Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 6 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ४८

देवायत अभीभी पुनमकी चुतमे लंड डालके उनके उपर अ‍ेसेही पडाथा ओर दोनोही बीच बीचमे अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते प्यार भरी बाते करते रहे.. तभी पुनमको अभीभी अपनी बच्चेदानीपे गरम महेसुस हो रहा था.. उनको फीरसे थोडा थोडा जोस बढने लगा तो बीच बीचमे अपनी कमर हीलाने लगी.. तब देवायतभी उनके गले ओर उनके दोनो संतरे जेसे बुब्स बारी बारी चुमने लगा ओर उनका लंड फीरसे पुनमकी चुतमे होते हुअ‍ेभी जटके मारने लगा ओर अ‍ेकदम सख्त होगया.. तब पुनम फीरसे मदहोसीमे छाने लगी....अब आगे

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ वापस इच्छा हो रहीहे आप फीरसे धीरे धीरे सुरु करो आज मुजे चोद चोदके नीचोड डालो.. कीतने अरसोके बाद आप मेरे हाथमे आये हो, आज पुरी रात आपसे प्यार (चुदना) करना हे..

देवायत : (कमर हीलाते) हां बेबी.. आजतो तुजे पुरी रात चोदना हे कही आजही तु प्रेगनेन्ट ना होजाये..

पुनम : (सरमाते नजर चुराते) भाइ होभी जाउ तो भी कोइ दीकत नही हे.. मे सबको जवाब दे दुगी आप फीकर मत करना.. मे प्रेगनेन्ट हुइ तो हमारा बच्चा पैदा करुगी.. ओर सच कहुतो मे प्रेगनेन्ट होना चाहती हु..

देवायत : नही बेबी तु अभी आइपील लेती रहेना जब वक्त आयेगा तब प्रेगनेन्ट होना, सब ठीक होजायेगा..

कहेते देवायत पुनमके गलेके नीचे हाथ डाल देता हे ओर उनपे जुकके थोडी स्पीडसे पुनमको चोदने लगता हे.. इस बार पुनमभी देवायतके गलेमे दोनो हाथ डालके खुलके कमर उछाल उछालके पुरे तालमेलमे देवायतसे चुदवाने लगी दोनो ही अ‍ेक बार फीरसे कामातुर होके चुदाइमे मसगुल होगये..

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तभी देवायतने पुनमके गेलेमे मुह डाल दीया ओर उनके गलेको चुमने लगा ओर कमर उछालते पुरा लंड बहार खीचते अ‍ेकही जटकेमे पुरा चुतमे डालते पुनमको जोरोसे चोदने लगा तो पुनमभी खुस होते नसीली आंखोसे देवायतकी कमरपे दोनो पैर डालके मस्तीमे आहे भरते चुदवाने लगी ओर दोनोके बीच धुआधार कामुक भरी चुदाइ होने लगी.. आज पुनम अपने भाइसे चुदवाते जींदगीका वो हर सुख पा रहीथी जीनका वो कही महीनोसे इन्तजार कर रही थी अपने भाइ देवायतसे चुदवाते आज उनका हर सपना पुरा हो रहा था..

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पुनम अपने भाइके साथ पुरी मस्तीमे चुदवाती रही ओर अचानक देवायतको बाहोमे भीचते आंधी आंख चडाते जडने लगी.. तो देवायत अपने लंडपे पुनमका गरम पानी महेसुस करते ओर जोसमे आजाता हे ओर पुनमको जोरोसे चोदने लगता हे ओर अ‍ेक बार फीर दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी इस बार देवायत काफी समय पुनमको उछल उछलके चोदता रहा.. तब पुनमको हर धकेके साथ अपनी बच्चेदानीपे देवायतका लंड टकराते महेसुस होने लगा तब उनको दर्द होने लगा ओर उनकी हल्की चीखे नीकलने लगी..

पुनम : (नसेकी हालतमे) बससस बससस बसस नहीइइइ भाइइइइ धीरे चोदोदोदो..दुखखखताताता हेहेहेइइइ सीइइइइ हंमममममउउउउउउउउअअअअअअअ भाभाइइइइइइ बससस मररररजाजाउउउउगीगीगीगी.. यारररर

देवायत : (मदहोसीमे) बच्चाचाचा चाहीहीहीयेयेयेये हंमममममम लेलेअ‍ेअ‍ेअ‍े डाललललदुदुदु हंममममम हांहां बोलललल हंहंममममम बोलललनांनां देदुदुदु बच्चाआआआ हहंममममम..

पुनम : (रोने जेसी आवाजमे) ननहीहीही भाइइइ बससस बससस धीरेरे चोचोदोदोदो हंहंममममउउउउउउ ससससइइइइइइउउउउउ हंमममम देदेदोदोदो..बच्चाचाचा..हंममममममम सीसीइइइइइ मेंममम करदो.. पेटसे..

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तभी देवायत पुनमके होंठ लीपलोक कर लेता हे तो पुनमभी देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते अपने तनसे चीपका लेती हे तब देवायत अपने लंडको पुनमकी चुतमे जडतक घुसा देता हे ओर धीरे धीरे कमरको जटकते अपना गरम पानी (विर्य) पुनमकी बच्चेदानीपे छोडने लगता हे तो पुनमभी अपनी बच्चेदानीपे देवायतका गरम पानी महेसुस करते उतेजीत होके उनके साथही जडने लगती हे.. ओर थोडीही देरमे दोनो सांत होते अ‍ेक दुसरेसे चीपकते अ‍ेसेही पडे रहेते हे तब दोनोही पुरे पसीनेसे भीग चुके थे ओर पुनम अपनी सांस दुरस्त करते देवायतकी पीठ सहेलाने लगती हे फीर कुछ देर अ‍ेसेही पडे रहेनेके बाद..

पुनम : (सरमाते नजर चुराते) भाइ आज आपने मुजे तृप्त करदीया.. मुजे चोद चोदके पुरी नीचोड डाली.. मेरा अ‍ेक अ‍ेक अंग दर्द कर रहा हे.. आप कीतना जोरोसे चोद रहे थे.. मेरी बच्चेदानीसे टकरा रहाथा.. इतना जोस कहासे आगया..?

देवायत : (होंठ चुमते) बेबी.. तुम सच केह रहीथी.. बहेनको चोदनेमे अ‍ेक अलगही मजा हे.. जब तुजे बहेन मानके चोद रहाथा तब मेरा जोस अ‍ेकदम बढ गया.. तुजे मजा आया..? हंमम..? जी चाहता हे तुजे बीना नीचे उतरे दीन रात अ‍ेसे ही चोदता रहु..

पुनम : (सरमाते हसते) बीलकुल पागल हो.. भाइ मे बहुतही थक गइ हु.. आपका दो बार होगया.. अब चलीयेना बाथरुम.. मुजे बाथरुममे जाना हे.. पुरे पसीनेसे भीग चुकी हु..

देवायत : (हसते) डार्लींग अ‍ेक बार ओर करलु..? हंमम..? पुरी रात करना हे..

पुनम : (सरमसे पानीपानी होते) भाइ.. प्लीज अ‍ेक बार नहा लेते हे.. थकान दुर होजायेगी.. फीर कुछ देर आराम करके फीरसे करते हेनां.. मुजेभी कहा सोना हे.. आज हमे पुरी रात जागते यही तो करना हे.. अबतो मे आपकी अमानत हो गइ हु जबभी जी चाहे मुजे बुला लीजीयेगा..

देवायत : (उपरसे उतरते) अरे मेरी बीवी.. चल नहातेहे.. बस..

कहेते देवायत पुनमकी चुतसे लंड नीकालते बेडसे उतर गया तो लंड नीकलतेही फच..की आवाज आइ तो पुनमकी चुतसे दोनोका कामरस बहेते चदरपे गीरने लगा तब पुनम बेडपे दोनो हाथ टीकाके बेठ गइ ओर बेडसे उतरनेकी कोसीस करने लगी तो उनकी चुतमे बहुतही जलन होने लगी ओर वो वापस बेडपे बेठ गइ.. ओर अ‍ेक नजर अपने बेडकी चदरपे डालके सरमसे पानीपानी होगइ फीर अपनी चुतपे हाथ रखते सर जुकाके देखने लगी.. फीर देवायतकी ओर देखने लगी.. क्युकी बेडके बीचमे अ‍ेक लाल धबा दीखाइ दे रहाथा जो पुनमके कौमार्य भंगकी नीसानी को दर्सा रहाथा तभी धीरेसे सरमाते कहा..

पुनम : भाइ..वहासे मेरा गाउन ओर वो दुसरी चदर नीकालके दो नां.. पुरी चदर खराब होगइ हे.. मुजसे चला नही जाता..

तभी देवायत उनकी अलमारी खोलता हे तब पुनम हाथकी उंगलीसे उनको दीखाती हे तो देवायत उनका गाउन ओर अ‍ेक दुसरी चदर नीकालते पुनमको देता हे तो पुनम बेठेही चदरको साइडमे रखते गाउन पहेन लेती हे ओर देवायतकी ओर हाथ बढाती हे तब देवायत पुनमको अपनी गोदमे उठाते उसे बाथरुमकी ओर ले चलता हे तब पुनम पुरी तराह थकी हुइ लगती हे..

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अंदर जातेही देवायत पुनमको अपनी गोदसे उतार देता हे ओर गीजरसे गरम पानी बालटीमे नीकालने लगता हे तब पुनम वही कमोडपे बेठ जातीहे ओर देवायत उनका गाउन नीकालते उनको खीतेपे टांग देता हे.. ओर कम्बलरसे पानी लेते पुनमकी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करने लगता हे तब पुनम जोरोसे सीसकारीया करते देवायतको ही देख रही हे तब जाके थोडी देरके बाद पुनमको राहत महेसुस होने लगती हे..

फीर देवायत पुनमको साबुन लगाते उनके बुब्सको मसलने लगता हे तब पुनम अ‍ेक बार फीरसे मदहोस होने लगती हे ओर आंख बंध करते सीसकारीया करने लगती हे फीर देवायत उनकी चुत पीठ सब जगाह साबुन लगाके उनको पानीसे नहेलाता हे फीर खुद नहा लेता हे देवायत पुनमकी इतनी कैर करता हे तो पुनम मनही मन खुस होजाती हे.. फीर देवायत पुनम ओर खुदको टोवेलसे पोछते पुनमको फीरसे गोदमे उठा लेता हे ओर बहार आके चदर चेन्ज करके उसे बेडपे सुलाके खुद उनकी साइडमे पीछेसे चीपकते सोजाता हे ओर पुनमके बुब्सको पकडते धीरेसे दबाने लगता हे तब पुनमभी पीछे हाथ लेजाते उनके अ‍ेक हाथको तकीया बनाके पेरको सहेलाने लगती हे

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तभी दोनोही थकानकी वजहसे कब नींदकी आगोसमे चले गये पताही नही चला.. तभी दुसरी ओर भानुके गांवमे आज लता ओर लखन सुहागदीन मनाके खाना खा लेते हे फीर लता सब काम नीपटाके भावेसको अपने रुममे दुध पीलाके जुलेमे सुला देती हे धरके सब दरवाजे लाइट अच्छी तराहसे बंध करके अपने रुममे आजाती हे ओर आयनेके सामने बेठते हल्कासा शींगार करने लगती हे ताकी अपने पती लखनको खुस करते रीजा सके..

तभी लखन बेडपे बेठते लताको देखने लगता हे ओर धीरेसे उठते लताके पीछे चला जाता हे ओर उनके गलेमे दोनो हाथ डालके उनके गालोसे अपना गाल रगडते आयनेसे ही लताके सौंदर्यका दीदार करने लगता हे तभी वो अ‍ेक हाथ लताके बुब्सपे रखते उसे दबाने लगता हे तो लता बहुतही सरमाके कामातुर होने लगती हे ओर अ‍ेक बार फीर दोनो सब कपडे नीकालके सुहागरात मनानेकी तैयारीया करने लगते हे..

लता ओर पुनम दोनोकी साथमेही सगाइ हुइथी ओर आज दोनोही अपनी सुहागरात मना रहीथी.. बस फर्कथा तो सीर्फ पुनमके पतीका.. पुनम धिरेनकी जगाह अपने भाइसे सादी करके सुहागरात मना रहीथी.. जो जवानीपे कदम रखतेही अपने भाइको पती मान चुकीथी..तो लताकी भी सब तम्मना आज पुरी हुइ थी..

क्युकी पीछले कइ दीनोसे रोज अपने भाइ भाभीकी चुदाइकी रासलीला देख रहीथी..वोभी कइ दीनोसे कामाग्नीमे जलते अपनी चुतमे कीसीका लंड लेना चाहती थी फीर उनके भाइकाही लंड क्यु नाहो.. लेकीन अब उनकी सगाइ करदी गइ जो आज उनके होनेवाले पती लखनसे सादीसे पहेले अपना कौमार्य भंग करवाते पुरा दीन चुदवा चुकी थी ओर अब सुहागरातमे फीरसे चुदवानेकी तैयारीया कर रही थी..

आज लता ओर लखन दोनोही पहेली बार मील रहेथे तो लखन ओर लता दोनोको नही पताथा की चुदाइके कीतने तरीके हे उनकोतो बस अ‍ेकही सीम्पल तरीका मालुम था तो लखन लताकी उसी तरीकेसे चुदाइ करने लगता हे.. दोनोही चुदाइके मामलेमे काफी खुल चुकेथे तो रातमे लता खुलके लखनसे चुदवाने लगी.. लखन १० मीनीटमे ही लताकी घमासान चुदाइ करके चुतमे पानी डालके ढेर होजाता..वोभी नही देखता की लता जड चुकीहे की नही.. ओर लता हर बार प्यासी रेह जाती.. ओर लखनसे उंगली करवाते सांत हो जाती..

फीर दोनोही अ‍ेक दो घंटे आराम करते..फीर लता लखनको अपनी चुतका जलवा दीखाती ओर लखनके लंडको हीलाके खडा करती ओर मुहमे लेकर चुमते फीरसे दोनो चुदाइ करने लगते.. इसी तराह लखन पुरी रातमे लताको ३ बार चोद चुकाथा ओर फीर दोनोही थकके साथमे नहाके अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये..

तभी दुसरी ओर पुनम अ‍ेक घंटेका आराम करके फीरसे जाग गइ ओर देवायतकी ओर करवट लेते उनके चहेरेको देखती रही.. आज वो पुरी रात अपनी सुहागरातका मजा लेना चाहतीथी तो वो देवायतके उपर जुक गइ ओर देवायतके मुसल लंडको अपनी मुठीमे भरके सहेलाने लगी ओर देवायतके सीनेको चुमती रही..तभी देवायतकी आंखभी खुल गइ ओर अ‍ेक हाथसे पुनमकी पीठको आधी नींदमे ही सहेलाने लगा..

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तभी पुनम देवायतके पैरके बीच आगइ ओर लंडकी ओर जुकते देवायतके लंडको नीचसे उपरकी ओर अपनी जीभसे चाटतने लगी जीसे देवायतके सरीरमे जुनजुनाट होने लगी ओर वो मस्तीमे पुनमकी ओर देखते हसने लगा.. तो पुनमभी मस्तीमे आके बार बार लंडको चाटती रही ओर अंतमे लंड गीला होते सख्त होगया.. तो लंडको धीरेसे अपने मुहमे लेलीया ओर देवायतकी ओर देखते लंडको मुहमे अंदर बहार करते देवायतको ब्लुजोब देने लगी..

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इस हरकतसे देवायतका लंड जटके मारते खडा होने लगा ओर हवामे सख्त होके लहेराने लगा तब पुनमने लंडको मुहसे नीकाल दीया वो पुरी तराह मदहोस होकर काम अग्नीमे जलने लगी.. उनकी आंखमे वासनाके डोरे मंडराने लगे.. ओर आंख लाल होगइ.. तभी देवायतकी कमरके पास आके बेठ गइ ओर अ‍ेक पैर उचा करते लंडको अपनी चुतपे सेट करने लगी तब देवायतकी आंखोमे कामुक नजरोसे देखते लंडपे धीरे धीरे बेठने लगी पुनमकी चुतने पुरा लंड नीगलते अपनी गीरफ्तमे लेलीया..

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ओर आंख बंध करते थोडी देर अ‍ैसेही बैठी रही फीर धीरे धीरे कमरको उपर उठाते वापस कमरपे बेठते लंडको चुतमे अंदर बहार करने लगी अब वो पुरी तराह मदहोसीमे छाने लगी.. पुनम देवायतसे हर तरीकेसे चुदवाना चाहती थी.. आज वो देवायतसे पुरी तराह तन ओर मनसे समर्पीत हो चुकी थी अबतो धिरेनसे सादी सीर्फ औपचारीक रेह गइथी.. उसने पुरी जींदगी अब अपने भाइ देवायतसे चुदवानेका मन बना लीया था.. वो देवायतको बेठे बेठे चोदने लगी.. फीर कुछ देरके बाद वो थक गइ..

तभी अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडके देवायतके कंधेके पास हाथ टीकाके उनपे जुक गइ ओर धीरे धीरे कमर हीलाते देवायतको फीरसे चोदने लगी.. अब वो पुरी तराह कामुक होके आंख बंध करते देवायतको चोद रही थी ओर चुदाइका पुरा मजा ले रहीथी.. तब देवायतभी उनकी कमरपे हाथ रखते उनको चोदनेमे मदद करने लगा आज वो हर सुख अपनी बहेनको देना चाहता था दोनोही पुरी तराह कामाग्नीमे जलते चुदाइमे मसगुल होगये थे..

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तभी अचानक पुनम देवायतसे चीपक जाती हे ओर उनके होंठोपे होंठ रखते भीच लेती हे ओर आधी आंख चडाते नसेकी हालतमे अपनी कमरको जटके मारते जडने लगती हे.. तब देवायतभी उसे जोरोसे बाहोमे भीचलेता हे ओर थोडीही देरमे पुनम देवायतके गलेमे मुह डालके सीनेपे ढेर होजाती हे.. तब देवायत उसे बाहोमे भरते पीठ सहेलाने लगता हे फीर कुछ देरके बाद बाहोमे कसके पलट जाता हे ओर दोनो पागलोकी तराह मुह खोलते अ‍ेक दुसरेके होठ चुमने लगते हे..

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तभी देवायत हाथके बल उचा होताहे ओर लंबे लंबे सोट मारते पुनमको चोदने लगता हे तब पुरा लंड पुनमकी चुतमे चला जाता हे तो वो बार बार अपनी बच्चेदानीसे टकराते महेसुस करती हे ओर हर धकेके साथ उनकी आहे नीकलने लगती हे वो अब पुरी तराह कामातुर होके चुदवाने लगी.. ओर दोनोके बीच अ‍ेक बार फीरसे घमासान चुदाइ होने लगी.. तब कमरेमे थपप थपप थपप फचच फचच फचच की आवाजके साथ पुनमकी चुडीतोकी खनखनाहट देवायतको ओर चोदनेको जोस बढा रही थी.. तब पुनमसे देवायतके लंडको बरदास्त करना मुस्कील होने लगा..

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पुनम : (मदहोसीमे) बससस बससस भाइइइ धीरेरे चोदोदो मरररर जाउउउगीगीइइइ नहीइइइ भाइइइइ बससस याररर हंमममअअअअअअ उउउउहहहहहममममम आहहह आहहह आहह सीइइइइइइइइइ मांइइ..

देवायत : (नसेमे) पुरारारा डालललदुदुदु.. हंममममम मजाजाज आरररहाहाहा हेहेहेहंमममममम हंमम..

पुनम : (नसीली आंखोसे देखते) हंमममम उउउउउअअअअअ हांहांहांआआआ बहुउउउततततत मजाजाज..आआरररहाहाहेहेहे.. ओरर चोदो.. मुजे..सीससइइइ आह..आह..आह..आह..

देवायत : (मदहोसीमे) रोजजज चुदददवावावयेयेयेगीगीगी हंममममम बोलललनानां..

पुनम : (आंख चडाके चुदवाते) हंममम हाहाहा..चोददददलेलेनानाना.. रोजजज चुदददवावावउउउगीगीगी..

दोनोही कामुक बाते करते चुदाइका मजा ले रहेथे देवायत काफी देर तक पुनमको चोदता रहा तभी पुनमने अ‍ेक बार फीरसे देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया ओर उनके होठोसे होठ मीलाके लीपलोक करलीया तभी देवायतको अपने लंडपे गरम पानीकी बौछार महेसुस हुइ तो उनके लंडपे सुरसुराहट होने लगी देवायतका पुरा सरीर कांपने लगा ओर उसने पुरा लंड पुनमकी चुतमे घुसा दीया ओर रुक गया..

तभी लंड पुनमकी बच्चेदानीसे टकरा गयातो पुनमकी अ‍ेक हल्की चीख नीकल गइ ओर देवायतके मुहमेही दब गइ तब पुनमकी आंख बडी होगइ ओर वो देवायतकी आंखोमे देखती रही.. तभी उसे अपनी बच्चेदानीपे देवायतका गरम विर्य पीचकारीयो की बोछार करते महेसुस होने लगा ओर वो आधी आंख बंध करते सातवे आसमानपे चली गइ ओर तीलमीलाते दर्र्दसे मुह बीगाडते साथमे जडती रही..

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तभी देवायत उनके होंठ चुमते पुनमके उपर पडा उनका कामुक चहेरेको देखते रहेता हे तब पुनम बहुतही सर्मसार होते नजर चुराते मुहको साइडमे घुमाने लगी.. उन्को अभीभी यकीन नही हो रहाथा की उनकी जबरदस्त चुदाइ अपने भाइने करली थी.. उनको अभी भी अपनी चुतमे देवायतका सख्त लंड महेसुस हो रहाथा ओर वो नैन चुराते देवायतके सरको सहेला रहीथी तभी देवायत उनके चहेरेको अपने दोनो हाथोमे थामके अपनी ओर करता हे ओर उनकी आंखोमे देखते होंठ चुम लेता हे ओर धीरेसे कहेता हे....

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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ४९

तभी देवायत उनके होंठ चुमते पुनमके उपर पडा उनका कामुक चहेरेको देखते रहेता हे तब पुनम बहुतही सर्मसार होते नजर चुराते मुहको साइडमे घुमाने लगी.. उन्को अभीभी यकीन नही हो रहाथा की उनकी जबरदस्त चुदाइ अपने भाइने करली थी.. उनको अभी भी अपनी चुतमे देवायतका सख्त लंड महेसुस हो रहाथा ओर वो नैन चुराते देवायतके सरको सहेला रहीथी तभी देवायत उनके चहेरेको अपने दोनो हाथोमे थामके अपनी ओर करता हे ओर उनकी आंखोमे देखते होंठ चुम लेता हे ओर धीरेसे कहेता हे....अब आगें

देवायत : बेबी तुम मुजे चारुके बारेमे कुछ बताने वालीथी..

पुनम : (सरमाते हसते) हां भाइ वो चारुभाभीके बारेमे नही इनकी बेटी वंदनाके बारेमे मुजे आपसे अ‍ेक बात करनीथी..

देवायत : (उनकी आंखोमे देखते) हां बेबी बोल क्या बात करनी थी.. उन्होने कुछ कहा..? क्युकी उनकी हमारे गांवकी स्कुलमे नोकरी पक्की कर रहा हु..

पुनम : (सरमाते) भाइ वो बात नही हे.., बात दरसल येहे की जब आपकी सादी नही हुइथी तबसे वो आपको चाहती हे.. ओर जब उनके दीलकी बात आप तक पहोचाये उनसे पहेलेही आप ओर भाभीकी लव स्टोरी उनके सामने आगइ ओर आपकी सादीभी होगइ तो उसने अब जींदगीभर सादी नही करनेका फैसला कर लीया हे.. इसीलीये अब वो कीसी ओरसे सादी करनेको तैयार नही हे..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) क्या बात कर रही हे..? बेबी अ‍ैसा नही होता तेरी तो पक्की सहेली हे तुम उसे समजाओ कीसी अच्छे लडकेसे सादी करले.. अकेली जींदगी कैसे काटेगी..?

पुनम : (सरमाते) भाइ मेने उनको बहोत समजाया लेकीन वो माननेको तैयार ही नही हे.. वैसेभी चाहत क्या होती हे वो हमसे बहेतर कौन जानते हे..चाहे में हु या भाभी, या फीर वंदना हो या मेरी सांस.. भाइ हम सभी आपको दीलोजानसे चाहती हे ओर आपको पानेके लीये हम कीसीभी हद तक जानेके लीये तैयार हे..

देवायत : सब पागल हो.. मुजमे अ‍ैसा क्या देखलीया.. जो सब मेरेही पीछे पागल हे.. बेबी तु उसे मेरा नाम लेके अ‍ेक बार ओर समजाओ सायद मान जाये..

पुनम : भाइ मेने बहुत ट्राइ कीया लेकीन वो अब इस बारेमे बात करनेको तैयारही नही हे.. मेरी सगाइमे आइथी तबभी वो सीर्फ आपकोही देख रहीथी ओर बार बार अपनी आंख गीली करती थी..भाइ मेरे खयालसे आप अ‍ेक बार उनसे बात करलो सायद आपकी बात मान जाये.. कहोतो आप दोनोकी मींटींग करवादु..?

देवायत : नही डार्लींग अभी रहेने दे हम मौका मीलतेही बात करलेगे.. वेसेभी उनको लेकर अ‍ेक बार सहेरमे जाना पडेगा क्युकी उनकी नोकरीकी बात पकी करनी हे..

पुनम : भाइ तब आपके पास बात करनेका अच्छा मौका होगा तो आप खुद बात कर लेना..

देवायत : चलो देखते हे मे उनसे बात कर लुगा.. वो बहुतही अच्छी ओर सीधी लडकी हे..

पुनम : (सरमाते हसते सरारतसे) तो फीर भाइ मे कैसी लडकी हु..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अरे तु सीर्फ अच्छी थोडीना हे मेरी डार्लींग बहेन बहुतही अच्छी खुबसुरत ओर सेक्सी हे..

पुनम : (सरमाते हसते) अच्छा..? तभीतो अभी भी मेरे उपर पडे हो.. भाइ अपनी बहेनको चोदकर कैसा लगता हे आपको..?

देवायत : (होंठ चुमते) अरे पुनो बातही मत कर.., अ‍ैसा लगताहे तुजे जींदगीभर चोदताही रहु.. तु तेरी भाभी ओर तेरी सांससे भी बहोत होट हे.. बेबी अ‍ेक बात याद रखना जबतक हम दोनो बुढे नही होजाते ओर हमारी चुदाइकी क्षमता खतम नही होजाती तबतक मे तुजे अ‍ैसेही चोदता रहुगा आइ प्रोमीस.. हें..हें..हें..

पुनम : (बुरी तराह सरमाके हसते) भाइ तबतो मुजे आपका बहोत ख्याल रखना पडेगा..देखना अपने वादेसे मुकर मत जाना.. मेभी आपसे वादा करती हु आपको मे हमेसा अ‍ेसेही प्यार देती रहुगी जैसा अभी दे रही हु..

दोनो अ‍ेसीही कामुक बाते करते फीरसे गरम होने लगते हे तभी पुनम मदहोसीमे नसीली आंख करते देवायतकी आंखोमे देखते उनके होंठ चुमने लगती हे अ‍ेक बार फीर दोनो मुह खोलके अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगते हे तभी देवायत उनके बुब्सको मुहमे लेके चुसने लगता हे ओर चुसते चुसते बुब्सके नीपलको अपने दातोसे दबाके खीचने लगता हे तब अ‍ेकबार फीर दोनो कामाग्नीमे जलने लगे..

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तब दुसरी ओर काम ओर रतीभी फीरसे दोनोके उपर मदहोसी ओर कामुक्ताके बाणोकी बारीस करने लगे दोनोही फीरसे मदहोसीमे छाने लगे देवायत बारी बारी दोनो बुब्सके नीपलको चुसते उनके होठोसे खीचने लगातो पुनम पुरी तराह पागल जैसे होगइ उनको देवायतकी इस हरकतको बरदास्त करना मुस्कील हो गया..ओर पुरी कामातुर होगइ.. ओर अपनी कमर धीरेसे हीलाने लगी..

तभी पुनमने देवायतके सरके बाल पकडते उसे अपनी मुहकी ओर खीचलीया ओर उनके होंठोसे लीपलोक करते जोरोसे होंठ चुसने लगी..तो देवायतका लंड चुतके अंदरही रहेके जटके मारने लगा..तभी अचानक देवायत पुनमके पैरोके बीच बैठ गया ओर पुनमकी कमरको पकडके अपनी ओर खीचलीया तब पुरा लंड पुनमकी चुतमे जडतक बच्चेदानी तक चला गया ओर पुनमकी अ‍ेक हल्कीसी चीख नीकल गइ..

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ओर पुनमने आंख बंध करते जोरोसे चदरको पकडली.. तभी देवायत कमर हीलाते हल्के हल्के सोट मारते पुनमको चोदने लगा..तब पुनम पुरी तराह कामाग्नीमे जलते चुदाइके नसेमे छा गइ.. वो बस आंख बंध करते अपनी चुदाइका पुरा मजा लेने लगी.. वो यहीतो चाहतीथी की उनका भाइ इनकी इसी तराह पुरी रात चुदाइ करता रहे.. वो देवायतके हर धक्केको आंख बंध करते महेसुस कर रही थी तब उनके गोरे गोरे संतरे जेसे बुब्स देवायतके हर धक्केके साथ तालमेलमे उछल रहेथे.. जो देवायतको कामुक्ताकी ओर धकेल रहेथे..

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देवायत काफी देर अ‍ेसेही पुनमकी चुदाइ करता रहा तभी पुनमने चुदाइ करवाते देवायतकी ओर देखा ओर उसे अ‍ेक हाथ लंबा करते अपने उपर आनेका इसारा कीया तो देवायत बेठे बेठे पुनमको चोद रहाथा ओर वो चुदइ करते करतेही पुनमके उपर जुक गया ओर पुनमने अ‍ेक पैर उपर उठालीया ओर देवायतके कंधेपे रखते देवायतका चहेरा अपने दोनो हाथोसे पकडलीया ओर चुदाइ करवाते लगातार देवायतकी आंखोमे कामुक भरी नजरोसे देखती रही..

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पुनम : (मदहोसीके नसेमे) भाइइइ बससस अ‍ेअ‍ेसेसेसेहीहीही मेरीरीइइइ चुदाइइइइइ करतेअ‍ेअ‍े रहेहेहेनानाना.. क्याआआआ मस्ततत चुदादाइइइइ करररतेतेतेते होहोहोहो..

देवायत : (चुदाइ करते) हंमममम हाहाहा हां क्याआआ मस्ततत चुततत हेहेहे तेरीरीइइइइ तुजेजेजेअ‍ेअ‍े चोदददताताताहीहीहीइइइ रररहुहुउउउउउउ चुददवावायेयेगीगीनानां मुजजजसेसेअ‍ेअ‍े हंमममम..?

पुनम : (नसेकी हालतमे) हंमममहाहाहा.. चुददवावावउउउउउगीगीगीइइइ चोददलोलोलो मुजेजेससइइइइइइ.. जींदगीइइइइ भररर अ‍ेसे हीइइइ चुदवातीइइइ रहुगीइइइ..

दोनोही चुदाइमे इतना मसगुल होगये की वो दोनो क्या बाते कर रहेथे वोभी उनको नही पताथा दोनोही धीरे धीरे करते अ‍ेक बार फीरसे धमासान चुदाइकी ओर बढने लगे.. तभी पुनमने देवायतका चहेरा पकडके रखाथा उसे अपने चहेरेकी ओर खीचते लीपलोक करलीया ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया फीर अपनी कमरको उछालते जटके देने लगी तभी देवायतको अपने लंडपे पुनमका गरम पानी महेसुस हुआ..

तब उनका जोस कइ गुना बढ गया ओर पुनमकी चुतसे लंडको खीचके नीकाल दीया तबभी पुनम कुछ समजती उनसे पहेलेही पुनमको साइडमे करलीया ओर वो उनके पीछे लेट गया ओर पीछेसेही पुनमकी चुतमे अपने लंडको पुरा जडतक उतार दीया तब पुनमकी अ‍ेक हल्की चीख नीकल गइ ओर पीठके बल लेटते अ‍ेक पैर देवायतकी कमरपे डालके चुदवाने लगी तो देवायतभी अपना मुह पुनमके बुब्सपे रखते चुमने लगा ओर अ‍ेक हाथसे पुनमका दुसरा बुब्स जोरोसे मसलते पुनमकी जोरोसे चुदाइ करने लगा..

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जब पुनमसे देवायतकी अ‍ैसी चुदाइ बरदास्त करना मुस्कील होने लगा तो वो साइडमे करवड लेके सोगइ तब देवायत उनके नीतंबको पकडके पुनमको जोरोसे चोदने लगा जो पुनम देवायतका लंड अपनी बच्चेदानीसे टकराते महेसुस करने लगी उनको बहुत दर्द होने लगा वो अपने मुहको खुला रखते देवायतके हर सोटको बरदास्त करते तीलमीलाने लगी.. तभी अचानक देवायत पुनमकी कमर पकडते जोरोसे चोदने लगा..

तब पुनमकी हालत पतली होने लगी अब देवायतके धकेको बरदास्त करना मुस्कील होने लगा ओर देवायतभी अपनी चुदाइके चरम पर पहोंच गया वो पुनमकी कमरको अपने लंडकी ओर खीचते पुरा लंड चुतमे खीच खीचके जडतक घुसाने लगा तब पुनम पुरी तराह कांपने लगी ओर देवायतसे छुटनेकी कोसीस करते तीलमीलाने लगी तभी उनको बच्चेदानीपे देवायतका गरम पानी महेसुस होने लगा तो वोभी तीलमीलाते अ‍ेक बार फीरसे देवायतहे साथ जडने लगी ओर दोनोही साथमे जडते ढेर होगये..

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थोडी देर दोनो अ‍ेसेही बेसुध जेसी हालतमे पडे रहे.. अब तक पुनम देवायतसे चार बार चुदवा चुकीथी ओर इसी बीच ना जाने वो कीतनी बार जड चुकीथी..आज वो थकके चकना चुर हो चुकीथी इनका अ‍ेक अ‍ेक अंग दर्द कर रहा था क्युकी उनकी अभी जो चुदाइ हुइ इनमे देवायतने उनको बहुतही कामुक ओर बुरी तराह चोद लीयाथा.. दोनोही अभीभी अ‍ेसे नीसब्द पडे थे तब उनकी चुतमे अभीभी देवायतका सख्त लंड घुसा हुआथा.. जो मुरजानेका नामही नही ले रहाथा..

तभी पुनमकी चुतसे दोनोका काम रस अपनी जगाह बनाते बहारकी ओर टपकने लगा जो पुनमके पैरोसे होते हुअ‍े उनकी चदरको गीली कर रहाथा लेकीन दोनोही हीलनेकी स्थीती मे नहीथे तब दोनोही अ‍ेसे पडे रहे ओर उनकी कब आंख लग गइ दोनोको पताही नही चला पुनमतो मानो अभीभी बेहोसीकी हालतमे सोइ हुइ थी दोनो काफी देर अ‍ेसेही सोते रहे तभी पुनमको नींदमे अपनी चुतमे कुछ हरकत महेसुस हुइ तब उनकी आंख अचानक खुल गइ ओर वो डरते देखने लगी..

देखा तो देवायत उनको पीठके बल सुलाते उनकी चुतमे लंड घुसा रहाथा.. वो कुछ कहेती समजती उनसे पहेलेही देवायतने उनकी चुतमे पुरे लंडको घुसा दीया ओर पुनमके उपर जुकते लेट गया ओर धीरे धीरे कमर हीलाते पुनमको फीरसे चोदने लगा तब पुनमने अपने दोनो पैर मोडके फैला दीये ओर उनकी कमरपे हाथ रखते अ‍ेसेही पडी रहते देवायतकी आंखोमे देखती रही.. फीर चुदवाते हुअ‍े धीरेसे कहा..

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पुनम : भाइ मे बहोत थक गइ हु.. आप धीरे धीरे करना अबतो हीलनेकी भी ताकात नही हे..

देवायत : (चुदाइ करते) बस बेबी ये आज आखरी बारही हे.. तुजे देखते आज बहुतही प्यार आ रहाहे तेरे जेसी बीवी पाकर मे धन्य होगया अबतो तुजे जींदगीभर मे अ‍ेसेही चोदता रहुगा..

पुनम : (चुदवाते हुअ‍े) भाइ आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे..

देवायत : हां डार्लींग बोल.. अबतो तु मेरी बीवीहे जोभी कहेना हो बीन्दास बोला कर..

पुनम : (चुदवाते सरमसे) भाइ..वो..मेरी सादीके बाद मुजे.. ये अ‍ेकही सालमे बच्चा चाहीये..

देवायत : (सोट मारते उसे देखते) बेबी इतनी जल्दी? कुछ सालकातो इन्तजार करती इतनी जल्दी क्यु हे..?

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ कुछ बाते मुजतक सीमीत रहेने दीजीये यही समजलो ये बाबाका हुकुम हे..

देवायत : (पुनमकी आंखोमे देखते चोदते) बेबी अ‍ैसी क्या बात हे जो मे नही जानता.. मुजे तुजे बच्चा देनेमे कोइ अ‍ेतराज नही लेकीन बेबी तेरी पढाइ डीस्टर्ब होजायेगी इनके बारेमे कभी सोचा हे..?

पुनम : भाइ वो सब मे मेनेज कर लुगी वो सब मुजे पता हे.. बस.. मे जब कहु मुजे बच्चा चाहीये..

देवायत : (चोदते होठ चुमते) ठीक हे बेबी तुजे जबभी बच्चा चाहीये मुजसे कहेना क्युकी मे तेरी सब बात समज रहा हु मुजे कुछ ओर नही जानना.. मुजे पता हे वो मेरे लीये कीतनी तकलीफ दायक हे..

पुनम : नही भाइ आपको स्ट्रोंग होना पडेगा तब हम दोनोकी स्थीती अ‍ेक जेसी होगी.. लेकीन आप फीकर मत करना मे हुनां.. मे आपको सम्हाल लुगी..

देवायत : (थोडा जोरोसे चोदते) बस..बेबी बाकीकी बाते हम कल फुरसतमे करेगे अभी मुजे मजा करने दे..

कहेते अ‍ेक पैर बेडके कीनारे नीचे रखते दुसरे पैरको मोडके बेडपे रख दीया ओर खडा होके पुनमकी कमरको पकडते उसे अपने पैरोकी ओर खीच लीया ओर पुनमको जोरोसे चोदने लगा तब पुनमने अ‍ेक पैर मोडके अपने हाथोसे पकडलीया ओर अ‍ेसेही थकी हुइ पडी रहेके देवायतसे चुदवाती रही..

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वो आज देवायतसे चुदवाते चुदवाते थकके चकना चुर हो चुकीथी फीरभी देवायतको मना नही कर पा रहीथी चुदवाते वो लगभग बेहोसीकी हालतमे जाने लगी तभी अचानक देवायत बेडसे उतर गया ओर पुनमकी कमरको पकडते खीच लीया ओर पुनमको जोरोसे चोदने लगा तब पुनम बेडके कीनारे पैर मोडके देवायतकी कमरको पकड लेती हे अब उसे देवायतका लंड अपनी चुतमे बरदास्त नही हो रहाथा वो लगभग बेहोस जैसी हो चुकीथी ओर पुनम अ‍ेसेही पडी रहेके देवायतके हर धकेको बरदास्त करती रही.. तभी देवायतने चुतमे जडतक लंडको घुसा दीया ओर धीरे धीरे कमरको जटके देते पुनमको चोदते जडने लगा..

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तब ढेर सारा विर्य पुनकी बच्चेदानीपे पीचकारीया मारते पुनमकी चुतको भरता रहा ओर वो जडके पुनमके उपर ढेर होगया तब पुनम अ‍ेसेही बेहोसीकी हालमे पडी रही.. फीर देवायतने लंडको खीचलीया तो चुतसे फच..की आवाजके साथ बहार आगया ओर देवायत खडा होके पुनमको अपनी गोदमे उठाके बाथरुममे लेगया ओर उसे नहेलाने लगा तब जाके पुनमको होस आया फीर उसनेभी नहा लीया ओर दोनोही तन पोछके बहार आगये..

तभ देवायतने पुनमको गाउन पहेना दीया ओर चदरको अ‍ेक बार फीरसे चेन्ज करलीया ओर पुनमको यही बेडपे सुलाके उनके उपर कंबल डाल दीया.. फीर वोभी अपने कपडे पहेनके बहार जाने लगा तो पुनमने उनका हाथ पकड लीया तो देवायत उनके पास बेडके कीनारे बेठ गया तो पुनमने उनकी गोदमे अपना सर डालदीया ओ देवायतकी आंखोमे देखने लगी फीर देवायतके मुहकी ओर मुह लेजाते देवायतके होंठ चुमलीये ओर मुस्कराते उनकी आंखोमे देखते कहेने लगी..

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पुनम : (सरमाते होठ चुमते) भाइ थेन्क्स फोर ब्युटीफुल नाइट.. आपने मेरी हर तम्मना पुरी करदी.. आज आपने मुजे पुरी तराह तृप्त करदीया.. मे हमारी इस सुहागरातको कभी नही भुलुगी..

देवायत : बस बेबी.. अब सोजा तु आइपील लेना मत भुलना ओर बहुत दर्द होतो पेइनकीलर भी लेलेना कल हमे तेरी भाभीको लेने जाना हे हम सामको चलेगे.. चलो गुडनाइट..

पुनम : (होंठ चुमते) भाइ आपभी यही सोजाओनां.. सुबह चले जाना..

देवायत : (हसते) बेबी घडीमे देखा हे..? ओल मोस्ट सुबहतो होनेको आइ हे देखो ४ बज गये हे अभी अ‍ेक दोढ घंटेमे दया ओर रजीया जाग जायेगी हमे अ‍ेक साथ देखके क्या सोचेगी..? चल सोजा हम कल मीलतेहे तु अच्छी तराह आराम करले भलेही सुबह उठनेमे देर होजाये.. ओके चल गुड नाइट

कहेते देवायत अ‍ेक बार फीर पुनमके होंठोपे कीस करके अपने रुमकी ओर चला जाता हे ओर अंदर जाके चेन्ज करके वोभी सो जाता हे तब भानुके घरभी लता ओर लखन तीन बार चुदाइ करके अ‍ेसेही नंगे अ‍ेक दुसरेके चीपकके सो गये थे.. आजकी रात लता ओर पुनमके लीये जींदगीकी अनमोल ओर बहेतरीन रात थी जो दोनोही अपना कौमार्य अपने पतीको सोंपके चेइनकी नींद सो रही थी.. लेकीन....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ५०

कहेते देवायत अ‍ेक बार फीर पुनमके होंठोपे कीस करके अपने रुमकी ओर चला जाता हे ओर अंदर जाके चेन्ज करके वोभी सो जाता हे तब भानुके घरभी लता ओर लखन तीन बार चुदाइ करके अ‍ेसेही नंगे अ‍ेक दुसरेके चीपकके सो गये थे.. आजकी रात लता ओर पुनमके लीये जींदगीकी अनमोल ओर बहेतरीन रात थी जो दोनोही अपना कौमार्य अपने पतीको सोंपके चेइनकी नींद सोइ थी.. लेकीन....अब आगे

लेकीन उन दोनोको नही पताथा की आने वाले वक्तमे दोनोकी जींदगीमे कैसा भुचाल आने वाला था सुबह छे बजतेही लताकी आंख खुल गइ तो खुदको नंगीही लखनकी बाहोमे सोती हुअ‍े पाया तो वो बहुतकी सर्मसार होके स्माइल करने लगी.. फीर धीरेसे लखनकी बाहोसे बहार आगइ ओर फटाफट नहाने चली गइ फीर नहाके आयनेके सामने कंपलीट तैयार होगइ ओर फटाफट चाइ नास्ता बनालीया ओर लखनको जगाने चली गइ..

लता : (सरमाते) लखन.. ओ लखन.. सुनीये उठ जाइअ‍ेनां.. आपको जाना नही हे क्या..?

लखन : (नींदमे) सोने दोना.. पुरी रात जागे हे यार.. बहोत नींद आ रही हे..

लता : (सरमाते हसते) क्या नींद आ रही हे..? उठीये आपको धर नही जाना क्या..? वहा बडे भैया ओर पुनमदीदी आपको नही देखेगी तो क्या कहेगे.. चलीये उठीये..

तभी लखनको रीयेलाइज हुआकी वो कलसे यही लताके पासही हे ओर वो फटाफट उठ गया फोरन घडीकी मे देखके लताकी ओर देखते स्माइल करने लगा, तब लता उनको बेडसे खीचके बाथरुममे धका मारते हसने लगी ओर वापस कीचनमे चली गइ तब लखन फटाफट नहाके कंपलीट होगया ओर बहार आगया वो सीधेही कीचनमे चला गया तो पुनम उनके लीये नास्ता बना रहीथी तब लखन उनके पीछे चला गया ओर पीछेसे लताको बाहोमे भरलीया ओर उनके गालको चुमने लगा..

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लता : (सरमाते हसते) बस बाबु अब ओर कोइ सरारत नही.. कलसे लगे हो.. अब चाइ नास्ता करलो ओर फटाफट नीकलो यहासे.. वरना आपको पुनमदीदी ओर भाइको जवाब देना पडेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (लताके गालको चुमते) बेबी.. मे यहा हु वो सब पुनोदीदीको पता हे उन्होने ही मुजे सब परमीशन दी हे बस सीर्फ भाइको नही पता.. चल नीकलता हु फीर कभी मीलेगे..

लता : (सरमाते) जानु चाइ नास्ता तो करते जाओ.. मेने बनालीया हे फीर चले जाना..

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फीर दोनोही साथमे चाइनास्ता करलेते हे ओर लखन अ‍ेक बार फीर लताको अपनी बाहोमे भरके बेइम्तहा चुमने लगता हे ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठ चुम लेते हे फीर लखन अपनी बाइक लेके वहासे नीकल जाता हे.. उसे अभी घरपे जाना उचीत नही लगा क्युकी सुबह सुबह देवायत के सवालोका जवाब देना पडता इसीलीये वो सीधेही अपने खेतोपे चला गया ओर वही जाके खटीयापे लेट गया..

उधर देवायत ओर पुनमभी देर तक सोते रहे रजीया ओर दयाभी दोनो जब कोइ अपने रुममे होताहे तो वहा अंदर नही जाती उसे जब कहा जाताहे या रुममे कोइ नही होता तबभी वो अंदर जाती हे तो दोनोही भाइ बहेन देरतक सोते रहे लेकीन पुनमकी आंख आठ बजे खुल गइ ओर खीडकीसे सुरजकी रोसनी देखते वो बेठपे फटाकसे बेठ यइ ओर घडीमे देखने लगी तो आठ बज चुकेथे तो वो जटसे बेडसे उतर गइ..

ओर बाथरुमकी ओर जाने लगी तबभी उनको अपनी चुतमे कुछ अजीबसा मीठासा दर्द महेसुस हो रहाथा तो उनकी हसी नीकल गइ.. ओर वो थोडी लडखडाते बाथरुमकी ओर चली गइ फीर अंदर जातेही वो फ्रेस होगइ ओर नहाते अ‍ेक बार फीरसे अपनी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करली, ओर बहार आके तैयार होते पुरी रातके घटनाक्रमके बारेमे सोचती रही.. ओर मनही मन खुस होती रही..क्युकी कलके बीते हुअ‍े दीनकी पुनम ओर आजकी पुनममे काफी फर्क था..

कलकी पुनम अ‍ेक क,लीथी अ‍ेक लडकीथी, ओर कंवारी थी.. जो आज वो कलीसे फुल तो लडकीसे ओरत ओर अपनेही भाइकी सुहागन हो गइथी, आज उसने अ‍ेक सारी पहेनली फीर आयनेके सामने खडी होके सुहागनकी तराह सब शींगार करने लगी.. ओर अपने बालोको थोडा हटाके अपनी मांगमे देवायतके नामका सींदुरभी लगा दीया ओर अपने बालोमे छुपालीया ताकी ओर लोगोकी नजरोमे ना आये..

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फीर उसने अ‍ेक पेइनकीलर ओर आइपीलकी गोलीभी खाली ओर अच्छेसे तैयार होके वो चदरको सम्हालके समेटने लगी जो उनपे अपने ओर देवायतके प्यारके ओर कौमार्य भंगके नीशान मौजुद थे वो उसे लेकर अ‍ेक केरी बेगमे सम्हालके रखती हे फीर अच्छेसे अलमारीमे रख देती हे ओर धीरे धीरे चलते बहारकी ओर आगइ तब दया ओर रजीया दोनोही उपरकी मंजीलमे सफाइ करने मे लगी हुइ थी..

तब वो धीरेसे देवायतके रुममे चली जाती हे ओर दरवाजा बंध करते पलटके देखती हे तो देवायत अभीभी घोडे बेचके सो रहाथाप तो उसे देखके पुनमको हसी आगइ ओर सरमाते बेडकी ओर बढ गइ वहा जाके देवायतके सरके पास बेठ गइ..ओर उनपे जुकके थोडी देर उनका चहेरा देखती रही फीर धीरेसे अपना चहेरा जुकाके देवायतके होठोपे अपने होंठ रख दीये.. तभी देवायतकी आंख खुल गइ तो पुनमकी कमरपे हाथ डालदीया.. ओर उसे अपने उपर खीचते बाहोमे भरलीया तो पुनम सरमाते हसने लगी..

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पुनम : (प्यारसे होंठ चुमते) पतीदेव उठीये.. पता हे कीतने बजे हे..? जाना नही हे क्या..?

देवायत : (होंट चुमते हसते) अरे सुबह सुबह मेरी इस खुबसुरत सेक्सी बीवीका दीदार होगया अब कोन कमबख्त जाना चाहेगा.. पुनो यही मेरे पास सोजाओ हमे फोन आयेगे तब जायेगे..

पुनम : (जुठा गुसा करते बेडसे खडी होते) कोइ जरुरत नही.. वहा आपकी दोनो बीवीया बेचारी अकेली आपका वेइट करती होगी ओर जनाबको अभी इस्क फरमाना हे.. चलीये उठीये मे चाइनास्ता रेडी करवाती हु.. आप फटाफट नहा लीजीये तबतक मे आपके कपडे इधर रख दुगी.. जाइअ‍े.. बडे आये प्यार करने वाले..

कहेते पुनम देवायतका हाथ खीचके उनको खडा कर देती हे ओर सरारतसे मुस्कराते उनको बाथरुमकी ओर धकेल देती हे.. तो देवायतभी हसते हुअ‍े बाथरुममे घुस जाता हे ओर फटाफट नहाने लगता हे, तबतक पुनम बहार कीचनमे चली गइ ओर दयाको आवाज देके चाइनास्ता रेडी करनेको कहेती वापस देवायतके रुममे चली जाती हे ओर देवायतके कपडे नीकालके वही बेडपे रख देती हे.. ओर खुदभी वहा वेइट करते बेठ जाती हे..

तभी देवायत बहार आके फटाफट तैयार होने लगा तब पुनम धीरेसे रुमका दरवाजा बंध करके देवायतके पास चली जाती हे तो देवायत पलटके उसे जोरोसे बाहोमे भीच लेता हे ओर दोनो पागलोकी तराह अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमने लगते हे.. फीर काफी देर अ‍ेक दुसरेके आलींगनमे खडे रहे फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देखते हे ओर अ‍ेक बार फीर होंठ मीलाके कीस करते हे फीर पुनम नजर जुकाके सरमाती हे ओर कहेती हे..

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पुनम : भाइ थेन्कयु सो मच.. आपने मुजे मेरी राखीका खुबसुरत तोहफा दीया.. मेने उसे सम्हालके रखदीया हे मे उसे जींदगीभर सम्हालके रखुगी, अब भाभीतो आपकी नइ बीवीके वहा कुछ दीन रहेगी.. अबतो यहा मेही आपकी बीवी हु.. आजसे आपका हर काम मुजेही करना हे अब मेही आपका खयाल रखुगी.. ओर हां.. अब हो सकेतो हर रात आप मेरे साथ ही सोना वरना देर रात मे आपके रुममे चली आउगी..

देवायत : लेकीन बेबी इधर दया ओर रजीया.. इन दोनोका खयाल रखना पडेगा मे नही चाहता हमारे नये रीस्तेके बारेमे कीसीको पता चले.. हमे अभी कोइ रीस्क नही लेना.. क्युकी मुजे ये रीस्ता अब जींदगी भर नीभाना हे.. ओर तुमभी सावधानी बरतना बाकी आगे सब देखा जायेगा..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. अब होसके इतनी जल्दी मुजे अ‍ेक काम करना हे जो बाबाने मुजसे कहा हे.. फीर वो काम होजाये फीर हम अपने तरीकेसे खुलके जींदगी जीयेगे..

देवायत : बेबी हमारे पास बहोत टाइम हे चल हम रास्तेमे बाते करेगे हम इतनी देरसे अंदर हे.. वो दोनो खामखा सक करेगी.. चल चाइ नास्ता करके हम नीकलते हे..

कहेते देवायत ओर पुनम दोनोही बहार आगये ओर साथमे चाइ नास्ता करने बेठ गये तब पुनमने लखनको फोन करदीया तो लखन खेतोपे सोया हुआ था ओर वो धर आनेको नीकल गया.. तो इधर पुनम चाइ नास्ता करते दया ओर रजीयाको कुछ कामकी बाते कर लेती हे.. फीर दोनो चाइ नास्ता करके नीकल जाते हे तब पुनम देवायतके बाजुमे बैठ गइ ओर उसने कारको सीधे आश्रममे लेजानेको कहा..

देवायत : बेबी अभी आश्रम जाना हे..? वापसीमे जायेगेनां..

पुनम : हां भाइ वापसीमे तो भाभी ओर मम्मीजी भी साथमे होगी.. फीर उनको घर छोडके जायेगे तो रातमें बहोत देर होजायेगी.. अभी हमारे पास पुरा टाइम हे हम आश्रमसे सीधे होस्पीटल चले जायेगे..

देवायत : हां बेबी येभी सही हे, अब बोल तु क्या केह रहीथी मुजे तेरा कोनसा काम करना हे जो बाबाने तुजे कहा हे..

पुनम : (सरमाते नजर जुकाते) भाइ..वो..वो मेरी सादीसे पहेले मुजे आपको प्रेगनेन्ट करना पडेगा.. मुजे आपका बच्चा चाहीये.. प्लीज आप कुछभी करके मेनेज करलो.. मे हमारा बच्चा चाहती हु..

देवायत : (अ‍ेक नजरसे पुनमको देखते) लेकीन बेबी इतनी जल्दबाजी क्यु..? क्या कोइ खास वजह..?

पुनम : हां भाइ कुछ बाते मे आपको अभी नही बता सकती वो बाते वक्त आनेपे आप खुद समज जायेगे..

देवायत : (हसते) लगता हे तुम ओर बाबाने मीलके काफी कुछ तैय करलीया हे.. कभी कभी मे तेरी ओर मंजुकी बाते समज नही पा रहा हु.. पता नही तुम दोनो कौन हो..

पुनम : (हसते) भाइ अब आप मेरी सादी धिरेनसे करवा रहे हो.. तो सादीके बाद मे उनको दुरतो नही रख सकती.. वोभी सबकुछ करेगा जो हमने हमारी सुहागरातमे कीया हे.. तो मे चाहती हु मेरा ओर धीरेनका मीलन होनेसे पहेलेही आपका बीज मेरे गर्भमे स्थापीत होजाये.. ताकी मुजे तसली मील जाये की ये बच्चा हम दोनोका ही हे.. फीर मुजेभी धिरेनसे मीलनेका कोइ अफसोस ना रहे..ओर बाबाका कामभी हो जाये..

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कहेते पुनम देवायतके सामने देखती रहेती हे.. तो देवायत अ‍ेक बार फीरसे पुनके होठ चुम लेता हे फीर पुनम उनके कंधेपे सर रख देती हे ओर देवायत कारको तेजीसे आश्रमकी ओर दोडाने लगता हे.. दोनोही खामोस बेठे आने वाले वक्तके बारेमे सोचते रहेते हे.. अब पुनमकोभी गोली खानेकी वजहसे अपनी चुतमे काफी राहत महेसुस हो रहीथी.. जब दोनो आश्रममे पहोचे तब पुनम काफी हद तक ठीक हो चुकीथी ओर वो देवायतका हाथ पकडकते अ‍ेक बीवीकी भांती साथमे चलने लगी..

अब पुनम ठीकसे चल रही थी.. दोनोही अंदर आगये तो बाबा कुछ सेवकोके साथ बेठेथे.. जो ठाकुर देवायतको देखतेही सब खडे होगये ओर उनसे नमस्कार करके अंदरकी ओर जाने लगे.. तब देवायत ओर पुनम अपने सरपे सारी ढकके बाबाके पैर छुके वही बेठ गये..तब बाबाने हसके पुनमको अखंड सौभाग्यके आशीर्वााद दीये.. ओर देवायतके सामने देखके हसते रहे.. तब पुनमभी मुस्कराते सर्मीन्दा होते हसने लगी..

बाबा : (हसते) कहो बेटा..दोनो मीया बीवी होस्पीटल जा रहे हो..?

देवायत : हां बाबा पुनमको इधर आनाथा.. तो सोचा यहा होते हुअ‍े जायेगे तो आगये..

पुनम : (सरमाते हसते) बाबा क्या आप मेरी वो सादी टाल नही सकते..? मुजे हमेसाके लीये भाइके साथ रहेना हे.. अब इनके बीना रहेना मुस्कील लगने लगा हे.. बाबा इनके प्रती मेरा प्यार ओर बढ गया हे.. ओर बढताही जा रहा हे.. आप कुछ कीजीयेनां..

बाबा : (हसते सरपे हाथ रखते) मेरी बच्ची.. बेटी में तेरी सादी जरुर टाल सकता हु.. लेकीन तु दुनीयाको क्या कहेती फिरेगी..? भुल मत तेरी सादीके बारेमे सीर्फ हम तीनोही जानते हे.. दुनीयाकी नजरमे तु आजभी अ‍ेक कुंआरी लडकी हे.. दुनीयाकी नजरमें तु बीना सादीके अपने घरमे रहेगी तो लोग तुजे ओर ये तेरे पतीकोही ताने मारेगे की बहेनकी सादी नही करवाइ.. तु यकीन कर.. तुजे उन (धिरेनसे) सादीसे कोइ फर्क नही पडेगा.. तु सादीके बाद तेरे भाइके यानी ये तेरे पतीके साथही रहेगी, तो कमसे कम येतो केह सकेगीकी तुम विधवा होके आइ हो.. तब लोग कुछ नही कहेगे.. ओर तुम अपने भाइके साथ उनकी सुहागन बनके खुलके जी सकोगी.. ओर जींदगीका आंनद लेते वो सब कार्य करती रहोगी.. जीसके लीये तुम्हारा जन्म हुआ हे..

देवायत : (सोक्ट होते) क्या..? मतलब बाबा वो धिरेन भी.. लेकीन क्यु..?

बाबा : बेटा ये बात अभी कीसीको नही बताना.. वो लडका बहुतही अल्प आयु वाला हे.. ये उनसे सादी नही करती तबभी वो अपने समयपे चला जाता.. तभीतो तेरी इस बहेनकी सादी इनसे करवा रहा हु.. ताकी तुम दोनो फीरसे मील सको ओर तबतक तुम दोनोकी बच्चीभी इस दुनीयामे आचुकी होगी.. जो लोग यही समजेगे की ये बच्ची वो लडके ओर इनकी हे.. तु मेरी बात समज रहा हेनां..?

देवायत : जी बाबा अब काफी कुछ समजमे आ रहा हे.. तो ये बात मंजु ओर आप दोनोही जानते हे.. मुजे अ‍ैसे खुलके बात क्यु नही बताते..?

बाबा : (हसते) बेटा.. तुम सीर्फ अ‍ेक महान कार्यके लीये आयेहो.. तभीतो मेने तुजे वो हर छुट दे रखी हे.. तेरे ही कारण कही कोखसे वो सब जन्म लेगी.. जीसके लीये काम ओर रतीने तुजे चुना हे.. ओर ये सब बाते मेरी मंजु बेटी ओर कुछ बाते मेरी इस बेटीभी जानती हे.. तु फीरक मत कर तुजे जो मनमे आये करता जा.. वरना सोच.. कोइ महात्मा कीसीको अ‍ैसा कार्य करनेके लीये थोडीनां कहेते हे.. मे जोभी कर रहा हु बहुत कुछ सोच समजके कर रहा हु..

पुनम : (सरमाते) हां भाइ बाबाने मुजे सबकुछ बता दीया हे तभीतो मे सादीसे पहेलेही आपसे..वो बच्चा..

बाबा : (सीरीयस होते) बेटा तु इनसे कोइ सवाल मत कर.. जो तेरी इस बीवी कहे वो सब कार्य करता जा.. सही समय आयेगा तब तुजे सब ज्ञात होजायेगा.. तुम अभी इतना स्ट्रंोंग नहीहो की सब रीस्ते स्वीकार कर लोगे.. तभीतो मुजे इन दोनोका सहारा लेना पडता हे.. जैसे जैसे समय बीतता जायेगा तुजे बहुत सारे रीस्तोके बारेमे ज्ञात होजायेगा.. तब तुम विचलीत मत होनां.. क्युकी जीस तराह उस हिमाचलके राजाके खानदानमे जो हो रहाथा वोही सब पीछली कइ पीढीयोसे तुम्हारे खानदानमे भी हो रहा हे.. समज गयानां..?

देवायत : (हसते) जी बाबा.. अब काफी कुछ समजमे आ गया.. मतलब अब जोभी हो रहा हे या आगे जोभी होगा वो सब होने देना हे.. क्युकी मुजे लगता हे हमारा जीवन हमारे हाथमे हे ही नही.. ये कोइ ओरही चला रहा हे.. अ‍ेसा मुजे लगने लगा हे.. क्या मे सही हु नां बाबा..

बाबा : (जोरोसे हसते) हां अब जाके समजा.. बेटा तुम सब केवल अ‍ेक माध्यम हो.. जो उन शक्तिको इस दुनीयामे लानेमे भागीदार बन रहे हो.. बस मुजे तुमको इतनाही कहेना हे.. बाकी तुम दोनो अपने तरीकेसे जींदगी जीओ.. सब उन्हीकी मरजीसे होगा.. ओर तुम दोनो कोइ संकोच मत करना की हम दोनो रीस्तेमे क्या हे ओर क्या होगये.. इनसे आगेभी तुजे बहुत कुछ ज्ञात होगा.. ओर पीछली पीढीके बारेमें भी बहुत कुछ ज्ञात होजायेगा जो तुम दोनोको पताभी नही हे.. बस तुम सब अपनी जींदगी मजेसे जीओ..

पुनम : (सरमाके हसते) बाबा अब आप इनकी फीकर मत करो.. मे इनको सम्हाल लुगी.. मे आपकी सब बाते समज गइ.. अब मेभी कीसी रीस्तेसे विचलीत नही होउगी.. मुजेभी अब काफी बाते समजमे आ रही हे..

बाबा : (हसते) हां बेटी अब तुजेही इनको सम्हालना हे.. तु ओर तुम्हारी सास दोनोही इनको सम्हाल लोगी..

अ‍ेसेही कुछ बाते करते दोनो वहासे नीकल गये ओर जंगलसे होते गुजर रहेथे तब देवायतने कारको वही खंडहरकी ओर मोडदी तो पुनम सब समज गइ ओर सरमसे पानीपानी होने लगी.. तब देवायत कार चलाते पुनमकी ओर कामुक नजरोसे हसने लगा.. तो पुनमभी नजरे जुकाते सरमाते मुस्कराते रही.. ओर देवायतने कारको घने जंगलमे लेजाकर रोकदी.. फीर पुनमकी ओर कामुक नजरोसे देखने लगा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ५१

अ‍ेसेही कुछ बाते करते दोनो वहासे नीकल गये ओर जंगलसे होते गुजर रहेथे तब देवायतने कारको वही खंडहरकी ओर मोडदी तो पुनम सब समज गइ ओर सरमसे पानीपानी होने लगी.. तब देवायत कार चलाते पुनमकी ओर कामुक नजरोसे हसने लगा.. तो पुनमभी नजरे जुकाते सरमाते मुस्कराते रही.. ओर देवायतने कारको घने जंगलमे लेजाकर रोकदी.. फीर पुनमकी ओर कामुक नजरोसे देखने लगा....अब आगे

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ आपने इधर कार क्यु लेली..? चलीयेना देर होजायेगी..

देवायत : (हसते) क्या सचमे देर हो रही हे..? तु कहेतो मे कार फीरसे सहेरकी ओर जाने दु..

पुनम : (सरमसे पानीपानी होते हसते) भाइ मुजे नही पता.. आपको जो अच्छा लगे.. आइ मीन..

देवायत : (हसते) हां हां बोलना..आइ मीन.. क्या.. हें..हें..हें..

पुनम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) भाइ मुजे नही पता.. आप बहुत नोटी हो.. मालुम हे फीरभी..

कहेते बहुतही सरमाते मुह यीन्डोकी ओर घुमालीया ओर मंद मंद मुस्कराती रही.. दीलसेतो वोभी यही चाहतीथी की उनका भाइ उसे पटक के चोदले.. जबसे देवायतके साथ सुहागरात मनाइ ओर उनके भाइका तगडा ओर लंबा लंड अपनी चुतमे लीया तबसे वो देवायतके बहोत करीब हो चुकीथी ओर चाहतीथी की उनका भाइ हर वक्त उनको चोदताही रहे.. वो देवायतसे कीसीभी वक्त ओर कहीभी चुदनेके लीये तैयार रहेती..

तभी देवायत पुनमका सर पकडते वही नीचे जुका देता हे तो पुनमका मुह सीधा देवायतके लंडकी ओर चला जाता हे तभी देवायत अपनी पेन्टकी क्लीप खोलके लंडको बहार नीकाल देता हे तब पुनम सरमसे पानीपानी होगइ ओर देवायतके लंडको अपनी मुठीमे भरलीया ओर हल्केसे उपर नीचे करते सहेलाने लगी ओर धीरेसे लंडको मुहमे लेलीया तब देवायत आंख बंध करते पुनमके सरको सहेलाने लगा..

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तब दोनोही मदहोस होने लगे तभी देवायत पुनमकी सारीको सरकाके नीकाल देता हे ओर उनके ब्लाउसके हुकभी खोलने लगता हे तब पुनम सही होके सीधी बैठ गइ ओर खुद सारीको कमरसे ओर अपने ब्लाउसको नीकालके पीछे रखदीया तब देवायतने पुनमके पेटीकोटका नाराभी खीच लीया तब पुनम खुब सरमाइ ओर खुदकेभी कपडे नीकालनने लगा

तब पुनम सरमसे मुस्कराती पेटीकोट नीकाल देती हे.. जब दोनोही नंगे होगये तब पुनम वापस लंडकी ओर जुक गइ ओर देवायतका तगडा लंड मुहमे लेके अंदर बहार करने लगी.. तब देवायत उनके सरपे हाथ रखते सहेलाने लगा..

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पुनम : (सरमाते) भाइ क्या यहा वो सब करना हे.. मतलब क्या हम वही नीचे चले जाये..?

देवायत : नही बेबी इतनी बडी कार हे हम पीछेही चले जाते हे.. अभी सीटको ढालके बडी कर देता हु.. पहेले मेरी इस बहेनको थोडा प्यारतो करलु..

कहेते देवायत वही पुनमको जुकाते उनके ब्लाउसको नीकाल देता हे तब पुनमके गोरे गोरे संतरे जेसे बुब्स उछलके बहार आगये जीसे देखतेही देवायत पागल होके उनपे मुह लगा देता हे.. ओर अ‍ेक हाथ नीकरमे डालके चुतको सहेलाते बुब्सको चुसने लगता हे तब पुनम पुरी तराह कामाग्नीमे जलते मदहोसीमे छाने लगी ओर देवायतके बालोमे हाथ डालके सरको सहेलाने लगी..

तभी देवायत अ‍ेक उंगली चुतमे डालके सहेलाने लगता हे.. तो पुनम आधी आंख चडाके पुरे नसेमे चली गइ ओर सीसकारीया करते बालको सहेलाती रही..

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पुनम : (मदहोसीमे) सीसीइइइइ बससस बससस बससस भाइइइ कुछछछ होरररहाहाह हेहेउउउससससइइइइइ सीसीइइइइ हंमममम नननहीहीहीही भाभाइइइइइइइ चोदददलोलोलो मुउउउजेजेजे ससइइइइइइइ.. मुजसेसेसे.. रहा.. नहीइइइ जाता..

देवायत : (बुब्स चुसते) चोदलुउउउ तुजेजेअ‍ेअ‍े हंममम मुंमुउउउ बुचचच.. बुचचच.. हंममम हां.. बच्चा चाहीये..?

पुनम : (सरको सहेलाते मदहोसीमे) हंमम हांहां देदोओओ..भाइइइइ मेअ‍ेअ‍ेअ‍े आपकेअ‍ेअ‍े बच्चेचेचेकीकी मां बनुनुउउगीगीइइइ बनानादोदोदो मुजेअ‍ेअ‍े मां..सीइइइइइइइ हंमममम.. चोदलोलोलो..नांनां..सीइइइइइ..

तभी अचानक देवायत कारसे उतर गया ओर दुसरी ओर जाके कारका दरवाजा खोल दीया ओर पुनमको गोदमे उठालीया तब पुनम पुरी तराह मदहोस हो चुकीथी वो आधी आंख चडाके नसेकी हालतमे देवायतको देखती रही तब देवायत उसे पीछला दरवाजा खोलके लंबी सीट करके सुला देता हे ओर पुनमकी पेन्टीमे उंगली फसाके उसे नीकाल देता हे ओर खुद नीकर नीकालके पुनमके उपर चडके लेट जाता हे..

तब पुनम देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते खुदसे चीपका लेती हे ओर अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते देवायतके वीसालकाय लंडको मुठीमे पकडते अपनी चुतपे धीसने लगती हे थोडीही देरमे लंड गीला होगया तब पुनमने लंडको अपनी चुतके लव होलका रास्ता दीखा दीया ओर वापस देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते उनके होठोको लीपलोक करलीया.. वो चाहतीथी की उनका भाइ जल्द लंडको अपनी चुतमे घुसादे..

तब दुवायतने देरना करते अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड पुनमकी चुतमे उतार दीया तब पुनमकी जोरोकी चीख नीकल गइ जो इस सांत घने जंगलोमे गुंज उठी.. ओर देवायत उनके गलेके हाथ डालके जोरोसे कमरको हीलाके पुनमको चोदने लगा तब पुनम पुरी तराह कामातुर होके देवायतके गलेमे दोनो हाथ डालके चुदवाने लगी.. तब देवायत पुनमके गले होंठ उनके बुब्सको लगातार चुमते जोरोसे चुदाइ करता रहा..

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पुनम : (कामुक होते चुदवात.) भाइइइइ करदो हंममम मुजेजेजे प्रेगनेन्ट.. देदोओओ बच्चा.. मुजेअ‍ेअ‍े..

देवायत : हंमममम हां..हा..हंमममममम बेबीइइइइ तु मस्ततत हेहेहे तेरीइइइ चुतततत बहुत पसंददद हेहेइइइ..

कहेते देवायत पुनमको चोदेही जा रहाथा तब पुनमभी मदहोसीमे देवातके सीनेको फीर उनके होठोको चुमते देवायतसे कमर हीलाते चुदवाती रही.. उनकी नाजुक चुतकी नाजुक चमडी देवायतके सख्त लंडको बडीही मुस्कीलसे जेल रहीथी.. ओर पुरी चुतकी दोनो पंखडीया अंदर बहार होते देवायतके लंडको नीगल रहीथी..

वो लगातार पानी छोड रही थी.. तभी अचानक पुनमने देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते अपनी कमरको जटके मारते जडने लगी ओर देवायतके लंडको अपने गरम पानीसे भीगोने लगी..

फीरभी देवायत उनको चोदे ही जा रहाथा तब पुनम थोडी सीथील होगइ ओर नजरे चुराते देवायतके हर धकेको जेलती रही.. तभी देवायतके लंडनेभी जवाब देदीया ओर पुनमको जोरोसे बाहोमे भीचते उनके गलेमे मुह डालके कमरको जटके देने लगा तब पुनमने अ‍ेक बार फीर देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया ओर देवायत कमरको जटके मारते पुनमकी चुतको अपने गाढे रस से लबालब भरने लगा..

तब पुनम उनकी पीठ सहेलाते अपने गर्भासयपे देवायतके पानीको महेसुस करती रही.. ओर आंख बंध करते बाबाको मनही मन प्रेगनेन्ट होनेकी प्रार्थना करने लगी.. क्युकी वो अपनी सादीसे पहेलेही देवायतसे जल्दसे जल्द प्रेगनेन्ट होना चाहती थी.. जो उसने बाबाको वादा कीया था..

कुछ बाते अ‍ेसीथी जो बाबाने उसे खुलके बतादीथी जो देवायत नही जानताथा.. वो बस देवायतसे चुदके अपने मक्सदकी ओर बढ रहीथी..

दोनोही काफी देर अ‍ेसेही पडे रहे तबतक पुनम देवायतकी पीठ ओर उनके सरको सहेलाती रही ओर सरमके मारे उनसे नजरे चुराती रही.. देवायत अभीभी चुतमे लंड डालके पुनमके सीनेपे सर रखके पडाथा.. तब पुनम उनसे नजरे चुराते इधर उधर देखती रही तब देवायत धीरेसे उतर गया तो पुनमकी चुतसे फच..आवाजके साथ लंडभी बार नीकल गया.. तब पुनमने अपने दोनो पैर उपरकी ओर करलीया..

फीरभी पुनमकी चुतसे दोनोका कामरस बहेते पुनमके पैरोसे होते नीचेकी ओर जाने लगा तो पुनमने फटसे वहासे अ‍ेक नेपकीन पडाथा तो उठालीया ओर अपनी चुतपे दबाके रख दीया फीर धीरे धीरे चुतको साफ करते पैरको साफ करने लगी ओर धीरेसे बेठ गइ तब उनके बाल अस्त व्यस्त होगये..

आज देवायत पुनमको पुरे जोसमे चोदते उनकी चुतकी धजीया उडादी.. जेसे कोइ पंखीको जानवर पींख देता हे.. तब पुनम धीरेसे नंगीही बहार नीकल गइ तो उनके पैर लडखडाने लगे..

तब देवायतने जटसे उनका हाथ पकडके उसे थाम लीया ओर पुनमको वही खडी करते पानीकी बोटल नीकालने लगा ओर अपने लंडको साफ करते पुनमकी चुत ओर पैरको पानीसे धोने लगा.. तबतक पुनम देवायतको प्यारभरी नजरोसे देखती रही.. फीर दोनोही अपने अपने कपडे पहेनने लगे ओर अच्छी तराहसे बाल बनाके तैयार होगये..

पुनमको पताथा की उनका भाइ उनके पीछे पागल हो चुकाहे.. तो उनकी कहीभी कभीभी चुदाइ कर लेगा.. इसीलीये पुनम शींगारका कुछ सामान अब कारमेही रखतीथी.. तभी देवायतके फोनकी रींग बजने लगी तो देवायतने देखा वो भानुका फोनथा तो उसने उठालीया..

देवायत : हां भानु बोल क्या हुआ..?

भानु : (फोनपे) भाइ कहाहो आप..? अब आप भाभीको लेने आ भी जाओ सृतीने दोनोको छुटी देदी हे..

देवायत : (हसते) भानु फीकर मत कर हम लोग रास्तेमे ही हे.. अभी पहोंच जायेगे..

कहेते देवायतने फोन काट दीया ओर पुनमकी ओर देखके हसने लगा तब पुनम सरमसे पानीपानी होगइ ओर देवायतने उनको कारमे बीठा दीया ओर खुदभी अंदर बेठ गया, तब देवायतने पुनमको अ‍ेक पेइन कीलरकी गोली नीकालके दी ओर पुनमको पानी देके खीलादी तो पुनमने चुपचाप गोली खाली.. फीर देवायतकी ओर देखती रही.. उनको अभीभी यकीन नही हो रहाथा की उनके भाइने उनको जबरदस्त तरीकेसे चोद लीयाथा.. ओर वोभी पुरे जोसमे मजे लेके अपने भाइसे चुदवा चुकी थी..

देवायत : (कारको चलाते हसते) कहो बेबी अ‍ैसे क्या देख रही हो..? तुम ठीकतो होनां..?

पुनम : (सरमाते हसते उनके बाजुमे अ‍ेक मुका मारते ) अ‍ेकतो चोद चोदके मेरी हालत बीगाडदी ओर पुछ रहे हो मे ठीक हुकी नही.. आपको इतना जोस आता कहासे हे..? आप कीतने जोसमे करते थे..

देवायत : (हसते) डार्लींग क्या करु.. तु मेरी बीवीके साथ मेरी बहेनभी हे.. तो तुजे देखतेही जोस बढने लगता हे.. तु ठीक कहेती हे.. बहेनको चोदनेका अ‍ेक अलगही मजा हे.. पता नही जबभी हम दोनो अकेले होतेहे तब अ‍ेसा लगता हे तुजे चोदताही रहु.. तेरे उपरसे कभी उतरु ही नही.. हें..हें..हें.. बहुत दर्दतो नही..?

पुनम : (सरमाते हसते) नही भाइ बस मामुली दर्द हे अभी ठीक होजायेगा.. भाइ.. मुजे यही आपका प्यार चाहीये जो अभी आपने मुजे दीया हे.. आपको कहीभी कीसीभी वक्त जबभी जरुरत पडे मुजे बुला लीजीयेगा आपकी ये बहेन हाजीर होजायेगी क्युकी अब आप मेरे भाइके साथ मेरे पतीभी हो.. मे कभी आपको मना नही करुगी.. आपकी हर जरुरतका मे पुरा खयाल रखुगी, मे आपको इतना चाहती हु, आइ लव यु सो मच..

देवायत : (हसते) लव यु टु बेबी..

अ‍ैसेही प्यारभरी बाते करते दोनो होस्पीटल पहोंच गये तब पेइनकीलर की वजहसे पुनम काफी हद तक ठीक चल रहीथी दोनोही कार पार्क करके अंदर चले गये तो पुनम जातेही चंदाको गले लग गइ फीर अंदर जाके मंजु ओर भावुको गले मीलके सरलाके पैर छुलीये ओर अपने भतीजेके साथ खेलने लगी तो देवायतभी अंदर आगया तो भानु मील गया ओर दोनोही डो.सृतीके पास चले गये.. तो सृती देवायतको देखतेही..

डो.सृती : (सरारतसे हसते) आइअ‍े आइअ‍े..जीजु.. अब पापा बन गयेतो सालीकोतो भुलही गये..हें..हें..हें.. ना कोइ फोन.. मेने नंबरतो दीया हे आपको.. कभी कभी हमसेभी बात करलीया करो.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) नही अ‍ैसी कोइ बात नही हे.. कहीये क्या हुकुम हे मेरे लीये..

डो.सृती : (हसते) बस कुछ नही अब आप दोनोको घर लेजा सकते हो मेने भानुभाइको दोनोकी दवाइआ लीखके देदी हे.. वो लेकर जाना.. ओर टाइमपे खीलाते रहेना.. बस चार पांच दीनके बाद बाद आप दोनोको लेके इधर आजाइअ‍े मे चेक करलुगी.. वेसे आप दोनो मेरे कब घर आओगे..?

देवायत : (हसते) हां आजायेगे अभी अ‍ेक महीनेमे घरपे सादी हे तो आपको इन्वीटेशन देने तो आनाही पडेगा.. हें..हें..हें.. वरना आपकी सहेलीको देखा हेनां..? मुजे नोच डालेगी.. हें..हें..हें..

डो.सृती : (जोरोसे हसते) नही.. वो अ‍ैसी नही हे..हें..हें..हें.. वैसे अभी चंदामौसीसे बात हुइ.. ठीक हे.. लेकीन इसे पहेले हम अ‍ेक बार बात कर लेगे मे आपको फोन करुगी हो सकेतो आजाइअ‍ेगा मुजे आपसे कुछ पर्सनल जरुरी बातभी करनी हे.. थोडी लंबीहे अभी नही कर सकते बाकी सब रेडी हे आप दोनोको लेजा सकते हो.. ओर भानुभाइ आपभी इनके साथ दीखाने आजायेगा..

देवायत : (हसते) सृती.. कुछ हीसाब बीसाब कीयाहे की नही..? लाइअ‍े बील.. मे पे कर देता हु.. ओर दोनोका बील साथमेही देना..

डो.सृती : (सरारतसे कामुक मुस्कानसे) ले लुगी.. सब बील लेलुगी.. आप फीकर मत करो.. जब वक्त आयेगा तब मेरा सब बील वसुल करलुगी.. फीलहाल तो आप दोनोको लेजाइअ‍े.. हें..हें..हें..

कहेते सृती खडी होगइ ओर आगे आगइ तब देवायत ओर भानुभी खडे होके बहार नीकलने लगे तब सृतीने मौका देखते देवायतके हाथको पंजा फसाके पकडलीया तो देवायत सृतीकी ओर देखने लगा.. तब सृती देवायतकी ओर कामुक स्माइल करती रही ओर सरारतसे अपने नैन नचाते फोनका इसारा करते देवायतके सामने हसती रही.. तब देवायतकी हसी नीकल गइ..

फीर सब रुममे आगये तबतक चंदा ओर सरलाने सब सामान समेटके जानेकी पुरी तैयारीया करलीथी.. तभी भानु ओर देवायत अंदर आगये तो सृती मंजुको गले मीलके बच्चेके साथ खेलने लगी..

देवायत : भानु तुम भावु ओर काकीको लेके सीधे घरही चले जाना.. मे मंजुको मौसीके घर छोडके आजाउगा फीर सामको खेतोपे मीलते हे..

भानु : (भारी मनसे) ठीक हे भाइ लेकीन तुजेभी मेरे घर आना पडेगा.. समज गयानां..

सरला : देवु बेटा अब वो बाबासे मीलके सादीकी तारीख फीक्स करलो.. मे चाहतीहु सादी जीतनी जल्दी होजाये उतना अच्छा हे.. बाकी ये सबतो होताही रहेगा..

देवायत : (हसते) ठीक हे काकी मे बाबासे मीलके बात करलुगा तब भानुकोभी लेके जाउगा..

भावना : (सीरीयस होते) जीजु आप घरपे कब आ रहेहो.. मुजे आपसे जरुरी कामभी हे..

मंजु : भावु कुछ खास काम हे कुछ चाहीये..? तो तुभी चलना मौसीके वहा दोनो साथही रहेगे..

भावना : अरे नही नही दीदी इतनाभी खास काम नही हे वो सब लताकी सादीकी तैयारीके बारेमे बात करनीथी.. (भावनाको अपनी गलतीका अहेसास होगया वो देवायतको जल्दबाजीमे पुछ बैठी)

चंदा : (हसते) भावु वो सब छोड मे सब मेनेज करलुगी सीर्फ कुछ खरीदी तो करनी हे हमे कहा तामजाम करना हे.. बस हम कुछ घरके रीस्तेदारोको बुलाके सादी रखनी हे.. जैसे चारोकी सगाइ रखीथी..

सरला : हां बहु जीस तराह हमने चारोकी सगाइ करदी उसी तराह सादीभी करदेगे.. ओर मे हुना तु क्यु चीन्ता करती हे.. तुतो बस आराम कर ओर अपनी बच्चीका खयाल रख.. बाकी सब हम देखलेगे..

तब भानु देवायत ओर भावनाही जानतेथे की भावनाको देवायतसे क्या कामथा.. तब भानु टेन्शनमे आजाता हे ओर वो सामान लेके बहारकी ओर जाने लगता हे तो पुनम ओर चंदा भी मंजुका सामान लेके बहार नीकलने लगते हे.. तब पुनमभी फटाफट सामान लेजाते कारमे रखदेती हे ओर कारके पीछे जाके लताको फोन करने लगती हे.. जब लता फोन उठातीहे तो धीमी आवाजमे बात करने लगती हे....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ५२

तब भानु देवायत ओर भावनाही जानतेथे की भावनाको देवायतसे क्या कामथा.. तब भानु टेन्शनमे आजाता हे ओर वो सामान लेके बहारकी ओर जाने लगता हे तो पुनम ओर चंदा भी मंजुका सामान लेके बहार नीकलने लगते हे.. तब पुनमभी फटाफट सामान लेजाते कारमे रखदेती हे ओर कारके पीछे जाके लताको फोन करने लगती हे.. जब लता फोन उठातीहे तो धीमी आवाजमे बात करने लगती हे....अब आगे

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लता : (हसते) हां पुनमदीदी कहीये केसे हे सब..?

पुनम : भाभी छोड सब.. हम सब होस्पीटलसे नीकल रहेहे अभी भानुभाइ ओर भाभी वहा पहोंय जायेगे अगर घरमे कुछ उल्टा सीधा होतो सब ठीक करदेना.. मतलब वो चदर बदर खराब होतो चेन्ज करलेना समज गइ..

लता : (सरमसे पानीपानी होते हसते) जी दीदी सब सही करदीया हे.. अ‍ेसी कोइ दीकत नही हे.. क्या आप सब लोग नीकल गये..?

पुनम : हां अभी नीकलही रहे हे, हम लोग मेरी सासुके घर जा रहे हे.. ओर भानुभाइ काकीलोग सब आपके घर आ रहेहे समज गइ..? चलो.. मे फोन रखती हु..

कहेते पुनम फटाफट वापस जाके चंदाके हाथसे सामान लेके कारमे रख देती हे तब देवायत मंजु ओर चंदा सृतीके साथ खडे होके बाते करते हे तब सृतीसे बाते करते सब कारके पास चले आते हे तो मंजु सृतीको गले लगाके कारमे पीछे बेठ गइ तो चंदाने बच्चेको मंजुके हाथमे देदीया ओर खुद सृतीको गले मीलते मंजुके पास बेठ गइ.. तब पुनम आगे देवायतके पास बेठ गइ ओर देवायतकी ओर कातील स्माइल करने लगी..

तो भानुभी कारमे बेठ गया ओर पीछे भावु ओर सरला बेठ गये ओर वो देवायतको हाथ हीलाके नीकल गया.. तो देवायतभी सृतीकी ओर स्माइल करते नीकलने लगा तभी सृतीने छुपकेसे इसारोसे देवायतको फोन करनेका इसारा कर दीया.. सृती देवायतको सुरुसे ही जानतीथी जब देवायत ओर मंजुकी सादीभी नही हुइथी.. उनके घर दोनो पहेली बार गयेथे तबही देवायत ओर मंजुने गांधर्वविवाह करलीया..

देवायत ओर मंजुका उनके घरही पहेलीबार सुहागरात मनाके मीलन हुआथा.. जब बादमे उनकी भी सादी होगइ तब वो अपने पतीसे खुस नहीथी ओर उनका डीवोर्स होगया.. तबसे वो बीना लंडके तडप रहीथी जबसे सृतीने मंजुसे देवायतके लंबे ओर मोटे लंडकी बात सुनी ओर देवायतके पेन्टके उभारको देखा तब उनकी काम वासना फीरसे जागृत होगइ ओर सृती देवायतके पीछे पागल होने लगी.. ओर देवायतको अपनी ओर आकर्सीत करनेकी पुरी कोसीस करने लगी..

उधर भानु कार लेके जा रहाथा तब सरला मनमे देवायतसे केसे मुलाकात करके अपनी प्यास बुजाये यही सोच रखते भानु ओर भावुसे लताकी सादीकी बाते कर रहीथी.. लेकीन भानु भावु ओर अपनी मामीके बीच रीस्तेको लेके विचारोमे खोया हुआथा वो भावुको छोडनाभी नही चाहताथा ओर अपनी मामीसेभी सादी करके उसे अपनी बीवी बनाना चाहता था.. सब अपनी अपनी सोचमे डुबे हुअ‍े थे..

तो दुसरी ओर भावुभी देवायतको सुरुसे ही पसंद करती थी ओर उसे प्यार करने लगी थी ओर भानुकी करतुतको अपनी आंखोसे देखके उसे देवायतके साथ रीलेशनमे आनेका रास्ता मील गयाथा तो वोभी भानुसे सब रीस्ता खतम करके देवायतके साथ केसे बात करके रीस्तेको कायम कर सके उनके बारेमे सोच रही थी.. ओर सब अपनी अपनी सोचमे डुबे अपने घरकी ओर बढ रहेथे..

तो देवायतभी कार लेके दुसरी ओर हाइवेमे कार दोडाते चोर नजरोसे सेन्ट्रल मीररमे चंदाकी ओर देखते मुस्करा देता तब पुनम इनकी इस हरकतको देखते धीरेसे देवायतकी जांगपे हाथ रखते आंखोके नैन नचाते देवायतकी ओर देखते हसने लगी तब मंजु अपने बच्चेको दुध पीला रहीथी..ओर चंदा मंजुसे बाते कर रहीथी..

दोनोही अपने अपने घर पहोंच गये तब पुनम पहेलीबार अपने ससुराल वाले घरपे आइथी तो वो बहुतही सरमा रहीथी.. तो चंदाने ताला खोल दीया ओर बच्चेको मंजुके हाथसे लेलीया फीर चारो अंदर आगये ओर सब सोफेपे बेठ गये तब चंदा सबको पानी देने लगी तो पुनम फटसे उठ गइ ओर चंदाके पास चली गइ ओर उनकी मदद करने लगी तो चंदानेभी हसते पुनमको कीचनमे सब दीखा दीया..

तब पुनम सबके लीये चाइ बनाने लगी तो चंदा मंजुको लेके नीचेके रुममे चली गइ यहा उसने मंजुको अपने बेडपे सुलाया ओर बच्चेको मंजुके पास छोडके बहार होलमे आगइ तब चंदा देवायतकी ओर देखते हसने लगी ओर उपरके रुमकी ओर इसारा करते कीचनमे जाने लगी..तब देवायतभी हसने लगा ओर खडा होके मंजुके पास चला गया तो मंजु देवायतको देखके बहुतही खुस होगइ ओर बच्चेको देवायतके हाथोमे देदीया..

मंजुला : (हसते) लोजी.. सम्हालो अपने बच्चेको.. देखो कीतना प्यारा हे बीलकुल आपहीकी तराह.. सब आपहीकी तराह हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (बच्चेको लेते हसते) नही इनकी सकल मेरी मंजुकी तराह हे.. अ‍ेकदम क्युट लग रहा हे. हें..हें..हें..

मंजुला : जानु.. मे यहा ज्यादा दीन नही रहुगी येतो मौसीने जीद की इसीलीये इधर आगइ.. क्या आप मुजे रोज मीलनेतो आओगेनां?

देवायत : हां बेबी.. मुजेभी वहा तेरे बीना अच्छा नही लगेगा मे आता जाता रहुगा..

मंजुला : जानु मुजे लगता हे भावु ओर भानुभाइके बीच कुछ अनबन हुइ लगती हे.. दोनोही अ‍ेक दुसरेसे बात नही कर रहेथे.. उन दोनोके बीच कुछतो हुआ हे आप भानुभाइसे बात करके जोभी मामला हो सुलजादो..

देवायत : (हसते) ठीक हे मे आजही भानुसे बात करता हु क्या तुजे भावुने कुछ कहा हे..?

मंजुला : नही..मेने भावुसे बहोत पुछा लेकीन कुछ बतानेको तैयारही नही.. कहेतीहे पहेले जीजुसे बात करलु फीर तुमको सब कुछ बताउगी.. लगता हे मेटर कुछ ज्यादाही सीरीयस हे.. आप भावुसे भी मील लेनां..

देवायत : ठीक हे उनसेभी बात करलुगा अब ये बता पुनमकी सादीके बारेमे क्या सोचा हे..? वो काकी बडीही उतावली हो रही हे.. क्या इस बारेमे तुम्हारे साथ कोइ बात हुइ..?

मंजुला : (हसते) जानु लगता हे ये चारो जीस तराह फोनपे बात कर रहेहे उसीसे उनको लगता होगाकी सादी जीतनी जल्दी होजाये उतना अच्छा हे.. कहेतीथी आजकलके लडके लडकीका कोइ भरोसा नही ये जवानी हेही अ‍ेसी.. (जोरोसे हसते) लगता हे काकी इस मामलेमे ज्यादा तजुरबेदार हे.. हें..हें..हें..वोभी अपनी जवानीमे ये सब खेल खेल चुकी लगती हे हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अब वोतो काकीही जानती होगी.. हें..हें..हें.. मंजु तुनेतो अ‍ैसी बाते करके मुजे गरम करदीया.. कुछ करनां..

मंजुला : (सरमाते हसते) जानु सृतीने मुजे दो महीने तक कुछभी करनेको मना करदीया हे तो फीर आप क्या करेगे..? (सरमाते) क्या आप मौसीके साथ..मतलब..वो आपकी बीवीही हेतो..उपर मीलना चाहोतो..

देवायत : नही मंजु अभी हमारी सादी कहा हुइ हे पहेले हमारी सादी होनेदे..

मंजुला : (सरमाते हसते) जानु वेसेभी आप दोनो सब कुछ करतो चुके हो.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही आप मौसीको मीललो ताकी हम तीनोकी नजदीकीया बढ सके.. कहोतो मौसीसे बात करु..? आप यही मेरे सामनेही मीललो.. उनकीभी सरम चली जायेगी..

देवायत : अभी नही बेबी आज पुनमभी साथ हे.. अगली बार मे अकेले आउगा तब देखेगे.. तुम मौसीसे हमारी सादीके बारेमे बात करलेना..

मंजुला : (खुस होते) ठीक हे जानु बस यही उलजन थी मेतो आपको अभी प्यार नही दे सकती ओर इसी बहाने मौसीसे आपकी नजदीकीयाभी बढेगी फीरतो हम तीनोको साथमेही रहेना हे.. खुब मजे करेगे..

पुनम : (अंदर आते) लीजीये भाइ भाभी आप दोनो चाइ पीजीये.. तबतक खाना बन जायेगा..

मंजुला : (हसते) अरे तुमनेतो अभीसे ससुरालमे सब काम सम्हाल लीया हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते चाइ देते देवायतकी ओर तीरछी नजरोसे देखते) क्या भाभी.. मेनेतो कबसे सुसुरालमे काम सम्हाल लीया हे.. हें..हें..हें.. आपकोही ध्यानमे नही आया क्यु भैया.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) तो क्या तुम इधर पहेले आ चुकी हो..? कही धीरेनके साथतो नही आइ.. हें..हें..हें.. देवु.. लगताहे इन दोनोकी सादी हमे जल्दी करदेनी पडेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) चुप करो भाभी.. भाइ खाना खाके हमे नीकलनाभी हे फीर वहाभी कोइ नही हे.. (मंजुको) भाभी आप उधरही चली आती.. हम सबतो हे वहा.. हम चंपाभाभीको ही बुला लेते..

मंजुला : पुनो मेभी यही केह रहीथी देखतेहे यहा अच्छा लगातो ठीक हे वरना मे मौसीको लेके वहा चली आउगी.. ओर देवु आप आजही भानुभाइसे मीललो ओर दोनो बाबाको मीलके जल्दी तारीख लेलो..

पुनम : (सरमाते धीरेसे मंजुको) भाभी क्या इतनी जल्दी हे..? पहेले हम भाइ ओर मौसीकी सादी करवा देते हे.. फीर हमारी सादी आरामसे रखते.. क्या कहेती हो आप..?

मंजुला : (हसते धीरेसे) हां पुनो हम यही करेगे तभीतो मुजे वहा आनेकी जल्दी हे..

देवायत : (हसते) अब तुम दोनो क्या खुसरपुसर कर रही हो..? जरा मोटेसे नही बोल सकती..?

पुनम : (हसते) जी नही ये आपके सुननेकी बात नही हे हम ओरतोकी बात हे क्यु भाभी..?

मंजुला : (देवायतसे तीरछी नजरोसे मुस्कराते) जी..आपको कोइ सुननेकी रुरत नही हे आपको जीतना कहा उतना कर दीजीये.. उन दोनोको मीलके कुछ कीजीये..

पुनम : (उठके जाते) आप दोनो बाते कीजीये मे मम्मीको कुछ मदद करती हु..

कहेके पुनम वापस कीचनमे चली गइ तो मंजु ओर देवायत उसे देखके हसते रहे तभी देवायत धीरेसे मंजुके पास आके बेठ जाता हेतो मंजु फोरन देवायतको बाहोमे भरलेती हे ओर दोनोके होंठ मील जाते हे ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमने लगे तभी देवायत मंजुके बुब्स पकडके मसलने लगता हे.. तभी अंदर चंदा आगइ ओर दोनोको इस हालतमे देखके वही जम गइ ओर देखतीही रही तब चंदा खुब सरमाइ..

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फीर मुह दुसरी ओर घुमाके जुठमुठका खांसने लगी तो देवायत ओर मंजु जटसे अलग होगये ओर सरमके मारे मुस्कराते रहे.. तब चंदा सरमाते हसती हुइ मंजुके पास आगइ ओर उनके पास बेडपे बेठ गइ फीर देवायतकी ओर सरमाके हसने लगी तो देवायत उठकर बहार चला गया ओर सोफेपे जाके बैठ गया तब..

चंदा : तुम दोनो कुछ दीन इन्तजार नही कर सकते.. अगर पुनमने देखलीया होता तो.. केसे बेसरमोकी तराह अ‍ेक दुसरेसे चुमाचाटी कर रहेथे..

मंजुला : (मोका देखते सरमाते) दीदी क्या करु.. इनके बीना रहाभी नही जाता..

चंदा : मंजु मे जानती हु आप दोनो आपसमे बहुत प्यार करते हे लेकीन कुछ दीनतो सबर करलेते पता नही इनसे सबर नही हुआतो..? क्या करेगे.. तुजे कमसे कम अ‍ेक महीने ध्यान रखना पडेगा..

मंजुला : (सरमाते) दीदी क्या देवु मेरे बीना अ‍ेक महीना रेह पायेगा..? प्लीज आप देवुसे सादी करलो ताकी मेरी कमी देवुको महेसुसना हो प्लीज.. आज पुनो साथमे हे वरना मे देवुको आपके साथ उपर भेज देती..

चंदा : (सरमसे पानीपानी होते) मंजु तु ये क्या केह रही हे..? कुछतो सर्म कर.. अभी सादीभी नही हुइ..

मंजुला : (सरमाते) दीदी तो क्या हुआ वेसेभी आप दोनो मीलतो चुके हो प्लीज.. मेरे देवुको सम्हाल लीजीये.. वो दुसरोकी तराह आम इन्सान नही हे उनको रोज प्यार चाहीये पता नही मेरा देवु मेरे बीना केसे रेहता होगा..? प्लीज दीदी आप कुछ कीजीये.. मे चाहतीहु धिरेन पुनोकी सादीसे पहेले आप दोनोकी सादी होजाये.. ताकी मेरी कमी वो आपसे पुरी कर सके..

चंदा : (सरमसे नजरे चुराते) मंजु प्लीज.. मत कर अ‍ैसी बाते.. मुजे सरम आ रही हे.. क्या ये सही होगा..?

मंजुला : (हसते) हां दीदी.. हमे कहा दुनीयाको दीखाना हे.. अबतो धिरेनभी मान चुका हे.. ओर पुनमकोभी सब पता हे.. तो क्या दीकत हे.. ओर आपभीतो मेरे देवुसे प्यार करती हो.. क्या उनके बीना रेह सकती हो..?

चंदा : (सरमसे मंजुको गले लगाते) प्लीज.. मंजु.. तु सच केह रही हे.. मे नही रेह पाती इनके बीना.. मेभी जल्दसे जल्द तुम लोगोके पास आना चाहती हु.. लेकीन क्या करु.. धीरेनकाभीतो देखना पडता हे.. उनकी सादी होजायेतो उनको पुनम सम्हाल लेगी.. फीर कोइ दीकत नही हे.. मे आजाउगी..

मंजुला : (हसते) दीदी इनकाभी हल हे.. जबतक ये दोनोकी सादी नही होजाती तबतक धिरेन यही आके खाना खा लेगे ओर वहा रहेतो भी हमे दिकत नही हे.. मे देवुसे बात करलुगी.. आप वही आजाओ..

चंदा : (मंजुके गालको चुमते) मेरी स्वीट दीदी.. थेन्क्स मेरी तकलीफ समजनेके लीये.. तुम जोभी करो मुजे सब मंजुर हे.. बस मेरे देवुसे मुजसे मीलादो.. हम दोनो मीलके उसे खुब प्यार देगे..

मंजुला : (हसते) दीदी ये हुइनां बात.. फील हालतो हमारे देवुको सीर्फ आपकोही प्यार देना हे अ‍ेक महीनेके बाद मेभी आपके साथ सामील होजाउगी तबतक आपको अकेलेको ही मेरे देवुको सम्हालना पडेगा..

चंदा : (सरमाते हसते धीरेसे) चल ठीक हे मे सम्हाल लुगी..पता नही उनमे कीतना आकर्शण हे हम उनको देखतेही पागल होजाती हे.. मुजसे उनके बीना नही रहा जाता..

मंजुला : (हसते) दीदी पता हे जब हमने प्यारका इजहार कीया तबसे मेरी हालतभी आपके जेसीथी ओर अभीभी वोही हालत हे मे मेरे देवुको प्यार करके बगैर रेह ही नही सकती मुजे उनका प्यार हर दीन चाहीये..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) अब बसभी कर मुजे नीचे कुछ हो रहा हे.. मेरी खातीर हमे धिरेन पुनमकी सादी जल्दी करवानी पडेगी.. तुम देवुको कहेके तारीख जरा जल्दी नीकलवालो ताकी मे वहा आ सकु..

मंजुला : (हसते धीरेसे) दीदी आप फीकर मत कीजीये मे देवु ओर धिरेन दोनोसे बात करलुगी.. क्या आपको अभी देवुसे मीलना हे..? तो फीर उपर चली जाइअ‍े मे देवुको भेजती हु..

चंदा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) नही.. प्लीज.. वो..वो पुनम इधर हे यार.. मुजे सरम आयेगी..

दोनोही रुममे बेठके बाते कर रहीथी तब देवायत होलमे बेठते पुनमको कीचनमे काम करते देख रहाथा तो पुनमभी सरमाते देवायतसे काम करते इसारोमे बात कर रहीथी उनको वहासे जानेकी बडी जल्दीथी ताकी घर जाके वो देवायतसे मील सके जबसे देवायतके साथ सुहागरात मनाके देवायतके लंडको अपनी चुतमे लीया तबसे ना पुनमको ओर नाही उनकी चुतको.. कही चेइन नही मीलताथा.. उनकी चुतकी दोनो नाजुक पंखडीया देवातको देखते फडफडा रहीथी ओर लगातार पानी छोड रहीथी..

ओर उपरसे अपनी भाभीसे अपनी सादीकी बात सुनके उनकी बेचेनी ओर बढ गइथी क्युकी वो सादीसे पहेले जल्दसे जल्द देवायतसे प्रेगनेन्ट होना चाहती थी.. जबतक मंजु यहा हे तबतकत पुनम ओर देवायतके पास अकेले मीलन करनेका पुरा मौकाथा ताकी वो अपने भाइ देवायतसे जल्दसे जल्द प्रेगनेन्ट हो सके.. जो इस मोकेको पुनम गवाना नही चाहती थी इसीलीये वो फटाफट खाना बना रहीथी ताकी खाना खाके दोनो जल्दी यहासे नीकल जाये..

दोनोही आंखोसे इसारा करते मस्तीया कर रहेथे तब पुनमकी चुतमे जोरोकी खुजली हो रहीथी ओर उनकी चुतसे पानी नीकल रहाथा तो बीच बीचमे कभी फ्लाइंग कीस देती तो कभी अपने बुब्सके दर्शन कराते देवुको अपना जलवा दीखाती रही.. दुसरी ओर मंजु ओर चंदाभी देवायतके बारेमे बाते करते कामुक होने लगीथी तब चंदाकी चुतसेभी पानी नीकलने लगा..

तभी पुनमने रोटीया बनाली ओर सबको खानेके लीये बोल दीया तब सब अ‍ेक साथ खानेके टेबलपे आगये चंदा मंजुको धीरे धीरे चलाके टेबल पे आगइ..

देवायत : मंजु खाना खाके हम नीकल रहेहे सोचता हु अ‍ेक दो दीनमे ही सब काम नीपटालु..

चंदा : देवु आप तारीख नीकलवालो मुजेभी सब तैयारीया करनी पडेगी..

मंजुला : मौसी कोइ जरुरत नही जो हे उसीमे हम नीपटालेगे बस कुछ कपडे ज्वेलरी लेनी हे वो आप ओर पुनो देवुके साथ जाके लेलेना..जीस तराह सगाइकी खरीदी करली उसी तराह सादीकी भी करलेना..

चंदा : पुनम बेटा तुजे कोनसी सारी लेनीहे या ड्रेस लेना हे..? मुजे बता देना वो मे ले लुगी.. तुम यहा डं्रेस पहेनो हमे कोइ अ‍ेतराज नही.. ओर आपका अ‍ेडमीशनकाभी देख लेना.. कोलेज पुरी करलो तुम..

पुनम : (सरमाते हसते) मम्मीजी..वो मे भाइके साथ जाउगी तब देखके आउगी देखती हु ओपनमे अ‍ेडमीसन मीलताहे तो ठीक हे वरना यहीसे पढाइ खत्म..

चंदा : (हसते) अरे अ‍ेसे थोडी चलता हे.. तुम पढो.. मे तुजे पढाउगी..

चंदा : (देवायतकी ओर सरमाते हसते) नही मम्मीजी अब ओर पढनेका मन नही हे.. फीरभी देखती हु..

मंजुला : (हसते) पुनो तुजे पढना हेतो कोइ मनाइ नही हे.. फीरभी अ‍ेक बार सोचले.. तुजे जो ठीक लगे करना.. अब सादीके बाद घरहीतो सम्हालना हे.. तुजे कहा कोइ नोकरी करनी हे..

सब अ‍ेसेही बाते करते खाना खा रहेथे फीर खाना खाके पुनमने चंदाका काममे हाथ बटाया फीर काम खतम होतेही देवायत ओर पुनम मंजु चंदाकी इजाजत लेके अपनी हवेलीकी ओर नीकल गये.. तब दुसरी ओर भानु सकबो लेके अपने गांवमे आगया पुरे रास्ते सीर्फ सरलाही बोलती रही जेसेही घर आये लता दोडके बहार आगइ ओर भावनाके हाथसे बच्चीको लेलीया ओर उसे देखते मुस्कराने लगी.. ओर बच्चेको प्यार देने लगी..

तब भानुभी सब सामान नीकालके अंदर लेजाने लगा ओर सरला भावुका हाथ पकडके उसे धीरे धीरे अंदर लेजाने लगी.. ओर पीछे लताभी बच्चीको लेके चलने लगी सब अंदर आगये तो सरलाने लताको कहा..

सरला : बेटा जा जरा अंदर जाके बहु के बेडको सही करदे ओर इसेभी लेतीजा..

तभी लता बच्चीको लेके अंदर चली गइ ओर उसे जुलेमे सुलाके बेडकी चदर सही करने लगी.. तबतक सरला भावुको लेकर अंदर आगइ ओर भावुको बेडपे सुलादीया ओर बच्चीको उनकी बगलमे लीटा दीया तब भावु ब्लाउस उचा करते बच्चीको दुध पीलाने लगी.. ओर सरला बहार आगइ तब लता भावेसको लेने अपने रुममे चली गइ तब भानु अपने रुममे आगया ओर लतासे बात करने लगा..

भानु : (धीरेसे रीक्वेस्ट करते) भावु प्लीज मुजसे बात कर कबतक मुजसे नाराज रहेगी.. कुछतो बोल..

भावना : भानु प्लीज तुम अभी जाओ.. मुजे आपसे कोइ बात नही करनी.. जबतकमे जीजुसे बात करलु तबतक तुम मुजसे दुर रहो.. मुजे मेरी कीस्मतपे छोडदो.. मे जीजीसु बात करके कोइ डीसीजन लुगी..

भानु : देख लता मे मानता हु मेने गलती की हे.. लेकीन तु मामीकी सीचुअ‍ेशनतो समज.. वो मामाके साथ रहेकेभी अ‍ेक अकेली ओरतकी तराह जींदगी गुजार रही हे.. उनके यहा खानेका भी प्रोबलेम हे तो मे उसे पैसे देने जाता था ओर हम करीब आगये ओर हमारे बीच रीलेशन होगया.. वो अकेली ओरत हे तु ओरतकी सीचुअ‍ेशनभी नही समजती..?

भावना : (भानुकी ओर अ‍ेक नजरसे गुसेसे देखते) भानु अगर यही सीचुअ‍ेशन मेरे साथ होती तो..? क्या तुम मुजे दुसरे मर्दके साथ सोते देखकर मुजे अ‍ेक्सेप्ट करते..? यार तुम जाओ यहा से.. मे मंजुदीदीसे या जीजुसे बात करके कोइ फैसला लुगी.. तबतक मुजसे दुर रहेना..

भानु : भावु प्लीज.. इस बारेमे मंजुभाभीसे कुछ बात मत करना उनकी तबीयत ठीक नही हे.. मे देवुसे कहुगा वो आके तुमसे बात करेगा.. वेसेभी सामको या कल देवु इधर आयेगा.. तब बात करलेना..

कहेते भानु वहासे नीकल जाता हे ओर बहार जाके टेन्शनमे खटीयापे बेठ जाता हे.. तब लता भावेशको लेके भावुके पास चली गइ ओर भावेसको अपनी छोटी बहेनको दीखाते उसके साथ खेलने लगी.. तब भावु छुपकेसे आंसु बहाते अपनी बच्चीको दुध पीला रहीथी तो लताने भावुके आंसु देख लीये ओर भावेशको जुलेमे डालके वो भावुके पास आके बैठ गइ ओर भावुके आंसु पोछने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ५३

कहेते भानु वहासे नीकल जाता हे ओर बहार जाके टेन्शनमे खटीयापे बेठ जाता हे.. तब लता भावेशको लेके भावुके पास चली गइ ओर भावेसको अपनी छोटी बहेनको दीखाते उसके साथ खेलने लगी.. तब भावु छुपकेसे आंसु बहाते अपनी बच्चीको दुध पीला रहीथी तो लताने भावुके आंसु देख लीये ओर भावेशको जुलेमे डालके वो भावुके पास आके बैठ गइ ओर भावुके आंसु पोछने लगी....अब आगे

लता : (धीरेसे) भाभी क्या हुआ आप अ‍ेसे रो क्यु रही हे..? क्या भाइने कुछ कहा..?

भावना : (जटसे अपने आंसु पोछते) अरे नहीरे.. कुछ नही हुआ.. तु खामखा परेसान हो रही हे..

लता : (भावनाका चहेरा अपने हाथोमे थामते) भाभी.. आप सीर्फ मेरी भाभीही नही मेरी सहेलीभी हे प्लीज.. बताइअ‍े मुजे.. आपको मेरी कसम हे.. मे कीसीसे कुछ नही कहुगी..

भावना : (फीरसे आंसु बहाते) अ‍ेक.. मारुगीनां.. क्यु कसम देदी? मे होतीहु कोन तुम्हारी..

लता : (भावुका चहेरा अपने सीनमे थामते) भाभी प्लीज.. क्या मुजे अपनी सहेली नही मानती..? अपने दीलपे हाथ रखके कहो आप मेरी कुछ नही लगती.. मे आपको कुछ नही पुछुगी यहासे चली जाउगी..

कहातो भावना लताको सीनेसे लगाके फुटफुटके रोने लगी.. ओर लता भावनाकी पीठ सहेलाती रही.. फीर कुछ देरके बाद भावु अपने आंसु पोछके लताको भानु ओर मामीके रीस्तेके बारेमे सबकुछ बता देती हे.. जीसे सुनके लताभी सोक्ट होजाती हे..

तब लताको अ‍ेक क्षण लगाकी वोभी अपने भाइके साथ घटी हुइ घटनाके बारेमे बतादे लेकीन वो कुछ सोचके बातको कहेनेसे टाल गइ ओर भावनाको आस्वासन देने लगी..

तभी बच्चीने पोटी करके चदरको खराब कर दीया तो भावना उसे साफ करने लगी ओर लताको दुसरी चदर लानेको कहा.. जब लता दुसरी चदर नीकाल रहीथी तब भावनाने बच्चीको गोदमे लेके वो चदर खीचके नीकालदी तब वो गदेको देखके चोंक गइ..

क्युकी गदेपे बीचमे खुनके धब्बे लगे हुअ‍ेथे जो उन्होने देखलीया ओर उनको समजमे जरासी भी देर नही लगीकी ये धब्बे कीसके हे.. ओर वो अ‍ेक नजरसे लताकी ओर देखने लगी.. फीर बडी आंख करते कामुक भावसे मुस्कराती रही..

जब लता दुसरी चदर बीछाने लगीतो उनका भी ध्यान वो खुनके धब्बेपे चला गया.. ओर वो गभराते जटसे चदर बेडपे डालके बीछाने लगी.. ओर अ‍ैसे बीहेव करने लगीकी जैसे कुछ हुआ ही नही.. ओर चोर नजरसे भावनाकी ओर देखने लगीकी कही भाभीने धब्बातो नही देख लीया.. वो चदरको बीछाके भावनासे नजरे चुराते बहार जाने लगी.. तभी भावनाने उसे धीरेसे आवाज देके रोक लीया..

भावना : (हसते) लता सुन.. जरा इधरतो आ.. मुजे तुमसे कुछ बात करनी हे..

लता : (दीलकी धडकन बढ गइ, सरमाते) क्या भाभी..? कुछ काम हे..? मे जरा खाना बनाने जा रही हु..

भावना : (सरारतसे हसते) वो बादमे बना लेना.. पहेले मे जो कहु उनका जवाब देती जा.. इधर आजा..

लता : (सरमसे सर जुकाते धीरेसे पास आते) जी.. भाभी.. कहीये.. क्या काम हे..?

भावना : (प्यारसे पास बीठाके लताके गाल सहेलाते) क्या लखन आया था..? सच बताना..

लता : (सरमसे पानीपानी होते नजर जुकाते सरमाते धीरेसे) जी..वो..वो.. मुजे अकेले डर लग रहाथा तो..

भावना : (हसते) अरे तो इतना गभराती क्यो हे..? वो तेरा होने वाला पती हे.. तुमसे मीलने नही आयेगातो कीससे मीलने आयेगा.. क्या वो पुरी रात इधरही थानां..? ये नीसान बहुत कुछ केह रहे हे..

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लता : (अपने पैरोके नाखुनसे जमीनको खरोदते सर्मसार होते) जी.. वो.. यही थे.. आज सुबह ही गये..

भावना : (लताके चहेरेको अपने हाथोमें थामते सरारतसे) क्या सब कुछ हो गया..? मतलब दोनोने कल रातको ही सुहागरात मनाली..? हें..हें..हें..

कहातो लता सरमसे पानीपानी होगइ ओर भावनाके सीनेमे लीपटके सरमाते हसती रही.. तब भावना हसते हुअ‍े उनकी पीठ सहेलाती रही.. फीर धीरेसे लताके चहेरेको अपनी हथेलीमे थाम लीया ओर हसते हुअ‍े उनकी आंखोमे देखती रही.. तब लता सर्मसार होते नजरे जुकाते मुस्कराती रही.. ओर अ‍ेक बार फीर भावनाकी ओर देखते उनसे लीपट गइ..

लता : (सरमाते धीरेसे) प्लीज.. भाभी ये बात कीसीको नही कहीयेगा.. मुजे बडी सर्म आ रही हे..

भावना : (हसते धीरेसे) चल कोइ बात नही वेसेभी तेरी सादी अभी होने वाली हे.. तो कोइ दिकत नही.. फीरभी कोइ रीस्क नही लेना.. कुछ गोली बोली खाइ हे की नही..?

लता : (सरमाते धीरेसे मुस्कराते) जी.. वो लेके आये थे.. सुबह ही दोनो गोली खाइ हे..

भावना : (हसते) अच्छा तो जनाब पुरी तैयारी करके आयेथे.. कोइ बात नही.., बस लता यही कुछ पल हे.. जो सगाइके बाद ओर सादीसे पहेले.. जो इसे हमे खुलके अ‍ेन्जोय करना हे.. जो मेरे नसीबमे नही था..

लता : (थोडी खुलके) तो क्या भाभी आपने ओर भैयाने सादीसे पहेले वो कुछ नही कीया..? मतलब..

भावना : (नीरास होते बीचमेही) नही.. लता.. सायद कुछ सुख मेरे नसीबमे नही हे.. तु बहोत नसीब वाली हे जीसको तुमने चाहा उसीसे तुम्हारी सादीभी हो रही हे, ओर तुम खुलके अपनी लाइफभी अ‍ेन्जोय कर रही हो..

लता : भाभी प्लीज मुजे आपके बारेमे सब बताओना.. मुजे सुनना हे.. मे वादा करती हु कीसीसे कुछ नही कहुगी.. क्युकी आपही मेरी भाभीके साथ बेस्ट फ्रेन्ड भी हो.. मे आपसे अब कुछ नही छुपाउगी.. सब बाते आपके साथ सेर करुगी..

भावना : (हसते) लता अब उन बातोका कोइ मतलब नही हे.. बस यही जानलो हम कीसको चाहते हे उनका कोइ मायना नही हे.. बस हमे कोन चाहता हे.. यही देखना हे.. मेनेभी अपनी लाइफसे समजोता करलीया हे..

लता : नही भाभी अ‍ेसे नही जरा खुलके बताओ.. लगता हे आप भी सादीसे पहेले कीसीको चाहती होगी.. जो आपको अपना प्यार नही मील पाया.. कोन हे वो खुसनसीब इन्सान जीसे मेरी बेस्ट भाभी चाहती थी..

भावना : (सरमाते हसते) रहेने दे लता.. अब गडे मुर्दे उखाडनेका कोइ फायदा नही.. बस तुजे लखन चाहता हे ओर वो तुजे मील गया मेरे लीये यही खुसीकी बात हे.. तु अपनी लाफको खुब अ‍ेन्जोय करना.. ओर तुम दोनोको मीलनेमे मेरी कोइ जरुरत होतो मुजसे बेजीजक कहेना मे तुम दोनोके मीलनेका इन्तजाम कर दुगी..

लता : (खुसीसे गले लगाते) थेन्कयु भाभी.. आइ अ‍ेम हेप्पी.. जो आप मेरी भाभीके साथ बेस्ट सहेलीभी बन गइहो.. आप हम प्रेमीकी तकलीफे भली भांती जानती हे.. मे जरुर आपसे कहुगी.. भाभी प्लीज.. अबतो बता दो वो कोन हे..? जीसपे मेरी प्यारी भाभी.. ओर मेरी बेस्ट सहेलीका दील आ गयाथा.. हें..हें..हें..

भावना : (गहेरी सांस लेते नीरास होते) नही लता.. मे उनका नाम नही बता सकती.. क्युकी हम सबके रीस्ते उनसे जुडे हुअ‍े हे.. गलती मेरी ही थी.. जो मे उनपे दिल लगाते भी पहेले अपने प्यारका इजहार उनसे नही कर पाइ.. ओर वो कीसी ओरके होगये..

लता : (धीरेसे) भाभी आपने कहा वो हम सबसे जुडे हुअ‍े हे..? कोन हे वो जो आप इनका नाम नही ले पा रही.. प्लीज मुजपे यकीन करो.. मे कीसीको कुछ नही कहुगी, क्या पता आगे जाके मेभी आपके पुराने प्यारको पानेमे आपकी कोइ मदद कर सकु.. मुजे पुरा भरोसा हे.. आपको अपना प्यार जरुर मील जायेगा..

भावना : (अ‍ेक नजरसे देखते) लता तु ये क्या केह रही हे..? अपने भाइको धोखा देनेको केह रही हे.., क्या तु चाहती हे मे तेरे भाइको धोखा दु..? अब हमारी सादी होगइ हे.. अब कुछभी मुमकीन नही हे.. कुछतो सोच समजके बोल..

लता : भाभी कुछ बाते अ‍ेसी होती हे जो हम चाहते हुअ‍ेभी भुला नही पाते.. ओर नाही कीसीसे सेर नही कर सकते.. फीर रही बात भाइकी तो कहाके दुधके धुले हुअ‍े हे.. उसनेभी आपको धोखा दीया हे.. ओर मुजे लगता हे आपकी सादीसे पहेलेही उन दोनोमे रीलेशन होगा.. क्युकी भाइ अक्सर मामीकी मदद करने जाते रहेते थे.. ओर दोदो तीन तीन दिम वहा रुकते थे.. सायद तभी उन दोनोके बीच रीलेशन रहे होगे या फीर बन गया होगा.. अगर वो आपको धोखा दे सकते हे.. तो फीर आप क्यु नही..?

भावना : नही लता.. फीरभी हम ओरतोकी कुछ मजबुरीया होती हे.. जो हम चाहते हुअ‍ेभी ये सब नही कर सकती.. लेकीन ओरतही ओरतकी दुस्मन होजाती हे.. येभी सच हे.. पता नही मे तेरे भाइके बीच आगइ या.. मामी हमारे बीच आ गइ.. बस इतना पता हे.. वो दोनो प्यार करते हे.. जो मे अपनी आंखोसे देख चुकी हु..

लता : भाभी आप फीकर मत करो.. मे आपके साथ हु.. हमे पता हे हम ओरते अ‍ेक बार उनका स्वाद चख लेती हे.. तो फीर इनके बीना हम नही रेह सकती.. लेकीन इसका मतलब येतो नही की हम कीसीकेभी साथ.. ये भी नही देखतीके वो सादी सुधा हेकी नही.. हम मामीकोभी दोस नही दे सकते.. ओर भाइकोभी नही.. जब ओरतकाही मन हेतो पुरुष बेचारा क्या करेगा.. आप अ‍ेक बार ठंडे दीमागसे सोचलो.. फीर कोइ डीसीजन लेना..

भावना : अब डीसीजन क्या लेना.. हम दोनोके बीच खाइ काफी बढ चुकी हे.. जो उसे पुरना कीसीके बसमे नही हे.. अबतो यही मेरा नसीब हे, अ‍ेकतो प्यार नही मीला ओर उपरसे पतीका सुखभी गवा बेठी..

लता : नही भाभी अ‍ेसे नीरास मत होइअ‍े.. मे पुरी कोसीस करुगी आपको भाइका प्यार मीले वरना आपके प्यारको पानेमे आपकी मदद करुगी, मुजपे यकीन कीजीये.. लेकीन आपने बताया नही वो कोन हे..? भाभी प्लीज.. बताइअ‍ेनां.. ये बात मेरे तकही सीमीत रहेगी, क्या अपनी इस सहेलीपे भरोसा नही हे..? प्लीज..

भावना : (गहेरी सांस लेते सरमाते धीरेसे) जीजाजी.. देवायत.. जीसे मे सादीसे पहेलेही अपना दील दे बैठीथी.. लेकीन मुजे क्या पता मंजुदीदी अपना दील मुजसे पहेलेही उनको दे बेठीथी ओर अपने प्यारका इजहारभी दोनो कर चुकेथे.. मेरी बात मेरे दीलमे ही रेह गइ.. ओर वो दोनो काफी आगे बढ चुके थे..

लता : (आस्चर्यसे मुह खुला रखते) क्या.. मेरे जेठजी.. यानी देवायतभाइ..?

भावना : हां लता मे उसे दीलो जानसे चाहने लगी थी.. जो इनका प्यार मेरे नसीब नही हुआ..

लता : (सरमाते धीरेसे) भाभी क्या आप अबभी देवायतभाइसे प्यार करती हे..?

भावना : (नजरे चुराते सरमाते) छोड लता.. अब इन सब बातोका कोइ मतलब नही..

लता : भाभी प्लीज.. अ‍ेक बार बतादो.. फीर मे आपको कुछभी नही पुछुगी..

भावना : (सरमाते धीरेसे) लता वो मेरा पहेला प्यार था.. मे उसे केसे भुल सकती हु..

लता : (हसते) बस भाभी.. मुजे यही जाननाथा.. अगर आपको अपना प्यार पानेका दुबारा मौका मीलेतो पीछेहट मत करना.. मे आपके साथ हु.. ओर यही भाइकी गलतीकी सजा हे.. भाभी मे चाहती हु आपभी यही रहेके अपनी लाइफ खुलके जीये.. फीर भलेही भाइ मामीसे सादी करले.. आपको कोइ फर्क नही पडेगा.. आप मेरी इस बातको समज रही हेनां..?

भावना : (आस्चर्यसे देखते) लता तु ये क्या केह रही हे..? अ‍ैसा नही हो सकता.. मे यहा घुटघुटके नही रेह सकती.. ओर नाही तु जो केह रहीहे वो मे कर पाउगी..

लता : (कुटील मुस्कानसे) भाभी.. कहा जायेगी आप..? इनसेतो बेटर हे आप भाइके साथ रहेकर ही अपनी लाइफको खुलके अन्जोय कीजीये.. अबतो भाइभी आपको कुछ नही केह सकते.. ओर अगर कुछ कहेतो मे अभी आपको अ‍ेक बात बताती हु, आप उसे हथीयारकी तराह इस्तेमाल करना.. उनका मुह बंध होजायेगा.. यही समजलो मेरा बदला भी पुरा होजायेगा.. कमीना कहीका..

भावना : लता..ये तु क्या केह रही हे..? मेरीतो कुछ समजमे नही आ रहा.. क्या उसने ओरभी कांड कीया हे..? मतलब तेरे साथतो कुछ.. उल्टा सीधा.. (बातको बीचमे छोडते)

लता : भाभी अभी माइ हे.. ओर आप चली जायेगीतो हमारी इजत मीटीमे मील जायेगी.. इनसेतो बहेतर हे आप यही रहेके अपनी लाइफ खुलके अन्जोय करो.. ओर देवायतभाइसे अ‍ेक बार बात करलो.. वो तो राजा हे कुछभी कर सकते हे.. क्या पता आपको आपका प्यार मील जाये.. तो आप पीछेहट मत करना मे आपके साथ हु.. वो बहुतही अच्छे हे.. अब मे जो कहु उसे ध्यानसे सुनो.. कीसीको कहेना मत..

कहेते लता उनके साथ भानुकी घटी हुइ पुरी घटना भावनाको सुना देती हे.. की कैसे उनके भाइने उनके मुहमे लंड डालके रेप करनेकी कोसीस कीथी.. जीसे सुनके भावना पुरी तराह सकपकाके सोक्ट होजाती हे.. ओर भानुके प्रती उनका खुनस ओर बढ जाता हे..

ओर मनही मन भानुसे बदला लेनेकी ठान लेती हे.. अब बदला कैसे लेनाथा उनकी प्लानींग वो पहेलेसे ही कर चुकीथी.. अब सीर्फ उनपे अमल करनाथा..

तभी सरला लताको आवाज देके खाना बनानेको कहेने लगी तो लताने भावनाको गले लालीया ओर उनके साथ होनेका आस्वासन दीया, फीर वो खाना बनाने चली गइ.. ओर भावना बच्चीको दुध पीलाते देवायतके बारेमे सोचते मनमे ठानली की अबतो वो अपने प्यारका इजहार करकेही रहेगी..

ओर देवायतसे हमेसाके लीये रीलेशन बनाके पुरी जींदगी बीता देगी.. यही सब सोचतेही उनकी नाजुक चुतकी पंखडीया फडफडाते पानी छोडने लगी..

इधर लताभी खुस होके खाना बनाने लगी क्युकी अब वो लखनसे खुलके मील सकतीथी.. ओर दोनोके मीलनमे खुद उनकी भाभी मदद करने वाली थी.. लेकीन उनकी भाभी उनके जेठको प्यार करतीथी ये सोचते उनको देवायतके लंडकी अ‍ेक बार फीरसे याद आने लगी..

जो कीतना लंबा ओर मोटाथा वो उनकी माइ सरलाकी चुदाइ करते वो कइ बार देवायतके लंडको अपनी आंखोसे देख चुकीथी.. अब उनके पास अ‍ेक हथीयार ओर था.. जो इनके बारेमे भावनाकोभी नही बतायाथा..

लताने यही सब सोचते खाना बनालीया ओर सबको खानेके लीये बुला लीया.. तब लता अ‍ेक थालीमे खाना लेके भावनाको देने चली गइ ओर दोनो ही अ‍ेक दुसरेको देखके हसने लगी.. फीर भावनाको खाना देके वो बहार आके सबके साथ बेठ गइ..

ओर चोर नजरसे भानुको देखने लगी.. तब भानु उसे कुछ परेसान नजर आने लगा तो वो मनही मन मुस्कराती रही ओर खाना खाती रही..

उधर देवायत ओर पुनम दोनोही कारमे बेठकर गांवकी ओर नीकल गये.. थोडी दुर जातेही पुनम देवायतसे लीपट गइ ओर उनके गाल ओर होंठोको चुमलीया.. फीर उनके बाजुको पकडके उनके कंधेपे सर रखके बेठ गइ तब देवायत मुस्कराने लगा..

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पुनम : भाइ अब जबतक भाभी यहा हे हमारी हर रात सुहागरात होगी.. मे देर रात आपके साथ सोने चली आउगी ओर अबतो आप लोग हमारी सादीभी जल्दी कर रहेहो तो मे चाहती हु मेरा काम आप करदो..

देवायत : (हसते) लेकीन बेबी तुजे इतनी जल्दी क्यु हे क्या बाबाने कहा हे..?

पुनम : (सरमाते हसते) हां.. बस यही समजलो ये बाबाने ही हुकुम कीया हे.. ओर मेरीभी यही इच्छा हेकी मे मेरे भाइके बच्चेको पैदा करु.. भाइ अभी हमारे पास पुरा मौका हे.. आप इन्ही दीनोमे मुजे प्रेगनेन्ट करदो.. मेरा दस दीन पहेलेही पीरीयड खत्म हुआ हे तो बच्चा ठहेरनेकी पुरी संभावना हे..

देवायत : लेकीन बेबी धिरेन या तेरी सासको पता चलेगातो तु क्या कहेगी..? की इतनी जल्दी क्याथी..

पुनम : भाइ वो सब मे मेनेज कर लुगी आप फीकर मत करो.. मे सबको केह दुगीकी मुजे बच्चा चाहीये था तो कर लीया.. मे धिरेनको समजा दुगी.. वेसेभी उनको मुजसे मीलनेकी बडी आग लगी हुइ हे.. तो केह दुगी बच्चा ठहेर गया.. बस मेरी सादीसे पहेले मे आपसे प्रेगनेन्ट होजाउ.. वो सब आप देखलो..

देवायत : बेबी मुजे लगता हे मुजे अ‍ेक बार बाबासे अकेलेमे मीलना पडेगा ओर सब खुलके पुछ लेना पडेगा.. की दोनो भाभी ननंद मीलके क्या क्या खीचडी पका रही हे.. मुजेतो कुछ कहेते ही नही.. हें..हें..हें..

पुनम : भाइ सही कहा आपने मुजेभी बाबाने कुछ जीम्वेवारी दीथी.. जो आधी पुरी होगइ ओर ये तीन चार दीीनमे आपको आधी पुरी करनी हे.. पता नही उनके दीमागमे क्या चल रहा हे, बस मुजसे बच्चीके लीये अ‍ेसे मीख मागते मनते कर रहेथे की बेटी मेरा ये काम तुम पुरा करदो.. बस तु ही अ‍ेक माध्यम हे.. अ‍ैसा केह रहेथे ओर मे उनको मना नही कर पाइ.. क्युकी इनमे मेराभी स्वार्थ था मे आपसे प्यारजो करती थी.. ओर मे खुसनसीब हुकी आप मुजे पतीके रुपमे मील गये..

अ‍ेसीही प्यार भरी बाते करते दोनो गांव तक पहोंच गये तो देवायतने कारको सीधेही रश्मीके घर जाने दी तो पुनम उसे आस्चर्यसे देखती ही रही.. तब देवायतने उनको साथ चलनेको कहातो वो देवायतका हाथ पकडते उनके साथ चलने लगी ओर दोनो रश्मीके घरमे आगये..

तब रश्मी के घरमे कोइ नही दीख रहाथा.. तब देवायत सरपंचके पास चला गया तो वो बेडपे लेटके चारो ओर टगर टयर देख रहाथा..

जेसेही देवायतको देखा उनके चहेरेपे खुनस बढने लगा तो देवायतकी हसी नीकल गइ.. ओर वो रश्मीको ढुंढते उनके रुमकी ओर बढने लगा तब पुनमभी पीछे पीछे चलने लगी देखातो रश्मी अपने बेडपे आराम कर रहीथी जेसेही देवायत पुनमको देखा फटसे बेडसे खडी होगइ..

ओर पुनमसे दोडके लीपट गइ फीर उनके चहेरेको दोनो हाथोसे थामते उनकी आंखोमे देखते मुस्कराती रही.. क्युकी देवायत पुनमके बारेमे अ‍ेक बार उनसे बात कर चुका था..

पुनम : (सरमाते हसते) भाभी मुजे अ‍ैसे क्या देख रही हो..? जेसे मुजे पहेली बार देख रही हो.. हें..हें..हें..

रश्मी : (हसते सुगुनके पैसे नीकालके देते) हां पहेले देखा हे तुजे.. तब तुम मेरी ननंद थी.. आज मेरी सौतन हो गइ हो.. क्या मस्त दीखती हो.. (आंखोसे टीका लगाते) कीसीकी नजर ना लगे.. क्या हो गइ दोनोकी सादी..?

इतना सुनतेही पुनमको बडा जटका लगा.. ओर वो देवायतकी ओर अ‍ेक नजरसे देखती रही.. तब देवायत ओर रश्मी दोनोही हस रहेथे तो पुनमने देवायतकी ओर सवालीया नजरोसे देखा तब..

देवायत : हां पुनो बाबाने तुजे कहाथानां..? की हमारे मीलनका इन्तजाम कर लीया हे.. वो यही तो हे..

पुनम : भाइ लेकीन.. रश्मीभाभीको सब कैसे पता..?

रश्मी : अरे मेरी लाडली तु डर मत.. मेनेभी तेरे भाइसे गांधर्व विवाह करलीया हे.. ओर अब ये भी मेरे पती हे.. अब तुजे जबभी इनको मीलनेका मन करे यही आजाना.. ओर अपने इस पतीसे खुलके प्यार कर लेना.. मुजे पता हे वहा हवेलीमे तुम दोनोको मीलनेमे बहुतही तकलीफ होगी.. तभी तो हमारे पतीने मुजसे कहा हे.. तु फीकर मत कर.. यही वो सीक्रेट जगाह हे.. तुजे जबभी इनको मीलनेका मन करे यहा सब इन्तजाम हे..

कहातो पुनम खुसीके मारे श्मीसे लीपट गइ ओर आंसु बहाने लगी.. तब रश्मीने हसते हुअ‍े उनके आंसु पोछे ओर उनको पानी पीलाया.. फीर दोनोको बेडपे बीठाया ओर कुछ ठंडा लाने कीचनमे चली गइ..

पुनम : भाइ क्या इसीलीये तुम मुजे उस दीन रश्मीभाभीसे दोस्तीके लीये केह रहेथेनां..?

देवायत : हां पुनो.. रश्मीने हमारी बहुत मदद कीहे सारे गांव वालोकी जमीनके कागजात हमे वापीस देदीये हे ओर हमारीभी बहुत सारी जमीन हे जो हमे मालुमही नहीथा.. ये मेरी सीक्रेट वाइफ हे.. जेसे तुम हो..

पुनम : भाइ तबतो मुजे आपसे मीलनेका जबभी मन करेगा मे यहा चली आउगी ओर आपको फोन कर दुगी आप आजाना.. क्युकी भाभी घरपे आजायेगी तब हमारा मीलना वहा मुस्कील होगा..

रश्मी : (अंदर आते दोनोको ठंडा देते) अरे मेरी लाडली बहेन तु फीकर मत कर.. इसीलीये तो ये इनकी सीक्रेट जगाह हे.. मे खुद इनको फोन करके बुलवा दुगी.. बस तु यही चली आना.. क्या अभी मीलना हे..? हें..हें..हें.. तो मे बहार चली जातीहु.. दोनो यही सुरु होजाओ.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) नही भाभी.. थेन्क्स.. वेसे कैसीहे आपके पतीकी तबीयत..?

रश्मी : बस वहा खटीया पकडके पडे हे.. पता नही इनसे कब छुटकारा मीलेगा.. कमीनेने बहुत पाप कीये हे..

पुनम : (हसते) भाभी.. बेचारेको अ‍ैसे क्यु केह रही हो..?

रश्मी : अरे वो कोइ बेचारे नही.. इनकी करतुत कभी पुछ लेना हमारे इस पतीको सब बतायेगे.. कमीनेने अ‍ेकभी ओरत-लडकीया नही छोडी..

पुनम : भाभी बी केरफुल जरा ध्यान रखना हमारे बारेमे कीसी ओरको पता नही हे..

रश्मी : (हसते) अरे मेरी प्यारी ननंद तुम फीकर मत करो.. तो मेरे बारेमे भी कहा कीसीको पता हे.., तुजे पता हे? हम दोनो कबसे रीलेशनमे हे..? पीछले छे सालसे जब तेरे इस भाइकी सादीभी नही हुइ थी.. क्या तुमको कभी पता चला..?

पुनम : (जोरोसे हसते) क्या..? छे सालसे..? भाभी तबतो आप हम सबकी सीनीयर नीकली.. हें..हें..हें..

रश्मी : (जोरोसे हसते) तो फीर.. ओर नहीतो क्या.. जबसे सादी करके इधर आइ ओर इनको पहेलीबार देखा तो मुजे भा गये.. तबसे इनके पीछे पागलथी.. बडी मुस्कीलसे इनको पटाया हे.. हें..हें..हें.. तब जाके अभी हमने सादी करली.. (अ‍ेकदम सरमाते अपने पेटपे हाथ रखते) ओर उनका नतीजा भी आगया..

कहेते देवायतके सामने सरमाते हसने लगी ओर धीरेसे देवायतका हाथ पकड लीया ओर अपने पेटपे रख दीया.. ओर नजर जुकाते मुस्कराती रही तब पुनम ओर देवायत दोनोही खुसीसे सोक्ट होते रश्मीको प्रस्नार्थ भरी नजरोसे देखते रहे.. तब रश्मीने गरदन हां मे हीलाइ ओर सरमाने लगी.. तब देवायत खडा होगया ओर खुसीके मारे रश्मीको जोरोसे बाहोमे भीच लीया..

तब रश्मी खुब सरमाइ ओर पुनमकी ओर देखते हसती रही.. तब पुनमभी खडी होके दोनोसे लीपट गइ.. तो देवायतने उसेभी अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर तीनोही अ‍ेक दुसरोकी बाहोमे काफी देर तक अ‍ैसेही खडे रहे.. तभी पुनमने कहा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ५४

कहेते देवायतके सामने सरमाते हसने लगी ओर धीरेसे देवायतका हाथ पकड लीया ओर अपने पेटपे रख दीया.. ओर नजर जुकाते मुस्कराती रही तब पुनम ओर देवायत दोनोही खुसीसे सोक्ट होते रश्मीको प्रस्नार्थ भरी नजरोसे देखते रहे.. तब रश्मीने गरदन हां मे हीलाइ ओर सरमाने लगी.. तब देवायत खडा होगया ओर खुसीके मारे रश्मीको जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. तब रश्मी खुब सरमाइ ओर पुनमकी ओर देखते हसती रही.. तब पुनमभी खडी होके दोनोसे लीपट गइ.. तो देवायतने उसेभी अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर तीनोही अ‍ेक दुसरोकी बाहोमे काफी देर तक अ‍ैसेही खडे रहे.. तभी पुनमने कहा....अब आगे

पुनम : (अलग होतेही) भाभी कोन्ग्रेच्युलेशन.., मुबारक हो आप मां बन गइ..

रश्मी : (देवायतकी बाहोमे रहेते) हां पुनमदीदी.. मुजे सब बांज कहेते ताने मारते थे.. ओर हमारे पतीने मुजे उस तानेसे छुटकारा दे दीया.. अब मे हमारे पतीके बच्चेको जन्म दुगी.. बस ये बात कीसीको नही मालुम.. सब यही समजतेहे की बच्चा खटीयामे बडे हुअ‍े मेरे भुतपुर्व पतीका हे.. आप इस बातका जीक्र कीसीसे मत करना.. की बच्चा हमारे इस पतीका हे..

पुनम : (हसते) भाभी फीकर मत करो.. अबतो हम दोनो ही अ‍ेक दुसरेकी राजदार हे.. हें..हें..हें..

रश्मी : (सरमाते हसते) पुनोदीदी हम कीतने दीन होगये नही मीले.. अगर आपको कोइ अ‍ेतराज नाहो ओर आपकी इजाजत होतो क्या मे इनसे थोडी देरके लीये मीललु..?

पुनम : (जोरसे हसते) अरे भाभी येभी कोइ पुछनेकी बात हे..? ये आपकेभी पती हे.. इनको खुलके मील लीजीये.. मे यही हु.. ओर हो सकेतो मेरे सामनेही मील लीजीये अब हमारे बीच कैसा पर्दा..? आप यही मीललो ताकी मुजेभी रातमे इनको मीलने मे बडी बेकरारी रहे.. हें..हें..हें..

कहातो रश्मी सरमा गइ ओर देवायतकी बाहोमे फीरसे समा गइ.. तब दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमने लगे ओर थोडीही देरमे मदहोस होके भुल गये की इधर पुनमभी बेठी हे.. दोनोही वही खडे खडे सुरु होगये ओर अ‍ेक दुसरेके कपडेको नीकालके दोनोही नीवस्त्र होगये.. तब देवयातने रश्मीको कमरसे पकडके अपनी ओर खीचलीया ओर अपने तनसे चीपकालीया तब रश्मी देवायतके होंठ चुमते अ‍ेक हाथ नीचे लेजाती हे..

वो देवायतके लंडको पकडके अपनी चुतका रास्ता दीखाती हे.. तब देवायतने रश्मीके बुब्स मसलते अ‍ेक हाथ उनकी कमरके पीछे ले गया ओर नीतंबपे रखके अपनी ओर जोरोसे दबा दीया तो देवायतका लंड रश्मीकी चुतमे सरक गया.. तब रश्मीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. तो पुनम हसने लगी.. तब रश्मी अ‍ेक बार कातील नजरसे पुनमकी ओर देख लेती हे ओर आंख मारके मुस्करा देती हे..

तभी पुनमभी गरम होजाती हे ओर धीरे धीरे अ‍ेक हाथ अपने बुब्सपे रख देतीहे ओर धीरेसे मसलने लगती हे तबतक देवायत ओर रश्मी अ‍ेक दुसरेको बाहोमे भीचते कमर हीलाते खडे खडे चुदाइ करने लगे.. तब रश्मी आंख बंध करते सीसकारीया करते मजेसे चुदवाने लगी तो पुनमभी काम वासनामे जलने लगी ओर बडीही कामुक नजरोसे दोनोकी चुदाइ देखते अ‍ेक हाथसे अपनी चुतको सहेलाने लगी..

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तभी देवायतने रश्मीके नीतंबपे दोनो हाथ रखके रश्मीको अपनी गोदमें उठा लीया.. तो रश्मीने दोनो हाथ देवायतके गलेमे रखके अपने पैर देवायतकी कमरमे आंटी लगाके उसे मजबुतीसे पकड लीया.. तब देवायत रश्मीको गोदमे उठाते राघव वाले रुमकी ओर चल पडा.. तब रश्मीकी चुतमे अभीभी देवायतका लंड घुसा हुआ था.. ओर रश्मीने देवायतके गलेमे हाथ डालके उनको कसके पकड रखा था..

तब देवायत राघवके सामने रश्मीको बेडपे पटक देता हे.. ओर खुद उनपे जुकके रश्मीके दोनो पेर अपने हाथोमे फसाके रश्मीको जोरोसे चोदने लगता हे तब रश्मीकी चीख पुरे रुममे गुंजने लगी..

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तो उनकी आवाज सुनके पुनमभी वहा दोडके आगइ ओर दरवाजेपे खडी होकर दोनोकी चुदाइ देखने लगी.. तभी उनका ध्यान राघवपे पडा तो गभराके थोडा पीछे हट गइ.. ओर रश्मीकी धमासान चुदाइ होते देखने लगी.. तब वो फीरसे गरम होने लगी ओर खडे खडेही अपनी चडीमे हाथ डालके अपनी चुतको सहेलाने लगी.. तब देवायत कमर उछाल उछालके रश्मीकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा तो रश्मीभी कमर उछालते देवायतका पुरा साथ दे रहीथी..

तभी रश्मीने देवायतको गलेमे हाथ डालके अपने आपसे चीपका लीया ओर कमरको जटके मारते जडने लगी.. तबभी देवायत रश्मीको चोदेही जा रहाथा.. तब रश्मी जडके पुरे पसीनेसे भीग चुकीथी फीरभी देवायत उसे चोदेही जा रहाथा.. अब रश्मीका जोस थोडा ठंडा पड गयातो देवायतके लंडको जेलना उनके लीये मुस्कील होगया.. तभी देवायत जुकके जोरोसे रश्मीको बाहोमे भीचलेता हे ओर लंडको रश्मीकी चुतमे जडतक घुसाके कमरको जटके मारते जडने लगाता हे.. ओर रश्मीकी पुरी चुतको अपने पानीसे भरके हरी भरी करदी..

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तब रश्मीने राहतकी सांसली ओर देवायतकी पीठको सहेलाती रही.. तब पुनमभी अपनी चुतमे उंगली करते जड गइ ओर कोमन बाथरुममे घुसके अपनी चुतको साफ करने लगी, तब रश्मी ओर देवायत अबभी अ‍ेसेही लंडको चुतमे डालके पडे थे तब रश्मी सरमके मारे देवायतसे नजरे चुराते मुहको इधर उधर घुमा रही थी.. ओर आखीर देवायत खडा होगया तब लंड फच..आवजके साथ बहार नीकल गया तो रश्मीने अपनी चुतपे अ‍ेक नेपकीन लगा दीया जो वही पडाथा ओर अपनी चुतको लेटे लेटे ही साफ करने लगी..

रश्मी : (सरमाते नजर चुराते) जानु आपनेतो अ‍ेकही बारमे मेरी चुतकी धजीया उडादी.. कीतना जोसमे चोदते थे, क्या मेरी इस बहेनकोभी अ‍ेसे चदते हो..? ध्यान रखना बाबु अभी ये बहुत नाजुक ओर छोटी हे..

देवायत : (लंडको पोछते) हां डार्लींग अभी हमने कलही हमारी सुहागरात मनाइ हे.. इनकी पुरी रात चुदाइ की हे.. सुबहतो लगभग बेहोस हो चुकी थी फीरभी उनको चुदाइकी तेरे जेसीही तडप हे..

पुनम : (देवायतके कपडे अंदर लाते) भाभी.. क्या करु.. इनको देखतेही मुजे मन होने लगता हे.. अब मे इनके बीना नही रेह सकती.. जीतो चाहता हे हम दोनो दीन रात यही करते रहे..

रश्मी : (हसते) हां.. अभी नइ नइ सादी हुइ हे तो यही लगेगा.. पुनमदीदी तु फीकर मत कर तुजे जबभी इनको मीलनेका मन करे यहा चली आना.. ओर उस कमरेमे घुस जाना.. ओर हां अ‍ेक बात ओर.. कभी कभी मेभी तुम दोनोके साथ सामील होजाउगी, देखुतो सही हमारे पती हम दोनोको कैसे ठंढी करते हे.., हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाके हसते) भाभी आप बहुत डेन्जर हो.. हें..हें..हें.. , थेन्क्स भाभी.. अच्छा हुआ ये मुजे आपके पास लेआये.. अबतो इनको अकेलेमे मीलनेका रास्ता खुल गया.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते कपडे पहेनते) बेबी इसीलीयेतो तुजे सीधा यही लेकर आगया.. ताकी तुम दोनो अ‍ेक दुसरेको अच्छी तराह समजलो ओर जानलो.. ये हमारी सीक्रेट जगाह हे जो हम तकही सीमीत रखनी हे..

रश्मी : (बेडसे खडी होते बालोका जुडा बनाते) पुनमदीदी मे ये घर बेचके गोंवके बहार दुसरा घर बनवा रही हु.. ताकी बहार कीसीको मालुम नापडे ओर हमे इनको मीलनेमे आसानी रहे..

पुनम : (सरमाते राघवकी ओर देखते) लेकीन भाभी आप दोनो इनके सामने..? आपके पती हेनां..?

रश्मी : (ब्लाउस पहेनते हसते) हे नही.. थे.., अब नही हे.. अबतो दुनीयाको देखानेके लीये उसे पती बनाके रखा हे अब मेरे पती यही आपके भाइ हे जो अब आपकेभी पती होगये हे.. हमने गांधर्व सादी करली हे.. हम दोनो अब इनकीही रानीया हे.. ओर इनको हम दोनो मीलके खुब प्यार करेगी..

पुनम : (हसते) भाभी पताहे हमारे पुर्खो यहाके राजा ही थे.. जो इनकी बहुत सारी रानीया थी.. तो अब येभीतो यहाके राजा हुअ‍े.. हें..हें..हें.. देखतेहे इनकी कीतनी रानीया होती हे.. हें..हें..हें..

रश्मी : (देवायतकी ओर कातील स्माइल करते) जीतनीभी रानीया हो हमे क्या फर्क पडता हे बस हमेतो हमारे हीसेका प्यार मील जाना चाहीये क्यु बाबु.. हें..हें..हें.. दोगे नां हम दोनोको प्यार..?

देवायत : (हसते) तुम दोनो क्या बाते लेकर बैठ गइ..? अरे बाबा जीतनी भी रानीया आये लेकीन तुम दोनो मेरी बेस्ट ओर चहीती रानीया रहोगी.. बस..? अब चलो चलना नही हे क्या..?

पुनम : (हसते) हां भाइ चलो.. आपकेतो मजे हे.. जहाभी जाओ माल रेडी ही हे.. हें..हें..हें..

रश्मी : (जोरोसे हसते) पुनमदीदी क्या तुम अभीभी इनको भाइ कहेती हो..?

पुनम : (देवायतको कामुक नजरोसे देखते) हां भाभी वो आप नही समजोगी.. क्युकी भाइसे प्यार करनेका (चुदनेका) अ‍ेक अलगही मजा हे.. क्यु भाइ.. हें..हें..हें..

देवायत : (पुनमका हाथ पकडके खीचते बहार लेजाते) हां अब चल तेरीभी क्या क्या फेन्टासी हे..

तब तीनोहे हसने लगे ओर देवायत पुनमको बहार लेके नीकल गया.. तब रश्मी दरवाजा बंध करके थोडी लंगडाते चलते बाथरुमकी ओर नहाने चली गइ.. क्युकी आज देवायतसे उसे बुरी तराह चोदकर उनकी चुतकी धजीया उडादी थी.. जो जलनकी वजहसे चुतकी सीकाइ करनी थी..

उधर देवायत पुनमको लेके हवेलीपे आगया..तब सामके ४ बज चुकेथे तो देवायत अपने रुममे चला गया तब दया ओर रजीया अपने रुममे आराम कर रहीथी तब पुनमभी देवायतके रुममे चली गइ.. ओर धीरेसे दरवाजा बंध करके देवायतके पास दोडके चली गइ ओर उसे जोरोसे बाहोमे भीचते इनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी..

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जबसे देवायतको रश्मीकी चुदाइ करते हुअ‍े देखलीयाथा तबसे पुनमकी चुतमे आग लगी हुइथी ओर वो जल्दसे जल्द देवायतके लंडको अपनी चुतमे लेना चाहतीथी.. ओर दोनोके होंठ मील गये दोनो ही मदहोसीमे छाने लगे ओर अ‍ेक दुसरेके होंठोके रसको पीने लगे.. तब देवायतने उसे चुमते चुमते बेडपे गीरा दीया..

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ओर उनकी बगलमे लेटते पुनमके गलेमे चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा तो पुनम मदहोसीमे छटपटाने लगी ओर हसते हुअ‍े देवायतके हाथको हटानेकी कोसीस करने लगी तब दोनोही मस्तीया करते अ‍ेक दुसरेके साथ प्यारका खेल खेलने लगे.. ओर पुनमने देवायतके गालोमे हाथ डालके उस्े जोरोसे अपने तनसे चीपका लीया ओर बाहोमे भरलीया..

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तभी देवायत पुनमकी कमरपे अ‍ै पैर डालके उनके उपर चड गया.. ओर पुनमके होठोको अपनी गीरफ्तमे लेकर उसे चुमने लगा.. तब दोनोके उपर काम वासना हावी होने लगी ओर पुनम अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते देवायतके लंडको पेन्टके उपरसेही पकडके मसलने लगी..

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तभी बहारकी ओर आहट सुनाइ दी तो पुनम गभराके देवायतको अपने उपरसे हटाके दुर होगइ ओर बाथरुमकी ओर भाग गइ.. तब बहारसे दयाकी आवाज सुनाइदी जो रजीयाको देवायतकी कार देखके चाइ नास्ता बनानेको केह रहीथी.. तब देवायतभी बहार चला गया ओर देखातो दया बहार चली गइथी ओर रजीया कीचनमे जा रहीथी तब देवायत अंदर हाथके इसारेसे पुनमको बहार आनेको कहेने लगा..

तो पुनमभी छुपकेसे धीरेसे बहारकी ओर आगइ.. फीर बहार कीसीको ना देखके जटसे अपने रुममे दबे पांव चली गइ तब देवायत ओर पुनमने राहतकी सांसली ओर देवायत नहाने चला गया तो पुनमभी बाथरुममे घुसके नहाने लगी.. फीर दोनोही नहाके तैयार होगये ओर अपने अपने रुमसे बहार आगये तब दया टेबलपे चाइ नास्ता रखते देवायतको आंखोसे अ‍ेसे इसारा करते मनत करने लगीकी जेसे पुछ रही हो हमसे मीलने कब आओगे.. फीर पुनमको देखने लगी ओर पुछ ही लीया..

दया : छोटी मालकीन आपतो मालकीनको लेने गयेथे..? क्या वो नही आइ..?

पुनम : (हसते) नही दया वो कुछ दीन मौसीके घर रहेगी.. फीर आजायेगी..

दया : (हसते) अच्छा आपके ससुराल आपकी सांसके यहां..? हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) दया.. तुमभीनां..? हां मेरी सांसके यहा रुकी हे.. तुजे जाना हे वहां..? हें..हें..हें..

दया : मालीक अगर वहा उनको जरुरत होतो मे आजाउगी.. वो मौसी अपना काम करेगी के बच्चेको सम्हालेगी.. क्या मेभी वहा आजाउ? उनका काममे हाथ बट जायेगा इधरतो अब सीर्फ आप तीन लोगही हो.. तो रजीया सब सम्हाल लेगी.. ओर अबतो वो चंपाभाभी भी आजाती हे.. आपने मालकीनको वहा खामखा रखा हे.. इधरही आजाती हम सब सम्हाल लेते..

देवायत : (हसते) ठीक हे दया.. वहा तीन दीनके बाद अ‍ेक बार डोक्टरको दीखाना हे उनको दीखाके सीधे यही लेकर आजायेगे.. वरना तु वहा चली जाना.. बस..

पुनम : (देवायतकी ओर देखते आंख मारते) भाइ दया बीलकुल सही केह रही हे इनको वहा भेजदो..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे कल अपने कपडे लेलेना हम दोनो जायेगे तब तुजे वहा छोडके आजाअ‍ेगे..

दया : (खुस होते) हां ये हुइना बात.. मे सब काम सम्हाल लुगी फीर मौसी भलेही बच्चे मालकीनको सम्हालती..

तब दया खुस होगइ तो दुसरी ओर पुनमभी खुस हो रहीथी क्युकी अब उसे सीर्फ रजीयाकाही खयाल रखना था ये तीन दीन उनके लीये बहुतही खासथे.. जो इन तीन दीनोमे वो अपने भाइसे चुदाइ करवाके प्रेगनेन्ट होना चाहतीथी.. फीर दोनो चाइ नास्ता करने लगे तब पुनम देवायतसे सटकर बेठ गल.. ओर देवायतकी जांगोको ओर उनके लंडको सहेलाते गरम कर रहीथी ताकी रातमे उनका भाइ उनकी जमकर चुदाइ करे..

तो देवायतभी काफी गरम हो गयाथा लेकीन अभी कुछ करना मुमकीन नही था तो वो फटाफट चाइनास्ता करके खडे लंडके साथ अपने खेतोकी ओर नीकल गया.. ओर वहा जाके देखा तो भानु बहार खटीयापे नीरास होके बेठाथा ओर लखन खेतोमे ट्रेक्टर चला रहाथा.. तब देवायत उन मजदुरके पास चला गया जो उसे राघवने माराथा फीर उनका हालचाल पुछके उनको कुछ पैसे देकर भानुके पास आके बेठ गया..

देवायत : (हसते) क्युबे.. अ‍ेसे मुह लटकाके क्यु बैठा हे..? क्या मेरी सालीने तुजे मारा हे.. हें..हें..हें..

भानु : (हसते) क्या यार तुभी.. तुजे पतातो हे सब.. अब तु उसे मीकर समजाके कुछ कर.. वरना मेरातो घर ही टुट जायेगा.. मुजसे बातही नही करती..

देवायत : यार मे उसे वहा केसे बात करु..? वहा काकी होगी लता होगी.. उनके सामने बात करना अच्छा नही लगता.. वो कुछ पुछेगेतो मे क्या कहुगा.. मुजे उनको अ‍ेकेले बात करनेका मौका मीलनेदे फीर बात करलुगा..

भानु : यार उनके पास फोनतो हे ओर तेरे पास उनका नंबरभी हे तो अ‍ेक बार उसे फोनपे तो बात करले.. ताकी उनके मनको तसली होजायेकी तु उनसे बात करेगा.. बस वोतो अ‍ेकही रट लगाये बेठी हे जीजासे बात करके डीसीजन लुगी.. पता नही अब कोनसा डीसीजन लेना हे उनको..

देवायत : चल ठीक हे मे बादमे बात करता हु तु टेन्शन मत ले सब ठीक होजायेगा वो कही नही जायेगी..

भानु : भाइ वो मामीकाभी फोन आयाथा.. मामाको अब बहुतही खुनकी उल्टीया होने लगी हे.. पता नही क्या होगा.. अ‍ेकतो सादी ओर उपरसे मामा ओर घरमे ये सब बखेडा मेरातो दीमाग ही काम नही करता..

देवायत : यार.. तु टेन्शन बहुत लेता हे मे हुनां.. फीर क्या प्रोबलेम हे..? सब काम होजायेगा सादीकी खरीदी करनीहे तु लताको भेज देना वो मौसीके साथ चली आयेगी पुनमभीतो होगी..

भानु : (हसते) यार उसे अबभी मौसी कहेता हे तेरी सादी इनसे होने वाली हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां ये हुइना बात.. बस तु युही हसता रहे.. बाकी सब मे देख लुगा.. क्या मामाको होस्पीटल लेके जाना हे..?

भानु : भाइ देखते हे.. मामीसे पुछ लुगा.. वरना सुबह मे लेके जाउगा देखतेहे आज रात तक.. क्या होता हे.. भाइ वो मां याद कर रहीथी तुजे मीलने बुलाया हे.. कहेतीथी दोनो जाके सादीकी तारीख नीकलवालो..

देवायत : भानु देखते हे अगर अ‍ैसा हेतो हम दोनो कल बाबाको मीलने जायेगे उनसे तारीख ले लेगे..

भानु : भाइ आपही कल सुबह जाके लेलो हमे सब मंजुर हे.. मे कल मामाका कुछ करता हु वरना साला युही मर जायेगा.. देखता हु उनको कोइ होस्पीटल लेके जाउगा.. आप बाबाको मीलने जाओ ओर मे मामाको मीलने जाता हु.. फीर दोपहोरके बाद इधर वापस मीलते हे.. ओर हो सकेतो अ‍ेक बार घरपे आजाओ..

देवायत : यार ये हरीया मालती कोइ दीखाइ नही दे रहा.. कहा गये सब लोग.. चाइ बाइ भी नही पीलाइ..

भानु : भाइ वो आपकी जमीलाकी कुछ तबीयत खराब होगइ थी तो उनको छोडने गये हे.. कल आजायेगे..

देवायत : (आस्चर्यसे) क्या हुआ जमीलाको..? कुछ प्रोबलेम हे क्या..?

भानु : भाइ पता नही वो उन मजदुरकी बीवीको पुछा तो केह रहीथी उनको बहुत उल्टीया हो रही थी ओर बुखारभी आगया था तो हरीया ओर मालती उनकी दवाइ लेके उसे अपने कबीले मे छोडने गये हे..

देवायत : चल ठीक हे मे कल बाबासे मीलने जाउगा तब उनकोभी मील लुगा.. जरा वो छोटुकी बीवीको कहेके चाइतो मंगवाले.. क्या नाम हे उनका..?

भानु : (हसते) रीटा.. बेचारी बहुत सीधी सादी हे .. कीसीके सामने देखती तक नही.. साला सरपंच.. इनकाही फायदा उठा रहाथा.. कमीना इसीलीये तो खटीया मे पडा हे.. हें..हें..हें..

तब भानु रीटाको जोरोसे आवाज देके दो कप चाइके लीये बोलता हे तो रीटा चाइ बनाने अंदर चली गइ.. तबतक देवायत जमीलाके बारेमे सोचता रहा की क्या हुआ होगा जमीलाको.. ओर भानु उनकी मामी रमाके बारेमे सोचता हुआ बैठा रहा.. तभी रीटा दो कप चाइ लेके आगइ ओर सरमाती देवायत ओर भानुको चाइ देने लगी तब चोर नजरसे देवायतको देखती रही ओर दोनो चाइ पीने लगे तबतक वही दुर खडी रही..

देवायत : (कप वापस देते) क्या रीटा.. यही नाम हेना..तेरा..? अब छोटु कैसा हे..?

रीटा : (सरमाते हसते) जी.. मालीक अब काफी ठीक होगये हे.. उनका प्लाटर कब खुलेगा..?

देवायत : देख रीटा उनकी हडी टुट गइ हे.. तो कमसे कम अ‍ेक महीनातो लगता ही हे.. तुम चीन्ता मत करना हम उसे होस्पीटल लेजायेगे ओर सब ठीक करवा देगे.. बाकी ओर कोइ जरुरत होतो कहेना..

रीटा : (सरमाते हसते) जी मालीक आप पैसे देतेहे उसीमे हमारा गुजारा होजाता हे.. यहा सब बडीया ओर ठीक हे.. (फीर रीटा चाइके कप लेके नीकल जाती हे)

भानु : भाइ अब आप भावुसे बात करलेना मे नीकलता हु.. कल जाता हु मामाको देखने फीर आके बताता हु

भानु देवायतसे बात करते नीकल जाता हे.. तब देवायत अपने गोडाउनकी ओफीसमे चला जाता हे ओर भावनाको फोन लगा देता हे तब भावना देवायतका फोन देखतेही मनमे खुस होजाती हे.. ओर अपने रुममे फोन लेकर चली जाती हे फीर दरवाजा बंध करके अपने बेडपे लेटे बात करने लगती हे....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ५५

भानु देवायतसे बात करते नीकल जाता हे.. तब देवायत अपने गोडाउनकी ओफीसमे चला जाता हे ओर भावनाको फोन लगा देता हे तब भावना देवायतका फोन देखतेही मनमे खुस होजाती हे.. ओर अपने रुममे फोन लेकर चली जाती हे फीर दरवाजा बंध करके अपने बेडपे लेटे बात करने लगती हे....अब आगे

भावना : (आंसु बहाते) जीजु.. अब आपको मुजसे बात करनेका टाइम मीला..? क्या मुजे पहेले फोन नही कर सकते थे..? वोभी आपके दोस्तने कहा होगा.. तभी फोन कीया होगा..

देवायत : (हसते) अरे नही मेनेतो अ‍ैसेही तेरी तबीयतका पुछने फोन कीयाथा.. बता कैसी हे तुम दोनोकी तबीयत कुछ तकलीफ तो नही..?

भावना : (आंसु पोछते) नही जीजु.. कोइ प्रोबलेम नही हे.. ये बताओ मंजुदीदी कैसी हे..ओर आप कैसे हो..? अबतो ठीकसे खातेभी नही होगे.. सारा दीन दोडधाम..

देवायत : मंजु मौसीके वहा हे सब ठीक हे ओर मेभी मस्त हु.. मेरी बहोत चीन्ता कर रहीहे तु.. ओर बता..

भावना : चीन्तातो करुगीनां मेरे अ‍ेक लौते जीजुहो आप.. मेरे फेवरीट.. हें..हें..हें.. सुनो.. जीजु मुजसे आपसे कुछ बात करनी हे.. लेकीन फोनपे बात करना उचीत नही हे आप घर चले आओ.. जब मे अकेली होउगी तब आपको फोन करुगी.. आप फौरन चले आना.. बहुत जरुरी बात हे..

देवायत : भावु.. क्या भानुके बारेमे बात करनी हे..? उनके बारेमे मे भी तुमसे बात करना चाहता हु..

भावना : जीजु मे आपसे बहुत नाराज हु.. आपको सब पताथा तो इनके साथ मेरी सादी क्यु करवाइ..? मे आपपे सबसे ज्यादा भरोसा करती हु.. इतनातो मेरे पतीपे भी नही करती..

देवायत : नही भावु तेरी सादी हुइ तबतक मुजे कुछ नही पताथा.. ये बाततो मुजे कुछ दीन पहेलेही मालुम हुइ.. मेरा यकीन कर.. कहोतो मे मंजुकी कसम खाता हु.. मुजे सचमे नही मालुम था..

भावना : नही जीजु मुजे आपपे पुरा विस्वास हे आप कसम मत खाओ.. मेरी कीस्मतही खराब हे.. अ‍ेकतो मुजे अपना प्यार नही मीला.. ओर उपरसे पतीभी अ‍ैसा मीला.. जीजु.. कास मेने पहेले ही हीमत करके अपने प्यारका इजहार करदीया होता.. तो मे जीसे प्यार करती थी उनके साथ खुसीसे जींदगी बीता रही होती..

देवायत : व्होट..? भावु क्या तुम सादीसे पहेले कीसीसे प्यार करतीथी..? तो फीर मुजे तब बताया क्यु नही..?

भावना : (आंसु बहाते धीरेसे) जीजु.. केसे बताती.. मे उनसे अपने दीलकी बात कहु इनसे पहेलेही वो कीसी ओरसे प्यारके बंधनमे बंध चुकेथे.. ओर उनकी सादीभी होने वालीथी.. जीजु मे अकेली पड गइ हु.. मुजे यहा घुटनसी हो रही हे आप कुछ कीजीये वरना मे मर जाउगी..

देवायत : पागल होगइ हो क्या..? अरे बाबा मे अ‍ेक दो दीनमे मीलने आता हुनां.. भावु तुजे मेरी कसम हे जो कुछ उल्टा सीधा सोचातो.. हमे अ‍ेक बार मीलने दे सब ठीक होजायेगा.. क्या अपने जीजुपे इतना भरोसा नही हे..?

भावना : जीजु बस अ‍ेक आपही हो जो मे सबसे ज्यादा भरोसा करती हु.. मेने आजतक आपको पुछे बगैर कोइ डीसीजन लीया हे क्या..? जीजु भानुने मुजे धोखा दीया हे.. अब मेभी पीछे नही हटुगी.. मेभी बदला लुंगी..

देवायत : भावु अ‍ेक बार हमे मीलके बात कर लेनेदे फीर तु जो डीसीजन लेगी मुजे मंजुर हे.. अ‍ेक बार उनकीभी सीचुअ‍ेशन समजले ओर इसमे तेरी मामीका कोइ दोस नही हे.. बेचारी अकेली हे क्या करेगी? तु ओरतोकी सीचुअ‍ेशन समज सकती हे.. कबतक बेचारी अकेली रेह सकती हे.. तु समज गइनां..?

भावना : (हसते) हां समज गइ.. जीजु मे भोली दीखती हु लेकीन हुं नही.. हें..हें..हें.. जीजु मुजे मामीसे कोइ सीकायत नही.. लेकीन मुजे सब सच बता देते.. ओर आपकल मामीपे बडा प्यार आ रहा हे..? मामीकी सीचुअ‍ेशन समज सकते हे तो क्या मेरी सीचुअ‍ेशन नही समज सकते..? मे आपकी कुछ नही लगती..?

देवायत : (हसते) हां मेरी अ‍ेक लौती सालीजो हो.. हें..हें..हें.., भावु तु समज.. तेरे साथ तेरा पती हे..ओर मामीका पती होनेके बावजुद ना होनेके बराबर हे.. आइ मीन..

भावना : हां.. जीजु मे समज सकतीहु वो आपका खास दोस्त हे तो इनकीही साइड बोलोगे मे कोन होती हु आपकी..? अबतो मेरी भी सीचुअ‍ेशन मामीके जैसे होगइ हे.. ठीक हे जीजु मुजे मेरी कीस्मतके भरोसे रहेने दीजीये.. आपसे बात करनाही बेकार हे..

कहेते भावुने फोन काट दीया तो देवायत बडाही दुखी हुआ.. ओर वो वापस भावनाको फोन करने लगा लेकीन हर बार रींगही बजती रही.. तब देवायतको बडी चीन्ता होने लगी की भावना कुछ उल्टा सीधा कदम ना उठाले.. ओर उसने लताको फोन लगा दीया तो लता देवायतका फोन देखके गभरा गइ ओर डरते फोन उठालीया..

लता : (सरमाते धीरेसे) हां भैया.. मे लता बोल रही हु.. कुछ काम था..?

देवायत : लता वो भावनाका फोन नही लग रहा.. जरा उनसे बात करवादे.. लगता हे उनका फोन बंध हे..

लता : (राहतकी सांस लेते) जी भैया.. अभी देती हु आप चालु रखना..

कहेते लता जटसे भावनाके रुमकी ओर जाने लगी देखातो दरवाजा बंध था.. तो लताने दरवाजा खटखटाया तब थोडीही देरमे भावनाने दरवाजा खोला लताने देखातो भावना रो रहीथी ओर आंसु पोछते दरवाजा खोलती हे तब लता उसे जीजुका फोन हे कहेके देती हे ओर वहासे चली जाती हे तब भावना फोनपे

भावना : (रोते) जीजु क्यु फोन कीया मुजे? अब कीसीसे बात नही करनी.. मुजे अपनी कीस्मतपे छोडदो..

देवायत : भावु बस अ‍ेक बार मेरी बात सुनले तु जो कहेगी सब करुगा.. मे भानुका पक्ष नही ले रहा.. तुजे मेरी कसम हे.. अगर तुने कुछ कीया तो.. क्या अ‍ेक बार मुजसे बात नही करेगी..? मुजे तुमसे मीलना हे..

भावना : (रोते) जीजु मेरीतो समजमे नही आ रहा हे मे क्या करु..? ओर आपने मुजे कसम क्यु दी.. आपको पता हे मेरे सबसे ज्यादा नजदीक आपही हो.. जीजु मे क्या करु? आपकी कसम मे नही तोड सकती.. प्लीज.. अ‍ेक बार मुजसे मीललो.. मे कीसीभी तराह आपसे मीलना चाहती हु.. प्लीज..

देवायत : भावु प्लीज.. रो मत.. मुजे नही पताथा बात इतनी सीरीयस होगी.. मे तुजे कलही मीलने आता हु..

भावना : जीजु बस अ‍ेक बार मीललो.. फीर मे आपको कभी कुछ नही कहुगी..

देवायत : बस अब रो मत.. मे तुजे कल मीलता हुनां.. भावु तेरी पोजीसन अभी कही घुमने फीरनेकी नही हे.. वरना तुजे अभीके अभी हवेलीपे बुला लेता.. क्या तुजे मौसीके घर जाना हे? मंजुभी वही हे दोनो कुछ दिन साथमे रहेना..

भावना : नही जीजु.. मे यही ठीक हु.. आप कलतो आही रहे हो.. वरना देखती हु.. जीजु में अ‍ेक बार अपने प्यारका इजहार ना करनेकी गलती कर चुकी हु.. अब दुबारा नही करुगी.. मे फोन रखती हु कल आपका इन्तजार करती हु.. हो सकेतो आप जल्दीसे आजाइयेगा..

देवायत : भावु तु क्या अबभी उसे प्यार करती हे..? अब तेरी सादी होगइ हे अ‍ेक बार सोचना.. मे नही चाहता भानु ओर तेरी लाइफ डीस्टर्ब होजाये.. ये गलत नही हे..?

भावना : नही जीजु.. अब मे मेरी लाइफ खराब नही करुगी.. अबतो यही रहेके सबकुछ करुगी.. अगर वो दुसरी सादी कर सकते हे तो मे अपने प्यारको क्यु नही मील सकती.. जीजु ये सब हम कल मीलके बात करेगे अभी रखती हु.. कोइ सुनलेगा तो गडबड होजायेगी.. चलो बाय..

कहेते भावनाने फोन रख दीया ओर लताको आवाज देके फोन दे दीया तब लता उनके सामने सवालीया नजरोसे देखने लगी.. तो भावनाने हसके उसे गले लगा लीया तो लताने हसके पुछही लीया..

लता : (धीरेसे) भाभी क्या हुआ..? क्या देवायतभाइसे आपकी सब बाते होगइ..? आइ मीन.. क्या आपने अपने दीलकी बात बतादी..?

भावना : (धीरेसे) नहीरे.. लता वो कल मुजे मीलने आ रहे हे तब बता दुगी.. क्या तु खुस हे..?

लता : (सरमाते हसते) हां भाभी..बहुत खुस हु.. कास भाइ आपके प्यारको कबुल करले.. तो सबसे ज्यादा खुसी मुजे होगी.. भाभी अ‍ेक बात कहु..? आप भानुभाइको मामीके साथ सादी करने दो.. ताकी आपभी अपनी लाइफ खुलके जीसको.. समज गइनां मेरी बात..

भावना : (सरमाते हसते) चल देखती हु.. तुजे बडी जल्दी हे हमे मीलवानेकी.. हें..हें..हें.. ताकी लखनके साथ मीलनेका तेरा रास्ता साफ होजाये.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते मुका मारते) क्या भाभी..आपभी.. अब मुजे नही मीलना उनसे क्युकी सादीमे दीनभी कीतने रेह गयेहे.. अबतो जोभी मीलना जुलना होगा हम सादीके बादही मीलेगे.. माइ केह रहीथी वो जल्दी हमारी सादी कर देना चाहती हे.. पता नही उनको इतनी जल्दी क्यु हे..

भावना : (जोरोसे हसते) हां तो सही हेना.. वरना पेट फुलाके सादीके फेरे लेती होगी.. हें..हें..हें..

कहातो लता सरमाके हसते हुअ‍े भावनाको पीठमे मुके मारने लगी तो भावना बेडके पीछे भागने लगी ओर लता उनके पीछे मारनेके लीये दोडने लगी दोनोही मस्तीया करते इधर उधर भागती रही तभी भानु अंदर आगया तो लता सरमाके हसते हुअ‍े अपने रुममे चली गइ.. ओर भावनाभी सीरीयस मुह करते धीरे धीरे चलते कीचनमे चली गइ.. तब भानु हाथ मुह धोके अपनी माइके पास चला गया ओर खटीयापे बेठके सरलासे बाते करने लगा..

भानु : माइ वो मामीका फोन आयाथा.. सायद मुजे कल मामाको लेके होस्पीटल जाना पडे.. उनको अब बहुत ही खुनकी उल्टीया होने लगी हे.. सायद तबीयत कुछ ज्यादाही खराब हे..

सरला : (गहेरी सांस लेते) हे भगवान.. अब इनको क्या होगया.. अ‍ेकतो इधर सादीकी तैयारीया करनी हे ओर उपरसे तेरा ये मामा.. चल ठीक हे दीखा लेना कही जाके.. सादीमे कोइ बीघन ना आजाये...

भानु : माइ मेने देवुसे कहा हे वो कल बाबाको मीलने जायेगा तो तारीख पकी करवाके आजायेगा ओर मामाकी बातभी कर लेगा.. माइ मेरे खयालसे आप अ‍ेक बार मामाको मीललो.. सायद आप उसे दोबारा नही मील सकोगी.. हो सकेतो कल ही मेरे साथ चलो..

सरला : तु ठीक केह रहा हे.. चल ठीक हे.. मे भी चलती हु.. क्या पता दुबारा उसे मीलनेका मौका मीले ना मीले.. कीतने साल होगये हम नही मीले..

मा बेटेकी यही सब बाते लता सुन रहीथी ओर मनही मन खुस होते वो कीचनमे चली गइ.. तो भावना वही खडीथी ओर धीरेसे भावनाको माइ ओर भानुके बीच हुइ सब बाते बताने लगी जीसे सुनके भावना मनही मन खुस होने लगी.. क्युकी इन दोनो नही होगे तो कलही देवायतको फोन करके बुला लेगी ओर सब बाते खुलके कर सकेगी.. यही सब सोचते वो मुस्कराती रही ओर खुसीके मारे लताके गालको चुम लीया तो लता भी सरमाके हसने लगी.. ओर भावनाके गले लग गइ.. फीर वही पडी सब्जीया काटने लगी..

लता : (सब्जीया काटते धीरेसे) भाभी कल अच्छा मौका हे.. आप देवायतभाइको बुलालो.. ओर यही सब बाते करलो..

भावना : (सरारतसे हसते) नही.. नही बुला सकती.. क्युकी तुमभी तो होगी.. वो सरमायेगे.. हें..हें..हें..

लता : (जुठ मुठका गुसा दीखाते) हां..हां..बडी आइ सरमकी पुछ.. मुजसे डरनेकी जरुरत नही हे.. मे मेरे रुममे ही रहुगी.. बात करती हे.. वो नही सरमायेगे लेकीन कल आप मत सरमाना.. वरना कलभी अपने दीलकी बात नही करपाओगी.. फीर मत कहेना लता मे बात नही करपाइ मेरी कीस्मत खराब हे वगेरे..वगेरे.. हें..हें..हें..

भावना : (सरमाके हसते पीठमे मुका मारते) चल जुठी कहीकी.. मे नही सरमाती कल पका सब केह दुगी.. बस.. अबतो खुस..? ओर हां खबरदार जो अपने रुमसे बहार नीकलके हमारी बात सुनलीतो..

लता : (हसते) देखना अबतो सब बाते छुपकेसे सुनुगी.. देखुतो सही मेरी सहेली केसे अपने दीलकी बात कहेती हे.. हें..हें..हें..

भावना : (जुठ मुठ बडी आंख करते) लता अ‍ेक मारुगी.. क्या मेरी सहेली नही हो..? प्ली..ज..

लता : (भावनाको गले लगाते) अरे मेरी भाभी नाराज होगइ चलो नही सुनुगी मेतो मजाक कर रहीथी..

दोनोही अ‍ैसी प्यार भरी मस्तीया करते बाते करती रही ओर लता खाना बनाती रही.. तब दुसरी ओर देवायतभी भावनासे बात करके थोडा रीलेक्स होगया ओर वो घरकी ओर नीकलने लगा तो लखनभी साथ चलने लगा ओर दोनो हवेलीपे आगये ओर फ्रेस होगये.. तब पुनम अपने रुममे आज रातकी सब तैयारीया कर चुकीथी वो अच्छेसे पानीमे इतर डालके नहाके हल्कासा शींगार कर रही थी..

तभी लखन ओर देवायतकी आवाज सुनके जटसे बहार आगइ तो देवायत उसे देखता ही रेह गया.. आज पुनम उसे बडी अप्सराकी तराह लग रहीथी जीसे देखतेही उनकी पेन्टमे लंडकी हरकत सुरु होगइ ओर पुनमको देखते जटके मारते खडा होने लगा तो पुनमने देखलीया.. ओर सरमाके देवायतकी ओर हसने लगी तो देवायतभी हसते अपने लंडको पेन्टमे हाथ डालके अ‍ेडजेस्ट करने लगा ओर जटसे अपने रुममे चला गया..

तो लखनभी उपर अपने रुममे चला गया वो आज ट्रेक्टर चलाके काफी थका हुआ लग रहाथा तो जातेही सीधा बेडपे गीर गया ओर आंख बंध करके लेटा रहा.. तब दया ओर रजीया खाना बना रहीथी तो पुनम धीरेसे देवायतके रुममे चली गइ.. तब देवायत चेन्ज कर रहाथा तो पुनम धीरेसे देवायतके पीछे चली गइ ओर पीछेसेही देवायतको बाहोमे भरलीया तब देवायत पलट गया ओर पुनमको जोरोसे बाहोमे भीचलीया

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पुनम : (धीरेसे) भाइ आप देर रात सब सोजाये तब मेरे रुममे आजाइअ‍ेगा.. मे दरवाजा खुला रखती हु..

देवायत : (होंठ चुमते) ठीक हे डार्लींग आज तैयार रहेना पुरी रात सोने नही दुगा.. आज क्या मस्त लग रही हे तु.. दील करताहे तुजे अभी प्यार करलु.. बीलकुल मेरी परी लग रही हे..

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ तो मेभी कहा सोना चाहती हु.. आज ही मेरा सब काम नीपटाना हे.. आप जल्दी आजाइअ‍ेगा.. ओर ये परी सीर्फ आपकी हे.. आप जब चाहो इस परीको प्यार कर सकते हो..

कहेके देवायतके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी ओर जटसे अलग होते बहार भाग गइ तब देवायत मुस्कराता अपने लंडको सही करते बहार चला गया तो पुनम खाना नीकाल रहीथी ओर देवायत सोफेपे बेठ गया ओर टीवी चालु करके देखने लगा.. ओर सोचता रहा..

देवायत : (मनमे) पीछले अ‍ेक महीनेमे कीतना कुछ बदल चुकाथा जो रीस्तेको मे इमानदारीसे नीभा रहाथा अब उन रीस्तेके माइने ही बदल चुके थे.. आज मेरी बहेन मेरी मासुका.. मेरी हमसफर होगइ हे.. जो पीछले तीन दीनोसे मेरा बीस्तर गरम कर रही हे.. ओर उनकी चुत.. आहा.. क्या कहेना.. कीतनी कसी हुल हे.. जी चाहता हे उस्े दिन रात चोदताही रहु.. ओर दीखनेमेभी कीसी हिरोइनसे कम नही हे.. अ‍ेकदम गोरा बदन संतरे जेसे चुचे.. बस उनको चुसता ही रहु..

पुनम : भाइ चलो खाना रेडी हे.. (जोरोसे आवाज देते) लखनभैया चलो आजाओ खाना रेडी हे..

तब देवायत टीवी बंध करके डाइनींगपे जाके बैठ जाता हे.. तब देवायतको नही मालुमथा की वो जो सोच रहा हे.. वो पीछली दो पीढीयोसे उनके खानदानमे हो रहा हे.. तभी लखन भी दोडके नीचे आजाता हे तो सब अपनी अपनी जगाहपे बेठ गये तो पुनमभी देवायतकी बाजुमे बैठ गइ ओर सबको खाना सर्व करने लगी.. तभी उनको अपने पैरपे देवायतका पैर महेसुस हुआ ओर वो कामुक मुस्कानके साथ सबको खाना देती रही..

उनको पताथा की उनका भाइ उनके पीछे पागल हो चुका हे.. तब उनकी जांगपे देवायतका हाथ महेसुस हुआ जो इनकी जांगको नीचेसे हाथ डालके सहेला रहा था तब पुनमकी सांसे तेज चलने लगी ओर वो आजु बाजु नजर घुमाते सरमाके खाना खाने लगी.. ओर देवायतके हाथपे हाथ रखके उनको पकडके अपनी जांगके बीच फसादीया.. तब इनको कंट्रोल करना मुस्कील होने लगा.. ओर उनकी नाजुक चुतकी पंखडीया फडफडाते पानी छोडने लगी.. तब..

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पुनम : (जोरोसे) दया रजीया तुम दोनोभी खाना खाने बेठ जाओ यहा मे भाइको सब दे दुगी..

रजीया : जी छोटी मालकीन..

ओर दोनोभी कीचनके बहार नीचे फर्सपे बेठके खाना नीकालके खाने लगती हे तब उधर आज भानुके घरभी सब खाना खाते बाते कर रहेथे.. तब सरलाने कल भानुके साथ मामाके पास जानेकी बातकी तो लता कातील नजरोसे भावनाकी ओर देखके हसने लगी.. तो बातो बातोमे भावनानेभी लताके साथ सोनेको केह दीया ताकी दोनो मीलके भावेश ओर बच्चीका बरोबर खयाल रख सकेतो सरलाने भी हां केहदी..

सरला : ठीक हे बेटा.. तुम दोनो साथमे सोजाना ताकी भावेश ओर बच्चीका साथमे खयाल रख सको.. हमतो कल जा रहे हे.. देखतेहे साम तक वापस आजायेगे.. तुम दोनो अच्छेसे सब बंध करके सोना ओर रहेना..

लता : (हसते) माइ हम दोनोकी फीकर मत करो.. मे सब सम्हाल लुगी.. ओर भाभीसे कहो आरामभी करती रहे.. सारा दिन घुमती रहेती हे.. आरामही नही करती.. हें..हें..हें..

सरला : हां बहु अभी दो दीन ही हुअ‍े हे इधर उधर मत घुमाकर अभी कमजोरी होगी तो कही गीर बीर जायेगी.. तो लेनेके देने पडेगे..

भावना : (सरमाते हसते) नही माइ मेतो अ‍ैसेही आइथी.. सारा दीन सोतीतो रहेती हु.. बस इनसे बाते करते टाइम पास कर रहीथी.. ताकी इनकोभी अकेलाना लगे..

सरला : बेटी बस अ‍ेक बार डाक्टरको दीखादे फीर भलेही घरमे घुमो.. हमारे जमानेमे तो ओरते डीलीवरी करके सीधेही खेतोमे काम करने चली जातीथी.. तब कहा ये होस्पीटल बोस्पीटल थी बस गांवकी दायणको बुलाके डीलीवरी करवा लेते थे.. सुबह डीलीवरी हुइ ओर सामकोतो ओरते घरका कामभी करने लगती थी.. मे भानुके टाइमभी उसी दीन कामपे लग गइथी..

लता : माइ वो आपका जमाना था.. ओर आजका जमाना अलग हे.. तब आप खोतोमे काम करती थी ओर हम घरमे पडी रहेती हे कुछतो फर्क होगा..

सरला : (हसते) हां तु तो सहेरकी होगइ हेनां.. तेरी भाभीके साथ रहेके तुभी सीख गइ.. हें..हें..हें..

अ‍ेसेही बाते करते सब खाना खा रहेथे.. तब भानु बडाही टेन्शनमे खा रहाथा ओर अपनीही सोचमे डुबा हुआथा उनको पताभी नही थाकी सब क्या बाते कर रहेहे.. वो बहुतही गहेरी सोचमे डुबा हुआथा उनकोतो बस अ‍ेकही विचार आ रहाथा की मामाके जानेके बाद वो मामीसे केसे सादी करे.. ओर घरमे सबको कैसे बात करे.. वोतो रमाको जल्दसे जल्द सादी करके घर ले आना चाहता था..

बस यही सोचमे डुबा हुआथा.. ओर खाना खा रहा था.. अबतो उनको भावनाके बेरुखी बर्तावसे नफरत होने लगीथी वो मनसे ओर दीलसे भावनासे दुर होता जा रहाथा.. उनकोभी पता चल गयाथा की भावना अब उसे माफ नही करेगी.. तो पुरी जींदगी उनके साथ कैसे कटेगी यही सब सोचते उनका दीमाग सुन हो गयाथा..

सरला : भानु क्या सोच रहा हे? खानातो खाले.. अ‍ेसेही नीवाला लेके बैठा हे तेरे मामाका जो होनाहे होगा तु क्यु चीन्ता करता हे.. हम तेरी मामी ओर नीलमको इधर लेआयेगे.. तु फीकर मत कर..

भानु : (खाना खाते मनमे सोचते) माइ अब तुजे कैसे कहु मुजे मामाकी चीन्ता नही हे तेरी दुसरी बहुकी चीन्ता हे.. जो मे उसे सादी करना चाहता हु.. कास तेरी दोनो बहुअ‍े मीलके साथमे रहे तो कीतना अच्छा हे..

सरला : भानु कल सुबह हम जल्दी जायेगे ताकी साम तक वापस आसके.. इधरभी तो काम होगा..

लता : माइ आरामसे मामाको मीलके आना.. ओर हो सकेतो अ‍ेक रात उधर उनके साथ रेहलो.. कीतने साल हो गयेहे आप मायके गइही नही.. हें..हें..हें..

सरला : (हसते) माइके वाली.. अब वहा तेरे मामा मामी के अलावा हे ही कोन..?

लता : माइ फीरभी मायका मायका होता हे.. क्यु भाभी.. आपभी कीतने दीन होगये नही गइ..

भावना : (हसते) माइ ये कबसे हम दोनोको मायके भगानेकी जीद क्यु कर रही हे..? हां अब समजी इनकी सादीजो होने वालीहे ताकी येभी यहा अपने माफकेमे आ सके.. हें..हें..हें.. लखनको कहुगी इनको मत आने देना हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते पीठमे मुका मारते) भाभी.. अ‍ेक मारुगीनां.. टांग खीचनेका अ‍ेकभी मौका नही छोडती.. माइ इनको कुछ कहोनां..

सरला : (हसते) मे तुम ननंद भौजीके बीच नही पडती.. वो तुम दोनो जानो.. बस भगवान करे तुम दोनो ननंद भोजाइका प्यार युही बना रहे..

भावना : (हसते) माइ अब आप लताकी चीन्तातो करना छोड ही दो मे हुनां.. इनका सब खयाल मे रखुगी..

कहातो भानुने सर उठाके अ‍ेक बार भावनाकी ओर देख लीया ओर उसे आशाकी अ‍ेक कीरण नजर आने लगी.. भावना लताका खयाल रखेगी मतलब वो मुने छोडके नही जायेगी.. यही सोचते वो खुस होते पानी पीने लगा ओर हाथ धोके अपने रुममे चला गया.. तब भावना ओर लता दोनोकोही नही मालुम थाकी दोनोके बीच क्या बाते होगइ सब भावनाओमे बहेकते बाते कर रहे थे....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ५६

कहातो भानुने सर उठाके अ‍ेक बार भावनाकी ओर देखलीया ओर उसे आशाकी अ‍ेक कीरण नजर आने लगी भावना लताका खयाल रखेगी मतलब वो मुने छोडके नही जायेगी.. यही सोचते वो खुस होते पानी पीने लगा ओर हाथ धोके अपने रुममे चला गया तब भावना ओर लता दोनोकोही नही मालुम थाकी दोनोके बीच क्या बाते होगइ सब भावनाओमे बहेकते बाते कर रहेथे....अब आगे

इधर हवेलीपे सब खाना खा रहेथे तब देवायतकी हरकतोकी वजहसे पुनम काफी गरम होचुकी थी अब उनसे अ‍ेक मीनीटभी देवायतसे दुर रहेना मुस्कील होने लगा.. ओर डीनर फीनीस कीया तब देवायत पुनमको कहेके गांवमे घुमने चला गया तो पुनमने उसे सबसे छुपके धीरेसे जल्दीसे वापस आजानेकी बातकी तो देवायत हसते हुअ‍े रमेशके घरकी ओर चला गया..

तो लखन उपर अपने रुममे चला गया.. उधर दया ओर रजीयाभी खाना खाके सब बर्तन उठा रहीथी ओर सब काम जल्दीसे नीपटाना चाहती थी.. ताकी मौका मीलेतो देवायतसे अपनी प्यास बुजा सके.. दोनोही बाते करते सब काम जल्दी नीपटाने लगी.. तब पुनम जटसे अपने रुममे चली गइ ओर दरवाजा बंध करके बाथरुममे भाग गइ ओर कमोडपे बेठते ही अपनी चुतमे उंगली डालके आंख बंध करलेती हे ओर देवायतके लंडको इमेजींग करते जोरोसे हीलाने लगी.. जबसे देवायतने छेडाथा तबसे उनको कही चेइन नही मील पा रहाथा..वो जल्दसे जल्द देवायतसे मीलन करना चाहती थी..

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उधर देवायत उनके दोस्त रमेशके धर गया तो वोभी खाना खाके टीवी देख रहाथा तो देवायतको देखते ही टीवी बंध करते खुस होगया ओर उनको गले मीलके सोफेपे बीठा दीया तब चारुभी देवायतकी आवाज सुनके खुसीके मारे रुमसे बहा नीकली.. ओर देवायतकी ओर देखते कातील स्माइल करते नमस्ते करते रमेशके साथ बेठ गइ.. आज कीतने दीनोके बाद देवायतको देखा तो खुसीसे हसती रही..

चारु : कहो देवरजी मंजुभाभी ओर बच्चेकी तबीयत कैसी हे..? दोनो ठीकतो हेना..? क्या घरपे आगये..?

देवायत : (हसते) भाभी दोनोही मजेमे हे.. ओर मौसीके घर रुके हे, अ‍ेक बार डोक्टरको दीखाले फीर इधर आजायेगे..

चारु : (हसते) अरे मुजे बुलालीया होता.. मेभी होस्पीटलमे साथ आती.. इधर वंदना हेतो कोइ दीकत नही थी.. मेने मंजुभाभीसे भी कहाथा.. यहाभी घरपे बेठे बेठे क्या करती मे.. सारा दीन फ्रि रहेती हु..

देवायत : नही भाभी वो मौसी आगइ थी तो दीकत नही थी.. खैर कहीये कैसे हे आप सब..?

रमेश : भाइ बस वोही रुटीन चल रहा हे.. आप कहो सादी कब रखी हे..? कमसे कम पुनमदीदी की सादीतो अ‍ेन्जोग करेगे हम.. आपसे ज्यादा हमे ज्लदी हे.. खास करके आपकी भाभीको.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) कल हमारे बाबाको मीलने जाता हु देखता हु वो कोनसी तारीख देते हे.. बस कुछ फ्रि होजाये तो सहेरभी जाना हे अब आप सब सम्हाललो.. ओर हो सकेतो कलही मेरे साथ चलो.. हम बाबाको भी मील लेगे.. ओर सहेर जाके उन अधीकारीकोभी मील लेगे जो मेरे जान पहेचानके हे.. क्या कहेते हो..?

रमेश : (मनमे खुस होते) भाइ नेकी ओर पुछ पुछ.. जरुर.. कहो हमे कब नीकलना हे..?

देवायत : भाइ कल दो पहोरको खाना खाके सीधे ही सहेर नीकल जायेगे.. ओर वापसीमे बाबाको मीलके फीर मंजुके पास होकर आयेगे.. मौसीका गांव हमारे रास्तेमे बीचमे ही आता हे..

चारु : (हसते) तो देवरजी मुजेभी साथ लेजाइअ‍े.. मुजे भाभीके पास छोड देना, ओर दोनो चले जाना फीर वापसीमे मुजे लेते आना.. तो मे भाभीसे भी मील लुगी ओर हमारी पुनमका ससुरालभी देख लुगी हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां ये बढीया रहेगा.. आपभी तैयार होजाना.. हम आपको लेकर जायेंगे.. हें..हें..हें..

रमेश : (हसते) भाइ देखलो अगर सब डीस्टर्ब होता हे तो रहेने दो.. वो यहा मील लेगी..

देवायत : अरे नही नही कोइ डीस्टर्ब नही.. भाभी आप चलना मे दोपहोरको लेने आउगा..

रमेश : चारु अब बाते ही करेगी की हमे चाइ बाइ भी पीलायेगी..

चारु : (देवायतको कातील नजरोसे हसते देखेत) जी.. अभी बनाके लाइ.. कीतने दीनो के बाद आये हे जनाब.. लगता हे हमारे लीये टाइमही नही मीलता.. आते ही नही..

कहेते खडी होके कातील स्माइल करते कीचनमे चली गइ.. तभी ट्युशन देके वंदना घरपे आइ तो देवायतको देखते बडीही सरमाने लगी ओर मुस्कराते नमस्ते करते अपने रुममे चली गइ.. तब देवायतको पुनमकी कही हुइ बात याद आने लगीकी वंदनाभी उसे प्यार करतीहे.. जो मेरी सादीकी वजहसे उसने अपनी सादी नही करनेका फैसला करलीया था.. तब ये सोचते देवायतको बडा ही दुख हुआ.. ओर वो पहेली बार वंदनाकी ओर आकर्सीत हुआ.. ओर मौका मीलतेही उनसे बात करनेका फैसला करलीया..

रमेश : भाइ वो रश्मीभाभीको लेके जाना पडेगा.. उनकाभीतो मुनीमकी जगाह पका करना हे..

देवायत : भाइ अभीतो हम सीर्फ उनको मीलने जा रहे हे.. देखतेहे वो क्या कहेते हे.. रही बात रश्मीभाभीकी तो वो सरपंच ओर कमीटीके ठरावसेही होजायेगा.. तब ठरावके साथ हमे वापस जाना पडेगा तब वंदनाको भी साथ ले लेगे.. क्युकी उनकीभी सरकारी टीचर्सकी नोकरीकी बात करनी हे..

रमेश : (मनमे खुस होते) स्योर भाइ.. हम चलेगे..वेसे वो लडकेका क्या हुआ वो ठीक हुआ की नही..?

देवायत : अब बेचारेकी हडी टुटी हे.. तो अ‍ेक महीनातो लगेगाही बेचारा खटीयामे पडा हे उनका खर्चा पानी दे रहा हु.. बहुतही अच्छे लोग हे.. पता नही राघवकी चुंगलमे कैसे फस गये.. उनकी बीवीभी बहुत भोली भाली हे.. कमीना उनका भी फायदा उठा रहाथा.. अब खटीयामे पडा हे.. ओर अपना पाप भुगत रहा हे..

रमेश : भाइ आपतो राजा हो.. भलेही यहा कोइ भी सरपंच बनजाये लेकीन आपही राजा रहोगे जो सबका अच्छेसे खयाल रखते हो.. मे आपकी तारीफ नही करता पर सच हे वो बता रहा हु.. आप वो कबीले वालोकाभी बहुत खयाल रखते हो.. सब आपकी बात मानते हे.. बस मुजे गाइड करते रहेना.. ताकी इसी बहाने लोगोकी सेवा करता रहु.. अब जीतना पैसा कमानाथा कमा लीया.. दुकानतो आदमी ही चला रहा हे बडाही इमानदार लडका हे.. बस वंदनाकी नोकरी पकी होजाये.. तो फीर गंगा नहाये..

देवायत : नही भाइ ये सब हमारे पुर्खोकी महेरबानी हे.. आप अ‍ेक काम करो सरपंच बनतेही अ‍ेक नेकीका काम करदो.. गांवमे कीतने लोग हे जो जीनकी जमीन सरपंचने ब्याजके पैसेके बदले धोखेसे लेली.. उनकी लीस्ट मुजे चाहीये.. वो नेक काम आपही अपने हाथोसे उनकी जमीन वापस लौटाके करदो..

रमेश : (खुसीसे) भाइ वोतो मे पता कर लुगा.. क्या राघवके पाससे आपके हाथमे कुछ आया..?

देवायत : नही लेकीन रश्मीभाभीने कहा हे.. वो सबकी जमीन वापस लौटाना चाहती हे.. बडी ही नेक हे..

चारु : (चाइ लाके देते) तबतो सोनेपे सुहागा.. हमारी रश्मीभाभी बहुतही अच्छी हे पता नही इस लंगुरके हाथ कैसे लग गइ.. मेरी मंजु भाभी ओर रश्मीभाभीकी आपसमे बहुत ही पटती हे.. लीजीये चाइ पीजीये..

तभी चारु देवायतको चाइ देते उनेके हाथको छुके दबा देती हे ओर देवायतके सामने सरारतसे हसने लगती हे.. फीर रमेशको चाइ देते वही उनके पीछे साइडमे बैठ जाती हे ताकी देवायतको देखते रमेश उसे देखना ले.. तब रमेश ओर देवायत बात करने लगे तो चारु देवायतको रमेशसे छुपके अकेलेमे मीलनेका इसारा करती रही कभी अपने होंठ अपनेही दातोमे दबाके कामुक इसारा करती तो कभी मौका मीलतेही देवायतको आंख मारके हसने लगती..

चारु बहेतही कामुक ओरत थी.. चारु रमेशके साथ सादी करके आइ.. ओर वंदनाको जन्म देकर ओर ज्यादा खुबसुरत ओर गदराये बदनकी मालीक होगइ.. रमेश देवायतसे उमरमे काफी बडाथा.. लेकीन सरीरसे अ‍ेकदम पतलाथा.. ओर देवायतसे उनकी खुब जमतीथी.. चारुने पहेली बार देवायतको देखा तबसेही वो देवायतके पीछे पागलथी.. ओर देवायतको रीजानेका अ‍ेकभी मौका नही छोडती.. जबभी देवायत रमेशके घर आता वो अपना जलवा दीखानेको नही चुकती..

ओर अ‍ेक दीन घरपे रमेश नही था ओर देवायत उनसे मीलने आगया.. तब चारुने आखीर अपनी मंजीलको पालीया.. वो देवायतसे अपने तनकी आगको बुजानेमे कामयाब होगइ.. ओर उस दिन देवायतने उनकी हालत खराब करदी.. दो दिन ठीकसे चलभी नही पाइ.. तबसे दोनोके बीच अ‍ेक नया रीस्ता बन गया ओर दोनो मौका मीलतेही अ‍ेक होजाते.. ओर सबकुछ कर लेते.. ओर ये रीस्ता आजभी कायम था.. चारु आजभी देवायतके पीछे इतनीही पागल थी..

देवायत : चलो भाइ मे चलता हु कल दोपहोरको दोनो तैयार रहेना..

चारु : (डबल मीनींग) देवरजी मेतो हमेसा रेडी ही रहेती हु.. आप अपने भाइको कहो टाइमपे तैयार रहे..

रमेश : (हसते) हां भाइ हां.. मे भी रेडी रहुगा.. चलो बाय..

तब रमेशभी देवायतको छोडने अपने दरवाजे तक गया तो चारुभी साथ चलने लगी ओर मौका मीलतेही देवायतका हाथ पकडके अपने बुब्सपे रखदेती हे ओर हसने लगती हे.. तब देवायतभी हसते वापस हवेलीपे आगया तो सब सोचुके थे.. जेसेही अंदर आया तो अ‍ेक साया उनका हाथ पकडके उसे लेनाजे लगा..

दया : (धीरेसे) मालीक चुपचाप मेरे साथ चलो.. सब सोगये हे आज अच्छा मौका हे हमे ठंडी करदो..

देवायत : दया लेकीन पुनम जागती होगी.. अभी मे रुममे देखकर आता हु तु चल.. रेडी रहे..

दया : छोटी मालकीनतो रुम बंध करके सोगइ हे.. मे देखके आइ हु ओर छोटे मालीकतो कबसे सो गये हे.. आप फटाफट आइअ‍े हम दोनो रेडी रहेती हे.. कीतने दीनोके बाद मीले हो.. अबतो आतेही नही..

तभी देवायत जाके चेन्ज करने लगता हे ओर अ‍ेक कामोतेजक गोली पानीके साथ ले लेता हे ओर चुपचाप दया ओर रजीयाके रुमकी ओर चला जाता हे.. तब दोनोही बेडपे सब कपडे नीकालके रेडी होके लेटी थी तब देवायतके जातेही दोनो उनपे टुट पडी ओर देवायतके चहेरेको चारो ओर चुमने लगी..

तब देवायतभी अपना गाउन नीकालके दोनोको चुमते प्यार करने लगा.. ओर थोडी ही देरमे रजीयाकी चुतमें पीछेसे लंड डालके जबरदस्त चुदाइ होने लगी.. ओर रजीयाकी हल्की चीखे सुनाइ देने लगी.. तब दयाभी दोनोके नीचे लेटते देवायतके होंठ चुमती रही..

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तबतक गोलीनेभी अपना असर दीखाना सुरु करदीयाथा रजीयाकी इतनी धमाकेदार चुदाइकी वो तीन बार जड चुकीथी तब देवायत अबभी उसे चोदेही जा रहाथा तब रजीयाकी हालत पतली होने लगी.. ओर देवायतने उसे कसके बाहोमे भीचलीया ओर रजीयाकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तब रजीया अ‍ेक बार फीर जड गइ तब वो हीलनेकी स्थीतीमे भी नही रही ओर वो अ‍ेसेही लगभग बेहोसीकी हालतमे वही पडी रही.. तब दया देवायतको लेकर साइडमे चली गइ.. ओर खीचके अपने उपर चडालीया..

फीर देवायत दयाको चोदने लगा तो दयाभी सीसकारीया करते बीचबीचमे चीखती रही दोनोही देवायतके लंडको ज्यादा बरदास्त नही करपाती थी.. ओर अ‍ेकही बारमे ढेर होजाती थी.. आज दोनोने ही मन बना लीयाथा की देवायतके आतेही उनसे चुदवायेगी तबसे दया देवायतका वेइट करते आंगनमे बेठीथी ओर अब वो देवायतके नीचे लेटे जबरदस्त तरीकेसे चुदवा रही थी..

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अभी तक दयाभी दो बार जडके अबभी देवायतसे चुदवा रहीथी.. तब देवायत उसे कसके बाहोमे भर लेता हे तो दयाभी देवायतको बाहोमे भीच लेती हे ओर दोनोही अ‍ेक साथ जडने लगते हे.. तब दयाकी चीख नीकल गइ क्युकी देवायतका लंड उनकी बच्चेदानीसे टकरा गयाथा फीर दोनोही अ‍ेसे थोडी देर पडे रहे तब दया पुरे पसीनेसे भीग चुकीथी ओर उनका पुरा सरीर दर्द कर रहाथा तब देवायत उपरसे हट गया..

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तब दया लेटेही रही.. उनकी चुतकी इतनी जबरदस्त चुदाइ हुइथी की अभीभी फडफडा रहीथी.. ओर चुतसे देवायतका कमरस बहारकी ओर टपक रहाथा.. फीर अपनी चुत अपने नीकरसे साफ करने लगी ओर अ‍ेक नजर रजीयाकी ओर डाली तो रजीया बेसुध जेसी हालतमे पडी सो चुकीथी.. तब दया बेडपे बेठ गइ ओर देवायतका हाथ पकडके अपने पास खीचके बीठा दीया ओर उनसे बेठे ही लीपट गइ ओर धीरेसे बाते करने लगी..

दया : मालीक रजीया केह रही थी अब उसे बच्चा चाहीये.. हो सकेतो उनकी कोख भरदीजीये..

देवायत : लेकीन अब उसे बच्चा क्यु चाहीये क्या करेगी..? यहा कीसीको पता चलेगातो सबको क्या कहेगी?

दया : मालीक आप उसे बच्चा देदो वो सब खुद देख लेगी.. बेचारीको बच्चेकी बडी आस हे ओर वेसेभी यहा सबको पता हे आपने हम दोनोको सम्हाल लीया हे ओर हमारी प्यास बुजाते हो.. तभी तो हमे बहार मुह मारने की जरुरत नही रहेती.. हम आपसेही संतुस्ट होजाती हे बस हम दोनोकी अ‍ेकही तम्मना हे की हम दोनोकी गोद भर जाये.. पता नही हमारे नसीबमे बच्चेका सुख हे की नही.. बस हमारी तम्मना पुरी करदो..

देवायत : वोतो ठीक हे दया लेकीन कोइ केहेगाकी कीसका बच्चा हेतो तुम क्या कहोगी..? कभी सोचा हे..?

दया : मालीक अगर अ‍ैसा हेतो हम दोनो कही दुर चली जायेगी.. बस सहेरमे कोइ छोटा मोटा काम करलेगी आपकीतो सहेरमे बहुत सारी पहेचान हे.. हमे कीसीभी जगाह नोकरीपे रखवा दीजीयेगा..

देवायत : नही दया तुम दोनोको कही जानेकी जरुरत नही.. मे मंजुसे बात कर लुगा फीर कुछ करते हे..

दया : मालीक तबतो बडी महेरबानी आप फीकर मत करना हम आपका नामतो कभी नही लेगी..

देवायत : नही दया मे बच्चेको नाजायज नही रहेने दुगा.. तु फीकर मत कर मे सहेरमे अ‍ेक बंगलो ले रहा हु तब तुम दोनो वही चले जाना.. ओर हमारे बंगलेको सम्हालना कोइ कहेतो कहेना ये मेरे बच्चे हे..

दया : (खुस होते) तबतो आपकी बडी महेरबानी लेकीन आपका नाम बतानेकी नोबत नही आयेगी.. हम लोगोको जवाब दे देगे.. बस आजकी तराह हमे खुस करते रहीये हमारे लीये यही बहुत हे..

देवायत : दया मे मौसीसे सादी कर रहा हु.. तब पुनो धिरेनके साथ वहा अकेली होगी.. तो मे चाहता हु तुम इनके साथ चली जाना.. ताकी पुनोको अकेला ना लगे ओर उनका काममे हाथभी बट जायेगा..

दया : (होंठ चुमते) मालीक ये आप क्या केह रहे हे..? हमारे होते हुअ‍े हम छोटी मालकीनसे थोडी काम करवायेगे.. ठीक हे मेही चली जाउगी.. लेकीन वहाभी आपको आके मुजे अ‍ेसेही खुस करना पडेगा..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे आगे देखते हे.. क्या होता हे.. बस तु अ‍ेकही हे जो मेरी राजदार हे.. ओर सुन चाहे कुछभी होजाये.. तुम हमारी बात कीसीको मत कहेना.. क्युकी अब बहुत कुछ नया होने वाला हे..

दया : ठीक हे मालीक.. वो चंपाभाभी आइथी.. आपका पुछ रही थी.. अब आयेतो क्या कहु..?

देवायत : बस मंजुको आने दे फीर तु चली जायेगीतो इनको इधर बुला लुगा.. वोभी तो तेरी तराह मेरी दीवानी हे.. हें..हें..हें..

दया : (हसते) हां..तभीतो.. क्या गदराया माल ढुंढा हे आपने.. क्या वो सरपंचकी बीवीकोभी..

देवायत : हां दया.. वो भी मेरी सीक्रेट वाइफ हे.. जेसे तुम हो.. जब तु पुनमके साथ उनके ससुराल जायेगी.. तब तेराभी सब काम होजायेगा..

दया : मालीक अ‍ेसे नसीब हमारे कहा जो आपकी बीवी बन सके.. बस हमे अ‍ेसे खुस करते रहीये हमारे लीये ये भी बहुत हे.. इसीलीयेतो हम दोनो आपका बच्चा चाहती हे जो नेक दील इन्सान होगा..

देवायत : बस दया कुछ दीन तुम दोनो इन्तजार करलो फीर वोभी दे दुगा.. बस अबतो खुस..?

दया : (बाहोमे भरते चुमते) हां अब खुस..ये हुइना बात कल रजीयाको कहुगी बेचारी खुस होजायेगी..

देवायत : बस बात तुम दोनोके बीच ही रखना कीसीको अभी बताना नही हे..

कहेते देवायत वहासे अपने रुममे चला जाता हे ओर नहाने बाथरुममे घुस जाता हे.. तब दया वापस रजीयाके पास लेट जाती हे ओर थोडी ही देरमे वोभी गहेरी नींदकी आगोसमे चली जाती हे क्युकी देवायतसे चुदवाके वोभी काफी थक गइ थी.. दोनोही हवेलीमे तबसे हे जब देवायतकी सादीभी नही हुइथी.. ओर तबसेही दोनो देवायतकी दीवानीथी ओर देवायतसे अपने तनकी प्यास बुजाती थी..

इधर देवायत नहाके गाउन पहेनके अंधेरेमे ही रुमा दरवाजा बंध करके धीरेसे पुनमके रुमकी ओर चला जाता हे.. तब वहा जाके हल्कासा दरवाजेको धका मारता हे तब दरवाजा खुल जाता हे.. ओर देवायत अंदर जाके दरवाजा धीरेसे बंध करके लोक करदेता हे.. ओर पलटके देखता हेतो पुनम अपने उपर चदर डालके लेटी हुइ हे.. ओर जागते हुअ‍े देवायतका इन्तजार कर रही हे..

पुनम : (धीरेसे) भाइ आजाओ बहुत लेट करदी आपने.. क्या दया ओर रजीयाके पास गये थे..?

देवायत : (पुनमके पास बेडपे बेठते) हां बेबी तुमतो जानती हो सब.. बेचारी मुजसेही उमीद लेके बैठी हे..

पुनम : भाइ अ‍ेक त्यक्ता हे ओर अ‍ेक बेचारी वीधवा हे.. तो कहा जायेगी.. ये आग बडी चीज हे.. ओरत अ‍ेक बार इनका स्वाद चख जाये फीर इनके बगैर रेहभी नही सकती.. अच्छा हे उन दोनोका आप खयाल रखते हे.. अब मुजेही देखलो.. जबसे हमने सुहागरात मनाइ हे तबसे आपसे अलग होनेका मनही नही करता..

देवायत : (जुकते होंठ चुमते) तो बेबी मेभी कहा तुमसे अलग रहेना चाहता हु.. हमारी सुहागरातके बादतो मेरी तेरे प्रती चाहत ओरभी बढ गइ हे.. मेतो प्राथना करता हुकी मुजे हर जन्ममे तुम ओर मंजु मीलती रहे..

पुनम : (मुस्कराते) भाइ.. आपको नही पता.. हम दोनो हर जन्ममे मीलतेहे.. ओर वोभी भाइ बहेन बनके.. फीर हम इसी तराह पती पत्नी होकर पुरी जींदगी बीता देते हे..

देवायत : (हसते) अच्छा..? तुम ओर तेरी बाते.. ओर वो मंजुभी अ‍ैसी बात करती रहेती हे.. मेरीतो कुछ समजमेभी नही आता.. चल अब बादमे बाते करेगे.. अभीतो मेरी बहेनको प्यार करना हे..

कहेते देवायत पुनमके उपरसे चदर खीच लेता हे तो पुनम सब कपडे नीकालके पुरी नंगी लैटी हुइ थी.. जेसे देवायतसे मीलन करनेकी जल्दी हो.. तब पुनमको नंगी देखके देवायतभी अपना गाउन नीकाल देता हे ओर वोभी नंगा होके पुनमके पास लेट जाता हे.. तब पुनम उसे कसके अपनी बाहोमे भीच लेती हे ओर उनके होंठ चुमने लगती हे दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते मदहोसीकी ओर बढने लगते हे..

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तभी रुममे अचानक सुगंध फैलने लगी.. जो देवायत ओर पुनम दोनोको मदहोसीकी ओर बढाते कामातुर करने लगी.. ओर दोनोही अपने होंस गंवाके अ‍ेक दुसरेमे समा जानेको बेकरार होने लगे.. क्युकी आज जीस कार्यका बाबा बरसो से इन्तजार कर रहेथे वो शुभ घडी आगइ थी.. जीहां.. रुममे स्यंम काम ओर रती दोनोही कामुक सुगंधके माध्यमसे अपनी मौजुदगीका अहेसास करवा रहेथे.. तभी काम देवायतके सरीरमे तो रती पुनमके सरीरमे वीलीन होगये.. ताकी अपने अपने अंसको संभोगके माध्यमसे पुनमके गर्भमे मीलन करवा सके..

पुनम : (कामुक आवाजमे) भाइ.. अब नही रहा जाता.. आप जटसे सुरु करो मे अ‍ेक पलभी आपसे जुदा नही रेह सकती.. प्ली..ज.. मेरे उपर आजाओ.. ओर डालदो अपना दमदार हथीयार मेरे अंदर..

देवायत : (कीस करते लडखडाती कामुक आवाजमे) हां बेबी.. मेभी तुमसे दुर नही रहेना चाहता.. आज मुजे अपने आपमे समाले.. अ‍ेक बार तेरे उपर चडुगा तो सुबह तक नही उतरुगा.. अ‍ेक बार सोचले..

पुनम : (मदहोसीमे होंठ चुमते) भाइइइइ मेभी आपको उतरने नही दुगी.. आज मुजे पेटसे करदो.. देदो अपना बच्चा मेरी कोखमे.. मे हमारे बच्चेको जन्म देना चाहती हु.. ये मेरी भी आरजु हे.. ओर बाबाका भी मक्सद पुरा होजाये.. पता नही आपका बच्चा पैदा करनेकी मुजे बहुत ही तडप हे.. डालदो अपना बीज मेरे अंदर..

देवायत : (कामुक नजरसे देखते) पुनो.. सच बताना.. क्या ये बच्चेके लीये बाबानेही तुजे कहा हेनां..?

पुनम : हां भाइ.. मुजे बाबाने कहा हे.. ओर मेरीभी बहुत इच्छा हे.. तभीतो आपसे बच्चा चाहती हु.. वरना मेरी सादी होजायेगी तो मे धिरेनको कीसी बातके लीये मना नही कर सकती.. इसीलीये अभी आपसे सादीसे पहेले प्रेगनेन्ट होना चाहती हु.. मुजे आजही प्रेगनेन्ट होना हे.. हमारे पास ये अ‍ेक हप्ता हे जो हम दोनो अकेले हे.. मे अपनी पुरी जींदगी जी लेना चाहती हु..

तभी देवायत अपनी अ‍ेक टांग पुनमके उपर डालके उपर चड जाता हे तब पुनम देवायतको कसके बाहोमे भीच लेती हे.. ओर दोनोही अपने होंठ मीलाके स्मुच करने लगते हे तब बीच बीचमे देवायत पुनमके गाल, बुब्स, ओर गलेको चुमने लगता हे.. जीनकी वजहसे पुनम बहुतही कामातुर होने लगी.. ओर देवायत चुमते चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा.. तब पुनम छटपटाने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ५७

तभी देवायत अपनी अ‍ेक टांग पुनमके उपर डालके उपर चड जाता हे तब पुनम देवायतको कसके बाहोमे भीच लेती हे.. ओर दोनोही अपने होंठ मीलाके स्मुच करने लगते हे तब बीच बीचमे देवायत पुनमके गाल, बुब्स, ओर गलेको चुमने लगता हे.. जीनकी वजहसे पुनम बहुतही कामातुर होने लगी.. ओर देवायत चुमते चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा.. तब पुनम छटपटाने लगी....अब आगे

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पुनम देवायतका सर पकडके उसे वापस अपने मुहकी ओर खीच लेतीहे ओर मुह खोलके देवाततके मुहमे अपनी जीच डाल देती हे ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे.. तब पुनमकी आंख लाल होने लगी.. ओर अ‍ेकदम कामुक होके देवायतके होठोको लीपलोक करते जोरोसे चुंबन करने लगी.. तभी देवायतने चुंबन करते अ‍ेक हाथ नीचे लेजाके पुनमकी चुतपे रख दीया ओर सहेलाने लगा तो पुनम छटपटाते सीसकारीया करने लगी ओर आधी आंख चडाके नसेकी हालतमे जाने लगी..

पुनम : (कामुक होते) बससस.. बससस.. बसस.. भाइ कुछ हो रहाहाहाहेहेहे डालदोनां.. उंहु..उंहु..ससइइइ..

देवायत : अभीसे..? अरे बेबी आजतो पुरी रात मजा करना हे.. तुजे पुरी रात बीना नीचे उतरेही चोदता रहुगा.. आज पुरी रात तेरी चुतमे लंडको अंदर रखना हे.. देखुतो सही मेरी बहेन कीतना मजा देती हे..

कहातो पुनम लंडका नाम सुनतेही बुरी तराह सर्मसार होते देवातकी आंखोमे वासनाभरी नजरोसे देखने लगी.. ओर अ‍ेकदम देवायतके होंठ चुम लीये.. ओर देवायतको वाइल्ड कीस करने लगी.. फीर..

पुनम : (मदहोसीमे) भाइइइइ हम दोनोके लीये ये नया अनुभव होगा.. मेभी आपको नीचे नही उतरने दुगी.. बस अ‍ेक बार मुने मेरी मरजीसे करने दो.. फीर आप मेरे उपर चड जाना ओर पुरी रात मुजे चोदते रहेना..

कहातो देवायतने कीस करतेही चुत सहेलाते अपनी अ‍ेक उंगली पुनमकी चुतमे घुसादी ओर चुतके दानेको टटोलने लगा तब पुनम कमर हीलाते पागल जेसे होगइ ओर देवायत उंगलीको अंदर बहार करने लगा तो पुनमने उनका हाथ पकडलीया ओर वासना भरी नजरोसे देवायतको देखने लगी तभी देवायत उनके बुब्सको मुहमे लेके चुसने लगा ओर नीपलको दांतोसे दबाके खीचने लगा.. पुनम वापस छटपटाने लगी..

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ओर देवायत धीरे धीरे नीचेकी ओर सरकने लगा ओर आखीर अपनी मंजीलपे पहोंच ही गया.. उसने पुनमकी चुतपे अपना मुह लगा दीया.. ओर जीभसे चुतको पांच छे बार चाटते चुतमे घुसा दीया ओर चुतके दानेको छेडने लगा.. तो पुनम आधी आंख चडाके नसेकी हालतमे चली गइ.. आज दोनोही पुरी तराह कामाग्नीमे जलते प्यारके आगोसमे चले गये थे.. क्युकी आज खुद काम ओर रती दोनोके सरीरमे प्रवेस करके पुनम देवायतके तनपे कब्जा करलीयाथा..

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ओर दोनोसे प्यारका खेल खेलवा रहेथे.. तब पुनम पुरी तराह कामातुर होके आंख बंध लेती हे ओर जोरोसे सीसकारीया करते अ‍ेक हाथ देवायतके सरपे सहेलाते दुसरे हाथसे चदर पकडके कमर उछालते छटपटाने लगती हे..

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पुनम : सीइइइइइ बससस बससस बससस भाइइइइ आहहहइइइइइइइ उउउउइइइइइ सीससइइइइइइ..

तब देवायत उनकी कुछ नही सुनता वोतो बस पुनमकी चुतमे मुह लगाते स्वर्गकी सैर कर रहाथा.. अब पुनमसे बरदास्तसे बहार होने लगा.. ओर वो अचानक बैठ गइ ओर दुर हटते देवायतको धका मारते बेडपे सुला देती हे ओर खुद उनकी कमरपे चडके बेठ जाती हे.. देवायत कुछ समज पाता उसे पहेले ही पुनम देवायतका लंड पकडके अपनी चुतपे सेट करने लगती हे ओर धीरेसे लंडको अपनी चुतकी गीरफ्तमे कर लेती हे.. ओर आंख बंध करते थोडी देर अ‍ेसेही बेठी रही.. फीर देवायतपे जुकते होंठ चुमते कमरको धीरे धीरे उपर नीचे करने लगी ओर देवायतको चोदने लगती हे..

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तब थोडी देरकी चुदाइके बाद पुनम बेठ जाती हे ओर देवायतका हाथ खीचके उसेभी बीठा देती हे.. फीर खुद उनके पेरपे बेठ जाती हे तब देवायत उसे बाहोमे भरके अपने तनसे चीपका लेता हे ओर दोनोके होंठ अ‍ेक बार फीरसे मील जाते हे.. तो पुनम अपने बालको सही करते आगेकी ओर कर देती हे जीनकी वजहसे देवायत उनका ये रुप देखकर ओर कामातुर होगया.. ओर अपनी कमरको हीलाते पुनमको चोदने लगा..

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फीर कुछही देरमे दोनोने अपनी रफ्तार पकडली ओर देवायत जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा तब पुनमने उसे कसके बाहोमे भीचलीया ओर होठोको लीपलोक करलीया.. तभी देवायतको अपने लंडपे गरमाहट महेसुस होने लगी.. तब उसे समजनेमे देर नही लगीकी पुनम जड चुकी हे.. तब देवायत दोनो पैर मोडके घुटनोके बल बैठ गया ओर पुनमको अपनी गोदमे रखते जोरोसे कमरको हीलाते सोट मारने लगा..

तब पुनमसे बरदास्त करना मुस्कील होगया ओर वो जोरोसे सीसकारीया करते देवायतसे चदवाती रही.. ओर आखीर दोनोही अपनी मंजीलपे पहोच गये तब देवायतने पुनमकी कमरमे हाथ डालके अपने लंडकी ओर खीच लीया ओर लंडको पुनमकी चुतमे जडतक घुसा दीया ओर पुनकी चुतको विर्यकी बौछार करते भरने लगा तब पुनम अ‍ेक बार फीर साथमे जडने लगी ओर दोनोही अपनी मंजीलपे पहोचके सांत होगये..

दोनो काफी देर अ‍ेक दुसरेको बाहोमे भीचते बैठे रहे.. फीर होंठ चुमते अलग होगये तब पुनमकी चुतसे दोनोका कामरस चुतसे बहार नीलते बहेने लगा ओर पुनमने अपने नीकरसे चुतको साफ करलीया.. फीर देवायतका लंड पकडके उसेभी साफ करने लगी फीर देवायतका हाथ पकडके उसे बाथरुममे लेजाने लगी..

पुनम : भाइ चलो अ‍ेक बार नहा लेते हे फीर हम बेडसे उतरेगे ही नही.. मुजे पीसाब भी लगी हे..

देवायत : (हसते) हां चलो सही कहा तुने.. आजतो मेरी बीवीकी सब आज्ञाका पालन करना हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हाथ पकडके बाथरुमकी ओर लेजाते) भाइ सीर्फ बीवी ही नही बहेनभी हु आपकी बीवी बनके हमने सुहागरात मनाली.. आज मुजे अपने भाइके साथ सुहागरात मनानी हे ओर भाइसे बच्चा चाहीये.. समजे..

देवायत : (पीसाब करते) पुनो.. तुजे भाइसे चुदवानेका बडा सौक हे..? कहासे सीखा सब..

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ पता नही.. लेकीन मे छोटीथी तबसेही आपको पसंद करती थी ओर जब होस्टेलमे गइ तब सुरुआतमे वो हिमाचलके राजाकी कीताब हाथ लग गइ.. ओर उनकी पुरी कहानी पढीली.. तबसेही मे आपकी ओर पुरी तराह आकर्सीत होगइ ओर आपसे चुदवानेका मन बनालीया था.. ओर किस्मत देखो वोही राजा हमारे यहा जन्म लेने वाला हे.. ओर आज मे आपकी बीवीभी होगइ.. भाइ जवानीपे कदम रखा ओर ये सब ज्ञान होने लगा तबसेही मुजे अपने भाइसे चुदवानेकी फेन्टासी हे..

देवायत : (हसते) चल आज तेरी सब फेन्टासी आज पुरी कर दुगा.. मेनेभी क्या कीस्मत पाइ हे.. मेरी ही बहेन मेरी बीवी होकर मुजसे चुदवाना चाहती हे.. मेतो धन्य हो गया.. हें..हें..हें..

फीर दोनोही बाते करते नहा लेते हे ओर बहार आके बेडपे लेट जाते हे.. तब देवायत पीछे पुनमसे चीपकके सोगया ओर अ‍ेक हाथ उनके सीनेपे रखके बुब्सको दबाते पुनमके गलेको चुमने लगा.. तो पुनमने करवट लेली ओर देवायतके सामने मुह करदीया.. ओर दोनोके होंठ अ‍ेक बार फीर मील गये.. तब देवायत पुनमके बुब्सको मसलते कीस करने लगा तो पुनमने देवायतकी कमरमे हाथ डालके उसे अपने उपर खीचलीया..

तो देवायतभी अ‍ेक पैर पुनमकी कमरमे डालके उनके उपर चड गया.. तब पुनम पीठके बल लेट गइ ओर दोनोही आपसमे होंठ मीलाते कीस कर रहेथे तब पुनमने हाथ नीचे लेजाते देवायतके लंडको मुठीमे पकडलीया ओर अपनी चुतमे घीसते लव होलमे सेट करलीया.. फीर देवायतको कसके बाहोमे भीचते जोरोसे होंठ चुमने लगी.. तब देवायतने कमरपे दबाव बनाके अ‍ेक जटका मारा तो लंड सीधाही पुनमकी चुतमे चला गया तो पुनमके चहेरे पे हसी आगइ..

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पुनम : (हसते) भाइ धीरे डालोनां.. आपनेतो अ‍ेकही बारमे धुसा दीया.. भाइ येतो अभीभी अ‍ेसेही कडक लग रहा हे अभीतो हम साथमे जडेथे .. फीरभी अ‍ेसे ही रहेता हे..?

देवायत : (धीरे धीरे सोट मारते) हां बेबी.. पता नही कैसे.., लेकीन ये हमेसा खडा ही रहेता हे.. अच्छा हेनां..? जी तो चाहता हे तुजे चोदताही रहु.. चुदवाते हुअ‍े क्या मस्त लग रही हे तु..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ तो मे आपको कहा मना कर रही हु.. आपकी जबभी इच्छा हो मुजे चोद लीया करे.. मे आपको कभी मना नही करुगी बस मुजे इसारा करदेना.. मे खुद चली आउगी..

तभी देवायत अ‍ेक हाथ पुनमके गलेमे डालके धीरे धीरे कमर हीलाते पुनमको चोदने लगता हे.. तब पुनमभी मदहोसीमे छाने लगती हे ओर आंख बंध करते देवायतके लंडको अपनी चुतमे महेसुस करते मजेसे चुदवाने लगती हे.. तभी देवायतभी उनके गलेमे मुह डालके चुमते होले होले सोट मारते मजेसे पुनमकी चुदाइ करने लगा तब दोनोही मदहोसीकी आलममे जाने लगे ओर दोनोपे चुदाइका नसा छाने लगा..

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दोनोही प्यारके भवंडरमे चुदाइ करते गोते लगाने लगे.. आज काम ओर रती दोनोही देवायत ओर पुनमके उपर हावी होगये थे.. पुरे रुममे सनाटा छाया हुआथा.. तब पुनमकी हल्की सीसकारीया सुनाइ दे रहीथी.. फीर धीरे धीरे चुदाइ करते दोनोने अपनी रफ्तार पकडली ओर देवायत पुनमको जोरोसे चोदने लगा तब पुनम पुरी तराह मदहोसीमे चली गइ जैसे उनपे कोइ नसा छा गया हो.. वो बडबडाने लगी..

पुनम : (आंख बंध करते चुदवाते) भाइइइइ सीससइइइ आहहह आहह आहह आजजज नीचोडडड डालोओओ मुजेजेजे अपना बच्चाचाचाआआ देदोओओ हंममममम उउउइइइइ सीसससइइइइइइइ उहु..उहु..उहु.. आइइइ..

देवायत : (नसेमे चोदते) हंमममम हां.. मजाजाजाज आररररहाहाहा हेहेहे.. हंममम...बोलललल बोलललनां..

पुनम : हंमम हाहाहा आरररहाहाहा हेहेहेहे ओरर जोरररसेसे चोदोदोदो भाइइइ.. मुजे.. अपने.. बच्चेकीइइ मां.. सीइइइइ बनादोओओ... आहह.. आहह.. आहह.. आहह.. आइइइइ हंमममम अअअअअउउउउससससइइइ..

देवायत : (कामुक आवाजमे) पुरीरीरी रातततत चुदेदेगीगीगी.. हंममम.. पुरी रात...चोदुगा... हंमममम..

पुनम : हांहाहा.. चोदतेतेते रहेहेनानाना बहुतततत मननन हेहेहे.. रोजजज चोदददनानाना...

देवायत : (मदहोसीके नसेमे) मेरारारा..बच्चाचाचा चाहीहीयेयेयेये हंमममम हांहाहा.. बोललल हमंमममम..

पुनम : (आधी आंख चडाके नसेमे) हंममम हांहाहा..आपपकाकाका बच्चाचाचा..देदोदोओओ सीसीइइइइइ..

दोनोही मदहसीके नसेमे बडबडाते धमासान चुदाइमे मसगुल थे..तो देवायतभी जोरोसे कमर हीलाते पुनमको चोद रहाथा तभी पुनमने जोरोसे देवायतको बाहोमे भीचलीया ओर देवायतसे होंठ मीलाके लीपलोक करलीया.. फीर दोनो आंखे बडी करतेदेवायतकी आंखोमे देखती रही.. तभी देवायतको अपने लंडपे पुनमका गरम पानी महेसुस होने लगा ओर उनका पुरा सरीर कांपने लगा.. जेसे कीसीने लंडको गरम भठीमे डाल दीया हो.. तब पुनमने कीस तोडके अपना सर बेडपे पटक दीया ओर वो सीथील होकर अ‍ेसेही पडी रहेके देवायतसे चुदवाती रही..

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तब पुरे रुममे सनाटा छाया हुआथा.. सीर्फ दोनोकी चुदाइकी आवाज आ रहीथी पुरे रुममे सीर्फ फचच फचच फचच फचच फचच फचच फचच फचच थपप थपप थपप थपप थपप थपप थपप की आवाजका संगीत गुंज रहाथा.. तब बीच बीचमे पुनमकी चुडीयोकी खनखनाहट देवायतको ओर कामातुर करते ओर जोरोसे चुदाइके लीये उकसा रहीथी..

आज कीसीभी हालमे सुबह तक प्यारका तुफान थमने वाला नहीथा.. क्युकी दोनोके सरीरमे आज खुद काम ओर रतीने कब्जा करलीया था.. जो अपने अपने अंसको कीसीभी तराह पुनमके गर्भमे स्थापीत करना चाहते थे..

देवायत अबभी पुनमको जबरदस्त तरीकेसे चोदेही जा रहाथा तब धीरे धीरे पुनम फीरसे गरम होने लगी.. अभी तब वो दो बार जड चुकीथी ओर फीरसे कामुक्ताकी ओर बढते अपनी कमर हीलाते देवायतका साथ देने लगी.. आज दोनोही कामातुर होके चुदाइ कर रहेथे.. दोनोही थकनेका नाम नही ले रहेथे क्युकी आज दोनोके सरीरमे स्यंम काम ओर रतीने प्रवेस करके मोर्चा सम्हाल लीयाथा.. तब पुनम ओर देवायत के सरीर सीर्फ माध्यम रेह गये थे..

तभी देवायत हाथके बस थोडा उचा होगया ओर जोरोसे कमर हीलाते पुनमको जोरोसे सोट मारते चोदने लगा तब पुनमकी इतनी जबरदस्त चुदाइ होने लगीकी पुनमसे बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. ओर वो जोरोसे सीसकारीया करते आधी आंख चडा लेती हे ओर दोनो हाथसे चदर पकडते छटपटाने लगती हे.. उनके मुहसे आवाजभी नीकलना बंध होगइ ओर वो पुरी तराह चुदाइके नसेमे चली गइ..

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तभी दोनोके सरीरमे लाखो चीटीया रेदती हुइ लंड ओर चुतकी तरफ दोडती महेसुस होने लगी.. तो देवायत जोरोसे पुनमको बाहोमे भरते उनके सरीरसे चीपक जाता हे तो पुनमभी देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते देवायतके होठोको लीपलोक करते उनकी ओर बडी आंख करते देखने लगती हे.. तब देवायत कमरको जटके मारते पुरा लंड पुनमकी चुतमे जडतक घुसा देता हे.. तो लंड पुनमकी बच्चेदानीसे टकरा जाता हे..

तब पुनमकी जोरोकी चीख नीकल गइ जो देवायतके मुहमेही दब जाती हे.. ओर दोनोही सातवे आसमानपे पहोचते अपनी अपनी कमरको जटके देते जडने लगते हे.. तभी पुनमको अपनी बच्चेदानीपे देवायतका गरम विर्यकी बौछार महेसुस होती हे तो वो उतेजनामे कांपने लगती हे.. ओर देवायतके लंडको अपने पानीसे भीगोने लगती हे.. दोनोही अपनी कमरको रुक रुककर जटके मारते जडने लगते हे.. तब दोनोके सरीर पसीनेसे तरबोर होते बीलकुल अ‍ेक दुजेसे चीपक जाता हे..

आज दोनोही इस बातसे अन्जान थे की दोनोके कामरससे देवायतके सेंकडो बीज पुनमके बीजसे मीलन करनेके लीये उनके गर्भकी ओर दोडेही जा रहेथे.. जीनमे रती अपना अंस छोड चुकीथी.. तब दोनोही जडके सांत होगये तो पुनमने अपने दोनो पैर उचा करते देवायतकी कमरमे आंटी लगाके रख दीये.. ओर अपनी कमर उची करते नीचे तकीया सरका दीया ओर वो देवायतकी पीठ ओर सरको सहेलाती रही..

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दोनोही सांत होगये तब देवायत पुनमके बुब्सपे सर रखके ढेर होके पडाथा तब पुनम उनके सरको सहेलाते नजर चुराते इधर उधर देखती मुहको घुमाती रही.. तब उसे नही मालुम थाकी जीस तराह दोनो बहार सांत होकर पडेथे तब अंदर देवायतके सेंकडो बीज रतीके अंसको मीलनेके लीये धमासान मचाते दौड रहेथे.. ओर आखीर अ‍ेक बीज पुनमके गर्भके अंडेमे घुसने मे कामयाब होगया.. आखीर वो बीज कमका जो था.. ओर पुनमके गर्भके अंडेमे जाकर रतीके बीजसे मील गया....

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