Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 57 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

सृती : (सामनेसे फोन उठाते धीरेसे) हां पुनोदीदी.. फोन क्यु नही उठा रही थी..? अभी तक जाग रही हो..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. आप भी तो अभी तक जाग रही हो.. वो.. मे धिरेनके साथ अपने रुममे थी.. कमीना मुजे छोड ही नही रहा था.. इनसे होता तो कुछ नही.. ओर पुरी रात प्यार करनेकी बाते कर रहा था.. कहीये.. आप अभी क्या कर रही हे..? बडे भाइकी बहुत याद आ रही हे क्या..? हें..हें..हें..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) हां दीदी.. आपके भाइने जो लत लगादी हे.. अब उनसे मीलन कीये बगैर नींद ही नही आ रही.. तो मोबाइलसे खेल रही थी.. ओर आप इतने दिनोके बाद तो अपने पतीसे मील रही हो.. तो क्या अभी आप फ्रि होगइ..? मैने सोचाकी अभी आप दोनो प्यार करते होगे.. दोनो काफी दिनोके बाद जो मीले हो.. ओर आपतो अपने पतीको गालीया दे रही हे..? हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. तो फीर मे क्या करु..? ओर यहा अ‍ैसा प्यार मेरे नसीबमे कहा हे..? जो हमे वहा हमारे पतीसे मीलता था.. यहा तो बस.. उपर चड गया.. अंदर डाला ओर हीलाकर कुछ ही देरमे ढेर होगया.. ये भी नही की पहेले अपनी बीवीको ठीकसे प्यार ब्यार करो.. पता नही इनको इतनी जल्दी कीस बातकी होती हे.. जो सीर्फ दो मीनीटमे ही खतम होजाता हे.. भाभी.. मेरी सेक्स लाइफ अच्छी नही हे..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. अब क्या कर सकते हे..? आपको कुछ दिन तो अ‍ैसे ही गुजारना पडेगा..

पुनम : भाभी.. कास मे इनसे सादी ही ना करती.. ओर लखन भैयाका प्यार कबुल कर लेती.. लेकीन मुजे बाबाकी बात भी माननी थी.. भाभी.. आज लखन भैयाकी बहुत याद आ रही हे.. क्या आपकी लखन भैयासे कोइ बात हुइ..?

सृती : (थोडी नीरास होते) नही दीदी.. कुछ खास नही.. आपको पता हे आज बंसीभाइ इधर सहेरमे सामतभाइको होस्पीटलमे दीखाने आये थे.. तो वही गुजर गये.. फीर देवु ओर लखन भैया इनको लेकर वापस गांव गये थे.. ओर लखन भैया देर सामको ही लौटे हे.. सीर्फ दो मीनीट मेरे पास बैठे.. ओर मुजे सोरी बोलके चले गये.. लगता हे.. वो हम दोनोसे अब भी बहुत नाराज हे..

पुनम : (थोडी उत्सुक्तासे) भाभी.. अभी सामको रास्तेमे धिरेनको भी मीले थे.. जब वो सहेर वापस जा रहेथे.. धिरेनने उनको घरपे आनेके लीये कहा.. तो नही आये.. उसीने मुजे बतायाकी सामतभाइ गुजर गये हे.. भाभी.. क्या लखन भैयाने मेरे बारेमे कुछ नही कहा..?

सृती : नही दीदी.. मैने उनसे बात करनेकी बहुत कोसीसकी तो वो चले गये.. फीर भी मैने उनको आपसे फोनपे बात करनेके लीये कहा.. तो कहा मुजे कीसीसे बात नही करनी.. जब मे उनसे रुबरु मीलुगा तब उनकी भी माफी मांग लुगा.. कहेकर नीकल गये.. ओर रातमे खाना खाते भी मुजसे बात नही कर रहे थे.. बात तो छोडीये.. वो मेरे सामने देखते तक नही थे..

पुनम : (आंख गीली करते) भाभी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मेरी वजहसे आपसे भी नाराज हो गये हे.. अब मे इनको कैसे मनाउगी..? मेरी तो कुछ समजमे ही नही आ रहा.. ओर मुजे उनके साथ ओर आपके साथ धिरेनके बारेमे अ‍ेक जरुरी बात भी करनी हे.. जो सीर्फ आप दोनोसे ही कर सकती हु.. भाभी.. आप लखन भैयाको कीसी भी हालमे मना लीजीये.. इसके लीये चाहे मुजे कुछ भी करना पडे.. मे रेडी हु.. भाभी.. मंजु दीदीने जो बात कही हे.. इस बदलाकी सुरुआत मुजसे भी क्यु ना हो.. मे तैयार हु..

सृती : पुनो दीदी.. बस.. मुजे थोडासा वक्त दे दीजीये.. मे धीरे धीरे करते उनको मना लुगी.. आप फीकर मत करना इसमे मेभी आपके साथ हु.. अगर लखन भैयाको मनानेके लीये मुजे दुसरा तरीका अजमाना पडे तो भी मुजे मंजुर हे.. देखना वो आपसे भी बात करेगे.. कहीये.. ओर क्या बात करनी थी मुजसे..

पुनम : (धीरेसे) भाभी.. थेन्क्स.. वो.. वो धिरेनके बारेमे.. उनकी लाइफमे अ‍ेक ओरत आ चुकी हे.. तो मे अब आसानीसे धिरेनसे छुटकारा पा सकती हु.. लेकीन अभी नही.. वो सब बाते हम कल फुरसतमे करेगे.. वो जब कल बेन्कपे चले जायेगे.. तब मे आपसे आरामसे बात करुगी.. चलो अभी तो सोते हे.. गुड नाइट..

सृती : (मुस्कुराते) हंम ठीक हे.. गुड नाइट..

दोनोही बाते करके सो गइ.. तो उपरकी ओर लता ओर रजीया दोनो अपने कमरेमे गइ.. तो लखन आज थकानकी वजहसे जल्दी सो गया था.. तो दोनोको आज लखनको जगाना उचीत नही लगा.. ओर दोनो उनकी बगलमे जाकर सोगइ.. तो आज नीलम ओर रमाको भी नींद नही आ रही थी.. दोनो अपने अपने कमरेमे बीस्तरपे करवटे बदल रही थी.. तब रमासे रहा नही गया.. ओर वो धीरेसे बहार नीकली..

सृती ओर लखनका रुम तो उपर ही था.. क्युकी जबतक रमा इधर थी तबतक सृती उपरकी मंजीलपे ही सोने वाली थी.. नीलमको नीचेकी ओर अ‍ेक लास्ट वाला अलग कमरा दे दीया था.. ओर उनके बगलका कमरा फीर हाल गेस्टका था जो अभी इसमे रमाभाभी सो रही थी.. तो उपरकी मंजीलपे भी चार कमरे थे.. जो अ‍ेकमे लखन लता ओर रजीया सोये हुअ‍े थे ओर दुसरेके अभी सृती सो रही थी.. ओर दो अ‍ैसे ही खाली थे..

तो रमा अभी नीचे गेस्ट रुममे थी.. तो बहार नीकलते ही वो सीडीके पास जाकर उपरकी ओर देखने लगी.. जब उपर सब सांत था.. तो रमा धीरेसे नीलमके रुमके पास चली गइ.. ओर दरवाजेको हल्कासा धका देने लगी.. तो दरवाजा लोक था.. ओर रमाने दरवाजेपे धीरेसे नोक कीया.. तो नीलम जाग ही रही थी.. तब नोक सुनते ही उनके दिलकी धडकर तेज हो गइ.. उन्होने सोचा की आज तो पका ही लखन जीजु होगे..

ओर उसने सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे दरवाजा खोला तो सामने रमा मुस्कुराते अंदर आ गइ.. ओर उसने दरवाजा फीरसे लोक करदीया ओर नीलमका हाथ कपडकर उसे बेडपे ले गइ.. ओर उनके साथ लेट गइ.. तब नीलम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर वो रमाकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. फीर वो भी बेडपे सो गइ.. तो रमा भी उनके साथ लेट गइ.. ओर कंबल खीचकर रमाने दोनोके उपर डाल दीया.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २०९

ओर उसने सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे दरवाजा खोला तो सामने रमा मुस्कुराते अंदर आ गइ.. ओर उसने दरवाजा फीरसे लोक करदीया ओर नीलमका हाथ कपडकर उसे बेडपे ले गइ.. ओर उनके साथ लेट गइ.. तब नीलम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर वो रमाकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. फीर वो भी बेडपे सो गइ.. तो रमा भी उनके साथ लेट गइ.. ओर कंबल खीचकर रमाने दोनोके उपर डाल दीया.. तभी.... अब आगे

रमा : (मुस्कुराते नीलमकी ओर करवट लेते धीरेसे) नीलु.. वहा अकेली नींद ही नही आ रही थी.. तो इधर आगइ.. अभी तक सोइ नही क्या..?

नीलम : (मुस्कुराते) नही मोम.. आज पहेला दिन हे.. ओर नइ जगाह हे.. तो मुजे भी नींद नही आ रही थी.. अच्छा हुआ आप इधर आगइ.. मोम.. आप जब तक इधर हे मेरे पास ही सोइअ‍ेनां..?

रमा : (सरमाते धीरेसे हसते नीलुकी टांग खीचते) नही नीलु.. अगर तेरे लखन जीजुको तुमसे मीलनेका मन कीया तो..? हें..हें..हें.. देख अभी नीचेकी मंजीलपे सीर्फ हम दोनो ही हे.. ओर आज वो सामत भाइकी वजहसे बहुत दोडधाम कीये हुअ‍े हे.. जीनकी वजहसे वो बहुत थके हुअ‍े लग रहे थे.. तो आज उनके आनेकी कोइ संभावना नही हे.. इसीलीये मे आगइ..

नीलम : (सरमाकर हसते बाजुमे मुका मारते) मोम.. आप भीनां.. क्या में सीर्फ जीजुके लीये ही इधर आइ हु..? हें..हें..हें.. मोम.. कीतना अजीब हेनां..? अभी घरपे आइ थी तब मे आपसे कीतनी डर रही थी.. ओर अब देखो.. हम दोनोके बीच ये कैसा रीस्ता हो गया हे.. अब तो आपको अपनी बेटीके बारेमे अ‍ैसा कहेते सरम भी नही आती..

रमा : (नीलमकी कमरपे पैर ओर हाथ डालते धीरेसे) अरे.. इसमे सरमानेकी क्या बात हे.. नीलु.. तब तुम सीर्फ मेरी बेटी थी.. अब हम दोनोका रीस्ता अ‍ेक सहेलीका हे.. वैसे भी हम दोनोकी मंजील भीतो अ‍ेक हे.. नीलु..

नीलम : (सामने देखते धीरेसे) मोम.. क्या हम दोनो सही कर रहे हे..? ये लोग कीतने अच्छे हे..

रमा : (मुस्कुराते) नीलु.. जानती हु मे.. हम गलत कर रहे हे.. लेकीन तेरे पापा मे भी तो दम नही हे.. की वो हम दोनोको अ‍ेसो आरामकी जींदगी दे सके.. मेने तो उनके साथ अपनी जींदगी बरबाद करली.. कमसे कम तु तो अपनी जींदगी सुधारले.. ओर मे ये सब तेरे लीये हीतो कर रही हु.. क्या ये तुजे अच्छा नही लगता..?

नीलम : (मुस्कुराते धीरेसे) नही मोम.. बात अच्छा लगनेकी या ना लगनेकी नही हे.. अनजानेमे ही सही.. हम लता दीदीका घर बरबाद कर रहे हे.. ओर बडे जीजु लखन जीजुभी कीतने अच्छे हे.. माना की दोनो जीजु थोडे रंगीन मीजाजके हे.. लेकीन धानका सारा बीजनेस जीजु ओर पापा ही तो सम्हालते हे..

रमा : (मुस्कुराते) नीलु.. तेरे लखन जीजु अब सीर्फ तेरा जीजु नही हे.. तेरा होने वाला पती भी तो हे.. ओर उन लोगोमे तो कीतनी सादीया होती हे.. अगर तुमने भी उनसे सादी करली तो क्या फर्क पडता हे..? ओर अब तुम सीर्फ मेरी बेटी ही थोडीना हो.. अब तो मेरी पकी सहेली होगइ हो.. ओर अब तो हम दोनो ही अ‍ेक दुसरेका सहारा हे.. तो तुम बार बार क्यु अ‍ैसा सोचती हो..? मे तो अब तुजे अपनी बेटी नही मानती.. अब तो सहेलीके अलावा हमारा रीस्ता कुछ ओर ही हो गया हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (मुस्कुराते) मोम आपभीनां.. मे तो सीर्फ आपसे पुछ रही थी.. लेकीन मोम.. मुजे बहुत डर लग रहा हे.. अगर सचमे लखन जीजु इधर आगये तो..? अभी आपने दरवाजेपे नोक कीया तो मुजे तो यही लगा.. की सायद लखन जीजु आये होगे.. मुजे तो बहुत सरम आइ..

रमा : (कमरसे खीचते अपने तनसे चीपकाते) अरे वो आभी गये तो क्या हुआ..? मेने तुजे सब समजाया तो हे तुजे क्या करना हे.. तुम खामखा उनसे डर रही हे.. इनमे कुछ नही होता.. बस.. पहेली बारमे थोडा दर्द होगा तो वो पेइन कीलरकी गोली खा लेनां.. तुजे कुछ नही होगा.. लेकीन बादमे जो मजा आता हे.. नीलु मे तुजे बया भी नही कर सकती..

नीलम : (हसते) मोम.. लगता हे.. आप पापासे इतने दिन दुर रही हे.. तो आपको बहुत इच्छा हो रही हे..

रमा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हां.. मे सादी सुधा हु.. तो इच्छा तो होगीनां.. नीलु.. अब जल्दसे जल्द तुम भी अपने लखन जीजुको अच्छेसे सेट करलो.. इसमे तुम जीतनी जल्दी करोगी.. आगे जाकर तुजे मजे के साथ साथ माल भी मीलता रहेगा..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) मोम.. अ‍ेक बात कहु..? जब हम सब खाना खा रहे थेनां.. तब लखन जीजु मेरी बजाये आपकी ओर ज्यादा ध्यान दे रहे थे.. वो बार बार आपकी ओर देख रहे थे.. मुजे लगता हे.. वो मेरे साथ साथ आपकी ओर भी आकर्सीत हो गये हे..

रमा : (सरमाकर मुस्कुराते बाहोमे भरते अपनी बात रखते) हां नीलु.. सायद तेरी बात सच हे.. मुजे भी लगता हे तेरे जीजु मुजपे लाइन मार रहे हे.. ये साले मर्द जातको तो सीर्फ अ‍ेक ही चीजमे इन्ट्रेस होता हे.. फीर वो चाहे सादी सुधा ओरत हो या तेरी तराह कुआरी लडकी.. क्या तुजे देखकर बुरा लगा..? हंम..?

नीलम : (मुस्कुराते) अरे नही नही मोम.. मुजे क्यु बुरा लगेगा.. इस घरमे तो रीस्ते जैसा कुछ दीखता ही नही.. आपने नीर्मला आंटीको देखा नही..? वो कैसे बडे जीजुकी ओर देखती रहेती हे.. जैसे उनकी सांस नही.. उनकी बीवी हो.. मुजे तो सक हे.. दोनोके बीच जरुर कोइ चकर होगा.. मोम.. आपसे अ‍ेक बात पुछु..? आप बुरा तो नही मानोगी..?

रमा : (मुस्कुराते होठ चुमते) अरी पुछना.. अब क्यु बार बार परमीशन ले रही हे.. कहा तो हे की अब हम दोनो सहेलीया हे.. पुछ.. कोइ बुरा नही लगेगा..

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नीलम : (सरमाते धीरेसे) मोम.. आपके कहेनेके मुताबीक अगर मुजे लखन जीजुके साथ सोना ही हे.. तो हम उनके पाससे अ‍ैसे ही माल नीकलवा सकते हे.. तो उनसे सादी करनेकी क्या जरुरत हे..?

रमा : (नीलुके बुब्सपे हाथ रखते) नीलु.. बात तो तेरी सही हे.. लेकीन लगता हे तुम मेरी बात ठीकसे समजी नही हो.. अगर तुम उनसे सादी करलोगी.. तो तुम उनकी लीगल बीवी होजाओगी.. ओर इसका मतलब तुम इनकी वीरास्तकी आधी जायदादकी कायदेसे वारीस होजाओगी.. तो भविस्यमे तुम ओर मे सारी जींदगी अ‍ैसे ही बैठे बैठे बीता सकती हे..
 
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) मोम.. आपकी बात तो मे समज गइ.. लेकीन वो तो मेरे बजाये आपके पीछे पडे हे.. मानलो मेने उनसे सादी भी करली.. फीर भी वो आपके साथ रीलेशन रखना चाहते हे.. तो आप क्या करोगी..?

रमा : (गाल सहेलाते) नीलु.. तुम तो कुआरी लडकी हो.. सीर्फ अ‍ेक बार उनसे मीलन करले.. वो सबको भुल जायेगे.. फीर भी हमारी अ‍ैसो आरामकी जींदगीके लीये अगर मुजे भी उनके नीचे लेटना पडे तो मे भी उनके नीचे लेटनेके लीये तैयार हु.. समजी..? इसीलीये तुजे उनके साथ सादी करना जरुरी हे.. लेकीन तुमने अ‍ैसा पुछा ही क्यु..? क्या तुम उनसे सादी करना नही चाहती..?

नीलम : (गभराते धीरेसे) अरे नही नही मोम.. मे तो बस.. अ‍ैसे ही पुछ रही थी.. ठीक हे.. मे उनसे सादीके लीये तैयार हु.. लेकीन मोम.. मे आपसे केह देती हु.. मे मेरी पढाइ तक कोइ सादी नही करुगी.. बस.. अ‍ेक बार मुजे ग्रेज्युअ‍ेट होजाने दीजीये.. फीर हम आरामसे सादी कर लेगे.. क्युकी मे सरकारी जोब करना चाहती हु..

रमा : (थोडा सरमाते धीरेसे बाहोमे भरते) अरे वाह.. मेरी बच्ची.. मे तुजे ग्रेज्युअ‍ेशनके लीये कहा मना कर रही हु.. प्यार तो सादीके बीना भी हो सकता हे.. बस.. जब तेरे लास्ट यरकी अ‍ेग्जामका वक्त नजदीक आजाये.. तब तुम सीचुअ‍ेशन देख लेना.. अगर तुजे लगे की तेरे जीजु तुजे सादी करनेके लीये तैयार नही हे.. तो फीर तुम्हारे पास अ‍ेक ही विकल्प होगा.. तब तुजे उनसे प्रेगनेन्ट होना हे.. जब तु प्रेगनेन्ट होजायेगी.. तब बाकीका सब काम मे सम्हाल लुगी..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) ठीक हे मोम.. मे आपकी सब बाते समज गइ.. लेकीन अ‍ेक जीजु हे.. जो अभी मेरे बजाये आपपे ज्यादा ध्यान देते हे.. कही उनका दिल आपपे तो नही आगया.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमाकर हसते) हंम.. नीलु.. आभी जाये तो क्या फर्क पडता हे.. अगर आ गया तो तुजे बुरा तो नही लगेगा..? हंम..?

नीलम : (मुस्कुराते) नही मोम.. मुजे क्यु बुरा लगेगा.. सबको अपनी अपनी नीड होती हे.. अगर लखन जीजु आपसे प्यार करे तो मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. क्युकी आजकल तो अ‍ैसे बहुत रीलेशन देखनेको मीलते हे..

रमा : (सरमाकर मुस्कुराते) नीलु.. सही कहा तुमने.. ओर वैसे आज कल तेरे पापाभी मुजसे दुर रहेने लगे हे.. ओर तेरे जीजुके गांवमे तो अ‍ैसे कइ रीस्ते हे.. मां अपने बेटेके साथ रीलेशनमे हे.. तो उनकी बेटी भी अपने उसी भाइके साथ रीलेशनमे हे.. अ‍ैसा मैने सादीमे कीसीके कानोसे सुना हे.. तो अगर हम दोनो भी लखनजीसे रीलेशन रखले तो क्या फर्क पडता हे.. आखीर वो भी तो मेरा दामाद होगा.. अगर मेरे साथ भी उनका रीलेशन होजाये.. तो क्या इस रीलेशनके लीये तुम राजी होनां..?

नीलम : (सरमाते हसते) हां मोम.. मुजे मंजुर हे.. वैसे भी हमारा मक्सद उनके साथ रीलेशन बनाना थोडीना हे.. हमे तो बस.. इनकी जायदादसे मतलब हे.. फीर वो चाहे मेरे साथ रीलेशन रखे या फीर आपके साथ.. वैसे भी आपने सच कहा.. अब पापा आपको कहा वो सुख देपाते हे..

हम इतने दिनसे यहा हे.. तो उन्होने आपको अ‍ेक फोन तक नही कीया.. तो इनसे तो बेटर हे आप लखन जीजुसे अपनी प्यास बुजालो.. मोम.. इस मामलेमे आप लखन जीजुके साथ आगे बढ सकती हो.. बस.. हमारी सर्त याद रखना.. मुजसे आप अपनी हर बात सेयर करना..

रमा : (बाहोमे भीचते गाल चुमते) ठीक हे नीलु.. तुम कीतनी समजदार हो गइ हो..? मेरे लीये कीतना सोचती हे..? मेरे लीये यही बहुत हे.. की तुम मेरी सब तकलीफ जानती हो.. मुजे हमारी हर सर्त याद हे.. (तभी मनमे सोचते..)

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रमा : (मनमे) नीलु.. मे हर बात तेरे साथ सेर नही कर सकती.. तुजे क्या पता तेरी मांको तेरे जीजुसे सचमे प्यार हो गया हे.. मे तेरे जीजुको प्यार करने लगी हु.. आज मेरी मजबुरी हे.. वरना तेरी जगाह मे ही उनसे सादी करलेती.. बस.. अ‍ेक बार हम दोनोका मीलन होजाये.. फीर मे हमेसाके लीये तेरे जीजुकी होजाउगी.. देखना अ‍ेक दिन तेरे जीजु हम दोनो मां बेटीको अ‍ेक साथ अ‍ेक ही बीस्तरमे चोदेगा.. नीलु.. मुजे तेरे जीजुसे चुदवानेकी बहुत इच्छा हो रही हे.. इसीलीये तो मे यहा आइ हु.. पता नही कब हम दोनोका मीलन होगा..

नीलम : (सरारत करते हसते) मोम.. कहा खोयइ आप..? हें..हें..हें.. कही अभी लखन जीजुसे मीलनेकी इच्छा तो नही होगइ..? हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते हसते) हां.. होगइ हे.. कमीनी तुमने तो बातोसे ही मुजे गरम करदीया.. चल अब तेरे लखन जीजु ना सही तुतो हे.. बस थोडासा अपनी मा को भी प्यार देदे..

सोचते रमा खुस होते नीलमको जोरोसे बाहोमे भीच लेती हे.. ओर उनके होठोको चुमने लगती हे.. तब नीलम भी सर्मसार होते हसने लगती हे.. फीर वो भी रमाका साथ देने लगती हे.. आज रमाने बडी ही सीफततासे लखनके साथ रीलेशनके लीये नीलमका मन जान लीया था.. तो दुसरी ओर नीलम भी लखनके साथ सादी करना नही चाहती थी.. फीर भी अपनी मां की बाते सुनकर हां मे हां मीला रही थी..

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तब कुछ ही देरके बाद नीलम ओर रमा पुरी तराह नंगी हो चुकी थी.. ओर मां बेटी दोनो ही सीक्स नाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेकी चुतको चाटकर अपनी जीभसे खरोद रही थी.. रमा नीलमके साथ लेस्बीयन खेलते नीलमको सेक्सका सारा पाठ पढा रही थी.. तब उनको नही पता थाकी उनकी बेटी पहेलेसे ही इस खेलमे खेली खीलाइ हे.. ओर मास्टर हो गइ हे.. दोनोने दो घंटे तक अ‍ेक दुसरेके अंगोके साथ खेलते प्यार कीया ओर अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट कर दीया.. फीर दोनो ही आपसमे चीपककर नंगी ही सो गइ..

तो दुसरी ओर आज गांवमे भी कुछ खास नही हुआ.. सबलोग सामतभाइकी मोतकी वजहसे थोडा सदमे मे थे.. तो आज सुबह टीना भी कार लेकर सुबह ही रश्मी ओर वंदनाको लेकर सहेरमे अपने घरपे ले गइ थी.. देवायत रमेश ओर कुछ सदस्य सामतक सामतभाइके घरपे रहे.. फीर वो सब भी अपने अपने घरपे चले गये.. लखनके सारे दोस्त आज पुरे दिनकी दोडधामसे थके हुअ‍े थे.. तो उन सबके घरपे भी कुछ खास नही हुआ..
 
लेकीन आज देवायतकी बहुत सारी बीवीया कहीना कही चली गइ थी.. चंदा नीर्मला सब हरीद्वार तो नीशा चारु बोम्बे थी.. तो आज रश्मी वंदना भी टीनाके घरपे चली गइ थी.. तो सृती लखनके साथ ओर पुनम अपने घर चली गइ थी.. तो इस वक्त आज हवेलीमे सीर्फ मंजु भावना ओर चंपा भाभी ही थी.. जीसका मंजुलाने पुरा फायदा उठा लीया.. दोनो अपने बच्चेको लेकर होलमे बैठे दुध पीला रही थी..

ओर आपसमे धीरेसे बाते कर रही थी.. तब चंपा भाभी अकेली रातका खाना बना रही थी.. आज मंजुने अपनी छोटी बहेन भावनाको अपने पहेले प्यारको मीलवानेका पुरा प्लान सामको ही बनालीया था.. तो वो भावनाको सबकुछ बता देना चाहती थी.. जो पुनमने भावनाको पहेले ही सबकुछ बता दिया था.. भावना थोती पतली.. मगर उनके बुब्स मंजुके मुकाबले बहुत बडे ओर भरावदार लग रहे थे.. तभी..

मंजुला : (अपने बच्चेको दुध पीलाते) भावु.. आज घरपे कोइ नही हे.. तो आज तुम मेरे रुममे ही चली आना.. ओर अब जबतक मम्मी लोग वापस नही आजाते तुम हमारे साथ ही सोना.. आज अच्छा मौका हे देवुको मीलनेका.. तो तुम देवुको मीललो.. तुजे हमारे घर भेजनेका मेरा यही मक्सद था..

भावना : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. थेन्क्स.. लेकीन मुजे तो बहुत सरम आयेगी.. क्युकी मे इनको कभी नही अ‍ैसे मीली.. ओर जब मीली तब सृती दीदीने मुजे डीलीवरीकी वजहसे मीलनेके लीये मना कीया था.. तो हम दोनोने सीर्फ उपर उपरसे ही प्यार कीया.. तो आज बहुत डर लग रहा हे.. क्युकी जीजुका हे भी बहुत बडा.. तो क्या आप वहा साथमे तो रहोगीनां..? क्युकी अगर मुजे कुछ होजाये तो आप सम्हाल सकती हो..

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मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. मुजे भी तेरे जीजुके बगैर कहा नींद आती हे.. तो मे साथमे ही रहुगी.. ओर तुम डरो मत.. मे तेरे साथ हुंना इनमे कुछ नही होगा.. यही समजलेना आज तेरी उनके साथ सुहागरात हे.. बस.. पहेली बार थोडा मामुली दर्द होगा.. जैसे तुजे भानुभाइके साथ अपनी पहेली सुहागरातमे हुआ था.. फीर तो मजे ही मजे हे.. देखना इसके बाद तु भानुभाइको भी भुल जायेगी..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. जीजु हे भी मस्त ओर हेन्डसम.. कोइ भी ओरत होया लडकी.. उनकी ओर आकर्सीत होजाती हे.. दीदी.. पुनोदीदी भी कुछ केह रहीथी.. क्या वाकइ आपने ओर जीजुने ये सब तैय कीया हे..? पुनो दीदीसे सुना हे.. अब लखन भैयाका भी बहुत बडा ओर मोटा होगया हे.. सायद जीजुसे भी बडा.. क्या ये वाकइ सच हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. ये सच हे.. लखनका तेरे जीजुसे थोडा छोटा था.. तो तेरे जीजु जीतना बढा ओर तेरे जीजुसे थोडा मोटा हो गया हे.. तुम उनकी बातोसे डर गइ क्या..?

भावना : (मुस्कुराते) नही दीदी.. अगर आप साथमे होतो कोइ डर नही.. क्या देवुकी सब बीवीया लखनके साथ रीलेशन रखने रजी होजायेगी..?

मंजुला : हां भावु.. मे तो यही समज रही हु की हम सब उसी लोकमे हे.. जहासे हम सब अपने स्वामीको मीलने आइ हे.. ओर हमारे खानदानमे सभी मर्द हमारे स्वामीके अंस ही तो हे.. तो फीर यहा हम कौनसा रीस्ता नीभाये..? इसीलीये मे तुजे सबसे पहेले तेरे जीजुसे मीलवा रही हु.. वरना लखनको पहेले जेलना तेरे बसका काम नही हे..

मंजुला : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. क्या मुजे भी लखन भैयासे मीलना पडेगा..? पुनो दीदी केह रही थी.. की अब हम चारोको इस हवेलीको सम्हालना हे.. उन्होने तो मुजे इनसे भी आगेका बहुत कुछ कहा हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. लेकीन अगर तुम चाहो तो.. वरना यहा जबर दस्ती कुछ भी नही होगा.. मंजु.. अ‍ेक वक्त अ‍ैसा भी आयेगा.. देवुकी सभी बीवीया लखन ओर मेरे विजयके साथ रीलेशनमे आयेगी.. ओर लखनकी बीवीया भी देवुके साथ रीलेशन रखेगी.. खुद हमारी चंदा मौसी भी हमारे विजयके साथ रीलेशन रखनेको मजबुर होजायेगी.. तुम सब तब भी अ‍ैसेही जवान रहोगी जैसे अभी हो.. तब कहा कोइ रीस्ते बचे..? ओर पुनोने सही कहा हे.. अब तुम चारोको ही सबकुछ सम्हालना हे..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. तो फीर भानु..? क्या मुजे उनके साथ नही रहेनां..? हंम..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. अभी कुछ दिनतो उनके साथ रहेना पडेगा.. फीर भानुभाइ भी हमेसाके लीये हमारे खेतोपे रहेने आजायेगे.. तब वो कीसी कामके नही रहेगे.. फीर भी उनको कभी कभी इच्छा हुइ.. तो हमारे खेतोपे बहुत सारी ओरते हे.. जो उनके साथ रीलेशनमे हे.. ओर आज भी वो अपने घरपे अकेले नही हे.. हमारे खेतोकी अ‍ेक मजदुरन तेरे घरपे पीछले चार पांच दिनसे रेह रही हे..

भावना : (आस्चर्यसे) दीदी.. क्या केह रही हो..? कौन हे वो मजदुरन..?

मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. क्या करोगी जानकर..? अ‍ैसी अ‍ेक थोडीना हे..? भानुने आजतक अपने कीसी भी दोस्तकी बीवीओको नही छोडा.. कुछ दोस्तकी बीवीओके तो बच्चे भी उनके हे.. बस.. सीर्फ वो लखनके दोस्त मुनाभाइकी मां बसंती भाभी ही उनकी चुंगलसे नीकल पाइ.. ओर अभी जो हे वो पहेले रश्मीके घरपे काम करती थी.. छोटुकी बीवी.. जीसे रश्मीके पतीने मारा था.. आज कल वो भानुभाइ की रखेल होगइ हे.. ओर पैसोके लीये खुद छोटु उन दोनोकी बहार रखवाली करता हे.. हें..हें..हें..

भावना : (थोडा गुस्सा करते) दीदी.. कुतेकी दुम.. तुम कीतनी भी कोसीस करते सीधी करो.. वो कभी सीधी हो ही नही पाती.. मैने तो सोचा था की रमा भाभीसे सादी करके कमीना सुधर गया होगा.. लेकीन आज भी वो अपनी हरकतसे बाद नही आता.. अब आप ही कहो.. मे इस कमीनेके साथ कैसे रेह पाउगी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. फीर भी तीन चार दिन तुजे कुछ भी मालुम नही हे.. अ‍ैसा समजकर उनके साथ रहेना होगा.. वो तुजे बादमे पता चल जायेगा.. क्युकी तुम भी पुनोकी तराह अपने पतीके साथ ज्यादा दिन नही रेह पाओगी.. अभी हाल ही मे भानुभाइके साथ कीसीने अपना बदला लेलीया हे.. तुम फीकर मत करो.. ओर कुछ ही दिनमे उनका हथीयार बेकार होजायेगा.. तब वो तुजे अपने आप ही छोड देगा.. ओर हमारे खेतोपे आजायेगे..

भावना : (आस्चर्यसे देखते) दीदी.. कीसीने बदला लेलीया हे मतलब..? कौन हे वो..? जीसने भानुसे बदला लीया हे.. ओर मेरा तो ठीक हे.. लेकीन उस रमा दीदीका क्या होगा..?

मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. उनके साथ कीसने बदला लीया हे.. क्या करेगी जानकर..? तुम बस.. अब यहा मजे कर.. हमने लखन भैयाको अ‍ैसे ही जडीबुटी नही दी.. वो तुम सबको बहुत खुस रखेगा.. ओर वो दोनो कमीनी हमारे खीलाफ साजीस रच रही हे.. देखना वो हमारे लखनकी रखैल बनकर रेह जायेगी.. उनको तो बस पैसे चाहीये.. तो पैसोके लीये वो मां बेटी दोनो लखनके नीचे लेटनेको भी तैयार हे.. हें..हें..हें..
 
भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. तो फीर वो नीलु..? क्या उनके साथ भी वही होगा..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन नीलु उतनी बुरी नही हे.. अभी तो वो रमाके बहेकावेमे आ गइ हे.. वो बहुत जल्द धिरेसे सादी करलेगी.. क्युकी उनको अपनी मांकी नीयत कुछ ठीक नही लगती.. फीर वो लखनके साथ भी रीलेशन रखेगी.. क्युकी धिरेन नीलुको कभी संतुस्ट नही करपायेगा.. ओर आगे जाकर हमारा विजय चंदा दीदीके साथ ही रहेता होगा.. तो वो भी नीलमका फायदा उठायेगा.. भावु.. अ‍ैसा तो बहुत कुछ होगा.. तब तुम चारो इन सबकी साक्षीया होगी.. देखना..

भावना : (आस्चर्यसे देखते) दीदी.. अभी आपने कहा.. की हमारा धिरेन नीलुको भी संतुस्ट नही कर पायेगा.. तो मतलब..? तो क्या वो पुनोदीदीको भी संतुस्ट नही कर पाता..

मंजुला : (गहेरी सांस लेते) हां भावु.. सही कहा तुमने.. ओर पुनोको संतुस्ट करना हर कीसी मर्दका काम नही हे.. इसे सीर्फ हमारे घरके मर्दही संतुस्ट करपायेगे.. तभी तो उसने तेरे जीजुसे सादीकी.. देखना अब वो हमारे लखनकी भी बीवी होते ही उनकी दिवानी होजायेगी..

भावना : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. पुनो दीदीने तो जीजुसे सादी कीहेनां..? तो फीर लखन भैयाके साथ भी..? आइ मीन.. जो आपने कहा हे वो होजायेगा..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. हमारे खानदानमे सादी तो अ‍ेक औपचारीक हे.. ताकी अ‍ेक दुसरेके साथ सेक्स करते कभी गील्टी फील ना हो.. पुनोका तेरे जीजुसे सादी करनेका अ‍ेक ही मक्सद था.. जो उनसे बाबाने कहा था.. देवुसे प्रेगनेन्ट होना.. जो अब हो चुकी हे..

आज तेरे जीजुका बच्चा उनके उदरमे पल रहा हे.. उन दोनोका सफर यही तक था.. हांलाकी फीरभी उनका रीलेशन तेरे जीजुसे होगा.. लेकीन अब पुनो लखनकी दिवानी ओर उनकी चहीती बीवी होजायेगी.. वो अ‍ेक पल लखनसे दुर नही रहेगी.. दोनोके बीच इतना गहेरा प्यार होगा.. देखलेना..

चंपाभाभी : (वहा आते) देवरानीजी.. खाना रेडी हे.. तो आप देवरजीको बुला लीजीयेना.. वरना खाना ठंडा होजायेगा..

मंजुला : (मुस्कुराते) भाभी.. बस.. अब वो आते ही होगे.. देखोना साम भी ढल गइ हे.. आप खाना खालो.. ओर सोजाओ.. आज हमे थोडी देर होजायेगी.. काम आप सुबह नीपटालेना.. कल उठनेकी कोइ जल्दी नही हे..

चंपाभाभी : (मुस्कुराते) ठीक हे.. मे खाना टेबलपे रख देती हु.. आप खालेना..

कहेते चंपा भाभी चली गइ.. ओर खाना खाने बैठ गइ.. तो आज भावना भी उनकी ओर आस्चर्यसे देखने लगी.. क्युकी अ‍ैसा मंजुने कभी नही कहा था.. तभी मंजुने उसे इसारोसे चुप रहेनेको कहा.. तो भावना समज गइकी मंजु चंपाभाभीको जल्दी अपने रुममे भगा देना चाहती थी.. लेकीन क्यु इसका अंदाजा भावनाको भी होने लगा.. ओर चंपा भाभी खाना खाकर कुछ काम नीपटाकर अपने रुममे चली गइ.. तब..

मंजुला : (खडी होकर) भावु.. क्या भावेश सो गया..? तो फीर जा.. फटाफट अपनी बच्चीका जुला हमारे रुममे लेकर आजा.. आज थोडी तैयारीया करनी हे.. फीर बच्चीको लेकर जुलेमे सुलादे मे भी विजयको सुला देती हु..

भावना : (सरमाकर खडी होते) दीदी.. भावेशको तो कबका खाना खीलाकर आपके रुममे सुला दीया हे.. इतनी जल्दी क्या हे..? पहेले जीजुको तो आने दीजीये..

मंजुला : (धीरेसे विजयको लेकर जाते) अरी जाना.. तु इनको लेकर फटाफट मेरे रुममे आजा फीर तुजे बताती हु क्या करना हे.. जा.. फटाफट..

कहातो भावना सरमाकर मुस्कुराती बच्चीको वही छोडकर जुला मंजुके रुममे रखकर आइ ओर बच्चीको लेकर मंजुके रुममे चली गइ.. तब दोनोने अपने अपने बच्चेको जुलेमे डालकर सुला दीया.. तब मंजुने भावनाको नहानेके लीये भेज दीया.. तो भावनाको भी थोडा आस्चर्य हुआ.. लेकीन वो कुछ नही बोली.. ओर जैसा मंजुने कहा करती गइ.. जब भावना नहाकर आइ तो मंजुने उनकी सादीका जोडा भावनाको पहेननेके लीये कहा..

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तो भावना चुपचाप सादीका जोडा पहेन लीया.. तब मंजुने उनको तैयार करके दुल्हनकी तराह सजा दीया.. फीर भावनाको अपने रुममे ही खाना खीला दीया.. ओर यही बैठे रहेते देवायतका इन्तजार करनेको कहा.. तब कुछ ही देरमे देवायत भी आजाता हे.. तो मंजु ओर देवायत खानेके लीये बैठ जाते हे.. मंजुने चंपाभाभीको पहेले ही अपने रुममे भेज दिया था.. तब मंजु देवायतकी गोदमे बैठ गइ.. ओर खाना खाते मुस्कुरा रही थी..

देवायत : (मुस्कुराते) बेबी.. आज बडी खुस हो रही हो..? मुजे फ्रेस होने अपने रुममे भी नही जाने दिया.. ओर मेरी गोदमे भी बैठ गइ.. कुछ हुआ हे क्या..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां जानु.. खुस तो हुगीना..? क्युकी आज आपके लीये बहुत बडी सरप्राइज हे.. आप फटाफट खाना खालो.. आज तो आपको पुरी रात जागना हे.. हें..हें..हें.

देवायत : (हसते) अरे तेरे साथ प्यार करनेके लीये कइ रात जागनेके लीये तैयार हु.. हें..हें..हें.. अरे हां.. अब पता चला.. आज तो सीर्फ तुम ओर मे ही घरपे हे.. ओर वो भावु कीधर गइ..? क्या उनको खाना नही खाना..?

मंजुला : (हसते) नही.. उन्होने खाना खालीया हे.. आप भी फटाफट खालो.. ओर हमारे रुममे चलो.. तबतक मे घरकी सभी लाइटे ओर दरवाजा बंध करके आती हु..

कहेकर मंजुने पानी पीलीया ओर खडी होकर घरकी सभी साइटे ओर दरवाजा बंध करने लगी.. तबतक देवातने भी खाना खालीया ओर वो भी खडा हो गया.. तब मंजु उनके पास आगइ.. ओर उनको लेकर होलमे चली गइ.. ओर वहा भी अंधेरा करके दोनो सोफेपे बैठ गये तब मंजु देवायतकी गोदमे बैठ गइ.. तो देवायत मंजुकी ओर देखकर हसता रहा.. ओर मंजुकी सभी हरकतोको देखता रहा.. तभी मंजु बैठे बैठे ही देवायतकी बाहोमे समा गइ..
 
मंजुला : (धीरेसे होंठ चुमकर) जानु.. आज आपके लीये बहुत बडी सरप्राइज हे..

देवायत : (मंजुकी ओर प्यारसे देखते) मंजु.. बताना कौनसी सरप्राइज हे.. क्युकी आज तु बहुत रोमेन्टीक मुड मे हे.. ओर बहुत खुस लग रही हे..

मंजुला : (प्यारसे आंखोमे देखते) हां जानु.. आज आपको मेरी भावुका सपना पुरा करना हे.. चलीये वो हमारा वही इन्तजार कर रही हे..

देवायत : (मंजुके बुब्सको मसलते होठोको चुमते) पहेले मुजे मेरी इस बहेनको प्यार तो करने दे.. फीर तेरी बहेनको भी नीपट लुगा..

मंजुला : (सरमाते धीरेसे) नही जानु.. अब जो भी करना हे हमारे रुममे जाकर करना हे.. पहेले आपको उनके साथ गांधर्व विवाह करना हे.. जो मे करवाउगी.. आज हम दोनो बहेने आपको छोडने वाली नही हे.. आज मेरी भावुका भी कल्याण करदो.. हम तीनो सुबह तक प्यार करेगे..

देवायत : (होंठ चुमते) मंजु.. मुजे कल अ‍ेक दिनके लीये वहा कबीलेपे भी जाना हे.. मे वहा जमीलाको प्रोमीस देकर आया हु.. उनसे भी सादी करनी हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) जानती हु मे.. आप कल सुबह वहा चले जाना.. ओर उनसे सादी करके अपनी सुहागरात मनाकर उसे कबीलेकी रानी बनाकर आना.. आप जानते नही आपकी वो बीवी हमारे लीये कीतनी इम्पोर्टन्ट हे.. हमारी पुनोकी बच्चीकी बच्चीको वो ही सम्हालने वाली हे..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) मंजु.. लगता हे उनके बारेमे तुजे बहुत कुछ पता हे.. क्या मुजे बता सकती हो..?

मंजुला : (सीनेपे सर रखते धीरेसे) हां जानु बस.. थोडा बहुत बताउगी.. आप उस बुढी ओरतको कम मत आंकना.. वो बहुत कुछ जानती हे.. ओर जमीला रानी बनते ही अपनी सारी विद्या उनको सीखाने वाली हे.. जो आगे जाकर वो ही विद्या पुनोकी बेटीको देगी.. जो हमारे विजयकी बीवी होगी.. फीर उनकी बेटी ही हमारे स्वामीकी बीवी होगी.. ओर हमारे स्वामीको वहीसे सबकुछ ज्ञात होजायेगा..

देवायत : अच्छा.. तो ये बात हे..? मंजु.. क्या पुनोकी बेटी.. यानीकी मेरी ही बेटी हमारे विजयकी बीवी होगी..? तो फीर वो भी दोनो भाइ बहेन होगेनां..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां जानु.. अब भाइ बहेनकी सादी हमारे खानदानकी परंपरा हो गइ हे.. आपकी जीतनी भी बेटीया होगी.. सब मेरे विजयकी बीवीया हे.. अब चलो भी सब आज ही जानलोगे क्या..?

कहेते मंजु देवायतका हाथ पकडकर उसे अपने रुममे ले गइ.. तो वहा बेडपे भावना पुरी तराह दुल्हनके लीबासमे बेठी थी.. जैसे ही देवायत ओर मंजु रुममे आये तब मंजुने दरवाजा बंध करदीया तब भावना देवायतको देखते ही बहुत ही सरमाने लगी.. तभी मंजुने उनको भी खडा करदीया ओर दोनोको लेकर घरके मंदिरके सामने चली गइ.. ओर वहाके दोनो हार उतारके देवायत ओर भावनाको अ‍ेक अ‍ेक हार थमा दीया..

मंजुला : जानु.. जीस तराह आपने मम्मीके साथ सादी कीथी उसी तराह आज आपको भावुके साथ सादी करनी हे.. दोनो अ‍ेक दुसरेको हार पहेना दीजीये..

देवायत : (सामने देखते) मंजु.. क्या सादी करना जरुरी हे..? क्युकी भावु हमारे भानुकी बीवी हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. जब आपने मम्मीसे सादी की.. तब वो भी तो हमारे पापाकी बीवी थी.. चलीये कोइ बहाना नही.. जैसा मे कहु दोनो करते जाओ.. फीर मुजे आपसे कुछ बात भी करनी हे.. पहेनाइअ‍े हार..

कहातो देवायतने भावनाके गलेमे हार पहेना दिया तो भावनाने भी सरमाकर देवायतको हार पहेना दीया.. फीर मंजुने देवायतको अ‍ेक सींदुरकी डीबी थमादी.. ओर उसे भावनाकी मांग भरनेको कहा.. तो देवायतने चुटकी सींदुर लेकर भावनाकी मांग भरदी.. तो भावनाकी आंखसे आंसु छलक गये.. फीर मंजुने दोनोको सादीकी सभी कसमे खीलवाइ.. ओर भावनाने मंजु ओर देवायतके पैर छु लीये.. तो मंजुने उसे गले लगालीया..

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मंजुला : (मुस्कुराते) जानु.. आजसे भावु भानुभाइकी नही.. आपकी बीवी हे.. ये सादी जरुरी थी.. देखना अब मेरी भावु पुनो सृती ओर लता.. कभी विधवा नही कहेलायेगी.. चारो हमेसा सुहागन ही रहेगी.. अब चलीये हमारे बेडपे.. आज तो पुरी रात हम दोनो बहेने आपको सोने नही देगी.. हें..हें..हें..

भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. थेन्क्स.. आपने मेरा सपना पुरा करदीया.. पहेले आप चलीयेनां.. मुजे तो बहुत सर्म आ रही हे..

मंजुला : (बेडकी ओर जाते हसते) अरे क्यु सरमा रही हे.. आज तेरी सारी तम्मना पुरी हो रही हे.. लुटले हमारे पतीको.. आजा.. ओर मीलले अपने पहेले प्यारको.. आज बहुत दिनोके बाद मौका मीला हे तुजे.. ओर आज तो हम दोनो खुसकीस्मत हे.. की हम दोनो बहेने अ‍ेक ही बीस्तरमे हमारे पतीको मील रही हे.. वरना तुम दोनोको मे वहा हमारे घरपे भेजने वाली थी.. चल.. आजा..

देवायत : (मुस्कुराते) भावु.. आजा.. आज तो पुरी रात मुजे तुम दोनो बहेनोके साथ प्यार कना हे.. आज तुजे छोडने वाला नही हु..

कहातो भावना सर्मसार होकर मुस्कुराते बेडपे चड गइ.. वो आज दुल्हनके लीबासमे कयामत लग रही थी.. ओर उपरसे ढीला जुडा बनाके रखा था.. जो भावनाकी कामुक्तामे चार चांद लगा रहे थे.. वो अपने दोनो पैर सीकुडकर बेडके बीच बैठ गइ.. तब देवायत भी उनके पास आकर बैठ गया ओर भावनाको अपनी बाहोमे भीचलीया.. तो भावना बहुत ही सरमा गइ.. तो मंजु हसने लगी.. ओर बेडपे पीठके बल लेट गइ....

कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २१०

कहातो भावना सर्मसार होकर मुस्कुराते बेडपे चड गइ.. वो आज दुल्हनके लीबासमे कयामत लग रही थी.. ओर उपरसे ढीला जुडा बनाके रखा था.. जो भावनाकी कामुक्तामे चार चांद लगा रहे थे.. वो अपने दोनो पैर सीकुडकर बेडके बीच बैठ गइ.. तब देवायत भी उनके पास आकर बैठ गया ओर भावनाको अपनी बाहोमे भीचलीया.. तो भावना बहुत ही सरमा गइ.. तो मंजु हसने लगी.. ओर बेडपे पीठके बल लेट गइ.... अब आगे

मंजुला : (लेटकर हसते) भाइ.. आज हमारी इस बहेनको तृप्त करदो.. हमारी सादीसे पहेले ही आपको प्यार करती थी.. जो आज फायनली आपकी बीवी होगइ.. हें..हें..हें..

भावना : (सर्मसार होते हसते) दीदी.. क्या आप जीजुको भाइ कहेती हो..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. हम दोनो अ‍ेक ही बापकी संतान हे.. ये बात मुजे सुरुसे ही पता थी.. इसीलीये तो मेने भाइसे सादी करली.. चल आज तु भी अपने नये पतीके साथ सुहागरात मनाले..

तभी देवायतने बाहोमे भरते भावनाके होठोको चुमते प्यारसे मंजुके पास लीटा दिया.. ओर उनके उपर चडके लेट गया.. तो भावना बहुत ही सरमा गइ.. तभीदेवायत भावनाके बुब्सपे हाथ रखकर मसलते भावनाके होठोको चुमने लगा.. तो भावनाके तनसे अ‍ेक बीजलीसी दोड गइ.. ओर वो उतेजीत होने लगी.. उनकी चुत फडफडाते पानी छोडने लगी.. ओर धीरे धीरे मदहोस होने लगी..

आज वो आपना सबकुछ लुटाना चाहथी थी.. इसीलीये वो आंख बंध करते देवायतका साथ देने लगी.. तब मंजु दोनोको देखते मुस्कुराते खडी होगइ.. ओर अपने कपडे नीकालने लगी.. फीर कपडे नीकालकर सीर्फ ब्रा ओर पेन्टीमे रेह गइ.. ओर वापस भावनाके साथ लेटते कामुक्तासे अपने बुब्सको मसलते अपनी चुतको सहेलाने लगी..

तब भावना ओर देवायत दोनो ही प्यारकी आगोसमे खोने लगे.. भावना धीरे धीरे होठोको चुमते मदहोस होगइ थी.. वो भुल गइकी उनके साथ उनकी बडी बहेन भी हे.. वो देवायतके गलेमे हाथ डालकर उनके होठोको जोरोसे चुसते जीभसे जीका पेच लडाने लगी.. तब दोनो अ‍ेक दुसरेके मुहमे अपनी जीभ घुसाते अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे.. अब भावना पुरी तराह मदहोस हो चुकी थी..

भावना : (कामुक आवाजमे धीरेसे कांपते) ओह.. जीजु.. आइ लव यु.. आपने बहुत इन्तजार करवाया हे मुजे.. आज सारी हदे पार करदो..

मंजुला : (चुतको सहेलाते कामुक नजरोसे) भावु.. अब ये तेरे जीजु नही हे.. आजसे येभी तेरे पती हो गये हे.. मम्मीकी तराह तुम भी इनकी सीक्रेट बीवी होगइ हो.. आज जी भरके लुटले हमारे पतीको.. मेरा भाइ बहुत मजा देता हे.. देखना आजके बाद तु इनकी दिवानी होजायेगी.. आज करले अपनी सारी कशर पुरी..

मंजुला : (मदहोसीमे) हां दीदी.. मे इसे बहुत प्यार करती हु.. आज तो पुरी राइ इनको सोने नही दुगी..

कहा तो मंजु भावनाके सादीके अ‍ेक अ‍ेक कपडे नीकालने लगी.. तब भावना बहुत ही सर्मसार हो रही थी.. तो देवायतने भी अपने सब कपडे नीकाल दिये.. ओर तीनो जन्मजात नंगे होगये.. तब भावना धीरेसे पीठके बल लेट गइ.. ओर देवायतका हाथ खीचकर अपने उपर खीचने लगी.. तो देवायत भी मुस्कुराते भावनाके उपर चडकर छा गया.. तो भावनाने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोको चुमने लगी..

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देवायतने भावनाके दोनो बुब्स अपने पंजोसे थाम लीया.. ओर दबाते धीरेसे मसलने लगा.. तो भावना उतेजीत होते सीसकारीया करने लगी.. वो मदहोसीमे आधी आंख चडाते देवायतके तनको अपने तनसे दबाकर रगडने लगी.. भावनाके दोनो बडे बुब्स देवायतके सीनेमे दब गये.. तो देवायत भावनाके गलेमे मुह डालकर चुमने लगा.. फीर उनके कानकी बुटको अपने दांतोसे दबाकर खीचने लगा..

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भावना : (आंखोकी पुतलीया पलटते मदहोसीमे) आह.. सीससससस... जा..नुउउउ... उहं.. आइइइ...

भावना बहुत ही उतेजीत होकर सीसकारीया करते देवायतको अपनी बाहोमे भीचते कसाव बढाने लगी.. जैसे वो देवायतके अंदर समा जाना चाहती हो.. तब मंजु भावनाका पागलपन देखते हसने लगी.. तभी देवायत चुमते चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा.. तो मंजुने भावनाके बुब्सको अपने कब्जेमे लेलीया ओर मुहमे लेकर चुसने लगी.. ओर देवायत भावनाकी नाभीको चुमकर छेड रहा था.. तो भावना दोनो तरफसे हमलेसे पागल जैसी होने लगी..

भावना : (आधी आंख चडाकर नसेमे) कमीनो.. दोनो मीया बीवी.. क्या कर रहे हो..? दीदी.. मुजे कुछ हो रहा हे.. बहुत मजा आ रहा हे.. कुछ कीजीयेनां..

मंजुला : (दुधु चुसते) भावु.. तेरा दुध तो बहुत मीठा हे.. मेरा लखन ओर विजय बहुत खुस होजायेगे..

भावना : (मदहोसीमे) दीदी.. अब इस घरके सभी मर्दोका इस दुधपे अधीकार हो गया हे.. आज जीजुको भी अपना दुध पीलाउगी.. ओर मुजे भी जीजुका रस पीना हे.. वो बहुत टेस्टी हे.. मे अ‍ेक बार पी चुकी हु..

मंजुला : (मदहोस होते) भावु.. तेरे दुधमे नसा हे.. आज मे भी तुजे अपना रस पीलाउगी.. देखना तुम पागल होजाओगी.. आजसे तुम भी इस खानदानसे जुड गइ हो.. आजसे तु भी इस घरकी बहु होगइ हो.. अब यही तेरा ससुराल हे.. तो आजसे इसी घरके सभी मर्दोका तुजपे अधीकार हे.. ओर इस घरके सभी मर्दोपे तम्हारा भी अधीकार होगा.. अब यहा कोइ रीस्ते नाते नही देखना.. यहा सीर्फ मर्द ओर ओरतका ही रीस्ता रहेगा.. अब तुम तेरे जीजु.. ओर हमारे देवर लखनके साथ सेक्स कर सकती हे..

भावना : (मदहोसीमे) दीदी.. थेन्क्स.. मेने सपने मे भी नही सोचा था.. की मेरी जींदगीमे इतना बडा बदलाव आयेगा.. क्या आप यही बदलावकी बात कर रही थी..?

मंजुला : (मदहोसीमे होठ चुमते) हां मेरी बहेन.. यही तो बदलाव हे.. जो सीर्फ हमारे घरपे ही नही.. आजु बाजुके सभी गांवमे होगा.. ओर सहेरमे भी इनकी हवा लगेगी..

तबतक देवायत चुमते चुमते भावनाकी चुतपे पहोंच गया था.. उनको दोनो बहेनोकी बातोसे कोइ मतलब नही था.. वो भी जानता था.. की आगे ये सब होने वाला हे.. ओर वो अपनी साली भावनाके साथ साथ अपने भाइकी बीवी लताको भी चोदनेके लीये बेकरार था.. तभी भावनाने अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडकर फैला दीये.. ओर देवायत उनके पैरोके बीच आगया..
 
फीर अपना मुह भावनाकी चुतपे लगा दीया.. तब भावना जोरोसे सीसकारीया करते नसेकी हालतमे चली गइ.. तभी मंजुला भावनाके बुब्सको छोडकर उनके होठोको चुमने लगी.. तो भावनाने भी मंजुका सर अपने हाथोमे थाम लीया.. ओर मंजुके होठोको जोरोसे चुसने लगी.. तभी देवायत भावनाकी चुतको चाटते चुतमे जीभ घुसा देता हे.. ओर चुतको खरोदने लगता हे.. तो भावना बहुत ही उतेजीत होकर बेकाबु होगइ..

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ओर अपनी कमर उछालने लगी.. जैसे कीसीने उनकी चुतमे करंट लगा दीया हो.. वो मंजुके होठोको छोडकर जोरोसे सीसकारीया करते मंजुकी ओर वासना भरी नजरोसे देखने लगी.. तब मंजु थोडी खडी होते भावनाके सीनेपे दोनो ओर पैर पसारते बैठ गइ.. ओर अपनी चुतको भावनाके मुहके पास रखदीया.. तो भावनाने फौरन अपना मुह मंजुकी चुतपे लगा दीया ओर मंजुकी चुतको चाटने लगी..

तब मंजु भी आंख बंध करते सातवे आसमानमे पहोंच गइ.. ओर नसेकी हालतमे भावनाके सरको सहेताने लगी.. आज देवायतके रुममे वासनाका खेल सुरु हो गया था.. देवायतने भावनाकी चुतके दानोको अपने दातोसे हल्केसे दबाके छेड दीया.. तब भावनाकी चुत पानीका रीसाव करने लगी.. ओर चुतकी नाजुक पंखुडीया अंदर बहार होते फडफडाने लगी..

देवायत आज पहेली बार अ‍ेक साथ दोनो बहेनोसे प्यार कर रहा था.. तो भावना भी मंजुकी चुतको चाटते अपनी जीभ चुतमे घुसा देती हे.. ओर चुतके दानेको अपनी जीभसे खरोदने लगती हे.. जीनकी वजहसे मंजु भी पागल जैसी होने लगी.. ओर अपनी कमरको आगे पीछे करते जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. तीनोही पागल होते अ‍ेक दुसरेके प्राइवेट पार्टके साथ खेलने लगे..

तो भावना ओर मंजु दोनो ही बरदास्त नही करपाइ.. ओर अकडने लगी.. दोनोही कांपते हुअ‍े जडने लगी.. तो मंजुका पुरा रस भावनाके मुहमे चला गया.. ओर भावनाकी चुतसे नीकली तेज धार देवायतके मुहको भीगोने लगी.. ओर कुछही देरमे दोनो बहेने सांत हो गइ.. तो तीनोही बाथरुममे घुस गये.. ओर अपना अपना मुह साफ करने लगे.. तभी..

देवायत : (हसते) दोनो बहेने कमीनी हो.. देखो तुम दोनोका हो गया लेकीन ये अभी भी अ‍ैसे ही फटा जा रहा हे.. भावु.. कैसा लगा..?

मंजुला : (हसते धीरेसे) हां भावु.. बोलनां.. कैसा लगा..? मजा आयाकी नही..? हें..हें..हें..

भावना : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. पुछो ही मत.. मजेकी तो बात ही मत करो.. अ‍ैसा लगता था.. मे तो स्वर्गमे आ गइ हु.. मैने भानुके साथ अ‍ैसा कभी नही कीया.. वोतो बस आतेही अंदर घुसा देता हे.. ओर ओर कुछही देरमे ढेर हो जाता हे.. पता नही उनको इतनी जल्दी कीस बातकी हे.. ओर कमीनेको बच्चे पैदा करनेका बहुत सौक हे..

मंजुला : भावु.. उनके बापु भी अ‍ैसे थे.. तभी तो सरला काकी मेरे ससुरके साथ रीलेशन रखती थी.. भानुभाइ ओर लता हमारे बापुकी तो संतान हे.. भावु.. अ‍ेक मर्द सेक्सके बीना रेह सकता हे.. लेकीन अ‍ेक ओरत कभी इस सुखसे वंचीत नही रहेती.. कमीनी कीसीना कीसीके साथ रीलेशनमे आही जाती हे.. ओर अपनी प्यास बुजा लेती हे.. इसीलीये तो मेने इस बदलवाके लीये कहा हे..

देवायत : (मुस्कुराते) मंजु.. तुम दोनो बाते बादमे करलेना.. अभी देखो.. मेरा ये फटा जा रहा हे.. भावु.. चल.. आज तुजे जनतकी सेर करता हु.. अब तुम दोनो बहेनोके बीना नही रेह सकता..

मंजुला : (मुस्कुराते बहार आते) हां हां पता हे.. आज तो नइ चुत मील रही हे तो जनाब बडे उतावले हो रहे हे.. चल भावु लेटजा.. अब तेरी असली सुहागरातका वक्त आ गया हे.. तु डरना मत मे यही तेरे पास हु..

कहेते बहार जाने लगी.. तब देवायतने भावनाको अपनी गोदमे उठालीया.. तब भावना बहुत ही सरमाने लगी.. ओर तीनो अपने बेडपे आगये.. देवायतने भावनाको बेडपे लीटादीया.. तो भावनाने हाथ पकडकर देवायतको भी अपने उपर खीच लीया.. ओर देवायत भावनाके उपर लेटते उनके होठोको चुमने लगा.. ओर कुछही देरमे दोनो प्यारकी आगोसमे खो गये.. तब भावना अ‍ेक बार फीरसे उतेजीत होने लगी..

तो मंजुभी भावनाके बुब्सके साथ छेडखानी करने लगी.. देवायतका लंड भावनाकी चुतपे ठोकर मारते अंदर घुसनेकी कोसीस करने लगा.. तो भावनाने हिंमत करते अपना हाथ नीचे लेजाकर देवायतके लंडको पकडलीया.. ओर अपनी चुतपे घीसने लगी.. तब उनकी चुत अ‍ेक बार फीर गोली होते देवायतके लंडको भीगोने लगी.. तभी मंजुने मुस्कुराते देवायतकी ओर देखते आंख मारदी..

तो देवायत मुस्कुराने लगा.. तो भावना सब कुछ समज गइ.. ओर लंडको पकडकर अपनी चुतमे थोडासा फसालीया.. ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भरते अपने तनसे चीपकाने लगी.. ओर उनके होठोको चुमने लगी.. तो देवायतने भी भावनाकी दोनो हाथकी कलाइको थाम लीया.. ओर होठोको चुमते चुमते लीपलोक करलीया.. फीर अपनी कमरको थोडा पुस करते थोडा जोरोसे जटका दीया..

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तो आधा लंड भावनाकी चुतको चीरते अंदर घुस गया.. ओर भावनाकी आंख फटी की फटी रेह गइ.. ओर उनके मुहसे चीख नीलकते देवायतके मुहमे ही दब गइ.. वो आंसु बहाते अपने दोनो पैर बेडपे पटकन लगी.. ओर देवायतके होठोसे अपना मुह छुडानेकी कोसीस करते छटपटाने लगी.. तब मंजु उनके सरके पास आगइ ओर सरको सहेलाते भावनाको हिंमत देते उनका होसला बढाने लगी.. तब भावनाकी आंखसे आंसु बेह रहे थे..

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मंजुला : (सरको सहेलाते) बस.. बस.. भावु.. सांत होजा.. हो गया.. आज तेरी असली सुहागरात हे.. अभीनंदन.. आजसे हमारी मम्मीकी तराह तुम भी मेरी सौतन होगइ हो.. अब हम तीनो मा बेटी हमारे इस पतीकी बीवीया हो गइ हे.. भावु.. हमारे घरके तीनो छेदोको मेरे भाइने फतेह करलीया.. कोन्ग्रेच्युलेशन..

फीर कुछ ही देरके बाद भावना सांत होगइ.. तो देवायतने उनके होठोको छोडदीया.. तो भावना लंबी लंबी सांसे लेने लगी.. तब मंजुने उनके बुब्सको अपने मुहमे लेलीया ओर चुसने लगी.. तो भावनाने अपने दोनो पैरसे देवायतकी कमरपे आंटी लगादी.. ओर देवायतसे नजरे चुराने लगी.. आखीर उसने देवायतके लंडको अपनी चुतमे लेही लीया.. तभी देर ना करते देवायतने अ‍ेक जटका ओर मारा ओर उनका पुरा लंड भावनाकी चुतमे घुस गया..

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तो भावनाकी फीरसे जोरोसे चीख नीकल गइ.. तो मंजुने फौरन उनके मुहपे हाथ रखदीया.. भावना फीरसे आंसु बहाने लगी.. तो मंजु उनके होठोको चुमते उनको सांत करने लगी.. भावनाका मुह खुलाही रेह गया.. ओर वो कमर हीलाते देवायतसे छुटनेकी कोसीस करते छटपटाने लगी.. उनकी चुतसे हल्कासा खुन नीकल गया.. भावनाको अपनी चुतपे बहुत जलन होने लगी.. ओर वो आंसु बहाती रही.. तभी..
 
मंजुला : (धीरेसे सरको सहेलाते) भावु.. बस.. होगया.. तुमने पुरा अंदर लेलीया हे.. अब तुजे कभी दर्द नही होगा.. आजसे हमारे पतीने तुजे पुरी तराह अपना लीया हे.. अब तुम मेरी बहेन नही मेरी सौतन होगइ हो.. इस खानदानकी बहु..

भावना : (मुह बीगाडते धीरेसे) दीदी.. बहुत जलन हो रही हे.. जीजुका बहुत बडा हे..

देवायत : (बुब्स चुमते) भावु.. तु उनपे ध्यान मत दे.. मुजे कीस करती रहे.. अभी दर्द खतम होजायेगा..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. आज तेरी असली सुहागरात हुइ हे.. हम बहुत नसीब वाली हे.. की हमे इतने बडे लंड नसीब हुअ‍े हे.. अब जबतक सब लोग वापस नही आजाते तब तुजे यही रुममे हमारे पास सोना हे.. ओर इसी लंडसे चुदवाकर मजे करने हे.. अब तो हम दोनोके मजे ही मजे हे..

भावना : (हां मे गरदन हीलाते) हां दीदी.. अब थोडा दर्द कम हुआ हे.. जीजु.. अभी थोडी देर अ‍ैसे ही रहेना.. जब मे कहु तब करना.. अब बुहत अच्छा लग रहा हे.. जीजु.. कास आप पहेले मील गये होते.. मे आपसे ही सादी करलेती.. उस कमीनेके पले तो नही पडती..

मंजुला : (मुस्कुराते) अरे.. पहेले के बादमे.. तुजे मील तो गये.. अब क्यु अफसोस कर रही हे..? कमसे कम तुजे कुछ हुआ तो नही.. वरना ज्यादातर कमीनी पहेली बारमे बेहोस होगइ थी.. हें..हें..हें..

भावना : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. इसीलीये.. क्युकी मुजे दो दो बच्चे होगये हे.. अगर जीजु पहेले मीले होते तो जीजुके बच्चे ही पैदा करती.. उस कमीनेके बच्चे कभी पैदा नही करती.. जीजु.. अब ठीक हे.. आप धीरे धीरे चोदीये.. बहुत मन कर रहा हे.. आज हमारा मीलन हो ही गया..

मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. फीकर मत कर.. तेरे जीजुसे भी तुजे बच्चे होगे.. चल अब असली मजेके लीये तैयार होजा.. बाते बादमे करेगे..

तब देवायत धीरे धीरे कमर हीलाकर भावनाको चोदने लगा.. तो भावना सीत्कार करते देवायतका साथ देने लगी.. तभी देवायत हाथके बल उचा हो गया.. तो मंजु भी घुटनोके बल देवायतके पास आकर उनके होठोको चुमने लगी.. तो कुछ ही देरमे देवायत जोरोसे कमर हीलाने लगा.. तब भावना आधी आंख चडाकर पुरी तराह मदहोस हो चुकी थी.. ओर बडबडाते देवायतको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्सा रही थी..

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तभी कुछ ही देरमे भावनाका तन अकडने लगा.. तो अपनी कमरको जटके देते जडने लगी.. ओर जडते ही सांत हो गइ.. फीर भी देवायत उनको जोरोसे चोद रहा था.. तब भावना थोडा मुह बीगाडते सांत रही.. देवायतके हर धके के साथ उनके बडे भरावदार बुब्स तालमेलमे उछल रहे थे.. तब कुछही देरमे वो फीरसे उतेजीत होगइ.. ओर इस बार दोनोके बीच बहुच लंबी धमासान चुदाइ हुइ..

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तो कुछ देरकी चुदाइके बाद भावना दुबारा अकडने लगी.. तभी देवायत उनके उपर जुक गया.. तो भावनाने उनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर उनके होठोपे होठ रखते लीपलोक करलीया.. ओर अपनी कमरको आडी टेडी हीलाते जटकने लगी.. ओर जडते देवायतके लंडको चुतके अंदर ही भीगोने लगी.. तब देवायतको भी अपने लंडपे गरमाहट महेसुस हुइ..

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उनके पुरे बदनमे अ‍ेक बीजलीसी लहेर दोड गइ.. ओर वो जोरोसे कमर हीलाते भावनाको चोदने लगा.. वो भावनाको काफी देर तक चोदता रहा.. तो भावना भी पहेली बार देवायतसे चुदवाते दो दो बार जड चुकी थी.. तभी देवायत जोरोसे कमर हीलाते भावनासे चीपक गया.. ओर उनके गेलेमे मुह डालकर जोरोसे चुमने लगा.. तो भावना समज गइ.. ओर उसने देवायतको अपनी बाहोमे जोरोसे भीच लीया..

देवायतके तनमे खुन दोडते लंडकी ओर जाने लगा.. ओर वो परम आनंदकी अनुभुती करते अपनी कमरको जटके देते लंठसे लंबी लंबी पीचकारीया छोडते जडने लगा.. ओर भावनाकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तब भावनाको अपनी बच्चेदानीपे गरम गरम महेसुस हुआ.. जीनकी वजहसे वो भी उतेजनामे कांपने लगी.. ओर अपनी आंखोकी पुतलीया पलटते अ‍ेक बार फीर देवायतके साथ जडने लगी..

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दोनो ही जैसे हवामे उड रहे हो.. दोनोने परम आनंदकी अनुभुती करते चरम सुखको पालीया.. तब देवायत जडते ही भावनाके सीनेपे ढेर होगया.. तो भावना जोरोसे सांस लेते उनकी पीठ सहेलाती रही.. दोनो पसीनेसे तरबोर हो चुके थे.. फीर कुछ देरके बाद दोनो सांत हो गये.. तो देवायतने सर उठाया ओर भावनाकी ओर देखकर मुस्कुराने लगा.. तब भावना भी मुस्कुराते बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर देवायतसे नजरे चुराने लगी..
 
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