ऐसा लगने लगा था कि अंकित जहां-जहां जाता था वहां वहां औरतें हाथ होकर उसके पीछे पड़ जाती थी उसकी किस्मत बड़ी तेज थी उसके दोनों हाथों में हमेशा लड्डू रहते थे वह कभी सोचा भी नहीं था कि हल्दी की रस्म में जाने पर दो-दो बुर उसे चोदने को मिल जाएगी,,,, सुमन की तो वह लेता ही रहता था लेकिन सुमन ने जिस तरह से हिम्मत दिखाई थी उसकी हिम्मत देखकर अंकित को वह अपने मुकाबले की लड़की लगने लगी थी लेकिन जब उसने शर्मा जी की बहू को देखा जो उन्हें रंगे हाथ पकड़ ली थी वह कभी सोचा भी नहीं था कि शर्मा जी की बहू उसे मौके का पूरा फायदा उठाएगी जो की पूरी सजी धजी थी और किसी दुल्हन से काम नहीं लग रही थी,, वह भी अंकित के मोटे तगड़े मुसल को देखकर अपना आपा खो दी थी अपने चरित्र को एक तरफ रखकर वह उसे पाल का पूरा आनंद ले लेना चाहती थी और उसने वैसा ही की,,,,।
तभी तो कहा जा रहा था कि जैसे अंकित की किस्मत को पंख लग गए हो, हल्दी की रस्म खत्म होने के बाद खाना खाने के बाद मां बेटे दोनों घर लौट आए थे,,,, घूम करने के बाद मां बेटे दोनों के लिए यह दूसरी रात थी पहली रात तो वैसे ही गुजर चुकी थी खाना दोनों खा चुके थे इसलिए खाना बनाने का झंझट बिल्कुल भी नहीं था इसलिए थोड़ी देर बैठकर आराम करने के बाद मां बेटे दोनों छत पर आ गए,,, गर्मी की वजह से सुगंधा साड़ी उतार कर गाउन पहन ली थी,,, गाउन भी पारदर्शक था जिसमें सब कुछ दिखाई दे रहा था दोनों के बीच इतनी बार संबंध बन चुके थे कि, आपस में दोनों इस तरह से रहते थे कि एक दूसरे के अंगों को देखने के बाद भी उन लोगों को असहज बिल्कुल भी महसूस नहीं होता था,,, दोनों हमेशा सामान्य बने रहते थे, अंकित छत पर चटाई बिछाने लगा, सुगंधा रात में अपने मोहल्ले का नजारा देखने लगी धीरे-धीरे सभी के घरों की लाइटें बंद हो रही थी किसी के घर में अंधकार छा गया था तो किसी के घर में जीरो का बल्ब जल रहा था,,, गहरी सांस लेते हुए सुगंधा अपने बेटे से बोली।
असली सुकून तो अपने घर पर ही आकर मिलता है,,,।
तुम सच कह रही हो मम्मी होटल का कमरा चाहे जितना महंगा हो चाहे जितना सुविधा से भरा हो लेकिन जो सुकून अपने घर पर चटाई पर सोने में मिलता है वैसा सुकुन गद्दे पर भी सोने में नहीं मिलता,,,,।
लेकिन यह सुकून अब कुछ दिनों का है,,, (मोहल्ले की तरफ देखते हुए सुगंधा बोली तो अपनी मां की बात सुनकर अंकित अपनी मां की तरफ देखने लगा और बोला)
कुछ दिनों का मतलब,,,!
अरे बुद्धू छुट्टियां खत्म होने वाली है तेरी बड़ी बहन भी तो आएगी फिर हम दोनों के बीच का यह रिश्ता पता नहीं कैसे आगे बढ़ेगा,,,,।
ओहहह यह बात है,,, मैं समझा कौन सी बात हो गई चिंता करने की कोई बात नहीं है आए दिन समय तो मिल ही जाएगा,,,,।
मिल तो जाएगा लेकिन रात को तेरी बाहों में जो सुकून मिलता है वह तब नहीं मिल पाएगी मुझे तो तेरी बाहों में ही नींद आने लगी है एक आदत सी पड़ गई है पता नहीं तृप्ति के आने के बाद यह सब कैसे चलेगा।
अरे बिल्कुल चलेगा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करना,,, मैं हूं ना सब संभाल लूंगा,,,,, और हां आज शर्मा जी के घर बहुत मजा आया तुम्हारा डांस देख कर तो मैं आश्चर्यचकित हो गया तुम इतना अच्छा नाचती हो एक बार पहले भी देख चुका हूं लेकिन तब तुम्हारी तरफ देखने का नजरिया कुछ और था
और अब,,,,!(अपने बेटे की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए सुगंधा बोली)
अब तो तुम्हें नाचते हुए देखा तो ऐसा लग रहा था कि बस तुम्हें देखा ही रहो तुम्हारी बड़ी-बड़ी चूचियां ब्लाउज में कैद जब तुम हाथ हिला हिला कर नाच रही थी तो ऐसा लग रहा था कि किसी भी वक्त तुम्हारा ब्लाउज का बटन टूट जाएगा और तुम्हारे दोनों कबूतर हवा में लहराते लगेंगे,,,,।
धत् हरामी,,,,,,।
अरे सच कह रहा हूं मोहल्ले की औरतें तो तुम ही को देख रही थी कुछ औरतें तो तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड के बारे में बातें कर रही थी सच में उन्हें सुनकर तो मेरा इस समय खड़ा हो गया था,,,।
क्या बातें कर रही थी,,,?(उत्सुकता दिखाते हुए सुगंधा बोली)
बोल रही थी कि चाहे जो भी हो सुगंधा की गांड सच में इस उम्र में भी एकदम कसी हुई है,,,, हमारी तो ढीली होने लगी है,,,,।
यह कौन कह रहा था,,,,।
शर्मा जी के बगल में जो घर है ना,,,,।
ओहहह ,,,,, सच में वह ऐसा कह रही थी,,,।
बिल्कुल मम्मी तुम्हें नाचते हुए देख कर ना जाने कितनी औरतें की गांड जल गई होगी,,,,, लेकिन मजा बहुत आया मेहंदी की रस्म में,,,,।
हां यह बात तो है शर्मा जी ने अच्छा व्यवस्था किया था,,, कल तो बारात आएगी कल भी शादी में जाना होगा,,,,।
हां वह तो है,,,,, लेकिन न एक बात मुझे समझ में नहीं आई,,,।
क्या,,,?
शर्मा जी का बेटा हल्दी की रस्म में नहीं था सोचो उसकी खुद की बहन की शादी है और वह समय पर घर पर ही नहीं है ऐसे में शर्मा जी को कितनी दिक्कत सहनी पड़ी होगी सारा ताम-झाम व्यवस्था उन्ही को देखना पड़ा होगा,,,,।
हां बिल्कुल,,,,,, मैं और सुमन दीदी खुद लोगों को शरबत बांट रहे थे देखी तो थी तुम,,,,, शर्मा जी खुद बोले थे मदद करने के लिए।
अरे यह तो अच्छी बात है लड़की की शादी में मदद करना ही चाहिए,,,,।
(अंकित अभी भी चटाई पर बैठा हुआ था और उसकी मां दीवार पकड़ कर खड़ी होकर रात का नजारा देख रही थी तभी अंकित अपनी मां से बोला,,)
मैंने सुना की शर्मा जी का बेटा छः छः महीना घर पर नहीं आता,,,।
हां मैं भी कल ही सुनी और से बात कर रही थी क्योंकि हल्दी की रस्म के दिन भी वह नहीं आया था,,,।
तब तो बहुत बेकार है,,, मैं तो यह भी सुना की शर्मा जी का बेटा घर पर इतने दिनों तक नहीं आता जरूर उसकी बीवी का किसी के साथ चक्कर है तभी तो एकदम बनी ठनी रहती है।
नहीं नहीं ऐसा बिल्कुलभी नहीं है आते जाते खुद उससे कई बार मुलाकात हो चुकी है कितनी सीधी है ऐसा वह कर नहीं सकती,,।
सीधी तो तुम भी थी,,, और दुनिया की नजर में अभी भी सीधी हो लेकिन मैं ही जानता हूं की कितनी बड़ी छिनार हो,,,,।
तू भी तो दुनिया के नजर में सीधा-साधा हैलेकिन मैं भी जानती हूं कि तू कितना बड़ा मादरचोद है।
मादरचोद बनाया किसने मेरी रानी,,,,,(इतना कहकर अंकित अपनी जगह पर खड़ा हो गया क्योंकि बात करने के दरमियान सुगंधा अपनी गांड को हिला रहे थे यह एक तरह से उसका इशारा था अपने बेटे को अपने पास बुलाने का और अंकित अपनी मां के इशारे को अच्छी तरह से समझता था अंकित समझ गया था कि उसकी मां को क्या चाहिए,,, इसलिए तुरंत अपनी मां के पीछे पहुंच गया और उसे अपनी बाहों में भरकर गाउन के ऊपर से ही उसकी चूची को दबाने लगा,,,, और अपने बेटे की हरकत देखकर वह मदहोश होते हुए बोली,,,)
मैंने बनाई,,,, और मुझे करो है कि मैं तुझे मादरचोद बनाई हूं वरना मेरी यह जवानी कोई और भोग रहा होता,,,,,।
ऐसा मैं कभी नहीं होने देता मेरी जान,,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी मां के अकाउंट की पट्टी को दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे की तरफ बांहों से सरकाने लगा,,, हैरानी की बात यह थी कि, गाउन के अंदर उसने ब्रा नहीं पहनी थी जिसकी वजह से अंकित को अपनी मां की चुचियों तक पहुंचने में बिल्कुल भी देर नहीं लगी थी और वह अपनी मां की नंगी चूची को दशहरी आम की तरह दबाना शुरू कर दिया था,,,,, तभी सुगंधा को एहसास हुआ कि वह जहां पर खड़ी थी वहां किसी की भी नजर पहुंच सकती थी इसलिए वह अपने बेटे से बोली रुक जा थोड़ा पीछे चल,,, कोई देख लेगा,,,।
कोई नहीं देखेगा मेरी रानी सब लोग सो गए हैं देखो,,, पूरा मोहल्ला शांत है,,,,।
अरे बुद्धू जैसे हम दोनों जग रहे हैं वैसे ओर भी लोग होंगे जो जाग कर यही खेल खेल रहे होंगे।
यह बात है,,,,, तो आ जाओ पीछे मेरी जान,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित पीछे से अपनी मां को पकड़ कर उठा दिया और थोड़ा पीछे लेकर आ गया जहां से वह लोग तो देख सकते थे लेकिन दूसरे लोग की नजर वहां नहीं पहुंच सकती थी मदहोशी सुगंधा के बदन में भी जाने लगे थे इसलिए वह बिल्कुल भी देर नहीं की और अपने हाथों से अपना गाउन निकालकर पूरी तरह से नंगी हो गई,,,,, इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से था कि कुछ दिनों बाद इस तरह से खुलकर वह मजा नहीं ले पाएगी भले चोरी छिपे अपने बेटे के साथ संभोग सुख प्राप्त कर ले लेकिन इस तरह से खुलकर आनंद लेना तब मुमकिन नहीं हो पाएगा इसलिए वह जितना हो सकता था उतना मजा ले लेना चाहती थी,,,,, अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को चांदनी रात में देखकर एक बार फिर से अंकित का मन बहकने लगा और वह भी अपनी मां की तरह अपने कपड़े उतारने में बिल्कुल भी देर नहीं किया और मैं भी अपनी मां की तरह एकदम नंगा हो गया,,,, अपनी मां के पिछवाड़े के स्पर्श से ही अंकित का लंड लोहे के रोड की तरह खड़ा हो चुका था जिसे देखकर सुगंध से रहा नहीं की और अपने घुटनों के बल बैठ गई और अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,, अपनी मां की हरकत से अंकित मदहोश होने लगा और वह अपने दोनों हाथों को उसके सर पर रखकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया उसकी मां भी इस खेल में उसका बराबर साथ दे रही थी उसके होठों का कसाव पूरा मुंह खोलने के बावजूद भी लंड के ऊपर बराबर बना हुआ था,,, सुगंधा की मदहोशी बढ़ते जा रही थी,,,,।
हल्दी की रस्म में जो जो हुआ था वह सब कुछ अंकित नमक मिर्च लगाकर अपनी मां को बताया था लेकिन यह बात बिल्कुल भी नहीं बताया था कि शर्मा जी के घर में सुमन और शर्मा जी की बहू के साथ उसने क्या किया था इस बात का एहसास अंकित को अच्छी तरह से था कि भले ही वह जब घूमने गया था तो पहाड़ी पर अपनी मां की आंखों के सामने गैर औरत के साथ उसने संबंध बनाकर उसे संतुष्टि प्रदान किया था तब उसकी मां कुछ नहीं बोली थी लेकिन वह जानता था कि ऐसा यहां पर चलने वाला नहीं है उसे समय उसकी मां मदहोश थी उत्तेजित थी और इसी बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसे औरत से अब दोबारा मुलाकात होने वाली नहीं है इसलिए वहां अपने बेटे द्वारा उसके साथ संबंध बनाने पर बिल्कुल भी ऐतराज नहीं जताई थी लेकिन यहां पर अगर वह किसी के साथ संबंध बनाता है और उसकी मां को इस बात की खबर पड़ जाती है तो वह कभी भी अपने बेटे को माफ नहीं करेगी क्योंकि एक औरत होने के नाते औरत कभी भी ऐसे मर्द को किसी और से बांटना नहीं चाहती जिसके साथ वह हम बिस्तर होती है जिसके साथ उसे संतुष्टि का एहसास मिलता है जिससे वह प्यार करने लगती है इस समय अंकित सुगंधा के लिए बहुत कुछ था,,,, इसलिए वह कभी नहीं चाहेगी कि उसका बेटा किसी गैर औरत के साथ संबंध बनाएं अपनी मां की भावनाओं को अंकित अच्छी तरह से जानता था इसलिए सुमन और शर्मा जी की बहू के बारे में अंकित ने कुछ बताया नहीं था।
कुछ देर तक अंकित और उसकी मां इसी तरह से मजा लेते रहे लेकिन इसके बाद अंकित अपनी मां को पीठ के बल लिटाकर उसकी दोनों टांगों के बीच मुंह डाल दिया और अपने लंड घुस के मुंह में डाल दिया दोनों इस तरह से एक दूसरे के अंगों को मजा दे रहे थे ऐसा करने में अंकित को भी बहुत मजा आता था वह अपनी मां की दोनों मोटी-मोटी जांघों को खोलकर उसकी गुलाबी छेद को अपनी जीभ से पागलों की तरह चाट रहा था,,, और सुगंधा भी अपने बेटे को पूरा मजा देने में लगी हुई थी,,,,, कुछ देर तक दोनों मजा लेने के बाद अंकित अपनी मां के ऊपर से उठकर बगल में बैठकर और अपनी मां को घोड़ी बनने के लिए बोला चटाई बिछी हुई थी चटाई के ऊपर अपनी दोनों घुटनों के नीचे तकिया लगाकर वह अपनी भारी भरकम गांड को हवा में उठा दे जिसे देखकर अंकित मुस्कुरा दिया और अपनी मां की गोरी गोरी गांड पर चांदनी रात में थप्पड़ लगाने लगा और उसकी गोरी गोरी गांड को पल भर में ही टमाटर की तरह लाल कर दिया,,,, और फिर अपने लिए जगह बनाकर उसके गुलाबी छेद में अपना लंड डाल दिया अंकित को अपनी मां की चुदाई पीछे से करने में कुछ ज्यादा ही मजा आता था। क्योंकि इस अवस्था में वह अपनी मां की बुर की गहराई तक बढ़िया आराम से पहुंच जाता था और उसकी मां को भी संतुष्टि का एहसास होता था अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़े हुए वह जोर-जोर से धक्के लगा रहा था । हर धक्के के साथ सुगंधा मदहोश हुए जा रही थी उसकी हालत एकदम मस्त हो चुकी थी,, छत के ऊपर खुले आसमान के नीचे वह अपनी बेटी से चुदाई का आनंद लूट रही थी।
आज वह जानबूझकर अपने घुटनों के नीचे दोनों तकिया लगा कर रखी थी क्योंकि उसके बेटे के थक्के इतनी तेज होते थे कि वह आगे की तरफ सड़क जाती थी जिसकी वजह से उसके घुटनों में दर्द के साथ-साथ जख्म भी हो जाता था लेकिन उस पल के आनंद के समय इस बात का इस दर्द का एहसास उसे नहीं होता था लेकिन दूसरे दिन जब वह घुटनों को देखी थी तो वह छिला हुआ दिखाई देता था,, इसलिए आज वहां नरम नरम तकिया लगाई थी और तकिया लगाने के बाद उसका जोश और उत्तेजना और ज्यादा पड़ गया था अंकित अपनी मां की दोनों चूचियों को पकड़ कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था,,, देखते ही देखते मां बेटे दोनों का बदन अकडने लगा और अंकित पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में कस के दबोचा हुए तब तक धक्का लगातार जब तक की उसके लंड से लावा की आखिरी बुंद तक उसकी मां की बुर में गिर नहीं गई,,,, दोनों काफी थक चुके थे, दूसरा राउंड लेने में दोनों की हिम्मत गवाही नहीं दे रही थी क्योंकि हल्दी की रस्म में सुगंधा नाच नाच कर थक गई थी तो अंकित अपनी कमर हिला हिला कर थक गया था,,, इसलिए दोनों एक दूसरे की बाहों में नग्न अवस्था में ही गहरी नींद में सो गए,,,।
आज शाम को विवाह था बरात आने वाली थी जिसकी तैयारी में सुगंधा सुबह से ही जुट गई थी,, क्योंकि हल्दी की रस्म में जो उसने अपनी जवानी के आकर्षण का समां बांध रखी थी उसे बरकरार रखना बेहद जरूरी हो चुका था। अपने बेटे के मुंह से दूसरी औरतों के द्वारा अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह पूरी तरह से सातवे आसमान पर पहुंच चुकी थी इसलिए आज वह कोई कमी रहने देना नहीं चाहती थी इसलिए अलमारी में से अपनी पसंदीदा साड़ी को ढूंढ रही थी और बहुत ही जल्द उसे अपनी आसमानी रंग की साड़ी भी मिल गई थी आसमानी रंग की साड़ी के साथ-साथ उसी के मैचिंग का पेटीकोट और ब्लाउज निकलकर वह अलमारी के दूसरे खाने में अपनी ब्रा और पैंटी ढूंढ रही थी,,,, लेकिन आसमानी रंग कि ना तो ब्रा थी और ना हीं पेंटी थी,,,, इसलिए वह थोड़ी उदास हो गई,, वह उदास होकर बिस्तर पर बैठी थी कि तभी अंकित वहां पर आकर और अपनी मां को उदास देखकर उसके पास में बैठ गया और बोला।
क्या हुआ मम्मी तुम्हारा मुंह उतरा हुआ क्यों है,,,?
आप क्या करूं शाम को बरात आने वाली है आज में अपने लिए आसमानी रंग की साड़ी पसंद की थी उसके मैचिंग का ब्लाउज और पेटीकोट तो मिल गया लेकिन आसमानी रंग की ना तो ब्रा है और ना हीं पेंटी है।
तो इसमें क्या हो गया लाल रंग की पहन लो,,,।
नहीं मेरा मन नहीं मान रहा है आसमानी रंग की ब्रा और पेटी होती तो मजा आ जाता पहनने में,,,।
तुम ऐसे कह रही हो जैसे तुम्हारा आशिक बारात में आने वाला है और तुम अपनी साड़ी उठाकर उसे अपनी पैंटी और ब्रा दिखाने वाली हो,।(अंकित चुटकी लेटा हुआ बोल तो अपने बेटे की बात सुनकर गुस्सा दिखाते हुए सुगंधा बोली,,,)
धत् हरामी अपनी मां के बारे में ऐसा बोलते हुए तुझे शर्म नहीं आती मेरा कौन सा आशिक है तेरे सिवा, जिसे मैं साड़ी उठाकर अपनी ब्रा और पेटी दिखाऊंगी,,,,।
अरे मम्मी मैं तो मजाक कर रहा था तुम बेवजह सीरियस हो जाती हो,,,।
तू बात ही ऐसा करता है कि दिमाग खराब हो जाता है एक तो ऐसे ही इसका मैचिंग नहीं मिल रहा है दिमाग घुमा हुआ है और तुम है कि इस तरह की बात करके और दिल जलाता है,,,,।
कोई बात नहीं लेकिन मैं तो ठीक ही कह रहा था साड़ी के अंदर कुछ भी पहनो कहां किसको दीखने वाला है,,,।
अरे बेवकूफ तू नहीं समझ रहा है एक ही रंग का सब कुछ होगा तो अपने मन को थोड़ा शांति मिलती है आत्म विश्वास बढ़ता है,,,,,।
ओहहह यह बात है तो चलो अभी खरीद देते हैं,,, जल्दी से तैयार हो जाओ अभी मार्केट चलते हैं,,,,,।
अभी,,,,(आश्चर्य से सुगंधा बोली)
हां तो क्या हुआ,,,?
धत् अगर गाड़ी होती तो कितना अच्छा होता है अभी जाकर जल्दी से लेकर चले आते,,,।
यह बात है अच्छा तुम रुको मैं अभी मोटरसाइकिल का बंदोबस्त करके आता हूं,,,(इतना कहते हुए अंकित कमरे से बाहर निकल गया उसकी मां उसे बुलाते रह गए लेकिन वह सुना नहीं और घर से निकल गया सुगंधा अपने मन में सोचने लगी कि यह कहां से मोटरसाइकिल का बंदोबस्त करके आएगा इसे चलाना आता भी है कि नहीं,,,, थोड़ी देर में अंकित शर्मा जी के घर पहुंच चुका था जहां पर शादी की तैयारी चल रही थी वहां पर पहुंचने पर वह शर्मा जी की बहू को ढूंढ रहा था क्योंकि शर्मा जी के घर पर मोटरसाइकिल थी और शर्मा जी की बहू ही उसे मोटरसाइकिल दे सकती थी,,, अंकित को मोटरसाइकिल चलाने आता है इस बात को ज्यादा लोग बिल्कुल भी नहीं जानते थे सिर्फ उसका एक दोस्त जानता था जिसका मोटरसाइकिल उसने चलाना सीखा था ज्यादा तो नहीं चलाया था लेकिन उसे पूरा विश्वास था कि वह चला लेगा,,, इधर-उधर देखते हुए थोड़ी देर में उसे शर्मा जी की बहू दिखाई थी जो कि खुले बालों में बहुत खूबसूरत लग रही थी और सही समय पर उसकी नजर भी अंकित पर पड़ गई तो अंकित को देखकर वह मुस्कुरा दी और अंकित के बुलाई बिना ही वह तुरंत उसके पास पहुंच गई और बोली,,,)
तु यहां क्या कर रहा है,,,,?
तुम्हारा इंतजार कर रहा था कल जो तुमने मजा दी हो रात भर में सो नहीं पाया,,,,।
(अंकित की बात सुनकर शर्मा जी की बहू शर्माने लगी और इधर-उधर देखने लगी कि कहीं कोई उसकी बात तो नहीं सुन रहा है लेकिन वहां पर कोई नहीं था इसलिए वह भी मुस्कुरा कर बोली)
एकदम सांड है तू अभी तक मेरी कमर दुख रही है।
मजा भी तो बहुत आया था ना भाभी,,,,,।
मैं भी रात भर सो नहीं पाई रात भर तेरी याद आती रही,,,,(शर्मा जी की बहू भी शरमाते हुए बोली)
तो क्या इरादा है भाभी फिर से,,,,(इतना ही कहा था कि शर्मा जी की बहू इधर-उधर देखते हुए बोली)
देख तो आए तो चारों तरफ मेहमानी मेहमानी ऐसे में मौका मिलना बहुत मुश्किल है,,,,, लेकिन चिंता मत कर मौका मिलते ही हम दोनों फिर से मजाकरेंगे,,,।
मुझे तुमसे यही उम्मीद थी बाकी सच में तुम इतनी खूबसूरत हो कि मैं तो पागल हो गया तुम्हें पागल तुम्हारे आगे सुमन तो कुछ भी नहीं है शादीशुदा होकर भी तुम्हारी बुर एकदम कसी हुई है,,,।
(अंकित के पूछे अपनी तारीफ सुनकर खास करके उसके मुंह से बुर शब्द सुनकर शर्मा जी की बहू एकदम से गनगना गई और इधर देखने लगी,,,, और शरमाते हुए बोली)
धत्,,, थोड़ा धीरे बोल कोई सुन लेगा तो गजब हो जाएगा ।
कोई सुनने वाला नहीं है तभी तो कह रहा हूं,,,,, सच कहूं तो तुम मुझे अपना दीवाना बना दि हो,,,,,।
बाद में मिलना मुझे अभी बहुत काम है,,, वैसे शाम को जल्दी आ जाना थोड़ा हाथ बंटा लेना,,,,।
यह भी कोई कहने की बात है भाभी,,,, जरूर आऊंगा,,,, वैसे आज थोड़ा मौसम ठंडा है,,,।
ठंड तो है मुझे डर है कि कहीं बारिश ना हो जाए देख रहे हो बादल भी है बारिश हो गई तो शादी का मजा किरकिरा हो जाएगा,,,,।
बारिश का महीना तो अभी आया नहीं है लेकिन कोई भरोसा भी नहीं है,,,,।
चलो अच्छा ठीक है मैं जा रही हूं,,,,(इतना कहकर शर्मा जी की बहू जाने वाली थी कि अंकित आवाज लगाते हुए बोला)
सुनो भाभी,,,,।
हां बोलो,,,(एकदम से रुक कर अंकित की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली)
तुम्हारी मोटरसाइकिल मिलेगी बस बाजार जाकर वापस आना है,,,,।
हां जरूर रुको मैं चाबी लेकर आती हूं,,,(इतना कहने के साथ ही वह घर के अंदर की तरफ जाने लगी है अपनी गांड मटका कर अंकित की नजर उसके पिछवाड़े पर ही थी जो कई हुई साड़ी में कुछ ज्यादा ही ऊभरी हुई नजर आ रही थी उसके पिछवाड़े को देखकर अंकित अपने मन में ही बोला कपड़े के अंदर जितनी खूबसूरत लगती है कपड़े के बिना उससे भी ज्यादा खूबसूरत दिखती है,,,,,, शर्मा जी की बहू जैसे गई थी वैसे ही वापस आ गई और मुस्कुराते हुए मोटरसाइकिल की चाभी अंकित के हाथ में थमा दी,,,,, और बोली,,,)
मोटरसाइकिल की चाबी सीधे मुझे ही देना,,,।
क्यों भाभी चाचा जी बोलेंगे क्या,,,?
नहीं नहीं कोई बोलेगा नहीं बस ऐसे ही कह रही हूं चाबी मुझे ही देना किसी और को मत दे देना,,(इतना कहते हुए शर्मा जी की बहू मुस्कुराने लगी और घर के अंदर चली गई अंकित तुरंत मोटरसाइकिल के अंदर चाबी लगाया और पहले ही की में मोटरसाइकिल स्टार्ट हो चुकी थी यह देखकर अंकित एकदम खुश हो गया था,,,,,, और जैसे-जैसे उसके दोस्त ने उसे चलाना सिखाया था ठीक वैसे-वैसे ही वह कलच दबाकर एक्सीलेटर को धीरे-धीरे देने लगा और मोटरसाइकिल धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी यह देखकर अंकित बहुत खुश हो रहा था और सीधा जाकर अपने घर के सामने खड़ी कर दिया और मोटरसाइकिल का होरन दबाने लगा होरन की आवाज सुनकर तुरंत सुगंधा दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई और अपने बेटे को मोटरसाइकिल पर बैठा देखकर खुशी से समा नहीं रही थी, और उत्साहित होते हुए बोली,,,)
बाप रे मुझे तो अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा है तुझे मोटरसाइकिल चलाने आती है।
तो क्या मम्मी क्या समझती हो मुझको,,,।
लेकिन यह तूने सीखा कब,,,,?
सब यही पूछ लगी जल्दी से आओ रास्ते में सब बताता हूं,,,,,।
(इतना सुनकर सुगंधा तुरंत अपने कमरे में गई और पर्स और थैला लेकर बाहर आ गई दरवाजे को बंद करके उसे पर ताला लगाकर वह सीधा मोटरसाइकिल पर अपने बेटे के पीछे बैठ गई भारी भरकम गांड रखकर बैठते हुए उसे बेहद उत्तेजना का अनुभव हो रहा था अपने बेटे के कंधे पर हाथ रखकर वह बोली,,,)
अब चल,,,,।
(अगले ही पल मोटरसाइकिल सड़क पर दौड़ रही थी,,, रास्ते में उसने अपनी मां को सब कुछ पता है कि उसने कैसे मोटरसाइकिल सीख लिया था,,,, सुगंधा को अपने बेटे पर बहुत गर्व हो रहा था लड़की इस बात का दुख भी था कि वह अपने बेटे को मोटरसाइकिल खरीद कर नहीं दे सकती थी,,,, कपड़े की दुकान पर पहुंचकर, सुगंधा जल्दी से कपड़े की दुकान में गई और थोड़ी ही देर में अपनी पसंदीदा ब्रा और पेंटी खरीद कर वापस आ गई,,, अपनी मां को 15:20 मिनट में ही आता देखकर अंकित खुश होता हुआ बोला,,,)
क्या हुआ इतनी जल्दी मिल गया,,,!
अरे अच्छा हुआ जल्दी मिल गया करना दो-चार दुकान ढूंढना पड़ता,,,,।
फैशन तो सिर्फ तुम्हारा ही है मम्मी,,,, वरना भला कौन औरत परेशान होती है की साड़ी के अंदर कौन से कलर का पैंटी पहनना है,,,,।
अच्छा यह बात है,,,(मोटरसाइकिल के पीछे बैठते हुए) अब आना मेरे पास साड़ी के नीचे कुछ पहनी नहीं रहूंगी तब पता चलेगा तुझे,,,,।
नहीं नहीं मम्मी ऐसा बिल्कुल मत करना साड़ी के अंदर कुछ पहनी रहती हो तभी जोश बढ़ जाता है,,,,(मोटरसाइकिल में कीक मारते हुए अंकित बोला,,, मोटरसाइकिल स्टार्ट हो चुकी थी और उसे आगे बढ़ाते हुए बोला,,) इसे पहनने के बाद सबसे पहले मुझे ही दिखाना की कैसी लग रही हो..
अरे मादरचोद मैं सिर्फ तुझे ही दिखाऊंगी तुझे दिखाने के बाद क्या लगता है किसी और को दिखाऊंगी क्या,,,,?
तुम्हारे मुंह से गाली बहुत अच्छी लगती है,,,,।
तु मुझे मजबूर कर देता है गाली देने के लिए,,,।
अच्छा ही तो है गाली सुनने को मिलती है,,,, अच्छा मम्मी अपने पास भी इस तरह की मोटरसाइकिल हो तो कितना मजा आ जाए ना मार्केट जाने में बिल्कुल भी समय ना लगे,,,।
बात तो तु ठीक कह रहा है लेकिन इतने पैसे अभी है नहीं,,,,।
अरे मैं लेने के लिए नहीं कह रहा हूं मैं तो सिर्फ बता रहा हूं कि अपने पास मोटरसाइकिल हो तो मजा आ जाए मैं कमाने लगूंगा तो खुद ही खरीद लूंगा,,,,।
तू कमाने लगेगा तो मुझे भी सहारा मिल जाएगा,,,,।
चिंता मत करो,,,,,,, जल्द ही कमाने लगूंगा,,,,,।
(थोड़ी देर में अंकित अपने घर के सामने पहुंच चुका था सुगंधा मोटरसाइकिल से नीचे उतर चुकी थी और दरवाजे का ताला खोल रही थी यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला,,,)
तुम चलो मैं अभी थोड़ी देर में आता हूं मोटरसाइकिल देकर,,,,।
ठीक है जल्दी आना,,,,।
अरे अगर वहां कोई काम निकल गया तो आने में देर हो जाएगी वैसे भी शादी वाला घर है कोई ना कोई काम तो निकलता ही रहता है इसलिए चिंता मत करना,,,,।
ठीक है जा,,,(इतना कहकर सुगंधा दरवाजा खोल दी और घर में प्रवेश कर गई और अंकित मोटरसाइकिल आगे बढ़कर शर्मा जी के घर पहुंच गया,,,,, दिन के 12:00 बज रहे थे और यह वही समय था जो शादी वाले घर में भी कुछ देर के लिए सन्नाटा छा जाता है लोग आराम कर रहे होते हैं क्योंकि थोड़ी देर आराम करने के बाद ही इतना काम रहता है कि सुबह तक समय ही नहीं मिलता मोटरसाइकिल खड़ी करके हाथ में चाबी लिए हुए अंकित इधर-उधर देख रहा था लेकिन शर्मा जी की बहू कहीं नजर नहीं आ रही थी,,,, तो अंकित धीरे से घर में प्रवेश करने लगा सामने ही शर्मा जी की बीवी कुछ काम कर रही थी अंकित को देखते ही बोली,,,,)
आओ,, बेटा,,,,,, क्या ढूंढ रहे हो,,,,?
अरे कुछ नहीं चाची भाभी जी को ढूंढ रहा था,,,,,।
बहु तो ऊपर वाले कमरे में है,,,,,।
कुछ काम था क्या,,,?
नहीं उनका सामान देना था इसलिए जा जाकर ऊपर ही दे दे और हां शाम को सुगंधा को बोलना पूरी तैयारी के साथ आएगी,,, तेरी मां तो एकदम हीरोइन की तरह नाचती है और दिखती भी हीरोइन की तरह वह शादी में आती है तो चार चांद लग जाते हैं कह देना जल्दी आएगी,,, ऐसा ना हो की बारात आ जाए तब आए,,,,।
जी नहीं चाची मम्मी जल्दी आएगी मुझसे कह रही थी कि जल्दी जाना होगा क्योंकि शादी में तो वैसे ही ढेर सारे काम आते हैं थोड़ा बहुत हाथ भी बंटाना होगा,,,।
तेरी मम्मी बहुत समझदार है जा जाकर मिलने में भी चलती हूं थोड़ा देर सो लेती हूं फिर उसके बाद सोने का समय नहीं मिलेगा,,,,,।
ठीक है चाची,,,,,।
(शादी वाला घर होने के बावजूद भी घर में कुछ देर के लिए सन्नाटा छाया हुआ था क्योंकि मेहमान भी अपनी कमरे में आराम कर रहे थे और अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि शर्मा जी की बहू इस कमरे में हो जहां पर दोनों की मुलाकात हुई थी तो मजा आ जाए,,,, यही सोचता हुआ वह सीढ़ियां चढ़ने लगा,,, और उसी कमरे के पास गया तो देखा कमरे का दरवाजा बंद था और उसे पर ताला लगा हुआ था यह देखकर अंकित को थोड़ी निराशा हुई और वह शर्मा जी की बहू को दूसरे कमरे में ढूंढने लगा तो दूसरी तरफ के कमरे के पास पहुंच कर देखा तो कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था,,,, सभ्यता दिखाते हुए अंकित सीधे दरवाजा खोलने के बजाय दरवाजे पर दस्तक देना ठीक समझा,,,,, दस्तक देते ही अंदर से शर्मा जी की बहू की ही आवाज आई जिसे सुनकर अंकित एकदम से खुश हो गया,,,,।
कौन है,,,,?
मैं हूं भाभी अंकित,,,,,,,।
अरे तु है,,,,(इतना कहने के साथ ही बिस्तर पर से वह उठने लगी वैसे तो दरवाजा बंद था लेकिन चूड़ियों के झांकने की आवाज से अंकित को एहसास हो गया था कि वह बिस्तर से खड़ी हो रही थी और उसके पायल की खनक बता रही थी कि वह दरवाजे के करीब आ रही थी अगले हीरे से दरवाजा खोली और मुस्कुराते हुए उनकी तरफ देखने लगी और बोली)
बहुत जल्दी आ गया मुझे तो लगा कि शाम को आएगा,,,।
जी नहीं भाभी काम जल्दी खत्म हो गया तो आ गया लीजिए आपकी चाबी,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित कमरे के अंदर नजर घुमाई तो देखा बिस्तर पर एक खूबसूरत लड़की बैठी हुई थी जिसके चेहरे पर थोड़ी निराशा थी लेकिन दिखने में वह बहुत खूबसूरत थी उसके चेहरे पर बदन पर हल्दी लगी हुई थी अंकित को समझते देर नहीं लगी की इसी की शादी है शादी से बात को शर्मा जी की बहू भी भांप गई थी इसलिए मुस्कुराते हुए बोली)
यह रजनी है मेरी ननद आज इसी की शादी है,,,,।
वह तो दिखाई दे रहा है लेकिन दीदी उदास क्यों है,,,?
(दीदी शब्द सुनकर रजनी दरवाजे की तरफ देखने लगी और शर्मा जी की बहू बोली)
किसी भी लड़की के लिए अपना घर छोड़कर दूसरे के घर जाना बड़ा दुखदाई होता है,,,, रजनी इसीलिए चिंतित हैं कि अब वह पराया हो जाएगी,,,,,।
अब कर भी क्या सकते हैं भाभी यह तो दुनिया का रिवाज है कुछ दिन पहले मैं भी यही सोच रहा था कि मेरी बड़ी दीदी भी शादी करके कुछ ही साल में दूसरे के घर चली जाएगी तब हम लोग कैसे रहेंगे,,,,।
चल कोई बात नहीं यह तो होना ही है,,,,,।
ठीक है भाभी अब मैं चलु शाम को आऊंगा,,,,।
अरे कहां जा रहे हो थोड़ा काम है शाम के लिए थोड़ा रसोई का सामान इकट्ठा करना है चलो मेरे साथ,,,, रजनी को तो ले नहीं जा सकती एक तो वैसे ही यह परेशान है,,,,,।
ठीक है भाभी चलो मुझे भी घर जाना है जल्दी काम खत्म करके,,,,,।
घर क्यों जाओगे,,,,?
अरे भाभी मुझे भी तो थोड़ा बहुत आराम करना होगा शाम को ही वापस आ जाना है।
चल अच्छा ठीक है रसोई वाला काम खत्म कर दे फिर चले जाना,,,,, अच्छा रजनी तुम आराम करो,,,,।
ठीक है भाभी,,,,,।
दरवाजा बंद कर लो,,,(कमरे से बाहर निकलते हुए शर्मा जी की बहू बोली और फिर जल्दी से रसोई वाले कमरे में आ गई अंकित और शर्मा जी की बहू दोनों कमरे के अंदर थी , शर्मा जी की बहू जल्दी से उत्साहित होते हुए कमरे का दरवाजा बंद कर दी,,, यह देखकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला,,,)
मैं सोचा नहीं था कि दोबारा इतनी जल्दी मौका मिलेगा,,,।
सोची तो मैं भी नहीं थी तो सही समय पर चाबी वापस देने के लिए आया है,,,।
भैया अभी तक नहीं है क्या,,,?
मरने दे हरामजादे को ना बीवी की फिक्र है ना अपनी बहन की शाम को आएगा,,,, मैं तो गुस्से में बोल दी की आना ही मत,,,।
यह तो अच्छा हुआ मुझे बार-बार मौका मिल जाएगा,,,।
हां हरामजादे तुझे तो मौका ही चाहिए,,,,,(इतना कहकर शर्मा जी की बहू खुद ही उसे अपनी तरफ पकड़ कर खींच ली और अपनी बाहों में भर ली और तुरंत अपने होठों को अंकित के होठों से सटा दी अंकित एकदम से मदहोश हो गया और तुरंत ही उसके दोनों हाथ शर्मा जी की बहू की भारी भरकम गांड पर पहुंच गई जिसे साड़ी के ऊपर से ही अंकित जोर-जोर से दबाने लगा मसलने लगा,,,)
कोई आएगा तो नहीं ना भाभी,,,,।
कुछ देर के लिए तो कोई नहीं आएगा सब लोग अपने-अपने कमरे में आराम कर रहे हैं,,,,,।
ओहहहहह भाभी तुमसे अच्छा कौन है,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित फिर से उसके होठों पर अपनी हॉट रखकर फिर से उसके लाल-लाल होठों का मधुर रस पीने लगा इसी के साथ उसकी गांड को बराबर से दबाता हुआ मसलने लगा,,, बच्चे ना होने की वजह से और अपनी जवानी के दौर में होने की वजह से शर्मा जी की बहू की गांड एकदम खुशी हुई थी जिसे दबाने में अंकित को बेहद आनंद की अनुमति हो रही थी कदकाठी में भी वहां अंकित से थोड़ा सा छोटी थी इसलिए अंकित का मजा दुगना होता जा रहा था,,,,, अंकित शर्मा जी की बहू की हिम्मत की दाद दे रहा था क्योंकि जिस तरह से शादी वाले घर में वह बड़ी बहू होने के बावजूद भी कमरे के अंदर उसके साथ संभोग सुख प्राप्त की थी आज भी उसी तरह से ही अपनी ननद को बेवकूफ बना कर उसे लेकर कमरे में घुस गई थी। वह कभी सोचा नहीं था कि उसके मोहल्ले में एक औरत इतनी हिम्मत वाली होगी लेकिन इस बात का उसे अब एहसास हो गया था कि हर घर में अनैतिकता पनपता ही है चाहे जिस रूप में इससे कोई बच नहीं सकता,,,, शर्मा जी की बहू के पीछे सबसे बड़ा प्रमुख कारण था उसके पति की बेरुखी,,, जो पालन पोषण में तो अपनी जिम्मेदारी निभा रहा था लेकिन अपनी पत्नी के शारीरिक संतुष्टि के लिए उसकी जिम्मेदारी शून्य थी उसमें वह बिल्कुल भी खरा नहीं उतर रहा था जबकि शादी के तीन ही वर्ष हुए थे शर्मा जी की बहू खूबसूरत थी कद काठी में आकर्षक थे अंगों का उठाव और उभार काम भावना जगाने के लिए पर्याप्त थी लेकिन फिर भी उसका पति उससे अलग था अपने काम में व्यस्त था इसलिए उसके काम में व्यस्त होने की वजह से शर्मा जी की बहु कामग्रस्त हो चुकी थी।
शर्मा जी की बहू की बड़ी-बड़ी गांड को अपने दोनों हाथों से दबाते हुए अंकित अपने मन में यही सोच रहा था कि कितना बेवकूफ पति है इतनी खूबसूरत बीवी को घर में अकेला छोड़कर बाहर काम रहा है अगर मैं इसकी जगह होता तो अपनी बीवी को बिल्कुल भी अकेला नहीं छोड़ता बल्कि जब मौका मिलता तब इसकी बुर में लंड डाल देता,,,,, यही सब सोचता हुआ अंकित धीरे-धीरे शर्मा जी की बहू की साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगा और शर्मा जी की बहुत तेज होते हुए अपने हाथ को सीधा उसके पेंट के उभरे हुए भाग पर रखकर जोर-जोर से लंड को पकड़कर मसलने लगी,,,,, दोनों मदहोश हुए जा रहे थे दोनों तैयार हो चुके थे,,,, दोनों में से कोई किसी से कम नहीं था लगातार दोनों के होंठो का चुंबन प्रगाढ़ होता जा रहा था। देखते ही देखते शर्मा जी की बहू के होठों का रस पीने में तल्लीन हुआ अंकित शर्मा जी की बहू की साड़ी को उसकी कमर तक उठा दिया था और उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों में लेकर जोर जोर से दबा रहा था,,, अंकित इतना अत्यधिक उत्तेजित हो जा रहा था कि उसकी पेंटिं में दोनों हथेलियां को डालकर उसकी नंगी गांड को दबाने की कोशिश कर रहा था,,,,,, अंकित की हरकतों से उत्तेजित हुई शर्मा जी की बहू अपने होठों को उसके होठों से अलग करके गहरी सांस लेते हुए बोली।
जो भी करना जल्दी करना,,,,,,।
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो भाभी,,,,, जो भी होगा मजेदार होगा,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित एक बार फिर से उसे अपनी गोद में उठा लिया और चलता हुआ बिस्तर पर लाकर पटक दिया अंकित की भुजाओं का बल वह पहले भी देख चुकी थी,,,, वह अंकित की ईस हरकत से आनंदित हो जाती थी,,, बिल्कुल भी देर करना उचित न समझते हुए अंकित में अपने दोनों हाथों को उसकी चड्डी पर रखकर नीचे की तरफ खींचने लगा शर्मा जी की बहू भी उसका सहयोग करते हुए अपनी भारी भरकम गांड को कुछ पल के लिए हवा में ऊपर उठा दी जिससे अंकित उसकी चड्डी को उतार सके और अगले ही पल शर्मा जी की बहू का सहयोग पाकर अंकित एक झटके में उसकी चड्डी उसके बदन से अलग कर दिया,,,, और उसकी भरी हुई जवान को नंगी देखकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला।)
भाभी आज से तुम्हारी बुर कचोरी जैसी फुली है।
तेरे लिए ही फुली है खुश हो गई है तुझे देख कर,,,।
तब तो इसकी खुशी बढ़ानी पड़ेगी,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित उसकी दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाकर उसकी मोटी मोटी जांघों के बीच से अपने दोनों हाथ को ले जाकर के उसकी कमर को पकड़ लिया और उसे थोड़ा सा ऊपर उठाते हुए उसकी कचोरी जैसी फुली हुई गुलाबी बुर पर अपने होंठ सटा दिया,,,,, अंकित के हरकत से शर्मा जी की बहू एकदम से मदहोश हो गई। और मचलते हुए उसकी गांड अपने आप ही थोड़ी ऊपर की तरफ उठ गई और अंकित पूरी तरह से उसकी मदहोश कर देने वाली जवानी पर छाने लगा पागलों की तरह उसकी बुर की चटाई करना शुरू कर दिया था,,,, बिस्तर पर शर्मा जी की बहुत तड़प रही थी मचल रही थी और हल्की-हल्की से शिसकारी की आवाज निकल रही थी। इसी तरह के प्रेम के लिए वह तड़प रही थी जिस तरह की उसकी गदराई जवानी थी उसे बिस्तर पर अंकित जैसा ही मर्द चाहिए था,,, जोश की जवानी को अपनी बाहों में लेकर निचोड़ सके,,,, शर्मा जी की बहू दोनों पैरों को अंकित के कंधों पर रखकर उसे अपनी बुर की तरफ दबाव बना रही थी यह एक अद्भुत काम कल था औरत की तरफ से मर्द को मदहोश करने का जिसमें अंकित भी चारों खाने चित्त हुआ जा रहा था। रह रहकर शर्मा जी की बहू अपने पैर का दबाव बराबर बनाकर उसे अपनी बुर से अलग होने नहीं दे रही थी क्योंकि उसकी जांघें मोटी मोटी थी जिससे वह अंकित पर बराबर का अंकुश कसी हुई थी।
अंकित भी कम नहीं था वह उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढाते हुए दोनों हाथ को उसके ब्लाउज के ऊपर लेकर और ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूचियों को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया और नीचे अपनी जीभ से लपालप उसकी बुर की मलाई चाट रहा था,,,, अंकित की हरकतों से शर्मा जी की बहू कंहर रही थी मदहोश हो रही थी अंकित हर तरफ से उसे खुश करने की कोशिश कर रहा था वह बिस्तर पर जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी,,,,, और फिर देखते ही देखते वह ब्लाउज का बटन खोलने लगा अपनी क्रिया को जारी रखते हुए वह एक साथ ढेर सारी क्रियाओ को अंजाम दे रहा था,,,, अगले ही पाल वहां शर्मा जी की बहू के ब्लाउज के सारे बटन खोल चुका था और ब्रा के ऊपर से उसकी चूची को दबा रहा था शायद इससे शर्मा जी की बहू को कम आनंद की प्राप्ति हो रही थी इसलिए वह खुद ही अपने दोनों हाथों से अपनी ब्रा को ऊपर की तरफ खींच दी और अपने दोनों दशहरी आम को खुला छोड़ दी,,,, नंगी चूची को अपने हाथ में लेकर अंकित पागल हो जा रहा था वैसे भी शर्मा जी की बहू की चूचियां बड़ी-बड़ी थी। जिस पर ज्यादा मेहनत हुआ नहीं था फिर भी वह पूरे आकार में खीली हुई थी अगर पर्याप्त मात्रा में इस पर मेहनत किया जाए तो शर्मा जी की बहू की छाती पर दो-दो चांद नजर आने लगे।
साड़ी कमर तक उठी हुई थी ब्लाउज का बटन खुला हुआ था नंगी चूचियां अपना खेल खेल रही थी,,,, शर्मा जी की बहू अपनी मोटी मोटी जांघों से अंकित को दबाए हुए थी और अपने दोनों हथेलियां को उसकी पीठ पर उसके सर पर रखकर सहला रही थी दबा रही थी। कुल मिलाकर दोनों अपनी अपनी तरफ से पूरी कोशिश में लगे हुए थे क्योंकि बिस्तर पर संभोग कैसे पहले और संभोग के साथ मर्द और औरत का दोनों का समान अधिकार होता है कि दोनों एक दूसरे को अपनी तरफ से संपूर्ण रूप से आनंदित करें तभी जाकर संभोग का असली सुख प्राप्त होता है और इस समय शर्मा जी की बहू भी वही क्रिया कर रही थी जो अंकित कर रहा था इसलिए दोनों अत्यधिक आनंद को महसूस कर रहे थे लगातार शर्मा जी की बहू की बुर से मदन रस का बहाव हो रहा था जिसे अंकित अपनी जीभ से बार-बार चाट कर अपने गले के अंदर उतार ले रहा था,,,,, दोनों हाथ से उसकी चूचियों को दबाते हुए उनकी धीरे से अपने हाथ को नीचे की तरफ ले आया और शर्मा जी की बहू की गुलाबी छेंद में अपनी दो ऊंगलियो को एक साथ डालकर उसे गोल-गोल घूमाने लगा जिससे शर्मा जी की बहू के बर्दाश्त के बाहर होने लगा और वह बार-बार अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठने लगी जिसे अंकित नीचे दबाने की कोशिश करते हुए उसे लगातार आनंदित कर रहा था,,,,।
अंकित तीन तरफ से शर्मा जी की बहू पर छाया हुआ था एक हाथ से उसकी दोनों चूचियों को बारी-बारी से दबा रहा था दूसरे हाथ की दो उंगलियों को उसके गुलाबी छेद में डालकर उसे अंदर बाहर करते हुए उसे मजा दे रहा था और जब और होठों से तो लगातार उसके गुलाबी बुर की चटाई कर रहा था,,,, शर्मा जी की बहू कभी सोची भी नहीं थी किस तरह से भी मर्द औरत को मजा देते हैं एक ही साथ तीनों तरफ से बचाया हुआ था शर्मा जी की बहू का गोरा मुखड़ा टमाटर की तरह लाल हो चुका था,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी सांसों की गति के साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी जिसे अंकित काबू में रखने की पूरी कोशिश कर रहा था,,,, थोड़ी देर में दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे,,, पंखा फुल स्पीड में चल रहा था लेकिन पंखे की हवा दोनों की जवानी की गर्मी को शांत करने में सक्षम बिल्कुल भी नहीं थी। देखते ही देखते शर्मा जी की बहू का बदन अकड़ने लगा उसके चेहरे के हाव-भाव बदलने लगे वह दोनों हाथ से अंकित का सर पकड़कर उसे अपनी बुर पर जोर-जोर से दबाने लगी,,,, अंकित समझ गया था कि अभी झड़ने वाली है इसलिए वह जितना हो सकता था उतनी जीभ को अंतर डालकर उसकी मलाई को चाटते हुए अपनी दोनों उंगलियों को बड़ी तेजी से अंदर बाहर कर रहा था और फिर देखते ही देखते वह झड़ने लगी उसकी बुर से मदन रस का फव्वारा फूट पड़ा लेकिन अंकित उसकी पर से निकलने वाले मदन रस की एक बुंद को भी नीचे गिरने नहीं दिया अपनी जीभ से उसे चट कर गया।
शर्मा जी की बहू झड़ चुकी थी और यह चुदाई से नहीं बल्कि अंकित की कामुक हरकतों से झड़ी थी,,, इसलिए शर्मा जी की बहू कुछ ज्यादा ही प्रसन्न नजर आ रही थी वह अंकित पर पूरी तरह से निछावर हो चुकी थी वह कभी सोचा भी नहीं थी कि एक जवान लड़का एक शादीशुदा औरत को इतना मजा देता होगा,,,, अंकित धीरे से अपने मुंह को शर्मा जी की बहू की बुर से हटकर गहरी गहरी सांस ले रहा था उसके होठों से शर्मा जी की बहू के बुर का मदन रस टपक रहा था जिसे देखकर शर्मा जी की बहू शर्म से पानी पानी हो गई,, धीरे से उठकर बिस्तर पर बैठते हुए शर्मा जी की बहू अपने साड़ी को एक तरफ करके अपनी पेटीकोट से उसके मुंह पर लगा अपने मदन रस को साफ करने लगी। खेल अभी खत्म नहीं हुआ था खेल तो अब शुरू हुआ था अंकित अंकित धीरे से बिस्तर पर से नीचे उतर गया और बिस्तर के नीचे खड़ा होकर अपने पेंट की चेन को खोलने लगा,,,, यह देखकर शर्मा जी की बहू घुटनों के बाल आगे बड़ी और उसका हाथ पकड़ कर पेंट पर से उसका हाथ हटा दी और खुद उसके पेंट की बटन खोलने लगी,,, झड़ने के बावजूद भी वह काफी उत्तेजित दिख रही थी पेंट में बना तंबू की तरफ वह आकर्षित हुए जा रही थी देखते ही देखते वह अंकित के पेट की बटन खोलकर अंडरवियर सहित उसे घुटनों तक नीचे खींच दी उसका लहराता हुआ लंड देखकर उसकी आंखों की चमक बढ़ने लगी,,,, वह कुछ बोली नहीं बस अंकित की तरफ देखकर एकदम से अपने लाल-लाल होठों को खोली और अगले ही पल मोटे सुपाड़े को अपने होठों के बीच रखकर चूसना शुरू कर दी,,,, एकदम से अंकित मत हो गया अपनी आंखों को बंद करके इस पल में वह खोने लगा। देखते ही देखते शर्मा जी की बहू अंकित के पूरे लंड को अपने गले तक उतार कर चूसना शुरू कर दी, शर्मा जी की बहू की यही अदा तो अंकित को घायल कर देती थी उसे शर्मा जी की बहू का गुलाम बनने के लिए मजबूर कर देती थी।
सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,, गजब भाभी,,,,, तुम बहुत मस्त हो,,,, मैं कभी सोचा भी नहीं था कि तुम इतना अच्छा चुसाई करती हो,,,,ऊमममममममम,,,,,,,(अंकित की बात सुनकर शर्मा जी की बहू का जोश पढ़ने लगा और वह सुपाड़े पर अपनी जीभ को गोल-गोल घूमाने लगी जिससे अंकित का मजा बढ़ने लगा था,,,, अंकित शर्मा जी के बहू के सर पर दोनों हाथ रखकर अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था देखते ही देखते धीरे-धीरे वह शर्मा जी की बहू के मुंह को ही चोदना शुरू कर दिया,,,,, वह कभी सोचा भी नहीं था कि मोहल्ले में ही उसे इतना मजा मिलेगा पहले सुषमा आंटी फिर सुषमा की लड़की और अब शर्मा जी की बहू उसके हाथों में तो चारों तरफ से लड्डू ही लड्डू आ रहे थे,,,, अपनी किस्मत पर अंकित को बहुत गर्व होने लगा था जहां लोग मोहल्ले की खूबसूरत औरतों को देखकर केवल आंहे भरा करते थे और बेकाबू होकर अपने हाथ से ही काम चलाया करते थे वही अंकित को सामने से औरतें अपने पास बुलाती थी हम बिस्तर होने के लिए।
शादी वाले घर में उसे इतनी खुली छूट मिलेगी वह
कभी सोचा भी नहीं था मेहमान हर कमरे में मौजूद थे आराम कर रहे थे और ऐसे में घर की बड़ी बहू मोहल्ले के जवान लड़के के साथ हम बिस्तर होकर मजा लूट रही थी,,,, शर्मा जी की बहू भी इस बात से हैरान हो जाती थी कि इतनी देर पीटने के बाद भी अंकित के लंड का पानी नहीं छुटता था,,,, और यही उसकी सबसे बड़ी खुशनसीबी भी थी जितनी कमी उसके पति ने उसके जीवन में महसूस कराया था उतना ही मजा अंकित उसे दे रहा था उसके सोच के विपरीत और कभी सोची नहीं थी कि जीवन में उसे इतना सुख प्राप्त होगा,,,, अंकित का लंड इतना मोटा और लंबा था कि बड़े आराम से उसके गले तक पहुंच रहा था और उसके होठों का छल्ला बना हुआ था,,,, कुछ देर तक शर्मा जी की बहू इसी तरह से अंकित को मजा देती रही और फिर अंकित धीरे से अपने लंड को उसके मुंह से बाहर निकाल दिया क्योंकि अब उसका मन उसे चोदने को कर रहा था,,,, इसलिए शर्मा जी की बहू के मुंह में से लंड को बाहर निकाल कर वहां अपने हाथ में लेकर उसे हिला रहा था चेहरे पर उत्तेजना के भाव एकदम साफ दिखाई दे रहे थे उत्तेजना से अंकित का चेहरा तमतमा रहा था,,,, वह शर्मा जी की बहू को आदेश देते हुए बोला।
अब घोड़ी बन जाओ मेरी जान समय आ गया है तुम्हारी सवारी करने का,,,,।
बहुत मन कर रहा है मैं तुम्हारा मेरी सवारी करने का,,,।
तो क्या भाभी तुम जब घोड़ी बन जाती हो तो मुझे घोड़ा बनना ही पड़ता है,,,।
यह बात है तो ले तेरी घोड़ी तैयार हो गई है,,,(इतना कहने के साथ ही शर्मा जी की बहू पलंग के किनारे हाथ की कोहनी को नीचे रखकर और घुटनों के पर बैठकर घोड़ी बन गई अपनी भारीभरकम गांड को हवा में उठाते हुए अंकित के सामने परोसती यह देखकर अंकित की उत्तेजना सातवें आसमान पर पहुंच गई और वह गोरी गोरी गांड पर चपत लगाए बिना नहीं रह पाया,,,, फिर उसके बाद अंकित को शर्मा जी की बहू का गुलाबी गली एकदम साफ दिखाई दे रही थी बिल्कुल भी देर ना करते हुए अंकित अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर से सटा दिया और एक ही धक्के में पूरा का पूरा उसके अंदर डाल दिया,,, अंकित के इस हरकत से उसकी चीख निकलते निकलते रह गई थी वह तो वह अपने आप पर काबू कर ले गई थी वरना उसकी चीज सुनकर सभी लोग कमरे के बाहर इकट्ठा हो गए होते। शर्मा जी की बहू की चुदाई शुरू हो चुकी थी। बड़ी बड़ी गांड लड़के के साथ पानी भरे गुब्बारे की तरह लहरा रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे शांत तालाब में कोई पत्थर फेंक दिया हो। और वैसे भी चोदते समय लहराती हुई गांड देखकर अंकित की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जाती थी इसलिए अंकित लगातार उसकी गांड पर चपत लगाते हुए धक्के लगा रहा था शर्मा जी की बहू चादर को दोनों हाथों से जोर से पकड़े हुए अपनी उत्तेजना को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन नाकाम हो जा रही थी। अंकित की हर धक्के के साथ शर्मा जी की बहू को परम आनंद प्राप्त हो रहा था।
देखते ही देखते अंकित उसकी दोनों चूचियों को दोनों हाथ में पड़कर लगाम की तरह कसके अपनी कमर हिला रहा था ऐसा लग रहा था कि सच में वह घोड़ी की सवारी कर रहा हूं शर्मा जी की बहू पसीने से तरबतर हो चुकी थी लेकिन थमने का नाम नहीं ले रही थी वह अंकित का बराबर सामना कर रही थी। वैसे भी यह खेल ऐसा था जिसमें एक का भी थक जाना दूसरे के हौसले को पस्त कर देता था,,, लेकिन यहां पर दोनों खिलाड़ी टक्कर के थे दोनों किसी से हार मानने को तैयार नहीं थे ना पीछे हटने को तैयार थे कुछ देर तक ईसी तरह से पीछे से ही शर्मा जी की बहू की लेता रहा। अंकित तो नहीं देखा था लेकिन शर्मा जी की बहुत थक गई थी घुटनों के बल घोड़ी बने हुए उसका घुटना दर्द कर रहा था क्योंकि हर धक्के के साथ हुआ आगे की तरफ पत्थर जा रही थी जिसे सहारा देकर अंकित ही उसे फिर से व्यवस्थित कर रहा था लेकिन इस तरह से अंकित का मजा किरकिरा हो जा रहा था इसलिए वह पीछे से शर्मा जी की बहू की गुलाबी छेद से अपने लंड को बाहर निकाल दिया और फिर उसे पीठ के बल लेटा दिया उसकी दोनों टांगों को खोल दिया,,, उसकी गुलाबी बुर छल्ले नुमा खुली हुई थी जिसे अंकित नहीं अपने लंड से बनाया था और एक बार फिर से उसमें घुसा कर उसे चोदना शुरू कर दिया था,,,, अंकित और शर्मा जी की बहू कमरे के अंदर मजा लूट रहे थे घर के सभी सदस्य कुछ देर के लिए आराम फरमा रहे थे लेकिन काफी देर होने की वजह से जब उसकी भाभी वापस नहीं लौटी तो रजनी अपने कमरे से बाहर निकल आई और धीरे-धीरे चलते हुए उसे कमरे में जाने लगी जहां शादी के रसोई का सारा सामान रखा हुआ था और जब वहां पहुंची तो अच्छी दरवाजा बंद था और वह अभी अंदर से और हल्की-हल्की अजीब सी अंदर से आवाज आ रही थी रजनी को तो पहले को समझ में नहीं आया लेकिन एक जवान लड़का और जवान भाभी को कमरे के अंदर होने की शंका से ही रजनी के अजीब से लहार उठने लगी वह अंदर देखने की कोशिश करने लगी लेकिन वहां खिड़की नहीं था इसलिए वह दरवाजे के की होल से अंदर देखने की कोशिश करने लगी।
उसे अंदर का सब कुछ दिखाने लगा था लेकिन अभी कुछ समझ में नहीं आ रहा था चित्र स्पष्ट नहीं था लेकिन जैसे ही धीरे-धीरे चित्र स्पष्ट होने लगा उसकी आंखें फटी की फटी रह गई अपनी आंखों के सामने का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए उसे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था उसे साफ दिखाई दे रहा था कि बिस्तर पर उसकी भाभी लेटी हुई थी उसकी दोनों टांगें हवा में खुली हुई थी और उसकी टांगों के बीच अंकित झुका हुआ था और अपनी कमर को जोर-जोर से हिला रहा था अभी तक सिर्फ यही नजारा दिखाई दे रहा था रजनी के तो होश उड़ गए थे उसके बदन में अजीब सी झुनझुनी छाने लगी थी,,,, लेकिन अगले ही पल उसे अंकित का लंड दिखाई दिया जिसे देखकर उसकी हालत और भी ज्यादा खराब हो गई,,, इतना मोटा और तगड़ा लंड हुआ भी जिंदगी में पहली बार देख रही थी,,, रजनी के कॉलेज में उसका एक बॉयफ्रेंड था जिसके साथ वह दो-तीन बार मजे ले चुकी थी लेकिन जो नजर वह अपनी आंखों से देख रही थी उसे देखकर उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था क्योंकि उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसके बॉयफ्रेंड का लंड इससे आधा ही था। रजनी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें सामने का दृश्य इतना मादकता से भरा हुआ था कि वह अपने आप को रोक भी नहीं पा रही थी अंदर के नजारे को देखने से,,,, इसलिए वह बार-बार उसे छोटे से छेद से अपनी आंख को सटा दे रही थी। जिस बेरहमी से अंकित उसकी भाभी की चुदाई कर रहा था उसे देखकर रजनी के रोंगटे खड़े हो गए थे लेकिन यह भी उसे साथ दिखाई दे रहा था कि उसकी भाभी कितना मजा ले रही थी वह बराबर उसे अपनी बाहों में जकड़े हुए थी,,,,।
रजनी ज्यादा देर तक वहां खड़ी नहीं रह पाई और अपने कमरे में आ गई वह अपनी भाभी के बारे में सोचने लगी वह कभी सोचा नहीं थी कि उसकी भाभी इस तरह का गंदा काम करेगी लेकिन एक औरत होने के नाते वह इसके पीछे के कारण को जानने की कोशिश करने लगी और उसे एहसास होने लगा कि इसमें उसके भाई की ही गलती है जो साल में बड़ी मुश्किल से एक महीना जैसा ही उसके साथ रहता था ऐसे में भला एक जवान औरत क्या कर सकती है थोड़ी देर तक अपनी बिस्तर पर बैठे रहने के बाद उसे दरवाजा खोलने की आवाज आई वह अपनी भाभी को बिल्कुल भी दोष देना नहीं चाहती थी,,,, लेकिन वह अपने कमरे के बाहर आकर खड़ी हो गई वह अपनी भाभी की तरफ देखी तो अपनी साड़ी को व्यवस्थित कर रही थी,,,, उसे दरवाजे पर खड़ी देखकर उसकी भाभी को किसी प्रकार की शंका हो इससे पहले ही वह अपनी भाभी को आवाज लगाते हुए बोली।