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- Dec 5, 2013
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मंजुला : (धीरेसे) मेरी बच्ची.. जीसका डर था वो हो गया.. अब तुम ओर लखन सबकुछ सम्हाल लेना..
पुनम : (गले लगते) जी दीदी.. आप सृती दीदीकी चीन्ता मत करना.. अभी वो गुस्सेमे हे.. जब उनका गुस्सा सांत होजायेगा मे सामको ही उनसे बात कर लुगी..
मंजुला : पुनो.. चल अब वक्त आ गया हे.. हम तेरे बारेमे भी चंदा दीदीसे बात करले..
पुनम : (सामने देखते) नही दीदी.. क्या उसे अभी सब बताना जरुरी हे..? वो आज ही तो आइ हे.. हम कल आरामसे बात करेगेनां.. वरना वो हम मेसे कीसीको फेइस नही करपायेगी.. ओर वो भी टुट जायेगी..
मंजुला : (सामने देखते) नही पुनो.. सब अेक ही साथ नीपट जाये तो अच्छा हे.. क्युकी वो धिरेनसे बात कीये बीना नही रहेगी.. ओर धिरेन उनको सब बतादे इनसे पहेले हम ही उनको सब बता देते हे..
पुनम : (रोकते) नही दीदी.. तब तो बहुत अच्छा हे.. हमे चंदा भाभीसे कुछ कहेनेकी जरुरत ही नही पडेगी.. ओर वो खुद धिरेनको यहा बुला लेगी.. तब मे सबके सामने हमारे डीवोर्सके पेपर उनके मुहपे मारुगी..
मंजुला : (मुस्कुराते सर सहेलाते) हंम.. मेरी बेटीका दिमाग बहुत तेज चलने लगा हे.. ठीक हे.. जा नही बताती.. अब तुम लोग तैयार होजाओ ओर सादीमे चले जाओ.. मे यहा आंटीके पास हु..
फीर पुनम लता भावना सबलोग सादीमे जानेकी तैयारीया करने लगे.. तो मंजु वापस नीर्मलाके रुममे चली गइ.. वहा नीर्मला चंदा ओर देवायत भुमीकाको सांत करके समजा रहे थे.. तभी..
नीर्मला : (मंजु अंदर आते ही) मंजु.. सृती कहा हे..?
मंजुला : (सामने देखते) मम्मी.. वो चली गइ.. सहेर.. अपने घर..
नीर्मला : (खडी होते) अरे..? वो अैसे कैसे चली गइ..? बीना कुछ बताये.. रोको उसे..
मंजुला : नही मम्मी.. जाने दीजीये उसे.. वो चली गइ.. अब भुमी आंटी यही रहेगी.. हमेसाके लीये.. हमारे पास.. कुछ दिन उसे वहा अकेली रहेने दीजीये.. जब उनका गुस्सा सांत होजायेगा तो पुनो उनसे बात करलेगी.. आप सृतीकी चीन्ता मत करो..
भुमीका : (थोडी चीन्तासे) बेटा वो वहा अकेली कैसे रहेगी..? उसे कहो.. हमारे लखनके घर चली जाये..
चंदा : हां मंजु.. सृतीका उनके घरपे अकेले रहेना ठीक नही.. उसे कहो हमारे घरपे चली जाये..
मंजुला : (मुस्कुराते) आंटी.. सृतीकी फीकर मत करो.. वो कइ बार घरपे अकेली रेह चुकी हे.. फीर भी यहासे जाते ही लखन उसे हमारे घरपे लेआयेगा.. अभी तो वो थोडी नाराज हे.. जब वो सहेर पहोच जाये..तब पुनो उनसे बात कर लेगी.. कल सादी खतम होते ही लखनको वहा भेज दुगी.. ओर देवु.. आप भी तैयार होजाइअे.. आपको सादीमे नही जाना क्या..?
देवायत : (मंजुके सामने देखते) मंजु.. तुम भुमी..
मंजुला : (मुस्कुराते) अरे आप अपनी इस बीवीकी चीन्ता मत करो.. इसे हम सब सम्हाल लेगे.. अेक दिनतो ये सब होना ही था.. ओर सुनो.. अब आप भुल जाइअे सृतीको.. मुजे इन तीनोसे कुछ जरुरी बात भी करनी हे.. तो आप आरामसे जाइअे..
देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे..
कहेते देवायत चला गया.. तो चंदा नीर्मला ओर भुमीका तीनो मंजुकी ओर सवालीया नजरोसे देखती रही.. ओर देवायतके जाते ही मंजुने दरवाजा बंध करदीया.. फीर तीनोके पास आकर बैठ गइ.. मंजुने तीनोको देवायतकी इतनी सारी बीवीया होनेकी वजहसे जो मुस्कीले हो रही हे.. ओर इसके लीये खुदने ओर देवायतने मीलकर दोनो भाइओके साथ रीलेशनको लेकर जो फैसला लीया हे उनके बारेमे बता दीया.. जीसे सुनकर तीनो ही आस्चर्यसे मंजुको देखती रही..
ओर सीर्फ यही नही.. पुनम लखनकी बातको छोडकर उसने लता देवायतके बारेमे भी तीनोको बता दीया.. फीर आने वाले वक्तमे इस गांव ओर सहेरमे कौनसे बदलाव होगे.. इनकी भी बात बतादी.. जीसे सुनकर तीनो ही सोक्ट होगइ.. फीर लखनको कीस परीस्थीतीमे जडी बुटी पीलाइ वो भी नीलम ओर धिरेनका नाम लीये बगैर तीनोको बता दीया.. ओर मंजुके सामने आस्चर्यसे देखते असंमजमे पड गइ.. तब..
नीर्मला : (आस्चर्यसे देखते) बेटा.. ये तुम क्या बोल रही हो..? इतना बडा फैसला..? क्या सब लोग तुम्हारे इस फैसलेको मानेगे..? ओर लखनको तो हम अपना बेटा मानती हे..
भुमीका : हां मंजु.. नीमुकी बात सही हे.. मानाकी वो भी इस खानदानका खुन हे.. वो राजाका अंस भी हे.. लेकीन उनके साथ..? नही नही.. ये हमसे नही होगा..
चंदा : (थोडा गुस्सेसे) कमीनी.. तुम दोनोने बीना सोचे समजे हमसे पुछे बगैर फैसला कैसे कर लीया..? अेक बार हमसे भी पुछ लेती.. अब हमारे देवरको भी हमारे उपर चडाओगी..? क्या हम जा रहेथे तब तुम जो बात कहेने वाली बात थी.. वो यही तो नही..?
मंजुला : (जोरोसे हसते) हें..हें..हें.. हां दीदी.. लेकीन.. मे आप तीनोको कहा केह रही हुकी लखनके साथ रीलेशन रखो.. वो सब आपकी मरजी.. मेने कहा तो सही.. जो भी होगा अेक दुसरेकी सहमतीसे होगा.. ओर मंजुरीसे होगा.. मेने अपना फैसला कहा कीसीपे जबरदस्तीसे ठोक दीया हे.. बाकी आपकी मरजी.. मेने जो फेसला लीया उनके बारेमे आपको बता दीया.. अब आपको देखना हे.. की अपने देवरको अपने उपर चडाना हेकी नही.. हें..हें..हें..
चंदा : (दांत पीसते अेक मुका मारते) मंजुदी.. तुम कीतनी कमीनी हो.. बस.. अब यही बाकी रेह गया था..
भुमीका : (मुस्कुराते) मंजु.. क्या ये सही होगा..? क्या इसीलीये तुमने लखन बेटेको वो जडी बुटी पीलाइ हेनां..? हमने आते ही देखा.. उनमे कीतना बडा बदलाव आ चुका हे.. जब वो हमसे गले मीला.. बापरे कीतना बडा लग रहा था.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) क्या..? आते ही देख भी लीया.. हें..हें..हें..
चंदा : (सरमाकर हसते) कमीनी.. भुमीदीदीका कहेना हे.. उनके पेन्टके उभारको देखा हे.. ओर कुछ नही..
मंजुला : (जोरोसे हसते) दीदी.. तो मेने कब कहा.. की तीनोने पेन्ट नीकलकर देखलीया.. हें..हें..हें..
चंदा : (पीठमे अेक मुका मारते हसते) कमीनी.. तु नही सुधरेगी.. कुछ तो सरम कर.. ये मा ओर मौसी हे तेरी.. मानाकी तु मेरी सौतन हे.. लेकीन हुतो मेभी तेरी मौसी.. हें..हें..हें..
मंजुला : (मुस्कुराते) दीदी.. ये मजाक नही हे.. सुनो.. आपसे अेक ओर बात कहेती हु.. जबतक इस खानदानके मर्दसे प्यार करती रहोगी.. तबतक इस घरकी सभी ओरते अैसे ही जवान रहेगी.. ओर सोचो.. अेक वक्त अैसा भी आयेगा.. जब हमारे पती इतने काबील नही रहेगे.. जो आप सबको संतुस्ट करपाये.. धीरे धीरे उनकी काम शक्तिया खतम होती जायेगी.. तब आप लोग क्या करोगी..?
नीर्मला : (थोडी चीन्तासे) हम सब जवान रहेगी..? काम शक्ति खतम होजायेगी..? मगर क्यु..?
मंजुला : (मुस्कुराते) हां मोम.. हमारे खानदानसे जुडी कोइ भी ओरत सामान्य नही हे.. या तो वो अप्सराअे हे या फीर परीया.. वो सभी इस घरके मर्दके साथ संभोग करती रहेगी तबतक वो अैसे ही जवान रहेगी.. ओर रही बात देवुकी.. तो सब मेरे बारेमे तो जानते ही हे..
मुजे दुसरे जन्ममे हमारी भावुकी कोखसे फीरसे इस घरमे आना हे.. ओर जवान होते ही मे मेरे विजयकी बीवी होजाउगी.. जब मे चली जाउगी तब देवु.. टुट जायेगा.. ओर उनको कामसे इन्ट्रेस्ट कम होता जायेगा.. तब मेरे विजयके बडे होने तक हमारा लखन ही अेक सहारा होगा.. तब आप लोग क्या करोगी..?
नीर्मला : (अपना सर पकडते) ओह गोड.. कमीनी तुम भी क्या बाते लेकर बैठ गइ.. जा चाइ बाइ पीलादे.. तब की तब सोचेगे.. अभी तो हमारा देवु हे.. हम इसीसे काम चला लेगे.. तेरी बाते सुनकर तो हमारा दिमाग ही खराब हो गया..
चंदा : (खडी होकर जाते) दीदी.. आप लोग फ्रेस होजाओ.. मे चाइ बनाकर लाती हु.. ये तो कमीनी अैसी ही बाते करती रहेगी.. हें..हें..हें..
पुनम : (गले लगते) जी दीदी.. आप सृती दीदीकी चीन्ता मत करना.. अभी वो गुस्सेमे हे.. जब उनका गुस्सा सांत होजायेगा मे सामको ही उनसे बात कर लुगी..
मंजुला : पुनो.. चल अब वक्त आ गया हे.. हम तेरे बारेमे भी चंदा दीदीसे बात करले..
पुनम : (सामने देखते) नही दीदी.. क्या उसे अभी सब बताना जरुरी हे..? वो आज ही तो आइ हे.. हम कल आरामसे बात करेगेनां.. वरना वो हम मेसे कीसीको फेइस नही करपायेगी.. ओर वो भी टुट जायेगी..
मंजुला : (सामने देखते) नही पुनो.. सब अेक ही साथ नीपट जाये तो अच्छा हे.. क्युकी वो धिरेनसे बात कीये बीना नही रहेगी.. ओर धिरेन उनको सब बतादे इनसे पहेले हम ही उनको सब बता देते हे..
पुनम : (रोकते) नही दीदी.. तब तो बहुत अच्छा हे.. हमे चंदा भाभीसे कुछ कहेनेकी जरुरत ही नही पडेगी.. ओर वो खुद धिरेनको यहा बुला लेगी.. तब मे सबके सामने हमारे डीवोर्सके पेपर उनके मुहपे मारुगी..
मंजुला : (मुस्कुराते सर सहेलाते) हंम.. मेरी बेटीका दिमाग बहुत तेज चलने लगा हे.. ठीक हे.. जा नही बताती.. अब तुम लोग तैयार होजाओ ओर सादीमे चले जाओ.. मे यहा आंटीके पास हु..
फीर पुनम लता भावना सबलोग सादीमे जानेकी तैयारीया करने लगे.. तो मंजु वापस नीर्मलाके रुममे चली गइ.. वहा नीर्मला चंदा ओर देवायत भुमीकाको सांत करके समजा रहे थे.. तभी..
नीर्मला : (मंजु अंदर आते ही) मंजु.. सृती कहा हे..?
मंजुला : (सामने देखते) मम्मी.. वो चली गइ.. सहेर.. अपने घर..
नीर्मला : (खडी होते) अरे..? वो अैसे कैसे चली गइ..? बीना कुछ बताये.. रोको उसे..
मंजुला : नही मम्मी.. जाने दीजीये उसे.. वो चली गइ.. अब भुमी आंटी यही रहेगी.. हमेसाके लीये.. हमारे पास.. कुछ दिन उसे वहा अकेली रहेने दीजीये.. जब उनका गुस्सा सांत होजायेगा तो पुनो उनसे बात करलेगी.. आप सृतीकी चीन्ता मत करो..
भुमीका : (थोडी चीन्तासे) बेटा वो वहा अकेली कैसे रहेगी..? उसे कहो.. हमारे लखनके घर चली जाये..
चंदा : हां मंजु.. सृतीका उनके घरपे अकेले रहेना ठीक नही.. उसे कहो हमारे घरपे चली जाये..
मंजुला : (मुस्कुराते) आंटी.. सृतीकी फीकर मत करो.. वो कइ बार घरपे अकेली रेह चुकी हे.. फीर भी यहासे जाते ही लखन उसे हमारे घरपे लेआयेगा.. अभी तो वो थोडी नाराज हे.. जब वो सहेर पहोच जाये..तब पुनो उनसे बात कर लेगी.. कल सादी खतम होते ही लखनको वहा भेज दुगी.. ओर देवु.. आप भी तैयार होजाइअे.. आपको सादीमे नही जाना क्या..?
देवायत : (मंजुके सामने देखते) मंजु.. तुम भुमी..
मंजुला : (मुस्कुराते) अरे आप अपनी इस बीवीकी चीन्ता मत करो.. इसे हम सब सम्हाल लेगे.. अेक दिनतो ये सब होना ही था.. ओर सुनो.. अब आप भुल जाइअे सृतीको.. मुजे इन तीनोसे कुछ जरुरी बात भी करनी हे.. तो आप आरामसे जाइअे..
देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे..
कहेते देवायत चला गया.. तो चंदा नीर्मला ओर भुमीका तीनो मंजुकी ओर सवालीया नजरोसे देखती रही.. ओर देवायतके जाते ही मंजुने दरवाजा बंध करदीया.. फीर तीनोके पास आकर बैठ गइ.. मंजुने तीनोको देवायतकी इतनी सारी बीवीया होनेकी वजहसे जो मुस्कीले हो रही हे.. ओर इसके लीये खुदने ओर देवायतने मीलकर दोनो भाइओके साथ रीलेशनको लेकर जो फैसला लीया हे उनके बारेमे बता दीया.. जीसे सुनकर तीनो ही आस्चर्यसे मंजुको देखती रही..
ओर सीर्फ यही नही.. पुनम लखनकी बातको छोडकर उसने लता देवायतके बारेमे भी तीनोको बता दीया.. फीर आने वाले वक्तमे इस गांव ओर सहेरमे कौनसे बदलाव होगे.. इनकी भी बात बतादी.. जीसे सुनकर तीनो ही सोक्ट होगइ.. फीर लखनको कीस परीस्थीतीमे जडी बुटी पीलाइ वो भी नीलम ओर धिरेनका नाम लीये बगैर तीनोको बता दीया.. ओर मंजुके सामने आस्चर्यसे देखते असंमजमे पड गइ.. तब..
नीर्मला : (आस्चर्यसे देखते) बेटा.. ये तुम क्या बोल रही हो..? इतना बडा फैसला..? क्या सब लोग तुम्हारे इस फैसलेको मानेगे..? ओर लखनको तो हम अपना बेटा मानती हे..
भुमीका : हां मंजु.. नीमुकी बात सही हे.. मानाकी वो भी इस खानदानका खुन हे.. वो राजाका अंस भी हे.. लेकीन उनके साथ..? नही नही.. ये हमसे नही होगा..
चंदा : (थोडा गुस्सेसे) कमीनी.. तुम दोनोने बीना सोचे समजे हमसे पुछे बगैर फैसला कैसे कर लीया..? अेक बार हमसे भी पुछ लेती.. अब हमारे देवरको भी हमारे उपर चडाओगी..? क्या हम जा रहेथे तब तुम जो बात कहेने वाली बात थी.. वो यही तो नही..?
मंजुला : (जोरोसे हसते) हें..हें..हें.. हां दीदी.. लेकीन.. मे आप तीनोको कहा केह रही हुकी लखनके साथ रीलेशन रखो.. वो सब आपकी मरजी.. मेने कहा तो सही.. जो भी होगा अेक दुसरेकी सहमतीसे होगा.. ओर मंजुरीसे होगा.. मेने अपना फैसला कहा कीसीपे जबरदस्तीसे ठोक दीया हे.. बाकी आपकी मरजी.. मेने जो फेसला लीया उनके बारेमे आपको बता दीया.. अब आपको देखना हे.. की अपने देवरको अपने उपर चडाना हेकी नही.. हें..हें..हें..
चंदा : (दांत पीसते अेक मुका मारते) मंजुदी.. तुम कीतनी कमीनी हो.. बस.. अब यही बाकी रेह गया था..
भुमीका : (मुस्कुराते) मंजु.. क्या ये सही होगा..? क्या इसीलीये तुमने लखन बेटेको वो जडी बुटी पीलाइ हेनां..? हमने आते ही देखा.. उनमे कीतना बडा बदलाव आ चुका हे.. जब वो हमसे गले मीला.. बापरे कीतना बडा लग रहा था.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) क्या..? आते ही देख भी लीया.. हें..हें..हें..
चंदा : (सरमाकर हसते) कमीनी.. भुमीदीदीका कहेना हे.. उनके पेन्टके उभारको देखा हे.. ओर कुछ नही..
मंजुला : (जोरोसे हसते) दीदी.. तो मेने कब कहा.. की तीनोने पेन्ट नीकलकर देखलीया.. हें..हें..हें..
चंदा : (पीठमे अेक मुका मारते हसते) कमीनी.. तु नही सुधरेगी.. कुछ तो सरम कर.. ये मा ओर मौसी हे तेरी.. मानाकी तु मेरी सौतन हे.. लेकीन हुतो मेभी तेरी मौसी.. हें..हें..हें..
मंजुला : (मुस्कुराते) दीदी.. ये मजाक नही हे.. सुनो.. आपसे अेक ओर बात कहेती हु.. जबतक इस खानदानके मर्दसे प्यार करती रहोगी.. तबतक इस घरकी सभी ओरते अैसे ही जवान रहेगी.. ओर सोचो.. अेक वक्त अैसा भी आयेगा.. जब हमारे पती इतने काबील नही रहेगे.. जो आप सबको संतुस्ट करपाये.. धीरे धीरे उनकी काम शक्तिया खतम होती जायेगी.. तब आप लोग क्या करोगी..?
नीर्मला : (थोडी चीन्तासे) हम सब जवान रहेगी..? काम शक्ति खतम होजायेगी..? मगर क्यु..?
मंजुला : (मुस्कुराते) हां मोम.. हमारे खानदानसे जुडी कोइ भी ओरत सामान्य नही हे.. या तो वो अप्सराअे हे या फीर परीया.. वो सभी इस घरके मर्दके साथ संभोग करती रहेगी तबतक वो अैसे ही जवान रहेगी.. ओर रही बात देवुकी.. तो सब मेरे बारेमे तो जानते ही हे..
मुजे दुसरे जन्ममे हमारी भावुकी कोखसे फीरसे इस घरमे आना हे.. ओर जवान होते ही मे मेरे विजयकी बीवी होजाउगी.. जब मे चली जाउगी तब देवु.. टुट जायेगा.. ओर उनको कामसे इन्ट्रेस्ट कम होता जायेगा.. तब मेरे विजयके बडे होने तक हमारा लखन ही अेक सहारा होगा.. तब आप लोग क्या करोगी..?
नीर्मला : (अपना सर पकडते) ओह गोड.. कमीनी तुम भी क्या बाते लेकर बैठ गइ.. जा चाइ बाइ पीलादे.. तब की तब सोचेगे.. अभी तो हमारा देवु हे.. हम इसीसे काम चला लेगे.. तेरी बाते सुनकर तो हमारा दिमाग ही खराब हो गया..
चंदा : (खडी होकर जाते) दीदी.. आप लोग फ्रेस होजाओ.. मे चाइ बनाकर लाती हु.. ये तो कमीनी अैसी ही बाते करती रहेगी.. हें..हें..हें..