Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 54 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. तो फीर सुन.. लता तुजे प्यार नही करती थी.. वो उनकी सादीसे पहेले ही हमारी पुनोकी तराह तेरे बडे भाइको प्यार करती थी.. वो तेरे बडे भाइके साथ नजदीक रेह सके इसीलीये उसने तुमसे सादी की.. ताकी यहा रहेकर वो तेरे बडेभाइका प्यार पा सके.. इसीलीये उसने तेरा रजीयाके साथ ओर तेरी मेडमके साथका रीलेशन भी स्वीकार करलीया हे.. अब नीर्णय तुने लेना हेकी तुजे क्या करना हे..

लखन : (आंख गीली करते) भाभीमां.. मे कभी ओरतोको समज ही नही पाया.. मे कीतना मुर्ख था.. मुजे लगता थाकी लता मुजसे बहुत प्यार करती हे.. लेकीन उनकी चाहत तो कोइ ओर ही थी.. बीलकुल हमारी पुनोकी तराह.. हम मर्द कीतने डरपोक होते हे.. कीसीको अपनी दिलकी बात भी नही केह पाते.. ओर ओरते अपने प्यारको पानेके लीये कोइ भी कदम उठानेके लीये पीछे नही हटती.. अ‍ैसा क्यु..?

मंजुला : (लखनके सरको अपने कंधेपे रखकर सहेलाते) बीटु.. तु बीलकुल सही केह रहा हे.. तुम तो क्या आज तक कोइ भी मर्द ओरतको नही समज पाया.. ओरते सीर्फ कहेनेके लीये अबला नारी हे.. असलमे अबला तो मर्दको कहेना चाहीये.. मुजे पता था ये बात जानकर तुजे जरुर दुख होगा.. बस.. तुम लतासे कोइ धृणा मत रखना.. क्युकी वो सचमे देवुसे प्यार करती हे.. ओर अब सायद तुजसे भी..

लखन : (कंधेपे सर रखते आंसु बहाते) भाभीमां.. भाइमे अ‍ैसा क्या हे..? जो मुजमे नही.. क्युकी सब भाइको ही पसंद करती हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु.. पहेला तो उनका आकर्सण.. जो हमारे गुरुजीने उसे जडी बुटी देकर दीया हे.. ओर दुसरा उसका वो अंग.. जीसे वो सभी ओरते ओर लडकीया संतुस्ट होती हे.. बीटु.. इसीलीये तो हमे तुजे वो जडी बुटी देनेकी आवस्यक्ता पडी.. यहा तो रीस्तोके कुछ मायने ही नही हे.. सबको सारीरीक सुख चाहीये.. जो हम सबकी जींदगीका अहेम हीसा हे.. उसीसे तो दुनीया चलती हे.. हमारे रुषी मुनीओने उनके उपर अ‍ैसे ही ग्रंथ नही लीखे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. क्या तो फीर मे भी भाइके जैसा होजाउगा..?

मंजुला : (हसते) हां बीटु.. देखना अब मेरे बीटुमे भी इतना आकर्सण होगा.. जो उनकी सभी भाभीया ओर लडकीया आपके पीछे पागल होजायेगी.. बीटु.. जब कोइ भी अ‍ेक बार आपसे मीलन करेगी.. मेरे देवुको भी भुल जायेगी.. बीटु.. तुजे अपना पुराना प्यार भी मील जायेगा.. ओर इसके अलावा भी बहुत कुछ.. जो आप सोच भी नही सकते.. देखा नही.. बीटु.. जब कोइ सामनेसे आये.. तब ये मत सोचना ये मेरी रीस्तोमे क्या हे.. समजे..? अब यहा सीर्फ अ‍ेक मर्द ओर ओरतका ही रीस्ता होगा..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. कीतना अजीब हे.. हेनां..? सच कहा आपने.. हमारे यहा तो रीस्तोके कुछ मायने ही नही हे.. फीर भी कोइ कीसीको धोखा नही देते.. जो होगा सब सबकी रजामंदीसे होगा..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां बीटु.. देखा नही.. रमा भाभी जैसी ओरत भी कीतनी लालचु हे.. पैसोके लीये अपने दोनो पतीको धोखा दे चुकी हे.. ओर यही पैसोकी वजहसे अपनी बेटीको भी इस दल दलमे डाल रही हे.. वो खुद अब तेरा प्यार पानेके लीये पागल हे.. ओर अब तो वो खुद नही.. नीलुभी आपकी ओर आकर्सीत होने लगी हे.. वो भी अपनी मांकी तराह धिरेनको धोखा देगी..

लखन : (सामने देखते) भाभीमां.. क्या उनके बारेमे भी आपको सब पता हेनां..? आपकी बात बीलकुल सही हे.. वो मां बेटी दोनो पैसोके लीये मुजसे रीलेशन रखनेके लीये तैयार होगइ हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां बीटु.. मे उनके बारेमे सबकुछ जानती हु.. यही तो कलयुग हे.. जो उनकी उमर अभी बहुत ही छोटी हे.. फीर भी अ‍ैसा बहुत कुछ देखनेको मीलता हे.. फीर पता नही आगे क्या क्या देखनेको मीलेगा.. बस.. अब तुजे भी अ‍ेक ओरतकी तराह सोचना हे.. ये नही देखना की सामने वाली ओरत रीस्तेमे तेरी क्या लगती हे..

फीर चाहे वो हमारी पुनो ही क्यु ना हो.. तुजे दि हुइ जडी बुटीका फायदा उठाना हे.. वो कैसे तो वो मुजसे बहेतर तुम ओर पुनो जानते हो.. बाकी मुजे कुछ नही कहेना.. क्या तुम पुनोसे भी नाराज होनां..? हंम.. तुजे नही लगता तुमने थोडी जल्द बाजी की..? हंम..?

लखन : (सर जुकाते) हां भाभीमां.. आइ अ‍ेम सोरी.. इसमे गलती मेरी ही थी.. मे कुछ ज्यादाही बहेक गया था.. ओर आगे बढ गया.. लेकीन क्या करु..? दोनोके साथ इतने दिनोसे मस्तीया कर रहाथा.. ओर पुनोसे तो मे प्यार करता था.. अच्छा हुआ.. पुनोने मुजे चाटा मारा.. ओर मुजे मेरी हद दीखादी..

मंजुला : (मुस्कुराते) नही बीटु.. गलती सीर्फ तेरी नही थी.. उन दोनोकी भी थी.. जीस तराह तुम बहेक गयेथे.. उसी तराह वो दोनो भी बहेक गइ थी.. जबसे तुजे पुनोने जडी बुटी दिहे.. तबसे वो दोनो तेरे अंदर आये बदलावको देखनेके लीये उत्सुक हे.. ओर अब तो तुम्हे सभी तराहकी छुट मील गइ हे.. तो अब कीसीके भी साथ आगे बढना चाहो तो बढ सकते हो.. लेकीन प्यारसे.. कोइ जल्द बाजी नही.. समजे..?

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) जी भाभीमां.. मे सब समज गया.. लेकीन भाइ..? वो कुछ कहेगे तो नही..?

मंजुला : (मुस्कुराते) नही.. वो तुजे कुछ भी नही कहेगे.. क्युकी वो खुद लताके साथ रीलेशनमे आयेगे.. ओर वो भी बहुत जल्द.. बीटु.. अ‍ेक दिन लता भी उनकी बीवी होजायेगी.. जीस तराह तुजे सब अधीकार मील रहा हे.. उसी तराह अब लताको भी सभी अधीकार देदे.. फीर तुम भी उनकी कोइ भी बीवीके साथ रीलेशन रखनेके संकोच मत करना.. समज गयानां.. बस.. सीर्फ मुजे छोड देना.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) भाभीमां.. ये आप क्या केह रही हे..? मे आपके बारेमे तो अ‍ैसा सोच भी नही सकता.. क्युकी मेने कभी आपको भाभी मानाही नही हे.. आप तो मेरी मां हो.. ओर मे यही प्रर्थना करता हुकी अब हर जन्ममे आपही मेरी मा बनो..

मंजुला : (मुस्कुराते आंख गीली करते) बीटु.. तुजे सब ज्ञात नही हेनां.. इसीलीये तु अ‍ैसा बोलता हे.. मे कइ जन्मोसे तेरे साथ जुडी हुइ हु.. मे उस हिमाचलमे भी तेरी मां थी.. आज भी तेरी मां हु.. ओर अगले जन्ममे भी तेरी मांकी मा होउगी.. बस.. सीर्फ अ‍ेक हीन्ट देती हु..

अगर तुमने उस किताबको पढा हेतो मुजे पहेचान चायेगा.. ओर खुदकी पहेचान भी होजायेगी.. मे सबकी जननी हु.. मे कभी अपने बेटेकी बीवी होती हु.. तो कभी उनकी मां.. ओर मां होते हुअ‍े भी फीरसे इनकी बीवी होजाती हु.. ओर ये चक्र चलता ही रहेता हे..

लखन : (खडा होकर पैरोमे गीरते) बस.. बस मां.. मे पहेचान गया आपको.. ओर खुदको भी पहेचान लीया.. क्या मे बबलु हुनां..? ओर आप गुरुमाइ.. मे ही तो आपका बेटा था.. आपका अयास बेटा बबलु.. जो उस जन्ममे अपनी दोनो बहेनको चाहता था.. ओर बादमे पीयुसे सादी करलेता हे..

मंजुला : (खडी होकर लखनको सीनेसे लगाते) हां मेरे लाल.. तुमने मुजे ओर खुदको सही पहेचाना.. बस.. इस बातका जीक्र तुम कीसीसे मत करना.. तुजे फीरसे जन्म लेकर आना हे.. मेरी ही बेटीकी कोखसे ओर तब तुजे तेरी पुनो मील जायेगी.. वो सीर्फ तेरी ही हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. बस.. अब सीर्फ अ‍ेक के बारेमे बतादो.. फीर मे आपको कुछ भी नही पुछुगा..

मंजुला : (हसते) कीसके बारेमे..? क्या पुनोके बारेमेनां..?

लखन : (हसते धीरेसे) हां.. आपको तो सब पता चल जाता हे.. हें..हें..हें.. प्लीज.. बताइअ‍ेना..

मंजुला : (मुस्कुराते) ठीक हे.. सुन.. लेकीन देखना.. इस बारेमे कीसीको पता नही चलना चाहीये.. मुजे यकीन हे.. मेरा बेटा अपनी मां की बात कभी नही टालेगा..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभीमां.. आइ प्रोमीस.. मे कीसीको कुछ नही बताउगा.. बाइअ‍ेना..

मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु.. वो पीछले जन्ममे उन राजाकी दादी थी.. फीर दुबारा जन्म लेकर पीयु बनके तेरी जींदगीमे आइ थी.. जो उस जन्ममे वही राजाकी चहीती बेटी थी.. वहा उनकी इतनी रानीया देखकर वो भी राजाकी ओर आकर्सीत होगइ थी.. लेकीन उस राजाने उनको अपनी बेटी माना था..

तो अगले जन्ममे वो भी इनकी पत्नी होना चाहती थी.. जो इस जन्ममे उनके अंसकी बीवी होगइ हे.. वो थी तेरी प्यारीसी छोटीसी पीयु.. जो इस जन्ममे देवुकी बीवी.. ओर आने वाले वक्तमे तेरी भी मासुका होजायेगी.. लखन बेटा.. तुजे तेरा प्यार जरुर मील जायेगा.. वो भी बहुत जल्द..

लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. आज दिलको तसली मील गइ.. मे आपकी हर बात मानुगा.. मुजे सभी बाते मंजुर हे.. बस.. कुछ दिनके लीये मे पुनोदीदीसे दुर रहेना चाहता हु.. ताकी उनको भी मेरे प्यारकी अहेमीयत पता चले..

मंजुला : (मुस्कुराते) ठीक हे बीटु.. लेकीन उसे बहुत ज्यादा मत तडपाना.. वो सीर्फ तेरी हे.. भले ही वो दुनीयाकी नजरमे कुछ भी हो.. वो हमेसा तेरी सुहागन कहेलायेगी.. वो तेरे लीये बहुत आंसु बहा रही हे.. मेरी बेटीको ज्यादा मत तडपाना.. ओर हां.. लता सीर्फ वहा धरको सही करनेके लीये ही आ रही हे.. वो जब कहे तुम उसे यहा छोड जाना.. ताकी वहा उन दोनोको मीलनेमे तुजे भी कोइ तकलीफ ना हो.. समज गया नां..?

लखन : (समरमते मुस्कुराते) जी भाभीमां.. जैसा आप कहे.. मे सब समज गया..

मंजुला : (हसते सरको सहेलाते) हंम.. जा अब रात बहुत हो चुकी हे.. वहा तेरे रुममे भी कोइ तेरा इन्तजार कर रही हे.. अब मे चाहती हु.. की तुम रजीयाको ओर तेरी उस मेडमको पुरी तराह अपनाले.. ताकी तुजे अपनी जींदगी जीनेके कोइ तकलीफ ना हो.. बस.. अ‍ेक दिन तेरी उस मेडमको इधर लेकर आना.. मुजे उनको देखना हे.. हें..हें..हें..

लखन : (पैर छुकर) हां भाभीमां.. अ‍ेक दिन उनको जरुर लेकर आउगा.. मोम.. लव यु..

मंजुला : (हग करते सर चुमते) लव यु टु बेटा.. अब जा सोजा.. ओर सुन.. आज हमारे बीच जो भी बाते हुइ हे.. उसे अपने दिलमे दफन कर देना.. ये बात कीसीको बतानेकी जरुरत नही हे.. समजे..?

लखन : (मुस्कुराते) जी मोम.. लव यु..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. लव यु टु बेटा..

कहातो लखन खुस होते मुस्कुराते उपरकी ओर जाने लगा.. तो मंजु भी हसते हुअ‍े लखनको खुस होकर जाते देखती रही.. फीर वो भी खडी होकर अपने रुममे चली गइ.. तब चंदा ओर सृती दोनो गहेरी नींद सो रही थी.. जो बाते पुनमको लखनको बतानी थी.. वोही बाते आज बडी ही सीफतता से ओर मर्यादित भाषामे मंजुने लखनको बतादी.. अ‍ेक दिन पुनम भी उनको मील जायेगी.. यही सोचकर लखन भी खुस होगया था.. आज पुनमको लेकर जो नाराजगी थी.. वो बहुत ही कम होगइ.. ओर मन ही मन पुनमको पानेका सपना देखने लगा....

कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २०४

कहातो लखन खुस होते मुस्कुराते उपरकी ओर जाने लगा.. तो मंजु भी हसते हुअ‍े लखनको खुस होकर जाते देखती रही.. फीर वो भी खडी होकर अपने रुममे चली गइ.. तब चंदा ओर सृती दोनो गहेरी नींद सो रही थी.. जो बाते पुनमको लखनको बतानी थी.. वोही बाते आज बडी ही सीफतता से ओर मर्यादित भाषामे मंजुने लखनको बतादी.. अ‍ेक दिन पुनम भी उनको मील जायेगी.. यही सोचकर लखन भी खुस होगया था.. आज पुनमको लेकर जो नाराजगी थी.. वो बहुत ही कम होगइ.. ओर मन ही मन पुनमको पानेका सपना देखने लगा....अब आगे

जब लखन मंजुके पास आया तब नीर्मलाके रुममे देवायत नीर्मला ओर भुमीका तीनोने अपने सभी कपडे नीकाल दीये थे.. इस वक्त दोनो साथ साथ पीठके बल लेटी हुइ थी.. ओर देवायत दोनोके बीच लेटे बारी बारी नीर्मला ओर भुमीकाके बुब्सको चुमते नीचेकी ओर सरकता गया.. दोनोकी नाभी चुमते आखीर दोनोकी चुतके पास आ गया.. ओर चुतपे मुह लगाते बारी बारी दोनोकी चुतको चाटने लगा..

तो नीर्मला ओर भुमीका पागल जैस्े होने लगी.. ओर दोनोने मदहोस होते आंख चडाली.. तब दोनोकी चुतसे पानी पानीका रीसाव होने लगा.. ओर दोनो अपनी कमर हीलाने लगी.. तभी देवायतने नीर्मलाकी चुतमे अपनी जीभ घुसादी.. ओर चुतके दानेको अपने मुहसे खरोदने लगा.. फीर यही हरकत भुमीकाकी चुतमे जीभ घुसाके की.. तब नीर्मला ओर भुमीका दोनोही उतेजीत होते पागल होने लगी..

नीर्मला : (उतेजनासे धीरेसे) बस.. बस देवु.. अब रहा नही जाता.. आप पहेले भुमीसे करलो.. फीर मेरे पास आजाना.. ओर हां.. थोडा ध्यान रखके करना.. उनके पेटमे बच्चा हे..

देवायत : (धीरेसे भुमीके उपर आते) नीमु.. पता हे मुजे.. मे ध्यान रखकर करुगा.. भुमी.. क्या तुम रेडी हो..?

भुमीका : (सर्मसारते धीरेसे) हां देवु.. आप आजाइअ‍े.. अब रहा नही जाता.. बहुत मन कर रहा हे..

देवायत : (भुमीके उपर आते) भुमी.. तेरा पेट तो काफी बढ गया हे.. अब बीना कपडोमे साफ दीखाइ दे रहा हे..

भुमीका : (सर्मसार होते धीरेसे बाहोमे भरते) हां देवु.. मुजे इसी बातकी चीन्ता हो रही हे.. आप सृतीको सम्हाल लेना.. हो सकता हे हम वापस आये तबतक सायद सृतीको पता चल जाये..

नीर्मला : (धीरेसे पास आते) हां देवु.. हम जीस डोक्टरको दीखाने गइ थी.. सायद वो सृतीकी फ्रेन्ड हे..

देवायत : (मुस्कुराते) भुमी.. अभी इनकी चीन्ता मत करो.. मंजुने सब अ‍ेरेन्ज करलीया हे.. अभीतो मुजे प्यार करने दो.. बहुत दीन होगये मे तुम दोनोको नही मीला..

नीर्मला : (मुस्कुराते होठ चुमते) देवु.. आज अपना सारा प्यार भुमीकी चुतमे भर देना.. फीर पता नही आपको भुमीसे कब प्यार करनेको मीले.. अब मुजे नही लगता इनकी डीलेवरी तक भुमी इस हालतमे आपसे चुदवाये..

भुमीका : (र्सासार होते धीरेसे) कमीनी कीतना गंदा बोलती हे.. कुछ तो सरम कर..

नीर्मला : (हसते धीरेसे) भुमी.. हमारे पती हे ये.. अब इनके सामने काहेकी सरम.. अब देर मत कर.. हमारे पतीका हथीयार रेडी हे.. इसे अपने हाथोसे ही घुसादे.. तभी तो मेरी बारी आयेगी..

भुमीका : (मुस्कुराते) कमीनी.. चुदवानेके लीये कीतनी उतावली हो रही हे.. देवु.. घुसादो अंदर..

कहेते भुमीकाने देवायतके लंडको पकडकर अपनी चुतपे सेट करदीया.. तब देवायतने भुमीके दोनो हाथोके पंजेको उंगलीया फसाकर पकडलीया.. ओर भुमीके होठोको चुमने लगा.. तब भुमीका पुरी तराह मदहोस होते नसेमे आगइ थी.. ओर वो आधी आंख चडाते दवायतके सोटका इन्तजार कर रही थी.. तभी धीरेसे देवायतने जटका दीया.. तो भुमीका दर्दके मारे मुह छुडाते इधर उधर मुह करने लगी..

देवायत : (गलेको चुमते धीरेसे) बस.. बस.. भुमी हो गया.. तुम तो अ‍ैसे कर रही हो जैसे पहेली बार चुदवा रही हो.. क्या बहुत दर्द कर रहा हे..?

भुमीका : (जोरोसे बाहोमे भीचते धीरेसे) नही देवु.. बस.. थोडा बच्चेकी वजहसे दर्द हुआ.. अब ठीक हे.. आप आरामसे करना.. आज इस मुजे जी भरके चोदलो.. अब मे दुबारा आपको चोदने नही दुगी.. अब मुजे ओर कोइ रीस्क नही लेना.. अब जो भी कुछ होगा बच्चेके आनेके बाद..

तब देवायत हाथके बल उचा हो गया ओर धीरे धीरे भुमीकाको चोदने लगा.. तो भुमीका लगातार देवायतकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखती रही.. ओर देवायतके हर सोटके साथ मुह खोलते आहे भरती रही.. तब नीर्मला देवायतके नजदीक आकर बैठ गइ ओर उनके होठोको चुमने लगी.. कभी वो अपने बुब्सको देवायतके मुहमे देकर चुसवाने लगती अ‍ैसेही देवायतने भुमीको दो बार जडा दीया..

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कुछही देरमे देवायत भुमीको जोरोसे चोदने लगा तब भुमीका मुह खुलाही रेह गया.. तभी देवायत अचानक भुमीके उपर लेट गया तो भुमीने उनको जोरोसे कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. तो देवायतने अपना लंड भुमीकी चुतकी गहेरालओमे घुसा दीया.. ओर रुक रुकके अपनी कमरको जटके देने लगा.. तब भुमीने उनके होठोको अपनी गीरफ्तमे लेलीया ओर जोरोसे चुसने लगी.. तब उनको अपनी चुतमे गरमाहट महेसुस हुइ..

तो वो भी अपनी कमरको जटके मारेते अ‍ेक बार फीर जडने लगी.. फीर देवायत उनके सीनेपे सर रखके ढेर होगया.. तब भुमीका उनकी पीठ ओर बालोको सहेलाने लगी.. ओर नीर्मलाकी ओर देखते अ‍ेक संतुस्टीके भावसे मुस्कुराने लगी.. तो नीर्मला भी खुस होते हसने लगी.. ओर वोभी भुमीके बाजुमे करवट लेकर लेट गइ.. ओर भुमीके होठोको चुमने लगी.. तब देवायत दोनोको देखकर हसने लगा..
 
नीर्मला : (मुस्कुराते) देवु.. क्या हस रहे हो..? अब तो आपको हम दोनो बीवीया साथमे ही मीलेगी..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) देवु.. कीतनी सानदार चुदाइ हुइ हमारी.. अब आगेसे बहुत तकलीफ होती हे.. आप अ‍ेक बार पीछेसे कर लोना..

नीर्मला : (आसच्र्यसे देखते हसते) भुमी..? क्या तुम पीछेसे करवाओगी..? कभी कीया हे क्या..?

भुमीका : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) हां.. बहुत बार.. जब हमने सादीकी तब हमारी सुहागरातमे ही मैने अपनी पीछेकी सील तुडवाइ.. सीर्फ यही अ‍ेक बची थी.. जो इनके लीये सम्हालके रखी थी.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (मुस्कुराते चुत सहेलाते) हां भुमी.. मे भी हमारा पहेला मीलन कभी नही भुली.. आज भी याद करती हुतो इनको मीलनेका दिल करता हे.. देवु.. आप हमारा अ‍ैसेही खयाल रखीयेगा.. चलोना जब हम वापस आजाये तब हमारे घरपे चले जाये.. वहा हम तीनो खुब मजे करेगे..

देवायत : (होंठ चुमते) नीमु.. तेरी ये तम्मना भी मे पुरी करदुगा.. बस.. अ‍ेक बार तुम चारो घुमकर आजाओ.. फीर हम चले जायेगे.. मुजे मेरी सभी बीवीओको सम्हालना हे..

भुमीका : (मुस्कुराते) देवु.. आपने इतनी सादीया क्युकी..? क्या सबको टाइम देपाते हो..?

देवायत : (मुस्कुराते) भुमी.. मे सबको टाइम देनेकी कोसीस तो कर रहा हु.. लेकीन दे नही पाता.. फीर मुजे हमारे बीजनेस ओर दुसरा काम भी देखना पडता हे.. अच्छा हुआ भानु ओर हमारे लखनने बहुत कुछ काम सम्हाल लीया हे.. तो थोडा बहुत समय मील जाता हे.. अब तुम चारो घुमकर आओ.. तब तुम मंजुसे पुछ लेना.. क्युकी इस बारेमे उन्होने कुछ तैय करके रखा हे.. ताकी सबको न्याय मील सके..

नीर्मला : (आस्चर्यसे देखते) अच्छा.. कमीनी हमारे पास बैठती तो हे.. फीर भी हमे नही बताया..

देवायत : (मुस्कुराते) नीमु.. इनके पीछे कुछ रीजन होगा.. तभी तो नही बताया होगा.. वरना वोतो तुजे हर बात बता देती हे.. सायद तुम चारो घुमकर आजाओ तब बताने वाली होगी..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) देवु.. अब बहार नीकाल लीजीयेना.. देखो अभी भी अंदर सख्त लग रहा हे.. मे पीछे घुम जाती हु.. आप पीछे आरामसे डालना.. क्युकी बहुत दिन होगये पीछे नही लीया.. फीर आप नीमुको अच्छेसे चोद लेना.. कमीनी कबसे आपका लंड लेनेके लीये फुदक रही हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (सरमाकर हसते धीरेसे) कमीनी.. तो क्या तुजे इच्छा नही हो रही थी..? बात करती हे.. देवु.. अ‍ेक बार इनको पीछेसे करलो.. फीर इधर आजाइअ‍ेगा.. मुजे आपसे चुदवानेका बहुत मन कर रहा हे.. आपको जीतनी मर्जी हो इतना मुजे चोद लेना.. मे मना नही करुगी..

कहा तो देवायतने लंड नीकाल लीया.. तो भुमीकी चुतसे दोनोका कामरस बहार नीकलने लगा.. तब भुमीकाने जटसे अपनी चुतपे अपनी चडी रखदी ओर चुतको साफ करने लगी.. फीर बैठकर घुम गइ.. ओर घोडीकी तराह खडी होगइ.. तब देवायत मुस्कुराते उनके पीछे चला गया.. ओर भुमीकी कमर पकडते अपने लंडको भुमीकी गांडपे सेट करते पुस करने लगा.. तब भुमीका मुह बीगाडते जोरोसे आंख बंध करलेती हे.. तब नीर्मला समज गइ.. ओर भुमीके मुहके पास हाथ रखती हे..

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तभी देवायतने थोडासा जोरोसे पुस कीया तो आधा लंड भुमीकी गांडमे धुस गया.. ओर भुमीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. तो नीर्मलाने फौरन उनके मुहपे हाथ रखदीया ओर हसने लगी.. तब देवायत भुमीकी कमरको पकडकर धीरे धीरे भुमीकी गांड चोदने लगा.. ओर चोदते चोदते पुरा लंड भुमीकी गांडमे उतार दीया.. तब भुमीका अपनी गांडको आगे पीछे करते मुह बीगाडते नीर्मलाकी ओर देखकर हसने लगी..

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भुमीका : (हसते) कमीनी हस क्यु रही हे.. हमारे पतीका ले रही हु.. जब तेरी गांडमे जायेगाना तब तुजे पता चलेगा.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते धीरेसे) कमीनी ज्यादा मत उछल.. मे भी इनका पीछे कइ बार ले चुकी हु.. लेकीन मुजे पीछे नही आगे मजा आता हे.. कास मेभी तेरी तराह मां बन पाती.. तो हम हमारा अ‍ेक बच्चा पैदा करते..

तब देवायत भुमीको जोरोसे चोदने लगा तो भुमीकी हालत पतली होने लगी.. तो नीर्मला भुमीके होठोको चुमते उनके बुब्स मसलने लगी.. तब भुमी बहुत ही तावमे आ चुकी थी.. वो पुरी तराह कामातुर होते देवायतसे मजेसे अपनी गांड मरवाने लगी.. ओर इसी बीच वो दो बार जड चुकी थी.. ओर आखीर देवायतने भुमीकी गांडपे अपना पानी उडेल दीया.. तब भुमीका भी जडके नीढाल हो चुकी थी..

तब वो अ‍ैसे ही बेडपे गीर गइ.. तो देवायतका लंड फच.. आवाजके साथ नीकल गया.. ओर वो बाथरुममे चला गया.. तबतक भुमीका लगभग बेहोसीकी हालतमे चली गइ थी.. उनकी गांडसे देवायतका कामरस बहे रहा था.. तल नीर्मलाने उसे साफ करदीया.. ओर भुमीकाको अच्छी तराह सुलाकर उनपे चदर डालदी.. ओर वो पीठके बल लेटकर देवायतका इन्तजार करते अपनी चुतको सहेलाने लगी..
 
तो इधर लखन जब उपरकी मंजीलपे आया तब अपने रुमके पास आकर रुक गया.. तभी उनका दरवाजा बंध था.. तो उनको अ‍ेब बार रमा ओर नीलमके रुमकी ओर जानेकी इच्छा होगइ.. ओर वो आजु बाजु देखकर दबे पांव रमा नीलमके रुमकी ओर चल गया.. ओर खीडकी थोडीसी खुली थी.. तो उनमेसे अंदर जांकने लगा.. तो अंदरका नजारा देखतेही लखन आस्चर्यके साथ चोंक गया..

क्युकी अंदर रुममे हल्कीसी रोसनीमे लखनको साफ दीखाइ दे रहा था.. की नीलम ओर रमा पुरी तराह नंगी होकर सीक्स नाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेकी चुतको अपने मुहसे खरोद रही थी.. अ‍ेक पल तो लखनको लगा की वो अंदर चला जाये.. ओर दोनो मां बेटीको पटक पटकके चोदले.. लेकीन दुसरे ही पल उन्होने अपने आपको कंट्रोल कर लीया.. क्युकी उनको पता था.. की अब उनका लंड बडा होगया हे..

तो अभी रमा ओर नीलम उनको नही जेल पायेगी.. ओर चीलायेगी तो सब लागोेके जाग जानेका डर भी था.. अब तो वो दोनो भी उनके साथ सहर आ रही थी.. तो लखन उन दोनोको आरामसे नीपटना चाहता था.. तो वो थोडी देर वहा खडा रहेके अंदर देखता रहा.. तब कुछ ही देरमे रमा ओर नीलम जड गइ.. ओर खडी होकर दोनो अ‍ेक साथ बाथरुामकी ओर जाने लगी..

तभी अचानक रमाका ध्यान खीडकीकी ओर गया.. तो वहा लखनको देखकर रमा चोंकते रुक गइ.. तो नीलम भी रमाकी रुकनेकी वजहसे उनकी नजरका पीछा करने लगी.. तो उसने भी लखनको देख लीया तो वो सरमसे पानी पानी होगइ.. क्युकी मां बेटी दोनो ही बीलकुल नंगी थी.. तो नीलम जटसे सरमाते दोडकर बाथरुममे धुस गइ.. तो रमाको भी होंस आया.. ओर वो भी सरमाते जटसे बाथरुममे चली गइ..

तब लखनको वहासे खीसकनाही बेहतर लगा.. ओर वो अपने रुममे चला गया.. तो इधर मां बेटी दोनो ही गभराते अ‍ेक दुसरेकी ओर देखती रही.. क्युकी उनको समजमे ही नही आ रहा था की दोनो क्या करे.. तभी रमाने कुछ सोचते अपने आपको सम्हाला ओर वो नोर्मल होनेकी कोसीस करने लगी.. ओर सरमाकर नीलमकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. तो नीलम उनको आस्चर्यसे देखती रही.. तभी..

रमा : (सरमाते धीरेसे) नीलु.. लखनजीसे गभरानेकी जरुरत नही हे.. अच्छा हुआ उन्होने हमे देखलीया.. देखना अब वो सामनेसे आगे बढेगे.. अगर इस बारेमे तुमसे कोइ बात करे.. तो पीछेहट मत करना.. उनकी जो भी डिमान्ड हो.. हां केह देना.. फीर आगे देखा जायेगा..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) मोम.. क्या केह रही हो..? उन्होने हमे अ‍ैसेही नंगा देखलीया हे.. ओर वो भी हम दोनोको साथमे.. वो इतने बुध्धु नही हे की हमारा रीलेशन ना समजे.. वो सीर्फ मेरे पास नही.. आपके पास भी डिमान्ड कर सकते हे.. तब आप क्या करोगी..?

रमा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) नीलु.. इतना कुछ सोचनेकी जरुरत नही हे.. फीर भी वो मेरे पास कोइ डिमान्ड करेगे तो मे मना करदुगी.. फीर भी नही माने तो आगे देखा जायेगा.. की हमे क्या करना हे..

इधर लखन जैसेही रुमका दरवाजा बंध करपे पलटा तब अ‍ेक बार फीर चौक पडा.. क्युकी बेडपे रजीया ओर लता दोनो बाते करते उनका इन्तजार कर रही थी.. तो जैसेही लखन अंदर आया तो रजीया सरमाकर हसने लगी.. तो लता भी लखनकी ओर देखते हस रही थी.. जैसे दोनोने लखनको सरप्राइज दी हो.. लखन हसता हुआ वही खडा रहा.. तो लता बेडसे खडी होगइ.. ओर हसते हुअ‍े उन्होने अपनी बाहे फैलाइ..

तो लखन दोडकर आगया ओर लताकी बाहोमे समा गया.. तब लताके कंधेपे सर रखते रजीयाकी ओर देखते हस रहाथा.. तब रजीया भी सर्मसार होते उनकी ओर देखते हस रहीथी.. तब लताने दोनो हाथसे लखनके चहेरेको अपनी हथेलीओमे थामलीया ओर हसते हुअ‍े लखनकी आंखोमे देखती रही.. फीर आंखोके इसारोसे रजीयाकी ओर इसारा करते अपने दोनो नैन नचाने लगी.. तब लखनकी हसी नीकल गइ..
 
लता : (हसते) क्यु पतीदेव.. कैसी रही हमारी सरप्राइज.. लीजीये अपनी इस बीवीको सम्हालीये..

लखन : (मुस्कुराते लताको बाहोमे भरते) लता.. आइ लव यु.. क्या तुजे सब पता चल गया..? तुम नाराज तो नही होनां..?

लता : (मुस्कुराते होठ चुमते) हां.. मे आपसे बहुत नाराज हु.. मुजे पहेले क्यु नही बताया..? क्या मुजपे भरोसा नही था क्या..?

लखन : (बाहोमे भीचते) नही लता.. भरोसेकी बात तो नही हे.. लेकीन मे तुमसे भी बहुत प्यार करता था.. मीन्स अभी भी करता हु.. लेकीन अ‍ेक डर था.. कही तुजे हमारे रीलेशनके बारेमे पता चला तो तुम मुजसे नाराज होकर चली ना जाओ.. इसीलीये बतानेमे डर रहा था..

लता : (चहेरेको थामते) मेरा भोला बलमा.. बहुत प्यार करते हो मुजे..? हंम..? लखन.. मे इतनी कमजोर नही हु.. की मे आपको छोडकर चली जाउ.. मुजे आज मंजुभाभीने सबकुछ बता दीया हे.. क्या सहेरमे भी आपकी अ‍ेक बीवी हेनां..? कभी हमसे मीलवाओगे नही..?

लखन : (आंख गीली करते मुस्कुराते) लता.. मे सायद तुजे पुरी तराह समज ही नही पाया.. तुमने कीतनी आसानीसे सब स्वीकार करलीया हे..

लता : (मुस्कुराते) जानु.. अब तो इस हवेलीमे बहुत कुछ बदलने वाला हे.. देखना कुछ रीस्ते देखकर वीचलीत मत होना.. क्युकी मंजुभाभी ओर भाइने कुछ तैय करलीया हे.. जो कभी फुरसतमे आपको मंजु भाभी बता देगी..

लखन : (मनमे) लता.. बता देगी नही भाभीमांने मुजे सबकुछ बता दीया हे.. मुजे तेरे बारेमे सबकुछ मालुम हो चुका हे.. तुम भीतो भाइको प्यार करती हो..

लता : (मुस्कुराते) लखन.. आप कहा खो गये..? मैने आपको कुछ कहा हे.. हें..हें..हें..

लखन : (थोडा हडबडाते मुस्कुराते) हां.. हां.. लता अगर तुजे सबकुछ पता हे तो तुही बता देनां..

लता : (मुस्कुराते) नही.. क्युकी मुजे ये सब बतानेकी मरमीशन नही हे.. चलीये.. आज आप अपनी इस बीवीसे प्यार करीये.. बेचारीको बहुत दिन होगये जो आपसे दुर रही.. अगर मुजे पहेले पता होता तो मे ही इसे बुला लेती..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) अ‍ेक मीनीट.. अगर इनको तुमने नही बुलाया.. तो फीर कीसने बुलाया हे..?

लता : (हसते) मंजुभाभीने.. आज भाभीने मुजे सबकुछ बता दीया हे.. तभी तो इनको यहा बुलाया हे.. लखन अब तो कल हम सहेर जा रहे हे.. तो अब रजीया दीदी हमारे साथ ही सोयेगी.. अब पता चला मुजे.. की बडे भैया ओर भाभी इनको हमारे साथ क्यु भेज रहे थे.. आइअ‍े.. अब भाभीने आपके लीये सब इन्तजाम कर दीया हे.. तो सम्हालीये अपनी बीवीको..

कहतो रजीया बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर मुह घुमाकर मुस्कुराने लगी.. तब लताने लखनको रजीयाकी ओर धका देदीया तो लखन सीधा रजीयाके उपर जा गीरा.. तो रजीया बेडपे गीर गइ.. ओर लखन उनके उपर गीर गया.. तो वो रजीयाके उपर अ‍ैसेही रहेते उनकी ओर देखते हसने लगा.. तो रजीया बहुत ही सरमाने लगी.. तब लता हस रही थी.. ओर वो भी बेडपे आकर अपने कपडे नीकालने लगी..

लता : (हसते) चलीये रजुदीदी.. आज हम दोनो मीलकर हमारे पतीको खुस करदेती हे.. हालाकी मे तो सीर्फ उपर उपरसे ही प्यार करुगी.. अब आपको ही हमारे पतीको सम्हालना हे..

जब लता अपने कपडे नीकाल रही थी.. तब पता ही नही चला की रजीया ओर लखनके होठ कब मीलगये.. रजीया आधी आंख चडाते मदहोस हो चुकी थी.. ओर हल्केसे लखनके होठ चुस रही थी.. तब लखन रजीयाके उरोजोको दबाते होंठ चुम रहा था.. जीनकी वजहसे रजीयाकी चुत पानी बहाने लगी थी.. ओर धीरे धीरे दोनोके उपरसे अ‍ेक अ‍ेक कपडे नीकलते गये.. ओर तीनो पुरी तराह नंगे हो गये..

तो इस वक्त नीचेकी ओर नीर्मला पीठके बल लेटी हुइ थी.. ओर देवायतने अपना तगडा लंड उनकी चुतमे उतार दीया था.. तो वो मुह फाडकर चुदवाते देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देख रही थी.. ओर देवायत उनके बुब्सकी नीपलको मुहमे लेते हल्केसे चुस रहा था ओर साथमे कमर हीलाते धीरेसे नीर्मलाको चोद रहा था.. नीर्मलाने अपने लंबे बाल खुले करलीये थे जो अभी बैडपे बीखरे पडे थे.. जीनकी वजहसे वो बहुत ही कामुक लग रही थी..

नीर्मला : (सरमाते धीरेसे) जानु.. बस अ‍ैसेही मुजे चोदते रहीये.. मुजे हर दिन आपका लंड मेरी चुतमे चाहीये.. कमसे कम दो दिनमे अ‍ेक बार मेरी चुदाइ करलो.. बहुत मन होता हे..

देवायत : (होंठ चुमते) नीमु.. इसके लीये मंजुने कुछ तैय कीया हे.. जब तुम वापस आओगी तब वो तुजे बता देगी..

नीर्मला : (मुस्कुराते) हां.. अभी वोही बात हो रही थी.. ठीक हे.. हम वापस आयेगी तब बात होगी.. अभी तो मुजे तृप्त करदो.. कीतने दिनोके बाद हम मीले हे..

देवायत : (हल्केसे चोदते) नीलु.. तुम मेरा पहेला प्यार ओर मेरी पहेली बीवी हो.. तुजमे आज भी वोही कसीस हे.. अ‍ैसा लगता हे.. मे तुजे पहेली बार चोद रहा हु..

नीर्मला : (जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह जानु.. आइ लव यु आइ लव यु सो मच.. आपको नही पता हम दोनोका जन्मोजन्मका साथ हे.. ओर मे हमेसा आपकी पहेली बीवी होती हु.. मे आपकी सोनु हु.. आप इस सोनुको चोद चोदके तृप्त करदो.. मे हमेसा आपकी दिवानी हु.. जानु.. मुजे ओर जोरोसे चोदीये..

तो देवायत हाथके बल उचा हो गया ओर नीर्मलाको जोरोसे चोदने लगा.. दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. तब नीर्मला हल्केसे सीसकारीया करते छटपटाती रही.. इसी बीच देवायतने उनको भी दो बार जडा दीया.. ओर अभी दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपके हुअ‍े थे.. ओर देवायत पुरा लंड घुसाकर अपनी कमरको जटके देते जड रहा था.. तब साथमे नीर्मला भी जडने लगी.. ओर देवायतने नीर्मलाकी चुतको लबालब अपने पानीसे भरदी..
 
नीर्मला : (पीठ सहेलाते सांस दुरस्त करते) जानु मजा ही आगया.. मेरी क्या मस्त चुदाइकी आपने.. बस.. आपसे जुदा होनेका मन ही नही करता.. अ‍ैसे ही अ‍ेक बार ओर चोदलो.. फीर आप आजाद.. आपको मंजुके पास भी जाना हे.. वरना वो कमीनी मुजपे चीलायेगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (होठ चुमते) नीमु.. मे मेरी कीसी भी बीवीको चोदता हुनां.. तो उनके उपरसे उतरनेका मन ही नही करता.. बस अ‍ैसा लगता हे उनको चोदता ही रहु..

नीर्मला : (सर्मसार होते मुस्कुराते) तो फीर आपको मना कीसने कीया हे..? चोदते रहीयेनां.. वैसे भी मंजु तो अब यही हे.. आज आप मेरे साथ ही सोजाइअ‍े.. हम सुबह तक प्यार करेगे..

देवायत : (मुस्कुराते) नही नीमु.. मुजे वहा जाना होगा.. वरना चंदाको सक होजायेगा..

नीर्मला : (होठ चुमते) जानु.. फीकर मत करो.. अब कुछ ही दिनोमे उसे भी हमारे बारेमे पता चल जायेगा.. क्युकी अब मंजु सबको सचाइ बता देना चाहती हे.. चलीये अब चोदीयेना.. अभी भी बहुत मन कर रहा हे.. अ‍ैसा लगता हे आपके हथीयारको बहार ही ना नीकालु..

तब अ‍ेक बार फीर देवायत धीरे धीरेसे कमर हीलाना सुरु करदेता हे.. तब नीर्मला बहुत ही मदहोस होकर वापस देवायतसे चुदवाने लगी.. ओर इस बार भी देवायतने उनको दो दो बार जडाके तीसरी बार साथमे जड गये.. तब नीर्मलाकी पुरी चुत देवायतके कामरससे लबालब भरी हुइ थी.. ओर चुतसे बहेते उनके पैरोसे होते कामरस गदेको खराब कर रहा था.. आज नीर्मलाका अ‍ेक अ‍ेक अंग देवायतने जोरोसे चोद चोदके तोड दीया..

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वो हीलनेकी स्थीतीमे भी नही थी.. तब देवायत उसे गोदमे लेकर बाथरुममे चला गया.. ओर वहा दोनोने साथमे सावर लीया तब अ‍ेक बार फीर नीर्मला उनकी ओर कामुक नजरोसे देखते मदहोस होगइ.. तब देवायतने उनको पीछेसे बाहोमे जकडलीया तो नीर्मला हसते हुअ‍े जुक गइ.. ओर देवायतने धीरेसे अपना लंड उनकी गांडमे घुसा दीया.. तब नीर्मलाकी हल्केसे चीख नीकल गइ..

ओर वो पीछे मुह करते देवायतकी ओर वासना भरी नजरोसे देखने लगी.. तब देवायत उनकी कमर को पकडकर उनकी गांडको चोदने लगा.. तो नीर्मला भी मदहोसीमे मजेसे चुदवाने लगी.. ओर नीर्मलाको अ‍ेक बार फीर जडाकर अपना लंड नीकालते नीर्मलाको अपने सामने करदीया.. ओर उनकी टांग पकडकर आगे चुतमे लंडको घुसा दीया.. फीर वो जोरोसे नीर्मलाको खडे खडे चोदने लगा..

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तब नीर्मलाकी हालत वाकइ खराब हो चुकी थी.. आज देवायतने तीसरी बार नीर्मलाकी चुतको भरके हरी भरी करदी.. फीर दोनो नहाकर कंपलीट होगये.. ओर देवायत नीर्मलाको गोदमे ही उठाके बहार ले आया ओर बेडपे सुला दीया.. तब नीर्मलाने सोते सोते अ‍ेक बार फीर देवायतको अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके होठोको चुम लीया.. फीर देवायत मुस्कुराते वहासे नीकल गया ओर अपने रुममे चला गया..

तब सृती ओर चंदा दोनो अ‍ेक दुसरेके साथ लेस्बीयन खेलकर अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सो गइ थी.. तब मंजु नीचे फर्सपे अपने गदेपे सोते देवायतका इन्तजार कर रही थी.. क्युकी आज वो देवायतसे कुछ बाते कहेना चाहती थी.. तो देवायतको अंदर आते देखते ही हसने लगी.. ओर सोते सोते ही अपने दोनो हाथ फैलाकर देवायतको अपने पास बुलाने लगी.. तब देवायत भी नंगा होकर मंजुके पास चला गया ओर उनकी रजाइमे घुस गया.. तो मंजुने पलटकर उसे जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया..

मंजुला : (होठ चुमकर) जानु.. अपनी दोनो बीवीओको कर आये ठंडी..? हंम..? कमीनी दोनो ही बहुत चुदकड हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (सामने देखते) मंजु.. तेरी मम्मीकी तो बात ही कुछ ओर हे.. भुमी बुआको भी सीर्फ आगे पीछे दो बार चोद पाया.. अब वो मुजे जेलनेकी स्थीतीमे नही हे.. मंजु.. हम भुमीका क्या करेगे..? वो सृतीसे बहुत डरती हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. अ‍ैसे बात करनेके मजा नही आता.. पहेले आप इसे अंदर घुसादो.. ओर अ‍ेक बार मुजे अच्छेसे चोदलो.. फीर मे आपसे कुछ बात कहेती हु..

कहा तो देवायत मुस्कुराते मंजुके उपर चड गया.. तो मंजुने उनका लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट करदीया.. ओर देवायतने अ‍ेक ही जटकेमे पुरा लंड मंजुकी चुतमे उतार दीया.. तो मंजुकी चीख नीकल गइ.. तब चंदा ओर सृती दोनो ही चीखकी आवाज सुनकर जाग कइ.. ओर मंजु ओर देवायतकी ओर देखते मंजुको गालीया देने लगी.. तो मंजु ओर देवायत दोनो ही जोरोसे हसने लगे.. तब दोनो वापस अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सो गइ..

तब कुछ ही देरके बाद देवायत ओर मंजुके बीच धमासान चुदाइ होने लगी.. मंजु आधी आंख चडाते बहुत ही कामुक तरीकेसे चुदवा रही थी.. तब देवायत उनको चोदते चोदते बुब्सकी नीपलको चुमने लगता.. तो कभी गलेको ओर होठोको चुम लेता.. तब मंजु अ‍ेकदम पागल होजाती.. ओर अपनी कमरको हीलाते देवायतको चुदवानेमे साथ देने लगती.. अ‍ैसेही मंजुको दो बार जडाकर तीसरी बारमे दोनो साथमे जड गये.. तब दोनो पुरी तराह पसीनेसे भीग चुके थे.. ओर मंजु देवायतकी पीठ सहेला रही थी.. तब..
 
देवायत : (होंठ चुमते) हां डार्लीग.. अब बोल क्या केह रही थी..?

मंजुला : (सांस दुरस्त करते धीरेसे) जानु.. पहेले सांस तो लेने दो.. आपने तो अ‍ेक ही बारमे मुजे नीचोडली.. कोइ इतना जोसमे करते हे..?

देवायत : (मुस्कुराते) जब तक तुजे दो बार चोद नही लेता तबतक तु मुजे अपने उपरसे उतरने नही देती.. क्या ये मेरी वही मंजु बोल रही हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां जानु.. आज कल बहुत थक जाती हु.. लगता हे अब मेरा जानेका वक्त नजदीक आने लगा हे..

देवायत : (जोरोसे बाहोमे भीचते) नही मंजु.. तु अ‍ैसा मत बोल.. मुजे बहुत डर लग रहा हे.. मे तुजे नही जाने दुगा.. तेरा विदेसमे जाकर भी इलाज करवाउगा.. मे तुमसे बहुत प्यार करता हु..

मंजुला : (होंठ चुमते) नही जानु.. अ‍ैसा मत करना.. क्युकी मुजे वापस भी तो आना हे.. मेरी भावुकी कोखसे.. आप प्रकृतीके बीच बाधा मत डालना.. मे कहा आपको छोडकर जा रही हु.. बस.. अ‍ेक नया सरीर लेकर ही तो भावुकी कोखसे वापस आना हे.. तभी तो हमारे स्वामी आयेगे.. जानु.. अब आप भावुको दया बहेनको ओर लताको भी अपनालो.. तीनो आपके लीये तडप रही हे.. आप तीनोको पुरी तराह अपनालो..

देवायत : (सीनेपे सर रखते) मंजु.. भावुतो ठीक हे.. लेकीन लताको मीलनेमे थोडा संकोच हो रहा हे.. क्या तुमने जो नीर्णय लीया हे.. उनके बारेमे लखन जानता हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. आपकी सब बाते मे समज गइ.. आज आपको यही बात बतानी थी.. भाइ.. आज जब आप मम्मीके साथ थे.. तब लखन आया तो मेने उनको सबकुछ बतादीया हे.. तो उसने मेरी हर बात मानली हे.. अब आपको लताको मीलनेके कोइ दीकत नही आयेगी.. अब हमारा विजय भी बडा होने लगा हे.. तो उनको भी तैयार करना हे.. ओर ये काम मैने पुनोको सोंप दीया हे.. भाइ.. हम दोनोने जो नीर्णय लीया हे.. सही लीया हे.. अब ये बात हमे जीनको नही पता हे उनको भी बता देनी चाहीये..

देवायत : मंजु.. कुछ गडबड तो नही होगीनां..? देखना कोइ तुमसे नाराज ना होजाये.. ओर तुम भुमीके बारेमे कुछ कहेने वाली थी.. बताना..

मंजुला : जानु.. बहुत जल्द सृतीको सब पता चल जायेगा.. तब भुमी आंटी ओर मेरी मम्मी दोनो पापाके मकानमे रहेने चली जायेगी.. ओर भुमी आंटीकी वही डीलीवरी करनी हे.. तब आपको वहा तीनोको सम्हालना हे.. भुमी आंटी मेरी मम्मी.. ओर हमारी भावुको.. वो भी वहा आती जाती रहेगी..

देवायत : मंजु.. तो फीर हमारा भानु..? क्या भावु उनके साथ नही रहेगी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. आज अ‍ेक सीक्रेट ओर बता देती हु.. अब हमारे भानुभाइ कीसीको संतुस्ट करनेमे काबील नही रहेगे.. तब वो हमेसाके लीये हमारे खेतोपे आजायेगे ओर हमारा काम सम्हाल लेगे.. क्युकी अब रामुकाकाके जानेका वक्त भी हो गया हे.. अब आप दयासे भी सादी करलो.. बेचारीने आपका बहुत इन्तजार कीया हे.. भाइ.. वो भी हमारी बहेन हे.. उनको अ‍ेक बच्चेकी बडी तम्मना हे.. आप उनकी तमना पुरी करदो.. ओर हो सके तो रामुकाकाकी हाजरी मे ही आप दयासे सादी करलो.. बेचारे खुस होजायेगे..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) मंजु.. तुम सबके बारेमे कीतना अच्छा सोचती हे.. ओर सादी तो मे करलुगा.. लेकीन भानुको कुछ होगया तो रमाभाभी ओर भावुका क्या होगा..?

मंजुला : (मुस्कुराते होठ चुमते) क्यु.. हमारी भावुके लीये तो आप हेनां.. ओर रही बात रमाभाभीकी.. तो उन मां बेटीको तो अब हमारा लखनही सम्हाल लेगा.. कमीनी मां बेटी दोनो ही बहुत ठरकी हे.. अभी से दोनो हमारे लखनके पीछे पड गइ हे.. देखना बहुत ही जल्द हमारा लखन दोनोकी चुतको फाडेगा..

कमीनी दोनो हमारी जायदादके पीछे पडी हे.. भाइ.. अगर आपको उनके बारेमे कुछ सुननेको मीले तो आप इसके लीये लखन भैयाको कुछ नही कहोगे.. ओर नीलुकी वजहसे तो पुनो धिरेनसे अलग होकर वापस आयेगी.. ओर वो नीलु धिरेनसे सादी कर लेगी..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब अब यहा बहुत कुछ बदलाव होने लगा हे.. ठीक हे.. चल अब सोना नही हे क्या..?

मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. क्या अ‍ैसेही सोजाओगे..? अभीतो मुजे सीर्फ अ‍ेक ही बार तो चोदा हे.. चलीये सुरु होजाये.. फीर सुबह आपको जाना भी तो हे.. हें..हें..हें..

तब अ‍ेक बार फीर देवायत मंजुको जबरदस्त तरीकेसे चोद लेता हे.. तब मंजु पुरी तराह संतुस्ट हो जाती हे.. फीर देवायत ओर मंजु दोनो ही अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सो जाते हे.. तब उपरकी मंजीलपे आज रजीयाकी हालत खराब होने वाली थी.. हालाकी वो देवायतसे कइ बार चुदवा चुकी थी.. फीर भी उनको लखनका लंड देवायतसे बडा लग रहा था.. सीक्स नाइन पोजीसनमे खेलते रजीया लखनके लंडको मुहमे लेकर चुस रही थी..

तब उनको वाकइ लखनका लंड देवायतके लंडसे बडा लगा.. क्युकी वो देवायतके लंडको भी कइ बार अपने मुहमे ले चुकी थी.. तब रजीया मनही मन डरने लगी.. की आजतो वो गइ कामसे.. तब कुछही देरमे उनकी चुतने जवाब देदीया.. तो लखनभी उतेजीत होकर जडने लगा.. ओर पीचकारीया मारते रजीयाके मुहको भरने लगा.. तब लखनका पानी रजीयाके मुहमे चला गया ओर वो खांसने लगी..

तब लता रजीयाकी ओर देखती ही रही.. क्युकी रजीयाका पुरा मुह लखनके पानीसे भरा हुआ था.. लखनका इतना सारा पानी नीकलते लताके साथ साथ रजीयाको भी आस्चर्य हुआ.. उसके बाद दोनो बाथरुममे जाकर सही होकर वापस आगये.. तो लखनने रजीयाको पीठके बल लीटा दीया.. ओर खुद उनके उपर चड गया ओर बुब्सको चुमने लगा.. अब लखन रजीयाके उपर पुरी तराह सवार हो चुका था.. तभी....

कन्टीन्यु
 
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