Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 51 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

मंजुला : (धीरेसे हसते) पुनो.. क्या लता हमारी बहेन हे.. जानकर दुखी नही हुइ..?

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. दुखी नही.. कमीनी सुनकर तो बहुत ज्यादा खुस होगइ.. कहेती थी अगर मुजे पहेले पता होता तो मे बडे भैयासे कबसे सादी करचुकी होती.. हें..हें..हें..

मंजुला : (जोरोसे हसते धीरेसे) कमीनी.. सब देवुके पीछे ही पडी हे.. आफ्टर ओल वो भी तो हमारी तराह उनकी बहेन हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाकर धीरेसे) दीदी.. आपने ओर बडे भाइने जो नीर्णय लीया हे.. इस बारेमे अब तो हमे लखन भैयाको भी सब बताना पडेगानां..? वरना लताको प्रोबेलेम होगी..

मंजुला : (सरारतसे मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. तो तुम ही बता देना.. क्युकी अब तो तुही उनकी चहीती भाभी हो.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) कौन मे..? अरे नही नही.. भाभी.. प्लीज.. मे उसे नही बता पाउगी.. मेने आपको कहा तो था.. की मुजे उनको बतानेमे बहुत सरम आयेगी.. आपही उनसे बात करलोनां.. आपको तो वो अपनी मां मानता हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) पुनो.. तुम क्यु उनसे इतना डर रही हो..? अ‍ेक ना अ‍ेक दिनतो तुजे ये सब फेइस करना ही पडेगा.. जब मे नही रहुगी तब तुम क्या करोगी..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. आपको पता तो हे वो कीतने सरारती हे.. वो कैसे मेरी मस्तीया करते हमारे साथ फ्लर्ट भी करने लगते हे.. मुजे तो बहुत सरम आती हे.. आप ही इनसे बात करलोनां..

मंजुला : (हसते धीरेसे) वो तुजे अपनी चहीती भाभी भी तो मानता हे.. ओर भाभी देवरके बीच अ‍ैसी मस्तीया तो आम बात हे.. वो तो सृतीके साथ भी फ्लर्ट करते हे.. तो क्या वो कभी सरमाइ..? चल ठीक हे.. मे ही उनसे बात करलुगी.. देख अब वो बेकाबु होने लगे हे.. तो थोडा ध्यानसे काम लेना.. क्या ये तीनोको बता दीया..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) हां दीदी.. लता दीदीको कल ही बता दीया.. भावना दीदी भी सबकुछ जानती हे.. ओर सृती दीदीको पहेलेसे ही बता चुकी हु.. वोतो ये सब जानकर बहुत ही खुस होगइ..

मंजुला : (हसते धीरेसे) पता हे मुजे.. कमीनी अपनी मांकी तराह ही चुदकड हे.. जब लखनका लेगीनां तब उसे पता चलेगा.. कमीनीको उनकी नानी याद आजायेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. क्या सबसे पहेले वाकइ वो लखन भैयासे.. मतलब..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. सीर्फ वो ही नही.. तुम सभी.. खुद तुम भी.. क्या तुजे सब पता नही हे..? क्यु अ‍ेक ही सवाल बार बार पुछ रही हे..? जब तुम सब उनसे मील लोगीनां.. तो हमारे पतीको भी भुल जाओगी.. तो सभी संयमसे काम लेना.. कोइ जल्द बाजीमे गलती मत करना.. समजी..?

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. बस.. उसी बातका तो डर हे.. वो बार बार अपना प्यार जता रहे हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) पुनो.. तुम अ‍ेक बात समजलो.. तुम्हारा रीलशन देवुके साथ इस बच्ची तक ही सीमीत था.. जो अभी तेरे उदरमे पल रही हे.. अब वक्त आ गया हे.. तुम लखनके पीछे पागल होगी.. भलेही देवुके साथ तेरा रीलेशन हो.. मगर अब तुम लखनको भी उतना प्यार करोगी.. ओर उसीके लीये तडपोगी.. तो फीर उनसे क्यु डर रही हो..

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कहा तो पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. क्युकी उसे भी पता था.. की अ‍ेक ना अ‍ेक दिन उनको भी लखनके नीचे लेटना पडेगा.. यही सब सोचते अ‍ेक बार फीर पुनमकी चुत गीली होने लगी.. पुनम ओर मंजु आपसमे बैठकर धीरेसे बाते कर रही थी.. तब वहा सब लोग बैठकर आरामसे आपसमे बाते कर रहे थे.. तब धिरेनको अपनी बात रखनेका मौका मील गया.. ओर वो मुस्कुराते देवायतसे बात करने लगा..

धिरेन : (खुस होते) जीजु.. मेरा हाउसींग लोन सेन्सन हो गया.. ओर मेरी कारकी लोन भी होगइ हे..

नीर्मला : (खुस होते) अच्छा..? खुद मेनेजरका बंगलो था.. तो सब फटाफट होगया होगा.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) हां मम्मी.. जाहीरसी बात हे.. पैसा उन्हीको मीलेगा.. हें..हें..हें.. जीजु.. परसो मकानका रजीस्ट्रेशन करवाना हे..

देवायत : (मुस्कुराते) कल तो तेरी मम्मी ओर मौसी लोग हरद्वार जा रहे हे.. तो इन सबको छोडनेके लीये हमे सहेर आना पडेगा.. तो देखता हु.. अगर टाइम मीला तो आजाउगा वरना तुम ही सब करवालेना.. अब उसमे कहा हमारी जरुरत पडेगी.. तुही सब करवा लेना..

चंदा : (खुस होते) हां बीटु.. मे भी जा रही हु.. लेकीन अभी वहा रहेने तुम मत जाना.. वो सब हम वापस आयेगे तब ही देख लेगे.. क्युकी नये मकानमे अ‍ैसेही नही जाते.. वहा कुछ शुभ कार्य करना पडता हे..

धिरेन : (मुस्कुराते) हां मोम.. वो सबतो मुजे भी पता हे.. तबतक मे ओर पुनो हमारे घरपे ही रहेगे.. क्या कल पुनो भी घर आ रही हेनां..?

देवायत : हां.. अब अंकलका सब काम होगया हे.. अगर तुम चाहोतो पुनम ओर दयाको आज ही लेजा सकते हो.. वरना वो ओर दया कल मेरे साथ ही आजायेगी.. मे उनको तुम्हारे घरपे छोड दुंगा.. कल लखन लता के साथ सृती भी जा रही हे.. वो भी भुमी बुआ वापस नही आती तबतक लखनके साथ ही रहेगी.. नीलु भी वही रहेकर पढाइ करेगी.. ओर उसे स्कुलमे लेने छोडने अभी लखन ही जायेगा..

धिरेन : (मुस्कुराते) जीजु.. मे बाइक लेकर आया हु.. तीनो अ‍ेक साथ नही आयेगे.. उनका सामान भी तो साथ होगा.. तो कल आप ही इनको छोड देना..

कहते धिरेन थोडा नीरास होगया.. ओर अपने दिमागमे नीलमको दुसरे तरीकेसे मीलनेका प्लान बनाने लगा.. तब मंजु ओर पुनम अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर कातील स्माइल करने लगी.. तो लखन भी पुनमकी ओर देखते मुस्कुराने लगा.. तभी पुनमने इसारोसे लखनको अपने रुममे मीलनेको कहा.. तो लखनको बडा आस्चर्य हुआ.. तो पुनम ओर लखन अ‍ेक अ‍ेक करते धीरेसे टहेलते पुनमके रुममे घुस गये..
 
लखन : (मुस्कुराते भावनाके पास बैठते) भाभी.. क्या बच्चीको दुध पीला रही हो..? कभी कभी हमे भी पीला दीया करो.. हें..हें..हें.. हम भी आपके देवर हे.. हें..हें..हें..

भावना : (सर्मसार होते अपने दांत पीसकर अ‍ेक मुका मारते) लखन.. कीतने कमीने हो आप.. कोइ भाभीके साथ अ‍ैसी मस्तीया करता हे..? मेरी ननंदको कहेना पडेगा.. की अ‍ेक बच्चा पैदा करले.. फीर उनका दुध पीते रहेना.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते धीरेसे) हां कहेना.. वो भी सनुकर खुस होजायेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) लखन.. आप भाभीकी मस्तीया बादमे कर लेना.. पहेले मेने जो बात कहेने केलीये आपको बुलाया हे.. उसे ध्यानसे सुनो.. वरना कोइ अंदर आजायेगा.. तो हमारी बात अधुरी रेह जायेगी..

लखन : (मुस्कुराते) हां दीदी.. कहीये.. क्या काम था..?

पुनम : (सरमाते हसते पास बैठते) लखन.. आज धिरेन ओर नीलु अ‍ेक दुसरेके साथ बहुत इसारा कर रहे थे.. लताने नीलुका फोन लेलीया हे.. तबसे दोनोकी बात नही हुइ होगी.. इसीलीये दोनो मीलकर कुछ बात करना चाहते हे.. तो मे चाहती हु.. आप सबसे छपाकर उन दोनोकी मुलाकात करवाके बात करवादो..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) दीदी.. क्या ये आप केह रही हे..? लेकीन क्यु..?

भावना : (आस्चर्यसे देखते) हां दीदी.. अ‍ैसा रीस्क क्यु ले रही हे..? अगर दोनोने बात करके कुछ मीलनेका प्लान करलीया तो..? देखा नही.. आज दोनो कमीने कैसे इसारा कर रहे थे..?

पुनम : (कातील मुस्कानसे धीरेसे) हां भाभी.. वही तो मे चाहती हु.. की दोनो मील जाये.. क्युकी हम उसे रोकेगे तब भी दोनो मीलके ही रहेगे.. ओर मे चाहती हु दोनो जल्दसे जल्द मील जाये.. ताकी मेरा जो प्लान हे.. वो आसान होजाये..

लखन : (मुस्कुराते भीरेसे) लेकीन दीदी.. हमारा प्लान तो.. आइ मीन.. अब कैसे कहु..? हम बादमे बात करे..?

पुनम : (सरमाते हसते) लखन.. आप भावना भाभीकी टेन्शन मत लो.. वो इस खेलमे हमारे साथ सामील हे.. इसे हमारे सारे प्लानके बारेमे ओर मेरे बारेमे सबकुछ पता हे.. तो आप हम चारोकी टेन्शन मत लेना..

भावना : (सरमाते हसते भीरेसे) हां.. इसीलीये आप पुनो दीदीको दीदी दीदी.. कहेके बुलाते होनां..? हें..हें..हें.. देवरजी.. मुजे सब कुछ पता हे.. आप मेरी टेन्शन मत लो.. इनको मेरी हाजरी मे भी भाभी केह सकते हो.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते हसते धीरेसे) हां भाभी.. मुजे लगा आपको कुछ पता नही होगा.. तो मे भाभीको दीदी केह रहा था.. ओर पुनमदी ओर मेरे बीच डील भी हुइ हे.. की हम अकेले होगे तब ही मे इनको भाभी कहुगा.. लेकीन धीरे धीरे करते सबको पता चल गया.. हें..हें..हें..

भावना : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) आप बडे कमीने हो.. बीलकुल अपने बडे भाइकी तराह.. हें..हें..हें.. आप मेरी हाजरीमे पुनोदीको भाभी केह सकते हो.. सृती दीदीको भी सब पता हे.. ओर अब तो लतभी सबकुछ जान चुकी हे..

पुनम : (सरमाते हसते) हां देवरजी.. अब तो लताको भी सबकुछ पता हे.. मैने कल ही उनको सबकुछ बता दीया हे.. अब वो भी हमारे साथ सामील होगइ हे.. अब हम पांच होगये हे.. ओर हमे ही सबका खयाल रखना हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. आपने लताको सबकुछ बता दीया तो फीर लताने कुछ नही कहा..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. लेकीन ये सब बाते बादमे.. आप फीकर मत करो.. जो आप चाहते हे वो भी सब होगा.. लेकीन अ‍ेक बार इन दोनोको मीलादो.. फीर हम बादमे तैय करेगे की हमे क्या करना हे.. आप अपनी कोसीस जारी रखो.. ओर मे जैसा कहु आप करते जाइअ‍े..

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. क्या ये थोडी जल्दबाजी नही हे..? क्यु इतना बडा रीस्क ले रही हे.. इसमे उल्टा आपकी लाइफ डीस्टर्ब होगी..

पुनम : (रहस्त भरी मुस्कानसे) भाभी.. यही तो मे चाहती हु.. ताकी मे जल्दसे जल्द वापस इस हवेलीमे आ सकु.. अब मे धिरेनसे कोइ रीलेशन रखना नही चाहती.. क्युकी जो बात मे जानती हु.. उस बारेमे अभी कीसीको पता नही हे.. मे यहा जल्द वापस आना चाहती हु.. फीर यहा आकर हमे बहुत कुछ सम्हालना हे.. ओर फीकर मत कीजीये तब आप भी हमारे साथ ही होगी.. हम पांचो मीलकर सबकुछ सम्हाल लेगे.. जो काम मुजे मंजु भाभीने सौंपा हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. मे कुछ समजा नही.. आप धिरेनके बारेमे क्या जान गइ हे..? ओर हम पांचो मीलकर.. मतलब..? कौन कौन..?

पुनम : (कातील नजरोसे स्माइल करते धीरेसे) मे.. सृतीभाभी.. भावना भाभी.. लता.. ओर आप.. समज गये..? हमारे प्लानके बारेमे लता भाभीको भी सबकुछ पता हे.. ओर वहा आपको उन दोनोसे मीलनेमे कोइ बाधा नही आयेगी.. समज गये..? ओर धिरेनके बारेमे आपको बादमे बता दुगी.. बस.. वहा जाकर अुछ बाते अ‍ेक बार कंन्फोर्म करनी हे.. अब आप भी अपना काम जल्द सुरु करदो.. मुजे रीजल्ट चाहीये..

लखन : (मुस्कुराते) जी भाभी.. मे समज गया.. समजो आपका काम आजसे ही सुरु होगया.. क्युकी कल तो हम सब चले जायेगे.. तब वहा सीर्फ हम ही होगे..

भावना : (मुस्कुराते) देवरजी.. अभी अभी लता भी मुजसे मीलकर गइ.. अब वहा आपको लतासे डरनेकी जरुरत नही हे.. उनको भी रमाभाभी ओर नीलमके बारेमे सब कुछ पता चल गया हे.. कमीनीकी इतनी हालत खराब करदो.. दो दिन बीस्तरसे खडी नही होनी चाहीये.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) लखन.. मेने लताभाभीसे बात करली हे.. की वो भी हमारी बहेन हे.. सुनकर कमीनीको कुछ फर्क ही नही पडा.. हम खामखा उनसे डर रहे थे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) हें..हें..हें.. लेकीन लता इन सबके लीये मान कैसे गइ..? उन्होने कोइ अ‍ेतराज नही जताया..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. क्युकी कुछ बात हे जो आपको भी स्वीकार करनी पडेगी.. ओर वो सब बाते आपको मंजु भाभी बता देगी.. अब आप जाइअ‍े.. वरना कोइ सक करेगा..

लखन : (खडा होकर जाते जाते भावनाके बुब्सपे हाथ रखकर मसलते) जी भाभी.. बहुत मस्त हे.. हें..हें..हें..

भावना : (जुठे गुस्सेसे मारेनेके लीये खडी होते) कमीने.. रुक जरा.. बताती हु.. सरम भी नही आइ..

कहेते सर्मसार होकर मुस्कुराते खडी होने लगी.. तबतक लखन बहारकी ओर भाग चुका था.. तो पुनम लखनकी इस हरकतको देखकर जोरोसे ठहाका मारते भावनाकी ओर देखते हसने लगी.. तो भावना अ‍ेक बार फीर सर्मसार होगइ.. ओर सरमाते हसते हुअ‍े वापस बेडपे बैठ गइ.. आज लखन उनके साथ अ‍ैसी हरकत करेगा भावनाको उनकी उमीद ही नही थी.. आज भानु देवायतके के अलावा लखन तीसरा सख्स था..

जो उनके दुधुके साथ छेडखानी करके गया.. भानुसे सादीके बाद जब भावनाने अपने रुममे देवायतको बुलाकर प्यारका इजहार कीया तब देवायतने भी उनके होठोको चुमते उनके दुधु मसल दीये थे.. यही सोचते भावनाकी चुत गीली होने लगी.. तब वो बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर वो वापस बैठकर अपनी बच्चीको दुध पीलाने लगी.. तब पुनमने रुमका दरवाजा बंध करदीया ओर आकर भावनाके पास सटकर बैठ गइ.. तब..
 
भावना : (सरमाते हसते) दीदी.. देखा हमारे देवरको.. अगर कीसीने देखलीया होता तो..? मुजे तो बहुत सरम आइ.. ये तो अभीसे सुरु हो गये.. क्या ये सभी भाभीओके साथ अ‍ैसी मस्तीया करते हे..?

पुनम : (मुस्कुराते गाल चुमते) नही भाभी.. सबके साथ नही.. लगता हे हमारे देवरको आप कुछ ज्यादा ही पसंद आगइ हो.. हें..हें..हें.. ओर ये सब सुरु होनेमे क्या मुहुर्त नीकालना हे क्या..? आप तो अभीसे डर गइ..? मत भुलो अब आने वाली जींदगीमे यही दोनो भाइ हमारी जींदगीका हीस्सा हे.. ओर इनके आगे भी बहुत कुछ होगा तब आप क्या करोगी..? हें..हें..हें..

भावना : (नसीली आंखोसे मुस्कुराते) दीदी.. मे डरी नही हु.. बस.. इन्होने अ‍ैसे अचानक छेड दिया तो बहुत सरम आइ.. दीदी.. क्या सचमे हमे दोनो भाइके साथ.. आइ मीन.. लखन भैया भी..?

पुनम : (मुस्कुराते दुध मसलते) अरे हां मेरी प्यारी भाभी.. हमारे छोटे देवर भी.. सीर्फ आप ही नही.. सृती भाभी.. आप.. आइ मीन.. हमारी जीतनी भी सौतने हे.. लीगल भी.. ओर इलीगल भी.. सबको छुट मील गइ हे.. अपनी मरजीसे सब हमारे देवरके नीचे आजायेगी.. कमीनी अ‍ेक भी बाकी नही रहेगी..

भावना : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. प्यार तो वो आपको भी करते हे.. मुजे लगता हे सबसे ज्यादा वो आपको पसंद करते हे.. ओर सौतनोमे तो आप भी आगइ.. आप भी तो इनकी भाभी हो.. तो क्या आप भी..? आइ मीन..

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते हां मे गरदन हीलाते) हां भाभी.. सच कहा आपने.. क्युकी वो मुजे बचपनसे प्यार करते हे.. बस.. अभी मैने उनको मुजसे जीतनी देर दुर रख सकती हु.. इतनी देर तक दुर ही रखाना हे.. इनमे अ‍ेक दिन मे भी अछुत नही रहुगी.. पता नही मेरी उनसे दुर रहेनेकी कोसीस कीतने दिन तक कामयाब रहेती हे.. फीर तो मुजे भी मजबुरन उनके नीचे आना ही पडेगा..

भावना : (सामने देखते) दीदी.. मजबुरन मतलब..? क्या मुजे ओर बता सकती हे..?

पुनम : (थोडी गंभीर होते) भाभी.. बताउगी.. आपको सबकुछ बताउगी.. लेकीन अभी नही.. जब हम दोनो अकेली होगी.. फुरसतमे आपको सब कुछ बता दुगी.. अभी दरवाजा खोलना पडेगा.. हम रातमे फुरसतमे बात करेगे.. फीर तो कल मे भी चली जाउगी.. पता नही फीर कब यहा वापस आनेको मीलेगा.. कल बंसीभाइकी सादीमे लतासे भी बहुत कुछ बाते करली..

भावना : (मुस्कुराते) हां.. अभी मुजे बता रही थी.. दीदी.. अच्छा हुआ आपने लताको दुर लेजाकर सभी बाते करली.. वरना वो मां बेटी तो उनको छोडती ही नही थी.. खास करके रमा भाभी.. कमीनी सारा दिन उनके पास ही चीपकी रहेती हे..

पुनम : (खडी होकर बहार जाते) भाभी.. फीकर मत करो.. सब सही होजायेगा.. बस.. आप तो अब बडे भाइको मीलनेकी तैयारीया सुरु करदो.. सायद कल आपकी भाइके साथ सुहागरात होगी.. हें..हें..हें..

कहेते पुनमने दरवाजा खोल दीया ओर बहार चली गइ.. तब भावना पुनमने कही बातपे रोमांचीत होते सर्मसार होने लगी.. तब देवायतके बारेमे सोचते उनकी चुत अ‍ेक बार फीर हरकतमे आगइ.. ओर चुतकी दोनो नाजुक पंखुडीया फडफडाते पानी बहाने लगी.. तब भावना बच्चीको जुलेके डालकर बाथरुममे चली गइ.. ओर बाथरुम बंध करते उनके पीछे आंख बंध करते खडी रही.. फीर नसीली आंख करते वही बुब्सपे हाथ रख दीया.. जीसे अभी लखन मसलके गया था.. ओर वो देवायतके बारेमे सोचते अपनी चुतमे उंगली करने लगी..

तो इधर अ‍ेक हप्तेके बाद श्रीधर ओर जयश्रीकी भी सादी थी.. तो लखनको उनकी सादी मे भी आना था.. ओर कल लखन लताके साथ रमा भी उनके साथ सहेरमे उनके घरपे सामान सेट करने जा रही थी.. जो इस वक्त लताके रुममे वो ओर नीलम लताके साथ घरका सामान पेक कर रही थी.. लेकीन आज धिरेन नीचे बैठा था.. तो नीलमका काममे मन नही लग रहा था.. ओर उनको बार बार नीचे जानेकी इच्छा हो रही थी..

क्युकी उसे धिरेनके पाससे उनके फोन नंबरकी चीठी लेनी थी.. तो दुसरी ओर धिरेनको भी नीलमको मीलनेकी इच्छा हो रही थी.. तभी भानु सबकी इजाजत लेकर खेतोपे आराम करने चला गया.. फीर अ‍ेक अ‍ेक करते सब लोग थोडी देर आराम करने अपने अपने रुममे चले गये.. तब चंदा सृती अपनी बाकी बची पेकींग भी करने लगे.. तभी लखन धिरेनको आराम करनेके बहाने उपर लेगया.. ओर धिरेनको लेकर उपरकी मंजसलमे रमाके बाजुके लास्ट रुममे चला गया.. तब..

धिरेन : (सरमाते मुस्कुराते) लखन भैया.. क्या आप भी मुजसे नाराज हे..? कुछ बोलते नही.. इसीलीये..

लखन : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. भला मे आपसे क्यु नाराज होउगा.. हम दोनो तो दोस्त हे.. ओर ये सबतो चलता ही रहेता हे.. वरना मे हमारे खेतोमे आपको वो लडकीके पास थोडीना भेजता..? आप मेरी टेन्शन मत लो.. क्या अभी नीलुसे मीलना हे..?

धिरेन : (थोडा सोक्ट होते सरमाते) अरे नही नही.. वरना वापस हंगामा होजायेगा.. नही मीलना उसे.. लता भाभीसे बहुत डर लग रहा हे.. क्या उसने कीसीको बताया तो नही..?

लखन : (मुस्कुराते कंधेपे हाथ रखते धीरेसे) नही जीजु.. अगर हम कीसीसे सच्चे दिलसे प्यार करते हेना.. तो कीसीसे डरना नही चाहीये.. मेरे खयालसे नीलुभी आपको सच्चा प्यार करती हे.. तो अ‍ेक बार आपको उनसे मील लेना चाहीये.. आप इधर आराम करो.. मे कुछ जुगाड करके नीलुको यहा भेजता हु..

धिरेन : (मुस्कुराते खुस होते) लखन भैया.. पुनो आपकी बहेन हे.. तो क्या आपको बुरा नही लगता..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे जीजु.. इसमे बुरा क्यु लगेगा..? मुजे पता हे आप पुनोसे नही नीलुको प्यार करते हो.. बस मेरी समजमे ये नही आ रहा.. की आप उनको प्यार नही करते थे.. तो फीर आपने उनसे सादी क्यु की..? क्युकी अबतो हम दोस्त हे.. अगर आप बताना चाहो तो मुजे बता सकते हो..

धिरेन : (सर जुकाते धीरेसे) नही लखनभैया.. सुनकर आपको बुरा लगेगा.. रहेने दीजीये..

लखन : (कंधेपे हाथ रखकर मुस्कुराते धीरेसे) जीजु.. अगर बुरा लगता तो मेने आपको ओर नीलुको रंगे हाथ पकडा.. तभीसे आपसे बात ही नही करता.. येतो आप मेरे जीजुके साथ मेरे दोस्त भी हे इसीलीये पुछ लीया.. अगर आप बताना नही चाहते तो रहेने दिजीये.. मे आपको फोर्स नही करुगा..

धिरेन : (सरमाते धीरेसे) नही लखनभैया अ‍ैसी बात नही हे.. ठीक हे.. सीर्फ आपको बता रहा हु.. लेकीन ध्यान रखना ये बात सीर्फ अपने तक सीमीत रखना.. क्युकी आपको मे सच्चा दोस्त मानता हु.. इसीलीये आपको बता रहा हु.. प्लीज.. सुनकर गुस्सा मत करना..

लखन : (कंधेपे हाथ रखते) अरे जीजु आप टेन्शन मतलो.. ये बात कीसीको पता नही चलेगी.. कहो..
 
धिरेन : (नजरे चुराते) हां लखनभैया आपकी बात सच हे.. मे पुनमको प्यार नही करता.. नीलुसे करता हु.. ओर पुनोसे सादी इसीलीये की.. क्युकी.. क्युकी.. मेरे अंदर बदलेकी भावना थी.. जो अब नही हे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) जीजु.. कीस बदलेकी भावनाकी बात कर रहे हो..? क्या मुजे बता सकते हो..?

धिरेन : (हांमे सर हीलाते) हां.. क्युकी तब मम्मीकी जीजुके साथ सादी नही हुइ थी.. तब मेरी मम्मी जीजुकी मौसीजी थी.. उनकी सादीसे पहेले दोनोके बीच नाजायज रीस्ता था.. मे जब कोलेजके लीये सहेर चला जाता.. तब पीछेसे जीजु हमारे घरपे आजाते थे.. ओर दोनो साम तक खुब रंगरेलीया मनाते.. मेने भी दोनोको दो तीन बार हमारे घरपे सेक्स करते देखा हे.. मेरी मां बहुत कामी ओरत हे.. ओर मे जीजुको भी अयास आदमी समजने लगा था.. तब मुजे नही पता था की ओरतोकी भी कुछ नीड होती हे..

लखन : (मुस्कुराते) लेकीन वो दोनो तो अ‍ेक दुसरेको प्यार करते थे..

धिरेन : (मुस्कुराते) हां लखन भैया.. फीर तो मंजु दीदीने भी मुजे सबकुछ समजाया तब पता चला दोनो आपसमे प्यार करते थे.. इसीलीये मेने ये सोचकर बदलेकी भावनासे पुनोसे सादी की.. की अ‍ेक दिन मे भी उनकी बहेनको ठोकुगा.. बस.. इसीलीये मेने पुनोसे सादी की..

लखन : (अ‍ेक नजरसे देखते) जीजु.. आप हमारे खानदानको क्या समजते हो..? आपको पता हे हमारे खानदानमे कौनसी परंपरा हे..? ओर आपको पता हे आपकी मम्मी कौन हे..? नहीनां..? इसीलीये आपको ये बदलेका खयाल आया.. अगर उस दिन मंजुभाभीसे कुछ ज्यादा जान लेते.. तो आपको ये बुरा खयाल कभी नही आता.. ओर आज पुनोदीदीकी जगाहपे नीलु आपकी बीवी होती.. खैर जाने दिजीये ये सब बाते.. अब ये बाते करना बेकार हे.. बाकी आप पुनमकी टेन्शन मत लो.. अभी सब लोग आराम कर रहे हे..

धिरेन : लखनभैया.. अभी जो बाते हुइ.. प्लीज.. देखना आपकी बहेनको पता ना चले..

लखन : (मुस्कुराते) जीजु आप इनकी टेन्शन मतलो.. ये बात सीर्फ मेरे तक सीमीत रहेगी.. जीजु आपको अ‍ेक सलाह दु..? देखना इस बातका कीसीको पता ना चले.. क्युकी आप मेरे सचे दोस्त हो.. इसीलीये आपको केह रहा हु..

धिरेन : (आस्चर्य भावसे देखते) हां लखन भैया कहीये.. क्युकी अ‍ेक आपही हो जो मेरा सपोर्ट कर रहे हो..

लखन : (कंधेपे हाथ रखते मुस्कुराते धीरेसे) जीजु.. अगर आप पुनोदीदीसे प्यार नही करते.. तो फीर उनको छोड क्यु नही देते..? दे दीजीये उनको डीवोर्स..

धिरेन : (सोक्ट होते) लखन भैया..? क्या ये आप केह रहे हे..? मत भुलो वो आपकी बहेन हे.. अगर मेने उनको डीवोर्स देदीया तो सब लोग मुजे कच्चा खाजेयेगे.. पहेले तो मेरी मम्मी ही मेरी मार मारके चमडी उखाड देगी.. मे अ‍ैसा सोच भी नही सकता.. कुछ ओर आइडीया होतो बतादो..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? गांड फट रही हे..? अगर कीसीसे प्यार भी करते हो तो हिंमत भी रखो.. अगर उनको डीवोर्स नही दोगे.. तो नीलुसे सादी कैसे करोगे..? मानभी लो हमारे खानदानकी तराह आप भी दो दो बीवीया रखोगे.. तो क्या दोनोके साथ खुस रेह पाओगे..? क्युकी मैने सुना हे पुनोदीदी तो आपके गांवमे ही रहेगी.. ओर आपनेतो नीलुके लीये सहेरमे अ‍ेक घर भी लीया हे.. तो दोनो जगाह पहोंच पाओगे..?

धिरेन : (आस्चर्यसे देखते) आपको कैसे पता मेने ये घर नीलुके लीये लीया हे..?

लखन : (फीकी मुस्कान करते) जीजु.. मे इतना भी भोला नही हु.. जीतना आप समज रहे हो.. सच बताना क्या ये नीलुके लीये ही लीया हेनां..?

धिरेन : (हां मे गरदन हीलाते) हां लखन भैया.. सच कहा आपने.. क्युकी मे नीलुसे सादी करना चाहता हु..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. तो फीर ठीक हे.. आप अ‍ेक काम करो.. कल जब पुनो वहा आये तो आप उनको सब सच बतादो.. की मे तुजे नही नीलुको प्यार करता हु.. ओर उनके साथ ही रहेना चाहता हु.. तब वो आपसे नाराज होकर खुद ब खुद आपको छोडकर यहा चली आयेगी.. ओर आपका रास्ता साफ.. फीर नीलुसे सादी करके वहा आरामसे रहेना.. क्या कहेते हो..?

धिरेन : (अ‍ेक नजरसे देखते) हा लखन भैयां.. यही होगा जो अभी आपने कहा हे.. मे भी यही सोच रहा था.. तो फीर क्या ये सब जानकर आपको बुरा नही लगा..?

लखन : (मुस्कुराते) नही.. क्युकी मे भी लताके अलावा दुसरी लडकीसे भी प्यार करता हु.. तो ये सब करनेकी हिंमत भी चाहीये.. जो आपके पास नही हे.. मुजे तो हर दिन अ‍ेक चुत चाहीये.. वरना आप इतने दिन तक पुनोसे दुर थोडीना रेह सकते हो.. अगर आपकी जगाह मे होता तो अबतक मेने पुनोको छोड दीया होता.. ओर नीलुको उठा लीया होता.. फीर नीलुसे सबके सामने सादी भी करली होती..

धिरेन : (हिंमत करते) नही लखन भैया.. मे भी इतना कमजोर नही हु.. जीतना आप समज रहे हो.. मे भी आपको ये सब करके दीखा दुगा.. बस.. अ‍ेक बार नीलुको सहेरमे आने दीजीये.. ओर पुनोसे दुर हुतो क्या हुआ..? वैसे भी मेने मेरा सब इन्तजाम करलीया हे.. मतलब.. वो.. वो.. चुतका.. हमारे घरपे ही.. कमीनी बहुत कडक माल हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते पीठ थप थपाते) हां.. ये हुइना बात.. मेरा सेर दोस्त.. मुजे पता था मेरे दोस्त कभी कमजोर नही होते.. कुछना कुछ जुगाड कर ही लेते हे.. हें..हें..हें.. अब बता भी दो आपने इतने दिन कैसे ओर कीसके साथ गुजारे.. फीर आपको नीलुसे भी मीलवाता हु..

धिरेन : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) लखन भैया प्लीज.. देखना कीसीको पता ना चले.. वरना उनकी ओर मेरी.. दोनोकी इजत चली जायेगी.. कमीनी बहुत मस्त माल हे.. सामनेसे आइ हे.. तो हर दिन उसीसे अपनी प्यास बुजाता हु.. ओर वो भी बहुत चुदकड हे.. जो अपने पतीसे संतुस्ट नही हे.. वो कीसी भी बहानेसे मेरे घरपे आजाती हे.. ओर हम दोनो मीया बीवीकी तराह खुब मजे करते हे..

लखन : (खुस होते मुस्कुराते) अच्छा..? कौन हे वो..? क्या आपही की गांवकी हे..?

धिरेन : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. वो.. वो.. जीजुके दोस्त हेनां.. भीमा भाइ.. तो वो भीमा भाइकी नइ बीवी.. पायलभाभी.. मेरे लीये रातका खाना वोही बनाके देजाती हे.. सुबह चाइ नास्ता भी देजाती हे.. तो सुबह ओर साम दो बार हम मीलते हे.. कभी कभी भीमा भाइ बहारगांव होते हे तब वो पुरी रात मेरे साथ ही सोती हे.. ओर हम दोनो पुरी रात खुब मजे करते हे..

लखन : (मुस्कुराते) जीजु.. आप तो बडे छुपे रुस्तम नीकले.. हें..हें..हें.. ये हुइना बात.. अच्छा हुआ आपने मेरी दोस्तीकी इजत रखली.. देखो मेरे सभी दोस्तोको.. कमीनो दो दो ओरतोको सम्हालके बैठे हे.. ओर दोनोको ठोकते हे.. हें..हें..हें.. अब आप बैठो मे नीलुको बुला देता हु.. ओर हां.. वहा सहेरमे नीलुको मीलना हो तब मुजे बताना.. मे आप दोनोको मीलनेका इन्तजाम करदुंगा..

धिरेन : (मनमे खुस होते) जी लखन भैया.. भैया.. थेन्कस..

कहातो लखन मुस्कुराने लगा.. ओर धिरेन नीलमको मीलनेकी उमीदमे अपना लंड खडा करने लगा.. तब धिरेनको नही पता था की बातो ही बातोमे दोस्तीका हवाला देकर लखनने उनसे बहुत बडा राज उगलवा लीया था.. जो पुनमको धिरेनसे दुर करनेके लीये काफी था.. क्युकी खुद लखन चाहता थाकी पुनम धिरेनको छोडकर जल्द उनके पास लौट आये.. क्युकी वो खुद भी पुनमका प्यार पाना चाहता था..

इधर लखन धिरेनसे बात करके अपने रुममे आगया.. तब रमा लता ओर नीलम अपने कपडे बेगमे पेक कर रही थी.. जैसेही लखन आया तब रमा ओर नीलम दोनो ही सरमाके मुस्कुराने लगी.. तब रमा कातील नजरोसे लखनकी ओर देखती रही.. तो नीलम भी अपनी मम्मी ओर लखनकी ओर नजर गडाके बैठ गइ.. फीर वो भी लखनकी ओर देखकर सरमाकर मुस्कुराने लगी.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९९

इधर लखन धिरेनसे बात करके अपने रुममे आगया.. तब रमा लता ओर नीलम अपने कपडे बेगमे पेक कर रही थी.. जैसेही लखन आया तब रमा ओर नीलम दोनो ही सरमाके मुस्कुराने लगी.. तब रमा कातील नजरोसे लखनकी ओर देखती रही.. तो नीलम भी अपनी मम्मी ओर लखनकी ओर नजर गडाके बैठ गइ.. फीर वो भी लखनकी ओर देखकर सरमाकर मुस्कुराने लगी.. तभी....अब आगे

लता : (मुस्कुराते) अरे लखन आप आगये..? क्या मे आपके सभी कपडे पेक करदु..? हंम..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. अभी अ‍ेक हप्तेके बाद श्रीधरकी सादी भी हे.. तब हमे वापस यहा आना पडेगा.. ओर अब यहा आना जाना तो लगा ही रहेगा.. तो हमारे आधे से ज्यादा कपडे यही छोडदे.. हम वहासे नया ले लेगे..

लता : (सरमाते मुस्कुराते) ठीक हे.. आप भाभी ओर नीलुके लीये भी कपडे लेना.. क्या अभी आपको यहा आराम करना हे..? तो आज आप बाजुमे भाभी वाले रुममे चले जाइअ‍े.. आज हमे सब पेकींग करना हे.. ओर नीलु.. तुजे भी जाना हो तो अपने रुममे चलीजा.. ओर कुछ देर आराम करले.. वरना तेरे जीजुसे बाते कर.. तबतक मे ओर भाभी सब पेकींग कर लेगे..

नीलम : (लखनकी ओर देखते मुस्कुराते) जी दीदी.. अभी चली जाउगी..

लखन : (नीलमकी ओर इसारा करते) लता मे भाभीके रुममे चला जाता हु.. तुम लोग अपना काम नीपटालो.. चल नीलु तुभी आजा..

कहेते नीलमको दुसरे रुममे आनेका इसारा करते लखन चला गया.. तो लखनकी इस हरकतको रमाने देख लीया.. तो मन ही मन खुस होते मुस्कुराने लगी.. तब नीलम भी लखनके इसारोसे बहुत ही सर्मसार होने लगी.. उनको लगाकी लखन उनके साथ कुछ छेडखानी करना चाहते हे.. इसीलीये उनको दुसरे रुममे आनेका इसारा करते गये.. तभी रमाने लताकी नजर बचाते नीलमको आंखोका इसारा करते लखनके पास जानेको कीया..

रमा : (मुस्कुराते) नीलु.. अगर आराम नही करना तो थोडी देर जीजुके पास बैठो.. ओर बैठकर दोनो बाते करो.. तबतक मेभी अभी पेकींग करके आती हु..

नीलम : (सरमाते खडी होते) जी मम्मी.. जाती हु मे..

कहेते नीलम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. क्युकी खुद उनकी मां भी यही चाहती थी.. की नीलम लखनके साथ अकेलेमे टाइम स्पेन्ड करे.. ओर इस मामलेमे वो खुद आगे बढे.. नीलम रमाके कहेनेपे मजबुरन खडी होगइ.. ओर सरमाते लखनके पीछे जाने लगी.. तब उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. क्युकी आज खुद रमा उनको लखनको मीलनेके लीये भेज रही थी..

तब नीलम सरमाते धीरेसे बहार नीकली ओर लखनके पीछे उनके रुमकी ओर जाने लगी.. अभी वो अंसमजमे थी.. की लखनके रुममे जाये के ना जाये.. क्युकी जाते वक्त नीलमको वो सभी बाते याद आने लगी.. जीस दिन लखन उनको अपने घरपे छोडनेके लीये आरहा था.. तब लखनने उनको अपने खेत दिखानेके बहाने अपनी गोडाउनकी ओफीसमे अमेले कैसे दबोच लीया था..

उनको कीस करते उनके दुधु मसलने लगा था.. यहा तक उनका लंड भी पकडा दीया था.. तभी उनको लास्ट वाले रुमके बहार लखन ओर धिरेन खडे दिखाइ दीये.. तो नीलमको देखते ही धिरेन स्माइल करने लगा.. तभी लखनने नीलमको इसारोसे धिरेनको मीलनेके लीये उनके रुममे साथ जानेको कहा.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर सरमाके हसने लगी.. तब लखन भी मुस्कुराते दुसरे रुममे चला गया..

तो नीलम जटसे चलने लगी.. ओर फटाफट पीछे देखकर धिरेनके रुममे घुस गइ.. तो धिरेनने फटाफट दरवाजा बंध करलीया.. ओर पलटकर नीलमको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनो पागलोकी तराह अ‍ेक दुसरेके चहेरेको चुमने लगे.. तब नीलम भी धिरेनका प्यार देखकर मदहोस होते नसेकी हालतमे जाने लगी.. ओर आधी आंख चडाते धिरेनका होठ चुमते साथ देने लगी..

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तब धिरेनने नीलमके बुब्सको अपने हाथोमे थाम लीया.. ओर मसलने लगा तो नीलम बहुतही उतेजीत होगइ.. ओर सीसकारीया करने लगी.. उनकी चुत फडफडाने लगी.. ओर उसमेसे पानीका रीसाव होने लगा.. नीलमने सरमाते धिरेनके लंडको पेन्टके उपरसे ही पकडलीया.. ओर मसलने लगी.. उसे लगाकी वो अभी के अभी धिरेनके लंडको अपनी चुतमे घुसादे.. तो धिरेनभी उतेजीत हो चुका था.. तभी..

धिरेन : (कामुक आवाजमे धीरेसे) नीलु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. कैसी हो तुम..?

नीलम : (सरमाते सामने देखते) जानु.. लव यु टु.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु.. बस.. आपके बीना तडप रही हु.. मुजे यहासे लेजाइअ‍े.. ओर सादी कर लीजीये मुजसे.. मे आपके साथ रहेना चाहती हु..

धिरेन : (धीरेसे होंठ चुमते) डार्लींग.. अ‍ैसा ही होगा जैसा तुम चाहती हो.. अब मुजे पुनोके साथ नही रहेना.. नीलु.. मेने हमारे लीये वो घर लेलीया हे.. जीसे हम देखने गये थे.. अब हम दोनो सादीके बाद वही रहेगे.. ओर मेने तुमको कीतनी बार ट्राइ कीया.. तुम्हारा फोन बंध ही आरहा हे.. कहा हे वो..?

नीलम : (सामने देखते) जानु.. सोरी.. वो लता दीदीके हाथ लग गगा.. तो उन्हीके पास हे.. वो हमसे बहुत नाराज हे.. ओर आपका नंबर भी मीस होगया.. अच्छा हे उसने अभी मेरे मम्मी पापाको नही बताया.. जानु.. मुजे अब लता दीदीके साथ रहेकर ही पढना पडेगा.. आप कुछ कीजीयेनां..

धिरेन : (जेबसे चीठी नीकालकर देते) नीलु.. तुम फीकर मत करो.. हम दोनो स्कुल टाइममे मीलेगे.. ये ले मेरा नंबर.. अब तेरे पास ही रखना.. मुजे भी कुछ अ‍ैसी ही आसंकाये थी.. तभी से मेरा नंबर लीखकर जेबमे रख लीया था.. अब इसे सम्हालके रखना.. हम बादमे दुसरा फोन लेलेगे.. तबतक तुम कीसी भी फोनसे बात करलेना..

नीलम : (आस्चर्यसे देखते) जानु.. वो.. वो.. लखन जीजु.. अभी यहा खडे थे.. तो क्याआआ....

धिरेन : (बीचमे ही बात काटते) हां नीलु.. तु उनकी टेन्शन मतले.. वो हमारे साथ हे.. लखन भैया मेरे सालेके साथ साथ मेरे बहुत अच्छे दोस्त भी हे.. हम दोनोके बारेमे सब कुछ जानते हे.. हमारा मीलन उसीने करवाया हे.. उनसे डरनेकी कोइ जरुरत नही.. ओर वहा जब भी तुजे मुजसे मीलनेका मन करे तु लखन भैयाको कहेना.. वो तुजे मुजसे मीलवा देगे..

नीलम : (आस्चर्यसे देखते) जानु.. क्या ये सब उसने कहा हे..? आइ कान्ट बीलीव.. क्या उन्होने ही..? मेरी तो समजमे नही आ रहा.. क्युकी वो खुद पुनम दीदीके सगे भाइ हे.. तो वो क्यु हमारी मदद करेगे..? वो ओर लता दीदीने तो हमे रंगे हाथो पकडा था.. ओर मुजे अपने साथ ले गये थे..

धिरेन : (मुस्कुराते) हां नीलु.. ये सच हे.. लखन भैया लता भाभीके कहेनेपे साथ आये थे.. मुजे लगता हे जबतक लखन भैया हे.. तबतक हमे मीलनेमे कोइ प्रोबलेम नही होगी.. वो मेरे सालेके साथ साथ बहुत अच्छे दोस्त भी हे.. देखा नही..? वो कैसे हमारी मदद कर रहे हे.. पुनोको तो बस.. यही पडे रहेना हे.. उनको अपने पतीकी कोइ चीन्ता नही हे..

नीलम : (चीठी जेबमे रखते) जानु.. मुजे जाना होगा.. मम्मी कभी भी रुममे आ सकती हे.. मुजे वहा नही देखेगी तो सक करेगी.. उनको लखन जीजुपे बहुत भरोसा हे.. तो अब हम सहेरमे ही मीलेगे.. मे आपको कोल करदुगी.. तब आजाना.. मे चलती हु.. ओर हां.. अभी आप बहार मत नीकलना.. वरना लतादीदी ओर मेरी मम्मी यही हे.. वो आपको देखेगी तो उनको भी सक होजायेगा.. वो कभी भी बहार नीकल सकती हे..

कहेते नीलम धिरेनके होठ चुमकर जटसे दबे पांव बहार नीकल गइ.. ओर बहार नीकलते ही दोनो ओर देखने लगी.. तो पासके ही रमा भाभीके रुमके पास लखन अभी भी बहार खडा रहेकर नीलमके बहार नीकलनेका इन्तजार कर रहा था.. जैसे ही नीलम उनके रुमके पास गुजरी लखनने फौरन उनका हाथ पकडकर अपने रुममे खीच लीया.. ओर जटसे दरवाजा बंध करदीया.. तो नीलम बहुत ही गभरा गइ..
 
तभी लखनने पलटकर नीलमको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके चहेरेको पकडकर अपना होंठ नीलमके होठोपे रखते जोरोसे चुसते कीस करने लगा.. तब नीलम छटपटाते लखनकी बाहोसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. तभी लखनने अ‍ेक हाथ उनके टोपमे घुसा दीया ओर नीलमके बुब्सको थामते जोरोसे मसलने लगा.. तब नीलमकी वापस सीसकारीया नीकल गइ.. वो कुछ बोलनेकी स्थीतीमे नही थी..

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अ‍ेक तो वो धिरेनको मीलकर पहेलेसे ही उतेजीत हो चुकी थी.. ओर उपरसे अभी लखन उनके होठोको चुमते उनके बुब्सको बुरी तराह मसल रहा था.. तभी नीलमको अपनी मम्मीकी बाते याद आगइ.. ओर उसने फौरन लखनका विरोध करना छोड दीया.. ओर अ‍ैसेही खडी रहेते सरमाकर लखनसे बुब्स मसलवाने लगी.. वो लखनको सब कुछ करने देने लगी..

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तभी लखनने उनके बुब्सको छोडकर स्कटके उपरसे ही उनकी चुतपे हाथ रख दीया.. ओर सहेलाते मुठी भरते चुतको धीरेसे दबोच लीया.. बस.. यही हरकत नीलमको बेकाबु करनेके लीये काफी थी.. चुतको छुते ही नीलम मीठे दर्दके कारण सीसकारीया करते उछल पडी.. तबतक लखनने अपने पेन्टकी जीप खोलकर अपने लंडको बहार नीकाल लीया.. तो लखनका लंड हवामे खडा रहेते जटके मारने लगा..

तब नीलम नीचेकी ओर टेडी नजरसे लंडको देखने लगी.. तो लखनका लंड देखते ही थोडीसी डर गइ.. क्युकी पीछली बारसे इस बार लखनका लंड कुछ ज्यादा ही मोटा ओर बडा दीख रहा था.. नीलम लखनके लंडकी ओर मुह फाडते देखती रही.. तभी अचानक लखनने नीलमका हाथ पकडकर अपने लंडपे रखदीया.. तो नीलमने हिंमत करते लखनके लंडको अपनी मुठीमे पकडलीया..

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आखीर वही हुआ जो उनकी मम्मी चाहती थी.. नीलमने अपनी मम्मीकी बाते मानकर अपने आपको लखनके हवाले करदीया.. ओर सरमके मारे उनके कंधेपे सर रख दीया.. उनकी चुतसे फीरसे पानीका रीसाव होने लगा.. उनकी आंखे नसीली होने लगी.. ओर वो अ‍ैसेही लखनकी बाहोमे खडी रही.. तभी अचानक लखनने उसे छोड दीया.. फीर नीलमकी ओर देखते कामुक स्माइल करते अपना लंड मसलते लगा..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) नीलु.. क्या तुमने मेरी सर्त मानली..? हंम..? देखले.. ये हेना धिरेनसे बडा..? ये तुजे धिरेनसे बहुत ज्यादा मजा देगा.. ठीकसे दुबारा देखले..

नीलम : (सर्मसार होते लंडको टेडी नजरसे देखते धीरेसे) जीजु.. पहेली बार देखा था इनसे तो बहुत बडा दीखता हे.. क्या आपकी सर्त ना माननेका इसके अलावा मेरे पास ओर कोइ रास्ता हे..? प्लीज.. आप देखना इस बारेमे कभी धिरेनको या कीसी ओरको पता ना चले.. वरना मेरी इजत मीटीमे मील जायेगी..

लखन : (मुस्कुराते) अरे कीसीको पता नही चलेगा.. तु मान गइ वो ही मेरे लीये काफी हे.. क्या अबभी उनको प्यार करती हे..? सादी करना चाहती हेना उनके साथ..? तु फीकर मत करना मे ही तेरी सादीके लीये तेरा रास्ता साफ कर दुगा.. फीर आरामसे उनसे सादी करके अपनी जींदगी जीना.. बस.. सीर्फ अ‍ेक ही सर्त हे.. तुजे सादीके बाद भी मेरे साथ रीलेशन रखना होगा.. ओर वो भी मे जब चाहु.. बोलो.. सर्त मंजुर हे..?

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते हुअ‍े हां मे गरदन हीलाते) हां जीजु.. मुजे आपकी सभी सर्त मंजुर हे.. बस.. देखना इस बारेमे कीसीको पता ना चले.. वरना मेरी जींदगी बरबाद होजायेगी..

लखन : (मुस्कुराते होठको चुमलेते) नीलु.. जब तक तु मुजे खुस करती रहेगी तबतक तेरी जींदगी बरबाद नही होने दुगा.. मे हुनां.. बाकी तु समजदार हे.. अब जो भी होगा सब सहेर जाकर होगा.. यहा कुछ नही.. इसके लीये तुम तैयार रहेना.. क्या ये तुजे पंसद आया..? हंम..?

नीलम : (बहुत ही सरमाते धीरेसे) जीजु.. ये तो बहुत बडा हे.. मुजे कुछ होगातो नही..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. यही समजलेना हमारी सुहागरात हो रही हे.. बस.. सीर्फ अ‍ेक बार दर्दको जेलना पडेगा.. जैसे तुमने धिरेनके साथ पहेली बार जेला था.. फीर देख.. तु कैसे मेरी दिवानी हो जाती हे.. तु धिरेनको भी भुल जायेगी..

नीलम : (सरमाकर धीरेसे) जीजु.. मुजे आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे.. वो धिरेन मुजसे सादी करना चाहते हे.. लेकीन मे थोडी दुवीधामे हु.. मे जींदगीका हर मजा लुटना चाहती हु.. इसमे मुजे आपकी मदद चाहीये.. आप मेरी मदद करोगेनां..? तो मे वहा रहेकर आपको खुस रखुगी.. आप मुजे खुस रखना.. बाकी कुछ बाते हे वो मे आपको सहेर जाकर बता दुगी..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे नीलु.. वो हम सब वहा आरामसे बैठकर तैय करेगे.. क्या तुजे ये पसंद आया..? अ‍ेक बार इसे प्यार करके देखले.. तु खुस होजायेगी..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) जीजु.. यहा नही.. अब तो हम सहेरमे साथ ही रहेगे.. तब आप प्यार करलेना.. दीदी केह रही थी.. वहा तो मेरा कमरा भी अलग होगा.. तो हमे मीलनेमे आसानी रहेगी..

लखन : (होंठ चुमकर) हां नीलु.. वो सब मेने ही इन्तजाम कीया हे.. तेरा कमरा मेने नीचे ही रखवाया हे.. नीलु.. अ‍ेक बार इसे प्यार नही करोगी..? अब तो यही तेरे नसीबमे हे.. देखले.. तुजे देखकर कैसे जटके मार रहा हे..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) जीजु.. अभी इस काबुमे रखीये.. यहा नही.. वहा जाकर सबकुछ करुगी.. जो आप कहोगे.. जीजु.. लेकीन अ‍ेक बात मेरी समजमे नही आइ.. मेरी धिरेनके साथ सादी करवानेमे आप हमारी मदद कर रहे हे.. लेकीन पुनमदीदी तो आपकी सगी बहेन हे.. तो क्या आपको बुरा नही लगता..? क्युकी अभी अभी आप हमारी सादीके जो बाधा हे.. उसे दुर करनेकी बात कर रहे थे.. वो कैसे..?

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लखन : (मुस्कुराते धीरेसे गाल सहेलाते) नीलु.. तुम सीर्फ आम खाओ.. गुटली मत गीनो.. वो सब मेरे उपर छोडदो.. फीर भी तुजे कुछ आसंका हे.. तो दुर करता हु.. पहेली बात.. धिरेन पुनोदीदीको नही तुमसे प्यार करता हे.. दुसरी बात.. जो आदमी मेरी बहेनको प्यार नही करता.. उनके साथ वो कैसे खुस रेह सकती हे..? इनसे तो बेटर हे वो उनसे अलग होजाये..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) जीजु.. तो फीर इसमेतो पुनमदीदीकी जींदगी खराब होजायेगी.. वो कहा जायेगी..? इसके बारेमे आपने कभी सोचा हे..?

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. तुम इनकी फीकर मत करो.. वो सब मे उनसे बात करके सम्हाल लुगा.. ओर बाकी सब बाते हम वहा जाकर आरामसे करेगे..(खडे लंडकी ओर इसारा करते आंख मारदी) अभी तो तुम इनके बारेमे सोचो.. देख वो तुजे प्यार करनेके लीये कीतना तरस रहा हे..

कहेते नीलमको लंडकी ओर इसारा करते आंख मार दी.. तब नीलम बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर लखनकी ओर तीरछी नजरोसे देखकर मुस्कुराने लगी.. फीर अपने कपडे ओर बाल सही करते जटसे अपने रुममे चली गइ.. आज नीलम लखनकी सभी हरकत देखकर मुस्कुराइ तो लखनने उनसे अ‍ेक बार फीर सब बाते करली.. तो नीलमकी सहेमतीसे वो बहुत खुस होगया..
 
आज उसने मां बेटी दोनोको अपने नीचे लीटानेके लीये तैयार करलीया था.. तो इधर रुममे आते ही नीलम अपने बेडपे लेट गइ.. आखीर आज उसने लखनको अपने वसमे करही लीया.. अब वो लखन ओर धिरेनसे चुदवाकर आरामसे पैसा नीकलवा सकती हे.. ओर अपनी अ‍ैसो आरामकी जींदगी जी सकती हे.. फीर चाहे उसे धिरेनके साथ ओर लखनके साथ सोना ही क्युना पडे.. ओर आंखोपे हाथ रखते लेटते सोचने लगी..

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नीलम : (मनमे) ओ बापरे.. उस दिनसे तो आज लखन जीजुका लंड बहुत बडा लग रहा था.. आज तो लगा की मे गइ कामसे.. वो आजही मुजे चोद लेगे.. लेकीन उसने मुजे छोड क्यु दीया..? सायद बाजुके रुममे धिरेन ओर मम्मी दीदीकी वजहसे छोडा होगा.. की कोइ ओर कारण होगा.? हंम.. अब समजी.. धिरेन भीना.. कीतना भोला हे.. उनको तो कुछ समज ही नही हे.. की लखन जीजु हमारी मदद क्यु कर रहे हे..

कैसे बहार खडे रहेकर मेरा इन्तजार कर रहे थे.. ओर मुजे अपने रुममे खीचकर कैसे प्यार करने लगे.. लगता हे मेरा होंठ भी सुजा दीया हे.. कीतना जोरोसे चुसते थे.. मेरी तो मुनीया ही दबोचली.. आज भी मुजे अपना हथीयार पकडा दीया.. कैसे अपना लंड मसलते कमीनी मुस्कान कर रहेथे.. मुजे आंख भी मारी.. लखन जीजु बीलकुल ठीक केह रहे थे.. धिरेनका तो इनसे आधाभी नही हे.. इनमे बेचारी दीदी चीखेगी नही तो क्या करेगी..

मम्मी भीनां.. कैसे मर्दके स्वभावके बारेमे अच्छी तराह जानती हे.. वो बीलकुल ठीक केह रही थी.. कमीने सभी मर्द अ‍ेक जैसे ही होते हे.. बस.. जरासा मुस्कुराकर इसारा करदो.. तो हमारे पीछे ही घुमने लगते हे.. आज देख भी लीया.. मर्दको रीजाना कोइ मुस्कील काम नही हे.. मुजे इनसे चुदवाकर प्रेगनेन्ट ही तो होना हे.. ताकी मे इनसे सादी कर सकु.. इसीलीये तो मेने उनकी सभी सर्ते मानली.. बापरे.. मुजे भी यही लंडसे चुदवाना पडेगा.. लगता हे ये तो मेरी भी फाडके रख देगा..

लेकीन धिरन भी मुजसे सादी करना चाहते हे.. इसमे खुद जीजु हमारी मदद करनेको तैयार हे.. मे धिरेनको भी नही छोड सकती.. ओर मम्मीकी इच्छाके अनुसार मुजे लखन जीजुसे भी सादी करनी हे.. अगर मे धिरेनके साथ रीलेशन रखुगी.. तो लखन जीजु मुजसे सादी क्यु करेगे..? ओर वो भी तो चाहते हे की मे धिरेनसे सादी करलु.. उनकोतो बस.. सीर्फ मेरे साथ मजे करने हे.. जो भी हो.. वो सब आगे सहेरमे जायेगे तब सोचेगे.. की क्या करना हे.. लेकीन लखन जीजुका लंड हे बहुत मस्त.. कैसा चमक रहा था..

इनसे चुदवाकर तो मजा ही आजायेगा.. बापरे धिरेनकी नुनीसे तो कितना सानदार हथीयार हे.. केह रहेथे.. अब तो जो भी होगा सब सहेर जाकर ही होगा.. ओर बात भी सही हे.. वरना ये तो आज ही मेरी हालत खराब कर देते.. मे सबको क्या जवाब देती..? भले ही सहेर जाकर मुजे दोनोसे चुदवाना पडे.. मे दोनोसे चुदवाकर उनसे पैसे नीकलवाती रहुगी.. मेरी तो लोटरी ही नीकल गइ.. अब तो दो दो लंडसे चुदवार मजा भी मीलेगा ओर साथमे ढेर सारे पैसे भी मीलेगे.. नीलु.. तेरी तो अब बले बले हे.. हें..हें..हें..

सोचते नीलमकी आंख लग गइ.. तो दुसरी ओर गांवमे आज सुबह बंसी ओर सांती भी देर तक सोते रहे.. तब जागुतीने आज उन दोनोको नही जगाया ओर बाकी रुमकी सफाइ करली.. तब जया कीचनमे काम करती रही.. दोनो मां बेटी अ‍ेक दुसरेके सामने नही बोल रही थी..

तब देरसे सांती भी उठकर कंपलीट होकर बहार आगइ.. आज उसने नइ सारी पहेनी थी.. मांगमे सींदुर ओर पैरमे पायलकी जंकारके साथ सरपे पलु डालकर अ‍ेक नइ नवेली दुल्हनकी तराह लग रही थी.. ओर वो सरमाते कीचनमे चली गइ.. तब जयाने मुस्कुराते उनको गले लगा लीया..

जया : (मुस्कुराते सर चुमते) आगइ मेरी बहु.. चल जा जागुको बुलाकर ला.. फीर हम सब चाइ नास्ता करने बैठ जायेगे.. आज तुजे कोइ काम नही करना.. मेरा बेटा उठ गया क्या..? वरना उनको भी जगादे..

सांती : (सरमाकर मुस्कुराते) जी मम्मीजी.. वो जाग गये हे.. ओर नहाने गये हे..

जया : (सामने देखते) सांती.. क्या बात हे..? आज भाभीकी जगाह सीधा मम्मीजी..? क्या तुमने मुजे माफ करदीया..? हंम..?

सांती : (सरमाते धीरेसे) मम्मीजी.. मे आपसे नाराज ही कब थी..? मे तो बस.. अ‍ैसे ही आपको समजा रही थी.. ओर अब आप मेरी सांस हे.. तो मम्मीजी ही कहुगी.. अब मेरा मायका कहो या ससुराल.. दोनो यही हे..

जया : (सांतीको बाहोमे भरते) बस सांती.. मे तेरे मुहसे यही सुनना चाहती थी.. की तुम मुजे अपनी सांसके रुपमे अ‍ेक्सेप्ट करलो.. आज तेरे मुहसे मम्मीजी सुनकर बहुत अच्छा लगा.. अब मुजे पुरा यकीन हे.. तुम मेरे बंसी ओर मेरी जागुको सम्हाल लोगी..

सांती : (मुस्कुराते पीठ सहेलाते) हां मम्मीजी.. आप जागुकी चीन्ता मत करना.. अब वो मेरी ननंद नही मेरी छोटी बहेन हे.. मे उनको बहेन मानकर उनका खयाल रखुगी.. आप जीलो अपनी जींदगी..

जया : (जटसे अलग होते कंधे पकडकर धीरेसे) बेटा.. सोरी.. क्युकी जीस रास्तेपे मे चल पडी हु.. अब वहासे वापस लौटना मेरे लीये मुमकीन नही हे.. क्युकी अ‍ेक तो उनका बच्चा मेरे उदरमे पल रहा हे.. ओर दुसरा.. उन्होने मेरे लीये अपनी पत्नीको भी छोड दीया हे.. तो मुजे उनके साथ जाना होगा.. अब तुजे ही इस घरको सम्हालना हे.. बस.. कभी कभी फोनपे मुजे सबकी खबर देते रहेना.. ओर तबतक ध्यान रखना.. इस बारेमे मेरे बंसी ओर जागुको पता ना चले..

सांती : (मुस्कुराते) हां मम्मीजी.. बस.. अ‍ैसा ही होगा जो आप चाहती हो.. आप नास्तेकी तैयारी करो मे जागुको बुलाकर आती हु..

कहेते सांती अपने सरपे पलु सही करते छम..छम.. पायलकी आवाजके साथ जागृतीके रुमकी ओर चली गइ.. तब जया मन ही मन खुस होते सांतीको जाते हुअ‍े मुस्कुराते देखती रही.. आज उनको सांती इस घरकी नइ नइ बहुके रुपमे बहुत अच्छी लगने लगी.. तभी सांती जागृतीके रुममे चली गइ.. तो जागृती अपना काम नीपटाकर तैयार होकर अपने बेडपे लेटी हुइ थी.. जैसे ही सांती उनके रुममे आइ जागृती मुस्कुराते जटसे बैठ गइ..

ओर सांतीने आतेही धीरेसे दरवाजा बंध करदीया.. ओर पलटके जागृतीकी ओर देखकर मुस्कुराते पास आने लगी.. तब जागृती जटसे खडी होगइ.. ओर दोडकर सांतीको गले लग गइ.. तब सांतीने भी जागृतीको कसके अपने गले लगा लीया.. ओर दोनो थोडी देर अ‍ैसेही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे खडी रही.. तभी सांती उनसे अलग हुइ.. ओर जागृतीके चहेरेको अपने हाथोमे थामकर मुस्कुराते उनकी आंखोमे देखती रही.. तब..
 
जागृती : (सरमाते हसते) भाभी.. अ‍ैसे क्यु देख रही हे..? आज आप बहुत खुबसुरत लग रही हे.. ओर बडी खुस नजर आ रही हे..? लगता हे आपकी ओर भाइकी सुहागरात बहुच अच्छी रही.. हें..हें..हें.. कैसे उछल उछलकर भाइको प्यार कर रही थी.. हें..हें..हें..

सांती : (हाथ पकडकर बेठपे बैठते) हां.. बहुत अच्छी रही.. कमीनी.. वो तो तुजे भी पता हे.. तुम हमे प्यार करते देख जो रही थी.. बहार उंगली करनेसे तो अच्छा हे तुम भी अंदर आ जाती.. तेरा भाइ मेरे साथ तुजे भी खुस कर देते.. हें..हें..हें..

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जागृती : (मुस्कुराते बाजुमे अ‍ेक मुका मारते) नही भाभी.. सुबह सुबह मजाक नही.. प्लीज.. कल आप दोनोकी सुहागरात थी.. मे तो हर रात आप दोनोको प्यार करते देखती हु.. वोतो कल आपने मुजे देख लीया इसीलीये आपको पता चला.. क्या भाइको इस बारेमे पता हे..?

सांती : (सरमाते हसते) हां जागु.. कल उन्होने भी तुजे देख लीया था.. तो तेरे चकरमे कइ गुना ज्यादा जोसमे मुजे प्यार करने लगे.. तेरी वजहसे तो कल मेरी हालत खराब करदी.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते हसते) भाभी.. मेरी वजहसे..? मे कुछ समजी नही.. इसमे मे कहासे बीचमे आगइ..?

सांती : (कामुक नजरोसे मुस्कुराते) कल बंसीने तुजे खीडकीमे जांकते देखलीया था.. तब उसने तेरे सामने क्या इसारा कीया था..? सच बताना.. क्युकी मेने उनको इसारा करते देख लीया था.. हें..हें..हें..

जागृती : (सर्मसार होते गले लग गइ) भाभी.. अब मे आपसे जुठ नही बोलुगी.. भाइने भी मुजे अंदर आनेका इसारा कीया था.. तो मुजे बहुत सरम आइ.. ओर मे वहासे सरमाती हुइ चली गइ.. सोरी भाभी..

सांती : (जोरोसे बाहोमे भीचते) अरे पगली इसमे तु क्यु सोरी बोल रही हे..? कोइ अ‍ैसे ही अपनी बहेनको अंदर आनेका इसारा नही करते समजी..? इसका मतलब बंसीभी तुजे प्यार करता हे.. ओर यही तो मे चाहती हु.. की तुम बंसीके साथ आगे बढो..

इसीलीये तो कल सुबह उनको जगानेके लीये तुजे भेजा था..

तब पता चला की तुम दोनो तो बहुत आगे बढ गये हो.. अरे मेरी बहेन उनको जेलना मुज अकेलीका काम नही हेरे.. अब तुम भी करले मेरे बंसीसे सादी.. हम दोनो बहेने मीलकर इस घरको सम्हाल लेगे.. अब हमे कीसीकी परवाह नही करनी.. इस बारेमे मेने कल बंसीसे बात भी करली हे..

जागृती : (जटसे अलग होते सरमाते धीरेसे) भाभी.. क्या केह रही हो..? तो फीर भाइने क्या कहा..?

सांती : (मुस्कुराते) अरे वो क्या कहेगे..? वो भी तो तुमसे सादी करनेके लीये रेडी हे.. अरे मेरी बहेन.. मुजे पता हे वो भी तुजे बहुत प्यार करते हे.. ओर तुम भीतो उनको प्यार करती हो.. मेने सादीमे देखा हे.. की तुम दोनो अ‍ेक दुसरेसे कैसे आंख मीचोली खेल रहे थे.. क्या ये सच हेनां..?

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जागृती : (सर्मसार होते हांमे गरदन हीलाते) हां भाभी.. ये सच हे.. भाभी.. मे भाइसे सुरुमे प्यार नही करती थी.. लेकीन जबसे जयश्री उनके भाइको प्यार करने लगी थी.. तबसे मेभी भाइकी ओर आकर्सीत होने लगी थी.. लेकीन तब मुजे पता चला की भाइ आपको प्यार करता हे.. तो मे इस मामलेमे आगे नही बढी..

सांती : (मुस्कुराते फीरसे हग करते) अरे मेरी बहेन.. अब तो कोइ दिकत नही हेनां..? जागु.. आजसे तुम मेरी ननंद नही हो.. अब मे तुजे अपनी छोटी बहेन ही मानुगी.. ओर तुजे बहेन ही कहुगी.. बस.. कुछ दिन इन्तजार करले.. फीर मे ही तुम दोनोकी सादी करवाउगी.. फीर हम तीनो खुब मजे करेगे..

जागुती : (सरमाकर गले लगते) भाभी.. लेकीन मम्मी पापा..?

सांती : (मुस्कुराते चहेरेको थामते) जागु.. उनकी चीन्ता तु मत कर.. वो सब मे देखलुगी.. ओर अब मुजे भाभी नही.. बडी दीदी केहना.. क्युकी मेने तो कल रातसे ही तुजे अपनी सौतनके रुपमे अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. बस.. अभी बंसीको इस बारेमे ज्यादा नही बताना.. वरना वो तो तुजे आज ही चोद डालेगा.. हें..हें..हें.. कमीना बहुत ठरकी हे.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाकर हसते) भाभी.. ओह.. सोरी सोरी.. बडी दीदी.. हमारे पतीको अब गाली तो मत दो.. हें..हें..हें..

सांती : (मनमे खुस होते हसते) हमारे पती..? हमं.. अब ठीक हे.. ये हुइनां बात.. चल.. मम्मी हमे नास्तेके लीये बुला रही हे.. फीर इस बारेमे हम दोनो आरामसे बाते करेगी..

जागृती : (हाथ पकडकर) दीदी.. मुजे उनको देखकर खुनस आने लगता हे.. हम बादमे करेगेनां..

सांती : (हाथ थामते धीरेसे) नही छोटी.. तुम उनसे इतनी नफरत मत कर.. वो मां हे तेरी.. वो भी तो अ‍ेक औरत हे.. क्या सीर्फ हमे ही प्यार करनेका अधीकार हे..? उनको नही..? उनको जब अपने पतीसे प्यार नही मीला.. तभी तो वो बहार गइ हे.. जागु.. अ‍ेक बात पुछु..? तुम बुरातो नही मानोगी..?

जागृती : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. मेने भी आपको अब सच्चे दिलसे बडी बहेन मान लीया हे.. आपका मुजपे पुरा हक हे.. तो मे क्यु बुरा मानुगी..? कहीये क्या कहेना हे आपको..?

सांती : (मुस्कुराते धीरेसे) जागु.. सच बताना.. बंसीसे सादीके बाद क्या तुम लखन भैयाको भुल पाओगी..? हंम..? तुम उनको प्यार करती थीनां..? मुजसे तेरी कोइ बात नही छुपी हे.. तुम जब भी उनको मीलने खंडहरपे जाती थी.. मेरी नजर हमेसा तुजपे रहेती थी.. मुजे सब पता था.. की तुम जयश्रीको साथ रखकर वहा क्यु जाती थी.. ताकी गांवके लोगोको तुमपे सक ना पडे.. जागु.. मुजे पता हे अब तुम वर्जीन नही हो.. बस.. यही हाल आज मम्मीका हे..

जागृती : (सर्मसार होते धीरेस) दीदी.. सोरी.. लेकीन ये सब आपको कैसे पता..? क्या कीसीने आपको कहा हे..? आइ मीन.. जयश्रीने या फीर..

सांती : (मुस्कुराते) नही छोटी.. मुजे कीसीने नही बताया.. मेरी बंसीके साथ सादी कल हुइ हे.. लेकीन मेने तो उनको पहेलेसे ही अपना पती मान लीया था.. ओर खुदको इस घरकी बहु.. तो इस घरकी बहु होनेके नाते इस घरका खयाल रखना मेरा फर्ज हे.. घरकी बेटी कहा जाती हे कीसके साथ बाते करती हे..

मुजे सब ध्यान रखना पडता हे.. लेकीन मुजे सब पता होनेके बावजुद मैने तुजपे कभी पाबंधी नही लगाइ.. क्युकी प्यार करना ओर होना कोइ गुनाह नही हे.. सबको अपनी जींदगी अपने तरीकेसे जीनेका अधीकार हे.. तो मे तुजपे क्यु पाबंधी लगाउ..? क्युकी मे खुद अपने भतीजेसे प्यार करती थी.. ओर हम दोनो हर रात साथ सोते थे..

जागृती : (आंख गीली करते हग करते) हां दीदी ये सच हे.. मे लखनको बहुत प्यार करती हु.. लेकीन उन्होने ही मुजे कहा हे.. की बंसी तुजे प्यार करता हे.. तो मे मेरे दोस्तको धोखा नही दे सकता.. तु करदे उनकी इच्छा पुरी.. ओर करले उनसे सादी.. क्युकी उन सभी दोस्तो अपनी बहेनको चाहते हे.. ओर उनसे सादी कर रहे हे.. ओर जयश्री भी यही चाहती थी.. की मे भी अपने भाइको अपनालु.. बस.. तबसे मे भाइकी ओर आकर्सीत होने लगी.. ओर उनको प्यार करने लगी..

सांती : (मुस्कुराते सर चुमते) छोटी.. लखन भैया बहुत अच्छे हे.. वो तुमसे भी सादी कर सकते थे.. लेकीन अपने दोस्तकी खातीर उन्होने अपने प्यारकी कुरबानी दी.. यही तो सच्चा प्यार हे.. यही तो त्याग हे.. जो लखन भैयाने अपने दोस्तके लीये दीया.. लेकीन अब मुजे सीर्फ यही कहेना हे.. की तुम पुरानी सब बाते भुलकर अपनी नइ जींदगीकी सुरुआत करो..

जागृती : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. आपको मेरे ओर लखनके बारेमे सबकुछ पता था.. तो फीर जब हम दोनो अकेली थी.. तब इस बातका जीक्र क्यु नही कीया..? आप तब भी मुजे सब कुछ पुछ सकती थी..

सांती : (प्यारसे गाल सहेलाते) हां छोटी.. मे तब भी तुमको सबकुछ पुछ सकती थी.. लेकीन लखन भैयाकी बात करके मे तुजे सर्मीन्दा करना नही चाहती थी.. इसीलीये नही पुछा.. अब तो तुम भी समजदार हो गइ हो.. अपना फैसला खुद ले सकती हो.. अब आगे क्या डीसीजन लेना हे.. सब तुजे ही तैय करना हे..

जागृती : (मुस्कुराते हग करते) दीदी.. कल मेने सब फैसला करलीया हे.. मे अब आपकी छोटी बहेन बनकर भाइको अपनाना चाहती हु.. आपका साथ पाकर आपकी छोटी बहेन होकर धन्य होगइ में.. बस.. मुजे अब सीर्फ पापाकी चीन्ता हे.. इसीलीये मम्मीपे खुनस आ रहा था.. लेकीन अब नही..

सांती : (मुस्कुराते गाल चुमते) छोटी.. सबको माफ करनेमे भलाइ हे.. सबको अपनी जींदगी अपने तरीकेसे जीनेका अधीकार हे.. ओर रही बात पापाकी.. तो उनके बारेमे मे तुने अभी नही बता सकती.. अब हमे उनको जीतना प्यार दे सके.. जीतनी खुसीया दे सके देना हे.. बस.. इसके आगे मे तुजे कुछ नही बता सकती.. कुछ दिनमे सब ठीक होजायेगा..

जागृती : (हाथ पकडकर) दीदी.. आप मुजसे कुछ छुपा रही हे.. क्या हुआ हे पापाको..? बताइअ‍ेना..

सांती : (आंख गीली करते) नही छोटी.. बस.. सीर्फ इतना जानले.. आने वाले दिनोमे हम सबको अपने आपको सम्हालना हे.. क्युकी अब पापाके पास कुछ ही दिन बचे हे..

जागृती : (आंसु बहाते) दीदी.. क्या केह रही हो..? क्या पापाको कोइ गंभीर बीमारी हे..? आपको सब कैसे पता..?

सांती : (आंसु बहाते) छोटी.. मे तुजे बताना नही चाहती थी.. लेकीन अपने दिलपे पथर रखले.. क्युकी अब हम दोनोको ही इस घरको सम्हालना हे.. इसीलीये तुजे भी स्ट्रोंग बनना हे..

जागृती : दीदी.. आंसु मत बहाइअ‍े.. मुजे सब सच बताइअ‍े.. मुजे कुछ नही होगा.. मे सब बाते सहेन कर सकती हु.. आइ प्रोमीस.. हम दोनो बंसी भैयाको सम्हाल लेगे..
 
सांती : (अपने आंसु पोछते) छोटी.. कल सबलोग चले गये.. तब पापा अपने रुममे अपनी बीमारीके बारेमे मम्मीको बता रहे थे.. तो सुनकर मम्मी खुब रोइ.. फीर मम्मीकी छोटी उमरका हवाला देते पापाने खुद मम्मीको रमेश अंकलके साथ सादी करलेनेको कहा..

सायद इस रीस्तेके बारेमे पापाभी जानते थे.. तब उनको नही पता थाकी उन दोनोकी बात मे भी सुन रही हु.. लेकीन देख मम्मीको.. सुबह जब मे उनको मीली तो वो अपने दिलपे पथर रखके मुस्कुराती रहेती हे.. ताकी पापाकी बीमारीके बारेमे हमे पता ना चले..

जागृती : (गीड गीडाते) दीदी.. प्लीज.. बताइअ‍ेना पापाको कोनसी बीमारी हे..?

सांती : (सामने देखते धीरेसे) छोटी.. देखना इस बारेमे अभी हमारे पतीको पता ना चले.. वरना वो सुनकर टुट जायेगे.. तब हम दोनोको मीलकर ही उनको सम्हालना हे.. पापाको ब्लड केन्शर हे.. वो भी लास्ट स्टेजका.. उस दिन रमेश भाइ उनको छोडने आयेथेनां..? उस दिन पापाको खुनकी उल्टीया हुइ थी.. छोटी.. अब कभी भी कुछ भी हो सकता हे..

जागृती : (लीपटकर आंसु बहाते) दीदी.. मुजे भी कुछ अ‍ैसी ही आसंकाये थी.. की पापाको जरुर कुछ हुआ हे.. पर क्या हुआ था नही पता था.. सायद इसीलीये उन्होने आपकी ओर भैयाकी सादी इतनी जल्दीसे करवादी..

सांती : (अलग करते आंसु पोछते) हां छोटी.. आंसु मत बहा.. अभी तो तुमने कहा मे सब सहेन कर लुगी.. चल बहार मम्मी हमारा नास्तेपे इन्तजार कर रही हे.. अब उनके सामने आंसु मत बहाना.. ओर उनको कुछ मत कहेना..

जागृती : (फटाफट आंसु बहाते) जी दीदी.. चलीये दोनो बाथरुममे मुह साफ कर लेते हे.. वरना सबको पता चल जायेगा..

फीर दोनो अपना हुलीया ठीक करके बहार आगइ.. तब सामतभाइ कंपलीट होकर डाइनींगपे बैठकर अखबार पढ रहा थे.. ओर साथमे कुछ कागजाते लीफाफे भी थे.. तो जया मुरजाये चहेरे के साथ चाइ नास्ता बहार रख रही थी.. जैसेही उन्होने जागृती ओर सांतीको देखा तो मुस्कुराने लगी.. ओर खुस होनेकी अ‍ेक्टींग करने लगी.. तो जागृती उनको प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. जैसेही जया ओर जागृती आंख मीली..

जागुती : मम्मी.. आप बैठीये.. मे सब लेकर आती हु..

कहेते जागृती जयाकी ओर देखते स्माइल करते कीचनमे जाने लगी.. तो जया जागृतीको उनकी ओर मुस्कुराते देखकर बहुत खुस होगइ.. तभी बंसी भी कंपलीट होकर आगया.. तो सांती उनको देखकर बहुत ही सरमाइ.. ओर अपने सरपे पलु डालकर सरको ढक लीया.. जब जागृची चाइ नास्ता लेकर आगइ.. तो सांती भी सरमाते जागृतीके साथ बैठ गइ.. सामत भाइकी हाजरीकी वजहसे कोइ कुछ बोल नही रहा था.. फीर सबने मीलकर चाइ नास्ता करलीया.. तभी..

सामत : (लीफाफेसे कागजातकी फाइल नीकालते) सांती बेटा.. ये लो.. तुम दोनोकी सादीकी भेट.. ये हमारे सहेरके बंगलेकी फाइल हे.. जीसे मैने तुम्हारे ओर मेरी जागुके नाम करदीया हे.. ओर ये दोनो फाइल इस हमारे खानदानी घरकी हे.. ओर ये फाइल हमारे सभी खेतोकी हे.. जो मैने बंसीके नाम करदीया हे.. ओर कुछ पैसे हे बेंकमे.. वो भी मेने तेरे बंसी ओर जागुके नाम करदीया हे.. इनमेसे कुछ पैसे मेने जयाको दीये हे..

बंसी : (आस्चर्यसे) लेकीन पापा अ‍ैसे अचानक ये सब करनेकी क्यु जरुरत पड गइ..? कुछ हुआ हे क्या..?

सामत : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. ये तो बस अ‍ैसे ही.. मन हुआ तो करदीया.. क्या हेना बेटा अब तेरी भी सादी हो गइ हे.. तो घरकी सारी जीम्वेवारी अब तुजे ओर बहुको ही सम्हालनी हे.. ओर वैसे भी मेरी उमर हो गइ हे.. तो सोचा तबीयत अच्छी हे तब ही सबकुछ अच्छेसे नीपट जाये.. बाकी कुछ भी नही हुआ..

जया : (धीरेसे) अ‍ेजी.. सुनीये.. मुजे कुछ भी नही चाहीये.. मेरे हीस्सेका पैसा भी आप बच्चोको दे दीजीये..

सामत : (मुस्कुराते) नही जया.. मुजे पता हे मे भी तुम्हारा गुनेगार हु.. तेरी छोटीसी उमर थी.. लगभग मेरेसे भी आधी उमर.. ओर मेने तुमसे सादी करली.. जो सुख तुजे मुजसे मीलना चाहीये वो सुख मे तुजे नही दे सका.. कल अगर मुजे बाय चान्स कुछ होजाये.. तो तुम अपने तरीकीसे जींदगी जीनेके लीये आजाद हो.. अगर तुम कीसीसे सादी कर लेना चाहती हो तो वो भी कर सकती हो.. इसीलीये मेने तुमको अपना हीस्सा दीया हे..

जया : (चोंकते) अ‍ेजी.. ये आप क्या अनाप सनाब बोल रहे हे.. मेरी भी कोइ सादी करनेकी उमर हे..? आपको कुछ नही होगा.. बच्चोके सामने तो अ‍ैसी बाते मत कीजीये..

सामत : (मुस्कुराते अपनी नाकपे उंगली रखते) जया.. चुप.. बस.. कुछ भी मत बोल.. मैने जो फैसला लीया हे सही लीया हे.. खास करके ये बात मे मेरे बच्चोको केह रहा हु.. ताकी तुजे तेरे बारेमे कोइ फैसला करनेमे बाधा ना आये..

जागृती : (आंख गीली करते) पापा.. आप अ‍ैसा सब क्यु बोल रहे हे.. आपको कुछ नही होगा..

सामत : (हसते) अरे मेरी बच्ची.. मुजे क्या हुआ हे..? जो तुम आंसु बहा रही हो.. अभी तेरे पापा जीन्दा हे.. में अ‍ैसे जाने वाला नही हु.. अभी तो तेरी भी सादी करवानी हे.. फीर मेरे पोतेका मुह भीतो देखना हे.. हें..हें..हें.. बस.. तुम तीनो बच्चोको सीर्फ यही कहेना हे.. अगर कल जया कही भी सादी करना चाहे तो तुम तीनो उनको कुछ नही कहोगे.. ओर इसीलीये मेने जयाको १० लाख रुपीये दीये हे.. जो उनका ओर मेरा अलग अ‍ेकाउन्ट हे.. उनमे रख दीये हे.. बाकी सब मेने तुम तीनोके खातेमे डाल दीये हे..

सांती : (सरमाते धीरेसे) पापा.. मत कीजीये अ‍ैसी बाते.. आप क्यु हमे डरा रहे हे.. आपको कुछ नही होगा..

सामत : (हसते खुस होते) अरे वाह मेरी बेटीने मुजे पापा कहा.. खुस रहो बेटा.. बस.. अब जल्दीसे अ‍ेक प्यारासा पोतेका मुह दीखादो.. तो गंगा नहाये.. हें..हें..हें..

जया : (सरमाकर मुस्कुराते) क्या आप भी..? बहुको सरमा रहे हे.. हें..हें..हें.. थोडा सब्र कीजीये.. हमे बहुत जल्दी ये भी खुस खबरी मील जायेगी.. हें..हें..हें..

सामत : (खुस होते) अच्छा..? तब तो ठीक हे.. बंसी बेटा.. आज मुजे तुजपे गर्व हे.. तुमने मेरी विधवा बहेनको सम्हाल लीया.. जीते रहो बेटा.. बस.. अब मेरी जागृतीका कोइ अच्छे घरमे रीस्ता होजाये..

सांती : (जागृतीकी ओर मुस्कुराते) पापा.. अब आप इनकी चीन्ता तो छोडही दो.. इनकी सादी करवानेकी जीम्वेवारी अब मेरी ओर आपके बेटेकी.. क्यु जागु.. हें..हें..हें..

सामत : (हसते) अच्छा अच्छा.. समज गया.. मतलब मेरी बेटीको कोइ पसंद हे.. ठीक हे बेटा.. तुम जहा सादी करना चाहो कर सकती हो.. बस.. लडकेका खानदान अच्छा होना चाहीये..

सांती : (मुस्कुराते) पापा.. आप उनके खानदानकी चीन्ता मत करना.. वो बहुत अच्छे खानदानसे हे.. हें..हें..हें..

कहा तो जागृती ओर बंसी दोनो सरमाने लगे.. तो बंसीने मौका देखकर जागृतीको आंख मारदी.. तब जागृती सर्मसार होगइ.. ओर खडी होकर मुस्कुराते दोडकर अपने रुममे चली गइ.. तो जया ओर सामत जोरोसे हसने लगे.. तभी सांती तीरछी नजरोसे देखते बंसीकी ओर कामुक स्माइल करती रही.. तब बंसीने सामत ओर जयाकी नजर बचाते सांतीको भी आंख मारदी.. तब सांती भी बहुत सर्मसार होगइ.. ओर वो भी सरमाकर मुस्कुराते जागृतीके पास उनके रुममे चली गइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २००

कहा तो जागृती ओर बंसी दोनो सरमाने लगे.. तो बंसीने मौका देखकर जागृतीको आंख मारदी.. तब जागृती सर्मसार होगइ.. ओर खडी होकर मुस्कुराते दोडकर अपने रुममे चली गइ.. तो जया ओर सामत जोरोसे हसने लगे.. तभी सांती तीरछी नजरोसे देखते बंसीकी ओर कामुक स्माइल करती रही.. तब बंसीने सामत ओर जयाकी नजर बचाते सांतीको भी आंख मारदी.. तब सांती भी बहुत सर्मसार होगइ.. ओर वो भी सरमाकर मुस्कुराते जागृतीके पास उनके रुममे चली गइ....अब आगे

जागृती : (अंदर जाते ही हसते) दीदी.. हमारे पतीतो बहुत ही कमीने हे.. हें..हें..हें..

सांती : (हसते) क्यु..? क्या हुआ..? उन्होने तुम्हारे साथ कोइ सरारत की क्या..? अरी बतानां..

जागृती : (सरमाकर हां मे गरदन हीलाते धीरेसे) दीदी.. मम्मी पापा थे.. ओर आप पापासे बात कर रही थी.. फीर भी उन्होने मुजे आंख मारी.. अगर मम्मी पापाने देख लीया होता तो..? मेरा भांडा तो वही फुट जाता.. अच्छा हुआ पापाने लडकेका नाम ओर उनके घरके बारेमे नही पुछा.. मुजे तो बहुत सरम आइ..

सांती : (जोरोसे हसते धीरेसे) छोटी.. वो बहुत कमीने हे.. मुजे भी आंख मारी.. उनसे जरा सम्हालके रहेना.. लगता हे बहुत ही जल्द तुम दोनोका मीलन होने वाला हे.. हें..हें..हें..

जागृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते अ‍ेक मुका मारते) दीदी.. आप भी बहुत कीमीनी हो.. मे कोइ मीलन बीलन करने वाली नही हु.. मुजे तो बहुत सरम आ रही हे..

सांती : (गले लगाते) अरे मेरी बनो तो सरमा भी रही हे..? हें..हें..हें.. सुन छोटी.. आज पापाने जो भी कहा तुजे समजमे आया..? लगता हे उन्होने हमारी बहुत सारी टेन्शन खतम करदी.. अब हमे हमारे पतीको इतना नही समजाना पडेगा..

जागृती : (अलग होकर धीरेसे) बडीदीदी.. लगता हे इस बारेमे पापाभी सब कुछ जानते होगे.. ओर आज उसने सबके सामने अपनी गलतीको भी मान लीया.. चलो.. जो भी हुआ अच्छा ही हुआ.. चलो.. अब काम करते हे.. मम्मी बेचारी अकेली सब कर रही होगी.. मे उनकी मदद करती हु..

सांती : (मुस्कुराते) हंम.. चल.. आज सीर्फ तुजे ही काम करना हे.. मम्मी तो मुजे आज काममे हाथ भी नही लगाने देती.. कहेती थी कल तेरी सादी हुइ हे.. तो आज मुजे कोइ काम नही करना.. हें..हें..हें..

जागृती : (दांत पीसकर मुस्कुराते अ‍ेक मुका मारते) हां.. सही तो कहा उसने.. कल महारानीकी सादी जो हुइ हे.. देखना मेरी सादीके बाद मे भी कोइ काम नही करुगी.. हें..हें..हें.. चलो..

सांती : (हाथ पकडकर बहारकी ओर जाते धीरेसे) हां मत करना.. मे भी तुजे काम नही करने दुगी.. क्युकी हमारे पती तुजे दुसरे दिन काम करने लायक छोडेगा तब तुम काम करोगीनां.. हें..हें..हें..

कहातो जागृती फीर अ‍ेक बार सर्मसार होगइ.. ओर वो सांतीको मारनेके लीये दोडी तो सांती भी हसती हुइ दोडकर बहार भाग गइ.. ओर जागृती सांतीकी ओर कातील नजरोसे हसती हुइ कीचनमे चली गइ.. ओर जयाकी मदद करने लगी.. तो जया भी बहुत खुस होगइ.. आज जागृती उनके साथ हस हसके बाते करने लगी.. तब जयाने भी राहतकी सांस ली.. सामत भाइके घरपे इस तराह हसी खुसीसे दिनकी सुरुआत होगइ थी..

तो दुसरी ओर आज श्रीधरके घरपे भी सब लोग मीलकर हसी खुसी श्रीधर जयश्रीकी सादीकी तैयारीया करने मे जुट गये.. आज वृन्दा ओर जीतुलाल भी सादीकी तैयारीया करते खुस हो रहे थे.. क्युकी जीतुलालको सादीके बाद हमेसा हमेसाके लीये ब्रीन्दासे छुटकारा मीलने वाला था.. ओर हमेसाके लीये अपनी भाभीके साथ रहेकर उनको अपनी बीवी बनानेकी तैयारीया कर रहा था..

तो दुसरी ओर ब्रीन्दा श्रीधर ओर जयश्री भी बहुत खुस थे.. ब्रीन्दा भी अब हमेसाके लीये अपने बेटेकी बीवी होजानेके लीये तैयार थी.. बंसीकी दो दिनकी सादी ओर उनकी सादीकी खरीदारी.. ये तीन दिनमे ब्रीन्दा ओर श्रीधर काफी बार मील चुके थे.. जीनकी वजहसे अब ब्रीन्दाके तनकी आग ओर भडक गइ थी.. ओर वो अब हमेसाके लीये श्रीधरकी होजाना चाहती थी.. सबको अपनी अपनी खुसीकी अलग अलग वजह थी..

गांवमे सबकुछ हो रहा था.. तब इन सबसे दुर मुम्बइमे.. सुधीर नीशा ओर चारु यहासे नीकलते ही दुसरे दिन मुम्बइ पहोच गये थे.. ओर जाते ही सुधीर सीधा होस्पीटलमे अ‍ेडमीट हो चुका था.. उन्होने अ‍ेक स्पेसीयल रुम ले रखा था.. ताकी नीशा चारु उनके साथ ही रेह सके.. जाते ही सुधीरका सभी टेस्ट दुबारा हुआ.. ओर आज सुबह उनका ओपरेशन भी होगया था.. तो अब वो सुधीरसे वसुधा बन चुका था..

सुधीरको होर्मोन्स चेन्जके काफी इन्जेक्शन दीये गये.. ताकी उनके बुब्स.. ओर बालोमे भी चेन्ज आ सके.. ओर संभोग करते उनको लडकीकी तराह सभी तराहकी फीलींग्स आसके.. सुधीर अभी भी बेहोस था.. ओर आइ.सी.यु. मे उनको ओब्जर्वेशनमे रखा गया था.. तब नीशा ओर चारु उनके रुममे बैठकर गपे लगा रही थी.. ओर फोन करके रश्मी ओर वंदनाको सब जानकीया दे रही थी..

जीसे सुनकर वंदना ओर रश्मी हस रही थी.. फीर चारुने देवायत ओर मंजुसेभी सब बाते करली.. अ‍ैसे ही साम ढल गइ.. तब दुसरे गांवमे खाना खाते मुना ओर बरखाके मामा विनोद ओर उनकी बीवी गीता आपसमे बसंतीके बारेमे बाते कर रहे थे.. बसंती देवायत ठाकुरके गांवमे रहेती हे सुनकर विनोदकी आंखमे अ‍ेक बार फीर हवसकी चमक आने लगी.. ओर वो मन ही मन बसंतीको मीलनेका प्लान सोचने लगा..

लेकीन उनको नही पता था की इस बार उनका दाव उल्टा पडने वाला था.. तो विनोद भी गीताको लखनने कही बडी स्कुल खुलनेकी बात बता देता हे.. ओर गीताको उसी स्कुलमे जोबकी ओफरकी बात करता हे.. जीसे सुनकर गीता भी बहुत खुस होने लगी.. ओर वो अप डाउन करके भी इस बडी स्कुलमे जोब करनेके लीये तैयार होगइ.. तब उनको नही पता थाकी आने वाले वक्तमे उनके साथ क्या होने वाला हे..
 
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