Incest बैलगाड़ी,,,,, - Page 22 - SexBaba
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Incest बैलगाड़ी,,,,,

राजू की युक्ति से मधु की बहुत खुश थी,,,, कब घर में सभी एक दूसरे के राजदार बन चुके थे केवल हरिया इस बात से अनजान था कि उसके बेटे का संबंध है उसकी छोटी बहन के साथ है,,,,, राजू अपनी बुआ को रोज जो देता है इस बात से हरिया बिलकुल बेखबर था लेकिन इस बात का भी डर अब राजू में बिल्कुल भी नहीं था,,,, अपने पिताजी को अपनी बुआ के साथ चुदाई करते हुए देख लिया है इस बात को अपनी मां से बताते हुए उसकी मां को बिल्कुल भी अच्छा नहीं हुआ था क्योंकि उसकी मां पहले से ही अपनी ननद और अपने पति के बीच के रिश्ते को जानती थी इस बात की हैरानी राजू को भी थी लेकिन,,,, किस बात से राजू भी खुश था कि उसकी मां अपने ही पति और अपनी मेहनत के बारे में जानकारी इसलिए खामोश थी कि अगर हरिया राजू और उसे रंगे हाथ पकड़ ले तो वह अपने पति का राज बता कर उसका मुंह बंद करवा सकती है,,,,

Raju k dwara apne pitaji ko batayi gayi mangadhant kahani k dwara



दोपहर में ही राजू अपनी बुआ और अपनी मां की जबरदस्त चुदाई करके दोनों को तृप्त कर चुका था,,,, एक साथ दो दो औरतों को चोदने का अनुभव प्राप्त करके राजू की मर्दाना ताकत मानव की ओर ज्यादा बढ़ चुकी थी उसे बिल्कुल भी थकान या कमजोरी महसूस नहीं होती थी बल्कि वह एक साथ दो दो बुर को पाकर और ज्यादा मस्त हो जाता था कभी अपनी मां की बुर में डालता तो कभी लंड को निकाल कर अपनी बुआ की बुर में डाल देता है ऐसा करने में उसे अद्भुत सुख प्राप्त हो रहा था,,,,, लेकिन इस बात से वह कभी इंकार नहीं कर सकता था कि सबसे ज्यादा मजा उसे अपनी मां की बुर से प्राप्त होता था,,,।

दिन भर आज बैलगाड़ी चलाने में हरिया का मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा था उसे यही चिंता सताए जा रही थी कि घर पर क्या हुआ होगा राजू अपनी मां के साथ क्या किया होगा क्या उसकी मां कुछ करने की होगी राजू की हरकत पर उसका क्या रवैया होगा,,,, हरिया को अपनी बीवी पर पूरा भरोसा था कि वह अपने बेटे को उसकी गलत हरकत को अंजाम नहीं होने देगी लेकिन इस बात का डर हरिया के मन में बैठ चुका था कि राजू का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और तगड़ा है और कहीं राजू ने अपनी मां को अपने मोटे तगड़े लंबे लंड के दर्शन करा दिए थे जो नहीं होना चाहिए वह हो जाएगा क्योंकि हरिया भी औरत की सबसे बड़ी कमजोरी को समझता था,,, और औरत की सबसे बड़ी कमजोरी होती है मर्दाना ताकत से भरा हुआ लंबा मोटा लंड,,, जोकि राजू के पास था और इसीलिए हरिया के मन में घबराहट भी हो रही थी इस बात को सोचकर वह हैरान हो रहा था कि अगर सच में अपने ही बेटे के साथ मधु ने संबंध बना ली तो क्या होगा,,,, वह तो कहीं का नहीं रह जाएगा लेकिन इस बात की भी तसल्ली उसने थी कि अगर वाकई में राजू ने यह बात बता दिया कि गुलाबी के साथ वह क्या कर रहा था तब तो और भी गजब हो जाएगा,,,, खयालों की इसी उधेड़बुन में लगे हुए वह‌ अपने घर कब पहुंच गया उसे पता ही नहीं चला,,,,

Raju apni ma ki chuchi se khelta hua

बेल गाड़ी लेकर जब वह घर पहुंचा तो रात हो चुकी थी चारों तरफ अंधेरा छा चुका था लोग अपने अपने घरों में लालटेन की रोशनी में खाना बना रहे थे,,,,, वैसे तो हरिया को भी भूख लग गई थी लेकिन उसकी उत्सुकता थी दिन के बारे में जानने की कि आज राजू ने क्या किया इसीलिए बैलगाड़ी को अपने घर के सामने खड़ी करके बेल को बैलगाड़ी से अलग करके वह पीछे की तरफ ले गया और उसे चारा पानी देकर वापस घर में आ गया और राजू को इशारा से अपने पास बुला कर उसे खेतों की तरफ ले कर चल दिया,,,, और उससे धीरे-धीरे बात करते हुए बोला,,,

क्या हुआ आज दिन में,,,(हरिया के मन में उत्सुकता भरी हुई थी जो कि उसके शब्दों से साफ झलक रहे थे राजू चाहता तो उसके और उसकी मां के बीच क्या हुआ वह ना बता कर अपने पिता को तसल्ली दे सकता था लेकिन वह ऐसा करना भी नहीं चाहता था क्योंकि वह जानबूझकर अपने पिता को अपनी और अपनी मां के बीच के बीच के संबंध के बारे में बताना चाहता था ताकि भविष्य में इस रिश्ते को लेकर कोई गलतफहमी ना हो,,,, और दोनों मां बेटे इसी तरह से मजा लेते रहें,,,,,)

क्या जानना जरूरी है,,,,!

Raju or uski ma



हां हां क्यों नहीं मैं जानना चाहता हूं कितने में क्या हुआ,,,?

अगर ना जानो तो अच्छा ही है,,,,

क्या मतलब,,,,,, तू कहना क्या चाहता है,,,,

कुछ भी नहीं कहना चाहता मैं खामोश रहना चाहता हूं ताकि सब कुछ ऐसे ही चलता रहे,,,

देख रहा हूं तुम मुझसे पहेलियां मत बुझा मुझे साफ-साफ बता के दिन में क्या हुआ,,,,,

अगर बता दिया तो हो सकता है कि तुम्हारा विश्वास मां के ऊपर से उठ जाए,,,,

नहीं राजू ऐसा नहीं हो सकता तेरी मां ऐसी बिल्कुल भी नहीं है वह तो बहुत सीधी-सादी और संस्कारी औरत है,,,,

Madhu or raju



तभी तो कह रहा हूं कि कुछ भी जानने की जरूरत नहीं है,,,,(गांव से दूर आकर खेतों के पास आकर राजू और हरिया दोनों खड़े हो गए,,,,, चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था इसलिए किसी के देखे जाने का डर भी नहीं था पर यहां पर वह इत्मीनान से बात कर सकता था,,,,)

नहीं मुझे तो बता जानना जरूरी है,,,, मैं अंधेरे में नहीं रहना चाहता,,,,

और मा को ना जाने कब से अंधेरे में रख रहे हो उसका क्या

वह तो मेरी गलती थी राजू जोकि अनजाने में हो गई,,,,

ऐसी कैसी गलती पिताजी कि समझ में नहीं आया क्या गलत क्या सही क्या है,,,, चोदने तक की प्रक्रिया तक पहुंचने मैं भी समय लगता है तब तक तो आप को होश आ जाना चाहिए कि आप क्या कर रहे हैं,,,,, माना कि आपने कुछ ऐसा देख लिया होगा बुआ में जिसे देख कर आपका दिमाग एकदम मदहोश हो गया होगा उनका कोई अंग देख लिए होंगे कुछ भी हो सकता है उनकी चूची उनकी कमरिया उनकी बोल दो कि अनजाने में ही तुम्हारी आंखों में तुम्हारी नजर में आ गई होगी,,,, काम करते हुए या पेशाब करते हुए कुछ तो देखोगे तभी तो तुम्हारे दिमाग में ऐसा ख्याल आया कि बुआ की चुदाई करने में मजा आएगा लेकिन,,,, बाकी दोनों टांगों के बीच पहुंचने में भी समय लगता है उनके कपड़े उतारना पड़ता है सलवार उतारनी पडी होगी कुर्ती उतारनी पडी होगी,,,,, माना कि बुआ की बुर देखकर तुम पागल हो गए होंगे लेकिन,,, जब तुम अपनी धोती उतार कर अपना लंड बुआ की बुर में डालने की तैयारी कीए होगे तब तो तुम्हें समझ जाना चाहिए कि तुम्हारे नीचे जो औरत है वह तुम्हारी बीवी नहीं बल्कि तुम्हारी बहन है,,,,, लेकिन ऐसा क्या तुम्हारे दिमाग में बिल्कुल भी नहीं आया होगा क्योंकि तुम्हारे द्वारा की गई यह गलती नहीं बल्कि तुम्हारे हवस का परिणाम है,,,,,।

(राजू अपने पिताजी के सामने ही अश्लील शब्दों में बातें कर रहा था उसे आप अपने पिता का बिल्कुल भी डर नहीं था वह अपने पिता के सामने कभी खुलकर बातें कर रहा था और उसकी बातों को सुनकर हरिया भी हैरान था लेकिन क्या करता गलती किए हुए पकड़े गया था इसलिए उसकी जुबान भी खामोश थी लेकिन अपने बेटे की बात सुनकर वह बोला)

लेकिन जो तू अपनी मां के साथ करना चाह रहा है वह क्या है वह भी तो एक हवस है,,,,।



हां इस बात को मैं मानता हूं कि मैं जो करने जा रहा था वह भी हवस है लेकिन वह तुम्हारी गलती की भरपाई है अपना मुंह बंद करने के लिए मैं ऐसा बिल्कुल भी ना करता मेरे मन में औरतों को लेकर इस तरह के ख्याल बिल्कुल भी नहीं आते थे लेकिन जब से मैंने तुम्हें अपनी ही बहन की बुर में लंड डालते हुए देखा हूं तब से ना जाने मेरे बदन में किस तरह की हरकत हो रही है बार-बार मेरा लंड खड़ा हो जा रहा है,,,,, और तो और तुम्हारे इस प्रस्ताव पर मेरा दिमाग एकदम से झन्ना गया कि मैं भी बुआ के साथ वह सब कुछ कर सकता हूं जो तुम कर रहे थे,,,,, इससे पहले मेरे मन में इस तरह की बातें कभी नहीं आती थी लेकिन तुम्हारे चलते मैं भी सोच में पड़ गया कि वाकई में औरत के साथ मजा आता होगा तभी तो तुम अपनी बहन के साथ चुदाई कर रहे थे,,,,

जब तुम्हारी हालत इस कदर खराब हो गई थी तो तुम्हें भी गुलाबी के साथ कर लेना चाहिए था ना,,,,



मेरी हालत देख कर मुझे भी यही ख्याल आया लेकिन इतना अच्छा मौका अपने अपने हाथ से भला कैसे जाने दे सकता था पहला अनुभव मैं बुआ के साथ नहीं बल्कि मां के साथ लेना चाहता था,,,, क्योंकि कई मायने में मां बहुत खूबसूरत है मुझे पूछने रानी होती है कि तुम मां जैसी खूबसूरत औरत को छोड़कर अपनी बहन के साथ शारीरिक संबंध बना लिए,,,, जबकि मां के साथ तुम्हें हर खुशी मिल रही थी,,,, और मेरी नजर में क्या सभी के नजर में मां की खूबसूरती का कोई दूसरा जोड़ आऊ है इसलिए मैं पहली बार ही मां को चोदना चाहता था,,,,,

तू मुझसे पहेलियां मत बुझा सिर्फ यह बता तेरी मां ने तुझे कुछ करने दि या फिर मार कर भगा दी,,,,,

पिताजी सुनोगे तो तुम्हारे होश उड़ जाएंगे,,,,, लेकिन तुम्हारा मानना भी एकदम सही था इतनी आसानी से माने मुझे अपना दी नहीं,,,,,



मतलब कि तूने अपनी मां को,,,,

हां पिताजी तुम ठीक ही सोच रहे हो लेकिन उसके लिए भी मुझे बहुत पापड़ बेलने पड़े,,,,,

(इतना सुनते ही हरिया एक बड़े से पत्थर पर बैठ गए उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसे अपनी बीवी पर पूरा भरोसा था उसे पूरा यकीन था कि वह राजू के साथ ऐसा बिल्कुल भी नहीं करेगी तू कितने वर्षों में वह अपनी बीवी के चरित्र को अच्छी तरह से समझ गया था लेकिन इस बात से भी वह इनकार नहीं कर पा रहा था कि इतने वर्षों में वह भी अपनी बीवी के साथ ही शारीरिक संबंध बनाकर संतुष्टि का अहसास प्राप्त कर रहा था लेकिन कुछ ही महीनों में उसका चरित्र बदल चुका था,,, और भाई यही सोच रहा था कि जब इतने बरसों में उसका चरित्र बदल सकता है तो उसकी बीवी का क्यों नहीं,,,,) पिताजी आप बिल्कुल भी चिंता मत करिए इस बात की तसल्ली रख ली कि मैंने मां को कुछ नहीं बताया अगर बता देता तो सोचो सब कुछ बदल जाता और तो और मेरी वजह से अब आप को खुली छूट मिल गई है आप बुआ के साथ अपनी काम क्रीड़ा जारी रख सकते हैं,,,,

वह सब तो ठीक है राजू लेकिन मुझे मधु से ऐसी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी,,,,



उम्मीद तो मुझे भी बिल्कुल भी नहीं थी मुझे इसी बात का डर था कि मां मुझे भगा देगी छूने नहीं देगी और इसके लिए मुझे बहुत कुछ करना पड़ा था तब जाकर में मां की चुदाई कर सका,,,,

लेकिन यह सब हुआ कैसे मतलब की मधु ऐसी औरत बिल्कुल भी नहीं है तेरी हिम्मत कैसे हो गई इतना कुछ करने की,,,,

क्या करूं पिताजी मुझे इतना तो पक्का यकीन हो गया था कि मेरी इस हरकत का आप किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं देंगे,,,, आपकी तरफ से और बुआ की तरफ से मेरा डर एकदम से खत्म हो गया था और एक औरत को चोदने का सोच कर ही मेरे तन बदन में अजीब सी हलचल मची हुई थी इसलिए मुझे तो हिम्मत दिखाना ही था क्योंकि मुझे अच्छी तरह से मालूम था कि डर के आगे ही जीत प्राप्त होती है मुझे इस डर से जीतना था,,,, और फिर मैं मां को बहलाने में लग गया,,,, और जानते हो पिताजी मैंने क्या किया,,,,

Madhu ki raseeli haseen boor



क्या किया,,,?(भारी मन से हरिया बोला)

मैं नहाने के लिए मां से ही एक बाल्टी पानी आंगन में ही मनाया मैं किसी भी तरह से मां को अपना लंड दिखाना चाहता था क्योंकि गांव की आवारा लड़कों के साथ मुझे इतना तो पता ही चल गया था कि औरतों की सबसे बड़ी कमजोरी मर्दों का लंड होता है,,,, इसीलिए मैं किसी भी तरह से मां को अपना लंड दिखाने की फिराक में लग गया,,,,,,(राजू की यह बनी बनाई बातें क्यों ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था लेकिन वह जानबूझकर अपने पिता को झूठ मूठ की कहानी सुना रहा था और हरिया भी बड़े ध्यान से अपने बेटे की कहानी को सुन रहा था)

फिर क्या हुआ,,,?



मां के बाल्टी लाने से पहले ही मैं अपने सारे कपड़े उतार कर एक छोटा सा टावल लपेट लिया और मां को चोदने के नाम से ही मेरा लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था जो कि टावल में तंबू बनाया हुआ था मैं अच्छी तरह से जानता था कि मां की नजर मेरे लंड पर जरूर पड़ेगी क्योंकि मेरे लंड की हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी और जैसे ही मां पानी से भरी बाल्टी लेकर आई और मेरे सोचने के मुताबिक ही मां की नजर मेरे लंड पर पड़ी और मां नीचे नजरों से मेरी दोनों टांगों के बीच के नजारे को ही देख रही थी,,,,, मैं मन ही मन खुश होने लगा,,,,,(अपने बेटे के मुंह से बनी बनाई कहानी को सुनकर हरिया का दिल जोरों से धड़क रहा था)

और जैसे ही माने पानी से भरी बाल्टी को मेरे पास रखी में लोटे से पानी निकाल कर अपने बदन पर डाल दिया था कि वह छोटा सा और पतला सा टूवाल एकदम से गीला होकर मेरे लंड से चिपक जाए और ऐसा ही हुआ पल भर में ही वह छोटा सा कपड़ा मेरे लंड पर एकदम से चिपक गया और गीला होने के नाते मेरा मोटा तगड़ा लंबा लंड एकदम साफ उभरकर नजर आने लगा मां की नजर मेरे लंड से बिल्कुल भी नहीं हट रही थी वह प्यासी आंखों से मेरी तरफ ही देख रही थी,,,,

फिर क्या हुआ,,,?(हरिया धड़कते दिल के साथ बोला)



फिर क्या था मां अपने काम में लगी हुई थी लेकिन तिरछी नजरों से मेरी तरफ देख रही थी वह कुछ बोल नहीं रही थी और वह मेरे लंड को ही देख रही थी मैं किसी भी तरह से अपने टावल को अपने बदन से अलग करना चाहता था,,,, और फिर मैंने पीठ मलने के बहाने मां को अपने करीब जिला है और मां बेझिझक मेरे करीब आ गई और मेरी पीठ को अपनी हथेली से मिलने लगी मैं खड़ा था मेरे ठीक पीछे ना करके मैं बार-बार पीछे मुड़ कर देख रहा था मेरी नजर मां की बड़ी बड़ी चूची ऊपर चली जा रही थी जो कि ब्लाउज का फायदा बटन खुला होने के नाते और ज्यादा बड़ी नजर आ रही थी,,,,,, मा भी किसी तरह से मेरी दोनों टांगों के बीच देखने की कोशिश कर रही थी और मैं उसकी इस कोशिश को सफल करने के लिए जानबूझकर अपने टुवाल को उतार कर फेंक दिया और एकदम नंगा हो गया और ठीक उनकी तरफ मुंह करके खड़ा हो गया मां एकदम से आश्चर्यचकित हो गई है उनका मुंह खुला का खुला रह गया और वह पागलों की तरह मेरे लंड को देख रही थी क्योंकि पूरी तरह से टनटनाकर खड़ा था,,,, मां कुछ भी बोल नहीं पा रही थी और मैं तुरंत मौका देखकर मां का हाथ पकड़कर अपने लंड पर रहती है और मां भी एकदम उत्तेजित होकर मेरे लंड को अपनी हथेली में महसूस करते ही कस के दबा दी मैं एकदम से मस्त हो गया लेकिन अगले ही पल मां को जैसे होश आ गया होगा कि हम दोनों के बीच रिश्ता कैसा है और वह तूने तो अपने हाथ को हटा दें और नजर को दूसरी तरफ घुमा ली,,,,, लेकिन मेरे तन बदन में आग लग चुकी थी मैं पागल हो चुका था मां की हथेली का स्पर्श पाकर मेरा लंड बाकी दूर में जाने के लिए तड़प उठा था,,,,, और मैं पीछे से जाकर मां को अपनी बाहों में भर लिया जिससे मेरा लंड सीधे उनकी बड़ी-बड़ी गांड में रगड़ने लगा,,,

Raju or uski ma



मां मुझसे अपने आप को छुड़ाने की भरपूर कोशिश कर रही थी लेकिन मैं मां को छोड़ने को तैयार ही नहीं था मां की गांड का स्पर्श पाकर मेरा लंड पूरी तरह से बवाल मचाने पर उतारू हो चुका था मैं सीधे सीधे ब्लाउज के ऊपर से ही मां की चूची को पकड़कर दबाते हुए बोला,,,,

क्या हुआ मैं तुम भी तो मेरा लंड देख रही थी तुम्हें भी मजा आ रहा है ना,,,,

नहीं राजू यह गलत है यह तू क्या कर रहा है पागल हो गया क्या,,,,



(मां की बातें सुनकर मैं समझ गया था कि अगर मैं पीछे हट गया तो मां मुझे कुछ भी करने नहीं देगी इसलिए मैं जबरदस्ती करता हुआ मां के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया और उनकी नंगी चूची को हाथ में लेकर दबाने लगा,,, उनका विरोध थोड़ा कम होने लगा था उनके मुख से अजीब सी आवाज आने लगी थी मुझे लगने लगा था कि शायद मां को भी अच्छा लग रहा है लेकिन वह फिर मुझे धक्का देकर हटा दी लेकिन ऐसा करने पर जो वह मेरी तरफ घूमी तो उनका नजर फिर से मिलने पर पड़ गई और मेरे अपने लंड को हाथ में लेकर उसे मुट्ठी आते हुए मां की तरफ आगे बढ़ने लगा मां की नजर विरोध करने के बावजूद भी मेरे लंड पर टिकी हुई थी शायद मां ने अब तक इस तरह का मोटा तगड़ा लंड नहीं देखी थी,,, मैं आगे बढ़ता हुआ बोला,,,

क्या हुआ मां पकड़ कर देखो कितना मजा आ रहा है,,,

राजू तू पागल हो गया है तेरे पिताजी को पता चला तो तुझे मार-मार कर घर से भगा देंगे तुम समझ नहीं रहा है कि तू कितना गलत कर रहा है,,,,

नहीं मां यह बिल्कुल भी गलत नहीं है जो कुछ भी हो रहा है उसे हो जाने दो,,,,





नहीं नहीं मैं तुझे ऐसा कुछ भी करने नहीं दूंगी,,,,,

(मां की बात सुनकर मैं समझ गया कि पिताजी जो कुछ भी कह रहे थे सच कह रहे थे लेकिन मैं एक बार फिर से मां को अपनी बाहों में भर लिया और उनके लाल लाल होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसना शुरू कर दिया आखिरकार वह एक औरत थी और मैं मर्दाना ताकत से भरा हुआ नौजवान लड़का अपनी मर्दानगी भरी गर्मी से मां के हौसले को पूरी तरह से पिघला दिया था,,,, पीछे से अपनी गांड पर मेरे मोटे तगड़े लंड की रगड को तो वह बर्दाश्त कर गई थी लेकिन आगे से अपनी बुर पर मेरे लंड की ठोकर को बर्दाश्त नहीं कर पाई और पूरी तरह से मेरी बाहों में समा गई और अपना विरोध छोड़ दी,,, और इसी मौके का फायदा उठाते हुए मैंने तुरंत मां को अपनी गोद में उठा लिया क्योंकि बुआ भी घर पर नहीं थी और मैं मां को होने के कमरे में ले जाकर के खटिया पर पटक दिया और फिर उनकी दोनों टांगों के बीच आकर उनकी साड़ी को पूरी तरह से खोलकर उन्हें नंगी कर दिया एक बार नंगी हो जाने के बाद मां के बदन में भी उत्तेजना की लार दूंगा लगी बाकी प्यासी नजरों से मेरी लंड की तरफ देखने लगी और मैं अगले ही पल बिना कुछ बोले अपने मोटे तगड़े लंड पर थोड़ा सा थूक लगाकर मां की बुर में डालना शुरू कर दिया,,,, और वाकई में पीताजी मां की बुर इतनी कसी हुई थी कि मेरा मोटा लंड उसमें जा ही रहा था,,,, फिर पता है मैंने क्या कहा,,,?

क्या कहा,,,(कंपकपाते होठों से हरिया ने बोला,,,)

मैंने कहा कि तेरा मोटा और लंबा है थोड़ा सा थुक लगा ले वरना घुस नहीं पाएगा,,,,

क्या,,तेरी मां ने ऐसा कहा,,,(एकदम आश्चर्यचकित होकर हरिया बोला)



हां पिताजी मैंने ऐसा ही कहा मैं भी मां की बात सुनकर एकदम उत्तेजित हो गया और मां के कहे अनुसार ढेर सारा थूक मां की बुर और अपने लंड पर लगाएं और उसके बाद जैसे ही मैंने अपने लंड को मां की बुर में डालना शुरू किया वह बड़े आराम से अंदर घुस गया और उसके बाद तो मैंने मां की जमकर चुदाई करना शुरू कर दिया,,,,

मुझे तो लगा कि अकेले कहीं बाहर में खत्म हो गया लेकिन इसके बाद दो बार और माने चुदवाई और खुद अपने मुंह से कह कर वरना मैं एक ही बार चोद कर घर से चला गया होता लेकिन तीन बार चुदाई करते करते शाम हो गई थी,,,,

(अपने बेटे के मुंह से अपने बेटे और अपनी बीवी की कामलीला सुनकर हरिया एकदम पसीने से तरबतर हो चुका था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जो कुछ भी राजू ने कहा है उसमें जरा भी सच्चाई है लेकिन उसके पास मानने के सिवा और कोई रास्ता भी नहीं था अब वहां बैठे रहने से कोई फायदा नहीं था हरिया की उत्सुकता राजू ने अपनी बातों से खत्म कर दिया था राजू अच्छी तरह से जानता था कि हरिया अपनी बीवी से उसके द्वारा बताई गई कहानी पूछेगा नहीं इसीलिए राजू मंघड़ंत नमक मिर्च लगाकर एक कहानी सुना दिया था जिसे सुनकर हरिया की खुद की हालत खराब हो गई थी अपनी जगह से उठा और गांव की तरफ चलने लगा लेकिन फिर भी वह बोला)

मुझे मधु से ऐसी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं दे रहा जो लेकिन ना जाने क्यों मेरा दिल कह रहा है कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ होगा,,,,

तुमसे बहुत प्यार करते हो ना पिता जी इसके लिए लेकिन अगर तुम्हें मेरी बातों पर यकीन नहीं आ रहा है तो अपनी आंखों से देख सकते हो,,,

मतलब,,,,

मतलब कि आज की रात तो नहीं लेकिन कल बहाना करके रात को चले जाना कि मैं बगल वाले गांव में शादी में जा रहा हूं और उसके बाद वहां जाना नहीं और 2 घंटे बाद दबे पांव घर में चले आना मैं मां के कमरे का दरवाजा हल्का सा खोल कर रख लूंगा और फिर अपनी आंखों से देख लेना कि मेरी बातों में सच्चाई है कि नहीं,,,,,

ठीक है राजू,,,,, लेकिन तूने अपना मुंह बंद करने के लिए बहुत बड़ी कीमत मुझसे चुकवा लिया है,,,

क्या करूं पिताजी तुम्हारी गलती भी तो बहुत बड़ी थी इसलिए हर्जाना भी तो बहुत बड़ा चुकाना ही होता,,,,(राजू मुस्कुराता हुआ बोला और दोनों घर पर पहुंच गए)
 
राजू की बातें हरिया के कानों में शुल की तरह चुभ रही थी लेकिन वह मजबूर था,,, उसे अपने ही बेटे के द्वारा बहुत बड़ी सजा मिली थी लेकिन फिर उसे अपने ही बेटे की बात याद आ गई कि गलती भी तो बहुत बड़ी थी आखिरकार उसका बेटा सच ही कह रहा था कि हरिया के द्वारा की गई गलती भी बहुत बड़ी थी क्योंकि वह अपनी बहन के साथ शारीरिक संबंध बना रहा था,,,,,,,,,,,,, राजू ने तो अपने पिता को,,, आमंत्रण तक दे डाला था कि अगर उसकी कई बातों पर उसे विश्वास ना हो तो अपनी आंखों से सब कुछ देख सकता है,,, और इसी बात को लेकर हरिया बहुत परेशान था सब कुछ उसे मुमकिन लगता था लेकिन मधु का इस तरह से बेवफाई करना नामुमकिन लग रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह राजू की बातों पर भरोसा करें या वह यह समझे कि राजू बनावटी बातें कर रहा है,,,

लेकिन जिस तरह कि उसने कहानी सुनाई थी उसे सुनकर हरिया को ना चाहते हुए भी अपने बेटे की बातों का विश्वास करना पड़ रहा था क्योंकि हरिया भी अपनी आंखों से अपने बेटे के लंड को देख चुका था जो कि उसका लंड नहीं एकदम मुसल था,,,,,

मधु और राजु



जैसे तैसे करके वह रात गुजार दिया लेकिन उसका मन नहीं मान रहा था वह इस बात को मधु से तो पूछ नहीं सकता था क्योंकि मधु इस तरह की बातों का जवाब देना उचित नहीं समझती और हो सकता था कि इस तरह के सवाल से मधु एकदम से भड़क जाए जिसमें हरिया का ही घाटा निश्चित नजर आ रहा था,,,,,,,,, अपने मन की शांति के लिए वह अपने मन में ठान लिया था कि आज वह अपनी बीवी की हकीकत को जानकारी रहेगा जिस पर वह इतना भरोसा करता था क्या वाकई में मधु ने उसके भरोसे को तार-तार कर दिया है बरसों के प्यार मोहब्बत को विश्वास को पलभर में ही बिस्तर पर पिघलाकर बेवफा बन गई,,,,, वैसे तो हरिया को अपने बेटे की बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था लेकिन फिर भी वह पूरी तरह से अपने मन में उठे शंका को निश्चित कर लेना चाहता था,,,,

इसलिए आज वह सुबह से ही अपने घर में बता दिया कि आज बारात को पड़ोस के गांव में शादी में जाने वाला है इस बात को सुनते ही राजू का‌ मन मयूर बन कर नाचने लगा,,,, वह अपने मन में यह सोच कर बहुत ज्यादा उत्तेजित और खुश हो रहा था कि आज वह अपने ही बाप की आंखों के सामने अपनी ही मां की चुदाई करेगा,,,, वह मंजर कैसा होगा वह एहसास कैसा होगा इस बारे में सोच सोच कर ही उसके बदन में गुदगुदी हो रही थी,,,,, उसकी मां और उसकी बुआ को यही लग रहा था कि वास्तव में वह शादी में जाने वाले हैं इसलिए वह लोग बिल्कुल सहज थे लेकिन इस बात से खुद हरिया और राजू असहज थे,,,,, राजू को इस बात से और उसके तन बदन में आग लगी हुई थी कि उसके पिताजी ने इशारों में ही अपनी बीवी को चुदते हुए देखने का आग्रह कर दिए थे,,,,, नित्य कर्म से निपट कर हरिया बेल गाड़ी लेकर रोज की तरह घर से निकल गया था जिस तरह से हरिया को रात होने का इंतजार था उसी बेसब्री से राजू को भी रात होने का इंतजार था वह आज अपनी मां के साथ अपने पिताजी की आंखों के सामने ही सुहागरात मनाना चाहता था आज की रात वह एकदम हसीन बना देना चाहता था,,,,, और इस बारे में राजू ने अपनी मां को भनक तक नहीं लगने दिया था वह चाहता था कि कमरे के अंदर उसकी मां उसके साथ एकदम खुल कर मजे ले उसे इस बात का अहसास तक नहीं होना चाहिए कि कमरे के बाहर दरवाजे पर खड़े होकर खुद उसके पतिदेव उसकी काम क्रीड़ा को अपनी आंखों से देख रहे हैं वरना वह काम क्रीडा में आत्मविश्वास नहीं दिखा पाएगी और बार-बार दरवाजे पर अपने पति के खड़े होने का एहसास उसे शर्मिंदगी का अहसास दिलाएगा,,,,।

मधु ओर राजू



आखिरकार शाम के ढलते ही हरिया बेल गाड़ी लेकर घर पर पहुंच गया था और अपने आप को कोश रहा था कि आखिर क्यों वह रंगे हाथों पकड़ा गया अगर ऐसा ना होता तो शायद आज जीवन की तस्वीर इस तरह से बदल नहीं गई होती लेकिन जो होना था वह तो हो गया था लेकिन अब आगे जो होना था उसके बारे में लेकर हरिया चिंतित भी था और अपने आपको तैयार भी कर रहा था आखिरकार एक पति जो अपनी बीवी को एकदम चरित्रवान और संस्कारी समझता है जिस पर आंख बंद करके वह भरोसा कर सकता है ऐसी बीवी अगर किसी गैर मर्द के साथ हमबिस्तर हो जाए तो उस पति पर क्या गुजरेगी,,,, यही एहसास हरिया को दुखी कर रहा था,,,,,

मौका देखकर राजू ने अपनी मां से अपने मन की बात कर दिया था कि आज उसके पिताजी शादी में जाने वाले हैं और सुबह ही लौटेंगे तो क्यों ना आज के साथ रंगीन कर ली जाए और जिसमें मधु को बिल्कुल भी इनकार नहीं था वह तो पहले से ही तैयार थी मतलब अपने मन में सोच रही थी कि अच्छा हुआ या बाद राजू ने कह दिया वरना वह खुद राजू को अपने कमरे में बुलाने वाली थी,,,,

हरिया सिर्फ एक रोटी खाकर यह कहकर घर से निकल गया कि शादी में जाकर खाएगा इसलिए किसी को हरिया की बातों पर शक भी नहीं हुआ और हरिया घर से निकल गया मधु और राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था गुलाबी भी पूरी तरह से निश्चिंत थी,,,, जिस तरह की कुल बुला हट मधु को अपनी बुर में महसूस हो रही थी उसी तरह की कुलबुलाहट गुलाबी को अपनी भी बुर में महसूस हो रही थी,,,, इसलिए राजू अपनी मां के कमरे में जाने से पहले गुलाबी को अपने कमरे में ले गया और जमकर उसकी चुदाई करने के बाद उसे उसी हाल में खटिया पर छोड़कर कमरे से बाहर निकल गया क्योंकि राजू इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि जमकर चुदा लेने के बाद गुलाबी गहरी नींद में सो जाती है,,,,।

मधु की गोरी गोरी गांड और राजु का बमपिलाड लंड



राजू धीरे से अपने कमरे से बाहर निकला चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था वह अपनी मां के कमरे की तरफ देखा तो दरवाजा हल्का से खुला हुआ था और अंदर लालटेन की पीली रोशनी कमरे को प्रकाशित कर रही थी वह अपनी मां के कमरे की तरफ जाने के बजाए घर के मुख्य द्वार की तरफ चल दिया ताकि घर के मुख्य द्वार को वहां खोल सके और मुख्य द्वार से उसके पिताजी घर में प्रवेश कर सकें वह जैसे ही मुख्य द्वार पर पहुंचकर दरवाजा खोलकर बाहर की तरफ देखा तो दीवाल की ओट से सटकर उसके पिताजी खड़े थे और राजू अपने पिताजी को देख कर मुस्कुराया और उन्हें अंदर आने का आमंत्रण दिया यह पल बेहद अद्भुत और उत्तेजना से भरा हुआ था राजू के लिए यह पर उत्तेजना से भरा हुआ था लेकिन हरिया के लिए यह पल डूब मरने वाला जैसा था क्योंकि वह अपनी आंखों से अपनी बीवी को अपने ही बेटे से चुदवाते हुए देखने जा रहा था,,,,,, धीरे से हरिया घर में प्रवेश किया और राजू दरवाजे को बंद करके कभी लगा दिया और होठो पर उंगली रखकर शांत रहने का इशारा करते हुए अपने पिताजी को पीछे पीछे आने का इशारा कर दिया,,,,

बाप बेटे दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था और कमरे में करवटें बदलते हुए मधु का भी दिल जोरों से धड़क रहा था देखते ही देखते दोनों बाप बेटे मधु के कमरे के करीब पहुंच गए जिसका दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था और हल्के से खुले हुए दरवाजे को देखकर ही हरिया समझ गया कि आखिरकार मामला क्या है क्योंकि इस तरह से मधु अपने दरवाजे को कभी खुला नहीं छोड़ दी थी पहली नजर में ही हरिया पूरी तरह से विवश हो गया था वह समझ गया था कि राजू जो कुछ भी कह रहा था उसमें सच्चाई थी,,,,, राजू धीरे से अपनी मां के कमरे में प्रवेश किया और दरवाजे को हम कैसे बिना करी लगाए बंद कर दिया और दरवाजा बंद होने के बावजूद भी उसमें इतनी जगह तो थी ही कि हरिया आराम से कमरे के अंदर के हर एक पल को अपनी आंखों से आराम से और एकदम साफ तौर पर देख सके क्योंकि कमरे के अंदर लालटेन भी जल रही थी जिसकी पीली रोशनी पूरे कमरे में फैली हुई थी,,,,,।

मधु अपने बेटे के साथ



राजू कमरे में प्रवेश करते ही खटिया पर पीठ के बल लेटी हुई अपनी मां पर नजर दौड़ाया और मुस्कुराने लगा जोकि हरिया भी दरवाजे पर अपनी नजर टीका कर कमरे के अंदर देखने लगा जो कि एकदम साफ दिखाई दे रहा था उसे दिखाई दे रहा था कि उसकी बीवी खटिया पर पीठ के बल लेटी हुई थी और उसकी साड़ी उसकी छाती से नीचे गिरी हुई थी और उसके विशाल छाती ब्लाउज में कैद नजर आ रही थी जो कि गहरी गहरी सांस लेने की वजह से उसके खरबूजे जैसी चूचियां बलाउज में कैद होने के बावजूद भी ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देख कर किसी भी मर्द का लंड खड़ा हो जाए,,,,, सबसे पहले उसे अपनी बीवी की आवाज सुनाई दी और उसे सुनकर वह दंग रह गया,,,,।

क्या रे राजू कितना इंतजार करवा रहा है मेरी हालत खराब हो रही है और तू है कि सो रहा था,,,

नहीं मां तुम्हारी खूबसूरत जवानी का रस चखने के बाद भला मेरी आंखों में नींद कैसे आ सकती है मैं तो इसी समय का इंतजार कर रहा था,,,,,

क्यों जल्दी नहीं आ सकता था क्या,,,,

अरे मुझे डर था कि कहीं पिता जी वापस आ गए तो,,,

चुदवाते समय मधु की हिलती हुई चुचीया

वह


अरे अब वह सुबह ही लौटेंगे तभी तो मैं तेरा इतनी बेसब्री से इंतजार कर रही थी,,,।

(इतना सुनते ही हरिया के कान खड़े हो गए उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि पहली बार में ही यह असर है अभी उसे अपने बेटे के लंड की मजबूती का एहसास हुआ और उसे पक्का विश्वास हो गया कि दुनिया की हर एक औरत मोटे तगड़े लंबे लंड को देखकर अपने ईमान से अपने संस्कार से फिसल सकती हैं जिसका जीता जागता सबूत उसकी आंखों के सामने था,,,, अपनी मां की बात सुनकर राजू जवाब देते हुए बोला,,,)

मुझे जरा भी इस बात का एहसास होता तो मैं अब तक तुम्हारी बाहों में होता,,,,

तो देर किस बात की है आजा मैं तो कब से तैयार हूं,,,,

तुम चिंता मत करो मैं आज की रात तुम्हारी जिंदगी की इतनी हसीन रात बना दूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,(अपने कुर्ते को उतारता हुआ राजू बोला और खटिए पर पीठ के बल लेटी हुई मधु अपनी नजरों को अपने बेटे की तरफ घुमा कर उसके पजामे में बने तंबू को देखने लगी और बोली,,,)

तेरे से जल्दी तो तेरा लंड तैयार हो जाता है,,,, देख कैसा पजामे में उछल रहा है,,,

क्या करूं मैं तुम्हारी नमकीन जवानी को देखकर ही इसकी हालत खराब हो जाती है,,,।

(हरिया तो अपनी बीवी के मुंह से लंड शब्द सुनकर एकदम से चौक गया था दोनों मां बेटों की बातें उसके तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर रही थी एक तरफ उसे अपनी बीवी की बातों को सुनकर उसकी हरकत को देख कर गुस्सा भी आ रहा था तो अंदर का गरमा गरम नजारा उसे उत्तेजित भी कर रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें इतना तो तय हो गया था कि उसके बेटे ने जो कुछ भी बताया था उसमें बिल्कुल भी अविश्वसनीय झूठापन नहीं था बल्कि उसका का एक-एक शब्द सच्चाई से भरा हुआ था जो कि वह अपनी आंखों से देख रहा था,,,, हरिया की खुद की हालत खराब हो रही थी क्योंकि खटिया पर लेटी हुई मधु की चूचियां जिस तरह से ऊपर नीचे हो रही थी उसे देखकर हरिया की धोती में हलचल मचने लगी थी,,, देखते ही देखते राजू अपनी कुर्ते को उतार फेंका था उसकी नंगी चौड़ी छाती को देखकर मधु के तन बदन में आग लग रही थी वह जल्द से जल्द अपने बेटे की चौड़ी छाती में समा जाना चाहती थी उसकी बाहों में अपने आपको सिमटता हुआ महसूस करना चाहती थी इसलिए खुद मधु अपनी बाहों को अपने बेटे की तरह फैला कर उसे खटिया पर आने का आमंत्रण दे रही थी जिसे राजू बिल्कुल भी ठुकराने के मूड में नहीं था और वह पजामे के ऊपर से ही अपनी खड़े लंड को पकड़ कर उसे जोर से दबाते हुए अपनी मां की तरफ आगे बढ़ने लगा,,,,, राजू अच्छी तरह से जानता था कि अब कुछ भी छुपाने से कोई फायदा नहीं है लेकिन वह इस बात को अपनी मां से बिल्कुल भी बताना नहीं चाहता था कि दरवाजे पर उसके पिताजी खड़े हैं वरना जिस तरह से प्राकृतिक रूप से उसकी मां हमबिस्तर होने में उसका साथ दे रही है ऐसा वह हीचक के मारा कर नहीं पाएगी और फिर सारा मजा किरकिरा हो जाएगा,,,,,

लालटेन की पीली रोशनी में सबकुछ साफ नजर जा था राजू और मधु दोनों ने ही कमरे में अंधेरा करना,,, उचित नहीं समझा और इसीलिए उजाले में ही काम क्रीड़ा को अंजाम देने लगे देखते ही देखते राजू खटिया पर घुटनों के बल चल गया और तुरंत अपने दोनों हाथों को अपनी मां की पीठ के नीचे की तरफ ले जाकर उसे हल्के से उठा लिया और उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख कर उसे चुंबन करने लगा या देखकर दरवाजे पर खड़ा हरिया तिलमिला उठा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि जो कुछ भी वह अपनी आंखों से देख रहा है वह हकीकत है या कोई सपना है क्योंकि वह कभी इस तरह के नजारे के बारे में कल्पना भी नहीं किया था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी बीवी उसे इस तरह की बेवफाई करेगी,,,,,

राजू पागलों की तरह अपनी मां के लाल लाल होठों को अपने मुंह में लेकर चूसने का उसके रस को नहीं छोड़ रहा था जिसमें हरिया की बीवी उसका बराबर का साथ दे रहे थे और अपने दोनों हाथों का घेरा बनाकर उसकी पीठ को सहला रही थी मानो कि जैसे उसे शाबाशी दे रही हो,,,,

कुछ देर तक राजू इसी तरह से अपनी मां के लाल लाल होठों का रसपान करते रहो अच्छी तरह से जानता था कि दरवाजे पर खड़े उसके पिताजी सब कुछ देख रहे होंगे और ना जाने अपने मन में कैसे-कैसे विचार ला रहे होंगे,,,,, राजू सब कुछ जानता था इस मौके को वह हाथ से जाने नहीं देना चाहता था वह आज वह अपने पिताजी के सामने अपनी मां की ऐसी चलकर चुदाई करना चाहता था जिसे देखकर उसके पिताजी भी दंग रह जाएं,,,, उसके पिताजी को इस बात का एहसास हो कि असली मर्द किसे कहते हैं,,,,, इसीलिए कुछ देर तक अपनी मां के लाल लाल होठों का रस पीने के बाद राजू अपनी मां के होठों से अपने होठों को अलग करके गहरी गहरी सांस लेते हुए आंखों में खुमारी लेकर अपनी मां की तरफ देखने लगा और मधु भी अपने बेटे की तरफ देखने लगी और मंद मंद मुस्कुराते हुए शर्मा गई और बोली,,,,।

इस तरह से मत देख मुझे शर्म आती है,,,,

अच्छा जब मेरा मोटा लंड अपनी बुर में लेती हो तब शर्म नहीं आती,,,,।

(हरिया के कानों में अपनी बीवी और अपने बेटे की बात पढ़ते ही उसके तो होश उड़ गए इस तरह से खुलकर दोनों बात करेंगे इस बात का अंदाजा हरिया को बिल्कुल भी नहीं था इस तरह से खुलकर दो हरिया भी अपनी बीवी से बात नहीं करता था,,,, इसीलिए तो हरिया उन दोनों की बातों को सुनकर हैरान हो गया था और राजू की बात सुनकर हरिया की बीवी जवाब देते हुए बोली,,,)

बुर की बात कुछ और होती है वह तो पागल हो जाती है तेरे लंड को अपने अंदर लेकर लेकिन जब तुम मेरे चेहरे को इस तरह से देखता है तो शर्म से मेरा चेहरा लाल हो जाता है,,,,

और जब तुम्हारा चेहरा शर्म से लाल हो जाता है तो तुम दुनिया की सबसे ज्यादा खूबसूरत औरत नजर आने लगती हो जैसा कि इस समय तुम्हारे चेहरे पर शर्म की लाली एकदम साफ दिखाई दे रही है मुझसे रहा नहीं जा रहा है मां,,,,, बोलो तो आगे बढ़ु,,,,

(राजू जानबूझकर इस तरह की बातें कर रहा था वह जानबूझकर आगे बढ़ने के लिए अपनी मां की इजाजत मांग रहा था वह जानता था कि उसकी मां उसे इनकार करने वाली नहीं है और अपनी मां की हामी सुनकर उसके पिताजी की हालत खराब हो जाएगी इसलिए राजू की बात को सुनकर मधु शरमाते हुए बोली)

तुझे रोका किसने है रे मेरे तन बदन पर तेरा पूरा अधिकार है क्योंकि तुझे मैं अपना तन सौंपती हूं तो तुझसे भी मुझे एक अपेक्षा रहती है कि तू मुझे संपूर्ण संतुष्टि का अहसास कराएगा और जिसमें तो सफल भी हो जाता है इसीलिए तो मैं तुझे बिल्कुल भी रोक नहीं रही हूं तू अपनी मर्जी से आगे बढ़े और मुझे अपनी बाहों में लेकर पिघला दे,,,

ओहहहह मां तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो तुम निश्चिंत रहो तुम्हें इतना सुख दूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी लेकिन पहले हम दोनों के प्यार करने के बीच में जो वस्त्र आ रहे हैं उन्हें तो उतार दुंं,,,,

उतार दे बेटा तू सही कह रहा है इस खेल को खेलने के लिए नंगी होना बहुत जरूरी है वरना खेल का मजा अधूरा रह जाता है,,,,

अभी तुम्हारे कपड़े उतार कर तुम्हें नंगी कर देता हूं,,,

(इतना कहने के साथ ही राजू अपने दोनों हाथों को बढ़ाकर अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोलने लगा और यह नजारा देखकर दरवाजे पर खड़े हरिया की हालत खराब होने लगे उसकी आंखों में खून उतर आ रहा था लेकिन जितना खून उसकी आंखों में उतर रहा था उससे भी कहीं ज्यादा खून उसके लंड पर उतर रहा था जिसके चलते ना चाहते हुए भी अंदर के नजारे को देखकर खुद उसका भी लंड खड़ा हो गया था उसे समझ में नहीं आ रहा था किस तरह के नजारे को देखकर गुस्सा करेगा इस नजारे का आनंद ले,,,, क्योंकि जिंदगी में पहली बार वह अपनी आंखों से चुदाई के खेल को देख रहा था,,,,, देखते ही देखते एक-एक करके राजू अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया और अगले ही पल उसके दोनों खरबूजे ब्लाउज के कैद से आजाद हो गए,,,,, अपनी मां के खरबूजे को देखकर राजू की हालत खराब होने लगी और वह फटी आंखों से अपनी मां की चुचियों को देखने लगा,,,, ऐसा नहीं था कि राजू पहली बार अपनी मां को नंगी कर रहा था उसकी चूची को देख रहा था बल्कि इस बार उसकी उत्तेजना और अत्यधिक बढ़ गई थी क्योंकि दरवाजे पर खुद उसके पिताजी खड़े होकर इस दृश्य को देख रहे थे और यह सोचकर वह और भी ज्यादा उत्तेजित था कि एक बाप को कैसा महसूस होता है जब उसका ही बेटा उसकी ही बीवी को अपने हाथों से ही के कपड़े उतारकर उसे नंगी करें और यही एहसास इस समय राजू के तन बदन में आग लगाया हुआ था अपनी मां की नंगी चूचियों को देखकर अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर दोनों सूची को दोनों हाथों में दशहरी आम की तरह पकड़कर दबाते हुए राजू एक बार फिर से अपनी मां के लाल लाल होठों पर हाथ रख दिया और उसके लाल होठों को चूसते हुए जोर-जोर से चूची को दबाना शुरू कर दिया राजू की हरकत से मधु के तन बदन में आग लगने लगी एकदम से उत्तेजना से बिलबिला उठी,,,,,।

सहहहरह आहहहहहह राजु,,,,,,

मजा आ रहा है ना मां,,,,

हा रे बहुत मजा आ रहा है तु कितनी जोर जोर से दबा रहा है,,,,,,,,,

क्या करूं मां तुम्हारी बड़ी बड़ी चूची देख कर मुझसे रहा नहीं जाता,,,,, कल तुम्हें बहुत मजा आया था ना,,,,

कमरे में राजु और उसकी मां कुछ ईस तरह से



हा रे पगले कल मुझे बहुत मजा आया था ऐसा सुख तो तेरे पिताजी ने भी आज तक नहीं दिया,,,,।

(इतना सुनते ही हरिया के होश उड़ गए उसे इसी बात का डर था वह जानता था कि,,, राजू के मोटे तगड़े लंबे लंड को एक बार अपनी बुर में ले लेने के बाद मधु उसकी दीवानी हो जाएगी,,,,, और उसका यह डर हकीकत में बदलता नजर आ रहा था हरिया को अपनी बीवी से इस तरह के नीच हरकत की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी उसे ऐसा ही लगता था कि राजू के मन की बात जानते ही उसकी बीवी राजू को डाटेगी फटकारेगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था बल्कि उल्टा एक मां अपने ही बेटे की मर्दानी की की दीवानी हो चुकी थी जो कि इस समय कमरे के अंदर पूरी तरह से बेशर्मी पर उतर आई थी,,,,, राजू पागलों की तरह अपनी मां के दशहरी आम को जोर जोर से दबा दबा उसका रस निचोड़ रहा था और मधु मदहोश ले जा रही थी उसकी आंखों में 100 बोतलों का नशा छाया हुआ था जो कि किसी भी तरह से उतरने वाला नहीं था,,,,, लेकिन अगले ही पल हरिया की आंखों के सामने जो दृश्य नजर आया उसे देखकर हरिया के होश उड़ गए क्योंकि आज तक इस तरह की क्रिया बेशर्मी से भरी हुई खुद उसके साथ उसकी बीवी ने नहीं की थी लेकिन अपने बेटे के साथ और पूरी तरह से खुल चुकी थी दरवाजे के पीछे खड़े होकर हरिया ने देखा कि उसकी बीवी पजामे के ऊपर से ही अपने बेटे के लंड को पकड़कर दबाते हुए गरम आहें भर रही थी और बोली,,,,

सहहहह आहहहहह मेरे बेटे,,,, तेरा तो एकदम मुसल जैसा खड़ा हो गया है रे,,,,।

आहहहह मां धीरे से क्या करूं जब से तुम्हारी बुर के दर्शन हुए हैं तब से मेरे लंड की हालत ऐसे ही खराब रहती है,,,,

मेरी बुर तुझे इतनी प्यारी लगने लगी है,,,,

राजु और उसकी मां कुछ ईस तरह से



तो क्या दुनिया में मेरे लिए तुम्हारी बुर से बेशकीमती उपहार और कोई नहीं है,,,, एक तरफ दुनिया भर का खजाना पड़ा हो और एक तरफ तुम्हारी बुर तुम्हें खजाना को छोड़कर तुम्हारी बुर को पसंद करो क्योंकि जो मजा जो स्वर्ग का आनंद मुझे तुम्हारी बुर से मिलता है वह मुझे दुनिया भर के खजाने से कभी नहीं मिल सकता,,,,,

ओह मेरे राजा मैं कभी सोची नहीं थी कि तू मेरी बुर से इतना प्यार करने लगेगा,,,(पैजामा के ऊपर से ही मधु अपने बेटे के लंड को जोर-जोर से दबाते हुए बोली अंदर के गरमा गरम नजारे को देखकर और मां बेटे की मदहोश कर देने वाली वार्तालाप को सुन कर खुद हरिया के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी इस समय हरिया को अपनी बीवी एक रंडी की तरह लग रही थी जो कि पूरी तरह से अपने रंडी पन पर उतर आई थी,,,,,)

मुझे तो तुमसे तुम्हारी खूबसूरत बदन से तुम्हारे हर एक अंग से प्यार हो गया है,,,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपनी प्यासे होठों को आगे बढ़ाया और अगले ही पल अपनी मां की चूची के छुहारे को मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया और अपने बेटे की इस हरकत पर मधु पूरी तरह से सिहर उठी,,,,,, राजू पागलों की तरह अपनी मां की दोनों चूची को दबा दबा कर उसे मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया था मानो कोई भूखा बच्चा दूध पीने की कोशिश कर रहा हो,,,, कुछ देर तक राजू इसी तरह से अपनी मां की दोनों चुचियों को दशहरी आम समझकर बारी-बारी से पीता रहा,,,, और राजू को इस बात का एहसास और ज्यादा मदहोश कर रहा था कि बाहर दरवाजे पर खड़े होकर उसके पिता अंदर के नजारे को अपनी आंखों से देख रहे हैं और यह भी देख रहे हैं कि एक जवान लड़का कैसे अपनी मां के खूबसूरत अंगों से खेल रहा है,,,,। हरिया की धोती में उसका खुद का लंड बगावत पर उतर आया था जिस तरह का नजारा वह अपनी आंखों से देख रहा था उसका मन कर रहा था कि जाकर अपनी बहन के कमरे का दरवाजा खोल कर कमरे में प्रवेश कर जाए और फिर उसकी जमकर चुदाई करके अपने बदन की गर्मी को शांत कर दें लेकिन शायद उस सुख से ज्यादा अत्यधिक सुख उसे इस समय अपने बीवी और अपने बेटे की कामलीला कुछ ज्यादा ही आनंददायक लग रहा था,,,,,

लालटेन की पीली रोशनी में हरिया को एकदम साफ नजर आ रहा था और राजू खुद कमरे की लालटेन को बुझाने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं किया था और जानबूझकर कमरे में उजाला किए हुए था ताकि उसके पिताजी अपनी ही बीवी की कामलीला को अपनी आंखों से देख सकें,,,,, मधु की गरम आहे साफ बयां कर रही थी कि उससे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था वह पागलों की तरह पजामे में कैद अपने बेटे के लंड को जोर जोर से दबा रही थी लेकिन जब बिल्कुल भी बर्दाश्त से बाहर हो गया तो वह अपने बेटे से बोली,,,,)

राजू और उसकी मां कुछ ईस तरह से



मेरे राजा मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है जल्दी से अपना पजामा उतार दे,,,,, मैं तेरे लंड को अपनी आंखों से देखना चाहती हूं इसे छूना चाहती हूं पकड़ना चाहती हूं दबोचना चाहती हूं,,,,, जल्दी कर मेरे राजा,,,,ओहहहह मेरे राजा,,,,,

(इतना सुनते ही राजू जो कि पहले से ही खटिया पर बैठा हुआ था वह खटिया पर ही घुटनों के बल हो गया और वह खुद अपने पैजामा को नीचे सरका पाता इससे पहले ही मधु अपने दोनों हाथ को आगे बढ़ा कर खुद अपने हाथों से अपने बेटे के पजामे को नीचे खींच ली और तुरंत राजू का बमपिलाट लंड हवा में लहराने लगा जिसे देखकर मधु के मुंह में पानी आ गया और इस नजारे को देखकर खुद हरिया की आंखें फटी की फटी रह गई और अपने मन मे यह सोचने लगा कि आखिर क्यों औरत का मन ना बहक जाए जब उसकी आंखों के सामने इतना मोटा तगड़ा लंबा लंड हो तो,,,,,,, खुद हरिया का दिल जोरो से धड़कने लगा था अपने बेटे के लंड को देखकर और उसे देख कर जिस तरह की चमक उसकी बीवी की आंखों में दिखाई दे रही थी उससे एक तरफ वह शर्मिंदा भी था और उत्सुक भी था कि अब उसकी बीवी अपने ही बेटे के लंड के साथ क्या करेगी और उसके सोचने के मुताबिक ही मधु झट से अपना एक हाथ आगे बढ़ाई और अगले ही पल अपने बेटे के लंड को हाथ में पकड़ कर पागलों की तरह उसे दबाने लगी पुचकारने लगी,,,,,

इस नजारे को देखकर हरिया समझ गया था कि उसकी बीवी कुछ अद्भुत करने वाली है और यही सोच कर उसका दिल बैठा जा रहा था राजू अच्छी तरह से जानता था कि आप उसके लंड के साथ उसकी मां क्या करने वाली है इसलिए दरवाजे की तरफ मुस्कुराता हुआ देख ले रहा था क्योंकि वह जानता था कि उसके पिताजी उन दोनों को ही देख रहे हैं,,,,, और देखते ही देखते मुझे अपने लाल-लाल होठों को अपने बेटे के लैंड के करीब ले जाने लगी और यह नजारा देखकर हरिया की धोती में गदर मचाने लगा हरिया पागल होने लगा उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि वह जानता था कि आप अगले पल क्या होने वाला है उसके सोच के मुताबिक ही मधु अपने बेटे के लंड के आलूबुखारा के सामान सुपाड़े को अपने लाल-लाल होठों के बीच दबा ली और से चूसना शुरु कर दी यह देखकर हरिया की हालत ऐसी हो गई मानो कि जैसे उसे सांप सो गया हो वह पागलों की तरह फटी आंखों से अपनी संस्कारी बीवी की छीनार वाली हरकत को देख रहा था,,,,, कुछ पल के लिए तो उसे समझ में नहीं आया कि यह क्या हो रहा है लेकिन जब उसे थोड़ी देर में इस बात का एहसास हुआ तब तक मधु पूरी तरह से अपने बेटे के ऊपर छा चुकी थी वह पागलों की तरह अपने बेटे के लंड को पूरा गले तक उतार कर उसे चूस रही थी,,,,,,

मधु







हरिया इस बात से हैरान था कि उसकी बीवी इस तरह का सुख उसे कभी नहीं दी थी हालांकि वह भी अपने पति के लैंड को मुंह में लेकर चुस्ती थी लेकिन उसके इस हरकत में वह रंडी पर नजर नहीं आ रहा था जैसा कि अपने बेटे के साथ नजर आ रहा था,,,,,, हरिया को साफ नजर आ रहा था कि अपनी मां की हरकत से राजू पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा है उसकी आंखें पूरी तरह से बंद हो चुकी है और वह हल्की-हल्की अपनी कमर को पानी के हिलोरे की तरह चला रहा था और बार-बार बंद आंखों से दरवाजे की तरफ देख ले रहा था और मुस्कुरा दे रहा था मानो कि जैसे राजू अपने पिता की चुटकी ले रहा हो कि देखो मैं तुम्हारी बीवी के साथ क्या कर रहा हूं,,,,।

ओहहह मां,,,,, मेरी रानी मेरा मोटा लंड तुम्हारे मुंह में कितना खूबसूरत लग रहा है,,, पिताजी का भी इसी तरह से मुंह में लेकर चुस्ती होगी ना,,,,।

हां रे,,,(कुछ पल के लिए अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल कर) लेकिन मेरे राजा जो मजा तेरे लंड को मुंह में लेकर आता है,,,, वह मजा तेरे पिताजी के लंड में बिल्कुल भी नहीं आता क्योंकि तेरे पिताजी का लंड तेरे से भी आधा है,,,

और मेरा,,,,

तेरा तो इतना मोटा और लंबा है कि ठीक तरह से मुंह में भी नहीं आता,,,,,(और इतना कह कर वापस लंड को मुंह में लेकर चुसना शुरू कर दी,,,,)

मोटा और लंबा लंड की औरत को ज्यादा मजा देता है तभी तो मैं तुम्हें पिताजी से भी ज्यादा मजा देता हूं और उससे ज्यादा देर तक तुम्हारी चुदाई करता हूं,,,,.

(हरिया हैरान था अपनी बीवी और अपने बेटे की बातों को सुनकर क्योंकि उसे साफ महसूस हो रहा था कि वह दोनों बातों ही बातों में उसकी मर्दानगी पर सवाल उठा रहे थे,,,, कोई और समय होता तो शायद हरिया इस बात का जवाब जरूर देता लेकिन इस समय मजबूर था,, कुछ भी कर सकने की स्थिति में वह बिल्कुल भी नहीं था इसलिए खामोश होकर अंदर के नजारे को देखता ही रहा,,,,

ओहहह मां,,,सहहह आहहहहहहहह,,,,, बहुत मजा आ रहा है मेरी रानी बस ऐसे ही पूरी अंदर तक लो,ऊममममम लाजवाब अति उत्तम तुम बहुत अच्छी हो,,,आहहहहह,,,,।

(राजू पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था और इस नजारे को देखकर हरिया की हालत खराब हो रही थी,,,, कुछ देर तक राजू इसी तरह से मजा लेता रहा और अपनी मां को देता है लेकिन अब वह कुछ और करना चाहता था इसलिए अपनी मां की कंधों को दोनों हाथों से पकड़कर उसे धक्का दिया और उसकी मां खटिया पर पीठ के बल लेट गई और फिर,,,, राजू धीरे-धीरे अपनी मां की साड़ी को उतारना शुरू कर दिया और देखते ही देखते अपनी मां का साथ पाकर राजू अपनी मां की साड़ी उतारने में कामयाब हो गया जिसे उतार करवा नीचे जमीन पर फेंक दिया और इस समय उसकी मां उसकी आंखों के सामने केवल पेटीकोट में थी और उसकी बड़ी-बड़ी दोनों खरबूजा जैसी चूचियां पानी भरे गुब्बारों की तरह छाती पर लौट रही थी,,,,, जिसे देखकर राजू की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी अपनी मां की पेटीकोट उतार करवा उसे पूरी तरह से नंगी करता है इससे पहले वह धीरे से खड़ा हुआ और खटिया पर खड़े खड़े ही अपने पजामे को उतारकर वह भी एकदम नंगा हो गया उसका मोटा तगड़ा लंड हवा में लहराने लगा जिसे देखकर हरिया का गला सूखता जा रहा था,,,,, और फिर धीरे से राजू अपनी मां के करीब बैठ गया और अपना हाथ आगे बढ़ा कर पेटिकोट की डोरी को पकड़ता हुआ बोला,,,,)

मजा तो तब आता है जब तु एकदम नंगी हो जाती है,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपनी मां की पेटीकोट की डोरी को एक झटके से खींच दिया और अगले ही पल कमर पर कसी हुई पेटीकोट एकदम से ढीली हो गई जिसे राजू अपने हाथों का सहारा देकर उतारने लगा और अपने बेटे का साथ देते हुए मधु खुद अपनी बारी बड़ी गांड को हवा में ऊपर की तरफ उठाकर उसे पेटीकोट उतारने में मदद करने लगी और जैसे ही राजू ने देखा कि उसकी मां अपनी बड़ी बड़ी गांड को हवा में उठाई है तो वह तुरंत पेटीकोट को एक झटके से नीचे खींच कर उसके पैरों से बाहर निकाल कर फेंक दिया और अपनी मां को एकदम नंगी कर दिया,,,,,।

नंगी होने के बाद मधु की जवानी एकदम से खिल उठी थी जिसे देखकर खुद उसके बेटे के मुंह में पानी आ रहा था और बाहर खड़े हरिया के द्वारा तो यह दृश्य देखा नहीं जा रहा था अपने बेटे की आंखों के सामने उसकी बीवी पूरी तरह से नंगी खटिया पर लेटी हुई थी जिसमें बिल्कुल भी शर्म नहीं थी वह एकदम से बेशर्म हो चुकी थी वरना ऐसी कौन सी मां होगी जो अपने बेटे के सामने एकदम नंगी बिस्तर पर लेटी होगी,,,,

सहहहरह ,,(जांघों पर दोनों हाथ रखते हुए) कसम से मेरी जान नंगी होने के बाद तो तो तू स्वर्ग से उतरी भी अप्सरा लगती है तुझे देखकर मैं पागल हुआ जा रहा हूं,,,(अपनी मां की बुर की तरफ देखते हुए) देख नहीं रही है मेरी रानी तेरी बुर कितना पानी छोड़ रही है,,,,(अपने बेटे के मुंह से इस तरह के शब्दों का प्रयोग और अपनी ही मां के लिए करता हुआ देखकर हरिया खुद शर्म से पानी पानी हो जा रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा अपनी मां से इस तरह की गंदी बातें कैसे कर सकता है)

कसम से मैं तेरी बुर का पानी एकदम अमृत की तरह है जिसे पीना बहुत जरूरी है,,,

तो रोका किसने है मेरे राजा,,,,(इतना कहने के साथ ही अपने दोनों टांगों को खोलकर अपने बेटे को आमंत्रण देने लगी कि अंदर आकर अपनी मनमानी कर ले और इस नजारे को देखकर हरिया के तन बदन में आग लग गई क्योंकि अपने बीवी के रंडीपन से वह पहली बार वाकिफ हो रहा था,,,। और दूसरी तरफ राजू अपनी मां की तरफ से आमंत्रण बातें ही उसकी इजाजत मिलते ही वह तुरंत अपनी मां की दोनों टांगों के बीच पहुंच गए और फिर दोनों हाथों से थोड़ा सा भी मां की टांगों को खोलता हुआ अपने लिए जगह बनाने लगा ठीक उसकी आंखों के सामने उसकी मां का खूबसूरत रसों से भरा हुआ बुर अपना पूरा उभार लिए हुए नजर आ रहा था,,,,,, जिसे देखकर राजू के मुंह में पानी आ रहा था उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था वह तुरंत अपने पैसे होठों को अपनी मां की फूली हुई बुर पर चिपका दिया और उसे चाटना शुरू कर दिया उत्तेजना के मारे मधु की बुर कचोरी की तरह भूल चुकी थी जो कि देखने में बहुत ही मदहोश कर देने वाली नजर आ रही थी एक तरफ मधु अपनी बुर से अपने बेटे को पूरी तरह से पागल किया हुए थी वहीं दूसरी तरफ हरिया अपनी बीवी और अपने बेटे की हरकत पर पूरी तरह से शर्मिंदगी से गड़ा जा रहा था एक तरफ वह शर्म से पानी पानी भी हो रहा था और एक तरफ अपनी बीवी के साथ अपने ही बेटे को इस तरह की शर्मनाक हरकत करते हुए उसके बदन में अजीब सी हलचल भी पैदा हो रही थी अपने बेटे से और अपनी बीवी से उसे इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी जिस तरह से उसका बेटा पागलों की तरह अपनी मां की बुर चाट रहा था यह देखकर हरिया को समझ में नहीं आ रहा था कि वाकई में यह उसी का बेटा है या कोई और आया है जो अपनी ही मां को पागलों की तरह प्यार करते हुए उसकी बुर को चाट रहा है,,,,

चपर चपर बुर चाटने की आवाज हरिया के कानों तक सुनाई दे रही थी जो कि इस बात की पूर्ति कर रहे थे कि राजू कितना मदहोश होकर अपनी मां की बुर से प्यार कर रहा है और अपने बेटे का यह प्यार पाकर खुद मधु मदहोश में जा रही है वह पागलों की तरह अपना सरदाएं पानी पटक रही थी उससे यह उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी,,,,,, राजू जहां तक होता था वहां तक अपनी जीभ को अपनी मां की बुर की गहराई में उतार कर उधर की मलाई चाटने की पूरी कोशिश कर रहा था और राजू की यह हरकत मधु की उत्तेजना में निरंतर वृद्धि कर रहे थे,,,,, अपनी बीवी की मदहोशी पन को देखकर हरिया धोती के ऊपर से यह अपने लंड को पकड़ कर दबा रहा था वह चाहता तो अपनी बहन के कमरे में जाकर अपने बदन की गर्मी को शांत कर सकता था लेकिन वह अपनी बीवी और अपने बेटे की कामलीला को पूरी तरह से अपनी आंखों से देख लेना चाहता था अब इसमें तो उसे बिल्कुल भी शक नहीं रह गया था कि जो कुछ भी राजू कह रहा था वह बिल्कुल ही सच कह रहा था उसमें जरा सी भी झूठा पन नहीं था या बनावटी नहीं था,,,,

राजू और उसकी मां कुछ ईस तरह से



कुछ देर तक राजू इसी तरह से खटिया पर घमासान युद्ध की तैयारी करता रहा वह अपनी मां की बुर में लंड डालने से पहले उसे पूरी तरह से तैयार कर लेना चाहता था ताकि वह बड़े आराम से मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में ले सकें,,,, और फिर धीरे से अपने फोटो को अपनी मां की बुर पर से अलग किया और अभी भी राजू के होठों से उसकी मां का काम रस टपक रहा था,,,,,

अपनी मां की दोनों टांगों के बीच घुटनों के बल अपने लिए जगह बनाता हुआ अपने लंड को एक हाथ से हीलाते हुए वह बोला,,,,।

बस करो मेरी रानी थोड़ा सा अपनी गांड ऊपर उठाओ और फिर तब देखना मैं तुम्हें कैसे आसमान की सैर कराता हूं,,,,

(और फिर इतना कहते ही राजू अपनी मां की कमर को पकड़कर अपनी तरफ खींचा और उसकी आदि गांड को अपनी जान पर चढ़ा लिया ऐसा करने पर उसकी गुलाबी बुर एकदम साफ नजर आने लगी और फिर एक बार फिर से दरवाजे की तरफ राजू अपने पिता को देखा और फिर जैसे कि उनसे आशीर्वाद मांग रहा हो इस तरह से वह खुश होकर अपने लंड के मोटे सुपाड़े को अपनी मां की गुलाबी छेद से छुआ दिया जिसका स्पर्श पाते ही मधु एकदम से सिहर उठी और अगले ही पल वह अपनी बुर के अंदरूनी भाग में अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को प्रवेश करता हुआ महसूस करने लगी और अपनी आंखों से देखने भी लगी,,,

देखते ही देखते राजू अपने पिता की मौजूदगी में ही भले ही वह कमरे के बाहर दरवाजे के पास खड़े होकर अंदर का द नजारा देख रहे हैं फिर भी राजू के मन में जरा सा भी झिझक जरा सा भी डर अपने पिताजी को लेकर नहीं थी और इसी का फायदा उठाते हुए राजू अपने पिताजी के सामने ही अपनी मां को चोदना शुरु कर दिया देखते ही देखते अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की बुर की गहराई में उतारकर उसे बाहर की तरफ खींच कर अपनी कमर को हल्के हल्के हिलाना शुरू कर दिया और इस तरह से अपनी मां को चोदना शुरु कर दिया,,,,,

मधु का चेहरे का रंग बदलने लगा था वह मदहोश हुए जा रही थी उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी बढ़ रही थी,, राजू के धक्के का प्रहार बढ़ता जा रहा था उसके धक्कों के साथ खटिया चरर मरर कर रही थी खटिया के चरर मरर की आवाज को सुनकर हरिया का लंड अपनी औकात से बाहर आ गया था,,,। इतनी जबरदस्त चुदाई तो उसने आज तक नहीं किया था लगातार अपनी बीवी के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज को सुनकर वह समझ गया था कि अगर ऐसा सुख औरत को बाहर मिलने लगेगा तो घरवाले की जरूरत ही नहीं पड़ेगी वह अपने बेटे की मर्दानगी को देखकर अपनी मर्दानगी से शर्मिंदा होने लगा था,,,,,

फच्च फुच्च की आवाज के साथ राजू अपनी मां को चोद रहा था और बाहर खड़ा हरिया कुछ भी कर नहीं पा रहा था ना ही इस काम क्रीड़ा को बंद कर पा रहा था क्योंकि अगर वह ऐसा करता तो राजू अपनी मां को उसके और गुलाबी के बीच के रिश्ते के बारे में बता देता और फिर ना जाने क्या हो जाता इसी डर से राजू कि पिताजी एकदम खामोश खड़े होकर अपनी आंखों के सामने ही अपनी बीवी की बेवफाई देख रहे थे एक मां को अपने बेटे के साथ हमबिस्तर होता हुआ देख रहे थे,,,,

हर धक्के के साथ मधु की आह निकल जा रही थी उसके मुंह से चीख निकल जा रही थी लेकिन उसे मजा भी बेहद अद्भुत तरीके का प्राप्त हो रहा था जिसे महसूस करके वह तृप्त हुए जा रही थी जो कि उसका चेहरा साफ बता रहा था देखते ही देखते मर्दों की सांसे अपने बेटे के तेज झटकों के साथ बढ़ने लगी और कुछ ही झटको में मां बेटे पूरी तरह से एक दूसरे को आपस में कस के पकड़ कर झढ़ना शुरू कर दिए,,,, हरिया या देखकर पूरी तरह से शर्म से गड़ा जा रहा था कि एक सका बेटा अपनी ही मां की बुर में झड़ रहा था और खुद उसकी मां अपने दोनों हाथों को उसके नितंबों पर रखकर उसे कस के दबाई हुई थी मानो कि उसके लंड का सहारा रस अपनी बुर से निचोड लेना चाहती थी,,,,,

दोनों चरम सुख को प्राप्त कर चुके थे दोनों एक दूसरे की बाहों में कुछ देर इसी तरह से लेटे रहे हरिया वहां से चला जाना चाहता था लेकिन उसका एक मन वहां उसे रोकने के लिए कह रहा था वह देखना चाहता था कि अब आगे क्या होता है थोड़ी देर बाद मधु अपने ऊपर से अपने बेटे को हटाने लगी तो राजू धीरे से अपनी मां के ऊपर से उठने लगा और साथ ही उसका मोटा सा बड़ा लंड जो कि अभी भी मधु की बुर में घुसा हुआ था वो धीरे से बाहर निकला और फिर मधु मुस्कुराते हुए अपनी जगह से खड़ी हो गई और अपनी साड़ी उठाकर पहनने लगी तो राजू अपनी मां की सारी को अपने हाथ से पकड़ कर खींच कर फिर से उसे जमीन पर फेंकता हुआ बोला,,,,।

अभी से साड़ी क्यों फेंक रही हो अभी तो पूरी रात बाकी है,,,

(इतना सुनकर खुद हरिया हैरान हो गया उसे लगा था कि यह खेल नहीं बंद हो जाएगा और राजू वापस अपने कमरे में चला जाएगा लेकिन वह तो इस खेल को भी जारी रखना चाहता है जोकि हरिया आज तक ऐसा नहीं कर पाया था क्योंकि जिस तरह की घमासान में चुदाई कर रहा था इसे चुदाई करने पर वह खुद एकदम से थक जाता था लेकिन राजू की तरह वह फिर भी चुदाई नहीं कर पाता था,,,,)

अरे पेशाब करने जा रही हूं मुझे बड़े जोरों की लगी है,,,

(इतना सुनते ही हरिया एकदम से हड़बड़ा गया क्योंकि अगर मधु पेशाब करने के लिए निकलेगी तो बाहर आ जाएगी और फिर वह हरिया को देख लेगी लेकिन तभी राजू मामले को संभालते हुए बोला)

तो इसके लिए बाहर जाने की क्या जरूरत है यहीं पर पेशाब करना वह कोने में,,,,,

तु सच में बहुत पागल है,,,(कमरे में कोने की तरफ देखते हुए मधु बोली,,,, हरिया को ऐसा लग रहा था कि उसकी बीवी अपने बेटे की आंखों के सामने पेशाब नहीं करेंगे क्योंकि यह भी एक अपने बेटे के सामने करने वाली शर्मनाक हरकत थी लेकिन उसके सोचने के विरुद्ध मधु बोली,,,) तेरे सामने पेशाब करने में शर्म आती है,,,,।

(शर्म आती है इस तरह का शब्द अपनी बीवी के मुंह से सुनकर हरिया को कुछ समझ में नहीं आया क्योंकि इस तरह का शब्द है तभी प्रयोग किया जाता है जब इस तरह की हरकत बहुत पहले से की जाती हो लेकिन राजू के कहे मुताबिक उन दोनों के बीच कल ही इस तरह का रिश्ता बना था लेकिन फिर हरिया अपने मन में सोचने लगा कि कल दिन भर उन दोनों के पास समय तो हो सकता है दोनों आपस में खुलकर इतना खुल गए हो कि मधु अपने ही बेटे के सामने पेशाब करने में शर्म नहीं महसूस करती हो और यही सोचकर हरिया बात को आई गई कर गया था और अपनी आंखों के सामने अपनी बीवी को गांड मटका ते हुए कमरे के कोने में जाते हुए देखने लगा यह देख कर हरिया के लंड का पानी निकलते निकलते बचा जब वह अपने ही बेटे के सामने मुस्कुराते हुए देखकर मुतने के लिए बैठने लगी,,,, और फिर उसी तरह से बैठकर पेशाब करने लगी,,,, जिस तरह से पूरी तरह से खुलकर बेशर्म की तरह मधु अपने ही बेटे के सामने पेशाब कर रही थी इस तरह से खुलकर कभी वह अपने पति के सामने नहीं की थी और इस बात का मलाल हरिया के चेहरे पर साफ झलक रहा था और हरिया यह देखकर यह सोचने लगा कि,,,, शायद उम्र के इस पड़ाव पर एक जवान लड़का और उसका जवान लंड पाकर उसकी जवानी एकदम से खिल उठी हो,,,,।

जहां एक तरफ अपनी बीवी की शर्मनाक हरकत देखकर हरिया अचंभित था वहीं दूसरी तरफ अपने बेटे की हरकत को भी देख रहा था उसे साफ दिखाई दे रहा था कि लालटेन की पीली रोशनी में उसकी बीवी एकदम नग्नावस्था में कमरे के कोने में बैठकर पेशाब कर रही है और अपनी ही मां की नंगी गांड और उसे पेशाब करता हुआ देखकर राजू का लंड फिर से खड़ा होने लगा था जिसे वह अपने हाथ में लेकर पकड़ कर उसे हिला रहा था,,,,,

अपनी मां की घमासान चुदाई किए हुए उसे अभी 10 मिनट भी नहीं हुए थे कि अपनी मां की नंगी गांड को देखकर एक बार फिर से उसका लंड खड़ा हो गया था और वह देखकर हरिया खुद आश्चर्यचकित हो गया था क्योंकि इतने कम अंतराल के समय में खुद उसका लंड इतनी जल्दी खड़ा नहीं हुआ था लेकिन उसके बेटे का लंड पल भर में ही खड़ा हो चुका था एक बार फिर से वह अपनी मां को चोदने के लिए तैयार हो चुका था अपने बेटे की मर्दानगी भरी ताकत को देखकर खुद है हरिया की हालत खराब हो गई थी राजू धीरे से खटिया पर से उतरा और अपना लंड हिलाते हुए धीरे से अपनी मां के पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपनी मां को पेशाब कर लेने का इंतजार करने लगा और फिर जैसे ही मधु पेशाब करने के बाद उठ कर खड़ी हुई और राजू की तरफ घूमी राजू पल भर का भी समय अपनी मां को दिए बिना उसे कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके लाल-लाल होठों को अपने होठों में भरकर पीता हुआ अद्भुत ताकत का परिचय दिखाते हुए तुरंत अपनी मां को गोद में उठा लिया और उसकी दोनों टांगों को उठाकर अपनी कमर के इर्द-गिर्द लपेट लिया जिससे उसके कंधों में बाहों का हार डालकर मधु एकदम से उसके ऊपर लटक गई और राजू मौके का फायदा उठाते हुए अपने मोटे खड़े लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी मां की गुलाबी छेद का रास्ता अपने लंड को दिखाता हुआ वह धीरे-धीरे उसमें अपने लंड को प्रवेश कराने लगा,,,,,

हरिया अपने बेटे की अद्भुत काम शक्ति को देखकर पूरी तरह से प्रभावित हो चुका था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके बेटे में इतनी अत्यधिक प्रचुर मात्रा में काम शक्ति भरी हुई है जो कि वह पूरी तरह से अपनी काम शक्ति का प्रयोग अपनी मां पर ही कर रहा था और इसी काम शक्ति के प्रभाव में उसकी मां पूरी तरह से अपने बेटे की आकर्षण में डूब चुकी थी देखते ही देखते राजू अपने लंड की सुपाड़े को अपनी मां की गुलाबी छेद में डालकर उसे अपनी बाहों के झूले में झूला थे उसे चोदना शुरू कर दिया हरिया इस बात से भी हैरान था कि उसकी बीवी का वजन कुछ ज्यादा था लेकिन राजू को बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था उसके वजन को लेकर क्योंकि राजू की काम शक्ति का पलड़ा को ज्यादा ही भारी था वह बड़े आराम से अपनी मां को गोद में लेकर चोद रहा था और इस चुदाई का भरपूर आनंद उसकी माल ले रही थी जांघों से जांघों के टकराने की आवाज पूरे कमरे में अद्भुत वातावरण को बना रही थी इस आवाज को सुन कर खुद हरिया की हालत खराब हो जा रही थी और राजू इसी अवस्था में अपनी मां को गोद में उठाए हुए ही ताबड़तोड़ धक्के पर धक्के लगा रहा था और वह भी बिना थके बिना हिले वह एकदम मदहोश होकर अपनी मां को गोद में उठाए हुए उसे चोद रहा था और ऐसा लग रहा था कि मधु को भी अपने बेटे पर पूरा भरोसा था जो कि निश्चिंत होकर उसकी गोद में झूल रही थी,,,,,

इस तरह से राजू अपनी मा को गोद में उठा कर चोदता हुआ



और राजू इसी तरह से अपनी मां को चोदते हुए एक बार फिर से उसका पानी निकाल चुका था अब हरिया का वहां खड़ा रहना उचित नहीं था वह शर्मसार हो चुका था अपनी आंखों के सामने अपनी संस्कारी बीवी को रंडी की तरह चुदवाते हुए देखकर उसकी खुद की आत्मा जवाब दे चुकी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और वो धीरे से घर से बाहर निकल गया और रात भर राजू अपनी मां को सोने नहीं दिया और उसको चोदता रहा,,,,।
 
अपनी बीवी की अपने ही बेटे के साथ काम लीला को देखकर हरीया अंदर ही अंदर टूट चुका था उसे अपने बीवी और अपने बेटे से इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन इस तरह से वह अपने मन में यही सोच रहा था कि यह सब उसके ही करनी का फल है अगर वह अपनी छोटी बहन के साथ शारीरिक संबंध बनाते हुए पकड़ा ना जाता तो शायद उसका बेटा इस तरह की हिम्मत कभी ना करता क्योंकि वह अपने बेटे को अच्छी तरह से जानता था लेकिन इस बात को वह बिल्कुल भी नहीं जानता था कि राजू पहले का राजू नहीं रहा था वह बिल्कुल बदल चुका था हरिया को ऐसा ही लग रहा था कि उसके पकड़े जाने के बाद ही राजू अपनी मां के साथ सारे संबंध बनाकर उसके साथ मजा कर रहा था लेकिन यह नहीं जानता था कि उसकी बहन के साथ संबंध बनाने से पहले ही राजू अपनी मां की चुदाई करना शुरू कर दिया था,,,,,,,,

रात को जो कुछ भी अपनी आंखों से हरियाने देखा था वह दृश्य बार-बार उसकी आंखों के सामने घूमने लगते थे जिसके बारे में सोच कर ही उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी जहां एक तरफ उसे अपने बीवी और बेटे पर गुस्सा आता था वही दोनों की कामलीला का नजारा देख कर उसके बारे में सोच कर उसके तन बदन में भी उत्तेजना कि लहर दौड़ने लगती थी जिस तरह से उसके बेटे ने अपनी मर्दानगी भरी ताकत के तौर पर अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की बुर में डाला था वह हरिया के लिए काबिले तारीफ था ऐसा हरिया सोच रहा था,,,,,,, क्योंकि पहली बार में ही राजू ने जिस तरह से मेहनत करके अपनी मां को अपनी मर्दानगी ताकत का दीवाना बना दिया था उसे देखकर खुद हरिया हैरान था वैसे तो अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को देख कर उसे इसी तरह की उम्मीद थी लेकिन यह उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी कि उसकी बीवी इतनी जल्दी मान जाएगी,,,,

Raju or soni





हरिया इस बारे में ही सोच रहा था कि कैसे उसकी बीवी बेशर्म रंडी की तरह अपने ही बेटे के साथ चुदाई का मजा लूट रही थी उसे बिल्कुल भी शर्म नहीं आई किसी से उसने जन्म दिया उसी के लंड को अपनी बुर में लेकर मस्त हो रही थी,,,, हरिया यही सोच रहा था कि अपने बेटे की मनसा जाने के बाद उसकी बीवी उसे धक्के देकर कमरे से बाहर निकाल देगी लेकिन सब कुछ पलट चुका था जिसे धक्का देकर कमरे से बाहर निकालना था उसे खुद अपनी दोनों टांगे फैलाकर उसे अपने ऊपर ले कर उसके धक्कों का मजा ले रही थी,,,,,

सुबह जब हरिया घर पर पहुंचा तो अपनी बीवी और अपने बेटे से नजर मिलाने तक की उसमें ताकत नहीं बची थी वह पूरी तरह से टूट चुका था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इस मुसीबत से कैसे निकला जाए,,,, घर पर पहुंचते ही मधु तुरंत एक लोटा पानी भर कर अपने पति के पास गई और उसे पानी भरे लौटे को पकड़ाते हुए बोली,,,।

आप आ गए आप तो चले जाते हैं लेकिन रात भर मेरी क्या हालत होती है आप नहीं जानते आपके बिना तो मेरी रात गुजरती नहीं है रात भर में खटिया पर करवट बदलते रह गई,,,,

Soni or raju ka bistar par Masti



(हरिया हैरान था अपनी बीवी की सती सावित्री वाली बातों को सुनकर उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इस समय जो सती सावित्री संस्कारी बनी हुई है रात में एकदम बेशर्म रंडी बन जाती है हरिया का मन तो कर रहा था कि इसी समय अपनी बीवी को बता दे कि वह रात भर अपने बेटे के साथ क्या गुल खिला रही थी लेकिन ऐसा करना उसके लिए भी मुश्किल पैदा कर सकता था क्योंकि राजू ने अभी तक अपनी मां को गुलाबी और उसके बारे में कुछ भी नहीं बताया था अगर वह रात वाली घटना को बता देगा तो राजू तुरंत गुलाबी का जिक्र छेड़ देगा और ऐसे में घर का माहौल पूरी तरह से बिगड़ जाएगा इसलिए अपने आप को संभालते हुए बोला,,,)

क्या करूं रानी अब समाज व्यवहार को देखना पड़ता है इसलिए जाना पड़ा वरना मुझे भी तुम्हारे बिना नींद नहीं आती,,,, मुझे यकीन है तुम्हें भी नहीं आई होगी,,,,

Lala ki bahan soni ko apna lund dikhata raju



हां पिताजी मुझे भी ऐसा ही लग रहा है देख नहीं रही हो मम्मी की आंखें एकदम लाल है लग रहा है सारी रात जाग रही थी,,,,(अपने पिताजी की तरफ देख कर राजू मुस्कुराते हुए बोला तो हरिया को ऐसा लगा कि मानो जैसे राजू अपने बोले गए शब्दों का बाड़ उसकी छाती पर छोड़ रहा है,,,, वह राजू की बात का बिल्कुल भी जवाब नहीं दिया और फिर हाथ मुंह धो कर नित्य कर्म में लग गया,,,, मधु मुस्कुराते हुए राजू की तरफ देखकर घर का काम करने लगे क्योंकि रात भर राजू ने उसकी जमकर सेवा किया था जिसके फलस्वरूप इस समय वह थोड़ा सा लंगड़ा कर चल रही थी क्योंकि जिस तरह के धक्के राजू उसकी बुर में लगा रहा था वह बेहद दर्दनाक के साथ-साथ आनंददायक भी था जिसका आनंद वह भरपूर ले चुकी थी,,,,

राजू नित्य दिन हवेली आया जाया करता था और सोने की जवानी का स्वाद भी चख लिया करता था,,,, गोदाम का हिसाब किताब देने लाला के पास जाना था इसलिए राजू जल्द ही हवेली की तरफ निकल गया था,,,, हवेली में पहुंचते ही लाला और सोनी के जोर जोर के हंसने की आवाज आने लगी तो राजू भी मुस्कुराता हुआ बोला,,,।

Raju soni ko uskike kamre k kone me chodta hua



क्या बात है आज मालिक और छोटी मालकिन कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रहे हैं,,,,

अरे राजू तुम आओ आओ सही समय पर आए हो आ जाओ नाश्ता कर लो,,,(राजू की तरफ देखकर लाला बोला और उसकी तरफ एक कुर्सी आगे बढ़ा दिया क्योंकि अब लाला राजू को अपने घर का ही सदस्य समझने लगा था और राजू को देखकर सोने की अंदर ही अंदर मुस्कुराने लगी,,,, राजू तुरंत कुर्सी पर बैठते हुए बोला)

अरे बताओ तो किस बात पर इतना टहाका लगाया जा रहा है,,,,,

Raju ko mast karti huyi soni



अरे राजू पहले नाश्ता तो करो,,,,(इतना कहने के साथ ही सोनी चाय का कप नाश्ता राजू की तरफ बढ़ा दी और लाला जो कि अभी भी हंसे जा रहा था वह हंसते हुए बोला,,,)

अरे राजू बात ही कुछ ऐसी है अगर सुनोगे तो तुम भी हंसते रह जाओगे,,,

ऐसी कौन सी बात है लाला जी,,,,

अरे वह विक्रम है ना विक्रम सिंह अपना सबसे बड़ा दुश्मन जो अपने आप को तीस मार खान समझता है,,,

हां उसे क्या हुआ,,,,?

2 दिन पहले ही कहा जाता है कि उस पर जंगली सूअर ने हमला कर दिया उसे लहुलुहान कर दिया,,,,

क्या बात कर रहे हैं लाला जी सच में,,,,

हां हां बिल्कुल सही बात है अच्छा ही हुआ अगर जंगली सूअर थोड़ा और जोर दिखाया होता तो मार ही डालता और सारा मामला ही खत्म हो जाता,,,,।

(लाला की बात सुनते ही राजू समझ गया कि गोदाम में उसी ने विक्रम सिंह की जमकर पिटाई किया था और उसी की खबर आपकी तरफ फैल रही है राजू चाहता तो लाला को हकीकत बता सकता था कि जंगली सूअर ने नहीं बल्कि उसने विक्रम सिंह को लहूलुहान कर दिया था लेकिन कारण भी क्या देता अगर कोई और कारण होता तो वह बता देता लेकिन कारण के पीछे उसकी मां थी जिसको चोदने के लिए वह गोदाम पर ले गया था और उस की जबरदस्त चुदाई करते हुए विक्रम सिंह उसे देख लिया था और विक्रम सिंह भी खूबसूरत औरत को देखकर उसकी बुर में अपना लंड डालकर अपनी वासना को शांत करना चाहता था जिसके एवज में राजू ने उसकी जमकर धुलाई किया था और उसे अधमरा छोड़ दिया था,,,, इसलिए राजू लाला को हकीकत नहीं बताया और वह भी लाला की बात पर हंसते हुए बोला,,,)

Raju Soni ki ghamasan chudai karta hua



यह तो बहुत अच्छा हुआ लालाजी आप सही कह रहे हैं अगर विक्रम सिंह को सुअर मार दिया होता तो सारा किस्सा ही खत्म हो जाता,,,,,

लेकिन लगता है राजू की विक्रम सिंह की मौत तुम्हारे यहां तो लिखी है तभी वह सूअर से बच गया,,,

लगता तो ऐसा ही है छोटी मालकिन,,,,

क्या राजू तुम भी छोटी मालकिन छोटी मालकिन लगा रखे हो मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि तुम दोनों के बीच किस तरह का संबंध है इसलिए तुम हवेली के अंदर छोटी मालकिन नहीं बल्कि सोनी कहा करो क्योंकि तुम दोनों के बीच रिश्ता ही कुछ ऐसा है,,,,

बात तो सही है मालिक,,,(मुस्कुराते हुए और अपने भैया की बात सुनकर सोनी भी शरमा गई) लेकिन आदत पड़ गई है ना इसके लिए,,,

तो क्या हुआ आदत को बदल डालो,,,,,

ठीक है मालिक जैसा आप कहें,,,, और हां मैं आम की पेटियों का हिसाब लाया था अगर देख लेते तो अच्छा होता,,,,

राजू तुम अभी भी नहीं समझे मैंने तुम्हें आधा मालिक बना दीया,, हूं फिर भी तुम मुझे हिसाब किताब दिखाने आ जाते हो तुम्हें खुद समझ लेना चाहिए,,,

बात तो सही है मालिक लेकिन फिर भी एक बार देख लेते तो मुझे भी तसल्ली मिल जाती,,,,

Raju or lala ki bahan soni



क्या राजू तुम भी आधे जमीदार हो लेकिन अपने आप को बदल नहीं पा रहे हो,,,(इतना कहते हुए हिसाब किताब का बहीखाता अपने हाथ में लेकर देखने लगा और थोड़ी देर उसे देखने के बाद तसल्ली के साथ बोला)

बहुत सही राजू तुम्हारी देख रेख मैं व्यापार और ज्यादा बढ़ रहा है जिसकी मुझे बहुत खुशी है,,,,,,, अच्छा तुम एक जगह काम से जा रहा हूं,,,,, तुम दोनों बातें करो,,,

ठीक है मालिक,,,,,

(लाला अपनी जगह से उठा और हाथ में अपनी छड़ी लेकर मुस्कुराता हुआ हवेली से बाहर निकल गया और राजू जैसे इसी मौके की ताक में था वह तुरंत अपनी जगह से खड़ा हुआ और सोनी के लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख कर उसे चुंबन करने लगा सोनी भी बेल की तरह उसके बदन से लिपट गई और राजू तुरंत उसे अपनी जगह से खड़ी करते हुए उसकी साड़ी को चुंबन करने के साथ ही ऊपर की तरफ उठाने लगाओ देखते-देखते कमर तक उसकी सारी को उठाकर उसे उसकी कमर से पकड़ कर हल्का सा उठाया और नाश्ते की टेबल पर बैठा दिया और तुरंत उसकी दोनों टांगों को चोरी करके उसकी नाजुक गुलाब की पंखुड़ी जैसी बुर को अपनी हथेली से टटोलने लगा इतने से ही सोनी की गर्म सांसे अंदर बाहर होने लगी,,,,, सोनी की बुर काफी गर्म थी जिसकी गर्माहट को अपनी हथेली में महसूस करते हैं राजू का लंड एकदम से खड़ा हो गया और वह तुरंत एक हाथ से सोने की बुर को मसलते हुए और दूसरे हाथ से अपने पजामे को नीचे करते हुए बोला,,,,)

Soni ki lete huye raj





जब देखो तब तुम्हारी बुर एकदम गरम रहती है एकदम तैयार लंड लेने के लिए,,,,

तुम भी तो जब देखो तब अपना लंड खड़ा करके ही मुझसे मिलने आते हो,,,

क्या करूं रानी तुम्हारी पुर से लग रहा नहीं जाता इसलिए तो पागल की तरह तुम्हारे घर आ जाता हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू तुरंत सोनी की दोनों टांगों को थोड़ा सा खोलते हुए अपने लिए जगह बनाया और अपने मोटे तगड़े लंड को एक ही बार में सोने की बुर में डाल दिया और अपने दोनों हाथों को सोनी के पीछे की तरफ ले जाकर उसकी गांड को थाम लिया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया यह पहली बार था जब राजू सोनी को खाने की टेबल पर बैठा कर चोद रहा था जल्दबाजी से किया गया संभोग भी अद्भुत सुख प्रदान करता है जिसका एहसास राजू और सोनी दोनों को बराबर हो रहा था सोनी पागलों की तरह राजू को अपनी बाहों में कस के दबा ली थी और राजू एकदम उत्तेजित अवस्था में अपनी कमर को जोर-जोर से आगे पीछे करके हिला रहा था,,,, इस तरह से खाने की टेबल पर बैठा कर चोदने की वजह से सोनी की बुर कुछ ज्यादा ही कसी हुई लग रही थी जिससे दोनों को बहुत मजा आ रहा था,,,,

Soni or raju



दोनों को लाला से पकड़े जाने का डर अब बिल्कुल भी नहीं था दोनों निश्चिंत और निडर हो चुके थे दोनों इसी तरह से जब भी मौका मिलता था एक दूसरे में समाने की भरपूर कोशिश करते थे राजू सोनी को अद्भुत सुख प्रदान कर रहा था जिससे उसकी जवानी और भी ज्यादा निखरती चली जा रही थी इसीलिए तो राजू सोनी का दीवाना था,,,,, राजू के तेज धक्के सोनी को अद्भुत सुख प्रदान कर रहे थे राजू अपनी क्रियाकलाप को बढ़ाते हुए दोनों हाथों को उसकी गांड से हटाकर उसके ब्लाउज पर रखकर उसके बटन को खोल रहा था और पल भर में ही जल्दबाजी दिखाता हुआ राजू सोनी के ब्लाउज के सारे बटन को खोल चुका था और उसकी दोनों दशहरी आम को हाथों में लेकर दबा दबा कर उसे मुंह में लेकर पीना शुरु कर दिया था,,,,

एक औरत होने के नाते सोनी अच्छी तरह से जानती थी कि मर्दों की यह हरकत औरत को और भी ज्यादा आनंदित कर देती है और यही सोनी के साथ भी हो रहा था राजू पागलों की तरह सोनी की चुचियों को दशहरी आम की तरह दबा दबा कर मुंह में लेकर पी रहा था और नीचे से अपनी कमर हिलाता हुआ अपने मोटे लंड को उसकी चिकनी बुर में अंदर बाहर कर रहा था,,,,,, पल भर में ही दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे राजू की मेहनत रंग ला रही थी लाला की बहन पूरी तरह से मस्ती के सागर में हिलोरे मार रही थी वह सातवें आसमान में उड़ रही थी उसे अद्भुत आनंद का एहसास केवल राजू ही दे सकता था और दे रहा था हर धक्के के साथ उसका लंड उसके बच्चेदानी से जा टकराया था जिससे उसका मजा दुगुना हो जाता,,,,,

आखिरकार राजू के धक्कों की गति तेज हो गई और सोनी की सांसे ऊपर नीचे होने लगी क्योंकि दोनों चर्मसुख के बेहद करीब पहुंच चुके थे और राजू इस समय उसकी दोनों चूचियों से हाथ हटाकर उसे कसके अपनी बाहों में जकड़ लिया था और अपनी कमर बड़ी तेजी से ही जा रहा था ऐसा करने पर खाने की टेबल पूरी तरह से हच मचा जा रही थी और उस पर रखे हुए पानी के गिलास हिलते हुए नीचे गिरना शुरू हो गए थे एक बड़े से चांदी के कटोरे में फल फ्रूट रखा हुआ था और वह भी राजू के तेज दुखों को संभालना पाने की वजह से धीरे-धीरे नीचे गिरते जा रहे थे देखते ही देखते राजू ने अपनी जवानी का जोश दिखाते हुए अपने तेज धक्कों से सोनी के तन बदन में तो आग लगाई रहा था लेकिन खाने की टेबल की भी हालत खराब कर दे रहा था और जब तक उसका पानी निकलता तब तक खाने की टेबल पर एक भी बर्तन रहने गए थे सब आवाज करते हुए नीचे गिर चुके थे और राजू आखरी पर सोनी को उसी खाने की टेबल पर पीठ के बल लेटा दिया और उसकी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखकर उसकी दोनों चूचियों को दशहरी आम की तरह अपनी हथेली में दबाकर धक्के पर धक्का लगाना शुरू कर दिया था और देखते ही देखते दोनों अद्भुत चरम सुख को प्राप्त करके ढेर हो चुके थे,,,,

कुछ देर तक मुझे किसी तरह से सोनी के ऊपर पड़ा रहा जैसे ही दोनों की सांसे दुरुस्त हुई राजू अपने लंड को सोनी की बुर में से बाहर निकाल कर सोनी की साड़ी से ही अपने लंड पर लगी मलाई को साफ किया और सोनी भी गहरी सांस लेते हुए पहले तो खाने की टेबल पर बैठ ही रह गई और फिर जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि राजू ने उसकी चुदाई करते हुए खाने की टेबल को पूरी तरह से खाली कर दिया है और सारे बर्तन नीचे गिरे हैं तो यह देखकर थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,।

यह क्या किया राजू मजा लेने के साथ-साथ मुझे सजा भी दे दिया ना अब यह सारा काम कौन करेगा,,,

हम दोनों मिलकर करेंगे मेरी रानी,,,(अपने पजामे को खींचकर ऊपर की तरफ करते हुए और फिर सोनी की तरफ बढ़कर उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख कर उसे चुंबन करते हुए प्यार से उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़कर उसे उठाते हुए नीचे रखते हुए बोला,,) तुम्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं दूंगा मैं हूं ना,,,

तुम तो हो मैं जानती हूं लेकिन तुम तो एकदम पागल हो जाते हो मुझे चोदते चोदते ऐसा लगता है कि मैं कहीं भाग जाऊंगी,,,

क्या करूं जान तुम्हारी बुर में लंड डालते ही मैं पागल हो जाता हूं मन करता है कि लंड को बाहर निकाल कर मैं खुद तुम्हारी बुर में घुस जाऊं,,,,

ईतना मजा आने लगता है तुमको,,,(सोनी हंसते हुए बोली)

पूछो मत जान की कितना मजा आता है,,,,

चलो अच्छा अब जल्दी से सब बर्तन को उठा कर रखो मैं साफ कर देती हूं,,,।

(फिर उसके बाद दोनों जल्दी से बर्तन उठा कर उसको सही जगह पर रखने लगी और नीचे गिरे फल को उठाकर चांदी के कटोरे में रखने लगी थोड़ी देर में सब कुछ पहले जैसा हो गया और राजू मुस्कुराता हुआ हवेली से बाहर निकल गया,,,, दूसरी तरफ हरिया परेशान था वह किसी भी तरह से इस काम क्रीड़ा को बंद करना चाहता था क्योंकि वह समझ गया था कि राजू के मोटे तगड़े लंड पहुंचकर बीवी अपनी बुर में लेकर उसकी दीवानी हो चुकी है अब राजू जब चाहे तब अपनी ही मां को चोद कर मजा ले लेगा और उसकी मां भी उसे इंकार नहीं कर पाएगी देने में,,,, तभी उसके मन में एक युक्ति आई और वह मन ही मन खुश होने लगा शाम ढलते ही जैसे वह घर पर पहुंचा और खाना खाते समय वह बोला,,,)

अगले सप्ताह गुलाबी को देखने वाले आ रहे हैं और उसी समय सगाई भी कर देंगे,,,(इतना सुनते ही गुलाबी एकदम से चौक गई और हैरान होते हुए अपने भैया की तरफ देखने लगी और फिर अपनी भाभी की तरफ राजू भी हैरान था क्योंकि यह तो बड़े जल्दबाजी की बात थी,,,)

इतनी जल्दी,,,(हाथ में निवाला पकड़े हुए ही मधु बोली)

हां तो क्या हुआ अब ज्यादा देर करना उचित नहीं है लड़के वालों को लड़की पसंद है बिना देखे ही क्योंकि तुम्हारे भैया ही रिश्ता तय करवा रहे हैं और रिश्तेदार भी बहुत अच्छे हैं इसलिए मैं कोई गलती नहीं करना चाहता और मैं यह सोच रहा था कि राजू की भी शादी झुमरी के साथ जल्द से जल्द तय करके निपटा दिया जाए,,,

(हरिया एक तीर से दो निशाना लगाया था वह जल्द से जल्द झुमरी का विवाह करके उसे इस घर से रुखसत कर देना चाहता था और राजू की शादी झुमरी से करके झुमरी को इस घर में जल्दी से लेकर आना चाहता था ताकि राजू अपनी मां की तरफ ध्यान ना दे सके और गुलाबी भी विवाह करके अपने घर पर सुखी से रहे और वह भी अपनी आदत को बदल कर केवल अपनी बीवी की बुर पर ध्यान देता रहेगा और घर में झुमरी के होने से राजू अपनी मां को चोदने के बारे में सोच भी नहीं पाएगा इससे हरिया के मन से भारी बोझ उतर जाएगा,,,, झुमरी से इतनी जल्दी विवाह होने के बारे में सोच कर राजू मन ही मन बहुत खुश हो रहा था लेकिन गुलाबी और मधु दोनों उदास हो चुकी थी क्योंकि गुलाबी और मधु दोनों अच्छी तरह से जानती थी कि झुमरी के आ जाने के बाद घर में राजू उन दोनों को चुदाई का मजा दे नहीं पाएगा इसलिए दोनों यही चाहती थी कि अभी इतनी जल्दी विवाह ना हो लेकिन वह दोनों कुछ कर सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी,,,,,,, हरिया अपनी चालाकी से मन ही मन बहुत खुश हो रहा था,,,,, और हरिया ने यह भी कहा था कि जल्द ही वह झुमरी की मां से मिलकर शादी तय कर देगा,,,,, इसी खुशी में हरिया रात को अपनी बीवी को जमकर चोदा लेकिन मधु को अब अपने पति के लंड से बिल्कुल भी संतुष्टि नहीं मिलती थी उसे तो अपने बेटे का बमपिलाट लंड ही अपनी बुर में चाहिए था,,,,,,

दूसरे दिन राजू गोदाम की तरफ जा रहा था लेकिन किसी काम की वजह से वह दूसरे रास्ते से जा रहा था और वहां रास्ते में उसे कमला चाची की बहू मिल गई जिसे देखते ही राजू एकदम खुश होते हुए बोला,,,।

क्या बात है भाभी बहुत दिनों बाद दिख रही हो मायके चली गई थी क्या,,,

मैं तो यही हूं बबुआ लेकिन तुम ही नजर नहीं आते लगता है कि अब हमारे से मन भर गया है,,,

ऐसा कैसे हो सकता है भाभी,,,,,, भला भाभी से किसी देवर का मन भरा है,,,

तो आते क्यों नहीं हो हमारे घर पर,,,,

वैसे क्या है ना भाभी अब कामकाज कुछ ज्यादा बढ़ गया है इसलिए समय नहीं मिलता वैसे एक बात कहूं,,,,,

क्या,,,,?(गांव की बहू होने के नाते कमला चाची की बहू घूंघट डाल कर रखती थी लेकिन राजू से बात करते हुए हल्का से घूंघट को अपने होठों के ऊपर तक उठाई हुई थी जिससे राजू को केवल उसके लाल लाल होंठ नजर आ रहे थे और उस की भरी हुई चुचीया,,, जिसे देखकर उसका लंड खड़ा हो चुका था जिस पर खुद कमला चाची की बहू की नजर पड़ चुकी थी इसीलिए उसकी बुर से काम रस टपक रहा था,,,)

यही कि बस ऐसे ही बुला रही हो कि मेरे लिए अपनी दोनों टांगे खोल दोगी,,,,

(राजू की बात सुनते हैं उसके होठों पर मुस्कान आ गई और उसके लाल-लाल होठों पर मुस्कान को देखकर राजू की हालत खराब होने लगी और राजू फिर बोला)

अब ऐसे मुस्कुराते रहोगी या बताओ गी भी,,,

जो तुम चाहते हो वह करूंगी पहले चलो तो सही,,,

हो मेरी भाभी कितनी अच्छी हो तुम चलो जल्दी से चलते हैं अब तो मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,,

रुको पहले मैं घर में जाऊंगी फिर थोड़ी देर में तुम घर में आ जाना मैं दरवाजा खुला रखुगी,,,,

कमला चाची नहीं है क्या घर पर,,,

नहीं वह पड़ोस में पूजा है वहां गई है इसलिए तो तुम्हें बुला रही हूं,,,

ओहहह मेरी भाभी तब तो बहुत मजा आ जाएगा,,,।

(मुस्कुराते हुए कमला चाची की बहू अपने घर की तरफ जाने लगी और पीछे पीछे राजू चारों तरफ नजर घुमाता हुआ कमला चाची की बहू के पीछे पीछे उसकी गोलाकार नितंबों की चाल को देखते हुए आगे बढ़ने लगा थोड़ी देर में कमला चाची की बहू अपने घर के दरवाजे पर खड़ी हो गई और चारों तरफ देखकर राजू की तरफ देखकर उंगली से इशारा करके उसे अंदर आने के लिए थोड़ी और वह दरवाजा खोलकर अंदर चली गई थोड़ी देर में राजू भी पीछे-पीछे कमला चाची के घर में प्रवेश कर गया और तुरंत दरवाजे को बंद कर दिया लेकिन दरवाजे पर सिटकनी मारना भूल गया,,)
 
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