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कहा तो दोनोही मुस्कुराने लगे.. लखन लताके सब कपडे पहेनाने लगा तो लता उनको प्यारसे मुस्कुराते देखती रही.. फीर लखनने भी अपने सब कपडे पहेनलीये.. फीर लखनने पुनमको फोन लगा दीया.. ओर लतासे उनकी बात करवादी.. तो लताने सरमाते सब बाते बतादी.. ओर लखनको बहार छतपे भेज दीया.. तो पुनमने फोन रखते ही सृतीको फोन लगा दीया.. तो वो भी देवायतसे दो बार चुदवाकर लेटी हुइ थी.. ओर इस वक्त देवायत मंजुके उपर लेटा हुआ था.. ओर दोनो बाते करते चुदाइमे मसगुल थे..
सृती : (धीरेसे) हां पुनो दीदी.. क्या हुआ..?
पुनम : (धीरेसे मुस्कुराते) भाभी.. प्लीज.. अपनी मेडीकलकी बेग लेकर आइअेना.. हमे लता भाभीके पास जाना पडेगा.. हमे जीस बातका अंदाजा था.. वोही हुआ हे.. उनको नीचे बहुत खुन नीकलने लगा हे..
सृती : (मुस्कुराते) हंम.. चलो मे अभी आती हु.. आप बहार आइअे..
फीर कुछही देरके बाद सृती कपडे पहेनकर अपनी मेडीकलकी बेग लेकर बहार आगइ.. तो बहार पुनम उनके रुमके पास खडी होकर सृतीका इन्तजार कर रही थी.. तो सृतीको देखते ही मुस्कुराने लगी.. ओर दोनो उपरकी मंजीलपे चली गइ.. तब पुनमने दरवाजेपे नोक कीया तो लताने उसे आवाज देकर अंदर आनेको कहा.. तो दोनो अंदर चली गइ तब वहा लखन नही था.. क्युकी उनको लताने छतपे चले जानेको कहा ताकी उनको सर्मीन्दा ना होना पडे..
सृती : (मुस्कुराते) हां लता क्या हुआ.. कुछ प्रोबलेम हे क्या..?
लता : (सर्मसार होते मुस्कुराते सारी उची करते) सोरी भाभी.. आपको डीस्टब्र कीया.. देखीयेना मुजे क्या हुआ.. बहुत खुन नीकलता हे..
सृती : (सारी उची करते देखते) लता.. तेरा पीरीयड होनेमे कीतने दिन बाकी हे..? हंम..?
लता : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अभी तो दो दिन बाकी हे.. उनके बाद सुरु होगा.. भाभी.. मे तो उनका देखते ही डर गइ थी.. मे उनको कीतना मना कर रही थी.. तो नाराज होगये.. ओर देखीये.. क्या करदीया..
सृती : (टोर्चकी लाइट जलाकर गौरसे देखते) लता.. कीतना अंदर गया था..? हंम..?
लता : (सर्मसार होते धीरेसे) भाभी.. बस.. अभी थोडासा फसाया ही था.. ओर धीरेसे पुस कीया तो अैसा लगा.. ये फट गइ हे.. पुनो दीदी आपने उनको कौनसी जडीबुटी दी हे..? जो उनका इतना बडा होगया हे..
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. मेने तो थोडी सी ही दी हे.. क्या बहुत बडा होगया हे..?
लता : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. बडा नही.. कीसी गध्धे जैसा होगया हे.. मुजे तो बहुत डर लग रहा हे.. पता नही आपको उनको ये सब देनेकी क्या आवस्यक्ता पड गइ..
पुनम : (लताकी ओर देखकर धीरेसे) भाभी.. इनको जडी बुटी देना जरुरी हो गया था.. तभी तो दी हे.. फीकर मत करो.. मे कल मंजुभाभीको पुछकर आपको सबकुछ बता दुगी..
सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) लता.. गभराने वाली कोइ बात नही हे.. ये तेरा पीरीयड सुरु हो गया हे.. इसीलीये इतना खुन नीकल रहा हे.. बाकी कुछ भी नही हे.. कभी कभी पीरीयड नजदीक होता हे.. तब अैसा हो जाता हे.. ओर ये कहीसे फटी नही हे.. हें..हें..हें..
लता : (सरमाके मुस्कुराते) भाभी.. आपको हसी आ रही हे.. बाबा मेरी तो जान ही नीकल गइ थी.. मेने उनको कीतनी मनते की तब जाके मुजे छोडा.. भाभी.. क्या इतना बडा अंदर जानेसे कुछ होगा तो नही..?
पुनम : (पास बैठते धीरेसे हसते) भाभी.. तुम खामखा डर रही हे.. इनमे कुछ नही होता.. बस पहेली बार थोडी तकलीफ होती हे.. (कानमे) भाभी.. बडे भाइका भी इतना ही बडा हे.. तब आप क्या करोगी..? देखो सृती भाभीको.. अभी अभी बडे भाइका अंदर लेकर ही आइ हे.. हें..हें..हें.. इनको कुछ हुआ क्या..? हें..हें..हें..
सृती : (सरमाकर हसते पुनमको मुका मारते) दीदी.. आप भी अपने भाइकी तराह बहुत कमीनी हो.. क्या आप नही लेती..? हंम..? अब तो लता को भी सब मालुम हे.. हें..हें..हें.. (लताकी ओर देखते) लता.. तुम गभराना नही इनमे कुछ भी नही होता.. बस.. तुम थोडासा डर गइ हो.. क्युकी तुमने इतना बडा देखा ओर अंदर लीया नही हेनां इसीलीये.. जब हम पहेली बार करते हेना उसी तराह अेक बार तकलीफ होगी.. फीर तो तुजे भी बडा लेनेकी आदत हो जायेगी.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते हसते) भाभी.. सच कहु.. भाइका लेनेमे बहुत मजा आता हे.. सुन लता भाभी.. मुजे तुमसे कल बहुत सारी बात करनी हे.. जब सब लोग सादीमे बीजी होजाये तब तुम मेरे साथ चलना.. कल तुजे सबकुछ बता दुगी.. चल अभी तो हम दोनो नीकलते हे.. ओर वैसे भी अब तेरी पांच दिनकी तो छुटी होगइ.. हें..हें..हें..
लता : (सरमाते हसते) हां.. बाबा मेतो बहुत डर गइ थी.. अच्छा कीया उसने आपको फोन करदीया..
पुनम : (हसते) भाभी.. वैसे कहा हे वो..? कही भगा दीया क्या..? हें..हें..हें..
लता : (सरमाते हसते) हां.. आपको सामने उनको बहुत सरम आ रही थी.. ओर मुजे भी नही आयेगी क्या..? हें..हें..हें..
सृती : (बेग लेते) हंम.. चल अब हम नीकलती हे.. तु बुलाले उसे.. यही बहार ही होगा.. हें..हें..हें..
कहेते दोनो ही हसते हुअे बहार नीकल गइ.. तब लखन सीडीयोके पास ही खडा था.. तो पुनम सृतीको देखते ही सरमा गया.. तभी पुनमने उसे देखलीया.. जैसेही दोनोकी आंख मीली तो पुनम लखनकी ओर देखते हसने लगी.. तो लखन भी पुनमकी ओर आंख मारते बहुत ही सरमाते हसने लगा.. तो पुनम बहुतही सर्मसार होते सृतीके साथ धीरेसे बाते करते नीचेकी ओर जाने लगी..
सृती : (धीरेसे) हां पुनो दीदी.. क्या हुआ..?
पुनम : (धीरेसे मुस्कुराते) भाभी.. प्लीज.. अपनी मेडीकलकी बेग लेकर आइअेना.. हमे लता भाभीके पास जाना पडेगा.. हमे जीस बातका अंदाजा था.. वोही हुआ हे.. उनको नीचे बहुत खुन नीकलने लगा हे..
सृती : (मुस्कुराते) हंम.. चलो मे अभी आती हु.. आप बहार आइअे..
फीर कुछही देरके बाद सृती कपडे पहेनकर अपनी मेडीकलकी बेग लेकर बहार आगइ.. तो बहार पुनम उनके रुमके पास खडी होकर सृतीका इन्तजार कर रही थी.. तो सृतीको देखते ही मुस्कुराने लगी.. ओर दोनो उपरकी मंजीलपे चली गइ.. तब पुनमने दरवाजेपे नोक कीया तो लताने उसे आवाज देकर अंदर आनेको कहा.. तो दोनो अंदर चली गइ तब वहा लखन नही था.. क्युकी उनको लताने छतपे चले जानेको कहा ताकी उनको सर्मीन्दा ना होना पडे..
सृती : (मुस्कुराते) हां लता क्या हुआ.. कुछ प्रोबलेम हे क्या..?
लता : (सर्मसार होते मुस्कुराते सारी उची करते) सोरी भाभी.. आपको डीस्टब्र कीया.. देखीयेना मुजे क्या हुआ.. बहुत खुन नीकलता हे..
सृती : (सारी उची करते देखते) लता.. तेरा पीरीयड होनेमे कीतने दिन बाकी हे..? हंम..?
लता : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अभी तो दो दिन बाकी हे.. उनके बाद सुरु होगा.. भाभी.. मे तो उनका देखते ही डर गइ थी.. मे उनको कीतना मना कर रही थी.. तो नाराज होगये.. ओर देखीये.. क्या करदीया..
सृती : (टोर्चकी लाइट जलाकर गौरसे देखते) लता.. कीतना अंदर गया था..? हंम..?
लता : (सर्मसार होते धीरेसे) भाभी.. बस.. अभी थोडासा फसाया ही था.. ओर धीरेसे पुस कीया तो अैसा लगा.. ये फट गइ हे.. पुनो दीदी आपने उनको कौनसी जडीबुटी दी हे..? जो उनका इतना बडा होगया हे..
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. मेने तो थोडी सी ही दी हे.. क्या बहुत बडा होगया हे..?
लता : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. बडा नही.. कीसी गध्धे जैसा होगया हे.. मुजे तो बहुत डर लग रहा हे.. पता नही आपको उनको ये सब देनेकी क्या आवस्यक्ता पड गइ..
पुनम : (लताकी ओर देखकर धीरेसे) भाभी.. इनको जडी बुटी देना जरुरी हो गया था.. तभी तो दी हे.. फीकर मत करो.. मे कल मंजुभाभीको पुछकर आपको सबकुछ बता दुगी..
सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) लता.. गभराने वाली कोइ बात नही हे.. ये तेरा पीरीयड सुरु हो गया हे.. इसीलीये इतना खुन नीकल रहा हे.. बाकी कुछ भी नही हे.. कभी कभी पीरीयड नजदीक होता हे.. तब अैसा हो जाता हे.. ओर ये कहीसे फटी नही हे.. हें..हें..हें..
लता : (सरमाके मुस्कुराते) भाभी.. आपको हसी आ रही हे.. बाबा मेरी तो जान ही नीकल गइ थी.. मेने उनको कीतनी मनते की तब जाके मुजे छोडा.. भाभी.. क्या इतना बडा अंदर जानेसे कुछ होगा तो नही..?
पुनम : (पास बैठते धीरेसे हसते) भाभी.. तुम खामखा डर रही हे.. इनमे कुछ नही होता.. बस पहेली बार थोडी तकलीफ होती हे.. (कानमे) भाभी.. बडे भाइका भी इतना ही बडा हे.. तब आप क्या करोगी..? देखो सृती भाभीको.. अभी अभी बडे भाइका अंदर लेकर ही आइ हे.. हें..हें..हें.. इनको कुछ हुआ क्या..? हें..हें..हें..
सृती : (सरमाकर हसते पुनमको मुका मारते) दीदी.. आप भी अपने भाइकी तराह बहुत कमीनी हो.. क्या आप नही लेती..? हंम..? अब तो लता को भी सब मालुम हे.. हें..हें..हें.. (लताकी ओर देखते) लता.. तुम गभराना नही इनमे कुछ भी नही होता.. बस.. तुम थोडासा डर गइ हो.. क्युकी तुमने इतना बडा देखा ओर अंदर लीया नही हेनां इसीलीये.. जब हम पहेली बार करते हेना उसी तराह अेक बार तकलीफ होगी.. फीर तो तुजे भी बडा लेनेकी आदत हो जायेगी.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते हसते) भाभी.. सच कहु.. भाइका लेनेमे बहुत मजा आता हे.. सुन लता भाभी.. मुजे तुमसे कल बहुत सारी बात करनी हे.. जब सब लोग सादीमे बीजी होजाये तब तुम मेरे साथ चलना.. कल तुजे सबकुछ बता दुगी.. चल अभी तो हम दोनो नीकलते हे.. ओर वैसे भी अब तेरी पांच दिनकी तो छुटी होगइ.. हें..हें..हें..
लता : (सरमाते हसते) हां.. बाबा मेतो बहुत डर गइ थी.. अच्छा कीया उसने आपको फोन करदीया..
पुनम : (हसते) भाभी.. वैसे कहा हे वो..? कही भगा दीया क्या..? हें..हें..हें..
लता : (सरमाते हसते) हां.. आपको सामने उनको बहुत सरम आ रही थी.. ओर मुजे भी नही आयेगी क्या..? हें..हें..हें..
सृती : (बेग लेते) हंम.. चल अब हम नीकलती हे.. तु बुलाले उसे.. यही बहार ही होगा.. हें..हें..हें..
कहेते दोनो ही हसते हुअे बहार नीकल गइ.. तब लखन सीडीयोके पास ही खडा था.. तो पुनम सृतीको देखते ही सरमा गया.. तभी पुनमने उसे देखलीया.. जैसेही दोनोकी आंख मीली तो पुनम लखनकी ओर देखते हसने लगी.. तो लखन भी पुनमकी ओर आंख मारते बहुत ही सरमाते हसने लगा.. तो पुनम बहुतही सर्मसार होते सृतीके साथ धीरेसे बाते करते नीचेकी ओर जाने लगी..