Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 15 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११२

दोनोही बाते करते नीचे आगइ ओर सीधेही पुनमके पास चली गइ तो वहाभी तीनो तैयार होकर बहार नीकल रहीथी.. तभी चंदा देवायतको जगाने रुममे चली गइ.. वो जानतीथी देवायत सरारत जरुर करेगा इसीलीये उसने धीरेसे दरवाजा बंध करलीया ओर देवायपे जुकते उसे प्यारसे जगाने लगी.. तभी अचानक देवायतने उसे खीचके अपने उपर सुला दीया तो चंदा हसते हुअ‍े उनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी....अब आगे

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ओर देवायत उसे बाहोमे लेकर पलट गया.. तो चंदा देवायतके नीचे लेटते छटछपाते मुहको इधर उधर करते नजरे चुराने लगी.. ओर हसती रही.. तभी देवायतने उनके चहेरेके थामते चंदाके होठोपे अपने होंठ रख दीये.. ओर दोनोही स्मुच करने लगे.. चंदा मदहोस होने लगी.. ओर देवायतके गलेमे हाथ डालके उसे जोरोसे बाहोमे भीचने लगी.. तो दवायत उनकी सारीको उची करते कमर तक लेजाने लगा.. तभी..

चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे) देवु.. अभी नही.. प्लीज.. सबलोग बहार आपका नास्तेके लीये वेइट कर रहे हे.. ओर मेने कपडेभी नये पहेने हे तो सबको पता चल जायेगा.. प्लीज.. हम दो पहोरको आरामके वक्त करेगेनां..

देवायत : (गाल चुमते) बेबी कलभी तुम सो गइ थी.. तुम अपने वादेसे मुकर रही हो..

चंदा : (मुस्कुराते होंठ चुमते) सोरी जानु.. सादीका घर हे.. सब लोग हेतो काममे थक जाती हु.. आज पका दुगी.. दो बार बस..? अबतो मेरा जानु खुस..?

देवायत : (हसते चुमते) बस..? सीर्फ दो बार..? डार्लींग पुरी रात तुजे चोदना हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते) छीं.. कीतना गंदा बोलते हो आप.. अरे बाबा कल हमारे लखन पुनोका मंडप मुहुर्त हे.. हमे सुबह जल्दी उठना हे.. अगर मे चलने फीरनेकी लायक नही रही तो..? कुछतो समजीये..

देवायत : हंम चल ठीक हे.. अ‍ेक बार दो पहरको ओर दो बार रातको.. अब तो खुस हेनां..?

चंदा : (सरमाते हसते) हंम.. बतलब आज मेरी तीन बार चुदाइ पकी हे.. आप बहुत कमीने हो.. हें..हें..हें.. चलीये अब फटाफट नहा लीजीये जाइअ‍े.. मेने आपके लीये स्पेसीयल आपके पसंदके आलु पराठे बनाये हे.. ओर वोभी अपने हाथोसे.. सीर्फ मेरे देवुके लीये.. ताकी आपमे ताकात आजाये तो रातमे आसानी रहेगी हें..हें..हें..

तब जाके देवायत हसते हुअ‍े चंदाके उपरसे हट गया.. तो चंदाभी सरमाते बेडसे उतर गइ ओर अपने कपडे सही करने लगी तो देवायतने उसे अ‍ेकबार फीरसे अपनी बाहोमे भीच लीया ओर उनके होंठ चुमने लगा तभी कीसीने उनका दरवाजा खटखटाया तो चंदा जटसे देवायतकी बाहोसे अलग होगइ.. ओर दरवाजा खोलदीया तो मंजु हसते हुअ‍े अंदर आगइ.. चंदाके सामने देखकर हसने लगी तब चंदा खुब सर्मसार होते हसती रही..

मंजुला : (हसते) लगता हे दीदी आज आप इनसे महेमानोकी वजहसे बच गइ.. हें..हें..हें.. देवु आप फटाफट नहालो आपको सहेरमे जाना हे..

देवायत : (आस्चर्यसे) क्यु.. कुछ लेना हे क्या..? अब क्या भुल गइ तुम..?

मंजुला : (हसते) अरे में कुछ नही भुली.. वो सृती कुछ अपना सामान भुल गइ हे.. तो उसे अकेला भेजना ठीक नही हे.. ओर आपके सीवा उनके साथ जायेगा कौन..? लखनको अब बहार नही भेजना.. वरना उसेही भेज देती.. प्लीज.. वो बेचारी तैयार होकर बैठी हे.. आप फटाफट नहालो.. फीर चाइ नास्ता करके नीकल जाना..

देवायत : (सृतीका नाम सुनतेही मनमे खुस होते) हंम.. चल ठीक हे..

कहेते मंजु देवायतके होंठ चुमते बहार चली गइ.. तभी देवायतको मंजुसे रातमे हुइ बाते याद आने लगी.. ओर सृतीके लीये उनके दिलमे हलचल तेज हो गइ.. ओर वो जटसे बाथरुममे नहाने घुस गया तब मंजुने रुमसे बहार आकर भुमीको इसारा करके उनके रुममे बुलाया.. तो भुमीभी सरमाते खडी होकर अपने रुममे चली गइ तब मंजु बेडपे बैठी थी.. तो भुमी भी वही जाकर बैठ गइ.. ओर मंजुकी ओर सवालीया नजरोसे देखने लगी..

मंजुला : (हसते) बुआ.. अब हमे साम तकतो कोइ खास काम नही हे.. तो क्युनां हम देवु ओर सृतीको साथ मे सहेर कोइ कामके बहाने भेजदे.. ताकी दोनोके बीच कुछ नजदीकीया बढ सके.. क्या कहेती हो आप..?

भुमीका : (खुसीसे हसते) अरे बेटी नेकी ओर पुछ पुछ.. ओर कामके बाने क्यु.. मे अभी सृतीको कहेती हु.. उनके गहेने भुल गइ हु.. जा देवुके साथ जाकर ले आ.. सादीमेतो पहेनना चहीयेनां हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते हग करते) बुआ आपभीनां.. चलो ठीक हे उसी बहाने दोनोको भेजदो.. मेने देवुसे केह दीया हेकी सृती अपना कुछ सामान भुल गइ हे उसे लेने जानाम हे आप उनके साथ चले जाइअ‍े.. अभी वो नहाने गये हे.. चाइनास्ता करके उन दोनोको सहेर भेज देते हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (इमोस्नल होकर) बेटी.. थेन्क्स.. तु वाकइ मेरी महान बेटी हे.. बेटा तुमसे अ‍ेक बात कहेनी हे..?

मंजुला : (हसते) हां बुआ कहीयेनां.. क्या बात कहेनी हे..?

भुमीका : (नजरे चुराते धीरेसे सर्मीन्दा होते) बेटा.. क्या तुजे वाकइ सब पता चल जाता हे..? तो फीर मेरे बोरेमे भी सब जानती होगी..

मंजुला : (समज जाती हे तो हसते) हां बुआ.. अब बाबाने कुछ जीम्वेवारी दी हे.. तो नीभानी तो पडेगी.. मुजे पता हे आप क्या पुछना चाहती हे.. आप गील्टी फील मत करो.. ये सबतो अ‍ेक दिन होनेही वाला था.. मुजे आपके बारेमेभी सब पता हे.. ओर मेरी मम्मीके बारेमे भी सब पता हे.. ओर इनमे मुजे कोइ अ‍ेतराज भी नही हे..

बस ये बात सीर्फ आप हम तीनोके बीच सीमीत रखना.. मुजे वो बातभी पता हे जो बात आज सुबह ही आपको मालुम हुइ.. वो मुजे तबसे पता हे.. जब आप दोनो चंदामौसी ओर देवुकी सादीसे पहेले मीलेथे.. क्या आप प्रेगनेन्ट हेनां..? बुआ.. आप सर्मीन्दा मत होना.. मे सृतीको समजा दुगी..

कहातो भुमीका मंजुके गले लगकर आंसु बहाने लगी.. तब मंजु उनकी पीठ सहेलाती रही.. काफी देर तक दोनो अ‍ैसेही बेठी रही.. फीर मंजु भुमीको लेकर बाथरुममे चली गइ ओर उनका हुलीया ठीक करवाया..

भुमीका : (नजर जुकाते) बेटी.. मुजे माफ करना.. मे अपने जजबातो पे बाकु नही रख सकी.. मे देवुके बगैर नही रेह सकती.. मे ओर तेरी मम्मी दोनो अ‍ेकही कस्तीपे सवार हे.. हम दोनोकी हालत अ‍ेक जैसी हे.. क्या अबभी तुम सृतीकी सादी देवायतसे करवानेके लीये राजी हो..? तुजे ये सब जानकर दुख नही होता..?

मंजुला : (दोनो बहार रुममे आते) नही बुआ.. क्युकी आप मेरे बारेमे जानती नही.. इसीलीये आप अ‍ैसा पुछ रही हे.. हम सभी हमारे देवुकी रानीया हे.. ओर हमारा देवु इतना सक्षम हेकी हम सबको सम्हाल सकता हे.. हम सबको अ‍ेक साथ संतुस्ट कर सकता हे.. क्युकी वो कामका अंस हे ओर हम सभी रतीके अंस हे.. हम सभी वहा परीया ओर अप्सराये हे.. ओर मे सबकी जननी हु.. वास्तमे आप सभी मेरी ही संतान हे.. तो मुजे मेरे बच्चोका खयालतो रखनाही पडेगा..

कहतो भुमी अ‍ेक नजरसे मंजुको देखतीही रेह गइ.. तो मंजु भुमीकी ओर देखते हसती रही.. तबभी भुमीकाको क्षोभ हो रहाथा.. तभी मंजुने भुमीका क्षोभ दुर करनेके लीये अ‍ैसा कुछ कीया जीसे भुमीका सर्मसार होते हसने लगी.. मंजुने अचानक भुमीको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होंठ चुम लीये.. तो भुमी सर्मसार होते हसने लगी.. ओर मंजुकी पीठमे अ‍ेक मुका मार दीया.. ओर भुमीका वापस मंजुके गले लग गइ.. ओर कहा..

भुमीका : (हसते) तुमभी बीलकुल अपनी मम्मीकी तराह पागल लडकी हो.. कोइ अपनी बुआके साथ अ‍ैसा करता हे..? हें..हें..हें.. मंजु.. तुमने मेरे दिलका बोज हल्का करदीया.. थेन्क्स..

मंजुला : (हसते धीरेसे कानमे) नही बुआ.. ये मेने अपनी बुआके साथ नही.. मेरी सौतनके साथ कीया हे.. बस अबतो आप ओर मम्मी दोनोही अपनी लाइफ अ‍ेन्जोय करो.. ओर खुस रहो.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) बडी बेसर्म लडकी हो तुम.. चल बहार मे सृतीको केह देती हु.. भेजदे दोनोको सहेर.. बेटी आज मे बहुत खुस हु.. दिलका अ‍ेक बोज हल्का हो गया.. वरना तुजे पता चलजानेकी बातसे बहुत डर लग रहा था.. पता नही तुम हम सबके रीस्तोको कैसे अ‍ेक्सेप्ट करलेती हो..

मंजुला : (हाथ पडते बहार लेजाते) बुआ.. छोडीये सब.. आइ लव यु.. बस आप खुस रहो.. ओर जोभी हो रहा हे उसे होने दो.. कुछ उल्टा सीधा मत सोचना..

भुमाका : (सरमाते हसते) हंम.. वाकइ मेरी बेटी समजदार होगइ हे.. हम सबकी मां.. हें..हें..हें..

कहेते दोनोही हसते हुअ‍े बहार आगइ.. तो नीर्मला दोनोके उपर बरोबर नजरे गडाये बैठीथी.. तो दोनोको हसते हुअ‍े बहार आते देखकर वोभी खुस होते हसने लगी.. ओर भुमीका सृतीके पास चली गइ..

भुमीका : (हसते धीरेसे) सृती बेटा.. वो.. वो मे तेरे गहेने लानातो भुल गइ.. अब तुम सादीमे क्या पहेनोगी..?

सृती : (थोडा जुठेसे नाराज होते) मोम.. आपभीनां..? अब मे सादीमे क्या पहेनुगी..? दो घंटा लगता हे वहा आने जानेमे.. ओर लेकर आजाउ तोभी दो पहोर होजायेगी.. आपभीनां अ‍ेक भी काम ठीकसे नही करती.. अब क्या करुगी में..?

भुमीका : (हसते) अरे सोरी सोरी बाबा.. अब जाकर लेआ.. मे कीसीको साथ भेजती हु.. वैसेभी दो पहर तक कोइ खास काम भी तो नही हे.. क्या मे देवुको तेरे साथ भेजदु.. हें..हें..हें..

सृती : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) मोम.. आपभीनां.. सादीकी इतनी दोडधाममे वो कहा फ्रि होगे..? (सर्मसार होते धीरेसे) मुजे नही चाहीये गहेने.. अ‍ैसे ही ठीक हु.. जाइअ‍े आप..

भुमीका : (धीरेसे) अरी जाना.. उसे भी कुछ काम नही हे.. मंजुने ही कहा हे.. चली जा..

मंजुला : (पास आते धीरेसे कानमे) हां.. जा कुतीया चली जा.. अच्छा मौका हे.. ओर हो सकेतो सब सेट करके आनां.. चल जा.. मे उनको भेजती हु.. तुम दोनो चाइ नास्ता करके चले जाओ..

सृती : (सरमाते जुठे गुसेसे घुरते) लगता हे तुमने ओर मम्मीने ही कुछ प्लान बनाया हे.. ये जान बुजकर ही गहेने भुल गइ होगी.. मंजु.. कीतनी कमीनी हो तुम.. ओर मोम आपभीनां.. सब क्या कहेगे.. कुछतो सोचते..

मंजुला : (चंदा पासमे आते ही) अरे बडी दीदी देवुने नहालीया होगा.. जाकर उनके कपडे दे दो.. उनको सृतीके साथ सहेर जाना हे.. ये अपना कुछ सामान भुल गइ हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते) जी.. अभी देकर आती हु..

सृती : (दांत पीसते गुस्सेसे) कुतीया.. देखना अ‍ेक दिन जरुर मेरे हाथसे पीटेगी.. मोम.. आपकोभी देख लुगी.. दोनोही अ‍ेक जैसी हो.. कमीनी..

भुमीका : (जोरोसे हसते) हां जा जा.. गालीया बादमे देना.. चल मंजु.. हें..हें..हें..

कहेते भुमीका सृतीकी ओर हसते मंजुका हाथ पकडके लेजाने लगी.. तो मंजुभी पलटकर सृतीके सामने देखते हसती रही.. तब सृती होठ फफडाते धीरेसे मंजुको जुठे गुस्सेके साथ गालीया देती रही.. जीसे देखकर भुमी ओर मंजु दोनोही जोरोसे हसने लगी.. ओर दोनो सोफेपे जाकर बैठ गइ.. ओर सृती पुनम वंदनाके पास उनके रुममे चली गइ.. तो वहा पुनम ओर वंदना दोनो ही धीरेसे हस हसके बाते कर रहीथी.. तो सृती वहा जाकर बैठ गइ..

पुनम : (हसते) क्यु सृतीदीदी ये चहेरा क्यु लाल हो गया हे.. कही कीसीने कीस बीस या आपके दुधु बुधु तो नही दबा लीया हें..हें..हें..

सृती : ( सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) हां.. अब बाकी रेह गया हो तो तुम भी मेरी टांग खीचलो.. अ‍ेक कमीनी तो अभी मेरी टांग खीचकर गइ.. उपरसे मम्मीने सब गडबड कर दीया.. मेरे गहेनेही घरपे भुल गइ..

पुनम : (जोरोसे हसते) कौन.. मंजुभाभी..? हें..हें..हें.. क्या कीया उसने..?

सृती : (सरमाते हसते धीरेसे) मोम मेरे गहेने लाना भुल गइ हे.. तो अभी मुजे जीजुके साथ घर जाना हे..

पुनम : (हसते धीरेसे) दीदी अबतो जीजु मत कहो.. आपके भी होने वाले पती हे.. अच्छा मौका हे आप चली जाओ.. ओर उसे सेट करके आना.. हें..हें..हें.. जाओ ताकी आपसे मे भाभी तो केह सकु.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) पुनोदीदी मुजेतो बहुत सर्म आ रही हे.. उनसे कैसे बात करुगी..?

पुनम : (हसते) अरे कुछ नही होता. आप अ‍ेक बार जाओतो सही.. मुजेतो नीकलने नही देते.. वरना मेही आप दोनोके साथ चली आती.. ओर आप दोनोकी सेटींग करवा देती.. सृतीदीदी बेस्ट ओफ लक.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) हां.. अब तुम भी सुरु हो गइ.. चलो चाइ नास्ता कर लेते हे.. सब आगये..

कहातो तीनोही हसते हुअ‍े खडी होगइ.. तबतक सब लोग होलमे आगये.. तो दया ओर रजीया चंपाभाभी रमाभाभी सबको डीस लेकर सभी जहा बैठे थे वही सबको चाइ नास्ता देने लगी.. भानु ओर राजीवभी साथमे बैठकर चाइ नास्ता करने लगे.. लता ने नीलमको अपने साथ ही रखा.. तो सरला भी राजीवके पास बैठकर नास्ता कर रहीथी.. तो राजीव उनको आग्रह करते सब दे रहाथा.. तो नीर्मला राजीवको घुर रहीथी.. तब भुमीका नीर्मलाको देखकर हस रही थी..

सभी लोग अपनी मस्तीमे चाइ नास्ता कर रहेथे.. तभी चंदा अपने रुममे जाकर धिरेनके साथ फोनपे बात कर रहीथी.. ओर उसे आनेके लीये पुछ रहीथी तब धिरेनभी सहेरकी ओर नीकल गयाथा.. ओर बीच रास्तेपे था.. वो सामको जल्दी वहा आनेकी बात करके फोन काट देता हे.. तभी रश्मी भी आगइ.. ओर वोभी सबके साथ चाइ नास्ता करने बैठ गइ.. आज पुरी हवेली महेमानोसे भरी हुइथी.. तब रमशे ओर सुधीरभी अपनी बीवीओको लेकर आगये..

देवायत : (हसते) आओ रमेश सुधीर बडे टाइमपे आ गये.. तुम चारो भी चाइ नास्ता करने बैठ जाओ..

चारु : (कामुक स्माइल करते) नही देवरजी.. आपही करलो.. हम चारो धरसेही चाइ नास्ता करके आये हे..

मंजुला : (हसते) नीशा भाभी आप बैठ जाओ.. आज आपकी पसंदका नास्ता हे.. चारुभाभी भलेही देखती रहे.. हें..हें..हें..

नीशा : (सरमाते हसते) नही भाभी.. घरपेभी यही बनाया था.. हें..हें..हें.. सुधीरको भी यही पसंद हे..

देवायत : (हसते) रमेश अब तुम दोनो यही रहेना मुजे जरा सहेर तक जाना पडेगा.. मेरी सालीके साथ..

रमेश : (हसते) अरे भाइ आरामसे जाओ आपका यहा कोइ काम नही हे.. हमने सब काम सेट करदीया हे.. अभी मंडप वाले ओर हलवाइ वाले आ रहे हे.. हम दोनो सब देख लेगे.. ओर दो तीन लोग ओर भी आ रहे हे.. अब आपतो फ्रि.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) यार यहा गांवमे अच्छा हे.. सब मीलबाटके सादी वगैरेके सभी काम नीपटा लेते हे..

मंजुला : (हसते) पापा.. ये रमेशभाइ देवुके खास दोस्त हे.. ओर ये सुधीरभाइतो उनके साथ कोलजमे पढते थे.. तबसे देवुके दोस्त हे.. ओर हमारे गांवमेही डोक्टर हे.. ये उनकी बीवी नीशाभाभी.. ओर ये चारुभाभी रमेशभाइकी बीवी हे.. वो हमारी वंदना हेना.. पुनोके साथ.. इन्हीकी बेटी हे..

राजीव : (हसते) अरे.. मे दोनोके बापुको पहेचानता हु.. तब हमभी सभी दोस्त थे.. सब घरकेही लोग हे..

सृती वंदना पुनम लता ओर नीलम साथमे बैठकर चाइ नास्ता कर रहीथी.. तो चंदा रमा रश्मीभाभी सब लेडीस साथमे बैठकर चाइ नास्ता कर रहीथी.. तो इधर राजीव देवायत भानु लखन सरला नीर्मला भुमीका ओर मंजु.. सोफेपे बैठेथे.. अ‍ैसेही बाते करते सबने चाइ नास्ता फीनीस कीया.. तो मंजु देवायतको लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर सृतीकोभी अपने रुममे बुला लीया.. तो सृतीभी सरमाती रुममे आगइ..

मंजुला : (हसते) देवु आप सृतीके साथ चले जाओ.. वो अपना सामान ले लेगी.. ओर टाइम मीलेतो आप बाबासेभी मील लेना.. ओर वो आना चाहेतो उसेभी सादीमे बुलालो.. ओर वहाके आपके सेवक लोगकोभी कहे देना.. (सृतीकी ओर) सृती.. दोनो आरामसे जाना देखना ये कोइ जल्द बाजी ना करे.. बहुत फास्ट चलाते हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अरे यार मे बहुत धीमे कार चलाता हु.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां हां.. पता हे आप कैसे धीमे चलाते हो.. देखना बेचारी सृती डरना जाये..

देवायत : (सृतीकी ओर देखते) कौन ये..? कभी इनको कार चलाते देखा हे..? रेसमे मुजे भी हरा देगी..

सृती : (सरमाते अ‍ेक मुका मारते) जीजु आपतो रहेने ही दो.. आपसे ज्यादा फास्ट मे नही चलाती..

मंजुला : (हसते) अरे दोनो जगडा करना छोडदो.. ओर जाओ फटाफट.. ओर आरामसे आना.. यहा कोइ काम नही हे.. हें..हें..हें..

कहातो देवायत बहार चलने लगा.. तो सृतीभी मंजुको पीठमे अ‍ेक मुका मारते उनकी ओर देखते सरमाकर हसते जाने लगी.. तभी मंजुने हसते हुअ‍े सृतीको थम्स अपकी साइन दीखाते धीरेसे बेस्ट ओफ लक कहा.. तो सृती सर्मसार होगइ.. ओर जटसे बहार चली गइ.. तभी मंजु भुमीका ओर नीर्मला सृती देवायतको जाते हुअ‍े देखकते खुस होने लगी.. ओर देवायत अपनी बडी कारमे बेठ गया तो सृतीभी सरमाती उनके पास बैठ गइ ओर देवायतने कारको सहेरकी ओर दौडादी..

सृती बहुतही सरमाती रही.. ओर मजेकी बात तो यहीथी की दोनोको पताथा की दोनोकी सादी आपसमे होने वाली हे.. ओर घरवालोने जान बुजकर प्लानींग करके दोनोको साथमे भेजा हे.. सृती देवायतकी कइ बार मस्तीया कर चुकी हे.. लेकीन आज जब देवायतके साथ अकेली थी.. तब वो बहुतही सरमा रही थी.. उनको समजमे नही आ रहाथा की वो देवायतके साथ कैसे बात करे.. तो इधर देवायतका हाल भी यही था.. तभी..

देवायत : (हसते) सृती.. तुम क्या सामान भुल गइ हो..?

सृती : (सरमाते हसते) जी.. जी.. वो.. वो.. मम्मी मेरे गहेने लेना भुल गइ थी.. मेने उसे मना कीया.. फीरभी मुजे मम्मीने ओर मंजुने जबरदस्ती लेने भेज दीया..

देवायत : (अ‍ेक नजर डालते) सृती.. पता हे तुजे जबरदस्ती क्यु भेजा हे..?

सृती : (सर्मसार होते हां मे गरदन हीलाते) जी.. हम दोनोके लीये.. ताकी हम दोनो अकेलेमे टाइम स्पेन्ड कर सके.. क्या आपको घरपे काम था..? तो सोरी..

देवायत : (हसते) अरे नही नही.. वहा मुजे कोइ काम नही हे.. ओर सच कहु.. मेभी तुम्हारे साथ अकेले मे टाइम स्पेन्ट करना चाहता था.. इस बारेमे मंजुसे मेरी कलही बात हुइ हे.. क्या तुम हमारे रीस्तेसे राजी हो..?

सृती : (सरमाते हसते नजर जुकाते) जी.. मे भी आपसे सुरुसे ही पसंद करती हु.. ओर बाबानेभी मुजे इस बारेमे कहा था.. की.. मेरी सादी आपसे होगी..

देवायत : (सृतीकी ओर देखते) सृती.. तो फीर मेरे बारेमे क्या जानती हे..? तुजे पता हे मेरी कीतनी बीवीया हे..? मेरा ओर ओरतोके साथभी रीस्ता हे.. दुनीयावालो की नजरमे मे अ‍ेक अयास आदमी हु.. फीरभी मुजसे सादी करोगी..?

सृती : (पहेलीबार देवायतकी ओर देखते) जीजु.. मुजे आपके बारेमे सब कुछ पता हे.. मेरी इस बारेमे मंजुसे सभी बाते होगइ हे.. मंजुने मुजे सब कुछ बतादीया हे.. मुजे आपके कीसीभी रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. ओर मंजुकी मम्मीसे भी बात होगइ हे.. जब आप सब खरीदी करने गये थे.. जीजु.. मुजे इतना पता हे मुजे आपसे प्यार हो गया हे.. बस.. आइ लव यु.. प्लीज.. मुजे अपनालो.. मेभी आपसे प्यार करती हु.. मुजे आपके कीसीभी रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही..

देवायत : (हसते) हंम.. आइ लव यु टु.. क्या अबभी मुजे जीजु कहेगी..? हंम..?

सृती : (सर्मसार होते मु्स्कुराते नां मे गरदन हीलाते) नही.. सोरी.. देवायतजी..

देवायत : (हसते) देवायत..जी.. नही.. सीर्फ देवु..

सृती : (सरमाते) जी.. देवु.. आपसे अ‍ेक रीक्वेस्ट हे.. क्या पहेले हम आश्रम चले..? मुजे बाबाके दर्शन करने हे..

देवायत : (हसते) हमं.. तुम चीन्ता मत करो.. तुम ना कहेती तो भी मे पहेले वही लेजाता.. मुजेभी बाबाका सुक्रीया अदा करना हे.. इस खुबसुरत बीवी देनेके लीये.. सृती.. आइ लव यु.. तुम मेरी जींदगीका बहुतही महत्वपुर्ण हीसा हो.. क्या तुमने रश्मी ओर पुनोको चेक कर लीया..?

सृती : (सरमाते हसते) हंम.. रश्मी भाभी बीलकुल ठीक हे.. मेरीही दवाइ चालु हे.. ओर पुनमदीदी.. सी इस प्रेगनेन्ट.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. आप पापा बनने वाले हे.. आपही का बच्चा हेनां..?

देवायत : (हसते) हंम.. लगता हे तेरी मंजुके साथ काफी कुछ बाते होगइ हे.. क्या तुजे मेरीही बहेनके साथ अ‍ैसे रीलेशनसे बुरा नही लगा..?

सृती : (हसते) नही देवु.. मे वो हिमाचलके राजाकी पुरी कहानी जानती हु.. वास्तवमे हम सभीतो उनका हिसा हे.. तो फीर बुरा लगनेकी क्या बात हे.. देवु.. जबसे मुजे मंजुकी बातोसे पता चला तबसे मेने भी प्रकृतीको अपना लीया हे.. ओर ये सब रीस्ते नातेका कोइ मायना नही हे.. सीर्फ सहेर ही नही.. अबतो गांवमेभी कइ अ‍ैसे रीस्ते दीखनेको मीलते हे.. ओर आपके गांवके लोगभी मेरे यहा आते हे..

देवायत : (अ‍ेक नजरसे देखते) मतलब..? क्या मीया बीवी आते हेनां..?

सृती : (सरमाते हसते) नही देवु.. सीर्फ मीया बीवी नही.. कइ ओर लोगभी आते हे.. मेतो अ‍ैसा काम नही करती.. लेकीन मेरी अ‍ेक सहेली हे.. वो पैसे लेकर यही काम करती हे.. ये इलीगल हे..

देवायत : (हसते) सृती.. क्या हमारे गांवसे अ‍ैसे लोग आते हे..?

सृती : (सरमाते हसते) हां देवु.. मेरे पास आते हे तो मे उनको मेरी सहेलीके वहा भेज देती हु.. आपहीके गांवके कोइ बडी उमरके ---नामके बुजुर्ग आदमी हे.. उनकी बहुसे बात हुइ तो कहेती थी उनका पती दुबइमे हे.. ओर ये मेरे ससुर हे.. हमारे सामने तो सब सचही बोल देती हे.. वो ससुर बहु.. दो बार मेरे पास अपना अ‍ेबोर्सन मतलब बच्चा गीराने आये थे.. तो मेने मेरी सहेलीके पास भेज दीया..

देवायत : (चोंकते) कौन..? वो --लाल..? वो अपनी बहुको..? यकीन नही होता.. दीखनेमे तो बहुतही धार्मीक लगता हे..

सृती : देवु आप बुरा मत मानना.. पती इतने टाइमसे दुबइमे हे.. तो वोभीतो ओरत हे.. उनकीभी नीड होती हे.. तो बेचारी कहा जायेगी..? ओर घरकेही पुरुषसे सबंध रखलीये.. ताकी बहार कीसीको सकभी ना पडे ओर उनकी बदनामी भी नाहो.. मे इस रीस्तेको गलत नही मानती.. इनकी छोडो.. आपके गांवसे कइ लडकेभी आ चुके हे.. पुछते हेतो कहेते हे मेरी गलफ्रेन्ड हे.. लेकीन पुलीसका डर दीखाओतो लडकी सब सच बता देती हे.. वो उनके भाइसे ही प्रेगनेन्ट होती हे..

देवायत : (आस्चर्यसे) ओह गोड.. बाबा सच कहेते थे.. सृती लगता हे अब वक्त आगया हे.. की हमारे गांवमे.. अरे सीर्फ हमारे गांवमे क्या..? आजु बाजु सभी गांवमे यही होने वाला हे.. कोइ रीस्ताही नही बचेगा.. सबको मेरी तराह आपसी रीस्ताही पसंद हे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) देवु छोडो ये सब बाते.. यहा तो रीस्तेके कोइ मायने ही नही हे.. सीर्फ आपके गांवमे नही सहेरमे भी अ‍ैसे कइ केस आते हे.. कोइ अपनी बडी बहेनको तो कोइ अपनी विधवा बुआको लेकर आते हे.. तो कोइ अपनी भाभी चाची.. मामी.. बहेन.. कीसीको नही छोडते.. ये तनकी आगही अ‍ैसी हे.. जब लगती हे तो कोइ रीस्ते नाते नही देखती.. सबको अपने तनकी प्यास बुजानी हे..

देवायत : (हसते) अच्छा..? चलो कोइ बात नही.. मेतो समजताथा की सीर्फ हमारे घरमेही ये सब हो रहा हे.. लेकीन यहातो सभीको अ‍ैसे रीस्ते पसंद हे.. हें..हें..हें.. सृती.. हो सकता हे.. आगे जाकर तुजेभी मेरे बारेमे अ‍ैसे रीस्तोका पता चले.. तो फीर तु क्या कहोगी..?

सृती : (थोडा खुलके) देवु.. छोडो ये सब बाते.. मुजे आपके कीसीभी रीस्तेसे अ‍ेतराज नही.. जब खुदकी बहेनको प्रेगनेन्ट करदीया.. तो फीर दुसरे रीस्तोके क्या मायने.. मुजे ये कहो.. जब हम दोनोकी सादी होजायेगी तो मे रहुगीं कहा..? क्या आपने इस बारेमे कुछ सोचा हे..?

देवायत : (हसते) पहेले तुम कहो.. तुम क्या चाहती हो..? कहा रहेना पसंद करोगी..?

सृती : (जोरोसे हसते) अरे.. मुजे क्या पता..? आपही कहे दो.. मेतो आपकी बीवी होजाउगी.. तो फीर आप जहा चाहो मे रहेनेके लीये तैयार हु.. बस अ‍ेक मम्मीकी चीन्ता हे..

देवायत : (हसते) नही सृती.. तुजे चीन्ता करनेकी कोइ जरुरत नही.. तु सहेरमे तेरी मम्मीके साथ ही रहेगी.. मे वहा आता जाता रहुगा.. क्युकी तेरी क्लीनीकभी तो वही हे.. ओर वैसे मेरी अ‍ेक बीवी सहेरमे भी तो होनी चाहीये.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते खुसीसे हसते) आप बहुत सरारती हो.. देवु.. थेन्क्यु वेरी मच.. आपने हमारे बारेमे इतना कुछ सोचा.. आइ लव यु.. सो मच.. लेकीन मंजुदीदी ओर चंदादीदीको बुरातो नही लगेगानां..?

देवायत : (हसते) नही.. तु टेन्शन मत ले.. मेरी मंजुनेही कहा हे.. ओर मंजुसे मंजु दी..दी..?

सृती : (सरमाते हसते) हां.. आपको कोइ अ‍ेतराज..? अब वो मुजसे बडी हे.. मेरी सौतन.. हें..हें..हें.. तो अबतो उस कमीनीको दीदी ही कहेना पडेगा हें..हें..हें..

दोनोही अ‍ैसी प्यारभरी बाते ओर मस्तीया करते करते आश्रमपे पहोंच गये.. तो वहा अ‍ेकल दुकल लोगही दीख रहेथे.. तो सृतीने अपना सर दुपटे से ढक लीया.. ओर देवायतसे सटकर उनके साथही अ‍ेब बीवीकी भांती चलने लगी.. दोनोही मंदिरमे दर्शन करके बाबाके पास चले गये.. तो बाबाभी अ‍ेक सेवकके साथ होलम अकेले तैयार होकर बैठे थे.. तो दोनोको देखतेही उनके चहेरेपे स्माइल आगइ..

बाबा : (हसते) आइअ‍े.. आइअ‍े.. महाराज आजतो सुबह सुबह ही आपके दर्शन होगये.. हें..हें..हें..

देवायत : (दोनोही पैर छुते) क्या बाबा आपभी.. सुबह सुबह आपको कोइ नही मीला..? अब काहेका महाराज.. अब आपभी मेरी मस्तीया करने लगे..

सृती : (सरमाते हसते) बाबा प्रणाम..

बाबा : (आशीर्वाद देते) जीती रहो बेटा.. क्या दोनोने सादी करली..? ओर कलतो पुनम बीटीया ओर तेरे भाइकी सादी हेनां..? तो तुम दोनो इधर कैसे आगये..?

देवायत : (हसते) बाबा अभी कहा हमने सादी कीहे.. अभीतो इसे सादी करनेके लीये मना रहा हु.. हें..हें..हें.. येतो इनका कुछ सामान भुल गइथी तो सहेर लेने जा रहेथे.. तो कहेती हे बाबाके दर्शन करने हे.. तो दोनो यहा चले आये.. हें..हें..हें..

बाबा : (सृतीको देखते हसते) देखा बीटीया.. मुजे कहेताथा मेरी मसती करते हो.. अब कौन कर रहा हे..? अ‍ेक बार तु इनसे सादी करले.. फीर मार मारके इनको सुधारदे.. बहुत सरारती होगया हे.. क्या ये सादीके लीये मान गया..?

सृती : (सरमाते हसते) जी.. मान गये हे.. हें..हें..हें..

बाबा : (सरपे हाथ रखते) बेटी.. तुजे पताही नही हेकी तुम सब कौन हो.. मेरी मंजु बीटीयाने तुजे बतातो दीया होगा.. बस अब तुजे ओर पुनम बीटीयाकोही सब सम्हालना हे.. मेरी पुनम बेटी बहुतही स्ट्रंोग ओर होनहार हे.. तुम उनका साथ देना.. अभी वो बच्ची हे..

देवायत : (हसते) बाबा आपकी मंजु बीटीयाने आपको सादीका न्योता दीया हे.. आपको ओर सब सेवकोको वहा आना हे.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) हां वोतो देगीनां मेरी बेटीहे वो.. तुम तो नही देगा.. हें..हें..हें.. लेकीन बेटा मे कही नही जाता.. तो केह देना मंजु बीटीयाको बस यहासे कुछ सेवकको भेज दुगा.. (सृतीकी ओर देखते) ओर बेटी.. अब कभीभी तुजे कुछ संकट जैसा लगेतो यहा चली आना.. मे बाप हु तेरा.. ओर तुजेतो बहुत कुछ देखना हे.. बस कीसीभी अ‍ैसे रीस्तोको देखो तो विचलीत मत होजाना.. क्युकी तुम सब अ‍ेकही हो.. समजी..?

सृती : (हसते) बाबा.. मे कुछ ठीकसे समजी नही.. क्या मुजेभी ये सब देखना हे..? बाबा मे पुनम जीतनी स्ट्रोंगतो नही हु.. लेकीन मे पुनमकी तराह स्टोंग बननेकी कोसीस जरुर करुगी.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) बेटी.. तुजे स्ट्रोंगतो बननाही पडेगा.. क्युकी कुछ रीस्ते अ‍ैसे होगे जो तुम वीचलीत हो सकती हो.. तब तुम्हे अपने आपको सम्हालना होगा.. वरना तुजेही तकलीफ होगी.. वास्तवमे तुम सब अ‍ेकही कस्तीमे सवार हो.. बस यही बात तुजे ध्यानमे रखनी हे.. तो तुजे तकलीफ नही होगी.. तुमतो वो राजाकी कहानी जानती हो.. बस यही समजले उनकी सभी रानीयाही जन्म लेकर तुम सबके रुपमे आइ हे..

सृती : (हसते) जी बाबा.. सुक्रिया.. मे आपकी ज्यादातर बाते समज गइ..

देवायत : (हसते) बाबा तो हम चले..? अभी सहेरभीतो जाना हे..

बाबा : (हसते) हां दोनो सांतीसे जाओ.. ओर बेटा अब तुम दोनो भी सादी करलो.. इनमे देरी करना ठीक नही हे.. मे जो केह रहा हु वो सोच समजकर ही केह रहा हु..

देवायत : जी बाबा.. ये पुनम लखनकी सादी होजाये तो हमभी सादी करलेगे.. फीर आयेगे आपके आशीर्वाद लेने हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) हां आजाना.. बहुत बदमास होगया हे तु.. हें..हें..हें..

सृती : (नमन करते हसते) जी.. बाबा आज्ञा दीजीये चलते हे हम..

बाबा : (सरपे हाथ रखते) बेटी सुखी रहो तुम.. जाओ.. सांतीसे जाना दोनो..

फीर देवायत ओर सृती हसते हुअ‍े वहासे नीकल गये.. ओर कारमे बैठकर सहेरकी ओर जाने लगे तब सृती देवायतकी ओर देखते सरमाते हसती रही.. इनकोतो पताही नही थाकी देवायतभी अ‍ैसे मस्तीखोर हे.. आज बाबासे जीस तराह मस्तीया करते बात कर रहेथे इनसे सृती देवायतकी ओर काफी प्रभावीत होगइ थी.. आधे घंटेकी ड्राइवके बाद दोनोही सहेरमे आगये.. ओर देवायतने कार सीधेही सृतीके घरपे जानेदी..

सृती कारसे उतरतेही घरकी ओर चली गइ.. ओर ताला खीलकर घरके अंदर आगइ.. तब उनके दिलकी धडकन बढने लगी.. आज वो पहेली बार कीसी मर्दके साथ अकेली आइ थी.. तबतक देवायतभी धरके अंदर चला गया.. ओर दरवाजा बंध करके सोफेपे बेठ गया.. तो सृती कीचनसे पनी लेकर नीकली.. ओर देवायतको पानी देते उनके सामने सरमाते हसती रही.. तभी..

सृती : (हसते) देवु.. दुध तो लाना पडेगा.. क्या मे कुछ ठंडा बनादु..?

देवायत : (हसते) नही.. अभी कुछभी नही पीना.. जा तु अपना सामान लेले.. मे यही बैठा हु..

सृती : (सरमाते हसते) अरे.. यही मम्मीके रुमसेही तो लेना हे.. आपभी चलीयेना यहा अकेले बोर होजायेगे..

कहेते सृती भुमीके रुममे चली गइ.. तो उनके पीछे देवायतभी जाकर बेडपे बैठ गया.. तब भुमीके दिलकी धडकन ओर बढ गइ ओर बहुतही सरमाने लगी.. उसे पताथा देवायत उनके साथ जरुर कोइ सरारत करेगा.. ओर वोभी तो यही चाहती थी.. इसीलीयेतो देवायतको अपने साथ रुममे ले गइ.. सृतीकी चुतसे हल्कासा पानीका रीसाव होने लगा.. वो बहुतही रोमांचीत होते भुमीकी अलमारी खोलकर सभी जगाह अपने गहेने ढुंढने लगी..

सृती : (थोडी परेसान होते) मम्मी भीनां.. पता नही कहा रखा होगा गहेने.. मीलही नही रहा..

देवायत : (हसते) अरे उसे फोन करके पुछले.. क्यु परेसान हो रही हो..?

सृती : (परेसान होते फोन करते) हां.. फोनही करती हु.. मम्मीभीनां.. कोइ काम ठीकसे नही करती..

भुमीका : (सामने फोन उठाते) हां सृती.. पहोंच गये दोनो..?

सृती : (फोनपे परेसान होते) हां.. मम्मी.. घरपे पहोंच गये हे.. कहा रखेहे गहेने.. मुजेतो मील ही नही रहा..

भुमीका : (हसते) अरे वही तीजोरी मे तो रखे हे.. वहीसे ढुंढले.. वहासे कहा जायेगा..?

सृती : (ढुंढते फोनपे) हां थोडी देर ठहेरो.. फोन चालुही रखना.. वही देख रही हु.. दो बारतो देखलीया.. तुमभीनां..

भुमीका : (मनमे हसते) हां ठीकसे देखले सायद उधरही हे.. हें..हें..हें..

सृती : (आस्चर्यसे गुस्सेसे ढुंढते) सायद..? क्या मोम.. तुजेभी पता नही हे.. यहा कही नही हे.. तुने तेरी बेग मे ठीकसे देखा..? अ‍ेक बार फीर देखले.. मे फोन चालु रखती हु.. तुम अ‍ेक भी काम ठीकसे नही करती..

भुमीका : (हसते) अरे गुस्सा क्यु करती हो..? ठहेर मे देखती हु.. फोन चालु रखना..

कहेते भुमीका अपने रुममे फोनपे बात करते चली गइ.. उनकोभी पताथा की गहेने उनकी बेगमे ही हे.. लेकीन मंजु ओर भुमीने दोनोको साथमे भेजनेका प्लान बनायाथा.. ताकी सृती ओर देवायतके बीच नजदीया बढे.. भुमीका जुठ मुठका देखतेही जटसे बेग चेक करते सृतीसे अपने रुमसे ही बात करने लगी..

भुमीका : (हसते) सोरी बेटा.. यही तेरे कपडे के बीच रखे हुअ‍े थे.. मील गये.. सोरी.. सोरी.. हें..हें..हें..

सृती : (गुस्सा होते) क्या मोम.. आपभी..? पता हे मे यहा कीतनी परेसान हु.. ओर आप हेकी.. अ‍ेक बार ठीकसेतो देख लेती.. हम दोनोका टाइम खराब कीया.. देवुको भी वहा कीतना काम होता हे.. बीना देखेही.. केह दीयाकी गहेने भुल गइ..

भुमीका : (जोरोसे हसते) अरे सोरी तो कहा.. अब क्या में तेरे पैर पडु..? ओर यहाभी कोइ काम नही हे.. हमभी तो सब गप्पे लगा रहे हे.. उनके दोस्तोने सब काम नीपटा लीया हे.. तो दोनो आरामसे आना..

कहेतेही भुमीने फोन काट दीया.. ओर सृतीको देवुकी हाजरीका अहेसास हुआ.. वो अपनी मम्मीको डांट रहीथी.. तब देवु उसे देखकर हसता रहा.. उनको पता चल गयाथा की ये सब भुमी ओर मंजुका प्लान था.. उसे सृतीकी सकल देखकर हसी आ रही थी.. तो दुसरी ओर सृतीकोभी समजमे नही आ रहाथा की वो अब देवायतसे क्या बात करे.. अंदाजातो उसेभी हो गया की ये मंजु ओर उनकी मम्मीका ही प्लान होगा..

सृती : (सरमाते) देवु.. सोरी.. गहेने वही मम्मीकी बेगमेही हे.. खामखा आपको परेसान कीया..

देवायत : (खडे होते) हंम.. सुना मेने.. अपनी मम्मीको डांट रहीथी.. तभी मे समज गयाथा.. तु कुछ समजी..?

सृती : (देवायतकी ओर आस्चर्य भावसे देखते) क्या..? मे कुछ समजी नही..

देवायत : (सृतीके पास जाते) अरे डार्लींग.. हम नीकले तबही तुजे भी पता था ओर मुजेभी पताथा की ये तेरी मम्मी ओर मंजुकी चालथी.. ताकी हम दोनो साथमे टाइम स्पेन्ड कर सके.. बात कुछ समजमे आइ..?

कहातो सृती बहुतही सर्मसार होगइ.. उनके चहेरेपे लाली छागइ.. ओर सरमाते मुह दुसरी ओर करते हसने लगी.. तभी अचानक देवायतने सृतीको अपनी बाहोमे भरलीया.. तो सृतीभी देवायतके सीनेमे सर छुपाते सर्मसार होते हसती रही.. देवायतने उनके चहेरेको अपनी हथेलीमे थाम लीया ओर उनकी आंखोमे देखता रहा.. तो सृतीभी अ‍ेक नजर उनकी आंखोमे देखते अपनी नजर सरमके मारे जुका लेती हे....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११३/१

कहातो सृती बहुतही सर्मसार होगइ.. उनके चहेरेपे लाली छागइ.. ओर सरमाते मुह दुसरी ओर करते हसने लगी.. तभी अचानक देवायतने सृतीको अपनी बाहोमे भरलीया.. तो सृतीभी देवायतके सीनेमे सर छुपाते सर्मसार होते हसती रही.. देवायतने उनके चहेरेको अपनी हथेलीमे थाम लीया ओर उनकी आंखोमे देखता रहा.. तो सृतीभी अ‍ेक नजर उनकी आंखोमे देखते अपनी नजर सरमके मारे जुका लेती हे....अब आगे

ओर देवायत अपना चहेरा सृतीके चहेरेकी ओर लेजाने लगा.. तब सृतीने अपनी आंख बंध करली उनके दोनो होंठ फडफडाने लगे.. आखीर वो वक्त आही गया जो सृती चाहती थी.. जबसे मंजुके मुहसे देवायतके लंडकी तारीफ सुनीथी तबसेही सृतीका मन देवायतके लंडको देखनेके लीये मचल रहाथा.. ओर आज उसे मौकाभी मील गया.. तभी उसे देवायतके होंठ अपने होंठोपे महेसुस हुआ....

तो सृती मदहोस होने लगी.. कीतने सालोके बाद आज वो कीसी मर्दसे अकेलेमे मील रहीथी.. जब उनकी सादी हुइथी तब पहेली रातमेही उसे पता चल गयाथा की उनका पती नामर्द हे.. तब सृतीके सभी अरमारन ओर सपने बीखर चुकेथे.. ओर वो डीवोर्स लेकर घर आगइ.. तबसे लेकर आज तक वो मर्दके बीना तडप रहीथी.. तो वोभी देवायतके गलेमे हाथ डालके उनका साथ देने लगी.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमने लगे..

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अ‍ेकतो इतने सालोसे इस आगसे जल रहीथी जो हर लडकीका सपना होता हे.. बस उसे अ‍ेक बार सीर्फ हवाके जोकेका ही इन्तजार था.. जो आज देवायतने दे दीया.. तब कुछही देरमे सृतीभी वासनाकी आगमे जलते खुलकर देवायतका साथ देने लगी.. वोभी मुह खोलकर देवायतके होठोको चुसने लगी.. तब दोनोही कामातुर होने लगे.. देवायत होंठ चुमतेही अ‍ेक हाथ सृतीके बुब्सपे रख देता हे.. ओर उसे हल्केसे दबाते मसलने लगता हे तब सृती सरसे पांव तक कांपने लगी..

वो देवायतको रोकना चाहते हुअ‍ेभी ना रोक सकी.. सृतीने सरमके मारे देवुको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर देवायतके होठोको जोरोसे चुमते अपनी कमरको देवुके लंडसे सटाने लगी.. तब सृतीको देवुका लंड उसे कपडेके उपरसे ही अपनी चुतपे ठोकर मारते महेसुस होने लगा.. सृती बहुतही उतेजीत हो चुकीथी.. ओर वो अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते देवायतके लंडको पेन्टके उपरसेही पकडकर मसलने लगी..

सृती : (कामुक आवाजमे) ओह.. सीइइइइ दे..वु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मुजे कुछ हो रहा हे.. आप कुछ कछजीयेनां..

देवायत : (लडखडाती आवाजमे) हंम.. क्या..? यही करना हे..? हंम.. चोदलु तुजे..? हंम.. बोलनां..?

सृती : (सरमाते सीनेके सर छुपाते धीरेसे) मुजे नही पता.. अंह.. आह.. देवु.. नीचे चुभ रहा हे.. मंजु केह रहीथी ये बहुत बडा हे..

देवायत : (सृतीकी चृतको धीरेसे दबोचते) हां.. यहां चुभता हे.. हंम.. बोलनां.. चोदलु तुजे..? हंम..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) मुजे नही पता.. आपका बहुत मन कर रहा हे क्या..? हंम..? मुजे कुछ होगातो नही..? तो करलो..

देवायत : (होठ चुमते) हंम.. सहेन करपाओगी..? पहेली बार हेनां..? हंम..

सृती : (सरमाते ओंखोमे देखते) जानु.. कल सादी हे.. अगर मे ठीकसे नही चल पाइतो..? जानु.. इसे हमारी सुहागरातमे करेगे.. मे तबतक इसे सम्हालके रखुगी.. अब ये सीर्फ आपकी अमानत हे.. बुरातो नही लगा..? नहीतो करलो..

देवायत : (हसते होंठ चुमते) हंम.. नही.. लगा.. कुछ ओर करे..? हंम.. उपरसे..

सृती : (सरमाते हां मे गरदन हीलाते) हंम.. मुजे अ‍ेक बार वो देखना हे.. बहुत बडा हे क्या..?

देवायत : (मुस्कुराते) तुम खुदही देखलो..

कहेते देवायतने सृतीको अपनी गोदमे उठालीया ओर बेडकी ओर ले गया.. तब सृती खुब सरमाने लगी.. ओर देवायतके सीनेमे सर छीपाते मुस्कुराती रही.. देवायतने सृतीको बेडपे सुला दीया ओर खुदभी उनके उपर चडके छा गया.. तो सृतीने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तब देवायतका लंड फीरसे सृतीकी चुतपे ठोकर मारने लगा.. लेकीन इस बार सृतीने उसकी परवाह नही की ओर देवायतके गलेमे दोनो हाथ डालके उनके होठोको जोरोसे चुमने लगी..

फीर धीरेसे सरमाते देवायतकी आंखोमे देखते उनके सर्टके बटन खोलने लगी.. तब देवायत उसे देखते हसने लगा.. तो सृतीभी कामुक नजरोसे देखते मुस्कुराने लगी.. ओर सृतीने उनका सर्ट नीकाल दीया..तभी देवायत बेडसे उतरकर खडा हो गया.. तो सृतीभी बेडसे उतरके उनके पैरोके पास नीचे घुटनोके बल बैठ गइ ओर देवायतके पेन्टकी क्लीप खोलने लगी.. आज उसे देवायतके लंडको देखनेकी बडी जल्दी थी..

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जब पेन्ट नीकालदी तब देवायत सीर्फ अपने नीकरमेही रेह गया ओर सृतीकी हरकत हसते हुअ‍े देखता रहा.. तभी सृतीने उनकी चडीको पकडकर नीचे कीया तो देवायतका तगडा लंट जटके मारते हवामे लहेराने लगा.. जीसे देखकर सृतीकी आंख फटीकी फटी रेह गइ..

वो बस आंख बडी करते उसे देखती ही रही.. उनको अभीभी यकीन नही हो रहाथाकी कीसी मर्दका लंड इतना बडा भी हो सकता हे.. उनके पहेले पतीका लंडतो इनसे आधाभी नही था.. वो बहुतही छोटा ओर पतलाथा.. लंड देखतेही सृतीकी आंखोमे चमक आ गइ..

ओर सृतीने धीरेसे डरते देवायतका लंड अपने हाथोमे पकडलीया.. ओर होलेसे सहेलाते देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते मुस्कुराने लगी.. सृती यही सोचते रोमांचीत होने लगीकी अब यही लंडसे वो चुदने वाली हे.. सृतीकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. ओर वो लंडको मुठीमे पकडते धीरे धीरे हीलाने लगी.. उनकी आंखमे वासनाके डोरे लाल होकर मंडराने लगे.. तब देवायतने सृतीको खडा करदीया ओर सृतीके कपडे नीकालने लगा.. तब सृती बहुतही सरमाते मुस्कुराने लगी..

सृती : (सरमाते हसते धीरेसे) देवु.. येतो कीतना बडा हे..? क्या मे इसे जेल पाउगी..? आपका ये हथीयारतो हमारी सुहागरातमे भी मेरी हालत खराब कर देगा.. पता नही मंजु इसे कैसे जेलपाती हे.. कास मे तबही उनके साथ आजाती..

देवायत : (हसते सृतीके कपडे नीकालते) कब..? कब आजाती..? हंम..

सृती : (सरमाते धीरेसे हसते) जब आप दोनो पहेली बार हमारे घर आयेथे ओर सादी करली तब.. कमीनी मुजेभी उनके साथ सामील करना चाहती थी.. तब मेने उसे मना करदीया था.. अगर आगइ होती तो आज मेभी आपकी बीवी होती..

देवायत : (सतीको गोदमे उठाते) हंम.. तो आजाना चाहीयेनां.. तुमतो जानती हो हम कीतनीभी सादी करले.. हमपे कोइ पाबंधी नही हे.. तो तुजेभी अपना लेता..

सृती : (देवायतकी आंखोमे देखते) चलो देरसेही सही आखीर आप मुजे मीलतो गये.. देखना मे अपनी सारी कशर पुरी कर लुगी.. देवु.. पता हे.. जब आप सृतीको लेकर होस्पीटलमे आतेथे तब आपको मेने कीतनी हीन्ट देदीथी.. फीरभी आप कुछ समजे नही.. मेने अपना पर्सनल नंबरभी दीयाथा.. जो सीर्फ आपके लीये था.. वरना तबही हम दोनो रीलेशनमे आजाते.. मेभी आपसे प्यार करने लगी थी..

देवायत : (बेटपे लीटाते) हंम.. पता हे मुजे.. लेकीन मंजुको देखा हे..? नोच डालती मुजे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते देवायतको अपने उपर खीचते) आप बहुतही फंटुस हो.. वोतो कमीनी कबसे मुजे आपके नीचे लीटाना चाहती थी.. जब आप दोनोकी सादीभी नही हुइथी.. ओर जब मेरा डीवोर्स होगया तबभी कइ बार मुजे ओफर करचुकी हे.. उसी कमीनीने तो हमारी बात मोमसे चलाइ हे.. पता नही क्यु..? जानु.. बाबानेभी कहाहे आपही मेरे पती हे.. सायद इसीलीये मंजुने मम्मीसे बात की होगी..

देवायत : (गंभीर होते) सृती.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. मुजे तुमसे कुछ कहेना हे.. लेकीन पहेले मेरी बीवीसे प्यारतो करलु.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) अ‍ेय मीस्टर.. मे अभी आपकी बीवी नही हुइ.. हां गलफ्रेन्ड समजकर प्यार कर सकते हो.. हें..हें..हें.. अरे.. आजाओ मेरे प्यारे मजनु.. अभीतो मेरी बारी हे.. फीरतो हमारी सुहागरातमे तो आप मेरी हालत बीगाडने ही वाले हो.. हें..हें..हें..

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कहेते सृती देवायतको अपनी बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमने लगती हे.. तो देवायतभी उनके संतरे जैसे कठोर बुब्सको मसलने लगा.. ओर उनकी नीपलको चुसने लगा तब सृती बहुतही उतेजनामे आकर कामातुर होने लगी.. ओर देवायतको वाइल्ड कीस करने लगी.. दोनोही बहेकने लगे.. देवायत सृतीके गलेको चुमने लगा तो सृतीने उनके सरको कसके अपने गलेमे दबा लीया.. ओर देवायत उनके पेरके बीच चला गया.. वोतो चाहतीथी की देवायत उसे आजही चोदले.. लेकीन अभी मुमकीन नही था.. तब..

सृती : (सरमाते) देवु.. क्या करने वाले हो..? मेने अ‍ैसा कभी नही कीया.. नीचे कुछ हो रहा हे.. कुछ कीजीयेनां..

दोयत : (हसते) अरे.. तुमतो डोक्टर हो.. ओर वोभी लेडीसकी.. तो तुजे पता नही हे क्या हो रहा हे..?

सृती : (सरमाते हसते) हंम.. पता हे तभीतो पुछ रही हु.. अगर मुजसे कंट्रोल नही हुआतो..? देखना बाबा मे ये सब हमारी फस्टनाइटमे करना चाहती हु.. फीर भलेही मेरी हालत बीगड जाये.. देवु.. आइ अ‍ेम वर्जीन..

देवायत : (हसते) क्यु..? तेरे पहेले पतीने तुजे छुआभी नही..?

सृती : (सर्मसार होते) नही.. उस कमीनेका तो खडाभी नही हुआ.. फीरतो मेने उसे हाथभी नही लगाने दीया.. सायद ये सब आपके साथ मेरी कीस्मतमे लीखा होगा..

कहेते ही देवु सृतीकी चुतपे हाथ रखते सहेलाने लगा.. तो सृती मदहोस होते सीसकारीया करने लगी.. सृती बहुतही उतेजीत होने लगी.. ओर आखीर देवायत उनकी चुतपे जुक गया.. ओर धीरेसे चुतपे मुह लगा दीया.. तब सृतीने जोरोसे चदरको मुठीमे पकड लीया.. ओर देवायतने अपनी जीभ नीकालकर सृचीकी चुतमे लगादी.. वो उसे चाटने लगा.. तब सृती कामातुर होते छटपटाने लगी..

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ये सृतीकी जींदगीका पहेला अनुभव था वो कोइ मर्द इसे इस तराह प्यारका अहेसास दीलवा रहाथा.. देवायतने चुत चाटते चाटते धीरेसे सृतीकी चुतमे जीभ घुसादी.. ओर उनकी चुतके दानेको अपनी जीभसे छेडने लगा.. तब सृती सातवे आसमानपे चली गइ.. ओर अपनी आंधी आंख चडाते अपना सब होंस गवा चुकी.. वो चदरको कसके मलसने लगी ओर छटपटाते जोरोसे सीसकारीया करते अपनी कमर उछालने लगी..

तभी इनके तनमे हजारो चीटीया रेंदती चुतकी ओर दोडते महेसुस करने लगी.. वोही प्यारा अहेसास.. जो कइ बार देवायतको इमेजींग करते अपनी चुतमे उंगली डालते कर चुकी थी.. ओर वो आंधी आंख चडाते मदहोस होगइ.. ओर अपनी कमरको जटके देने लगी.. तभी चुतसे अ‍ेक तेज धारसे पानीका फवारा नीकल गया जो देवायतके चहेरेके भीगोने लगा.. ओर सृती जड गइ.. तब अपनी सांस कंट्रोल करते अ‍ैसेही सीथील होगइ.. उनकी सासे तेज चल रही थी..

तभी देवायत बेडसे उतरके बाथरुममे चला गया.. ओर अपना मुह साफ करने लगा तब बहार सृती अभीभी अ‍ैसे मदहोस होकर अपनी चुत ओर बुब्सपे हाथ रखते सीथील पडीथी.. उनको अभीभी यकीन नही हो रहाथा की उनके स्वप्नके राजकुमारने इसे इस तराह जडाकर संतुस्ट कर दीयाथा.. वो सर्मसार होते देवायतकी ओर देखते हसने लगी.. तभी देवायत आकर उनके पास लेट गया तो सृतीने करवट लेकर देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होंठ चुमलीये..

सृती : (सरमाते हसते) देवु.. थेन्क्यु वेरी मच.. आपने कीतना प्यारा अहेसास करवाया.. जानु आप जल्द मुजसे सादी करलो.. मे अपना सबकुछ आपपे लुटाना चाहती हु.. मे आजभी कुआरी हु.. जान.. आपही मेरा कौमार्य भंग करोगे.. अभी कल सादी हे वरना आजही बीना सादीके मे सबकुछ करनेको तैयार हु.. फीरभी आपका मन करता हे तो मे रेडी हु.. करलो सब कुछ..

देवायत : (होठं चुमते) नही सृती.. ये अनमोल खजाना हमारी सादी तक सम्हालके रखना.. में इसे इसी घरमे हमारी सुहागरातमे लुट लुगा.. चल अब चलना हे की नही..? हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते धीरेसे) देवु.. प्लीज.. थोडी देर ओर रुकते हेना.. आपने तो मेरा अमृत पीलीया.. अब मेभी आपका अमृत पीना चाहती हु.. मुजे जींदगीका हर मजा चाहीये.. ओर वोभी सीर्फ आपसे.. आप सीधे होकर लेट जाओ.. मुजे आपका अमुत पीना हे..

कहातो देवायत पीठके बल लेट गया तो सृती देवायतके पैरोके बीच चली गइ.. ओर धीरेसे कामुक नजरोसे देवायतकी ओर देखते देवायतके लडंपे जुक गइ.. ओर देवायतकी आंखोमे देखेते धीरेसे जीभ नीकालकर देवायतके लंडको चाटने लगी.. सृतीभी इतने सालोसे सेक्ससे वंचीत थी.. तो वोभी अपनी मम्मीकी तराह बहुतही कामी हो चुकीथी.. जब देवायतसे उनकी सरम चली गइ तो उनसे बीन्दास्त बाते करने लगी..

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सृतीने धीरेसे लंडको पकडते अपने मुहमे लेलीया ओर सक करते उसे चुसने लगी.. सृती लंडको अ‍ैसे सक कर रहीथी जैसे कोइ मुह लगाते पाइपसे पानी खीच रही हो.. तो देवायतके तनमे भी सुर सुराहट बढ गइ.. उनका लंड कीसीने आज तक अ‍ैसे नही चुसा था.. वो सृतीकी हर हरकतको कोनीके बल बैठकर हसते हुअ‍े देखने लगा.. अब सृती पुरा लंड मुहमे लेके चुस रहीथी.. जीसे देवायतभी मदहोस होने लगा..

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तभी सृती लंडको मुहसे बहार नीकालते जोरोसे हाथोसे पकडके हीलाने लगी..ओर देवायतके सरकी ओर बढते उनके होठोको चुमने लगी.. देवायतभी सृतीके गलेमे हाथ डालकर जोरोसे सृतीके होठ चुमने लगा दोनोही मुह खुला रखते अ‍ेक दुसरेकी जीभसे पीच लडाने लगे ओर अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे.. तबभी सृती देवायतका लंड अपननी मुठीमे पकडकर जोरोसे हीला रहीथी..

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तब देवायत अपने आपको कंट्रोल करनेमे नाकाम होने लगा ओर वो उतेजनासे कांपने लगा.. तो अचानक सृतीको अपनी बाहोमे भीचते जोरोसे सृतीके होठ काटते चुसने लगा तो सृतीकी आंख दर्दके मारे बडी होगइ सृती उसे कुछ कहे इनसे पहेलेही देवायत सृतीको बाहोमे भीचते पलट गया.. ओर सृतीकी कमरपे बैठकर जोरोसे अपने लंडको मुठीमे पकडते हीलाने लगा.. तब सृतीभी समज गइ ओर अपना मुह खोलकर देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखती रही..

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तब कुछही देरमे देवायतके लंड से अ‍ेक तेज धार नीकलकर सृतीके मुहकी ओर चली गइ.. कुछ विर्य सृतीके मुहमे चला गया तो बाकीका सृतीके चहेरेको भीगोने लगा.. फीरभी देवायत आहे भरते लंडको जटके मारते जडता रहा.. ओर बहुत सारा पानी सृतीके सीनेपे गीरते उनके बुब्सको भीगोता रहा..

जब देवायत जडकर सांत होगया.. तब सृती देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते अपने बुब्स ओर मुहपे लगे देवायतके विर्यको अपने हाथोसे पोछते अपनी जीभ नीकालकर उसे चाटने लगी.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर हसने लगे..

देवायत : (अपना लंड पोछते) सृती तुमतो वाकइ पक्की खीलाडी नीकली.. अ‍ैसातो ना मंजुने कीया हे ओर नाही चंदा ओर पुनोने कीया हे.. कीतना सक करते चुसती थी.. कहासे सीखा ये सब..? हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) देवु.. लेकीन आपको मजा आयाकी नही..? मेने अ‍ेक पोर्न मुवीमे देखाथा.. तो सोचा चलो आप मेरे होने वाले पतीपे ही ट्राइ करलु.. चलो अब नहाले..? देखो मुजे पुरी गंदी करदी.. आप कीतना पानी नीकालते हो.. इतने पानीसे तो कोइ अ‍ेकही बारमे प्रेगनेन्ट होजायेगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (गोदमे उठाकर बाथरुमकी ओर लेजाते) हां.. फीकर मत कर तुजेभी कर दुगा.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) नही.. मुजे नही होना प्रेगनेन्ट.. देवु मे पुरी लाइफका मजा लेना चाहती हु.. कमसे कम पांच छे सालतो कुछभी नही.. फीर हम सोचेगे.. अब हमारी सगाइ हो जायेतो अच्छा हे..

देवायत : (बाथरुममे खडी करते) हंम.. सृती हम पुनोकी सादीके दिन सगाइ करले..? हंम.. क्या कहेती हो..? सभी लोग होगे.. तो वही साथमे हो जायेगा..

सृती : (सावर चालु करते) देवु.. लेकीन हमने कोइ तैयारीया नहीकी.. ओर मम्मीसेभी बात करनी पडेगी..

देवायत : (हसते) वो सब में देखलुगा.. ओर इसमे तैयारीया क्या करनी हे.. सीर्फ अंगुठीयातो लेनी हे.. हम श्रीफल वैगरे अभी लेकर जाते हे.. मे मंजु ओर भुमी बुआसे बात करलुगा.. तु टेन्शन मत ले.. बस मे जल्दसे जल्द मेरी इस होट बीवीसे मीलना चाहता हु..

सृती : (सरमाते गलेमे हाथ डालते) हंम.. आप कीतना क्युट हो.. अगर मीलना हे तो क्या हे.. अभी मील लेते हे.. जानु.. क्या सचमे मीलना चाहते हो..? तो चलो.. मे रेडी हु.. अबतो मेभी आपसे दुर नही रेह सकती.. जो करना हे करलो..

देवायत : (हसते होंठ चुमते) नही बेबी.. अगर तेरी हालत बीगड गइतो सबको क्या कहोगी..?

सृती : (लंड पकडकर सहेलाते) हंम.. केह दुगीकी मेरे बोयफ्रन्डने मेरी अ‍ैसी हालत कीहे.. हें..हें..हें..

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फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेको रगड रगडके नहेलाते हे.. आज सृती बहुतही खुस थी वो अब देवायतसे सब बाते खुलकर कर रहीथी.. अब उसे देवायतसे बात करनेमे कोइ संकोच नही हो रहाथा.. फीर दोनोने नहालीया तब बहार आतेही दोनो तैयार होने लगे.. ओर कंपलीट होगये.. तब सृती अ‍ेक बार फीरसे देवायतकी बाहोमे चली गइ.. ओर दोनो होंठ मीलाकर स्मुच करने लगे.. फीर घरको ताला लगाकर कार लेकर नीकल गये..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११३/२

रास्तेमे देवायतने अ‍ेक बडे जवेलेरीके शोरुमपे अपनी कार रोकदी.. दोनोही कारसे उतर गयेतो सृती हसते हुअ‍े जटसे देवायतके पास आगइ ओर उनका हाथ पकडलीया.. फीर दोनोही शोरुममे चले गये.. वहा दोनोने अ‍ेक दुसरेकी नापकी अंगुठीया लेली.. ओर सील्वर श्रीफल वगैरे जोभी लेनाथा वो सब लेलीया.. ओर दोनो पेमेन्ट करके कारमे आकर बैठ गये.. फीर देवायतने अ‍ेक ट्रावेल्सकी ओफीसमे कार रोक दी..

तो देवायत सृती दोनोही अंदर चले गये.. ओर वहा दो कपलके लीये अ‍ेक छे दिनका गोवाका हनीमुन पेकेज लेलीया.. ओर देवायतने इसके बारेमे सृतीको कीसीसे ना कहेनेकी सुचना देदी.. वो चारोको सरप्राइज देना चाहता था.. फीर देवायत ओर सृती दोनो कारमे गांवकी ओर आपसमे बाते करते नीकल गये.. अभी सीर्फ ११ बजेथे.. तो दोनोही समयपे पहोचने वाले थे..

सृती : (कारमे देवायतके कंधेपे सर रखते) देवु.. अ‍ेक बात पुछु..? आप दोनो कपलको हनीमुनमे गौवा भेजना चाहते हे.. लेकीन पुनम धिरेनके साथ सेट हो पायेगी..? वो आपको कीतना प्यार करती हे.. जानु आप पुनोदीदीके साथ रीलेशनमे कैसे आगये..? ओर उसे प्रेगनेन्ट तक करदीया.. उनको इतनी जल्दी क्या थी..?

देवायत : हंम.. सृती वो जब स्कुलमे थी.. ओर उसे प्यारकी परीभासा समजमे आइ तबसे मुजे सुरुसेही प्यार करती थी.. फीर बाबाके सम्पर्कमे आइतो बाबाने उसे बहुत कुछ बता दीया.. ओर बाबानेभी मुजे पुनमसे सादीके लीये केह दीया.. जब सृतीकी डीलीवरी हुइ उसी दिन मंदिरमे बाबाने हम दोनोकी सादी करवादी..

ओर उसी रात हम दोनो पहेली बार हमारी सुहागरातमे मील गये.. फीरतो चार दिन सीर्फ मे ओर पुनोही हवेलीपे थे.. हमने वो चार दिन हमारे हनीमुनकी तराह बीताये.. वो चार दिनमे हम दोनोने खुब सेक्स कीया.. उसी दौरान पुनो प्रेगनेन्ट हो गइ.. ओर तबसे हम दोनो अ‍ेक पती पत्नीके तौरपे रीलेशनमे हे..

सृती : (कामुक नजरोसे हसते) जानु आपकेतो मजे हे.. हें..हें..हें.. लेकीन पुनोकी सादी धिरेनसे करना जरुरी था.. मंजुने मुजे सब कुछ बता दीया हे.. पता नही बाबा कीस मक्सदसे ये सब करवा रहे हे.. क्या आपको पता हे..?

देवायत : (हसते) नही.. वोभीतो नही बताते.. लेकीन इतनातो पता चल गया हे की उनका मक्सद बहुत बडा हे.. सब मेरे पोतेके हाथो होगा.. तब क्या पता हम होंगे की नही.. कहेते हे तब तुजे पुनो ओर चंदाकोही सब सम्हालना हे.. सायद आप लोग तब होंगे.. (आंख गीली करते) बस.. मेरी मंजु नही होगी..

सृती : (हसते देवुकी आंख पोछते) हंम.. यही सब सोचके दिल गभरा रहा हे.. पता नही हम तीनो सब हेन्डल कर पायेगी की नही.. जानु तब आपभी होगे.. कीतना अजीब हेनां..? मे अ‍ेक डोक्टर ओर मंजु चंदामौसी.. ओर आपभी अ‍ेक ग्रेज्युअ‍ेट.. इतने पढे लीखे होनेके बावजुद भी हम सभी अ‍ैसी बाते माननेको विवस हे.. ओर ये सच भीतो हे.. बाबाकी आज तक अ‍ेकभी बात गलत नही हुइ.. वो हम सबके बामे कीतना कुछ जानते हे.. मुजेतो अभी भी ये सब अ‍ेक स्वप्नकी तराह लग रहा हे..

देवायत : सृती.. बाबा सीर्फ ना इस जन्मके बारेमे.. बल्की हमारे पीछले जन्मके बारेमे ओर आने वाले जन्मके बारमेभी सब जानते हे.. ओर मुजेभी देखो.. इतनी इतनी खुबसुरत बीवीया होनेके बावजुदभी कीतनी लडकीया ओर ओरतोके साथ रीलेशन रखने पडते हे.. कभी कभीतो इस सब चीजोसे उब जाता हु.. कभी कभी तो लगता हे मे आप सबको धोखातो नही दे रहा हु..?

सृती : (तीरछी नजरसे देखते सरमाते हसते) नही जानु.. अगर आप उब गयेतो हम सब कहा जायेगी..? हें..हें..हें.. अरे बाबा आप अपना काम जारी रखो.. हमे कोइ अ‍ेतराज नही.. बस हमे खुस रखा कीजीये.. ओर आप हमे कोइ धोखा नही दे रहे.. बस आप हम सबके बारेमे ज्यादा कुछ जानते नही इसीलीये आपको अ‍ैसा लगता हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हंम.. तुमभी मेरी मंजुकी तराह बाते कर रही हो.. वोभी अ‍ैसाही कहेती हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) देवु.. अ‍ेक बात कहु..? बस आपका यही हथीयार देखतेही हम खुस होजाती हे.. सायद कीसीके नसीबमे इतना बडा हथीयार नही होगा.. हम सब इनकी दिवानी हे.. मंजुभी मेरे सामने इनकी इतनी तारीफ कर चुकी हेकी मेभी आपको प्यार करने लगी.. हें..हें..हें.. जब ये अंदर जायेगा तब पता नही मेरा क्या होगा.. फट जायेगी मेरी हें..हें..हें.. धीरे प्यारसे करना बाबा.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अब बहुत तारीफ मत कर वरना यही बीच रास्तेमेही हमारी सुहागरात मन जायेगी.. हें..हें..हें.. लेकीन सृती अ‍ेक बात कहु..? मुजे लगता हे ये मुजे विरासतमे मीला हे..

सृती : (हसते आस्चर्यसे देखते) विरासतमे..? देवु मे कुछ समजी नही..

देवायत : (हसते) हां रिासतमे.. सुन.. पहेले हमारे खानदानमे सीर्फ अ‍ेकही लडका पैदा होताथा.. मेरे दादाका फीर मेरे बापुका.. ओर अब मेरा.. सबका हथीयार बडा हे.. श्रापकी मुक्तीके बाद लखन आया.. तो उनमे ये सब नही हे.. लेकीन तुमने तो मंजुकी डीलेवरी की हे.. तो तुजे हमारे बेटेमे कोइ फर्क नही दीखा..?

सृती : (आस्चर्यसे) अरे हां.. देवु.. आपके बेटेमे यहीतो फर्क था.. मेने मंजुसेभी इस बारेमे बात कीथी.. उनकाभी नोर्मल लडकेसे काफी बडा दीख रहा हे.. अब बात समजमे आइ.. वाकइ अ‍े वारीसमे मीलता होगा..

दोनोही अ‍ैसी बाते करते १२ बजेके आसपास हवेलीपे पहोंच गये.. ओर हसते हुअ‍े अंदर आने लगे.. तब मंजु ओर भुमीका दोनोही देवायत सृतीको खुस होते देखकर हसने लगी.. तो सृतीने जातेही मंजुको हसते हुअ‍े पीठमे मुका मारदीया.. ओर सरमाकर हसती हुइ पुनमके रुममे चली गइ.. तो वंदना ओर पुनमभी सृती को देखकर जोरोसे हसने लगी.. तो सृती सर्मसार होते पुनमको मुका मारते उनके पास बैठ गइ ओर हसती रही..

पुनम : (जोरोसे हसते धीरेसे) वंदु.. ये मेरी भाभीतो बीलकुल ठीक चल रही हे.. हें..हें..हें.. लगता हे भाइने इसे छोड दीया हे.. हें..हें..हें..

वंदना : (सरमाते हसते) हें..हें..हें.. हां.. सृतीभाभी आपतो बीलकुल ठीक चल रही हो.. दोनोने प्यार ब्यार कीयाकी नही..? आपके पास अच्छा मौका था.. दोनो मजे करके आरामसे आते.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते वंदनाकी जांगपे चपत लगाते) दोनोकी दोनो बेसर्म हो.. कमीनी कहीकी हम वहा मजे करने थोडीना गये थे.. मेरे गहेने मम्मी भुल गइ थी उसे लेने गये थे.. बात करती हे.. ओर बाय धवे.. आज ये तुम दोनोने मेरे आतेही भाभी भाभी क्या लगा रखा हे.. कमीनीओ क्या मे तुम्हारी भाभी हु..?

पुनम : (हसते धीरेसे) सृतीभाभी.. रहेने दिजीये.. वहा सबको पता चल गया हे.. अब आपकी प्रेम कहानी सबको मालुम होगइ हे.. हें..हें..हें.. इसीलीयेतो भुमी बुआ ओर मंजुभाभीने आप दोनोको सहेर भेजाथा.. ओर भाइकोभी सब मालुम था.. सीर्फ आपको नही पता.. हें..हें..हें..

सृती : (आस्चर्यसे हसते) भाइको मालुम था मतलब..? देवुको आइ मीन जीजुको पता था.. लेकीन क्या..?

पुनम : (हसते धीरेसे) भाभी.. रहेने दिजीये.. अबतो उसे जीजु कहेना छोड दिजीये.. आपके गहेनेतो यही थे.. बस आप दोनोकी अ‍ेंगेजमेन्ट रींग ओर सील्वर श्रीफल लेनाथा.. हमारी सादीके दिनही आप दोनोकी सगाइ रखी हे.. बलकी मंजुभाभी ओर भुमीबुआ नीर्मलाआंटी ओर मेरे ससुरके बीच सब तैय होगया था.. तो सबने मीलकर आपको भाइके साथमे भेजनेका प्लान बनाया.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) हंम.. तो सबने मीलकर मुजे उल्लु बनाया.. ओर देवुभी.. मीलदो मुजे.. तुम सब कीतने कमीने हो.. अ‍ेक अ‍ेक को देख लुगी..

पुनम : (हसते) हां मील लेना अ‍ेकेलेमे.. लेकीन अब आप दोनोकी सगाइके बाद.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) ओह.. गोड.. सबके सब कमीने हे.. मेरी मोमभी.. मीलनेदो उसेभी..

तभी पुनमके रुममे मंजु चंदा लता नीलम रमा सब हसती हुइ आगइ.. ओर सृतीके सामने देखतेही सभी जोरोसे हसने लगी.. तो सृती सर्मसार होते खडी होगइ ओर मंजुके गले लग गइ.. ओर उनकी पीठमे हल्केसे मुके मारने लगी.. तब सभी दोनोकी ओर देखते हस रहीथी.. तब सृती खुब सरमाइ.. तभी दोनो गले लगते खडी थी.. तब सृतीने मंजुको कानमे कहा..

सृती : (हसते कानमे) कमीनी.. ये तुने अच्छा नही कीया.. देखना अ‍ेक दिन मेभी इसका बदला लुंगी.. तुम सब कीतने कमीने हो..

मंजु : (धीरेसे हसते कानमे) हां तबकी तब देखी जायेगी.. ओर कमीनी तुम अ‍ेसे ठीकसे चल कैसे रही हो..? क्या वहा तुम दोनोने कुछ नही कीया..? इसीलीयेतो तुजे वहा भेजाथा.. देवुसे चुदवाकर आरामसे आती..

सृती : (हसते सरमाते कानमें) मंजु.. हम इस बारेमे बादमे बात करेगे.. अभी यहा नही.. यहा सब हे..

फीर सभी सृतीसे हाथ मीलाते उसे अभीनंदन देने लगी.. तब सृती खुब सरमाइ ओर हसती रही.. देवायतभी बहार सबके साथ बैठ गया तो नीर्मला ओर भुमीका उनके सामने सरारतसे हस रहीथी.. तो देवायत अभी दोनोको इग्नोर करते रमेश ओर सुधीरसे बाते करता रहा.. हवेलीमे सब पंडाल लग चुके थे.. खेतोसे हरीया मालती छोटु उनकी बीवी रीटाभी आज पटाका बनकर काम करने आइथी.. ओर हलवाइभी अपनी सब तैयारीया कर रहाथा.. तभी दया सबको खानेके लीये बुलाने आइ..

सभी लोग खानेके लीये आगये.. सुबह जब देवायत ओर सृती सहेरकी ओर गये तब मंजु ओर भुमीकाने सबको होलमे बुलाकर दोनकी सगाइकी बात करके प्लानींग करली.. तो सभी खुस होगये.. कीसीकोभी देवायतकी या कोइ ओर की दुसरी सादीसे फर्क नही पडाथा.. देवायतकी सगाइकी बात सुनकर अ‍ेक बार फीर वंदनाके साथ आज चारु नीशाभी नीरास होगइ.. लेकीन अपने चहेरेपे जाहीर नही होने दीया..

सबने भोजन करलीया तब वंदनाने आज पुनम ओर लताकी कल सादी होनेसे पहेले मेकअपकी सब तैयारीया करली.. फीर सृतीको ओर दुसरी ओरतोको वेक्सीन बेक्सीन यगैरे करदीया.. आज मंजु चंदा सृती सभी ओरते कलकी तैयारीया कर रहीथी तब लखनभी गांवके नाइके पास चला गया.. ओर वोभी अपनी सब तैयारीया करने लगा तो दुसरी ओर धिरेनभी सहेर गयाथा तो वही सब खुदको सेट बेट करवाने लगा..

फीर कुछ खीरदारी करके वापस अपने गांवमे आगया ओर अपना सब सामान लेकर देवायतके गांवकी ओर नीकल गया.. इसी बीच लताने नीलमको अपने साथही रखा.. वो नीलमको अ‍ेक पलभी अपनेसे दुर नही जाने देती.. देवायत सुधीर रमशे राजीव भानु ओर गांवके दुसरे सदस्यभी आज साथ बेठकर गपे लगा रहेथे.. कुल मीलाके पुरी हवेलीमे सादीका माहोल बन गया था..

गांवकी सभी ओरते आज हवेलीपे जानेके लीये उत्साहीत थी.. तो साम होतेही सादीके गाना गानेके लीये हवेलीपे आगइ.. तब ज्यादातर ओरतोकी बस अ‍ेकही ख्वाहीस थी.. वो थी देवायतको देखने की.. सब गाना गाते चोर नजरसे देवायतको देखती रही.. इनमेसे कुछ ओरते ओर लडकीया देवायतके नीचे लेटनेका सौभाग्य प्राप्त कर चुकी थी.. ओर देवायतभी सभी मर्दोमे अलगही दीख रहा था.. उनका व्यक्तीत्व.. उनका आकर्सण सबको आजभी अपनी खीच रहाथा.. ओर देखनेके लीये विवस कर रहाथा..

तभी हवेलीपे धिरेन आगया.. तो चंदाके चहेरे पे खुसीके मारे स्माइल आगइ.. तब नीलमभी सरमाते खुस होकर हसने लगी.. तो सभी ओरतोका ध्यान धिरेनकी ओर गया तो सभी उन्हीके गाने गाने लगी.. तो धिरेन खुब सरमाया ओर हसते हुअ‍े जटसे होलमे चला गया.. वहा सबके पैर छुकर राजीवके पास चला गया ओर उनके पांव छुते वही उनके पास बैठ गया.. नीर्मला ओर भुमीका.. अपने रुममे बैठकर बाते कर रही थी..

धिरेनने राजीवके पास बैठतेही नीर्मलाके बारेमे पुछा तो राजीवने उनके रुमकी ओर इसारा करदीया.. तो धिरेन हसते हुअ‍े खडा होकर उसी रुममे चला गया.. जैसेही नीर्मलाने धिरेनको देखा वो धिरेन.. चीलाते जटसे खडी होगइ.. ओर दोनो गले लग गये.. तब नीर्मलाने धिरेनका सर चुमलीया.. फीर धिरेनने भुमीकाके पैरभी छु लीये.. तो नीर्मलाने हाथ पकडकर अपने पास बेडपे बीठा लीया.. तब भुमीका धिरेनको देखते हसती रही..

नीर्मला : (हसते) कहो बेटा.. छुटी बुटी लेली.. आनेमे बहुत देर करदी..? हंम..?

धिरेन : (हसते) मौसी वो कुछ खरीदी बरीदी करनीथी.. ओर अपनी भी कुछ तैयारीया करनी थी.. तो सहेर गयाथा.. इसीलीये देर हो गइ..

भुमीका : (हसते) हां भइ.. अब जमाना बदल गया हे.. सीर्फ लडकीयाही थोडी पार्लर जाती हे.. अबतो सहेरमेभी लडकोके लीये पार्लर खुल गये हे.. दैखो.. हमारा बेटा कैसे चमक रहा हे.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) क्या मौसी.. आपभी.. बस थोडा हल्कासा मेकअप करवा लीया.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) हंम.. चल कोइ बात नही.. मेरा बेटा दुल्हा हे.. तो जचनातो चाहीयेनां..?

धिरेन : (हसते) मौसी.. वो मंजुदीदी कही दीख नही रही.. कही गइ हे क्या..?

नीर्मला : (हसते सरको सहेलाते) नही.. यही कही होगी.. उनको पता नही होगाकी तु आया हे.. ओर बेटा.. अब मुजे मौसी कहेना बंध करदे.. अबसे मे ही तेरी मां हु.. ओर पुनोभी हमे अपना सास ससुर मानती हे..

धिरेन : (हसते) जी मोम.. हें..हें..हें.. लेकीन अ‍ेक सर्तपे.. आप दोनो मेरे साथ रहेने आजाओ..

नीर्मला : (हसते सर चुमते) नही बेटा.. तुमतो जानते हो.. तुम्हारे मौसा नही मानेगे.. ओर हमारा धंधाभी उधर हे.. फीर आगे देखते हे.. अबतो तुही हमारा वारीस हे..

मंजुला : (अंदर आतेही जोरोसे) अरे धिरेन.. मेरा भाइ.. कब आये तुम..?

कहेते मंजु दोडके धिरेनके गले लग गइ.. तभी भावना ओर चंदा ओर सृतीभी आकर धिरेनको गले लगाते मीली.. सब धिरेनकी खातीदारी करनेमे लगे रहे.. इसी बीच पुनम वंदनासे कुछ बात करती रही.. दोनोको धिरेनके आनेकी खबर मील चुकीथी.. तो पुनम बहुतही सरमा रहीथी.. आखीर धिरेनसे उनकी सादीजो होने वालीथी.. लेकीन मनके अ‍ेक कोनेमे अबभी सादीसे पहेले अ‍ेक बार देवायतको मीलनेकी आस थी.. इसके लीये पुनमने रश्मीभाभीसे बात करके पुरा इन्तजाम करलीया था..

सभी लेडीस साम देर तक नाच गान.. सब धमाल करती रही.. तो सभी जेन्ट्सभी अ‍ेक दुसरेके साथ गपे लगाते हसी मजाक करते रहे.. तो धिरेन लखनभी कुछ दोस्तोके साथ अपनी टोली बनाकर हसी मजाक करते रहे.. जब साम ढल गइ तब सभी लोग खाना खाकर अपने अपने घरकी ओर चलने लगे.. दयाने हरीया ओर मालतीके साथ रामुकाका का टीफीन भेज दीया.. घरके लोगोके अलावा सभी लोगोने भोजन करलीया..

तो लखनने धिरेनको अपने साथ रुममे रुकनेके लीये कहा.. तो धिरनने अपना सब सामान लखनके रुममे ही रखने चला गया.. वहा सामान रखकर बाथरुममे ही फ्रेस होगया.. तो इधर लता ओर नीलमभी खानेसे पहेले फ्रेस होने उपर अपने रुममे जा रहीथी.. ओर जैसेही दोनो उपर गेलेरी मे जा रहीथी.. तब धिरेन बहार नीकला.. ओर उनका सामना लता ओर नीलमसे होगया..

तो धिरेन लताको देखतेही सर जुकाके जटसे चलने लगा.. तो लताके पीछे नीलम आरही थी वो धिरेनकी ओर तीरछी नजरसे देखते मुस्कुराने लगी.. तो लता थोडी देर सडनली रुक गइ ओर नीलमको आगे करदीया तो नीलम सर जुकाते जटसे अपने रुममे चली गइ.. ओर लता धिरेनकी ओर उसे घुरकर जाते हुअ‍े देखती रही.. आज लताको देखतेही धिरेनकी गांड फट गइथी.. ओर वो चुपचाप नीचे सबके पास चला गया..

जब गांवके सभी लोग चले गये तब सीर्फ रमेश सुधीर ओर दोनोकी बीवीया ओर रश्मीही रुक गइ.. फीर वो लोगभी अ‍ेक साथ खाना खाने बैठ गये.. तब धिरेन ओर नीलम सबकी नजर बचाते अ‍ेक दुसरेको चोर नजरसे देखते मु्सकराते रहे.. तभी नीलमने धिरेनको लताकी ओर आंखोसे इसारा करते केह दीयाकी लताकी नजर हम दोनोपे हे.. तब धिरेनने नीलमकी ओर देखना बंध कर दीया..

इसी बीच सब आपसमे बाते करते खडे खडेही खाना खा रहेथे तब चंदा ओर मंजु सबको मीठाइआ बाटते जबरदस्तीसे खीला रहीथी.. तब देवायत रमशे सुधीर नीशा ओर चारु सब अ‍ेकही साथ खडे होकर खाना खा रहेथे तब देवायतने रमेशको गांवमे सबको भोजनके लीये ओर जीनकीभी जमीन थी उसे कल साम हवेलीपे बुलानेको केह दीया.. सभी खानेमे बीजीथे.. तभी रमशे ओर सुधीर कुछ लेने काउन्टर पले गये.. तो मौका देखतेही देवायतने जेबसे लेटर नीकालके नीशाको स्वीट देनेके बहाने स्वीटके साथ लेटरका कवरभी दे दीया..

तो नीशाके साथ चारुभाभी भी खुस होगइ.. ओर नीशाने सरमाते हसते हुअ‍े जटसे लेटरको डीसके नीचे छीपा लीया.. ओर चारुके साथ सबसे दुर चली गइ.. तो देवायत पुनम ओर लताके पास जाकर खडा होगया तो वहा मंजु ओर चंदा सृतीभी आगइ.. आज सृती बहुतही सरमा रहीथी.. तो मंजु ओर पुनम चंदा वंदना सब उनकी खीली उडाते मस्तीया कर रहीथी.. तो दुरसे नीर्मला ओर भुमीकाभी सबकी ओर देखते हस रहीथी..

तभी लखनभी धिरेनको लेकर सबके पास आगया तो चंदा धिरेनको देखकर खुस होने लगी.. अबतो पुनमकोभी धिरेनको इग्नोर करना ठीक नही लगा.. तो उसने सरमाते अपनी डीसमे अ‍ेक स्वीटका टुकडा उठाकर धिरेनकी डीसमे रख दीया ओर सरमाते हसने लगी.. तो ये देखकर लखननेभी अ‍ेक स्वीटका टुकडा उठाकर लताके मुहमे ही खीला दीया.. तो लता सर्मसार होगइ.. तो भानु रमा भावु सरला सभी लोग खुसीसे हसने लगे..

भावना : (वहा आते हसते) अरे.. क्या बात हे लखनभौया.. लगता हे हमारी लता अब यहा भुखी नही रहेगी.. हें..हें..हें..

रमा : (हसते) हां.. तो हमारे जमाइकोभी क्यु अ‍ैसेही भुखे रखे.. लीजीये आज मेरे हाथोसेभी खा लीजीये..

कहेते रमानेभी लखनको खीला दीया.. तब मंजु ओर चंदाभी धिरेनको.. फीर सबको स्वीट खीलाने लगी.. फीर राजीव नीर्मला भुमीका सबको खीलाती रही इसी बीच देवायतनेभी भुमीका ओर नीर्मलाको जबरदस्तीसे खीला दीया.. तो सब लोग देखते हसते रहे.. तो चंदा देवायतको लेकर सृतीके पास चली गइ.. तब सृती ओर देवायतने अ‍ेक दुसरेको खीला दीया तो सृती बहुतही सरमाइ ओर मुस्कुराती रही..

इसी तराह सबने हसी खुसी भोजन संम्पन कीया.. तो रमेश ओर सुधीरभी नीशा चारुको लेकर अपने घर चले गये.. तो बाकीके सभी लोग होलमे आकर बैठ गये ओर गप्पे लगाते अ‍ेक दुसरेके साथ हसी मजाक करते रहे.. इसी बीत रश्मीने मंजुसे कुछ बाते करली तो मंजुभी पुनोकी ओर देखकर हसने लगी.. ओर उसने हां मे गरदन हीला दीया.. फीर रश्मी पुनम वंदना ओर सृतीसे पास आकर हसते हुअ‍े बाते करने लगी..

तो पुनमभी सरमाकर हसने लगी ओर वंदना सृती देवायतकी ओर देखकर मुस्कुराने लगी.. तो देवायतको कुछ समजमे नही आया.. इधर नीर्मला ओर भुमीकाभी देवायतको अकेलेमे मीलकर कुछ बाते करना चाहती थी.. लेकीन सादीके माहोलकी वजहसे उसे देवायतसे अ‍ेकेले मीलनेका मौका नही मील रहाथा.. तो दुसरी ओर भावनाभी लताके साथ मीलकर देवायतसे अकेले मीलकर बाते करना चाहती थी.. तभी..

मंजुला : (हसते पास आते) देवु.. सभी लडकीया आज रश्मीभाभीके वहा सोने जारही हे.. सुबह उनको जल्दी उठकर तैयार होना हेतो आप सबको रश्मीभाभीके वहा छोडकर आजाइअ‍े आज हमभी जल्दी सो जायेगे.. सुबह चारोका मंडप मुहुर्त हे.. जाइअ‍े.. ओर लता नीलु तुमभी साथ चली जाओ..

कहातो पुनम रश्मीकी ओर देखने लगी.. तभी रश्मीने उसे आंखोके इसारोसे कुछ केह दीया तो पुनमके चहेरेपे स्माइल आगइ.. तो वंदनानेभी अपने मेकअपका सामान सााथमे लेलीया तो लता नीलमभी अपने कुछ कपडेकी बेग लेकर नीचे आगइ तब नीलम काफी नीरास लग रहीथी ओर वो चोर नजरसे धिरेनको देखने लगी.. सबके सो जानेके बाद वो धिरेनको उपर मीलना चाहती थी.. तो उनका सारा प्लान चोपट होगया..

चंदा : (सबको) देखो वंदना.. तुम ये दोनोको सुबह पहेले जल्दी तैयार करदेना ताकी यहा उनकी जरुरत पडेतो दोनो रेडी होनी चाहीये.. सब कार्य हमे मुहुर्तपे करना हे..

मंजुला : (हसते) अरे दीदी फीकर मत करो.. सुबह जल्दी कोइ मुहुर्त नही हे.. हमे नव बजेके बादही मुहुर्त करना हे..

रमा : (हसते चंदाके कानमे) दीदी.. आज दोनोको आरामसे सोने दो.. फीर कलसेतो हमारी तराह कहा सो पायेगी.. वो सोने देगे तबनां.. हें..हें..हें..

कहातो चंदाने सर्मसार होते हसते रमाको उनकी पीठमे अ‍ेक मुका मार दीया.. फीर दोनोही सबसे थोडी दुर जाते सरमाते हसते हुअ‍े धीरेसे अ‍ेक दुसरेकी सुहागरातके बारेमे बाते करने लगी.. तो सृतीभी भुमीकासे बात करके सबके पास आकर खडी होगइ.. तब मंजुने देवायतकोभी बुला लीया उनके साथ मंजुभी जा रहीथी.. ओर सभी लोग पैडल चलते रातके अंधेरेमे साथ चलते बाते करते रश्मीके घरकी ओर जाने लगे....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११४

कहातो चंदाने सर्मसार होते हसते रमाको उनकी पीठमे अ‍ेक मुका मारदीया.. फीर दोनोही सबसे थोडी दुर जाते सरमाते हसते हुअ‍े धीरेसे अ‍ेक दुसरेकी सुहागरातके बारेमे बाते करने लगी.. तो सृतीभी भुमीकासे बात करके सबके पास आकर खडी होगइ.. तब मंजुने देवायतकोभी बुलालीया उनके साथ मंजुभी जा रहीथी.. ओर सभी लोग पैडल चलते रातके अंधेरेमे साथ चलते बाते करते रश्मीके घरकी ओर जाने लगे....अब आगे

सभी लेडीस आपसमे बाते करते चल रहीथी तब लता धीमी आवाजमे नीलमको अबभी धिरेनसे दुर रहेनेके लीये समजा रही थी.. तब मंजु सृती ओर देवायत बाते करते सबके पीछे चल रहेथे.. फीर मंजुने सृतीको पुछही लीयाकी दोनोने वहा क्या कीया.. सृतीने धीरेसे बाते करते मंजुको सब बता दीया की दोनोने सीर्फ ओरल सेक्सही कीया हे.. बाकी सबवो अपनी सुहागरातमे करेगे.. अ‍ैसे ही सब रश्मीके घर आगये..

अंदर आतेही रश्मीने पहेले सरपंचका जायजा लीया.. ओर उसे टीफीन नीकालकर खीलाने लगी.. तभी सब लेडीस ओर देवायतभी अंदर चले गये तो देवायतको देखतेही राघवका दीमाग खराब होगया.. अर उसने खानेको ठुकरा दीया.. तब रश्मीने उनको अ‍ेक बार फीर खरी खोटी सुनाइ ओर टीफीन लेकर कीचनमे रख दीया.. फीर सभी लोग होलमे सोफेपे बेठ गये ओर आपसमे बाते करती गप्पे लगाने लगे..

आज पुनमने रश्मीको बता दीयाथा की वो उनकी सादीसे पहेले अ‍ेक बार अपने भाइको मीलना चाहती हे.. तो रश्मीने उसे अपने रुममेही मीलनेको केह दीयाथा.. तभी रश्मीने घर आतेही इसारोसे पुनमको अपना रुम दीखा दीया.. तो पुनम मंजुको लेकर रुममे चली गइ.. ओर अंदर जातेही सरमाते देवायतको सादीसे पहेले आखरी बार मीलनेके लीये बुलानेको ओर उनको साथ रहेनेको कहा.. ताकी कीसीको सक नाहो.. तब मंजु मुस्कुराते वापस बहार आगइ ओर आतेही कहा..

मंजुला : (हसते) देवु.. वो आपने कागजात दीयेथे.. उनके बारेमे पुनोको समजादो.. ओर उसे आपसे कुछ जरुरी बातभी करनी हे.. तो आइअ‍े मेरे साथ.. (लेडीसको) पुनोतो सादी करके चली जायेगी तो बहुतही जरुरी बात करनी हे.. आप सब बैठना हम अभी आते हे..

रश्मी : (हसते) अरे आरामसे जाइअ‍े.. तबतक मे इन सबको बढीयासी चाइ पीलाती हु.. हें..हें..हें..

वंदना : (हसते) हां भाभी.. हम सब इधरही बैठी हे.. हमारी फीकर मत करो.. आरामसे बाते करके आओ..

कहातो मंजु वंदनाकी ओर कातील स्माइल करते देवायतको लेकर रश्मीके रुममे चली गइ.. ओर अंदर जातेही मंजुने धीरेसे दरवाजा बंध करलीया.. ओर धीरेसे लोक करलीया ताकी कोइ भुलसेभी अंदर ना आजाये.. जैसेही देवायत अंदर गया तो पुनम रश्मीके बेडपे सरमाते बैठी थी.. अब इसे मंजुका कोइ डर नही था.. जैसेही देवायत आया तो वो जटसे खडी होगइ ओर दोडकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर आंसु बहाने लगी..

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पुनम : (आंसु बहाते) भाइ.. आइ लव यु.. आइ लव यु सोमच.. बस मे सादीसे पहेले आपको आखरी बार मीलना चाहती थी..

देवायत : (बाहोमे कसते) बस.. बस.. अब आंसु मत बहा.. क्या मुजे कमजोर करना चाहती हे..? हंम..? ओर आखरी बार क्यु..? हंम.. तुजेतो मे जींदगीभर मीलता रहुगा.. तुम मेरी मासुका ओर बीवी हमेसा रहेगी..

पुनम : (होंठ चुमते) हां.. भाइ.. आप कमजोर मत होना.. वरना मे टुट जाउगी.. जींदगीने मुजे कीस मोडपे लाके खडी करदी हे.. भाइ मुजे वहा मीलनेतो आओगेनां..?

मंजुला : (हसते सरको सहेलाते) हां मेरी बच्ची.. मे इनको वहा भेजती रहुगी.. तु फीकर मत कर.. तुजेही तो मेरे देवुको सम्हालना हे.. ओर सुन.. सादीके बाद ये १५ बीस दीनमेही तुजे प्रेगनेन्टकी बात करनी हे.. उनमे देर मत करना.. बस ज्यादासे ज्यादा २० दिन..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अगर धिरेनने बच्चेके लीये मना करदीया तो..? मे क्या करुगी..?

मंजुला : (गंभीर होकर धीरेसे) नही पुनो.. वो मना करेतो उसे तुम मना लेना.. केह देनाकी मे बच्चा नही गीराउगी.. चाहे जोभी परीणाम आये.. मे सम्हाल लुगी.. मुजसे फोनपे बात करवाना.. तुजे वही डटके रहेना हे.. भलेही वो नाराज होजाये.. तुम तो सब जानती हे..

पुनम : (हां मे गरदन हीलाते) हां भाभी.. मुजे इस बच्चीको जन्म देनाही हे.. वरना बाबाको क्या मुह दीखाउगी.. भाइ.. मे अब आपको वही मीलुगी.. ओर आपसे फोनपे बात करती रहुगी..

मंजुला : (धीरेसे हसते) पुनो मे बहार जाती हु.. अब वक्त बरबाद मत करो.. दोनो अच्छी तराह मीललो..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) नही भाभी.. आपभी इधरही रहीये.. अब आपसे कैसा परदा.. आज जोभी करना आपके सामनेही करना हे.. अगर आप बहार गइतो कोइ हम दोनो पे सक कर सकती हे.. इसीलीये तो आपको साथ मे रखा हे.. आज हम तीनोही अ‍ेक साथ मीलेगे..

मंजुला : (सरमाते हसते) नही पुनो.. कल तुम्हारी सादी हेतो तुमही इनको अच्छेसे मीललो.. वरना तेरे साथ मेरी भी हालत खराब ना करदे.. देवु आज बहुत सम्हालके कल इनकी सादी हे.. तो धीरे करना.. हम घर जाकर आरामसे कर लेगे.. आज पुनोको अच्छेसे मीललो..

देवायत : (होंठ चुमते) हां पुनो मे भी सादीसे पहेले तुजे अ‍ेक बार मीलना चाहता था चल आजा.. आज मेरी बहेनको खुस कर दुगा.. फीर पता नही हमारे मीलनेकी कब बारी आयेगी..

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ.. मेने धिरेनसे उनका सब सेड्युल जान लीया हे.. हम मेरे घर आरामसे मील सकते हे.. में आपको फोन करके बुला लुगी.. या भाभीसे बात करलुगी.. अब चलीये.. देर मत कीजीये..

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कहेते पुनम देवायतके होठोको चुमने लगी.. दोनोही पागलोकी तराह अ‍ेक दुसरेके होठ चुमते रहे.. तभी देवायत पुनमको अपनी गोदमे उठाते बेडकी ओर चला गया ओर पुनमको बेडपे धीरेसे पीठके बल सुला दीया ओर अपनी पेन्टको नीचे करते अपना लंड बहार नीकाल दीया तो पुनम सर्मसार होगइ.. ओर वोभी सरमाते अपना पायजामा ढीला करते नीचे घुटनो तक कर देती हे.. तब देवायत उनके उपर चड गया..

तब पुनमने उसे कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. तब देवायतका लंड जटके मारते पुनमकी चुतपे ठोकर मारते अपने बीलका रास्ता ढुंढने लगा.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके होठ चुमते मुहको थोडा खोल देते हे ओर अ‍ेक दुसरेके मुहमे जीभ डालते जीभको चुसने लगते हे.. तब पुनमने अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते लंडको पकडके उनके बीलका रास्ता दीखा दीया.. ओर देवायतने धीरेसे अपनी कमर दबाते पुनमकी चुतमे पुस करदीया..

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तो लंड पुनमकी चुतमे घुस गया.. तो पुनम आधी आंख चडाते मदहोसी मे छा गइ.. ओर सातवे आसमानपे चली गइ.. दोनोही भुल गयेकी इनके साथ मंजुभी हे.. तो मंजुभी दोनोको देखतेही उतेजीत होगइ ओर वोभी पुनमके सरके पास बेडके कीनारे बैठ गइ.. ओर पुनमके सरको सहेलाते अ‍ेक हाथसे अपनी सारीको कमर तक उची करते अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर देवायत होलेसे कमर हीलाते धीरे धीरे पुनमको चोदने लगा..

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आज देवायतभी मंजुके सामनेही अपनी बहेनको पहेली बार चोद रहा था.. दोनोही उतेजनाकी वजहसे कामुक्ताके नसे मे चुदाइमे मसगुल होगये.. तो मंजुभी अपनी चुतमे उंगली डालकर आंख बंध करके जोरोसे हीलाने लगी.. तभी पुनमने देवायतको अपनी बाहोमे जोरोसे भीच लीया ओर जोरोसे लीपलोकर करते अपनी कमरको जटके देने लगी.. ओर जडते देवायतके लंडको चुतके अंदर ही भीगोने लगी..

पुनम : (लडखडाती आवाजमे) बस.. बस.. भाइ.. अ‍ैसेही मुजे चोदते रहीयेगा.. मे आपके बीना नही रहुगी..

देवायत : (चुदाइके नसेमे धीरेसे) हंम.. हा.. हा... पुनो.. तुजे वहा आकर भी चोदता रहुगा.. भलेही मेरी जींदगीमे कीतनीभी ओरत आये.. लेकीन तुम मेरे लीये मेरी मंजुकी तराह स्पेसीयल हो.. आइ लव यु..

अंदर भाइ बहेनका प्यार चुदाइमे तबदील होते तांडव मचा रहाथा.. तब बहारकी ओर सृती लता नीलम वंदना सभी अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया कर रही थी.. सब सृतीको देवायतका नाम लेकर छेड रहीथी.. तब रश्मीभी चाइ नास्ता बनाकर बहार लेकर आ गइ.. ओर वोभी सबके साथ सृतीकी मस्मी करनेमे सामील होगइ.. तब सृती सरर्मसार होते हसती रही.. ओर वंदनाको मुके मारने लगी.. तो नीलमकोभी अब यहा मजा आने लगा ओर वोभी सबके साथ सामील होगइ..

तबतक अंदर देवायतने धमाकेदार चुदाइ करके पुनमको दो बार जडा दीयाथा.. ओर अभी हाथके बल उचा होते पुनमको जोरोसे चोद रहाथा.. तब मंजुभी अपनी चुतमे जोरोसे उंगलो हीलाने लगी तभी उनकी चुतसे पानीका फवारा नीकल गया तो वो जटसे अंदरके बाथरुममे भाग गइ.. ओर अपनी चुतको साफ करते हाथ मुह धोते कंपलीट होने लगी.. तब तक देवायत ओर पुनमके बीच घमासान चुदाइ चल रहीथी..

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तब अचानक देवायत पुनमके उपर लेटकर छागया.. ओर पुनमके गलेमे मुह डालते उसे दांत गडाके चुमने लगा तो पुनमनेभी देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया तभी पुनमको अपनी बच्चेदानीपे गरम गरम महेसुस होने लगा ओर वो उतेजनासे कांपने लगी ओर देवायतके साथ जडने लगी.. दोनोही सांत हो गये तब पुनम देवायतके होंठ चुमते उनकी पीठ सहेलाती रही.. तब मंजुभी बाथरुमसे बहार आगइ..

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मंजुला : (बेडपे बेठकर पुनमके सरको सहेलाते) दोनोका होगया बच्ची..? ओर करना हे..? तो करवाले.. फीर तेरा भाइ तेरे हाथोमे १० १५ दिनोके बाद आयुगा..

पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) नही भाभी.. भाइ अ‍ेकही बारमे हमको थका देते हे.. अगर आपको करवाना हे तो करवालो.. मे यही बैठी हु..

मंजुला : नही पुनो.. हमतो घर जाही रहे हे.. तो हम दोनो वहा आरामसे करेगे.. चलो दोनो बाथरुममे जाकर ठीक होजाओ.. फीर हमे जानभी हे..

कहातो देवु पुनमके उपरसे उतर गया तो लंड चुतसे फच.. आवाज करते बहार नीकल गया.. तो पुनमकी चुतसे दोनोका कामरस चुतसे बहार बहेने लगा.. तब पुनमने जटसे अपने नीकरसे चुतको पोछ लीया.. तभी देवायतने पुनमको अपनी गोदमे उठालीया ओर बाथरुमकी ओर चलने लगा.. तो पुनम मंजुके सामने देखकर हसने लगी.. ओर दोनो अंदर चले गये तो देवायतने पुनमको नीचे खडा कर दीया..

तभी पुनम अ‍ेक बार फीरसे देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर देवायतको पागलोकी तराह चहेरेको चुमने लगी.. तो देवायतने फीरसे लंडको बहार नीकाल लीया.. ओर पुनम कुछ कहे इनसे पहेलेही पुनमकी अ‍ेक टांगको उची करते अपने हाथोमे फसा लीया ओर खडे खडेही लंडको पुनमकी चुतमे घुसा दीया.. तो पुनमने सर्मसार होते जोरोसे देवायतको बाहोमे पकड लीया.. ओर देवायतभी जोरोसे खडे खडे पुनमको चोदने लगा..

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पुनम : (लडखडाती आवाजमे) भाइ.. बस.. बस.. ओर नही.. धीरेसे.. बस.. आप अ‍ेक बार सुरु होजाते हो तो फीर हमे छोडतेही नही.. बस.. हमे चोदतेही रहेते हो.. आपकी यही चोदनेकी अदा मे मीस करुगी.. आप कीतना मस्त चोदते हो.. बस मुजे वहा आकर अ‍ैसेही चोदते रहीयेगा..

देवायत : (धीरेसे होंठ चुमते) पुनो.. मेभी तो तेरे बगैर नही रेह सकता.. देखना तुजे वहा आकर चोद लुगा.. क्या मस्त माल दीखती हे तु.. वाकइ तु मेरी बीवी हे.. जी चाहता हे तुजे चोदता ही रहु..

पुनम : (चुदवाते) भाइ.. अब उस वंदनाकी बारीभी लेलो.. वो बीलकुल तैयार हे.. वो आपसे अपने प्यारका इजहार करना चाहती हे.. आप उसे सहेरमे लेजाओ तब ही उनका काम तमाम करदो.. वो आपको मना नही करेगी.. वो बस आपके प्यारका इजहार करनेका इन्तजार कर रही हे.. आप उसेभी बीवी बनाके चोदलो..

देवायत : (धीरेसे चोदते) पुनो तुजेभी हमारे साथमे चलना हे.. मे तुम दोनोको अ‍ेक साथ चोदना चाहता हु..

पुनम : आइ... भाइ मे गइ.. ओर जोरसे चोदो.. भाइ.. हमे मेरे घरमे बहुत मोके मीलेगे.. मे वंदनाको वही बुला लुगी.. आप आजाना.. हम तीनोही मेरे घर खुब मजे करेगे..

कहातो देवायत पुनमको जोरोसे चोदने लगा.. तब कुछही देरमे दोनो अ‍ेक दुसरेको जोरोसे बाहोमे भीच लेते हे ओर अपने होंठ लीपलोक करते अ‍ेक बार फीर दोनो साथमे जड गये.. ओर देवायतने पुनमकी चुतको अपने गरम पानीसे भरके हरी भरी करदी.. फीर दोनोही अपने लंड चुतको साफ करके फ्रेस होगये.. ओर अपना हुलीया ओर कपडे सही करके बहार आगये.. तब पुनम मंजुकी ओर देखते सरमाकर हसने लगी..

मंजुला : (हसते धीरेसे) पुनो.. क्या अंदरभी तेरी कुटाइ होगइ..? हें..हें..हें.. मुजे पता था ये दो बार कीये बीना मानेगे नही.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हां भाभी.. लेकीन आज भाइने मजाभी बहुत दीया.. अब चलीये बहार..

फीर तीनोही बहार आगये तब सभी लेडीस चाइ नास्ता कर रही थी.. वंदना रश्मीके अलावा कीसीको पताभी नही थाकी अंदर दोनो भाइ बहेन चुदाइ करके आये हे.. तो वंदना देवायतको चोर नजरसे देखते सरमा रही थी.. तीनोभी सबके साथ चाइ नास्ता करने बैठ गये.. तभी सबकी नजर बचाते जैसेही वंदनासे आंख मीली तो देवायतने हसते हुअ‍े वंदनाको आंख मारदी.. तो वंदनाका मुह खुलाही रेह गया.. वो सोक्ट होकर सर्मसार होगइ.. फीर मुहको दुसरी ओर करते सर्मसार होते हसने लगी..

सबने चाइ नास्ता करलीया तो देवायत मंजु नीकलने लगे.. तो रश्मी ओर सृती उसे बहार तक छोडने आ गइ.. तो बहार आतेही दोनो देवायत ओर मंजुको गले मीलने लगी.. तब देवायतको गले मीलते रश्मी ओर सृतीने देवायतके होठ चुमलीये तो मंजु हसने लगी.. फीर दोनो नीकल गये ओर रश्मी सृती वापस अंदर आगइ.. ओर सभी दरवाजे लोकर करदीये.. तो दुसरी ओर देवायत ओर मंजु अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडके हवेलीकी ओर बाते करते जाने लगे..

देवायत : (हसते) मंजु.. तुमने पुनमको कहाकी तुमतो सब जानती हो.. तो क्या मुजे ये सब मालुम नही होगा..? तुम ओर पुनम बहुत कुछ जानती हो.. मुजे कब अपनी पहेचान करवाओगी..?

मंजुला : (हसते) हंम.. देवु.. सोचती हुकी आपको आज ही मेरी पहेचान करवादु.. ताकी आपको बार बार मुजसे कुछ पुछना ना पडे.. आज मे आपको हमारे संभोगके माध्यमसे कुछ शक्तिया दुगी.. (हसते) क्या आपको अपनी बहेनको चोदनेमे इतना मजा आता हेकी उसे दो बार चोद लीया..? मेभी तो आपकी बहेन हु.. आज मुजेभी पुनोकी तराह चोदलो.. मुजे आज संभोगके माध्यमसे आपको कुछ देना हे..

जब दोनो बाते करते हवेलीपे पहोचे तब सभी अपने रुममे जाकर सो रहे थे.. लखन धिरेनभी बेडपे लेटकर आपसमे बाते कर रहेथे.. तो राजीव दवाइकी वजहसे सो चुकाथा.. तो दुसरे रुममे नीर्मला ओर भुमीका दोनोही गाउन पहेनकर अ‍ेक दुसरेको बाहोमे भरके बाते भी कर रहीथी ओर बीच बीचमे अ‍ेक दुसरेके होंठ चुम रही थी.. रजीया दया ओर चंपाभी पुरे दिन कामकी थकानकी वजहसे सो चुकीथी.. तो देवायत मंजु अपने रुममे चले गये..

जब अंदर गये तो चंदा भी पुरे दिनकी दोड धामकी वजहसे गहेरी नींदमे सो चुकी थी.. तो देवायत मंजुको उसे जगाना ठीक नही लगा ओर दोनो नीचे गदा डालकर पुरे नंगे होकर सोने लगे.. आज मंजु खुद देवायतके उपर चड गइ.. उनकी कमरपे दोनो ओर पैर मोडके बैठ गइ.. रश्मीके घर पुनम ओर देवायतको चोदते हुअ‍े देखकर कबसे अपनी चुतसे पानी बहा रहीथी.. वो घर आतेही जल्दसे जल्द देवायतका लंड अपनी चुतमे लेना चाहती थी..

तो कमरपे बैठतेही मंजुने देवायतका लंड पकडकर अपनी चुतपे रखदीया.. ओर धीरेसे बैठकर पुरा लंड अपनी चुतमे घुसा दीया.. फीर थोडी देर कामुक नजरोसे देवायतकी ओर देखते धीरे धीरे उपर नीचे होते देवायतको चोदने लगी.. तो देवायत भी उनके सामने बैठ गया.. ओर मंजुको अ‍ैसे चोदते हुअ‍े देखकर हसता रहा.. आज मंजु उसे बहुतही कामी नजर आ रहीथी.. मानो कीसी रतीका अवतार हो..

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तभी मंजु देवायतको चोदते हुअ‍े अपनी आंख बंध करके बैठ गइ.. तो देवायतभी अपना होस गवा चुका.. आज मंजु देवायतको अपनी कुछ शक्तिओसे अवगत करवाना चाहती थी.. आज वो अपनी पहेचान देवायतसे करवाना चाहती थी.. ओर मंजु आंख बंध करते अपनी योनीके माध्यमसे देवायतके अंदर अपनी कुछ काम शकित स्थापीत करने लगी.. ओर देवायत स्वप्नकी दुनीयामे चला गया.. उसे बहुत कुछ ज्ञात होने लगा.. आज मंजु उसे कुछ अलगही लग रहीथी.. तभी मंजुने उनको अपना असली रुप दीखा दीया..

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देवायतको मंजुके असली रुपके दर्शन हो गये.. तब देवायतको मंजुके अंदर अपनी जननी विमलाका आभास होने लगा.. उसे अ‍ैसा प्रतीत होने लगाकी वो अपनी मां विमलाको चोद रहा हे.. ओर वो यही सोचते थोडा वीचलीत होगया.. ओर उसने फोरन अपनी आंख खोलदी.. तब मंजु आंख बंध करके अपनी कमर हीला रही थी.. तो देवायत उनको आस्चर्यसे देखता ही रेह गया.. तभी मंजुने आंख खोलकर देवायतकी ओर वासना भरी नजरोसे देखा.. ओर मंजुने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमे भीच लीया..

मंजुला : (धीरेसे कामुक आवाजमे) देवु.. कुछ गलत मत सोचो.. बस मुजे जोरोसे चोदते रहो.. भरदो मेरी योनीको.. यही जीवन हे.. हमे कोइ रीस्ते नातेको अहेमीयत नही देनी.. हम सब प्रकृतीसे जीनेवाले लोग हे..

देवायत : (थोडा जीजकते अपनी कमर हीलाते) मंजु.. ये सब क्या हे..? कौन हो तुम..? क्या मेने देखा वही हो..? मुजे अपनी असली पहेचान करवाओ..

मंजुला : (लडखडाती आवाजमे) देवु.. अभी कुछ नही.. पहेले मुजे अ‍ेक बार अच्छेसे चोदकर ठंडी करदो.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. अभीतो मुजे जमकर चोदलो.. फीर आपको मे सब कुछ बताती हु..

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फीर देवायतने कुछ भी गलत सोचना बंध करदीया.. ओर मंजुको बाहोमे भीचते उसे जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा.. तब कुछही देरमे मंजुने देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीचते होंठोको लीपलोक करलीया.. ओर अपनी कमरको जटके मारते जडने लगी.. तो आज देवायतभी जल्दीसे छुट गया..

ओर वोभी अपनी कमरको जटके देते मंजुकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तो आज जडते हुअ‍े देवायतको कुछ अलग ही महेसुस होने लगा.. ओर दोनो साथमे जडकर सांत होगये.. फीर दोनोने अ‍ेक दुसरेके होठोको छोड दिये.. ओर अ‍ैसेही अ‍ेक दुसरेको बाहोमे भीचते बैठे रहे तब..

मंजुला : (धीरेसे) देवु.. आपने देखा वोही सच हे.. इसीलीये मे आपको अपनी पहेचान नही करवा रहीथी.. मेही आपकी मां विमला हु.. मेही आपकी सास नीर्मला हु.. मेही आपकी बुआ भुमीका हु.. मेही हमारी पुनो हु.. ओर मेही मेरे देवुकी मंजु हु.. मे इन सबकी जननी हु.. आप सभी मेरे संतान हो..

देवायत : (हसते) हंम.. मंजु.. मे बहुत कुछ समज गया.. क्या हमने कुछ गलत तो नही कीया..? बस मुजे सीर्फ इतनाही जानना हे.. क्युकी आज बाबाने भी सृतीको बहुत कुछ बता दीया हे.. तो उनकी बातोसे लगा की भवीस्यमे मेरे कइ रीस्ते भी उजागर होने वाले हे.. वो सृतीको बार बार विचलीत ना होनेको समजा रहेथे..

मंजुला : (देवायतके गलेमे हाथ रखते आंखोमे देखते) हां.. जानु.. सायद.. कुछ अ‍ैसाही होगा.. बाबाने सृतीको आपका ओर भुमी बुआके रीस्तेके बारेमे कहा होगा.. आगे बहुत कुछ होगा.. लेकीन आप बीलकुल गील्टी फील मत करना.. क्युकी आपका कामही उन राजाकी तराह हे.. हम दोनो खुद उनकेही अंस हे.. कइ जन्मोमे मुजे आपको जन्म देकर आपसे ही सादी करनी पडती हे.. ओर ये सब होता रहेता हे..

देवायत : मंजु.. क्या तुजे मेरे ओर भुमी बुआके रीस्तेके बारेमे जानकर दुख नही हुआ..? ओर बाबा सृतीको भी सायद इसीलीये समजा रहेथे.. हमने आज तक कीसीको हमारे रीस्तोके बारेमे भनकभी नही लगने दी.. तो फीर बाबा सृतीको अ‍ैसा क्यु समजा रहेथे..?

मंजुला : (हसते होंठ चुमते) देवु.. बस अ‍ेक बार ये सादी नीपट जाने दो.. इस बारेमें भुमी बुआ खुद आपसे बात करेगी.. ओर आप जोभी नीर्णय लो.. सोच समजक लेना.. हमे कीसीकी परवाव नही करनी..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) मंजु अ‍ैसी क्या बात हे.. जो तुम अ‍ैसा केह रही हो..? अगर अ‍ैसा कुछ हेतो तुमभी हमारे साथ रहेना.. अब जोभी होगा तेरे सामने ही होगा.. मुजे तुमसे कुछभी नही छीपाना..

मंजुला : (हसते) देवु.. मुजे सबकुछ पता हे.. कुछ अ‍ैसे रीस्ते होते हे.. जो हमे गील्टी फील करनेको मजबुर करते हे.. जैसे हमारी बुआ.. पुनम.. ओर यहा तककी मेरी मम्मी भी.. आपके लीये बुआ बहेन ओर सास हे.. उनके साथ फीजीकल होनेसे आपको गील्टी फील होती हे.. लेकीन ये सभी मेरे लीये केवल अ‍ेक परी यातो अप्सराये हे..

अगर मानलो ये तीनोही आपसे रीस्तेमे कोइ ना होतीतो..? क्या आपको कभी उनके साथ फीजीकल होनेसे गील्टी फील होती..? नहीनां..? बस आप सीर्फ इतना दिमागमे रखो की आप अ‍ेक मर्द हे ओर हम सभी सीर्फ ओरते हे.. इनसे ज्यादा आपको सोचने की जरुरत नही हे.. हमारे लोकमे रीस्तोके कोइ मायने नही हे..

देवायत : मंजु.. बस मुजे अ‍ेकही जवाब चाहीये.. फीर मुजे तुमसे कुछ भी नही जानना..?

मंजुला : (होंठ चुमते धीरेसे) हां मेरे देवु.. आज आपको जोभी पुछना हो बीन्दास पुछलो.. फीर कभी कोइ सवाल मत करना.. बस अपना यही कार्य करते रहेना.. देवु आपको अभीभी बहुत सी ओरते ओर लडकीया मीलेगी उन सभीकी गोद भरनी हे.. जीनको अपने पतीसे बच्चे नही हो रहे.. बस आपका कामही यही हे.. पुछो.. क्या पुछना चाहते हो..?

देवायत : (हसते) मंजु.. सीर्फ इतना बतादे.. हम सभी आपसी रीस्तेसे क्यु बंधे हे..? मतलब हमारे पर दादा फीर दादा फीर हमारे बापु ओर अब स्यंम हम.. तुम ओर हमारी पुनमभीतो मेरी बहेन हो.. भुमीका मेरी बुआ हे.. ओर तेरी मम्मी मेरी सास हे.. तो मे सबसे ज्यादा उन्हीकी ओर आकर्सीत होता हु.. जो मेरे आपसी रीस्तेमे होती हे.. कोइ खास वजह..?

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मंजुला : (हसते होंठ चुमते) हंम.. देवु.. बस इतना जानलो.. आपके जीवनमे जीतनीभी ओरते या लडकी आइ हे.. यातो भवीस्यमे आने वाली हे.. वो कोइभी सामान्य ओरत नही होगी.. वो सभी यातो परीया होगी या फीर हमारे अप्सरा लोककी अप्सराये होगी.. ओर आप उन सबके राजाके अंस हो.. तो वहा कोइभी परीया या अप्सरा बहारके लोगसे सादी नही करती.. सब आपसी रीस्तोमेही सादी करते हे.. वहा हम सभी आपकी रानीया हे..

आप स्वयंम कामके अंस हो ओर मे स्वयंम रतीका अंस हु.. ओर सबकी जननी हु.. वास्वमे आप सभी मेरे ही संतान हो.. तो वो सबका आपकी ओर आकर्सीत होना ओर आपके साथ रीलेशनमे आना लाजमी हे.. उन सबको आपकोही संतुस्ट करना पडेगा.. ओर वो भी यहा धरतीपे सीर्फ आपके लीये ही जन्म लेकर आइ हे.. इसीलीये वो सभी अपके प्रती.. ओर आप उन सभीके प्रती आकर्सीत होते हो..

देवायत : (हसते) अगर हम सब तुम्हारी संतान हे तो तुम.. तुम अपने बेटेके साथ भी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां.. लेकीन मत भुलो.. तुम सीर्फ उनका अंस हो.. तुम स्वयंम नही हो.., स्वयंतो मे हुं.. स्वंय तो वो राजा हे.. जो आने वाले वक्तमे हमारा पोता मेरी ही कोखसे जन्म लेकर आयेगा.. हमारे विजयकी संतान.. तबभी मुजे उनको अपनी कोखसे जन्म देना हे.. ओर आगे जाकर उनकी पत्नी भी होना हे..

इसीलीये तो मुजे यहासे जल्दीसे जाना पडेगा.. जानु.. मे कही नही जा रही.. मुजे हमारे ही बेटे विजयसे सादी करके स्वयंम मेरे स्वामीको जन्म देना हे.. फीर मे विजयको छोडकर उनसे सादी कर लुगी.. तब आप मुजे पहेचान लेनाकी ये मेरी मंजु हे.. इसीलीये हम सब आपसी रीस्तोसे बंधे हे..

देवायत : (हसते) मंजु.. तो फीर सृतीकी ओर आकर्सीत होकर उनको पसंद करता हु तो वोतो मेरी बहेन नही हे.., तो फीर मुजे उनकी ओर क्यु लगाव हो रहा हे..?

मंजुला : (सरमाते हसते) लगता हे जानु आज मुजे आपको सब सचाइ बता देनी चाहीये..

देवायत : (हसते) हंम.. मंजु अब तुमसे तो कुछ छीपा नही हे.. बतादे..

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मंजुला : (हसते अपनी कमर हीलाते धीरेसे चोदते) देवु.. क्या मस्त पोजीसनमे आप सब पुछ रहे हे.. आजतो मजा आजायेगा.. आप भी धीरे धीरे मुजे चोदीये.. मे आपको सब बताती हु.. हम चुदाइ करते बाते करते हे..

देवायत : (कमर हीलाते चोदते) हंम.. अब बता.. क्या मस्त चुत हे तेरी.. जी चाहता हे तुजे सुबह तक अ‍ैसेही चोदता रहु..

मंजुला : (होंठ चुमते) तो मना कीसने कीया हे.. मे मेरे स्वामीके लीये इसीलीये तो यहा आइ हु.. सुनो.. जानु.. असलमे सृती भी आपकी बहेन हे.. भुमी बुआको कोइ संतान नही हो रहीथी.. तब बाबाके आदेशके बाद भुमी बुआने हमारे बापुसे राखीके तोहफेके बदलेमे अपनी गोद भरनेको कहा.. ओर हमारे बापुको मजबुरन भुमी बुआको प्रेगनेन्ट करना पडा.. बस सृती इन्हीकी संतान हे.. ओर ये बात आजतक कीसीको नही पता.. इनके बारेमे हमारे बापु ओर सीर्फ भुमी बुआही जानते हे..

देवायत : (हसते) क्या..? भुमी बुआ बापुसे फीजीकल हुइ होगी..? हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां.. जब अपनी खुदकी बहेन विमला यानीकी आपके मां से वो सादी कर सकते हे.. तो भुमी बुआ तो मुह बोली बहेन हे.. ओर सीर्फ इतना ही नही.. जब नरेश अंकल गुजर गये तब दोनोने सादीभी करली थी.. ओर उनके घरके खर्चे से लेकर सृतीकी पुरी पढाइ तक आपके बापुने ही उनका खयाल रखा हे.. जो अभी आप उनका खयाल रख रहे हो.. हें..हें..हें.. समजे कुछ..? की अभी नही समजे..? हें..हें..हें..

देवायत : (सरमाते हसते) हंम.. मतलब तुजे सब मालुम हे.. क्या तुजे हमारे बारेमे जानकर दुख नही हुआ..?

मंजुला : (हसते होंठ चुमते) नही जानु.. मत भुलो हमारी भुमी बुआ भी वोही हे.. पीछले जन्मकी माधवी.. तो उसेभी मेरी मम्मीकी तराह अपके संपर्कमे आनाही था.. हें..हें..हें..

देवायत : हंम.. बापुभीनां.. क्या वो भी मेरी तराह ठरकी थे..? मंजु इतनी कीतनी बहेन हे मेरी..?

मंजुला : (हसते कमर हीलाते) हंम.. अ‍ेक ओर भी हे.. जो समयके रेहेते वो भी आपके नीचे लेट जायेगी.. वोभी तो आपको पसंद करती हे.. ओर हमारे पोतेकी चहीती रानीको वोही जन्म देगी.. वो आपहीकी लडकी होगी..

देवायत : (आस्चर्यसे हसते देखते) अच्छा..? तो क्या हमारा पोताभी अपनी बुआसे सादी करेगा..? वो कौन हे..? क्या मुजे उनका नाम बता सकती हो..?

मंजुला : (हसते चोदते) हां आज आपको सबकुछ बता दुगी.. हें..हें..हें.. अरे आप भी चोदीयेनां.. बहुत मजा आ रहा हे.. आप क्या मस्त चोदते हो.. इसीलीये तो सभी कमीनी आपके नीचे लेटनेको तैयार होजाती हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते थोडी जोरोसे कमर हीलाते) हां.. बता अब.. कोन हे वो.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हमं.. अब ठीक हे.. क्या मस्त चोदते हो आप.. सुनीये.. वो हे.. हमारी लता.. भानुभाइ ओर लता हमारे बापुकी ही संतान हे.. देवु.. इसी बीच सुख ओर दुख दोनोही आते रहेगे.. तब आप वीचलीत मत होना.. क्युकी हम सबका जीवन कोइ ओरही चला रहा हे.. कीसकी अ‍ेन्ट्री होगी ओर कीसकी अ‍ेक्जीट होगी.. वो सब वोही तैय करेगे.. तभी तो मुजे धिरेनका जानकर दुख नही होता.. बस अभी मे सीर्फ इतनाही कहुगी.. वरना आप फीरसे दुखी होजायेगे.. जानु.. कल साम आपकी ओर सृतीकी सगाइ हे..

ओर हां.. वो बेचारी नीशाका कामभी करदेना.. वोभी लाइनमे खडी हे.. वैसे वंदनाभी आपकी बीवी हे.. अब उनकाभी नंबर लेलो.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हंम.. तुम बहुत कुछ जानती हो.. ओर सृतीका पता हे मुजे.. तुमने ही तो कहाथा.. मेने हम दोनोकी अंगुठी ओर चांदीका श्रीफल लेलीया हे.. मंजु वोभी तेरी तराह मुजे चाहती थी.. हम दोनोने वहा ओरल सेक्स कीया.. मंजु सीर्फ सृती जानती हे.. ओर अभी सीर्फ तुजे बता रहा हु.. मे दोनो कपलको गौवा हनीमुनके लीये भेज रहा हु.. मेने छे दिनका हनीमुन टुर पेकेज लेलीया हे..

मंजुला : (हसते होंठ चुमते) हंम.. चलो अच्छा हुआ.. कमसे कम पुनोतो कुछ धिरेनकी नजदीक आयेगी.. जानु.. कभी मुजेतो हनीमुनपे नही लेगये.. हें..हें..हें.. ओर अपनी दोनो छोटी बहेनको भेज रहे हो.. क्या इस बडी बहेनको नही लेजाओगे..? हें..हे..हें..

देवायत : (हसते कमर हिलाते चोदते) हंम.. तुजे चंदा ओर सृती तीनोको लेजाउगा.. लेकीन मंजु.. पुनम ओर लतासे छुपकर तुम उनका पेकींग करलेना परसो सामकी चारोकी टीकीट हे.. हम उन चारोको सरप्राइज देगे..

मंजुला : (हसते) हंम.. चलो अब कोइ बात नही अभीतो मुजे चोदो.. बहुत मजा आ रहा हे.. क्या मस्त चोदते हो आप..

इसके बाद दोनोके बीच धीरे धीरे करते घमासान चुदाइ होने लगी.. मंजुके अ‍ेक बार जडनेके बाद देवायतने मंजुको पीठके बल लीटा दीया ओर खुद उनके उपर चडते हाथके बल उचा होकर मंजुको जोरोसे चोदने लगा.. जबभी मंजु जडती देवायतको कसके बाहोमे भीचते लीपलोक कर लेती.. दोनोही सुबह चार बजेतक बीना लंड नीकाले चुदाइ करते रहे.. अबतक देवायत मंजुकी चुतको चार बार अपने पानीसे भर चुकाथा..

इधर नीर्मला ओर भुमीकाभी अ‍ेक दुसरेकी चुतमे उंगलीया करते ठंडी होकर सो गइथी.. तो देवायत मंजुभी अपने आपको बाथरुममे सही करके अ‍ेक दुसरेको बाहोमे भरकर सो गये.. तो आज गांवमेभी चारु ओर नीशा अच्छी तराह तैयार हुइथी.. तो रमेशनेभी घर जाकर चारुको चोदलीया.. लेकीन चारु हमेसाकी तराह प्यासी रेह गइ.. तो रमेशने उंगलीसे उनको ठंडी करदीया तो वही नीशाका भी वही हाल हुआ..

सुधीरने अभी अंदर डाला नही डाला.. तब नीशाकी चुतको छुतेही लंडने उल्टी करदी.. तब नीशा सहम गइ.. लेकीन कुछभी बोली नही ओर वो धीरेसे लेटर छुपाते लेकर बाथरुममे चली गइ.. ओर पहेले कमोडपे बेठकर उंगलीसे अपने आपको सांत करने लगी.. जब ठंडी होगइ तब देवायतने उसी चीठीमे नीचेकी खाली जगाहपे अपना जवाब लीखाथा.. जो वो धीरेसे लेटर नीकालकर पढने लगी..

प्रिय नीशाभाभी.. आपके बारेमे जानकर बहुतही दुख हुआ.. मुजे पता हे सुधीर अपनी कुछ गलत आदतोकी वजहसे आपको सारीरीक सुख देनेमे सक्षम नही हे.. जब वो खुद दुसरे मर्दके साथ अपको सबंध बनानेको केह रहाहे तो मुजे क्या अ‍ेतराज हो सकता हे..? मे आपको नीरास नही करुगा आप दुसरे गलत विचार करनेको त्याग दीजीये..

मेरातो कामही यही हे.. खैर वो मे आपको नही बता सकता.. लेकीन आपजोभी चाहती हे वो सब मे देनेके लीये तैयार हु.. मे सुधीरको सुरुसेही जानता हु.. उनके सामनेभी हम मीलेगे तबभी वो कोइ अ‍ेतराज नही करेगा.. ओर ये हम दोनोके लीये फायदेमंद भी हे.. क्युकी इनके कारण आपको संतान सुखभी मीलेगा.. मे आपको सबकुछ देनेको तैयार हु..

ओर वैसे देखा जायेतो जबसे मेने आपको सादीमे देखा तबसेही मुजे सुधीरसे ज्वेलेसी होने लगीथी.. मे तबसेही आपको पसंद करता हु.. ओर आपकी चीठी पढतेही मेने आपको अपना लीयाथा.. आजसे ये देवायत आपका होगया.. बस अ‍ेक बिनंती हे.. हम चारुभाभी ओर रश्मीभाभीके अलावा सबसे हमारे सबंध गुप्त रखेगे ताकी आपको कोइ प्रोबलेम ना हो.. हम सादीके बाद बहुतही जल्द मीलेगे.. आइ लव यु.. सो मच.. सीर्फ आपका प्रिय देवायत..

चीठी पढतेही नीशाकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. खुसीके मारे उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. ओर आंसुओके बावजुद भी वो हसने लगी.. ओर बार बार चीठीको चुमने लगी.. नीशा फोरन खडी होगइ ओर चीठीको अपने सीनेसे लगाते बाथरुममे कुदते हुअ‍े नाचने लगी.. आज उनकी सब मुराद देवायतने पुरी करदीथी.. ओर उसने जटसे चीठीको फोल्ड करके अपने गाउनमे हाथ डालकर अपने उरोजोकी क्लेवजमे छुपालीया..

ओर मुस्कुराते बाथरुमसे बहार आगइ.. तबतक सुधीर नींदकी आगोसमे चला गयाथा.. तो नीशाने धीरेसे अपनी अलमारी खोलकर चीठी नीकालकर अ‍ेक सारीकी गडीमे छुपालीया.. जहा सुधीरकी नजरभी ना पडे.. फीर नीशा खुस होते सुधीरको देवायत समजकर उनकी बगलमे आकर उनको बाहोमे भरके सोगइ.. तो रश्मीके घरधी वंदना देर रात तक सबको मंहेन्दी लगाती रही.. पहेले पुनम फीर लताको महेन्दी लगाकर सबको मंहेन्दी लगादी.. फीर अ‍ेक अ‍ेक करते सब सोगइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११५

ओर मुस्कुराते बाथरुमसे बहार आगइ.. तबतक सुधीर नींदकी आगोसमे चला गयाथा.. तो नीशाने धीरेसे अपनी अलमारी खोलकर चीठी नीकालकर अ‍ेक सारीकी गडीमे छुपालीया.. जहा सुधीरकी नजरभी ना पडे.. फीर नीशा खुस होते सुधीरको देवायत समजकर उनकी बगलमे आकर उनको बाहोमे भरके सोगइ.. तो रश्मीके घरधी वंदना देर रात तक सबको मंहेन्दी लगाती रही.. पहेले पुनम फीर लताको महेन्दी लगाकर सबको मंहेन्दी लगादी.. फीर अ‍ेक अ‍ेक करते सब सोगइ....अब आगे

आज हवेलीमे सुबहका सुरज अ‍ेक अलगही खुसीओका भंडार लेकर नइ रोसनीसे हवेलीको भीगोने लगा.. हवेलीपे सुबहसे ही चहेल पहेल बढ गइथी.. रश्मीके घर सभी लडकीया सुबह जल्दी उठ गइथी तब वंदनाने पुनम ओर लताको सजाकर तैयार करदीया.. ओर रश्मीने वही सबको चाइ नास्ता भी करवा दीया जब सभी तैयार होगइ तब रश्मी सबको लेकर हवेलीपे आगइ.. तब रास्तेमे आते वक्त पुनम ओर लता बहुतही सरमा रही थी..

आज हवेलीमेभी सभी जल्दी उठ गये.. तो आजके लीये मंडप मुहुर्त मे अंजु चंदाने सब इन्तजाम कर लीयाथा.. की कौन कहा बैठेगा.. ये काम मंजु चंदाने बडीही सावधानीसे अ‍ेरेन्ज कीयाथा.. ताकी कीसीको कुछ पताभी ना चले.. कुछ लोगोको छोडकर ओलमोस्ट सभीने चाइ नास्ता करलीया ओर जीतनेको मंडप मुहुर्तमे बैठनाथा सबने उपवास रख लीया.. तभी गांवकेभी बहुत सारे लोग आगये..

आज रमेश चारुके साथ सुधीर नीशाभी आगये तब नीशा कुछ ज्यादीही उत्साहीत ओर खुस लग रहीथी.. ओर क्युना हो..? आखीर उनकोभी देवायत मील गयाथा.. तब मंजु उनकी ओर देखकर हसने लगी.. तो नीशा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर जटसे मंजुके पास चली गइ.. तो साथमे चारुभी हसती हुइ आ गइ.. ओर मंजुने बारी बारी दोनोको गले लगा लीया.. तब नीशाके गले लगते मंजुने धीरेसे कहा..

मंजुला : (धीरेसे हसते कानमे) क्युरी कमीनी.. आज बहुत खुस हो रही हे..? जब उनका लंड खायेगीनां तब तुजे पता चलेगा.. कही बेहोस मत होजाना.. समजी.. हें..हें..हें..

नीशा : (अ‍ेकदम सरमाते सोक्ट होते) भाभी.. वो.. वो.. मे.. मे.. आप क्या केह रही हे..? अ‍ैसा कुछ नही हे..

चारु : (हसते धीरेसे) नीशा.. मंजुभाभीको हमारे बारेमे सब पता हे.. इसे डरनेकी जरुरत नही हे..

मंजुला : (हसते) हां नीशा तुजे डरनेकी जरुरत नही हे.. मुजे सब पता हे बस सादी होजानेदे.. मे खुद उनको तेरे पास भेज दुगी.. तब लुटलेना मेरे पतीको.. हें..हें..हें.. कमीनी तुमभी तो मेरी बहेन हो.. समजी..

नीशा : (आस्चर्यसे चारुकी ओर देखते) जी.. भाभी.. आइ कान्ट बीलीव.. ये आप केह रही हे..?

मंजुला : नीशु वो सब हम बादमे फुरसतमे डीस्कस करेगे.. अभी बहुत काम हे चल कामपे लगजा.. फीर हम इस बारेमे आरामसे बात करेगे..

कहेते मंजु हसते हुअ‍े चली गइ तब चारु खुस होकर हसते हुअ‍े नीशाको कीचनकी ओर जाते धीरेसे सब बताती रही.. जीसे सुनकर नीशाभी सरमाकर हसती रही.. तो दुसरी ओर नीर्मला भुमीका दोनोही आज अ‍ेक लडकीकी तराह सजधजके पटाका लग रही थी.. तभी लखन ओर धिरेनभी सजधजके तैयार होकर नीचे आगये.. तो चार पंडीतभी आकर अपनी तैयारीया करने लगे.. तबतक बहुत सारी ओरते ओर लडकीया भी आगइ..

चार मंडपमे मंजुने पुनम लता लखन ओर धिरेनको अलग अलग बीठा दीया.. तो मंजुने धिरेनके साथ राजीव नीर्मलाको.. तो लताके साथ भानु ओर रमा बैठ गये.. तभी पुनमके पास रमेश ओर चारु आकर बैठ गये तो उनके साथ मंजुने सुधीर नीशाकोभी बीठा दीया.. तब नीशाकी आंख गीली होगइ.. ओर खुद देवायत चंदाको लेकर लखनके पास जाकर बैठ गइ.. ओर भुमीका ओर सृतीकोभी अपने साथ बीठा दीया गांवकी सभी ओरते लडकीया सादीके गीत गाने लगी..

सभी जेन्टके लीये बहार पंडालमेही सुधीर रमेशने खुरशीया डालके बैठनेकी व्यवस्था करदी थी.. तो सभी जेन्ट लोग वही बैठकर मंडप मुहुत देखते बाते करते रहे.. ज्यादातब जेन्ट्स अपनी लुगाइ यातो जीनके साथ अवैध सबंध थे उनको देखते खुस होते रहे.. तो लडकेभी सब अ‍ेक जगाह अ‍ेकठे होकर आपी बहेनको या जीनके साथ उनके जीस्मानी रीस्ते थे उनकी ओर देखते नैन मटक करते हसते रहे..

तो गाना गाते ओरते ओर लडकीयाभी अपने यारकी ओर चोर नजरसे देखते सरमाकर हसती रही.. सबका कीसीना कीसीके साथ टाका भीडा हुआ था.. ओर जबसे मंजुने पुनमको अनुभुती करवाइ उस रात पुरे गांवमे चुदाइका तांडव मचा हुआथा.. तभीसे सबके मन ओर दिलो दीमागमे काम वासना बढ गइथी.. जीनकी वजहसे गांवमे चुदाइका दौरभी बढ गयाथा.. अब हर दिन सभी अपने यारको या अपनी मासुकाको मौका देखकर ही पकड लेते.. ओर अ‍ेक होजाते चुदाइ कर लेते..

तब कीसीको नही पताथाकी ये सब क्यु हो रहा हे.. ज्यादातर लोग अपनी मासुकाको प्रेगनेन्ट कर चुकेथे.. उस दिन कीसीभी गर्भनीरोधक गोली या आइपील बेअसर होचुकी थी.. कीसीको पता नही थाकी कुछही दिनोमे पुरे गांवमे हंगामा होने वाला था.. आज सब अपनी मोज मस्तीमे गांवके राजकुमार ओर राजकुमारीकी सादीका लुप्त उठा रहेथे.. लगभग पुरा गांव आज हवेलीपे था.. सभी पंडीत मंत्रोसे चारोकी पुजा करवा रहेथे..

देवायत पुजा कर रहाथा तब मंजु ओर चंदा उसे हाथ लगाकर बेठीथी तब सबकी नजर बचाते सबसे छुपके कोइ ना देखे इसी तराह भुमीने भी देवायतको नीचीसे हाथ लगा दीयाथा.. ये बात सीर्फ मंजु ओर देवायतही जान पाये.. भुमीका देवायतकी पत्नी होनेके नाते ये सब कर रहीथी.. इस बातसे सृती ओर चंदाभी अंजान थे.. तो दुसरी ओर आज राजीव ओर नीर्मला धिरेनकी सब वीधीयोमे सामील होकर बहुतही खुस हो रहेथे..

सब कार्य अ‍ेक देढ घंटा तक चलता रहा.. जब मंडप मुहुर्त खतम होगया तो सभी लेडीस होलमे चली गइ.. ओर कुछ देरके बाद मंडपके नीचेही बाकीकी वीधीया करने लगी.. तो देवायत राजीव भानु सब जेन्ट्सके पास आकर बैठ गये.. तभी रमेशने वही सभी जेन्ट्सके सामने जीनकी भी जमीन राघवने हडपली थी.. उन सबके नामकी घोसणा करते बता दीयाको सबकी जमीन उसे आज सामको वापस मील जायेगी..

ओर ये नेक काम देवायतकी वजहसे हो रहा हे.. तो सामको उन सभीको यहा आनेके लीये केह दीया तो पुरे गांवके लोगोमे खुसीका माहोल होगया.. ओर सबलोग हर्षोलास करने लगे.. गांवके सभी लोग देवायतकी जयकारा करने लगे.. तो कुछ लोगतो देवायतको यहाका राजा कहेते उनकी सराहना करने लगे.. तो कुछ लोगोने तो कल सादीके साथ गांवमे दिवाली मनानेकी घोसणा भी करदी.. सबकी नजरमे आज देवायतका मान बढ गया.. तो जीनकी जमीनथी वोतो खुसीसे आंसु बहाते देवायतको भगवान ही कहेने लगे..

ओर देखतेही देखते ये बात पुरे गांवमे फैल गइ.. ओर अंदर सभी लेडीसको भी पता चल गइ.. तो गांवके सभी लोग हवेलीपे इकठा होने लगे.. तो अंदर सभी ओरते मंजुको खुस होते धन्यवाद देने लगी.. तो नीर्मला ओर भुमीकाकी आंखोमे खुसीके आंसु आगये.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेसे लीपटकर रोने लगी.. तो सृतीने दोनोको हसते हुअ‍े पानी पीलाया तब उनकी आंखभी खुसीके मारे गीलीथी.. आज पुरे गांवमे सादीकी खुसीया दुगनी होगइ..

इसी बीच धिरेन ओर नीलमको बात करनेका मौका मील गया.. दोनोही सबकी नजर बचाते बाते करने लगे.. ओर दोनोने उपरकी मंजसलपे अकेलेमे मीलनेका तैय करलीया.. पुरे गांवमे अ‍ेक उत्सव जैसा माहोल बन गयाथा.. देखते देखतेही बात दुसरे गांवो तकभी पहोंच गइ.. जब विधीया सम्पन हुइ तो सभीके लीये भोजन था.. तो सब भोजन करते समयभी देवायतको आकर मीलते रहे.. ओर जीनकी जमीनेथी वोतो देवायतके पांव पकडकर माइ बाप कहेते रोने लगते..

तो अंदरकी ओर पुनमके रुममे पुनमके साथ लता सृती वंदना नीशा भी बहारके माहोलकी चर्चा करते खुसथी.. तो लखनभी अपने सभी गावके दोस्तोके साथ हसी मजाक कर रहाथा.. सब अपनी अपनी मस्तीयामे डुबे हुअ‍े थे.. तब धिरेन ओर नीलमको मौका मील गया.. ओर धिरेन धीरेसे फ्रेस होनेके बहाने उपर अपने रुममे चला गया.. तो जाते नीलमको उपरकी ओर आनेका इसारा करता गया.. तो मौका देखतेही नीलमभी सबकी नजर बचाते दबे पांव उपरकी मंजीलपे चली गइ.. तो उपरकी मंजीलपे कोइ नही था..

नीचे सब अपने काममे या सादीके माहोलमे बाते करते बीजी थे.. ज्यादातब लोग भोजनके पंडालमे थे.. अबतो लताको भी अपनी सादी तक पुनमके साथ उनके रुममे रहेना था.. इसी मौकेका फायदा उठाकर नीलम सुबहसे धिरेनके आसपास ही घुमती रही.. उनसे बाते करनेका मौका ढुंढती रही.. ओर नजर मीलते ही उसे उपरकी ओर आनेका इसारा करती रही..

जब नीलम धिरेनके रुमके पास गुजरी तब रुमके अंदर धिरेन नीलमका इन्तजार करते खडाथा ओर नीलमने वहीसे गुजरते धिरेनको लास्ट वाले रुममे आनेका इसारा कर दीया.. ओर वो लास्टवाले रुममे चली गइ.. आज नीलम पहेली बार धिरेनको अ‍ैसे अकेलेमे मील रहीथी.. तब उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. तो पीछे धिरेनभी आजु बाजु सभी जगाह नजर घुमाते धीरेसे दबे पांव लास्ट वाले रुमकी ओर बढ गया.. ओर धीरेसे अंदर चला गया.. तो नीलम वही दरवाजेके पीछे खडी थी.. जैसेही धिरेन रुममे आया..

नीलमने फौरन धीरेसे दरवाजा बंध करके लोक कर दीया.. तो धिरेन थोडी दुर जातेही दरवाजेकी आवाजसे वही पलटके नीलमको देखता रहा.. तभी नीलम हींमत करके सरमाते दोडकर धिरेनकी बाहोमे आकर समा गइ.. ओर धिरेनने नीलमको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. फीर दोनोही सब भुलकर प्यारमे अ‍ेक दुसरेके चहेरे को पागलोकी तराह चुमने लगे.. जैसे बरसोके बाद दोनो मील रहेहो.. फीर धिरेनने नीलमका चहेरा अपनी हथेलीओमे थामलीया.. ओर नीलमकी आंखोमे प्यार भरी नजरोसे देखता रहा..

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तो नीलमने सरमके मारे अपननी नजरे जुकाली.. धिरेन नीलमके चहेरेको प्यार भरी नजरोसे देखता रहा.. तो उसे नीलमके चहेरेपे मासुमीयत देखी.. तभी धिरेनने धीरेसे अपने होंठ नीलमके होठोपे रख दीया.. ओर दोनोही अक दुसरेके होंठ चुमने लगे.. नीलमने अपनी आंख बंध करली.. आज वो अ‍ेक बंध कमरेमे अपने यारको पहेली बार अकेलेमे मील रहीथी.. तब उसे पता नही थाकी उनका यार उसे कीस हद तक प्यार करेगा..

तो धिरेन नीलमको चुमते चुमते अ‍ेक हाथसे उनके बुब्सको दबाके मसलने लगा.. तब नीलम मदहोस होगइ.. उसने धिरेनका कोइ विरोध नही कीया ओर वोभी अपने बुब्सको मसलवानेका पुरा मजा लेने लगी.. तब दोनोके उपर काम वासना पुरी तराह हावी हो चुकीथी.. नीलमकी आंख वासनाकी वजहसे लाल होने लगी.. ओर नीलमने आज पहेली बार सरमाते धीरेसे धिरेनका लंड पेन्टके उपरसे ही पकड लीया.. ओर धीरे धीरे मसलने लगी.. तब उनकी चुतकी पंखडीया फडफडाते तरल पदार्थ छोडने लगी..

तब उनको नही पताथाकी नीचे दो लोग हे.. जो उनको सब पता चल जाता हे.. पुनम सब जानतीथी फीरभी वो अनदेखी करती रही.. क्युकी आने वाले वक्तके बारेमे उसे सब पताथा.. उसे धिरेन ओर नीलमके रीलेशनसे कोइ मतलब नही था.. इसीलीये वो अब धिरेनको ज्यादा तवजो नही दे रहीथी.. उनका पतीतो उनका भाइ देवायत था.. बस धिरेनसे सादी करनेकी कुछ मजबुरीया थी.. उनकोतो बस कुछ दिन धिरेनका लंड अपनी चुतमे लेनाथा.. ताकी वो अपनी बच्चीको उनका नाम दे सके..

तो इस बार मंजुने धिरेसे भावनाको बुलाकर उनके कानमे कुछ कहा.. तो भावना आग बबुला होगइ.. ओर अपनी बच्चीको धीरेसे सरलाको पकडाकर उपरकी मंजीलकी ओर चली गइ.. तब धिरेन नीलमके लोअरमे हाथ डालक उनकी चुतको सहेलाते उनके होंठ चुम रहाथा.. तो नीलमभी कामाग्नीमे जलते सीसकारीया करते पुरी तराह मदहोस होकर धिरेनका साथ दे रहीथी..

आज वो कीसीभी बातका विरोध नही कर रहीथी.. आग दोनोकी ओर बराबर लगी हुइथी.. धिरेन ओर नीलम कुछ आगे बढे इनसे पहेलेही कीसीने उनके रुमका दरवाजा धीरेसे खट खटाया.. तब नीलम ओर धिरेन दोनोकी गांड फट गइ.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने दखने लगे..

ओर दोनो गभराते अ‍ेक दुसरेसे अलग होगये ओर अपने आपको सही करने लगे.. तब नीलम अ‍ेक पलके लीयेतो धिरेनको देखती रही.. तब धिरेनने उसे इसारोसे बहार देखनेको कहा तो तभी वापस उनके दरवाजेपे हल्कीसी दस्तक हुइ.. ओर नीलमने धीरेसे थोडासा दरवाजा खोल दीया ओर अपना चहेरा बहार नीकालकर देखनेकी कोसीस करने लगी.. तभी भावनाने जटसे पुरा दरवाजा खोल दीया ओर अंदर आगइ..

भावना : (थोडी सख्तीसे अदब लगाते) दोनो यहा अंदर अकेले दरवाजा बंध करके क्या कर रहे हो..?

नीलम : (अ‍ेकदम गभराते) छोटी मम्मी वो.. वो.. मे.. मे.. वो जीजुको मुजसे कुछ कामथा तो.. (स..टा..क.. भावनाने अ‍ेक तमाचा नीलमके गालपे जड दीया)

भावना : (गुस्सेमे धीरेसे) कमीनी.. कुछ कामथा तो नीचेही सबके सामने दोनो मील लेते.. यहा दरवाजा बंध करके अकेलेमे कौनसा काम होता हे.. मुजे बेवकुफ बना रही हे..? नीचे जाकर कहेने दे अपनी मांको.. वोही तुजे ठीक करेगी..

नीलम : (रोते गीडगीडाते) नही.. मम्मी भुल होगइ मेरी.. मे इसे कभी नही मीलुगी.. बस अ‍ेक बार माफ करदो.. आप जोभी कहोगी मे करुगी प्लीज.. मोमको मत कहेना.. वरना वो मेरी खाल उखाड देगी..

भावना : (धिरेनकी ओर घुमते) ओर तुम..? तुजेभी जरासी सरम नही आइ.. आजही तुम्हारी सादी हे ओर आजही.. अ‍ैसा घीनोना काम.. छी.. क्या कहेदु चंदा मौसीको..? मुजे तुम्हे भाइ कहेनेमे भी सरम आती हे.. क्या यही सीखाया हे तुजे मौसीने.. हंम..? अगर इतनीही आग लगी हुइ हे तो अ‍ेक दिनभी नही ठहेर सकता..? कलतो तेरी बीवीभी आजायेगी.. जो करना हे करलेता उनके साथ..

धिरेन : (रोते पांवमे गीरते) नही दीदी प्लीज.. आप अ‍ैसी बाते मत करो.. आप कीसीको मत कहेना वरना मे मर जाउगा.. प्लीज.. बस अ‍ेक बार माफ करदो.. भुल होगइ मेरी.. आप कीसीको मत कहेना..

भावना : (थोडे सख्त लहेजेमे) धिरेन.. कमसे कम मुजे तुमसे तो ये उमीद नही थी.. मत कहेना मुजे बहेन.. येतो अभी छोटी बच्ची हे.. अ‍ेक बच्चीकी जींदगीसे खीलवाड करने यहा आया हे..? अभी नीचे मौसीको बता दुगी तो तेरी जींदगी बरबाद होजायेगी.. वोभी बेचारी कीसीको मुह दिखाने लायक नही रहेगी.. कमसे कम अपनी मां के बारेमेतो सोचलीया होता.. ओर उस बेचारी मासुम परी जैसी पुनमकी क्या गलती.. जो तुम जैसे हरामीसे सादी करने जा रही हे.. कभी सोचाहे उनको मालुम होगातो उनपे क्या बीतेगी..?

धिरेन : (पांवमे पडते गीडगीडाते) नही दीदी.. कीसीको मत कहेना वरना मेरे पास सुसाइड करेनेके अलावा कोइ रास्ता नही होगा.. मे बरबाद होजाउया प्लीज.. मुजे अ‍ेक बार माफ करदो.. मे आपके पांव पडता हु..

भावना : (सख्तीसे) ठीक हे.. इस बारतो मे पुनमकी जीदंगी खराब ना होजाये इसीलीये तुजे छोड रहीहु.. लेकीन याद रखना मेने तुजे माफ नही कीया हे.. ओर कभी इस कमीनीकी ओर दुबारा देखाना.. तो इस बार मे खुद तेरी चमडी उखाड लुगी.. जा यहासे.. आजके बाद मुजे कभी मत बुलाना.. कमीना कहीका..

कहातो धिरेन फौरन अपने आंसु पोछते खडा होगया ओर भावनाके पैर छुकर जटसे अपने रुममे चला गया.. ओर बाथरुममे जाकर अपना हुलीया ठीक करके नीचे चला गया.. तब उनके चहेरेका रंग उड चुकाथा.. तो उपर भावना नीलमको लेकर बही बेडपे बैठ गइ.. तो नीलम अबभी अपना सर नीचे करते आंसु बहा रहीथी.. आज दोनोही अ‍ेक दुसरेके साथ प्यारके इजहारके बाद पहेली बार मीले ओर फीरसे दोनो रंगे हाथ पकडे गये.. कारमे उसे लताने पकडलीया तो वहा उसे भावनाने प्यार करते दबोच लीया..

भावना : (थोडी सख्तीसे) हां.. तो अब बता.. दोनोके बीच कबसे ये चकर चल रहा हे.. सच बताना..

नीलम : (रोते) मम्मी.. सोरी.. हम आज पहेलीही बार मीले हे.. लेकीन हमने कुछभी नही कीया..

भावना : (अ‍ेक नजरसे देखते) कुछ नही कीया मतलब..? तो क्या तु यहा उनसे चुदवाने आइथी..? बता कबसे तुम दोनोके बीच ये सब चल रहा हे.. वरना मुजे तेरी मम्मीकी भी जरुरत नही पडेगी.. बता..

नीलम : (आंसु बहाते) मम्मी वो हम खरीदी करने गये तबही आते वक्त कारमे मेरे मना करनेके बावजुदभी मेरी मस्ती कर रहेथे.. इस बातका लता दीदीको भी पता हे.. ओर मुजे अपनी कसम देकर फोन करनेको कहाथा.. वोभी लता दीदीने उनसे बात करली थी.. ओर आज मुजे इधर मीलने बुलाया बस.. इसके आगे कुछभी नही हुआ.. मे सच केह रहीहु.. आपकी कसम..

भावना : (थोडा सांत होते) हंम.. देख नीलु.. अभी तु इन सब चीजोके लीये छोटी हे.. तेरे लीये अभी ये बहुत बुरी चीज हे.. अगर अ‍ेक बार इनकी आदत लग गइना.. तो तेरी जींदगी खराब हो जायेगी..

नीलम : (रोते) मम्मी प्लीज.. बस अ‍ेक बार माफ करदो.. आप जोभी कहोगी मे वही करुगी.. आप मेरी मम्मीको मत कहेना.. वरना मे मर जाउगी..

भावना : (सरपे हाथ घुमाते) बस.. अब रोना नही.. मेरी बच्ची.. मे मानती हु तेरी उमरमे ये सब होता हे.. लेकीन यही समय हे तुजे अपने आपको सम्हालना होगा.. हंम.. अगर अ‍ैसा कुछ होता हे तो बाथरुममे जाकर अपनी उंगलीसे अपने आपको सांत करले.. बस तेरी सादी तक तुजे अ‍ैसेही अपने आपको सम्हालना हे..

नीलम : (सर जुकाते अपने आंसु पोछते) जी.. मम्मी.. आइ अ‍ेम सोरी..

भावना : (प्यारसे हाथ घुमाते) मेरी बच्ची.. तुजे पता नही हे.. हमारे आसपास धिरेन जैसे कीतने भेडीये घुमते हे.. तुजे नोच डालेगे.. तुजे पताभी नही चलेगा तेरी जींदगी बरबाद कर देगे.. इस धिरेनसे तो तुम दुर ही रहेना.. अगर तुजे कुछ अ‍ैसा लगेतो मुजसे आकर बात करना.. मेभी तेरी मां हु.. तो मुजसे कहेनेमे कोइ सरम मत करना.. तु पढ लीखके अ‍ेक काबील लडकी होजा.. तेरेमे आत्म विस्वास आयेगा.. तो तुजे धिरेनसेभी ज्यादा काबील लडका मीलेगा.. जो तुजे पुरी जींदगी खुस रखेगा.. हंम..? जा अंदर जाकर अपना हुलीया ठीक करले..

कहतो नीलम बाथरुममे चली गइ.. ओर अपना मुह ओर हाथ पाव धोकर बहार आगइ ओर अपने आपको सही करलीया ओर भावनाके पास आगइ तो भावनाने उनको गले लगा लीया ओर उनका सर चुमते उसे हाथ पकडकर बहार लेगइ.. ओर दोनो नीचे आगइ तब भावनाने उसे लताके पास भेज दीया.. ओर खुद मंजुलाके पास चली गइ.. तो मंजु भावनाको लेकर अपने रुममे चली गइ ओर दोनो बेडपे बैठ गइ..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. बोल भावु क्या हुआ..? दोनोने कुछ कीयातो नही..? नीलु बच गइनां..?

भावना : (धीरेसे) हां.. दीदी.. आपने क्या सोचकर पुनोकी सगाइ इस कमीनेसे करवाइ..? आजतो नीलु बच गइ.. अब कमीना कभी इस नीलुकी तरफ आंख उठाकर देखेगाभी नही.. आज मेने उनको खुब खरी खोटी सुनाइ.. पता नही पुनो दीदीका क्या होगा..

मंजुला : (कुछ सोचते) भावु.. धिरेनको गाली मत दे.. भाइ हे वो हमारा.. आजतो तुमने उसे बचालीया.. लेकीन आगे नही बचा पाओगी.. वो नीलुकी जींदगीसे खीलवाड करके ही रहेगा.. क्युकी उनकी कीस्मतमे ही वो सब लीखा हे.. नीलुसे वो सादी करलेगा.. कुछ बाते हे जो मे तुजे अभी नही बता सकती..

भावना : (धीरेसे) दीदी मुजे पता हे आपको सब पता चल जाता हे.. फीरभी..

मंजुला : (धीरेसे) नही भावु.. अभीके लीये ठीक हे.. आगे तुम नीलुको ओर धिरेनको कुछ नही कहोगी.. उन दोनोका मीलन जरुरी हे.. तभीतो धिरेन पुनमसे दुर होपायेगा.. भावु मुजे इतना पता हे.. नीलु उनसे सादी करलेगी.. वो बहुतही कामी लडकी हे.. उसे रोकना हम कीसीके बस मे नही हे..

भावना : (आस्चर्यसे धीरेसे) दीदी.. ये आप क्या केह रही हे..? आप कुछ सहस्यभरी बाते कर रही हे.. मेरी तो कुछ समजमे नही आता.. क्या ये दोनो सादी करलेगे..?

मंजुला : (खडी होते) हां भावु.. इस वक्त ये सब बाते करनेका समय नही हे.. बस ये सादी नीपट जानेदे हम इस बारेमे फुरसतमे बात करेगे.. चल बहार.. ओर ये बात अभी तुम कीसीको मत कहेना.. समजी..?

भावना : (आस्चर्यसे देखते खडी होते) जी..दीदी.. समज गइ.. लेकीन मुजे इनके बारेमे सब जानना हे..

मंजुला : (हसते) हां.. सब बता दुगी.. लेकीन अभी नही.. चल बहार..

कहेते दोनोही रुमसे बहार आगइ.. तब नीलम मायुस होकर लताके पास बैठ गइ.. तो पुनम कातील मुस्कान करते नीलमकी ओर टेडी नजरोसे देखती रही.. वंदना ओर सृती दोनोही धीरेसे अ‍ेक दुसरेके कानमे हस हसके बाते कर रहीथी.. आज चंदा बहुतही खुस लग रहीथी क्युकी उनके बेटे धिरेनकी सादीजो हो रही थी.. तब रमाभी भानुको अ‍ेक तरफ बुलाकर उनसे हस हसके बाते करने लगी..

आज धिरेन बहुतही परेसान लग रहाथा.. तो वोभी अपना मुड चेन्ज करनेके लीये लखन ओर उनके दोस्तोके पास जाकर बैठ गया.. तो लखनके सभी दोस्तो धिरेनको जीजु जीजु कहेकर उनसे बाते करने लगे.. तो कुछही देरके बाद धिरेनभी सबके साथ घुल मील गया.. लेकीन उसने अपने मनमे नीलमको पानेका इरादा मजबुत करलीया.. उनको पता चल गयाकी नीलम भी उसे दिलोजानसे प्यार करती हे..

क्युकी आज नीलमने उसी कीसीभी हरकतका विरोध नही कीयाथा.. ओर उल्टा उनके कहे बगैरही नीलमने धिरेनका लंड पकड लीयाथा.. जीस तराह आज वो नीलमकी चुत ओर उनके बुब्सको मसलते उनके साथ खेल रहाथा ओर नीलम बीना कोइ प्रतीक्रीया दीये बगेर उनका साथ दे रही थी उनसे धिरेनको पका यकीन हो गयाकी नीलमभी वोही चाहती हे जो वो जीसके लीये तडप रहा हे.. धिरेन अब जल्दसे जल्द नीलमको अपने नीचे लीटाना चाहता था.. ओर इस बातसे खुसभी थाकी अब पुनमकी कल उनके नीचे लेट जायेगी..

यही सब सोचते उनका लंड खडा होने लगा.. अब उसे भावनाकी टांटसे कोइ फर्क नही पडा.. ओर वो फीरसे अ‍ेक बार नीलमको मीलनेका सोचने लगा.. लेकीन अब यहा मीलना मुस्कील था तो अब उसे सहेरमे मीलनेके अलावा कोइ रास्ता नही सुजा.. ओर वो हस हसके सभी लडकोके साथ बाते करने लगा.. गांवकी ओरते ओर लडकीया भी पंडालके नीचे बैठकर लडकोकी ओर देखते हसी मजाक करते बाते कर रहीथी..

जैसे यहा पुनम लखनकी सादी नही.. कोइ प्रेमी मीलापका मेला लगा हो.. सभी जेन्ट्स भोजन कर रहेथे.. जब उन लोगोने भोजन करलीया तो सभी ओरते ओर लडकीया भोजन करने चली गइ.. तो गांवके सभी लडकेभी उनके भोजनका प्रबंध करने के बहाने ओरते ओर लडकीयोकी आस पास मंडराने लगे.. तो ओरते ओर लडकीयाभी सरमाते हसने लगी.. आज अ‍ैसा गांवमे पहेली बार हो रहाथा जो सब लडके ओरतोकी मदद कर रहेथे..

अंदर राजीवने खाना खालीया तो नीर्मलाने उसे अपनी दवाइ पीलादी.. तो वोभी अपने रुममे जाकर सो गया तब नीर्मला सरला ओर भुमीका सोफेपे बैठकर बाते कर रहीथी.. सारी हवेलीपे चहेल पहेल ओर बातोसे सोर सराबा हो रहाथा.. ओर अ‍ैसेही सब गांव वालोका भोजन संपन होगया.. तो सभी अपने घरकी ओर जाने लगे.. तब सीर्फ घरके लोगही खाना खानेके लीये पंडालमे आगये..

रमेशने पुनम लता सृती वंदना ओर नीलमके लीये उनके रुममेही भोजनका प्रबंध करदीया.. नीर्मला सरला ओर भुमीकाको अंदर भोजनके लीये कहातो तीनोने मना करदीया.. वो देवायतके साथ खाना चाहती थी.. आज नीर्मला भुमीका ओर सरलाभी सजधजके कयामत लग रहीथी.. तो आज मंजुने दया रजीया चंपाभाभीको भी अपने साथ लेलीया चंदा रमा रश्मी चारु नीशा सब अ‍ेक साथ हसी मजाक करते पंडालमे आगइ.. वहा रमेश ओर सुधीरने सबके लीये टेबल खुरशी लगवाकर भोजनका प्रबंध कियाथा..

लखन धिरेन देवायत रमेश सुधीर भानु सब अ‍ेक साथ भोजन करने बैठ गये.. नीर्मला ओर भुमीकाने खडी होकर सबका मुह मीठाइ खीलाकर मीठा करवाया.. तो नीशा रश्मी चारु सभी चोर नजरसे देवायतको देखते खाना खा रहीथी.. सबने हसी मजाक ओर बाते करते भोजन करलीया.. तबतक ३.३० बज चुकेथे.. भोजन करके सब होलमे आगये.. तो रमेश ओर सुधीर पंडालमे रातके भोजनकी तैयारीयामे लग गये..

आज कीसीके नसीबमे आराम करना नही लीखाथा.. देवायत ओर रश्मी होलमेही बैठकर सब गांव वालोकी जमीन वापस देनेकी तैयारीया करने लगे.. दोनोही लीस्टके हिसाबसे चेक करते फाइल रखने लगे.. तो उनके गांवके अलावा आजु बाजुके गांवके बहुतसे लोगोकी भी जमीने थी.. चंदा नीशा मंजु रमा सब मंजुके रुममे बैठकर बाते करते गप्पे लगाने लगी.. तो नीर्मला ओर भुमीका वही होलमे बैठकर रश्मी ओर देवायतकी तैयारीया देखते आपसमे बाते कर रहीथी..

भुमीका : (धीरेसे) नीमु.. हम दोनो बहुतही कीस्मत वाली हे.. हमे अ‍ैसा होनहार दामाद मीला हे..

नीर्मला : (हसते धीरेसे कानमे) ओर हमारा पतीभी.. हें..हें..हें.. देख उनके पेन्टमे.. अभी भी तुजे देखकर ठुमकी मार रहा हे.. हें..हें..हें.. कमीनी इसी लंडने तुजे प्रेगनेन्ट करदीया ओर मुजे भनकभी नही लगने दी..

भुमीका : (सर्मसार होते अ‍ेक जांगपे चपत लगाते धीरेसे) कमीनी यहातो अ‍ैसा मत बोल.. कोइ सुन लेगा.. बेसर्म कहीकी.. नीमु.. मुजे कुछ अजीबसा लग रहा हे.. कही चैइन नही मीलता..

नीर्मला : (गंभीर होते धीरेसे) भुमी.. कही व्होमीट जैसातो नही लगता..? तो चल हमारे रुममे.. यहा कुछ गडबड ना होजाये.. वरना तेरी बात छुपाना मुस्कील हो जायेगा..

भुमीका : (धीरेसे चींतीत होते) हां.. सायद अ‍ैसाही कुछ लग रहा हे.. चल अंदर हमारे रुममें..

कहेते दोनोही खडी होगइ.. ओर धीरे धीरे बाते करते अपने रुममे चली गइ.. तो मंजुको भी पता चल गया ओर वो धीरेसे कुछ खोजनेके बहानेसे अपने पास रखी हुइ अ‍ेक गोली लेकर भुमीके कमरेमे चली गइ.. तब भुमी ओर नीर्मला दोनोही बाथरुममे थी.. मंजु रुमका दरवाजा धीरेसे बंध करके बाथरुममे आ गइ तब भुमीका व्होमीट कर रहीथी.. ओर नीर्मला उनकी पीठ सहेला रहीथी..

जब व्होमीट करके मुह साफ करलीया.. भुमीने अपना मुह पोछतेही दोनोही पलट गइ.. तो पीछे मंजुको खडी देखकर दोनोही गभरा गइ.. तो मंजुने हसते हुअ‍े भुमीको अ‍ेक गोलीके साथ पानीभी दे दीया.. तब नीर्मला सीर्फ मंजुको ही देखती रही.. भुमीको पता थाकी मंजु उनके सबारेमे सब जान गइ हे ओर इस बारेमे दोनोके बीच बातभी हो चुकीथी.. तब भुमीने मुस्कुराते गोली खाली ओर मंजुको ग्लास वापस देदीया..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) थेन्क्स बेटा.. बस देखना बहार कीसीको पता ना चले..

मंजुला : (हसते) बुआ.. आप चीन्ता मत करना अब आपको उल्टीया नही होगी.. अब सादीके बाद हम आपके बारेमे कुछ सोचेगे.. हमे देवुकोभी बताना पडेगा वोही कोइ रास्ता नीकालेगे..

नीर्मला : (धीरेसे हसते) मंजु.. क्या तुजे भुमीके बारेमे सब पता हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां मोम.. जब ये दोनो पहेली बार रीलेशनमे आये तबही मुजे पताथा..

नीर्मला : (हसते) कमाल हे..? बेटी तुजे ये सब जानकर दुख नही होता..?

मंजुला : (हसते) नही मोम.. कुछ चीजे देवुके लीये.. आप सबके लीये.. ओर मेरे लीये जरुरी हे.. हम सब अ‍ेकही कस्तीमे सवार हे.. मत भुलो.. भुमी बुआभी हम मेसे अ‍ेक हे.. हमारे पीछले जन्मकी माधवी..

नीर्मला : मंजु.. मे कोलेजमे थी तब वो कीताब मेने पढीथी.. लगताहे मुजे वो दुबारा पढनी पडेगी.. क्या वो कीताब तेरे पास हे..? मुजे देना मे वापस पढना चाहती हु.. मुजे मेरे बारेमे सब जानना हे..

भुमीका : (हसते) नीमु.. वो कीताब (ये कैसी अनुभुती) मेरे पास हे.. सृती लेकर आइथी.. वो अक्सर ये कीताब पढती हे.. मेभी उसे कइ बार पढ चुकी हु.. इस बार घर आना तुजे पढनेके लीये देदुगीं..

मंजुला : (हसते) बुआ.. आप थोडी देर इधर आराम कीजीये.. सामको सब गांव वालेकी जमीन वापस देना हे.. ओर सबके सामनेही हम सृती ओर देवुकी सगाइ रखेगे.. तबतक आपको आरामभी होजायेगा..

नीर्मला : (थोडी सीरीयस होते) मंजु.. अगर सृतीको पता चल गया तो..? सोचतेही दिल गभरा रहा हे..

मंजुला : (बहार आते धीरेसे) मोम.. अभी कीसीको पता नही चलेगा.. सृती समजदार हे.. मे उसे समजा दुगी.. इस बातको ज्यादा दिन हम सबसे छुपाभीतो नही सकते..

भुमीका : (गंभीर होते) मंजु बेटी.. ये सब मेरी गलतीकी वजहसे हुआ हे.. ओर..वो..वो.. मे ये बच्चा नही चाहती.. इसे नीकालना पडेगा.. जो सादीके बादही हम इस बारेमे सोचेगेकी बच्चा कहा गीराना हे..

मंजुला : (थोडी परेसान होते) बुआ पागल होगइ हो क्या..? अ‍ैसा क्यु करना हे..? हम देवुसे बात करेगेनां..? वोही कुछ रास्ता नीकालेगे.. चलीये इस बारेमे ज्यादा मत सोचीये.. आराम कीजीये..

कहेते मंजु परेसान होते बहार नीकल गइ.. तो भुमी ओर नीर्मला उसे देखतेही रेह गइ.. फीर दोनोही बेडपे लेटते आराम करने लगी.. देखते ही देखते साम होगइ.. सभी गांव वालो ओर आसपासके गांवके लोगभी ये नेक काम देखनेके लीये हवेलीपे अ‍ेकठा होगये.. ना सीर्फ गांवमे लेकीन आसपासके सभी गांवके लोगोमे देवायतकी चर्चा होने लगी ओर उनकी इजत बढ गइ.. सब लोग मंडपके पंडालमे बैठ गये..

रमेश ओर सुधीरने टेबल खुरसी लगवाकर अ‍ेक मंच जैसा कर दीया.. मंचपे माइक साउन्डभी रख दीया.. ओर अंदर जाकर सबकी फाइले लेकर टेबलपे रखदी.. घरके सभी लोगोके लीये भी बैठनेकी व्यस्था करदी.. पुरे पंडालमे लोग खुसीसे आपसमे बाते कर रहेथे.. तब देवायत राजीव नीर्मला ओर भुमीका मंजु चंदाके साथ आगया.. तो पुरे पंडालमे सांती छागइ.. सभी आकर खुरशीओमे बैठ गये तब रश्मी रमेश ओर सुधीरभी फाइलके बंडलके पास आकर बैठ गये.. तभी रमेशने माइक हाथमे लीया तो सब सांत होगये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११६

रमेश ओर सुधीरने टेबल खुरसी लगवाकर अ‍ेक मंच जैसा कर दीया.. मंचपे माइक साउन्डभी रख दीया.. ओर अंदर जाकर सबकी फाइले लेकर टेबलपे रखदी.. घरके सभी लोगोके लीये भी बैठनेकी व्यस्था करदी.. पुरे पंडालमे लोग खुसीसे आपसमे बाते कर रहेथे.. तब देवायत राजीव नीर्मला ओर भुमीका मंजु चंदाके साथ आगया.. तो पुरे पंडालमे सांती छागइ.. सभी आकर खुरशीओमे बैठ गये तब रश्मी रमेश ओर सुधीरभी फाइलके बंडलके पास आकर बैठ गये.. तभी रमेशने माइक हाथमे लीया तो सब सांत होगये....अब आगे

रमेश : (माइकमे) भाइओ ओर बहेनो.. जैसेकी आप जानते हे.. हमारे ठाकुर साहब देवायतजी यहाके राजा हे.. लेकीन उन्होने कभी कीसीके साथ अ‍ेक राजा जैसा व्यवहार नही रखा.. वो सबको अपने घरके सदस्य मानते ही सबके साथ अ‍ेक अपनापन जैसा व्यवहार करते हे.. हमारे तो वो अच्छे मीत्र भी हे.. यहाके सभी सरपंच इन्हीकी महेरबानीसे सरपंच बने हे.. फीर भी हमारे पीछले सरपंचने उनकी अ‍ेक नही सुनी..

ओर आप सब लोग जानते हे उन्होने क्या कीया हे.. ना सीर्फ हमारे गांवमे.. लेकीन आसपासके गांवके खेडुतसे भी अपने पैसेके जालमे फसाकर उनकी जमीन हडपली.. पैसो के बदलेमे उन्होने कइ ओरतो ओर लडकीयोकी जींदगीके साथभी खलवाड कीया.. ओर आखीर भगवानने उनको इनके कर्मोकी सजा भी देदी.. आज पडे हे अपनी खटीयापे..

उन्हीके पास पडे आप सब लोगोकी जमीनके कागजात हमारे राजाजीने हासील करलीये.. आप सभी जानते हे कल हमारे छोटे ठाकुर लखनसिंहकी ओर उनकी लाडली बहेन पुनमदीदीकी सादी हे.. तो इसी शुभ मौकेपे उन्होने आप सबको अपनी जमीन वापस देनेका फैसला करलीया.. तो आइअ‍े हमारे राजाजी देवायतजीसे भी कुछ बाते सुनते हे..

कहातो सभी लोग हर्षोलास करते तालीया बजाने लगे.. सबके चहेरेपे खुसीके साथ आंसुभी दीख रहेथे.. कीसीको अपनी जमीन वापस आनेकी उमीद नही थी.. लेकीन देवायतके इस फैसलेने गांवके सब लोगोके दिलमे अ‍ेक नइ उमीद जग गइ.. सभीके मनमे देवायतके लीये अ‍ेक अलगही नेक ओर इमानदार राजाकी पहेचान बन गइ.. सबके दिलमे उनके लीये ओर इजत बढ गइ.. तभी देवायतने खडे होकर अपने हाथमे माइक लीया तो सभीने उनका जयघोष करना सुरु करदीया.. ओर तालीया बजाते रहे.. तब देवायतने हसते हुअ‍े सबको सांत कीया ओर..

देवायत : (हसते) मेरे भाइओ ओर बहेनो.. जैसेकी आप जानते हे.. आप लोगोकी जमीन पीछले सरपंच राघवजीके पास थी.. लेकीन वो जमीन आपको वापस देनेका फैसला मेरा नही था.. ये फैसला उनकी बीवी हमारी रश्मीभाभीका था.. उन्होनेही मुजे सभी कागजात वापस दीये.. ओर सबको अपनी जमीन वापस देनेको कहा.. जीतना बुरा राधव था.. उतनीही नेक दिल ओर इमानदार उनकी बीवी हमारी रश्मीभाभी हे..

कहतो गांव वाले हर्षोलासके साथ रश्मीके नामका जयघोष करने लगे.. तो रश्मीकी आंखमे खुसीके आंसु छलक गये.. ओर वो सबके सामने हाथ जोडकर सबको अभीवादन करती रही.. उनकोतो पताही नही थाकी देवायत उनकी अ‍ैसी तारीफसे सभी गाव वालोके मनमे उनके प्रती इजत बढ जायेगी.. देवायतकी इसी बातपे आज राजीव नीर्मला भुमीका सृती चंदा सभी गर्व महेसुस करने लगे.. तभी..

देवायत : (माइकमे) इसीलीये हमने फैसला करलीयाकी इस गांवका सारा वहीवट हम रमेशको सरपंच बनाकर ओर रश्मी भाभीको पंचायतकी सदस्य बनाकर उसे सोंप रहे हे.. ओर बहुतही जल्द हमारे गांवमे अ‍ेक बडी स्कुल खोलने जा रहे हे.. अब हमारे ओर आसपासके गांवके बच्चोको कही बहार पढनेके लीये नही जाना पडेगा.. इसी स्कुलके लीये ये दोनोने जमीनके लीये सरकारको नीवेदनभी भेज दीया हे.. ओर दुसरी बात..

आप सब जानते थे.. हमारे खानदानपे अ‍ेक बहुत बडा श्रापथा.. जीनकी बदौलत हमारे खानदानमे अ‍ेकही लडका होताथा.. उनका जन्म होतेही अ‍ेक दो सालमे हमारे बुजुर्ग चले जाते थे.. तो हमारे कुलगुरुने वोभी दुर करदीया.. ओर जीनकी वजहसे आज मेरे भाइ बहेनकी सादीभी हे.. हमारे गरुजी कहेते हे इस गांवमे अब बहुत बडा बदलाव आने वाला हे.. वो बदलाव क्या होगा मुजे नही पता.. की क्या बदलाव आने वाला हे..

पर हमे समाजमे परीवर्तनके लीये तैयार रहेना पडेगा.. बस.. यही कहेनाथा.. आज हमारे बीच हमारे पीताकी जगाह इसी गांवमे रहेने वाले मेरे ससुर यहा हे.. तो मे चाहता हु ये नेक काम इन्हीकी हाथोसे हो.. तो आइअ‍े हमारे सरपंच जीनका नाम बोले वो यहा आकर अपनी जमीनके कागजात वापस लेजाये.. सबको नमस्ते..

तब रमेशने माइक अपने हाथोमे लेलीया.. ओर वो अ‍ेक अ‍ेक नाम बोलत गया.. तो जीनकाभी नाम बोलता रश्मी उनकी फाइल राजीवको देने लगी.. तो राजीव उनको अपने हाथोसे फाइल देता.. तब सब लोग खुसीसे फाइल लेते देवायत ओर राजीवके पांव छुने लगे.. कुछ फाइले राजीवने देदी तब देवायतने नीर्मलाके हाथोसे फीर भुमी.. मंजु चंदा रश्मी रमेश फीर अंदरसे पुनम लता ओर लास्टमे सृतीके हाथोसे फाइल दीलवाइ..

जब लास्ट फाइल सृतीने देदी तब राजीवने सृतीको वही रोक लीया ओर रमेशको इसारा करके माइक मंगवा लीया.. तब सृती बहुतही सरमा रहीथी.. गांवके सभी लोगोमे आज खुसीके साथ उत्साहभी दीख रहाथा.. जैसेही राजीवने माइक सम्हाला सब लोग आपसमे बाते कर रहेथे वो सांत होगये.. ओर देखने लगेकी अब राजीव क्या कहेगे.. तब राजीज माइक लेकर अपनी जगाहपे खडे होगये.. ओर कहेने लगे..

राजीव : (हसते) मेरे भाइओ ओर बहेनो.. मे आज बहुत खुस हुकी आप लोगोको अपनी जमीन वापस मील गइ.. आज हमारा दोस्त ओर आपके बडे ठाकुर जहाभी होगे खुस होते हम सबको आशीर्वाद देते होगे.. यहा हमारे चारो बेटो बेटीयोकी कल सादीभी हे.. तो इसी खुसीके मौकेपे आज मे कुछ अ‍ेनाउन्स करना चाहता हु.. आप सब जानते हे येतो अ‍ेक राजाकी रोयल फेमीली हे.. आजादीसे पहेले इनके पुर्खोका यहा राज हुआ करताथा.. मेरे परदादा दादा ओर मेरे पीतानीजे इनके यहा मुनीमका काम कीया हे..

देवायतके पीता किशन मेरा खास दोस्त था.. ये मेरी बीवी ओर ये देवायतके पीताकी मुहबोली बहेन भुमीका.. हमसब अ‍ेकही साथ पढते थे.. ओर आपसमे सब दोस्तथे.. ओर ये मेरा दामाद देवायत हमारे लीये आजभी यहाके अ‍ेक राजा हे.. ओर ये जो लडकी सृती खडी हेना..

वो हमारी बहेन भुमीका की लडकी हे.. जो सहेरमे अ‍ेक बहुत बडी लेडीस की डोक्टरभी हे.. तो आज मुजे कहने मे खुस हो रही हे की आज हमारी बेटी सृतीकी सगाइ हमारे राजा देवायतसे हो रही हे.. तो आइअ‍े हम सब अंगुठीकी रस्म यहा सबके सामनेही कर देते हे..

कहातो ना सीर्फ देवायत सृतीभी खुसीके मारे सोक्ट होते सरमार मुस्कुराती रही.. ओर वो धीरेसे मंजुके पीछे चली गइ.. तब मंजु चंदा पुनम वहा सभी लेडीस खुसीसे हसने लगी.. तो सृती सर्मसार होगइ.. तभी मंजुने अपनी पर्समेसे दो अंगुठी नीकालकर देदी.. फीर देवायत ओर सृतीने सबके सामने अ‍ेक दुसरेको अंगुठी पहेनाइ.. तभी बहारकी ओर पटाका फुटने लगे.. जो सब अ‍ेरेन्ज रमशे मंजु ओर राजीवने कीयाथा..

तब सृती बहुतही सर्मसार होकर वापस मंजुके पीछे छीप गइ.. ओर इसी तराह कायक्रम संपन हुआ तो सभी लोग खडे होकर देवायतके पांव छुनेके लीये अ‍ेकठा होने लगे तब भुमीका नीर्मला सृती मंजु सभी लेडीस हसती हुइ अंदरकी ओर जाने लगी.. तब बहार सभी लोग राजीव रमेश सबके पांव छुते रहे.. तो सभी लेडीस रश्मी बे पांव छुने लगी.. तब रश्मी बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर सब लोग अंदर हवेलीमे आगये..

आज देवायतने गांवमे बडे बदलावकी बात करदी तो गांवके सभी लोग उनकीही चर्चा करते खुस होते अपने घकी ओर जाने लगे.. इधर अंदर आते ही मंजु भुमीका नीर्मला चंदा सभी लेडीस सृती ओर देवायतकी सगाइकी वीधीकी तैयारीया करने लगे.. तब हवेलीमे सब घरके लोग ओर कुछ आमंत्रित महेमानही रेह गये.. ओर सबने मीलकर देवायत ओर सृतीको सोफेपे अ‍ेक साथ बीठा दीया तब मंजुने अ‍ेक मां की तराह सृतीको चुनरी पहेनाकर उनके हाथमे श्रीफल दे दीया ओर सगाइकी वीधीया करने लगी..

सभीने सृती ओर देवायतको कुमकुम अक्षतके साथ तीलक कीया.. तब सृती बहुतही सरमा रहीथी.. आखीर भुमीकी आखरी इच्छाभी आज पुरी होगइ.. सृती अब इस घरकी बहु के साथ उनकी सौतनभी हो गइ थी.. यही सब सोचते भुमीकाकी आंखमे खुसीसे आंसु छलक आये.. तो नीर्मलाने हसते हुअ‍े उसे अपनी बाहोमे भरलीया.. तो भुमी अपने आंसु पोछते मुस्कराने लगी.. ओर नीर्मलाने उसे अपने पास बीठालीया..

नीर्मला : (हसते धीरेसे कानमे) भुमी.. आखीर तुमभी मेरी तराह अपनी बेटीकी सोतन होगइ.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते हसते) कमीनी.. यहातो मत बोल.. कोइ सुनलेगा.. बस अबतो मुजे इस बच्चेकी चीन्ता हे.. भगवान करे सब ठीक होजाये.. नीमु.. तुम मेरे साथ मेरे घर चलना.. हम दोनो कही दुसरे सहेरमे जाकर सब नीकाल करवा देगे.. हमारे सहेरमेतो बहुत लेडी डोक्टर मुजे पहेचान जायेगी..

नीर्मला : (धीरेसे कानमे) पागल होगइ हो क्या..? क्यु बच्चेको गीरवा रही हो.. मंजुनेतो कहाहे जो सृतीको समजा देगी.. इस उमरमे ये सब करना.. कीतना जोखीम भरा हे तुजे पता हे..? बात करती हे..

भुमीका : (धीरेसे) नही नीमु.. नही चाहीये मुजे बच्चा.. मे सबको क्या मुह दीखाउगी.. तु समजती क्यु नही..? मंजु सृतीको समजायेगी.. बाकी सबको कैसे समजायेगी..? मुजे नही चाहीये बच्चा..

नीर्मला : ठीक हे.. हम सादीके बाद कुछ करते हे.. अभीतो चुप होजा.. मेरी मां..

सरला : (हसते) अरे दोनो कबसे क्या खुसर पुसर कर रही हो..?

नीर्मला : (हसते) कुछ नही भाभी.. हमतो सृतीके बारेमे बात कर रहेथे.. देखो अबतो वोभी आपकी लताकी तराह इस घरकी रानी होजायेगी..

सरला : (हसते खुस होते) हां.. देखो.. मेरी लताभी यहा सबके साथ घुल मील गइ हे.. हें..हें..हें..

तीनोही बाते करती रही तब देवायत ओर सृतीकी सगाइभी सम्पन हो गइ तो सब लोग दोनोको बधाइआ देने लगे तब सृती बहुतही सरमाइ.. फीर सृती पुनम लता वंदना सब लडकीया पुनमके रुममे आ गइ.. आज सृतीकी सगाइसे दो लडकीयाको सृतीसे बडेही ज्वेलेसी होने लगी.. अ‍ेकथी भावना.. ओर आज पहेली बार लताकोभी सृतीसे ज्वेलसी होने लगी.. लता ना चाहते हुअ‍ेभी देवायतकी ओर ढलती जा रहीथी..

भलेही लताकी सादी कल लखनसे हो रहीथी.. लेकीन उनके दिलमे देवायतके लीये अ‍ेक अलगही जगह बन चुकी थी.. अ‍ैसेही अ‍ेक घंटा बीत गया.. तो गांवकी कुछ ओरते गाना गानेके लीये आने लगी.. लखन धिरेन ओर उनके कुछ दोस्त लखनके रुममे ही कल सादीकी तैयारीया करते रहे.. मंजुका बेटा विजय ज्यादातर चंदाके पासही रहेने लगा.. तो भावनाभी अपनी बच्चीको लेकर अ‍ेक जगाह बैठी सब देखती रही..

तो रमाभी भावेशको अपनी गोदमे लेकर लताकी सभी तैयारीया देखती रही.. इसी बीच भानुभी फ्रि टाइमपे खेतोपे चकर लगाने चला जाता.. दया रजीया चंपा सब महेमानोकी देखभाल ओर किचनके काममे बीजी रहेती.. तो चारु नीशा ओर रश्मीभी उनकी मदद करती रहेती.. सभी सादीके माहोलमे बीजी होगये.. तो नीलमभी कुछ नीरास होकर लताके साथ बैठी रहेती.. ओर भावनाकी बच्चीके साथ खेलती रहेती..

नीलमने अब यहा धिरेनको मीलनेका विचार त्याग दीया.. अब जोभी करना हे सहेरमे पढने जायेगी वही करेगी.. यही सब सोचते वो धिरेनके सामने देखती भी नहीथी.. वो गुमसुम बैठकर सोचती रहेती.. अगर आज उसे भावनाने पकड लीया ना होता तो पता नही धिरेन उनके साथ क्या क्या कर लेता.. आज पका उसे चोदही लेता.. यही सब सोचतेही उनकी चुत गीली होने लगी.. अब उसने मनही मन धिरेनसे सादीसे पहेलेही मोज कस्ती ओर उनके साथ जींदगी बीतानेका फैसलाभी करलीया..

सभी लेडीस सादीके गाना गाती रही.. ओर साथमे नाचती भी रही.. तो घरकीभी सब ओरते उन सब ओरतोके साथ सामील होगइ.. ओर सभी गान नाचके साथ मजे करते रहे देवायत राजीव ओर गांवके उनके सभी दोस्त बहार पंडालमे बैठकर रमेश ओर सुधीरके काम काज देखते रहे.. अ‍ैसेही साम ढल गइतो सभी लोगने भोजनभी करलीया.. ओर गांवके लोग सुबह जल्दी आनेको कहेकर अपने घर जाने लगे..

देर रात कलकी सब तैयारीया करके काम खतम होतेही रमेश चारु ओर सुधीर नीशाभी अपने घर चले गये.. तो नीशा जाते वक्त देवायतको कुछ कामुक इसारा करते हसती हुइ चली गइ.. उनकी इस हरकतको चारुने भी देख लीया तो वोभी देवायतकी ओर कामुक नजरोसे हसते हुअ‍े जाने लगी.. तबतक राजीव अपनी दवाइ पीकर सो गयाथा.. भुमीका ओर नीर्मलाभी अपने रुममे अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे लेटकर बाते कर रहीथी..

ओर देवायत अंदर होलमे बैठाथा.. तो यहाभी आज सब थकानकी वजहसे सोनेकी तैयारीया कर रहेथे.. तो रश्मीभी जानेके लीये टीफीन लेकर तैयार खडी थी.. वो देवायतकी ओर कामुक इसारा करते उसे अकेलाही घर छोडनेका इसारा कर रहीथी.. वो नही चाहती थीकी आज कोइ तीसरा हमारे साथ उनके घर आये.. तभी..

मंजुला : (हसते) देवु.. प्लीज.. आप रश्मीभाभीको उनके घर छोडदो.. सुबह सादी हे.. तो जल्दी उठना पडेगा.. मे आज बहुत थक गइ हु.. तो सो जाउगी.. आप भी इनको छोडकर फटाफट आकर सो जाना..

देवायत : (हसते) हां आजाउगा.. तुमभी साथ चलोनां..

मंजुला : (कामुक स्माइल करते धीरेसे) नही.. आज सोना हे.. चंदाको जगा देनां.. हें..हें..हें..(रश्मीकी ओर देखते धीरेसे) ओर तुमभी कमीनी इनको आज जल्दी छोड देनां.. तेरे पेटमे बच्चा हे.. खयाल रखना.. हें..हें..हें..

कहतो रश्मी सर्मसार होकर हसने लगी.. ओर हां मे सर हीलाकर बहारकी ओर चलने लगी तो देवायतभी उनके साथ चला गया.. ओर मंजुभी अपने रुममे चली गइ.. तब दयाने सब दरवाजा लाइट बंध कर दीया तो पुरी हवेलीमे अंधेरा छागया.. ओर वोभी अपने रुममे चली गइ..

देवायत ओर रश्मी दोनोही रातके घने अंधेरेमे साथ चलने लगे तब पुरे गांवमे कोइ नही दीख रहाथा तो रश्मीने देवायतका हाथ बीन्दास पकडलीया ओर दोनो अ‍ेक मीया बीवीकी तराह साथमे सटकर चलने लगे.. तो देवायतनेभी रश्मीकी कमरमे हाथ डालदीया....

रश्मी : (सरमाते) देवु.. अ‍ेक बात कहु..? क्या आपकी बुआके साथभी आपका चकर हेनां..? कल दोनो अ‍ेक दुसरेको बाहोमे भरकर कीस कर रहेथे.. मेने कीचनसे देखा था.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां रश्मी.. वोभी मेरे पीछे तेरी तराह पागल हे.. हमने मंदिरमे जाकर सादी करली हे.. लेकीन इस बातको हमे सबसे छुपाना हे.. क्युकी आजही मेरी सृतीके साथ सगाइ हुइ हे.. तो बी केरफुल.. इस बातका कीसीको पता नही हे..

रश्मी : (हसते) पतीदेव मुजपे भरोसा कीजीये.. क्या आज तक मेने कीसीभी रीस्तेके बारेमे कीसीको कहा हे..? आपके पासतो कल मस्त मौकाथा.. तो तुम दोनो चले जाते मेरे रुममे.. वहा उस वक्त कौन आता..?

देवायत : नही रश्मी.. वो तुमसे बहुतही सरमा रही थी.. वो कीसीके सामने मुजे मीलना नही चाहती.. ओर बता.. क्या केह रही हे नीशाभाभी..

रश्मी : (जटसे हसते) जानु वोतो आपको मीलनेके लीये मरी जा रहीहे.. लगता हे आप दोनोके बीच बात होगइ हे.. वो बहुतही खुस हो रहीथी.. ओर आपको मीलना चाहती हे.. वो चारुभाभीसे कुछ केह रहीथी.. बेचारी सुधीरभाइसे बहुत दु:खी हे..

देवायत : (हसते) हां उन्होने मुजे चीठी लीखीथी.. तो मेने जवाब देदीया.. रश्मी हमारा सुधीर उनको संतुस्ट नही करपाता.. तो बेचारीने सुसाइटकी कोसीस कीथी.. ओर चारुभाभीने उसे बचा लीयाथा..

रश्मी : (हसते) जानु पता हे गांवमे सब इन्हीकी बाते करते हे.. मेनेभी सुना हे उनके यहा लडका काम करता हे उनसेही वो अपनी गांड मरवाता हे.. ओर उनकी बहेन भी सुधीरके वहा जोब करती हे.. दोनोही भाइ बहेन सुधीरके वहा नोकरी करते हे.. ओर हमारे रमेशभाइकी दुकानमे वो आदमी हेनां उन्हीके बच्चे हे.. मुजे नीशाभाभीसे ओर अ‍ेक बात भी पता चली..

देवायत : (हसते) क्या..?

रश्मी : (धीरेसे हसते) जानु लडकेका नाम मुना हे ओर उनकी बहेनका नाम बरखा हे.. वो दोनोभी आपसमे प्यार करते हे.. मुनाका इनकी बहेनके साथही चकर हे.. ये बात मुजे नीशाभाभीने बताइ.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां सही हे.. रश्मी आने वाले दिनोमे हमे गांवमे अ‍ैसा बहुत कुछ सुननेको ओर देखनेको मीलेगा.. अब हमारे गांवमे बहुत बडा बदलाव आने वाला हे.. कोइ अपनी बहेनके साथ तो कोइ अपनी कजीन.. बुआ मामी भाभी.. यहातक की अपनी बहुके साथभी रीलेशनमे होगे.. तब हमे अ‍ैसे रीस्तेके लीये सबको समजाना पडेगा..

रश्मी : (सरमाते हसते) जानु आप सब गांव वालोको इसी बदलावके बारेमे तो बात नही कर रहेथे..?

देवायत : (हसते) हां रश्मी.. इसीके बारेमे ही बात कर रहाथा.. लेकीन अभी सबको खुलकर कहेना उचीत नही हे.. सब अपने आपही सामने आजायेगा.. तब हमे सबको समजाना पडेगा ओर गांवमे अ‍ेक नये रीस्तेकी सुरुआत हो जायेगी.. बीलकुल उस हिमाचलकी तराह.. हमे सबको आपसी रीस्तोके लीये समजाना पडेगा..

दोनोही बाते करते रश्मीके घर आगये.. तो अंदर आतेही रश्मीने गेइट बंध करदीया ओर देवायतका हाथ पकडकर उसे राघव वाले रुममे लेकर चली गइ.. रश्मीने टीफीन खोलकर राघवको खीलानेकी कोसीस की तो राघव देवायतको देखतेही गुसेसे आग बबुला हो गया.. ओर खानेसे मुह फेर लीया फीरभी रश्मीने उसे जबर दस्तीसे खीलानेकी कोसीसकी फीरभी राघवने मुहसे नीवाला बहार नीकाल दीया.. जैसे वो देवायतके घरका खाना ही ना खाना चाहता हो..

रश्मी : देखा देवु.. अकडतो अभी भी वैसी ही हे.. कमीना मरताभी नही हे.. ताकी इनसे छुटकारातो मीले..

देवायत : (हसते) अरे.. छोडना इसे.. कीतने दिन नही खायेगा.. चल मे चलता हु.. रात बहुत होगइ हे.. तुमभी सुबह जल्दी आजाना..

रश्मी : (टीफीन बंध करते) अरे.. क्या में चलता हु..? अरे बाबा मंजुदीदीने आपको अ‍ैसेही यहा अकेले नही भेजा.. क्या अपनी इस बीवीसे प्यार नही करना..? चलो अ‍ेक बार इनके सामनेही मुजे चोदलो.. इस कमीनेकी अकडभी नीकल जायेगी.. आज मुजपे कोइ रहेम मत करना नीचोड डालो मुजे.. भलेही मेरी हालत खराब होजाये.. कलकी कल देखा जायेगा..

कहेते रश्मी खुदके कपडे नीकालकर देवायतके भी कपडे नीकाल देती हे.. वैसेभी सादी मे सजधजके आइ थी तो देवायतका लंड पहेलेही रश्मीको देखकर जटके मार रहाथा.. दोनोही नंगे होगये तब देवायत बेडपे बैठ गया तो रश्मी उनकी गोदमे बैठ गइ ओर देवायतका लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट करते धीरेसे बैठ गइ ओर देवायतकी गोदमे धीरे धीरे कामुक सीसकारीया करते उछलने लगी..

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कुछ देर उछलनेके बाद अचानक रश्मी देवायतके उपर जुकते उसे बाहोमे भीचलेती हे.. ओर उनसे लीपलोक करते जडने लगती हे.. फीर रश्मी वही राघवके सामने बेडपे अपने पैर फैलाते लेट गइ.. ओर देवायत उनके पैरके बीच बैठ गया.. अपना लंड रश्ममीकी चुतमे घीसते धीरेसे उनकी चुतमे फसा देता हे.. ओर रश्मीके उपर अपने दोनो हाथके बल जुकते रश्मीको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगता हे.. तो रश्मी दर्दके मारे हल्केसे चीखने लगती हे..

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देवायतने रश्मीकी जबरदस्त चुदाइ करता रहा ओर रश्मी चीखती चीलाती रही.. वो खुद चाहती थी की देवायत उनकी बुरी तराह चुदाइ करले.. दोनोके बीच घमासान चुदाइ हो रहीथी तब रश्मी अ‍ेक बार फीर छडपडाते जडने लगी.. ओर जडते जडटे टेडी होगइ तो देवायत उनके पैरको दुसरी ओर करते उनको पीछेसे चोदने लगा.. तो रश्मी करवट लेकर दर्द के मारे अपना मुह बीगाडते चुदवाने लगी..

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राघव टेडी नजर करते देवायतको अपनी बीवीको बेहरेहमीसे चोदतेहुअ‍े देखता रहा.. ओर देवायतपे गुसा करता रहा.. अभी तक रश्मी दो बार जड चुकीथी.. अब रश्मीको देवायतके लंडको जेलनेकी शक्ति नही थी वो अ‍ैसेही सीथील होकर देवायतके हर धकेके वारको दर्दसे मुह बीगाडते जेलती रही.. ओर देवायतभी रश्मीके कहेनेकी वजहसे उसे बडीही बेहरेहमीसे चोद रहाथा.. ओर रश्मीकोभी देवायतकी अ‍ैसेही चुदाइ पसंद थी..

तब देवायत पीछेसे रश्मीकी कमरको पकडते जोरोसे कमरको जटके देने लगा ओर रश्मीकी चुतको भरने लगा.. तब रश्मीका मुह खुलाही रेह गया.. उनके मुहसे आवाज तक नही नीकली.. ओर देवायतने रश्मीकी चुतको अपने गाढे पानीसे लबालब भरदी.. तो रश्मी मुह बीगाडते करवट लेते देवायतसे दुर हटने लगी.. ओर देवायतने अपना लंड नीकाल लीया तब रश्मी अ‍ैसेही बेसुध्ध जैसी हालत मे पडी रही..

ओर देवायत उसे गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया.. वहा दोनोने अपने आपको सही कीया ओर देवायत रश्मीको वापस उठाके उनके रुमके बेडपे सुला देता हे.. रश्मी अ‍ैसेही बेडपे नंगी सोने लगी तो देवायतभी अपने कपडे पहेनकर रश्मीके होंठ चुमते वहासे नीकलने लगा.. तब रश्मीने अ‍ेक बार फीरसे उसे जुकाते बाहोमे भीचलीया.. ओर देवायतके होंठ चुम लीये..

रश्मी : (धीरेसे मुस्कुराते) जानु.. आजतो आपने वाकइ मेरी हालत खराब करदी.. बस अ‍ैसेही मुजे चोदते रहीये..

देवायत : (हसते) हंम.. चल मे चलता हु.. कल सुबह आनेमे कोइ जल्दी मत करना.. आरामसे आना..

कहेते देवायत वहासे नीकल गया ओर हवेलीपे आगया.. तब हवेलीपे सनाटा छाया हुआथा.. सभी लोग सो चुके थे ओर देवायत धीरेसे अपने कमरेमे चला गया.. तो मंजु ओर चंदा दोनोही गहेरी नींदमे सो चुकीथी.. तब देवायत चेन्ज करके मंजु चंदाके बीच जाकर धीरेसे चंदाकी ओर करवट लेकर सोगया.. ओर चंदाकी गरदनके नीचे हाथ रखते उसे अपनी ओर खीचते बाहोमे भरकर सोने लगा.. ओर उनके होंठ चुम लीये..

चंदा : (आंख खोलते धीरेसे) जानु आगये आप..? चलीये सो जाइअ‍े.. अभी कुछ नही.. बहुत थक गइ हु..

देवायत : (बाहोमे भीचते) हंम.. चल सोजा.. अब सब सादीके बाद..

कहेते चंदाको अपनी बाहोमे भीचकर सोने लगा तो मंजुभी देवायतकी ओर करवट लेकर उसे पीछेसे बाहोमे भरके सोगइ.. भुमीका ओर नीर्मलाभी अ‍ेक दुसरेको ठंडी करके आपसमे चीपकते सोगइ थी.. तो नीलम अबभी धिरेनके बारेमे सोचते आंख बंध करते उसे आगे मीलनेकी प्लानींग कर रही थी.. तभी भावेशके रोनेकी आवाज आइ तो लताने उसे अपने तनसे चीपका लीया..

तो नीलम आंखोसे हाथ थोडा हटाते देखने लगी.. तब भावेश लताके बुब्सपे मुह मारते उसे मुहमे लेनेकी कोसीस करने लगा.. तो लताने धीरेसे नीलमकी ओर देख लीया.. जब नीलमको सोते हुअ‍े पाया तो धीरेसे अपना कमीज उचा करने लगी.. ओर कमीजको उपर चडातेही अपनी ब्रा को भी उची करदी.. ओर अपने दोनो बुब्स बहार नीकाल दीये तो भावेशने लताके बुब्सकी नीपलको मुहमे लेलीया ओर उनकी नीपलको मुहमे लेकर चुसने लगा.. तो लता मदहोस होकर अपने दुसरे बुब्सको अपने हाथोसे ही मसलने लगी.. तभी..

नीलम : (लताकी ओर करवट लेते धीरेसे हसते) दीदी.. क्या इसमे दुध आता हे..?

लता : (हडबडाते थोडी गभराते भावेशको अपने बुब्ससे हटा देती हे) तुम..? अभी तक जाग रही हो..?

नीलम : (मुसकुराते धीरेसे) हां दीदी यहा नींदही नही आती.. तो अ‍ैसे ही आंख बंध करके पडी थी.. बताइअ‍ेना.. इसमे दुध आता हे..?

लता : (सरमाते धीरेसे) नीलु.. वो.. भावेशको नींद नही आती तो कभी कभी अ‍ैसा करता हे.. चल सोजा सुबह जल्दी भी उठना हे.. ओर हां.. ये बात कीसीको मत कहेना.. समजी.. इसमे अभी दुध नही आता.. येतो अ‍ैसही इनको आदत पड गइ हे.. चल सोजा..

नीलम : (मुस्कुराते लताकी ओर करवट लेते) दीदी.. अ‍ेक बात बताइअ‍ेना..? इनमे कब दुध आता हे..?

लता : (अपनी ब्रा ओर कमीज सही करते) क्यु..? तुजे ये सब जानकर क्या करना हे..? आज कल इनसब बातोपे तेरा ध्यान बहुत रहेता हे.. सोजा अब..

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. प्लीज.. अब ये सब जानकारी आपसे नही लुगी.. तो कीनसे लुगी.. प्लीज बताइअ‍ेना.. मुजे जानना हे..

लता : (सरमाते) देख नीलु.. तु बहुत जीदी हे.. चल बताती हु.. जब लडकी या कोइ ओरत कोइ बच्चेको जन्म देती हे तभी इसमे दुध आता हे.. जानलीया..? चल अब कोइ सवाल नही सोजा सुबह जल्दी उठना हे..

फीर दोनोही सो गइ.. तो आज भानु अबभी वायाग्रा खाकर रमाको जोरोसे कमर हीलाते चोद रहाथा.. तो रमाभी कामुक सीसकारीया करते मजेसे अपनी कमर उछाल उछालकर भानुसे चुदवा रहीथी.. जबसे दोनोकी सादी हुइ.. तबसे अ‍ेक रातभी बीना चुदाइकी नही गइ.. अबतो रमाका डरभी नीकल चुकाथा ओर वो भानुके कायदेसरकी बीवी हो गइथी.. तो रमाकी जवानी फीरसे जाग गइथी.. ओर वो पहेलेसे ज्यादा कामुक होगइ थी.. अब उसे अ‍ेकभी रात बीना लंड खाये नींद नही आती थी..

रमाभी सरलाकी तराह चुदाइकी सौकीन होगइथी.. वो अब भानुके साथ हर रात.. ओर कभी कभीतो दिनमेभी बीन्दास्त चुदाइ करवालेती थी.. दोनो ही तीन बजे तक चुदाइ करते रहे.. जब रमाने मना कीया तब जाके भानुने उनको छोडा.. ओर वो दोनो भी अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे नंगेही सोगये.. गांवमे भी सुधीर दो दिनसे यही थातो क्लीनीक बंध थी जीनकी वजहसे उनके आदमी मुना ओर उनकी बहेनको दो दिनकी छुटी मील गइथी.. तो मुनाने ये दो दिनमे अपनी बहेन बरखाको पांच बार चोद लीयाथा..

जबभी दोनोको मौका मीलता मुना बरखाको पकड लेता ओर कभी अपने रुममे बुलाकर तो कभी कीचनमे खडे खडे तो कभी सुबह जब बरखा नहाने गुसलखानेमे जाती तो वही उनके पीछे घुस जाता.. ओर बरखाकी जबरदस्त चुदाइ कर लेता.. अबतो बरखाभी काफी ठरकी हो चुकी थी.. वोभी अपने भाइके लंडके बगैर नही रेह सकती थी.. उनका मन होता तब वोभी अपने भाइको बुलाकर उनके साथ चुदाइ करवा लेती.. ओर अभीभी वो दोनो भाइ बहेन अपने घरकी छतपे टंकीके पीछे चुदाइ कर रहेथे..

जीस तराह आज रश्मीको ओर नीशाको मुना ओर उनकी बहेन बरखाके बारेमे पता चला उसी तराह कुछही दिनोमे गांवमे भी अब सबके नाजायज रीस्ते धीरे धीरे करते अ‍ेक दुसरेकी नजरमे आने लगेगे.. क्युकी जबसे मंजुने पुनमको अनुभुती करवाइथी तबसे उनकी असरके फल स्वरुप गांवमे चुदाइका दौर पहेलेसे काफी बढ गयाथा.. तो आजभी कइ जगाह अ‍ैसीही चुदाइ चल रही थी.. ओर देर रात सभी चुदाइ करके सो गये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११७/१

जीस तराह आज रश्मीको ओर नीशाको मुना ओर उनकी बहेन बरखाके बारेमे पता चला उसी तराह कुछही दिनोमे गांवमे भी अब सबके नाजायज रीस्ते धीरे धीरे करते अ‍ेक दुसरेकी नजरमे आने लगेगे.. क्युकी जबसे मंजुने पुनमको अनुभुती करवाइथी तबसे उनकी असरके फल स्वरुप गांवमे चुदाइका दौर पहेलेसे काफी बढ गयाथा.. तो आजभी कइ जगाह अ‍ैसीही चुदाइ चल रही थी.. ओर देर रात सभी चुदाइ करके सो गये....अब आगे

आज सुबह सभी लोग ५ बजे उठ गये.. तब गांवके हलवाइने अपने आदमीओके साथ रसोइका काम सुरु कर दीया था.. तब अंदरकी ओर पुनमके रुममे पुनम लता ओर वंदना सृती चारो जाग चुकी थी ओर अ‍ेक अ‍ेक करते नहाकर बहार आगइ.. तब वंदना ओर सृती दोनो मीलकर पुनम ओर लताका शींगार करने लगी.. तो मंजु चंदाभी सुबह जल्दी उठकर नहा धोकर तैयार होगइ थी.. तब भुमीका ओर नीर्मलाभी अ‍ेक साथ नहाने चली गइ..

तभी हवेलीमे रमशे चारु ओर सुधीर नीशाभी सजधजके आगये.. तो रमशे सुधीर आतेही भोजनके पंडालमे रसोइका काम देखने लगे.. तो नीशा चारु अंदर आगइ ओर कीचनमे चली गइ.. तो वहा दया रजीया ओर चंपाभाभी भी तैयार होकर सबके लीये चाइ नास्तेका इन्तजाम कर रहीथी.. तो उपरकी मंजीलपे लखन ओर धिरेनभी उठकर नहानेकी तैयारीया कर रहेथे.. तो भानुभी तैयार होकर नीचेकी ओर आने लगा..

रमा तैयार होकर नीलमको अपने कपडे दे रहीथी तो नीलमभी नहाने चली गइ.. भावनाभी तैयार होकर अपनी बच्चीको उनके रुममेही तैयार कर रहीथी.. उसने अब भानुको बुलाना लगभग बंधही कर दीयाथा.. जीनकी वजहसे दोनोका रीस्ता लगभग खतम होनेकी कगारपे आगया था.. जब भुमीका तैयार हो रहीथी तब नीर्मला फटाफट तैयार होगइ.. ओर वो राजीवके रुममे चली गइ.. तो वहा राजीव फ्रेस होकर नहाकर बहार अपने बेडपे बैठाथा..

नीर्मला : (हसते) अरे आपने तो नहा भी लीया.. लीजीये आपके कपडे देती हु..

राजीव : (हसते) नीमु.. आज तुम मस्त लग रही हो.. अ‍ेकदम पटाका.. हें..हें..हें.. जी चाहता हे तुजे अभी प्यार करलु.. चलना.. अ‍ेक बार प्यार कर लेते हे.. यहा कोइ नही हे..

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नीर्मला : (सर्मसार होते कपडे देते हसते) राजीव.. कुछतो सरम करो.. हमे कन्यादान करने बैठना हे.. मंजुने कहा हे.. ओर आपको प्यार करना हे..? भाइ.. अभी तुम बीलकुल ठीक नही हुअ‍े हो.. अगर तुम्हे कुछ हो गयातो..? ना बाबा यहा कुछभी नही अब जोभी करना हे घर जाके.. ओर वोभी डोक्टरकी परमीशन लेके..

राजीव : (हाथ पकडते उसे अपनी बाहोमे लेते) अरे कुछ नही होगा.. क्या मे मेरी बीवीसे प्यारभी नही कर सकता.. ओर तुमभी भुमीके साथ सोने चली जाती हो.. यहा सोओनां.. नीमु.. आज तुजे प्यार करनेका बहुत मन कर रहा हे.. चलना सीर्फ अ‍ेक बार.. कीतने दिन होगये.. तुजे प्यार नही कीया..

नीर्मला : (होंठ चुमते) राजीव.. मनतो मेराभी बहुत कर रहा हे.. लेकीन जबतक तुम बीलकुल ठीक नही होजाते तबतक कुछभी नही.. डोक्टरने इन सब चीजोके लीये मना कीया हे.. बस अ‍ेक बार डोक्टर कहेदे फीर आपको जीतना प्यार करना हो कर लीजीयेगा.. मे मना नही करुगी..

राजीव : (हसते गाल चुमते) नीमु.. वहा चीजे नही तो हम ओरल करेगे.. उपर उपरसे ही.. हंम.. आज रात तुम इधर सोना.. बहुत मन कर रहा हे.. बस अ‍ेक बार उसे देखना हे.. ओर उसे चुमना हे..

नीर्मला : (गाल सहेलाते) राजीव मान जाओ.. ये तुम्हारे लीये बहुतही जोखम भरा हे.. मे कोइ रीस्क लेना नही चाहती.. फीर ना तुम अपने आपको कंट्रोल कर पाओगे.. ओर ना मे.. हम घर जाकर कुछ सोचेगे.. अगर डोक्टर परमीसन देगे तो आप मुजे जी भरके प्यार करलेना.. अभी फटाफट कपडे पहेनो.. ओर तैयार होजाओ.. अभी पंडीत आजायेगे आज सुबहका पहेला मुहुर्त हे..

कहेते राजीवको तैयार करने लगी.. तभी मंजु रमा चंदा सब पुनम वाले रुममे चली गइ.. तो वहा वंदना ओर सृती दोनो कन्याओको तैयार कर रहीथी.. जब भुमीका बहार आकर सोफेपे बैठ गइ तब सरलाभी उनके पास आकर बैठ गइ.. आज हवेलीमे सुबह सेही हलचल बढने लगी.. अभीभी थोडा थोडा अंधेरा था.. तब रश्मी कीसीकी नजर ना पडे उसी तराह फटाफट थोडी लंगडाती कीचनमे चली गइ.. तो चारुने देखलीया..

चारु : (जोरोसे हसते) अरे रश्मीभाभी.. क्या हुआ..? कही रातमे पैरमे मोच बोच नही आगइ..? हें..हें..हें..

कहातो दया नीशा रजीया ओर चंपाभी रश्मीकी ओर हसते हुअ‍े देखने लगी तो रश्मी धीरेसे चलके अ‍ेक जगाहपे बेठ गइ.. तो सभी ओरते हसने लगी तब रश्मी सर्मसार होगइ.. ओर चारुको मुका मारने लगी..

रश्मी : (सरमाते हसते) कमीनीओ कुछतो सरम करो.. ओर चारुभाभी आप जो समज रही हे अ‍ैसा कुछभी नही हे.. रातमे सचमे बाथरुममे पैर फीसल गयाथा.. तो मोच आगइ.. बात करती हे..

नीशा : (सरमाते धीरेसे) रश्मी भाभी.. आपतो रातमे देरसे घर गइ थीनां.. ?

रश्मी : (हसते) हां.. उस कमीनेका टीफीन जो लेकर जाना था.. कुता इस घरका खाना भी नही खाता..

चंपा : (हसते) कमीनी.. पती हे वो तेरा.. उसे गालीयातो मत दे.. हें..हें..हें..

दया : (जोरोसे हसते फीर धीरेसे चारुके कानमे) भाभी.. रातमे हमारे मालीक उसे घर छोडने गयेथे.. हें..हें..हें..

चारु : (आंखोमे चमक के साथ हसते) हां.. तभी.. मे सोचु कलतो ठीक चल रहीथी.. कमीनी अ‍ैसा बोलनां रातको हमारे देवर तुजे छोडने आयेथे.. हम सब समज गइकी तुजे कहा मोच आइ हे.. हें..हें..हें..

नीशा : (आस्चर्यसे सरमाते हसते) क्या..? देवरजी..? रश्मीभाभी आपतो छुपी रुस्तम नीकली.. हें..हें..हें..

रश्मी : (सरमाते हसते) कमीनी तुभी ज्यादा मत हस.. तेरीभी बारी आयेगी.. तब तुजेभी पता चलेगा.. मुजे पता हे तुमभी लाइनमे खडी हो.. हें..हें..हें..

नीशा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते रश्मीको मारते) भाभी तुम कीतनी कमीनी हो.. अ‍ैसा कुछभी नही हे..

रजीया : (हसते धीरेसे कानमे) नीशाभाभी फीकर मत करो.. यहा जीतनीभी बैठी हेना वो सब मालीकके नीचे लेट चुकी हे.. आपको सरमानेकी जरुरत नही हे.. अगर अ‍ैसा हे तोभी हमे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. आप खुलके अ‍ेन्जोय करना.. क्या मस्त हथीयार हे उनका.. अ‍ेक बार उसे अंदर लेलीया तो आपको बार बार लेनेका मन करेगा..

नीशा : (सरमाते धीरेसे) नही रजीया सचमे अ‍ैसा कुछभी नही हे.. येतो खामखा.. अ‍ैसेही केह रही हे..

चारु : (हसते धीरेसे) नही रजीया नीशा सच केह रही हे.. लेकीन आगेकी मेरी कोइ गेरंटी नही.. हें..हें..हें..

अ‍ैसेही मजाक मस्ती करते सभी चाइ नास्ता बना रहेथे.. तभी मंजु देवायतको जगाने अपने रुममे चली गइ ओर रुमका दरवाजा बंध कदीया.. उनको पताथा देवायत कोइ सरारत जरुर करेगा..मंजु भी सरारतसे हसते धीरेसे देवायतके उपर जुक गइ.. ओर उनके होठोको चुमलीया..

तो देवायतने आंख खोलकर मंजुको देखतेही उसे खीचकर अपने उपर गीरा दीया.. ओर उसे अपनी बाहोमे भीच लीया तो मंजु हसते हुअ‍े देवायतके उपर लेट गइ ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके चहेरेको थामते अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमने लगे.. फीर मंजुने उनकी आंखोमे देखते कहा..

मंजुला : (हसते) जानु चलो उठ जाओ.. अभी सादीकी वीधी हे.. आप फटाफट तैयार होजाओ.. अभी प्यार ब्यार कुछभी नही.. हमे देर होजायेगी..

देवायत : (थोडा सीरीयस होते) मंजु.. पता नही आज अच्छा नही लगेगा.. मुजे पुनोसे बीछडनेका डर लग रहा हे..

मंजुला : (होठ चुमते) नही जानु.. वो आपके साथ हमेसाके लीये रहे इसके लीये ये सादी जरुरी हे.. जानु पुनोकी सादीके बाद हम दोनो अकेले होगे तब मे आपको कुछ बात बताउगी.. लेकीन ध्यान रखना चंदादीदीके सामने उनका जीक्र मत करना उनको अच्छा नही लगेगा..

देवायत : मंजु अ‍ैसी कोनसी बात हे..? क्या तुम कुछ जानती हो..? मुजे बताना..

मंजुला : (खडी होते) जानु वो सब बादमे.. अभी चलो देर हो रही हे.. मे आपको सबकुछ बताउगी.. लेकीन अभी नही सब सादीके बाद हम दोनो अकेले होगे तब.. अब आप फटाफट नहालो मे आपके कपडे इधर रखती हु.. मुजे ओर भी तैयारीया करनी हे.. मेने अजयको चंदा दीदीको सम्हालने के लीये दीया हे.. ओर उपरसे आपकी लाडलीके हनीमुनपे जानेके लीये पेकींग भी तो करनी हे..

देवायत : (हसते) मंजु सीर्फ उनकी नही.. वो लखन ओर लताकी भी कर देना..

मंजुला : (हसते) अरे हां बाबा हां.. उनकी भी कर दुगी.. चारोकी होजायेगी.. अब आप फटाफट नहालो..

कहेते मंजु देवायतके कपडे अलमारीसे नीकालकर बेडपे रखने लगी तो देवायतभी टोलीया लेकर नहाने चला गया.. तबतक बहारकी ओर सादीकी सब तैयारीया चल रहीथी पंडीतभी आकर अपनी तैयारीया कर रहेथे तबतक राजीव भुमी नीर्मला सरला सभी तैयार होकर होलमे सोफेपे बैठकर गपे लगा रहीथी.. तो अंदर रुममे वंदना ओर सृतीने पुनम ओर लताको शींगार करके दुल्हन बना दीया था..

आज दोनोही आसमानसे उतरके आइ कीसी अप्सराकी तराह लग रहीथी.. आज यकीनन लखन ओर धिरेन दोनोही अपनी दुल्हनको देखकर ही अपनी पेन्ट गीली करने वाले थे.. तब वंदना सृती ओर नीलमको भी तैयार करने लगी.. तो मंजु रमा भावना चंदा भी अपने हल्के शींगारके लीये बार बार पुनमके रुममे चकर लगा रही थी.. तब पुनम ओर लता पुरी तराह दुल्हनके लीबासमे चेरपे बैठी सब देख रही थी..

बहार भानु भी तैयार होकर आगया.. ओर रमाको ढुंढते उनके पास चला गया.. आजकल रमा ओर भानुका प्यार काफी बढ गया था.. तब सृती ओर वंदनाने अ‍ेक अ‍ेक करके सबका शींगार कर दीया.. तबतक दया रजीया सबने चाइ नास्ता भी बना लीया तो नीर्मला राजीव ओर भानु रमाको छोडकर सब चाइ नास्ता करने लगे.. चंपा नीशा रश्मी चारु सब जहा बैठेथे वही सबको चाइनास्ता देने लगी.. तब बहारकी ओर गांवके लोगभी आने लगे.. फीर दया रजीया ओर चंपाभी तैयार होने चली गइ..

बहारकी ओर ढोल नगारेके साथ बेन्ड बाजाकी आवाज सुनाइ देने लगी.. तबतक लखन ओर धिरेनके पास उनके सभी दोस्तो उपरकी मंजीलपे चले गये ओर लखन धिरेनको पुरे दुलहेकी तराह सजा दीया.. सहेरसे भी धिरेनके कुछ कोलेजके तो कुछ अपनी बेन्कके दोस्त भी आगये.. ओर धिरेनके पास चले गये.. पुरी हवेलेपे उत्साह ओर खुसनुमा सादीका माहोल होगया.. हर तरफ चहेल पहेल हो रहीथी..

तबतक देवायतभी तैयार होकर बहार आगया ओर सभी जगाह घुमकर कामका जायजा लेने लगा वो रमेश ओर सुधीरको सबके लीये भोजनकी ओर पंडालकी व्यवस्था देखनेकी कुछ सुचना देकर अंदर चला गया.. ओर सभी महेमानोको मीलने लगा.. तब बहार अ‍ेक सादीकी शीगार कीहुइ बग्गी भी आगइ.. तो गांवकी सभी ओरते अ‍ेकठा होकर जोरोसे लखन ओर धिरेनका नाम लेकर सादीका गाना गाने लगी..

तबतक लखन धिरेनभी उनके सभी दोस्तोको साथ नीचे आगये.. तबतक सभी लेडीस भी दोनोके साथ आगइ.. चंदाने ओर भावनाने अपने बच्चोको सरला ओर भुमीकाको सम्हालने दे दीया.. ओर सभी लोग दुल्हेके साथ बहार आगये.. चंदा ओर मंजुने मीलकर दोनो दुल्हेको कुमकुम अक्षतका तीलक करदीया ओर सब लोग बहार आगये तो लखन ओर धिरेन बग्गीमे बैठ गये.. ओर उनके साथ चंदा मंजुभी बैठ गइ..

तो गांवके सभी लोग बारातमे सामील होगये सब लेडीस बग्गीके पीछे चलते जोरोसे गाने गा रहीथी ओर पुरा काफला बेन्डबाजेके साथ गांवके मंदिरकी ओर चलने लगा.. तब धिरेन ओर लखनके सभी दोस्तो आगे पटाके ओर आतसबाजी करते साथ चलने लगे.. तो कुछ दोस्तो बेन्डके साथ नाचने लगे.. ओर पुरा काफला मंदिरके चोराहेपे आगया.. तो मंजु ओर चंदा दोनो दुल्हेको लेकर बग्गीसे उतर गइ..

अंदर जाकर दोनो दुल्हेको श्रीफलके साथ दर्शन करवाये.. ओर वापस बग्गीमे बैठ गये.. तो सभीलोग बारत लेकर वापस हवेलीकी ओर चलने लगे.. आज पुरे गावंके लोग सजधजके सादीमे आये थे.. तो गांवके कुछ लडके ओरतोके पीछे अपनी मासुकाके साथ नैन मटक करते उनकी मस्तीया करते साथ चल रहे थे.. तो लडकीया ओर ओरतेभी उनके सामने कुछ इसारा करते हसते हुअ‍े गाना गाते साथ चल रही थी..

पुरे गांवमे खुसीका माहोल था ओर सब लोग नाच गान करते वापस हवेलीपे आगये.. तब दोनो दुल्हेके स्वागतके लीये नीर्मला ओर रमा सजधजके आगइ तो रमाने अपने साथ भावनाको रखा.. ओर नीर्मलाने अपने साथ भुमीको रखा.. तो दुल्हेके पास मंजु चंदा सृती सब खडी होगइ.. तब नीर्मला धिरेनका ओर रमा भावना लखनका कुछ वीधीया करते स्वागत करने लगी.. ओर सभी लोग मंडपमे आगये..

दोनो मंडपमे आमने सामने दो सीहासन जैसी खुरशीया रखीथी.. तो अ‍ेक मंडपमे लखन ओर अ‍ेक मंडपमे धिरेन बैठ गया.. तब मंजु ओर चंदा रमा भावना सब अंदरकी ओर चली गइ.. तभी पंडीतजीने कन्यादान करने वाले कपलको बुलाया तो नीर्मला राजीवको लेकर पुनम वाले मंडपमे चली गइ.. ओर वो भुमीकाको भी साथ लेगइ.. तो दुसरी ओर रमा भानुको बुलाकर मंडपमे जानेसे पहेले भावनाके पास चली गइ.. ओर धीरेसे उनसे बात करने लगी..

रमा : (धीरेसे) भावना दीदी.. चलीये आपकोभी हमारे साथ कन्यादान करने बैठना हे.. आपभीतो भानुकी बीवी हे..

भावना : (हसते धीरेसे बच्चीको सम्हालते) नही दीदी.. आपही बैठो.. मुजे उस आदमीके साथ नही बैठना..

रमा : (धीरेसे) भावु दीदी.. प्लीज.. इतनीभी नाराजगी ठीक नही.. क्यु लोगोके बीच तमासा करना.. चलोना सीर्फ मेरी खातीर..

दोनोही बाते कर रहीथी तब सभी लोग इन दोनोका इन्तजार करते इनकी ओर देखते रहे तो नीर्मला राजीवभी थोडा परेसान होने लगे.. तो भानुभी थोडा परेसान होगया.. उनकोभी पता चल गयाकी रमा भावनाको साथ बैठनेके लीये उसे मना रही हे.. तो नीर्मला खडी होकर मंजुके पास चली गइ.. तो मंजु चंदा ओर नीर्मला तीनोही भावना रमाके पास आकर खडी होगइ.. ओर उनकी बात सुनने लगी.. तब रमाने मंजुको कहा..

रमा : (धीरेसे) मंजु दीदी अब आपही भावुको समजाइअ‍े.. इनको कहोना हमारे साथ कन्यादान करने बैठ जाये.. सब लोग क्या सोचेगे..?

नीर्मला : (थोडी चींतासे) भावु बेटी.. क्या हुआ..? क्यु मना कर रही हो..?

भावना : (धीरेसे) नही मोम.. अब मुजे उस आदमीके साथ नही बैठना.. अब मुजे उनके साथ कोइ लेना देना नही हे.. (रमाको) ओर दीदी आपभी जीद मत कीजीये मुजे आप लोगोसेभी कोइ गीला सीकवा नही हे.. तो फीर क्यु जीद कर रही हे..? आप आरामसे जाइअ‍े ओर कन्यादान कीजीये.. मे लताको सम्हाल लुगी..

मंजुला : (हसते) ठीक हे.. रमा दीदी.. आप ही बैठ जाओ.. इस बातका फैसला हम सादीके बाद करेगे..

तब रमा ओर नीर्मला वापस मंडपमे चली गइ.. ओर अपने पतीके पास जाकर बैठ गइ.. तब पंडीतजी उनसे सादीकी विधीया करने लगे.. फीर कुछ देरके बाद पंडीतजीने दोनो कन्याओको मंपडमे आनेको कहा तो वंदना पुनमका हाथ पकडकर तो भावना लताको हाथ पकडकर मंडपमे लेकर आगइ फीर दोनोको अपने दुल्हेके सामने बीठाकर खुदभी उनके साथ बाजुमे बैठ गइ.. तब सृतीभी अ‍ेक खुरशी लेकर वंदनाके साथ बैठ गइ..

पुनम अपनी नजर जुकाते धिरेनके सामने बैठीथी तब धिरेन नजर उठाके चोर नजरसे पुनमकी ओर बार बार देखता रहा.. फीरभी पुनमने नजर उठाकर धिरेनकी ओर नही देखा.. पुनम आज सादीके जोडेमे कयामत लग रहीथी.. तो दुसरी ओर लखनभी लताको देख रहाथा.. तो लताभी अपना सर जुकातेभी नजर उठाकर लखनको देख लेतीथी.. जब दोनोकी नजरे मीलती तब लता सर्मसार होते मुस्कराने लगती.. ओर पंडीतजी सादीयाकी वीधीया करते रहे..

कुछ देरके बाद चारोका हस्तमेलाप हुआ.. तब लखन उंगलीसे लताकी हथेलीको खरोदने लगा तब लता खुब सरमाइ.. ओर हसते हुअ‍े अ‍ैसेही बैठी रही.. तो वोही हरकत धिरेनने की तो पुनमने कोइ प्रतीक्रीया नही दी.. ओर वो अ‍ैसेही नजर जुकाते बैठी रही.. तो धिरेन थोडा बोखला गया.. ओर कुछ परेसान दीखने लगा.. ओर उसने मन ही मन पुनमको रातमे अपनी सुहागरातमे बदला लेनेका फैसला करलीया..

इसके लीये धिरेन सहेरसेही बहुत कुछ तैयारीया करके आया था.. ओर वो टेडी नजर करके नीलमको ढुंढने लगा.. तो नीलम भावुकी बच्चीको लेकर उनके साथ दुर बैठकर खेल रहीथी.. ओर धिरेनकी ओर देखते बच्चीके गालको चुमते हस रही थी.. जैसे धिरेनको देकर जता रही होकी मे तुमको चुम रही हु ओर तुम्हे अबभी प्यार कर रही हु.. तो धिरेनभी उनकी ये हरकत देखकर मुस्कराने लगा..

कुल मीलाके अ‍ेक घंटे तब सादीकी वीधीया चली जब हस्त मेलाप खतम होगया तब पंडीतनी चारोको खडा करदीया ओर अंदर रुममे भेज दीया तो भावना लताको तो वंदना सृती पुनमको लेकर अपने रुममे चली गइ.. तो लखन धिरेन ओर उनके दोस्तो दुसरे रुममे चले गये ओर अंदर जातेही सब फ्रेस होने लगे.. तबतक बहारकी ओर पंडीतजी फेरेकी तैयारीया करने लगे.. तबतक गांवकी सबभी ओरते लडकीया गाना गाती रही..

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कुछ देरके बाद पंडीतजीने वापस चारोको मंडपमे बुलाया तब उनके फेरे हुअ‍े जब फेरे संपन हुअ‍े मंजु चंदा देवायत पुनमके मंडपमे ओर भानु रमा भावना सब लताके पास खडे थे.. तब लखन ओर धिरेनको अपनी पत्नीओको मंगलसुत्र पहेनानेको कहा.. ओर आखीरमे दोनोको उनकी बीवीओकी मांग भरनेको कहा.. जब धिरेनने पुनमकी मांग भरदी.. तब पुनम पलटकर देवायतसे लीपट गइ ओर फुट फुटके रोने लगी..

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तब सभी ओरते ओर महीला गाना गाते रुक गइ ओर पुनमकी ओर देखती रही.. सब समज रहेथे की अब पुनम अपने भाइ भाभीसे बीछडनेकी वजहसे रो रही हे लेकीन उनका सही रीजनतो सीर्फ देवायत मंजु सृती ओर रश्मी वंदना ही जानते थे.. की पुनम क्यु रो रही हे.. तब मंजु ओर चंदाने मुस्कीलसे पुनमको सम्हाला.. तब मंजुने पुनमको सम्हालते उनके कानमे कुछ कहेकर ओर उनको सांत कीया..

तब जाके पुनम सांत हुइ.. ओर इसी तराह चारोकी सादी संपन हुइ तब पहेले घरके लोग फीर गांवके दोनो कपलको सगुन देकर आशीर्वाद देने लगे.. तबतक दो पहोर होगइ.. ओर चारोको अंदर भेज दीया.. तो रमेश ओर सुधीर महेमानोको भोजनके लीये भोजनके बुलाकर पंडालमे ले गया.. सबसे पहेले सभी जेन्ट्स भोजनके लीये गये.. जब सभी जेन्ट्सने भोजन करलीया तो गांवकी सभी लेडीस भोजनके लीये चली गइ..

जब सभीने भोजन करलीया.. आज कीसीकी विदाय तो यहासे होने वाली नही थी.. तो गांवके लोग अपने अपने घरकी ओर जाने लगे.. तब रमेश ओर सुधीरने घरके लोग ओर कुछ खास महेमानोके लीये टेबल लगवाकर भोजनकी व्यवस्था करदी तब चारो कपल ओर घरके सभी सदस्यो ओर महेमान दोस्तो भोजनके लीये बैठ गये.. तब सरला भुमीका राजीव नीर्मला चंदा मंजु चारु नीशा सभी लोग पंडालमे आ गये..

भावनाने बीचमे लताको बीठाया ओर उनके साथ लखनको बेठनेके लीये कहा.. फीर लखनके पास धिरेन ओर फीर पुनम बैठ गये तो पुनमकी बाजुमे मंजु फीर देवायत ओर उनके साथ चंदा बैठ गइ.. तो दुसरी ओर लताके पास रमा फीर भानु बैठ गये.. तो सामने राजीव नीर्मला भुमीका सृती वंदना भावना नीलम ओर खुद रमेश चारु ओर रश्मी नीशा सुधीरभी बैठ गये..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११७/२

तो मंजुने दया रजीया ओर चंपाभाभीको भी अपने साथ बीठा दीया.. तो दया ओर रजीया बहुतही खुस होगइ.. तो वहा कुछ गांवके लोगभी खडेथे.. तो घरकी नौकरानीको इतनी इजत देनेसे सब अचंभीत हो गये.. ओर उनके दिलमे देवायतके लीये इजत ओर बढ गइ..

क्युकी गांवके लोग रजीया ओर दयाको सीर्फ घरकी नौकरानी समजते थे.. लेकीन उनकी असली पहेचान कीसीको नही पताथा.. वो बात सीर्फ मंजुही जानती थी.. सभी लोग खाना खाने लगे.. तब सभी कपलने अ‍ेक दुसरेको मीठाइ खीलाकर मुह मीठा करवाया तो पुनमनेभी धिरेनको कुह मीठा करवाया..

आज पुनमको अ‍ेक बात समजमे आगइ की जैसेभी हो उसे अब धिरेनके साथ अच्छा रीलेशन रखना पडेगा.. पीछले कुछ दिनोसे वो धिरेनके साथ दुरीया बनाकर रहेती थी.. लेकीन अब वक्त आ गयाथा.. की उसे आज अपना तन धिरेनको सोंपनाही पडेगा.. ओर वो धिरेनके साथ मीलन करनेको लेकर अपने आपको मानसीक रुपसे तैयार करने लगी.. फीर भी उनके जहेनमे सीर्फ देवायतका चहेरा ही आता रहा..

वो खाना खातेभी देवायतके साथ अपने पहेले मीलनको याद करती रही.. की कैसे उनके भाइ देवायतसे अपनी सुहागरातमे पहेली बार चुदवाते बेहोस हो गइथी.. यही सब सोचते उनकी चुत फडफडाते गीली होने लगी.. आज वक्त आ गयाथा की आज वो अपनी चुत दुसरे मर्दको सोंपने वाली थी.. ये सब सोचतेही वो सरमाते रोमांचीत होने लगी.. ओर उनकी चुत अ‍ेक बार फीर फडफडाते पानी बहाने लगी..

तो दुसरी ओर धिरेन ओर नीलमभी खाना खाते अ‍ेक दुसरेको चोर नजरसे देखते रहे.. तब ओर आंखोही आंओमे अ‍ेक दुसरेको दुबार मीलनेका आस्वासन देते रहे.. अ‍ैसेही सबने भोजन करलीया.. तो रमेश सुधीरके अलावा सभी लोग घरके अंदर जाने लगे.. तो वहा दरवाजेपे मंजुने धिरेन पुनमको ओर लखन लताको साथमे खडा करदीया तो नीर्मला ओर मंजु चंदा दोनो कपलकी विदायकी विधीया करने लगी..

फीर चारोको घरके अंदर बुला लीया तो पुनम लता सृती नीलम वंदना सभी पुनमके रुममे आगये.. तो लखन धिरेन ओर उनके सभी दोस्तो उपरकी मंजीलपे चले गये.. ओर आपसमे बाते करते आराम करने लगे.. तो कुछ दोस्तो फुल लेकर लास्ट वाले दो कमरेको लखन ओर धिरेनकी सुहागरातके लीये फुलोसे बेडको सजाने लगे.. तो नीचेकी ओर जीर्मलाने राजीवको दवाइ पीलादी तो वोभी अपने रुममे जाकर सो गया..

फीर नीर्मला भुमीकाभी अपने रुममे कुछ देरके लीये आराम करने चली गइ.. तो सरला ओर भावनाभी अपने बच्ची ओर भावेशको लेकर अपने रुममे बच्चीको दुध पीलाने चली गइ.. तब मंजु चंदा रमा देवायत ओर भानु होलमे सोफेपे बैठे बाते करने लगे.. सादीके पुरे प्रसंगके दौरान भावनाने भानुसे कोइ बात नही की जीनकी वजहसे भानु कुछ परेसान दीख रहाथा.. वो रमासे सादी करके भावनाकोभी खोना नही चाहता था..

भानु : भाइ अब सादीतो होगइ.. तो मे सोच रहा हु अ‍ेक दो दिनमे हम सहेर जाकर नीलमका दाखला दिलवादे.. अब वो कबतक घरपे बैठी रहेगी..? उनकी पढाइ भी रुक गइ हे..

देवायत : भानु वो वंदनाके पेपरभी सबमीट करवाने हे.. तो यहाभी स्कुल सुरु होजाये.. ओर बस कलसे वोही सब काम करने हे.. तुम नीलमकी तैयारीया सुरु करदो.. हम उसे दाखला दीलवाके वही छोडकर ही आयेगे..

रमा : (सरमाते हसते) तबतो देवरजी उनकी सब पेकींगभी बाकी हे.. तो हमे आजही घर जाना पडेगा..

मंजुला : (हसते) अरे.. अ‍ैसे कैसे जाओगे..? अ‍ेक दिनतो रुक जाइअ‍े कल साम आरामसे चले जाना..

भानु : (हसते) नही भाभी.. नीलमके पेपर बेपर उनके कपडे बहुत तैयारीया करनी हे.. तीन दिनसे तो इधर हे.. ओर सादी भी होगइ हे.. तो हम सामकोही चले जायेगे अब आना जानातो लगाही रहेगा..

देवायत : (हसते) ठीक हे यार.. हम सुबह ही चले जायेगे.. तुम नीलमको ओर उनका सामान लेकर सुबह ही इधर आजा.. मंजु अभी वंदनाको केह देगी उनकेभी सब पेपर रेडी हे.. ओर हमे रश्मीभाभीको भी अ‍ेक बार लेजाना हे तो उनकोभी साथ ले लेगे.. सब काम अ‍ेक साथ ही नीपट जायेगा..

चंदा : (सरमाते धीरेसे मंजुको) दीदी वो धिरेनकोभी घर जाना हे.. तो वोभी कल जानेको केह रहाथा.. तो फीर हम क्या करे..? साथ मे पुनोको भेजदे..?

मंजुला : (हसते) बडी दीदी अब वो उस घरकी बहु हे.. आप उनकी सांस हो.. तो अब हमसे ज्यादा आपका उनपे अधीकार हे.. तो आपही तैय करलो.. क्या करना हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते नजर जुकाते) नही दीदी.. अब मे इस घरकी बहु हु.. पुनम मेरी बहु नही.. वो अब मेरीभी ननंद हे.. अब मुजसे ज्यादा धिरेनपे बडी दीदी ओर भैयाका अधीकार हे.. अब वोही उनके माता पीता हे.. तो हम उनको ही पुछ लेगे..

देवायत : (हसते) चंदा अब उसे क्या पुछना हे..? पुनो अब उस घरकी बहु हे तो पतीके साथ नही जायेगी तो क्या यहा अकेली रहेगी..? तुम उन दोनोकी जानेकी तैयारीया सुरु करदो.. ओर हां अब दया पुनोके साथ ही रहेगी.. ओर उनका सब काम वोही देखेगी..

दया : (हसते चाइ लाते) लीजीये भैया भाइ पीजीये.. ओर मेनेतो अपनी सब पेकींगभी करली हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (जोरोसे हसते) देखा.. पुनोसे ज्यादातो इनको वहा जानेकी जल्दी हे.. हें..हें..हें..

दया : (हसते) हां.. तो जल्दीतो होगीनां.. मेरे रहेते पुनो दीदीको वहा काम थोडीना करने दुगी.. सुबह उठकर दोनोका चाइनास्ता खाना कपडे बपडे सब मेही तो देखुगी.. हमारी पुनोदीदीने ये सब काम थोडीना कीया हे..

चंदा : (हसते) अरे हां.. मेरी मां.. तुमभी साथ चली जाना.. अबतो खुस..? हें..हें..हें..

मंजुला : (धीरेसे हसते) दीदी.. दया वहा जायेगी लेकीन अ‍ेक हप्तेके बाद.. हम उसे बादमे भेज देगे..

दया : (सरमाते हसते) हां ठीक हे.. जब आप कहोगे तब चली जाउगी.. (कहेते हसती हुइ कीचनमे चली गइ..तब)

चंदा : (हसते आस्चर्यसे) मंजु.. अ‍ेक हप्तेके बाद..? मतलब..? मे कुछ समजी नही..

मंजुला : (धीरेसे कानमे हसते) दीदी.. देवु इन चारोको गौवा हनीमुनके लीये भेज रहा हे.. चारोको सरप्राइज देनी हे तो बी केरफुल.. अभी ये बातका जीक्र नही करना.. मेने सबकी पंकींग करली हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (खुस होते हसते हां मे गरदन हीलाते) हंम.. अब समजी.. हें..हें..हें..

भानु : (धीरेसे) मंजुभाभी.. अब आपसे कैसे कहु..? आप भावुसे कुछ समजाइअ‍े.. मुजसे अभीभी नाराज लगती हे.. मुजसेतो बातही नही करती.. क्या ये अच्छा लगता हे..?

मंजुला : (हसते) भानुभाइ उनकी चीन्ता आप मत कीजीये मे उनसे बात करलुगी.. ओर देवुभी उनको समजायेगे.. आप फीकर मत करना.. बस.. सब अचानक हो गयातो थोडी परेसान लगती हे..

रमा : मंजुभाभी.. मेने उनसे बात करली हे.. बस थोडी नाराजगी हे.. समयके साथ वोभी दुर होजायेगी.. बस.. इनमे भानुकी भी थोडी गलती हे.. इस वजहसे उनसे थोडी नाराज हे..

भानु : भाइ अब गलती होगइ हे तो क्या करु..? कहोतो उनसे माफीभी मागं लुगा.. मेने रमासे सादी इसीलीये नहीकी.. की मे भावुको छोडदु.. भाइ मे उनकोभी खोना नही चाहता..

चंदा : भानुभाइ.. देवु उनको समजायेगे.. मुजे पुरा यकीन हे वो इनकी बात मान जायेगी.. वो देवुको बहुत मानती हे.. बस इसके लीये थोडा वक्त लगेगा.. उनकी बच्चीभी अभी छोटी हे.. ओर वो कहा उस घरको छोडनेको केह रही हे..?

भानु : (हसते) बस.. भाभी.. यही चीन्ता थी.. क्या हेना वो मुजसे बात नही करतीतो थोडी परेसानी हुइ इसीलीये आपको केह दीया.. ओर कुछ नही..

फीर कुछ देर सब लेडीस आपसमे बात करने लगी तो भानु देवायत अपने कारोबारकी बाते करते रहे तभी चारु रश्मी नीशाभी आकर बैठ गइ तो बहारसे सुधीर ओर रमेशभी सब काम नीपटाकर अंदर आगये.. सभी लोग गांवके लोगोकी जमीनके बारेमे ओर सादीके बारेमे बाते करते रहे.. तो दो घंटे अ‍ैसेही बातोमे बीत गया.. तभी राजीव नीर्मला ओर भुमीका भी सबके साथ आकर बैठ गये.. तो रजीया दयाने ओर चेयर लाकर वही रखदी..

उपरकी मंजीलपे लखन धिरेन ओर उनके सभी दोस्तोभी वही बेठकर हसी मजाक करते रहे.. तब मंजुने सबको चाइ नास्तेके लीये नीचे बुला लीया तो सभी लोग होलमे इकठा होकर बाते करने लगे.. तब सृती नीलम ओर वंदनाभी बहार आकर वही दरवाजेके पास खडी होकर सबकी बाते सुनने लगी.. तो दया रजीया चंपा सबके लीये चाइनास्ता लेकर आगइ.. ओर सभी चाइ नास्ता करते बाते करते रहे.. तब नीलम ओर धिरेनभी आंखोसे कइ बाते कर चुके थे..

जब चाइनास्ता करलीया तो धिरेनके सहेरके दोस्त ओर गांवके लखनके सभी दोस्तो नीकलने लगे तब लखन ओर धिरेन सबको बाते करते बहार तक छोडने गये.. जब सभी चले गये तब लखन धिरेन वापस आकर सबके साथ बैठ गये.. लखन चंदाके पास बैठ गया..

तो धिरेनभी राजीवके पास जाकर बैठ गया.. तो राजीव धिरेनके साथ उनकी जोबके बारेमे बाते करने लगा तभी रमेश सुधीरभी नीशा ओर चारुको लेकर चले गयेतो उनको बहार तक छोडने देवु ओर मंजुभी चली गये.. फीर वापस आकर मंजुने नीर्मलासे हसते हुअ‍े कहा..

मंजुला : (हसते) मम्मी हमारी समधनतो अपने घर जानेकी बात कर रही हे.. हें..हें..हें.. अब आपही इसे समजाइअ‍े.. अ‍ेक दो दिनतो यहा रहे..

नीर्मला : (हसते) क्या सरला भाभी यहा आपको कौन पथ्थर तुडवा रहे हे.. रुक जाइअ‍ेनां.. हमभी यहा अ‍ेक दो दिन रुके हे.. फीरतो हमेभी जाना हे..

सरला : (हसते) अरे.. तीन दिनसे तो इधर हे.. ओर वहाभी घरपे ताला लगाकर आये हे वहा सब अ‍ैसेही पडा होगा तो जानातो होगा ही.. ओर अबतो यहा आना जाना लगाही रहेगा..

भानु : (हसते) मम्मीजी.. अब खेतोमेभी सब देखना पडेगा.. सब अ‍ैसेही पडा हे.. ओर हमे सहेरभी जाना हे देवुकोभी उधरका काम हे ओर हमे नीलमका दाखलाभी दिलवाना हे तो जाना पडेगा..

भुमीका : (हसते) हां नीमु.. हमभी कल सुबह नीकल रहे हे.. सृतीने सीर्फ तीन दिनके लीये क्लीनीकपे अ‍ेरेन्ज कीयाथा.. उनकोभी अब जाना पडेगा.. तो कल सुबह हम नीकल जायेगे..

नीर्मला : (हसते) लोजी अ‍ेक ओर आगइ.. अब तुजे कहा जाना हे..? सीर्फ सृतीको भेजदे.. हम दो दिन यही रहेगे.. फीर तुजे देवु घर छोड देगा..

मंजुला : (हसते) हां बुआ.. अब आपतो जानेकी बात मत करो.. जबतक मम्मी पापा इधर हे तो आपभी इधर रहीये.. फीर हम आपको घर छोड देगे..

सृती : (हसते) मंजुदीदी सीर्फ हम दोनो नही जा रहे.. हम नीर्मलाआंटी ओर राजीव अंकलकोभी साथ लेजा रहे हे.. वो दोनो दो दिन हमारे साथ वही रहेगे..

भुमीका : (हसते) हां.. कीतने साल होगये.. मेरा भाइतो कभी उधर आयाही नही हे.. तो इस बार मे उसे वहा लेजाउगी.. ओर तुम दोनो कुछभी नही बोलोगे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां मम्मी भुमी बुआ ठीक केह रही हे.. आप दो दिन वही चले जाओ फीर इधर आजाना..

राजीव : (हसते) ठीक हे भुमी हम कल साथमे चल रहे हे.. नीमु.. अब सादीतो होगइ हे.. तो इन लोगोकोभी घंघेका देखना हे.. मेभी सोच रहा हुकी अब हमेभी अपनी दुकान खोल देनी चाहीये.. अबतो मे ठीक होगया हु.. भुमीके घरसे हम चले जायेगे..

मंजुला : (जटसे) पापा अब दुकान खोलनेकी कोइ जरुरत नही.. अब आप आराम कीजीये बहुत धंधा करलीया.. अब जोभी करनाहे सब देवु देख लेगे.. अब आप दोनोको इधरही रहेना हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) अरे अ‍ैसे थोडीना चलेगा.. बेटा बेटीओके घर ज्यादा नही रहेते.. भलेही तेरे पापा दुकानपे ना जाये लेकीन हम रेहेगे तो वही.. यहा नही रहेना..

राजीव : (हसते) देवु बेटा.. अब मे सोच रहा हु.. की हमारा मकान अब धिरेनके नाम करदु.. क्या कहेतेहो आप..? क्युकी अब धिरेनभी हमारा बेटा हे.. मेरी दोनो बेटीतो अच्छेसे सेट होगइ हे.. मुजे आप सब लोगोकी राय चाहीये..

चंदा : (हसते) नही भैया.. वहाभी इतना बडा घर हे.. खेती हे.. वोभी धिरेनके नाम करदीया हे.. तो वो उस घरका क्या करेगा.. आप इसे मंजु भावुके नामही करदो..

धिरेन : (हसते) हां मौसाजी मम्मी ठीक केह रही हे.. वो मकान मेरे नाम मत कीजीये.. अबतो मुजेभी हमारे गांवमे ज्यादा दिन नही रहेना.. भलेही वो मकान गांवमे रहे.. मे अब नोकरीकी वजहसे सहेरमे रहेने का सोच रहा हु.. मे ओर पुनो उधरही चले जायेगे.. मुजे बेंक लोन दे रहा हे तो सोचता हु वही अ‍ेक छोटा मकान खरीदलु..

मंजुला : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? धिरेन तुम सहेरमे रहेने जाओगे..?

धिरेन : (हसते) हां दीदी.. अगर मम्मी ओर आप लोग परमीशन देगे तो वही रहेना हे मुजे..

चंदा : नही धिरेन.. मे हमारा मकान तुजे बेचने नही दुगी.. वो हमारे पुर्खोका मकान हे.. भलेही तुम वहा सहेरमे दुसरा मकान लेलो इसे नही बेचना हमारी खेतीकी जमीनभी हे उसे कौन देखेगा..? ओर पुनमभी हमारे गांवके मकानमे ही रहेगी.. अब वहाका सब वहीवट वोही देखेगी.. तुजे इधरसे ही अपडाउन करना पडेगा..

नीर्मला : (हसते) अरे वो सबतो बादकी बाते हे.. वो बेचारा कहा रोज अपडाउन करता रहेगा.. भलेही सहेरमे अ‍ेक मकान लेले.. अगर कभी आनेमे देर बेर होगइ तो वही रुकतो सकता हे.. देवु आपतो कुछ बोलीये..

देवायत : (हसते) अरे मे क्या बोलु..? धिरेनकी अपनी लाइफ हे.. अब पुनो उनकी बीवी हे.. अब जोभी नीर्णय करना हे उन दोनोको करना हे.. हमे क्या अ‍ेतराज हो सकता हे.. ओर रही बात आपके मकानकी.. तो आपको दुसरेके नाम करनेकी इतनी जल्दी क्यु हे.. अभीतो आप दोनो वहा रेह रहे हो..

राजीव : (थोडा सीरीयस होते) देवु बेटा.. अब इस सरीरका कोइ भरोसा नही.. अगर मुजे कुछ होगया तो मे चाहता हु नीमु इधर तुम्हारे साथ रहेने आजाये.. तो हम उस मकानका क्या करेगे..? कीसीके नामतो करनाही हे.. अभी नीमु हे तबतक भलेही उनके नामका हो.. लेकीन बादमेतो कीसीको देनाही हे.. तो हमने सोचाकी अभी हम दोनो हे तो हमारी हाजरीमे ही ये सब होजाये.. इसीलीये केह रहेथे.. बोलो क्या कहेते हो तुम..?

देवायत : (हसते) ठीक हे.. अगर आप मेरी राय लेना ही चाहते होतो मे आपको अ‍ेकही राय दे सकता हु..

नीर्मला : (हसते) हां कहो.. मुजे पता हे तुम कुछ सोच समजकर ही राये दोगे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) पापा.. मेरी मानोतो आप अपना मकान भावुके नाम करदो.. बाकी कीसीकी चीन्ता आपको करनेकी जरुरत नही हे.. ओर अब आप दुकानभी कीसीको कीरायेपे देदो.. अब आपको काम नही करना.. बाकी सब मे देख लुगा.. क्या कहेतेहो आप..?

मंजुला : (हसते) हां पापा.. देवु ठीक केह रहे हे.. आप भावुके नाम मकान करदो.. ओर दुकान कीसीको चलाने भाडे पे देदो..

भावना : (बच्चीको लेकर बहार आते) पापा.. क्या मुजसे नही पुछोगे..? ओर मे आपकी अकेली बेटी थोडीना हु.. बडी दीदीका भी उनपे इतना हक हे.. तो फीर अकेले मेरे नामका ही क्यु..? मुजे अकेलीको नही चाहीये.. आप उस मकानको जीनको देना चाहे दे दीजीये.. नही चाहीये मुजे मकान..

मंजुला : (हसते) अरे.. तो इसमे गलत क्या हे.. ओर भावु.. मेरे पासतो इतनी बडी हवेली हे मे क्या करुगी उस मकानका..? जीद मत कर तेरे जीजुने कहाहे वोही ठीक हे..

भावना : नही दीदी.. उनपे आपकाभी इतना हक हे.. मे अकेली नही लुगी.. तो फीर भलेही धिरेनके नाम करवादे हमे कुछ नही चाहीये.. आप दोनोने हमे इतना पढा लीखाया ओर हमारी सादी करवादी यही बहुत हे..

धिरेन : नही दीदी.. मे क्या करुगा मकानका.. ओर ये आप दोनोका हक हे.. मुजे नही चाहीये..

मंजुला : (खडी होकर भावनाके पास जाते) अभी अ‍ेक मीनीटमे आइ.. भावु तु अंदर चल मेरे साथ..

कहेते मंजु भावनाका हाथ पककर उसे रुममे लेगइ ओर दरवाजा बंध करलीया तो सब उनको देखतेही रेह गये.. ओर सोचने लगेकी मंजु भानाको अंदर समजाने लेगइ हे.. लेकीन उनको नही पता थाकी मंजु कीस वजहसे वो मकान भावुके नाम कर रही हे.. तब मंजु भावनाको अंदर लेजाकर बेडपे बेठ गइ ओर भावनाकोभी अपने पास बीठा दीया ओर धीरेसे उनसे बात करने लगी..

मंजुला : भावु.. अब ध्यानसे सुनना.. तेरे जीजुने सही कहा हे.. ये सब मे सोच समजकर कर रही हु.. भावु.. तुजे तेरे जीजाजी वही मीलेगे.. ओर उनको वहा मीलनेमे तुजे आसानी रहेगी.. आगे जाकर तुजे सब समजमे आजायेगा.. मुजे तुमसे इस बारेमे बहुत कुछ कहेना हे.. लेकीन अभी नही.. बात तेरे फायदेकी हे तु हां कहेदे.. फीर हम दोनो अकेली होगी तब तुजे सब कुछ बताउगी..

भावना : (आस्चर्यसे देखते) लेकीन दीदी.. जीजु वही मीलेगे.. मतलब..?

मंजुला : (हसते) भावु.. अभी इस बारेमे बात करना उचीत नही हे बहार सब हमारा लन्तजार करते बैठे हे.. हम इस बारेमे फुरसतमे बात करेगे.. तब मे तुजे सबकुछ बता दुगी.. बस अभी इतना जानले.. आगे जाकर तुमको देवुकी सीक्रेट वाइफ बनकर वही रहेना हे.. तब वहा सीर्फ तुम अकेली ही रहोगी.. समज गइनां.. अभी चल बहार ओर मम्मी पापाको हां कहेदे.. अब कुछभी मत बोलना.. चल बहार..

कहेते मंजु बहार आगइ तो पीछे भावनाभी उनको देखती रेह गइ.. भावुको इतना पता थाकी मंजुको सब पता चल जाता हे ओर उनका देवायतके साथ अफैरका पता चल गया हे.. तो मंजुके मनमे आगेकी क्या प्लानींग हे..? वो उनको नही पताथा.. यही सब सोचते वोभी अपनी बच्चीको लेकर उनके पीछे बहार नीकल गइ.. तब मंजुने बहार आतेही देवायतके पास बैठते केह दीया..

मंजुला : मोम.. भावु मान गइ हे.. आप मकान उनके नाम कर दीजीये.. (सरलाकी ओर देखते) ओर सरला मौसी.. भावु मम्मी पापा यहा हे.. तबतक उनके साथ रहेना चाहती हे.. तो कुछ दिन भलेही वो यहा रहेती.. फीर देवु उनको आपके घर छोड देगा..

सरला : (हसते) अरे बेटी.. तो इनमे मुजसे कहेनेकी क्या जरुरत हे..? हम थोडीना उसे मना करते हे.. भलेही यहा जीतने दिन रहेना चाहे रहे.. इनको भी यहा अच्छा लगेगा.. कीतने महीने हो गये वो मायकेभी नही गइ..

कहातो भावनाभी मंजुको देखती रेह गइ.. यहा रुकनेकी बाततो उसनेभी मंजुको नही कहीथी.. तो फीर मंजुने अ‍ैसा क्यु कहा..? यही सब सोचते वो मंजुको देखती रही.. आज सादीकी वजहसे सब लोग पुरे दिन दोडधाम करते रहे तो सभीके चहेरे पे थकान महेसुस हो रहीथी.. सब लोग बाते करते रहे तबतक साम ढल चुकीथी.. तबतक दया रजीया ओ चंपाने रातका खानभी बनालीया था..

तो मंजुने पुनम लताकोभी डीनरके लीये बुला लीया.. ओर सब डीनर करने साथमे बैठ गये.. आज पुनमको मजबुरन धिरेनके साथ बैठना पडा.. तो लताभी लखनके साथ बैठ गइ.. तब भावनाने नीलमको अपने साथ बीठा दीया.. भुमीकाभी अपनी प्रेगनन्सीकी वजहसे थोडी परेसान थी.. तो सृती बार बार देवायतको चोर नजरसे देखती रही.. तो लताभी लखनके साथ सुहागरात मनानेको बेताब थी..

लेकीन उनकी नजर बार बार देवायतकी ओर चली जाती थी.. तो पुनमके मनमेभी धिरेनके साथ मीलन करनेको लेकर धमासान चुध्ध चल रहाथा.. अब वो चाहे या ना चाहे.. उसे आज रातको अपने आपको धिरेनको सोपना पडेगा.. अपनी सुहागरातमे धिरेनेको वो सबकुछ करना देना पडेगा जीसे वो अबतक धिरेनसे बचके आइ थी.. ओर धिरेनके साथ मीलन करना उनके बच्चेके लीये जरुरीभी था.. यही सब सोचते अपने आपको धिरेनको समर्पीत करनेको तैयार होगइ.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ११८/१

लेकीन उनकी नजर बार बार देवायतकी ओर चली जाती थी.. तो पुनमके मनमेभी धिरेनके साथ मीलन करनेको लेकर धमासान चुध्ध चल रहाथा.. अब वो चाहे या ना चाहे.. उसे आज रातको अपने आपको धिरेनको सोपना पडेगा.. अपनी सुहागरातमे धिरेनेको वो सबकुछ करना देना पडेगा जीसे वो अबतक धिरेनसे बचके आइ थी.. ओर धिरेनके साथ मीलन करना उनके बच्चेके लीये जरुरीभी था.. यही सब सोचते अपने आपको धिरेनको समर्पीत करनेको तैयार होगइ.. तभी....अब आगे

नीर्मला : (खाना खाते हसते) भुमी.. तो अब तुमने सृतीकी सादीके लीये क्या सोचा हे..?

भुमीका : (हसते) अरे.. मुजे क्या पता..? अब ये सब मंजुको तैय करना हे.. हमतो सादीके लीये तैयार हे.. हमे कहा कुछ लेना हे.. सृतीके लीये सबकुछ लेकर रखा हे.. हमतो कभीभी सादी कर सकते हे..

मंजुला : (हसते) बुआ.. हमेभी कहा कुछ लेना हे.. बस कुछ गहेने ओर मंगलसुत्र हीतो लेना हे.. कुछ सारीया लेनी हे फीर हम अ‍ेक हप्तेके बाद जब धिरेन पुनो ओर लखन लता वापस आजाये तब ये दोनोकी आश्रममेही सादी कर देगे.. क्या कहेतेहो पापा..?

रमा : (हसते) वापस आजायेगे मतलब..? ये चारो कहा जा रहे हे..?

मंजुला : (जोरोसे हसते) ओ बापरे.. सोरी सोरी.. देवु.. सोरी मुहसे नीकल गया.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) मंजु कोइ बात नही.. अबतो बतानाही पडेगा.. (रमाकी ओर देखते) भाभी.. सृती ओर मंजु ओर चंदाने डीसाइड कीया हे.. वो चारोको हनीमुनके लीये गौवा भेज रही हे.. दोनोकी पेकेज टुरकी टीकीट भी आगइ हे.. कल दो पहोरको चारो हमारे साथ ही चल रहे हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते कामुक नजरोसे) जुठे.. हम तीनोने कब डीसाइड कीया..?

देवायत : (हसते) अरे.. सृतीने कहाथा.. की मेने मंजुभाभी ओर चंदामौसीने ये सब तैय कीया हे.. इसीलीये तो टीकीट लेलीया..

सृती : (जटसे जोरोसे बोलते) मेने कब कहाथा..? जुठे कहीके.. आप खुद लेकर आगये थे.. मुजे तो पता भी नही था.. कीतना जुठ बोलते हे..

राजीव : (हसते) अरे जगडो मत.. हां यही ठीक रहेगा.. ये चारो वापस आजाये तब हम आश्रममे सादी कर देगे.. मेभी कीतने साल होगये बाबाको नही मीला.. उनकेभी दर्शन हो जायेगे.. आप जब कहो हम दोनो सादीमे आजायेगे..

मंजुला : (हसते) क्या सादीमे आजायेगे..? पापा अभी आप दो तीन दिन भुमी बुआके साथ रहो.. फीर इधर चले आना.. अब सादी तक दोनोको कही नही जाना.. दोनो यही रहेगे..

चंदा : (हसते) बडे भैया.. अ‍ेक सजेसन हे.. कल आप दोनो भुमी दीदीके साथ मत जाओ.. दो तीन दिन यही रहो.. वहा भुमी बुआभी अकेली हे.. तो सादीके दो दिन पहेले आप दोनो उधर चले जाना.. तो भुमी दीदी कोभी वहा सादीमे अकेला ना लगे.. फीर सादीके बाद आपको घर जाना हेतो जा सकते हो..

नीर्मला : (जोरोसे हसते) अरे वाह.. छोटी क्या आइडीया दिया हे तुने.. तेरी सादीके बादतो तेरा दिमाग भी देवुके साथ रहेकर चलने लगा.. हें..हें..हें.. हम वही करेगे.. क्यु राजीव..?

राजीव : (हसते) हां.. भुमी.. चंदा बीलकुल ठीक केह रही हे.. हम दो तीन दिनके बाद हमारा बोरीया बीस्तरा लेकर वही चले आयेगे.. ओर वहीसे हम आश्रमपे जायेगे.. फीर देवु हमे हमारे घर छोड देगा..

भावना : (हसते) पापा.. मेभी आपके साथ रहुगी.. मुजे हमारे घर भी कुछ दिन रहेना हे..

सरला : (हसते) हां तो बेटा तुमभी साथ चले जाना.. जबतक तेरा मन करे वहा रुकना.. फीर भानु तुजे लेने आजायेगा..

भावना : (सरमाते हसते) ठीक हे मम्मी.. मे आजाउगी.. जीजुके साथ आजाउगी.. वोतो वहा आते जाते हे..

देवायत : (हसते) कोइ जरुरत नही.. तेरे पतीके साथही चली जाना.. मे तेरी नोकरी थोडीना करता हु..

भावना : (जुठे गुस्सेसे) देखा दीदी.. इनको सीर्फ आपही मार मारके सुधार सकती हो.. टांग खीचनेका अ‍ेकभी मौकाम नही छोडते.. ये तो आप पापा बैठे हे तो बच गये.. वरना..

राजीव : (खाना खाते हसते) अरे..? दोनो फीर सुरु होगये..? बेटी अ‍ैसा नही कहेते ये जीजा हे तेरा..

भावना : (तीरछी कामुक नजरोसे देखते) पापा जीजा हे तभी तो केह रही हु.. बहुत बीगड गये हे.. हें..हें..हें..

सभी मस्ती मजाक करते बाते करते रहे.. इसी बीच नीलमकी सहेरमे दाखलेकी बातभी हुइ.. जीसे सुनकर नीलम ओर धिरेन दोनोही मनही मन खुस होने लगे.. ओर सबकी मस्ती मजाकके बीच धिरेन ओर नीलम मौका देखते ही अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते आंखोसे कुछ बाते कर लेते हे.. धिरेनने सबकी नजर बचाते नीलमको कुछ मोबाइलका इसारा कीया.. लेकीन नीलम ठीकसे समज नही पाइ.. ओर सबने खाना फीनीस कीया..

तब वंदना ओर सृती पुनम लताको लेकर पुनमके रुममे चली गइ.. तब अंदर जातेही दोनो पुनम लताको हल्का शींगार करते सुहागरातके लीये तैयार करने लगी.. तब दोनोही रोमांचीत होने लगी.. तो मंजुने लखन ओर धिरेनकोभी उपर अपने अपने रुममे भेज दिया.. इसी बीच सभी लोग होलमे आकर बैठ गये.. ओर बाते करते रहे तबतक दयाने दोनोके रुममे केशर बादाम वाला दुध गरम करके रख दीया..

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बाकीकी सब तैयारीया लखन ओर धिरेनके दोस्तो करके गये थे.. दोनोके बेड पुरे फुलोसे सजाया था.. ओर उनके बेडपे दोनोके फुलोसे नाम लीखे थे.. लखन ओर धिरेन दोनोही लखनके रुमपे बेठकर गौवाके बारेमे बाते कर रहेथे.. तब नीचेकी ओर नीर्मलाने राजीवको दवाइ पीलादी तो उसे नींद आने लगी ओर वो अपने रुममे जाकर सोगया.. तो सरलाभी भावनाके साथ उनके दोनो बच्चेको लेकर सोने चली गइ..

तो भानुभी रमाको लेकर अपने रुममे चला गया.. जब चंदा पुनमके रुममे देखने चली गइ.. तो मंजुने देवायतको रश्मीको अपके घर छोडनेको कहा.. तो साथमे नीर्मला ओर भुमीकाभी कुछ सोचकर वोकींगके बहाने साथ चलनेको तैयार होगइ.. तब मंजु बहुत कुछ समज गइ..

आज वंदना सृती ओर नीलम पुनमके रुममे सोने वालीथी.. तो नीलमभी पुनोके रुममे चली गइ.. वहा वंदना ओर सृती दोनोही लता ओर पुनमको अपनी सुहागरातके लीये सजा रही थी.. तो नीलम उसे देखते सरमा गइ.. तो सृतीने नीलमकी मस्ती करते कहा..

सृती : (हसते) नीलु.. सब देखले.. अ‍ेक दिन तेरीभी अ‍ैसी बारी आयेगी.. तब वंदु तुजेभी अ‍ैसे सजा देगी.. हें..हें..हें..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते हसते) क्या दीदी.. सादीके लीये बहुत देर हे.. मेतो अभी बहुत छोटी हु..

चंदा : (सृतीको मुका मारते हसते) क्यु बच्चीकी टांग खीच रही हो.. अभी तो नीलु बहुत छोटी हे.. हें..हें..हें..

लता : (नीलमको देखते हसते) भाभी.. ये कोइ छोटी नही हे.. १८ को होनेकी आइ हे.. आजकल इनकेभी पंख नीकल आये हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (नीलमको हग करते) अ‍ेय.. देवरानी मेरी बच्चीको तंग मत करो.. ये बहुतही अच्छी लडकी हे.. कोइ बडी नही हुइ.. अभीतो छोटी बच्ची हे पढ रही हे.. जब इनकी सादी होगी.. तो मे इनका खयाल रखुगी..

कहातो पुनम दोनोकी ओर देखते कातीलाना स्माइल करने लगी.. क्युकी अनजानेमे ही सही.. आज चंदाके मुहसे सच नीकल गया.. तब उनको पता नही थाकी यही नीलम उनके साथ हमेसाके लीये रहेने वाली थी.. ओर यही बात पुनमको पता चल गइथी.. की आगे जाकर यही नीलम उनकी सौतन बनकर आयेगी.. ओर अपने लीये अपने भाइ देवायतसे मीलनेका रास्ता बनायेगी.. जबसे मंजुने पुनमको अनुभुतीके माध्यमसे सब ज्ञात करवाया तबसे पुनमभी बहुत कुछ जानने लगी थी..

उनको धिरेन नीलमके रीस्ते ओर भुमीका देवायतके रीस्तोके बारेमे भी सब पताथा.. लेकीन उसको मंजुकी सभी सलाह याद थी.. की कीसीभी रीस्तेमे इन्टरफीयर नही करना.. तो उसने अपना मुह बंध रखनेका फैसला करलीया था.. ओर ये उनके लीये फायदे मंदभी था..

जब देवायत भुमी ओर नीर्मला साथ चलके रश्मीको उनके घर छोडने जाने लगे.. तो मंजुभी पुनमके रुममे आगइ.. ओर पुनमके पास चली गइ.. पुनमको बैठेही पीछेसे हग करलीया.. तो पुनम उसे देखतेही सरमाकर मुस्कुराने लगी.. तब मंजुने धीरेसे कहा..

मंजुला : (हसते धीरेसे कानमे) अरे मेरी बच्चीतो बीलकुल अप्सरा लग रही हे.. देखना.. आज अपना रोल बरोबर नीभाना..

पुनम : (हसते) भाभी.. बहुत अजीब लग रहा हे.. कही कुछ गडबड ना होजाये..

मंजुला : (हसते कानमे) चुप.. कुछ मत बोलना.. ओर कोइ गडबड मत करना.. अब वो उल्टीकी टीबलेट लेना बंध करदे.. बस १२ १५ दिनके बाद तुजे फीरसे उल्टीया होगी.. तब तुजे धिरेनको बच्चा ठहेरनेके बारेमे बताना हे.. समज गइनां.. बस अबतो तु अपनी लाइफ मजेसे अ‍ेन्जोय कर.. तु नसीब वाली हे.. तुजे दो दो लंड मीले हे.. देखना यही लडकी तुजे तेरे भाइसे वापस मीलवायेगी.. ये बहुतही कामुक लडकी हे..

चंदा : (जोरोसे हसते) अरे दोनो क्या खुसर पुसर कर रही हो.. कुछ टीप्स अपनी देवरानीको भी देदो.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) नही दीदी.. येतो इस मामलेमे होशीयार हे.. ये ओर हमारे लखन भाइ इस मामलेमे काफी तजुरबेदार हे.. उल्टा हम दोनोको इनके पास टीप्स लेनी पडेगी.. हें..हें..हें..

लता : (सर्मसार होते हसते) क्या भाभी.. आप भीना.. अब आगे मत बोलना.. कुछतो सरम करो.. नीलु यहा खडी हे..

चंदा : (जोरोसे हसते) क्यु..? अभीतो तुमनेही कहाकी इनके पंख लग गये हे.. हें..हें..हें..

वंदना : (हसते) लोजी होगया.. लताभाभी.. आजतो आप पटाका लग रही हे.. लगताहे लखनभाइ आज आपको देखतेही दिलसे घायल होजायेगे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) सृती तेरा होगया..? तो तुम दोनो इनको अपने रुममे छोडकर आओ.. वरना वो दोनो कमीने हमे गालीया देते होगे.. हें..हें..हें..

कहातो सभी जोरोसे हसने लगे.. ओर सृती वंदना पुनम ओर लताको लेकर उपरकी मंजीलपे चली गइ.. तब लखन ओर धिरेन बाते कर रहेथे तब वहासे सृती ओर वंदना दोनो दुल्हनको लेकर नीकली तब उसे देखते ही लखन ओर धिरेन दोनोके लंड जटके मारते खडे होने लगे.. दोनोकी सांसे तेन चलने लगी.. तो दुसरी ओर वंदना ओर सृतीने दोनोको अपने रुममे घुंघट नीकालकर बेडपे बीचमे अच्छेसे बीठा दीया..

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तो पुनम ओर लताकी सांसे तेज चलने लगी.. लता अपने पतीके साथ मीलनको लेकर उत्साहीत थी.. तो दुसरी ओर पुनमभी आज धिरेनके साथ मीलनको लेकर अ‍ेक अलगही रोमांचकी अनुभुती करने लगी.. तभी सृती वंदना पुनम लताको बेस्ट ओफ लक कहेते हसती हुइ बहार नीकल गइ.. ओर दरवाजा अ‍ेसेही बंध करदीया.. ओर नीचेकी ओर जाने लगी.. तब लखनके रुमके पास आतेही दोनो रुक गइ तो सृतीने हसते हुअ‍े कहा..

सृती : (हसते) लखनभैया धिरेन.. जाओ अपने रुममे दोनोकी दुल्हन रेडी हे.. ओर धिरेनभैया.. आपका लास्ट वाला रुम हे.. देखना गलतीसे दुसरे रुममे मत घुस जाना हें..हें..हें..

कहेते दोनोही हसती हुइ चली गइ.. तो लखन ओर धिरेन दोनोही सरमाकर मुस्कुराने लगे.. फीर दोनोने गले मीलकर अ‍ेक दुसरेको बेस्ट ओफ लक कहा.. ओर धिरेन अपने रुमकी ओर चला गया.. तब लखनने फटाफट जेबसे अ‍ेक वायग्राकी गोली नीकालकर पानीके साथ पीली.. ओर वोभी अपने रुमकी ओर चला गया.. तब दोनोके दिलकी धडकन तेज होगइ थी.. आज धिरेनके लीये वो घडी आ ही गइ..

जो वो कबसे पुनमके साथ मीलन करना चाहता था.. वो बहुतही अ‍ेक्सायटेड होगया.. तो उनका लंड पेन्टके अंदरही जटके मारने लगा.. वो नीलमकोभी भुल गया.. ओर भारी धडकनसे अपने रुमका दरवाजा धीरेसे खोलदीया.. तब पुनम बेडके बीच घुघंट नीकालके धिरेनके इन्तजारमे बैठी थी.. ओर धिरेनने अंदर जातेही धीरेसे दरवाजा बंध करके लोक करदीया तब पुनमकी दिलकी धडकन तेज होगइ.. ओर उसे अपने जहेनमे देवायतके साथ बीताइ अपनी पहेली सुहागरात आगइ.. ओर देवायतका बडा लंड दीखने लगा..

तो इधर बाजुके रुममे लखनभी दरवाजा बंध करके बेडपे आगया तब लता घुंघट डालके बेडके बीच बैठीथी.. तो लखन उनके पास जाकर बैठ गया ओर लताका घुघंट उठाने लगा.. तो लताने लखनके हाथपे अ‍ेक चपत लगादी.. ओर हसने लगी.. तो लखन फोरन समज गया ओर जेबसे अ‍ेक डायमंड नेकलेश ओर अ‍ेक स्मार्ट फोनका बोक्ष लताके हाथोमे थमा दीया..

तो लता लखनकी ओर कामुक नजरोसे देखते हसते हुअ‍े खुद घुंघट हटाकर अपनी गीफ्ट देखने लगी.. डांयमंड सेट देखतेही उछलके लखनके गले लग गइ ओर सेट इखनको थमा दीया ओर अपनी गरदन जुकाली.. तो लखन हसते हुअ‍े लताको गलेमे सेट पहेनाने लगा.. फीर दुसरा बोक्ष खोलकर देखने लगी.. तो उसमे फोन देखतेही लखनको धका मारते बेडपे गीरा देती हे..

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ओर दोनो पैर फैलाके लखनके सीनेपे बेठकर जुक जाती हे.. ओर लखनके चहेरेको पकडकते पागलोकी तराह चुमने लगती हे.. जैसे आज वो लखनका बलात्कार करना चाहती हो.. तो लखनभी हसते हुअ‍े लतासे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगा.. ओर दोनोही मस्तीया करते अ‍ेक दुसरेके हाथ पांव पकडने लगे.. ओर लखनने लताको दबोच लीया ओर बेडपे धका मारते पीठके बल सुलाते उनके उपर चड गया..

लता : (जोरोसे हसते) लखन.. छोडदो मुजे.. कीतने कमीने हो.. छोडो.. वरना आपकी भाभीको चीलाकर बुला लुगी.. की देखो.. तुम्हारा देवर मेरे साथ क्या क्या कर रहा हे.. हें..हें..हें..

लखन : (जुकते होठोपे जबरदस्तीसे कीस करते) हां बुलाले.. कमीनी आजतो तु गइ कामसे.. बहुत नखरे करती थी.. अबतो सुबह तक तेरी चोद चोदके हालत खराब कर दुगा.. आजतो कपडेभी नही नीकालने दुगा.. तुजे पुरी रात इन्ही दुल्हनके लीबासमे चोदुगा.. हें..हें..हें..

लता : (जोरोसे हसते अपना मुह इधर उधर करते छुटनेकी कोसीस करते) छी.. कीतने गंदे लडके हो.. कपडेतो नीकालने दो.. खराब हो जायेगे.. आपके अंदर कीतनी आग लगी हुइ हे.. सादीसे पहेलेही मुजे चोद लीया.. हें..हें..हें..

लखन : (चहेरेको थामते आंखोमे देखते) नही लता.. आज अ‍ैसेही रहे.. इन कपडोमे तु कयामत लग रही हे.. सीर्फ तेरा पेडीकोट उचा करले.. आज कोइ कपडे नही नीकालने दुगा ओर शींगारभी अ‍ैसेही रखना हे.. तु क्या मस्त लग रही हे.. आजतो तुजे अ‍ैसेही दुल्हनके लीबासमे चोदनेका मन करता हे.. जी चाहता हे तुजे आजही बच्चा देदु..

लता : (सरमाते हसते आंओमे देखते धीरेसे) नही लखन.. इतनी जल्दी क्या हे..? हम तीन चार सालके बाद आरामसे बच्चा करेगेनां.. तबतक हम मोज मस्ती करते रहेगे.. क्या कहेते हो..? में अभी बच्चा नही चाहती..

लखन : (आंखोमे देखते) फेमीली प्लानींग..? चल तु जो कहेगी वही करेगे.. लता तु आज वाकइ मस्त दीखती हे.. मेरा तो आज सुबह तुजे देखा तबही खडा हो गयाथा.. जीतो चाहता था तुजे दोपहरको ही रुममे बुलाकर चोदलु.. ओर तु हेकी सामनेभी नही देखती थी..

लता : (सरमाते धीरेसे) मुजे बहुत सरम आ रहीथी.. लखन अबतो हमारी सादी होगइ हे.. अब हम बीना कीसी डरसे चुदाइ कर सकते हे.. अब हम दिनमेभी दोपहोरको आराम करने आये तब करेगे.. आप चोद लेना मुजे.. अब मे आपको कभी मना नही करुगी.. ओर मुजेभीतो ये आपका लंड चाहीये.. पता हे मे इनके बीना कीतनी तडपी हु.. अब मे अपनी सारी कशर पुरी कर लुगी.. अब टाइम खराब मत करो.. इसे अंदर डालदो..

दोनोही अपनी सुहागरातमे चुदाइकी खुलकर चर्चा कर रहेते.. तब धिरेन बेडपे बेठकर पुनमके घुंघटको हटाता हे.. तब पुनम अपनी नजरे जुकाते अ‍ैसेही बेठी सरमा रहीथी.. ओर उनके गालोपे लाली छा गइ.. तो चहेरेपे सरमके मारे हल्कीसी मुस्कान फैल गइ.. ओर धिरेनने उनके दोनो गालको सहेलाते पुनमके चहेरेको थामलीया.. पुनम तबभी अपनी नजर जुकाये बैठी मुस्कराती रही.. ओर धिरेनने धीरेसे आगे मुह करते पुनमके होठोपे अपने होठ रख दीये..

तब पुनम सरसे पांव तक हील गइ.. ओर उसने जोरोसे अपनी आंख भीचली.. तभी धिरेनने अपनी जेबसे अ‍ेक नया मोबाइल फोन नीकालकर पुनमको दे दीया.. तो पुनम उसे लेकर बैठी रही.. धिरेन सहेरसे दो फोनका सेट लेकर आयाथा.. अ‍ेक पुनमके लीये.. ओर दुसरा.. नीलमके लीये.. उसने नीलमके फोनमे अ‍ेक नया सीम लगाकर अपना मोबाइल नंबर डालकर सेव करलीया था..

फीर फोनको बंध करके वापस बोक्षमे रखकर अपनी बेगमे छुपा लीया.. ताकी सहेरमे जाते मौका मीलतेही वो फोन नीलमको दे सके.. तभी धिरेनने अपनी जेबसे अ‍ेक पेंडल वाला सोनेका चेइन नीकालकर पुनमके गलेमे डाल दीया तो पुनम उसे हाथमे लेकर देखने लगी.. फीर फोन नीकालकरभी देखलीया तो बहुतही खुस होगइ.. फीर नजर उठाके धिरेनकी ओर मुस्कुराते देखा..

पुनम : (धीरेसे सरमाते) धिरेन.. ये बहुतही सुदर हे.. थेन्क्स.. फोन भी मस्त हे..

धिरेन : पुनो.. आज तुम परी लग रही हो.. क्या मस्त दीखती हो.. मुजे तो अभीभी यकीन नही हो रहा.. की तुम जैसी सुंदर लडकी मेरी जींदगीमे मेरी पत्नी बनकर आइहो.. मे तो तुजे पाकर धन्य होगया.. बस सीर्फ अ‍ेकही अफसोस रेह गया.. क्या तुम मुजे सचमे प्यार करती हो..?

पुनम : (सारा माजरा समज गइ) क्यु..? धिरेन आप मुजे अ‍ैसा क्यु पुछ रहे हे..? क्या मुजसे कोइ गलती हो गइ..? अफकोर्स मे आपको प्यार करती हु.. आपने अ‍ैसा क्यु पुछा..?

धिरेन : (सरमाते हसते) नही पुनो.. मेतो बस अ‍ैसेही.. क्युकी मेरी कुछ फेन्टासी थी.. जो तुमने पुरी नही की.. इसीलीये तुमसे पुछ लीया.. अगर मेरा अ‍ैसे पुछनेमे तुमको बुरा लगाहो तो सोरी..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) धिरेन मुजे पता हे आपकी फेन्टासीके बारेमे.. लेकीन मेरी भी कुछ मजबुरीया थी.. मे अपना कौमार्य हमारी सुहागरातमेही मेरे पतीको सोंपना चाहती थी.. मे वो सब हमारी सादीसे पहेले नही करना चाहती थी.. जब अ‍ेक बार करलीया तो फीर उनकी आदत पड जाती.. फीर इसके बीना हम दोनोही नही रेह सकते.. तो फीर मे कहा जाती..? धिरेन आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे अफसोस हेकी मेने आपकी फेन्टासी पुरी नही की.. लेकीन अब आप अपनी सारी कशर पुरी करलेना.. अबतो मे आपकी बीवी हु..

धिरेन : (हसते) पुनो कोइ बात नही.. पुनो.. आइ लव यु.. कल हम हनीमुनपे जा रहे हे.. जीजुने टुर अ‍ेरेन्ज करदी हे..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) धिरेन.. पता हे मुजे.. मंजुभाभीने मुजसे कहाथा.. अब मे आपकी अर्धागींनी हु.. आप मुजे जहा लेजाना चाहते हो लेजाइये.. लेकीन इसके बारेमे मुजे आपसे कुछ बात करनी हे.. क्या मे अभी आपको बता सकती हु..?

धिरेन : हां पुनो.. तेरे दिलमे कोइ बात मत रखना.. जोभी हो कहेदे.. अब हमारे बीच कैसा पर्दा..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) धिरेन.. आप वो अभी सबको सहेरमे जानेकी बात कर रहे थे.. क्या हम दोनो सहेरमे रहेने जा रहे हे..? मेने सुनाहे आप वहा अ‍ेक मकान लेनेकी बात कर रहे थे..

धिरेन : हां पुनो.. लेकीन मम्मीने वहा तुजे लेजानेको मना करदीया हे.. क्युकी यहा हमारी खेतीबाडी ओर हमारे पुर्खोका मकान हे.. तो मम्मी चाहती हे तुम वही रहो.. ओर सब सम्हाललो.. ओर मे अप डाउन करता रहु..

पुनम : (हसते) धिरेन.. तो फीर सहेरमे मकान क्यु लेना हे..? क्या वो लेना जरुरी हे..?

धिरेन : पुनो.. अब बेंकमे मेरा काम बहुत बढ गया हे.. मे वहा क्लास वन ओफीसर हु.. तो हप्तेमे दो तीन दिन रातके ८ से ९ बज जाते हे.. तो मुजे वही होटेलमे रुकना पडता हे.. ओर मम्मीने स्कुटर लेकर रातमे आने जानेको मना कीया हे तो मे क्या करु..? इसीलीये सोच रहाथाकी बेंक मुजे लोन दे रहा हे.. तो मे अ‍ेक हमारा छोटासा मकान लेलु.. ताकी कभी देर हो जायेतो वही सोजाउ.. क्या कहेती हो तुम..?

पुनम : (मुस्कुराते) अगर यही रीजन हेतो लेलो.. देखना वहा कोइ मेरी सोतनको मत लेआना.. हें..हें..हें.. अगर लेआना होतो मुजे पुछकर लेआना.. आपतो जानते हे.. भाइनेभी कीतनी सादी करली हे.. तो मे आपको मना कैसे कर सकती हु.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) वेरी फनी.. तुम मजाक बहुत अच्छा करती हो.. अ‍ैसी कोइ बात नही हे.. क्या अब हमे सीर्फ बातेही करनी हे..?

पुनम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते नजरे जुकाते धीरेसे हसते) मुने क्या पता..?

धिरेन : (पुनमका अ‍ेक गाल सहेलाते) पुनो.. सचमे आज तुम बहुतही खुबसुरत लग रही हो.. मुजेतो अभीभी यकीन नही हो रहा.. की तुम जैसी खुबसुरत लडकी मेरी बीवी हे.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच..

पुनम : (आंख बंध करते) आइ लव यु टु धिरेन..

कहेते धिरेन धिरेसे पुनमके होठोपे होठ रख देता हे तब पुनम सीहरके कांपने लगी.. ओर धिरेनके होठ चुमते उनका साथ देने लगी.. वो जानतीथी की धिरेनके साथ मीलन करना जरुरी हे.. मंजुने उसे सब समजा दीया था.. यही सोचते पुनमभी सब भुलकर मदहोस होने लगी.. तभी उसे अपने बुब्सपे धिरेनका हाथ उनके बुब्सको मसलते महेसुस हुआ.. तो पुनम कांपने लगी ओर उसने जोरोसे धिरेनको अपनी बाहोमे भीचलीया..

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तब पुनमकी चुत पखडीओकी तराह फडफडाने लगी.. उनमे तरल पदार्थका रीसाव होने लगा.. ओर पुनम आंख बंध करके मदहोसीमे धिरेनको बाहोमे लेके उनके अगले पलका इन्तजार करने लगी.. तभी उसे अपने गलेपे धिरेनका होठ गलेको चुमते महेसुस हुआ.. ओर पुनम मदहोसीमे आहे भरते धीरेसे सीसकारीया करने लगी.. ओर गलेको चुमते धिरेन पुनमकी सारीको नीकालने लगा..

तब पुनम अ‍ैसेही धिरेनको बाहोमे लेके बैठी रही.. ओर धिरेनने धीरे धिरे करते पुनमके सभी कपडे नीकाल दीये.. तब पुनम सीर्फ टु पीसमे रेह गइ ओर धिरेन बेडसे उपरकर अपने कपडे नीकालने लगा.. तब पुनम तीरछी नजरोसे धिरेनके पेन्टकी ओर देखने लगी.. वो धिरेनका लंड देखना चाहती थी.. तभी धिरेनने अपना नीकर नीकाला तो उनका लंड तनके हवामे जटके मारते लहेराने लगा.. तब पुनम उसे दखतेही सरमा गइ..

ओर मनमे हसने लगी.. क्युकी धिरेनका लंड देवायतसे आधा ओर पतला लग रहा था.. वो अपने भाइ देवायतका तगडा ओर मोटा लंड कइ बार अपनी चुतमे लेकर कइ राते रंगीन कर चुकीथी.. तो धिरेनका लंड उनकी चुतमे उसे महेसुस होगा की नही.. यही सोचते पुनम मनमे हसने लगी.. उसे अपने कुआंरेपनका नाटक करते बहुत मजा आ रहाथा.. वो धिरेनको ये बात जताने बीलकुल कामथाब होगइ की आज वो पहेली बारही चुदवाने जा रही हे..

तभी धिरेन बेडपे आगया.. वो पुनमको धीरेसे बेडपे पीठके बल सुला देता हे.. ओर पुनमके बाजुमे उनपे जुकते लेट गया.. पुनम उनसे नजरे चुराने लगी.. तभी धिरेन उनके चहेरेको थामते उनको होठोपे कीस करने लगा तब पुनमभी उनका साथ देने लगी.. तभी धिरेन पुनमकी ब्रा मे हाथ डालके बुब्स दबाते मसलने लगा.. तो पुनम सरमा गइ.. ओर सोचने लगी..

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पुनम : (मनमे) भाइका बडा ओर मोटा लंड मे अपनी चुतमे ले चुकी हु.. ओर धिरेनकी ये नुनी अंदर जायेगीतो मुजेतो पताभी नही चलेगा.. अगर मेने कोइ रीअ‍ेक्शन नही दियातो धिरेनको मुजपे सक होगा.. तो मुजे कुछ दर्द होनेका नाटक करना पडेगा.. वरना इनको सक होजायेगा की मे पहेले से ही चुदी हुइ हु..

यही सब सोचते पुनम धिरेनका साथ उनके होठ चुमते देने लगी.. ताकी धिरेनको उनपे कोइ संका ना हो.. धिरेन पुनमके होठ चुमते उनको ब्राको नीकाल देता हे.. ओर उनके बुब्सको मुहमे लेकर चुमने लगता हे.. तब पुनमभी उतेजीत होने लगी.. ओर सीसकारीया करते धिरेनका साथ देने लगी.. तब बाजुके रुममे लखनपे वायग्राका असर होने लगा ओर वोभी लताकी सारीको उनकी कमर तक चडाते उनके उपर चडकर होठ चुम रहाथा..
 
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