Incest पहाडी मौसम - Page 11 - SexBaba
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Incest पहाडी मौसम

सूरज एक और बुर की चुदाई कर चुका था और वह भी ऐसी बुर जो सुहागन होने जा रही थी जिस पर पहला हक उसके पति का था,, जो पहला व्यक्ति था जो उसके बदन परहाथ रखता उसके अंगों से खेलते उसके साथ सुहागरात मनाता लेकिन उसके खूबसूरत जिस्म पर अपनी बड़ी चालाकी दिखा देना सूरज विवाह से पहले ही उसके साथ सुहागरात मना लिया था,,,कसी हुई चिकनी बुर में अपना लंड डालकर पूरी तरह से मस्त हो चुका था और लाडो को भी जवानी का मजा कैसे लेते हैं यह अच्छी तरह से बता दिया था और सूरज के इस तरह के संभोग से वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी और काफी खुश भी थी,,, विवाह के बाद विदाई तक सूरज साथ में ही सारे रस्मे में शामिल रहा और बारात के चले जाने के बाद वह अपने घर वापस लौट चुका था,,,, अब फिर से उसे अपनी दिनचर्या शुरू करनी थी,,, थोड़ी ही देर में वह अपने घर पहुंच चुका था,,,, और खेत पर जाने की तैयारी कर रहा था क्योंकि मुखिया के खेत के फसल की कटाई अभी पूरी तरह से नहीं हुई थी अब थोड़ा जल्दबाजी दिखाने का समय आ गया था।





घर पर पहुंचा तो देखा उसकी मां रसोई बना रही थी रानी घर पर नहीं थी अपनी मां को देखते ही उसे शादी वाली घटना याद आने लगी वह रस में याद आने लगी जब गांव की औरतेंढोल बाजे पर अपनी कमर हिला रही थी जिसमें उसकी खुद की मां शामिल थी अपनी मां को देखते ही उसकी आंखों के सामने उसकी मटकनी हुई गांड नजर आने लगी और वह अपनी आंखों में खुमारी भरते हुए सीता अपनी मां के सामने जा बैठा और मुस्कुराते हुए अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,।

वाह कमाल का नाचती हो मां,,तुम,,,,

तु कब देख लिया,,,!(सुनैना को मालूम था की उसे नहाते हुए उसका बेटा देखा था लेकिन फिर भी वह बात को बनाते हुए बोल रही थी,,, और अपनी मां की बात सुनकर सूरज फिर से मुस्कुराते हुए बोलालेकिन इस बार बोलते हुए उसका ध्यान उसकी मां की चूचियों पर चला गया था जो की ब्लाउज का एक बटन खुला होने की वजह सेचुचियों का नजारा बेहद अद्भुत दिखाई दे रहा था और आधे से ज्यादा चूचियां बैठने की वजह से बाहर लड़की भी दिखाई दे रही थी जिस पर सुनैना का ध्यान नहीं था,,,)





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कल जब मैं चाशनी बना रहा था तब तुम सामने ही तो नाच रही थी अपनी कमर हिला हिला कर,,,।

(सूरज कमर हिलाने की जगह गांड मटका कर बोलना चाहता था लेकिन इस तरह का शब्दों का प्रयोग करना अभी उसे उचित नहीं लग रहा था और सुनैनाअपने बेटे की बात सुनकर खास करके कमर हिला हिला कर नाचने वाली बात पर वह शर्म से पानी पानी होने लगी उसका चेहरा तुरंत शर्म से सुर्ख लाल होने लगा वह अपनी नजर को नीचे झुकाते हुए ही बोली,,,)

तू देख लिया था,,,, वैसे तो मुझे नाचना नहीं आता लेकिन सभी औरतें जिद कर रही थी इसलिए,,,

कौन कहता है तुम्हें नाचना नहीं आता सभी औरतों में तुम सबसे अच्छा नाच रही थी तभी तो औरते तुम्हें नाचने के लिए बोलती है,,,(अपनी मां की चूचियों को प्यासी नजर से देखते हुए वह बोला,,,,)

क्या सच में मैं अच्छा नाच रही थी,,,।

हां तुम बहुत अच्छा नाच रही थी बल्कि तुम्हारा नाच तो हलवाई को भी ज्यादा पसंद आ रहा था,,।

हलवाई को,,,(एकदम प्रसन्न होते हुए)

तो क्या,,,,

क्या कह रहा था वो,,,,(रोटी को तवे पर रखते हुए बोली)





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तुम्हारे नाच की तारीफ कर रहा था कह रहा था कि मैं आज तक इस तरह का अच्छा नाच नहीं देखा कसम से कितना अच्छा नाच रही है और दूसरी औरतों को तो नाचना ही नहीं आता,,,,(सूरज अपने मन से इस तरह की बातें कर रहा था उसका मन तो कर रहा था कि वह अपनी मां के सामने सब कुछ साफ-साफ बता दे जो कुछ भी हलवाई बोल रहा था उसकी जवानी के बारे में उसके खूबसूरत बदन के बारे में और उसकी बड़ी-बड़ी गांड देखकर जिस तरह से उसका मन ललचा रहा था वह सब कुछ बता दे कि उसे देखकर दूसरे मर्द उसके बारे में क्या सोचते हैं,,,, लेकिन इस समय इस तरह की बातें करना उचित बिल्कुल भी नहीं था,,, लेकिन वह अच्छी तरह से जानता था कि औरत के सामने उसकी तारीफ करने पर अगर वह कठोर दिल की भी होगी तो फिर वह पिघलने लगेगी इसलिए वह अपनी मां के सामने उसकी तारीफ कर रहा था। अपने बेटे की बात सुनकर वह बोली,,,)

क्या सच में वह ऐसा बोल रहा था,,,।

सुनैना और उसका बेटा





तो क्या मां तुम नाचती ही इतना बढ़िया हो कि कोई भी तुम्हारी तारीफ किए बिना नहीं रह सकता हलवाई की तो छोड़ो लाडो के पिताजी भी कह रहे थे की भाभी जी कितना अच्छा नाचती है,,,, लाडो की शादी में आकर चार-चांद लगा दी है,,,,(सूरज सब कुछ बनी बनाई बात बोल रहा था ऐसा कुछ भी नहीं था हवाई उसकी मां की तारीफ जरुर कर रहा था लेकिन उसके नाच कि नहीं बल्कि उसकी खूबसूरती की,,,, सूरज पागलों की तरह अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को देखनाअभी कल शाम को ही वह अपनी मां को पूरी तरह से नग्न अवस्था में देख चुका था उसके नंगे बदन का रसपान अपनी आंखों से करके वह पूरी तरह से मत हो चुका था लेकिन फिर भी यह प्यास ऐसी थी कि कभी बुझती ही नहीं थी,,,, तभी तो इस समय अपनी मां की चूचियों की हल्की सी झलक देखकर भी वह बावला हुआ जा रहा था,,,, तवे पर रोटी पक रही थी और पक कर फूल रही थी बिल्कुल सुनैना की बुर की तरह,,, फूली हुई रोटी को जब-जब सूरज देख रहा था तब तक उसे अपनी मां की बुर का ख्याल आ रहाऔर वह अपने मन में यही कह रहा था कि इस समय भी उसकी मां की बुर रोटी की तरह फुल गई होगी,,,, अपने बेटे के मुंह से अपने नाचने की तारीफ सुनकर वह गदगद हुए जा रही थी लेकिन फिरउसे एहसास हुआ कि उसका बेटा उसकी छतिया की तरफ देख रहा था और वह अपनी नजर को हल्की करके अपनी छतिया की तरफ देखी तो अपनी स्थिति पर वह शर्म से पानी पानी होने लगी।





और अपनीचूचियों को व्यवस्थित करने के लिए वह अपने कदमों को इधर-उधर करके अपने आप को व्यवस्थित कर ली जिससे उसकी बाहर निकली हुई चूचियां फिर से ब्लाउज के अंदर समा गई लेकिन फिर भी अपने होने का एहसास वह बड़ी अच्छी तरह से कर रही थी और बात की दिशा बदलते हुए सुनैना बोली,,,।

अब जा जल्दी से नहा कर तैयार हो जा खेत पर भी जाना है मुखिया का खेत अभी भी वैसा कहीं वैसा है कुछ ज्यादा काम हुआ नहीं खेत में,,,।

मैं भी आज यही सोच रहा था अब तक तो आधा काम हो जाना चाहिए,,,,,(फिर से अपनी मां की चूचियों की तरफ देखता हुआ वह बोला और अपनी मां की चूचियों की तरफ देखकर जैसे उसे कुछ याद आ गया हो और वह एकदम से अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) कल वाला ब्लाउज तुम नहीं पहनी हो,,,

(ब्लाउज का जिक्र होते ही सुनैना एकदम से उत्तेजना से सिहर उठी ब्लाउज वाली घटना उसे अच्छी तरह से याद थी,,,वह कभी सोची नहीं थी कि उसके ब्लाउज की डोरी उसका बेटा अपने हाथों से बांधेगा और उसके बेहद करीब आकर,,,, उस पल को याद करके इस समय सुनैना की दोनों टांगों के बीच की पतली बाजार में हलचल होना शुरू हो गई थी वह उस पल के सुनहरी यादव ने एकदम से खोने लगी थी,,, तभी सूरज फिर से अपनी बात को दोहराते हुए बोला,,,)





क्या हुआ मां कल वाला ब्लाउज तुम क्यों नहीं पहनी हो वह तुम पर ज्यादा अच्छा लगता था खास करके उसकी डोरी,, रेशमी डोरी तुम्हारी चिकनी गोरी पीठ पर खूबसूरत लग रही थी,,,(अपनी मां की खूबसूरती के आकर्षण में वह अपने मन की बात अपनी मां से बोल दिया था और उसकी मां उसकी बात सुनकर एकदम से सन्न में रह गई थी,,,, सूरज खुले शब्दों में उसकी चिकनी गोरी पीठ की तारीफ कर रहा था,,,,सुनैना अच्छी तरह से जानती थी कि एक बेटे के मुंह से उसके मन की तारीफ में इस तरह के शब्द शोभा नहीं देते लेकिन फिर भी वह चाह कर भी कुछ बोल नहीं पा रही थी क्योंकि ना जाने क्यों उसे भी अपने बेटे के मुंह से निकले इन शब्दों में उसकी खूबसूरती की तारीफदिखाई दे रही थी और वह अपने बेटे को कुछ बोल नहीं पा रही थी क्योंकि उसकी बात उसे अच्छी लग रही थी,,,, फिर भी अपने बेटे की बात सुनकर वह शरमाते हुए अपनी नजर को नीचे झुकाए हुए उत्तर देते हुए बोली,,,)

सुनैना और उसका बेटा एक ही बिस्तर पर





पागल हो गया है क्या तू वह हमेशा पहनने के लिए थोड़ी ना है शादी विवाह पर ही में पहनती हूं और आज सुबह नहा कर उसे धो डाली हूं ताकि ऐसे ही किसी समय पर उसे पहना जा सके,,,।

लेकिन मेरी मानो तो तुम्हें उसे तरह का ब्लाउज रोज पहनना चाहिए क्योंकि वह तुम्हारी खूबसूरती को और ज्यादा बढ़ा देता है,,,।

तुझे कैसे मालूम कि मेरी खूबसूरती को वह ब्लाउज बढा देता है,,,,(सुनैना जानबूझकर अनजान बनते हुए यह सवाल पूछ रही थी)

क्या मां शाम को मैं ही तो तुम्हारे ब्लाउज की डोरी को बांधा था तुमसे तो खुद से अपनी डोरी की गिठान नहीं बांधी जा रही थी,,,, डोरी बांधते हुए ही तो मैंने देखा था,,,।

अच्छा तो तू यही सब देखता है,,,,(दूसरी रोटी को तवे पर रखते हुए बोली,,,)

नहीं ऐसी बात नहीं है बस आंखों के सामने देखा तो बता रहा हूंऔर वैसे कोई जानबूझकर मैं तुम्हारे कमरे में नहीं आया था मैं तो तुम्हें जल्दी शादी में चलने के लिए बुलाने के लिए आया था और जब कमरे पर पहुंचा तो तुम कपड़ेपहन कर ब्लाउज पहनने की कोशिश कर रही थी और पहन नहीं पा रही थी,,,,।





अब क्या करूं पीछे ठीक तरह से हाथ नहीं पहुंच पा रहा था,,,।

अगर मैं नहीं आता तो क्या करती तब क्या पहनती,,,

रानी थी ना,,,,,,

कहां थी रानी,,,,वो तो पहले ही शादी में जा चुकी थी,,,,,,,,

तब तो मुझे दूसरा ब्लाउज पहन कर ही जाना पड़ता,,,,

अच्छा हुआ मैं समय पर आ गया था,,,, और वैसे भी तुम्हारे ब्लाउज की तारीफ हो रही थी,,,।

ब्लाउज की तारीफ,,,,,(आश्चर्य जताते हुए) ब्लाउज की तारीफ अब कौन कर रहा था,,,,

लाडो के घर पर जो बाहर से औरतें आई थी वही औरतें बार-बार तुम्हारे ब्लाउज की तरफ देख रही थी और तारीफ कर रही थी,,,।

क्या सच में,,,,, औरतें मेरे ब्लाउज की तारीफ कर रही थी,,,।

अरे तो क्या ब्लाउज के साथ-साथ तुम्हारी खूबसूरती की तारीफ भी करते हुए कह रही थी किजाते-जाते में जरूर पूछूंगी की यह ब्लाउज कहां से सिलवाई हो,,,,

तू यह सब अपने कानों से सुना,,,,।





अरे तो क्या हलवाई का सारा जिम्मा मेरे सर पर था पर मुझे बार-बारकमरे में जाना पड़ता था सामान लाने के लिए वहीं पर सब होते हैं यही सब बातें कर रही थी और उन्हें नहीं मालूम मैं कौन हूं वरना मुझसे ही पूछ ली होती कि तुम्हारी मां ब्लाउज कहां से सिलवाई है,,,,।

अच्छा हुआ उन लोगों को नहीं मालूम था कि तू मेरा ही बेटा ही करना तुझसे पूछ रही होती और मैं नहीं चाहती कि इस तरह का ब्लाउज कोई और भी पहने,,,।

क्यों,,,?

मेरे ही पास है तभी तो सब पूछ रही थी सबके पास हो जाएगा तो कौन पूछेगा,,,।

बात तो तुम सही कह रही हो मां,,,,,।

अच्छा इन सब बातों को छोड़ और जल्दी से जाकर तैयार हो जा खेत पर भी जाना है,,,,।

ठीक है,,, लेकिन लाओ में एक रोटी खा लूं,,,(अपने हाथ को तवे की तरफ आगे बढ़ाते हुए) खुशबू बहुत अच्छी आ रही है,,,,

अरे अरे यह क्या कर रहा है थोड़ा पक तो जान दे,,,।

पक तो गई है,,,,।

ऐसे थोड़ी थोड़ी और फूल जाने दे,,,

फूल जाएगी तब क्या होगा,,,?(सूरज बड़ी मासूमियत के साथ बोला)

अरे बुद्धू तवे पर रोटी के फूलने का मतलब है कि वह खाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी है,,,,।

(अपनी मां की इस तरह की बात सुनकर सूरज अपने मन में ही बोलाजैसे तुम्हारी बुर जब फूल जाती है तो समझ लो चोदने के लिए तैयार हो चुकी है,,,, मैं जानता हूं तुम्हारी बुर भी गर्म होकर फूल जाती है तुम्हारी बुर को भी मेरे लंड की जरूरत है,,, सूरज अपने मन में यही सोच रहा था कि तभी उसकी मां खुली हुई रोटी को अपने हाथ में लेकर उसके किनारी को हल्के से पकड़ कर अपने बेटे की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)





ले अब खा ले,,,,।

(सूरज अपनी मां के हाथ में से रोटी को ले लिया लेकिन खुली हुई रोटी को देखकर उसे गरमा गरम बर याद आने लगा और उसका लंड खड़ा होने लगा इसलिए वह रोटी को खाते हुए अपनी मां से बोला,,)

यह सुबह-सुबह रानी कहां चली गई,,,,।

कहीं नहीं गई है गाय को चारा खिला रही है,,,,।

ओहहहह,,,,चलो कोई बात नहीं तब से मैं नहा धोकर तैयार हो जाता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और घर से बाहर की तरफ जाने लगा यह देखकर सुनैना की जान में जान आई क्योंकि अपने बेटे की मौजूदगी में उसे अजीब सा महसूस होने लगा था,,,, एक अजीब सा आकर्षण उसके बदन को झकजोर कर रख दे रहा था,,,,और सबसे बड़ी बात यह थी कि उसकी बातें उसे अच्छी लगने लगी थी और उसकी बातों को सुनकर उसकी बुर पानी छोड़ने लगती थी अपने बदन में अपने बेटे की मौजूदगी से हो रही इस तरह के बदलाव से वह कभी-कभी इस बात से घबरा जाती थी की कही उसके कदम बहक ना जाएक्योंकि उसे इतना तो समझ में आ गया था कि उसके बेटे की नजर उस पर पूरी तरह से गंदी हो चुकी है अब वह एक मां के तौर पर नहीं बल्कि एक औरत के तौर पर उसे देखता था,,,, ऐसी बातों को याद करके पल भर में ही उसकी आंखों के सामने उसके बेटे को लेकर ऐसी घटना याद आने लगी जिसकेबारे में सोचकर ही उसकी बुर कचोरी की तरह फूल गई थी,,, पहली बार अपने बेटे के साथ उसका आलिंगन बद्ध होना,,, जिसका फायदा उठाते हुए सूरज का उसके नितम्बों पर हाथ फेरना उसे हल्के से दबाना,,,, बार-बार उसकी चूचियों की तरफ घूरना,,,, खेत में कटाई के दौरान जब वह पेशाब कर रही थी तो उसे पीछे से प्यासी नजरों से देखनाऔर फिर शायद उसी के बदौलत जब गहरी नींद में सो रही थी तो उसकी साड़ी को कमर तक उठाकर उसकी नंगी गांड पर मोटा लंड रगड़ना और पानी निकाल देना,,, और फिर उसके ब्लाउज की डोरी बांधना उसकी खूबसूरती की तारीफ करना यह सब याद करके सुनैना मदहोश हो रही थी।

सुनैना की चुदाई





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दूसरी तरफ रानी अपने ही ख्यालों में खोई हुई गीत गुनगुनाते हुए गए और बकरियों को चारा खिला रही थी आज उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव कुछ ज्यादा ही नजर आ रहे थे क्योंकि आज उसे नदी पर कुंवर से जो मिलना था,,,, वह अपनी ही धुन में गीत गुनगुना रही थी और तभी उसके बेहद करीब पहुंचकर सूरज उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी गांड पर हाथ रखते हुए बोला,,,।

क्या बात है रानी कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रही हो,,,,।

(अपनी गांड पर हाथ का स्पर्श महसुस करते ही वह थोड़ा सा चौक गई थी लेकिनजब उसे पता चला कि उसकी गांड पर हाथ रखने वाला और कोई नहीं उसका भाई है तब उसकी जान में जान आई और एकदम से खुश होते हुए बोली,,)

जिसका ऐसा भाई हो तो उसे बहन को तो हमेशा खुश रहना ही पड़ेगा,,,।

क्यों आज ज्यादा मन कर रहा है क्या मेरी रानी बहन का,,,,

तुझे पास होता है भाई तब ना जाने क्या होने लगता है,,,,,।

कहां पर होने लगता है बताना,,,,(कुर्ती के ऊपर से चुची पर हाथ रख कर दबाते हुए,,,)

ऊईईई मां धीरे से भाई दुख रहा है,,,

मजा भी तो आता है,,,

वह तो आता ही है लेकिन इस तरह से एकाएक दबाओगे तो दुखेगा ही ना,,,





अच्छा यह बता कहां पर होने लगता है,,,,

रहने दो ना भाई मां आ जाएगी,,,।

अभी नहीं आने वाली क्योंकि वह रोटी पका रही है,,,, बता तेरा मन कर रहा,, है ना,,,,

अब रहने दो ना,,,, मुझे नहाने जाना है,,,,

मेरा तो मन कर रहा है,,,देख,,,,(इतना कहने के साथ ही अपने पजामा को आगे की तरफ खींच कर अपना खड़ा लंड दिखाते हुए और उसकी नजर पडते ही रानी की बुर फूलने पिचकने लगी,,,, वह तुरंत अपना हाथ अपने भाई के पजामा में डालकर उसे कस के पकड़ ली उसकी हरकत पर सूरज एकदम मदहोश हो गया और बोला,,,) चल मजा करते हैं,,,.

नहीं नहीं मां आ गई तो,,,,

आ गई तो क्या हुआ देख लेगी कि उसकी बेटी जवान हो गई है लंड लेने के लायक हो गई है,,,,।(सलवार के ऊपर से ही अपनी बहन की बुर पर हाथ रखकर उसे दबाते हुए अपने भाई की हरकत से रानी मदहोश होते हुए बोली,,)

और जब मा देखेगी कि उसका बेटा यह क्या कर रहा है तब,,,।

तब क्या वह भी समझ जाएगी कि उसका बेटा जवान हो गया है चोदने के लायक और खुद अपनी भी टांग मेरे सामने खोल देगी,,,।

धत् यह कैसी बातें करते हो भाई मां के बारे में,,,

सच कह रहा हूं मेरी जान औरत की सबसे पहली पसंद यही होती है जो तू पकड़े हुए हैं,,,,,

(अपनी बहन से अश्लील बातें करते हुए और उसके खूबसूरत चेहरे पर बदलते भाव को देखकर सूरज समझ गया था कि उसकी बहन को क्या चाहिए और वह तुरंत अपनी बहन को गोद में उठा दिया और टूटी हुई झोपड़ी में ले जाने लगा जिसमें गए बंधी हुई थी,,,, और उसमें ले जाकर केतुरंत उसके सलवार की डोरी खोलने लगा और इस समय रानी उसे इनकार नहीं कर पाए क्योंकि उसका भी मन बहुत कर रहा था और देखते ही देखते सूरज अपनी बहन की सलवार निकाल कर उसे कमर से नीचे नंगी कर दिया था,,,, और रानी खुद ही अपनी कमीज कोअपनी छतिया के ऊपर तक खींच दी थी ताकि उसकी चूचियां एकदम से नंगी हो जाए और उसकी नंगी चूची पर है हाथ रखकर से जोर-जोर से दबाते हुए दूसरे हाथ की उंगलियों को अपनी बहन की बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करने लगा और उसकी दूसरी चूची पर मुंह लगाकर पीना शुरू कर दिया,,,, सूरज अपनी बहन की जवानी पर चारों तरफ से हमला कर रहा था और इस हमले का जवाब रानी के पास बिल्कुल भी नहीं था वहअपने भाई के हमले से पूरी तरह से ग्रस्त हो चुकी थी और एकदम मस्त हुए जा रही थी। टूटी हुई झोपड़ी में रानी की गरमा गरम शिसकारियां गुंज रही थी,,,।

सुनैनाऔर उसका बेटा





सूरज की हालत खराब होती जा रही थी उसका लंड पूरी तरह से अकड़ कर लोहे का रोड बन चुका थावह तुरंत अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच घुटने के बल बैठ गया और अपनी लपलपाती हुई जीभ को उसके गुलाबी छेद पर रखकर चाटना शुरू कर दिया,,,, रानी एकदम से मत हो गई और दोनों हाथ से अपनी भाई के बालों को पड़कर उसके मुंह को अपनी बुर से सटाने लगी दबाने लगी,,, अपने भाई की जीभ की करामात से रानी पानी पानी हुए जा रही,,,, सूरज अपनी बहन पर अपनी सारी कलाबाजिया दिखा रहा था,,,और दोनों भाई बहन की कलाबाजियां टूटी हुई झोपड़ी में घास खा रही गई बार-बार सर उठा कर देख रही थी,,,,लेकिन उसके देखे जाने का रानी और सूरज पर बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ रहा था क्योंकि वह लोग इंसानों से नजर बचाकर टूटी हुई झोपड़ी में मजा ले रहे थे जानवर से नहीं,,,, देखते ही देखते रानी पूरी तरह से मस्त होने लगी,,,,सूरज समझ गया था कि अब उसकी बहन को क्या चाहिए इसलिए तुरंत उठकर खड़ा हो गया था लेकिन तुरंत उसके कंधों पर अपने दोनों हाथ रखकर उसे नीचे की तरफ झुकने लगा उसकी बहन भी समझ गई थी कि उसके भाई को क्या चाहिए और अगले ही पल उसका मोटा तगड़ा लंड उसके गले की गहराई नाप रहा था।।।

लेकिन अपने भाई का लंड चूसने के लिए रानी घुटनों के बाल बैठी नहीं थी बल्कि हल्के से झुकी हुई थी जिससे उसकी गोरी गोरी गांडहिलती हुई सूरज को नजर आ रही थी और सूरज से रहने जा रहा था सूरत तुरंत अपना हाथ आगे बढ़कर उसकी गांड पर रखकर उसे जोर-जोर से मसल रहा था उस पर जोर-जोर से चपत भी लगा रहा था जिससे रानी को भी मजा आ रहा था,,,,रानी लंड चूसने में पूरी तरह से माहिर हो चुकी थी और उसे माहिर बनाने वाला उसका खुद का भाई ही था क्योंकि अभी तक वह अपने भाई के साथ ही शारीरिक संबंध का मजा ले रही थी,,,, लेकिन वह पूरी तरह से आत्मविश्वास से भर चुकी थी किउसके भाई के सिवा अगर किसी और से उसे शारीरिक संबंध बनाना पड़ेगा तो वह अपनी हरकतों से अपनी जवानी के जलवे से उसे पूरी तरह से अपना गुलाम बना देगी,,,, क्योंकि वह खुद अपने भाई की हालत खराब कर दे रही थीकुछ देर तक यह सिलसिला चलता रहा और फिर सूरज अपनी बहन के मुंह में से अपने लंड को बाहर खींच लिया क्योंकि अब समय आ गया था चुदाई का,,,, और सूरज को कुछ भी बताने की जरूरत नहीं थी रानी खुद ही टूटी हुई झोपड़ी के बीच में गड़े हुए मोटे से डंडे को जो की झोपड़ी को खड़े रहने में सहायक था,,, उसे दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी गोल-गोल गांड को अपने भाई के सामने उठाकर परोस दी यह देखकर उसके भाई के मुंह में पानी आ गया,,,,

उसका भाई भी अपनी बहन की हरकत से एकदम से खुश होता हुआ ढेर सारा थुक अपनी उंगलियों पर लिया और उसे अपने लंड के सुपाड़े पर लगाकर अपनी बहन की गुलाबी गली दिखा दिया और उसका घोड़ा सरपट गुलाबी गली में दौड़ना शुरू कर दिया सूरज अपनी बहन की कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था वह जमकर अपनी बहन की चुदाई कर रहा था,,,,शुरू शुरू में अपनी बहन की बुर में लंड डालने में उसे थोड़ी तकलीफ होती थी लेकिन अब ऐसा लग रहा था की रानी की बुर में उसके भाई के लंड का सांचा बन चुका था और बड़े आराम से लंड अंदर बाहर हो रहा था। रानी कसके मोटे लकड़े को पकड़ी हुई थी और अपने भाई के मोटे डंडे को अपनी बुर में ले रही थी,,,,सूरज अपनी बहन की मस्ती बढ़ाने के लिए और खुद मजा लेने के लिए अपने दोनों हाथ अपनी बहन की कमर से हटकर आगे की तरफ ले जाकर उसके मौसंबियों को पकड़ लिए थे और उन्हें जोर-जोर से दबाते हुए अपनी कमर हिलाकर उसकी चुदाई कर रहा था।

दोनों अपनी मंजिल के बेहद करीब पहुंच चुके थेसूरज की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी और वह अपनी बहन की नंगी गांड पर जोर-जोर से चपत भी लग रहा था जिससे उसकी गांड पूरी लाल हो चुकी थी,,, थोड़ी ही देर में दोनों अपने चरम सुख को प्राप्त कर लिए थे रानी अपने कपड़ों को दुरुस्त करके जल्दी से वहां से निकल गई थी और पीछे-पीछे सूरज भी नहाने के लिए चला गया था।
 
खेत में जाने से पहले सूरज अपनी बहन की जमकर चुदाई कर चुका था और उसकी बहन भी अपने भाई की घमासान चुदाई से पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी,,, और रानी के लिए बेहद जरूरी दिखाअपने सपनों के राजकुमार से मिलने से पहले यह घमासान चुदाई क्योंकि वह कुंवर के बारे में सोच सोच कर अपनी बुर को गीली कर ले रही थी वैसे उसका कोई इरादा नहीं था कि पहली मुलाकात में ही कुंवर के साथ शारीरिक संबंध बना बैठे लेकिन वक्त और हालात का कोई भरोसा नहीं होता इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी,,,,।





सूरज नहा कर तैयार हो चुका था,,, औररसोई के पास बैठकर खाना खा रहा था उसकी मां उसके लिए खाना परोस कर खुद नहाने के लिए चली गई थी,,, अपनी मां की हालत को देखकरसूरज को पूरा यकीन हो गया था कि एक न एक दिन चिड़िया जाल में फंसने वाली है,,, और इसके पीछे मूल कारण यह भी था कि महीनो से वह अपने पति से अलग थी और धीरे-धीरे सूरजऔरतों को समझने लगा था वह अच्छी तरह से जानता था कि मर्द के बिना औरत कितना तड़पती है और वह तो खुद अपनी आंखों से अपनी मां को बिस्तर पर करवटें बदलते हुए और अपने हाथ से अपनी जवानी की प्यास बुझाते हुए देख चुका था इसलिए उसे पूरा यकीन था कि धीरे-धीरे एक दिन वह उसकी मां की दोनों टांगों के बीच उसकी प्यास बुझाने के लिए उपस्थित होगा जिसमें उसकी मां की पूरी तरह से रजामंदी होगी। यही सब सोचता हुआ वह खाना खा रहा था,,, और दूसरी तरफ गुसल खाने में यह जानते हुए भी की उसका आप जवान बेटा घर में उपस्थित है फिर भी वह अपने सारे कपड़े उतर चुकी थी और एकदम नंगी गुशल खाने में अपने रंगीन ख्यालों में खोई हुई थी।





उसके रंगीन ख्यालों में उसका बेटा ही था वह अपने बेटे के बारे में सोचकर मस्त हुए जा रही थी हालांकि वह ऐसा चाहती नहीं थी लेकिन फिर भी न जानेकैसा एहसास था कि वह अपने बेटे के ख्याल में डूबी जा रही थी और जिस तरह से उसका बेटा उसके साथ हरकत करता था बातें करता था उसे देखते हुए सुनैना को लगने लगा था कि जैसे उसके मन की बात को समझने वाला उसका बेटा ही है बात-बात पर उसकी खूबसूरती की तारीफ कर देना उसके कपड़े की तारीफ कर देना यह सब सुनैना को अच्छा लगने लगा था और उसकी कामुक हरकतें उसके बदन में एक अद्भुत उत्तेजना का रस घोल देती थी,,, खास करके खेत वाली हरकत में तो उसके दिलों दिमाग पर कब्जा बना लिया था वह अपने बेटे की हरकत और उसकी हिम्मत को देखकर उत्तेजना से गदगद हुए जा रही थी, वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसका बेटा इस तरह से हरकत कर बैठेगा,,, उस अच्छी तरह से याद था जब वह आराम करने के लिए खटिया पर दूसरी तरफ मुंह करके लेटी हुई थी वह तो पूरी तरह से सहज थी लेकिन वह नहीं जानती थी उसे देखकर उसका बेटा असहज हो जाएगा,,,, साड़ी में कसी हुई उसकी गांड उसके बेटे के लिए उत्तेजना का कारण बन जाएगी उसे अच्छी तरह से एहसास हुआ था उसके बेटे का उसके करीब आकर बैठना लेकिन तब तक उसे नहीं मालूम था कि उसका बेटा उसके साथ कामुक हरकत करेगा।





उसका धीरे-धीरे नितंबों पर हाथ घूमानाऔर फिर उसके बदन में बिल्कुल भी हलचल न होने की वजह से उसके हिम्मत का बढ़ जाना और धीरे-धीरे साड़ी को ऊपर की तरफ उठानाइन सब के बावजूद भी सुनैना को अच्छी तरह से याद था कि उसके बाद में बिल्कुल भी हरकत नहीं हो रही थी वह जाग चुकी थी और अपने बेटे की आगे की हरकत को देखने के लिए निश्चित होकर सोने का नाटक कर रहे थे और फिरसूरज के द्वारा उसकी साड़ी को पूरी तरह से कमर तक उठा देना कमर तक साड़ी उठा देने के मतलब कुछ सुनैना अच्छी तरह से जानती थी एक मर्द की औरत की साड़ी कोतभी कमर तक उठा देता है जब वह उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए निश्चित हो जाता है,,,, और जब उसके बेटे ने इस तरह की हरकत को किया थातब सुनैना का दिल चोरों से धड़क रहा था उसे एहसास हो रहा था कि उसका बेटा आप उसके साथ क्या करने वाला है लेकिन न जाने ऐसा कौन सा कारण था कि वह अपने बेटे को इतने पर भी नहीं रोक पा रही थी,,, पहले तो वह अपने हाथों से ही उसके नितंबोंको सहला रहा था हल्के हल्के दबा रहा था जब इतने से भी उसके बाद में बिल्कुल भी हरकत नहीं हुई तो उसकी हिम्मत और ज्यादा बढ़ गई और वह धीरे से अपने लंड को बाहर निकाल लिया और गरम सुपाड़े को उसके नंगी गांड पर रगड़ना शुरू कर दिया,,,,,,,,सुनैना एक मर्द की हालत को अच्छी तरह से समझ सकती थी जब उसके इतने करीब एक खूबसूरत जवान औरत लेती हो और उसकी साड़ी कमर तक उठी हो तो मर्द पर इसका क्या असर होता है इस बात का एहसास सुनैना को अच्छी तरह से था और सुनैना अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा पूरी तरह से उसकी जवानी को देखकर पागल हो गया हैइतने से भी वह अपने बेटे को नहीं रोक पा रही थी जिसका अंजाम यह हुआ कि सूरज अपने लंड को उसकी गांड की फांकों के बीच धीरे-धीरे अपने लंड को डालना शुरू कर दिया,,,।





सूरज के इस हरकत का असरसूरज पर कैसा हो रहा है इतना तो सुनैना जानते ही थी लेकिन उसके बेटे की हरकत का असरउसके बदन में आग लग रहा था एक तो महीनों से वह पुरुष संसर्ग के लिए तड़प रही थी और ऐसे हालात में एक मोटा तगड़ा लंड उसके बुर के बेहद करीब रगड़ रहा था,,,ईस गरमा गरम एहसास से उसकी बुर का लावा पिघलने लगा था,,,, वह मदहोश हो जा रही थीऔर उसकी हलटता बहुत ज्यादा खराब होने लगी जब लंड का सुपाड़ा धीरे-धीरे उसके बुर के मुहाने पर स्पर्श होने लगा ठोकर मारने लगा,,,,अपने बेटे की इस काम को हरकत से वह पूरी तरह से गदगद हो गई थी और प्रार्थना कर रही थी कि उसका लंड उसकी बुर के अंदर प्रवेश कर जाए लेकिन शायदऐसे में सुनैना के सहकार के बिना सूरज का लंड उसकी बुर में प्रवेश कर पाना नामुमकिन था लेकिन फिर भी वह उसे मुख्य द्वार तक पहुंच चुका था जहां पहुंचने के लिए दुनिया का हर मर्द अपनी तरफ से पूरी कोशिश करता है और पहुंच जाने के बाद अपने आप को सबसे भाग्यशाली समझता है लेकिन सूरज इतने करीब पहुंच कर भी अपने आप को भाग्यशाली समझ रहा था भले ही वह अपने लंड को अपनी मां की बुर में प्रवेश नहीं करा पाया था,,, फिर भी यह उसके लिए बहुत बड़ा सौभाग्य था और इतने में ही वह अपने लंड का अलावा उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर उगलना शुरू कर दिया था।





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उसे घटना को याद करके सुनैना गुसलखाने के अंदर अपनी टांगों को खोलकर अपनी बुर में अपनी दो उंगली डालकर उसे अंदर बाहर कर रही थी और पूरी तरह से निश्चिंत होकर के की घर में उसकी जवान बेटी और उसका जवान बेटा दोनों मौजूद हैं उसे इस बात की भी चिंता नहीं थी कि इस हालत में उसका बेटा अगर उसे देख लेगा तो उसके लिए तो सोने पर सुहागा हो जाएगा वह समझ जाएगा कि उसकी मां लंड के लिए तड़प रही है,,, और शायद अपनी मां की स्थिति को देखकर वह अपने आप पर काबू न कर पाए और खुद गुसलखाने में प्रवेश करके अपनी मां की जवानी की प्यास को अपने मोटे तगड़े लंड से बुझा डालें,,, शायद दिल के किसी कोने में सुनैना के मन में यही चल भी रहा था एक तरफ वह आगे बढ़ने से डर भी रही थी लेकिन एक तरफ वह चाह भी रही थी कि शायद ऐसा हो जाए,,,अपनी आंखों को बंद करके अपनी दो ऊंगली को अपनी बुर में डालकर अंदर बाहर करते हुए मस्त हो रही हैऔर मजे की बात यह थी कि इस समय उसके ख्यालों में उसका बेटा ही था जो उसकी कल्पना में उसके दोनों टांगों को खोलकर उसके अंदर पूरी तरह से समा जाने की पूरी कोशिश कर रहा था और देखते ही देखते वह भल भला कर झड़ने लगी,,, उसे संतुष्टि का एहसास हो रहा था और अपने आप को दुरुस्त करके वह नग्न अवस्था में ही नहाने लगी,,, जब वह नहा रही थी तभी अचानकरानी वहां पर आ गई और अपनी मां को पूरी तरह से नंगी होकर नहाते हुए एकदम आश्चर्य से भर गई और हंसते हुए बोली,,।

यह क्या मां तुम अपने सारे कपड़े उतार कर नहा रही हो,,,,।

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(कानों में रानी की आवाज पडते ही पल भर के लिए सुनैना शर्मिंदगी के एहसास से भरने लगी हालांकि अभी तक वह रानी की तरफ देखी नहीं थी,,, और अगले ही पल वह अपने आप को दुरुस्त करते हुए एकदम सहज होते हुए अपनी बेटी की तरफ देखे बिना ही बोली,,,)





तो इसमें कौन सा पहाड़ टूट पड़ा हैअपने ही कपड़े उतार कर नहा रही हूं ना किसी और के कपड़े उतार कर उसे नहला तो नही रही हूं,,,,।

अरे मैं कुछ बोल थोड़ी रही हूं लेकिन जानती हो भाई घर में है अगर यहां पहुंच गया तो तुम्हें ईस हालत में देखेगा तो क्या सोचेगा,,,,,।

(सुनैना इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज घर पर मौजूद हैलेकिन फिर भी अपनी बेटी की बात सुनकर अनजान बनने का नाटक करते हुए बोली,,,)

क्या कहा तूने सूरज घर पर है अरे वह तो कब से घर से बाहर जाने के लिए बोल रहा था और खेत पर मिलुंगा ऐसा कह रहा था,,,,।

अरे नहीं मा वह घर पर ही है तभी तो मैं कह रही हूं कि अगर भाई तुम्हें ईस हालत में देख लिया तो क्या सोचेगा,,,,।

हाय दैया अच्छा हुआ तूने मुझे बता दी,,,(इतना कहते हुए लोटा भर कर अपनी अपने ऊपर डालते हुए वह धीरे से खड़ी हो गई और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) ला मेरा कपड़ा मुझे दे,,,,

(रानी अपनी मां की नंगी जवान देखकर मंत्र मुग्ध हो रही थीरानी का ध्यान अपनी मां की खरबूजे जैसी कई हुई चूचियों पर थी जिनमें जरा भी लचक नहीं थी वह अभी भी जवानी से भरी हुई थी,,, भरा हुआ शरीर चिकन पेट उन्नत छातियांऔर जैसे ही रानी की नजर अपनी मां की दोनों टांगों के बीच त्रिकोण आकार पर पड़ी तो उसके होश उड़ गए दो बच्चों की मां होने के बावजूद कि उसकी गुलाबी पत्ती बस हल्की सी बाहर दिखाई देती थी ऐसा लग रहा था कि जैसे सुबह-सुबह गुलाब खिल रहा हो,,, मोटी मोटी केले के तने के समान चिकनी जांघें,,, देख कर रानी को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि इस उम्र में भी वह अपनी मां के आगे कुछ भी नहीं थी और इस बात से वह खुश भी हो रही थी वह अपनी मां को एक तक ऊपर से नीचे की तरफ देखे जा रही थी यह देखकर सुनैना बोली,,)

अरे क्या हुआ क्या देख रही है जल्दी से मेरे कपड़े दे,,,,,,।





देख रही हूं मां की तुम कितनी खूबसूरत हो,,,,

(अपने बेटे के मुंह से तो अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह मस्त हो ही रही थी और इस समय अपनी बेटी के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह गदगद हुए जा रही थी,,,,उसे रानी के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर बड़ा अच्छा लग रहा था लेकिन फिर भी वह जानबूझकर इस पर ना ध्यान देने का बहाना करते हुए बोली,,)

अरे तू यह सब छोड़ जल्दी से मेरे कपड़े दे कहीं सही में यहां पर सूरज आ गया तो गजब हो जाएगा,,,,,

(अपनी मां की बात सुनकर रस्सी पर रखे हुए कपड़ों को अपने हाथ में लेकर वह अपनी मां की तरफ हाथ आगे बढ़ा दी और सुन ना जल्दी से अपनी बेटी के हाथ से कपड़े लेकर पहनने लगी,,,, और कपड़े पहनते हुए वह बोली)

मुझे खेत पर जाना है देर हो रही है मेरे कपड़े धो देना,,,।

ठीक है मां,,,,(इतना कहकर वह अपनी मां की खूबसूरत बदन के बारे में सोचने लगी और इस बारे में भी सोचने लगी कि अगर वाकई में उसके भाई की नजर इस समय उसकी मां पर पड़ जाती तो उसके मन में क्या चल रहा होता,,,, रानी यह सोचकर हैरान थी कि जब वह अपनी सगी बहन को नहीं छोड़ाउसकी नंगी गांड देखकर उसे सिर्फ पेशाब करते हुए देखकर उसकी हालत हो गई और उसके साथ रोज चुदाई कर रहा है तो अपनी मां को तो पूरी तरह से नंगी देखकर वह उसका गुलाम बन जाएगा और वह अपनी मां के साथ भी शारीरिक संबंध बना देगा यह ख्याल उसके मन में आती है उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी और अगले ही पर उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,, यह सोचकर कि अगर वाकई में ऐसा हो गया तो उसका भी रास्ता साफ हो जाएगा जब घर में ही बेटे का संबंधबहन के साथ-साथ मां के साथ भी बन जाएगा तो तीनों को खुला दऐर मिल जाएगा अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए,,, किसी जात का रोक-टोक नहीं होगा जब मन करे तब खटिया पर लेकर सो जाओ,,,,।





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यह सोचकर उसके चेहरे परउत्तेजना और शर्म की लाली जा रही थी और यह सोचकर वह थोड़ी हैरान हो गई थी कि अगर वाकई में उसके भाई का संबंध उसकी मां की शादी बन जाएगा तो उसके भाई को सबसे ज्यादा मजा चोदने में किसको आएगा उसे खुद को या अपनी मां को फिर वह अपने मन में सोचने लगी कीहोना हो उसके भाई को अपनी मां चोदने में कुछ ज्यादा ही मजा आएगा क्योंकि इस समय वह खुद अपनी मां का खूबसूरत बदन देखकर उसकी तरफ आकर्षित हो गई थी तो भला सूरज किस खेत की मूली है,,, अब वह यह सोचकर हैरान भी थी कि अगर ऐसा हो गया तो सच में उसका भाई तो मां के ही कमरे में घुसा रहेगा और फिर ऐसा भी तो हो सकता है कि उसका भाई एक साथ दोनों की चुदाई करें एक ही खटिया पर बारी बारी से दोनों की चुदाई करें,,, इस बात को सोचकर वह मस्त हुए जा रही थी कि तभी उसकी मां बोली,,,)

क्या हुआ किस ख्याल में खोई हुई है,,,,।

कककक,,, कुछ नहीं बस ऐसे ही,,,।

मैं जो कह रही हूं काम कर देना और घर खुला छोड़कर इधर-उधर मत घूमना,,,।

ठीक है मां मैं घर खुला छोड़कर इधर-उधर नहीं घूमने वाली,,,,,।

(कपड़े पहनकर वह आंगन में आई तो देखी तो उसका बेटा खाना खा चुका था और वहीं पास में पड़ी खटिया पर बैठा हुआ था,, उसे देखकर मन अपने मन में ही सोचने लगी काश उसका बेटा उसे नंगी नहाते हुए देख लेता तो मजा आ जाता जब उसे पैसाब करते हुए देखकर उसकी यह हालत हुई थी कीनंगी गांड करके उसका लंड पकड़ रहा था अगर उसे पूरी तरह से नंगी देख लेता तो शायद उसकी बुर में ही लंड डाल देता,,,,फिर किसी तरह से अपने आप को ख्यालों की दुनिया से बाहर निकालते हुए वह अपने बेटे से बोली,,)





सूरज अब अपने काम को बढ़ाना होगा फसल की जितनी कटाई होनी चाहिए थी उतनी कटाई हुई नहीं है,,,,।

मैं भी यही सोच रहा था,,,।

सोचने से काम बनने वाला नहीं है अब थोड़ी फुर्ती दिखानी होगी,,,।

तुम चिंता मत करो मा सब कुछ हो जाएगा,,,,।

तू खाना तो खा लिया ना,,,,।

हां मैंने तो खा लिया हूं,,,(अपनी कुर्ते को निकालते हुए) तुम भी खा लो,,,,(और कुर्ती को खटिया पर रखते हुए कुर्ता निकल जाने के बाद इसकी चौड़ी छाती एकदम से उजागर हो गई जिसे देखकर सुनैना की टांगों के बीच थरथराहट महसूस होने लगी,,, वह अपने मन में सोचने लगी थी उसका बेटा वाकई में पूरा मर्द बन चुका है एकदम बांका जवान,,,, पल भर के लिए सुनैना का मन कर रहा था कि वह अपने बेटे की बाहों में समा जाए लेकिन जल्द ही वह अपने आप को सहज करते हुए बोली,,,)

हां मैं भी खा लेती हूं,,,,।

खाने के बाद थोड़ी रोटी और सब्जी बांध लेना दोपहर में भूख लग जाती है,,,,।

भूख लग जाती है तो मेरा दूध पी लिया कर दबा दबा कर तेरा पेट भर जाएगा,,,(अपने बेटे की बात सुनकर अनायास ही उसके मन में यह ख्याल किया था और वह अपने मन में ही यह बात बोल रही थी लेकिन अपने बात को अपने मन में ही बोलने के बाद वह शर्म से पानी चाहिए होने लगी थी उसे अपनी ही सोच पर शर्मिंदगी का एहसास हो रहा था कि वह अपने बेटे के साथ ऐसा कैसा सोच रही है,,,, शर्म के मारे वह अपने बेटे को कुछ बोल नहीं पाई और रसोई में खाने के लिए बैठ गई,,,,खाना खाने के बाद वह अपने बेटे के कहे अनुसार थोड़ी सब्जी और थोड़ी रोटी को कपड़े में बढ़ रही थी और दोनों खेत की तरफ निकल गए थे,,, रानी अपनी मां और अपने भाई के जाने के बाद बाकी का बचा काम करने लगी क्योंकि उसे भी आज कुंवर से जो मिलना था,,,, उससे पहले मुलाकात के बारे में सोचकर ही उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी।





दूसरी तरफ मां बेटे दोनों खेत पर पहुंच चुके थेऔर वाकई में फसल काटने में थोड़ी तेजी दिखा रहे थे,,,, फसल काटते हुए भी सुनैना का मन इधर-उधर भटक रहा थावह अच्छी तरह से जानती थी कि उसके बेटे की नजर हमेशा उसे पर ही बनी हुई है वह जब फसल काटने के लिए झुकती थी तो वहअच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा उसके पिछवाड़े कोई घूरता रहता है और अपनी बात की तसल्ली खेलने के लिए वहां झुक कर अपने बेटे की तरफ देख भी ले रही थी और वाकई में उसका सोचना सही साबित हो रहा था जहां एक तरफ उसे अपने बेटे की हरकत से थोड़ी परेशानी महसूस होती थी वही वह उत्तेजना से गदगद भी हो जा रही थी,,,, देखते ही देखते सूरज एकदम सर पर आ चुका था और दोनों नीम के पेड़ के नीचे बैठकर इस खटिया पर जी खटिया पर मां बेटे दोनों अद्भुत सुख का एहसास किए थे उसी पर खाना खा रहे थे,,,,वह दोनों खाना खा ही रहे थे कि तभी सामने से मुखिया और मुखिया की बीवी आई हुई नजर आई जिसे देखकर सुन ना एकदम से खटिया से नीचे उतर कर खड़ी हो गई और अपने बेटे से बोली,,,।

सूरज हुआ देख मुखिया और मुखिया की बीवी आ रही है,,,,।





तो क्या हो गया तुम खटिया पर से उठकर नीचे क्यों खड़ी हो गई आने दो वह तो खेत का मुआयना करने के लिए आ रहे होंगे,,,।

फिर भी मुझे दूसरों के सामने बैठकर खाना खाने में अच्छा नहीं लगता,,,,,।

(तभी मुखिया और उसकी बीवी एकदम से करीब आ गए और मुखिया मुस्कुराते हुए सूरज कि तरफ देखते हुए बोले,,,)

और सूरज बेटा काम कहां तक पहुंचा,,,,,(इतना कह कर सुनैना की तरफ देखते हुए हाथ जोड़कर नमस्ते करते हुए बोले) नमस्ते भाभी जी,,,





नमस्ते मलिक,,,(सुनैना भी शर्मा कर अपने दोनों हाथ जोड़कर नमस्ते करते हुए बोली,,,,, शालीनता दिखाते हुए सूरज की खटिया से नीचेउतर कर खड़ा हो गया था और मुखिया और मुखिया की बीवी को बैठने के लिए बोल रहा था,,,,,उसकी बात मानते हुए मुखिया तो खटिया पर बैठ गया था लेकिन मुखिया की बीवी के मन में कुछ और चल रहा था वह सूरज से बोली,,,,,)

इसके आगे ही अंगूर का बाग है ना,,,,,

जी मालकिन,,,,,

अच्छा एक काम करो,,,, आप यहीं बैठो,,, मैं सूरज को लेकर जाती हूं थोड़े अंगूर तोड़ने हैं,,,।

अंगूर किस लिए भाग्यवान,,,( अपनी बीवी की बात सुनकर मुखिया जी बोल पड़े,,,)

अरे रिश्तेदारों के वहां भेजना है इस बार भेज नहीं पाई हूं समय से समय निकल गया तो अंगूर भी खराब हो जाएंगे,,,,‌

मालकिन सच कह रही है समय निकल गया तो अंगुर भी खराब हो जाएंगे,,,,(सुनैना भी घूंघट की आड़ में से मुखिया की बीवी के सुर में सुर मिलाते हुए बोली,,, उसका जवाब सुनकर मुखिया की बीवी प्रसन्न हो गई और अपने पति से बोली,,,)

आप यह सब नहीं समझेंगे,,,,, चल सूरज जल्दी से अंगूर तोड़ दे,,,।

मैं भी चलु मालकिन,,,,

नहीं नहीं तुम यहीं रहो,,,, सब लोग वहां जाकर क्या करेंगे,,,,।

अच्छा तो मैं बाल्टी ले लेता हूं उसी में अंगूर भर लेंगे,,,,(सूरज तुरंत बाल्टी की तरफ लपका और उसे अपने हाथ में ले लिया,,,और दोनों गेहूं के खेत के बीच में से आगे की तरफ बढ़ने लगे उन दोनों को जाते हुए सुनैना देख रहे थे उसकी मांभी उन दोनों के साथ जाने को कर रहा था क्योंकि अब न जाने क्यों किसी भी अंजान औरत के साथ अपने बेटे को छोड़ने में उसे अजीब सा महसूस होने लगा था,,,,लेकिन फिर भी अपने मन को दिलासा देते हुए वह अपने आप से ही बोली कि इतने बड़े मुखिया की बीवी भला हम जैसे छोटे गरीब लोगों को मुंह क्यों लगाएगी भला वह उसके बेटे के साथ संबंध क्यों बनाएगी,,, यही वह खड़ी होकर सोच रही थी कि तभी मुखिया जी बोले,,)

खड़ी क्यों हो बैठ जोलगता है हम लोग गलत समय पर आ गए तुम लोग खाना खा रहे थे ना,,,।

नहीं नहीं मालिक हम लोग तो खाना खा चुके थे,,,

तब ठीक है,,,, सच कहूं तो भोला मेरे छोटे भाई जैसा था वह रहता था तो समझ लो मेरे सर से आधा बोझ कम हो जाता था,,,, पता नहीं कहां कमाने चला गया,,,,।

(मुखिया के मुंह से अपने पति का जिक्र सुनकर सुनैना को थोड़ा दुख हुआ,,, फिर वह भी अपने आप को स्वस्थ करते हुए बोली,,,)

कोई बात नहीं मालिक हम लोग हैं नाअभी वह नहीं है तो हम लोग काम कर देंगे जब वह आएंगे तो फिर वह खुद सारा काम कर लेंगे,,,,,

हां यह बात तो है,,,(इसी तरह से दोनों के बीच वार्तालाप होती रही और दूसरी तरफ थोड़ी डर निकलने के बाद मुखिया की बीवी सूरज से बोली,,,)





क्या है रे अब आता क्यों नहीं मेरे पास मैं रोज तेरा इंतजार करती हूं और तू है की नजर ही नहीं आता कहीं ऐसा तो नहीं की दूसरी तो नहीं मिल गई तुझे,,,,।

यह कैसी बात कर रही हो मालकिन,,,(गेहूं के खेत में बीचो-बीच खड़े होकर दोनों बात करते हुए ) तुमसे ज्यादा खूबसूरत और हसीन कौन मिलेगी,,,,.

नहीं मुझे तो ऐसा लग रहा है कि कोई और मिल गई है वरना तेरे जैसा जवान लड़का खूबसूरत बुर पाकर दिन रात लार टपकाए पीछे-पीछे घूमता रहता है और तू है कि अब मेरे घर आना ही छोड़ दिया है,,,।

ऐसी बात नहीं है मालकिन देख रही हो ना अभी फसल की कटाई बाकी है समय पर कटाई नहीं हुई तो बारिश शुरू हो जाएगी इसीलिए समय नहीं मिल पाता,,,,,(अंगूर के बाग की तरफ आगे बढ़ते हुए)

यह तो मुझे सब बहाना लग रहा है जरूर तुझे कोई और बुर मिल गई है डालने के लिए,,,, तभी तो मेरे पास नहीं आता है और हां कहीं ऐसा तो नहीं तेरी मां ही तुझे मजा दे रही हो,,,,,।

( मुखिया की बीवी की यह बात सुनकर सूरज चलते-चलते अपनी जगह पर ही रुक गया और मुखिया की बीवी की तरफ देखते हुए बोला,,,)

यह कैसी बात कर रही हो मालकिनभला ऐसा हो सकता है क्या एक बेटा अपनी मां के बारे में ऐसा सोच भी नहीं सकता,,,,।

अरे बेवकूफ आजकल क्या नहीं हो सकता और मैं तो देखती हूं कि तेरी मां मुझे की ज्यादा खूबसूरत है भरे बदन वाली है उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां मुझे भी ज्यादा बड़ी है उसकी गांड देखकर तो किसी का भी लंड खड़ा हो जाए,,,, ऐसे में मुझे पूरा यकीन है कि तेरा भी लंड खड़ा हो जाता होगा,,,, और औरत की जवानीकी तड़प तो अच्छी तरह से जानता है किसी भी हद तक जा सकती है और तेरी मां तो महीनों से अपने पति से दूर है,,,, मैं समझ सकती हूं तेरी मां की हालतऐसी हालत में औरत के सामने किसी का भी लंड हो उसे बिल्कुल भी परवाह नहीं होता उसे बस अपनी बुर में लेकर वह मस्त हो जाती है,,,,,।





(मुखिया की बीवी की बातें सुनकरसूरज की हालत खराब हो रही थी मुखिया की बीवी खुले शब्दों में उसकी मां के बारे में बात कर रही थी और उन दोनों के बीच संबंध को लेकर शंका जता रही थी जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था हालांकि सूरज अच्छी तरह से जानता था की मुखिया की बीवी कुछ हद तक एकदम सही थी क्योंकि उसकी नजर उसकी मां पर थी और वह अपनी मां को चोदना चाहता था और उसे इस बात से भी ऐतराज नहीं था कि उसकी मां मुखिया की बीवी से ज्यादा खूबसूरत और भरे बदन वाली थी ऐसे में वाकई में उसे देखकर किसी का भी लंड का खड़ा हो जाना हैरानी की बात नहीं थी।इसलिए मुखिया की बीवी की बात में पूरी तरह से सच्चाई थी लेकिन वह अपनी मां की बात को वह मुखिया की बीवी के सामने कैसे बता सकता था कि वाकई में वह अपनी मां को चोदना चाहता है या दोनों के बीच कुछ है,,,, इसलिए वह मुखियाकी बीबी की बात को सुनकर बोला,,,)

ऐसा कुछ भी नहीं है मालकिन मेरे लिए तो पूरी दुनिया में आप ही सबसे ज्यादा खूबसूरत हैं और सच में आप बहुत खूबसूरत है,,,।

नहीं मुझे तो ऐसा नहीं लगता है तभी तुम दोनों खेत में बड़े आराम से काम करते हो एक दूसरे का साथ पाकर सच-सच बताना तेरी मां साड़ी उठाकर तुझे कुछ दिखाती तो नहीं है,,,,।





नहीं मालकिन ऐसा कुछ भी नहीं है,,,,,।

नहीं नहीं मुझे तो ऐसा ही लग रहा है,,,,नहीं तो तू इस तरह से मुझे नजर अंदाज नहीं करता मुझे पूरा यकीन है कि तेरी मां तुझे चोरी चुपके अपना सब कुछ दिखाई है नहाते हुए पेशाब करते हुए सच बताना अपनी मां को पेशाब करते हुए देखा है कि नहीं,,,,।

अरे अब मैं कैसे बताऊं ऐसा कुछ भी नहीं है मालकिन,,,,,(दोनों बातचीत करते हुए अंगूर के बाग में पहुंच चुके थे,,,, अंगूर का भाग वाकई में बहुत खूबसूरत लग रहा था हर एक लताओं पर अंगूर का गुच्छा लटका हुआ था,,,,, बड़े-बड़े डंडे कोचारों तरफ लगाकर उसके ऊपर अंगूर की लताएं बिछी हुई थी जिसे नीचे एकदम छांव था अंगूर को देखकर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) देखो तो सही मालकिन चारों तरफ अंगूर ही अंगूर दीख रहे हैं,,,,।

यहां अंगूरी तड़प रही और तुझे अंगूर की पड़ी है,,,, सच-सच बताना कहीं तुम मां बेटे के बीच तो कुछ नहीं चल रहा है,,,,।

फिर वही बात मालकिन ऐसा कुछ भी नहीं है,,,,।

नहीं है तो फिर तो मेरे पास क्यों नहीं आता,,,(इतना कहते हुए मुखिया की बीवी तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ाकर सूरज के पजामे के आगे वाले भाग को अपनी मुट्ठी में दबोच दी और एकदम से चौंकते हुए बोली,,,)तुम्हें क्या है यह इतना खड़ा क्यों हो गया है सच में तुम मां बेटे के बीच कुछ चल रहा है तभी तेरा लंड खड़ा हो गया,, है,,,,,।

अब इस तरह की बातें करोगी तो किसी का भी लंड खड़ा हो जाएगा,,,,,,,

ओहहहह अपनी मां की मस्ती भरी बातें सुनकर तेरा लंड खड़ा हुआ है ना तब तो जरूर तेरा मन तेरी मां को चोदने को करता होगा,,,,,(सूरज के लंड को अपनी मुट्ठी में दबाते हुए बोली,,,)

आहहहबह मालकिन धीरे से दुख रहा है,,,,,।





रुक इसका दर्द दूर कर देती हूं,,,,(इतना कहने के साथ हीमुखिया की बीवी पजामा के ऊपर से ही उसके लंड को पकड़े हुए अंगूर की लताओं के नीचे की तरफ ले जाने लगी क्योंकि वहां छांव थी और सूरज भी उसके पीछे-पीछे अंगूर के बाग में पहुंच गया वहां पर पहुंचते ही मुखिया की बीवी तुरंत अपने घुटनों के बल बैठ गई और तुरंत फुर्ती दिखाते हुए सूरज के पजामी को एक झटके से उसकी घुटनों तक खींच दी जिसकी वजह से उसका मोटा तगड़ा लंड हवा में लहराने लगाऔर मुखिया की बीवी के चेहरे पर उत्तेजना और प्रसन्नता के भाव साथ नजर आने लगे लेकिन वह इतनी जल्दी में थी कि सूरज के लंड को पकड़ने की जरूरत नहीं समझी और तुरंत उसे अपने लाल-लाल होठों को खोलकर उसे अपने मुंह में भर लीऔर उसे पागलों की तरह चूसने लगी मानो के जैसे बहुत दिन बाद उसे उसका पसंदीदा खिलौना मिला हो,, सूरज एकदम से मस्त होने लगा पागल होने लगा और अपनी आंखों को बंद कर लिया मुखिया की बीवी मदहोश होकर अपना पूरा हुनर सूरज के लंड पर दिखा रही थी,,,वह जैसे-जैसे अपनी जीभ उसके मोटे सुपाड़े पर घूमा रही थी वैसे-वैसे सूरज की हालत और ज्यादा खराब होती चली जा रही थी उसका बदन कसमसा रहा थाअपने आप को संभाल पाने की शक्ति है उसने नहीं थी इसलिए वह तुरंत अपना हाथ ऊपर की तरफ करके मोटे लकड़ी को थाम लिया जिस पर अंगूर की लताएं बिछी हुई थी,,,, और अपनी कमर आगे पीछे करके उसके मुंह को चोदना शुरू कर दिया।





मुखिया की बीवी मस्त हो रही थी पागल हुई जा रही थी वह सूरज के लंड को मुंह में लेकर चूसते हुए ब्लाउज के ऊपर से अपने दोनों चूचियों को जोर-जोर से अपने हाथ से दबा रही थी,,,,, यह देख कर सुरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी और वह अपने मन में सोचने लगेगा कि उसकी मां मुखिया की बीवी की तरह क्यों नहीं है,काश उसकी मा भी मुखिया की बीवी की तरह होती तो उसे इतना तड़पना नहीं पड़ता,,,,, दोनों मजा ले रहे थे और गरम आंहे भरते हुए सूरज बोला,,,)

मालकिन पहले अंगूर तोड़ ली होती तो,,,,,।

उतना समय नहीं है अंगूर बाद में तोड़ लिया जाएगा,,,(बस इतना कहने के लिएमुखिया की बीवी अपने मुंह में से सूरज के लंड को बाहर निकली थी और इतना कहने के साथ ही फिर से उसे अपने गले के अंदर गटक ली थी,,,सूरज भी मत हुआ जा रहा था वह एक हाथ से मोटे लकड़े को पकड़कर दूसरे हाथ को मुखिया की बीवी के सर पर रखकर उसे अपने लंड की तरफ और ज्यादा दबाव दे रहा था।कुछ देर तक मुखिया की बीवी इसी तरह से मजा लेती भी रही और सूरज को मजा देता भी रही और फिर धीरे से उसके लंड को बाहर निकलना और गहरी सांस लेते हुए तुरंत उठकर खड़ी हो गई,,,, सूरज को लग रहा था कि अब यह पेलवाएगीलेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था वह तुरंत अपनी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर तक उठाई और सूरज से बोली,,,)

बैठ नीचे,,,,,





(सूरज भी मुखिया की बीवी की बात मानते हुए तुरंत नीचे बैठ गया और मुखिया की बीवी अपनी मोटी मोटी जंग को ऊपर की तरफ उठाकर उसके कंधे पर रख दी और तुरंत अपनी बुर को उसके होठों से सटा दी,,,, और पागलों की तरह सूरज से अपनी बुर चटवाने लगी,,,,, बहुत दिनों से मुखिया की बीवी तड़प रही थी सूरज के साथ चुदवाने के लिए,,, और युं एकाएक खेत पर आने की युक्ति भी मुखिया की बीवी की ही थी,,, वह किसी भी तरह से सूरज से मिलना चाहती थी अपनी जवानी की प्यास बुझाना चाहती थीजब खेत पर आई तो उसकी मां को साथ में देखकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें कोई बहाना उसे दिखाई नहीं दे रहा था तो एकदम से अंगूर का बहाना उसे याद आ गया और सूरज को लेकर अंगूर के बगीचे में आ गई थी और यहां पर आकर वह सूरज के साथ मजे लूट रही थी,,,,,, सूरज पागलों की तरह मुखिया की बीवी का नमकीन पानी चाट रहा था और अंगूर के बगीचे में मुखिया की बीवी की गरमा गरम शिसकारी गुंज रही थी और इस शिसकारी को सुनने वाला वहां कोई नहीं था,,,,मुखिया की बीवी पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी उसकी बुर में आग लगी हुई थी वह जल्दी से जल्दी सूरज के लंड को अपनी बुर में ले लेना चाहती थी,,,, इसलिए सूरज के चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ कर वह अपनी बर से उसे अलग की और अपनी साड़ी को कमर तक उठाए हुए ही वह दूसरी तरफ घूम गई और अपनी गांड को सूरज के सामने परोस दी,,,,।

मुखिया की बीवी की गोरी गोरी बड़ी गांड देखकर सूरज की हालत खराब हो गई और वह अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगा लिया,,, और अपने लंड को अपने एक हाथ में पकड़ कर धीरे से उसकी टांग को हल्के से खोलकर उसके गुलाबी छेद से टिका दिया और हल्का सा धक्का मारा मुखिया की बीवी की बुर पहले से ही पनीयाई हुई थी इसलिए पहले प्रयास में ही सूरज का लंड उसकी बुर में प्रवेश कर गया थाऔर फिर वह दोनों हाथों से मुखिया की बीवी की कमर थाम कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था मुखिया की बीवी पागल हो जा रही थी अभी कुछ दिन ही हुए थे सूरज से चुदवाई लेकिन इन कुछ दिनों में ही उसे बरसों की तड़प महसूस हो रही थी,,, सूरज बड़े तेजी से मुखिया की बीवी की चुदाई कर रहा था,,,,, और मुखिया की बीवी मस्त हुए जा रही थी।





सहहहह आहहहहहह जोर-जोर से धक्के लगा रे हरामी तेरा दम खत्म हो गया क्या मादरचोद,,,।

मेरा दम खत्म नहीं हुआ है मेरी जान,,,,,

तेरी बुर और ज्यादा कसीली हो गई है,,,,,(जोर-जोर से धक्के लगाते हुए)

तो तेरी मां की ढीली है क्या मादरचोद,,,,

उसकी तो और भी ज्यादा कसी हुई होगी बहुत दिनों से उसकी बुर में लंड जो नहीं गया है,,,,(एकदम मस्ती में आकर मुखिया की बीवी को चोदते हुए वह एकदम से बहक गया था और अपनी मां के बारे में बातें करने लगा था,,,)

जब ज्यादा कसी हुई बुर है तो कैसे चोदेगा अपनी मां को,,,,,,

जैसे तेरी चुदाई कर रहा हूं छिनार वैसे ही उसकी भी चुदाई करूंगा,,,,,

आहहहहह आहहहहहह,,,, जालिम तेरा लंड तो सांड की तरह है,,,,।

तो साड़ी ही तो पसंद है तुम औरतों को छिनार क्या पतला लंड से तेरी प्यास बुझने वाली है,, नहीं ना,,,, तुम छिनार लोग को तो सांड की तरह ही चोदना चाहिए,,,,।

तेरी मां की तो छिनार है उसे भी इसी तरह से चोदना,,,,,

अभी तक तो नहीं है लेकिन धीरे-धीरे बन जाएगी तेरी जैसी छिनार मादरचोद बहुत आग लगी है,,,ना तेरी बुर में,,,,, भोसड़ा चोदी,,,, अंगुर तोड़ने के बहाने मुझे लेकर आई ना,,,, रुक तेरा खरबूजा दबाता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज अपना दोनों हाथ आगे की तरफ ले जाकर एक झटके सेउसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा और उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को दबाना शुरू कर दियामुखिया की बीवी को बहुत मजा आ रहा था आज पहली बार सूरज इस तरह की गंदी बातें करते हुए गाली देते हुए उसकी चुदाई कर रहा था और पहली बार सूरज को भी एहसास हो रहा था की औरतों की चुदाई करते समय गाली देने में बहुत मजा आता है और मुखिया की बीवी भी इस पल का आनंद ले रही थी,,,,)





मेरे पास तो खरबूजा है लेकिन तेरी मां के पास तो तरबूज है जोर-जोर से दबाना ज्यादा मजा आएगा छिनार का,,,,।

उसका बाद में देखा जाएगा लेकिन इस समय रंडी का दबा दबा कर जो मजा मिल रहा है उसका क्या कहना,,,, मुखिया जी लगता है तेरी चुदाई नहीं कर पाते तभी तु तड़प रही है,,,,।

मुखिया मादरचोद में दम कहां है तभी तो तेरे सामने टांगें खोलकर खड़ी हूं,,,,,

तब तक तो सही जगह पर अपने टांगें खोलकर खडी है ले संभाल,,,,।

आहहहहह आहहहहहह,,ऊईईईईई मां,,,,ऊममममममम आहहहहहहह,,,, हाय रे जालिम तु तो मेरी बुर का भोसड़ा बना देगा,,,,,

मन तो मेरा कर रहा है की घुस जाऊं तेरी बुर में,,,आहहहहहह बहुत मजा देती है तु छीनार ,,,,,आहहहहहह,,,,

तू भी बहुत मजा देता है मादरचोद,,,,।

(मदहोशी में दोनों पागल हो जा रहे थे सूरज पागलों की तरह धकके पर धक्का लगा रहा था,,,, मुखिया की बीवी को एहसास हो रहा था कि वह यहां आकर कोई गलती नहीं की थी क्योंकि गजब का सुख दे रहा था सूरज और फिर थोड़ी देर बाद दोनों एकदम चरम सुख के करीब पहुंचने लगे सूरज एकदम से मुखिया की बीवी की कमर को जोर से थाम लियाऔर जोर-जोर से धक्के लगाने लगा और मुखिया की बीवी भी झड़ने वाली थी इसलिए दोनों हाथों से मोटे-मोटे डंडों को पड़कर अपने आप को संभाले हुए थी,,, फिर देखते ही देखते दोनों झड़ना शुरू कर दिए,,,,

दोनों मस्त हो चुके थे मदहोश हो चुके थे तृप्ति का एहसास दोनों के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था वासना का तूफान गुजर जाने के बाद दोनों अपनी-अपने कपड़ों को दुरुस्त करने लगे और फिर सूरज जल्दी-जल्दी अंगूर के गुच्छे को तोड़कर बाल्टी में भरने लगा था,,,, थोड़ी देर बाद दोनों खेत में पहुंच चुके थे,,,,सूरज को देखकर सुनैना की जान में जान आई लेकिन एक औरत के साथ इतनी देर तक अपने बेटे को खेत में अंगूर तोड़ते हुए देखकर कुछ अजीब लग रहा था और वैसे भीमुखिया की बीवी के बाल थोड़ा अस्त व्यस्त नजर आ रहे थे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या है,,, लेकिन वह ज्यादा कुछ बोल नहीं पाईऔर जब मुखीया और मुखिया की बीवी दोनों जाने को हुए तो,,,, सुनैना बोल पड़ी,,)

मलिक अगर थोड़े पैसे मिल जाते तो,,,।

अरे हां,,,,(इतना कहकर मुखिया अपनी कुर्ते की जेब में हाथ डालकर पैसे निकालने लगा,,,और पैसे निकाल कर मुस्कुराते हुए सुनैना के हाथ पैर रख दिया सुनैना भी खुशी-खुशी उसे लेकर अपनी साड़ी के पल्लू में बांधने लगी,,,,दोनों के चले जाने के बाद वापस मां बेटे फसल की कटाई करने लगे लेकिन अभी भी सुनैना के मन में ढेर सारे सवाल चल रहे थे,,,)
 
अंगूर तोड़ने के बहाने मुखिया की बीवी सूरज को अपने अमरूद का स्वाद चखा गई थी,,, कई दिन से वह भी सूरज के साथ अपनी प्यास नहीं बुझा पाई थी,,, इसके लिए उसे इस तरह से खेत पर सूरज से मुलाकात करने के लिए आना ही पड़ा,, वैसे मुखिया की बीवी का इसमें कोई दोष नहीं था। क्योंकि बुर की खुजली होती है इतनीजबरदस्त कि उसे मिटाने के लिए औरत किसी भी हद तक जा सकती है,,,, लेकिन मुखिया की बीवी भी पक्की खिलाड़ी थी अपने पति के साथ खेत पर पहुंच गई थी और वहां पर खुद सूरज की मां भी मौजूद थी लेकिन कितनी सफाई से अपने पति और सूरज की मां को वहीं पर रोक कर वहां अंगूर तोड़ने के बहाने अंगूर के बाग में सूरज के केले से अपनी भुख मिटा रही थी,,, वैसे तो मुखिया की बीवी की मौजूदगी सेसुनैना को थोड़ा बहुत एक औरत होने के नाते औरत से जलन तो होने लगी थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा आप पूरा जवान हो चुका है ऐसे में प्यासी औरतों की नजर उसके बेटे पर बनी रहना लाजमी था,,, इसलिए मुखिया की बीवी की मौजूदगी में अपने बेटे को लेकर सुनैना के मन में शंका बनी रहती थी।





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आज भी उसके मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थेवह भले ही मुखिया के साथ बैठी थी लेकिन उसका ध्यान अपने बेटे और मुखिया की बीवी पर ही बना हुआ थाक्योंकि वह मर्दों की नजरों से अच्छी तरह से बाकी थी वह जानती थी कि अब सूरज पूरी तरह से जवान हो चुका है और उसकी भी नजर औरतों के खूबसूरत जिस्म पर बनी रहती थीक्योंकि उसे अच्छी तरह से मालूम था कि जब उसकी नजर अपनी ही सगी मां पर बनीहुई है तो दूसरी औरतों को वह किस तरह से देखता होगा इसका अंदाजा तो उसे लग ही गया था,,, फिर भी सूरज और मुखिया की बीवी के लौटने के बाद जिस तरह से उसने थोड़े से पैसों की मांग की थी और तुरंत मुखिया जी ने पैसे निकाल कर उसकी हथेली में रख दिए थे उस सुनैना को काफी संतुष्टि प्राप्त हुई थी और वह उन दोनों के जाने के बाद फिर से फसल की कटाई में लग गई थी।

फसल की कटाई करते हुएसूरज अपनी किस्मत के बारे में सोच रहा था और अपनी किस्मत पर उसे गर्व महसूस हो रहा था आज का दिन उसके लिए कुछ ज्यादा ही नसीबदार बना हुआ था। सुबह-सुबह अपनी मां की चूचियों के दर्शन करने के बाद और उससे मद भरी बातें करने के बाद जिस तरह का उत्तेजना का अनुभव उसके बदन में हो रहा था,,, उसे देखते हुए सूरज के लिए अपनी उत्तेजना शांत करना जरूरी बन गया था और ऐसे में घर के पीछे गाय भैंस बांधने वाली जगह पर अपनी बहन की जमकर चुदाई किया था और खेत में मुखिया की बीवी भी उससे चुदवाने के लिए आ गई थी,,,यह सब उसके लिए गर्व की बात थी और नसीब की बात थी क्योंकि अभी कुछ महीने पहले ही वह कभी सोचा नहीं था की औरतों की वह इतना करीबजा पाएगा औरतों से तो डरता था उनसे बात करने में शर्म आता था लेकिन उसके जीवन में ऐसा बदलाव आया कि आज औरतें खुद उसकी बाहों में आने के लिए मचल उठती थी,,, फसल काटते समय सूरज अपने मन में यह भी सोच रहा था की जवानी मर्दों के लिए कितना वरदान दाई होता है सच में मर्दों के लिए चुदाई के सुख से बड़ा और कोई सुख नहीं होता,,, तरह-तरह की औरतें अगर चोदने का मिल जाए तो इससे बड़ी मर्द के लिए और क्या बात हो सकती है बड़ी-बड़ी चूचियां नंगी जैसी चूचियां तरबूज जैसी गांड तो किसी की सुडौल गांड किसी की एकदम कसी हुई कुंवारी बुर तो किसी की जवानी की प्यास से भरी हुई चोदने को मिल जा रही थी यही तो जीवन का असली सुख होता है भला इससे बेहतर कौन सा सुख होगा जीवन में क्योंकि हर कोई तो इसी के लिए तरसता है और उसकी झोली में तो रोज कोई ना कोई बुर अपने आप चुदने के लिए आ रही थी। रोज संभोग का सुख मिलने के बावजूद भीसूरज इसी तरह से जानता था कि अभी भी उसके जीवन मेंकुछ कमी थी और उसे कमी को भी अच्छी तरह से जानता था वह कभी थी उसकी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी जिसे वह किसी भी कीमत पर प्राप्त करना चाहता था उसे अच्छी तरह से मालूम था कि अब तक वह जितनी भी बुर की चुदाई करता आ रहा था उन सब में सबसे ज्यादा खूबसूरत और मजा देने वाली बुर उसकी मां की ही होगी,,, और उसे दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहा था जिस दिन उसे उसकी मां की बुर चोदने को मिलेगी,,,





यही सब अपने मन में सोचता हुआ सूरज फसल की कटाई कर रहा था,,, आज मां बेटे दोनों ने फुर्तीदिखाई थी और आज कुछ ज्यादा ही फसल की कटाई वह दोनों ने कर दिए थे,,, लेकिन फिर भी अभी शाम ढलने में बहुत ज्यादा समय था इसलिए दोनों काम में लगे हुए थे। सुनैना के मन में बहुत कुछ चल रहा थापैसे मिल जाने के बाद कुछ देर के लिए वह मुखिया की बीवी को बोल रही थी लेकिन फसल काटते हुए फिर से उसके दिमाग में मुखिया की बीवी घूम रही थीउसकी आंखों के सामने बार-बार मुखिया की बीवी की मटकनी हुई गांड दिखाई देती थी जब वह अंगूर के बाद की तरफ जा रही थी और पीछे-पीछे उसका बेटा पार्टी लेकर जा रहा था उस समय सुनैना ने अच्छी तरह से गौर की थी कि आगे आगे चल रही मुखिया की बीवी पर गोलाकार नितंबों पर उसके बेटे की नजर गड़ी हुई थी,,, उस दृश्य के बारे में सोचते ही सुनैना के तन बदन में सिहरन सी दौड़ने लग गई थी,,,और उसे अपने बेटे पर गुस्सा भी आ रहा था कि कैसे प्यासी नजरों से मुखिया की बीवी की गांड देख रहा था,,, उसे दृश्य को याद करके सुनैना अपने मन में ही सोच रही थी कि वाकई में उसका बेटा आप जवान हो चुका था औरतों के बारे में उसकी सोच बदलती जा रही थी यह उसे उसकी हरकत से ही मालूम पड़ा रहा था। अपने बेटे के नजरिए को देखकरसुनैना को उसे पर गुस्सा भी आ रहा था और वह फसल की कटाई करते समय वह अपने गुस्से पर बहुत देर से काबू किए हुए थी लेकिन अब वह अपने आप पर काबू कर सकने की स्थिति में नहीं थी क्योंकि बार-बार उसकी आंखों के सामने मुखिया की बीवी की मटकती हुई गांड दिखाई देती थी और उसके बेटे की प्यासी नजर ,,,और फिर अपने आप को घर रोक नहीं पाई और फसल की कटाई करते-करते एकदम से रुक गई और अपने बेटे से बोली,,,।





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मैं देख रही हूं की मुखिया की बीवी को तेरे से कुछ ज्यादा ही कम पडने लगा है।

(अपनी मां की बात सुनकर सूरज भी फसल काटते हुए अपनी मां की तरफ देखने लगा और एकदम सहज रूप से जवाब देते हुए बोला,,,)

क्यों क्या हो गया,,,?

अंगूर तोड़ने वाली बात तो मुखिया भी बोल सकते थे,,, लेकिन मुखिया की बीवी क्यों बोली।

तो उनके बोलने से तुम्हें दिक्कत है,,,।

दिक्कत उस बात से नहीं है,,, दिक्कत अब तेरी उम्र से है तेरी उम्र अब बच्चों वाली नहीं है।

(औरतों की संगत में उनसे सुख प्राप्त करके सूरज को इतना तो पता ही चल गया था की औरतों का मन कैसा होता हैइसलिए उसे अच्छी तरह से समझ में आ रहा था कि उसकी मां को मुखिया की बीवी से दिक्कत थी और उसका कारण वह भी अच्छी तरह से समझ रहा था फिर भी अपनी मां के सवाल पर वह अनजान बनता हुआ बोला,,,)

उम्र से क्या लेना देना मां पहले में छोटा था और अब बड़ा हो गया हूं इसमें क्या दिक्कत हो रही है,,,।

दिक्कत है मुझे,,, मैं देख रही हूं की मुखिया की बीवी को तेरे से कुछ ज्यादा ही काम पडने लगा है किसी और से भी तो वह काम करवा सकती थी उनके पास नौकर चाकर की कहां कमी है,,,।

अरे मांअगर वह फसल की कटाई का काम किसी और को दे देंगे तो हमें क्या मिलने वाला है,,,,

मैं फसल की कटाई के बारे में नहीं बात कर रही हूं।

तो,,,,,?

मैं अंगूर तोड़ने वाली बात कर रही हूं,,,,।

अच्छा यह बात है,,,।

हां यही बात है अंगूर तो वह खुद अपने हाथ से भी तोड़ सकती थी।





क्या मां तुम भी खामखा परेशान हो रही हो अंगूर अगर वह अपने हाथ से तोड़ने लगेंगी तो दूसरी औरतों में और उन में फर्क क्या रह जाएगा,,,, आखिर कार वह मुखिया की बीवी है,,,, और वह लोग अपने हाथ से काम नहीं करते बल्कि दूसरे से करवाते हैं और सभी को दूसरों को पैसे मिलते हैं अगर सब काम हुआ अपने हाथ से करने लगे तो दूसरों लोगों का क्या होगा हम जैसे लोगों का क्या होगा,,,, समझने की कोशिश करो,,, और वैसे भी अंगूर तोड़ने में कौन सी बड़ी बात है बस तोड़ा और उन्हें दे दिया।

बात अंगूर की भी नहीं है,,,,(गुस्सा दिखाते हुए; सुनैना बोली)

लो अब कर लो बात अभी कह रही थी अंगूर की बात है और आप कह रही हो अंगूर की बात नहीं है तुम्हारी बात मुझे कुछ समझ में नहीं आ रही है,,,(फिर से फसल की कटाई करते हुए सूरज बोला,,,सुनैना अपने बेटे के सामने खुलकर बोल देना चाहती थी कि वह किस लिए ऐसा बोल रही है लेकिन ऐसा कहने में से शर्म महसूस हो रही थी लेकिन फिर भी जैसे तैसे करके वह दूसरे शब्दों में बोली,,,,)

बात यही कि आप तेरा मुखिया की बीवी के साथ रहना मुझे पसंद नहीं है।

ऐसा क्यों कह रही हो मां आखिरकार वह हमारी मालकिन है,,,,।

मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि वह हमारी मालकिन है लेकिन वह मालकिन से पहले एक औरत है और तू औरतों को नहीं जानता,,,।





क्या मन में तुम्हारी बात कुछ समझ नहीं पा रहा हूं मेरे तो पहले ही नहीं पड़ रही है कि तुम कहना क्या चाहती हो ठीक ठीक समझाओ तो कुछ समझ में भी आए,,,,,(सूरज सब कुछ समझ रहा था लेकिन जानबूझकर अनजान बनने का नाटक कर रहा था अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां किस बारे में बात कर रही थी,,,, अपने बेटे की बात सुनकर सुनैना इधर-उधर देखने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि किस तरह से अपने बेटे से बताएंउसे शर्म महसूस हो रही थी और वह संस्कारी औरत थी अपने बेटे सही तरह की बात करना उसके संस्कार में बिल्कुल भी नहीं था अपनी मां की खामोशी देखकर सूरज फिर से बोला)

अरे जब तक बताओगी नहीं तो समझ कैसे आएगा कि तुम्हें दिक्कत क्या है,,,,।

(सूरज की बात सुनकर सुनैना इधर-उधर देखने लगी तसल्ली करने लगी कि कहीं कोई उसकी बात सुन तो नहीं रहा है उन्हें देख तो नहीं रहा है लेकिन तसल्ली कर लेने के बाद वह धीरे से अपने होठों को अपने बेटे की तरफ आगे बढ़ाई और धीरे से बोली)

मुझे इस बात की चिंता है कि तू मुखिया की बीवी से कुछ ज्यादा ही घुलन मिलने लगा है।

क्या मां यह कोई बात नहीं हुई,,,,

बात है सूरज अब तुझे कैसे बताऊं तेरा नजरिया बदलने लगा है।

मेरा नजरिया बदलने लगा हैलेकिन कैसे मुझे भी तो समझ में आना चाहिए ऐसा तो मुझे बिल्कुल भी महसूस नहीं होता,,,(अंकित जानता था कि उसकी मां किस बारे में बात कर रही थी लेकिन फिर भी वह अपनी मां के मुंह से सब कुछ सुनना चाहता था।





तुझे नहीं मालूम लेकिन मुझे सब कुछ समझ में आ रहा है।

क्या समझ में आ रहा है कुछ बोलोगी भी,,,,

मैं देख रही थी जब मुखिया की बीवी आगे आगे चल रही थी तो तेरा ध्यान किधर था।

किधर था मेरा ध्यान,,,,

मुखिया की बीवी के पिछवाड़े पर तो मुखिया की बीवी का वही घुरे जा रहा था,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर सूरज आश्चर्य से अपनी मां की तरफ देखने लगा वैसे उसे कुछ ज्यादा हैरानी नहीं हो रही थी बस वह हैरान होने का नाटक कर रहा था फिर अपने आप को सहज करने का नाटक करते हुए हुए वह बोला)

हे भगवान यह क्या कह रही हो मां तुम में भला ऐसा कैसे कर सकता हूं अनजाने में उस पर नजर चली गई होगी लेकिन मेरा उसे घूरने का कोई इरादा नहीं है,,,,(सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां के मन में क्या चल रहा था इसलिए वह इस मौके का फायदा उठा लेना चाहता था और इसीलिए आवाज थोड़ा बेशर्मी दिखाते हुए अपनी मां से बोला,,) यह क्या कह रही हो मां तुम ऐसा सोच भी कैसे सकती हो इसका मतलब तो तुम्हें लगता है कि मेरा और मुखिया की बीवी का कुछ चल रहा है,,,,।

हां ऐसा ही है तेरा मुखिया का बीवी का कुछ चल रहा होगा,,,मुझे अच्छी तरह से समझ में आ रहा है मुखिया की बीवी का बार-बार तेरे से मिलना और एकदम खुला मिलकर बातें करना उसे दिन जब हम लोग उसके घर पर गए थे तब भी तो कुछ लेने के लिए उसके घर में चला गया था और बहुत देर बाद लौटा था और आज भी ऐसा ही कुछ हो रहा है,,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर सूरज खुश नजर आ रहा था अपनी मां के मुंह से इस तरह की बातें सुनकरउसे उम्मीद की किरण नजर आ रही थी और उसे यह बात अच्छी तरह से समझ में आ रहा था कि उसकी मां एक औरत के करीब उसे जाने नहीं देना चाहती अपनी मां की बात सुन लेने के बाद और फिर भी शांत होकर जवाब देते हुए बोला,,,)





सच में मुझे ऐसा लग रहा है कि अब तुम्हारा दिमाग काम नहीं कर रहा हैजरा यह तो सोचो कि वह मालकिन है और हम लोग नौकर हैं उनके खेतों में काम करने वाले लोग हैं ऐसे में भला एक मालकिन अपने नौकर के साथ इस बारे में सोच भी कैसे सकती है। पता है वह अपने आप को किसी को छूने भी नहीं देती,, और यह बात उनके घर के नौकर के द्वारा ही मुझे पता चली थी।

कौन सी बात,,,,।

अरे उनका नौकर एक दिन बता रहा था कि ऐसे ही अनजाने मेंमालकिन के हाथ में से सब्जी लेते हुए उसका हाथ उसकी उंगलियां उसकी उंगलियों से स्पर्श हो गई थी तो वह एकदम से गुस्से में देख रही थी और जाकर अपना हाथ अच्छे से धोकर आई थीऔर तुम सोचो जब हाथ की उंगलियां इस पर सोचने पर मुखिया की बीवी इतना गुस्सा करती है तो कोई उनके बारे में गलत करने की सोच भी कैसे सकता है,,,।

क्या सच में मुखिया की बीवी उंगली स्पर्श होने पर गुस्सा करती थी।

मुझे तो नहीं मालूम लेकिन उनका नौकर ही बता रहा था,,,,।





एक सूरजऔरतों के बारे में तो नहीं जानता औरतें बड़ी चालाक और हरामी होती है तो अब जवान हो रहा है बड़ा हो रहा है मुझे डर है कि कहीं किसी औरत के चक्कर में तू ना पड़ जाए,,,,

यह क्या सोच रही हो मा तुम ऐसा सोच भी कैसे लिया तुमने।

तू नहीं समझ रहा है सूरज तेरे बाबुजी के जाने के बाद,,,, बहुत सारी जिम्मेदारियां हैं जो मेरे सर पर आ चुकी है और यह जिम्मेदारियां तेरे ऊपर भी हैपता है ना तुझे रानी जवान हो चुकी है उसका अब विवाह करना है इसके लिए हमें पैसे इकट्ठे करने हैं। अगर तू औरतों के चक्कर में पड़कर गलत राह पर चल गया तो मैं अकेली पड़ जाऊंगी,,,,।

नहीं नहीं ऐसा सोचना भी मत मैं अपनी जिम्मेदारियां को अच्छी तरह से समझता हूं मैं जानता हूं कि पिताजी के जाने के बादघर में जिम्मेदारी भर चुकी है वरना अगर पिताजी घर पर मौजूद होते तो शायद इतना कुछ हमें करना ही नहीं पड़ता मैं भी आराम से गांव में इधर-उधर घूम रहा होता,,,, और जैसा तुम सोच रही हो वैसा बिलकुल भी नहीं है मुखिया की बीवी आसमान का तारा है और मैं जमीन पर रहने वाला इंसान हूं मैं चाहूं भी तो उसे छू नहीं सकता,,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकरसुनैना को थोड़ी राहत महसूस हो रही थी उसे यकीन हो रहा था कि वाकई में इतने बड़े घर की औरत उसके बेटे के साथ क्यों संबंध बनाएगी अगर उसे संबंध बनाना भी होगा तो वह अपने हैसियत के हिसाब से किसी के साथ संबंध बनाएगी अपने खेत में काम करने वाले नौकर के साथ ऐसा कैसे कर सकती हैं,,,,,सुनैना के मन में बहुत सारी बातें चल रही थी वह एक तरह से अपने मन को मनाने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह यह भी जानती थी की औरतों का कोई भरोसा नहीं होता टांगों के बीच की गर्मी शांत करने के लिए वह किसी के सामने अपनी टांगे खोलने में देर नहीं करती वह यह नहीं देखे कि फिर सामने वाला कौन है कैसा है उसे बस अपनी टांगों के बीच की गर्मी शांत करने से मतलब होता है,,,,, फिर भी अपने बेटे की बात को मानकर वह फिर से फसल की कटाई में लग गई थी।





दूसरी तरफ कुंवर अपनी बहन के घर परतैयार हो रहा था उसे आज रानी से जो मिलना था नदी पर इसके लिए उसे तैयारी करना था अपनी बहन से पैसे चाहिए थे इसलिए वह तैयार होकर अपनी बहन के कमरे की तरफ आगे बढ़ रहा था दोपहर का समय था और जैसे ही वह अपनी बहन के कमरे के पास पहुंचा तो अंदर से कुछ आवाज़ आ रही थी जिसे सुनकर वह दरवाजे पर ही रुक गया,,,)
 
कुंवर अपनी बहन के कमरे के आगे आकर रुक गया था दरवाजे पर ही खड़ा हो गया था क्योंकि अंदर से कुछ आवाज आ रही थी जिसे वह कान लगाकर सुनने की कोशिश कर रहा था,, अंदर से उसकी बहन की आवाज आ रही थी,,,।

राजा जी यह आप ठीक नहीं कर रहे हैं,,,,

क्या ठीक नहीं कर रहा हूं,,,,

मुझे आप पर शक है आप मेरे सिवा दूसरी औरतों के साथ भी संबंध रखते हैं,,,,।





यह कैसी बातें कर रही हो रानी साहिबा,,, भला यह कैसे हो सकता है,,,,।

(कुंवर के कानों में अंदर से आ रही है अपनी बहन और अपने जीजा की आवाज को सुनकरवह थोड़ा सा कर न रह गया था क्योंकि उसे अपनी बहन की बात सुनकर मामला समझ में आ रहा था इसलिए वह अंदर देखने की कोशिश करने लगा था और जल्द हीखिड़की से उसे अंदर देखने का मौका मिल गया था क्योंकि खिड़की बंद नहीं थी हल्की सी खुली हुई थी जिसमें से उसे अंदर का सब कुछ एकदम साफ दिखाई दे रहा था क्योंकि अंदर कमरे के सामने की खिड़की खुली हुई थी जिसमें से सूरज की रोशनी कमरे में एकदम उजाला किए हुए था,,,,)

मैं अच्छी तरह से जानती हूं रात रात भर तुम मेरे कमरे से गायब रहते हो तुम्हें चोरी छुपे आते जाते मैं खिड़कियों सेदेखा है इसका मतलब साफ है कि तुम दूसरे औरतों के साथसंबंध बनाए हो तभी रात भर मेरे साथ नहीं रहती और दिन भर गायब रहते हो जब तुम्हें मेरी जरूरत पड़ती है तभी तुम मेरे पास आते हो,,,(कुंवरअपनी बहन की बातों को सुन पी रहा था और उसे अच्छी तरह से देख भी रहा था दिन के उजाले में उसकी बहन उसे साफ दिखाई दे रही थी लेकिन अंदर का नजारा देखकर उसके तन बदन में अजीब से हलचल होने लगी थी क्योंकि उसकी बहन बिस्तर पर बैठी हुई थी और उसके जीजाबिस्तर के नीचे खड़े थे लेकिन जिस तरह की दोनों की हालत थी उसे देखकर कुंवर के तन बदन में सिहरन सी दौड़ रही थी,,,क्योंकि उसकी बहन बिस्तर पर केवल पेटीकोट में बैठी हुई थी और कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी थी उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम साफ दिखाई दे रही थी यह पहला मौका था जब वह अपनी बहन को इस अवस्था में देख रहा था इसलिए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें पल भर के लिए उसके मन में आया कि वह वहां से चला जाए लेकिनबात कुछ और थी उसकी बहन की बातें सुनकर उसे अच्छी तरह से समझ में आ रहा था कि उसके जीजा किसी दूसरी औरतों के साथ भी संबंध बनाए हैं इसलिए वह अपने आप को वहां से हटा नहीं पाया और एक कारण यह भी था की पहली बार हुआ किसी औरत की नंगी चूचियों को देख रहा था इसलिए वह अपनी नजरों को अंदर कमरे से हटा नहीं पाया,,, लेकिन अभी तक कमरे में उसके जीजा राजा साहब अभी तक नजर नहीं आए थे इसलिए कुंवर अपने जीजा को देखने की कोशिश कर रहा था,,, तभी उसे कमरे के कोने की तरफ से आवाज आई जो कि उसके जीजा की थी,,,)





तुम खामखा मुझ पर शक कर रही हो यह केवल तुम्हारा वहम है,,,,(राजा साहब की आवाज के साथ-साथ वह भी कुंवर को नजर आया लेकिन जिस अवस्था में नजर आया उसे देखकर कुंवर की हालत खराब होने लगी उसे समझ में आ गया था कि कमरे के अंदर उसकी बहन और जीजा के बीच कुछ चलने वाला है इसलिए वह वहां से हट जाना चाहता था क्योंकि वह जानता था कि अपनी बहन को इस अवस्था में देखना पाप है लेकिन वह भी जवानी के दौर से गुजर रहा था और जिस तरह का नजारा कमरे के अंदर दिखाई दे रहा था उसे तरह के नजारे को देखकर कुंवर की उम्र के लड़केमदहोश हो जाते हैं उत्तेजित हो जाते हैं और अपनी नजर ऐसे दृश्य हटाने की जगह नजर गडा कर देखते रह जाते हैं और यही कुंवर के साथ भी हो रहा था कुंवर चाह कर भी अपने आप को वहां से हटा नहीं पा रहा था,,,उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी बहन की बात सुनकर उसके जीजा सफाई देते हुए कैमरे के दूसरे कोने से बिस्तर की तरफ आगे बढ़ रहे थे और इस समय उनके भजन पर कपड़े का रेशा तक नहीं था और वह कटोरी में कुछ लिए थे और उसकी धार को अपने लंड पर गिरा रहे थे जो कि इस समय एकदम अपनी औकात में आकर खड़ा था,,,,।





यह नजारा कुंवर के तन बदन में उत्तेजना का तूफ़ान पैदा कर रहा था कुंवर अच्छी तरह से जानता था कि इस समय उसकी बहन के कमरे में क्या होने जा रहा हैउसके जीजा का इस तरह से अपने लंड पर तेल की धार गिरने का मतलब साफ था कि अब वह उसकी बहन की चुदाई करने जा रहा है,,,, जिसके बारे में कुंवर कभी सोचा भी नहीं था,,,,,, उसके जीजा अपने लंड पर हाथ से तेल को लगाना शुरू कर दिए थे,,,, और तेल की कटोरी को एक तरफ टेबल पर रख दिए थे और बिस्तर की तरफ आगे बढ़ते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोले,,,)

मेरी रानी मेरे जीवन में तुम्हारे सिवा और कोई दूसरी औरत नहीं है,,,।

मुझे अच्छी तरह से मालूम है तुम कितने धोखेबाज हो मुझे सब पता चल गया है तुम्हारा एक औरत से दिल भरता ही नहीं है,,,, (कुंवर की बहन रानी साहिबा इस तरह से बिस्तर पर बैठे अपने पति से शिकायत कर रही थी लेकिन ऐसा लग रहा था कि उसकी शिकायत का राजा साहब पर बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ रहा था वह अपनी ही मस्ती में आगे बढ़ता चला जा रहा था और रानी साहिबा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,,) क्या कमी है मेरे मेंक्या मैं खूबसूरत नहीं हूं क्या मेरा बदन भरा हुआ नहीं है क्यों तुम मुझे छोड़ कर दूसरी औरतों के पास सोते हो,,,,,मैं भी तो वही सब कुछ दे रही हूं जो दूसरी औरतों के साथ तुम देना चाहते हो जो सुख प्राप्त करना चाहते हो तुम्हें यहां नहीं मिल रहा है क्या,,,,

(अपनी बहन के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर कुंवर के तन बदन में भी आग लगने लगी थी,,,, अपनी बहन की बातें सुनकर वह उत्तेजित होने लगा थाबार-बार ना चाहते हुए भी उसकी नजर अपनी बहन की बड़ी-बड़ी चूचियों पर चली जा रही थी जो खरबूजे की तरह उसकी छाती से लटके हुए थे उत्तेजना के मारे कुंवर का गला सूख रहा था इतनी उत्तेजना का अनुभव तो उसे उसे समय भी नहीं आया था जब वहगांव में पानी में डूबती हुई रानी को बचाया था और रानी पूरी तरह से उसकी बाहों में उसके कंधे पर एकदम नंगी थी जिसे वह नदी के बाहर ले आया था और,,,उसकी जान बचाया था उसे समय वह पूरी तरह से निर्वस्त्र से एकदम नंगी उसका अंग अंग उसके बदन से सटा हुआ था लेकिन फिर भी इस तरह की उत्तेजना का अनुभव नहीं हुआ था जिस की उसे चेतना का अनुभव इस समय अपनी बहन की बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर हो रहा था,,, अपनी बहन की बातें सुनकर जहां एक तरफ उसे उत्तेजना का अनुभव हो रहा था मैं दूसरी तरफ अपनी जीजा की हरकत और उसकी बातें सुनकर उसे गुस्सा आ रहा था लेकिन उसका ध्यान अपने जीजा के लंड पर भी था। जिस पर वह इस समय तेल से मालिश कर रहा था,,, और वह अच्छी तरह से जानता था कि उसका जीजा उसकी बहन की बुर में लंड डालने के लिए तेल की मालिश कर रहा था। मालिश करता हुआ वह बिस्तर पर बैठ गया,,,, और एक हाथ आगे बढ़कर रानी साहिबा की चूची पर रखता हूं मैं उसे दबाने की कोशिश करने लगा लेकिन रानी साहिबा अपने आप को पीछे की तरफ खींच ली यह देखकर कुंवर की सांसें भारी होने लगी,,,,)





यह क्या हरकत है रानी साहिबा तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं है,,,।

पहले था लेकिन अब नहीं है,,,,,(रानी साहिबा का अपने पति पर शक करने की वजह भी थी,,, रानी साहिबा को अक्सर एहसास होता था कि उसका पति रात को कहीं चला जाता है और सुबह देर में वापस लौटता था और जिस रात को वह अपना पति समझ कर किसी दूसरे मर्द से चुद गई थी उस रात से उसे अपने पति पर शक होने लगा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि राजा साहब की हवेली में किसी की हिम्मत नहीं थी कि कोई उसके शयन कछ तक पहुंच सके लेकिन उसे रात उसका यह भरम पूरी तरह से टूट गया था और उसे अपने पति पर शक होने लगा थावह समझ गई थी कि कोई करीबी ही है जो इस तरह की हरकत कर गया था और वह अच्छी तरह से जानता था कि इस समय राजा साहब कहां होंगे क्योंकि वह पूरे इतनी नाम के साथ उसके साथ संभोग किया था बिना किसी उतावला केजिसका मतलब साफ था कि उसे अच्छी तरह से मालूम था कि राजा साहब कब तक लौटेंगे और कहां जाते हैं यह भी उसे मालूम था,,,, और धीरे-धीरे उसका शक यकीन में तब बदलने लगा जब वह एक रात सिर्फ सोने का नाटक की थी और जैसे ही राजा साहब कमरे से बाहर निकले वह भी धीरे से राजा साहब के पीछे-पीछे चल दी थोड़ी देर में दोनों घर के पीछे वाली झोपड़ी के पास पहुंच चुके थेरानी साहिबा कुछ दूरी से पेड़ के पीछे छिप कर सब कुछ देख रही थी जहां पर उसने दो आदमी को देखी थी और उन दोनों आदमियों के साथ एक औरत भी थी जिसका हाथ पकड़ कर राजा साहब झोपड़ी के अंदर चले गए थे और दोनों आदमी मुस्कुराते हुए दूसरी तरफ चल दिए थे दर से वह उन दोनों आदमियों को पहचान नहीं पाई थी वरना सब कुछ पाने की तरह साफ हो जाता लेकिन इतना तो होता है ताकि उसका पति निर्लज और दूसरी औरतों के चक्कर में था,,,,उसे सब कुछ मालूम था सिर्फ वह अपने पति के मुंह से सुनना चाहती थी लेकिन उसका पति था कि हर बात को इनकार कर रहा था)





अब क्यों नहीं है मेरी जान,,,,(पेटिकोट को ऊपर की तरफ सरकाने की कोशिश करते हुए राजा साहब बोला लेकिन रानी साहिबा तुरंत उसका हाथ झटक दी यह देखकर अपनी बीवी की हरकत को देखकर राजा साहब एकदम से गुस्से में आ गया और बोला,,,) यह क्या बदतमीजी है रानी साहिबा तुम इसी तरह से मालूम है कि ऐसे समय पर मुझे इस तरह की बदसलूकी पसंद नहीं है।

मुझे अच्छी तरह से मालूम है राजा साहब कि तुम्हें अपनी हवस मिटाते समय इस तरह की बदसलूकी बिल्कुल भी पसंद नहीं है,,, लेकिन याद रखोअब मुझे भी यह सब बिल्कुल भी पसंद नहीं है तो मेरी मर्जी के बिना मेरे शरीर को हाथ तक नहीं लगा सकते,,,,, मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तुम हर रात को नहीं औरत के साथअपनी रातें रंगीन कर रहे हो और यह सब कुछ में किसी के कहने पर नहीं बल्कि अपनी आंखों से देख चुकी हूं कोई दो आदमी है जो तुम्हारे लिए हर रात एक नहीं औरत को लेकर आते हैं,,,(इतना सुनते ही राजा साहब के चेहरे से रंग उड़ने लगा जिसे देखकर रानी साहिबा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) तुम राजा साहब तुम्हारे चेहरे का रंग क्यों उड़ने लगा,,,,,(बाहर खिड़की पर खड़े होकर सुन रहा कुंवर एकदम हैरान था अपनी बहन की बातें सुनकर उसे अजीब लग रहा था और वह अपने आप से ही बोला कि उसकी बहनऐसे ही यह सब बातें नहीं कर रही है वह अपनी आंखों से देख चुकी है तभी इतने विश्वास के साथ कह रही है इसका मतलब साफ है कि उसके जीजा दूसरे औरतों के साथ भी संबंध रखते हैं)





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ऐसी कोई बात नहीं है तुम कोई सपना देखी होगी।

काश वह सपना ही होता,,,, मैं तुम्हें कितना मानती थी कितना प्यार करती थी मुझे लगता था कि तुम्हारे जैसा अच्छा इंसान पूरी दुनिया में नहीं है लेकिन मेरा विश्वास तुमने एकदम से तोड़ दिया अरे दूसरी औरतों के पास भी तो वही है जो मेरे पास हैचोरी छुपे दूसरे आदमियों का सहारा लेकर किसी औरतों के साथ संबंध बनाने में तुम्हें अच्छा लगता है तुम्हें बाजारु औरतें पसंद है घर की औरत नहीं,,,,,।

(राजा साहब एकदम आश्चर्यचकित होकर अपनी बीवी की तरफ देख रहे थे और वह जान चुका था कि अब कोई रास्ता नहीं था सफाई देने का कोई मौका नहीं बचा था,,,, लेकिन अपनी बीवी की हरकत और अपनी राजा साहब की हैसियत को देखते हुए वह अपनी हरकत से अपनी बीवी की आवाज को दबा देना चाहता था,,, इसलिए एकदम से गुस्सा दिखाते हुए बोला,,,)





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हरामजादी,,,(अपनी जगह से उठकर एकदम से उसके बाल को कस के अपने मुट्ठी में भींचते हुए ) मेरी जासूसी करती है यह देखती है कि मैं कहां-कहां जाता हूं,,,,,, हरामजादी,,,, मैंने कभी तेरी जासूसी किया,,,,।

आहहहह,,, यह क्या कर रहे है आप छोड़िए मुझे दर्द हो रहा है,,,(अपने पति के हाथ से अपने बालों को छुड़ाने की नाकाम कोशिश करते हुए वह बोली यह सब बाहर खड़ा कुंवर देख रहा था और वहअपने जीजा की हरकत को देखकर एकदम से आग बबूला हो गया था और इसी समय कमरे के अंदर दाखिल होने की सोच रहा था लेकिन कुछ सोच करो ऐसा नहीं कर पाया सिर्फ देखने के सिवा,,,)

दर्द तो तुझे होगा ही,,,,और मैं एक मर्द हूं मैं क्या करता हूं क्या नहीं करता हूं इससे तेरा कोई वास्ता नहीं होना चाहिए मैं एक औरत के साथ सोऊं या दश औरत के साथ सोऊं इससे तुझे कोई मतलब नहीं होना चाहिए,,,, और मैं तेरी कभी जासूसी किया कि तू कहां कहां जाती है,,,,।

करके देख लो अगर मेरे बारे में कुछ सुन पाओ तो मुझे घर से निकाल देना मैं कुछ नहीं कहूंगी,,,।





चल रहने दे रंडी दिन भर में नहीं रहता रात को भी नहीं रहता हूंतू भी रात को किसी को अपने कमरे में बुला लेती होगी क्योंकि अगर तू सो रही होती तो तुझे कैसे पता चला कि मैं रात को तेरे साथ नहीं रहता,,,, तू भी दूसरे मर्दों से चुदवाती है रंडी छिनार,,,,

खबरदार जो मुझे रंडी और छिनार कहा तो मैं तुम्हारे जैसी बिल्कुल भी नहीं हूं,,,,(रानी साहिबा एकदम से गुस्से में आकर अपने पति से बोली तो राजा साहब एकदम से गुस्से में आकर उसके गाल पर दमा दम तीन-चार तमाचा जड़ दिया जिससे वह एकदम से प्यार हो गई बाहर खड़ा कुंवारी यह सब देख कर एकदम से परेशान हो गया लेकिन वह इस समय कुछ कर नहीं सकता था ,,,,)

साली हरामजादी मेरे पीठ पीछे न जाने कितनों का लंड लेती होगी,,,, तभी तो अभी मुझे हाथ नहीं लगाने दे रही है मैं भी देखता हूं कि कैसे मुझे रोकती है,,,, हरामजादी अगर मेरी बात नहीं मानी तोतुझे और तेरे भाई को इसी समय हवेली से बाहर निकाल दूंगा और तुझ पर ऐसे ऐसे इल्जाम लगाऊंगा की पूरा समाज उसे पर थुकेगा कोई तुझे अपनाएगा नहींऔर रही बात मेरे पर एग्जाम लगाने की तू सच भी कह रही होगी तो भी कोई तुझ पर विश्वास नहीं करेगा रंडी,,,,।

(रानी साहब अपने पति की बात सुनकर एकदम हैरान हो गई थी वह अपने पति पर इल्जाम नहीं लग रही थी बल्कि अपने पति को आया दिख रही थी ताकि वह रास्ते पर वापस लौट आए लेकिन पासा यहां पर उल्टा चल चुका था अब यहां पर रानी साहिबा के लाले पड़े हुए थेरानी साहिबा अच्छी तरह से समझ रही थी उसका पति जो कुछ भी कह रहा था उसमें हकीकत था अगर उसका पति उसके बारे में समझ में गंदी अफवाहें फैलाएगाउसके चरित्र को लेकर उल्टी सीधी बातें करेगा तो वह किसी को सफाई देने लायक नहीं रहेगी और यह बिल्कुल सच है कि समाजउसे पर ही इल्जाम लगाएगी और वह कहीं की नहीं रह जाएगी इस बात से वह एकदम घबरा गई थी और वह अपने पति को आश्चर्य से देखने लगी थी उसकी आंखों में आंसू थे वह कुछ भी कह सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी।)





चल घोड़ी बन छिनार ,,,,,,,

(अपने जीजा की बातें सुनकर कुंवर हैरान हो गया थाउसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका जीजा क्या बनने को कह रहा था घोड़ी का मतलब वह समझ नहीं पा रहा था,,,,,राजा साहब की बात का असर रानी साहिबा पर इस समय नहीं पड़ा था वह अपने ही दुख में डूबी हुई थी तभी वह दोबारा जोर से चिल्लाया)

हरामजादी सुन नहीं रही है चल जल्दी से घोड़ी बन (अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए क्योंकि इस समय वह ढीला पड़ गया था और वह फिर से उसे खड़ा करने में लगा हुआ था) बेवजह मेरा दिमाग खराब कर रही है इतना मन कर रहा था तेरी गांड मारने का और तु है कि मेरे मनसुबे पर पानी फेर रही है,,,, साली रंडी छिनार,,,,(घोड़ी बनने की बात सुनकर रानी साहिबा एकदम से घबरा गई थी वह समझ गई थी कि राजा साहब क्या करना चाहते हैं वह समझ गई थी कि क्यों वह अपने लंड पर सरसों का तेल लगा रहा था,,,, यह पहली बार नहीं था पहले भी वह गांड मरवा चुकी थी लेकिन इसमें उसे बहुत दर्द होता था लेकिन वह अपने राजा साहब से बहुत प्यार करती थी इसलिए थोड़ा सा दर्द सहकर भी हुआ आपने राजा साहब को खुश रखना चाहती थी लेकिन आज वह पूरी तरह से टूट चुकी थी लेकिन राजा साहब के गुस्से को देखकर और उनकी बातो को सुनकर वह घबरा गई थी,,,, और अपने पति की बात मानते हुए वह धीरे से घोड़ी बन गई थी और तब जाकर कुमार को पता चला था कि घोड़ी बनने का मतलब क्या था,,,,,जिस तरह से उसकी बात मानते हुए रानी साहिबा घोड़ी बनी हुई थी यह देखकर राजा साहब के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी थी और वह हंसता हुआ बोला।

देख ली ना हरामजादी जब तक बोल नहीं रहा था तब तक सर पर चढ़ी हुई थी क्या मिला तुझे मेरी जासूसी करके मैं राजा साहब हूं कहीं औरतों के साथ संबंध बनाना मुझे मेरी विरासत से मिला है तुझे घर में इज्जत से रख रहा हूं यही बहुत है,,,,, चल अब गांड ऊपर उठा,,,, जैसे रोज उठाती है,,,, पता चलना चाहिए की रानी साहिबा के गांड है किसी बाजारु,,, औरत की नहीं,,,,,।(अपने लंड को जोर-जोर से हिलाते हुए और उसे खड़ा करने की कोशिश करते हुए वह बोला और उसकी बात सुनकर रानी साहिबा पलंग के किनारे अपने घुटनों को थोड़ा सा फैलाते हुए अपनी बड़ी-बड़ी गांड को ऊपर की तरफ उठाने लगी,,,यह देखकर राजा साहब खुद ही अपना दोनों हाथ आगे बढ़कर अपनी बीवी की गांड को पकड़ कर उसे अपने तरीके से व्यवस्थित करने लगा और गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर थोड़ा और हवा में लहराता हुआ बोला,,,,)

तू बोलती है ना हरामजादी कि मेरे पास भी तो वही है जो दूसरे के पास है यह बात सही है कि दूसरों के पास जो हैवही तेरे पास भी है लेकिन तेरे पास वह कला नहीं है मर्दों को खुश करने कातुझे सब कुछ बताना पड़ता है लेकिन उन्हें बताना नहीं पड़ता बल्कि वह खुद मेरे ऊपर इतना छा जाती है कि मैं पागल हो जाता हूं,,,,,सब कुछ वह लोग अपने तरीके से करते हैं बोलो अच्छी तरह से जानती है कि मर्दों को कैसे खुश किया जाता है राजा साहब को कैसे खुश किया जाता है राजा साहब को क्या चाहिए और तू है कि मेरी बीवी होने के बावजूद भी तुझे कुछ नहीं पता,,,,,(ऐसा कहते हुएराजा साहब ढेर सारा सुख अपने लंड पर लगाकर उसकी मालिश करने लगा औरथोड़ा सा तू रानी साहिबा के भूरे रंग के छेद पर लगने लगा यह देखकर कुंवर का दिल जोरो से धड़कने लगा,,,,वह यह सोचकर हैरान हो रहा था कि उसका जीजा उसकी बहन की गांड के छेद पर क्यों थूक लगा रहा हैजबकि उसे तो उसके गुलाबी बुर में लंड डालना चाहिए जो कि इस समय खिड़की पर खड़े होने के बावजूद भी कुंवर को सबको साफ दिखाई दे रहा था अपनी बहन की जवानी से भरी हुई बड़ी-बड़ी गांड और उसकी गुलाबी छेद को देखकर उसका खुद का लंड खड़ा हो गया था,,,। उसका भी जोरों से दर्द रहा था और वह फटी आंखों से अपनी बहन और अपने जीजा को देख रहा था,,,,इस तरह की उत्तेजना का अनुभव से पहले कभी नहीं हुआ था आज अपनी आंखों से सब कुछ देखकर उसकी हालत खराब हो रही थी,,,

और कुंवर के लिए सबसे ज्यादा उत्तेजित करने वाली बात यह थी कि उसकी आंखों के सामने उसकी बहन पूरी तरह से नंगी थी,,, कुछ देर पहले उसके बदन पर पेटिकोट था लेकिन उसके जीजा का गुस्सा देखकर जब वह घोड़ी बनने के लिए बोला था वह खुद अपने हाथों से अपने पेटिकोट की डोरी खोलकर उसे अपने बदन से अलग कर दी थी,,,,, और अपने हाथों से अपने पेटिकोट की डोरी खोलता हुआ अपनी बहन को देखकर कुंवर की हालत और ज्यादा खराब होने लगी थी,,,,,अपनी बहन की नंगी बड़ी-बड़ी गांड उसकी चूची और उसके गुलाबी छेद को देखकर उसके होश उड़े जा रहे थे,,,, अभी तक उसे यह भी समझ में नहीं आया था कि उसका जीजा उसकी गुलाबी छेद की जगह उसकी गान्ड के छेद पर क्यों थूक लगा रहा था,,,,, लेकिन जल्द ही उसेइस बात का पता चल गया कि ऐसा उसका चेहरा क्यों कर रहा था क्योंकि अगले ही पल उसका जीजा अपने लंड के मोटे सुपाड़े को,,, उसकी बहन के भूरे रंग के छेद पर रगड़ना शुरू कर दिया जिससे रानी साहिबा के बदन में कसमसाहट होने लगी,,,, और जैसे ही राजा साहब अपनी कमर को आगे की तरफ ठेला थोड़ा सा जोर लगाया रानी साहिबाअपने बदन को एकदम से आगे की तरफ सिकोड़ने लगी जिसकी वजह से राजा साहब तुरंत उसकी कमर को पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और एक हाथ से अपने लंड को पकड़कर अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा।

राजा साहब की हरकत सेउसका लंड धीरे-धीरे रानी साहिबा की गांड के छेद में प्रवेश करने लगा और यह सब देखकर कुंवर के पसीने छूटने लगे,,,, कुंवर पहली बार चुदाई देख रहा था जहां तक उसे ज्ञान था की लंड को औरत की बुर में डाला जाता था लेकिन यहां परउसका जीजा अपने लंड को उसकी बहन की गांड में डाल रहा था शायद इसी को गांड मारना बोलते थे। यहां से उसकी बहन का चेहरा तो उसे साफ दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन इस समयरानी साहिबा की हालत खराब हो रही थी क्योंकि भले भी वह अपने पति से गांड बहुत बार मरवा चुकी थी लेकिन अपनी खुशी से नहीं बल्कि अपने पति की खुशी के लिए क्योंकि गांड मरवाने में उसे दर्द होता था,,,, धीरे-धीरे राजा साहब का पुरा लंड रानी साहिबा के कोमल छेद में अंदर तक प्रवेश कर गया था राजा साहब अपनी बीवी की कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था,,,, उसे अपनी बीवी की गांड मारने में बहुत मजा आता था,,,, वह दूसरी औरतों के साथ भी ऐसा कर चुका था,,,, बाहर खड़ा कुंवर यह सब देखकरपागल हुआ जा रहा था उसके बस में कुछ भी नहीं था इस समय वह अपनी बहन को गांड मरवाते हुए देख रहा थाऔर चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता था क्योंकि दोनों के बीच रिश्ता ही कुछ ऐसा था कि दोनों यह इस क्रिया को चाहे जब कर सकते थे।

कुंवर अपनी दोनों टांगों के बीच गौर किया तो देखा कि उसके लंड की हालत एकदम खराब हो गई थी वह पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा था और वह पजामे के ऊपर से उसे दबा भी रहा था,,,,, थोड़ी ही देर में कमरे में दर्द भरी शिसकारी की आवाज गुंज रही थी,,,,,वैसे तो रानी साहिबा को इस क्रिया में बिल्कुल भी मजा नहीं आता था लेकिन इस क्रिया को करते हुए राजा साहब की हरकतें जिस तरह से बढ़ जाती थी उसकी वजह से उसके बदन में उत्तेजना का एहसास होने लगता था और उसे अलग तरीके से मजा आता था और इस समय राजा साहब अपने दोनों हाथों को आगे की तरफ करके उसके बड़े-बड़े खरबुजो को अपने हाथ में पकड़कर दबा रहा था मसल रहा था,,, जिससे रानी साहिबा को भी थोड़ी बहुत आनंद की अनुभुति हो रही थी। राजा साहब धीरे-धीरे अपनी रफ्तार को बढ़ने लगा था,,,, ऊपर का छेद पूरी तरह से राजा साहब के लंड से भरा हुआ था लेकिन नीचे की गुलाबी गली सुनी पड़ी हुई थी और उसकी गलियारे से उसका मदन रस आंसू बनकर टपक रहा था,,, जिस पर इस समय किसी का भी ध्यान नहीं था।

थोड़ी ही देर में राजा साहब अपनी बीवी और अपने लंड अपनी बीवी के पेटीकोट से ही वह अपने लंड को साफ कर रहा था और मुस्कुराते हुए अपनी बीवी से बोला,,,।

आज तुझे साफ-साफ बोल दे रहा हूं आइंदा से मैं कहां जाता हूं क्या करता हूं इस बारे मेंजासूसी करने की जरूरत नहीं है मैं सब तुझे बता देता हूं कि हां मैं दूसरी औरतों के पास जाता हूं क्योंकि तेरे से मुझे वह सुख नहीं मिलता जो दूसरी औरतों मुझे देती हैऔर अगर तुझे इस बात से ऐतराज है तो यह घर तू अभी छोड़ सकती है लेकिन मेरे बारे में किसी से कुछ कहेगी तो उल्टा तू ही बदनाम हो जाएगी इसलिए खामोश रहना इस घर में रानी बनकर रहना है तो अपने होठों को सी कर रहना,,,,, अपने मुंह से कुछ भी बकने की जरूरत नहीं है,,,,,,(रानी साहब अपने पति की बात उसी तरह से घोड़ी बन सुन रही थी इस समय उसकी गांड में राजा साहब का लंड भी नहीं था फिर भी वह घोड़ी बनी हुई थी क्योंकि वह एकदम से शर्मिंदा हो गई थीवह अपने आप की नजर में ही अपने आप को गिरता हुआ महसूस कर रही थी क्योंकि उसे ऐसा ही भ्रम था कि वह अपने पति से बहुत प्यार करती है और उसका पति उसे बहुत प्यार करता है अगर वह अपने पति से इस बारे में बात करेगी तो उसका पति उसकी बात मानते हुए यह सब छोड़ देगा और सीधे से उसके साथ ही खुश रहेगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था आज उसे एहसास हुआ था कि उसका पति उसे बिल्कुल भी प्यार नहीं करता होगा तो वासना से भरा हुआ है और हर एक रात उसे नई दुल्हन चाहिए,,, अपने पति की बात सुनकरअब तो वह यह बात अपने मां-बाप से भी नहीं बता सकती थीक्योंकि वह जानती थी कि राजा साहब उसके ही चरित्र पर इल्जाम लगाकर उसे पूरी तरह से छिनार साबित कर देगा तब वह अपने मां-बाप से कैसे नजर मिला पाएगी समाज से कैसे नजर मिला पाएगी,,,,जो लोग दिन रात से रानी साहिबा रानी साहिबा कहते हुए नहीं थक रहे हैं वही कल को उसके पति के द्वारा लगाए गए ईल्जाम को लेकर उसे पर हसेंगे उसे पर फब्तिया कसेगे उसकी बिल्कुल भी इज्जत नहीं करेंगे यही सोचकर वह एकदम से घबरा गई थी,,,,

राजा साहब अपने कपड़े पहन चुका था लेकिन रानी साहिबा अभी भी नंगी घोड़ी बनी हुई थी यह देखकर वह मुस्कुराने लगा और बोला।

अपने कपड़े पहन ले अभी मैं तेरी नहीं लूंगा अब जा रहा हूं,,,,,(ऐसा कहकर वह कमरे से बाहर निकलने वाला था और समय देख कर कुंवर भी वहां से चलता बना था,,,थोड़ी देर बाद वहां अपने जीजा के चले जाने के बाद अपनी बहन के कमरे के पास फिर आया था उसे लगा था कि उसकी बहन अब सहज हो गई होगीलेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था खिड़की से देखा तो अभी भी उसकी बहन घोड़ी बनी हुई थी एकदम नंगी और रो रही थी उसके रोने की आवाज जिसके कानों में साफ सुनाई दे रही थी कुंवर को यह समय अपनी बहन से बात करने का बिल्कुल भी ठीक नहीं लग रहा था इसलिए वह वहां से चला गया और जिस तरह का माहौल बना हुआ था उसे देखते हुए उसका मन नहीं किया रानी से मिलने के लिए।
 
रानी सज संवरकर खड़ी दुपहरी में घर से निकल गई थी अपने सपनों के राजकुमार से मिलने के लिए थोड़ी बहुत सजावट के बाद रानी सच में किसी रियासत की रानी लग रही थी राजकुमारी लग रही थी। वैसे तो बहुत ही खूबसूरत लेकिन इस समय उसकी खूबसूरती में चार चांद लगे हुए थेवह बहुत खुश नजर आ रही थी और गीत गुनगुनाते हुए वह नदी की तरफ चल दी थी सबसे नजर बचाते हुए क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि उसकी सहेली की नजर उस पर पड़े और उसकी सहेली भी उसके साथ नदी की तरफ चल दे और सारे किए कराए पर पानी फिर जाए। इसलिए वह किसी की नजर में नहीं आना चाहती देखते ही देखते वह नदी पर पहुंच चुकी थी लेकिन नदी पर पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था। इंसान तो इंसान जानवर भी इस समय नदी पर नहीं था रानी को थोड़ा अजीब लग रहा था क्योंकि उसेइस बात का यकीन था कि कुंवर सबसे पहले नदी पर उसका इंतजार कर रहा होगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था।

रानी नदी के सन्नाटे में किनारे किनारे पर कुंवर को ढूंढते हुए इधर से उधर भटक रही थी लेकिन कुंवर का कहीं अता पता नहीं था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,, थक हार कर वह एक पेड़ के किनारे बैठ गई और अपने सपनों के राजकुमार का इंतजार करने लगी लेकिन देखते ही देखते एक घंटा बीत गया लेकिन कुंवर का दूर-दूर तक ठिकाना नहीं था रानी को यकीन हो गया कि कुंवर आने वाला नहीं है इस बात का अहसास होते ही उसकी आंखों में आंसू की बूंद नजर आने लगी वह अपने आप से ही बात करते हुए बोली कि आखिरकार ईतने बड़े घर का लड़का उसके साथ प्रेम क्यों करेगा वह तो अपने ही हैसियत की लड़की ढूंढेगा गरीब घर की लड़की से भला वह क्यों प्यार करने लगा,,, उस दिन सब दिखावा था, छलावा था मैं हीं बेवकूफ थी जो उसकी बातों में आ गई,,, मुझे यहां आना ही नहीं चाहिए था अच्छा हुआ कि किसी ने मुझे यहां आते हुए देखा नहीं। आंख में आंसू लिए हुए वह अपने आप से ही बातें कर रही थी वहां बैठे-बैठे उसे और कुछ ज्यादा समय हो चुका थाअपने आप से निराशा से बात करते हुए भी उसके मन में कहा था की किरण थी जिसके चलते वह बार-बार इधर-उधर देख ले रही थी लेकिन दूर-दूर तक कुंवर का ठिकाना न थाइसलिए वह निराश होकर वहां से उठकर खड़ी हो गई और अपने घर की तरफ जाने लगी। और आइंदाकुंवर की बातों में ना आने का अपने आप से ही वादा करने लगी।

दूसरी तरफ खेतों में काम करते हुए मां बेटे दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे,,,, सुनैना थक चुकी थी लेकिन पैसे पाने की खुशी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी,,, वह फसल की कटाई करते हुए अपने बेटे से बोली।

आज थोड़ा हाथ जल्दी-जल्दी चला,,,

ऐसा क्यों,,,?

क्योंकि मैं सोच रही हूं कि कल बाजार चलते हैं,,,, राशन का कुछ सामान खरीदना है और कुछ जरूर की चीजें भी खरीदनी है,,,।(हाथ में फसल काटने का औजार लिए हुए वह एक हाथ से अपने माथे से पसीने को पोंछते हुए बोली,,,, सूरज उससे एक मीटर की ही दूरी पर फसल की कटाई कर रहा था वह अपनी मां की बात सुनकर खड़ा हो गया और गहरी सांस लेते हुए बोला,,,)

वह सब तो ठीक है लेकिन पैसा,,,!(इतना कहना था कि सूरज की नजर पसीने से भीगी हुई अपनी मां की ब्लाउज पर चली गई और पसीने से भी होने की वजह से ब्लाउज का कपड़ा उसकी गोल-गोल चूचियों से चिपक गई थी जिसे उसके छुहारे जैसी कड़ी निप्पल एकदम साफ दिखाई दे रही थी जिसे सूरज देखता ही रह गया था,,,, अपने बेटे की बात सुनकर वह बोली,,)

अभी-अभी तो मुखिया जी ने पैसा दिया और कुछ पैसे में बचा कर रखी हूं खरीदी करने के लिए तू चिंता मत कर,,,,

तब तो ठीक है अगर पहले बताई होती तो मैं भी मालकिन से कुछ पैसे ले लिया होता,,,,।

मुखिया जी ने तो दिया तो मालकिन क्यों देती,,,!

वह भी दे देती क्योंकिफसल की कटाई के अलावा भी तो इधर-उधर का काम थोड़ा बहुत करवाती ही रहती है जैसे कि अंगूर तोड़ना हो क्या सब्जियां तोड़ना हो गया और वैसे भी मालकिन साफ दिल की है इसलिए पैसे दे देती है मुखिया जी को इसमें कोई एतराज नहीं होता,,,,।

ओहहह तब तो तुझे मांग लेना चाहिए था थोड़ी बहुत और खरीदी कर लेते,,,,।

ऐसा करता हूं कि शाम होने के बाद में उनके घर से ही ले लेता हूं,,,।

ठीक है,,,,,(सुनैना एकदम सहज थीइस समय वह अपने बेटे और मुखिया की बीवी को लेकर बिल्कुल भी शंकासील नहीं थी,,, लेकिन तभी अहसास हुआ कि उसका बेटा उसकी छाती की तरफ प्यासी नजर से देख रहा है पल भर में ही अपने बेटे की नजर सेसुनैना के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी वह अपनी शंका को निश्चितकरने के लिए जब अपनी छाती की तरफ देख तो वह भी हैरान हो गई थी वाकई में पसीने से उसका पूरा ब्लाउज भेज चुका था और ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूचीकी गोली एकदम से साफ झलक रही थी और उसका छुहारा भी एकदम ब्लाउज के कपड़े में उपसा हुआ था,,,, अपने बेटे की नजर से सुनैना की टांगों के बीच सिहरन सी दौड़ने लगी वह एकदम से दूसरी तरफ घूम गई और फिर से फसल की कटाई करने लगी लेकिन इस बार उसका पिछवाड़ा सूरज की तरफ थाअपनी मां की चूचियों को देखकर जिस तरह की उत्तेजना का अनुभव उसे हो रहा था अपनी मां का बड़ा पिछवाड़ा देखकर उसका मन कर रहा था कि अभी पीछे से बाहों में भर लु लेकिन किसी तरह से वह अपने आप पर काबु कर ले गया और वह भी फसल की कटाई में लग गया।

दूसरी तरफ सुनैनाअपने बेटे की हरकत से हैरान थी क्योंकि उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि दिन-ब-दिन उसके देखने का नजरिया उसकी हरकत पूरी तरह से बदलती जा रही थी उसे एहसास होने लगा था कि वह सच में पूरी तरह से जवान हो चुका है,,, कभी-कभी तो उसे अपने बेटे की मौजूदगी में डर लगने लगा था और कभी-कभी अपने बेटे की हरकत पर उसे आनंद आने लगता था एक अलग ही एहसास में वह डूबने लगती थी,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, कुछ देर की खामोशी के बाद सुनैना अपने बेटे से बोली,,,,।

बाजार सुबह चलना ठीक होगा कि शाम को,,,,।(सुनैना इसलिए अपने बेटे से पूछ रही थी क्योंकि उसे बाजार के बारे में कुछ ज्यादा मालूम नहीं था बाजार कब लगी होती है कब नहीं इसलिए वह अपने मन में उठ रहे शंका का समाधान चाहती थी)

सही कहूं तो बाजार तो सुबह भी लगती है लेकिन जो रौनक शाम को होती है वह सुबह नहीं होती मेरा मतलब है कि शाम को बाजार भरचक रहती है जो लोग सुबह बाजार में सामान बेचने के लिए नहीं आते वह लोग शाम को जरूर आते हैं इसलिए मेरा मानना है कि शाम को ही चलते हैं,,,।

तब तो ठीक है लेकिन फिर दोपहर तक खेत में काम करना होगा।

तब तो ठीक ही रहेगा ना थोड़ी और कटाई हो जाएगी और वैसे भी चार-पांच दिन की ही कटाई रह गई है।

चलो फिर शाम को ही चलेंगे,,,,।(सुनैना निश्चिंत होते हुए बोली,,,,, इतना कहकर दोनों फिर से काम में लग गए,,,, देखते ही देखते शाम ढलने लगी थी अंधेरा होने लगा था लेकिन फिर भी दोनों काम कर रहे थे,,,, सुनैना ही सूरज को रोकते हुए बोली)

चल अब बस रहने दे,,,,,शाम ढल रही है थोड़ी देर में अंधेरा हो जाएगा अब हमें घर जाना चाहिए और वैसे भी घर जाकर खाना भी बनाना है,,,।

ठीक है,,,, तुम खेत से बाहर चलो मैं तब तक फसल को एक तरफ रख देता हूं,,,(सूरज की बात मानते हुए सुगंधा खेत से बाहरथोड़ी ऊंची टेकरी पर चली गई और वहां पर खड़ी हो गई तब तक सूरज कटी हुई फसल को एक तरफ रखना लगा और थोड़ी ही देर में फसल का ढेर लगा दिया वह भी पसीने से तरबतर हो चुका था,,,, फिर वह भी ऊंची टेकरी पर आ गया,,,शाम ढल चुकी थी लेकिन अभी भी थोड़ा-थोड़ा उजाला थाआगे आगे सुनैना चल रही थी और पीछे-पीछे सूरज लेकिन सूरज को बड़ी जोर की पेशाब लगी हुई थी और वह अपनी मां से बिना बताए कच्ची पगडंडी के किनारे रुक गया और एक पेड़ के पीछे जाकर खड़ा हो गया,,,, और धीरे से अपना पजामा खोलने लगा,,,, अभी तक उसका लंड सहज आकार में था उसमें बिल्कुल भी तनाव नहीं था, ढीला था लेकिन फिर भी जानदार था जिसे पकड़कर वह पेशाब कर रहा था,,,, उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि अगले ही पल क्या होने वाला है,,, वह तो अपनी ही धुन में था इस बात से अनजान की अपनी मां को ना बताने की वजह से वह उसे ढूंढ रही होगी,,,सुनैना अपने बेटे को अपने पीछे आता हुआ ना देख कर वहीं रुक गई थी और उसे इधर-उधर ढूंढने लगी थी लेकिन वह आवाज नहीं लगाई थी क्योंकि सुनैना को भी ऐसा था कि कुछ पल में ही उसका बेटा न जाने कहां रुक गया था,,,,।

लेकिन वह अपने बेटे को ढूंढते हुए ठीक उसके सामने झाड़ियों के पास आ गई थी और सूरज अपनी मां को देख लिया था लेकिन ना देखने का नाटक कर रहा था और जैसे ही सुनैना की नजर अपने बेटे परपड़ी वह कुछ बोल नहीं पाई उसे समझ में आ गया था कि उसका बेटा पेशाब कर रहा हैशाम ढल चुकी थी लेकिन इतना उजाला तो था ही कि वह अपने बेटे केमर्दाना अंक को देख सके और उसे देखने की लालच में वह कुछ बोल नहीं पाए और अपने आप को झाड़ियां में थोड़ा और ज्यादा छुपा ली ताकि वह वह पर आराम से खड़ी होकर अपने बेटे के लंड को देख सके,,,चोर नजरों से सूरज अपनी मां की तरफ देख रहा थाउसे लगा था कि उसे इस हालत में देखकर उसकी मां वहां से चली जाएगी लेकिन जैसे ही उसे एहसास हुआ कि उसकी मां झाड़ियां में छुपा कर उसे देखने की कोशिश कर रही हो एकदम से उत्साहित हो गया,,,, लेकिन इस समय अपने आप पर से थोड़ा गुस्सा आ रहा था क्योंकि उसका लंडबिल्कुल भी खड़ा नहीं था वह सामान्य अवस्था में था लेकिन फिर भी गजब का लग रहा था लेकिन वह ऐसी अवस्था में अपनी मां को अपना लंड दिखाना नहीं चाहता था,,,,उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी पेशाब अभी भी जोरों की लगी हुई थी इसलिए उसके लंड से पेशाब की धार निकल रही थी,,,, सूरज को लगने लगा था कि यही सही मौका है अपनी मां को अपनी मर्दाना अंक का दर्शन करने का जिसे देखकर वह उसे पाने के लिए मचल उठे।

इसलिए पेशाब करते हुए ही वह अपने लंड को खड़ा करने की कोशिश करने लगा उसकी आंखों के सामने उसकी मां खड़ी थी जिसे वह चोदना चाहता था जिसका नंगा बदन उसे बार-बार उत्तेजित और उत्साहित कर देता था मदहोश बना देता था,,,, अपने लंड को खड़ा करने के लिए वह उसे हिलाते हुए अपनी मां के नंगे बदन के बारे में सोचने लगा अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों के बारे में सोचने लगा जो एकदम खरबूजे जैसी गोल-गोल थी अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड के बारे में सोचने लगा जिसे देखकर उसका लंड पल भर में खड़ा हो जाता था,,,, अपनी मां की रसीली बुर के बारे में सोचने लगा जिसमें वह दिन रात उसमें लंड डालने के बारे में सोचा करता था,,,, और उसकी सोच उसका गरम एहसास उसे उत्तेजित करने लगा और देखते ही देखते पेशाब करते हुए उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ गया,,, और अपने लंड के आकार को देखकर,, सूरत संतुष्ट होने लगा क्योंकि इसी हालत में वह अपनी मां को लंड दीखना चाहता था ताकि उसके लंड को देखकर उसकी मां की बुर पानी छोड़ने लगे,,,सूरज अपनी मां को कर नजरों से देख रहा था अपनी नजर उठा कर अपनी मां की तरफ देखने की बिल्कुल की कोशिश नहीं कर रहा था क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां उसके लंड को प्यासी नजरों से देख रही थी और वह अपनी औकात में आ चुका था एक औरत के मन को अच्छी तरह से समझता थाएक मर्द के मोटे तगड़े लंड को देखकर औरत की क्या हालत होती है इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से था और उसका सोचना बिल्कुल सही था।

अपनी आंखों के सामने अपने बेटे के खड़े होते हुए लंड को देखकरसुनैना की आंखें फटी की फटी रह गई थी पहली बार वह अपने बेटे के लंड के दर्शन कर रही थीऔर पहली बार में ही उसे एहसास हो गया था कि उसके बेटे का लंड उसके पति के भी लंड से ज्यादा लंबा और मोटा था,,, जिसे देखते ही उत्तेजना के मारे उसकी बुर कचोरी की तरफ फुल गई थी और अपनी खुशी जाहिर करते हुए फूलने पिचकने लगी थी,,,,पल भर में ही सुनैना की सांस गहरी हो गई,, वह झाड़ियां में छुपकर अपने बेटे के लंड को देख रही थी जिसमें से पेशाब की धार फूट पड़ी थी और उसका लंड जिस औकात में आकर खड़ा था उसे देखकर सुनैना की बुर पानी छोड़ रही थी,,,। सुनैना को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि वह इस तरह का लंबा तगड़ा मोटा लंड पहली बार देख रही थी और उसे यकीन भी नहीं हो रहा था कि वाकई में किसी का लंड इतना मोटा और लंबा हो सकता है। अपने बेटे के लंड को देखकर सुनैना अपने बदन में उत्तेजना का अनुभव कर रही थी झाडीयो में छुप करवह अपने बेटे को जिस अवस्था में देख रही थी वह बार-बार अपने अगल-बगल भी देख रही थी कि कहीं कोई उसे देख तो नहीं रहा है लेकिन दूसरा वहां कोई भी नहीं था इसलिए वह निश्चिंत होकर अपने बेटे को देख रही थी।

अपने बेटे को देखकर उसकी हालत को देखकर वह जिस तरह से अपने लंड को पकड़ कर हिला हिला कर पेशाब कर रहा था उसे देखकर वह अपने आप से ही बोली,,,।

बाप रे कितना बेशर्म हो गया है देखो तो सही कैसे हिला हिला कर पेशाब कर रहा है अभी पूरा मर्द बन चुका है तभी इसका नजर और उसका नजरिया दोनों बदलने लगा है इसकी हरकतें कितनी बदल गई है तभी वह मुझे प्यासी नजरों से देखता हैं मेरे अंगों को घूरता है,,,, और ऐसाहो भी भला कैसे नहीं जिसे इतना मोटा लंबा होगा उसकी हरकतें तो बदलेंगे ही बाप रे जिसकी भी चुदाई करेगा उसकी तो फाड़ ही डालेगा,,,(अनायास ही उसके मन में इस तरह का ख्याल आ गया थाजिस पर उसका भी बस नहीं था और अपने मन में इस तरह का एक ख्याल के बारे में सोचकर वह खुद ही शर्मिंदा हो गई और अपने आप से बोली हाय दैया यह में अपने ही बेटे के बारे में क्या सोच रही हूं,,,, अपने बेटे के बारे में मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए लेकिन फिर अपने ही बात पर वह खुद से ही जवाब देते हुए बोली भला ऐसा क्यों ना सोचुं इसका लंड तो देखो पूरा मुसल है जिसकी भी बुर में घुसेगा सच में बुर का भोसड़ा बना देगा,,,,, यह सब सोचते हुए उसकी खुद की बुर से पानी टपक रहा था,,, और अनजाने में ही उसका हाथ खुद की बुर पर आ गया और वह साड़ी के ऊपर से ही हल्के से अपनी बुर को दबा दी जिससे उसके मुंह से हल्कि सी शिसकारी फूट पड़ी। और वह आनंद से मस्त हो गई।

सूरज अपना काम कर चुका था उसे एहसास हो गया था कि उसकी मां मस्त हो चुकी है उसके लंड को देखकर और वह काफी दिनों से यही चाहता था लेकिन ऐसा कर नहीं पता था लेकिन आज अनजाने में ही उसने अपनी मां को अपने मोटे तगड़े लंड का दर्शन कर दिया था उसका काम बन चुका था उसे मालूम था कि उसकी मां के मन में इस समय क्या चल रहा होगा,,,,सूरज को एहसास होने लगा था कि उसकी वह भी पूरी तरह से लाइन पर आ जाएगी पर थोड़ी सी और मेहनत करना बाकी है,,, अगर ऐसा ना होता तो उसकी मांउसे पेशाब करते हुए इस तरह से चोरी छुपे ना देखे बल्कि वहां से हट गई होती चली गई होती लेकिन वह झाड़ियां में अपने आप को छुपा कर उसे देख रही थी इससे सूरज का आत्मविश्वास पूरी तरह से बढ़ने लगा था,,,वह समझ गया था कि उसकी मां की वही चाहती है जो वहां जाता है बस थोड़ा सा शर्मा का पर्दा लगा हुआ है जिसे हटाना जरूरी था और वह धीरे-धीरे उसे पर्दे को बेपर्दा करने लगा था,,,,सूरज पेशाब कर चुका था और अपने लंड को पकड़कर जोर से झटका देकर आखिरी बुंद को भी नीचे गिराते हुए उसे वह वापस पजामे के अंदर भर लिया था,,,, यह देखकर सुनैना को होश आया और वह तुरंत झाड़ियों से बाहर आ गई और जल्दी-जल्दी आगे की तरफ चलने लगीसूरज भी अपनी मां को थोड़ी दूर निकल जाने का मौका दे रहा था इसलिए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था सुनैना काफी दूर निकल गई थी और एक बड़ी से पेड़ के नीचे खड़ी होकर उसका इंतजार कर रही थी या यूं कह लो कि उसका इंतजार करने का नाटक कर रही थी।

जैसे ही सूरज अपनी मां के करीब पहुंचा उसकी मां बोली,,,।

कहां रुक गया था मैं कब से तेरा यहां इंतजार कर रही हूं,,,।

कुछ नहीं ऐसे ही बगल वाले गांव का एक दोस्त मिल गया था उससे बातचीत करने लगा था इसलिए थोड़ा देर हो गई,,,(मां बेटे दोनों झूठ बोल रहे थे इसका एहसास दोनों को हो रहा था और दोनों ही अपने अपने तरीके से खुश हो रहे थे देखते ही देखते दोनों घर पर पहुंच चुके थे अंधेरा हो चुका था और जिस तरह की हालत में वह अपने बेटे को देखी थी उसके लंड को देखी थी उसे देखते हुए वह मुखिया की बीवी के पास अपने बेटे को नहीं जाने देना चाहती थी क्योंकि अंधेरे में औरत और मर्द के बीच जरूर कुछ गड़बड़ हो जाता है इसलिए वह अपने बेटे से बोली,,,)

एक काम कर तुम मुखिया जी के घर जाने वाला थाना,,,अंधेरा हो गया इस समय जाना ठीक नहीं है तो सुबह चले जाना,,,,।

(सूरज अच्छी तरह से समझ रहा था कि उसकी मां यह बात किस लिए कह रही थी एक औरत होने के नाते मुखिया की बीवीके करीब उसका जाना उसकी मां को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था इसलिए वह ऐसा बोल रही थी और यह सूरज के लिए भी काफी उत्साहित कर देने वाली बात थी क्योंकि इस समयउसकी मां उसे बेटे के रूप में नहीं बल्कि एक मर्द के रूप में देख रही थी जो की एक औरत कभी भी अपने मर्द को किसी गैर औरत के करीब जाने नहीं देना चाहती थी और इस बात से सूरज काफी खुश नजर आ रहा था इसलिए अपनी मां से बोला)

ठीक है मैं कल सुबह चला जाऊंगा,,,,.

(अपने बेटे का जवाब सुनकर सुनैनाके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह मुस्कुराते हुए घर के अंदर चली गई)
 
सूरज की तरफ से कई बार तांका झांकी का एहसास सुनैना कर चुकी थीउसकी हरकतों को भी महसूस कर चुकी थी लेकिन आज पहली बार था कि सुनैना हिम्मत करके झाड़ियां के पीछे छुपकर अपने बेटे को पेशाब करते हुए देखी थी और वह भी अनजाने में लेकिन अनजाने में भी देखा गया या नजर उसके दिलों दिमाग पर पूरी तरह से छाप छोड़ दिया था वह कभी सपने भी नहीं सोची थी कि किसी का लंड इतना मोटा और लंबा हो सकता है,, हालांकि उसके पति का भी लंड एकदम दमदार था जो उसे आज तक पूरी तरह से संतुष्ट करता आ रहा था। लेकिन अपने बेटे का लंड देखकर वह पूरी तरह से हक्की बक्की रह गई थी,, वह सच में कभी नहीं सोची थी कि किसी भी मर्द का लंड इतना लंबा और मोटा होता है।जहां एक तरफ वह हैरान थी इस बात को लेकर वही वह अंदर ही अंदर बहुत खुश नजर आ रही थीजिंदगी में पहली बार मोटा और तगड़ा लंबा लंड देखी भी तो अपने ही बेटे का। यह एहसास उसे एकदम उत्तेजित किए जा रहा था।





वैसे तो उसने कभी सपने में भी नहीं सोचती कि अपने बेटे को छुपकर कभी पेशाब करते हुए देखेगी या देखने की कोशिश करेगी क्योंकि उसके मन में यह सब कुछ कभी चलता ही नहीं था शायद यह सब पति के साथ न होने का नतीजा था जो उसे खुद के ही बेटे की तरफ आकर्षित किया जा रहा था उसकी हर एक हरकत इसकी क्रिया का लाभ उसका ताकना झांकना कहीं ना कहीं सुनैना को भी अच्छा लग रहा था। आखिरकारअपने बेटे के मुंह से उसने अपनी जवानी और अपनी खूबसूरती की तारीफ जो सुन रखी थी और एक अपने ही बेटे की उम्र का लड़का आकर खूबसूरती की तारीफ करने लगे तो वाकई में एक औरत के लिए काफी गर्व की बात होती है,,, और यही सब एहसास उसे अपने बेटे की तरफ कहीं ना कहीं आकर्षित कर रहा था।जब से वह अपने बेटे के लंड के दर्शन की थी तब से उसका मन किसी काम में नहीं लग रहा था। वह नहाने के लिए गुसलखाने में जा चुकी थी क्योंकि खेत से आई थी तो पसीने से तरबतर हो चुकी थी इसलिए वह अपने मन को हल्का करना चाहती थी,,,गुसलखाने में जाते ही वह अपने बदन से सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई थी क्योंकि अब अंधेरा हो गया था और जहां पर वहां नहा रही थी वहां लालटेन भी नहीं थी इसलिए निश्चित होकर नहाने लगी थी।

जिस तरह की तपन उसके बदन में अपने बेटे पेशाब करते हुए और उसके मुंह से जैसे लंड को देखकर बढ़ गई थीउसे ठंडा करने के लिए वह लोटे से अपने बदन पर ठंडा पानी डाल रही थी लेकिन इसका भी फायदा उसे जरा भी नहीं हो रहा था और आश्चर्यकर देने वाली बात यह थी कि आज बार-बार उसकी हथेली अपने आप ही उसकी बुर पर चली जा रही थी और वह अपने बेटे के लंड को याद करके अपनी हथेली से अपनी बुर को दबा दे रही जिससे उसके बदन में एक अजीब सी टीस उठ जा रही थी और वह एकदम मस्त हो जा रही थी। इस क्रिया को वह बार-बार कर रही थी आखिरकार बदन की गर्मी आंखों में खुमारी पूरी तरह से छा जाने की वजह से अपने आप ही उसकी दो उंगली धीरे से उसकी बुर में प्रवेश करके और वह अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगी अपनी आंखों को बंद करके वह मत होने लगी उसके जीवन में उसके बेटे का लंबा तगड़ा लंड थाजिसे वह पेशाब करते हुए अपने हाथों से पकड़ कर ऊपर नीचे करके हिला रहा था और यह दृश्य सुनैना के लिए बेहद आह्लालदक था,जिसकी तुलना वह किसी से नहीं कर सकती थी वाकई में बेहद अतुलनीय दृश्य था सुनैना के लिए। सुनैना की हालत खराब होती जा रही थी र उसकी कल्पनाओं का घोड़ा बड़ी तेजी से दौड़ रहा था,, आंखों को बंद करके वह अपनी जवानी की प्यास बुझाने में लगी हुई थी।





और उसके जेहन में उसके बेटे का लंबा तगड़ा मोटा लंड था जो इस समय कल्पना में उसकी दोनों टांगें खोलकर उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा था,,,सुनैना की हालत खराब होती चली जा रही थी अपनी उंगली से वह अपनी जवानी की प्यास बुझाने की नाकाम कोशिश कर रही थी। हालांकि इस समय उसे अपनी उंगली से नहीं बल्कि उसे उसकी कल्पना से आनंद प्राप्त हो रहा था जिस तरह की कल्पना हुआ कर रही थी वह काफी हद तक एक मां के लिए बेहद हिम्मत वाली बात थी क्योंकि सुनैना कभी सपने में भी यह सब नहीं सोची थी लेकिन आज लाचार हो चुकी थीइसलिए वह कल्पना में ही अपने बेटे से चुदवाते हुए अपने उंगली को अपनी बुर के अंदर बाहर कर रही थी।तभी उसे कल्पना में ही एहसास हुआ कि जैसे उसका बेटा उसे घोड़ी बनने के लिए बोल रहा है और वह कल्पना में घोड़ी बन गई थी जिसके चलते कल्पना में उसका बेटा उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर, अपने मुसल को बड़ी तेजी से उसकी बुर के अंदर बाहर कर रहा था और देखते ही देखते गुसलखाने में ही सुनैना झड़ने लगी। जैसे हीवासना का भूत उसके दिलों दिमाग से उतरा वह अपनी हालत पर एकदम से घबरा गई क्योंकि गुसलखाने में वह पूरी तरह से नंगी थी और उसकी दो ऊंगली उसकी बुर के अंदर घुसी हुई थी उसे सुबह का वाक्या याद आ गया जब वह इसी तरह से निर्वस्त्र होकर नहा रही थी और रानी वहां आ गई थी और अपनी मां की हालत को देखकर हैरान गई थी,,, सुबह के बारे में सोचकरसुनैना जल्दी से अपनी बुर में से अपनी दोनों उंगलियों को बाहर निकाल दी और अपने मन में सोचने लगी कि अच्छा हुआ इस समय उसकी बेटी वहां पर नहीं आ गई नहीं तो उसे देखकर क्या सोचती।





जल्दी-जल्दी नहा कर सुनैना अपने कपड़े पहनकर रसोई घर में पहुंच गई थी ,,, और खाना बनाने में झुक गई थी जिसमें रानी खुद उसकी मदद कर रही थी। लेकिन सुनैना की आंखों के सामने बार-बार उसके बेटे का झूलता हुआ टनटनाया हुआ लंड लहराने लगता था और वह हैरान हो जाती थी परेशान हो जाती थी जब से उसने अपने बेटे के लंड को देखी थी तब से उसकी बुर बार-बार पानी छोड़ रही थी,,, वह अपना ध्यानकाम में लगाने की भरपूर कोशिश कर रही थी लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था सब्जी बनाते समय रोटी पकाते समय हर वक्त उसे उसके बेटे का वही रूप दिखाई देता था उसे खुद हैरानी हो रही थी कि ऐसा क्यों हो रहा है इसका जवाब उसके पास नहीं था। शायद इसलिए हो रहा था क्योंकि उसने अपने बेटे से लंड को कभी अपनी आंखों से देखी नहीं थी भले ही खेत में जब गहरी नींद में सो रही थीऔर उसके नींद में होने का फायदा उठाते हैं सूरज अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी नंगी गांड पर जोर जोर से रगड़ कर अपना पानी निकाला था हालांकि अपने बेटे की ईस हरकत से उसे आनंद भी तो बहुत आया था लेकिन जिस तरह के हालात इस तरह की हालत इस समय उसकी हो रही थी ऐसा उसे समय नहीं हुआ था भले ही वह अपने बेटे के लंड की ताकत को अपनी दोनों टांगों के बीच और अपनी बुर के मुहाने पर महसूस की थी लेकिन उसे अपनी आंखों से देखी नहीं थी इसलिए उसकी हालत ऐसी नहीं हुई थी, लेकिन आज तो अपनी आंखों से सब कुछ उसने देखी थी इसलिए उसका मन बहक रहा था।

तवे पर रखी हुई रोटी उत्तेजना से उसकी बुर की तरह फुल चुकी थी और सुनैना किसी ध्यान में खोई हुई थी यह देखकर रानी एकदम से बोली।





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अरे मां रोटी एकदम फुल गई है उसे जल्दी से तवे पर से उतारो नहीं तो जल जाएगी।

(रानी की आवाज सुनते ही सुनैना एकदम से होश में आई और एकदम से हड़बड़ाहट में तवे की तरफ देखने लगीऔर फूली हुई रोटी को देख कर हाथ से ही उसे एकदम से उतार कर बर्तन में रख दी जिससे थोड़ा सा उसे जलन का एहसास हुआ और यह देखकर रानी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,)

कहां खो गई थी मां,,,।

(रानी का यह सवाल सुनकर सुनैना को समझ में नहीं आया कि वह क्या जवाब दें वह एकदम से झेंप गई थी लेकिन फिर भी वह अपने आप को स्वस्थ करते हुए बोली,,)

अरे वह कल बाजार जाना है ना उसी के बारे में सोच रही थी कि क्या-क्या लाना है,,,।

(बाजार के बारे में सुनते ही रानी एकदम से उत्साहित होते हुए बोली,,)

कल बाजार जा रही हो मां मेरे लिए चूड़ियां लेते आना,,,।

ठीक है,, लेती आऊंगी,,,।

और समोसे और जलेबीया भी लेते आना,,,।

जरूर,,,, चलो जल्दी से खाली लेकर आ भोजन तैयार हो गया है और हां सूरज को भी बुला ले पता नहीं कहां चला गया है,,,,(सुनैना का इतना कहना था कि सामने दरवाजे से ही वह अंदर आता हुआ दिखाई दिया जिसे देखकर रानी बोली)

लो मां शैतान का नाम ली शैतान हाजिर,,,,।

अच्छा तो मैं तुझे शैतान दिखाई दे रहा हूं,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुनैना अपने मन में नहीं बोली जिस तरह का तेरा लंड है सच में तु शैतान हीं है,,, वह अपने मन में यही कह रही थी कि तभी सूरज रानी की चुटियां पकड़ लिया और उसे खींचते हुए बोला,,,)

बोल अब बोलेगी कभी शैतान,,,।

आहहह भैया दुख रहा है अब कभी नहीं बोलुंगी,,,।

हां यह हुई ना बात,,(ऐसा कहकर वह अपनी बहन की चुटिया छोड़ दिया और वह बाल्टी उठकर पानी लेने के लिए जाने लगी लेकिन फिर से शरारत करते हुए बोली)

शैतान,,,, शैतान,,,

तेरी तो,,,(इतना कहकर सूरज अपनी बहन की तरफ आगे बढ़ा ही था कि वह हंसते हुए बाल्टी लेकर घर से बाहर चली गई और सूरज मुस्कुराता हूं अपनी मां की तरफ देखने लगा जो की चूल्हे में जल रही आज की तपन में तो कम लेकिन अपनी जवानी की तपन में कुछ ज्यादा ही झुलस रही थी,,,,,सूरज जानता था कि शाम को खेत से लौटते समय क्या हुआ था इसलिए अपनी मां की तरफ देख रहा था उसके हवाओं को देख रहा था और सुनैना थी कि अपने बेटे से शर्म के मारे नजर तक नहीं मिल पा रही थी सूरज अपनी मां की हालत को अच्छी तरह से समझ रहा था और मन ही मन खुश हो रहा था और वह धीरे से बोला,,)

भोजन तैयार हो गया मां,,,,।

हां तैयार हो गया बस रानी पानी लेकर आए बस इतनी देरी है,,,,।(इतना कहते हुए भी वह अपने बेटे से बिल्कुल भी नजर नहीं मिल पा रही थी और कर नजरों से अपने बेटे की तरफ देख रही थी तो उसे केवल उसकी दोनों टांगों के बीच का वह जगह दिखाई दे रहा था जहां पर उसका लंड लटका हुआ था,,, एक बार फिर से सुनैना उत्तेजना से सिहर उठी,,,, और वह फिर से अपना ध्यान दूसरी तरफ करने लगी सूरज अपनी मां की मनोदशा को अच्छी तरह से समझ रहा था और मन ही मन खुश हो रहा था,,, थोड़ी देर में रानी भी पार्टी में पानी भरकर आंगन में ले आई थी और तीन थाली लाकर अपनी मां के पास बैठ गई थी,,, सुनैना तीनों थाली में गरमा गरम भोजन परोस रही थी,,,, जिसे देखकर रानी बोली,,,)

गरमा गरम भोजन करने का मजा ही कुछ और है,,, क्यों भैया सच कह रही हूं ना,,,(अपने भाई की तरफ देखते हुए रानी बोली तो रानी की बात सुनकर सूरज मुस्कुराते हुए बोला)

तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो रानी गरमा गरम भोजन,,(अपनी मां की दोनों टांगों के बीच देखते हुए) करने का मजा ही कुछ और होता है,,,,( इतना कहकर वह अपने मन में ही बोला इस समय मा की बुर कुछ ज्यादा ही गरम होगी,,,, और इतना कहकर अपनी जगह पर बैठ गया तीनों अपनी-अपनी का भोजन करने लगेसूरज अपनी मां की तरफ कनखियों से देख ले रहा था लेकिन सुनने की हिम्मत नहीं हो रही थी कि अपने बेटे से नजर मिल सके धीरे-धीरे तीनों ने भोजन कर लिया फिर सुनैना के साथ मिलकर रानी बर्तन साफ करने लगी और वही आंगन में बिछी खटिया पर बैठकरसूरज अपनी मां के बारे में सोचने लगा जिस तरह के हालात पैदा हो रहे थे उसे देखते हुए वह समझ गया था कि आज उसकी मां जरूर अपनी बुर में उंगली करेगी,,,,।

थोड़ी देर में साफ सफाई का काम पूरा हो चुका था औररानी अपने कमरे में जा चुकी थी उसे तो बेसब्री से अपने भाई का अपने कमरे में आने का इंतजार रहता था इसलिए वह अपने कमरे में जाकर दरवाजे की कड़ी बंद नहीं करती थीबाहर का दरवाजा बंद करके सुनैना भी अपने कमरे में चली गई थी अभी भी उसकी हालत खराब थी बार-बार उसकी आंखों के सामने उसके बेटे का लंड लहरा रहा था,,,,, अपने बेटे से नजर बचाते हुए अपने कमरे में चली गई अपनी मां को दिखाने के लिए भाभी अपने कमरे में चला गया और दरवाजा को बंद कर लिया और कुछ देर तक अपनी बिस्तर पर बैठा रहा कुछ समय गुजर जाने के बाद वह धीरे से अपने कमरे से बाहर निकला,,, और अपनी मां के कमरे की तरफ देखा दरवाजा बंद था लेकिन अंदर लालटेन चल रही थी इसका आभास उसे अच्छी तरह से हो रहा था,,,, वह धीरे से चोर कदम से आगे बढ़ता हुआ अपनी मां की कमरे के दरवाजे के पास पहुंच गया और बिल्कुल भी आहट न करते हुएएकदम दरवाजे के करीब पहुंच गया और दरवाजा लकड़ी के पाटी का बना हुआ था जिसमें अच्छा खासा संकरा दरार बना हुआ था जिसमें से कमरे के अंदर का सब कुछ देखा जा सकता था और इसी दरार में से सूरज अपनी मां की नंगी जवानी के दर्शन कर चुका था,,,, सूरज का दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था वह जानता था कि इस समयउसे इस हाल में देखने वाला वहां कोई नहीं था लेकिन फिर भी नजर आगे पीछे घूमाकर वह देख लेना चाहता था की कहीं रानी तो उसे नहीं देख रही है ,, पूरी तरह से तसल्ली कर लेने के बाद सूरज एक बार फिर से लकड़ी के उस दरारमैं अपनी नजर सटा दिया और अंदर की तरफ देखने लगा पहले तो उसे कुछ समझ में नहीं आया लेकिन लालटेन की पीली रोशनी में जल्द ही उसे सब कुछ साफ-साफ नजर आने लगा।

अपनी मां के कमरे के अंदर का नजारा देखकर वह एकदम दंग रह गया,,खटिया पर देखा तो उसकी मां पूरी तरह से नंगी लेटी हुई थी उसके बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था और अपनी बुर को हल्के हल्के सहला रही थी और किसी ख्यालों में डूबी हुई थी,,, इस अद्भुत नजारे को देखते ही सूरज का लंड खड़ा होने लगा और वह प्यासी नजरों से अपनी मां की काम क्रीड़ा को देखने लगा जो की बेहद मनमोहक होती जा रही थी।लालटेन की पीली रोशनी में सूरज को सबको साथ दिखाई दे रहा था उसकी मां का नंगा बदन पीली रोशनी में और भी ज्यादा चमक रहा था और भी ज्यादा उत्तेजक दिखाई दे रहा था उसकी बड़ी-बड़ी चूची एकदम तनी हुई थीऔर वह एक हाथ अपनी चूची पर कब से हल्के हल्के से दबा रही थी और दूसरी हथेली को अपनी गुलाबी छेद पर रखकर उसे सहला रही थी,,,,इस नजारे को देखकर सूरज अपने मन में सोचने लगा कि आज तो उसे अपनी बहन की चुदाई से ज्यादा अपनी मां को नंगी और उसकी क्रियाकलाप देखकर मुठ मारने में ज्यादा मजा आएगा लेकिन तभी उसके दिमाग में न जाने क्या सोच और वह कुछ देर तक वही सोचने लगा और फिर सीधा अपनी बहन के कमरेकी तरफ आया जिसका दरवाजा पहले से ही खुला था दरवाजा खुलते ही,रानी एकदम से उठकर खटिया पर बैठ गई उसे नींद नहीं आ रही थी वह जाग रही थी और अपने भाई का इंतजार कर रही थी अपने भाई को देखकर वह मुस्कुराने लगी लेकिन जल्दी उसका भाई कमरे में आया और उसे खटिया पर से उठाने लगा तो वह बोली,,,,।

क्या है भैया,,,?

(रानी की आवाज सुनते ही वह उसे चुप रहने का एकदम से इशारा किया और रानी भी एकदम खामोश हो गईसूरज उसका हाथ पकड़ कर कमरे से बाहर ले आया वह उससे पूछना चाहती थी कि कहां ले जा रहे हो लेकिन तो कुछ बोल नहीं पा रही थी क्योंकि इशारे ही इशारे में सूरज ने उसे खामोश रहने के लिए बोला थासूरज उसका हाथ पड़कर तभी पांव चलने का इशारा करके उसे अपनी मां के कमरे के दरवाजे तक लेकर आयाअपनी मां के कमरे पर पहुंच कर रानी को बहुत ही रानी हो रही थी और इशारे से ही उसे पूछ रही थी कि क्या बात है लेकिन सूरज उसे कुछ बोल नहीं रहा था बस उसे शांत रहने का इशारा करके फिर से अपनी नजरों को उस लकड़ी के दरवाजे की दरार में अपनी नजर सटाकर अंदर की तरफ देखने लगा और फिर अपनी बहन को उसी तरह से देखने का इशारा किया,,,,रानी पूरी तरह से हैरान थी उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि उसका भाई उसे अपनी मां के कमरे में क्या दिखाना चाहता हैलेकिन अपने भाई की बात मानते हुए वह हैरान होते हुए जिस तरह से सूरज उसे तरह में से अंदर देख रहा था उसी तरह से वह भी उस दरार में अपनी आंखों को सटा दी पहले तो रानी को कुछ भी समझ में नहीं आया। लेकिन जैसे-जैसे कमरे के अंदर का चित्र स्पष्ट होने लगा हैरानी से उसकी आंखें चौड़ी होती चली गईउसे भी उसकी मां खटिया पर एकदम नंगी लेटी हुई साथ दिखाई दे रही थी और उसकी क्रियाकलाप रानी को हैरान कर देने वालीलग रही थी रानी है रानी से अपनी मां के इस रूप को देख रही थी जिसका एक हाथ अभी भी उसकी चूची करता और दूसरा हो तो उसकी बुर पर था जिसे वह हल्के हल्के सहला रही थी,,,,रानी एकदम से उसे दरार में से अपनी नजर को हटा ली और आश्चर्य से अपने भाई की तरफ देखने लगी।

रानी आश्चर्य से हैरान थी वह अपने भाई से इशारे में बोल रही थी कि यह सब क्या हो रहा है?तो जवाब में बिना कुछ बोले इशारे में ही सूरज उसे अंदर देखने के लिए बोला और इस बार भाई बहन दोनों ही कमरे के अंदर देखने लगे अंदर का नजारा पूरी तरह से कम होता चला जा रहा था लालटेन की पीली रोशनी में भाई-बहन अपनी मां का यह काम रूप देखकर पूरी तरह से पागल हो जा रहे थे रानी के लिए तो उसकी मां का यह रूप बेहद आश्चर्यजनक था क्योंकि उसने अपनी मां के बारे में कभी यह सब सोची नहीं थी कि उसकी मां इस तरह की हरकत करती होगी लेकिन सूरज तो अपनी मां को देख चुका था इसलिए उसके लिए हैरान कर देने वाली कोई बात नहीं थी बल्कि उसके लिए तो आनंद दायक बात थी कि उसकी मां चुदवाने के लिए तड़प रही थी। रानी अपनी मां के चेहरे पर बदलते हवाओं को देख रही थी वह पूरी तरह से मादकता में डूबती चली जा रही थी और हैरान कर देने वाली बात यह थी किरानी अपनी मां को देख रही थी उसकी बड़ी-बड़ी जैसी चूचियों को देख रही थी जो कि उसके आकार की तुलना में उसकी मां की चूची है वाकई में बहुत ज्यादा बड़ी थी और बेहद कर सकती जिसे वहां एक हाथ में पड़कर उसके छुहारे को अपने मुंह में डालने की कोशिश कर रही थी और जीभ से अपने उसे भूरे रंग के छुहारे को चाट भी रही थी,,,, उसे रहा नहीं गया और अनायास उसके मुंह से निकल गया।

भैया मां क्या कर रही है,,,,?(सूरज उसकी बात सुनते ही एकदम से डर गया और तुरंत उसके मुंह पर हाथ रख दिया इस बात का एहसास रानी को भी हुआ कि उसने गलती कर दी है इसलिए वेलकम से खामोश हो गई अच्छा हुआ कि कमरे के अंदर मस्त हो रही उसकी मां को उसकी आवाज सुनाई नहीं दी थी,,, रानी की सांस ऊपर नीचे हो रही थी और देखते ही देखतेसुनैना अपनी उंगली को अपनी बुर में डालकर उसे अंदर बाहर कर रही थी यह देखकर तो रानी की हालत और ज्यादा खराब होने लगी वह आश्चर्य से अपने भाई की तरफ देखी और सूरज अपनी बहन की आंखों में उसके सवाल को पहचान गया था इसलिए धीरे से उसके कान में बोला।

पिताजी बहुत दिन से मां के साथ नहीं है इसलिए बाकी ऐसी हालत हो रही है,,,(सूरज एकदम से धीरे से बोला था कि उसकी मां बिल्कुल भी सुना ना सके अपने भाई की बात सुनकर रानी भी एकदम धीरे से बोली)

मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है भैया कि मैं अपनी आंखों से यह सब देख रही हूं,,,।

मैं भी तो हैरान हूंमैं तो यहां से निकल रहा था पेशाब करने के लिए तो मां के कमरे से अच्छी-अच्छी आवाज आ रही थी जो कि ईस समय तो बंद हो गई है और जब मैं अंदर देखने लगा तो अंदर का नजारा देखकर मैं खुद हैरान हो गया वैसे तो मैं तुम्हें बुलाना नहीं चाहता था लेकिन तुम्हें बुलाना बहुत जरूरी था मैं यह दिखाना चाहता था कि देखो मर्द के बिना औरत की क्या हालत होती है हम लोग अपनी मां को कितनासीधी-सादी औरत समझते थे लेकिन देखो बिस्तर पर मां क्या कर रही है है,,,(सूरज अपनी बहन से अपनी मां की काम लीला की बात कर रहा था उसे दिखा रहा था वह अपना उल्लू सीधा करना चाहता थावह इस बारे में पहले भी अपनी बहन से बात कर चुका था क्योंकि वह जानता था कि आज नहीं तो कल वहां जरूर अपनी मां की चुदाई करेगा और जब इस बारे में उसकी बहन को पता चलेगा तो उसकी बहन अपने भाई और अपनी मां को देखकर कहीं क्रोधित ना हो जाएइसलिए वह अपना रास्ता साफ कर लेना चाहता था और अपनी मां की काम मिला को अपनी बहन को दिखाकर यह साबित कर देना चाहता था कि उसे भी मर्द की जरूरत है। अपने भाई की बात सुनकर हैरान होते हुए रानी बोली)

यह सब देखकर तो मैं एकदम परेशान हो गई हूं कहीं ऐसा ना हो की मां दूसरी औरतों की तरह किसी और के साथ,,,( इतना कहकर रानी एकदम से चुप हो गई उसकी बात के कहने का मतलब को सूरज इसी तरह से समझ रहा था इसलिए वह अपनी बहन की बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

तू सच कह रही है रानीतू तो अच्छी तरह से समझ सकती है कि यह जवानी की प्यास कितना तड़पाती है,,,(इतना कहते हुए धीरे-धीरेसूरज अपनी बहन की सलवार में अपना हाथ डाल दिया और उसकी बुर को दबोचने लगा क्योंकि पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) अगरअपनी बुर की आग के चलते कहीं माने गांव में किसी मर्द से चुदवा ली तो बदनाम हो जाएगी,,,,

तू सच कह रहा है भाई,,,सहहहहह,,(अपने भाई की हरकत से एकदम गरम होते हुए) लेकिन हमें मां को रोकना चाहिए,,।

अरे बेवकूफ कैसे रोकेगी यह रहेगी की मां तुम दूसरे से मत चुदवाना,,,।

नहीं ऐसा तो नहीं कह सकते,,,,

फिर क्या करें,,,(सूरज अपनी बहन के मुंह से सुनना चाहता था एक बार वह पहले भी अपनी मां के बारे में अपनी बहन से बता चुका था और अपनी मां को चोदने की इच्छा जाहिर किया था,,,,अपने भाई की बात सुनकर दरार में से अपनी मां की जवानी को देखते हुए जो कि उसकी दो उंगली को पूरी तरह से अपनी बुर में लेकर मजे ले रही थी टांगें खोलकर बिस्तर पर तड़प रही थी वह एकदम से अपने भाई से बोल पड़ी,,,)

मैं तो कहती हूं कोई दूसरा मां की चुदाई करें तुझे ही कुछ करना चाहिए भाई और एक बार तो पहले भी बता चुका है कि अगर ऐसा हो गया तो हम दोनों का भी राज राज रह जाएगा मां को अगर पता चल गया तो भी कुछ नहीं कहेगी,,,,।

(अपनी बहन की बात सुनकर सूरज एकदम से उत्साह में आ गया और सीधा अपनी बहन के पीछे पहुंच गया उसकी चूचियों को कुर्ती के ऊपर से जोर-जोर से दबाने लगा उसकी बहन भी मस्त होने लगे लेकिन दरवाजे से अपनी नजर को बिल्कुल भी नहीं हटा रही थी,,,,आज सूरज के मन में कुछ और चल रहा था और वह दरवाजे पर खड़े-खड़े अपनी बहन की सलवार की डोरी खोलने लगा अपने भाई की हरकत से रानी थोड़ा हैरान हो गई क्योंकि वह जगह इस काम के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं थी क्योंकि उसकी मां को पता चल सकता था। इसलिए वह उसका हाथ पकड़ ली और उसे ईसारे में हीरुकने के लिए बोली लेकिन सूरज अब कहां मानने वाला था वह अपनी बहन की बात का उसके इशारे को अनसुना करते हुएदेखते देखते अपनी बहन की सलवार की डोरी खोल दिया और एक झटके में उसे घुटनों के नीचे उसके कदमों में गिरा दिया कमर के नीचे उसकी बहन पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,, और वह उसकी नंगी गांड को दोनों हाथों में लेकर जोर-जोर से दबाने लगा अपने भाई की हरकत से रानी भी गर्म होने लगीलेकिन वह जानती थी कि दरवाजे पर हाथ रखेगी तो उसकी मां को पता चल जाएगा इसलिए वहांदरवाजे के दोनों तरफ की दीवार को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी गांड को पीछे की तरफ उठा दी ताकि आराम से उसका भाई उसके साथ खेल सके।

अपनी बहन की रजा मंदी पातें ही सूरज अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और तुरंत अपने पजामे को नीचे करकेअपनी खड़े लंड को बाहर निकाल दिया और थोड़ा सा थूक लगाकर उसे अपनी बहन की बुर से सटा दिया और उसकी कमर पकड़ कर उसे चोदना शुरू कर दिया,,,, रानी अपने भाई की हरकत से पूरी तरह से बेहाल हो गई उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह अपनी मां की गर्म जवानी देखते हुए अपने भाई से अपनी मां के कमरे के दरवाजे पर खड़ी-खड़ी चुदवा रही थी,,,,रानी को मजा आने लगा सूरज अपनी बहन की कमर थाने की चुदाई कर रहा था और रानी दरवाजे की दरार में आंख सटाए हुए अपनी मां की काम क्रीड़ा को देख रही थी,,,,,उसकी मां पागल हो जा रही थी अपनी दोनों टांगों को एकदम से खोलकर मजे ले रही थी ऐसा लग रहा था कि उसका पानी निकलने वाला है और इसका अहसास होते ही,,,, रानी मौके की नजाकत को समझते हुए अपने भाई से धीरे से बोली,,,।

मां झड़ने वाली है,,,,(और इतना सुनते ही सूरज भी समझ गया किअब उसका दरवाजे पर खड़ा रहना उचित नहीं है लेकिन वह अपनी बहन की बुर में से लैंड को निकालना नहीं चाहता था वह पूरी तरह से उसकी गहराई में समा गया था इसलिए वह तुरंत अपनी बहन की कमर में दोनों हाथ डालकर उसे ऊपर की तरफ उठा दिया ऐसे हालात में उसका लंड रानी की बुर में घुसा हुआ थाऔर वह उसे कमर से उठाए हुए उसके कमरे की तरफ ले जाने लगा रानी भी हैरान थी अपने भाई की हरकत को देखकर लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी और देखते ही देखते सूरज अपनी बहन के कमरे में धीरे से दाखिल हुआ और उसी अवस्था में धीरे से कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और खटिया पर पीठ के बल लेट गया ऐसे में उसकी बहन उसके ऊपर थी और वह भी अपनी सूझबूझ दिखाते हुए अपना फर्ज समझते हुए अपने भाई के लंड पर कूदना शुरू कर दी अपनी गांड पटकना शुरू कर दी और तब तक पटकती रही जब तक की दोनों झड़ नहीं गए लेकिन यह सिलसिला सुबह तक जारी रहा।
 
सूरज बड़ी चालाकी से अपनी छोटी बहन रानी अपनी मां की करतुत को दिखा दिया था,, रानी भी अपनी मां की मदहोश जवानी देखकर दंग रह गई थी उसे भी एहसास होने लगा था कि आखिरकार औरत को एक मर्द की जरूरत पड़ती ही है और सूरज अपनी बहन से अपनी मां की इस तरह की वास्तविकता होने से अवगत करा दिया था कि अगर इसी तरह से चलता रहा तो मांअपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए किसी गैर मर्द का सहारा लेने से नहीं हिचकीचाएगी,,, और अगर ऐसा हो गया तो समाज में बदनामी हो जाएगी,, सूरज अपना रास्ता बनाना चाहता था क्योंकि उसे अच्छी तरह से मालूम था कि जिस तरह से उसके और उसकी मां के बीच हालात पैदा हो रहे थे एक ना एक दीन जरूर दोनों हम बिस्तर हो जाएंगे,,, अगर तब रानी को उसका पता चला तो हो सकता है कि वह मां बेटे के बीच के रिश्ते को देखकर नाराज हो जाए इसीलिए सूरजऐसा माहौल खड़ा कर देना चाहता था कि अगर मां बेटे के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो भी जाता है और इस बारे में रानी को पता चलता है तो उसे भी कोई हैरानी नहीं होगी।





अपनी मां की बुर में घुसी हुई उसकी उंगलियों को देखकर, खुद रानी की भी उत्तेजना बढ़ चुकी थी,,, जिसके चलते वह अपने भाई को इनकार नहीं कर पाई थी और दरवाजे पर ही उसकी हरकत का आनंद लेने लगी थी उसे भी बहुत मजा आ रहा था अपनी मां के कमरे के दरवाजे पर खड़े होकर चुदवाने में,,, उसकी मां तो अपनी उंगली से ही झड़ चुकी थी लेकिन भाई बहन दोनों का पानी निकलना बाकी था इसलिए मौके की नजाकत को समझते हुए सूरज उसी अवस्था में अपनी गोद में उठाए हुए उसे उसके ही कमरे में ले गया और सुबह तक उसकी चुदाई करता रहा।,,,,

सुबह का समय था और सुनैना आंगन में झाड़ू लगा रही थी वह कभी झुक जाती तो कभी बैठ जाती वही आंगन में खटिया परसूरज बैठा हुआ था और अपनी मां के रूप को देख रहा था पास में ही रानी खड़ी होकर दातुन कर रही थी रात को जो कुछ भी सूरज ने अपनी बहन को दिखाया था वह अपनी बहन के मन का जायजा लेना चाहता था वह देखना चाहता था किअगर वह अपनी मां के बारे में कुछ कहता है तो रानी को बुरा लगता है या उसे अच्छा लगता है इसलिए वह अपनी बहन के मन को परखना चाहता था और वह अपनी बहन से धीरे से बोला,,,।

देख रही है रानी मां कितनी सीधी शादी लग रही है।

इस समय कोई भी देखेगा तो वह तो मां को सीधी शादी ही समझेगा,,,,(खटिया पर एक पैर रखकर वह बडे आराम से अपनी मां की तरफ देखते हुए बोली,,,)

और रात को,,,(ऐसा कहकर अपनी बहन की तरफ देखने लगा रानी अपने भाई के कहने के मतलब को समझ कर मुस्कुरा दी और सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) रात को तो ऐसा लग रहा था कि मां की बुर में गधे का भी लंड घुस जाएगा,,,.





छ,,,,, धीरे से कहीं मा सुन गई तो गजब हो जाएगा,,,,।

(रानी एकदम से उसे धीरे से कहने के लिए बोली और सूरज यह देखकर बहुत खुश हो रहा था,,, कि रानी को उसकी कही गई बात से बिल्कुल भी हैरानी नहीं हुई थी ना तो कोई एतराज था,,, इसलिए वह और मस्ती करते हुए बोला,,,)

अरे मां नहीं सुनेगी,,, मुझे तो लगता है की मां पूरी तरह से प्यासी औरत हो चुकी है पिताजी के बिना,,, देख रही थी कैसे नंगी होकर अपनी ही बुर में उंगली डाल रही थी,,,।

मैं भी तो हैरान हो गई थी यह सब देखकर मैं कभी सोची नहीं थी की मां इस तरह की हरकत करती होगी,,,।

हैरान तो मे भी हो गया था , मैं भी कभी सपने में नहीं सोचा था लेकिन मुझे पहले से थोड़ा शक होता था।

शक क्यों होता था,,,(हैरान होते हुए रानी बोली)

तू ही देख अपनी मां जैसी खूबसूरत औरत पूरे गांव में नहीं है,,, यह तो तुझे भी पता होगा।

हां यह बात तो है,,,।

और इतना भी पता होगा कि गांव में औरतें न जाने किसके किसके साथ नैन लड़ा रही है मतलब की सब कुछ कर रही है,,, और अपनी मां की तरफ देख 6 महीने से ज्यादा समय गुजर चुका है पिताजी घर पर नहीं है ऐसे में दूसरी औरतों की तरह मां के भी तो कुछ अरमान होंगे उसकी भी कुछ जवानी उबाल मारती होगी और कल रात को ही तू अपनी आंखों से देख चुकी है,,,ऐसे में मां अपनी बदन की प्यास बुझाने के लिए किसी गैर मर्द का सहारा लेती होगी मुझे ऐसा पहले लगता था और वैसे भीऔरतों के बारे में तु अच्छी तरह से समझ गई होगी खुद अपनी हालत देख एक रात को मैं नहीं आता तो तेरी हालत खराब हो जाती है।





(अपने भाई की बात सुनकर रानी शर्मा गई उसके कहने का मतलब बिल्कुल सही था एक रात भी अगर सूरज अपनी बहन के कमरे में नहीं जाता था तो रात भर करवटे बदल बदलकर वह गुजार देती थी)

तभी मुझे लगने लगा था की मां का भी किसी के साथ गलत संबंध है लेकिन कल रात को देखने के बाद मुझे यकीन हो गया कि अभी तक मां अपनी राह से भटकी नहीं है अपने हाथ से ही अपनी जवानी के प्यास बुझा रही है लेकिन यह कब तक चलेगा यह कोई नहीं जानता हो सकता है कि पिताजी के मन होने का कोई गैर मर्द फायदा उठा ले,,, मा की हालत तो तु कल रात बिस्तर पर देख ही चुकी है,,,, ऐसे में किसी भी गैर मर्द का उसके साथ संबंध बनाना कोई बड़ी बात नहीं है मां की मर्यादा और संस्कार धरे के धरे रह जाएंगे,,,,

बात तो तु सच कह रहा है भाई,,,, लेकिन कर भी क्या सकते हैं।

देख देख मां की गांड देख कितनी बड़ी-बड़ी है,,, तेरी तो मां के आगे कुछ भी नहीं है,,,(बैठकर अपनी मां को झाड़ू लगाते हुएभाई-बहन दोनों देख रहे थे सुनैना आगे की तरफ झुक कर झाड़ू लगा रही थी जिसे उसका पिछवाड़ा कुछ ज्यादा ही बाहर को निकला हुआ था अपने भाई की बात सुनकर रानी बोली)

बात तो बिल्कुल सही है मेरी तो,,(नजर पीछे घूमा कर अपनी गांड की तरफ देखते हुए) मां की गांड के आगे कुछ भी नहीं है सच में मां की गांड कितनी खूबसूरत और आकर्षक लगती है। अच्छा भाई सही-सही बता मां की गांड को देखकर तुझे कुछ कुछ होता है।





क्यों नहीं होगा,,,,, जब तेरी नंगी गांड देखकर मेरी हालत खराब हो गई तो मां की तो बात ही कुछ और है,,,।

अच्छा कल रात से पहले मां को तूने कभी नंगी देखा है,,,?(इस तरह के सवाल जवाब में रानी को भी मजा आने लगा था रानी के सवाल को सुनकर सूरज रानी के सामने अपनी मां को पूरी तरह से एक गंदी औरत साबित कर देना था इसलिए वह बोला)

सच कहूं तो रानीमैं यह सब बताना नहीं चाहता था लेकिन मैं मां को पहले भी बहुत बार नंगी देख चुका हूं एक बार तो नदी पर देखा था बिना कपड़े के पूरी तरह से नंगी नदी में नहा रही थी।

यह क्या कहरहा है भाई ऐसा कैसे हो सकता है नदी पर भला कोई बिना कपड़े के,,,।(रानी एकदम से आश्चर्य जताते हुए बोली,,,)

क्यों नहीं दोपहर का समय था और तू तो जानती है कि गर्मी के महीने में दोपहर के समय नदी पर वैसे भी कोई नहीं होता उसी समय में नदी पर पहुंच गया था और देखा तो मां बड़े से पत्थर के पीछे बिल्कुल कपड़े उतार कर नंगी नहा रही थी उसी समय मां को उस अवस्था में देखकर मेरी तो हालत खराब हो गई थी।

मां को इस बात के बारे में पता है।

पागल हो गई है क्या मां को भला कैसे पता होगा,,,, शायद गर्मी की वजह से मां ने ऐसा किया होगा,,,, और हां एक बार और दिमाग में पूरी तरह से नंगी देखा हुं अगर मैं कहूंगा तो तुझे विश्वास नहीं होगा।





क्या खुसर फुसर हो रही है भाई बहन में (बैठे-बैठे ही झाड़ू लगाते हुए दरवाजे पर पहुंचकर सुनैना पूरी तो भाई बहन दोनों से एकदम शांत हो गए तब सूरज ही बात को संभालते हुए बोला)

कुछ नहीं मा बस ऐसे ही बातें कर रहे थे। आज बाजार जाने वाले हैं इसलिए रानी से पूछ रहा था कुछ चाहिए कि नहीं।

उसे क्या चाहिए कल ही मुझे बता दि है अब उससे कुछ भी ज्यादा नहीं लेकर आऊंगी,,,(इतना कहते हुए वह झाड़ू लेकर आंगन के बाहर चली गई तो रानी बेहद उत्सुक होते हुए बोली)

कहां पर देखा है भाई बताना,,,!

उस कमरे में,,(सूरज उंगली सेएक कमरे की तरफ इशारा करते हुए जिसमें अनाज रखा हुआ होता था)

उसमें जहां राशन का सामान रखा रहता है वहां पर मां क्या कर रही थी।

अरे मेरी बात सुन तो सही पहले,,,,दोपहर का समय था और मैं घर पर पानी पीने के लिए आया था और उसे कमरे में से अजीब अजीब सी आवाज आ रही थी मुझे तो नहीं मालूम था कि वहां कोने में धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा आवाज कुछ अजीब थी इसलिए मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था मैं धीरे-धीरे कमरे के पास पहुंच गया तब मुझे अंदर से आवाज आने लगी।

कैसी आवाज,,,,!(हैरान होते हुए रानी बोली)

पिताजी की आवाज,,,,

हें,,, पिताजी की आवाज,,,,(रानी फिर से आश्चर्य जताते हुए बोली,,)

अरे मेरी बात तो सुन पिताजी की आवाज जैसे मेरे कानों में पड़ी मेरे तो कान एकदम सन्न रह गए,,,,।

ऐसा क्या बोल रहे थे पिताजी,,,,

सुन तो सही में जैसे ही दरवाजे के पास पहुंचा तो मेरे कानों में पिताजी की आवाज आई,,,, अरे पहले साड़ी तो कमर तक उठा मैं भी तो देखु तेरी बुर कितना पानी छोड़ती है,,,,,,।





हाय दइया सच में ऐसा पिताजी बोल रहे थे,,,।

अरे तो क्या तभी तो मैं कह रहा था तुझे यकीन नहीं होगा क्योंकि मुझे भी अपने कान पर भरोसा नहीं हो रहा था लेकिन कमरे के अंदर जो आवाज आ रही थी वह पिताजी की थी,,,, मुझे लग रहा था कि पिताजी ना जाने किसके साथ कमरे के अंदर है लेकिन जैसे ही अगली आवाज मेरे कानों में पड़ी मैं तो दंग रह गया।

किसकी आवाज़ थी,,,?

मां की,,,

वह क्या बोल रही थी,,,?

मां की बात सुनकर तो मेरी भी हालत एकदम से खराब हो गई थी।

बताओ तो सही क्या बोल रही थी,,,।

तुझे बहुत जल्दी पड़ी है मां की बात सुनने के लिए,,,

हां तो क्यों नहीं जल्दी पड़ेगी बात ही कुछ ऐसी है।

मैं समझ सकता हूं मेरी भी हालत खराब हो गई थी मां की बात सुनकर पिताजी की बात नहीं तो पहले ही मुझे हैरान कर दिया था लेकिन मां की बात ने तो सच कहूं तो उस समय एकदम से मेरे लंड को खड़ा कर दिया था। पिताजी की बात सुनते ही वह बोली,,, तुम्हारा मोटा लंबा लंड देखते हो मेरी बुर पानी छोड़ने लगती है,,,,।(इतना कहकर वह रानी की तरफ देखा रानी पूरी तरह से हैरान थी वह समझ नहीं पा रही थी कियह उसका भाई क्या बोल रहा है उसने अपनी मां के बारे में कभी यह सब सोच नहीं थी कल रात को देखने के बाद उसे थोड़ा थोड़ा एहसास होने लगा कि उसकी मां भी दूसरी औरतों की तरह हीहै लेकिन उसकी बातें सुनकर वह और ज्यादा हैरान हो गई थी आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया था यह देखकर सूरज बोला)

क्या हुआ हैरान हो गई ना,,,।

हाय दैया में बता नहीं सकती हूं कि मैं कितनी हैरान हूं,,, मुझे तो अपने कानों पर भरोसा ही नहीं हो रहा है।





जिस तरह से तुम्हें हैरानी हो रही है उसे समय मैं भी पूरी तरह से हैरान हो चुका था समझ में आ गया था कि कमरे के अंदर पिताजी और मन है दोनों किस तरह की बातें सुनकर मैं समझ गया था कि अंदर क्या हो रहा है मेरा तो मन वहां से जाने को नहीं कर रहा था मुझे डर लग रहा थामैं कमरे के ठीक बाहर खड़ा था दरवाजे पर जैसा कि कल हम दोनों मां के कमरे के दरवाजे पर खड़े थे ठीक उसी तरह से,,,,।

तब तो भाई कमरे के अंदर देखे बिना तुझसे रहा नहीं गया होगा,,,।

बात तो ठीक कह रही है रानी मेरी जगह कोई भी होता तो उसके लिए हालत होती है मां और पिताजी की बातें सुनकर तो मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था,,मुझे कमरे के अंदर देखना था कि अंदर क्या हो रहा है इतना तो मुझे मालूम था कि अंदर क्या हो रहा होगा लेकिन मेरे लिए सब कुछ नया था,,।

फिर क्या किया तूने,,,,

मैं अंदर देखने वाला था कि तभी पिताजी की आवाज मेरे कान में आई पिताजी बोल रहे थे,,, अरे वाह रे मेरी रानी सच में तेरी बर बहुत पानी छोड़ रही है ऐसे ही साड़ी पकड़े रे,,, मैं तुझे अपनी हालत दिखाता हूं कि तूने मेरी हालत क्या कर दी है,,,, थोड़ी देर सन्नाटा चल रहा है और अगले ही पल मां एकदम खुश होते हुए बोल रही थी।

वह मेरे राजा तुम्हारा घोड़ा तो पूरी तरह से तैयार हो चुका है मैदान में दौड़ने के लिए,,,,।

फिर क्या हुआ,,?





फिर क्या अब तो मुझे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था कि अंदर क्या हो रहा है मैं धीरे से दरवाजे से अपनी आंख सटा दियावैसे भी दरवाजे में दरार पड़ा हुआ था अंदर सब कुछ दिखाई दे रहा था दोपहर का समय था इसलिए रोशनदान से अंदर रोशनी भी आ रही थी और अगले ही पल जो नजर मेरी आंखों के सामने दिखाई दिया उसे देखकर मैं एकदम दंग रह गया,,,।

क्या देखा तूने भाई,,,.

मैंने देखा की मां अपने हाथों से अपने ब्लाउज का बटन खोल रही थीऔर उसे अपने ब्लाउज का बटन खोलने में बिल्कुल भी समय नहीं लगा अगले ही पल उसके खरबूजे जैसी चूचियां एकदम से नंगी हो गई थी,,,।

फिर,,,!

फिर क्या था मा खुद अपना हाथ आगे बढ़कर पिताजी के गरदन में अपना हाथ डाल दिया और उसे अपनी छाती से सटा दी पिताजी को बिल्कुल भी देर नहीं लगी मां की चुचीयां,,, पीने में,,,,, मैं तो पहली बार मां का यह रूप देख रहा था,,,मैं तो पागल हुआ जा रहा था पहली बार में मां की चूचियां देख रहा था कमर तक उठी उसकी साड़ी देख रहा था और उसकी बुर देख रहा था जिसे पिताजी अपनी हथेली से सहला रहे थे दबा रहे थे मसल रहे थे और मां की हालत और ज्यादा खराब हो रही थी,,,,

( यह सब सुनकर रानी की हालत खराब हो रही थी रानी की बर पानी छोड़ रही थी वह कभी सोच नहीं सकती थी कि उसकी मां इतनी अत्यधिक कामुक औरत है वह आश्चर्य से फटी आंखों सेअपने भाई की तरफ देख रही थी और उसकी रसभरी बातों को सुन रही थी)

अगले ही पल मा खुद हाथ आगे बढ़ाकर पिताजी के लंड को पकड़ ली और उसे हिलाना शुरू कर दी,,,मैं तो हैरान था इस नजारे को देख कर क्योंकि मैं अभी तक मां के हाथों में केवल झाड़ू बेलन बाल्टी यही सब देखा था लेकिन पहली बार पिताजी का लंड को देखकर थोड़ा अजीब लग रहा था लेकिन यह देखकर मेरी हालत खराब हो रही थी।

हालत तो मेरी भी खराब हो रही है,,,।





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क्यों तेरी भी बुर से पानी टपक रहा है ना।

अब बात ही ऐसी है कि मैं क्या किसी की भी बुर से पानी टपकने लगेगा।

तू सच कह रही है रानी,,,,

अच्छा फिर क्या हुआ,,?

होना क्या था जो मैंने अपनी आंखों से देखा उसे देखकर तो मैं हैरान हो गयावैसे तो जो कुछ भी मैं देख रहा था वह पूरी तरह से हैरान कर देने वाला ही था लेकिन पल-पल परत दर परत मां की बेशर्मी खुल रही थी।

क्यों ऐसा क्या देख लिया,,,?

मैंने देखा कि मां खुद घुटनों के बल बैठ गई और पिताजी की लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी।

सच में,,(हैरानी से रानी बोली)

बिल्कुल रानी मुझे तो लगा जैसे सब कुछ सपना है,,, लेकिन सब कुछ मेरी आंखों के सामने था सपना नहीं था हकीकत था पागलों की तरह मां लंड को गले तक लेकर चूस रही थी जैसा कि तु चुसती हैऔर सच कहूं तो तभी मुझे पता चला कि इस तरह से भी मजा लिया जाता है तभी तो मैंने यह सब तेरे साथ किया था और तुझे भी बहुत मजा आया था,,,(अपने भाई की बात सुनकर रानी शर्मा गई)

फिर क्या हुआ,,,?

फिर क्या था पिताजी की कमर आगे पीछे हिलने लगी पिताजी को मजा आने लगा और पिताजी मस्ती में जाकर मालूम है क्या बोल रहे थे।

क्या बोल रहे थे,,,?





चुस मेरी छिनार,,, अंदर तक लेकर चुस।

छिनार,,,,(एकदम आश्चर्य से)

हां छिनार,,,,

और मा कुछ बोली नहीं।

उनके मुंह में तो लंड घुसा हुआ था और वैसे भी ना भी घुसा हुआ होता तो भी मुझे नहीं लगता की मां कुछ बोलती क्योंकि उन्हें अच्छा ही लग रहा था।,,, क्योंकि पिताजी ने बार-बार उन्हें छिनार कहके संबोधन कर रहे थेमुझे तो बड़ा अजीब लग रहा था पिताजी की बातें सुनकर और उस पर मां का कुछ ना कहना,,,।

(रानी की हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी,,, उसकी बुर पूरी तरह से पानी से चिपचिपी हो गई थी पहली बार वह अपनी मां के बारे में इस तरह की बातें सुन रही थी और वह भी अपने बड़े भाई के मुंह सेऔर उसके बड़े भाई ने ही रात को जो नजारा दिखाया था वह अब तक उसकी आंखों के सामने घूम रहा था,,, उत्तेजना से भरी हुई रानी गहरी सांस लेते हुए बोली)

उसके बाद क्या हुआ,,,?

उसके बाद तो गजब ही हो गया,,

क्या हुआ,,,,?

मां पिताजी के लंड को जी भर कर चूसने के बाद उठकर खड़ी हो गई और पिताजी उसे दीवार के सहारे घूमने लगे ताकि वह पीछे से उनकी बुर में लंड डाल सके लेकिन मैं पूरी तरह से हैरान हो गया जब देखा की मां पिताजी के कंधे पर दोनों हाथ रख दी और उन्हें नीचे की तरफ दबाते हुए बोली।





अपना तो मजा ले लिए हो मुझे मजा कौन देगा,,,और पिताजी मां की बात सुनकर मुस्कुराने लगे और खुद ही नीचे बैठ गए और बाकी एक तन को अपने कंधे पर रखकर उनके बुर को चाटना शुरू कर दिए,,,,।

क्या,,,?(रानी एकदम हैरानी से अपने भाई की तरफ देखते हुए बोली)

तो क्या मां इतनी मस्तानी होगी मुझे तो पता ही नहीं थाऔर अपनी बर चटवाते समय मां की मुंह इतनी गजब गजब की आवाज ही नहीं कर रही थी ऐसी आवाज तो तू भी नहीं निकाल सकती,,,,।

मेरी तो सोच कर ही हालत खराब हो रही है।

जरा सोच जब तेरी सोच कर हालत खराब हो रही है मैं तो अपनी आंखों से देखा था मेरी क्या हालत हो रही हो कि मेरे लिए तो यह सब कुछ पहली बार का था तुझे पता है मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था,,, पिताजी भी मा की बुर चाटते हुए बार-बार अपने लंड को हिला रहे थे,,, उन्हें भी मजा आ रहा था लेकिन मुझे लग रहा था कि उन्हें मां की बुर में लंड डालने का उतावल था,,, कुछ देर तक मां और पिताजी इसी तरह से मजा लेते रहे और मजे की बात क्या थी तुझे पता है।

मुझे कैसे पता होगा कुछ तो तुम देख रहे थे,,,।

मजे की बात यह थी कि थोड़ी ही देर में मां पिताजी के कंधे को पकड़कर ऊपर की तरफउठने लगी और खुद ही दीवार पकड़ कर दूसरी तरफ मुंह करके खड़ी हो गई और अपनी बड़ी-बड़ी गांड को एकदम से पिताजी के सामने परोसती मानो के जैसे भोजन की थाली परोसती हो,,,,पिताजी तो पूरी तरह से पागल हो गए थे वह ढेर सारा थुक अपने लंड पर लगाए और सीधा मां की बुर में पीछे से डाल दिएएक हल्की सी चीख मां के मुंह से निकली लेकिन वह चीख के दर्द से नहीं थी बल्कि मजे से निकली थी,,,, और फिर क्या था पिताजी तो मां की कमर पकड़ कर पीछे से चोदना शुरू कर दिया और चोदते हुए ही बाकी के कपड़े मां के बदन से अलग करने लगे देखते ही देखते दोनों पूरी तरह से नंगे हो चुके थे,,, पिताजी की कलाबाजी से तो मैं पूरी तरह से हैरत में पड़ गया था,,,, तुझे एक बात बताओ इस समय मुझे पता चला था लंड हिलाने से क्या निकलता हैकमरे के अंदर का नजारा देखकर मैं पागल हुआ जा रहा था मुझे रहने जा रहा था और यह सब कुछ मेरे साथ पहली बार हो रहा था मैं अपने लंड को निकाल कर उसे हिलाना शुरू कर दिया और हिलाते हिलाते उसमें से जोर की पिचकारी निकली और पिचकारी निकलते समय इतना मजा आया कि पूछो मत ,,,,, मैं फिर वहां से चला गया तभी मुझे पता चल गया की मां कितनी बड़ी चुडक्कड़ है बस हम लोग के सामने सीधी शादी बनी रहती है। और इसीलिए तो मुझे डर भी लगता है की कही मां पिताजी के न रहने की वजह से किसी दूसरे से चुदवाने ना लगे।





कल रात को जो कुछ भी मैंने देखी और अभी जो कुछ भी तुम्हारे मुंह से सुन रही हूं अब तो मुझे भी लगने लगा है कि कहीं मां बहक ना जाए,,,(रानी थोड़ा परेशान होते हुए बोली तभी रानी के मन की बात जानने के लिए सूरज बोला)

अच्छा रानी एक बात बता कल रात में जोमां बिस्तर पर नंगी होकर हरकत कर रही थी अगर ऐसी हालत में मैं ठीक उनके सामने जाकर खड़ा हो जाऊं तो मा क्या करेंगी,,,,।

मां एकदम से डर जाएगी,।

सही कह रही है लेकिन मां की तरह मेरी उनके सामने एकदम नंगा होकर खड़ा हो जाऊं मेरा लंड एकदम खड़ा हो और मां की नजर में लंड पर पड़े तब क्या हो तब मां क्या करेगी।

जिस तरह से तू बता रहा है ना भाईमुझे तो लगता है की मां तुझे पकड़ कर अपने ऊपर खींच लेंगी क्योंकि मैं समझ सकती हूं बुर जब तड़पती है तो क्या हश्र होता है,, कुछ भी नहीं सुझता फिर चाहे लंड किसी का भी हो बस बुर में जाना चाहिए। अच्छा एक बात बता भाईक्या सच में तुम मन को एकदम नंगी देखकर उसके ऊपर चढ़ सकता है।

क्यों नहीं कोई दूसरा मां पर चढे इससे अच्छा तो मैं चढ़ जाऊं,,,,।





(अभी दोनों की बातचीत जारी हुई थी रानी की बुर पूरी तरह से पानी पानी हो चुकी थी सूरज का भी लंड अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था लेकिन तभी झाड़ू लिए हुए आंगन में दाखिल होते हुए बोली)

तुम दोनों की बात अभी तक खत्म नहीं हुई सूरज तुझे तो मुखिया के घर जाना था ना कुछ पैसे लेने जा जल्दी जा फिर अपने खेत पर भी जाना है।

ठीक है मां मैं जाता हूं और जल्द ही आता हूं। (इतना कहकर सूरज खटिया पर से उठ कर खड़ा हो गया उसके पजामे में तंबू बना हुआ था,,,, लेकिन सुनैना की नजर उस पर नहीं पड़ी और वह घर के बाहर चला गया फिर रानी भी काम में लग गई।)
 
सूरज जिस तरह से अपनी मां को लेकर अपनी बहन से उसके बारे में गंदी गंदी बातें बता रहा था उसकी चुदाई के बारे में बता रहा था ईन सब बातों के चलते भाई बहन दोनों मदहोश और उत्तेजित हो गए थे सूरज बड़ी चालाकी से अपना रास्ता बना रहा था जिसमें उसकी बहन खुद उसकी राहगीर बन चुकी थी उसे भी आपको ऐतराज नहीं था अगर सूरज अपनी मां की चुदाई करता है तो क्योंकि उसे भी इस बात का डर था कि वास्तव में अगर उसकी मां अपनी जवानी की प्यास के आगे आधीन हो गई तो वह किसी भी मर्द के सामने अपनी टांगें खोल देगी और अगर ऐसा हो गया तो समाज में बदनामी हो जाएगी और अगर उसका बड़ा भाई ही, उसकी मां की चुदाई करते हैं उसकी जवानी की प्यास बचाता है तो घर की बात घर में भी रह जाएगी और उसकी मां का भी काम चल जाएगा ऐसे में बदनामी होने का डर भी नहीं रहेगा यह बात सोचकर रानी भी बहुत खुश हो रही थी लेकिन जिस तरह की उत्तेजना का एहसास दोनों के तन बदन में हो रहा था सूरज का मन अपनी बहन की चुदाई करने को था लेकिन तभी उसकी मां आ चुकी थी और सूरज मुखिया की बीवी से पैसे लेने के लिए उसके घर की तरफ निकल गया था।





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रानी अपनी मां के काम में हांथ बंटा रही थी लेकिन जब जब अपनी मां की तरफ देखती तो उसे यकीन नहीं होता कि यह वही उसकी मां है जो रात को पूरी तरह से नंगी होकर अपनी ही उंगली से अपनी जवानी की प्यास बुझा रही थी,,,, कभी-कभी अपनी मां को देखकर रानी को गुस्सा भी आता था लेकिन खुद एक औरत होने के नाते एक औरत की चाहत को उसकी जरूरत को अच्छी तरह से समझ सकती थी इसलिए अपनी मां पर तरस भी आता था कि भरी जवानी में उसे पति के होने के बावजूद भी अपनी उंगली से काम चलाना पड़ रहा था। लेकिन अब रानी को अपनी मन में एक कामुक औरत नजर आने लगी थी अब तो वह अपनी मां के पिछवाड़े को देखकर अपनी गांड से उसकी तुलना करती थी जो कि उसकी आकार से छोटी ही थी,,, एक औरत होने के नाते रानी को भी अच्छी तरह से मालूम था कि औरत के भारी भरकम नितंब मर्दों को किस तरह से अपनी तरफ आकर्षित करते हैं और अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड देखकर वह अच्छी तरह से समझ सकती थी कि जब यह गांव में चलती होगी तो मर्दों की क्या हालत होती होगी।

दूसरी तरफ सूरज धीरे-धीरे मुखिया के घर पर पहुंच चुका था,,,, उसने आंगन में देखा तो कोई नहीं था,,, कुछ देर तक वहीं खड़ा है क्योंकि वह भी जानता था कि अगर पैसे मिल गए तो बाजार में सामान खरीदने में बड़ी आसानी होगी वह अपने मन का भी कोई सामान खरीद सकता है,,,, और इस बात की भी लालच थी कि अगर मुखिया की बीवी मौका मिल गया तो वह उसका लंड भी ले लेगी क्योंकि वह मुखिया की बीवी को अच्छी तरह से पहचान चुका था हर वक्त उसके दिमाग में चुदाई ही चलती थी। कुछ देर इंतजार करने के बाद जब आंगन में कोई नजर नहीं आया तो सूरज अंदर की तरफ जाने की सोच जहां पर एक बार घर के पीछे वाली जगह पर उसने मुखिया की बीवी की चुदाई किया था क्योंकि मुखिया के बीवी वहीं पर खाना भी बना रही थी सुबह का समय था इसलिए उसे पक्का तो नहीं लेकिन थोड़ा सा शंका था की मुखिया की बीवी घर के पीछे ही मिलेगी,,,, और यही अनुमान लगाते हुए वह धीरे-धीरे घर के पीछे की तरफ पहुंच गया था लेकिन मन में उसके ढेर सारी बातें चल रही थी जिस तरह से मुखिया की बीवी उसके साथ चुदाई का सुख भोग रही थी उसे पूरा यकीन करके मुखिया से कुछ होता नहीं था अगर मुखिया इस लायक होता तो शायद उसकी बीवी उसके साथ रंगरेलियां ना मनाती,,,, इस बात की खुशी भी ठीक ही अच्छा हुआ कि मुखिया अपनी बीवी को खुश करने के लायक नहीं है तभी तो उसके हिस्से का प्रसाद उसे मिल रहा था ‌।





यही सब सोचते हुए सूरज धीरे-धीरे घर के पीछे की तरफ पहुंच चुकाथा वैसे इस समय घर के पीछे जाते समय किसी के द्वारा देखे जाने या उसे रोक कर पूछे जाने का सवाल उसके मन में बिल्कुल भी नहीं उठता था क्योंकि मुखिया और मुखिया की बीवी उसे बहुत अच्छी तरह से जानते भी थे और मानते भी थे इसलिए उसके मन से इस बात का डर बिल्कुल भी नहीं था कि जिस तरह से वह घर के पीछे की तरफ जा रहा है कोई रोक लगा तो कोई सवाल पूछेगा तो वह क्या जवाब देगा यह सब बातें उसके मन में बिल्कुल भी नहीं थी। इसीलिए तो निश्चिंत होकर लीडर होकर वह घर के पीछे की तरफ जा रहा था और जहां जाने का रास्ता घर के मुख्य द्वार से ही था जो कि सीधा पीछे की तरफ निकला हुआ था देखते ही देखते सूरज घर के पीछे की तरफ पहुंच चुका था घर के पीछे वाले दरवाजे पर पहुंचा तो वहीं पर खड़े होकर देखा तो उसे मुखिया की बीवी पीछे की तरफ झाड़ू लगाते हुए नजर आ गई उसका मदहोश कर देने वाला पिछवाड़ा एकदम बाहर निकला हुआ था क्योंकि वह बैठकर झाड़ू लगा रही थी और कदमों से आगे बढ़ रही थी जैसे एक कदम आगे बढ़ाती थी उसका पिछवाड़ा और ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता था । यह सब देखते ही सूरज का लंड फिर से खड़ा होने लगा था,,,, वह दरवाजे पर खड़ा खड़ा ही दोनों हाथ बांधकर मुस्कुराते हुए बोला।

मालकिन तुम झाड़ू लगाते हुए बहुत खूबसूरत लगती हो,,,, (अचानक कान में इस तरह की आवाज आते ही मुखिया की बीवी एकदम से घबरा गई थी और पीछे की तरफ देखी तो सूरज खड़ा था तब उसकी जान में जाना है और वह झाड़ू लगाते हुए ही बोली)





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अरे हरामि इस तरह से बोलकर तो तूने मेरी जान ही निकाल दी थी मैं तो घबरा हई गई की आवाज कहां से आई,,,,।

वैसे तो तुम घबराने वाली लगती नहीं हो।

बात तो सही है लेकिन यू अचानक कहीं से आवाज आ जाएगी तो कोई भी डर जाएगा वैसे एक बात बता,,, (बैठे हुए ही सूरज की तरफ मुंह करके घूमते हुए) इतनी सुबह-सुबह क्या करने आ गया।

मालकिन के दर्शन करने और क्या करने,,,,।

ओह हो हो,,,, क्या बात है मालकिन के दर्शन करने के लिए इतना जी मचल रहा था।

अब कर भी क्या सकता हूं जब मालकिन इतनी खूबसूरत हो तो हर वक्त दर्शन करने का ख्याल बना ही रहता है आज रहा नहीं जा रहा था तो चला आया दर्शन करने के लिए,,,, (ऐसा कहते हुए वह धीरे-धीरे मुखिया की बीवी की तरफ आगे बढ़ने लगा,,, मुखिया की बीवी की झाड़ू लेकर हाथ में खड़ी हो गई थी,,,,)





चल अच्छा किया आ गया तो ठीक है चाय बन गई है पीकर जाना,,,,, (ऐसा कहकर वह अपनी साड़ी के पल्लू से,,, अपने माथे पर उपसे हुए पसीने को पोंछने लगी और उसके ऐसा करने पर उसकी मदहोश कर देने वाली छतिया एकदम से उजागर हो गई थी ब्लाउज के ऊपर का एक बटन खुला हुआ था जिससे उसकी बड़ी चूचियों की बीच की गहरी दरार एकदम साफ दिखाई दे रही थी और उसे गहरी दरार में अपनी नजर को पूरी तरह से डूबोते हुए सूरज बोला)

लेकिन मैं तो मालकिन सुबह-सुबह चाय नहीं दूध पीता हूं,,, (ललचाई आंखों से मुखिया की बीवी के चूचियों की तरफ देखते हुए बोला तो उसकी नजर को मुखिया की बीवी पहचान गई थी उसके होंठों पर भी मादक मुस्कान तैर रही थी। इसलिए वह भी मुस्कुराते हुए बोली,,,)





लेकिन सुबह-सुबह मेरे वहां दूध नहीं मिलता सिर्फ चाय मिलती है,,,, पीना है तो पी वरना चला जा,,,,।

मुझे नहीं लगता कि मैं यहां से खाली हाथ जा पाऊंगा क्योंकि मेरी आंखों के सामने ही दूध का कटोरा भरा हुआ है,,,,।

यह तेरे लिए नहीं है,,,।

तो किसके लिए है मुखिया जी के लिए,,,।

मुखिया के लिए भी नहीं है मुखिया जी अगर दूध पीते तो शायद बात ही कुछ और होती।

तब तो यह मेरे लिए ही है इतना इकट्ठा करके किस लिए रखी हो,,, ,,,।

तेरे लिए थोड़ी ना रखी हूं,,,, (मुखिया की बीवी का इतना कहना था कि सूरज से बिल्कुल भी रहा नहीं गया क्योंकि सुबह-सुबह भी अपनी बहन से अपनी मां के बारे में गंदी बात करते हो उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था जो की धीरे-धीरे शांत हो चुका था लेकिन मुखिया की बीवी का पिछवाड़ा और उसके बड़े-बड़े दूध देखकर उसकी चाहत फिर से जगने लगी थी और उत्तेजना के चलते वह तुरंत,,, मौके की नजाकत को समझते हुए, तुरंत उसका हाथ पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींच लिया और वह सीधा उसकी बाहों में उसकी पीठ उसकी तरफ थी उसके सीने से लगी हुई थी अगले ही पल मुखिया की बीवी को एहसास हो गया कि सूरज पूरी तरह से उत्तेजित था,,,क्योंकि पजामे में बना तंबू उसके नितंबों में धंसना शुरू कर दिया था,,,, और सूरज तुरंत अपने दोनों हाथ को मुखिया की बीवी की भारी भरकम चूचियों पर रखकर उन्हें जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया और चूची को दबाते हुए बोला,,,)





फिर किसके लिए रखी हो मालकिन,,,,, मुझे तो बहुत अच्छी लगती है तुम्हारी चूचियां,,, (और इतना कहने के साथ ही जल्दबाजी दिखाते हुए सूरज अपने हाथों से मुखिया की बीवी के ब्लाउज का बटन खोलने लगा मुखिया की बीवी उसे रोकते हुए,बोल रही थी)

रहने दे सूरज अभी रहने दे शालू नीलू दोनों घर पर ही है,,,,।

दोनों छोटी मालकिन अभी सो रही होंगी मालकिन,,, (इसे कहते हुए वहां मुखिया की बीवी के ब्लाउज का आखिरी बटन भी खोल दिया और आखिरी बटन खोलते हुए उसकी दोनों चूचियां हवा में लहराने लगी जिसे सूरज अपने दोनों हाथों से पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया था उसे मुखिया की बीवी की चूची को दबाने में ज्यादा मजा आता था वैसे तो मुझे की बीवी की चूची उसकी मां की चूची से छोटी ही थी लेकिन फिर भी,,, सूरज को ज्यादा मजा आता था क्योंकि चुदाई के मामले में उसे हर एक गुण सीखाने वाली मुखिया की बीवी ही थी,,,,)

सहहहहह आहहहह क्या कर रहा है सूरज छोड़ मुझे वह दोनों किसी भी वक्त आ सकती हैं,,,, (सूरज की हरकत से मदहोश होते हुए मुखिया की बीवी बोली)





इतनी सुबह-सुबह वह दोनों नहीं उठती होंगी मालकिन तुम चिंता मत करो,,, (ऐसा कहते हुए वह एक तरफ उसका स्तन मर्दन कर रहा था और दूसरी तरफ वह नीचे से अपने पजामे में तने हुए तंबू को उसकी गांड पर गोल-गोल घूमाना शुरू कर दिया था जिसे मुखिया की बीवी मस्त और सूरज के सामने परास्त होती जा रही थी,,)

अरे उठ गई तो गजबहो जाएगा,,, (मदहोशी में अपनी आंखों को बंद करते हुए बोली क्योंकि इस समय सूरज जल्दबाजी दिखाते हुए ऊपर से ही अपनी उंगलियों को धीरे-धीरे साड़ी के अंदर सरकाना शुरू कर दिया था वैसे तो मुखिया की बीवी कमर पर साड़ी कस के बंधी हुई थी लेकिन फिर भी सूरज बहुत चालाक था वह किसी भी तरह से अपनी हथेली को साड़ी के अंदर पहुंचा दिया था और अगले ही पल अपनी हथेली को उसकी बुर पर रखकर दबोचना शुरू कर दिया था। मसलना शुरू कर दिया मुखिया की बीवी एकदम से मस्त हो गई ,यह जानती हुए भी की उसकी दोनों बेटियां घर पर ही है और वहकिसी भी वक्त वहां आ सकती है,,, लेकिन वह सूरज के हाथों की कठपुतली बन चुकी थी सूरज अपनी कामकला से मुखिया की बीवी को पूरी तरह से मदहोश कर दिया था मस्त कर दिया था एक हाथ से उसकी नंगी चूची को बारी-बारी से दबा रहा था और दूसरी हाथ तो उसकी साड़ी में डालकर उसकी बुर को मसल रहा था जो की मदन रस से पूरी तरह से चिपचिपी हो गई थी,,,,,)

मन तो तुम्हारा भी बहुत कर रहा है मालकिन देखो तो सही तुम्हारी बुर कितना पानी छोड़ रही है,,,।

अब ऐसी हरकत करेगा तो पानी तो छोड़ेगी ही,,,, सहहहहह आहहहह,,,,, थोड़ा धीरे से दबा,,, तू तो पागल हो गया है जोर-जोर से दबा रहा है,,,।





क्या करूं मालकिन मजा तो जोर-जोर से ही दबाने में आता है,,, ‌

तो इतना भी जोर से मत दबा की दर्द करने लगे च इसलिए दबाते हैं कि दोनों को मजा आए तुझे भी और मुझे भी सारा मजा तो तू ही ले रहा है मुझे तो सिर्फ दर्ददे रहा है।

और जब बुर में लंड घुसता है तब दर्द नहीं होता,,, (एकदम से अपनी उंगली को बर के अंदर घुसेड़ते हुए सूरज बोला उसकी हरकत से और उसकी बात से एकदम से मस्त होते हुए मुखियाकी बीवी बोली,,,)

उसमें तो चाहे जितना जोर से डाल मजा ही मजा आता है।

(सूरज सुबह-सुबह मुखिया की बीवी को मदहोश कर चुका था पूरी तरह से चुदवासी बना चुका था इस समय वह चुदवाना नहीं चाहती थी लेकिन सूरज की हरकतों से वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी वह बिल्कुल अपने काबू में नहीं थी सूरज ने उसे मस्त कर दिया था बेकाबू कर चुका था,,,,, सूरज का लंड भी पूरी तरह से अपनी औकात में आकर साड़ी के बीच धंसा जा रहा था,,,, और मुखिया की बीवी एकदम मस्त होकर के अपनी बड़ी गांड को सूरज के तंबू पर गोल-गोल घूमाकर रगड़ रही थी जिससे सूरज की उत्तेजना चरम शिखर पर पहुंच चुकी थी,,,,,, सूरज एकदम से उसकी साड़ी में से अपने हाथ को बाहर निकाला तो उसकी उंगली पूरी तरह से उसके मदन रस से तरबतर हो चुकी थी और वह अपनी उंगली को सीधे मुखिया की बीवी के चेहरे के सामने लाकर दिखने लगा जिसमें से उसकी बुर का मदन रस नीचे टपक रहा था और यह देखकर मुखिया की बीवी शर्म से पानी पानी हो गई लेकिन सूरज की उत्तेजना एकदम से बढ़ चुकी थी,,,, मुखिया की बीवी को और भी ज्यादा उत्तेजित करते हुए सूरज एकदम से अपनी उंगली को अपने मुंह में डालकर चाटना शुरू कर दिया यह देखकर मुखिया की बीवी की बुर झडते झडते रह गई। वह एकदम से चुदवासी हो गई,,,, मुखिया की बीवी के हालात पूरी तरह से बदतर हुए जा रहे थे वह अपनी बुर में सूरज के लंड के लिए तड़प रही थी। सुरेश पागलों की तरह एक हाथ से उसकी चूची को दवाई जा रहा था और दूसरी हाथ की उंगली को अपने मुंह में डालकर चाट रहा था यह एक औरत के लिए वाकई में मदहोश कर देने वाला फल होता है जब एक मर्द उसकी बुर से निकले हुए मदन रस को इस तरह से उंगली पर लगाकर चाटता है,,, और इसी काम कला की तो वह दीवानी हो चुकी थी। मुखिया की बीवी उत्तेजित अवस्था में अपनी भारी भरकम गांड को सूरज के तंबू पर गोल-गोल घूमाते हुए अपने हाथ पीछे की तरफ लाकर पजामे के ऊपर से ही उसके लंड को पकड़ ली,,,,





सूरज समझ गया था कि अब मुखिया की बीवी क्या चाहती है और यही तो वह चाहता था वह मुखिया की बीवी को पूरी तरह से खुश करके उससे पैसे लेना चाहता था और खुद भी मजा लेना चाहता था। सूरज अच्छी तरह से जानता था कि खुश होने के बाद मुखिया की बीवी पैसे देकर और भी ज्यादा खुश कर देती है,,,, सूरज और मुखिया की बीवी की कामक्रीड़ा चल ही रही थी कि,,, तभी अचानक नीलू दूसरी तरफ से वहीं आ रही थी लेकिन कुछ हलचल देखकर वह एकदम से दीवार के पीछे छूप गई,, इस बात की खबर ना तो मुखिया की बीवी को था और ना ही सूरज को,,, वह तो अपने काम क्रीड़ा में पूरी तरह से मगन थे। लेकिन अब इस कामक्रीड़ा में तीसरा शख्स भी जुड़ गया था लेकिन उन दोनों के साथ नहीं बल्कि दीवार की ओट से उन दोनों को देख रही थी,,, और वह थी मुखिया की छोटी लड़की नीलू,,,, पहले तो उसे कुछ समझ में नहीं आया,,, जब ध्यान से देखी तो उसके एकदम से होश उड़ गए अपनी मां को सूरज के साथ देखकर वह बेहद अचंभित हुई उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी आंखों के सामने उसकी मां गांव के लड़के के साथ इस तरह की हरकत कर रही है। ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि नीलु सीधी साधी लड़की थी वह खुद सूरज के साथ संभोग सुख का मजा ले चुकी थी लेकिन कभी सोचा नहीं था कि उसकी मां इस तरह से गांव के लड़के के साथ मज़ा लेगी।





मुखिया की बीवी अभी भी पीछे हाथ करके पजामे के ऊपर से सूरज के लंड को पकड़ कर दबा रही थी मुखिया की बीवी की हरकत से सूरज पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुका था और यह सब नीलू चोरी-छिपे देख रही थी पहली बार अपनी मां की छीनरपन को देख रही थी वह कभी सोच भी नहीं थी कि उसकी मां इस तरह की हरकत कर सकती है। जहां एक तरफ नीलू को यह सब देखकर बड़ा अजीब लग रहा था अपनी मां पर गुस्सा आ रहा था वहीं दूसरी तरफ अपनी मां और सूरज की हरकत को देखकर उसके बदन में भी हलचल होना शुरू हो गया था। उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां हाथ पीछे ले जाकर के सूरज के पजामे के ऊपर से उसके लंड को दबोचे हुए थी और सूरज उसकी मां की एक चूची को जोर-जोर से दबा रहा था यह नजारा वाकई में एक बेटी के लिए देखना शर्मसार कर देने वाला होता है क्योंकि उसे उम्मीद नहीं होती कि उसकी मां इस तरह की हरकत करेगी अगर अपने पिता के साथ अच्छी होती तो शायद बात कुछ और होती लेकिन वह गांव के ही एक लड़के के साथ मजे ले रही थी और वह भी अपने ही घर में,,, नीलु के लिए यह नजारा उत्तेजनात्मक के साथ-साथ हैरान कर देने वाला इसलिए भी था कि उसकी मां उसके पिता को धोखा दे रही थी यह नीलू से बर्दाश्त नहीं हो रहा था लेकिन दोनों की हरकतें उसके बदन में मदहोशी का रस घोल रही थी। ना चाहते हुए भी वह अपनी आंखों से अपनी मां की बेशर्मी को देख रही थी।





सूरज पागलों की तरह मुखिया की बीवी के गर्दन पर चुंबनों की बारिश करते हुए नीचे से अपने लंड को उसकी गांड के बीचोंबीच धंसा भी रहा था और उसकी चूची को भी दबा रहा था। यह सब मुखिया की बीवी के लिए असहनीय तो था ही उत्तेजना की नजरीए से लेकिन नीलू के लिए भी यह मदहोशी का समां बांध रहा था सूरज से चुदवाए हुए उसे भी काफी दिन गुजर चुके थे,,, इसलिए रह रहकर उसकी बुर में चुदास का रस भरा जाता था लेकिन काफी दिनों से वह सामान्य हो चुके थे लेकिन एक बार फिर से उसकी मां और सूरज दोनों ने उसके बदन में उत्तेजना की चिंगारी को भड़का दिया था,,,,,, नीलू और उसकी मां के बीच कोई ज्यादा दूरी नहीं थी तकरीबन 2 मीटर की दूरी थी जहां पर वह अपनी मां की सिसकारी की आवाज भी सुन सकती थी। और उसे सुनाई भी दे रही थी सूरज की हरकत से वह काफी मदहोश हो रही थी उसके मुंह से गरमा गरम शिसकारी की आवाज छूट रही थी जो नीलू के कानों में बड़े आराम से पहुंच रही थी नीलू किस तरह की आवाज से भली भांति परिचित थी सूरज के साथ चुदाई का सुख भोगते हुए उसके मुंह से भी इसी तरह की आवाज निकलती थी। नीलू को साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां से रहा नहीं जा रहा था,वह बार-बार अपनी भारी भरकम गांड को सूरज के लंड पर गोल-गोल घूमाकर रगड़ रही थी जो कि इस बात का एहसास दिला रहा था कि वह कितनी चुदवासी हो चुकी है,,,, तभी मुखिया की बीवी ने ऐसी हरकत की, कि सूरज से बिल्कुल भी रहा नहीं गया मुखिया की बीवी अपने हाथ को सीधे उसके पजामे में डाल दी और उसके खड़े लंड को पकड़ ली जिससे सूरज समझ गया था कि लोहा पूरी तरह से गर्म हो चुका है अब हथोड़ा मारने की आवश्यकता आ गई है।





इसलिए तुरंत उसने मुखिया की बीवी को कंधों से पकड़ कर एकदम से घुमा दिया और दोनों आमने-सामने हो गए उसकी नंगी चूचियों को देखकर सूरज उसकी चाची को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और सीधा उसे मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया,,,,, जिस तरह की उत्तेजना और जल्दबाजी सूरज ने दिखाया था उसे देखकर मुखिया की बीवी एकदम अचंभित हो गई थी लेकिन उसकी बुर का तालाब मदन रस से,पूरी तरह से भर चुका था।

अपनी मां और सूरज की जल्दबाजी देखकर नीलू की सांस ऊपर नीचे हो रही थी उसे रहा नहीं जा रहा था और वहां भी अपनी मां की तरह है अपनी खुद की सलवार के अंदर अपना हाथ डालकर अपनी बुर को मसलना शुरू कर दी थी,,,, सूरज पागलों की तरह मुखिया की बीवी की दोनों चूचियों को पी रहा था बारी-बारी से दोनों चूचियों की सेवा में लगा हुआ था और मुखिया की बीवी दोनों हाथों से पजामी को नीचे करके उसके खड़े लंड को अपने हाथ से पकड़ कर हिला रही थी,,,, नीलू कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसकी मां, इतनी बड़ी छिनार होगी क्योंकि वह अपनी मां को दूसरों से हमेशा कड़क रवैया में बातचीत करते देखी थी,,,, कभी भी किसी से प्यार से बात करते हुए नहीं देखी थी इसलिए कभी भी नीलु को शक ही नहीं हुआ था कि उसकी मां भी अंदर से प्यासी औरत होगी,,,, आज उसकी प्यास नीलु की आंखों के सामने दिखाई दे रही थी। अपनी मां के बदन की आग उसे और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी,,,, नीलु को साफ दिखाई दे रहा था की सूरज पागलों की तरह उसकी मां की चूची को पी रहा था। यह एहसास ही नीलू की बुर को गीली कर रहा था। इसीलिए तो वह भी धीरे से अपनी एक उंगली को अपनी बुर के अंदर सरका चुकी थी। कुछ देर तक सूरज इसी तरह से मुखिया की बीवी के अंगों से खेलता रहा और उसे मस्त करता रहा। लेकिन अब समय आ गया था असली खेल खेलने का वह भी मौके की नजाकत को समझता था। वह जानता था कि काफी देर हो चुका था उसे इस जगह पर आए, सुबह का समय था इसलिए अब घर का कोई भी सदस्य इधर आ सकता था।





मुखिया की बीवी भी यही चाहतीथी,,, लेकिन वह मदहोशी में कुछ बोल नहीं पा रही थी बस वह इशारे में ही अपनी स्थिति को जाहिर कर रही थी वह एक हाथ से अपनी साड़ी को तुरंत अपनी कमर तक उठा दी थी और एक हाथ में पहले से ही सूरज का मोटा तगड़ा लंड था जिसे वह पकड़कर अपनी तरफ खींचते हुए अपनी बुर पर सटा कर उसे ऊपर नीचे करके रगड़ रही थी,,, मुखिया की बीवी की हरकत से सूरज भी पूरी तरह से गर्म हो चुका था वह तुरंत अपने दोनों हाथों को मुखिया की बीवी के पीछे की तरफ लेकर और उसके नितंबों को जोर से पकड़ कर अपनी तरफ खींचने लगा मुखिया की बीवी के हाथ में उसका लंड था ही वह भी मौके की नजाकत को समझते हुए हल्के से अपनी टांगों को खोलकर सूरज के लंड को अपनी गुलाबी गली का रास्ता दिखा दी,,,, मुखिया की बीवी की पनीयाई बुर पाकर बड़े आराम से सूरज का मोटा लंड बुर के अंदर सरकने लगा,,,, और जैसे-जैसे अंदर जा रहा था वैसे मुखिया की बीवी के चेहरे का हाव बदलता जा रहा था,,, देखते ही देखते सूरज अपनी मर्दाना ताकत दिखाते हुए मुखिया की बीवी की बुर की गहराई तक अपने लंड को डाल दिया और वह भी खड़े-खड़े स्थिति में, खुद मुखिया की बीवी हैरान थी और नीलू भी यह देखकर हैरान हो चुकी थी। सूरज खड़े-खड़े मुखिया की बीवी की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़े हुए अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था। मुखिया की बीवी मदहोश हुए जा रही थी उसके सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और ऐसे में मुखिया की बीवी के मुंह से निकलती गर्म सिसकारी की आवाजें सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ा रही थी।





सहहहहह आहहहह,,,,, सुरज ,,,,, आहहहह बहुत मजा आ रहा है रे,,,,, सहहहहहह,,, ऊमममममम और जोर-जोर से धक्के लगा,,,, आहहहहहह,,, ऊमममममम तेरा मोटा लंड मेरी बुर फाड़ डालेगा,,,, सहहहहहह आहहहहहहहह,,, बहुत अच्छे से चोदता है तू,,,, आहहहहहहहह,,,,,।

(मुखिया की बीवी की इस तरह की बातें जहां एक तरफ सूरज की उत्तेजनक और ज्यादा बढ़ा रही थी वहीं दूसरी तरफ उसकी खुद की बेटी को अचंभित किए हुए थी जो कुछ भी उसने कभी सपने में भी नहीं सोची थी वह सब कुछ अपनी आंखों के सामने तो देख ही रही थी लेकिन अपनी मां के मुंह से इतनी गंदी बातों को सुनकर वह हैरान हो गई थी आश्चर्य से उसकी आंखें फटी जा रही थी अपनी मां को इस तरह से चुदवाते हुए देखकर और इतनी गंदी गंदी बातें करते हुए,,,,,, उसकी खुद की ऊंगली उसकी बुर में अंदर बाहर हो रही थी और वह भी बड़ी तेजी से ,, मजा तो उसे भी बहुत आ रहा था पहली बार हुआ अपनी मां की चुदाई देख रही थी और वह भी किसी अनजान लड़के से जो कि इस समय उसके लिए तो अनजान नहीं था क्योंकि वह खुद उसके साथ मजे ले चुकी थी लेकिन फिर भी वह घर का नहीं था गांव का ही लड़का था। यह सब नीलू देख कर मजा ले ही रही थी कि तभी वह एकदम से हैरान हो गई क्योंकि सूरज एकदम उत्तेजना से उसकी मां की चुदाई करते हुए सीधा उसे अपनी गोद में उठा लिया था और गोद में उठाए हुए अपनी कमर हिला रहा था,,,,, मुखिया की बीवी उत्तेजना से भर चुकी थी वह सूरज की ताकत को अच्छी तरह से जानती थी इसलिए उसे डरने का बिल्कुल भी डर नहीं था वह उसके कंधे पर हाथ रखकर खुद अपनी तरफ से कमर हिला रही थी लेकिन इस तरह से वह सिर्फ कोशिश कर रही थी सफल नहीं हो पा रही थी लेकिन नीचे से सूरज का मोटा लंड बड़े आराम से उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा था।





देखते ही देखते मुखिया की बीवी का बदन अकड़ने लगा वह झड़ने वाली थी इस बात को वह खुद जाहिर कर दी थी एकदम मदहोश होते हुए,,,,।

सहहहहह आहहहहहह,,,,, आहहहहहहहह मैं झड़ने वाली हूं सूरज जोर-जोर से धक्के लगा मेरआ निकलने वाला है,,, आहहहहहह,,,,।

चिंता मत करो मालकिन मेरा भी निकलने वाला है,,,, (और इतना कहकर सूरज जोर-जोर से धक्के लगाने लगा था दूसरी तरफ नीलु भी अपनी बुर में बड़ी तेजी से उंगली को अंदर बाहर करने लगी और देखते ही देखते तीनों झड़ने लगे,,,,, थोड़ी ही देर में वासना का तूफान शांत होने के बाद सूरज अपनी गोद से मुखिया की बीवी को नीचे उतार दिया और मुखिया की बीवी अपनी सांसों को दुरुस्त करते हुए अपने कपड़ों को व्यवस्थित करने लगी और कपड़ों को ठीक करते हुए बोली,)

यही करने के लिए तू इधर आया था ना।

क्या करूं मालकिन तुम्हारी याद बहुत सतारही थी,,।

(दोनों की करतूत और दोनों की बातों को सुनकर नीलू को समझते देर नहीं लगी थी कि यह मामला काफी दिनों से चल रहा है,, नीलू भी अपने सलवार में से अपने हाथ को बाहर निकल चुकी थी पकड़े जाने का डर उसे बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि वह जिस जगह पर खड़ी थी वहां पर दोनों की नजर नहीं पहुंच सकती थी इसलिए वह वहीं पर खड़े होकर अभी भी उन दोनों की बातों को सुन रही थी.. सूरज की बात सुनकर मुखिया की बीवी बोली)

याद सता रही थी तो सीधा घर पर आ गया और वो भी सुबह-सुबह,,,।

क्या करूं रहा नहीं गया,,,,।

अच्छा तो हो गया है ना अब जा यहां से,,,,।

मालकिन अगर थोड़े पैसे मिल जाते तो आज बाजार जाना है।





ठीक है रुक लेकर आती हुं, ( इतना कहकर मुखिया की बीवी घर के अंदर की तरफ चली गई और थोड़ी ही देर में पैसे लेकर आई और सूरज के हाथों में तुम्हारी सूरज खुशी-खुशी पैसे लेकर घर के बाहर की तरफ चला गया,,,,, नीलू की दूसरी तरफ से जल्दी-जल्दी जाने लगी ताकि वह सूरज को इस बारे में मिलकर बात कर सके कि यह सब क्या चल रहा है लेकिन जब तक वह घर के आगे की तरफ पहुंच पाती तब तक सूरज जा चुका था और रास्ते में ही कुर्सी पर उसके पिताजी बैठे थे इसलिए वह आगे जा नहीं पाई)
 
नीलू अपनी आंखों से अपनी मां की करतूत को देख चुकी थी वह कभी सोची नहीं थी कि उसकी मां इतनी बड़ी छिनार होगी,,,, अपनी मां को कड़क मिजाज की समझने वाली नीलू आज अपनी आंखों से अपनी मां को चुदवाते हुए देखकर अपनी मां के बारे में जो धारणा थी वह पूरी तरह से धराशाई हो चुकी थी,,, नीलू सूरज के बारे में भी सोच रही थी कि कितना बड़ा हारामी है उसके साथ तो रंगरलियां मनाता है उसकी मां को भी नहीं छोड़ा है,,,, इसी बारे में वह सूरज से बात करना चाहती थी लेकिन वह उससे मुलाकात कर पाती से पहले ही वह चला गया था लेकिन वह अपने मन में निश्चय कर ली थी कि अपनी मां से तो वह बाद में बात करेगी लेकिन अब इस बारे में वह सूरज से बात करके रहेगी,,, ,, भले ही समय वह अपनी मां की हरकत को देखकर थोड़ी क्रोधित अवस्था में थी लेकिन फिर भी अपनी मां की चुदाई देखकर उसकी भी बुर कचोरी की तरह फुल गई थी,,, जिसे वह खुद अपनी उंगली से शांत करने की कोशिश की थी।





पैसे पाकर सूरज बहुत खुश था उससे भी ज्यादा खुशियों से ऐसी बात की थी कि सुबह-सुबह मुखिया की बीवी चोदने के लिए उसे मिल गई थी,,, और उसकी खुशी का सबसे बड़ा कारण यह था कि आज वह मुखिया की बीवी के साथ अपने आप से ही मनमानी करके उसकी चुदाई किया था वरना हर बार मुखिया की बीवी अपने मन से उसके साथ चुदवाती थी। इसलिए सूरज के चेहरे पर कुछ ज्यादा ही खुशी झलक रही थी,,,, आज सूरज और उसकी मां खेत में जल्दी से काम निपटा दिए थे क्योंकि उन्हें बाजार जाना था,,, सुनैना खेत से आने के बाद नहा धोकर तैयार हो रही थी। नहा कर वह केवल साड़ी लपेटकर अपने कमरे की तरफ आगे बढ़ रही थी। बाजार जाने की शुध में वह इतनी बेशुध हो गई थी कि घर पर उसका बेटा सूरज मौजूद है इस बात का उसे आज तक नहीं हुआ और वह इस बात पर नजरअंदाज करते हुए सीधा अपने कमरे में चली गई थी। सूरज अपने कमरे में बैठा बैठा देख रहा था नहाने के बाद जिस तरह से उसकी मां केवल साड़ी को अपने बदन पर लपेटी हुई थी गीले बदन पर साड़ी लिपटे होने की वजह से उसका अंग अंग झलकने लगा था,,, और सबसे ज्यादा सूरज को व्याकुल करने वाला अंग था उसकी मां की उभरी हुई बड़ी-बड़ी गांड जो की गली साड़ी में कुछ ज्यादा ही मादकता छलका रही थी,,, सुनैना कोई इस बात का बिल्कुल भी आभास नहीं था औपचारिक रूप से एकदम सहज होते हुए अपनी गांड मटकाते हुए अपने कमरे में चली गई थी वह यह नहीं जानती थी कि उसके इस रूप सौंदर्य का रस उसका बेटा अपने कमरे में बैठा बैठा अपनी आंखों से पी रहा था।

सूरज कितने बदले में मदहोशी का तूफान उठने लगा था अपनी मां की इस रूप यौवन को देख कर पजामे में उसका लंड अंगड़ाई लेने लगा था वह इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि इस समय उसका कुछ होने वाला नहीं है क्योंकि अभी तक उसकी मां और उसके बीच नजदीकी या बड़ी नहीं थी बस जो कुछ भी हुआ था नैनो से हुआ था और सूरज तो अभी यह ठीक से समझ नहीं पाया था कि उसकी मां के मन में क्या चल रहा है हालांकि सूरज अपनी तरफ से पूरी तरह से निश्चित तथा जिस तरह से वह वासना की नजर से अपनी मां को देखा था उसकी नजर बदलने वाली नहीं थी उसकी मंजिल उसकी मां की दोनों टांगों के बीच का वह गुलाबी छेद ही था जिसे पाने के लिए वह दिन रात तड़पता था। उसने अपनी मां की उसे गुलाबी गली को अपनी मंजिल बना लिया था जहां पहुंचने के लिए वह दिन रात जुगाड़ में लगा हुआ था इस समय घर में रानी भी मौजूद नहीं थी और वैसे भी अगर वह मौजूद होती तो भी उसे कोई दिक्कत नहीं थी क्योंकि वह पहले ही रानी को पूरी तरह से विश्वास में ले चुका था। सूरज को पूरा यकीन था कि बदन पर लिपटी हुई साड़ी उतारने के बाद ही उसकी मां कपड़े पहनकर तैयार होगी क्योंकि वह सिर्फ साड़ी लपेटी हुई थी ब्लाउज और पेटीकोट नहीं पहनी थी इसका मतलब साफ था कि अभी कपड़े पहनना बाकी था और यही उसके लिए मौका था अपनी मां के नंगे बदन को उसकी आंखों के सामने देखने का।





सूरज जानता था कि कुछ होने वाला नहीं है लेकिन फिर भी अगर वह अपनी मां की नग्नावस्था के समय ठीक अगर उसके सामने खड़ा होगा तो उसकी मां के चेहरे का हाव भाव कैसा होगा यही वह देखना चाहता था,,,, और इसके लिए वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर लिया था वह अपनी मां के कमरे में जाने के लिए निश्चिंत हो गया था। और उसके पास अपनी मां के कमरे में जाने का कारण भी था क्योंकि बाजार जाना था और थोड़ा देर हो रहा था अगर ज्यादा देर हो गया तो वापस आने में अंधेरा हो जाएगा इस बात का कारण वह अपनी मां के सामने रख सकता था जो की पूरी तरह से औपचारिक भी था इसमें कोई प्रपंच सुनैना को नजर नहीं आता इसलिए सूरज धीरे से खटिया पर से उठकर खड़ा हो गया और गहरी सांस लेता हुआ धीरे से अपने कमरे से बाहर आ गया। अपने कमरे से बाहर आकर वह इधर-उधर देखने लगा वह निश्चित कर लेना चाहता था कि वाकई में घर में उन दोनों के सिवा तीसरा तो कोई नहीं है और पूरी तरह से तसल्ली कर लेने के बाद वह अपनी मां के कमरे की तरफ देखा तो कमरे का दरवाजा हल्का सा बंद था उसे पर कड़ी नहीं लगी हुई थी यह उसके लिए सुनहरा मौका था उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे यह मौका खुद उसकी मां आगे चलकर उसे दे रही थी वह इस बात को जानता था कि हल्का सा खुला दरवाजा उसके लिए आमंत्रण तो बिल्कुल भी नहीं था बस वह जाने में खुला छोड़ रखी थी शायद तैयार होने की जल्दबाजी में लेकिन इसी मौके का फायदा उसे उठाना था,,,,





उत्तेजना के मारे सूरज का गला सूख रहा था क्योंकि वह जानता था कि अगले पल अगर वह अपनी मां के कमरे में दाखिल हो गया तो उसे क्या देखने को मिलेगा और जो कुछ भी उसे देखने को मिलेगा उसे मादकता भारी दृश्य का नशा अपने आप में समाहित कर लेने की क्षमता रखने के लिए वह अपने आप को तैयार कर रहा था क्योंकि वह जानता था की आंखों के सामने जो तेरे से दिखने वाला है उस दृश्य को देखकर कोई भी मर्द अपने आप पर काबू कर सकने में असमर्थ हो जाता है और कुछ ऐसा कर देता है जिसकी वह कल्पना भी नहीं कर सकता वाकई में आकर किसी जवान से भरे हुए मर्द की आंखों के सामने जब उसके रोम रोम में किसी स्त्री को पाने की लालसा पूरी तरह से प्रबल हो गई हो और ऐसे ही समय उसकी आंखों के सामने गदराई जवानी से भरी हुई एक खूबसूरत औरत बिना वस्त्र के एकदम नंगी खड़ी हो तो ऐसे में वह मर्द बिना उसे भोगे नहीं रह पाएगा वैसे तो सूरज को अपने मन को काबू में करने का हुनर अच्छी तरह से आता था क्योंकि यह उसके लिए पहली बार नहीं था इससे पहले वह कहीं औरतों को नंगी देख चुका था उन्हें भोग भी चुका था और जिनके जिनके साथ उसने शारीरिक संबंध बनाया था वह सभी औरतें बेहद खूबसूरत और जवानी से भरी हुई थी लेकिन सूरज इस बात को भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां की बात ही कुछ और थी जिन औरतों के साथ उसने सारी संबंध बनाया था उन सभी औरतों में सबसे ज्यादा खूबसूरत और बेलगाम जवानी की मालकिन उसकी मां थी जिसकी जवानी पर काबू बना हर एक मर्द का सपना होता है जो कि कभी पूरा नहीं होता।





इसलिए सूरज अपने मन पर काबू किए हुए था वह अपने सपने को पूरी तरह से साकार कर देना चाहता था लेकिन अपनी मां का सहकार पाने के बाद ही किसी भी प्रकार की जोर जबरदस्ती से नहीं,,, और ना ही किसी भी प्रकार की मजबूरी में,,,, क्योंकि इस बात को वह अच्छी तरह से समझ गया था कि मजा तभी आता है जब सामने वाली पूरी तरह से तैयार हो इसलिए वह अपनी मां को पूरी तरह से तैयार कर लेना चाहता था इतना तो वह जानता ही था कि उसकी मां भी अंदर ही अंदर से चुदवाने के लिए तड़प रही थी। लेकिन किसके साथ यह अभी पूरी तरह से निश्चित नहीं था वैसे तो उसे इतना मालूम ही था कि उसकी मां किसी गैर करने के साथ कभी भी जिस्मानी ताल्लुकात नहीं बनाएगी उसकी यह तड़प उसके अपने पति के लिए थी जिसके साथ वह चुदाई का भरपूर मजा लेती थी। लेकिन सूरज यह भी जानता था कि औरत की मजबूरी और उसकी तड़प कुछ भी करने को मजबूर कर देती है। यह सब सोचता हुआ सूरज गहरी सांस लिया क्योंकि वह ज्यादा वक्त बाहर खड़े नहीं गुजार सकता था क्योंकि वह जानता था कि उसकी जरा सी देरी उसकी सोच और उसकी चाहत पर पानी फेर सकती थी इसलिए वह अपनी मां के कमरे में जाने के लिए अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर लिया।

Suraj ki chahat





सूरज अपनी मां के कमरे की तरफ जल्दबाजी में कदम आगे बढ़ाया और ऐसा दिखाना चाहता था कि वह कमरे में एकाएक आ गया था उसे कुछ भी मालूम नहीं था और वह तुरंत दरवाजे को धक्का दिया और कमरे में दाखिल हो गया और दाखिल होने के साथ बोला।

मां तुम अभी तक,,,,, (इतना कहने के साथ ही वह एकदम से रुक गया उसकी आंखें एक ही दृश्य पर जमीन की जमीन रह गई उसके शब्द उसके होठों में एकदम से जम गए क्योंकि उसकी आंखों के सामने जैसा हुआ सो रहा था उससे भी कहीं ज्यादा खूबसूरत मादकता लिए हुए दृश्य दिखाई दे रहा था इस नजारे की तो उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था वह जिस तरह से अपनी कल्पना में अपनी मां के नग्न बदन के बारे में सोच रहा था उससे भी कई ज्यादा खूबसूरत इस समय उसकी मां दिखाई दे रही थी उसकी आंखों के सामने उसकी मां खड़ी थी और वह भी पूरी तरह से नंगी जिसे साड़ी को वह अपने बदन पर लपेट कर आई थी वह गली साड़ी उसके कदमों में गिरी हुई थी जिसे वह अपने हाथों से उतर कर जमीन पर नीचे गिरा दी थी,,,, और वह अपने रूप रंग को अपने खूबसूरत चेहरे को कमरे में टंगे छोटे से आईने में देख रही थी,,,,, सूरज की आंखों के सामने उसकी मां एकदम नंगी खड़ी थी उसकी पीठ सूरज के सामने थी मतलब कि उसकी बड़ी-बड़ी गांड एकदम साफ दिखाई दे रही थी और उसे पर से अभी भी पानी की बूंदे कीमती मोती की तरह फिसल रहे थे अपनी मां की नंगी चिकनी पीठ से नजर नीचे फिसलते हुए उसकी बड़ी-बड़ी उन्नत नितंब पर पहुंच गई थी जो की एक अद्भुत आकार लिए हुए था,,,, ऐसी खूबसूरत गोलाकार भगवान की कलाकृति का एक अद्भुत नमूना था ऐसा लग रहा था किसी से किसी शिल्पकार ने अपने हाथों से पत्थर को तरस तरस कर उसे गोल आकार देकर खूबसूरत बना दिया हो,,,,,, ऐसा नहीं था कि सूरज पहली बार अपनी मां को नंगी देख रहा था वह इससे पहले भी कई बार अपनी मां को नंगी देख चुका था लेकिन आज की बात कुछ और थी आज उसकी मां जरूर से ज्यादा खूबसूरत दिखाई दे रही थी क्योंकि पानी में भीगा हुआ उसका बदन एक अलग ही मादकता लिए हुए था,,,,।





पल भर में ही सूरज की सांस ऊपर नीचे होने लगी थी और उसके पजामे में तंबू बनने लगा था,,,, यू एकाएक दरवाजा खुलने की वजह से सुनैना भी एकदम घबरा गई थी और वह एकदम से पलट कर दरवाजे की तरफ देखने लगी थी और सामने ही अपने बेटे को खड़ा देखकर वह एकदम से हड़बड़ा गई थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अभी तक तो जिस तरह से वह खड़ी थी सूरज को पीछे का ही खजाना दिखाई दे रहा था लेकिन हर बार हाथ में जिस तरह से वह सूरज की तरफ घूमी थी अब तो उसकी आंखों के सामने उसकी मां के हुस्न का पूरा खजाना खुल गया था बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां जो छाती की शोभा बढ़ा रही थी वह एकदम लहराती हुई दिखाई दे रही थी पतली मांसल कमर और गहरी नाभि जिसमें अभी भी पानी की बूंदे तेरी हुई थी ऐसा लग रहा था कि जैसे पानी की बूंदे सुनैना के खूबसूरत हुस्न को छोड़कर जाना ही नहीं चाहती हो,,, और गहरी नाभि के नीचे हल्के-हल्के रेशमी बालों का गुच्छा और रेशमी बालों के गुच्छों के बीच गहरी सी पतली दरार मानो पहाड़ी में से कोई झरना निकल रहा हो। सूरज तो अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को आंख फाड़ देख रहा था वाकई में उसने अब तक जितनी भी औरतों को भोगा था उनमें से सबसे ज्यादा हसीन उसकी मां ही थी,,, सुनैना को भी समझ में नहीं आ रहा था अपनी आंखों के सामने अपने बेटे को खड़ा पाकर वह एकदम से हतभ्रत हो गई थी उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें। वह बस अपने बेटे को देखे जा रही थी और सूरज अपनी मां के खुले खजाने को देख रहा था ऊपर से नीचे तक इस खूबसूरत नजारे को देखकर उसकी आंखें वासना से भरने लगी थी। क्या खूबसूरत नजारा देखकर उसकी आंखों की भूख मिट नहीं रही थी।





सुनैना भूल चुकी थी कि वह इस समय किस अवस्था में है पल भर के लिए उसके दिमाग से अपने आप के शुध एकदम से गुम हो गई थी उसे नहीं मालूम था कि उसके खूबसूरत बदन पर एक भी वस्त्र नहीं थे उसके खूबसूरत बदन को रखने के लिए कपड़े का रेशा तक उसके बदन पर नहीं था वह पूरी तरह से नंगी थी लेकिन तभी सूरज की ऊपर और नीचे उठती बैठती नजरों को देखी तो, वह एक नजर हल्के से अपने बदन पर डाली और एकदम से चौंक गई उसे एहसास हुआ कि वाकई में वह कमरे में आते ही अपने बदन पर लिपटी हुई साड़ी को नीचे उतार फेंकी थी वह पूरी तरह से नंगी थी,,,, अपनी स्थिति का अहसास होते हुए एकदम से घबरा गई और एक हाथ से अपनी दोनों चुचियों ढकने की नाकाम कोशिश करते हुए दूसरे हाथ की हथेली को अपनी दोनों टांगों के बीच के उसे खूबसूरत दरार को ढंक ली और एकदम से हड़बड़ाहट में दूसरी तरफ घूम गई और उसके ऐसा करने से एक बार फिर से उसकी नंगी गांड उसके बेटे के सामने उजागर हो गई उसकी सांस एकदम से ऊपर नीचे होने लगी अपनी मां की मस्त-मस्त जवानी और उसकी शर्म की अदा देखकर सूरज का मन और इमान दोनों डोलने लगा था उसके पजामे में उसका तंबू पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा था। सूरज पूरी तरह से बेकाबू हुआ जा रहा था इस समय वह अपने मन में यही सोच रहा था कि यही मौका है मंजिल तक पहुंचाने का अपनी मां की प्यास बुझाने का और अपनी चाहत पूरा करने का क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां भी यही चाहती है लेकिन यह नहीं जानता था कि यह अपने ही बेटे के साथ तैयार होगी कि नहीं लेकिन औरत के मन को सूरज अच्छी तरह से समझने लगा था।

उसे पूरा यकीन था कि अगर इस समय वह अपनी मां के साथ कुछ करेगा तो वह भी मदहोश होकर उसका साथ पूरा देगी। और वह ऐसा करने जा ही रहा था वह अपना पूरा मन बना दिया था अभी तक उसके मन पर उसका काबू था लेकिन अपनी मां की मदहोश कर देने वाली अदा और उसकी गदराई जवानी उसकी बड़ी-बड़ी गांड देखकर वह पूरी तरह से बेकाबू हो गया था,,,,,,लेकिन अपने मन में आए विचार को वह एक तरफ रख दिया,,,,, जब एकदम से हडबढ़ाते हुए उसकी मां बोल पड़ी,।

हाय दइया,,, तततत,, तू यहां क्या कर रहा है,,, (सुनैना इस तरह से अपनी नंगी जवान को छुपाने की नाकाम कोशिश करते हुए बिना अपने बेटे की तरफ देखें बोली,,,,, लेकिन जैसे उसके कहे गए शब्द सूरज के कानों तक पहुंचे ही ना हो वह एक अभी भी अपनी मां की नंगी जवान को घुरे जा रहा था तभी दोबारा सुनैना बोली,,,)

तुझे समझ में नहीं आ रहा है मैं किस स्थिति में खड़ी हूं और तू यही खड़ा है।

(दोबारा जब उसके कानों में उसकी मां के कहे कहीं शब्द पड़े तो जैसे उसे होश आया हो वह भी एकदम से वासना के तूफान से बाहर आते हुए हडबढ़ाते हुए बोला,,)

मममममम,,, मैं तो तुम्हें बुलाने के लिए आया था और तुम हो अभी तक तैयार नहीं हुई हो।

तैयार होकर आ रही हूं तु जाकर बाहर इंतजार कर,,,।

ठीक है जा रहा हूं लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि तुम इस स्थिति में होगी,,, मैं जानबूझकर नहीं आया था।

हां मुझे मालूम है लेकिन अभी तो जा कमरे से बाहर।

ठीक है,,,,, जा रहा हूं लेकिन जल्दी तैयार होकर आओ अगर यही देर हो गई तो वापस आने में अंधेरा हो जाएगा,,,,(सूरज का अपनी मां के कमरे से बाहर निकलने का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था लेकिन वह अपने मां पर पत्थर रखकर अपनी मां के कमरे से बाहर निकल गया और बाहर खटिया पर बैठकर उसके बाहर निकलने का इंतजार करने लगा सूरज के बाहर जाते ही सुनैना तुरंत नग्न अवस्था में ही चलती हुई दरवाजे तक आई और दरवाजे को बंद करके वैसे तो अब दरवाजा बंद करने की कोई जरूरत थी ही नहीं लेकिन फिर भी एहतियात के तौर पर वह दरवाजा बंद कर चुकी थी और उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी उसका मन एकदम से घबरा गया था मन में एक अजीब सी हलचल भी हो रही थी जो की उत्तेजना से भरी हुई थी क्योंकि आज वह अपने बेटे की आंखों के सामने पूरी तरह से नंगी खड़ी थी और उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसकी अवस्था उसके बेटे से बिल्कुल भी छुपी नहीं थी उसे अच्छी तरह से मालूम था कि जिस तरह के हाव भाव उसके बेटे के चेहरे पर बन रहे थे उसके बदन का एक भी अंक उसकी नजर से छुपा नहीं था और यह बात का अहसास होते ही उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी और वह जल्दी-जल्दी तैयार होने लगी थोड़ी ही देर बाद तैयार होकर वह अपने कमरे से बाहर निकले लेकिन अपने बेटे से नजर नहीं मिल पा रही थी वह शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी और धीरे से घर से बाहर निकल गई और पीछे-पीछे सूरज भी घर से बाहर निकल गया और बाहर निकलते ही दरवाजा बंद कर दिया और अपनी मां के पीछे चलने लगा।)
 
मां बेटे दोनों बाजार के लिए निकल गए थे लेकिन बाजार निकलने से पहले जो नजर सूरज ने अपनी मां के कमरे में देखा था उसे देखकर अभी तक उसके लंड की अकड़ ज्यों की त्यों बनी हुई थी,, ऐसा पहली बार नहीं हुआ था कि वह अपनी मां को नंगी ना देखा हो वाकई बार अपनी मां को बिना वस्त्र के देख चुका था उसके नंगे बदन को अपनी आंखों से देखकर अपने हाथों से अपने मन की प्यास बुझा भी चुका था अपनी मां के खूबसूरत बदन का हर एक अंग उसे छुआ नहीं था लेकिन फिर भी आज जो कुछ भी उसने अपनी मां के कमरे में देखा था उसे उसके मन में उठ रहे वासना की भावनाओं का तूफान शांत नहीं हो रहा था बार-बार उसकी आंखों के सामने उसकी मां की बड़ी-बड़ी गदराई गांड नजर आ रही थी,,, जिसे वह खुद अपने हाथों से पकड़ कर दबाना चाहता था उसे खेलना चाहता था उस पर अपनी होठ रखकर चूमना चाहता था और एक बार उसने अपनी अभिलाषा को पूरी भी किया था खेत में काम करते हुए,, जब उसकी मां थककर वही खटिया पर पेड़ के नीचे सो गई थी उसे दिन सूरज हिम्मत दिखाते हुए अपनी मां की गांड पर अपने लंड को जी भरकर रगड़ा था और अपना अपनी अपनी मां की गांड पर ही निकाल दिया था ‌।

इन सबके बावजूद भी जब भी वह अपनी मां को लग्न अवस्था में देखा था इसका एहसास बिल्कुल तरो ताजा हो जाता था ऐसा लगता भी नहीं था कि वह अपनी मां को इससे पहले भी नंगी देख चुका है इसलिए तो उसकी यह हालत हो जाती थी,,,, सूरज के तन बदन में वासना का तूफान उठ रहा था बार-बार उसकी आंखों के सामने उसकी मां कपड़े बदलते हुए कपड़े उतारते हुए अपनी नंगी गांड मटकाते हुए यही सब क्रियाकलाप करते हुए नजर आ रही थी इसलिए वह अपने मन को लाख समझाने की कोशिश करने के बावजूद भी उसका मन मान नहीं रहा था,, सुनैना आगे आगे चल रही थी और सूरज पीछे-पीछे चल रहा था और इस समय उसकी नजर अपनी मां की गदराई चौड़ी गांड पर ही थी,,, क्योंकि कच्ची पगडंडी से चलते हुए उसके पैर ऊपर नीचे हो रहे थे जिसकी वजह से उसकी बड़ी-बड़ी गांड की दोनों फांके कसी हुई साड़ी में आपस में रगड़ खाकर एक अद्भुत आकार साड़ी के ऊपर उपसा रहे थे। सूरज अपनी मां से बातचीत करना चाहता था क्योंकि वह जानता था कि औरत के करीब पहुंचने का सबसे आसान तरीका होता है आपस में बातचीत करना लेकिन इस समय उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी मां से बात की शुरुआत कैसे करें क्योंकि वह जानता था कि जिस समय वह अपनी मां के कमरे में दाखिल हुआ था उसे समय उसकी मां के बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं था वह पूरी तरह से नंगी खड़ी थी,,, इसलिए वह अपने मन में यही सोच रहा था कि उसकी मां उसके बारे में क्या सोच रही होगी और ऐसे भी अगर उसकी मां उसे इस बारे में कुछ कहती भी तो उसके पास बहाना था कि दरवाजे पर कड़ी नहीं लगी थी और उसे देर हो रही थी बाजार चलने में और यह भी कह सकता था उसे क्या मालूम कि इस समय वह कपड़े बदल रही है और कपड़े बदलते समय सारे कपड़े उतार कर कपड़े बदलती है। उसके पास साफ बहाना था कि जो कुछ भी हुआ था वहअनजाने में हुआ था। लेकिन धीरे-धीरे वह लोग गांव के बाहर आ चुके थे लेकिन सुनैना ने जो कुछ भी कमरे में हुआ था उस बारे में बिल्कुल भी जिक्र नहीं की थी।

दोपहर का समय सड़क पर गांव के इक्का दुक्का लोग दिखाई दे रहे थे आते जाते,, बाजार पहुंचकर अच्छी तरीके से खरीदी करने का समय दोनों के पास पर्याप्त था। और वैसे भी सूरज पहली बार अपनी मां के साथ बाजार जा रहा था क्योंकि ऐसा कभी मौका ही नहीं आया था कि वह अपनी मां के साथ बाजार जाकर खरीदी कर सके सुन ना ज्यादातर अपने पति के साथ ही बाजार जाती थी या तो गांव की औरतों के साथ यह पहला मौका था जब अपने बेटे के साथ बाजार जा रही थी। तभी सामने से सोनू और सोनू की चाची आते हुए नजर आए उन्हें देखकर सुनैना रुक गई और सूरज भी रुक गया सुनैना सोनू की चाची से मुस्कुराते हुए बोली।

कहां से आ रही हो इतनी दोपहर में,,,।

क्या बताऊं पास के गांव गई थी वहीं से आ रही हूं।

पास के गांव,,,,!(सुनैना आश्चर्य से बोली)

अरे ऐसे ही कोई खास काम नहीं था तो घूमते हुए वहां निकल गई थी,,,,(उन दोनों की बातचीत हो रही थी तभी सोनू सूरज के पास आ गया और दोनों मुस्कुरा कर बातें करने लगे तो सूरज सोनू की चाची की तरफ देखते हुए सोनू से बोला)

क्या बात है सोनू बहुत खुश नजर आ रहा है । कहीं चाची की चुदाई तो कर के तो नहीं आ रहा है।

नहीं यार मेरी किस्मत ऐसी कहां कसम से बहुत मन करता है लेकिन मुझे लगता नहीं है कि चाची कुछ करने देगी,,,(सोनू भी अपनी चाची के पिछवाड़े की तर क्षफ देखते हुए बोला और यह सूरज देख चुका था इसलिए चुटकी लेते हुए बोला।)

अपनी चाची की गांड देख रहा है ना,,, (सूरज की बात सुनकर सोनू मुस्कुरा दिया तो सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,) कसम से यार जिस दिन से तूने अपनी चाची की नंगी गांड देखा है तब से तो मेरे सपने में तेरी चाची आती है अब तो मेरा भी मन बहुत करता है तेरी चाची को चोदने के लिए कोई जुगाड़ लगा यार हम दोनों का भला हो जाए,,,,।

मुझे नहीं लगता कि इस जन्म में हम दोनों की ख्वाहिश पूरी होगी मैं तो देख देख कर हिला कर काम चला लेता हूं ।

लगता है मुझे भी अब यही करना होगा,,, तेरी संगत में मैं भी बिगड़ गया हूं,,,,,,।

(सूरज आज तक इस बात की भनक तक सोनू को नहीं लगने दिया था कि वह उसकी चाची की चुदाई कर चुका है,, थोड़ी देर में सोनू की चाची गांव की तरफ जल्दी और सूरज और उसकी मां बाजार की तरफ लेकिन जाते-जाते भी एक नजर सूरज सोनू की चाची की तरफ मारता गया और सोनू की चाची भी उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा दी और दोनों की यह ताक झांक न तो सुनैना को दिखाई दिया और ना ही सोनू को,,,, थोड़ी दूर चलने के बाद सुनैना को लग रहा था किसके बेटे से बात करना चाहिए वरना उसके बेटे को ऐसा ही लगेगा कि जो कुछ भी कमरे के अंदर हुआ था उससे वह नाराज हो चुकी है और वैसे जो कुछ भी कमरे में हुआ था उसी के बारे में सुनैना सोच भी रही थी और न जाने की उसके तन-बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी और यह हलचल खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हो रही थी और उसे साफ महसूस हो रहा था कि जब-जब अपने बेटे के बारे में सोच रही थी तब तक उसकी बुर से नमकीन पानी का रिसाव हो रहा था। इसलिए उसकी सांस थोड़ी गहरी हो जा रही थी लेकिन फिर भी सुनैना अपने बेटे से बातचीत की शुरुआत करने के लिए आगे आगे चलते हुए पीछे नजर घूमाकर देखी तो उसका दिल धक से रह गया क्योंकि उसे अच्छी तरह से एहसास हो गया कि उसका बेटा उसकी भारी भरकम गांड की तरफ ही देख रहा था और वह भी ललचाई नजर से,,, अब तो सुनैना के बदन में और भी ज्यादा हलचल होने लगी थी लेकिन फिर भी वह सामान्य बनी रहना चाहती थी इसलिए वह चलते हुए बोली,,,,,, बातचीत की शुरुआत करने के लिए कोई मुद्दा तो था नहीं इसलिए वह ऐसे ही अपने बेटे से बोली)

सूरज बाजार में घर के लिए कोई सामान चाहिए तो याद दिलाना ऐसा ना हो कि इतनी दूर आने पर भूल जाए और घर पर पहुंचे तो पता चले यह सामान तो लिया ही नहीं,,,।

हां मुझे भी मालूम है,,,, वैसे तुम्हें क्या-क्या खरीदना है?

वह तो वहां चलने पर ही पता चलेगा,,,,,,, की क्या-क्या लेना है।

लेकिन फिर भी बाजार चल रही हो कुछ तो पता होगा कि वहां क्या खरीदना है राशन का सामान खरीदना है या कुछ जरूरी सामान खरीदना है।

अब ऐसे कैसे बता दूं वहां पहुंचेंगे तो खुद ही देख लेना की क्या-क्या लेना है वैसे तो राशन का सामान भी चाहिए हल्दी मसाला नामक यह सब तो खत्म ही हो गया है वह भी खरीद लेंगे और थोड़ा जरूरी सामान है वह भी खरीद लेंगे।

चलो देखते हैं वैसे मां तुम पहली बार मेरे साथ बाजार चल रही हो ना,,,।

हां पहली बार तेरे साथ बाजार चल रही हूं इसके पहले तो तेरे बाबुजी रहते थे तब उनके साथ जाती थी।

(सूरज अपने मन में यही सोच रहा था कि यही सही मौका है अपने बाबूजी के बारे में अपनी मां से पूछने का कि वह क्या जवाब देती है इसलिए वह बोला)

बाबुजी की याद नहीं आती,,,,?

(सूरज की बात सुनकर सुनैना को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले वह खामोश हो गई थी और सूरज इसी तरह से जानता था कि उसकी मां को उसके बाबूजी की याद बहुत सताती है दिनभर भले वह सामान्य रहती हो लेकिन रात को बिस्तर पर तो उसे उसके बाबूजी की याद बहुत सताती है जिसे वह अपनी आंखों से देख भी चुका था और अपनी बहन को दिखा भी चुका था जब सुनैना की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला तो सूरज फिर से बोला)

क्या हुआ तुम कुछ बोल नहीं रही हो मां क्या तुम्हें बाबूजी की याद आती है।

तुझे आती है,,,(सुनैना उल्टा ही अपने बेटे से यह सवाल पूछ बैठी थी)

पहले आई थी लेकिन अब धीरे-धीरे आदत सी पड़ गई है,,, और वैसे भी सारा काम हम लोगों को करना पड़ रहा है तो भला याद क्यों आएगी उन्हें भी तो सोचना चाहिए कि मेरा परिवार है मेरी बीवी है और जब इतने के बावजूद भी उन्हें हम लोगों की याद नहीं आती तो हमें भी उन्हें याद करने की कोई जरूरत नहीं है आखिरकार हम लोगों का काम तो चल ही रहा है ना काम रुक तो नहीं रहा है।(सूरज जानबूझकर अपनी मां से इस तरह की बातें कर रहा था जिसे उसके पिताजी के साथ न होने का उसे फर्क ही नहीं पड़ता क्योंकि वह भी अपनी मां की मां की बात जानना चाहता था और अपनी मां के मन में ऐसे भाव पैदा करना चाहता था कि उसे भी इस बात से बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता कि उसके पति उसके साथ नहीं है। कुछ इस तरह से सूरज ने कहा था उसकी बात सुनकर सुनैना के मन में भी अपने पति के प्रति तिरस्कार की भावना पैदा हो रही थी इसलिए वह भी बोली।)

उसे इंसान को तो ऐसा ही लगता था कि मैं नहीं रहूंगा तो यह लोग कैसे जिंदा रहेंगे कैसे ईन लोगों का काम चलेगा कैसे खेती-बाड़ी का काम होगा,,,, लेकिन उसे नहीं मालूम की हम भी इंसान हैं हमें भी मेहनत करना आता है हमें भी भगवान ने दो हाथ दिए हैं हम भी बना खा सकते हैं खेतों में काम कर सकते हैं मजदूरी कर सकते हैं कैसे भी करके अपना परिवार संभाल सकते हैं। मुझे भी उसकी जरूरत नहीं है,,,,।

(पहली बार सूरज अपनी मां के मुंह से अपने बाबूजी के लिए इस तरह के तिरस्कार के शब्द सुनने को मिल रहे थे यह शायद उसके मन का क्रोध ही था जो शब्द के रूप में उसके मुंह से बाहर निकल रहे थे वरना वह आज तक अपने पति के बारे में इस तरह के शब्दों का प्रयोग कभी कि नहीं थे शायद जीवन की ज़रूरतें जिम्मेदारी और अपने पति की तरफ से शारीरिक जरूरत को पूरे करने की कमी का ही नतीजा था जो सूरज की मां इस तरह से अपने पति के बारे में बोल रही थी और यही सूरज के लिए भी सही मौका था गरम लोहा देखकर हथौड़ा मारने का इसलिए वह भी अपनी मां की बात सुनकर बोला)

तुम्हें क्या लगता है मां बाबूजी कहां होंगे कहीं कमाने गए होंगे या फिर,,,,।

कमाने गए होते तो अब तक तो आ गए होते उनके गए भी 6 महीने से ऊपर हो चुके हैं कोई तो खोज खबर होती ।(आगे आगे चलते हुए सुनैना बोली)

यही सब सो कर तो मेरा भी मन शंका से भरा जा रहा है।

किस तरह का शंका,,,,,,,(चलते हुए ही सुनैना बोली,,,, अपनी मां की बात सुनकर सूरज को समझ में नहीं आ रहा था कि यह बात उसे अपनी मां से कहना चाहिए या नहीं कहना चाहिए इसलिए अभी थोड़ी देर तक खामोश हो गया था लेकिन फिर अपने आप से ही बात करते हुए बोला कि अगर उसे अपने लिए रास्ता साफ करना है तो उसकी मां के मन में उसके बाबूजी के प्रति तिरस्कार भरना होगा कुछ ऐसी बातें बतानी होगी जिसे सुनकर वाकई में उसकी मां अपने पति से ही नफरत करने लगे और फिर वह भी कुछ ऐसा करने लगे जैसा उसे नहीं करना चाहिए लेकिन इन सब में सूरज की ही भलाई थी इसलिए वह बोला,,)

मुझे तो लगता है मां की बाबूजी किसी औरत के चक्कर में है,,,,।

(यह बात सुनते ही सुनैना एकदम से रुक गई और सूरज की तरफ मुड़कर देखने लगी सूरज अपनी मां की तरफ देख रहा था सुनैना के चेहरे पर खामोशी और दर्द की रेखाएं साथ झलक रही थी वह पूरी तरह से आश्चर्यचकित थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह बात उसका बेटा कह रहा था कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी बनी रही तो सूरज ही अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

मैं ऐसे ही यह बात नहीं कह रहा हूं शुरू शुरू में जब पिताजी घर नहीं आते थे तों में उन्हें ढूंढता हुआ शराब के ठेके पर पहुंच गया था लेकिन वहां भी पिताजी का कोई अता-पता नहीं चला,,,, लेकिन मैं वहां कुछ लोगों को यह कहते सुना की भोला का का चक्कर दो-तीन गांव छोड़कर किसी ऐसी औरत के साथ चल रहा है जिसका पति नहीं है और उसके दो बच्चे हैं मैंने तो यह सुन तो मुझे तो अपने कानों पर भरोसा ही नहीं हुआ लेकिन उन सभी ने उसकी बात का समर्थन किया।

(इतना सुनकर तो सुनैना की हालत एकदम से खराब हो गई पल भर के लिए उसके चेहरे पर किसी भी प्रकार का भाव दिखाई नहीं दे रहा था वह एकदम जड़वंत हो गई थी,,,,, फिर ना जाने क्या हुआ था बिना कुछ बोले फिर से आगे आगे चलने लगी,,,,, यह देखकर सूरज भी पीछे-पीछे चलने लगा और बोला,,,)

मुझे तो पूरा यकीन हो गया कि यही सब चक्कर है वरना बाबूजी जरूरआते,,,।

किस्मत में जो लिखा होगा वही होगा शायद मेरी किस्मत में यही लिखा है,,,,।

लेकिन तुम्हें निराश होने की कोई जरूरत नहीं है मैं हूं ना हम लोग मिलकर घर को चला तो रहे हैं,,,, किसी भी प्रकार की चिंता करने की जरूरत नहीं है जिस तरह से बाबूजी मेहनत करते थे उससे ज्यादा मेहनत नहीं करूंगा मैं हर तरीके से तुम्हें खुश रखूंगा बस तुम कभी उदास मत होना,,,,।

(सूरज अपना उल्लू सीधा करने में लगा हुआ था और सुनैना अपने बेटे के मुंह से एक जिम्मेदारी वाली बात सुनकर एक जिम्मेदार बेटा होने का एहसास दिलाता हुआ देखकर सुनैना के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी उसे अपने बेटे की यह बातें बड़ी अच्छी लग रही थी,,, लेकिन फिर अपने मन में सोचने लगी कि जैसा वह कह रहा है कि उसे हर तरीके से खुश रखेगा तो क्या हुआ उसकी शारीरिक जरूरतों को भी पूरी कर पाएगा,,, यह ख्याल उसके मन में अनजाने में आया था और अपने इस ख्याल से वह खुद अपनी नजरों में शर्म से पानी पानी हो जा रही थी और अपने आप से ही बोली यह कैसी बातें कर रही है वह तेरा बेटा है भला अपने ही बेटे से अपनी शारीरिक जरूरतो को पुरी करने की ख्वाहिश वह कैसे कर सकती हैं। लेकिन यह ख्याल ही उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर पैदा कर रहा था। अनायास ही उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी और वह अपनी बेटी की बात सुनकर खुश होते हुए बोली।)

मुझे तेरे ऊपर नाज है,,,, पूरे गांव में तेरे जैसा बेटा किसी का नहीं होगा मुझे इतनी कम उम्र में ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा लिया है,,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर सूरज खुशी से गदगद हुए जा रहा था और देखते ही देखते वह लोग काफी दूर तक निकल गए थे अब थोड़ी दूरी रह गई थी बाजार पहुंचने में लेकिन तभी अचानक चलते-चलते सुनैना एकदम से रुक गई,,,,, जहां पर रुकी थी वहां की कच्ची सड़क के दोनों किनारे बड़े-बड़े पेड़ थे घनी झाड़ियां,,, सूरज भी खड़ा हो गया और अपनी मां से बोला,,,)

क्या हुआ यहां क्यों खड़ी हो गई हो,,,,?(ऐसा कहकर वह चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगा कि कहीं उसकी मां कुछ देख तो नहीं रही है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था थोड़ी देर सुनैना इधर-उधर देखने के बाद जब उसे लगने लगा कि उसका बेटा उसके पास ही खड़ा रहेगा तो वह धीरे से बोली,,,)

तू आगे चल में आती हुं,,,,।

लेकिन यहां क्या करोगी मैं कुछ समझ नहीं रहा हूं यहां क्या करोगी खड़ी रहकर,,,,,।

अरे तू समझने की कोशिश कर तू आगे तो चल में आ रही हूं वापस नहीं चली जाऊंगी,,,।

(अपनी मां की हालत देखकर सूरज को इतना तो समझ में आ गया था कि उसकी मां को बड़े जोरों की पेशाब लगी थी क्योंकि वह अपने पेशाब पर काबू पाने के लिए अपने पैर की उंगलियों पर खड़ी हो जा रही थी,,,, और सूरज को अपनी मां की ऐसी हालत देखने में मजा आ रहा था। )

लेकिन फिर भी बताओ तो सही यहां क्या कर रही हो क्यों रुकी हो मुझे चिंता हो रही है कहीं कोई आसपास में है तो नहीं,,,,।

नहीं ऐसा कुछ भी नहींहै,,,,

फिर,,,,(सूरज अच्छी तरह से जानता था लेकिन वह अपनी मां के मुंह से सुनना चाहता था इसलिए वह जिद कर रहा था और अनजान बनने की कोशिश कर रहा था अपनी बेटी की बात सुनकर थोड़ा झल्ला कर सुनैना बोली,,,)

बात को समझने की कोशिश कर सूरज मैं तुझे कह रही हूं थोड़ा आगे क्या तो चला क्यों नहीं जाता,,,,,(ऐसा कहते हुए फिर ना जाने सुनैना को क्या सूझी वह भी अपने बेटे से बताने के लिए मचल उठी और धीरे से बोली,,,) बात तो समझने की कोशिश कर मुझे बड़े जोरों की,,,,,(अपनी जोरों की आ रही पेशाब पर काबू करने की कोशिश करते हुए इधर-उधर पेर उठाकर चलते हुए) पेशाब लगी है,,,,(ऐसा कहते हुए सुनैना एकदम शर्म से पानी पानी हो गई,,, वह अपने बेटे के सामने पेशाब शब्द का प्रयोग करना नहीं चाहती थी लेकिन मजबूरन उसे इस तरह का शब्द का प्रयोग करना पड़ा था लेकिन अपने बेटे के सामने इस तरह के शब्दों का प्रयोग करके जहां एक तरफ वह शर्म से पानी पानी हो रही थी वहीं दूसरी तरफ उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी उसके दोनों टांगों के बीच की पतली दरार फूल पिचक रही थी। अपनी मां के मुंह से पेशाब वाली बात सुनकर सूरज भी मदहोश हो गया था लेकिन एकदम सहज बनने का नाटक करते हुए वह बोला,,,)

ओहहहहह मुझे मालूम नहीं था,,,, अच्छा कर लो,,,,(ऐसा वह जानबूझकर बोला था क्योंकि किसी औरत को पेशाब करने के लिए जब मरद इस तरह के शब्दों का प्रयोग करता है तो मर्द और औरत के बीच बहुत कुछ घटित हो चुका होता है या घटित होने की आशंका बनी होती है और इसी बात के एहसास से सुनैना के तन-बदन में मदहोशी का रस घुलने लगा था वह एकदम से शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी वह अपने बेटे से नजर नहीं मिल पाई थी,,,, सूरज अपने शब्दों का बाद अपनी मां के मन पर चला कर वह थोड़ा दूर जाकर खड़ा हो गया था वैसे तो इस स्थिति में वह अपने बेटे के करीब होते हुए पेशाब नहीं करना चाहती थी लेकिन वह अपने पेशाब पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पा रही थी इसलिए मजबूरन उसे पेशाब करना ही था इसलिए वह थोड़ा इधर-उधर देखकर घनी झाड़ियों के बीच जाकर खड़ी हो गई,,,,, और वह वहां से अपने बेटे की तरफ देखी तो उसका बेटा वहां से दिखाई दे रहा था लेकिन सूरज जानबूझकर अपनी मां की तरफ नहीं देख रहा था क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां अभी खड़ी है अपने बेटे की आंखों के सामने उसे शर्मिंदगी का एहसास हो रहा था वह धीरे से अपनी साड़ी को अपने हाथों से पकड़ ली थी और अपने बेटे की तरफ देख रही थी कि कहीं वह उसकी तरफ देखा तो नहीं रहा है,,,, जब अनिश्चित हो गई कि उसका बेटा उसकी तरफ नहीं देख रहा है तो वह मुस्कुरा कर लेकिन इस मुस्कुराहट में भी पूरी तरह से शर्मिंदगी छिपी हुई थी वह धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी और इधर-उधर देख भी ले रही थी कि कहीं कोई गांव का इंसानतो वहां नहीं है लेकिन वह लोग गांव से काफी दूर आ चुके थे और दोपहर का समय होने की वजह से किसी के भी आने की आशंका दिखाई दे नहीं रही थी इसलिए वह निश्चित होकर अपनी साड़ी को एकदम से कमर तक उठा ली थी,,,,,

उसका दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि चार-पांच मीटर की दूरी पर ही उसका बेटा खड़ा था और एक जवान बेटे की आंखों के सामने उसके करीब होते हुए एक मां अपनी साड़ी उठाकर पेशाब करने के लिए बैठ जाए यह एक शर्मिंदगी की बात थी इसलिए सुनैना के तन बदन में अजीब सी हलचल भी हो रही थी और थोड़ा अलग ही एहसास हो रहा था जिसे वह बयान नहीं कर सकती थी,,,,, साड़ी कमर तक उठाकर वह जल्दी से पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई थी और यह एहसास अंकित को भी हो गया था कि उसकी मां पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई थी क्योंकि पल भर में उसके कानों में उसकी मां की बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज एकदम साफ सुनाई दे रही थी,,,, और यही एहसास जहां एक तरफ उसके बेटे को मदहोश कर रहा था उत्तेजित कर रहा था वही सुनैना को शर्मसार कर रहा था क्योंकि उसे भी साफ-साफ एहसास हो रहा था कि उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज इस बिराने में काफी शोर मचा रही थी उसे पूरा यकीन था कि उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज उसके बेटे के कानों तक जरूर पहुंच रही होगी। वह शर्मिंदगी का एहसास लिए अपनी बर से पेशाब की धार मेरी रही थी कि तभी वह एकदम से जोर से चीख पड़ी,,)
 
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