रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - ९८
तभी लखन अपनी मर्दांगीपे गर्व करते लताको अपनी गोदमे उठा लेता हे ओर धीरेसे दरवाजा खोलकर लताको अपने बेडकी ओर लेजाता हे.. तब नीलम आंख खोलके दोनोको रजाइमेसे देखती रही.. ओर लखन लताको धीरेसे बेडपे सुलाके उनके होंठ चुमने लगता हे तो लतानेभी लखनको अेक बार जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर दोनोने कीस करली.. तब लखन लताके उपर चदर डालके बहार नीकल गया ओर दरवाजा बंध करके उपर अपने रुममे चला गया.. देखातो उनके बेडपे रजीया नंगी होकर लेटी हुइ थी....अब आगे
लखन अपने रुम मे जातेही रजीयाको अैसे बेडपे नंगी लेटे हुअे देखतेही खुसीसे सोक्ट होगया.. ओर वो मुस्कराने लगा.. क्युकी वहा उनके बेडपे रजीया अपने सब कपडे नीकालके लेटी हुइ थी.. ओर लखनका हसते हुअे इन्तजार कर रहीथी.. जब लखन लताको उनके रुममे छोडने गया तब वो दबे पांव कीचनसे नीकलकर लखनके रुममे चली गइथी.. ओर अपने कपडे नीकालकर लखनका इन्तजार कर रहीथी.. लखनने हसते हुअे फटाफट अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया ओर वो जटसे बेडकी ओर चला गया..
लखन : (खुसीसे हसते) रजीया.. व्होट अे सरप्राइज..? मेनेतो तुजे आज आनेको मना कीयाथा.. फीरभी..
रजीया : (लखनको हाथ पकडके अपने उपर खीचते) पतीदेव मुजे पता हे आज आप अपनी बीवीको मीलना चाहते थे.. अबतो मील लीयानां..? तो चलीये अब इस बीवीको भी खुस कर दीजीये.. में आपको छोडने वाली नही हु.. उस बीवीके चकरमे कभी इस बीवीको भुल मत जाना.. समजे.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते रजीयाके उपर लेटते) तो क्या तुजे पता था मे लताको मीलने गया था..?
रजीया : (लखनके गलेमे हाथ डालते होंठ चुमते) हां.. मुजे सब पता हे आप अभी अभी मेरी सौतान यानीकी अपनी बीवीकी बजाके आये हो.. मे वही कीचनमे खडी थी.. ओर आप दोनोकी चुदाइ देख रही थी.. आजतो बेचारीकी हालत पतली करदी आपने.. हें..हें..हें.. वोभी खुस हो गइ होगी..
लखन : (गाल चुमते हसते) हां.. डार्लींग तुम बहुत डेन्जर हो.. ये सब तुम्हारी ट्रेनींगका कमाल हे.. क्या दया सोगइ हे..? देखना वो कही जागते इधर ना आजाये.. हें..हें..हें..
रजीया : (सरमाते हसते) सो गइ नही.., मेने उसे सुला दीया हे.. हें..हें..हें.. अबतो वो सुबह ही उठेगी.. हें..हें..हें..
लखन : (होंठ चुमते) डार्लींग तु बहोत डेन्जर होगइ हे.. क्या उसे नींदकी गोली पीलाकर आइ हो..?
रजीया : (लखनका लंड सहेलाते) हां.. अब मेरे इस पतीको मीलनेके लीये मुजे कुछतो करनाही पडेगा.. चलीये इस बीवीको ठंडी कर दीजीये फीर मुजे जानाभी हे.. सुबह जल्दी उठना हे..
लखन : (सरमाते होंठ चुमते) बेबी मे अभी अभी तेरी सौतनको चोदकर आया हु.. तो इतनी जल्दी..
रजीया : अरे हां.. तो क्या हुआ लाइअे मे कीस कामकी हु.. अभी इसे फीरसे तैयार कर देती हु आप लेट जाइअे.. मुजे सब पता हे इनको कैसे खडा करना हे.. चलीये यहा कपडे नीकालकर लेट जाइअे..
तब लखन हसते हुअे अपने सब कपडे नीकालकर लेट जाता हे ओर रजीया उनके पैरके बीच बैठ जाती हे फीर जुकतेही लखनका लंड अपने हाथोमे लेकर थोडी देर सहेलाती हे.. फीर अपने मुहमे लेकर चुसने लगती हे जैसे कोइ लोलीपोप चुस रही हो.. तब थोडीही देरमे लखनका लंड फीरसे खडा होने लगा.. ओर तनके जटके मारने लगा.. तब रजीया उसे मुठीमे कपडते होले होले सहेलाने लगी.. ओर अपनी जीभसे लंडको चाटने लगी..
तब लखनका लंड तनके लोहेकी माफीक सख्त होगया.. तभी रजीया बेडपे फटाफट पीठके बल लेट गइ.. ओर लखनको खीचके अपने उपर चडा लीया.. ओर उनका लंड पकडते अपनी चुतपे घीसने लगी.. तो उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. ओर रजीयाने लंडको गीला करदीया फीर लंडको मुठीमे पकडके अहीस्तासे चुतके लव होलमे फसाके सेट कर दीया.. ओर लखनके गलेमे दोनो हाथ डालकर अपने तनसे चीपका लीया..
रजीया : (लखनके गलेमे हाथ डालते) लखन अब आप पहेले इसे अंदर डाल दीजीये.. फीर मे आपको कुछ बताती हु.. पहेले मुजे चोदीये.. पता नही आज आपसे चुदवानेका बहुत मन कर रहा हे.. अब आपके बीना रहा नही जाता..
लखन : (बाहोमे कसते लंड घुसाते) मेरे बीना की मेरे लंडके बीना..? हें..हें..हें..
रजीया : (सरमाते मुस्कराते) हां.. वोही.. आपके लंडके बीना.. अब डाल दीजीयेनां.. आज मुजे जीभरके चोद लीजीये.. चलीये.. जल्दी कीजीये.. आज आपका लंड चुतमे लेनेका बडा मन कर रहा हे..
लखन : अरे डार्लींग इतनी जल्दी क्या हे.. हम आरामसे करते हेना.. अबतो यहा कोइ आने वाला नही.. पहेले बता तुम मुजसे क्या बात करने वाली हो.. (कहेते जोरसे कमर दबाके पुरा लंड चुतमे घुसा देता हे)
रजीया : (कामुक आवाजमे) आह इइइइइइ... सीइइइइ.. बाबा आरामसे.. धीरे करोनां.. मे कही भागी नही जा रही.. पहेले मुजे अेक बार चोदकर ठंडी करदीजीये फीर हम आरामसे बात करेगे.. आपहीके फायदेकी बात हे हें..हें..हें..
तब लखन हाथके बल उचा होजाता हे ओर रजीयाको पुरा लंड अंदर बहार करते जोरोसे चोदने लगता हे.. तब रजीयाभी नीचेसे कमर उछालते लखनको चुदवानेमे साथ देने लगी.. ओर सीसकारीया करती रही.. दोनोके बीच धमासान चुदाइका युध्ध होने लगा जेसे दोनोही अेक दुसरेके अंदर समा जानेकी होडमे लगे हो.. तभी रजीया लखनके गलेके हाथ डालके लखनको अपने तनसे चीपका लेती हे.. दोनोके बीच काफी देरतक धमासान धका पैनी चुदाइ होती रही..
तो लखनभी रजीयाके गलेमे मुह डालते गलेको चुमने लगता हे ओर रजीया लखनको अपनी बाहोमे भीचते कमरको जटके देते जडने लगती हे.. तब लखनभी जोरोसे कमर हीलाते रजीयाको चोदने लगता हे.. ओर पुरा लंड रजीयाकी चुतमे घुसाते कमरको जटके मारने लगता हे.. तब दोनोके होंठ लीपलोक होजाते हे..
तभी रजीया अपने गर्भासयपे लखनका गरम विर्य महेसुस करती हे.. ओर वो लखनकी पीठ सहेलाने लगती हे.. लखन जडतेही रजीयाके सीनेपे सर रखकर ढेर होजाता हे.. फीर दोनो सांत हो जाते हे.. दोनोकी तेज सांस चलनेकी आवाज अेक दुसरे कहेसुस करते हे.. तभी कुछ देरके बाद..
रजीया : (सरमाते सरको सहेलाते) लखन.. अब हटीये.. मेरीतो अेकही बारमे हालत खराब करदी आपने.. मेरी पुरी चुत लबालब भरदी आपने.. अब आप चुदाइमे मास्टर होगये हे.. देखो बेड गंदा हो रहा हे.. अब आपभी कीतना जडते हो.. कुछ दिन अैसेही चोदते रहे तो मे अेक दिन पका प्रेगनेन्ट होजाउगी..
लखन : (होंठ चुमते) हां.. तो करले पैदा मेरा अेक बच्चा.. रजीया ये सब तुम्हारा कमाल हे.. तुमने मुजे बहुत कुछ सीखाया हे.. चुदाइके मामलेमे तुम मेरी गुरु हो.. मे तुजे कभी नही भुलुगा.. क्या मेरे साथ रहेगी..? सादी करले मुजसे.. मे तुमसे बहुत प्यार करता हु.. जींदगीभर तेरा साथ नीभाउगा.. सच केह रहा हु.. मे तुमसे सादी करना चाहता हु..
रजीया : (प्यारसे गालको चुमते) लखन.. मेतो हमेसा आपके साथ हु.. अब सादीकी क्या जरुरत हे.. बस अेक बार आपकी लताभाभीसे सादी होजाये फीर हम कुछ सोचेगे.. अबतो मुजेभी आपकी आदत होगइ हे.. अबतो आपही मेरा पती हो मेरा सहारा हो.. मे हमेंसा आपसे अैसेही चुदवाती रहुगी.. मे आपको अपना पती मान चुकी हु.. लखन आइ लव यु.. मुजे सचमे आपसे प्यार हो गया हे..
लखन : (सरको चुमते) रजु.. आइ लव यु टु.. तुम मुजे कुछ बताने वाली थी..कहोना क्या बात करनी थी..
रजीया : (होंठ चुमते) हाये.. आपके मुहसे रजु.. सुनके कीतना प्यारा लगता हे.. आप मुजे रजु कहेके ही बुलाइअे.. मुजे अैसा लगता हे मेरा पती मुजे प्यारसे बुला रहा हे.. हें..हें..हें.. सुनो आपको अेक बात कहेनी थी.. लेकीन ये बात सीर्फ आप तक ही सीमीत रखना.. कीसी ओरको पता नही हे.. ओर इसमे आगे बढना होतो मुजे कहीयेगा मे इसमे आपकी मदद करुगी में हमेसा आपका साथ दुगी.. कोइ जल्दबाजी मत करना..
लखन : (गाल चुमते) अरे बाबा.. पहेले बताओतो सही बात क्या हे.. कुछ सीरीयस मेटरतो नही..?
रजीया : (हसते) अरे नही नही.. लखन भाभीके साथ वो लडकी क्या नाम हे उनका..? हां.. नीलम.. आपकी साली हेनां..? आप ओर लताभाभी होलमे चुदाइ कर रहेथेनां..? तब वो सोफेके पीछेही खडी थी.. ओर आप दोनोकी चुदाइ देख रहीथी.. सीर्फ देखही नही रहीथी.. अपनी चुतमे उंगली करते सहेला रही थी..
लखन : (चोंकते धीरेसे) क्या नीलु..? लेकीन वोतो सो गइ थी.. तो फीर वहा कैसे..? क्या तुजे पुरा यकीन हे वो नीलु ही थी..? वो तो बहुत छोटी हे.. तो इस उमरमे ये सब..
रजीया : (हसते) लखन मुजेतो वो कोइ छोटी नही दीखती.. उसनेभी जवानीके दहेलीजपे कदम रखलीया हे.. वो टीनेजर लगती हे.. होगी कोइ १६ १७ सालकी.. यानी लंड खानेके लायक हो चुकी हे.. आपको नही पता इस उमरमेही लडकी आसानीसे फस जाती हे.. वैसेभी आपकीतो साली हे.. मतलब आधी घरवाली.. समज गयेनां..? अगर इनमे आपको मेरी कोइभी मदद की जरुरत होतो मुजे बेजीजक कहेना.. ओर आपतो राजा हो.. समज गयेनां..? हें..हें..हें..
लखन : (सरमाते हलते) क्या रजीया तुमभी.. तेरी भाभीको देखा हे.. मार डालेगी मुजे.. हें..हें..हें.. पहेले मे तुम दोनोसे तो ठीकसे चोदलु.. फीर आगे देखते हे.. तब मे तुजे बता दुगा.. हें..हें..हें.. नीलु.. हें..हें..हें..
रजीया : (धीरेसे हसते) जानु.. आपको नही पता.. अगर आपने उसपे हाथ नही मारातो वो कही ओर चली जायेगी.. इनसे तो अच्छा हे आपही उनका काम तमाम करदो.. ओर दीखनेमे भी कडक माल लगती हे.. खुबसुरत हे.. जवान हे.. मेने कीचनसे मेरे फोनमे सुट करलीया हे.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) रजु तुम बहुत डेन्जर हो.. ठीक हे.. वो क्लीप मुजे मेरे फोनमे भेज देना.. मे देख लुंगा.. अब वो वापस आयेगी तब तुमही देखलेनां उसे.. अभी अेक दो दीनमे यही वापस सादीमे आजायेगी.. तब देखते हे..
दोनोही अैसी बात कर रहेथे.. तब लखन अभीभी रजीयाके उपर उनकी चुतमे लंड डालके पडाथा.. अब रजीया लखनको ही अपना पती मानके उनके साथ रात रातभर सोती लखनका बीस्तर गरम करती थी.. बीवीका हर फर्ज वो नीभाती थी.. लेकीन आज वो उठकर अपने कपडे पहेनकर दयाके पास चली गइ.. ओर सोगइ.. क्युकी आज लता घरपे थी तो वो कोइ रीस्क लेना नही चाहती थी..
तो दुसरी ओर आज पुरे गांवमे वासनाका खेल चल रहाथा.. गांवकी हर ओरतो ओर लडकीयो की अपनी कहानी थी.. आज जीनकी बीवी कही महीनोसे नही चुदी थी.. वोभी अपने पतीके साथ संभोग कर रही थी.. ओर गांवमे ज्यादातर लडकीया ओर ओरते अपने पतीके बजाय नाजायज संबधो मे चुदवा रही थी.. गांवमे लगभग हर घरमे अेक नाजायज रीस्ता पनप रहा था.. लेकीन अेक दुसरेको इस बारेमे कीसीको कुछ भी पता नही था.. ओर अैसा आजसे ही नही.. कइ सालोसे चल रहा हे..
हर ओरत ओर लडकीके मनमे उनके स्वप्नका अेक राजकुमार होता हे.. फीर वो सादी कीसीसे भी करले.. लेकीन वो उनकी सादीसे पहेले यातो सादीके बाद अपने मनके राजकुमारको खोजकर उनसे मीलकर ही रहेती हे.. ओर सबसे छुपकर उनको समर्पीत होकर उनसे जानायज रीस्ता बना लेती हे.. ओर उसे अपना सब कुछ सोंप देती हे.. ओर ये सब सीर्फ आजही नही.. राजा महाराके कालमेभी होता रहा हे.. आज गांवमे ओर सहेरमे सब जगाह अैसा चल रहा हे.. तो आज इस गांवमे भी अैसे कइ रीस्ते पनप रहेथे..
ओर ये सब आज काम ओर रतीकी महेरबानी से हो रहाथा.. अैसा नही थाकी आज देवायत ओर चंदाकी सुहागरातथी इसीलीये काम ओर रती पुरे गांवपे हावी थे.. उसने इसीलीये सबको अपने वसमे करलीया था ताकी आज हवेलीपे कुछ अैसा होने वाला था.. जीनकी वजहसे काम ओर रती.. खुद अपने चरमो पे थे.. ओर वो कीसीका वो रुप देखने आयेथे.. जो सब परीओ ओर अप्सराओकी जननी थी..
जीहां.. में मंजुकी बात कर रहा हु.. जो अप्सरालोकमे सबकी जननी ओर चहीती रानीथी.. ओर इस धरतीपे अेक खास मक्सदसे अपनेही अंसको जन्म देने आइ थी.. जीनकी पुर्व तैयारीके रुपमे आज अपने स्वामीकी अेक चहीती रानीको उनसे रुबरु करवाने आज खुदकी पहेचान पुनमसे करवा रहीथी..
ओर अपनी सब शक्तिया पुनमके अंदर स्थापीत करने वालीथी.. ओर ये सब बाबाके आदेशके अनुसार हो रहाथा.. तब बाजुके रुममे देवायत ओर चंदा दोनोही चुदाइमे अेक बार साथमे जडके अेक दुसरेसे प्यार कर रहेथे.. देवायत अभीभी चंदाकी चुतमे लंड डालके उनके उपर लेटा हुआथा.. ओर दोनो प्यार भरी बाते कर रहेथे..
तब इधर मंजु विजयको दुध पीलाकर उसे जुलेमें सुला देती हे ओर पुनमको लेकर बाथरुममे चली जाती हे.. दोनोने साथमे नहालीया तब मंजुने पुनमको अैसेही बीना कपडोके साथ बहार आनेको केह दीया ओर खुदभी बीना कपडोके साथ बहार आगइ.. तब पुनमको मंजुका सब व्यवहार कुछ अजीब लगा.. दोनोही नंगी बहार आगइ तो पुनम बहुतही सरमा रहीथी.. तभी मंजु शीसेके सामने बैठकर अपना शींगार करने लगी.. तब पुनम उनको शींगार करते देखती रही.. उनकी समजमे कुछभी नही आरहा था.. की भाभी क्या करने वाली हे..
पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) भाभी क्या मे नाइटके कपडे पहेनलु..?
मंजुला : (हसते) नही पुनो.. मेने तुजे कहाथाना की मे तुजे सब बताउगी.. तो सुन आज मे तुजे अनुभुतीके माध्यमसे सबकुछ ज्ञात करवाउगी.. ओर तुजे आज मेरी सब शक्तिओसे अवगत करवाउगी.. ताकी आगे जाकर तुजे सब सम्हालनेमे आसानी रहे.. आज मे मेरी सब शक्तिया तुजमे स्थापीत करदुगी.. ताकी मे दुबारा जन्म लेकर आउ तब मुजे वापस मील सके.. तबतक तुजे ओर सृतीकोही सब सम्हालना हे.. तो तुजे सब पता होना जरुरी हे.. तु बैठ मे अभी आती हु.. आज तुमसे बहुत कुछ बताना हे..
पुनम : (नंगीही बेडपे बेठते) क्या..? भाभी मुजे कुछ बैचेनी जेसा अजीब लग रहा हे कही कुछ होगातो नही..?..
मंजुला : पुनो वो तु चीन्ता मत कर.. मे तुजे अभी अेक गोली देती हु.. तु उसे खालेना.. तुजे कुछ नही होगा.. सब तेरी प्रेगनेन्सीकी वजहसे हो रहा हे.. बस अभी ये बात तु कीसीसे मत कहेना.. खास करके चंदा दीदीको.. उसे भी तुजे ओर सृतीकोही सम्हालना हे.. बस अेक बार वो हमारे राजा आजाये..
पुनम : (धीरेसे) भाभी.. क्या उनकी वजह कही धिरेनतो नही..? मुजे उनकी बहुत चीन्ता होती हे..
मंजुला : नही पुनो तुम उनकी चीन्ता मत करो.. मेरे बेटेके संपर्कमे आतीही वो फीरसे ठीक होजायेगी.. तबतक तुजे ओर सृतीकोही सब सम्हालना हे.. चल बेडके बीच ठीकसे बैठजा मे जल लेकर आती हु.. फीर हम सुरु करते हे.. ओर गभराना नही.. तुजे आज परम आनंदकी अनुभुती होगी.. तु आज सब अनुभुती करेगी..
कहेते मंजु दरवाजा अच्छेसे लोक करके सभी लाइट बुजा देती हे.. फीर अेक हल्कीसी रोसनीका बल्ब जलाते अेक छोटा टेबल बेडके पास खीचलीया ओर पानीका लोटा लेकर बेटपे आगइ.. उसने पुनमको बेडके बीच नंगी बीठा दीया.. फीर खुदभी नंगी पुनमके बीलकुल सामने उनसे नजदीक सटकर बेठ गइ.. दोनोके घुटने अेक दुसरेके साथ टच करने लगे.. तब पुनम सरमाते हसते हुअे सीर्फ मंजुको देखती रही.. आज शींगार करते मंजु कोइ कादेवकी मुरत लग रहीथी.. जीनका रुप अेक बार चंदा देख चुकीथी..
अब मंजुको सब ज्ञात होने लगाथा.. उनको सब वीधीया पताथी की उनको क्या करना हे.. तभी पुनमभी सरमाते मंजुकी ओर देखती रही की ये क्या कर रही हे.. तभी मंजुने हाथमे जल लीया ओर आंख बंध करके कुछ मंत्र बोलने लगी.. ओर उसने जलको पुनमके उपर छीडक दीया.. तब जलको छीडकतेही पुनम अेक बार कांपते हुअे हील गइ.. उनके सरीरमे कंपन फील होने लगा.. तब मंजुने दुबारा हाथमे जल लीया ओर उसी क्रियाको दुबारा दोहराया.. तब पुरे कमरेमे गुलाबकी खुस्बु आने लगी.. पुनमको कुज अजीब फील होने लगा..
ओर पुनमकी आंख बंध होगइ.. ओर वो अनायासही मंजुके सामने हाथ जोडके बैठ गइ.. उसे अैसा फील होने लगाकी वो हवामे उड रही हे.. ओर पुनम परम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. उनका पुरा सरीर फुलके माफीक हल्का होने लगा.. हजारो चीटीया उनके सरीरमे रेदती महेसुस करने लगी.. ओर तीसरी बार जलके छीडकतेही पुनम बेहोसी जैसी ध्यानकी हालतमे चली गइ.. वो आंख बंध करके सुन होगइ.. तब मंजुने जलके लोटेको साइडमे रख दीया..
ओर खुद आंब बंध करते दोनो हाथोसे पुनमका चहेरा थामलीया.. ओर तब ना पुनमको होस रहा ओर नाही मंजुको.. सब अनायास ही अपने आप होने लगा.. मंजु मनमे होठ फडफडाते मंत्र बोलने लगी.. ओर पुनम परम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. जैसे वो फुलोकी माफीक हल्की होकर हवामे उड रही हो.. दोनोकी चुत हरकतमे आगइ.. चुतके दोनो होठ फडफडाते अंदर बहार होने लगे.. तभी रतीने पुनमके सरीरमे प्रवेस करलीया.. तो कामभी मंजुके अंदर चला गया.. दोनोही उतेजीत होने लगी..
जैसे दोनोकी चुतमे लंड डालकर कोइ उनकी जबरदस्त चुदाइ कर रहा हो.. वो परम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. ओर अैसा मंजुके साथ भी होने लगा.. तब मंजुने पुनमके चहेरेपे हाथ घुमाते नीचेकी ओर लेगइ ओर पुनमके दोनो उरोजोको अपनी हथेलीमे थामलीया.. तब पुनम कांपने लगी.. फीरभी वो हीलनेकी स्थीतीमे नही थी.. तभी मंजु अेक हाथ घुमाते नीचेकी ओर लेगइ.. ओर दुसरा हाथ पुनमके सरपे रखदीया..
तभी पुनमको बेहोसीकी हालतमेही अपनी चुतपे कुछ महेसुस होने लगा.. तब मंजु नीचे हाथ लेजाते उनकी चुतपे रखदीया.. तभी मंजुकी सब शक्तिया पुनमके अंदर स्थापीत होने लगी.. तब पुनम स्वर्गकी अनुभुती करने लगी.. ओर वो अपने आपको हवामे उडते हुअे देखने लगी.. वो अपनी पीठमे पंखको महेसुस करने लगी.. जैसेकी वो कोइ परी हो.. तभी उसे हवामे ही अेक कपल उडते हुअे अपनी ओर आते हुअे दीखने लगा.. जो दोनोको पंख लगे हुअे थे.. पुनाको बादलोके बीच सब धुंधलासा दीखने लगा..
तब उनमे से पुरुषथा वो आतेही पुनमको गले लगा लेता हे.. ओर अपनी बाहोमे भरलेता हे.. तब नीचेकी ओर पुनम ओर मंजुकी चुत जोरोसे फडफडाने लगी.. ओर गांवमे भी जीतने लोग जीस पोजीसनमे थे उसी पोजीसनमे मदहोसीकी हालतमे चले गये.. कोइ सो रहाथा तो कोइ देवायत चंदाकी तराह प्यार कर रहाथा.. सब परम आनंदकी अनुभुतीमे चले गये.. ओर जोभी पोजीसनमेथे वोही पोजीसनमे रेह गये.. तब ज्यादातर लोग अपनी मासुकाके साथ संभोग करनेमे लीप्त थे.. तो सब अैसेही संभोगकी पोजीसनमे रेह गये..
तभी बाजुके रुममे चंदाभी आंख बंध करते परम आनंदकी अनुभुतीमे चली गइ तो देवायतभी चंदाके सीनेमे सर रखते ढेर हो गयाथा.. दोनोको कुछ पता नही चलाकी ये सब क्या हो रहा हे.. लेकीन दोनोकी कमर जोरोसे हील रहीथी.. ओर दोनोही चुदाइमे लीप्त हो चुकेथे.. ओर अैसा गांवमेभी हो रहाथा.. जो भी लोग चुदाइ कर रहेथे सबका यही हालथा.. तभी पुनमकोभी वो पुरुषकी बाहोमे चुदाइकी अनुभुती होने लगी..
उसे महेसुस होने लगाकी वो पुरुषका बडा लंड उनकी चुतमे हे ओर वो परुष उसे बाहोमे भरके चोद रहा हे.. उनकी चुत जोरोसे फडफडा रहीथी.. ओर वो चुदाइकी अनुभुती करते उन स्त्रीकी ओर देखती हे.. तब वो चोंक जाती हे.. क्युकी उसी स्त्रीके चहेरेमे उसे उनकी भाभी मंजु नजर आइ जो पुरी तराह नीवस्त्र दोनोकी प्रेमलीला हसते हुअे देख रहीथी..
जीनकी दस भुजाअे थी.. जो खुद रतीका अवतार लग रहीथी.. ओर ये वहीथी.. सबकी जननी देवयानी जो अेक रानी अप्सराथी.. ओर अभी धरतीपे मंजुका जन्म लेकर आइथी.. वो बहुतही कामुक ओर आकर्सक लग रहीथी.. तब पुनमने जटसे अेक नजर उन पुरुषकी ओर डाली जो अभी भी उनको अपनी बाहोमे भरके हवामे उडते उनके साथ संभोगकी अनुभुती करवा रहाथा..
तो पुनम अेक बार फीरसे चोंक गइ.. क्युकी वो अेक बहुतही खुबसुरत पुरुष था.. जो देवायतकी सकलमे दीख रहाथा.. जो अेकदम जवान ओर कामकी माफीक आकर्सक दीख रहाथा.. तब उन पुरुषने पुनमको अपनी बाहोसे अलग कीया ओर उनका हाथ पकडते उसे वो स्त्रीके पास लेगया.. तब पुनम अनायासही उनके सामने हाथ जोडके खडी रेह गइ.. ओर उस स्त्रीने हसते हुअे अेक हाथ पुनमके सरपे रख दीया..
तब नीचेकी ओर पुनमको सब ज्ञात होने लगा.. जो शक्तिया बाबाने मंजुके अंदर स्थापीत कीथी ओर उस समय मंजुने जोभी अनुभुती कीथी वोही अनुभुती आज पुनम कर रहीथी.. जो शक्तिया मंजुको समजनेमे इतनी देर लगी वोही सब शक्तिया पुनमके अंदर स्थापीत होने लगी.. ओर पुनम उसी पल सब समजने लगी.. पुनमके अंदर अेकही पलमे सब शक्तिया आगइ.. उसे सब ज्ञात होने लगा.. की वो वास्तवमे कौन हे..
तभी वो पुरुष दोनो स्त्रीओका हाथ पकडते हवामे उडने लगा तब पुनम ओर मंजु दोनोही हसती हुइ उनके साथ उडने लगी.. ओर तीनोही समुद्रकी ओर जाने लगे.. तब वो दोनोका हाथ पकडते समुद्रकी गहेराइओमे ले गया.. तब पुनम ओर मंजु दोनोही परम संभोगकी अनुभुती करने लगी.. ओर उनकी चुतसे पानी नीकलने लगा.. दोनोही जडने लगी.. ओर फीर तोनोही उपर आगये.. फीर कुछ देरके बाद वापस समुद्गकी गहेराइओ मे चले गये ओर गोते लगाने लगे..
पुनम ओर मंजु जीतनी बार समुद्रकी गहेराइओमे गइ उतनी बार जडती रही.. तब देवायतसे चुदाइ करते चंदाभी जडती रही ओर गांवमेभी जीतने लोग चुदाइ कर रहेथे उनके नीचे लेटी हुइ ओरत ओर लडकीया के साथ सभी मर्दोभी जडते रहे ओर नीचे लेटी हुइ लडकी या ओरतोकी चुतको अपने विर्यसे भरते रहे.... कीसीको कुछ पता नही थाकी ये सब क्या हो रहा हे.. कोइ अपनी भाभीको तो कोइ अपनी बहेनको तो कोइ अपने भाइकी बीवीको चोद रहाथा.. तब चारु ओर वंदनाभी लेस्बीन खेल रही थी..
ओर आखीर वो पुरुष दोनोको परीलोकमे लेगया.. तब पुनमको वहा बहुत सारे चहेरे दीखनेको मीले.. तब कुछ चहेरेको देखके पुनम अेक बार फीरसे चोंक गइ.. उनमे सबका चहेरा था जो वो उसे जानती थी.. वहा उनको उनकी मां विमला उनकी दादी फीर चंदा सरला चारु वंदना भावना लता नीलम रमा रश्मी चंपा दया रजीया ओर नीशा के साथ उसने सृती ओर उनकी मां भुमीका का चहेराभी देखनेको मीला.. ओर अेक चहेरा नीर्मलाका भी देखा.. तब पुनमको समजनेमे जरासीभी देर नही लगीकी हम सब परीया हे..
पुनमको सब कुछ ज्ञात होने लगा.. वो सोचने लगी..की अगर यही सब परीया हे तो सबका जरुर उनके भाइ देवायतके साथ जीस्मानी रीस्ता होगा.. पुनमको सबसे थोडी ज्वेलेसी भी फील होने लगी.. सब चहेरेमे उनको अपनी सौतन दिखने लगी.. तब वो थोडी वीचलीत होगइ.. वो अचानक जाग गइ.. उनकी आंख खुल गइ.. ओर गभराकते चारो ओर देखने लगी.. तभी उसने खुदको अपने बेडपे पाया ओर सामने मंजु अभीभी आंख बंध करते हाथ जोडकर बेठी हुइ थी..
ओर पुनमने घडीकी ओर नजर डालीतो सुबह ४:३० बज चुके थे.. तब मंजुने भी धीरेसे आंखे खोलदी.. ओर पुनमकी ओर देखते मुस्कराने लगी.. वो पुनमकी सब मनोदसा जान गइथी.. तब पुनम सरमके मारे पानी पानी होगइ.. ओर वो मंजुके चरणोमे जुक गइ.. आजवो मंजुको पुरी तराह पहेचान गइथी.. तब मंजुने पुनमके सरपे हाथ रख दीया.. ओर मुस्कुराते सरको सहेलाने लगी.. आज मंजुने उनकी सब शक्तिया पुनमके अंदर स्थापीत कर दीथी.. क्युकी आने वाले समयमे पुनमही उनके देवायतकी देखभाल करने वाली थी..
उनको अपने बच्चे विजयकी कोइ चीन्ता नही थी.. क्युकी वो जानतीथी की चंदा उसे अपना बच्चा समजकर उनकी देखभाल करने वाली थी.. तब विजय सीर्फ चंदाकोही मा मानकर उनके लाड प्यारमे बीगड जायेगा.. वो पढाइमे होशीयार होनेके बावजुदभी अेक अयास आदमी बन जयेगा.. उनका कारणभी सीर्फ चंदाही होगी.. क्युकी तब वोभी अपने बेटेके प्यारमे अंधी होकर उनकी हर डीमांड पुरी करती होगी.. ओर नतीजेके फल स्वरुप उनकोभी अपनी गलतीका खामयाजा भुगतना पडेगा..
तभी गांवमे भी सबको धीरे धीरे होंस आने लगा.. तब कइ लडकीया अपने भाइके नीचे तो कइ ओरत अपने देवर या जेठतो कोइ अपने ससुरके नीचे लेटी हुइ थी.. सब चुदाइ करते थकके चकनाचुर हो चुकेथे.. सभी ओरत ओर लडकीका चुदाइकी वजहसे बुरा हाल हो चुकाथा.. कीसीको हीलने तककी स्थीती नहीथी.. कीसीको कुछ समजमे नही आयाकी सब क्या हुआ.. सब पकड जानेके डरसे गभराइ हुइ थी..
तब चंदाभी होंसमे आकर देवायतके नीचे लेटी उनकी पीठ सहेला रहीथी.. देवायत अभीभी चंदाकी चुतमे लंड डालके उनके उपर पडा था.. दोनोमेसे कीसको पताही नही थाकी वो कीतनी देरसे चुदाइ कर रहेथे..
सब अैसेही पडे रहे.. आज चुदाइके बावजुदभी सबको अेक अलगही आनंदकी अनुभुती फील हो रही थी.. तभी पुनमको अपने नीचे कुछ गीला गीला महेसुस होने लगा.. तो पुनमका ध्यान उनकी चदरपे चला गया तो वो चोंक गइ.. क्युकी आज दोनोकी चुतसे जडकर इतना पानी नीकल चुकाथा की पुरी चदर गीली हो चुकी थी.. उसने नीचेकी ओर देखातो उनकी चुतसे ओर मंजुकी चुतसे अभीभी हल्का पानी नीकल रहाथा.. ओर वो थोडी डर गइ.. ओर मंजुकी ओर प्रस्नार्थ भरी नजरोसे देखने लगी..
मंजुला : (हसते) पुनो अनुभुतीमे ये सब आम बात हे.. इसे गभरानेकी जरुरत नही हे.. हमारे स्वामी अनुभुतीमे ही हम सबको संभोगकी फीलींग्स कराते हे.. परीलोक ओर अप्सरालोकमे वोही हमारे स्वामी हे.. जो उनका अेक अंस हमारे भाइ देवु हे.. जरा सोचो.. जब उनका अंसही हम सबको इतना खुस रख सकता हे तो जब वो स्वयंम आयेगे तब हम सबका क्या होगा..? ओर तु डर क्यु गइ..? क्या वहा कीसीको देख लीया..? जो तुम विचलीत होगइ थी.. अैसे डर मत..
पुनम : (सरमाते) हां भाभी.. मेने कुछ अैसे चहेरे देखे.. जो मुजे यकीन ही नही हो रहा.. की उनकाभी रीस्ता हमारे स्वामीके साथ होगा.. यहा अभीतो हमारे भाइ हे.. तो क्या उनकाभी रीस्ता भाइके साथ रहा होगा..? भाभी मुजे कुछ अजीब लगा.. मे भाइको कीसी ओरके साथ सेर नही कर सकती.. मुजे अैसा लगाकी हमारे भाइको सब हमसे छीनकर लेजायेगी..
मंजुला : (हसते) हां पुनो.. मत भुलो हमारे माता पीताजीभी वही थे.. ये सब पीछले तीन पीढीसे हो रहा हे.. तो जाहीरसी बात हे हमारे भाइभी वोही हे.. ओर उनकातो काम ही यही हे.. उनको अपनी सब रानीओको खुस रखना पडता हे.. वरना सोचो मे तुमारा रीस्ता तुम्हारे भाइके साथ कैसे अक्सेप्ट करती..? यहा पृथ्वीपे हम सब कीसीना कीसी रीस्तोसे बंधे हे इसीलीये हमे दुख होता हे.. लेकीन वहातो तुमने जीतनेभी चहेरे देखे सब उनकी रानीया हे.. तो यहा वो उनके स्वामीसे कैसे दुर रेह सकती हे..
पुनम : (सरमाते हसते) भाभी.. तो क्या अभी यहा भी भाइका सबके साथ रीलेशन हे.. आइ मीन.. आप समज गइनां..? क्युकी कुछ चहेरे.. मुजेतो अभीभी यकीन नही हो रहा.. क्या आप उनके बारेमे भी सुरुसेही सब जानती थी..?
मंजुला : (हसते) नही.. पहेले नइ जानतीथी.. लेकीन मुजे सब ज्ञात होने लगा तब मे सबके बारेमे जान चुकी हु.. अेक पलतो मुजेभी सोक्ट लगा.. लेकीन दुसरे ही पल मेरी समजमे आयाकी हम सब परीया ओर अप्सराये हे.. ओर यही सब मेरा अंस हे.. तो मे अपनी बच्चीओको हमारे स्वामीसे कैसे दुर रख सकती हु..
पुनम : (सरमाते हसते) हंम.. भाभी.. सीर्फ यहा हम दोनोही उनकी बहेन नही हे.. यहातो ओरभी हे.. जो मे आपको बता नही सकती.. कुछ रीस्ते तो अैसे हे जो मन उसे स्वीकार करनेको तैयार नही हे.. क्या आपको कुछ अजीब नही लगता..? आप सबके रीलेशन हमारे भाइके साथ कैसे अेक्सेप्ट कर सकती हे..?
मंजुला : (हसते) पुनो.. हमारी तराह सब अपनी भुमीका नीभाने इधर धरतीपे आइ हे.. जैसे हम दोनो उनकी बहेन बनके आइ हे.. तो बाकीकी सभी ओरतेभी कोइना कोइ भुमीका नीभाने आइ हे.. तो हम उसे अपने स्वामीसे प्यार करने कैसे मना कर सकती हे.. ओर तुम्हेतो आगे जाकर अैसे कइ रीस्तोको फेइस करना पडेगा.. बस हमे यही खयाल रखना हे की कीसी रीस्तेको सबके सामने उजागर नही करना.. सब अपने आप सामने आजायेगा तब हमे सब रीस्तेको सहजतासे स्वीकार करलेना हे.. समजी.. (हसते) क्या अबभी तुम मुजे भाभी कहेगी..?
पुनम : (सरमाते हसते) हां.. मुजे आपको बडी दीदीके बजाये भाभी कहेनेमे बहुत अच्छा लगता हे.. ओर मे बीस्तरमेभी भाइसे बहेन बनकर ही रीलेशनमे आती हु.. ओर मुजे ये अच्छाभी लगता हे.. भाभी.. क्या हमारी दयाभी हमारी बहेन..
मंजुला : हां पुनो.. उन बेचारीको तो पता भी नही हे.. रामुकाका हमारे पीताके खास दोस्त थे.. ओर हमारे साथ कइ बरसोसे जुडे हुअे हे.. उनको कोइ सन्तान नही हो रहाथा.. ओर उनकी बीवी हमारे बापुके साथ रीलेशनमे आगइ.. दया उन्हीकी संतान हे.. हमारी बहेन.. इसीलीये तो मेने उनको हमारी नौकरानी नही समजा.. ओर इस बातका रामुकाकाको भी नही पता.. ओर.. हमारी सृती..भी.. हमारी लताभी..
पुनम : (आस्चर्यसे हसते) क्या सृतीदीदी ओर लताभाभी भी..? भाभी.. अेक बात पुछु..? हमारे बापुतो भुमी आंटीको राखी बांधते थेनां..? ओर भुमी आटीभी उनको अपना बेस्ट भाइ मानती थी.. तो फीर वोभी.. बापुके साथ कैसे रीलेशनमे आगइ..? क्या इस बातका कीसीको पता हे..?
मंजुला : (हसते) नही पुनो.. ओर तुमभी ध्यान रखना.. इस बातका आज तक कीसीको पता नही हे.. जो कोइ कोइ होता हेना तेरी तराह.. हें..हें..हें.. तो क्या तुमभी अपने भाइको राखी नही बंधती..? ओर तुमने राखीके तोहफे के बदले तो हमारे भाइका प्यार मांगलीया.. क्या ये सच हेनां..?
पुनम : (सरमाते नजर जुकाते मुस्कराते) जी भाभी.. मे भाइसे सुरुसे पसंद करती थी.. मेने उनको अपना भाइ मानाही नही.. वो सुरुसेही मेरे सपनोका राजकुमार हे..
मंजुला : (हसते) हां बस.. भुमी आंटीनेभी वोही कीया.. अेक दिन राखीके तोहफे मे उनकी गोद भरनेको केह दीया.. क्युकी उनकी भी गोदभराइ नही हो रहीथी.. ओर हमारे बापुके लाख समजानेके बावजुद मजबुरन उसे सब करना पडा.. क्युकी बाबाने भुमी बुआसे सब सचाइ बता दीथी.. तो हमारे बापुजीको भुमीबुआके साथ रीलेशनमे आना पडा..
पुनम : (हसते) अच्छा ये सीर्फ बच्चे तक ही सीमीत था.. ओर कुछ नही..
मंजुला : (हसते) नही पुनो.. वोभी कोलेजमे थी तब हमारे बापुको पसंद करतीथी.. लेकीन हमारे बापु मेरी मम्मीको प्यार करते थे.. हमारे बापुभी कामके अंस थे.. ओर हम सब परीया हे.. तो अेक बारमे कैसे संतोस मान लेती.. वोभी हमारी तराह हे.. बस अेक बार उनका स्वाद चख लीया.. फीरतो ये सीलसीला चलता रहा..
भुमी आंटी ओर हमारे बापुने कीसीको अपने रीस्तेके बारेमे आज तक पता चलने नही दीया.. जब नरेश अंकल गुजर गये तबतो दोनोको खुली छुट मील गइ थी.. दोनोने सबसे छुपकर सादी करली.. अकेलेमे दोनो ही मीया बीवीकी तराह रहेते.. ओर दुनीयाके सामने भाइ बहेन बनकर खुब प्यार करते रहे.. बीलकुल तेरी तराह.. हें..हें..हें..
पुनम : (हसते) भाभी तो क्या आपको ये सब जानकर दुख नही होता..? आइ मीन आपकी मम्मी भी..
मंजुला : पुनो.. मे तेरा इसारा समज गइकी तु क्या कहेना चाहती हे.. अेक दो दिनमे तुजेभी सब ज्ञात होने लगेगा.. तब तु सबके बारेमे जान जायेगी.. तब आजकी तराह विचलीत मत होना.. तुजे अैसे कइ रीस्ते दिखनेको मीलेगे.. बस तुजे कीसीपे ज्यादा ध्यान नही देना.. तुम सीर्फ हमारे भाइको प्यार देती रहेना.. सायद बाबाने इसीलीये तेरा मौसीका ओर सृतीका चुनाव कीया हे..
पुनम : (हसते) भाभी मे आपकी तराह स्ट्रोंग नही हु.. हें..हें..हें.. मे भाइको दुसरी ओरतके साथ इमेजींग करती हुतो बुरा लगता हे..
मंजुला : (हसते) पुनो तुजे स्ट्रोंग बनना पडेगा.. जबभी तेरे सामने हमारे पतीके अैसे रीस्ते सामने आये तब यही सोचनाकी हम सब परीया ओर अप्सराये हे ओर सभी हमारे पतीकी रानीया हे.. बस.. तुजे दुख नही होगा.. आज हमारे बापु इस दुनीयामे नही हे.. तो उनकी जगह हमारे भाइ देवुने लेली हे.. हम सभी परीया ओर अप्सराये आज हमारे देवुके साथ जुडी हुइ हे..
पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) तो भाभी.. आप केह रहीथीकी हम सब परीया ओर अप्सराये हे तो क्या इस वक्तभी वो सब हमारे भाइके साथ रीलेशनमे.. आइ मीन आप समज गइनां मे क्या कहेना चाहती हु..
मंजुला : (हसते) हां पुनो तुम जो सोच रहीहो अैसाही हे.. लेकीन हमे कीसीके रीस्तेको उजागर नही करना.. ओर जोभी हो रहा हे या होने वाला हे उसे होने देना हे.. फीर चाहे मेरी मम्मी हो या सरलाचाची या भुमीका बुआ.. तु सब समज गइनां..? सभी अपने तनकी प्यास अपने स्वामीसे फीजीकल होते बुजाती हे.. सब अपने स्वामीके प्यारमे पागल होजाती हे..
पुनम : (सरमाते हसते) हां भाभी.. समज गइ.. ओर मुजे अब कोइ अेतराजभी नही हे.. भाभी नीचे बहुत गीला लग रहा हे.. पहेले हम चदर चेन्ज करले..? फीर मुजे आपसे कुछ ओरभी जानना हे.. मेरे मनमे कइ सवाल आ रहे हे..
मंजुला : (हसते) हां चल उतर नीचे.. सुबह होनेको आइ हे.. सब आजही जानलेगी क्या..? हम अेक दो घंटा आराम करले फीर तुजे सुबह सब बताउगी.. लेकीन तब सीर्फ हम दोनोही होगी.. तभी मे तुजे बताउगी.. फीरतो तुम स्वयंम सब जानलेगी.. चल आजा..
कहेते दोनोही बेडसे उतर गइ फीर पुनमने चदरको चेन्ज करलीया ओर गीली चदर लेकर दोनोही बाथरुममे घुस गइ.. तब पुनमने चदरको वोसींगमे डाल दीया ओर दोनो नहाने लगी.. तब अचानक मंजु पुनमको लेकर बाथटबमे बैठ गइ ओर पानी चालु करदीया.. तब पुनम खुब सरमाने लगी.. ओर मंजु पैर फैलाकर पुनमके सामने बैठ गइ ओर पुनमकी कमरमे हाथ डालकर उसे अपनी ओर खीचलीया ओर पुनमके चहेरेको हाथमे थाम लीया.. फीर उनकी आंखोमे कामुक नजरोसे देखती रही..
पुनम : (अेकदा सर्मसार होते) भाभी.. प्लीज.. क्या कर रही हो.. मुजे नीचे कुछ हो रहा हे..
मंजुला : (सरमाते मुस्कराते) पुनो मे सीर्फ तेरी भाभी ही नही हु.. तेरी बडी बहेन भी हु.. मेरा भावुके साथ मौसीके साथ सृतीके साथ सबके साथ ये रीस्ता हे.. ओर आज मुजे मेरी इस बहेनपेभी बहुत प्यार आ रहा हे.. आज मेने मेरा सबकुछ तुजे सोंप दीया हे.. मेरा देवु भी.. तो आज मुजे मत रोको.. क्या वंदनाके साथभी तेरा रीस्ता हेनां..?
कहेते मंजु पुनमके चहेरेकी ओर अपना चहेरा लेजाती हे.. तब पुनम सरमके मारे अपनी आंख बंध कर लेती हे.. आज वो अपनी भाभीके साथ पहेलीबार अैसे रीस्तेमे आ रहीथी.. तभी उसे अपने होठोपे मंजुके होंठ महेसुस होने लगे.. जो मंजु उसे हल्कासा चुम रहीथी.. तब पुनमभी उतेजीत होने लगी.. ओर परंम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. सब सरम त्यागकर वो मंजुका साथ देने लगी.. मंजुके साथ वो आज अेक अलगही कसीस फील कर रहीथी.. तब उसे क्या पताथाकी मंजु उनके अंदर कीसके माध्यमसे क्या ज्ञान दे रहीहे..
दोनोही अेक दुसरेके होंठोके रसको पीने लगी.. तभी मंजुने अपने मुहके रसको पुनमके मुहमे उडेल दीया ओर पुनम उसे अपनी हलकमे उतारकर पी गइ.. तब वो अेकदम उतेजीत होगइ.. वासनाकी आगमे उनका तन कांपने लगा.. तभी दोनोही अेक दुसरेकी चुतको आपसमे रगडते अेक दुसरेके उरोजोके साथ खेलने लगी..
कुछ ही देरमे दोनोही जोरोसे सीसकारीया करते अेक दुसरेकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते अेक दुसरेकी चुतमे उंगली डालकर जोरोसे हीलाने लगी.. दोनोही पुरी तराह कामुक हो चुकी थी.. तभी अचानक ही दोनो अेक दुसरेके तनसे चीपक गइ ओर दोनोने अपने होंठ लीपलोक करलीये..
फीर अपनी कमरको साथमे जटके देते साथमे जडने लगी.. तब दोनोने अपने होंठ छोड दीये.. फीर दोनो अेक दुसरेकी आंओमे देखती रही.. ओर मंजु पुनमकी ओर देखते कातील स्माइल करते हसने लगी.. तो पुनमभी सरमके मारे पानीपानी होते मुस्कराने लगी.. तभी पुनमको कुछ अजीब फील होने लगा ओर उनकी बैचैनी बढ गइ.. उसे उल्टी जैसा होने लगा.. तो वो जटसे टबसे बहार नीकल गइ.. ओर गेन्डीपे जाकर व्होमीट करने लगी.. तब मंजुने उनकी जटसे बाहर आते पुनमकी पीठको सहेलाया ओर पुनमको उल्टी होगइ..
पुनमने मुहको साफ करलीया.. ओर मंजुकी ओर देखने लगी.. तब मंजुने खुसीसे मुस्कराते पुनमको अपनी बाहोमे भरलीया.. फीर मंजुने अलग होकर पुनमके चहेरेको अपनी दोनो हथेलीमे थामलीया ओर उनकी आंखोमे देखकर मुस्कुराते हां मे सर हीलाने लगी.. तो पुनम खुसीके मारे फीरसे मंजुके गले लग गइ.. फीर दोनोही फटाफट नहाकर बहार आगइ.. तब मंजुने अपने पर्समेसे अेक गोली नीकालकर पुनमको खीलादी.. ओर अपने अपने नाइट गाउन पहेनकर बेडपे अेक दुसरेको चीपकर सोने लगी.. तब पुनमने सरमाते कहा..
मंजुला : पुनो.. अभी कीसीको ये उल्टीके बारेमे मत बताना.. ये प्रेगनन्सीकी वजहसे उल्टी हुइ हे.. हमारे भाइने मेरी तराह तुजेभी प्रेगनेन्ट करदीया हे.. ठीक नौ महिनेके बाद तु हमारे भाइकी बच्चीको जन्म देगी.. जो हमारी तराह परी होगी..
पुनम : (सरमाते हसते) जी. भाभी.. आज मे बहुत खुस हु.. भाभी आपको अचानक क्या होगया.. जो अैसा कीया.. मुजेतो आपके साथ बहुत मजा आया..
मंजुला : (हसते पुनमके बालको सहेलाते) पुनो.. मुजे हमारे भाइसे चुदाइकी आदत पड गइ हे.. मे उनसे चुदाइके बगैर नही रेह सकती.. इसीलये मे सृतीके साथ या चंदामौसीके साथ अैसा करती हु.. क्या तुम अब हमारे भाइके बगैर रेह सकती हो..?
पुनम : (सरमाते हसते) नही भाभी.. मेभी नही रेह सकती.. तभीतो में कभी कभी वंदनाके साथ अैसा करती हु.. क्या.. आपसे अेक बात पुछु..? जब भाइ कीसी ओरके साथ करते हे तब आपको बुरा नही लगता..?
मंजुला : (हसते) नही.. क्युकी मुजे पता हे मेरा देवु मुजे बहोत प्यार करता हे.. ओर सामको मेरे पासही लोटकर आयेगा.. आगे जाकर तुजेही हमारे देवुको मेरी तराह सम्हालना होगा.. ओर अबतो मे सबको पहेचान गइ हु.. अबतो मुजेभी सब पता चल गया हे की उनकातो कामही यही हे.. पुनो.. देवुके साथ जीनका भी रीलेशन हे वो सभी हमारी तराह परीया हे.. आगे जाकर तुमको बहुत कुछ देखना हे.. ओर सबको सम्हालना हे.. तु मेरी स्ट्रोंग बेटी हे.. ओर हमाराभी कर्तव्य हे की हम हमारे स्वामीके सभी अंसको खुस रखे..
पुनम : (अचानक मंजुकी ओर आस्चर्यसे देखते) सभी अंसोको खुस रखे मतलब..?
मंजुला : पुनो तु अभी इतनी परीपकव नही हुइ हे की सब बात समज सके.. तुजे धीरे धीरे करते सब ज्ञात होजायेगा.. तब तु सबकुछ समज जायेगी..
पुनम : (हसते) भाभी.. क्या वाकइ हम सब आपकी संतान हे..?
मंजुला : हां पुनो.. वास्तवमे हमारे बापुजी उनके बापुजी हमारा देवु तुम सब मेरी ही संतान हो.. हमारे स्वामीकी सीर्फ कुछही रानीया हे.. बाकी सब उन्हीका अंस हे.. जबभी हमे धरतीपे आनाहो तब मुजेही हमारे स्वामीके अंसको जन्म देके उनके साथही मुजे सादी करनी पडती हे.. ओर उनकेही बच्चे पैदा करना होता हे..
पुनम : (हसते) भाभी येतो बहुतही अटपटा हे.. मेरी तो कुछ समजमेही नही आरहा.. बहुत बाते हे जो मुजे आपसे जाननी हे.. कुछ चहेरे मेने देखे जो उनके बारेमे सब जानना हे..
मंजुला : (होठोपे कीस करते) मुजे पता हे तुम कीसके बारेमे बात करना चाहती हे.. अब बहुत देर होगइ हे कुछ आराम करले..? तुजे सब कुछ कल बताउगी.. मुजे पता हे तुजे कीसके बारेमे जानना हे.. चल सोजा..
तब दोनोही अेक दुसरेकी बाहोमे चीपकते सो जाती हे.. तब बाजुके रुममे चंदाभी पुरी रात देवायतके नीचे लेटकर चुदवाते थककर चकनाचुर हो चुकीथी.. वो देवायतके बालो ओर पीठ सहेलाती कब नींदकी आगोसमे चली गइ उनको पताही नही चला.. तब देवायतभी अभी तक उनकी चुतमे लंड डालके चंदाके सीनेपे सर रखके सो चुकाथा.. दोनो अनुभुतीमे पुरी रात चुदाइ करते रहे.. जीनकी वजहसे दोनोही थकके सो चुकेथे.. तब गांवमेभी जब सबको होंस आया तब सब फटाफट अपनी जगाह जाकर सोने लगे.. तब ओरते ओर लडकीयाभी महा मुस्कीलसे चलके अपने रुममे जाकर सोगइ....
कन्टीन्यु