Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 47 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

मुना : मोम.. तो फीर आपकी सादी बापुसे कैसे हुइ..?

बसंती : मुनाजी.. फीर तो आपके मामा मेरी मौसीके बजाये मेरी ओर ढलने लगे थे.. सायद वो मुजे सचमे प्यार करने लगे थे.. ओर ये बात मेरी नइ मां यानीकी मौसीको राच नही आइ.. ओर उसने आनन फाननमे मेरी सादी आपके बापुसे करवादी.. ओर मेरी सादीके बाद मौसीने भी आपके मामासे सादी करली.. बस.. इसीलीये मेरी ओर आपके बापुकी उमरमे इतना फर्क हे.. मुनाजी.. उस दिनके बाद मेने उस घरकी चोखटपे कभी कदम नही रखा.. ओर इसीलीये मे आप दोनोको अपने मामाके घरपे नही जाने देती थी..

मुना : मोम.. आइ अ‍ेम सोरी.. हमे नही पता थाकी आपके साथ मामा ओर नानीने आइ मीन मामीने इतना बुरा कीया हे.. लेकीन मे आपसे वादा करता हु.. अ‍ेक दिन मे इसका बदला जरुर लुगा.. क्या वो हमारे पास वाले गांवमे ही रहेते हेनां..?

बसंती : (जटसे) नही नही मुना.. अब आप ही हमारा सहारा हो.. अगर आपको कुछ होगया तो मे ओर बरखा जीन्दा नही रहेगी.. हमे उनसे कोइ बदला नही लेना.. भुलजाइअ‍े सब.. इसीलीये मे आपको ये सब नही बता रही थी.. बीटु.. मेरी खातीर.. बरखा की खातीर.. आप अ‍ैसा वैसा कोइ कदम मत उठाना.. आपको मेरी कसम हे..

मुना : (मुस्कुराते) मोम.. मे अ‍ैसा कोइ बदला नही लुगा जो आप सोच रही हे.. बस.. मुजे सीर्फ हमारे मामाके बारेमे जानकारीया दे दीजीये.. ओर देखीये.. उनके साथ क्या होता हे.. बस.. सीर्फ अ‍ेक बात बता दीजीये.. क्या मामा ओर नानी मुजे ओर बरखाको पहेचानते हे..? बस.. सीर्फ इतना बता दीजीये..

बसंती : (मुस्कुराते) नही मुनाजी.. मेने उनका साया भी आप दोनोपे नही पडने दिया.. अबतो आपके नानाभी नही रहे.. बस.. मुजे सीर्फ इतना पता हे.. मेरी सादीके बाद मौसीने आपके मामाके साथ सादी करली थी.. ओर असलमे वो उनकी सादीसे पहेले ही आपके मामाकी पत्नी बनकर ही घरपे रहेने लगी थी..

जब उसने अपनी सादीसे पहेले अपना बच्चा गीरा दिया.. तबसे उनकोभी अब कोइ संतान नही हुइ हे.. अब मेरे मायकेमे सीर्फ आपके मामा ओर नानी जो अब आपकी मामी होगइ हे वोही रहेते हे.. बस.. मुजे सीर्फ इतना ही पता हे..

मुना : (मुस्कुराते) मोम.. क्या नाम हे मामाका.. ओर मेरी नइ नानीका.. हें..हें..हें.. ओर क्या काम करते हे मामा..

बसंती : (सरमाकर हसते) क्या करेगे जानकर..? देखना आप कुछ उल्टा सीधा मत करना.. क्युकी अब कुछ दिनोके बाद मेभी आपकी बीवी होजाउगी.. जब मेरी सादी आपके बापुसे हुइ तब हमारी स्थीती इतनी अच्छी नही थी.. जो भी थोडी बहुत जमीन थी वोही जमीन आपके मामा सम्हालते थे.. लेकीन जैसेही वो गांवके सरपंच होगये..

तो आज उनके पास पुरे पचीस अ‍ेकर जमीन हे.. आपके मामाका नाम विनोद हे.. जो उसी गांवमे सरपंच भी हे.. सायद आज या कल सामतभाइके घरपे सादीमे भी आयेगे.. मे आपको दिखा दुगी.. ओर आपकी नइ नानी वही गांवमे बच्चोको पढाती हे.. वो वहा घरपे ही पढाती हे.. गीता नाम हे उनका.. बहुत ही खुबसुरत.. बरखा ओर मेरी तराह कामी ओरत हे.. हें..हें..हें..

मुना : (कातील मुस्कानसे) मोम.. आप दोनो सचमे बहुत ही सेक्सी हो.. तुम दोनोको देखते ही मन होने लगता हे.. लेकीन मोम.. बुरा मत मानना.. अब मामी गइ कामसे.. हें..हें..हें..

बसंती : (सरमाकर हसते अ‍ेक चपत लगाते) आप बहुत कमीने हे.. आपकी बहेन ओर मांकोतो पटालीया अब मामीको भी नही छोडेगे.. हें.. हें..हें.. देखना सब ध्यान रखकर करना.. आपके मामाको पता ना चल जाये.. कमीना बहुत खतरनाक हे.. गांवमे सरपंच जो हे..

मुना : (मुस्कुराते) मोम.. आप मेरी चीन्ता मत करना.. मे नही.. उनको तो कोइ ओरही सम्हाल लेगा.. मे कही पीक्चरमे आने वाला ही नही.. बस.. अब तुम सीर्फ देखती जाओ.. हें..हें..हें..

बसंती : (खडी होते) ठीक हे.. चलो अब सादीमे नही जाना क्या.. जाइअ‍े तैयार होजाइअ‍े.. आज सुबह कीतना जोसमे कीया हे.. नीचे अभी भी जलन हो रही हे.. आपको जेलना इतना आसान नही हे.. आप हेक ही बारमे मुजे थका देते हे..

मुना : (मुस्कुराते बाहोमे भरते) मोम.. चलोनां.. अ‍ेक बार फीर करते हे.. आज आपको चोदनेका बहुत मन हो रहा हे.. प्लीज.. अभी फटाफट होजायेगा..

बसंती : (सर्मसार होते कामुक नजरोसे देखते धीरेसे) नही नही.. अभी मे तैयार हो गइ हु.. हम बादमे करेगे.. दो पहोरको खाना खानेके बाद हमारे पास बहुत टाइम होगा.. बरखा तो अब वही रुकेगी.. तब आपको जीतना प्यार करना हे करलेना.. चलीये अब जाना हे.. आपके बापुभी उधर गये हे.. बस.. उनका खयाल रखना.. बाकी बरखाका अब कोइ डर नही हे.. कमीनी खुद भी वही चाहती हे..

मुना : (बुब्स मसलते होठोको चुमते) येस मोम.. आइ लव यु.. चलो..

बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) हंम.. आइ लव यु टु.. मेरा छोटा पती.. हें..हें..हें.. चलीये.. घरको ताला लगा दीजीये..

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कहातो मुनाने अ‍ेक बार फीर बसंतीको अपनी बाहोमे जकड लीया.. ओर उनके दोनो उरोजोको मसलते होठोको चुमने लगा.. तब बसंती भी मदहोस होने लगी.. ओर मुनाका साथ देते उतेजीत होने लगी.. तब अ‍ेक बार फीर उनकी चुतमे हलचल होने लगी.. तब बसंती जटसे मुनासे अलग होगइ.. ओर सर्मसार होगइ.. उसने मुनाको कामुक नजरोसे हसते गालपे अ‍ेक हल्कीसी चपत लगादी..
 
बसंती : (सरमाकर हसते) चलीये पतीदेव.. दो पहोरको आरामके वक्त अपनी सारी तम्मना पुरी करलेना..

मुना : (हसते) येस डार्लीग.. हें..हें..हें..

फीर दोनो घरको ताला लगाकर साथमे चलने लगे.. जैसे कोइ पती पत्नी जा रहे हो.. तभी उसी वक्त दोनोको श्रीधर ओर ब्रीन्दा भी उनकी तराह सजधजके साथ चलते नजर आये.. तो दोनोकी हसी नीकल गइ.. जैसेही दोनो पास आये तो ब्रीन्दा ओर बसंती भी सरमाकर हसते आपसमे गले लग गइ.. जैसे दोनो अ‍ेक दुसरेका राज जानती हो.. तो श्रीधर ओर मुनाभी हसकर अ‍ेक दुसरेके गले लग गये.. ओर हस हसके बाते करते चारो साथ चलने लगे.. तो चलते चलते दोनो हस हसके बाते करते श्रीधर ओर मुनाके पीछे चल रही थी..

ब्रीन्दा : (हसते धीरेसे) कहीये बसंती बहेन कैसी चल रही हे जींदगी..? बहुत मजा आ रहा हेनां..?

बसंती : (हसते धीरेसे) ब्रीन्दा बहेन.. जैसे आपकी जींदगी चल रही हे.. अ‍ैसे ही मेरी चल रही हे.. क्युकी आपको तो सबकुछ पता होगा.. हमारे बैटे जो आपसमे अच्छे दोस्त हे.. दोनो अ‍ेक दुसरेसे कोइ बात नही छुपाते.. क्या ये सच हेनां..?

ब्रीन्दा : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) हां.. कमीने सभी दोस्त अ‍ैक जैसे ही हे.. बसंती बहेन प्लीज.. ये राज सीर्फ हम दोनोके बीच ही रखना..

बसंती : (मुस्कुराते) अरे ब्रीन्दा बहेन फीकर मत करो.. हम दोनो अ‍ेक ही कस्तीमे सवार हे.. तो अब हम दोनोके बीच कैसा पर्दा..? हमारी भी कुछ जरुरते हे.. तो हम कहा पुरी करेगे..? बहार तो हमारी बदनामी होगी.. तो इनसे अच्छा हे घरकी बात घरमे ही रहे.. क्या भाइ साहेबने आपको डिवोर्स देदीया..?

ब्रीन्दा : (सरमाकर मुस्कुराते) नही.. बस मे उन्हीका इन्तजार कर रही हु.. कमीना अपनी भाभीके साथ सादी करना चाहता हे..

बसंती : (मुस्कुराते) क्या वो वृन्दा बहेन आपके ताउकी लडकी हेनां..? अब आपके जेठ भीतो बुढे हो गये हे.. तो बेचारी कहा जायेगी.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते धीरेसे) नही बसंती बहेन.. कमीनी वो कोइ बेचारी नही हे.. उन दोनोके बीच मेरी सादीसे पहेले ही चकर था.. पता नही मे यहा कहा फस गइ.. ये तो अच्छा हुआ मेरे बेटेने सब सम्हाल लीया.. वरना मे तो टुट जाती..

बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) ब्रीन्दा बहेन.. क्या आप श्रीधर भाइको अबभी अपना बेटा कहेती हो..? क्या आपने श्रीधर भाइसे सादी करली हेनां..? मुनाजी केह रहे थे आप दोनोने सहेर जाकर सादी करली हे.. ओर हमारे ठाकुरके बंगलेपे ही थे.. जहा आप दोनोने अपनी सुहागरात भी मनाली हे..

ब्रीन्दा : (बहुत ही सर्मसार होते धीरेसे) हां.. प्लीज अभी ये बात कीसीको कहेयेगा नही.. खास करके मेरी बहु जयश्रीको.. वरना उनको बुरा लगेगा.. क्या आपने मुना भाइसे सादी करली..?

बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) अरे नही.. अभी उनके बापु जीन्दा हे.. तो नही कर सकती..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते धीरेसे) अच्छा.. ये तो आप उनको मुनाजी केह रही हे.. इसीलीये पुछ रही थी.. तो फीर दोनोने कुछ कीया बीया की नही..? अ‍ैसे ही तो मजे कर सकती हो.. हमे भी सादीकी वजहसे बडी मुस्कीलसे मीलनेका मौका मीला हे.. तो आज मील गये.. हें..हें..हें..

बसंती : (सरमाकर हसते) सभी दोस्तो कमीने हे.. क्या अ‍ैसा मौका कोइ जाने देते हे.. हमारी बहुअ‍े इधर सादीमे आइ हे.. तो आज दोनोको मौका मील गया.. आज हम दुसरी बार मीले.. मेरी तो अ‍ेक ही बारमे हालत खराब करदी.. ओर अभी भी उनको करना था.. लेकीन सादीमे भी तो आना था.. तो मैने मना करदीया.. अब तो यही मेरे पती हे.. मैने दिलसे इनको पती मानलीया हे.. इसीलीये मुनाजी केह रही हु..

ब्रीन्दा : (सरमाकर हसते) बसंती बहेन.. मेरा भी यही हाल हे.. पता नही मुना भाइने सबको कौनसी जडी बुटी दी हे.. मेरी भी अ‍ेक ही बारमे हालत खराब कर देते हे.. लेकीन मजा भी तो बहुत आता हे.. क्या आजसे हम दोनो पक्की सहेली..? हंम..

बसंती : (मुस्कुराते हाथ मीलाते) हंम.. लेकीन अ‍ेक सर्त पे.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेके साथ कोइ राज नही छुपायेगे.. सबकु बाते सेर करेगे.. बोलो सर्त मंजुर हे.. तो हम आजसे पकी सहेली हे.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सरमाते हसते) ठीक हे.. आपकी सर्त मंजुर हे.. आजसे हम दोनो पकी सहेली.. क्या इस बारेमे बरखाको सब पता हे..?

बसंती : (मुस्कुराते) हां.. कमीनी वो खुद चाहती हे.. की मे मुनाजीसे सादी करलु.. हें..हें..हें.. क्या आपकी बहु जयश्रीको सब पता हे..?

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते थोडा मायुस होते) नही.. अभी उनको कुछ भी पता नही हे.. बस उनका ही डर लग रहा हे.. आप बरखाको कहीयेनां.. बातो ही बातोमे वो जयश्रीको समजाये..

बसंती : (मुस्कुराते) ठीक हे.. अब वो आप मुजपे छोड दीजीये.. मेरी बरखा सबकुछ सम्हाल लेगी..

दोनो ही बाते करते अ‍ेक दुसरेके साथ अपने राज सेर कर रही थी.. ओर धीरे धीरे मुना श्रीधरके पीछे चल रही थी.. जैसे दोनो उनकी बीवीया हो.. ओर बातोही बातोमे ब्रिन्दाने बातोका दौर सम्हाल लीया.. ओर धीरे धीरे करते बंसतीसे मुना ओर उनके बीच रीलेशनकी सब बाते उगलवाने लगी.. तो बसंती भी उनके ओर श्रीधरके बारेमे सब जानती हे कहेते वो भी ब्रिन्दा ओर श्रीधरके रीलेशनके बारेमे सभी बात जानने लगी..

ओर दोनो सामत भाइके घरपे जाकर भी पास पास बैठकर बाते करती रही.. आज बाते करते ब्रिन्दा ओर बसंती अ‍ेक दुसरेकी राजदार हो गइ थी.. ओर पकी सहेलीया बन चुकी थी.. फीर ब्रिन्दाने उनके परीवारके बारेमे सबकुछ बता दीया की वो ओर उनके पती डीजोर्स ले रहे हे.. तो बसंतीने भी मुनाके साथ सादी करनेकी अपनी इच्छा जाहीर करदी.. दोनो सहेलीया धीरे धीरे हस हसके बाते कर रही थी..
 
तो दुसरी ओर हवेलीपे भी सभी लेडीस तैयार हो गइ थी.. तब देवायतने अपनी बडी कार लेली.. तो मंजुने चंदाके हाथोमे कुछ पैसोकी बेग थमादी.. तो चंदा मुस्कुराते बेग लेकर देवायतकी बगलमे बैठ गइ.. तब नीर्मला भुमीका सृती ओर पुनमभी कारमे बैठने लगे.. तो मंजुने सबको हाथ हीलाकर बाय कहा.. ओर देवायत कार मे सबको लेकर सहेरकी ओर नीकल गया.. तब चंदा धिरेनको फोन करने लगी..

तो घरपे मंजु भावना लता सब लोग सादीमे जानेकी तैयारीया करने लगी.. साथमे दया ओर रजीयाभी जा रही थी.. तब घरपे सीर्फ सरलाचाची ओर चंपा भाभी ही रेहने वाली थी.. तभी भानुभी रमा ओर नीलमको लेकर आगया.. उसेभी सादीमे जाना था.. रमा ओर नीलम सहेरमे जानेके लीये अपना सब सामान साथ मे लेकर आये थे.. आज दोनो ही पटाखा बनके आइ थी.. क्युकी रमाने नीलमको हमेसा सजधजके रहेनेकी सब बाते समजा दीथी.. की वहा कैसे रहेना हे..

रमा आतेही मंजु लता भावना सबको हस हसके गले मीली.. जैसे उनके मनमे कोइ गलत भाव ही ना हो.. तब नीलम रमाकी सभी हरकते नोटीस कर रही थी.. ओर हस रही थी.. तभी लखन भी सबको लेने वापस आगया.. तो रमाको देखते ही खुस होगया.. तब रमा ओर नीलम दोनो ही लखनको देखकर सरमा गइ.. ओर दोनो ही उनके सामने देखकर मुस्कुराने लगी.. तब नीलम बडी ही कातीलाना नजरोसे देखकर हस रही थी.. लेकीन लखनने नीलमक ओर ध्यान ही नही दीया..

फीर भानु ओर लखन सभी लेडीसको लेकर सादीमे चले गये.. तो वहा सांती ओर बंसीका मंडप मुहुर्त चल रहा था.. जैसेही मंजु कारसे उतरी तब वहा बैठी सभी लेडीस खडी होगइ.. ओर रानी साहीबा यहा बैठीये कहेकर मंजुको अपने पास बुलाने लगी.. तब मंजु हसकर सबको हाथ जोडकर अभीवादन करते रश्मी वंदनाके पास जाकर बैठ गइ.. ओर सबलोग सादीका आनंद लेने लगे.. तब रमा ओर लखनकी बार बार आंखे मीलने लगी..

तो आंख मीलते ही रमा सरमाकर मुस्कुराने लगती.. तो आज नीलमभी लखनको देखकर सरमा रही थी.. ओर तभी भावना दोनोके उपर नजर जमाये टेडी नजरोसे देखती रही.. ओर लखनकी तरफ देखते सरारत भरी नजरोसे देखने लगी.. जबसे उनकी पुनम ओर मंजुके साथ बात हुइ तबसे उनको रमाके उपर बहुत गुस्सा आ रहाथा.. तो लखनके बारेमे भी उनको सब पता था.. लखन श्रीधर मुना साहील सभी दोस्तो अ‍ेक जगहपे बैठकर अपनी मासुकाको देखके आपसमे मस्तीया कर रहे थे..

तब जागृती जयश्री ओर बरखा भी सभी लडकोकी ओर देखकर हस रही थी.. ओर उनके सामने मुह बनाते लडकेको छेड रही थी.. तो आज सामतभाइ ओर जया खुद बंसी ओर सांतीके साथ मुहुर्तपे बैठ गये थे.. अ‍ैसेही मस्ती मजाक करते मुहुर्त खतम हुआ.. तब सभी लेडीस दुसरी वीधीया करती रही.. तब रमेश ओर लखनकी पुरी टीम भोजनकी तैयारीया करने लगे.. सामतभाइके घरपे बहुत महेमान आचुके थे..

तो दुसरी ओर देवायत सभी लेडीसको लेकर धिरेनके घरपे पहोंच गया.. तब धिरेनने भी अपनी बाइक लेली.. ओर सब लोग सहेरकी ओर नीकल गये.. जब चंदाका फोन आयाथा तब ही धिरेनने अपने मेनेजरसे बात करली थी.. की उनकी सालीकी जगह उनकी बीवी मकान देखने आ रही हे.. तो कुछ गडबडना होजाये.. तब पोने घंटेके बाद सभी लोग बेन्क मेनेजरके घरपे थे.. तो वहा उनकी बीवीओने सबका स्वागत कीया..

फीर कुछ औपचारीक बातोके बाद मेनेजर ओर उनकी दोनो बीवीओने सबको पुरा मकान दीखाया.. तो चंदा मकान देखकर बहुत खुस होगइ.. पुनमको भी पसंद था.. लेकीन अब वो धिरेनके साथ रहेना नही चाहती थी.. तो उसने अपने चहेरे कोइ नाखुसीका भाव आने नही दीया.. तो दुसरी ओर नीर्मला ओर भुमीका भी मकान देखकर बहुत खुस हो रही थी.. तो सृती भी मकान देखकर खुस होगइ..

क्युकी ये मकान अ‍ेक छोटे बंगले जैसा दिख रहा था अंदर तीन रुमके अलावा होल कीचन ओर स्टोर रुमके साथ सब तराहकी सुवीधाये ओर बहुत अच्छा इन्टीरीयर ओर फर्नीचर था.. तो सबको पसंद आगया.. फीर देवायत धिरेन ओर मेनेजरने आपसमे बैठकर मकानकी कीमत तैय करली.. ओर देवायतने वही चंदाके पाससे पैसे लेकर मेनेजरको टोकन थमा दिया.. तब मेनेजरकी दोनो बीवीया बहुतही खुस होगइ.. सबके लीये ठंडा ओर आइसक्रिम आगया.. फीर कुछ देरके बाद देवायत सबको लेकर वहासे नीकल गया..

धिरेन अपनी बेन्कपे चला गया.. तो देवायत सृती ओर पुनमको क्लीनीकपे छोड देता हे.. ओर नीर्मला भुमीका ओर चंदाको लेकर भुमीकाके घरपे आगया.. तो वहा भी घरमे बहुत मीटी आगइ थी.. तब देवायत सबके लीये खाना ओर दुध लेने बाजार चला गया.. तब तक भुमीका नीर्मला ओर चंदा.. तीनोने मीलकर घरकी सफाइ करली.. जब सफाइ होगइ तब देवायत सबका खाना लेकरभी आगया..

फीर चारोने मीलकर खाना खाने बैठ गये.. तो नीर्मला ओर भुमीका दोनो खाना खाते देवायतके पेरोको सहेलाने लगी.. ओर देवायतको छेडने लगी.. जब देवायतने नजर घुमाकर देखा तब चंदा चुपचाप खाना खा रही थी.. जैसेही भुमी नीर्मलाकी ओर देखा तो भुमीकाने देवायतको अपने रुममे आनेका इसारा कीया.. तब नीर्मला देवायतकी ओर सरमाकर हस रही थी.. तभी देवायतने इसारोमे नां कहेते चंदाकी ओर इसारा कीया..

तो क्लीनीकपे सृतीने खुदका ओर पुनमका खाना होटेलसे मंगवा लीया था.. जैसेही सब पेसन्टको देख लीया.. तब दोनो ही खाना खाने बैठ गइ.. ओर खाना खाते हस हसके लखनके बारेमे बाते करने लगी.. ओर बातोही बातोमे दोनो अ‍ेक बार फीर लखनमे आये बदलावकी बाते करने लगी.. अब सृती ओर पुनम दोनोने हवेलीकी पुरी कमान सम्हालने की ठानली थी.. दोनोही सभी चर्चा खुलकर करने लगी थी..
 
खाना खानेके बाद दोनोही सृतीके पर्सनल रुममे आराम करने चली गइ.. तो घरपे भुमीका ओर नीर्मला देवायतको रुममे आनेका इसारा करते नीचे भुमीके रुममे आराम करने चली गइ.. तब चंदा ओर देवायत दोनोही उपरकी मंजीलपे सृतीके रुममे चले गये.. तब चंदा बहुतही सरमा रही थी.. क्युकी अ‍ेक तो वो अ‍ैसेही बहुत चुदकड थी.. ओर देवायतसे हर वक्त चुदाइ करवाने तैयार ही रहेती.. उपरसे आज वो अकेली थी.. उनको येभी पता थाकी अभी उपर जाते ही उनकी कुटाइ होजायेगी..

ओर हुआ भी यही.. उपर जातेही देवायतने चंदाको दबोच लीया.. तो चंदा जोरोसे हसते देवायतसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. तब कुछही देरके बाद दोनोही पुरी तराह नंगे थे.. दोनोके कपडे अ‍ेक कोनेमे साथ पडे अपनी कीस्मतपे रो रहे थे.. देवायत ओर चंदा दोनोही सीक्ष नाइन पोजीसमे थे.. देवायत चंदाकी चुतमे जीभ डालकर उनके भगन्साको खरोद रहाथा.. तो चंदाभी उतेजीत होते जोरोसे देवायतके लंडको मुहमे भरके अंदर बहार कर रही थी..

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आज कितने दिनोके बाद दोनोको अकेलेमे प्यार करनेका मौका मीला था.. तो चंदा अ‍ेक अ‍ेक लह्मा जी लेना चाहती थी.. वो देवायतसे उनकी सादीसे पहेले मीलती थी.. उसी तराह मीलना चाहती थी.. पीछले कुछ दिनोसे उनकी मां बननेकी इच्छा भी बहुत बढ गइ थी.. लेकीन उनके बेटे धिरेनकी सादी भी हो चुकी थी.. तो देवायतसे कहे भी कैसे की मुजे तुम्हारे बच्चेको जन्म देना हे.. वो इस बातको कहेनेके लीये बहुत सरमा रही थी.. लेकीन मंजु उनके दिलकी सभी बाते जान चुकी थी..

ओर आज चंदाको देवायतसे प्यार करनेका बहुत अच्छा मौका मील गया था.. चंदा मदहोस होकर पुरी तराह देवायतका साथ दे रही थी.. ओर देवायतकी छेडखानीको ज्यादा देर तक बरदास्त नही कर पाइ.. ओर देवायतके मुहमे फवारा छोड दीया.. तब देवायत बाथरुममे चला गया.. ओर अपना मुह साफ करके वापस चंदाके पास आगया.. तब चंदाने भी अपनी चुतको कपडेसे साफ करली..

तभी चंदाने उसे पकडकर अपने उपर खीचलीया ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमने लगी.. ओर अ‍ेक हाथ नीचे लेजाकर देवायतके लंडको पकडने लगी.. तब कुछही पलमे देवायतके लंडको मुठीमे पकडलीया.. ओर होले होले सहेलाते अपनी चुतपे घीसने लगी.. जब लंड गीला हो गया तब चंदाने लंडको चुतमे थोडा फसालीया ओर देवायतके गलेमे हाथ डालकर उनको अपने तनसे जोरोसे चीपका लेती हे..

तब देवायतने चंदाके होठोको लीपलोक करते अ‍ेक जोरोका जटका दीया.. तब नीचेकी ओर नीर्मला ओर भुमीका अ‍ेक दुसरेको लीपटकर बाते कर रही थी.. तब उनको चंदाकी चीखनेकी आवाज जोरोसे सुनाइ दी.. तब दोनोही अ‍ेक दुसरेकी ओर देखकर सरमा गइ.. ओर मुस्कुराने लगी.. तो अचानक भुमीने नीर्मलाका हाथ थाम लीया ओर उसे बेडसे खडा करते खुद भी बेडसे उतर गइ..

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भुमीका अपने नाकपे उंगली रखते नीर्मलाको चुप रहेनेका इसारा करते उसे धीरेसे सीडीयोकी ओर लेजाने लगी.. दोनो उपरकी मंजीलकी ओर दबे पांव जाने लगी.. जैसेही दोनो उपरकी मंजीलपे गइ.. तो सृतीके रुमका दरवाजा खुला था.. देवायत ओर चंदाको कोइ उमीद नही थी की नीर्मला ओर भुमीका उपरकी मंजीलपे आ सकती हे.. दोनो ही बीन्दास दरवाजा खुला रखकर चुदाइमे मसगुल थे..

नीर्मला ओर भुमीका धीरेसे दरवाजेके बहार खडी रहेकर अंदरकी ओर जाकने लगी.. तो अंदरका नजारा देखकर दोनोही उतेजीत होने लगी.. ओर दोनोने अ‍ेक दुसरेका हाथ थाम लीया.. दोनो ही धीरेसे देवायत चंदाकी चुदाइ देखने लगी.. तब चंदाके दोनो पैर मुडकर देवायतकी कमरपे थे.. ओर देवायत हाथोके बल जोरोसे चंदाकी चुदाइ कर रहा था.. तब नीर्मला ओर भुमीका दोनो सरमाके अ‍ेक दुसरेके सामने देखते मुस्कुराने लगी..

नीर्मला आज पहेली बार अपनी बहेनको अ‍ैसे चुदवाते देख रही थी.. तब उनकी ओर भुमीकाकी चुतभी गीली होने लगी.. अभीतक सीर्फ सृती लता ओर चंदा ही थी.. जीनको भुमीकाके देवायतके साथ रीलेशनके बारेमे नही पता था.. तो दुसरी ओर पुनम ओर सृती रुममे अ‍ेक दुसरेकी कमरपे पेर डालकर बाते कर रही थी.. दोनोही लखनकी बाते करते उतेजीत हो गइ थी.. ओर बीच बीचमे अ‍ेक दुसरेके होठोको चुम लेती थी..
 
तो इधर गांवमे भी भोजन हो रहा था.. सभी जेन्ट्सने खाना खालीया था.. ओर अभी सब लेडीस खाना खा रही थी.. तब नीलम सबसे छुपकर बार बार लखनकी ओर देखकर सरमाके मुस्कुरा देती थी.. तो रमा भी नीलम ओर लखनकी आंख मीचोली देखकर खुस हो रही थी.. ओर वोभी लखनसे बात करनेके लीये उनके आस पास ही मंडरा रही थी.. लेकीन आज इतने लोगोके बीच लखनने खुदको बहुत ही सयंम मे रखा..

तो दुसरी ओर ब्रीन्दा भी जयश्रीको बात करते दो पहोरको आराम करने घरपे चले जानेकी बात करते श्रीधरको मीलनेकी प्लानींग कर रही थी.. तो यही हाल मुना ओर बसंतीका भी था.. जब बसंती खाना लेने काउन्टरपे लडकोके पास आइ.. तब मुनाने इसारोसे बसंतीको घरपे जानेकी बात करली.. जीसे सुनकर बसंती भी खुब सरमाइ.. ओर हांमे गरदन हीलाते दुसरा खाना लेने आगे नीकल गइ..

तो बाकीके लडके अपनी मासुकाओके साथ सेटींग करनेमे लगे हुअ‍े थे.. जब सभी लेडीसका खाना खतम हो गया.. तब मंजु रश्मी वंदना भावना लता रमा नीलम सभी लेडीस हवेलीपे आराम करने आगइ.. दो पहोरके बाद बंसी ओर सांतीकी हल्दीकी रसम होने वाली थी.. ओर साथमे सादीके गानेके साथ नाच गानका प्रोग्राम भी होने वाला था.. तो अभी जयश्री जागृती बरखा तीनो सांतीके रुममे बेठकर सांतीकी टांग खीचाय करते आपसमे मस्तीया कर रही थी..

तो सहेरमे भुमीके घरपे अब भी देवायत चंदाकी जबरदस्त चुदाइ कर रहा था.. वो चंदाको दो बार जडाके खुद भी जडनेको आया तब चंदाने देवायतकी कमरपे अपने दोनो पैरकी आंटी लगादी.. ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते अपने तनसे चीपका लीया.. ओर देवायतने अपनी कमरको जटके देते अ‍ेक बार चंदाकी चुतको लबा लब भर दीया.. तब चंदाभी उनके साथ जड गइ.. आज चंदाकी हालत पतली होगइ थी.. तब..

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चंदा : (पीठ सहेलाते सर्मसार होते धीरेसे) जानु.. आज इसे बहार मत नीकालना.. आप आज मेरी सारी तम्मना पुरी करदो.. आज भरदो मेरी कोखको.. मे हमारे बच्चेको जन्म देना चाहती हु..

देवायत : (मुस्कुराते होठ चुमत) चंदा.. आज अ‍ैसा ही होगा.. जबतक मे तेरी कोख नही भरुगा तबतक मे तेरे उपरसे उतरने वाला नही हु.. क्युकी मुजे मंजुने कहा हे.. की आज तेरा काम करना हे..

चंदा : (सरमाते मुस्कुराते) देवु.. कभी कभ मुजे मंजु बहुत ही रहस्यमय लगती हे.. पता नही उनको मेरे दिलकी बात पता कैसे लग जाती हे.. देखा नही.. बडे भैया उनके आखरी वक्तमे मंजुको कैसे हाथ जोडते थे.. ओर भैयाने भी बडी दीदीका हाथ आपको सोप दीया.. ओर कहा लो सम्हालो अपनी सोनुको.. जानु.. कौन हो आप..? ओर कौन हे बडी दीदी.. उसने दीदीको सोनु क्यु कहा..?

देवायत : (मुस्कुराते) चंदा.. उन सभी बातोका जवाब तो तुजे मंजुही दे सकती हे.. कभी फुरसतमे उनसे पुछ लेना.. वो हम सबके बारेमे बहुत कुछ जानती हे..

चंदा : (मुस्कुराते) जानु.. अबतो पुछनाही पडेगा.. क्युकी अबतो दीदीको आपको ही सम्हालना पडेगा.. चलीये.. अब दुसरा राउन्ड नही करना क्या..? देखना आज तो साम तक आपको मेरे उपरसे उतरने ही नही दुगी.. जबतक आप मेरे अंदर अपना बीज नही डालते.. फीर भलेही मेरी हालत खराब होजाये..

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ओर देवायत बीना लंड बहार नीकाले चंदाकी दुसरी बार चुदाइ करने लगा.. तब नीर्मला ओर भुमीका भी अपनी अपनी चुतमे उंगली करके जड गइ थी.. दोनो ही चंदा ओर देवायतकी बाते सुन रही थी.. तब नीर्मलाका जीर्क होते ही नीर्मला सरमाने लगी.. ओर भुमीका हाथ पकडकर उसे नीचे लेजाने लगी.. दोनो वापस नीचे अपने रुममे आकर बेडपे लेटी हुइ थी.. ओर अ‍ेक दुसरेसे चीपकते बाते कर रही थी..

तभी अचानक भुमीका अपने मुहपे हाथ रखके बाथरुममे चली गइ.. ओर उल्टीया करने लगी.. तब नीर्मला समज गइ.. ओर फटाफट रुमका दरवाजा बंध करके भुमीकाके पास बाथरुममे चली गइ.. ओर उनकी पीठ सहेलाती रही.. जब भुमीकाको उलटीया होगइ तब उसने अपना मुह साफ करलीया.. ओर दोनो वापस बेडपे आके लेट गइ.. तब नीर्मलाने भुमीकाको अपनी बाहोमे भरलीया..

नीर्मला : (मुस्कुराते) भुमी.. क्या तुम उल्टीकी गोली नही लेती..? हंम..?

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) नीमु.. ये अचानक राजीवका हादसा हो गया.. तो मेने तीन दिनसे नही ली थी.. मे गोली खाना भुल गइ थी.. अभी ले लेती हु.. वरना सृतीको पता चलेगा तो गडबड होजायेगी..

नीर्मला : (मुस्कुराते) भुमी.. अ‍ेक दिनतो उसे पता चल ही जायेगा.. मेरी बात मान तुम अ‍ेक बार उनसे खुलकर बात करले.. क्या पता सायद वो तुम दोनोके रीस्तेको अ‍ेक्सेप्ट करले..

भुमीका : (जटसे धीरेसे) अरे नही नही.. मे उनको जानती हु.. वो हमारा रीस्ता कभी अ‍ेक्सेप्ट नही करेगी.. नीमु.. वो मंजुकी तराह नही हे.. जो अपनी मांका रीलेशन अपने पतीके साथ स्वीकार करले.. तुम बहोत नसीब वाली हो.. सृती कभी नही चाहेगी.. की उनकी मां का रीलेशन अपने दामाद के साथ हो..

नीर्मला : भुमी.. तो फीर क्या करोगी..? मुजे लगता हे अब तुजे जल्द ही कीसी लेडी डोक्टरको दिखाना चाहीये.. वरना दुसरी प्रोबलेम होगी तो क्या करोगी..?

भुमीका : (अचानक खडी होते) नीमु.. चल मेरे साथ.. मे अ‍ेक टोक्टरको जानती हु.. उसे नही पता की मे सृतीकी मां हु.. हम दोनो अभी उनको दिखाकर वापस आजायेगी.. ये दोनो भलेही अपना मजा लुटे..

नीर्मला : (जटसे खडी होते) भुमी.. क्या हम अभी दिखाकर वापस आजायेगी..? चल..

भुमीका : (हाथ पकडकर बहार नीकलते) अरी चल तो सही.. मे यहीसे उनको आवाज लगाकर केह देती हु.. की हम अभी आते हे.. चल फटाफट..

भुमीका नीचेसेही जोरोसे आवाज लगाकर चंदाको कहेती हेकी हम अभी पडोसमे मीलकर आते हे.. ओर दोनो बहार नीकलकर फटाफट ओटो रीक्षा पकडकर दुर अ‍ेक लेडी डोक्टरके पास चली गइ.. तब उनको नही पता थाकी यही लेडी डोक्टर उनकी जींदगीमे भुचाल लायेगी.. क्युकी सृती जब मेडीकल कोलजमे थी तब इसी डोक्टरके पास वाले रुममे रहेती थी.. ओर तब भुमीका अक्सर सृतीको मीलने जाया करती थी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९२

भुमीका नीचेसे ही जोरोसे आवाज लगाकर चंदाको कहेती हेकी हम अभी पडोसमे मीलकर आते हे.. ओर दोनो बहार नीकलकर फटाफट ओटो रीक्षा पकडकर दुर अ‍ेक लेडी डोक्टरके पास चली गइ.. तब उनको नही पता थाकी यही लेडी डोक्टर उनकी जींदगीमे भुचाल लायेगी.. क्युकी सृती जब मेडीकल कोलजमे थी तब इसी डोक्टरके पास वाले रुममे रहेती थी.. ओर तब भुमीका अक्सर सृतीको मीलने जाया करती थी....अब आगे

भुमीकाको ये नही पता था की वही डोक्टर उनकी बेटीके साथ पढाइ करती थी.. ओर सृतीकी दोस्त भी थी.. दोनो ही क्लीनीकपे चली गइ.. ओर अंदर जाकर बैठ गइ.. जब वहा उनकी बारी आइ तो दोनो ही अंदर चली गइ.. ओर भुमीकाने खुदको प्रेगनेन्ट होने की बात करी.. तब डोक्टरको थोडा आस्चर्य हुआ.. ओर उसने भुमीको सोनोग्राफी करके चेक करलीया.. तो भुमीकी प्रेगनन्सीके बारेमे जानकर थोडी हेरान रेह गइ.. ओर बहार आकर उसने भुमीको इस उमरमे बच्चा ना करनेकी सलाह दी..

डोक्टर : देखीये मेडम.. अभी तो कोइ दिकत नही हे.. सब नोर्मल हे.. लेकीन आपको इस उमरमे बच्चा नही करना चाहीये.. आगे जाकर आपको कोइ प्रोबलेम आ सकती हे.. आपके लीये ओर बच्चेके लीये बहुत ही जोखीम भरा हे.. फीर आपकी मरजी..

भुमीका : (थोडी परेसान होते) अरे नही नही.. मुजे बच्चा पैदा करनेमे कोइ अ‍ेतराज नही.. आप दवाइ दे दीजीये.. मुजे ये बच्चा चाहीये.. कीसी भी हालमे..

डोक्टर : (मुस्कुराते) अच्छा.. क्या आपको दुसरा कोइ बच्चा नही हे.. मतलब आप पहेली बार प्रेगनेन्ट हुइ हे..?

भुमीका : (जटसे) अरे हे.. लडकी.. नही.. नही.. मे पहेली बार प्रेगनेन्ट हुइ हु.. पचीस साल बाद..

डोक्टर : (जब भुमीका थोडी हकलाने लगी.. तो थोडी संकासे देखते) ठीक हे मेडम.. मुजे क्या अ‍ेतराज हे.. लीजीये मे दवाइ लीख देती हु.. आप टाइमपे खाइअ‍ेगा.. ओर कुछ उल्टीया जैसा लगे तो ये भी लीख देती हु.. बाकी सब ठीक हे..

कहेते दवाइ लीखने लगी.. फीर लीखकर भुमीकाको देते वो गौरसे उनकी ओर देखती रही.. तब उसे भुमीकाका चहेरा थोडा जाना पहेचाना लगा.. तभी उसे अचानक सृती याद आगइ.. जो उनकी मम्मी उनको अक्सर होस्टेलमे मीलनेके लीये आती थी.. ओर जीस तराह जवाब देते भुमीका गभरा रही थी.. तब डोक्टरको भुमीपे सक होने लगा.. ओर उसने फोन नंबर देखते भुमी ओर नीर्मलाकी छुपकेसे तसवीर लेली.. तभी..

नीर्मला : (खडी होते) डोक्टर मेडम.. आपकी फीस..

डोक्टर : (मुस्कुराते भुमीकी ओर गौरसे देखते) जी.. बहार काउन्टरपे दे दीजीयेगा..

भुमीका : (खडी होकर मुस्कुराते) थेन्कयु.. मेडम..

डोक्टर : (अचानक) अ‍ेक मीनीट.. सायद मेने आपको कही देखा हे.. क्या आप इसी सहेरमे ही रहेती हे..?

नीर्मला : (जटसे) अरे नही नही.. हम दोनो तो पासके ---गांवसे आइ हे.. सायद आपको कोइ गलत फेहमी हुइ हे..

डोक्टर : (मुस्कुराते) ओह.. सोरी सोरी.. सायद मुजे गलत फेहमी हुइ हे.. क्या हेना कोलेजमे मेरी अ‍ेक फ्रेन्ड थी.. सृती.. उनका रुम हमारे रुमके पास ही था.. तो उनकी मम्मी उनको मीलने आती थी.. जो हुबहु उनकी सकल आपसे मीलती हे.. लेकीन वोतो इसी सहेरमे रहेते थे.. ओर आप लोग तो गांवके हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (मुस्कुराते) ठीक हे मेडम कभी गलत फहेमी होजाती हे.. चलो बाय..

कहेते नीर्मलाने बहार नीकलकर फटाफट फीस देदी.. ओर दोनो ओटो पकडकर धरपे आनेके लीये बैठ गइ.. तब भुमीका ओर नीर्मलाकी सकल देखने लायक थी.. आज दोनो ही बाल बाल बच गइ थी.. क्युकी ये डोक्टर भी सृतीकी जानी पहेचानी नीकली.. ओर सृती गलत केस.. यानी अवैध ओर नाजायज बच्चेका केस इनके पास ही भेज देती थी.. ओर ये मेडम इलीगल अबोर्सन करके तगडा माल कमाती थी.. आज भुमीकाको पता नही थाकी वो फस चुकी हे..

यहा आनेके लीये खुदको मन ही मन कोसने लगी.. ओर नीर्मला भुमीका घरपे आगइ.. दोनोही रुममे आकर लेट गइ.. ओर बाते करने लगी.. तब भी चंदा ओर देवायतकी चुदाइ जारी थी.. अब तक देवायत दो बार चंदाकी चुतको अपने पानीसे भर चुका था.. लेकीन आज चंदाने उसे अपने उपरसे उतरने नही दीया.. ओर देवायत चंदाकी तीसरी बार धमासान चुदाइ कर रहा था..

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चंदा अभी हीलनेकी स्थीती मे भी नही थी.. वो मुह फाडकर बहुत ही कामुम नजरोसे देखते देवायतसे चुदवाती रही.. उसके सभी बाल बीखरके बैडपे फैल चुके थे.. जीनकी वजहसे चंदा बहुत ही सेक्सी ओर कामी ओरत लग रही थी.. तब चंदाको पता नही था की देवायतका बीज उनके गर्भमे स्थापीत हो चुका हे.. चंदाकी पुरी चुत देवायतके पानीसे लबालब भरी हुइ थी.. जीनकी वजहसे सोट लगतेही पानी बहार नीकल रहा था..

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तीसरी बार चुदाइकी वजहसे चंदाकी हालत पतली होती जा रही थी.. लेकीन फीर भी वो देवायतका साथ दे रही थी.. ओर आखीर देवायतने तीसरी बार भी चंदाकी चुतको लबालब भर दीया.. तब चंदाकी चुतसे ढेर सारा काम रस बहार नीकलने लगा था.. तब चंदा लगभग बेहोस जैसी हो चुकी थी.. आज देवायतने चंदाको पुरी तराह संतुस्ट कर दीया था.. ओर आखीर चंदा भी देवायतसे प्रेगनेन्ट होगइ..

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क्लीनीकपे भी आज पुनम ओर सृती लखनकी बातोसे उतेजीत होकर अ‍ेक दुसरेके साथ लेस्बीयन खेल खेलकर अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट कर चुकी थी.. आज दोपहोरके बाद कोइ खास पेसन्ट नही थे.. तो सृती ओर पुनम दोनोही ओटो करके घरकी ओर नीकल गइ.. तबतक देवायत कंपलीट होकर नीचे आगया था.. तो चंदा थकानकी वजहसे अ‍ैसे ही नंगी नींदकी आगोसमे चली गइ..
 
जैसेही देवायत नीचे आया तब नीर्मला ओर भुमीका नीचे होलमे कंपलीट तैयार होकर बैठी थी.. तो देवायतको देखते ही दोनो उनपे भडक गइ.. ओर देवायतको मुके मारने लगी.. क्युकी आज उनके पास देवायतको मीलनेका बहुत अच्छा मौका था.. लेकीन चंदाकी वजहसे वो दोनोको नही मील सका.. क्युकी चंदाको अभी तक भुमीका ओर देवायतके रीलेशनके बारेमे नही पता था..

नीर्मला : (सरमाकर मुस्कुराते) देवु.. आपको जरासी भी सरम नही आती..? हम दोनोने आपको कीतना इसारा कीया.. आज हमे मीलनेका कीतना अच्छा मौका था..? इसीलीये तो हम आराम करनेके बहाने यहा रुके थे..

देवायत : (मुस्कुराते) यार तुम दोनो समजती ही नही.. अभी तक चंदाको हमारे रीस्तेके बारेमे नही पता.. ओर आज मंजुने भी उनका काम करनेको कहा था.. बेचारीकी आज हालत पतली होगइ हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (जोरोसे पीठमे मुका मारते सरमाते धीरेसे ) हां हम दोनो उपर देखने आइ थी.. आपतो बीना रहेम खाये बेचारीकी धमाकेदार चुदाइ कर रहे थे.. कोइ अपनी बीवीको इतनी बेहरहेमीसे चोदता हे क्या..?

देवायत : (हसते धीरेसे) तुम दोनोको पता नही.. वो खुद कीतनी चुदाइ करवाने की सौकीन हे.. हम दोनोने हमारी सादीसे पहेले पुरी पुरी रात प्यार कीया हे.. ओर आज तो उनका काम भी करना था..

नीर्मला : (हसते आस्चर्यसे देखते धीरेसे) देवु.. कौनसा काम..?

देवायत : (मुस्कुराते बाहोमे भरते) अरे मेरी भोली डार्लींग.. आज उनको प्रेगनेन्ट कर दीया हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (खुसीसे हसते) क्या..? क्या सचमे चंदाको प्रेगनेन्ट कर दीया..? ओ..ह.. गो..ड..

भुमीका : (खुसीसे हसते धीरेसे) नीमु.. तुजेतो पता हे सब.. हमारी मंजुको सब पता चल जाता हे.. ओर ये सब हमारे पतीने उसीके कहेनेपे तो कीया हे.. हें..हें..हें.. (सरमाते हसते) नीमु.. मुजे भी इसी तराह प्रेगनेन्ट कीया हे..

नीर्मला : (सरमाते धीरेसे होंठ चुमते) देवु.. कास.. मे भी आपका बच्चा पैदा कर सकती.. सबकी बाते सुनकर बहुत इच्छा होती हे.. क्या मुजे प्रेगनेन्ट नही कर सकते..? जानु.. कोसीस करोनां..

देवायत : (आंख गीली करते) नीमु.. सोरी यार.. लेकीन मंजुने जो भी मुजसे कहा हे.. आइ प्रोमीस.. अगले जन्ममे सबसे पहेले तुही मेरी बीवी होगी ओर सबसे पहेले तुही प्रेगनेन्ट होगी.. आइ लव यु..

भुमीका ओर नीर्मला : (दोनो बाहोमे समाते) जानु.. आइ लव यु टु..

नीर्मला : (मुस्कुराते होंठ चुमकर) जानु.. अब चंदाको हमारे रीस्तोके बारेमे बतादोनां.. हम उनकी हाजरी मे आपको मील भी नही सकती..

देवायत : (मुस्कुराते) नही नीमु.. अगर बताना होता तो अबतक उसे मंजुने बता दीया होता.. वो सब काम मेरा नही हे.. वो सीर्फ मंजु ही बता सकती हे..

तभी बहाकी ओर दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ.. तो देवायत नीर्मला ओर भुमीकाको छोडकर उनसे थोडा दुर जाकर बैठ गया.. तभी पुनम ओर सृती घरपे आगइ.. तब नीर्मला भुमीका ओर देवायत बाते करने लगे.. तभी सृतीने चंदाके बारेमे पुछा तो नीर्मला ओर भुमीका दोनो ही सरमा गइ.. ओर उपरकी तरफ इसारा करते हसने लगी.. तो सृती ओर पुनम दोनो समज गइ की आज दो पहोरको चंदाकी कुटाइ होगइ हे.. ओर दोनो मुस्कुराते उपरकी मंजीलपे चली गइ.. तो वहा चंदा अभी भी नंगी लेटे नींदकी आगोसमे थी..

तभी सृतीने उसे जगाया.. तो चंदा दोनोको देखके हडबडा गइ.. अपने आपको पुरी तराह नंगी देखकर सरमके मारे जल्दीसे बेडपे बैठ गइ ओर मुस्कुराते अपने कपडे लेकर जल्दीसे बाथरुममे घुस गइ.. ओर नहाते अपने आपको सही करने लगी.. फीर कुछ देरके बाद कपडे पहेनकर बहार आइ.. तब सृती ओर पुनम उनकी ओर देखकर जोरोसे हसने लगी.. तब चंदा भी सरमाइ ओर मुस्कुराते सृतीको पीठमे मुका मारने लगी..

चंदा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) कमीनी.. हस क्यु रही हे..? तु भी तो हमारे पतीको अ‍ैसे ही मीलती हे..

सृती : (हसते) हां दीदी.. लेकीन आपके तो मजे हे.. हें..हें..हें.. हो गइ कुटाइ..? दोनोने कीतनी बार कीया..?

चंदा : (सर्मसार होते हसते) तु बहुत कमीनी हे.. कैसी सौतन हे मेरी..? पुछकर मजे ले रही हे.. तुजे तो सब पता तो हे.. की हम अकेले उनसे मीलती हे तो क्या होता हे.. दो बारसे पहेले वो कहा हमे छोडते हे.. हें..हें..हें.. सृती.. अभी पुनम इधर हेतो मे क्या कहु..? आज तो उसने मुजे लुट ही लीया.. लगातार तीन बार मेरी कुटाइ हो गइ.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) भाभी.. आज आपका काम हो गया हे.. देखना कुछ महीनोके बाद आप भी मुजे अ‍ेक प्यारीसी भतीजी देगी.. आज मे बहुत खुस हु..

चंदा : (बहुत ही सर्मसार होते मुस्कुराते) पुनो दीदी.. क्या आपको भी तो सब पता चल जाता हे.. तो क्या सचमे देवुने मुजे प्रेगनेन्ट करदीया हे..? तब तो आपके मुहमे घी सकर.. क्युकी मेरी तो कबकी तमना थी.. की मे आपके भाइके बच्चेकी मां बनु..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. ये सच हे.. ओर हमसे सरमाइअ‍े मत.. मुजे भी सब पता हे.. की भाइ खाना खाते ही आपको लेकर उरप आगये थे.. बस.. हमे आनेमे थोडी देर होगइ.. वरना हम दोनो भी आपका लाइव सो देखती.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते पुनमको मुका मारते) देखा सृती.. हमे कैसी ननंद मीली हे..? मस्ती करनेका अ‍ेक भी मौका नही छोडती.. अब चलो.. चलना नही हे क्या..? दीदीके सामने बहुत सरम आयेगी..

पुनम : (हसते) भाभी.. इसीलीये तो हम आपको जगाने आये हे.. चलीये नीचे सब हमारा इन्तजार कर रहे हे.. अभी चाइ नास्ता भी बनाना हे.. फीर आरामसे घर चलते हे.. वहा जाकर सादीमे भी जाना होगा..

नीचे आकर सृती ओर पुनमने चाइ नास्ता बना लीया.. ओर सबने साथमे बैठकर चाइ नास्ता करलीया.. फीर सृतीने अच्छेसे घरको ताला लगा दीया ओर सब लोग वहासे नीकल गये.. तो इसी बीच दोपहोरको सामत भाइके घरपे सबका भोजन होगया था.. तब श्रीधर ब्रीन्दाको घरपे छोडनेका बहाना बनाकर ब्रीन्दाके साथ अपने घरपे चला गया.. तो घरपे वृन्दा अपने रुममे आराम कर रही थी..
 
तो ब्रीन्दा चुपकेसे श्रीधरको अपने रुममे लेकर चली गइ.. अंदर जाते ही दरवाजा लोक करलीया.. फीर पलटकर श्रीधरकी बाहोमे समा गइ.. ओर श्रीधरके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. तब श्रीधर भी उतेजीक होकर ब्रीन्दाके होठोका रसपान करने लगा ओर उनके उरोजोको मसलने लगा.. तो ब्रीन्दा पागल जैसे होने लगी.. ओर आधी आंख चडाते मदहोस होने लगी.. तब उनकी चुत फडफडाने लगी.. तभी श्रीधर ब्रीन्दाको अपनी गोदमे उठाकर बेडकी ओर चल पडा..

ब्रीन्दा : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. आपसे मीलन करनेका बहुत मन करता हे.. जयश्री मीली हे.. तो कभी मुजे भुलतो नही जाओगेनां..?

श्रीधर : (बेडपे सुलाते) मोम.. आप कैसी बाते कर रही हे..? आप मेरा पहेला प्यार हे.. ओर मेरी पहेली बीवी हे.. तो मे आपको कैसे भुल सकता हु.. मे जयश्री दीदीको छोड सकता हु.. लेकीन आपको नही.. आप बहुत ही खुबसुरत हे.. भले ही दीदी मेरी बीवी हे.. लेकीन मेरा पहेला प्यार ओर पहेली बीवी आपही रहोगी.. मे आज भी आपके पीछे पागल हु..

ब्रीन्दा : (अपने उरप खीचते) अरे मेरा पती मुजे इतना प्यार करता हे..? चल आजाओ आज इस बीवीको छोडना नही.. खुस करदो मुजे.. जानु.. अब मे आपकी पत्नी हु.. अब तो मुजे मोम कहेना छोडदो..

श्रीधर : (होठोको चुमते) नही मोम.. मुजे मेरी मोमको.. ओर अपनी बहेनको चोदनेका बहुत सौक हे.. तो मे आपको मोम ही कहुगा.. जब जयश्री दीदीको चोदता हु.. तब उनको भी दीदी दीदी कहेते चोदता हु..

ब्रीन्दा : (सर्टके बटन खोलते मुस्कुराते) जानु आप बहुत कमीने हो.. वो मुना भाइ भी आपही की तराह हे.. वो भी अ‍ैसे करते हे.. ठीक हे.. लेकीन जब हम प्यार नही करते तब तो नाम लेकर बुलाइअ‍े.. हमने बाकायदा मंदीरमे जाकर सादी कीहे..

श्रीधर : (पेटीकोटके बटन खोलते) मोम.. जब हम तीनो इस घरमे अकेले रहेगे.. ओर दीदीको हमारे रीस्तेके बारेमे पता चल जायेगा तब मे आपको नाम लेकर बुलाउगा.. बस अ‍ेक बार आपका डीवोर्स होजाने दीजीये.. ओर आपको मुनाके बारेमे सब कैसे पता चला..? क्या बसंती आंटीने बताया..?

ब्रीन्दा : (सरमाते धीरेसे) हां जानु.. वो.. वो बसंती बहेन अब मेरी पकी सहेली होगइ हे.. वो हमारे बारेमे भी सब कुछ जानती हे.. ओर उनके ओर मुना भाइके बारेमे भी मुजे सबकुछ बता दीया.. जीस तराह अभी हम मील रहे हे.. उसी तराह अभी मुना भाइ ओर बसंती दीदी भी मील गये होगे.. आज हम दोनो सहेलीने अपने बेटेसे मीलन करनेका मन बनालीया था.. बहुत जल्द वो भी दोनो सादी करलेगे.. ओर वो बसंती आंटीसे आपकी भाभी होजायेगी..

तब कुछ ही देरमे दोनो मां बेटेने अ‍ेक दुसरेके कपडे नीकाल दीये तब श्रीधर ब्रीन्दाके उरप चड गया.. तो ब्रीन्दाने श्रीधरका लंड पकडकर सीधा अपनी चुतपे सेट कर दीया.. ओर अ‍ेक ही जटकेमे श्रीधरने पुरा लंड ब्रीन्दाकी चुतमे उतार दीया.. तब ब्रीन्दा हल्कासा चीखते मदहोस होने लगी.. तब कुछ ही देरके बाद दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. ब्रीन्दा श्रीधरके नीचे आते ही अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह अपनी कमर उछालते चुदाइ करवाती थी..

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तो इधर बसंती भी मुनाको इसारा करके घरपे चली गइ थी.. तब कुछ देरके बाद मुनाभी बहाना बनाकर घरपे चला गया.. ओर आंगनका दरवाजा बंध करके कुंडी लगादी.. ओर घरमे चला गया तो वहा मुनाको कोइ नजर नही आया.. वो अपने रुममे जाकर देखता हे तो बसंती वहा भी नही थी.. तब मुना धीरेसे बसंतीके रुमकी ओर बढ गया.. ओर दरवाजेको हल्कासा धका मारा.. तो दरवाजा खुल गया.. पुरे रुममे अंधेरा था.. तभी बसंती की आवाज आइ..

बसंती : (धीरेसे) मुनाजी.. आप दरवाजा बंध कर दीजीये.. ओर लोक करके इधर आजाइअ‍े.. आपकी बीवी आपका इन्तजार कर रही हे.. आज आप अपनी सारी कसर पुरी करलो.. अब मेने आपको पतीके रुपमे स्वीकार करलीया हे..

मुना : (धीरेसे दरवाजा बंध करते) मोम.. आपने अचानक फैसला क्यु बदल दीया..

बसंती : (मुस्कुराते धीरेसे) मुनाजी.. अब मोम नही.. सीर्फ आपकी बीवी बसंती हे.. तो नाम लेकर बुलाइअ‍े.. बाकी बाते बादमे करेगे.. अभी फटाफट आजाइअ‍े.. आज बहुत अच्छा मौका मीला हे.. आइअ‍े..

तो मुना मुस्कुराते दरवाजा बंध करके लोक कर देता हे.. ओर छोटासा बल्ब जलाकर रुममे हल्कीसी रोसनी करते धीरेसे बसंतीके बेडकी ओर चला गया.. तो वहा बसंती अपने उपर चदर डालकर लेटी हुइ थी.. ओर मुनाकी ओर नजरे चुराते सरमाके मुस्कुरा रही थी.. मुनाने जातेही बसंतीकी चदरको खीच लीया.. तब बसंती पुरी तराह नंगी होकर लेटी थी.. उनका गोरा बदन कीसी कांचकी पुतलीकी तराह चमक रहा था.. ओर उसने जटसे अपने दोनो हाथ अपनी चुतपे रख दीया..

ओर मुना बसंतीको देखकर पागल जैसा होने लगा.. वो अपने सभी कपडे फटाफट नीकालने लगा.. ओर कुछही देरमे वोभी पुरी तराह नंगा हो गया.. तब बसंती टेडी नजरोसे मुजाके लंडकी ओर देखने लगी.. तो मुनाका लंड तनके उपरकी तराह हवामे लहेरते जटके मार रहा था.. जैसे उनको नइ चुतमे जानेकी जल्दी हो.. ओर मुना धीरेसे आकर बसंतीकी बगलमे लेट गया.. तब बसंतीने मुनाको कमरमे हाथ डालते अपने उपर खीचकर चडा दीया..
 
बसंती : (धीरेसे कामुक आवाजमे) मुनाजी आपकी जगाह मेरे बगलमे नही मेरे उरप हे.. अब ये तन सीर्फ आपका हे.. इसे जैसे भीगना चाहो भोग लीजीये..

कहेते मुनाके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. मुनासे अब कंट्रोल करना मुस्कील होने लगा.. तभी बसंती की चुतपे मुनाका लंड ठोकर मारते गीला होने लगा.. तो बसंतीको अपनी चुतपे मुनाका लंड दबाव बनाते महेसुस होने लगा.. जैसे वो अंदर धुसनेकी कोसीस कर रहा हो.. लेकीन तब भी बसंती ओर मुना मदहोस होकर अ‍ेक दुसरेके मुहमे जीभ धुसानेकी कोसीस करते जीभसे पेच लडाते रहे..

दानोही अ‍ेक दुसरेके अंदर समाजानेके लीये पागल हो रहे थे.. तभी बसंती कुछ सोचे समजे इनसे पहेलेही मुनाके लंडने अपने बीलका रास्ता ढुंढ लीया था.. ओर बसंतीकी नाजुक चुतको चीरते मुनाका तगडा लंड अंदर पुरा घुस गया.. तब बसंतीकी जोरोसे चीख नीकल गइ.. उनको आंखोसे दो बुंद आंसु नीकल गये.. ओर उसने अपने दोनो पैर मुनाकी कमरमे आटी लगाकर मुनाको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..

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तब मुना बसंतीके गलेके मुह डालकर उनके गलेको चुमने लगा.. तब बसंती पुरी तराह मदहोस होते कामातुर होगइ थी.. आज मुनाको बसंती अ‍ेक कुआरी लडकी की तराह लग रही थी.. वो सजधजके पुरी तराह अपने बेटेको रीजानेमे कामयाब हो गइ थी.. ओर आखीर मुना भी बसंतीको पानेके लीये पागल होने लगा था.. तो दुसरी ओर बसंतीने भी अब पुरी तराह मुनाको अपना लया था.. तभी..

बसंती : (मुह बीगाडते धीरेसे) मेरे सरताज.. आप कहेकर तो डालते.. अब ये बसंती आप ही की अमानत हे..

मुना : सोरी डार्लीग.. मे तुजे देखकर कंट्रोल नही करपाया.. क्या मस्त बदन हे तेरा.. जी तो चाहता हे तुजे सारी जींदगी चोदता ही रहु.. तु मेरी बरखा से भी बहुत सेक्सी दीखती हे.. तु मुजे बहोत मजे देती हे..

बसंती : (होंठ चुमते) हां मुनाजी.. बस.. अब आप मुजे अ‍ैसेही बुलाइअ‍ेगा.. मे पुरी तराह आपकी पत्नी बनकर रहेना चाहती हु.. अब ये बदन सीर्फ आपका ही हे.. आजसे मांग मे सीर्फ आपके नामका ही सींदुर लगेगा.. अपना लीजीये मुजे.. मे आपसे सादी करनेके लीये तैयार हु.. मुजे आपके बापुकी परवाह नही करनी.. मे नही रेह सकती आपके बीना.. मुजसे ओर इन्तजार नही होगा..

मुना : (बुब्स चुमते धीरेसे कमर हीलाते) मोम.. हम दोनो बहुत ही जल्द सादी करलेगे.. मोम.. अंदर बहुत गरम लग रहा हे.. बीलकुल भठीकी माफीक..

बसंती : (सर्मसार होते सर सहेलाते) मुनाजी.. अब मे आपकी मोम नही.. बीवी हु.. नाम लेकर बुलाइअ‍े.. मेरे अंदर बहुत ज्यादा आग हे.. जो सीर्फ आपही के लीये सम्हालके रखी हे.. अब ये आग सीर्फ आपही बुजा सकते हे.. मे भी बरखाकी तराह हमारे बच्चेको जन्म दुगी.. लेकीन इसके लीये आपको थोडासा इन्तजार करना पडेगा.. अब चोदीये मुजे.. बहुत मन कर रहा हे..

मुना : (थोडी जोरोसे कमर हीलाते) बसंती.. आइ लव यु.. आजसे मे तुजे अपनी पत्नी मानुगा.. ओर कभी कभी मुजे मेरी माको चोदनेकी इच्छा होगी तब मे तुजे मां भी कहुगा.. क्या मस्त चुदाइ करवाती हे तु..

बसंती : (कामुक होते कमर हीलाते) हां मुनाजी.. अब आपको जैसा भी मन करे मानके चोदते रहीये.. अब ये बसंती सीर्फ आपकी अमानत हे.. आजसे बरखा मेरी बेटी या बहु नही.. मेरी सौतन हे.. चोद लीजीये मुजे..

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दोनोही कामुक बाते करते चुदाइमे मसगुल होगये.. बहुत दिनोके बाद आज मुना तीसरी बार बसंतीकी चुदाइ कर रहा था.. तो बसंती भी कइ दिनोसे बीना चुदाइ तडप रही थी.. इसीलीये बसंती आज अपनी सारी लाज सरम त्यागकर मुनासे चुदवाकर अपनी सारी कसर पुरी कर देना चाहती थी.. तो दुसरी ओर ब्रीन्दाभी अपनी कमर उछाल उछालके श्रीधरसे बहुत कामुक तरीकेसे चुदवाते साथ दे रही थी.. ओर श्रीधरकी पत्नी होनेका हक अदा कर रही थी..

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मुना ओर श्रीधर दोनोने अपनी अपनी मांको दो दो बार चोद लीया ओर चोद चोदके दोनोने अपनी मांको संतुस्ट करदीया था.. आज मुनाने बसंतीके ओर श्रीधरने ब्रीन्दाके अ‍ेक अ‍ेक अंगको जंजोरके रख दीया था.. दोनोके पुरे बदनमे हल्कासा दर्द हो रहा था.. अभी दोनोही अपने अपने बेटेसे चुदवाकर बेडपे आराम कर रही थी.. तब मुना ओर श्रीधर दोनोही कंपलीट होकर वापस बंसीके घरपे आ चुके थे..

तो उधर हवेलीपे भी मंजु भावना रमा लता नीलम रश्मी ओर वंदना सब लोग सामत भाइके घरसे खाना खाकर हवेलीपे आराम करने आगइ थी.. तो सभी लेडीस होलमे बैठकर थोडी देर गप्पे लगाती रही.. तो कुछ देरके बाद लता रमा ओर नीलम उपर लताके रुममे आराम करने चली गइ.. तो बाकी की सभी लेडीस मंजुके कमरेमे घुस गइ.. ओर वही लेटकर बाते करने लगी.. फीर साम होते ही सभी तैयार होकर सामत भाइ के घरपे चली गइ..

तो वहा इस वक्त बंसी ओर सांतीकी हल्दीकी रशम हो रही थी.. गांवकी सभी लेडीस सांतीको ओर बंसीको हल्दी लगाकर अ‍ेक दुसरेको हल्दी लगाते मस्तीया करने लगी.. तब जागृती भी मस्तीया करते सांती ओर बंसीको हल्दी लगाती हे.. तभी बरखा जयश्री ओर सांतीने मीलकर जागृतीके पुरे चहेरे पे हल्दी लगादी.. तब जागृती बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर बंसीकी ओर कामुक नजरोसे देखते हसती रही..

कुछ देरके बाद ब्रीन्दा ओर बसंती थी तैयार होकर आगइ.. ओर सभी लेडीसके साथ सामील होगइ.. दोनो साथ साथ बैठकर अ‍ेक दुसरेसे सरमाते हस हसके आजके अपने अनुभवकी बाते करने लगी.. दोनो ही अ‍ेक दुसरेसे खुलकर सभी तराहकी बाते करने लगी थी.. तब बसंतीने ब्रीन्दाको बता दीया.. की अब उसने अपने बेटेको पतीके रुपमे स्वीकार करलीया हे.. ओर बहुत ही जल्द दोनो सादी करने वाले हे..

आज दोनो अ‍ेक दुसरेकी पुरी राजदार बन चुकी थी.. ओर दोनोने अ‍ेक दुसरेसे सभी बाते आपसमे सेर करनेका फैसला करलीया था.. तो इस वक्त भी दोनो मुना ओर श्रीधरकी ओर इसारा करते सरमाते हस हसके दो पहोरमे अपने अपने बेटेके साथ हुइ चुदाइके बारेमे बाते कर रही थी.. तब ब्रीन्दा बार बार श्रीधरकी ओर देखकर मुस्कुरा रही थी.. तो बसंती भी मुनाको देखकर सरमा जाती थी.. ओर मुस्कुराने लगती थी..
 
तब बसंतीको नही पता थाकी उनकी सभी हरकते उनकी बेटी बरखा देख रही हे.. तब बरखाको भी बसंती ओर मुनाको लेकर मनमे आसंकाये होने लगी.. ओर मन ही मन खुस होने लगी.. की चलो.. अगर दोनो मां बेटेका रीलेशन होजाये तो कीतना अच्छा हे.. तब दो आंखे बार बार मील रही थी.. ओर आंखो ही आंखोमे बहुत सारी बाते कर रही थी.. ओर वो कोइ ओर नही बंसी ओर उनकी बहेन जागृती की आंखे थी..

जो बंसी सबसे नजर बचाते जागृतीको बार बार आंखोके इसारोसे उपर अपने घरकी छतमे मीलनेका इसारा कर रहाथा.. तो जागृती बहुत ही सर्मसार होजाती ओर मुस्कुराते बंसीको ना मे गरदन हीलाकर हसने लगती.. ओर कभी कभी सबकी नजर बचाते बंसीको अपनी चुभ नीकालकर चीडाती ओर हसने लगती.. दोनो ही भाइ बहेन आंख मीचोली खेल रहे थे.. तब दोनोका इसारा जयश्री ओर बरखाकी नजरमे आगया..

जयश्री : (हसते जागृतीके कानमे) जागु.. क्यु बेचारेको तडपा रही हे.. उसे हां कहेदेनां.. उनकी सादी हे.. तो अबतो उनको देदे.. वो खुस होजायेगा.. हें..हें..हें..

जागृती : (बहुतही सर्मसार होकर हसते धीरेसे कानमे) कमीनी.. थोडा मजातो लेने दे.. देख अब वो पुरी तराह मेरे पीछे लटु हो गया हे.. मे उसे अ‍ैसेही नही दुगी.. बस.. थोडा तडपाउगी.. तभी तो वो मेरे प्यारकी अहेमीयतको समजेगा..

जयश्री : (हसते कानमे धीरेसे) कमीनी.. ज्यादा भाव मत खा.. कही अ‍ैसा ना होकी हाथसे ट्रेन छुट जाये.. अच्छा मौका हे.. मीलले उसे.. यही समजलेना तेरी तरफसे सादीकी गीफ्ट हे.. हां कहेदे उसे.. हें..हें..हें..

बरखा : (हसते धीरेसे) हां जागु.. जयश्री सही केह रही हे.. कमीनी हां कहेदे.. अब तो उसने तुजे महेंदी भी लगादी हे.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते हसते धीरेसे) कमीनीओ.. तुम दोनो तो मेरे पीछे ही पड गइ हो.. ठीक हे.. लेकीन हमे मीलनेका मौका भी तो मीलना चाहीये.. देखती नही अभी घरपे कीतने सारे महेमान आये हे.. मुजे भी भाभीके पास सोना पडता हे..

बरखा : (हसते धीरेसे) कमीनी तो क्या हुआ.. तुमतो केह रही थी.. तेरी भाभी भी खुद यही चाहती हे.. तो क्या प्रोबलेम हे..? (हसते) उनको कहेना थोडी देरके लीये दुसरी ओर मुह करके सो जाये.. तब दोनो मील लेनां.. हें..हें..हें.. (मुनाकी ओर इसारा करते) देख मेरे पतीको.. वो खुद उनकी मम्मीके पीछे पडा हे.. हें..हें..हें..

जागृती : (मुनाकी ओर देखते धीरेसे) कमीनी.. क्या बोल रही हे..? वो तेरी भी तो मम्मी हे.. हें..हें..हें.. तुजे तो तेरी मम्मीके बारेमे बात करते सरम भी नही आती.. हें..हें.. हें.. वैसे आज आंटी भी क्या मस्त लग रही हे.. बीलकुल सांती बुआकी तरह दुल्हन लग रही हे.. जैसे उनकी सादी हो.. हें..हें..हें..

बरखा : (सरमाते जोरोसे हसते धीरेसे) जागु.. वो अब मेरी मम्मी नही हे.. अब वो मेरी सास हे.. हें..हें..हें.. मेरा बस चले तो मे उनको अपनी सौतन बनानेके लीये भी तैयार हु.. हें..हें..हें..

जयश्री : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) कमीनी.. तु क्या बोल रही हे..? जागु.. बरखा.. देखलो.. सीर्फ बसंती आंटी नही.. मेरी सासुमा भी अ‍ैसे सजधजके आइ हे.. दोनो सुबहसे साथ साथ ही घुम रही हे.. ओर इस वक्त बार बार श्रीधरकी ओर देख रही हे.. कही उन दोनोके बीच भी तो कोइ चकर नही हे नां..? हें..हें..हें.. देखना बाबा.. कही तेरी सास मेरी सासको भी ना बीगाडदे.. वरना वो भी मेरी सौतन होजायेगी.. हें..हें..हें..

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बरखा : (सरमाकर धीरेसे) जयश्री.. तो अच्छा हेनां.. बीगडने दे उसे.. अगर बीगड भी जाये तो क्या फर्क पडता हे.. तुही तो केह रही थी.. की अब तेरे ससुर ओर सास अलग हो रहे हे.. तो फीर सोच अब तेरी सासु कहा जायेगी..? वो भी तो अभी जवान हे.. उपरसे खुबसुरत.. जो तुमसे टकर ले सके.. तो क्या तु उनके बारेमे नही सोचेगी..?

जागृती : (सरमाकर हसते धीरेसे) हां जयश्री बरखा सही केह रही हे.. उसने बडी मुस्कीलसे अपनी मांको वो भानु भाइकी चुंगलसे नीकाला हे.. ओर अब वोभी तो अपनी मांके बारेमे सोचती हे.. वो खुद चाहती हे की बसंती आंटीका रीलेशन मुना भाइसे होजाये.. ताकी घरकी बात घरमे ही रहे.. ओर बहार वालोको कीसीको पता भी ना चले.. तुम भी अ‍ेक बार ब्रीन्दा आंटीके बारेमे सोचले.. हें..हें..हें..

जयश्री : (सरमाते हसते आस्चर्यसे) क्या..? बरखा.. जागु क्या केह रही हे..? क्या तु वाकइ चाहती हेकी आंटीकी सेटींग मुना भाइसे होजाये..? क्या ये गलत नही हे..?

बरखा : (सरमाते धीरेसे) नही जयश्री अब तो हमारे गांवमे इतना सारा बदलाव होने लगा हे.. जबसे बदलावकी बाते सुनी हे.. तबसे सभी लडकेको अपनी बहेन ओर मां ही अच्छी लगने लगी हे.. सीर्फ मेरा मुना ओर श्रीधरभाइ ही नही.. यहाके सभी लडकोको घरके रीस्ते ही अच्छे लगते हे.. पता नही हमारे घरके जैसे रीस्ते कीतने होगे.. कोइ अपनी विधवा भाभीके पीछे लगा हुआ हे.. तो कोइ तो अपनी बडी अम्माके साथ भी रीलेशन मे हे.. क्या हम साहीलभाइके बारेमे नही जानते..?

जयश्री : बरखा.. फीर भी ये कुछ अजीब नही लगता.. अपनी माके साथ ही..? सरम भी नही आती..

बरखा : जयश्री.. तो इसमे सरम काहेकी..? तु सुनती नही.. आज कल गांवमे हमारी मम्मीके बारेमे हमे क्या क्या सुनना पड रहा हे.. जब अ‍ेक बार अंदर लेती हेना.. फीर तो हर रात उनको डंडा चाहीये.. तुमने भी अ‍ेक बार श्रीधर भाइके साथ मीलन करलीया.. फीर क्या उनसे दुर रेह सकती थी..? नहीनां.. फीर तु तेरी सासु अकेली होजायेगी तब उनके लीये डंडा कहासे नीकालेगी.. कमीनी देखना वो भी मेरी मांकी तराह भटक जायेगी.. ओर बहार चुदवाती रहेगी..

जागुती : (सरमाते धीरेसे) हां जयश्री बरखा सही केह रही हे.. इस बेचारीने बडी मुस्कीलसे उनकी मांको भानुभाइकी चुंगलसे छुडाया हे.. ओर अ‍ेक ये मेरी मां.. आज कल इनके ओर रमेश भाइके बारेमे भी बहुत कुछ सुनना पड रहा हे.. तो बेचारी अब ब्रीन्दा आंटी भी अकेली होजायेगी.. तो सोच कल अगर इनके भी कदम कही बहेक गये तो..? इनसे तो अच्छा हे घरकी बात घरमे ही रहे..
 
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