Incest पहाडी मौसम - Page 3 - SexBaba
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Incest पहाडी मौसम

चोर कदमों से सूरज घर के बाहर आ चुका था लेकिन अपने अंदर एक तूफान लेकर आया था जो रिश्तो के बीच मर्यादा की दीवार को अपने थपेड़ों से गिरा देने वालीथी,,,, सूरज कभी सपने भी यह नहीं सोचा था कि उसकी आंखों के सामने यह सब नजर आएगा उसे नहीं मालूम था कि उसे यह सब देखना पड़ेगा,,,, लेकिन उसने जो कुछ भी देखा था उसे देखने के बाद उसका जवान दिल पूरी तरह से गर्म हो चुका था उसे एहसास होने लगा था कि वह पूरी तरह से जवान हो चुका है,,,।





और ऐसा होना लाजिमी ही था क्योंकि आज तक उसने अपनी मां के खूबसूरत बदन का दर्शन नहीं किया था और ना ही उसकी खूबसूरत बदन के किसी भी अंग को नग्नावस्था में देखा था,,, और ऐसे हालात में अगर वही औरत उसकी आंखों के सामने एकदम नंगी नजर आ जाए तो क्या होगा उसका हल भी सूरज जैसा ही होगा सूरज ने कभी भी अपनी मां को गलत नजरिया से देखा भी नहीं था लेकिन जिस दिन से उसने मुखिया की बीवी को नहाते हुए देखा था उसके अंगों को देखा था और फिर बगीचे में मुखिया की दोनों लड़कियों के खूबसूरत अंगों का जिस तरह से दर्शन किया था उसे देखने के बाद उसका भी नजरिया हर एक औरत के प्रति बदलता जा रहा था यहां तक कि वह अपनी मां में भी एक औरत ढूंढ रहा था लेकिन अनजाने में ही उसे अपनी मां की खूबसूरत बदन को नग्न अवस्था में देखने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ था नग्न अवस्था में ही क्या वह अपनी मां को चुदवाते हुए देख लिया था और अपने ही पिता से,,,,।





उस दृश्य को याद करके सूरज के तन बदन में आग लग जा रहा था उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी वह बड़े आराम से अपनी मां की गोल-गोल बड़ी-बड़ी कहां को एकदम साफ तौर पर देख पा रहा था और उसकी दोनों टांगों के बीच उसके पिताजी का लंड अंदर बाहर होता हुआ नजर आ रहा था या हालांकि जिस तरह से उसकी मां दीवार का सहारा लेकर खड़ी थी उधर से सिर्फ उसकी गांड का एक तरफ भाग ही नजर आ रहा था उसकी बुर उसे नजर नहीं आ रही थी लेकिन जिस तरह से उसके पिताजी का लड दोनों टांगों के बीच अंदर बाहर हो रहा था उसे देखकर वह समझ गया था कि उसके पिताजी का लंड उसकी मां की किस अंग के अंदर घुस रहा है और बाहर निकल रहा हैं,,, इस बात का अहसास होते ही उसकी आंखों के सामने नीलू की खूबसूरत उभरी हुई बुर नजर आने लगती थी इतना तो वह जानता ही था कि हर औरत के पास एक जैसा ही अंग होता है इसलिए नीलू की बुर को देखने के बाद अपनी मां की बुर की कल्पना करना उसके लिए कोई कठिन कार्य नहीं था लेकिन बुर के अंदर लंड अंदर बाहर होता हुआ उसने अभी तक नहीं देखा था सिर्फ उसकी एक हल्की सी झलक पर देखा था इतना ही जवान हो चुके सूरज के लिए काफी था,,,,,।





जहां एक तरफ अपनी मां को चुदवाते हुए देखकर सूरज के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी वहीं दूसरी तरफ अपनी मां के प्रति और अपने बाबूजी के प्रति उसे थोड़ा बहुत गुस्सा भी था उसे नहीं मालूम था कि उसकी मां यह काम भी करवाती है होगी चुदवाती होगी जो कि सूरज इस बात को नहीं समझ पा रहा था कि उसकी मां ही नहीं बल्कि दुनिया की हर एक औरत इस उम्र में बढ़ती उम्र में या चाहे जिस उम्र में जब भी उनका मन करता है तो वह चुदवाती हीं है,,,। सूरज अपनी मां को हमेशा एक संस्कारी औरत के रूप में ही देखता रहा था जिसके मुंह से कभी अप शब्द भी नहीं निकलता था वह अपनी मां को एक सीधी साधी संस्कारी औरत ही समझता था लेकिन पल भर में ही उसका यह भ्रम दूर हो चुका था,,,, अब वह जहां भी जाता वहां उसकी आंखों के सामने उसकी मां की हिलती हुई गांड और गांड के बीच उसके पिताजी का अंदर बाहर होता हुआ लंड नजर आता था,,, और उस दृश्य को याद करते ही उसका खुद का लंड खड़ा हो जाता था,,,।





इसके बाद वहां देर रात को घर लौटा जब खाना बन चुका था क्योंकि ना जाने क्यों वहां अपनी मां से नजर मिलाने में कतरा रहा था,,, जबकि उसकी मां ने कोई बड़ा काम नहीं किया था वह शारीरिक संबंध बनाई भी थी तो अपने पति के साथ ना कि किसी गैर मर्द के साथ लेकिन फिर भी सूरज के मन पर उसका भारी असर पड़ रहा था वह अपनी मां के साथ-साथ अपने पिताजी से भी नजर नहीं मिला पा रहा था,,,, उसके देर से आने पर उसकी मां बोली,,,।

क्यों रे सूरज कहां रह गया था कितनी देर लगा दी आने में खाना बनाकर तैयार हो चुका है जा जल्दी से हाथ मुंह धो कर और खाना खा ले,,,,

(सुनैना की बात सुनकर भोला भी उसके सुर में सुर मिलाते हुए बोला,,,)

यह अब हरामी हो गया है गांव के आवारा लड़कों के साथ घूमता रहता है,,,,,, इसे संभालो नहीं तो बिगड़ जाएगा,,,,

अरे नहीं बिगड़ेगा मैं अपने लड़के को अच्छी तरह से जानती हूं,,,, इसे मैं अच्छे संस्कार दि हुं ,





हुं ,, दोनों कितने सीधे बन रहे हैं संस्कार की बात कर रहे हैं और दिन में तो कैसे एकदम नंगे होकर चुदाई का खेल खेल रहे थे,,,(सूरज अपने मन में ही हाथ पैर धोते हुए बोला,,,,, दोपहर के बाद से उसका मन थोड़ा उखाड़ सा गया था अपनी मां और अपने बाबु जी के प्रति क्योंकि वह दोनों को चुदाई का खेल खेलता हुआ देख लिया था जबकि उसके मन में ऐसा ही था कि वह तूने ऐसा नहीं करते होंगे,,,, थोड़ी देर में वह भी खाना खाने बैठ गया लेकिन वह कुछ बोल नहीं रहा था और ना ही अपने मां और अपने बाबु जी की तरफ देख रहा था,,, थोड़ी ही देर में सुनैना घर का सारा काम निपटा कर अपने कमरे में चली गई और थोड़ी देर बाद उसके पिताजी भी कमरे में चले गए और दरवाजा बंद कर लिए दोपहर में जिस तरह का दृश्य सूरज ने अपनी आंखों से देखा था उसके बाद उसे विश्वास हो गया था कि इस समय भी दरवाजा बंद करके दोनों चुदाई का खेल खेल रहे होंगे लेकिन इस बार सूरज की हिम्मत नहीं हुई कि दरवाजे पर जाकर कमरे के अंदर का दृश्य को देख सके वह अपने कमरे में आ गया और बिस्तर पर लेट गया दोपहर का दृश्य उसकी आंखों से दूर नहीं हो रहा था,,,,। बार-बार वही चुदाई वाला तेरी उसकी आंखों के सामने नाचने लग जा रहा था जिसके चलते उसके पजामे में तम्बू बन जा रहा था,,,।





वह बार-बार बिस्तर पर करवट बदल रहा था,,,, जब उसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो वह पेट के बाल बिस्तर पर लेट गया जिससे उसका खड़ा लंड बिस्तर में पूरी तरह से धसने लगा,,,, लेकिन उसकी हरकत से उसे आनंद मिलने लगा उसे मजा आने लगा हुआ धीरे-धीरे अपनी कमर को ऊपर नीचे करके अपने लंड को बिस्तर पर ही रगड़ना शुरू कर दिया उसे अद्भुत सुख की प्राप्ति हो रही थी उसने आज तक इस तरह की गंदी हरकत कभी किया नहीं था लेकिन आज वह अपने ही हाथों मजबूर हो चुका था,,,।

देखते ही देखते वहां पीठ के बल लेट गया और फिर अपने पजामे में हाथ डालकर अपने खड़े लंड को पकड़ लिया,,, मादकता भरे एहसास से सूरज पहली बार अपने लंड को पकड़ रहा था हालांकि वह अपने लंड को पकड़ता जरूर था लेकिन सिर्फ पेशाब करने के लिए लेकिन आज मदहोशी के आलम में वह अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भर लिया था जो की लंड की मोटाई की वजह से पूरी तरह से उसकी मुट्ठी में उसका लंड समा भी नहीं रहा था,,, देखते ही देखते वह अपने पजामी को घुटनों तक नीचे खींच दिया और फिर अपने खड़े लंड की तरफ लालटेन की पीली रोशनी में देखने लगा जो की पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था नीचे जड़ से पकड़ कर वह अपने लंड को हिला रहा था ऐसा करने से उसका लंड और भी ज्यादा जालिम नजर आ रहा था,,,, देखते ही देखते वह अपने लंड को पूरी तरह से अपनी मुट्ठी में पकड़ कर उसे ऊपर नीचे करके हिलना शुरू कर दिया और फिर अनजाने में उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसका लंड तो उसके पिताजी के लंड से भी ज्यादा मोटा और लंबा है इस बात का अहसास होते हैं उसके तन बदन में अजीब सा हलचल होने लगा,,,, और फिर अचानक ही उसके दिमाग में यह ख्याल आया कि उसका लंड उसके पिताजी से जब ज्यादा लंबा और मोटा है तो क्या वह अपनी मां को अधिक सुख दे पाएगा,,,,,,





क्योंकि यह ख्याल उसके मन में इसलिए आया था कि जब वह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच अपने पिताजी के लंज को अंदर बाहर होता हुआ देख रहा था तो उसके मन के मुंह से एक अद्भुत आवाज भी निकल रही थी जो की बेहद सुख और मदहोशी से भरी हुई थी इसलिए वहां सिर्फ अंदाजा लगाया था कि वह अपनी मां को उसके पिताजी से भी ज्यादा सुख दे पाएगा कि नहीं लेकिन यह ख्याल मन में आते ही उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी उत्तेजना के मारे वह अपने लंड को और ज्यादा कस के दबा दिया था क्योंकि उसके जेहन में वह अपने आप को अपने पिताजी की जगह रखकर अपनी मां की चुदाई करने की कल्पना कर रहा था जो कि उसकी नजरिए से भी पाप था लेकिन इस समय उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी इसलिए वह कुछ देर तक अपने लंड को बार-बार जोर-जोर से दबाता रहा दूसरे लड़कों की तरह उसे मुठ मारने नहीं आता था,,,, लेकिन वह अपने दोस्त को झाड़ियां के पीछे बैठकर यह क्रिया करते हुए देखा था जब वह दोनों मिलकर उसकी चाची को पेशाब करते हुए देख रहे थे और इस समय उसका दोस्त मुठ मारते हुए अपना पानी बाहर निकाल दिया था लेकिन उसे क्रिया के बारे में सूरज को कुछ ज्यादा ज्ञान नहीं था इसलिए वह सिर्फ अपने लंड को जोर-जोर से दबा रहा था और ऐसा करने पर भी उसे अद्भुत सुख की प्राप्ति हो रही थी हालांकि संतुष्टि के चक्कर में उसकी काम भावना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी उसे ऐसा एहसास होने लगा कि उसे बड़े चोरों की पेशाब लगी हुई है और वह तुरंत बिस्तर सेउठकर बैठ गया और मटके से एक गिलास ठंडा पानी निकाल कर पीने के बाद वह धीरे सपना दरवाजा खोलकर घर से बाहर चला गया और थोड़ी देर में पेशाब करके घर में आ गया,,, अपने कमरे में प्रवेश करने से पहले वह एक बार,,, उत्सुकता वश अपनी मां के कमरे के पास गया दरवाजा बंद था कुछ देर तक किसी भी प्रकार की हलचल की आवाज वहां से नहीं आ रही थी और अंदर लालटेन भी बुझ चुकी थी कमरे के अंदर पूरी तरह से दे रहा था किसी भी प्रकार की हलचल आवाज ना आता देखकर सूरज वापस अपने कमरे में आ चुका था ,,,, उसे नहीं मालूम था कि जब अपने कमरे में बिस्तर पर लेट कर अपने लंड को सहला रहा था तभी उसके मा और बाबूजी चुदाई का खेल खेल चुके थे,,,।





दूसरे दिन भोला को किसी रिश्तेदार के घर जाना था तीन-चार दिनों के लिए और वह काफी जल्दबाजी में था,,,, इसलिए वह अपने बेटे से बोला,,,।

सूरज बेटा मैं तीन-चार दिनों के लिए रिश्तेदारी में जा रहा हूं वहां पर शादी है वहां पर सबको लेकर जा नहीं सकता इसलिए मुझे अकेले ही जाना है और तो यह बात मालकिन को बता देना कि मैं तीन-चार दिन तक नहीं आ पाऊंगा और कोई छोटा-मोटा काम हो तो तू कर देना,,,,,

ठीक है पिताजी मैं यह बात मुखिया जी को बता दूंगा और उनकी बीवी को भी,,,,, लेकिन शादी किसकी है,,,?

अरे हे एक रिश्तेदार उसी के वहां जा रहा हूं ठीक है बता देना,,,,(इतना कहकर भोला चलता बना,,,, कुछ देर खड़े होकर सूरज अपने पिताजी को देखता रहा जब तक कि वह दूर उसकी आंखों से ओझल नहीं हो गए और अपने पिताजी को देखते हुए वह कमरे के दृश्य के बारे में सोचने लगा और अपने मन में ही बोलने लगा कि देखने पर उसके मन और बाबुजी इसे बिल्कुल भी नहीं दिखते जैसा कि उसने कमरे में देखा था और फिर वह भी मुखिया की बीवी के घर की तरफ निकल गया खबर पहुंचाने के लिए,,,,।





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थोड़ी ही देर में वह उसे जगह पर पहुंच गया जहां पर खेतों में काम हो रहा था मजदूर लगे हुए थे उसे पूरा यकीन था कि यही मुखिया और मुखिया की बीवी भी मिल जाएंगे और ऐसा ही हुआ दूर बड़े से पेड़ के नीचे मुखिया और उसकी बीवी बैठे हुए थे सूरज जल्दी-जल्दी उन दोनों के पास किया और नमस्कार किया मुखिया की बीवी तो सूरज को देखते ही मन ही मन मुस्कुराने लगी और बोली,,,)

क्या हुआ रे सुरज,,,, तेरे पिताजी नहीं आए आज काम पर,,,,

की मालकिन यही तो बताने आया हूं कि पिताजी जरूरी काम से दो-तीन दिनों के लिए किसी रिश्तेदार के वहां गए हैं और यही खबर में देने आया हूं,,,,

ओहहहह ,, इसके बारे में तो कभी जिक्र भी नहीं किया भोला ने,,,, चलो कोई बात नहीं,,,,(मुखिया की बीवी गहरी सांस लेते हुए बोली और गहरी सांस लेने की वजह से उसकी उन्नत चुचीया एकदम से बाहर की तरफ निकल गई क्योंकि वह जानबूझकर की थी सूरज को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए और सूरज की भी नजर एकदम से उसकी चूचियों पर चली गई थी यह देखकर मुखिया की बीवी मन ही मन प्रसन्न होने लगी थी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

तेरे पिताजी का काम तू कर देना,,,





वह तो ठीक है मालकिन लेकिन मुझे तो कुछ आता ही नहीं है,,,,,(सूरज एकदम मासूमियत भरे श्वर में बोला,,,)

हां शोभा ठीक तो कह रहा है यह इस कहां कुछ आता है,,,,

हां यह तो ठीक है लेकिन मैं सोच रही हूं कि कुछ दिनों से अपने आम के बगीचे में से आम की चोरी हो रही है रात को वहां रख वाली के लिए मुझे जाना होगा मैं सोच रही थी कि साथ में सूरज को ले जाती तो अच्छा होता,,,।

हां हां क्यों नहीं,,,, यह तो बहुत अच्छा है तुम्हें साथ भी मिल जाएगा और आम के बगीचे की रखवाली भी हो जाएगी,,,, ।

(मुखिया की बीवी के साथ रात को रख कर आम की रखवाली करने के बारे में सुनकर ही सूरज के बदन में रोमांच बढ़ गया उसके बदन में अच्छी सी हलचल होने लगी मुखिया की बीवी अपने फैसले पर मुस्कुरा रही थी उसके मन में बहुत कुछ चल रहा था,,,, वह सूरज की तरफ देखकर बोली,,,)





तुझे कोई एतराज तो नहीं है ना बदले में तुझे पैसे भी मिलेंगे और पके हुए आम भी,,,(आम बोलते हुए वह अपनी छाती को थोड़ा सा और उभार दी थी,,, हालांकि उसके इस मतलब को सूरज समझ नहीं पाया था लेकिन उसे इनकार भी नहीं था उसे पैसे और पके हुए आम का लालच नहीं था बल्कि उसे मुखिया की बीवी के साथ रहना अच्छा लगता था इसलिए वह इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहता था,,,)

जी मुझे कोई एतराज नहीं है वैसे कब से रखवाली करने जाना है,,,(सूरज मुखीया और मुखिया की बीवी की तरफ देखते हुए बोला,,,,,)

आज से ही,,,, शाम ढलते ही आ जाना मेरे घर पर वहीं से मैं तुम्हें ले चलूंगी आम के बगीचे पर,,,

हां यह तुम ठीक कह रही हो शोभा ,, घर से ही इसे ले जाना तब सही रहेगा,,,,,

ठीक है सूरज अभी तो कोई काम नहीं है जाकर घर पर आराम कर सकते हो लेकिन समय पर आ जाना,,,

ठीक है मालकिन में समय पर आ जाऊंगा,,, नमस्ते,,,

(इतना कहकर दोनों का अभिवादन करके वह अपने घर की तरफ निकल गया लेकिन वह बहुत खुश था मुखिया की बीवी के साथ समय बिताने के नाम से ही उसके बदन में हलचल हो रही थी और मुखिया की बीवी उसे जाते हुए कुटिल मुस्कान बिखेर रही थी,,, आम के बगीचे की रखवाली करना तो उसके लिए केवल बहाना रहता था वह जब कभी मन होता था तो आम की रखवाली के बहाने अपनी जवानी की प्यास जवान लड़कों से बुझाती थी,,, इस बात को भोला भी नहीं जानता था मुखिया की बीवी को भी रात होने का इंतजार बड़ी बेसब्री से होने लगा,,,,।)
 
मुखिया की बीवी आम के बगीचे की रखवाली करने का बहाना देकर अपनी चाल चल चुकी थी,,, और इस बात से सूरज भी बहुत खुश नजर आ रहा था वैसे भी उसे मुखिया की बीवी के साथ वक्त गुजारना अच्छा लगता था और इसी बहाने वह रात भर मुखिया की बीवी के साथ आम की रखवाली तो कर सकता था इसी बात को लेकर उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे।





मुखिया को इसमें कोई एतराज नहीं था क्योंकि इससे पहले की उसकी बीवी आपके बगीचे की रखवाली करने के लिए बगीचे में कई राते रुक चुकी थी लेकिन मुखिया इस बात से अनजान था कि आम के बगीचे की रखवाली करने के बहाने उसकी बीवी रात रंगीन करतीथी। इसीलिए तो मुखिया एकदम सहज था अपनी बीवी के प्रति उसे बिल्कुल भी शंका नहीं था और वैसे भी जिस तरह से वह खेत खलिहान का काम संभालती थी,,, मजदूरों को संभालती थी और हिसाब किताब देखी थी इतना कुछ करने की क्षमता मुखिया में बिल्कुल भी नहीं थी इसीलिए तो वह अपनी बीवी से बहुत खुश था क्योंकि उसके चलते ही उसे आराम मिलता था।

एक तरफ मुखिया की बीवी पूरी तरह से उत्सुक थी सूरज से रात को मिलने के लिए और दूसरी तरफ सूरज का भी यही हाल था जिस तरह का नजारा मुखिया की बीवी ने उसे दिखाई थी वह नजारा आज तक उसके मन-मस्तिष्क में किसी चित्र की भांति छप गया था और उसे नजारे के बारे में जब भी उसे ख्याल आता था तब तब उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगती थी,,, वह उसकी आंखों के सामने कपड़ा उतारना अपनी खूबसूरत बदन की नुमाइश करना और जिस तरह से वह पेटीकोट को खोलकर आगे की तरफ खींची थी उसकी दोनों टांगों के बीच घुंघराले बाल को देखकर आश्चर्यचकित हो जाना यह सब याद करके सूरज के तन बदन में आग लग जाती थी,,, इसलिए तो वह भी बेसब्री से शाम ढलने का इंतजार कर रहा था और यह बात उसने अपने घर पर भी बता दिया था पहले तो उसकी मां थोड़ा नाराज हुई लेकिन,, क्योंकि घर पर उसका पति भी नहीं था और अब सूरज भी कहीं आम की रखवाली करने के लिए जा रहा था वैसे उसने इस बात को नहीं बताया था कि वह मुखिया की बीवी के साथ आम की रखवाली करने के लिए जा रहा है वह सिर्फ इतना ही बताया था कि रात को आम के बगीचे की रखवाली करना है कुछ लोगों के साथ साथ में पैसे भी मिलेंगे और पके हुए आम भी मिलेंगे उसने मुखिया की बीवी के साथ वाली बात को छुपा ले गया था न जाने कहां से सूरज में इतना दिमाग आ गया था वरना अगर वह यह बात बता देता तो शायद सुनैना के मन में ढेर सारे शंका ने जन्म ले लिया होता। और आम के बगीचे की रखवाली के बदले में पैसे और पके हुए आम मिलने के लालच में सुनैना भी कुछ बोल नहीं पाई और जल्दी-जल्दी खाना बनाने लगी।





शाम ढल चुकी थी बहुत जल्द ही उसे मुखिया के घर पर पहुंचना था वैसे तो उसे रात बिरात डर बिल्कुल भी नहीं लगता था लेकिन वह समय पर पहुंचना चाहता था,,, सूरज ठीक रसोई के सामने बैठकर भोजन का इंतजार कर रहा था और उसकी मां जल्दी-जल्दी तवे पर रोटियां पका रही थी लेकिन उसकी इस जल्दबाजी में वह यह भूल गई थी कि उसके कंधे पर से उसके साड़ी का पल्लू नीचे गिर चुका था और वह चूल्हे के सामने बिना साड़ी के पल्लू की बैठी हुई थी जिसकी वजह से उसकी दोनों चूचियां ब्लाउज में एकदम कसी हुई नजर आ रही थी लेकिन ऐसी अवस्था में ,, उसकी बड़ी-बड़ी दोनों चूचियां ब्लाउज फाड़कर बाहर आने के लिए एकदम आतुर नजर आ रहे थे इस पर नजर पडते ही सूरज की हालत खराब होने लगी,,,।

सूरज एकदम से भूल गया कि उसे मुखिया की बीवी के साथ जल्दी आम के बगीचे पर जाना है वह तो अपनी मां के दोनों खरगोश में खो गया था और चूल्हे के आगे बेटी होने की वजह से उसके बदन से पसीना टपक रहा था और उसके माथे से पसीना बुंद बनकर उसके गोरे-गोरे गाल से होते हुए उसके गर्दन का रास्ता नापते हुए सीधे-सीधे उसके ब्लाउज के बीच वाली घाटी से होते हुए ब्लाउज के अंदर की तरफ जा रहे थे यह सब देखकर सूरज के लंड में हरकत होना शुरू हो गया,,, सुनैना इस बात से बेखबर खाना बनाने में लगी हुई थी,,, सूरज यह जानते हुए भी की जो कुछ भी वह अपनी मां की तरफ देख कर सो रहा है वह गलत है लेकिन फिर भी वह अपने आप को रोक नहीं पा रहा था अपनी मां की तरफ देखने से,,,खास करके उसकी चूचियों की तरह और वह भी चूल्हे के सामने बैठी होने की वजह से चूल्हे में जल रही आग की पीली रोशनी में उसका खूबसूरत बदन और भी ज्यादा चमक रहा था।। यह सब सूरज के लिए बहुत ही ज्यादा असहनीय होता जा रहा था। जिस तरह से सुनैना रोटियां बेल रही थी उसके हाथों की हरकत की वजह से उसके ब्लाउज में भी उतार चढ़ाव एकदम साफ नजर आ रहा था यह सब देखकर सूरज के लंड की अकड़ बढ़ती जा रही थी। इस नजारे को देखकर अनायास ही उसके मन में यह ख्याल आ गया कि काश उसकी मां ब्लाउज नहीं पहनी होती तो उसकी नंगी चूचियों को देखने में कितना मजा आता है लेकिन अपने इसी ख्याल पर वह अपने आप पर ही गुस्सा दिखाने लगा,। क्योंकि वह सब जानता था कि जो कुछ भी वर्क कर रहा है अपने मन में सोच रहा है वह बहुत ही गलत है लेकिन वह इससे ज्यादा कुछ सोच पाता इससे पहले ही सुनैना बोली।





बस ले अब तैयार हो गया है गरमा गरम खा ले,,,(इतना कहने के साथ ही एक थाली में थोड़ी सी सब्जी दाल चावल और रोटी निकालकर सूरज की तरफ आगे बढ़ा दी सूरज भी अपना हाथ आगे बढ़कर थाली को ले लिया और खाना शुरू कर दिया उसकी मां तुरंत अपनी जगह से उठकर खड़ी हुई और मटके से ठंडा ठंडा पानी गिलास भरकर लाई और उसके पास रख दी और उसे हिदायत देते हुए बोली,,)

देख रात का समय है और बगीचे का इसलिए ध्यान देना कहीं अकेले मत जाना जहां भी जाना अपने साथी लोग के साथ ही जाना,,, वैसे तो मुझे अच्छा नहीं लग रहा है लेकिन तू भी अब बड़ा हो गया है कामकाज देखेगा तभी तो जीवन की गाड़ी आगे बढ़ेगी।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो ना मैं सब संभाल लूंगा,,,(निवाला मुंह में डालते हुए बोला और थोड़ी ही देर में वह खाना खा लिया और जाने के लिए तैयार हो गया था लेकिन जाते-जाते वह अपनी मां को बोला)

मैं अब जा रहा हूं पिताजी भी घर पर नहीं है इसलिए दरवाजा बंद कर लेना और खोलना नहीं और तुम दोनों की जल्दी से खाना खाकर सो जाना।

ठीक है सूरज तू अपना ख्याल रखना,,

ठीक है मां,,,(और इतना कहते हुए वह मुखिया की बीवी के घर की तरफ निकल गया,,, लेकिन रास्ते में वह अपनी मां की चूचियों के बारे में सोचने लगा,,, और अपने आप से ही बातें करते हुए बोला

मां की चूचीया कितनी बड़ी-बड़ी है,,, ब्लाउज में इतनी जबरदस्त लगती है तो बिना ब्लाउज की जब एकदम नंगी होती होगी तो कितनी खूबसूरत लगती होगी एकदम गोल-गोल खरबूजे जैसी मैंने तो कभी देखा भी नहीं है लेकिन ब्लाउज में उसकी गोलाई देखकर अंदाजा लगा लेता हूं कि कैसी दिखती होगी ,,, कसम से अभी तो मेरी हालत खराब हो गई थी,, अच्छा हुआ कि मां ने नहीं देखी,,, यह साला मुझे क्या हो जाता है सब कुछ जानते हुए भी की जो कुछ भी मैं देख रहा हूं जो सोच रहा हूं सब गलत है फिर भी मैं अपने आप को रोक क्यों नहीं पाता,,,, लेकिन पहले तो मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं था तो अब ऐसा क्यों हो रहा है मां को देखते ही मेरे दिल की धड़कन क्यों बढ़ने लगती है क्यों मेरी नजर उनके अंगों पर चली जाती है वैसे भी जिस दिन से मा की चुदाई देखा हूं तब से तो न जाने मेरे मन में कैसे-कैसे विचार आने लगे हैं।





उस दिन कमरे में मां और पिताजी पूरी तरह से नंगे थे लेकिन मुझे ज्यादा कुछ नहीं दिखाई दिया सिर्फ मां की बड़ी-बड़ी गांड और उसकी दोनों टांगों के बीच पिताजी का अंदर बाहर होता हुआ लंड मां की बुर भी मै अभी तक नहीं देख पाया,,, लेकिन वह नजारा देखकर मेरी तो हालत खराब हो गई थी मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था कि मेरी मां भी चुदवाती होगी लेकिन सब कुछ मैं अपनी आंखों से देखा था पिताजी कैसे जोर-जोर से धक्के लगा रहे थे और न जाने कैसे-कैसे आवाज मां के मुंह से निकल रही थी इसका मतलब मन को भी चुदवाने में मजा आता है।

(सूरज अपने मन में यही सब सोते हुए और अपने आप से ही बात करते हुए आगे की तरफ चले जा रहा था वह अपनी बात को अपने मन में ही आगे बढ़ाते हुए अपने आप से ही बोला)

कितना अच्छा मौका था उसे दिन पूरी तरह से मांगी थी पिताजी नंगे थे लेकिन फिर भी ज्यादा कुछ दिखाई नहीं दे रहा था पिताजी मां को नीचे लेट कर उसकी चुदाई करते तो मैं सब कुछ देख लेता उनके बुर भी देख लेता की कैसी उनके बुर हैं,,, नीलू की तो मैं अपनी आंखों से देख लिया था एकदम चिकनी कचोरी की तरह खुली हुई क्या इस तरह की मां की भी बुर होगी,,, पता नहीं मैं अभी तक नीलू की छोड़कर किसी और की बुर देखा ही नहीं,,, मुझे तो यह भी नहीं मालूम कि सब की एक जैसी होती है कि अलग-अलग होती है लेकिन जो नशा देखकर हुआ था वह नशा आज तक मेरी नस-नस में घुला हुआ है,,,





पिताजी कितने कसकस के धक्के लगा रहे थे,,, पूरा दम लगाकर पता नहीं मा कैसे उनके धक्को को सहन कर पा रही थी,,,,,, कुछ पता ही नहीं चला था की मां को कैसा लग रहा है पता नहीं उन्हें दर्द कर रहा था कि मजा आ रहा था और वैसे भी दीवाल पकड़ कर झुकी हुई थी एकदम घोड़ी बनकर,,, जैसे की घोड़ी के ऊपर घोड़ा,,,, जो मां और पिताजी कर रहे थे उसे ही चुदाई कहते हैं और यह सब शादी के बाद ही होता है काश मेरी भी शादी हो गई होती तो मैं भी सब कुछ जान जाता,,,। और रोज मजे लेता,,,,।

(वह यही सब सोते हुए मुखिया के घर की तरफ चले जा रहा था कि तभी एक कुत्ता भोकता हुआ उसकी तरफ लपका तो उसका ध्यान एकदम से भंग हुआ और वह तुरंत नीचे से पत्थर उठा दिया और गाली देता हुआ उसकी तरफ चल दिया कुत्ता तुरंत वहां से भाग गया तब उसे इस बात का एहसास हुआ कि चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था उसे इस बात का डर था कि कहीं देर तो नहीं हो गई कहीं मुखिया की बीवी अकेले तो बगीचे पर नहीं चली गई यही सब सोता हुआ वह जल्दी-जल्दी मुखिया के घर की तरफ जाने लगा जो की दुर से ही मुखिया का घर नजर आ रहा था। ऊपर वाले मंजिले पर बाहर की तरफ लालटेन चल रही थी क्योंकि दूर से ही दिखाई दे रही थी।

सूरज जल्दी-जल्दी मुखिया के घर की तरफ जाने लगा और थोड़ी देर में पहुंच गया बाहर ही कुर्सी पर बैठकर मुखिया और मुखिया की बीवी सूरज का इंतजार कर रही थी सूरज को देखते ही मुखिया की बीवी बोली।

कहां रह गया था रे मैं कब से तेरा इंतजार कर रही हूं देख कितना समय हो गया या अंधेरा हो गया हमें और जल्दी जाना चाहिए था।





मैं माफी चाहता हूं मालकिन घर पर खाना बनने में देर हो गया था इसलिए जल्दी से खाकर मैं जल्दी-जल्दी भागता हुआ यहां आया हूं मुझे तो लग रहा था कि कहीं आप अकेले ना निकल गई हो।

अकेले क्यों जाऊंगी तुझे लिए बिना कैसे जा सकती हूं,,, तूने खाना खा लिया है।

हां मालकिन,,,

चल कोई बात नहीं खाना खा लिया तो ठीक ही है लेकिन खाने का डब्बा भी ले ले कहीं रात को भूख लग गई तो ,,,,

(इतना सुनते ही पास में पड़ा हुआ खाने के डब्बे को सूरज उठा लिया और फिर मुखिया जो वही कुर्सी पर बैठा हुआ था वह बोला)

सूरज वह सामने कुल्हाड़ी पड़ी है उसे भी ले ले,,,

कुल्हाड़ी क्यों मालिक,,,(सूरज आश्चार्य जताते हुए बोला,,,)

अरे पागल रात का समय है चोर उचक्के का डर तो रहता ही है लेकिन जंगली जानवरों का भी डर रहता है हाथ में हथियार रहेगा तो डर तो नहीं रहेगा।

(मुखिया की बात सुनकर सूरज को थोड़ी घबराहट हुई लेकिन फिर भी वहां मुखिया के बताएं अनुसार कुल्हाड़ी को हाथ में ले लिया और फिर मुखिया खुद अपनी जगह से खड़ा होकर लालटेन अपने हाथ में लिया और उसे अपनी बीवी को थमा दिया.. लालटेन को अपने हाथ में लेते हुए वह मुस्कुरा कर बोली,,,)

इसकी तो ज्यादा जरूरत है,,,,(और फिर एक हाथ में लालटेन और एक बड़ा सा डंडा अपने हाथ में लेकर दोनों आम के बगीचे की तरफ निकल गए)



 
‌‌ ‍ मुखिया की बीवी एक हाथ में लालटेन और एक हाथ में बड़ा सा डंडा लेकर आम के बगीचे की ओर जाने के लिए तैयार हो चुकी थी सूरज भी हाथ में कुल्हाड़ी ले लिया था हालांकि कुल्हाड़ी का जिक्र आते ही उसे थोड़ी बहुत घबराहट हुई थी लेकिन मुखिया की बीवी के साथ में होते ही ना जाने क्यों उसकी हिम्मत दुगनी हो जाती थी,,, वह भी बेफिक्र होकर हाथ में कुल्हाड़ी ले लिया था। सूरज के लिए यह पहला मौका था जब पहली बार वह रात को आम की रखवाली करने के लिए आम के बगीचे में जा रहा था वरना आज तक वह कभी रात को कहीं रुका ही नहीं था,,,। पैसों का लालच या किसी चीज को पाने का लालच उसमें बिल्कुल भी नहीं था अगर ऐसा होता तो शायद वह जाने के लिए तैयार भी नहीं होता लेकिन यहां बात थी मुखिया की बीवी के साथ रात गुजारने की उसके साथ रख कर आम के बगीचे की रखवाली करने की इसलिए सूरज तुरंततैयार हो गया था। क्योंकि मुखिया की बीवी का साथ ही उसके लिए काफी था।





देर तो हो चुकी थी लेकिन फिर भी मुखिया की बीवी सूरज को बिल्कुल भी डांट नहीं रही थी,,, और इसके पीछे उसका लालच भी छुपा हुआ था। चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था। घर से निकलते समय मुखिया की बीवी रोटी और सब्जी रुमाल में बांध ली थी ताकि रात को अगर भूख लगे तो खा सके वैसे तो दोनों घर से खा कर ही निकले थे और मुखिया की बीवी तो सूरज के खाने का इंतजाम घर पर एक ही थी लेकिन वह घर से खा कर ही आया था और इसी में देर भी हो चुकी थी।

धीरे-धीरे मुखिया की बीवी और सूरज दोनों आगे बढ़ रहे थे चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था थोड़ी देर में दोनों गांव से दूर निकल गए थे वैसे तो आम का बगीचा कुछ खास दूरी पर नहीं था लेकिन फिर भी आधा घंटे का समय लगता था। बात की शुरुआत इस तरह के माहौल में वैसे तो मुखिया की बीवी ही करती थी लेकिन सूरज से रहा नहीं जा रहा था इसलिए वह बोला।

मालकिन तुम इसी तरह से आपकी रखवाली करने के लिए रात को आती रहती हो।,,,,

हां रे,,, मेरा तो रोज का काम है आए दिन में आम के बगीचे की रखवाली करने के लिए आती ही रहती हूं।

अकेली आती हो या फिर किसी के साथ,,,

वैसे तो अकेली कभी आई नहीं हूं क्योंकि रात का समय होता है तो अकेले थोड़ा तो डर लगता ही है लेकिन वैसे मुझे डर नहीं लगता लेकिन कोई साथ होता है तो अच्छा ही लगता है आज तू मिल गया तो तुझे लेकर आई हूं तू घर पर बात कर तो आया है ना।





हां मालकिन में घर पर बात कर आया हूं वैसे मैं घर से बाहर कभी रात को कहीं रुकता नहीं हूं लेकिन तुम्हारे कहने पर मैं चल रहा हूं।

(सूरज की इस बात पर मुखिया की बीवी मंद मंद मुस्कुराने लगी क्योंकि एक जवान होते लड़के के मन की बात को वह भी अच्छी तरह से समझती थी वह जानती थी कि सूरज किस लालच से उसके साथ रात को बगीचे की रखवाली करने के लिए आया है,,, सूरज की बात सुनकर मुस्कुराते हुए वह बोली,,)

तब तो बहुत अच्छा है कि तू मेरी बात मानने लगा है,,,, वैसे तुझे डर तो नहीं लगता ना रात में,,,

बिल्कुल भी नहीं मालकिन इसमें डरने का क्या है,,,

तब तो बहुत अच्छा है वैसे भी मुझे निडर लोग बहुत अच्छे लगते हैं डरपोक मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है,,,।

तुम भी बहुत बहादुर हो मालकिन वरना इस तरह से रात को कोई बगीचे की रखवाली करने के लिए औरत नहीं आती।

बात तो तो सही कह रहा है। और वैसे भी पहले में डरपोक रही थी लेकिन धीरे-धीरे जब घर की जिम्मेदारी अपने सर पर लेना पड़ता है तो निडर होना पड़ता है।

( मुखिया की बीवी भी काफी खुश नजर आ रही थी क्योंकि आज बहुत दिनों बाद वह आम के बगीचे की रखवाली जो करने जा रही थी और वह भी एक जवान लड़के के साथ,,,, चारों तरफ धुप्प अंधेरा छाया हुआ था,,, तकरीबन तीन-चार मीटर से ज्यादा दूर दिखाई नहीं दे रहा था इतना दे रहा था वह तो गनीमत थी कि आगेआगे मुखिया की बीवी लालटेन लेकर चल रही थी जिसकी रोशनी में सूरज सब कुछ साफ़-साफ़ देख पा रहा था उस दिन की तरह आज भी मुखिया की बीवी आगे आगे चल रही थी क्योंकि उसे दिन भी सूरज को नहीं मालूम था कि कहां जाना है और आज भी सूरज को नहीं मालूम था कि आम का बगीचा कहां है इसलिए दिशा निर्देश के लिए मुखिया की बीवी खुद आगेवानी करते हुए आगे आगे चल रही थी लेकिन उसके इस तरह से आगे चलने पर इसकी भारी भरकम नितंबों का घेराव लालटेन की पीली रोशनी में,,, एकदम साफ साफ दिखाई दे रहा था जो कि वातावरण और सूरज के मन में मादकता भर रहा था।





सूरज का ध्यान पूरी तरह से मुखिया की बीवी की गांड पर था,,, न जाने क्यों उसे मुखिया की बीवी की गांड का आकर्षण कुछ ज्यादा ही बढ़ता जा रहा था हालांकि अभी तक उसने मुखिया की बीवी की गांड को संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में नहीं देखा था। लेकिन फिर भी उसे पूरा यकीन था कि पूरा कपड़ा उतारने के बाद सबसे ज्यादा आकर्षक उसकी गांड ही नजर आती होगी,,, हालांकि नहाते समय जिस तरह से वह अपने कपड़े उतार रही थी उसके बदन की थोड़ी बहुत झलक सूरज देख लिया था जिसकी वजह से ही तो आज उसका मन उसका नजरिया पूरी तरह से बदल चुका था।,,,, कुछ देर वातावरण में पूरी तरह से खामोशी छाई रही,,,।

वातावरण में झींगुर की आवाज बड़ी तेज सुनाई दे रही थी रह रहकर कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी। बस्ती से दोनों काफी दूर आ चुके थे और वैसे भी एक गांव पूरी तरह से पहाड़ों से घिरा हुआ था इसलिए अंधेरे में कुछ ज्यादा ही,,, डरावना नजर आता था। जिस तरह का माहौल बना हुआ था चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था अगर ऐसे समय में केवल मुखिया की बीवी को ही आना होता तो शायद वह डर के मारे नहीं आती और शायद सूरज भी इस तरह से अंधेरे में बाहर निकलने से घबराता,,, क्योंकि इससे पहले कभी भी वहां रात को बाहर और अभी इतनी दूर निकला नहीं था लेकिन आज की बात कुछ और थी,,, दोनों के मन में किसी भी प्रकार का भय नहीं था दोनों निडर होकर आगे बढ़ रहे थे क्योंकि एक दूसरे का साथ जो था और उससे भी बड़ी बात थी कि दोनों का एक दूसरे के प्रति आकर्षण था,,,





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जवानी से भरी हुई मुखिया की बीवी सूरज का साथ पाकर पूरी तरह से भाव भी बोर हो चुकी थी वह एक साजिश के तौर पर उसे आम के बगीचे की रखवाली करने के लिए ले जा रही थी क्योंकि वह उसकी जवानी से खेलना चाहती थी और जवानी के दहलीज पर कदम रख चुका सूरज एक जवान औरत का साथ प्रकार पूरी तरह से मत हो चुका था,,, उसके बदन के आकर्षण में पूरी तरह से अपने आप को डूबो चुका था,,, उसे यह तो नहीं मालूम था कि आम के बगीचे में उसके साथ क्या होने वाला है लेकिन वह बहुत खुश था,,,।

कुछ देर की खामोशी के बाद मुखिया की बीवी बोली,,,,।

बस अब आने ही वाला है,,,,आहहहह,,,(दर्द भरी कहानी की आवाज मुंह से निकलने के साथ ही अपनी हथेली को अपनी कमर पर रख दी और हल्का सा झुक गई और एक ही जगह पर खड़ी होकर,,) हाय दइया मर गई रे,,,

क्या हुआ मालकिन,,,,?(एकदम आश्चर्य से सूरज भी अपनी जगह पर खड़ा होकर बोला)

हाय मेरी कमर ऐसा लगता है कि जैसे मेरी जान लेकर छोड़ेगी,,,,,(मुखिया की बीवी उसी जगह पर खड़ी होकर अपनी हथेली को कमर पर हल्के-हल्के घूमाते हुए बोली,,, वह अपनी हरकत से सूरज का ध्यान अपनी कमर पर लाना चाहती थी लेकिन सूरज का ध्यान उसकी गोलाकार नितंबों पर था फिर भी वह कमर की तरफ देखते हुए बोला,,,)

कमर में क्या हो गया मालकिन,,,,!

ऊबड खाबड रास्ते से चलते हुए मेरी कमर लचक गई है,,,,आहहहहह,,,, बहुत दर्द कर रही हैं,,,,(एक कदम बढ़ाकर एकदम से लड़खड़ाने का नाटक करते हुए वह बोली,,, और मुखिया की बीवी को इस तरह से लड़खड़ाता हुआ देखकर सूरज से रहने की और वह तुरंत आगे बढ़ाकर उसकी कमर को दोनों हाथों से थाम लिया,,, और बोला,,,)

संभाल कर मालकिन,,,,,,

(जैसे ही मुखिया की बीवी ने अपनी कमर पर सूरज के मर्दाना हथेलियां का स्पर्श महसूस की वह पूरी तरह से मदहोश हो गई उसके बदन में एकदम से सुरसुराहट बढ़ गई,,,, खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में तो मानो जैसे आग लग गई हो,,,, तुरंत उसकी बुर नुमा कटोरी मदन रस से भर गई,,, मन तो उसका कर रहा था कि इसी समय सूरज को धर दबोचे और उसके ऊपर चढ़ जाए,,, लेकिन अनुभव से भरी हुई मुखिया की बीवी जल्दबाजी करने में नहींमानती थी,,,, वह जानती थी कि उसके दोनों टांग खोलते ही सूरज लार टपकाते हुए उसकी दोनों टांगों के बीच आ जाएगा,,,)

हाय दईया,,,,,,,(एकदम से मदहोश होते हुए मुखिया की बीवी बोली,,,,) अच्छा हुआ तू थाम लिया वरना मैं तो गिर जाती,,,,

मेरे होते हुए तुम कैसे गिर जाओगी मालकिन,,, मैं किस लिए हूं,,,,

अरे इसीलिए तो तुझे लेकर आई हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह खुद ही सूरज के कंधे पर हाथ रख दी और बोली) मुझे तो एक कदम भी नहीं चला जा रहा है,,,,, तुझे सहारा देकर ही मुझे ले जाना पड़ेगा,,,,,।

(सूरज के कंधे पर हाथ डालकर सहारा लेते ही सूरज के तन बदन में आग लग गई थी एक खूबसूरत औरत का इस तरह से उसके बदन से चिपकना उसे बहुत ज्यादा उत्तेजित कर रहा था उसका लंड पूरी तरह से औकात में आकर खड़ा हो चुका था उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी क्योंकि जिस तरह से वह उसके कंधे पर अपना हाथ रखकर सहारा ली थी उसकी भाई च सीधे-सीधे उसके एक तरफ की छाती से स्पर्श हो रही थी और सूरज भी उसे सहारा देते हुए अपने हाथ को दूसरी तरफ से उसकी कमर पर लपेट रखा था कुल मिलाकर दोनों की हरकत बेहद कामोत्तेजना से भरी हुई थी ,,,)

लाओ मालकिन लालटेन मुझे दे दो,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज मुखिया की बीवी के हाथ से लालटेन को अपने हाथ में ले लिया और उसकी पीली रोशनी में धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा,,,,)

मुझे नहीं मालूम था रे की कमर इतनी ज्यादा परेशान करेगी वरना मैं आज नहीं आती,,,,(धीरे-धीरे लंगड़ा कर पैर आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

कोई बात नहीं मालकिन में हूं ना तुम्हें फिक्र करने की जरूरत नहीं है,,,।

तू तो बहुत अच्छा लड़का है मुझे लगता है कि तो हम लोगों का साथ बहुत देगा,,,, अब तो हमारे लिए ही काम किया कर पैसे इज्जत सब कुछ मिलेगा।

यह तो आपका बड़प्पन है मालकिन जो आपने काम के लिए मुझे चुना है,,,,(सूरज और मुखिया की बीवी बातें करते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे मुखिया की बीवी की कमर में और ना ही पैर में बिल्कुल भी तकलीफ नहीं थी वह तो सिर्फ अपना जादू चल रही थी सूरज के ऊपर जो कि अच्छा खासा काम भी कर रहा था क्योंकि लालटेन की रोशनी में मुखिया की बीवी की नजर उसके पजामा के आगे वाले भाग पर थी जो की काफी उठा हुआ था उसमें तंबू बना हुआ था यही देखकर मुखिया की बीवी मन ही मनपसंद भी हो रही थी और उतेजित भी हो रही थी क्योंकि उसका जादू काम कर रहा था,,,, सूरज बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अभी कितना दूर है मालकिन,,,,

बस आने ही वाला है तुझे तकलीफ हो रही है क्या,,,!

नहीं नहीं मालकिन मुझे बिल्कुल भी तकलीफ नहीं हो रही है मैं तो जिंदगी भर तुम्हें सहारा देकर इसी तरह से चल सकता हूं,,,।

अरे वाह रे बातें तो तू बड़ी-बड़ी करता है,,, एकदम मर्द की तरह,,,

मैं भी तो मर्द ही हूं मालकिन,,,,

हां वह तो दिखाई दे ही रहा है,,,(कनखियों से सूरज के पजामे की तरफ देखते हुए बोली,,, वैसे भी इस तरह से मुखिया की बीवी को सहारा देने में उसे किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं थी जिस तरह से वह मुखिया की बीवी की कमर पर हाथ रखा हुआ था उसके कमर की चिकनाहट उसकी हथेली में स्पर्श हो रही थी,,, सूरज को अब जाकर इस बात का एहसास हो रहा था की औरतों की कमर कितनी चिकनी होती है एकदम मक्खन की तरह उसकी हथेली फिसल जा रही थी और मुखिया की बीवी सूरज की हथेली को अपनी कमर पर महसूस करके गनगना जा रही थी,,,,)

मैंने कितनी बार शालू और नीलू को कहा कि मेरी कमर की मालिश कर दे लेकिन वह दोनों है कि दिनभर बस खेलती रहती है इधर-उधर मेरी बात सुनती ही नहीं है,,,,

(मुखिया की बीवी जानबूझकर सूरज से कमर की मालिश वाली बात बोली थी और सच तो यही था कि ना तो उसकी कमर में दर्द हो रहा था ना ही वह मालिश के लिए चालू और नीलू को बोली थी वह तो बस सूरज के मन को टटोल रही थी)

हां मालकिन वो तो में देखा हूं,,, शालू और नीलू दोनों दिन भर बस घूमती रहती है उन्हें चाहिए था कि तुम्हारी कमर की मालिश कर देती ताकि आराम हो जाता,,,,

अरे सूरज मेरी कहां सुनने वाली है दोनों मैं तो परेशान हो गई हूं बस जल्दी से जल्दी दोनों के हाथ पीले करके ससुराल भेज दु तो समझ लूं की गंगा नहा ली,,, अच्छा सूरज तुझे आता है क्या मालिश करना,,,,

ममममम,, मालिश करना,,,,,,हां,,,हां,,, आता तो है एक दो बार मैंने मालिश किया हूं मां की उनकी भी कमर में इसी तरह का दर्द होता था,,,,(सूरज हड बढ़ाते हुए झूठ बोल रहा था,,, क्योंकि मालिश वाली बात सुनकर उसके मन में उमंग जगने लगी थी ,,, उसे इस बात का एहसास होने लगा था की मुखिया की बीवी उसे मालिश करने के लिए जरुर बोलेगी इसीलिए वह इनकार नहीं कर पाया और सच तो यही था कि उसे मालिश करना नहीं आता था और ना ही कभी उसने अपनी मां की मालिश किया था बस वह ईस मौके को जाने नहीं देना चाहता था,,,, मालिश के बहाने वहां मुखिया की बीवी की मक्खन जैसी कमर को अपने हाथों से छूना चाहता था स्पर्श करना चाहता था रगड़ना चाहता था इसलिए सूरज की बात सुनते ही वह बोली,,,,)

तब तो ठीक है तब तो तू मेरी भी मालिश कर लेगा ना,,,

जरूर मालकिन इसमें कौन सी बड़ी बात है,,,

सूरज तु कितना अच्छा लड़का है,,, काश तू मेरा बेटा होता तो मुझे यह सब चिंता करने की जरूरत ही नहीं होती,,,,

कोई बात नहीं मालकिन अपना ही समझो,,,,

(वैसे तो सूरज को औरतों से बात करने का अनुभव बिल्कुल भी नहीं था लेकिन न जाने क्यों इस समय वह मुखिया की बीवी के साथ एक मजे हुए मर्द की तरह बातें कर रहा था ऐसा लग ही नहीं रहा था कि वह पहली बार किसी औरत से बात कर रहा हो ऐसा लग रहा था कि जैसे वह इस तरह की बातें औरतों से कर चुका है और उसे इस तरह की बातें करने में मजा भी आ रही थी,,,, मुखिया की बीवी की तो हालत खराब होती जा रही थी उसके बदन में उत्तेजना का तूफान उठ रहा था वह न जाने किस तरह से अपने आप को संभाली हुई थी वरना उसका मन तो चुदवाने के लिए मचल रहा था,,, उसकी बर पानी पानी हो रही थी उसे अपनी बुर से मदन रस टपकता हुआ महसूस हो रहा था,,,, मालिश वाली बात का जिक्र छेड़ कर वह मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि वह जानती थी की मालिश करवाने के बहाने वह अपने हर एक अंक को खोलकर सूरज को दिखा सकेगी और फिर सूरज को अपनी जवानी का जलवा दिखाकर मदहोश करके अपनी मनमानी करवा सकेगी और अपनी जवानी की आग बुझा सकेगी,,,,, क्योंकि अभी तक खेतों में जिस तरह से उसे गिरने से बचाते हुए सूरज ने उसे अपनी बाहों में भर लिया था,,, साड़ी के ऊपर से ही उसके लंड की चुभन उसे अभी तक महसूस होती थी,,,, और इस चुभन को महसूस करके मुखिया की बीवी अंदाजा लगा ली थी कि सूरज के पास जो मर्दाना अंग है वह बहुत खास और मजबूत है जो कि उसे अपनी बुर में लेकर वह पूरी तरह से अपनी जवानी का रस निचोड़ सकेगी,,,,)

रात धीरे-धीरे गहरा रही है देखो तो सही चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ है और वैसे भी हम लोग गांव से काफी दूर आ चुके हैं,,,,

सही कह रहा है सूरज तू,,,, इसीलिए तो मुझे आम के बगीचे की रखवाली करने आना पड़ता है क्योंकि यह दूर है और यहां पर लोग आसानी से आम चुरा ले जाते हैं,,,,

(चूड़ियों की खनक पायल की झनक से वातावरण और भी ज्यादा उत्तेजित हुआ जा रहा था मुखिया की बीवी के खूबसूरत बदन की मादक खुशबू सूरज के तन बदन में आग लग रही थी पहली बार वह किसी औरत को इस तरह से अपने बदन से सटाया हुआ था इसीलिए तो औरत के बदन की खुशबू भी उसे महसूस हो रही थी,,,,,,, यहां तक की उसकी चूचियों की रगड़ से उसके बदन में उत्तेजना बरकरार थी वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था यहां तक कि उसे अपने लंड में दर्द महसूस होने लगा था,,,। और यही हाल मुखिया की बीवी का भी था उसकी बुर पानी पानी हो रही थी यहां तक की उसकी पर से निकलने वाला पानी उसे अपनी जांघों पर टपकता हुआ महसूस हो रहा था और जिस तरह से उसकी चूची उसकी छाती से रगड़ खा रही थी,,, उसकी वजह से उसकी चूची में उत्तेजना के चलते कसाव बढ़ता जा रहा था,,,,,, थोड़ी ही देर में आपका बगीचा दिखाई देने लगा बड़े-बड़े पेड़ की वजह से उसे जगह पर और भी ज्यादा अंधेरा छाया हुआ था,,,,, बगीचे पर नजर पडते ही मुखिया की बीवी बोली,,,।)

वह देख सूरज बगीचा आ गया,,,,

हां मालकिन बहुत बड़े-बड़े पेड़ हैं इसके आम भी तो बड़े-बड़े होंगे,,,,

बहुत बड़े-बड़े है रे चल तुझे दिखाती हूं,,,,

(मुखिया की बीवी यह बात अपनी चूचियों को लेकर बोली थी लेकिन सूरज समझ नहीं पाया था,,,, सूरज अभी भी उसी तरह से उसे सहारा देकर आगे बढ़ रहा था उसके हाथ में लालटेन थी और दूसरे हाथ में कुल्हाड़ी थी और मुखिया की बीवी उसके कंधे पर हाथ रखकर एक हाथ में डंडा लेकर उसके सहारे से चल रही थी,,,, आम के बगीचे में प्रवेश करने से पहले ही वह शर्माने का नाटक करते हुए धीरे से बोली,,,)

ररररररर,,,, यही रुक जा सूरज,,,,,

(उसकी बात सुनते ही सूरज एकदम से रुक गया और उसकी तरफ आश्चर्य से देखते हुए बोला)

क्यों क्या हुआ मालकिन,,,,

अब तुझे कैसे कहूं मैं,,,,(इधर-उधर देखकर शर्माने का नाटक करते हुए बोली)

क्यों क्या हुआ बोलो तो सही,,,,

मुझे बड़ी जोरों की पेशाब लगी है,,,,

(मुखिया की बीवी के मुंह से पेशाब शब्द सुनते ही उत्तेजना के मारे सूरज का गला सूखने लगा पहली बार किसी औरत के मुंह से पेशाब करने वाली बात सुन रहा था उसका दिल जोरो से धड़कने लगा था वह पल भर में उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुका था वह आश्चर्य से मुखिया की बीवी के खूबसूरत चेहरे की तरफ देख रहा था जो की लालटेन की पीली रोशनी में और भी ज्यादा दमक रहा था,,,)
 
मुखिया की बीवी और सूरज दोनों आम के बगीचे में पहुंच चुके थे बगीचा एकदम घना था चारों तरफ आम के बड़े-बड़े पेड़ नजर आ रहे थे वैसे रात का समय था इसलिए कुछ खास ज्यादा दिखाई तो नहीं दे रहा था लेकिन जिस तरह का घना अंधेरा था उसे देखते हुए सूरत समझ गया था कि यह जगह आम के पेड़ों से पूरी तरह से घिरा हुआ था,,, और ऐसे में मुखिया की बीवी का पेशाब करने वाली बात का कहना सूरज के लिए पूरी तरह से उत्तेजना का संचार करने वाला साबित हो रहा था क्योंकि आज तक सूरज ने किसी औरत के मुंह से यह कहते हुए नहीं सुना था कि उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी है यह मौका उसके लिए पहली बार का था इसीलिए तो उसके कान एकदम से खड़े हो गए थे और साथ में उसके पजामे में उसका लंड भी,,,, अपनी औकात में आ चुका था,,,,।





मुखिया की बीवी के मुंह से पेशाब करने वाली बात सुनकर सूरज पूरी तरह से चौंक गया था क्योंकि उसे यकीन नहीं हो रहा था कि कोई औरत उसे यह शब्द का प्रयोग कर सकती है वह आश्चर्य से मुखिया की बीवी की तरफ ही देख रहा था जो की लालटेन की पीली रोशनी में पूरी तरह से दमक रहा था सूरज को पहली बार एहसास हो रहा था की मुखिया की बीवी कुछ ज्यादा ही खूबसूरत है उसका भरा हुआ चेहरा गोल-गोल ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे गुलाब का फूल हो,,,, वह अभी भी सूरज के कंधों का सहारा लेकर खड़ी थी उसके बदन से उठ रही मादक खुशबू सूरज की तन बदन में आग लग रही थी इतने करीब वह किसी भी औरत के नहीं आया था जितना करीब मुखिया की बीवी के था,,,।

वैसे तो वह जानबूझकर ही सूरज को अपनी गांड दिखाने के लिए पेशाब करने वाली बात कही थी लेकिन पेशाब करने के नाम से ही उसे वास्तव में बड़े जोरों की पेशाब लग गई थी जिसकी वजह से वह अपने पैर को इधर-उधर रख रही थी वह अपनी पेशाब की तीव्रता को रोक नहीं पा रही थी उसकी हालत को देखकर सूरज भी समझ गया था कि वाकई में इसे पेशाब लगी है लेकिन वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था क्योंकि उसने आज तक किसी भी औरत को पेशाब करने की मुद्रा में कल्पना नहीं किया था उसके जीवन में पहली औरत उसके दोस्त की चाची थी जिसे वह पेशाब करते हुए देखा था और उसके दोस्त ने हीं दिखाया था,,,। सूरज को समझ में नहीं आ रहा था कि मुखिया की बीवी से वह क्या बोले,,, और मुखिया की बीवी खेली खाई औरत थी सूरज के मन की बात को अच्छी तरह से समझ रही थी सूरज के चेहरे के बदलते भाव को देखकर वह मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि वह समझ गई थी कि उसके मुंह से पेशाब करने वाली बात सुनकर सूरज पूरी तरह से हक्का-बक्का हो गया है,,,, इसलिए वह फिर से बोली,,,,।

समझ में नहीं आ रहा क्या करूं,,,,!





अब जैसा तुम ठीक समझो अगर रोक सको तो,,,(घबराते हुए सूरज ने बोला उसकी बात सुनकर मुखिया की बीवी बोली,,,,)

पागल हो गया है क्या कोई रोक सकता है अगर रोक भी सकता है तो कितनी देर तक पेट दर्द करने लगेगा पागल,,,

नहीं मेरे कहने का मतलब यह नहीं था,,,,

तू रहने दे अपने खाने के मतलब को यहां मेरी हालत खराब हो रही है अच्छा तो एक काम कर लालटेन को ठीक से पकड़,,,, और मेरी तरफ तु बिल्कुल भी मत देखना,,,

कैसी बात कर रही हो मालकिन मैं इतना बेशर्म थोड़ी हूं जो किसी औरत को,,,,(इतना कहकर सूरज रुक गया क्योंकि आगे का शब्द उसे कहने में शर्म महसूस हो रही,,, थी,,,।)

अच्छा ठीक है तो मुझे सहारा देकर उस झाड़ियों के पास ले जा,,,,

कहां ,,,,,,उधर,,,,(हाथ के इशारे से घनी झाड़ियां के बीच बताते हुए सूरज बोला,,,)

हां वही आज तो मुझे आना ही नहीं चाहिए था अगर मुझे पता होता है कितनी दिक्कत होगी तो मैं आता ही नहीं लेकिन अगर नहीं आती तो,,,, फिर कोई भी जाकर आम तोड़ कर ले जाता तूने देखा नहीं है सूरज इस बगीचे के हम बहुत बड़े-बड़े हैं खरबूजे जैसे मैं तुझे कल दूंगी,,,,,(मुखिया की बीवी के बाद जीत के दौरान सूरज उसे सहारा देकर घड़ी झाड़ियां के पास ले गया)

अब तू थोड़ा पीछे हो जा,,, लालटेन जितना लालटेन की रोशनी से ज्यादा दूर नहीं क्योंकि सांप बिच्छू का डर रहता है।

तुम चिंता मत करो मालकिन मैं चारों तरफ देख रहा हूं,,,,

भले तो चारों तरफ देखना लेकिन मेरी तरफ अभी मत देखना मुझे बहुत शर्म आती है,,,

नहीं नहीं मालकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा मैं इतना गिरा हुआ नहीं हूं,,,,।

(मुखिया की बीवी जान बैठकर उसे अपनी तरफ ना देखने के लिए बोल रही थी लेकिन वह जानती थी कि सूरज उसे देखे बिना नहीं रह पाएगा क्योंकि वह मर्दों की फितरत से अच्छी तरह से वाकिफ थी,,, सूरज तीन-चार कदम दूर जाकर खड़ा हो गया जहां से लालटेन की रोशनी मुखिया की बीवी तक आराम से पहुंच रही थी वैसे भी वह इससे ज्यादा दूर नहीं जाना चाहता था क्योंकि वह लालटेन की रोशनी में मुखिया की बीवी को पेशाब करते हुए देखना चाहता था उसकी नंगी गांड के दर्शन करना चाहता था वह देखना चाहता था की पेशाब करती हुई औरत कितनी खूबसूरत लगती है क्योंकि वह अपने मां के इस लालच को दवा नहीं पा रहा था भले ही मुखिया की बीवी ने उसे ऐसा न करने की सलाह दी थी लेकिन वह मानने वाला नहीं था वह क्या दुनिया का कोई भी मर्द होता तो शायद इस समय मुखिया की बीवी की बात मानने से इनकार कर देता,,,,, मुखिया की बीवी झाड़ियां के पास खड़ी थी वह जानती थी कि इस बगीचे में सूरज के सिवा और कोई नहीं है फिर भी वह इधर-उधर देख ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है यह उसकी आदत में शुमार था वैसे भले ही वह छिनार बन चुकी थी लेकिन फिर भी पेशाब करते हैं समय आदत के अनुसार वह इधर-उधर देख लेती थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है और वैसे भी ज्यादा तर वह पेशाब करने बैठी थी तो किसी ना किसी को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए ही,,,, जिसमें आज सूरज का नंबर था सूरज को वह पूरी तरह से अपनी जवानी का दीवाना बना देना चाहती थी ताकि वह उसका गुलाम बनकर रह जाए,,,, मुखिया की बीवी अपनी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ कर सूरज की तरफ देखे बिना ही वह बोली,,,)





तु यहां देख तो नहीं रहा है ना,,,,

नहीं मालकिन बिल्कुल भी नहीं,,,,( वह जानबूझकर अपनी नजर को दूसरी तरफ घूम लिया था)

ठीक है ऐसे ही खड़े रहना जब तक कि मैं पेशाब न कर लूं,,,,,(और इतना कहते हुए वहां अपने दोनों हाथों की नाजुक उंगलियों का सहारा लेकर अपनी साड़ी को उसमें फंसा कर ऊपर की तरफ उठने लगी जैसे-जैसे साड़ी ऊपर की तरफ जा रही थी वैसे सूरज का दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था वह तिरछी नजर से मुखिया की बीवी की तरफ ही देख रहा था,,,, देखते ही देखते मुखिया की बीवी की साड़ी उसके घुटनों तक उड़ गई उसकी मोटी मोटी मांसल चिकनी पिंडलियों को देखकर सूरज के बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी उसका लंड अकड़ने लगा,,,, धीरे-धीरे मुखिया की बीवी साड़ी को अपनी टांगों के ऊपर ले जा रही थी वह जानबूझकर धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर उठा रही थी ताकि सूरज उसके बेहतरीन हुस्न को देखकर मदहोश हो जाए उसकी जवानी चारों खाने चित हो जाए,,, और ऐसा हो भी रहा था।

देखते ही देखते मुखिया की बीवी की साड़ी उसकी मोटी मोटी जांघों की ऊपर तक आ गई इतना ऊपर की सूरज को उसके नितंबों का नीचला हिस्सा दिखने लगा था और नितंबों के उसे गोलाकार आकार को देखकर सूरज की तो जैसे सांस ही अटकी जा रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था गांव से दूर अाम के बगीचे में इतना गर्म गर्म दृश्य देखने को मिलेगा उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था। जिस तरह से सूरज की हालत खराब थी उसी तरह से मुखिया की बीवी की भी हालत खराब हो रही थी हालांकि वह कई मर्दों के सामने अपने वस्त्र उतार कर नग्न हो चुकी थी लेकिन आज पहली बार उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि कपड़े उतारते समय भी उसके बाद में उत्तेजना की लहर उठ रही थी वह मदहोश हो रही थी,,, आज उसे एक जवान लड़की के सामने अपने कपड़े उठाने में बेहद शर्म महसूस हो रही थी और इस शर्म की महसूसियत उसे अपनी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार से बहती हुई महसूस हो रही थी,,,,।

जिस तरह से सूरज का दिल जोरों से धड़क रहा था उसी तरह से मुखिया की बीवी की भी सांस बड़ी तेजी से चल रही थी क्योंकि बस थोड़ा सा और उसकी अपनी साड़ी उठाना था इसके बाद सूरज को वही दिखने वाला था जो वह दिखाना चाहती थी उसकी गांड एकदम नंगी हो जाने वाली थी और इसी पल का सूरज के साथ-सा त मुखिया की बीवी को भी बड़ी बेसब्री से इंतजार,,,।

आम के बगीचे में पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था बस चारों तरफ झींगुरों का शोर मचा हुआ था रहने कर दूर दराज से कुत्ते के भौंकने की भी आवाज आ रही थी कुल मिलाकर वातावरण भयानक ही था लेकिन इस भयानक वातावरण में भी मुखिया की बीवी अपनी जवानी के जोर से पूरे वातावरण को मदहोश बना दी थी,, सूरज जो की रात को बेवजह घर के बाहर नहीं निकलता था आज पहली बार मुखिया की बीवी के साथ वह खुली रात का आनंद ले रहा था और उसे पहली बार एहसास हो रहा था कि रात में कितना मजा आता है रात में जितना दर का माहौल होता है उससे भी ज्यादा कहीं आनंद का माहौल बना होता है बस माहौल बनाने वाली होनी चाहिए,,, और इस समय रात के भयानक वातावरण में मदहोश कर देने वाला माहौल बनाने वाली थी मुखिया की बीवी जिसके अंग अंग से जवानी टपक रही थी,,,।





मुखिया की बीवी अब ज्यादा देर नहीं करना चाहती थी क्योंकि अभी रात बहुत बाकी थी और पूरी रात उसे आनंद लेना था इसलिए वह अपनी उंगलियों को हरकत करते हुए बाकी साड़ियों को भी अपने नितंबों से ऊपर उठा ली और देखते ही देखते लालटेन की पीली रोशनी में मुखिया की बीवी की भारी भरकम गोरी गोरी गांड एकदम से चमकने लगी जिस पर नजर पड़ते ही सूरज की हालत एकदम से खराब हो गई उसकी आंखें फटी की फटी रह गई मुखिया की बीवी की नंगी गांड देखकर वह मदहोश हो गया,,,,।

देख तो नहीं रहा है ना रे,,,,।

(मुखिया की बीवी पीछे नजर घुमाई बिना ही बोली क्योंकि वह तो जानती ही थी कि सूरज उसे ही देख रहा होगा पर इसीलिए वह सूरज के रंग में भंग नहीं डालना चाहती थी,,,, मुखिया की बीवी के इस सवाल पर सूरज पूरी तरह से हड़बड़ा गया और हडबढ़ाते स्वर में बोला,,,।)

नननन,,, नहीं बिल्कुल भी नहीं मैं ऐसा कर भी नहीं सकता,,,,।

(सूरज के लड़खड़ाते शब्दों को सुनकर मुखिया की बीवी के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव में जलने लगी क्योंकि उसके लड़का आते हुए शब्द ही उसके मन की बात को बयां कर रहे थे वह मुस्कुराने लगी और साड़ी को कमर तक उठाए हुए ही वह नीचे बैठ गई और अगले ही पल उसकी गुलाबी पूरे से पेशाब की धार फूट पड़ी और उसमें से एक तीर्व मधुर आवाज पूरे वातावरण में गुंजने लगी जो कि यह आवाज सूरज के कानों तक बड़े आसानी से पहुंच रही थी सूरत समझ गया था कि उसकी बुर से पेशाब निकल रहा है वह भी इस एहसास से ही मदहोश हुआ जा रहा था उसका लंड पूरी तरह से अकड़ गया था,,,। सूरज के लिए यह नजारा बेहद अद्भुत और अतुलनीय इस तरह के नजर को कभी अपनी आंखों से देखा नहीं था बस उसके दोस्त ने दूर से ही दिखाया था लेकिन इतना साफ-साफ उसे समय भी नहीं नजर आ रहा था क्योंकि वह काफी दूर था और झाड़ियां के पीछे खुद छुपा हुआ था लेकिन यहां सब कुछ खुला था लाल टीम की पीली रोशनी में मुखिया की बीवी पूरी तरह से नजर आ रही थी उसकी नंगी बड़ी-बड़ी गांड देखकर तू सूरज के मुंह में पानी आ रहा था उसका मन कर रहा था कि आगे बढ़कर मुखिया की बीवी की गांड को दोनों हाथों से पकड़ ले वह औरत की गांड को दोनों हाथों से पकडने का सुख भोगना चाहता था उसे सहलाना चाहता था देखना चाहता था की साड़ी में कसी हुई गांड वास्तव में छूने पर कैसी होती है,,,,।





मुखिया की बीवी की गुलाबी बुर में से निकल रही सीधी की आवाज पूरे वातावरण में गूंज रही थी और इस बात का एहसास मुखिया की बीवी को भी था वह अच्छी तरह से जानती थी कि बुर से निकल रही सिटी की आवाज सूरज के कानों में अच्छी तरह से पहुंच रही होगी और वही समाज को सुनकर पूरी तरह से मदहोश हो चुका होगा,,, वह इतना तो जानती ही थी कि सूरज उसकी तरफ ही देख रहा होगा लेकिन फिर भी वह अपने मन की तसल्ली के लिए हल्की नजरों से पीछे की तरफ देखने की कोशिश की तो वास्तव में सूरज आंख फाड़े उसकी तरफ ही देख रहा था उसके एक हाथ में कल आ रही थी और दूसरे हाथ में लालटेन थी,,, मुखिया की बीवी के तेज नजरों ने उसकी पजामे में उठे हुए भाग को भी देख ली थी और उसे भाग को देखकर उसके चेहरे की प्रसन्नता बढ़ने लगी और अंदर ही अंदर खुश होने लगी क्योंकि वह अपनी चाल में कामयाब होती हुई नजर आ रही थी वह जानती थी कि आज रात भर वह सूरज के साथ मजा लुटेगी,,,। फिर भी वह बोली,,,)

क्या रे सूरज देखा तो नहीं रहा है ना,,,

बिल्कुल भी नहीं मालकिन मैं अपने वादे का पक्का हूं एक बार कह दिया तो कह दिया,,,

मुझे तुझे यही उम्मीद थी तेरी जगह कोई और होता तो अपनी नजरों को यहां घूमाने से रोक नहीं पाता तु बहुत सीधा लड़का है,,।

(ऐसा कहते हुए वह अपनी बुर की गुलाबी छेद के अंदर से जोर लगाकर बड़े जोरों से पेशाब कर रही थी और उसके पेशाब की धार सामने की घास को भिगो रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह पानी दे रही हो,,,, देखते ही देखते वह पूरी तरह से पेशाब कर चुकी थी लेकिन उसके झांट के बालों में उसके पेशाब की बूंदे अभी भी लगी हुई थी जिसे वह उठने से पहले अपनी बड़ी-बड़ी भारी भरकम गांड को झटका देते हुए अपने झांट के बाल में से पेशाब की बूंद को नीचे गिराने की कोशिश करने लगी,,, लेकिन उसकी यह हरकत सूरज के लिए बेहद जानलेवा साबित हो रही थी सूरज ठीक उसके पीछे खड़ा होकर मुखिया की बीवी को अपनी गांड झटकाते हुए देख रहा था,,, और उसके ऐसा करने पर उसकी गांड पूरी तरह से पानी में गिरे कंकड की तरह लहर मार रही थी,,, मुखिया की बीवी की तरफ से उसकी है हरकत सूरज को पूरी तरह से मदहोश कर गई और अनजाने में ही उसका हाथ पजामा के ऊपर से ही उसके खड़े लंड पर आ गया जिसे वह जोर से दबा दिया,,,, और उसकी यह हरकत पैनी नजरों से मुखिया की बीवी ने देख ली थी,,,। और मंद मंद मुस्कुराने लगी उसे यकीन हो गया था कि उसका जादू सूरज पर पूरी तरह से चल गया था,,, और वह पेशाब करने के बाद धीरे से उठकर खड़ी हो गई और फिर कमर तक उठे हुई साड़ी को वह धीरे से नीचे गिरा दी और पल भर में ही एक खूबसूरत नाटक पर पर्दा पड़ गया,,,, वह मुस्कुराते हुए सूरज की तरफ घूम गई और बोली,,,।

अब जाकर राहत हुई वरना ऐसा लग रहा था कि मैं चल ही नहीं पाऊंगी इतना दर्द कर रहा था मेरा पेट,,,,

चलो अच्छा हुआ मालकिन की तुम्हें आराम हो गया,,,,।

(सूरज चलने को तैयार था लेकिन मुखिया की बीवी उसके पास आकर उसके हाथ से लालटेन और कुल्हाड़ी लेते हुए बोली,,,,)

एक काम कर सूरज तू भी पेशाब कर ले वरना रात को लगेगी तो ऐसे माहौल में बाहर निकलना ठीक नहीं है क्योंकि सियार घूमते ही रहते हैं,,,,।

(सियार शब्द सुनकर ही सूरज को थोड़ी घबराहट हुई वह पेशाब नहीं करना चाहता था क्योंकि उसे लगी नहीं थी लेकिन मुखिया की बीवी का ठीक कहना भी था अगर रात को लगेगी तब क्या करेगा,,,, इसलिए वह तैयार हो गया और जहां पर मुखिया की बीवी बैठकर पेशाब कर रही थी उसे जगह पर जाने लगा और उसने लालटेन की रोशनी में गीली जमीन को देखा तो मन ही मन उत्तेजित होने लगा क्योंकि जहां पर मुखिया की बीवी बेठी थी वहां की मिट्टी मुखिया की बीवी के पेशाब से पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,,,। सूरज कदम आगे बढ़कर वहां से आगे निकल जाना चाहता था क्योंकि उसे भी मुखिया की बीवी के सामने पेशाब करने में शर्म महसूस हो रही थी लेकिन तभी मुखिया की बीवी ने उसे रोकते हुए बोली,,,)

अरे आगे मत जा जहां पर मैं कर रही थी वही कर ले आगे सांप बिच्छू का डर रहता है,,,,।

(मुखिया की बीवी अपने फायदे के लिए उसे पास में रखना चाहती थी लेकिन वह शर्म के मारे आगे चला गया लेकिन जैसे ही वह अपने पजामे पर हाथ रख वैसे ही झाड़ियां में हलचल हुई और वह एकदम से घबरा गया और तो कभी पीछे ले लिया मुखिया की बीवी भी इसी पल का फायदा उठाते हुए उसके पास पहुंच गई और उसका हाथ पकड़ कर पीछे की तरफ खींचने लगी और बोली,,,,)

मैं कह रही हूं ना कि मत जा सांप बिच्छू का डर रहता है देख सांप निकल कर गया ना,,,,।

ओहहहह मालकिन मैं तो देखा ही नहीं मैं तो एकदम से घबरा गया,,,,।(डर के मारे हांफते हुए सूरज बोला,,,)

इसलिए तो कह रही हूं,,,, चल अब आगे मत जा यही पेशाब कर ले,,,, अगर तुझे कुछ हो गया तो तेरे घर वालों को क्या जवाब दूंगी,,,,,।

(झाड़ियों में सुरसुराहट की वजह से मुखिया की बीवी का काम बनता हुआ नजर आ रहा था,,,,, मुखिया की बीवी की बात सुनकर सूरज असहज होता हुआ बोला,,,,)

यहां,,,, नहीं नहीं मुझसे नहीं होगा,,, तुम्हारे सामने कैसे,,,,,

अरे तो क्या हो गया,,,, तू तो मेरे बेटे जैसा है और कोई मां भला अपने बेटे को नुकसान होने देना चाहेगी इसलिए तू यहीं पर कर ले अगर तुझे शर्म आती है तो मैं अपनी नजर घुमा लेती हूं,,,,,।

(इतना कहते हुए मुखिया की बीवी चालाकी दिखाते हुए अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमली थी उसके हाथ में कुल्हाड़ी थी और दूसरे हाथ में लालटेन थी लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था मुखिया की बीवी के सामने पेशाब करने में सूरज शर्म महसूस कर रहा था लेकिन उसे भी जोरों की पेशाब लग चुकी थी और मुखिया की बीवी नजर दूसरी तरफ घूम कर रखी थी इसलिए उसकी हिम्मत बढ़ने लगी और वह धीरे से पजामे को पकड़ कर नीचे कर दिया पजामे के नीचे होते ही उसका खड़ा लंड एकदम से हवा में झूलने लगा,,,, झाड़ियों में हुई सुरसुराहट की वजह से कुछ देर के लिए उसके लंड में थोड़ा ढीलापन आ गया था लेकिन सूरज के हाथ में आते ही एक बार फिर से उसमें रक्त का प्रभाव बड़ी तेजी से होने लगा और वह एकदम से कड़क हो गया और वह शर्म महसूस करते हुए पेशाब करना शुरू कर दिया,,, पेशाब गिरने की आवाज कान में पडते ही,,, मुखिया की बीवी की दोनों कामों के बीच हलचल होना शुरू हो गया उसकी उत्सुकता बढ़ने लगी और वह अपने आप को सूरज की तरफ देखने से रोक नहीं पाई,,,, और वह धीरे से सूरज के लंड की तरफ निगाह घूमा कर देखने लगी तो उसके होश उड़ गए,,,, उसका मुंह खुला का खुला रह गया उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था क्योंकि आज तक कुछ नहीं इतना मोटा और लंबा लंड कभी नहीं देखी थी,, ।

सूरज के मोटे तगड़े लंड पर मुखिया की बीवी की नजर पढ़ते ही उसकी बुर उत्तेजना के मारे फुलने पीचकने लगी,,,, उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था उसे लग रहा था कि वह कोई सपना देख रही है कितना मोटा और लंबा लंड भी हो सकता है इसका उसे अंदाजा ही नहीं था,,, क्योंकि जवानी से लेकर उम्र के ईस पड़ाव तक बन जाने कितने लैंड को अपनी बुर में ले चुकी थी लेकिन आज तक उसकी आंखों के सामने उसकी बुर के अंदर इतना मोटा और तगड़ा लंड कभी भी प्रवेश नहीं कर पाया था,,, या यूं कह लो कि आज तक जितने भी मर्द उससे मिले थे उनका लंड ऐसा था ही नहीं तभी तो मुखिया की बीवी एकदम आश्चर्य चकित हो गई थी उसकी आंखों में उसे पाने की चमक साफ नजर आ रही थी सूरज को भी इस बात का एहसास हो गया था की मुखिया की बीवी उसके लंड को देख रही थी और यह एहसास होते ही सूरज के तन-बड़े में आग लगने लगी यह पहली मर्तबा था जब कोई औरत उसके लंड की तरफ देख रही थी,,,, सूरज शर्म से मरा जा रहा था लेकिन उसे अपने बदन मेंअत्यधिक उतेजना का अनुभव हो रहा था उसके हाथ में अभी भी उसका लंड था जिसमें से पेशाब की धार फूट रही थी वह मुखिया की बीवी को यह नहीं बोल पाया कि वह अपनी नजर को दुसरी तरफ कर ले क्योंकि ना जाने क्यों उसके मन में भी ऐसा हो रहा था की मुखिया की बीवी उसके लंड की तरफ देखते ही रहे,,, यही तो जवानी का नशा था यही तो इस उम्र की चाहत थी और इसी में सूरज मदहोशी के चरम शिखर पर विराजमान होता जा रहा था,,,,।

पेशाब करने के बाद जैसे ही सूरज ने लंड में से पेशाब की बूंद को झटकने के लिए अपने लंड को ऊपर नीचे करके दो-चार बार झटका और उसके इस तरह से झटकते हुए लंड को देखकर मुखिया की बीवी की उत्तेजना उसके बस में बिल्कुल भी नहीं रही और उसकी बुर से मदन रस की बुंद टपक कर नीचे जमीन पर गिर गई,,,, और फिर बिना कुछ बोले सूरज अपने लंड को वापस पजामे में डाल दिया लेकिन उसमें तंबू बना हुआ था,,,,।

हो गया मालकिन,,,,

हां अब ठीक है ,,ले लालटेन पकड़,,,, अब हमें चलना चाहिए,,,,, देख वह रही झोपड़ी बड़े से पेड़ के नीचे,,,, मैं आम के बगीचे की रखवाली के लिए ही है झोपड़ी बनवा कर रखी हूं,,,,,।

(हालांकि घना अंधेरा होने की वजह से वह झोपड़ी ठीक से सूरज को दिखाई नहीं दे रही थी लेकिन वह लालटेन पकड़कर आगे आगे चलने लगा,,,, और देखते ही देखते दोनों उस झोपड़ी के पास आ गए कुछ झोपड़ी के पास एक हेड पंप भी बना हुआ था,,, और हेड पंप को देखकर सूरज बोला,,,)

यह तो अच्छा की हो मालकिन की यहां पर हेड पंप गडवा कर रखी हो वरना अगर पानी प्यास लग जाए तो इंसान तो अपनी बिगर ही मर जाएगा,,,,।

इसीलिए तो हेड पंप लगवाई हूं,,,,,(इतना कहते हुए दोनों झोपड़ी के एकदम पास पहुंच गए एक हाथ में कुल्हाड़ी लिए हुए,,, मुखिया की बीवी लकड़ी के बने दरवाजे को खोलने लगी और लकड़ी का दरवाजा खोलते ही सूरज के हाथ में से लालटेन को ले ली और खुद पहले झोपड़ी में प्रवेश कर गई और उसके पीछे सूरज,,,,)
 
रात पूरी तरह से गहरा चुकी थी चारों तरफ अंधेरा अंधेरा नजर आ रहा था,,, आपके बड़े-बड़े पेड़ होने की वजह से यह अंधेरा कुछ ज्यादा ही डरावना लग रहा था लेकिन इस समय ना तो मुखिया की बीवी के मन में किसी प्रकार का डर था और ना ही सूरज के मन में क्योंकि दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लग रहा था और मुखिया की बीवी तो अपने मां के इरादों को पूरा करने के लिए सूरज को साथ में लेकर आई थी,,,, और जिस तरह का नजारा उसने कुछ देर पहले सूरज को दिखाई थी उसे देखने के बाद तो सूरज चारों खाने चित हो गया था वह पूरी तरह से मुखिया की बीवी की जवानी का गुलाम हो चुका था,,, इतने करीब से,,,, जिंदगी में पहली मर्तबा हुआ किसी औरत को पेशाब करते हुए देख रहा था जिसकी नंगी चिकनी गांड उसके इरादों को फिसलने पर मजबूर कर रही थी पहली बार वह औरत की बुर में से निकल रही सिटी की आवाज को एकदम साफ-साफ सुना था जिसे सुनने के बाद दुनिया का हर मधुर संगीत उसके लिए फीका नजर आ रहा था,,,,, वैसे तो सूरज इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि औरत से पेशाब करती है तो उनके बुर से सिटी की आवाज निकलती है लेकिन यह उसके लिए पहली बार था जब वह उस आवाज को सुना था,,, इसीलिए तो अभी भी उसके पजामे में उसका लंड तना हुआ था,,,।





मुखिया की बीवी के लिए खाई औरत थी इसीलिए जबरदस्ती उसे वहीं पर पेशाब करवाने के बहाने उसके लंड के दर्शन कर ली थी और आंखों ही आंखों में उसकी लंबाई और मोटी को नाप चुकी थी और मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि वह जानती थी कि जिस तरह का हथियार सूरज के पास है उसकी जवानी का रस पूरी तरह से निचोड़ देगा,,,,, सूरज के मुसल को वह अपनी ओखली में लेने के लिए तड़प रही थी,,,। दोनों छोटी सी घास फूस की झोपड़ी के पास पहुंच चुके थे,,,, लकड़ी के दरवाजे को खोलकर सबसे पहले मुखिया की बीवी उसे झोपड़ी में प्रवेश की ओर पीछे-पीछे सूरज,,,, सूरज का दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह पहली बार रात के एकांत में किसी खूबसूरत जवान औरत के साथ रात गुजारने वाला था उसे नहीं मालूम था कि आज की रात उसके साथ क्या होने वाला है,,, लेकिन मुखिया की बीवी की हरकत को देखकर इतना तो वह समझ ही गया था कि मजा बहुत आने वाला है,,,,,,।

थोड़ी ही देर में पुरी झोपड़ी में लालटेन के पीली रोशनी फैल गई झोपड़ी के अंदर सब कुछ साफ-साफ नजर आने लगा,,,, झोपड़ी के अंदर एक टेबल रखा हुआ था जिस पर गिलास और थाली रखी हुई थी पास में चारपाई बिछी हुई थी लेकिन बिस्तर मोड कर रखा गया था क्योंकि जब झोपड़ी के अंदर रुकना होता था तभी बिस्तर को चारपाई पर बिछाया जाता था,,,,, सूरज झोपड़ी के अंदर खड़ा होकर पुरी झोपड़ी में नजर घुमा कर देख रहा था घास फूस की झोपड़ी में भी छोटी सी खिड़की बनी हुई थी जिसमें से ठंडी हवा अंदर आती थी ताकि गर्मी ना लगे और इस समय भी ठंडी हवा खिड़की से झोपड़ी के अंदर बड़े आराम से आ रही थी और बदन में ठंडक का एहसास दिला रही थी,,,,। मुखिया की बीवी भी मुस्कुरा कर कभी सूरज की तरफ तो कभी अपनी झोपड़ी की तरफ देख रही थी ईस झोपड़ी में उसके जीवन के बहुत ही रंगीन रातें बीती थी यह वही चारपाई थी जिस पर उसने अपनी जवानी लुटाई थी,,, और आज अपनी ही चारपाई पर वहां सूरज का बिस्तर गर्म करने के इरादे से उसे लेकर आई थी,,,,।





अरे सूरज दरवाजा तो बंद कर दे नहीं तो जंगली जानवर अंदर घुस जाएंगे,,,,।

जी मालकिन,,,(इतना कहने के साथ ही वह दरवाजे की तरफ बढ़ गया,,, दरवाजे पर खड़े होकर वहां बाहर की तरफ नजर घुमाई तो बाहर का अंधेरा देखकर उसे थोड़ी बहुत घबराहट महसूस हो रही थी क्योंकि चारों तरफ उसे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था बस केवल चारों ओर से झींगुर की आवाज आ रही थी जिससे वातावरण और भी भयानक नजर आ रहा था,,, वह तो उसके साथ मुखिया की बीवी थी जिसकी जवानी के दर्शन वह कर चुका था और इसी लालच में हो उसके साथ इस आम के बगीचे की रखवाली करने के लिए इतनी रात को आया था वह जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया छोटी सी झोपड़ी को भी मुखिया की बीवी ने बहुत अच्छे तरीके से बनवा कर एक छोटा सा घर की तरह उसे सकल दे दी थी और इस झोपड़ी में रात रुकने लायक सभी साधन मौजूद थे,,,, दरवाजा बंद करने के बाद जैसे ही हो मुखिया की बीवी की तरफ घुमा मुखिया की बीवी उसे फिर से बोली,,,,।

लालटेन को टेबल पर रख दे,,,, ताकि पूरे झोपड़ी में रोशनी बनी रहे,,,, तुझे रोशनी में नींद तो आती है ना,,,

की मालकिन कोई दिक्कत नहीं होती,,,,,(सूरज सो रहा था की मुखिया की बीवी सहज रूप से यह सवाल पूछ रही थी,,, लेकिन हकीकत यही था कि वह लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ-साफ देखना चाहती थी वरना उसे भी रोशनी में नींद नहीं आती थी,,,,)

ठीक है मुझे भी रोशनी पसंद है,,,

अब तुम्हारी कमर का दर्द कैसा है,,,(लालटेन को टेबल पर रखते हुए सूरज बोला)

कैसा क्या है इसका इलाज ही कहां हुआ है जो आराम मिल जाएगा,,,, हाय दइया बहुत दर्द कर रही है,,,(मुखिया की बीवी को जैसे एकदम से याद आ गया हो कि उसकी कमर में तो दर्द हो रहा था और तुरंत अपनी कमर पर हाथ रखते हुए बोली,,,)

लगता है मालिस से ही इसका दर्द ठीक होगा,,,,

मुझे भी ऐसा ही लग रहा है,,,,





लेकिन मालकिन यहां तेल मिलेगा कहां,,,(सूरज थोड़ा निराश होते हुए बोला)

अरे बुद्धू सब कुछ मिल जाएगा वह टेबल पर जो संदूक रखी है ना उसके अंदर देख सरसों के तेल की सीसी रखी होगी,,, मुखिया की बीवी के कहते हैं सूरज टेबल पर रखे हुए संदूक को खोलकर अंदर देखा तो अंदर वाकई में सरसों के तेल की शीशी दिया सलाई और थोड़ी बहुत काम के साधन पड़े हुए थे सरसों के तेल की शीशी को देखकर सूरज मन ही मन प्रसन्न होने लगा क्योंकि वह जानता था की मालिश के बहाने वह आज औरत के अंगों को स्पर्श कर पाएगा,,, वह जल्दी से सब दुख में से सरसों के तेल की शीशी को निकाल लिया और संदूक को बंद कर दिया,,,, मुखिया की बीवी सूरज की तरफ देख रही थी सूरज के चेहरे पर उत्सुकता और प्रसन्नता के भाव साफ नजर आ रहे थे और मुखिया की बीवी सूरज को देखकर प्रसन्न हो रही थी उसके अरमान मचल रहे थे क्योंकि वह अच्छी तरह से जानते थे कि बस थोड़ी देर की बात है उसके बाद तो सूरज उसकी पूरी तरह से गुलाम हो जाएगा और वह जो कहेगी वही करेगा ,,,,, क्योंकि मुखिया की बीवी को पूरा अनुभव था कि मर्द किस तरीके से औरत के काबू में आते हैं पहली मर्तबा तो वह सूरज को नहाने के बहाने अपनी खूबसूरत अंग के दर्शन करा कर उसे ऐसा मोह जाल में फंसा ही थी कि आज वह खुद आम के घने बगीचे में रात रुकने के लिए तैयार हो गया था,,,

सूरज तू मालिश कर तो लेगा ना,,,,,,,(मुखिया की बीवी जानबूझकर आश्चर्य से सूरज की तरफ देखते हुए बोली,,,, लेकिन औरतों से हमेशा कन्नी काटने वाला सूरज कुछ भी दिनों में औरतों के बेहद करीब रहने का शौकीन बन चुका था इसलिए पूरे आत्मविश्वास के साथ वह बोला,,,,)

जी मालकिन चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है ऐसी मालिश करूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,,(हाथ में सीसी लिए हुए वह हल्की मुस्कान अपने चेहरे पर लाते हुए बोला,,,,,,, सूरज को मुस्कुराता हुआ देखकर मुखिया की बीवी के मन में भी संतुष्टि हो रही थी वह भी मुस्कुरा कर सूरज की तरफ अच्छी और हल्के से लंगड़ा कर चलने का बहाना करते हुए वहां बिस्तर के करीब जाने लगी और बोली,,,)





रुक पहले में बिस्तर लगा लूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही वह चारपाई पर रखे हुए बिस्तर को खोलने लगी बिस्तर लगाने से सूरज मुखिया की बीवी को इनकार करना चाहता था लेकिन जिस तरह से वह बिस्तर लगाने के लिए झुकी हुई थी उसकी भारी भरकम गांड एकदम उभर कर सामने नजर आ रही थी साड़ी में कई होने के बावजूद भी उसकी रूपरेखा लालटेन की पीली रोशनी में एकदम साफ नजर आ रही थी सूरज तो एकदम मतवाला हो चुका था उसका मन कर रहा था कि पीछे से जाकर मुखिया की बीवी को पकड़ ले और उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर अपना लंड रगड़ रगड़ कर अपने तन की गर्मी को शांत करें,,, सूरज ठीक उसके पीछे खड़ा होकर मुखिया की बीवी को देख रहा था वह झुक कर बिस्तर लगा रही थी उसके इस तरह से झुकने में भी बड़ा आनंद था सूरज नजर भरकर उसके पिछवाड़े को देख रहा था,,,, की तभी उसे याद आया की झोपड़ी में तो एक ही कर पाई है वह कहां सोएगा क्योंकि यह तो निश्चित ही था कि मुखिया की बीवी चारपाई पर ही लेटने वाली है लेकिन उसके लेटने की कोई व्यवस्था नहीं थी और ना ही कोई चादर थी जिसे वह जमीन पर बिछाकर सो सके या चटाई पर आराम कर सके,,, इसलिए अपने मन में उमड़ रहे इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए वह मुखिया की बीवी से बोला,,,)





मालकिन यहां तो सिर्फ एक ही कर पाई है और कोई चटाई भी नहीं है मैं कहां सोऊंगा,,,,।

(उसके इस मासूमियत भरे सवाल पर मुखिया की बीवी मन ही मन प्रसन्न होने लगी और उसकी प्रसन्नता के भाव उसके होठों पर आ गए और मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

अरे बुद्धू एक ही चारपाई का मतलब है कि हम दोनों इसी पर सोएंगे तुझे कोई दिक्कत है क्या मेरे साथ सोने में,,,,।

(मुखिया की बीवी के मुंह से इतना सुनते ही सूरज के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी उसके मन की तरंगे उछाल मारने लगी,,,,,, वह एकदम से मदहोश हो गया और मुखिया की बीवी की तरफ आश्चर्य से देखने लगा,,, क्योंकि एक औरत के मुंह से इस तरह के जवाब कि उसे उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी वह सच में पड़ गया था कि यह खूबसूरत जवान औरत एक जवान लड़के के साथ एक ही चारपाई पर कैसे सो सकती है लेकिन यहां पर वही हो रहा था जिसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था,,,, मुखिया की बीवी भी सूरज के चेहरे पर उठ रहे भाव को देख रही थी और समझ रही थी और मन ही मन प्रसन्न हो रही थी वह समझ गई थी कि एक ही चारपाई पर सोने के नाम पर सूरज की हालत खराब हो गई थी और वह‌ चोर नजरों से उसके पजामे की तरफ भी देखी तो उसके होश उड़ गए,,, उसके पजामे में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था और उसके तंबू की शक्ल देखकर,,,, उसकी बुर पानी छोड़ने लगी और वह अपने मन में ही अपने आप से ही बोली,,,, बाप रे ये तो तेरी बुर का भोसड़ा बना देगा,,,,। सूरज के चेहरे पर अभी भी आश्चर्य के भाव साफ नजर आ रहे थे उसके मन में यही चल रहा था कि वह एक खूबसूरत जवान औरत के साथ एक ही बिस्तर पर कैसे सोएगा यह सोचकर वह हैरान भी था और उसे उत्सुकता भी हो रही थी क्योंकि वह इस अनुभव को पूरी तरह से जी लेना चाहता था,,,।





जो हाल इस समय सूरज का था वही हाल मुखिया की बीवी का भी था,,, ऐसा नहीं था कि यह मुखिया की बीवी के लिए पहली बार था जिंदगी में न जाने वह कितनी बार अनजान जवान मर्दों के सामने अपने कपड़ों को उतार कर नंगी हो चुकी थी और उनके साथ जवानी का मजा लूट चुकी थी लेकिन फिर भी सूरज के सामने न जाने क्यों उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह पहली बार यह सब करने जा रही थी और सूरज के लिए तो यह सब बिल्कुल नया सा था एक नई दुनिया नया सुख नहीं अनुभूति इसलिए उसके मन में उत्सुकता बहुत ज्यादा थी,,,,।

मुखिया की बीवी बिस्तर लगा चुकी थी सिरहाने दो तकिया भी था दो तकिया को देखकर सूरज मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रहा था क्योंकि जिंदगी में पहली बार वह खूबसूरत औरत के पास सोने जा रहा था और वह भी एक ही चारपाई पर,,, सूरज के हाथ में सरसों के तेल की सीसी थी सीसी की तरफ देखते हुए मुखिया की बीवी बोली,,,,।

तू तैयार है ना मालिश करने के लिए,,,,।

जी मालकिन,, ,,

(सूरज के इतना कहते ही मुखिया की बीवी मुस्कुराते हुए,,,, अपनी साड़ी का पल्लू कंधे पर से पकड़ कर नीचे गिरा दी और उसकी छातिया एकदम से उजागर हो गई ब्लाउज में कैद उसकी दोनों चूचियां जाल में फंसे हुए कबूतर की तरह पंख फड़फड़ा रहे थे सूरज तो मुखिया की बीवी का यह रूप देखता ही रह गया उसकी भरी फूली छाती देखकर उसके होश उड़ गए,,।)
 
मुखिया की बीवी धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए सूरज को अपनी जवानी के जाल में पूरी तरह से फंसा रही थी,,, घनघोर रात में मुखिया की बीवी सूरज को लेकर अपने आम वाले बगीचे पर बगीचे की रखवाली करने के बहाने पहुंच चुकी थी और उसे झोपड़ी में मालिश के बहाने अपने वस्त्र उतारना शुरू कर दी थी मुखिया की बीवी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि दुनिया का कोई मर्द औरत के उत्तेजक बदन को देखकर मुंह नहीं मोडता,,, बल्कि खूबसूरत औरत के मादक रूप को देखकर वह उसका गुलाम बन जाता है और यही सूरज के साथ भी हो रहा था धीरे-धीरे सूरज मुखिया की बीवी के हर एक बात को मानते हुए आज उसके बेहद करीब पहुंच गया था,,,, सूरज को यह नहीं मालूम था कि आज की रात क्या होने वाला है लेकिन इतना जरुर जानता था कि मजा बहुत आने वाला है जिसकी शुरुआत हो चुकी थी,,।

मुखिया की बीवी अपने साड़ी के पल्लू को अपने कंधे पर से पकड़ कर नीचे गिरा दी थी जिसकी वजह से उसकी भारी भरकम चूचियां ब्लाउज में कैद एकदम से उजागर हो गई थी,, जिसे देखते ही सूरज की आंखें फटी की फटी रह गई थी सूरज की आंखों के सामने मुखिया की बीवी की खरबूजे जैसी चूचियां कबूतर की तरह उसके ब्लाउज की कैद में फड़फड़ा रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी चूचियां खुद ब्लाउज फाड़कर बाहर आने को उतारू हो चुकी है,,,, सूरज की तो सांसे ऊपर नीचे होने लगी क्योंकि मुखिया की बीवी की चूची हो कि बीच की पतली तरह एकदम साफ नजर आ रही थी और बहुत ही ऊपर और गहरी लकीर छोड़ रही थी,,,। सूरज आंख फाड़े मुखिया की बीवी की छातियो की तरफ देख रहा था और यह देखकर मुखिया की बीवी मन ही मन प्रसन्न हो रही थी जवानी की पहली सीढ़ी सफलतापूर्वक मुखिया की बीवी ने सूरज को पार करा दी थी,,,, मुखिया की बीवी अच्छी तरह से जानती थी कि जब सूरज का यह हाल सिर्फ ब्लाउज के ऊपर से देखने से है अगर वह ब्लाउज उतार कर अपनी नंगी चूचियां दिखाई की तब सूरज का क्या हाल होगा यह सोचकर वह मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,, ।





रुक जरा मैं साड़ी उतार दूं तब तू आराम से मालिश कर सकेगा नहीं तो मालिश करने में भी दिक्कत आएगी,,,,,(साड़ी को अपनी कमर से खोलते हुए मुखिया की बीवी बोली और उसकी यह बात सुनकर सूरज कुछ बोल नहीं पाया बस वह हैरान होकर मुखिया की बीवी की तरफ देखता रह गया और मुखिया की बीवी उसकी आंखों के सामने ही अपने वस्त्र को उतार रही थी अपनी साड़ी को अपने कमर से खोलकर उसे धीरे-धीरे अपनी कमर से अलग कर रही थी यह देखकर तो सूरज का तंबू एकदम बंबू बन चुका था,,, वह पसीने से तरबतर होने लगा था,,,.।,,, सूरज के सामने अपने वस्त्र उतारने में मुखिया की बीवी के भी तन बदन में हलचल हो रही थी खास करके जब-जब उसकी नजर सूरज के तंबू की तरफ जाती तब तब उसकी दोनों टांगों की पतली दरार में हलचल सी होने लगती थी उसकी बुर कुल बुलाने लगती थी,,, क्योंकि उसकी पारखी नजरे अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज के पजामे में कौन सा हथियार छुपा हुआ है और वैसे भी वह पेशाब करते हुए उसके लंड के दर्शन को कर चुकी थी और जिस तरह के हालात उसकी दोनों टांगों के बीच नजर आ रहे थे उसे देखते हुए वह अंदर ही अंदर थोड़ा घबरा भी रही थी,,,। क्योंकि नजर भर में ही उसने सूरज के लंड की मोटाई और लंबाई को अपनी आंखों से ही नाप ली थी उसके लंड कैसे पानी को देखते ही उसकी आंखों के सामने आलू बुखारा नजर आ रहा था जो कि उसके लंड का सुपाड़ा एकदम आलू बुखारे की तरह था,,, और यही सोचकर वह घबरा रही थी कि सूरज का आलू बुखारा जैसा सुपाड़ा उसकी गुलाबी बुर में कैसे घुसेगा,,, आज तक जितने मर्दों के साथ उसने संबंध बनाई थी यह सवाल उसके मन में कभी नहीं उभरा था लेकिन सूरज के मामले में कुछ अलग ही हलचल उसके मन में हो रही थी और इस हाल-चाल को लेकर वह‌ बेहद उत्सुक भी थी,,,, वह जल्द से जल्द सूरज के संड के मोटे सुपाड़े को अपनी गुलाबी छेद पर महसूस करना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि एक जवान मर्द का मोटा तगड़ा लंड जब एक औरत की बुर पर स्पर्श होता है तो औरत को कैसा महसूस होता है हालांकि इस अनुभव से वह कई बार गुजर चुकी थी लेकिन आज नए अनुभव की तलाश उसे थी,,,, जिसके लिए वह धीरे-धीरे करके अपने कमर पर से अपनी साड़ी को खोलकर अपने बदन से अलग कर चुकी थी और उसे नीचे जमीन पर गिरा दी थी सूरज की आंखों के सामने अब वह केवल पेटिकोट और ब्लाउज में थी जो की पीली रोशनी में सबको साफ नजर आ रहा था सूरज हक्का-बक्का होकर मुखिया की बीवी की मदहोश कर देने वाली जवानी को अपनी आंखों को देख रहा था या यूं कह लो की मुखिया की बीवी की मदहोश जवानी का रस वह अपनी आंखों से पी रहा था,,,।





एक तरह से सूरज इस खेल में पूरी तरह से अनाड़ी ही था क्योंकि अगर उसकी जगह कोई और अनुभव से भरा हुआ जवान मर्द होता तो मुखिया की बीवी को अपने हाथों से अपने वस्त्र उतारने की जरूरत ही नहीं पड़ती वह खुद अपने हाथों से अब तक तो मुखिया की बीवी के वस्त्र को उतार कर उसे संपूर्णता नग्न कर चुका होता,,, लेकिन इसमें सूरज का भी कोई दोस्त नहीं था उसमें अनुभव की कमी थी वह इस खेल में पूरी तरह से नया था इस खेल के नियम के बारे में उसे बिल्कुल भी ज्ञान नहीं था वह नहीं जानता था कि औरत रूपी किताबों के पन्नों को किस तरह से खोला जाता है किस तरह से उसके अंगों के शब्दों को पढ़ा जाता है वह तो नादान की तरह बस आंखें फाड़े देखे जा रहा था और इतने से ही उसे अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था उसकी उत्तेजना इतनी चरम पर थी कि उसे लग रहा था कि उसका लंड फट जाएगा और उसे इस बात का डर था कि कहीं उसका लंड पजामा फाड़ कर बाहर न जाए,,,।

मुखिया की बीवी साड़ी को उतारकर जमीन पर फेंकने के बाद सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए चारपाई पर बैठ गई उसके पैर नीचे जमीन पर थे और वह सूरज की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी सूरज के होठों से एक भी शब्द फुट नहीं रहे थे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह कोई मूर्ति बन गया हो वह मुस्कुराते हुए बोली,,,।

देख सूरज,,, आज मजबूरी वश किसी जवान लड़के के सामने अपने कपड़े उतार रही हूं तुझ पर भरोसा करके लेकिन इस बात की खबर अपने मालिक को बिल्कुल भी नहीं होने देना नहीं तो मेरी सामत आ जाएगी और साथ में तेरी भी,,, मैं क्या कह रही हूं समझ रहा है ना,,,, इस बात को राज ही रखना है कि आज की रात झोपड़ी में क्या हो रहा है,,,।





बिल्कुल मालकिन मैं इस बात को किसी से नहीं कहूंगा मैं अच्छी तरह से जानता हूं एक औरत की इज्जत क्या होती है और वैसे भी कोई औरत अनजान मर्द के सामने इस तरह से कपड़े नहीं उतरती वह तो तुम्हारी मजबूरी है मैं सब समझता हूं आज की रात जो कुछ भी हो रहा है वह राज ही रहेगा तुम निशचिंत रहो,,,,

(सूरज का जवाब सुनकर मुखिया की बीवी मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

तू बहुत समझदार है इसीलिए तो तुझ पर भरोसा कर रही हूं,,,, अब अच्छे से मालिश करना ताकि मेरा दर्द एकदम से दूर हो जाए,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो नमकीन ऐसी मालिश करूंगा कि तुम खुश हो जाओगी,,,।

ठीक है,,,(इतना कहकर मुस्कुराते हुए मुखिया की बीवी चारपाई पर पेट के बल लेट गई और पेट के बल लेटने से जो नजर सूरज की आंखों के सामने नजर आ रहा था उसे देखकर सूरज के तन बदन में आग लगने लगी उसके होश उड़ाने लगे और मदहोशी उसके नसों में घुलने लगी,,,, पेट के बल लेटने की वजह से,,, मुखिया की बीवी की भारी भरकम गांड और भी ज्यादा उभरी हुई नजर आने लगी क्योंकि उसने साड़ी उतारती थी और पेटिकोट का पतला कपड़ा उसके कसे हुए नितंबों से एकदम चिपक सा गया था,,ं और उसकी गांड की रूपरेखा एकदम साफ तौर पर नजर आ रही थी जिसे देखकर सूरज के तन बदन में आग लग रही थी उसके पीठ की नीचे कमर के इर्द-गिर्द जो हल्का सा दोनों तरफ गड्ढा पड़ा हुआ था उसे देखकर तो सूरज की जवानी मुखिया की बीवी की जवानी के आगे घुटने टेक रही थी सूरज मदहोश होकर मुखिया की बीवी के खूबसूरत बदन की रूपरेखा को देख रहा था और मुखिया की बीवी नजर को तिरछी करके सूरज की तरफ देखकर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि वह इतना तो समझ ही गई थी कि ‌,, सूरज उसकी गांड देखकर ही मंत्र मुग्ध हुआ जा रहा है,,,, सूरज को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और कुछ देर तक इसी तरह से खड़े होकर केवल मुखिया की बीवी की जवानी को रह गया वह तो यह भी भूल गया था की मदहोशी के आलम में उत्तेजित अवस्था में उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा था और पजामे में तंबू बनाया हुआ था,,,,।

अरे खड़ा होकर देखता ही रहेगा या मालिश भी करेगा,,,(मुखिया की बीवी की आवाज से सूरज की तंद्रा भंग हुई और एकदम से हड़बड़ा गयाऔर बोला,,,)

जजजज,,,,जी मालकिन मै शीशी का ढक्कन खोल रहा था,,,,(और इतना कहने के साथ ही वहां जल्दी-जल्दी सीसी का ढक्कन खोलने लगा सीसी का ढक्कन खुलते ही वह,, हाथ में सरसों के तेल की सीसी लिए हुए ठीक उसके बगल में चारपाई के पाटी पर बैठ गया,,,,,, इससे पहले उसने कभी भी किसी औरत की मालिश नहीं किया था हां अपने पिताजी की मालिश जरूर किया था जब उनकी कमर दुखती थी लेकिन एक औरत के अंगों की मालिश करने की लालच को वह रोक नहीं पाया था इसलिए हामी भर दिया था लेकिन फिर भी अनुभव न होने के बावजूद भी अपने पिताजी की पीठ और कमर की मालिश का अनुभव उसे जरूर था,,,।

दोनों तरफ से उत्सुकता बढ़ती जा रही थी मुखिया की बीवी जल्द से जल्द सूरज के हाथों को अपनी चिकनी नंगी पीठ पर महसूस करना चाहती थी उसका बस चलता है तो इसी समय अपने सारे वस्त्र उतार कर नंगी होकर सूरज से मालिश करवाती ,,,लेकिन धीरे-धीरे आगे बढ़ने में उसे भी मजा आ रहा था,,,

सूरज चारपाई की पाटी पर बैठा हुआ था,,, उसकी नज़रें मुखिया की बीवी के गोलाकार उभरे हुए नितंबों और उसकी चिकनी कमर पर ही टिकी हुई थी,,,। सूरज सरसों के तेल की सीसी में से तेल की धार को अपनी हथेली में गिराने लगा और फिर उसे सीसी को चारपाई के नीचे रख कर धीरे से अपनी हथेली को मुखिया की बीवी की कमर पर रख दिया और जैसे ही सूरज ने अपनी हथेली को मुखिया की बीवी की चिकनी कमर पर रखा मुखिया की बीवी एकदम से मदहोश हो गई उसके चेहरे के भाव एकदम से बदल गए ऐसा लग रहा था कि जैसे पहली बार यह सब हो रहा है और सूरज भी एक खूबसूरत जवान औरत की चिकनी कमर पर अपनी हथेली रखते ही उसके नरम नरम चिकनी कमर का एहसास हथेली पर होते ही मदहोश होने लगा,,,,, और धीरे-धीरे वह अपनी हथेली को मुखिया की बीवी की कमर पर घुमाना शुरू कर दिया,,,, सूरज का यह पहला मौका था जब वह किसी जवान खूबसूरत औरत की कमर की मालिश कर रहा था और पल भर में ही वह आनंद के परम सागर में गोते लगाने लगा उसे बहुत अच्छा लग रहा था उसकी नज़रें लगातार उसके नितंबों पर टिकी हुई थी वह मनी मनी यही चाह रहा था की मुखिया की बीवी अपनी पेटीकोट भी उतार देती तो उसकी नंगी गांड़ की मालिश करने में और ज्यादा मजा आता,, कुछ ही देर में सूरज की दोनों हथेलियां सरसों के तेल की चिकनाहट और मुखिया की बीवी की चिकनी कमर की चिकनाहट पाकर फिसलने लगी,,,, देखते ही देखते सूरज पेटिकोट के किनारे और ऊपर ब्लाउज के किनारे के बीचों बीच चिकनी पीठ पर तेल की मालिश करना शुरू कर दिया था और उसकी चिकनी पीठ सरसों के तेल की वजह से लालटेन की पीली रोशनी में एकदम चमक रही थी,,,, मुखिया की बीवी को सुखद अनुभव हो रहा था,,,ं एक तरफ उसे मालिश की वजह से आराम की अनुभूति हो रही थी वहीं दूसरी तरफ सूरज की हथेली से मदहोशी का एहसास भी हो रहा था जिसके चलते उसकी बुर से नमकीन रस टपक रहा था,,,। कुछ देर मालिश करने के बाद मालिश करते हुए सूरज बोला,,,‌

अब कैसा लग रहा है मालकिन,,,

बहुत मजा आ रहा है सूरज मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि तू मालिश करने में इतना माहिर है इतना तो औरतें भी अच्छी तरह से मालिश नहीं कर पाती तुझे मालूम है गांव में एक औरत है जिसे मालिश करने के लिए मैं बुलाती हूं वह अक्सर महीने में एक दो बार मेरी मालिश कर देती है लेकिन जितना अच्छा तू कर रहा है उतना वह नहीं कर पाती,,,,।

यह तो तुम्हारा बड़प्पन है मालकिन वरना में मालिश करने में माहिर तो नहीं हूं लेकिन अच्छी खासी कर लेता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही सरसों के तेल की चिकनाहट पाकर सूरज की उंगली एकदम से मुखिया की बीवी के ब्लाउज के किनारी में हल्के से प्रवेश कर गई,,,, और इसका एहसास मुखिया की बीवी को होते ही वह एकदम से मदहोश हो गई उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे जानबूझकर सूरज ने अपनी उंगली को उसके ब्लाउज में घुसाने की कोशिश किया हो,,, वह अंदर ही अंदर प्रसन्न होने लगी लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था तेल की चिकनाहट पाकर सूरज की उंगली अपने आप फिसल कर ब्लाउज में सरक गई थी,,,, लेकिन अनजाने में हुए इस हरकत से सूरज को भी बहुत अच्छा महसूस हो रहा था और उसकी हरकत पर मुखिया की बीवी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया होता ना देखकर सूरज की हिम्मत बढ़ने लगी थी और वह मालिश करते हुए अपनी उंगली को रह रहा कर मुखिया की बीवी के ब्लाउज में प्रवेश करा दे रहा था,, , सूरज की हरकत पर मुखिया की बीवी का दिल जोरो से धड़क रहा था उम्मीद की किरण उसे नजर आ रही थी उसे लग रहा था कि आगे का काम सूरज को बताना नहीं पड़ेगा वह खुद ही कर लेगा लेकिन कुछ देर तक सूरज की तरफ से इसी तरह की हरकत होती रही लेकिन इससे आगे वह बढ़ नहीं पा रहा था,,, इसलिए मुखिया की बीवी को लगने लगा कि उसे ही कुछ करना होगा वरना रात यूं ही मालिश में ही गुजर जाएगी,,,।

रात पूरी तरह से गहरा चुकी थी,,, एक अजीब सा सन्नाटा पूरे वातावरण में घुला हुआ था,,, रह रहकर कुत्तों के भौंकने की आवाज आती थी और झींगुर के शोर से वातावरण थोड़ा और भी ज्यादा डरावना हो जाता था लेकिन इन सब के बावजूद भी घनघोर रात में आम के बगीचे में बस्ती से दूर मुखिया की बीवी और सूरज एक दूसरे के संगत में आनंद प्रमोद में डूबे हुए थे इसलिए बाहर के वातावरण से उन दोनों को कुछ भी लेना-देना नहीं था,,,, मुखिया की बीवी जानती थी कि अब दूसरे वस्त्र को उतारने का समय आ गया है,,,, इसलिए वह बोली,.।

सूरज थोड़ा ऊपर भी दर्द कर रहा है,,,, ऊपर भी थोड़ी मालिश कर देता तो आराम मिल जाता,,,।

(इतना सुनकर सूरज के हाथ वहीं के वहीं रुक गए वह कुछ पल खामोश रहने के बाद बोला,,)

लेकिन मालकिन ब्लाउज में,,,,, मालिश कैसे होगी,,,

(सूरज थोड़ा रुक रुक कर बोला वैसे भी एक औरत के सामने ब्लाउज शब्द बोलते हुए उसके लंड की अकड़ बढ़ गई थी और उसके मुंह से इतना सुनकर मुखिया की बीवी मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और वह बोली).

अरे हां मैं जानती हूं इस तरह से मालिश नहीं हो पाएगी इसके लिए मुझे ब्लाउज को उतारना होगा,,,।

(मुखिया की बीवी के मुंह से इतना सुनते ही ,,, सूरज का दिमाग एकदम सन्न हो गया,,, पहली बार हो किसी औरत के मुंह से अपने ब्लाउस उतारने की बात को सुन रहा था,,, इसलिए उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी ,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह सच में मुखिया की बीवी के मुंह से ब्लाउज उतारने वाली बात सुना था या उसके कान बज रहे थे इसलिए अपने मन की तसल्ली के लिए वह बोला,,,)

क्या सच में उतारना पड़ेगा मालकिन,, !

हां रे सच में उतारना पड़ेगा क्या बिना उतारे मालिश कर पाएगा तु ,

नहीं ऐसे तो बिल्कुल भी मालिश नहीं हो पाएगी,,,

हां तो इसीलिए तो कह रही हूं कि ब्लाउज उतारना पड़ेगा,,, तेरे हाथों में तो जादू है,,,, रुक मैं अपना ब्लाउज उतार देती हूं,,,,,,,(इतना कहने के साथ ही मुखिया की बीवी धीरे से चारपाई पर उठकर बैठ गई उसका मुंह दूसरी तरफ था वह जानबूझकर सूरज की तरफ पी५ किए हुए बैठी थी क्योंकि वह सूरज के तन-बदन में और ज्यादा आग लगाना चाहती थी,,,, सूरज ठीक उसके पीछे चारपाई की पाटी पर बैठा हुआ था,,, और मुखिया की बीवी की हर क्रियाकलाप को देख रहा था,, ,। वह मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रहा था क्योंकि धीरे-धीरे मुखिया की बीवी अपने बदन पर से एक-एक वस्त्र उतरती जा रही थी साड़ी के बाद अब उसके ब्लाउज की बारी थी और ब्लाउज के उतरते ही सूरज जैसा जवान लड़का इतना तो जानता ही था कि ब्लाउज के अंदर औरतें अपने कौन से अंग को छुपा कर रखती हैं और ब्लाउज के उतरते ही उसका खूबसूरत अंग उजागर होने वाला था जिसे देखने के लिए सूरज का मन ललाईत हुआ जा रहा था,,, और दूसरी तरफ मुखिया की बीवी के भी तन-बदन में आग लग रहा था वह जानती थी कि सूरज के सामने वह धीरे-धीरे करके अपने सारे वस्त्र उतार कर एकदम नंगी हो जाएगी और एक खूबसूरत जवान औरत को आधी रात के वक्त कोई भी मर्द है संपूर्ण रूप से नंगी देखने के बाद अपने आप पर काबू नहीं कर पाएगा और यही सोचकर मुखिया की बीवी के तन बदन में भी हलचल मची हुई थी वैसे तो वह न जाने कितनी मर्दों के सामने अपने वस्त्र उतार कर नंगी हो चुकी थी लेकिन आज सूरज के सामने अपनी वस्तु उतारने में उसे कुछ ज्यादा ही मजा और आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,,।

रात का सन्नाटा झींगुर के आवाज और कुत्तों के भोगने की आवाज से थोड़ा बहुत भंग हो रहा था लेकिन इन सब की परवाह ना तो मुखिया की बीवी को था और ना ही सूरज को और ना ही दोनों की आंखों में थकान और नींद नजर आ रही थी दोनों की आंखों से नींद कोसों दूर जा चुकी थी आज की रात दोनों जाग कर ही बिताने वाले थे,,,,

मुखिया की बीवी चारपाई पर उठ कर बैठ गई थी उसकी पीठ सूरज की तरफ थी लालटेन की रोशनी पूरे झोपड़ी में अपना प्रकाश फैला रही थी,,,। मुखिया की बीवी अपने दोनों हाथों की नाजुक उंगलियों को हरकत देते हुए अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी और तिरछी नजर से सूरज की तरफ भी देख रही थी कि सूरज कहां देख रहा है और इस बात से उसका मन और ज्यादा प्रसन्न हो गया क्योंकि सूरज उसकी तरफ ही ललचाई आंखों से देख रहा था ,, धीरे-धीरे मुखिया की बीवी अपने ब्लाउज के ऊपर वाले बटन को खोल दी और दूसरे बटन को खोलने शुरू कर दी और दूसरे बटन को खोलते हुए वह सूरज से बोली,,,।

अच्छा सूरज यह बात कभी किसी औरत ने तेरे सामने इस तरह से अपने कपड़े उतारी है,,,(खेली खाई मुखिया की बीवी अपने इस सवाल से सूरज के चरित्र के बारे में जानना चाहती थी वह यह देखना चाहती थी कि सूरज वाकई में एकदम सीधा-साधा लड़का है या वह पहले भी औरतों की संगत में आ चुका है जिसका जवाब इस सवाल से उसे मिल जाने वाला था और मुखिया की बीवी की यह बात सुनकर सूरज बोला,,,)

नननन,,, नहीं मालकिन ऐसा कभी नहीं होगा कभी किसी औरत ने मेरी आंखों के सामने इस तरह से कपड़े नहीं उतारे हैं जैसा कि आप उतार रही हैं,,,,।

(सूरज का जवाब सुनकर मुखिया की बीवी को संतुष्टि हुई और मन ही मन प्रसन्न होने लगी और उसकी बात सुनकर वह अपना दूसरा बटन खोल चुकी थी और तीसरे बटन को खोलते हुए वह बोली,,,,)

देख सूरज तु अच्छा लड़का है,,, मुझे तेरे पर पूरा भरोसा है इसलिए तेरे सामने अपने कपड़े उतार रही हूं लेकिन तू यह बात बाहर किसी से भी मत बताना वरना तू ही मुश्किल में पड़ जाएगा,,,(इतना कहते हुए वह अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल चुकी थी उसके ब्लाउज के दोनों पार्ट एकदम से अलग हो चुके थे और पीछे बैठा सूरज यह सब देख रहा था भले ही उसे मुखिया की बीवी की चूची इस समय नजर ना आती हो लेकिन इस समय उसे पूरा अहसास हो रहा था की मुखिया की बीवी ने अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल चुकी थी और उसकी बात सुनकर वह बोला,,,)

बिल्कुल भी नहीं मालकिन भला मैं क्यों दूसरों को यह सब बताने लगा वैसे भी मैं यहां आम की रखवाली करने आया हूं मेरी मां को यह सब पता चलेगा तो मुझे ही भला बुरा कहेंगी इसलिए तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो यह सब मैं किसी से नहीं कहूंगा,,,,

(इतना सुनते ही मुखिया की बीवी के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर अपने ब्लाउस को दोनों हाथों से उतारने के लिए सूरज से बोली,,,)

अच्छी बात है ले जरा मेरा ब्लाउज पीछे से खींचना तो,,,,(इतना सुनते ही सूरज का दिल जोरो से धड़कने लगा उसकी हालत खराब होने लगी क्योंकि मुखिया की बीवी सीधे-सीधे उससे अपने ब्लाउज को उतरवा रही थी,,,।)
 
अच्छी बात है ले जरा मेरा ब्लाउज पीछे से खींचना तो,,,,(इतना सुनते ही सूरज का दिल जोरो से धड़कने लगा उसकी हालत खराब होने लगी क्योंकि मुखिया की बीवी सीधे-सीधे उससे अपने ब्लाउज को उतरवा रही थी,,,

सूरज का दिल जोरो से धड़क रहा था मुखिया की बीवी के इस बात में उसके तन बदन में आग लगना शुरू कर दिया था वह मदहोशी के आलम में अपने कदम को रख चुका था वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कोई खूबसूरत जवान औरत इस तरह से उसे अपने कपड़े उतरवायेगी और वह भी ब्लाउज,,,, सूरज एक सीधा-साधा गांव का नौजवान लड़का था वैसे तो वह सच में ही सीधा-साधा था लेकिन कुछ दिनों से उसके साथ जो कुछ भी हो रहा था उन सभी हादसों के कारण उसके तन बदन में जवानी पूरी तरह से अंगड़ाई लेने लगी थी औरतों का संगत उनके अंगों को झांकना देखना उनके बारे में सोचना यह सब उसे उत्तेजित कर जाता था उसे ही सब का नतीजा था कि मुखिया की बीवी के साथ वह रात में आम की रखवाली करने के लिए आम के बगीचे में आ गया था और यहां आम की रखवाली करने की जगह उसकी नजर दूसरे ही आम पर टिकी हुई थी जिसे वह खुद अपने हाथों से निर्वस्त्र करने जा रहा था,,,, ।।

मुखिया की बीवी अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ करके सूरज को ब्लाउज को पीछे की तरफ खींचने के लिए बोल रही थी लेकिन सूरज पूरी तरह से हैरान था उत्तेजित था मदहोश था इसलिए उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है वह बस आंख फाड़े चारपाई की पाटी पर बैठकर मुखिया की बीवी की जवानी को देख रहा था,,,,। और सूरज की तरफ से किसी भी प्रकार की हरकत होता हुआ ना देख कर मुखिया की बीवी फिर से बोली,,,।

अरे सूरज क्या कर रहा है उतार तो सही,,,,।

जजजज ,, जी,,,, मालकिन,,,,(मुखिया की बीवी की आवाज सुनते ही जैसे सूरज होश में आया हो इस तरह से हड़बड़ाहट भरे स्वर में बोला और फिर अपने हाथों को मुखिया की बीवी के ब्लाउज की तरफ बढ़ा दिया और अपने दोनों हाथों से मुखिया की बीवी के ब्लाउज को पकड़ लिया और इतनी मात्रा से ही सूरज के बदन में पूरी तरह से मदहोशी भर गई थी वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था क्योंकि वह औरत के बदन पर पहली बार उसके ब्लाउज को छू रहा था उसे पकड़ रहा था और वह भी उतारने के लिए यह एहसास ही सूरज के लिए बहुत खास था,,,। दोनों तरफ से हालत खराब हो रही थी मुखिया की बीवी की भी हालत खराब हो रही थी और सूरज का तो यह सब पहली बार था इसलिए उसकाहालत खराब होना लाजिमी था,,,, मुखिया की बीवी के बताएं अनुसार सूरज मुखिया की बीवी के ब्लाउज को पीछे की तरफ खींचकर उसके बाहों में से उतारने लगा और उसके खींचने की वजह से उसका ब्लाउज उतरना शुरू कर दिया यह एहसास उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी को और ज्यादा भड़का रहा था आखिरकार सूरज भी एक मर्द था और मर्द में एक औरत के प्रति उत्तेजना और आकर्षक होना लाजिमी था और ऐसे हालात में तो सूरज कच्चा खिलाड़ी था वरना कोई और होता तो ब्लाउज के साथ-साथ उसकी पेटिकोट उतार कर उसे नंगी कर दिया होता है,,,,,।

धड़कते दिल के साथ देखते ही देखते सूरज मुखिया की बीवी की बाहों में से उसके ब्लाउज को उतार दिया और उसे अपने हाथ में लिए हुए मुखिया की बीवी की नंगी चिकनी मांसल पीठ को देखने लगा,,,, मुखिया की बीवी की नंगी चिकनी पीठ को देखकर ही सूरज को एहसास हो रहा था कि वह कितनी जवान से भरी हुई थी अपने बदन से ब्लाउज उतरते ही मुखिया की बीवी का भी दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि वह कमर के ऊपर नंगी हो चुकी थी उसकी नंगी चूचियां भले ही सूरज की आंखों के सामने नहीं थी लेकिन फिर भी उसे यकीन था कि सूरज उसकी नंगी चूचियों के बारे में ही सोच रहा होगा और उसका सोचना बिल्कुल सही था क्योंकि सूरज उसके दोनों खरबूजा के बारे में ही सोच रहा था की नंगी चूचियां कैसी दिखती होगी कैसा आकार होगा कठोर होगी कि नरम होंगी,,, यह सब सो कर सूरज परेशान हुआ जा रहा था और मुखिया की बीवी भी उसे इतनी जल्दी अपनी नंगी चूचियों के दर्शन करना नहीं चाहती थी वह धीरे-धीरे सूरज के तन बदन में आग लग रही थी उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी और एक तरह से वह उसे अपना गुलाम बना देना चाहती थी,,,,।

अब उसे हाथ में ही लिए रहेगा या उसे नीचे भी रखेगा,,,,(मुखिया की बीवी की आवाज सुनते ही सूरज को एहसास हुआ कि उसके हाथ में उसके बदन से उतरा हुआ ब्लाउज था जिसमें उसके बदन की खुशबू थी उसके चुचीयो की खुशबू थी,,, जिस पर उसके पसीने की मादक खुशबू आ रही थी मुखिया की बीवी के कहते हैं सूरज उसके बदन से उतरे हुए ब्लाउज को जमीन पर रखने वाला था लेकिन उससे पहले ही ना जाने उसके मन में क्या हुआ वहां ब्लाउज को अपने नाक के करीब लाया और गहरी सांस लेते हुए उसे ब्लाउज की खुशबू को अपने अंदर उतारने लगा मानो की जैसे उसके हाथ में उसका ब्लाउज नहीं बल्कि उसकी चूचियां हो सूरज एकदम से मस्त हो गया और उसे जमीन पर रख दिया,,,,।

रात धीरे-धीरे और भी गहरी होती जा रही थी अभी बहुत समय था दोनों के पास इसलिए तो मुखिया की बीवी पूरी तरह से निश्चित थी और वैसे भी वह इस बात से भी निश्चित थी कि सूरज आज की रात के बाद उसकी जवानी का गुलाम हो जाएगा,,,। मुखिया की बीवी बिना कुछ बोले वापस पेट के बल लेट गई वह चाहती तो इसी समय पीठ के बल लेट कर अपनी जवानी के दोनों केंद्र बिंदु के दर्शन कर सकती थी लेकिन वह ऐसा इस समय नहीं करना चाहती थी,,,वह धीरे-धीरे खेल में आगे बढ़ना चाहती थी क्योंकि वह सूरज की तड़प को देख रही थी महसूस कर रही थी और उसे मजा आ रहा था,,,।

अब कंधों से लेकर कमर तक अच्छे से मालिश करना,,,

जी मालकिन,,,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज वापस सरसों के तेल की शीशी को नीचे से उठा लिया और उसमें से तेल की धार को इस बार अपनी हथेली में नहीं बल्कि मुखिया की बीवी की चिकनी पीठ पर गिराने लगा,,, जिसका एहसास मुखिया की बीवी को अच्छी तरह से हो रहा था,,,, सरसों की तेल की धार उसकी पीठ से होकर नीचे को गिरती ईससे पहले ही सूरज सरसों के तेल की सीसी को नीचे रखकर अपनी दोनों हथेलियां को उसकी नंगी चिकनी पेट पर रखकर मालिश करना शुरू कर दिया उसके कंधों से लेकर उसकी कमर की गहराई तक घूम रही थी,,,,, सूरज पहले केवल मुखिया की बीवी की कमर पर मालिश कर रहा था लेकिन वह अपने मन में सोच रहा था कि वह अपना ब्लाउज भी उतार देती तो मजा आ जाता है और ऐसा ही हुआ और इसलिए उसकी लालच और ज्यादा पढ़ने लगी थी वह अपने मन में सोच रहा था कि काश मुखिया की बीवी अपना पेटीकोट भी उतार कर नंगी हो जाती तो मालिश करने में और उसके खूबसूरत बदन को देखने में और स्पर्श करने में मजा आ जाता,,,।

जैसी सोच और विचार सूरज के मन में पनप रहे थे वही ख्याल मुखिया की बीवी के मन में भी आ रहा था वह भी अपनी पेटीकोट को उतार कर नंगी हो जाना चाहती थी और अपने पूरे नंगे बदन पर सूरज की मर्दाना हाथों को उसकी हथेलियों की रगड़ को महसूस करना चाहती थी,,,, लेकिन धीरे-धीरे इस समय वह सूरज की मालिश की कारीगरी का पूरा आनंद ले रही थी वैसे तो सूरज ने कभी भी किसी की भी मालिश किया नहीं जाने की मुखिया की बीवी की मालिश वहीं से कर रहा था मानों जैसे मालिश करने में वह उस्ताद हो,,,, अपनी दोनों हथेलियां को वहां कंधों से होते हुए नीचे की तरफ उसकी कमर की दोनों तरफ लेकर आता और नीचे की तरफ लाकर उसकी कमर को दोनों हाथों से इस तरह से दबोच लेता मानो जैसे की पीछे से उसकी चुदाई करने की तैयारी कर रहा हो और यही ख्याल मुखिया की बीवी के मन में भी आ जाता था जब वह पीछे से उसकी कमर को दोनों हाथों से थामता था और यह ख्याल उसके मन में आते ही उसकी बुर पानी फेंक देती थी,,,,।

सूरज बार-बार अपनी इस क्रिया को दोहराता था और जब उसकी दोनों हथेली ऊपर की तरफ कंधों पर आती तो वह कंधों को भी दोनों हाथों से थाम लेता था,,, ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी लेकिन अभी विवाह चारपाई की पाटी पर बैठा हुआ था और इस तरह से मालिश करने में उसे सहज नहीं महसूस हो रहा था लेकिन फिर भी आनंद ही आनंद उसे प्राप्त हो रहा था,,,,।

अब कैसा लग रहा है मालकिन,,,,(सूरज इस तरह से कंधों से लेकर के नीचे कमर तक अपनी हथेली घूमाता हुआ बोला,,,)

बहुत अच्छा लग रहा है रे,,,, ऐसी मालिश तो किसी ने नहीं किया था,,,,,आहहहहह,,,, तेरे हाथों में तो जादू है,,,, आज लगता है कि तू मेरे बदन से दर्द को निकाल फेंकेगा,,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मालकिन ऐसा ही होगा,,,,।

आहहहह,,,, थोड़ा हथेलियां को नीचे की तरफ भी ले जा वहां भी दर्द हो रहा है,,,,,।

(मुखिया की बीवी के मुंह से इतना सुनते ही सूरज के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसका दिल जोरो से धड़कने लगा,,,, और इस बार बहुत अपनी हथेली को नीचे की तरफ लेकर आते हुए अपनी उंगली को मुखिया की बीवी की पेटिकोट के अंदर हल्के से घुसाने की कोशिश करने लगा और अपनी हथेली का दबाव उस जगह पर बढ़ाने लगा और बोला,,,

यहां पर मालकीन,,,,

हा रे यहां पर ऐसा लग रहा है की नस खींचा रही है,,,,

कहां यहां पर,,,,,(अपनी बीच वाली उंगली को उसकी पेटिकोट के अंदर डालकर उसके नितंबों के बीच की दरार के केंद्र बिंदु पर स्थिर करते हुए बोला और उसके इतने मात्र से ही सूरज का लंड पजामे में दंगल मचाने लगा,,,, क्योंकि उसे इतना तो एहसास हो ही रहा था कि वह अपनी उंगली को कौन सी जगह पर रखा हुआ है वह जगह हल्का सा गहरा गड्ढा लिया हुआ था जिससे,,, सूरज की मदहोशी बढ़ने लगी थी और यही हाल मुखिया की बीवी का भी था क्योंकि वह सूरज की उंगली को अपनी गांड की तरह की ऊपरी हिस्से पर महसूस कर रही थी और एकदम से गहरी सांस लेते हुए बोली,,,,।)

हां यहीं पर ज्यादा खिंचाव हो रहा है,,,,

रुकिए मालकिन मैं कोशिश करता हूं,,,,,,,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज सरसों के तेल की सीसी उठाकर थोड़ा सा तेल अपनी हथेली में गिरा दिया और उसे अपनी उंगली पर लगा लिया,,,,, उसका दील जोरों से धड़क रहा था,,, क्योंकि इस समय उंगली पर तेल लगाने की वजह से उसे पुरानी बात याद आ रही थी,,,,, जब गांव में एक दूसरे से बहस हो रही थी तब,,, गांव का ही एक आदमी उसके दोस्त को गुस्से में गाली देते हुए कह रहा था कि मादरचोद तेल लगाकर तेरी मां की चुदाई करूंगा,,,,, चुदाई करने वाली बातें तब तो ठीक थी लेकिन तेल लगाकर इस बात के मतलब को सूरज समझ नहीं पा रहा था,,, उसके मन में तेल लगाने वाली बात की जिज्ञासा बनी हुई थी और वह कई बार इस बात को जानने की कोशिश भी किया था लेकिन अपने भोलेपन के कारण वह अपने प्रश्न के उत्तर को ढूंढ नहीं पाया था,,,, अनायास ही यह बात उसके मन में आ गई थी लेकिन फिर भी वह अभी भी उसे आदमी के द्वारा कही गई बात के मतलब को अभी तक नहीं समझ पाया था,,,,,।

सूरज अपनी हाथ में और उंगली में सरसों का तेल लगाकर अपनी उंगली को चारपाई की पाटी पर बैठा हुआ,,, अपनी तेल लगी उंगली को मुखिया की बीवी की पेटीकोट के अंदर सरकाने लगा,,,, इतने से सूरज के तन बदन में अजीब सी उत्तेजना का संचार हो रहा था वह मदहोश हो रहा था वह अपनी उंगली को,,, मुखिया की बीवी के नितंबों के ऊपरी हिस्से की शुरुआती केंद्र बिंदु पर रखकर उसे हल्के हल्के दबाता हुआ मालिश कर रहा था,,,, नितंबों के बीच के उस गड्ढे में उंगली दबाने में सूरज को बहुत अच्छा लग रहा था और मुखिया की बीवी की तो हालत खराब हो रही थी उसकी बुर पूरी तरह से पानी से लपा लप हो रही थी,,,।

इस बात को सूरज और मुखिया की बीवी दोनों अच्छी तरह से समझ रहे थे कि इस तरह से अच्छी तरह से मालिश नहीं हो पा रही थी,,,, इसलिए मुखिया की बीवी बोली,,,।

तू पाटी पर बैठा है ना,,,

जी मालकिन,,,,

इसलिए तु ठीक से मालिश नहीं कर पा रहा है,,, एक काम कर तू मेरी कमर के दोनों तरफ घुटने रखकर आराम से बैठ जा तब तू आराम से मालिश कर पाएगा,,,,।

मुखिया की बीवी की बात सुनते ही सूरज की आंखों में नशा छाने लगा क्यों किसी सीधे-सीधे यह उसके ही फायदे की बात थी ऐसे में वह मुखिया की बीवी के नितंबों के स्पर्श में आ सकता था,,,,। वह तो उतावला हुआ जा रहा था लेकिन फिर भी जानबूझकर इनकार करते हुए बोला,,,।

कोई बात नहीं मालकीन ठीक है,,,,

अरे ठीक कैसे हैं तो ठीक से मालिश नहीं कर पा रहा है,,, चल जल्दी से जैसा रहती हूं वैसा ही कर,,,,

(सूरज को भला इसमें कौन सा एतराज था वह इस बार इनकार नहीं कर पाया और मुखिया की बीवी के बताएं अनुसार उसकी कमर के एक तरफ अपने घुटने को मोड कर रख दिया और दूसरी तरफ भी,,,ऐसा ही किया,,,,,,, इस तरह से वह मुखीया की बीवी के नितंबों पर सवार हो चुका था,,,, जिस तरह से सूरज मुखिया की बीवी के ऊपर बैठा हुआ था,,,ऐसै हालात मे ,,, मुखिया की बीवी की गांड से सुरज की गांड से स्पर्श हो रही थी।
 
मुखिया की बीवी के कहे अनुसार सूरज उसके नितंबों पर सवार हो चुका था और वह भी मालिश करने के लिए और ऐसे हालात में मुखिया की बीवी की भारी भरकम गांड और सूरज की गांड आपस में स्पर्श हो रहे थे जो हाल सूरज का था वही हालत मुखिया की बीवी का भी था सूरज तो पूरी तरह से मदहोश हो रहा था क्योंकि एक औरत की गांड उसके बदन से जो स्पर्श हो रही थी और मालिश करने के लिए वह उसकी गांड पर सवार हो चुका था,,,,।





हां अब तु ठीक से मालिश कर पाएगा,,,(मुखिया की बीवी गहरी सांस लेते हुए बोली)

सही कह रही हो मालकिन अब अच्छे से मालिश हो पाएगी,,,,(सूरज भी मुखिया की बीवी कि सुर में सुर मिलाता हुआ बोला,,,)

जब तुझे मालूम था तो पहले क्यों नहीं बोला,,,

मैं भला क्या बोल सकता हूं मालकिन,,,

तू बोल दिया कर जो तेरे मन में हो,,, मैं तुझे डांटने वाली थोड़ी हूं,,,।





फिर भी आप मालकिन हैं,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज सरसों के तेल की शीशी को हाथ में लेकर तेल की धार को उसकी कमर के बीचों बीच गहरी दरार में गिरने लगा जिससे मुखिया की बीवी मदहोश होने लगी और फिर थोड़ी ही देर में सूरज दोनों हाथों से नीचे से लेकर के ऊपर तक कंधों तक मालिश करना शुरू कर दिया एक खूबसूरत जवान औरत के नंगे जिस्म पर हाथ घुमाने में कैसा आनंद की अनुभूति होती है आज वह आनंद की अनुभूति सूरज अपने अंदर महसूस कर रहा था वह बहुत ज्यादा उत्तेजित और मदहोश था उसका लंड पजामे में अपनी औकात में आ चुका था,,, वैसे भी एक खूबसूरत जवान औरत के गोलाकार भारी भरकम नितंबो पर बैठने का यह पहला अनुभव बेहद अतुलिनिय था,,, जिसकी तुलना और अनुभूति का वर्णन कर पाना शायद सूरज के लिए असंभव था,,,,। कमर से अपनी हथेली को उसे पर दबाव बनाते हुए ऊपर की तरफ ले जाते हुए सूरज बोला,,,)





अब कैसा लग रहा है मालकिन,,,,

बहुत सुकून मिल रहा है रे,,, मैं तो कभी सोची भी नहीं थी की मालिश करवाने में भी इतना आनंद आता होगा,,,, गजब का हुनर है तेरे हाथों में,,,,,

हुनर कहां मालकिन जरूरत पड़ने पर मालिश कर देता हूं बस,,,,(ऐसा कहते हुए अपने दोनों हथेलियां को मुखिया की बीवी के कंधों तक ले गया और कंधों को दोनों हथेली में दबोच लिया उसका इस तरह से दबोचना मुखिया की बीवी के तन बदन में काम रस की झड़ी बरसा रहा था मुखिया की बीवी उत्तेजित हुए जा रही थी क्योंकि इस तरह से उसका पकड़ना कुछ और कहानी कह रहा था,,,. बार-बार उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि जैसे पीछे से सूरज का बाप भोला उसके कंधों को पड़कर उसकी बुर में लंड पल रहा हूं और यह एहसास मुखिया की बीवी को पानी पानी कर रहा था उसकी बुर से मदन रस का बहाव हो रहा था,,,,)





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फिर भी तेरे हाथों में जादू है बहुत अच्छा लग रहा है,,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मालकिन आज तुम्हारे बदन से पूरा दर्द गायब हो जाएगा और ऐसा कहते हुए वह कंधों से नीचे अपनी हथेली को लाया तो अन्य से ही तेल और मखमली बदन की चिकनाहट पाकर उसकी हथेली दोनों तरफ से नीचे की तरफ सरक गई और ऐसे हालात में उसकी दोनों हथेलियां मुखिया की बीवी की चुचियों तक पहुंच गई,,, और अनायास ही उसकी दोनों हथेलियां में मुखिया की बीवी के दोनों खरबूजे आ गए और अचानक से वह उन्हें दबा भी दिया,,,,। सूरज की यह हरकत मुखिया की बीवी के बाद में उत्तेजना की चिंगारी को और ज्यादा भड़का दी उसके मुंह से हल्की सी आह निकल गई और यह आवाज सूरज के कानों तक एकदम से पहुंच गई वह इस आवाज को पहचानता नहीं था वह सोचा कि उसकी वजह से मुखिया की बीवी को दर्द महसूस हो रहा है इसलिए वह बोला,,,।)





क्या हुआ मालकिन दुख रहा है क्या,, ,(हालांकि उसकी कौन-कौन चुचियों का एहसास अपनी हथेली में महसूस करके सूरज पूरी तरह से मस्त हो चुका था और उसे इस बात का एहसास हो चुका था कि आनायास ही उसके हाथ में मुखिया की बीवी का कौन सा अंग आ गया है,,,,, मुखिया की बीवी कुछ और कह पाती इससे पहले ही सूरज की बात सुनते ही उसके दिमाग में युक्ति सुझने लगी और वह बोली,, )

हां रे,,,, जहां पर तेरा हाथ गया था ना वहां ज्यादा दर्द कर रहा है,,,,

(जानबूझकर दर्द भरे स्वर में मुखिया की बीवी बोली तो उसकी बात सुनते ही सूरज का रोम रोम पुलकित होने लगा उसके लंड की अकड़ बढ़ने लगी क्योंकि वह जानता था कि अचानक उसका हाथ कहां पहुंच चुका था और इस पर मालिश करने के लिए मुखिया की बीवी बोल रही थी और मन ही मन प्रसन्न होता हुआ एक बार फिर से सूरज कमर से लेकर ऊपर की तरफ अपनी हथेली को ले गया,,,, और जहां से उसकी हथेली फ़ीसदी थी उसी जगह से वह अपनी दोनों हथेलियां को वापस उसकी चूचियों की तरफ ले गया लेकिन इस बीच उसके दिल की धड़कन पूरी तरह से बढ़ने लगी थी क्योंकि वह जानता था कि अगले पल उसकी हथेली मुखिया की बीवी की चूची पर होगी जिसे देखने के लिए वह मचलता रहता था तड़पता रहता था उन्हें छूने का आज उसे मौका मिल रहा था,,,,,।





मालिश के बहाने दबाने का मौका मिल रहा था हालांकि सूरज में इन सब का ज्ञान नहीं था लेकिन इतना तो जानता ही था कि क्या करना है इसलिए सूरज की हथेलियां नीचे की तरफ गई और दोनों हथेलियां उसकी चूचियों की तरफ आगे बढ़ते हुए तेल की चिकनाहट और जिस का मखमली पान पाकर उसकी हथेली पड़े आराम से उसकी दोनों चूचियों की तरफ फिसल कर पहुंच गई और सूरज हथेली में मुखिया की बीवी की चूची आते हैं उसे हल्के से दबाते हुए मालिश करने लगा यह सब सूरज की हालत तो खराब कर ही रहा था लेकिन मुखिया की बीवी की भी हालत बिल्कुल भी अच्छी नहीं थी उसकी भी सांस गहरी चलने लगी थी वह भी मदहोश होने लगी थी उदास की लहर उसके बदन में भी उठ रही थी,,,,, सूरज मुखिया की बीवी की आज्ञा पाकर बार-बार इसी हरकत को दोहरा रहा था मुखिया की बीवी की चूची को पकड़ने में दबाने में मसलने मुझे बहुत मजा आ रहा था हालांकि वहएक मर्द के तौर पर उसकी चूची को दबा नहीं पा रहा था बस मालिश के बहाने हल्के से स्पर्श करके उसे पर दबाव बना रहा था और इस बात को मुखिया की बीवी भी अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी कि जब सूरज का स्पर्श इतना लाजवाब है तो जब वह उसे जोर-जोर से दबाएगा तब कितना मजा आएगा,,,,,.





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लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था आधी रात का समय हो चुका था गांव से दूर आम के बगीचे में छोटी सी झोपड़ी में एक खूबसूरत जवान औरत एक जवान लड़की के साथ मालिश का सुख भोग रही थी और यह मालिश का सुख दोनों को कहां लेकर जाने वाला था इस बात का एहसास अभी दोनों को भी नहीं था हालांकि मुखिया की बीवी अच्छी तरह से जानती थी कि आज की रात क्या करना है लेकिन सूरज तो बिल्कुल अनजान था लेकिन इतने सही जो उसे आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था आधी रात का समय हो जाने के बावजूद भी ना तो सूरज की आंखों में नींद थी ना तो मुखिया की बीवी की आंखों में दोनों की आंखों से नींद कोसों दूर जा चुकी थी,,,,, आम के बगीचे में फैला सन्नाटा रह रहकर कुत्तों की आवाज से थोड़ा बदल जाता था वैसे तो आमतौर पर आधी रात के समय गांव के बाहर जंगल जैसे बगीचे में यह वातावरण डरावना ही था लेकिन जिस तरह का खेल झोपड़ी के अंदर एक खूबसूरत जवान औरत और एक जवान मर्द खेल रहे थे उन दोनों को बाहरी वातावरण से कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा था वह दोनों तो लालटेन की पीली रोशनी में मदहोशी का आनंद लूट रहे थे,,,।





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अभी तक के अनुभव से जिस तरह से सूरज मुखिया की बीवी के नितंबों पर सवार था,,, अब उसकी हरकत बढ़ने लगी थी क्योंकि उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था और वह अपने लंड का जवाब मुखिया की बीवी की गांड पर महसूस करना चाहता था,,, न जाने कैसे अनुभवहीन सूरज में इतनी हिम्मत आ गई थी इसीलिए वह अपने नितम्बो को थोड़ा पीछे की तरफ ले गया और मुखिया की बीवी की गांड के निचले हिस्से से जहां से उभार शुरुआत होती है वहां पर अपने नितंबों को टिका दिया,,,, ऐसा करते ही वाकई में सूरज का लंड जो पजामे में तना हुआ था वह मुखिया की बीवी की उभरी हुई गांड पर स्पर्श होने लगा और अनुभव से भरी हुई मुखिया की बीवी भी इस स्पर्श को इस गरमाहट को पूरी तरह से महसूस करके मदहोश हो गई,,,, सूरज की इस हिम्मत को वह मन ही मन सलाम कर रही थी हालांकि उसे ऐसा ही लग रहा था कि अनजाने में ही ऐसा हुआ है क्योंकि वह सूरज को अच्छी तरह से समझ गई थी वह जानती थी कि वह आगे से अपनी तरफ से किसी भी तरह की हरकत करने की हिम्मत नहीं कर पाएगा लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसमें मुखिया की बीवी मस्त हुए जा रही थी और सूरज इस तरह से बार-बार मालिश करते हुए उसकी दोनों चूचियों को हथेली में लेकर दबाते हुए मालिश कर रहा था,,,, ।





अब कैसा लग रहा है मालकिन,,,?

बहुत अच्छा,,,,(अपनी सांसों को गहरी खींचते हुए मुखिया की बीवी बोली,,,, और यह सच ही था उसे बहुत अच्छा लग रहा था,,,, और एक काम से भरी हुई औरत को भला क्यों ना अच्छा लगता जब उसके ऊपर एक जवान लड़का अपनी गांड सटाकर उसकी गांड पर बैठा हो और उसका तना हुआ लंड उसकी नितंबो पर रगड़ रहा हो ,,उसकी गर्माहट से उसकी बुर पिघल रही हो,,, तो भला इससे ज्यादा आनंद दायक काम से भरी हुई औरत के लिए क्या होगा,,,,) आज मुझे बहुत सुकून मिल रहा है अच्छा हुआ मैं तुझे आम के बगीचे में ले आई वरना मैं तो जान ही नहीं पाती की मालिश इस तरह से भी होती है,,,,,

मैं तो ऐसा ही करता हूं मालकिन,,,, आज देखना तुम्हारे बदन से पूरा दर्द निकाल दूंगा,,,,





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ऐसा ही करना सूरज बेटा,,,,,।

(मुखिया की बीवी और सूरज दोनों आनंद के सागर में गोते लगा रहे थे सूरज तो पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि कहीं उसके लंड की नसें फट ना जाए,,, इतना अत्यधिक कड़कपन उसने कभी महसूस नहीं किया था उसका लंड बार-बार मुखिया की बीवी की उभरी हुई गांड पर धंसा जा रहा था और इस चुभन को मुखिया की बीवी अच्छी तरह से जानती थी महसूस कर रही थी,,, और यह भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी गांड के दरार में चुभने वाली चीज क्या है,,, इसलिए तो उसकी मां और भी ज्यादा प्रसन्न हुआ जा रहा था क्योंकि उसे आवाज हो चुका था कि सूरज में कितना दम है,,,,





मालिश का कार्यक्रम लगातार जारी था और ऐसा भी नहीं था कि दोनों को किसी चीज के लिए जल्दबाजी हुई जा रही थी दोनों निश्चित थे,,, मुखिया की बीवी आराम से खटिया पर लेटी हुई थी और मालिश का आनंद लूट रही थी और जवानी से भरा हुआ सूरज मुखिया की खूबसूरत बीवी के नंगे जिस्म पर अपनी हथेली घुमा घुमा कर आनंद के सागर में गोते लगा रहा था,,,,,,,, लेकिन अनुभव से भरी हुई मुखिया की बीवी अच्छी तरह से जानती थी कि अब इस खेल में आगे बढ़ाने में ही बनाई थी क्योंकि उसकी बुर से पानी निकल निकल कर पूरा तालाब बन चुका था,,, उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसकी पेटिकोट उसके मदन रस से भीग चुकी थी,,,, अब वह सूरज के सामने पूरी तरह से निर्वस्त्र हो जाना चाहती थी एकदम नंगी हो जाना चाहती थी,,, ताकि सूरज मदहोश हो जाए और उसकी जवानी की प्यास को अपने मजबूत औजार से बुझा सके,,, इसलिए वह अपने मन में युक्ति ढूंढ रही थी की कैसे सूरज के सामने एकदम नंगी हो जाए पैसे तो वह आधी नंगी तो हो ही चुकी थी लेकिन अभी उसके नंगेपन को उसका पेटिकोट ढका हुआ था और वैसे भी मर्दों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बिंदु अभी भी सूरज के नजर से दुर ही था। इसलिए कुछ देर तक इसी तरह से मालिश करवाने के बाद वह बहाना बनाते हुए बोली ,,।





सहहहह,,, सूरज जल्दी से मेरे ऊपर से उतर,,,,

(हड़बड़ाहट में मुखिया की बीवी बोली उसकी बात सुनकर सूरज भी समझ नहीं पाया और वैसे भी वहां मुखिया की बीवी के ऊपर से उठना नहीं चाहता था लेकिन फिर भी हैरान होते हुए बोला,,,।)

क्या हो गया मालकिन,,,,,?(एकदम से सूरज भी धीरे से अपने आप को उसके बदन से ऊपर उठाते हुए बोला)

अरे बड़े जोरों की पेशाब आई है,,,,,।

(एक बार फिर से मुखिया की बीवी के मुंह से पेशाब शब्द सुनते ही सूरज के तन बदन में आग लगने लगी उसकी आंखों में खुमारी छाने लगी,,,, किसी तरह से वह अपने आप को संभालते हुए ना चाहते हुए भी बोला,,,)





लेकिन मालकिन अभी तो आप करके आई थी ना,,,

तो क्या हो गया इस पर मेरा बस थोड़ी चलता है,,,,,(सूरज मुखिया की बीवी के ऊपर से उतरकर खटिया के नीचे खड़ा हो गया था मुखिया की बीवी इस अवस्था में धीरे से उठकर खटिया पर बैठ गई अभी भी उसका मुंह सामने की तरफ था उसकी पीठ सूरज की तरफ वैसे तो लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ नजर आ रहा था लेकिन सूरज जो देखना चाह रहा था अभी भी उसकी आंखों से दूर ही था,,,,,)

तू जल्दी से लालटेन ले ले,,,,(मुखिया की बीवी का इतना कहना था कि वह झोपड़ी के कोने में टंगी हुई लालटेन को लेने के लिए उसे और आगे बढ़ा और लालटेन को अपने हाथ में ले लिया तब तक मुखिया की बीवी खटिया पर से उठकर दरवाजे की तरफ आ चुकी थी वह चाहती तो इसी समय वहां अपनी नंगी चूचियों का दर्शन सूरज को कर सकती थी लेकिन वह उसकी तरफ को ज्यादा बढ़ाना चाहती थी इसलिए वह इस तरह से खड़ी थी कि उसकी पीठ अभी भी सूरज के सामने थी और वह धीरे से दरवाजा खोलकर झोपड़ी से बाहर आ गई,,,, झोपड़ीके बाहर चारों तरफ धुप्प अंधेरा छाया हुआ था,,, कुछ भी नजर नहीं आ रहा था,,,, कोई और समय होता कोई और हालत होती तो शायद इस समय मुखिया की बीवी भी झोपड़ी से बाहर निकालने की हिम्मत ना करती क्योंकि बाहर कल अंधेरा देखकर ही मन में घबराहट हो रही थी लेकिन इस समय उसके मन में कुछ और चल रहा था वह सूरज को अपनी नंगी गांड के दर्शन करना चाहती थी जो की एक बार कर चुकी थी लेकिन इस समय का माहौल कुछ और था वह जानते थे कि सूरज पूरी तरह से गर्म हो चुका है इसलिए वह अपने जवानी का मुख्य द्वार उसे दिखाना चाहती थी,,,,





झोपड़ी के दरवाजे पर आगे मुखिया की बीवी खड़ी थी और पीछे सूरज लालटेन लेकर खड़ा था उसकी रोशनी झोपड़ी से बाहर निकल रही थी तो बाहर थोड़ा बहुत उजाला नजर आ रहा था और इस उजाले को देखकर मुखिया की बीवी झोपड़ी से बाहर निकल गई हालांकि इस समय सूरज को भी डर लग रहा था क्योंकि वह दूर-दूर घने पेड़ों की तरफ देख रहा था क्योंकि एकदम दोनों की तरह नजर आ रहे थे लेकिन उसकी आंखों के सामने जवानी से भरी हुई खूबसूरत औरत थी जो की कमर के ऊपर पूरी तरह से नंगी थी और उसके बदन पर केवल पेटिकोट था और उसके हुस्न के जादू में वह सब कुछ भूल चुका था,,,, मुखिया की बीवी की नंगी पीठ और उसके नितंबों के उभार को देखते हुए सूरज बोला,,,।

कहां जाना है मालकिन,,,?





ज्यादा दूर नहीं जाना है यही पास में हेड पंप के पास,,,,(और इतना कहकर मुखिया की बीवी फिर पंप की तरफ पैर आगे बढ़ा दी और पीछे सूरज भी हाथ में लालटेन लिए उसके पीछे-पीछे चल पड़ा सूरज जानबूझकर उसके पीछे चल रहा था ताकि लालटेन की पीली रोशनी में वह मुखिया की बीवी की नंगी गांड के दर्शन कर सके,,,, जैसे ही हैंडपंप आया मुखिया की बीवी ऐसा जताने लगी जैसे उस पेशाब काबू में नहीं हो रहा हो और वह तुरंत इसकी भी परवाह नहीं की की सूरज उसे कितनी दूरी पर खड़ा रहेगा तुरंत अपनी पेटिकोट कमर तक उठाकर एकदम से नीचे बैठ गई यह सब सूरज को लालटेन की रोशनी में दिखाई दे रहा था वह एकदम से मदहोश हो गया था,,, दिन के उजाले में जितना साफ नहीं देखा जा सकता था उतना सूरज रात के अंधेरे में लालटेन की रोशनी में देख रहा था उसकी नजर एकदम से मुखिया की बीवी की गांड पर चिपक की गई जिस पर कुछ देर पहले बैठा हुआ था एक बार फिर से मुखिया की बीवी की बुर सेतेज सिटी की आवाज निकालने लगी जो की शांत वातावरण में पूरी तरह से मधुर संगीत भी खेल रही थी और यह संगीत सूरज के कानों में भी बड़े आराम से पहुंच रही थी सूरज तो मदहोश बज रहा था वह तो ऐसा लग रहा था कि जैसे चार बोतलों का नाश कर लिया हो उसकी आंखों में खुमारी छा रही थी और उसकी नजर मुखिया की बीवी की नंगी गांड से हट ही नहीं रही थी,,,।





सूरज को ऐसा लग रहा था कि जैसे काली रात में पूनम का चांद खिल गया हो और वह ठीक उसकी आंखों के सामने नजर आ रहा हो,,,, सूरज की जवानी जोर मार रही थी उसका लंड पर जाने में गदर मचाने को तैयार था जिसे वह हाथ से दबा दबा कर काबू में करने की कोशिश कर रहा था लेकिन लंड की अकड़ ,, बाढ़ के पानी की तरह बढ़ती जा रही थी जितना भी रोकने की कोशिश करो वह सब कुछ बिखर कर आगे बढ़ती चली जा रही है इस तरह से सूरज का हाल था सूरज का मन कर रहा था कि पीछे से जाकर मुखिया की बीवी की बुर में लंड डाल दे लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत भी नहीं थी और ना ही उसे इस तरह का कोईअनुभव था,,, इस तरह की अनुभव से वह काफी दूर था,,, उसे नहीं मालूम था की औरतों के साथ कैसे संबंध बनाया जाता है लेकिन इतना जरुर जानता था कि औरत को चोदा जाता है और लंड से चोदा जाता है,,, लेकिन कैसे यह नहीं जानता था इसीलिए तो वह इस समय मुखिया की बीवी की नजर में मूर्ख ही था वरना उसकी जगह कोई और होता तो अब तक खटिया पर कुश्ती खेल लिया होता,,,,।





मुखिया की बीवी की बुर से लगातार सिटी की आवाज आ रही थी और यह देखकर सूरज भी सोच में पड़ गया था की मुखिया की बीवी कितना मुतती है,,, मुखिया की बीवी तिरछी नजरों से सूरज की तरफ देखने की कोशिश कर रही थी और सूरज को लगातार अपनी तरफ देखा हुआ पाकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी मदहोशी उसके पूरे बदन में छा रही थी उसे अच्छा लग रहा था सूरज का इस तरह से उसे घूरना,,, उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए मुखिया की बीवी अपने दोनों हाथों को अपनी गोल-गोल गांड पर हल्के से चपत लगाते हुए उसे चारों तरफ फिराते हुए बोली,,,।

यहां मच्छर बहुत है,,,,





सच कह रही हो मालकिन जल्दी से उठ जाओ वरना मच्छर तुम्हारी गोरी गोरी गांड को काटकर लाल कर देंगे,,,,(अनजाने में ही सूरज के मुंह से यह शब्द निकल गई थी पहली बार में किसी औरत के सामने गोरी गोरी गांड के शब्दों का प्रयोग किया था और यह शब्द सुनकर मुखिया की बीवी एकदम मगन हो गई थी लेकिन जैसे ही सूरज को अपनी कई बातों का एहसास हुआ वह एकदम से शर्मिंदा हो गया और आगे कुछ बोल ही नहीं पाया लेकिन उसके सवाल का जवाब देते हुए मुखिया की बीवी बोली,,,)

क्या सच में मेरी गांड गोरी है,,,(सूरज की तरफ देखे बिना अपने चेहरे पर मुस्कुराहट लाते हुए वह बोली )

जी मालकिन एकदम गोरी,,,,

लेकिन तुझे कैसे मालूम,,,, तूने तो अभी तक मेरी गान्ड नही देखा है,,,,





मेरे सामने तो बैठी हो पेटिकोट उठाकर एकदम साफ दिखाई दे रही है,,,,,

हाय दैया इसका मतलब तू मेरी तरफ देख रहा है,,,(जानबूझकर चौंकने का नाटक करते हुए मुखिया की बीवी बोली,,,)

नननन,, नहीं मालकिन बिल्कुल नहीं वह तो अचानक ही मेरी नजर चली गई थी,,,,,

बहुत शैतान हो गया है तू,,,, खैर कोई बात नहीं तेरी तो नजर अचानक ही पड़ गई तेरी जगह कोई और होता तो जान बुझ कर देखता ही रहता,,, भला ऐसा मौका कौन छोड़ना चाहेगा,,,,।

अगर कोई ऐसा करे तो तुमको गुस्सा नहीं आएगा मालकिन,,,,





बिल्कुल नहीं रे यह सब तो सामान्य है और वैसे भी तेरी उम्र के लड़के या तेरे से बड़े आदमी यही सबसे ढूंढते रहते हैं तो ही एकदम सीधा-साधा है तभी तो मैं तुझे अपने साथ लेकर आई हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही मुखिया की बीवी पेटिकोट को हाथ में पकड़े हुए ही अपनी जगह पर खड़ी हो गई ,,,,,, अपनी नंगी गांड को ढकने की उसे बिल्कुल भी दरकार नहीं थी वह तो सूरज को अपनी जवानी का जलवा दिखाना चाहती थी,,,, लेकिन तभी वह धीरे से पेटीकोट को नीचे गिर कर एकदम से सूरज की तरफ घूम गई और उसकी नंगी छातिया एकदम से उजागर हो गई,,, हाथ में लालटेन लिए हुए सूरज की नजरे सीधे मुखिया की बीवी की मदहोश कर देने वाली छातियो पर चली गई,,, और उसकी नंगी चूचियों को देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई यह सब मुखिया की बीवी ने जानबूझकर की थी लेकिन तुरंत वह जानबूझकर एकदम से चौंकने का नाटक करते हुए अपने दोनों हाथों से अपनी चूचियों को ढकने का नाकाम प्रयास करते हुए बोली,,,।

मुखीया की बीवी





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हाय दैया या मैं तो भूल गई,,,,,(उसकी बात सुनकर सूरज भी जैसे होश में आया हो वह भी शर्मिंदा होकर अपनी नजर को दूसरी तरफ घूमा लिया,,,, थोड़ी ही देर में दोनों वापस झोपड़ी में आ चुके थे और सूरज लालटेन को वापस अपनी जगह पर टांगने लगा और मुखिया की बीवी लकड़ी के दरवाजे को अपने हाथों से बंद करने लगी,,,, दरवाजा बंद करने के बाद वह सूरज को देखने लगी सूरज लालटेन को टांग कर जैसे ही घुमा तो अपनी आंखों के सामने मुखिया की बीवी को देखकर उसकी चूचियों को देखकर उसके बाद में रक्त का प्रभाव बड़ी तेजी से होने लगा वह एक बार फिर से फटी आंखों से मुखिया की बीवी की दोनों जवान को देखने लगा जो कि एकदम दशहरी आम की तरह थी,,,, अब मुखिया की बीवी अपनी चूचियों को अपने हाथों से छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी और सूरज से बोली,,,।

सूरज अब मैं चाहती हूं कि तुम मेरे पूरे बदन की मालिश करें और मेरे बदन के दर्द को एकदम जड़ से निकाल कर फेंक दें,,,,।

की मालकिन ऐसा ही होगा,,,,(उसकी नंगी चूचियों पर नजर गडाए हुए सूरज बोला,,,)

लेकिन उसके लिए मुझे अपना पेटीकोट भी उतारना होगा मुझे एकदम नंगी हो जाना पड़ेगा,,,,,।

(मुखिया की बीवी की बात सुनते ही सूरज के तो होश उड़ गए वह एकदम से आश्चर्य से मुखिया की बीवी की तरफ देखने लगा मुखिया की बीवी सूरज की हाव-भाव को देखकर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी...)

मुखीया की बीवी



 
मुखिया की बीवी बड़े भोलेपन में बोल दी थी कि पूरे बदन पर मालिश करवाने के लिए उसे अपना पेटीकोट भी उतारना होगा उसे पूरी तरह से नंगी होना होगा,,,, मुखिया की बीवी इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज से यह बात कहने पर उसके मन में उसके बदन में कैसी हलचल होगी इसीलिए वह अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रही थी,,,, सूरज तो मुखिया की बीवी के मुंह से इस तरह की बात सुनकर एकदम से हक्का-बक्का रहेगा उसे तो अपने कानों पर भरोसा ही नहीं हो रहा था कोई खूबसूरत औरत भला एक जवान लड़के के सामने अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होने की बात कैसे कह सकती हैं और वह भी अनजान लड़के के सामने लेकिन जो कुछ भी उसके कानों ने सुना था उसमें रत्ती भर भी झूठा पन नहीं था,,, मुखिया की बीवी सच कह रही थी,,,,। वह अपनी बातों से अपनी अदाओं से सूरज के ऊपर बिजलियां गिरा रही थी सूरज तिल तिल तड़प रहा था,,,।





सूरज की हालत खराब हो चुकी थी मात्र इतना सुनकर की उसे अपना पेटिकोट उतार कर नंगी होना पड़ेगा एक औरत के मुंह से अगर नंगी शब्द मर्द अगर सुन तो भी उसकी हालत खराब हो जाती है उसके मन में ढेर सारी भावनाएं और कल्पनाएं घर करने लगती हैं उसी तरह से सूरज के मन में भी पल भर में ही ढेर सारी भावनाएं और कल्पनाएं अपना असर दिखना शुरू कर दी थी वहां पल भर में ही सोचने लगा था कि पेटिकोट उतार कर संपूर्ण रूप से नंगी होने के बाद मुखिया की बीवी कैसी नज़र आएगी यह सोचकर ही उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी,,,,, सूरज को तो समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कहें क्या करें यहां तक कि उसे अपने कानों पर भरोसा भी नहीं हो रहा था वह एक बार मुखिया की बीवी की बात को सुनिश्चित कर लेना चाहता था कि वाकई में उसने क्या कही है,,,। इसलिए वह एकदम भोला बनते हुए बोला,,,।





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अब तो तुमको आराम है ना मालकिन,,,,(सूरज मुखिया की बीवी की नंगी चूचियों की तरफ देखते हैं बोला जो कि उसकी ठीक आंखों के सामने थी और मुखिया की बीवी अब उसे ढकने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी क्योंकि अब तो वह अपने बाकी के भी वस्त्र को उतारकर पूरी तरह से नंगी होने वाली बात कर रही थी...)

कहां रे जहां तक तूने मालिश किया वहां तक तो आराम है लेकिन बाकी बदन में तो अभी भी दर्द हो रहा है इसलिए तो कह रही थी कि बाकी बदन में भी अगर मालिश कर देता तो आराम हो जाता,,,,(मुखिया की बीवी मादक अंगड़ाई लेते हुए बोली,,,, मुखिया की बीवी की चुचीया उसके अंगडाई लेने से ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर सूरज के पजामे में उसका लंड और ज्यादा तनता चला जा रहा था,,, मुखिया की बीवी की बातें सुनकर सूरज उसकी चूचीयो पर से नजर हटाए बिना ही बोला,,,)





लेकिन,,,,(इतना कहकर वह कुछ बोल नहीं पाया मुखिया की बीवी अच्छी तरह से समझ रही थी कि वह क्या कहना चाह रहा है इसलिए मुस्कुराते हुए वह बोली ,,)

तू जो कहना चाह रहा है मैं अच्छी तरह से जानती हूं पूरी तरह से मालिश करवाने के लिए मुझे पेटिकोट उतार कर नंगी हो जाना पड़ेगा लेकिन तेरे सामने मुझे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि तू बहुत अच्छा लड़का है,,,,,,,(,,, अब इससे ज्यादा मुखिया की बीवी के पास बोलने के लिए कुछ और नहीं था,,, इसलिए वह तुरंत अपने दोनों हाथों को अपनी पेटिकोट की डोरी की तरफ ले गई और अपनी नाजुक उंगलियों से पेटिकोट की डोरी पकड़कर हल्के से खींच ली,,,जिससे पेटिकोट की डोरी,, खुल गई और कमर पर कसी हुई पेटिकोट एकदम से ढीली हो गई यह सब देखकर सूरज की सांस ऊपर नीचे होने लगी लेकिन उसकी नजर मुखिया की बीवी पर से हट नहीं रही थी,,, लेकिन मुखिया की बेटी पेटिकोट की डोरी खोलने के बाद वह एकदम से मादक अदा दी खेलते हुए घूम गई और अपनी पीठ को सूरज की आंखों के सामने कर दी ऐसा लग रहा था कि मानव जैसे ही वह अपनी जवानी के कीमती खजाने को इतनी जल्दी सूरज को नहीं दिखाना चाहती थी और फिर अपने दोनों हाथों की उंगलियों के सहारे से वह पेटीकोट को धीरे से नीचे की तरफ सरकाने लगी,,, वह चाहती तो पेटीकोट को कमर से ही छोड़ दी होती और उसकी पेटिकोट उसको कदमों में जाग रही होती और वह एकदम से सूरज की आंखों के सामने नंगी हो जाती है लेकिन वह धीरे-धीरे अपनी पेटीकोट को उतार रही थी क्योंकि वह अपनी बेशर्मी को इस तरह से जाहिर नहीं होने देना चाहती थी वैसे तो बेशर्मी दिखने में अब उसकी तरफ से कोई कसर बाकी नहीं रह गया था लेकिन फिर भी वह बेशर्मी में भी थोड़ी नजाकत रखती थी,,,,।





सूरज फटी आंखों से सब कुछ देख रहा था उसकी आंखों में मुखिया की बीवी की जवानी का नशा पूरी तरह से छा चुका था और मुखिया की बीवी अपनी पेटीकोट को धीरे-धीरे अपने बदन से अपने नितंबों के घेराव से नीचे उतारते हुए उसे नीचे तक ले गई और उसे अपने कदमों के नीचे तक ले जाने के लिए थोड़ा सा आगे की तरफ झुक गई जिससे उसके गोलाकार नितंब एकदम से बड़े-बड़े तरबूज की तरह उभर कर सूरज की आंखों के सामने आ गए और एक खूबसूरत जवान औरत की नंगी गांड को देखकर सूरज एकदम से बेकाबू होने लगा उसका मन कर रहा था कि आगे बढ़कर वह मुखिया की बीवी की गांड को दोनों हाथों से थाम ले,,, लेकिन ऐसा करने की हिम्मत उसमें अभी नहीं थी हालांकि उसे बहुत मजा आ रहा था वाकई में एक जवान होते हुए लड़के के लिए उससे ज्यादा बेहतर खूबसूरत नजारा क्या होगा जब उसकी आंखों के सामने ही एक जवानी से भरी हुई औरत धीरे-धीरे करके अपने बदन से सारे वस्त्र उतार कर नंगी होती हो,,,,,,,, मुखिया की बीवी की गांड थोड़ी बड़ी थी लेकिन गजब की और इस समय सूरज की नजर मुखिया की बीवी की गांड पर टिकी हुई थी वैसे भी औरत के बदन में मर्दों को आकर्षित करने लायक हर एक चीज होती है हर एक अंग होता है लेकिन सबसे खास होता है उसके नितंबों का आकार जो की कपड़ों के ऊपर से ही उसके आकार को माप कर मर्दों को उत्तेजित होने का थर्मामीटर का काम करता है की मर्द कितना ज्यादा उत्तेजित है और इस समय मुखिया की बीवी जवानी से भरी हुई थी और उसकी नंगी गांड सूरज की आंखों के सामने थी जिसे देखकर सूरज की हालत एकदम से खराब हो रही थी और अनजाने में उसका हाथ पजामे के ऊपर से उसके लंड के ऊपर चला गया था और वह उत्तेजना में अपने लंड को पजामे के ऊपर से ही दबा दिया था,,,





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आधी रात के समय आम के बगीचे में गांव से दूर एकांत में घास फूस की झोपड़ी में मुखिया की जवान बीवी एक जवान अनजान लड़के के सामने अपने वस्त्र उतार कर पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी और उसे अपने कपड़े उतारने में बिल्कुल भी शर्म का एहसास नहीं हो रहा था बल्कि तो उसे बेशर्म बनने में कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था और वह नंगी होने के बाद नजर घूमाकर सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराने लगी और इस अवस्था में जाकर बिस्तर पर बैठ गई वह अभी तक अपनी बुर के दर्शन सूरज को नहीं कराई थी ऐसा लग रहा था कि जैसे बुरे के दर्शन करने के लिए सूरज को किसी कठिन परिश्रम से गुजरना होगा उसके दर्शन के लिए उसे तपस्या करनी होगी और वाकई में ऐसा ही हो रहा था जबकि सूरज मुखिया की बीवी की बुर को देखने के लिए तड़प रहा था उसने आज तक नंगी बुर के दर्शन कभी नहीं किए थे,,, हालांकि अपने ही घर में अपनी मां को चुदवाते हुए वह जरूर देखा था उसे समय उसके पिताजी और उसकी मां संपूर्ण रूप से नग्नावस्था में चुदाई का मजा लूट रहे थे और दरवाजे के छोटे से सुराख से सूरज अंदर की तरफ देखकर अपनी मां को चुदवाते हुए देख रहा था लेकिन उसे ज्यादा कुछ नजर नहीं आ रहा था बस इतना ही उसे नजर आ रहा था उसकी मां की कमर बड़ी जोरों से आगे पीछे हो रही थी और ठीक उसके पीछे उसके पिताजी अपने लंड को उसकी बुर की गहराई में डाल रहे थे लेकिन ना तो ठीक से उसके पिताजी का लंड नजर आ रहा था ना तो उसकी मां की बुर,,,, इसलिए चुदाई का कामुक दृश्य देख लेने के बावजूद भी अभी औरत के खूबसूरत नाजुक अंग को उसने अभी तक नहीं देखा था इसलिए उसकी लालसा मुखिया की बीवी की बुर को देखने के लिए बढ़ती जा रही थी लेकिन मुखिया की बीवी थी कि उसकी तड़प को और ज्यादा बढ़ा रही थी,,,,।





वह बिस्तर पर बैठ चुकी थी,,,, लेकिन वह इस तरह से बैठी थी कि उसकी पीठ सूरज की तरफ थी और सूरज तड़प रहा था उसके संपूर्ण अंगों को देखने के लिए,,, लेकिन उसे ऐसा लग रहा था कि बुर देखने में अभी थोड़ा बिलंब है,,,,।

अब अच्छे से मालिश करना,,,(मुखिया की बीवी सूरज की तरफ देखे बिना ही बनी और फिर धीरे से खटिया पर पेट के बल लेट गई,,, सूरज की आंखों के सामने एक खूबसूरत जवान औरत एकदम नंगी लेटी हुई थी उसका पिछवाड़ा इतना खूबसूरत लग रहा था कि मानो आसमान में चांद खिल गया हो,,, आज सूरज की किस्मत में एक खूबसूरत औरत की गांड देखने का शुभ अवसर लिखा था,,, सूरज कभी सोच भी नहीं सकता था कि इतने करीब से खूबसूरत औरत के नंगे जिस्म को देखने को मिलेगा और यहां तक कि उसे पर हाथ रखकर छूने को मिलेगा मालिश करने को मिलेगा,,,, एकटक मुखिया की बीवी के नंगे बदन को देखते हुए उत्तेजनात्मक स्वर में वह बोला,,,।)





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की मालकिन चिंता मत करना आज तुम्हारे बदन से दर्द निकल फेंकूंगा,,,

तुझसे ऐसे ही उम्मीद है,,, अब जल्दी से मालिश करना शुरू करते हैं ऊपर तो तूने कर दिया है अब कमर के नीचे मालिश कर,,,,।

(सूरज पहली बार ऐसी औरत को देख रहा था जो इतनी खुलकर बातें कर रही थी अपने नंगे बदन पर मालिश करवाने के लिए बोल रही थी और वह भी एक अनजान जवान लड़के से,,,,, सूरज का दिल जोरो से धड़क रहा था भला ऐसा मौका कौन जाने देता,, सूरज को मुखिया की बीवी की बात माननी हीं थी,,, और इसी में उसकी भलाई भी थी जो कि उसकी जवानी को चार चांद लगाने वाली थी,,,, सूरज खटिया की पाटी पर बैठ गया था,,, वापस सरसों के तेल की शीशी लेकर अपनी हथेली में सरसों की तेल की धार गिराने लगा,, और फिर देखते ही देखते मुखिया की बीवी की नितंबों से नहीं बल्कि उसके पैरों से मालिश करना शुरू कर दिया वैसे तो मुखिया की बीवी यही चाहती थी कि सूरज की हथेली अब उसके लिए नितंबों पर हो लेकिन यह सूरज की हिचकीचाहट और उसका डर ही था कि वह उसके पैरों से शुरुआत कर रहा था,,,,।)





सूरज उसकी गोरी गोरी टांगो पर मालिश करना शुरू कर दिया था,,, सूरज की हथेली मुखिया की बीवी के पैरों से स्पर्श होती मुखिया की बीवी के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी,,, सूरज उसकी नरम नरम मांसल पिंडलियों की अच्छे से मालिश कर रहा था,,, उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था,,, उत्तेजना के चलते सूरज अपनी हथेली में उसकी मोटी मोटी पिंडलियों को बड़े जोर से दबोच ले रहा था मानो कि जैसे उसकी पिंडलियां ना हो कर उसकी चूचियां हो,,,,,, और ऐसा करने से मुखिया की बीवी को भी बहुत मजा आ रहा था लेकिन मुखिया की बीवी की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी वह जल्द से जल्द सूरज की हथेलियां को अपने नितंबों पर महसूस करना चाहती थी,,,, और जो मुखिया की बीवी चाहती थी वही सूरज भी चाहता था लेकिन सूरज डर रहा था कुछ देर तक वहां घुटनों के नीचे उसके पिंडलियों से लेकर के पैर के तलवों तक की मालिश बड़े अच्छे से कर रहा था लेकिन मुखिया की बीवी चाहती थी कि अब वह ऊपर की तरफ बढे,, इसलिए वह बोली।)





बहुत अच्छा लग रहा है सूरज सच में तेरे हाथों में जादू है अब थोड़ा ऊपर की तरफ बढ़ मेरी जांघों में भी बहुत दर्द कर रहा है,,,,।

की मालकिन,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह अपनी दोनों हथेलियां को ऊपर की तरफ ले जाने लगा लेकिन मुखिया की बीवी को कुछ अधूरा लग रहा था इसलिए वह बोली,,,)

ऐसे नहीं,,,,

फिर कैसे मालकिन,,,!

मेरा मतलब है कि जैसे पहले ऊपर चढ़ कर बैठा था वैसे ही चढ़ जा तब ठीक से मालिश कर पाएगा,,,।

जी मालकिन,,,(सूरज भी यही चाहता था क्योंकि कुछ देर पहले वह मुखिया की बीवी पर सवार होकर उसकी मालिश कर रहा था और उसे अवस्था में उसके लंड का दबाव मुखिया की बीवी की गांड पर बराबर बना हुआ था यह बात मुखिया की बीवी को भी पता था और यही उसे अधूरा भी लग रहा था उसके लंड की चुभन,,, वही वह महसूस करना चाहती थी,,, अपनी मालकिन की बात मानते हैं सूरज वापस उसके घुटनों के पास अपने दोनों घुटनों को इधर-उधर रखकर अपने लिए जगह बना लिया वह इस अवस्था में उसके नितंबों पर बैठना चाहता था लेकिन नितंबों की मालिश करना बाकी था लेकिन इतना भी उसके लिए बहुत था धीरे-धीरे करके सूरज मालिश करते हुए उसकी मोटी मोटी जांघों को अपनी हथेली में लेकर दबोच रहा था,,, नग्न अवस्था में औरत की खूबसूरती उसकी मोटी मोटी जांघें और भी ज्यादा बढ़ा देती है,,, क्योंकि मर्दों को औरत की मोटी मोटी जांघें भी बहुत ज्यादा पसंद है जो कि उनकी उत्तेजनात्मक क्रिया को और ज्यादा बढ़ावा देती है,,, और इस समय सूरज के साथ भी वही हो रहा था सूरज अपने दोनों हथेलियां को मुखिया की बीवी की दोनों मोटी मोटी जांघों पर रखकर मालिश का आनंद ले रहा था,,,,





लेकिन धीरे-धीरे अब सूरज की हथेली और उसकी उंगलियां मुखिया की बीवी के नितंबों के निचले स्तर तक पहुंचने लगी थी जहां से उसके नितंबों की दोनों फांकों का कटाव शुरू हो रहा था। और जैसे ही उसकी उंगलियां वहां पहुंचती थी वैसे ही मुखिया की बीवी के बदन की कसमसाहट बढ़ने लगती थी,,, वह भी आनंद के सागर में डूबने लगती थी वह चाहती थी कि उसकी उंगलियां उसकी बुर को छुए,,, और यही करने के लिए सूरज भी बेताब था उसे भी बहुत मजा आ रहा था लेकिन उसे थोड़ा अजीब एहसास हो रहा था जब वह अपनी हथेलियां को उसके नितंबों के कटाव के करीब ले जाता तब उसकी हथेली और उंगलियों में एक अजीब सी गर्माहट महसूस होती थी और इस गरमाहट को सूरज पहचान नहीं पा रहा था समझ नहीं पा रहा था,,,। और यह गर्माहट उसकी बुर से उत्पन्न हो रही थी और इस गर्मी से सूरज पूरी तरह से अनजान था,,,।





बेहद अद्भुत और कामोत्तेजना से भरा हुआ नजारा झोपड़ी के अंदर नजर आ रहा था लालटेन की पीली रोशनी में सूरज को सब कुछ साफ नजर आ रहा था ,,, मुखिया की बीवी की गोलाकार गांड देखकर सूरज के मुंह के साथ-साथ उसके लंड में भी पानी भर दे रहा था,,,,, सूरज अपने दोनों हाथों से मुखिया की बीवी की गांड को पकड़ कर दबाना चाहता था रगड़ना चाहता था उसे मसलना चाहता था लेकिन यह चाहत वह अपने मन में लिए हुए ठीक उसी तरह से मालिश कर रहा था जैसा की उसे और मुखिया की बीवी को आनंद दे बार-बार उसकी हथेलियां उसकी मोती मोती जांघों से फिसलती हुई उसके नितंबों की निचले दरार से छू जाती थी जहां से उसकी उंगलियां और मुखिया की बीवी की बुर के बीच की दूरी बस दो-तीन अंगुल घर की रह जाती थी लेकिन इस बीच की दूरी को तय कर पाने में सूरज के पसीने छूट जा रहे थे,,,,, मुखिया की बीवी की सांस बेहद गहरी चल रही थी वह मदहोश हुए जा रही थी उत्तेजना उसके दिलों दिमाग पर छा चुकी थी,,,, अनगिनत मर्दों के संगत में आने के बावजूद भी और उम्र के इस पड़ाव में एक जवान लड़की की हरकत से मुखिया की बीवी पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डुबकी लगा रही थी वह मदहोश हो गई थी ऐसा लग रहा था कि जैसे सब कुछ उसके साथ पहली बार हो रहा हो,,, उत्तेजना के मारे उसकी बुर से लगातार कांग्रेस बह रहा था और अत्यधिक मदहोशी के आलम में उसकी कचोरी जैसी फुली हुई बुर फूल पिचक रही थी,,,‌ मुखिया की बीवी जब आगे बढ़ना चाहती थी सूरज की हथेलियां को उसकी उंगलियों को अपनी बुर पर महसूस करना चाहती थी,,,, इसलिए वह बोली,,,,।

आहहहह ,,,सुरज ,,,, बहुत अच्छा लग रहा है रे,,,, अब जरा मेरी गांड पर भी मालिश कर दे,,,, बरसों गुजर गए मेरी गांड की मालीस ,,,, हुए,,,(मुखिया की बीवी के मुंह से गांड से सुनकर सूरज के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी उसकी नजर पहले से ही मुखिया की बीवी की गांड पर टिकी हुई थी लेकिन उसकी बात सुनकर उसकी नजर उसकी दरार के अंदर तक झांकने की कोशिश करने लगी,,,,, और मुखिया की बीवी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,,) जब तक चंदा थी तब तक वह 15 दिन में आकर मेरी मालिश कर जाती थी,,, लेकिन जब से वह गांव छोड़कर गई है तब से मेरी मालिश भी छूट गई है देख तो एकदम खुरदुरी हो गई है ना,,,,,(मुखिया की बीवी जानबूझकर इस तरह की बातें कर रही थी वह सूरज का ध्यान अपनी गांड पर लाना चाहती थी और वैसे भी वह जानती थी कि उसकी नजर इस समय उसके कौन से अंग पर टिकी होगी लेकिन अब वह अपनी बातों के जरिए सूरज को उत्तेजित कर देना चाहती है मुखिया की बीवी की बात सुनकर सूरज एकदम मदहोश आने लगा था और अपने आप पर अपनी भावनाओं पर काबू न कर पाने की वजह से वह अपने दोनों हाथ के लिए को मुखिया की बीवी की बात सुनते हैं उसकी गोलाकार गांड पर रखते हुए बोला,,,)

बिल्कुल भी नहीं मालकीन यह तो बहुत मुलायम है एकदम चिकनी,,,,(सूरज एकदम से मदहोशी भरे स्वर में बोला और मुखिया की बीवी उसके शब्दों की मदहोशी पन को अपने तजुर्बे से टटोल रही थी वह समझ गई थी कि उसकी जवानी का नशा सूरज के सर पर चढ़ गया था इसीलिए उसके शब्दों में थोड़ी मदहोशी भरी हुई थी,,,,)

धत् ,, तू झूठ बोल रहे हैं भला ऐसे कैसे हो सकता है बरसों से इसकी मालिश हुई नहीं है इसका रंग भी उतर गया होगा,,,,।

नहीं मालकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है तुम्हारी गांड तो एकदम गोरी है एकदम चिकनी और लालटेन की पीली रोशनी में तो एकदम सोने की तरह चमक रही है,,,,(मदहोशी में सूरज एकदम से मुखिया की बीवी से उसकी गांड के बारे में बोल दिया था एक तरह से वह उसकी गांड की तारीफ कर रहा था लेकिन अपने मुंह से एक औरत के सामने गांड शब्द उसके मुंह से निकल गया था इसलिए वह एकदम से हैरान हो गया था और शर्मिंदा हो गया था उसकी हथेली अभी भी मुखिया की बीवी की गांड पर थी और यह एहसास मुखिया की बीवी के तन बदन में आग लग रही थी,,,)

तू सच कह रहा है सूरज,,,

हम आखिर में एकदम सच कह रहा हूं तुम्हारी गांड एकदम चिकनी और गोरी है,,,,

तुझे कैसी लग रही है,,,

बहुत खूबसूरत ऐसा लग रहा है कि जैसे चांद का टुकड़ा मेरे हाथों में आ गया हो,,,,,(सूरज कि ईस तरह की बात सुनते ही मुखिया की बीवी मंद मंद मुस्कुरा रही थी आखिरकार सूरज उसकी खूबसूरती की तारीफ जो कर रहा था ,,, और वह भी खास करके उसकी गांड की,,,, वैसे तो सूरज इस तरह की बातें कभी करता नहीं था और भी औरतों के बारे में लेकिन आज न जाने कहां से उसके होठों पर इस तरह के शब्द आ रहे थे औरत की तारीफ उसके मुंह से निकल रही थी वह खुद हैरान था कि उसके मुंह से इस तरह के शब्द कैसे निकल रहे हैं लेकिन न जाने क्यों उसे भी इस तरह से बात करने में बेहद उत्तेजना का अनुभव रहा था उसे अच्छा भी लग रहा था,,,। सूरज की बात सुनकर मुखिया की बीवी बोली,,,)

क्या सच में तुझे मेरी गांड एकदम खूबसूरत लग रही है,,,।

हां मालकिन एकदम सच कह रहा हूं मुझे बहुत खूबसूरत लग रही है,,,

क्या कभी किसी की देखा है,,,?(मुखिया की बीवी अपने सवाल से यह जानना चाहती थी कि क्या इससे पहले वह किसी और औरत को भी नंगी देख चुका है या वह पहली औरत है उसके जीवन में,,,)

बिल्कुल भी नहीं मालकिन मेरे लिए पहला मौका है जब मैं किसी औरत को नंगी और उसकी गांड को देख रहा हूं,,,,(अपनी हथेलियां का दबाव मुखिया की बीवी की गांड पर बराबर बनाते हुए बोला वह ऐसा करना नहीं चाहता था लेकिन उसके मन की उनमादक स्थिति उससे ऐसा करवा रही थी,,,)

क्या तू सच कह रहा है,,, मेरा मतलब है कि तू जवान है एकदम ठीक-ठाक है तेरे जीवन में तो अब तक बहुत सी लड़कियां आ चुकी होगी,,,। उनमें से किसी की तो देखा होगा,,।

नहीं मालकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है मैं अपने गले की कसम खा कर बोलता हूं मैं आज तक ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा,,,,।

सच कहूं तो सूरज मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है इसका मतलब है कि तेरी जिंदगी में मैं पहली औरत हूं जो तेरे सामने कपड़े उतार कर नंगी हुई है,,,

जी मालकिन,,,

और तुझे मेरी गांड बहुत खूबसूरत लग रही है,,,(मुखिया की बीवी मदहोश में जा रही थी क्योंकि उत्तेजना के मारे सूरज की दोनों हथेलियां उसकी गांड की गोलाई पर टीकी हुई थी और वह हल्के हल्के उसे दबा रहा था,,, जो की मुखिया की बीवी को उत्तेजित कर रहा था इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) तो चल इसकी खूबसूरती को और ज्यादा बढ़ा दे इसकी भी मालिश कर दे सरसों के तेल से,,,,

जी मालकीन,,,,,

सरसों के तेल की धार,,, एकदम मेरी गांड के धार के बीचों बीच गीराना पुरी तेल की धार अंदर जानी चाहिए,,,,

ठीक है मालकिन ऐसा ही होगा,,,,(उत्तेजना के मारे अपने थरथराते स्वर को वह ठीक करने की कोशिश करते हुए बोला लेकिन उसके शब्दों में जिस तरह का कंपन था उससे साफ पता चल रहा था कि वह बेहद उत्तेजित हो जा रहा है और मुखिया की बीवी उसके शब्दों की तरह से अच्छी तरह से पहचान रही थी कि वह मदहोश हो रहा है,,,। ऐसा कहते हुए सूरज फिर से खटिया के नीचे से सरसों के तेल की शीशी को उठाकर अपने हाथों में ले लिया और उसके ढक्कन को खोलने लगा लेकिन तभी मुखिया की बीवी फिर से बोली,,,)

और हां सूरज तेल की धार गांड के बीचों बीच बराबर जानी चाहिए अगर नहीं पहुंच रही है तो अपनी उंगली अंदर की तरफ डालकर मालिश करना और आज तो मेरी गांड को फिर से एकदम मुलायम और चिकनी बना दे,,,,।

(मुखिया की बीवी के मुंह से इतने खुले शब्द सुनकर सूरज की तो बोलती बंद हो गई उसके बदन में उत्तेजना का कंपन होने लगा हुआ एकदम से मदहोश होने लगा और अपनी फटी आंखों से मुखिया की बीवी की खूबसूरत गोल-गोल गांड को देखने लगा ,, और अपनी किस्मत पर खुश होने लगा की मालिश करने के बहाने मुखिया की बीवी के हर एक अंग को छूने का मौका मिल रहा है,,,।)
 
और हां सूरज तेल की धार गांड के बीचों बीच बराबर जानी चाहिए अगर नहीं पहुंच रही है तो अपनी उंगली अंदर की तरफ डालकर मालिश करना और आज तो मेरी गांड को फिर से एकदम मुलायम और चिकनी बना दे,,,,।

यह कहकर मुखिया की बीवी अपने अंतर मन की बात सूरज को बता रही थी वह यह एहसास दिला रही थी कि उसे क्या चाहिए वह क्या चाहती है धीरे-धीरे वह बहक रही थी,,, और सूरज तो मुखिया की बीवी की मदमस्त जवान और उसकी बातों को सुनकर मस्त मौला हुआ जा रहा था उसकी तो दसों उंगलियां घी में थी,,, उसकी किस्मत इस तरह से चमकेगी उसे विश्वास नहीं हो रहा था,,, सूरज पूरी तरह से तैयार था मुखिया की बीवी की मदमस्त बड़ी-बड़ी गांड को अपनी हथेली में लेकर दबाने के लिए उसे पर मालिश करने के लिए वह उसके नितंबों के नीचे उसकी मोटी मोटी जांघों पर सवार था,,, एक जवान मर्द के लिए इससे ज्यादा और क्या चाहिए जीतने की उम्मीद थी उससे कई गुना ज्यादा सूरज को मिल रहा था,,,।





हाथ में सरसों के तेल किसी से लेकर वह मुखिया की बीवी के नितंबों की मालिश करने के लिए तैयार हो चुका था और सरसों के तेल की सीसी से तेल की धार को वहां मुखिया की बीवी की गांड की दरार के बीचों बीच किरण शुरू कर दिया उसकी धार जैसे ही मुखिया की बीवी अपनी गांड की दरार में गिरते हुए महसूस की वह एकदम से गदगद हो गई वह मदहोश होने लगी उसे अच्छा लग रहा था,,, इस तरह की मालिश अपने जीवन में कभी भी नहीं करवाई थी,,, इसलिए आज की रात उसके लिए बेहद खास थी,,, सूरज सरसों के तेल का ढक्कन बंद करके उसे वापस खटिया के नीचे रख दिया और फिर अपने दोनों हाथों को मुखिया की बीवी के नितंबों पर रख दिया,,,,।





आहहहह,,, गजब एहसास मदहोश कर देने वाला पल,,, ऐसा सुख ऐसा एहसास सूरज ने कभी महसूस नहीं किया था वह पूरी तरह से मदहोश हो गया मुखिया की बीवी की गोरी गोरी गांड को अपने दोनों हाथों से स्पर्श करते ही,,,, सूरज एकदम से गदगद हो गया,,,, यह पल उसके लिए अद्भुत और अतुलनीय था उसके बदन में कंपन सा होने लगा और आंखों में चार बोतलों का नशा छाने लगा,,, आज उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि बड़े बुजुर्ग सही कहते हैं कि शराब से ज्यादा नशा औरतों में होता है औरतों का नशा जो चख ले वह जिंदगी भर औरतों का गुलाम बन जाता है,,,, और इस समय सूरज भी मन से और तन से मुखिया की बीवी का गुलाम बन चुका था,,,, सूरज अपनी हथेली का जादू मुखिया की बीवी की गांड पर चलाना शुरु कर दिया वह अपनी हथेली से सरसों की तेल की मालिश उसकी गांड पर करना शुरू कर दिया देखते ही देखते हैं उसकी गांड एकदम से चमकने लगी लालटेन की पीली रोशनी में सोने की तरह मुखिया की बीवी की गांड चमक रही थी,,,। सूरज इस पल का पूरा फायदा उठा रहा था वह अपने दोनों हथेलियां को पूरी तरह से मुखिया की बीवी की गांड पर इधर से उधर रगड़ रहा था और उसे इस बात का भी एहसास था की मुखिया की बीवी की गांड इतनी बड़ी थी कि उसकी हथेली में ठीक तरह से समा नहीं पा रही थी,,,, सूरज मुखिया की बीवी की गांड की मालिश करते हुए उसकी गांड की दरार की बीचो-बीच झांकने की उतरने की सोच रहा था लेकिन ऐसा करने की उसमें हिम्मत नहीं हो रही थी जबकि मुखिया की बीवी की तरफ से उसे पूरी रजा मंदि मिल चुकी थी,,, क्योंकि उसी में खुद अपने मुंह से कही थी अगर तेल की धार गांड के नीचे बीच नहीं पहुंच रही है तो अपनी उंगली डालकर मालिश करें,,,, लेकिन फिर भी सूरज के मन में डर था क्योंकि यह कोई खेती-बाड़ी का काम नहीं था कि अपने मन से जो अच्छा लगे कर ले खेत का मैदान नहीं था बल्कि एक औरत का नंगा शरीर था उसका खूबसूरत बदन था जिस पर इस समय उस औरत का हक था,,,। और सूरज केवल उसे खूबसूरत बदन का मुलाजिम था जो उसकी मालकिन के हुक्म पर चलता था,,,, इसीलिए बहुत डर रहा था हालांकि चाहत तो बहुत ही उसके मन में गांड के बीच की दरार में झांकने के लिए और देखने के लिए की इस बड़ी सी गांड की पतली सी दरार में उसकी गहराई में क्या छुपा हुआ है,,, इसलिए मन में अपनी चाहत को दबाए हुए वहां गांड के ऊपरी हिस्से की मालिश करता रहा उसकी हथेलियां बड़ी चंचलता से उसके नितंबों के उतार-चढ़ाव पर इधर से उधर फिसल रही थी और पहले की तरह उसकी उंगलियां बुर की बेहद करीब आकर वापस लौट जाती थी और यह सब मुखिया की बीवी को मदहोश कर दे रहा था पागल बना दे रहा था,,,, बार-बार मुखिया की बीवी चाहती थी कि सूरज की उंगलियों का स्पर्श उसके गुलाबी छेंद से हो जाए लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था और मुखिया की बीवी अपनी मन में ही बोल रही थी कि कितना बुद्धि और निठल्ले है अगर इतना मौका किसी और लड़के को दी होती तो अब तक उसका लंड उसकी बुर में होता,,,, इसलिए थोड़ा सा अपने शब्दों में गुस्से का लेहजा लाते हुए बोली,,,।





अरे सूरज जैसा बोली हूं वैसी मालिश कर गांड के अंदर तो तेल पहुंच ही नहीं रहा है तुझे नहीं मालूम वहां की जगह सुखी रह जाती है तो खुजली होने लगती है,,,,

ठीक है मालकिन मैं सोच रहा था कि पहले ऊपर से अच्छे से कर दो फिर अंदर से करूंगा,,,,

नहीं सब साथ में ही कर तभी अच्छे से कर पाएगा,,,

की मालकिन,,,,

(इतना कहने के साथ अभी सूरज का आदमी जोरों से धड़कने लगा क्योंकि वह भी तो यही चाहता था बस अपनी मालकिन की इजाजत चाहता था और इजाजत मिलने के बाद अगले ही पल वह दोनों हथेलियां को गांड के दोनों आंखों पर रखकर अपने अंगूठियां को दोनों तरफ से उसकी गांड की दरार में अंदर की तरफ दर्शाते हुए ले गया और फिर ऊपर से नीचे तक अपने अंगूठे को उसकी गांड की दरार में रगड़ते हुए मालिश करते हुए नीचे की तरफ ले आया और ऐसा करते हुए निचले छोर पर,,, सूरज को कुछ दरदराहट महसूस हुई,,, वह सोचने लगा कि यह कौन सा अंग है कहीं यही तो इसकी बुर नहीं,,, लेकिन दर्द रहता तो बहुत छोटे से छेद जैसा है,,,,(यह ख्याल उसके मन में आते ही उसकी इच्छा और ज्यादा प्रचलित हो गई उसे अंग को देखने के लिए उसे जगह को देखने के लिए लेकिन अपना मन महसूस करवाओ इस तरह से मालिश करता रह गया और देखते ही देखते ही हवा अपनी अंगूठी को बारी-बारी से उसकी गांड की तरह में ऊपर से नीचे से ऊपर तक मालिश करते हुए उसे छोटे से दर्द रहता पर अपनी इच्छा को दबाते हुए अपने अंगूठे के दबाव को बढ़ा देता था और ऐसा करने से मुखिया की बीवी के तन बदन में दुगना जोश भर जाता था लेकिन वह जानती थी कि अभी तक सूरज की उंगलियां उसकी बुर तक नहीं पहुंच पाई थी क्योंकि वह अपने अंगूठे को वहीं से वापस ऊपर की तरफ ले जा रहा था शायद वह ऐसा ही सोच रहा था कि बस यही तक औरत का खूबसूरत अंग की शुरुआत होकर अंत हो जाता है लेकिन उसे बुद्धू को क्या मालूम था कि इससे नीचे ही तो जन्नत का द्वार शुरू होता है,,,, लेकिन मुखिया की बीवी सूरज के द्वारा मालिश से पूरी तरह से मदहोश और मदमस्त हो चुकी थी,,, उसकी सांसे बड़ी गहरी चल रही थी और लगातार उसकी बुर से मदन रस का बहाव हो रहा था,,,।





मुखिया की बीवी की मोटी मोटी जांघों पर बैठे हुए सूरज उसके नितंबों की लगातार मालिश कर रहा था लगातार अपनी उंगलियों को अपने अंगूठे को उसकी गांड की दरार में इधर से उधर घूमा रहा था और जब जब सूरज का अंगूठा मुखिया की बीवी की गांड के छोटे से छेद पर स्पर्श होती तो मुखिया की बीवी एकदम से कसमसा जाती,,, उत्तेजना और मदहोशी में उसके माथे से पसीना टपक रहा था मुखिया की बीवी मदहोश हुए जा रही थी,,,, लगातार मालिश करते हुए सूरज बोला,,,।

अब तो ठीक है ना मालकिन,,,

बहुत अच्छा,,,, तू तो मुझे मस्त कर दिया,, अब तो मेरी गांड चमक रही होगी,,,

बिल्कुल मालकिन एकदम सोने की तरह चमक रही है,,,





हां यही तो,,, मैं चाहती थी महीनो गुजर गई मालिश नहीं हुई,, आज इसी बहाने तु महीनो की कसर पूरी कर दिया,,, लेकिन गांड की दरार के बीच एक छोटा सा छेद है उधर मुझे बहुत खुजली हो रही है थोड़ा सा अपनी उंगली से खुजला देता तो अच्छा हो जाता,,, थोड़ा सा सरसों का तेल लगाकर,,,,,(एकदम मस्त होते हुए मुखिया की बीवी बोली और उसकी यह बात सुनकर सूरज के बदन न में गनगनाहट होने लगी,,,, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा,,,, पैसे सूरज की भी यही इच्छा थी वह भी मुखिया की बीवी की गांड के दरार के बीच देखना चाहता था,,,, की मुखिया की बीवी दरार के अंदर कौन सा खजाना छुपाए बैठी है,,,। इसलिए वह बोला,,,,)

लेकिन मालकिन वह छोटा सा छेद मुझे दिखाई नहीं दे रहा है,,,

अरे बुद्धू बार-बार तेरा अंगूठा उस पर छू जा रहा है और तुझे पता नहीं चल रहा है,,,।

हां कसम से मुझे बिल्कुल भी पता नहीं चल रहा है,,,





तू सच ही कह रहा होगा तुझे औरतों के अंगों के बारे में पता नहीं है इसीलिए समझ नहीं पा रहा है तेरी जगह कोई और होता तो अब तक तो,,,,,(इतना कहकर वह एकदम से रुक गई वैसे मुखिया की बीवी का कहना भी बहुत लाजिमी था वह उचित स्थिति को देखते हुए सच ही कह रही थी जिस तरह से सूरज का अंगूठा उसके छोटे से छेद से स्पर्श हो रहा था कोई और होता तो अब तक अपने अंगूठे के साथ-साथ अपना लंड भी उसकी गांड के छेद में डाल दिया होता जिसकी हकदार इस समय मुखिया की बीवी पूरी तरह से थी मुखिया की बीवी की बात सुनकर उसकी बात कोई दोहराते हुए सूरज बोला,,,)

अब तक तो क्या मालकीन,,,,(अपनी हथेली को उसके नितंबों पर घूमाते हुए बोला,,,)

कुछ नहीं धीरे-धीरे सब समझ जाएगा रुक जा मेरे ऊपर से थोड़ा उठ तो मैं थोड़ी टांग खोल दूं तुझे सब कुछ साफ दिखाई देगा,,,,।

(मुखिया की बीवी एकदम शातिर पन से भोलापन दिखाते हुए बोली,,, और उसकी यह बात सुनकर सूरज के लंड की अकड़ बढ़ने लगी,, जिसे वह खुद अपने हाथ से दबाकर स्थिर करने की कोशिश कर रहा था मुखिया की बीवी की बात सुनते ही वह धीरे से अपने नितंबों को मुखिया की बीवी की मोटी मोटी जांघों के ऊपर से हटाया,,, वह केवल अपनी नितंबों को ही ऊपर उठाया था और मुखिया की बीवी हल्के से अपनी टांगों को थोड़ा चौड़ा कर दी सूरज की नजर मुखिया की बीवी की गांड पर ही टिकी हुई थी,,,, और जैसे ही अपनी टांग को खोली सूरज को वाकई में लालटेन की पीली रोशनी में मुखिया की बीवी की गांड का वह छोटा सा छेद एकदम साफ नजर आने लगा और उसके नीचे कचोरी जैसी फोली हुई उसकी गुलाबी बुर भी हल्की-हल्की नजर आने लगी,,, जिसे देखते ही सूरज का तन बदन और उसका मन खुशी के मारे झूमने लगा वह मदहोश होने लगा,,, इस समय वह अपने आप को दुनिया का सबसे खुश नसीब लड़का समझ रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने ठीक उसके नीचे एक बेहद खूबसूरत औरत नंगी लेटी हुई थी और वह भी गांव की मानी जानी औरत मुखिया की बीवी जिसे देखकर ही ना जाने कितनों का लंड खड़ा हो जाता था लेकिन आज वही औरत सूरज का लंड खड़ा की हुई थी अपनी हरकतों से अपनी मादकता से अपने हुस्न के जादू से,,,,,,,





अब दिखाई दे रहा है,,,,(एकदम बेशर्मी भरे लहजे में मुखिया की बीवी बोली इस तरह से उसने आज तक इतनी मर्दों के साथ संबंध बनाई थी लेकिन इस तरह से खुलकर अश्लील शब्दों का प्रयोग पहले ही प्रयास में नहीं की थी लेकिन सूरज के साथ वह बिल्कुल अलग ही व्यक्तित्व की बन चुकी थी,,,, सूरज का दिल जोरो से धड़क रहा था उसकी नजर मुखिया की बीवी की गांड की दरार के बीचों बीच उसके भूरे रंग के छत पर और ठीक उसके नीचे उसके गुलाबी कचोरी पर टिकी हुई थी और गहरी सांस लेते हुए वह बोला)

बिल्कुल साफ दिखाई दे रही है मालकिन,,,,

बस अब उसे पर थोड़ा तेल लगाकर मालिश कर दे बहुत खुजली होती है,,,।

ठीक है मालकिन,,,,

(सूरज भला कब मना करने वाला था मुखिया की बीवी का गुप्त छेद देखकर वह पूरी तरह से मदहोशी के आलम में डूबने लगा था वह जानता था की मुखिया की बीवी का यहां गुप्त छेद बहुत कम लोगों ने देखा होगा,,, बहुत कम से इसका मतलब था मुखिया जी से लेकिन वह नहीं जानता था की मुखिया की बीवी बहुत लोगों को अपना गुप्त छेद और गुलाबी गली की सैर करा चुकी थी,,,, अपनी मालकिन की बात मानते हुए एक बार फिर से सरसों के तेल कि शीशी को हाथ में ले लिया और उसका ढक्कन खोलकर तेल किधर है कैसे उसे छोटे से छेद पर गिराया और सरसों का तेल मुखिया की बीवी की गांड के भुरे रंग के क्षेत्र पर गिरता हुआ उसके गुलाबी मखमली क्षेत्र को भिगोना शुरू कर दिया,,,, और फिर सरसों के तेल का ढक्कनलगाकर वह वापस खटिया के नीचे सीसी को रख दिया और फिर मदहोशी के आलम में वह अपने दोनों हाथों में मुखिया की बीवी की बड़ी-बड़ी गांड की दोनों फांकों को पकड़कर हल्के से फैलाते हुए उस छोटे से सुराख को देखने लगा जो कि बडा ही लुभावना लग रहा था,,, सूरज की हरकत मुखिया की बीवी को पूरी तरह से मदहोश कर गई वह एकदम से मस्त हो गई क्योंकि पहली बार सूरज अपनी तरफ से कोई हरकत किया था और उसकी हरकत मुखिया की बीवी को एकदम से चुदवासी बना गई,,, और वह मदहोश होते हुए बोली,,,।





क्या देख रहा है,,,,?(मुखिया की बीवी अच्छी तरह से जानती थी कि इस समय सूरज उसकी गांड के छोटे से छेद को ही देख रहा होगा और उसके नीचे फुली हुई कचोरी को,,, मुखिया की बीवी की बात सुनते ही सूरज बोला,,,)

ककककक,,, कुछ नहीं मालकिन,,, छोटे से छेद को देख रहा था,,,,

क्यों इतने गौर से देख रहा है,,,(इस बार अपनी नजरों को पीछे की तरफ घूम कर सूरज की तरफ देखते हुए बोली सूरज भी मुखिया की बीवी की तरफ देखने लगा और घबराहट उत्तेजना और मदहोशी के मिले-जुले मिश्रण में बोला..)

बहुत खूबसूरत लग रही है,,,,,(सूरज के शब्दों में उत्तेजना और कुमारी भरी हुई थी उसका चेहरा देखने लायक था मुखिया की बीवी की गांड और उसके छोटे से छेद को देखकर वह पूरी तरह से मत हो गया था उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो गया था उसके चेहरे का भाव देखकर मुखिया की बीवी मन में ही मन प्रसन्न होने लगी और बोली)

तुझे सच में खूबसूरत लग रही है,,,





जी मालकिन छोटा सा छेद एकदम गोल उसके इर्द गिरते एकदम हल्की-हल्की रेखाएं,,, ऐसा लग रहा है जैसे की बैलगाड़ी का पहिया,,,,।

(बैलगाड़ी का पहिया सुनकर मुखिया की बीवी हंसने लगी और हंसते हुए बोली)

चल अब बस कर जल्दी से मेरी खुजली मिटा दे अभी भी खुजली हो रही है खुजला दे जल्दी से,,,

की मालकिन,,,,(सूरज की दोनों हथेलियां अभी भी मुखिया की बीवी की गांड की दोनों फांकों को थामे हुई थी और चौड़ा किए हुए थी,,,,,,, सूरज कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कोई औरत अपनी गुप्त छेद को इस तरह से पराए जवान लड़के से खुजलाने के लिए बोलेगी मालिश करने के लिए लेकिन जो कुछ भी हो रहा था वह कोई ख्वाब नहीं था कोई कल्पना नहीं थी बिल्कुल हकीकत था और हकीकत का मजा इस समय सूरज बखूबी लूट रहा था,,,,, बगीचे में आने से पहले उसे नहीं मालूम था कि यहां पर क्या होने वाला है क्या-क्या करना पड़ेगा बस इतना जानता था की मुखिया की बीवी के साथ उसे बहुत मजा आएगा क्योंकि खेतों में वह मुखिया की बीवी के रूप रंग और उसके तेवर को देख चुका था और उसे बेहद लुभावना लगा था और इसीलिए वह जिंदगी में पहली बार बगीचे में रखवाली करने के लिए आया था और यहां तो उसे जन्नत का सुख मिल रहा था,,,,)





सूरज अपनी उंगली से हल्के से मुखिया की बीवी के गांड के छोटे से छेद पर रखकर उसे धीरे-धीरे कुरेदने लगा,,, खुजलाने लगा,,,, मुखिया की बीवी मदहोश होने लगी उसे मजा आने लगा जीवन में पहली बार वह किसी से खुजलवा रही थी और वह भी अपनी गांड का छोटा सा,,,,छेद,,,, सूरज पूरी तरह से किस्मत का धनी बन चुका था क्योंकि इसके बारे में सोचकर लोग मस्त हो जाते हैं उसके बारे में न जाने कैसे-कैसे कल्पना किया करते थे और अपने हाथ से हिला कर अपनी जवानी का पानी निकालते थे,,, उसी औरत के नंगे बदन को वह जहां तहां छू रहा था मसल रहा था रगड़ रहा था,,,।

अब कैसा लग रहा है मालकिन,,,

बहुत अच्छा लग रहा है ,,आहहहह,,, (उसका इतना कहना था कि सूरज की उंगली अनजाने में ही उसके छोटे से छेद में प्रवेश कर गई और गांड के छेद के अंदर की गर्माहट अपनी उंगली पर महसूस करके सूरज एकदम मस्त हो गया,, ,, लेकिन वह एकदम से चौंक गया और एकदम से अपनी उंगली को बाहर निकाल लिया और बोला,,,)





बाप रे कितनी गर्म है,,,,

क्या हुआ सूरज बाहर क्यों निकाल लिया अच्छे से तो खुजला रहा था,,,।

पता नहीं क्यों बोली अंदर घुस गई मालकिन,,,(सूरज वाकई में एकदम बोला था उसे छोटे से छेद में उंगली घुसने पर एकदम से घबरा गया था,,,, उसे इस बात का डर था की मालकिन क्या कहेगी,,, लेकिन सूरज की हरकत और उसके भोलेपन को देखकर मुखिया की बीवी बोली,,,)

तो क्या हुआ तेरी उंगली अंदर घुसते ही मुझे राहत मिलने लगी,,,, फिर से डाल उंगली अच्छे से मालिश कर और खुजला,,,,

फिर से उंगली डालु,,, वह तो अनजाने में चली गई थी,,,

तो क्या हुआ फिर से डाल दे,,,

क्या इसमें उंगली डालते हैं मालकिन,,,,

अरे पगले मर्द तो उसमें अपना वह भी डाल देते हैं,,,

वह भी मतलब,,,,(धड़कते दिल के साथ सूरज बोला,,, क्योंकि थोड़ा-थोड़ा उसे भी समझ में आ रहा था की मुखिया की बीवी क्या कहना चाहती है,,,)

तुझे नहीं मालूम,,,,





सच में मालकिन मुझे नहीं मालूम तभी तो मैं डर गया था जैसे ही उंगली धंसी,,,,

यह बात है अच्छा फिर से उंगली अंदर डालकर अंदर बाहर कर मुझे अच्छा लग रहा है,,,,

(मुखिया की बीवी गांड के छेद में लंड डालने की बात कर रही थी लेकिन आज तक उसने कभी भी गांड नहीं मरवाई थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि छोटे से छेद में मोटा लंड कुछ ज्यादा ही दर्द देगा,,,, अभी के लिए इस बात पूर्ण विराम लग चुका था,,,, मुखिया की बीवी मंद मंद मुस्कुरा रही थी और अपनी मालकिन की बात सुनकर सूरज अपनी उंगली को मुखिया की बीवी की गांड के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया पहली मर्तबा एक जवान लड़की के लिए औरत का खूबसूरत नंगा बदन ही उसकी दुनिया की सबसे बड़ी खुशी बन जाती है और यही सूरज के साथ भी हो रहा था मुखिया की बीवी के नंगे बदन का स्पर्श और उसकी गांड के छोटे से छेद में अपनी उंगली अंदर बाहर करने में भी उसे चुदाई जैसा सुख प्राप्त हो रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, उसे साथ महसूस हो रहा था की गांड का वह छोटा सा छेद अंदर से कितना गरम और भभक रहा था,,,, मुखिया की बीवी सूरज के उंगली से एक तरह से अपनी गांड मरवा रही थी आज तक उसने अपनी गांड के छेद में अपनी खुद की उंगली नहीं डाली थी लेकिन सूरज की उंगली से वह आनंद के सागर में गोते लगा रही थी वह मदहोश हो रही थी,,, उसकी बर पानी पानी हो रही थी,,,, सूरज एक हाथ से उसकी गांड की मालिश करते हुए अपनी दूसरी हाथ की उंगली को लगातार उस छोटे से छेद में अंदर बाहर कर रहा था,,, एक मर्तबा तो उसे ऐसा ही लगा कि अपनी उंगली की जगह अपना लंड अंदर डाल दे तो कितना मजा आए लेकिन इतनी हिम्मत उसने बिल्कुल भी नहीं थी जबकि मुखिया की बीवी सूरज की तरफ से ऐसी ही किसी हरकत का इंतजार कर रही थी जो की उसके लिए भी ख्वाब ही था,,,, आखिरकार मुखिया की बीवी गहरी गहरी सांस लेने लगी उसका बदन कसमसाने लगा और हल्का सा उसके बदन में ऐंठन हुआ और उसकी बुर से कामरस की पिचकारी फूट पड़ी,,, वह झड़ने लगी लेकिन इस बात से सूरज पूरी तरह से अनजान था मुखिया की बीवी की बुर से मलाई टपक रही थी जो की उसकी बुर का छेद नीचे की तरफ होने की वजह से सूरज को दिखाई नहीं दे रहा था और वह कुछ देर तक किसी तरह से अपनी उंगली अंदर बाहर करता रहा तो खुद मुखिया की बीवी उसे रोकते हुए बोली,,,।





बस बस सूरज तूने बहुत अच्छा काम किया है,,, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि तू इतनी अच्छी मालिश करता होगा,,,

तो क्या मालिश पूरी हो गई मालकिन अब नहीं करवाना है,,,,(सूरज उदास होता हुआ बोला क्योंकि वह नहीं चाहता था की मालिश का कार्यक्रम इतनी जल्दी समाप्त हो जाए वह पूरी रात इसी तरह से मुखिया की बीवी के बदन पर सरसों के तेल की मालिश करने के बहाने उसके अंगों को छूना चाहता था उसका मजा लेना चाहता था,,,। और सूरज की बात से मुखिया की बीवी भी पूरी तरह से अवगत थी वह जानते थे कि सूरज उसकी मालिश करके खुद प्रसन्न हो रहा है इसलिए मुस्कुराते हुए वह बोली,,,)

नहीं अभी तो बाकी है लेकिन अब आगे की बारी है,,,।

(इतना सुनते ही सूरज की कामअग्नि और ज्यादा भड़कने लगी,,, आगे की बारी का मतलब सूरज अच्छी तरह से जानता था जो काम हुआ मुखिया की बीवी के पिछवाड़े किया था वहीं अब आगे करते हैं की बारी आ चुकी थी और आगे मालिश करने की बारी का मतलब था मुखिया की बीवी की खरबूजे जैसी चूचियां और उसकी गुलाबी बुर जिस पर अब सूरज सरसों के तेल की मालिश करने वाला था,,,) मेरे ऊपर से हट ,,,,।





(इतना सुनते ही सूरज तुरंत मुखिया की बीवी के ऊपर से उठ गया और खटिया के नीचे जाकर खड़ा हो गया मुखिया की बीवी अभी भी पेट के बल लेटी हुई थी लालटेन की पीली रोशनी में उसका नंगा बदन सोने की तरह चमक रहा था,,, और मुखिया की बीवी के नंगे बदन को देखकर सूरज के पजामे में तंबू बना हुआ था,,,। मुखिया की बीवी धीरे से उठी और नजर घूमर सूरज की तरफ देखने लगी और उसके सीधे नजर सूरज के पजामे पर गई जहां पर अच्छा खासा तंबू बना हुआ था और उसके तंबू को देखकर उसके बुर की गुलाबी पत्तियां कुल बुलाने लगी,,, वह सूरज की तरफ सहज रूप से देखते हुए खटिया पर ही घूम गई और अपनी खूबसूरत खजाने को सूरज की तरफ करते हुए पीठ के बल लेट गई सूरज तो देखा ही रहेगा सूरज मुखिया की बीवी की मदद कर देने वाली जवानी की चका चोंध देखकर आश्चर्यचकित हो गया था,, लेकिन पीठ के बल लेटते समय वह अपनी बेटी को उठाकर उसे अपनी बुर के ऊपर रखकर अपने अनमोल खजाने को ढक दी थी और ऐसा करके वह यह जताना चाहती थी कि अभी उसके दर्शन का समय सूरज के लिए नहीं है,,,, और इसी बात पर सूरज को थोड़ा सा अपने मन में दुख हो रहा था लेकिन उससे भी बेहतर उसके लिए इस समय मुखिया की बीवी की भरी हुई छतिया थी और उसकी दोनों चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह दोनों तरफ लटकी हुई थी,,, सूरज आश्चर्यचकित होकर फटी आंखों से मुखिया की बीवी के नंगे बदन को देख रहा था और यह देखकर मुखिया की बीवी मुस्कुराते हुए बोली,,,)





अरे देखता ही रहेगा की मालिश भी करेगा तुझे मालूम है ना कहां-कहां मालिश करना है मेरे बदन का एक भी कोना बाकी नहीं रहना चाहिए,,,,

जी मालकिन,,,,(सूरज अच्छी तरह से समझ गया था,,, अब उसे क्या करना है वह धीरे से खटिया पर चढ़ा और पहले की तरह ही मुखिया की बीवी पर सवार हो गया और फिर खटिया के नीचे से सरसों के तेल के सीसी को अपने हाथों में लिया उसका ढक्कन खोलकर उसके धार को मुखिया की बीवी की चूची के बीचों बीच गिराना शुरू कर दिया,,,, इतने करीब से औरत के अंग को सूरज पहली बार देख रहा था एक औरत की खूबसूरत चूचियां कितनी ज्यादा खूबसूरत होती है पहली बार उसे एहसास हो रहा था पानी भरे गुब्बारे की तरह बड़े-बड़े चूचियां मुखिया की बीवी की छाती पर लौट रही थी और फिर तेल की धार गिरा लेने के बाद सूरज सीसी को वापस खटिया के नीचे रख दिया मुखिया की बीवी लगातार सूरज की तरफ देख रही थी उसका इस तरह से देखना सूरज के तन बदन में आग लगा रहा था,,, सूरज की आंखों में शर्म नजर आ रही थी लेकिन मुखिया की बीवी की आंखों में मदहोशी और खुमारी नजर आ रही थी एक मर्द को पाने की चाहत नजर आ रही थी,,, और वह उत्तेजित स्वर में बोली,,,)





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सूरज जैसे पीछे की मालिश किया है वैसे आगे की भी करना कोई कसर बाकी मत रखना,,,,।

जी मालकिन,,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज अपने दोनों हथेलियां को कंधे पर रखकर हल्के हल्के मालिश करते हुए वह धीरे-धीरे नीचे की तरफ आने लगा एक मुखिया की बीवी की दोनों चूचियों को पकड़ने में सूरज को शर्म महसूस हो रही थी अजीब सा हालात बन चुका था झोपड़ी में एक औरत और मर्द के बीच जहां इस तरह की हरकत से औरत को शर्माना चाहिए वही एक मर्द शर्मा रहा था और औरत बेशरम बनी हुई मजा लूट रही थी और सच ही है औरत और मर्द के बीच बेशर्मी की हद पार करने में ही ज्यादा मजा और आनंद आता है लेकिन अभी इस ज्ञान और अनुभव से सूरज कोशो दूर था इसलिए उसे नहीं मालूम था,,,, सूरज धीरे-धीरे अपनी हथेलियां को मुखिया की बीवी की उन्नत छातियों पर लेकर आया उसका दिल जोरो से धड़क रहा था उसके बदन में उसके मन में घबराहट हो रही थी लेकिन मुखिया की बीवी की चूची को अपनी हथेली में दबाने की चाहत भी अंदर ही अंदर उछाल मार रही थी,,, मुखिया की बीवी लगातार सूरज की तरफ देख रही थी उसके चेहरे की तरफ देख रही थी वह पल-पल सूरज के चेहरे के बदलते भाव को देख रही थी और जैसे-जैसे उसकी चूचियों पर उसकी हथेली जम रही थी वैसे-वैसे उसके चेहरे का भाव एकदम से बदलता चला जा रहा था और यह सब देखने में मुखिया की बीवी को बेहद आनंद प्राप्त हो रहा था,,,,।





देखते ही देखते सूरज अपनी दोनों हथेलियां में मुखिया की बीवी की खरबूज जैसी बड़ी-बड़ी चूचियों को भर लिया था हालांकि उसकी हथेली में मुखिया की बीवी की बड़ी-बड़ी चूचियां पूरी तरह से समा नहीं रही थी लेकिन फिर भी वह उसे थामे हुए था और उसकी मालिश करना शुरू कर दिया उत्तेजना की हमारी मुखिया की बीवी की निप्पल खजूर की तरह तनकर खड़ी हो गई थी,,,। जितना मजा सूरज को आ रहा था उतना ही मजा मुखिया की बीवी को भी हारा था जबकि मुखिया की बीवी का यह पहली बार नहीं था अपने मनपसंद मर्दों के साथ हुआ इस तरह का अश्लील खेल चुकी थी कई मर्द ने उसकी चूचियों को अपने हाथ में लेकर दबाने का सुख भोग चुका था लेकिन सूरज की बात ही कुछ और थी,,, सूरज का यह पहली बार था इसलिए पहली बार उसकी हथेलियां में मुखिया की बीवी की चूचियां गर्व महसूस कर रही थी,,,।





सहहहह आहहहहहह बहुत अच्छा लग रहा है सूरज,,,, ऐसे ही जोर-जोर से दबाकर मालिश कर,,,,आहहहहह,,,,

(मुखिया की बीवी एकदम मदहोश होते हुए बोली और सूरज को ऐसा ही लग रहा था कि शायद माली से मुखिया की बीवी को राहत मिल रही है इसलिए उसके मुंह से इस तरह की आवाज निकल रही थी लेकिन इस बात को वह नहीं जानता था कि कामोत्तेजित और मदहोशी की अवस्था में औरत के मुंह से इस तरह की शिकारी की आवाज निकलती है वह मुखिया की बीवी की बात को सुनकर और मानकर जोर-जोर से उसकी चूचियों को मसलते हुए मालिश करने लगा,,, एक मर्द के लिए औरत की चूची कितनी उन्मादक होती है यह पहली बार सूरज को एहसास हो रहा था मुखिया की बीवी की चूची की मालिश और दबाने में इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत उसका लंड ऐसा लग रहा था की मानो फट जाएगा इतनी अत्यधिक उसमें उत्तेजना का अनुभव हो रहा था रक्त का संचार हो रहा था मुखिया की बीवी उसके पहचाने में उसके तने हुए तंबू को और उसके चेहरे को बार-बार देख रही थी मुखिया के बीवी का भी मन कर रहा था कि अपना हाथ आगे बढ़कर सूरज के लंड को अपने हाथ में पकड़ ले उसके साथ खेली लेकिन वह भी अपने आप पर काबू रखे हुए थी,,,, कमर से लेकर ऊपर तक बराबर मालिश कर रहा था ज्यादातर मालीश वह मुखिया की बीवी की चूचियों पर ही कर रहा था,,, और उसके छोटे से खजूर के दाने को अपने दोनों उंगलियों में लेकर बराबर से सरसों का तेल लगाकर उसे दबा रहा था और ऐसा करने पर मुखिया की बीवी के बदन में उत्तेजना की लहर एकदम से उठने लगती और उसका वजन कसमसा जाता एक बार मदन रस का फवारा निकल जाने के बाद भी उसकी बुर से लगातार मदन रस का बहाव हो रहा था और उसकी पेटीकोट को भीगो रहा था,,,। मुखिया की बीवी उन्मादित्य होते हुए बोली,,,।





तुझे कैसा लग रहा है सूरज मेरी चूचियों की मालिश करने में,,,,

बहुत अच्छा मालकिन,,,

इस तरह से कभी और किसी की मालिश किया है,,,

बिल्कुल भी नहीं मालकिन किसी औरत की मालिश करने का सौभाग्य मुझे पहली बार प्राप्त हो रहा था और मैं खुशनसीब हूं की पहली बार में ही तुम्हारे बदन की मालिश करने का सौभाग्य मुझे मिल रहा है मैं आज तक इतनी खूबसूरत औरत और इतना खूबसूरत बदन कभी नहीं देखा,,,

मेरी चुचीया कैसी है,,,?(अपने चेहरे पर मादक मुस्कान लाते हुए मुखिया की बीवी बोली)

एकदम दशहरी आम की तरह मालकिन,,,

दशहरीआम,,,,(आश्चर्य से मुखिया की बीवी मुस्कुराते हुए बोली)

जी हां मालकिन अपने पूरे गांव में और अगल-बगल के पूरे गांव में दशहरी आम की तरह कोई आम नहीं होता इसीलिए मैं तुम्हारी चुची को दशहरी आम की तरह कह रहा हूं,,, सबसे अनमोल,,,

(सूरज के मुंह से अपनी चूचियों की तारीफ सुनकर मुखिया की बीवी मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रही थी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)





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पहले भी कभी किसी की चूची देखा है क्या,,,।

क्या बात करती हो मालकिन पहली बार तुम्हें किसी नंगी औरत को देख रहा हूं और चूची की बात तो बहुत दूर की बात है आते जाते ब्लाउज में औरतों की चूची की तरफ निगाह जरूर चली जाती थी लेकिन उन्हें कभी देखा नहीं आज पहली बार तुम्हारी चूची देख रहा हूं और ,,, और तुम्हारी चूचियों की जोड़ी इतनी खूबसूरत कि मैं बता नहीं सकता ऐसा लगता है कि आसमान में दो-दो चांद‌ चमक रहे है,,,

बातें तो बहुत बड़ी-बड़ी करता है,,, तारीफ तो ऐसे कर रहा है कि जैसे बहुत सी औरतों के साथ ऐसा कर चुका है,,,

बिल्कुल भी नहीं मालकिन यह पहली मर्तबा है कि मैं किसी औरत की खूबसूरती की तारीफ कर रहा हूं वरना इस तरह के बातें करना तो दूर में इन सब के बारे में कभी सोच भी नहीं सकता,,,,(ऐसा कहते हुए उत्तेजना के मारे सूरज बड़े जोरों से मुखिया की बीवी की चूची को दबा दिया और उसके मुंह से दर्द भरी कराग निकल गई,,,)

आहहहह हाय दैया,,, धीरे से रे दर्द करता है,,,,

माफ करना मालकिन न जाने कैसे जोर से दब गई,,,।

(मुखिया की बीवी जानती थी कि सूरज ने इतनी जोर से क्यों दबा दिया वह जानती थी कि वह उत्तेजित हो गया था मदहोश हो गया था और अपने आप पर काबू नहीं रख पाया था और इसी से वह अंदाजा भी लगा रही थी कि जब वह। उसे पेलेगा तब कितना मजा आएगा,,,, सूरज कुछ देर तक किसी तरह से कमर से ऊपर तक उसकी चूची की मालिश करता रहा और फिर इसके बाद मुखिया की बीवी बोली,,,,)

बसकर सूरज,,,अब तुझे उस जगह पर मालिश करना है जहां पर औरत बहुत कम लोगों को पहुंचने देती है,,,

कहां पर मालकीन,,,,

मेरे ऊपर से थोड़ा सा उठ,,,,,

(सूरज जल्दी से मुखिया की बीवी की बात मान गया अपनी गांड को ऊपर उठा लिया मुखीया की बीवी सूरज की तरफ देखते हुए अपनी पेटीकोट को जोकि उसकी बुर को ढकी हुई थी उसे एकदम से अपनी बुर पर से हटा दी लेकिन इस दौरान वह अपनी बुर की तरफ नहीं बल्कि सूरज की तरफ देख रही थी और सूरज फटी आंखों से मुखिया की बीवी की बुर की तरफ देख रहा था,,,, सूरज की तो हालत खराब हो गई थी वह आश्चर्य से मुखिया की बीवी की बुर को देखता ही रह गया ,, मुखिया की बीवी की बुर को देखकर सूरज के पजामे में गदर मचा हुआ था,,, मुखिया की बीवी सूरज के चेहरे की तरफ देख रही थी उसके बदलते हाव भाव को देख रही थी उसके अंतर मन को समझने की कोशिश कर रही थी और अच्छी तरह से समझ भी रही थी कि सूरज की ईस समय क्या हालत हो रही है,,,, सूरज फटी आंखों से मुखिया की बीवी की बुर को देखना था जिंदगी में पहली बार हुआ किसी औरत की बुर के साछात दर्शन कर रहा था इसलिए पल भर में उसकी आंखों में चार बोतलों का नशा छाने लगा,,, सूरज को इस तरह से पागलों की तरह देखा हुआ देखकर मुखिया की बीवी बोली,,,)

ऐसे क्या देख रहा है रे पहले कभी देखा नहीं क्या,,,?

बताया तो मालकिन मैं पहली बार किसी नंगी औरत को देख रहा हूं पहली बार तुम्हारी चूची को देखा पहली बार तुम्हारी गांड को देखा और पहली बार तुम्हारी,,,,, इसको देख रहा हूं,,,।

ईसको किसको देख रहा है इसका नाम नहीं मालूम क्या,,,,

मालूम है मालकिन,,,,(एकदम मदहोश होते हुए बोला)

क्या नाम है इसका,,,,,(मुखिया की बीवी भी उत्तेजित होते हुए पूरी उसकी गहरी चलती सांसों के साथ-साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी सूरज उसके ही सवाल पर उसकी तरफ देखने लगा मुखिया की बीवी से उसकी नजर टकराई और सूरज एकदम से मदहोश हो गया और लड़खड़ाते शब्दों में बोला)

बबबबब,,, बुरररर,,,,,

(बुर शब्द कहते हुए सूरज की जबान पूरी तरह से लड़खड़ा गई थी,,, सूरज की आंखों में मदहोशी और वासना एकदम साफ नजर आ रही थी सूरज के मुंह से बुर शब्द सुनकर मुखिया की बीवी की भी उत्तेजना परम शिखर पर पहुंच गई और उसकी बुर से बदन रस की बूंद मोती के दाने की तरह बाहर टपक गई,,, सूरज की बात सुनकर मुखिया की बीवी बोली,,)

चल अच्छा हुआ इतना तो मालूम है तुझे वरना मैं तो समझी थी कि एक मर्द होने के बाद तुझे यह सब मालूम नहीं होगा,,,,। अब तुझे इसकी मालिश करना है और एकदम बराबर करना है,,,,

(इतना सुनकर वह मुखिया की बीवी की बुर को देख कर मुखिया की बीवी की तरफ देखने लगा उसे अब भी यकीन नहीं हो रहा था की मुखिया की बीवी उसे अपनी बुर की मालिश करने के लिए बोल रही है,,,, मुखिया की बीवी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

चल जल्दी कर देख कर रहा है,,, तेरे हाथों और उंगलियों का जादू मुझे यहां पर भी देखना है,,,,।

(इस बार वह कुछ बोला नहीं अब तक के अनुभव से वह थोड़ा बहुत तो सीख चुका था वापस अपनी गांड को उसकी नंगी जांघों पर टिका कर सूरज सरसों के तेल के सीसी खटिया के नीचे से लिया और उसका ढक्कन खोलकर धीरे-धीरे उसकी धार को इस बार मुखिया की बीवी की बुर के बीचों बीच गिराना शुरू कर दिया जैसे-जैसे तेल की धार मुखिया की बीवी की बुर पर गिर रही थी वैसे-वैसे मुखिया की बीवी के चेहरे के है-भाव बदलते जा रहे थे मदहोश होती जा रही थी उत्तेजना उसके बदन में पूरी तरह से अपना असर दिखा रही थी पल भर में उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया था और उसके बदन की कसमसाहट बढ़ने लगी थी,,,, सरसों के तेल की सीसी को बंद करके,,, सूरज खटिया के नीचे रख दिया और फिर अपने हाथ को मुखिया की बीवी की बुर की करीब ले जाने लगा लेकिन इस बार उसके हाथों में कंपन था वह उत्तेजित अवस्था में कांप रहा था लेकिन उसे आगे बढ़ाना एक नए अनुभव के लिए एक नए सांस के लिए अपने आप को एक औरत के लिए तैयार करना था इसलिए देखते ही देखते वह अपनी हथेली को मुखिया की बीवी की बुर पर रख दिया और उसकी बुर एकदम से उसकी हथेली से थक गई और एक अद्भुत मदहोशी सूरज के बदन में नशे की तरह दौड़ने लगी और यही हाल मुखिया की बीवी का भी हो रहा था मुखिया की बीवी अपनी दोनों टांगों के बीच देख रहीथी वह साफ देख रही थी कि सूरज उसकी बुर को अपनी हथेली से ढक लिया था,,,, और उसकी हरकत से उसके बदन में हलचल सी हुई और वह अपनी आंखों को बंद कर दी,,, सूरज की सांसे बड़ी गहरी चल रही थी,,, वह अपनी हथेली का दबाव निरंतर मुखिया की बीवी की बुर पर बढ़ता चला जा रहा था मालिश करने का भान उसमें नहीं था वह उत्तेजित हो रहा था मुखिया की बीवी की बुर से खेल रहा था पहली बार किसी औरत की बुर उसके हाथों में थी उसकी हथेली में थी जिस पर उसे मालिश करनी थी,,,, उसकी हरकत से मुखिया की बीवी मदहोश हो रही थी मुखिया की बीवी भी जानती थीकि सूरज उसकी मालिश नहीं बल्कि उसकी बुर को अपनी हथेली से दबा रहा था उसके इस हरकत पर उसकी मदहोश भरी शिसकारी निकल रही थी,,,।

सहहहहहह आहहहहहह ऊमममममम,,,,

(मुखिया की बीवी की मुंह से इस तरह की आवाज निकालते हुए देख कर सूरज बोला ।)

क्या हुआ मालकिन,,,

बहुत अच्छा लग रहा है,,, बहुतअच्छा,,,,सुरज,,,आहहहहह,,,,,।

(सूरज जब रुकने वाला नहीं था सूरज इसी तरह से अपनी हथेली से दबा दबा कर मुखिया की बीबी की बुर की मालिश भी कर रहा था उसे मसल भी रहा था,,, सूरज को बहुत मजा आ रहा था लालटेन के पीली रोशनी में सूरज को सबको नजर आ रहा था मुखिया का बीवी का नंगा बदन सोने की तरह चमक रहा था मुखिया की बीवी का चेहरे का हाव भाव निरंतर बदलता जा रहा था,,,। सूरज मुखिया की बीवी की बुर की चारों तरफ बारिश कर रहा था उसे पर हल्के हल्के रेशमी बाल उगे हुए थे जो की बहुत ही छोटे थे,,, और छोटे होने के कारण ही मालिश करने में बिल्कुल भी दिक्कत नहीं आ रही थी मुखिया की बीवी का बर कचोरी की तरह एकदम से फूल गई थी उसमें से लगातार मदन रस का बाहर हो रहा था और उसके बुर से निकले हुए रस से सूरज की हथेली गीली हो जा रही थी,,,।)

बहुत गर्म है मालकिन तुम्हारी बुर,,,

हां रे इसमें बहुत गर्मी है और जब इसमें गर्मी बढ़ती है तो औरत की हालत खराब हो जाती है,,,

जब उसकी गर्मी बढ़ती है तब क्या करती हो मालकिन,,,

तुम मुझे मर्द के पास जाना पड़ता है,,,, और तू तो जानता ही है मर्द के पास औरत कब जाती है,,,,

जी नहीं,,,,(मदहोश होते हुए उसकी बुर को जोर-जोर से मसलते हुए सूरज बोला,,,)

सच में तु बहुत बुद्धू है,,,।
 
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