लगाना आसान हो जा रहा था वह पूरी तरह से जवानी से भरी हुई बेलगाम घोड़ी नजर आ रही थी,,,, सूरज बार-बार उसके नितंबों की तरफ देखने की कोशिश कर रहा था जो की फ्रॉक में कुछ खास नजर नहीं आ रहा था लेकिन शालू के सलवार कमीज की वजह से उसके नितंबों का आकार एकदम साफ नजर आ रहा था वह कई हुई सलवार पहनी हुई थी जिसकी वजह से उसके नितंबों का आकार उसकी गोलाई उसका भूगोल एकदम उभर कर सामने दिखाई दे रहा था,,,, तीनों में से कोई बात नहीं कर रहा था तीनों बेर खाने में मस्त है,,,, लेकिन सूरज ऐसा जता रहा था कि मानो जैसे वह भी उन दोनों की तरह ही बेर खाने का लुफ्त उठा रहा हो,,,,, बल्कि वह बेर खाने में नहीं बल्कि दोनों बहनों की बुर के चक्कर में था,,,, कुछ देर बाद बात की शुरुआत करते हुए सूरज बोला,,,।

वैसे तुम दोनों बहने इसी तरह से अपनी मां और बाबूजी से जिद करते रहते हो या कभी-कभी,,,

सही कहूं तो मां और बाबूजी दोनों हम दोनों से एकदम से परेशान हो चुके हैं,,,(बेर खाते हुए नीलू बोली तो उसके बाद को आगे बढ़ाते हुए शालू बोल पड़ी,,,)

हम दोनों इसी तरह से हमेशा मस्ती करते रहते हैं और एक न एक चीज के लिए रोज जिद करते हैं इसीलिए मन और बाबूजी दोनों परेशान हो जाते हैं,,,,

लेकिन तुम दोनों तो बड़ी हो चुकी हो जवान हो चुकी हो और इतनी खूबसूरत भी हो,,, तो तुम दोनों को इस तरह से जीत नहीं करना चाहिए अब तो कुछ ही वर्षों में तुम दोनों की शादी करने लायक हो गई हो,,,

क्या कहा तुमने,,,, हम दोनों अभी शादी करने वाले नहीं है,,,(शादी की बात सुनकर थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए नीलू बोली लेकिन इसके विपरीत शालू शादी की बात सुनकर और अपने दोनों की खूबसूरती की तारीफ सुनकर और वह भी एक जवान लड़के से वह थोड़ा शर्मा गई उसके गाल सुर्ख लाल हो गए वह कुछ नहीं बोली बस अपनी नजर को शर्म के मारे नीचे कर ली,,,,)

लेकिन शादी की उम्र होने पर तो तुम्हारे मन और बाबूजी शादी तो कर ही देंगे और वैसे भी तुम दोनों में किसी प्रकार की कमी नहीं है तुम दोनों बहुत खूबसूरत हो,,,

हां यह तो सब कहते हैं,,,,(नीलू थोड़ा इतराते हुए बोली,,, लेकिन शालू का शर्म से बुरा हाल था,,,, वह कुछ देर के लिए बैर खाना भूल गई थी,,,,)

सब कहते होंगे लेकिन यह सही बात है वैसे तुम दोनों पढ़ाई करती हो कि नहीं,,,

नहीं बिल्कुल भी नहीं,,,,

मैं भी नहीं करता,,,,

तब तो हम लोगों की खूब जमेगी,,,,(नीलू उत्साहित होते हुए बोली)

कैसे जमेगी थोड़ी ना हम तीनों फिर से मिलने वाले हैं,,,,

क्यों नहीं मिल सकते हम दोनों इसी तरह से बगीचे में आ जाएंगे और तुम भी चले आना और इसी तरह से बैर तोड़ कर देना,,,,(इस बार शालू बोल पड़ी न जाने क्यों शालू को भी सूरज का साथ अच्छा लग रहा था,,,, शालू की बात सुनकर सूरज बोला)

अरे बेर का मौसम थोड़ी ना 12 महीना रहता है,,,,

तो क्या हुआ जिस फल का मौसम रहेगा उसी बहाने आ जाना,,,।(नीलू बोली,,,)

दोनों बहनों से बातें करना सूरज को अच्छा लग रहा था दोनों से बातें करते हुए सूरज कैसा लगने लगा था कि यहां कुछ बात बन सकती है लेकिन सूरज दूसरे लड़कों की तरह आवारा नहीं था वरना जिस तरह से दोनों से बातें हो रही थी अगर सूरज की जगह कोई दूसरा लड़का होता तो अब तक वह अपने मन की बात दोनों से कह दिया होता,,,, कुछ देर तक तीनों में इसी तरह से इधर-उधर की बातें होती रही लेकिन जब थोड़ा समय ज्यादा होने लगा तो शालू बोली,,,)

अब हमें चलना चाहिए काफी समय हो गया है,,,,

हां सही कह रही हो शालू नहीं तो तुम्हारे मां बाबूजी चिंता करेंगे,,,, लेकिन इतने सारे बैर,,(शालू की कुर्ती में ढेर सारे बर देखकर )घर ले कैसे जाओगी,,,,

हां यह तो मैंने सोचा ही नहीं कुछ रखने का थैला भी नहीं है,,,,

तुम्हारा दुपट्टा है ना उसमें रख लो,,,,

नहीं नहीं ऐसा करूंगी तो मा बहुत बिगड़ेगी,,,,

ऊमम,,,(सोतते हुए) तो कैसे ले जाओगी,,, अच्छा रुको,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज अपना कुर्ता निकालने लगा यह देखकर नीलू बोली,,, )

अरे अरे यह क्या कर रहे हो,,,,?

अरे इसी में ढेर सारे बर रख लो मैं बांध देता हूं फिर कल मेरा कुर्ता लेते आना,,,( सूरज जानबूझकर अपना कुर्ता देकर फिर से मिलने का जुगाड़ बना रहा था और देखते ही देखते सूरज अपना कुर्ता निकाल दिया और उसमें ढेर सारे बेर शालू की कुर्ती से गिराकर उसे कस के बांधकर एक पोटली बना दिया,,,, और जब उस पोटली को शालू को थमाने लगा तो शालू की नजर उसके नंगे बदन पर गई तो वह देखते ही रह गई एकदम चौड़ी छाती एकदम चिकनी एकदम गठीला बदन सूरज का मोहक स्वरूप देख कर एकदम से आकर्षित होने लगी और यही हाल नीलू का भी होने लगा हुआ अभी एक टक सूरज की नंगी छाती को देखने लगी और दोनों को इस तरह से देखकर सूरज मैन ही मन प्रसन्न हो रहा था शालू सूरज के हाथों से बेर की पोटली को ले ली,,,, और जैसे ही चलने को हुए वैसे ही नीलू की चीख निकल गई,,,)

हाय दइया मर गई रे,,,,,आहहहहह,,,,

क्या हुआ,,,?(एकदम से सूरज और शालू नीलू की तरफ देखते हुए बोले,,)

पैर में कांटा लग गया मैं तो मर गई बहुत बड़ा कांटा लगता है,,,,(वह एकदम दर्द से बिलबिलाते हुए बोली,,, वह एक पर को ऊपर उठा दी थी और एक पैर से लंगड़ा रही थी कि तभी सूरज को लगा कि वह गिरने वाली है और वह तुरंत आगे बढ़ाकर उसे थाम लिया और एक पत्थर पर बैठा दिया,,,,)

हाय दइया बड़ा दर्द कर रहा है,,,,(नीलू एकदम से दर्द भरे स्वर में बोली शालू उसके पास पहुंचकर,, बोली,,,)

तू चिल्लाना बंद कर,,, छोटा सा कांटा लगा है,,,

दिखाओ कहां लगा है,,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज घुटनों के बल बैठकर नीलू की टांग को पड़कर उसे थोड़ा ऊपर की तरफ उठाकर उसके पैर के तलवे की तरफ देखने लगा जिसमें वाकई में बड़ा सा कांटा छुपा हुआ था वह थोड़ा पैर उठाने की वजह से पीछे की तरफ झुक गई थी जिसे खुद शालू ने सहारा देकर संभाली हुई थी,,,,)

अरे अभी निकाल देता हूं तुम तो खामखा इतना चिल्ला रही हो,,,

अरे सच में मुझे बहुत दर्द कर रहा है जल्दी से निकालो,,

अरे हां अभी निकाल देता हूं,,,,, बस थोड़ा सा सब्र रखना कांटा कुछ ज्यादा ही अंदर घुस गया है,,,,(इतना कहते हुए सूरज थोड़ा सा टांग को और ऊपर की तरफ ले गया और कांटा को अपने हाथों की उंगलियों में पकड़ कर उसे खींचने वाला था कि उसकी नजर नीलू की दोनों टांगों के बीच चली गई जो की फ्रॉक पहने होने की वजह से फ्रॉक कुछ ज्यादा ही जनों के ऊपर चढ़ गई थी जिससे उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार एकदम साफ नजर आ रही थी यह सूरज के लिए पहला मौका था जब वह किसी खूबसूरत लड़की की बुर को देख रहा था एकदम खूबसूरत बुर जिसकी आज तक सूरज ने केवल कल्पना ही किया था,,, ।

कुछ पल के लिए तो सूरज को समझ में ही नहीं आया कि नीलू की दोनों टांगों के बीच वह पतली दरार एक पतली सी रेखा आखिर है क्या लेकिन थोड़ी देर में उसके दिमाग में जैसे घंटी बजी हो और वह तुरंत समझ गया कि वह पतली सी दरार से दिखने वाली चीज कुछ और नहीं बल्कि नीलू की बुर हैं और इतना समझ में आते ही तो उसके होश उड़ गए,,,, पल भर में ही सोया हुआ लंड एकदम से फिर से खड़ा हो गया,,, सूरज उसे मनमोहिनी प्यारी सी गुलाबी से अंग पर एकदम से मोहित हो गया इतना खूबसूरत नजारा सूरज ने आज तक नहीं देखा था फ्रॉक के अंदर झांकती हुई नीलू की बुर एकदम साफ नजर आ रही थी लेकिन उसे इस बात का भी एहसास हो रहा था कि नीलू की बुर पर उसकी मां की बुर की तरह उगे हुए बाल ज्यादा घने नहीं थे बस हल्के-हल्के रेशमी से दिख रहे थे,,,,,,, जो की कचोरी की तरह दरार के इर्द-गिर्द वाली जगह फूली हुई थी जिसे देखकर दुनिया का कोई भी मर्द नीलू की जवानी पर मोहित हो सकता था आज सूरज अपने आप को बेहद खुश नसीब इंसान समझ रहा था क्योंकि कल्पना में मदहोश कर देने वाला अंग उसे एकदम साफ नजर आ रहा था कुछ देर के लिए सूरज सब कुछ भूल गया वह यह भी भूल गया कि नीलू के पैर में से छुपा हुआ कांटा बाहर निकलना है वह पागलों की तरह मदहोश होकर एक तक नीलू की दोनों टांगों के बीच की उसे पतली दरार की तरफ देखे जा रहा था,,,,,।

नीलू तो पूरी तरह से बदहवास थी वह दर्द से पीड़ित थी उसे कुछ सोच नहीं रहा था उसे क्या मालूम था कि जिस तरह से वह बैठी हुई है जिस तरह से सूरज उसकी टांग को ऊपर उसके कंधों तक उठाया हुआ है ऐसे हालात में उसकी चिकनी बुर एकदम साफ नजर आती होगी,,, लेकिन शालू को जल्द ही पता चल गया कि माजरा क्या है वह जल्द ही सूरज की नजरों को पहचान गई कि उसका निशाना कहां लगा हुआ है और जब उसे इस बात का एहसास हुआ तो उसके बदन में भी उत्तेजना की सुरसुरी द१ड़ने लगी वह एकदम से सिहर उठी,,,, पल भर में ही उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी वह समझ गई की नीलू की बुर सूरज देख रहा है सूरज को नीलू की बुर एकदम साफ नजर आ रही है यह एहसास होते ही वह अपने मन में ही बोली,,,।

हाय दइया यह सूरज क्या देख रहा है इसे बिल्कुल भी शर्म नहीं आ रही है,,,, अब क्या करूं कैसे उसे रोकु आखिरकार उसने जानबूझकर तो ऐसा किया नहीं है,,, उसकी जगह कोई भी होगा तो अगर इस नजारे को देखेगा तो वह देखता ही रह जाएगा,,,, जब शालू को लगने लगा कि सूरज पूरी तरह से मंत्र मुग्ध हो गया है उसकी बहन की बुर देखकर तो वह खुद ही बोली,,,।

अरे सूरज क्या कर रहे हो जल्दी से कांटा निकालो,,,

आं,,,,(शालू की है बात सुनकर ऐसा लग रहा था कि जैसे सूरज को कोई गहरी नींद से जगाया हो वह एकदम से शक पका गया और अपनी चोरी पकड़ी ना जाए इसलिए एकदम से होश में आते हुए बोला,,,)

हा,,,हा,,, निकल रहा हूं कांटा कुछ ज्यादा ही बड़ा है,,,,(सूरज को ऐसा ही लग रहा था कि उसकी ईस आंखों की चोरी को कोई देख नहीं पाया है लेकिन शालू समझ गई थी और वह धीरे-धीरे कांटे को निकलना शुरू कर दिया लेकिन उसकी नज़रें लगातार नीलू की फ्रॉक के अंदर टिकी हुई थी सूरज को नीलू की बुर पर उपसी हुई पानी की बूंद जो की मोती के दाने की तरह चमक रही थी एकदम साफ नजर आ रही थी जिसे देखकर उसके लंड की अकड़ बढ़ने लगी थी,,,। सूरज का मन उसे पतली दरार से अपनी नजर को हटाने को नहीं हो रहा था,,, वह अपने मन में सोच रहा था कि काश यह वक्त यही रुक जाए और वह उस खूबसूरत बुर को बस देखता ही रहे,,,, लेकिन ऐसा मुमकिन नहीं था वह जोर से खींच कर कांटे को निकाल दिया कुछ देर के लिए उसमें से खून निकला और उसे जगह पर सूरज ने तुरंत अपना अंगूठा लगाकर उसे खून को बंद करने के बहाने कुछ देर तक इस तरह से फिर से टांग उठाए रखा,,,।

इसमें तो होश कर देने वाले नजारे को देखकर सूरज की हालत एकदम खराब होती जा रही थी उसकी सांसे उत्तेजना के मारे गहरी चलने लगी थी,,, वह किसी भी बहाने से नीलू की बुर को नजर भर कर देख लेना चाहता था इतने करीब से वह पहली बार किसी खूबसूरत लड़की की बुर को देख रहा था उसकी मखमली नरमाहट को वह अपनी आंखों से ही टटोलने की कोशिश कर रहा था,,,, और सूरज की हरकत को देखकर खुद शालू की हालत खराब होती जा रही थी साल उसकी निगाहों को देखकर शर्म से भरी जा रही थी,,,, यहां तक की सूरज की हरकत की वजह से उसकी खुद की बुर गीली होती जा रही थी और पानी छोड़ रही थी उसे अपने बदन में अजीब सी हलचल महसूस हो रही थी,,,,।

आखिरकार इस नजारे पर पर्दा तो पडना ही था,, हालांकि सूरज का मन तो बिल्कुल भी इससे खूबसूरत नजारे पर परदा गिरने को नहीं भरा था लेकिन नीलू ही बोल पड़ी,,,।

बस बस अब मुझे सही लग रहा है,,,,(वह तो पूरी तरह से सहज थी उसे बिल्कुल भी एहसास तक नहीं था कि उसकी टांग ऊपर उठने की वजह से उसकी बुर सूरज के एकदम साफ दिखाई दे रही थी वरना वह इस तरह से टांग ऊपर उठाई ना रहती,,,, नीलू की बात सुनकर वहां मन महसूस कर उसकी टांग को नीचे रख दिया और फिर वह धीरे से खड़ा हो गया लेकिन इस बार चालू एकदम चौंक गई और नीलू की भी नजर उसके पजामे में बने तंबू पर गई तो वह भी हल्के से मुस्कुरा दी सूरज इस बात से बेखबर था की उत्तेजना के मारे उसका लंड पजामे में तंबू बनाया हुआ है क्योंकि उसके उठने की वजह से उसका तंबू उन दोनों जवान लड़कियों को एकदम साफ नजर आने लगा था नीलू को तो उतना फर्क नहीं पड़ा था लेकिन शालू की बुर उत्तेजना के मारे फुल ने पिचकने लगी थी क्योंकि दोनों जवान थी और दोनों को इस बात का एहसास था कि जिस तरह से औरतों की टांगों के बीच मर्दों को लुखाने वाली छोटी सी चीज होती है इस तरह से मर्दों की टांगों के बीच भी औरतों को लुभाने वाला उनका कड़क अंग होता है जिसे लंड कहा जाता है,,,,।

सूरज को तो इस बात का अहसास तक नहीं था कि उसके पजामे में तंबू बना हुआ है वह तो नीलू की खूबसूरत बुर की याद में ही खोया हुआ था और वह तुरंत उठकर खड़ा हो गया और आगे आगे चलने लगा,,,,, सूरज खोया था नीलू की मध भरी बुर के ख्यालों में और दोनों बहने सूरज के तंबू के ख्यालों में पूरी तरह से खो गई थी,,,,, थोड़ी ही देर में तीनों मुखिया के और मुखिया की बीवी के पास पहुंच चुके थे अपनी दोनों बेटियों को देखकर मुखिया की बीवी बोली,,,।

मन भर गया बैर खाकर,,, न जाने कब अक्कल आएगी,,,(इतना कहते हुए तभी उसकी नजर सूरज की खुली छाती पर गई तो वह उसे देखते ही रह गई उन दोनों बहनों के साथ-साथ मुखिया की बीवी की भी नजर सूरज की नंगी छाती पर पडते ही वह पूरी तरह से सूरज क्या आकर्षण में खो गई,,,, और अपने आप को संभालते हुए बोली,,,)

अरे सूरज तेरा कुर्ता कहां गया,,,,?

शालू के हाथों में,,,,(शालू के हाथों में ली हुई पोटली की तरफ इशारा करते हुए सूरज ने बोला तो,,,, शालू के हाथों में कुर्ते की बनी हुई पोटली देखकर मुखिया की बीवी बोली,,,)

तुम दोनों नहीं सुधरोगी,,,,

कोई बात नहीं मालकिन मैं बाद में ले लूंगा,,,,

(और इतना कहकर वहां से चला गया)
 
सूरज का मन अब किसी काम में नहीं लगता था उसके जीवन में जबरदस्त बदलाव आना शुरू हो गया था ,,या यूं कह लो कि अब वह पूरी तरह से जवान हो चुका था जो किसी भी औरत और खूबसूरत लड़कियों की तरफ आकर्षित होने के लिए तैयार हो चुका था और उसके साथ ऐसा हो भी रहा था,,,, घर लौटते समय रास्ते भर वह बगीचे वाली घटना के बारे में सोचता रहा,,, उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया है उसे कुछ सुझ ही नहीं रहा था,,, उसके लिए तो हालत बाद से बदतर होते जा रहे थे जिसके लिए वह खुद जिम्मेदार नहीं था बल्कि उसकी इस हालात के पीछे दूसरे ही जिम्मेदार थे एक तो उसका सबसे जिगरी दोस्त सोनू और फिर मुखिया की बीवी,,,, लेकिन मन ही मन उसे अच्छा भी लग रहा था वह इस बात से खुश था कि वह अपने आप को पूरी तरह से जवान महसूस कर रहा था,,,।,,

अब उसका किसी काम में मन नहीं लग रहा था लगता भी कैसे जवानी के केंद्र बिंदु के दर्शन जो उसे हो चुके थे यूं तो वह गया था मुखिया की बीवी के अंग के दर्शन करने लेकिन अनजाने में ही उसने मुखिया की बीवी की खूबसूरत लड़की के खूबसूरत अंग के दर्शन कर लिए जिसके बारे में उसने कल्पना भर किया था और कल्पना में भी उसका सही रूप जान नहीं पाया था लेकिन आज अपनी आंखों से वह उसे अंग को देख चुका था इसलिए तो उसकी आंखों की नींद दिल का करार पूरी तरह से गायब हो चुका था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, वह मन ही मन बहुत खुश भी था,,, की अच्छा हुआ वह ठीक समय पर मुखिया की बीवी से मिलने के लिए सही जगह पर पहुंच गया था,,, और यह भी अच्छा हुआ कि वहां पर उसकी दोनों जिद्दी लड़किया बेर खाने के लिए आ गई,,, जिसके चलते वह उन दोनों को बैर के बगीचे में ले गया और वहां पर,,, नीलू के पैर में कांटा लग गया और इस बात पर वह उसे कांटे को भी मन ही मन धन्यवाद दे रहा था जो नीलू के पैर में चुभ गया था जिसे निकालते समय सूरज को दुनिया की सबसे खूबसूरत और हसीन चीज देखने को मिली थी वह थी एक खूबसूरत लड़की की खूबसूरत बुर जिसे देखते हैं उसके बदन में सनसनी सी दौड़ने लगी थी,,, जिस पर नजर पडते ही वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था पल भर में ही उसकी दोनों टांगों के बीच की स्थिति बे लगाम हो चुकी थी,,,, उस पल को याद करके सूरज की हालत और खराब हो जाती थी,,,,।

खाना खाकर सूरज अपने बिस्तर पर लेट कर शालू और नीलू के बारे में ही सोच रहा था और जिस तरह से दोनों बेझिझक उससे बातें कर रही थी उन दोनों के व्यवहार को देखते हुए सूरज को ऐसा लग रहा था कि उन दोनों के साथ ही कुछ काम बन पाएगा,,, और उसे इस बात की खुशी थी कि अच्छा हुआ कि अपनी कमीज में बैर बांधकर उन दोनों को दे दिया था क्योंकि कमीज के बहाने वह दोनों से फिर से मिल सकता था और इसी मुलाकात को लेकर वह बेसब्र हुआ जा रहा था,,,, नीलू की खूबसूरत गुलाबी बुर के बारे में सोच कर ही उसका लंड खड़ा हो गया था और वह अपने लंड को पजामे के ऊपर से ही धीरे-धीरे दबा रहा था,,, और ऐसा करने में सूरज को बहुत मजा आ रहा था,,,,।

दूसरी तरफ शालू और नीलू दोनों एक ही कमरे में सोती थी,,, नीलू तो पूरी तरह से साहस थी लेकिन शालू असहज थी क्योंकि उसने सूरज की नजरों को देखी थी शालू भी पूरी तरह से जवान थी इसलिए लड़कों की नजरों को वह भी पहचानती थी भले ही थोड़ी स्वच्छंद किस्म की थी लेकिन फिर भी जवानी की दहलीज पर वह कदम रख चुकी थी इसलिए अपने बदन में होने वाले बदलाव को और दूसरों की नजरों को अच्छी तरह से जानती थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज नीलू की फ्रॉक में से उसकी बुर को देख रहा था जो कि एकदम साफ नजर आ रही थी और उसी के बारे में सोचकर उसके तन-बदन में भी अजीब सी उलझन होने लगती थी,,,, वह नीलू से इस बारे में बात करते हुए बोली,,,।

तू एकदम पागल है नीलू,,,

क्यों क्या हो गया,,,?

तुझे नहीं मालूम है क्या,,,!

मुझे मालूम होता तो पूछती,,,

अरे जब तेरे पैर में कांटा चुभा था,,

हां वह तो मालूम है,,,,

और वह सूरज तेरे पैर से कांटा निकालने के लिए तेरे पर को ऊपर उठाकर अपने कंधे तक ले गया था पता है तुझे,,,

हां मुझे मालूम है कि उसने मेरे पैर में से कांटा निकाला,,,

और भी कुछ मालूम है,,,(लालटेन की रोशनी में एक ही बिस्तर पर दोनों बहने लेट कर बातें कर रही थी और शालू हर एक सवाल को मुस्कुरा कर पूछ रही थी नीलू को तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार शालू इस तरह के सवाल क्यों कर रही है,,,)

नहीं तो मुझे और कुछ नहीं मालूम है क्योंकि मुझे उसे समय बहुत दर्द कर रहा था,,, और इस समय भी मुझे दर्द कर रहा है,,,

वह तो ठीक हो जाएगा लेकिन तूने सूरज की नजरों को देखी थी,,,

क्या चालू तू भी पहेलियां बुझा रही है ठीक-ठीक क्यों नहीं बताती,,,,

अरे बुद्धू जब वह तेरे पैर से कांटा निकालने के लिए पर को अपने कंधों तक उठाया था तब उसकी नजर तेरी फ्रॉक के अंदर थी,,,

क्या,,,,,,(एकदम से आश्चर्य में)

हां वह तेरी फ्रॉक के अंदर देख रहा था और तुझे पता है उसे तेरी बुर दिख रही थी,,,।

हाय दइया यह क्या कह रही है तू,,,,

एकदम सही कह रही हूं वह तेरी बुर देख रहा था और एकदम पागल हो गया था,,,, तुझे दर्द हो रहा था तुझे नहीं मानोगे लेकिन मैं उसके चेहरे को देखी थी एकदम लाल हो गया था वह एक टक तेरी बुर को देख रहा था जो कि एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,,,

बाप रे मुझे तो पता ही नहीं है,,,,

तुझे कैसे पता होगा तू तो अपनी बुर दिखाने में लगी हुई थी,,,,

धत्,,,,शालु,,,,,, तू कैसी बातें कर रही है भला मैं जानबूझकर उसे क्यों दिखाऊंगी,,,

जवान हो गई है खूबसूरत है इसीलिए दिखाएगी,,,(शालू एकदम इतराते हुए बोली हालांकि नीलू इस समय सर में से पानी पानी हुए जा रही थी उसे समय तो उसे नहीं मालूम था कि सूरज उसकी फ्रॉक में क्या देख रहा है क्योंकि वह तो अपने दर्द है से ही तड़प रही थी लेकिन शालू के बताने पर उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया था एक तरफ उसे गुस्सा आ रहा था लेकिन एक तरफ उसके मन में उत्सुकता थी और वह भी इस बात की की पहली बार कोई लड़का उसकी बुर को देखा था,,,,)

चल तू झूठ बोल रही है ऐसा नहीं हो सकता और वैसे भी टांग उठाने से बुर थोड़ी दिखाई देगी,,,

अच्छा यह बात है कि तुझे बताती हूं अच्छा हुआ कि तू अभी भी फ्रॉक पहनी है,,,, चल तू जैसा दोपहर में दर्द से दिल मिल रही है ठीक उसी तरह से बैठ जा,,,(शालू अपनी जगह पर उठकर बैठते हुए बोली)

अच्छा रुक जा,,,(और इतना कहने के साथ ही वह भी उठकर बैठ गई और दो तकिया को बिस्तर पर रखकर उसे पर अपनी गांड रखकर बैठ गई क्योंकि वह दोपहर में बड़े से पत्थर पर बैठी थी,,,,) अब ठीक है,,,

हा रुक में अभी बताती हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही शालू खुद सूरज की अवस्था में बैठ गई और उसकी टांग को धीरे से ऊपर की तरफ उठाने लगी और बोली,, ) तू थोड़ा सा पीछे की तरफ झुक जा जैसे दोपहर में झुकी हुई थी,,,

अब ठीक है,,,(शालू अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर पीछे की तरफ झुकते हुए बोली,)

हां अब ठीक है,,,, सूरज तेरी टांग को धीरे-धीरे उठाकर अपने कंधों तक ले गया था,,,(शालू भी नीलू की टांग को धीरे-धीरे उठाकर अपने कंधे तक ले गई थी और लगातार उसकी फ्रॉक के अंदर झांक रही थी जो की कंधों तक टांग उठने की वजह से उसकी प्रमुख जनों से ऊपर की तरफ सरकना शुरू हो गई, जिसका आभास नीलू को भी हो रहा था,,,, लालटेन की रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था और देखते ही देखते शालू की नजर जैसे ही,,,, नीलू की बुर पर गई वह एकदम से चहकते हुए बोली,, )

हाय हाय क्या नजारा है हाय दइया मैं तो मर गई सच में तेरी बर एकदम साफ दिख रही है जब मेरी यह हालत है तो सोच सूरज की क्या हालत होती होगी उसका तो लंड खड़ा हो गया था मैं एकदम साफ देखी थी जब वह अपनी जगह से उठकर खड़ा होकर जा रहा था,,,,। उसके पजामे में तंबू बना हुआ था,,,,।,,,

क्या कह रही है शालू तु,,,(अपनी बड़ी बहन के मुंह से लंड शब्द सुनकर नीलु मस्त होते हुए बोली,,,,,)

हां रे नीलू सूरज का लंड एकदम खड़ा हो गया था और वह भी तेरी बुर की वजह से,,,(इतना कहने के साथ ही शालू अपना हाथ उसकी फ्रॉक में डालकर उसकी बुर को अपनी उंगली से कुरेद दी जिसकी वजह से नीलू एकदम से चौंक गई,,,)

हाय दैया यह क्या कर रही है,,,,,(उत्तेजना के मारे एकदम गहरी सांस लेते हुए बोली)

कुछ नहीं रे देख रही हूं,,, तेरी बुर कितना पानी छोड़ रही है,,,

ऐसी बातें करेगी तो पानी तो छोड़ेगी ही,,,, क्या सच में सूरज को मेरी बुर दिख रही थी,,,

हा,रे में सच कह रही हूं,,,(अभी भी नीलू की टांग शालू के कंधे पर थे और वह नीलू की बुर को नजर भर कर देख रही थी) सूरज एकदम साफ-साफ तेरी बुर देख रहा था कसम से वह तो,,, न जाने कैसे सूरज अपने आप पर काबू कर गया वरना उसकी जगह कोई और होता है तो सच में तेरी बुर में अपना लंड डाल दिया होता,,,।

धत्,,, दीदी तुम बहुत हारामी हो गई हो इस तरह से कोई बात करता है क्या,,,?

अच्छा ऊपर से तो ऐसा कह रही है और अपने मन में यही सोच रही थी कि सच में वह डाल दिया होता तो मजा आता,,,,,,

ना बाबा ना मै ऐसा बिल्कुल भी नहीं सोच रही हूं,,,

अच्छा यह बात है तो फिर यह तेरी,,,(एक बार फिर से अपने हाथ को उसकी फ्रॉक में डालकर पूरी तरह से उसकी बुर को अपनी हथेली में दबोच कर) बुर क्यों पानी छोड़ रही है,,,

आहहहह दीदी,,,,(एकदम मस्ती से आहे भरते हुए अपनी गोल गोल गांज को ऊपर की तरफ उठाते हुए) क्या कर रही हो,,,,

क्यों बहुत मजा आ रहा है क्या,,,?

पता नहीं दीदी लेकिन न जाने क्या हो रहा है,,,,(नीलू इस तरह से गरम आहे भरते हुए और शालू भी पूरी उत्तेजना से अपनी हथेली में उसकी छोटी सी बुर को दबाते हुए मचल रही थी, , शालू इस तरह की हरकत को पहली बार कर रही थी दोनों ही इस तरह से पहली बार बातें करते हुए आनंद ले रहे थे वैसे तो इधर-उधर की वह दोनों बातें बहुत करती थी और इनमें इस तरह की भी बातें होती थी लेकिन आज पहली बार दोनों इस तरह की बातों को अपने बदन पर आजमा रहे थे और इसमें दोनों को ही धीरे-धीरे मजा आ रहा था,,,, शालू इस तरह से अपनी हथेली में नीलू की बुर को जोर-जोर से दबाते हुए बोली,,,)

क्या हो रहा है बताना,,,,

पता नहीं दीदी क्या हो रहा है मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है,,,(उत्तेजना के मारे नीलू अपनी हर एक बात को अटक-अटक कर ऐर गहरी सांस लेते हुए बोल रही थी,,,,)

तू एकदम जवान हो गई है,,,

तुम मुझसे बड़ी हो तुम भी तो जवान हो गई हो,,,

लेकिन तेरी बुर ज्यादा खूबसूरत है तभी तो सूरज देख रहा था अगर उसका बस चलता तो अपना खड़ा लंड तेरी बुर में डाल देता,,,

ओहहहह शालू ऐसी बातें मत कर तू अपनी आंखों से देखी है क्या लंड को,,,

नहीं रे अभी तक तो नहीं देखी लेकिन सूरज के पजामे में जिस तरह से आगे वाला भाग उठा हुआ था उसे देखकर तो मैं भी अचंभित हो गई थी कुछ ज्यादा ही बड़ा था पता नहीं कैसा होगा उसका,,,,

देख लेना चाहिए था ना दीदी,,,

तू अगर तैयार होती तो शायद देखा भी लेती,,,

मतलब मैं समझी नहीं,,,

मतलब कि अगर तू सूरज के लिए अपनी दोनों टांगें खोल देती तो शायद वह अपने लंड को अपने पजामे में से बाहर निकालता और मैं देख लेती,,,।

धत्,,, दीदी ऐसा कभी नहीं होगा,,,,(नीलू का इतना कहना था कि तभी शालू अपनी हरकत को आगे बढ़ते हुए अपनी एक उंगली को शालु की बुर में डाल दी और यह पहली बार था जब नीलू अपनी बुर में पतली सी उंगली का प्रवेश महसूस कर रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हो गई और अगले ही पल उसकी बुर से बदन रस का फवारा फूट पड़ा वह शालु की हरकत से और उसकी बातों से झड़ रही थी,,,,)

आहहहह आहहहहहह शालु,,,(अपनी उत्तेजना पर काबु ना कर सकने की स्थिति में वह शालू के हाथ को कस के पकड़ ली और अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठाकर झड़ना शुरू कर दी शालू की यह देखकर हैरान हो गई उसकी हथेली पल भर में ही उसकी मदन रस के फव्वारे से भीग गई,,,,)

हाय दइया नीलू यह तूने क्या करी तूने तो मेरे ऊपर ही मुत दी,,,,

आहहहहह आहहहहहह,,, मुझे नहीं मालूम कि मैं क्या की लेकिन सब कुछ अपने आप ही हो गया लेकिन अभी तो मुझे बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,,

चल रुक जा अभी मत करना तु सारा बिस्तर खराब कर देगी,,,, चल घर के पीछे चलते हैं वही में अपना हाथ भी धो लुंगी,,,

चल,,,(थोड़ी देर में अपने आप को दुरुस्त करके नीलू बिस्तर पर से नीचे उतरी और शालू भी बिस्तर से नीचे उतर गई और दोनों पेशाब करने के लिए अपने कमरे से बाहर निकल गए)
 
शालू अनजाने में ही अपनी उंगली से नीलू को झाड दी थी,,, नीलू को समझ में नहीं आ रहा था उसके बदन में यह सब क्या हो रहा है लेकिन उसे इतना आनंद आया था कि पूछो मत जिंदगी में ऐसा सुख उसने पहली बार प्राप्त की थी,, और इस पल का उसने पूरी तरह से फायदा उठाई थी वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,, जवानी से भरी हुई नीलु का यह पहला स्खलन था,,, जिसमें वह पूरी तरह से डूब चुकी थी,,,।





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झड़ने के बाद उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी जिसके चलते दोनों बहने अपने कमरे में से निकल कर बाहर आ गई थी,,, वैसे तो दोनों बहनें इस तरह से रात के समय अपने कमरे से बाहर निकलते नहीं थी लेकिन कभी-कभार इसी तरह से तेज पेशाब लगने की वजह से दोनों साथ में ही निकलती थी और अकेले निकलने में उन दोनों को डर लगता था,,, अपने कमरे में से बाहर निकालने के बाद दोनों बहने धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए आगे बढ़ रही थी,,, क्योंकि वह दोनों नहीं चाहती थी कि उनकी वजह से उनके मां और बाबूजी की नींद खराब हो,,,।

धीरे-धीरे कदम बढ़ाना बिल्कुल भी शोर मत मचाना वरना मा जाग जाएगी,,,(शालू दबे श्वर में नीलू को समझाते हुए बोली,,,)

ठीक है मुझे मत समझा लेकिन तेरी पायल शोर मचा रही है उसका क्या,,,,

हां तु सच कह रही है,,,(अपने पैरों की तरफ देखते हुए शालु बोली और धीरे से नीचे छप गई और अपने पैरों में से पायल को निकलने लगी,,,)

अरे तू यह क्या कर रही है,,,?





रुक तो सही,,,(और इतना कहने के साथ ही चालू अपने दोनों पैरों में से घुंघरू वाले पायल को निकाल कर अपने हाथ में ले ली और मुस्कुराते हुए बोली,,)

ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी,,, अब चल,,,

अरे अरे क्या कर रही है,,,(नीलू उसे रोकते हुए बोली,,)

क्यों क्या हुआ,,,?

अभी तो कुछ नहीं हुआ लेकिन अगर अंधेरे में या पायल कहीं खो गई तो बहुत कुछ हो जाएगा मां तुझे मार डालेगी,,,

हां यह तो तु ठीक कह रही है,,,

जा उधर रख दे,,,(नीलू उसे छोटे से रोशनदान की तरफ हाथ दिखाते हुए पूरी और चालू भी उसकी बात बातें भी तुरंत दोनों पायल को उसी में रख दी और फिर दोनों आगे बढ़ने लगे,,, दो कमरे को छोड़कर तीसरा कैमरा मुखिया और मुखिया की बीवी का था,,, वहां पर पहुंचते ही दोनों लड़कियों के कानों में अपनी मां के कमरे से खूसर फुसर और हंसने की आवाज आने लगी,,, जिसे सुनकर नीलू बोली,,,)

मां बाबु जी अभी भी जाग रहे हैं,,,

हा रे दोनो तो इतनी रात को भी जाग रहे हैं,,, पता नहीं दोनों क्या बातें कर रहे हैं और इतनी रात को हंस भी रहे हैं,,,,(इतना कहते हुए शालू दरवाजे और खिड़की की तरफ देखने लगी कहीं से भी अंदर देखने की जगह बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन अंदर लालटेन जल रही थी इसका पूरा आभास हो रहा था,,,,, शालू को इस तरह से टुकुर-टुकुर दरवाजे और खिड़कियों की तरफ देखते हुए पाकर नीलू बोली,,)

क्या देख रही है,,,?

अरे मैं देख रही हूं कि अंदर देखने की कहीं जगह दिख रही है मैं भी तो देखूं अंदर क्या हो रहा है,,,

पागल हो गई है क्या इस तरह से आधी रात को किसी के कमरे में झांका नहीं जाता,,,(नीलु उसे समझाते हुए बोली,,,)

अरे दूसरे के कमरे में कहां देखने की कोशिश कर रही हूं मैं तो मा बाबुजी के कमरे में देखने की कोशिश कर रही हूं,,,

चल रहने दे जल्दी से मुझे बड़े जोरों की पेशाब लगी है कहीं ऐसा ना हो कि यही छूट जाए,,,,

नाना ऐसा गजब मत करना,,, वरना सबको पता चल जाएगा कि नीतू आधी रात को कमरे के बाहर ही मुत देती है,,,,।

आहहहहह,,,,,(उन दोनों बातें कर रही थी कि तभी उसकी मां के हल्की सी चीख की आवाज सुनाई दी लेकिन साथ में हंसने की भी आवाज थी उन दोनों को ठीक से सुनाई नहीं दे रहा था कि वह क्या बोल रही थी लेकिन अभी तक केवल उसकी मां की ही आवाज आ रही थी उसके बाबूजी की आवाज बिल्कुल भी नहीं आ रही थी,,,, उस आवाज को सुनकर शालू बोली,,,)

मुखिया की बीवी की चुचिया पिता हुआ





पता नहीं अंदर क्या हो रहा है,,,!(शालू को इस बात का आभास था कि उसकी मां कमरे के अंदर चुदाई का खेल खेल रही है चुदवा रही है लेकिन वह खुले शब्दों में बोल नहीं पा रही थी इसीलिए वह देखने की कोशिश कर रही थी क्योंकि उसने भी आज तक चुदाई होते हुए अपनी आंख से कभी नहीं देखी थी लेकिन उसे देखने की उसके मन में जिज्ञासा बराबर बनी हुई थी लेकिन इस समय अपनी मां के कमरे में देख पाना उसके लिए नामुमकिन सा था क्योंकि ना तो दरवाजे में और ना ही खिड़की में कहीं भी थोड़ी सी जगह नजर नहीं आ रही थी जिससे वह कमरे के अंदर की दृश्य को देख सके उसे इस तरह से कड़ी देखकर नीलु फिर से बोली,,,)

तू चाल चालू वरना कहीं मां को पता चल गया कि हम दोनों कमरे के बाहर खड़े हैं तो गजब हो जाएगा,,,

चल अच्छा मुझे भी बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,(अपना मन मसोस कर शालू बोली फिर दोनों पेशाब करने के लिए आगे बढ़ गए,,,,।

दूसरी तरफ मुखिया के कमरे का वातावरण पूरी तरह से गर्म हो चुका था क्योंकि मुखिया की बीवी अपने बिस्तर पर नरम नरम गद्दे पर संपूर्ण नग्न अवस्था में अंगड़ाई ले रही थी और उसके साथ उसका पति नहीं बल्कि भोला था जो कि उसकी बड़ी-बड़ी चूची को पपाया की तरह दोनों हाथों से पकड़कर मुंह में डालकर पी रहा था और मुखिया की बीवी पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी,,,)

सहहहहह आहहहहहह मेरे राजा तू कितना अच्छा प्यार करता है रे,,,,।

ओहहहह मालकिन तुम्हारी चूचियां है बेइंतहा प्यार करने के लायक तभी तो मैं तुम्हारी चूचियों पर मर मिटा हूं। ,,(भोला तकरीबन 1 घंटे से मुखिया की बीवी के कमरे में उसके बिस्तर पर उसकी बीवी के साथ था लेकिन एक घंटे में यह पहला शब्द उसके मुंह से निकला था जिसे सुनकर मदहोश होते हुए मुखिया की बीवी बोली,,,)





ओहहहह भोले तुझे कितनी बार समझाऊं कि मैं दुनिया के सामने तेरे लिए मालकिन होने की अकेले में तो मुझे मेरा नाम लेकर ही बोल कर शोभा,,,

ओहहहह शोभा रानी,,,, तुम बहुत अच्छी हो तुमने तो मुझे पागल कर दिया है तुम्हारी चूचियां पीने में मुझे बहुत मजा आता है बस इसी तरह से तुम मुझे अपना दूध पिलाया करो,,,

तेरे लिए ही तो है रै,,,,सहहहह आहहहहह आहहहहह बहुत मजा आ रहा है भोला जोर जोर से दबा आहहहहहह,,,(मुखिया की बीवी की बात सुनते ही भोला और जोर-जोर से उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया,,,,,, तकरीबन 10 मिनट तक शालू और नीलू अपनी मां के कमरे के बाहर खड़ी थी लेकिन इस बीच उसे केवल अपनी मां की ही आवाज सुनाई दे रही थी अगर अंदर से आ रही मर्द की आवाज भी उन दोनों के कान में पड़ जाती तो शायद आज उन दोनों के हाथों अपनी ही मा का भांडा फूट जाता,,, इसीलिए तो मुखिया की बीवी किस्मत की भी बड़ी तेज थी,,,,।

भोला भी पूरी तरह से नग्न अवस्था में बिस्तर पर लेटा हुआ था और मुखिया की बीवी के हाथ में भोला का मोटा तगड़ा काला लंड था जिसे वह जोर-जोर से हिला रही थी,,, और भोला पर प्यार बरसाते हुए बोली,,,।

मुखिया की बीवी और भोला





शालू के पिताजी के आंख में धूल झोंक कर तु कैसे आ गया रे मुझे तो लग रहा था कि तू आज नहीं आ पाएगा,,,

तुम बुलाओ और मैं ना आऊं मेरी रानी कभी ऐसा हो सकता है क्या,,,,

लेकिन तू आया कैसे वह तो खाना खाकर कमरे में ही आ रहे थे,,,

बात तो सही है शोभा लेकिन तुम्हारा पति खाना खाने के बाद थोड़ा पीने का भी शौकीन हो गया है जो कि मेरी ही बदलती और इसीलिए तुम्हें तुम्हारे पति को पिलाने के लिए मेहमान घर में ले गया और वहां पर कुछ ज्यादा ही शराब पिला कर सुला दिया और उसके बाद में तुम्हारे कमरे में आ गया,,,।

ओहहहह मेरे राजा बहुत चालाक हो गया है तु,,,(भोला के खड़े लंड को अपनी मुट्ठी में जोर से भींचते हुए वह बोली। ,)





यह सब तुमसे ही सीखा हूं मेरी,,, अब जल्दी करो मुझे रहा नहीं जा रहा है अपनी बुर की मलाई मुझे खिला दो,,,,।

ओहह राजा इतना कहके तूने तो मुझे पागल कर दिया है,,, रुक अभी तुझे मलाई खिलाती हूं,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपनी जगह से उठकर बिस्तर पर बैठ गई और फिर एक टक भोला के मोटे तगड़े लंड की तरफ देखते हुए उसे एक हाथ से पकड़े हुए ही अपने लिए जगह बनाने लगी और थोड़ी देर में वह भोला के ऊपर चढ़ गई वह अपनी गोल-गोल भारी पर काम गांड को भोले के चेहरे पर रख दी और खुद आगे की तरफ झुक गई देखते ही देखते भोला मुखिया की बीवी की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पड़कर उसे लगभग फैलाते हुए अपनी जीभ को बाहर निकाला और फिर अपनी जीभ को मुखिया की बीवी की बुर में डाल दिया और से चाटना शुरू कर दिया और मुखिया की बीवी एकदम मस्त होकर अपनी भारी भरकम गांड को गोल-गोल भोला के चेहरे पर घूमाते हुए खुद उसके मोटे तगड़े लंड को मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दी,,, अपनी मालकिन की कामुक हरकत को देखकर भोला एकदम से मदहोश हो गया और अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा दिया यह उसकी उत्तेजना की निशानी थी कि वह अपनी उत्तेजना को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था दूसरी तरफ वह अपनी मालकिन की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हथेली में दबोच कर लप लप करके उसकी बुर का रस चाटना शुरू कर दिया देखते ही देखते दोनों पूरी तरह से मदहोश होने लगे,,,,,।

मुखिया की बीवी तो जैसे एकदम से पागल हो गई वह अपनी गोल गोल भारी भरकम गांड को बड़ी तेजी से भोला के चेहरे पर पटकने शुरू कर दी भोला को भी अपनी मालकिन का यह अंदाज बहुत अच्छा लगता था भोला भी अपनी हरकत को बढ़ाते हुए अपनी दो उंगली को एक साथ उसकी गुलाबी बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करके उसे और मजा देता था,,,। भोला को अच्छी तरह से मालूम था कि मुखिया की बीवी कब चुदवाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाती है,,, लोहा गरम होने के बाद ही भोला हथोड़ा मारता था,, और मुखिया के बीवी का इस तरह से मदहोश होकर भोला के चेहरे पर अपनी गांड पटकन इस बात का इशारा करता था कि लोहा गरम हो चुका है,,, और इसी मौके की ताक में,,, जल्दबाजी दिखाते हुए भोला,,, तुरंत मुखिया की बीवी की मांसल कमर को दोनों हाथों से पकड़कर उसे पलट दिया और खूब जग बदलते हुए उसके ऊपर आ गया उसकी दोनों टांगों को खोलकर उसकी कमर को पड़कर उसे अपनी तरफ खींचा और उसकी भारी भरकम गांड को अपनी जांघों पर चढ़ा लिया और फिर अपने आलू बुखारा जैसे मोटे सुपाड़े को मुखिया की बीवी की गुलाबी बुर पर रखकर जोरदार धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड मुखिया की बीवी की बुर में समा गया,,,, और एक जोरदार चीख मुखिया की बीवी के मुंह से निकली और फिर भोला चुदाई शुरू कर दिया,,,।

दूसरी तरफ दोनों बहने धीरे-धीरे घर के पीछे पहुंच चुकी थी और उन दोनों की सोच के मुताबिक बाहर अंधेरा नहीं बल्कि चांदनी रात थी जिसकी वजह से चांदनी पूरे वातावरण में छींटकी हुई थी और सब कुछ एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,,, वह दोनों घर के पीछे घनी झाड़ियां के पास पहुंच चुकी थी यहां पर किसी के द्वारा देखे जाने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि घर के पीछे चारों तरफ दूर-दूर तक खेती ही खेत थे घर एक भी नहीं थे इसलिए दोनों निश्चिंत थे नीलू को तो बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए वह तुरंत अपने फ्रॉक को उठाकर वहीं पर बैठ गई और पेशाब करना शुरू कर दी चांदनी रात में उसकी गोरी गोरी गांड एकदम चमक रही थी जिसे देख कर खुद शालू के मुंह में पानी आ रहा था उसकी गोल-गोल गांड को देखकर शालू बोली,,,।)

चांदनी रात में तो तेरी गांड कितनी चमक रही है रे,,,

तेरी भी तो चमकती है जरा अपनी सलवार उतार तो सही,,,

लेकिन तेरी कुछ ज्यादा ही चमकता है और तेरी बुर में से देख कितनी सीट की आवाज आ रही है चारों तरफ गूंज रही है,,,।

धत् कैसी बातें करती है तू,,,(शालू की बात सुनकर नीलू शर्मा गई थी और उसकी तरह शालु भी अपनी सलवार की डोरी खोल कर पेशाब करने के लिए बैठ गई थी दोनों बहने एकदम पास में बैठी हुई थी सालों से रहने गया तो अपना हाथ नीलू की गांड पर रख दी और बोली,,,)

आहहहहह,,,, कितनी मुलायम है रे तेरी गांड एकदम मखमल का कपड़ा,,,,

हाए दीदी हाथ हटाओ ना गुदगुदी हो रही है,,,,

उंगली डाली थी तब गुदगुदी नहीं हो रही थी,,,

बहुत जरूरी हो रही थी तभी तो जोरों की पेशाब लग गई,,,।

(दोनों बहने अपनी गांड खोलकर पेशाब करने बैठी हुई थी और इस खूबसूरत मादकता भरे नजारे को देखने वाला इस समय वहां पर मर्द जात का नामोनिशान नहीं था उसकी खूबसूरत गांड को केवल प्रकृति देख रही थी पेड़ पौधे देख रहे थे आसमान में निकला हुआ चांद सितारे देख रहे थे अगर ऐसी हालत में किसी मर्द की नजर दोनों बहनों पर पड़ जाती तो बे कहें दोनों की बुर में उस मर्द का लंड घुसा हुआ होता,,, थोड़ी ही देर में पेशाब करने के बाद दोनों बहने अपने कपड़ों को दुरुस्त करके घर के आगे वाले भाग में आ गए और दोनों बड़ी-बड़ी से हेड पंप चला कर अपना हाथ मुंह धो कर वापस अपने कमरे की तरफ आगे बढ़ने लगे,,, अपनी मां के कमरे के पास से गुजरते हुए दोनों को किसी भी तरह की आवाज सुनाई नहीं दे रही थी तो वह दोनों समझ गए की उसकी मां और बाबूजी सो गए हैं लेकिन उन दोनों को कहां मालूम था कि अंदर चुदाई का खेल चालू था और इस समय उसकी मां की बुर में उसके बाबूजी का नहीं बल्कि उनके नौकर भोला का लंड घुसा हुआ था,,, दोनों बहने अपने कमरे में जा चुकी थी,,,, और इस समय उन दोनों की मां भोला के ऊपर चढ़ी हुई थी और भोले का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में अंदर तक घुसा हुआ था और वह खुद अपनी गांड को उसके लंड पर पटक रही थी,,,।

जवानी की आग में तड़पती हुई सुनैना





एक तरफ भोला मुखिया की बीवी की जवानी में पूरी तरह से डूबा हुआ था और दूसरी तरफ उसकी जवानी से लदी हुई बीवी बिस्तर पर करवटें बदल रही थी,,, सुनैना वैसे तो बेहद संस्कारी औरत थी और मर्यादा में रहने वाली औरत थी लेकिन जिस तरह से सभी औरतों को पेट की भूख के साथ-साथ बदन की भी भूख सताती है इस तरह से सुनैना की भी हालत थी सुनैना को भी अपने मर्द की जरूरत थी उसके मोटे तगड़े लंड को सुनना भी अपनी बुर के अंदर महसूस करना चाहती थी चुदवाना चाहती थी,,,,, लेकिन वह मजबूर हो चुकी थी अपने पति की आदत से खाना खाने के बाद से ही वह मुखिया के खेत पर काम करने का बहाना बनाकर घर से निकल गया था सुनैना को तो ऐसा ही लग रहा था कि उसका पति वाकई में मुखिया के खेत में काम कर रहा होगा लेकिन उसे क्या मालूम था कि इस समय उसका पति किसी और के खेत को जोत रहा था जो कि उसके खुद का खेत सूख रहा था,,,।

अपने पति की राह देखती हुई सुनैना





सुनैना सोने से पहले अपनी साड़ी को उतार कर रख दी थी और इस समय केवल पेटिकोट और ब्लाउज में ही थी और इस अवस्था में वह पूरी तरह से जवानी से गदराई हुई दिखाई दे रही थी,,, लालटेन की पीली रोशनी में उसका खूबसूरत गोरा बदन सोने की तरह चमक रहा था उसके छाती की शोभा बढ़ा रहे हैं उसके दोनों चूचियां दशहरे आम की तरह एकदम खेल रहे थे मांसल चिकनी कमर और पेट के बीच में उसकी नाभि एकदम गहरी थी जो कि उसकी छोटी सी बुर की तरह नजर आती थी,,,, सुनैना से रहा नहीं जा रहा था बार-बार वह अपने पति का रास्ता देखते हुए वह कमरे के दरवाजे पर खड़ी होकर उसकी राह देखती रहती थी लेकिन अफसोस दूर-दूर तक उसका पति कहीं नजर नहीं आ रहा था चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था और कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी वह कुछ देर तक दरवाजे पर इस तरह से बैठकर अपने पति का इंतजार करती रही लेकिन तक हर करूंगा वापस अपने कमरे में आ गई और बिस्तर पर करवट बदलते हुए कब उसे नींद आ गई उसे भी पता नहीं चला,,,।



 
एक तरफ जहां जवान हो चुके सूरज की हालत पहली बार नीलू की या युं कहलो की पहली बार किसी औरत की नंगी बुर के दर्शन करके उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी वहीं दूसरी तरफ यह जानकर कि सूरज नीलू की बुर को नजर भर कर देख रहा था इस बात को जानते ही नीलू पूरी तरह से उत्तेजना से सिहर उठी थी,,, उसकी जानकारी में पहली बार किसी जवान लड़के ने उसकी बुर के दर्शन किए थे इस बात को जानते ही नीलू पूरी तरह से मचल उठी थी और इसका पूरा फायदा उठाते हुए पूरी तरह से जवान हो उठी शालू अपनी बहन नीलू की बुर को अपनी मुट्ठी में पूरी तरह से भींच ली थी,,, और फिर अपनी एक उंगली को उसकी बुर में डालकर उसे झड़ने पर मजबूर कर दी थी,,, और फिर दोनों बहने पेशाब करने के लिए घर के पीछे की तरफ निकल गई थी घर से निकलते समय उन्हें अपनी मां के कमरे में से खुसर फुसर की आवाज सुनाई दे रही थी उन दोनों को ऐसा ही लग रहा था कि उनकी मां और बाबूजी होंगे लेकिन उन्हें कहा मालूम था कि उनके पीठ पीछे उनकी मां कितना रंगरेलियां मनाती है और वह भी अपने ही नौकर भोले के साथ जो की इत्तेफाक से सूरज का ही बाप था ,, इस बात से अनजान दोनों बहने पेशाब करके अपने कमरे में वापस लौट आई थी लेकिन भोला रात भर नीलू और शालू दोनों की मां की जमकर चुदाई करता रहा,,,।





दूसरी तरफ सूरज की भी हालत खराब हो चुकी थी क्योंकि मर्दों की उत्तेजना बढ़ाने वाली औरतों की उत्तेजना के केंद्र बिंदु को जो उसने अपनी आंखों से देख लिया था,,। और उसी को देखने के बाद में पूरी तरह से पागल हो चुका था मदहोश हो चुका था सोते जागते उठते बैठते उसकी आंखों के सामने केवल नीलू की कचोरी जैसी फुली हुई कोरी बुर दिखाई देती थी,,, जिसे याद करते ही उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो जाता था उसे हमेशा लगने लगा था कि जैसे वह पहले वाला सूरज नहीं रह गया था क्योंकि उसके दिलों दिमाग पर अब हमेशा औरतों की ही यादें उनके अंग उनका चलना उनका बोलना उनका हंसना उनके अंगों का मरोड़ उठाव बस यही घूमता रहता था,,,। और वैसे भी इसमें उसका कोई दोष नहीं था क्योंकि वह उम्र के ऐसे दौर से गुजर रहा था जहां पर औरतों के प्रति जवान खूबसूरत लड़कियों के प्रति आकर्षण होना लाजिमी था और इससे दुनिया का कोई भी मर्द नहीं बच पाया था और उसे अच्छा भी लग रहा था,,,।





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एक तरफ भोला जहां मुखिया की बीवी के साथ अपनी जवानी की प्यास बुझा रहा था वहीं दूसरी तरफ अपनी बीवी के साथ नाइंसाफी कर रहा था,, जहां बोला कि हर एक रात मुखिया की बीवी के बिस्तर पर गुजरती थी वहीं दूसरी तरफ उसकी बीवी बिस्तर पर केवल करवट बदलकर अंगड़ाई लेकर अपनी रात गुजार रही थी,, कभी-कभी तो उसे अपने पति पर बहुत गुस्सा आता था क्योंकि वह रात भर प्यासी रह जाती थी,,, इसलिए एक दिन जब दोपहर में भोला खाना खा रहा था,,, उसकी बीवी सुनैना उसे गुस्से में खाना परोस रही थी,,, यह देख कर भोला बोला,,।





यह तुझे हो क्या गया है रे सुनैना इस तरह से कोई खाना परोसता है क्या और वह भी अपने ही पति को,,,

कोई परोसता हो कि ना परोसता हो लेकिन मैं तो तुम्हें इसी तरह से खाना परोसूंगी,,,

अरे वह क्यों भला,,,,(खाने की थाली को अपने हाथों से अपनी तरफ खींचते हुए)

मैं कौन हूं तुम्हारी,,,, क्या लगती हूं तुम्हारी,,,(गुस्से से थाली में रोटी रखते हुए)

अरे आज तुझे हो क्या गया है,,,

मुझे पूछने की जगह अपने आप से पूछो जो दिन रात मुखिया के खेत में रहते हो मुखिया की बीवी जो कहती है वह करते हो,,,(मुखिया की बीवी का जिक्र आते ही भोले के माथे पर पसीना उपसने लगा,,,)





यह क्या कह रही है तू,,,, वह लोग तो हमारे मालिक है उनका काम करते हैं तभी तो पैसा मिलता है,,,

अरे और भी तो मजदूर है जो शाम होते ही अपने घर चले आते हैं लेकिन तुम क्यों नहीं आते मुझे तो लगता है की मुखिया की बीवी के साथ जरूर तुम्हारा कुछ चल रहा है,,,(गुस्से में अपनी जगह से उठकर लोटा में पानी भरने लगी और भोले अपनी बीवी के मुंह से मुखिया की बीवी के साथ चक्कर वाली बात को सुनकर एकदम हैरान हो गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी बीवी को पता तो नहीं चल गया है लेकिन फिर भी बात को बदलते हुए वह बोला,,,)

अरे भाग्यवान जरा अकल से काम ले कहां मैं और कहां वह जमीदार की बीवी वह तो अपने पास भटकने भी ना दे,,,,

तो रात को वहां क्या करते रहते हो,,,?





खेतों में पानी देते रहता हूं और क्या करते रहता हूं,,,, आखिरकार में मजदूर हूं मजदूरी करने पर ही पैसे मिलेंगे ना कि बेवजह कोई पैसे दे देगा वह तो अच्छे हैं,,, मुखिया की मुझे ही सबसे पहले बुलाते हैं वरना तू जो कह रही है वह सच है कि और भी मजदूर हैं गांव में लेकिन मेरा काम मलिक को पसंद है और इसी से अपना घर भी चलता है,,,,(भोला बड़े चालाकी से अपनी मजबूरी की दुहाई देकर सफाई दे रहा था जिसका प्रभाव सुनैना पर भी पड़ रहा था लेकिन फिर भी वह गुस्से में बोली,,,)

पति का फर्ज होता है घर चलाना लेकिन पति का और भी कोई फर्ज होता है कि नहीं अपनी बीवी के साथ रात को मैं हमेशा करवट बदलते हुए तुम्हारा इंतजार में कब सो जाती हो मुझे पता ही नहीं चलता जब तक जागती हूं तब तक रास्ता देखती रहती हूं कि अब आओगे अब आओगे,,,, लेकिन नतीजा कोई नहीं निकलता मुझे तो शक होता है कि कहीं दूसरी औरतों के साथ चक्कर तो नहीं है तुम्हारा,,,।





फिर वही बकवास करने लगी,,,,(निवाला मुंह में डालते हुए बोला लेकिन केला खाया भोला पूरी तरह से अनुभव से भरा हुआ था औरतों के मामले में वह सब कुछ जानता था और उसे समझते देर नहीं लगी कि उसकी बीवी किस लिए इतनी गुस्से में है क्योंकि वाकई में बहुत दिन हो गए थे वह अपनी बीवी को शरीर सुख नहीं दिया था उसकी जमकर चुदाई नहीं किया था और इसी का दुख उसकी बीवी के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था,,,, उसे इस बात का भी एहसास हो रहा था की मुखिया की बीवी के मुंह में वह अपनी बीवी को सुख देना भूल गया था जो की जरूरी भी था अगर उसे अपने मुखिया की बीवी के चक्कर को एक राज की तरह रखना है तो उसे अपनी बीवी के साथ भी संबंध पहले की तरह रखना होगा ताकि उसकी बीवी को किसी भी प्रकार का शक ना हो वर्ना सारा मामला बिगड सकता था,,,। इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

मैं जानता हूं तू किस लिए नाराज है चुदवाने के लिए,,,

(भोला एकदम खुले शब्दों में बोला तो सुनैना एकदम से शर्मा गई,,, और गुस्से में बोली,,,)

पागल हो गए हो क्या मैं ऐसा कब कही,,,,(सुनैना जानबूझकर अपना बचाव करते हुए बोल रही थी क्योंकि भले ही वह अपने पति से चुदवाने के लिए नाराज थी लेकिन सुनैना भी एकदम संस्कारी औरत थी और इस तरह के खुले शब्दों उसे सिर्फ रात को हम बिस्तर होते समय ही अच्छे लगते थे ईस तरह दोपहर में नहीं,,,)

अरे तुम्हारे कहने का मतलब तो यही था,,,





मेरे कहने का मतलब यह बिल्कुल भी नहीं था मैं यह चाहती हु कि तुम रात को मेरे साथ रहो बस,,,

अरे मेरी रानी ऐसा ही होगा बस कुछ दिन की बात और है लेकिन मैं सारी कसर दिन में ही निकाल दूंगा,,,

रहने दो कोई जरूरत नहीं है,,,,(झूठ-मूठ का मुंह बनाते हुए सुनैना बोली,,,)

नहीं नहीं मैं सच कह रहा हूं मैं जानता हूं कि मैं तुम्हारा कसूरवार हूं लेकिन क्या कर सकता हूं,,, घर चलाने के लिए घर से बाहर निकलना ही पड़ता है,,,,।

(भोला अपनी चालकी भरी बातों में अपनी बीवी को पूरी तरह से बहला लिया था,,, और उसकी बीवी को पूरा विश्वास भी हो गया था कि उसका पति झूठ नहीं बोल रहा था कामकाज में ही उलझने के कारण वह उसके साथ समय नहीं बिता पा रहा था इसलिए उसके मन से गिला शिकवा दूर हो चुका था भोला खाना भी खा चुका था और इस समय वह अपनी बीवी की प्यास बुझाने के बारे में सोच रहा था क्योंकि रात को उसका रुकना संभव नहीं था क्योंकि रात को उसे फिर से मुखिया की बीवी के पास जाना था,,,, सुनैना झूठे बर्तन लेकर घर के कोने में धोने के लिए रखने लगी और उसके झुकने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी गांड एकदम से उभर आई जो कि कई हुई साड़ी में और ज्यादा बड़ी लग रही थी जिस पर नजर पडते ही भोला की धोती में हलचल होने लगी और यही मौका उसे ठीक भी लग रहा था वह तुरंत अपनी बीवी के पास पहुंचकर उसे पीछे से अपनी बाहों में जाकर उसे उठा दिया,,,)





अरे अरे छोड़ो यह क्या कर रहे हो,,,, कोई देख लेगा,,,(वह समझ गई थी कि उसका पति चुदवासा हो गया है)

कोई नहीं देखेगा मेरी रानी बच्चे तो बाहर है,,,

(इतना कहते हुए वह अपनी बीवी को गोद में उठाए हुए ही अपने कमरे में नहीं बल्कि जहां आलू प्याज राशन रखा रहता है उसे कमरे में ले जाने लगा,,, यह देखकर वह बोली)

अरे यहां कहां ले जा रहे हो,,,?

जहां पर ठीक रहेगा अपने कमरे में ले जाऊंगा तो अगर कोई आ गया तो सिद्ध कमरे की तरफ ही आएगा और यहां पर किसी को शक भी नहीं होगा,,,

हाय दैया तुम तो एकदम उतावले हो गए हो,,,,

क्या करूं मेरी रानी,, तूने मेरी धोती में सोए हुए शेर को जगा दी है,,, उसका भुगतान तो तुझे करना ही होगा,,,(और ऐसा कहते हुए अपनी बीवी को उठाए हुए ही वह दरवाजे के पास पहुंच गया और खुद अपनी बीवी से दरवाजा खोलने के लिए बोला जो की सुनैना भी अपने पति की हालत को देखकर चुदवासी हो चुकी थी उसकी भी बुर पानी छोड़ रही थी,,,, वह भी जल्दबाजी दिखाते हुए खुद अपने हाथों से दरवाजा खोल दी,,,, और भोला अपनी बीवी को अनाज वाले कमरे में लेकर घुस गया यहां पर वह अपनी बीवी को जमीन पर लेट नहीं सकता था क्योंकि चारों तरफ आलू प्याज और सब्जियां रखी हुई थी गेहूं रखे हुए थे चावल रखे हुए थे,,,, सरसों रखा हुआ था नीचे बिल्कुल भी जगह नहीं थी,,,, इसलिए वह अपनी बीवी को गोद में से नीचे उतरते ही तुरंत उसे अपनी बाहों में भरकर उसके गर्दन पर चुंबनों की बारिश कर दिया,,,)

सहहहहह आहहहहहह,,,(जो भी करना मेरे राजा जल्दी करना,,, अपने पति की हरकत से उत्तेजित स्वर में सुनैना बोली)

मैं बिल्कुल भी देर नहीं करूंगा मेरी रानी,,,(और इतना कहने के साथ ही अपनी बीवी की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबोचते हुए वह जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया,,, भोला का हाथ खेतों में काम कर करके बहुत ज्यादा मजबूत हो गया था इसलिए उसका इस तरह से ब्लाउज के ऊपर से चूचियों को दबाना सुनैना के लिए असहनीय तो था ही लेकिन उसे मजा भी बहुत आ रहा था,,,, और पल भर में उसके मुंह से सिसकारी की आवाज निकालना शुरू हो गई थी,,,, बिल्कुल भी देर ना करते हुए भोला अपनी औरत के ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू कर दिया और देखते-देखते वह एक झटके में ही अपने बीवी के ब्लाउज के सारे बटन को खोलकर उसकी खरबूजे जैसी चूचियों को बाहर निकाल दिया और उसे जोर-जोर से दबाते हुए बोला,,,)

ओहहहह ऐसा लग रहा है कि जैसे बहुत दिनों बाद मैं तुम्हारी चूचियों को देख रहा हूं,,,,

काम के ही चक्कर में पड़े रहोगे तो ऐसा ही लगेगा,,,

अब ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा मेरी रानी अगर मुझे रात को खेतों में जाना पड़ा तो दिन में ही तुम्हारी चुदाई कर दूंगा,,, ताकि रात को बिस्तर पर तुम्हें करवट ना बदलना पड़े,,,

ओहहहह मेरे राजा,,,,आहहहह,,,(एकदम से सुनैना के मुंह से सिसकारी की आवाज फूट पड़ी जब भोला उसकी चूची को मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया,,,, दोनों को बहुत मजा आ रहा था वैसे तो बोला अक्सर इस तरह का आनंद मुखिया की बीवी से लेट ही रहता था लेकिन सुनैना के लिए तो बहुत दिन गुजर गए थे इस तरह के सुख की कल्पना किए हुए इसलिए वह मदहोश हुए जा रही थी मस्त हुए जा रही थी,,,, जहां एक तरफ भोला,,, अपनी बीवी की चूची को मुंह में लेकर जी भर कर पी रहा था वहीं दूसरी तरफ दूसरे हाथ से उसकी साड़ी को खोल रहा था दोपहर में ही भला उसे नंगी करके चोदने का मन बना दिया था वैसे भी औरतों को छोड़ने का मजा तभी आता है जब उनके बदन पर एक भी वस्त्र नहीं होता और इस बात को भोला भली भांति जानता था,,,।

सुनैना भी अपने पति को कपड़े उतारने से मन नहीं कर रही थी क्योंकि उसे भी मालूम था कपड़े उतारने के बाद ही जीवन का असली सुख प्राप्त होता है और देखते-देखते भोला उसकी साड़ी को उतार कर वही नीचे रख दिया और फिर उसकी पेटिकोट की डोरी को एक झटके से खींचकर पेटिकोट को भी ढीली कर दिया लेकिन अभी तक पेटिकोट उसकी कमर में फंसी हुई थी क्योंकि वह कमर पर पूरी तरह से कसी थी जिसे भोला अपनी उंगली के सहारे से कमर पर कई हुई पेटीकोट को ढीली कर दिया और उसे उसी अवस्था में छोड़ दिया और किसी नाटक के परदे की तरह सुनैना का पेटीकोट उसके कदमों में जा गिरा और वह पूरी तरह से नंगी हो गई,,,,।

भोला भी अपने कपड़े उतारने में बिल्कुल भी देरी नहीं किया और अगले ही पल वह भी पूरी तरह से नंगा हो गया उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था,,, नीचे जमीन पर लेटना मुनासिब नहीं था इसलिए सुनैना बोली,,,।

यहां कैसे करोगे नीचे तो सब सब्जियां रखी हुई है,,,

चिंता मत करो मेरी रानी आज तुम्हारी खड़े-खड़े लूंगा,,, बस मेरी तरफ गांड करके झुक जाओ,,,,।

(अपने पति की बात सुनकर सुनैना के होठों पर मुस्कान तैरने लगी,,, वह भी बहुत उतावली थी इसलिए अपने पति की बात मानते हुए तुरंत सामने की दीवार पर हाथ रखकर झुक गई और अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हवा में लहराने लगी,,,, अनाज के कमरे में पति-पत्नी दोनों लगे हुए थे और ऐसे में सूरज आज जल्दी घर पर आ गया था,,,, और देखते ही देखते वह रसोई घर की तरफ आ चुका था,,, वह खाना निकालने के लिए अपनी मां को ढूंढ रहा था लेकिन उसे उसकी मां कहीं नजर नहीं आ रही थी इसलिए वह इधर-उधर सब जगह ढूंढ रहा था थक हार कर वह वहीं पर बैठ गया उसे लगा कि उसकी मां कहीं पड़ोस में गई होगी वह अपने लिए खुद खाना निकालने के बारे में सोच ही रहा था कि तभी उसे आवाज सुनाई दी जो की सुनैना की थी और वह भी थोड़ा दर्द भरा हुआ था उसकी आवाज में,,,,।

आहहहहह,,,,,

(इस तरह की आवाज को सुनकर सूरज एकदम से चौंक गया और आवाज वाली दिशा में देखने लगा वह आवाज अनाज वाले कमरे से आ रही थी इतना तो उसे समझ में आ गया था लेकिन किसकी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था क्योंकि वह इस तरह की आवाज पहली बार सुन रहा था वह कुछ देर तक उसे कमरे की तरफ देखता रहा,,,, वहां से इसी तरह की आवाज आ रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा और देखते ही देखे उसे कमरे के दरवाजे तक पहुंच गया दरवाजा लकड़ी का बना हुआ था इसलिए जगह-जगह छेद था और वहां से अंदर देखना कोई बड़ी बात नहीं थी सब कुछ साफ दिखाई देता अगर सूरज दरवाजे के छेद से अंदर देखने की कोशिश करता तो लेकिन वह कुछ देर तक खड़ा रहा तभी उसके कानों में जो आवाज आई उसे सुनकर एकदम से चौंक गया,,, क्योंकि वह आवाज उसकी मां की थी और वह अपनी मां की आवाज को अच्छी तरह से पहचानता था,,,।

आहहह क्या कर रहे हैं थोड़ा सा थूक लगाकर डालो ना,,,,

(इतना सुनते ही उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी क्योंकि उसे समझ में आ गया कि अंदर क्या हो रहा है यह उसके जीवन का पहला मौका था जब वह अपनी मां और अपने बाबूजी को इस तरह का गंदा खेल खेलता हुआ देखने जा रहा था हालांकि अभी तक उसके पिताजी की आवाज उसे सुनाई नहीं दी थी लेकिन यह भी कसर पूरी हो गई थी उसके कानों में दूसरी आवाज उसके पिताजी की थी)

तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे पहली बार चुदवाने जा रही हो दो बच्चों की मन हो गई हो लेकिन फिर भी ऐसा नखरा करती हो जैसे आज ही सुहागरात हो,,,

क्या करूं दर्द करता है जब सुखा सुखा डालते हो तो,,,

(दोनों की बातचीत सुनकर सूरज की तो हालात पूरी तरह से खराब हो गई उसकी आंखों के सामने अंधेरा जाने लगा वह कभी सोच नहीं सकता था कि वह अपने मां और पिताजी के बीच के संवाद को इस तरह से सुन पाएगा,,, उसके दिल की धड़कन एकदम से बढ़ चुकी थी अब उसकी उत्सुकता अपनी मां और बाबूजी को चुदाई करते हुए देखने के लिए बढ़ती जा रही थी और वह अपने मन को बिल्कुल भी समझ नहीं सकता था कि ऐसा करना उचित नहीं है,,, दरवाजे की तरफ वह नजर गड़ाए हुए था लेकिन दरवाजे के पीछे दरवाजे के अंदर उसे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था और उसे देखने के लिए उसे थोड़ी हिम्मत जुटाना जरूरी था लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, लेकिन तभी उसके कानों में उसकी मां की शिसकारी की आवाज सुनाई देने लगी,,,)

सहहहहह आहहहहलआहहहहह ऊममममम थोड़ा धीरे करो मेरे राजा,,,आहहहहह आहहहहहह,,,।

(इस आवाज को सुनकर तो उसके होश उड़ गए उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया और वह अपने आप को बिल्कुल भी नहीं रोक सकता था इस तरह के दृश्य को देखने के लिए इसलिए वह धीरे से अपनी कम को आगे बढ़ाया और बड़े संभाल के दरवाजे की दरार में अपनी आंख लगा दिया और अंदर की तरफ देखने लगा अंदर का दृश्य थोड़ी मस्सकत करने के बाद एकदम साफ होने लगा उसे साफ दिखाई देने लगा,,,, और अंदर का जो नजर उसकी आंखों ने देखा उसे देखकर उसकी आंखें एकदम से चौंधिया गई उसने इस तरह की दृश्य की कभी कल्पना नहीं किया था,,,।

लेकिन उसे अपनी मां और बाबूजी का पूरा शरीर नहीं दिखाई दे रहा था उसकी मां झुकी हुई थी और उसके पिताजी खड़े थे उनका दोनों हाथ उसकी मां की चिकनी कमर पर था उसकी गोल-गोल गांड सूरज को एकदम साफ दिखाई दे रही थी उसे इस बात का एहसास तो हो गया था उसके मन और बाबूजी के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था वह दोनों पूरी तरह से मतलब अवस्था में थे,,,, सूरज को सिर्फ इतना दिखाई दे रहा था उसकी मां का झुका हुआ शरीर और वह भी चूचियां उसे नहीं दिख रही थी क्योंकि वह जिस तरह से झुकी हुई थी उसका आधा शरीर पूरी तरह से दरवाजे की दीवार की ओट में छीप गया था लेकिन जितना भी दिख रहा था,,, वह किसी भी स्वर्ग के नजारे से सूरज के लिए काम नहीं था सूरज को उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड और वह भी एक तरफ से दिख रही थी उसके पिताजी के कमर के नीचे वाला भाग दिख रहा था लेकिन इतने से ही सूरज की आंखों में वासना के तूफान नजर आ रहे थे वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था क्योंकि सूरज अपनी मां की बुर में घुसते हुए अपने पिताजी के लंड को एकदम साफ देख रहा था वह देख पा रहा था कि उसके पिताजी का लंड उसकी मां की दोनों टांगों के बीच से होता हुआ उसकी बुर की गहराई नाप रहा था,,, और वह भी बड़ी तेजी से अंदर बाहर हो रहा था,,,।

पल भर में ही सूरज पसीने से तार बात हो चुका था इस तरह के नजारे की कभी उसने कल्पना भी नहीं किया था और देखा भी तो पहली बार में ही अपनी मां और बाबूजी की चुदाई देख लिया जो की पूरी तरह से उसे मस्त कर गई थी बीच-बीच में उसकी मां की मादक सिसकारियां सूरज को पूरी तरह से वासना के समंदर में डुबा ले जा रहे थे सूरज कभी सोचा नहीं था कि इस तरह का दृश्य वह कभी सपने में भी देख पाएगा पहली बार में चुदाई देख रहा था उसकी मां की दोनों टांगों के बीच से होता हुआ उसके बाबूजी का लंड बड़े आराम से उसकी मां की बुर की गहराई का सफर पूरा कर रहा था,,,।

ओहहहह मेरी रानी आज तो पूरी कसर पूरी कर दूंगा ताकि तुम मुझसे नाराज ना हो मैं जानता हूं बहुत दिनों से तुम्हारी चुदाई नहीं हुई है इसलिए तुम मुझसे नाराज थी लेकिन आज तुम्हारी बुर पाकर में भी मस्त हो गया हूं एकदम कसी हुई लग रही है,,,,आहहहह मेरी रानी बहुत मजा आ रहा है,,,।

ओहहहह मेरे राजा मैं भी एकदम मस्त हो गई हूं बहुत दिनों बाद तुम्हारा लंड मेरी बुर में घुसा है ऐसा लग रहा है कि जैसे आज ही सुहागरात हो,,, आआहहह मेरे राजा और जोर-जोर से चोदो,,,।

सूरज तो एकदम हैरान था अपनी मां और बाबूजी के मुंह से इस तरह की गंदी बातों को सुनकर वह अपनी मां के बारे में कभी इस तरह की कल्पना भी नहीं किया था कि वह इस तरह की गंदी बातें करती होगी लेकिन आज पहली बार अपने कानों से सुनकर तो उसके होश उड़ गए थे लेकिन न जाने क्यों सूरज को अपनी मां के मुंह से इस तरह की बातों को सुनकर बहुत अच्छा लग रहा,,, था,,, सूरज को समझते देर नहीं लगा था कि भले उसकी मां इतनी संस्कारी ऊपर से दिखती थी लेकिन वह भी लंड के लिए तड़प रही थी,,,, ना चाहते हुए भी सूरज कहां तक अपने आप ही पजामे के अंदर चला गया था और वह अपने खड़े लंड को जोर-जोर से दबा रहा था ऐसा करने में उसे भी बहुत मजा आ रहा था,,,।

अंदर का गरमा गरम दृश्य सूरज के कोमल मां पर शोले बरसा रहा था उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी अपनी मां और बाबूजी की चुदाई को देखकर अपने लंड को बड़े जोर-जोर से दबा रहा था वैसे करने में उसे भी बहुत ज्यादा उत्तेजना का अनुभव हो रहा था,,,, एकाएक उसकी मां की शिसकारी की आवाज एकदम से बढ़ने लगी,,,।

आहहहह मेरे राजा और जोर-जोर से करो मेरा निकलने वाला है मेरा होने वाला है मेरे राजा,,,

चिंता मत करो मेरी रानी मैं भी आ रहा हूं मेरा भी निकलने वाला,,,

(सूरज को नहीं समझ में आ रहा था कि उसकी मां का क्या होने वाला है और उसके बाबूजी का क्या निकलने वाला है लेकिन उसे बहुत मजा आ रहा था जिस तरह से वह अपना लंड दबा रहा था एक उसकी आंखों के सामने एकदम से अंधेरा जाने लगा और पल भर में वह पूरी तरह से मदहोश हो गया और उसके लंड से पहली बार वीर्य की पिचकारी फूट पड़ी जो कि उसके ही पजामे में गिरने लगी और वह पूरी तरह से गिला होने लगा लेकिन उसके निकलने से उसे ऐसा सुख महसूस हो रहा था कि जैसा आज तक उसने अनुभव नहीं किया था,,,, वह अपनी उखड़ती सांसों के साथ कमरे के अंदर देखा तो धीरे से उसके पिताजी ने अपने लंड को,,, उसकी मां की बुर में से बाहर निकाला और उसके लंड में से कुछ धीरे-धीरे टपक रहा था कुछ मलाईदार चु रहा था,,,, यह सब देखकर सूरज पूरी तरह से हैरान था लेकिन अब उसका वहां ज्यादा देर तक खड़े रहना उचित नहीं था इसलिए वह धीरे से अपनी जगह से अपने कदमों को पीछे लिया और धीरे से घर के बाहर निकल गया ताकि उसके मां-बाबुजी को बिल्कुल भी शक ना हो कि यहां कोई आया था,,,।
 
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