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मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. तो फीर सुन.. लता तुजे प्यार नही करती थी.. वो उनकी सादीसे पहेले ही हमारी पुनोकी तराह तेरे बडे भाइको प्यार करती थी.. वो तेरे बडे भाइके साथ नजदीक रेह सके इसीलीये उसने तुमसे सादी की.. ताकी यहा रहेकर वो तेरे बडेभाइका प्यार पा सके.. इसीलीये उसने तेरा रजीयाके साथ ओर तेरी मेडमके साथका रीलेशन भी स्वीकार करलीया हे.. अब नीर्णय तुने लेना हेकी तुजे क्या करना हे..
लखन : (आंख गीली करते) भाभीमां.. मे कभी ओरतोको समज ही नही पाया.. मे कीतना मुर्ख था.. मुजे लगता थाकी लता मुजसे बहुत प्यार करती हे.. लेकीन उनकी चाहत तो कोइ ओर ही थी.. बीलकुल हमारी पुनोकी तराह.. हम मर्द कीतने डरपोक होते हे.. कीसीको अपनी दिलकी बात भी नही केह पाते.. ओर ओरते अपने प्यारको पानेके लीये कोइ भी कदम उठानेके लीये पीछे नही हटती.. अैसा क्यु..?
मंजुला : (लखनके सरको अपने कंधेपे रखकर सहेलाते) बीटु.. तु बीलकुल सही केह रहा हे.. तुम तो क्या आज तक कोइ भी मर्द ओरतको नही समज पाया.. ओरते सीर्फ कहेनेके लीये अबला नारी हे.. असलमे अबला तो मर्दको कहेना चाहीये.. मुजे पता था ये बात जानकर तुजे जरुर दुख होगा.. बस.. तुम लतासे कोइ धृणा मत रखना.. क्युकी वो सचमे देवुसे प्यार करती हे.. ओर अब सायद तुजसे भी..
लखन : (कंधेपे सर रखते आंसु बहाते) भाभीमां.. भाइमे अैसा क्या हे..? जो मुजमे नही.. क्युकी सब भाइको ही पसंद करती हे..
मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु.. पहेला तो उनका आकर्सण.. जो हमारे गुरुजीने उसे जडी बुटी देकर दीया हे.. ओर दुसरा उसका वो अंग.. जीसे वो सभी ओरते ओर लडकीया संतुस्ट होती हे.. बीटु.. इसीलीये तो हमे तुजे वो जडी बुटी देनेकी आवस्यक्ता पडी.. यहा तो रीस्तोके कुछ मायने ही नही हे.. सबको सारीरीक सुख चाहीये.. जो हम सबकी जींदगीका अहेम हीसा हे.. उसीसे तो दुनीया चलती हे.. हमारे रुषी मुनीओने उनके उपर अैसे ही ग्रंथ नही लीखे..
लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. क्या तो फीर मे भी भाइके जैसा होजाउगा..?
मंजुला : (हसते) हां बीटु.. देखना अब मेरे बीटुमे भी इतना आकर्सण होगा.. जो उनकी सभी भाभीया ओर लडकीया आपके पीछे पागल होजायेगी.. बीटु.. जब कोइ भी अेक बार आपसे मीलन करेगी.. मेरे देवुको भी भुल जायेगी.. बीटु.. तुजे अपना पुराना प्यार भी मील जायेगा.. ओर इसके अलावा भी बहुत कुछ.. जो आप सोच भी नही सकते.. देखा नही.. बीटु.. जब कोइ सामनेसे आये.. तब ये मत सोचना ये मेरी रीस्तोमे क्या हे.. समजे..? अब यहा सीर्फ अेक मर्द ओर ओरतका ही रीस्ता होगा..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. कीतना अजीब हे.. हेनां..? सच कहा आपने.. हमारे यहा तो रीस्तोके कुछ मायने ही नही हे.. फीर भी कोइ कीसीको धोखा नही देते.. जो होगा सब सबकी रजामंदीसे होगा..
मंजुला : (मुस्कुराते) हां बीटु.. देखा नही.. रमा भाभी जैसी ओरत भी कीतनी लालचु हे.. पैसोके लीये अपने दोनो पतीको धोखा दे चुकी हे.. ओर यही पैसोकी वजहसे अपनी बेटीको भी इस दल दलमे डाल रही हे.. वो खुद अब तेरा प्यार पानेके लीये पागल हे.. ओर अब तो वो खुद नही.. नीलुभी आपकी ओर आकर्सीत होने लगी हे.. वो भी अपनी मांकी तराह धिरेनको धोखा देगी..
लखन : (सामने देखते) भाभीमां.. क्या उनके बारेमे भी आपको सब पता हेनां..? आपकी बात बीलकुल सही हे.. वो मां बेटी दोनो पैसोके लीये मुजसे रीलेशन रखनेके लीये तैयार होगइ हे..
मंजुला : (मुस्कुराते) हां बीटु.. मे उनके बारेमे सबकुछ जानती हु.. यही तो कलयुग हे.. जो उनकी उमर अभी बहुत ही छोटी हे.. फीर भी अैसा बहुत कुछ देखनेको मीलता हे.. फीर पता नही आगे क्या क्या देखनेको मीलेगा.. बस.. अब तुजे भी अेक ओरतकी तराह सोचना हे.. ये नही देखना की सामने वाली ओरत रीस्तेमे तेरी क्या लगती हे..
फीर चाहे वो हमारी पुनो ही क्यु ना हो.. तुजे दि हुइ जडी बुटीका फायदा उठाना हे.. वो कैसे तो वो मुजसे बहेतर तुम ओर पुनो जानते हो.. बाकी मुजे कुछ नही कहेना.. क्या तुम पुनोसे भी नाराज होनां..? हंम.. तुजे नही लगता तुमने थोडी जल्द बाजी की..? हंम..?
लखन : (सर जुकाते) हां भाभीमां.. आइ अेम सोरी.. इसमे गलती मेरी ही थी.. मे कुछ ज्यादाही बहेक गया था.. ओर आगे बढ गया.. लेकीन क्या करु..? दोनोके साथ इतने दिनोसे मस्तीया कर रहाथा.. ओर पुनोसे तो मे प्यार करता था.. अच्छा हुआ.. पुनोने मुजे चाटा मारा.. ओर मुजे मेरी हद दीखादी..
मंजुला : (मुस्कुराते) नही बीटु.. गलती सीर्फ तेरी नही थी.. उन दोनोकी भी थी.. जीस तराह तुम बहेक गयेथे.. उसी तराह वो दोनो भी बहेक गइ थी.. जबसे तुजे पुनोने जडी बुटी दिहे.. तबसे वो दोनो तेरे अंदर आये बदलावको देखनेके लीये उत्सुक हे.. ओर अब तो तुम्हे सभी तराहकी छुट मील गइ हे.. तो अब कीसीके भी साथ आगे बढना चाहो तो बढ सकते हो.. लेकीन प्यारसे.. कोइ जल्द बाजी नही.. समजे..?
लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) जी भाभीमां.. मे सब समज गया.. लेकीन भाइ..? वो कुछ कहेगे तो नही..?
मंजुला : (मुस्कुराते) नही.. वो तुजे कुछ भी नही कहेगे.. क्युकी वो खुद लताके साथ रीलेशनमे आयेगे.. ओर वो भी बहुत जल्द.. बीटु.. अेक दिन लता भी उनकी बीवी होजायेगी.. जीस तराह तुजे सब अधीकार मील रहा हे.. उसी तराह अब लताको भी सभी अधीकार देदे.. फीर तुम भी उनकी कोइ भी बीवीके साथ रीलेशन रखनेके संकोच मत करना.. समज गयानां.. बस.. सीर्फ मुजे छोड देना.. हें..हें..हें..
लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) भाभीमां.. ये आप क्या केह रही हे..? मे आपके बारेमे तो अैसा सोच भी नही सकता.. क्युकी मेने कभी आपको भाभी मानाही नही हे.. आप तो मेरी मां हो.. ओर मे यही प्रर्थना करता हुकी अब हर जन्ममे आपही मेरी मा बनो..
मंजुला : (मुस्कुराते आंख गीली करते) बीटु.. तुजे सब ज्ञात नही हेनां.. इसीलीये तु अैसा बोलता हे.. मे कइ जन्मोसे तेरे साथ जुडी हुइ हु.. मे उस हिमाचलमे भी तेरी मां थी.. आज भी तेरी मां हु.. ओर अगले जन्ममे भी तेरी मांकी मा होउगी.. बस.. सीर्फ अेक हीन्ट देती हु..
अगर तुमने उस किताबको पढा हेतो मुजे पहेचान चायेगा.. ओर खुदकी पहेचान भी होजायेगी.. मे सबकी जननी हु.. मे कभी अपने बेटेकी बीवी होती हु.. तो कभी उनकी मां.. ओर मां होते हुअे भी फीरसे इनकी बीवी होजाती हु.. ओर ये चक्र चलता ही रहेता हे..
लखन : (खडा होकर पैरोमे गीरते) बस.. बस मां.. मे पहेचान गया आपको.. ओर खुदको भी पहेचान लीया.. क्या मे बबलु हुनां..? ओर आप गुरुमाइ.. मे ही तो आपका बेटा था.. आपका अयास बेटा बबलु.. जो उस जन्ममे अपनी दोनो बहेनको चाहता था.. ओर बादमे पीयुसे सादी करलेता हे..
मंजुला : (खडी होकर लखनको सीनेसे लगाते) हां मेरे लाल.. तुमने मुजे ओर खुदको सही पहेचाना.. बस.. इस बातका जीक्र तुम कीसीसे मत करना.. तुजे फीरसे जन्म लेकर आना हे.. मेरी ही बेटीकी कोखसे ओर तब तुजे तेरी पुनो मील जायेगी.. वो सीर्फ तेरी ही हे..
लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. बस.. अब सीर्फ अेक के बारेमे बतादो.. फीर मे आपको कुछ भी नही पुछुगा..
मंजुला : (हसते) कीसके बारेमे..? क्या पुनोके बारेमेनां..?
लखन : (हसते धीरेसे) हां.. आपको तो सब पता चल जाता हे.. हें..हें..हें.. प्लीज.. बताइअेना..
मंजुला : (मुस्कुराते) ठीक हे.. सुन.. लेकीन देखना.. इस बारेमे कीसीको पता नही चलना चाहीये.. मुजे यकीन हे.. मेरा बेटा अपनी मां की बात कभी नही टालेगा..
लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभीमां.. आइ प्रोमीस.. मे कीसीको कुछ नही बताउगा.. बाइअेना..
मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु.. वो पीछले जन्ममे उन राजाकी दादी थी.. फीर दुबारा जन्म लेकर पीयु बनके तेरी जींदगीमे आइ थी.. जो उस जन्ममे वही राजाकी चहीती बेटी थी.. वहा उनकी इतनी रानीया देखकर वो भी राजाकी ओर आकर्सीत होगइ थी.. लेकीन उस राजाने उनको अपनी बेटी माना था..
तो अगले जन्ममे वो भी इनकी पत्नी होना चाहती थी.. जो इस जन्ममे उनके अंसकी बीवी होगइ हे.. वो थी तेरी प्यारीसी छोटीसी पीयु.. जो इस जन्ममे देवुकी बीवी.. ओर आने वाले वक्तमे तेरी भी मासुका होजायेगी.. लखन बेटा.. तुजे तेरा प्यार जरुर मील जायेगा.. वो भी बहुत जल्द..
लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. आज दिलको तसली मील गइ.. मे आपकी हर बात मानुगा.. मुजे सभी बाते मंजुर हे.. बस.. कुछ दिनके लीये मे पुनोदीदीसे दुर रहेना चाहता हु.. ताकी उनको भी मेरे प्यारकी अहेमीयत पता चले..
मंजुला : (मुस्कुराते) ठीक हे बीटु.. लेकीन उसे बहुत ज्यादा मत तडपाना.. वो सीर्फ तेरी हे.. भले ही वो दुनीयाकी नजरमे कुछ भी हो.. वो हमेसा तेरी सुहागन कहेलायेगी.. वो तेरे लीये बहुत आंसु बहा रही हे.. मेरी बेटीको ज्यादा मत तडपाना.. ओर हां.. लता सीर्फ वहा धरको सही करनेके लीये ही आ रही हे.. वो जब कहे तुम उसे यहा छोड जाना.. ताकी वहा उन दोनोको मीलनेमे तुजे भी कोइ तकलीफ ना हो.. समज गया नां..?
लखन : (समरमते मुस्कुराते) जी भाभीमां.. जैसा आप कहे.. मे सब समज गया..
मंजुला : (हसते सरको सहेलाते) हंम.. जा अब रात बहुत हो चुकी हे.. वहा तेरे रुममे भी कोइ तेरा इन्तजार कर रही हे.. अब मे चाहती हु.. की तुम रजीयाको ओर तेरी उस मेडमको पुरी तराह अपनाले.. ताकी तुजे अपनी जींदगी जीनेके कोइ तकलीफ ना हो.. बस.. अेक दिन तेरी उस मेडमको इधर लेकर आना.. मुजे उनको देखना हे.. हें..हें..हें..
लखन : (पैर छुकर) हां भाभीमां.. अेक दिन उनको जरुर लेकर आउगा.. मोम.. लव यु..
मंजुला : (हग करते सर चुमते) लव यु टु बेटा.. अब जा सोजा.. ओर सुन.. आज हमारे बीच जो भी बाते हुइ हे.. उसे अपने दिलमे दफन कर देना.. ये बात कीसीको बतानेकी जरुरत नही हे.. समजे..?
लखन : (मुस्कुराते) जी मोम.. लव यु..
मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. लव यु टु बेटा..
कहातो लखन खुस होते मुस्कुराते उपरकी ओर जाने लगा.. तो मंजु भी हसते हुअे लखनको खुस होकर जाते देखती रही.. फीर वो भी खडी होकर अपने रुममे चली गइ.. तब चंदा ओर सृती दोनो गहेरी नींद सो रही थी.. जो बाते पुनमको लखनको बतानी थी.. वोही बाते आज बडी ही सीफतता से ओर मर्यादित भाषामे मंजुने लखनको बतादी.. अेक दिन पुनम भी उनको मील जायेगी.. यही सोचकर लखन भी खुस होगया था.. आज पुनमको लेकर जो नाराजगी थी.. वो बहुत ही कम होगइ.. ओर मन ही मन पुनमको पानेका सपना देखने लगा....
कन्टीन्यु
लखन : (आंख गीली करते) भाभीमां.. मे कभी ओरतोको समज ही नही पाया.. मे कीतना मुर्ख था.. मुजे लगता थाकी लता मुजसे बहुत प्यार करती हे.. लेकीन उनकी चाहत तो कोइ ओर ही थी.. बीलकुल हमारी पुनोकी तराह.. हम मर्द कीतने डरपोक होते हे.. कीसीको अपनी दिलकी बात भी नही केह पाते.. ओर ओरते अपने प्यारको पानेके लीये कोइ भी कदम उठानेके लीये पीछे नही हटती.. अैसा क्यु..?
मंजुला : (लखनके सरको अपने कंधेपे रखकर सहेलाते) बीटु.. तु बीलकुल सही केह रहा हे.. तुम तो क्या आज तक कोइ भी मर्द ओरतको नही समज पाया.. ओरते सीर्फ कहेनेके लीये अबला नारी हे.. असलमे अबला तो मर्दको कहेना चाहीये.. मुजे पता था ये बात जानकर तुजे जरुर दुख होगा.. बस.. तुम लतासे कोइ धृणा मत रखना.. क्युकी वो सचमे देवुसे प्यार करती हे.. ओर अब सायद तुजसे भी..
लखन : (कंधेपे सर रखते आंसु बहाते) भाभीमां.. भाइमे अैसा क्या हे..? जो मुजमे नही.. क्युकी सब भाइको ही पसंद करती हे..
मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु.. पहेला तो उनका आकर्सण.. जो हमारे गुरुजीने उसे जडी बुटी देकर दीया हे.. ओर दुसरा उसका वो अंग.. जीसे वो सभी ओरते ओर लडकीया संतुस्ट होती हे.. बीटु.. इसीलीये तो हमे तुजे वो जडी बुटी देनेकी आवस्यक्ता पडी.. यहा तो रीस्तोके कुछ मायने ही नही हे.. सबको सारीरीक सुख चाहीये.. जो हम सबकी जींदगीका अहेम हीसा हे.. उसीसे तो दुनीया चलती हे.. हमारे रुषी मुनीओने उनके उपर अैसे ही ग्रंथ नही लीखे..
लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. क्या तो फीर मे भी भाइके जैसा होजाउगा..?
मंजुला : (हसते) हां बीटु.. देखना अब मेरे बीटुमे भी इतना आकर्सण होगा.. जो उनकी सभी भाभीया ओर लडकीया आपके पीछे पागल होजायेगी.. बीटु.. जब कोइ भी अेक बार आपसे मीलन करेगी.. मेरे देवुको भी भुल जायेगी.. बीटु.. तुजे अपना पुराना प्यार भी मील जायेगा.. ओर इसके अलावा भी बहुत कुछ.. जो आप सोच भी नही सकते.. देखा नही.. बीटु.. जब कोइ सामनेसे आये.. तब ये मत सोचना ये मेरी रीस्तोमे क्या हे.. समजे..? अब यहा सीर्फ अेक मर्द ओर ओरतका ही रीस्ता होगा..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. कीतना अजीब हे.. हेनां..? सच कहा आपने.. हमारे यहा तो रीस्तोके कुछ मायने ही नही हे.. फीर भी कोइ कीसीको धोखा नही देते.. जो होगा सब सबकी रजामंदीसे होगा..
मंजुला : (मुस्कुराते) हां बीटु.. देखा नही.. रमा भाभी जैसी ओरत भी कीतनी लालचु हे.. पैसोके लीये अपने दोनो पतीको धोखा दे चुकी हे.. ओर यही पैसोकी वजहसे अपनी बेटीको भी इस दल दलमे डाल रही हे.. वो खुद अब तेरा प्यार पानेके लीये पागल हे.. ओर अब तो वो खुद नही.. नीलुभी आपकी ओर आकर्सीत होने लगी हे.. वो भी अपनी मांकी तराह धिरेनको धोखा देगी..
लखन : (सामने देखते) भाभीमां.. क्या उनके बारेमे भी आपको सब पता हेनां..? आपकी बात बीलकुल सही हे.. वो मां बेटी दोनो पैसोके लीये मुजसे रीलेशन रखनेके लीये तैयार होगइ हे..
मंजुला : (मुस्कुराते) हां बीटु.. मे उनके बारेमे सबकुछ जानती हु.. यही तो कलयुग हे.. जो उनकी उमर अभी बहुत ही छोटी हे.. फीर भी अैसा बहुत कुछ देखनेको मीलता हे.. फीर पता नही आगे क्या क्या देखनेको मीलेगा.. बस.. अब तुजे भी अेक ओरतकी तराह सोचना हे.. ये नही देखना की सामने वाली ओरत रीस्तेमे तेरी क्या लगती हे..
फीर चाहे वो हमारी पुनो ही क्यु ना हो.. तुजे दि हुइ जडी बुटीका फायदा उठाना हे.. वो कैसे तो वो मुजसे बहेतर तुम ओर पुनो जानते हो.. बाकी मुजे कुछ नही कहेना.. क्या तुम पुनोसे भी नाराज होनां..? हंम.. तुजे नही लगता तुमने थोडी जल्द बाजी की..? हंम..?
लखन : (सर जुकाते) हां भाभीमां.. आइ अेम सोरी.. इसमे गलती मेरी ही थी.. मे कुछ ज्यादाही बहेक गया था.. ओर आगे बढ गया.. लेकीन क्या करु..? दोनोके साथ इतने दिनोसे मस्तीया कर रहाथा.. ओर पुनोसे तो मे प्यार करता था.. अच्छा हुआ.. पुनोने मुजे चाटा मारा.. ओर मुजे मेरी हद दीखादी..
मंजुला : (मुस्कुराते) नही बीटु.. गलती सीर्फ तेरी नही थी.. उन दोनोकी भी थी.. जीस तराह तुम बहेक गयेथे.. उसी तराह वो दोनो भी बहेक गइ थी.. जबसे तुजे पुनोने जडी बुटी दिहे.. तबसे वो दोनो तेरे अंदर आये बदलावको देखनेके लीये उत्सुक हे.. ओर अब तो तुम्हे सभी तराहकी छुट मील गइ हे.. तो अब कीसीके भी साथ आगे बढना चाहो तो बढ सकते हो.. लेकीन प्यारसे.. कोइ जल्द बाजी नही.. समजे..?
लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) जी भाभीमां.. मे सब समज गया.. लेकीन भाइ..? वो कुछ कहेगे तो नही..?
मंजुला : (मुस्कुराते) नही.. वो तुजे कुछ भी नही कहेगे.. क्युकी वो खुद लताके साथ रीलेशनमे आयेगे.. ओर वो भी बहुत जल्द.. बीटु.. अेक दिन लता भी उनकी बीवी होजायेगी.. जीस तराह तुजे सब अधीकार मील रहा हे.. उसी तराह अब लताको भी सभी अधीकार देदे.. फीर तुम भी उनकी कोइ भी बीवीके साथ रीलेशन रखनेके संकोच मत करना.. समज गयानां.. बस.. सीर्फ मुजे छोड देना.. हें..हें..हें..
लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) भाभीमां.. ये आप क्या केह रही हे..? मे आपके बारेमे तो अैसा सोच भी नही सकता.. क्युकी मेने कभी आपको भाभी मानाही नही हे.. आप तो मेरी मां हो.. ओर मे यही प्रर्थना करता हुकी अब हर जन्ममे आपही मेरी मा बनो..
मंजुला : (मुस्कुराते आंख गीली करते) बीटु.. तुजे सब ज्ञात नही हेनां.. इसीलीये तु अैसा बोलता हे.. मे कइ जन्मोसे तेरे साथ जुडी हुइ हु.. मे उस हिमाचलमे भी तेरी मां थी.. आज भी तेरी मां हु.. ओर अगले जन्ममे भी तेरी मांकी मा होउगी.. बस.. सीर्फ अेक हीन्ट देती हु..
अगर तुमने उस किताबको पढा हेतो मुजे पहेचान चायेगा.. ओर खुदकी पहेचान भी होजायेगी.. मे सबकी जननी हु.. मे कभी अपने बेटेकी बीवी होती हु.. तो कभी उनकी मां.. ओर मां होते हुअे भी फीरसे इनकी बीवी होजाती हु.. ओर ये चक्र चलता ही रहेता हे..
लखन : (खडा होकर पैरोमे गीरते) बस.. बस मां.. मे पहेचान गया आपको.. ओर खुदको भी पहेचान लीया.. क्या मे बबलु हुनां..? ओर आप गुरुमाइ.. मे ही तो आपका बेटा था.. आपका अयास बेटा बबलु.. जो उस जन्ममे अपनी दोनो बहेनको चाहता था.. ओर बादमे पीयुसे सादी करलेता हे..
मंजुला : (खडी होकर लखनको सीनेसे लगाते) हां मेरे लाल.. तुमने मुजे ओर खुदको सही पहेचाना.. बस.. इस बातका जीक्र तुम कीसीसे मत करना.. तुजे फीरसे जन्म लेकर आना हे.. मेरी ही बेटीकी कोखसे ओर तब तुजे तेरी पुनो मील जायेगी.. वो सीर्फ तेरी ही हे..
लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. बस.. अब सीर्फ अेक के बारेमे बतादो.. फीर मे आपको कुछ भी नही पुछुगा..
मंजुला : (हसते) कीसके बारेमे..? क्या पुनोके बारेमेनां..?
लखन : (हसते धीरेसे) हां.. आपको तो सब पता चल जाता हे.. हें..हें..हें.. प्लीज.. बताइअेना..
मंजुला : (मुस्कुराते) ठीक हे.. सुन.. लेकीन देखना.. इस बारेमे कीसीको पता नही चलना चाहीये.. मुजे यकीन हे.. मेरा बेटा अपनी मां की बात कभी नही टालेगा..
लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभीमां.. आइ प्रोमीस.. मे कीसीको कुछ नही बताउगा.. बाइअेना..
मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु.. वो पीछले जन्ममे उन राजाकी दादी थी.. फीर दुबारा जन्म लेकर पीयु बनके तेरी जींदगीमे आइ थी.. जो उस जन्ममे वही राजाकी चहीती बेटी थी.. वहा उनकी इतनी रानीया देखकर वो भी राजाकी ओर आकर्सीत होगइ थी.. लेकीन उस राजाने उनको अपनी बेटी माना था..
तो अगले जन्ममे वो भी इनकी पत्नी होना चाहती थी.. जो इस जन्ममे उनके अंसकी बीवी होगइ हे.. वो थी तेरी प्यारीसी छोटीसी पीयु.. जो इस जन्ममे देवुकी बीवी.. ओर आने वाले वक्तमे तेरी भी मासुका होजायेगी.. लखन बेटा.. तुजे तेरा प्यार जरुर मील जायेगा.. वो भी बहुत जल्द..
लखन : (मुस्कुराते) भाभीमां.. आज दिलको तसली मील गइ.. मे आपकी हर बात मानुगा.. मुजे सभी बाते मंजुर हे.. बस.. कुछ दिनके लीये मे पुनोदीदीसे दुर रहेना चाहता हु.. ताकी उनको भी मेरे प्यारकी अहेमीयत पता चले..
मंजुला : (मुस्कुराते) ठीक हे बीटु.. लेकीन उसे बहुत ज्यादा मत तडपाना.. वो सीर्फ तेरी हे.. भले ही वो दुनीयाकी नजरमे कुछ भी हो.. वो हमेसा तेरी सुहागन कहेलायेगी.. वो तेरे लीये बहुत आंसु बहा रही हे.. मेरी बेटीको ज्यादा मत तडपाना.. ओर हां.. लता सीर्फ वहा धरको सही करनेके लीये ही आ रही हे.. वो जब कहे तुम उसे यहा छोड जाना.. ताकी वहा उन दोनोको मीलनेमे तुजे भी कोइ तकलीफ ना हो.. समज गया नां..?
लखन : (समरमते मुस्कुराते) जी भाभीमां.. जैसा आप कहे.. मे सब समज गया..
मंजुला : (हसते सरको सहेलाते) हंम.. जा अब रात बहुत हो चुकी हे.. वहा तेरे रुममे भी कोइ तेरा इन्तजार कर रही हे.. अब मे चाहती हु.. की तुम रजीयाको ओर तेरी उस मेडमको पुरी तराह अपनाले.. ताकी तुजे अपनी जींदगी जीनेके कोइ तकलीफ ना हो.. बस.. अेक दिन तेरी उस मेडमको इधर लेकर आना.. मुजे उनको देखना हे.. हें..हें..हें..
लखन : (पैर छुकर) हां भाभीमां.. अेक दिन उनको जरुर लेकर आउगा.. मोम.. लव यु..
मंजुला : (हग करते सर चुमते) लव यु टु बेटा.. अब जा सोजा.. ओर सुन.. आज हमारे बीच जो भी बाते हुइ हे.. उसे अपने दिलमे दफन कर देना.. ये बात कीसीको बतानेकी जरुरत नही हे.. समजे..?
लखन : (मुस्कुराते) जी मोम.. लव यु..
मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. लव यु टु बेटा..
कहातो लखन खुस होते मुस्कुराते उपरकी ओर जाने लगा.. तो मंजु भी हसते हुअे लखनको खुस होकर जाते देखती रही.. फीर वो भी खडी होकर अपने रुममे चली गइ.. तब चंदा ओर सृती दोनो गहेरी नींद सो रही थी.. जो बाते पुनमको लखनको बतानी थी.. वोही बाते आज बडी ही सीफतता से ओर मर्यादित भाषामे मंजुने लखनको बतादी.. अेक दिन पुनम भी उनको मील जायेगी.. यही सोचकर लखन भी खुस होगया था.. आज पुनमको लेकर जो नाराजगी थी.. वो बहुत ही कम होगइ.. ओर मन ही मन पुनमको पानेका सपना देखने लगा....
कन्टीन्यु