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कहातो पुनम बेडसे उतर गइ.. ओर फटाफट अपने सभी कपडे नीकालने लगी.. तबतक देवायतभी अपने सब कपडे नीकाल देता हे.. ओर पुनम देवायतकी बगलमे लेट गइ.. तो देवायतने जोरोसे उनको अपनी बाहोमे भीचते अपने उपर लीटा दीया.. ओर पुनम मुस्कुराते खडी होकर देवायतकी कमरपे बैठ गइ.. ओर कमरको उची करते देवायतके लंडको पकडते अपनी चुतपे सेट करने लगी.. फीर धीरेसे बैठ गइ..
तो देवायतका पुरा लंड पुनमने अपनी चुतकी गीरफ्तमे लेलीया.. ओर मदहोस होते अपनी आंख चडाके देवायतपे जुकते उनके उपर लेट गइ.. ओर देवायतकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते अपनी कमर धीरे धीरे हीलाते देवायतको सोट मारते चोदने लगी.. आज पुनम बडेही दिनोके बाद देवायतको मील रहीथी इसीलीये उसे फोर प्लेयकी कोइ जरुरत महेसुस नही हुइ.. वो जल्द ही देवायतका मुसल लंड अपनी चुतमे लेना चाहती थी..
तब कुछही देरमे बाद दोनोके बीच धुआधार चुदाइ होने लगी.. जब पुनम अेक बार जड गइ तो देवायतके सीनेपे ढेर होगइ.. तभी देवायतने उसे जोरोसे बाहोमे भीचते साइडमे लीटा दीया.. ओर अेक हाथ पुनमके गलेमे डालके दुसरे हाथ उनकी टांगेमे फसाकर पुनमकी जबरदस्त चुदाइ करने लगा.. दोनोही कामातुर हो चुकेथे.. पुनम चुदवाते हुअेभी लगातार देवायतकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखती रही..
काफी धुआधार चुदाइके बाद दोनोही अपनी मंजीलके करीब चहोंच गये.. तब दोनोने अेक दुसरेको अपनी बाहोमे भीच लीया.. देवायतने अपना पुरा लंड पुनकी चुतमे जडतक घुसा दीया.. ओर अपनी कमरको जटके देने लगा.. तभी पुनमकी चुतमे देवायतका लावा फुट पडा.. ओर पुनमकी चुतको भरने लगा.. तो पुनमभी कांपते हुअे देवायतके साथ जडने लगी.. फीर दोनोही सांत होगये.. तब दोनोही पसीनेसे तरबोर हो चुकेथे..
फीर कुछ देरके बाद देवायत पुनमके उपरसे हड गया.. ओर बेडसे उतरकर पुनमको गोदमे उठाकर बारुममे ले गया.. ओर दोनो सावरके नीचे खडे होकर नहाने लगे.. वहा भी नहाते पुनम देवायतके लंडको पकडके सहेलाते वासना भरी नजरोसे देखने लगी.. तो देवायत नहाते हुअे खडे खडे अेब बार फीर पुनमकी जबरदस्त चुदाइ करलेता हे.. तब पुनम पुरी तराह संतुस्ट होगइ थी.. ओर दोनोही नहाके बहार आगये..
फीर दोनोने फटाफट अपने कपडे पहेन लीये.. ओर पुनम सरमाते देवायतके होठोको चुमकर रातको फीर सृतीके साथ मीलकर सोनेको कहेकर अपने कमरेमे चली गइ.. ओर आराम करने लगी.. तबतक देवायतभी बेडपे सोतेही नींदकी आगोसमे चला गया.. अभी दोनोने अेक घंटेभी आराम नही कीया होगाकी तभी सृतीकी कारका होर्न बजा.. तो दया जटसे अपने रुमसे नीकली.. तो कारसे सृती ओर भुमीका मुस्कुराते बहार नीकली..
दया : (खुस होते) अरे आइअे आइअे बुआ.. आइअे सृतीदीदी.. बेग मुजे दे दीजीये.. सब लोग आराम करते सो रहे हे.. हें..हें..हें.. आपभी थोडा फैस होजाइअे.. तबतक मे पुनो दीदीको जगाती हु..
सृती : (मुस्कुराते जटसे) अरे नही दयाबहेन.. उनको सोने दीजीये.. तबतक हमभी थोडा आराम कर लेते हे..
भुमीका : (होलमे आते) दया.. क्या अभी घरपे सीर्फ पुनमबीटीया ही हे..? ओर कोइ नही हे..?
दया : (बेग लेकर साथ चलते) अरे नही बुआ.. बडे मालीक ओर छोटे मालीकभी देरसे आये हे तो वोभी सो रहे हे.. क्या मे बडे मालीक को जगादु..? अभी अेक घंटे पहेलेही अपने रुममे गये हे..
भुमीका : (मुस्कुराते) अरे नही.. सोनेदे सबको.. हमभी थोडा आराम करलेते हे.. मेतो सफरसे थक गइ..
तो दया गेस्ट रुममे बेग लेकर चली गइ.. तो भुमीका ओर सृती दोनोने ही फ्रेस होकर चेन्ज करलीया.. भुमीका बेडपे लेट गइ.. तब सृती सरमाकर धीरेसे बहार नीकल गइ.. ओर अपने पतीके रुममे चली गइ.. तो भुमीका समज गइकी सृती अपने पतीके पास चली गइ हे.. इधर सृतीने भी देवायतके रुममे आकर देखातो देवायत गहेरी नींदमे सो रहाथा.. तो उनको देखकर सृतीको हसी आगइ.. ओर वो धीरेसे उनकी बगलमे जाकर लेट गइ.. तब देवायतने नींदमे ही उनकी कमरमे हाथ डालके सृतीको बाहोमे भरलीया..
सभी लोग आराम कर रहेथे तब श्रीधर ओर जयश्रीके मम्मी पापा घरमे अबभी अपने अपने रुममे बेचैन होकर करवटे बदल रहे थे.. जयश्रीके पापा जवेरीलालको अभी तक उनके छोटेभाइ जीतुलाल ओर अपनी बीवी वृन्दाके बीच चल रहे नाजायज रीस्तेके बारेमे नही पताथा.. लेकीन श्रीधरके मम्मी पापा अबभी अपने रुममे अेक दुसरेके साथ बहेस कर रहेथे.. दोनो ही अपने रुममे बंध दरवाजा करते बहुतही धीमी आवाजमे जगडा कर रहेथे..
जब श्रीधरके पापा इस रीस्तेके खीलाफ बोलने लगे.. ओर श्रीधरको अपनी जमीन जायदादमे बेदखल करनेकी बात करने लगे.. तब मजबुरन श्रीधरकी मम्मीने उनके पतीको उनकी भाभीके साथ अवैध रीलेशनके बारेमे बता दीया.. तब सुनके श्रीधरके पापाको बडाही जटका लगा.. ओर श्रीधरकी मम्मीके सामने गीड गीडाते उनकी माफी मांगने लगा.. बस श्रीधरकी मम्मीके पास अपनी बाते मनवानेका जो हथीयार था..
उनमे पहेला हथीयार इस्तमाल करलीया.. तब बडीही सीफततासे श्रीधरकी मम्मीने माफी देनेके सर्तके तौर पर अपने दोनो लडकेके रीस्तेको अपनानेके लीये मना लीया.. ओर इस रीस्तेको माननेके लीये अपने भाइ भाभीको भी मनानेको कहे दीया.. कहेते हेनां मरता क्या नही करता.. तो श्रीधरके पीतानेभी मजबुरन इनकी बीवीको अपने भाइ भाभीको मनानेके लीये हां कहेदी.. तब जाके मीयी बीवीके बीच जगडा सांत हुआ..
लेकीन उनके बडे भाइके कमरेमे जयश्रीकी मम्मी अबभी आंसु बहा रहीथी.. तब उनको नही पताथा की बाजुमे उनके देवरके कमरेमे उनकी देवरानीने अपने पतीके सामने उन दोनोके रीलेशनका भांडा फोड दीया हे.. जयश्रीकी मम्मी अपने पतीको बार बार ठाकुरसाहेबको मीलनेके लीये केह रहीथी.. ताकी उन दोनो भाइ बहेनको समजाकर घर वापस लेआये.. तब उनके पतीने सामको मीलने जाउगा कहेकते उनको आस्वासन दीया.. तब जाके जयश्रीकी मम्मी सांत हुइ..
तो देवायतका पुरा लंड पुनमने अपनी चुतकी गीरफ्तमे लेलीया.. ओर मदहोस होते अपनी आंख चडाके देवायतपे जुकते उनके उपर लेट गइ.. ओर देवायतकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते अपनी कमर धीरे धीरे हीलाते देवायतको सोट मारते चोदने लगी.. आज पुनम बडेही दिनोके बाद देवायतको मील रहीथी इसीलीये उसे फोर प्लेयकी कोइ जरुरत महेसुस नही हुइ.. वो जल्द ही देवायतका मुसल लंड अपनी चुतमे लेना चाहती थी..
तब कुछही देरमे बाद दोनोके बीच धुआधार चुदाइ होने लगी.. जब पुनम अेक बार जड गइ तो देवायतके सीनेपे ढेर होगइ.. तभी देवायतने उसे जोरोसे बाहोमे भीचते साइडमे लीटा दीया.. ओर अेक हाथ पुनमके गलेमे डालके दुसरे हाथ उनकी टांगेमे फसाकर पुनमकी जबरदस्त चुदाइ करने लगा.. दोनोही कामातुर हो चुकेथे.. पुनम चुदवाते हुअेभी लगातार देवायतकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखती रही..
काफी धुआधार चुदाइके बाद दोनोही अपनी मंजीलके करीब चहोंच गये.. तब दोनोने अेक दुसरेको अपनी बाहोमे भीच लीया.. देवायतने अपना पुरा लंड पुनकी चुतमे जडतक घुसा दीया.. ओर अपनी कमरको जटके देने लगा.. तभी पुनमकी चुतमे देवायतका लावा फुट पडा.. ओर पुनमकी चुतको भरने लगा.. तो पुनमभी कांपते हुअे देवायतके साथ जडने लगी.. फीर दोनोही सांत होगये.. तब दोनोही पसीनेसे तरबोर हो चुकेथे..
फीर कुछ देरके बाद देवायत पुनमके उपरसे हड गया.. ओर बेडसे उतरकर पुनमको गोदमे उठाकर बारुममे ले गया.. ओर दोनो सावरके नीचे खडे होकर नहाने लगे.. वहा भी नहाते पुनम देवायतके लंडको पकडके सहेलाते वासना भरी नजरोसे देखने लगी.. तो देवायत नहाते हुअे खडे खडे अेब बार फीर पुनमकी जबरदस्त चुदाइ करलेता हे.. तब पुनम पुरी तराह संतुस्ट होगइ थी.. ओर दोनोही नहाके बहार आगये..
फीर दोनोने फटाफट अपने कपडे पहेन लीये.. ओर पुनम सरमाते देवायतके होठोको चुमकर रातको फीर सृतीके साथ मीलकर सोनेको कहेकर अपने कमरेमे चली गइ.. ओर आराम करने लगी.. तबतक देवायतभी बेडपे सोतेही नींदकी आगोसमे चला गया.. अभी दोनोने अेक घंटेभी आराम नही कीया होगाकी तभी सृतीकी कारका होर्न बजा.. तो दया जटसे अपने रुमसे नीकली.. तो कारसे सृती ओर भुमीका मुस्कुराते बहार नीकली..
दया : (खुस होते) अरे आइअे आइअे बुआ.. आइअे सृतीदीदी.. बेग मुजे दे दीजीये.. सब लोग आराम करते सो रहे हे.. हें..हें..हें.. आपभी थोडा फैस होजाइअे.. तबतक मे पुनो दीदीको जगाती हु..
सृती : (मुस्कुराते जटसे) अरे नही दयाबहेन.. उनको सोने दीजीये.. तबतक हमभी थोडा आराम कर लेते हे..
भुमीका : (होलमे आते) दया.. क्या अभी घरपे सीर्फ पुनमबीटीया ही हे..? ओर कोइ नही हे..?
दया : (बेग लेकर साथ चलते) अरे नही बुआ.. बडे मालीक ओर छोटे मालीकभी देरसे आये हे तो वोभी सो रहे हे.. क्या मे बडे मालीक को जगादु..? अभी अेक घंटे पहेलेही अपने रुममे गये हे..
भुमीका : (मुस्कुराते) अरे नही.. सोनेदे सबको.. हमभी थोडा आराम करलेते हे.. मेतो सफरसे थक गइ..
तो दया गेस्ट रुममे बेग लेकर चली गइ.. तो भुमीका ओर सृती दोनोने ही फ्रेस होकर चेन्ज करलीया.. भुमीका बेडपे लेट गइ.. तब सृती सरमाकर धीरेसे बहार नीकल गइ.. ओर अपने पतीके रुममे चली गइ.. तो भुमीका समज गइकी सृती अपने पतीके पास चली गइ हे.. इधर सृतीने भी देवायतके रुममे आकर देखातो देवायत गहेरी नींदमे सो रहाथा.. तो उनको देखकर सृतीको हसी आगइ.. ओर वो धीरेसे उनकी बगलमे जाकर लेट गइ.. तब देवायतने नींदमे ही उनकी कमरमे हाथ डालके सृतीको बाहोमे भरलीया..
सभी लोग आराम कर रहेथे तब श्रीधर ओर जयश्रीके मम्मी पापा घरमे अबभी अपने अपने रुममे बेचैन होकर करवटे बदल रहे थे.. जयश्रीके पापा जवेरीलालको अभी तक उनके छोटेभाइ जीतुलाल ओर अपनी बीवी वृन्दाके बीच चल रहे नाजायज रीस्तेके बारेमे नही पताथा.. लेकीन श्रीधरके मम्मी पापा अबभी अपने रुममे अेक दुसरेके साथ बहेस कर रहेथे.. दोनो ही अपने रुममे बंध दरवाजा करते बहुतही धीमी आवाजमे जगडा कर रहेथे..
जब श्रीधरके पापा इस रीस्तेके खीलाफ बोलने लगे.. ओर श्रीधरको अपनी जमीन जायदादमे बेदखल करनेकी बात करने लगे.. तब मजबुरन श्रीधरकी मम्मीने उनके पतीको उनकी भाभीके साथ अवैध रीलेशनके बारेमे बता दीया.. तब सुनके श्रीधरके पापाको बडाही जटका लगा.. ओर श्रीधरकी मम्मीके सामने गीड गीडाते उनकी माफी मांगने लगा.. बस श्रीधरकी मम्मीके पास अपनी बाते मनवानेका जो हथीयार था..
उनमे पहेला हथीयार इस्तमाल करलीया.. तब बडीही सीफततासे श्रीधरकी मम्मीने माफी देनेके सर्तके तौर पर अपने दोनो लडकेके रीस्तेको अपनानेके लीये मना लीया.. ओर इस रीस्तेको माननेके लीये अपने भाइ भाभीको भी मनानेको कहे दीया.. कहेते हेनां मरता क्या नही करता.. तो श्रीधरके पीतानेभी मजबुरन इनकी बीवीको अपने भाइ भाभीको मनानेके लीये हां कहेदी.. तब जाके मीयी बीवीके बीच जगडा सांत हुआ..
लेकीन उनके बडे भाइके कमरेमे जयश्रीकी मम्मी अबभी आंसु बहा रहीथी.. तब उनको नही पताथा की बाजुमे उनके देवरके कमरेमे उनकी देवरानीने अपने पतीके सामने उन दोनोके रीलेशनका भांडा फोड दीया हे.. जयश्रीकी मम्मी अपने पतीको बार बार ठाकुरसाहेबको मीलनेके लीये केह रहीथी.. ताकी उन दोनो भाइ बहेनको समजाकर घर वापस लेआये.. तब उनके पतीने सामको मीलने जाउगा कहेकते उनको आस्वासन दीया.. तब जाके जयश्रीकी मम्मी सांत हुइ..