Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 23 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १४९

कहातो मुना खुस होते हसते हुअ‍े वहासे चला गया.. ओर देवायतभी मुस्कुराते वापस आके भानु ओर रामुकाकाके पास बैठ गया.. तो भानु देवायतकी ओर देखते हस रहाथा.. तो देवायतको भानुसे रामुकाकाके सामने बात करना उचीत नही लगा.. ओर वो इसारोसे भानुको अंदर आनेको कहेते गोडाउनकी ओफीसमे चला गया.. तो उनके पीछे भानुभी उठकर आगया.. ओर देवायतके सामने बैठ गया.. तब....अब आगे

देवायत : (जोरोसे हसते) क्युरे कुते.. बहार बडाही हस रहाथा..? साले तेरीही बात हो रहीथी.. हें..हें..हें..

भानु : (आस्चर्यसे हसते) मेरे बारेमे..? भाइ.. क्या बाते हो रहीथी..? वो कीस लीये इधर आया था..?

देवायत : (हसते भानुके सामने थोठा जुठ बोलते) सुन.. वो गांवकी अ‍ेक खबर देने आयाथा.. भानु.. अब तुम उनकी मांसे दुर ही रहेना.. तुम दोनोके बारेमे उनकोभी सब पता चल गया हे.. (थोडा जुठ बोलते) मुजे तेरी दोनो बीवीको मीलनेके लीये केह रहाथा.. तो अभी मेने भानुको मे समजा दुगा कहेकर उसे रोक दीया हे.. तो बी केरफुल.. कही अ‍ैसा नाहोकी अ‍ेक बीवीके साथ साथ दुसरी बीवीसे भी हाथ धोना पडे.. अभी अभी बडी मुस्कीलसे हमने भावुको मनाया हे.. कही अ‍ैसा नाहो की रमाभाभी भी तुमसे नाराज होजाये..

भानु : (थोडा परेसान होते) अरे नही नही.. मुजे क्या पागल कुतेने काटा हे..? जो अब उसे मीलु.. भाइ उसे समजा देना मे अब उनकी मांसे कभी नही मीलुगा.. वरना तो मेरा घर ही बीखर जायेगा..

देवायत : (मुस्कुराते) भानु.. अभी तु कोइ टेन्शन मतले.. मेने उसे सब समजा दीया हे.. उसेभी तो उनकी बहेनसे सादी करनी हे.. तु समज गयानां.. हें..हें..हें.. ओर सुन.. इसके लीये उनकी मां मान भी गइ हे..

भानु : (हसते) भाइ.. भाडमे जाये वो लोग.. मुजे अब उनसे कोइ लेना देना नही.. हें..हें..हें..

देवायत : (जोरोसे हसते) हंम.. अब आया लाइनपे.. हें..हें..हें.. (थोडा सीरीयस होते) सुन भानु.. अब तुम दो तीन दिन कही मत जाना.. इधर ही रहेना.. सायद अब हमे हमारे ससुरके घरपे कभी भी जाना पडे.. तु समज गयानां..?

भानु : (थोडा सीरीयस होते) भाइ.. क्या अभी दोनोभाभी ओर भावु उधरही हेनां..? मुजे पता हे.. भाभीको इसके बारेमे सबकुछ पता चल जाता हे.. तो क्या अंकलकी तबीयत ज्यादा खराब हे..?

देवायत : नही भानु.. इस बारेमें मंजुने कुछ कहातो नही.. लेकीन उनकी सब बाते ओर उनके सब व्यवहारकी वजहसे मुजे लगाकी अब उनका टाइम खत्म होगया हे.. मंजुने सृती ओर भुमीआंटीको भी इधर बुलालीया हे.. सायद दो पहोरके बाद वोभी इधर आजायेगी.. तो मुजे भुमी आंटीको लेकर वहा जाना पडेगा.. तो तुम इधर सब सम्हाल लेना..

भानु : ठीक हे भाइ.. मे इधर ही हु.. आप यहाकी टेन्शान मतलो.. वहा सब नीपटा लेना.. भाइ.. मुजे आपसे कुछ बात करनी हे.. जो आज सुबह लताने मुजसे कही..

देवायत : (मुस्कुराते) हां तो बोलना.. कमीने इसमे इतना गभरा क्यु रहा हे.. बोल क्या बात हे..

भानु : भाइ.. आज सुबह चाइ नास्ता कर रहेथे तब लताने मुजसे अ‍ेक बात कही.. हमारी नीलुके बारेमे..

देवायत : (थोडा सीरीयस होते) नीलुके बारेमे..? कुछ हुआ हे क्या..? वो वहा ठीक तो हेनां..?

भानु : (मुस्कुराते जटसे) अरे नही नही.. अ‍ैसी कोइ गभराने वाली बात नही हे.. वो वहा बीलकुल ठीक हे..

देवायत : (सामने देखते) तो फीर..? ओर क्या बात हे..? क्या कहे रही थी लता..?

भानु : (सरमाते) भाइ.. वो केह रहीथी की अब दो तीन दिनमे वो ओर हमारा लखन सहेरमे रहेने जा रहे हे.. तो वो नीलुको अपने साथ हमारे बंगलोपे रखना चाहती हे.. कहेती थी नीलु वहीसे स्कुस चली जायेगी..

देवायत : (खुसीसे मुस्कुराते) अरे हां.. तो लता सहीतो केह रही हे.. ये बात हमारे दिमागमे क्यु नही आइ..? हमारी लता बहुतही समजदार हे.. उसने सही फैसला लीया हे.. भानु.. हम नीलुको उनके साथही रखेगे..

भानु : (मुस्कुराते) थेन्क्स भाइ..

देवायत : (हसते) कमीने.. अ‍ेक जापट लगाउगानां..? मुजे थेन्क्स कहेता हे.. जा इसके लीये हमारी लताको थेन्क्स कहेना.. वो खुस होजायेगी.. भानु.. थेन्क्स तो मुजे कहेना चाहीये.. हमारी लता लखनको देनेके लीये.. हमारी लता बहुतही प्यारी ओर समजदार हे.. हम इसे हमारे खानदानकी बहु बनाकर धन्य होगये..

भानु : (इमोस्नल होते) बस भाइ.. ओर कुछ मत कहेना.. अभी घरपे भी आप सब लोगोकी बाते करते थकती ही नही.. रमा केह रहीथी.. सारा दिन आप लोगोकी बाते ही करती रहेती हे.. हें..हें..हें..

दोनोही बाते करते उधर बैठे रहे.. तबतक लखनभी पुनम ओर दयाको लेकर वापस हवेलीपे आगया था.. आते वक्त लखनने दयाकी खुब टांग खीचाइ की.. वो उसे भाभी भाभी कहेते छेड रहाथा ओर पुनम भी पुरे रास्ते हसती रही.. तो दया बहुतही सरमा रहीथी.. तो दयाभी रजीयाको लेकर लखनको खुब चीडा रहीथी.. ओर तीनो मस्ती मजाक करते घरपे आगये.. तभी लखनके फोनकी रींग बजने लगी.. देखातो लताका फोन था.. ओर वो फोन लेकर जटसे उपरकी मंजीलपे अपने रुममे चला गया.. ओर उनसे बात करने लगा..

लखन : (धीरसे हसते) हाइ डार्लींग.. बस अ‍ेकही दिनमे हमारी याद आगइ..? हें..हें..हें..

लता : (सरमाते धीरेसे फोनपे) हंम.. जानु.. यहा आपके बीना अच्छा नही लगता.. क्या मे वापस आजाउ..?

लखन : (हसते) अरे.. अभी कलही तो गइहो.. सब क्या सोचेगे..? लता.. सीर्फ दो तीन दिनकी तो बात हे..

लता : (सरमाते धीरेसे) जानु.. मुजे आपसे कुछ बात करनी हे.. मेने आपको पुछे बगैरही भाभीसे बात करली हे.. कही आप मुजसे नाराज तो नही होगेनां..? हंम..?

लखन : (थोडा सीरीयस होकर) कीस बारेमे..? हंम..? लता.. तुम कीस बात के बारेमे केह रही हो..?

लता : (धीरेसे सरमाते) जानु.. मेने भाभीसे हमारी नीलुको सहेरमे हमारे साथ रखनेकी बात कही हे.. क्या हेना.. वहासे उनका स्कुलभी जनदीक पडेगा.. ओर होस्टेलका खर्चाभी नही होगा.. क्या मेने सही कीया हेनां..? सोरी जानु.. मेने आप सबको पुछे बगैरही भाभीको हां केह दीया हे.. आप अ‍ेक बार बडेभैयासे बात करलेना..

लखन : (मनमे लडु फुटने लगे.. बहुत खुस होते) अरे डार्लींग.. तो इसमे इतनी गभराती क्यु हे..? वोतो तुमभी भाइसे बात कर सकती हो.. नीलु पराइ थोडीना हे.. वोभी तो हमारी साली ही हे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते मुस्कुराते) कीतने कमीनेहो आप.. मत भुलो.. वो आपकी साली नही भतीजी हे.. हें..हें..हें.. लेकीन वो कमीनी भीतो आपको जीजु कहेती हे.. जानु.. आप अ‍ेक बार भाइसे बात करलोनां.. अब सादीके बाद उनसे बात करनेमे मुजे बहुत सरम आती हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) अरे.. इसमे सरमानेकी क्या बात हे..? बडे भैयाहे वो हमारे.. ओर हमारे घरमे अ‍ैसी कोइ पाबंधी नही हे.. सब खुले विचारोके हे.. तो तुम भाइके साथभी बीन्दास्त बाते कीया कर.. हमारी सादीसे पहेले तो तुम उनसे बहुत बाते ओर उनकी मस्तीया कीया करती थी.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) जानु.. तबकी बात ओर थी.. अबवो मेरे जेठजी हे.. हें..हें..हें.. ठीक हे.. नीलुके बारेमे मेही उनसे बात करलुगी.. उनका नंबर हे मेरे पास.. ओर सुनो.. रमाभाभी केह रहीथी आप उनसे कुछ नाराज हे..? आप उनसे बात क्यु नही करते..?

लखन : (थोडा गभराते) नहीतो..? क्यु..? तुजे अ‍ैसा क्यु लगा..? इस बारेमे भाभी कुछ केह रहीथी..?

लता : (सरमाते हसते) हंम.. जब आप मुजे छोडने आये तब आपने उनसे बात नहीकी तो मुजे केह रहीथी.. की हमारे जमाइ मुजसे कुछ नारनज लग रहे हे.. मुजसे बात तक नहीकी.. जानु.. आप अ‍ेक बार उनसे बात करलेना.. क्या उनका नंबर आपके पास हेनां..? अगर नही हे तो मे अभी उनका नंबर सेन्ड कर देती हु..

लखन : (थोडा परेसानीमे) लता.. अब उनसे मे क्या बात करु..? मेरे पास उनका नंबर भी नही.. तुम नंबर सेन्ड करदो मे बादमे उनसे बात करलुगा.. वरना उनको मेरा नंबर दे देना.. ताकी वोभी मुजसे बात कर सके..

लता : (सरमाते धीरेसे) जानु.. मुजसे नाराज तो नही..? हंम..? अगर आप कहोगेतो हम नीलुको होस्टेलमे ही रखेगे.. वरना आपतो सब जानते हो.. वो धिरेनजीजु भी सहेरमे नोकरी कर रहे हे.. तो दोनोको मीलनेका पुरा मौका मील जायेगा.. ओर मे नही चाहती नीलुका उनके साथ कोइ रीलेशन हो.. आप समज गयेनां..?

लखन : (खुस होते) अरे तुम नीलुकी चीन्ता मत करो.. उसे हम हमारे साथही रखेगे.. बस तुम अ‍ेक बार इस बारेमे भाइसे बात करलेना.. वरना मेही करलुगा.. वो बहुतही कमीना इन्सान हे.. पता नही भाइने क्या देखकर पुनो दीदीकी सादी उनसे करदी.. वरना वोतो मुजे पसंद भी नही.. देखा नही उस दिन कारमे वो नीलुके साथ क्या कर रहाथा..?

लता : (सरमाते धीरेसे) जानु.. अ‍ेक बातका तो आपको पता ही नही हे.. हमारे सादीवाले दिन अ‍ेकबार दोनोही उपरकी मंजीलमे अकेले मील गये थे.. उसी दिन सबकुछ होजाता.. वो दोनो मीलन करने ही वालेथे.. ओर अ‍ेन्ड वक्तपे भावुदीदी वहा पहोंच गइ.. ओर नीलुको बचालीया.. वरना वो कमीना उसी दिन उनका काम तमाम करदेता.. कमीना बहुतही ठरकी हे.. बस.. इसीलीये हमे नीलुकी चीन्ता हो रही हे..

लखन : (थोडा सोक्ट होते) क्या..? क्या केह रही हो तुम..? क्या ये सब तुजे भावना भाभीने कहा..?

लता : (सरमाते धीरेसे) हंम.. वो भाभी आपके लीये होगी.. मेरी तो बडी दीदी हे.. मे उसे अब दीदीही कहेती हु.. जानु उसीने मुजे सब बताया.. क्युकी मंजुभाभीको सब पता चल जाता हे तो उन्होने ही फौरन भावना दीदीको उपर भेज दीया.. ओर हमारी नीलमको बचालीया.. जानु.. हम नीलुको हमारे साथही रखेगे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. डार्लींग.. तुम फीकर मत करो.. हम अ‍ैसाही करेगे.. बस अ‍ेक बार हम सहेर चले जाये.. फीर उन कुतेके पीलेको तो मे देख ही लुगा.. सुन.. मे अभी दीदीको इधर लेकर आया हु..

लता : (खुस होते हसते) क्या पुनोदीदी उधर आइ हे..? तो जानु मुजेभी यहासे लेजाओनां.. उनके साथ बहुत मजा आता हे.. मुजे उनसे मीलना हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) नही.. वो भी अपने मायकेमे आइ हे.. तो तुम भी अपने मायकेमे ही रहो.. हें..हें..हें..

लता : (जोरोसे हसते) आप बहुत कमीने हो.. ठीक हे मे उनसे फोनपे ही बात करलुगी.. आप अ‍ेक बार रमा भाभीसे बात कर लेना.. चलो मे फोन रखती हु.. लगता हे रमाभाभी इधर ही आ रही हे.. क्या उनसे आपकी बात करवाउ..?

लखन : (जटसे) अरे नही नही.. मे बादमे बात करलुगा.. चलो बाय.. मुं..हां.. बुच..बुच.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते फोनपे कीस करते धीरेसे) बुच.. बुच.. बाय..

कहेते लताने फोनपेही कीस करते फोन काट दीया.. तभी उनके रुममे रमा आगइ.. तो लताके हाथोमे फोन देखकर रमा समज गइकी लता उनके पती लखनके साथ अकेलेमे बात कर रही थी.. तो वो अपने दोनो हाथ पोछते मुस्कुराते लताके पास आकर बेडपे बैठ गइ.. ओर लताकी ओर सरारतसे देखती रही.. तो लताभी उनकी ओर देखते सरमाकर हसने लगी.. तब रमाने पुछ ही लीया..
 
रमा : (हसते) हंम.. तो अपने पतीसे बाते हो रहीथी.. हें..हें..हें.. क्या केह रहेहे हमारे जमाइ.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) भाभी कुछ नही.. बस थोडी नीलुके बारेमे बात हुइ.. ओर आपके बारेमे भी पुछ लीया.. अभी आपका नंबर उसे सेन्ड करदेती हु.. वो बादमे आपसे बात करलेगे.. या फीर आपही उनसे फोनपे बात करलेना.. क्या उनका नंबर आपके पास हेनां..?

रमा : (सरमाते हसते) हंम.. हे मेरे पास.. अब आपका कभी भी काम हो तो पहेले हमे उनकोही बताना पडेगानां..? हें..हें..हें.. तो आपके भाइके पाससे उनका नंबर ले लीया हे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. तो फीर आपही उनसे बात करलेना.. वो बहुत सरर्मीले हे.. सायद आपको फोन ना करे.. तो आपही उनको फोन करके बात करलेना.. वो केह रहेथे मे कोइ नाराज नही हु..

रमा : (मुस्कुराते) अरे आप इनकी टेन्शन मतलो.. मेतो बस अ‍ैसे ही केह रहीथी.. आप लखनजीको कहीयेनां खाना इधरही आके खालीया करे.. हें..हें..हें.. उनको जोभी पसंदहे मे बना दुगी..

लता : (सरमाते हसते) भाभी.. वो नही आयेगे.. वहा अभी पुनोदीदी आइ हे.. दोनो भाइ बहेनके बीच बहुत पटती हे.. वहा रश्मीभाभी नीशाभाभी वंदना दीदी सब अच्छी सहेली हे.. सब मीलके खुब धमाल करते हे.. वहा बहुत मजा आता हे.. तो मे उनसे केह रहीथी की मुजेभी उधर आना हे..

रमा : (हसते) अच्छा.. तभी मेरी प्यारी ननंदको इधर मजा नही आता.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) अरे नही भाभी.. अ‍ैसी कोइ बात नही हे.. ये आपको कीसने कहा..? की मुजे यहा मजा नही आता.. भला मायकेमे कीसको मजा नही आता.. भाभी.. अ‍ेक बात कहु..? क्या अब आपके मायकमे कोइ हे की नही..?

रमा : (आंख गीली करते) नही दीदी.. अ‍ेक माता पीता थे.. वोतो गुजर गये.. भाइ थातो वोभी दारु पीकर कही पडा रहेता था.. तो अ‍ेक दिन वोभी चल बसा.. बस भाभी थी.. वोतो भाइ था तबही कीसीके साथ भाग गइ थी.. बाकी रीस्तेदारोका कुछ पता नही.. तो वहा कीसके पास जाउ..? जब मेरी छोटी उमरमे ब्याह हुआ.. तबही हमारी पोजीसन बहुत खराब थी.. यही समजलो मुजे पैसोके बदलेमे आपकी नानीको बेच दीया.. (कहेते आंसु बहाने लगी)

लता : (फौरन खडी होकर हग करते) भाभी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे आपको ये नही पुछना चाहीये था.. फीकर मत करो.. आपको जबभी मायके जानेका मन करे आप मेरे यहा चली आना.. अबतो वहा सहेरमे हम अकेले ही रहेगे.. ओर नीलुकी चीन्ता भी मत करना.. मेने अभी लखनसे बात करली हे.. वोभी नीलुको हमारे साथ रखनेको राजी हे.. कहेतेथे नीलु हमारे घरकी ही लडकी हे.. तो होस्टेलमे थोडीना रहेगी.. हें..हें..हें..

रमा : (मुस्कुराते अपने आंसु पोछते) दीदी.. आप जैसी ननंद ओर लखनजी जैसे बहेनोइ हे तो मुजे नीलुकी क्या चीन्ता करनी..? मेनेतो नीलुको कबसे आपको सोंप दीया हे.. अब उनका जोभी करना हे आपही दोनोको करना हे.. हमारे लखनजी कीतने अच्छे हे.. बीलकुल अपने बडे भाइपे गये हे.. हें..हें..हें.. दीदी.. अ‍ेक बात पुछु..? लगता हे वो आपको बहुत प्यार करते हे.. बीस्तरपे आपको थका देते होगे.. हें..हें..हें..

लता : (बहुतही सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) भाभी.. प्लीज.. ये आप क्या केह रही हे..? भला अ‍ैसा कोइ पुछता हे क्या..? आपको सरमभी नही आती हें..हें..हें..

रमा : (हसते धीरेसे पास बैठते) अरे इनमे सरमाना क्या..? भाभी ननंदके बीच अ‍ैसी बात तो होती ही रहेती हे.. बताइअ‍ेना.. मे कहा कीसीको कहेने वाली हु.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते धीरेसे) हंम.. वो बहुत प्यार करते हे.. आपने कहा वैसे ही.. वाकइ मुजे थका देते हे.. क्या भाइ आपको अ‍ैसे प्यार नही करते..? हंम..? बताइअ‍ेना.. हें..हें..हें..

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रमा : (गहेरी सांस लेते) नही दीदी.. बुरा मत मानना.. सच कहु..? अब आपके भाइमे पहेले वाला जोस नही रहा.. पहेले तो वोभी मुजे थका देते थे.. वो वहा आतेथे तब हम दोनो पुरी रात प्यार करते थे.. वोभी बीना गोली खाये.. अब सीर्फ अ‍ेक या दो बारही कर पाते हे.. ओर कभी कभी मुजे अ‍ैसेही प्यासी रख देते हे..

लता : (सरमाते हसते) भाभी.. अ‍ेक बात कहु..? अबतो सहेरमे अ‍ैसी कइ गोलीया मीलती हे.. आप भाइको कहीयेना कोइ अच्छी गोली लेकर आये.. इनमे देसी गोलीया अच्छी आती हे..

रमा : (सरमाते धीरेसे हसते) हंम.. लाये हे.. लेकीन मे उसे अब हप्तेमे अ‍ेक या दो बार ही देती हु.. वरना मुजे सुबह चलने लायक नही रहेने देते.. हें..हें..हें.. दीदी.. मेने सुना हे.. अब गांवमे बहुत बडा बदलाव होने लगा हे.. सब कोइभी रीस्तोमे सादीया कर सकेगे.. अ‍ैसा आपके भाइ अ‍ेक बार केह रहेथे.. क्या ये सब सच हे..? आपको इसके बारेमे कुछ पता हे..?

लता : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. अ‍ेक दो बार मंजुभाभी चंदाभाभी ओर हमारी चारुभाभी तीनो बाते कर रही थी तब मेने सुनाथा.. ये बात सच हे.. ओर हमारी मंजुभाभीको इन सब बातोका पहेलसे ही पता चल जाता हे.. कहेतीथी सायद अब वो दिन दुर नही हे.. जो हमे अ‍ैसे रीस्ते दिखनेको मीलेगे.. अभी हमारे गांवमे अ‍ैसे कइ रीस्ते पनप रहे हे.. ज्यादातर लखनके दोस्त ही हे.. जो उनका अपनी ही बहेनोके साथ चकर हे.. हें..हें..हें..

रमा : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? खुदकी बहेनोके साथ..? तो उनके घरवालोको पता नही चलता..?

लता : (मुस्कुराते) नही भाभी.. दोनोही भाइ बहेन हे तो घरमे उनपे कौन सक करेगा..? उल्टा दोनो तो बहुत ही सेइफ रहेते हे.. ओर अ‍ेकही घरमे साथ रहेते हे तो रातको मीलनेमे भी आसानी रहेती हे.. हें..हें..हें..

रमा : (हसते धीरेसे) अरे हां.. अ‍ेक बार आपके भाइभी वोही केह रहेथे.. क्या आजके जमानेमे अ‍ैसा हो सकता हे..? मुजेतो अभीभी यकीन ही नही हो रहा..

लता : (सरमाते धीरेसे) हां भाभी.. ये सब सच हे.. भाइको सब पता होगा.. उनको मेरे जठजीने कहा होगा..

रमा : (हसते) दीदी.. तबतो आनेवाले दिनोमे यहा कोइ रीस्ताही नही बचेगा.. हें..हें..हें.. जो जीसे चाहे उनके साथ सादी कर सकते हे.. भाइ बहेन, बुआ भतीजा.. चाची भतीजा ओर हमारी तराह मामी भांजाभी हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) भाभी.. सीर्फ इतनाही नही.. अगर बडी अम्मा या चाची बुआ.. यहा तक की कोइ तो अपनी विधवा मां से भी सादी करलेगा.. बीलकुल उन हिमाचलकी तराह.. वहा अभी ये सब हो रहा हे.. वहा आजभी कोइ विधवा या त्यक्ता नही हे.. सभी सुहागन हे.. वहाके राजाने ये नइ परंपरा सुरु कीथी..

रमा : (आस्चर्यसे देखते) दीदी मेने भी अ‍ेक बार कहीसे सुनाथा.. क्या ये सब सच हे..?

लता : (सरमाते मुस्कुराते) हां भाभी.. सब सच हे.. ओर आपको अ‍ेक राजकी बात बताउ..? आपको पता हे अब हमारे सब गांवमे अ‍ैसा सब क्यु हो रहा हे..? तो सुनीये.. पुनोदीदी केह रहीथी.. की वोही हिमाचलके राजा अब दुबारा हमारे खानदानमे जन्म लेकर आने वाला हे.. तो सब उसीके कारण हो रहा हे.. हें..हें..हें..

रमा : (आस्चर्यसे हसते) क्या..? वो राजा खुद आपके खानदानमे..? आइमीन.. आपके यहा जन्म लेगा..? दीदी कही वो आपकी कोखसे तो नही आयेगा.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते मुका मारते) भाभी.. आप बहुतही सरारती हो.. हें..हें..हें.. मुजे नही पता..

रमा : (खडी होते) हंम.. दीदी अब चलीये बहुत बाते करली.. मुजे खाना भी बनाना हे.. वरना टाइमपे खाना नही बनातो माजी चीलायेगी.. हें..हें..हें.. आप आराम कीजीये.. मे चली कीचनमे..

लता : (खडी होते) अरे नही भाभी.. मेभी आ रहीहु आपकी मदद करने.. ओर हां.. आप अ‍ेक बार उनसे बात कर लीजीयेगा.. ताकी आपको भी तसली मील जाये.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते धीरेसे) हंम.. ठीक हे.. मे लखनजीसे बादमे बात करलुगी.. अभीतो चलो.. वो भावेशकोभी भुख लगी होगी.. उनकोभी कुछ खीलादु.. अबतो मेरे साथभी अच्छेसे घुलमील गया हे.. आपने उनकी कीतनी आदते बीगाडी हे.. हें..हें..हें..

लता : (हसते साथ चलते धीरेसे) मेने..? मेने कौनसी आदत बीगाडी हे..?

रमा : (कीचनमे जाते धीरेसे हसते) दीदी.. अब उनको साथमे सुलाओतो सीधाही हमारे दुधुमे हाथ डालता हे.. ओर उनको दुधुके साथही खेलना होता हे.. बडी मुस्कीलसे मेने उनकी ये आदत छुडवाइ हे.. क्या वो आपके साथभी अ‍ैसा करता था..? हें..हें..हें..

लता : (सरमाते धीरेसे) हंम.. इनको ये आदत भावना दीदी दुध पीलाती थी तबसे ही होगइ थी.. हें..हें..हें..

दोनोही बाते करते कीचनमे खाना बनानेकी तैयारीया करने लगी.. आज रमाने बातो ही बातोमे लतासे लखनके बारेमे काफी कुछ जानलीया.. इस बातकी लताको भनकभी नही लगने दी.. क्युकी आगे जाकर वो नीलमकी सादी लखनसे करवाके नीलमको उस हवेलीकी रानी बनानेका सपना देख रहीथी.. तो बातोही बातोमे लतासे लखनकी स्टेमीनाके बारेमे जानकारीया लेली..

रमाके सातीर दिमागमे नीलमको ओर खुदको लेकर प्लान चलने लगा.. तो वो जानकारीया लेकर देखना चाहती की लखन नीलमको खुस रख पायेगा की नही.. ओर अबतो वोभी लखनकी ओर काफी ढलने लगीथी.. तो हो सकता हे अ‍ेक दिन उनकाभी लखनके साथ रीलेशन होजाये.. ओर इसके लीये रमा लखनके साथ अच्छे रीस्ते बनाये रखना चाहती थी.. तब उनको नही पताथाकी उनके साथ आगे क्या होने वाला हे..
 
तो आज सहेरमे नीलम सुबहसे ही बहुतही रोमांचीत हो रहीथी.. उनको पताथा की आज उसे धिरेन कीसीभी हालमे उनको अपने घर लेकरही जायेगा.. ओर घर जाकर उनके साथ नाजाने क्या क्या करेगा.. यही सोचते वोभी बहुतही अ‍ेक्साइटेड हो रहीथी.. वो सुबह ही अपनी चुतको हेर रीमुवरसे साफ करके नहा धोकर कंपलीट हो चुकी थी.. ओर अ‍ेक बेगमे अपने दो तीन दिनके कपडे रख रही थी.. तभी उनकी रुम पार्टनर दियाभी बहारसे आगइ.. तब..

दिया : (मुस्कुराते) नीलु.. क्या घर जानेकी सब तैयारीया होगइ..? हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) कमीनी तुजे सब पता तो हे.. तो फीर क्यु पुछती हे..? दिया.. क्या तेरा बोयफ्रेन्ड अभी तक नही आया..? हंम..?

दिया : (मुस्कुराते अपने कपडे बेगमे रखते) हंम.. आ रहा हे.. अभी नीचे गइथी मेडमके पास तो उसीका फोन था.. वो अपने मम्मी पापाको ट्रेनमे छोडकर मुजे लेने आ रहा हे.. चल तु अपना खयाल रखना.. ओर सुन.. अगर तेरे जीजु कुछ करे तो करने देना.. गभराना नही.. इनमे कुछ नही होता.. बादमे बहुत मजा आता हे..

नीलम : (सरमाते हांमे गरदन हीलाते) हंम.. दिया.. थेन्क्स.. अगर तुम ना होती तो मे इतनी हिमंत नही करपाती.. चल.. तुजे बेस्ट ओफ लक.. हें..हें..हें..

दिया : (मुस्कुराते हग करते) हंम.. तुजेभी.. अ‍ेन्ड.. अ‍ेडवान्समे कोन्ग्रेच्युलेशन.. अ‍ेक कलीसे फुल बननेके लीये.. हें..हें..हें.. आइ होप अब जब हम मन्डेको मीलेगे तब आसा करती हु.. तु अ‍ेक ओरत होजायेगी..

दोनोही बाते कर रहीथी तब दियाके फोनकी रींग बजी.. तो फोन देखतेही उनके चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर नीलमको हग करके अपने कपडेकी बेग लेकर नीकल गइ.. नीलुको दो पहोरको जानाथा.. लेकीन अभी तब धिरेनका फोन नही आयाथा.. तो वो थोडी परेसान हो रहीथी.. फीर अपनी बेग कंपलीट करके वो दियाने दि हुइ बुक (ये केसी अनुभुती) लेकर पढने बैठ गइ ओर पढने लगी..

तो इधर धिरेनभी बहुतही अ‍ेक्साइटेड होकर बेंकपे आगया.. आतेही अपना सब काम फटाफट नीपटाने लगा.. क्युकी आज सेटरडे की वजहसे बेन्क सीर्फ अ‍ेक बजे तकही खुली रहेने वाली थी.. फीरभी सब काम नीपटाते दो तो बजही जाता.. वैसेभी आज सेटरडेकी वजहसे बेंकमे भीडभी थोडी ज्यादा थी.. तब धिरेनको नीलमको फोन करनेका टाइमही नही मीला.. ओर अ‍ैसेही अ‍ेक बज गया.. ओर चोकीदारने गेइट बंध करदीया.. फीर सभी स्टाफ अपना काम नीपटाते घरकी ओर जाने लगे.. तभी..

मेनेजर : (मुस्कुराते धिरेनके पास सामने बैठते) कहो धिरेन.. कैसी चल रही हे आपकी लाइफ.. कभी भाभीको लेकर घरपे तो आइअ‍े..? हें..हें..हें..

धिरेन (अपना काम खतम करते हसते) जी सर.. आइअ‍े.. अब सब आपपे डीपेन्ड हे.. क्या आपने घरपे हमारी दोनो भाभीओसे बात करली..?

मेनेजर : (मुस्कुराते) जी.. कल रातको डीनरके वक्त बात की.. तो दोनोही रेडी हे.. उसेभी नये बंगलोपे जानेकी जल्दी हे.. हें..हें..हें.. कहेतीथी धिरेनजीको आजही मकान दीखादो.. हें..हें..हें.. तो सामको भाभीको लेकर आइअ‍े.. साथमे बैठकर चाइ पीयेगे.. हें..हें..हें..

धिरेन : (मुस्कुराते) सर.. आपकोतो सब पता हे.. अभी मेरी वाइफतो मायके गइ हे.. ओर मे यहा सहेरमे थोडीना रहेता हु.. तो साम तक कहा घुमुगा.. बस इधर मेरी सालीजी हे.. तो उनकोही पहेले दिखाना हे.. अगर उनको पसंद आगया तो समजो हम सबको पसंद आजायेगा.. हें..हें..हें..अभी तो होस्टेलमे होगी उनको भी लेने जाना हे.. अब आप लंच करके थोडा आराम करलीजीये तबतक मे उनको लेकर आजाउगा..

मेनेजर : (खुस होते हसते) अरे आइअ‍े आइअ‍े.. मे चार बजे रेडी ही रहुगा.. लगता हे आपकाभी मेरी तराह ही हे.. हें..हें..हें.. सालीजीका बहुत खयाल रखते हो.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते धीरेसे) सर.. यही समजलो.. आपही की तराह हे.. हें..हें..हें..

मेनेजर : (जोसमे जोरोसे हसते हाथ मीलाते) हें..हें..हें.. लगता हे.. हमे जल्द ही दुबारा लडु खानेको मीलेगे..

धिरेन : (मुस्कुराते) जी सर.. पका.. हें..हें..हें.. सर.. थोडा सीक्रेट.. प्लीज.. देखना यहा कीसीको पता ना चल जाये.. हें..हें..हें..

मेनेजर : (हसते हाथ थामते) अरे फीकर नोट.. आप नीस्चींत रहीये.. बात सीर्फ मेरे तकही सीमीत रहेगी.. ओर आप लोन बोनकी तो चीन्ता ही मत करना.. मे यहा सब अ‍ेडजेस्ट कर दुगा.. हें..हें..हें..

धिरेन : (मुस्कुराते) थेन्क्स सर.. फीर अ‍ेक नइ कार भी लेनी हे.. वोभी छोटी..

मेनेजर : (मुस्कुराते) ठीक हे धिरेन.. वोभी होजायेगी.. अब आपका काम खतम हो गया हे तो चलो.. आपभी लंच बंच करलो.. वरना मेरे साथही मेरे घर चलो.. वहा दोनो साथमे लंच कर लेगे.. हें..हें..हें..

धिरेन : नही सर.. मेने मेरी सालीको फोनभी नही कीया.. उनको लेकर लंच करने ही जाना हे.. फीर थोडा घुमकर आपके घर आते हे.. बस वो घरको देखले.. अगर उसे पसंद आगया तो बाकी सबतो हम बादमे बैठकर तैय करलेगे..

मेनेजर : (खडा होते) ठीक हे.. तो फीर चलो चलो.. मुजेभी जाना हे.. आप अपनी सालीको लेकर चार बजे आइअ‍े..

कहेते मेनेजर खुस होते चला गया तो धिरेन अपना फोन लेकर नीलमको रींग देने लगा.. तो नीलम अभी भी बुक बढ रही थी.. आज वो नीचे लंच करनेभी नही गइ.. उनको धिरेनपे बहुत गुसा आ रहा था.. तभी उनके फोनकी रींग बजने लगी.. तो नीलमने जुठा गुस्सा करते फोन उठालीया..

नीलम : (जुठे गुस्सेसे) कोन हे आप..? मेने आपको पहेचाना नही.. फोन रख दीजीये..

धिरेन : (मुस्कुराते) अरे सोरी.. सोरी.. नीलु क्या हेना.. आज सेटरडेकी वजहसे बहुत काम था.. तो फोन करनेका टाइम ही नही मीला.. ओर फोन करनेही वालाथा तभी हमारे मेनेजर साहब आकर सामने बैठ गये.. वो अभी अभी गये तो मेने तुरंत फोन करदीया.. सोरी अगेइन..

नीलम : (मुस्कुराते) हंम.. जनाबके पास हमेसा बहाना रेडी ही रहेता हे.. आपको पताभी हे मेने अभी तक लंचभी नही कीया.. पहेले केह देते तो मे लंच करने नीचे ही चली जाती.. अब आप कब आ रहे हो..?

धिरेन : (मुस्कुराते) बस.. जो अभी बेन्कसे नीकल ही रहा हु.. तुम रेडी होकर नीचे आजाओ.. फीर तुजे कुछ बताता हु.. पहेले हम कही जाकर लंच करते हे.. आजाओ फटाफट.. ओर हां अपने कपडेकी बेग लेना मत भुलना.. हम मकान देखकर सीधेही घर चले जायेगे..

नीलम : (सरमाते हसते) बीलकुल पागल हो.. अरे बाबा पहेले आओ तो सही मे रेडी ही हु.. हें..हें..हें..

फोन कट करतेही नीलमने बुक बंध करली.. ओर अपनी बेगमे रखकर जानेकी तैयारीया करने लगी.. वो बाथरुममे जाकर फ्रेस होगइ.. फीर हल्कासा मेकअप करके कंपलीट होगइ.. आज धिरेनकी दिलवाइ हुइ ड्रेस पहेनी थी.. तो उसमे नीलम कयामत ओर बहुत कामुक दीख रहीथी.. वो सभी लाइट बंध करके अपनी बेग लेकर बहार आगइ.. ओर रुमको ताला लगाकर नीचे चली गइ.. ओर मेडमको रुमकी चाबी देदी.. तब..
 
मेडम : (मुस्कुराते) हंम.. नीलम.. घर जा रही हो..? क्या कोइ लेने आया हे..?

नीलम : (सरमाते हसते) जी मेडम.. अभी मेरे जीजाजी लेने आ रहे हे.. वोभी आज हमारे गांव आ रहे हे.. मे मन्डेको सुबह वापस आजाउगी.. कोइ कहेतो कहेना दीदीके साथ उनके घर गइ हे..

मेडम : (मुस्कुराते) हंम.. क्या तेरे जीजाजी यही सहेरमे ही रहेते हे..?

नीलम : (मुस्कुराते) अरे नही.. वोतो हमारे गांव जाते हे तब बीचमे जो --गांव आताहे वही रहेते हे.. वो तो यहा बेन्कमे जोब करते हे.. बेन्कमे क्लास वन ओफीसर हे.. हें..हें..हें..

मेडम : (मुस्कुराते आस्चर्यसे) अच्छा..? तबतो बहुत अ‍ेज्युकेटेड फेमीली लगती हे.. कोइ बात नही..

नीलम मेडमके साथ कुछ देरतक बाते करती रही तभी धिरेन आगया.. तो मेडमने उनके साथ हाथ मीलाया.. ओर उसे कुछ औपचारीक बाते करते हाउसींगकी लोनके बारेमे पुछ लीया.. तब धिरेन ने उसे लोन दिलवानेका आस्वासन दीया तो मेडम भी खुस होगइ.. ओर खुसी खुसी नीलमको अपने साथ लेजानेको कहेने लगी.. तो नीलमने अपनी बेग लेली.. ओर दोनोही बहार आगये.. ओर बाइकपे बैठ गये..

नीलम : (सरमाते हसते) धिरेन.. आपनेतो मेडमको ही पटालीया.. हें..हें..हें.. अब वो मुजे आपके साथ आनेके लीये कभी नही रोकेगी.. हें..हें..हें..

धिरेन : (बाइक स्टार्ट करते मुस्कुराते) हंम.. तो अच्छा हेना.. अब मे मेरी बीवीको लेकर कभी भी कहीभी जा सकता हु.. कहो.. पहेले हम कही अच्छी होटेलमे लंच करने चले..? फीर वहा तुजे कुछ बताता हु..

नीलम : (सरमाते हसते) हंम.. आपनेतो आज मुजे भुखी रखदी.. चलो चलो जल्दी.. बहुत भुख लगी हे..

दोनोही बाइक लेकर अ‍ेक बडीयासी होटेलमे चले गये.. नीलु आज बहुतही सरमा रहीथी.. जैसे धिरेनके साथ उनकी नइ नइ सादी हुइ हो.. ओर वो अपने पतीके साथ आइ हो.. दोनोही अ‍ेक टेबलपे जाकर बैठ गये.. तब वेइटर उन दोनोका ओर्डर लेकर चला गया.. तबतक नीलम ओर धिरेनको बात करनेका कुछ वक्त मील गया.. धिरेन मकानके बारेमे नीलमको जानकीरीया देने लगा..

धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. आज हमारे मेनेजर साहेब आये थे.. हमे चार बजे उनके घर जाना हे.. उनका मकान देखने.. पहेले तुम देखलो.. अगर तुजे उनका मकान पसंद आये तो हम वही लेलेगे..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) धिरेन.. वोतो ठीक हे.. लेकीन आप अ‍ेक बार पुनोदीदीको दीखा देना.. अगर उनको पसंद आये तो ही हम उस मकान लेगे.. वो आपकी बीवी हे.. तो उनको दीखाना आपका फर्ज हे..

धिरेन : (मुस्कुराते) हंम.. उसेभी दीखा दुंगा लेकीन बादमे.. पहेले तुम देखलो.. क्युकी भविस्यमे तुजे ही उधर रहेना हे.. नीलु.. मे ये मकान सीर्फ तेरे लीये ले रहा हु.. मत भुलो हम सादी करने वाले हे..

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) ठीक हे.. जैसे आप ठीक समजे.. क्या सचमे वो मेरे लीये ले रहे हो..? अगर कीसीको पता चला तो..? की आपने ये मेरे लीये लीया हे..

धिरेन : (मुस्कुराते) नही नीलु.. ये बात अभी कीसीको पता नही चलेगी.. क्युकी मेने घरवालोको दुसरा ही बहाना दीया हे.. कहाहे मुजे देर तक कामकी वजहसे आनेमे देर होजाती हे.. तो होटेलमे रुकना पडता हे.. इसीलीये मे ये मकान ले रहा हु.. तो सबने मुजे मकान लेनेकी परमीशन देदी.. बस अ‍ेक बार मकान लेलु.. फीर मे जल्द ही तुम्हारे साथ सादी करलुगा.. बाकीका तुम मेरे उपर छोडदो..

तभी वेइटर दोनोका खाना लेकर आगया.. तो दोनोही खाने लगे.. कुछ देरतक दोनोही खाते रहे.. दोनोको जोरोकी भुख लगीथी.. जब दोनोने खालीया.. तो धिरेनने बील पे करदीया ओर दोनोही वहासे नीकल गये.. दोनोको अ‍ेक घंटा कही नीकालना था.. तो धिरेनने अपनी बाइक अ‍ेक आइसक्रिम पार्लरमे लेली.. ओर दोनोही अ‍ेक प्राइवेट केबीनमे चले गये.. ओर आइसक्रिम ओर्डर करदीया.. फीर..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) धिरेन.. क्या पुनोदीदी मायके चली गइ..? हंम..? आप उसे छोडने गयेथे..?

धिरेन : (पैरोसे पैर सहेलाते) नही डार्लींग.. साथमे दया थी तो अ‍ेकही बाइकमे हम तीनोतो नही जा सकते.. तो लखनभैयाही लेने आने वाले थे.. नीलु.. लखनभैया बहुत अच्छे हे.. मेरी उनसे बहोत पटती हे.. मानोनां मेरे सालेके साथ मेरा खास दोस्त भी हे..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) जानु.. क्या कर रहे हो..? मुजे पैरमे गुद गुदी हो रही हे.. हें..हें..हें.. सीधा बैठीयेनां कोइ आजायेगा.. सुनो.. आप लखनजीजुको हमारे बारेमे अभी कुछ मत कहेना.. वैसे तो वो मेरे फुफाजी हे.. लेकीन मे उनको जीजु ही कहेती हु.. हें..हें..हें..

धिरेन : (मुस्कुराते) हंम.. क्या मस्त आदमी हे.. ओर अ‍ेक तेरी लता बुआ.. ओर भावना दीदी.. जैसे हमारे प्यारकी दुस्मन.. खुदतो प्यार के लीये कुछभी करते हे.. ओर हमपे पाबंधी लगाते हे..

नीलम : (तभी आइसक्रिम आगइ तो खाते सरमाते धीरेसे) जानु.. आपको अ‍ेक बात कहु..? आप जो केह रहेथे अ‍ैसाही हे.. लखनजीजु बहुतही रंगीन मीजाजके हे.. आपको पता हे..? सादीसे पहेले वो ओर लतादीदी अ‍ेक पुरा दिन ओर पुरी रात दोनोही हमारे घरपे अकेले थे.. जब भावना मम्मीकी डीलवरी हुइ थी.. तब उनकी सादीसे पहेले ही उन दोनोने सबकुछ करलीया.. हें..हें..हें..

धिरेन : (मुस्कुराते) हंम.. इस बारेमे लखनभैयाने मुजसे भी कहाथा.. नीलु.. जब हमलोग हनीमुनपे गये थे तब लखन भैया हर रात गोली खाकर तेरी बुआकी हालत बीगाड देते थे.. हें..हें..हें.. सुबह वो ठीकसे चलभी नही पाती थी.. हें..हें..हें.. नीलु.. हमारे पास दो दिन ओर दो रात हे.. आज लखनभैयाकी तराह हमभी वोही करने वाले हे.. क्या तुम इसके लीये रेडी होनां..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. धिरेन.. इनमे कुछ होगातो नही..? हंम..? देखना आज मे मेरी जींदगीका बहुतही अहेम कदम उठाने जा रही हु.. मुजे मजधारमे छोडोगे तो नही..? हंम..? वरना मेरे पास दुसरा ओर कोइ रास्ता नही होगा.. क्युकी मे आपको बहुत चाहती हु.. मेने आपको सच्चे दिलसे प्यार कीया हे..

धिरेन : (नीलमका हाथ थामते) नीलु.. मेभी तुमको सच्चे दिलसे प्यार करता हु.. ओर तुम्हारे साथ ही पुरी जींदगी बीताना चाहता हु.. मुजपे यकीन करो.. अ‍ैसी कोइ नौबत नही आयेगी.. इसीलीये तुम उल्टा सीधा सोचना छोडदो.. अगर तुम मुजे नही मीली तो तुमसे पहेले मे इस दुनीयाको छोड दुगा.. आइ प्रोमीस..

नीलम : (आंख गीली करते जटसे धिरेनके मुहपे हाथ रखते) बस.. धिरेन.. मे यही सुनना चाहती थी.. आजसे मेरा ये तन आपका हुआ.. आपको जोभी करना हे कर लीजीये.. लेकीन मेरी इजतका खयाल रखीयेगा.. अ‍ेक कुआंरी लडकी की सबसे बडी दौलत उनका कौमार्य होता हे.. जो मे आपको सोप रही हु.. अब मुजे कीसीकी परवाह नही.. मे अ‍ेक आजाद पंछीकी तराह जीना चाहती हु..

धिरेन : (जीलमकी आंख पोछते) बस.. नीलु.. अब कुछभी मत बोल.. तुम जो चाहती हो वही होगा.. बस अ‍ेक बार हमारा मीलन होजाये.. फीर मे तुमसे जल्दसे जल्द सादी करलुगा.. ओर हम सबके सामने खुलकर रहेगे.. बस तुम स्ट्रोंग रहेना.. कोइ कुछभी कहे.. केह देना मे धिरेनके साथही रहेना चाहती हु.. बाकी मे सब सम्हाल लुगा..

दोनोही आइसक्रिम खाते अपने फ्युचरके बारेमे बाते कर रहेथे.. तब सहेरमे सृतीभी अपने घरपे आ चुकी थी.. तब भुमीका खाना बनाके रेडी ही थी.. वो सुबहसे ही देवायतके गांव जानेके लीये अ‍ेक्साइटेड थी.. तो कंपलीट रेडी होकर सृतीका वेइट कर रहीथी.. तो सृतीके आतेही दोनोने खाना खालीया.. फीर फटाफट सब काम नीपटाकर दोनोही घरको ताला लगाके अपनी कार लेकर देवायतके गांवकी ओर नीकल गइ....

कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १५०

दोनोही आइसक्रिम खाते अपने फ्युचरके बारेमे बाते कर रहेथे.. तब सहेरमे सृतीभी अपने घरपे आ चुकी थी.. तब भुमीका खाना बनाके रेडी ही थी.. वो सुबहसे ही देवायतके गांव जानेके लीये अ‍ेक्साइटेड थी.. तो कंपलीट रेडी होकर सृतीका वेइट कर रहीथी.. तो सृतीके आतेही दोनोने खाना खालीया.. फीर फटाफट सब काम नीपटाकर दोनोही घरको ताला लगाके अपनी कार लेकर देवायतके गांवकी ओर नीकल गइ.... अब आगे

तो दुसरी ओर सहेरसे दुर.. राजीवके गांव सबलोग होलमे बैठकर आपसमे गपे लगाते रहे.. तबतक भावना ओर चंदाने लंच बनालीया तो सबलोग अ‍ेक साथ खाना खाने बैठ गये.. चंदाने सब खाना राजीवकी पसंदका बनाया था.. तो राजीवभी खाना देखकर खुस होगया.. नीर्मला उनसे सटकर ही पासमे बैठी थी.. तो मंजु भावना ओर चंदा उनकी सामनेकी चैरपे बैठे खाना खा रहीथी..

कल नीर्मलाने उसे प्यार कीया तबसेही राजीवकी सेक्सके प्रती चाहत वापस बढ गइ थी.. वो नीर्मलाको जल्दसे जल्द चोदना चाहता था.. नीर्मला उसे कामदेवकी मुरत लग रहीथी तो खाना खाते भी नीचेसे अपने पैरोसे नीर्मलाके पैरोको सहेला रहाथा.. तब नीर्मला बहुत ही कामुक होगइ.. ओर खाना खातेही अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते राजीवके लंडको पेन्टके उपरसेही पकड लीया ओर होले होले सहेलाने लगी.. जीनकी वजहसे राजीवकी वासना अ‍ेकदम बढ गइ.. तब..

राजीव : (धीरेसे कानमे) नीमु.. बस.. कर.. नही रहा जाता.. अभी थोडा कंट्रोल कर.. सब बच्चे इधर ही हे.. देख लेगे..

नीर्मला : (मुस्कुराते धीरेसे कानमे) भाइ.. तो क्यु मुजे पैरोसे छेड रहे हो.. आपकोभी पता हे मे नही रेह सकती.. भाइ.. मुजे चोदलो..

राजीव : (कानमे) तो दोपहोरको जल्दी हमारे रुमके अंदर आजाना.. वही कुछ करेगे..

भावना : (जोरोसे) ओ.. मोम.. ओ.. डेड.. कबसे दोनो आपसमे अ‍ेक दुसरेके कानमे खुसर पुसर कर रहे हो..? हम तीनो भी यहा बैठी हे.. बोलना हे तो जोरोसे बोलीयेना ताकी हमभी सुन सके.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (सरमाकर हसते) चुप कर.. ये हम पती पत्नीकी आपसकी बात हे.. तु बीचमे बडबड मत कर.. हें..हें..हें.. अगर तेरे कामकी बात होगी तो हम तुजे बता देगे.. हें..हें..हें.. क्यु राजीव..?

चंदा : (हसते खाना खाते) रहेनेदे भावु.. यहा दीदीके पास तेरी दाल गलने वाली नही.. हें..हें..हें..

राजीव : (मुस्कुराते) अरे मंजुबेटी.. सुन.. तुम कल केह रहीथी भुमी आने वाली हे.. तो क्या यहा आने वाली हे.. की तुम्हारे घर..? तो देवुको फोन करके बतादे की उसे यहा छोडदे.. सब साथमे हे तो कीतना मजा आता हे..

मंजुला : (हसते) जी पापा.. लेकीन वहा पुनोदीदी आइ हे तो सृती तो नही आयेगी.. लेकीन मे देवुको फोन कर दुगी.. की वो भुमी आंटीको इधर छोड जाये..

नीर्मला : (जुठा गुसा करते) अरे.. वो अभी अभी तीन चार दिन पहेले मीलके गइ हे.. फीर भी तुम्हारा जी नही भरा.. राजीव.. कही तुम मेरी सौतन लानेके चकरमे तो नही..? हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) चुप कर.. बहेन हे वो मेरी.. जब देखो पतीपे संका करती हो.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (मुस्कुराते कातीलाना अंदाजमे) अच्छा..? तो फीर मे कौन थी..?

कहातो राजीव हसते हुअ‍े सर जुकाते चुपचाप खाने लगा.. तब चंदा भावना मंजु ओर नीर्मला जोरोसे हसने लगी.. सबने अ‍ेक दुसरेकी टांग खीचते मस्ती मजाकमे खाना खा लीया.. तो चंदा भावना ओर मंजु सब काम नीपटाने लगी.. तबतक नीर्मला ओर राजीव दोनोही होलमे बैठकर भावना मंजुके बच्चोके साथ खेलते रहे.. जब सब काम नीपट गयातो मंजु भावना अपने बच्चेको लेकर अपने रुममे चली गइ..

तो साथमे चंदाभी चली गइ.. ओर नीर्मला राजीव अ‍ेक दुसरेके सामने खुस होतकर हसने लगे.. ओर अपने रुममे आराम करने चले गये.. तो अंदर जातेही नीर्मलाने दरवाजा बंध करदीया.. ओर दोडकर राजीवकी बाहोमे समा गइ.. जबसे नीर्मलाको राजीवने छेडाथा तबसे दोनोही अ‍ेक दुसरेको मीलनेके लीये अ‍ेक्साइटेड होगये थे.. तब राजीव नीर्मलाके चहेरेको पागलोकी तराह चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा.. तब नीर्मला बहुतही उतेजीत होगइ..

नीर्मला : (मदहोसीमे) बस.. रा..जी..व.. बस.. ओर नही मे नही रेह पाउगी.. तुमने क्या आग लगाइ हे..

राजीव : (जोरसे होंठ चुमते) हंम.. अंअअ.. बु..च.. नीमु.. प्लीज अ‍ेक बार करने दे.. बहुत मन हो रहा हे..

नीर्मला : (राजीवको जोरोसे बाहोमे भीचते) हंम.. बस.. भाइ.. बस भी करो.. आप रातमे मुजे चोद लेना.. कीतने दिन होगये.. मेने आपका लंड अपनी चुतमे नही लीया.. आज रातको पका दुगी..

राजीव : (लडडखडाती आवाजमे) नी..मु.. बस.. अ‍ेक बार.. अ‍ेक बार अभी अंदर डालने देने.. हंम.. फीर नीकाल लुंगा.. मुजे तुमको अभी चोदना हे.. प्लीज.. नीमु.. इधर बेडपे आजा..

नीर्मला : (कामुक आवाजमे) भाइ.. अभी नही.. हम रातमे करते हेनां..? चलो अभी मे आपको अ‍ैसेही ठंडा कर देती हु.. ओर आपभी मुजे ठंडी करदो.. बीना डाले अ‍ैसेही.. हंम..?

राजीव : (कामुक आवाजमे) हंम.. नीमु.. आजा.. नही रहा जाता.. बस अ‍ेक बार..

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कहातो नीर्मला सरमा गइ.. ओर राजीवसे अलग होकर उनके सामने जाकर अपना गाउन नीकाल दीया.. ओर कामुक नजरोसे राजीवकी ओर अदासे देखने लगी.. तो राजीव उनका हाथ पकडके बेडपे ले गया.. तब कुछही देरके बाद दोनोके जीस्मपे अ‍ेकभी कपडे नही थे.. नीर्मला आज राजीवको बहुत प्यार देना चाहती थी.. वो राजीवकी हर बात मानती थी.. ओर राजीव नीर्मलाको सुलाके उनके पैरोके बीच चला गया..

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राजीवने पैरोके बीच जातेही सीधे नीर्मलाकी चुतपे मुह लगाके हमला कर दीया.. वो चुतमे अपनी जीभ डालकर नीर्मलाकी चुतके दानेको छेडने लगा.. वो जानता था उनकी बहेन नीर्मला बहुत कामी ओरत हे.. उसे बीस्तरमे वसमे करना कीसीके वसकी बात नही हे.. ये बात वो बखुबी जानता था.. तो नीर्मला भी पुरी तराह मदहोस होगइ.. वो होले होले राजीवके सरको सहेलाते सीसकारीया करने लगी.. ओर बेडपे छटपटाने लगी..

नीर्मला : (मदहोसीमे आंख बंध करते) रा..जी..व.. तुम.. बहुत.. कमीने हो.. तुमने तो मुजे गरम करदीया.. बस.. ओर नही.. चल आजा .. इधर लेटजा मेही कुछ करती हु.. वरना तुमतो आज पका मुजे चोद लोगे..

कहेतेही नीर्मलाने राजीवके बाल पकडके उनको अपने उपर खीचलीया.. तो राजीवने उपर आतेही नीर्मलाके बुब्सको अपने मुहमे लेकर हमला बोल दीया.. तब राजीवका लंड नीर्मलाकी चुतमे घुसनेके लीये चुतपे दस्तक देने लगा.. तो नीर्मला ओर भडक गइ.. ओर जोरोसे सीसकारीया करते राजीवको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती हे.. ओर उनकी कमरमे पैर डालकर पलट जाती हे.. अब नीर्मला राजीवके उपर लेटी हुइ थी.. ओर उसने जोरोसे राजीवके होठोको अपने होठोसे भीच लीया..

फीर धीरेसे चुमते हुअ‍े नीचेकी ओर जाने लगी.. ओर राजीवके पैरोके बीच चली गइ.. नीर्मलाने आहीस्तासे सर जुकाते राजीवके लंडको अपनी मुठीमे पकडलीया.. ओर अपना मुह जुकाते लंडको अपने मुहमे लेलीया.. ओर होले होले चुसने लगी.. तो राजीवभी सातवे आसमानपे चला गया.. वो अपनी दोनो आंख बंध करते परम आंनदकी अनुभुती मे सीसकारीया करने लगा..

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राजीव : (मदहोसीमे) बस.. बस.. नीमु.. अभी नीकल जायेगा.. क्या अ‍ेक बारभी नही डालने देगी..? हंम..? थोडासा डालने देनां..

नीर्मला : (लंड मुहमे रखते राजीवकी ओर नां मे गरदन हीलाते) हंममम.. गलप.. गलप.. गलप..

राजीव : (कामुकक्तासे) नी..मु.. आइ.. लव.. यु.. बस.. बस.. आजा.. प्लीज.. घुमजा.. मुजे भी करना हे..

कहतो नीर्मला लंडको मुहमे रखकर ही राजीवके उपर घुमकर आगइ.. ओर उनके उपर दोनो ओर पैर रखते घुटनोसे मोडके बैठ गइ.. ओर अपनी कमर पीछे लेजाते अपनी चुत राजीवके मुहके पास रख देती हे.. फीर वो लंडको थोडा जोरोसे मुहमे अंदर बहार करते चुसने लगी.. तो राजीवने भी अपना मुह नीर्मलाकी चुतपे लगा दीया ओर अपनी जीभसे नीर्मलाकी चुतको खरोदने लगा.. दोनोही सीक्स नाइन पोजीसनमे चरम पे पहोंच गये..

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नीर्मलापे पुरी तराह वासना हावी हो चुकीथी.. राजीवने उनकी चुतपे पुरी तराह हमला कर दीयाथा.. वो अपनी पुरी जीभ नीर्मलाकी चुतमे घुसाते जीभसेही नीर्मलाको चोदने लगाथा.. ओर नीर्मलासे बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. उसने जटसे मुहसे लंडको नीकाल दीया.. ओर मुह घुमाकर राजीवकी ओर वासना भरी नजरोसे देखने लगी.. उनकी आंख पुरी तराह लाल हो चुकीथी.. तभी राजीवभी बेडपे बैठ गया..

वो कुछभी सोचने समजनेकी स्थीतीमे नही थी.. ओर वो जटसे घुमकर राजीवकी कमरपे बैठ गइ.. राजीव उनकी ओर देखता ही रेह गया ओर नीर्मलाने अपनी कमर उची करके लंडको पकडकर अपनी चुतपे सेट करदीया.. फीर आंख बंध करते धीरेसे लंको अपनी चुतकी गीरफ्तमे लेलीया.. वो राजीवके पुरे लंडको अपनी चुतमे नीगइ गइ.. फीर धीरेसे वासना भरी नजरोसे देखते राजीवके चहेरेकी ओर जुकते बैठ गइ.. आखीर नीर्मलाने राजीवका लंड अपनी चुतमे लेही लीया..

नीर्मला : (मदहोसीमे होंठ चुमते) भा..इ.. तुम बहुत कमीने हो.. आखीर मुजे चोदने के लीये मजबुर कर ही दीया.. आप लेटे रहो.. मेही आपको चोदती हु.. कीतने महीनोके बाद ये लंड नसीब हुआ हे..

राजीव : (कामुक आवाजमे) हां मेरी बहेन.. बस.. मुजे यही चुत चाहीये.. चोदले मुजे..

नीर्मला पुरी तराह कामातुर हो चुकीथी.. वो धीरे धीरे अपनी कमर हीलाते राजीवको चोदने लगी.. तब राजीवको अ‍ैसा लगने लगाकी अपना लंड कीसी गरम भठीमे डालदीया हो.. नीर्मलाकी चुत लगातार पानी छोड रहीथी.. ओर पुरे रुममे सनाटा छाया हुआ था.. रुममे सीर्फ फच..फच.. फच.. की आवाज आ रहीथी.. ओर बीच बीचमे नीर्मला आंख बंध करते सीसकारीया कर रहीथी.. ओर राजीवके होठोको चुम रही थी..

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राजीव : (मदहोसीमे बुब्स चुमते) नीमु.. आइ लव यु.. बहेनको चोदनेका अ‍ेक अलगही मजा हे.. बस अ‍ैसेही मुजे चोदती रहेना..

नीर्मला : (वासनाभरी नजरोसे देखते धीरेसे) भाइ.. मे आपको खुब प्यार दुगी.. आज पुरी रात हम अपनी सुहागरात मनायेगे.. क्या आप मुजे चोदना चाहते थेनां..? हंम.. आज अपनी इस बहेनको जी भरके चोद लेना.. जैसे आपने मुजे पहेली बार चोदा था..कीतनी हसीन रात थी वो.. आपने पुरी रात मुजे चोदा था..

राजीव : (होंठ चुमते) हां नीमु.. बस.. अ‍ैसेही चोदती रहे.. बहुत मजा आता हे..

दोनोही अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे वासनाभरी नजरोसे देखते चुदाइका आनंद ले रहेथे.. तब कुछ ही देरकी चुदाइके बाद नीर्मलाका सरीर अकडने लगा.. ओर उसने जोरोसे राजीवको अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर राजीवके होठोपे लीपलोक करलीया.. तभी वो जडने लगी.. तो राजीवको अपने लंडपे बहुतही गरमाहट महेसु हुइ.. ओर वोभी कांपने लगा.. ओर नीर्मलाके साथही जडने लगा..

दोनोही जड गये.. तब अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे अ‍ैसेही सीथील होकर पडे रहे.. नीर्मला राजीवके सीनेपे सर रखके ढेर हो चुकीथी.. तब राजीव नीर्मलाके सरपे हाथ डालके उनके सरको सहेलाता रहा.. तभी अचानक नीर्मलाको खयाल आयाकी राजीवको कुछ नही हुआ.. तो वो मनमे खुस होते राजीवकी ओर सर उचा करते देखते मुस्कुराने लगी.. ओर उसने अ‍ेक बार फीर राजीवको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. तब..

राजीव : (मुस्कुराते) नीमु.. क्या हुआ..? हंम..? मुजे कुछ नही हुआ इसीलीये हस रही हेनां..? हंम..?

नीर्मला : (सरमाते मुस्कुराते सीनेपे सर रखते) हां भाइ.. बस.. अ‍ेक डरसा लग रहा था.. की कही आपको कुछ होना जाये.. भाइ.. आजमे बहुत खुस हु.. मे आपको अ‍ैसेही प्यार करती रहुगी..

राजीव : (नीर्मलाके सरको सहेलाते) नीमु.. अ‍ेक बात कहु..? हंम..? बाय चान्स मुजे कुछ होजाये.. तो तुम मंजुके घर चली जाना.. हमारा देवु बहुत अच्छा हे..

नीर्मला : (जोरोसे बाहोमे भीचते आंख गीली करते) भाइ.. मत करो अ‍ैसी बाते.. मुजे बहुत डर लग रहा हे..

राजीव : (नीर्मलाके सरको उचा करते उनकी आंओमे देखते) नीमु.. डर मत.. सबको अ‍ेक दिन जाना ही हे.. तुम हमारी मंजु ओर भावुका खयाल रखना.. मेरी भावुतो अभी बच्ची हे.. उनकोतो कुछ पताभी नही हे.. की दुनीया दारी क्या हे..? वो ओर हमारी चंदा बडी ही मासुम हे.. तुजे तीनोको सम्हालना हे..

नीर्मला : (प्यारसे गाल सहेलाते) भाइ फीकर मत करो.. हमारा देवु हेनां..? वोही इतना काबील हे की वो अकेला ही हम सबको सम्हाल सकता हे.. देवुने हमारी भावुकी पुरी जीम्वेवारी लेली हे.. अब सब सही हो गया हे.. आपको कीसीकी चीन्ता करनेकी जरुरत नही..

राजीव : (प्यारसे देखते) नीमु.. अ‍ेक बात कहु..? तुजे नही लगता हमने भावुकी सादी भानुसे करके बहुत बडी गलती करदी.. हंम..? अगर भानुकी जगाह हम भावुकी सादी देवुसे कर देते तो कीतना अच्छा होता.. तुजेभी पता हे उनके खानदीनमे कीतनी भी सादी करले.. कोइ पुछने वाला नही..

नीर्मला : (मुस्कुराते) भाइ.. अगर आगे जाकर अ‍ैसी कोइ सीचुअ‍ेशन आइ तो मे वोही करुगी.. आप भावुकी चीन्ता छोड ही दो.. क्या अपनी भावुको बहोत प्यार करते हे..? हंम..?

राजीव : नही नीमु.. मे प्यारतो सबको करता हु.. लेकीन.. भावु.. हम दोनोके प्यारकी नीशानी हे.. तो उनके प्रती कुछ ज्यादाही लगाव हे.. बस.. ओर कुछ नही..

नीर्मला : (सामने देखते) भाइ.. आइ अ‍ेम सोरी.. मेरी अ‍ेक गलतीकी वजहसे मे आपको अपना कौमार्य नही देसकी.. ओर आपने भी मुजे खुसी खुसी स्वीकार करलीया.. ओर पतीका वो हर सुख दीया.. जो अ‍ेक पत्नी चाहती हे.. मे आपको पाकर धन्य होगइ.. आइ लव यु.. भाइ.. आइ लव यु सो मच..

राजीव : (प्यारसे गाल सहेलाते) नही नीमु.. तुम दिल छोटा मत कर.. हम सब नसीब वाले हे.. जो उस खानदानके साथ जुडे हुअ‍े हे.. तुजेतो सब पता हे.. वहा खुद वो इश्वरका अंस जन्म लेने वाला हे.. ओर ये सब प्रकृतीने पहेलेसे ही तैय कीया हुआ हे.. तो तेरा देवुके पीता कीशनके साथ जुडना लाजमी हे..

नीर्मला : (सामने देखते) भाइ.. फीरभी दिलमे अ‍ेक गील्टी फील होती हे.. की मे आपको अपना कौमार्य नही सोप सकी.. भाइ.. कीतना अजीब हेनां..? उन्होने खुद अपनी बहेनसे सादी करली.. अगर उनके खानदानमे सब अपनी बहेनसे सादी करते आये हे तो फीर मे उनके प्यारमे कैसे फसी..? मेरी तो समजमे ही नही आ रहा.. छोडो सब.. अब आप थोडा आरामभी करलो.. मे बाथरुममे जाकर आती हु..

कहेतेही नीर्मला राजीवके उपरसे हट गइ.. तो उनकी चुतसे दोनोका कामरस बहेने लगा.. तब नीर्मलाने बेडसे उतरतेही अपने नीकरसे अपनी चुतको साफ करलीया ओर नीकर लेकर बाथरुममे घुस गइ.. तब वो बाथरुमसे बहार आइ तबतक राजीव अ‍ैसेही नंगा नींदकी आगोसमे चला गया था.. तब नीर्मला उनको देखकर मुस्कुराइ.. ओर रावीवके पास लेटकर उनकी बाहोमे नंगी ही सोगइ..
 
तो गांवमे दो पहोरको खाना खातेही रमेश पंचायतके कामसे बहार नीकल गया.. तब चारुने फटाफट सभी काम नीपटा लीया.. क्युकी.. जबसे कल उनकी रश्मीसे बात हुइ तबसे वो देवायत ओर अपनी बेटी वंदनाके बारेमे सब बाते जाननेकी बडीही उत्सुक थी.. खाना खाते उसने रमेशसे जान लीयाकी आज रश्मी ओर वंदना दोनोही पंचायतकी ओफीसमे नही आइथी.. तब चारु बहुत कुछ समज गइ.. ओर मनही मन खुस होने लगी..

वो फटाफट अपना काम नीपटाकर घरको ताला लगाकर रश्मीके घरकी ओर चली गइ.. तब रश्मी ओर वंदना दोनोही खाना खाकर सब काम नीपटाके अ‍ेकही बेडपे लेटकर अ‍ेक दुसरेके सामने करवट लेकर बाते कर रही थी.. तभी उनके दरवाजेपे दस्त हुइ.. तो रश्मी उठकर दरवाजा खोलने गइ.. तब वंदना बहुतही सरमाने लगी.. उसे पता नही थाकी इस वक्त रश्मीके घरपे कौन आया होगा.. वो थोडा गभरा रही थी..

रश्मी : (दरवाजा खोलतेही खुसीसे धीरेसे) चारुभाभी आप..? अभी इस वक्त..? अकेली आइहो क्या..?

चारु : (मुस्कुराते अंदर आते धीरेसे) हां भाभी.. कहा हे वंदु..? हंम..? उसने देवुसे बात करली..? हंम..?

रश्मी : (वापस दरवाजा बंध करते धीरेसे मुस्कुराते) हां.. हां भाभी.. उसने देवुसे बात भी करली.. ओर.. ओर.. देवु पुरी रात इधर ही था.. मेरे रुममे.. हमारी वंदुके साथ.. आप समज गइनां..

चारु : (खुस होते धीरेसे) क्या..? दोनो अ‍ेकही रुममे.. मतलब.. दोनोने.. क्या सब कुछ करलीया..?

रश्मी : (धीरेसे हसते हाथ पकडके अंदरकी ओर लेजाते) हां भाभी.. अब हमारी वंदु लडकी नही रही.. उसने अ‍ेक ओरत बननेका सुख पालीया हे.. दोनोही अ‍ेक पती पत्नीकी तराह अपनी सुहागरात मना चुके हे..

कहातो चारु वही रुक गइ.. ओर उसने रश्मीको जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर उनके कंधेपे सर रखते खुसीके मारे आंसु बहाने लगी.. ओर रश्मी हसते हुअ‍े उनकी पीठ ओर सरको सहेलाती रही.. फीर चारु आंसु बहाते रश्मीसे अलग होगइ.. ओर उनके दोनो हाथ थामते उनके सामने आंसु होनेके बावजुद देखते मुस्कुराती रही.. तब रश्मीने भी हसते हुअ‍े हां मे गरदन हीलाते अ‍ेक बार फीर चारुको हग करलीया.. फीर दोनोही होलमे आकर बैठ गइ.. तब रश्मीने उसे पानी पीलाया ओर दोनो बैठकर धीरेसे बाते करने लगी..

चारु : भाभी.. कहाहे मेरी वंदु..? क्या आराम कर रही हे..? हंम..?

रश्मी : (मुस्कुराते) भाभी.. आप वंदुकी चीन्ता मत करो.. मेने उनको सही करदीया हे.. अभी अभी हम दोनोने खाना खाया ओर वो अंदर आराम कर रही हे.. हम दोनोही बाते कर रही थी तभी आप आगइ..

चारु : (खुस होते मुस्कुराते) भाभी.. क्या मे वंदुको अंदर जाकर मीललु..? हंम..? हम मां बेटीके साथ अ‍ेक अच्छी सहेली भी हे.. आज मेरी ओर वंदुकी बरसोकी तमना पुरी होगइ.. मे उसे मीलना चाहती हु..

रश्मी : (हसते हाथ पकडके धीरेसे) हां भाभी.. आपहीकी बेटी हे.. मेतो बहुत खुस हु की आप जैसी औरत वंदनाकी मां हे.. क्या कोइ मां अपनी बेटीके लीये इतना बडा रीस्क लेती हे..?

चारु : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. मेने मेरी वंदुकी देवुके लीये तडप देखी हे.. वो रात रातभर हमसे छुपके हमारे देवुके लीये आंसु बहाती थी.. भलेही दुनीया कुछभी कहे.. आज मेरी वंदुकी सारी तम्मना पुरी होगइ.. जो वो चाहती थी.. कहा हे वो.. मे उसे मीलना चाहती हु..

रश्मी : (हसते) भाभी.. जाइअ‍े मेरे रुममे आराम कर रही हे.. मील लीजीये.. तबतक मे हम तीनोके लीये मस्त दुध कोल्ड्रींंक्स बनाती हु.. ओर हां.. उसे रुलाइअ‍ेगा मत.. हें..हें..हें..

कहेते रश्मी हसते हुअ‍े कीचनकी ओर चली गइ.. तब चारु वंदनाके रुमकी ओर जाने लगी.. तब अ‍ेक बार उनके दिलकी धडकन बढ गइ.. वो बडीही असहज होने लगी.. की अंदर जातेही वो वंदनासे क्या बाते करेगी.. उनको पता थाकी वो वंदनाको मीलेगी तब वंदना खुब सरमायेगी ओर उनको फेइस नही कर पायेगी.. यही सोचते वो धीरेसे रुमके पास पहोंच गइ.. तब वंदनाभी कुछ आहट सुनके चोकनी होगइ..

की इस वक्त रश्मीके घर कौन आया होगा.. ओर वो आहट सुनतेही लैटी थी तो जटसे बेडपे बैठ गइ.. तभी उनको अपनी मम्मी चारु दरवाजेपे खडी नजर आइ.. वो खुसीके मारे वही दरवाजेपे रुक गइ.. ओर वंदनाकी ओर आंसु बहाते भी मुस्कुराते देखती रही.. वंदनाने उनकी मम्मीकी आंखोमे आंसु बहेते देख लीया.. ओर फीर भी वो खुसीके मारे हस रहीथी.. ओर वंदनाको प्यार भरी नजरोसे देख रही थी..

तब वंदना बहुतही सर्मसार होते मुस्कुराते खडी होगइ.. तो चारु दोडके वंदनाके पास आगइ.. ओर वंदनाने उसे जोरोसे अपनी बाहोमे कस लीया.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके कंधेपे सर रखते आंसु बहाने लगी..

वंदना : (रुहांसी आवाजमे) मम्मी..

चारु : (वंदनाकी पीठ सहेलाते) बस.. बस.. वंदु.. कुछ भी मत बोल.. मेने रश्मीभाभीसे सब जानलीया हे.. आज मे बहुत खुस हु.. की तुजे तेरा प्यार मील गया.. आजतो खुसीका दिन हे.. मेरे ये आंसु खुसीके हे..

वंदना : (अलग होते उनकी आंखोमे देखते) मम्मी.. देवुने मुजे अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. वो मुजसे सादीभी करेगे.. मे उनकी बीवी होकर भी आपके साथही रहुगी.. अबतो आप खुस हेनां..?

चारु : (वंदनाका सर चुमते) हां मेरी बच्ची.. हमारा देवु बहुत अच्छा हे.. मे बहुतही जल्द तुम दोनोकी सादी करवा दुगी.. तु कीसीकी चीन्ता मत करना.. मेने तेरे पापासेभी इस बारेमे बात करली हे.. वोभी मान गये हे.. वो भी इस रीस्तेसे राजी हे..

वंदना : (खुस होते हग करते) मम्मी.. क्या केह रही हो..? पापा मान गये..? बस.. मुजे सीर्फ इन्हीकी चीन्ता थी.. मम्मी.. आप बैठो इधर मेरे पास.. मुजे आपसे कुछ कहेना हे..

चारु : (खुसीसे मुस्कुराते दोनो ही बेडपे सटकर बैठ गइ) हां बोल मेरी बच्ची.. क्या कहेना हे..?

वंदना : (सर नीचे करते सरमाते) मम्मी.. मुजे माफ करना.. हमने सादीसे पहेले ही.. आइ मीन.. अब मे लडकी नही रही.. उसने मुजे ओरत बना दीया हे.. सोरी मम्मी.. हम दोनोही बहेक गये थे.. मे खुसीके मारे अपनी भावनाओपे काबु नही कर सकी.. मम्मी.. तेरी बेटी अब कलीसे फुल बन चुकी हे..

चारु : (मुस्कुराते ठुंडी पकडते) हंम.. यही तो चाहती थी मे.. मुजे सब पता हे.. इस बारेमे अभी रश्मीभाभीसे बात हुइ.. बेटी तुम सोरी मत बोल.. इस बातसे मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. बल्की मेतो ये सुनके बहुत खुस हु.. बेटा.. यही हमारी जींदगीका सबसे हसीन लम्हा हे.. जो तुने अनुभव कीया.. सादीसे पहेलेही अपने प्रेमीको अपना कौमार्य सोंपना बहुतही रोमांचकारी हे.. मेभी इस लम्हेको अनुभव कर चुकी हु.. तेरे पापाके साथ.. हें..हें..हें..

वंदना : (सरमाते मुस्कुराते नजर जुकाते) मोम.. अ‍ेक बार इस बारेमे हमारी बात हुइ थी.. तब आप ओर पापा दोनोही कोलेजमे अ‍ेक साथ पढते थेनां..?

चारु : (मुस्कुराते) हंम.. जब तेरे पापाके घरपे कोइ नही थे.. तब वो मुजे अपने घरपे ले गयेथे.. उसी दिन हमने सबकुछ करलीया.. तेरे पापाने वही मेरा कौमार्य भंग कीया था.. कीतना हसीन पलथा वो.. हें..हें..हें.. चल.. मे रश्मीभाभीके पास बैठी हु.. तु आराम करले..

रश्मी : (मुस्कुराते कोल्ड्रींक्स लेकर आते) अरे भाभी इधर ही बैठो.. वंदु सुबहसे आराम ही तो कर रही हे.. हें..हें..हें..
 
फीर तीनो ही ठंडा पीते बाते करने लगी.. तब वंदना सीर्फ सुनती रही ओर बीच बीचमे मुस्कुराने लगती.. इसी बीच देवायतभी दो पहोरको खानेके लीये हवेलीपे आगया.. तब पुनम उनको देखते ही खुसीके मारे दोडकर उनके गले लग गइ.. तब देवायतने भी हसते हुअ‍े पुनमको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. फीर वही पुनमकी कमरमे हाथ डालकर पुनमको अपनी गोदमे उठालीया.. तो पुनम बहुतही सर्मसार होगइ..

चंपाभाभीको वही लगाके सादीके बाद पुनम पहेली बार हवेलीप आइहे तो भाइ बहेनका प्यार हे.. लेकीन उनको नही पताथा की ये भाइ बहेनका मीलन नही.. अ‍ेक मीया बीवीका मीलन हे.. तब देवायत पुनमकी ओर मुस्कुराते उनको गोदमे उठाकर अंदरकी ओर चल पडा.. ओर दोनो भाइ बहेन अंदर होलमे आगये.. तब देवायत पुनमको वही छोडके सीधाही अपने रुममे घुस गया ओर फटाफट फ्रेस होकर बहार आगया..

तब दयाभी कीचनसे नीकलते ही उनको हग करने लगी.. तो देवायतने उनके बुब्स दबाते होंठ चुमलीये.. जीसकी दयाको जरासी भी उमीद नही थी.. तब रजीया चंपाभाभी पुनम सब हसने लगे.. तो दया सरमाके हसते हुअ‍े कीचनमे भाग गइ.. तो रजीया ओर चंपाभाभी उनकी टांग खीचाइ करने लगी.. तभी लखनभी बहारसे आते ही सीधा फ्रेस होकर आगया.. ओर सबलोग खानेके टेबलपे बैठ गये.. तो आज पुनम बहुत खुस नजर आ रहीथी.. ओर वो बीन्दास्त देवायतके पास उनसे सटकर बैठ गइ.. तभी..

देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. आज तुम खेतोपे दीख ही नही रहाथा..? सुबह से कीधर था..?

लखन : (रहस्य भरी मुस्कानसे) कही नही भाइ.. बस गांवमे कुछ काम था तो वही दोस्तोके पास था..

देवायत : (हसते खाना खाते) लखन.. मैने सुना हे की तेरा अ‍ेक दोस्त आज अ‍ेक लडकीको लेकर भाग गया हे.. हें..हें..हें.. क्या उनकी सेवामे तो नही था..?

लखन : (सरमाते हसते) अरे नही नही.. भाइ.. क्या आपको भी सब पता चल गया.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. बच्चु.. मेभी इसी गांवमे रहेता हु.. ज्यादा भोला मत बन.. मुजे सब पता हे की उनके बारेमे तु सब जानता हे.. की वो इस वक्त कहा हे.. बोल.. मे सच कहे रहा हुनां..?

लखन : (जोरोसे हसते) अरे नही भाइ.. मुजे इस बारेमे कुछ भी नही मालुम.. सच केह रहा हु.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) भाइ.. आप कीसकी बात कर रहे हे..? सुबह जब लखनभैया गये तब कोइ आपको पुछने इधर आया था.. तो चंपाभाभीसे बात करके वो नीकल गया.. तो हमने भी चंपाभाभीसे कुछ नही जाना..

चंपाभाभी : (सरमाते हसते) लीजीये देवरजी.. रोटी खाइअ‍े.. आजकल बहुत दुबले होगये हो.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) हां भाभी.. खीलाइअ‍े.. मे जबसे गइ हु.. आप भाइका अच्छेसे खयाल ही नही रखती.. हें..हें..हें..

चंपाभाभी : (जोरोसे हसते) अरे.. लेकीन आजकल आपके भाइके घरमे पेर ही कहा टीकते हे.. सारा दीन ना जाने कहा कहा घुमते रहेते हे.. हें..हें..हें.. लगताहे इनको बहारही खाना मील जाता हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते) भाभी.. आज सुबह हमारे घरपे कौन आया था..? क्या आप उसे जानती हे..?

चंपाभाभी : (हसते) अरे हां जानती हु उसे.. वो तुम्हारे डाक्टर दोस्तकी गलीमे तो रहेता हे.. बडे ही सीधे लोग हे.. दोनो भाइ साथमे ही रहते हे.. ओर सहेरमे उनका कारोबार हे.. वो नही जो हमारे रमेशभाइ की दुकानमे काम करते हे..? बस उन्हीके घरके बीलुकुल पीछे घर हे उनका.. क्या नाम बताया उसने.. कुछ जवेरीलाल.. अ‍ैसा कुछ बोला वो..

लखन : (हसते) भाइ.. वो चंपाभाभी उसीकी बात कर रही हे.. जीनके लडका लडकी भाग गये हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (खाना खाते जोरोसे हसते) भाइ.. लगता हे लखनभैया बहुत कुछ जानते हे लेकीन बताते नही.. भाइ बताओना आपका कौन दोस्त भाग गया..? ओर कीसकी लडकीको भगाकर लेगया..? हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते हसते) अरे वो.. श्रीधर.. हम सबका दोस्त हे.. वो अपने बडेपापाकी लडकीको ही लेकर आज सुबह घरसे भाग गया हे.. जयश्री नाम हे उनका.. वो तेरी सहेली वंदनाकी भी सहेली हे..

पुनम : (आस्चर्यसे देखते हसते) क्या नाम कहा..? क्या वो जयश्री.. हमारे सामतभाइकी लडकी जागृतीकी सहेली.. हंम..? क्या वो अपने चाचाके लडकेको आइ मीन अपनेही कजीन भाइको लेकर भाग गइ..?

लखन : (सरमाते खाना खाते मुस्कुराते) हां.. बस.. चंपाभाभी उसीकी बात कर रही हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (कामुक स्माइल करते देवायतके पैरोसे पैर सहेलाते) हें..हें..हें.. भाइ.. लगता हे आज कल सब लोग अपनी बहेनकोही पसंद करते हे.. ओर उसेही प्यार करने लगे हे.. हें..हें..हें..

कहातो दया सबको सब्जी देते पुनमकी ओर देखके सरमाते हसने लगी.. ओर कीचनमे चली गइ.. तबतक देवायतने बहुत कुछ सोच लीया.. ओर सबने बाते करते खाना खालीया.. तो पुनम जटसे अपने रुममे चली गइ.. क्युकी उसे पताथा की अभी देवायत उनके रुममे आराम करने चला जायेगा.. इसीलीये वो उसे अकेलेमे मीलना चाहती थी.. ओर वो अपने रुममे जाकर दरवाजा बंध करके हल्कासा शींगार करने लगी.. तब लखन उपर अपने रुममे चला गया.. तब देवायतभी थोडी देरके बाद पीछेसे उपरकी मंजीलपे लखनके रुममे चला गया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १५१

कहातो दया सबको सब्जी देते पुनमकी ओर देखके सरमाते हसने लगी.. ओर कीचनमे चली गइ.. तबतक देवायतने बहुत कुछ सोच लीया.. ओर सबने बाते करते खाना खालीया.. तो पुनम जटसे अपने रुममे चली गइ.. क्युकी उसे पताथा की अभी देवायत उनके रुममे आराम करने चला जायेगा.. इसीलीये वो उसे अकेलेमे मीलना चाहती थी.. ओर वो अपने रुममे जाकर दरवाजा बंध करके हल्कासा शींगार करने लगी.. तब लखन उपर अपने रुममे चला गया.. तब देवायतभी थोडी देरके बाद पीछेसे उपरकी मंजीलपे लखनके रुममे चला गया....अब आगे

लखन : (देवायतको उनके रुममे देखतेही) अरे भैया आप..? इधर..? कुछ काम था क्या..? मुजे बुलालीया होता..

देवायत : (धीरेसे दरवाजा बंध करते लखनके पास आकर बैठते) लखन.. तुमने नीचे तो सबके सामने जुठ बोल लीया.. मुजे पता हे तुजे सब मालुम हे.. अब मुजे पुरी सचाइ बतादे.. बोल कहा हे वो दोनो..?

लखन : (सरमाते हसते) भाइ.. मे आपके सामने जुठ नही बोल सकता.. मेने ही उन दोनोके भागनेका इन्तजाम करदीया था.. वो अभी सहेरमे हमारे बंगलेपे ही हे.. ओर इस बारेमे सीर्फ हम तीन लोगही जानते हे..

देवायत : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. तेरे अलावा अ‍ेक उनकी सहेली जो हमारे सामतभाइकी लडकी हे.. जागृती.. ओर दुसरी खुद तेरे दोस्त श्रीधरकी मम्मी.. बोल..? तेरे अलावा यही दोनो हेनां..?

लखन : (आस्चर्यसे मुह फाडके देखते) भाइ..? ये सब आपको कैसे पता..? हां.. मेरे अलावा यही दोनो हे.. जो इस बातको जानते हे.. ओर अ‍ेक हे बंसी.. जो उनको हमारे गांवसे बहार तक छोडके आया..

देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. मत भुल.. हम कौन हे.. अब ये बता.. उन दोनोको भगानेकी जरुरत क्यु पडी..? ओर इन दोनोमे से तुम कीसके साथ रीलेशनमे हो..? मुजे सब सच बताना..

लखन : (सर जुकाके अ‍ैसेही खामोस बैठा रहा) भाइ.. वो.. वो..

देवायत : (मुस्कुराते लखनके कंधेपे हाथ रखते) देख लखन.. तुजे मुजसे डरनेकी जरुरत नही हे.. मुजे सब सच बतादे.. क्युकी मेभी अ‍ैसे कइ ओरतोके साथ रीलेशनमे हु.. तो मुजे तेरे कीसीभी रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. मुजे पता हे हमारे खेतोमे भी कल लडकीया ओर ओरतोका तुम्हारे साथ रीलेशन हे.. आजकल तुमभी काफी रंगीन मीजाजके होगये हो.. बोल..

लखन : (सर जुकाते धीरेसे) भाइ.. वो..वो.. हमारे सामतभाइकी लडकी.. जागृती.. हम दोनो रीलेशनमे हे.. मेने उसीके कहेने पे इन दोनोको भगाया हे.. ओर इसमे खुद श्रीधरकी मम्मीने हमारी मदद कीहे..

देवायत : (हसते) लखन.. खुद श्रीधरकी मम्मीने ही अपने बेटे ओर अपनी भतीजीको भगाया हे..? ये बात कुछ हजम नही हो रही..( देवायत सबकुछ जानताथा फीरभी अनजमन बनकर लखनके मुहसे सब सुनना चाहता था)

लखन : (सरमाते हसते) भाइ.. ये बात थोडी लंबी हे.. मुजे सब जागृतीने ही बताया.. ओर कुछ बात मुजे खुद श्रीधरने कही हे.. क्युकी हम सभी दोस्त आपसमे अ‍ेक दुसरेके साथ सभी बाते खुलकर सैर करते हे..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तुम दोस्तोकी बाते जानता हु मे.. बता..

लखन : भाइ.. श्रीधरके पीता ओर उनकी भाभीके बीच रीलेशन हे.. ये बात श्रीधरकी मम्मीको पता चल गइ थी.. तो उनकी मम्मीने ही बदलेकी भावनासे उनकी भतीजीको अपने बेटेके साथ रीलेशन रखनेको कहा.. आपतो जानते हे.. उनकी जवानी तब पुरी तराह उफानपे थी.. तो वो आसानीसे अपनी चाचीकी जालमे फस गइ.. उसने जयश्रीको बहुतही अच्छी तराह समजाया की घरमे रीलेशनसे दोनोही सेइफ रहोगे..

ओर मीलनेमे भी आसानी रहेगी.. बहार बदनामीका डर रहेता हे.. अ‍ैसी बाते करके उसनेही जयश्रीको श्रीधरके साथ रीलेशन रखनेको कहा.. ओर उनकी मम्मीने ही अ‍ेक्जामके समय दोनो भाइ बीवीके साथ घुमने जानेके बहाने उन दोनोके पहेले मीलनका इन्तजाम कर दीयाथा.. तबसे ये दोनो भाइ बहेन रीलेशनमे हे..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तो फीर अ‍ैसे ही रीलेशनमे तो थे.. तो फीर भागनेकी क्या जरुरत पड गइ..?

लखन : (सामने देखते धीरेसे) भाइ.. श्रीधर केह रहाथा की कल रात उन दोनो साथ थे तब जयश्रीको उल्टीया हुइ थी.. ओर कल दोपहोरको भी खानेके बाद जयश्री उल्टीया कर रहीथी.. तब उनकी मम्मीको कुछ आसंकाये हुइ.. तो श्रीधरकी मम्मीने खानेमे कुछ आगया होगा कहेकर बातको टाल दीयाथा.. लेकीन वो जान चुकीथी की कुछतो गडबड हे.. तब उसने रातको ही जयश्रीको वो प्रेगनेन्सीकी कीट सबसे छुपर देदी थी.. ओर सुबह चार बजेही जयश्रीने पीसाब करने गइ तब चेक कीया.. तो पता चलाकी वो श्रीधरसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे..

देवायत : हंम.. तो रातमे पता चला तो दोनो भागे कब..? ओर उनको कौन छोडने गयाथा..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. सुबह ही जयश्रीने उनकी चाचीको सब बता दीया तो उसी वक्त श्रीधरकी मम्मीने उन दोनोको भाग जानेके लीये केह दीया.. सुबह श्रीधरका फोन आयाथा.. तो सामतभाइका लडका बंसीही हमारी जीप लेकर उनको छोडके आगया..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. लखन.. अगर कीसीने सुबह हमारी जीपको देख लीया होता तो..?

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. मेने हमारे घरका पता ओर चाबी उनको देदी थी.. ओर बंसीभी सहेरमे नही उनको बस तक छोडके ही आगया.. ओर जीप सीधेही हमारी हवेलीपे रखके चला गया.. साडे चार बजेतो जीप यही थी.. भाइ.. अगर वो लोग आयेतो आप उनको दोनोकी सादीके लीये मनाना.. वो दोनो अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करते हे.. प्लीज..

देवायत : (मुस्कुराते खडा होते) हंम.. लखन तुमतो जानते हो.. अब इस गावमे यही सब हमे देखनेको मीलेगा.. तो हमे यहीतो करना हे.. ओर अ‍ेक बात बता.. क्या तुम जागृतीसे सादी करने वाले हो..?

लखन : (सरमाते हसते) नही भाइ.. पहेले तो मेनेभी उनके साथ सादीका सोचा था.. लेकीन अब नही..

देवायत : (उनके सामने देखते) क्यु..? क्या सीर्फ मोज मजे करनेही उनके साथ रीलेशनमे हो..? देख लखन अगर वो सादीसुधा होतीतो बात कुछ ओरथी.. लेकीन हमे कीसीभी कुआरी लडकीके जजबातो से इस तराह खेलना नही चाहीये.. अगर तुम उसे अपनाना चाहोतो अपना सकते हो हमे कोइ अ‍ेतराज नही..

लखन : भाइ.. इरादातो मेराभी उनको अपनानेका था.. लेकीन अब नही.. क्युकी उनके साथ कोइ ओर ही सादी करना चाहता हे.. वो उनके पीछे बहुत पागल हे.. वो उसे हर हालमे पाना चाहता हे.. तो मेने मेरा इरादा बदल दीया हे.. भाइ वोभी मेरा खास दोस्त हे.. तो मे उनका दिल कैसे तोड सकता हु..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तो मेरा भाइ काफी समजदार भी हो गया हे.. हें..हें..हें.. लखन ये बता क्या तेरे उन दोस्तको तुम दोनोके रीलेशनके बारेमे पता हे..? कौन हे वो दोस्त जो उनसे सादी करना चाहता हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. मेरे जागृतीके साथ रीलशनकी बात अभी सीर्फ हम तीनोके बीच ही हे.. अ‍ेक मे अ‍ेक जागृती.. ओर तीसरी उनकी सहेली जयश्री.. तो मेने कलही जागृती ओर जयश्रीको ये बात बतादी हे.. खुद जागृतीका भाइ ही उनकी बहेनको पाना चाहता हे.. जो अभी वो उनकी बुआके साथभी रीलेशनमे हे..

देवायत : (मुस्कुराते) जयश्रीतो ठीक हे.. लेकीन ये बात जानके जागृतीने तुजे कुछ नही कहा..? की तेरा भाइ ही तुमसे सादी करना चाहता हे..?

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. वो क्या कहेती.. मेरे साथ रीलेशनमे आनेसे पहेले वो खुदभी तो वोही चाहती थी.. लेकीन उनका भाइ बंसी उनकी बुआके साथ रीलेशनमे हे.. तो वो उनको बोल नही सकी.. ओर उसने मेरे साथ रीलेशन रखलीया..

देवायत : (मुस्कुराते जाते) हंम चल ठीक हे.. आज सामकोही श्रीधर जयश्रीके माता पीताको मीलना पडेगा.. तु आराम कर.. फीर खेतोपे जाकर सब देख लेना.. सायद मुजे रातमे आनेमे देर होजाये.. तेरी सृतीभाभी भी सायद आज साम आजायेगी.. तो मुजे भुमी आंटीको छोडने राजीव अंकलके घर जाना पडे..

कहेतेही देवायत नीचे चला गया.. तो कुछही देरके बाद लखनके रुममे रजीया हसती हुइ आगइ.. ओर दरवाजा बंध करके अ‍ेक पत्नीकी तराह लखनके बगलमे आकर लेट गइ.. तो कुछही देरके बाद रजीया लखनके नीचे नंगी होकर लैटी थी.. ओर लखन भी नंगा होकर हाथके बल उचा होते रजीयाकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. आज रजीयाको दयाने सामनेसे ही कहेकर लखनके पास भेज दीयाथा..

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तो देवायतभी उपरसे आतेही सीधाही अपने रुममे चला गया.. ओर दरवाजा बंध करके आराम करनेही जा रहाथा.. क्युकी आज वो पुरी रात वंदना ओर रश्मीके साथ था.. ओर वो चेन्ज करके अपने बेडपे सोही रहाथा की तभी उनके रुममे बाथरुमका दरवाजा खुला.. ओर अंदरसे पुनम अ‍ेकदम अप्सारी तराह सजधजके तैयार होकर बहार नीकली.. ओर देवायतकी ओर कामुक स्माइल करते उनके साथ बेडमे आकर सोगइ..

देवायत : (मुस्कुराते बाहोमे भीचते) अरे मेरी पुनो रानी आगइ.. तेरी सादीके कीतने दीनोके बाद हम अ‍ैसे मीले हे.. चल आजा..

पुनम : (होंठ चुमते) भाइ.. आपकी बाहोमे अ‍ेक सुकुन मीलता हे.. फीकर मत करो.. अब हम दोनो जल्दी ही मीलेगे.. चलो.. अ‍ेक बार मुजसे प्यार करलो.. कीतने दिनोके बाद हम मील रहे हे.. बस अ‍ेक बार मुजे ठंडी करदो.. फीर थोडा आरामभी करलो.. अभी सृतीभाभी ओर भुमी बुआ भी आजायेगी.. वो दोनोही सहेरसे नीकल चुकी हे.. अभी सृतीभाभीका फोन आयाथा.. आपको भुमी बुआको छोडने भी जाना हे..

देवायत : (होंठ चुमते) पुनो.. कल मेने तेरी सहेलीको पुरी तराह अपना लीया हे.. क्या उनकी तेरे साथ कोइ बात हुइ..?

पुनम : (देवायतके सर्टके बटन खोलते मुस्कुराते) हां भाइ.. मेने सुबह ही उनके साथ फोनपे बात करली हे.. वो अभी रश्मीभाभीके घरपे हेनां..? मे ओर सृतीभाभी सामको उनको मीलने जा रही हे.. भाइ.. वो बहुत खुस लग रही थी.. क्या आप दोनोके बीच सबकुछ होगया..?

देवायत : (पुनमके बुब्सको मसलते) हंम.. पुनो.. हमने सादीसे पहेले ही सबकुछ करलीया.. वो अब कलीसे फुल बन चुकी हे.. चल आजा मुजसे रहा नही जाता.. वो दोनोके आनेसे पहेलेही हम सब नीपटा लेते हे..
 
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