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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - ७७
तब तीनोही अंदर चले गये.. तो आज मंजुभी सृतीके घर पहेली बार आइथी तो वोभी अंदर नजर घुमाते सब देखती रही.. भलेही बहारसे खंडहर जैसे दीखता हो लेकीन अंदरसे बहुतही सुंदर सजावट थी.. तब अेक खुरसीपे सृतीकी मम्मी बैठी नजर आइ.. जो कोइ कीताब पढ रही थी.. तब मंजु ओर देवायत उनके पास चले गये ओर उनके पांव छुके वही पासमे बैठ गये.. तब सृती भी दोनोके लीये पानी लेकर आगइ ओर पानी देते उनकी मम्मीसे कहने लगी....अब आगे
सृती : मम्मी ये मेरी बेस्ट सहेली हे.. मंजुला.. ओर ये हे उनके पती.. देवायतजी.. पासके गांवके रहेते हे..
सृतीकी मम्मीका नाम भुमीका हे अब हम कहानीमे उसे नामसे ही जानेगे..
भुमीका : (हसते) अच्छा अच्छा.. जीते रहे बेटा.. क्या हेना तुम लोगोको कभी देखा नही हेनां.. तो पहेचान नही पाइ.. बेठो सब.. (सृतीकी ओर देखते) बेटा इनके लीये कुछ चाइ नास्ता बनाले..
सृती : (मंजुकी ओर देखते हसते) मम्मी इनकी अभी अभी नइ सादी हुइ हे.. तो दोनो मीया बीवी सहेर घुमने आये हे.. दो तीन दीन अब यही रुकेगे.. फीर मेरी कोलेजमे भी छुटी हे.. तो इधर ही बुला लीया..
भुमीका : (हसते) अच्छा कीया..
कहातो मंजु जुठे गुसेके साथ आंख बडी करते सृतीको घुरने लगी.. तब सृतीकी हसी नीकल गइ तो अपने मुहपे हाथ रखके घुम गइ ओर हसने लगी.. तब देवायतभी हसता रहा.. क्युकी उनकोभी सृतीकी अैसी सरारत अच्छी लगी.. तब सृती मंजुकी ओर हसती हुइ कीचनमे चली गइ तब मंजुभी खडी होगइ.. ओर वोभी सृतीके पीछे जाने लगी.. तो सृतीकी मम्मी हसने लगी.. ओर मेरी ओर घुम गइ.. फीर बाते करने लगी..
भुमीका : बेटा आप लोग कीस गांवसे हे..? ओर क्या करते हे आप..?
देवायत : (हसते) जी.. आंटी मे --गांवमे रहेता हु.. ओर हमारा बहुत बडा धानका कारोबार ओर खेतीबाडी हे.. ओर मंजु अभी अपनी पढाइ पुरी कर रही हे.. वो ओर सृती दोनो साथमेही पढती हे..
भुमीका : (आस्चर्यसे हसते) अच्छा अच्छा.. तो आप उस गांवमे रहेते हे.., बेटा जब मे कोलेजमे थी तब उस गांवमें मेरीभी अेक सहेली थी.. नीर्मला नाम था उनका.. ओर कुछ दोस्तभी थे जो हम सब मीलके कोलेजमे बडी धमाल करते थे हें..हें..हें.. अेकतो वहाके ठाकुर साहबका लडकाथा.. किशन.. जो बहुतही नेकदील इन्सान था.. सबकी मदद करता रहेता.. फीर विरजी.. राजीव मेरा पती नरेश.. हम सब दोस्त थे.. ओर नीर्मला सायद किशनकी हवेलीमे रहेती थी..
देवायत : (आस्चर्यसे हसते) क्या आप जानती हो ठाकुर साहबको..?
भुमीका : (खुसीसे हसते) हां ठाकुर साहबको नही उनके लडकेको जानतीथी.. किशन.. मेरा मुह बोला भाइ.. जो हम सब अेकही क्लासमे साथ पढते थे.. हम सब दोस्त थे.. नीर्मलाभी उस गांवसे आतीथी.. मेरी खास सहेली.. जैसे सृतीकी ये तुम्हारी बीवी हे..
बडीही मासुम थी.. जो उन ठाकुर साहेबके लडके किशनसे प्यार करती थी.. फीर पता नही कहा चली गइ.. मुजे आजतक नही मीली.. ओर नाही उनका कोइ सुराग.. पता नही इस वक्त वो कहा होगी.. क्या तुमने उनको वहा कभी देखा हे..?
कहातो देवायत चोंक गया.. क्युकी वो उन्ही नीर्मलाकी बात कर रहीथी जीनसे देवायतने अभी अभी सादी कीथी.. तब देवायत बडाही दुवीधामे पड गयाकी उनके बारेमे सृतीकी मम्मीसे बात करनी चाहीये की नही.. अगर वो जान जायेगी की नीर्मलाकी बेटी ये मंजुही हे तो कीतनी खुस होजायेगी.. तब देवायत उनकी पहेचान छुपाके बाकी सब बातानेको राजी होगया.. ओर वो सृ.मम्मी भुमीकासे बात करने लगा..
देवायत : (हसते) हां आंटी में उनके बारेमे जानता हुं.. आपको मालुम हे ये मेरी बीवी मंजु कौन हे..? ओर आपकी सहेलीभी यही हे.. वो -- गांवमे रहेती हे ओर ये मंजु उन्हीकी बेटी हे..
भुमीका : (खुसीसे सोक्ट होते हसते) क्या..? ये मंजु मेरी नीमुकी बेटी हे..? हे भगवान.. देखो आखीर उसने मुजे मीलाही दीया.., कहा गइ मेरी बच्ची.. आनेदो उनको.. उनसे बहुत सारी बाते करनी हे.. पता नही वो कहा हे.. क्या आप उसी ठाकुरके गांवमे रहेते होनां..? क्या मुजे अेक बार नीमुसे मीलवा सकते हो..?
देवायत : (हसते) आंटी.. जब उनकी बेटीभी यही हेतो.. वोही आपको उनसे मीलवा देगी.. अभी आयेगी.. आप उन्हीसे बात करके सब पुछलो.. वो हमारे गांवमे नही रेहती..
सृती : (दोनो चाइनास्ता लाते) क्यु.. जीजु.. मम्मीसे क्या बाते हो रही हे.. कही मेरी बहेनकी सीकायततो नही कर रहे.. हें..हें..हें..
भुमीका : (मंजुको हसते) अरे.. आ बेटी तु इधर आ.. बेठ मेरे पास.. मुजेतो पताही नही थाकी तुम मेरी नीमुकी बेटी हो.. कहा हे वो.. ओर कैसी हे वो.. जबसे कोलेज छोडदी तबसे मुजे मीलीही नही..
सृती : (आस्चर्यसे खुस होते) मम्मी.. क्या तुम जानतीहो मंजुकी मम्मीको..?
भुमीका : (हसते) हां.. बेटी.. अभी अभी हम दोनो बाते कर रहेथे तो बातो बातोमे ही मुजे पता चलाकी तेरी सहेली मेरी खास सहेली नीमुकी बेटी हे.. मेने कीतना ढुंढा उसे.. कभी मीलीही नही.. तेरे मामा किशननेभी कभी इनके बारेमे नही बताया.. ओर देखो.. आज अनायासही मील गइ.. (मंजुको) बेटी.. कैसीहे मेरी नीमु..? कहा हे वो.. मुजे उनसे मीलना हे..
मंजुला : (असंमजमे हसते) जी..आंटी.. लेकीन.. वो.. वो.. आप मेरी मम्मीको.. मतलब उनको कैसे जानती हो..?
भुमीका : (हसते) अरे बेटी.. जीस तराह तुम ओर सृती साथमे पढती हो.. उसी तराह मे ओर नीमु साथमे अेकही क्लासमे थे.. हम दोनोभी पकी सहेलीथी.. हम सबने कोलेजमे खुब धमालकी हे.. हें..हें..हें.. हमारे कुछ ओर दोस्तभी थे.. ये तेरा पतीभी उसी गांवका हे जो तेरी मम्मी ओर हमारे दोस्त उस गांवके थे..
सृती : (हसते) मम्मी तबतो ये आपके भी जमाइ हुअे.. हें..हें..हें.. तबतो इनकोभी जानती होगी.. हें..हें..हें..
कहातो देवायतने सृतीकी ओर आंखोसे इसारा करते ना पुछनेको मना करदीया.. तब सृती देवायतकी ओर देखते चुप होगइ.. ओर अेक नजरसे देवायतको देखती रही.. फीर सबने चाइनास्ता करलीया इसी बीच सृतीकी मम्मी मंजुसे हस हसके बाते करती रही.. ओर नीर्मलाके बारेमे जानकारीया लेने लगी..
तब सृती सवालीया नजरोसे देवायतको देखती रही.. फीर मंजु सृती देवायत कपडेकी बेग लेके उपरकी मंजीलपे चले गये तो वहाभी बहुत सारे कमरेथे.. तो सृती दोनोको अपने अपने कमरे दीखाने लगी.. तब देवायत अपने कपडे रखने रुमके अंदर चला गया तब मौका देखतेही मंजु सृतीके पास चली गइ ओर.. सरमाते मुस्कराते..
मंजुला : (धीरेसे सरमाते) सृती.. हम दोनो अेकही कमरेमे अेडजेस्ट करलेगेनां..
सृती : (कामुक मुस्कानके साथ धीरेसे दांत पीसते) कमीनी.. मत भुल.. अभी तुम लोगोने सादी नही की हे..
मंजुला : (सरमाते हसते) तो क्या हुआ.. मे जींदगीका हर मजा लेना चाहती हु.. अगर तुजेभी आना हे तो तुभी आजा.. दोनो मीलके इनको लुट लेगे.. हें..हें..हें.. अच्छा मौका हे.. चलनां.. मुजे कोइ अेतराज नही..
सृती : (सर्मसार होते मुका मारते धीरेसे) मुजे नही आना कमीनी.. जा तुही चुदवाले.. बेसर्म कहीकी.. कीतनी आग लगी हे तुजे.. देखना कही उंच नीच ना होजाये.. वरना पेट फुलाकर घुमती रहेगी.. हें..हें..हें..
मंजुला : (सरमाते हसते) सृती.. प्लीज. ये बात तुम कीसीको मत कहेना.. कोलेज खतम होतेही हम सादी करलेगे.. मम्मी लोग मानेगे तो ठीक हे वरना हम भागके सादी करके इधरही आजायेगे.. तु इनकी टेन्शन मतले.. तुमतो मेरे बारेमे सब जानती हो..
सृती : (हसते धीरेसे) चल ठीक हे आजाना.. चलो अब कही घुमने बुमने जाना हेकी यही रहेके इनसे चुदवाना हे.. हें..हें..हें..
मंजुला : (सरमाते हसते) कमीनी.. कहा जायेगे.. इधरतो सब जगाह देखी हे.. यही रहेते हेनां.. हमारे पास तीन दिन ओर रात हे.. तुभी चलनां.. हम दोनोही इनकी रानीया बनजायेगी..
सृती : (हसते) कुती कहीकी.. मुजे नही आना तुही चुदवाले.. मुजे पताथा तुम इनको यहा कीसलीये लेकर आइ हो.. चल कोइ बात नही.. लेकीन सुन.. देख तेरी मम्मी ओर मेरी मम्मी मील जाये इससे पहेले इनसे सादी करले वरना तुम दोनोका भांडा मेरी मम्मी तेरी मम्मीसे बात करके फोड देगी.. जीजुने तेरी मम्मीके बारेमे बताकर गडबड करदी.. ओर वो खुद उनकी पहेचान मम्मीसे छुपा रहे हे.. पता नही क्यु..
मंजुला : (सरमाते हसते) तु फीकर मत कर इनसे पहेले हम दोनो मीलकर कुछना कुछ जुगाड तो करही लेगे.. तु उनकी टेन्शन मतले.. हें..हें..हें..
सृती : चल ठीक हे.. मे नीचे जाती हु.. मंजु.. तुम जीजुसे मीलन करनेसे पहेले अेक बार फीर सोचले.. क्युकी तुम बहुत बडा रीस्क ले रही हो..
मंजुला : (मुस्कराते) सृती.. मेने सब सोचलीया हे.. अब जोभी होगा देखा जायेगा.. इसीलीयेतो तुजे मे मेरे साथ सामील होनेका केह रही हु.. ताकी मेरे बाद तु मेरे देवुको सम्हाल सके..
सृती : (सरमाते हसते) नही मंजु.. थेन्कस.. तुने मुजपे इतना विस्वास कीया.. लेकीन मे अभी इन सब चीजोके लीये तैयार नही हु.. बस अेक बार डोक्टर बनजाउ.. ओर मम्मी पापाका सपना पुरा करलु.. फीर इस बारेमे हम सोचेगे.. अब तुजा मे नीचे जाकर कुछ तैयारीया करलु..
मंजुला : (हसते) ठीक हे.. तु जा.. फीर बात करते हे..
सृती : (नीचेकी ओर जाते मनमे सोचते) कैसे मंजुने उसे खुला ओफर देदीया.. मुजे सौतन बनानेकोभी तैयार होगइ.. कमीनी.. पहेले तुमतो ठीकसे चुदवालो.. फीर मुजे कहेना.. जीजुका पेन्टके अंदरसेही कीतना बडा दीखता हे.. जब वो रीयलमे तेरी फाडेगा तब तुजे पता चलेगा.. लेकीन जीजु दीखतेभी मस्त हे.. अेकदम हेन्डसम.. कास तुजसे पहेले वो मुजे मीलजाते.. तो आज तेरी जगाह मे होती.. कोइ बात नही आगे देखा जायेगा.. अगर तुजे कोइ अेतराज नही हे तो फीर मुजे क्या अेतराज होगा..? देखती हु.. अगर जीजु मेरी ओर प्यारकी नजरसे देखते हेतो मेभी आगे बढनेका सोचुगीं.. क्या मस्त दीखते हे..
सोचते हुअे सृती हसती हुइ नीचे आजाती हे.. तो दुसरी ओर मंजुभी सरमाते देवायतवाले कमरेमे अपने कपडे लेके अंदर चली जाती हे.. ओर धीरेसे दरवाजा बंध कर देती हे.. तब देवायत बाथरुममे फ्रेस हो रहाथा.. तो मंजु अपने कपडेकी बेग वही बेडपे रखके बैठ गइ ओर कमरेमे नजर घुमाते सब देखने लगी.. तब उसे सृतीकी आर्थीक हालत समजमे आइ.. ओर वो मनसे दुखी होने लगी.. तभी देवायत अपना सर पोछते बहार आगया.. ओर मंजुको देखते..
देवायत : (हसते) अरे मंजु तुभी इधर आगइ..? क्या सृतीको पता हे..? देखना कुछ गडबड ना होजाये..
मंजुला : (खडी होते सरमाते) हां.. अब आपकी बीवी हु तो इधर नहीतो कीधर जाउगी.. आजाओ बाबु..
कहेते देवायतकी ओर चली गइ.. तब देवायतने अपने दोनो हाथ फैला दीये तो मंजु देवायतकी बाहोमे चली गइ.. दोनोही अेक दुसरेकी बाहोमे समा गये ओर थोडी देर अैसेही खडे रहे.. तभी देवायतने उनका चहेरा हथेलीमे थामलीया तब मंजुने अपनी दोनो आंख बंध करली ओर उनके होंठ फडफडाने लगे.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. तब मंजु मदहोस होने लगी ओर दोनो अेक दुसरेके होठोके रसपान करने लगे..
तभी मंजुको देवायतका हाथ अपने बुब्सपे मसलते महेसुस हुआ तो वो सरसे पांव तक हील गइ ओर कांपने लगी.. मंजुने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमें भीचलीया.. ओर उनके कंधेपे सर रखके खडी रही.. वो पुरी तराह कामवासनामे जलने लगी.. ओर उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. तब अेक बार फीर देवायतने उनके सरको पकडते होंठोसे होंठ मीला दीये.. तब मंजु आंधी आंख चडाते नसेमे देवायतका साथ देने लगी..
मंजुला : (कामुक होते) बुचचच.. बुचचच.. अंहहहह उहुंउउ उहुउउ.. देवुउउउउ.. हंमममम मंमम बुचचचच.. देवु.. मेरे.. दे..वु.. प्लीज.. कुछ करोनां.. मे आपके बीना नही रेह सकती..
देवायत : (होंठ छोडतेही) मंजु.. आज कुछ गलत ना होजाये.. अभी कंट्रोल करले.. अभी कुछ नही..
मंजुला : (सरमाते सीनेमे सर छुपाते) देवु वोहीतो नही होता.. इसीलीयेतो मे आपको इधर लाइ हु.. जानु अेक बात कहु..? अगर मम्मी पापा नही मानेतो हम क्या करेगे..? आपने दुसरे प्लानके बारेमे कुछ सोचा हे..? चलोना हम भागकर सादी करलेते हे.. हमारे पास ये तीन दिन हे..
देवायत : हां.. फीरभी हमारी सादी होजायेगी.. तुम फीरक मत करो क्युकी हमारे गुरुजीका आश्रम हे.. हम वही चले जायेगे.. ओर हम मंदिरमे सादी करलेगे.. वो हमारे कुलगुरु हे.. क्या तुम इसके लीये तैयार हो..?
मंजुला : (उत्सुक्तासे) हां.. देवु वो कीतनी दुर हे..? चलोनां हम अभी चले जाते हे.. हम वहा सादी करलेगे.. फीर मम्मी लोग मानेगे तो ठीक हे वरना हम केह देगेकी हमने मंदिरमे सादी करली हे.. चलोनां.. हम अभी जाते हे तो सामतक लौट आयेगे.. मे सादीके लीये रेडी हु..
देवायत : (हसते) पागल होगइ हो क्या..? पहेले अपनी मम्मीसे बात तो करले.. फीर नही मानेतो हम चले जायेगे.. ओर अभी सादी करलीतो भावुभी तेरे साथ हे उसे पता चल गया तो..?
मंजुला : अरे कीसीको पता नही चलेगा चलोनां.. अभी आप यही ठहेरो.. मे अभी आइ..
कहेते मंजु जटसे नीचे चली गइ ओर सृतीसे बात करने लगी.. तो सृती उसे कुछ समजाती रही लेकीन मंजु उनसे बात करके फटाफट वापस आगइ.. ओर देवायतके सामने देखते हसते हुअे बाथरुममे घुस गइ तब देवायत उसे देखताही रहा.. फीर वो कपडे पहेनके अपने बाल बना रहाथा तब सृती कुछ कपडे लेकर उपर आगइ ओर बेडपे रखके देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते सरमाके हसती हुइ नीचे चली गइ..
देवायतको पताही नही चलाकी सृती उनके सामने इतनी क्यु सरमा रही थी.. तब थोडीही देरमे मंजु नहाके बहार आगइ ओर बेडपे पडे कपडोको पहेनने लगी तबतक देवायत उसे देखताही रहा.. तब मंजु अेक लाल सारी पहेनके तैयार होगइ ओर अेक दुल्हनकी तराह शींगार करने लगी.. तभी सृतीभी वापस आकर बेठ गइ ओर मंजुको देखते हसती ही रही.. तब देवायतभी दोनोके सामने बैठे हसता रहा..
सृती : (हसते) जीजु क्या पटी पढाइ आपने इसे.. येतो बीलकुल पागल होगइ हे.. क्या आपभी तैयार होगये..?
मंजुला : (हसते चुडीया पहेनते) कमीनी.. तु अभी तक तैयार क्यु नही हुइ.. चल जा ओर तैयार होकर आजा तुभी हमारे साथ चल रही हे..
सृती : (हसते) पागल हो क्या..? इधर मम्मीका खाना कोन बनायेगा..? तुम दोनोही चले जाओ.. ओर आप दोनोका खानाभी मे इधर बना रही हु.. दोनो जल्दी वापस चले आना..
मंजुला : अरे चलनां.. तु नखरे बहुत कर रही हे.. हम अभी आजायेगे.. मम्मीके लीये रास्तेसे खाना पेक करवा लेगे.. देवु इनको बोलो तैयार होजाये.. खानाका हम बादमे सोचेगे..
देवायत : हां सृती तुमभी चलोनां.. हम दो घंटेमे वापस आजायेगे यही पासही तो हे.. हमारे गांवके बीच..
सृती : नही जीजु.. मम्मीको बहारका खाना नही देना उनकी तबीयत बीगड जाती हे आप लोग चले जाओ..
मंजुला : ठीक हे तो फीर हम दोनोका खाना मत बनाना हम लंच करके आयेगे.. क्यु देवु..?
देवायत : (हसते) हां.. बस तुम अेक बार चलोतो सही.. बाबाही हमको बीना खाने नही आने देगे..
तभी मंजु शींगार करके खडी होगइ ओर देवायतका हाथ पकडके लगभग बहारकी ओर दोढ ही पडी.. तब सृतीभी दोनोके पीछे हसती हुइ आने लगी ओर दोनो कार लेके नीकल गये.. तब रास्तेसे देवायतने दो फुलोका हार लेलीया ओर दोनो हाइवेकी ओर जाने लगे.. तब मंजु देवायतके कंधेपे सर रखके बेठ गइ ओर सोचमे डुब गइ.. क्युकी आज वो इतना बडा डीसीजन लेके देवायतके साथ सादी करने जा रहीथी.. जो इस सादीको अभीके लीये सबसे छुपाके रखना चाहती थी..
तब २५ मीनीटकी ड्रइवके बाद दोनो आश्रम पंहोच गये तभी कारसे उतरतेही मंजु चारो ओर नजर घुमाते देखती रही.. ओर जाके देवायतका हाथ बाजुसे पकडलीया.. फीर दोनो अंदर जाने लगे.. मंजु आज यहा पहेली बार आइथी तो इतना बडा आश्रम देखते उनके दीलमे घभराट महेसुस करने लगी.. की आश्रम इतना बडा हेतो यहाके महंत कौन होगा.. क्या वो हमारी सादीके लीये मान जायेगे..? अैसे तराह तराहके सवाल उनके मनमे उठने लगे.. तब उनको पता नही थाकी आगे क्या होने वाला हे..
जेसेही दोनो आश्रमके होलमे गये तब सामने बाबा अपने आसनपे बीराजमान थे ओर दो सेवकसे कुछ बाते कर रहेथे.. तब देवायतके साथ मंजु वहा चली गइ ओर बाबाको गभराते देखती ही रही.. तब वहा पहोचतेही देवायतने बाबाको दंडवत कीये ओर पांव छुलीये तो मंजुनेभी देवायतका अनुकरण करते बाबाके पांव छुने लगी.. तब बाबाने उनको पांव छुनेसे रोक लीया.. तो मंजु आस्चर्य भावसे डरते उनको देखने लगी..
तब बाबा देवायतको आशीर्वाद देते मुस्कराते रहे.. वो दोनो सेवक देवायतको नमस्कार करके चले गये.. तो देवायत ओर मंजु उनके चरणोके पास बेठ गये तब बाबा देवायतके सामने देखके हसने लगे.. फीर मंजुकी ओर देखते अपना सीस नमाते उनके सामने दोनो हाथ जोड लीये.. तब मंजु ओर देवायतको बडाही आस्चर्य हुआ.. ओर दोनो बाबाके सामने हाथ जोडकर बैठे रहे.. तब बाबाने देवायतको कहा..
बाबा : (मजाकमे हसते) क्यु महाराज.. आखीर अपनी रानीसाहेबाको लेकर आही गये.. हें..हें..हें..
देवायत : (सरमाते हसते) क्या बाबा.. क्यु मजाक कर रहे हो.. अब काहेका राजा.. वो सबतो चले गये..
बाबा : (हसते) गलत.. बेटा तु चाहे जोभी कुछ कहे.. लेकीन तेरे गांववाले ओर कबीले वाले तुजे आजभी अपना राजा मानते हे.. (मंजुकी ओर देखते) क्यु बेटी.. आखीर तुमभी आही गइ.. तुने मुजे बहुत इन्तजार करवाया हे.. तुजे पताही नही होगाकी तुम कौन हो.. अब जाके सही जगह आगइ..
मंजुला : (सरमाते हसने लगी) जी.. वो..वो.. बाबा.. में..तो इधर पहेली बार आइ हुं.. क्या आप मुजे जानते हे..?
बाबा : (हसते) अरे बेटी.. इतना गभराती क्यु हो..? बाप हु तेरा.. कोइ बेटी अपने बापसे गभराती हे क्या..? इनसे सादी करना चाहती हेनां..? तो फीर इतनी क्यु गभरा रही हो..? मे अभी करवा देता हु तुम दोनोकी सादी.. बस..? फीर मुजे तुमसे ढेर सारी बात भी तो करनी हे.., तुम तो मेरी बहादुर बच्ची हे.. तुने जोभी डीसीजन लीया हे वो बीलकुल सही लीया हे.. बस अभी इतना जानले.. ये सब होनेही वाला था.. जो तुजे आगे जाकर पता चल जायेगा..
मंजुला (कुछ राहत महेसुस करते) जी.. बाबा.. हम.. हम दोनो आपसमे प्यार करते हे.. तो सादी करने आ गये.. पता नही मेरे घरवाले मांनेगे की नही.. तो.. हम इधर आगये..
बाबा : (हसते) मांनेगे क्यु नही..? इतना होनहार लडका हे.. तो जरुर मान जायेगे.. बस तुजे थोडी कसरत करनी पडेगी.. फीर मान जायेगे.. फीरभी ना मानेतो मेरा नाम लेलेना.. तेरे पास इस मंदिरमे सादी करलेनेका हथीयार हे.. इसे स्तेमाल करना फीर सब मान जायेगे.. ओर तुम्हारी सादी बडी धुमधामसे कर देगे.. क्या हार बार लाइ हो..?
मंजुला : (हसते हार देते) जी.. यही रहे.. मे साथ लेकर ही आइ हु.. लीजीये..
जबतक मंजु ओर बाबा आपसमे बाते कर रहेथे तबतक देवायत मंजुकी ओर देखते हसता ही रहा.. उनको आज मंजु बडीही मासुम ओर भोली लग रही थी.. आज उनके भोलेपनपे देवायतको बहुत प्यार आ रहा था.. वो सबकुछ भुलके मंजुकी ओर देखता ही रहा ओर मनही मन इसे पत्नीके रुपमे स्वीकार करने लगा तब बाबाने कहा..
बाबा : अब बेठे बेठे हस क्या रहा हे चलो दोनो.. तुम मंदिरमे जाओ मे अभी आता हु.. फीर तुम्हारी सादी करवाता हु.. जाओ..
तब देवायत खडा होगया तो मंजुभी मनही मन खुस होते मुस्कराते देवायतके साथ खडी होगइ.. ओर दोनो मंदिरकी ओर चलने लगे तबतक बाबा अपने रुममे चले गये ओर कुछ लेने लगे.. फीर वोभी मंदिरकी ओर चले गये.. तब वहा देवायत ओर मंजु मंदिरके सामने हाथ जोडके दर्शन कर रहेथे ओर बाबाका वेइट कर रहेथे.. जब बाबा आये तब दोनोही साइडमे हाथ जोडके खडे रहे ओर बाबाने दोनोको अंदर बुलालीया..
बाबा : मे जब कहु दोनो अेक दुसरेको हार पहेनादोगे.. फीर मे जोभी कहु तुम दोनो मेरे साथ दोहराओगे..
दोनो अेक साथ : जी..बाबा..
तब बाबाने हाथमे जल लेके कुछ मंत्र पढने लगे.. ओर जल मंजुके उपर छीडक दीया तो मंजुके सरीरमे अेक कंपनके साथ अलगही शक्तीका संचार होने लगा.. जो मंजु खुद महेसुस करने लगी तब बाबाने अेक बार ओर अैसा कीया.. अैसा तीन बार कीया तबतक मंजु सबकुछ भुल चुकी हो अैसा फील करने लगी.. ओर बाबा ने दोनोको अेक दुसरेको हार पहेनानेको केहदीया.. तो दोनोने अेक दुसरेके गलेमे हार पहेना दीया तब बाबा कुछ ओर मंत्र पढने लगे..
फीर दोनोको सप्तपदीकी सब कसमे खीलवाइ ओर अेक दुसरेको पती पत्नीके रुपमे स्वीकार करनेकी कसमे खीलवाइ.. तब बाबाने देवायतको मंजुकी मांग भरनेको कहा तब मंजु आंख बंध करते कांपने लगी ओर उनकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. तभी देवायतने उनकी मांग भरदी तब अपनेही हाथोसे चहेरा ढकते फुटफुटके रोने लगी.. तो देवायतने उनको सीनेसे लगाके सम्हाला तब बाबा हस रहेथे..
बाबा : बेटी सांत होजा.. तुजे पताही नही हे की तु कौन हे.. ओर तुमने कीनसे सादी की हे..
तब मंजु अपने आंसु पोछ देती हे ओर दोनो अेक बार फीर दर्शन करके बाबाके पैरमे जुक गये ओर पैर छुने लगे.. तब बाबाने उसे अखंडसौभाग्यके आशीर्वाद दीये ओर अपने साथ होलमे चलनेको कहा तब देवायत ओर मंजुने हार गलेसे नीकालके केरी बेगमे रखलीया.. ओर दोनो बाबाके पीछे चलने लगे ओर तीनो होलमे जाके बैठ गये.. तब मंजुको अपने सरीरमे कुछ अलगही फीरल हो रहाथा..
बाबा : बेटा भोजनमे कुछ वकत हेतो तुम दोनो मेरे रुममे आओ मुजे तुम दोनोसे कुछ जरुरी बात करनी हे..
तभी दोनो बाबाके पीछे उनके रुममे चले जातेहे तब बाबा अपने आसनपे बेठ जातेहे ओर ये दोनो उनके चरणोके पास बैठ जातेहे तब मंजुकीभी उत्सुक्ता बढने लगती हे..की बाबा हमे क्या कहेगे.. तब बाबा हिमाचलके उस राजाके बारेमे बताने लगते हे तो दोनोही इस कहानीको जानते थे.. फीरभी दोनो सुनते रहे..
तभी बाबाने उन राजाके पुर्न जन्मकी बात दोनोको कहेदी.. की तुम्हारा पोताही वो राजा होगा.. जो तुम्हारे घर जन्म लेगा.. तो दोनो सुनके सोक्ट होके बाबाकी ओर आसच्र्य भावसे देखने लगे.. फीर बाबाने उसे इस बारेमे बहुत कुछ बता दीया.. फीर देवायतको थोडी देर बहार कामसे भेजकर बाबाने मंजुको उनके बारेमे ओर देवायतके बारेमे ओर आने वाले समयके बारेमे बहोत सारी बाते बतादी जीसे सुनके मंजुभी अचभींत ओर सोक्ट होगइ..
तब बाबाने उनपे जब छीडकते कुछ शक्तियोसे अवगत करवाया.. ओर उन शक्तिीयोका असर अेक हप्तेके बाद सुरु होजायेगा अैसा कहेके बाबाने मंजुको अेक जडीबुटीकी पुडी देदी.. ओर इसे देवायतको छुपकेसे दुधके साथ मीलाकर देनेके लीये कहा.. तब मंजु बहुत सरमाइ.. ओर बाबाने उसे बहोत सारी बाते खुलके बतादी..
तब मंजुने भी अपनी सहमती जतादी.. ओर बाबाने उसे कुछ बाते दुसरोको ना कहेनेकी कसमेभी खीलवाइ.. फीर बाबाने मंजुकी खुदसे पहेचानभी करवाइ की वो कौन हे.. ओर कीस उदेस्यसे उनका जन्म हुआ हे.. तब मंजुको रीयलाइझ हुआकी वो कौन हे.. ओर उनका जन्म कीस उदस्यसे हुआ हे तो वो अपने आपको बहुत भाग्यसाली समजने लगी.. ओर ये सोचते बडीही रोमांचीत होने लगीकी मे इन सबकी जननी हु.. ओर मेरे ही संतानसे सादी कर रही हु..
तभी देवायतभी वापस अंदर आगया ओर बाबाने दोनोको साथमे बेठाया फीर हाथमे जल लेके कुछ मंत्र पढने लगे ओर दोनोके उपर छीडक दीया.. तब मंजु नसेकी हालतमे चलते वही ढल गइ ओर नींदकी आगोसमे चली गइ.. तब बाबा उनके सामने देखके हस रहेथे फीर देवायतको लेकर बहार जाते अपने रुमका दरवाजा अेसेही खाली बंध करदीया ओर होलमे अपने आसनपे जाके बैठ गये तब देवायतभी थोडा गभराते उनके पास नीचे बेठ गया.. तब बाबा उनकी मनोदसा समज गये ओर हसकर उनको बताने लगे..
बाबा : बेटा उनमे कोइ गभरानेकी बात नही हे.. वो अभी बहार आजायेगी.. आज मेरा अेक मक्सद पुरा हुआ हे.. उनको कुछ देना था तो देदीया.. तु चीन्ता मत करना.. ओर आगे जोभी होता हे उसे होने देना हे.. कीसीभी बातपे कोइ बाधा नही डालनी.. तुजे धीरे धीरे करते सब ज्ञात होने लगेगा.. बस अभीके लीये तुम उसके लीये परीपकव नही हो.. जब तुमभी सब समजने लगोगे तब तुजे मेरी इस बीटीयाही सबकुछ बता देगी..
देवायत : बाबा क्या वाकइ ये सच हेकी वो राजा ओर उनकी सभी रानीया फीरसे हमारे यहा जन्म लेकर आयेगे..? मुजेतो अभी भी यकीनही नही होरहा हेकी आजके जमानेभी अैसा कुछ होगा..
बाबा : बेटा आयेगे नही आ चुके हे.. बस ये सब उन्ही राजाके जन्मके लीये पहेले पुर्व तैयारीके भागरुपे आ गइ हे.. तेरी इस बीवीभी वोही हे ओर तुमभी वोही हो.. बस अभी तुम लोगोको उनका ज्ञान नही हे.. इसीलीये तुमको यकीन नही हे.. लेकीन जब जब वक्त बीतता जायेगा तब तुमको इस बातका ज्ञान होता जायेगा.. आगेतो तुजे बहुत कुछ नया दिखनेको मीलेगा..
देवायत : (सरमाते हसते) बाबा तबतो हो सकता हे हमारे यहाभी बहुत सारे रीस्तोमे परीवर्तन आयेगा..
बाबा : (हसते) आयेगा नही आचुका हे.. बस अभी मे तुजे इस बारेमे बात नही कर सकता.. लेकीन आगे तुजे सब पता चलता जायेगा.. क्युकी तुमभी इस रीस्तोसे छुट नही सकते.. ओर उनकी सुरुआत तुमसे तीन पीढीसे पहेले ही हो चुकी हे.. बस अभी तुम्हारे लीये इतनाही जानना जरुरी हे.. बाकी मेरी इस बेटी सब जान जायेगी.. ओर वो सब रहस्य आगे जाके तुम भी जान जाओगे..
अभी दोनो बातेही कर रहेथे तब दरवाजा खोलके मंजु बहार आके दोनोके पास बैठ गइ.. तब वो देवायतकी ओर देखते खुब सरमाइ ओर चुपचाप बैठी रही.. फीर भोजनका वक्त हो गयातो बाबाने दोनोको भोजनके लीये भेज दीया.. ओर दोनो भोजन करके बाबाकी इजाजत लेके नीकल गये..
तब मंजु कारमे चुपचाप बेठे आने वाले समयके बारेमे सोचमे डुबी हुइ थी.. तब देवायतभी बीच बीचमे उनकी ओर देखता रहा.. दोनोही असंमजमे खामोस बैठे रहे.. उनको पता ही नही थाकी दोनो सादीके लीये जा रहे थे तब अेक सामान्य मनुस्य थे.. ओर जब सादी करली तब वो सामान्य मानवी नही रहे....
कन्टीन्यु
अध्याय - ७७
तब तीनोही अंदर चले गये.. तो आज मंजुभी सृतीके घर पहेली बार आइथी तो वोभी अंदर नजर घुमाते सब देखती रही.. भलेही बहारसे खंडहर जैसे दीखता हो लेकीन अंदरसे बहुतही सुंदर सजावट थी.. तब अेक खुरसीपे सृतीकी मम्मी बैठी नजर आइ.. जो कोइ कीताब पढ रही थी.. तब मंजु ओर देवायत उनके पास चले गये ओर उनके पांव छुके वही पासमे बैठ गये.. तब सृती भी दोनोके लीये पानी लेकर आगइ ओर पानी देते उनकी मम्मीसे कहने लगी....अब आगे
सृती : मम्मी ये मेरी बेस्ट सहेली हे.. मंजुला.. ओर ये हे उनके पती.. देवायतजी.. पासके गांवके रहेते हे..
सृतीकी मम्मीका नाम भुमीका हे अब हम कहानीमे उसे नामसे ही जानेगे..
भुमीका : (हसते) अच्छा अच्छा.. जीते रहे बेटा.. क्या हेना तुम लोगोको कभी देखा नही हेनां.. तो पहेचान नही पाइ.. बेठो सब.. (सृतीकी ओर देखते) बेटा इनके लीये कुछ चाइ नास्ता बनाले..
सृती : (मंजुकी ओर देखते हसते) मम्मी इनकी अभी अभी नइ सादी हुइ हे.. तो दोनो मीया बीवी सहेर घुमने आये हे.. दो तीन दीन अब यही रुकेगे.. फीर मेरी कोलेजमे भी छुटी हे.. तो इधर ही बुला लीया..
भुमीका : (हसते) अच्छा कीया..
कहातो मंजु जुठे गुसेके साथ आंख बडी करते सृतीको घुरने लगी.. तब सृतीकी हसी नीकल गइ तो अपने मुहपे हाथ रखके घुम गइ ओर हसने लगी.. तब देवायतभी हसता रहा.. क्युकी उनकोभी सृतीकी अैसी सरारत अच्छी लगी.. तब सृती मंजुकी ओर हसती हुइ कीचनमे चली गइ तब मंजुभी खडी होगइ.. ओर वोभी सृतीके पीछे जाने लगी.. तो सृतीकी मम्मी हसने लगी.. ओर मेरी ओर घुम गइ.. फीर बाते करने लगी..
भुमीका : बेटा आप लोग कीस गांवसे हे..? ओर क्या करते हे आप..?
देवायत : (हसते) जी.. आंटी मे --गांवमे रहेता हु.. ओर हमारा बहुत बडा धानका कारोबार ओर खेतीबाडी हे.. ओर मंजु अभी अपनी पढाइ पुरी कर रही हे.. वो ओर सृती दोनो साथमेही पढती हे..
भुमीका : (आस्चर्यसे हसते) अच्छा अच्छा.. तो आप उस गांवमे रहेते हे.., बेटा जब मे कोलेजमे थी तब उस गांवमें मेरीभी अेक सहेली थी.. नीर्मला नाम था उनका.. ओर कुछ दोस्तभी थे जो हम सब मीलके कोलेजमे बडी धमाल करते थे हें..हें..हें.. अेकतो वहाके ठाकुर साहबका लडकाथा.. किशन.. जो बहुतही नेकदील इन्सान था.. सबकी मदद करता रहेता.. फीर विरजी.. राजीव मेरा पती नरेश.. हम सब दोस्त थे.. ओर नीर्मला सायद किशनकी हवेलीमे रहेती थी..
देवायत : (आस्चर्यसे हसते) क्या आप जानती हो ठाकुर साहबको..?
भुमीका : (खुसीसे हसते) हां ठाकुर साहबको नही उनके लडकेको जानतीथी.. किशन.. मेरा मुह बोला भाइ.. जो हम सब अेकही क्लासमे साथ पढते थे.. हम सब दोस्त थे.. नीर्मलाभी उस गांवसे आतीथी.. मेरी खास सहेली.. जैसे सृतीकी ये तुम्हारी बीवी हे..
बडीही मासुम थी.. जो उन ठाकुर साहेबके लडके किशनसे प्यार करती थी.. फीर पता नही कहा चली गइ.. मुजे आजतक नही मीली.. ओर नाही उनका कोइ सुराग.. पता नही इस वक्त वो कहा होगी.. क्या तुमने उनको वहा कभी देखा हे..?
कहातो देवायत चोंक गया.. क्युकी वो उन्ही नीर्मलाकी बात कर रहीथी जीनसे देवायतने अभी अभी सादी कीथी.. तब देवायत बडाही दुवीधामे पड गयाकी उनके बारेमे सृतीकी मम्मीसे बात करनी चाहीये की नही.. अगर वो जान जायेगी की नीर्मलाकी बेटी ये मंजुही हे तो कीतनी खुस होजायेगी.. तब देवायत उनकी पहेचान छुपाके बाकी सब बातानेको राजी होगया.. ओर वो सृ.मम्मी भुमीकासे बात करने लगा..
देवायत : (हसते) हां आंटी में उनके बारेमे जानता हुं.. आपको मालुम हे ये मेरी बीवी मंजु कौन हे..? ओर आपकी सहेलीभी यही हे.. वो -- गांवमे रहेती हे ओर ये मंजु उन्हीकी बेटी हे..
भुमीका : (खुसीसे सोक्ट होते हसते) क्या..? ये मंजु मेरी नीमुकी बेटी हे..? हे भगवान.. देखो आखीर उसने मुजे मीलाही दीया.., कहा गइ मेरी बच्ची.. आनेदो उनको.. उनसे बहुत सारी बाते करनी हे.. पता नही वो कहा हे.. क्या आप उसी ठाकुरके गांवमे रहेते होनां..? क्या मुजे अेक बार नीमुसे मीलवा सकते हो..?
देवायत : (हसते) आंटी.. जब उनकी बेटीभी यही हेतो.. वोही आपको उनसे मीलवा देगी.. अभी आयेगी.. आप उन्हीसे बात करके सब पुछलो.. वो हमारे गांवमे नही रेहती..
सृती : (दोनो चाइनास्ता लाते) क्यु.. जीजु.. मम्मीसे क्या बाते हो रही हे.. कही मेरी बहेनकी सीकायततो नही कर रहे.. हें..हें..हें..
भुमीका : (मंजुको हसते) अरे.. आ बेटी तु इधर आ.. बेठ मेरे पास.. मुजेतो पताही नही थाकी तुम मेरी नीमुकी बेटी हो.. कहा हे वो.. ओर कैसी हे वो.. जबसे कोलेज छोडदी तबसे मुजे मीलीही नही..
सृती : (आस्चर्यसे खुस होते) मम्मी.. क्या तुम जानतीहो मंजुकी मम्मीको..?
भुमीका : (हसते) हां.. बेटी.. अभी अभी हम दोनो बाते कर रहेथे तो बातो बातोमे ही मुजे पता चलाकी तेरी सहेली मेरी खास सहेली नीमुकी बेटी हे.. मेने कीतना ढुंढा उसे.. कभी मीलीही नही.. तेरे मामा किशननेभी कभी इनके बारेमे नही बताया.. ओर देखो.. आज अनायासही मील गइ.. (मंजुको) बेटी.. कैसीहे मेरी नीमु..? कहा हे वो.. मुजे उनसे मीलना हे..
मंजुला : (असंमजमे हसते) जी..आंटी.. लेकीन.. वो.. वो.. आप मेरी मम्मीको.. मतलब उनको कैसे जानती हो..?
भुमीका : (हसते) अरे बेटी.. जीस तराह तुम ओर सृती साथमे पढती हो.. उसी तराह मे ओर नीमु साथमे अेकही क्लासमे थे.. हम दोनोभी पकी सहेलीथी.. हम सबने कोलेजमे खुब धमालकी हे.. हें..हें..हें.. हमारे कुछ ओर दोस्तभी थे.. ये तेरा पतीभी उसी गांवका हे जो तेरी मम्मी ओर हमारे दोस्त उस गांवके थे..
सृती : (हसते) मम्मी तबतो ये आपके भी जमाइ हुअे.. हें..हें..हें.. तबतो इनकोभी जानती होगी.. हें..हें..हें..
कहातो देवायतने सृतीकी ओर आंखोसे इसारा करते ना पुछनेको मना करदीया.. तब सृती देवायतकी ओर देखते चुप होगइ.. ओर अेक नजरसे देवायतको देखती रही.. फीर सबने चाइनास्ता करलीया इसी बीच सृतीकी मम्मी मंजुसे हस हसके बाते करती रही.. ओर नीर्मलाके बारेमे जानकारीया लेने लगी..
तब सृती सवालीया नजरोसे देवायतको देखती रही.. फीर मंजु सृती देवायत कपडेकी बेग लेके उपरकी मंजीलपे चले गये तो वहाभी बहुत सारे कमरेथे.. तो सृती दोनोको अपने अपने कमरे दीखाने लगी.. तब देवायत अपने कपडे रखने रुमके अंदर चला गया तब मौका देखतेही मंजु सृतीके पास चली गइ ओर.. सरमाते मुस्कराते..
मंजुला : (धीरेसे सरमाते) सृती.. हम दोनो अेकही कमरेमे अेडजेस्ट करलेगेनां..
सृती : (कामुक मुस्कानके साथ धीरेसे दांत पीसते) कमीनी.. मत भुल.. अभी तुम लोगोने सादी नही की हे..
मंजुला : (सरमाते हसते) तो क्या हुआ.. मे जींदगीका हर मजा लेना चाहती हु.. अगर तुजेभी आना हे तो तुभी आजा.. दोनो मीलके इनको लुट लेगे.. हें..हें..हें.. अच्छा मौका हे.. चलनां.. मुजे कोइ अेतराज नही..
सृती : (सर्मसार होते मुका मारते धीरेसे) मुजे नही आना कमीनी.. जा तुही चुदवाले.. बेसर्म कहीकी.. कीतनी आग लगी हे तुजे.. देखना कही उंच नीच ना होजाये.. वरना पेट फुलाकर घुमती रहेगी.. हें..हें..हें..
मंजुला : (सरमाते हसते) सृती.. प्लीज. ये बात तुम कीसीको मत कहेना.. कोलेज खतम होतेही हम सादी करलेगे.. मम्मी लोग मानेगे तो ठीक हे वरना हम भागके सादी करके इधरही आजायेगे.. तु इनकी टेन्शन मतले.. तुमतो मेरे बारेमे सब जानती हो..
सृती : (हसते धीरेसे) चल ठीक हे आजाना.. चलो अब कही घुमने बुमने जाना हेकी यही रहेके इनसे चुदवाना हे.. हें..हें..हें..
मंजुला : (सरमाते हसते) कमीनी.. कहा जायेगे.. इधरतो सब जगाह देखी हे.. यही रहेते हेनां.. हमारे पास तीन दिन ओर रात हे.. तुभी चलनां.. हम दोनोही इनकी रानीया बनजायेगी..
सृती : (हसते) कुती कहीकी.. मुजे नही आना तुही चुदवाले.. मुजे पताथा तुम इनको यहा कीसलीये लेकर आइ हो.. चल कोइ बात नही.. लेकीन सुन.. देख तेरी मम्मी ओर मेरी मम्मी मील जाये इससे पहेले इनसे सादी करले वरना तुम दोनोका भांडा मेरी मम्मी तेरी मम्मीसे बात करके फोड देगी.. जीजुने तेरी मम्मीके बारेमे बताकर गडबड करदी.. ओर वो खुद उनकी पहेचान मम्मीसे छुपा रहे हे.. पता नही क्यु..
मंजुला : (सरमाते हसते) तु फीकर मत कर इनसे पहेले हम दोनो मीलकर कुछना कुछ जुगाड तो करही लेगे.. तु उनकी टेन्शन मतले.. हें..हें..हें..
सृती : चल ठीक हे.. मे नीचे जाती हु.. मंजु.. तुम जीजुसे मीलन करनेसे पहेले अेक बार फीर सोचले.. क्युकी तुम बहुत बडा रीस्क ले रही हो..
मंजुला : (मुस्कराते) सृती.. मेने सब सोचलीया हे.. अब जोभी होगा देखा जायेगा.. इसीलीयेतो तुजे मे मेरे साथ सामील होनेका केह रही हु.. ताकी मेरे बाद तु मेरे देवुको सम्हाल सके..
सृती : (सरमाते हसते) नही मंजु.. थेन्कस.. तुने मुजपे इतना विस्वास कीया.. लेकीन मे अभी इन सब चीजोके लीये तैयार नही हु.. बस अेक बार डोक्टर बनजाउ.. ओर मम्मी पापाका सपना पुरा करलु.. फीर इस बारेमे हम सोचेगे.. अब तुजा मे नीचे जाकर कुछ तैयारीया करलु..
मंजुला : (हसते) ठीक हे.. तु जा.. फीर बात करते हे..
सृती : (नीचेकी ओर जाते मनमे सोचते) कैसे मंजुने उसे खुला ओफर देदीया.. मुजे सौतन बनानेकोभी तैयार होगइ.. कमीनी.. पहेले तुमतो ठीकसे चुदवालो.. फीर मुजे कहेना.. जीजुका पेन्टके अंदरसेही कीतना बडा दीखता हे.. जब वो रीयलमे तेरी फाडेगा तब तुजे पता चलेगा.. लेकीन जीजु दीखतेभी मस्त हे.. अेकदम हेन्डसम.. कास तुजसे पहेले वो मुजे मीलजाते.. तो आज तेरी जगाह मे होती.. कोइ बात नही आगे देखा जायेगा.. अगर तुजे कोइ अेतराज नही हे तो फीर मुजे क्या अेतराज होगा..? देखती हु.. अगर जीजु मेरी ओर प्यारकी नजरसे देखते हेतो मेभी आगे बढनेका सोचुगीं.. क्या मस्त दीखते हे..
सोचते हुअे सृती हसती हुइ नीचे आजाती हे.. तो दुसरी ओर मंजुभी सरमाते देवायतवाले कमरेमे अपने कपडे लेके अंदर चली जाती हे.. ओर धीरेसे दरवाजा बंध कर देती हे.. तब देवायत बाथरुममे फ्रेस हो रहाथा.. तो मंजु अपने कपडेकी बेग वही बेडपे रखके बैठ गइ ओर कमरेमे नजर घुमाते सब देखने लगी.. तब उसे सृतीकी आर्थीक हालत समजमे आइ.. ओर वो मनसे दुखी होने लगी.. तभी देवायत अपना सर पोछते बहार आगया.. ओर मंजुको देखते..
देवायत : (हसते) अरे मंजु तुभी इधर आगइ..? क्या सृतीको पता हे..? देखना कुछ गडबड ना होजाये..
मंजुला : (खडी होते सरमाते) हां.. अब आपकी बीवी हु तो इधर नहीतो कीधर जाउगी.. आजाओ बाबु..
कहेते देवायतकी ओर चली गइ.. तब देवायतने अपने दोनो हाथ फैला दीये तो मंजु देवायतकी बाहोमे चली गइ.. दोनोही अेक दुसरेकी बाहोमे समा गये ओर थोडी देर अैसेही खडे रहे.. तभी देवायतने उनका चहेरा हथेलीमे थामलीया तब मंजुने अपनी दोनो आंख बंध करली ओर उनके होंठ फडफडाने लगे.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. तब मंजु मदहोस होने लगी ओर दोनो अेक दुसरेके होठोके रसपान करने लगे..
तभी मंजुको देवायतका हाथ अपने बुब्सपे मसलते महेसुस हुआ तो वो सरसे पांव तक हील गइ ओर कांपने लगी.. मंजुने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमें भीचलीया.. ओर उनके कंधेपे सर रखके खडी रही.. वो पुरी तराह कामवासनामे जलने लगी.. ओर उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. तब अेक बार फीर देवायतने उनके सरको पकडते होंठोसे होंठ मीला दीये.. तब मंजु आंधी आंख चडाते नसेमे देवायतका साथ देने लगी..
मंजुला : (कामुक होते) बुचचच.. बुचचच.. अंहहहह उहुंउउ उहुउउ.. देवुउउउउ.. हंमममम मंमम बुचचचच.. देवु.. मेरे.. दे..वु.. प्लीज.. कुछ करोनां.. मे आपके बीना नही रेह सकती..
देवायत : (होंठ छोडतेही) मंजु.. आज कुछ गलत ना होजाये.. अभी कंट्रोल करले.. अभी कुछ नही..
मंजुला : (सरमाते सीनेमे सर छुपाते) देवु वोहीतो नही होता.. इसीलीयेतो मे आपको इधर लाइ हु.. जानु अेक बात कहु..? अगर मम्मी पापा नही मानेतो हम क्या करेगे..? आपने दुसरे प्लानके बारेमे कुछ सोचा हे..? चलोना हम भागकर सादी करलेते हे.. हमारे पास ये तीन दिन हे..
देवायत : हां.. फीरभी हमारी सादी होजायेगी.. तुम फीरक मत करो क्युकी हमारे गुरुजीका आश्रम हे.. हम वही चले जायेगे.. ओर हम मंदिरमे सादी करलेगे.. वो हमारे कुलगुरु हे.. क्या तुम इसके लीये तैयार हो..?
मंजुला : (उत्सुक्तासे) हां.. देवु वो कीतनी दुर हे..? चलोनां हम अभी चले जाते हे.. हम वहा सादी करलेगे.. फीर मम्मी लोग मानेगे तो ठीक हे वरना हम केह देगेकी हमने मंदिरमे सादी करली हे.. चलोनां.. हम अभी जाते हे तो सामतक लौट आयेगे.. मे सादीके लीये रेडी हु..
देवायत : (हसते) पागल होगइ हो क्या..? पहेले अपनी मम्मीसे बात तो करले.. फीर नही मानेतो हम चले जायेगे.. ओर अभी सादी करलीतो भावुभी तेरे साथ हे उसे पता चल गया तो..?
मंजुला : अरे कीसीको पता नही चलेगा चलोनां.. अभी आप यही ठहेरो.. मे अभी आइ..
कहेते मंजु जटसे नीचे चली गइ ओर सृतीसे बात करने लगी.. तो सृती उसे कुछ समजाती रही लेकीन मंजु उनसे बात करके फटाफट वापस आगइ.. ओर देवायतके सामने देखते हसते हुअे बाथरुममे घुस गइ तब देवायत उसे देखताही रहा.. फीर वो कपडे पहेनके अपने बाल बना रहाथा तब सृती कुछ कपडे लेकर उपर आगइ ओर बेडपे रखके देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते सरमाके हसती हुइ नीचे चली गइ..
देवायतको पताही नही चलाकी सृती उनके सामने इतनी क्यु सरमा रही थी.. तब थोडीही देरमे मंजु नहाके बहार आगइ ओर बेडपे पडे कपडोको पहेनने लगी तबतक देवायत उसे देखताही रहा.. तब मंजु अेक लाल सारी पहेनके तैयार होगइ ओर अेक दुल्हनकी तराह शींगार करने लगी.. तभी सृतीभी वापस आकर बेठ गइ ओर मंजुको देखते हसती ही रही.. तब देवायतभी दोनोके सामने बैठे हसता रहा..
सृती : (हसते) जीजु क्या पटी पढाइ आपने इसे.. येतो बीलकुल पागल होगइ हे.. क्या आपभी तैयार होगये..?
मंजुला : (हसते चुडीया पहेनते) कमीनी.. तु अभी तक तैयार क्यु नही हुइ.. चल जा ओर तैयार होकर आजा तुभी हमारे साथ चल रही हे..
सृती : (हसते) पागल हो क्या..? इधर मम्मीका खाना कोन बनायेगा..? तुम दोनोही चले जाओ.. ओर आप दोनोका खानाभी मे इधर बना रही हु.. दोनो जल्दी वापस चले आना..
मंजुला : अरे चलनां.. तु नखरे बहुत कर रही हे.. हम अभी आजायेगे.. मम्मीके लीये रास्तेसे खाना पेक करवा लेगे.. देवु इनको बोलो तैयार होजाये.. खानाका हम बादमे सोचेगे..
देवायत : हां सृती तुमभी चलोनां.. हम दो घंटेमे वापस आजायेगे यही पासही तो हे.. हमारे गांवके बीच..
सृती : नही जीजु.. मम्मीको बहारका खाना नही देना उनकी तबीयत बीगड जाती हे आप लोग चले जाओ..
मंजुला : ठीक हे तो फीर हम दोनोका खाना मत बनाना हम लंच करके आयेगे.. क्यु देवु..?
देवायत : (हसते) हां.. बस तुम अेक बार चलोतो सही.. बाबाही हमको बीना खाने नही आने देगे..
तभी मंजु शींगार करके खडी होगइ ओर देवायतका हाथ पकडके लगभग बहारकी ओर दोढ ही पडी.. तब सृतीभी दोनोके पीछे हसती हुइ आने लगी ओर दोनो कार लेके नीकल गये.. तब रास्तेसे देवायतने दो फुलोका हार लेलीया ओर दोनो हाइवेकी ओर जाने लगे.. तब मंजु देवायतके कंधेपे सर रखके बेठ गइ ओर सोचमे डुब गइ.. क्युकी आज वो इतना बडा डीसीजन लेके देवायतके साथ सादी करने जा रहीथी.. जो इस सादीको अभीके लीये सबसे छुपाके रखना चाहती थी..
तब २५ मीनीटकी ड्रइवके बाद दोनो आश्रम पंहोच गये तभी कारसे उतरतेही मंजु चारो ओर नजर घुमाते देखती रही.. ओर जाके देवायतका हाथ बाजुसे पकडलीया.. फीर दोनो अंदर जाने लगे.. मंजु आज यहा पहेली बार आइथी तो इतना बडा आश्रम देखते उनके दीलमे घभराट महेसुस करने लगी.. की आश्रम इतना बडा हेतो यहाके महंत कौन होगा.. क्या वो हमारी सादीके लीये मान जायेगे..? अैसे तराह तराहके सवाल उनके मनमे उठने लगे.. तब उनको पता नही थाकी आगे क्या होने वाला हे..
जेसेही दोनो आश्रमके होलमे गये तब सामने बाबा अपने आसनपे बीराजमान थे ओर दो सेवकसे कुछ बाते कर रहेथे.. तब देवायतके साथ मंजु वहा चली गइ ओर बाबाको गभराते देखती ही रही.. तब वहा पहोचतेही देवायतने बाबाको दंडवत कीये ओर पांव छुलीये तो मंजुनेभी देवायतका अनुकरण करते बाबाके पांव छुने लगी.. तब बाबाने उनको पांव छुनेसे रोक लीया.. तो मंजु आस्चर्य भावसे डरते उनको देखने लगी..
तब बाबा देवायतको आशीर्वाद देते मुस्कराते रहे.. वो दोनो सेवक देवायतको नमस्कार करके चले गये.. तो देवायत ओर मंजु उनके चरणोके पास बेठ गये तब बाबा देवायतके सामने देखके हसने लगे.. फीर मंजुकी ओर देखते अपना सीस नमाते उनके सामने दोनो हाथ जोड लीये.. तब मंजु ओर देवायतको बडाही आस्चर्य हुआ.. ओर दोनो बाबाके सामने हाथ जोडकर बैठे रहे.. तब बाबाने देवायतको कहा..
बाबा : (मजाकमे हसते) क्यु महाराज.. आखीर अपनी रानीसाहेबाको लेकर आही गये.. हें..हें..हें..
देवायत : (सरमाते हसते) क्या बाबा.. क्यु मजाक कर रहे हो.. अब काहेका राजा.. वो सबतो चले गये..
बाबा : (हसते) गलत.. बेटा तु चाहे जोभी कुछ कहे.. लेकीन तेरे गांववाले ओर कबीले वाले तुजे आजभी अपना राजा मानते हे.. (मंजुकी ओर देखते) क्यु बेटी.. आखीर तुमभी आही गइ.. तुने मुजे बहुत इन्तजार करवाया हे.. तुजे पताही नही होगाकी तुम कौन हो.. अब जाके सही जगह आगइ..
मंजुला : (सरमाते हसने लगी) जी.. वो..वो.. बाबा.. में..तो इधर पहेली बार आइ हुं.. क्या आप मुजे जानते हे..?
बाबा : (हसते) अरे बेटी.. इतना गभराती क्यु हो..? बाप हु तेरा.. कोइ बेटी अपने बापसे गभराती हे क्या..? इनसे सादी करना चाहती हेनां..? तो फीर इतनी क्यु गभरा रही हो..? मे अभी करवा देता हु तुम दोनोकी सादी.. बस..? फीर मुजे तुमसे ढेर सारी बात भी तो करनी हे.., तुम तो मेरी बहादुर बच्ची हे.. तुने जोभी डीसीजन लीया हे वो बीलकुल सही लीया हे.. बस अभी इतना जानले.. ये सब होनेही वाला था.. जो तुजे आगे जाकर पता चल जायेगा..
मंजुला (कुछ राहत महेसुस करते) जी.. बाबा.. हम.. हम दोनो आपसमे प्यार करते हे.. तो सादी करने आ गये.. पता नही मेरे घरवाले मांनेगे की नही.. तो.. हम इधर आगये..
बाबा : (हसते) मांनेगे क्यु नही..? इतना होनहार लडका हे.. तो जरुर मान जायेगे.. बस तुजे थोडी कसरत करनी पडेगी.. फीर मान जायेगे.. फीरभी ना मानेतो मेरा नाम लेलेना.. तेरे पास इस मंदिरमे सादी करलेनेका हथीयार हे.. इसे स्तेमाल करना फीर सब मान जायेगे.. ओर तुम्हारी सादी बडी धुमधामसे कर देगे.. क्या हार बार लाइ हो..?
मंजुला : (हसते हार देते) जी.. यही रहे.. मे साथ लेकर ही आइ हु.. लीजीये..
जबतक मंजु ओर बाबा आपसमे बाते कर रहेथे तबतक देवायत मंजुकी ओर देखते हसता ही रहा.. उनको आज मंजु बडीही मासुम ओर भोली लग रही थी.. आज उनके भोलेपनपे देवायतको बहुत प्यार आ रहा था.. वो सबकुछ भुलके मंजुकी ओर देखता ही रहा ओर मनही मन इसे पत्नीके रुपमे स्वीकार करने लगा तब बाबाने कहा..
बाबा : अब बेठे बेठे हस क्या रहा हे चलो दोनो.. तुम मंदिरमे जाओ मे अभी आता हु.. फीर तुम्हारी सादी करवाता हु.. जाओ..
तब देवायत खडा होगया तो मंजुभी मनही मन खुस होते मुस्कराते देवायतके साथ खडी होगइ.. ओर दोनो मंदिरकी ओर चलने लगे तबतक बाबा अपने रुममे चले गये ओर कुछ लेने लगे.. फीर वोभी मंदिरकी ओर चले गये.. तब वहा देवायत ओर मंजु मंदिरके सामने हाथ जोडके दर्शन कर रहेथे ओर बाबाका वेइट कर रहेथे.. जब बाबा आये तब दोनोही साइडमे हाथ जोडके खडे रहे ओर बाबाने दोनोको अंदर बुलालीया..
बाबा : मे जब कहु दोनो अेक दुसरेको हार पहेनादोगे.. फीर मे जोभी कहु तुम दोनो मेरे साथ दोहराओगे..
दोनो अेक साथ : जी..बाबा..
तब बाबाने हाथमे जल लेके कुछ मंत्र पढने लगे.. ओर जल मंजुके उपर छीडक दीया तो मंजुके सरीरमे अेक कंपनके साथ अलगही शक्तीका संचार होने लगा.. जो मंजु खुद महेसुस करने लगी तब बाबाने अेक बार ओर अैसा कीया.. अैसा तीन बार कीया तबतक मंजु सबकुछ भुल चुकी हो अैसा फील करने लगी.. ओर बाबा ने दोनोको अेक दुसरेको हार पहेनानेको केहदीया.. तो दोनोने अेक दुसरेके गलेमे हार पहेना दीया तब बाबा कुछ ओर मंत्र पढने लगे..
फीर दोनोको सप्तपदीकी सब कसमे खीलवाइ ओर अेक दुसरेको पती पत्नीके रुपमे स्वीकार करनेकी कसमे खीलवाइ.. तब बाबाने देवायतको मंजुकी मांग भरनेको कहा तब मंजु आंख बंध करते कांपने लगी ओर उनकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. तभी देवायतने उनकी मांग भरदी तब अपनेही हाथोसे चहेरा ढकते फुटफुटके रोने लगी.. तो देवायतने उनको सीनेसे लगाके सम्हाला तब बाबा हस रहेथे..
बाबा : बेटी सांत होजा.. तुजे पताही नही हे की तु कौन हे.. ओर तुमने कीनसे सादी की हे..
तब मंजु अपने आंसु पोछ देती हे ओर दोनो अेक बार फीर दर्शन करके बाबाके पैरमे जुक गये ओर पैर छुने लगे.. तब बाबाने उसे अखंडसौभाग्यके आशीर्वाद दीये ओर अपने साथ होलमे चलनेको कहा तब देवायत ओर मंजुने हार गलेसे नीकालके केरी बेगमे रखलीया.. ओर दोनो बाबाके पीछे चलने लगे ओर तीनो होलमे जाके बैठ गये.. तब मंजुको अपने सरीरमे कुछ अलगही फीरल हो रहाथा..
बाबा : बेटा भोजनमे कुछ वकत हेतो तुम दोनो मेरे रुममे आओ मुजे तुम दोनोसे कुछ जरुरी बात करनी हे..
तभी दोनो बाबाके पीछे उनके रुममे चले जातेहे तब बाबा अपने आसनपे बेठ जातेहे ओर ये दोनो उनके चरणोके पास बैठ जातेहे तब मंजुकीभी उत्सुक्ता बढने लगती हे..की बाबा हमे क्या कहेगे.. तब बाबा हिमाचलके उस राजाके बारेमे बताने लगते हे तो दोनोही इस कहानीको जानते थे.. फीरभी दोनो सुनते रहे..
तभी बाबाने उन राजाके पुर्न जन्मकी बात दोनोको कहेदी.. की तुम्हारा पोताही वो राजा होगा.. जो तुम्हारे घर जन्म लेगा.. तो दोनो सुनके सोक्ट होके बाबाकी ओर आसच्र्य भावसे देखने लगे.. फीर बाबाने उसे इस बारेमे बहुत कुछ बता दीया.. फीर देवायतको थोडी देर बहार कामसे भेजकर बाबाने मंजुको उनके बारेमे ओर देवायतके बारेमे ओर आने वाले समयके बारेमे बहोत सारी बाते बतादी जीसे सुनके मंजुभी अचभींत ओर सोक्ट होगइ..
तब बाबाने उनपे जब छीडकते कुछ शक्तियोसे अवगत करवाया.. ओर उन शक्तिीयोका असर अेक हप्तेके बाद सुरु होजायेगा अैसा कहेके बाबाने मंजुको अेक जडीबुटीकी पुडी देदी.. ओर इसे देवायतको छुपकेसे दुधके साथ मीलाकर देनेके लीये कहा.. तब मंजु बहुत सरमाइ.. ओर बाबाने उसे बहोत सारी बाते खुलके बतादी..
तब मंजुने भी अपनी सहमती जतादी.. ओर बाबाने उसे कुछ बाते दुसरोको ना कहेनेकी कसमेभी खीलवाइ.. फीर बाबाने मंजुकी खुदसे पहेचानभी करवाइ की वो कौन हे.. ओर कीस उदेस्यसे उनका जन्म हुआ हे.. तब मंजुको रीयलाइझ हुआकी वो कौन हे.. ओर उनका जन्म कीस उदस्यसे हुआ हे तो वो अपने आपको बहुत भाग्यसाली समजने लगी.. ओर ये सोचते बडीही रोमांचीत होने लगीकी मे इन सबकी जननी हु.. ओर मेरे ही संतानसे सादी कर रही हु..
तभी देवायतभी वापस अंदर आगया ओर बाबाने दोनोको साथमे बेठाया फीर हाथमे जल लेके कुछ मंत्र पढने लगे ओर दोनोके उपर छीडक दीया.. तब मंजु नसेकी हालतमे चलते वही ढल गइ ओर नींदकी आगोसमे चली गइ.. तब बाबा उनके सामने देखके हस रहेथे फीर देवायतको लेकर बहार जाते अपने रुमका दरवाजा अेसेही खाली बंध करदीया ओर होलमे अपने आसनपे जाके बैठ गये तब देवायतभी थोडा गभराते उनके पास नीचे बेठ गया.. तब बाबा उनकी मनोदसा समज गये ओर हसकर उनको बताने लगे..
बाबा : बेटा उनमे कोइ गभरानेकी बात नही हे.. वो अभी बहार आजायेगी.. आज मेरा अेक मक्सद पुरा हुआ हे.. उनको कुछ देना था तो देदीया.. तु चीन्ता मत करना.. ओर आगे जोभी होता हे उसे होने देना हे.. कीसीभी बातपे कोइ बाधा नही डालनी.. तुजे धीरे धीरे करते सब ज्ञात होने लगेगा.. बस अभीके लीये तुम उसके लीये परीपकव नही हो.. जब तुमभी सब समजने लगोगे तब तुजे मेरी इस बीटीयाही सबकुछ बता देगी..
देवायत : बाबा क्या वाकइ ये सच हेकी वो राजा ओर उनकी सभी रानीया फीरसे हमारे यहा जन्म लेकर आयेगे..? मुजेतो अभी भी यकीनही नही होरहा हेकी आजके जमानेभी अैसा कुछ होगा..
बाबा : बेटा आयेगे नही आ चुके हे.. बस ये सब उन्ही राजाके जन्मके लीये पहेले पुर्व तैयारीके भागरुपे आ गइ हे.. तेरी इस बीवीभी वोही हे ओर तुमभी वोही हो.. बस अभी तुम लोगोको उनका ज्ञान नही हे.. इसीलीये तुमको यकीन नही हे.. लेकीन जब जब वक्त बीतता जायेगा तब तुमको इस बातका ज्ञान होता जायेगा.. आगेतो तुजे बहुत कुछ नया दिखनेको मीलेगा..
देवायत : (सरमाते हसते) बाबा तबतो हो सकता हे हमारे यहाभी बहुत सारे रीस्तोमे परीवर्तन आयेगा..
बाबा : (हसते) आयेगा नही आचुका हे.. बस अभी मे तुजे इस बारेमे बात नही कर सकता.. लेकीन आगे तुजे सब पता चलता जायेगा.. क्युकी तुमभी इस रीस्तोसे छुट नही सकते.. ओर उनकी सुरुआत तुमसे तीन पीढीसे पहेले ही हो चुकी हे.. बस अभी तुम्हारे लीये इतनाही जानना जरुरी हे.. बाकी मेरी इस बेटी सब जान जायेगी.. ओर वो सब रहस्य आगे जाके तुम भी जान जाओगे..
अभी दोनो बातेही कर रहेथे तब दरवाजा खोलके मंजु बहार आके दोनोके पास बैठ गइ.. तब वो देवायतकी ओर देखते खुब सरमाइ ओर चुपचाप बैठी रही.. फीर भोजनका वक्त हो गयातो बाबाने दोनोको भोजनके लीये भेज दीया.. ओर दोनो भोजन करके बाबाकी इजाजत लेके नीकल गये..
तब मंजु कारमे चुपचाप बेठे आने वाले समयके बारेमे सोचमे डुबी हुइ थी.. तब देवायतभी बीच बीचमे उनकी ओर देखता रहा.. दोनोही असंमजमे खामोस बैठे रहे.. उनको पता ही नही थाकी दोनो सादीके लीये जा रहे थे तब अेक सामान्य मनुस्य थे.. ओर जब सादी करली तब वो सामान्य मानवी नही रहे....
कन्टीन्यु