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सृती : (सामनेसे फोन उठाते धीरेसे) हां पुनोदीदी.. फोन क्यु नही उठा रही थी..? अभी तक जाग रही हो..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. आप भी तो अभी तक जाग रही हो.. वो.. मे धिरेनके साथ अपने रुममे थी.. कमीना मुजे छोड ही नही रहा था.. इनसे होता तो कुछ नही.. ओर पुरी रात प्यार करनेकी बाते कर रहा था.. कहीये.. आप अभी क्या कर रही हे..? बडे भाइकी बहुत याद आ रही हे क्या..? हें..हें..हें..
सृती : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) हां दीदी.. आपके भाइने जो लत लगादी हे.. अब उनसे मीलन कीये बगैर नींद ही नही आ रही.. तो मोबाइलसे खेल रही थी.. ओर आप इतने दिनोके बाद तो अपने पतीसे मील रही हो.. तो क्या अभी आप फ्रि होगइ..? मैने सोचाकी अभी आप दोनो प्यार करते होगे.. दोनो काफी दिनोके बाद जो मीले हो.. ओर आपतो अपने पतीको गालीया दे रही हे..? हें..हें..हें..
पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. तो फीर मे क्या करु..? ओर यहा अैसा प्यार मेरे नसीबमे कहा हे..? जो हमे वहा हमारे पतीसे मीलता था.. यहा तो बस.. उपर चड गया.. अंदर डाला ओर हीलाकर कुछ ही देरमे ढेर होगया.. ये भी नही की पहेले अपनी बीवीको ठीकसे प्यार ब्यार करो.. पता नही इनको इतनी जल्दी कीस बातकी होती हे.. जो सीर्फ दो मीनीटमे ही खतम होजाता हे.. भाभी.. मेरी सेक्स लाइफ अच्छी नही हे..
सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. अब क्या कर सकते हे..? आपको कुछ दिन तो अैसे ही गुजारना पडेगा..
पुनम : भाभी.. कास मे इनसे सादी ही ना करती.. ओर लखन भैयाका प्यार कबुल कर लेती.. लेकीन मुजे बाबाकी बात भी माननी थी.. भाभी.. आज लखन भैयाकी बहुत याद आ रही हे.. क्या आपकी लखन भैयासे कोइ बात हुइ..?
सृती : (थोडी नीरास होते) नही दीदी.. कुछ खास नही.. आपको पता हे आज बंसीभाइ इधर सहेरमे सामतभाइको होस्पीटलमे दीखाने आये थे.. तो वही गुजर गये.. फीर देवु ओर लखन भैया इनको लेकर वापस गांव गये थे.. ओर लखन भैया देर सामको ही लौटे हे.. सीर्फ दो मीनीट मेरे पास बैठे.. ओर मुजे सोरी बोलके चले गये.. लगता हे.. वो हम दोनोसे अब भी बहुत नाराज हे..
पुनम : (थोडी उत्सुक्तासे) भाभी.. अभी सामको रास्तेमे धिरेनको भी मीले थे.. जब वो सहेर वापस जा रहेथे.. धिरेनने उनको घरपे आनेके लीये कहा.. तो नही आये.. उसीने मुजे बतायाकी सामतभाइ गुजर गये हे.. भाभी.. क्या लखन भैयाने मेरे बारेमे कुछ नही कहा..?
सृती : नही दीदी.. मैने उनसे बात करनेकी बहुत कोसीसकी तो वो चले गये.. फीर भी मैने उनको आपसे फोनपे बात करनेके लीये कहा.. तो कहा मुजे कीसीसे बात नही करनी.. जब मे उनसे रुबरु मीलुगा तब उनकी भी माफी मांग लुगा.. कहेकर नीकल गये.. ओर रातमे खाना खाते भी मुजसे बात नही कर रहे थे.. बात तो छोडीये.. वो मेरे सामने देखते तक नही थे..
पुनम : (आंख गीली करते) भाभी.. आइ अेम सोरी.. मेरी वजहसे आपसे भी नाराज हो गये हे.. अब मे इनको कैसे मनाउगी..? मेरी तो कुछ समजमे ही नही आ रहा.. ओर मुजे उनके साथ ओर आपके साथ धिरेनके बारेमे अेक जरुरी बात भी करनी हे.. जो सीर्फ आप दोनोसे ही कर सकती हु.. भाभी.. आप लखन भैयाको कीसी भी हालमे मना लीजीये.. इसके लीये चाहे मुजे कुछ भी करना पडे.. मे रेडी हु.. भाभी.. मंजु दीदीने जो बात कही हे.. इस बदलाकी सुरुआत मुजसे भी क्यु ना हो.. मे तैयार हु..
सृती : पुनो दीदी.. बस.. मुजे थोडासा वक्त दे दीजीये.. मे धीरे धीरे करते उनको मना लुगी.. आप फीकर मत करना इसमे मेभी आपके साथ हु.. अगर लखन भैयाको मनानेके लीये मुजे दुसरा तरीका अजमाना पडे तो भी मुजे मंजुर हे.. देखना वो आपसे भी बात करेगे.. कहीये.. ओर क्या बात करनी थी मुजसे..
पुनम : (धीरेसे) भाभी.. थेन्क्स.. वो.. वो धिरेनके बारेमे.. उनकी लाइफमे अेक ओरत आ चुकी हे.. तो मे अब आसानीसे धिरेनसे छुटकारा पा सकती हु.. लेकीन अभी नही.. वो सब बाते हम कल फुरसतमे करेगे.. वो जब कल बेन्कपे चले जायेगे.. तब मे आपसे आरामसे बात करुगी.. चलो अभी तो सोते हे.. गुड नाइट..
सृती : (मुस्कुराते) हंम ठीक हे.. गुड नाइट..
दोनोही बाते करके सो गइ.. तो उपरकी ओर लता ओर रजीया दोनो अपने कमरेमे गइ.. तो लखन आज थकानकी वजहसे जल्दी सो गया था.. तो दोनोको आज लखनको जगाना उचीत नही लगा.. ओर दोनो उनकी बगलमे जाकर सोगइ.. तो आज नीलम ओर रमाको भी नींद नही आ रही थी.. दोनो अपने अपने कमरेमे बीस्तरपे करवटे बदल रही थी.. तब रमासे रहा नही गया.. ओर वो धीरेसे बहार नीकली..
सृती ओर लखनका रुम तो उपर ही था.. क्युकी जबतक रमा इधर थी तबतक सृती उपरकी मंजीलपे ही सोने वाली थी.. नीलमको नीचेकी ओर अेक लास्ट वाला अलग कमरा दे दीया था.. ओर उनके बगलका कमरा फीर हाल गेस्टका था जो अभी इसमे रमाभाभी सो रही थी.. तो उपरकी मंजीलपे भी चार कमरे थे.. जो अेकमे लखन लता ओर रजीया सोये हुअे थे ओर दुसरेके अभी सृती सो रही थी.. ओर दो अैसे ही खाली थे..
तो रमा अभी नीचे गेस्ट रुममे थी.. तो बहार नीकलते ही वो सीडीके पास जाकर उपरकी ओर देखने लगी.. जब उपर सब सांत था.. तो रमा धीरेसे नीलमके रुमके पास चली गइ.. ओर दरवाजेको हल्कासा धका देने लगी.. तो दरवाजा लोक था.. ओर रमाने दरवाजेपे धीरेसे नोक कीया.. तो नीलम जाग ही रही थी.. तब नोक सुनते ही उनके दिलकी धडकर तेज हो गइ.. उन्होने सोचा की आज तो पका ही लखन जीजु होगे..
ओर उसने सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे दरवाजा खोला तो सामने रमा मुस्कुराते अंदर आ गइ.. ओर उसने दरवाजा फीरसे लोक करदीया ओर नीलमका हाथ कपडकर उसे बेडपे ले गइ.. ओर उनके साथ लेट गइ.. तब नीलम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर वो रमाकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. फीर वो भी बेडपे सो गइ.. तो रमा भी उनके साथ लेट गइ.. ओर कंबल खीचकर रमाने दोनोके उपर डाल दीया.. तभी....
कन्टीन्यु
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. आप भी तो अभी तक जाग रही हो.. वो.. मे धिरेनके साथ अपने रुममे थी.. कमीना मुजे छोड ही नही रहा था.. इनसे होता तो कुछ नही.. ओर पुरी रात प्यार करनेकी बाते कर रहा था.. कहीये.. आप अभी क्या कर रही हे..? बडे भाइकी बहुत याद आ रही हे क्या..? हें..हें..हें..
सृती : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) हां दीदी.. आपके भाइने जो लत लगादी हे.. अब उनसे मीलन कीये बगैर नींद ही नही आ रही.. तो मोबाइलसे खेल रही थी.. ओर आप इतने दिनोके बाद तो अपने पतीसे मील रही हो.. तो क्या अभी आप फ्रि होगइ..? मैने सोचाकी अभी आप दोनो प्यार करते होगे.. दोनो काफी दिनोके बाद जो मीले हो.. ओर आपतो अपने पतीको गालीया दे रही हे..? हें..हें..हें..
पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. तो फीर मे क्या करु..? ओर यहा अैसा प्यार मेरे नसीबमे कहा हे..? जो हमे वहा हमारे पतीसे मीलता था.. यहा तो बस.. उपर चड गया.. अंदर डाला ओर हीलाकर कुछ ही देरमे ढेर होगया.. ये भी नही की पहेले अपनी बीवीको ठीकसे प्यार ब्यार करो.. पता नही इनको इतनी जल्दी कीस बातकी होती हे.. जो सीर्फ दो मीनीटमे ही खतम होजाता हे.. भाभी.. मेरी सेक्स लाइफ अच्छी नही हे..
सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. अब क्या कर सकते हे..? आपको कुछ दिन तो अैसे ही गुजारना पडेगा..
पुनम : भाभी.. कास मे इनसे सादी ही ना करती.. ओर लखन भैयाका प्यार कबुल कर लेती.. लेकीन मुजे बाबाकी बात भी माननी थी.. भाभी.. आज लखन भैयाकी बहुत याद आ रही हे.. क्या आपकी लखन भैयासे कोइ बात हुइ..?
सृती : (थोडी नीरास होते) नही दीदी.. कुछ खास नही.. आपको पता हे आज बंसीभाइ इधर सहेरमे सामतभाइको होस्पीटलमे दीखाने आये थे.. तो वही गुजर गये.. फीर देवु ओर लखन भैया इनको लेकर वापस गांव गये थे.. ओर लखन भैया देर सामको ही लौटे हे.. सीर्फ दो मीनीट मेरे पास बैठे.. ओर मुजे सोरी बोलके चले गये.. लगता हे.. वो हम दोनोसे अब भी बहुत नाराज हे..
पुनम : (थोडी उत्सुक्तासे) भाभी.. अभी सामको रास्तेमे धिरेनको भी मीले थे.. जब वो सहेर वापस जा रहेथे.. धिरेनने उनको घरपे आनेके लीये कहा.. तो नही आये.. उसीने मुजे बतायाकी सामतभाइ गुजर गये हे.. भाभी.. क्या लखन भैयाने मेरे बारेमे कुछ नही कहा..?
सृती : नही दीदी.. मैने उनसे बात करनेकी बहुत कोसीसकी तो वो चले गये.. फीर भी मैने उनको आपसे फोनपे बात करनेके लीये कहा.. तो कहा मुजे कीसीसे बात नही करनी.. जब मे उनसे रुबरु मीलुगा तब उनकी भी माफी मांग लुगा.. कहेकर नीकल गये.. ओर रातमे खाना खाते भी मुजसे बात नही कर रहे थे.. बात तो छोडीये.. वो मेरे सामने देखते तक नही थे..
पुनम : (आंख गीली करते) भाभी.. आइ अेम सोरी.. मेरी वजहसे आपसे भी नाराज हो गये हे.. अब मे इनको कैसे मनाउगी..? मेरी तो कुछ समजमे ही नही आ रहा.. ओर मुजे उनके साथ ओर आपके साथ धिरेनके बारेमे अेक जरुरी बात भी करनी हे.. जो सीर्फ आप दोनोसे ही कर सकती हु.. भाभी.. आप लखन भैयाको कीसी भी हालमे मना लीजीये.. इसके लीये चाहे मुजे कुछ भी करना पडे.. मे रेडी हु.. भाभी.. मंजु दीदीने जो बात कही हे.. इस बदलाकी सुरुआत मुजसे भी क्यु ना हो.. मे तैयार हु..
सृती : पुनो दीदी.. बस.. मुजे थोडासा वक्त दे दीजीये.. मे धीरे धीरे करते उनको मना लुगी.. आप फीकर मत करना इसमे मेभी आपके साथ हु.. अगर लखन भैयाको मनानेके लीये मुजे दुसरा तरीका अजमाना पडे तो भी मुजे मंजुर हे.. देखना वो आपसे भी बात करेगे.. कहीये.. ओर क्या बात करनी थी मुजसे..
पुनम : (धीरेसे) भाभी.. थेन्क्स.. वो.. वो धिरेनके बारेमे.. उनकी लाइफमे अेक ओरत आ चुकी हे.. तो मे अब आसानीसे धिरेनसे छुटकारा पा सकती हु.. लेकीन अभी नही.. वो सब बाते हम कल फुरसतमे करेगे.. वो जब कल बेन्कपे चले जायेगे.. तब मे आपसे आरामसे बात करुगी.. चलो अभी तो सोते हे.. गुड नाइट..
सृती : (मुस्कुराते) हंम ठीक हे.. गुड नाइट..
दोनोही बाते करके सो गइ.. तो उपरकी ओर लता ओर रजीया दोनो अपने कमरेमे गइ.. तो लखन आज थकानकी वजहसे जल्दी सो गया था.. तो दोनोको आज लखनको जगाना उचीत नही लगा.. ओर दोनो उनकी बगलमे जाकर सोगइ.. तो आज नीलम ओर रमाको भी नींद नही आ रही थी.. दोनो अपने अपने कमरेमे बीस्तरपे करवटे बदल रही थी.. तब रमासे रहा नही गया.. ओर वो धीरेसे बहार नीकली..
सृती ओर लखनका रुम तो उपर ही था.. क्युकी जबतक रमा इधर थी तबतक सृती उपरकी मंजीलपे ही सोने वाली थी.. नीलमको नीचेकी ओर अेक लास्ट वाला अलग कमरा दे दीया था.. ओर उनके बगलका कमरा फीर हाल गेस्टका था जो अभी इसमे रमाभाभी सो रही थी.. तो उपरकी मंजीलपे भी चार कमरे थे.. जो अेकमे लखन लता ओर रजीया सोये हुअे थे ओर दुसरेके अभी सृती सो रही थी.. ओर दो अैसे ही खाली थे..
तो रमा अभी नीचे गेस्ट रुममे थी.. तो बहार नीकलते ही वो सीडीके पास जाकर उपरकी ओर देखने लगी.. जब उपर सब सांत था.. तो रमा धीरेसे नीलमके रुमके पास चली गइ.. ओर दरवाजेको हल्कासा धका देने लगी.. तो दरवाजा लोक था.. ओर रमाने दरवाजेपे धीरेसे नोक कीया.. तो नीलम जाग ही रही थी.. तब नोक सुनते ही उनके दिलकी धडकर तेज हो गइ.. उन्होने सोचा की आज तो पका ही लखन जीजु होगे..
ओर उसने सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे दरवाजा खोला तो सामने रमा मुस्कुराते अंदर आ गइ.. ओर उसने दरवाजा फीरसे लोक करदीया ओर नीलमका हाथ कपडकर उसे बेडपे ले गइ.. ओर उनके साथ लेट गइ.. तब नीलम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर वो रमाकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. फीर वो भी बेडपे सो गइ.. तो रमा भी उनके साथ लेट गइ.. ओर कंबल खीचकर रमाने दोनोके उपर डाल दीया.. तभी....
कन्टीन्यु