Incest यह क्या हुआ - Page 40 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

सावित्री अपने कमरे में जाकर राजेश की आने का इंतजार करने लगी।

सुमित्रा _राजेश, अब क्या होगा? मुझे लगता है कि सावित्री दीदी को सब पता चल गया।

क्या सोच रही होंगी मेरे बारे में वैसे भी आज मुझे देर तक करवाने का मूड था सब गुड गोबर हो गया।

राजेश _मामी आप चिन्ता मत करो। तुम तैयार रहना। जैसे ही मैं आवाज लगाऊंगा कमरे में आ जाना।

सुमित्रा _क्यू दीदी के कमरे में जाकर मै क्या करूंगी?

राजेश _थ्रीसम करेंगे और क्या?

वैसे भी मैं 2/3दिन ही यहां रहूंगा फिर अपना घर चला जाऊंगा। मेरी याद आयेगी फिर सारी रात जागती रहोगी।

आज हम थ्रीसम करेंगे। फिर जब भी मेरी याद आयेगी तुम और बड़ी मामी एक दूसरे की प्यास बुझा लेना।

सुमित्रा _इसका मतलब तुम सावित्री दीदी का भी भोग लगा लिए।

राजेश _मुस्कुराने लगा।

सुमित्रा _हे भगवान, पर ये सब huwa कैसे? सावित्री दीदी तो धार्मिक संस्कारी और पतिव्रता स्त्री है वह किसी गैर मर्द के बारे में सपने में भी नहीं सोच सकती फिर तुमने उसे राजी कैसे किया।

राजेश _अरे मामी छोड़ो न जानकर क्या करोगी?

अच्छा मै जा रहा हूं बड़े मामी के कमरे में तुम तैयार रहना।

राजेश सुमित्रा के कमरे से निकल कर सावित्री के कमरे में चला गया।

सावित्री _कब से चल रहा है तेरे और सुमित्रा के बीच।

राजेश _क्या ? मै समझा नही।

सावित्री _ज्यादा भोले मत बनो। मैंने सुमित्रा की सिसकारी सुनी।

बताओ सच सच।

राजेश _जब इलाज के लिए, शहर गई थी तब।

सावित्री _इसका मतलब, उसके बच्चे का असली बाप तू है।

राजेश _छोटे मामा में ही कमी थी, उसके बीज मे वो क्षमता नही था कि वो छोटे मामी को मां बना सके।

तो मैंने उसकी मदद की।

क्या मैंने ठीक नहीं किया?

सावित्री _क्या ये बात किसी और को मालूम है?

राजेश _हा, प्रिया दी और मां को पता है।

सावित्री _ओह, ये बात किसी बाहर वाले को पता नही चलनी चाहिए। नही तो बड़ी बदनामी होगी।

राजेश _जी।

अच्छा अब मैं चलता हूं।

सावित्री _क्यों, मन भर गया क्या मुझसे?

राजेश _जी यह जानने के बाद शायद आपका मूड खराब हो गया हो।

सावित्री _पता नही, तुमने क्या जादू कर दिया है, बेड पर सोते ही, तेरा घोड़ा याद आने लगता है। ऊपर से सुमित्रा की सिसकारी सुनकर आग और भड़क गई है।

आज मुझे जमकर चोद।

सावित्री ने राजेश की लोवर खिसका कर उसका लंद बाहर निकाल लिया और उसका लंद पकड़ कर चूसना शुरू कर दी।

राजेश, प्यार से उसकी बालों को सहलाने लगा। सावित्री

लंद चूसते चूसते कही खो गई।

राजेश _मामी कहा खो गई।

सावित्री होश में आई।

सावित्री _मै कुछ सोच रही थी।

राजेश _क्या सोचने लगीं।

सावित्री _सुप्रिया बता रही थी कि उसकी सास उसे ताने मारती रहती है।

राजेश _क्यूं?

सावित्री _उसका कोई लडका नही है न इस कारण।

राजेश _तो लडके के लिए दीदी और जीजू और प्रयास क्यों नहीं करती।

सावित्री _उन लोगो ने दो बार और प्रयास किया था, पर जांच में पता चला की वे भी लड़किया है तो उसकी सास ने तीन माह में ही बच्चे गिरा दी।

राजेश _ओह।

सावित्री _ज्यादा गर्भपात कराने से शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है इसलिए डॉक्टर ने और गर्भ पात न कराने की सलाह दी है। इसलिए उन दोनो ने अब उम्मीद छोड़ दी।

राजेश मै सोच रही हूं कि क्यू न तुम सुप्रिया को एक बच्चा दो?

राजेश _मामी ये आप क्या कह रही है?

सावित्री _मेरी बेटी को कोई ताना मारे, ये मुझे बर्दास्त नही होता जबकि मेरी बेटी की कोई गलती नही है। लडका या लड़की होना ये तो पुरष पर निर्भर करता है न। औरतों पर नही।

तुम ज्यादा दिन तो यहां रुकोगे नही। इसलिए मैं सोच रही हूं की क्यू न आज से ही शुरू करे।

राजेश _पर क्या दीदी इसके लिए तैयार होगी।

सावित्री _मै उसे मनाऊंगी।

तुम तैयार हो न।

राजेश _अगर आप दोनो, तैयार हो तो पर मेरी एक शर्त है।

सावित्री _कैसी शर्त?

राजेश _आपके सामने ही, उसके गर्भ में अपना बीज डालूंगा।

सावित्री _ये कैसी शर्त है, मेरे सामने ही।

राजेश _हा और सुमित्रा मामी भी साथ होगी।

सावित्री _ये कैसा हो सकता है?

राजेश _हो सकता है, अगर आप चाहे तो।

सावित्री _पर सुमित्रा की सामने मौजुद रहने की क्या जरूरत है, मै रह जाऊंगी।

राजेश _मेरी इच्छा है, क्या मेरी इच्छा के लिए ये आप नही कर सकती।

वैसे भी, छोटी मामी की इच्छा अभी पूरी नही हुई थी आपके कारण, मुझे उसे बिना संतुष्ट किए ही, आना पड़ा।

वो साथ में रहेगी तो, मै तीनो को ठंडा कर पाऊंगा। और सभी चैन से सो पाएंगे।

सावित्री _पर अपनी बेटी के सामने मै नंगी नही हो पाऊंगी।

सुप्रिया क्या सोचेगी मेरे बारे में, उसकी मां जो सती सावित्री बनी फिरती थी वो रण्डी निकली।

न बाबा मै उसके सामने नही कर पाऊंगी।

मैं शर्म से मर ही जाऊंगी।

राजेश _अरे मामी, अपनी ही बेटी के सामने चुदने में आपको डबल मजा आयेगा।

सावित्री _न बाबा न मुझसे नही हो पाएगा।

राजेश _ठीक है फिर रहने दो, मुझे नही बनना है सुप्रिया दीदी के बच्चे का बाप।

सावित्री _तू समझ क्यू नही रहा है? मै सुप्रिया के सामने नही chud पाऊंगी।

राजेश _अच्छा ठीक है, तुम मत chudna पर साथ में रहना।

सावित्री _ठीक है। तुम सुमित्रा को बुला लो। मै सुप्रिया को लेकर आती हूं।

सावित्री अपने कमरे से निकल कर सुप्रिया के कमरे के पास जाकर दरवाज़ा खटखटाया।

सुप्रिया ने दरवाज़ा खोली।

सुप्रिया _मां, आप इस समय, कुछ काम था क्या?

सावित्री _हा बेटी, बच्चे सो गए क्या?

सुप्रिया _हा, दोनो सो रहे हैं।

सावित्री _इधर आओ, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।

सावित्री और सुप्रिया दोनो हाल में आ गए।

सुप्रिया _क्या बात है मां?

सावित्री _बेटी, क्या तुम्हारी सास तुम्हे अब भी ताना देती है, लडका पैदा न कर पाने को लेकर।

सुप्रिया _मां, ये सब बातें इतनी रात को क्यों पूछ रही हो।

सावित्री _हा बेटी, तुम्हे अजीब तो ज़रूर लग रहा होगा, पर मै तुम्हारी खुशियां चाहती हूं, मै नही चाहती की मेरी बेकसूर बेटी को कोई ताना मारे।

सुप्रिया _मां, आप कहना क्या चाह रही हो?

सावित्री _बेटी, लड़की या लडका पैदा करना, पुरुषो के ऊपर होता है, औरतों के ऊपर नही, दामाद जी और तुमने चार बार कोशिश की, मुझे लगता है कि दामाद जी में लडका पैदा करने की क्षमता नही है, बार बार गर्भपात कराने से तुम्हारे जान पर भी बन सकती हैं।

सुप्रिया _तो क्या सकते हैं मां? हमारे बस में तो कुछ है नही।

सावित्री _बेटी, दामाद जी के बस में भले ही न हो पर तुम्हारे बस में है, अगर तुम चाहो।

सुप्रिया _मै कुछ समझा नही मां?

सावित्री _बेटी मै चाहती हु,तुम किसी और के साथ एक बार कोशिश करके देख लो, शायद लडका हो जाय।

सुप्रिया _मां, ये आप क्या कह रही है?

सावित्री _हा बेटी, काफी सोचने के बाद मैंने ये तुम्हे सलाह देने की सोंचा है।

सुप्रिया _पर मां मैं किसी और से बच्चा पैदा करू,ये मुझसे नही हो पाएगा।

सावित्री _अरे बेटी कब तक अपनी सास की ताना सुनती रहेगी, तुम्हारी सास गर्भपात करा करा कर तुम्हारी जान ही ले लेगी। तुम मेरी सलाह मान लो।

सुप्रिया _मां वैसे इसकी क्या गारेंटी है जिसके साथ मै सोऊंगी, उससे लडका ही होगा।

सावित्री _क्यों की वह लडका पैदा कर चुका है?

सुप्रिया _कौन है वो, जिसके साथ मुझे सोने को बोल रही हो, मै भी तो जानू।

सावित्री _तुम्हारा भाई।

सुप्रिया _मेरा भाई, मै समझा नही। तुम किसकी बात कर रही हो।

सावित्री _अरे राजेश, और कौन है, तेरा भाई।

सुप्रिया _क्या?

सावित्री _हां मै चाहती हूं की तुम राजेश से बच्चा पैदा कर लो।

सुप्रिया _मां आप तो कह रही थी, वो एक लडके का बाप है?

राजेश का तो अभी शादी नहीं हुई है।

सावित्री _बाप बनने के लिए क्या शादी होना जरूरी है?

सुप्रिया _मतलब , राजेश ने किसीदूसरी की औरत को पेट से किया? मै भी तो जानू, वो किसके बच्चे का बाप है?

सावित्री _तुम्हारी, चाची के,,

सुप्रिया _क्या?

सावित्री _तुम्हारे चाचा के बीज में बच्चा पैदा करने की क्षमता नही था, तो सुमित्रा ने राजेश का मदद लिया। मै चाहती हूं, तुम भी राजेश से लडका पैदा कर लो।

सुप्रिया मुस्कुराने लगी।

वह अपने आप से कहने लगी,,

ये राजेश तो छुपा रुस्तम निकला, मतलब ये प्रिया दीदी के साथ साथ चाची का भी बजा रहा है।

हे भगवान मै तो पहले से ही सोच रही थी की क्यू न मै राजेश से लडका पैदा करने की कोशिश कर लूं।

पर डर रही थी किसी को पता न चल जाए। अब तो मां खुद ही कह रही है।

मै राजेश की बच्चे की मां बनूंगी, इससे अच्छी बात तो और हो ही नहीं सकती।

सावित्री _बेटी क्या सोचने लगी।

सुप्रिया _पर मां क्या राजेश इसके लिए तैयार होगा।

सावित्री _, मैने राजेश से बात कर ली है। वो तैयार है पर उसकी एक शर्त है।

सुप्रिया _कैसी शर्त मां।

सावित्री _वो चाहता है की, जब तुम दोनो एक दूसरे के क़रीब आओ तो उस समय मैं और तेरी चाची भी मौजुद रहे।

सुप्रिया _क्या?

मतलब शैतान, चाची और मां के सामने ही मेरी लेना चाहता है, वह अपने मन में बोली।

सावित्री _बेटी फिर क्या सोचने लगी?

सुप्रिया _मां, मुझे बड़ी शर्म आयेगी, मै आपके और चाची के सामने ही कैसे राजेश के साथ सो पाऊंगी?

सावित्री _शर्म तो मुझे भी बहुत आयेगी बेटी, पर कमबख्त की यही ईच्छा है।

अब मजबूरी है।

सुप्रिया सुबह ही राजेश से chudi थी, जिसका दर्द अभी गया नही था।

अब जब उसे उसे पता चला कि वह अपनी मां और चाची के सामने ही राजेश से चुदेगी यह सोचकर उसे शर्म तो आ रही थी। पर उसकी boor में फिर से पानी रिसना शुरू हो गया।

उधर राजेश ने सुमित्रा को सारी बाते बता दी थी।

सुमित्रा और राजेश सावित्री के कमरे में इन्तजार कर रही थी।

सुप्रिया और सावित्री दोनो कमरे में पहुंची।

राजेश और सुमित्रा दोनो पहले से मौजूद थे।

राजेश _मामी क्या दीदी तैयार है मेरे बच्चे की मां बनने के लिए।

सावित्री _खुद ही पूछ लो।

सुप्रिया _मां तुम भी न, शर्म से पानी पानी होते हुए बोली।

राजेश _दीदी तो शर्माने लगी।

सावित्री _सुप्रिया की हां है।

राजेश _तो शुरू करे।

सुमित्रा _हां, पहले तुम अपने कपड़े उतारो।

राजेश अपना कपड़ा उतार कर नंगा हो गया।

उसका तना huwa लंद झटका मारते हुए सबके सामने आ गया।

सुमित्रा _तेरा घोड़ा तो पहले से और लंबा और मोटा लग रहा है re, कही अपनी बहन को मां बनाने का सोच कर तो और ज्यादा फूल कर, ठुमक तो नही रहा।

सुप्रिया शर्म से पानी पानी हो गई।

राजेश _हा मुझे भी लगता है। मेरा नुनु दीदी को मां बनाने के लिए ज्यादा मोटा और लंबा हो गया है।

सुमित्रा _चल सुप्रिया तू भी उतार दे अपने कपड़े और दिखा दे अपनी गुफा अपनी भाई को, ताकि वहा घुस कर तेरी कोख में अपना बीज डालकर अपना पानी निकाल सके।

सुप्रिया _चाची तुम भी न,

सावित्री और सुमित्रा हसने लगी।

सुप्रिया _मां मै अपने कपड़े नही उतारूंगी। आप लोगो के सामने मुझे बड़ी शर्म आ रही है।

सुमित्रा _

अरे लडका पैदा करना है तो शर्म छोड़नी पड़ेगी।

सावित्री _अच्छा ठीक है, तू अपना नाइटी पहनी रह, अपनी पेंटी उतार दे।

सुप्रिया अपनी पेंटी, खिसका कर उतार दी।

सुमित्रा _चल अब घोड़ी बन जा।

सावित्री हसने लगी।

सुप्रिया _चाची आप भी न।

सुमित्रा _अरे झुकेगी तभी तो तुम्हारे गुफा में राजेश घुसेगा।

सावित्री हसने लगी।

सुप्रिया बेड पकड़ कर घोड़ी बन गई।

सुमित्रा ने उसकी नाइटी ऊपर उठा दिया।

सुमित्रा _दीदी, अब शुरू हो जाओ, राजेश का घोड़ा को तैयार करो, गुफा में घुसने के लिए। मै गुफा को तैयार करती हूं।

सावित्री राजेश के पैरो के नीचे बैठ गई और राजेश का लंद पकड़ कर चूसने लगी।

इधर सुमित्रा, सुप्रिया की chut चाटने लगी।

जिससे सुप्रिया सिसकने लगीं।

राजेश नीचे झुक कर सावित्री की ब्लाउज के ऊपर से ही चूची मसलने लगा।

जिससे सावित्री गर्म होने लगी।

राजेश _मामी खोल दो न अपनी ब्लाउज। तुम्हारी चूंची से खेलना है मुझे।

सावित्री गर्म हो गई थी वह अपनी ब्लाउज निकाल दी।

राजेश नीचे झुक कर उसकी चूची मसलने लगा।

राजेश _छोटे मामी तुम भी अपने सारे कपड़े उतार दो, मुझे तुम्हारे दूध पीना है।

सुमित्रा, एक एक कर अपनी सारे कपड़े उतार दी और पूरी नंगी हो गई।

फिर से वह सुप्रिया की boor चाटने लगी।

सुमित्रा _सावित्री दीदी अब राजेश का घोड़ा सुप्रिया की गुफा में डाल दो।

सावित्री ने राजेश का लंद पकड़ कर उसे सुप्रिया की boor में सेट कर दिया।

राजेश ने एक जोर का धक्का मारा।

लंद boor चीरकर आधा से ज्यादा अदंर समा गया।

सुप्रिया _उई मां,

सावित्री _क्या huwa बेटी?

सुप्रिया _मां देखो न बदमाश ने एक ही बार में पुरा घुसा दिया।

सावित्री हसने लगी।

अब राजेश सुमित्रा को अपने पास खीच लिया और उसकी चूची को मुंह में भर कर चूसते हुए।

सुप्रिया को चोदना शुरु कर दिया।

उसका लंद सुप्रिया की boor में गपा गप अदंर बाहर होने लगा।

यह दृश्य देखकर सावित्री उत्तेजित हो गई और अपने कपडे उतार कर नंगी हो कर अपनी हाथ boor खुजाने लगी।
 
सभी मित्रों का शुक्रिया।
 
उस रात राजेश ने सुप्रिया, सुमित्रा और सावित्री को जमकर चोदा। तीनो औरते नंगी होकर राजेश से रात भर chudi राजेश ने अन्त में अपना बीज सुप्रिया की योनि में छोड़ दिया।

अगले दिन खेत जाने से पहले राजेश और सुप्रिया को बुलाकर कहा की, राजेश 3_4 दिन ही और यहां रुकेगा इसलिए जितनी बार हो सके तुम लोग संबंध बनाओ । ताकि सुप्रिया पेट से हो जाए।

अब राजेश और सुप्रिया दिन में भी chudai करने लगें।

रात में तीनो औरते राजेश से जी भरकर चुदाते और अंत में राजेश अपना बीज सुप्रिया के boor में छोड़ देता ताकि वह पेट से हो जाए।

इस तरह 3रोज और गुजर गए।

अगले दिन राजेश के दोनो मामा घर आ गए।

सतपाल सिंह ने बताया की भईया को फिर से समाज का अध्यक्ष चुन लिया गया है, सभी लोग खुश हुवे।

उस रात प्रिया सब के सो जानें के बाद चुपके से राजेश के कमरे में गई और जमकर chudi

अगले दिन राजेश अपना बैग लेकर अपने घर के लिए निकल पड़े, सभी ने उसे कुछ दिन और रुकने के लिए कहा, पर राजेश ने काम का बहाना बनाकर अपने घर के लिए निकल पड़ा।

सतपाल सिंह उसे कार से बस स्टैंड छोड़ने के लिए गया। राजेश बस से अपने घर राजधानी के लिए निकल पड़ा।

जब वह घर पहुंचा तो शाम हो चुका था।

सुनीता कीचन में काम कर रही थी।

राजेश अपना बैग सोफे पर रखी और चुपके से किचन में गया और पीछे से सुनिता को अपनी बाहों मे भर लिया।

सुनीता चौंक गई।

सुनीता _अरे तू आ गया।

राजेश _हा मां।

सुनीता _अरे छोड़ मुझे, दूर रह मुझसे।

सुनीता ने राजेश को खुद से अलग किया।

राजेश _क्यू मां क्या हुआ?

सुनीता _ऐसे ही।

राजेश ने फिर से सुनिता को बाहों में भर लिया, नाराज हो क्या मुझसे?

सुनीता ने फिर से राजेश को अपने से अलग किया।

सुनीता _अरे कहा न, मुझसे दूर रहो। दूर रहकर बात करो।

राजेश _, क्या बात है मां? मुझसे कोई गलती हुई है क्या?

सुनीता _नही, तुमसे कोई गलती नही हुई है।

राजेश _फिर मुझे अपने से क्यू दूर कर रही हो?

सुनीता _क्यों की अभी मैं गंदी हूं?

राजेश _मै समझा नही।

सुनीता _औरतों को जो हर माह प्रॉब्लम आती है न, वो वाली प्रॉबलम है मुझे, सुनिता शर्माते हुए बोली।

राजेश _ओह, आपका मासिक धर्म चल रहा है।

सुनीता _चुप बेशरम मां के सामने गंदी बातें करता है।

राजेश फिर से सुनिता से लिपट गया,

मां इसमें गंदी वाली क्या बात है, ये तो नार्मल है।

सुनीता _न न, दूर रहो मुझसे, ऐसे समय में एक मर्द को औरत से दूर रहना चाहिए।

तुम्हारे मामा लोग, समाजिक अधिवेसन से लौट आए।

राजेश _हा मां, मामा जी फिर अध्यक्ष चुने गए हैं।

सुनीता _ये तो बड़ी खुशी की बात है।

राजेश _मामा मामी तो बड़े जिद कर रहे थे और रुकने के लिए।

बड़े मुस्कील से आने दिए।

सुनीता _अरे, तो और रुक जाना था कुछ दिन। तुम्हारी छोटे मामी तुम्हारा ख्याल नही रख रही थी क्या?

राजेश _नही मां, मामी तो बड़े अच्छे से ख्याल रख रही थी।

सुनीता _अच्छा फिर क्यों चले आए।

राजेश सुनिता से फिर लिपट गया।

आपकी याद आ रही थी।

सुनीता _चल झूठा कही का।

और छोड़ मुझे, दूर रह मुझसे।

सुनीता ने, खुद को राजेश से छुड़ाते हुए कहा।

जा अब अपने कमरे में जाकर फ्रेश होकर आराम कर, तू सफर से थक गया होगा।

मै काफी बनाकर लाती हूं।

राजेश अपने कमरे में गया फ्रेश होकर नहाया फिर अपने कमरे मे आराम करने लगा।

कुछ देर बाद सुनिता काफी लेकर उसके कमरे में आई।

सुनीता _, लो बेटा काफ़ी पिलो।

राजेश _मां बैठो न।

सुनीता _न, बताया था न, अभी मैं अशुद्ध हूं।

राजेश,_मां तुम भी न, एक दम पुराने खयालात की हो।

सुनीता, वहा से चली गई।

राजेश कॉफी पीने के बाद। अपने कपड़े पहन लिए और फिर किचन में पहुंचा।

राजेश _मां मै दोस्तों से मिलने जा रहा हूं।

सुनीता _कुछ ही देर तो huwa है आए हुवे, आराम करना छोड़कर दोस्तों से मिलने जा रहे हो।

भोजन के समय तक घर आ जाना।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश बाइक लेकर भगत से मिलने उसके पार्टी कार्यालय पहुंचा। वहा भगत के साथ उसके पार्टी के कार्यकर्ता भी मौजुद थे।

भगत _अरे राजेश भाई, तुम कब आए, अपने मामा के यहां से।

राजेश_आज ही आया यार घर में बोर हो रहा था तो सोचा तुमसे मिल हूं।

भगत _भाई अच्छा किया, आपको देख कर बड़ी खुशी हुई।

भगत न अपने कार्यकर्ताओं से कुछ बात चीत किया फिर कल मिलने को कहा।

भगत,_, सॉरी भाई सामने चुनाव आने वाली है बस उसी की तैयारी चल रही है।

राजेश _कोई बात नही यार। मुझे तो खुशी हो रही है। तुमको बीजी देख के।

भगत _चलो भाई कहा चले कही टहलने।

राजेश _कही भी।

भगत ने राजेश को नदी किनारे ले गया, शहर की शोर शराबा से दुर। नदी किनारे गार्डन बना था।

वहा बेंच पर बैठ गए।

भगत _भाई, निशा जी का कोइ फोन या मैसेज आया क्या?

राजेश _नही यार, वो मुझे भूल चुकी है। निशा जी को ऐसा लड़का चाहिए जो उसके प्रति वफादार हो। कितनी औरतों के साथ मैने संबंध बनाए हैं, मुझे खुद को याद नही। मै उसके लायक नहीं।मैने दोनो मा बेटी का बहुत दिल दुखाया है। अब तो सुजाता मैम भी मूझसे नफरत करती है।

सुजाता मैम से मैने कह दिया है कि आज के बाद मैं कभी उसके सामने नही आऊंगा।

मेरा तो इस शहर में अब रहने का भी मन नही करता।

यहां रहता हूं तो , पुरानी बाते याद आने लगती है। देखो वहां पर मै और निशा जी बैठ कर घंटो समय बिताया करते थे। ओ पल याद आती है तो दिल को बडा दर्द होता है। इसलिए मैं कल ही सूरज पुर के लिए निकल जाऊंगा।

भगत _मै समझ सकता हूं भाई आपकी हालत। भाई मुझे पुरा यकिन है निशा जी तुम्हे भूली नहीं होगी। और मुझे लगता है वह एक दिन जरूर आएगी।

राजेश _वह आ भी गई तो क्या होगा भगत। मैने तो अपनी गलती सुधारी नही है।

बल्कि मौका मिलते ही, हवस के खेल में डूब जाता हूं। वो मेरे सामने आएगी, तो मैं उससे नजर मिलाने के लायक नहीं हूं।

राजेश और भगत कुछ समय वहा और बिताया फिर वे दोनो वहा से चले गए।

राजेश जब घर पहुंचा तो, शेखर अपने ड्यूटी से आ चुका था। दोनो ने एक दूसरे का हाल चाल पूछा।

सुनीता _राजेश बेटा जाओ अपने कमरे में फ्रेश होकर आ जाओ, तब तक मैं खाना लगाती हूं। स्वीटी अपने कमरे मे होगी उसे भी भोजन के लिए बुला लेना।

राजेश _ठीक है मां।

सभी भोजन के लिए, डायनिंग टेबल पर बैठ चुके थे। सुनिता ने सबको भोजन परोशी।

आज राजेश का पसंदीदा भोजन बना था।

सुनीता _राजेश बेटा क्या huwa, ठीक से भोजन नहीं कर रहा है। कुछ खोया खोया सा है। क्या बात है। सुनिता ने राजेश के बालो को प्यार से सहलाते हुए कहा।

राजेश _कुछ नही मां।

सुनीता _मै तेरी मां हूं। तुम्हारे चेहरे की भावो को अच्छी तरह पढ सकती हूं।

राजेश _मां मै कल सुरज पुर वापस जा रहा हूं।

सुनीता _बेटा, अभी तो गांव से लौटे हो, कुछ दिन बाद चले जाते।

स्वीटी _हा भईया, आज ही गांव से आए हो फिर जानें की बात कर रहे हो।

सुनीता _वैसे भी बेटा, मुझे तुम्हारा सुरज पुर जाना अच्छा नही लगता, मुझे तुम्हारी चिंता लगी रहती हैं।

तुम्हे अब वहां जानें की क्या जरूरत? अब तो तुम्हारा इंटरव्यू भी हो गया है कुछ दिनों में रिजल्ट भी जारी हो जायेगा।

शेखर _हां बेटा तुम्हारी मां ठीक कह रही है। तुम्हे अब यही रहना चाहिए। वैसे भी तुम्हारा आईएएस में चयन होने के बाद, तुम्हे ट्रैनिंग के लिए बाहर जाना पड़ेगा। फिर पता नही तुम्हारी पोस्टिंग कहा होगी।

इसलिए तुम यहीं रहो।

राजेश _नही पिता जी, मेरा सुरज पुर जाना जरूरी है। वहा के लोगो को मुझसे काफी उम्मीदें है। गांव की स्थिति तो आप जानते ही हैं। गांव से फोन भी आया था, कब आ रहे हो?

सुनीता _बेटा कल ही जानें की क्या जरूरत है कुछ दिन रुक कर चले जाते।

राजेश _नही मां मैं कल ही जाऊंगा। वैसे भी इस शहर में मेरा मन नही लगता।

सुनीता _मै जानती हूं, उस लङकी को तुम अब तक भूल नहीं पाए हो।

बेटा उसे तुम भूल जाओ, उसी में हम सबकी भलाई है। ये बड़े लोगो की न तो दोस्ती अच्छी होती है न दुश्मनी। मैने तुम्हे बार बार चेताया था , बड़े घर की लड़की से दुर रहने के लिए, पर तुमने माना नही, अगर तुमने मेरा कहा माना होता तो आज तुम्हारा दिल नही टूटता।

खैर जो huwa सो huwa, अब तुम अपने लिए कोई दूसरी लड़की ढूंढ लो, ताकि उस निशा की याद तुम्हारे दिल से निकल जाए।

शेखर _हा राजेश तुम्हारी मां ठीक कह रही है।

निशा _भईया, आपको तो कोई भी लड़की मिल जाएगी। उस निशा में रखा क्या है भूल जाओ उसे।

उसे पता नही वो किस हीरे को छोड़कर गई है।

सुनीता _तुम्हे कोई लड़की पसंद आए तो मुझे बता देना, मै उससे तुम्हारी शादी की बात करूंगी।

भोजन करने के बाद सभी लोग अपने अपने कमरे में सोने के लिए चले गए।

सुनीता, कीचन का काम निपटाने के बाद राजेश के कमरे में पानी का बॉटल लेकर गई।

सुनीता _बेटा सो गया क्या?

राजेश _नही मां , कुछ काम था क्या?

सुनीता _, ओ पानी बॉटल लेकर आई थी।

और किसी चीज की जरूरत तो नही।

राजेश _नही मां।

सुनीता _अच्छा ठीक, अब मैं भी अपने कमरे में सोने जा रहीं हूं। तुम भी सो जाओ।

राजेश की बालो के सहलाते हुए बोली।

राजेश _ठीक है मां।

सुनीता अपने कमरे में चली गईं।

राजेश, बीते दिनों को याद कर रहा था। एक साल में कितना कुछ बदल गया है।

उसे आज नींद नहीं आ रही थी।

वह अपने बेड से उठ कर, अपने आलमारी से सिगरेट का पैकेट निकाला और अपने कमरे से निकल कर,

छत पर चला गया।

वह सिगरेट जलाया और पीते हुए छत से, सड़क पर चल रहे वाहनों को देखने लगा। किसी विचार में मग्न।

उधर सुनिता को राजेश के चेहरे के भाव देखकर पता था। वह आज कुछ उदास है। इसलिए उसे भी नींद नहीं आ रही थी।

वह यह जानने के लिए की राजेश सोया है कि नही वह अपने कमरे से निकल कर राजेश के कमरे में गई।

राजेश कमरे में नही मिला तो वह इधर उधर ढूंढने लगी।

जब घर में कही नही मिला तो वह छत पर गई।

छत पर उसे राजेश सिगरेट पीता छत से बाहर झांकते पाया।

सुनीता _राजेश बेटा, तुम छत पर क्या कर रहे हों? नींद नहीं आ रही क्या? और ये क्या? तुम सिगरेट पी रहे हो।

राजेश _मां, आप। आप यहां क्यों आ गई?

सुनीता _वो तुम्हारे कमरे में गई थी, तू सोया है कि नही देखने। मुझे पता था की आज तू कुछ उदास है।

राजेश,_मां मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं छत पर चला आया।

सुनीता _तुम सिगरेट पी रहे हो।

राजेश _ओह सॉरी मां, राजेश ने सिगरेट को बुझाया और छत से फेक दिया।

सुनीता _क्या बात है बेटा? क्या सोच रहे थे।

राजेश _कुछ भी तो नहीं मां।

सुनीता _मै तुम्हारी मां हूं सब समझती हूं।

सच बात तो ये है की जब तुम इस शहर में रहते हो तो निशा के साथ बिताए पल तुम्हे सताने लगती है।

तुम्हे इस तरह उदास देखकर मुझे अच्छा नहीं लगता।

राजेश _सॉरी मां।

राजेश,सुनिता के गले लग कर कहा।

सुनीता _बेटा ये सिगरेट वगैरा मत पिया कर ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।

राजेश _जानता हूं मां।

सुनीता _रात बहुत हो चुकी है, नीचे चलो, अपने कमरे में।

मै तुम्हारे सिर की मालिश कर दूंगी, फिर तुम्हे अच्छी नींद आएगी।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश और सुनिता दोनो छत से नीचे आ गए।

सुनीता _बेटा तुम अपने कमरे में चलो मै कीचन से तेल लेकर आती हूं।

राजेश अपने कमरे में चला गया। और बेड पर लेट गया। कुछ देर बाद सुनिता उसके कमरे में तेल लेकर आई।

वह राजेश के बालो में तेल लगाकर मालिश करने लगी।

सुनीता _कैसा लग रहा है।

राजेश _बहुत अच्छा मां।

सुनीता _बेटा तुम अपने शर्ट और लोवर भी उतार दो, मै तुम्हारे हाथ और पैरों की भी मालिश कर देती हूं, इससे तुम्हे अच्छा फील होगा और जल्दी नींद आयेगी।

राजेश _मां, रहने दो न क्यों तकलीफ उठा रही हो, मेरा हाथ पैर की, आप मालिश करे मुझे अच्छा नहीं लगेगा।

_सेवा तो मुझे आपकी करना चाहिए।

सुनीता _कर लेना जब मैं बीमार पढूंगी। अभी तो तुम्हे मेरी मदद की जरूरत है। चलो उतारो अपने टी शर्ट। सुनिता ने राजेश के टी शर्ट को ऊपर खीच कर अलग कर दिया।

फिर उसे हाथ पीठ सीने को मालिश करने लगी।

सुनीता _तुम अपने लोवर को भी उतार दो बेटा, मै पैरों की भी मालिश कर देती हूं। तुम्हे अच्छा महसूस होगा।

सुनीता ने राजेश के लोवर को नीच की , राजेश अब सिर्फअंडरवियर में था।

सुनीता राजेश के पैरो की मालिश करने लगी।

पैरो की मालिश के बाद टांगो की भी मालिश की।

राजेश _ आपका मासिक धर्म चल रहा है आपको आराम करना चाहिए था, मेरी सेवा कर रही हो।

सुनीता _तू जागता रहेगा, तो क्या मैं चैन से सो सकूंगी।

राजेश _आप मेरी इतनी चिंता करती हो।

सुनीता _अब बाते बंद करो और सोने की कोशिश करो। लगता हैं तुम्हे अभी भी नींद नहीं आ रही।

लगता है तुम्हारे घोड़े की भी मालिश करनी पड़ेगी तभी तुम्हे नींद आयेगी।

राजेश _आप की मर्जी।

सुनीता ने राजेश का अंडरवियर भी खीच कर उतार दिया।

और तेल लगाकर उसके घोड़े की मालिश करने लगी।

सुनीता की हाथ लगते ही। राजेश का लंद तन कर खड़ा हो गया।

सुनीता उसके लंद पर तेल लगा कर मालिश करने लगी।

लंद और मोटा होकर एकदम कठोर हो गया।

राजेश _ये क्या मां, पहले तो मुझे नींद नहीं आ रही थी, अब तो आपने घोड़े को भी जगा दिया। अब जब तक घोड़ा सोएगा नही मुझे नींद नहीं आएगी।

सुनीता _जानती हूं। जब तक तुम्हारा घोड़ा उल्टी नही करेगा, तुम्हे नींद नहीं आएगी।

राजेश _घोड़े को उल्टी कराने के लिए आपको काफी मेहनत करनी पड़ेगी। तुम तो जानती हो इतनी आसानी से यह घोड़ा उल्टी नही करता। वैसे भी तुम्हारा मासिक धर्म चल रहा है। आपने घोड़े को जगाकर मुसीबत मोल ली।

सुनीता, राजेश के लंद को मुंह में भर कर चूसने लगी। उसके अंड कोश सहलाने लगी।

वैसे सुनिता की भी हालत खराब हो चुकी थी। मासिक धर्म के समय उसकी सेक्स इच्छा बड़ जाती है। ऊपर से राजेश का लंद उसके हाथो में था। उसका मासिक स्राव और बड़ गया।

वह पैड पहनी थी, एकदम गीला महसूस कर रही थी।

पर ऐसी अवस्था में सेक्स करने से मना किया जाता है, इन्फेक्शन का खतरा जो रहता है। इसलिये वह भी आज तक ऐसी अवस्था में कभी सेक्स नहीं कीथी।

सुनीता ने काफी देर तक लंद चूसा पर लंद का पानी नहीं निकाल पाई।

सुनीता _लगता है मैने तुम्हारे घोड़े को जगाकर गलती कर दी। तुम्हारा पानी तो निकल ही नहीं रहा है।

राजेश _मां, अब तो ये नाग तभी उल्टी करेगा जब आपके बिल में जायेगा ।

सुनीता _न बाबा, अभी मैं अशुद्ध हूं, अभी मैं इसे अपने अदंर नही ले सकती।

राजेश _तो अपनी सकरी बिल में ले लो वो तो अशुद्ध नही है।

सुनीता _तुम्हारा कोई भरोशा नही कही बड़े बिल में डाल दिया तो,,, तुम्हे इन्फेक्शन हो सकता है।

क्या तेरे पास कंडोम है।

राजेश _हा, आलमारी में रखा था, पता नही कब जरूरत पड़ जाए।

सुनीता _ठीक है, तू अलमारी से कंडोम निकाल लो, तब तक मैं आती हूं।

सुनीता बाथरूम में गई और अपने अपनी नाईटी उतार कर अपनी पेंटी के अदंर जो पैड लगाई थी उसे निकाल दी। पैड रक्त स्राव से गीली हो चुकी थी। सुनिता नहाई और अपनी chut को अच्छे से ऊंगली डाल कर साफ की। अपने शरीर पर साबुन लगा कर, नहाई।

फिर तौलिए से पोंछ कर। नंगी ही बाहर आई।

राजेश से इत्र मांगी,

राजेश _अरे मां आपके बदन से तो ऐसे ही बड़ी अच्छी खुशबू आती है इत्र लगाने की क्या जरूरत।

जो कहा है वो करो। राजेश ने अलमारी से इत्र निकाल कर दे दिया।

सुनीता अपने पूरे बदन पर इत्र छिड़की।

चूंकि मासिक धर्म के समय औरत के शरीर से एक अलग गंद आती हैं जो कुछ पुरुषो को अच्छा लगता है तो कुछ को यह गंध पसंद नही आता।

सुनीता _दो कंडोम मुझे।

राजेश ने सुनिता के हाथ में कंडोम पकड़ा दिया।

सुनीता राजेश के लंद को मुंह में लेकर फिर से चूसी, उसके बाद कंडोम निकाल कर लंद पर चढ़ा दी।

राजेश ने सुनिता को खडा किया और उसे जकड़ लिया फिर उसकी ओंठ चूसने लगा।

उसकी गर्दन चूमने लगा। धीर धीर नीचे बडा और उसकी चूची मसलने लगा, निप्पल को मुंह में भर कर चूसने लगा।

सुनीता तो पहले ही बहुत गर्म थी। मासिक धर्म के समय उसकी सेक्स इच्छा बड़ जाती थी, वह पहली बार ऐसी अवस्था में चुदने वाली थी,। राजेश की हरकतों से उसकी योनि का स्राव और बड़ गया।

राजेश ने कुछ देर तक उसकी खूबसूरत नाभी और पेट को खूब चूमा चांटा।

उसके बाद सुनिता को बेड पकड़ा कर झुका दिया।

सुनीता की योनि को देखा, उसकी योनि एकदम गीली थी कुछ लाल स्राव नजर आया। एक अलग गंध पाकर उसका लंद और शख्त हो गया।

राजेश ने लंद योनि में रखा और एक जोर का धक्का मारा, लंद एक ही बार में सर सराता huwa अंदर घुस गया।

सुनीता सिसक उठी।

ऐसी अवस्था में बच्चेदानी का द्वार खुला रहता है।

राजेश एक और धक्का मारा लंद का टोपा बच्चेदानी के अदंर तक घुस गया।

सुनीता को एक अलग ही अहसास हुआ। जैसा लंद पुरा पेट में घुस गया हो।

राजेश अब सुनिता की कमर को पकड़ कर, लंद को योनि में अदंर बाहर करना शुरू कर दिया।

लंद फाच फैच की आवाज करता huwa पूरी जड़ तक अन्दर बाहर होने।

सुनीता जन्नत में पहुंच गई।

वह मासिक धर्म के समय पहली बार chud रही थी। ऐसी अवस्था में उसकी सेक्स इच्छा काफी बड़ जाती थी। आज ऐसी अवस्था में राजेश से चुदने में दोगुना आनंद मिल रहा था। जिसकी कल्पना उसने नही की थी।

उसकी मादक सिसकारी पुरे कमरे में गूंजने लगी।

इधर लंद, मासिक धर्म के रक्त और boor का पानी से सन गया। कुछ रक्त तो नीचे टपकने लगा।

सुनीता को इतना मजा आ रहा था किखुद ही अपनी कमर हिला हिला कर राजेश का साथ देने लगी।

कुछ ही देर में सुनिता झड़ गई।

राजेश उसे बेड किनारे लिटा कर उसकी ओंठ चूसने लगा उसकी चूचियां दबाने लगा। निप्पल मुंह में भर कर चूसने लगा।

सुनीता ने अपनी टांगे खोल दी। वह फिर चुदने तैयार थी।

राजेश उसके टांगो के बीच पोजीसन सम्हाल लिया।

राजेश ने एक ही धक्के में लंद को फिर से जड़ तक अन्दर घुसा दिया।

सुनीता सिसक उठी।

राजेश ने सुनिता की चूची को पकड़ कर तेज तेज धक्का लगा कर चोदना शुरु कर दिया।

सुनीता फिर से स्वर्ग में पहुंच गई।

कमरे में दोनो की आह उह आह उह की आवाज गूंजने लगी।

मासिक धर्म का स्राव और बड़ गया था, स्राव बेड पर टपकने लगा।

दोनो को chudai के खेल में बहुत मजा आ रहा था। सुनीता राजेश को अपने अंदर पुरी तरह समा लेना चाहती थी।

कमरे में उसकी मादक सिसकारी आह उन आई माई,

चूड़ियों की खनक खन खन खन खन,,

फ्च फ्च फच की आवाज गूंजने लगीं।

राजेश _मां आपको मजा तो आ रहा है न, ऐसी अवस्था में चुदने से कही दर्द तो नहीं हो रहा है।

राजेश चोदना बंद कर के पूछा।

सुनीता _तू रुक मत, बहुत मजा आ रहा है, जमकर चोद मुझे, ऐसा मजा आज से पहले कभी नहीं मिला।

चोद मुझे,,

फाड़ दे अपनी मां की chut

सुनीता चीखते हुए बोली।

राजेश _ले शाली रण्डी,chud मेरे लंद से,,

सबके सामने तो बड़ी संस्कारी बनती हैं, मेरे लंद के नीचे आते ही रण्डी बन जाती है।

बूरचोदी साली।

सुनीता _हा हा मै रण्डी हूं, मै तेरी रखैल हूं। तू ही मेरा असली मरद है, तेरा बाप तो मेरी प्यास बुझा नही पाता,चोद अपनी औरत को, दिखा अपनी ताकत फाड़ दे मेरी chut , भड़वे।

राजेश और तेज तेज चोदने लगा।

राजेश _ले बुरचोदी साली, तेरी chut की सारी आग आज मैं निकालता हूं।

ले एक और ले,

जोर जोर से धक्के लगाते हुए कहा।

सुनीता _थोड़ा और दम लगा भड़वे, फाड़ मेरी chut, दिखा अपनी ताकत, मेरी दुध का कर्ज चुका तू,,,

फाड़ दे chut साले मेरी boor बहुत परेशान करती है मुझे, अगर तू मेरा बेटा है तो आज बुझा दे इसकी सारी प्यास। सुनिता चीखते हुए बोली।

राजेश _लगा तो रहा हूं धक्के साली, तेरेboor के अदंर घुस जाऊं क्या? छीनाल कही को।

सुनीता _मादर चोद भड़वे, और तेज चोद मै आनी वाली हूं।

राजेश _ले साली kutiya, हरामजादी, ले chud मेरे लंद से

राजेश तेज तेज चोदने लगा।

तेज धक्के से कंडोम फट गया।

राजेश रुक गया।

रसुनिता _क्या huwa re रुका क्यू? तेरा पानी निकल गया क्या?

राजेश _मां कंडोम फट गया।

सुनीता _फटने दे तू, रुक मत चोद मुझे। फाड़ मेरी chut मादरचोड मै आने वाली था, सारा मूड खराब मत कर।

राजेश _ले साली बेटा चोद कही की ले अब तो राजेश ने कंडोम को निकाल फेका और एक ही धक्के में फिर से लंद को योनी में जड़ तक घुसा दिया।

फिर तेज़ तेज धक्के मारने लगा।

दोनो इतने जोश में थे कि उसके मुंह से क्या निकल रहा है दोनो को होश नही था।

पुरी चादर सुनिता की रक्त स्राव से गीली हो गई।

कमरे में सुनिता की मादक सिसकारी चीखने तो कभी सिसकने तो कभी गाली निकलती।

दोनो को संभोग का अद्भुत आनंद मिल रहा था।

और सुनिता एक बार फिर झड़ गई। वह राजेश से कस कर लिपट गई।

राजेश भी उसके सीने से लग कर सुस्ताने लगा।

कुछ देर सुस्ताने के बाद।

राजेश _तुम ठीक तो हो न मां।

सुनीता _हूं।

बेटा अब जल्दी करो मै काफी थक गई हूं।

राजेश ने अपने लंद पे लगा खून साफ़ किया और अपने आलमारी से चिकनाई वाली क्रीम निकाल कर, अपने लंद पर लगाया और सुनिता की गाड़ में भर दिया।

सुनीता को घोड़ी बनाकर उसकी गाड़ में लंद डालकर चोदना शुरु कर दिया।

वह तब तक गाड़ मारता रहा जब तक वह झड़ नही। गया उसे लगा की वह झड़ने वाला है तो लंद को गाड़ से निकाल कर योनि में डाल दिया और तेज तेज चोदने लगा।

अपनी वीर्य से सुनिता की गर्भाशय को पुरी तरह भर दिया। क्यू की वह जानता था ऐसी अवस्था में पेट से होने की संभावना नहीं की बराबर होती है।

Chudai से दोनो थक चुके थे। सुनिता राजेश के बाहों में कुछ देर लेटी रही फिर, जब वह उठी तो देखा की चादर उसके रक्त स्राव से गंदा हो गया है। वह चादर को बेड से निकाल दी। फिर राजेश को नहलाई और खुद नहाई।
 
अगली सुबह राजेश उठता है वह कीचन जाता है। सुनिता कीचन में काम कर रही होती है।

राजेश उसे पीछे से बाहों में भर लेता है।

राजेश _गुड मॉर्निंग मां।

सुनीता _गुड मॉर्निंग बेटा।

राजेश सुनिता की एक चूची मसलकर गालों में किस कर देता है।

सुनीता _क्या कर रहा है? लगताहै रात कल रात तुम्हारा मन नहीं भरा है । अरे छोड़ों तुम जानते हो न अभी मेरा माहवारी चल रहा है।

राजेश_हूं , पर कल तो दी थी न।

सुनीता _तो , ऐसी अवस्था में रोज रोज ठीक नहीं। समझा करो।

राजेश _ पर आपको भी तो खूब मजा आया था।

सुनीता _तो, देखा न पुरा चादर खराब हो गया था। वैसे भी ऐसी अवस्था में करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

राजेश _कंडोम है न।

सुनीता _वो तो फट गया था।

राजेश _आप ही ने तो कहा था तेज़ तेज़ करने के लिए। राजेश फुसफुसाते हुवे बोला।

वैसे मैं कुछ सोच रहा था?

सुनीता _क्या?

राजेश _यही कि कल रात, मेरे कमरे का चादर खराब huwa था। आज आपके कमरे का चादर खराब करते हैं।

सुनीता _चल हट बेशरम।

राजेश ने अपना लंद सुनिता की गाड़ में धसा दिया।

सुनीता _छोड़ न क्या कर रहा है? समझा कर, अभी मुझसे दूर रह। वैसे तुम तो आज गांव जानें वाले थे। कितने समय की ट्रेन है।

राजेश _रात 10 बजे की। घरसे रात का भोजन करके निकलूंगा।

तो क्या इरादा है ?

सुनीता _किस बारे में?

राजेश _चादर खराब करने के बारे में। राजेश फुसफुसाते हुवे कहा।

सुनीता _चल हट बेशरम,,,

कल रात गलती हो गई, उसे फिर से नही दोहराना।

राजेश ने सुनिता को छोड़ दिया।

राजेश _, ठीक है मुझे क्या?

वहा गांवों में तो मेरे ख्याल रखने के लिए, भाभी और ताई है, सोचा था जानें से पहले, आपकी इच्छाए पुरी कर दू।

सुनीता _हा हा वहा जानें को बेताब हो, यहां तुम्हे तुम्हे दुध पीने को नही मिल रहा है? वहा जायेगा तो ताजा दुध पीने को मिलेगा।

राजेश _मुझे कुछ जलने की बू आ रही है?

सुनीता _मै क्यू जलने लगी? अब का हाल में मै काफी लेकर आती हूं।

राजेश, हाल में चला गया। शेखर वहा बैठ कर अखबार पड़ रहा था।

दोनो बातचीत करने लगे।

कुछ देर बाद सुनिता काफी लेकर पहुंची।

सभी कॉफी का आनद लेने लगे।

काफी पीने के बाद।

राजेश _मां मै थोडा टहल कर आता हूं।

सुनीता _, ठीक है। जल्दी आ जाना।

राजेश _ठीक है।

राजेश गार्डन चला गया वहा कुछ एक्सरसाइज किया।

वो घर लौट रहा था, तभी सुनिता का फोन आया।

राजेश _क्या बात है मां? मै रास्ते में ही हूं,,,

सुनीता _बेटा वो ,,, ले आना,,,

झिझकते हुवे बोली,,,

राजेश _वो क्या मां?

सुनीता _वो,,, अब कैसे कहूं,,,, तू समझ न,,,

राजेश _अब आप बोलो गी नही तो कैसे समझूंगा

सुनीता _, वो, जो कल रात फट गया था? झिझकते हुए बोली।

राजेश _ओह आप कंडोम कि बात कार रही हो। राजेश हंसते हुए कहा।

सुनीता शर्मा गई।

पर मां कंडोम का क्या करोगी?

आप तो आज मना कर रही थी न। कहीं आपका मूड तो मैं बदल गया। वैसे भी कल आपको खूब मजा आया। कैसे जोश में आकर गंदी गंदी गालियां बक रही थी।

सुनीता_चुप बेशरम।

राजेश _अच्छा मां मैं वो लेके आता हूं।

सुनीता _क्या वो?

राजेश _, वहीं जो कल फट गया था।

सुनीता,,_अच्छी ब्रांडेड वाली लाना, फटनी नही चाहिए।

राजेश _आप चिन्ता न करें? अच्छी ब्रांडेड वाली लाऊंगा। पुरा दिन लेने पर भी नहीं फटेगा। हसने लगा।

सुनीता _चुप बेशरम।

सुनीता ने काल कांट दिया।

राजेश मेडिकल दुकान गया और अच्छी ब्रांडेड वाली कंडोम खरीद लिया।

वह घर पहुंचा तो सुनिता कीचन में काम कर रही है। वह पीछे से जाकर लिपट गया।

सुनीता _अरे आ गया तू।

राजेश,_हां मैं ये लो आपकी अमानत। एक दम ब्रांडेड वाली है।कंडोम को उसकी हाथ में थमाते हुए कहा।

सुनीता _चुप बेशरम, ये कर रहा है?, तुम्हारे पापा न देख लिया कांडोम तो, इसे अपने पास रख।

और नहाकर तैयार हो जाओ नाश्ता का समय होने वाली है।

राजेश अपने कमरे मे जाकर फ्रेस होकर नहाया, स्वीटी कमरे में आई।

स्वीटी _भईया मां नाश्ता के लिए बुला रही है।

राजेश,_बस अभी आया।

राजेश टी शर्ट और लोवर पहन कर, हाल में पहुंचा।

शेखर और स्वीटी दोनो नाश्ता करने इन्तजार कर रहे थे।

सुनीता ने तीनो के लिए नाश्ता लगाया।

तीनो नाश्ता करने लगे।

शेखर _कल गांव जानें के बारे में बोल रहे थे। बेटा क्या तुम सच में आज गांव का रहे हो।

राजेश _हा पास रात को 10बजे की ट्रेन है।

शेखर _,,, इतनी जल्दी जानें कि क्या जरूरत, कुछ दिन सुर रुक जाते यहां।

स्वीटी _हा भईया कुछ दिन और रुक जाते।

राजेश _यहां रहकर भी क्या करुंगा पापा, वहा गांव में मेरी आवश्यकता है, आपने तो देखी है न वहा की स्थिति, गांवों के लोगो को मुझसे काफी उम्मीदें हैं की मै गांव के विकास के लिए कुछ करुंगा।

शेखर _पर बेटा उस ठाकुर, से तुम दूर ही रहना। वो तुम्हे नुकसान पहुंचा सकते हैं ।

राजेश _पापा आप चिंता न करें वह ठाकुर मेरा कुछ नही बिगाड़ पाएगा। पुराना हिसाब भी तो अभी बाकी है। उसकी करनी की सजा भी तो अभी देनी है ।

इस तरह बात चीत करने हुवे वे नाश्ता करने लगे।

नाश्ता करने के बाद शेखर अपने ड्यूटी पर चला गया। कुछ देर बाद स्वीटी भी कालेज चली गई।

इधर सुनिता किचन के काम निपटा रही थी।

राजेश किचन में गया और सुनिता को बाहों मे भर लिया।

सुनीता _अरे छोड़ों न क्या कर रहा है?

राजेश _पापा और switi तो चले गए, अब सुरु करे।

सुनीता _न बाबा अभी मुझे बहुत से काम है।

अभी जाओ अपने कमरे में। इन्तजार करो।

राजेश _अरे मां देखो ने कैसा अकड़ गया है, ये ज्यादा इन्तजार नहीं कार पाएगा। राजेश ने अपना लोअर खिसका कर लंद के बाहर निकाल कर दिखाते हुवे कहा।

सुनीता _कल तो खूब मजा लिए थे इसने। खूब डुबकी लगाई था मेरे बाढ़ के पानी में। ये तो फिर तैयार हो गया है डुबकी लगाने।

राजेश _हां, अब चलो, अपनी गुफा में इसे प्रवेश करा कर इसको फिर मजे दो।

सुनीता _न बाबा अभी बहुत काम है। तब तक इसे इन्तजार करने कहो। तुम अपने कमरे में जाकर अभी आराम करो और इसे भी आराम करने दो। मै मेसेज करूंगी तब आना ।

राजेश _अच्छा ठीक है। मै जा रहा हूं।

सुनीता _अच्छा सुनो, वो कांडोम मुझे दे दो।

राजेश ने अपने लोवर से कांडोम के पैकेट निकाला और सुनिता को थमा दिया।

राजेश अपने कमरे में जाकर इन्तजार करने लगा। अपने लंद को तेल सी मालिश करने लगा।

इधर सुनिता किचन का काम निपटा लेने की बाद, बाथरूम में जाकर एक बार फिर नहाई।

अपनी शरीर की सफाई की और फिर अपने शरीर पर इत्र छिड़की। उसने चोली और घाघरा पहन ली। अपने गहने आलमारी से निकाल कर शृंगार करने लगी।

वह दुल्हन की तरह लग रही थीं।

अपने बेड पर नई सफेद चादर डाल दिया। और बेड में बैठ कार घूंघट डाल ली। फिर राजेश को मैसेज कर दी कमरे में आने के लिए।

राजेश अपने खड़ा लंद मसलते हुवे कमरे में पहुंचा।

दरवाज़ा खुला था, राजेश अदंर गया।

उसने देखा, बेड पर कोई दुल्हन घूंघट डाल कर बैठी है।

राजेश आश्चर्य प्रकट किया।

राजेश, सुनिता के सामने जाकर बैठ गया।

राजेश ने अपने दोनो हाथो से पकड़ कर घूंघट उठाया।

सुनीता की सुंदरता देखकर राजेश मंत्र मुग्ध हो गया। सुनिता आंखें बंद कर ली थी।

राजेश _मां सच में कितनी खूबसूरत हो तुम।

उसने उसकी माथे को चूम लिया।

सुनीता ने आंखें खोली।

वे एक दूसरे की आंखो में देखा।

राजेश ने सुनिता की ओंठ के चूसना शुरु कर दिया। सुनिता राजेश से लिपट गई।

राजेश ने सुनिता को अपनी गोद में बिठा लिया।

उसकी चुनरी हटाई।

उसकी चोली को खोल कर अलग कर दिया।

राजेश ने एक एक कर सुनिता के सारे गहने उतारे।

सुनीता ने भी राजेश का टी शर्ट उतार दिया।

उसके बाद राजेश ने सुनिता को अपनी बाहों में जकड़ लिया। उसकी ओंठ गले को चूमने चाटने लगा।

सुनीता सिसकने लगी ।

उसकी चूची चूसने लगा।

कुछ देर बाद राजेश बेड पर लेट गया। सुनिता उसके ऊपर थी।

सुनीता राजेश की ओंठ चूसने लगी। उसके सीने को चूमने लगी।

फिर वहा आगे बडी और राजेश के लोअर के निकाल कर चड्डी भी उतार दिया। अब वह बिलकुल नंगा था।

सुनीता राजेश के लंद चूसना सुरु कर दी।

राजेश प्यार से उसकी बालों को सहलाते हुवे। लंद चुसाई का मजा लेने लगा।

राजेश का लंद खूब लंबा और मोटा हो गया।

सुनीता _नई तकिए के नीचे रखे कांडोम का पैकेट निकाला और कांडोम को राजेश की लंद पर चढ़ा दिया।

Sunita बेड पर खड़ी हो गई। वह घाघरे की डोरी खोल दी। घाघरा राजेश के ऊपर गिर गया।

राजेश उसे पकड़ कर चूम लिया और साइड रख दिया।

सुनीता की एकदम चिकनी और रसभरी chut देखकर राजेश का लंद झटके मारने लगा।

सुनीता

लंद को अपने हाथ में लेकर अपनी योनि द्वार मे रख कर बैठ गई।

लंद सरसराता huwa गप से पुरा योनि के अंदर चला गया।

राजेश जन्नत मे पहुंच गया। सुनिता सिसक उठी।

सुनीता सिर्फ घाघरे में थी।

सुनीता ने राजेश के सीने पर दोनो हाथ रख कर लंद पर धीरे धीरे उछलना शुरू की।

लंद boor में फच फच की आवाज करता huws अदंर बाहर होने लगा।

सुनीता को माहवारी के समय उसकी सेक्स ईच्छाबढ़ जाती थी। ऐसी अवस्था में कल राजेश से चुदने में उसे दोगुना आनद मिला था।

इस आनद को फिर से महसूस करने के लिए वह फिर से आज राजेश से चुदने का मन बना ली थीं, यह जानते हुए भी कि ऐसी अवस्था में सेक्स करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।

वह अपनी आंखें बन्द कर उछलने कि गति को बढ़ाने लगी।

लंद बिना किसी रुकावट के अदंर बाहर हो गए था।सुनिता को संभोग का परम आनंद की अनुभूति हो रही थी।

वह सिसकते हुवे, लेंड पर उछल रही थी। उसकी योनि से लाल रंग का द्रव्य बाहर निकल कर लंद को भिगो कर उसके अंडकोष से होता huws चादर में टपकने लगा।

कमरे में सुनिता की चूड़ियों कि खनक खन खन खन ,,, उसकी मादक सिसकारी

आह उह आह उह,,,,

फच फ्च की आवाज गुंज रही थी।

राजेश भी सुनिता की चूची मसलते हुए नीचे से कमर हिला हिला कर लंद को boor में गहराई तक पहुंचाने की कोशिश में लगा था।

सुनीता इतनी अधिक उत्तेजित होकर गई की खुद को रोक न सकी और चीखते हुए झड़ने लगी वह राजेश की ऊपर लुड़क गई। राजेश उसे अपनी बाहों में जकड़ कर पीठ सहलाने लगा।

कुछ डर बाद राजेश सुनिता के ऊपर आ गया। उसकी ओंठ चूसने लगा। फिर चूची मसलते हुए निपल चूसने लगा।

सुनीता फिर से गर्म हो गई।

राजेश उसकी कमर के नीचे तकिया लगा दिया और अपना लंद पकड़ कर एक ही बार मेंफुच से अंदर कर दिया।

सुनीता सिसक उठी।

राजेश अब सुनिता की चूची मसलते हुए सुनिता की kuwe की खुदाई सुरू कर दिया।

राजेश के धक्के से लंद का टोपा उसकी गर्भाशय के अदंर तक दखल देने लगा।

सुनीता को अपार आनंद की अनुभूति होने लगी वह बहुत अधिक गर्म हो गई और मुंह से अनाप शनाप बकने लगी।

आह उह चोद चोद, अपनी मां को आह मां आह,,, फाड़ दे मेरी chut , और जोर से चोद,, मादर चोद

आह

राजेश _ले शाली, रण्डी chud अपने बेटे के लंद से

ले एक और ले

साले छीनार, लडखोर कही की।

सुनीता _हा हा मै लंदखोर हूं । मुझे तुम्हारा लंद चाहिए, और अदंर डाल, भड़वे,,,

राजेश _चुप साली,boor chodi kutiya डाल तो रहा हूं। और कितना अदंर घुसू तेरे पेटमें घुस जाऊं क्या? राजेश जोर जोर से चोदने लगा।

सुनीता _हा हा घुस जा मेरे पेट के अदंर, भूल गया तू इसी पेट के अदंर था तू और इसी boor से बाहर निकला है जिसे तू चोद रहा है, फाड़ के घुस जा अंदर,,,, मादर चोद

राजेश साली तेरी तो आज फाड़ के रहूंगा,, ले साली,,,

राजेश के तेज तेज धक्के से कडोम फिर फट गया।

राजेश _चोदना बंद कर दिया।

सुनीता _रुक क्यों गया भड़वे, झड़ गया क्या?

राजेश शाला कडोम फिर फट गया।

सुनीता _रुक मत चोदता रह, मै झड़ने वाली हूं,,,

राजेश ने तेज तेज चोदना शुरु कर दिया।

कमरे में सुनिता की मादक सिसकारी, चूड़ियों की खनक फच फच की आवाज गुंज रही थी।

राजेश और तेज तेज चोदने लगा सुनिता राजेश से लिपट कर चीखते हुए झड़ने लगी।

कुछ देर दोनो वैसे ही लेटे रहे।

कुछ देर बाद राजेश ने फिर से सुनिता को चूम चांट कर गरम कर दिया फिर उसे घोड़ी बना दिया।

राजेश ने कंडोम निकाल कर लौड़े में थूक लगाया और सुनिता की गाड़ में डाल दिया।

कुछ देर गाड़ मारने के बाद लंद को योनि में डाल कर गपागप चोदने लगा।

सुनीता फिर जन्नत में पहुंच गई।

राजेश सुनिता को kutiya बनाकर तब तक चोदता रहा जब तक वह झड़ नही गई।

सुनीता थक चुकी थी।

सुनीता _अब बस कर मैं थक गई, मुझे खाना भी बनाना है।

अब बाद में करना।

बेड का चादर सुनिता के माहवारी खून से गंदा हो गया था। उसे हटा दी फिर दोनो ने बाथरूम में जाकर नहाने लगे, इसी बीच राजेश ने सुनिता नल की टोटी पकड़ा कर झुका दिया और लंद उसकी योनि में घुसा कर गच गच चोदने लगा।

फिर कमोड में बैठ कर सुनिता को अपनी गोद में बिठा लिया।

सुनीता उछल उछल कर चुदने लगी, जब तक वह एक बार फिर।झड़ न गई।

सुनीता नंगी ही कीचन मे जाकर काम करने लगी राजेश बेड पर लेट आराम करने लगा।

उसका लंद अभी भी खड़ा हुआ था।

कुछ देर बाद राजेश कीचन में गया और सुनिता को कीचन में ही चोदने लगा।

फिर किचन स्लैब में बिठाकर उसकी टांगो के बीच आ गया और चोदना शुरू कर दिया।

जब तक सुनिता फिर से झड़ी नहीं उसे किचन में ही रगड़ता रहा।

उसके बाद राजेश हाल में आकर सोफे में लेट गया।

सुनीता ने भोजन तैयार कर राजेश को उठाया।

दोनो भोजन के लिए डायनिंग टेबल पर बैठे।

राजेश सुनिता को खींचकर अपने गोद में बिठा लिया।

अपना लंद उसकी योनि में डाल दिया।

फिर दोनो भोजन करते रहे और राजेश हल्का हल्का कमर हिला कर उसे चोदता भी रहा। दोनो को बहुँत मजा आ रहा था।

भोजन कर लेने के बाद, सुनिता बर्तन धोने लगी। राजेश सोफे पर बैठ कर वेट करता रहा।

किचन का काम निपटाकर सुनिता, राजेश के पास आई।

राजेश ने सुनिता को अपने गोद में बिठा करउसकी चूची मसलने लगा उसे गर्म कर दिया। सुनिता राजेश के लंद में बैठ कर उछल उछल कर फिर चुदने लगी।

सुनीता एक बार में झड़ गई।

दोनो फिर से बेड रुम में जाकर आराम करने लगे।

कुछ देर बाद राजेश ने फिर से सुनिता को गर्म किया।

सुनीता राजेश के लंद को boor में डालकर उछलने लगी।

राजेश ने सुनिता को बेड किनारे लिटा दिया और उसके टांगो के बीच आकर उसकी चूची पकड़ कर फिर ठुकाई करने लगा।

अंत में राजेश सुनीता की boor में ही अपना वीर्य छोड़ दिया। दोनो थक चुके थे। एक दूसरे से लिपट कर सो गए।

4बजने पर,,

सुनीता उठी और अपने कपड़े पहन कर कॉफी बनाने चली गईं। कॉफी बनाकर कमरे में लाई।

सुनीता _राजेश बेटा उठो,,,

राजेश _क्या huwa मां।

सुनीता _स्वीटी की कालेज से आने का समय हो चुका है!

राजेश _मां स्वीटी को तो पता है न हमारे संबंधों के बारे में।

सुनीता _तुम्हे मेरे रुम में इस हालात में देखेगी न तो मुझे ताना मारेगी की खुद टू भईया के साथ मजा करती हो और मुझे मना करती हो, इसलिए कपड़े पहनकर अपने कमरे में जाओ।

राजेश बेड से उठा बाथरूम में फ्रेस होकर अपना कपड़ा पहना।

सुनीता और राजेश दोनो साथ में काफी पिए, फिर राजेश अपने कमरे में चला गया।

थोड़ी देर बाद switi कालेज से आई।

इधर राजेश अपने जानें की तैयारी शुरू कर दिया।

अपना सामान पैक करने लगा।

रात में भोजन करने के बाद, राजेश सुनिता की पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

सुनीता _अपना ख्याल रखना बेटा और फोन करते रहना।

राजेश _ठीक है मां

शेखर और switi उसे स्टेशन छोड़ने के लिए गए।

रात्रि 10बजे उसकी ट्रेन आई, राजेश शेखर से आशिर्वाद लेकर ट्रेन से गांव के लिए निकल पड़ा।

जब ट्रेन लक्ष्मण पर पहुंचा तो सुबह हो चुकी थी।

भुवन राजेश को लेने के लिए स्टेशन पहुंचा दोनो बाइक से सुरज पुर के लिए निकल पड़ा।

जब सुरज पुर पहुंचा तो राजेश को कुछ बदला बदला महसूस होने लगा।

वे दोनो घर पहुंचे।

भुवन _मां देखो तो राजेश आ गया।

पदमा _अरे राजेश बेटा तू आ गया।

राजेश ने पैर छूकर प्रणाम किया।

पदमा _घर में सब ठीक तो हैं न

राजेश _हा ताई, सब ठीक है।

पदमा _अरे आरती, राजेश का बैग उसके कमरे में छोड़ हा।

आरती राजेश का बैग उसके कमरे में छोड़ने आई।

पूनम _अरे देवर जी आप आ गए।

राजेस _हां भाभी, आप कैसी हो?

पूनम _मै तो ठीक हूं देवर जी बस आपके आने का ही इंतजार कर रहे थे।

पदमा _अरे बहु जाओ राजेश के लिए चाय नाश्ता वगैरा बना दो।

पूनम _जी मां जी।

पदमा _बेटा तुम्हारा इन्टर व्यू कैसा गया?

राजेश _इंटरव्यू तो अच्छा गया है ताई उम्मीद है मेरा चयन हो जायेगा।

पदमा _ये तो बड़ी खुशी की बात है बेटा।

राजेश _आरती तुम्हारा स्कूल कैसा चल रहा है?

आरती _बहुत अच्छा भईया।

राजेश _ताई ज्योति दीदी दिखाई नहीं रही।

पदमा _बेटा, और कितनी दिनो तक मायका में रहेगी? दामाद जी उसे लेने आए थे। वह अपने घर चली गई।

बेटा तुम ट्रेन की सफर से थक गए होगे, जाओ पहले नहा लो फिर नाश्ता करके अपने कमरे मे आराम करना। बाते तो होती रहेगी।

राजेश _ठीक है ताई।

राजेश कमरे में जाकर अपना कपड़ा चेंज किया फिर नहाने के लिए घर के पीछे चला गया।

वहा नहाकर आया।

भुवन और राजेश दोनो ने साथ नाश्ता किया।

भुवन _अच्छा राजेश अब तुम आराम करो मै खेत निकलता हूं।

राजेश अपने कमरे मे चला गया।

कुछ देर बाद पूनम उसके कमरे मे आई।

राजेश _भाभी जी क्या हाल चाल है गांव का।

पूनम _हमारी हालचाल नही पूछोगे देवर जी, आप तो शहर जाने के बाद अपनी भाभी को बिलकुल भूल ही गए थे। फोन से हालचाल भी नहीं पूछते।

पूनम रूठते हुए बोली।

राजेश _सॉरी भाभी, वो क्या है न कि यहां नेटवर्क का इशू रहता है।

पूनम _देवर जी आपको पता है तुम्हारी दिव्या जी अपनी नौकरी छोड़कर यहां से चली गई।

राजेश _क्या? भाभी ये तुम क्या कह रही हो?

पूनम _क्या आपको सच में पता नहीं।

राजेश _सच में भाभी मुझे इस बारे में पता नहीं। पर नौकरी छोड़कर क्यू गई।

पूनम _लोग कहते है की आगे पढ़ाई करने वह विदेश चली गईं है, पर सच क्या है किसी को पता नहीं।

राजेश दिव्या जी ने मुझे इस बारे में बताया क्यों नहीं।

पूनम _वो तो आपकी अच्छी दोस्त थी, मुझे लगा आपको बताया होगा।

उसके जाना किसी को अच्छा नहीं लगा। कितनी अच्छी थी दिव्या जी।

राजेश ने दिव्या को काल किया।

उसका मोबाइल लगे नही पाया।

पूनमी_क्या huwa देवर जी?

राजेश _दिव्या जी से संपर्क नही हो पा रहा है?

भाभी मुझे हवेली जाना पड़ेगा।

पूनम _पर देवर जी आप अभी तो आए हो।

राजेश _दिव्या जी अगर आगे की पढाई के लिए विदेश जाना चाहती तो वो मुझसे जिक्र जरूर करती, उसने मुझसे कभी जिक्र ही नहीं किया।

बात क्या है जानने के लिए मुझे हवेली जाना ही पड़ेगा, वो मेरी अच्छी दोस्त है वो मुझे बिना बताए कैसे जा सकती हैं?

मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा है!

राजेश अपना कपड़ा पहन कर बाइक लेकर हवेली के लिए निकल पड़ा।

जब वह हवेली पहुंचा,,,

ठाकुर के आदमी _रानी मां आपसे मिलने, राजेश आया है।

ठाकुरभी वहा था!

ठाकुर _वो शाला यहां क्या करने आया है। उस शाले को तो आज मैं गोली से उड़ा दूंगा।

रत्नावती_ये आप क्या कह रहे है? राजेश को कुछ huwa तो जो बाते आप सब से छिपाए है वो जग जाहिर हो जायेगा।

क्यों की लोगो को पहले ही लगता है कि दिव्या और राजेश के बीच कुछ चल रहा है।

अब राजेश को मार दो ge , और दिव्या भी अचानक से कही चली गईं हैं तो लोगो को कुछ गडबड होने का अंदेशा हो जायेगा।

इसलिए उसे कोई नुकसान न पहुंचाना।

गीता _पिता जी मां ठीक कह रही है।

ठाकुर _ठीक है, पर उस साले को कुछ भी बाते सच न बताना दिव्या कहा है? और उसे यहां से जल्दी बाहर भेजो। उस साले की शकल से मुझे नफरत हो गई है।

ठाकुर _पिता जी आप भूल गए हैं की राजेश ने ही हम दोनो की जान बचाई है।

ठाकुर _मुझे पता होता की उनके अहसानों की बदले मुझे इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी तो मैं खुद को गोली मार लेता, उससे मदद नहीं लेता।

ठाकुर _सुनो जी आप यहां से जाइए, आप यहां रहोगे तो मामला और बिगड़ जायेगा।

ठाकूर _ठीक है मै जा रहा हूं।
 
राजेश हवेली के अंदर गया।

रत्नवती _अरे राजेश बेटा आओ, बैठो।

राजेश _नमस्ते मां जी।

नमस्ते दी।

गीता _कैसे हो राजेश?

राजेश _मै बिलकुल ठीक हूं दी। आप लोग जैसे है?

रत्नवती _ हम लोग भी अच्छे हैं बेटा।बेटा तुम तो दिल्ली गए, थे न।

राजेश _हा , मां जी।

आज ही सुबह दिल्ली से लौटा।

गीता _, राजेश तुम्हारा इंटरव्यू कैसा रहा?

राजेश _बहुत अच्छा दी।

गीता _ये तो बड़ी अच्छी बात है, अब कुछ दिनो बाद तुम आई ए एस अफसर बन जाओगे।

रत्नवती ने नौकरों से राजेश के लिए चाय नाश्ता का प्रबंध करने कहा।

राजेश _मां जी, घर से चाय नाश्ता करके आया हूं, रहने दीजिए।

मां जी ओ दिव्या जी दिखाई नहीं दे रही है।

रत्नवती और गीता दोनो एक दूसरे के मुंह ताकने लगे।

क्या बोले उन्हे समझ नही आ रहा था?

राजेश _ओ भाभी बोल रही थी कि दिव्या जी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से इस्तीफा दे दिया है।

गीता _ओ हां, क्या है न कि वो आगे डाक्टरी की पढाई और करना चाहतीं थी,,,,,

तो,,,, वह,,,

मां तुम बताओ न,,,

रत्नवती _वो बेटा, दिव्या आगे पढ़ाई के लिए,,,,,

रत्नवती भी बोल नही पाई।

गीता _वो राजेश, दिव्या आगे की पढाई के लिए रूस चली,,,,,

राजेश _क्या, दिव्या रूस चली गईं?

पर उसने तो मुझसे कभी जिक्र ही नहीं किया था, इस बारे में।

गीता _वो क्या है न कि उसने ये योजना अचानक से बनाई। अब तुम दिल्ली में थे इंटरव्यू के लिए तो वो तुम्हे डिस्टर्ब करना नही चाहती थी।

राजेश _ओह,

राजेश का मन उदास हो गया।

अच्छा दी,मै चलता हूं।

दिव्या जी का कोइ काल या मेसेज आए तो मुझे काल करने के लिए कहना।

रत्नवती _बेटा कॉफी वगैरा तो लेते जा।

राजेश _नही मां जी, मुझे ईच्छा नही हो रही है कॉफी पीने की, अच्छा मां जी मुझे इजाजत दीजिए।

रत्नवती _ठीक है बेटा, हवेली आते जाते रहना। दिव्या नही है तो क्या? हम तो है।

राजेश _जी।

राजेश वहा से चला गया।

उसका मन उदास हो गया।

वह बाइक लेकर सुरज पुर के लिए निकल पड़ा।

इधर हवेली में।

गीता _मां राजेश से झूठ बोल कर मुझे बिल्कुल अच्छा नही लग रहा है।

रत्नवती _बेटा मुझे भी, जब राजेश को सच पता चलेगा तो हम उनसे नजर नहीं मिला पाएंगे।

गीता _मां मै तो कहती हूं हम राजेश को सब सच बता देते हैं? जो होना होगा देखा जाएगा।

रत्नवती _पर बेटी, दिव्या ने तो मना की है न कुछ बताने। और तुम्हारा पिता वो तो राजेश के नाम से ही चिड़ता है, मारने या मरने में उतारू हो जाता है।

पता नहीं आगे क्या होगा?

रत्नवती _हे भगवान मेरी बेटी की जिंदगी में जो तूफान आया है, उससे उसे तू ही निकाल सकता है प्रभु। उसकी जिंदगी में जो कांटे आए हैं।

उसे तू ही हटा सकता है।

इधर राजेश गांव पहुंचने के पहले जो शिव का मंदिर था, वहा बाइक रोक दिया।

वह मंदिर के सीढ़ी में बैठ कर सोच में डूब गया।

उसे दिव्या के साथ बिताए पल याद आने लगा।

मंदिर का पुजारी उसके पास आया।

पुजारी _अरे राजेश बेटा तुम, क्या बात है बेटा कुछ उदास लग रहे हो।

राजेश _हा बाबा, आज मैं दूसरी बार उदास huwa हू। आज फिर मुझे मेरा एक सच्चा दोस्त मुझे छोड़ कर चली गईं।

बाबा _बेटा, तुम प्रभु के दरबार में आए हो, तुम सच्चे मन से प्रभु से प्रार्थना करो। तुम्हे छोड़कर जाने वाले जरूर तुमसे फिर से मिलेंगे। तुमने सबके भलाई के लिए काम किया है। प्रभु तुम्हारी जरूर सुनेंगे।

जाओ बेटा, प्रभु के चरणों में जाकर प्रार्थना करो।

राजेश मंदिर के ऊपर चढ़ा, वह घंटी बजाया, फिर उसने ईश्वर से प्रार्थना किया,

हे प्रभु, तुमने निशा को तो मुझसे दूर कर दिया, इसमें गलती मेरी ही थी इसलिए आपसे कभी शिकायत नहीं की।

पर दिव्या वह भी मुझे बिना बताए, मुझसे दूर चली गईं,,, लगता है आप मुझे मेरे बुरे कर्मो की सजा दे रहे है। जिन्हे मै अपना सच्चा दोस्त समझता हूं उसे आप मुझसे छीन लेते हैं। मेरे बुरे कर्मों की सजा देने का अच्छा तरीका निकाला है आपने। निशा की याद सताती थी इस लिय मैं शहर छोड़ आया, अब यहां भी आपने दिव्या जी को मुझसे दूर कर दिया, अब मैं कहा जाऊ प्रभु,,,

राजेश घुटने के बल बैठ कर प्रभु के सामने हाथ जोड़ लिया। उसकी आंख भर आया था।

पुजारी _उठो बेटा, प्रभु पार विश्वास रखो।

वो जरूर सब ठीक कर देंगे।

राजेश कुछ देर मंदिर में और रुका। फिर वह घर आ गया।

घर आया और किसी से कुछ बात किए, अपने कमरे जाकर लेट गया।

पूनम उसके कमरे में आई।

पूनम _क्या huwa देवर जी, उदास लग रहे हो?

राजेश _भाभी तुमने जो बताता था वो सच है दिव्या जी यहां से चली गईं हैं।

पूनम _तुम उसके चले जाने से दुखी हो।

राजेश _दिव्या जी मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी भाभी।

पूनम _देवर जी आप चिन्ता न करो, मै आपकी सारी उदासी दूर कर दूंगी।

चलो पहले खाना खा लो।

राजेश _भाभी मुझे भूख नहीं है।

पूनम _देखो देवर जी, तुम्हारे भूखे रहने से दिव्या जी वापस तो नही आ जायेगी न।

अगर तुम नहीं खाओगे तो मैं भी नही खाऊंगी, कह देती हूं हा।

राजेश _मेरे कारण आप क्यों भूखी रहेंगी भाभी।

पूनम _अच्छा मेरी चिंता है तो चलो भोजन कर लो।

राजेश _अच्छा, चलो मै आता हूं।

पूनम _ये हुई न बात। अच्छा तुम हाथ मुंह धोकर किचन में आओ, मै खाना लगाती हूं।

राजेश _जी।

राजेश हाथ मुंह धोकर कीचन में गया, पूनम ने भोजन परोसा।

राजेश _ताई नही दिख रही।

पूनम _खेत में कुछ काम ज्यादा है न तो, वह खेत चली गईं। आरती स्कूल गई है।

राजेश थोड़ा सा भोजन किया।

पूनम _देवर जी और लो न, बस थोड़ा सा ही खाएं हो।

राजेश _न भाभी, पेट भर गया।

राजेश भोजन करके अपने कमरे में जाकर लेट गया।

पूनम भी भोजन करने के बाद कीचन का काम निपटाकर राजेश के रूम मे आया।

पूनम _देवर जी आपको किसी चीज की जरूरत तो नही है।

देवर जी कहा खोए हो,,,

राजेश _की भाभी आपने कुछ कहा,,,

पूनम _तुम फिर किसी सोच मे डूब गए।

कही तुम दिव्या से प्यार करने तो नही लगे थे।

राजेश _भाभी प्यार तो सिर्फ एक बार होता है न।

पूनम _क्यू? एक बार क्यो? इंसान को जीवन में कई बार प्यार हो सकता है? तुम्हारी हालत देख कर तो यही लगता है कि तुम दिव्या जी को प्यार करते हो।

राजेश _दिव्या से मुझे प्यार है कि नही ये तो मैं नही जानता भाभी लेकिन वो मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी। और उसका इस तरह जाना, मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।

पूनम _ठीक है देवर जी, तुम आराम करो किसी चीज की जरूरत हो तो मुझे आवाज देना।

शाम के समय राजेश अपने चाचा चाची से मिलने चला गया।

राजेश _नमस्ते चाचा जी।

माधव _अरे राजेश, खुश रह, यार तू कब आया।

राजेश _जी आज सुबह ही।

माधव _और इंटरव्यू कैसा गया?

राजेश _बहुत अच्छा चाचा जी।

माधव _भईया भाभी कैसे है?

राजेश _मां और पापा दोनो अच्छे है।

माधव_राजेश, तुम्हारी चाची रोज तुम्हारी ही बाते करती रहती हैं जाओ उससे मिल लो।

सविता किचन में काम कर रही थी।

राजेश चुपके से गया और उसके पीछे खड़े होकर उसकी आंखो को को अपनी हाथ से बंद कर दिया।

सबिता चौंक गई।

कौन हो छोड़ों मुझे,,

राजेश ने हाथ हटाया।

सबिता _अरे राजेश तू, तू कब आया।

राजेश _जी आज सुबह।

सबिता _तू सुबह का आ चुका है और अभी मिलने आया। तुम्हे तो मेरी परवाह ही नहीं।

राजेश _सॉरी चाची।

सबिता _और सुना कैसा गया तुम्हारा इंटरव्यू?

राजेश _जी बहुत अच्छा।

सबिता _और घर में सब कैसे है?

राजेश _सब अच्छे से है?

सविता _तू तो वहा जाने के बाद अपनी चाची को बिलकुल भूल ही गया था re

न कोई फोन न कोई खोज खबर। मुझे तो लग रहा था कि तू गांव वापस आएगा ही नहीं।

राजेश _चाची मै आप लोगो को कैसे भुल सकता हूं?

आप लोगो की याद आते ही चला आया।

सबिता _चल झूठा कही का।

राजेश _चाची, कैसा चल रहा है आपका पंचायत का काम।

सबिता _बस पहले जैसा ही, सब लोग तुम्हे याद कर रहे थे। अब तू आ गया है तो कुछ छोटी छोटी समस्या है पर अब तू आ गया है तो सब ठीक हो जाएगा।

तू काफी पिएगा की चाय।

राजेश _जी काफी बना दीजिए।

सबिता काफी बनाने लगी, दोनो आपस में बात चीत करने लगें।

सबिता _लो काफी पियो।

राजेश _थैंक यू चाची।

राजेश काफी पीने लगा।

राजेश _अच्छा चाची अब मैं चलता हूं, दोस्तो से मिलना है।

सबिता _ठीक है पर सुन रात का भोजन यही करना, मै तेरा पसंद का भोजन बनाऊंगी।

राजेश _ठीक है चाची।

सबिता _तू कुछ भूल रहा है।

राजेश _क्या?

सबिता _तू तो कुछ ही दिनो मे सब कुछ भूल ही गया re

सविता नाराज होते हुए बोली।

राजेश उसके पास गया और उसकी गाल को चूम लिया।

सबिता शर्मा गई।

राजेश _अब चलु।

सबिता _हूं।

राजेश गांवों के दोस्तों से मिलने चला गया। दोस्तो से गांव का हालचाल जाना।

रात का भोजन सबिता के घर किया। सबिता ने उसके लिए उसका पसंद का भोजन बनाया था। भोजन करने के बाद वह घर आया। अगली सुबह उठ कर वह आर्मी प्रशिक्षण केंद्र गया।

वह वहा चल रही ट्रेनिंग का जायजा लिया। दोपहर में वह स्कूल गया।

माधुरी राजेश को देखकर बहुत खुश हुई।

स्कूल की पढाई का अवलोकन किया।

अगले दिन वह ग्राम पंचायत के मीटिंग में शामिल huwa, बैठक में गांव की समस्याओं पर चर्चा किया गया। राजेश ने समाधान हेतु अपना सुझाव दिया।

इस तरह कुछ दिन निकल गया।

राजेश अकेले में दिव्या को बहुत मिस करता था।

उनके साथ बिताए हुए पलों को याद करता था।

इधर आश्रम में दिव्या, ने अपने त्याग, समर्पण औरव्यवहार से सभी का दिल जीत लिया था।

रात में जब राजबती और दिव्या जब भोजन करने के बाद बेड पर आराम कर रही थी।

राजवती _बेटी, यहां के लोग तुमसे बहुत प्रेम करने लगें है अपनी त्याग समर्पण और व्यवहार से तुमने कुछ ही दिनो मे सबका दिल जीत लिया है।

मै तुम्हारे आने के पहले बहुत चिंतित थी बेटी।

दिव्या _किस बात के लिए नानी।

राजवती _बेटी मै चिंतित थी की मेरे बाद इस आश्रम का क्या होगा। कोन सम्हालेगा इसे। मै भगवान से हमेशा प्रार्थना करती थी। इस आश्रम का वारिश के लिए। बेटी भगवान ने मेरी सुन ली। उसने तुम्हे यहां भेजा।

बेटी तुम मुझसे वादा करो, मेरे जाने के बाद, इस आश्रम को तुम सम्हालोगी।

दिव्या _नानी क्या आपको लगता है कि इतने बड़े आश्रम को मैं सम्हाल पाऊंगी।

राजवती _तुम्हारी काबिलियत देखकर ही मेने यह फैसला लिया है बेटी मेरे बाद तुम ही यहां की नई माता बनोगी।

एक दिन राजेश दिव्या को बहुत मिस कर रहा था। वह उस स्थान पर गया था। जहा दिव्या के साथ समय बिताया था।

वह रोड किनारे अपना बाइक रख कर।

वह उन स्थानों पर आगे बढ़ता गया। जहां दिव्या के साथ समय बिताया था।

शाम के समय गीता जिला कार्यालय से घर आ रही थी।

उसने राजेश का बाइक रोड किनारे खडा देखा उसने ड्राइवर को बाइक रोकने के लिए कहा।

गीता _ये तो राजेश का बाइक है, इस सुन सान जगह पर राजेश क्या कर रहा है!

वह अपने वाहन से उतरी और राजेश को इधर उधर ढूंढने लगी।

राजेश नदी किनारे बैठा हुआ था।

वह दिव्या को याद कर रहा था, उसके साथ जो गीत गाया था वो पल उसे याद आ रही थी।
 
आप सभी मित्रो का शुक्रिया, अगला अपडेट कल आयेगा।
 
गीता ने जब देखा की, राजेश नदी किनारे अकेला बैठा है, अपने ख्यालों में खोया हुआ है। वह उसके पास गई।

उसने राजेश को आवाज दी।

गीता _राजेश,,

राजेश,,,

राजेश ने कोई जवाब नहीं दिया, वह कही खोया हुआ था। तब गीता उसकी कंधे पर हाथ रखी,,,

गीता _राजेश,,,

राजेश, अपने ख्यालों से बाहर आया।

राजेश _गीता दी तुम यहां,,,

गीता _वहीं सवाल तो मैं तुम्हे पुछने वाली थी। तुम यहां क्या कर रहे हो।

राजेश _बस ऐसे ही,, अपना अकेला पन इन हसीन वादियों के साथ बाटने, चला आया।

पर आप यहां कैसे?

गीता _मै तो जिला कार्यालय मीटिंग में गई थी, यहां सड़क किनारे तुम्हारा बाइक खड़ा देखा तो, तुम्हे ढूढते यहां चला आया।

वैसे जगह काफी खूबसूरत है, लगता है तुम यहां पहले भी किसी के साथ आते रहे हो।

राजेश _जगह ही ऐसी है दी, राही को रुकने पर मजबूर कर देता है।

गीता _पर लोग यहां अकेले तो नही आते ,,

राजेश _ये तो किस्मत की बात है दी , इंसान का समय हमेशा, एक जैसा तो नही रहता न। कभी कोई हमारे साथ होती है तो कभी हम अकेले रह जाते हैं।

गीता _तुम दिव्या को मिस कर रहे हों?

राजेश _दिव्या जी को मैने अपना सच्चा दोस्त माना था, दी, पर वह मुझे बिना बताए ही चली गई।

मतलब वह मुझे अपना दोस्त नहीं समझती थी।

पहले निशा जी, और अब दिव्या जी, शायद मेरे जीवन में अकेला पन ही लिखा है।

जब भी कोई मुझे अपना लगने लगता है, मुझे छोड़ कर चली जाती है।

वैसे आपको, इस सुन सान जगह पर नही आना चाहिए था दी।

गीता _राजेश दिव्या ने, तुमसे सच बताने से मना कि थी, पर मुझे लगता है कि सच बताना जरूरी है नही तो बहुत देर हो जायेगी।

राजेश _कैसा सच दी?

गीता _यही की दिव्या, विदेश नही गई है

राजेश _क्या?

गीता _हां, दिव्या विदेश नही गई है ।

राजेश _तो फिर कहा है दिव्या जी।

गीता _वह, नानी के पास गई है, सेवा आश्रम ।

राजेश _अगर वह नानी के पास गई है तो फिर झूठ बोलने की क्या जरूरत पड़ी?

गीता _क्यों कि वह मां बनने वाली है?

राजेश _क्या,,

दी ये आप क्या कह रही है?

गीता _वही जो सच है।

वह मां बनने वाली हैं ?

इससे पहले लोगो को पता चलता की वह बियाहे, मां बनने वाली हैं? लोग हमारे खानदान पर कीचड़ उछाले, वह यहां से चली गईं।

राजेश _पर ये कैसे हो सकता है दी, दिव्या जी ने तो मुझे कभी बताया ही नहीं की कोई उसका यार दोस्त भी है, फिर वो मां कैसे बन सकती है?

गीता _क्यों, तुम तो हो न उसके दोस्त?

राजेश _दी मै कुछ समझा नही।

गीता _राजेश उसके पेट मे जो बच्चा है वह तुम्हारा है?

राजेश _दी ये आप क्या कह रही है? दिव्या जी के पेट में मेरा बच्चा कैसे आ सकता है?

गीता _तुम चौंक गए न।

तुम्हे पता नही उस रात क्या huwa था?

राजेश _तुम किस रात की बात कर रहे हो दी?

गीता _राजेश, वह दिन याद करो जब गणेश पुर मेले का उद्घाटन था, मुझे सर पिता जी को नक्सली अपने साथ ले गए थे। तुमने और दिव्या ने अपनी जान जोखिम में डाल कर हमे बचाया, हम नदी के रास्ते लकड़ी के नाव से रात में निकल रहे थे।

राजेश _हां दी वो सब तो मुझे याद है।

गीता _तुम्हे यह भी याद होगा, नाव हम सबका भार नही उठा पाया तो तुम नदी में ही तैरते हुए, नाव को किनारे तक पहुंचाने की कोशिश करने लगे।

राजेश _हां दी ये सब तो मुझे याद है।

गीता _उसके बाद क्या हुआ था तुम्हे याद है?

राजेश _नही दी, उसके बाद तो सुबह मैं अपने आपको झोपड़ी के खाट में लेटा पाया।

गीता _राजेश तुम्हे पता नहीं है उस रात क्या हुआ था। नदी का पानी इतना ठंडा था की पानी में डूबे रहने से तुम्हारा पुरा शरीर ठंड से अकड़ गया था। तुम बेहोश हो गए थे।

तुम्हारा शरीर का खून जम गया था। नब्ज एकदम धीमा हो गया था।

हमने कई उपाये किए तुम्हे होश ही नहीं आया।

तब दिव्या ने तुम्हे बचाने के लिए वह किया जो आज उसके जीवन का अभिशाप बन गया।

राजेश _दी, दिव्या जी ने मेरी जान बचाने के लिए क्या किया?

दिव्या _वह निर्वस्त्र होकर तुम्हे अपनी जिस्म की गर्मी दिया। जिस्म की गर्मी से तुम धीरे धीरे होस में आने लगे। फिर वही huwa जिसका डर था।

तुमने उसकी कौमार्य भंग कर दिया।

राजेश _नही, ऐसा नहीं हो सकता? मै दिव्या जी के साथ ऐसा सोच भी नही सकता।

गीता _ये सच है, राजेश।

राजेश _पर ये सब चीजे मुझसे छिपाने की क्या जरूरत थी? दिव्या जी ने मुझे बताया क्यूं नही?

गीता _क्या बताती वह, तुम तो निशा से प्यार करते हो न। दिव्या यह बता कर की वह तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हैं? तुम पर कोई दबाव नहीं बनाना चाहती थी। वैसे भी तुम्हारा इंटर व्यू था।

इन सबका तुम्हारा इंटरव्यू पर बुरा प्रभाव पड़ सकता था। दिव्या नही चाहती थी कि तुम्हारा इंटरव्यू पर बुरा प्रभाव पड़े, वह तुम पर दबाव भी नहीं बनाना चाहती थी।

हमने उसे बच्चा गिराने के लिए कहा, पर वह नही मानी। वह तुम्हारे बच्चे को जन्म देना चाहती है!

पिता जी तो उसकी दूसरे से शादी कराने की बात कर रहे थे। पर दिव्या नही मानी।

अब दिव्या के पास कोई और चारा नहीं बचा था, इसलिए उसे यहां से जाना पड़ा।

राजेश _दिव्या जी को मेरे कारण इतना कुछ सहना पड़ा, धिक्कार है मुझे।

मुझे उसके पास जाना है, दी कहा है दिव्या जी बताओ मुझे। पता नहीं वह किस हालत में होगी ?

गीता _मैने बताया तो था, वह नानी के पास गई है। यहां से 300km दूर नानी का सेवा आश्रम है।

वह वहीं गई है।

राजेश _दिव्या जी मै आ रहा हूं, मै अकेले आपको दुनिया से संघर्ष करने नही दूंगा। चाहे जो भी हो जाए।

राजेश और गीता वहां से घर चलें आए।

रत्नवती _बेटी आज आने में देर कर दी?

गीता _हां मां, मुझे रास्ते में राजेश मिला था, वह अकेला था। नदी किनारे बैठा था। मां राजेश दिव्या को बहुत मिस कर रहा है।

मैने राजेश को सब सच बता दिया कि दिव्या विदेश नही बल्कि नानी के घर गई है, उनकी सेवा आश्रम में।

रत्नवती _बेटी ये तूने क्या किया? दिव्या ने मना किया था, बताने को।

गीता _मैने जो किया ठीक किया मां, शायद दिव्या की इसी में भलाई है। मै जानती हूं, दिव्या राजेश को बहुत प्यार करती है, और दिव्या निशा के कारण राजेश से यह बात छिपाती है। मां दिव्या ने जो जो त्याग किया है उसके लिए उसे फल मिलना चाहिए मां। राजेश कल सेवा आश्रम जा रहा है, दिव्या से मिलने।

रत्नवती _बेटी, अब क्या होगा?

गीता _जो भी होगा, अच्छा ही होगा मां।

गीता और रत्नवती की बाते ठाकुर ने छुपकर सुन लिया।

ठाकुर _मुझे उस साले को रोकना होगा? वो साले दिव्या से मिले और मेरी इज्जत को मिट्टी में मिला दे, मै उस साले को ही मिट्टी में मिला दूंगा।

दिव्या जब आश्रम पहुंची, तो ठाकुर ने पहले ही, अपने आदमियों को, वहां तैनात कर दिया था। आश्रम की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए।

वहा की जानकारी उसको मिलती रहे।

उसने अपने खास आदमी भैरव को वहा भेजा था।

उसने भैरव को फोन लगाया।

भैरव _हुकुम आपने मुझे याद किया।

ठाकुर _हा भैरव।

वो समय आ चुका है, जिसके लिए तुम्हे वहा भेजा था। मुझे पता था वो शाला एक दिन आश्रम जरूर पहुंचेगा, वो शाला राजेश कल आश्रम पहुंच रहा है।

पर तुम्हे उसे आश्रम में पहुंचने से पहले ही ख़त्म करना होगा।

भैरव _हुकुम आप चिन्ता न करे। राजेश, आश्रम नही पहुंचेगा।

ठाकुर _भैरव, उस साले को ख़त्म करना आसान नहीं है बहुत ताकतवर है साला, उसे खत्म करने की कई बार कोशिश किया गया, पर हर बार बच निकलता है।

तुम लोग उसे सामने से नही नही हरा सकते। उसे धोखे से मारना।

भैरव _मै समझ गया हुकुम। इस बार वह नही बचेगा आप निश्चिंत रहिए।

उसके बाद भैरव, राजेश को ख़त्म करने के लिए योजना बनाने में जुट गया।

इधर राजेश घर पहुंचा,,,

पदमा _अरे बेटा तू कहा गया था?

राजेश _कही नही ताई, बस यूं ही टहलने के लिए।

पदमा _अरे बेटा कही जाता है तो बताकर जाया कर, हमे तुम्हारी चिन्ता होने लगती है।

राजेश आंगन में लगे खाट पर लेट गया।

पदमा _बहु, राजेश के लिए चाय ले आ।

पूनम _ जी मां जी,

राजेश _नही ताई चाय को रहने दो, पीने का मन नही है।

पदमा _क्या बात है बेटा, कुछ चिंतित लग रहा है?

राजेश _ताई मै कल चंद्रपुर जा रहा हूं। वहा एक गांव है शिवपुर।

पदमा _पर वहा क्या काम है बेटा?

राजेश _हां ताई, वहा कुछ काम है, जो अभी आपको नही बता सकता। वहा से आने के बाद ही आपको बताऊंगा।

पदमा _ऐसा क्या काम आ गया है बेटा, कही कोई लड़ाई झगडे वाली बात तो नही। मुझे बड़ी चिंता हो रही है।

राजेश _नही ताई, ऐसी कोई बात नही है। मै जाकर जल्द ही वापस लौट आऊंगा।

रात में भोजन के समय घर के सभी लोगो को पदमा ने यह बात बताई की राजेश कल चंद्रपुर जा रहा है।

भुवन _राजेश, मुझे लगता है की तुम्हारा अकेले जाना ठीक नही है, मै भी तुम्हारे साथ चलूंगा।

राजेश _भईया मुझे वहा कितने दिन लगेंगे, एक दो तीन दिनो में आ जाऊ या सप्ताह लगेंगे। कह नही सकता, यहां आपकों खेती के काम सम्हालने है। इसलिए मेरा अकेला जाना ही उचित है।

रात में सबके सो जाने के बाद पूनम राजेश के कमरे में आई।

राजेश _भाभी आप इस वक्त

पूनम _तुम भी तो इतनी रात तक जाग रहे हो।

क्या बात है देवर जी। आज आप कुछ ज्यादा ही चिंतित लग रहे हैं।

राजेश _हां भाभी, आज मैं चिंतित हूं ।

पूनम _चिंता का कारण आप अपनी भाभी को नही बताओगे।

राजेश _भाभी, बात ऐसी है जो मैं अभी किसी को नहीं बता सकता मुझे माफ करना भाभी।

पूनम _कोई बात नही देवर जी। कल आपको चंद्रपुर जाना है। आप इस तरह जागते रहेंगे तो, तबियत बिगड़ सकती है।

राजेश _अभी इन आंखो में नींद मुस्किल हैं भाभी, मुझे रात जाग कर ही बितानी होगी।

आप मेरी चिंता न कीजिए, जाइए सो जाइए।

पूनम _मै तुम्हारी नींद में कुछ मदद कर दू।

पूनम ने अपनी ब्लाउज की बटन खोलते हुए कहा,,

राजेश _भाभी आज मेरा मन नही है, प्लीज

पूनम _तुम्हारा मन नही है तो क्या,मेरा तो मन है, लगता है तुम्हारा, मन अपने भाभी से भर गया है। जब से इंटरव्यू दिलाकर आए हो। एक बार भी प्यार से गले नही लगाए होऔर कल फिर जा रहे हो। देवर जी तुम मतलबी निकले।

पूनम की आंखो में आंसू भर आए।

वह आंसू पोछते हुवे, कमरे से जानें लगी।

तभी राजेश ने उसकी हाथ को पकड़ लिया।

राजेश _भाभी , मुझसे नाराज़ हो गई क्या?

पुनम _नही, देवर जी आपको क्या लगता है, सिर्फ निशा और दिव्या ही आपसे प्यार करती है और कोई नहीं।

आपने तो कभी किसी औरत की दिल की बात जानना चाहा नही, रात को भोग कर सुबह सब भूल गए।

पर औरत के साथ ऐसा नहीं है, हा मै ये जानती हूं कि अपनी पति के अलावा दूसरे मर्द को चाहना गलत है।

पर दिल कहा किसी की सुनता है। जिसको ये दिल भाता है बस उसी का होकर रह जाता है।

तुम मर्दों को तो औरत बस मन बहलाने की चीज लगती है। कुछ दिन खेल लिए फिर जी भर गया तो भूल गए।

राजेश _भाभी मुझे माफ कर दो, आपकी भावनाओं को मैं समझ नही पाया। अभी मैं कुछ दिनो से तनाव में हूं।

पुनम _कोई बात नही देवर जी, अब मुझे जाने दो, आगे मै आपसे कोई शिकायत नहीं करूंगी।

राजेश _नही भाभी, पता नही आगे क्या होने वाला है। आगे हमे मिलने का मौका मिलेगा कि नही कुछ कहा नहीं जा सकता। इसलिए आज की रात, अपने सारे गीले सिकवे दूर कर लो।

पुनम राजेश की आंखों में देखी, फिर वह उसके करीब गई। फिर अपनी ओंठ राजेश की ओंठ पर रख चूसने लगीं।

राजेश भी पुनम की साथ देने लगा।

दोनो के बीच कुछ देर तक चूमा चाटी चलता रहा। उसके कपड़े कब उतरे उन्हे पता ही नहीं चला। राजेश ने पूनम की दूदू को मसल मसल कर खूब निचोड़ निचोड़ कर पिया। उसकी chut चांट चांट कर उसे खूब मज़े दिए। पुनम ने भी राजेशका लंद चूस चूस कर उसका लंद खूब लंबा और मोटा कार दिया।

राजेश रात भर पुनम को पेलता रहा। उसे कामसूत्र के कोइ भी आसन नहीं बचा जिसका उसने उपयोग न किया हो।

रात भर कमरे के अदंर पुनम की मादक सिसकारी और चूड़ियों की खनकने की आवाज गूंजती रही।

पुनम को पूरी तरह तृप्त करने के बाद, राजेश उसकी योनि में बीज छोड़कर उसके ऊपर ढेर हो गया।

राजेश थक चुका था उसे नींद आ गई।

पुनम कुछ देर बाद उठा अपने कपड़े पहने फिर राजेश के ऊपर चादर डाल कर उसकी माथा चूम कर वहा से चली गईं।

सुबह राजेश का नींद खुला तो 7बज चूके थे।

उसे याद आया उसे तो चंद्रपुर जाना है। वह नहाने चला गया। बहाकर आया।

पुनम ने उसके लिए चाय नाश्ता की तैयार कर ली थी।

पदमा _बेटा चाय नाश्ता तैयार हो गया है, चाय नाश्ता करके ही जाना।

राजेश ने चाय नाश्ता किया फिर अपना बैग पर कुछ कपड़े और सामान लेकर जाने को तैयार हो गया।

पदमा _बेटा तुम अपना ख्याल रखना।

राजेश _जी ताई।

भुवान _यार पहुंचते ही फोन करना, और हाल चाल बताते रहना।

राजेश _जी भईया।

राजेश सन से इजाजत लेकर, चंद्रपुर के लिए अपनी बाइक से निकल पड़ा। सूरज पुर से चंद्रपुर जिला जाना था वहा एक गांव शिवपुर जो नदी किनारे बसा था। वही था सेवा आश्रम।

राजेश बाइक को तेजी से दौड़ाता huwa चले जा रहा था।

बीच बीच में लोगो से रास्ता पूछ लेता था। कही रास्ता अच्छा था तो कही खराब, उसे शिवपुर पहुंचते पहुंचते शाम हो गया।

इधर भैरव और उसके साथी, रास्ते पर जगह जगह छिपे हुए थे। राजेश की पहुंचने की जानकारी भैरव को हो चुका था। भैरव सिंह ने ही राजेश को अस्त्र शस्त्र चलाना सिखाया था। उसके ताकत से भैरव सिंह भी वाकिफ था।

भैरव सिंह एक भिखारी का रूप बना लिया और सड़क पर चलने लगा जिस मार्ग से राजेश आ रहा था।

राजेश ने जब बूढ़े व्यक्ति को देखा।

राजेश _बाबा ये सेवा शिव पुर आसपास है क्या?

भैरव सिंह _हा, बेटा शिव पुर पास में ही है। तुम्हे किसके घर जाना है।

राजेश _बाबा मुझसे सेवा आश्रम जाना है।

भैरव सिंह _बेटा सेवा आश्रम तो मैं भी जा रहा हूं।

राजेश _अच्छा बाबा तो आप मेरे बाइक पर बैठिए। हम दोनों की मंजिल एक ही है।

भैरव सिंह _ठीक है बेटा।

राजेश _बाबा, मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं आपको पहले से जानता हूं।

भैरव _अरे बेटा, दुनिया में तो एक ही सकल की कई आदमी होते है। देखा होगा किसी मेरे हमसक्ल को।

राजेश _हो सकता है बाबा।

भैरव _बेटा इस रास्ते से चलो , ये हमे आश्रम तक जल्दी पहुंचाएगी।

राजेश _पर बाबा ये रास्ता तो थोड़ी खराब लग रही है।

भैरव _आगे रास्ता ठीक है बेटा।

कुछ दूर चलने के बाद रास्ता आगे बंद था।

राजेश _बाबा, ये रास्ता तो आगे बंद है।

भैरव _बेटा मै बूढ़ा हूं न मेरी आंखें कमजोर हो गई है, लगता है हम गलत रास्ते पर आ गए। तुम गाड़ी रोको बेटा।

राजेश ने गाड़ी रोका।

भैरव सिंह अपने पास छुरा छिपाकर रखा था। उसे वह निकाल लिया।

और राजेश पीठ पर घोप दिया।

आस पास घने पेड़ों के बीच भैरव के साथी भाई छिपे थे वे भी बाहर निकल आए।

और राजेश सम्हल पाता उसके पहले ही लाठी से उसके सिर पर कई वार कर दिया। राजेश का सिर फट गया।

राजेश के आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। वह लोगो को पहचानने की कोशिश करने लगा। पर पहचान न सका। वह वहीं पर लहूलुहान बेहोश होकर गिर पडा।

भैरव सिंह _अब ये नही बचेगा। इसने ठाकुर खानदान के इज्जत से खेला था, उसकी सजा मिली साले को।

उसके बाद भैरव और उसके साथी वहा से चले गए। और ठाकुर को इस बात की जानकारी दिया।

भैरव _हुकुम हवेली की इज्जत से खेलने वाले को हमने खत्म कर दिया।

ठाकुर बहुत खुश huwa

इधर अंधेरा होने को था। किसान लोग खेत में काम करने वाले किसानों का घर जाने का समय था।

दो किसान अपने खेत से काम करके घर के लिए जा रहे थे। उसने रास्ते में लहूलुहान किसी व्यक्ति को पड़ा देखा।

किसान _ये कौन है? लगता है किसी ने इज पर जान लेवा हमला किया है।

एक किसान _देखो तो इसकी सांसे चल भी रही है या मर गया है।

दूसरे किसान ने राजेश का हाथ छूकर अवलोकन किया।

किसान २_ये मरा नहीं है। ये बेहोश हो गया है। इसकी सांसे अभी भी चल रही है।

किसान १_इसे हमे आश्रम ले जाना चाहिए। वहा शायद इसकी जान बच जाए।

आश्रम में एक बडा हॉस्पिटल भी था जहा आश्रम में रहने वाले लोगो के साथ साथ आस पास के गांव के लोग भी इलाज कराने के लिए आते थे।

दोनो किसानों ने किसी तरह राजेश को आश्रम तक पहुंचाया ।

हॉस्पिटल में कई डॉक्टर, नर्स एवम कर्मचारी कार्य कर रहे थे। अन्य बड़े बड़े डाक्टर भी सेवा आश्रम से जुड़े हुए थे। आवश्यकता पड़ने पर उन्हे बुलाया जाता था। दिव्या भी डॉक्टर के रूप में सेवा देने के साथ साथ अन्य जिम्मेदारी भी सम्हाल रही थी।

आश्रम के डॉक्टरों ने किसानों से पूछा _कोन है ये, इसकी ये हालात कैसे हुई?

किसान _ये कोई अजनबी है, ये हमे रास्ते पर पड़ा मिला। लगता है इस पर किसी ने जानलेवा हमला किया है।

हमने देखा इसकी सांसे अभी भी चल रही है तो हम इसे आश्रम ले आएं। शायद इसकी जान बच जाए।

डाक्टर _इसकी हालत तो काफी खराब लग रही है।

लोगो की भीड़ देख कर दिव्या ने नर्स से पूछा।

दिव्या _क्या बात है, नीरा वहा इतनी भीड़ क्यू है।

दिव्या हॉस्पिटल में एडमिट कुछ मरीजों की हालचाल पूछ कर बाहर निकल रहीं थीं।

नर्स _दीदी, एक नया केस आया है। कोई युवा है। किसी ने उस पर जानलेवा हमला किया है। डाक्टर बता रहे थे की उसका बचना मुश्किल है।

इधर डाक्टर लोगो ने राजेश का पर्स चेक किया। उसमे रखे परिचय कार्ड से उसके बारे में पता चला कि इस युवक का नाम राजेश है और ये राजधानी का रहने वाला है।

दिव्या अन्य मरीजों को देख रही थी तभी उसके कानो पे राजेश शब्द सुनाई पढ़ा वह चौंकी।

उसका दिल जोरो से धड़कने लगा।

वहकापते कदमों से, उस युवा की ओर बड़ने लगा जिसे डाक्टरों ने घेर रखा था।

दिव्या जब युवक के पास पहुंची। उसे देखते ही। चीख पड़ी।

सवहा सभी लोग चौंक पड़े।

वहा के बुजुर्ग हेड डाक्टर _दिव्या बेटी क्या तुम इसे जानते हो।

दिव्या _ये राजेश है,ये यहां पहुंचा कैसे किसने की इसकी ये हालात। राजेश, उठो,,,

दिव्या रोने लगी,,

बुजुर्ग डॉक्टर _बेटी तुम डॉक्टर होकर भावुक हो रही हो, धैर्य रखो।

दिव्या _डॉक्टर, राजेश को कुछ नहीं होना चाहिए। जल्दी इलाज सुरू करो, दिव्या चीखी।

राजेश को आपातकाल कक्ष में ले जाया गया।

वहा पर राजेश का गहन जांच किया गया। उसके पीठ पर घुपे छुरे को निकाला गया।

जांच के दौरान पाया गया कि उसके सिर पर गंभीर चोंट लगी है।

इधर दिव्या की हालात की बात राजवती तक पहुंची। वह भी दौड़ी भागी हॉस्पिटल पहुंची।

राजवती _बेटी क्या हुआ क्यों रो रही हो?

दिव्या _नानी राजेश की हालात काफी नाजुक हैं। पता नहीं क्या होगा?

राजवती _पर बेटी राजेश वहा आया कैसे और मेरे उसके साथ ये सब huwa कैसे?

दिव्या _मुझे कुछ नही मालूम नानी, उसकी ये हालात किसने की और वह शिव पुर पहुंचा कैसे? नानी उसे कुछ नहीं होना चाहिए।

राजवती _बेटा, धैर्य रखो, सब ठीक होगा बेटा, तुम खुद एक डॉक्टर हो। तुम तो एक साहसी लड़की हो। तुम इतनी भावूक कैसी हो सकती हो?

दिव्या _नानी मै राजेश से बहुत प्यार करती हूं, अगर राजेश ही नहीं रहा तो मेरा जीना व्यर्थ है। उसे बचा लो।

बुजुर्ग डॉक्टर आपात कालीन रूम से बाहर निकला।

राजवती _क्या huwa डॉक्टर, राजेश ठीक तो है न।

डॉक्टर _माता जी, राजेश की हालात काफी गंभीर है। उसके सिर पर गंभीर चोंट लगी है। आपरेशन करना पड़ेगा। और यह ऑपरेशन स्पेसलिष्ट ही कर सकता है।

राजवती _ठीक है आप उसे फोन लगाइए और मुझसे बात कराइए।

डॉक्टर ने स्पेलिस्ट डॉक्टर को फोन लगाया। राजवती ने उससे बात किया।

स्पेशलिस्ट डॉक्टर राजधानी में ही था। उसे आने में 6से 7घंटे लग सकता था। राजवती ने उसे चार्टेड प्लेन से आने को कहा, सारा खर्च आश्रम उठाएगा।

स्पेशलिस्ट डॉक्टर चार्टेड प्लेन से 2घंटे में ही आश्रम पहुंच गया।

उसने राजेश का ऑपरेशन किया।

ऑपरेशन कक्ष से बाहर निकला।

राजवती _डॉक्टर राजेश ठीक तो है न।

डॉक्टर _मैने उसका ऑपरेशन कर दिया है माता जी। पर उसकी स्थिति काफी नाजुक हैं । उसे 24घंटे के अदंर होश आ गया तो ठीक, नही तो कुछ कहा नहीं जा सकता।

दिव्या _नही मेरे राजेश को कुछ नहीं हो सकता, वह जरूर उठेगा,,,

दिव्या, आश्रम अपने कमरे में रखी श्री कृष्ण की मूर्ति के सामने जाकर फरियाद करने लगी।
 
आखिर 24घंटे बीतने के पहले राजेश होश में आ गया।

इस बात की जानकारी नर्स ने दिव्या को जाकर दी।

दिव्या बेशुद भगवान के मूर्ती के सामने पड़ी थी।

नर्स _दीदी उठो,,,

दिव्या ने अपनी आंखें खोली,,

नर्स _दीदी राजेश को होश आ गया है,,,

दिव्या _क्या कहा तुमने, राजेश को होश आ गया,,

नर्स _हा दीदी, वो तुम्हे याद कर रहा है।

दिव्या_क्या?

दिव्या _ राजेश

दिव्या उठी और भागते हुवे , राजेश के पास पहुंची,,,

दरवाजे के पास जाकर खड़ी हो गई।

राजेश ने दिव्या की ओर मुड़ कर देखा।

राजेश _दिव्या जी,,,

धीमे स्वर में कहा,,

दिव्या दौड़कर राजेश के पास गई और घुटने पर खड़ी हो गईं।

दिव्या _राजेश तुम होश में आ गए,,

राजेश के हाथ को पकड़ कर कहा ,,,

राजेश _दिव्या की मुझे माफ कर दीजिए,,,

धीमे स्वर में कहा,,

मेरे कारण आपको इतने कष्ट सहने पढ़ रहे हैं।

दिव्या _राजेश, इसमें तुम्हारी कोई गलती नही,किस्मत में जो होना लिखा था वो हो गया,,, इसमें तुम अपने को दोषी न समझो,,,

तभी वहां राजवती पहुंची साथ में उस क्षेत्र के थानेदार भी थे। राजवती ने इस घटने की जानकार थाने को दी थी और रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।

थानेदार _राजेश क्या तुम हमें बता सकते हो की तुम पर हमला किसने किया था?

राजेश जान चुका था कि हमला ठाकुर के कहने पर उसके आदमियों ने किया था।

राजेश ने हमलावरों को पहचानने से इंकार कर दिया।

राजेश _नही थानेदार साहब, वे कौन लोग थे, मुझे पता नही।

थानेदार _क्या तुम्हे किसी पर शक है?

दिव्या _देखिए थानेदार साहब, अभी राजेश की हालत ठीक नहीं है, इन सब सवालों से उसके उसके दिमाक पर दबाव बढ़, ये सब बाते आप बाद में पूछ लेना।

राजवती _दिव्या ठीक कह रही है थानेदार साहब, राजेश जब ठीक हो जाए तो सब जानकारी ले लेना। लेकिन जिन लोगो ने राजेश पर हमला किया है, जब उसे पता चलेगा राजेश बच गया है तो वे राजेश पर फिर से हमला की कोशिश कर सकते हैं।

इसलिए अपने दो जवानों को राजेश की सुरक्षा के लिए तैनात कर दो।

थानेदार _ठीक है माता जी।

थानेदार ने अपना 2 जवान राजेश की सुरक्षा के लिए लगा दिया।

जवान दरवाजे बाहर बैठ कर निगरानी करने लगे।

दिव्या ने पुलिस जवानों को साफ हिदायत दे दी थी की उसके इजाजत के बिना राजेश के कमरे मे कोई भी प्रवेश न करे।

इधर गीता ने दिव्या को फोन किया।

गीता _दिव्या कैसी है तू?

दिव्या _यहां सब ठीक नही है दी ,,

दिव्या ने अपने रूवासी होते हुए कहा,,

गीता _क्या huwa दिव्या?

दिव्या _क्या आपने राजेश को सारी सच्चाई बताई?

गीता _सॉरी दिव्या, राजेश यहां तुम्हे बहुत मिस कर रहा था। उसकी दशा देखकर मुझे सच बताना पढ़ा।

वह तुम्हारे पास जाने वाला था, वो पहुंचा क्या?

दिव्या _दी राजेश राजेश पर कुछ लोगो ने हमला कर दिया था, उसकी हालात बहुत खराब थी दी, बहुत मुस्किल से उसकी जान बच सकी है।

गीता _क्या राजेश को कुछ लोगो ने जान से मारने की कोशिश की।

अभी कैसा है राजेश।

गीता _अभी वो खतरे से बाहर है दी।

दिव्या _किसने किया था राजेश पर हमला।

दिव्या _पता नही दी, राजेश ने अभी कुछ बताया नही है?

गीता _दिव्या तू घबरा मत, मै वहां आ रही हूं। तू अपना और राजेश का ख्याल रखना।

दिव्या _जी दी।

गीता ने यह बात अपनी मां को बताई।

रत्नवती _मुझे लगता है राजेश पर हमला तुम्हारे पिता ने कराया है। उसे पता चल गया होगा की राजेश दिव्या से मिलने जा रहा है।

गीता _ मुझे पता नहीं था पिता जी सच में ऐसी हरकत करेंगे नही तो मैं राजेश को सच्चाई नहीं बताती।हमे आश्रम चलना चाहिए। वहा दिव्या बहुत दुखी हैं।

रत्नवती _ठीक है बेटी वहा जाने की तैयारी करो, मै तुम्हारे पिता से मिलकर आती हूं।

रत्नवती ठाकुर के पास पहुंची,,,

रत्नवती _ये आपने अच्छा नही किया?

ठाकुर _मैंने क्या किया?

रत्नवती _भोले मत बनो। राजेश पर आपने हमला करवाया है न।

ठाकुर _मेरे घर के इज्जत से खेलने वाले को मैं ऐसे ही जाने दूंगा? साले को उसकी करनी की सजा मिली। और तू अपनी मुंह बन्द रखो, नही तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।

रत्नवती _क्या करोगे, मारोगे मुझे, मारो लो मारो,,,

मैने पहले ही कहा था आपको, आपकी सारी जुल्मों को अब तक देखती और सहती आ रही थी। पर बात मेरी बेटियों की खुशियों पर आयेगी तो मैं चुप नही बैठूंगी।

राजेश पर हमला कराकर आपने अच्छा नही किया। भगवान की कृपा है कि राजेश बच गया, अगर उसे कुछ हो गया होता न तो पूरी दुनिया को चीख चीख कर बताती कि उसकी जान तुमने ली है।

ठाकुर _क्या वो साला बच गया?

रत्नवती _शुक्र मनाओ की वह बच गया, नही तो अपनी पत्नी और बेटियों से हाथ धो बैठते । और सुन लो आज के बाद ऐसी हरकत करने के बारे में भी सोंचे तो मैं और गीता दोनो हवेली छोड़कर सदा के लिए मां के पास चले जायेंगे आश्रम।

रत्नवती वहा से चली गईं,,,

ठाकुर शराब पीने लगा,,,

गीता और रत्नावति दोनो आश्रम के लिए निकल पड़े।

शाम तक वे आश्रम पहुंच गए।

वे दोनो राजेश से मिले, उसकी हालत देखकर दोनो को काफी दुख हुआ।

राजेश _मां जी आप यहां,,

रत्नवती _हा बेटा, दिव्या ने तुम्हारे बारे में हमें बताया, तो रहा नहीं गया तुम्हे देखने चले आए।

मै आपसे माफी मांगती हूं बेटा,,,

राजेश _किस बात के लिए मां जी,,,

रत्नवती _तुम पर हमला बेटा मेरे पति ने ही कराया है और शायद ये बात तुम भी जानते होगे। इसलिए मैं माफी मांगती हूं तुमसे।

राजेश _जानता हूं मां जी, पर आपकों माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं, ये तो मेरे कर्मों की सजा मुझको मिली है। मेरे कारण दिव्या की को इतना कुछ सहना और त्यागना पड़ा है।

रत्नवती _ये तो तुम्हारा बड़प्पन है बेटा।

इधर दिव्या को जब पता चला कि राजेश पर हमला उसके पिता ने ही करवाया है, उसे गुस्सा आया।

वह अपने पिता जी को फोन लगाया।

ठाकुर _बेटी दिव्या कैसी है तू, वहा सब ठीक तो है न?

दिव्या _पिता जी आप अनजान बनने का नाटक मत करिए मुझे सब पता चल गया है। राजेश पर आपने ही हमला करवाया है न।

ठाकुर _ये सच नही है बेटी, लगता है किसी ने तुमको बहकाया है।

दिव्या _मां कभी झूठ नहीं बोल सकती, अब तक आपको मै भगवान की तरह पूजती रही। लेकिन मुझे अब पता चला कि आप उस लायक नहीं है। जिस आदमी ने आपकी बेटियों की इज्जत बचाया ,आपका जान बचाया उसके साथ आप ऐसा कैसे कर सकते हैं। मेरे साथ जो कुछ भी huwa उसके लिए राजेश दोषी नहीं है यह सब जानते हुवे भी। आज

आप मेरे नजरो से गिर गए पिता जी।

दिव्या _अब मै आपके सामने कभी नहीं आऊंगी।

दिव्या ने फोन रख दिया। और रोने लगी।

ठाकुर, दिव्या की बात सुनकर,,,

ये क्या हो गया? ये साला राजेश ने मुझे बर्बाद कर दिया। मेरी पत्नी और बेटियां सब मेरे खिलाफ हो गए। पर उस साले से बदला लेकर रहूंगा, चाहे कुछ भी हो जाए।

ठाकुर और ज्यादा शराब पीने लगा।

बिंदिया _बस करो ठाकुर और कितना पियोगे।

ठाकुर _चुप कर साली,,

उस साले के कारण मेरी बेटी और पत्नी मेरे खिलाफ हो गई है। उस साले ने मुझे बर्बाद कर दिया है।

बिंदिया _शराब पीने से क्या क्रोध शांत हो जायेगा, ज्यादा शराब पीने से आपका लिवर खराब न हो जाए। आपकी क्रोध शांत करने के लिए आज रात नई लड़कि का प्रबंध किया है मैने? आप अपना गुस्सा उस लङकी की chut पर उतारिए। वो चीखेंगी। तो आपको सुकून मिलेगा।

ठाकुर _पर ये लड़कि कहा कि है?

बिंदिया _पास वाले गांव की है। मुनीम ने बताया कि उस के पिता जी कर्ज नही चुका पा रहे हैं तो एक रात अपनी बेटी को हवेली भेजने के लिए राजी हो गए हैं। 18की है एकदम अनछुई कली।

ठाकुर _बिंदिया तू कितनी अच्छी है मेरी जान तू मेरी कितना ख्याल रखती है।

उस को बुलाकर दुल्हन बनाकर मेरे कमरे मे भेजो। आज हवेली में उनकी चीख गूंजेगी। मै अपना सारा गुस्सा उस लड़की की सील तोड़ कर उतारूंगा।

हा हा हा हा हा,,,,

ठाकुर हंसने लगा।

इधर आश्रम में गीता और रत्नवती आज रुकी,,

दिव्या राजेश की देखभाल में लगी हुई थी। वह रात में भी राजेश के कमरे में ही राजेश के पलंग के नीचे चटाई बिछाकर सोने लगी ताकि राजेश को रात में उसकी जरूरत न पढ़ जाए।

इधर उस रात रत्नवती ,गीता और राजवती आपस में राजेश और दिव्या के बारे में ही बात कर रहे थे।

रत्नवती _अब तो दिव्या की जिंदगी में खुशियां तभी आयेगी, जब राजेश से उसकी शादी हो जायेगी।

गीता_जानती हूं मां दिव्या राजेश से बहुत प्यार करती है। पर ये तभी संभव हो पाएगा जब राजेश दिव्या को शादी के लिए स्वयं प्रपोज करेगा। दिव्या कभी भी राजेश को शादी के लिए नही कहेगी।

राजवती _भगवान पर भरोसा रखो बेटी, भगवान दिव्या को उसका त्याग का फल जरूर देगा।

इधर रात में हवेली में बिंदिया ने उस लङकी की नहलाई शरीर पर उगे अनचाहे बालों की सफ़ाई कर दुल्हन की तरह सजा कर ठाकुर के कमरे में सेज पर बिठा दी।

बिंदिया _जाओ ठाकुर साहब दुलहन आपकी इन्तजार कर रही है।

ठाकुर हाथ में मोंगरे का माला डाला था उसके सूंघते हुए। लढ़खराते कदमों से कमरे में प्रवेश किया।

जब उसने दुलहन का घूंघट उठाया तो उसकी खूबसूरती देख कर दिल खुश हो गया।

उसने लङकी के एक एक कर सारे गहन उतारे फिर कपड़े उतार कर नंगी कर दिया। और स्वयं भी नंगा हो गया।

उसके बाद ठाकुर ने लङकी की सील तोडी और बेदर्दी से चोदने लगा। पुरे बिस्तर पर खून फेल गया। राजेश का सारा गुस्सा उस लङकी पर उतारने लगा। रात भर हवेली में उस लङकी की चीखे गूंजने लगी।

अगले दिन सुबह गीता और रत्नवती , राजवती से इजाजत लेकर और दिव्या का हौसला अफजाई कर दोनो आश्रम से घर के लिए निकल पड़े।

दिव्या राजेश की देखभाल में लगी रही 5दिन निकल गए।

पदमा ने भुवन से राजेश फोन लगा कर उसकी हाल चाल पुछने को कहा।

राजेश का मोबाइल स्विच ऑफ बताया।

घर के लोगो को राजेश की चिन्ता होने लगी।

पदमा ने भुवन से कहा की अपने दोस्तों को लेकर आश्रम चले जाओ, वहा राजेश का हाल चाल पता करो, पुरे एक सप्ताह हो गए राजेश की कोई खबर ही नहीं। मुझे बड़ी चिंता हो रही है।

पदमा के कहने पर भुवन, अपने कुछ दोस्तों को लेकर आश्रम के लिए निकल पड़ा।

वे आश्रम में जाकर पता लगाया की क्या राजेश नाम का कोइ लडका यहां आया है, वह आश्रम जाने के लिए ही सूरज पुर से निकला था, उसके बाद से उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया है, कृपया हमारी मदद कीजिए।

आश्रम के एक सेवा दार भुवन और उसके दोस्तों को दिव्या के पास लेकर गया।

भुवन और उसके दोस्त दिव्या को देखकर चौंक गए।

भुवन _दीदी आप यहां,

दिव्या _भुवन तुम यहां,,,

भुवन _ दिव्या दीदी हम तो राजेश से मिलने यहां आए हैं। एक सप्ताह पहले वह गांव से निकला था, आश्रम के लिए। जब उसकी कोई खोज खबर नही मिली तो हमें उसकी बड़ी चिंता हुई ।

इसलिए हम उनसे मिलने आश्रम आए हैं। पर आप यहां कैसी। हमे तो बताया गया था कि आप आगे की पढाई के लिए, विदेश गई है।

दिव्या _कुछ समस्या के कारण मुझे आश्रम आना पड़ा।

भुवन _मतलब राजेश यहां आश्रम आपसे मिलने के लिए आया है।

दिव्या _अच्छा किया, आप लोग यहां आ गए राजेश आप लोगो से मिले गा तो उसे अच्छा लगेगा उसकी हालत में जल्दी सुधार होगी।

भुवन _दिव्या दी, क्या हुआ है राजेश को।

दिव्या ने भुवन और उसके दोस्तों को सारी सच्चाई बता दिया।

दिव्या ने भुवान और उसके दोस्तों को राजेश के पास लेकर गई।

दिव्या _राजेश देखो तो तुमसे मिलने कौन आया है?

राजेश _अरे भुवन भईया आप।

भुवन और उसके दोस्त राजेश की हालात देख कर काफी दुखी हुवे।

भुवन _इतना कुछ हो गया हमे पता ही नहीं चला। जब इतने दिनो तक तुम्हारा कोई खबर नहीं आया तो घर के सभी लोग चिंतित हुवे, तुम्हारा खोज खबर लेने के लिए ही भेजा है घर वालों ने हमें।

राजेश _माफ करना भईया मेरी यह हालत जानकर आप लोग दुखी और चिंतित न हो जाए इसलिए मैंने कोई काल नही किया। वैसे भी मेरा मोबाइल पता नहीं कहा है?

दिव्या _राजेश तुम जल्दी से अच्छे हो जाओ फिर मैं तुम्हारे लिए एक अच्छी सी मोबाइल गिफ्ट करूंगी।

भुवन _राजेश, ठाकुर साहब ने आप पर हमला करवा कर अछा नही किया?

राजेश _आपको किसने बताया की ठाकुर साहब ने मुझ पर हमला करवा या है।

भुवन _दिव्या दी ने हमें सच बता दिया है। आप दिव्या जी से मिलने यहां आ रहे थे, ठाकुर साहब नही चाहते थे आप दिव्या दीदी से मिले इसलिए उसने तुम पर हमला करवाया।

ठाकुर की ये हरकत उस पर बहुत भारी पड़ेगी।

राजेश _देखो गुस्से में आकर तुम लोग कोई उल्टी सुल्टी हरकत न कर देना जिससे लेने के बदले देना पड़ जाए। मुझे बिना बताए कोई कदम नहीं उठाना।

भुवन और उसके दोस्त दो दिन आश्रम में रुके और अगले दिन अपने गांव के लिए निकल पड़े।

गांव पहुंचने के बाद, राजेश के स्थिति एसऔर ठाकुर के करनी के बारे में सबको बताया।

सभी लोग राजेश से मिलने के लिए आश्रम आना चाहते थे।

भुवन ने उन्हें बताया कि राजेश ने उन्हें आने से मना किया है कुछ दिनों में वह ठीक हो जाएंगे फिर वह खुद गांव आ जायेंगे। दिव्या जी उसकी बहुत अच्छी देखभाल कर रही है।

गांव के लोगो को जब पता चला की दिव्या विदेश नही गई है बल्कि वह शिव पुर गई है और वहां अपने नानी के आश्रम के हॉस्पिटल में अपनी सेवा दे रही है।

तब लोगो ने यह समझा कि ठाकुर ने दिव्या को राजेश से दूर करने के लिए ही यहां से अपनी नानी के पास आश्रम भेजी, और लोगो को झूठ बोला गया की वह विदेश गई है। जब राजेश को सचाई पता चला तो दिव्या से मिलने शिवपुर गया।

ठाकुर को यह बात पता चल गया होगा तो उसने राजेश को पर हमला करवा कर उसे जान से मारने की कोशिश की।

सूरज पुर और आसपास के गांव वाले ठाकुर के इस करनी से काफी क्रोधित हुए। वैसे भी ठाकुर के अत्याचार से आस पास के गांव वालों के अदंर उसके खिलाफ काफी आक्रोश था।

वे सभी ठाकुर को सबक सिखाने के लिए मौके की तालाश में थे।

और वह मौका आ चुका था। सामने चुनाव था। आस पास के गांव के लोग ठकुर को सबक सिखाने के लिए योजना बनाने लगे।

वह इस बार चुनाव में ठाकुर के खिलाप प्रत्यासी उतारेंगे। और ठाकुर को सबक सिखाएंगे।

इधर दिव्या की सेवा से राजेश की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ अब उसे हॉस्पिटल से छुट्टी दे दिया गया।

अब उसे राजवती ने अपने भवन में ही एक कमरे में राजेश को ठहरने का इंतजाम कर दिया।

अब राजेश दिव्या के साथ सुबह और शाम प्रार्थना सभा में जाने लगा।

आश्रम के हरे भरे गार्डन में भी दोनो समय बिताने लगे।

एक दिन राजवती ने राजेश को अपने पास बुलाई और बोली।

राजवती _राजेश बेटा जरा इधर आना।

राजेश _जी माता जी,,

राजवती _बेटा तुम मुझे माता जी नही, नानी मां कहा करो।

राजेश _जी, आपको कुछ काम था मुझसे।

राजवती _बेटा कुछ दिनो से मैं तुमसे कुछ बात कहने वाली थी पर तुम्हारे स्वास्थ्य के कारण कह नही पाई।

राजेश _बोलो नानी मां क्या बात है।

राजवती_बेटा बात दिव्या को लेकर है।

वैसे तो वो बहुत साहसी लड़की है, लेकिन उस दिन जब तुमको लहूलुहान देखी तो वह अपनी सुध बुध खो बैठी वह डॉक्टर होकर भी अत्यंत भावुक हो गईं। जानते हो इसका कारण क्या हैं?

वो तुमसे बेपनाह मुहब्बत करती है बेटा, मुझे पता है कि यह बात वह तुमसे कभी नहीं कहेगी। क्यों कि वह बता रही थी कि तुम किसी अन्य लङकी से प्यार करते हो, पर इतना मै तुमसे मै पुरे विश्वास के साथ कह सकती हूं की दिव्या जितनी प्यार तुम्हे और कोई नहीं कर सकती बेटा, वो तो पूरी जिंदगी तुम्हारी याद के सहारे ही गुजार देगी। वह अपनी दिल की बात कभी नहीं कहेगी।अब आगे तुम्हारी मर्ज़ी बेटा, तुम क्या फैसला लेते हो। तुम पर किसी का की दबाव नहीं है।

एक दिन राजेश और दिव्या गार्डन में टहल रहे थे।

राजेश _दिव्या जी आप जानती हो निशा ने मुझे क्यों छोड़ा, क्यों कि मेरे कई औरतों से संबंध थे। जब उन्हे पता चला तो वह ये सदमा बर्दास्त नही कर सकी और वह विदेश चली गई।

दिव्या जी तुम त्याग कि देवी हो मैं आपकी बहुत इज्जत करता हूं। मै आपको धोखा में भी नहीं रहना चाहता पहले भी मैने एक दोस्त खो दिया है। अब आपको धोखे में रख कर, मै आपको खोना नहीं चाहता।

सच पूछो तो मैं आपके काबिल नहीं हूं। मेरे आज भी कई औरतों से संबंध है। मै टू यह बात कहने की हिम्मत भी नहीं कर सकता, लेकिन नानी मां की बात सुनकर मैं आपसे कहने की हिम्मत जुटा पा रहा हूं।

दिव्या _क्या बात है राजेश, तुम्हारे मन में जो भी बात है, निःसंकोच कह सकते हो।

राजेश _क्या तुम मुझसे शादी करोगी?

दिव्या राजेश की आंखों में एक टक देखती रही। उसकी आंखो में आंसू छलक आए।

वह राजेश के गले से लिपट गई।

वह राजेश को ऐसे चूमने चाटने लगी। जैसे बरसो बिछड़ने के बाद प्रेमी प्रेमिका मिलते हो। उसकी आंखो से आंसू बह रही थी।

अगले दिन वे दोनो आश्रम के पास नदी किनारे घूमने गए। वे दोनो प्यार के गीत गाने लगें।

माहिया तेरी कसम हाय जीना नहीं जीना मुझे तेरे बिना हाय।

साथिया तेरी कसम हाय तेरे बिना जीना भी है क्या जीना हाय,,,
 
रात को सोते समय,,,

राजवती _बेटी तुम आज बहुत खुश लग रही हो, क्या बात है?

दिव्या _नानी राजेश मुझसे शादी करना चाहता है। रजवती के गले से लिपट कर बोली।

राजवती _क्या? बेटी ये तो बहुत बड़ी खुशखबरी है।

देखना तुम दोनो की शादी मै कितनी धूमधाम दे कराती हूं। मै कल ही पंडित जी को बुलाकर शुभ मुहूर्त निकलवाती हूं।

नानी, दिव्य राजवती से कस के लिपट ली।

राजवती _यह बात अपनी मां को बताई की नही।

वो तुम्हारी कितना चिंता करती है यह जानेगी तो वो बहुत खुश हो जायेगी। मै उसे अभी फोन करती हूं।

राजवती ने रत्नवती को फोन लगाई।

रत्नवती _मां इतनी रात को, क्या बात है वहा सब ठीक तो है?

राजवती _अरे बेटी बहुत बड़ी खुशखबरी है, मुझसे रहा न गया, सोचा तुमको बता दू, तुम दिव्या को लेकर बहुत चिंतित जो रहती हो।

रत्नवती _क्या बात है मां बड़ी खुश लग रही हो।

राजवती _बात ही ऐसी है, राजेश और दिव्या दोनो शादी करने जा रहे हैं।

रत्नवती _ये तो बड़ी खुशी की बात है मां,

राजवती _मै कल पंडित जी से शादी का शुभ मुहूर्त निकलवा रही हूं, देखना मै राजेश और दिव्या के शादी कितनी धूम धाम से कराती हूं।

पहली बार यह आश्रम दुलहन की तरह सजेगा।

रत्नवती _हां मां, हम दिव्या की शादी धूमधाम से करेंगे।

यह खुशखबरी बताने के लिए रत्नवती , गीता कमरे मे गई।

गीता _मां इतनी रात को मेरे कमरे में, कुछ काम था क्या?

रत्नवती _बेटी बात ही इतनी खुशी की है कि मैं खुद को रोक नहीं पाई और तुम्हे बताने चली आई। अभी आश्रम से मां का फोन आया था।

मां बता रही थी की राजेश और दिव्या दोनो शादी करने जा रहे हैं।

गीता _ओह सह मां, ये तो बहुत बड़ी खुशखबरी है

रत्नवती _हां बेटी अब दिव्या बेटी की जिंदगी को सारी तकलीफ दुर हो जायेगी।

गीता _हा मां, आख़िर दिव्या को उसका प्यार मिल ही गया। हर किसी की किस्मत ऐसी नही होती।

रत्नवती _अरे बेटी, अगर तुम्हे भी कोई पसन्द हो तो बता दो, तुम दोनो की शादी एक साथ करा देंगे।

गीता _नही मां, कबीर के जाने के बाद अब मुझे शादी में कोई इंट्रेस्ट नही।

अब तो मैं अपनी पूरी जिंदगी समाज सेवा में निकाल देना चाहतीं हूं।

मां तुम पिता जी को दिव्या और राजेश की शादी करने की बात, अभी मत बताना। पिता जी शादी पे अडंगा डालने की कोशिश करेंगे।

रत्नवती _बेटी तुम चिन्ता मत करो, तुम्हारा पिता जी ऐसा कुछ नहीं करेगा।

मैने उसे समझा दिया है, राजेश पर फिर से हमला huwa तो मैं और मेरी बेटी हवेली छोड़कर, चले जायेंगे। अब वह ऐसा नहीं करेगा।

राजेश और दिव्या की शादी करने की बात आस पास के क्षेत्रों में आग की तरह फैल गई।

राजवती ने पंडित को बुलाकर शुभ मुहूर्त निकलवाया। आज से एक सप्ताह बाद, दोनो की शादी की तिथि तय हुआ।

राजवती शादी की तैयारी में लग गई।

भुवन ने राजेश को फोन किया,,,

भुवन _राजेश मां तुमसे बात करना चाहतीं है, लो बात करो।

पदमा _राजेश बेटा जो हम सुन रहे हैं क्या वो सच है? तुम ठाकुर की बेटी से शादी कर रहे हों।

राजेश _हा ताई आपने सही सुना है।

पदमा _बेटा ये ठाकुर तुम्हरे जान के पीछे पड़ा है और तुम उसकी बेटी से शादी कर रहे हो। बेटा वो ठाकुर तुम्हे फिर नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा।

राजेश _ताई, आप चिंता न करे, वो ठाकुर मेरा कुछ नही बिगाड़ पाएगा।

पदमा _क्या तुमने ए बात अपने मां को बताई।

राजेश _, नही ताई,

पदमा _तुम्हारी मां इसके लिए कभी नही तैयार होगी।

राजेश _टाई मै मां को मना लूंगा। मुझे पुरा भरोसा है मां मान जायेगी।

पदमा _बेटा तू अपना ख्याल रखना। जी ताई।

पदमा ने भुवन को सुनिता के पास फोन लगाने के लिए कहा।

भुवन_प्रणाम चाची।

सुनीता _अरे भुवन बेटा तुम, खुश रहो, वहा गांव में सब ठीक तो है न।

भुवन _चाची, लो मां से बात करो, वही बताएगी, यहां का हाल चाल।

पदमा _सुनिता कैसी है तू?

सुनीता _मै ठीक हूं दी, आप लोग कैसे है? वहा सब ठीक तो हैं, भुवन की बातो से लगा, वहा कुछ ठीक नहीं है।

पदमा _हा, सुनिता, तुम कुछ बताने लिए ही फोन किया था।

सुनीता _क्या बात है दीदी, बताओ ,,

पदमा _राजेश ठाकुर की बेटी दिव्या से शादी करने जा रहा है।

सुनीता _क्या?

पदमा _हां, ये सच है

सुनीता _राजेश ने मुझे अब तक कुछ नहीं बताया है इस बारे में आख़िर मै उसकी मां हूं जिंदगी का इतना बड़ा फैसला आख़िर वो मुझसे बिना पूछे कैसे ले सकता है।

पदमा _सुनिता तुम जल्दी गांव आ जाओ, कही देर न जो जाए।

सुनीता _दीदी हम कल ही गांव पहुंचती हूं।

सुनीता ने यह बात शेखर के बताया। शेखर को भी राजेश का फिक्र होने लगा।

उसने ट्रेन के लिए टिकट उपलब्ध न होने के कारण वे कार से ही गांव के लिए निकल पड़े।

वह सुबह 6बजे घर से निकले गांव पहुंचते उन्हे रात हो गए।

गांव के घर पहुंचते ही।

सुनीता _भुवन बेटा, राजेश कहा है? बुलाओ उसे,

पदमा ने सारी बाते सच सच बता दिया कि राजेश यहां नही शिव पुर स्थित सेवा आश्रम में है। उसके ऊपर हुवे हमले के बारे में सब बाते बता दो।

सुनीता _दीदी इतना कुछ हो गया और हमे आप लोगो ने बताया ही नहीं।

पदमा _माफ कर दो सुनिता, राजेश ने हमले के बारे में आपको बताने सी मना किया था, तुम डर न जाओ इसलिए। पर बात उसकी शादी तक पहुंच गई है,,, इसलिए तुम्हे बताना जरूरी समझी।

तभी वहां कविता भी आ पहुंची,,

कविता _कैसी हो दीदी, लोगो ने बताया की आप लोग आए हो तो हम लोग मिलने चले आए,,

पदमा _कविता इतना कुछ हो रहा है आप ने भी मुझे तुमने भी मुझे बताया नही,,

कविता _दीदी पदमा दीदी ने तो आपको बताया ही होगा राजेश ने आपको बताने से मना किया था।

पर शादी के फैसले से उसे रॉक तो सकते थे।

कविता _दीदी राजेश एक समझदार लडका है जो भी कर रहा है सोच समझ कर रहा होगा।

वैसे दिव्या बहुत अच्छी लङकी है।

पदमा _बात दिव्या की नही है, बात ठाकुर की है वह जरूर इस शादी के खिलाफ होगा और राजेश को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा।

कविता _दीदी उसकी चिन्ता तो हम सबको है।

हम सब कल वहा चलेंगे, उससे बात करेंगे।

भुवन _ चाची आप लोग चिंता न करे, गांव के सारे लडके तैयार है ठाकुर उसका अब कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।

अगले दिन राजेश और दिव्या राजवती, शादी की तैयारी पर ही चर्चा कर रहे थे कि सेवादार ने बताया की कोई व्यक्ति राजेश से मिलने आया है।

राजेश उस व्यक्ति से मिलने गया।

राजेश _लाखन काका आप यहां।

लाखन _राजेश, मुझे पता चला है कि तुम ठाकुर की बेटी से शादी करने जा रहे हो, और यह भी पता चला है कि ठाकुर के आदमियों ने तुम पर जानलेवा हमला किया था, तो तुमसे मिलने चला आया।

ठाकुर डे हम बदला लेना चाहते हैं पर तुम उसकी बेटी से शादी कर रहे हो ये बात मुझे कुछ समझ नहीं आया।

राजेश _लाखन काका, गलती ठाकुर ने किया है उसकी बेटियो ने नही, वे बहुत अच्छे लोग हैं, ठाकुर की जुल्मों में उनका कोई हाथ नहीं,ठकुराइन और उसकी बेटियां तो हमेशा लोगो के भला के बारे में ही सोंचती है। अगर आपको लगता है कि दिव्या से शादी के बाद मैं उस ठाकुर को उसके किए की सजा नही दिलाऊंगा, तो ऐसा नहीं है। ठाकुर को उसकी करनी का फल भुगतना ही पड़ेगा।

लाखन _ओह मै तो कुछ और ही समझ बैठा था। सुना है ठाकुर इस शादी के खिलाफ है वह शादी को रोकने का प्रयास कर सकता है। पर तुम निश्चिंत रहो ठाकुर के आदमी ऐसा कुछ नहीं कर पाएगा। मै अपने साथियों को आस पास तैनात कर दूंगा। वे आस पास नजर रखेंगे। ठाकुर के आदमी अगर आस पास भी नजर आए तो वे बचेंगे नही।

इधर हवेली में,,,

मुनीम _हुजूर, उधर आश्रम में दिव्या और राजेश की शादी की तैयारी चल रही है और आप हाथ में हाथ धरे बैठे हैं, क्या आप भी उस दो टके के लडके को अपना दामाद बनाने के लिए राजी हो गए हैं।

ठाकुर _मुनीम जी मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है क्या

किया जाय। अब तो पत्नी और बेटियां भी मेरे खिलाफ हो गए हैं। रत्नवती ने मुझे धमकी दिया है की मैने अब राजेश को कोई नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी किया तो वे घर छोड़ कर चले जायेंगे।

तभी वहां रत्नवती पहुंची,,,

रत्नवती _मै आपको ये बताने आई हूं कि मैं और गीता आश्रम जा रहे हैं, दिव्या और राजेश की शादी हो रही है। क्या आप भी चलेंगे?

ठाकुर _मुझे इस शादी में कोई इंट्रेस्ट नही। मै उस दो टके के लडके को अपना दामाद स्वीकार नहीं कर सकता।

रत्नवती _ठीक है, पर तुम्हे मेरी बात याद है न शादी में विघ्न डालने की कोई भी कोशिश किए तो,,,,

रत्नवती वहा से चली गईं,,,

इधर शाम तक सुनिता, पदमा कविता स्वीटी शेखर और माखन सभी आश्रम पहुंच गए थे।

सेवा दार उन्हें राजवती के पास लेकर गए।

सेवादार _ये इस आश्रम की माता है, इस आश्रम की फाउंडर । माता जी ये लोग राजेश भईया से मिलने के लिए आए हैं।

राजवती _आप लोग कौन है, और राजेश से क्यों मिलना चाहती हो।

सुनीता _मै राजेश की मां हूं। और ये उनके पिता।

राजवती _ओह बड़ी खुशी हुई आप लोग यहां चल आए। आप लोगो के शादी मे शामिल होना बहुत जरूरी था।

राजवती ने सेवादार से सब के लिए चाय नाश्ता का प्रबंध करने के लिए कहा।

सुनीता _हमे राजेश सी मिलना था, कहा है वो,,,

राजवती _वे दोनो कुछ काम से गए हैं मै उन्हें बुलाती हूं।

राजवती ने दिव्या और राजेश को बुलाने भेजा।

दिव्या और राजेश दोनो कुछ देर में वहां पहुंचे।

राजेश उन सबको वहा देख कर चौंका,,

राजेश _मां आप लोग यहां,,,

राजेश ने सबका पैर छूकर प्रणाम किया। दिव्या ने भी सबका पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

सुनीता _राजेश मुझे तुमसे कुछ बाते करनी है।

अकेले में,,,

राजेश दिव्या की ओर देखने लगा,,,

दिव्या ने हा में इशारा किया,,,

राजेश _क्या बात है मां सबके सामने भी तो कह सकती हो!

सुनीता _नही मुझे तुमसे कुछ पूछना है।

राजवती _बेटा, जाओ अपने कमरे में अपनी मां को ले जाओ,

राजेश और सुनिता कमरे में गए।

सुनीता _ये सब क्या है? तुम जानते हो ठाकुर हमारा दुश्मन है और तुम उसकी बेटी से शादी कर रहे हो, और एक बार अपनी मां से पूछा नही क्या मैंने यही संस्कार दिया है।

राजेश_सॉरी मां मैं फोन करके बताना ही चाहता था, यहां नेटवर्क का इशू था।

सुनीता _राजेश चलो मै तुम्हे यहां से ले जाने आई हूं। तुम मेरे साथ शहर चलोगे।

राजेश _मां ये आप क्या कह रही हो दिव्या जी और मेरी शादी होने वाली है, और तुम मुझे अपने साथ ले जाना चाहतीं हो।

सुनीता _देखो बेटा मै मानती हूं दिव्या एक अच्छी लङकी है पर उसके पिता जी, वो ठाकुर तुम्हे अपना दामाद कभी स्वीकार नहीं करेगा। वो तुम्हे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा।

राजेश _मां क्या आप चाहती हो तुम्हारा बेटा किसी के नजरो में गिर जाए। जिस लङकी ने मेरी दिन रात सेवा की मेरी जान बचाई, उसे मै जमाने के ताने से मरने के लिए छोड़ दू।

सुनीता _बेटा तुम क्या कहना चाहते हो मै कुछ समझा नही।

राजेश ने सुनिता को सारी बाते सच सच बता दिया, किस प्रकार दिव्या ने उसकी जान बचाने के लिए अपनी इज्जत दाव में लगा दी, और वह आज उसके बच्चे की मां बनने वाली हैं।

उस बच्चे को गिराया नही वह उसे जन्म देने सब कुच छोड़कर इस आश्रम में रहने चली आई। कितना कष्ट सहा है राजेश के लिए उसने।

राजेश _बोलो मां सब कुछ सच जानने के बाद भी क्या तुम चाहती हो मै दिव्या के उसकी हालत पार छोड़कर तुम्हारे साथ शहर चला जाऊ। तो ठीक है चलो मै माता जी से कह देता हूं,,,

सुनीता रुक गई,,

राजेश _मां क्या हुआ?

सुनीता _नही बेटा, सच जानने के बाद, मै जान गई हूं की दिव्या ज्यादा प्यार करने वाली लङकी तुम्हे और नही मिलेगी। अब जो होगा देखा जाएगा बेटा, दिव्या तुम्हारी दुलहन जरूर बनेगी।

राजेश _मां

राजेश ने सुनिता को अपने गले से लगा लिया। मां मुझे यकीन था, तुम यहीं सच जानने के बाद यही फैसला करोगी।

दोनो कमरे से बाहर निकले।

सुनीता _दिव्या बेटी मेरे पास आना।

दिव्या _जी मां जी,,,

सुनीता_बेटी राजेश ने मुझे सब सच बता दिया, उसकी जान बचाने के लिए तुमने क्या कुछ नहीं किया।

तुम एक लङकी नही देवी हो बेटा, तुम मेरी बहु बनो इससे बड़ी खुशी की बात और कुछ नहीं हो सकती।

दिव्या _मां जी मैंने जो कुछ भी किया वो मेरा फर्ज था।

इधर सभी लोग सुनिता के की बात सुनकर हैरत में थे।

सुनीता _अब तो तुम दोनो की शादी धूमधाम से सारी रीति रिवाज और रश्म से करेंगे। कल से ही सारी रस्में सुरु हो जायेगी।

कुछ देर बाद ही वहा रत्नावती और गीता भी वहा पहूंच गई।

रत्ननावती और सुनिता ने शादी की तैयारी शुरू कर दी। अब बचे हुए हर दिन शादी की कोई न कोई रश्म होने लगें।

पूनम भुवन और आरती भी वहा पहूंच गए। शादी के रस्मों में शामिल हुवे।

हल्दी रस्म

सभी बारी बारी से राजेश पर हल्दी लगा रहे थे।

राजेश सिर्फ एक छोटा सफेद कपड़ा कमर पर लपेटा था।

पूनम _ने राजेश के पुरे शरीर पर हल्दी मल रही थी।

सभी औरते आपस में हसी ठिठोली कर रहे थे। राजेश को छेड़ रहे थे।

तभी कविता ने पुनम को इशारा किया।

राजेश _भाभी हो गया न और कितना हल्दी लगाओगी।

पूनम _देवर जी, अभी सभी जगह कहा लगा है। एक जगह तो अभी बांकी है वहा पर हल्दी लगाने का अधिकार भाभी का ही होता है। इसलिए यह जिम्मेदारी मुझे सौंपा गया है।

पूनम ने हाथ में हल्दी लेकर सीधा राजेश के अंडर वियर के अंदर घुसा दिया।

राजेश चौंक गया।

सभी औरते हसने लगे।

पूनम राजेश के लंद और अंडकोष पे अच्छे से हल्दी मलने लगा।

राजेश _भाभी क्या कर रही हो छोड़ों न।

पदमा _बाबुवा लगाने दे अच्छे से तुम्हारी भाभी को सबसे ज्यादा जरूरत तो हल्दी लगाने की यही पर होती है।

सभी लोगो हंसने लगे।

सुनीता भी अपनी मुंह छिपाकर हसने लगीं।

कविता _पूनम अगर तुमने लगा लिया तो हटो मुझे लगाने दो।

पूनम _हा भई जानती हू ऐसी खास जगह पर हल्दी लगाने का अधिकार भाभी की बाद चाची का ही होती है।

पूनम वहा से हट गई। अब कविता ने राजेश के पुरे शरीर में हल्दी मलने के बाद हाथ में हल्दी लेकर राजेश के अंडर वियर में हाथ घुसा दिया, और राजेश के अंडकोष में हल्दी लगाने लगी। उसके लंद को हल्दी और तेल से मूठ मारने लगी।

राजेश गर्म हो गया न चाहते हुए भी उसका लंद खडा हो गया

बड़ा उभार देखकर सब समझ गए की राजेश का खडा हो गया है। सभी मुंह छिपाकर हसने लगे।

राजेश शर्मिंदा हो रहा था।

स्वीटी _मां , देखो तो भईया का घोड़ा तो,,,

सुनीता _चुप बेशरम,,,

सभी औरतों ने बारी बारी से राजेश के पुरे शरीर में हल्दी मला, पर राजेश के लंद पार हल्दी लगाने का अधिकार भाभी और चाची को ही था।

सुनीता ने देखा की राजेश का लंद हल्दी रश्म के बाद भी तना huwa है अभी कुछ और रस्म निभाने है और पुरुष भी उपस्थित रहेंगे।

सुनीता चिंतित हो गई,, अगर ऐसे ही खड़ा रहा तो राजेश पर सब हसेंगे।

राजेश बेटा अब बांकी का रस्म कल करेंगे । जाकर अपने कमरे में आराम करो।

उधर राजवती, गीता और रत्नवती और आश्रम की सेविकाएं, दिव्या के पुरे शरीर में हल्दी मल रही थी। सेविकाओं ने तो दिव्या के boor में भी अच्छे से हल्दी मल दी। दिव्या शर्म से पानी पानी हो गई। सभी औरते हंसने लगी। हल्दी रस्म पूरी होने के बाद।

सभी लोग अपने अपने कमरे मे जाकर सोने लगे।

रात में राजेश आराम कर रहा था। तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया।

राजेश ने दरवाज़ा खोला..

राजेश _भाभी आप इस वक्त,,,

कुछ काम था क्या?

पूनम _मै ये देखने आई थी कि तुम्हे किसी चीज की जरूरत तो नही।

राजेश _भाभी, मुझे तो किसी चीज की जरूरत नहीं है अभी,,

पूनम _अच्छा देवर जी, फिर ये अब तक खड़ा क्यू है?

पूनम ने राजेश के अंडरवियर के ऊपर से ही लंद को पकड़ कर सहलाते हुए कहा।

राजेश _भाभी, ये क्या कर रही हो छोड़ों कोई आ गया तो।

पूनम _अरे कोई नहीं आएगा। सब सो रहे हैं। मै तो तुम्हारी मदद के लिए ही आई हूं मुझे पता था कि तुम्हारा घोड़ा जब खड़ा हो जाता है तो कुंआ का बिना पानी पिए बैठता नही। इसलिए तुम्हारे पास आई हूं। तुम मेरी कुंवे का पानी अपने घोड़े को पिलाकर इसकी प्यास बुझाओ।

पूनम ने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया। और राजेश का अंडरवियर खीच कर लंद बाहर निकाल कर चूसने लगी।

राजेश पहले ही गर्म था वह और भी गर्म होने लगा। उसका लंद झटका मारने लगा।

तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया।

राजेश और पूनम घबरा गए।

पूनम _देवर की अब क्या होगा? कही दिव्या जी होगा?

राजेश _एक काम करो तुम बाथरूम में छिप जाओ।

पूनम _बाथरूम में जाकर छिप गई।

राजेश ने दरवाज़ा खोला_चाची आप, इस वक्त कुछ काम था क्या?

सविता _मुझे नींद नहीं आ रही थी तो तुमसे बात चीत करने चली आई।

राजेश _पर इस वक्त?

सविता _क्यू क्या हुआ? तुम तो ऐसे चौंक रहे हों जैसे पहली बार रात में तुम्हारे कमरे में आ रही हूं।

राजेश _पर चाची जगह तो अलग है न।

सविता _मैने खुद को समझाने की बहुत कोशिश की पर मेरा मन नही माना,,,

राजेश _बोलो क्या बात करनी है।

सविता _जब से तुम्हारे मूसल पे हल्दी लगाया है मेरा मन बडा बेचैन है।

मेरे अंदर का पानी बाहर निकल कर मुझे परेशान कर रहा है वैसे भाई कितने दिन हो गए। पानी निकालने के खेल खेले हुए । कल तुम्हारी शादी हो जायेगी। उसके बाद तो तुम दिव्या के ही होकर रह जाओगे। इसलिए आज मेरे शरीर में जो पानी जमा है उसे बहा दो ताकि तुम्हारी यादों में तड़पती न रहु।

सविता राजेश का अंडरवियर खीच कर उसके लंद बाहर निकाल कर चूसने लगी।

राजेश _आह चाची, आह क्या कर रही हो?

आह कोई आ जाएगा?

राजेश सवीता की बालो को सहलाने लगी।

कुछ देर बाद फिर किसी ने दरवाज़ा खटखटाया।

दोनो चौंक गए।

सविता डर गई,,,

कौन हो सकता है अब क्या करे?

राजेश _चाची आप आलमारी में छुप जाओ।

सविता अलमारी में छिप गई।

राजेश ने दरवाज़ा खोला।

राजेश _ताई आप इस वक्त, कुछ काम था क्या?

पदमा _तू सोया है कि नही बस पता करने आई थी। हल्दी रस्म के समय तू उत्तेजित हो गया था। तो मुझे लगा की तुम्हे आज ठीक से नींद नहीं आएगी। और देखो मेरा अनुमान सच निकला तुम अभी तक जग रहे हो।

और ये तुम्हारा सांप भी। पदमा ने राजेश के अंडरवियर की ओर इसारा करते हुवे कहा। वैसे सच कहूं तो हल्दी रश्म के समय औरतों की हसी ठिठोली छेड़ छाड़ से मैं भी गर्म हो गई थी, मुझे भी नींद नहीं आ रही थी। इसलीय तुम्हारे पास आई हूं।

पदमा ने राजेश के बेड पर लेट गई और अपनी पेटी कोट और साड़ी ऊपर उठा दी।

पदमा _बेटा, अपनी ताई को आज जमकर बजा और उसकी प्यास बुझाओ।

राजेश बेड में चढ़ गया और अपनी दो उंगलियां पदमा की योनि में घुसा कर अदंर बाहर करने लगा।

फिर अपना खड़ा लंद उसकी योनि में सेट कर गाच से पेल दिया। लंद उसकी योनि को चीरकर आधे से ज्यादा अदंर घुस गया।

पदमा कराह उठी। राजेश ने फिर एक जोर जोर धक्का मारा।

पदमा की boor फाड़कर पुरा अंदर घुस गया लंद का टोपा सीधा उसके बच्चेदानी से टकराया।

पदमा सिसकने चीख उठी।

अब राजेश पदमा की ब्लाउज का बटन खोल कर उसकी चूची को थाम लिया और मसल मसल कर तेज तेज चोदने लगा।

पदमा की सिसकारियां कमरे में गूंजने लगी। पूनम और सविता उसकी सिसकारियां सुनकर और गर्म हो गई। अपनी chut सहलाने लगी।

तभी फिर किसी ने दरवाज़ा खटखटाया।

पदमा और राजेश चौंक गए।

पदमा _बेटा अब क्या होगा? हम पकड़े गए तो बहुत बदनामी होगी।

राजेश _ताई, तुम तुम बेड के नीचे छुप जाओ, मै देखता हूं। कौन है।

पदमा बेड सेउतरी अपने कपड़े ठीककी फिर बेड के नीचे छुप गई।

राजेश ने दरवाज़ा खोला _मां, आप इस वक्त।

सुनीता _हूं देखने आई थी की मेरा बेटा अब तक सोया है कि नही।

तुम्हारे कमरे किसकी आवाज आ रही थी बेटा।

राजेश _मां किसी की भी तो नही, लगता है ये आपका कोई वहम है।

सुनीता _कौन छिपा है बाहर निकलो? नही तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।

तीनो औरते बाहर निकली।

सुनीता तीनो को देखकर सब चौंक गई। पदमा भी पूनम और सविता को देखकर चौंक गई।

सुनीता _ये सब क्या है? कल राजेश की शादी होने वाली है। और तुम लोग, ये हरकत कर रहे हों।

दिव्या या उसके परिवार के किसी को भी पता चल गया तो।

पदमा _सुनिता हमे माफ कर दो, हल्दी रश्म के हसीं ठिठोली छेड़ छाड़ से हम गर्म हो गए थे। नींद नहीं आ रही थी।

तो हमने सोचा कल तो राजेश की शादी हो जायेगी फिर हम उससे संभोग का सुख फिर नही मिलेगा इसलीये हमारा मन नही माना और हम यहां चले आए।

सुनीता _राजेश तुम भी इन लोगो की बात में आ गए।

पदमा _वो क्या मना करेगा बेचारा, उसका तो हल्दी रश्म के बाद से अब तक खड़ा huwa है।

सभी औरते मुंह छिपाकर हसने लगीं।

सुनीता ने राजेश के अंडर वियर की ओर देखा। एक बडा उभार देख कर समझ गई।

राजेश का खड़ा हुआ है।

सुनीता _राजेश तुम क्या चाहते हो?

राजेश _आप लोगो की खुशी।

सुनीता _हमे खुश करने के लिए क्या अपनी बीबीi से धोखा करोगे।

राजेश _मां मैने उसे प्रपोज करने से पहले ही बता दिया था कि मेरे कई औरतों से संबंध है।

सुनीता _क्या?

राजेश _हां मां।

सुनीता _फिर भी वो शादी के लिए मान गई।

राजेश _हा मां।

सुनीता _शादी के पहले तुम्हारे कई औरतो से संबंध भले ही हो पर बेटा मई नही चाहती तुम शादी के बाद भी दिव्या से छिपाकर तुम दूसरी औरतों के साथ संबंध बनाओ।

राजेश _आप ठीक कह रही है, मैं दिव्या जी से छिपाकर किसी से संबंध नहीं बनाऊंगा।

सुनीता _मुझे तुमसे यही उम्मीद है बेटा।

पदमा _पर सुनिता आखिरी बार तो हमें राजेश से संभोग सुख ले लेने दो। फिर हम आपसे वादा करते है। हम राजेश से कभी संभोग के लिए नही कहेंगे।

सुनीता कुछ देर सोची,,

ठीक है पर ये आखिरी बार है जितनी मजा लेना है ले लो।

फिर मौका नहीं मिलेगा।

सभी औरते खुश हो गई।

उसके बाद सभी औरते नंगी। हो गई।

पदमा _सुनिता तू क्यू खड़ी है। तुम भी आखरी बार मजा ले लो अपने बेटे से चुदने का।

पूनम उतार दो सुनिता के कपड़े।

सुनीता की कपड़े उतार कर उसे भी नंगी कर दी।

सभी औरते बारी बारी से राजेश का लंद चूसने लगी।

पूनम _देवर जी तुम मेरा दूदू पियो। दूदू पीने से तुम्हे ताकत मिलेगा। हम चारों की चीखे निकालने के लिए।

राजेश पूनम की चूची पकड़ कर मसल मसल कर गटागट उसकी दूध पीने लगा।

उसके बाद राजेश बेड पर लेट गया।

सविता _पहले कौन सवारी करेगा लंद की।

सुनीता _पहले हक मेरा है मै उसकी मां हूं। इसलिए उसके घोड़े की सवारी पहले मैं करूंगी।

सभी औरते मुस्कुराने लगी।

सुनीता बेड पार चढ़ गई और राजेश के लंद को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी योनि द्वार पर रखी और बैठ गई। लंद सरसराता huwa जड़ तक अन्दर घुस गया।

राजेश ने अपने दोनो हाथो से उसकी चूतड पकड़ लिया।

सुनीता उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश भी ऊपर की ओर धक्के लगाने लगा। लंद गच घच्छ अंदर बाहर होने लगा। सुनिता जन्नत में पहुंच गई वह चीखने चिल्लाने लगी।

पदमा _ये रण्डी तो खूब चीख रही है इसकी आवाज सुनकर पुरा आश्रम उठ जाएगा। उसके मुंह में कपड़ा ठूंस।

सविता ने अपनी पेंटी सुनिता के मुंह में ठूंस दिया।

सुनीता कुछ देर में झड़ गई।

अब पदमा ने सुनिता का स्थान ले ली। वह भी लंद पर उछल उछल कर चुदने लगी। उसे चीखती देख पूनम ने अपनी सास के मुंह में अपनी पेंटी ठूस दी।

कुछ देर में ही पदमा भी झड़ गई।

उसके बाद सविता ने पोजीसन सम्हाली। सविता के बाद पूनम भी राजेश के लंद पर उछल उछल कर चुदाने लगी।

और वह भी झड़ गई।

अब राजेश ने सुनिता को kutiya बना दिया और पीछे से अपना लंद उसकी boor में घाप से पेल दिया। फिर दनादन चोदना शुरु कर दिया।

उसके बाद राजेश ने तीनो को घोड़ी बना कर बारी बारी पेलने और उन सबकी चीखे निकालने लगा।

राजेश ने सुनिता को गोद में उठाया और उसे अपने land में बिठा कर हवा में उछाल उछाल कर चोदने लगा। एक एककरके सभी औरतों को इसी पोजीशन में चोदा।

अब राजेश ने सुनिता को घोड़ी बनाया और उसकी गाड़ में लंद घुसा कर पेलना शुरु कर दिया। सुनिता चीखने लगी तो पूनम ने अपनी पेंटी उसकी मुंह में ठूंस दी। उसके बाद बारी बारी से सभी की गाड़ मारकर फाड़ दिया। रात भर चुदते रहे। सुबह चार बजे तक सभी थक कर वही राजेश से लिपट कर सो गए थे। सुबह 5बजते ही वे वहा से निकल कर अपने अपने कमरे में चली गई।
 
राजेश ने भगत को अपने शादी के बारे में बताया और शादी में आने के लिए कहासाथ ही अन्य दोस्तों को भी जानकारी देने एवम शादी में साथ लाने को कहा।

रीता मेहता ने सुजाता को काल की।

सुजाता ने उसकी काल के इग्नोर किया।

रीता ने जब बार बार काल की तो सुजाता ने काल उठाया।

सुजाता _क्या बात है,क्यों बार बार काल कर रही हो?

रीता _अरे यार मैं समझती हूं कि तू मुझसे नाराज़ हैं। मेरे कारण राजेश तुमसे दुर हो गया । इसके लिए मैं माफी मांगती हूं। मैं अब भी तुम्हारी अच्छी सहेली हूं।

अब क्या करूं सुजू मेरा भी राजेश पर दिल आ गया तो। अब राजेश तो है ही ऐसा वो किसी एक का होकर रह नही सकता। इस बात को तुम जानते हुए भी मुझसे नाराज़ हों। सहेली होने के नाते मुझे तुम्हारी फिक्र रहती है।

सुजाता _देखो क्यो काल की थी? इज पर बात करो, फालतू बात के लिए मेरे पास समय नहीं है?

रीता _सॉरी यार मैं तो अपने दिल की बात बता रही थी। मै इतनी बुरी भी नहीं जीतना तुम समझने लगीं हो। खैर छोड़ों इन बातो को, मै टू यह पुछने के लिए फोन लगाई थी कलतुम शिव पुर जा रहीं हो क्या?

सुजाता _शिव पुर ये किस जगह का नाम है, और मै क्यू वहा जाने लगी।

रीता _लगता है आपको कुछ पता नहीं है। राजेश ने आपको बताया नही क्या?

सुजाता _मुझे उस आवारा से मतलब नही। मुझे उस में कोई इंट्रेस्ट नही। वैसे ये शिव पुर वाली क्या माजरा है?

रीता _कल राजेश की शादी है न शिव पुर में स्वीटी ने हमें फोन करके बताई, और आने के लिए कहा है? अब स्वीटी तो हमारी घर की बहू बनने वाली है। तो हमें तो जाना ही पड़ेगा न।

मुझे लगा तुम्हे भी बुलाया होगा तो साथ मे चले जायेंगे। वैसे मैं तो उस लङकी को देखने के लिए उत्साहित हूं, जो राजेश की पत्नी बनने वाली हैं। पर राजेश ने आपको आमंत्रित नही किया ओह सॉरी सुजु यह जानकर मुझे बुरा लगा। अच्छा मै फोन रखती हूं। मुझे राजेश की शादी के लिए गिफ्ट चूज करना है। बाई सूजू,,,

सूजाता , अपने मन सोचने लगी,,,

राजेश शादी कर रहा है,,,

तभी उसकी सेकेट्री उसके केबिन में आई।

सेकेट्री _मैम,,,,

मैम,,,,

सुजाता अपने विचारो में डूबी हुई थी।

सेकेट्री _मैम,,,

सुजाता जैसे नींद से जागी,,,

सुजाता _क्या huwa?

सेकेट्री _मैम आप ठीक तो है न,,

सुजाता _क्यू मुझे क्या huwa?

सेकेट्री _मैम मिस्टर वर्मा और उसके साथी आपसे मिलना चाहते हैं। वे हमारी कंपनी में निवेश करना चाहते हैं न,,,,

सुजाता _ओ, जा याद आया, पर देखो मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं है। उनसे कहो बाद में मिले।

सेकेट्री _ठीक है मैम, आप रेस्ट कीजिए।

सेकेट्री के जाने के बाद,,,

सुजाता अपने मन में सोचने लगी।

क्या सच में राजेश शादी कार रहा है। राजेश ऐसा कैसे कर सकता है? वो तो निशा सी प्यार करता था।

रीता झूठ भी बोल सकती है, अपने मतलब के लिए । मुझे भगत से पूछ कर पता करना चाहिए।

सुजाता ने भगत को काल किया,,

भगत _नमस्ते मैम, बस आप ही को काल करने वाला । वो राजेश भाई ने फोन किया था। कल उसकी शादी है। सभी दोस्तों को बताने के लिए कहा है?

मै आपको फोन करके बताने ही वाला था। मैम आप जायेगी न, भाई की शादी में ।

सुजाता _कुछ दिन अभी मैं बीजी रहूंगी, मै कही नही भगत, मेरे तरफ से मुबारक बात दे देना अपने दोस्त को।

सुजाता ने काल काट दिया।

सुजाता अपनी मन में सोचने लगी,,,

कही निशा को इसके बारे में पता न चल गया हो पता नहीं कैसी महसूस करेगी वो।

मुझे उससे बात करनी चाहिए ।

सुजाता ने निशा को फोन लगाया।

निशा _हेलो मॉम, आप कैसी है?

सुजाता _मै ठीक हूं बेटा, तुम ठीक हो न,,

निशा _मॉम मै बहुत खुश हूं, हमारी प्रोडक्ट का डिमांड बहुत बड़ गया है मॉम, हमारी फैक्ट्री की चार यूनिट भी पूर्ति नहीं कर पा रही है। हम दो यूनिट और लगाने जा रहे हैं।

सुजाता _ये तो बड़ी खुशी की बात है बेटा।

खुशी _मॉम हम इस कामयाबी के बाद नए प्रोजेक्ट पर काम करने जा रहे हैं। इलेक्टिक टू व्हीलर और फोर व्हीलर पर।

सुजाता _ये तो बड़ी खुशी की बात है बेटा? मुझे अपनी बेटी पर पुरा है, एक दिन मेरी बेटी कामयाबी की बुलंदियों को छुएगी। मेरी बेटी दुनिया की सबसे कामयाब महिला उद्यमी बनेगी। पूरी दुनिया उसके सामने झुकेगी।

निशा _थैंक यू मोम,,

इधर भगत ने सीमा को फोन करके बता दिया था कि राजेश शादी करने जा रहा है।

जब से यह बात पता चला था, वह उदास थी।

वह यह बात निशा को नहीं बताई। क्यों कि वह जानती थी कि निशा को जब यह बात पता चलेगा तो वह बहुत दुखी होगी।

निशा _सीमा, आज तुम कुछ उदास लग रही हो, क्या बात है?

सीमा _नही तो, ऐसा कुछ भी नहीं है!

निशा _मै तुम्हारी सहेली हूं। तुम्हारे चेहरे के भाव अच्छे से पढ़ सकती हूं।

बताओ क्या बात है?

सीमा _ओ क्या है n की मुझे मोम डैड की याद आ रही थी न, इसलिए थोड़ी उदास थी।

सुजाता _ओह मै समझ सकती हूं सीमा, मेरे कारण तुमको यहां लंदन आना पड़ा,,

सॉरी यार,,

सीमा _अरे बाबा तुमको सॉरी बोलने की जरूरत नहीं है। मै तो तुम्हारे साथ यहां बहुत खुश हू। जहां निशा वहा सीमा।

अब मां बाप की याद कभी कभी आ ही जाती है। इसके लिए तू अपने के दोषी मत ठहरा। वैसे भी हम कमयाब होकर जब घर लौटेंगे न तो हमारे मॉम डैड को हम पर फक्र होगा।

निशा _हां सीमा, मुझे दुनिया की सबसे सफल उद्यमी बनना है। मेरी यह सपना पूरी करने में मुझे तुम्हारा साथ चहिए।

सीमा _निशा, मै तुम्हारे साथ हूं और हमेशा रहूंगी। मुझे पुरा यकिन है तुम अपने लक्ष्य पर जरूर कामयाब होगी।

इधर आश्रम में राजवती ने दिव्या को अपने पास बुलाया। और उसे एक कमरे में ले गया।

दिव्या _नानी क्या बात है, कुछ काम था क्या?

राजवती _हां बेटी, मेरे साथ आओ।

राजवती ने दिव्या को एक कमरे में ले गई। और दरवाजा बंद कर दी।

वहां एक आलमारी था। आलमारी के उसने खोला। आलमारी के अंदर एक गुप्त दरवाज़ा था।

राजवती ने उस दरवाज़े को खोला, एक कमरे में पहूंच गए।

दिव्या ने देखा कमरे में बहुत सारे बॉक्स रखे थे।

दिव्या _नानी, इन बॉक्स में क्या है?

राजवती ने उन बॉक्स को खोल कर दिखाया। बॉक्स सोने चांदी हीरे जेवरात से भरे पड़े थे।

दिव्या _नानी इतने सारे हीरे जेवरात,,,

राजवती _हां बेटी, ये हमारी राजघराने की संपत्ति है जिसे मेने सम्हाल कर रखा है। ये मुसीबत के समय आश्रम के काम आयेंगे।

इसकी जानकारी मेरे सिवाय अब सिर्फ तुमको है। क्यों की मेरे बाद इस आश्रम को तुमको ही सम्हालनी है।

राजवतीने एक खास बॉक्स कोखोला।

इस बॉक्समें राजवती केसारे गहने थे।

राजवती_बेटी, ये मेरेगहने है। मै इसे पहना करतीथी ।

मैचाहती हूं की बेटी आज शादी में तुम इन गहनों को पहनो। मेरी तरफ से ये शादी की भेट हैं बेटा तुम्हे।

इसे पहनकर तुम महारानी लगोगी।

दिव्या _नानी, मुझे बस आपका आशिर्वाद चाहिए, और कुछ नही। वैसे भी इतने सारे गहने का मै करूंगी क्या? मेरे लिए तो बस राजेश के हाथो सी पहनाया huwa एक मंगलसूत्र ही काफी है।

राजवती _बेटी, जानती हूं, तुम्हारी भावनाओ को, तभी तो तुमको इस आश्रम की वारिश चुनी है।मेरी खुशी के लिए रख लो।

राजवती ने एक और बॉक्स खोला, इसमें मोतियों के माला, और कुछ गहने थे जो उसके पति के थे।

बेटा ये मोतियों के माला तुम्हारे नाना के है। इन मालाओं के और हीरा मोतियो से जड़ा हुआ ये पगड़ी जबर राजेश पहनेगा तो महाराजा लगेगा।

इन दोनो बॉक्स को राजवती ने निकाल लो फिर उस कमरे को बंद कर दी।

राजवती ने राजेश को बुलाने सेविका को भेजी। कुछ देर में राजेश पहूंच गयाराजवती ने राजेश को वह बॉक्स भेट में दिया और पगड़ी मोतियों की माला शादी में पहनने को कहा।

राजेश लेने से मना कर रहा था।

पर राजवती ने कहा की मेरी यह ईच्छा है तुम दोनो को महाराजा और महारानी के रूप में देखू।

मेरी ईच्छा को तुम दोनो पूरी नही करोगे।

राजवती की बात सुनकर दिव्या और राजेश मजबूर हो गए।

अगले दिन शाम को शादी होनी थी।

रात में सुजाता को नींद नहीं आ रही थी।

सुजाता सोच रही थी,,,,

राजेश तो निशा से प्यार करता है। फिर अचानक से शादी। अभी तो उसका आईएएस का रिजल्ट भी नही आया है। लगता है मेरी बर्ताव से आहत होकर वो शादी कर रहा है। मै भी देखना चाहूंग, आख़िर वह किस लङकी से शादी कर रहा है।

सुजाता न चाहते हुए भी वहा जाने को मजबूर हो गई।

आखिर वह दिन आ ही गया, जब दिव्या और राजेश की शादी होने वाली थी सभी यार दोस्त मेहमान अपने अपने साधनों से शिवपुर पहूंच गए थे।

सूरजपुर एवम आसपास के गांव से बहुत से लोग आए थे। रीता रोहन भगत एवम उसके दोस्त, सुजाता । प्रिया , शुप्रिया उनके मामा मामी।

जब सुनिता ने सुजाता को देखी,,,

सुनीता _ये चुड़ैल यहां क्या करने आई है कही ये शादी में विघ्न डालने तो नही आई है।

सुनीता _सुजाता जी आप आइए न बैठिए।

सुजाता _शुक्रिया सुनिता जी, मै तो वर वधु को आशिर्वाद देने आई हूं।

सुनीता _आने के लिए शुक्रिया।

तभी वहां रीता भी पहूंच गई,,

रीता _अरे सूजु तुम यहां,,,

तुम्हे यहां देखकर बड़ी खुशी हुई।

इधर राजेश और दिव्या तैयार होकर जब शादी के मंडप में पहुंचे, सभी लोग दोनो को देखते ही रह गए।

दोनो महाराजा और महारानी लग रहे थे।

शादी संपन्न होने के बाद वर वधु दोनो मंच पर पहुंचे जहां सभी मेहमान एक एक करके बधाई शुभकामनाए एवम आशिर्वाद देने के लिए के लिए मंच पर गए।

राजेश अपने दोस्त यार एवम रिश्तेदारों से दिव्या से सभी का परिचय कराने लगा।

जब सुजाता मंच पर गई,,,

राजेश सुजाता से आंखें चुराने लगा,,,

सुजाता _राजेशअपनी दुलहन से हमारा परिचय नही करावोगे।

राजेश _दिव्या जी, ये सुजाता मैम है सुजाता एवम विशाल ग्रुप की मालकिन।

दिव्या _नमस्ते मैम।

दिव्या ने पैर छूकर आशिर्वाद लिया।

सुजाता _खुश रहो,,,

दिव्या _ऐसा लगता है कि मैंने आपको पहले कही देखा है।

सुजाता _मै तो पहली बार आपसे मिल रही हूं।

दिव्या _राजेश, तुम्हारे मोबाइल पर निशा की जो फोटो है उससे मैम की शक्ल हू ब हू मिलती है।

सुजाता _ओह आप निशा को जानती है, मुझे लगा था निशा के बारे में आपको राजेश ने कुछ बताया नही होगा। बाई द वे मै निशा की मां हूं।

दिव्या _आप निशा की मां है?

राजेश ने हम पर बहुत उपकार किया था। उसके अहसान के बदले उसने अभी तक कुछ लिया नही है। इसलिए मेरी ओर से ये ब्लैंक चेक शादी का तोहफा समझ कर रख लो। किसी के अहसान तले दबा रहना मुझे पसन्द नही।

दिव्या _जी मैम मै यह नही ले सकती। मुझे राजेश मिल गया उससे बडा धन दुनिया में और नही है। मै तो एक कुटिया में भी राजेश के साथ अपना पुरा जीवन बिता दूंगी।

सुजाता _तुम्हारे विचार तो बहुन्त अच्छे है, पर तुम लगता है राजेश के पास्ट के बारे में नही जानते हो, इसलिए ऐसी बाते कर रहे हों।

दिव्या _नही, राजेश ने मुझे सन कुछ सच बता दिया है।

निशा क्यों छोड़ के गई।

सुजाता _ओह फिर भी तुमने राजेश से शादी।

दिव्या _हां, क्यों कि मैं राजेश से बहुत प्यार करती हूं। और मुझे पता है शादी के बाद वह मुझे धोखा नही देगा।

सुजाता _इतना विश्वास है इस पर।

दिव्या _हां, मुझे राजेश पर पुरा भरोसा है।

सुजाता _मै भी भगवान सी प्रार्थना करूंगी, यह सुधर जाए। पार मुझे नही लगता ये सुधरेगा।

तभी वहां मंच पर रीता पहूंच गई।

रीता _अरे सूजु क्या बात कर रही हो दुलहन की साथ इतने देर तक, बांकी लोग भी इन्हे आशिर्वाद देने के लिए लाइन में लगे हैं भाई।

रीता _वैसे राजेश तुम्हारी दुलहन तो बहुत खूबसूरत है। तुम दोनो की जोडी शुभान अल्लाह किसी की नजर न लगे क्यो सूजू।

मेरे तरफ से एक छोटा सा तुम दोनो को उपहार ये कार के चाबी।

तुम दोनो इसमें बैठ कर घूमना। पूरे 2करोड़ की है।

सुजु तुम क्या दे रही हो वर वधु को,,,,
 
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