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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १९०
दोनोही बाते करते रश्मीके घरपे पहोंच गइ.. तब वंदना ओर रश्मी मीलकर खाना बना रही थी.. तो वंदना पुनम सृतीको देखकर बहुत खुस होगइ.. ओर दोडकर पुनमके गले लग गइ.. तब रश्मी हसने लगी.. फीर पुनम ओर सृती चेयर लेकर कीचनके पास ही बैठ गइ.. ओर चारो बाते करने लगी.. तब रश्मी ओर वंदनाने सुधीर के बारेमे दोनोको बता दीया.. ओर ये भी कहाकी तीनो बोम्बे चले गये हे सुनकर पुनम ओर वंदना दोनो खुब हसी.....अब आगे
कुछ देर बाते करते दोनोही वापस आपसमे बाते करते हवेलीकी ओर चल पडी.. जाहीरसी बात हे.. आज सारा दिन दोनोके दिमागमे लखन ही छाया हुआ था.. पुनमने लखनके बारेके सृतीको सब कुछ बता दीया.. फीर खुदकी ओर देवायतके बीच हुअे रीलेशनकी बात भी बतादी.. की बाबाके कहेनेपे कैसे उन्होने देवायतको अपने साथ प्यार करनेके लीये मजबुर कीया था.. फीर बाबाने कैसे दोनोकी सादी करवाइ..
ओर उसी रात हवेलीपे कोइ नही था तब अपनी सुहागरात मनाइ.. फीर आज बातो ही बातोमे पुनमने सृतीको आने वाले वक्तके लीये आगाह करते उनको मानसीक तौरपे प्रीपेर कर दीया था.. तो सृती भी पुनमकी बाते सुनकर बडी ही उलजनमे फस गइथी.. अब उनके दिलमे भी लखनके लीये चाहत बढ चुकी थी..
लखनके बारेमे सोचते उनके दिलमे भी पुनमकी तराह हलचल तेज होने लगी थी.. पुरे रास्ते लखनके बारेमे सोचते आज पहेली बार सृतीकी चुतभी गीली होगइ थी.. बाते करते दोनो घरपे आगइ.. तब पुनम ओर सृतीका लखनके प्रेती नजरीया बदल चुका था.. आज दोनोको पता चल गया था.. की अेकना अेक दिन उनको दोनोको भी लखनको अपनाना पडेगा.. ओर उनके साथ भी राते रंगीन करनी पडेगी..
तो दुसरी ओर कल सामतभाइके घरपे बंसी ओर सांतीका मंडपका मुहुर्त था.. ओर दुसरे दिन दोनोकी सादी थी.. तो सुबह देवायत नीर्मला भुमीका चंदा ओर पुनम.. धिरेनका मकान देखने ओर सौदा करने जा रहे थे.. ओर बंसी सांतीकी सादीके दुसरे ही दिन राजीवका क्रिया कर्म था.. तो क्रियाकर्म खत्म होते ही इनके दुसरे दिन नीर्मला भुमीका चंदा ओर सरला चारो हरद्वारके लीये नीकलने वाली थी..
तो लखन भी लता ओर नीलमको लेकर हमेसाके लीये सहेरमे रहेने जा रहा था.. तो अब पुनमका भी धिरेनके घर जानेका वक्त आगया था.. अभी देवायत ओर लखन सामतके घरसे नही आये थे.. तब मंजु चंदा नीर्मला ओर भुमीका बैठकर आपसमे जानेकी सब प्लानींग कर रहेथे.. तभी सृती ओर पुनम भी रश्मीके घरसे आगइ.. तो कुछ देरके बाद देवायत लखन भी आगये.. तभी चंदाने रजीयाको कहेकर सबके डीनरके लीये कहा.. ओर सबलोग डीनर करने अैकठे बैठ गये.. तब..
देवायत : लखन.. कल मे इन सबको लेकर धिरेनका मकान देखने जा रहा हु.. तो सृतीको मे लेकर जाउगा.. कल तुजे इनको छोडने लेने जानेकी जरुरत नही हे.. कल तुम सामत भाइके घरपे रहेना.. सादीका हमे ही अेरेन्ज करना हे.. ओर घरपे जीतने लोग रहेगे सबको लेकर सादीमे जाना.. हमे दो दिन सबको उनके घरपे सादीमे जाना होगा..
लखन : (मुस्कुराते) जी भैया..
मंजुला : देवु.. मम्मी ओर भुमी आंटी.. सादीमे नही आ सकते.. क्युकी वो दोनो बडे हे.. बाकी सबको हम भेज देगे.. क्या आपके साथ पुनो भी आ रही हेनां..?
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. मे घरपे आपके पास ही रहुगी.. मुजे नही जाना..
नीर्मला : (मुस्कुराते) पुनो बेटा.. अब धिरेन तुम दोनोके लीये तो घर ले रहा हे.. तो तुम भी चलो.. तुम भी सब देखलो.. तुम्हे भी तो पसंद आना चाहीये..
चंदा : (मुस्कुराते) हां दीदी.. आपभी चलो.. वरना धिरेनको बुरा लगेगा..
पुनम : (मंजुकी ओर देखा तो मंजुने आंखोके इसारेसे हां कहा) ठीक हे भाभी.. तो फीर मेभी चलुगी..
सृती : (हसते) पुनो दीदी... चलो चलो.. मेभी आ रही हु.. फीर हम दोनो मेरी क्लीनीकपे चले जायेगे.. ये लोग भले ही हमारे घरपे आराम करते रहे.. सामको हम सब वापस आजायेगे..
भुमीका : (देवुकी ओर कातील नजरोसे देखते) हां ये सही हे.. सब हमारे घरपे आराम करने चले जायेगे..
देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे.. ओर लखन.. अब दो दिनके बाद अंकलका क्रियाकर्म हे.. तो अब तुम भी सहेर चले जाओ.. ओर वहाका सब काम सम्हाललो.. वहा नीलुकी पढाइ भी डीस्टर्ब हो रही हे.. तो उसे भी साथ ले चलो..
नीर्मला : (मुस्कुराते) हां.. पुनो बेटा.. अब क्रियाकर्म खतम होते ही आप भी धिरेनके पास जा सकती हो.. वोभी कइ दिनसे अकेला हे.. तो उनको खाने पीनेकी तकलीफ होगी..
पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) जी मम्मीजी..
मंजुला : (मुस्कुराते सृतीको) हां.. सृती.. तुम भी लखन भैयाके साथ चली जाना.. ओर जबतक भुमी आंटी वापस नही आजाती तबतक लखन लताके साथ ही रहेना.. ताकी तुजे छोडने लेनेकी जरुरतही ना पडे..
देवायत : (मुस्कुराते) हां सृती.. ये सही रहेगा ओर सामतभाइके घर सादीके दिन छुटी रखलेना.. हम सबको सादीमे जाना होगा.. (लताकी ओर देखते) ओर लता.. राजीव अंकलके क्रियाकर्ममे रमा भाभी ओर नीलुकोभी आना हे.. भानु तो इधर ही होगा.. तो तुम फोन करके जरा रमाभाभीको कहेना वो नीलुका सब सामान लेकर आजाये.. ताकी नीलु तुम लोगोके साथ ही चली जाये.. ओर तुम भी अब अपना सामान पेक करना सुरु करदो.. ओर रजीयाको भी बोलदो.. वो भी अपना सामान पेक करले..
लता : (सरमाते मुस्कुराते) जी भैया.. आजही भाभीको फोन करदुगी.. ओर हमारा सामान भी पेक करलुगी..
सबलोग डीनर करते जानेकी प्लानींग करने लगे.. जब सबने डीनर करलीया तो लखन दोस्तोके साथ बंसीके घर जानेकी बात करके चला गया.. तब सबलोग होलमे बेठकर बाते करने लगे.. तब देवायतने भी धिरेनको फोन करके कल सबको लेकर आनेकी बाते करली.. तो धिरेन भी खुस होते कलकी प्लानींग करने लगा.. उनका इतने दिनोसे नीलमसे कोइ कोन्टेक्ट नही हो पाया था.. तो वो इसके लीयेभी बैचेन रहेता था..
अध्याय - १९०
दोनोही बाते करते रश्मीके घरपे पहोंच गइ.. तब वंदना ओर रश्मी मीलकर खाना बना रही थी.. तो वंदना पुनम सृतीको देखकर बहुत खुस होगइ.. ओर दोडकर पुनमके गले लग गइ.. तब रश्मी हसने लगी.. फीर पुनम ओर सृती चेयर लेकर कीचनके पास ही बैठ गइ.. ओर चारो बाते करने लगी.. तब रश्मी ओर वंदनाने सुधीर के बारेमे दोनोको बता दीया.. ओर ये भी कहाकी तीनो बोम्बे चले गये हे सुनकर पुनम ओर वंदना दोनो खुब हसी.....अब आगे
कुछ देर बाते करते दोनोही वापस आपसमे बाते करते हवेलीकी ओर चल पडी.. जाहीरसी बात हे.. आज सारा दिन दोनोके दिमागमे लखन ही छाया हुआ था.. पुनमने लखनके बारेके सृतीको सब कुछ बता दीया.. फीर खुदकी ओर देवायतके बीच हुअे रीलेशनकी बात भी बतादी.. की बाबाके कहेनेपे कैसे उन्होने देवायतको अपने साथ प्यार करनेके लीये मजबुर कीया था.. फीर बाबाने कैसे दोनोकी सादी करवाइ..
ओर उसी रात हवेलीपे कोइ नही था तब अपनी सुहागरात मनाइ.. फीर आज बातो ही बातोमे पुनमने सृतीको आने वाले वक्तके लीये आगाह करते उनको मानसीक तौरपे प्रीपेर कर दीया था.. तो सृती भी पुनमकी बाते सुनकर बडी ही उलजनमे फस गइथी.. अब उनके दिलमे भी लखनके लीये चाहत बढ चुकी थी..
लखनके बारेमे सोचते उनके दिलमे भी पुनमकी तराह हलचल तेज होने लगी थी.. पुरे रास्ते लखनके बारेमे सोचते आज पहेली बार सृतीकी चुतभी गीली होगइ थी.. बाते करते दोनो घरपे आगइ.. तब पुनम ओर सृतीका लखनके प्रेती नजरीया बदल चुका था.. आज दोनोको पता चल गया था.. की अेकना अेक दिन उनको दोनोको भी लखनको अपनाना पडेगा.. ओर उनके साथ भी राते रंगीन करनी पडेगी..
तो दुसरी ओर कल सामतभाइके घरपे बंसी ओर सांतीका मंडपका मुहुर्त था.. ओर दुसरे दिन दोनोकी सादी थी.. तो सुबह देवायत नीर्मला भुमीका चंदा ओर पुनम.. धिरेनका मकान देखने ओर सौदा करने जा रहे थे.. ओर बंसी सांतीकी सादीके दुसरे ही दिन राजीवका क्रिया कर्म था.. तो क्रियाकर्म खत्म होते ही इनके दुसरे दिन नीर्मला भुमीका चंदा ओर सरला चारो हरद्वारके लीये नीकलने वाली थी..
तो लखन भी लता ओर नीलमको लेकर हमेसाके लीये सहेरमे रहेने जा रहा था.. तो अब पुनमका भी धिरेनके घर जानेका वक्त आगया था.. अभी देवायत ओर लखन सामतके घरसे नही आये थे.. तब मंजु चंदा नीर्मला ओर भुमीका बैठकर आपसमे जानेकी सब प्लानींग कर रहेथे.. तभी सृती ओर पुनम भी रश्मीके घरसे आगइ.. तो कुछ देरके बाद देवायत लखन भी आगये.. तभी चंदाने रजीयाको कहेकर सबके डीनरके लीये कहा.. ओर सबलोग डीनर करने अैकठे बैठ गये.. तब..
देवायत : लखन.. कल मे इन सबको लेकर धिरेनका मकान देखने जा रहा हु.. तो सृतीको मे लेकर जाउगा.. कल तुजे इनको छोडने लेने जानेकी जरुरत नही हे.. कल तुम सामत भाइके घरपे रहेना.. सादीका हमे ही अेरेन्ज करना हे.. ओर घरपे जीतने लोग रहेगे सबको लेकर सादीमे जाना.. हमे दो दिन सबको उनके घरपे सादीमे जाना होगा..
लखन : (मुस्कुराते) जी भैया..
मंजुला : देवु.. मम्मी ओर भुमी आंटी.. सादीमे नही आ सकते.. क्युकी वो दोनो बडे हे.. बाकी सबको हम भेज देगे.. क्या आपके साथ पुनो भी आ रही हेनां..?
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. मे घरपे आपके पास ही रहुगी.. मुजे नही जाना..
नीर्मला : (मुस्कुराते) पुनो बेटा.. अब धिरेन तुम दोनोके लीये तो घर ले रहा हे.. तो तुम भी चलो.. तुम भी सब देखलो.. तुम्हे भी तो पसंद आना चाहीये..
चंदा : (मुस्कुराते) हां दीदी.. आपभी चलो.. वरना धिरेनको बुरा लगेगा..
पुनम : (मंजुकी ओर देखा तो मंजुने आंखोके इसारेसे हां कहा) ठीक हे भाभी.. तो फीर मेभी चलुगी..
सृती : (हसते) पुनो दीदी... चलो चलो.. मेभी आ रही हु.. फीर हम दोनो मेरी क्लीनीकपे चले जायेगे.. ये लोग भले ही हमारे घरपे आराम करते रहे.. सामको हम सब वापस आजायेगे..
भुमीका : (देवुकी ओर कातील नजरोसे देखते) हां ये सही हे.. सब हमारे घरपे आराम करने चले जायेगे..
देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे.. ओर लखन.. अब दो दिनके बाद अंकलका क्रियाकर्म हे.. तो अब तुम भी सहेर चले जाओ.. ओर वहाका सब काम सम्हाललो.. वहा नीलुकी पढाइ भी डीस्टर्ब हो रही हे.. तो उसे भी साथ ले चलो..
नीर्मला : (मुस्कुराते) हां.. पुनो बेटा.. अब क्रियाकर्म खतम होते ही आप भी धिरेनके पास जा सकती हो.. वोभी कइ दिनसे अकेला हे.. तो उनको खाने पीनेकी तकलीफ होगी..
पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) जी मम्मीजी..
मंजुला : (मुस्कुराते सृतीको) हां.. सृती.. तुम भी लखन भैयाके साथ चली जाना.. ओर जबतक भुमी आंटी वापस नही आजाती तबतक लखन लताके साथ ही रहेना.. ताकी तुजे छोडने लेनेकी जरुरतही ना पडे..
देवायत : (मुस्कुराते) हां सृती.. ये सही रहेगा ओर सामतभाइके घर सादीके दिन छुटी रखलेना.. हम सबको सादीमे जाना होगा.. (लताकी ओर देखते) ओर लता.. राजीव अंकलके क्रियाकर्ममे रमा भाभी ओर नीलुकोभी आना हे.. भानु तो इधर ही होगा.. तो तुम फोन करके जरा रमाभाभीको कहेना वो नीलुका सब सामान लेकर आजाये.. ताकी नीलु तुम लोगोके साथ ही चली जाये.. ओर तुम भी अब अपना सामान पेक करना सुरु करदो.. ओर रजीयाको भी बोलदो.. वो भी अपना सामान पेक करले..
लता : (सरमाते मुस्कुराते) जी भैया.. आजही भाभीको फोन करदुगी.. ओर हमारा सामान भी पेक करलुगी..
सबलोग डीनर करते जानेकी प्लानींग करने लगे.. जब सबने डीनर करलीया तो लखन दोस्तोके साथ बंसीके घर जानेकी बात करके चला गया.. तब सबलोग होलमे बेठकर बाते करने लगे.. तब देवायतने भी धिरेनको फोन करके कल सबको लेकर आनेकी बाते करली.. तो धिरेन भी खुस होते कलकी प्लानींग करने लगा.. उनका इतने दिनोसे नीलमसे कोइ कोन्टेक्ट नही हो पाया था.. तो वो इसके लीयेभी बैचेन रहेता था..