Incest पहाडी मौसम - Page 10 - SexBaba
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Incest पहाडी मौसम

Kuch dino se theek se chal nahi Raha he isliye update nahi de pa raha hu kya problem ho gayi he
 
नदी पर जो कुछ भी हुआ था रानी उसे अपने घर पर बताना उचित नहीं समझ रही थी इसलिए उसने घर पर किसी को भी नहीं बताई थी की नदी पर उसके साथ कैसा हादसा हुआ था,,, और यह बात उसने अपनी सहेलियों को भी बात रखी थी कि हमारे साथ जो कुछ भी हुआ है वह कोई भी अपने-अपने घर नहीं बताया किसी को कानो कान खबर नहीं पडनी चाहिए,,, क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि अगर उसके घर वालों को नदी वाले हादसे के बारे में पता चलेगा तो उसका घर से निकलना बंद हो जाएगा अपनी सहेलियों से मिलना बंद हो जाएगा और यही कारण उसने अपनी सहेलियों को भी बताई थी और उन्हें भी सही लग रहा था इसलिए वह लोग भी इस बात की जिक्र किसी को भी नहीं की थी क्योंकि वह लोग अपनी आजादी नहीं छीन लेना चाहती थी,,, और यही कारण था कि वह लोग भी नदी पर हुए इतने बड़े हादसे के बारे में किसी को कुछ भी नहीं बताई।





रात को रानी अपने कमरे में अपने बिस्तर पर सोते हुए उसने जवान लड़की के बारे में सोच रही थी जिसने उसकी जिंदगी बचाई थी,, जिंदगी में वह किसी के भी सामने अपने सारे वस्त्र उतार कर नंगी नहीं हुई थी लेकिन न जाने वह कैसा पल था कि वह अपने आप ही उसने जवान लड़के के सामने नंगी थी उसके बदन पर एक भी वस्त्र नहीं था रानी अपने मन में उसे पल के बारे में सोचकर हैरान तो हो रही थी लेकिन मदहोश भी हुए जा रही थी बार-बार उसकी आंखों के सामने वह नौजवान घुड़सवार नजर आ जाता था। उसका रूप रंग इतना मोहक था कि रानी पहली बार में ही उसे ऐसा लग रहा था कि दिल दे बैठी थी। क्योंकि बार-बार रानी दिनभर इस नौजवान लड़के के बारे में ही सोच रही थी आलम यह था कि रात को सोते समय भी वही ना जवान लड़का उसकी आंखों के सामने नाच रहा था। उसने जवान लड़के के बारे में सोचते हुए रानी बिस्तर पर करवट बदल रही थी। वह कभी सोची भी नहीं थी कि कोई नवजवान लड़का इस तरह से उसे बेचैन कर जाएगा। क्योंकि यह उसका पहला मौका था जब किसी जवान लड़की के बारे में इतना बेचैन हो रही थी और उसके बारे में इतना सोच रही थी।

रानी अपने मन में सोच रही थी कि वह नौजवान लड़का उसके बदन के हर एक अंगों को देखा होगा अपनी आंखों से उसके बदन को पूरी तरह से टटोल लिया होगा,, और वैसे भी उसे अवस्था में छुपाने लायक कुछ भी नहीं था उसकी आंखों के सामने सब कुछ तो था उसकी नंगी चूची नंगा जिसमें नंगी गांड और नंगी बुर जिसे देखने के लिए दुनिया का हर एक मर्द तड़पता रहता है। रानी अपने ही मन में उतरे सवाल का अपने आप से ही देते हुए अपने मन में बोल रही थी क्यों नहीं देखा होगा जब मरद चोरी-छिपे औरत के हर एक अंग को देखने की कोशिश करता है तो उसकी आंखों के सामने तो सब कुछ खुला था कुछ भी छुपा नहीं था और वह नदी में कूद कर उसकी जान बचाया था उसे अपने कंधे पर उठकर नदी के बाहर ले आया था ऐसे में उसकी हथेली उसके नाजुक अंगों पर जरूर शरारत की होगी। और वैसे भी एक खूबसूरत नई किसी नौजवान मर्द के सामने निर्वस्त्र अवस्था में आ जाए तो ऐसे में वह उसे मौके का फायदा उठाए बिना नहीं रह सकता,, उसने जवान लड़की ने भी उसके अंगों को छुआ होगा दबाया होगा या फिर मसल दिया होगा,,, यह सब बातें रानी को एक तरफ हैरान कर रही थी और एक तरफ उसे उत्तेजित भी कर रही थी उसकी बुर पूरी तरह से गिली हो चुकी थी। रानी के मन में फिर एक सवाल उठने लगा कि उसे इस अवस्था में देखकर उसने अपने आप पर इतना काबू कैसे कर पाया वरना उसकी जगह कोई होता तो शायद उसकी हालत में उसकी चुदाई कर दिया होता फिर अपने ही मन में उठ रही सवाल का जवाब वह खुद ही अपने आप को देते हुए बोली नहीं ऐसा हुआ कैसे कर सकता था भले ही उसके मन में इस तरह के ख्याल आए हो लेकिन नदी के बाहर उसकी सहेलियां भी तो खड़ी थी शायद उन सब की उपस्थिति में वह ऐसा नहीं कर पाया वरना उसके खूबसूरत जिस्म को देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए।





रानी अपने मन में सोचने लगी कि उसने अपनी जान पर खेल कर उसकी जान बचाया था लेकिन वह उसका नाम भी नहीं जान पाई लेकिन उसने बताया जरूर था अपना नाम लेकिन उसे याद नहीं था इस बारे में सोचकर वह हैरान हो रही थी काश उसका नाम ही पता होता तो कितना अच्छा होता शायद बेहोशी की हालत में ऐसा हो गया था कि उसके बताने के बावजूद भी वह नाम याद नहीं कर पाई थी लेकिन रानी इतना तो समझ गई थी कि पहनावे से वह इस गांव का बिल्कुल भी नहीं था और उन लोग जैसा बिल्कुल भी नहीं था किसी बड़े घर का ही था तभी तो घोड़े पर चलता था और इस बारे में रानी अपनी सहेलियों से पूछ भी नहीं सकती थी क्योंकि वह जानती थी कि उसे लड़के के बारे में अपनी सहेलियों से कुछ भी पूछने का मतलब था कि आफत मोल ले लेना,,, क्योंकि वह जानती थी कि उसकी सहेलियां बाद में उसका नाम ले लेकर उसे चिढ़ाएंगी उसे परेशान करेंगी और ऐसे में गांव भर में उसे अनजान नौजवान लड़के से उसका नाम जुड़ने लगेगा जिससे बदनामी होने का भी पूरा डर था। इसलिए वह अपनी सहेलियों से भी उसके बारे में कुछ भी पूछ नहीं सकती थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें उसकी याद उसे बेचैन बना रही थी उसे पागल बना रही थी लेकिन वह ना तो उसका नाम जानती थी ना ही उसका पता जानती थी और इस बारे में अपनी सहेली से वह पूछ नहीं सकती थी बड़ी अजीब सी स्थिति हो गई थी उसकी।

रानी अभी उस जवान लड़के के बारे में सोच ही रही थी कि तभी उसके कमरे का दरवाजा खुला और वह एकदम से पलट कर दरवाजे की तरफ देखने लगी तो वहां पर उसका बड़ा भाई सूरज खड़ा था जो दरवाजे को बंद करके कड़ी लग रहा था ओर रानी को इस तरह से अपनी तरफ देखता पाकर वह मुस्कुराते हुए बोला।

क्या हुआ मेरी रानी नींद नहीं आ रही है ना मुझे मालूम था कि तो मेरा इंतजार कर रही हो अभी तुम्हारी प्यास बुझा देता हूं,,,(इतना कहने के साथ ही वह धीरे से अपनी बहन की खटिया के तरफ आगे बढ़ा उसकी बहन का दिल जोरो से धड़कने लगा था क्योंकि जिस नौजवान लड़के के बारे में सोचकर उसकी बुर गीली हुई जा रही थी,,, उसकी प्यास बुझाने के लिए उसका भाई कमरे में आ चुका था जो अपने मोटे तगड़े लंबे लंड से उसकी बुर की गहराई नापते हुए उसकी प्यास बुझाने के लिए सक्षम था,,, वह धीरे से अपने सारे वस्त्र उतार कर तुरंत नंगा हो गया कमरे में दाखिल होते ही उसका लंड खड़ा होना शुरू हो गया था,,, लेकिन खटिया पर चढ़ने से पहले वह कोने में टंगी लालटेन की तरफ गया जो की तेज रोशनी में जल रही थी वह धीरे से उसकी रोशनी कम किया क्योंकि वह नहीं चाहता था कि उसकी मां को जरा भी सबको की उसकी बहन के कमरे में ईतनी रात को उसका भाई भी है,,,, लालटेन की रोशनी कम करने के बाद वह मुस्कुराता हुआ अपनी बहन की खटिया पर चढ़ गया और चढ़ते ही वह तुरंत उसे अपनी बाहों में भर लिया उसके लाल होंठों को अपने होंठ में भरकर उसका चुंबन करने लगा,,,, रानी भी पूरी तरह से मदहोश थी वह एकदम से अपने भाई से लिपट गई,,,।

सूरज अपनी बहन के लाल-लाल होठों का रसपान करता हुआ एक हाथ उसकी सलवार में डाल दिया और उसकी बुर पर रखकर अपनी हथेली को रगड़ने लगा और उसे तुरंत एहसास हुआ कि उसकी बुर पूरी तरह से गीली थी यह देखकर वह आनंदित होता हुआ बोला।

वह मेरी रानी मेरे इंतजार में पहले से ही अपनी बुर गीली करके रखी हो,,,।

क्या करूं भैया रहा नहीं जा रहा था,,, मैं कब से तुम्हारा इंतजार में करवट बदल रही थी लेकिन आज लगता है कि तुम ही देर लगा दिए हो मुझे तो लगने लगा था कि आज की रात तुम नहीं आओगे।

ऐसा कैसे हो सकता है,,,,(सलवार की डोरी खोलते हुए) तुम्हारी चुदाई की अभी ना तो मुझे भी नींद नहीं आती लेकिन अब थोड़ा संभाल कर तुम्हारे कमरे में आता हूं कहीं मां को शक ना हो जाए ,,,)

यह तो तुम बिल्कुल ठीक करते हो भैया लेकिन मैं सोच रही थी कि अगर किसी दिन मां को पता चल गया तब क्या होगा,,,।

बिल्कुल भी नहीं पता चलेगा,,,(रानी की सलवार को उसकी जांघों से नीचे सरकाते हुए,,,)

लेकिन फिर भी अगर पता चल गया तब क्या होगा,,,(रानी शंका जताते हुए बोली उसकी बात सुनकर,,, सूरज कुछ देर के लिए सोच में पड़ गया लेकिन अपने आप को स्वस्थ करके वह जवाब देते हुए बोला)

होगा क्या,,, मां को भी पता है कि इस उम्र में लड़के और लड़की को क्या चाहिए,,,,।

क्या मैं कुछ समझी नहीं,,,,।

अरे समझना क्या है,,,(सलवार को उसकी दोनों टांगों से बाहर निकाल कर एक तरफ रखते हुए और उसकी नंगी बुर पर अपनी हथेली रखकर उसे हल्के हल्के सहलाते हुए) मां भी तो एक औरत है जो चीज तुम्हें चाहिए वही मन को भी तो चाहिए और तुम तो अच्छी तरह से जानती हो की 6 महीने से ज्यादा गुजर गए हैं लेकिन पिताजी का कोई पता ठिकाना नहीं है एक औरत होने के नाते तुम्हें भी इस बात का एहसास होगा कि एक औरत को पेट की भूख के साथ-साथ जिस्म की भूख भी लगती है,,,, ।

मैं समझी नहीं तुम क्या कहना चाहते हो,,,(रानी हैरान होते हुए बोली)

अरे मेरी जान इतने दिन से चुदवाते हो गया लेकिन अभी तक बात समझ में नहीं आ रही है,,, रात को तुम्हारी तड़प क्यों बढ़ जाती है बताओ,,,।

तुमसे मिलने के लिए,,,(जानबूझकर रानी नाटक करते हुए बोली तो उसका भाई तुरंत उसका हाथ पकड़ कर पजामे के ऊपर से ही अपने खड़े लंड पर रखते हुए बोला,,)

मिलने के लिए नहीं इसके लिए,,,,।

(अपने भाई की बात सुनकर रानी एकदम से शर्मा गई और यह देखकर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

ठीक इसी तरह मां को भी यही चाहिए जब तक पिताजी थे तब तक रोज मां की चुदाई करते थे,,,।

(अपने भाई के मुंह से अपनी मां के बारे में इस तरह की बात सुनकर रानी थोड़ा हैरानी जताते हुए बोली)

यह क्या कह रहे हो भैया,,,?

अरे हां पगली मैं सच कह रहा हूं,,(कमीज के ऊपर से अपनी बहन की चूची दबाते हुए) तुझे शायद पता नहीं है लेकिन मैं अपनी आंखों से देखा हुं।

क्या देखे हो अपनी आंखों से,,,?

मां को चुदवाते हुए पिताजी के साथ और वह भी एकदम नंगी होकर,,,,।

हाय दैया यह क्या कह रहे हो भैया,,!

मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं रानी मैं मां की चुदाई अपनी आंखों से देखा हूं और तू नहीं जानती कि चुदवाते समय मां की हालत कैसी हो जाती है वह एकदम पागल हो जाती है,,, एकदम उत्तेजित मदहोश हो जाती है,,,,।

मैं कुछ समझी नहीं मतलब कैसी हो जाती है,,,(रानी भी उत्सुकता दिखाते हुए बोली न जाने क्यों उसे भी अपनी मां के बारे में इस तरह की बातें सुनने में मजा आने लगा था,, अपनी बहन की आवश्यकता देखकर सूरज के दिमाग का घोड़ा बड़ी तेजी से दौड़ने लगा क्योंकि वह भी अपनी मां को छोड़ना चाहता था और आज नहीं तो कल वह जानता था कि वह अपनी मंजिल को प्राप्त कर लेगा वह अपनी मां की चुदाई जरूर करेगा और ऐसे हालात में अगर रानी को पता चल गया तो वह क्या सोच की इसीलिए यही सही मौका था अपनी मां के बारे में उसे अच्छी तरह से बता देना और अगर आगे चलकर उसके और उसकी मां के भी सारी संबंध स्थापित होता है तो उसे बिल्कुल भी ऐतराज ना हो बल्कि वह इसमें खुशी-खुशी शामिल हो सके इसलिए वह अपनी बहन से बोला,,,)

रानी तू नहीं जानती जिस तरह से तू मेरा लंड के लिए तड़पती है ना उसी तरह से मां भी पिताजी के लंड के लिए पागल है

तुझे यह सब कैसे मालूम,,,!

क्योंकि मैं सब कुछ अपनी आंखों से देखा हूं,,,, चुदवाते समय मां अपने हाथों से अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाती है,,,, तुझे पता है रानी मां को लंड चूसना बहुत पसंद है मैं अपनी आंखों से देखा था,,,

(अपने भाई की यह बात सुनकर रानी का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि अपनी मां के बारे में इस तरह की बातें कभी सोचा ही नहीं थी वह कभी यह नहीं सोची थी कि एक औरत होने के नाते उसकी मां को भी इन सब चीजों की जरूरत पड़ती होगी लेकिन आज अपने भाई की बात सुनकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपने भाई की बातों पर यकीन करें की ना करें और वह आश्चर्य से अपने भाई की तरफ देखने लगी,,, सूरज को अपनी बहन की आंखों में ढेर सारे सवाल नजर आ रहे थे इसलिए वह बोला,,,)

मैं यह सब दोपहर में देखा था बीच वाले कमरे में जहां पर सब्जियां और गेहूं चावल रखे होते हैं मैं ऐसे ही अपने कमरे की तरफ जा रहा था तो अंदर से कुछ आवाज आ रही थी मुझे समझ में नहीं आया कि अंदर कैसी आवाज आ रही है इसलिए धीरे-धीरे उसे कमरे की तरफ गया अंदर चूड़ियों की खनकने की आवाज और हंसने की आवाज आ रही थी मुझे कुछ समझ में नहीं आया मैं कुछ भी आवाज नहीं किया और दरवाजे पर अपनी आंख लगाकर अंदर की तरफ देखने लगा तो अंदर जो दिखाई दिया उसे देखकर तो मेरे होश उड़ गए,,,।

क्या देखा भाई,,,,(अपने भाई के द्वारा स्तन मर्दन से मस्त होते हुए रानी बोली)

अंदर में देखा कि पिताजी मां की कमर में दोनों हाथ डाले हुए उसे दीवार के सहारे खड़ी कर रहे थे लेकिन वह घुटनों के बाल देखने के लिए जिद कर रहे थे मुझे तो पहले कुछ समझ में नहीं आया लेकिन जब पिताजी उसकी कमर से अपने दोनों हाथ को हटाए तो हम मां घुटनों के बल बैठकर तुरंत पिताजी के लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी,,,,

क्या कह रहे हो भाई,,,(रानी एकदम हैरान होते हुए बोली)

मैं वही कह रहा हूं जो मैंने अपनी आंखों से देखा था। मुझे भी अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ था मां को इस रूप में देख कर वह तो पागलों की तरह अपने गले तक लेकर मस्त हुए जा रही थी।

दैया रे दैया क्या मा भी दूसरी औरतों की तरह,,,,।

दूसरी औरतों की तरह क्या सभी औरतें इसी तरह की होती हैं सिर्फ हम लोग समझ नहीं पाए क्योंकि अपनी आंखों से देख नहीं होते हैं मैं तो सब कुछ अपनी आंखों से देखा हूं तभी समझ गया था की मां कितनी प्यासी है,,,।(धीरे से वह अपनी बहन की कमीज भी उतरने लगा और उसकी बहन भी कमीज उतारने में उसकी सहायता करने लगी,,,, और देखते ही देखते वह अपनी बहन की कमीज उतार कर उसे भी अपनी तरह ही नंगी कर दिया,,, अपने भाई की अश्लील बातें और उसकी हरकत से मस्त होते हुए रानी बोली।)

पिताजी का लंड कैसा था,,!(एक औरत होने की नाते उसके मन में यह ख्याल आना स्वाभाविक था और अपने मन में आयुष सवाल को अपने होठों पर ला दी थी उसकी यह बात सुनकर सूरज मन में मुस्कुराने लगा और बोला,,)

पिताजी का भी लंड मोटा तगड़ा है लेकिन मेरे से छोटा ही है,,,,।

(अपने भाई की बात सुनकर रानी अपने भाई की तरफ आश्चर्य से देखने लगी क्योंकि उसे यकीन नहीं हो रहा था कि एक बेटे का लंड उसके बाप से ज्यादा मोटा और लंबा है अपनी बहन की आंखों में इस सवाल को सूरज में जैसे पढ़ लिया हो इसलिए सूरज बोला,,,)

मैं उसे दिन पिताजी के लंड को बड़ी गौर से देखा था वाकई में पिताजी का लंड मेरे से छोटा ही है लेकिन उसे समय मां के लिए पिताजी का लंड दुनिया में सबसे ज्यादा मोटा और लंबा था क्योंकि शायद मां पिताजी के लंड के सिवा किसी दूसरे के लंड को देखी नहीं थी ऐसा मेरा मानना है हो सकता है दूसरी औरतों की तरह मा भी किसी गैर मर्द के साथ संबंध स्थापित कर चुकी हो,,,

नहीं मैं ऐसी बिल्कुल भी नहीं है कि किसी दूसरे मार्ट के साथ इस तरह के संबंध बनाएगी,,,।

अब यह तो मैं नहीं जानता लेकिन जिस तरह से पिताजी 6 महीने से गायब है हो सकता है मां के बदन की प्यास उन्हें मजबूर कर दे किसी दूसरे मर्द के साथ संबंध स्थापित करने के लिए,,, क्योंकि इतना तो तुम समझ ही गई होगी कि बुर की गर्मी औरत को कितना परेशान कर देती है।

(रानी अपने भाई की बात से पूरी तरह से सहमत थी क्योंकि उसकी भी हालत बहुत खराब थी बिना लंड लिए उसे भी नींद नहीं आती थी,,,, लेकिन मुझे यकीन नहीं हो पा रहा था कि वाकई में उसकी मां भी दूसरी औरतों की तरह गैर मरद के साथ संबंध स्थापित कर सकती है,,, सूरज अपनी बहन की बुर में उंगली डालकर अंदर बाहर करते हुए उसके जोश को बढ़ाते हुए अपनी बात को नमक मिर्च लगा कर बोला।)

लेकिन रानी तुम अगर उसे दिन अपनी आंखों से अच्छी होती तो तुम्हें भी समझ में आ जाता कि वाकई में मा भी ऐसा कर सकती है,,, पिताजी मां के मुंह में से अपना लंड बाहर निकाल कर उसका हाथ पकड़ कर खड़ी किए और दीवार से सटा दिए,,, मां खुद पिताजी की तरफ नजर घुमा कर देखते हुए अपनी बड़ी-बड़ी गांड को पिताजी की तरफ ऐसे ऊपर उठाकर रख दी कि मानो जैसे कि पिताजी के सामने वह अपनी गांड परोस रही हो,,,, पिताजी तो यह देख कर पागल हो गई और मां की कमर पकड़ कर अपना लंड उनकी बुर में डालने वाले थे कि मां एकदम से अपना पैर पीछे की तरफ मारकर पिताजी को रोक दी और जो मैंने अपनी कानों से सुना उसे सुनकर तो मेरे होश उड़ गए,,,।

(अपने भाई की रंगीन बातें सुनकर रानी के भी होश उड़ रहे थे अपनी मां के बारे में वह कभी इस तरह से सोची नहीं थी अपने भाई के मुंह से अपनी मां के बारे में इस तरह की गंदी बातें सुनकर उसका भी जोश पूरी तरह से बढ़ने लगा था और अपनी मां के रंगीन मिजाज के बारे में जानने के लिए भी वह भी उत्सुक हुई जा रही थी , इसलिए वह बोली,,)

क्या सुना भाई,,,,।

हमारे पिताजी से कहा कि डालने से पहले मेरी बुर चाटो,,,, बाप रे यह शब्द जैसे ही मेरे कान में पर ही मेरे तो होश उड़ गए मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मेरी आंखों के सामने मेरी मां खड़ी है कि कौन है,,, सच कहूं रानी तुम्हें मां के बारे में कभी इस तरह की बातें सोच भी नहीं था लेकिन अपनी आंखों से देखकर मेरे तो हो सुख गए थे उसके बाद तो पिताजी पागलों की तरह मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों में लेकर जीभ से बुर के साथ-साथ मां की गांड भी चाट रहे थे,,,,(सूरज अपनी बातों में नमक मिर्च लगाकर लगातार अपनी बहन को मदहोश बना रहा था उसे बेकार रहा था आगे चलकर उसके और उसकी मां के बीच अगर शारीरिक संबंध बन जाता है तो एक आधार वह यह भी बना रहा था कि ज्यादा दिन तक एक औरत मर्द से दूर नहीं रह सकती और ऐसे हालात में अगर वह उसकी मां का हम साया ना बनता तो शायद कोई गैर मर्द घर में आकर रोज उसकी चुदाई करके चला जाता,,, और यह उनके परिवार के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं था इस तरह की धारणा बनाकर सूरज लगातार अपनी बहन के बुर में उंगली अंदर बाहर कर रहा था और उसकी बुर लगातार चिपचिपी हो रही थी,,,)

फिर क्या हुआ,,,?

फिर क्या था पिताजी मां की कमर पकड़ कर अपने लंड को मां की बुर में डालकर इतनी जोर जोर से धक्के मार रहे थे कि पूछो मत और हर धक्के के साथ मां के मुंह से अजीब अजीब सी आवाज आ रही थी जिसे सुनकर मेरे होश उड़ गए थे और इसीलिए मैं कह रहा हूं कि 6 महीने गुजर चुके हैं और ऐसी औरत भला एक मर्द के बिना कैसे रह सकती है,,,

तो क्या सच में मां किसी और के साथ संबंध बनाई होगी।

मां की जवानी देखकर तो मुझे लगता है कि किसी के साथ संबंध बना ली हो कि या बनाने के लिए सोच रही होगी क्योंकि मुझे नहीं लगता की मां अपने आप को ज्यादा दिन तक रोक पाएगी,,,।

और अगर मां हम दोनों को ईस अवस्था में देख ली तो क्या होगा,,,?

होगा क्या जो भी होगा देखा जाएगा लेकिन इतना तो तय है कि अगर मां हम दोनों की सफलता में देख लेगी तो किसी दूसरे को तो बताएगी नहीं यह हिस्सा भी हो सकता है कि मेरे मोटे तगड़े लंड को देखकर मन की भी इच्छा जागरुक हो जाए और मेरे साथ संबंध बना ले।

पागल हो गया है क्या भाई भला एक मां अपने बेटे के साथ इस तरह से संबंध कैसे बना सकती है।

जैसे एक बहन अपने भाई के साथ संबंध बना सकती है,,,(इतना कहते हुए सूरज अपनी बहन को पूरी तरह से विश्वास में लेने के लिए उसकी चूची को मुंह में लेकर चूसने लगा रानी एकदम से मस्त हो गई उसकी मां के बारे में गंदी बातें सुनकर उसका जोश और बढ़ने लगा था,,,, अपने भाई की हरकत देखकर उसके सर पर हाथ रखते हुए रानी बोली)

क्या सच में ऐसा हो सकता है,,,।

बिल्कुल हो सकता है रानी और मेरा लंड तो पिताजी के लंड से मोटा और लंबा है मां की जवानी उसे पूरी तरह से परेशान कर देगी,,, अगर वह मेरे लंड को देख ली तो,,, पागल हो जाएगी उसे अपनी बुर में लेने के लिए,,,।

क्या सच में ऐसा हो सकता है,,,।

क्यों नहीं हो सकता अगर वह हम दोनों को देख लेंगे चुदाई करते हुए तो वह अपने मन में जरूर सोचेंगी कि अगर एक बहन अपने भाई से चुदवा सकती है तो एक मां अपने बेटे से क्यों नहीं चुदवा सकती,,,।

क्या सच में मां के मन में ऐसा सवाल आएगा,,,।

अरे पागल तू नहीं जानती जब एक औरत एक औरत को चुदवाते हुए देखते हैं तो उसके मन में यही ख्याल आता है उसे समय उसे औरत को उसे औरत से ईर्ष्या होने लगती है वह सोचती है कि काश वह उसे औरत की जगह खुद होती तो कितना मजा आता और मा भी यही सोचेगी,,,।

लेकिन क्या भाई तू भी मा को चोदने के लिए तैयार हो जाएगा,,,

क्यों नहीं मां को देखी है ना कितनी खूबसूरत है,, और वैसे भी मैं नहीं चाहता कि कोई दूसरा मरद बाहर का आकर मां की चुदाई करें और अगर यह बात गांव में फैल गई तो हमारे परिवार की बदनामी हो जाएगी इसलिए अगर मां चाहेगी तो जरूर में ऐसा करूंगा,,, और रानी यह सब अगर हो जाएगा तो अपने लिए ही सबसे ज्यादा बेहतर होगा तो खुलकर मुझसे चाहे जब चुदाई का मजा लूट सकती है,,।

क्या सच में ऐसा होगा,,,।

जरूर ऐसा ही होगा,,,।

तब तो बहुत मजा आएगा,,,।

(रानी पूरी तरह से अपने भाई के बाद में आ चुकी थी और सूरज अपनी बहन को अपनी मां को चोदने के लिए पूरी तरह से विश्वास में ले चुका था,, सूरज जानता था कि आज नहीं तो कल ऐसा जरूर होने वाला है और कभी रानी अगर अपनी आंख से यह सब देख लेगी तो उसे बिल्कुल भी ऐतराज नहीं होगा इसलिए वह अपनी बहन को पूरी तरह से तैयार कर चुका था और फिर खटिया पर उसे पूरी तरह से मस्ती के साथ अपनी बाहों में लेकर उसकी बुर में अपना लंड डालकर जमकर चुदाई करने लगा।)
 
सूरज अपनी बहन को विश्वास में लेकर अपनी मनसा अपनी मां के साथ पूरी करने के लिए तैयार हो चुका थालेकिन यह मौका यह पल कब आने वाला था या उसे भी नहीं मालूम था लेकिन इतना पूरा विश्वास था कि यह मौका उसके जीवन में जरूर एक दिन आएगा क्योंकि वह अपनी मां की हालत को अच्छी तरह से समझ गया था वह जानता था कि बिस्तर पर वह रोज रात को करवट बदल कर अपनी प्यास को अपने काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह जानता था कि चाहे जितना भी उसकी मां अपनी जवानी को अपने काबू में करने की कोशिश कर ले उसकी जवान काबू में आने वाली नहीं बल्कि और भी ज्यादा बेकाबू होने वाली है। आखिरकार एक औरत कब तक अपनी खूबसूरत खजाने को किसी बांका जवां मर्द पर लूटाने से रोक कर रख पाएगी,एक न एक दिन तो वह खजाना लूटने वाला उसे मिल ही जाएगा और वह जानता था कि उसकी मां का अनमोल खजाना लूटने वाला दूसरा कोई नहीं बल्कि वह खुद होगा,।





अब रोज खेत पर काम करते हुएसूरज अपनी मां के खूबसूरत बदन की बनावट को निहारता रहता था,,, और इस बात को सुनैना भी अच्छी तरह से जानती थी लेकिन न जाने क्यों धीरे-धीरे उसके बेटे का इस तरह से उसे निहार ना अच्छा लगने लगा था क्योंकि वह उम्र के उसे दौर में पहुंच चुकी थी जहां पर परिवार की जिम्मेदारी सर पर आते ही सारी भावनाएं दब जाती हैं और वह औरत अपनी जिम्मेदारी को पूरा करने में अपना जीवन गुजार देती है,,,। और ऐसा उसके साथ भी हो रहा था जब तक उसका पति उसके साथ था लेकिन कुछ महीनो से बदन के प्यास उसे व्याकुल बना रही थीएक तरफ को जिम्मेदारी तो निभा रही थी लेकिन अपने बदन की जरूरत के आगे वह कमजोर पड़ती जा रहे थे जिसके चलते उसे अपना ही बेटा अच्छा लगने लगा था उसके प्रति वह धीरे-धीरे आकर्षित होती जा रही थी अपने बेटे की हरकत और उसकी प्यासी नज़रें उसकी खुद की प्यास को भड़का रही थी।लेकिन फिर भी वह अपने आप पर काबू करने की पूरी कोशिश कर रही थी क्योंकि वह जानती थी कि इसके प्रति वह आकर्षित होती जा रही है वह उसका बेटा है,,,, इसीलिए वह कुछ घटनाओं के बाद थोड़ा सा तर्क तो हो गई थी लेकिन जब कभी ऐसे पल आ जाते थे तो न जाने क्यों वह फिर से अपने आप को कमजोर महसूस करने लगती थी और फिर यह जानते हुए भी की उसका बेटा उसे प्यासी नजर उसे देख रहा है वह अपने अंगों के उभारों को अपने बेटे से छुपाने की कोशिश नहीं कर पाती थी। जिसके चलते वह खेत में काम करते हुए जब उसे थकान महसूस हुई तो वह खेत में ही बनी टूटी हुई झोपड़ी जिसमें एक खटिया भी रखी हुई थी और उसके ईद दो-तीन बड़े-बड़े पेड़ भी थे जिसकी छांव में वह खटिया पर बैठ गई सूरज अभी भी अपने काम में लगा हुआ था। अपनी मां को इस तरह से खटिया पर बैठा हुआ देखा तो वह बोला।





क्या हुआ,,,?

अरे कुछ नहीं रे थकान महसूस हो रही थी तो बैठ गई,,,,(सुनैना झोपड़ी में से खटिया को बाहर लाकर उसे पर बैठी हुई थीपेड़ की छांव की वजह से ठंडी हवा चल रही थी जिससे उसे रात महसूस हो रही थी अपनी मां की बात सुनकर सूरज बोला)

गर्मी बहुत है ना इसलिए जल्दी थकान लग जा रही है,,,, कोई बात नहीं तुम आराम करो मैं काम कर लेता हूं,,,,।(इतना कहकर सूरज गेहूं की कटाई जारी रखा और सुनैना बैठे-बैठे ठंडी हवा की वजह से उसे नींद आने लगी थी और वह चारपाई पर लेट गई थी थकान की वजह से वह अपने घुटनों को मोडी हुई थी जिसके चलते उसकी साड़ी एकदम से उसकी जांघों तक सरक गई थी और उसकी मोटी-मोटी जांघे एकदम से उजागर हो गई थी,,,,, जैसे हीसुनैना को एहसास हुआ वह तुरंत अपनी आंखें खोल दी और चकर पकर देखने लगी और इस दौरान अपनी साड़ी को भी एकदम व्यवस्थित कर ली,,,,उसे इस बात से रहता है कि उसका बेटा सूरज उसकी तरफ नहीं देख रहा था बल्कि दूसरी तरफ मुंह करके गेहूं काट रहा था और अपने मन में सोचने लगी कि अच्छा हुआ उसका बेटा इस अवस्था में उसे नहीं देख पाया वरना उसके मन में न जाने कैसी भावनाएं पैदा होने लगतीक्योंकि वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि जब एक औरत की चारपाई पर लेटे हुएघुटनों को मोड़कर जब उसकी साड़ी उसकी जांघों तक सरक जाती है तो वाकई में इस अवस्था में औरत को देखकर मर्द की क्या हालत होती है,,,,वह ईस अवस्था का एक मर्द पर गहरा प्रभाव पड़ता है इस बात को अच्छी तरह से जानती थी क्योंकि वह एक बार ईस मनोदशा से गुजर चुकी थी।





जब नई नई शादी हुई थी तब कुछ महीनो बाद शराब को लेकरसुनैना और उसके पति के बीच थोड़ा मन मोत हो गया था झगड़ा नहीं हुआ था लेकिन थोड़ी बहुत बहस बाजी हो गई थी क्योंकि सुनैना नहीं चाहती थी कि उसका पति शराब की लत में डूब जाए और उसे दिन गांव में शादी थी जिसकी वजह से सुनैना का पति कुछ ज्यादा ही शराब पी लिया था और नशे में धुत होकर घर पर आया था,,, जिसके चलते सुनैना गुस्से में लगभग 10-15 दिनों तक अपने पति से बातचीत करना छोड़ दी थी तब तो उसकी सास भी जीवित थी,,,, और उसकी सास ने भी सुनैना का ही साथ देते हुए बोली कि जो कुछ भी वह कर रही है बिल्कुल सही कर रही हैक्योंकि इस बात को वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि सर आपकी गलत इंसान को कितना नीचे गिरा देती है इसीलिए वह अपने बेटे का साथ न देकर अपनी बहू का साथ दे रही थी,,,, अपनी सास का साथ मिल जाने की वजह से सुनैना भी काफी उत्साहित थी,,,,और इसी वजह से वह 10 15 दिन तक अपने पति से बिल्कुल भी बातचीत नहीं की थी और उसका पति भी अपनी जीत पर है गया था और वह भी अपनी बीवी के आगे झुकना नहीं चाहता था।





लेकिन एक रात को जब वह घर पर लौटा तो सब लोग खाना खाकर सो चुके थे रात काफी हो चुकी थी वह धीरे से दरवाजा खोला और अपने कमरे में दाखिल हुआ अपनी पत्नी से झगड़ा के कारण वह अपना बिस्तर अलग-अलग आता थालेकिन वह दरवाजा खोलकर जैसे ही कमरे में प्रवेश किया और दरवाजे पर कड़ी लगाकर उसे बंद किया तो उसकी नजर अपनी बीवी पर गई जो बेसुध होकर सो रही थी,,,, लालटेन की पीली रोशनी में उसे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,,उसने देखा कि उसकी बीवी एक दिन गहरी नींद में सो रही है और उसकी एक टांग मुड़ी हुई थी जिसकी वजह से उसकी साड़ी पूरी तरह से उसकी कमर थी और उसकी नंगी मोटी मोटी जांघें एकदम से उजागर हो गई थी,,,, अपनी बीवी का यह रूप देखकर अपने आप को रोक नहीं पाया 15 दीनों का झगड़ा आपस की तकरार और अपनी जीद एकदम से हवा में फूर्र हो गई थी। अपनी बीवी का मांसल बदन और उसका रूप यौवन देखकर सुनैना के पति की हालत खराब हो गई उसकी आंखों में एकदम से उत्तेजना और मदहोशी नजर आने लगी वह अगले ही पर अपनी पजामा का नाडा खोलकर उसे एक झटके से नीचे गिरकर अपने पैरों में से निकाल दिया और एकदम से नंगा हो गया।





अपनी बीवी की कमजोरी अच्छी तरह से जानता था वह जानता था कि इस समय उसे जगह कर उसके साथ संबंध बनाना मुमकिन नहीं नहीं नामुमकिन नहीं क्योंकि वह गुस्से में थी लेकिन उसे मनाना हुआ अच्छी तरह से जानता था और यह कैसे करना है उसे अच्छी तरह से मालूम था वह धीरे सेअपनी बीवी के बिस्तर पर गया और धीरे से उसकी टांगों को खोलकर अगले ही पल वह अपने प्यास होठों को अपनी बीवी की नंगी बुर पर रख दिया,,,, और उसे पागलों की तरह चाटना शुरू कर दिया उसकी हरकत पर उसकी बीवी की नींद एकदम से खुल गई लेकिन जब तक उसे कुछ समझ में आताउसके बदन में मदहोशी जाने लगी थी वह एकदम से अपनी दोनों टांगों के बीच देखें तो घबरा गई लेकिन जैसे ही मदहोशी में यह एहसास हुआ कि उसकी दोनों टांगों के बीच उसका पति है तो वह उसकी हरकत से पागल होने लगी और 15 दिन का गुस्सा भूल कर वह तुरंत अपने हाथ को आगे बढ़कर अपने पति के सर पर रख दी और उसके बाल को अपनी मुट्ठी में दबोच ली और हौले हौले से अपनी कमर को गोल-गोल घुमा कर अपने पति को अपनी बुर चटाने लगी,,, सुनैना की यह सबसे बड़ी कमजोरी थीजिसे उसका पति भली-भांति जानता था और इसी कमजोरी का फायदा उठाकर 15 दिन बाद वह अपनी बीवी से एकाकार होने वाला था,,,, और उसके बाद सुनैना अपने पति से रात भर चुदवाती रही लेकिन इसके बदले में वह अपने पति से यह वादा ले ली थी कि अब वह कभी शराब को हाथ भी नहीं लगाएगा लेकिन वक्त के साथ-साथउम्र कैसे पड़ाव में जाकर उसका पति अपने वादे से मुकर गया और दारू की लत में पूरी तरह से डूब गया और इस कदर डूबा की अपनी खूबसूरत बीवी को अपनी खूबसूरत परिवार को भूल गया।





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पल भर के लिए सुनैना के मन में यही सब चलने लगा था वह अपनी साड़ी को व्यवस्थित कर चुकी थी और एक नजर अपने बेटे के ऊपर डालकर करवट लेकर सो गई,,,, और एकदम से गहरी नींद में डूब गई थोड़ी देर बाद सूरज भी थक हार करखटिया के पास आए और देखा तो उसकी मां दूसरी तरफ मुंह करके सो रही थी उसकी बड़ी-बड़ी गांड कसी हुई साड़ी में तूफान मचा रही थी जिसे देखकर सूरज के अंदर वासना का तूफान उठने लगा उसकी आंखों में हवस के डोरे नजर आने लगे वह अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था क्योंकि इस समय उसकी मां खटिया पर लेटी हुई थीउसकी आंखों के सामने जवानी से भरी हुई है खूबसूरत औरत गहरी नींद में सो रही थी जो अंदर ही अंदर एक मर्द के लिए तड़प रही थी सूरज अच्छी तरह से जानते थे कि उसकी मां को एक मोटे तगड़े लंड की जरूरत है,,, अपनी मां के प्यासेपन को वह अच्छी तरह से समझ रहा था,,,, कुछ देर तक सूरज खटिया के पास खड़े होकर अपनी मां के नितंबों को हीं घुरता रहा,,,,पल भर के लिए उसके मन में आया कि अपने हाथों से अपनी मां की साड़ी कमर तक उठाकर उसकी नंगी गांड के दर्शन कर ले लेकिन ऐसा करने में उसे झिझक हो रही थी डर महसूस हो रहा था ,,,, लेकिन वासना के आगे वह मजबूर हो चुका था।





खेत के बीचो-बीच टूटी हुई झोपड़ी के बाहर खड़े होकर वह चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगा वह जानता था कि चारों तरफ गेहूं के खेत ही खेत थे और यह बिल्कुल भी मुमकिन नहीं था कि कोई उन्हें देख सके चारों तरफ से क्योंकि खेत से गिरे होने के कारण वह पूरी तरह से सुरक्षित जगह थी और तसल्ली कर लेने के बाद वह धीरे से खटिया पर बैठ गया उसकी मां गहरी नींद में सो रही थी,,,,, सूरज का दिल जोरों से धड़क रहा था,,,, वह कुछ देर तक खटिया पर बैठे-बैठे कुछ सोचता रहा काफी देर तक उसकी मां के बदन में बिल्कुल भी हरकत नहीं हो रही थी और उसे यकीन हो गया कि उसकी मां गहरी नींद में सो रही है इसलिए वह धीरे से खटिया पर लेट गया यह एक अलग ही अनुभव था आज पहली बार वह एक ही खटिया पर अपनी मां के साथ लेटा हुआ था पजामे की तरफ देखा तो उसमें अच्छा खासा तंबू बना हुआ था। वह एक नजर अपनी मां की भारी भरकम गांड की तरफ डालकर वह अपने हाथ से पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को दबा दिया,,,,, यह एक अलग अनुभव थाकि आज वह अपनी मां की गांड को देखते हुए अपने लंड को दबा रहा था वरना वह अपनी मां के कामुक ख्यालों में डूब कर रहा है अपने हाथ से हिला कर काम चला लेता था लेकिन आज ऐसा मौका उसके हाथ लगा था कि एक ही खटिया पर अपनी मां के साथ लेटे रहने पर अपनी मां की गांड देखकर अपने लंड को दबा रहा था और ऐसा करने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह मदहोश हुआ जा रहा था।





उत्तेजना और मदहोशी देखते-देखते सर चढ़कर बोलने लगा,,,,सूरज पागलों की तरह अपनी मां की गांड को नहीं आ रहा था गहरी गहरी सांस लेने की वजह से उसके बदन में हल्की-हल्की उठाव और बैठाव हो रहा था जिसे देखने में भी सूरज को बहुत मजा आ रहा था वह पीठ के बल लेटे हुए था और उसकी मां करवट लेकर सो रही थी कुछ देर तक इसी तरह से लेते रहने के बाद हो काफी हिम्मत जताकर अपने हाथ को आगे बढ़ाया और अपनी मां की नितंब पर रख दियाअपनी मां की गांड पर अपनी हथेली रखते हैं एक अद्भुत उत्तेजना का संचार उसकी हथेली में महसूस होने लगा जो सीधा उसकी दोनों टांगों के बीच के हथियार पर अच्छी तरह से महसूस कर रही थीयह उत्तेजना पूरी तरह से उसे पागल बना रहे थे अपनी मां की गांड पर हाथ रखकर वह हल्के हल्के उसे सहला रहा थासाड़ी में होने के बावजूद भी सूरज को अपनी मां की गांड का अहसास बड़ी अच्छी तरह से हो रहा था क्योंकि वह काफी कसी हुई साड़ी पहनती थी अपनी मां की गांड पर हाथ फेरने पर उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसकी मां की गांड अंदर से कितनी कसी हुई होगीउसे बहुत मजा आ रहा था कुछ देर तक अपनी मां की गांड को सहलाता रहा और उसकी तरफ देखता रहा कि कहीं उसकी आंख ना खुल जाए लेकिन थकान की वजह से सुनैना गहरी नींद में सो रही थी।





अपनी हरकत को अंजाम देकर वह काफी खुश नजर आ रहा था और बेहद उत्साहित भी था क्योंकि वह बहुत बार अपनी मां की गांड पर अपना हाथ फेर रहा था लेकिन उसकी मां के बदन में जरा भी हलचल नहीं हो रहा था क्योंकि वह गहरी नींद में सो रही थी और उसके गहरी नींद में इस तरह से सोनेके चलते सूरज की हिम्मत और ज्यादा बढ़ने लगी थी वह पागल हुआ जा रहा था अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड से पागल कर रही थीऔर फिर वह धीरे से अपने हाथ को ऊपर की तरफ ले जाकर अपनी मां की चिकनी कमर पर हथेली रख दिया और उसे पर अपनी हथेली फिर आने लगा बदन की गर्माहट उसके बदन में उत्तेजना के रस को पूरी तरह से खोल रही थी अपनी मां की चिकनी कमर को अपने हाथ में पकड़ कर एक अद्भुत एहसास में वह पूरी तरह से डूबता चला जा रहा था पल भर के लिए उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे वह अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर बस उसे चोदने की तैयारी कर रहा है,,,, कमर पर हथेली रखकरहल्के हल्के उसे पर फिराने पर भी उसकी मां के बदन में जरा भी हलचल नहीं हुआ तो वह उत्तेजना वह साल के लड़के अपनी हथेली के दबाव को अपनी मां की कमर पर बढ़ाने लगा था।लेकिन ऐसा करते हुए भी वह अपना सर उठाकर खेत के चारों तरफ देख ले रहा था कि कहीं कोई एक्षआ तो नहीं रहा है जबकि वह इस बात का अच्छी तरह से जानता था कि यहां पर कोई आने वाला नहीं था और वैसे भी इतनी तेज धूप थी कोई अपने घर से बाहर नहीं निकलता था तो इतनी दूर चलकर इस खेत में क्या करने आता।





अपनी मां के साथ एक ही खटिया पर लेटने पर और एकांत पाकर उसकी मां बढ़ने लगा था उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी और उसका सब्र जवाब दे रहा था पजामे में लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा थावह अपने लंड की रगड़ को अपनी मां की बुर की गहराई में महसूस करना चाहता था लेकिन इस समय ऐसा बिल्कुल भी संभव नहीं था।क्योंकि वह जानता था कि वह अभी अपनी मां से इतना भी नहीं खुल चुका है कि वह अपनी मनमानी कर सके और ना ही उसकी मां उसके मन में क्या चल रहा है यह जानती थी। या उसकी मां को भी यह एहसास नहीं था कि एक पति से महीनो दूर रहने के बाद उसके बदन की प्यास का जायजा खुद उसका बेटा ले चुका है।और वह जानता है कि उसे पुरुष संसर्ग की इच्छा हो रही है,,,और उसकी इस तरह की हरकत पर वह कुछ बोले कि नहीं बस मजा लेती रहेगी कुछ इस बात का डर उसके मन में इस समय जरूर घूम रहा था लेकिन वह इस पल का मजा भी ले लेना चाहता थाइसलिए वह धीरे से अपनी मां की तरफ ही करवट ले लिया और ऐसा करते ही उसके पेट में बना तंबू एकदम से उसकी मां की गांड से रगड़ खाने लगा,,,,।





यह एक बेहद अद्भुत संगम थाऔर ऐसा पहली बार हो रहा था कि भले ही कपड़ों के ऊपर से सूरज अपनी मां की गांड पर अपने लंड का दबाव महसूस करवा रहा था,,, पजामा में बना तंबू पूरी तरह से तूफान पर था ऐसा लग रहा था कि पजामा फाड़कर बाहर आ जाएगा और साड़ी सहित उसकी मां की बुर में घुस जाएगा,,,, यह बेहद अद्भुत भीम का दौर था जिससेसूरज गुजर रहा था वह पागल हुआ जा रहा था बार-बार अपनी मां की गांड पर अपने लैंड का दबाव बना रहा था ऐसा करने में उसके बदन में झुनझुनी सी फेल जा रही थी उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थीलेकिन वह जानता था कि अभी उसके लंड का दबाव केवल नितंबों के ऊपरी सतह पर हो रहा था और वह इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां की गांड का गुलाबी छेद कौन सी जगह पर है‌।इसलिए वह धीरे से थोड़ा सा नीचे सरक गया और अपने लंड को पजामी के ऊपर से ही पकड़ कर वहां अपनी मां के गांड के बीच को बीच की दरार के अंदर रगड़ने लगा और अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा,,, इतने पर भी जबउसकी मां की नींद बिल्कुल भी नहीं खुली और ना ही उसके बाद में जरा भी हलचल हुई तोसूरज की हिम्मत और ज्यादा बढ़ने लगी उसे इस तरह की हरकत करने में बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह बेहद उत्तेजित और मदहोश हुआ जा रहा था।





लेकिन उसकी यह हरकत अकल्पनीय थावह कभी सोचा नहीं था कि अपनी मां के साथ इस तरह की हरकत करेगा और वह भी उसके गहरी नींद में होने पर ऐसा तो वह जानता था कि एक न एक दिन जरूर वहांसब कुछ सही रहा तो अपनी मां की जवानी पर पूरी तरह से काबू कर लेगा लेकिन या नहीं जानता था कि खेत में काम करते हुए वह इस तरह से अपनी मां के साथ मजा लेगा उसकी मां की नींद ऐसा लग रहा था कि जैसे गहराई में डूबती चली जा रही थी और इसका फायदा उठाते हुए सूरजबार-बार अपनी मां की गांड के बीचों बीच अपने लंड का दबाव बढ़ा रहा था और उसे रगड़ रहा था,,,अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड का स्पर्श भले ही साड़ी के ऊपर से हो रहा था लेकिन सूरज इतना अत्यधिक उत्तेजना अनुभव कर रहा था कि उसे डर था कि कहीं उसके लंड से पानी न निकल जाए। लंड की अकड पूरी तरह से बढ़ती जा रही थी,,,,, पजामे के अंदर होने के बावजूद भी वह पूरी तरह से अपनी मां की गांड के बीचो-बीच होने का एहसास करा रहा था,,,, इस अकल्पनीय दुसाहस के चलते फिर भी जब उसकी मां की नींद तट से मस नहीं हुई तो उसकी हिम्मत और बढ़ने लगी वह पागल होने लगा उत्तेजना में सरोबोर डूबने के पश्चात वह अपने कदम पीछे नहीं ले पा रहा था अपनी क्रिया से उत्साहित होकर उसका मन निरंतर उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा था।जिसके चलते वह एक हाथ अपनी मां की कमर पर रखकर हौले हौले से अपनी कमर को आगे पीछे करने लगा था यह उत्तेजना और वासना का मिला-जुला असर था जो उसे इस तरह की क्रिया को करवा रहा था,,,, जबकि इस बात को जानते हुए की उसकी मां साड़ी पहनी हुई है ऐसे मेंउसका लंड उसकी गांड की फांकों को चीरकर उसकी गुलाबी छेद तक नहीं पहुंच सकता,,, लेकिन फिर भी इस क्रिया को करने में उसे बेहद आनंद आ रहा था।





लेकिनसूरज का उत्साह और उत्तेजना कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था जिसके चलते उसकी कमरकुछ ज्यादा ही जोर से हिचकोले खाने लगी थी और उसकी ही हरकत सेसुनैना की नियत एकदम से खुल गई थी वह आंख खोल कर कुछ समझने की कोशिश कर रही थी उसे अच्छी तरह से महसूस हो रहा था किकिसी की हथेली उसकी कमर पर थी और उसकी गांड के बीचों बीच कोई नुकीली चीज चुभ रही थी उसे पल भर के लिए कुछ समझ में नहीं आया। वह स्थिति को समझने की कोशिश करने लगी,,,,क्योंकि वह गहरी नींद से एकदम से उठ गई थी उसकी आंख खुल गई थी और स्थिति का जायजा लेने में कुछ पल जरूर लगने वाला था क्योंकि लगभग लगभग वह बेहोशी की हालत से बाहर आई थी,,,, धीरे-धीरे सब कुछ स्पष्ट होने लगा था उसे एहसास होने लगा था कि उसके साथ खटिया पर कोई सो रहा है कोई है जो उसके साथ गंदी हरकत कर रहा हैलेकिन ऐसी हरकत कौन कर सकता है खेत पर तो सिर्फ वह और उसका बेटा ही था ऐसे में तीसरे के आने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी और उसे समझते थे नहीं लगी कि जो कुछ भी उसके साथ हो रहा है उसके पीछे उसके बेटे का यहां थे उसकी खटिया पर उसके पीछे उसका बेटा भी लेटा हुआ है और अपने लंड को साड़ी सहित उसकी बुर में डालने की कोशिश कर रहा है यह एहसास यह ज्ञात होते ही उसके तन बदन में एकदम से झुरझुरी सी फैलने लगी,,,,, उसे अच्छी तरह से महसूस हो रहा था कि उसके बेटे का लंड उसकी साड़ी सहित गांड के बीचों बीच घुसने का प्रयास कर रही थी। यह एहसासउसे पूरी तरह से भीगोने लगा, वह मदहोश होने लगी उसे एहसास होने लगा कि उसके बेटे की हरकत से उसकी बुर पानी छोड़ रही थी।





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सुनैना को समझ में नहीं आ रहा था कि वह करें तो क्या करें अपने बेटे को ऐसा करने से कैसे रोके और वैसे भी जिस तरह के हालात थे सुनैना उसे रोकना नहीं चाहती थी क्योंकि उसे भी मजा आने लगा था,,, वह समझ गई थी कि उसके नींद में होने का फायदा उसका बेटा उठा लेना चाहता था और वह कब गहरी नींद में सो गई तो उसे खुद पता नहीं था और उसके गहरी नींद में होने की वजह से ही उसका बेटा उसके साथ इस तरह की हरकत करने पर उतारू हो गया था,,,,, पल भर के लिए सुनैना को अपना पति याद आ गया था जो कुछ देर पहले याद करके वहां गहरी नींद में सो गई थी और वही हरकत उसका बेटा उसके साथ दोहरा रहा था बस फर्क ईतना था कि उसका बेटासाड़ी के ऊपर से मजा ले लेना चाहता था और उसका पति उसकी बुर चटाई से पूरी तरह से उसे मस्त कर दिया था,,,, सुनैना की सांस ऊपर नीचे हो रही थीवह अपने जज्बात पर काबू नहीं कर पा रही थी उसका मन कर रहा था किसी से मैं अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी बेटे के लंड को अपने हाथ में पकड़कर उसे अपनी गुलाबी छेद का रास्ता दिखा दे,,, लेकिन इस बात को वह जानती थी कि उसका खुद से ऐसा करना उसे अपने ही बेटे की नजर में रंडी बना देगा छिनार बना देगाऔर उसका बेटा समझ जाएगा कि वह अपने बदन की प्यास बुझाने के लिए हो सकता है कि दूसरों के साथ भी शारीरिक संबंध बनाई हो और ऐसा हुआ बिल्कुल भी नहीं चाहती थी उसका बेटा उसके बारे में कुछ गलत सोच गलत धारणा अपने मन में बना बैठे। इसलिए वह खामोश रहीऔर अपने बेटे की हरकत को महसूस करके मस्त होने लगी और देखना चाहती थी कि इससे ज्यादा उसका बेटा क्या कर सकता है।

लेकिन ऐसा सोचने के बावजूद भी उसके मन में इस बात का डर था कि कहीं कोई इस जगह पर आना जाए और मां बेटे को इस अवस्था में देखकर पूरे गांव वालों में बता दे और वह गांव में किसी को मुंह दिखाने के लायक ना रह जाए। लेकिन इस बात को वह जानती थी कितनी धूप में इतनी दूर खेत में कोई आने वाला नहीं था,,,क्योंकि यह जगह चारों तरफ गेहूं के ऊंचे ऊंचे फसल से घीरी हुई थी दूर से भी यहां पर देखे जाने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी,,, इसलिए मैं थोड़ा निश्चित हो गई लेकिन अपने बेटे की हथेलीका दबाव अपनी कमर पर कुछ ज्यादा ही शख्ती से महसूस कर रही थी जिसका एहसास उसे पानी पानी कर दे रहा था,,,,और वह मन में कल्पना करने लगी थी कि जैसे उसका बेटा उसकी कमर पकड़ कर उसकी बुर में लंड डाल रहा है यह एहसास उसे पूरी तरह से मदहोश कर दे रहा था उसके वजूद को हिला कर रख दे रहा था अभी तक वह अपने बेटे से इस तरह की केवल कल्पना करती थीऔर अपनी कल्पना को साकार करने में उसे जरा भी रुचि नहीं थी क्योंकि वह जानती थी कि उन दोनों के बीच मां बेटे का पवित्र रिश्ता है और वह इस रिश्ते को कलंकित नहीं करना चाहती थी लेकिन इस समय उसके बेटे ने जिस तरह की हरकत की थी उसे डर था कि उसका सब्र का बात कहीं एकदम से टूट न जाए और वह खुद पहल कर दे,,,,लेकिन जैसे तैसे करके वह अपने आप पर काबू करके इस अवस्था में लेती रह गई वह देखना चाहती थी कि उसका बेटा आप अपनी हरकत को आगे बढ़ाता है या ईसी पर अपने आप को रोक देता है।

सूरज की हिम्मत बढ़ने लगी थीउसकी मां के बदन में जरा भी हलचल नहीं हुई थी सूरज को जरा भी एहसास नहीं हुआ था कि उसकी मां जाग चुकी है,,,उसे तो ऐसा ही लग रहा था कि अभी भी उसकी मां गहरी नींद में सो रही है और उसकी हरकत का उसे पता तक नहीं है इसलिए वह अपनी हरकत को बढ़ाना चाहता था उसका मन बढ़ने लगा था उसका दिल की धड़कनऔर भी ज्यादा बढ़ने लगी थी क्योंकि उसके मन में अब अपनी मां की नंगी गांड देखने की चाहत बढने लगी थी और उस पर अपना नंगा लंड रगड़ने को मचलने लगा था,,,,अभी तक के हालात को देखकर वह समझ गया था कि उसकी मा थकान की वजह से बेहद गहरी नींद में सो रही है,,,और ऐसा मौका उसे न जाने कब मिले इसलिए वह आज ही इस मौके का फायदा उठा लेना चाहता था इसलिए धीरे से वह अपने आप को थोड़ा सा अपनी मां के नितंबों से अलग करके धीरे-धीरे साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगा,,,,लेकिन एक तरफ की साड़ी ऊपर उठ रही थी लेकिन दूसरी तरफ की साड़ी सुनैना के बदन के भार के नीचे दबी हुई थीजिसे ऊपर उठाना थोड़ा मुश्किल था लेकिन नामुमकिन बिल्कुल भी नहीं था और इस बात को शायद सुनैना भी जानती थी इसलिए अपने भजन को एकदम से ढीला छोड़ रखी थी ताकि उसका बेटा उसकी साड़ी को एकदम ऊपर तक उठा सके,,,, सुनैना का सहकार रंग ला रहा था धीरे-धीरे सूरज अपनी मां की साड़ी को जागो तक उठा दिया था उसकी नंगी चिकनी पिंडलियां उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा रहा था,,,, सुरज के दील की धड़कन बढ़ती जा रही थी।

सुनैना की साड़ी उसका बेटा सूरज जांघों तक उठा दिया था,,,, आधा सफर का पूरा कर चुका था और यही उसके लिए उम्मीद की किरण थी क्योंकि अभी तक उसकी मां के बदन में जरा भी हलचल नहीं हुआ था,,,,यही उसके लिए राहत की सांस लेने जैसा था उसकी हिम्मत बढ़ती जा रही थी अपनी मां की नंगी चिकनी मोटी मोटी जांघों को देखकर जो कि अभी आधी ही दिखाई दी थी वह पूरी तरह से पागल होने लगा था,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी अपने बेटे की हरकत को महसूस करके ही सुनैना पानी पानी हो रही थी उसे अपने आप पर काबू करना मुश्किल हुआ जा रहा था लेकिन जैसे तैसे करके वह अपने आप को काबू की हुई थी,,,, देखते ही देखते सूरज अपनी मां की साड़ी को उसके नितंबों के उन्नत उठाव के ऊपर की तरफ उठाने लगा था।और ऐसा करने में उसे अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था,,,, क्योंकि वह जानता था किउसके बगल में उसके लिए दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत लेटी हुई थी जिसे वहकमर से नीचे नंगी कर देना चाहता था और लगभग लगभग उसमें कामयाब भी हो गया था जैसे साड़ी ऊपर की तरफ जा रही थी वैसे वैसे सुनैना की हालत खराब होती जा रही थी वह जानती थी कि थोड़ी देर में उसके बेटे की आंखों के सामने उसकी गांड एकदम से नंगी हो जाएगी और यह एक मां होने के नाते उसके लिए बेहद शर्मनाक पल था लेकिन न जाने क्यों इस शर्मनाक पल मेरी उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी बरसों बाद वह इतनी अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी।

धीरे-धीरे सूरज कामयाब होता चला जा रहा था अपनी मां की साड़ी को वह कमर तक उठाने में कामयाब होने की कगार पर था,,,,, अब बस थोड़ा सा और फिर उसकी आंखों के सामने उसकी मां की नंगी गांड एकदम सेअपना जलवा भी करने के लिए तैयार थी ऐसा करने से पहले वह एक बार फिर से अपने चारों तरफ नजर थोड़ा कर देखने लगा और तसल्ली कर लेने के बाद फिर से अपनी क्रिया में जुड़ गया,,,,और अगले ही पर जिसे खूबसूरत नाटक को शुरू करने से पहले नाटक के मंच पर उसका पर्दा उठाया जाता है इस तरह से सूरज भी एक अद्भुत कार्य एकमदहोश कर देने वाला नाटक खेलने से पहले अपनी मां की साड़ी कमर तक उठा दिया था उसकी आंखों के सामने उसकी मां की बड़ी-बड़ी गदराई जवानी से भरी हुई नंगी गांड अपनी मादकता बिखेर रही थी,,,,,
 
जेठ का महीना ऊपर से कडकती धुप,,, ऐसे में गांव वाले अपने-अपने घर में ही रहकर आराम करते थे अगर जो खेतों में चले जाते थे तो खेत में ही बनी झोपड़ी के अंदर पेड़ के नीचे आराम कर लेते थे क्योंकि अगर किसी को गर्मी लग जाए तो मुश्किल हो जाता है तबीयत खराब हो जाती है इसलिए गांव वाले अपने बचाव के लिए इतनी कड़कती धूप में कभी भी अपने घर से बाहर निकलते,,, और ऐसे ही गर्मी के महीने में खेत में काम करने की थकान से थक कर गहरी नींद में सो चुकी सुनैना और उसका बेटा एक अलग ही कार्य में लगे हुए थे।





अपनी मां की गहरी नींद में होने का पूरा फायदा उठाते हुए सूरजधीरे-धीरे करके अपनी मां की साड़ी को उसकी कमर तक उठा दिया था हालांकि ऐसा करने में उसे काफी समय और मस्सकत झेलनी पड़ी थी लेकिन फिर भी,,, जो कार्य उसे करना था वह करके ही दम लिया था,,,लेकिन इसमें भी उसकी मां का पूरा सहकार था वरना वह ऊपर से साड़ी को कमर तक तो उठा सकता था लेकिन मोटी-मोटी जांघों के नीचे फंसी साड़ी को वह ऊपर तक नहीं उठा सकता था,,, इसलिएअपने बेटे की हरकत का आनंद लेते हुए और यह देखने के लिए कि इससे आगे उसका बेटा क्या करता है इसीलिए वह अपने बेटे का सहकार कर रही थी और अपने वजन को खटिया पर हल्का छोड़ दी थी ताकि आराम से साड़ी ऊपर की तरफ जा सके और उसका यह सहकार रंग लाया था,,, अब उसकी साड़ी पूरी तरह से कमर के तक उठी हुई थी कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी इस बात का एहसास उसे पूरी तरह से गनगना दे रहा था। सुनैना अपने बेटे के सामने इस अवस्था में कभी नहीं आना चाहती थीक्योंकि वह बेहद संस्कारी और मर्यादा से औरत थी लेकिन उसके बेटे की हरकत में ही उसके मन को बदल कर रख दिया था और आलम यह था कि आज अपने बेटे के सामने अपनी नंगी गांड बिछाए वह मदहोश हुए जा रही थी। ऐसे तो अपने बेटे के सामने सब स्थान मेंहोना उसके लिए कोई बहुत बड़ी मजबूरी नहीं थी लेकिन बदन की जरूरत भी एक सबसे ज्यादा बड़ी मजबूरी हो जाती है एक औरत के लिए अपने चरित्र को अभी तक संभाल कर रखने वालीसुनैना अपने बेटे की हरकत से इतना अत्यधिक गर्म हो चुकी थी कि उसकीहर एक हरकत का आनंद लेते हुए वह उसके हाथों की कठपुतली बनने को तैयार हो चुकी थी।





एक मां होने की नाते वह अपनी भावनाओं पर एक हद तक काबू कर पाई थी लेकिन अपने बेटे की हरकत से वह बेकाबू हुई जा रही थी,,, बरसों बाद वह अपनेवह अपने नितंबों पर एक मोटे तगड़े लंबे लंड की रगड़ को महसूस की थी और यह रगड़ उसे पूरी तरह से मदहोश कर दिया था बेकाबू कर दिया थाऔर बरसों से अपने चरित्र को जिस तरह से वह संजो के रखी हुई थी उसे तार-तार करने के लिए कुछ हद तक वह भी तैयार हो चुकी थी,,,,अपनी चिकनी कमर पर अपने बेटे की हथेली को महसूस करके वह पानी पानी हो गई थी बार-बार उसकी बुर पानी छोड़ रही थी,,,उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी सुनैना इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि एक औरत की बुर अत्यधिक पानी कब छोड़ती है और क्यों छोड़ती है,,, इसीलिए तो वह अपने बेटे की हरकत से मद-मस्त होकर उसकी हरकतों का आनंद लेते हुए उसे आगे बढ़ने का मौका दे रही थी और उसका बेटा भी अपनी मां की जवानी की आग में कदर पागल हो गया की मां बेटे के रिश्ते को खोलकर वह अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा दिया था और उसकी नंगी गांड को प्यासी नजरों से देख रहा था।





सूरज का दिन बड़े जोरों से धड़क रहा था ऐसा नहीं था कि वह अपनी मां की गांड को पहली बार देख रहा था उसकी नंगी गांड के पहली बार दर्शन कर रहा था वह आज से पहले भी बहुत बार अपनी मां को नग्न अवस्था में देख चुका था यहां तक की अपने पिताजी के साथ चुदवाते हुए भी देख चुका था लेकिन फिर भी हर एक बार एक नयापन उसे महसूस होता था और आज भी यही नयापन उसे मदहोशी से भर दे रहा था,,,, आज का दिन उसके लिए बेहद खास और भाग्यशाली नजर आ रहा थाक्योंकि उसकी जानकारी में आज पहली बार हुआ अपनी मां के साथ एक ही खटिया पर लेटा हुआ था और उसकी मां पूरी तरह से बेसुध होकर सो रही थी इतना बेसुध कीउसने अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा दिया था और उसकी मां को इस बात की भनक तक नहीं लगी थी ऐसा उसका मानना था जबकि यह वह नहीं जानता था कि उसकी मां जाग चुकी थी और उसकी हरकतों का मजा ले रही थी,,,। अब तकसूरज की जिंदगी में जितनी भी औरतें आई थी वह एक से बढ़कर एक थी लेकिन उसकी मां की बात ही कुछ और थी इस बात को सूरज अच्छी तरह से जानता था इसीलिए तो मदहोशी के परम शिखर पर पहुंच चुका था,,,।





दूर-दूर से अपनी मां के नंगे बदन के दर्शनकर चुका है सूरज आज पहली बार उसके बेहद करीब था उसकी नंगी गांड की बेहद गरीब का उसकी हालत इस कदर खराब थी कि वह पजामे के ऊपर से ही अपने खड़े लंड को जोर-जोर से दबा रहा था,,,, इस तरह की हरकत उसकी सांसों की गति को और ज्यादा तेज कर दे रही थी उसके लंड की नसों में रक्त का प्रभाव इतना अत्यधिक हो रहा था कि कभी-कभी उसे लगने लगता था कि कहीं उसके लंड की नस फट न जाए,,,,,इस बात का डर भी उसे अपनी मां को इस अवस्था में देखने से नहीं रोक पा रहा था जबकि उसके लंड की हालत अपनी मां को ही समझता में देखने की बातें ही हुआ था पूरी तरह से टनटनाया हुआसूरज का लंड किसी लोहे के रोड की तरह लग रहा था जिसे इस समय बिल्कुल भी मोडा नहीं जा सकता था,,,, उसमें जरा भी ढीलापन नहीं था अगर वह अपने मन में ठान लें तो शायद साड़ी सहित भी वह अपनी मां की बुर में अपने लैंड का प्रवेश करा सकता था। सूरज प्यासी नजरों से अपनी मां की नंगी गांड को देखते हुए अपने मन में ढेर सारी कल्पनाओं को जन्म दे रहा था उसके चेहरे पर उत्तेजना का असर एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,,, उसका चेहरा उत्तेजना से लाल हो चुका था आंखों में वासना के डोरे दिखाई दे रहे थे,,,, हवस से उसका चेहरा पूरा भरा हुआ था,,,,।





हवस और वासना इसलिए कीखटिया पर उसके साथ में लेटी हुई औरत कोई गैर औरत नहीं थी वह उसकी खुद की मां थी इसके बारे में गलत सोचना भी बात थाअगर उसकी जगह कोई और औरत होती तो शायद इस वासना और हवस का नाम देना उचित इतना होता क्योंकि एक गैर औरत एक जवान लड़के के साथ एक ही खटिया पर तभी सोती है जब उसकी सहमति होती है और जब वह भी उसे जवान लड़के से कुछ चाहती हो अपने बदन की प्यास बुझानी चाहती हो,,, लेकिन यहां पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं था यहां पर सूरज की आंखों में हवस साफ दिखाई दे रही थी,,और वह भी किसी दूसरी औरत के लिए नहीं अपनी मां के लिए,,,बार-बार सूरज अपनी मां की गोरी गोरी बड़ी बड़ी गांड देखकर पजामी के ऊपर से अपने लंड को जोर से दबा दे रहा था ऐसा करने में उसे बहुत मजा आ रहा था उसका मन तो इसी क्रिया कोअपनी मां की बुर में करने को तड़प रहा था लेकिन वह जानता था कि ऐसा करना उचित नहीं है कहीं उसकी मां की नींद खुल गई तो गजब हो जाएगा इस अवस्था में उसे देखकर वह पूरी तरह से भड़क जाएगी,,,सूरज का ऐसा मानना था जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं था उसकी मां को सब पता था और अगर इस समय सूरज हिम्मत दिखाकर अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर में डालने की कोशिश करता है तो शायद उसकी मां उसका सहकार देते हुए अपनी टांगें खोल देती।





क्योंकि वासना और जवानी की आग में केवलसूरज ही नहीं जल रहा था उसकी मां भी पूरी तरह से तप रही थी6 7 महीने से अपने पति से अलग रहने के बाद उसके बदन की प्यास उफान पर थी। वह अपने आप को बिल्कुल भी समझा नहीं पा रही थी कि उसे करना क्या है,,, अपने पति की याद मेंरात भर वह बिस्तर पर करवट बदलती रह जाती थी और अपने हाथ से अपनी जवानी की प्यास बुझाने की नाकाम कोशिश करती रहती थी क्योंकि वह जितनी भी अपने बदन की प्यास बुझाने की कोशिश करती थी वह प्यास और भी ज्यादा भड़क जाती थी,,, और इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि जिस तरह से उसकी जवानीबेलगाम होती जा रही है उसकी खुद की उंगली से कुछ होने वाला नहीं है वह जानती थी कि उसे एक मोटे तगड़े लंबे लंड की जरूरत है जो उसकी बुर में घुसकर तबाही मचा सके उसकी जवानी की आग को बचा सके,,,, पर जाने में उसे एहसास होता था कि ऐसा जवां मर्द है तो केवल उसका बेटा ही है जो उसे अपनी बाहों में दबोच कर उसे रगड़ रगड़ कर चोद सकता है,,,, और जब जब उसके मन में यह ख्याल आता था तब तब उसकी बर पानी छोड़ देती थी। किसी से उसे अंदाजा लग गया था कि जब भी अगर ऐसा मौका आएगा तो उसे उसका बेटा बेहदमजा देगा उसे पूरी तरह से संतुष्ट कर देगा लेकिन एक तरफ इस तरह का एहसास उसके तन-बदन को मधुर रस से भिगो देता तो दूसरी तरफ इस तरह के ख्याल से थोड़ा घबरा जाती थी क्योंकि वह जानती थी कि वह किसके बारे में इस तरह की गंदी बातें सोच रही थी अपनी बेटी के बारे में इस तरह की गंदी बातें सोचना एक मां के लिए बहुत बड़ा पाप होता है लेकिन इस समय वह मजबूर हो चुकी थी अपने बदन की प्यास के खातिर वह पूरी तरह से बहक चुकी थी।





सूरज अपनी मां के बगल मेंखटिया पर लेटा हुआ था उसके पजामे में अच्छा खासा तंबू बना हुआ थाऔर उसकी आंखों के सामने उसकी मां की नंगी गांड थी जिसकी गहरी फांक में वह कुदकर डूब जाना चाहता था,,, सूरज को लग रहा था कि जैसे खटिया में उसकेपास आसमान का चांद उतर आया हो,, उसकी मां की नंगी गांड एकदम चांद की तरह दिखाई दे रही थी जो कि एकदम चमक कर अपनी आभा बिखेर रही थी,, सूरज इस चांद को अपनी हथेली में लेकर तबोच लेना चाहता था उसे सारी दुनिया की नजरों से बचाकर अपनी मुट्ठी में कैद कर लेना चाहता था ताकि इस पर केवल उसका ही हक हो किसी और का हक बिल्कुल भी ना हो और ना तो कोई उसे आंख उठा कर देख सके एक तरह से हुआअपनी मां की जवानी को अपनी आगोश में लेकर पूरी दुनिया से बचा लेना चाहता था क्योंकि उसे इस बात का भी डर था कि कहीं उसकी मां अपनी प्यास बुझाने के लिए किसी गैर मर्द का सहारा ना ले ले,,,।

अपनी मां कीबेस कीमती खजाने की तरफ वह अपना हाथ आगे बढ़ा कर धीरे से अपनी हथेली को उसे मखमली अंग पर रख दिया जो कि बाहर से शांत देखने वाली शीतल दीखने वाली उसकी बड़ी-बड़ी गांड अंदर से दहक रही थी सुलग रही थी सूरज अच्छी तरह से जानता था कि वह इतना क्यों समझ रही है उसे मालूम था कि ऐसी ताकती हुई गांड पर लंड की पिचकारी करने पर वह शांत हो जाती है ठंडी पड़ जाती है,,,, और सूरज वही इलाज करना चाहता थाधीरे-धीरे सूरज अपनी मां की नंगी गांड पर अपनी हथेली रखकर सहला रहा था उसे ऊपर से नीचे तक घूम रहा था ऐसा करने में उसे बहुत मजा आ रहा था अपनी मांकी गांड को अपनी हथेली से सहलाने में उसे इतना आनंद आ रहा था कि पूछो मत वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था।अपनी मां की गांड की गरमाहट को अपनी हथेली में महसूस कर रहा था लेकिन वह गर्मी हथेली से होते हुए सीधा उसकी दोनों टांगों के बीच के हथियार पर उसकी तपन साफ महसूस हो रही थी। कुछ देर तक सूरज इसी तरह से अपनी मां की गांड को सहलाता रहा।लेकिन इस दौरान भी उसे अच्छी तरह से महसूस हो रहा था कि उसकी मां के बदन में जरा भी हलचल नहीं हुई थी उसकी मां की आंख नहीं खुली थी,,।





जबकि ईस बात का उसे अंदाजा तक नहीं था कि उसकी मां जाग चुकी है और उसकी हरकतों का आनंद ले रही है,,,, जब काफी देर तक सूरज को अपनी मां के बदन में जरा भी हलचल महसूस नहीं हुआ तो उसकी हिम्मत बढ़ने लगी,,, लेकिन धीरे-धीरे समय गुजर रहा थाजो भी करना था उसे जल्दी करना था क्योंकि वह जानता था कि उसे किस तरह से आनंद मिलने वाला है,,,, वह अपनी मां की गांड सहलाता हुआ आगे की योजना बना रहा था,,,वह जानता था कि जो काम वह अब करने जा रहा है वह काफी हिम्मत का काम था धीरे का काम था जिसमें उसके पसीने छूटने वाले थे,,, अगर कहीं उसकी मां की आंख खुल गई तो गजब हो जाने वाला था इसतरह के खतरे को अच्छी तरह से जानता था लेकिन इन खतरों को भेज कर आगे जो सुख था उसे सुख की लालच में वह इस तरह के खतरे लेने के लिए तैयार हो चुका था। इसलिए वह अपनी योजना को अमल में लाने के लिए अपने दिल की धड़कन पर काबू करके गहरी सांस लिया और धीरे से वह थोड़ा सा आगे अपनी मां की तरफ सरक गया,,, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा था,,,,,एक बार वह इसी तरह से पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को पकड़ कर अपनी मां की गांड कि दरार के अंदर पजामा सहित अपने लंड को रगडना शुरू कर दिया उसे बहुत मजा आ रहा थावह देखना चाहता था कि उसकी मां के बदन में हलचल होती है कि नहीं,,,। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ तो उसकी हिम्मत बढ़ने लगी,,,।





लेकिन इस बार सुनैना को और ज्यादा मजा आने लगा अपनी नंगी गांड पर अपने बेटे के लंड की रगड़ जो की पजामे के अंदर था फिर भी उसकी गर्माहट उसे साफ तौर पर महसूस हो रही थी जिससे उसकी बुर की अंदर का लावा पीघलकर बाहर आ रहा था,,,, वह पागल हुई जा रही थी कभी-कभी तो वह एकदम बेकाबू हो जा रही थी और अपने मन में सोच रही थी कि शर्म किस बात की है उसका बेटा भी तो यही चाहता है और क्यों ना वह खुद पहल कर दे और अपनी जवानी की प्यास बुझा लेऐसा मन में सोच कर वह एकदम से अपने बेटे के सामने आ जाना चाहती थी लेकिन एक मां होने की नाते वह ऐसा करने से डर रही थी शर्मा रही थीऔर उसका बेटा उसके बारे में क्या सोचेगा यह सोचकर वह अपने आप को रोक ले रही थी वरना इसी समय वह अपने बेटे के साथ हम बिस्तर होकर अपनी जवानी की प्यास बुझा लेतीइसलिए वह अपनी तरफ से कोई ऐसी हरकत नहीं करना चाहते थे जिससे उसका बेटा उसके बारे में गलत धारणा अपने मन में बना ले,,, लेकिन अपने मन में वह ऐसा चाहती जरूर थी की बात कुछ आगे बढ़े। इसलिए तो वह बेसुध होकर लेटी हुई थी,,,,अपने बेटे के लंड की रगड़ को अपनी गांड पर महसूस करके पानी पानी हो रही थी,,,,,,,

सूरज अपनी मां की नंगी गांड पर हाथ रखकर उसे चल रहा था और ऐसा करने में उसे इतनी उत्तेजना का अनुभव हो रहा था कि पूछो मत वह इसी समय अपने लंड को उसकी बुर में डालने के लिए अपने आप को तैयार कर चुका था लेकिन फिर ना जाने क्या सोच कर वह रुक गया था,,,,जितनी भी औरतें उसके जीवन में आई थी उन सब से हसीन और खूबसूरत गांड उसकी मां की थी,,,और वह अपने मन में यही सोच रहा था कि उसके पिताजी कितने बेवकूफ है कि ईतनी खूबसूरत और हसीन औरत को छोड़कर दूसरी बाजारु औरत के पीछे पड़े हैं,, जोकि उसकी मां की जवानी के आगे कुछ भी नहीं थी,,,, सूरजकमल के बारे में सोच रहा था उसे अपनी आंखों से देख चुका था उसकी जवानी को भी देख चुका था वैसे तो सब कुछ ठीक-ठाक ही था लेकिन वह जानता था कि उसकी मां के आगे वह कुछ भी नहीं थी, इसलिए तो अपने मन में ही वह कमला की गांड कीतुलना अपनी मां की गांड से कर रहा था और उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में उसकी मां की गांड कितनी खूबसूरत और हंसीन है,,, सहलाते सहलाते वह उत्तेजना के चलते वह अपनी मां की गांड को अपनी हथेली में दबोच ले रहा था,,, और ऐसा करने में उसे बहुत मजा आ रहा था।

लेकिन आप उसे एहसास हो रहा था कि समय ज्यादा गुजर रहा है उसे ज्यादा देर नहीं करनी चाहिए क्योंकि धीरे-धीरे दिन बीत रहा था और कुछ ही देर मेंशाम होने को थी ऐसे में उसकी अपनी मां के साथ इस तरह से मस्ती करना उसके लिएखतरा बन सकता था अगर उसकी मां की नींद खुल जाती तो इसलिए वह अपनी हरकत को अब तेज कर देना चाहता था जिसके चलते वह अपने पजामे को धीरे-धीरे उतारना शुरू कर दिया,,,और देखते ही देखते अपने हाथ से और अपने पैर का सहारा लेकर अपने पजामी को उतार कर वह भी कमर के नीचे पूरी तरह से नंगा हो गया,,,, वैसे तो वह अपनी मां के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए तड़प रहा था लेकिन वहखेत में इस तरह से कुछ करेगा इस बारे में कभी सोचा नहीं था यह तभी संभव हो पाया जब अपनी मां को गहरी नींद में खटिया पर सोते हुए देखा उसकी बड़ी-बड़ी गांड देखकर उसका ईमान बदलने लगा और आलम यह था कि इस समय उसकी मां भी कमर के नीचे से नंगी थी और वह भी कमर के नीचे से नंगा था। लैंड की अकड़उसे बर्दाश्त नहीं हो रही थी लैंड में उसे दर्द महसूस हो रहा था क्योंकि वह जानता था कि इस समय उसका लंड औकात से ज्यादा सख्त हो चुका थाऔर यह सब उसकी मां की जवानी की बदौलत ही थी वरना उसकी आंखों के सामने मुखिया की बीवी मुखिया की लड़की सोनू की चाची पास के गांव की बहू और खुद उसकी बहनभी नंगी हो चुकी थी लेकिन इस तरह का एहसास उसे कभी नहीं हुआ था जैसा कि अपनी मां की नंगी जवान देखकर वह पागल हो रहा था।

सुनैना का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि खटिया पर जिस तरह की हलचल हो रही थी उसे न जाने क्यों महसूस हो रहा था कि उसका बेटा अपने कपड़े उतार रहा था,,,, और इस बात का एहसास उसे होते ही उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी बदन में झुनझुनी से फैलने लगी थी,,,, सांसे बेहद गहरी चलने लगी थी,,,, क्योंकि उसे एहसास होने लगा था कि कुछ ही देर में अगर वह सही है तो,,, उसके बेटे का नंगा लंड उसकी नंगी गांड खाते हुए महसूस होगा और इस अनुभव के लिए वह पूरी तरह से मचल उठी थी तैयार हो चुकी थी,,,,करने का अजीब सी खुशी उसे पूरी तरह से मदहोश किए हुए थे उत्तेजना के मारे चेहरा सुर्ख लाल हो चुका था,,,,सूरज अपने नंगे लंड को पकड़कर उसे ऊपर नीचे करके हिला रहा था और अपनी मां की नंगी गांड देख रहा था,,,,एक हाथ उसकी नंगी गांड पर रखकर उसे सहलाते हुए दूसरे हाथ से अपने लंड को मुठिया रहा था ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,,, उसकी आंखें वासना से लाल हो चुकी थी,,,,आगे का निर्णय वहां सही तरीके से ले नहीं पा रहा था उसकी आंखों के सामने जवानी से भरी हुई औरत कमर से नीचे नंगी थी उसकी गांड नंगी थी जो उसकी आंखों के सामने थी उसके लंड के सिधान पर थी,,,,उसकी थोड़ी सी हिम्मत उसे एक अद्भुत सुख प्रदान कर सकती थी लेकिन इस तरह की हिम्मत दिखाने के लिए भी हिम्मत चाहिए थी,,,।अगर उसकी मां की जगह कोई और औरत होती तो शायद तो हिम्मत दिखा कर अब तक उसकी बुर में अपना लंड डाल दिया होता क्योंकि वह औरत को काबू में करना अच्छी तरह से जानता था लेकिन इस समय खटिया पर उसकी मां थी इसलिए वह थोड़ा हिचकिचा रहा था।

फिर भी अब तक जिस तरह का अनुभव से मिला था अब तक जिस तरह से उसकी मां ने पूरा सहयोग दी थी गहरी नींद में होकरइसे देखकर उसकी हिम्मत बढ़ रही थी और वह अपने मन में सोचा कि एक बार अपनी मां की गांड पर नंगा लंड रगड़ लेने में क्या बुरा है वह भी मैसेज करना चाहता था कि लंड का सुपाड़ा जब नंगी गांड पर रगड़ खाता है तो कैसा महसूस होता है और वह भी खास करके अपनी मां की गांड पर,,, यही सोच कर वहअपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसके सुपारी को अपनी मां की गांड की दरार के बीचों बीच हल्के हल्के रगड़ने लगा यह अनुभव उसके लिए बेहद उत्तेजना से भरा हुआ था वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था पल भर के लिए उसे लगा कि कहीं उसके लंड से पिचकारी ना छूट जाए,,, वह अपने आप को, नियंत्रित करके गहरी सांस लेने लगा,,,, क्योंकि वह जानता था कि किस तरह की जल्दबाजी पानी की पिचकारी निकल सकती थी,,,और कुछ देर शांत रहने के बाद वह फिर से अपनी क्रिया को दोहराने लगा अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड के चारों तरफ अपने लंड को पकड़ कर घूमते हुए उसके सुपाड़े की गर्मी की रगड़ से जो अद्भुत सुख से प्राप्त हो रहा था वह पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था,,, और यही हाल उसकी मां का दिखाअपने बेटे के मोटे तगड़े लंड के गरम सुपाड़े को अपनी गांड पर महसूस करते हैं उसकी गर्मी से उसकी बुर का गरम लावा पीघलना शुरू कर दिया था।सुनैना को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अपनी तरफ से कोई भी क्रिया व कर नहीं सकती थी क्योंकि वह अपने बेटे की नजर में गिरना नहीं चाहती थी लेकिन अपने बेटे की हरकत से वह बेकाबू हो जा रही थी मन तो कर रहा था कि अपना हाथ पीछे लाकर अपने बेटे के लंड जोर से पकड़ ले और उसे अपनी बुर का रास्ता दिखा देक्योंकि आप उससे भी रहने जा रहा था लेकिन किसी तरह से वह अपने आप को नियंत्रित कि हुई थी।

कुछ देर तक सूरज इसी तरह से अपने लंड को अपनी मां की गांड पर रगड़ता रहा,,,,लेकिन जब उसने देखा कितने से भी उसकी मां के बदन में हलचल नहीं हो रहा है तो उसकी हिम्मत बढ़ने लगी और वहां अपने लंड को इस तरह से छोड़कर अपनी मां की कमर पर हाथ रख दिया और अपने लंड को अपनी मां की गांड पर रगड़ने के लिए अपनी कमर को गोल-गोल घूमने लगा जिसकी वजह से उसके लंड का सुपाड़ा उसकी मां की गांड के ईर्द गिर्द रगड़ खाने लगा। अपनी मां की कमर को पकड़कर ईस तरह की हरकत करने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, और उसकी मां भी मस्त हो रही थी।कमर पर जिस तरह से उसके बेटे ने हाथ रखा हुआ था उसकी कमर को पकड़े हुए थे पल भर के लिए तो उसे ऐसा ही लग रहा था कि उसका बेटा अपने लंड को उसकी बुर में डाल देगा लेकिन उसका बेटा लंड को रगड़ रगड़ कर ही खुद मजा ले रहा था उसे भी मजा ले रहा था। लेकिन अब उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी शायद वह बेकाबू भी हो रहा था,,, क्योंकि शायद कोई भी मर्द ईतने से अपने आप को रोक नहीं सकता था क्योंकि 2 इंच की दूरी पर हीऔरत की सबसे खूबसूरत अंग उसका गुलाबी छेद था जिसके लिए इतनी सारी प्रक्रिया मर्द करता है,,,, और शायद अब सूरज भी अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था,,,, उसके लंड से पदार्थ निकल रहा थाजिसे वह अपनी मां की गांड के चारों तरफ अपने लंड के सुपाडे से ही लगा रहा था। जिसका एहसास सुनैना को हो रहा था,,,, सूरज अब अपनी क्रिया को आगे बढ़ाना चाहता था,,,, इसलिए लंड के सुपाड़े को पकड़ कर वह धीरे-धीरे अपनी मां की गांड कि दरार के अंदर प्रवेश करने लगा यह एहसास सुनैना को होते ही वह पानी पानी होने लगी,,,,

उसकी गहरी सांसों से पागल कर रही थी और अपनी गर्दन पर अपने बेटे की गहरी सांस को महसूस करके उसकी हिम्मत छूट रही थी,,, आधे से ज्यादा सुपड़ा गांड की गहराई ली हुई दरारमैं प्रवेश कर चुकी थी और एक बार रास्ता दिखा देने के बाद सूरज लंड पर से अपना हाथ हटा लिया और सीधा उसे अपनी मां की गांड पर रख दिया,,,सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसकी हरकत से उसका लंड उसकी मां के गुलाबी छेद में जाने वाला बिल्कुल भी नहीं है लेकिन वह इस समय अपनी मां की बुर में अपना लंड डालना भी नहीं चाहता था क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां की बुर में लंड घुसते ही उसकी आंख खुल जाएगी उसकी नींद टूट जाएगी और उसके बाद क्या होगा या तो वह भी नहीं जानता हो सकता है कि उसकी हरकतउसकी मां को पूरी तरह से मस्त कर दे और वह तैयार भी हो जाए लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि उसकी मां उसकी हरकत से पूरी तरह से नाराज हो जाए और सूरज अपनी मां की नजर में गिर जाए ऐसा सूरज बिल्कुल भी नहीं चाहता था। लेकिन सूरज जानता था कि इतने से भी उसे बेहद आनंद की प्राप्ति होगीइसलिए वह अपनी मां की गांड पर हाथ रख कर धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करने लगा मानो कि जैसे अपनी मां की चुदाई कर रहा हो,,,सूरज को मजा आ रहा था बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी लेकिन वह इस बात से हैरान भी था कि उसकी मां की गांड की आंखों के बीच की गहरी दरार भी बेहद गहरी थी मानो की जैसे किसी बुर में उसका लंड प्रवेश कर रहा हो,,,।

सुनैना की हालत खराब हो रही थी उसे अपने बेटे के लंड की रगड़ बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रही थी क्योंकि उसके लंड का सुपड़ा बार-बार उसकी गांड के छोटे से छेद को छेड़ दे रहा था और उसकी मां गांड मराने को उत्सुक हुआ जा रहा था,,,,सूरज को अपने छुपाने पर अपनी मां की गांड की गर्मी अच्छी तरह से महसूस हो रही थी वह मदहोश हो रहा था उसकी आंखें बंद थी और वह अपनी मां की गांड पकड़ कर अपनी कमर को हिला रहा था वह इस बात से बिल्कुल भी निश्चित हो गया था कि उसकी मां अगर जाग जाएगी तो क्या होगा क्योंकि वह अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी में पूरी तरह से डूब चुका था,,,,, लंड से निकल रहा गीला पदार्थसुनैना की गांड कि दरार को पूरी तरह से भिगो दे रहा था उसमें चिकनाहट पैदा हो रही थी जिसकी चिकनाहट पाकर लंड का सुपाड़ा गांड की छेद से नीचे की तरफ सरक रहा था और उसकी बुर के करीब जा रहा था। और यह एहसास सुनैना को होते ही,,, उसकी बर पानी छोड़ने लगी और चिपचिपी होने लगी,,,, सूरज को तो इस समय बुर में डाले बिना नहीं चुदाई का एहसास हो रहा था,,उसे चुदाई का सुख प्राप्त हो रहा था,,,, क्योंकि जो क्रिया बुर के अंदर होती है वही क्रिया गांड की दरार के बीचों बीच भी हो रही थी वही आनंद वही माया उसे मिल रहा थाउसे यकीन नहीं हो रहा था कि किसी औरत की गांड की दरार भी इतनी कसी हुई हो सकती है कि मानो की जैसे बुर हो,,,,अपनी मां की गांड पकड़ कर सूरज इस तरह से अपनी कमर हिला रहा था और धीरे-धीरे उसके लंड कैसे छुपाना उसकी मां की गुलाबी बुर के छेद तक पहुंच जा रहा था।

यह सुनैना के लिए असहनीय होता जा रहा था,,, उसका मन व्याकुल हुआ जा रहा था,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह बेचैन हो रही थी जैसे कोई मनपसंद नहीं मन जो बेहद अजीब होवह दरवाजे तक आए और दरवाजे से ही लौट जाए तो कितना दुख होता है कितना अजीब लगता है वही हाल ही समय सुनैना का थाएक मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की दीवार से बार-बार वापस चला जा रहा था जिसे वहां अपनी बर के अंदर लेना चाहती थी उसका स्वागत करना चाहती थी उसकी सेवा करना चाहती थी लेकिन वह चाहकर भी ऐसा नहीं कर सकती थी।उसका बस दरवाजा खोलने की देर थी और वह अपने उसे अजीज मेहमान को घर में प्रवेश कर सकती थी उसके स्वागत कर सकती थी उसकी सेवा कर सकती थी लेकिन ऐसा करने में भी बहुत सी बातें बना सकती थी जिसे अच्छी तरह से जानती थी,,,वह किसी भी तरह से अपने बेटे के लंड को अपनी गुलाबी छेद के अंदर लेना चाहती थी लेकिन जिस तरह से वह लेटी हुई थी इस अवस्था में बिल्कुल भी मुमकिन नहीं था कि उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंबा लैंड आराम से उसकी बुर में प्रवेश कर जाए लेकिन बार-बार उसकी बुर पर ठोकर जरूर मार रहा था मानो के जैसे दरवाजे पर दस्तक दे रहा हो अंदर आने के लिए।

सुनैना तड़प रही थी मचल रही थीवह अपनी तो एक टांग को मोड़कर खटिया के पाटी पर कर लेना चाहती थी ताकि उसकी दोनों टांगें पीछे से खुल जाए और उसकी बुर उसके बेटे को नजर आ जाए,,, ताकि हिम्मत दिखा कर उसका बेटा आराम से उसकी बुर में अपना लंड डाल सके लेकिन ऐसा करने में भी सुनैना के पसीने छूट रहे थे,,,, और बार-बार सूरज के लंड का सुपाड़ाउसकी मां की बुर पर दस्तक दे रहा था बार-बार उसके गुलाबी छेद से उसके लंड का सुपाड़ा से स्पर्श हो रहा था जिससे उसके लंड की गर्मी एकदम से बढ़ रही थी।वह चरम सुख के करीब पहुंच रहा था और दूसरी तरफ जिस तरह की हालत सुनैना की हो रही थी वह अपने मन में हिम्मत जुटा रही थी वह दिन दुनिया के बारे में सोचना भूल गई थी इस समय उसे सिर्फ अपना ख्याल था अपने बेटे का ख्याल था अपनी जवानी की प्यासबुझाना महत्व पूर्ण लग रहा था और वह अपने मन में पूरी तरह से निर्णय कर चुकी थी कि अब वह अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेकर रहेगी,,,और वह इसके लिए अपनी टांग को मोड़ना चाहती थी ताकि गुलाबी छेद उसके बेटे की आंखों के सामने एकदम से खुलकर उजागर हो जाए और वह ऐसा करने ही वाली थी कि तब तक उसके बेटे की हिम्मत जवाब दे गई वह एकदम से अपने चरम सुख पर पहुंच गया और उसके अंदर से पिचकारी छूटने लगी जिसका एहसास से नैना को होते ही उसकी बुरे भी पानी छोड़ दी वह मदहोश हो गई बार-बार उसकी गांड की दरार से उसके बेटे के लंड से निकली पिचकारी टकरा रही जिससे उसका आनंद दुगना होता चला जा रहा था और सूरज गहरी सांस लेते हुए पानी छोड़ रहा था।

वासना का तूफान पूरी तरह से थम चुका थासूरज झड़ चुका था और अपनी हरकतों से अपनी मां का भी पानी निकल चुका था वह भी गहरी सांस ले रही थी लेकिन अभी तक वह नींद से बाहर आने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं की थी,,,,सूरज अपनी मां की गांड की तरफ देखा तो उसके लंड से निकाला गरम लावा की पिचकारी पूरे गांड को भिगो दिया था। वह इस तरह सेअपनी मां को उसके हाल पर नहीं छोड़ सकता था इसलिए अपने पजामे से अपनी मां की गांड साफ किया यह सब का एहसाससुनैना को अच्छी तरह से हो रहा था अच्छी तरह से अपनी मां की गांड साफ कर लेने के बाद वह धीरे-धीरे अपनी मां की साड़ी को नीचे की तरफ खींचने लगा और इसमें भी उसकी मां ने उसका पूरा सहयोग की नींद में होकर भी वह अपने बेटे को पूरी मदद कर रही थी और देखते-देखते सूरज अपनी मां की साड़ी को उसके घुटनों के नीचे तक कर दिया था सब कुछ उसे बराबर लग रहा था वह इस बात से खुश था कि इतना कुछ हो गया लेकिन उसकी मां को उसकी भनक तक नहीं लगी थी,,, और फिर वह अपने काम में लग गया,,,।

थोड़ी देर बाद सुनैना नींद से उठने का नाटक करते हुए खटिया पर बैठकर अंगड़ाई ले रही थी और जब देखी की शाम हो गई है तो जानबूझकर अनजान बनने का नाटक करते हुए बोली।

हाय दइया यह तो दिन ढल गया शाम हो गई और तूने मुझे जगाया नहीं,,,,।

जगह कर क्या करता तुम गहरी नींद में सो रही थी इसलिए तुम्हें जागना उचित नहीं लगा और मैं ही खेत का काम सब कर दिया,,,।

तू मेरे बारे में कितना सोता है ना तो सच में बहुत अच्छा बेटा है,,,,।

वह तो हूं ही,,,, अब चलो घर चलते हैं आज का काम मैं कर दिया हूं,,,।

( सूरज की बात सुनकर वह अपने मन में नहीं बोली हां जानती हूं तो आज का काम कर दिया है थोड़ा और अपने काम को बढ़ाया होता तो उसका भी काम हो जाता है लेकिन जो कुछ भी हुआ उसमें मजा को बताया और वह मुस्कुराते हुए खटिया पर से नीचे उतर गई और फिर दोनों मां बेटे घर की तरफ चल दिए,,, सूरज को इस बात की खुशी देखीउसने जो कुछ भी अपनी मां के साथ किया था गहरी नींद में होने की वजह से कुछ पता ही नहीं चला था।)
 
घर पर पहुंच कर सुनैना सीधे गुसलखाने में घुस गई और बिना कुछ सोचे अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई,,,, क्योंकि उसे अपनी गांड पर चिपचिपा सा महसूस हो रहा था जिस पर उसके बेटे ने अपना पूरा माल गिराया था अपनी जवानी का लावा बहाया था,,, वह खुद अपने हाथों से उसे साफ भी किया था लेकिन उसका चिपचिपापन रह गया था,,, क्योंकि पूरे रास्ते भर उस चिपचिपे बक्षपन के एहसास से उसके बदन में गुदगुदी सी होती रही थी इसीलिए वह इस समय नहाना उचित समझा रहे थे लेकिन जिस तरह की हरकत उसके बेटे ने उसके साथ किया था उसके चलते उसके बाद में उत्तेजना की लहर अभी भी बरकरार थी वह पूरी तरह से मदहोशी के आलम में थे और हो भी कैसे नहींआज उसके बेटे ने उसके साथ वो हरकत कर दिया था जिसके बारे में वह कभी सोच भी नहीं सकती थी,,,।





अपने सारे वस्त्र उतार कर नंगी हो जाने के बाद सुनैना अपने बेटे के बारे में सोच रही थी,,,, वह कभी सोची नहीं थी कि उसका बेटा उसके साथ इतनी हिम्मत दिखा पाएगा और इस तरह की हरकत करेगा,,, सुनैना उसे दिन की बात याद आ गई थी जब वह उसे गले लगाई थी उसी दिन उसे समझ जाना चाहिए था उसका बेटा अब उसका बेटा नहीं रह गया था पूरी तरह से मर्द बन चुका था,,,जब उसके बेटे ने उसके दुलार को अपनी वासना में तब्दील करते हुए अपने दोनों हथेलियां को उसके नितंबों पर रखकर जोर से दबाया था,,,, शायद उसी दिन धीरे-धीरेउसका बेटा मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते को तार तार करने के बारे में सोचने लगा था और मर्यादा की दीवार को धीरे-धीरे गिराना शुरू कर दिया था,,,तभी तो आज इस तरह की हरकत हुआ कर पाया था वरना शुरुआती दौर में इस तरह की हरकत करने के बारे में सोचने में भी उसे डर लगता कि कहीं उसकी मां जग ना जाए और जागने के बाद उसे इस तरह की हरकत करते हुए देखकर गुस्से में लाल-लाल ना हो जाए लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था इसका मतलब साफ था कि वह काफी दिनों से अपनी मां के बारे में गंदी बातें सोच रहा था और आज मौका मिलने पर अपनी सोच को पूरी तरह से हरकत में बदल दिया था।इन सब बातों को सोच कर सुनैना की हालत खराब हो रही थी अपने वस्त्र उतारने के बाद वह कुछ देर तक नग्न अवस्था में ही गुसलखाने में खड़ी रह गई थी अपने बेटे के बारे में सोचते हुए।





अपने बेटे की हरकतको देखकर जहां एक तरफ हुआ पूरी तरह से हैरान थी वहीं दूसरी तरफ ना जाने क्यों उसके बाद में उमंग उठ रही थी एक बदहवासी एक मदहोशी उसकी नसों में घुल रहा था,,, जहां एक तरफ अपनी बेटे की हरकत के बारे में सोच करउसे बुरा लग रहा था वहीं दूसरी तरफ अपने बेटे की हरकतों से वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी पूरी तरह से वासना ने अपने आप को डूबती हुई महसूस कर रही थी,,, सुनैना अच्छी तरह से जानती थी कि जो कुछ भी उसके बेटे ने किया था वहगलत था पाप था एक मां बेटे के बीच इस तरह का रिश्ता कभी भी मान्य नहीं होता और ना ही समाज इस तरह के रिश्ते की मंजूरी देता हैसमाज की नजर में अपने आप की नजर में इस तरह की हरकत इस तरह के संबंध नाजायज और पाप ही थे लेकिन फिर भी न जाने क्योंसुनैना का मन अपने बेटे की हरकत पर पुलकित हुआ जा रहा था प्रसन्न हुआ जा रहा था,,, और शायद इसलिए कि उसके बेटे ने जो भी उसके साथ किया था यह उसकी भी जरूरत थी महीनों से अपने पति से दूर रहने के बाद बदन की गर्मी जवानी की प्यास उसे भी तड़पा रही थी उसे भी अपने बदन की प्यास बुझाना बेहद आवश्यक जान पड़ रहा था,,, इसीलिए वह अपने बेटे की हरकत से हैरान परेशान होने के बावजूद भी काफी हद तक संतुष्ट थी उसे अपने बेटे की हरकत बहुत अच्छी लगी थी।





और अच्छी लगती भी क्यों नहीं जवानी से भरी हुई सुनैना अपनी बड़ी-बड़ी गांड की मखमली देह परअपने बेटे के मर्दाना कठोर अंग की रगड़ महसूस करके पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,अनुभव से भरी हुई सुनैना को इस बात का एहसास होने लगा था कि वाकई में उसके बेटे की टांगों के बीच जो हथियार है वह किसी भी औरत को पूरी तरह से संतुष्ट और मदहोश कर देने के लिए सक्षम था तभी तो वह बिना किसी रुकावट की उसकी गुलाबी छेद तक पहुंच रहा थासुनैना को अपने नितंबों की बनावट का पूरा अनुभव और एहसास था वह जानती थी कि जिस तरह से वह लेटी हुई थी उसके पीछे से किसी भी मर्द का लंड उसके गुलाबी छेद तक पहुंच पानामुश्किल ही नहीं नामुमकिन था ऐसा तभी संभव हो सकता था जब उसके लंड की लंबाई कुछ ज्यादा हो जैसा कि गधे का लंड और इस समय वह इस एहसास से पूरी तरह से गदगद में जा रही थी कि उसी तरह का लंड उसके बेटे का था,,,जो कि बिना किसी रुकावट की उसके गुलाबी छेद तक बड़े आराम से पहुंच चुका था और उसे पर बार-बार ठोकर भी मार रहा था,,,,उसे पाल को याद करके सुनैना पानी पानी हो रही थी उसकी बुर नमकीन पानी छोड़ रही थी और वह एक नजर अपनी गुलाबी छेद की तरफ डालकर मुस्कुरा दीऔर अपने मन में सोचने लगी कि,,,जब उसके बेटे का लंड बड़े आराम से उसके गुलाबी छेद तक पहुंच रहा था तो उसके बेटे ने उसे अंदर डालने की कोशिश क्यो नहीं किया,,,? क्योंकि दुनिया के किसी भी मर्द का आखरी पड़ाव औरत का वही छेद नहीं होता है जिसमें अपना लंड डालने के लिए वह तड़पता रहता है इतने सारे प्रपंच रचता है,,,और उसे छोटे से गुलाबी छेद को पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाता है।





फिर सूरज पीछे क्यों हट गयाअपनी मंजिल के इतने करीब तक पहुंच कर सीधा दरवाजे पर दस्तक देते हुए ही वापस क्यों लौट गया क्यों उसने अंदर आने की कोशिश नहीं किया क्यों एक अद्भुत सुख प्राप्त करने कीकोशिश नहीं किया क्यों थोड़ा सा हिम्मत दिखा कर एक औरत से संभोग सुख प्राप्त करने की हिम्मत नहीं दिखा पाया यह सारे सवाल सुनैना को परेशान कर रहे थे और इसका जवाब भी शायद उसी के पास था वह अपने मन में उठ रहे इन सभी सवालों का जवाब अपने आप से ही देते हुए बोली,,,,।

शायद इसलिए कि वह अभी नादान हैशायद उसे नहीं मालूम की एक मर्द का लंड औरत के कौन से अंग में डाला जाता है,,,और हो सकता है कि शायद वह औरत के उस अंग को अपनी आंखों से देखा ही ना हो कैसा होता है क्या करते हैं,,,और इसीलिए वह इतना कुछ करने के बावजूद भी अपने लंड को सही जगह पर डाल नहीं पाया बस दरवाजे पर दस्तक देकर वापस लौट गया,,,,अपने मन में ही जवाब देते हुए वह अपने मन में सोचने लगी की खास उसे लंड को डालने का सही जगह मालूम होता,,, काश उसे मालूम होता की औरत का वह खूबसूरत मर्द को कितना मजा देता है काश उसे मालूम होता की बुर में लंड डालकर कमर हिलाने को ही चुदाई कहते हैं,,, काश मेरा बेटा अपने लंड को अपनी मां की बुर में डाल कर चोद दिया होता,,,,,इन सब बातों को अपने मन में सोच कर ही उसकी बुर पानी छोड़ रही थी और उसकी हथेली अपने आप ही उसकी बुर तक पहुंच चुकी थी जिसे वह अपनी उंगलियों से ही कुरेद रही थी,,,,बदन में उत्तेजना का एहसास बढ़ने लगा एक खुमारी से छाने लगी आंखों में चार बोतलों का नशा चढ़ने लगा और अपने आप ही उसकी उंगली बुर के अंदर प्रवेश करने लगी,,, यह एहसास होते ही वह नजर उठा कर गुजर खान के बाहर चकर पकर देखने लगी कि कहीं कोई आ तो नहीं रहा है,,,, लेकिनउसे तसल्ली हुई कि कोई वहां नहीं था और वैसे भी शाम ढलने के बाद अंधेरा होने लगा थाबदन में जिस तरह की खुमारी जा रही थी वह अपनी उंगली को बिल्कुल भी रोक सकने में समर्थ नहीं थी,,,।





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और धीरे-धीरे अपनी उंगली कोअपनी बुर के अंदर बाहर करने लगी और अपने मन में सोचने लगी की लंड ना सही उंगली से ही काम चला लिया जाए,,,,सुनैना इस तरह की औरत बिल्कुल भी नहीं थी कि अपनी वासना अपनी बदन की चाहत के चलते दूसरी औरतों की तरहदूसरे मर्द के साथ संबंध बनाने लगे या इस बारे में सोचने लगे लेकिन पिछले बीते दिनों में जो कुछ भी हुआ था उससे उसकी सोच थोड़ी बदलती जा रही थी और वह भी किसी गैर मर्द के लिए नहीं अपने बेटे के लिए जो कि अब पूरी तरह से जवान हो चुका था और अपनी जवानी का एहसास उसने खेत में ही करा दिया था,,,,सुनैना के ख्यालों में इस समय पूरी तरह से उसका बेटा छाया हुआ था वह अपनी आंखों को बंद करके अपनी बुर में लगातार उंगली को अंदर बाहर कर रही थी,,, उसके बदन में वासना का गिरफ्त पूरी तरह से हो चुका था,,,, मदहोशी पूरी तरह से आंखों में छा चुकी थीअपने आप को या अपनी उंगली को यहां से पीछे ले जाने का मतलब था कि अपनी प्यास को और ज्यादा भड़काना और वैसे भी वह इस तरह से अपनी प्यास को बचा नहीं रही थी बल्कि और ज्यादा भड़का रही थी लेकिन इस समय वह कर भी क्या सकती थी।





गुसलखाने में वह पूरी तरह से नंगी होकर अपनी उंगली से अपनी बर के अंदर बाहर करके एक लंड के एहसास में पूरी तरह से डूब चुकी थी और वह लंड किसी गैर मर्द का नहीं था बल्कि उसके ही सगे बेटे का था जिसकी रगड़ जिसकी गर्माहट उसे अभी तक अपनी दोनों जांघों के बीच अपनी बुर के इर्द-गिर्द महसूस हो रही थी,,, जिससे उसकी बुर का गरम लावा धीरे-धीरे पिघल रहा था,,,,,अपनी उंगली से अपनी जवानी की गर्मी शांत करते हुए उसका मन कह रहा था यह क्या कर रही है सुनैना ऐसा मत कर तू पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी है कहीं ऐसे हालत में तेरा बेटा देख लिया तो कहीं इस और आकर तुझे इस अवस्था में देख लिया तो गजब हो जाएगा,,, वह तेरे बारे में क्या सोचेगा कि उसकी मां को क्या हो गया है यह क्या कर रही है,,,,इस तरह का सवाल उसके एक मन में उठ रहा था लेकिन इन सभी सवाल का जवाब उसका दूसरा मन अपने आप ही दे रहा था।

देख लेगा तो देख लेगाऔर सोचने के लिए बाकी क्या है यही सोचेगा कि उसकी मां चुदवाने के लिए तड़प रही है,,, उसे अपनी बुर में मोटा तगड़ा लंड चाहिए,,, बदन की प्यास उसे पागल कर रही है,,,,,, अपनी मां को ही समझता में देख कर तो उसे खद समझ जाना चाहिए किउसकी मां की मदद करना उसका परम कर्तव्य है उसकी मां को मोटे-मोटे लंड की जरूरत है उसे चुदाई की सख्त आवश्यकता है ऐसी हालत में कोई गैर मर्द उसकी चुदाई करें परिवार की बदनामी हो इससे पहले इस कर्तव्य का पालन उसे ही करना चाहिए अपनी मां को इससे स्थिति से बाहर लाना चाहिएऔर एक पूरी तरह से मर्द बनाकर अपनी मां की बुर में लंड डालकर उसकी जवानी की गर्मी को नीचोड निचोड़ कर बहा देना चाहिए,,,,इस तरह का दिलासा उसका दूसरा मन दे रहा था जिसके चलते उसके उत्तेजना और भी ज्यादा भर्ती चली जा रही थी और फिर वह अपनी दूसरी उंगली भी अपनी बुर में डालकर उसे जोर-जोर से मसल रही थी दबा रही थी अंदर बाहर कर रही थी ऐसा करते हुए उसका बदन पूरी तरह से अकड़ने लगा और देखते ही देखते वह भल भला कर झड़ने लगी,,,आज इस तरह की कल्पना करते हुए अपनी उंगली का सहारा लेकर जिस तरह का आनंद उसे प्राप्त हुआ था इस तरह का आनंद उसे कभी भी प्राप्त नहीं हुआ था वह पूरी तरह से मत हो चुकी थीझड़ जाने के बाद वह गहरी गहरी सांस ले रही थी और अपने आप को अपनी सांसों को दुरुस्त करने की कोशिश कर रही थी,,,,।





और जैसे ही वासना का तूफान शांत हुआ उसके मन में उलझन बढ़ने लगी वह परेशान होने लगीऔर वह भी इसलिए कि वह यह सब किस तरह की कल्पना कर रही है अपने ही बेटे के बारे में इस तरह के ख्याल उसके मन में क्यों आ रहे हैं,,, क्यों अपने बेटे के साथ ही संभोग रत की कल्पना करके वह झड जा रही है। यह तो बिल्कुल भी गलत हैसूरज उसका बेटा है और अपने बेटे के बारे में इस तरह की गंदी बातें सोचना पाप है किसी को पता चल गया तो क्या होगामां बेटे के बीच इस तरह का रिश्ता बिल्कुल भी संभव नहीं है नहीं वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं करेगी अपने बेटे को उस समय रोक देना चाहिए था,,,, और वह रुक जाता और कभी भी इस तरह का ख्याल अपने मन में नहीं रहता लेकिन शायद उसका ना रोकना कहीं उसकी हिम्मत को और ज्यादा बढ़ावा ना दे क्योंकि यह उम्र ही कुछ ऐसी होती है इस उम्र में जवानी की प्यास बुझाने के लिए आग लगी होती हैवह आज उसके बेटे के बदन में भी लगी हुई है तभी तो वह अपनी बदन की आग बुझाने के लिए अपनी ही मन के साथ इस तरह की गंदी हरकत कर रहा था और अपना पानी निकाल दिया था। नहीं अब उसे रोकना होगाकहीं ऐसा ना हो कि आज तो वह उसके नींद में होने का फायदा उठाकर इस तरह की हरकत कर दिया है कहीं ऐसा ना हो की जवानी और जोश बढ़ जाने परवह उसके साथ जबरदस्ती न करने लगी और अपने लंड को उसकी बुर में डालकर मां बेटे के पवित्र रिश्ते को तार कर दे नहीं-नहीं ऐसा वहां नहीं देगी अपने बेटे को रोकेगी इससे आगे वह बढ़ने नहीं देगी।





ऐसा मन में सोच कर कहा नहाने लगी और अपनी नितंबों को मलमल कर साफ की,,, और नहाने के बाद कपड़े पहन कर वह खाना बनाने में लग गई। वह उदास नजर आ रही थी खाना बनाते समय भी वह अपने बेटे के बारे में सोच रही थी,,,, और सूरजबढ़िया आराम से घर में इधर-उधर घूम रहा था क्योंकि आज जो उसने किया था उसको लेकर उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे आज अपनी मां की नंगी गांड पर अपना लंड रगड़ने में जो आनंद जो सुखों से प्राप्त हुआ था और तो और उसे इस बात का भी अच्छी तरह से एहसास था कि वह अपने लंड को सुपाड़े को अपनी मां के गुलाबी छेद तक पहुंचने में सफल हो चुका था और जानबूझकर वह अपने लंड को अपनी मां की बुर में डाला नहीं था,,, क्योंकि उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी मां की नींद खुल गई तो वह नाराज ना हो जाए,,,, वह उसके बारे में क्या सोचेगीजबकि वह इतना तो जानता ही था कि उसकी मां को भी लंड की जरूरत है, वह भी प्यासी है लेकिन यह नहीं जानता था कि उसकी मां उसके बारे में क्या सोचती है और इसीलिए वह डर रहा था घबरा रहा था,,,, वरनाएक औरत को पूरी तरह से काबू करना उसे अच्छी तरह से आता था और वह अपनी इस कार्य क्षमता को अपने इस कुशलता को अपनी मां पर भी लागू कर सकता था और उसे पूरी तरह से अपने काबू में करके उसकी चुदाई कर सकता था लेकिन वह अपने आप को ऐसा करने से रोक लिया थावरना वह इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि लंड को औरत के कौन से छेद में डाला जाता है। इसीलिए तो हुआ काफी प्रसन्न नजर आ रहा था क्योंकि उसे पूरा विश्वास था कि एक न एक दिन वह जरूर अपनी मां के गुलाबी छेद पर विजय प्राप्त कर लेगा।





रानी भी खाना बनाने में अपनी मां की मदद कर रही थी पर थोड़ी देर में खाना बनाकर तैयार हो चुका था लेकिन अभी भी खाना खाने में काफी समय था,,,, सुनैना अपने बेटे से नजर नहीं मिल पा रही थी फिर भी अपने आप को सहज रखने के लिए उससे बातें कर रही थी ताकि उसे कुछ शक ना हो,,,तीनों आपस में बात कर रहे थे कि तभी बाहर से आवाज आई,,,।

दीदी,,,ओ,,,, दीदी,,,, कहां हो,,,,,?

(सुनैना को यह किसकी आवाज़ है समझ में आ गया था वह खटिया पर से साड़ी को संभालते हुए उठते हुए बोली,,,)

यह सोनू की चाची को क्या काम पड़ गया,,, तुम दोनों बातें करो मैं देख कर आती हूं,,,,(इतना कहकर सुनैना बाहर की तरफ जाने लगी लेकिन सोनू की चाची की आवाज सुनकरसूरज का दिल जोरो से धड़कने लगा वह भी सोनू की चाची का पूरी तरह से दीवाना हो चुका था,,,, इसलिए हुआ अभी खटिया पर से उठकर खड़ा हो गया और भाभी अपनी मां के पीछे-पीछे चल दिया,,,, सोनू की चाची को दरवाजे पर खड़ी देखकर सुनैना बोली,,,,)

क्या हुआ क्या काम पड़ गया,,,।





अरे दीदी काम की तो पूछो मत तुमसे तो इतना काम पड़ता है कि मैं क्या बताऊं,,,,,।

अब कौन सा काम पड़ गया,,,,।

(तभी अपनी मां के पीछे से एक तरफ खड़े होकर सूरज मुस्कुराते हुए बोला)

क्या हुआ चाची बहुत दिनों बाद आई हो यहां का तो रास्ता ही भूल गई हो ऐसा लग रहा है,,,।

अरे नहीं बेटा तुमको और दीदी को क्यों भूलूंगी भला पूरे गांव में एक दीदी ही तो है जिनसे में अपने सुख दुख की बात बताती हूं,,,,।

आज कौन सी बात बताने के लिए आई हो,,,(सुनैना बोल पड़ी)

अरे अपनी लाडो है ना परसों उसका विवाह है बारात आने वाली है उसके पिताजी पूरे गांव को न्योता दे चुके हैं और मैं यहां आ रही थी तो मुझे ही बोल दी है कि जाकर बोल देना पूरे घर का खाना पीना वही रहेगा,,,,।

अपनी लाडो,,,, अरे कल तक तो नाक बहाती फिर रही थी और आज पूरी तरह से जवान हो गई और उसकी शादी है,,, मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है बोलो,,,।

तुम सच कह रही हो दीदी लड़कियां इतनी जल्दी बड़ी हो जाती है अपनी रानी भी तो शादी के लायक हो चुकी है अब जल्दी से इसके लिए भी लड़का देख कर इसके हाथ पीले कर दो,,,,।





मैं भी यही सोच रही हूं कोई अच्छा सा रिश्ता मिले तो बात आगे बढ़ाऊं,,,,।

(दोनों की बातचीत को दौरान सूरज सोनू की चाची को ही देख रहा था और अपनी मां के पीछे खड़े होकर मुस्कुरा रहा था अपनी मां से नजरे बचा कर वह अपने एक हाथ की उंगली और अंगूठे को गोल बनाकर उसके बीच में सेअपने दूसरे हाथ की उंगली को अंदर बाहर करते हुए उसे चुदाई करने का इशारा कर रहा था और उसके सारे को देखकर सोनू की चाची मन ही मन में मुस्कुरा रही थी और खुश हो रही थी,,,, अभी उन लोगों की बात हो रही थी कि सुनैना की पड़ोसन हाथ में लोटा लिए हुए आई और बोली,,,,)

अच्छा हुआ तुम दोनों की यहां मिल गई चलो साथ में चलते हैं और वैसे भी देखो ना मौसम कितना अच्छा है ठंडी हवा चल रही है खेत में कुछ देर तक बैठेंगे तो मजा आ जाएगा इधर-उधर की बातें करेंगे,,,,।

(उसकी बात सुनकर सुनैना और सोनू की चाची भी तैयार हो गई और हैंडपंप के पास जाकर वहां से अपने लिए एक-एक डिब्बा ले ली और उसमें हेडपंप से पानी भरकर तीनों खेत की तरफ निकल गई एक साथ तीनों को जाते हुए देखकरसूरज अपने मां पर काबू नहीं कर पाया और उनसे नजर बचाकर वह भी उन तीनों के पीछे-पीछे जाने लगा क्योंकि उन तीनों की बातें सुनने में उसे बहुत मजा आता था वह देखना चाहता था कि आज वह तीनों किस तरह की बातें करते हैं,,,,



 
सोनू की चाची रात को आकर सुगंधा को लाडो के विवाह का आमंत्रण देने के साथ-साथ,,, सुगंधा के पड़ोसन और सुगंधा के साथ सौच करने के लिए मैदान की तरफ जा रही थी,,, और उनके पीछे-पीछे सूरज भी छुपाते छुपाते आगे बढ़ने लगा था वह अच्छी तरह से जानता था कि यह समय सौच करने का बिल्कुल भी नहीं था,,, शाम ढलने के साथ ही गांव की औरतें मैदान की तरफ निकल जाती थी,,, और अपने अपने लिए खुले मैदान में या झाड़ियां के पीछे जगह चुनकर बैठ जाती थी वैसे तो गांव में अक्सर शाम ढलने के बाद ही औरतों सौच करने के लिए मैदान की तरफ निकलती थी क्योंकि शाम ढलने के बाद अंधेरा हो जाता था और अंधेरे में दूर से देखने की आशंका कम हो जाती थी,,, लेकिन इस समय सूरज की मां सोनू की चाची और उसकी पड़ोसन सौच के बहाने गप्पे लगाने के लिए जा रही थी और उनके गप्पे किस मुद्दे पर होते थे यह सूरज अच्छी तरह से जानता था इसलिए तो उनके पीछे-पीछे चल दिया था।





चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा नजर आ रहा था गांव से निकलते समय सूरज बड़े संभाल कर आगे बढ़ रहा था,, क्योंकि कुछ मीटर की दूरी पर ही उसकी मां और कुछ औरतें मैदान की तरफ जा रही थी ऐसे में सूरज को उनके पीछे जाता देखकर किसी को भी अजीब लग सकता था इसलिएसूरज सब की नजर से बचकर आगे की तरफ बढ़ रहा था एक बार में पहले भी इन तीनों को ही मैदान में सोच करते हुए देख चुका था इन तीनों की मदमस्त कर देने वाली गांड और उनकी रस भरी बाते भी सुन चुका था,,, और वह एक अद्भुत अनुभव था,,, जिसका आना तो वह पहले भी ले चुका था और इस समय उसे इस बात से प्रेरणा मिली थी कि उसकी पड़ोसन सोनू की चाची को उसके साथ संबंध बनाने के लिए बोल रही थी और बाकी उसकी मां के सामने जिसका विरोध उसकी मां थोड़ा बहुत की थी सूरज तो इस बात से पूरी तरह से उत्साहित हो गया था की औरतों में वह कितना चर्चित है और वह भी एक मर्द के तौर पर, इस बात की खुशी उसे बहुत अच्छी तरह से हुई थी और अपने आप पर गर्व भी हो रहा था। जिसके चलते उसे सोनू की चाची के साथ संबंध बनाने में जरा भी दिक्कत पेश नहीं आई और आज सुबह सोनू की चाची से मौका मिलते ही अपनी जवानी की प्यास बुझा लेता था,,, और यही देखने के लिए की आज कौन सी खिचड़ी पकती है वह धीरे-धीरे उन लोगों की तरफ आगे बढ़ रहा था।





गांव में काफी अंधेरा था लेकिन गांव से बाहर निकलते ही चांदनी रात का एहसास बहुत अच्छी तरह से हो रहा थावैसे तो ज्यादा कुछ खास नहीं लेकिन गौर से देखने पर सब कुछ दिखाई दे रहा है,,, सोनू की चाची सुनैना और वह सुनैना की पड़ोसन तीनों देखते ही देखते एक खुली जगह पर पहुंच चुके थे लेकिन आसपास तकरीबन तीन-तीन चार-चार फीट की झाड़ी थी और यह जगह खुद सूरज की मां ने पसंद की थी ताकि बैठने के बाद दूर-दूर से कोई उन्हें देख ना पाए,,, तीनों एक ही जगह पर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर खड़ी हो चुकी थी तीनों ने अपने हाथ में लिया हुआ डिब्बा नीचे जमीन पर रख दी थी और उनसे तकरीबन 2 मीटर की दूरी बनाकर सूरज एकदम झुक कर झाड़ी के पीछे अपने आप को छुपा लिया था यहां पर किसी के भी होने का अंदेशा उन तीनों को बिल्कुल भी नहीं था और यही सूरज चाहता भी था,,,।सूरज का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि एक बार फिर से वहां अपनी मां के साथ-साथ उन दोनों की भी गांड देखने वाला था वैसे तो सोनू की चाची के साथ वह पूरी तरह से मजा ले चुका था लेकिन फिर भी हर बार एक नया एहसास उसके बदन को मदहोश कर देता था। तीनों खड़ी होकर एक दूसरे को देख रही थीऔर सुगंधा नजर घुमा कर चारों तरफ देख रही थी कि कहीं कोई उन्हें देख तो नहीं रहा है लेकिन कहीं भी ऐसा कोई शख्स दिखाई नहीं दे रहा था जो उन्हें इस हालत में देख सकता,,, और वैसे भी समय कुछ ज्यादा हो रहा था इसलिए इस समय यहां किसी के आने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी।





अरे अब सोच क्या रही हो जो करने के लिए आई हो वह करो कि ईस तरह से खड़ी होकर रात यही गुजारोगी,,,(इतना कहने के साथ ही सुनैना अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी पकड़ कर उसे धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाने लगी,,,, सूरज के लिएमदहोश कर देने वाली बात यह थी कि तीनों की पीठ उसकी तरफ थी मतलब की एक साथ आज उसकी आंखों के सामने तीन-तीन औरतों की खूबसूरत गांड दिखने वाली थी,,और यह सही भी था क्योंकि वह ठीक उनके पीछे झाड़ियां के पीछे था और इस तरह से वह तीनों उसकी तरफ देख भी नहीं सकती थी,,, सुनैना की बात सुनकर उसकी पड़ोसन बोली,,,)

क्या बात है दीदी आज गांड दिखाने का ज्यादा मन कर रहा है क्या तुम्हारा,,,।

अच्छा तो ज्यादा मन मेरा कर रहा है चल अच्छा मेरा मन कर रहा है लेकिन तुझे गांड दिखा कर मेरा क्या फायदा होगा,,, तु क्या कर लेगी मेरी गांड के साथ,,,।

बात तो तुम सही कह रही हो दीदी,,,यह भी ना कुछ भी कहती रहती है दीदी सच कह रही है अगर तुझे अपनी गांड दिखा भी देगी तो तो कर क्या देगी तेरे पास लटकता और प्यार तो है नहीं जो दीदी की गांड में डालकर इनको मस्त कर देंगी,,,,,।

(अपनी मां और सोनू की चाची की बात को सुनकर तो बैठे-बैठे ही सूरज का लंड खड़ा हो गया,,, अपनी मां की बात की शुरुआत को सुनते ही सूरज की हालत खराब होने लगी थी और उसे समझ में आ गया था कि आजइन तीनों के बीच का चर्चा कुछ ज्यादा ही उत्तेजक होने वाला हैआज पहली बार वह अपनी मां के मुंह से इस तरह की बात सुन रहा था क्योंकि उसे दिन वहअपनी मां के मुंह से इस तरह की बात बिल्कुल भी सुन नहीं रहा था वह ज्यादा कुछ बोल नहीं रही थी लेकिन आज न जाने क्या हो गया था कि वह एकदम से खुलकर बोल दी थी,,, सुगंधा और सोनू की चाची की बात सुनकर सुनैना की पड़ोसन मुस्कुराते हुए बोली,,,)





काश मेरे पास औजार होता तो यही पटक कर तुम्हारी गांड में डाल देती क्योंकि कसम से तुम जब गांड मटका कर चलती हो तो मेरी हालत खराब हो जाती है,,,मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है कि बेचारा सूरज पर क्या गुजरती होगी जब वह तुम्हें चलते हुए दिखता होगा तुम्हारी गांड देखकर तो उसका लंड बार-बार खड़ा हो जाता होगा,,,,।(अपने पड़ोस वाली चाची की बात सुनकर तो सूरज के होश उड़ गए वहएकदम से उसके बारे में बोल रही थी और उसकी मां के बारे में भी बोल रही थी दोनों को आपस में जोड़कर जिस तरह का वह मुद्दा उठाई थी वह काफी उत्तेजित कर देने वाला था,,, जो कि सूरज की हालत खराब कर दे रहा थाऔर उसकी बात सुनकर सुनैना के भी होश उड़ रहे थे क्योंकि वह तो उसका सिर्फ खराबी पुलाव था लेकिन अब सुनैना को लगने लगा था कि उसके बेटे की हालत सच में उसकी गांड देखकर खराब हो जाती है तभी तो खेत में उसकी नींद का फायदा उठाकर जो हरकत उसने किया था अगर उसकी जगह कोई और औरत होती तो शायद मां बेटे के फर्क को भूलकर, खुद उसके लंड पर चढ़ जाती और जी भर कर मजा लुटती,,,, उसकी बात सुनकर तोसूरज और उसकी मां की हालत थोड़ी खराब तो हो ही रही थी लेकिन उसके सर में सुर मिलाते हुए सोनू की चाची भी बोल पड़ी,,)





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यह तो सच कह रही है मैं भी यही सोच कर हैरान हो जाती हूं दीदी,,, की कसम से तुम्हारी गांडपूरे गांव में सबसे खूबसूरत और बड़ी-बड़ी है जब कपड़े उतार कर नंगी होती होगी तो कसम से देखने वाली की हालत तो खराब हो जाती होगी मुझे तो लगता है कि भैया का लंड तुम्हारी गांड देखकर ही पानी छोड़ देती होगी,,,,,।

(सोनू की चाची की ऐसी बातें सुनकर,, सुगंधा जो अपनी साड़ी को पूरी तरह से कमर तक उठा ली थी और उसका यह अद्भुत नजारा खुद उसका बेटा उसके पीछे झाड़ियों में छुप कर बैठ कर देख रहा था।अपनी मां की मद-मस्त कर देने वाली गांड को चांदनी रात में देखकर सूरज की हालत खराब होने लगी थी,,, उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां को इस बात का एहसास नहीं था कि उसका बेटा पीछे छुपकर उसकी गांड देख रहा है वरना साड़ी कमर तक उठाने की हिम्मत कभी ना करती,,, सोनू की चाची की बात को सुनकर वह इतराते हुए बोली,,)

तुझे क्या उनके मर्द होने पर शक है,,,, पगली एक बार उनका ले लेगी ना तो सबका भूल जाएगी,,,,मेरी नंगी गांड क्या मुझे पूरी नंगी देखकर भी उनका पानी नहीं निकलता जब तक की मेरा पानी नहीं निकाल देते,,, पर तुझे यकीन ना हो तो एक बार उनसे चुदवाकर देखना बुर का भोसड़ा बन जाएगा,,,।





(सूरज को अपने कानों पर भरोसा नहीं हो रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वाकई में वह अपनी मां के मुंह से इस तरह की बातें सुन रहा हुं हो या कोई सपना देख रहा हूं,,,, अपनी मां की इस तरह की रस भरी बातें सुनकर वह पूरी तरह से सन्न रह गया था,,,, और इस समय शायद यह जायज भी था,,, क्योंकि इस समय एक पत्नी के सामने उसके पति के मर्दानगी का सवाल जो उठ गया था क्योंकि अगर वह सोनू की चाची की बात पर हामी भर देती तो उन लोगों को ऐसा ही लगता है कि उसकी जवानी की प्यास उसका पति नहीं बुझा पा रहा है जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं था और इसीलिए शायद सुनैना इस तरह का जवाब दि थी,,, उसका जवाब सुनकर सोनू की चाची तो मुस्कुरा रही थी लेकिन उसकी पड़ोसन एकदम से बोल पड़ी,,,)

जरूर इसको तो ज्यादा जरूरत है मैं तो कहती हूं भाई साहब को एक बार इसके पास भेज ही दो जो अपनी गुलाबी बुर लेकर उछलती है ना एक ही बार में भाई साहब बुर का भोसड़ा बना देंगें तब लंगड़ा के चलेगी,,,, ऐसे मानने वाली नहीं है,,,,।

अभी तो इस समय खुद दीदी की बुर सूनी पड़ी है मेरी बुर का भोसड़ा कैसे बनेगा,,,,(अपनी साड़ी को कमर तक उठते हुए सोनू की चाची बोली और एक पर्दा और उठ गया एक खूबसूरत गांड के ऊपर से,,,, सोनू की चाची की बात सुनकर दूसरी वाली औरत बोली,,,)

हां रे तू तो सच कह रही हैअभी तो भाई साहब ना जाने कहां कमाने में व्यस्त हैं खूबसूरत बीवी को बिस्तर पर तड़पता हुआ छोड़कर कसम से मैं अगर मर्द होती तो ऐसी खूबसूरत औरत को कभी छोड़कर ना जाती,,, मैं तो दिन भर इसकी बुर में लंड डालकर पड़ी रहती क्यों दीदी मेरा लंड लेती ना,,,,(वह भी अपनी साड़ी पर कमर तक उठते हुए बोली और एक साथ तीनों नंगी गांड सूरज की आंखों के सामने थी अगर इस समय कोई तीनों में से एक औरत को चोदने के लिए पसंद करने को बोलना तो वह इस समय अपनी मां को ही पसंद करता,,, क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां जैसी खूबसूरत गदराए बदन वाली औरत तीनों में से सिर्फ उसकी मां ही थी,,, उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर पहले से ही अपना लंड रगड़ कर पानी निकाल चुका था,,, वह जानता था कि उसकी मां को चोदने में अद्भुत सुख की प्राप्ति होगी। अपनी पड़ोसन की बात सुनकर सुनैना थोड़ा साउदास हो गई लेकिन फिर भी अपने आप को स्वस्थ करते हुए बोली,,)





अरे तो क्या हो गया कुछ देर बंद रहने से मशीन थोड़ी खराब हो जाएगी फिर इस मशीन का मालिक आएगा तेल पानी देगा फिर चल पड़ेगी फिर वही धुआं धुआं उठेगा,(सुगंधा एकदम से मुस्कुराते हुए नीचे बैठ गई उसकी बात सुनकर वह दोनों भी जोर-जोर से हंसने लगी लेकिन अपनी मां की बात सुनकर सूरज के तन बदन में आग लगने लगे वह समझ गया कि उसकी मां भी दूसरी औरतों की तरह ही है बस उसे खोलने की जरूरत है लेकिन ऐसा लग रहा था कि धीरे-धीरे वह खुल रही थी पहली बार जब इसी जगह पर अपनी मां कोऔरतों से बात करते हुए सुना था तब इस तरह की बातें वह बिल्कुल भी नहीं करती थी लेकिन आज उसकी बातों में मदहोशी का रस छलक रहा था जिसकापान करके सूरज का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था,,, सुगंधा के बैठने के साथ ही वह दोनों भी नीचे बैठ गई थी,,,, वाकई में औरतें इस तरह की बातें करती हैं यह जानकर सूरज के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,,वैसे तो वह जानता ही था कि मर्दों की तरह औरतों की गंदी बातें करती हैं लेकिन इतना खोलकर करती है यह आज पहली बार देख रहा था और अपनी मां को तो इस तरह की बात करते हुए जिंदगी में वह पहली बार सुन रहा था इसलिए तो उसकी हालत और ज्यादा खराब थी,,,,।

(कुछ देर तक वातावरण में खामोशी छाई रही तीनों के सिर्फ हंसने की आवाज आ रही थी लेकिन तभी सुनैना की पड़ोसन बोल पड़ी,,,)





अरे उस दिन तुझे बोली थी ना कि दीदी के लड़के से चुदवा ले बहुत मजा आएगा,,,, अब तक बात बढी कि नहीं,,,,।

उड़ा ले मजाक अभी मेरा दिन खराब है इसलिए वरनाअगर मेरा पति भी हट्टा कट्टा होता ना तो तेरे सामने उसके लंड को अपनी बुर में डलवाती,,,,,,और तुझे दिखा दिखा कर चुदवाती,,,,।

अच्छा तु इतना तड़प रही है चुदवाने के लिए,,, तो जा मैं तुझे छुट देती हूं,,,, मेरे बेटे से चुदवा ले,,, जी भर कर जितना मन करता है उतना चुदवा ले,,,(सुनैना एकदम से मस्ती में आते हुए बोली उसकी बात सुनकर सोनू की चाची की हालत एकदम खराब हो गई,,, और वह अपने मन में ही बोली इसमें तुम्हारी इजाजत लेना जरूरी नहीं है दीदी पहले से ही तुम्हारा बेटा मुझे चोद रहा है,,,,,,, सुनैना की बात सुनकर उसकी पड़ोसन एकदम से बोल पड़ी,,)

यह हुई ना बात दीदी मैं भी कब से इसे यही समझ रही हूं,,,, ले अब तो दीदी ने भी छूट दे दी है लेजा सूरज को अपने घर,,, और बना ले अपना आदमी,,,।

ना,,,,ना,,, ऐसा मत करना सिर्फ उससे चुदवाने के लिए बोल रही हूं उसे अपना आदमी बनाने के लिए नहीं बोल रही हूं फिर पता चलेगी वह तेरे घर पर ही रहने लगा तब तो मेरी सारी मेहनत पानी में मिल जाएगा,,,,।





क्यों दीदी तुम्हारी भी प्यास बुझाने लगा है क्या तुम्हारा बेटा,,,,(एकदम धीरे से सुनैना के पड़ोसन बोली तो वह एकदम से बोल पड़ी,,,)

धत् हारामी कुछ भी बोलती रहती है,,,,।

तब तुम कैसे विश्वास के साथ बोल रही हो कि सूरज दीदी की प्यास बुझा लैगा जी भर कर उनकी चुदाई करेगा,,,,

क्योंएक औरत की प्यास बुझाने का एक मेरा बेटा नहीं लगता क्या अब तो पूरी तरह से जवान हो चुका है लंबा-तंबा हो चुका है तो उसकी लंबाई के साथ-साथ उसका हथियार भी तो बड़ा हो गया होगा,,,,(सुनैना यह बात भले हीहंसी में बोल रही थी लेकिन वह अपनी बेटी के लंड का अनुभव हो चुकी थी वह जानती थी कि उसके बेटे का लंड कितना दमदार है,,, सुनैना की बात सुनकर सोनू की चाची बोल पड़ी,,)

बात तो सही कह रही हो दीदी तुम्हारा बेटा किसी भी औरत की प्यास बुझाने लायक तो हो ही गया है हट्टा कट्टा शरीर बांका नौजवान, बन चुका है,,,।

ओ हो,,,, लगता है कि अब सूरज पर नजर बिगड़ने लगी है तुम्हारी,,,(सुनैना की पड़ोसन एकदम से बोल पड़ी,,,)

नहीं रे ऐसी कोई बात नहीं है लेकिन जिस दिन से तूने सूरज के बारे में जिक्र की है तब से न जाने क्यों सूरज को देखती हूं तो बदन में कुछ कुछ होने लगता है,,,,(मुस्कुराते हुए सोनू की चाची बोल रही तो यह सुनकर पीछे बैठकर एक साथ तीनों औरतों की गांड देख रहा सूरज मन ही मन में प्रसन्न होने लगा,,,,,,, वह यह देखकर और खुश हो रहा था कि कैसे सोनू की चाची बात बना रही है क्योंकि अपने मुंह से सच्चाई तो बात नहीं सकती की जिसके बारे में तुम बात कर रही हो उसका लंड मेरी बुर में न जाने कितनी बार अंदर बाहर हो चुका है,,,,,,सुनैना भी सोनू की चाची की बात सुनकर उसकी तरफ हैरानी से देखने लगी और मुस्कुराने लगी उसे इस बात से खुशी थी कि उसका बेटा पूरा मर्द बन चुका है गांव की औरतों की नजर में बात धीरे-धीरे बसने लगा है,,,क्योंकि वह अभी हकीकत से वाकिफ नहीं थी उसे लग रहा था कि यह सब शुरुआत है अभी तक उसका बेटा किसी भी औरत की संगत में आया नहीं है किसी भी औरत के साथ जिस्मानी तालुका बनाया नहीं है इसलिए वह इस बात से तसल्ली नुमा खुश थी लेकिन वह यह बात नहीं जानती थी कि उसका बेटा गांव की अब धीरे-धीरे कई औरतों के साथ संबंध बन चुका था और उसके जीवन में सोनू की चाची भी आ चुकी थी,,,, सोनू की चाची की बात सुनकर सुनैना बोली,,,)





क्या बात है,,, इसकी,,(अपने पड़ोसन की तरफ हाथ से इशारा करते हुए) बातों ने लगता है तेरा दिमाग घुमा दिया है,,,, सच-सच बताना मेरे बेटे को देखकर तेरी बुर गीली हो जाती है क्या,,,,?

(जवाब में बिना कुछ बोलेसोनू की चाची मुस्कुराने लगी और शर्माने लगी उसे लग रहा था कि यही सही मौका है इस बात का अंदेशा दिलाने का की उसके बेटे की तरफ वह आकर्षित है ताकि भविष्य में अगर वह पकड़ी जाए तो उन लोगों को उसे पर उतना गुस्सा ना आए क्योंकि इसके लिए वह लोग ही उसे उकसा रही थी,,,, उसका इस तरह से शर्माना देखकर सोनू की चाची फिर से बात को छेडते हुए बोली,,,)

बताना क्या हुआ शर्मा क्यों रही हैमैं भी तो सुनो की मेरे बेटे को देखकर गांव की औरतों को क्या-क्या हो रहा है,,,,,( अंदर ही अंदर सुनैना खुश होते हुए बोलीऔर ऐसा हुआ इसलिए बोल रही थी क्योंकि खेत में उसके बेटे ने जिस तरह से उसे पूरी तरह से मदहोश कर दिया था उसे मदहोशी में वह इस समय भूल चुकी थी कि वह किसके बारे में बात कर रही हैअपने ही बेटे के बारे में वॉइस खराब की बातें कर रही थी और गांव की औरतों को उसके साथ संबंध बनाने के लिए क्रेडिट कर रही थी जो कि यह पूरी तरह से मदहोशी में कह रही थी वरना हकीकत में कोई भी मन अपने बेटे को गांव की औरतों के साथ संबंध बनाने के लिए कभी नहीं रहती और शायद सुनैना भी इस तरह सेमजाक की मजाक में सोनू की चाची को अपने ही बेटे के साथ संबंध बनाने के लिए प्रेरित ना करती,, सुनैना की बात सुनकर सोनू की चाची को थोड़ी हिम्मत मिल रही थी वह अपने मन में सोच रही थी कि जब सूरज की मां ही उसे बोल रही है तो भला वह क्यों पीछे हट जाए,,, और इस बात से वह वाली भांतिपरिचित थी कि आज नहीं तो कल जो कुछ भी वह सूरज के साथ कर रही है किसी न किसी को पता तो चली जाएगा अगर यह बात उड़ते हुए सूरज की मां को पता चल गया तो गजब हो जाएगा इसलिएइसी समय अपने मन में क्या है वह बता दे ताकि भविष्य में किसी भी तरह का तकरार ना हो मनमुटाव ना हो क्योंकि अगर तब पता चलेगा और सुनैना उसे भला बुरा कुछ कहेगी तो वहां भी बोल सकती है कि तुम ही ने तो प्रेरित किया था अपने ही बेटे के साथ संबंध बनाने के लिए। इसलिए वह सुनैना की बात सुनकर मुस्कुराते हुए बोली,,)





सच कहूं तो दीदी पहले ऐसा कभी नहीं होता था सूरज को जब भी अपनी आंखों के सामने देखी थी तो उसे अपने बेटे के रूप में ही देखी थी उसे देखकर मेरे मन में कुछ भी होता नहीं था लेकिन तुम लोगों की बातों ने हीं मेरे दिमाग को एकदम बदल सा दिया है,,, अब जब भी सूरज को सामने देखती हूं तो न जाने मेरे बदन में क्या होने लगता है और सच बताऊं तो दीदी मेरी बुर पानी छोड़ने लगती हैं,,,, और तुम शायद ठीक कह रही हो तुम्हारा बेटा सूरज मजबूत बुझाओ वाला है उसका शरीर देखो कितना हट्टा कट्टा है। मुझे भी तुम्हारी बात सच लगती है कि उसके शरीर की तरह उसका लंड भी लंबा होगा,,,,,।

(सोनू की चाची की बात सुनकर सूरज बहुत खुश हो रहा था और वह धीरे से अपने पजामे में से अपने लंड को बाहर निकाल लिया था और एक साथ उन तीनों की गांड देखकर और उनकी मध्य भरी बातें सुनकर उसे हिलाना शुरू कर दिया था,,,,,सूरज की तरह ही सुनैना का भी हालत हो रहा था एक पराई औरत के मुंह से अपने बेटे की मर्दाना ताकत की तारीफ सुनकर उसके बदन में भी उत्तेजना की लहर उठ रही थी और बुर से मदन रस टपक रहा था,,,, उसकी बातें सुनकर

एक पल के लिए सुनैना का मन हुआ कि इसी समय वह सोनू की चाची को बता दे कि वाकई में उसके बेटे का लंड बहुत लंबा और मोटा है,,,, वह सोने की चाची से कहना चाहती थी कि तुझे तो केवल अंदाजा लगाकर यह बोल रही है लेकिन मैं तो पूरा अनुभव ले चुकी हूं,,,,बड़ी-बड़ी गांड होने के बावजूद भी उसका लंड बुर तक बड़े आराम से चला जाता है कसम से तू अगर उसका लंड लेगी तो पागल हो जाएगी,,,, लेकिन वह यह बातें अपने मुंह से नहीं कह सकती थी लेकिन सोनू की चाची की बात सुनकर उसे करो महसूस हो रहा था और वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,,, सोनू की चाची की बात सुनकर सुनैना की पड़ोसन बोली,,,)





हाय दैया जब बेटे की मां तैयार हो गई है तो देर किस बात की है,,,, तुम्हें तो जल्द से जल्द सूरज के लंड को अपनी बुर में ले लेना चाहिए शायद उसकी चुदाई से ही तो मां बन जाओ,,,,।

चल रहने दे जब वक्त आएगा तब देखा जाएगा,,,, वैसे तुम बताओ दीदी सूरज क्या तुम्हेंऐसी वैसी नजर से देखा है तुम हो तो इतनी खूबसूरत घर में तुम्हें कपड़े बदलते हुए नहाते हुए तो देखा ही होगा,,,,।

क्यों ऐसा क्यों पूछ रही है,,,?

बस ऐसे ही क्योंकि मैं जानती हूं कि तुम पूरे गांव में सबसे ज्यादा खूबसूरत हो जरूर तुम्हारा बेटा भी तुम्हें प्यासी नजरों से देखा होगा तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड बड़ी-बड़ी चूची देखकर उसका भी लंड खड़ा हो जाता होगा।

धत्,,,, यह कैसी बातें कर रही है भला एक मां को देखकर किसी बेटे का लंड खड़ा होता है क्या,,,?(शरमाते हुए सुनैना बोली,,,पहले उसे भी लगता था कि एक बेटा भला अपनी मां को गंदी नजर से कैसे देख सकता है लेकिन खेत में जिस तरह की हरकत उसने किया था उसे यकीन हो गया था कि शायद अपनी मां की खूबसूरती देखकर हर बेटे का यही हालत होता है,,,, सुनैना की बात सुनकर सोनू की चाची बोली,,,)

क्यों नहीं दीदी वैसे भी जब नंगी कभी अपनी बेटी के सामनेखड़ी हो जाओगी तो वह यह नहीं देखेगा कि तुम उसकी मां हो तुम्हारे में उसे एक औरत दिखेगी खूबसूरत औरत और जरूर उसका लंड खड़ा हो जाएगा शायद तुम्हें यकीन नहीं होगा यह मैं अनुभव से बोल रही हूं,,,,।

अनुभव से मैं कुछ समझी नहीं,,,( सुनैना की पड़ोसन बोल पड़ी)





अरे अभी 2 दिन पहले ही मैं घर के पीछे नहा रही थी और मुझे तो मालूम नहीं था कि कोई मुझे देख रहा है,,,, मैं धीरे-धीरे अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी होगी और नहाना शुरू कर दी,,, और तभी पीछे लोटा गिरने की आवाज आई और पीछे मुड़कर देखी तो मेरे तो होश उड़ गए,,,,।

क्यों ऐसा क्या हो गया,,,(सुनैना उत्सुकता दिखाते हुए बोली)

अरे पीछे सोनू खड़ा था और मुझे नंगी नहाते हुए देखकर अपना हिला रहा था मैं तो देख कर एकदम से चौक गई,,,,,।

ओहहहह ,,,, फिर क्या हुआ ,,,,(सुनैना की पड़ोसन बोली)

फिर क्या मैं तो डर गई मैं कुछ बोलती ईससे पहले सोनू वहां से भाग गया,,,,।

हाय दइया इतना हारामी है सोनु,,,,(आश्चर्य जताते हुए सुनैना बोली,,,,)

तो क्या मुझे भी नहीं मालूम था,,,,पहली बार मुझे ऐसा सुबह की घर पर जवान लड़के का होना एक औरत के लिए कितनी मुसीबत बन जाती है,,,,,।

तब तुमने उसकी मां को नहीं बताई,,,

नहीं दीदी मैं नहीं बताई क्या पता वह खुद इल्जाम लगा दे कि मेरे बेटे को बहलाती है अपनी तरफ आकर्षित करती है,,,, क्योंकि वह तो जानती ही हैं कि,,, मेरा पति कैसा है,,,, इसीलिए कहती हूं दीदीघर में जवान लड़का हो तो खूबसूरत औरत को तकलीफ हो ही जाती है,,,, या तो तकलीफ होती है या तो औरत भी उसमें मजा लेने लगती है। और दीदी तुम्हारे घर में तो मुझे लगता है कि और भी ज्यादा तकलीफ पड़ जाती होगी जब मेरा यह हाल है,,,तुम तो पूरे गांव में सबसे ज्यादा खूबसूरत है और तुम्हारा लड़का भी पूरी तरह से जवान हो चुका है क्या वह भी तुम्हें देखता है,,,।

(सोनू की चाची जो कुछ भी बता रही थी वह पूरा मनगढ़ंत था वह सिर्फ ऐसा जताना चाहती थी कि घर में अगर जवान लड़का हो तो औरत के प्रति आकर्षण होना लाजिमी ही है भले ही वह किसी भी रिश्ते से बंधा हो,,, इस बात को सुनैना भी अच्छी तरह से जानती थी, क्योंकि इसका अनुभव उसे हो चुका था। इस बात को जानते हुए भी वह अपनी तरफ से सफाई देते हुए बोली,,,)

नहीं नहीं मेरा बेटा ऐसा बिल्कुल भी नहीं है मुझे तो कभी नहीं लगा कि वह मुझे देखता है,,,,,।

(झाड़ियां के पीछे छुपकर देख रहा और सुन रहा सूरज अपनी मां की बात सुनकर मन ही मन में मुस्कुरा रहा थाक्योंकि उसे भी थोड़ा बहुत अंदेशा था कि उसकी मां को पता है कि वह उसे देखा है और वह भी सहज रूप से नहीं बल्कि गंदी नजर से सुनैना की बात सुनकर सोनू की चाची शंका जताते हुए बोली,,)





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मुझे तो बिल्कुल भी नहीं लगता दीदी घर में तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत हो और जवान लड़के का मन ना बहके ऐसा हो नहीं सकता,,,।

अब तुझे क्या लगता है यह मैं नहीं जानती लेकिन जो कुछ भी है मैं सब कुछ बता रही हूं अब ऐसा तो है नहीं कि मैं घर में अपने बेटे को अपनी गांड दिखाते घूमती रहूं,,,, चल अब बस बहुत हो गया बहुत समय हो गया है,,,,,,(इतना कहकर सुनैना डिब्बे से पानी लेकर अपनी गांड धोने लगी और फिर उसको देखकर उन दोनों ने भी अपनी गांड धोना शुरू कर दिया,,,,यह देखकर सूरज की हालत और ज्यादा खराब होने लगी और वहां अपनी मां के साथ-साथ दोनों औरतों की बड़ी-बड़ी गांड देखकर जोर-जोर से अपना लंड हिलाना शुरू कर दिया और अगले ही पल वह झड़ गया,,,,, सुनैना और वह दोनों औरतेंअपना डिब्बा लेकर गांव की तरफ जल्दी और उनके जाने के बाद धीरे-धीरे सूरज भी गांव की तरफ जाने लगा,,,)
 
सुनैना और दोनों औरतें,,,सौच करते समय मादक और रसभरी बातें करके गांव की और जाने लगे थे उनके पीछे-पीछे दूरी बनाकर सूरज भी वापस लौट रहा थाजो कुछ भी आज उसने अपनी मां के मुंह से सुना वह काफी दंग कर देने वाला था इस तरह की पहली मुलाकात में उसने अपनी मां के मुंह से इस तरह के अश्लील शब्दों का प्रयोग करते हुए नहीं सुना था लेकिन आज की बात कुछ और थीआज उसे साफ पता चल रहा था कि उसकी मां का मिजाज कुछ बदला हुआ थाऔर यह सब कैसे हो गया उसे बिल्कुल भी नहीं मालूम था खेत में जो कुछ भी हुआ थासूरज को ऐसा ही लग रहा था कि उसकी मां की गहरी नींद में होने से उसने ऐसा कर पाया था लेकिन जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं था वह इस बात को नहीं जानता था कि उसकी मां नींद में नहीं थी जाग रही थी जितना मजा उसने उसकी नींद में होने का उठाया था उतना ही मजा नींद में होने का नाटक करके उसने भी ली थी,,,। लेकिन सूरज इस बात से अनजान था और आज अपनी मां को इस तरह से खुले शब्दों में बात करते हुए देखकर पूरी तरह से उत्तेजना से भर गया था,,,।

सूरज की किस्मत बहुत तेज थी अपनी मां के साथ-साथ दोनों औरतों को वह दूसरी बार एक साथ सौच करते हुए देख लिया था,,,एक साथ अपनी आंखों के सामने तीन-तीन नंगी गांड देखना यह किस्मत की ही बात थी और वह भी इतने करीब से जिसमें सूरज की खुद सपनों की मल्लिक भी शामिल थी उसकी मां जिसे हर वक्त नंगी देखने का वह आदि हो चुका था,,, सोनू की चाची का वह भोग पहले से ही लगा चुका था इसलिए सोनू की चाची भी उसके जीवन में हम भूमिका रखती थी,, क्योंकि उसके जीवन में औरतों के प्रति आकर्षण जगाने में सर्वप्रथम सोनु की चाची का ही प्रथम और प्रमुख योगदान था,,, जिसमें खुद सोनू ही सहकार किया था,,, वैसे तो अपनी आंखों के सामने तीन-तीन औरतों को कमर तक साड़ी उठाकर बैठी हुई देखकर सूरज का मन बेहद ललच रहा था,,,और वह अपने मन में सोचता भी था कि अगर एक साथ तीनों की चुदाई करने को मिल जाए तो कितना मजा आए एक की बुर में से लंड निकालो तो दूसरे की बुर में दूसरी की बुर में से निकालो तो तीसरी की बुर में,,, जीवन जीने का यही सही तरीका भी है काश ऐसी किस्मत होती तो कितना मजा आता,,, सूरज का एहसास सोचना जायज भी थाक्योंकि उसकी किस्मत इतनी तेज थी कि उसका सोचा सच भी हो सकता था,,,गांव के लड़के की उम्र में शायद उसके जैसा सुख नहीं रोक पाए थे और वह था कि आए थे नई-नई औरतों की बुर पर कब्जा जमा रहा था,,। तीनों औरतों की नंगी बड़ी-बड़ी गांड देखकर कर वह अपने हाथ से ही हिला कर पानी निकाल चुका था,,, जबकि उसे ऐसा करने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि उसके पास अपनी जवानी की गर्मी मिटाने के लिए जुगाड़ मौजूद था मुखिया की बीवी से लेकर के उसकी खुद की बहन रानी थी,,,जिसके साथ चुदाई करके वह अपनी जवानी की गर्मी शांत कर सकता था लेकिन उसकी आंखों के सामने जो कुछ भी दिखाई दे रहा था वह बेहद अद्भुत और अतुलनीय था।

अपनी आंखों के सामने केमादकता भरे नजारे को देखकर वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाया था और उन तीनों को गांड धोकर खड़े होते होते वह अपने हाथ से हिला कर अपना पानी निकाल चुका था,,,,, थोड़ी ही देर में वह अपने घर पहुंच चुका था,,,, कुछ देर तक वह घर के बाहर ही इधर-उधर घूमता रहा खाने का समय हो रहा था उसकी मां कब से हाथ पैर धोकर खाना खाने की तैयारी में लग गई थी,,, खाने की थाली लगाकर उसकी मां रानी को उसे बुलाने के लिए भेजी और वह घर के बाहरजाकर देखने लगी तो सूरज बाहर ही खटिया पर बैठा हुआ था उसे देखते ही वह खाना खाने के लिए बोली और यहां भी हाथ पैर धोकर खाना खाने के लिए आनंद में चला गया जहां पर पहले से ही उसकी मां तीन थाली लगाकर बैठकर इंतजार कर रही थी,,,। सूरज को देखते ही वह बोली,,,।

क्यों रे अभी तो यही था कि मेरे जाते ही कहां निकल गया,,,, जब देखो तब इधर उधर घूमता ही रहता है,,,,।

अरे कहीं नहीं मां तुम गई तो मैं भी थोड़ा इधर-उधर गांव में घूमने लगा,,,,,(सूरज अपनी मां कोजवाब देते हुए बोला मन तो कर रहा था कि बोल दे कि तुम्हारे पीछे-पीछे ही गया था तुम्हारी गांड देखने के लिए लेकिन ऐसा वह बोल नहीं सकता था,,,)

अच्छा चल आकर खाना खा ले,,, हाथ पैर तो धोया है ना,,,।

हां अभी-अभी तो धोकर आ रहा हूं,,,,(इतना कहकर वह अपनी मां के सामने ही बैठ गया और एक थाली अपनी तरफ सरका लिया दूसरी तरफ उसकी बहन रानी बैठ गई और तीनों बैठकर खाना खाने लगे,,, सुनैना चोर नज़रों से अपने बेटे की तरफ देख रही थी और अपने आप से ही बोल रही थी देखो तो चेहरा कितना मासूम है इसका चेहरा देखकर कोई कह नहीं सकता की इतनी गंदी हरकत यह कर सकता है,,, और हरामि का लंड कितना मोटा और लंबा है,,, मासूम चेहरा देखकर कोई बात नहीं सकता की इसके पास गजब का मुसल होगा,,, और सही बात है चेहरा देखकर कोई किसी के भी लंड की लंबाई और मोटाई की कल्पना नहीं कर सकता जब तक कि वह अपनी आंखों से देख ना ले,,,, अपने बेटे की तरफ कर नजरों से देख कर सुनैना अपने मन में बहुत सारी बातें सोच रही थी,,,,उसे यकीन नहीं हो रहा था कि खेत में जिस तरह की हरकत उसका बेटा कर रहा थाउसे यकीन नहीं हो रहा है कि उसकी आंखों के सामने उसका वही मासूम बेटा बैठा हुआ है,,, लेकिन समझ में नहीं आता कि यह ऐसी हरकत करने पर उतारू कैसे हो गया ऐसा क्या हो गया कि वह इस तरह की गंदी हरकत अपनी मां के साथ कर दिया,,,।

अपने मन में उठ रहे इस सवाल का जवाब वह खुद ही अपने आप से ढूंढते हुए अपने मन में बोली,,, जरूरसूरज उसे पेशाब करते हुए देखकर ही इस तरह की हरकत करने पर मजबूर हो गया होगा उसकी नंगी बड़ी-बड़ी गांड देखकर उसका मन डोल गया होगा आखिरकार पूरी तरह से जवान हो चुका है उसकी आंखों के सामने कोई खूबसूरत औरत अपनी गांड दिखाते हुए पेशाब करेगी तो ऐसे में उसका मन तो डोलेगा ही,,,, हां हां मुझे पूरा यकीन है कि मुझे पेशाब करते हुए देखकर ही वह बहक गया होगा,,, आखिरकार गांव की और तुमसे कुछ ज्यादा ही खूबसूरत जो हूं,,, ऐसा तो खुद मेरा बेटा ही बोलता है मेरी खूबसूरती की तारीफ करता है उस दिन बात ही बात में वह मेरी खूबसूरती की तारीफ के साथ-साथ मेरे पिछवाड़े के बारे में भी तो बोला था,,,, वह एकदम साफ लफ्जों में बोला था किमेरी जैसी कई हुई और बड़ी-बड़ी गांड पूरे गांव में किसी औरत की नहीं और शायद यही वजह थी कि,,, मुझे पेशाब करते हुए देख लेने के बाद मेरे बेटे की हालत खराब हो गई और वह खेत मेंमेरी गहरी नींद का फायदा उठाते हुए अपने मुसल को मेरी गांड में बराबर कर रगड़ कर पानी निकाल दिया,,,, सुनैना अपने मन में यही सब सो रही थी और यह सब सोचने पर उसकी बुर पानी छोड़ रही थी,,,,।

दूसरी तरफ सूरजअपनी मां की तरफ देख ले रहा था और वह भी यही सोच रहा था कि इतनी मासूम और खूबसूरत दिखने वाली औरत इस तरह की बात करती होगी मुझे यकीन नहीं हो रहा है,,,, अभी तक तो भाई इस तरह की बात नहीं करती थी लेकिन आज एकाएक उसका सुर बदल गया था,,, शायद ऐसा हो सकता है कि बदन में सुरसुराहट होती है बुर में कुलबुलाहट होती हो क्योंकि काफी समय हो गया है बुर में लंड लिए इसीलिए बदन की जरूरत शब्दों के जरिए बाहर निकल रही है,,,, काश यह मौका मिल पाता कि मैं खुद मां की जवानी की प्यास बुझा पाता तो कितना मजा आता,,,, सूरज खाना खाते हुए ऐसा सोचकर मन ही मन में मत हुआ जा रहा थाअपनी मां के बारे में इस तरह के ख्याल अपने मन में लाना उसे काफी उत्तेजित कर दे रहा था,,,,। और दूसरी तरफ रानी अपने अलग ही ख्यालों में खोई हुई थी,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे उसे उसकी मां का राजकुमार मिल चुका था और उससेमुलाकात के लिए तड़प रही थी लेकिन उसके सामने समस्या यह थी कि ना तो वह उसका नाम जानती थी नहीं उसका पता ठिकाना जानती थी बस इतना ही जानती थी कि वह किसी राजघराने से संबंध रखता था।

खाना खा लेने के बाद,,, सुनैना और रानी थोड़ी बहुत सफाई करने के बाद अपने अपने कमरे में चले गएअपने कमरे में जाते ही सुनैना की वही हालत थी कमरे में जाते ही दरवाजे की कड़ी लगाकर वह अपने सारे कपड़े उतार कर अपने हाथों से अपनी जवानी की प्याज बढ़ाने की नाकाम कोशिश करती रही और दूसरी तरफ सूरज अपनी बहन के कमरे में जाकर उसकी चुदाई करता रहा,,,, रानी का रात का कार्यक्रम लगभग एक जैसा ही हो गया था,,,लेकिन हर रात को उसे लगता था कि जैसे आज उसकी पहली रात हो सूरज इस तरह से उसकी चुदाई करता था वह पूरी तरह से मत हो जाती थी लेकिन जब से घुड़सवार को देखी थी तब से उसके मन में उसे घुड़सवार की तस्वीर पूरी तरह से अंकित हो चुकी थी जिसके बारे में वह दिन रात सोचती रहती थी यहां तक कि जब भी उसका भाई उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता था तभी अपने भाई के चेहरे में वह उसे घूडसवार का चेहरा दिखाई देने लगा था मन ही मन में वह उस घुड सवार से प्रेम करने लगी थी।

दूसरे दिन खेत पर सुनैनाकी आराम करने की हिम्मत नहीं हुई उसे इस बात का डर था कि अगर वह फिर से आराम करने के लिए खटिया पर लेट जाएगी तो उसका बेटा फिर से वही हरकत दोहराएगाऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि उसका मन नहीं कर रहा था उस हरकत का मजा लेने के लिए,,,वह भी अपने बेटे की इस हरकत का मजा फिर से लेना चाहती थी लेकिन एक मां होने के नाते उसे संकोच महसूस हो रहा था,,, वह एक मर्यादाशील औरत थी और वह जानती थी कि इस तरह की हरकत से उसकी मर्यादा की दीवार टूटने में जरा भी वक्त नहीं लगेगा उसी दिन उसकी मर्यादा की यह दीवार टूट गई होती है अगरउसके बेटे सूरज का लंड उसकी बुर में प्रवेश कर गया होता तो क्योंकि उसकी हरकत से ही वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी इसलिए आज वह आराम करने की हिम्मत नहीं कर पाई थी,,,और सूरज ने भी उसे आराम करने के लिए नहीं बोला था सूरज को इस बात कर रहा था कि उसकी मां को जरा भी शक हो गया तो बात बिगड़ सकती है इसलिए वह अपनी मां को दोपहर में आराम करने के लिए बिल्कुल भी नहीं बोला था।

शाम को घर लौट के बाद सूरज अपने मन में सोचा कि चलो गांव में घूम कर थोड़ा देख लो और थोड़ा जिसके घर साथी है उसके घर भी जाकर देख लो क्या माहौल है यही सोचकर वहां शाम को गांव घूमने के लिए निकल गया और चलते-चलते वह लाडो के घर पर पहुंच गया,,, जहां पर शादी की तैयारी हो रही थी लाडो के घर के लोग उसके चाचा उसके मामा जोशादी में आए थे वह लोग शादी की तैयारी में लगे हुए थे सभी लोग अपना-अपना काम कर रहे थे सूरज कुछ देर वहीं खड़ा होकर सब कुछ देख रहा था,,,, तभी उसकी नजर कुछ औरतों पर पड़ी जो गोलाई बनाकर घेरे हुए थी और गाना गा रही थी,,,, उत्सुकता वश सूरज उन औरतों के करीब पहुंच गया तो देखा कि वह औरतें हल्दी की रस्म निभा रही थी सूरज को समझने के लिए नहीं लगी कि जिसे हल्दी लग रही है उसका ही नाम लाडो है,,,, लाडो को देखते ही वह इस गौर से देखने लगा और अपने मन में सोचने लगा यह तो वही लड़की है कल तक उसकी नाक बहती थी और आज देखो पूरी तरह से जवानी से खीली हुई है,,,उसे याद आया की बचपन में वह उसके साथ खेल चुका था और वह उसे अच्छी तरह से जानती थी वह उसे देखकर मुस्कुरा रहा था कि तभी दूर से आवाज आई,,,,।

,,, सूरज,,,, ओ,,,,,, सूरज,,,,, इधर आ तो बेटा,,,,,।

(यह आवाज कानों में पडते ही सूरज पीछे की तरफ देखने लगा,,,, कुछ ही दूरी पर,,, वहशख्स कुर्सी पर बैठा हुआ था जिसे देखकर सूरज को समझते देने लगी कि वह लाडो के पिताजी थे वह तुरंत उनके पास गया और बोला,,,)

नमस्ते चाचा जी,,,,।

खुश रहो बेटा,,,, देखो सूरज तुम्हें भी मैं शादी का कार्यभार सौंप रहा हूं,,,, रसोई की सारी तैयारी करने की जिम्मेदारी में तुम्हें सोंपता हूं,,,,और यहां पर कोई लड़का मुझे ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है जो इस जिम्मेदारी को अच्छी तरह से निभा पाएगा मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि तुम एक जिम्मेदार लड़के हो और इस जिम्मेदारी को अच्छी तरह से निभा पाओगे,,,,।

जी चाचा जी जैसा आप ठीक समझे मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगा और किसी भी तरह कि शिकायत का मौका नहीं दूंगा,,,।

शाबाश बेटे मुझे तुमसे यही उम्मीद थी,,,,,। अभी थोड़ा सामान आने वाला हैआलू प्याज मसाले वगैरा तुम उसे कमरे में रखवा देना मैं तब तक दूसरा काम देख लेता हूं,,,,(इतना कहकर लाडो के पिताजी वहां से उठकर खड़े हो गए और दूसरी तरफ चले गए सूरज को इस तरह की जिम्मेदारी मिलते ही उसके चेहरे पर एक गर्व की लालिमा छा रही थी उसेलगने लगा था कि अब वह इस तरह की जिम्मेदारी को अच्छी तरह से उठा सकता है और वह तुरंत कुर्सी पर बैठ गया और उन औरतों की तरफ देखने लगा जो अभी भी हल्दी की रस्म निभा रही थी,,,, थोड़ी देर में हल्दी की रस्म पूरी हो गई और लाड़ो अपने कमरे में चली गई,,, सूरज उसे जाता हुआ देख रहा थाऔर कुछ ही वर्षों में जिस तरह का बदलाव उसके बदन में आया था इसका जायजा ले रहा था उसके कमर के नीचे का भार उसके नितंबों का घेराव जिस तरह से फला फुला था उसे देखकर उसका लंड फुलने लगा था वाकई में,,, लाडो पूरी तरह से जवानी से भरी हुई थी,,, लाडो अपने कमरे में जा चुकी थी और थोड़ी ही देर में उसके पिताजी के कहे अनुसार आलू प्याज और कुछ मसाले लेकर एक आदमी आ चुका था और सब कुछ अपनी निगरानी में वह उसे वहीं पर उतरवा लिया था,,,, वह सामान के पास कुर्सी पर बैठा ही था कि तभी लाडो की मां वहीं से गुजरने लगी तो सूरज एकदम से अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और बोला,,,)

नमस्ते चाची,,,,।

खुश रहो बेटा,,, तुम तो सूरज हो ना अपने भोला के बेटे,,,।

जी चाची,,,, अच्छा चाची यह रसोई का समान है इसे कहां रखवाना है,,,।

बेटा इस सामने ले जाकर कमरे में रख देना,,,।

ठीक है चाची,,,,(इतना कहकर वहां दूसरी ओर चली गई धीरे-धीरे अंधेरा बढ़ने लगा था और जो काम सूरज को मिला था उसे करना जरूरी था,,, वह आलू का बोरा उठाया और अपने कंधे पर रख लिया और सामने कमरे की तरफ जाने लगा,,,,घर में प्रवेश करते ही उसे समझ में नहीं आ रहा कि किसी और जाना है दोनों तरफ कमरे बने हुए थे और सामने पतली सी जगह थी जिसके पीछे भी कमरे बने थे,,,, कुछ देर वही आलू की बोरी लेकर खड़े रहने के बाद वह बगल वाले कमरे की तरफ जाने लगालेकिन देखा तो कमरा बंद था उसे पर ताला लगा हुआ था इसलिए वह थोड़ा सा और आगे बढ़ गया और दरवाजे के पास आकर खड़ा हो गया दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था और वह बिना आवाज दिए ही अंदर प्रवेश कर गया,,,, अंदर प्रवेश करते ही देखा तो सामने लाडो बैठी हुई थी,,,, उसे देखते ही सूरज एकदम से खुश होता हुआ बोला,,,)

अरे लाड़ो,,,,(आलू की बोरी को कमरे के कोने में रखते हुए) तू तो एकदम बड़ी हो गई रे

लाडो जो इस तरह से कमरे का दरवाजा खुलने से थोड़ा घबरा गई थी वह सूरज को पहचानती थी उसकी आवाज को पहचानती थी इसलिए एकदम से खुश होते हुए बोली,,,,।

अरे सूरज तु यहां,,,,, यह क्या कर रहा है,,,।

तुम्हारे पिताजी ने ही मुझे रसोई का काम देखने के लिए बोला है इसलिए रसोई का सामान यहां लेकर आ रहा हूं,,,, लेकिन लाडो देखते ही देखते तुम इतनी बड़ी हो गई कि आज तुम्हारी शादी हो रही है बोलो,,,,।(सूरज खुश होता हुआ बोला)

मुझे तो बहुत डर लग रहा है सूरज,,,,

डर ,,,, कैसा डर,,,,तुम्हें तो खुश होना चाहिए गांव की लड़कियों की शादी होती तो वह कितना खुश हो जाती है और तुम हो कि डर रही हो,,,,।

पता नहीं क्यों लेकिन मुझे डर लग रहा है,,,,।

ओहहह अब समझा तुम किस लिए डर रही हो,,,(अपनी कमर पर हाथ रखते हुए) तुम्हारा डर थोड़ा जायज है क्योंकि कल के बाद एक नए माहौल में एक नए घर में नए व्यक्तियों के साथ तुम्हारी मुलाकात होगीतुम्हारा अपना पति इसके बारे में तुमको जानती नहीं होगी ऐसे शख्स से तुम्हारी मुलाकात होगी तो थोड़ा बहुत तो डर मन में होगा ही,,,,,,।

तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो सूरज,,, मेरा मन यही सोच सोच कर घबरा रहा है कि क्या होगा कैसे होगा,,,(इतना कहते हुए वहां अपने बिस्तर से उठकर खड़ी हो गई और सूरज के पास आ गई,,, लाडो पूरी तरह से मासूम थी भले ही शादी के लायक हो चुकी थी और कल उसकी शादी थी लेकिन अभी तक वह शरीर सुख प्राप्त नहीं कर पाई थी और यही उसके मन में डर बना हुआ था कि कल क्या होगा शादी के बाद उसका पति उसके साथ कैसे पैश आएगा,,,, कमरे में लालटेन चल रही थी जिसकी रोशनी में लाडो का चेहरा एकदम साफ दिखाई दे रहा था लालटेन की पीली रोशनी में हल्दी लगाई हुई लाडो भला की खूबसूरत लग रही थी उसे देखकर सूरज के दिल में कुछ-कुछ हो रहा था लाडो की बात सुनकर वह मुस्कुराते हुए बोला,,,)

सब ठीक होगा तुम इतनी खूबसूरत हो कि तुम्हारा पति तुम्हें देखता ही रह जाएगा,,,(सूरज अपनी कलाबाजियां बिखरने लगा था अपनी बातों की बाण को लाडो के मन पर चलने लगा था इस बात को अच्छी तरह से जानती थे की औरत को क्या सुनना पसंद है और इस समय वह वही कर रहा था,,, सूरज के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर लाडो मन ही मन खुश होने लगी,,,, फिर भी उसकी बात सुनकर वह बोली,,,)

मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,, और वैसे भी इस घर को छोड़कर जाने का मन नहीं कर रहा है,,,।

यह तो होना ही है लाडो लड़कियों को मां-बाप का घर छोड़ कर जाना ही पड़ता है तभी तो वह एक नई दुनिया बसाती है और सही पूछो तो मजा तो शादी के बाद ही आता है,,,, पर मुझे मालूम है कि तुम्हारे मन में किस बात को लेकर घबराहट है,,,,।

किस बात को लेकर,,,,,( लाडो भी अपने दोनों हाथ को कमर पर रखते हुए बोली उसकी यह अदा देखकर,,, सूरज के लंड ने अंगड़ाई लेना शुरू कर दिया था उसका तो मन कर रहा था कि इसी समय लाडो को अपनी बातों में लेकर सुहागरात के पहले ही वह खुद उसके साथ सुहागरात मना ले लेकिन इस समय यहां पर किसी के भी आने की आशंका बनी हुई थी इसलिए वह अपने मन को मनाते हुए बोला,,,)

देखो मुझे मालूम है लेकिन तुम्हारे सामने कहना मुझे ठीक नहीं लग रहा है,,,,,,(उसका इतना कहना था कि तभी वहां पर किसी के आने की आहट सुनाई थी और सूरज अपने आप को एकदम से संभालते हुए धीरे से बोला,,,) लेकिन कल जाते-जाते तुम्हें मैं बता दूंगा,,, और अच्छी तरह से समझा दूंगा तुम्हारे मन से डर बिल्कुल निकल जाएगा,,,,(उसका इतना कहना था कि लाडो की मां वहां पर आ गई और बोली,,,)

बेटा सूरज बाकी का सामान भी यहां पर रख दो,,, और कल समय पर आ जानाअब शादी में रसोई की जिम्मेदारी तुम्हारी ही है,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो चाची,,,, लाडो मेरी भी तो बहन है,,, कोई कमी नहीं आने दूंगा,,,।

बहुत अच्छे बेटा,,,, अच्छा चलो लाडो तुम्हारी मामी तुमसे मिलना चाहती है,,,,,,,(इतना कहते हुए लाडो की मां लाडो को लेकर कमरे से बाहर चली गई,,, और सूरज बाकी का सामान उसी कमरे में रखकर वह भी अपने घर चला गया।)
 
सूरज अच्छी तरह से समझ गया था कि लाडो के मन में किस तरह की घबराहट हो रही है वह क्या चाहती है इसलिए वह अपना उल्लू सीधा करना चाहता था वह औरतों के मन में क्या चल रहा है यह अच्छी तरह से समझने लगा था और इसी के चलते वहलाडो के साथ अपनी मनसा पूरी करना चाहता था और वैसे भी जिस तरह का कार्य लाडो के पिताजी ने उसे सौंप रखा था पैसे में लाडो से मुलाकात होना लाजिमी था,,, पहले दिन तो वहरसोई का सामान कमरे में रखवा कर और लड़ो से कुछ देर बात करके वहां से अपने घर के लिए निकल गया था अपने घर पर पहुंचकर उसने अपनी मां और अपनी बहन दोनों को बोल दिया था की शादी में अच्छी तरह से चलना है क्योंकि उसे शादी में उसे भी रसोई का काम देखने की जिम्मेदारी मिल चुकी है इसलिए ऐसा समझना है कि वह शादी अपने ही घर की है,,,,,। अपने बेटे की बात सुनकर सुनैना काफी खुश नजर आ रही थी क्योंकि पहली बार गांव में शादी के सम्मेलन में रसोई का कार्यभार संभालने को मिला था इस बात से वह मन ही मन खुश हो रही थी उसे इस बात की खुशी थी कि अब उसका बेटा जिम्मेदार बन चुका था तभी तो उसे लाडो के पिताजी इतनी बड़ी जिम्मेदारी का काम सौंप दिए थे।





शादी के दिन सुबह से ही गांव में मेहमानों का आना-जाना शुरू हो चुका था,,,,,,,,, गांव के लोग शादी में हर तरह की मदद कर रहे थे सूरज को भी रसोई का काम संभालने के लिए जाना था इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,,।

आज गेहूं काटने के लिए नहीं जाते हैं,,,।

क्यों क्या हुआ,,,?(झाड़ू लगाते हुए सुनैना बोली)

अरे भूल गईआज लाडो की शादी है बारात आने वाली है और मुझे रसोई संभालने का काम मिला है अगर अभी से मैं खेत चला गया तो वहां का काम कौन देखेगा और फिर इतनी बड़ी जिम्मेदारी देकरवह तो निश्चित हो गए होंगे लेकिन मैं समय पर नहीं पहुंचा तो वह मेरे बारे में क्या सोचेंगे,,,।

अरे हां मैं तो भूल ही गई कि आज लाडो का विवाह है,,,,, लेकिन शादी में तो सुबह से तेरा काम होगामेरा काम तो होगा नहीं एक काम कर तू वहां चला जा और मैं खेत चली जाती हूं जितना हो सकता है उतना काम कर लूंगी,,,, और साथ में रानी को भी ले लेती हूं थोड़ा सहारा मिल जाएगा,,,।

हां यह ठीक रहेगा जितना हो सकता है उतना कम करना और फिर जल्दी घर चली आना क्योंकि शादी में रात निकल जाएगी,,,,।(सूरज एकदम खुश होता हुआ बोल वह भी अपने मन में सोच रहा था कि थोड़ा बहुत गेहूं की कटाई का काम भी हो जाएगा और मैं शादी में जाकर थोड़ा इंतजाम देख लूंगा दोनों जगह का काम ठीक हो जाएगा,,,,(इतना कहकर सूरज सुबह-सुबह ही लाडो के घर की तरफ निकल गया और सुनैना घर की साफ सफाई करने के बाद खाना बनाने लगे और रानी को भी बोल दी थी कि आज उसे भी खेत पर चलना है गेहूं की कटाई के लिए पहले तो रानी इंकार करती रही लेकिन फिर वह भी मान गई,,,, थोड़ी ही देर में सुनैना खाना बनाकर तैयार कर चुकी थी और खेत पर जाने के लिए तैयार हो गई थी,,,,, मां बेटी दोनों खेत की तरफ निकल गई थी रानी पहली बार गेहूं कटाई के लिए खेत पर आ रही थी और वह भी अपने खेत पर नहीं बल्कि जमीदार के खेत पर अभी तक रानी सिर्फ अपने ही खेतों में काम की थी पहली बार किसी और के लिए काम करने जा रही थी,,,,। इसलिए वह भी थोड़ा उत्साहित थी,,,,।





आज अपने बेटे के बिना खेत में काम करने में सुनैना का मन नहीं लग रहा था ,,उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि उसे क्या हो रहा है लेकिन बात यही थी जो वह खुद नहीं समझ पा रही थी,,, बार-बार वह थोड़ा काम करके रुक जा रही थी और किसी ख्यालों में खो जा रही थी,,, और उसके मन में किसी और का ख्याल नहीं आ रहा था बल्कि अपने ही बेटे का ख्याल आ रहा था,,, सुनैना की नजर झोपड़ी के बाहर रखी हुई खटिया पर चली जा रही थीऐसा लग रहा था की खटिया से उसकी बहुत सारी यादें जुड़ चुकी थी और वाकई में उसे खटिया से उसकी सबसे बेहतरीन यादगार पल जुड़ा हुआ था। रानीअपने ही ख्यालों में मस्त होकर गेहूं की कटाई कर रही थी वह अपनी मां की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही थी और सुनैना थी की झोपड़ी के बाहर खड़ी खटिया की तरफ देख कर कभी उदास हो जा रही थी तो कभी मुस्कुराने लग रही थी जाहिर सी बात थी कि उसे उस दिन वाली बात याद आ रही थी। और उस बात को लेकर वह इस समय हैरान भी हुए जा रही थी क्योंकि उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसे दिन वाली घटना उसे क्यों याद आ रही है बार-बार उसकी आंखों के सामने वही दृश्य क्यों घूम रहा है,,,, भले ही वह इनकार कर रही हो लेकिन दिल के किसी कोने में उसका आकर्षण अपने बेटे की तरफ बढ़ता जा रहा था,,, उसे दिन वाली घटना तो उसके मानस पटल पर पूरी तरह से छप चुकी थी।





और बार-बार उसे घटना को याद करके सुनैना उत्तेजित हो जाती थी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में सुरसुराहट सी दौड़ने लगती थीकभी-कभी उसे घटना के बारे में याद करके उसे अच्छा भी लगता था तो कभी बुरा भी लगता था कभी-कभी वह अपने आप को ही कोसने लगती थी कि वह अपने बेटे को उसे दिन रोक क्यों नहीं पाई क्यों उसे ऐसा करने से मना नहीं कर पाई सुनैना को इस बात का ज्ञान अच्छी तरह से था कि उसके द्वारा उसे दिन अपने ही बेटे को दी गई मनमानी एक न एक दिन दोनों के बीच की मर्यादा की दीवार को गिरा देगा संयम का बांध दोनों के बीच टूट कर रहेगा इस बात का अंदाजा सुनैना को लग चुका था क्योंकि वह जानती थी कि जिस चीज के लिए उसका बेटा तड़प रहा है इस चीज के लिए वह भी अंदर ही अंदर तड़प रही है। दोनों प्यासे थेसमय के अनुसार उसका बेटा पूरी तरह से बड़ा हो चुका था जवान हो चुका था ऐसे में एक औरत के प्रति उसका आकर्षण बढ़ जाना लाजिमी थालेकिन वह नहीं जानती थी कि उसका आकर्षण अपनी ही मन के ऊपर इस कदर बढ़ जाएगा कि वह अपनी मां के साथ अत्यंत गंदी हरकत करने पर उतारू हो जाएगा,,,, और सुनैना की तो जरूरत थी जिस तरह से उसका पति रोज उसकी चुदाई करता था उसके कहीं चले जाने के बाद सुनैना की बुर बंजर जमीन की तरह सूख रही थी जिस पर पानी की बौछार के लिए वह तड़प रही थी और उसे लगने लगा था कि अगर वह अपने बेटे को नहीं रोकेगी तोउसकी बुर पर पानी की बौछार उसके बेटे के द्वारा ही पड़ेगी।





इस समय गेहूं काटते हुए वह अपने बेटे को बार-बार याद कर रही थी बार-बार उसकी आंखों के सामने वही खटिया वाली घटना दिखाई दे रही थी,,,, और उसे पल को याद करके वह बार-बार गनगना जाती थी जब उसके बेटे का लंड उसकी बुर के द्वारा तक ठोकर मार रहा थाइस समय वह अपने मन में यही सोच रही थी कि काश उसके बेटे का लंड उसकी बुर की गहराई में समा जाता तो कितना मजा आता और फिर उसके एक दिन पहले वाली ही घटना उसके दिलों दिमाग पर पूरी तरह से ताजा बनी हुई थीजब वह पेशाब करने के लिए झोपड़ी के पीछे गई थी और ठीक उसी समय उसका बेटा उसके पीछे खड़े होकर उसे ही देख रहा थासुनैना अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा उसकी बड़ी-बड़ी गांड देखने के बाद ही इस कदर उसका दीवाना हो चुका था कि उसके साथ गंदी हरकत करने पर उतारू हो चुका था उसे इस बात का भी डर नहीं था कि अगर उसकी मां की नींद खुल गई तो क्या होगा शायद उसे अपने आप पर विश्वास था कि अगर उसकी मां की नींद खुल भी जाएगी तो उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी आंखों मेंइस कदर वासना का नशा भर देगा कि वह खुद अपने हाथ से लंड पकड़ कर अपनी बुर के छेद पर रख देगी,,, और ऐसा शायद हो भी जाता अगर वह खुद मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते की दुहाई ना दी होती अपने आप को समझाई ना होती।धीरे-धीरे गेहूं की कटाई करते हुए समय भी कितना चला जा रहा था और देखते ही देखते सूरज एकदम सर पर आ गया था गर्मी बढ़ने लगी थी इसलिए रानी अपनी मां के पास आई और बोली,,,,।

गर्मी बहुत ज्यादा पड़ रही है मां मुझसे तो अब रहा नहीं जा रहा है और भूख भी बड़े जोरों की लगी है,,,, अब चलो पेड़ के नीचे चलकर खाना खा लेते हैं,,,,।





तु ठीक कह रही है मैं भी यही सोच रही थी और वैसे भी आज का काम इतना ही हो पाएगा शाम को शादी में भी जाना है चल चल कर खा लेते हैं,,,,।

इतना कहने के साथ ही मां बेटी दोनों पेड़ के छांव में आकर झोपड़ी के बाहर खड़ी खटिया को गिराकर उस पर बैठ गई और खाना खाने लगे,,, तभी दोनों के कानों में घोड़े की टाप की आवाज सुनाई दे रही थी,,, उस आवाज को सुनकर सुनैना बोली।

लगता है कोई घोड़े पर बैठकर इधर ही आ रहा है,,,।

(अपनी मां के मुंह से घोड़ा शब्द सुनते ही हैरानी से तन बदन में अजीब सी लहर उठने लगी उसके मन में ऐसा लगने लगा कि उस दिन वाला ही घुड़सवार होगा,,,, मां बेटी दोनों इधर-उधर देखने लगे लेकिन अभी तक घोड़ा कहीं नजर नहीं आ रहा था,,,, और वैसे भी गेहूं कीफसल इतनी बड़ी-बड़ी और दूर तक फैली हुई थी कि किसी के भी देखे जाने का अंदेशा बिल्कुल भी नहीं था तभी उनके कान में आवाज सुनाई दी,,,)

अरे कोई है,,,,, खेत में,,,,,।

(आवाज को सुनकर सुनैना को लगा कि कोई अगर घोड़े से आया है तो मुखिया का रिश्तेदारी होगा या हो सकता है मुखिया ही हो क्योंकिघोड़ा तो सिर्फ बड़े लोगों के ही पास था गांव में किसी के पास नहीं था इसलिए वह खटिया पर स्थित होने के नीचे उतर गई और बोली,,,)

हां हम लोग खेत में काम कर रहे हैं क्या काम है,,,?

(इतना कहकर सुनैना जवाब का इंतजार करने लगी और इधर-उधर देखने लगी रानी भी खटिया पर से नीचे उतरकर इधर-उधर देखने लगी लेकिन कोई दिखाई नहीं दे रहा था तभी गेहूं की फसल के बीच में से एक नौजवाननजर आया जो उनकी तरफ आगे बढ़ रहा था रानी उसे देखते ही एकदम से गदगद हो गई क्योंकि वह उसी दिन वाला घुड़सवार था जिसके बारे में वह दिन रात सोचा करती थी और दोबारा उससे मुलाकात होगी कि नहीं इसके बारे में सोचकर परेशान हुआ करती थी,,,, गेहूं की फसल के बीच में से उन लोगों की तरफ आते हुए वह तुरंत सुनैना और रानी को देखकर बोला,,,,)





नमस्ते,,,,,(इतना कहते हुए उसकी नजर रानी पर पड़ी तो वह एकदम सेखुश होता हुआ कुछ बोलते ही वाला था की रानी उसे इशारे से चुप रहने के लिए बोली तो वह उसका इशारा समझ कर एकदम से खामोश हो गया जिस तरह से उसने नमस्ते बोला था सुनैना उसके व्यवहार से एकदम खुश हो गई थी और बोली)

आप कौन हैं आप मुखिया के रिश्तेदार हैं क्या,,,?

नहीं नहीं मैं इस गांव का नहीं हूं मैं बगल वाले गांव के जमींदार का साला हूं मेरा नाम कुंवर है,,,,,।(नाम सुनकर रानी मां ही मन प्रसन्न होने लगी क्योंकि उसे दिन जिस तरह के हालात थे उसे देखते हुए घुड़सवार का नाम नहीं याद आ रहा था लेकिन आज फिर से उसी घुड़सवार के मुंह से उसका नाम सुनकर रानी प्रसन्न हो गई थी,,,, उसका परिचय जानकर सुनैना को समझ में आ गया कि यह बड़े घर का बेटा है और बड़े जमींदार का साला है इसलिए एकदम से उसे इज्जत देते हुए बोली,,,)

यहां कैसे आना हुआ मालिक,,,।

पहली बात तो आप मुझे मलिक मत कहिए मेरा नाम कुंवर है चाची,,,,,(रानी की तरफ देखते हुए वह समझ गया था कि रानी उनकी ही बेटी है इसलिए वह रानी की मां को बड़े इज्जत से पेश आ रहा था और वैसे भी कुंवर बेहद संस्कारी और इज्जतदार लड़का थारानी की मां सुनैना तो उसे बड़े घर के लड़के के मुंह से चाचा शब्द सुनकर एकदम से गदगद हो गई और एकदम से प्रसन्न होते हुए बोली)





to be

धूप में क्यों खड़े हो कुंवर आओ इस समय यहां तो कोई व्यवस्था नहीं है यही खटिया है बैठने के लिए इस पर बैठ जाओ,,,।

जी बहुत-बहुत धन्यवाद,,,(इतना कहते हुए कुंवर खटिया पर बैठ गया और देखा की खटिया पर रोटी और सब्जी रखी हुई थी यह देखकर वह मुस्कुराते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) आप लोग भोजन कर रहे थे कहीं मैं आपको परेशान तो नहीं कर दिया,,,।

नहीं नहीं कुंवर इसमें परेशानी की कौन सी बात है,,,,।

(रानी की तो हालत खराब हो रही थी वह अपने दुपट्टे को अपनी उंगली पर लपेट लपेटकर कुमार को देख रही थी उसका रूप वाकई में बेहद मनमोहक था,,, तभी वह कुंवर फिर से बोला)

मुझे बड़े जोरो की प्यास लगी है और थोड़ी भूख भी लगी है अगर आपको परेशानी ना हो तो क्या मैं इसमें से एक रोटी खा सकता हूं,,,।

(उसकी बात सुनकर सुनैना एकदम से हैरान होते हुए बोली,,,)

कुंवर जी आप तो बड़े घर के लड़के हैं क्या आप हम लोग के साथ खाना पसंद करेंगे मतलब कि हम लोग का भोजन क्या आप खा सकेंगे,,,।

यह कैसी बात कर रही हो चाची भोजन में भेदभाव कैसा हमारे घर जो रोटी बनती है वह इसी खेत के गेहूं से तो ही बनती है,,,, और खेत में मेहनत भी आप लोग करते हैं तो फिर यह भेदभाव कैसा और यह सब भेदभाव में बिल्कुल भी नहीं मानता अमीर गरीब कुछ नहीं होता दिल साफ होना चाहिए,,,,। अगर इजाजत हो तो,,(रोटी और सब्जी की तरफ उंगली से इशारा करते हुए उसका ही सारा समझते हैं सुनैना एकदम से दो साफ रोटी और सब्जी उसे पर रखते हुए कुंवर की तरफ आगे बढ़ा दी जिसे वह बड़े ही प्यार से लेकर खाने लगा,,,, यह देखकर सुनैना मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)

आप खाना खाओ मैं जल्दी से पानी लेकर आती हूं,,,(इतना कहकर सुनैना छोटी सी बाल्टी लेकर हैंडपंप की तरफ जल्दी,,,, उसके जाते ही रानी अपनी मां के जाने का तसल्ली कर लेने के बाद एकदम से खुश होते हुए बोली,,,)

मुझे तो उम्मीद ही नहीं थी कि आप मुझे फिर से इस तरह से मिलेंगे,,,,।

सच कहूं तो मैं तुमसे ही मिलने के लिए गांव-गांव भटक रहा हूं क्योंकि मुझे भी तुम्हारे घर का पता नहीं मालूम था और किस्मत देखो आखिरकार खेत में तुमसे मुलाकात हो ही गई,,,।

अच्छा हुआ कि तुम्हेंमेरे घर का पता नहीं मालूम था वरना तुम घर पर पहुंच जाते तो लोग क्या समझते,,,(दुपट्टे को उंगली में गोल-गोल घूमते हुए रानी बोली,,)

हां यह भी सही है,,,,।

लेकिन तुम मुझसे क्यों मिलना चाहते थे,,,।

पता नहीं क्यों उसे दिनतुम्हें देखने के बाद दिन-रात मेरे दिमाग में तुम्हारा ही चेहरा घूम रहा था इसलिए तुमसे मिलने के लिए मैं तड़प रहा था दो-तीन दिन इधर-उधर भटकने के बाद आज तुमसे मुलाकात हुई है,,,,।

(कुंवर की बात सुनकर रानी मां ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि उसे एहसास हो रहा था कि जिस तरह से वह तड़प रही थी कुंवर भी उससे मिलने के लिए तड़प रहा था,,,, थोड़ी देर की खामोशी के बाद कुंवर निवाला मुंह में डालते हुए बोला,,,)

तुम मुझे इशारा करके रोक क्यों दी जब मैं कुछ बोलने जा रहा था तो,,,,।

मुझे मालूम था कि तुम उसे दिन वाली बात मेरी मां के सामने बता देती और यह बात मेरी मां को बिल्कुल भी नहीं मालूम है इसलिए मैं नहीं चाहती थी कि उस दिन वाली घटना मेरी मां को पता चले,,,।

ओहहह यह बात है,,,, वैसे सच कहूं तो तुम बहुत खूबसूरत हो उस दिन तुम्हें देखा तो तुम्हें देखता ही रह गया,,,,,।

(कुंवर की बात सुनकर रानी एकदम से शर्मा गई क्योंकि रानी जानती थी कि उसे दिन कुंवर उसे किस हालत में देखा था,,,, इसलिए वह थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

बिना कपड़ों की थी इसलिए तुम्हें खूबसूरत लग रही थी,,,।

नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है वैसे तुम्हारा खूबसूरत चेहरा देखकर बोल रहा थाऔर सच कहूं तो मैं सिर्फ तुम्हारा खूबसूरत चेहरा ही देखा था बाकी अंगों पर मेरा ध्यान बिल्कुल भी नहीं किया था जैसा तुम समझ रही हो मैं उस तरह का लड़का बिल्कुल भी नहीं हूं,,,,।

(दोनों की बातचीत आगे बढ़ पाती से पहले ही सुनैना पानी भरकर वहां आ गई और लोटे में पानी भरकर कुंवर को देने लगी,,,, कुंवर खाना खाने के बाद पानी पीने लगा और उसे पानी पीता हुआ देखकर सुनैना मुस्कुराते हुए बोली,,,)

वैसे कुंवर जी आप यहां क्या करने आए थे कोई काम था क्या,,,,?

नहीं ऐसी कोई बात नहीं थी यहीं से गुजर रहा था तो मुझे बड़े जोरों की प्यास लगी थी औरमुझे लगा कि कोई खेत में होगा इसलिए यहां खड़ा होकर आवाज लगने लगा और मेरी किस्मत देखो वाकई में आप लोग यहां पर मौजूद थे जो मुझे अपनी भी पिलाए और खाना भी खिलाएं आप लोगों का एहसान में जिंदगी भर नहीं भुलुंगा,,,।

अरे अरे कुंवर जी आप यह कैसी बात कर रहे हैं इसमें एहसान कैसा यह तो हमारी किस्मत है कि आप जैसे बड़े घर के लड़के हमारे साथ बैठकर खाना खाए,,,।

देखो चाची आप फिर मुझे शर्मिंदा कर रही हो,,,,

लेकिन जो हकीकत है वह बदल तो नहीं सकती ना कुंवर जी,,,,।

कुंवर जी नहीं अब तो आप मुझे बेटा कहिए क्योंकि मैं आपको चाची कहता हूं,,,।

बबबबबब,,,,बेटा,,,,

हां बेटा आप मुझे इतने प्यार से खाना खिलाई पानी पिलाई तो मैं आपका बेटा ही हुआ ना,,,।

धन्य है तुम्हारी मां जो तुम्हें इतना अच्छा संस्कार दी है वरना बड़े घरके लड़के इस तरह से हम जैसे लोग से तो बात भी नहीं करते,,,,।

दूसरों में और मुझ में जमीन आसमान का फर्क है चाची,,,,,। अच्छा बहुत-बहुत धन्यवाद अब मैं चलता हूं,,,,।

(रानी अच्छी तरह से जानती थी कि कुंवर किस काम के लिए इस गांव में आए थे उनका काम बन चुका था,,,,रानी उनसे पूछना चाहती थी कि आप कहां मुलाकात होगी लेकिन अपनी मां के सामने पूछ नहीं पा रही थी लेकिन उसकी इस परेशानी को खुद कुंवर ही दूर करते हुए सुनैना से बोला,,,,)

आप इसी गांव में रहती हैं चाची,,,,।

जी बेटा मैं इसी गांव में रहती हूं,,,।

और यह खेत,,,,।

यह मेरा नहीं है यह तो मुखिया जी का है हम लोग इसमें काम कर रहे हैं,,,,।

कोई बात नहीं चाची फिर मुलाकात होगी,,,,।

(सुनैना बाल्टी को एक तरफ रखने लगी तभी कुंवर धीरे से रानी के करीब आकर बोला,,)

कल नदी पर मिलना,,,,(बस इतना कहकर वह फिर से गेहूं की फसल में से जाने लगा और रानी मां ही मन मुस्कुराने लगी और थोड़ी देर बाद मां बेटी दोनों घर पर आ गए,,,,

दूसरी तरफ सूरज सुबह से ही लाडो के घर पर कामकाज में लगा हुआ था बड़े अच्छे से घर की सजावट हो रही थी गांव की सजावट हो रही थी और छोटे-मोटे काम में गांव के लोग हाथ बंटा रहे थे लेकिन इस सबके बीच सूरज की नजर लाडो पर बराबर बनी हुई थी,,,, वह किसी काम से सामान लेने के लिए कमरे में पहुंचा तो वहां पर देख लाडो फिर अकेली बैठी हुई थी,,,लेकिन वह जानता था कि इस समय कुछ करना उचित नहीं था और सूरज को देखते ही लाडो एकदम से खुश होते हुए बोली,,,)

अच्छा हुआ तुम आ गई सूरज मैं सुबह से तुम्हारा ही इंतजार कर रही थी,,,।

(यह सुनकर सूरज मैन ही मन खुश होने लगा और मुस्कुराते हुए बोला)

क्यों मेरा इंतजार क्यों कर रही थी,,!

अरे तुम ही तो कल बोले थे कि तुम्हारी परेशानी क्या है मैं जानता हूं तो बताओ ना मेरी परेशानी क्या है मैं इतना परेशान क्यों हो रही हूं जबकि शादी के नाम से दूसरी लड़कियां खुश होती हैं तो मुझे क्यों वह खुशी नहीं मिल रही है बल्कि घबराहट हो रही है।

हां मैं जानता हूं ऐसा क्यों हो रहा है लेकिन अभी समय नहीं आया है ठीक समय देखकर मैं तुम्हें बता दूंगा और तुम्हारी परेशानी भी दूर कर दूंगा,,,।

भला यह कैसी बात हुई अभी तो तुम मेरे सामने ही हो बता सकते हो बताओ ना मेरे परेशानी क्या है,,,।

पागल हो गई हो क्या ऐसे में नहीं बता सकता मैं सही समय जानता हूं सही समय आने दो मैं तुम्हें बता दूंगा,,,।( लाडो की उत्सुकता देखकर सूरज मन ही मन प्रसन्न होता हुआ बोला,,,)

कैसी बेवकूफी भरी बातें कर रहे हो तुम अच्छी तरह से जानते हो कि आज मेरा विवाह हो जाएगा और मैं अपने ससुराल चली जाऊंगी तब कौन सा समय तुम्हें मिलेगा बताने का,,,,।

विवाह रात को होगा उससे पहले मैं तुम्हें बता दूंगा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,(और इतना कहकर सूरज आलू की बोरी लेकर कमरे से बाहर निकल गया,,,)



 
लाडो की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी कि सूरज उसकी परेशानी किस तरह से दूर करने वाला है और उसकी परेशानी क्या है यह भी वह ठीक तरह से नहीं समझ पा रही थी बस एक मन में असमंजसता सी थी,,,जिसे वह खुद नहीं समझ पा रही थी इसीलिए वह बड़ी बेसब्री से सूरज का इंतजार कर रही थी सूरज एक बार आलू की बोरी लेने के लिए उसके कमरे में भी आया था लेकिनविवाह होने से पहले वह उसकी परेशानी दूर कर देगा ऐसा दिलासा देकर वह कमरे से चला गया था,,, और उसके जाने के बाद लाडो निराश होकर बिस्तर पर बैठ गई थी और शाम होने का इंतजार कर रही थी।





दूसरी तरफ रानी आज बहुत खुश थी क्योंकि जिसके बारे में वह दिन रात सोचा करती थी जिससे मिलने के लिए वह तड़प रही थी वह खुद चलकर आज उसके पास आया थाऔर उसके साथ खाना भी खाया था जहां रानी के लिए बेहद खुशी की बात थी,,, उस दिन तो वह बेहोशी की हालत में थी लेकिन आज वह पूरे होशो हवास में थी और उसे घुड़सवार को इतने करीब से देख कर वह उसके प्रति आकर्षित हुई जा रही थी,,, और कुंवर भी रानी के प्रति आकर्षित हो चुका था इसीलिए तो उसे ढूंढता फिर रहा था लेकिन उसकी भी मेहनत रंग लाई थी और दोनों की मुलाकात अच्छे तरीके से हो गई थी और वह भी रानी की मां की आंखों के सामने,,, रानी की मां भी उसके अच्छे व्यवहार से काफी प्रभावित हुई थी बड़े घर का होने के बावजूद भी उसमें जरा भी अभिमान नहीं था और यही बात सुनैना को भी काफी प्रभावित कर रही थी,,, और इशारों ही इशारों में नदी के किनारे मिलने के लिए रानी को बोल भी दिया था,,,। कुंवर के जाने के बाद मां बेटी कुछ देर तक वहां बैठी रही और फिर घर वापस आ गई क्योंकि आज उन्हें शादी में जाना था जिसके लिए उन्हें तैयारी करना था।





शाम हो चुकी थी और धीरे-धीरे शाम ढल रही थी गांव में मेहमानों का आना-जाना शुरू हो चुका था और वैसे भी गांव में जब शादीहोती है तो पूरा गांव और शादी में शामिल भी होता है और मदद भी करता है इसलिए आज पूरे गांव में त्यौहार जैसा माहौल नजर आ रहा था सभी बहुत खुश थे क्योंकिशादी की खुशी में इस बात की भी खुशी थी कि शाम को पूरी सब्जी मिठाई खाने को मिलने वाली थी और अधिकतर गांवों के लोग शादी विवाह का इंतजार भी इसीलिए करते हैं कि कुछ अच्छा खाने को मिल जाएगा,,, जैसे-जैसे शाम डर रही थी वैसे-वैसे माहौल निखरता चला जा रहा था,,, चारों तरफ लालटेन या मसाल जलाकर रोशनी की जा रही थी,,, और उसकी रोशनी में पूरा गांव जगमगा रहा था।जिसे देखकर गांव के बूढ़े बच्चे औरतें सभी खुश नजर आ रहे थे और सभी अपने तरीके से शादी में शामिल होने के लिए तैयार हो रहे थे। और यही उत्साह सुनैना के साथ-साथ रानी में भी दिखाई दे रहा था सूरज तो खैर लगा हुआ था शादी में और अपनी जुगाड़ में और उसे पूरा यकीन था कि वह अपनी जुगाड़ में जरुर सफल हो जाएगा। इसीलिए तो वह चारों तरफ नजर बनाए हुए थाऔर उसे परिवार में ऐसा घुल मिल गया था कि मानो जैसे उसी परिवार का कोई सदस्य हो।लेकिन अब उसे भी घर जाना था तैयार होकर वापस शादी में आना था इसलिए वह लाडो के पिताजी से इजाजत लेकर घर जाने लगा लेकिन लाडो के पिताजी उससे बोले।

बेटा जल्दी आनाक्योंकि रसोई का काम तुम्हारे हाथ में है अगर वह बिगड़ गया तो समझ लो शादी में कुछ भी अच्छा नहीं होगा।

आप बिल्कुल भी फिक्र मत करिए मैं यूं गया और युं आया,,,,, मुझे ज्यादा समय नहीं लगेगा,,,बस हलवाई पर थोड़ा ध्यान देना बाकी मैं सब कुछ उसे बता दिया हूं,,,,,।

ठीक है बेटा,,,,।

(और मुस्कुराता हुआ सूरज अपने घर की तरफ चल दिया,,,,रास्ते में जो भी मिल रहा था पूछे जाने पर वह यही बोल रहा था कि लाडो के घर जा रहे हैं शादी में,,, पूरे गांव का न्योता जो था उसके घर पर,,,,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसके पास भी समय काम है जो कुछ भी करना है वह सोच समझ कर करना है,,, लाडो की हालत को वह अच्छी तरह से समझ रहा था। लाडो की परेशानी का हाल सूरज अच्छी तरह से जानता था वह जानता था कि लाडो किस लिए परेशान हो रही है,,,इसलिए तो वह समझ रहा था कि लोहा पूरी तरह से गर्म हो चुका है बस हथोड़ा करने की देरी है और इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था। लाडो के बारे में सोचता हुआ वह अपने घर पर पहुंच चुका था,,, घर पर पहुंच कर देखा तो कपड़े इधर-उधर बिखरे पड़े थे,,,,,, और पानी की धार घर के अंदर की तरफ जा रही थी जो कि अंधेरा होने के बावजूद भी लालटेन की रोशनी में साफ दिखाई दे रहा था और उस पानी की धार को देखकर उसके निशान को देखकरसूरज को समझते देर नहीं लगा था कि अभी-अभी कोई नहा कर अंदर की तरफ गया है,,, और उसकी आंखों के सामने रानी का चेहरा नजर आने लगा उसके बारे में सोच कर सूरज की आंखों की चमक बढ़ने लगी क्योंकि शादी में शामिल होकर लाडो के बारे में जिस तरह का ख्याल उसके मन में आ रहा था वहख्याल की बदौलत इस समय सूरज अपने बदले में उत्तेजना का अनुभव कर रहा था और वह तुरंत रानी के कमरे में घुस जाना चाहता थाऔर अपनी जवानी की प्यास बुझा लेना चाहता था इसलिए वह प्रसन्न होता हुआ उसे धार के सहारे अंदर की तरफ जाने लगा,,,,लेकिन वह पानी कि धार रानी के कमरे की तरफ नहीं उसकी मां के कमरे की तरफ जा रही थी। और यह देखकर सूरज वहीं पर रुक गया,,,।

उसे समझ में नहीं आ रहा था कि समय उसे अपनी मां के कमरे की तरफ जाना चाहिए कि नहीं जाना चाहिए,,,, कुछ देर वहीं खड़े रहने के बाद उसका मन नहीं माना और वह अपनी मां के कमरे की तरफ कदम आगे बढ़ा दिया,,,वह धीरे-धीरे अपने कदम आगे बढ़ाना आशा ताकि उसके कदमों की आहट उसकी मां के कानों तक ना पहुंच सके क्योंकि वह नहीं चाहता था कि उसके होने की मौजूदगी उसकी मां को पता चले,,, और देखते ही-देखते वह अपनी मां के कमरे के करीब पहुंच गया।कमरे का दरवाजा बंद जरूर था लेकिन हल्का सा खुला हुआ था उसे पर सिटकनी नहीं लगी हुई थी और और उसमें से कमरे का सारा दृश्य दिखाई दे रहा था। दीवार की ओट में अपने आप को छुपा कर सूरजहल्के से नजर को दरवाजे के अंदर टीकाकर कमरे के अंदर का दृश्य देखने लगा,,,पहले तो उसे कुछ समझ में नहीं आया लेकिन धीरे-धीरे अंदर का दृश्य एकदम साफ दिखाई देने लगा,,, लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ स्पष्ट होने लगा और जैसे ही उसकी नजर उसकी मां पर पड़ी उसकी आंखें फटी की फटी रह गई।

वहआश्चर्यचकित होकर अपनी मां के रूप सौंदर्य को देखता ही रह गया,,,,, अपनी मां के रूप को देखकर और उसके गीले बालों को देखकर वह समझ गया था कि उसकी मां अभी-अभी नहा कर अपने कमरे में गई है,,,, लेकिन जिस अवस्था में अपने कमरे में थी उसे अवस्था को देखकर सूरज का लंड अपनी औकात में आ गया था,,,सूरज क्या उसकी जगह कोई और भी होता तो उसकी भी यही हालत होती क्योंकि उसकी मां अपने कमरे में पूरी तरह से नंगी खड़ी थी उसके बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं था इसलिए तो सूरज अपनी मां को देखता ही रह गया,,,लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां कमरे में पहुंचकर अपने कपड़े उतार लिया नहाने के बाद वह नंगी ही अपने कमरे के अंदर तक गई है,,, अपने मन में आए इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए वह कमरे के अंदर चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगा कि कहीं कोई गिला वस्त्र दिखाई दे दे लेकिन ऐसा कुछ भी कमरे में दिखाई नहीं दिया जिसे लपेटकर उसकी मां कमरे तक आई हो और उसे पूरा यकीन हो गया कि उसकी मनाने के बाद बिना कपड़ों के ही नंगी अपने कमरे के अंदर दाखिल हुई है और इस बारे में सोचकर तो एकदम से उसके लंड की अकड़ बढ़ने लगी,,,।

धड़कते दिल के साथ सूरज कमरे के अंदर के किसी को देख रहा था और उसकी मां छोटे से आईने में अपनी खूबसूरत चेहरे को देख रही थी और उसके बाकी के खूबसूरत अंगों को सूरज चोर नजरों से देख रहा था,,,सुनैना की पीठ दरवाजे की तरफ थी जिसे सूरज को उसकी मां की नंगी चिकनी पीठ और उसकी बड़ी-बड़ी गांड एकदम साफ दिखाई दे रही थी गांड की लचक एकदम खूबसूरत मटके की तरह थी एकदम गोलाई लिए हुए उसमें बिल्कुल भी भारीपन नहीं था,,, जिससे गांड लटक जाए बल्कि वह एकदम कसाव लिए हुए था,,,जिसे देख कर सूरज का मन विचलित हो रहा था उत्तेजित हो रहा थाऔर उसका मन कर रहा था कि इसी समय कमरे में दाखिल हो जाए और अपनी मां को पीछे से पकड़कर अपनी बाहों में दबोच ले,,, लेकिन वह ऐसा कर नहीं सकता था खेत में जिस तरह से उसनेअपनी मां के नींद में होने का पूरा फायदा उठाकर अपने लंड को उसकी मदमस्त कर देने वाली गांड से रगड़ कर अपना पानी निकाला था,,, इस समय वही गांड भीगी होने पर और भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई दे रही थी लालटेन की पीली रोशनी में तो ऐसा लग रहा था कि जैसे आसमान में कोई चांद चमक रहा हो,,, सूरज इस खूबसूरत नजारे को अपने लंड को अपनी मुट्ठी में दबा दबा कर देख रहा था,,, और उसे इस समय किसी के भी द्वारा उसे देखे जाने का डर नहीं था,,,क्योंकि वह जानता था कि घर में उन तीनों के सिवा और कोई तो था नहीं रानी को पहले ही वह अपनी मां के बारे में चिकनी चुपड़ी बात बात कर उसे मना लिया था कि भविष्य में अगर उन दोनों का राज खुला तो वह इस खेल में वह अपनी मां को भी शामिल कर लेगा ताकि तीनों का राज राज ही बनकर रह जाए,,,, इसलिए वह खूबसूरत नजारे को निश्चिंत होकर देख रहा था।

कुछ देर आईने में अपने आप को देखने के बाद सुनैना नए वस्त्र को पहनने लगी वह नई पेटिकोट निकालकर उसे दोनों हाथों में पकड़ करऊपर से नहीं बल्कि नीचे से अपनी एक-एक पैर उठाकर उसे अंदर की तरफ डाली और एकदम से कमर तक ले आई जिससे एक खूबसूरत दृश्य पर पर्दा से पड़ गया थालेकिन फिर भी पेटिकोट इतनी कसी हुई थी की डोरी बांधने के बाद भी उसकी बड़ी-बड़ी कर पेटीकोट में अपना जलवा बिखेर रही थी,,,सूरज इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि यह खूबसूरत है तेरे से धीरे-धीरे पहन के पीछे छुप जाने वाला हैलेकिन फिर भी इस नजाकत को देखने के लिए उसका मन तड़प रहा था वह लगातार अपनी मां की तरफ देख रहा था और उसकी मां धीरे-धीरे एक-एक करके अपने वस्त्र पहन रही थी पेटिकोट पहने के बाद वह एक खूबसूरत सा ब्लाउज निकाली और उसे पहनने लगीऔर मजे वाली बात यह थी कि वह अपनी दोनों चूचियों को अपने हाथ से पकड़ कर ब्लाउज की गोलाई में डालकर उसे व्यवस्थित कर रही थी,,, अपनी मां की इस हरकत को देखकर उसकी नजाकत को देखकर सूरज को यही समझ में आया था कि उसकी मां की चूची ब्लाउज के नाप सेबड़ी थी जिसे वह अपने हाथ से पकड़ कर उसे व्यवस्थित कर रही थी और यह एहसास होते ही सूरज जोर से अपने लंड को दबोच लिया,,,,।

सुनैना बारी-बारी से अपनी दोनों चूचियों को ब्लाउज के दोनों गोली में डाल चुकी थी लेकिन वह ब्लाउज बटन वाली नहीं बल्कि डोरी वाली थी,,, जिसे पीछे से कस के बांधा जाता थाऔर सुनैना उस डोरी को बांधने की नाकाम कोशिश करने लगी।लेकिन उसका हाथ ठीक से पीछे की तरफ जा नहीं रहा था जिसकी वजह से वह अपने ब्लाउज की डोरी को बांध नहीं पा रही थी काफी देर से वह परेशान हो रही थी,,,,सुनैना को भी लगने लगा कि वह अकेले इस काम को अंजाम नहीं दे पाएगी वह परेशान हो गई थी और इस समय घर पर रानी भी नहीं थी क्योंकि वह पहले ही तैयार होकर चली गई थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें वह इसलिए उधेड़बुन में थी कि तभी उसके कानों में आवाज सुनाई दी,,,।

लाओ में डोरी बांध देता हूं,,,,,,,।

(यह शब्द जैसे ही उसके कान में पड़े उसका पूरा बदन एकदम से ठंड पड़ने लगा क्योंकि वह इस आवाज को पहचानती थी समझ गई कि दरवाजे पर उसका बेटा खड़ा है,,,,, सुनैनाकी हालत ऐसी थी कि ना तो वह कुछ कर सकती थी और ना ही पीछे पलट कर अपने बेटे की तरफ देख सकती थी वह शर्म से गड़ी जा रही थी,,,, अपने बेटे केइस बात पर वह बिल्कुल भी किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन अपनी मां का जवाब सुने बिना हीसूरज अपनी मां के कमरे में जाकर भर चुका था उसके आने की आहट उसे पूरी तरह से मदहोश कर रही थी सुनैना को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,, पीछे पलट कर देखे बिना ही वह इस बात को जान गई थी कि कमरे में उसका बेटा है उसकी आवाज उसकी अाहट वह अच्छी तरह से पहचानती थी,,, सुनैना की सांसें बड़ी तेजी से चल रही थी,,,, सूरज मन ही मन में मुस्कुराता हुआ धीरे-धीरे अपनी मां के करीब पहुंच चुका था,,,,सुनैना के दोनों हाथ अभी पीछे की तरफ थे और उसके दोनों हाथों की नाजुकों ऊंगलियों में ब्लाउज की डोरी थी,,, और उस डोरी को सूरज जल्दी से जल्द अपने हाथ में ले लेना चाहता था,,,और वह ठीक अपनी मां के पीछे जाकर खड़ा हो गया था जहां से उसका खुद का भी चेहरा आईने में साफ दिखाई दे रहा था वह आईने की तरफ देखा तो उसकी मां कुछ पल के लिए आईने में देख रही थी लेकिन जैसे ही आईने में दोनों की नजरे टकराई सुनैना शर्म के मारे अपनी नज़रें नीचे झुका ली,,,,।

सूरज अपनी मां की स्थिति को अच्छी तरह से समझ रहा था औरवह समझ गया था कि उसकी मां उसे रोकने वाली नहीं है क्योंकि अगर उसे रोकना होता तो वह तुरंत उसकी तरफ देखती और इस दरवाजे पर ही रोक देती लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ थाऔर सूरज अपना हाथ आगे बढ़कर अपनी मां के हाथों में से उसके ब्लाउज की रेशमी डोरी को अपने हाथ में ले लिया लेकिन डोरी को अपने हाथ में लेते हुएमां बेटे दोनों की उंगलियां आपस में स्पर्श हुई जिससे दोनों के बदन में उत्तेजना का तूफान उठने लगा,,,,आईने में सूरज बराबर देख रहा था आइना कुछ खास बड़ा नहीं था लेकिन उसमें सिर्फ चेहरा ही दिखाई दे रहा था और हल्के से उसकी मां की चूचियों के ऊपरी गहरी लकीर दिखाई दे रही थी अगर आईना बड़ा होता तो उसकी मदमस्त कर देने वाली चुचीया एकदम से नंगी आईने में उजागर हो जाती। बस यही बात का मलाल सूरज के मन में इस समय हो रहा था,,,,लेकिन वह कुछ कर नहीं सकता था वैसे तो करने को वह इस समय बहुत कुछ कर सकता था मन तो उसका कर रहा था कि इसी समय दोनों डोरी को पकड़ कर वह पीछे सेअपनी मां को अपनी बाहों में भर ले या फिर अपने हाथों से उसका ब्लाउज उतार कर उसका पेटिकोट उतार कर एक बार फिर से उसे पूरी तरह से नंगी कर दे लेकिन ऐसा वह कर नहीं सकता था,,,, और हाथों में लिया हुआ रेशमी डोरी को कहा बांधने लगा और डोरी को कस के पीछे की तरफ खींच कर उसका गिठान बांधने से पहले वह बोला,,,)

इतना ठीक है ना नहीं तो कस के बंध जाएगी तो दुखेगी,,,,।

ठठठ,,,, ठीक है,,,,(उत्तेजना के मारे सुनैना के मुंह में से शब्द नहीं फूट रहे थे,,,,उसकी गहरी गहरी चलती सांसों के चलते उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी,,,,, अपनी मां का जवाब सुनकर आईने में अपनी मां की खूबसूरत शर्म से भरे हुए चेहरे को देखकर मुस्कुराते हुए सूरज बोला)

हां इतना सही रहेगा इसमें तुम्हें आराम भी रहेगा और दुखेगा की नहीं,,,(इतना कहते हुए वहां डोरी की गिंठान बांधने लगा,,,,,उसकी मां को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले लेकिन फिर भी बड़ी हिम्मत करके उसके मुंह से सिर्फ इतना ही निकला,,,)

तू कब आया,,,

मैं तो कब से खड़ा हूं और देख रहा हूं कि तुम अपने हाथ से अपने ब्लाउज की डोरी नहीं बांध पा रही हो,,,,,।

(अपने बेटे का जवाब सुनते ही सुनैना की तो हालत खराब होने लगी,,,,क्योंकि वह जानती थी कि कुछ क्षण पहले वह कमरे में पूरी तरह से नंगी करी थी और उसका बेटा कह रहा था कि वह कब से तुम्हें देख रहा है इसका मतलब था कि वह जब नंगी थी तभी उसका बेटा उसे देख रहा था उसके नंगे बदन को उसका बेटा देख लिया यह सोचकर उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,, और वह हैरान होते हुए बोली,,,)

क्या तू कब से खड़ा था,,,!(सुनैना के शब्दों में थोड़ा गुस्साथोड़ी मदहोशी थोड़ी हैरानी सबकुछ साफ दिखाई दे रही थी सूरज को समझते देर नहीं लगी कि उसकी मां इस समय क्या समझ रही है क्या सोच रही है,,,,,, इसलिए वह अपनी मां की शंका को दूर करने के लिए बोला,,,)

मतलब कि जब तुम अपना हाथ पीछे की तरफ करकेब्लाउज की डोरी बांधने की कोशिश कर रही थी तभी मैं आया था क्योंकि शादी में जाने के लिए देर हो रही है वहां जाओगी तो गाना बजाना होगागांव की सभी औरतें शामिल है और तुम्हारे बारे में सब पूछ रहे थे इसलिए मैं जल्दी-जल्दी आया हूं,,,,(ब्लाउज की डोरी को बांधते हुए सूरज बोला,,,और उसकी बातें सुनकर सुनैना को राहत हुई कि उसका बेटा इससे पहले नहीं आया वरना वह उसके नंगे बदन को देख लेता,,,,सुनैना ईस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा उसके साथ खेत में किस तरह की हरकत कर चुका है उसे पेशाब करते हुए देख चुका है उसकी नंगी गांड पर अपना लंड रगडकर अपना पानी निकाल चुका है,,,, इसलिए उसकी गांड उसके बेटे के लिए कुछ नई नहीं थी लेकिन फिर भी बहुत खुश थीलेकिन उसे इस बात की तसल्ली हुई कि उसका बेटा जब वह कमरे में नंगी थी तब नहीं आया था जब वह कपड़े पहन रही थी तब आया था,,,,सूरज की बात सुनकर सुनैना जल्द से जल्द कमरे से बाहर निकल जाना चाहती थी क्योंकि उसे दिन की हरकत को देखकर उसे इस बात का डर था कि कहीं एकांत पाकर उसका बेटा उसके साथ कोई हरकत ना कर देऔर वह अपने बेटे को रोक नहीं पाएगी क्योंकि उसकी हरकत से वह भी मदहोश हो जाती थी इसलिए वह डोरी बंध जाने के बाद बोली,,,)

चल अब तू उठ जा जल्दी से नहा कर तैयार हो जा मे तैयार हो गई हूं मैं जा रही हूं और तू आते समय दरवाजा बंद करके आना ,,,,।





ठीक है,,,,,, मैं भी जाकर नहा लेता हूं,,,,(इतना कह कर वह दरवाजे की तरफ घूमने को हुआ किसुनैना तुरंत अपनी नजर पीछे घूमकर अपने बेटे की तरफ अच्छी और उसकी नजर सीधे उसके पजामे में बने तंबू पर पड़ गई उसके तंबू को देखकर सुनैना एकदम से सिहर उठी और कमरे से उसके बाहर जाते हुए जल्दी से साड़ी पहनकरशादी के लिए निकल गई और थोड़ी देर बाद सूरज भी ना हाथ होकर तैयार होकर दरवाजे को अच्छी तरह से बंद करके शादी के लिए निकल गया।)
 
थोड़ी ही देर में गांव के सभी लोग शादी में शामिल हो चुके थे,,, और अपनी अपनी तरफ से शादी में सहयोग कर रहे थे,, गांव के बूढ़े एक तरफ बैठकरआगे क्या करना है उसके बारे में लाडो के पिताजी को समझ रहे थे क्योंकि लड़ो के पिताजी से ज्यादा अनुभव उन बुढो बुजुर्गों में था,,, गांव की औरतें आंगन में बैठकर शादी का गीत गा रही थी और कुछ औरतें नाच रही थी,,, जवान लड़के फुर्ती दिखाते हुए शादी की प्रक्रिया में आगे बढ़ रहे थे यह देखकर लाडो के पिताजी का मन प्रसन्नता से भरा जा रहा था क्योंकि गांव के सारे व्यक्ति उनकी लड़की की शादी में सहयोग कर रहे थे,,, लेकिन इनमें भी खास सहयोग था सूरज का क्योंकि वहां शादी का महत्वपूर्ण हिस्सा संभाले हुए था और वह था भोजन का,,, जिसको बिना शादी चाहे जैसी भी हो अधूरी ही लगती है,,, क्योंकि बाराती भी तो खाने के उद्देश्य से ही शादी में शामिल होते हैं अगर उन्हें स्वादिष्ट भोजन ना मिले तो फिर जाते-जाते भी ताने कसने लगते हैं और यह जिंदगी भर का हो जाता है और यही लाडो के पिताजी नहीं चाहते थे,,,, इसलिए रसोई की सारी जिम्मेदारी उन्होंने सूरज को दे दिया था,,,।





और यह जिम्मेदारी उन्होंने ऐसे ही सूरज को नहीं दे दिया था उन्हें पूरा यकीन था कि सूरज उसके पिताजी की तरह हीरसोई की जिम्मेदारी अच्छी तरह से निभाएगा क्योंकि गांव में कहीं भी शादी पड़ती थी तोरसोई की जिम्मेदारी सूरज के पिताजी ही संभालते थे और आज तक ऐसा नहीं हुआ था कि उनके द्वारा भोजन समारंभ उचित तरीके से ना हुआ हो। और यही वजह थी किलाडो के पिताजी भोजन की व्यवस्था संभालने के लिए सूरज का चयन किए थे क्योंकि उन्हें पूरा यकीन था कि सूरज अपने पिताजी की तरह ही है जिम्मेदारी वह खुशी निभा पाएगा और अब तक तो उसने जिस तरह से रसोई की जिम्मेदारी संभाले हुए था एक-एक चीज रसोईया को लाकर दे रहा था उससे साफ दिखाई दे रहा था कि वह भी उसके पिताजी की तरह ही रसोई संभालने में बेहद उम्दा निकलेगा,,,, सब कुछ एकदम सही तरीके से हो रहा था अब बरात आने का समय हो चुका था इसलिए लाडो के पिताजी शादी की व्यवस्था देख रहे थे और जगह-जगह पर समझा भी रहे थे कि अब आगे क्या करना है,,,,।





दूसरी तरफ लाडो कमरे में इधर-उधर घूम रही थी साथ में उसकी सहेलियां भी थी जो उससे मजाक कर रही थी और मजाक में यही सब चल रहा थाकी शादी की पहली रात को जीजा जी तेरे साथ क्या करेंगे,,, इस सवाल पर लाडो शर्मा जा रही थी लेकिन उसका मजा लेते हुए दूसरी लड़कियों कह रही थी।

जीजा जी करेंगे क्या जैसे सभी लोग करते हैं कमरे में जाते ही लाडो के कपड़े उतार कर नंगी कर देंगे और क्या,,,,,

(उसकी बात सुनकर लाडो एकदम से शर्मा गई शर्म की लालिमा उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी,,,,, लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थीउसके मन में यही तो परेशानी चल रही थी कि आखिरकार शादी की पहली रात को उसका पति उसके साथ किस तरह से व्यवहार करेगा कैसा व्यवहार करेगा यही उसे समझ में नहीं आ रहा था और यही उसकी परेशानी और चिंता का सबब भी था,,, उस लड़की की बात सुनकर दूसरी लड़की बोली,,,)

बस इतना ही करेंगे जीजा जी की इससे आगे भी बढ़ेंगे,,,,।

बढ़ेंगे ना इसके बाद ही तो असली खेल शुरू होता है,,,,।

क्या होता है दीदी बताओ ना लाडो को भी समझ में आ जाएगा कि आप क्या होगा उसके साथ,,,(उस लड़की की बात सुनकर दूसरी लड़की बोली क्योंकि वह शादीशुदा थी उसे ज्यादा अनुभव था,,,,)

अरे मेरी लाडो के लिए ही तो बता रही हूं जीजा जी इसके सारे कपड़े उतार करइसे गोद में उठाकर बिस्तर पर पटक देंगे और फिर इसके पूरे अंगों को अपने होठों से चूमेंगे,,,,,,।

ओहहहह क्या कह रही है दीदी क्या सच में ऐसा करेंगे जीजा जी,,,।





तो क्या रे,सिर्फ यूं ही पैसे खर्च करके इसे घर का काम करने के लिए थोड़ी ले जा रहे हैं इसके साथ मजा लूटने के लिए ले जा रहे हैं,,,।

अच्छा दीदी फिर क्या करेंगे जीजा जी,

फिर क्या जिस तरह से जीजा जी इसके कपड़े उतार कर लेंगेकिए थे उसी तरह से अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो जाएंगे और फिर अपने लंड का इसकी बर पर जोर-जोर से रगड़ रगड़कर इसे पूरी तरह से गर्म कर देंगे,,,,।

आहहह, दीदी यह क्या कह रही हो मेरा तो सुनकर ही पानी निकलने लगा,,(उस शादीशुदा लड़की की बात सुनकर उसकी दूसरी सहेली बोली,,,)

चिंता मत कर मेरी रानी तेरा भी नंबर आएगा,,, लाडो को तो देखो मुझे तो लगता है सुनकर ही इसका पानी निकलने लगा होगा,,,(पर शादीशुदा लड़की लाडो की तरफ देखते हुए बोली तो लाडो शर्म से अपनी नजर नीचे झुका लिया कुछ बोल नहीं पा रही थी तभी उसकी बात सुनकर दूसरी लड़की बोली)

साड़ी उठाकर देखे क्या दीदी,,

पागल हो गई है क्या एक काम सिर्फ जीजा जी का है और यह काम वही करेंगे हम लोगों को कुछ नहीं करना है समझ गई ना,,,,,,

हां समझ गई दीदी,, लेकिन यह तो बताओ फिर क्या करेंगे जीजा जी,,!

फिर,,,फिर करना क्या है जीजा जी धीरे-धीरे अपने लंड को उसकी बुर में डालते चले जाएंगे और फिर जैसे ही पूरा लंड इसकी बुर में घुस जाएगा वह इसकी कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर देंगे और यह सिलसिला रात भर चलता रहेगा देखना लाडो दूसरे दिन ठीक से चल भी नहीं पाएगी लंगड़ा कर चलेगी,,,,।

ओहहहह हो,,,, लाडो को तो देखो अभी से मजा आ रहा है इसके मन में तो लड्डू फूट रहा है,,,।





(पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं था यह सब सुनकर लाडो की हालत खराब हो रही थी वह मन ही मन में घबरा रही थी अपनी सहेलियों की बात सुनकर उसकी परेशानी और बढ़ती जा रही थी और वह बार-बार खिड़की सेबाहर की तरफ देख रही थी उसे सूरज का इंतजार था क्योंकि वह कुछ बताने वाला था उसकी परेशानी क्या है कैसे परेशानी दूर होगी यही सब वह जानना चाहती थी और उसे बड़ी बेसब्री से सूरज का इंतजार था और वह अपने मन में का भी रही थी किउसने विवाह से पहले उसकी परेशानी दूर करने का वादा किया है लेकिन अब तक उसका ठिकाना ही नहीं है,,,,,,, जिस तरह से लाड़ो परेशान थी सूरज से मिलने के लिए उसी तरह से सूरज भी बेताब था लाडो से मिलने के लिएलाडो को लग रहा था कि सूरज उसे कोई बात बताया कि उसकी परेशानी दूर हो जाएगी लेकिन लाडो नहीं जानती थी कि सूरज अपने मकसद से उससे मिलना चाहता था,,।





जहां पर औरतों का नाच गाना हो रहा था वहीं से तकरीबन 5 मीटर की दूरी पर ही हुआ रसोई का काम संभाले हुए था,,,, थोड़ी ही देर हुआ था उसकी मां तैयार होकर उन औरतों के बीच आकर बैठ गई थीउन औरतों के बीच में भी सूरज को अपनी मां को पहचानने में जरा भी देखने लगी थी क्योंकि उन औरतों के बीच में भी उसकी मां चांद की तरह चमक रही थी,,,, रसोई का काम संभालते हुए और खुद ही चाशनी को बड़े से पलटे से कढ़ाई में हिला रहा था ताकि चाशनी अच्छे से बन सके इसी में गुलाब जामुन जो डालना था,,,, और ऐसा करते हुए वह अपनी मां की तरफ देख ले रहा था,,, सुनैना की भी नजर अपने बेटे पर पड़ चुकी थी वह भी चोर नजर से अपने बेटे को देख ले रही थी,,,, कुछ देर पहले उसके कमरे में जो कुछ भी हुआ था उसके चलते अभी तक उसके बदन में उत्तेजना की सुरसुराहट हो रही थी,,,, और अपने बेटे के बदले हुए चल को उसके रूप ढंग को देखकर हैरान थी कुछ ही महीना में उसका बेटा पूरी तरह से बदल चुका था एक मासूम बच्चे से वह पूरा मर्द बन चुका था,,,, चोर नजर से अपने बेटे की तरफ देखकर सुनैना अपने मन में यही सोच रही थी कि उसका बेटा सच कह रहा था या झूठ कह रहा था यह कैसे यकीन करें।





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सूरज नहीं तो बड़े साफ तरीके से कह दिया था कि जब वह ब्लाउज कीडोरी बांधने की कोशिश कर रही थी तभी वह दरवाजे पर आकर खड़ा हो गया था लेकिन उसकी बात में सुनैना को जरा भी सच्चाई नजर नहीं आ रही थी क्योंकि अगर अचानक ही वहदरवाजे पर आता तो उसकी आहट उसे साफ सुनाई देती यह जरूर वह कुछबोलना जैसे उसे पुकारने के लिए बुलाने के लिए लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था,,,मतलब साफ था कि वह चोरी छिपे उसके कमरे तक आया था ताकि उसके कदमों की आहट उसे सुनाई ना दे यह सब ख्याल सुनैना के मन में आ रहा था और किस तरह का ख्याल उसके मन को बिजली भी कर रहा था उसके बदन में रह रहकर उत्तेजना की लहर उठ रही थी,, सुनैना अपने मन में यह सोचकर और हैरान हुए जा रही थी कि उसका बेटा पहले से आकर दरवाजे पर खड़ा हो तो फिर तो कुछ भी छुपाने लायक नहीं था क्योंकि वह तो कमरे में पूरी तरह से नंगी खड़ी होकर आने में अपना रूप देख रही थी उसने अपने बदन पर एक भी कपड़ा नहीं लपेटी थी,, सुनैना इस बारे में सोच कर काफी हैरान हुए जा रही थी।





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पहली बार ही तो मैं बिना कपड़ों के नहा कर नंगी अपने कमरे में गई थी क्योंकि अंधेरा हो चुका था उसे समय सूरज घर पर नहीं था मुझे तो लगा कि वह शादी में ही होगाइसलिए निश्चित थी अपने कमरे में जाकर भी मैं दरवाजा नहीं बंद कर पाई थी क्योंकि मुझे बिल्कुल भी एहसास तक नहीं था कि सूरज घर पर आ जाएगा और इसी वक्त पर आएगा जब वह बिना कपड़ों के अपने कमरे में खड़ी होकर अपने रूप को देख रही होगी बाप रे अगर सच में ऐसा हुआ होगा तब वह मेरे बारे में क्या सोच रहा होगा,,,,बाप रे अगर सच में वह दरवाजे पर खड़ा होगा तब तो मेरी पीठ सीधे दरवाजे की तरफ ही थी मेरी नंगी गांड बड़ी बड़ी गांड बड़े आराम से देख सका होगा,,,,, हाय दइया मुझे नंगी देखकर वह अपने मन में न जाने क्या-क्या सोच रहा होगा,,,अभी 2 दिन पहले ही तो उसने मेरी नींद में होने का फायदा उठाते हुए मेरी नंगी गांड पर अपना लंड लगाकर पानी निकाल दिया था और मेरा भी निकलवा दिया था,,,, जरूर मुझे नंगी देखकर मुझे चोदने के बारे में सोच रहा होगा,,,, क्योंकि उसकी हरकत देखकरऐसा तो बिल्कुल भी नहीं लगता कि वह मेरे बारे में सही सोच रहा होगा जब भी वह मेरे बारे में सोचेगा तो गंदी बात ही सोचेगा वरना वह मेरे साथ इस तरह की हरकत ना करता,,,,





हाय दइया यह क्या हो गया,,,,,(इस तरह की बातें अपने मन में सोच कर सुनैना खुद ही पानी पानी हुई जा रही थी उसकी बर पानी छोड़ रही थी,,) उस दिन खेत वाली हरकत देखकर सच में अगर मैं कमरे से बाहर न निकलती तो जरूर वह मेरे साथ कुछ ना कुछ कर बैठता और मैं तो देखी भी थी उसके पजामे में तंबू बना हुआ था और इतना तो मैं बेवकूफ हूं नहीं कीसमझ ना पाऊं की एक मर्द का लड कब खड़ा होता है क्यों खड़ा होता है,,,मुझे नंगी देखकर ही मेरे नंगे बदन को देखकर मेरी नंगी गांड देखकर ही सूरज का लंड खड़ा हुआ थाऔर जब मुझे देख कर मतलब कि जब एक मां को देखकर एक बेटे का लंड खड़ा होने लगे तो बेटे से और क्या उम्मीद की जा सकती है मौका मिलने पर वह तो कभी भी चढ़ जाएगा,,,,इस तरह की बातें सोच कर सुनैना अपनी बुर गीली कर ही रही थी कि तभी गांव की एक औरत उसका हाथ पकड़ कर नाचने के लिए उठाने लगी,,,, सूरज अपनी मां की तरफ ही देख रहा थावैसे तो सुनैना का मन बिल्कुल भी नाचने को नहीं था लेकिन अपने बेटे की तरफ देखकर उसके मन में न जाने क्या सोच और वह उसे औरत की बात मानकर ढोलक के थाप पर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दी और अपनी गांड मटकाना शुरू कर दी,,,, सूरज अपनी मां को ही देख रहा था,,, अपनी मां को नाचते हुए देख कर उसे भी अच्छा लग रहा था।





यह दूसरी बार था जब सूरज अपनी मां को नाचते हुए देख रहा था पहली बार वह अपनी मां को नाचते हुए बगल के गांव में कुछ प्रयोजन था तब वहां पर वह अपनी मां को पहली बार नाचते हुए देखा था उसकी बड़ी-बड़ी गांड को हिलते हुए देखकर उसका लंड के कार्टून भेज रहा थाऔर अपने लंड की तरफ को मिटाने के लिए जिसके घर गया था उनके घर की बहू की चुदाई करके वापस आया था,,,,, चासनी को चलाते हुएसूरज अपनी मां को ही देख रहा था उसकी बड़ी-बड़ी गांड कैसी हुई साड़ी में गजब उभार लिए हुए नजर आ रही थी और उसके नाचने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी गांड की फांक बड़े-बड़े तरबूज की तरह आपस में रगड़ खा रहे थे जिसे देख कर सूरज उत्तेजित हुए जा रहा था। सूरज आसपास भी देख रहा था और उसेयही एहसास हो रहा था कि लोगों को भी उसकी मां का नाचना अच्छा लग रहा था और सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां का क्या दूसरे मर्दों को अच्छा लग रहा थाक्योंकि एक मर्द होने के नाते उसे इस बात का एहसास था कि मर्द औरत के कौन से अंग को देखकर प्रभावित होते हैं और वह यकीन के साथ अपने आप को कह रहा था किबाकी के लोग उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड और बड़ी बड़ी चूचियों को हिलते हुए देखकर मन ही मन उत्तेजित हो रहे थे,,, तभी उसके कान मेंजो मुख्य रसोईया था और वह मिठाई बन रहा था वह बीड़ी पीता हुआ उसकी मां की तरफ देखकर बोला,,,,।)





बाप रे क्या मस्त औरत है मैंने तो आज तक इसी खूबसूरत औरत नहीं देखा,,,,,(और यह बात वह सूरज से ही कह रहा था क्योंकि उसे नहीं मालूम था कि वह नाचने वाली औरत सूरज की मां है वह रसोईया यह सोच रहा था कि जब वह इतना खूबसूरत दृश्य देख रहा है तो लगे हाथ वह सूरज को भी दिखा दे की औरत क्या चीज होती है,,,, उसकी बात सुनकर सूरज अनजान बनता हुआ बोला,,,,)

कौन सी औरत,,,, हलवाई बाबू,,,,(चासनी को चलाते हुए,,,)

अरे वह देखो बबुआ,,,, जिसकी गांड बड़ी-बड़ी है और अपनी गांड मटका मटका करना चाहिए कम से देखा तो सही कितनी बड़ी गांड है बबुआ,,,,।

वह वाली औरत जो गोरी सी है,,,,(उंगली के इशारे से बताते हुए)

अरे हां बबुआ वही,,,, देख लो ऐसा नजारा देखने को नहीं मिलेगा,,,,(वह हलवाई सूरत के साथ काफी खुल चुका था,,,, सूरज यह जानते हुए भी कि वह हलवाई उसकी मां के बारे में गंदी सोच रख रहा है फिर भी सूरज से कुछ बोल नहीं रहा थाक्योंकि सूरज को मालूम था कि एक तरह से वह उसकी मां की खूबसूरती की तारीफ ही कर रहा था और जिस तरह से उसकी मां सज धज कर आई थी उसे देखकर कोई भी उसकी तरफ आकर्षित हो सकता था और ऐसा हो भी रहा थाइसलिए वह हलवाई से कुछ कह नहीं पा रहा था और वह देखना चाहता था कि वह क्या-क्या कहता है,,,, उसकी बात सुनकर सूरज बोला,,,)





बात तो तुम सच कह रहे हो,,,,।

अरे तभी तो कह रहा हूं देख लो ऐसा नजारा देखने को नहीं मिलेगा,,,, मेरी तो धोती में लंड अंगड़ाई लेने लगा है,,,।

क्या सच में,,,(सूरज उसकी हालत पर हंसते हुए बोला)

तो क्या बबुआ आपके सामने ऐसी औरत नाच रही हो तो भला कौन सा मर्द होगा जिसका लंड खड़ा नहीं होगा,,,,, अगर यह रात भर के लिए मिल जाए तो इसकी बुर से पूरी चाशनी चाट जाए,,,,।

(उसकी यह बात सुनकर सूरज एकदम सन्न रह गया,,,,, और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

लेकिन तुम्हारी दाल गलने वाली नहीं है बबुआ इस औरत के सामने,,,।

ऐसा क्यों,,,?

अरे देख नहीं रहे हो उसकी गदराई जवानी,,,, उसकी बड़ी-बड़ी गांड तुम तो अपना लंड उसकी बुर पर रखते ही ढेर हो जाओगे उसकी गर्मी सहन नहीं कर पाओगे,,,,।

क्या सच में ऐसा होता है हलवाई जी,,,,!





अरे तो क्यातुम अभी बच्चे हो इसलिए तुम्हें औरतों के बारे में कुछ ज्ञान नहीं है,,,,,ऐसी गर्म औरत अगर एक बार तुम्हारा लंड हाथ में पकड़ ले तो भी तुम्हारा पानी निकल जाएगा ऐसी औरत से निपटने के लिए कलाबाजी चाहिए,,,, जो अभी तुम्हारे बस की बात नहीं है,,,,थोड़ा यहां देखते रहना मेरी तो हालत खराब हो गई है शांत करके आता हूं,,,,।

क्या शांत करके,,,!(सूरज एकदम आश्चर्य जताते हुए बोला)

अरे देख नहीं रहे हो मेरी धोती में हालत खराब है,,, शादी में ऐसी ऐसी औरत शामिल होंगी तो हम हलवाई का तो पानी निकल जाएगा,,,,।

(उसकी हालत को देखकर सूरज मन ही मन मुस्कुराने लगा और वह हलवाई घर के पीछे अंधेरे में गायब हो गया सूरज समझ गया था कि वह क्या करने क्या है,,, लेकिन आज उसे समझ में आ गया था किवाकई में उसकी मां पूरे गांव में सबसे ज्यादा खूबसूरत और गर्म औरत है जिसे देखकर अच्छे-अच्छे का पानी निकल जाए और यही हालत हलवाई की हो रही थी,,,,, कुछ देर और सूरज अपनी मां का नाच देखते रहा,,,, और फिर थोड़ी ही देर में लोगों में चहल-पहल मचने लगी क्योंकि बारात दूर से दिखाई देने लगी थी,,,, क्योंकिथोड़ी बहुत आतिशबाजी अभी हो रही है जो कि सूरज को भी दिखाई दे रही थी और यह देखकर लाडो के पिताजी एकदम व्याकुल और परेशान होने लगे क्योंकिउन्हें सारा इंतजाम सही समय पर चाहिए था इसलिए वह तुरंत सूरज के पास आए और बोले,,,)

सूरज भोजन तैयार हो चुका है ना,,,,।

बिल्कुल चाचा जी आप चिंता मत करिए भोजन तैयार है,,,।

और मिठाई,,,?





मिठाई भी एकदम तैयार हैबस इस चासनी में गुलाब जामुन डालने की दे रही है और एकदम तैयार,,,,।

बहुत अच्छे बेटा जल्दी से गुलाब जामुन इसमें डालो,,,,,,(इतना कहकर लाडो के पिताजी दूसरी व्यवस्था देखने चले गए लोग इधर-उधर होने लगे और सभी लोग उसे रास्ते पर इकट्ठा होने लगे जहां से बारात आने को थी उसमें उसकी मां भी शामिल थी वह भी वहीं पर चली गई थी और रानी भी,,,, सूरज बार-बार लाडो के कमरे की तरफ देख रहा था अभी भी उसके साथ कुछ लड़कियां थी और यही सही मौका भी था लाडो के पास जाने का,,,, लेकिन अभी चाशनी में गुलाब जामुन डालना बाकी था,,,, और जैसे ही वह हलवाई आया यह काम भी पूरा हो गया,,,अब सूरज के पास और कोई काम नहीं था धीरे-धीरे बारात नजदीक आ रही थी घर के सभी लोग बरात का स्वागत करने के लिए गांव के किनारे पहुंच चुके थे, थोड़ी ही देर में लाडो की मां भी उसके कमरे से निकाल कर एकदम उत्साहित होते हुए बारात देखने के लिए चली गई सूरज को यही मौका ठीक लग रहा था और वह धीरे से इधर-उधर नजर घुमा कर देखने के बाद धीरे से लाडो के कमरे की तरफ आगे बढ़ गया,,, कमरे में पहुंच कर देखा अभी भी तीन-चार लड़कियां लाडो को घेर कर खड़ी थी वह अपने मन में कुछ सोचने लगा और थोड़ी देर बाद उन लड़कियों को आदेश देते हुए बोला,,)





अरे तुम लोग यहां खड़ी हो चाचा जी तुम लोगों को आवाज दे रहे थे जो बारातियों का स्वागत करना है और थोड़ा फूल भी ले लेना बारातियों पर छिड़कने के लिए,,,।

(सूरज की बात सुनकर वह लड़कियां भी एकदम उत्साहित हो गई और एकदम खुश होते हुए बोली)

अरे जल्दी चलो हम लोगों को तो आगे होना चाहिए बारातियों का स्वागत करने के लिए,,,।

हां हां जल्दी जाओ,,,,,।

(और थोड़ी ही देर में वह लड़कियां कमरे से निकल गई और बारातियों का स्वागत करने के लिए गांव के किनारे जाने लगी,,, उन लोगों के जाते ही सूरज धीरे से दरवाजा बंद कर दिया और यह देखकर लाडो एकदम से बोल पड़ी,,,)

तुम दरवाजा क्यों बंद कर रहे हो और तुम इतनी देर से थे कहां मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रही थी,,,,।

(उसकी बात सुनकर वह उसकी तरफ देखने लगा तो उसे देखा ही रह गया लालटेन की पीली रोशनी में उसका खूबसूरत चेहरा और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था और लाल रंग की साड़ी में तो वहां स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा दिखाई दे रही थी कुछ देर के लिए सूरज उसे देखता ही रह गया और मुस्कुराते हुए बोला,,,,)





मैं अच्छी तरह से जानता हूं तभी तो यहां पर आया हूं तुम्हारी परेशानी दूर करने के लिए,,,,,।

तो करो ना मेरी परेशानी दूर मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,,,(लाडोकुछ ज्यादा ही परेशान थी इसलिए उसकी समस्या थोड़ा तेजी से चल रही थी जिसके साथ उसकी नंगी जैसी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी यह देखकर सूरज की हालत एकदम से खराब हो गई और वह बिल्कुल भी समय बिगड़ता नहीं चाहता था वह तुरंत उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और अपनी बाहों में भर लिया यह देख कर लाडो एकदम से घबरा गई और बोली,,,)

यह क्या कर रहे हो सूरज,,,,,

तुम्हारी परेशानी दूर कर रहा हूं लाडो,,,,(और एकदम से अपने दोनों हथेलियां को उसके गोलाकार नितंबों पर रखकर उसे दबाना शुरू कर दिया लाडो सूरज की हरकत से एकदम से घबरा गई,,,)

यह ठीक नहीं है यह क्या तुम कर रहे हो तुम तो मेरी परेशानी दूर करने आए थे मैं अभी शोर मचा दूंगी,,,,(सूरज की बाहों से निकलने की कोशिश करते हुए लाडो बोली)

अरे पगली मैं तुम्हारी परेशानी तो दूर कर रहा हूं मैं जानता हूं,,,,तुम कहो परेशान हो और तुम्हारी परेशानी क्या है इसलिए जो कुछ भी नहीं कर रहा हूं मुझे करने दो शादी से पहले तुम्हारी परेशानी दूर कर दूंगा ऐसा मैंने तुमसे वादा भी किया था,,,,।(दोनों हाथों से उसकी गांड को जोर-जोर से दबाते हुए और ऐसा करने से उसके बदन में खुमारी भी छा रही थी,,,,, लेकिन फिर भी वह सूरज को रोकने की कोशिश करते हुए बोली,,,)





नहीं मुझे इस तरह की परेशानी नहीं है तुम चले जाओ मेरे कमरे से,,,,।

कैसी बात कर रही हो लाडो,,,(उसके कान के पास उसकी गर्दन पर हल्के-हल्के चुंबन करते हुए और गहरी सांस का एहसास कराते हुए)तुम्हारी यही परेशानी है मैं अच्छी तरह से जानता हूं तुम इसीलिए परेशान हो रही हो की शादी की रात को तुम्हारा पति तुम्हारे साथ क्या करेगा,,,,,(सूरज की ऐसी बात सुनकर लाडो की अपने मन में सोचने लगी कि वह तो इसीलिए सबसे ज्यादा परेशान है इसलिए वह कुछ बोल नहीं पाई और सूरज अपनी बात को और अपनी हरकत को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,,)हर लड़की को यही डर रहता है की शादी की पहली रात को उसका पति उसके साथ क्या करेगा (ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूची को दबाते हुए जिससे लाडो के बदन में उत्तेजना का एहसास होने लगा वह गर्म होने लगी)और मैं इसीलिए तुम्हारी परेशानी दूर कर देना चाहता हूं ताकि तुम अपने ससुराल जाओ और शादी की पहली रात को तुम्हारा पति तुम्हारे साथ कुछ ऐसा करें तो तुम्हें तकलीफ ना हो,,,,.

कैसी तकलीफ,,,,!(आश्चर्य जताते हुए लाडो बोली)





चुदाई की तकलीफ जब उसका लंड तुम्हारी बुर में जाएगा तो अगर तुम्हें बिल्कुल भी अनुभव नहीं होगा तो तुम्हें बहुत दर्द करेगा तुम्हें समझ में नहीं आएगा कि तुम क्या करोगी,,,, और तुम्हारी तकलीफ बढ़ती चली जाएगी,,,,,,।

(अब वह बड़ी गौर से सूरज की बात को सुनाने लगी और चुदाई वाली बात और लंड शब्द सुनकर तो उसकी बुर से पानी टपकने लगा,,, वह कुछ बोल नहीं पा रही थी और सूरज समझ गया की लोहा गरम हो रहा है,,,,आतिशबाजी की आवाज अभी भी दूर से आ रही थी इसलिए सूरज को पूरा यकीन था कि अभी उसके पास काफी समय है,,, और वह लगातारउसकी चूची ब्लाउज के ऊपर से दबाते हुए एक हाथ से उसकी गांड को भी मसल रहा था यह एक तरह से वह लाडे को चुदाई के लिए तैयार कर रहा था और ऐसा हो भी रहा था लाडो मदहोश हो रही थी,,,, उसकी हरकत का मजा लेते हुए उत्तेजित स्वर में लाडो बोली,,,)

क्या सच में इससे मेरी तकलीफ दूर हो जाएगी,,,।

बिल्कुल लड़ो और फिर तुम्हें अपने पति से बिल्कुल भी शिकायत नहीं होगी और उसकी हरकत से मजा आएगा और जी भर कर मजा लोगी,,,

क्या सच में ऐसा होगा सूरज,,,,(गहरी सांस लेते हुए वह बोली,,,)

बिल्कुल मेरी रानी और ऐसा कहते हुए वही हाथ से उसका ब्लाउज का बटन खोलने लगा,,,,,(दरवाजा बंद था उस पर सिटकनी लगी हुई थी सूरज समझ गया था कि उसके पास अब समय है लाडो की चुदाई करने के लिए क्योंकि बारात अभी गांव में नहीं पहुंची थी और यहां तक आने में उसे काफी समय था अब सूरज की हरकतों का मजा लाडो भी लेने लगी थीपहली बार उसके साथ कोई मर्द इस तरह की हरकत कर रहा था सूरज के हाथों से अपने ब्लाउज का बटन खोले जाने पर लाडो की हालत खराब होने लगी और देखते ही देखते सूरज जिसके ब्लाउज के सारे बटन खोलकर उसकी दोनों चूचियों को आजाद कर दिया उसकी दोनों चूचियों को लालटेन की पीली रोशनी में देखकर सूरज एकदम से खुश होते हुए बोला,)

वाह लाडो तुम्हारी चूची तो एकदम अमरूद की तरह है,,(उसकी बात सुनकर लाडो शर्मा गईऔर सूरज अपने दोनों हाथों को उसकी नंगी चूचियों पर रखकर दबाना शुरू कर दिया यह एहसास उसे पूरी तरह से मदहोश कर रहा था लाडो के लिए यह सब पहली बार था इसलिए लाडो पागल हो जा रही थी और जैसे ही सूरज ने उसकी चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू किया लाडो की तो बोलती बंद हो गई उसकी आंखें अपने आप बंद होने लगी,,,,सूरज अच्छी तरह से जानता था कि औरत को कैसे चुदवासी किया जाता है,, और सूरज अपनी सारी कलाबाजियांलाडो के ऊपर आजमा रहा था और उसमें धीरे-धीरे सफल भी हो रहा था उसकी दोनों चूचियों को भारी-बड़ी से मुंह में लेकर पीते हुए वह उन्हें मसल रहा था दबा रहा था जिससे उसकी चूचियां उसके बदन में आनंद की फुहार भर रही थी। अपनी हरकत को जारी रखते हुए वह लाडो से बोला,,,)

अब कैसा लग रहा है,,लाडो,,,,,

बहुत अच्छा लग रहा है सूरज कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि क्या कहूं,,,,।

तुम कुछ मत कहो बस मजा लो,,,,,और ऐसा कहते हुए वहां कुछ देर तक उसकी चूची को और पीता रहा मसलता रहा और फिर उसकी चूचियों को अपने मुंह से आजाद करता हुआ,,,,वह उसकी कंधे पर हाथ रखकर उसके खूबसूरत चेहरे को देखने लगा और फिर दोनों हाथों में उसका खूबसूरत चेहरा लेकर उसके लाल लाल होठों पर अपना होता रख दिया यह चुंबन भी लाडो के लिए पहले ही बार का था वह पूरी तरह से पानी पानी हो रही हैसूरज जी भरकर उसके होठों का रसपान करने लगा और इस दौरान वह अपने दोनों हाथों को फिर से उसके नितंबों पर ले गया और साड़ी के ऊपर से ही उसे जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया लेकिन इस बार,,,,अपने हाथ से वह उसकी साड़ी को कमर तक उठाना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे वह उसकी कमर तक साड़ी को उठाकर उसके होठों का रसपान करते हुए उसकी नंगी गांड को दोनों हाथों में दबोच कर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया अपनी नंगी गांड पर सूरज की हथेलियां का स्पर्श और उसकी पकड़ महसूस करके लाडो की बुर कचोरी की तरह फुलने लगी,,,,,।

कोई आ गया तो,,,,(इस मदहोशी भरे स्वर में भी लाडो चिंता जताते हुए बोली तो उसकी चिंता को दूर करते हुए सूरज बोला,,,)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो अभी सब लोग बरात का स्वागत करने के लिए पहुंच गए हैं और अभी देख रही हो आतिशबाजी की आवाज अभी भी दूर से आ रही है अपने पास काफी समय है तुम्हारी परेशानी दूर करने के लिए,,,,,(और ऐसा कहते हुए वह तुरंत लाडो के कंधे को पड़करदूसरी तरफ घुमा दिया और उसे दीवार से सटा दिया उसकी पीठ सूरज की तरफ थी लेकिन ऐसा करने पर उसकी साड़ी फिर से उसके कदमों में जा गिरी थी और सूरज अपने घुटनों के बल बैठकर उसकी साड़ी को फिर से उठाकर कमर तक कर दिया और उसकी नंगी गांड पर अपनी गाल को सहलाते हुए उसकी नितंबों का चुंबन लेने लगा उसकी ही हरकत से लाड़ो एकदम से सिहर उठी,,,,, और सूरज पागलों की तरह उसकी गांड पर चुंबनों की बौछार लगा दियायह सब तो ठीक था लाडो मदहोश हो जा रही थी लेकिन तब उसकी उत्तेजना और उसकी उत्सुकता का ठिकाना ना रहा जब सूरज उसकी एक टांग को उठाकर दीवार से ही सताए हुए अपने होंठों को नीचे की तरफ ले गया और उसके गुलाबी छेद पर रखकर उसपर चुंबन करने लगा,,,, लाडो पूरी तरह से मदहोश हो गई और अपने बदन को समेटने लगी क्योंकिउसे यह सब अजीब लग रहा था और वह एकदम से अपने हाथ को पीछे की तरफ लाई और सूरज के सर पर रखकर उसका बाल पकड़ कर उसे पीछे की तरफ करते हुए बोली,,)

यह क्या कर रहे हो सूरज ऐसा भला कोई करता है क्या,,!

क्यों नहीं लाडो शादी की पहली रात से ही तुम्हारा पति यही सब तुम्हारे साथ करेगा इसलिए तुम्हें तुम्हें यह सब सीख रहा हूं तुम इन सब में माहिर रहोगी तो सुख भोग पाओगी मजा ले पाओगी, इसलिए जो मैं कर रहा हूं उसे करने दो,,,,(और ऐसा कहने के बाद सूरज फिर से उसकी बुर पर अपने होठ रख दिया और उसे चाटना शुरू कर दियालाडो पूरी तरह से पागल हो जा रहे थे ऐसा नहीं था कि उसकी यही हरकत पर उसे मजा नहीं आया था वह पूरी तरह से आनंद से भर गई थी लेकिन उसे थोड़ा अजीब लग रहा थाइसलिए तो वह दोबारा इनकार नहीं कर पाए और सूरज उसे पूरी तरह से मत करने लगा वह दीवार से सटे हुए सूरज की हरकतों का मजा ले रही थी उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी उसके ब्लाउज के सारे बटन खुले हुए थे शादी के जोड़े में वह शादी से पहले ही गांव के ही लड़के से सुहागरात मना रही थी,,,, लाडो की गर्म सांसे और उसकी शिकासरी से पूरा कमरा गुंज रहा था लाडो खुद हैरान थी कि उसके मुंह से यह किस तरह की आवाज निकल रही थी,,,, लेकिन फिर भी वह इस समय सिर्फ मजा लूट रही थी,,,,,धीरे-धीरे आतिशबाजी की आवाज करीब होती चली जा रही थी सूरज अच्छी तरह से जानता था कि समय तो उसके पास है लेकिन अब पर्याप्त समय नहीं है,,, इसलिए उसे जो करना था जल्दी करना थाऔर इसीलिए वह समय के अभाव में उठकर खड़ा हो गया और धीरे से पजामा नीचे करके अपने टनटनाए लंड को बाहर निकाल लिया,, और बिना कुछ बोले वह धीरे से खड़ा हुआ औरअपने लंड को लाडो की गांड पर रगड़ना शुरू कर दिया यह एहसास पूरी तरह से लाडो को मस्त कर दिया वह पागल होने लगी उसे इतना तो समझ में आ रहा था किसूरज उसकी गांड पर क्या रंग लग रहा है और वह उसे अंग को देखना चाहती थी लेकिन उसे घबराहट भी हो रही थी और उसकी इसी घबराहट को दूर करते हुए सूरज उसके हाथ को पकड़ कर सीधा अपने लंड पर रख दिया उसकी गर्माहट इसकी मोटाई लाडो से बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हुई और वह अपना हाथ पीछे खींचना चाहती थी लेकिन सूरज उसे जबरदस्ती उसके हाथ को अपने लंड पर रखा हुआ था और धीरे-धीरे उसकी मुट्ठी पर रखकर उसे मुट्ठीया रहा था,,,,, लाडो एकदम मदहोश होते हुए बोली,,,,

, यह क्या है सूरज,,,,?

तुम्हारे काम की चीज है लाडो शादी की पहली रात से ही यह खिलौना तुम्हें मिलने लगेगा और इसकी आदत तुम्हें डालनी होगी तभी मजा ले पाओगी,,,, इसलिए तुम अपनी आंखों को खोलो और इसे देखो,,,,,,(इतना कहते हैं सूरज उसे अपनी तरफ घुमा दिया और लाड़ो उसके लंड को अपने हाथ में पकड़े हुए धीरे-धीरे अपनी आंख को खोलने लगी,,,,और आंख खोल कर जब वह अपने हाथ में लिए हुए अंग को देखी तो एकदम से घबरा गई और वह बोली,,,)

हाय दईया इतना मोटा और लंबा,,,,,।

यह क्या कह रही हो लाड़ो अगर ऐसा अपने पति के सामने बोलोगी तो वह नाराज हो जाएगा ,,,ऐसा बिल्कुल भी मत बोलना बल्कि ईससे तो खेलना और यह खेलने वाली चीज हैजितना अच्छा तुम इसके साथ खेलोगे उतना तुम्हारा पति तुमसे खुश होगा वरना तुम्हें वापस नहीं भेज देगा और फिर बदनामी हो जाएगी,,,,।

क्या सच में ऐसा होता है।

बिल्कुल ऐसा ही होता हैअब सुनो अपने पास समय ज्यादा नहीं है तुम्हारी परेशानी पूरी तरह से दूर करने के लिए इसलिए जो कुछ भी करना है जल्दी करना है,,,,,,।

मुझे क्या करना होगा,,,,,।

(लाडो की बात सुनकर सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भावना जलने लगे और वह उत्साहित होता हुआ बोला,,,)

जैसा मैंने तुम्हारी बुर को अपने होठों से चाट कर मस्त किया हूं उसी तरह से तुमको भी मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना होगा,,,,

यह क्या कह रहे हो सूरज,,, क्या ऐसा करना जरूरी होता है,,,।

बिल्कुल लाड़ोवशादी की पहली रात को तुम्हारा पति तुम्हारे साथ यही करेगा यही करवाएगा अगर तुम इनकार कर दोगी तो सोचो वह तुम्हारे साथ क्या करेगा,,,,,,।

क्या करेगा,,,?

तुम्हें मारेगा तूने फिर से यही भेज देगा और इल्जाम लगाएगी कि तुम्हें मर्द को खुश करना नहीं आता सोचो अगर यह खुले शब्दों में तुम्हारी मां से कहेगा तो वह क्या सोचेगी।

क्या मेरा पति अगर मैं ऐसा नहीं करूंगी तो सच में ऐसा करेगा,,,।

बिल्कुल मेरी रानी मैं तुमसे झूठ क्यों कहूंगा इसलिए तो मैं आया हूं तुम्हारे परेशानी दूर करने के लिएमैं नहीं चाहता कि तुम्हारी बदनामी हो शादी की पहली रात को ही तुम्हारा पति तुमसे नाराज हो जाए मैं चाहता हूं कि तुम पहली रात को ही अपने पति को वह खुशी तो जैसा हुआ चाहता हूं ताकि जिंदगी भर वह तुमसे खुश रहे,,,,।

(इतना सुनकर वह सूरज की बातों में आ गई और हल्के से नीचे झुक गई सूरज अपने लंड से हल्के से ऊपर की तरफ उठाकर उसके होंठों से रगडना शुरू कर दिया और लाडो उसे मुंह में लेकर चूसने लगी पहले तो उसे थोड़ा अजीब लगा लेकिन धीरे-धीरे उसे भी मजा आने लगा और वहां बड़े आराम से इस अंदर बाहर करने लगी अब समय आ गया था उसकी चुदाई का क्योंकि धीरे-धीरे आतिशबाजी की आवाज और करीब होती चली जा रही थी धीरे से सूरज अपने लंड को उसके मुंह में से बाहर निकाल कर खिड़की से बाहर की तरफ देखा अभी भी वहां कोई नहीं था सब लोग बरात के स्वागत में ही लगे हुए थे,,,, मौके की नजाकत को देखते हुए सूरज लाडो को बिस्तर पर लेटने के लिए बोला,, और उसकी बात मानकर लाडो बिस्तर पर पीठ के बल लेट गई सूरत जल्दी से एक मोटा तकिया की गांड के नीचे रख दिया ताकि उसकी गांड ऊंची रहे,,,, और ढेर सारा थुक उसकी बुर पर लगाया ताकि बड़े आराम से उसका लंड उसने खोज सकेसूरज धीरे से उसकी दोनों टांगों के बीच जगह बनाकर उसको गुलाबी क्षेत्र पर अपने लंड का सुपाड़ा टीका दिया और उसे धीरे-धीरे अंदर की तरफ डालना शुरू कर दिया सूरज की कलाबाजी उसका धैर्य रंग ला रहा था और धीरे-धीरे उसका लंड लाडो की बुर की गहराई नाप रहा था,,,,।

थोड़ी देर बाद सूरज की कमर अपने आप आगे पीछे होने लगी और लड़ो मदहोश होने लगी उसके मुंह से गरमा गरम शिसकारी की आवाज पहुंचने लगी वह थोड़ा दर्द झेल रही थी लेकिन इतना मजा आ रहा था कि वह खुद बयां नहीं कर सकती थी,,, वह खुलकर सूरज के साथ चुदाई का मजा लूट रही थी और वह भी अपनी शादी से पहले,,,,सूरज अपना काम पूरा करने के बाद धीरे से खटिया पर से नीचे उतर गया और अपने कपड़ों को व्यस्त करने लगा और उसे भी अपने कपड़े व्यवस्थित कर लेने के लिए बोला,,,, वह अपने ब्लाउज का बटन बंद कर रही थी तब सूरज बोला,,,)

अब तुम्हें कोई परेशानी तो नहीं है,,,,,,





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नहीं अब मुझे कोई परेशानी नहीं है अब बिल्कुल ठीक है,,,,।

इसीलिए तो मैं यहां आया हूं तुम्हारी परेशानी दूर करने के लिए और अब तुम्हारी परेशानी दूर कर दिया हूं,,,(ऐसा कहते हुए एक बार फिर से उसके होंठों का चुंबन ले लिया और कमरे से बाहर निकल गया तब तक बारात धीरे-धीरे घर के आंगन में आ चुकी थी,,,, सूरज शादी की हर रस्म मैं सुबह तक साथ में था। बारात विदाई होने के बाद ही वह अपने घर वापस आया)
 
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