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फीर जटसे लंडको नीकालकर बाथरुममे घुस गया ओर अपने लंडको साफ करने लगा.. तब बहार रश्मी ओर वंदना दोनोही ढेर होकर बेडपे पडी थी.. ओर अपनी सांसको दुरस्त कर रहीथी.. देवायत कंपलीट होकर बहार आगया.. ओर अपने कपडे पहेनकर दोनोके होठोपे कीस करके वहासे नीकल गया.. ओर वापस हवेलीपे आगया.. तो वहा रजीया दया ओर चंपाभाभी सभी काम नीपटाकर अपने रुममे सोने चली गइ थी..
तभी सरला अपने रुममे आराम कर रहीथी तो लखन ओर लता दोनो सोनेके लीये उपरकी मंजीलपे अपने रुममे चले गये थे.. तब सृती पुनमके साथ उनके रुममे बैठकर बाते कर रही थी.. तब पुनम सृतीको धिरेन ओर नीलमके बारेमे पुरी सटोरी सुना रही थी.. जीसे सुनकर सृती बडेही आस्चर्यसे गौरसे सुन रही थी.. तभी चंदा अपने रुममे विजयको सुला रही थी.. तो बहारके होलमे अब भी नीर्मला भुमीका ओर मंजु भावना बैठकर बाते कर रही थी.. तो देवायत भी आकर उनके पास बैठ गया..
नीर्मला : देवु.. हम राजीवके बारेमे बात कर रही थी.. हमे उनकी सब वीधीया पांचवे दिन खत्म कर देनी हे.. क्या कहेते हो आप..? बस अेक छोटासा हवन करके पींडदान करना हे.. उनमे आप ओर धिरेन अपनी बीवीओके साथ बैठ जाइअे.. ओर अपने हाथोसे कार्यको सम्पन कर दीजीये..
देवायत : (मुस्कुराते) नही.. मे सोच रहा हु सीर्फ मे ओर धिरेन नही.. हमारे साथ भानु ओर भावना भी बैठेगे.. वोभीतो उनका जमाइ हे.. अगर सीर्फ मे बैठुगा तो अच्छा नही लगेगा.. क्या कहेते हो आप सब..?
मंजुला : (मुस्कुराते खुस होते) हां.. मम्मी.. देवु ठीक केह रहा हे.. वरना भानुभाइको बुरा लगेगा..
नीर्मला : (मुस्कुराते) हंम.. चलो वोभी सही हे.. ठीक हे.. तो आप तीनो कपल बैठ जाना.. फीर उनके पीछे ओर कोइ सौक नही रखना.. सब लोग अपने कार्यमे लग जाना..
भावना : (मुस्कुराते) मोम.. मेरा अेक सजेशन हे.. क्युना आप ओर भुमी मौसी हरद्वार चली जाती..? वहा आप अपने हाथोसे पापाके अस्थीका वीसर्जन करके चली आना.. तो आपकोभी थोडा चेन्ज मीलेगा..
देवायत : (मुस्कुराते) मंजु.. सीर्फ ये दोनोही क्यु..? मेतो कहेता हु.. आप चंदा ओर भावुको भी साथ लेजाओ.. ओर वैसे सरलचाची भी कही नही गइ होगी.. तो उसे भी साथ लेलो.. वोभी वहा सब देख लेगी..
भावना : (खुस होते) नही.. मुजे इतनी छोटी बच्चीको लेकर नही जाना.. आप चंदा मौसीको साथ लेलो.. आखीर पापा उनका भी भाइ था.. उनकोभी अच्छा लगेगा..
भुमीका : (हसते) हां बेचारी सरला भाभीको भी साथ लेलो.. वो कहा कभी कही गइ होगी..
देवायत : (मुस्कुराते) चलो.. तैय होगया.. आप चारो जा रही हे.. मे सबकी टीकीट ओर वहा रहेने घुमनेका इन्तजाम करता हु.. आप अेक हप्ते तक आजु बाजुमे सब देख लेना..
नीर्मला : (सरमाते हसते) देवु.. आप ओर मंजु भी साथ चलीयेनां..
मंजुला : (हसते) मम्मी.. मेरीभी भावु जैसी हालत हे.. हें..हें..हें.. ओर वैसे देवुभी कही दिनोसे अैसेही दोडधाम करते रहे.. तो अब उनकोभी थोडा अपने बीजनेशको देखने दीजीये.. यहा भी बहुत कुछ करना हे..
अैसेही बाते करते कुछ देरके बाद सबलोग सोने चले गये.. आज नीर्मला ओर चंदाकी वजहसे पुनम देवायतके पास नही जा सकी.. तो भावना पुनमके पास उनके रुममे सोने चली गइ.. तो नीर्मला भुमीकाभी अेकही रुममे सोने चली गइ.. तब सृती मंजु ओर चंदा तीनोही देवायतके साथ उनके रुममे चली गइ.. तो कीतने दिनोके बाद आज चंदा ओर मंजु देवायतके साथ सो रही थी..
तो जाहीरसी बात हे.. दोनोही आज देवायतको छोडने वाली नही थी.. तो देवायतने मंजुको इसारेमे कुछ केह दीया तो मंजु खुस होकर हांमे गरदन हीलाती हे.. ओर अेक गदा बेडके पास नीचे बीछाकर वही लेट जाती हे.. तब उस रात देवायतने सृती ओर चंदाको दो दो बार चोदकर उनकी हालत खराब करदी.. दोनोको तीन तीन चार चार बार जडाकर दो दो बार उनकी चुतको अपने पानीसे सीच दीया..
तो सृती थकी हारी सो गइ.. तब उस रात देवायतने तीसरी बार चंदाको चोद लीया.. तब चंदा लगभग बहोसीकी हालतमे चली गइ थी.. आज देवायतने चंदाकी सारी कशर पुरी करदी.. चंदा अैसेही पडी रहेते बीना कुछ बोले देवायतसे चुदवाती रही.. वो पुरी तराह पसीनेसे भीग चुकी थी.. जब देवायतने तीसरी बार उनकी चुतको भरदीया ओर उनके उपरसे हट गया तबभी चंदा अैसेही लेटी रही..
उनकी चुत लंड नीकल जानेके बावजुद अब भी फडफडा रहीथी.. ओर उनमेसे दोनोका काम रस चुतसे होते उनके पेरोसे गीर रहाथा.. तब देवायत उनको गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया.. ओर उसे नहेलाया तब चंदाको होस आया.. ओर वो जुठा गुस्सा करते देवायतको सीनेमे मुके मारने लगी.. ओर देवायत उसे वापस बेडपे लेकर आगया तो चंदा ओर सृती दोनोही नींदकी आगोसमे चली गइ.. तब देवायत मंजुके पास उनके बीछानेपे आगया ओर उनके साथ लेट गया तब मंजुने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया....
कन्टीन्यु
तभी सरला अपने रुममे आराम कर रहीथी तो लखन ओर लता दोनो सोनेके लीये उपरकी मंजीलपे अपने रुममे चले गये थे.. तब सृती पुनमके साथ उनके रुममे बैठकर बाते कर रही थी.. तब पुनम सृतीको धिरेन ओर नीलमके बारेमे पुरी सटोरी सुना रही थी.. जीसे सुनकर सृती बडेही आस्चर्यसे गौरसे सुन रही थी.. तभी चंदा अपने रुममे विजयको सुला रही थी.. तो बहारके होलमे अब भी नीर्मला भुमीका ओर मंजु भावना बैठकर बाते कर रही थी.. तो देवायत भी आकर उनके पास बैठ गया..
नीर्मला : देवु.. हम राजीवके बारेमे बात कर रही थी.. हमे उनकी सब वीधीया पांचवे दिन खत्म कर देनी हे.. क्या कहेते हो आप..? बस अेक छोटासा हवन करके पींडदान करना हे.. उनमे आप ओर धिरेन अपनी बीवीओके साथ बैठ जाइअे.. ओर अपने हाथोसे कार्यको सम्पन कर दीजीये..
देवायत : (मुस्कुराते) नही.. मे सोच रहा हु सीर्फ मे ओर धिरेन नही.. हमारे साथ भानु ओर भावना भी बैठेगे.. वोभीतो उनका जमाइ हे.. अगर सीर्फ मे बैठुगा तो अच्छा नही लगेगा.. क्या कहेते हो आप सब..?
मंजुला : (मुस्कुराते खुस होते) हां.. मम्मी.. देवु ठीक केह रहा हे.. वरना भानुभाइको बुरा लगेगा..
नीर्मला : (मुस्कुराते) हंम.. चलो वोभी सही हे.. ठीक हे.. तो आप तीनो कपल बैठ जाना.. फीर उनके पीछे ओर कोइ सौक नही रखना.. सब लोग अपने कार्यमे लग जाना..
भावना : (मुस्कुराते) मोम.. मेरा अेक सजेशन हे.. क्युना आप ओर भुमी मौसी हरद्वार चली जाती..? वहा आप अपने हाथोसे पापाके अस्थीका वीसर्जन करके चली आना.. तो आपकोभी थोडा चेन्ज मीलेगा..
देवायत : (मुस्कुराते) मंजु.. सीर्फ ये दोनोही क्यु..? मेतो कहेता हु.. आप चंदा ओर भावुको भी साथ लेजाओ.. ओर वैसे सरलचाची भी कही नही गइ होगी.. तो उसे भी साथ लेलो.. वोभी वहा सब देख लेगी..
भावना : (खुस होते) नही.. मुजे इतनी छोटी बच्चीको लेकर नही जाना.. आप चंदा मौसीको साथ लेलो.. आखीर पापा उनका भी भाइ था.. उनकोभी अच्छा लगेगा..
भुमीका : (हसते) हां बेचारी सरला भाभीको भी साथ लेलो.. वो कहा कभी कही गइ होगी..
देवायत : (मुस्कुराते) चलो.. तैय होगया.. आप चारो जा रही हे.. मे सबकी टीकीट ओर वहा रहेने घुमनेका इन्तजाम करता हु.. आप अेक हप्ते तक आजु बाजुमे सब देख लेना..
नीर्मला : (सरमाते हसते) देवु.. आप ओर मंजु भी साथ चलीयेनां..
मंजुला : (हसते) मम्मी.. मेरीभी भावु जैसी हालत हे.. हें..हें..हें.. ओर वैसे देवुभी कही दिनोसे अैसेही दोडधाम करते रहे.. तो अब उनकोभी थोडा अपने बीजनेशको देखने दीजीये.. यहा भी बहुत कुछ करना हे..
अैसेही बाते करते कुछ देरके बाद सबलोग सोने चले गये.. आज नीर्मला ओर चंदाकी वजहसे पुनम देवायतके पास नही जा सकी.. तो भावना पुनमके पास उनके रुममे सोने चली गइ.. तो नीर्मला भुमीकाभी अेकही रुममे सोने चली गइ.. तब सृती मंजु ओर चंदा तीनोही देवायतके साथ उनके रुममे चली गइ.. तो कीतने दिनोके बाद आज चंदा ओर मंजु देवायतके साथ सो रही थी..
तो जाहीरसी बात हे.. दोनोही आज देवायतको छोडने वाली नही थी.. तो देवायतने मंजुको इसारेमे कुछ केह दीया तो मंजु खुस होकर हांमे गरदन हीलाती हे.. ओर अेक गदा बेडके पास नीचे बीछाकर वही लेट जाती हे.. तब उस रात देवायतने सृती ओर चंदाको दो दो बार चोदकर उनकी हालत खराब करदी.. दोनोको तीन तीन चार चार बार जडाकर दो दो बार उनकी चुतको अपने पानीसे सीच दीया..
तो सृती थकी हारी सो गइ.. तब उस रात देवायतने तीसरी बार चंदाको चोद लीया.. तब चंदा लगभग बहोसीकी हालतमे चली गइ थी.. आज देवायतने चंदाकी सारी कशर पुरी करदी.. चंदा अैसेही पडी रहेते बीना कुछ बोले देवायतसे चुदवाती रही.. वो पुरी तराह पसीनेसे भीग चुकी थी.. जब देवायतने तीसरी बार उनकी चुतको भरदीया ओर उनके उपरसे हट गया तबभी चंदा अैसेही लेटी रही..
उनकी चुत लंड नीकल जानेके बावजुद अब भी फडफडा रहीथी.. ओर उनमेसे दोनोका काम रस चुतसे होते उनके पेरोसे गीर रहाथा.. तब देवायत उनको गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया.. ओर उसे नहेलाया तब चंदाको होस आया.. ओर वो जुठा गुस्सा करते देवायतको सीनेमे मुके मारने लगी.. ओर देवायत उसे वापस बेडपे लेकर आगया तो चंदा ओर सृती दोनोही नींदकी आगोसमे चली गइ.. तब देवायत मंजुके पास उनके बीछानेपे आगया ओर उनके साथ लेट गया तब मंजुने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया....
कन्टीन्यु