Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 13 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०३/२

जब लंड गीला होगया तब मंजुने लंडको अपने मुहमे भरलीया ओर धीरे धीरे लंडको मुहमे अंदर बहार करने लगी.. तबतक देवायत मंजुकी सब हरकते देखता रहा.. उनकोभी अ‍ेक डर थाकी मंजु इतना बडा रीस्क क्यु ले रही हे.. लेकीन उनको क्या पता की मंजु पीछले जन्मकी देवयानी हे.. जो चुदवाते हुअ‍े भी अ‍ेक बार स्नान करतेही फीरसे कवारी लडकीकी तराह होजाती हे.. मंजु इस जन्ममेभी अपनी बहुत सारी शक्तिया पहेचान चुकी थी.. बस वो अभी कीसीके सामने उसे उजागर करना नही चाहती थी..

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जब देवायतका लंड गीला होगया तब वो मुहसे लंड नीकालकर वापस देवायतके उपर चड गइ.. ओर अपने हाथोसे देवायतका लंड पकडते अपनी चुतपे सेट करने लगी.. ओर देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते धीरे धीरे लंडपे बैठने लगी.. ओर लंडको अपनी चतकी गीरफ्तमे लेने लगी.. तब अ‍ेक बारतो उनका मुहभी दर्दके मारे बीगड गया.. तब देवायत मंजुको कुछ कहेता उनसे पहेलेही मंजुकी चुतने अ‍ेक साप चुहेको नीगलता हे उसी तराह देवायतका पुरा लंड उनकी चुतने नीगल लीया..

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मंजु देवायतके चहेरेपे जुक गइ ओर उनके होठोको चुमते धीरे धीरे कमरको उपर नीचे करते देवायतसे चुदवाने लगी.. देवायत बस अ‍ैसेही लेटा रहा.. ओर मंजुका साथ देने लगा.. मंजुभी मदहोसीमे नसेकी हालतमे चली गइ.. ओर होले होले देवायतके लंडको अंदर बहार करते चोदती रही.. जब दोनोके बीच कामुक्ता भरी चुदाइ हो रहीथी.. तब चंदा गहेरी नींदमे सो रहीथी.. तभी मंजु देवायतके गलेके नीचे हाथ डालके उनसे पुरी तराह चीपक गइ.. ओर अपनी कमर हीलानेकी स्पीडको बढाने लगी..

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तब कुछही देरमे मंजु आधी आंख चडाते नसेकी हालतमे अपनी कमरको जटके देने लगी.. तभी देवायत समज गयाकी मंजु जड रही हे.. जब मंजु सांत होगइ तब देवायत उसे अपनी बाहोमे भरके पलट गया ओर मंजुके उपर चड गया.. फीर मंजुसे चीपक कर उनके गलेको चुमते मंजुको होले होसे सोट मारते चोदने लगा.. तब देवायतके हर धकेके साथ उनका लंड मंजुकी बच्चेदानीसे टकराने लगा.. तब मंजुकी मस्ती भरी आहे नीकलने लगी.. दोनो ही चुदाइमे पुरी तराह मस्तीमे छागये थे..

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दोनोही धीरे धीरे काफी देर तक अ‍ैसेही चुदाइ करते रहे.. देवायत मंजुको चोदते हुअ‍ेभी उनका बहुत खयाल रख रहाथा.. तभी अचानक देवायतने मंजुके गलेमे अपना मुह घुसा दीया ओर वहा उनके गलेमे दांत गडाते चुमने लगा.. तब मंजुने देवायतको जोरोसे कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. तभी उसे अपनी बच्चेदानी पर देवायतका गरम विर्य महेसुस हुआ.. जो मंजुकी चुतको लबालब भरते ही जा रहाथा.. जीसे मंजुका तनभी कांपने लगा.. ओर वोभी मुह खुला रखते आहे भरती देवायतके साथ फीरसे जडने लगी..

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तो दुसरी ओर आज दयाने सामनेसे रजीयाको लखनके पास जानेके लीये कहा.. तो रजीयाकी आंखमे आंसु आगये ओर वो दयासे लीपट गइ.. फीर जैसेही देवायत ओर मंजु अपने रुममे चले गये तब रजीया धीरेसे दबे पांव लखनके पास चली गइ.. ओर वहाभी दोनोके बीच जमकर चुदाइका दौर चल पडा.. लखनने रजीयाको तीन बजे तब दो बार चोद लीया.. ओर रजीया चुदवाकर वापस आकर सो गइ..

आज सुबहका सुरज नइ रोसनी लेकर अपने रथपे सवार होकर नीकला था.. तब हवेलीपे सबके मनमे अ‍ेक नइ उमंग ओर नइ उर्जाका संचार फील हो रहाथा.. दया ओर रजीया सुबह जल्दी उठकर अपने काममे लग गइ थी.. तभी नीर्मला मंजु चंदा सभी अपने अपने बाथरुममे नहाकर तैयार हो रहीथी.. तो पुनमभी सुबह कंपलीट होकर कीचनमे दयाका हाथ बटाने लगी.. तभी रजीया भी सभी सगाह जाडु पोछा लगा रहीथी..

इधर सहेरमे भी आज सृती सुबह जल्दी उठ गइ ओर नहा धोकर हल्कासा शींगार करने लगी.. तबतक भुमीकाभी उठ चुकी थी.. आज वोभी सजधजके कंपलीट होकर पुजा पाठ करके होलमे बैठीथी.. तभी सृती तैयार होकर रुमसे बहार आगइ तो भुमीका उसे देखतेही रेह गइ.. आज सृती पुरी तराह सज धजके अ‍ेक दुल्हनकी तराह तैयार हो गइथी.. जैसे उनकी आजही देवायतके साथ सगाइ हो.. तब भुमीका उनको देखकर हसने लगी.. तो सृती सरमा गइ..

सृती : (सरमाते हसते धीरेसे) मोम.. क्या हस रही हो..? मे सीर्फ तैयारही तो हुइ हु..

भुमीका : (हसते) सृती तुमतो अ‍ैसे तैयार हुइहो जैसे आजही तुम्हारी देवुके साथ सगाइ हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) मोम.. आपभी नां.. आपभीतो आज पटाका लग रही हो.. जेसे मुजे नही आपको वहा जानेकी जल्दी हो.. चलीये हमे देर हो रहीहे.. मे पहेले चाइ नास्ता बनाती हु.. फीर चलते हे..

भुमीका : ((हसते) हां.. हां.. जा बनादे.. आजतो तुजेभी अपने ससुराल जानेकी जल्दी होगी.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते जुठे गुसेसे) मोम.. आप मुजे तंग करनेका अ‍ेकभी मौका नही छोडती.. देखना मेरी भी बारी आयेगी.. तब मेभी बदला लुंगी..

कहेते सृती सरमाते हसते कीचनमे चली गइ.. तो भुमीका उनको देखकर हसती रही.. फीर सृतीने चाइ नास्ता बनालीया तो दोनो मां बेटीने साथ बैठकर चाइ नास्ता करलीया ओर सृतीने दोनोके कपडेकी बेग लेली.. ओर घरके सची खीडकी दरवाजे अच्छेसे चेक करके बंध करलीया ओर घरको ताला लगा दीया.. फीर मां बेटी दोनोही पडोसीको ध्यान रखनेको कहेकर देवायतके गांवकी ओर नीकल गइ..

लेकीन सृतीको क्या पताकी उनको जानेकी जल्दीके बजाये भुमीकाको जानेकी जल्दीथी.. क्युकी उनका रीजन सीर्फ वोही जानती थी.. आज देवायतके पीता किशनके गुजर जानेके बाद कितने महीनोके बाद वो हवेलीपे अपने कदम रखेगी.. वो बहुतही अ‍ेक्साइटेड होने लगी.. सृती हाइवेकी ओर कार दोडाने लगी.. तब भुमीका उनके पास बैठकर अपने अतीतको याद करने लगी.. ओर आंख बंध करते पुरानी बाते ताजा करने लगी..

(थोडा फ्लेशबेकमें)

जब उनका पती नरेश वीरजी राजीह नीर्मला ओर उनका चहीता भाइ किशन.. सब अ‍ेकही कोलेजमे साथ पढ रहेथे.. सबने पढाइके अलावा बहुत धमाल कीथी.. इनमेसे सबसे ज्यादा होशीयार किशन था.. ओर उपरसे वो राज परीवारसे तालुक रखताथा तो दोस्तोके पीछे ज्यादातर वोही सब खर्चा करता था.. फीर चाहे पढाइमे हो या कोइ पार्टीमे हो.. तब भुमीके मनमे किशनके लीये अ‍ेक अलगही फीलीग्स थी.. पुरे गृपमे सीर्फ वो दोनोही लडकी थी..

वो ओर नीर्मला बहुतही पक्की सहेली थी ओर हर बात दोनो आपसमे सेर करती थी.. ओर इनके लीये दोनो आपसमे कसमसे बंधी हुइ थी.. वो किशनके बारेमे नीर्मलासे अपनी दिलकी बात कहे उनसे पहेलेही अ‍ेक दिन नीर्मलाने उसे किशेनके साथ फीजीकल रीलेशनमे होनेकी बात कहेदी.. तबतो भुमीका दिल टुट हीगया.. ओर उसने अपने चहेरेपे कोइ भाव आने नही दीया.. ओर इस बारेमें बात करना टाल दीया.. फीरतो कइ बार नीर्मलाके साथ कीशनको मीलने साथमे जाना पडा.. ओर वो सबकुछ देखना पडा..

जीनकी वजहसे कुछही दिनोके बाद अ‍ेक दिन नरेशने उसे प्रपोज करदीया.. तो उसने नरेशका प्रपोज अ‍ेक्सेप्ट करलीया.. नीर्मलाभी घरपे किशनके बा बापुजी ओर उनके पीता ओर भाइ राजीवकी वजहसे किशनसे खुलकर नही मील पा रहीथी.. क्युकी तब किशनके मीलनेके लीये वो अक्सर भुमीकाको अपने साथ लेजाने लगी.. दोनो सहेलीया भुमीकाके घरका या सहेरमे कीसी होटेलमे खरीदी करनेका बहाना बनाकर साथमे अकेली चली जाती..

तब किशनभी सबकी नजर बचाते अकेलाही नीकल जाता.. ओर तीनो तैय की हुइ जगाहपे मीलने लगे.. भुमीकाके घरपे कोइ नही होता तब नीर्मला कभी भुमीके घर यातो किशन कीसी होटेलमे मीलनेके लीये बुलाता.. तब अ‍ेकही कमरेकी वजहसे नीर्मलाको भुमीकोभी साथ रखना पडता.. ओर नीर्मला किशन भुमीके सामनेही मीलने लगे.. अ‍ेक दो बार मीलनेके बादतो भुमीकाकी सरमभी चली गइथी.. किशन नीर्मलाकी चुदाइ अपनी आंखोके सामने देखकर तो उनके तनकी आग भी बढने लगी..

नीर्मलाभी नीर्लज होकर भुमीकाके सामनेही किशनसे चुदाइ करवाने लगती.. तो भुमीका भी वासनाकी आगमे जलने लगी.. लेकीन किशनको कहेभी तो कैसे..? ओर उपरसे नरेशभी उनको दिलोजानसे चाहने लगाथा.. ओर आखीर अ‍ेक दिन उनके घरपे कोइ नहीथा.. तब भुमीकाने नरेशको अपने घर बुलालीया..

ओर आखीर दोनो मीलही गये.. तब नरेशने भुमीकाका कौमार्य भंग कीया.. फीरतो वो ओर नरेश तीनसे चार बार फीजीकल हुअ‍े.. लेकीन उनके मामे अबभी किशन राज कर रहाथा.. वो किशनको अपने दिलसे नही नीकाल पाइ..

तो दुसरी ओर किशनभी मनसे भुमीकाको अपनी बहेन मानने लगाथा.. फीर तो किशनभी नीर्मलाको भुमीकाके सामने ही चोदने लगता.. दोनोही सब भुलकर खुब चुदाइ करते.. ओर भुमीका देखती रहेती.. अबतो किशन ओर नीर्मलाको भुमीकाकी हाजरीसे कोइ फर्क नही पडता था.. जब दोनो अपनी चुदाइमे मशगुल होते तब भुमीकाभी काफी गरम होजाती ओर दोनोकी चुदाइ देखते हुअ‍े अपनी चुतको सहेलाती..

जब बरदास्तसे बहार चला जाता तब अपनी चुतमे जोरोसे उंगली डालकर हीलाती ओर जड जाती.. यातो उसी दिन नरेशके साथ चुदाइ करवा लेती.. लेकीन भुमीकाने नीर्मलाको नरेशके साथ फीजीकल होनेकी बात कभी नही बताइ.. वो अपनी पसर्नल लाइफके बारेमे बहुतही कमही नीर्मलासे बाते करती.. उन्होने नीर्मलाको कभी नही बतायाकी उनका किशनके साथभी क्रश हे.. ओर ये बात वो सबसे छुपाना चाहती थी..

ओर जबसे किशनने उनको अपनी बहेन माना तबसे वोभी किशनको नरेशसे ज्यादा तवजो देने लगी.. जब चुदाइ होजाती तब किशन अक्सर नीर्मलाके साथ भुमीकाकोभी महेगी गीफ्ट देने लगा.. ओर राखीके दिन भुमीका किशनको राखी बांधती तबभी किशन भुमीकाहो राखीके तोहफे मे महेगी गीफ्ट ओर ढेर सारा केश भी देता.. ओर उसने भुमीकाकी पढाइका ओर उनकी सब जरुरतोका पुरा खर्चा उठालीया था..

तबभी भुमीका नरेशको प्यार करनेके बावजुद भी किशनकी ओर ज्यादा ढलने लगीथी.. लेकीन इसी बीच उनके साथ अ‍ेक हादसा होगया.. तब उसे नही पताथाकी वीरजीभी उसे प्यार करता हे.. ओर अ‍ेक दिन विरजीने भी उसे प्रपोज करदीया.. ओर भुमीने उसे मना करदीया तो विरजी बोखला गया ओर दोनोके बीच कहासुनी होगइ.. तब भुमीने विरजीको सनकी कहे दिया ओर विरजीका गुसा सातवे आसमानपे चला गया..

विरजीने मनमे भुमीकासे बदला लेनेकी ठानली.. ओर अ‍ेक दिन वासनाकी आगमे जलते मौका देखकर जबर दस्तीसे भुमीकाको उनके घर लेगया.. ओर भुमीकाके साथ बलात्कार कीया.. तभी पीछेसे किशन ओर नरेश आगये ओर किशनने विरजीको खुब मारा.. तब मारते वक्त किशनने विरजीको कहाकी ये उनकी बहेन हे.. तब विरजीकोभी पछतावा होने लगा ओर वही भुमीकाके पैरमे गीरते माफी मांगने लगा..

फीरतो दोस्तीकी वजहसे सबने विरजीको माफ करदीया.. लेकीन भुमीका मनसे विरजीको माफ नही कर पाइ.. फीरतो वोभी किशनको अपना भाइ मानने लगी.. लेकीन दिलके अ‍ेक कोनेमे अबभी किशनके लीये बेसुमार प्यार छलक रहाथा.. ओर अ‍ेक दिन अचानक नरेशके कहेनेपे कीसीको कहे बगैर भुमीका ओर नरेशने कोलेज छोडदी.. तब भुमीका ओर नरेशने आपसमे सादी करनेका फैसला करलीया था..

ओर अ‍ेक दिन दोनोही छुपकेसे अकेले किशनको कोलेजके बहार मीलनेके लीये आगये.. तब भुमीकाने किशनको भारी मनसे उनकी सादीमे आनेका न्योता दिया.. ओर दोनोही कोर्ट मेरेज करने वालेथे तब विटनेस के तौरपे भुमीकाने सीर्फ किशनको बुलालीया.. ओर कीसीको ना कहेनेकी किशनको कसमभी खीलवाइ.. तब किशन कीसीको कहे बगैर दोनोकी सादीमे चला गया.. ओर भुमीके भाइके रुपमे विटनेशमे साइन करदी..

तब भुमीका किशनको लीपटकर खुब रोइ.. फीर नरेश ओर भुमीकाने सीर्फ किशनको अपने घर मीलनेके लीये आनेकी छुट देदी.. तब किशनने कुछ पैसे देना चाहा तो भुमीका ओर नरेश दोनोने लेनेको मना कर दीया.. ओर किशनने भुमीकाको अ‍ेक भाइकी ओरसे तोहफा कहेकर जबर दस्तीसे भुमीको अ‍ेक तगडी रकम देदी.. फीरतो भुमीकी ओर नरेश दोनोका संसार अच्छेसे चलने लगा.. नरेशकोभी सरकारी होस्पीटलमे जोब मील गइथी.. ओर भुमीका उनका घर सम्हालने लगी..

किशन सालमे तीनसे चार बार भुमीका ओर नरेशको मीलने जाता.. ओर सालमे अ‍ेक बार भुमीकासे राखी बंधवाना कभी नही भुलता.. ओर गांवकी ओर दोस्तोकी सब बाते उनके साथ सेर करता.. तब दोपहोरका खाना वो उधर ही खाकर आता.. लेकीन भुमीकाने अब राखीके बदले तोहफा लेना बंध करदीया.. ओर हर बार जब जरुरत पडेगीतो मांग लुंगी कहेके टाल देती.. ओर अ‍ैसेही महीनो ओर साल बीतने लगे..

इसी बीच किशनकी हवेलीपे बहुत कुछ हो चुकाथा.. उनको नीर्मलाको छोडके उनकी बहेन विमलासे सादी करनी पडी.. तब सादीके कुछही हप्तो बाद किशनके माता पीताकी मोत होगइ.. ओर विरजीकीभी सादी सरलासे हो चुकीथी.. तब अ‍ेक दिन नरेश घरपे नहीथा तब किशन भुमीकाके घरपे आगया

ओर तब भुमीकाने किशनको अपने भाइ बहेनका वास्ता देकर विरजीसे बदला लेनेकी बात कहेदी.. ओर अ‍ैसा बदलाकी जीनकी वजहसे किशन सरलाके साथ रीलेशनमे आगया.. तब देवायत विमला नीर्मला के साथ बदलेकी बावनासे सरलाको भी प्रेगनेन्ट कर चुका था..

इसी बीच तीनसे चार साल बीत गये.. तबभी भुमीकाको बच्चा नही ठहेर रहाथा.. तब नरेश ओर भुमीका चींतीत होने लगे.. दोनोने बहुत इलाज करवाया.. फीरभी कुछ फर्क नही पडा.. ओर अ‍ेक दिन किशन नरेश ओर भुमीकाको अपने साथ आश्रमपे बाबाके पास लेगया.. तीनो पुरा दिन वही रहे.. तब बाबासे बहुत सारी बाते करली.. जब नरेश ओर किशन आश्रममे घुम रहेथे तब चुमीका बाबाके साथ बैठी रही.. जैसेही बाबा ओर भुमीका अकेले रेह गये तब बाबा भुमीकाके साथ अकेलेम कुछ बाते करने लगे..

बाबा : बेटी.. बुरा मत मानना.. जो मे तुमसे केह रहा हु उसे ध्यानसे सुनना.. तेरे नसीबमे अ‍ेक बच्ची हे.. लेकीन ये सब तेरे पतीसे मुमकीन नही हे.. वो कीसी ओरसे मुमकीन हे.. तु समज गइनां..?

भुमीका : (सरमाते थोडी सकपकाके) नही.. नही.. बाबा.. ये आप क्या केह रहे हे.. मे कुछ समजी नही.. इसका मतलब..? वो सब.. अ‍ैसा नही होसकता..

बाबा : (मुस्कुराते) बेटी.. तुम सब समजती हो.. ओर तुम जीनसे दिलसे प्यार करती हो उनसेही सब मुमकीन होगा.. क्या तुम तुम्हारे दोस्त देवायतसे प्यार नही करती..? हंम..?

भुमीका : (सरमाते) बाबा.. प्यारतो मे अबभी करती हु.. लेकीन अब मे सादी सुधा हु.. वो अब मुजे अपनी बहेन मानते हे.. ये सब अब मुमकीन नही हे.. अगर मे मानभी जाउ.. तो वो इस कामके लीये कभी राजी नही होगे..

बाबा : (हसते) बेटी.. उसने जब खुदकी सगी बहेनसे सादी करली.. फीरभी तुमतो उनकी मुह बोली बहेन हो.. ओर ये सब तुजे करनाही पडेगा.. तुजेही उनसे बात करके उनको मनवाना पडेगा.. ओर मुजे पका विस्वास हे तुम उनको मना लोगी.. ओर ये सब तेरे लीये जरुरीभी हे.. तुम चाहो या ना चाहो.. बच्चीतो सीर्फ उनसे ही होकर रहेगी..

भुमीका : (कुछ सोचते सरमाते) बाबा.. अब ये मुमकीन नही हे.. आपनेतो मुजे बडी उलजनमे डाल दीया.. अगर मेरे पतीको पता चल गया तो..? क्या ये सब उनको धोखा देना नही हे..? वो भी मुजे बहुत प्यार करते हे.. ओर किशनभी उनको कभी धोखा देना नही चाहेगा.. मे उसे अच्छी तराह जानती हुं..

बाबा : बेटी मेरी बात ध्यानसे सुनो.. सायद ये सब बाते जानकर तुजे दुखभी होगा.. लेकीन ये सब जानना तेरे लीये जरुरी भी हे.. ओर ये बात तुम सीर्फ तेरे तकही सीमीत रखना.. क्युकी ये सब होकरही रहेगा..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) जी. बाबा.. कहीये..

बाबा : (आंख बंध करते) सुन बेटी.. तेरे पतीकी आयु अब सीर्फ १० से १२ साल तककी ही हे.. फीर तुजे किशन ही तेरे साथ सादी करके तुजे सम्हालेगा.. तुम दोनोका संसार सबसे छुपके चलता रहेगा. तु इनकी चीन्ता मत करना.. ये सब किशन सम्हाल लेगा.. बस अब ये बातका जीक्र तुम अभी कीसीसे मत करना..

भुमीका : (सोक्ट होते धीरेसे) बाबा ये आप क्या केह रहे हे..? क्या ये सब सच हे..?

बाबा : हां बेटी.. मेरी आजतक कोइ बात मीथ्गा नही हुइ.. ओर अ‍ेक सचाइ ओर बता रहा हु.. किशनका बेटाही तेरी बेटीसे सादी करेगा.. अब उनके घरमे भाइ बहेनके बीच सादीकी परंपरा सुरु होगइ हे.. फीर वोही तुम दोनो मां बेटीका खयाल रखेगा.. तुम खुदभी उनको सामनेसे अपना लोगी..

भुमीका : (आस्चर्यसे देखते) बाबा ये आप क्या केह रहे हे..? आपको पका यकीन हेकी मेरी बच्चीका बाप किशनही होगा.. कोइ ओर इलाज नही होसकता..? ओर किशनके बेटेको मे अपना लुगी..? मेरीतो कुछ समजमे नही आता.. अ‍ैसे कैसे हो सकता हे..?

बाबा : (हसते) नही बेटी.. मेरी बात ध्यानसे सुनो.. वास्तवमे तुम सबको पताही नही हेकी तुम सब कौन हो..? बस कुछ सालो तक इन्तजार करले.. अ‍ेक दिन तेरे सामने सब सचाइ सामने आजायेगी..

किशन : (नरेशके साथ आते) बाबा क्या केह रहीहे भुमी.. कही आपका दिमागतो नही खा रही.. हें..हें..हें..

भुमीका : (जुठे गुसेसे हसते) किशन.. अ‍ेक मारुगीनां.. मे ओर बाबा तो बाते कर रहे थे.. बाबाने मुजे अ‍ेक दवाइ देदी हे.. मुजे वो छे महीने तक लेनी हे.. फीर सब ठीक होजायेगा.. क्यु बाबा..?

तभी किशन ओर नरेशभी खुस होते वही बैठ गये ओर बाबाभी भुमीके जुठ बोलनेपे हसने लगे.. फीर बाबाने भुमीकाको अ‍ेक बच्ची होनेकी बात केहदी.. तब नरेश बहुत खुस होगया.. फीर साम होतेही तीनो बाबाको दक्षीणा देकर वहासे नीकल गये.. तब किशनको नरेश ओर भुमीको छोडने वापस सहेर जानाथा.. ओर तीनो वहासे नीकल गये.. उनके बाद भुमी का नरेशके प्रती देखनेका नजरीया बदल चुकाथा..

वो अब किशनको अपने भाइसे ज्यादा अ‍ेक भावि पतीके रुपमे देखने लगी.. बच्चेकी चाहतमे उसे नरेशकी कम आयुकाभी अफसोस नही हो रहाथा.. बस अब भुमीके लीये सीर्फ अ‍ेकही काम बाकी रेह गया था.. ओर वो था किशनको इस बातके लीये राजी करना.. ओर ये बात वो भली भांती जानतीथी की किशनको इस बातके लीये कैसे राजी करना हे.. ओर वो इस बातके लीये आजसेही मीशन चाइल्डपे लग गइ..

भुमीका : (कारमे पीछे बैठे) नरेश.. तुम कितने दिन होगये बा को मीलने गांवमे नही गये.. तो इस बार २० दिनके बाद राखीभी हे.. तो तुम अपनी बहेनसे राखी भी बंधवा लेना.. ओर बा की तबीयत भी देख आना..

नरेश : भुमी पागल होगइ हो क्या..? हमारा गांव थोडीना नजदीक हे..? वहा जानेके लीयेभी १४ घंटे लगते हे.. मे वहा अ‍ेक दिन रुककर आजाउगा फीरभी वहा आने जानेके लीये तीन दिन लग जायेगे.. ओर अगर जाना हे तो तुजेभी साथ चलना पडेगा.. तुम तीन दिन अकेली यहा क्या करोगी..?

भुमीका : नरेश तुम समजते क्यु नही..? मुजे यहा अकेली कोन खाजायेगा.. ओर वेसेभी मुजेभी तो अपने भाइको राखी बांधनी हे.. मे किशनके घरही चली जाउगी.. तीन दिन पहेलेही बा का फोन आयाथा.. वो तुजे बहुत याद कर रही हे.. हम सादीके बाद सीर्फ तीन बारही उधर गये हे.. इस बार तुम अकेलाही चले जाना..

नरेश : भुमी.. पहेले मे छुटीका देखता हु.. अगर छुटी मील गइतो चला जाउगा.. ओर तुमभी अकेली यहा मत रहेना.. किशनके घरही चली जाना..

भुमीका : (मनमे खुस होते) हां तो वही चली जाउगी.. मेरे भाइका घर हे.. कीतने दिन होगये मे विमला भाभीको भी नही मीली.. उनसेभी मील लुंगी.. हें..हें..हें..

तीनोही बाते करते घर पहोंच गये.. पुरे रास्ते भुमी सीर्फ किशनके बारेमेही सोचती रही.. तो दुसरी ओर आज किशनको भी भुमीकी नजर उनके प्रती कुछ अलग ही लगी.. उसे बार बार किशनका वो तगडा लंड नजरमे आने लगा.. जो कइ बार नीर्मलाकी चुदाइ करते अपनी आंखोसे देख चुकीथी..

भुमी बार बार किशनके पेन्टके उभारको देखने लगी.. तब किशनको वहासे नीकल जाना मुनासीब लगा.. ओर वो नीकलने लगा तब भुमी ओर नरेशने किशनको रुकनेका बहुत आग्रह किया फीरभी किशन घरकी ओर नीकल गया.. तभी..

(फस्लेसबेक खतम)

सृती : (थोडी उची आवाजमें) मोम.. मोम.. क्या हुआ.. नींद आगइ क्या..? पुरी रात तो खर्राटा मारके सोती रही हो.. फीरभी आपको नींद कैसे आजाती हे.. हें..हें..हें.. कोइ नींद वींदकी गोलीतो नही खाइ..?

भुमीका : (अतीकसे बहार आते) अरे मे कोइ सो नही रहीथी.. कोइ गली नही खाइ.. समजी.. बस आंख बंध करके बैठी हुइ थी.. बस कुछ पुरानी बाते याद आ रहीथी.. मेरा किशन.. कीतने सालो के बाद मे वहा पैर रखुगी..

सृती : (हसते) मोम.. बस हम पहोंच गये.. देखो.. आपके देवुका गांव आगया.. ओर ये हवेली तो देखो.. दुरसेही बहुत बडी लग रही हे..

भुमीका : (सरारतसे हसते) हां.. यही तेरा ससुराल हे.. मे तो यहा कइ बार आ चुकी हु.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) मोम.. आप मेरी टांग खीचनेका कोइ भी मौका नही छोडती.. हें..हें..हें..

दोनोही मस्ती मजाक करते हवेलीपे आगइ.. जैसेही कारका बोर्न बजा तो मंजु चंदा पुनम सभी दोडके बहार आगइ.. ओर सृतीने कारको वही पार्क करदीया.. ओर दोनो कारसे उतर गइ.. तो भुमीका उतरतेही सब जगाहपे नजर घुमाते देखती रही.. तभी मंजु दोडकर सृतीके गले लग गइ.. फीर भुमीकाके पैर छु लीया तो सभी सृतीको गले लगाते भुमीके पैर छुने लगे.. ओर पुनमने सृतीका बेग लेलीया.. ओर सभी होलमे आने लगे.. तब होलमे राजीव ओर नीर्मला तैयार होकर बैठे थे.. जेसेही नीर्मलाने भुमीकाको देखा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०४/१

दोनोही मस्ती मजाक करते हवेलीपे आगइ.. जैसेही कारका वोर्न बजा तो मंजु चंदा पुनम सभी दोडके बहार आगइ.. ओर सृतीने कारको वही पार्क करदीया.. ओर दोनो कारसे उतर गइ.. तो भुमीका उतरतेही सब जगाहपे नजर घुमाते देखती रही.. तभी मंजु दोडकर सृतीके गले लग गइ.. फीर भुमीकाके पैर छु लीया तो सभी सृतीको गले लगाते भुमीके पैर छुने लगे.. ओर पुनमने सृतीका बेग लेलीया.. ओर सभी होलमे आने लगे.. तब होलमे राजीव ओर नीर्मला तैयार होकर बैठे थे.. जेसेही नीर्मलाने भुमीकाको देखा....अब आगे

नीर्मला जटसे खडी होगइ ओर आगे आकर भुमीकाके गले लग गइ.. तब राजीवभी हसते हुअ‍े खडा होगया.. जब दोनो अलग हुइ तब चुमीका धीरेसे राजीवकी ओर बढते उसे बस देखती ही रही.. ओर उनकी आंखसे दो बुंद आंसु गीर गये.. ओर जटसे राजीवको गले लगा लीया.. दोनो काफी देर अ‍ैसेही खडे रहे.. जब अलग हुअ‍े तब भुमीकाने राजीवका सर चुमलीया ओर उनके दोनो हाथ थामके उनके सामने देखती रही..

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भुमीका : राजीव.. मेरे भाइ.. कैसी तबीयत हे तेरी..? देख.. कैसा होगया हे तु..

राजीव : (हसते) भुमी.. मेतो अब ठीक होगया हु.. तु बता.. तुम कैसी हो..? जबसे गइ.. वापस कभी मुडके भी नही देखा.. क्या कभी तुजे हमारी याद नही आइ..? कमसे कम अपनी सहेलीको ही मील लेती.. क्या हमसेभी नफरत हो गइथी..?

भुमीका : (मुस्कुराते) नही भाइ.. अ‍ैसी बात नही हे.. तुजेतो सब पता हे.. बस सीर्फ किशनको मीलती थी.. वो हस साल राखी बंधवाने आजाता था.. तो कभी कभी मेभी उनको मीलने यहा आती थी.. तब आपकी ओर नीमुकी खबर उनसे पुछ लेतीथी.. भाइ सब बीखर गया.. मेरा किशन हमे छोडकर चला गया..

राजीव : (भुमीको हाथ पकडते अपने पास बीठाते) भुमी.. अब हमारी उमरभी तो होगइ हे.. सबको अ‍ेक दिन जानाही हे.. मुजे किशनसेही पता चलाकी नरेशभी गुजर गया.. लेकीन तुमसे मीलनेभी कैसे आउ..? तुमतो हमे मीलना ही नही चाहती थी.. तेरा भाइतो सीर्फ किशनही था.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) नही भाइ.. सोरी.. अ‍ैसी कोइ बात नही हे.. आजाते.. मेने तुजे तो अपना भाइ नही मेरा जीजाजी माना हे.. हें..हें..हें.. नीमुतो मेरी बडी बहेन हे.. हें..हें..हें.. लेकीन राजीव.. मेने तुम दोनोको बहुत मीस कीया.. (जोरोसे हसते) तुम तो वाकइ अब बुढे होगये हो.. हें..हें..हें.. मे ओर नीमुतो आजभी वैसी ही हे.. क्यु नीमु.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (थोडी जेंपते सर्मसार होते) भुमी.. तेरा बस चले तो तु कभी बुढी ही नही होती.. हें..हें..हें.. देख तुतो आजभी वैसी ही दीख रही हे.. जैसे तु सृतीकी मां नही उनकी बडी बहेन हो.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) हां.. तो मे अभी जवानही हु.. क्यु भाइ..? भाइ आदमी भलेही सरीरसे बुढा हो जाये.. लेकीन वो दिलसे जवान होना चाहीये.. तबभी तो बुढापा हसी खुसीसे बीत जाता हे.. हें..हें..हें..

राजीव : (जोरोसे हसते) हां.. तभीतो आजभी मे तेरी बडी बहेनसे प्यार करता हु.. लेकीन आज कल वो मुजे कुछ खास भाव नही देती.. हें..हें..हें.. अब तुजो आगइ हे.. तो मेरा चान्स बढ गया हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (सरर्मसार होते हसते) राजीव.. कुछतो सर्म करो.. यहा बच्चेभी खडे हे.. आतेही मेरी बहेनपे लाइन मार रहे हो.. हें..हें..हें.. अब आपका कोइ चान्स लगने वाला नही हे.. क्यु भुमी..? हें..हें..हें..

भुमीका : (जोरोसे हसते) हां राजीव.. अभीतो कहाकी तुम अब बुढे हो चुके हो.. हें..हें..हें..

तीनो बाते कर रहेथे तब मंजु पुनम.. चंदा सृती सब वही खडे रहेते तीनोकी अ‍ैसी मजाक भरी बाते सुनकर जोरोसे हस रहेथे.. देवायतभी सुबह देर तक सोता रहा तो वोभी जागकर अपने रुममे तयार हो रहाथा.. लखन पहेलेही उठकर चाइ नास्ता करके खेतोपे चला गयाथा.. भुमीका आइ तो घरमे रोनक आगइ थी.. तभी दया सबके लीये पानी लेकर आगइ.. तो मंजुने कहा..

मंजुला : (हसते) बुआ.. इनको पहेचानती होनां..? ये रामुकाका की लडकी हे.. दया..

भुमीका : (हसते) अरे हां इनको कइ बार मील चुकी हु.. इसे अच्छी तराह पहेचानती हु.. रामुभाइ किशनके बहुत अच्छे दोस्त थे.. वोही तो सब खेती बाडी सम्हालते थे.. दया.. अब कैसे हे वो..?

दया : (भुमीके पैर छुते) बुआ.. बस अब उमरकी वजहसे सारा दिन खेतोपेही होते हे.. वही बेठे होगे..

भुमीका : (हसते) बेटा अबतो तीन दिन यही हु.. उनकोभी मीलकर जाउगी.. (ंमंजुकी ओर देखते) बेटा.. तेरा पती कीधर हे.. वो कही दिख नही रहा..? कही धंधेपे तो नही चला गया..? हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते) नही बुआ.. बस अंदर तैयार हो रहे हे.. अभी आते होगे.. मे बुलाती हु..

तभी देवायत तैयार होकर बहार नीकलता हे तो भुमीका ओर सृतीको देखकर खुस होते सृतीको गले लगाता हे.. ओर भुमीकाके पास जातेही भुमीका खडी होजाती हे.. ओर देवायत उनके पैर छुअ‍े उनसे पहेलेही उसे रोकते वो हसती हुइ देवायतको जोरोसे गले लगा लेती हे.. तब नीर्मला उनकी ओर कामुक मुस्कान करते देखती रहेती हे..

ओर देवायतने भुमीकाको हसते हुअ‍े जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया तो भुमीका जोरोसे आउच.. करते देवायतसे अलग होगइ ओर उनकी पीठमे मुका जड दीया.. तो सबलोग हसने लगे.. फीर भुमीका देवायतको हाथ पकडके अपने पास उनसे सटाकर बीठा देती हे..

देवायत : (हसते) बुआ.. आपको आनेमे कोइ तलकीफ तो नही हुइ..? हवेली सीधी मील गइनां..?

भुमीका : (हसते) देवु.. मे यहा तेरे बापु थे तब कइ बार आचुकी हु.. लेकीन तुमने हवेलीमे काफी चेन्ज करलीया हे.. थोडी देर बैठ.. फीर मुजे पुरी हवेली देखनी हे.. ओर तुम्हारे खेतोपे भी जाना हे.. मे वहाभी कइ बार जा चुकी हु.. मे वहा ज्यादातर सबको जानती हु..

मंजुला : (हसते) बुआ.. आप दोनो पहेले फ्रेस होजाओ.. फीर चाइनास्ता करके जीधर भी जाना हो देवुके साथ चली जाना.. चलीये मे आपको अपना कमरा दिखाती हु..

नीर्मला : (हसते) मंजु.. इसे भी हमारे पास वाले कमरेमे ही सेट करना.. दोनो वहा मीलती रहेगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) बुआ यहा नीचेभी ६ कमरे हे.. ओर उपरभी दस कमरे हे सभी लोग आरामसे अ‍ेडजेस्ट हो जायेगे.. ओर अब आयेगाभी तो कौन.. सीर्फ भानुकी फेमीलीतो हे.. ओर मंजु.. तुम वो धिरेनको भी फोन करदे.. अभी तक आया क्यु नही..? कही उनको छुटी बुटीकी प्रोबलेमतो नही..?

चंदा : (सरमाते हसते) मंजु.. रहेने दे मे अभी उनसे बात कर लेती हु..

सृती : (हसते) हां भाइ.. हम सब दुल्हेके बगैर क्या करेगे.. बुलालो.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) सृतीदीदी आप मेरे साथही आजाइअ‍े.. हम तीनो वही रहेगे.. आइअ‍े..

कहेते पुनम सृतीको लेकर अपने रुममे चली गइ.. फीर सभी लोग चाइ नास्ता करने बेठ जाते हे.. तो आज सृती सरमाते देवायतको कुछ अलगही नजरोसे नजरे चुराते देख रहीथी.. तब भुमी नीर्मला राजीव ओर देवायत आपसमे बाते करते चाइ नास्ता कर रहेथे.. तभी चंपाभाभी ओर रश्मीभाभी भी आगइ.. सबने दोनोको चाइनास्ता करनेका बहुत आग्रह कीया लेकीन वो दोनो घरसे ही चाइनास्ता करके आइथी.. सबने चाइनास्ता करलीया तब देवायत खेतोपे जानेके लीये तैयार होगया..

भुमीका : देवु.. तुम अभी चले जाओ.. हम दोपहोरके बाद खेतोपे जायेगे.. मुजे अभी मंजु ओर नीमुसे कुछ कामभी हे..

राजीव : (हसते) हां भाइ.. तुम सामकोही चली जाना लेकीन मेतो अभी जा रहा हु.. तुम लेडीसके बीच मेतो बोर होजाउगा.. हें..हें..हें.. चलो बेटा.. मे भी तुम्हारे साथ ही चलता हु.. खेतोकी तो बातही कुछ ओर हे..

नीर्मला : (थोडी चींतासे) राजीव.. तुम्हे आराम करना हे.. अ‍ेक बार ठीक होजाओ.. फीर घुमते रहेना..

राजीव : (हसते) अरे कुछ नही होता.. ओर मेने खेत देखा हे.. वहाभी आराम करनेके लीये मकान बकान ओफीस सब हे.. चलो बेटा.. फीर तुम्हारे साथ ही चला आउगा.. नीमु.. वहा हवा ताजी आती हे..

मंजुला : (हसते) हां मोम.. पापाको जाने दीजीये.. उनको वहा अच्छा लगेगा.. जाइअ‍े पापा..

फीर देवायत ओर राजीव दोनोही अपने खेतोपे चले जाते हे.. तभी मंजु नीर्मला दोनो सृती ओर भुमीकाको लेकर पुरी हवेली दीखाने लगती हे.. तो चंपा ओर रश्मी दोनोही दया ओर रजीयाका हाथ बटाने लगती हे तो साथमे पुनमभी चारोके साथ बाते करते काम करने लगती हे.. तभी चंदा अपने रुममे चली जाती हे ओर बेडपे बेठते ही धिरेनको फोन लगा देती हे.. तो कुछ ही देर मे धिरेन फोन उठा लेता हे..

धिरेन : (हसते) हेलो.. मोम.. कैसी हो आप..? क्या वहा सादीकी सब तैयारीया होगइ..?

चंदा : (हसते) हां बीटु.. लेकीन तुम अभी तक आये क्यो नही..? तुजे मंजु ओर सृती याद कर रही हे.. ओर सुबह देवुभी पुछ रहाथा.. क्या कुछ प्रोबलेम तो नही..?

धिरेन : नही मोम.. कोइ प्रोबलेम नही हे.. बस कुछ काममे बीजी हु.. ओर बेंकमेभी आज कल बहुत काम हे.. सामके ७ बज जाते हे.. तो थोडी छुटीमे प्रोबलेम हुइथी.. लेकीन अब ठीक हे.. मे कल साम तक वहा पहुंच जाउगा..

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चंदा : (हसते) क्या.. कल साम तक पहोंच जाउगा..? धिरेन परसो तुम्हारी सादी हे.. क्या आज नही आ सकते..? ओर तुमने तेरी सब तैयारीया करली..?

धिरेन : मोम.. इसीलीये मे कल ही आपाउगा.. बस मुजेभी कुछ तयारीया करनी हे.. तो काममे बीजी हु.. सहेरमेभी कुछ पुनोके लीये खरीदी बाकी रेह गइ हे तो कलतक सब नीपटाकर आजाउगा..

चंदा : (हसते धीरेसे) हां अब अपनी बीवीके लीये कुछ बडीयासी गीफ्ट लेना.. हें..हें..हें.. बेटा.. सुन.. तु कही हमसे या मुजसे नाराज बाराज तो नही हेनां..? मुजे सच बताना.. तुजे मेरी कसम हे..

धिरेन : मोम.. ये आप क्या बोल रही हे.. कसम मतदो.. भला मे आपसे क्यु नाराज होउगा..? उल्टा मेतो आपकी सादीसे बहुत खुस हु.. मोम.. अ‍ेक.. अ‍ेक बात कहु.. जो काम आपको बहुत पहेले कर देना चाहीयेथा.. वो अब कीया हे.. खैर.. देरसे ही सही.. आपको बात समजमे तो आइ.. वो कहेते हेना देर आये दुरुस्त आये हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) हंम.. मोमकी मस्ती करता हे..? चलो मेरा बेटा बहुत सयाना होगया हे.. बस तेरे खाने पीनेकी चीन्ता हे.. वहा जट पुनो आजाये तो ये चीन्ता भी दुर होजायेगी.. उसे फोनपे बात करता हेकी नही..? बीटु तेरी बहुत याद आती हे.. आइ मीस यु..

धिरेन : आइनो मोम.. आइ ओल्सो मीस यु.. अब वही आकर उनसे बात करुगा.. लेकीन मे बहुत खुस हु.. मोम.. आपको जीजु जैसे पती मील गये.. मोम.. जीजु बहुत अच्छे हे.. हम सबकी कीतनी कैर करते हे.. (धीरेसे सरमाते) मोम.. क्या वो भानुजीजुकी फेमीलीके लोग आगये..?

चंदा : नही बीटु.. अभी सीर्फ बडीदीदी ओर तेरे मामाही आये हे.. तुजे बहुत याद कर रहेथे.. ओर अभी अभी तेरी सृतीदीदी ओर भुमी मौसी आये हे.. ओर वो भानुभाइकी फेमीलीके लोगभी सामतक आजायेगे.. बस सीर्फ तुम नही आये.. आजा बीटु..

धिरेन : (हसते) मोम.. मे कल पका आजाउगा.. ओर ट्राइ करुगाकी वहा जल्दी आजाउ.. मोम.. लव यु..

चंदा : (हसते) लव यु टु बेटा.. बस तु खुस रहे.. ओर अब मोमको लव यु बोलना छोडदे.. क्या पुनमसे फोनपे बात करता हेकी नही.. अब उसे आइ लव यु बलोदे.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) क्या मोम.. आपभी.. चलो मे रखता हु.. वैसेभी अब सादीतो हे.. हें..हें..हें..

चंदा : हंम.. चल बाय.. कल जल्दी आजाना.. मुं..हा..

चंदाने हसते हुअ‍े फोन काट दीया ओर बहार चली गइ.. तो इधर धिरेनभी फोन कट होतेही फोनको देखते कातील मुस्कान करने लगा.. आज वो पहेली बार चंदाकी देवायतके साथ सादीसे खुस हो रहाथा.. क्युकी वो अकेला होतेही अब अपनी मर्जीके मालीक बन गयाथा.. अब वो जैसे चाहे अपनी लाइफ जी सकता था.. जबसे नीलमके संपर्कमे आया तबसे उसने बहुत कुछ प्लानींग करके रखी थी..

जब पुनमने उनको सादीसे पहेले सेक्सके लीये मना कीया तबसे वो कीसीभी हालमे अ‍ेक बार पुनमको भोगना चाहता था.. अब उसे पुनमके प्रती कोइ लगाव नहीथा.. लेकीन पुनमके साथ सादी करनाभी उनकी मजबुरी थी.. ताकी कीसीको उनके ओर नीलमके बारेमे पता नाचले.. इसीके लीये उसने अभीसे बहुत सारी तैयारीया करनी सुरु करदीथी.. ओर ये बात सीर्फ दोही लोग जानते थे.. अ‍ेक मंजु.. ओर दुसरी पुनम..

जबसे मंजुने पुनमको अनुभुती करवाइ तबसे पुनमभी बहुत कुछ जानने लगीथी.. उसे अपने भाइ देवायतके सभी नाजायज रीसतोके बारमे पता चल गयाथा.. लेकीन वोभीतो उसे बहुत प्यार करतीथी.. ओर इस बारेमे उसे मंजुने सब समजा भी दीयाथा.. इसीलीये देवायतके कीसीभी रीस्तेसे उसे कोइ अ‍ेतराज नही था.. ओर उनकी दोनो सहेलीओके साथ खुद पुनम चाहती थी की उनका रीस्ता देवायतके साथ होजाये..

अ‍ेक थी वंदना ओर दुसरी नीशा.. दोनोही पुनमकी बेस्ट सहीली थी.. वो नीशा ओर वंदनाके प्रोबलेम के बारेमे भी भली भांती जानती थी.. उसे गांवमेभी कइ अ‍ैसे रीस्तोके बारेमे पता चल गयाथा.. तो फीर उनके होने वाले पती धिरनको कैसे नही पहेचानती..? फीरभी उनसे सादी करना जरुरी था.. ताकी वो अपने उदरमे पलने वाले बच्चेको धिरेनका नाम दे सके.. ओर दुसरोके सामने अपने भाइके साथ के रीस्तेको छुपा सके..

इधर हवेलीपे उपरकी मंजीलपे मंजु ओर सृती दोनोही धीरे धीरे आपसमे हस हसके देवायतके बारेमे बाते करती चल रहीथी तो उनके पीछे नीर्मला ओर भुमीकाभी आपसमे धीरेसे बात करते सब जगाहको देख रहीथी.. दोनोही राजीवके बारेमे बाते कर रहीथी.. लेकीन नीर्मलाके कइ बार पुछनेभी भुमीका अपने अफेरके बारेमे बतानेको तैयार नहीथी.. तो दुसरी ओर नीर्मला जब इतने सालोके बाद भुमीकाको पहेली बार सहेरमे जाकर मीली.. तबही देवायतके साथ अपने अफेरकी बात बता चुकी थी....

तो दुसरी ओर भुमीकाने भी आजतक किशनके साथ अपने रीलेशनकी बात कीसीको नही बताइ.. लेकीन वो आजभी अ‍ेक जवान लडकीकी तराह इतनी रोमांजीत हो रहीथी.. ओर इनका कारणभी सीर्फ वोही जानती थी.. भुमीका आजभी दिखनेमे कयामत लग रहीथी.. आजभी अपने नीतंभ हीलाके चलती ओर उनकी घुटनो तककी चोटी या खुले बाल लहेराती तो आजभी कइ मर्द अपने पेन्टमे तंबु खडा कर देते.. ओर यहाभी अपने यारको कहो या अपने नये पतीको.. उसे मीलनेकी सब तैयारीया करके आइथी..

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तभी नीचे चारुभाभी ओर वंदना अपने सामानके साथ आगइ तो साथमे सुधीरकी वाइफ नीशाभी थी.. जीसे देखकर पुनम खुसीसे जुम उठी.. ओर सबको गले लगाकर वंदना ओर नीशाको लेकर अपने रुममे चली गइ.. तो चारुभाभी हसते हुअ‍े सबके साथ काममे हाथ बटाने लगी.. तभी विजयके रोनेकी आवाज आइ तो रश्मीभाभी उनको लेकर सोफेपे बैठ गइ ओर बच्चेके साथ खेलने लगी.. जीसे देखकर सभी हसने लगी..

चंपा : (हसते) रश्मी.. अच्छेसे बच्चेको संभालना सीखले.. अब तेरे ही काम आयेगा हें..हें..हें..

रश्मी : (सरमाते हसते) हां.. तो मे आपकोही लेजाउगी.. आपही सम्हालनां.. मेरी भाभी कीस दिन काम आयेगी.. हें..हें..हें..

चंपा : (हसते) अरे आजाउगी तु फीकर मत करना.. हम सब हेनां.. चारुकोभी अच्छा खासा अ‍ेक्स्पीरीन्स हे हें..हें..हें.. वोभी अभी भी बच्चा पैदा कर सकती हे.. बस हमारे रमेशभाइ कुछ करते नही.. हें..हें..हें..

चारु : (सरमाते हसते) कीमीनीओ धीरे बोलो.. अंदर लडकीया हे.. सुन लेगी.. मेरीतो अ‍ेक बच्ची हे.. कहोतो रमेशको आपके यहा भेजदु.. हें..हें..हें.. अपनीभी बच्चेकी तम्मना पुरी करलो.. हें..हें..हें..

चंपा : (जोरोसे हसते) क्या अब रमेशभाइसे कुछ होगा..? तो भेजदे उनको मे ही रखलुगी.. फीर तु क्या करेगी..? हें..हें..हें.. आयेगी उसे ढुंढते हुअ‍े.. हें..हें..हें..

चारु : (सरमाते हसते) हां लेजाओ उसे.. कमीनी तुजेभी पता चलेकी वो कोइ कामका हेकी नही.. हें..हे..हे..

दया : (हसते) चंपाभाभी.. रहेने दीजीये.. उनसे कुछ होता नही होगा.. वरना चारुभाभी आपको हां थोडीना कहेती.. हें..हें..हें.. वरना अभी तक वंदनाका अ‍ेक भाइभी होता.. हें..हें..हें..

सभी अ‍ैसी मस्ती मजाक करते काम करती रही.. तो रुममे भी पुनम वंदना ओर नीशा बेडपे बैठकर अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया कर रहीथी.. आज नीशाभी मेकअप करके अ‍ेकदम सजधजके आइथी..

नीशा : (धीरेसे हसते) पुनोदीदी क्या सादीकी सब तैयारीया आपने करली..? आइ मीन.. नीचे सब सफाइ बफाइ.. वैक्सीन वगैरे.. कहोतो मे करदु..?

वंदना : नही नीशा.. इसीलीये तो आइ हु.. कमीनीको आजही सब कर दुगी ओर देखना.. अ‍ैसी चीकनी करदुगी.. की धिरेन जीजु देखतेही पागल हो जायेगे.. हें..हें..हें..

नीशा : (सरारतसे हसते) कमीनी चीकनी सीर्फ इनको नही अब तुजेभी चीकनी होनेकी जरुरत हे.. अब कोइ अच्छेसे लडकेको सेट करके तुमभी सादी करले.. कबतक अ‍ैसे उंगलीसे काम चलायेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (जोरोसे हसते) हां.. नीशाभाभी ये आपने सही कहा.. हें..हें..हें..

वंदना : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) नीशा.. अब तुभी मम्मीकी तराह सुरु होगइ.. अरे बाबा नही करनी मुजे सादी.. मे अ‍ैसेही खुस हु.. ओर तुमनेभी सादी करके कोनसा तीर मारलीया..?

पुनम : (गुसा होकर वंदनाको अ‍ेक मुका मारते) कमीनी अ‍ैसातो मत बोल.. कीसीको अ‍ैसा नही कहेते..

नीशा : (मुस्कुराते) नही पुनोदीदी.. सीर्फ तुम दोनोही तो मेरी बेस्ट सहेली हो.. वंदु मेरे बारेमे सबकुछ जानती हे.. इसीलीये अ‍ैसा केह रही हे.. ओर मुजे उनकी बातोसे दुखभी नही होता.. सचही तो केह रही हे वो.. अब मेरा नसीबही अ‍ैसा हेतो वो क्या कहेगी..?

पुनम : (माहोल हल्का करनेके लीये वंदनाकी ओर देखते) नीशाभाभी.. आप फीकर मत करो.. कुछही दिनमे वंदुभी मेरी तराह चीकनी होकर घुमेगी.. हें..हें..हें..

नीशा : (खुसीसे आस्चर्यसे देखते) क्या..? वंदु चीकनी होकर घुमेगी..? मतलब..? क्या इसने कीसीको सेट करलीया हे..? कमीनी ने मुजे बतायाभी नही.. मेरीतो सब बाते जानलेती हे.. वंदु ये तुने अच्छा नही कीया..

वंदना : (सर्मसार होते हसते) नही नीशा.. अ‍ैसा कुछभी नही हे.. पुनो जुठ बोल रही हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (वंदनाकी ओर कातीलाना मु्स्कानसे) अच्छा..? मे जुठ बोल रही हु..? कमीनी.. तो फीर खा मेरी कसम.. की मे जुठ बोल रही हु.. हें..हें..हें..

वंदना : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) नही.. हें..हें..हें.. कमीनी क्यु मेरी पोल खोल रही हे..? तुजेभी पता हे मे तेरी कसम नही खा सकती.. अभी बात तो पक्की होने दे.. हें..हें..हें..

नीशा : (वंदनाको अ‍ेक मुका मारते) अच्छा.. तो मतलब कोइ हे.. कमीनी तो फीर तुमने मुजसे जुठ क्यु बोला..? वंदु.. मे तुमसे आज बहुत नाराज हु.. मेरी तो सब बाते जानलेती हे.. तो तुमने मुजे अपनी दिलकी बात क्यु नही बताइ.. क्या मुजपे इतनाभी भरोसा नही हे..? तुमने मुजे आज हर्ट कीया हे..

वंदना : (सरमाते हसते) सोरी नीशा.. मुजे डर थाकी कही बातोही बातोमे तुम मम्मीको बतानादो.. इसीलीये..

नीशा : (थोडा नीरास होते) वंदना.. आज तुमने वाकइ मुजे हर्ट कीया.. अरे कमीनी तेरी मम्मीसे पहेले इस गांवमे तु ओर पुनो मेरी सहेली हो.. पुनोतो यहा नहीथी.. लेकीन मेने तुमसे कभी कोइ बात नही छुपाइ.. यहा तक की मेने तुमसे अपनी पर्सनल बातेभी सेर की.. अब मे तुजपे विस्वास करु भी तो कैसे..?

वंदना : (थोडी रुहांसी आवाजमे) नीशा.. आइ अ‍ेम सोरी.. बस अ‍ेक बार मेरी गलतीको माफ करदो.. में तुजे अपनी सब बाते सेर करुगी.. लेकीन अभी नही.. जब सब कंन्फोर्म होजायेगा तो बादमे तुजे सब सच बता दुगी.. (कान पकडते) सोरी..

पुनम : (हसते) भाभी.. अ‍ेक बार इस कमीनीको माफ करदो.. इस मामलेमे ये बहुत सर्मीली हे.. अभीतक अपने दिलकी बात केह नही पाइ..

नीशा : (हसते) हां.. पता हे मुजे.. अभी कंन्फर्म नही हुआ हे.. कमीनी आइन्दा ध्यान रखना.. वरना मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. गांड मारलुंगी तेरी.. हें..हें..हें.. तेरे भाइने मुजे गांड मारना सीखा दीया हे.. हें..हें..हें..

कहेते नीशा ओर पुनम जोरोसे हसने लगी तो वंदनाभी सरमाकर हसने लगी ओर नीशाकी पीठमे दांत पीसते अ‍ेक मुका जड दीया.. नीशा नीहायती अ‍ेक खुबसुरत गोरी पतली लडकीथी.. जो उनके बालभी उनकी नीतंब तक लंबे थे.. उनके मा बापकी हालत इतनी अच्छी नहीथी.. सुधीर ओर नीशाका परीवार अ‍ेक दुसरेको अच्छी तराह जानते थे.. नीशा अ‍ेकदम गोरी पतली ओर बहुतही आकर्सक थी इसीलीये नीशाकी सादी सुधीरके साथ उनकी डोक्टरीकी वजहसे करदी गइ थी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०४/२

लेकीन पहेली रातमेही नीशा नीरास होगइ.. क्युकी उनकी खुबसुरती ही इतनीथी की सुधीर उनको देखतेही जड गयाथा.. सुधीर देवायतके साथ पढनेकी वजहसे उनका दोस्तभी था.. उनके होर्मोन्समे कुछ गडबडी थी.. उनको लडकीके बजाये लडके ज्यादा पसंद थे.. जीनकी वजहसे बस अ‍ेकही गलत आदतथी.. वो अपनी गांड मरवानेका सौकीन था.. वो नीशाको संतुस्ट नही कर सकता था..

उनका लंड बडी मुस्कीलसे खडा होताथा.. जो कोइ बहुतही खुबसुरत लडकीको देखता.. ओर वो फोरनकी जड जाता.. नीशा पहेली रातमेही सुधीरको पहेचान चुकीथी.. ओर उनका नतीजा.. चारुसे देवायतके व्यक्तीत्व ओर उनके दमदार लंडकी बाते सुनकर वोभी देवायतकी ओर ढलने लगीथी.. चारुसे उनकी अच्छी पटती थी.. तो चारुने नीशाको बता दीया थाकी देवायतके साथ उनका फीजीकल रीलेशन हे..

आज गांवसे दुर भानुके घरभी सुबहसे ही वहाका माहोल खुसनुमां लग रहाथा.. सबके दिलमे आज अ‍ेक अलगही अ‍ेक्साइटमेन्ट फील हो रहीथी.. ओर खास करके.. भावना सरला.. ओर लताके दिलमे.. तो दुसरी ओर नीलमभी बहुतही खुसहो रहीथी लेकीन अपनी खुसी चहेरेपे जाहीर करना नही चाहतीथी.. जबसे अ‍ेक बार धिरेनके साथ फोनपे बात करली ओर अपने प्यारका लजहार करलीया..

ओर जब नीलमके साथ कारमे धिरेनने छेडछाडकी तबसे नीलमका दिल अपने हाथोमे नही रहा.. तबसे उनकी कामवासना बढ गइथी.. ओर वो बहुतही अ‍ेक्साइटेडके साथ वापीस धिरेनसे फोनपे यातो उनसे रुबरु मीलके बात करना चाहती थी.. लेकीन उसे फोनपे बात करनेका मौका नही मील रहाथा.. आज सुबहशी सब चाइ नास्ता करके खडे हुअ‍े तब भानु तो खेतोपे चला गया.. तब भावनाने अपनी बच्चीको दुध पीला दीया..

फीर भावेश ओर बच्चीको बहार खटीयापे सरलाके पास उसे संभालनेको देदीया.. फीर भावु लता रमा अपने बाकी रेह गये कपडे पेक करने लगी.. तो नीलम चाइ नास्तेके बर्तन धोने लगी.. पीछले अ‍ेक घंटेसे तीनो सब सामान पेक कर रही थी.. तभी बच्चीकी रोनेकी आवाज आइ.. तो भावना ओर लता दोनो काम छोडकर बच्चोको लेकर लताके रुममे चली गइ.. तो रमाभी कीचनमे सब काम समेटने लगी..

ओर भावना रुममे आतेही ब्लाउस उचा करके बच्चीको दुध पीलाने लगी तो लताभी भावेशको अपनी बगलमे लीटाकर सुलाने लगी.. तभी भावेशभी लताके बुब्सपे मुह मारने लगा.. जीसे देखकर लता सरमके मारे पानी पानी होगइ.. ये पहेली बार नहीथा.. लेकीन आज भावनाके सामने भावेशकी इस हरकतकी वजहसे लता सरमा रहीथी.. उसीने जब कोइ नहो होता तब भावेशको अपने बुब्स चुसवानेकी आदत डाली थी..

भावना : (हसते धीरेसे) लता.. अभी मौका हे.. भावेशको अपना दुध पीलाते प्रेक्टीस करले.. हें..हें..हें.. देख तेरा दुधु ढुंढ रहा हे.. कही हमसे छुपके तु इसे दुधतो नही पीलाती.. हें..हें..हें..

लता : (सर्मसार होते हसते) भाभी.. आपभीनां.. मुजे नही पीलाना दुध.. मे कोइ इसे दुध नही पीलाती.. बस येतो मुजे आप समजकर अ‍ैसी हरकत करता रहेता हे.. भाभी.. अ‍ेक बात कहु..? क्या आपकी मेरे जेठसे कुछ बात हुइ..?

भावना : (नीरास होते) नही लता.. तुमभी जानती हे इधर सभी होते हे.. तो मे उनसे कैसे बात करती..? लता क्या तुम लोग आये तब उनसे तेरे साथ कोइ बात हुइ..?

लता : (हसते) नही भाभी.. वो नीलम साथमे थी.. तो में उनसे कैसे बात करती..? भाभी.. वहा आपको बहुत मौका मीलेगा.. बस अ‍ेक बार अकलेमे उनसे बात करलो..

भावना : (सरमाते हसते) चल देखती हु.. मेरी छोड.. तु बता.. कल अ‍ेक रात वहा रुककर आइ.. क्या लखनसे अकेले मीलीकी नही..? आइ मीन.. तुम दोदोने.. कुछ कीया बीयाकी नही.. सच बताना.. हें..हें..हें..

लता : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे हसते) भाभी.. वो बहुत ठरकी हे.. उनको मौका मीलेतो वो कैसे जाने देते.. रातको हमारे कमरेमे घुस आये.. मुजेतो बहुत ही डर लगा.. वो कमीनी नीलमभी तो साथमे थी..

भावना : (उत्सुक्तासे धीरेसे) अरे उसे गाली क्यु देती हे..? नीलमका कैसा डर.. कही बहार चले जाते.. ओर वोभी तो कमीनी जवान होगइ हे.. उनकाभी अब खयाल रखना पडेगा.. तु बताना कुछ कीया दोनोने..?

लता : (सर्मसार होते धीरेसे) हां.. भाभी सब सो गये तब वो मुजे होलमे लेकर गयेथे.. ओर वहा दोनोने होलमे सोफेपे अ‍ेक बार करलीया.. जालीमने कीतनी बेहरेमीसे कीया.. मुजेतो नीचे दर्द होने लगाथा.. लेकीन भाभी.. हमे नीलमपे ध्यान रखना पडेगा.. वो धिरेनकी नीयत मुजे ठीक नही लगती.. ओर ये कमीनीभी उसे लाइन दे रही हे.. मुजेतो लगता हे दोनोका टाका भीड गया हे..

भावना : (हसते) क्यु..? इन दोनोने कुछ कीया हे क्या..? जो तुम अ‍ैसा केह रही हो.. कही तुमने कुछ देखतो नही लीया.. मुजेभी इन लडकीकी नीयत ओर उनकी चाल चलन ठीक नही लगती..

लता : (धीरेसे) भाभी जब हम सब खरीदी करते रातको आ रहेथे तब नीलु ओर धिरेन साथमे ही बैठेथे.. ओर धिरेन पता नही नीलुको कहा कहा छु रहाथा.. मुजेतो कहेनेभी सर्म आती हे.. कभी उनके बोबे तो कभी गलेमे चुमताथा.. ओर अ‍ेक बारतो नीलुके नीचेभी हाथ डाल दीया था.. ओर ये महारानीभी उनको हस हसके ना जाने क्या क्या कर रहीथी.. दोनोही लीप कीस कर रहेथे.. इसीलीये केह रही हु..

भावना : (हसते धीरेसे) लता अ‍ेक बात कहु..? जब हम दोनो बहेने कोलेजमे थी तब हम दोनोकाभी बहुत मन कर रहाथाकी कोइ हमेभी अ‍ैसे प्यार करे.. लेकीन इस मामलेमे मेरा नसीब फुटा हुआथा.. ओर मंजु बडी नसीब वालीथी.. उसने ओर जीजुने सादीसे पहेले बहुत प्यार कीया हे.. मौका मीलतेही दोनोही फीजीकल हो जाते..

ओर तुमने भीतो लखनके साथ सादीसे पहेले सब कुछ करलीया हे.. तो फीर हमे नीलमपे क्यु पाबंधी लगानी हे..? उनकीभी लाइफ हे उनकेभी सपने हे.. लता.. अ‍ेक बात कहु.. उसेभी अपनी कीस्मतपे छोड देनी चाहीये.. अब वोभी जवान होगइ हे.. साली जवानी चीजही अ‍ैसी हे.. इनमे हमभी बाकात नही हे..

लता : लेकीन भाभी.. धिरेनकी अभी पुनोदीदी के साथ सादी हे.. ओर उनके साथ ये सब..?

भावना : लता.. वो मेरा भाइभी हे.. ओर भाइसे पहेले वो अ‍ेक मर्द हे.. अगर हम हमारी सादीके बावजुदभी दुसरे मर्दको प्यार कर सकती हे तो मर्दको क्यु छुट नही मीलनी चाहीये.. हमे उनकीभी भावनाओका खयाल रखना हे.. अगर मर्द अ‍ैसे सोख रखते हेतो हमे इनमे कोइ अ‍ेतराज नही करना चाहीये..

ओर क्या पता तुजेभी सादीके बाद कीसी ओरसे प्यार होजाये..? मे भी ओरत हु.. ओर तुम मेरी बेस्ट सहेलीके साथ मेरी दीदी भी हे.. समज गइनां..? ओर सच कहुतो आज कल सबको अ‍ैसेही रीस्तोमे प्यार करना पसंद हे..

लता : (आस्चर्यसे) भाभी मे कुछ समजी नही आप क्या कहेना चाहती हे..?

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) देख लता.. अगर हम कोइ मर्दकी नजरको पहेचान जाती हेतो.. ओरतकी क्यु नही.. तुम बुरा मत मानना.. पीछले कुछ दिनोसे मे देख रही हु.. देवुके प्रती तेरी देखजेकी नजर कुछ बदल गइ हे.. ओर मे इसे बुराभी नही मानती.. क्युकी हमारा देवु हे ही अ‍ैसा.. कीसीकाभी मन मोहले..

लता : (सर्मसार होते नजरे चुराते) भाभी.. प्लीज.. ये आप क्या केह रही हे.. अभी लखनके साथ मेरी सादी होने वाली हे.. ओर आप अ‍ैसे केसे केह सकती हे.. वो मेरे जेठजी हे..

भावना : (हसते धीरेसे) लता बुरा मत मानना.. ओर मुजे इनमे कोइ अ‍ेतराजभी नही हे.. ओर तुम बेफीक्र रहेना.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रहेगी.. मेरी कसम खाकर कहेदे ये जुठ हे.. मेने तुम्हारी ओंखोमे देवुके लीये प्यार देखा हे.. ओर कल देवु गया तो मेने तेरा इसारा भी देखलीया था.. ये सच हेनां..?

लता : (सर्मसार होते धीरेसे) भाभी.. प्लीज.. अपनी कसम मत दो.. मे आपकी कसम नही खा सकती.. ओर आपसे जुठभी नही बोल सकती.. क्युकी मे इस घरमे सबसे ज्यादा आपको प्यार करती हु ओर आपपे ही विस्वास कर सकती हु.. मे सच कहुगी.. (नजरे जुकाते धीरेसे) आपकी सब बाते सच हे.. दिलके अ‍ेक कोनेमे लखनसे पहेले ही मुजे देवुभैयासे प्यार हे.. ओर मैने लखनसेभी इसीलीये सगाइ कीहे.. ताकी मे देवुभैयाके नजदीक रेह सकु.. पता नही भाभी मे सुरुसेही उनके प्रती आकर्सीत हु..

भावना : (हसते) लता.. तेरे मुहसे सब सच जानकर आज मे बहुत खुस हु.. आज मुजे यकीन होगया.. तुम पीछले जन्ममे जरुर मेरी बहेन होगी.. तुम यकीन मानोे हमारा देवु हम सबको खुस रख पायेगा.. अगर तुजेभी अपना प्यार मील जायेतो मुजे तुमसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. बस लखनको मत छोडना.. वो बहुत अच्छा लडका हे.. मेनेभी भानुसे इसीलीयेही सादी कीथी ताकी मेभी जीजुसे मीलती रहु..

लता : भाभी.. आप फीकर मत करना.. आप जबभी उधर आयेगी तब मे आप दोनोके मीलनका इन्तजाम करदुगी.. मेरे रुममे मेरे बेडपेही मील लेना.. मेतो आप जैसी बहेनको पकर धन्य होगइ.. अब मुजे कोइ चीन्ता नही हे.. लव यु भाभी..

भावना : (हसते) लता आइ प्रोमीस हम दोनोही अ‍ेक दुसरेका अ‍ैसेही खयाल रखेगी.. क्या अबभी मुजे भाभी कहोगी..? हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) सोरी दीदी.. लेकीन सबके होनेकी वजहसे मुजे आपको भाभीही कहेना पडेगा..

भावना : (हसते) क्यु.. ये रमातो तेरी भाभी हे.. सबको कहेदे भावना आजसे मेरी दीदी हे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) हां.. ये सही कहा आपने.. कोइ बात नही मौका मीलतेही मे सबको केह दुगी.. अब चलो ये दोनोतो सो गये हे.. अ‍ेरे दहेजका अभी बहुत सामान पडा हे.. उसेभी पैक करले..

दोनोही बच्चेको सुलाकर वही रखा सब सामान पेक करने लगी.. अ‍ैसेही दोपहोर होनेको आइ तब रमा खाना बनाने लगी.. तो दुसरी ओर नीलमभी बर्तन धोकर कीचननमे रख रहीथी तब रमाने नीलमको कहा..

रमा : (रोटी बनाते) नीलु.. सब काम होगया हे तो अब तुमभी मेरे रुममे जाकर नहाले.. ओर नये कपडेभी वहीसे लेलेना.. ताकी दोपहरको चेन्ज ना करना पडे.. जा.. सुबहसे अ‍ैसेही घुम रही हे..

नीलम : (कुछ सोचते खुस होते) जी मम्मी.. अभी जाती हु..

कहेते नीलम जटसे खुस होते रमाके रुममे चली गइ ओर दरवाजा बंध करलीया फीर टोलीया लेकर फोन ढुंढने लगी.. तभी रमाका फोन उसे टेबलपे मील गया ओर वो फोन लेकर बाथरुममे घुस गइ ओर उनकाभी दरवाजा बंध करलीया ताकी कोइ बाथरुमके पाससेभी उनकी बाते सुन ना सके.. ओर उसने टोवेलको साइडमे रखकर धडकते दिलसे धिरेनको फोन लगा दीया.. तो कुछही देरमे धिरेनने फोन उठालीया..

धिरेन : (हसते) हेलो.. कोन.. नीलु..? मेने तेरा ये फोन नंबर सेव करलीया था..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) हां धिरेन.. मे नीलु बोल रही हु.. कैसेहे आप..? क्या कर रहे हो..? आप ओफीस चले गये..?

धिरेन : नही नीलु.. बस आधे घंटेके बाद नीकल रहा हु.. क्या तुम वहा अकेली हो..? कहासे बोल रही हो..? देखना बाबा कोइ तुजे देखना ले.. मे तेरे मामलेमे कोइ रीस्क लेना नही चाहता.. आइ लव यु..

नीलम : (धीरेसे) हां.. बाथरुममे नहाने आइ हु.. धिरेन आपकी बहुत याद आरही थी.. तो फोन करलीया..

धिरेन : (धीरेसे) नीलु मुजेभी तेरी बहुत याद आ रही हे.. कल पुरी रात नही सो सका तुमने मेरी नींद ओर मेरा चैइन चुरा लीया हे.. नीलु.. तुम बहुत खुबसुरत हो.. मुजे तुमसे सचमे प्यार होगया हे नीलु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच..

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) धिरेन.. आइ लव यु टु.. मेरीभी आपकी जैसी होलत होगइ हे.. मुजेभी आपसे प्यार हो गया हे.. क्या वहा आप मुजे मीलोगे..? अब यहा मन नही लगता..

धिरेन : नही नीलु.. वहा सबलोग होगे.. नीलु मुजे विडीयो कोल करनां.. मे तेरा दिदार करना चाहता हु.. मुजे तुमको देखना हे..

नीलम : (सरमाते हसते) जी.. अभी करती हु..

धिरेन : (विडीयो कोल आतेही) हाइ.. नीलु.. क्या आजु बाजुमे कोइ हेतो नही..? मतलब बहार रुममे..

नीलम : (सरमाते हसते) नही.. मेने रुमका दरवाजा बंध कीया हे.. बस लता दीदीका डर लग रहा हे..

धिरेन : नीलु.. वहाभी ध्यान रखना मुजसे बात मत करना.. उनसेतो मुजेभी डर लग रहा हे.. अबतो मे तुम सहेरमे आओगी तबही मीलुगा.. नीलु.. उस दिन कारमे बहुत मजा आया.. लेकीन लताभाभीने मुड खराब करदीया.. क्या सहेरमे मेरे साथ घुमनेतो आओगीनां..? मेने हम दोनोकी बहुत कुछ प्लानींग करली हे..

नीलम : (सरमाते हसते) मुजे क्या पता..? मे कोइ मीलने बीलने नही आउगी.. हें..हें..हें..

धिरेन : (जुठमुठ नाराज होते) ठीक हे तो फीर मे फोन रखता हु.. तुम सब अ‍ेक जैसी ही लडकीया हो..

नीलम : (हसते) अरे.. आपतो नाराज होगये.. ठीक हे.. वही मीलीगे.. लेकीन आपकोही कुछ जुगाड करना पडेगा.. वरना होस्टेलमे बीना पहेचान वालोके साथ नही भेजते.. वही होस्टेलमे दाखला ले रही हु.. जहा पुनमदीदी थी.. क्या वो होस्टेल आपने देखा हे..?

धिरेन : (हसते) हां.. तेरी सौतनको पहेले वही मीला था.. हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होते) धत्.. मे थोडीना उनकी सौतन हु.. हमारी सादी कहा हुइ हे.. धिरेन आपभीनां.. कुछभी बोलते हो.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) नीलु.. नही हुइ तो होजायेगी.. देखना मे तुजे यही सहेरमे रानी बनाकर रखुगा.. वोभी सबसे छुपाके.. क्या मुजसे सादी करोगीनां..? मेने सब इन्तजाम करलीया हे..

नीलम : (सर्मसार होते हसते) मुजे नही पता.. अभीतो पुनोदीदीसे भी सादी नही हुइ.. ओर नीकले मुजसे सादी करने.. क्या दो दो सादी करोगे.. आपकी दीदीको देखा हे..? हें..हें..हें.. सुनो.. अब मे फोन रखदु..? मुजे नहाना हे.. देर होजायेगी लता दीदी मुजपे सक करेगी..

धिरेन : (हसते) नीलु.. बस अ‍ेक कीस दे दोनां.. उस दिन दोनोने कीतना मजा कीयाथा.. प्लीज..

नीलम : (सर्मसार होते हसते) नही.. मुजे बहुत सरम आरही हे.. वोतो मेने थोडीना कीयाथा.. आपने मुजसे जबरदस्तीसे कीयाथा.. आप बहुत नोटी हो.. हें..हें..हें.. कोइ अपनी सालीके साथ अ‍ैसा करता हे.. अपनी होने वाली बीवीसे करलो..

धिरेन : (हसते) नीलु प्लीज.. सीर्फ अ‍ेक बार.. क्या तुम मुजसे प्यार नही करती..?

नीलम : (सर्मसार होते) हंम.. करती हु.. लेकीन सीर्फ अ‍ेक बार.. मुं..हां.. बुच.. बुच.. बुच.. बस..?

धिरेन : (दिलपे हाथ रखते) हाये.. नीलु डार्लींग आइ लव यु.. कपडोमे भी क्या मस्त लग रही हे.. जब हमारी सुहागरातमे तुजे बीना कपडे देखुगा तो कयामतही आजायेगी.. हें..हें..हें..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) धिरेन.. आप भीना.. अ‍ेक नंबरके.. मे फोन रखती हु.. गंदे कहीके..

धिरेन : (हसते) अरे सुननां..? मेतो मजाक कर रहाथा.. लेकीन नीलु मुजे तुमसे सचमे प्यार होगया हे.. ओर मेने हम दोनोके बारेमे बहुत कुछ प्लानींग करली हे.. हम सबसे छुपकर सादीभी करलेगे.. वो बाकीका मे तुजे बादमे बताउगा.. चल अब आखरी बार.. बस अ‍ेक बार उनके दर्शन करादे.. फीर फोन रख देनां.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते हसते) क्या..? कीसके दर्शन..? धिरेन आप हेनां बहुतही कमीने हो.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) वो.. तुम्हारे गोरे गोरे संतरे जेसे रसीले आम.. आइमीन तेरे बुब्सका दर्शन.. क्या मस्त हे.. उस दिन दबाया था मेने.. कीतने सोफ्ट हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) धिरेन अब आप कुछ ज्यादाही आगे बढ रहेहो.. तुम्हारी डीमांड बढतीही जा रहीहे.. मुजे बहुत सर्म आरही हे.. पता हे मुजे.. वो.. वो कारमे भी आप.. इनके साथ छेडछाड कर रहेथे..

धिरेन : (हसते) नीलु तो फोनपे थीडाना छेडछाड करुगा.. बस सीर्फ देखनाही तो हे.. प्लीज.. वरना तुमसे बात नही करुगा.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते हसते) धिरेन.. प्लीज.. बहुत देर होगइ हे.. अभी मम्मी बुलायेगी.. मान जाओ प्ली..ज..

धिरेन : (जुठ मुठका मुह बीगाडते) ठीक हे.. रखदे फोन.. मुजे तुमसे बात नही करनी..

नीलम : अरे यार आपतो बात बातमे नाराज होते हो.. धिरेन प्लीज मुजे बहुत सर्म आ रही हे.. ठीक हे.. लेकीन सीर्फ अ‍ेक बार ओर ये आखरी बार फीर आप कोइ डीमांन्ड नही करोगे.. मे फोन रख दुगी..

धिरेन : (हसते) ठीक हे.. फीर हम जब मीलेगे तब तुमसे बदला ले लुगा.. हें..हें..हें.. दीखादो.. अपना टीसर्ट ही नीकालदो.. बस.. फीर फोन रख देना..

नीलम : (सर्मसार होते) अब कोनसा बदला लेना हे.. आप बहुत नोटी हो.. मुजसे हर काम करवा लेते हो..

कहेते नीलम सर्मसार होते सामने फोन सेट करके रख देती हे ओर सरमाते हुअ‍े धीरेसे अपना टीसर्ट नीकालने लगती हे.. धिरेनकी अ‍ैसी डीमांडपे वोभी रोमांचीत ओर उतेजीत होने लगती हे.. ओर सच कहोतो धिरेनकी अ‍ैसी डीमान्ड उसे अच्छी भी लगती हे.. नीलमने पुरा टीसर्ट नीकाल दीया उसने ब्रा नही पहीनीथी तो उनके गोरे गीरे छोटे संतरे बहुा उछलते दीखने लगे ओर नीलमने उसपे अपने दोनो हाथ रख दीया फोर फोनमे देखकर सरमाती सरारतसे मुस्कराती रही..

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धिरेन : (हसते) अरे नीलु हाथ हटालोनां.. प्लीज.. देखना वरना मीलोगी तब उसे मसल दुगा.. हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होते) धिरेन.. आपभीनां.. (हाथ हटाते) बस.. अब देख लीयानां..? चलो मुजे नहाना हे फोन रखती हु..

धिरेन : नही.. थोडी देर अ‍ैसेही रहोनां.. नीलु तुम मोबाइलको थोडा नीचे करके नहालो.. मुजे देखना हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (जुठा गुसा करते) धिरेन.. अब आप कुछ ज्यादाही आगे बढ रहेहो चलो मे फोन रखती हु.. मम्मी बुला रही हे.. बाय..

कहेते नीलमने फटाफट फोन काट दीया ओर हसने लगी.. फीर फोन साइडमे रखकर पुरी नंगी होगइ ओर नहाने लगी.. तभी उनको कुछ याद आयातो सरमाते हसने लगी.. ओर फोनको सेट करके विडीयो रेकोडींग चालु विडीयो क्लीप बनाने लगी.. जब साबुन लगा रहीथी तब उनके बुब्सपे साबुन लगाते कुछ ज्यादाही मसलकर साफ करने लगी.. जैसे उनके बुब्सको ओर गोरा करनेकी कोसीस कर रहीहो..

तभी बहारसे रमाने दरवाजा बटखटाया तो नीलमने सुनलीया ओर गभराकर फोनको बंध करदीया ओर फटाफट नहाने लगी.. ओर नहाकर बहार आगइ.. बहार आतेही फोनको रखनेसे पहेले विडीयोकी वो क्लीप धिरेनको सेन्ड करदी.. ओर फोनसे डीलीट करदी.. फीर फोन अपनी जगाहपे रखदीया ओर अपने कपडे पहेनने लगी.. जब कपडे पहेन लीये तब उसने दरवाजा खोल दीया तो रुममे रमा आगइ..

आतेही बेडपे बैठकर नीलमको घुरने लगी.. तो अ‍ेक बारतो नीलमकीभी गांड फटने लगी.. ओर रमा उसे घुरते हुअ‍े वापस कीचनमे चली गइ.. तो नीलमने राहतकी सांसली.. ओर गाना गुनगुनाते अपने बालोको सवारने लगी.. जब बाल सवारके घुमी तभी सामने दरवाजेपे लता अपने दोनो हाथ अपनी कमरपे रखते नीलमको अ‍ेक नजरसे घुर रहीथी.. ओर अ‍ैसेही कमरपे हाथ रखते लता धीरेसे अंदर आगइ....

कनटीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०५/१

आतेही बेडपे बैठकर नीलमको घुरने लगी.. तो अ‍ेक बारतो नीलमकीभी गांड फटने लगी.. ओर रमा उसे घुरते हुअ‍े वापस कीचनमे चली गइ.. तो नीलमने राहतकी सांसली.. ओर गाना गुनगुनाते अपने बालोको सवारने लगी.. जब बाल सवारके घुमी तभी सामने दरवाजेपे लता अपने दोनो हाथ अपनी कमरपे रखते नीलमको अ‍ेक नजरसे घुर रहीथी.. ओर अ‍ैसेही कमरपे हाथ रखते लता धीरेसे अंदर आगइ....अब आगे

लता : क्यु महारानी.. आज नहानेमे इतनी देर कैसे लगादी..? ओर तुमने रुमका दरवाजा क्यु बंध कीयाथा..? आज कुछ ज्यादाही खुस लग रही हो..? कही धिरेनका फोन बोन तो नही आगया..?

नीलम : (थोडी गभराते) अरे नही नही.. दीदी.. वो..वो मुजे नहाकर सीधे कपडे बदलने थे तो.. दरवाजा बंध रखाथा.. आपतो पीछेही पड गइ हे..

भावना : (हसते अंदर आते) लता क्यु बच्चीको तंग कर रही हे.. दरवाजा बंध रखातो क्या हुआ..?

लता : (नीलमको घुरते) भाभी.. अब ये कोइ बच्ची वच्ची नही हे.. इनपे भी नइ नइ जवानी चडी हुइ हे.. आज कल ये कुछ ज्यादाही उछल कुद कर रही हे.. मुजे तो दालमे कुछ काला लग रहा हे.. क्यु नीलु..? सच बताना.. क्या धिरेनका फोन आया थानां..?

नीलम : (मायुस होते गभराते) नही.. छोटी मम्मी.. अ‍ैसा कुछ भी नही हे.. दीदी खामखा मुजपे सक कर रही हे.. ना उनका फोन आया हे ओर मेरे पासतो फोन ली नही हे..

भावना : (सरपे हाथ घुमाते) चल कोइ बात नही.. बेटा इस उमरमेही तुजे खयाल रखना हे.. ओर सभी लडके अच्छे नही होते.. ओर तुजेतो अभी होस्टेलमे रहेना हे.. तो तुजे वहा अपना बहुत खयाल रखना पडेगा.. कही तेरा पैर बैर फीसल गया तो तेरी मम्मी कही मुह दिखाने लायक नही रहेगी.. समज गइनां..? चल खाना खाले.. फीर हमारी थोडी मदद भी करदे..

लता : (नीलमकी ओर घुरते) भाभी इनको ज्यादा सरपे मत चढाना.. इनपे नजर रखनी पडेगी.. आपको इनकी करतुतके बारेमे पता नही..

फीर तीनो ही बहार आजाती हे.. ओर सभी खाना खाने बैठ जाते हे.. तब नीलमकोभी अपनी गलतीका अहेसास होने लगा.. उसने धिरेनके साथ फोनपे कुछ ज्यादा देर तक बाते करलीथी.. धिरेनकी बातसे उनको बहुत कुछ उमीद जगीथी.. वो मनही मन धिरेनके साथ घर बसानेका सपना देखने लगी.. अबतो धिरेन नीलमके दिलो दिमागमे पुरी तराह हावी हो चुकाथा.. ओर उसे सीर्फ धिरेनही दीखाइ दे रहाथा..

तभी दुसरी ओर सुबह देवायत ओर राजीव अपने खेतोपे चले गयेथे.. तभी वहा रामुकाका भानु ओर लखनभी बैठे थे.. तभी ये दोनोभी वहा जाकर बैठ गये.. तो रामुकाका राजीवको देखते ही खुस होगये ओर उनके गले लग गये.. फीर दोनोने अ‍ेक दुसरेका हाल चाल जाना.. ओर भानु लखनने भी राजीवके पैर छुलीये.. फीर भानु मालतीको आवाज देकर चाइके लीये कहेता हे.. ओर सभी वही खटीयापे बैठ जाते हे..

भानु : भाइ.. अब वो छोटुका प्लास्ट नीकलवाने जाना हे.. अब उनकाभी टाइम होगया हे.. बेचारा कबतक खटीया पे पडा रहेगा..

देवायत : भानु बस दो दीन ठहेरजा.. ये सब सादीका नीपट जाये तो तुमही उनको सहेरमे लेजाकर सबकुछ करवाले.. वरना वहाके डोक्टरको फोन करके पुछले तो सुधीरके पास जाकर ही इनका प्लास्टर नीकलवा देगे..

लखन : (हसते) भाइ वोतो ठीक होगया हे.. अबतो प्लास्टर होनेके बावजुद भी वो चलता हे.. इनमे कुछ नही होता.. यही सुधीभाइके वहा जाकरही नीकलवालो..

देवायत : लखन यहाभी सबको कहेदे सादीमे वही खानेके लीये आजाये..

भानु : (हसते) भाइ वोतो सबको केह दीया हे.. अबतो हमभी घरके सभी लोग सामको इधर आजायेगे..

हरीया : (हाथ जोडते आते) मालीक घरपेभी कुछ काम होतो कहेना.. मे अभी मंडप वालाको लेकर घरही जा रहा हु.. वहा सब कंपलीट करवा दुगा.. कुछ ओर काम होतो बताइअ‍े..

भानु : भाइ वो हलवाइ वालेको भी सामको उधर बुलाया हे.. कुछ सामान लेना हे.. तो जाना पडेगा..

देवायत : भानु तु रहेने दे वो सब रमेश देख लेगा.. मेने उनको बोल दिया हे.. ओर वो सुधीरभी सामको आ रहा हे.. मेने सबको केह दीया हे.. अब हमे कुछ कामही नही हे.. ओर वो पंडीतकोभी मंजुने केह दीया हे.. पुजाका सामानभी वोही लेकर आयेगा.. तो हमे कामही क्या हे.. ओर लोगभी कीतने हे.. सीर्फ गांवके लोग ओर हम घरके लोगही तो हे.. ओर हां.. तुजेभी तेरे गांवमे कीसीको कहेना होतो केह देना..

भानु : (हसते) नही भाइ.. सीर्फ दो लोगोको ही बोला हे.. वहा हे ही कौन मेरातो सबसे ज्यादा पहेचान वाले यहा हे.. जो आपनेभी उसे बोल दिया हे.. हें..हें..हें..

तभी मालती सबके लीये चाइ लेकर आगइ ओर देवायतको देते उनकी ओर कातील स्माइल करने लगी.. तभी देवायतने नजरोसे राजीवकी ओर इसारा करदीया तो मालती चुपचाप सबको चाइ देकर नीकल गइ.. तबतक राजीव ओर रामुकाका सब पुरानी बाते याद करके अ‍ेक दुसरेके साथ हस हसके बाते कर रहेथे.. तभी देवायत खडे होकर छोटुके रुमकी ओर चला गया.. तो छोटु ओर रीटा वही बेठे थे..

तो देवायतको देखतेही रीटा सरमाकर हसने लगी.. ओर कीचनमे जाने लगी.. तभी देवायतने छोटुको कुछ पैसे दीये.. ओर यहा सुधीरसे प्लासटर नीकलवानेकी बात करली.. जीसे सुनकर छोटु ओर रीटा दोनोही खुस होगये.. तभी रीटा देवायतके लीये पानी लेकर आगइ ओर देवायतको पानी देते अपने दोंतोसे नीचेहे होंठ दबाते फीर अपनी जीभ अपने होठोपे फीराने लगी.. मानो वो देवायतको कुछ हिन्ट देना चाहती हो..

छोटु : मालीक.. अबतो में ठीक हो गया हुं.. सब काम कर सकता हुं.. तो मेरी बीवीभी अकेली बोर होजायेगी.. क्या येभी खेतोमे कामपे लग जाये..? मेरे काममे हाट बट जायेगा..

देवायत : देख छोटु.. अब ये तुम्हारा ही खेत हे.. यहा कीसीको कुछ पुछनेकी जरुरत नही हे.. तुजे जैसे ठीक लगे अ‍ैसा करना.. तुम दोनोकोही पगार मीलेगी.. अबतो तुम दोनोको यही रहेना हे.. ओर इस लडकेको भी गांवकी स्कुल खुलतेही उनमे दाखला दीलवा देना.. इसेभी कुछ पढा लीखा बनाओ..

रीटा : (सरमाते कातीलाना हसते) मालीक आपकी महेरबानीसे यहा बहुत अच्छा काम मील गया हे.. ओर मे खानाभी बहुत अच्छा बनाती हु.. (सरमाते डबल मीनींग) वो मालतीसे भी अच्छा.. हें..हें..हें.. तो कभी कभी मालतीकी तराह मुजेभी मौका दीजीये.. बस अ‍ेक बार मेरे हाथोका खाना खालीया.. तो फीर मुजसे ही खानेके लीये कहेगे..

देवायत : (रीटाकी सब बाते समज गया.. हसते) ठीक हे रीटा.. बस अ‍ेक बार घरपे सादी होजानेदे.. अ‍ेक बार तेराभी खाना खाउगा.. देखता हु तु कैसा खाना मुजे खीलाती हे..

छोटु : (नीर्दोस भावसे) मालीक रीटा ठीक केह रही हे.. ये बहुत अच्छा खाना बनाती हे.. अ‍ेक बार इसे मौका देकर तो देखलो.. आपको नीरास नही करेगी.. हें..हें..हें..

रीटा : (कातीलाना नजरोसे हसते) देखा मालीक.. अबतो इन्होने भी केह दीया हे.. तो मुजे कभीभी बुला लीजीयेगा.. मे आपकी सेवामे हाजीर होजाउगी.. हें..हें..हें..

फीर देवायत रीटाके हाथोमें पैसा देकर वहासे नीकलने लगा तो रीटा देवायतकी ओर तीरछी नजरसे कामुक स्माइल करती रही.. वो यहा रहेकर अक्सर जमीला ओर मालतीको देवायतकी ओफीसमे जाते देखती रहेती.. ओर कइ कइ बारतो दोनोकी चीखे भी सुनलेती तब वो समज गइकी दोनोही मालीकसे चुदवाती हे..

ओर उपरसे छोटुने भी पैर टुटनेकी वजहसे रीटाको दो महीनोसे चोदा नही था.. तबसे रीटाकी प्यास बढ गइ थी.. ओर देवायतसे चुदवानेका मन बना चुकी थी.. इसीलीये आज मौका मीलतेही देवायतको इनडारेक्टली नीमंत्रण दे चुकीथी..

देवायत वापस आता उनसे पहेलेही लखन खेतोपे काम करने ट्रेक्टर चलाते दुर चला गयाथा.. तो भानु राजीव ओर रामुकाका अभीभी बातोमे मसगुल थे.. ओर देवायत चलकर खेतोकी ओर चला गया ओर सभी जगहका जायजा लेने लगा.. सभी मजदुरो खेतोपे काम कर रहेथे तो देवायतको देखतेही सब खडे होकर उनको जुकते प्रणाम करते रहे.. ओर देवायत ट्युबवेलकी रुमके पाससे गुजरा..

तो ट्रेक्टर वही बहार पडा हुआ मीला जो अभी लखन चला रहाथा.. वहा आसपास कोइ दिख नही रहाथा.. ओर रुमके अंदरसे कुछ आवाजे आ रही थी.. तो देवायतको कुछ आसंकाये हुइ.. ओर वो धीरेसे रुमके पीछे चला गया.. ओर पीछेकी खीडकीसे अंदर जांकने लगा.. तो अंदरका नजारा देखतेही चोंक गया.. क्युकी अंदर लखन कीसी मजदुरकी जवान लडकीके उपर चडकर उनको चोद रहाथा.. ओर वो लडकीभी हस हसके अपनी कमर उछालते लखनसे मजेसे चुदवा रहीथी..

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जीसे देखकर देवायतकी हसी नीकल गइ.. आखीर लखनभी तो उनकाही खुनथा.. तो वो कैसे इन सब चीजोसे बाकात रहेता..? ओर यहीतो जवानी हे.. इसी जवानीमे तो सब मोज मस्ती करनी होती हे.. ओर खुदके भी अ‍ैसी कइ ओरते ओर लडकीयोसे नाजायज रीस्ते हे.. वोभी जमीला ओर मालतीको अकस्र अपनी ओफीसमे बुलाकर उनकी चुदाइ कर लेताथा.. ओर अभी वो अ‍ेक नइ चुतका इन्तजाम करके आयाथा..

कइ मजदुरकी बीवीया जो सामनेसे आतीथी उनकोभी देवायत चोद लेता था.. गांवमेभी चारु रश्मीके अलावा जीनकी गोद भराइ नही होतीथी अ‍ैसी कइ ओरतोकी चुदाइ करके उनकी गोद भर चुकाथा.. जैसे देवायतका जन्मही इन सब चीजोके लीये हुआ हो.. तो वो लखनको इन सब चीजोके लीये कैसे मना करता..? यही सब सोचकर वो चुपचाप मुस्कुराते हुअ‍े वापस राजीव भानुके पास आकर बैठ गया..

फीर देवायतने सुधीरको फोन करके बात करली.. तो सुधीरने छोटुको क्लीनीकपे बुला लीया.. तो भानु छोटुको कारमे लेकर सुधीरके पास चला गया.. ओर सुधीनने अ‍ेक्सरेकी कोइ जरुरत नही हे कहेके छोटुका प्लास्टर काट दीया.. ओर आधे घंटेके बाद भानु छोटुको लेकर वापस खेतोपे आगया तब छोटुभी खुस था.. ओर देवायतके पांव पडते अपने रुममे चला गया.. तो रीटा ओर बच्चेभी खुस होगये.. ओर भानुने पुरे परीवारको खानेका न्योता भी देदीया.. दो पहोरको जब घर जानेका टाइम हुआ तब देवायतने भानुको कहा..

देवायत : (कारकी चाबी भानुको देते) भानु.. तु अब मेरी बडी कारही लेजा.. तेरी कार मुजे देदे ताकी घरके सभी लोग ओर सामान इनमे आजायेगे..

भानु : (की अ‍ेक्सेन्ज करते) हां भाइ यही ठीक रहेगा.. मे सामको चार बजे सबको लेकर वहा पहोंच जाउगा..

फीर भानु देवायतकी बडी कार लेकर चला गया.. ओर देवायतभी राजीवको लेकर वापस हवेलीपे आ गया.. वहा खुली हवामे बेठकर रामुकाकासे बाते करते राजीवभी खुस लग रहाथा.. फीर दोनोही फ्रेस होकर होलमे बैठ गये.. तब वंदना ओर चंपाभाभीके अलावा गांवकी सभी ओरते अपने घर जा चुकीथी.. फीर सभी लोग अ‍ेक साथ खाना खाने बैठ गये.. तब आज वंदना भी बार बार देवायतकी ओर नजरे चुराते खाना खा रही थी.. जब दोनोकी आंख मीलती तो वंदना सरमाते मुस्कराने लगती..

तो सृतीभी आज देवायतसे काफी सरमा रहीथी.. लखनभी खाना खाते रजीयाकी ओर चोर नजरसे देख लेताथा.. सबके दिलमे कोइना कोइ हलचल मच रहीथी.. सीर्फ दो लोगही सब जानते हुअ‍ेभी आरामसे मजा लेते खाना खा रहेथे.. अ‍ेकथी मंजु ओर अब दुसरी पुनम.. तो सृतीभी काफी कुछ जानती थी.. सभी खाना खाकर थोडा आराम करने अपने अपने रुममे चले गये.. तो पुनमने सृतीको अपने साथ बुला लीया..

तो सृती वंदना पुनमके साथ चली गइ.. तो नीर्मलाभी भुमीकाके रुममे आराम करने चली गइ.. राजीवको नीर्मलाने दवाइ पीलादीथी तो वो अपने रुममे जाकर सो गया.. ओर मंजु चंदा देवायतके साथ अपने रुममे चली गइ.. तब चंपाभाभी रजीया ओर दयाने भी खाना खाकर सब काम समेट लीया.. ओर तीनो दया वाले रुममे आराम करने चली गइ.. देवायत रुममे जातेही सो गया..

तो वंदना पुनमको वेक्स बेक्स लगाकर सही करने लगी.. ओर सृती दोनोसे बेडपे लेटकर बाते करती रही.. इधर भुमीके रुममे नीर्मलाने आतेही दरवाजा बंध करलीया ओर भुमीके पास बेडपे लेट गइ.. तो भुमीने हसते हुअ‍े नीर्मलाके मुहकी ओर करवट लेली.. तो नीर्मला सरमाकर हसने लगी.. ओर भुमीने उनकी कमरमे हाथ डालकर अपने तनसे चीपका लीया.. फीर नीर्मलाको अपनी बाहोमे भरलीया..

नीर्मला : (हसते) कमीनी अबतो ये आदते छोड.. हमारी लडकीयोकी भी सादी होगइ हे.. तु कीतनी ठरकी होगइ हे.. अब तुभी अ‍ेक लंडका इन्तजाम करले.. ताकी तुजे ठंडी करता रहे..

भुमीका : (हसते) नही नीमु.. हम दोनोने जींदगीभर अ‍ेक दुसरेका साथ देनेका वादा कीया था.. मुजे कीसीभी लंडकी जरुरत नही हे.. मे तुमसे मीलकरही संतुस्ट होजाती हु..

नीर्मला : (हसते) आइनो.. भुमी.. बस अबतो हम दोनोको अ‍ैसेही अ‍ेक दुसरेका खयाल रखना पडेगा..

भुमीका : (मुस्कुराते) क्यु..? क्या हमारा भाइ तुजे अब नही चोदता..? नीमु वो ठीकतो हेनां..? ओर हमारा देवुभीतो हे.. क्या उसे अब नही मीलती..?

नीर्मला : (नीरास होते) नही भुमी.. सब बीखर गया.. राजीवको ब्रेइनमे स्ट्रोक आया हे.. उनको अब ट्रेस नही लेना.. अगर मुजे चोदेगा तो उनका रक्तचाप बढ जायेगा.. ओर वो उनके लीये घातक होगा.. तु समज गइनां.. अब राजीव मेरे लीये कोइ कामका नही रहा..

जींदगीमे उसने मेरा खुब साथ नीभाया हे.. भुमी.. मेने उनके साथ सादी करली.. तबसे आज तक उन्होने मुजे कोइ सवाल नही पुछा.. बस वो मुजे सीर्फ खुस रखना ही जानते हे.. कभी कभी देवुसे मीलती थी तो मुजे राजीवको धोखा देनेका दुख होता था..

भुमाका : नीमु.. अ‍ेक बात कहु..? तुजे नही लगता तुमने किशनको सादीके लीये ना कहेते बहुतही जल्द बाजीमे फैसला लीया हे..

नीर्मला : (मुस्कुराते) हां.. भुमी.. मेने बहुत बडी गलती कीहे.. पर क्या करती..? विमलाकी बातोने मेरा दिमागही सुन.. करदीया था.. मे कुछ सोचही नही पा रहीथी.. ओर उपरसे जवानीकी ये तनकी आग.. मे किशनके बगैर बहुतही तडपी हु.. जब सारी जानकारीया मुज तक पहोंची तबतक बहुत देर हो चुकीथी..

तबतक मे ओर राजीव फीजीकल रीलेशनमे आ चुकेथे.. जब राजीवने मुजे प्रेगनेन्ट करदी तब मेरे पेटमे उनकी बेटी यानी मेरी भावु पल रहीथी.. तो मेने राजीवसे सादी करली.. अब तुही बता मे क्या करती..? तु बता तुम दोनो कीसीको क्यु नही मीले..?

भुमीका : (मुस्कुराते) नीमु.. तुमतो जानती हे.. वो विरजीने मेरे साथ क्या कीया.. फीर मे सबको क्या मुह दीखाती.. मुजे बहुत सरम आ रहीथी.. ओर नरेशभी नही चाहताथा की अब हम कीसीसे मीले.. बस सीर्फ किशन सहेर आता तब मीलताथा.. ओर राखीके दिन मुजे अचुक मीलता.. वो राखी बंधवाने आजाता..

नीर्मला : (मुस्कुराते) कीतना अजीब हेनां..? खुदकी बहेनको बीवी बनालीया.. ओर मुहबोली बहेनके साथ बहेनका हर रीस्ता नीभाया.. मे कीशनको कभी समजही नही पाइ.. विमलासे सादी करकेभी वो मुजे बहुत चाहता था.. जब बाबाने श्रापका नीवारण करदीया तब मुजसे फीरसे अपनानेके लीये ओर सादी करनेके लीये कहेने आयाथा.. तब मेनेही उसे मना करदीया..

भुमीका : (हसते) तो क्या प्रोबलेम थी.. तु करलेती किशनसे सादी..

नीर्मला : (सरमाते मुस्कुराते) नही.. भुमी.. क्युकी तबतक मे ओर राजीव रीलेशनमे आगये थे.. हम दोनो बहुत आगे बढ चुके थे.. तब हम दोनोके बीच भाइ बहेनका रीस्ता ना रहेके बीना सादीही अ‍ेक पती पत्नीकी तराह जी रहेथे.. भुमी.. उन्होने मेरी हर जरुरतको पुरा कीया..

फीर चाहे घर चलानेकी बातहो या ये तनकी आंग मीटानेकी बातहो.. राजीवने मुस्कील वक्तमे मेरा खुब साथ दीया.. तो मे उनको धोखा देना नही चाहती थी.. तो किशन ओर मुजमे क्या फर्क रेह जाता.. मेरा राजीव.. ओर अभी भी मेरा साथ दे रहा हे.. आजभी मुजे इतना प्यार करता हे..

भुमीका : नीमु.. तुम बहोत नसीबवाली हो.. जो अभी तक राजीवके साथ हो.. मेरा नरेशतो मुजे सृती बाराह सालकी थी तबही मुजे छोडके चला गया.. तब किशनने मेरा खुब साथ दीया.. उन्होनेही सृतीको पढाया लीखाया.. हमारे घर चलानेका खर्चा देता रहा.. मेरी सृतीको उन्होने ही डोक्टर बनाया.. ओर अब हमारा खयाल हमारा देवु रखता हे.. बीलकुल हमारे किशनपे गया हे.. बस अब मेरी सृतीकी सादी होजाये.. तो गंगा नहाये..

नीर्मला : (कुछ सोचते) भुमी अगर तुम बुरा ना मानोतो अ‍ेक बात कहु..? ये लोग अ‍ेक रोयल फेमीली हे.. इन लोगोमे तो दुसरी तीसरी भी सादी कर सकते हे.. तो फीर.. सृतीके लीये हमारे देवुके लीये कुछ सोचनां..? वैसेभी देवु तुम दोनोका खयालतो रखही रहा हे.. ओर सृतीको कहा इधर रहेना हे.. वहाभी उनकी क्लीनीक हे.. तो देवुसे सादी करके सृती वही रहेगी.. ओर उनका घरभी बंध जायेगा.. क्या कहेती हो..? कहोतो मे मंजुसे बात करु..?

भुमीका : (सरमाते हसते धीरेसे) नीमु.. मे तुमसे यही बात कहेने वालीथी.. लेकीन सोचतीथी तुमसे कैसे कहु..? सुन.. जब चार दिन पहेले हम सब चंदाकी सादीमे गयेथे.. तब खुद बाबाने ये बात मंजुको कहेदी.. की सृती इस घरकी बहु बनेगी.. तो मंजुने खुद मेरे पास इस बातका प्रस्ताव रखा.. ओर मेने उसे हां केह दीया.. नीमु.. तेरी बात सच होगइ.. मेरी सृतीभी इस घरकी बहु बनेगी.. मेरे देवुकी रानी..

नीर्मला : (खुसीसे भुमीको बाहोमे भीचते) कमीनी.. तो अबतक तुमने मुजे कहा क्यु नही..? भुमी.. मे बहुत खुस हु.. हमारी सृतीकाभी घर बस जायेगा.. क्या इस बारेमे तुमने देवुसे बात की..?

भुमीका : (हसते) नही.. अभी उनकोतो कुछ पताभी नही हे.. ओर तुमभी खयाल रखना अभी कीसीको ये बात मालुम नही हे.. मंजुने कहा हे.. सबको सरप्राइज देनी हे.. मे सोच रहीहु अगर मामला यही आगे बढेतो दोनोकी सगाइ इधर ही कर देना चाहती हु.. बस अभी इस बातपे सृती ओर देवुको खुद आगे बढने दो.. मेने ओर मंजुने मीलकर कुछ प्लान कीया हे.. जब दोनो अ‍ेक दुसरेको प्यार करने लगे तब हम दोनोकी सादी कर देगे.. बोलो.. क्या कहेतीहो तुम..?

नीर्मला : (सरमाते हसते) हां तो सहीतो हेनां.. मेरी मंजु इस मामलेमे बहुतही समजदार हे.. भुमी तुम इस बातपे आगे बढना.. आज तुमने मुजे बहुत बडी सरप्राइज के साथ खुसखबर देदी हे..

भुमीका : (सरारतसे मुस्कराते) तो चल इसी खुसीमे कुछ होजाये.. नीमु कीतने दिन हो गये हम नही मीले.. चलना.. मुजे अ‍ेक बार ठंडी करदे.. फीर मे तुजे कर दुगी..

नीर्मला : (सरमाते) कमीनी तुजेतो कोइना कोइ बहाना चाहीये.. वहा आती हु तबभी मुजे नही छोडती..

भुमीका : (हसते) तो कमीनी इस उमरमे मे कहा लंड ढुंढने नीकलु.. हें..हें..हें.. तुही तो अ‍ेक सहारा हे..

नीर्मला : (हसते) कहोतो देवुको बुलालु.. हें..हें..हें.. वो इतना सक्षमहे की हम दोनोको ठंडी कर देगे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) कमीनी कुछतो सरम कर.. वो मेरा भतीजा हे.. ओर तेरा दामाद हे.. क्या तु उसे अबभी चुदवाती हे..? बात करती हे..

नीर्मला : (बातको वही छोडते) चल.. कपडे नीकाल.. कुती तुने तो बातोसे ही मुजे गरम करदीया.. हें..हें..हें..

भुमीका : (अपनी सारी नीकालते) बातोसे.. या.. देवुकी बातोसे.. कमीनी सच बताना.. क्या अबभी उनसे चुदवाती हेनां..?

नीर्मला : (अपने कपडे नीकालते) कमीनी दामाद हे वो मेरा.. अगर चुदवाभी लीया तो मेरा हक हे उनपे.. हमने भी घरके मंदिरके सामने आपसमे गांधर्व विवाह कीया हे..

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दोनोही बेडपे बैठकर अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमने लगी.. फीर भुमीका ओर नीर्मला दोनोही कपडे नीकालकर सीक्स नाइन पोजीसनमे होजाती हे.. ओर अ‍ेक दुसरीकी चुतको छेडने लगती हे तब कुछही देरमे दोनोही सीसकारीया करते अ‍ेक दुसरेकी चुतमे जीभ घुसाके चुतके दानेको छेडने लगी.. नीर्मला अब भुमीकासे देवुके साथ अपने रीलेशन छुपाना चाहती थी.. तो दुसरी तरफ भुमीकाभी देवुके बारेमे ज्यादा बात करना नही चाहती थी.. फीर अचानक दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने बैठ गइ..

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ओर अ‍ेक दुसरोकी चुतमे उंगली डालकर जोरोसे हिलाते अंदर बहार करने लगी.. तब कुछही देरमे भुमीकाकी चुतने जवाब दे दीया.. तो नीर्मलाकी चुतसेभी अ‍ेक फवारा नीकल गया.. ओर दोनो जडकर सांत होगइ.. फीर दोनो नंगीही बाथरुममे चली गइ.. तब अंदर जातेही भुमीकाने नीर्मलाको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया ओर नीर्मलाके होंठ चुमने लगी.. तब नीर्मला भी भुमीके होंठ चुमते उनका साथ देने लगी..

भुमीका : (लडखडाती आवाजमें) नीमु.. अब मुजसे अकेलापन नही सहा जाता.. चलना मेरे साथ रहेने आजानां.. वहा घरपे मेरा बेल्ड वाला डोल्डोतो हे.. हम अ‍ेक दुसरेको चोदकर ठंडी करते रहेगे..

नीर्मला : (चुमते) भुमी.. मेरीभी वोही हालत हे.. लेकीन मे राजीवको छोडकर नही आ सकती.. हम हमेसाकी तराह हप्ते दस दीनमे मीलती रहेगेनां.. अब लंडके बीना बहुत मुस्कील लग रहा हे.. आदतजो पड गइ हे..

भुमीका : (धीरेसे कानमे) नीमु.. मेरी मान.. तुम हमारे देवुको फीरसे सेट करले.. क्यु उनसे रीलेशन खतम करलीये.. पहेलेभी उनसे तुम चुदवा चुकी हो.. कमसे कम तेरे नसीबमे तो लंड होगा.. क्या कहेती हो..?

नीर्मला : (उतेजीत होकर होंठ चुमते) नही.. अब दामाद हे वो मेरा.. मेरा दिल नही मानता.. तबकी बात कुछ ओर थी.. क्या तेरा दिल करता हे..? तो तुमही उसे सेट करले.. वो तुम मां बेटी दोनोको खुस रखेगा.. भुमी.. कितना दमदार लंड हे उनका.. बस अ‍ेक बार अपनी चुतमे लेगी तो उनकी दिवानी होजायेगी.. किशनसेभी बडा ओर मोटा हे.. मे कइ बार उसे अपनी चुतमे ले चुकी हु.. मानजा तु..

भुमीका : (अलग होते सरमाते) नही.. नीमु.. मेरा भतीजा हे वो.. ओर अब उपरसे मेराभी दामाद होजायेगा.. पहेले कहा होतातो कुछ सोचती.. तुम ठीक केह रही हो.. हम दोनो लंडके बीना नही रेह सकती..

दोनोही आज अ‍ेक दुसरेकी दिलकी बाते करहेनेसे रेह गइ.. ओर अपनी अपनी चुतको साफ करके बहार आगइ.. फीर दोनोने अपने कपडे पहेन लीये.. ओर अ‍ेक दुसरेके साथ चीपककर बेडपे लेट गइ.. लेकीन दोनोके दिमागमे देवु घुम रहाथा.. दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बातको अ‍ेक दुसरेसे छीपा रहीथी.. नीर्मलाकी आंख लग गइ.. लेकीन भुमीके आंखोसे नींद कोसो दुर थी.. ओर वो अ‍ेक बार फीर सोचते अतीतमे चली गइ....कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०५/२

(थोठा अतीत में)

उसे वो दिन अच्छी तराह याद था.. जब नरेशको चार दिनकी छुटी मील गइ.. उसने घर आकर भुमीको बतादीया.. फीर अपने घरपेभी अकेले आनेकी बात करली ओर किशनकोभी भुमीको घर लेजानेकी बात करलेता हे.. ओर आखीर वो दिन आही गया.. राखीके अगले दिन नरेशको दो पहोरको जानाथा.. ओर किशन सुबह ही अपनी कार लेकर चला गया.. आज भुमीने जल्दी खाना बनालीया था..

फीर तीनोने साथ बैठकर खाना खाया तब नरेशने अ‍ेक बार फीर किशनको भुमी का खयाल रखनेको कहा.. उनको सबसे ज्यादा किशनपे विस्वास था.. लेकीन उनको क्या पताथाकी उनकी खुदकी पत्नी इस विस्वासको तार तार करने वाली हे.. जब तीनोने खाना खालीया तब भुमीकाने नरेशके सब कपडे अ‍ेक बेगमे पेक करलीये थे.. नरेशने बेग हाथमे लेली तो भुमीका ओर किशन नरेशको स्टेसन छोडने कारमे चले गये..

किशन ड्राइव कर रहाथा ओर नरेश आगे बेठाथा.. दोनोही बाते कर रहेथे तो भुमी पीछली सीटमे बीचमे बेठकर दोनोकी बाते सुन रहीथी.. ओर बीच बीचमे सेन्ट्रल मीररसे देवायतकी ओर अजीब नजरोसे नजरे चुराते देख लेती थी.. जब किशनभी मीररमे देखता तब दोनोकी आंखे मील जाती तो भुमीका किशनकी ओर कामुक स्माइल कर देती थी.. तो कुछ पलतो किशनको भी आज थोडा अजीब लगा..

किशनके साथ बिन्दास्त बाते करनेवाली भुमीका आज किशनसे नजरे चुराते देख रही थी.. उनके दिलकी धडकन आज बहुतही बढ गइ थी.. दिलके अ‍ेक कोनेमे आज उसे नरेशको धोखा देनेका डर भी था.. फीरभी वो आज किशनके साथ अपना नया रीस्ता बनानेका मन बना चुकी थी.. ओर इसके लीये वो कइ दिनोसे सही मौकेकी तलासमे थी.. ओर इस दिनका इन्तजार कर रही थी.. जो मौका आज उसे मील ही गया..

नरेश : (पीछे देखकर) भुमी.. मे आते वक्त तुजे या किशनको फोन करदुगा.. तो किशनको कहेना तुजे छोडने आजायेगा.. ओर विमला भाभीको भी मेरा नमस्ते कहेना.. हो सकेतो उनकोभी साथ लेआना..

भुमीका : (हसते) अरे हां बाबा.. उसे मे केह दुगी.. देखती हु वो आती हेकी नही.. वो उनका बच्चा भी तो छोटा हे.. सादीके बाद सीर्फ अ‍ेक बारही हमारे घर आइ हे.. भाइ उनको कभी हमारे घर लाते ही नही..

किशन : (हसते) नरेश.. वो देवुका स्कुलमे अभी अभी दाखला दीलवाया हे.. देखते हे वो क्या कहेती हे.. अगर वो आना चाहे तो मे जरुर साथ लाउगा..

तीनोही बाते करते स्टेसन पहोंच गये जबतक नरेश ट्रेनमे नही बैठ गया तबतक भुमी ओर किशन वही खडे रहेके नरेशसे बाते करते रहे.. जब नरेश ट्रेनमे बैठकर चला गया तब किशन ओर भुमी स्टेशनसे बहार नीकल गये.. तो भुमीकी दिलकी धडकन तेज होने लगी.. वो किशनसे कैसे बात करे इसके बारेमे सोचने लगी.. ओर दोनो चुपचाप बीना बोलेही कारके पास आगये.. ओर भुमी बीना कुछ कहे किशनके साथ उनकी बगलमे बैठ गइ.. ओर किशनने कारको नरेशके घरकी ओर जानेदी..

किशन : भुमी.. तुमने अपने कपडे पेक करलीये हेनां..? हम सीधे कपडे लेकर मेरे गांव नीकल जायेगे..

भुमीका : (सरमाते हींमत करते) किशन.. मे.. मे.. वो.. उधर तुम्हारे साथ नही आ रही..

किशन : (आस्चर्यसे भुमीकी ओर देखते) लेकीन क्यु..? अभी तो नरेशके सामने केह रही थी तुम आ रही हो.. अचानक क्या हो गया..?

भुमीका : (सर जुकाते नजरे चुराते) वो.. वो.. मेने नरेशसे जुठ बोला था.. तुम पहेले घर चलो.. फीर हम बात करते हे.. मुजे तुमसे कुछ जरुरी बात कहेनी हे..

किशन : (भुमीकाकी ओर देखते) भुमी.. क्या बात हे.. कुछ हुआ हे क्या..? कही नरेशके साथ कुछ अन बनतो नही होगइ..? हंम..? नही आनाथा तो मुजे इधर बुलायाही क्यु..?

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) नही किशन.. वो बात नही हे.. तुम घर चलो वहा हम आरामसे बात करते हे.. वैसे कल राखीका दिनभी हे.. तो आपकोतो वैसेभी आनाथा.. तो अ‍ेक दिन पहेलेही सही.. (तीरजी नजरोसे हसते) भाइ.. कल राखी हे.. आप मुजे क्या गीफ्ट देने वाले हो..? हें..हें..हें..

किशन : (हसते) अरे तुम कहा मुजसे गीफ्ट लेती हो.. मेतो तु जोभी कहे देनेके लीये तैयार हु.. लेकीन तुम मांगती भी नही हो.. हर बार मना कर देती हो.. भुमी.. तुम अ‍ैसा क्यु करती हो..? तुम्हारा भाइ तुजे सब कुछ देनेको तैयार हे.. लुटलो मुजे हें..हें..हें..

भुमीका : (अपनी बात बडी सीफततासे आगे बढाते हसते) भाइ.. इस बार मे राखीकी गीफ्ट मांग लुंगी.. देखती हु आप मुजे गीफ्ट देपाते हो की नही.. अगर नही दे पाये तो मे जींदगीभर आपसे कोइ गीफ्ट नही लुगी.. आइ प्रोमीस..

किशन : (आस्चर्यसे भुमीकी ओर देखते) भुमी.. अ‍ैसा कोनसा गीफ्ट हे जो तुम अ‍ैसा बोल रही हो..? क्या तुजे अपने भाइपे इतनाभी यकीन नही हे..? मेरी जानभी मांगले.. मे उंह.. तक नही करुगा.. बोल क्या चाहीये तुजे..?

भुमीका : (आंखमे आंसुके साथ किशनका हाथ चुमते) भाइ.. मत करो जानकी बात.. तुम्ही तो मेरा सबकुछ हो.. आपही मेरी जान हो.. ओर अ‍ैसी कोइ गीफ्ट नही हे.. जो आप दे ना सको.. आप घर चलीये.. मे आपको सबकुछ बताती हु..

नरेशका अ‍ेक बडा भाइभी था जो गांवमे उनकी माताके साथ रहेता था.. उनके पीताजीने तबही बटवारा करदीया था जब वो जीन्दा थे.. गांवमेभी उनकी बहुत सारी खेतीबाडीकी जमीन थी.. नरेश सहेरमे रहेना चाहता था.. लेकीन उनके बडेभाइको सहेरकी हवेलीपे नरेशका कब्जा कर लेनेका डर था.. तब खुद नरेशने गांवकी सारी जमीन ओर गांवका मकान उनके बडे भाइके नाम करदेनेको कहा..

तो उनका बडाभाइ ओर उनकी भाभी बहुतही खुस होगये.. ओर आसानीसे हवेली नरेशको देने राजी होगये.. इसीलीये ये हवेली उनके पीताजीने नरेशके नाम करदी.. ओर खेतीकी जमीन उनके बडे भाइको देदी.. तैय हुआकी नरेशके माता पीता जबतक जीन्दा रहेगे तब उनकी सारी जीम्वेवारी उनके भाइकी होगी ओर वो उन्हीके साथ रहेगे.. ये सब बाते सबकी रजा मंदीसे तैय हुइ.. तबसे नरेश यहा अकेला रहेता हे..

किशन ओर भुमीका बाते करते भुमीके घर आगये.. ये घर नरेशके पुर्खोने बनवाया था.. बहारसे अ‍ेक हवेली जैसा लग रहाथा.. लेकीन नरेशने अंदरसे बहुतही आधुनीक बंगलेकी तराह सजाया हुआ था.. वो बहुत बडी जगाह थी.. तकरीबन २५०० मीटर.. मकानतो सीर्फ जमीनके चोथाइ भागसेभी कम जमीनपे था.. बाकी सब जमीन खुली पडीथी.. ओर चारो ओर कंम्पाउन्ड वोलके साथ अ‍ेक बडा पुराना दरवाजा भी था..

जो सीधा सहेरके मेइन रोडपे ही खुलता था.. ओर मेइन रोडकी वजहसे ये हवेलीके दाम आसमानको छु रहाथा.. जब नरेशने भुमीसे सादी करली.. ओर सृतीके जन्मके बाद बीमार रहेने लगा तबही नरेशने ये हवेली भुमीके नाम करदीथी.. भुमी ओर किशन दोनोही कार लेकर अंदर आगये.. ओर भुमीने घरका ताला खोल दीया ओर दोनो अंदर चले गये.. तब भुमीके दिलकी धडकन ओर तेज होगइ.. ओर दोनो सोफेपे बैठ गये..

भुमीका : (खडी होकर) भाइ आप बैठो मे पानी लेकर आती हु.. फीर हम दोनोके लीये मस्त चाइ बनाती हु..

किशन : (मुस्कुराते) भुमी रहेने दे.. अभी अभी तो खाना खाया हे सीर्फ पानी ही पीलादे..

भुमीका : (पानी लेकर आते) भाइ.. थोडी बनाने दोनां.. आज मेराभी चाइ पीनेका दिल कर रहा हे..

किशन : (पानी पीकर हसते) ठीक हे तो थोडी ही बनाना..

तब भुमीका खाली ग्लास लेकर हसते हुअ‍े चली गइ ओर फटाफट चाइ बनाने लगी.. वो चाइ बनाते किशनके साथ कैसे बात करे उनके बारेमे सोचती रही.. तभी चाइ उबलने लगी तब भुमी सोचकी तंद्गासे बहार आगइ ओर दो कप चाइ लेकर होलमे आगइ.. फीर किशनके साथ आज उनसे थोडी सटकर नजदीक बैठ गइ ओर किशनको अ‍ेक चाइका कप पकडा दीया तब किशन चाइकी चुस्की लेते भुमीकी ओर प्रस्नार्थ भरी नजरोसे देखता रहा..

किशन : भुमी.. तुम मुजे कुछ कहेने वाली थी.. बता क्या प्रोबलेम हे.. तु मेरे घर क्यु नही आ रही..?

भुमीका : (चाइ पीते नजरे चुराते) भाइ.. मुजे कल क्या गीफ्ट दोगे..? क्या मे जो मांगु मुजे दोंगे..?

किशन : (चाइ पीते हसते) अरे भुमी.. ये क्या बात हुइ.. घर आनेका ओर गीफ्टका आपसमे क्या वास्ता..? कीतने दिनोके बादतो तुम गीफ्ट मांग रही हो.. वरना मुजे राखीके दिन अ‍ैसे ही खाना खीलाते वापस भेज देती हो.. बोल क्या चाहीये तुजे..? तैरा भाइ तुजे प्रोमीस करता हे.. जो तुम मांगोगी वोही मीलेगा.. बोल कल तुजे क्या गीफ्ट चाहीये..? आइ प्रोमीस तेरा भाइ तुजे मना नही करेगा..

भुमीका : (चाइका कप साइडमे रखते नजरे जुकाकर सरमाते धीरेसे) भाइ.. कल.. गीफ्टमे.. वो.. वो.. बस.. आपसे.. मुजे अ‍ेक.. बच्चा चाहीये.. भर दीजीये मेरी कोख.. बस मे गीफ्टमे आपसे सीर्फ यही मांगती हु..

किशेन : (चोंकते थोडे गुसेमे उची आवाजमें) भुमी.. तुम पागल होगइ हो..? ये क्या पागलपन हे..? कोइ भाइसे अ‍ैसी गीफ्ट मांगते हे..? पागल कहीकी.., तुजे पताभी हे तुमने मुजसे क्या मांगा हे..? इसका मतलब भी जानती हो..? मे ये काम कैसे कर सकता हु..? तेरा दिमाग खराब हो गयाहे क्या..?

भुमीका अपने घुटनोपे दोनो हाथ टीकाते दोनो हथेलीमे अपने चहेरेको छुपाकर फुटफुटकर रोने लगती हे.. ओर किशन उसे रोते हुअ‍े देखता ही रहा.. भुमीका काफी देर रोती रही.. तब किशनका गुसा थोडा कम होगया.. ओर वो हीचकीचाते भुमीके पीठमे हाथ रख देता हे.. ओर उनकी पीठ सहेलाने लगा.. तभी भुमीका किशनको बैठेही लीपट गइ ओर उनके कंधेपे सर रखते काफी देर तक रोती रही.. किशन अबभी उनकी पीठको सहेलाता रहा..

किशन : भुमी.. बसभी करो.. अब रोना बंध करो.. कीतना रोयेगी..? देख रोते रोते क्या हालत होगइ हे तेरी.. कोइ अ‍ैसी नादानी थोडीना करता हे..? कुछ ओर मांगले.. मेरी जान मांगले.. मेरी सारी प्रोपर्टी मांगले.. मे तुजे मना नही करुगा..

भुमीका : (अबभी अ‍ैसे रोते) भाइ सोरी.. मुजे माफ करदो.. अब मुजे कुछ भी नही चाहीये.. सोरी..

किशन : (आंख गीली करते) भुमी.. क्यु..की अ‍ैसी नादानी..? तुमतो मेरी समजदार बहेन हो.. बस अ‍ेक हम दोनोका रीस्ताही तो पवित्र रहा हे.. क्यु हमारे रीस्तेको तार तार करनेपे तुली हो..? ओर तेरे मनमे ये सोच आइभी तो कैसे..? क्या कीसीने तुजे कुछ कहा हे..? अरे बच्चा नही हो रहाहे तो नरेशका अच्छेसे इलाज करवाओ.. ओर उस बाबाने भीतो तुजे दवाइ देदी थी.. बस सीर्फ छे महीने तक तो इन्तजार करना हे..

भुमीका : (किशनकी बाहोसे अलग होते अपने आंसु पोछते) भाइ.. उस दिन मेने जुठ बोलाथा.. बाबाने मुजे कोइ दवाइ नही दी.. जब आप दोनो आश्रममे घुम रहेथे मे ओर बाबा हम दोनोही अकेले बैठे थे तब उसने मुजे साफ साफ केह दीयाकी नरेश मुजे बच्चा नही दे सकता.. ओर उसने मुजसे अ‍ेक सचाइ ओर बतादी.. इसीलीये मेने ये कदम उठा लीया.. भाइ आइ अ‍ेम सोरी..

किशन : (आस्चर्यसे देखते) भुमी.. उस दिन तुमने जुठ कहाथा..? तो फीर बाबाके साथ तुम्हारी क्या बाते हुइ..? क्या इसके बारेमे नरेशको कुछ पता हे..? भुमी.. मुजे सब बाते बता.. उस दिन बाबाने तुमसे क्या क्या कहा हे..

भुमीका : (सर जुकाते धीरेसे) भाइ.. उस दिन जब आप दोनो बहार घुम रहेथे तब बाबाने मुजे सब सचाइ बतादी.. की.. की.. नरेश कभी बाप नही बन सकता.. भाइ.. नरेश मुजे बच्चा देनेमे सक्षम नही हे..

किशन : (चोंकते) क्या..? बाबाने खुद तुमसे अ‍ैसा कहा..? तो उसने क्या उपाय बताया..?

भुमीका : भाइ आपको सब सचाइ बता दुगी.. बाबाने मुजसे कहा की मेरे नसीबमे अ‍ेक बच्ची हे.. लेकीन वो नरेशसे नही होगी.. भाइ.. उसी समय मेनेभी बाबाके सामने अ‍ेतराज कीया था.. लेकीन बाबाने कहा ये सब होकर ही रहेगा.. मेरी आज तक कोइ बात मीथ्या नही हुइ.. ओर इस बच्चीका बाप नरेश नही होगा..

किशन : (चोंकते) व्होट..? बाबाने तुमसे अ‍ैसा कहा..? तो फीर.. वो बच्चीका बाप.. भुमी मुजे सब सचाइ जाननी हे.. बता बाबाने तुमसे ओर क्या क्या कहा हे..?

भुमीका : (सरमाते धीरेसे सर जुकाते) भाइ.. जब मेनेभी ये सवाल कीया तो बाबाने कहा.. की.. वो.. तुम जीनसे सचा ओर ज्यादा प्यार करती हो उनसेही ये बच्ची होगी.. ओर भाइ आपभी जानते हे.. मेरे दिलके सबसे करीब आप ही हो.. मेने नरेशको भी आपके बादका स्थान दीया हे.. बाबाने भी आपका नाम लीयाथा..

किशन : (धीरेसे) वोतो ठीक हे लेकीन भुमी.. में..? तुमतो जानती हो मेने तुजे अपनी बहेन माना हे.. तो मे कैसे ये काम कर सकता हु..? क्या तुजेभी ये सब जायज लगता हे..? बाबाभीनां..

भुमीका : (किशनके दोनो हाथ थामते) भाइ.. मेने आज तक अपने दिलकी बात कीसीको नही बताइ.. जो आज आपसे केह रही हु..

किशन : (अ‍ेक नजरसे देखते) कौनसी बात..? भुमी आज तुम मुजे सब खुलकर बतादे..

भुमीका : भाइ.. जब हम सब कोलेजमे थे तबसेही मे आपको पसंद करती थी.. लेकीन जब मे अपने दिलकी बात आपसे कहु उनसे पहेलेही नीर्मलाने मुजे आप दोनोके रिलेशनके बारेमे बता दिया.. ओर कहाकी हम दोनो कइ बार फीजीकलभी हो चुके हे.. भाइ तब मेरा दिल टुट गया.. उस रात मे खुब रोइ.. बडी मुस्कीलसे मेने अपने आपको संभाला हे.. मे तबसे आपको पसंद करती हु.. बाकीतो सब आप जानतेही हे..

किशन : (थोडा विचलीत होते) तो भुमी तुमने मुजे तब वो बात क्यु नही बताइ.. तुजेतो पता हे हमारे घरमे सादीकी कोइ पाबंदी नही हे.. हम कीतनीभी सादी करले.. तो मे तुजेभी अपना लेता.. लेकीन अब बहुत देर होचुकी हे.. अब ये सब मुमकीन नही हे.. सोरी ओर मे नरशको भी धोखा नही दे सकता..

भुमीका : (मायुस होते सर जुकाते) भाइ कोइ बात नही.. गलती मेरी ही हे जो मेने आपको अपने दिलकी बात नही बताइ.. अब मुजे मेरी किस्मतपे ही छोडदो.. रहेनेदो मुजे बांज.. भाइ.. आज बाबाकी सब बाते मीथ्या होगइ.. उसने नरेशके बारेमेभी मुजे बताया.. लेकीन अब आपसे कहेनेका कोइ मतलब नही हे.. मे अकेली ही अपनी जींदगी गुजार लु्रगी..

किशन : (आस्चर्यसे) नरेशके बारेमे..? क्या बताया बाबाने..? भुमी मेने कहानां मुजे सब बाते जाननी हे..

भुमीका : भाइ.. बाबाने कहाथा.. जब मेरी बच्ची बाराह सालकी होजायेगी तब वो हमारे बीच नही होगा.. तब आपही मेरे पती होगे.. ओर हम दोनो सबसे छुपकर हमारा संसार चलायेगे..

किशन : (थोडा परेसान होते) भुमी.. ये तुम क्या केह रही हो..? मेरीतो कुछ समजमे नही आ रहा.. क्या तुम सब सच केह रही हो..?

भुमीका : भाइ मुजपे विस्वास नही हेनां..? आप अ‍ेक बार बाबासे मीलकर बात करलेना.. मुजे मेरे हालपे छोडदो.. मुजे आपके घर नही आना.. मे यहा अकेली रेह लुगी.. मेरी फीकर मत करना..

किशन : (कुछ सोचते अचानक खडा होकर भुमीका हाथ पकडते) भुमी.. तु अभीके अभी चल मेरे साथ.. हम दोनो बाबाको मीलने जा रहे हे..

भुमीका : (खडी होकर थोडी परेसान होते) लेकीन.. भाइ अब हमे बाबाको मीलने क्यु जाना हे..? मे कहा कोइ जीद कर रही हु.. नही चाहीये मुजे कोइ बच्चा..

किशन : नही भुमी.. आज जींदगीमे पहेली बार मेरी बहेनने कुछ मुजसे मांगा हे.. लेकीन इनसे पहेले मे अ‍ेक बार बाबाको मीलना चाहता हु.. ओर हम दोनोही जायेगे.. तेरे सामनेही मुजे बाबासे कुछ जानना हे.. चल..

कहेते किशन लगभग भुमीकाको हाथ पकडते खीचता बहार लेगया.. ओर भुमीने भी बहार नीकलकर फटाफट घरको ताला लगादीया वो थोडी गभराइ हुइ थी.. ओर किशनके साथ कारमे बैठ गइ तो किशनने कार सीधेही आश्रमकी ओर जानेदी.. तब भुमी पुरे रास्ते सीर्फ किशनको ही देखती रही.. उनको कुछ समजमे नही आ रहाथा की किशनको अचानक क्या होगया हे.. ओर पुरे रास्ते दोनोमेसे कोइ कुछ भी नही बोले..

फीर आधे घंटेमे दोनो आश्रमके परीसरमे पहोंच गये.. ओर किशन कारसे उतरतेही भुमीके पास आकर उनका हाथ पडकर बाबाके पास लेगया.. तब बाबा ओर अ‍ेक आश्रमका सेवक बाते करते होलमेही बैठेथे.. ओर बाबा इन दोनोको देखकर सब कुछ समज गये.. ओर उसने सेवकको सबके लीये चाइ लानेको कहेकर उसे बहार भेज दीया.. तब किशन ओर भुमीका बाबाके पैर छुकर उनके चरणोके पास बैठ गये..

बाबा : (मुस्कुराते) क्यु महाराज.. आज कुछ ज्यादाही परेसान लग रहे हो.. हें..हें..हें..

किशेन : (मुस्कुराते) हां.. अब बाकी रेह गया हेतो आपभी मेरी टांग खीचलो.. बाबा इसे समजाओ.. आपने इसे क्या केह दीया हे..? ये कैसी नादानी करती हे.. ओर मे इनको दुखी होते देखभी तो नही सकता..

बाबा : (मुस्कुराते) समजना इनको नही तुजे हे.. बेचारी सहीतो केह रही हे.. इसने क्या गलत केह दीया..?

किशन :(आस्चर्यसे देखते) बाबा.. ये आप केह रहे हे..? जानते हे ये मेरी कौन हे..? में बहेन मानता हु इसे..

बाबा : (हसते) अच्छा..? तो फीर जीनसे तुमने सादी करली हे वो कौन हे..? उसे कही बहारसे ब्हाकर लाया हे क्या..? हंम..? बेटा मत भुलो तुम सब कौन हो.. जब खुदकी बहेनसे सादी करके उसे बच्चा दे सकता हे तो फीर भी येतो तेरी मुह बोली बहेन हे.. अगर इसे उनके पतीसे बच्चा नही हो रहाहे.. तो तुजे बच्चा देने मे क्या प्रोबलेम हे..? तेरातो काम ही यही हे.. मत भुलो तुम कौन हो..

किशन : बाबा.. आपभी तो नही कहेते की वास्तवमे हम सब कौन हे.. क्या होने वाला हे..

बाबा : सुन बेटा.. अ‍ेक दिन अकेला टाइम नीकालकर आजा तुजे सब बता दुगा.. अभी सीर्फ इताही बताता हु.. सीर्फ तुमही नही.. तेरे दादाने तेरे पीताजीने ओर अभी तुम खुदने.. सबने अपनी बहेनसे सादी करली हे.. क्यु..? पता हे तुजे..? बेटा आने वाले वक्तमे तुम्हारे वहा बहुत बडा बदलाव आने वाला हे..

तुम उन हिमाचलके राजाके बारेमे तो सब जानते ही हो.. बस यही समजले आगे जाकर वोही राजा तुम्हारे घर दुबारा जन्म लेकर आने वाला हे.. तुम सब उन्हीके अंस हो.. ओर सब इन्हीकी वजहसे ये सब बदलाव हो रहा हे..

किशन : लेकीन बाबा वो सब हमारे यहा ही क्यु जन्म लेना चाहते हे..? कोइ खास वजह..?

बाबा : (हसते) हां.. वो बहुत बडी वजह हे.. इसीलीये तो स्वयंम काम ओर रती अपने अंसको तुम्हारे यहा जन्म दे रहे हे.. सभी परीया ओर अप्सराये तुम्हारे घर जन्म ले रही हे.. तुम्हारी दादी तुम्हारी मां.. तुम्हारी बहेन जो अभी तेरी बीवी हे.. यहा तक की तुमने जीसे छोडा हे वोभी.. ओर मेरी इस बेटीभी.. बेटा मत भुलो तुम सब इन्हीके अंस हो.. इसीलीयेतो ये तुम्हारे साथ जुडी हुइ हे..

किशन : बाबा मुजेतो ये सब बहुत अजीब लग रहा हे.. हमतो ठीक हे क्या हमारी आने वाली पीढी इस बातको मानेगी..? मुजे नही लगता वो सब इन बातोपे यकीन करेगे..

बाबा : (हसते) बेटा तुमतो ठीक हे लेकीन वो सबतो तुमसे भी दो कदम आगे होगे.. वोतो कोइ रीस्ते नाते मानते ही नही होगे.. तब सायद तुम नही होगे.. लेकीन तेरा बेटा जो अभी बहुत छोटा हे वोभी अपनी सभी बहेनो से सादी कर लेगा.. तब मेरी इस बेटी होगी जो सब अपनी आंखोसे देखेगी..

किशन : (सरमाते हसते) बाबा तो फीर अ‍ेक बात पुछु..? अगर मानलो की मे इसे अ‍ेक बच्ची देभी दु.. तो वोभी तो मेरे बटेकी बहेन हुइनां..? तो क्या वोभी..

बाबा : (हसते) हां.. इसीलीयेतो इनको बच्चा देनेको केह रहा हु.. ताकी वोभी तेरे बेटेके साथ सादी कर सके.. बेटा तुजे पता ही नही हे.. तेरे बेटेकी कीतनी रानीया होगी.. उनकी सब बहेने उनकी रानीया होगी.. सब प्रकृतीके हिसाबसे चलेगा.. इनमे ना तेरी चलेगी ओर नाही मेरी.. चलेगी.. क्युकी तुम्हारा जीवन तुम्हारे होथोमे हे ही नही..

किशन : (भुमीकाकी ओर देखते) बाबा मे समज गया.. फीरभी मुजे ये काम करने मे संकोच हो रहा हे..

बाबा : अच्छा..? सीर्फ सेकोच ही हो रहा हेनां..? इनका काम करनेमे तो कोइ अ‍ेतराज नही हेनां..? तुम दोनो चलो मेरे साथ.. अब कोइ सवाल मत करना..

कहेते बाबा अपनी जगहसे खडे होगये.. तब किशन ओर भुमीकाभी आस्चर्यसे अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते खडे होगये.. ओर बाबाके पीछे चुपचाप जाने लगे.. बाबा दोनोको लेकर मंदिरमे चले गये.. तब किशन ओर भुुमीकाने अंदर जातेही हाथ जोडकर दर्शन करलीये ओर बाबाके सामने देखते रहे.. तभी बाबाने दोनोको मंदिरके अंदर बुला लीया.. तो दोनो चुपचाप अंदर चले गये तभी बाबाने वही पडे दो हार उठालीये..

बाबा : (मुस्कुराते अ‍ेक हार किशनको देते) ले पकड इसे ओर पहेनादे मेरी इस बेटीको.. (अ‍ेक हार भुमीको देते) ले बेटी.. तुमभी इसे पहेनादे.. मे आज तुम दोनोका गांधर्व विवाह अभी करा रहा हु..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) बाबा लेकीन मेरा पती.. मेतो ओल रेडी सादीसुधा हु..

बाबा : बेटी पता हे मुजे.. ये गांधर्व विवाहतो कभीभी कीसीसेभी हो सकता हे.. ओर इसीलये करवा रहा हु की ये महासयको अपनी बहेनको बच्चा देनेमे संकोच हो रहा था.. अबतो संकोच नही करेगा.. क्युकी आजके बाद तुमभी इनकी बीवी होजाओगी.. चलो दोनो अ‍ेक दुसरेको हार पहेनादो.. ओर ये मेरा आदेश भी हे..

तभी किशन भुमीकाको हार पहेना देता हे तो भुमीकाभी नजरे जुकाते किशनको हार पहेना देती हे.. फीर बाबा वहासे अ‍ेक सींदुरकी डीबी नीकालते हे ओर खोलकर किशनको थमा देते हे.. फीर किशनको भुमीकाकी मांग भरनेको कहेते हे ओर किशनने भुमीकाकी मांग भरदी.. तब भुमीकाकी आंखसे आंसु नीकल गये.. ओर बाबाने दोनोको जींदगीभर अ‍ेक दुसरेका साथ नीभानेकी कसम खीलवाइ..

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बाबा : बेटा अब तुम दोनो हार यही छोडदो ओर वापस चलो.. मुजे तुमसे कुछ बातभी करनी हे..

दोनोही अ‍ेक साथ बाबाके पैर छुकर वापस मंदिरमे दर्शन करने लगे.. फीर चुपचाप बाबाके पीछे जाने लगे.. तब भुमीका बहुतही सरमा रहीथी.. तीनो होलमे आगये तब सेवक चाइ लेकर तीनोका इन्तजार करते खडाथा.. ओर बाबाने सबको चाइ देनेको कहा ओर वो तीनोको चाइ पीलाकर डीस लेकर चला गया तब बाबाने दोनोकी ओर देखा ओर मुस्कुराने लगे..

बाबा : बेटा संकोच मत कर.. वास्तवमे तो ये सब होनेही वाला था.. ओर बेटी तुमभी कोइ संकोच मत करना की मेने अपने पतीको धोखा दीया हे.. वास्तवमे यही तुम्हारा पती हे.. अगर उस दिन अपने दिलकी बात इनको बताती तो आज यही तुम्हारा पती होता.. खैर छोटो.. जानेदो पुरानी बाते.. अब दोनो अच्छेसे अपना संसार चलाओ.. बेटी मेरा आशीर्वाद हे तुजे जींदगीमे कोइ तकलीफ नही होगी..

किशन : (हसते) ठीक हे बाबा.. अब हमे आज्ञा दीजीये..

बाबा : (हसते) ठीक हे अब आरामसे जाओ.. ओर बेटी.. जल्द मुजे खुसखबरी देदे.. तेरा काम होजायेगा..

भुमीका : (सर्मसार होते हसते) जी बाबा.. आशीर्वाद दीजीये.. हम चलते हे..

फीर किशन ओर भुमीका कारमे आकर बैठ गये.. ओर किशनने कार सहेरकी ओर जाने दी.. तब भुमीका चोर नजरोसे किशनको सर नीचे करते सरमाते देखती रही.. अब वो बहुत सरमा रहीथी.. तो दुसरी ओर किशनभी बार बार भुमीकाकी ओर देख रहाथा.. दोनोको कोइ उमीद नही थी की बाबा इन दोनोकी सादी करवा देगे.. ओर इस बातपे भुमीका अंदरसे बहुत ही खुस थी....

कन्टीन्यु
 
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०६/१

फीर किशन ओर भुमीका कारमे आकर बैठ गये.. ओर किशनने कार सहेरकी ओर जाने दी.. तब भुमीका चोर नजरोसे किशनको सर नीचे करते सरमाते देखती रही.. अब वो बहुत सरमा रहीथी.. तो दुसरी ओर किशनभी बार बार भुमीकाकी ओर देख रहाथा.. दोनोको कोइ उमीद नहीथी की बाबा इन दोनोकी सादी करवा देगे.. ओर इस बातपे भुमीका अंदरसे बहुत ही खुस थी.... अब आगे

आखीर किशनने खामोसी तोडते कहा..

किशन : (मुस्कुराते) भुमी क्यासे क्या होगया.. मुजेतो अभीभी यकीन नही हो रहाहे की बाबाने हम दोनोकी सादी करवादी हे.. हम नरेशको क्या जवाब देगे..? इस बारेमे तो हमने कुछ सोचाही नही हे..

भुमीका : (सरमाते नजरे जुकाते धीरेसे) किशन.. मे अबभी तुमपे कोइ फोर्स नही कर रही.. तुम चाहोतो तुम मुजसे आजाद हो.. मे अ‍ैसा कोइ काम जबर दस्तीसे करवाना नही चाहती.. जीनमे आपका मन ना हो.. हम आजभी भाइ बहेन हे.. ओर आगेभी भाइ बहेनही रहेगे.. बस मेनेतो जो बाबाने बात कहीथी वोही बात आपको कहेदी थी.. ओर अब आपने भी सुनलीया की मे जुठ नही बोल रही थी..

किशन : नही भुमी बात सच जुठकी नही हे.. बस मुजे नरेशकी चीन्ता हे..

भुमीका : किशन मेरी बात सुनो.. अगर हम इस रीस्तेको आगे बढाये तबभी मे तुम्हारी बहेन बनके नरेशके साथ रहुगी.. तुमतो जानतेहो बाबाने नरेशके बारेमे क्या कहाहे.. तबभी मे दुनीयाकी नजरमें विधवा होकरभी तुम्हारी बहेन बनकर रहुगी.. मे हमारे रीस्तेको कीसीके सामने उजागर करना नही चाहती.. फीर चाहे कोइभी हो.. तुम्हारी बीवी मिमलाभाभी भी क्यु ना हो.. मे हमारे रीस्तेको सबसे जुपाकर रखना चाहती हु.. हमारी बच्चीसेभी.. इनके लीये तुम मरते दम तक मामाही रहोगे.. आइ प्रोमीस..

किशन : (मुस्कुराते) हंम.. लगता हे तुमने काफी कुछ प्लान करके रखा हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते हसते) हां किशन.. तुम सुरुसे ही मेरे मनके राजकुमार रहे हो ओर आगेभी रहोगे.. चाहे हमारा रीस्ता कुछभी क्यु ना हो.. भाइ.. मे तुम्हे अबभी प्यार करती हु.. नरेशके साथ मेने कोम्प्रोमाइज कीया हे.. तुम आजभी मेरे दिलमे राज करते हो.. मेने अपने दिलमे आपके सीवा कीसीको जगह नही दीहे..

किशन : (हसते) ठीक हे भुमी.. हम अपना रीस्ता आगे बढायेगे.. जा.. देदीया तुजे राखीका तोहफा.. अब तो तु खुस हेनां..?

भुमीका : (किशनको कारमेही लीपटते) ओह.. किशन आइ लव यु.. आज तुमने मेरी जोली खुसीओसे भरदी.. आइ लव यु सो मच.. देखना मे तुम्हारी अ‍ेक अच्छी बीवी बनकर दीखाउगी.. मुंहा..

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कहेते भुमीने खुसीके मारे किशनके गालको चुम लीया तब किशनभी हसने लगा.. फीरतो सारे रास्ते भुमी खुस होकर किशनके सामने हसती रही.. आज उनका नरेशको गांव भेजनेका सभी प्लान कामयाब हो गया.. आज फीरसे भुमीकी चुत फडफडाते पानी बहाने लगी.. ताकी ये चार दिन ओर तीन रात वो किशनके साथ हम बिस्तर होके बीता सके.. वो मनही मन खुस होकर बाबाका सुक्रिया अदा करने लगी..

दोनो भुमीकाकी हवेलीपे आगये.. ओर भुमीका कारसे उतरतेही धरकी तरफ लगभग दोडही पडी.. भुमीने जटसे घरका ताला खोल दीया.. तबतक किशनभी उनके पास आगया.. ओर दोनोही अंदर आगये.. तब भुमी जटसे वापस बहार चली गइ ओर हवेलीका मेइन गेइट बंध करके अच्छेसे लोक कर दीया.. ओर वो मुस्कुराते घरके अंदर आगइ.. अंदर आतेही घरकाभी दरवाजा बंध करदीया..

तब किशन उसे हसते हुअ‍े देखता ही रहा.. जब गेट बंध करके पलट गइ तब किशन उनके सामने हस रहाथा.. ओर किशनने अपने दोनो हाथ फैला दीये.. तब भुमीकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा ओर वो हसती हुइ दोडकर आगइ.. ओर आतेही किशनकी बाहोमे समा गइ.. भुमीने किशनको कसके अपनी बाहोमे भीच लीया ओर उनके सीनेमे सर छुपाते मुस्कुराती रही.. आज वो पहेली बार अने स्वप्नके राज कुमारकी बाहोमे खडी थी..

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(अतीतसे बहार)

नीर्मला : (हसते थोडी उची आवाजमें) भुमी.. ओ.. भुमी.. सो गइ क्या..?

भुमीका : (चोंकते तंद्गासे जागते) हां.. हां.. बोल नीमु.. क्या हुआ..? कीतने बजे हे..?

नीर्मला : (हसते) अरे.. देख साम चार बजनेको आये हे.. सो गइथी क्या..? कमीनी.. नींदमे भी हस रही थी.. हें..हें..हें.. कोइ स्वप्न बप्न तो नही देख रहीथी..? हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते लेटेही नीर्मलाको बाहोमे भरते होंठ चुमते) हाये.. नीमु.. क्या हसीन स्वप्न था.. ओर कमीनी तुमने जगा दीया..

नीर्मला : (जोरोसे हसते) कमीनी.. क्या स्वप्नमे कीसीसे चुदवा रही थी.. जो अ‍ैसा कहेती हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते हसते) नही.. बस हम चुदाइकी ओर बढ ही रहे थे.. ओर कुतीया तुमने मुजे जगा दीया.. खैर छोड सब.. अब बहार नही चलना क्या..? अभी महेमान आते होगे.. चल फ्रेस होजाते हे..

नीर्मला : (हसते) हां.. चल.. इसीलीये तो तुजे जगाया हे.. हें..हें..हें..

कहेते दोनोही बेडसे उतर गइ ओर बाथरुममे जाकर मुह हाथ धोकर फ्रेस होगइ.. फीर बहार आकर अपने कपडे सही करते बाल बनाने लगी.. जब दोनो तैयार होगइ तब अ‍ेक बार फीर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गइ ओर दोनोके होंठ मील गये.. फीर अलग होतेही हसती हुइ बहार जाने लगी.. जब दोनो बहार नीकली तब राजीव ओर मंजु चंदा तीनोही होलमे सोफेपे बैठे थे.. तब राजीव मंजुके बेटे विजयके साथ खेल रहाथा ओर भुमीका नीर्मलाभी वहा आकर बैठ गइ..

मंजुला : (हसते) अरे बुआ.. आजतो तुम दोनोने खुब आराम कीया.. दोनो सो गइथी क्या..?

भुमीका : (हसते) हां बेटी.. आज सुबह जल्दी उठेथे.. तो नींद आगइ.. वो सभी बच्चे कही दिखाइ नही देते..? कही गये हे क्या..?

चंदा : (हसते) हां दीदी.. वो पुनो वंदना ओर सृतीको रश्मीभाभी अपने घर लेगइ हे.. ओर लखन खेतोपे गया हे.. देवु अभी आते होगे.. बस आप दोनोका वेइट कर रहे थे.. फीर हम चाइ नास्ता कर लेते हे.. अभी भानुभाइ ओर उनके घरके सभी लोग आजायेगे.. दीदी हम सबको उपरकी मंजीलपे सेट कर देगे.. यहा बहुत कमरे हे..

राजीव : (हसते) मंजु बेटा.. वो हमारी समधन बेचारीको नीचेही कीसी कमरेमे ठहेराना.. अब इतनी उमरमे वो कहा उपर नीचे आती जाती रहेगी.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (तीरछी नजरसे राजीवकी ओर देखते) राजीव.. आपको बडी चीन्ता हो रही हे हमारी समधनकी..?

कहातो सभी जोरोसे राजीवकी ओर देखकर हसने लगे.. तब राजीव भी सरमाते मुस्कराने लगा.. तो नीर्मला भी राजीवकी ओर देखते जोरोसे हसने लगी.. तभी देवायतभी अपने रुमसे बहार आगया.. तो सबको अ‍ैसे हसते हुअ‍े देखरकर वोभी मुस्कुराते सबके पास आकर मंजुसे चीपकके बैठ गया.. तभी दयाने सबको चाइ नास्तेके लीये आवाज लगाइ.. तो सभी हसते हुअ‍े खडे होगये ओर डाइनींगकी ओर जाने लगे तब चंदाने भी खडे होते राजीव को कहा..

चंदा : (हसते) बडे भैया आप लगे रहोे दीदीतो अ‍ैसेही आपको चीडा रही हे.. हें..हें..हें..

फीर सभी हसी मजाक करते चाइ नास्ता करने लगे.. सभी लोग दो पहोरको खाना खाकर आराम कर रहेथे तभी पुनम वंदना ओर सृती मंजुके कहेनेपे रश्मीके घर चली गइ थी.. तब जाते वक्त सृतीने अपनी कारमेसे अपनी कीट लेली थी.. तो रश्मी तीनोको देखते ही खुस होगइ.. ओर तीनोको अपने पर्सनल रुममे ले गइ.. वहा सृतीने पहेले रश्मी भाभीको चेक करलीया.. तो उनका सब रीपोर्ट ओके था.. तभी..

रश्मी : (वंदनाकी ओर देखते) वंदु.. देखना यहा जोभी तुम देखो वो कीसीके सामने जीक्र मत करना..

वंदना : (हसते) भाभी आप फीकर मत करो मुजे सब पता हे.. हें..हें..हें.. जा पुनो अब तेरी बारी हे.. हें..हें..हें..

कहातो पुनम सर्मसार होगइ.. ओर सरमाते हुअ‍े बेडपे सो गइ.. जब सृतीने उसे अपना लोअर नीचे करनेको कहा तब वो खुब सरमाइ.. ओर सरमाते अपना लोअर नीचे करते थोडी गभराभी रहीथी तब जाके रश्मी भाभीने उनको हिंमत दीलवाइ.. तो उनकी सरम कम हुइ ओर सृतीने उनकी प्रेगनेन्सी चेक करली.. पुनमका पीसाबका सेम्पल भी अपने पास रखी कीटमे चेक कर लीया ओर बीना कुछ बोलेही अपना सामान पेक करने लगी.. तब तीनोही सृतीकी ओर सवालीया नजरोसे देखती रही..

वंदना : (हसते) सृती दीदी क्या हुआ..? इस कमीनीको कोइ प्रोबलेम तो नही हेनां..?

सृती : (हसते) वंदु तु उनकी खास दोस्त हेना..? तो पार्टी तो हम सब तुजसे ही लेगे.. हें..हें..हें.. देख.. तेरी सहेली हेना..सी इज प्रेगनेन्ट.. हें..हें..हें.. लेकीन इस बातका जीक्र अब कीसीसे मत करना.. मंजुने मना कीया हे.. बस अब सादीके बाद धिरेन इनको लेकर आयेगा तब मे इसे दुबारा चेक करलुगी तब देखती हु धिरेनकी सकल कैसे होती हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते अपने कपडे सही करते) वंदु.. देखना इस बारेमें भुलसेभी कीसीको मत कहेना.. तेरी मम्मी को ओर नीशा भाभीको भी नही.. वरना सब कबाडा होजायेगा.. ओर मेरी सासकातो खास खयाल रखना..

वंदना : (हसते) अरे.. हां बाबा..हां.. अब कीतनी बार मुजसे कहोगी..? आप सभीतो मेरे पीछेही पड गइ हे..

पुनम : (हसते) हां तो तुजेही कहेगेनां कमीनी.. फीर तेरी भी बारी आयेगी.. तब हमेभी छुपाना हे.. हें..हें..हें..

रश्मी : (आस्चर्यसे हसते) क्या.. वंदनाकी बारी..? मतलब..? वंदु आजकल तुम बहुत कुछ मुजसे छुपा रही हो.. सच बताना कमीनी कीसको फसाके रखा हे.. कही उनसे चुदवा बुदवा तो नही लीया..? हें..हें..हें..

पुनम : (जोरोसे हसते) नही रश्मी भाभी मेतो अ‍ैसेही मजाक कर रही हु.. लेकीन ये कीमीनी कीसीको भावही नही देती.. इसे आप ही समजाइअ‍े कबतक अ‍ैसे उंगलीसे काम चलाती रहेगी.. हें..हें..हें..

कहातो वंदना सर्मसार होगइ ओर पुनमको मारनेके लीये दोडी तो पुनमभी भागती हुइ बेडके आसपास चकर लगाती रही तब सृती ओर रश्मी दोनोको हसते हुअ‍े देखती रही.. अ‍ैसेही मस्ती मजाक करते सृतीने पुनम ओर रश्मी दोनोकी प्रेगनन्सी चेक करली.. फीर तीनोके लीये रश्मी भाभीने चाइ नास्ता ठंडा सबकुछ कीया ओर चारोने खुब अन्जोय कीया.. बादमे तीन घंटेके बाद तीनो वहासे हवेली आनेके लीये नीकली..

तो इधर भानुके घरभी सबने अपनी पेकींग करली थी.. ओर साम ४ बजे रमाने चाइ नास्ता बनालीया तो सभी चाइ नास्ता करके नीकलने लगे.. रमाने भानुने नीलम ओर लताने सब समान लेलीया ओर कारकी डीकीमे रखने लगे.. तब सामान रखते लताने अ‍ेक बार अपने घरपे नजर डाली.. ओर उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. क्युकी आज वो इस घरसे विदा हो रहीथी.. ओर भावनाने उनकी मनो दसा समजली..

वो अपनी बच्चीको रमाको थमाकर लताके पास चली गइ ओर उनको गले लगा लीया.. तो लताके आंसु फुट पडे ओर अपनी भाभीको लीपटक जोरोसे रोने लगी.. तो रमा ओर सरलाने उनको समजाकर सांत कीया.. क्युकी इस घरसे उनके बचपनकी ओर बहुत कुछ यादे जुडी हुइ थी.. ओर सभी लोग कारमे बैठने लगे.. ओर रमाने सभी जगाह ताला लगा दीया ओर सब कारमे बैठकर हवेलीकी ओर नीकल गये..

इधर सभी चाइ नास्ता करके होलमे बैठेही थे तभी भानु सबको लेकर आगया.. तो चंदा मंजु ने सबका गर्म जोसीसे स्वागत कीया.. तभी भुमीका ओर नीर्मलाभी बहार आगइ.. लताने भावनाकी बच्चीको अपने हाथोमे लेलीया ओर सभी लोग अंदर आने लगे.. तब नीर्मलाको देखतेही भावनाकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. तो नीर्मलाने भी आंसु बहाते भावनाको जोरोसे अपने गले लगा लीया..

तब भावना फुटफुटकर रोने लगी.. तब केवल रमा ओर भानु ही जानते थे की भावना इतना क्यु रो रही हे.. ओर आज भानु सर्मीन्दा होने लगा.. तभी रमाभी नीर्मलाके सामने हाथ जोडकर खडी होगइ.. ओर नीर्मलाने रमाको भी हसकर गले लगा लीया.. क्युकी उनको पताथा.. की इनमे रमाकी कोइ गलती नही हे.. क्युकी रमा ओर भानु के बारेमें मंजुने नीर्मलाको सबकुछ बतादीया था.. ओर भावना अंदर होलमे चली गइ..

सभी लोग अंदर होलमे आने लगे तब अंदर भावना ओर राजीव आपसमे लीपटकर दोनोही आंसु बहा रहेथे.. ओर राजीव भावनाके सरपे हाथ रखते उसे सहेला रहाथा.. ओर भानुभी देवायतको गले मीलकर राजीवके पैर छुलेता हे.. तब राजीव उसेभी आशीर्वाद देता हे.. ओर सभी लोग सोफेपे ओर खुरसीपे बेठने लगे तब मंजु भावना लता रमा सबको लेकर उपरकी मंजीलपे चली गइ.. ओर सरला राजीवके पास बैठ गइ..

भुमीका : (सरलाके पास बैठते) कैसी हो भाभी..? क्या मुजे पहेचानती हो की नही..? हें..हें..हें..

सरला : (सरमाते भुमीका हाथ पकडते धीरेसे) भुमी दीदी.. क्यु मजाक कर रही हो..? भला मे आपको कैसे नही पहेचानती.. कहो.. कैसीहे आपकी तबीयत..? सृती बेटीको तो मील चुकी हु.. क्या वो आइ हे.. इधर..?

भुमीका : (हसते) हां.. वो ओर पुनम जरा गांवमे कामसे गइ हे अभी आजायेगी..

राजीव : (हसते) कहो सरला भाभी.. आपतो हमारे घर भानुकी सादी करके गइ इनके बादतो दीखती ही नही हो.. सादीके बाद मुस्कीलसे तीनसे चार बार घर आइ हो.. क्या हमसे कोइ गलती हुइ हे..? हें..हें..हें..

सरला : (सरमाते हसते) अरे भाइसाहब ये आप क्या बोल रहे हे.. बस अब बच्चो ओर घर सम्हालनेमे फस गइ हु.. आपकी तबीयत देखने आनातो चाहती थी.. लेकीन मुजे वहा लेकर आये कौन..? ओर मेरी भावुबेटी भी तो बच्चेकी वजहसे नही आपाइ.. कहो.. अब कैसी हे आपकी तबीयत..? वैसे देवुसे आपकी सब खबर हमे मील जाती हे..

राजीव : (हसते) बस अब ठीक हु.. इश्वरकी महेरबानीसे बच गया.. मेरे देवुने मेरी खुब सेवा की..

सरला : (देवुकी ओर हसते) हां.. हमारा देवु हे ही अ‍ैसा.. सबकी मदद करता रहेता हे.. मुजेभी कोइ प्रोबलेम यातो कोइ मुस्केली आती हे तो मे भानुसे पहेले देवुकोही बुला लेती हु.. हें..हें..हें..

कहातो नीर्मला ओर भुमीका दोनोही देवायतकी ओर जुठे गुस्सेसे घुरने लगी.. जैसे उन दोनोकी तराह सरलाके साथ भी उनको रीस्ता हो.. लेकीन उन दोनोको नही पताथाकी उन दोनोसे पहेलेही देवायतका सरलाके साथ बहुत पुराना चकर हे.. ओर वो सरलाको कइ बार चोद चुका हे.. तब देवायत भुमीका ओर नीर्मलाको उनकी ओर अ‍ैसे देखते ही हसी आगइ.. तो नीर्मला ओर भुमीका ओर भडक गइ.. ओर भुमीकाने कहा..

भुमीका : (देवुको घुरते) सरला भाभी आप इस मामलेमे बहुत लकी हे.. देवुने हमारी कदद तो कभी नही की.. क्यु नीर्मला..? क्या वो तेरी मदद करता हे..?

नीर्मला : (देवुको घुरते) मेरी मदद कहा करता हे.. येतो बस राजीव बीमार होगया तबही इनको उधर देखा..

राजीव : (समज गया दोनो देवुकी टांग खीच रही हे तो हसते) अरे.. वो सबकी मदद करता तो हे.. क्यु बेचारेकी टांग खीच रही हो..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) रहेने दीजीये पापा.. मे ये दोनोसे तो चुन चुनकर बदला ले लुंगा.. आज कल दोनो बहुत बोलती हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (खडी होकर सारीका पलु कमरमे खोसते) अच्छा हम बहुत बोलती हे..? अभी तुजे दीखाती हु..

कहेते देवायतको मारनेके लीये उनकी ओर जाने लगी तो देवायत हसते हुअ‍े जटसे खडा होगया ओर भुमीकासे बचनेके लीये सोफेके पीछे चला गया.. तो वहा बैठे सभी लोग हसते हुअ‍े दोनोका तमासा देखने लगे.. ओर भुमीका देवायतको भागते देखकर वापस हसते हुअ‍े अपनी जगाहपे बैठ गइ ओर देवायतभी वापस आकर बैठ गया.. तभी गांवकी कइ ओरते हवेलीपे आगइ.. ओर सब उनमे बीजी होगये..

तबतक मंजु चंदा रमा लता नीलमभी अपने रुममे सामान रखकर नीचे आगइ.. ओर सभी ओरते होलमे बीचमे बीछाना बीछायाथा.. वहा बैठ गइ तो नीर्मला सरला ओर भुमीकाभी सबके पास जाकर नीचे बैठ गइ.. तब रजीया दया ओर चंपाभाभी सबको पानी देने लगी.. तब सभी ओरते लखन लता ओर पुनम धिरेनका नाम लेकर सादीके गाने गाने लगी.. तब मंजु ओर चंदा बहुतही खुस होने लगी.. तो लताभी वही बैठी सरमाती हस रही थी..

तभी पुनम सृती ओर वंदना रश्मीभाभी भी आगइ.. रश्मी सबके साथ बैठ गइ तो पुनम सृती ओर वंदना पुनमके रुममे सरमाती चली गइ.. तो उनके पीछे लता ओर नीलमभी खडी होकर चली गइ.. तो दोनोके अंदर आतेही पुनम सृती ओर वंदना लता ओर नीलमको गले मील गइ.. फीर पुनमने अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया.. तब लता ओर सृती आपसमे हस हसके बाते करने लगी.. तभी वंदनाने कहा..

वंदना : (हसते) सृतीदीदी.. अब चलो अब हमे हमारी तैयारीया करलेनी चाहीये.. ये दोनोको आज सही करदे.. चलो पुनो तुम ओर लताभाभी बाथरुममे आजाओ.. ओर दोनोको चीकनी कर देगे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते धीरेसे) क्या..? मे भी..? मतलब.. मे..

सृती : (हसते) हां.. अब सादी तुम दोनोकी हे तो तुम दोनोको ही सब तैयारीया करनी पडेगी.. चलो दोनो बाथरुममे जाओ.. ओर वंदु तुमभी अपनी कीट लेले मे भी तेरी मदद करने आती हु..

तब लता ओर पुनम सरमाते हसती हुइ बाथरुममे चली गइ.. तो पीछे वंदनाभी कुछ हेर रीमुवर क्रिम ओर कुछ रेजर वगैरे सामान लेकर अंदर चली गइ.. तभी सृती ओर नीलमभी हसते बेडपे बैठ गइ.. दोनो बाते करने लयी.. तो सृती नीलमके बारेमे उनके अभ्यासके बारेमे सब जानकारीया लेते उनसे पुछती रही.. तो नीलमने उसे सहेरमे दाखीला लेनेकी बात करने लगी..

सृती : (हसते) क्या तुम नीलम होनां..? भानुभाइकी बेटी.. पढती हो क्या..?

नीलम : (सरमाते हसते) जी.. वो.. अभी सादीके बाद मेरा सहेरमे दाखला करवा रहे हे.. जहा पुनमदीदी ओर लखन जीजु पढते थे..

सृती : (हसते) अच्छा.. तो तुम वहा होस्टेलमे रहोगी.. चलो कोइ बात नही मेभी सहेरमे ही हु.. कभी कुछ काम होतो मुजसे मीलने आजाना.. मे तुजे अपना अ‍ेड्रेस दे दुगी.. क्या वही कोइ ओर पहेचान वाले हे..?

नीलम : (सरमाते हसते) जी.. वो.. वो.. धिरेनजीजु हे नां.. वो वहीतो जोब करते हे.. उसने भी मुजे मददके लीये कहा हे..

सृती : (खुस होकर हसते) कौन.. धिरेन..? अरे वोतो मेरा भाइ हे.. चलो तबतो कोइ चीन्ता नही हे.. वो तेरा बहुत अच्छेसे खयाल रखेगा.. (बाथरुमकी ओर देखते जोरोसे) वंदना.. क्या कुछ मदद करने आजाउ..?

वंदना : (अंदरसे) अरे नही दीदी.. बस अभी होगया.. आप वहा नीलमके पास बैठो हम अभी आते हे..

तभी बहारकी ओर रमेश सुधीर ओर गांवके दुसरे पंचायतके सदस्य सभी लोग आकर बैठे.. तब दया रजीया ओर चंपाभाभी सबको पानी ओर चाइ नास्ता देकर सबका आउभगत करती रही.. तो रुममे वंदना ओर सृती पहेले पुनम लताको नीचेसे साफ सफाय करके उसे वेक्सीन बगैरे करती रही फीर दोनोके साथ साथ सृती नीलम वंदना खुदको भी तैयार करती रही.. तो बहार सभी जेन्टस होलमे बैठकर गपे लगा रहेथे..

सभी लेडीस सादीका गाना गाते नाच भी रहीथी.. आज पुरी हवेलीमे सादीका माहोल बन गया था.. सभी ओर खुसीया ही खुसीया नजर आ रहीथी.. तो चारु ओर नीशा आपसमे देवायतकी ओर छुपकेसे देखते धीरेसे बाते करते हस रही थी.. तभी देवायतकी नजर नीशाकी ओर चली गइ.. ओर उसे नीशाका दीया हुआ लेटर याद आगया जो कारमे ही रेह गयाथा.. ओर वोही कार भानु अपने घर लेकर गयाथा..

तबतो ये लेटर कही भानुके हाथतो नही लग गया.. ये सोचते अ‍ेकबार तो देवायतकी भी गांड फट गइ ओर वो जटसे खडा होगया ओर भानुसे अपनी कारकी चाबी लेकर कारकी ओर चला गया.. ओर कारके अंदर बेठकर आगेके डेस्कबोड मे खाना खोलकर देखने लगा तो कवर वही सीलबंध पडा हुआथा ओर देवायतने राहतकी सांसली.. उसने कवर सीफततासे लेकर अपनी पेन्टकी जेबमे रख लीया..

ओर कार लोक करके वापस सबके पास आकर बैठ गया.. सबके साथ बाते करता रहा लेकीन उनका मन अब नीशाके कवरपे था.. तभी वो खडा होकर अपने रुममे चला गया ओर बाथरुममे घुसतेही कवर नीकालकर देखा तो उनमे से अ‍ेक चीठी नीकली.. तभी देवायत फटाफट गडी खोलकर चीठीको पढने लगता हे.. देखा तो वो नीशाकी लीखी हुइ चीठी थी.. जो उन्होने देवायतके नामपे लीखीथी.. ओर देवायत चीठी पढने लगा..

मेरे प्रिय देवायतजी..

मुजे पता हे आपको मेरे प्रिय कहेना थोडी जल्दबाजी होगी.. लेकीन अब सीर्फ यही सब्द मेरी आने वाली जींदगीको तैय करेंगे.. मे अपनी जींदगीकी जंग हार चुकी हु.. आपतो आपके भाइके बारेमे सब जानते हे.. फीरभी मे उनके साथ अ‍ेक उमीद लेकर कोम्प्रोमाइज करके जी रही हु.. लेकीन वोभी मेरा दुख भली भांती जानते हे.. ओर उसने मुजे दुसरेके साथ सादी करलेनेको या दुसरे मर्दसे सबंध बनानेको कहा.. इसीलीये वो मुजे डीवोर्स देना चाहते हे.. ताकी मे अपनी लाइफ अपने तरीकेसे जी सकु..

ओर मेने इसी हतासामे सुसायड करनेकी ठानली.. ओर अ‍ेन्ड वक्तपे मुजे चारुभाभीने आकर बचा लीया.. क्युकी सीर्फ वोही थी.. जो मेरी सब तकलीफके बारेमे जानती थी.. ओर उसीने मुजे आपके बारेमे बताकर अ‍ेक नइ उमीद जगाइ.. बस अबतो आपही मेरी उमीद हे.. मुजे चारुभाभीने अ‍ेक बार अपने दिलकी बात आपसे कहेनेको कहा.. लेकीन मेरी आपसे बात करनेकी हिमंत नही हुइ.. इसीलीये मे ये चीठीके माध्यमसे आपको अपने दिलकी बात बता रही हु.. बस अब आपपे नीर्भर हे..

मे येतो नही केह सकती की आप मुजसे सादी करलो.. हम ओरतोको चाहीये भीतो क्या..? बस आपसे केवल वो सुख चाहती हु जो आप चारुभाभी को देते हो.. क्युकी मे ओर चारुभाभी दोनो लगभग अ‍ेकही कस्तीमे सवार हे.. उन्होने आपके साथ रीलेशनमे आकर अपनी जींदगी सवांरली.. तो अब आपका उतर ही तैय करेगा की मुजे इस दुनीयामे जीना हेकी नही..

क्युकी मेरे मा बापकी भी अ‍ैसी हालत नही हेकी मे वहा वापस चली जाउ.. उमीद हे आप मेरी समस्याओको अच्छी तराह जानते मुजे नीरास नही करोगे.. आपके उतरकी प्रतीक्षामे.. आपको हमंसा चाहने वाली आपकी प्यारी नीशा.. आइ लव यु..

ओर चीठी पढतेही देवातकी आंख गीली होगइ.. नीशाने देवायतके लीये इतना बडा कदम उठालीया था देवायतको उनकी उमीद नही थी.. वो अपनी आंख पोछते पानीसे मुहको साफ करलेता हे ओर बहार आतेही अ‍ेक पेन लेकर वोही चीठीमे नीचेकी जगाह पे कुछ लीखने लगता हे.. फीर चीठीको वापस कवरमे डालकर जेबमे रख लेता हे.. फीर बहार नीकलते ही वो नीशाकी ओर अ‍ेक नजर डालकर सबके साथ आकर बैठ जाता हे..

जब सादीका नाच गाना चल रहाथा तब अ‍ेक बार नीशा ओर देवायतकी नजर मील गइ.. तब नीशाको देवायतकी आंखोमे अपने लीये बेसुमार प्यार नजर आया.. कहेते हेना कोइभी ओरतहो या लडकी सबमे अ‍ेक शक्ति होती हे जीसे हमलोग सीक्षसेन्स कहेते हे.. ओर नीशाने वही देवायतकी नजर पढली.. ओर उसे आशाकी अ‍ेक नइ किरण नजर आने लगी. ओर मनही मन खुस होने लगी..

सामको नाच गान खतम होगया तब दया रजीया सबको बडीयासा नास्ता देने लगी.. तो मंजु चंदा ओर भावना रमा सबको बडीयासी गीफ्ट देजे लगी.. तो गांवकी सभी ओरते ओर लडकीया खुस होगइ.. ओर धीरे धीरे करते सब अपने घरकी ओर जाने लगी.. तो मंजु ओर चंदाने सबको कल फीर जल्दी आजानेको कहा.. ओर धीरे धीरे करते सब लोग चले गये.. तो सुधीर ओर रमेशभी अपनी बीवीओको लेकर चले गये..

फीर सभी घरकेही लोग रेह गये.. ओर दया रजीया चंपाभाभी ओर रश्मी मीलकर रातका डीनर बनाने लगी.. तब घरके सभी लोग होलमे आकर बैठ गये.. ओर सभी आजके फंक्शनके बारेमे बाते करने लगे.. फीर साम ढलतेही सबने डनर करलीया.. ओर कुछ देर होलमे बैठकर बाते करने लगे..

तो रश्मीनेभी सरपंचके लीये अ‍ेक टीफीन लेलीया.. बाते करते सब अपने रुममे सोनेके लीये जाने लगे.. उपर भानु ओर रमा अ‍ेक ही रुममे सोने चले गये.. तो भावनाको मंजुने बच्चीकी वजहसे नीचेही सरलाके रुम मे सेट करदीया.. तभी भुमी ओर नीर्मला....कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०६/२

भुमीका : (हसते) नीमु.. ये गांवमे तो सब बहुत जल्दी सो जाते हे.. अभी तो इसी समय सृती होस्पीटलमे होती हे.. फीर आकर खाना बनाती हे ओर हम मां बेटी देरसे १० बजे खाना खाती हे.. ओर देखो.. यहातो अभी नव बजनेको आया ओर हमने खानाभी खा लीया ओर येतो सोनेभी जा रहे हे.. बाबा मुजे इतनी जल्दी नींद नही आयेगी.. क्या तुम लोग भी वहा जल्दी सो जाते हो..?

नीर्मला : (हसते) हां.. हमभी राजीवके आतेही खाना खा लेते हे.. ओर ज्यादासे ज्यादा दस बजते हे.. क्यु..? तुजे अभी जागना हे..? तो हम बैठते हेनां..

भुमीका : (हसते) अरे तो क्या करुगी..? मुजेतो अभी नींद ही नही आयेगी.. देर तक जागनेकी आदतजो हे..

मंजुला : (सुनतेही हसते) बुआ.. तो क्या हुआ.. अभी देवु रश्मीभाभीको उनके घर छोडने जायेगे तो आपभी उनके साथ चली जाओ.. ओर वोकींग करते जाना ताकी आपका टाइमभी पास होजाये.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) हां ये सही हे.. नीमु तुमभी चलोना.. दोनो साथमे वोकींग करलेगी.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (सरमाते हसते) ना बाबा ना.. मुजे नही करनी वोकींग.. तुमही अकेली चली जाओ.. फीर आकर सो जाना.. मुजे राजीवको दवाइ भी पीलानी हे.. कुछ देर उनके पास बैठुंगी.. फीर तेरे रुममे आकर सो जाउगी.. तो आकर सो जाना..

तभी लता भावनाके बडे बेटे भावेशको लेकर उपर चली गइ तो उनके साथ नीलमभी चली गइ.. नीचे पुनमके बेडपे सृती ओर वंदना सेट होगइ.., ओर तीनो लेटकर आपसमे बाते करने लगी.. तभी मंजुने देवायतको भुमी बुआको साथ लेकर रश्मीभाभीको उनके घर छोडनेको केह दीया.. तो भुमीका कातीलाना हसते हुअ‍े खडी होगइ ओर तीनो चलकर रश्मीके घरकी ओर जाने लगे.. तब आज रश्मी कुछ नीरास होगइ..

क्युकी साथमे आज भुमीकाथी तो वो देवायतसे अकेली मीलनेका चान्स गवा चुकी.. तभी भुमीकाने रश्मीके बारेमे जानना चाहा तब घरतक पहोंचते रश्मी इन सोर्ट अपने बारेमे सबकुछ बता देती हे.. बस सीर्फ उनके ओर देवायतके रीलेशनके बारेमे नही बताती.. तब देवायतका गांवके लीये इतना कुछ करना.. भुमीको देवायतपे गर्व महेसुस होने लगा.. ओर वो साथमे चलते देवायतके बारेमे सोचने लगी..

(बस थोडा अतीतमे)

आज कितने दिनोके बाद वो देवायतसे अकेली मील रही थी.. जबसे देवायतने उनका बडा घर बीकवा दीया ओर भुमीको अच्छी खासी तगडी कीमत दीलवाइ.. ओर उसे अ‍ेक नया बंगलो भी सस्ते दामोपे दीलवा दीया.. तबसे भुमीका देवायतपे आंख बंध करके विस्वास करने लगी थी.. तब कुछही दिनोके बाद अ‍ेक दिन अचानक नीर्मला उनको ढंढते हुअ‍े भावनाके साथ सहेरमे आगइ.. ओर उसे मीली..

दोनोही अ‍ेक दुसरेको गले लगाकर खुब रोइ.. तब सृती अपने क्लीनीकपे थी.. फीर दोनोही अपने कोलेज लाइफको याद करते बाते करती रही.. ओर बातो बातोमे भुमीको पता चलाकी देवायतही किशनका बेटा हे.. तबसे भुमीका देवायतको अपने घरका लडका समजने लगी.. ओर अ‍ेक बार फीरसे उनके मनमे सृतीके लीये अ‍ेक नइ उमीद बढने लगी..

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फीर भावनाके साथ होनेकी वजहसे नीर्मलाने भुमीकाके साथ ज्यादा बाते नही की.. ओर भुमीकाको जल्द दुबारा मीलनेको कहेकर वापस अपने गांव चली गइ.. ओर अ‍ेक हप्तेके बाद नीर्मला वापस भुमीको मीलने आइ.. उस दिन भुमीका ओर नीर्मलाने वोही पुराना लेस्बीयन खेल खेला.. भुमीका आजभी उतनीही जवान ओर खुबसुरत दीख रहीथी वो आजभी बहुत कामुक ओर प्यासी ओरत थी..

तब नीर्मला ओल रेडी देवायतके साथ रीलेशनमे आचुकी थी.. फीरतो नीर्मला अक्सर भुमीको मीलने लगी.. कइ बारतो भुमीका नीर्मलाको फोन करके अपने पास बुला लेती.. तब मीलतेही दोनोके बीच लेस्बीयन खेल होता.. तभी अ‍ेक दिन अ‍ेक दुसरेकी चुतमे उंगली करते बातोही बातोमे नीर्मलाने उनके देवायतके साथ रीलेशनकी बात कहेदी.. ओर उस दिन देवायतके लंडकी ओर उनके चोदनेकी स्टेमीनाकी बहुत तारीफ करदी.. तबसे भुमीका का देवायतकी ओर देखनेका नजरीया बदल गया..

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फीरतो भुमीका देवायतसे ज्यादा नजदीक रहेने लगी.. ओर उनके मीलतेही घंटो तक दोनो बाते करते.. समय बीतने लगा.. तबतक तो देवायत भी मंजुके साथ सादी कर चुकाथा.. ओर उसने नीर्मलाके साथ भी ब्रेकअप करलीया था.. इसी बीच भुमीका ओर देवायतके बीच नजदीकीया बढने लगी.. देवायत ओर भुमीका बार बार मीलने लगे.. जबसे नीर्मलासे देवातके लंडके बारेमे सुना तबसे भुमीका बार बार उसे देखने लगती..

फीर तो अक्सर देवायत महीनेमे तीनसे चार बार भुमीको उनके घर मीलने चला जाता.. तब सृती अपनी क्लीनीकपे होती ओर देवायत भुमीका पुरानी सब बाते करते रहे.. तब कइ बार भुमीकाकी नजर देवायतके पेन्टके उभारपे चली जाती.. आखीर वोभी तो किशनका खुन हे.. तो भुमीकाको ये सब बाते सहज लगने लगी.. ओर उनके किशनके साथ बीताये हर पलको याद करने लगती.. तब वो बहुत सरमा जाती.

देवायतका भुमीको बार बार मीलना.. ओर ये सब बाते बार बार याद आती रहेना.. भुमीके लीये.. अब सरमकी बाते नही रही.. ओर वो धीरे धीरे देवायतसे खुलकर बीना सरमाये बाते करने लगी.. तब कभी कभी बातोमे वो देवायतकी मस्तीयाभी करने लगती तो देवायतभी भुमीके साथ खुलकर बाते करते भुमीके साथ मजाक मस्ती कर लेता.. दोनो हर विसय पे खुलकर चर्चा करते..

अ‍ेक दिन दोनोही बाते कर रहेथे तब देवायतने अपने बापु ओर उनकी सास नीर्मलाके रीलेशनके बारेमे पुछ लीया.. तो भुमीकाने बीना सरमाये देवायतको सबकुछ बता दीया.. की कैसे नीर्मला ओर उनके बापु.. उनकी हाजरीमे मीलते थे.. ओर उनके सामनेही सबकुछ करते थे.. सब बाते अ‍ैसे बताती रही की दोनो बहुत पुराने दोस्त हो.. तब सेक्सकी बाते करते अ‍ेक बार फीर भुमीकाकी काम वासना बढने लगी..

भुमीकाको देवायतसे अ‍ैसी बाते करते देवायतका साथ अच्छा लगने लगा.. कइ बार दिनमे वो देवायतको फोन करके उनके घर बुला लेती.. ओर दोनो खुब अ‍ेक दुसरेकी मस्ती करते बाते करते रहेते.. अबतो मस्ती करते हाथोसे भी अ‍ेक दुसरे को छु लेते.. कभी भुमी देवायतको मारने लगती तो देवायतभी भुमीके दोनो हाथ मजबुतीसे पकड लेता.. तो कभी भुमीको अपनी गोदमेभी उठा लेता.. तो कभी भुमीकाके नीतंबपे चपत लगा देता.. तब भुमीका खुब सरमाती ओर जोरोसे हसने लगती..

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भुमीको भी देवायतके साथ अ‍ैसी मस्ती करनेमे बहुत मजा आने लगा.. फीर भुमीका देवायतके लीये उनकी मन पसंद डीस बनाती.. ओर दोनो साथमे खाना खाते.. बात यहा तक बढ गइकी दोनो ही जरुरतसे ज्यादा मस्ती करने लगे.. ओर बात अ‍ेक दुसरेके साथ छेडछाड तक आगइ.. दोनोही धीरे धीरे करते अ‍ेक दुसरेके साथ छुटछाट लेने लगे.. जैसे ये दोनो कोइ प्रेमी हो.. तब भुमीका तीरछी कामुक नजरोसे देवायतको देखकर हसती..

जब देवायत घर आनेके लीये वापस आता तब भुमीका नीरास होजाती ओर देवायतसे फीरसे मीलनेका वादा लेकर वक्त तैय कर लेती.. भुमीको पताही नही चलाकी वो देवायतकी ओर काफी ढल चुकी हे.. भुमीका देवायतको तबभी बुलाती जब सृती अपनी क्लीनीकपे होती हे.. अ‍ैसा वो क्यु कर रही हे उनकोभी नही पताथा.. बस उनकोतो सीर्फ देवायतसे हर वीसय पे बारे करना.. उनके साथ मस्तीया करना देवायतका उनके साथ छेडछाड करना.. यही सब बातेसे देवायतका साथ अच्छा लगने लगा था..

तब अ‍ेक बार देवायत उनके कामोकी वजहसे दो महीने तक भुमीकाको नही मील पाया.. तब भुमी बेचेन रहेने लगी.. ओर सृतीपे भी बात बातपे चीडने लगी.. तब उसे अहेसास होगया की जो देवायतको अपना दिल दे बैठी हे.. ओर वो सोचतेही खुब सरमाइ.. फीर भी देवायतके बगैर नही रहेपाइ.. तब उसे नही पताथा की देवायतके दिलमे भी भुमीके प्रती चाहत बढ गइ थी..

देवायत भी भुमीकाको पसंद करने लगाथा.. उसे बडी उमरकी ओरतोको प्यार करना बहुत पसंदथा.. ओर वो भली भांती जानता था की भुमीका रीस्तोमे उनकी बुआ हे.. लेकीन भुमीकाकी खुबसुरती आजभी कहेर ढाल देती थी.. ओर भुमीका भी देवायतको पसंद करने लगी थी.. ओर अ‍े दिन उसने देवायतको फोन करदीया.. तब देवायतने उसे दो दीनके बाद मीलने आउगा कहेकर बात करने लगा..

भुमीका : (धीरेसे) देवु.. मुजसे नाराज हो क्या..? जो दो महीनोसे मुजे मीलने भी नही आता..

देवायत : (हसते) आंटी.. बस थोडा काममे फसाथा.. (हसते) क्या मेरी बहुत याद आ रही हे..? आप मेरे बगैर नही रेह सकती..? कही आपको मुजसे प्यार तो नही हो गया.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते हसते) कमीने.. अ‍ेक मारुगी.. प्यार कीतो बातही मत करना.. मेने देखा तेरा प्यार.. तभीतो मुजे दो महीनोसे मीलने नही आया.. ओर कुते.. मे बुआ हु तेरी कोइ तेरी गर्लफ्रेन्ड नही हु.. ओर तु आंटी कीसको कहेता हे..? कीतनी बार कहा मे तेरी बुआ हु.. फीरभी जान बुजकर मुजे आंटी कहेकर चीडाता हे.. तु अ‍ेक बार आकर मील मुजे.. फीर मे तेरी खबर लेती हु.. कब आ रहा हे तु..?

देवायत : (जोरोसे हसते) तबतो आंटी मुजे आनाही नही.. खामखा मुजे मार पडेगी.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) अरे.. क्यु तंग करता हे मुजे.. अरे अ‍ेक बार आजानां.. वो तेरा बील्डर दोस्त हेना उनके आदमी इस महीने किरायाभी लेने नही आया.. तुमही उसे पहोंचादे.. बस ये दो दिनमे आजा.. क्या तेरी बुआको भुल तो नही गया..? चल तेरे लीये बढीया खाना बनाउगी.. ओर साथमे आइसक्रिम भी खीलाउगी.. बस अब खुस..? अब तो आयेगानां..?

देवायत : (हसते) हंम.. तो ठीक हे.. अबतो आपकी आइसक्रिम खानेके लीये आनाही पडेगा.. बस कल तक वैइट करलो मे कल ही आता हु.. वहा मुजे सहेरमे आधे दिनका काम भी हे..

भुमीका : (सरमाते हसते धीरेसे) सुन देवु.. वो पहेले तेरा काम खतम करके इधर आना.. कल सृतीभी कही बहारगांव कोन्फरन्समे जाने वाली हे.. वो परसो सामको आयेगी.. तो तुम यही रुक जाना.. मंजुको कहे देना.. भुमी बुआ अकेली हे इसीलीये मुजे अपने घर बुलाया हे.. कहो तो मे उसे फोन करदु..?

देवायत : (हसते) हंम.. नही मंजुकोतो मे कहे दुंगा.. मतलब आपके लीये मुजे वहा रुकना हे.. ओर वोभी सीर्फ अ‍ेक आइसक्रिमके लीये.. ओर कुछ नही मीलेगा..? हें..हें..हें..

भुमीका : (स्र्मसार होते समज गइ) कमीने ओर क्या चाहीये तुजे..? बदमास.. तेरी बीवी तुजे नही देती..? जोभी चाहीये तेरी बीवीको कहेना.. वो दे देगी.. मेरी मस्ती करता हे.. अ‍ेब बार आकर मील मुजे.. फीर देती हु तुजे.. चल फोन रख.. कमीना कहीका..

कहेते जुठे गुस्सेके साथ भुमीकाने फोन रख दीया.. ओर थोडी देर सोफेपे बैठी रही.. फीर कुछ सोचते सरमाते हसने लगी.. आज देवायतने उनके साथ कैसी बाते करलीथी.. भुमीका यही सोचते सरमाती रही ओर मुस्कुराती रही.. आज देवायतने अनजानेमे ही सही भुमीकाके दिलके तार छेड दीये थे.. ओर भुमीका रोमांचीत होने लगी.. जैसे जैसे देवायतके बारेमे सोचती रही उनकी देवायतको मीलनेकी बैचेनी बढने लगी..

ये पहेली बार नही था.. अ‍ैसी मस्तीया दोनो कइ बार कर चुके थे.. ओर भुमीकाको भी देवायतके साथ अ‍ैसी मस्तीया करना पसंद था.. भुमीका कइ बार कामुक नजरोसे देखते देवायतकी जांग सहेलाते उनको उतेजीत करते उनकी मस्तीया करती.. तो देवायतभी कइ बार भुमीकाके नीतंबको अपने हाथोसे दबा देता तब भुमीका उसे मारनेके लीये दोडती ओर वो भागता.. फीर भुमीकाको अपनी गोदमे उठा लेता..

तब भुमीकाके उरोज देवायतके सीनेमे दब जाते.. तब उनकी कामवासना बढ जाती ओर वो खुब सरमाती.. वो चाहतीकी देवायत उसे अभी मसलके चोदले.. लेकीन देवायत अपने भतीजे होनेकी वजहसे उनको कहेनेकी हिमंत नही करपाती.. तब वो देवायतके गाल चुम लेती.. ओर देवायतभी उनको अपनी गोदमे उठाकर पुरे घरमे घुमता.. तब वो उनका कोइ विरोध नही करती ओर हसते हुअ‍े मजे लेती..

आखीर वो दिनभी आगया.. जब देवायत सहेरका सभी काम नीपटाकर दो पहोर तीन बजे भुमीके घर आगया.. तबतक सृतीभी खाना खाकर कोन्फरन्समे जा चुकी थी.. जब दरवाजा खटखटा तब भुमीका जटसे आगइ ओर दरवाजा खोल दीया.. तो सामने देवायत मुस्कुराते खडाथा.. ओर भुमीने सरमाकर हसते उसे रास्ता देदीया जब देवायत अंदर आगया तब भुमीने दरवाजा बंध करके लोक करदीया ओर पलटकर देखा..

तो देवायत उनके पीछे सोफेके पास खडा भुमीको देखते हस रहाथा ओर भुमीका कुछ बोले बगैर ही दोडकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तो देवायतनेभी भुमीकाको कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. दोनोही इस तराह आज पहेली बार मील रहेथे.. ओर भुमीका काफी देर देवायतके सीनेमे सर रखके उनकी बाहोमे खडी रही.. फीर धीरेसे सर उठाकर देवायतके चहेरेकी तराह देखा.. तब देवायत उनकी ओर देखते मुस्कुराता रहा.. ओर भुमीका अचानक उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. फीर देवायतकी ओर देखकर कहा..

भुमीका : देवु.. इस बार तुमने मुजे बहुत इन्तजार करवाया.. तुमने क्या जादु करदीया हे.. तेरे चहेरेको देखे बगैर मुजे कही चेइनही नही मीलता.. कहा फस गयाथा तु.. क्या अ‍ेक बारभी इस बुआकी याद नही आइ..?

देवायत : बुआ बहुत आतीथी.. लेकीन क्या करु..? काममे जो फस गयाथा.. आपतो जानती हे.. जबसे बापु गुजर गये तबसे बहुत काम बढ गया हे.. अबतो भानुभी हमारे साथ खेतोपे आगया हे..

भुमीका : (अलग होते दोनो हाथ थामते) चल बोइ बात नही.. अब कल साम तक तुजे जाने नही दुगी.. सृतीभी नही हे.. कल सामकोही आयेगी.. बस इस लडकीकी सादी होजाये.. तो गंगा नहाये..

देवायत : बुआ हो जायेगी.. कोइ अच्छा लडकाभी मीलना चाहीयेना.. जो यहा रेह सके.. ओर आप दोनोकी अच्छी तराह देख भाल कर सके..

भुमीका : (सरमाते हसते) मीलाथा अ‍ेक.. लेकीन.. उसनेभी कही ओर सादी करली.. वैसे वो अबभी मेरी सृतीको अपना सकता हे.. बस उनसे बात करनेकी देरी हे..

देवायत : (हसते) अच्छा..? कौन हे वो खुसनसीब लडका मुजसे कहीये मे उनसे बात करता हु..

भुमीका : (हसते) अरे नही नही.. जब जरुरत पडेगी तब तुमस ेही कहुगी.. चल पहेले कुछ खा पीले.. सुबहसे घरसे नीकला होगा.. तो भुख लगी होगी.. मेने तेरे लीये तेरी पसंदकी सब्जी बनाइ हे..

देवायत : नही बुआ मे होटेलमे हमारे अ‍ेक व्यापारीके साथ खाकर आया हु.. बस चाइ ही बनालो.. मेरी यादमे कीतनी दुबली होगइ हो.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते हसते अ‍ेक मुका मारते) चल बदमास.. हर वक्त तुजे मस्ती ही सुजती हे.. चल मेरे साथ कीचनमे.. कंपनी दे मे चाइ बना देती हु.. कुछ नास्ताभी करले..

कहेते दोनोही कीचनमे चले गये.. भुमीका आजभी मटकते चलती तो कहेर ढाल देती.. देवायत उनके नीतंबको देखते उनके पीछे चलने लगा.. तब भीमुकाने पीछेकी ओर मुह घुमाते देखा.. तो देवायतको उनके नीतंबको ताडते वोभी देवायतकी नजरसे घायल होगइ.. वो भली भांती जानती थी की देवायत उनके पीछवाडेको देखेगा..

ओर भुमीकाको भी देवायतका इस तराह उसे ताडना अच्छा लगता था.. वो मुस्कुराते कीचनमे चली गइ.. तब देवायत वही प्लेटफोर्मपे बैठ गया ओर भुमीका चाइ बनाने लगी.. वो चाइ बनाते तीरछी नजरोसे देवायतको देखते मुस्कराती रही.. तभी रश्मीकी आवाजने उनको अपने अतीतकी यादोसे बहार नीकाल दीया ओर वो रश्मीकी आवाजसे चोंक गइ..

(अतीतसे बहार)

रश्मी : लोजी बुआजी.. आगया मेरा घर.. आइअ‍े अंदर फीर चाइ बाइ पीकर आरामसे चले जाना..

भुमीका : (उनके पीछे अंदर जाते) अरे रश्मी.. घरतो तुमने बडा बनवाया हे..

रश्मी : (हसते) हां.. तो बुआ हरामकी कमाइसे तो बडाही बनेगानां.. आइअ‍े देखीये अपने पापोकी सजा अब खटीयामे पडे भुगत रहे हे.. बहुत गरीबोकी जमीन पैसे ओर ओरतोको लुटा हे.. इश्वर भला करे इस देवरजीका.. जो सबको अपनी जमीन वापस दे रहे हे.. आइअ‍े अंदर..

कहेते रश्मी देवायतके पीछे भुमीकाभी अंदर आगइ ओर सीधेही तीनो सरपंच वाले रुममे चले गये.. तो वहा खडीयापे सरपंच मुह टेडा करते पडा था.. जैसेही सरपंचने भुमीकाको देखा सरपंचकी आंख बडी होगइ.. ओर वो खटीयापे ही उछल कुद करने लगा.. क्युकी किशन भुमीकाके रीस्तेके बारेमे छानभीन करके दोनोके रीस्तेको गांवके सामने उजागर करना चाहता था.. ओर इनके बदले किशनकी कीतनी जमीन किशनको ब्लेक मेइल करते हडप चुकाथा.. जीनके बारेमे भुमीका भी जानती थी..

भुमीका : (सरपंचको देखतेही स्माइल करते) क्युजी.. सरपंचजी.. पहेचाना मुजे.. अब कैसा लग रहा हे..? मेरे किशनको बहुत परेसान कीयाथानां..? अब देखो.. इश्वरने उनकी सजा दे दी आपको..

देवायत : (आस्चर्यसे) अरे.. बुआ.. आप पहेचानती हो..इसे..?

भुमीका : (सरपंचकी ओर कुटील मुस्कानसे) हां देवु.. बहुत अच्छी तराह.. मेरे किशनको खुब परेसान कीया हे.. उनकी बहुत सारी जमीनभी हडप चुका हे.. ये कुता अभी तब जींदा हे वोही बहुत बडी बात हे..

रश्मी : (हसते) बुआ फीकर मत करो.. अब ये ज्यादा दीनके महेमान नही हे..

भुमीका : (हसते) रश्मी बेटा.. तुमतो बहुत अच्छी लडकी हो.. इस कीमीनेके पले कैसे पड गइ..?

रश्मी : (हसते) बुआ.. नसीब फुटाथा मेरा.. अब जाके.. इनसे छुटकारा मीला हे.. कमीनेका इनकी बहेनके साथ ही चकर था.. मेरी ही पडोसमे रहेती थी.. ओर मेरीही खास सहेली थी.. फीरभी मुजे मालुम नही हुआ.. खैर आप आइअ‍े मेरे रुममे बैठीये मे कुछ बनाके लाती हु.. क्या पीयोगे..?

भुमीका : रश्मी कुछ ठंडाही बनादे चाइमे फीर नींद नही आती.. हें..हें..हें..

रश्मी : (देवायतकी ओर इसारा करते हसते जाते) हां तो इनके साथ बाते करते रहीयेगा.. ये कीस कामके हे.. हें..हें..हें..

तब देवायत ओर भुमीका दोनोही बहार आगये ओर होलमे सोफेपे अ‍ेक दुसरेके साथ चीपककर बैठ गये.. ओर रश्मी देवायतकी ओर कातील मुस्कान करते कीचनमे जाने लगी तो देवायतने उसे आंख मारते इसारा करदीया.. तब बहुत कुछ समज गइ.. ओर कीचनमे जाकर आरामसे देर लगाते ठंडा बना रही थी.. तब भुमीका देवायतकी ओर देखते सरमाकर हसने लगी..

तभी देवायतने भुमीकाके पीछे हाथ लेजाते उनको कमरसे पकडा ओर अपने नजदीक खीचते बाहोमे भरलीया तब भुमीका बहुत डरते सरमा थइ.. वो देवायतको कुछ कहेती उनसे पहेलेही देवायतने उनके चहेरेको अपनी ओर करते थाम लीया.. वो कुछ समज पाती इनसे पहेलेही देवातने अपने होठ भुमीकाके होंठसे मीला दीया ओर उसे चुमने लगा.. तब कुछ देरके लीयेतो भुमीकाभी सोक्ट होते गभरा गइ..

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फीर वोभी देवायतका साथ देने लगी.. ओर दोनो लगातार अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते होठोका रसपान करते रहे.. ओर देवायतने अ‍ेक हाथ भुमीके उरोजोपे रख दीया ओर उसे हल्केसे दबाकर मसलता भुमीके होठोका रसपान करता रहा.. तब भुमीका खुब सरमाइ ओर उनको होस आया की वो कहा हे.. ओर जटसे देवायतसे अलग होगइ.. ओर उनकी ओर तीरछी नजरोसे सरमाते हसने लगी.. तब..

देवायत : (हसते) भुमी क्या हस रही हो..? यहा डरनेकी कोइ जरुरत नही हे.. आप आरामसे बैठो.. रश्मीभाभी मेरे बारेमे सब कुछ जानती हे.. ओर यही मेरी सीक्रेट जगाह हे.. (बात बदलते) लगता हे आप मुजसे बहुत कुछ छुपाती हो.. इन सरपंचको पहेचानती हो.. मुजसे तो कभी नही कहा..? क्या मुजपे विस्वास नही हे..?

भुमीका : (देवायतको कसके गले लगाते धेरसे) नही देवु.. बात विस्वासकी नही हे.. मेरी मंजु सबकुछ जानती हे.. बस कभी वो बताना चाहे तो आप उनसे पुछ लेना.. मे आपको मेरे अतीतके बारेमे अभी नही बता सकती.. बस अ‍ेक काम बाकी रेह गया हे.. फीर में आपको मेरे बारेमे सबकुछ बता दुगी.. या सब मंजुसे जान लेना.. क्युकी अब मेरा आपके ओर सृतीके अलावा इस दुनीयामे हे ही कौन..? आइ लव यु देवु..

देवायत : (उनको अपनी बाहोमे भीचते) लव यु टु.. भुमी.. तुम अ‍ैसी बाते मत करो.. पता नही मुजेभी तुमसे कैसा लगाव होगया हे.. मे तुमको बहुत चाहता हु.. मेरी मंजुकी तराह तुमभी मेरी सबकुछ हो.. अ‍ेक मां अ‍ेक बुआ.. मेरी मौसी.. यहा तक मेरी पत्नी भी.. तुमने मुजे हर तरहका प्यार दीया हे.. मुजे तुम्हारे बारेमे कुछ नही जानना.. बस तुम जैसीभी हो मुजे स्वीकार हे..

भुमीका : (जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह.. देवु.. मेतो आपको पाकर धन्य होगइ.. आइ लव यु सो मच.. बस अब आपको मेरा सीर्फ अ‍ेक काम करना हे.. आशा हे इनमे भी आप मुजे नीरास नही करेगे.. देवु मंजुतो सब कुछ जानती हे.. तो क्या उसने कभी हमारे रीस्तेके बारेमे नही पुछा..? मुजेतो बहुत डर लग रहा हे.. कही हमारे रीस्तेके बारेमे उसे पता चल गयातो..?

दुवायत : नही भुमी.. मेरी मंजु मुजे मेरे कीसीभी रीस्तोके बारेमे नही पुछती.. उसे हमारे रीस्तेके बारेमेभी पता होगा.. पता नही वो कौन हे.. भुमी.. मे उसे ओर तुम सबको हर जन्ममे पाना चाहता हु.. तुम सभीका प्यारमे कभी नही भुलुगा..

भुमीका : देवु.. वादा करो अगले जन्ममे आप फीरसे मुजे मीलोगे.. फीरभी मे आपसे सादी कर लुगी.. ताकी पुरी जींदगी हम दोनो साथ गुजार सके.. मुजे आप प्रोमीस करो.. मे यहा सीर्फ आपके लीयेही आइ हु..

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देवायत : (बाहोमे भीचते होंठ चुमते) हां भुमी.. आइ प्रोमीस.. तुम जो कहेती हो वोही होगा.. आइ लव यु..

भुमीका : (सरमाते हसते) आइ लव यु टु मेरी जान..

रश्मी : (कोल्डींक की ट्रे लाते हसते) अरे वाह बुआको भतीजेपे बहुत प्यार आ रहा हे.. लीजीये ठंडा पीजीये..

भुमीका : (सही होते हसते) रश्मी.. यही तो मेरा भतीजा हे.. तो प्यारतो आयेगा ही.. तु बता.. अब आगे क्या करोगी..? तुमने तुम्हारे भविस्यके बारेमे कुछ सोचा हे..?

रश्मी : नही बुआ.. इन्होने मुजे पंचायतमे ही नोकरी दीलवादी हे.. तो वहीसे मेरा गुजारा होजायेगा.. बस देखते हे भगवान मुजे क्या देता हे.. तो इनके ही सहारे जींदगी जी लुंगी.. बाकी ये देवरजी तो हे ही.. हें..हें..हें..

भुमीका : (ठंडा पीते) हंम.. तो तुम प्रेगनेन्ट हो.. देखना तेरे बच्चेको इस तेरे पती जैसा मत होने देना.. आखीर खुनभी तो इनका हे..

तब रश्मी खुब रसमाइ.. उनको समजमे नही आयाकी वो भुमीकाको क्या कहे.. वो देवायतकी ओर देखकर सरमाते हसने लगी.. तो भुमीकाकोभी दालमे कुछ काला लगा.. तो वो आस्चर्यसे हसते देवायतकी ओर सवालीया नजरोसे देखती रही.. तभी देवायतने भुमीकाको सब सचाइ बताना उचीत लगा.. ताकी वो भुमीकाको भी यहा लाकर उनके साथ हम बीस्तर हो सके.. ओर वो धीरेसे कहेता हे..

देवायत : (हसते) बुआ.. आप बुरा मत मानना.. ये रश्मीके पेटमे जो बच्चा पल रहा हेनां.. वो उनके पती ये सरपंचका नही हे.. मेरा हे.. आपकी तराह रश्मीभी मुजे प्यार करती हे..

भुमीका : (खुसीसे सोक्ट होते) क्या.. मतलब.. तुम दोनोभी.. कबसे..?

रश्मी : (सरमाते हसते) हां बुआ.. जब मे सादी करके इस गांवमे आइ तब कुछ दो तीन सालके बाद ही मे इनको पसंद करने लगी थी.. ओर तबसे हम दोनो रीलेशनमे हे.. इस बारेमे मंजुभाभी भी जानती हे.. अब यही मेरे भी पती हे.. हम दोनोने सबसे हमारे रीस्तेको छुपाकर रखा हे.. यहा कीसीको पता नही की ये बच्चा हम दोनोका हे.. सब यही समजतेहे की सरपंचका हे.. तो बी केरफुल..

भुमीका : (सरमाते हसते) हंम.. रश्मी तु फीकर मत कर.. मेरा देवु हे ही अ‍ैसा.. अपने बापुकी तराह.. सबका खयाल रखता हे.. मेराभी खयाल रख रहा हे.. हें..हें..हें..

रश्मी : (सरमाते हसते धीरेसे) बुआ.. क्या आपको मीलना हे इसे..? तो जाइअ‍े दोनो मेरे रुममे चले जाइअ‍े.. वहा कोइ खतरा नही हे.. फीर दोनो आरामसे चले जाना..

भुमीका : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) नही रश्मी.. थेन्क्स.. प्लीज.. खयाल रखना हम दोनोके बारेमे कीसीको पता ना चले.. अगर इनसे मीलना होगा तब मे इनको लेकर यहा आजाउगी.. ओके..?

फीर तीनोने साथ बैठकर ठंडा पीया तब देवायत ओर भुमीने बातको डायवर्ट करदीया ओर गांवकी बाते करते रहे आज भुमीका साथमे थी तो रश्मी ओर देवायत कुछ नही कर सके तो भुमीकाभी रश्मीके सामने देवायतको मीलना नही चाहती थी.. तीनो ही अपनी मर्यादामे रहे.. फीर ठंडा पीतेही देवायत ओर भुमीका वहासे नीकल गये.. ओर चलते बाते करने लगे.. तब भुमीकाने देवायतसे सृतीकी बात करना उचीत लगा.. बस इनके लीये सही मौकेका इन्तजार था....

कन्टीन्यु
 
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