Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 58 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. कैसा रहा..? मजा आयाकी नही..?

भावना : (सरमाते हसते) दीदी.. पुछो ही मत.. मेतो स्वर्गमे चली गइ थी.. इतना मजातो मुजे कभी नही आया.. आज पता चला सुहागरात क्या होती हे.. मे पहेली बार तीन तीन बार जडी हु.. दीदी.. मुजे अब भानुके साथ नही रहेना.. प्लीज.. मुजे यही रहेने दो..

मंजुला : (हसते) अरे.. तो अब तुजे यही तो रहेना हे.. लेकीन अभी नही.. वो वक्त भी बहुत जल्दी आयेगा.. जब तुम हमेसाके लीये इधर रहोगी.. सुन.. अभी तो सीर्फ अ‍ेक बारही हुआ हे.. हमारे पतीकी आदत हे.. जबतक वो कीसीको भी दो बार नही चोद लेते.. तबतक वो अपना हथीयार बहार ही नही नीकालते.. हें..हें..हें.. क्यु भाइ..?

देवायत : (मंजुके होठ चुमते) हां भावु.. ओर ये सब तेरी दीदीका कमाल हे.. ये सब इसीने मुजे सीखाया हे..

भावना : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. मुजे तो अ‍ेक ही बारमे पुरी नीचोडली.. तो दुसरी बारमे मेरी तो हालत ही बीगड जायेगी.. देखो.. अभी भी अंदर बहुत ही सख्त लग रहा हे.. वरना भानुका तो जडते ही अपने आप बहार नीकल जाता था.. कुछ पता ही नही चलता था.. आज असली मर्दसे पाला पडा हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (होठोको चुमते) भावु.. आज हम पहेली बार मील रहे हे.. हमारी सादी भी हुइ हे.. तो आज हमारी सुहागरात भी हे.. तो मे तुजे सुबह तक छोडने वाला नही हु.. अब भुलजा भानुको.. अब तुम मेरी बीवी हो..

भावना : (सरमाते) जीजु.. अगर सुबह तक करोगे.. तब तो मे सुबह चलने लायकभी नही रहुगी.. आपको जेलना इतना आसान नही हे.. भानु गोलीया खाकर करता हे तब भी मेरी हालत बीगड जाती थी.. ओर आपने तो बीना गोली खाये ही मुजे तीन तीन बार जडा दीया.. आज मे पहेली बार संतुस्ट हुइ हु.. लव यु जीजु..

मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. जब तेरा दुसरी बार होजाये तब देवुको मे सम्हाल लुगी.. तबतकत तुम कुछ देर आराम कर लेना.. फीर वो तेरे पास आजायेगे.. देखले.. मे तो इनका पुरी रात अंदर लेकर सोती हु.. हें..हें..हें..

भावना : (सर्मसार होते हसते) दीदी.. आज पता चला तुम ओर हमारी मम्मी जीजुके पीछे इतना पागल क्यु थी..

मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. सीर्फ मे ही नही.. हमारी सभी सौतनोके अलावा मम्मी.. भुमी आंटी जैसी ओरते भी इनके पीछे पागल हे.. हमारी मौसी अ‍ैसेही इनके प्यारमे नही पडी.. कमीनी मेरी सादीमे ही इनसे आंख लडा बैठी थी.. ओर मुजे पता भी नही चला.. ओर इनसे चुद गइ..

तबसे वो भी इनकी दिवानी हो गइ थी.. ओर इतना बडा लडका होनेके बावजुद इनसे सादी भी करली.. आज तेरे साथ सादी करके मेरे देवुकी ग्याराह बीवी होगइ हे.. ओर अभी तीन सादीया ओर भी करनी हे.. तो मेरे देवुकी चौदाह बीवीया होजायेगी..

भावना : (मुह फाडकर आस्चर्यसे) चौदाह बीवीया..? जीजु.. आप सबको कैसे सम्हालेगे..? क्या अभी ग्याराह बीवीओको सम्हाल पाते हे..? क्या सबको समय दे पाते हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) नही भावु.. इसीलीये तो मुजे ओर देवुको वो नीर्णय लेना पडा.. जो तुजे पुनोने कहा हे.. मेरे खयालसे हमारे खानदानके बारेमे तुजे सबकुछ पता चल गया हे..

भावना : (मुस्कुराते) हां दीदी.. मेरी पुनो दीदीसे सभी बाते होगइ हे.. दीदी.. बताओनां.. हमारे इस पतीकी ग्याराह बीवीया कौन कौन हे..? ओर अभी तीन कौन बाकी हे.. जो हमारी सौतन होगी.. क्या मुजे बता सकती हो..?

मंजुला : (मुस्कुराते बुब्सको छेडते) हां भावु.. अब तो सीर्फ तुम चारो ही होगी जो इस विरासतको सम्हालोगी.. पहेली पत्नीतो हमारी मम्मी खुद हे.. फीर मे.. चंदा मौसी.. तुम.. फीर भुमीका आंटी ओर सृती.. फीर हमारी पुनो.. इसके अलावा चारुभाभी ओर नीशा भाभी.. फीर रश्मी भाभी ओर वंदना.. ओर जीनकी सादीया बाकी हे उनमे अ‍ेक कबीलेकी लडकी जमीला.. फीर हमारी लता.. ओर दया बहेन..

भावना : (सरमाकर हसते) ओ बापरे.. क्या दया बहेन भी..? दीदी.. क्या सृती दीदीको भुमीका आंटीके बारेमे पता हे..?

देवायत : (बुब्सको चुमते) नही भावु.. अभी इस बातका सृतीको नही पता.. तो बी केरफुल.. पता नही जब उनको पता चलेगा तब वो क्या हंगामां करेगी..

मंजुला : हां भावु.. अभी उनको भुमीका आंटीके बारेमे नही पता.. लेकीन उनको बहुत जल्द पता चल जायेगा.. क्युकी भुमीका आंटी हमारे पतीसे प्रेगनेन्ट होगइ हे.. ओर भावु.. दया बहेन भी हमारी बहेन हे.. मेरी ओर देवुकी सोतेली बहेन.. बेचारीको उनको भी नही पता की वो भी हमारी बहेन हे.. मे उनकी भी सादी जल्दसे जल्द देवुसे कर देना चाहती हु.. क्युकी अब हमारे रामुकाका का समय भी नजदीक आगया हे..

देवायत : (मुस्कुराते होठ चुमते) भावु.. तुम दोनो बाते बादमे करलेना.. चल दुसरे राउन्डके लीये तैयार होजा.. आइ अ‍ेम रेडी..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) जीजु.. क्या रेडी..? इतनी जल्दी..? अभी अभी तो मेरे अंदर जडे हो.. देखो अभी मेरी पुरी चुत भरी पडी हे..

मंजुला : (हसते) हां भावु.. तेरे जीजु वो जडी बुटीकी वजहसे अ‍ेक साथ दस दस ओरतोको चोद सकते हे.. हें..हें..हें..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. क्या लखन भैयाको भी वो जडी बुटी दी हेनां..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. अब इस घरकी सभी ओरतोको इन दोनो भाइको ही सम्हालना हे..

भावना : (मुस्कुराते) जीजु.. क्या ये सब सुनकर आपको बुरा नही लगता..? हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते होठ चुमते) नही भावु.. क्युकी मुजे भी इनकी बीवी.. ओर तेरी ननंदसे सादी करनी हे.. फीर मेरा रजीयाके साथ भी रीलेशनमे था.. जो अब लखनकी बीवी हे.. ओर मंजुने ये नीर्णय कुछ सोच समजकर ही लीया होगा.. तो मुजे बुरा क्यु लगेगा..? आखीर वो भी तो इस खानदानका खुन हे.. चल अब दुसरे राउन्डके लीये रेडी होजा.. मे ओर नही रहे सकता.. आज तो दोनो बहेनकी पुरी रात बजाता रहुगा..

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ओर इस बार भी देवायतने भावनाकी जबर दस्त तरीकेसे धमाकेदार चुदाइ करली.. भावनाको इस बार भी तीन तीन बार जडाकर उनकी चुतको अपने पानीसे लबालब भरदीया.. तब भावनाकी अ‍ेक अ‍ेक नब्स ढीली हो चुकी थी.. उनका पुरा बदन दर्द कर रहा था.. वो हीलनेकी स्थीतीमे भी नही रही.. तब देवायत उनको गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया ओर वहा दोनोने सावर लीया..

फीर देवायत उसे वापस लाकर बेडपे सुला देता हे.. तब मंजु पहेलेसे ही पीठके बल लेटकर अपनी चुतको सहेलाते देवायतका इन्तार कर रही थी.. तो इस बार मंजुको भी देवायतने दो बार चोद लीया.. फीर भावनाको कभीघोडी बनाकर चोदा.. तो कभी खडे खडे चोद लीया.. पुरी रात यानीकी सुबह चार बजे तब देवायत दोनो बहेनेको बारी बारी चोदता रहा.. आज भावना ओर मंजुला दोनो ही संतुस्ट हो चुकी थी.. फीर तीनो ही नंगे अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सो गये..
 
सुबह तीनो देर तक सोते रहे.. फीर भी देवायतको जाना था तो मंजुने उस्े आठ बजे जगा दीया.. तो वो उठ गया ओर तैयार हो गया.. तबतक मंजुने दो जोडी कपडे पेक करदीये ओर चंपाभाभीने चाइ नास्ता भी बना लीया.. ओर चाइ नास्ता करके देवायत अपनी कार लेकर सीधाही अपने खेतोपे चला गया.. फीर वहासे हरीया ओर उनकी दोनो बीवीया मालती ओर रेणुको लेकर कबीलेकी ओर नीकल जाता हे..

तब मालती फोन करते जमीलासे सब बाते करलेती हे.. जीसे सुनकर जमीला भी बहुत खुस होजाती हे.. फीर सबलोग कबीलेकी ओर चले जाते हे तब बीच रास्ते जमीला सबकी नजर बचाते पीछेसे देवायतसे छेडखानी करती रहेती हे.. ओर अ‍ेक बार मौका मीला तो देवायतको वहा मीलनेके लीये इसारा भी करती हे.. क्युकी काफी दिन हो गये थे जमीला ओर देवायत नही मीले थे..

तो हवेलीपे भावना अब भी नींदकी आगोसमे थी.. क्युकी देवायत सुबह चार बजे तक दोनो बहेनोकी चुदाइ करता रहा.. तो भावना थककर चकनाचुर हो गइ थी.. तभी उसे मंजुने जगाया तो भावना अब भी ठीकसे चल नही पा रही थी.. तब मंजुने उसे सहारा दीया.. ओर बाथरुममे जाकर उनकी चुतकी सीकाइ भी करदी.. फीर बहार आकर भावनाको अ‍ेक पेइन कीलरकी गोली भी खीलाइ.. तब जाके भावनाको राहत महेसुस हुइ..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. आप सही केह रही थी.. जीजुको जेलना इतना आसान नही हे.. पता नही आप उनको कैसे जेल पाती हो.. आज पता चला.. सब इनके पीछे क्यु पागल हे.. इनमे हमारी मम्मी भुमी मौसी ओर पुनो दीदी भी बाकात नही हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. अ‍ेक बात कहु..? तुमने आज पहेली बार हमारे पतीके साथ मीलन कीया हे.. जब तुम लखन भैयाके साथ मीलन करोगी.. तब तुम हमारे इस पतीको भी भुल जाओगी.. ओर जब हमारा विजय बडा होजायेगा.. ओर उनके साथ मीलन करोगी.. तब तुम लखन भैयाको भी भुल जाओगी.. तब तुम सोचो.. जब हमारे स्वामी स्वयंम आयेगे तब तुम सबकी क्या हालत होगी.. सबकी सब इनकी दिवानी होजाओगी..

भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. क्या हमारी सभी ओरते सचमे.. आइ मीन.. क्या हमे सचमे लखन भैयाके साथ.. क्युकी पुनो दीदीने मुजे कुछ ओर भी बताया हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां भावु.. पता हे मुजे.. तुजे पुनोने जो भी बताया हे वो ही सच हे.. हमारे इस पतीके बीजसे सीर्फ मेही तेरी कोखसे जन्म लुगी.. जब सही वक्त आयेगा.. बाकीके संतान हमारे लखन भैयासे ही होगे.. तेरे ओर सृतीके.. सृतीकी दुसरी संतान भी लखनसे पैदा होगी.. ओर तुजे अ‍ेक बात ओर बताती हु.. सृती अभी प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. इस बार सृती यहासे पेटसे होकर गइ हे.. जो इस बातकी अभी उनको भी खबर नही हे..

भावना : (बेडपे लेटते) दीदी.. आप केह रही थी.. भुमी मौसी भी हमारे पतीसे प्रेगनेन्ट हे.. तो क्या इन दोनोके रीलेशनके बारेमे सृतीदीदीको पता नही हे..? क्युकी ये बात ज्यादा दिन छुपाकर तो नही रख सकते..

मंजुला : (थोडी सीरीयस होते) हां भावु.. मुजे भी इस बातकी चीन्ता सता रही हे.. ओर देखा जाये तो सब कुछ अपने समयपे हो रहा हे.. भावु.. हमारा जीवन हमारे हाथोमे हे ही नही.. तो फीर इन सब बातोकी क्यु चीन्ता करना.. सृती थोडे समयके लीये हम सबसे रुठी रहेगी.. तब हमारी पुनो ओर लखन ही उनको सम्हाल लेगे.. ओर तब ही वो लखनके साथ रीलेशनमे आजायेगी.. ओर वो भी बहुत जल्द..

भावना : (गौरसे सुनते) दीदी.. तो फीर अ‍ेक बात बताओ.. लखन भैया इतना सक्षम होगये हे.. तो वो अभीतक लताको प्रेगनेन्ट क्यु नही करपाये..? क्या वो आपके साथ भी रेलेशनमे आयेगे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) नही भावु.. हम तीन ओरते अ‍ैसी हे जो हमे हमारे स्वामी ओर देवुके अलावा ओर कोइ प्रेगनेन्ट नही कर सकता.. इनमे अ‍ेक तो मे हु.. दुसरी हमारी पुनो ओर तीसरी हमारी लता हे.. इसीलीये लखन भैया लताको प्रेगनेन्ट नही करपायेगे.. ओर दुसरी बात..

पुनो भी लखनसे कीतना भी रीलेशन बनाये.. वो भी लखनसे प्रेगनेन्ट नही होगी.. ओर मेरा रीलेशन लखनसे कभी नही होगा.. क्युकी वो मुजे अपनी भाभी नही.. अपनी मां मानता हे.. ओर मे उनकी मां ही हु.. उस हिमाचलमे मे भी मे उनकी मां थी..

भावना : (मुस्कुराते) दीदी.. तो फीर आपके बारेमे ओर लखन भैयाके बारेमे थोडासा बताओनां.. कौन थे आप दोनो..?

मंजुला : (मुस्कुराते) तुमने वो किताब तो पढी हे.. पहोनले हमे..

भावना : (मुस्कुराते) अरे बताओना दीदी.. क्यु सता रही हो..? हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कुराते) ठीक हे.. सुन.. मेही उस देवयानी देवी हु.. सबकी जननी.. मेरा जन्म हमारे स्वामीके अंस से ही होता हे.. फीर हमारे स्वामीसे ही सादी करके उनके अंसको जन्म देती हु.. फीर उसी अंससे फीरसे सादी करके उनके ही वंसको आगे बढाती हु.. जबसे उन हीमाचलमे मेरे पतीका मोक्ष हो गया.. तबसे मे हमेसाके लीये मेरे स्वामीको समर्पीत होगइ थी.. ओर तबसे ये सीलसीला चल रहा हे..

भावना : (मुस्कुराते) दीदी.. कीतना अजीब हे.. अपने ही बेटेको जन्म देकर उनसे सादी करना.. फीर उनके बच्चे पैदा करना.. क्या ये सब आजके जमानेमे पोसीबल हे..? तो फीर लखन भैया..?

भावना : (मुस्कुराते) हां.. सुन.. उस हिमाचलमे बबलु ही मेरा बेटा था.. जो इस जन्ममे लखन बनके आया हे.. तब भी उस राजा बबलुको अपना छोटा भाइ मानता था.. जो इस जन्ममे भी हमारे पतीका भाइ बनके आया हे.. ओर लखन भैया मुजे पहेचान गये हे.. तो वो मेरे साथ कभी रीलेशन नही बनायेगे.. क्युकी ये बात खुद लखनने मुजसे कही हे..

भावना : (मुस्कुराते) दीदी.. तो फीर पुनो दीदी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. हमारी पुनो वही पीयु हे.. जो उस जमानेमे बबलुकी बीवी थी.. वो उनके अगले जन्ममे वहा उस राजाकी कभी दादी हुआ करती थी.. चल अब बहुत होगइ बाते.. तुमतो अ‍ेक अ‍ेक करते सबके बारेमे पुछ रही हो.. भावु.. आजके दिन ओर रात थोडा आराम करले.. फीर कल रातको हमारे पती वापस आयेगे तो हम दोनोको छोडेगे नही.. हें..हें..हें..

कहेते मंजु बहार नीकल गइ.. ओर भावना आराम करने लगी.. तो सहेरमे भी सुबह चार बजे रमा अपने रुममे जाकर सो गइ थी.. तो आज लखन लता रजीया तीनो ही सुबह छे बजे उठकर तैयार होकर नीचे आगये थे.. तो सृती भी अ‍ेक घंटेके बाद यानीकी सात बजे जाग चुकी थी.. ओर अभी बाथरुममे नहा रही थी.. फीर वो भी कंपलीट होकर नीचे आगइ.. तब लखन टीवीपे न्युज देख रहा था.. तो सृती उनके पास जाकर बैठ गइ.. तब लता ओर रजीया चाइ नास्ता बना रही थी.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २११

कहेते मंजु बहार नीकल गइ.. ओर भावना आराम करने लगी.. तो सहेरमे भी सुबह चार बजे रमा अपने रुममे जाकर सो गइ थी.. तो आज लखन लता रजीया तीनो ही सुबह छे बजे उठकर तैयार होकर नीचे आगये थे.. तो सृती भी अ‍ेक घंटेके बाद यानीकी सात बजे जाग चुकी थी.. ओर अभी बाथरुममे नहा रही थी.. फीर वो भी कंपलीट होकर नीचे आगइ.. तब लखन टीवीपे न्युज देख रहा था.. तो सृती उनके पास जाकर बैठ गइ.. तब लता ओर रजीया चाइ नास्ता बना रही थी.. तभी.... अब आगे

सृती : (मुस्कुराते) लखन भैया गुड मोर्नीग.. कैसे हो आप..?

लखन : (सामने देखे बीना) गुड मोर्नीग.. बस ठीक हु..

सृती : (सरमाते धीरेसे) लखन भैया.. प्लीज.. हमसे बात कीजीये.. इसमे मेरी क्या गलती हे..? मैने आपको थोडीना कुछ कहा हे..? जो आप मुजसे भी बात नही करते..

लखन : (टीवीका वोल्युम कम करते) भाभी.. मैने कब कहा गलती आपकी हे.. मैने कीसीको कुछ कहा..?

सृती : (धीरेसे मुस्कुराते) तो फीर आप मुजसे बात क्यु नही करते..? बात तो छोडो.. आपतो मेरे सामने भी नही देखते..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. मे कैसे आपसे नजरे मीलाउ..? गलती आप दोनोकी नही मेरी थी.. क्युकी मे ही अपनी मर्यादा भुल गया था.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे आप दोनोके साथ अ‍ैसा नही करना चाहीये था.. मे पुनो दीदीसे मीलुगा तब उनकी भी माफी मांग लुगा.. अब मुजे अपनी हदका पता चल गया हे.. की मुजे कीस हद तक रहेना हे..

सृती : (धीरेसे) लखन भैया.. प्लीज.. मत करो अ‍ैसी बाते.. आप हमारे साथ नही बोलते तो हमे अच्छा नही लगता.. पहेले आप कैसे हमारी मस्तीया करते थे.. हमारे साथ फ्लर्ट भी करते थे.. तब भी हमने कोइ अ‍ेतराज नही कीया.. मे जीतने दिन भी वहा रही.. आपके साथ मस्तीया करते बहुत मजा आया.. तो फीर इतनीसी बातके लीये कोइ बोलना बंध करदेता हे क्या..?

लखन : (आंख गीली करते) भाभी.. तब आप भी तो वहा साथ थी.. जब कोइ दिलसे ज्यादा करीब होते हेनां..? ओर चोट भी उसीसे मीलती हेनां..? तो दुख बहुत ज्यादा होता हे.. मानाकी मे बहेक गया था.. लेकीन गलती सीर्फ अ‍ेक तरफा तो नही होती..? जब मे आप लोगोके साथ मस्तीया ओर फ्लर्ट कर रहा था.. तब भी आप मुजे रोक सकती थी.. तो बात इतनी आगे कभी नही बढती.. ओर मे सबसे ज्यादा करीब आप दोनोसे ही था..

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सृती : (मुस्कुराते) यार सोरी.. आपकी बात सही हे.. लेकीन मैने कहा अ‍ैतराज कीया हे..? देवर भाभीमे इतनी मस्तीया तो होती ही रहेती हे.. ओर मैने तो सुना हे.. जब आप दोनो स्कुलमे पढते थे.. तब तो बहुत सारी मस्तीया करते थे.. ओर खुलकर सभी तराहकी बाते भी करते थे.. ओर आपतो पुनो दीदीको प्यार भी करते थेनां..? तो फीर उनसे इतनी नाराजगी क्यु..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. वही तो.. हम जब स्कुलमे थे.. तब तो हम दोनो सभी मर्यादा लांघते चर्चा करते थे.. तब तो उसने कोइ अ‍ेतराज नही कीया..? तब वो अ‍ैसी चर्चा करनेसे मना कर देती.. मे कहा उनके साथ जबरदस्ती कर रहा था.. उनके अंडर गारमेन्ट तक मेही लाकर देता था.. तब तो उसे मुजे कभी नही रोका.. उनको भी पता था की मेरे दिलमे उनके लीये क्या फीलींग्स हे.. उनको भी पता थाकी मे उसे प्यार करने लगा हु.. तब तो उनको मुजे रोकना चाहीयेनां..? तो फीर..

सृती : (पास आते धीरेसे हाथ थामते) लखन भैया.. प्लीज.. मुजे पता हे गलती पुनोदीदी की थी.. आप अ‍ेक बार उसे माफ करदो.. उनको भी अपनी गलतीका अहेसास फौरन होगया था.. वो मेरे पास खुब रोइ हे.. अब तो आपसे बात करनेसे भी डर रही हे.. प्लीज.. आप अ‍ेक बार उनके साथ फोनपे बात करलो.. वरना वो मन मे ही घुटती रहेगी.. वो वहा भी आंसु बहा रही हे.. मेरी कल रात ही उनसे बात हुइ हे.. वो वहा खुस नही हे.. वो आपसे बात करना चाहती हे..

लखन : (आंख पोछते) नही भाभी.. अब कीसीके साथ कुछ भी बात करनेका मन नही हो रहा.. आइ अ‍ेम सोरी.. मे ही पागल था.. जो उसे भाभी मानने लगा था.. ओर उनकी मस्तीया करने लगा था.. उसमे मुजे बता दीया हे.. की वो मेरी भाभी नही मेरी बहेन ही हे.. अब उसे आइन्दा कभी भाभी नही कहुगा.. ओर अब भाइने भी मुजे बहुत सारी जीम्वेवारी दी हे.. तो अब उसीपे ध्यान देना हे..

सृती : (अ‍ेक नजरसे देखते) ठीक हे.. तो फीर मे उसे आपकी बात बता दुगी.. क्युकी वो आपसे कोइ ओर ही बात सेर करना चाहती थी.. सायद धिरेनके बारेमे.. रात अ‍ेक बजे उनका फोन आया था.. कहेती थी बहुत जरुरी बात हे.. अब आपकी मरजी.. अगर उनसे बात करना चाहो तो उनको फोन करलेना.. फीर मुजे मत कहेना मैने आपको बताया नही था.. सायद धिरेनके बारेमे आपको कोइ इन्फोर्मेशन देना चाहती थी..

लखन : (चीन्तासे सामने देखते) भाभी.. वो कोइ मुसीबतमे तो नही..? आपकी तो उनके साथ बहुत अच्छी पटती हे.. तो फीर आपको नही बतायाकी वो धिरेनके बारेमे क्या बात करना चाहती हे.. क्युकी मुजे पता हे.. की आगे जाकर आप चारोको ही सब कुछ सम्हालना हे.. तो फीर आपसे ही बात कर लेती..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) आपको कैसे पता.. की आगे जाकर हम चारो सबकुछ सम्हालने वाली हे.. क्या आपकी मंजुदीदीसे बात हुइ हे..?

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) हां भाभी.. यहा आनेसे पहेले अगली रातमे ही भाभी मांने मुजे सब कुछ बता दीया था.. वो चारो आप पुनो दीदी.. भावना भाभी ओर लता हेनां..?

सृती : (आस्चर्यसे देखते) हां.. लेकीन अ‍ेक पांचवा नाम आप भुल गये.. जो हमारी मदद करेगे.. क्या उनका नाम नही लोगे..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. मैने मददके लीये कभी मना नही कीया.. उसने जो काम मुजे सोंपा हे मे कर दुगा.. उनको केह दीजीयेगा..

सृती : (सरमाके मुस्कुराते) क्या सीर्फ यही अ‍ेक काम करना हे..? आप पुनोदीदीका कोइ ओर काम.. मतलब अगर आपको दुसरा काम सोंपा जायेगा.. तो नही करोगे..? लखन भैया.. मत भुलो.. वो हमारे खीलाफ बहुत बडी साजीस कर रही हे.. आगे जाकर हमे विजयके लीये.. फीर उस राजाके लीये भी तो काम करना हे.. ओर ये सब उन्हीके लीये तो हो रहा हे.. अगर आप पुनो दीदीसे बात नही करोगे.. तो कैसे चलेगा..? हो सकता हे.. वो धिरेनकी वजहसे कोइ मुसीबतमे भी हो..

लखन : (चीन्ताके भावसे) भाभी.. प्लीज.. अ‍ेक बार उनसे बात कर लीजीये.. अगर वो कोइ मुसीबतमे हे.. तो मुजे बता दीजीयेगा.. मे उनके लीये सब कुछ करुगा.. अपनी जान भी दे दुगा.. ओर मे काम करनेके लीये कहा मना कर रहा हु..? बस.. इतना केह रहा हु.. की उनको जो भी काम हो.. आपको बतादे.. आप मुजे कहेना मे सब काम कर दुगा..

सृती : (मुस्कुराते) मतलब.. आप पुनो दीदीसे डायरेक्ट बात करना नही चाहते.. ठीक हे.. मे ही उनसे बात करलुगी.. क्या पुनो दीदीसे बहुत प्यार करते हेनां..? हंम..? आज मैने देखली आपकी चाहत..

लखन : (आंखसे आंसु छलक गये) भाभी.. वो मेरा पहेला प्यार थी.. आज भी हे.. ओर आगे भी रहेगी.. मैने उनको अपने दिलसे नीकालनेकी बहुत कोसीस की.. लेकीन मे नही नीकाल पाया.. तभी इतनी तकलीफ होती हे.. मे पुनो दीदीसे आज भी बहुत प्यार करता हु.. बस.. अब उनका सामना नही कर पाउगा..

सृती : (मुस्कुराते) लखन भैया.. आपका प्यार सच्चा हे.. लगता हे वो भी आपको चाहने लगी हे.. तभी तो आपके लीये इतने आंसु बहाती हे.. मुजे लगता हे.. आपको अ‍ेक बार पुनो दीदीसे बात करलेनी चाहीये.. मुजे यकीन हे आपको अपना प्यार जरुर मील जायेगा..

लखन : (आंसु पोछते) नही भाभी.. अब वो भाइकी अमानत हे.. इस जन्ममे उनको कभी नही पा सकुगा.. अब मे मरते दम तक उनको अपनी बहेन ही मानुगा.. ओर अगले जन्ममे फीर उनका इन्तजार करुगा.. सीर्फ अगले जन्ममे नही.. मे हर जन्ममे उनका इन्तजार करता रहुगा..

सृती : (मुस्कुराते) क्यु..? आपकी तो मंजु दीदीसे सभी बात हुइ हेनां..? मंजुने ये नही कहा की आपको कुछ जीम्वेवारी भी मीली हे.. आपके भाइ ओर भाभीमांने मीलकर कुछ फैसले भी लीये हे.. आपको वो अधीकार भी दीये हे.. जो सीर्फ अ‍ेक पतीका होता हे.. वो अधीकार.. जो आजके जमानेमे पोसीबल नही हे.. इसीको जरीया बनाकर आप अपना पहेला प्यार पा सकते हो.. अगले जन्म तक इन्तजार करनेकी क्या जरुरत हे..?

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) भाभी.. भाभीमांने ये भी कहा हे.. जो भी हो.. अ‍ेक दुसरेकी सहमतीसे हो.. जबरदस्ती कुछ भी नही होगा.. ओर मेने जबरदस्ती करके देख भी लीया.. ओर वैसे भी मेरा मानना हे.. जो प्यार पानेकी चाहत रखता हेनां.. जब उसे अपना वोही प्यार मील जाता हे तो वो प्यारकी अहेमीतको खो देता हे.. ओर मे मेरे प्यारकी अहेमीतको खोना नही चाहता.. मे उनसे दुर रेहकर भी मेरे दिलके करीब रखना चाहता हु.. वो हमेसा मेरे दिलमे रहेगी.. मेरे दिलसे उनको कोइ छीन नही सकता..

सृती : (मुस्कुराते) देवरजी.. आपने तो बहुत गहेरी बात कहेदी.. आइ अ‍ेम इम्प्रेस.. मतलब आप पुनोको प्यार तो करते हो.. लेकीन उसे पाना नही चाहते.. ठीक हे.. मे पुनो दीदीसे बात करके आपके दिलकी बात बता दुगी.. फीर वो क्या कहेती हे वो भी मे आपको बता दुगी.. देखना वो आपकी बाते सुनकर बहुत रोयेगी.. क्युकी वो भी आपको चाहने लगी हे.. कही अ‍ैसा नाहो वो आपकी जीदकी वजहसे हमेसाके लीये आपकी जींदगीसे दुर होजाये.. अ‍ेक बार फीर सोचलो..

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. अ‍ैसी नोबत कभी नही आयेगी.. इनसे पहेले मे इस दुनीयाको छोड दुगा.. भाभी.. बस.. कुछ दिन उनसे दुर रहेना चाहता हु.. ओर कुछ नही..

सृती : (हसते) डीक हे देवरजी.. कमसे कम मुजसे तो बात करलीया करो.. हमारे बीच कहा कुछ अनबन हुइ हे..? मेने कहा आपको कुछ कहा हे..? ओर अब तो मे हमेसाके लीये यही रहेने वाली हु.. आपके साथ..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. वैसे भी मे आपसे नाराज नही हु.. तो आप दिलसे ये बात नीकाल दीजीये.. आप आज भी मेरी चहीती भाभी हे.. हें..हें..हें..

सृती : (खुसीसे हाथ मीलाते गाल खीचते) अरे.. ये हुइना बात..? मेरे प्यारे क्युट देवर.. हें..हें..हें..

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लता : (हाथ पोछते पास आते) अरे.. देवर भोजाइ इधर ही बैठे हो..? भाभीको बडा प्यार आ रहा हे आपे देवरपे.. हें..हें..हें.. चलीये चाइ नास्ता रेडी हे.. मे भाभी ओर नीलुको जगाकर आती हु.. देखो कीतने बज गये.. दोनो महारानी अभी तक सोये पडी हे..

लखन ओर सृती अ‍ेक दुसरेकी ओर खुस होते हस रहे थे.. लेकीन उस लखन पुनम वाले हादसेके बाद आज पहेली बार सृती ओर लखनने इतनी बाते की थी.. ओर बीचमे लताके आनेकी वजहसे सृतीको अच्छा नही लगा.. फीर दोनो चाइ नास्ताके लीये खडे होगये.. तब रमा ओर नीलम भी कंपलीट होकर अपने अपने रुमसे बहार नीकली.. ओर सब लोग चाइ नास्ता करने बैठ गये..
 
रजीया अब इस घरकी नोकरानी नही लखनकी बीवी थी.. तो लताने रजीयाको भी अपने पास बीठा दीया.. तो रजीया बहुत ही सरमा रही थी.. आज लताके साथ साथ उसने भी अपनी मांग भरी हुइ थी.. दोनो ही लखनके पास बैठ गइ.. तो सृती रमा ओर नीलम उनके सामने बैठी थी.. तब रमा बहुत ही कामुक तरीकेसे लखनकी ओर देखते मुस्कुरा रही थी.. तो नीलम भी रमाकी नजरको पहेचानते सरमा गइ.. तभी..

लता : (मुस्कुराते) लखन.. आज आप नीलुको इनके स्कुलपे छोडदो.. ओर वहाकी प्रीन्सीपालसे भी मील लेना.. बहुत दिन हुअ‍े स्कुल नही गइ.. ओर आपकी मेडमको मील लेना.. ओर बात करलेना की वो कब हमारे घरपे आ रही हे.. देखे तो सही मेरी सौतन कैसी हे.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते धीरेसे) लता.. वो उनकी मां की वजहसे यहा नही आपायेगी.. हम सबको उनके घरपे खानेके लीये बुलाया हे.. ताकी वो भी अपनी मां से आप सबको मीलवा सके..

लता : (खुस होते) ठीक हे.. यहाका सब काम नीपट जायेगा तब अ‍ेक दिन हम उनसे भी मील लेगे.. क्यु सृती दीदी..?

सृती : (लखनकी ओर तीरछी नजरोसे मुस्कुराते) हां.. हम भीतो देखे.. हमारी देवरानी कैसी हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. मे उनसे मीलवा दुगा.. (लताकी ओर देखते) लता.. हमारी जीप तो खेतोके लीये हे.. ओर भाइने मुजे यहाके लीये अ‍ेक नइ कार लेनेको कहा हे.. तो तुम ओर भाभी डीसाइड कर लेना.. हमे कौनसी कार लेनी हे.. क्युकी अब हम घरपे जायेगे तो जीपको छही छोडदेना हे..

सृती : (मुस्कुराते) क्यु..? यहा मेरी कार तो हे.. तो फीर दुसरी कारका खर्चा क्यु करना..? अगर लेना हे तो अ‍ेक स्कुटर लेलो.. ओर लताको भी सीखादो.. यहा सहेरके लीये ठीक रहेगा.. फीर हम तीनो ही इनमे अडजेस्ट करलेगे.. क्यु लता..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) नही भाभी.. ये कार तो आपकी हे.. आपको क्लीनीकपे भी जाना होता हे.. ओर कुछ दिनमे भुमी बुआ भीतो आजायेगी.. तो आप उनके साथ अपने घरपे चली जायेगी.. तो हम यहाके लीये नइ कार ले लेगे..

सृती : (थोडी मायुस होते) ठीक हे.. जैसे आपकी मरजी.. वैसे कीसने कहा.. की मे अपने घरपे चली जाउगी..? अब तो वही घर मेरा ससुराल हे.. मे अब कही जाने वाली नही.. यही मेरे देवरके पास ही रहुगी.. हां.. अगर आप लोग मुजे अभी भी पराइ समजते हो.. मे मम्मीके साथ चली जाउगी.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

लखन : (थोडा गुस्सेसे) भाभी.. आपको कीसने कहा ये घर आपका नही हे..? अब तो आप यही रहेगी.. ओर ये घरपे पहेला हक आपहीका हे.. अब दुबारा अ‍ैसी बात कभी मत कहीयेगा.. वरना मुजसे बुरा कोइ नही होगा.. समजी..? बात करती हे..

सृती : (हसते) हां ये हुइना बात.. तो चलीये क्या आप मुजे क्लीनीकपे छोडने नही आ सकते..? मेने तो सोचा था.. मेरा देवर अब यही हे.. तो मुजे क्लीनीकपे छोडने लेने आयेगा.. ओर मेरी खुब सेवा करेगा.. तो मुजे कारकी क्या जरुरत हे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते मुस्कुराते) अरे.. नही नही दीदी.. ये जरुर आयेगे.. आप अ‍ैसी बाते मत कीजीये.. आपकी बात सही हे.. हम स्कुटर ही लेगे.. हें..हें..हें..

लखन : (सामने देखते) भाभी.. सोरी.. ठीक हे.. जैसा आप कहो.. आप जब चाहो मे आपको छोडने लेने आजाउगा.. बस..? आप पराइ वाली बात कभी मत करना.. वरना मुजसे बुरा कोइ नही होगा.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे.. नही करुगी.. तो फीर मे साम छे बजे चली आउगी.. फीर हम तीनो स्कुटर देखने जायेगे.. ओर पंसद करके लेआयेगे..

लता : (हसते) अरे दीदी.. आप अपने देवरके साथ ही देखने चली जाना.. उनमे मुजे कहा पता चलेगा.. तब तक मे ओर भाभी कुछ सामान भी सेट कर देगे.. नीलु.. तुम चाइ नास्ता करके तेरी स्कुलकी तैयारीया करले.. फीर तेरे जीजु तुजे छोडने ओर लेने आजायेगे.. क्या टाइम हे तेरी स्कुलका..?

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) जी.. वो.. दोपहोर.. १२ से साम ५ बजे तक..

सृती : (मनमे खुस होते मुस्कुराते) तो देवरजी.. मेतो सुबह नौ बजे क्लीनीकपे जाती हु.. ओर साम आठ बजे वापस आती हु.. हम दोनोका टाइम अ‍ेडजेस्ट होजायेगा.. हें..हें..हें.. अब सामको तैयार रहीयो.. हम दोनो ६ बजे स्कुटर लेने जा रहे हे.. आज मे छे बजे चली आउगी..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) जी भाभी.. नीलुको स्कुलसे वापस लाउगा तब हम दोनो चलेगे..

इतना सुनते ही सृती मन ही मन खुस होगइ.. क्युकी इनके बीच ओर लखनके बीच जो दुरीया होगइ थी.. वो खतम हो गइ थी.. तो दुसरी ओर नीलम भी मनमे खुस होने लगी.. क्युकी वो धिरेनको मीलना चाहती थी.. ओर धिरेनका कोन्टेक्ट कैसे करना हे.. उनकी भी नीलमने तैयारीया करली थी.. तो दुसरी ओर नीलम लखनके साथ जा रही थी.. तो रमा भी इस उमीदमे मन ही मन खुस हो रही थी..

क्युकी वो चाहती थी की इसी बहाने लखन ओर नीलम दोनोके बीच नजदीकीया बढे.. फीर वो भी लखनको अकेले मे मीलकर उनके साथ बहुत कुछ करना चाहती थी.. जीसके लीये वो कामके बहाने सहेरमे आइ थी.. सबने भाइ नास्ता करलीया.. तो सृती अपने क्लीनीकपे जानेकी तैयारीया करने लगी.. तो रजीया घरका काम समेटने लगी.. तब रमा ओर लता घरका सामान होलमे रखकर खोलने लगी.. आज वो दोनो धीरे धीरे करते सब सामानको सेट कर देना चाहती थी..
 
तो दुसरी ओर देवायत कबीलेपे पहोंच गया.. तो जमीलाके साथ साथ कबीलेके लोग भी बहुत खुस हो गये.. ओर वहाकी बुढी माइ दोनोकी सादीकी तैयारीया करने लगी.. फीर गांवकी ओरतोने जमीलाको वहाकी दुल्हनकी तराह सजा दीया.. तो सभी जेन्ट्सने वहाके पारंपरीक पोसाकमे देवायतको भी सजाकर दुल्हा बना दीया.. फीर सब लोग सादीके लीये वही मंदिरमे चले गये.. जहा उन्होने चंदासे ओर चारु नीशा ओर भुमीकासे से सादी की थी..

सबलोग मंदिरमे अ‍ेकठे हो गये.. ओर बुढी माइ देवायत ओर जमीलाको साथ बीठाकर पुजा करवाने लगी.. तभी अचानक अंदरके बीलसे वोही लंबा सांप नीकला.. जो पहेले भी देवायत देख चुका था.. ओर कबीलेके लोग उसे वही भगवानका रुप मानते थे.. ओर साप आकर वही शीवलींगपे आकर अपने फन फैलाकर बैठ गया.. तो कबीलेके लोग थोडा दुर होगये.. ओर बैठकर आपना सीस जुकाते उसे प्रणाम करने लगे..

बुढीमाइ देवायत ओर जमीला उनको आंख बंध करते प्रणाम करने लगे तो पीछे कबीलेके भी सबलोग आंख बंध करते दर्शन करने लगे.. तब कीसीको पता नही थाकी सांप सरकते देवायतकी गोदमे कंडली लगाकर बैठ गया.. जैसे ही सबने आंख खोली तो सापको देवायतकी गोदमे बैठा पाया.. तो सबलोग डरके थोडा दुर हो गये.. फीर थोठी देर बैठकर सांप अपनी जगाहपे बीलमे चला गया.. तो सबलोग देवायतको प्रवीत्र मानते उनके पैरोमे जुकने लगे..

फीर वहा देवायत ओर जमीलाकी उन्हीके रीती रीवाजसे वो बुढीमाइने सादी करवाइ.. फीर सबलोग वापस कबीलेपे आगये.. तब हरीयाने वहाके लोगोसे मीलकर बढीया खाना बनाया.. फीर साम ढलते ही नाच गानका प्रोग्राम सुरु हुआ.. इनसे पहेले देवायतने जमीलाको वहाकी रानी घोसीत कीया.. तो सभी लोगोने हर्षोलासके साथ देवायत ओर जमीलाको वहाके राजा रानीके रुपमे स्वीकार करते अपनी अपनी ओर से उपहार दीया..

जब वहा नाच गानका कार्यक्रम सुरु हुआ तो उनके साथ देवायत ओर जमील भी कुछ देरके लीये सबके साथ नाचे.. फीर मालती रेणु ओर दुसरी ओरतोने दोनोको अ‍ेक नइ ओर बडी कुटीयामे भेज दीया.. जीसे वहाके लोगोने अपने नये राजा रानीके लीये बनाइ थी.. फीर पुरी रात सबलोग नाच गान करते रहे.. ओर देवायत जमीलाके साथ अपनी सुहागरात मनाता रहा.. पुरी रात वो जमीलाको जमकर चोदता रहा..

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चोद चोदके जमीलाकी हालत खराब करदी.. हांलाकी उनके पेटमे देवायतका बच्चा पल रहा था.. तो देवायत बहुत ध्यान रखते जमीलाको चोद रहा था.. तब जमीला थकके चकना चुर होचुकी थी.. ओर सुबह चार बजे जमीला लगभग बेहोसीकी हालतमे चली गइ थी.. तब मालती सबकी नजर बचाते सुबह दोनोकी कुटीयाके पास चली गइ.. ओर अंदर जांकते देखने लगी.. तब जमीला घोडे बेचकर सो रही थी..

तो मालती धीरेसे दरवाजा खोलकर अंदर चली गइ.. ओर नंगी होकर चुपचाप देवायतके पास लेटकर उनको चुमने लगे.. तो देवायत मालतीको देखकर हसने लगा.. ओर देर ना करते उनके उपर चड गया.. फीर देवायतने मालतीको भी दो बार जमकर चोद लीया.. फीर मालती अपने कपडे पहेनकर देवायतके होठोको चुमकर वापस चली गइ.. बहार गांवमे भी सब लोग कुछ देरके लीये सो गये.. ओर अ‍ैसेही रात बीत गइ..

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तो दुसरी ओर देवायतके गांवमे दिनमे सबकुछ रुटीन हुआ.. अ‍ेक तरफ श्रीधरके घरपे सादीकी तैयारीया चल रही थी.. तो दुसरी ओर बंसीके घरपे दुसरे गांवके लोग अपना सोक व्यक्त करने आ रहे थे.. इस वक्त सांती बरखा बंसी ओर जया सब लोग सोकमे थे.. जैसे भी हो.. सामत जयाका पती था.. इसकी वजहसे जयाका मुड भी ठीक नही था.. तो इस हालमे कुछ दिनके लीये रमेशने भी जयासे दुर रहेना उचीत समजा..

यहा कबीलेपे भी सुबह सबलोग देरसे उठे.. फीर सब लोग अ‍ेकठे हो गये.. तब देवायत ओर जमीला वहाके मुखीयाके पोसाकमे आगये.. फीर देवायतने वहाकी सारी जीम्वेवारी जमीलाको सोंपदी.. ओर उनके साथ रहेने लीये देवायतने उन बुढी माइको बोल दीया.. फीर देवायतने कबीोेके लोगोको होने वाले बदलावको लेकर बातकी.. इसमे उनके बेटे ओर पोतेको लेकर गांवकी कीतनी जीम्वेवारी हे.. उनके बारेमे भी बात करली.. जीसे सुनकर वहाके लोग ओर खुस होगये.. फीर..

देवायत : (मुस्कुराते) माइ.. अब आपको जमीलाके साथ रहेना हे.. ओर मेरी पत्नीने कहा हे.. आप जमीलाको वो सब अच्छी तराह सीखादे.. जो आप जानती हे..

बुडी माइ : (हसते) अच्छा.. तो रानी साहीबाको सब पता हे.. ठीक हे.. इस बारेमे हमारे गुरुजीकी भी याज्ञा हे.. मे हाल मे ही आश्रमपे गइ थी.. तब गुरु बाबाने मुजे सबकुछ बता दीया हे.. आप फीकर मत कीजीये.. अब जमीला यहाकी रानी होगइ हे.. उनके देखभालकी सब जीम्वेवारी मेरी.. मे उसे सब कुछ सीखा दुगी..

फीर देवायत बुडी माइ ओर जमीलाको बहुत सारे पैसे भी देता हे.. ओर गांजके लोगोको भी बहुत सारे उपहार देता हे.. तो सब लोग बहुत खुस होगये.. फीर देवायत दो पहोरके भोजनके बाद हरीया ओर उनकी दोनो बीवीया मालती ओर रेणुको लेकर वहासे नीकल जाता हे.. ओर वापस गांवमे आकर सीधा खेतोपे चला जाता हे.. तो मालती देवायतकी ओर कातीलाना मुस्कुराते रेणुको लेकर अपने रुममे चली जाती हे..
 
तो दुसरी ओर सुबह धिरेन जब उठा तो रुममे कोइ नही था.. उनका सर दर्द कर रहा था.. पुनम जल्दीसे उठकर तैयार होकर नीचे चली गइ थी.. तो धिरेन अपना सुबहका कार्यक्रम नीपटाने लगा.. तब उसे रातकी सभी घटना याद आने लगी.. तो वो सर्मीन्दगी महेसुस करने लगा.. क्युकी पुरी रात प्यार करनेकी बडी बडी बाते करते ओर कामोतेजक गोली खानेके बावजुद वो पनुमको अ‍ेक बारभी ठीकसे नही चोद पाया..

ओर उस वजहसे उनको पुनमकी खरी खोटी सुननी पडी वो अलग.. उसे ये भी पता नही चलाकी वो इतनी जल्दीसे कैसे सोगया..? धिरेन नहाते नहाते सोचने लगा.. की वो नीलम ओर भीमाभाइकी बीवी पायल भाभीको कैसे कामोतेजककी गोली खाकर अच्छेसे चोद लेता था.. तो फीर वो पुनमको क्यु नही चोद पाता..? यही सब सोचकर वो नहाकर बहार नीकला तो पुनम उनके रुममे आचुकी थी..

ओर अलमारीसे उनके कपडे नीकालकर बेडपे रख रही थी.. तो धिरेनने मुस्कुराते उनके पीछे आगया.. ओर पुनमको पीछेसे अपनी बाहोमे भर लीया.. तो पुनम थोडे गुसेसे उनकी ओर देखते घुरने लगी.. ओर धिरेनकी बाहोसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. तो धिरेनने उनको मुस्कुराते थोडा कसके पकडलीया.. ओर उनके होठोको जबरदस्तीसे चुम लीया.. तब पुनम कोइ प्रतीक्रिया दिये बगैर अ‍ैसेही खडी रही.. तभी..

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धिरेन : (मुस्कुराते) पुनो.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे पता हे.. तुम रातकी बातोसे अभी तक मुजसे नाराज हो..

पुनम : (थोडी सख्तीसे) धिरेन.. आपको सब पता हे.. तो फीर आप अपना इलाज क्यु नही करवाते..? मेरी भी कुछ तम्मनाये होती हे.. क्या आप मेरी फीलींग्सको कभी नही समजोगे..?

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धिरेन : (थोडा नाराज होते) यार मे ठीकसे तो करता हु.. पता नही तुजे देखते ही सब जल्दीसे होजाता हे.. तो मे क्या करु..? फीर भी तुम कहेती हो तो आज मे कीसी डोक्टरको दीखाकर आजाउगा.. बस..?

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. धिरेन.. पता नही.. आपने मुजे प्रेगनेन्ट कैसे करदीया.. आपको पता हे..? मेरी तम्मना क्या हे..? मुजे बीस्तरमे लंबी रेसका घोडा चाहीये.. जो मुजे सुबह तक प्यार करे..

धिरेन : (सामने देखते थोडी जल्द बाजीमे) पुनो.. मे लंबी रेसका घोडा ही हु.. यकीन नही हे.. तो पुछलो..

पुनम : (थोडा चोंकनेका नाटक करते) पुछलु..? कीसे..?

धिरेन : (गलतीका अहेसास होते ही बातको सम्हालते) वो.. वो.. मेरा मतलब.. आज डोक्टरको दीखा दुगा.. फीर उनको पुछ लेना.. की मे लंबी रेसका घोडा होगया हु.. की नही.. हें..हें..हें..

पुनम : (मनमे हसते बहारकी ओर जाते ) ठीक हे.. आप तैयार होकर नीचे आजाइअ‍े.. ओर हां.. अब अपना इलाज करवाके ही मुजे हाथ लगाइअ‍ेगा.. अब मे अ‍ैसे प्यासी रहेना नही चाहती.. समजे..?

धिरेन : (थोडा गुस्सेसे) पुनो.. ये क्या बात हुइ..? थोडे दिन वहा रही तो.. तुजे तो बहुत आग लगी हे..

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पुनम : (पीछे मुडकर थोडा रुकते) हां धिरेन.. मुजमे बहुत आग हे.. ओर मेरी आग बुजाना आपका फर्ज हे.. धिरेन.. ये सब मुजसे सादी करनेसे पहेले ही सोच लेना चाहीये था.. क्या आप मुजसे जगडा करना चाहते हे..? तो बता दीजीये.. सुबह सुबह मेरा मुड मत खराब कीजीये.. ओर हां.. मे ओर दया बहेन आपके जानेके बाद हमारे गांव जा रही हे.. वो सामतभाइके घरपे.. सोक मनाने.. ओर हम दोनो बससे वापस आजायेगी.. अगर हमे आनेमे देर होजाये तो चीन्ता मत करना.. हमे बडे भैया छोड जायेगे..

धिरेन : (मनमे बडबडाते) कमीनी कहीकी.. जब देखो बडे भैया ओर छोटे भैयाकी मालाही जपती हे.. अगर वो इतने ही प्यारे हे तो मुजसे सादी क्युकी..? पुरी जींदगी उनके पास रहेकर उनसे ही चुदवाती.. जानता हु तेरे बढे भैयाको.. अ‍ेक नंबरका अ‍ैयास हे वो.. ठरकी कहीका..

पता नही मेरी मां पे क्या जादु करदीया.. उनको फसाकर सादी करके लेगया.. ओर वो भी कमीनी चुदकढ नीकली.. अगर लंड खानेका इतना ही सौक था तो मुजसे कहेती.. घरपे इतना जवान लडकेको छोडके बहार वालोसे चुदवाती थी.. घरपे सीर्फ हम दोनो ही तो थे.. कीसीको क्या पता चलता..?

पुनम : (मनकी बात जानकर गुससे देखते) कुछ कहा आपने..? मनमे क्या बडबडाते हो.. जो कहेना हे साफ साफ कहो..

धिरेन : (थोडा जेंपते) नही तो.. कुछ नही.. तु जा यार.. मे आता हु..

कहा तो पुनम गुस्सेके साथ बहार चली गइ.. तो धिरेन उनको मुह फाडकर देखता ही रहा.. क्युकी आज उन्होने पहेली बार पुनमको इतने गुस्सेमे देखा था.. तो धिरेनका मुड भी थोडा खराब होगया.. ओर वो जल्दीसे अपने कपडे पहेनकर नीचे आगया.. तो देखा घरपे भीमाकी नइ बीवी पायल भाभी आइ हुइ थी.. जो वो ओर पुनम सोफेपे बैठकर हस हसके बाते कर रही थी.. तो धिरेन उनको देखकर खुस होगया.. तभी..

पायल : (कातीलाना नजरोसे मुस्कुराते) अरे देवरजी.. आगये आप..? बेंन्कपे जानेकी तैयारीया हो रही हे क्या..? आपने बताया नही मेरी देवरानी आगइ हे.. देखो.. कीतनी खुबसुरुरत हे.. अगर पता होताकी ये आगइ हे.. मे तो इनको मीलने पहेले ही आजाती.. हें..हें..हें..

धिरेन : (मुस्कुराकर पास बैठते) अरे भाभी.. मुजे भी कहा पता था.. की ये इतनी खुबसुरत हे.. वरना मे इनको उनके मायके थोडीना जाने देता.. हें..हें..हें.. ओर खुबसुरत तो आप भी कम नही हो.. तभी तो भीमाभाइ आपके पीछे इतना पागल हे.. क्यु पुनो..? हें..हें..हें..

पायल : (सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) चलो.. हटो बदमास.. बीवीके सामने ही मस्तीया करते हो..? देवरानीजी.. इनकी जुबान बहुत चलती हे.. जरा इनको सम्हालके रखीयेगा.. कही हाथसे ना नीकल जाये.. आप इसे मार मारके सुधारदो.. हें..हें..हें.. बहुत बीगड गये हे..

पुनम : (धिरेनकी ओर मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. इनकी सीर्फ जुबान ही चलती हे.. बाकी कुछ नही.. मतलब.. ये अ‍ैसे नही हे.. बहुत कम बोलते हे.. भाभी.. थेन्क्स.. आपने धिरेनका इतने दिनो तक खयाल रखा.. वरना ये तो वहा खानेके लीये आते भी नही थे.. तो इनकी बहुत चीन्ता हो रही थी..

धिरेन : (मुस्कुराते सामने देखते मनमे) कमीनी.. कीतना जुठ बोलती हे..

पायल : (धिरेनकी ओर मुस्कुराते) देवरानीजी.. मेरे होते हुअ‍े आपको इनकी चीन्ता करनेकी जरुरत नही हे.. मेरे अ‍ेक लौते देवर जो हे.. इनके भाइने मुजे इनका अच्छेसे खयाल रखनेको कहा हे.. क्यु देवरजी..?

धिरेन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. अगर खयाल रखने वाली आप जैसी भाभी हे.. तो मुजे चीन्ता करनेकी क्या जरुरत हे..? आपने मेरा बहुत अच्छेसे खयाल रखा.. चलीये चाइ नास्ता रेडी हे.. आप भी बैठ जाइअ‍े..

पायल : (मुस्कुराते) अरे नही.. मे चाइ नास्ता करके ही आइ हु.. ये तो देवरानीजीको मीलनेके लीये आइ थी.. अब आप लोग चाइ नास्ता करलीजीये मे चली.. अब तो आना जाना लगाही रहेगा.. हें..हें..हें..

कहेते पायल धिरेनकी ओर कातील मुस्कान करते नीकलने लगी.. तभी धिरेनने पुनमकी नजर बचाते उनको जटसे आंख मारदी.. तो पायल बहुत ही सरमा गइ.. ओर जटसे नीकल गइ.. तब पुनम धिरेनकी ओर नजर गडाये बैठी थी.. जब धिरेनने पुनमकी ओर देखा तब पुनम सीर्फ उनको ही देख रही थी.. वो भी थोडा गुस्सेसे.. जीसे देखकर धिरेन थोडा जेंप गया.. ओर डाइनींग टेबलपे जाकर बैठ गया.. तो पुनम भी यहा आकर बैठ गइ..

पुनम : (धीरेसे) भाभीके साथ तो बडा फ्लर्ट कर रहे थे..? कही इनके साथ कुछ चकर बकर तो नही..?

धिरेन : (थोडा जेंपते) अरे यार.. तुम बीवीओका प्रोबलेम ही यही हे.. जरा कीसी लडकी या ओरतसे हसके बाते करलो.. तो तुरंत सक करने लगती हो.. मेरा अ‍ैसा कोइ चकर बकर नही हे.. समजी..?

पुनम : (चाइ नास्ता देते) ठीक हे.. ठीक हे.. चुपचाप चाइ नास्ता करलो.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. अभी आपको बेन्कपे जानेमे देर नही हो रही..?

कहा तो धिरेन चुपचाप चाइ नास्ता करने लगा.. तब दया कीचनसे दोनोकी नोक जोक सुनकर हस रही थी.. उसे पता था इस नोक जोकसे पुनम धिरे धिरे करते धिरेनसे दुरीया बना रही थी.. धिरेन फटाफट चाइ नास्ता करके जटसे बेन्कपे चला गया.. तब पुनम ओर दया चाइ नास्ता करने बैठ गइ.. तो दोनो अ‍ेक दुसरेकी ओर देखकर जोरोसे हसने लगी.. ओर चाइ नास्ता करने लगी.. तभी....

कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २१२

कहा तो धिरेन चुपचाप चाइ नास्ता करने लगा.. तब दया कीचनसे दोनोकी नोक जोक सुनकर हस रही थी.. उसे पता था इस नोक जोकसे पुनम धिरे धिरे करते धिरेनसे दुरीया बना रही थी.. धिरेन फटाफट चाइ नास्ता करके जटसे बेन्कपे चला गया.. तब पुनम ओर दया चाइ नास्ता करने बैठ गइ.. तो दोनो अ‍ेक दुसरेकी ओर देखकर जोरोसे हसने लगी.. ओर चाइ नास्ता करने लगी.. तभी....अब आगे

पुनम : (मुस्कुराते) देखा दया बहेन.. यही छमक छलो थीनां..? जो कल हमारे घरपे आइ थी.. यही कमीनी हे.. जो इतने दिनोसे धिरेनसे चुदवा रही हे.. ओर अ‍ेक तेरे जीजु हे.. अपनी बीवीको तो खुस नही कर पाते.. जो उपर चडते ही ढेर हो जाते हे.. पता नही ये इनके पीछे दिवानी क्यु बनी हुइ हे..

दया : (जोरोसे हसते) दीदी.. ये साली आग बहुत बुरी चीज हे.. देखा नही.. उस रात चंपा भाभी लखन भैयाको देखकर कैसे बहेक गइ थी.. उनको पता था.. की लखन भैया रजीयाको मीलने आये हे.. फीर भी अंधेरेका फायदा उठाकर उन्होने लखन भैयाको अपने उपर चडा दीया.. ओर अपनी हालत खराब करवाली.. हें..हें..हें.. ठीकसे चलनेमे दो दिन लगे.. तब जाके सहीसे चल पाइ.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) दया बहेन.. हमने लखन भैयाको जडी बुटी देदी हे.. ओर लताका पीरीयड चल रहा हे.. तो वो थोडा बेकाबु हो गये थे.. अब उसे कीसी भी हालमे सेक्स करना चाहीये ही चाहीये..

दया : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. क्या वाकइ लखन भैयाका इतना बडा होगया हे..? रजीया केह रही थी.. अब मंजु भाभीने उसे हमेसाके लीये लखन भैयाके साथ सोनेके लीये कहा हे.. तो लखन भैयासे मीलते ही वो बेहोस होगइ थी.. इसीलीये आपको पुछ रही हु.. क्युकी आपको ओर भाभीको तो सब पता चल जाता हेनां..?

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) हां दया बहेन.. आपकी बात सच हे.. उनका बडे भैया जीतना लंबा.. ओर उनसे भी थोडा मोटा होगया हे.. लता मुजे भी बता रही थी.. जब मैने उनको सब बताया.. दया बहेन.. मे आज आपको भी सब बता देना चाहती हु.. की भाइ.. ओर भाभीने मीलकर क्या फैसला लीया हे.. आज मे हमारे घरके बारेमे आपको सबकुछ बता दुगी.. ओर आपके बारेमे भी.. जो आप नही जानती..

दया : (मुस्कुराते) जी दीदी.. आप कल भी कुछ बतानेको केह रही थी.. अब तो जीजु भी बेन्कपे चले गये हे.. तो बताइअ‍ेना..

पुनम : (मुस्कुराते) दया बहेन.. पहेले चाइ नास्ता तो करलो.. फीर आरामसे बैठकर बाते करेगे..

फीर दोनो चाइ नास्ता खतम करके होलमे आकर बैठ गइ.. तो पुनम धीरे धीरे करते दयाको सभी बाते बताने लगी.. देवायत ओर लखनकी कीतनी बीवीया हे.. जीनके साथ सादी ओर गांधर्व विवाह कर लीया हे.. ओर आगे कीतनी बीवीया होगी.. से लेकर उनका कीसके साथ अवैध रीलेशन हे.. फीर विजय ओर आने वाले वक्तमे उनके बेटे यानीके उन राजाके बारेमे भी बता दीया..

फीर देवायतकी इतनी बीवीया होनेकी वजहसे मंजुको कीन हालातमे फैसला लेना पडा.. जीनमे फैसलेमे दोनो भाइ मीलकर घरकी सभी ओरतोको सम्हाल लेगे.. ओर लखनको कीन हालातमे जडी बुटी देनी पडी.. ओर हवेली के खीलाफ रमा नीलमकी वो साजीसके बारेमे भी बात करली.. ओर लखनकी उनके बारेमे क्या फीलींग्स थी.. ओर अभी कीस बातसे नाराज हे वो भी बता दीया.. तो दया गौरसे सुनते हसती रही..

दया : (मुस्कुराते) दीदी.. क्या वो दोनो कमीनी पैसोके लीये इतना नीचे तक गीर सकती हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां दया बहेन.. तभी तो हमने लखन भैयाको वो जडी बुटी दी हे.. ओर भी बाते हे.. जो आप नही जानती.. तो वो बाते भी सुनो..

फीर पुनम दयाको अपने बारेमे भी सबकुछ बताने लगी.. की वो जब लखनके साथ स्कुलमे थी तब लखन उनसे प्यार करने लगे थे.. लेकीन अपना प्यार जता नही पाये.. से लेकर ओर अपने बडे भाइके साथ रीलेशनसे उनके साथ सादी तककी बाते कहेदी.. फीर आने वाले वक्तके बारेमे भी बता दीया.. ओर आखीरमे ये भी बतादीया की मंजुभाभी सृती लता सब आपसमे बहेने हे.. ओर जब पुनमने उनको ये बताया की वो भी उनकी सौतेली बहेन हे.. तब दया चौक गइ.. ओर उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. तभी..

दया : (आंसु बहाते) दीदी.. इसीलीये मंजुदीदी ओर आप मुजे इतना प्यार करते थेनां..?

पुनम : (दयाको हग करते) हां दया बहेन.. इसके बारेमे पहेले सीर्फ मंजुदीदीको ही पता था.. फीर मुजे सब शक्तिया देदी.. तब मुजे पता चला.. वरना इस बारेमे हमे कभी पता नही चलता.. दया बहेन.. रामुकाका बापुके अच्छे दोस्त थे.. लेकीन वो भी बच्चा देनेमे सक्षम नही थे.. इसीलीये आपकी मम्मीने खुद बच्चेके लीये सामनेसे बापुके साथ रीलेशन रखा था.. ओर आपका जन्म हुआ..

दया : (आंसु पोछते) दीदी.. मे मेरे बापुको बहुत प्यार करती हु.. वो आज भी मेरे पीता हे.. ओर मे उसे ही अपना पीता मानुगी.. दीदी.. मैने भी बडे भैयाको प्यार कीया हे.. मैने उनको अपना सबकुछ सौंप दीया हे.. तब मुजे नही पता था.. की ये मेरे बडे भैया हे.. दीदी.. मैने भी अपने भाइके साथ रीलेशन रखलीया हे..

पुनम : (मुस्कुराते ) हां दया बहेन.. ये तो रखना ही था.. सीर्फ आप ही नही.. हम सभी बहेनोने भाइके साथ रीलेशन रखा हे.. ओर हम सभी बहेने आज उनकी पत्नीया हे.. वो बहुत जल्द आपके साथ ओर लता दीदीके साथ भी सादी कर लेगे.. ओर सीर्फ भाइ ही नही.. हमारे पीता ओर हमारे दादाजीने भी इनकी बहेनोके साथ सादीया करली थी.. रामुकाका सीर्फ आपके पीता नही हे.. हम भी उनको अपना पीता मानते हे..

दया : (आंसु पोछते मुस्कुराते) दीदी.. आज तो आपने बहुत बडा राज खोल दीया.. अब मे बडे भैयाके साथ कैसे नजरे मीलाउगी..? क्या उनको पता हे की मे भी उनकी बहेन हु..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां दया बहेन.. उनको मंजुभाभीने पहेले ही सब बता दीया था.. तो आपको उनके सामने सर्मीन्दा होनेकी जरुरत नही हे.. इसीलीये तो वो आपके साथ सादी करना चाहते हे.. दीदी.. अब आप भी भाइसे सादी करनेकी तैयारीया सुरु करदो.. वो बहुत जल्द आपसे भी सादी करलेगे.. फीर हम सभी बहेनोको मतलब.. हमारे घरकी सभी ओरतोको दोनो भाइ मीलकर सम्हाल लेगे.. तो अब लखन भैयासे मीलनेके लीये भी आप तैयार रहेना.. हें..हें..हें..

दया : (सरमाकर मुस्कुराते) ओह गोड.. दीदी.. मतलब मुजे दोनो भाइके साथ सुहागरात मनानी हे.. हें..हें..हें.. दीदी.. आप भी तो उनकी बहेन हो.. तो क्या वो आपके साथ भी..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) हां दया बहेन.. मे भी.. क्युकी वो तो मुजे सुरुसे ही प्यार करते थे.. लेकीन मेने आपको बतायाना.. तो इस वजहसे आजकल वो मुजसे रुठे हुअ‍े हे.. पता नही सृती दीदी उनको कैसे मनायेगी.. अभी तक उनका फोन भी नही आया.. सायद अपनी क्लीनीकपे जाकर बात करेगी..

दया : (मुस्कुराते) दीदी.. अब इस महारानीका क्या करना हे..? जो अभी आइ थी..

पुनम : (रहस्य मुस्कानसे) दया बहेन.. मेने इनके बारेमे भी जाना हे.. वो इतनी भी बुरी नही हे.. बस.. उनका पती भी इनको बच्चा देनेमे सक्षम नही हे.. इसीलीये उसने धिरेनके साथ सबंध बनाया हे.. इसी सीलसीलेमे मुजे लखन भैयासे बात करनी हे.. हमे इसीको जरीया बनाकर वापस हमारे घरपे जाना हे.. अब देखते हे.. लखन भैया कब मुजे माफ करते हे.. बस.. अ‍ेक बार वो मुजसे बात करले.. तो इनके ओर धिरेनके बारेमे उनको सब कुछ बता दुगी.. फीर लखन भैया ही इनको सम्हाल लेगे..

दया : (मुस्कुराते) दीदी.. अगर आप कहोतो मे रजीयासे बात करलु..? क्युकी वो उनकी बहुत मानते हे..

पुनम : (मुस्कुराते) अरे दया बहेन.. तबतो आपके मुहमे घी सकर.. बस.. अ‍ेक बार मेरा लखन मुजसे बात करले.. फीर तो मे ही उनको मना लुगी..

दया : (मुस्कुराते) दीदी.. कोइ मस्तीया करते इतने रुठ जाते हे क्या..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हां दया बहेन.. बस.. वो ही भाभी देवर वाली मस्ती.. आपको तो पता हे..? वो अब मुजे अपनी बहेन नही.. भाभी मानते हे.. बस.. दो दिन पहेले वो मेरी ओर सृतीदीदीकी मस्तीया करते थोडा बहेक गये थे.. ओर मेने उसे चाटा मार दीया.. तबसे वो मुजसे नाराज हे.. हें..हें..हें..

दया : (आस्चर्यसे हसते) क्या..? आपने उसे चाटा मारा..? हें..हें..हें.. दीदी.. उनको भी पता चल गया की आप बडे भैयाकी बीवी हो..?

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) हां दया बहेन.. लेकीन गलती मेरी ही थी.. मैने ही उनको मेरे बारेमे ओर भैयाके बारेमे सब कुछ बता दीया था.. खैर.. अब चलीये फीर हम दोनोको जाना भी हे.. वो सामत भाइके घरपे.. बस.. अब आप इस पायल भाभीपे नजर रखना.. ओर अगर कुछ अ‍ैसा दीखनेको मीले.. तो उनकी विडीयो क्लीप बना लेना.. ताकी जल्दसे जल्द हम दोनोका यहासे छुटकारा होजाये..

दया : (हसते) दीदी.. हमे यहा आये रुमा जुमा सीर्फ दो दिन ही तो हुअ‍े हे.. क्या इतनी जल्दी हमे वापस जाना हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां दया बहेन.. अब मे इस कमीनेके साथ रहेना नही चाहती.. बस.. अ‍ेक बार मेरा लखन मुजसे बात करले.. फीर देखो.. कैसे हमारी जींदगीमे बहार आयेगी..

दया : (खडी होते मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. आप फीकर मत करो.. मे सब देख लुगी.. लगता हे आप भी लखन भैयासे प्यार करने लगी हो.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हां दया बहेन.. अब आपसे क्या छीपाना.. आप भी हमारी बहेन हो.. दया बहेन.. मे लखनसे प्यार करने लगी हु.. बस.. अ‍ेक बार मील जाये.. मे उनकी सारी नाराजगी दुर करदुगी..

कहेते दोनो बाते करते खडी होगइ.. ओर घरका सभी काम मीलकर नीपटाने लगी.. फीर घरका सारा काम नीपटाकर पुनम अपना फोन लेकर होलमे सोफेपे बैठ गइ.. ओर दया घरका दुसरा काम देखने लगी.. पुनमने सृतीको फोन लगा दीया.. फोन लगते ही पहेले उसने लखनके बारेमे पुछ लीया.. तब सृतीने लखनके साथ हुइ सारी बाते पुनमको बतादी.. जीसे सुनकर पुनम थोडी नीरास होगइ..
 
फीर पुनमने सृतीको धिरेनकी करतुतके बारेमे बता दीया.. की धिरेन इतने दिन हवेलीपे खाना खाने क्यु नही आ रहे थे.. ओर घर जाते ही उनकी धिरेनके साथ बहेस भी हुइ थी.. ओर वोभी बता दीया.. की रुमकी सफाइ करते उसे घरमे कीतने सारे कोन्डम ओर आइ पीलकी गोलीया मीली.. फीर उनके बीच ओर धिरेनके बीचकी अपनी सेक्स लाइफके बारेमे भी चर्चा हुइ.. जीसे सुनकर सृतीको भी आस्चर्य हुआ..

सृती : (आस्चर्यसे) दीदी.. क्या बात कर रही हो..? उनका दुसरी ओरतके साथ भी चकर हे..? वो आपको तो ठीकसे संतुस्ट नही कर पाता.. तो दुसरी ओरतको कैसे संतुसट कर पाता हे..?

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) भाभी.. वोही तो.. ओर मे दुसरी ओरतोसे थोडी अलग हु.. वो दुसरी ओरतको संतुस्ट करपाये या ना करपाये वो मुजे नही पता.. लेकीन मुजे हमारे घरके मर्दोके अलावा कोइ ओर संतुस्ट नही कर सकता.. बस.. मुजे सीर्फ इतना पता हे.. ये तो बाबाके कहेनेपे इनसे सादी करनी पडी.. वरना मे लखन भैयासे सादी करना पसंद करती.. भाभी.. क्या लखन भैया मुजसे बात तो करेगेनां..?

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) अरे हां दीदी.. क्यु नही करेगे..? वो अब मुजसे नाराज नही हे.. वो मुजसे खुलकर बात करने लगे हे.. देखना बहुत ही जल्द वो आपसे भी बात करेगे.. मे पुरी कोसीस कर रही हु.. की वो आपसे बात करे..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) भाभी.. थेन्क्स.. तब तो बहुत ही अच्छा हे.. देखना अब उनको कभी कोइ सीकायतका मौका नही दुगी.. भाभी.. अभी कीसीको कहीयेगा नही.. अब मेने भी लखन भैयाके साथ आगे बढनेका फैसला करलीया हे.. बस.. अ‍ेक बार वो मुजसे बात करले.. फीर मे सबकुछ सम्हाल लुगी..

सृती : (मुस्कुराते खुस होते) दीदी.. अ‍ैसा अचानक क्या हो गया..? जो आपने इतनी जल्दीसे फैसला लेलीया.. कुछ ओर हुआ हे क्या..?

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) नही दीदी.. इनकी दो वजह हे.. अ‍ेक तो अब बडे भैया सबको बहुत ही कम समय देपायेगे.. ओर दुसरा मेरी धिरेनके साथ सेक्स लाइफ अच्छी नही हे.. ओर वो खुद नीलमसे सादी करनेके लीये मुजसे छुटना चाहते हे.. तो मे कहा जाउगी..? ओर तीसरी बात.. भाभी.. हमे भी पता हे.. की आगे क्या होने वाला हे.. हमे अ‍ेकना अ‍ेक दिन तो लखन भैयाको अपनाना ही पडेगा..

सृती : (सरमाते हसते) दीदी.. कीतना अजीब हेनां..? हमारे पतीके होते हुअ‍े भी हमे हमारे देवरको पतीके रुपमे स्वीकार करना पडेगा..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. अब हमारी जींदगीमे हमारे घरके मर्दोके अलावा कोइ नही हे.. जो हमे संतुस्ट कर सके.. बडे भैयाके पास हमारे लीये टाइम नही हे.. इसीलीये मेने लखन भैयाके साथ आगे बढनेका फैसला करलीया हे.. अब तो जबतक विजय बडा नही होजाता तबतक हमे लखन भैयाका ही सहारा हे..

सृती : दीदी.. ये अपने बहुत अच्छा नीर्णय लीया हे.. फीकर मत करो.. मे भी आपके साथ हु.. अब मैने भी यही फैसला करलीया हे.. अब तो हमे जींदगी खुलकर जीनी हे.. अब जीतना हो सके मे इतना टाइम हमारे देवरके साथ स्पेन्ड कर रही हु.. लेकीन अ‍ेक डरसा लग रहा हे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी डरो मत.. आपने सही डीसीजन लीया हे.. पता नही ये बात मे कैसे समज नही पाइ.. अच्छा हुआ मंजुदीदीने सबको अच्छी तराहसे समजा दीया.. चलो अब मे फोन रखती हु.. मुजे ओर दया बहेनको सामत भाइके घरपे जाना हे.. सामको हम दोनो वापस आजायेगी.. अगर लखन भैयासे कुछ बात होजाये तो मुजे फोन करके बता देना.. बाय..

सृती : (मुस्कुराते) बाय दीदी.. टेक केर.. हें..हें..हें..

फीर पुनम ओर दया.. घरको ताला लगाकर बसमे अपने गांव चली गइ.. ओर सीधी हवेलीपे आगइ.. तो वहा सीर्फ भावना ओर मंजुला ही थी.. तो दया आकर चंपाभाभीको गले मीली.. ओर मंजुके पैर छु लीये.. तो पुनम भी आते ही मंजु ओर भावनाके गले लग गइ.. तब भावना थोडा लंगडाते चल रही थी.. तो पुनम उनको देखकर सब कुछ समज गइ.. ओर हसने लगी.. फीर तीनो होलमे जाकर सोफेपे बैठ गये.. ओर दया कीचनमे चली गइ.. तब..

पुनम : (खुस होते धीरेसे) दीदी.. क्या आपका काम होगया..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां पुनो.. अब भावु भी हमारी सौतन होगइ हे.. मेने इनकी भी सादी देवुसे करवादी हे.. बस.. अब तुम्हारे वापस आनेकी देरी हे.. फीर मे दयाकी सादी भी जल्दी करवा दुगी.. फीर तुम चारो इस हवेलीको सम्हाल लेना..

पुनम : (बैठे ही हग करते) नही दीदी.. आप अ‍ैसी बाते मत करो.. हमे डर लग रहा हे.. अ‍ैसा लगता हे.. आप हमे कही छोडकर जा रही हो..

मंजुला : (सरको चुमते) अरे मेरी बच्ची.. मे कहा जा रही हु..? मुजे जाकर वापस भी तो आना हे.. मेरी भावुकी कोखसे.. बस.. तुम हमारे घरके लोगोको सम्हाल लेना.. ओर सुन..? क्या धिरेनसे कुछ अन बन हुइ हेनां..?

पुनम : (सर जुकाते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो.. अब आपसे कैसे कहु..? आपको तो सब पता हे.. वो यहा इतने दिन क्यु नही आये थे.. दीदी.. वहा उनका भाइके दोस्तकी बीवीके साथ चकर हे.. ओर मेरी भी सेक्स लाइफ अच्छी नही हे.. जातेही उनसे थोडी बहेस होगइ थी..

मंजुला : (मुस्कुराते) पुनो.. जानती हु मे.. तुजे सम्हालना धिरेनका काम नही हे.. इसीलीये तुजे लखनके साथ अच्छे संबध रखनेको केह रही थी.. बस.. कुछ ही दिनोकी तो बात हे.. फीर यहा तो तुम सबके मजे ही मजे हे.. ओर तुम उन ओरतकी फीकर मत कर.. हमने लखनको अ‍ैसे ही वो जडी बुटी नही दीहे.. अब वो ही उनको ओर आप सबको सम्हाल लेगे..

भावना : (आस्चर्यसे देखते) दीदी.. पुनोदीदी क्या केह रही हे..? हमारा धिरेन कीसी ओरतके चकरमे पडा हे..? कमीना.. अपनी बीवीको तो ठीकसे संतुस्ट नही करपाता ओर दुसरी ओरतके चकरमे हे.. अभी नीलु भी उनके साथ लगी हुइ हे.. जब उनको पता चलेगा तो नीलुका क्या होगा..? कमीना कहीका..

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) नही भावु.. धिरेन अ‍ेक नोर्मल इन्सान ही हे.. वो दुसरी ओरत ओर नुलुको तो संतुस्ट करपाता हे.. लेकीन हमारी पुनोको संतुस्ट करना धिरेनके बसकी बात नही हे.. क्युकी मुजे पुनोको ओर हमारी लताको संतुस्ट करना हर कीसीका काम नही हे.. हम तीनो ओरते सबसे अलग हे.. हमारे अंदर बहुत आग हे.. हमे तो हमारे घरके मर्दही संतुस्ट करपायेगे..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. हमने वो सामत भाइके बारेमे सुना.. तो मुजे ओर दया बहेनको वही जाना हे.. क्या आप साथमे आ सकती हे..? फीर हमे धिरेनके आनेसे पहेले घरपे जाना भी होगा..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. चल मे साथ चलती हु.. भावु भले ही यहा आराम करती.. हमारे पती कबीलेपे गये हे.. वो वहाकी रानीका उधार करने.. हें..हें..हें.. सायद वापस भी आगये होगे.. पुनो.. तुम कभी उसे मीलना.. वो बहुत अच्छी लडकी हे.. क्या लखनसे तेरी बाते होगइ..?

पुनम : (आंख गीली करते) नही दीदी.. अभी तो नही.. वोतो मुजसे बात करनेके लीये राजी ही नही हे.. कल रातमे ही सृती दीदीसे बात हुइ.. वो सृती दीदीकी माफी मांग रहे थे.. ओर मुजसे भी मीलकर मेरी माफी मागने वाले हे.. ओर अभी यहा आइ तब वापस सृतीदीदीसे बात हुइ तो पता चला.. वो आज सुबहसे सृती दीदीसे बात करने लगे हे.. वो बहुत जल्द लखन भैयाको मेरे लीये मना लेगी..

मंजुला : पुनो.. तुम फीकर मत कर.. वो बहुत जल्द तुमसे भी बात करने लगेगा.. क्युकी वो ज्यादा दिन तुमसे दुर नही रेह सकता.. आखीर जन्मो जनमका प्यारहे तुम दोनोका.. इसीलीये तो पहेलेसे ही प्यार करता हे तुजे..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. क्या हम जानती हे.. वो ही सबकुछ होगा..? मुजे अ‍ैसा लगता हे मे बडे भैयाको धोखा दे रही हु.. इसी डरसे तो मेरा हाथ उठ गया..

मंजुला : (प्यारसे अ‍ेक नजरसे देखते धीरेसे) मेरी बच्ची.. तु अपने भाइको कोइ धोखा नही दे रही.. तु जानती हे तो वहा हमारे उस लोकमे क्या परंपरा हे.. तो तुम क्यु इतना डर रही हे..? क्या तुजे पता नही की तुम कौन हो..? तुजे भी पता हे तेरा तेरे बडे भाइके साथ रीलेशन सीर्फ तेरी बच्ची तक ही सीमीत था.. फीर भी वो तुजे प्यार करनेको कहा मना कर रहे हे..? तुम जब भी देवुको मीलना चाहो मील सकती हो.. इनमे लखन भी मना नही करेगा..

पुनम : (आंसु छलक गये) दीदी.. मैने लखन भैयाके साथ बहुत बुरा कीया हे.. पता नही मे कब उसे मनाउगी..

मंजुला : (मुस्कुराते सर सहेलाते) बहुत जल्द.. मेरी बच्ची दिल छोटा मत कर.. वैसे भी पती पत्नीके बीच अ‍ैसे छोटे मोटे जगडे होते ही रहेते हे.. बस.. मे इतना जानती हु.. की आने वाले दिनोमे तेरी ओर सृतीकी जींदगीमे खुसीओकी बहार आयेगी..

पुनम : (सर्मसार होते नजर जुकाते) दीदी.. पती..? लेकीन लखन भैया मेरे पती नही हे.. मे तो सीर्फ बडे भैया ओर धिरेनकी अमानत हु.. तो आप हमे पती पत्नी क्यु केह रही हे..?

मंजुला : (अ‍ेक नजरसे देखते) क्या सबकुछ मेरे मुहसे उगलवायेगी..? क्या तुजे नही पता तुम ओर लखन कौन हो..? हंम..? पुनो.. लोगोकी नजरोमे तुम भले ही कुछ भी हो.. असलमे अब तुम मेरे लखनकी सुहागन हो.. बीटु.. तुजे तो पता हे वो पहेले भी तेरा पती था.. ओर यहा भी तुजे उनकी पत्नी बनकर जींदगी गुजारनी हे.. तेरा असली पती लखन ही होगा.. जो तुजे बेइम्तहा महोबत करता हे.. वो तुजे अब समयके साथ सबकुछ पता चल जायेगा.. चल.. हम सामत भाइके घरपे जाते हे..

फीर मंजु पुनो ओर दयाको लेकर सामत भाइके घरपे सोक जताने चली गइ.. तो वहा उनको ब्रिन्दाके साथ बसंती भी मील गइ.. तब सांती ओर बरखा पुनम मंजुको देखकर बुहत ही सरमा रही थी.. फीर वहा आधे घंटे बैठकर तीनो वापस हवेलीपे आगइ.. तब मंजुने पुनम ओर दयाको खानेके लीये रोकना चाहा.. लेकीन पुनमको धिरेनके आनेसे पहेले वापस अपने घरपे पहोंचना था.. तो दया पुनम बसमे बैठकर अपने घरकी ओर नीकल गइ..
 
जब पुनम मंजु ओर दया सामत भाइके घरपे थी तब देवायत हरीया ओर मालती रेणुको लेकर अपने खेतोपे आ चुका था.. फीर कुछ देर अपना काम देखकर रामुकाकाके पास जाकर बैठ गया.. तब उसने हरीयाको आवाज लगाते दो कप चाइ बनानेको कहा.. तो रामुकाका खुस होते देवायतके सामने हसने लगे.. फीर देवायतने कुछ देर खेतोकी जानकारीया लेकर रामुकाकाको भानुके बारेमे पुछा.. तबतक मालती दोनोको चाइ देकर चली गइ..

देवायत : (मुस्कुराते चाइ पीते) कहो काका.. सब कैसा चल रहा हे..? कही भानु दिखाइ नही देता..?

रामुकाका : (चाइ पीते मुसकुराते) हां वो भी आता हे.. अब तो फसल कटाइका वक्त हे.. तो मजदुरोसे काम करवाता हे.. लेकीन लगता हे आजकर वो कुछ परेसान दीख रहा हे.. यहाका काम जल्दीसे खतम करके वो अपने घरपे चला जाता हे.. बेटा.. क्या उनके घरपे तो सब सही हेनां..?

देवायत : (मुस्कुराते) हां काका सब सही हे.. अब अकेला आदमी परेसान नही होगा तो क्या करेगा.. क्युकी कुछ दिनोसे भाभी नीलु ओर काकी हमारे घरपे ही हे.. रमाभाभी ओर नीलुको पढाइके लीये सहेर छोडने ओर लखनके घरका कुछ सामान सेट करने गइ हे.. ओर काकी मेरी सास ओर चंदाके साथ अंकलके अस्थी विसर्जन करने हरीद्वार गइ हे.. तो भानुको खाने पीनेमे तकलीफ तो होगीनां..

रामुकाका : (मुस्कुराते) हां सही कहा तुने.. बीवीके बीना तकलीफ तो होती ही हे.. कीसको पतीके बीना तो कीसीको पत्नीके बीना.. बेटा.. कैसी हे मेरी दया..? आज कल दिखाइ नही देती..

देवायत : (मुस्कुराते) काका.. आप दयाकी फीकर करना तो छोडही दो.. आवकल वो पुनोके साथ उनके घरपे हे.. दोनो पकी सहेलीया जो हो गइ हे.. दोनोकी खुब जमती हे.. हें..हें..हें..

रामुकाका : (खुस होते) अच्छा अच्छा.. वो पुनो बीटीयाके साथ हे.. कोइ बात नही.. बस.. वो खुस रहे..

देवायत : (सरमाते धीरेसे) काका मुजे आपसे अ‍ेक जरुरी बात करनी हे..

रामुकाका : (मुस्कुराते) हां कहो बेटा.. क्या बात करनी हे..?

देवायत : (सरमाते धीरेसे) काका.. आपको जानते हे हमारे आनदानमे कीतनी सादीया होती हे..

रामुकाका : (हसते) हां सब पता हे मुजे.. ना जाने तेरे बापु ओर दादाने भी कीतनी सादीया की होगी.. ओर सबसे मजेकी बाते सभीने अपनी बहेनसे सादी करली थी.. तो गांवमे बहुत बडा हंगामा हो गया था.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते) काका.. तो फीर अगर आप बुरा ना माने ओर आपकी रजामंदी होतो मे हमारी दयासे सादी करना चाहता हु.. बस.. आप हमे आशीर्वाद दीजीये..

रामुकाका : (सोक्ट होते आस्चर्यसे देवायतकी ओर देखते) बेटा.. ये तुम क्या केह रहे हो..? अ‍ेक नोकरानीके साथ..? वो विधवा हे.. बेटा हम बहुत गरीब लोग हे.. हमारा मजाक मत उडाओ..

देवायत : (पैरोके पास घुटनोके बल बैठते) काका.. मे मजाक नही कर रहा.. क्या कभी मेने आपके साथ मजाक कीया हे..? ओर कीसने कहा आप गरीब हो.. दुनीयामे सबसे धनी हो आप.. दया जैसी लक्ष्मी हे आपके घर.. गरीब तो हम हे.. जो आपकी बेटीका हाथ मांग रहे हे.. काका नीरास मत कीजीये हमे.. दे दीजीये दया हमे.. ओर ये सब आपकी बडी बहुने कहा हे..

कहा तो रामुकाका अपना चहेरा अपने हाथोसे ढकते फुट फुटके रोने लगे.. तो अ‍ेक पलतो दुर खडे हरीया मालतीको भी अजीब लगा.. वो दोनो दुर अपने रुमके पास खडे होकर अ‍ेक नजरसे रामुकाका ओर उनके पैरोमे बैठे देवायतको देखते रहे.. देवायतने रामुकाकाको थोडी देर रोने दिया ओर हरीयाकी ओर देखते उसे पानी लानेका इसारा कीया.. तो हरीया दोडकर पानी लेकर आगया.. ओर देवायतको दीया..

देवायत : (पानी देते) बस कीजीये काका.. लीजीये पानी पीजीये.. अगर मेने कुछ गलत केहदीया होतो मुजे माफ कीजीये.. लीजीये..

रामुकाका : (पानी लेते दुसरा हाथ देवायतके सरपे रखते) अरे नही नही बेटा.. ये तुम क्या बोल रहे हो..? आपसे कोइ गलती नही हुइ.. ये तो मेरे खुसीके आंसु थे.. जो इस अभागेको आपने काबील समजा.. तुम बीलकुल तेरे बापकी तराह हो.. अ‍ेकदम दयालु.. बेटा मुजे खुसी होगी जो आप मेरी दयाको इस हवेलीकी रानी बना रहे हो.. मे दुनीयाका सबसे बडा खुसनसीब बाप हु.. जो आप मेरी विधवा दयासे सादी कर रहे हो..

खेवायत : (मुस्कुराते) काका.. ये सब आपकी बडी बहुका हुकम हे.. हम सबने कभी दया ओर रजीयाको अपनी नोकरानी समजा ही नही.. हमारी रजीयाने भी हमारे लखनसे सादी करली हे.. बस.. अब आपका आशीर्वाद चाहीये.. मे हमारी दयाको विधवा नही सुहागन देखना चाहता हु..

रामुकाका : (देवायतके सरपे हाथ रखते) बेटा मेरा आशीर्वाद तो हमेसा तेरे साथ हे ही.. रजीया भी मेरी बेटी जैसी हे.. अच्छा हुआ लखन बेटाने उनसे सादी करली.. बेचारीका हमारे सीवा इस दुनीयामे उनका कोइ हे भी नही.. भगवान आप सबको लंबी उमर दे.. खुस रहो बेटा..

देवायत : (मुस्कुराते खडा होते) काका.. मे आज ही आपकी बडी बहुसे बात करलेता हु.. देखते हे वो कब सादीका केहती हे.. काका हम चाहते हे सादी आपकी मौजुदगीमे हो.. हमारे आश्रमपे..

रामुकाका : (खुसीसे हाथ जोडते) बेटा.. तबतो मेरा अहोभाग्य.. जो बाबाकी हाजरीमे मेरी दयाकी सादी हो रही हे.. मे जरुर आउगा..

देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे काका तो फीर मे चलता हु.. दो दिनसे घरपे गया ही नही.. आपकी बहुसे बात करके आपको बताता हु..

रामुकाका : (हसते) अच्छा अच्छा तो फीर जल्दीसे जाओ.. वरना मेरी बहु की डांट खानी पडेगी.. हें..हें..हें..

कहातो देवायत भी हसने लगा ओर अपनी हवेलीकी ओर नीकल गया.. जबतक देवायत घर पहोंचता तबतक घरसे पुनम ओर दया भी वापस अपने घरकी ओर नीकल चुकी थी.. तो देवायतको देखतेही मंजु खुसीके मारे दोडकर उनको गले लग गइ.. तो भावना भी बहुत सरमाते हसने लगी.. तो देवायतने उनकी ओर भी अपनी बाहे फैलादी.. तो भावना भी सरमाकर देवायतके गले लग गइ.. तभी..

देवायत : (मुस्कुराते) भावु.. तुम क्यु इतना सरमा रही हो..? मत भुलो तुम अब भानुकी नही मेरी बीवी हो..

मंजुला : (भावनाकी ओर हसते) बेचारी सरमायेगी नही तो क्या करेगी..दो दिन आराम करते बडी मुस्कीलसे अपने बीस्तरसे उठ पाइ हे.. आपने उनकी हालत जो खराब करदी थी.. हें..हें..हें..

भावना : (सरमसे पानी पानी होते) दीदी.. चुप रहीये.. मुजे बहुत सरम आ रही हे.. जीजु.. कैसा रहा आपका सफर..?

मंजुला : (हसते) कमीनी अब तो इसे जीजु कहेना बंध करदे.. अब हमारे पती हे ये.. हें..हें..हें..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) नही दीदी.. मे इसे जीजुही कहुगी.. क्युकी मेने जीजुको प्यार कीया था.. ओर वैसे भी जबतक भानु हे मुजे जीजु सालीका रीलेशन बरकरार रखना पडेगा..

देवायत : (बाहोमे भीचते) मंजु.. भावु सही केह रही हे.. कबीले पे भी सब मस्त रहा.. वहा जमीलाको मेरी रानी बनाकर उसे सब जीम्वेवारी देकर आगया.. ओर सुन.. मेने हमारी दयाके बारेमे भी अभी रामुकाकासे बात करली हे.. अब सब तुजे देखना हे.. की दयाके साथ कब सादी करनी हे.. मेने उसे हमारे आश्रमका कहा हे..

मंजुला : (खुस होते मुस्कुराते) ये आपने अच्छा कीया.. जो रामुकाकासे बात करली.. देवु.. तो फीर हमे कीसीका वेइट नही करना.. हम दो तीन दिनमे ही आश्रमपे जाकर सब नीपटा लेते हे.. अभी आपके आनेसे पहेले ही पुनो ओर दया यहासे गइ.. दोनो सामत भाइके लीये सोक मनाने आइ थी..

देवायत : (मुस्कुराते) क्या वो दोनो आइ थी..? तो मुजे फोन करना चाहीयेना... मे उन दोनोको छेडकर आजाता..

मंजुला : (हसते) जी नही.. अब तो दयाको सादीके दिनही मीलोगे.. वरना पता चला आपने आज ही उनके साथ सुहागरात मनाली.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) वेरी फनी.. मंजु.. हमारी पुनो कीतनी व्यावारीक ओर समजदार होगइ हे.. मुजे अफसोस हे.. की आज कल मे उनको समय नही दे रहा..

मंजुला : (थोडी सीरीयस होते) देवु.. भुल जाइअ‍े पुनोको.. अब इसकी कोइ आवस्यक्ता नही हे.. ओर पुनोकी फीकर करनेकी जरुरत नही हे.. पहेले आप फ्रेस होजाइअ‍े.. फीर हम आरामसे बात करते हे.. आज आपको पुनोके बारेमे भी बात करनी हे.. तबतक खाना भी बन जायेगा.. आप सफरसे थके भी होगे.. जाइअ‍े..

कहातो देवायत मंजु ओर भावनाके होठोपे बारी बारी कीस करते अपने रुममे चला गया.. ओर फ्रेस होकर बहार आगया.. तब भावना ओर मंजु होलमे सोफेपे देवायतके इन्तजारमे बैठी आपसमे पुनम ओर लखनके बारेमे बाते कर रही थी.. जैसे ही देवायत उनके पास आकर बैठ गया तो मंजुने पुनम ओर धिरेनके बीच सुरुसे यहा आने तक हुआ सारा वाक्या सुना दीया.. जीसे सुनकर थोडी देरतो देवायत भी सोक्ट हो गया.. ओर उसे पुनमकी चीन्ता होने लगी.. तभी....

कन्टीन्यु
 
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