रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - ११२
दोनोही बाते करते नीचे आगइ ओर सीधेही पुनमके पास चली गइ तो वहाभी तीनो तैयार होकर बहार नीकल रहीथी.. तभी चंदा देवायतको जगाने रुममे चली गइ.. वो जानतीथी देवायत सरारत जरुर करेगा इसीलीये उसने धीरेसे दरवाजा बंध करलीया ओर देवायपे जुकते उसे प्यारसे जगाने लगी.. तभी अचानक देवायतने उसे खीचके अपने उपर सुला दीया तो चंदा हसते हुअे उनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी....अब आगे
ओर देवायत उसे बाहोमे लेकर पलट गया.. तो चंदा देवायतके नीचे लेटते छटछपाते मुहको इधर उधर करते नजरे चुराने लगी.. ओर हसती रही.. तभी देवायतने उनके चहेरेके थामते चंदाके होठोपे अपने होंठ रख दीये.. ओर दोनोही स्मुच करने लगे.. चंदा मदहोस होने लगी.. ओर देवायतके गलेमे हाथ डालके उसे जोरोसे बाहोमे भीचने लगी.. तो दवायत उनकी सारीको उची करते कमर तक लेजाने लगा.. तभी..
चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे) देवु.. अभी नही.. प्लीज.. सबलोग बहार आपका नास्तेके लीये वेइट कर रहे हे.. ओर मेने कपडेभी नये पहेने हे तो सबको पता चल जायेगा.. प्लीज.. हम दो पहोरको आरामके वक्त करेगेनां..
देवायत : (गाल चुमते) बेबी कलभी तुम सो गइ थी.. तुम अपने वादेसे मुकर रही हो..
चंदा : (मुस्कुराते होंठ चुमते) सोरी जानु.. सादीका घर हे.. सब लोग हेतो काममे थक जाती हु.. आज पका दुगी.. दो बार बस..? अबतो मेरा जानु खुस..?
देवायत : (हसते चुमते) बस..? सीर्फ दो बार..? डार्लींग पुरी रात तुजे चोदना हे.. हें..हें..हें..
चंदा : (सरमाते हसते) छीं.. कीतना गंदा बोलते हो आप.. अरे बाबा कल हमारे लखन पुनोका मंडप मुहुर्त हे.. हमे सुबह जल्दी उठना हे.. अगर मे चलने फीरनेकी लायक नही रही तो..? कुछतो समजीये..
देवायत : हंम चल ठीक हे.. अेक बार दो पहरको ओर दो बार रातको.. अब तो खुस हेनां..?
चंदा : (सरमाते हसते) हंम.. बतलब आज मेरी तीन बार चुदाइ पकी हे.. आप बहुत कमीने हो.. हें..हें..हें.. चलीये अब फटाफट नहा लीजीये जाइअे.. मेने आपके लीये स्पेसीयल आपके पसंदके आलु पराठे बनाये हे.. ओर वोभी अपने हाथोसे.. सीर्फ मेरे देवुके लीये.. ताकी आपमे ताकात आजाये तो रातमे आसानी रहेगी हें..हें..हें..
तब जाके देवायत हसते हुअे चंदाके उपरसे हट गया.. तो चंदाभी सरमाते बेडसे उतर गइ ओर अपने कपडे सही करने लगी तो देवायतने उसे अेकबार फीरसे अपनी बाहोमे भीच लीया ओर उनके होंठ चुमने लगा तभी कीसीने उनका दरवाजा खटखटाया तो चंदा जटसे देवायतकी बाहोसे अलग होगइ.. ओर दरवाजा खोलदीया तो मंजु हसते हुअे अंदर आगइ.. चंदाके सामने देखकर हसने लगी तब चंदा खुब सर्मसार होते हसती रही..
मंजुला : (हसते) लगता हे दीदी आज आप इनसे महेमानोकी वजहसे बच गइ.. हें..हें..हें.. देवु आप फटाफट नहालो आपको सहेरमे जाना हे..
देवायत : (आस्चर्यसे) क्यु.. कुछ लेना हे क्या..? अब क्या भुल गइ तुम..?
मंजुला : (हसते) अरे में कुछ नही भुली.. वो सृती कुछ अपना सामान भुल गइ हे.. तो उसे अकेला भेजना ठीक नही हे.. ओर आपके सीवा उनके साथ जायेगा कौन..? लखनको अब बहार नही भेजना.. वरना उसेही भेज देती.. प्लीज.. वो बेचारी तैयार होकर बैठी हे.. आप फटाफट नहालो.. फीर चाइ नास्ता करके नीकल जाना..
देवायत : (सृतीका नाम सुनतेही मनमे खुस होते) हंम.. चल ठीक हे..
कहेते मंजु देवायतके होंठ चुमते बहार चली गइ.. तभी देवायतको मंजुसे रातमे हुइ बाते याद आने लगी.. ओर सृतीके लीये उनके दिलमे हलचल तेज हो गइ.. ओर वो जटसे बाथरुममे नहाने घुस गया तब मंजुने रुमसे बहार आकर भुमीको इसारा करके उनके रुममे बुलाया.. तो भुमीभी सरमाते खडी होकर अपने रुममे चली गइ तब मंजु बेडपे बैठी थी.. तो भुमी भी वही जाकर बैठ गइ.. ओर मंजुकी ओर सवालीया नजरोसे देखने लगी..
मंजुला : (हसते) बुआ.. अब हमे साम तकतो कोइ खास काम नही हे.. तो क्युनां हम देवु ओर सृतीको साथ मे सहेर कोइ कामके बहाने भेजदे.. ताकी दोनोके बीच कुछ नजदीकीया बढ सके.. क्या कहेती हो आप..?
भुमीका : (खुसीसे हसते) अरे बेटी नेकी ओर पुछ पुछ.. ओर कामके बाने क्यु.. मे अभी सृतीको कहेती हु.. उनके गहेने भुल गइ हु.. जा देवुके साथ जाकर ले आ.. सादीमेतो पहेनना चहीयेनां हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते हग करते) बुआ आपभीनां.. चलो ठीक हे उसी बहाने दोनोको भेजदो.. मेने देवुसे केह दीया हेकी सृती अपना कुछ सामान भुल गइ हे उसे लेने जानाम हे आप उनके साथ चले जाइअे.. अभी वो नहाने गये हे.. चाइनास्ता करके उन दोनोको सहेर भेज देते हे.. हें..हें..हें..
भुमीका : (इमोस्नल होकर) बेटी.. थेन्क्स.. तु वाकइ मेरी महान बेटी हे.. बेटा तुमसे अेक बात कहेनी हे..?
मंजुला : (हसते) हां बुआ कहीयेनां.. क्या बात कहेनी हे..?
भुमीका : (नजरे चुराते धीरेसे सर्मीन्दा होते) बेटा.. क्या तुजे वाकइ सब पता चल जाता हे..? तो फीर मेरे बोरेमे भी सब जानती होगी..
मंजुला : (समज जाती हे तो हसते) हां बुआ.. अब बाबाने कुछ जीम्वेवारी दी हे.. तो नीभानी तो पडेगी.. मुजे पता हे आप क्या पुछना चाहती हे.. आप गील्टी फील मत करो.. ये सबतो अेक दिन होनेही वाला था.. मुजे आपके बारेमेभी सब पता हे.. ओर मेरी मम्मीके बारेमे भी सब पता हे.. ओर इनमे मुजे कोइ अेतराज भी नही हे..
बस ये बात सीर्फ आप हम तीनोके बीच सीमीत रखना.. मुजे वो बातभी पता हे जो बात आज सुबह ही आपको मालुम हुइ.. वो मुजे तबसे पता हे.. जब आप दोनो चंदामौसी ओर देवुकी सादीसे पहेले मीलेथे.. क्या आप प्रेगनेन्ट हेनां..? बुआ.. आप सर्मीन्दा मत होना.. मे सृतीको समजा दुगी..
कहातो भुमीका मंजुके गले लगकर आंसु बहाने लगी.. तब मंजु उनकी पीठ सहेलाती रही.. काफी देर तक दोनो अैसेही बेठी रही.. फीर मंजु भुमीको लेकर बाथरुममे चली गइ ओर उनका हुलीया ठीक करवाया..
भुमीका : (नजर जुकाते) बेटी.. मुजे माफ करना.. मे अपने जजबातो पे बाकु नही रख सकी.. मे देवुके बगैर नही रेह सकती.. मे ओर तेरी मम्मी दोनो अेकही कस्तीपे सवार हे.. हम दोनोकी हालत अेक जैसी हे.. क्या अबभी तुम सृतीकी सादी देवायतसे करवानेके लीये राजी हो..? तुजे ये सब जानकर दुख नही होता..?
मंजुला : (दोनो बहार रुममे आते) नही बुआ.. क्युकी आप मेरे बारेमे जानती नही.. इसीलीये आप अैसा पुछ रही हे.. हम सभी हमारे देवुकी रानीया हे.. ओर हमारा देवु इतना सक्षम हेकी हम सबको सम्हाल सकता हे.. हम सबको अेक साथ संतुस्ट कर सकता हे.. क्युकी वो कामका अंस हे ओर हम सभी रतीके अंस हे.. हम सभी वहा परीया ओर अप्सराये हे.. ओर मे सबकी जननी हु.. वास्तमे आप सभी मेरी ही संतान हे.. तो मुजे मेरे बच्चोका खयालतो रखनाही पडेगा..
कहतो भुमी अेक नजरसे मंजुको देखतीही रेह गइ.. तो मंजु भुमीकी ओर देखते हसती रही.. तबभी भुमीकाको क्षोभ हो रहाथा.. तभी मंजुने भुमीका क्षोभ दुर करनेके लीये अैसा कुछ कीया जीसे भुमीका सर्मसार होते हसने लगी.. मंजुने अचानक भुमीको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होंठ चुम लीये.. तो भुमी सर्मसार होते हसने लगी.. ओर मंजुकी पीठमे अेक मुका मार दीया.. ओर भुमीका वापस मंजुके गले लग गइ.. ओर कहा..
भुमीका : (हसते) तुमभी बीलकुल अपनी मम्मीकी तराह पागल लडकी हो.. कोइ अपनी बुआके साथ अैसा करता हे..? हें..हें..हें.. मंजु.. तुमने मेरे दिलका बोज हल्का करदीया.. थेन्क्स..
मंजुला : (हसते धीरेसे कानमे) नही बुआ.. ये मेने अपनी बुआके साथ नही.. मेरी सौतनके साथ कीया हे.. बस अबतो आप ओर मम्मी दोनोही अपनी लाइफ अेन्जोय करो.. ओर खुस रहो.. हें..हें..हें..
भुमीका : (हसते) बडी बेसर्म लडकी हो तुम.. चल बहार मे सृतीको केह देती हु.. भेजदे दोनोको सहेर.. बेटी आज मे बहुत खुस हु.. दिलका अेक बोज हल्का हो गया.. वरना तुजे पता चलजानेकी बातसे बहुत डर लग रहा था.. पता नही तुम हम सबके रीस्तोको कैसे अेक्सेप्ट करलेती हो..
मंजुला : (हाथ पडते बहार लेजाते) बुआ.. छोडीये सब.. आइ लव यु.. बस आप खुस रहो.. ओर जोभी हो रहा हे उसे होने दो.. कुछ उल्टा सीधा मत सोचना..
भुमाका : (सरमाते हसते) हंम.. वाकइ मेरी बेटी समजदार होगइ हे.. हम सबकी मां.. हें..हें..हें..
कहेते दोनोही हसते हुअे बहार आगइ.. तो नीर्मला दोनोके उपर बरोबर नजरे गडाये बैठीथी.. तो दोनोको हसते हुअे बहार आते देखकर वोभी खुस होते हसने लगी.. ओर भुमीका सृतीके पास चली गइ..
भुमीका : (हसते धीरेसे) सृती बेटा.. वो.. वो मे तेरे गहेने लानातो भुल गइ.. अब तुम सादीमे क्या पहेनोगी..?
सृती : (थोडा जुठेसे नाराज होते) मोम.. आपभीनां..? अब मे सादीमे क्या पहेनुगी..? दो घंटा लगता हे वहा आने जानेमे.. ओर लेकर आजाउ तोभी दो पहोर होजायेगी.. आपभीनां अेक भी काम ठीकसे नही करती.. अब क्या करुगी में..?
भुमीका : (हसते) अरे सोरी सोरी बाबा.. अब जाकर लेआ.. मे कीसीको साथ भेजती हु.. वैसेभी दो पहर तक कोइ खास काम भी तो नही हे.. क्या मे देवुको तेरे साथ भेजदु.. हें..हें..हें..
सृती : (अेकदम सर्मसार होते धीरेसे) मोम.. आपभीनां.. सादीकी इतनी दोडधाममे वो कहा फ्रि होगे..? (सर्मसार होते धीरेसे) मुजे नही चाहीये गहेने.. अैसे ही ठीक हु.. जाइअे आप..
भुमीका : (धीरेसे) अरी जाना.. उसे भी कुछ काम नही हे.. मंजुने ही कहा हे.. चली जा..
मंजुला : (पास आते धीरेसे कानमे) हां.. जा कुतीया चली जा.. अच्छा मौका हे.. ओर हो सकेतो सब सेट करके आनां.. चल जा.. मे उनको भेजती हु.. तुम दोनो चाइ नास्ता करके चले जाओ..
सृती : (सरमाते जुठे गुसेसे घुरते) लगता हे तुमने ओर मम्मीने ही कुछ प्लान बनाया हे.. ये जान बुजकर ही गहेने भुल गइ होगी.. मंजु.. कीतनी कमीनी हो तुम.. ओर मोम आपभीनां.. सब क्या कहेगे.. कुछतो सोचते..
मंजुला : (चंदा पासमे आते ही) अरे बडी दीदी देवुने नहालीया होगा.. जाकर उनके कपडे दे दो.. उनको सृतीके साथ सहेर जाना हे.. ये अपना कुछ सामान भुल गइ हे.. हें..हें..हें..
चंदा : (सरमाते हसते) जी.. अभी देकर आती हु..
सृती : (दांत पीसते गुस्सेसे) कुतीया.. देखना अेक दिन जरुर मेरे हाथसे पीटेगी.. मोम.. आपकोभी देख लुगी.. दोनोही अेक जैसी हो.. कमीनी..
भुमीका : (जोरोसे हसते) हां जा जा.. गालीया बादमे देना.. चल मंजु.. हें..हें..हें..
कहेते भुमीका सृतीकी ओर हसते मंजुका हाथ पकडके लेजाने लगी.. तो मंजुभी पलटकर सृतीके सामने देखते हसती रही.. तब सृती होठ फफडाते धीरेसे मंजुको जुठे गुस्सेके साथ गालीया देती रही.. जीसे देखकर भुमी ओर मंजु दोनोही जोरोसे हसने लगी.. ओर दोनो सोफेपे जाकर बैठ गइ.. ओर सृती पुनम वंदनाके पास उनके रुममे चली गइ.. तो वहा पुनम ओर वंदना दोनो ही धीरेसे हस हसके बाते कर रहीथी.. तो सृती वहा जाकर बैठ गइ..
पुनम : (हसते) क्यु सृतीदीदी ये चहेरा क्यु लाल हो गया हे.. कही कीसीने कीस बीस या आपके दुधु बुधु तो नही दबा लीया हें..हें..हें..
सृती : ( सर्मसार होते अेक मुका मारते) हां.. अब बाकी रेह गया हो तो तुम भी मेरी टांग खीचलो.. अेक कमीनी तो अभी मेरी टांग खीचकर गइ.. उपरसे मम्मीने सब गडबड कर दीया.. मेरे गहेनेही घरपे भुल गइ..
पुनम : (जोरोसे हसते) कौन.. मंजुभाभी..? हें..हें..हें.. क्या कीया उसने..?
सृती : (सरमाते हसते धीरेसे) मोम मेरे गहेने लाना भुल गइ हे.. तो अभी मुजे जीजुके साथ घर जाना हे..
पुनम : (हसते धीरेसे) दीदी अबतो जीजु मत कहो.. आपके भी होने वाले पती हे.. अच्छा मौका हे आप चली जाओ.. ओर उसे सेट करके आना.. हें..हें..हें.. जाओ ताकी आपसे मे भाभी तो केह सकु.. हें..हें..हें..
सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) पुनोदीदी मुजेतो बहुत सर्म आ रही हे.. उनसे कैसे बात करुगी..?
पुनम : (हसते) अरे कुछ नही होता. आप अेक बार जाओतो सही.. मुजेतो नीकलने नही देते.. वरना मेही आप दोनोके साथ चली आती.. ओर आप दोनोकी सेटींग करवा देती.. सृतीदीदी बेस्ट ओफ लक.. हें..हें..हें..
सृती : (सरमाते हसते) हां.. अब तुम भी सुरु हो गइ.. चलो चाइ नास्ता कर लेते हे.. सब आगये..
कहातो तीनोही हसते हुअे खडी होगइ.. तबतक सब लोग होलमे आगये.. तो दया ओर रजीया चंपाभाभी रमाभाभी सबको डीस लेकर सभी जहा बैठे थे वही सबको चाइ नास्ता देने लगी.. भानु ओर राजीवभी साथमे बैठकर चाइ नास्ता करने लगे.. लता ने नीलमको अपने साथ ही रखा.. तो सरला भी राजीवके पास बैठकर नास्ता कर रहीथी.. तो राजीव उनको आग्रह करते सब दे रहाथा.. तो नीर्मला राजीवको घुर रहीथी.. तब भुमीका नीर्मलाको देखकर हस रही थी..
सभी लोग अपनी मस्तीमे चाइ नास्ता कर रहेथे.. तभी चंदा अपने रुममे जाकर धिरेनके साथ फोनपे बात कर रहीथी.. ओर उसे आनेके लीये पुछ रहीथी तब धिरेनभी सहेरकी ओर नीकल गयाथा.. ओर बीच रास्तेपे था.. वो सामको जल्दी वहा आनेकी बात करके फोन काट देता हे.. तभी रश्मी भी आगइ.. ओर वोभी सबके साथ चाइ नास्ता करने बैठ गइ.. आज पुरी हवेली महेमानोसे भरी हुइथी.. तब रमशे ओर सुधीरभी अपनी बीवीओको लेकर आगये..
देवायत : (हसते) आओ रमेश सुधीर बडे टाइमपे आ गये.. तुम चारो भी चाइ नास्ता करने बैठ जाओ..
चारु : (कामुक स्माइल करते) नही देवरजी.. आपही करलो.. हम चारो धरसेही चाइ नास्ता करके आये हे..
मंजुला : (हसते) नीशा भाभी आप बैठ जाओ.. आज आपकी पसंदका नास्ता हे.. चारुभाभी भलेही देखती रहे.. हें..हें..हें..
नीशा : (सरमाते हसते) नही भाभी.. घरपेभी यही बनाया था.. हें..हें..हें.. सुधीरको भी यही पसंद हे..
देवायत : (हसते) रमेश अब तुम दोनो यही रहेना मुजे जरा सहेर तक जाना पडेगा.. मेरी सालीके साथ..
रमेश : (हसते) अरे भाइ आरामसे जाओ आपका यहा कोइ काम नही हे.. हमने सब काम सेट करदीया हे.. अभी मंडप वाले ओर हलवाइ वाले आ रहे हे.. हम दोनो सब देख लेगे.. ओर दो तीन लोग ओर भी आ रहे हे.. अब आपतो फ्रि.. हें..हें..हें..
राजीव : (हसते) यार यहा गांवमे अच्छा हे.. सब मीलबाटके सादी वगैरेके सभी काम नीपटा लेते हे..
मंजुला : (हसते) पापा.. ये रमेशभाइ देवुके खास दोस्त हे.. ओर ये सुधीरभाइतो उनके साथ कोलजमे पढते थे.. तबसे देवुके दोस्त हे.. ओर हमारे गांवमेही डोक्टर हे.. ये उनकी बीवी नीशाभाभी.. ओर ये चारुभाभी रमेशभाइकी बीवी हे.. वो हमारी वंदना हेना.. पुनोके साथ.. इन्हीकी बेटी हे..
राजीव : (हसते) अरे.. मे दोनोके बापुको पहेचानता हु.. तब हमभी सभी दोस्त थे.. सब घरकेही लोग हे..
सृती वंदना पुनम लता ओर नीलम साथमे बैठकर चाइ नास्ता कर रहीथी.. तो चंदा रमा रश्मीभाभी सब लेडीस साथमे बैठकर चाइ नास्ता कर रहीथी.. तो इधर राजीव देवायत भानु लखन सरला नीर्मला भुमीका ओर मंजु.. सोफेपे बैठेथे.. अैसेही बाते करते सबने चाइ नास्ता फीनीस कीया.. तो मंजु देवायतको लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर सृतीकोभी अपने रुममे बुला लीया.. तो सृतीभी सरमाती रुममे आगइ..
मंजुला : (हसते) देवु आप सृतीके साथ चले जाओ.. वो अपना सामान ले लेगी.. ओर टाइम मीलेतो आप बाबासेभी मील लेना.. ओर वो आना चाहेतो उसेभी सादीमे बुलालो.. ओर वहाके आपके सेवक लोगकोभी कहे देना.. (सृतीकी ओर) सृती.. दोनो आरामसे जाना देखना ये कोइ जल्द बाजी ना करे.. बहुत फास्ट चलाते हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) अरे यार मे बहुत धीमे कार चलाता हु.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) हां हां.. पता हे आप कैसे धीमे चलाते हो.. देखना बेचारी सृती डरना जाये..
देवायत : (सृतीकी ओर देखते) कौन ये..? कभी इनको कार चलाते देखा हे..? रेसमे मुजे भी हरा देगी..
सृती : (सरमाते अेक मुका मारते) जीजु आपतो रहेने ही दो.. आपसे ज्यादा फास्ट मे नही चलाती..
मंजुला : (हसते) अरे दोनो जगडा करना छोडदो.. ओर जाओ फटाफट.. ओर आरामसे आना.. यहा कोइ काम नही हे.. हें..हें..हें..
कहातो देवायत बहार चलने लगा.. तो सृतीभी मंजुको पीठमे अेक मुका मारते उनकी ओर देखते सरमाकर हसते जाने लगी.. तभी मंजुने हसते हुअे सृतीको थम्स अपकी साइन दीखाते धीरेसे बेस्ट ओफ लक कहा.. तो सृती सर्मसार होगइ.. ओर जटसे बहार चली गइ.. तभी मंजु भुमीका ओर नीर्मला सृती देवायतको जाते हुअे देखकते खुस होने लगी.. ओर देवायत अपनी बडी कारमे बेठ गया तो सृतीभी सरमाती उनके पास बैठ गइ ओर देवायतने कारको सहेरकी ओर दौडादी..
सृती बहुतही सरमाती रही.. ओर मजेकी बात तो यहीथी की दोनोको पताथा की दोनोकी सादी आपसमे होने वाली हे.. ओर घरवालोने जान बुजकर प्लानींग करके दोनोको साथमे भेजा हे.. सृती देवायतकी कइ बार मस्तीया कर चुकी हे.. लेकीन आज जब देवायतके साथ अकेली थी.. तब वो बहुतही सरमा रही थी.. उनको समजमे नही आ रहाथा की वो देवायतके साथ कैसे बात करे.. तो इधर देवायतका हाल भी यही था.. तभी..
देवायत : (हसते) सृती.. तुम क्या सामान भुल गइ हो..?
सृती : (सरमाते हसते) जी.. जी.. वो.. वो.. मम्मी मेरे गहेने लेना भुल गइ थी.. मेने उसे मना कीया.. फीरभी मुजे मम्मीने ओर मंजुने जबरदस्ती लेने भेज दीया..
देवायत : (अेक नजर डालते) सृती.. पता हे तुजे जबरदस्ती क्यु भेजा हे..?
सृती : (सर्मसार होते हां मे गरदन हीलाते) जी.. हम दोनोके लीये.. ताकी हम दोनो अकेलेमे टाइम स्पेन्ड कर सके.. क्या आपको घरपे काम था..? तो सोरी..
देवायत : (हसते) अरे नही नही.. वहा मुजे कोइ काम नही हे.. ओर सच कहु.. मेभी तुम्हारे साथ अकेले मे टाइम स्पेन्ट करना चाहता था.. इस बारेमे मंजुसे मेरी कलही बात हुइ हे.. क्या तुम हमारे रीस्तेसे राजी हो..?
सृती : (सरमाते हसते नजर जुकाते) जी.. मे भी आपसे सुरुसे ही पसंद करती हु.. ओर बाबानेभी मुजे इस बारेमे कहा था.. की.. मेरी सादी आपसे होगी..
देवायत : (सृतीकी ओर देखते) सृती.. तो फीर मेरे बारेमे क्या जानती हे..? तुजे पता हे मेरी कीतनी बीवीया हे..? मेरा ओर ओरतोके साथभी रीस्ता हे.. दुनीयावालो की नजरमे मे अेक अयास आदमी हु.. फीरभी मुजसे सादी करोगी..?
सृती : (पहेलीबार देवायतकी ओर देखते) जीजु.. मुजे आपके बारेमे सब कुछ पता हे.. मेरी इस बारेमे मंजुसे सभी बाते होगइ हे.. मंजुने मुजे सब कुछ बतादीया हे.. मुजे आपके कीसीभी रीलेशनसे कोइ अेतराज नही हे.. ओर मंजुकी मम्मीसे भी बात होगइ हे.. जब आप सब खरीदी करने गये थे.. जीजु.. मुजे इतना पता हे मुजे आपसे प्यार हो गया हे.. बस.. आइ लव यु.. प्लीज.. मुजे अपनालो.. मेभी आपसे प्यार करती हु.. मुजे आपके कीसीभी रीस्तेसे कोइ अेतराज नही..
देवायत : (हसते) हंम.. आइ लव यु टु.. क्या अबभी मुजे जीजु कहेगी..? हंम..?
सृती : (सर्मसार होते मु्स्कुराते नां मे गरदन हीलाते) नही.. सोरी.. देवायतजी..
देवायत : (हसते) देवायत..जी.. नही.. सीर्फ देवु..
सृती : (सरमाते) जी.. देवु.. आपसे अेक रीक्वेस्ट हे.. क्या पहेले हम आश्रम चले..? मुजे बाबाके दर्शन करने हे..
देवायत : (हसते) हमं.. तुम चीन्ता मत करो.. तुम ना कहेती तो भी मे पहेले वही लेजाता.. मुजेभी बाबाका सुक्रीया अदा करना हे.. इस खुबसुरत बीवी देनेके लीये.. सृती.. आइ लव यु.. तुम मेरी जींदगीका बहुतही महत्वपुर्ण हीसा हो.. क्या तुमने रश्मी ओर पुनोको चेक कर लीया..?
सृती : (सरमाते हसते) हंम.. रश्मी भाभी बीलकुल ठीक हे.. मेरीही दवाइ चालु हे.. ओर पुनमदीदी.. सी इस प्रेगनेन्ट.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. आप पापा बनने वाले हे.. आपही का बच्चा हेनां..?
देवायत : (हसते) हंम.. लगता हे तेरी मंजुके साथ काफी कुछ बाते होगइ हे.. क्या तुजे मेरीही बहेनके साथ अैसे रीलेशनसे बुरा नही लगा..?
सृती : (हसते) नही देवु.. मे वो हिमाचलके राजाकी पुरी कहानी जानती हु.. वास्तवमे हम सभीतो उनका हिसा हे.. तो फीर बुरा लगनेकी क्या बात हे.. देवु.. जबसे मुजे मंजुकी बातोसे पता चला तबसे मेने भी प्रकृतीको अपना लीया हे.. ओर ये सब रीस्ते नातेका कोइ मायना नही हे.. सीर्फ सहेर ही नही.. अबतो गांवमेभी कइ अैसे रीस्ते दीखनेको मीलते हे.. ओर आपके गांवके लोगभी मेरे यहा आते हे..
देवायत : (अेक नजरसे देखते) मतलब..? क्या मीया बीवी आते हेनां..?
सृती : (सरमाते हसते) नही देवु.. सीर्फ मीया बीवी नही.. कइ ओर लोगभी आते हे.. मेतो अैसा काम नही करती.. लेकीन मेरी अेक सहेली हे.. वो पैसे लेकर यही काम करती हे.. ये इलीगल हे..
देवायत : (हसते) सृती.. क्या हमारे गांवसे अैसे लोग आते हे..?
सृती : (सरमाते हसते) हां देवु.. मेरे पास आते हे तो मे उनको मेरी सहेलीके वहा भेज देती हु.. आपहीके गांवके कोइ बडी उमरके ---नामके बुजुर्ग आदमी हे.. उनकी बहुसे बात हुइ तो कहेती थी उनका पती दुबइमे हे.. ओर ये मेरे ससुर हे.. हमारे सामने तो सब सचही बोल देती हे.. वो ससुर बहु.. दो बार मेरे पास अपना अेबोर्सन मतलब बच्चा गीराने आये थे.. तो मेने मेरी सहेलीके पास भेज दीया..
देवायत : (चोंकते) कौन..? वो --लाल..? वो अपनी बहुको..? यकीन नही होता.. दीखनेमे तो बहुतही धार्मीक लगता हे..
सृती : देवु आप बुरा मत मानना.. पती इतने टाइमसे दुबइमे हे.. तो वोभीतो ओरत हे.. उनकीभी नीड होती हे.. तो बेचारी कहा जायेगी..? ओर घरकेही पुरुषसे सबंध रखलीये.. ताकी बहार कीसीको सकभी ना पडे ओर उनकी बदनामी भी नाहो.. मे इस रीस्तेको गलत नही मानती.. इनकी छोडो.. आपके गांवसे कइ लडकेभी आ चुके हे.. पुछते हेतो कहेते हे मेरी गलफ्रेन्ड हे.. लेकीन पुलीसका डर दीखाओतो लडकी सब सच बता देती हे.. वो उनके भाइसे ही प्रेगनेन्ट होती हे..
देवायत : (आस्चर्यसे) ओह गोड.. बाबा सच कहेते थे.. सृती लगता हे अब वक्त आगया हे.. की हमारे गांवमे.. अरे सीर्फ हमारे गांवमे क्या..? आजु बाजु सभी गांवमे यही होने वाला हे.. कोइ रीस्ताही नही बचेगा.. सबको मेरी तराह आपसी रीस्ताही पसंद हे.. हें..हें..हें..
सृती : (हसते) देवु छोडो ये सब बाते.. यहा तो रीस्तेके कोइ मायने ही नही हे.. सीर्फ आपके गांवमे नही सहेरमे भी अैसे कइ केस आते हे.. कोइ अपनी बडी बहेनको तो कोइ अपनी विधवा बुआको लेकर आते हे.. तो कोइ अपनी भाभी चाची.. मामी.. बहेन.. कीसीको नही छोडते.. ये तनकी आगही अैसी हे.. जब लगती हे तो कोइ रीस्ते नाते नही देखती.. सबको अपने तनकी प्यास बुजानी हे..
देवायत : (हसते) अच्छा..? चलो कोइ बात नही.. मेतो समजताथा की सीर्फ हमारे घरमेही ये सब हो रहा हे.. लेकीन यहातो सभीको अैसे रीस्ते पसंद हे.. हें..हें..हें.. सृती.. हो सकता हे.. आगे जाकर तुजेभी मेरे बारेमे अैसे रीस्तोका पता चले.. तो फीर तु क्या कहोगी..?
सृती : (थोडा खुलके) देवु.. छोडो ये सब बाते.. मुजे आपके कीसीभी रीस्तेसे अेतराज नही.. जब खुदकी बहेनको प्रेगनेन्ट करदीया.. तो फीर दुसरे रीस्तोके क्या मायने.. मुजे ये कहो.. जब हम दोनोकी सादी होजायेगी तो मे रहुगीं कहा..? क्या आपने इस बारेमे कुछ सोचा हे..?
देवायत : (हसते) पहेले तुम कहो.. तुम क्या चाहती हो..? कहा रहेना पसंद करोगी..?
सृती : (जोरोसे हसते) अरे.. मुजे क्या पता..? आपही कहे दो.. मेतो आपकी बीवी होजाउगी.. तो फीर आप जहा चाहो मे रहेनेके लीये तैयार हु.. बस अेक मम्मीकी चीन्ता हे..
देवायत : (हसते) नही सृती.. तुजे चीन्ता करनेकी कोइ जरुरत नही.. तु सहेरमे तेरी मम्मीके साथ ही रहेगी.. मे वहा आता जाता रहुगा.. क्युकी तेरी क्लीनीकभी तो वही हे.. ओर वैसे मेरी अेक बीवी सहेरमे भी तो होनी चाहीये.. हें..हें..हें..
सृती : (सरमाते खुसीसे हसते) आप बहुत सरारती हो.. देवु.. थेन्क्यु वेरी मच.. आपने हमारे बारेमे इतना कुछ सोचा.. आइ लव यु.. सो मच.. लेकीन मंजुदीदी ओर चंदादीदीको बुरातो नही लगेगानां..?
देवायत : (हसते) नही.. तु टेन्शन मत ले.. मेरी मंजुनेही कहा हे.. ओर मंजुसे मंजु दी..दी..?
सृती : (सरमाते हसते) हां.. आपको कोइ अेतराज..? अब वो मुजसे बडी हे.. मेरी सौतन.. हें..हें..हें.. तो अबतो उस कमीनीको दीदी ही कहेना पडेगा हें..हें..हें..
दोनोही अैसी प्यारभरी बाते ओर मस्तीया करते करते आश्रमपे पहोंच गये.. तो वहा अेकल दुकल लोगही दीख रहेथे.. तो सृतीने अपना सर दुपटे से ढक लीया.. ओर देवायतसे सटकर उनके साथही अेब बीवीकी भांती चलने लगी.. दोनोही मंदिरमे दर्शन करके बाबाके पास चले गये.. तो बाबाभी अेक सेवकके साथ होलम अकेले तैयार होकर बैठे थे.. तो दोनोको देखतेही उनके चहेरेपे स्माइल आगइ..
बाबा : (हसते) आइअे.. आइअे.. महाराज आजतो सुबह सुबह ही आपके दर्शन होगये.. हें..हें..हें..
देवायत : (दोनोही पैर छुते) क्या बाबा आपभी.. सुबह सुबह आपको कोइ नही मीला..? अब काहेका महाराज.. अब आपभी मेरी मस्तीया करने लगे..
सृती : (सरमाते हसते) बाबा प्रणाम..
बाबा : (आशीर्वाद देते) जीती रहो बेटा.. क्या दोनोने सादी करली..? ओर कलतो पुनम बीटीया ओर तेरे भाइकी सादी हेनां..? तो तुम दोनो इधर कैसे आगये..?
देवायत : (हसते) बाबा अभी कहा हमने सादी कीहे.. अभीतो इसे सादी करनेके लीये मना रहा हु.. हें..हें..हें.. येतो इनका कुछ सामान भुल गइथी तो सहेर लेने जा रहेथे.. तो कहेती हे बाबाके दर्शन करने हे.. तो दोनो यहा चले आये.. हें..हें..हें..
बाबा : (सृतीको देखते हसते) देखा बीटीया.. मुजे कहेताथा मेरी मसती करते हो.. अब कौन कर रहा हे..? अेक बार तु इनसे सादी करले.. फीर मार मारके इनको सुधारदे.. बहुत सरारती होगया हे.. क्या ये सादीके लीये मान गया..?
सृती : (सरमाते हसते) जी.. मान गये हे.. हें..हें..हें..
बाबा : (सरपे हाथ रखते) बेटी.. तुजे पताही नही हेकी तुम सब कौन हो.. मेरी मंजु बीटीयाने तुजे बतातो दीया होगा.. बस अब तुजे ओर पुनम बीटीयाकोही सब सम्हालना हे.. मेरी पुनम बेटी बहुतही स्ट्रंोग ओर होनहार हे.. तुम उनका साथ देना.. अभी वो बच्ची हे..
देवायत : (हसते) बाबा आपकी मंजु बीटीयाने आपको सादीका न्योता दीया हे.. आपको ओर सब सेवकोको वहा आना हे.. हें..हें..हें..
बाबा : (हसते) हां वोतो देगीनां मेरी बेटीहे वो.. तुम तो नही देगा.. हें..हें..हें.. लेकीन बेटा मे कही नही जाता.. तो केह देना मंजु बीटीयाको बस यहासे कुछ सेवकको भेज दुगा.. (सृतीकी ओर देखते) ओर बेटी.. अब कभीभी तुजे कुछ संकट जैसा लगेतो यहा चली आना.. मे बाप हु तेरा.. ओर तुजेतो बहुत कुछ देखना हे.. बस कीसीभी अैसे रीस्तोको देखो तो विचलीत मत होजाना.. क्युकी तुम सब अेकही हो.. समजी..?
सृती : (हसते) बाबा.. मे कुछ ठीकसे समजी नही.. क्या मुजेभी ये सब देखना हे..? बाबा मे पुनम जीतनी स्ट्रोंगतो नही हु.. लेकीन मे पुनमकी तराह स्टोंग बननेकी कोसीस जरुर करुगी.. हें..हें..हें..
बाबा : (हसते) बेटी.. तुजे स्ट्रोंगतो बननाही पडेगा.. क्युकी कुछ रीस्ते अैसे होगे जो तुम वीचलीत हो सकती हो.. तब तुम्हे अपने आपको सम्हालना होगा.. वरना तुजेही तकलीफ होगी.. वास्तवमे तुम सब अेकही कस्तीमे सवार हो.. बस यही बात तुजे ध्यानमे रखनी हे.. तो तुजे तकलीफ नही होगी.. तुमतो वो राजाकी कहानी जानती हो.. बस यही समजले उनकी सभी रानीयाही जन्म लेकर तुम सबके रुपमे आइ हे..
सृती : (हसते) जी बाबा.. सुक्रिया.. मे आपकी ज्यादातर बाते समज गइ..
देवायत : (हसते) बाबा तो हम चले..? अभी सहेरभीतो जाना हे..
बाबा : (हसते) हां दोनो सांतीसे जाओ.. ओर बेटा अब तुम दोनो भी सादी करलो.. इनमे देरी करना ठीक नही हे.. मे जो केह रहा हु वो सोच समजकर ही केह रहा हु..
देवायत : जी बाबा.. ये पुनम लखनकी सादी होजाये तो हमभी सादी करलेगे.. फीर आयेगे आपके आशीर्वाद लेने हें..हें..हें..
बाबा : (हसते) हां आजाना.. बहुत बदमास होगया हे तु.. हें..हें..हें..
सृती : (नमन करते हसते) जी.. बाबा आज्ञा दीजीये चलते हे हम..
बाबा : (सरपे हाथ रखते) बेटी सुखी रहो तुम.. जाओ.. सांतीसे जाना दोनो..
फीर देवायत ओर सृती हसते हुअे वहासे नीकल गये.. ओर कारमे बैठकर सहेरकी ओर जाने लगे तब सृती देवायतकी ओर देखते सरमाते हसती रही.. इनकोतो पताही नही थाकी देवायतभी अैसे मस्तीखोर हे.. आज बाबासे जीस तराह मस्तीया करते बात कर रहेथे इनसे सृती देवायतकी ओर काफी प्रभावीत होगइ थी.. आधे घंटेकी ड्राइवके बाद दोनोही सहेरमे आगये.. ओर देवायतने कार सीधेही सृतीके घरपे जानेदी..
सृती कारसे उतरतेही घरकी ओर चली गइ.. ओर ताला खीलकर घरके अंदर आगइ.. तब उनके दिलकी धडकन बढने लगी.. आज वो पहेली बार कीसी मर्दके साथ अकेली आइ थी.. तबतक देवायतभी धरके अंदर चला गया.. ओर दरवाजा बंध करके सोफेपे बेठ गया.. तो सृती कीचनसे पनी लेकर नीकली.. ओर देवायतको पानी देते उनके सामने सरमाते हसती रही.. तभी..
सृती : (हसते) देवु.. दुध तो लाना पडेगा.. क्या मे कुछ ठंडा बनादु..?
देवायत : (हसते) नही.. अभी कुछभी नही पीना.. जा तु अपना सामान लेले.. मे यही बैठा हु..
सृती : (सरमाते हसते) अरे.. यही मम्मीके रुमसेही तो लेना हे.. आपभी चलीयेना यहा अकेले बोर होजायेगे..
कहेते सृती भुमीके रुममे चली गइ.. तो उनके पीछे देवायतभी जाकर बेडपे बैठ गया.. तब भुमीके दिलकी धडकन ओर बढ गइ ओर बहुतही सरमाने लगी.. उसे पताथा देवायत उनके साथ जरुर कोइ सरारत करेगा.. ओर वोभी तो यही चाहती थी.. इसीलीयेतो देवायतको अपने साथ रुममे ले गइ.. सृतीकी चुतसे हल्कासा पानीका रीसाव होने लगा.. वो बहुतही रोमांचीत होते भुमीकी अलमारी खोलकर सभी जगाह अपने गहेने ढुंढने लगी..
सृती : (थोडी परेसान होते) मम्मी भीनां.. पता नही कहा रखा होगा गहेने.. मीलही नही रहा..
देवायत : (हसते) अरे उसे फोन करके पुछले.. क्यु परेसान हो रही हो..?
सृती : (परेसान होते फोन करते) हां.. फोनही करती हु.. मम्मीभीनां.. कोइ काम ठीकसे नही करती..
भुमीका : (सामने फोन उठाते) हां सृती.. पहोंच गये दोनो..?
सृती : (फोनपे परेसान होते) हां.. मम्मी.. घरपे पहोंच गये हे.. कहा रखेहे गहेने.. मुजेतो मील ही नही रहा..
भुमीका : (हसते) अरे वही तीजोरी मे तो रखे हे.. वहीसे ढुंढले.. वहासे कहा जायेगा..?
सृती : (ढुंढते फोनपे) हां थोडी देर ठहेरो.. फोन चालुही रखना.. वही देख रही हु.. दो बारतो देखलीया.. तुमभीनां..
भुमीका : (मनमे हसते) हां ठीकसे देखले सायद उधरही हे.. हें..हें..हें..
सृती : (आस्चर्यसे गुस्सेसे ढुंढते) सायद..? क्या मोम.. तुजेभी पता नही हे.. यहा कही नही हे.. तुने तेरी बेग मे ठीकसे देखा..? अेक बार फीर देखले.. मे फोन चालु रखती हु.. तुम अेक भी काम ठीकसे नही करती..
भुमीका : (हसते) अरे गुस्सा क्यु करती हो..? ठहेर मे देखती हु.. फोन चालु रखना..
कहेते भुमीका अपने रुममे फोनपे बात करते चली गइ.. उनकोभी पताथा की गहेने उनकी बेगमे ही हे.. लेकीन मंजु ओर भुमीने दोनोको साथमे भेजनेका प्लान बनायाथा.. ताकी सृती ओर देवायतके बीच नजदीया बढे.. भुमीका जुठ मुठका देखतेही जटसे बेग चेक करते सृतीसे अपने रुमसे ही बात करने लगी..
भुमीका : (हसते) सोरी बेटा.. यही तेरे कपडे के बीच रखे हुअे थे.. मील गये.. सोरी.. सोरी.. हें..हें..हें..
सृती : (गुस्सा होते) क्या मोम.. आपभी..? पता हे मे यहा कीतनी परेसान हु.. ओर आप हेकी.. अेक बार ठीकसेतो देख लेती.. हम दोनोका टाइम खराब कीया.. देवुको भी वहा कीतना काम होता हे.. बीना देखेही.. केह दीयाकी गहेने भुल गइ..
भुमीका : (जोरोसे हसते) अरे सोरी तो कहा.. अब क्या में तेरे पैर पडु..? ओर यहाभी कोइ काम नही हे.. हमभी तो सब गप्पे लगा रहे हे.. उनके दोस्तोने सब काम नीपटा लीया हे.. तो दोनो आरामसे आना..
कहेतेही भुमीने फोन काट दीया.. ओर सृतीको देवुकी हाजरीका अहेसास हुआ.. वो अपनी मम्मीको डांट रहीथी.. तब देवु उसे देखकर हसता रहा.. उनको पता चल गयाथा की ये सब भुमी ओर मंजुका प्लान था.. उसे सृतीकी सकल देखकर हसी आ रही थी.. तो दुसरी ओर सृतीकोभी समजमे नही आ रहाथा की वो अब देवायतसे क्या बात करे.. अंदाजातो उसेभी हो गया की ये मंजु ओर उनकी मम्मीका ही प्लान होगा..
सृती : (सरमाते) देवु.. सोरी.. गहेने वही मम्मीकी बेगमेही हे.. खामखा आपको परेसान कीया..
देवायत : (खडे होते) हंम.. सुना मेने.. अपनी मम्मीको डांट रहीथी.. तभी मे समज गयाथा.. तु कुछ समजी..?
सृती : (देवायतकी ओर आस्चर्य भावसे देखते) क्या..? मे कुछ समजी नही..
देवायत : (सृतीके पास जाते) अरे डार्लींग.. हम नीकले तबही तुजे भी पता था ओर मुजेभी पताथा की ये तेरी मम्मी ओर मंजुकी चालथी.. ताकी हम दोनो साथमे टाइम स्पेन्ड कर सके.. बात कुछ समजमे आइ..?
कहातो सृती बहुतही सर्मसार होगइ.. उनके चहेरेपे लाली छागइ.. ओर सरमाते मुह दुसरी ओर करते हसने लगी.. तभी अचानक देवायतने सृतीको अपनी बाहोमे भरलीया.. तो सृतीभी देवायतके सीनेमे सर छुपाते सर्मसार होते हसती रही.. देवायतने उनके चहेरेको अपनी हथेलीमे थाम लीया ओर उनकी आंखोमे देखता रहा.. तो सृतीभी अेक नजर उनकी आंखोमे देखते अपनी नजर सरमके मारे जुका लेती हे....
कन्टीन्यु