Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 49 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

कहा तो दोनोही मुस्कुराने लगे.. लखन लताके सब कपडे पहेनाने लगा तो लता उनको प्यारसे मुस्कुराते देखती रही.. फीर लखनने भी अपने सब कपडे पहेनलीये.. फीर लखनने पुनमको फोन लगा दीया.. ओर लतासे उनकी बात करवादी.. तो लताने सरमाते सब बाते बतादी.. ओर लखनको बहार छतपे भेज दीया.. तो पुनमने फोन रखते ही सृतीको फोन लगा दीया.. तो वो भी देवायतसे दो बार चुदवाकर लेटी हुइ थी.. ओर इस वक्त देवायत मंजुके उपर लेटा हुआ था.. ओर दोनो बाते करते चुदाइमे मसगुल थे..

सृती : (धीरेसे) हां पुनो दीदी.. क्या हुआ..?

पुनम : (धीरेसे मुस्कुराते) भाभी.. प्लीज.. अपनी मेडीकलकी बेग लेकर आइअ‍ेना.. हमे लता भाभीके पास जाना पडेगा.. हमे जीस बातका अंदाजा था.. वोही हुआ हे.. उनको नीचे बहुत खुन नीकलने लगा हे..

सृती : (मुस्कुराते) हंम.. चलो मे अभी आती हु.. आप बहार आइअ‍े..

फीर कुछही देरके बाद सृती कपडे पहेनकर अपनी मेडीकलकी बेग लेकर बहार आगइ.. तो बहार पुनम उनके रुमके पास खडी होकर सृतीका इन्तजार कर रही थी.. तो सृतीको देखते ही मुस्कुराने लगी.. ओर दोनो उपरकी मंजीलपे चली गइ.. तब पुनमने दरवाजेपे नोक कीया तो लताने उसे आवाज देकर अंदर आनेको कहा.. तो दोनो अंदर चली गइ तब वहा लखन नही था.. क्युकी उनको लताने छतपे चले जानेको कहा ताकी उनको सर्मीन्दा ना होना पडे..

सृती : (मुस्कुराते) हां लता क्या हुआ.. कुछ प्रोबलेम हे क्या..?

लता : (सर्मसार होते मुस्कुराते सारी उची करते) सोरी भाभी.. आपको डीस्टब्र कीया.. देखीयेना मुजे क्या हुआ.. बहुत खुन नीकलता हे..

सृती : (सारी उची करते देखते) लता.. तेरा पीरीयड होनेमे कीतने दिन बाकी हे..? हंम..?

लता : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अभी तो दो दिन बाकी हे.. उनके बाद सुरु होगा.. भाभी.. मे तो उनका देखते ही डर गइ थी.. मे उनको कीतना मना कर रही थी.. तो नाराज होगये.. ओर देखीये.. क्या करदीया..

सृती : (टोर्चकी लाइट जलाकर गौरसे देखते) लता.. कीतना अंदर गया था..? हंम..?

लता : (सर्मसार होते धीरेसे) भाभी.. बस.. अभी थोडासा फसाया ही था.. ओर धीरेसे पुस कीया तो अ‍ैसा लगा.. ये फट गइ हे.. पुनो दीदी आपने उनको कौनसी जडीबुटी दी हे..? जो उनका इतना बडा होगया हे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. मेने तो थोडी सी ही दी हे.. क्या बहुत बडा होगया हे..?

लता : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. बडा नही.. कीसी गध्धे जैसा होगया हे.. मुजे तो बहुत डर लग रहा हे.. पता नही आपको उनको ये सब देनेकी क्या आवस्यक्ता पड गइ..

पुनम : (लताकी ओर देखकर धीरेसे) भाभी.. इनको जडी बुटी देना जरुरी हो गया था.. तभी तो दी हे.. फीकर मत करो.. मे कल मंजुभाभीको पुछकर आपको सबकुछ बता दुगी..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) लता.. गभराने वाली कोइ बात नही हे.. ये तेरा पीरीयड सुरु हो गया हे.. इसीलीये इतना खुन नीकल रहा हे.. बाकी कुछ भी नही हे.. कभी कभी पीरीयड नजदीक होता हे.. तब अ‍ैसा हो जाता हे.. ओर ये कहीसे फटी नही हे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाके मुस्कुराते) भाभी.. आपको हसी आ रही हे.. बाबा मेरी तो जान ही नीकल गइ थी.. मेने उनको कीतनी मनते की तब जाके मुजे छोडा.. भाभी.. क्या इतना बडा अंदर जानेसे कुछ होगा तो नही..?

पुनम : (पास बैठते धीरेसे हसते) भाभी.. तुम खामखा डर रही हे.. इनमे कुछ नही होता.. बस पहेली बार थोडी तकलीफ होती हे.. (कानमे) भाभी.. बडे भाइका भी इतना ही बडा हे.. तब आप क्या करोगी..? देखो सृती भाभीको.. अभी अभी बडे भाइका अंदर लेकर ही आइ हे.. हें..हें..हें.. इनको कुछ हुआ क्या..? हें..हें..हें..

सृती : (सरमाकर हसते पुनमको मुका मारते) दीदी.. आप भी अपने भाइकी तराह बहुत कमीनी हो.. क्या आप नही लेती..? हंम..? अब तो लता को भी सब मालुम हे.. हें..हें..हें.. (लताकी ओर देखते) लता.. तुम गभराना नही इनमे कुछ भी नही होता.. बस.. तुम थोडासा डर गइ हो.. क्युकी तुमने इतना बडा देखा ओर अंदर लीया नही हेनां इसीलीये.. जब हम पहेली बार करते हेना उसी तराह अ‍ेक बार तकलीफ होगी.. फीर तो तुजे भी बडा लेनेकी आदत हो जायेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) भाभी.. सच कहु.. भाइका लेनेमे बहुत मजा आता हे.. सुन लता भाभी.. मुजे तुमसे कल बहुत सारी बात करनी हे.. जब सब लोग सादीमे बीजी होजाये तब तुम मेरे साथ चलना.. कल तुजे सबकुछ बता दुगी.. चल अभी तो हम दोनो नीकलते हे.. ओर वैसे भी अब तेरी पांच दिनकी तो छुटी होगइ.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) हां.. बाबा मेतो बहुत डर गइ थी.. अच्छा कीया उसने आपको फोन करदीया..

पुनम : (हसते) भाभी.. वैसे कहा हे वो..? कही भगा दीया क्या..? हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) हां.. आपको सामने उनको बहुत सरम आ रही थी.. ओर मुजे भी नही आयेगी क्या..? हें..हें..हें..

सृती : (बेग लेते) हंम.. चल अब हम नीकलती हे.. तु बुलाले उसे.. यही बहार ही होगा.. हें..हें..हें..

कहेते दोनो ही हसते हुअ‍े बहार नीकल गइ.. तब लखन सीडीयोके पास ही खडा था.. तो पुनम सृतीको देखते ही सरमा गया.. तभी पुनमने उसे देखलीया.. जैसेही दोनोकी आंख मीली तो पुनम लखनकी ओर देखते हसने लगी.. तो लखन भी पुनमकी ओर आंख मारते बहुत ही सरमाते हसने लगा.. तो पुनम बहुतही सर्मसार होते सृतीके साथ धीरेसे बाते करते नीचेकी ओर जाने लगी..
 
तभी पुनमने हाथ पीछे लेजाते अपने अनुठेसे लखनको थम्सअप वाली साइन दिखाइ.. ओर अ‍ेक बार पीछे मुडकर लखनकी ओर देखते आंख मारके हसने लगी.. तो सृतीने भी मुडकर लखनकी ओर देख लीया ओर वो भी हसने लगी.. तो लखन भी हसने लगा.. आज उसने हिंमत करते पुनमको आंख मारी तो पुनमने भी उसे आंख मारते जवाब दीया.. लखन पुनमका ये अन्दाज देखकर बहुत ही खुस ओर रोमांचीत होने लगा..

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ओर उनका लंड अ‍ेक बार फीर जटके मारते खडा होने लगा.. वो आज भी पुनमको इतना चाहता था जीतना स्कुलमे था तब चाहता था.. पुनम उनके सपनोकी रानी थी.. जो उनको आज भी पानेकी चाहत रखता था.. तो यही हाल पुनमका भी होने लगा.. वो भी लखनकी ओर ढलती ही जा रही थी.. सृती ओर पुनमका होने लगा.. दोनोको अ‍ेक बार फीर लखनके लंडको देखनेकी इच्छा होने लगी..

जबसे पुनमको पता चला की लखन भी उनको चाहता हे.. तबसे वो भी लखनकी ओर कुछ ज्यादा ही जुकती जा रही थी.. ओर आज लखनने दुसरी बार अपना प्यार जताते काफी बाते करली.. तो पुनमने भी लखनको आंख मारके जवाब दीया.. तब पुनमकी चुत अ‍ेक बार फीर फडफडाते पानीका रीसाव करने लगी.. पुनम लखनके बारेमे बाते करते नीचेकी ओर जा रही थी तब सृतीको भी पुनमकी बातोमे इन्ट्रेस होने लगा..

पुनम : (धीरेसे हसते) भाभी.. मुजे तो सक हे.. क्या वाकइ लखन भैयाका बडे भैयासे भी बहुत बडा होगया होगा..? हंम..? लताकी तो फाडके रखदी.. ओर उनका पीरीयड सुरु करवा दीया.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते धीरेसे) पुनोदी.. मुजे भी अ‍ैसा ही लग रहा हे.. अब तो कभी मौका मीला तो हमे लखन भैयाका देखना पडेगा.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाकर हसते) भाभी.. आपतो डोक्टर हो.. ओर लखन भैया आपको छोडने लेने भी आते हे.. तो कभी चेक करनेके बहाने देख लीजीयेनां.. फीर मुजे बताना.. की हमारे पती जीतना हे की नही.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) हां ये सही हे.. लेकीन देखुगी.. जब आप भी मेरे साथ होगी.. हें..हें..हें.. पुनोदी.. मे कुछ जुगाड करलुगी.. तब आप मेरी क्लीनीकमे कही छुप जाना.. ओर आप भी छुपकर देख लेना.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते हसते) भाभी आप ही देख लेना.. मुजे तो बहुत सरम आयेगी.. हें..हें..हें..

सृती : (आंख मारके हसते धीरेसे) अरे..? इसमे सरमानेकी क्या बात हे.. हमारा देवरका ही तो हे.. वैसे भी वो आपको प्यार भी तो करते थे..

पुनम : भाभी.. करते थे नही.. वो आज भी मुजे इतना चाहते हे.. भाभी.. मे ना चाहते हुअ‍े भी उनकी ओर ढलती जा रही हु.. आज उसने फीरसे अपने प्यारका इजहार कीया.. पता नही मे उनको क्या जवाब दु..

सृती : (थोडी सीरीयस होते अ‍ेक नजरसे देखते) दीदी.. तो फीर आपको प्रोबलेम क्या हे..? करलीजीये उनका प्यार कबुल.. ओर वैसे भी अब इस घरमे तो बहुत कुछ बदलने वाला हे..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) भाभी.. मे कुछ नीर्णय नही लेपा रही हु.. हम इस बारेमे कल बाते करेगे.. कल मुजे लताभाभीको भी सबकुछ बताना पडेगा.. क्युकी तब वो भी तो भावना भाभीकी तराह हमारे साथ होगी.. तो उनको भी विस्वासमे लेना जरुरी हे..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी. तो फीर उसे सबकुछ बता दोनां.. क्यु उनसे छुपाते हो..? उनको भी तो पता चले.. की ये दोनो कमीनीओका क्या प्लान हे..

पुनम : भाभी.. बताउगी.. लेकीन अभी नही.. क्युकी इनमे मंजु भाभीकी रजामंदी चाहीये.. अगर वो हां कहेती हे.. तो कल उसे सब कुछ बता दुगी..

दोनो लखन की बाते करते अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते अपने अपने रुममे चली गइ.. तब लखन वापस अपने रुमकी ओर आने लगा.. तभी उनका ध्यान रमा ओर नीलमके रुमकी ओर गया.. तो लखन अ‍ेकदम रुक गया.. ओर धीरेसे उल्टे पांव चलके खीडकीसे अंदर जाकने लगा.. तो नीलम ओर रमा दोनो ही मां बेटी अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपकर सो रही थी.. तब लखनको भी थोडा अजीब लगा..

क्युकी रमाका ब्लाउस खुला था.. ओर उनके दोनो भरावदार बुब्स बहार थे.. ओर नीलमका अ‍ेक हाथ अभी भी रमाके बुब्सपे था.. तो लखन समज गयाकी दोनो मां बेटीके बीच लेस्बीयन रीस्ता हे.. जीसे देखकर लखन बहुत खुस हो गया.. क्युकी अब वो मां बेटी दोनोके साथ अ‍ेक ही बीस्तरमे अ‍ेक साथ सेक्स कर सकता हे.. यही सब सोचते वो मनमे खुस होते मुस्कुराने लगा.. ओर वो अपने रुममे आगया..
 
तब रुममे लता नही थी.. उनका पीरीयड सुरु हो गया था.. तो वो सेनेटरी पेड लेकर बाथरुममे अपने आपको सही करनेके लीये गइ थी.. तब कुछ ही देरके बाद वो बहार नीकली तो लखन बेडपे बैठकर लताका इन्तजार कर रहा था.. तो लता उनके पास आकर बैठ गइ.. ओर बैठे ही लखनको अपनी बाहोमे भरते मुस्कुराने लगी.. तो लखनने भी लताको मुस्कुराते देखकर राहतकी सांस ली.. ओर खुद भी मुस्कुराने लगा..

लता : (सरमाते धीरेसे) जानु.. अभी अभी भाभी ओर दीदी चेक करके गइ.. मुजे कुछ भी नही हुआ हे.. आपका इतना बडा हथीयार अंदर जानेकी वजहसे मेरा पीरीयड सुरु हो गया हे.. बाकी कुछ नही.. लखन.. आइ अ‍ेम सोरी.. क्या आपको बुरा लगा.. हंम..?

लखन : (मुस्कुराते बाहोमे भीचते) अरे नही लता.. तुम रो रही थी तो मे भी गभरा गया था.. ओर उपरसे खुन देखकर ओर गभरा गया.. थेन्क गोड तुजे कुछ नही हुआ.. सीर्फ पीरीयड ही आया हे..

लता : (सरमाते हसते) जानु.. आप बुरा मत मानना.. मेरा पीरीयड सुरु हो गया हे.. अब हम पांच दिनके बाद फीरसे करेगे.. अब मे आपको कभी मना नही करुगी.. जाहे मेरी जान भी क्यु नीकल जाये..

लखन : (मुस्कुराते लताके होठोपे उंगली रखते) नही लता.. तुम जानकी बाते मत कर.. मे तुजे बहुत प्यार कता हु.. बस.. ये चार पांच दिनसे कुछ नही कीया तो कंट्रोल नही हो रहा था..

लता : (सरमाते धीरेसे) लखन.. मे आपकी तकलीफ समजती हु.. अगर आपको बुरा ना लगे.. तो मे आपसे अ‍ेक बात करना चाहती हु.. कही आपको बुरा तो नही लगेगानां..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. बता.. क्या बात करनी हे.. तेरा कभी बुरा नही लगता..

लता : (सरमाते धीरेसे) लखन.. अ‍ेक तो आपको मुना भाइने देसी दवाइका कोर्ष करवाया हे.. तो आप मुजे अ‍ैसे ही थका देते हो.. ओर उपरसे पुनो दीदीने आपको ये जडी बुटी दी.. तो आपका ये गध्धे जैसा होगया हे.. तो मुजे लगता हे अब मे आपको अकेली नही जेल पाउगी.. अगर आप चाहो तो दुसरी सादी कर सकते हो.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

लखन : (अ‍ेक नजरसे देखते) लता.. कही तुम पागल तो नही होगइ..? हंम..? तुमने अ‍ैसा सोचा भी कैसे..?

लता : (जटसे) अरे नही नही.. आप मुजे गलत समज रहे हे.. बस.. मुजे अ‍ैसा लगा इसीलीये आपको बता दीया.. वैसे भी हमारे खानदानमे दो दो तीन तीन सादीया करनेका रीवाज होगया हे.. ओर बडे भाइने भी तो तीन तीन सादीया की हे.. पुनो दीदी केह रही थी उनको भी जडी बुटी दी हे.. उनका भी हथीयार आपके जैसा हे.. तो फीर आपको दुसरी सादी करनेके क्या दीकत हे..? करलीजीये दुसरी सादी..

लखन : (मुस्कुराते) क्या..? पुनो दीदीने खुद अ‍ैसा कहा..?

लता : (सरमाकर हसते) हां.. आपको पता तो हे उन्होने खुद भाइसे सादी करली हे.. ओर अभी भाइसे ही वो प्रेगनेन्ट हे.. वो केह रही थी अ‍ेक बीवी भाइको जेल नही सकती.. इसीलीये तो मंजुभाभीने उनकी दो दो सादीया करवादी हे.. ओर पुनो दीदी उनकी सीक्रेट बीवी हे वो अलग.. पता नही भाइकी अ‍ैसी कीतनी सीक्रेट बीवीया होगी.. तो फीर दुसरी सादी करनेमे आपको क्या दिकत हे..

लखन : (मुस्कुराते) लता.. बात तो तेरी सही हे.. लेकीन मेने दुसरी सादीया करली तो तुजे बुरा तो नही लगेगा..? फीर देखना.. मे सचमे सादी करलुगा..

लता : (मुस्कुराते) अरे बाबा मे सामनेसे तो केह रही हुनां..? तो फीर क्या प्रोबलेम हे..? वैसे भी आपके खानदानमे सब दुधके दुले हुअ‍े नही हे.. हें..हें..हें.. मुजेभी पता हे हमारी सादीसे पहेले आप भी कीसीना कीसीको ठोकते आये हो.. लखन.. अब मे अकेली सचमे आपको नही जेल पाउगी.. इसलीये केह रही हु.. की आप भी दुसरी सादी करलो.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. अगर कीसी ओरपे आपका दिल आजाये तो आप उनसे सादी भी कर सकते हो.. बस.. मेरे हीसेका प्यार तो आप अ‍ैसेही देते हो..

लखन : (बेडपे सुलाते) तुम कीतनी कमीनी हो.. मेरी सारी कुंडली जानली.. क्या ये सब पुनोदीदीने बताया..? चल ठीक हे.. हम इस बारेमे आगे सोचेगे.. अभी सोजा बहुत रात हो चुकी हे..

लता : (सरमाते हसते) लखन.. क्या मे हाथसे हीलादु..? हंम..?

लखन : (मुस्कुराते) नही अब इनकी कोइ जरुरत नही.. चल सोजा..

कहातो लता लखनके सीनेपे सर रखके लेट गइ.. तो लखन इनके सरको सहेलाता रहा.. ओर गहेरी सोचमे डुब गया.. क्युकी लखनकी दुसरी सादीके बारेमे लताको आज तक पता नही था.. ओर उपरसे वो रजीया ओर राधीकासे भी गांधर्व सादी कर चुका था..ओर आज कल वो अपनी बहेन पुनमसे भी बहुत खुल चुका था.. ओर उनसे दो बार अपने प्यारका इजहार भी कर चुका था.. फीर भी पुनमकी ओरसे उनको कोइ खास रीस्पोन्स नही मीला..

तब वो थोडा नीरास होगया था.. लेकीन आज उनके साथ बाते करते ओर आंख मारनेकी घटनासे उसे अ‍ेक आशाकी किरण नजर आइ.. जीस तराह पुनमने भी उनको आंख मारके जवाब दीया तब लखनमे थोडी ओर हिंमत आगइ.. अब उसे घरकी सभी ओरतोमे कामदेवकी मुरत नजर आने लगी.. वो सृतीके साथ भी काफी खुल चुका था.. तब लखनने अ‍ेक बार फीर पुनम ओर सृतीके साथ आगे बढनेकी ठानली..

तब मंजु अब भी अ‍ैसे ही आंख बंध करते देवायतको अपनी बाहोमे भीचकर लेटी थी.. आज उनका पुरा ध्यान लखन सृती ओर पुनम लताकी बातोकी ओर था.. मंजु इस घरमे होने वाले बदलावको साफ देख रही थी.. इस बारेमे उसने पुनमको कुछ जीम्वेवारी भी सौंपी थी.. लेकीन उनको पता था की पुनम इस बारेमे लखनसे कभी बात नही कर पायेगी.. तब उसने लखनसे बात करनेका फैसला करलीया..

उसने देवायतके साथ मीलकर लीये फैसलेके बारेमे ओर इसके अलावा भी लखनको सबकुछ बतानेका फैसला करलीया.. तब देवायत भी अपना तगडा लंड मंजुकी चुतकी गहेराइओ मे उतारके उनके सीनेपे ढेर होकर पडा था.. आज मंजुने देवायतको तीन तीन बार नीचोड लीया था.. लेकीन उनकी चुत अब भी प्यासी थी.. तभी तो उसने अपनी चुतसे देवायतके लंडको नही नीकालने दिया.. ओर अ‍ैसे ही पुरी रात बीत गइ....

कन्टीन्यु
 
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९५

उसने देवायतके साथ मीलकर लीये फैसलेके बारेमे ओर इसके अलावा भी लखनको सबकुछ बतानेका फैसला करलीया.. तब देवायत भी अपना तगडा लंड मंजुकी चुतकी गहेराइओ मे उतारके उनके सीनेपे ढेर होकर पडा था.. आज मंजुने देवायतको तीन तीन बार नीचोड लीया था.. लेकीन उनकी चुत अब भी प्यासी थी.. तभी तो उसने अपनी चुतसे देवायतके लंडको नही नीकालने दिया.. ओर अ‍ैसे ही पुरी रात बीत गइ....अब आगे

सब लोग सादीकी थकानकी वजहसे नींदकी गहेराइओमे चले गये थे.. ओर सबको लगा.. की आज सुबहका सुरज बहुत ही जल्दीसे ना नीकले.. सुबह साडे तीन बजे घरके सधी लोग ओर महेमान सो रहे थे.. तब सांतीकी आंख खुल गइ.. क्युकी आज खुदकी सादी थी.. तो आज रात उनको नींद ही नही आइ.. ओर उसने जागृतीको भी जगा दीया.. तो जागृती भी जागकर अपने बीस्तरपे ही बैठ गइ.. तब..

सांती : (सरमाते धीरेसे) जागु.. मे नहाने जा रही हु.. तो तुम तेरे भाइको भी जगादे.. आज उनको भी तैयार होनेमे टाइम लगेगा.. जा जगादे उसे..

जागृती : (सरमाते मुस्कुराते) भाभी.. मे..? नही आज आप ही जगादोनां.. मे जयश्री ओर बरखाको फोन करती हु.. वो दोनो अभी आपको तैयार करनेके लीये आजायेगी..

सांती : (पास आकर बैठते मुस्कुराते) अरी जाना.. मे नहाने जा रही हु.. वो दोनो चार बजे आजायेगी.. आज सीर्फ मुजे ही थोडीना तैयार होना हे..? आज तो तुजे भी मस्त दुल्हनकी तराह तैयार होना हे.. आज अच्छा मौका हे.. देखले.. मेरा बंसी तुजे देखकर पागल हो जायेगा.. हें..हें..हें..

जागृती : (सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) भाभी.. आपभीनां.. आप बहुत सरारती हो.. पहेले आप दोनोकी सादी तो होजाने दो.. बाद मे मेरे बारेमे सोचुगी.. फीर देखना जींदगी भर आपका पीछा नही छोडुगी.. अ‍ेक बार फीर अच्छेसे सोचलो.. हें..हें..हें..

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सांती : (मनमे खुस होते) अरे हां हां बाबा.. मत छोडना.. तु जातो सही.. मेने सब सोचलीया हे.. तबतक मे फटाफट नहा लेती हु.. फीर तुम भी नहालेना.. वो दोनो पहेले हम दोनोको तैयार करदेगी.. फीर मम्मीजी को..

जागृती : (सामने देखते) भाभी.. क्या उनका अ‍ैसे तैयार होना जरुरी हे..? आपही उनको सरपे चडा रही हे.. फीर देखना वो कमीना रमेश अंकल उनके आस पास ही घुमता रहेगा.. कुछ काम धंधातो करेगा नही..

सांती : (खडी होते गालको चुमते) अरे जाना.. मे जैसा कहु करती जा.. वो भले घुमते रहे.. फीर कल मे तुमसे उनके बारेमे आरामसे बात करुगी.. अभी जीतना बोला हे उतना कर.. मे जा रही हु नहाने..

कहेते सांती जटसे बाथरुममे घुस गइ.. तबतक जागृती अ‍ेक नजरसे उनको देखती ही रही.. तभी उसे बंसीको जगानेका खयाल आया तो जागृती बहुत ही सरमाने लगी.. ओर उनके दिलकी घडकन तेज होगइ.. बंसीको जगाना मतलब.. वो अच्छी तराह जानती थी.. की बंसीको जगाने जायेगी.. तब वो जरुर कुछना कुछ सरारत करेगा.. ओर सांती भी तो वही चाहती थी.. की जागृती ओर बंसीके बीच नजदीकीया बढे..

इसीलीये तो उसने आज मौका देखकर जागृतीको बंसीके पास भेज दीया.. तब जागृती सरमाते धडकते दिलके साथ आयनेके सामने चली गइ.. ओर अपने बालोको हाथसे सही करने लगी.. फीर सरमाते धीरेसे दबे पांव बंसीके रुमकी ओर जाने लगी.. जैसे सबसे छुपकर अपने प्रेमीको मीलने जा रही हो.. तब सभी लोग अब भी सो रहे थे.. ओर जागृती धीरेसे दरवाजा खोलकर बंसीके रुममे चली गइ..

ओर अंदर जाते ही उसने दरवाजेको वापस धीरेसे बंध करके लोक करदीया.. ताकी बंसी उनके साथ कोइ सरारत करे तो भी कीसीको कुछ पता ना चले.. वो खुद भी तो वही चाहती थी.. की बंसी उनके साथ सबकुछ करे.. ओर वो भारी धडकनके साथ बंसीके पास चली गइ.. ओर बंसीके उपर जुकते उनको धीरेसे हीलाकर जगाने लगी.. तब दो तीन बार धीरेसे आवाज लगाकर बंसीको जगाया तब बंसी जाग गया..

ओर आंख खोलकर देखा तो जागृती उनपे जुककर उसे जगा रही थी.. तो बंसीने जागृतीको देखते ही पुरे रुममे नजर डालकर दरवाजेकी ओर देखलीया.. तो दरवाजा बंध था ओर इस वक्त जागृती उनके रुममे अकेली थी.. तो बंसी जागृतीकी ओर देखने लगा तो जागृती सरमाते हुअ‍े उनपे जुकते मुस्कुरा रही थी.. तब बंसी सबकुछ समज गया.. की अभी रुममे सीर्फ वो ओर जागृती ही हे..

ओर उसने जागृतीका हाथ पकडकर खीचते अपने उपर गीरा दीया.. तब जागृती बहुत ही सर्मसार होते बंसीके सीनेपे सर रखते गीर गइ.. ओर बंसीने जागृतीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. तो जागृतीकी मुहसे आउच.. की आवाज नीकल गइ.. ओर वो सर्मसार होते मुस्कुराने लगी.. तो बंसी भी मुस्कुराते जागृतीकी पीठको सहेलाते उनके सामने देखकर हसने लगा.. तो जागृतीने सरमाते नजरे जुकाली..

तभी बंसीने दोनो हथेलीमे जागृतीके चहेरेको थाम लीया.. ओर जागृतीकी आंखोमे देखने लगा.. तो जागृतीने अ‍ेक नजर बंसीकी ओर देखते मुस्कुराते अ‍ेक बार फीर अपनी नजरे जुकाली.. तभी उसे अपने होठोपे बंसीके होठ महेसुस हुअ‍े.. तो जागृती सीरसे लेकर पांव तक कांपने लगी.. उनकी चुत गीली होने लगी.. फीर अचानक उसने बंसीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर अपने तनको बंसीके तनसे रगडने लगी..

तो जागृतीने उनको बाहोमे भीचतेही बंसीने भी जागृतीको कसके बाहोमे भीच लीया.. फीर पलटकर जागृतीको अपने नीचे करते खुद उनके उपर लेट गया.. तब जागृती सरमके मारे पानी पानी होते मुस्मुराते बंसीसे नजरे चुराने लगी.. ओर तभी बंसीने जागृतीके होठोपे अपने होंठ रख दीये.. तो जागृती सर्मसार होते अपना मुह इधर उधर करने लगी.. तभी अचानक बंसीने अ‍ेक हाथ उनके दुधुपे रख दीया ओर हल्कासा मसलते जागृतीके होठोका रसपान करने लगा..

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तब जागृती भी आंख बंध करते मदहोस होने लगी.. ओर उनका हल्कासा विरोध भी थम गया.. फीर वो भी बंसीकी पीठमे दोनो हाथ रखकर बंसीको बाहोमे भरते उनका होठ चुमते साथ देने लगी.. आखीर आज उसे बंसीको अकेलेमे प्यार करनेका मौका मील ही गया.. तो कुछ ही देरमे दोनोकी जीभ आपसमे पेच लडा रही थी.. दोनो ही अ‍ेक दुसरेके मुहको रसको पी रहे थे.. तब बंसी ओर जागृती दोनो ही उतेजीत हो गये थे..

दोनोकी आंखोमे वासनाके डोरे मंडराने लगे.. तभी बंसीने उनके टोपमे अपना हाथ घुसादीया.. ओर टोपको थोडा उचा करते जागृतीके संतरे जैसे बुब्सको थाम लीया.. ओर हल्केसे अपनी मुठीमे दबोचके मसलने लगा.. जीससे जागृती सीसकारीया करते सीहर उठी.. ओर बंसीकी ओखोमे देखने लगी.. जागृतीकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. मनसे तो चाहती थी की बंसी अभी उसे चोदले.. तब..
 
जागृती : (सर्मसार होते नसीली आंखोसे धीरेसे प्यारसे गाल सहेलाते) बस.. बस भाइ.. अभी ओर कोइ सरारत नही.. हम दोनो सादीके बाद फुरसतमे मीलेगे.. अभी मुजे जाने दो सबलोग जाग जायेगे..

बंसी : (भारी सांसोसे बुब्स सहेलाते) जागु.. आइ लव यु.. मे तुमसे भी बहुत प्यार करता हु.. तुम भी करले मुजसे सादी.. मे तुम दोनोको खुस रखुगा..

जागृती : (सरर्मसार होते मुस्कुराते) भाइ.. जानती हु में.. बस.. थोडासा इन्तजार कीजीये.. भाभी भी यही चाहती हे.. की हम दोनो मील जाये.. पहेले आप दोनोकी सादी तो होजाने दीजीये.. अब तो मे आपकी ही अमानत हु.. फीर हम भी सादी कर लेगे..

बंसी : (सरमाते धीरेसे) जागु.. अ‍ेक बात कहु..? मे हमारी सादीसे पहेले अ‍ेक बार तुमको मीलना चाहता हु.. तु.. तु समज गइना..? बस.. अ‍ेक बार तुमसे मीलन करना चाहता हु.. फीर हम दोनो सादी करलेगे..

जागृती : (सरमाते अ‍ेक नजरसे देखते धीरेसे) भाइ.. मे भी यही चाहती हु.. लेकीन अभी नही.. आपकी सभी तम्मना मे पुरी कर दुगी.. बस.. अ‍ेक बार आप दोनोकी सादी होजाने दीजीये.. फीर हमे इस घरमे अ‍ेकेले मीलनेका बहुत मौका मीलेगा.. तब आप अपनी सारी कसर पुरी कर लेना..

बंसी : (सरमाते हसते) जागु.. चलना अ‍ेक बार अभी करते हे.. अभी फटाफट सब होजायेगा.. कीसीको पता नही चलेगा.. क्युकी तुजे देखकर बहुत मन करता हे..

जागृती : (सरमाते उठनेकी कोसीस करते) भाइ पागल मत बनो.. आज आपकी सादी हे.. भाभी अभी नहाने गइ हे.. बहार नीकलती हो होगी.. हम बादमे मीलते हेना.. मे कहा आपको मना कर रही हु.. बस.. थोडा इन्तजार करनेको केह रही हु.. आज आप भाभीके साथ अच्छेसे सुहागरात मनालो.. आइ प्रोमीस.. फीर हम भी मीलेगे..

बंसी : (पागलोकी तराह चुमते) जागु.. मान भी जाओनां.. अभी फटाफट होजायेगा.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. मुजे तुमसे मीलनेका बहुत मन कर रहा हे..

जागृती : (सर्मसार होते) भाइ समजते क्यु नही..? मुजे भी आपको मीलना हे.. लेकीन आज नही.. वरना मेरी हालत खराब होजायेगी.. मे सबको क्या कहेती फीरुगी.. बस.. थोडासा सब्र करलो.. प्लीज..

लेकीन बंसीने जागृतीकी अ‍ेक नही सुनी.. ओर वो जागृतीके टोपको उचा कर देता हे.. तब जागृतीके दोनो बुब्स उछलकर बहार आगये.. तो जागृती बहुत ही सर्मसार होते उसे ढकनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. लेकीन उनसे पहेले ही बंसीने अ‍ेक बुब्सको अपने मुहमे लेलीया था.. ओर जागृतीके गोरे गोरे बुब्सको चुसते अ‍ेक हाथ नीचे लेजाकर उनकी चुतको सहेलाने लगा..

तब जागृती बहुत ही सर्मसार होते मदहोस होने लगी.. अपनी कमरको उछलने लगी.. वो बंसीके हाथको पकडकर अपनी चुतसे हटानेकी कोसीस करती रही.. तभी बंसीने अपनी मीडल उंगली जागृतीकी चुतमे घुसादी.. ओर उनकी क्लोरीटीसको छेडने लगा.. तो जागृती सातवे आसमानपे चली गइ.. वो पुरी तराह मदहोस हो चुकी थी.. ओर उसने बंसीका हाथ छोडदीया.. ओर अपनी कमर हीलाने लगी..

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जागृती : (मदोहसीमे धीरेसे) भा..इ.. बस.. बस.. ओर नही.. मे बहेक जाउगी.. छोडीयेनां.. अभी घरपे महेमान हे.. अंह.. अंह.. सीसससइइइइ.. भाइ..इइइ छोडोनां.. नीचे कुछ हो रहा हे..

उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. ओर मदहोस होते हुअ‍े नसीली आंखसे बंसीकी ओर देखते उनको फीरसे रोकनेकी कोसीस करने लगी.. तभी बंसीने जागृतीकी चुतमे उगली घुसादी ओर उसे अंदर बहार करते हीलाने लगा.. तो जागृतीने आंख बंध करली.. ओर बंसीके चहेरेपे हाथ घुमाते धीरेसे मदहोसीमे बडबडाने लगी.. तब बंसी चुतमे उगली करते जागृतीके दोनो बुब्सको बारी बारी मुहमे लेकर चुसने लगा..

जागृती भी अपना सभी होस गवा चुकी थी.. ओर मदहोस होकर आधी आंख चडाते अ‍ेक हाथसे बंसीके बालोको सहेलाने लगी.. आज बंसीने उनकी चुतको छेड दीया था.. तब जागृती बहुत ही उतेजीत होते अपनी चुतमे अपने भाइसे ही उगली करवा रही थी.. वो बार बार बंसीके गलेमे हाथ डालकर अपने उपर जुकाते उनके होठोको चुमने लगी.. तभी अचानक वो अकडने लगी.. तो..

जागृती : (मदहोसीमे) अंह..अंह.. आइइइ.. भा..इ.. मुजे कुछ हो रहा हे.. कुछ कीजीयेनां..

कहेते दुसरा हाथ नीचेकी ओर लेजाते हिंमत करते बंसीके लंडको पकडलीया.. ओर हल्कासा कडकर सहेलाने लगी.. तब उसे बंसीका लंड भी लखनके लंडकी माफीक मोटा ओर बडा लगा.. तब जागृती मनमे बहुत खुस होते सरर्मसार होने लगी.. दोनो ही काम वासनामे जलने लगे.. जागृती अब बंसीसे चुदवानेके लीये पुरी तराह तैयार थी.. तभी उनकी चुतने जवाब देदीया.. ओर वो जड गइ.. ओर ठंडी होगइ..

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तो वो बंसीको धका मारते अपने उपरसे हठा देती हे.. ओर जटसे खडी होते बेडसे उतर गइ.. फीर सरमाकर अपने सब कपडे ओर बालोको सही करते बंसीको ओर नसीली आंखोसे देखते मुस्कुराने लगी.. बंसी भी हसते हुअ‍े खडा होगया.. तभी जागृती अपने आपको सही करके बंसीकी बाहोमे समा गइ.. ओर बंसीके होठोपे होठ रखते कीस करदी.. फीर उनकी बाहोमे रहेकर सीनेपे सर रखते धीरेसे कहा..

जागृती : (धीरेसे) भाइ.. थेन्कस.. कीतना हसीन अहेसास था.. मे आपकी सभी इच्छा पुरी कर दुगी.. लेकीन अभी पुरी नही कर सकती.. आप बादमे करलेना.. भाइ.. आइ लव यु.. आप फीकर मत करो.. हम बहुत ही जल्द मीलेगे.. अब आप ही मेरे पती हो.. आज मेने फैसला करलीया हे.. अब मे हमेसा हमेसाके लीये आपकी होना चाहती हु.. भाइ.. मुजे जाना होगा.. भाभीने नहालीया होगा.. फीर हम आरामसे मीलकर बात करेगे..

कहेते जागृने अ‍ेक बार फीर बंसीके होठोको चुमलीया.. फीर वो जटसे बंसीसे अलग होगइ.. ओर जटसे दरवाजा खोलकर बहार नीकल गइ.. तो बंसी भी खुस होते बाथरुममे धुस गया.. जागृती जटसे वापस सांतीके पास चली गइ.. तब सांती नहाकर नीकली ही थी.. तो जागृतीकी हालत देखते ही समज गइ.. ओर जोरोसे हसने लगी.. तो जागृती बहुत ही सर्मसार होते हसने लगी.. तभी..
 
सांती : (हसते धीरेसे) कमीनी उसे जगाने भेजाथा.. सुहागरात मनाने नही.. समजी..? देख तेरी पुरी सलवार गीली होगइ हे.. जा फटाफट नहाले.. अभी वो दोनो कमीनीओ आती ही होगी.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अ‍ैसा कुछ भी नही हुआ जो आप सोच रही हो.. आज तो बाल बाल बच गइ.. वरना आज तो गइ थी कामसे..

सांती : (खुस होते धीरेसे) चल अच्छा हुआ तुम दोनोकी सेटींग होगइ.. अब जा फटाफट नहाले.. अभी सबलोग जाने लगेगे..

कहा तो जागृती सरमाकर मुस्कुराते बाथरुममे घुस गइ.. आज वो वाकइ बंसीसे बच गइ थी.. तो दुसरी ओर सामत भाइके घरपे सब लोग उठकर तैयार होने लगे.. आज बंसी ओर सांतीकी सादी थी.. तो आज भी जयश्री ओर बरखा सांतीको दुल्हनके रुपमे सजाने सुबह जल्दी आ गइ.. तब जागृती नहाकर बहार नीकल गइ.. ओर सांतीेका शींगार करनेमे मदद करते अपनी बारीका इन्तजार करने लगी..

तो दुसरी ओर आज भी ब्रिन्दा ओर बसंतीको अपने बेटेको मीलनेका फीरसे मौका मील गया था.. तो दोनो कैसे हाथसे जाने देती.. तो ब्रिन्दा जयश्रीके जातेही श्रीधरके रुममे घुस गइ थी.. ओर अभी उनके नीचे लैटते उछल उछलके चुदवा रही थी.. तो दुसरी ओर आज बसंती भी बरखाके जाते ही सामनेसे मुनाके रुममे चली गइ.. तो वो भी इस वक्त मुनाके नीचे नंगी होकर लेटी हुइ थी.. ओर मुना बसंतीकी हाथके बल उचा होकर जबर दस्त चुदाइ कर रहा था..

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इधर हवेलीमे भी अ‍ेक अ‍ेक करके सब लोग जागने लगे ओर तैयार होने लगे.. लखन भी जागकर बाथरुम मे घुसा हुआ था.. ओर बाकीकी सभी लेडीस तैयार हो रही थी.. तो गांवमे भी सब तैयार होकर सामत भाइके घरकी ओर जा रहे थे.. तब सामत भाइने आज रमेशको जल्दी बुला लीया ओर सादीकी सारी कमान उनको सौंपदी थी.. ओर खुद जया भाभीके साथ नये कपडे पहेनकर इधर उधर घुम रहे थे..

अ‍ेक घंटेके बाद नीर्मला, भुमीका ओर सरला चाचीके अलावा देवायतकी पुरी फेमीली सामत भाइके घरपे आ चुकी थी.. आज पुरा गांव सामतभाइके घरपे सादीमे अ‍ेकठा हो रहा था.. ओर सामतभाइ अपनी ही विधवा बहेनकी सादी अपने बेटेके साथ करवाके गांवमे अ‍ेक नइ मीसाल कायम कर रहे थे.. तो इस मौके को देवायत ओर मंजु कैसे हाथसे जाने देते.. तो यहा आनेसे पहेले देवायतने आश्रमपे फोन करके बाबासे सभी बाते करली थी..

तो आज बाबा भी सबको समजानेके लीये आने वाले थे.. तो दुसरी ओर ब्रिन्दा ओर बसंती अपने अपने बेटेसे चुदवाकर बहुत ही खुस होगइ थी.. तो दोनो ही आज शींगार करके पटाका लग रही थी.. ओर अपने अपने नये पती.. यानीकी अपने बेटेके साथ आगइ थी.. अ‍ैसा लगता था दोनोकी नइ नइ सादीया हुइ हो.. ये दो दिनमे दोनो सहेलीया होकर अ‍ेक दुसरेसे काफी खुल चुकी थी.. हस हसके दबी आवाजमे अ‍ेक दुसरेके साथ अपने बेटेके साथ कीया हुआ प्यारका अनुभव सेर कर रही थी..

आजकी सादी गांवके लीये बहुत ही खास थी.. क्युकी आज पहेली बार अ‍ैसे आपसी रीस्तोमे सादी हो रही थी ओर वो भी सामत भाइ जैसे प्रतीसीष्ठ व्यक्तीके घरपे.. तो सब लोग गांवमे होने वाले बदलावको देखनेके लीये आरहे थे.. ओर ना सीर्फ इस गांवके बल्की आजु बाजुके गांवमे जीतने भी बडे बुजुर्ग थे.. वो मन ही मन गांवमे ओर अपने घरमे अ‍ैसे जीतने भी रीस्ते पनप रहे थे उनको स्वीकार करने लगे..

आज सामत भाइ बहुत खुस नजर आरहे थे.. जैसेही सादीका मुहुर्त हुआ तब बंसी दुल्हा बनकर मंडपपे आ गया.. तो जयाने उनका स्वागत कीया.. फीर जागृती जयश्री ओर बरखा सांतीको दुल्हनके लीबासमे पंडपके नीचे लेकर आगइ ओर उसे बंसीके सामने बीठा दिया.. तो आज सांतीके कहेनेपे बरखा ओर जयश्रीने जागृतीको भी दुल्हनकी तराह सजा दीया था.. जैसे उनकी भी सादी हो.. वो भी सजधजके दुल्हनकी तराह पटाका लग रही थी.. तो वो भी बार बार बंसीकी ओर देखकर सरमा रही थी..

फीर सामतभाइ ओर जयाभाभी तैयार होकर कन्यादान करने बैठ गये.. तब मंत्रोचारके साथ पंडीत बंसी ओर सांतीके विवाहकी वीधीया करने लगे.. तो सांतीकी आंखसे खुसीके मारे आंसु छलक रहे थे.. तब उनके पास बैठी जागृती ओर जयश्री उनके आंसु पोछती रही.. तो बंसीने भी अपने खास दोस्त लखनको अणवरके तौरपे अपने पास बीठा दीया था.. तो जागृती उनको देखकर भी बहुत सरमा रही थी..

तो आज दुसरे गांवसे भी बहुत महेमान आये हुअ‍े थे.. तो सभी महेमानोको देवायत जवेरीलाल बनजारीलाल ओर रमेश सम्हालके बैठे थे.. तो लखनके सभी दोस्तो भोजनकी व्यवस्थामे लगे हुअ‍े थे.. ओर खुद लखन बंसीके साथ उनका अणवर बनके बैठा हुआ था.. तब बंसीके साथ साथ लखन ओर जागृतीका भी आंख मीचोलीका खेल चल रहा था.. तो इस खेलमे आज जयश्री ओर बरखा भी सामील हो चुकी थी..

तो दुसरी ओर बंसीने भी आज सुबह अपनी बहेन जागृतीके साथ खुलकर प्यार कीया था.. तबसे उनका दिल भी जागृतीको मीलनेके लीये मचल रहा था.. जीनकी वजहसे अभी आंखोसे इसारा करते जागृतीको मीलनेके लीये केह रहा था.. तब जागृती भी आंखोके इसारोसे हां कहेते बहुत ही सर्मसार होने लगती.. आज बंसी ओर लखन दोनो ही उनकी ओर इसारा कर रहेथे.. तब जागृतीको दोनोको सम्हालना मुस्कील होने लगा..

तब उसने सोचलीया की सारी जींदगी अपने भाइ बंसीके साथ गुजारनी हे.. ओर लखनके साथ भी रीलेशन रखना हे.. तब वो बारी बारी दोनोको अ‍ेक दुसरेसे छुपकर इसारोसे जवाब देती रही.. तो दुसरी ओर जागुती ओर लखनके बीच चल रहे आंखोके इसारोका मजा लेते बरखा ओर जयश्री भी बार बार लखनके पेन्टकी ओर देख लेती थी.. ओर सरमाकर हस हसके दबी आवाजमे अ‍ेक दुसरेके कानमे बाते करते हस रही थी..

तब पुनम सृती ओर मंजु भी लखन ओर ये सबकी हरकत देखकर हस रही थी.. तो सृती भी कभी कभी लखनको लेकर पुनमके कानमे कुछ कहेते हसने लगती थी.. तब पुनम बहुत ही सर्मसार हो जाती थी.. जाहीरसी बात हे कल रातसे ही दोनोके मनमे लखनके लंडको लेकर उनको देखनेकी उत्सुक्ता बढ गइ थी.. ओर इस बारेमे अब दोनो खुलकर बीन्दास्त बाते करने लगी थी..

आज रमा ओर नीलम भी साथ साथ बैठी थी.. ओर उनकी बगलमे भावना ओर लता बैठकर आपसमे बाते कर रही थी.. तब रमा ओर नीलम लखनको रीजानेके लीये पुरी कोसीसमे लगी हुइ थी.. तो आज लखन नीलमके बजाये रमापे कुछ ज्यादा ही ध्यान देने लगा था.. आज भानु भी अपना पुराना प्यार बसंतीको देखकर मन ही मन खुस हो रहा था.. ओर बसंतीकी ओर देखकर हसनेकी कोसीस करते आंखोसे इसारा कर रहा था..

तब इन दोनोको नही पता था.. की बसंतीका लडका मुना बसंती ओर भानुपे नजर गडाये दुरसे खडा होकर देख रहा हे.. तभी बसंती ओर भानुकी नजर मीली.. तो बसंतीने भानुकी ओर अपना मुह बीगाडते दुसरी ओर मुह घुमा लीया.. तो भानु नीरास होगया.. ओर वो खडा होकर भोजन वाले पंडालमे चला गया.. अब वो पुरी तराह समज गया की अब बसंतीने उनको छोड दिया हे..

तो ये देखकर मुना मन ही मन खुस होने लगा.. की चलो अब उनकी मांको भानुमे अब कोइ इन्ट्रेस नही रहा.. लेकीन भानुने देवायतको बसंतीको ना मीलनेका प्रोमीस देकर भी आज बंसतीको पानेकी कोसीस की.. जीनकी वजहसे मुना नाराज होगया.. तब उसने भी मनमे कुछ सोच लीया.. जो भानुके लीये बहुत ही खतरनाक था.. तो दुसरी ओर सादीका माहोल देखकर दो लोग अ‍ेक अ‍ेक करके चुपकेसे अपने घर चले गये..

ओर घर जातेही अ‍ेक रुममे घुस गये.. ओर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. फीर कुछ ही देरके बाद वासनामे अंधे होकर अ‍ेक होगये.. दोनो अ‍ेक दुसरेके साथ घमासान चुदाइ करनेमे मसगुल हो गये.. ओर वो थे जीतुलाल.. ओर उनकी भाभी वृन्दा.. जो दोनो सभी घरवालेको सादीमे होनेका फायदा उठा रहे थे.. ओर चुदाइ करते करते अपने बच्चेको लेकर फ्युचरकी प्लानींग कर रहे थे.. वृन्दा अब पुरी तराह जीतुलालसे सादी करके उनकी हो जाना चाहती थी..

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वृन्दा चुदवाते हुअ‍े बार बार जीतुलालको उनको प्रेगनेन्ट करनेका दबाव डाल रही थी.. ताकी उनका अपने पती जवेरीलालसे भी छुटकारा हो जाये.. ओर वो जीतुलालकी बीवी बनकर सारी जींदगी जीतुलालके साथ रेह सके.. अब ना वृन्दा जीतुलालके बगैर रेह सकती थी.. ओर ना ही जीतुलाल वृन्दाके बगैर.. दोनोने अ‍ेक दुसरेको अपना पती पत्नी मानलीया था.. जो इस वक्त चुदाइमे मसगुल होकर अपनी वासना सांत कर रहे थे..
 
दुसरे गांवके बहोत सारे सरपंच पंचायतके सदस्तो के साथ गांवके प्रतीसीष्ठ व्यक्ती आये हुअ‍े थे.. तभी अ‍ेक कार आकर रुक गइ.. तो सब लोग उधर देखने लगे.. तो देवायत मुस्कुराते जटसे कारकी ओर चला गया.. तो साथमे मंजु भी हसते हुअ‍े खडी होगइ.. तो सब लेडीस मंजुकी ओर देखने लगी.. तो वो भी जटसे देवायतके पास कारकी ओर चली गइ..तो कुछ ही देरके बाद अंदरसे बाबा मुस्कुराते हुअ‍े बहार नीकले..

तो देवायत ओर मंजुने हसते हुअ‍े उनके पैर छु लीये.. तो सादीमे आये सभी लोग बाबाको देखकर खुस होते खडे होगये.. ओर उनके पैर छुने लगे.. तो बाबा सबको हस हसके आशीर्वाद देते रहे.. तब देवायत ओर मंजुसे बात करके बाबा मुस्कुराते मंडपकी ओर आने लगे.. तो सामत भाइकी खुसीका कोइ ठीकाना नही था.. वो जटसे खडे होगये ओर हाथ जोडकर बाबाके पांव छुने लगे.. तो बाबाने उनको आशीर्वाद दीया..

फीर बंसी ओर सांतीकी ओर चले गये.. ओर उनको भी सादीका आशीर्वाद दीया.. तब गांवके सभी लोग हाथ जोडकर सांत होगये.. फीर बाबाने सबको प्रकृतीके ज्ञानके साथ हिमाचलके राजाकी कहानी सुनाइ.. ओर उसी राजाके देवायतके घर अ‍ेक खास मक्सद से दुबारा जन्म लेनेकी बात कही.. ओर उसी कारण देवायतके घर पीछली तीन पीढीसे अपनी बहेनसे सादीको लेकर गांवमे रीस्तोमे बदलाव होने बात कही..

तो सुनकर गांवके सभी लोग दंग रेह गये.. तब सबको पता चला की हवेलीमे पीछली तीन पीढीसे सभी मर्द अपनी बहेनसे क्यु सादी कर रहे हे.. तब ज्यादातर नां सीर्फ इस गांव बल्की दुसरे गांवके लोगोने भी बाबाकी बातको मान लीया.. ओर आने वाले बदलवावको स्वीकार करलीया.. तभी जोसमे आकर जवेरीलालने खडे होकर अ‍ेक हप्तेके बाद अपनी बेटी जयश्री ओर अपने भाइके लडके श्रीधरकी सादीकी बात सबके सामने कहेते सबको सादीका न्योता दिया..

तो सुनकर जयश्री बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर अपना मुह जागृतीके पीठमे छुपाते मुस्कुराने लगी.. तो गांव वाले जयश्रीकी ओर देखते तालीया बजाने लगे.. तो सब लोग श्रीधरको भी बधाइआ देने लगे.. तब जवेरीलाल भी खुस होगये.. फीर बाबा सबको आशीर्वाद देकर जाने लगे.. तब देवायत मंजुके साथ पुनम सृती भी सामील होगइ.. ओर देवायतने बाबाको अपने घरपे चलनेकी बात कही..

तो बाबाने मुस्कुराकर फीर कभी आनेको कहेते पुनम सृतीसे भी कुछ बाते करली.. ओर आशीर्वाद दीया तो पुनम ओर सृती भी बहुत ही खुस होगइ.. गांवमे कीसीको उमीद नही थी.. की बाबा अ‍ैसे अचानक आयेगे.. जब बाबा चले गये.. तब पुनम मंजुको अ‍ेक तरफ हाथ पकडकर लेगइ.. ओर उसने कल रात लताके साथ जो भी कुछ हुआ वो सब बता दीया.. फीर उसने लताको सबकुछ कहेनेकी बातकी तब..

पुनम : (धीरेसे) दीदी.. लगता हे अब हमे लताभाभीको सबकुछ बता देना चाहीये.. क्युकी परसोतो वो भी सहेर चली जायेगी ओर मे भी चली जाउगी.. ओर अभी वो दोनो उनसे चीपकी ही रहेती हे.. तो उनको बुलाकर बात करलु..?

मंजुला : (मुस्कुराते) क्या..? अभी तक तुमने कीसीको बताया नही..? पुनो.. जा आज ही करले बात.. लेकीन ध्यान रखना.. उन दोनोको इस बारेमे पता ना चलजाये.. वरना तुम दोनो भाइ बहेनका सारा प्लान चोपट होजायेगा.. ओर लताको भी कहेना उनके साथ अपने व्यवहारमे कोइ बदलाव ना लाये.. पहेले उनके साथ रहेती थी अ‍ैसे ही रहे..

पुनम : (मुस्कुराते) जी दीदी.. मे सब देख लुगी.. आप उनकी टेन्शन मतलो..

मंजुला : (हसते धीरेसे) मुजे टेन्शन उनकी नही हे.. वो तो तुम भाइ बहेन सम्हाल ही लोगे.. टेन्शन मुजे तेरी ओर सृतीकी हे.. हें..हें..हें.. कमीनीओ.. जीस तरह तुम दोनो आगे बढ रही हो.. तो मुजे पका यकीन हे.. वो कमीना भी तुम दोनोको छोडने वाला नही हे.. हें..हें..हें.. कल रात तुम दोनो क्या आंख मीचोली खेल रहे थे..?

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो.. भाइ मुजसे इसारा कर रहेथे.. आइ अ‍ेम सोरी..

मंजुला : (प्यारसे गाल सहेलाते) अरे मेरी बच्ची सोरी क्यु बोल रही हे..? मेतो सीर्फ मजाक कर रही थी.. बाकीतो तुजे भी सब पता हे सबके साथ क्या होने वाला हे.. तु अ‍ैसे गभरा मत.. अब तुजेही तो सबको सम्हालना हे.. लेकीन पुनो.. तुजे अ‍ेक बात कहु..? जीस तराह तु अपने बडे भाइको प्यार कती हे.. उसी तराह हमारा लखनभी तुजे आज भी इतना प्यार कता हे.. वो अपने पहेले प्यारको कभी नही भुल पाया.. हो सके तो उनका प्यार कबुल करले..

पुनम : (आंख गीली करते) दीदी.. मे भी उसी उलजनमे हु.. मे उनका प्यार कैसे कबुल करलु..? क्युकी मेरी चाहत बडे भाइ हे.. मुजे भी पता हे वो मुजसे आजभी उतना प्यार करते हे जीतना पहेले करते थे.. कल भी वो अपना प्यार जता रहे थे.. तो मेने मना करदीया..

मंजुला : (आंख पोछते) पुनो दुखी मत हो.. हमे सीर्फ अपनी भावनाओको नही देखना चाहीये.. कभी कभी हमे ना चाहते हुअ‍े भी दुसरेकी भावनाओका खयाल रखना पडता हे.. वो भी तो हमारा भाइ ही हे.. वैसे भी हमे कीसीकी थोडीसी जींदगानीमे उनको कुछ सुख देना पडे.. तो इसमे बुराइ भी क्या हे.. बाकी तुम समजदार हो.. अबतो हमारे बडे भाइको भी इस रीस्तोसे कोइ प्रोबलेम नही हे.. तो फीर तु क्यु डर रही हे..? आखीर तुम सबको दोनो भाइको ही तो सम्हालना हे..

पुनम : (सरमाके मुस्कुराते) जी दीदी.. मे सबकुछ समज गइ.. बस.. थोडासा संकोच हो रहा था.. जो आज आपने दुर करदीया.. दीदी.. फीर भी दिलके अ‍ेक कोनेमे डर लग रहा हे.. कही मे बडे भैयाको धोखा तो नही दे रही..

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) पुनो.. धोखा तो तुम अब भी दे रही हो.. लेकीन देवुको नही धिरेनको.. तो क्या तुजे दुख होता हे..? नहीनां.. तो फीर ये तो हमारा छोटा भाइ हे.. तो फीर तुजे क्या प्रोबलेम हे.. मत भुलो हम सब कौन हे.. ओर हम सभी यहा कीस मक्सदसे आइ हे.. ये बात तुजे हमारी सभी सौतनोको बताना होगा..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) जी दीदी.. तो क्या इस बारेमे मे हमारी सभी सौतनोसे बात करलु..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां मेरी बच्ची.. अभी मे वो ही तो केह रही थी.. अब इस जीम्वेवारी तो तुजे ही उठानी हे.. बस ध्यान रखते सबको विस्वासमे लेले.. मुजे पुरा यकीन हे.. तेरी बात कोइ नही टालेगा.. ओर वैसे भी कहा कीसीके साथ जबरदस्ती करनी हे.. सब अपनी मरजीकी मालीक हे.. बाकीका काम तो हमारा लखनही सम्हाल लेगा.. फीर विजयका भी तो देखना हे.. बस.. जबतक वो इधर हे तुम उनका अच्छेसे खयाल रखना.. जैसा मेने कहा हे करते जा.. ओर हो सके तो इस बारेमे लखनसे भी बात कर लेना..

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पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) जी दीदी.. हम तीन तो रेडी हे.. अब लताभाभीको भी सबकुछ बताकर विस्वासमे लेना हे.. वो भी मान जायेगी.. बस.. इसीलीये आपको पुछने आइ थी.. लेकीन लखन भैयाको..? दीदी.. उनको बतानेकी मेरी हींमत नही होगी.. आप ही बतादोनां..

मंजुला : (मुस्कुराते) चल ठीक हे.. मे ही उनसे बात करलुगी.. वैसे भी बाबाका तेरे उपर पुरा आशीर्वाद हे.. तुम जरुर कामयाब होगी.. ओर सुन.. लखन अब बेकाबु होने लगा हे.. मे उनको भी सब बाते बता दुगी.. ताकी तुम सबका संसार अच्छेसे चले.. चल अब हम सबके साथ बैठते हे.. तुम लतासे बात करले..

फीर मंजुला सृती पुनम सबलोग वापस आकर सबके साथ बैठ गये.. आज पुनमने मंजुसे लताके बारेमे सब कुछ पुछ लीया.. तो आज मंजुने भी इन्डारेक्ट पुनमको लखनके साथ आगे बढनेकी बात करली.. सब लोग वापस सादीके माहोलमे खुस होकर अ‍ेक दुसरेके साथ गांवमे होने वाले बदलावकी बाते करने लगे.. तभी जीतुलाल ओर वृन्दा भी घरपे दो दो बार घमासान चुदाइ करके सही होकर वापस आगये..

तब जीतुलाल वृन्दाको पता ही नही थाकी जवेरीलालने सबके सामने श्रीधर जयश्रीकी सादी अ‍ेक हप्तेके बाद फीक्स करदी हे.. तभी पांसके गांवका अ‍ेक सरपंच भी अपनी बीवीके साथ आगया.. उनकी बीवी बहुत ही खुबसुरत ओर पुरी हाइट वाली थी.. जो बहुत ही कामुक पटाखा लग रही थी.. जो सब लेडीसके पास जाकर बैठ गइ.. वो दोनो थे बसंतीका भाइ विनोद ओर उनकी नइ भाभी गीता थी.. जो पहेले बसंतीकी मौसी ओर बादमे उनकी नइ मां फीर उनकी भाभी होगइ थी..

तब बसंती उनको देखकर चौंकनी होगइ.. क्युकी वो आकर बरोबर बसंतीके पीछे ही बैठी हुंइ थी.. बसंती इसी गांवमे रहेती हे वो नातो विनोदको पता था ओर नाही गीताको.. तभी बसंती ब्रिन्दाके कानमे कुछ कहेने लगी.. तो ब्रिन्दा भी पीछे मुह करते गीताकी ओर देखने लगी.. फीर वो भी बसंतीके कानमे कुछ कहेने लगी.. तब बसंती सर्मसार होते पीछे मुडकर देखते हसने लगी.. तभी गीताका ध्यान बसंतीकी ओर गया..

जो दोनो उनकी ओर देखकर हसते बाते कर रही थी.. तब गीता बसंतीको देखते ही चोंक गइ.. ओर कुछ परेसान होने लगी.. क्युकी गीता बसंतीको अच्छी तराह पहेचान चुकी थी.. तभी बंसी ओर सांती फेरेके लीये खडे हो गये.. तो सबलोग वापस सादी देखनेमे बीजी होगये.. तभी पुनम सृती भावना ओर लता साथ ही बैठे थे.. तब पुनमने लताके कानमे कुछ कहा..

ओर सृती भावनाको कानमे कुछ कहेकर खडी होकर पीछे चली गइ.. तो लताभी सबकी ओर नजर डालते धीरेसे सबकी नजर बचाते वहासे सरक गइ.. ओर पुनमके पास पीछे चली गइ.. तब पुनम धीरेसे सरकते हवेलीकी ओर चलने लगी.. तो लताभी जटसे आकर पुनमके साथ होगइ.. ओर दोनो साथ चलते हवेलीकी ओर बाते करते जाने लगी.. आज पुनमने लताको सबकुछ बतानेका फैसला करलीया था....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९६

ओर सृती भावनाको कानमे कुछ कहेकर खडी होकर पीछे चली गइ.. तो लताभी सबकी ओर नजर डालते धीरेसे सबकी नजर बचाते वहासे सरक गइ.. ओर पुनमके पास पीछे चली गइ.. तब पुनम धीरेसे सरकते हवेलीकी ओर चलने लगी.. तो लताभी जटसे आकर पुनमके साथ होगइ.. ओर दोनो साथ चलते हवेलीकी ओर बाते करते जाने लगी.. आज पुनमने लताको सबकुछ बतानेका फैसला करलीया था....अब आगे

पुनम : (साथ चलते मुस्कुराते) हां.. भाभी.. बोल.. कल क्या केह रही थी तुम..?

लता : (मुस्कुराते) पुनोदीदी.. आप मुजसे कुछ कहेने वाली थी.. क्युकी परसो तो आप भी चली जायेगी.. ओर हम भी सहेर चले जायेगे तो हमे बात करनेका मौका ही नही मीलेगा.. बस.. सीर्फ इतना बता दीजीये आपको या मंजु भाभीको लखनको जडी बुटी देनेकी क्या आवस्यक्ता पड गइ.. की इनका इतना बडा होगया..

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. सुन भाभी.. अब आज मे जो भी बात करु.. वो सभी बाते तुमको अपने तक ही सीमीत रखना हे.. भुलसे भी रमा भाभी या नीलमको मत बताना.. वरना बहुत कुछ अनर्थ हो सकता हे.. क्युकी आज मे आपको सबकुछ बता देना चाहती हु.. तुमसे कुछ भी छीपाना नही चाहती..

लता : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) दीदी.. अनर्थ हो सकता हे मतलब..? क्या रमा भाभी ओर नीलुकी वजहसे..? लेकीन कैसे..? छीपाना नही चाहती मतलब..? मे कुछ समजी नही..

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) हां भाभी.. ये सच हे.. मे आपको सबकुछ बता दुगी.. आपको तो पता हे मुजे ओर मंजुभाभीको हमारे बाबाकी दी हुइ शक्तिओके माध्यमसे सबकुछ पता चल जाता हे.. तो लखन भैयाको जडी बुटी देनेका फैसाला भी मेरा ओर मंजु भाभीका था.. ओर वो भी बाबाबके कहेने पे.. ताकी आगे चलकर वो भी अ‍ेक साथ कइ ओरतोको संतुस्ट कर सके.. लेकीन ये बात अभीके लीये नही हे.. अभी इस बातका कोइ मायना नही.. सब बाते आगेके लीये हे..

लता : (दोनो धीरेसे चलते) दीदी.. आगेके लीये..? ओर खुद बाबाने अ‍ैसा कहा हे..? मतलब मे कुछ समजी नही जरा खुलकर बताइअ‍ेनां..

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पुनम : ठीक हे भाभी.. मे सबकुछ बताती हु.. सुन.. तुजे तो पता हेनां हम सब कोइ सामान्य ओरते नही हे.. हम सभी उस लोककी परीया यातो अप्सराये हे.. हम यहा अपने स्वामीओके लीये आइ हे.. भाभी.. हमे पता हे.. तुम यहा सीर्फ लखन भैयाके लीये नही.. हमारे बडे भाइके लीये आइ हो.. लखनसे सादी तो सीर्फ यहा आनेका अ‍ेक जरीया हे.. सही मायनेमे तुम बडे भैयाकी बीवी हो.. ओर तेरी ही कोखसे वो हमारे राजाकी चहीती रानी जन्म लेगी.. हमारा यहा जन्म लेनेका उदेस्य कुछ ओर ही हे..

लता : (सरमाते मुस्कुराते) हां दीदी.. इस बारेमे पहेलेभी हमारे बीच सब बाते हुइ हे.. दीदी.. अगर मे बडे भाइकी बीवीहु.. तो फीर हमारे लखनका क्या होगा..? क्युकी इनको जेलना अब मेरे बसकी बात नही हे.. इसीलीये मेने कल ही उसे दुसरी सादीके लीये केह दीया हे.. तो सुनकर वो थोडा नाराज होगये थे.. दीदी.. वो मुजे बहुत प्यार करते हे.. आप अ‍ेक बार केह रहीथीनां.. उनका दुसरी ओरतोके साथ भी रीलेशन हे.. तो उनको कहीयेना उनके साथ ही..

पुनम : (परखते) भाभी.. तो फीर तुजे बुरा नही लगेगा..? हंम..

लता : (मुस्कुराते साथ चलते) दीदी इसमे बुरा लगनेकी क्या बात हे.. वैसे भी हमारे खानदानमे तो सब दो दो तीन तीन सादीया करते ही आये हे.. मानोनां दो तीन सादीओकी अ‍ेक परंपरा ही होगइ हे.. बडे भैयाकी भी तीन तीन सादीया हुइ हे.. ओर हम जैसी ओरत उनको प्यार करती हे वो अलग..

इनमे भावना भाभी ओर आप भी बाकात नही हे.. तो फीर लखन दुसरी सादी करले या दुसरी ओरतसे रीलेशन रखले तो मुजे क्या आपती हो सकती हे..? वैसे भी अ‍ेक दिनको मुजे बडे भैयाके साथ सादी करनी ही हे.. वो भी तो सब आपने ही कहा था..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. तो फीर सुन.. लखन भैयाको जडबुटी देना आवस्यक हो गया था.. क्युकी हमारा जन्म लेनेका उदेस्य अलग हे.. आपकी सादीसे पहेले लखन भैयाका दो ओरतोके साथ रीलेशन था.. अ‍ेक हम स्कुलमे थे तब.. ओर अ‍ेक हम स्कुलसे वापस घर आगये तब.. आप दोनोकी सादीसे पहेले वो उन्हीके साथ रीलेशनमे थे.. ओर अपनी प्यास बुजाते थे.. जीनके साथ उन्होने गांर्धव सादी भी करली हे.. तो तुम सबको वो कैसे संतुस्ट करते..? बस.. इसीलीये हमने उसे जडी बुटी दी हे..

लता : (थोडी मायुस होते) दीदी.. तो फीर मुजे पहेले बताया क्यु नही..? क्या उनको या आपको मुजपे विस्वास नही था..? क्या मे उनको मना करती..?

पुनम : (थोडा सीरीयस होते) नही भाभी.. बात विस्वास ओर अविस्वासकी नही हे..? जीस तराह आप बडे भैयाको प्यार करती हे.. उसी तराह लखन भैया भी उन दोनोसे प्यार करते हे.. ओर आप बहुत ही भोली ओर सेन्सेटीव हे.. उनको डर थाकी कही आपको पता चलेगा तो आप उनको छोडके चली ना जाओ.. ओर कुछ सचाइ अ‍ैसी हे जो जानकर आपको दुख होता.. बस.. इसी डरकी वजहसे वो आपको केह नही पाये.. बाकी कुछ बाते हे जो आज आपको पता चल जायेगी.. देखना सुनकर वीचलीत मत होजाना..

लता : (आंख गीली करते) दीदी.. मे इतनी कमजोर नही हु.. जीतनी आप ओर लखन समज रहे हे.. मेने तो आपको खुलकर सब बता दीया हे.. की हां मे बडे भाइसे प्यार करती हु.. ओर उनको ही पाना चाहती हु.. तो फीर लखनका दुसरी ओरतके साथ रीलेशनसे मुजे क्या फर्क पडता हे.. आपको तो सब पता चल जाता हे तो आपको भी मालुम हे की मे क्या चाहती हु.. मेरी कीताब तो खुली हे.. तो फीर आप मुजे सचाइ बतानेमे संकोच क्यु कर रही हे..? बता दीजीये मुजे सब.. मे भी खुलकर जीना चाहती हु..

पुनम : (धीरेसे साथ चलते) भाभी.. तो फीर सुन.. ओर अभी ये बात तुम तेरे तक ही सीमीत रखना.. क्युकी तुम जानकर अभी विचलीत भी हो सकती हो.. ओर मे ये बात आपको इसीलीये बता रही हु.. ताकी आगे चलकर हम चारोको ही इस घर ओर हमारी विरासतको सम्हालना हे.. क्युकी तुम हमारे लीये कीतनी इम्पोर्टन्ट हो तुजे तो पता ही नही हे..

लता : (आंसु पोछते मुस्कुराते) दीदी.. वो सब पता हे मुजे.. की मेरा रोल कीतना अहेम हे.. आज मुजे सबकुछ खुलकर बता दीजीये.. ओर हम चारो कौन हे..? वो भी बता दीजीये.. जीनका अभी आपने जीक्र कीया.. वो रमाभाभी ओर नीलुके बारेमे.. मैने तो हमारी सादीसे पहेले भी बहुत कुछ देखा हे.. मे इतनी कमजोर नही हु.. जीतनी आप समज रही हे..

पुनम : (गाल सहेलाते) भाभी.. आपको सायद नही पता.. मंजु भाभी मेरी बडी बहेन हे.. वो नीर्मला आंटी ओर हमारे बापुकी लडकी हे.. उसी तराह तुम भी हमारी बहेन हो.. आपके बापु सरला चाचीको सारीरीक सुख देनेमे कमजोर थे.. तो सरला चाचीने हमारे बापुके साथ ही रीलेशन रखलीया था.. सीर्फ आप ही नही.. भानुभाइ भी हमारे भाइ हे..

ओर अ‍ेक सचाइ ओर बतादु.. मंजु भाभी ओर आपकी तराह सृतीभाभी भी हमारी बहेन हे.. हालाकी इस बातका सृतीभाभी ओर भानुभाइको अभी पता नही हे.. तो आपभी खयाल रखीयेगा.. की अभी उन दोनोको इस बात मालुम ना पडे.. भाभी.. हम सब आपसमे बहेने हे.. ओर मजेकी बात ये हे.. हम सब अपने भाइकी बीवीया हे.. हें..हें..हें..
 
लता : (आंसु बहाते हग करते) दीदी.. बस..? इतनीसी बात करनेके लीये डर रही थी..? अगर मुजे पहेले पता होता तो मे पहेलेसे ही इस घरमे बडे भाइकी बीवी बनकर आ चुकी होती.. दीदी.. इस बातका मुजेतो पहेलेसे ही सक था.. क्युकी मेरी मां बहुत ही कामी ओरत हे.. सीर्फ हमारे बापुके साथ ही नही..

मेरी सादीसे पहेले ही उनका बडेभैयाके साथ भी रीलेशन हे.. वो भी मुजे पता हे.. मेने दोनोको कइ बार सेक्स करते देखा भी हे.. तब ही मेने बडेभैयाका हथीयार देख लीया था.. तभी तो मे इनकी ओर आकर्सीत हुइ हु.. बस.. अब आप मुजे भी अपनी छोटी बहेनके रुपमे स्वीकार कर लीजीये..

पुनम : (आंसु पोछते) बस.. बस दीदी.. अब सांत होजाओ.. अब मे आपको कभी भाभी नही कहुगी.. आजसे आप मेरी छोटी बहेन हे.. दीदी.. आगे चलकर मुजे..आपको.. सृती भाभीको ओर भावना भाभी को ही सब सम्हालना हे.. वो कैसे इस बारेमे आप तीनो मुजपे छोड दीजीये.. इनमे अभी लखन भैया भी हमारे साथ हे.. बस.. अभी सीर्फ इतना कहेना हे आप रमाभाभी.. ओर नीलमको ज्यादा तवजो मत देना..

लता : (मुस्कुराते) हां दीदी.. येतो बताइअ‍े उन दोनोसे हमे क्या खतरा हे.. ताकी मेभी चौकनी रहु..

पुनम : दीदी.. अभी जैसा चल रहा हे चलने दो.. अब आप नीलमको धिरेनसे प्यार करनेमे नही रोकेगी.. उनको जो भी करना हो करने दो.. क्युकी मेभी धिरेनको प्यार नही करती.. ओर मुजे यहा वापस भी तो आना हे.. जब मे यहा हमेसाके लीये वापस आजाउगी.. तब हम चारोको इस हवेलीको सम्हालना हे.. ओर रमाभाभीके साथ भी अ‍ैसा व्यवहार करना.. जैसा अभी करती आइ हो.. क्युकी उन दोनोको पता नही चलना चाहीये की हमे उन दोनोके बारेमे सब पता हे..

लता : (मुस्कुराते) दीदी तो फीर रमा भाभी ओर नीलुसे कैसा खतरा हे..? इस बारेमे खुलकर बताइअ‍ेनां..

पुनम : (मुस्कुराते) हां दीदी.. अब इस बातको सुनकर आप वीचलीत मत होना.. क्युकी इसके लीये मेने लखन भैयासे मीलकर कुछ प्लान भी बनाया हे.. बस.. लखन भैयाको जडी बुटी देनेका अ‍ेक कारण येभी हे..

लता : (सरमाकर हसते) वैसे भी हमारा भाइ कमीना.. हे भी बहुत ठरकी.. हें..हें..हें..

पुनम : (जोरोसे हसते) कमीनी गालीयातो मत दे पती हे तेरा.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) दीदी.. तब पता नही थाकी मेरा भाइ ही मेरा पती हे.. वरना उसे गालीया देते प्यार करती.. हें..हें..हें.. इसका मतलब आखीर मैनेभी अपने भाइसे ही सादी की हे.. हें..हें..हें.. दीदी वो रमाभाभीके बारेमे बताइअ‍ेनां..

पुनम : (मुस्कुराते) हां सुन.. रमा भाभीकी तेरे मामाके साथ सादी नही हुइ थी तभीसे ही उसे पैसोसे बहुत लगाव हे.. ओर उपरसे तेरी नानीने उनको पैसेके बदले खरीदा हे.. मानोना.. वो बहुत ही गरीब थे.. जब तेरे मामाका अ‍ेक्सीडन्ट हुआ तब भानुभाइने ही सब खर्चा दिया हे.. तभी वो पैसे देखकर भानुभाइकी ओर ढल गइ.. ओर उनके साथ रीलेशन रखलीये.. वो पैसोके लीये कीसीभी हद तक जा सकती हे..

लता : (आस्चर्यसे धीरेसे) दीदी.. तो क्या वो भाइसे प्यार नही करती थी..? कहीयेना आपको तो सब पता चलजाता हे..

पुनम : (मुस्कुराते साथ चलते) हंम.. सुन.. उसने भानुभासे इसीलीये सादी की.. क्युकी वो समजती थीकी होस्पीटलमे अपने पतीपे इतना खर्चा कीया.. तो इनके पास बहुत पैसे होगे.. लेकीन यहा आकर उनका सपना सपनाही रेह गया.. फीर उसने बडे भैयाको भी रीजानेकी बहुत कोसीसकी.. लेकीन उनमे भी वो कामयाब नही हुइ.. क्युकी बडे भाइ.. भानुभाइको कभी धोखा नही देते.. इसीलीये भाइने उनपे कोइ ध्यान नही दीया..

लता : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? कमीनी अ‍ैसी हे..? फीर..

पुनम : (मुस्कुराते) अरे दीदी.. आगेतो सुन.. सुनकर तेरा तो दिमाग ही चकरा जायेगा.. जब उनकी दाल वहा नही गली.. तब उसने हमारे लखन भैयाको फसालीया.. इसके लीये उसने अ‍ेक बहुत ही खतरनाकर चाल चली हे.. ओर वो भी अपनी बेटीको जरीया बनाके.. तुम सुनोगी तो उनको गालीया देने लगोगी..

लता : (धीरेसे) दीदी आज उनके बारेमे मुजे सबकुछ बताही दीजीये.. कमीनी दीखनेमे तो कीतनी भोली हे..

पुनम : दीदी.. जब आप ओर भाइ नीलुको धिरेनके वहासे लेकर आये.. फीर नीलु अपने घरपे चली गइ तब उसने नीलुको समजाकर अपने विस्वासमे लेलीगा.. ओर अपने प्लानमे सामील करलीया.. अपने प्लानके मुताबीक उसने हमारे लखन भैयाको नीलुके प्यारमे फसाकर उनके साथ फीजीकल रीलेशन रखेनेके लीये नीलुको राजी करलीया हे.. ताकी नीलु उनकी पढाइके आखरी साल लखन भैयासे प्रेगनेन्ट होजाये.. तबतक वो आइ पीलकी गोली लेती रहेगी..

लता : (चोंकते देखते) व्होट..? लेकीन क्यु..? वो नीलुको लखनसे क्यु प्रेगनेन्ट करवाना चाहती हे..? ओर नीलु इस कामके लीये राजी भी कैसे होगइ..?

पुनम : (कातील मुस्कानसे) दीदी.. आखीर नीलु भी तो उनकी बेटी हे.. जीस तराह रमा भाभीको पैसा प्यारा हे उसी तराह उनकी बेटी भी पैसोकी पुजारन हे.. उनके भी महेंगे महेगे सौक हे.. इसीलीये तो धिरेनसे प्यार करती हे.. क्युकी धिरेन बेन्कमे सरकारी जोब करता हे.. तो वो समजती हे उनके पास पैसोकी कमी नही हे.. इसीलीये तो धिरेनको प्यार करती हे.. देखा नही.. वो कैसे जुठ बोलकर धिरेनके साथ उनके घरपे रंगरेलीया मना रही थी.. ओर धिरेनने भी उनको महेगे कपडे ओर महेगा फोन भी तो दीलवाया हे..

लता : (आस्चर्यसे) अच्छा.. तो ये माजरा हे.. फीर..? इनमे रमाभाभी नीलुको लखनसे प्रेगनेन्ट करवाना क्यु चाहती हे..? कोइ खास वजह..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. ताकी इस बातका हमारे बडे भाइको पता चल जाये.. की लखनने नीलुको प्रेगनेन्ट करदीया हे.. ताकी वो नीलुकी सादी लखन भैयासे करवादे.. ओर वो कायदेसे लखन भैयाकी बीवी होजाये.. ताकी इस हवेलीकी आधी जायदादकी मालकीन बन जाये.. फीर दोनो ही मां बेटी दोनो भाइके बीच फुट डालवाके जायदादका बटवारा करवा दे.. ओर हमारी आधी जायदादकी मालकीन बन सके..

लता : (आस्चर्यसे धीरेसे) ओह.. माय.. गोड.. कुती.. कमीनी.. रंडीकी ओलाद.. दीदी.. कमीनीओने क्या प्लान बनाया हे.. अच्छा हे आपको ओर बडी दीदीको सब पता चल जाता हे.. वरना ये दोनो कमीनीतो हमारा घर ही बरबाद कर देती.. कमीनीओको छोडना मत.. क्या कोइ पैसोके लीये इतना नीचे गीर सकती हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां दीदी.. तभी तो हमे लखन भैयाको ये जडीबुटी देनेकी आवस्यक्ता पडी.. हमे भी पता था लखन भैयाको ओर उनके सभी दोस्तोको मुना भाइने स्टेमीनाके लीये आयुर्वेदीकका कोर्ष करवाया हे.. फीर भी हमने इनको जडीबुटी दी.. ताकी इनका हथीयारभी बडा ओर मोटा होजाये.. हमे लखन भैयाका अ‍ैसे बहुत उपयोग करना हे.. उन मा बेटीकी तो फाडके रखदेगे.. कमीनी.. अपनी बेटीको लखन भैयासे चुदवानेका बहुत सौक हेनां.. अब देखो भैया दोनोकी क्या हालत करते हे..

लता : (सरमाकर हसते) दीदी.. क्या रमा भाभीको भी.. मतलब.. वो भी..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. आपको पता नही वो भी चुदवानेकी कीतनी सौकीन हे.. नीलुसे पहेले तो वो लखन भैयाका लेनेके लीये उछल रही हे.. आपको पता नही हे वो भी लखन भैयाको प्यार करने लगी हे.. क्युकी अब उनको भानुभाइ संतुस्ट नही करपाते.. ओर उनको भानुभाइमे अब कोइ इन्ट्रेस भी नही हे.. क्युकी भानुभाइ भाइके प्रती बहुत ही वफादार हे.. उनको पता हे भानुभाइ उनका इस जायदादके मामलेमे साथ नही देगे.. तो उसने लखन भैयाको फसालीया हे..

लता : (थोठी सोचमे) दीदी.. ये दोनो कमीनी तो बहुत ही खतरनाक नीकली.. लखनको कहेना पडेगा.. की इनसे बचके रहे..

पुनम : (वापस मुडकर चलते मुस्कुराते) नही दीदी.. इसकी चीन्ता तुम मत करो.. तुम लखन भैयाको कुछ मत कहेना.. इन दोनोको तो मे ओर लखन भैयाही नीपट लेगे.. बस.. तुम सीर्फ हमारे बडे भाइपे ध्यान देना.. चलो हम वापस चलते हे..

कहेते पुनम ओर लता हवेली तक बाते करते पहोंच गइ थी.. दोनोही अपनी बातोमे मसगुल थी.. लेकीन पुनम हवेलीके आतेही वापस मुड गइ.. लताका पोजीटीव रीस्पोन्स देखकर पुनमने आज लताको सबकुछ बतानेका फैसला करलीया.. तो लता भी पुनमकी बातोसे खुस नजर आ रही थी.. दोनो बाते करते करते चलकर वापस सामत भाइके घरकी ओर चल पडी..
 
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