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मंजुला : (धीरेसे हसते) पुनो.. क्या लता हमारी बहेन हे.. जानकर दुखी नही हुइ..?
पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. दुखी नही.. कमीनी सुनकर तो बहुत ज्यादा खुस होगइ.. कहेती थी अगर मुजे पहेले पता होता तो मे बडे भैयासे कबसे सादी करचुकी होती.. हें..हें..हें..
मंजुला : (जोरोसे हसते धीरेसे) कमीनी.. सब देवुके पीछे ही पडी हे.. आफ्टर ओल वो भी तो हमारी तराह उनकी बहेन हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाकर धीरेसे) दीदी.. आपने ओर बडे भाइने जो नीर्णय लीया हे.. इस बारेमे अब तो हमे लखन भैयाको भी सब बताना पडेगानां..? वरना लताको प्रोबेलेम होगी..
मंजुला : (सरारतसे मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. तो तुम ही बता देना.. क्युकी अब तो तुही उनकी चहीती भाभी हो.. हें..हें..हें..
पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) कौन मे..? अरे नही नही.. भाभी.. प्लीज.. मे उसे नही बता पाउगी.. मेने आपको कहा तो था.. की मुजे उनको बतानेमे बहुत सरम आयेगी.. आपही उनसे बात करलोनां.. आपको तो वो अपनी मां मानता हे.. हें..हें..हें..
मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) पुनो.. तुम क्यु उनसे इतना डर रही हो..? अेक ना अेक दिनतो तुजे ये सब फेइस करना ही पडेगा.. जब मे नही रहुगी तब तुम क्या करोगी..?
पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. आपको पता तो हे वो कीतने सरारती हे.. वो कैसे मेरी मस्तीया करते हमारे साथ फ्लर्ट भी करने लगते हे.. मुजे तो बहुत सरम आती हे.. आप ही इनसे बात करलोनां..
मंजुला : (हसते धीरेसे) वो तुजे अपनी चहीती भाभी भी तो मानता हे.. ओर भाभी देवरके बीच अैसी मस्तीया तो आम बात हे.. वो तो सृतीके साथ भी फ्लर्ट करते हे.. तो क्या वो कभी सरमाइ..? चल ठीक हे.. मे ही उनसे बात करलुगी.. देख अब वो बेकाबु होने लगे हे.. तो थोडा ध्यानसे काम लेना.. क्या ये तीनोको बता दीया..?
पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) हां दीदी.. लता दीदीको कल ही बता दीया.. भावना दीदी भी सबकुछ जानती हे.. ओर सृती दीदीको पहेलेसे ही बता चुकी हु.. वोतो ये सब जानकर बहुत ही खुस होगइ..
मंजुला : (हसते धीरेसे) पता हे मुजे.. कमीनी अपनी मांकी तराह ही चुदकड हे.. जब लखनका लेगीनां तब उसे पता चलेगा.. कमीनीको उनकी नानी याद आजायेगी.. हें..हें..हें..
पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. क्या सबसे पहेले वाकइ वो लखन भैयासे.. मतलब..
मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. सीर्फ वो ही नही.. तुम सभी.. खुद तुम भी.. क्या तुजे सब पता नही हे..? क्यु अेक ही सवाल बार बार पुछ रही हे..? जब तुम सब उनसे मील लोगीनां.. तो हमारे पतीको भी भुल जाओगी.. तो सभी संयमसे काम लेना.. कोइ जल्द बाजीमे गलती मत करना.. समजी..?
पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. बस.. उसी बातका तो डर हे.. वो बार बार अपना प्यार जता रहे हे..
मंजुला : (मुस्कुराते) पुनो.. तुम अेक बात समजलो.. तुम्हारा रीलशन देवुके साथ इस बच्ची तक ही सीमीत था.. जो अभी तेरे उदरमे पल रही हे.. अब वक्त आ गया हे.. तुम लखनके पीछे पागल होगी.. भलेही देवुके साथ तेरा रीलेशन हो.. मगर अब तुम लखनको भी उतना प्यार करोगी.. ओर उसीके लीये तडपोगी.. तो फीर उनसे क्यु डर रही हो..
कहा तो पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. क्युकी उसे भी पता था.. की अेक ना अेक दिन उनको भी लखनके नीचे लेटना पडेगा.. यही सब सोचते अेक बार फीर पुनमकी चुत गीली होने लगी.. पुनम ओर मंजु आपसमे बैठकर धीरेसे बाते कर रही थी.. तब वहा सब लोग बैठकर आरामसे आपसमे बाते कर रहे थे.. तब धिरेनको अपनी बात रखनेका मौका मील गया.. ओर वो मुस्कुराते देवायतसे बात करने लगा..
धिरेन : (खुस होते) जीजु.. मेरा हाउसींग लोन सेन्सन हो गया.. ओर मेरी कारकी लोन भी होगइ हे..
नीर्मला : (खुस होते) अच्छा..? खुद मेनेजरका बंगलो था.. तो सब फटाफट होगया होगा.. हें..हें..हें..
धिरेन : (हसते) हां मम्मी.. जाहीरसी बात हे.. पैसा उन्हीको मीलेगा.. हें..हें..हें.. जीजु.. परसो मकानका रजीस्ट्रेशन करवाना हे..
देवायत : (मुस्कुराते) कल तो तेरी मम्मी ओर मौसी लोग हरद्वार जा रहे हे.. तो इन सबको छोडनेके लीये हमे सहेर आना पडेगा.. तो देखता हु.. अगर टाइम मीला तो आजाउगा वरना तुम ही सब करवालेना.. अब उसमे कहा हमारी जरुरत पडेगी.. तुही सब करवा लेना..
चंदा : (खुस होते) हां बीटु.. मे भी जा रही हु.. लेकीन अभी वहा रहेने तुम मत जाना.. वो सब हम वापस आयेगे तब ही देख लेगे.. क्युकी नये मकानमे अैसेही नही जाते.. वहा कुछ शुभ कार्य करना पडता हे..
धिरेन : (मुस्कुराते) हां मोम.. वो सबतो मुजे भी पता हे.. तबतक मे ओर पुनो हमारे घरपे ही रहेगे.. क्या कल पुनो भी घर आ रही हेनां..?
देवायत : हां.. अब अंकलका सब काम होगया हे.. अगर तुम चाहोतो पुनम ओर दयाको आज ही लेजा सकते हो.. वरना वो ओर दया कल मेरे साथ ही आजायेगी.. मे उनको तुम्हारे घरपे छोड दुंगा.. कल लखन लता के साथ सृती भी जा रही हे.. वो भी भुमी बुआ वापस नही आती तबतक लखनके साथ ही रहेगी.. नीलु भी वही रहेकर पढाइ करेगी.. ओर उसे स्कुलमे लेने छोडने अभी लखन ही जायेगा..
धिरेन : (मुस्कुराते) जीजु.. मे बाइक लेकर आया हु.. तीनो अेक साथ नही आयेगे.. उनका सामान भी तो साथ होगा.. तो कल आप ही इनको छोड देना..
कहते धिरेन थोडा नीरास होगया.. ओर अपने दिमागमे नीलमको दुसरे तरीकेसे मीलनेका प्लान बनाने लगा.. तब मंजु ओर पुनम अेक दुसरेके सामने देखकर कातील स्माइल करने लगी.. तो लखन भी पुनमकी ओर देखते मुस्कुराने लगा.. तभी पुनमने इसारोसे लखनको अपने रुममे मीलनेको कहा.. तो लखनको बडा आस्चर्य हुआ.. तो पुनम ओर लखन अेक अेक करते धीरेसे टहेलते पुनमके रुममे घुस गये..
पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. दुखी नही.. कमीनी सुनकर तो बहुत ज्यादा खुस होगइ.. कहेती थी अगर मुजे पहेले पता होता तो मे बडे भैयासे कबसे सादी करचुकी होती.. हें..हें..हें..
मंजुला : (जोरोसे हसते धीरेसे) कमीनी.. सब देवुके पीछे ही पडी हे.. आफ्टर ओल वो भी तो हमारी तराह उनकी बहेन हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाकर धीरेसे) दीदी.. आपने ओर बडे भाइने जो नीर्णय लीया हे.. इस बारेमे अब तो हमे लखन भैयाको भी सब बताना पडेगानां..? वरना लताको प्रोबेलेम होगी..
मंजुला : (सरारतसे मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. तो तुम ही बता देना.. क्युकी अब तो तुही उनकी चहीती भाभी हो.. हें..हें..हें..
पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) कौन मे..? अरे नही नही.. भाभी.. प्लीज.. मे उसे नही बता पाउगी.. मेने आपको कहा तो था.. की मुजे उनको बतानेमे बहुत सरम आयेगी.. आपही उनसे बात करलोनां.. आपको तो वो अपनी मां मानता हे.. हें..हें..हें..
मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) पुनो.. तुम क्यु उनसे इतना डर रही हो..? अेक ना अेक दिनतो तुजे ये सब फेइस करना ही पडेगा.. जब मे नही रहुगी तब तुम क्या करोगी..?
पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. आपको पता तो हे वो कीतने सरारती हे.. वो कैसे मेरी मस्तीया करते हमारे साथ फ्लर्ट भी करने लगते हे.. मुजे तो बहुत सरम आती हे.. आप ही इनसे बात करलोनां..
मंजुला : (हसते धीरेसे) वो तुजे अपनी चहीती भाभी भी तो मानता हे.. ओर भाभी देवरके बीच अैसी मस्तीया तो आम बात हे.. वो तो सृतीके साथ भी फ्लर्ट करते हे.. तो क्या वो कभी सरमाइ..? चल ठीक हे.. मे ही उनसे बात करलुगी.. देख अब वो बेकाबु होने लगे हे.. तो थोडा ध्यानसे काम लेना.. क्या ये तीनोको बता दीया..?
पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) हां दीदी.. लता दीदीको कल ही बता दीया.. भावना दीदी भी सबकुछ जानती हे.. ओर सृती दीदीको पहेलेसे ही बता चुकी हु.. वोतो ये सब जानकर बहुत ही खुस होगइ..
मंजुला : (हसते धीरेसे) पता हे मुजे.. कमीनी अपनी मांकी तराह ही चुदकड हे.. जब लखनका लेगीनां तब उसे पता चलेगा.. कमीनीको उनकी नानी याद आजायेगी.. हें..हें..हें..
पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. क्या सबसे पहेले वाकइ वो लखन भैयासे.. मतलब..
मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. सीर्फ वो ही नही.. तुम सभी.. खुद तुम भी.. क्या तुजे सब पता नही हे..? क्यु अेक ही सवाल बार बार पुछ रही हे..? जब तुम सब उनसे मील लोगीनां.. तो हमारे पतीको भी भुल जाओगी.. तो सभी संयमसे काम लेना.. कोइ जल्द बाजीमे गलती मत करना.. समजी..?
पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. बस.. उसी बातका तो डर हे.. वो बार बार अपना प्यार जता रहे हे..
मंजुला : (मुस्कुराते) पुनो.. तुम अेक बात समजलो.. तुम्हारा रीलशन देवुके साथ इस बच्ची तक ही सीमीत था.. जो अभी तेरे उदरमे पल रही हे.. अब वक्त आ गया हे.. तुम लखनके पीछे पागल होगी.. भलेही देवुके साथ तेरा रीलेशन हो.. मगर अब तुम लखनको भी उतना प्यार करोगी.. ओर उसीके लीये तडपोगी.. तो फीर उनसे क्यु डर रही हो..
कहा तो पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. क्युकी उसे भी पता था.. की अेक ना अेक दिन उनको भी लखनके नीचे लेटना पडेगा.. यही सब सोचते अेक बार फीर पुनमकी चुत गीली होने लगी.. पुनम ओर मंजु आपसमे बैठकर धीरेसे बाते कर रही थी.. तब वहा सब लोग बैठकर आरामसे आपसमे बाते कर रहे थे.. तब धिरेनको अपनी बात रखनेका मौका मील गया.. ओर वो मुस्कुराते देवायतसे बात करने लगा..
धिरेन : (खुस होते) जीजु.. मेरा हाउसींग लोन सेन्सन हो गया.. ओर मेरी कारकी लोन भी होगइ हे..
नीर्मला : (खुस होते) अच्छा..? खुद मेनेजरका बंगलो था.. तो सब फटाफट होगया होगा.. हें..हें..हें..
धिरेन : (हसते) हां मम्मी.. जाहीरसी बात हे.. पैसा उन्हीको मीलेगा.. हें..हें..हें.. जीजु.. परसो मकानका रजीस्ट्रेशन करवाना हे..
देवायत : (मुस्कुराते) कल तो तेरी मम्मी ओर मौसी लोग हरद्वार जा रहे हे.. तो इन सबको छोडनेके लीये हमे सहेर आना पडेगा.. तो देखता हु.. अगर टाइम मीला तो आजाउगा वरना तुम ही सब करवालेना.. अब उसमे कहा हमारी जरुरत पडेगी.. तुही सब करवा लेना..
चंदा : (खुस होते) हां बीटु.. मे भी जा रही हु.. लेकीन अभी वहा रहेने तुम मत जाना.. वो सब हम वापस आयेगे तब ही देख लेगे.. क्युकी नये मकानमे अैसेही नही जाते.. वहा कुछ शुभ कार्य करना पडता हे..
धिरेन : (मुस्कुराते) हां मोम.. वो सबतो मुजे भी पता हे.. तबतक मे ओर पुनो हमारे घरपे ही रहेगे.. क्या कल पुनो भी घर आ रही हेनां..?
देवायत : हां.. अब अंकलका सब काम होगया हे.. अगर तुम चाहोतो पुनम ओर दयाको आज ही लेजा सकते हो.. वरना वो ओर दया कल मेरे साथ ही आजायेगी.. मे उनको तुम्हारे घरपे छोड दुंगा.. कल लखन लता के साथ सृती भी जा रही हे.. वो भी भुमी बुआ वापस नही आती तबतक लखनके साथ ही रहेगी.. नीलु भी वही रहेकर पढाइ करेगी.. ओर उसे स्कुलमे लेने छोडने अभी लखन ही जायेगा..
धिरेन : (मुस्कुराते) जीजु.. मे बाइक लेकर आया हु.. तीनो अेक साथ नही आयेगे.. उनका सामान भी तो साथ होगा.. तो कल आप ही इनको छोड देना..
कहते धिरेन थोडा नीरास होगया.. ओर अपने दिमागमे नीलमको दुसरे तरीकेसे मीलनेका प्लान बनाने लगा.. तब मंजु ओर पुनम अेक दुसरेके सामने देखकर कातील स्माइल करने लगी.. तो लखन भी पुनमकी ओर देखते मुस्कुराने लगा.. तभी पुनमने इसारोसे लखनको अपने रुममे मीलनेको कहा.. तो लखनको बडा आस्चर्य हुआ.. तो पुनम ओर लखन अेक अेक करते धीरेसे टहेलते पुनमके रुममे घुस गये..