Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 71 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) कमीनी.. जा मीलले उसे सब यहा हे तो आज अच्छा मौका हे मीलनेका.. पता नही मे कब इनसे मील पाउगी.. ओर सुन.. काम होते ही जल्दी वापस आजाना..

बसंती : (मुस्कुराते कानमे) कमीनी मे भी देख रही हु.. तु कबसे हमारे देवरके पीछे पडी हे.. देख कीतना बडा हे इनका.. सब सादीमे बीजी हेतो इसे बुलाले अंदर.. क्या पता तेरी भी खुजली मीट जाये.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सरमाकर हसते) नही यार.. इनको यहा मीलना पोसीबल नही हे.. बस.. अ‍ेक बार इन सबको सहेर जानेदे.. फीर तो मोका ही मोका हे.. अब तो मेभी आजाद होजाउगी.. अब जा भी.. तेरा यार तेरा इन्तजार करता होगा..

ब्रीन्दाने बसंतीको जल्दीसे वापस आनेको कहेते घर जानेकी अनुमती देदी.. तो बसंती भी सबकी नजर बचाते अपने घरपे चली गइ.. जैसे ही वो घरपे आइ मुनाने दरवाजा बंध करते बसंतीको वही दबोच लीया.. ओर उसे गोदमे उठाकर अपने बेडरुममे ले गया.. बसंतीको बेडपे पटकते उनकी सारी कमर तक उची करते अपना लंड बहार नीकालते बसंतीके पैरोके बीच आ गया.. तो बसंती भी मुनाकी बेकरारी देखकर सरमाके हसने लगी..

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बसंती : (मुस्कुराते) मेरे जानु.. इतनी बेताबी अच्छी नही.. मे कहा भागे जा रही हु.. हें..हें..हें..

मुना : (अपना लंड चुतपे धीसते) मम्मी.. अभी कुछ मत बोलना.. आज आप क्या मस्त लग रही हे.. मेरा तो सुबह ही आपको चोदनेका मन कर रहा था.. मे आज मेरी मासुकाको नही मेरी माको चोदना चाहता हु..

बसंती : (उतेजीत होते) तो फीर चोदले मेरे लाल.. तुजे रोका कीसने हे..

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कहा तो मुनाने अ‍ेक ही जटकेमे अपना पुरा लंड बसंतीकी चुतमे घुसा दीया तो बसंतीकी चीख नीकल गइ.. ओर आंखमे आंसु आगये.. मुना बसंतीकी परवा कीये बगैर हाथके बल उचा हो गया.. ओर बसंतीको धनाधन चोदने लगा.. बसंती भी मदहोस होने लगी.. ओर आंखोकी पुतलीया पलटते मुनाके हर धकेको अपनी चुतकी गहीराइओमे महेसुस करते अपनी कमरको हीलाते छटपटाने लगी..

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दोनोके बीच बहुत ही कामुक तरीकेसे धमाकेदार घमासान चुदाइ होने लगी.. बसंतीके बुब्स मुनाके हर धकेके साथ तालमेलमे उछलते रहे.. कुछ ही देरकी चुदाइके बाद बसंती अपकडने लगी.. ओर मुनाके लंडको अपनी चुतमे भीगोने लगी.. तो मुना ओर उतेजीत हो गया.. ओर जोरोसे कमर हीलाते बसंतीको चोदने लगा.. तब बसंतीकी चुतमे भी दर्द होने लगा.. ओर वो मुह बीगाडते मुनासे चुदवाती रही..

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जब मुनाने उसे दुसरी बार जडा दीया तो अपना लंड नीकालते बसंतीको घोडी बनादीया.. ओर पीछेसे लंड घुसाके बसंतीको पीठसे चीपकते उनके दोनो बुब्स थामकर जोरोसे चोदने लगा.. आज बसंती मुनाको हर अ‍ेन्गलमे चुदवानेमे साथ दे रही थी.. तो मुना भी बसंतीको काफी देर तक चोदता रहा.. ओर आखीर दोनो अपने चरम पे पहोंच गये.. ओर मुना बसंतीकी चुतको भरते हरी भरी करने लगा..

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ओर उनकी पीठपे ही ढेर हो गया.. दोनो काफी देर अ‍ैसे ही पडे रहे.. आज बसंती हीलनेकी स्थीतीमे भी नही थी.. जो बसंती सुबहसे ही अपने बेटे मुनासे चुदवानेके लीये बेकरार थी.. उसी बसंतीको अभी अभी मुनाने उसे पुरी बहेरमीसे चोद लीया था.. ओर बसंतीकी सारी अकड नीकाल दीथी.. जैसे ही मुनाने अपनां लंड खीचके बहार नीकाला.. बसंती दर्दके मारे मुह बीगाडते बेडपे गीर गइ..

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ओर पीठके बल लेटते अपनी सांसको कंट्रोल करने लगी.. उनकी चुतसे दोनोका काम रस बहार नीकल रहा था.. अभी भी बसंतीकी चुत कीसी गभरु परींदेकी तराह फडफडा रही थी..तब मुना बसंतीको गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया ओर बसंतीको नीचे उतारा तब बसंतीके पैर लडखडाने लगे.. ओर वो मुनाको पकडकर जुठे गुस्सेसे सीनेमे मुका मारने लगी.. तो मुना भी हसते हुअ‍े बसंतीको अपनी बाहोमे भीच लेता हे.. ओर उनके होठोको चुम लेता हे..
 
बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) छोडीये मुजे.. क्या अभी भी आपका जी नही भरा..? आज तो आपने अ‍ेक ही बारमे मेरी हालत बीगाडदी.. आज क्या हो गया था आपको जो मुजे इतजी जोरोसे चोद रहे थे..? बापरे.. अब इस हालतमे मे वहा कैसे जाउगी..

मुना : (मुस्कुराते गाल चुमते) सोरी डीर्लींग.. वो आज श्रीधरकी सादी थी.. ओर उपरसे तुम मस्त तैयार होकर आइ थी.. तो मुजसे रहा नही गया.. ओर कुछ नही.. मोम.. चलोना हम भी सादी कर लेते हे.. अब अ‍ैसे छीप छीपके मीलनेमे मजा नही आता..

बसंती : (अपनी चुतको साफ करते) अरे पागल होगये हो क्या..?.. मत भुलो.. अभी आपके बापु जींदा हे.. ओर अ‍ैसे छीप छीपके ही प्यार करनेमे मजा हे.. वरना मे अ‍ेक बार सादी करके आपकी हो गइ.. तो आप मुजे अ‍ैसे ही प्यार थोडीनां करोगे..? चलीये अब सादीमे नही जाना क्या..? लाइअ‍े मे आपका हथीयार धो देती हु.. अब तो उस कमीनीको भी पता चल जायगा की मे आपसे जमकर चुदवाकर आइ हु.. आपने तो मेरी चाल ही बदलदी.. अभी भी नीचे कीतना दर्द हो रहा हे..

मुना : (आस्चर्यसे देखते) कौन..? कीसको पता चल जायेगा..?

बसंती : (सरमाकर हसते) अरे वो.. जो आजकल मेरी पकी सहेली होगइ हे.. तेरे श्रीधरकी मां.. ब्रीन्दा.. वो भी तो अपने बेटे श्रीधरसे चुदवाती हे.. कमीनी बहुत कामी ओरत हे.. ओर तेरा दोस्त भी उनके पीछे पागल हे.. जैसे मे तेरे पीछे पागल हु.. हें..हें..हें..

मुना : (हसते) मोम.. वो दोनो मा बेटे भी रीलेशनमे थे हमे तो पता ही नही था.. सीर्फ लखन भैया जानते थे.. हमे तो सब बादमे पता चला..

बसंती : (आकर बाहोमे समाते) जानु.. अ‍ेक बात कहु..? अभी कीसीको कहीयेगा नही.. जब आपका दोस्त पढता थानां.. तब ही उन मां बेटेने सादी करली थी.. पता नही हमारी सादी कब होगी..

मुना : (मुस्कुराते होठ चुमते) मोम.. इसीलीये केह रहा हु आप भी मुजे सादी करलो.. क्युकी ब्रीन्दा आंटीका पती भी अभी जीन्दा हे.. तो फीर हम सादी क्यु नही कर सकते..?

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बसंती : (सीनेपे सर रखकर मुस्कुराते) जानु.. सादी तो अब अ‍ेक औपचारीक रेह गइ हे.. हमने सबकुछ तो कर रहे हे.. जो अ‍ेक पती पत्नीके बीच होता हे.. ओर मेतो मनसे आपको अपना पती भी मान चुकी हु.. ओर पतीकी तराह ही आपका खयाल रखती हु.. तो फीर थोडासा इन्तजार करनेमे क्या हर्ज हे..?

मुना : (मुस्कुराते) ठीक हे मोम.. जैसा आपको ठीक लगे..

बसंती : (अलग होते) बेटा अब कीतने दिन घरपे बैठे रहोगे..? आपके डोक्टरका तो कुछ अता पता नही वो कब आयेगे.. वरना आप अपने बापुकी दुकान ही सम्हाललो..

मुना : (मुस्कुराते) मोम.. बडे ठाकुर भैया केह रहे थे.. ओर तीन चार दिनमे ही होस्पीटल खुल जायेगी.. केह रहेथे.. वहा अब वसुधा नामकी कोइ लेडी डोक्टर आ रही हे.. सायद सुधीर अंकल हमेसाके लीये बोम्बे चले गये हे.. अब चलीये सादीमे..

फीर दोनो ही बारी बारी वापस आजाते हे.. बसंती थोडी धीमे चल रही थी.. ओर उनके पैर भी थोडा लडखडाते थे.. जीसे देखकर ब्रीन्दा उनके सामने देखकर हसने लगी.. तो बसंती सर्मसार होगइ.. उसे नही पताथा की बरखा कबसे दोनोकी हरकत देख रही हे.. ओर वो बसंतीको अ‍ैसे चलते देखकर बहुत कुछ समज जाती हे.. ओर मन ही मन खुस होजाती हे.. अब उसने बसंतीके उपर नजर रखनेकी ठानली..

तो आज वृन्दा ओर जीतुलाल भी बहुत खुस थे.. क्युकी आज जीतुलालको हमेसा हमेसाके लीये ब्रीन्दासे छुटकारा जो मीलने वाला था.. तो वृन्दा भी इसीलीये खुस थी की अब उसे भी हमेसाके लीये जीतुलालका साथ मीलने वाला था.. दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर बार बार हस रहे थे.. जब भी मौका मीलता दोनो बारी बारी घरके अंदर चले जाते.. ओर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा जाते..

फीर जीतुलाल वृन्दाके बुब्सको मसलते उनके होठोका रसपान करता.. फीर बारी बारी दोनो बहार चले आते.. ओर वृन्दा जीतुलालाकी ओर देखकर सरमाके हसने लगती.. आज दोनोके उपर प्यारका परवाना चढा हुआ था.. तब अ‍ेक सख्स था.. जो दोनोकी हरकतको बराबर ध्यान रखता था.. जो अभी वृन्दाके उपर नजर जमाये हुआ था.. वो था श्रीधर..

जबसे उसे ब्रीन्दासे पता चलाकी तउनके पापा जीतुलाल ओर जयश्रीकी मम्मीके बीच चलकर हे.. ओर जयश्री उन्हीकी बेटी हे.. ये सब जानकर श्रीधर अपनी मम्मीको धोखेका बदला लेना चाहता था.. तबसे वो सोच रहाथा.. की उनकी मम्मीका बदला कैसे लीया जाये.. तबसे उनका वृन्दाको लेकर नजरीया बदलने लगा था.. इसीलीये वो जीतुलाल ओर वृन्दापे हर वक्त नजर रखता था..
 
जब लखन इस गांवको छोडकर सहेर चला गया था.. इसी बीच जवेरीलालने भी सहेरमे अ‍ेक दो बेड वाला मकान अच्छी सोसायटीमे लेलीया था.. जो लखनकी सोसायटीके पास ही थी.. सृतीका बंगलो भी लखनके बंगलेकी दुसरी गलीमे ही था.. जीतुलालने भी अपने डीवोर्सके सभी पेपर रेडी रखे थे.. तो जवेरीलालने बटवारेका सब पेपर रेडी करवा लीया था.. सबलोगने अपनी अपनी तैयारीया करके रखी थी..

जैसे ही सादी संपन हुइ बरखा ओर जागृती जयश्रीको लेकर घरमे चले गइ.. तो श्रीधर भी लखनको बुलाकर अपने दोस्तोके साथ अंदर चला गया.. इसी बीच रमेशने सभी जेन्ट्सको भोजनके लीये बुला लीया.. तो सभी लेडीज अ‍ैसे ही मंडपके नीचे बैठकर गप्पे लगा रही थी.. फीर जब जेन्ट्सने भोजन करलीया तो लेडीस भोजन करने आगइ.. फीर सबलोग भोजन करके अपने अपने घरकी ओर जाने लगे..

मंजु भी घरकी सभी लेडीसको लेकर हवेलीपे चली गइ.. ओर लास्टमे देवायत लखन ओर नजदीकके पहेचान वाले वही घरके लोगोके साथ भोजन करने लगे.. आज हवेलीपे चंदाको कही चेइन नही मील रहा था.. तो सादीमेसे आते ही वो फोन लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर उसने धिरेनको फोन लगा दीया.. तो दो तीन बार ट्राइ कीया फीर भी धिरेनने फोन नही उठाया तब चंदा ओर परेसान होगइ.. ओर उसने मंजुको रुममे बुला लीया..

मंजुला : (अंदर आते ही) हां दीदी कहीये.. क्या भावेस सो गया..?

चंदा : (थोडी परेसानीमे) हां मंजुदी.. सुनो.. मुजे आपसे कुछ बात करनी हे.. मे जरा दरवाजा बंध करलु..

मंजुला : (सबकुछ समज गइ फीर भी) अरे.. दरवाजा क्यु बंध कीया..? कोइ खास बात हे क्या..?

चंदा : (दरवाजा बंध करके वापस आते) हां दीदी.. सीर्फ खाली ही बंध कीया हे.. यहा आइअ‍े.. बेठपे बेठकर आरामसे बात करते हे..

मंजुला : (पास बैठते) हां दीदी.. कहीये.. क्या बात हे..?

चंदा : (मुस्कुराते) दीदी.. अब आपसे कैसे कहु..? वो.. वो.. मे देख रही हु.. पीछले दो दिनसे.. पुनो दीदी.. यहा हे.. ओर वो धिरेन भी मेरा फोन नही उठाता.. कही इन दोनोके बीच कुछ जगडा बगडा..? आइ मीन.. सब ठीक तो हेनां..?

मंजुको अब चंदाको सबकुछ बताना उचीत लगा.. क्युकी इस वक्त देवायत ओर लखन भी यहा नही थे.. ओर मंजु सबकुछ जल्दीसे नीपट जाये तो अच्छा हे.. यही सोचकर चंदाको सबकुछ बतानेका फैसला करलेती हे.. ताकी वो जल्दसे जल्द पुनमको लखनके पास सहेर भेज सके.. मंजु गहेरी सोचमे डुबी हुइ थी तभी अ‍ेक बार फीर चंदाकी आवाजने उसे तंद्नसे बहार नीकाल दीया..

चंदा : (थोडी परेसानीसे) मंजुदीदी.. मे आपसे कुछ पुछ रही हु.. आप क्या सोच रही हे..? क्या इन दोनोके बीच सबकुछ ठीक तो हेनां..?

मंजुला : (सामने देखकर धीरेसे) नही दीदी.. सबकुछ खतम हो गया हे..

चंदा : (आस्चर्यसे देखते चीन्तासे) सबकुछ खतम होगया हे..? मतलब.. मे कुछ समजी नही.. दीदी मुजे सबकुछ खुलके बताओनां.. दोनोके बीच क्या हुआ..?

मंजुला : (नजरे चुराते) दीदी.. दिलपे पथर रख लीजीये.. हमारे धिरेनने पुनोको डीवोर्स देदीया हे.. वो भी देवु ओर दयाकी सादी थी उसी दिन.. यानी आप लोग यहा आये उनसे ठीक अ‍ेक दिन पहेले..

चंदा : (सोक्ट होते चोंकते जोरोसे) क्या..? धिरेनने पुनो दीदीको डीवोर्स देदीया..? लेकीन क्यु..? दोनोके बीच कुछ जगडा बगडा हुआ था क्या..?

मंजुला : नही दीदी.. हमारी पुनम तो अ‍ैसी हे वो कीसीके सामने उची आवाजमे बात तक नही करती.. तो वो जगडा क्या करेगी..?

चंदा : (परेसान होते) तो फीर धिरेनने उसे डीवोर्स क्यु दिया..? क्या आप मुजे बता सकती हे..? वैसेभी आपको तो सबकुछ पता चल जाता हे.. तो फीर मे दो दिनसे यहा आगइ हु.. तो मुजसे ये बात छीपाइ क्यु..? मंजुदी.. दोनोके बीच कुछ तो हुआ हे.. बताइअ‍े मुजे..

मंजुला : बडी दीदी.. बात दरसल ये हेकी धिरेन उनकी सादीसे पहेले अ‍ेक दुसरी लडकीसे प्यार करता था.. ओर उनसे ही सादी करना चाहता था.. बस.. पुनोसे सादी तो सीर्फ अ‍ेक बदलेकी भावनासे की थी..

चंदा : (सोक्ट होते) बदलेकी भावनासे..? कीस बातका बदला..? अगर वो दुसरी लडकीसे सादी करना चाहता था तो मुजे बता देना चाहीये था.. तो फीर उसने पुनो दीदीसे क्यु सादी की..? मंजुदी.. मुजे पुरी बात बता दीजीये..

फीर मंजु नीलमका नाम लीये बगैर चंदाको सुरुसे लेकर अंत तक सबकुछ बता देती हे.. ओर धिरेन उनसे कीस बातका बदला लेना चाहता था वोभी बता दीया.. ओर ये भी बता दियाकी धिरेन पुनमके बारेमे ओर उनके बारेमे कैसी सोच रखता हे.. जीसे सुनकर चंदा फुटफुटके रोने लगी.. उसे यकीन नही हो रहा थाकी उनके खुदके बेटेने उसे रंडी तक केह दीया था..
 
ये सब बाते सुनकर चंदाका गुस्सा सातवे आसमानमे पहोंच गया.. ओर वो अपने दोनो हाथोसे अपना सर पीटने लगी.. चंदा पागलोकी तराह बरताव करने लगी.. तो मंजुने उनका हाथ पकडलीया.. ओर उनको गले लगा लीया.. फीर भी चंदा धिरेनके बारेमे अनाप सनाप बोले ही जा रही थी.. चंदाके दिमागमे ये बात बैठ गइ.. की धिरेनने उनके ओर देवायतके रीलेशनकी वजहसे पुनमके साथ बुरा कीया हे..

उसे अब समज नही आ रहाथाकी वो पुनमसे कैसे नजरे मीलायेगी.. उसने देखा ये दो दिनमे पुनमने उनके साथ व्यवहारमे कोइ रागद्वेस नही कीया.. बस.. चंदा जोरोसे रोये ही जारही थी.. तभी सबलोग भी चंदाके रोनेकी आवाज सुनकर मंजुके रुममे दरवाजा खोलकर आगये.. तो पुनम सबकुछ समज गइ.. ओर चंदाको रोते देखकर उनकी आंखोमे भी आंसु आगये.. ओर वो भी चंदाके पास जाने लगी..

तभी चंदाने पुनमको देखलीया.. तो खडी होकर दोडते पुनमको अपने गले लगा लेती हे.. ओर फीरसे फुटफुटकर रोने लगती हे.. नीर्मला भुमीका चंदाको सांत करने लगी.. क्युकी इस बारेमे मंजुने दोनोको पहेलेसे ही सबकुछ बता दीया था.. काफी देर समजानेके बाद चंदा सांत हुइ तब वो पुनमके सामने हाथ जोडकर खडी होगइ.. जैसे उनकी माफी मांग रही हो.. पुनम उनको अ‍ैसा ना करनेको कहेते चंदाके गले लग गइ..

चंदा : (रोते) दीदी.. मुजे माफ करदीजीये.. मेरी वजहसे आपकी जींदगी बरबाद होगइ.. अगर मुजे पता होता तो मे आपकी सादी धिरेनसे कभी नही करवाती.. मुजे माफ करदीजीये.. माफ कर दीजीये..

पुनम : (सांत करते) बस भाभी.. बस.. आपको मेरी कसम.. पहेले आप सांत होजाइअ‍े.. इसमे आपकी कोइ गलती नही हे.. ये सब मेरी किस्मतमे ही लीखा होगा.. मुजे आपसे कोइ सीकायत नही हे..

चंदा : (आंसु पोछते) दीदी.. आपका दिल कीतना बडा हे.. मे आपके साथ हु.. देखना इस हरकतकी वजहसे मे उस कुतेको कभी माफ नही करुगी.. आजसे वो मेरे लीये मर गया..

मंजुला : (जोरोसे) दीदी.. ये आप क्या अनाप सनाप बोल रही हे.. वो बेटा हे आपका.. कोइ बेटेके लीये अ‍ैसा बोलते हे..?

चंदा : (मंजुसे हाथ जोडते) नही मंजुदी.. इनसे तो बे ओलाद होना ही अच्छा हे.. आप भी मुजे माफ करदीजीये.. मे इस घरकी गुनेहगार हु.. मेरी वजहसे पुनो दीदीका घर टुट गया.. हे भगवान.. ये क्या हो गया मुजसे..

मंजुला : (खडी होकर गले लगाते) बस.. बस.. अब कुछ भी मत बोलना.. इनमे आपका कोइ कसुर नही हे.. जो होनाथा वो होगया.. अब आप पहेलेकी तराह ही रहीयेगा.. भुल जाइअ‍े सब..

नीर्मला : (प्यारसे सर सहेलाते) चंदा सांत होजा अब.. इसमे तेरी कोइ गलती नही हे..

चंदा : (नीर्मलाको) बडी दीदी.. मेने क्या गुना कीया था..? सीर्फ देवुसे प्यार ही तो कीया था.. मुज विधवाका हाथ थामा हे देवुने.. मेरी विरान जींदगीमे खुसीया भरदी.. ओर बदलेमे मेने इसे क्या दिया.. उनकी ही बहेनका घर उजाड दीया.. मे धिरेनको कभी माफ नही करुगी.. (मंजुकी ओर हाथ जोडते) दीदी.. मुजे भी इस घरसे नीकाल दीजीये.. इस कुते की यही सजा हे..

मंजुला : (जोरोसे) अरे पागल होगइ हे क्या..? क्या अनाप सनाप बके जा रही हे.. चुप होजाइअ‍े.. ये घर आपका हे.. आपका ससुराल.. कहाना इसमे आपकी कोइ गलती नही.. फीर भी..? अब तो मरते दम तक आप इसी घरमे रहेगी.. समजी..?

चंदा : (सांत होकर बैठते) नही दीदी.. अब मे इस घरमे नही रेह पाउगी.. मे जब भी पुनम दीदीको देखुगी.. मे इनसे नजरे नही मीला पाउगी.. ओर नाही देवुसे.. मुजे मेरे घर जाना हे.. आप लखन भैयाको कहीये मुजे मेरे घरपे छोडदे..

भुमीका : (जोरोसे) चंदा.. क्या अनाप सनाप बके जा रही हे.. अगर यहासे जानेकी बात कहीनां.. तो तुजे अ‍ेक जापट लगाउगी.. कबसे सब केह रही हे..की इसमे तेरी कोइ गलती नही.. फीर भी कीसीकी बात सुनती ही नही.. चुपचाप बैठ इधर.. हम सब अ‍ेक ही कस्तीमे सवार हे.. अ‍ेक तो मुजसे रुठकर चली गइ.. अब तुभी यहासे जाना चाहती हे..?

चंदा : (सर पकठते) दीदी.. मे क्या करु..? मेरा तो दिमाग ही काम काम नही कर रहा.. मेरा सर दर्दसे फटा जा रहा हे.. मेने सोचा नही थाकी मेरी ओलाद अ‍ैसी नीकलेगी.. उसने मुजे रंडी कहा.. कोइ अपनी मांके बारेमे अ‍ैसा बोलता हे..? पता नही मेने उसे कहा पालनेमे गलती करदी..

मंजुला : (विजयको चंदाकी गोदमे देते) दीदी.. भुल जाइअ‍े सब.. आजसे मेरा विजयही आपका लडका हे.. पालीये इसे.. दुनीयाका काबील इन्सान बनाइअ‍े इसे.. आजसे मे मेरे विजयको आपको सोंपती हु..

चंदा : (विजयको वापस देते) नही दीदी.. मे अ‍ेक काबील मां नही बन सकी.. अगर इसे भी पालनेमे मुजसे कमी रेह गइ.. तो मे कीसीको मुह दिखाने लायक नही रहुगी.. मे इस घरकी गुनेहगार हु.. सजा दीजीये मुजे.. आप लोगोकी हर सजा मंजुर हे मुजे..

नीर्मला : (परेसान होते) चंदा.. क्या हो गया हे तुजे..? सांत होजा.. कहाना इसमे तेरी गलती नही हे..

चंदा : (सामने देखते) दीदी.. मेरी ही गलती हे.. सुना नही आपने.. मुजे धिरेनने क्या कहा.. मे अ‍ेक रंडी हु.. तो रडींकी यही सजा हे.. मेरी वजहसे पुनोदीदीकी जींदगी खराब हुइ हे.. मंजुदी.. आप मुजे सजा दिजीये..
 
मंजुला : (सामने देखते) अच्छा..? सजा चाहीये आपको..? तो फीर ठीक हे.. सुनीये.. आजसे आपकी सजा ये हेकी अब आप विजयको अपने बेटेकी तराह पालेगी.. ओर अ‍ैसे पालेगी.. जीसे हमारी पुनो चाहेगी.. इस बारेमे आप कभी पुनोकी बात नही टालेगी.. क्युकी इसी विजयकी माध्यमसे हमे हमारे स्वामीको इस धरतीपे लाना हे.. समजी..? आजसे आपका यही कर्तव्य होगा.. बोलो मंजुर हे..?

चंदा : (विजयको लेकर सीनेसे लगाते) हां.. हां दीदी.. मंजुर हे.. आजसे यही मेरा बेटा हे.. देखना मेने धिरेनके पालनेमे जो गलती की.. इस गलतीको मे अब नही दोहराउगी.. मे इसे खुब पढाउगी.. ओर जैसा पुनोदीदी कहेगी.. अ‍ैसा ही करुगी.. ओर अ‍ैसे ही पालुगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. ये हुइना बात.. लेकीन याद रखना.. अब भुलसे भी यहासे जानेकी बात मत करना.. वरना मुजसे बडी हे फीर भी आपकी टांगे तोड दुगी.. समजी..? हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते मुस्कुराते) हां.. नही जाउगी.. अब सबलोग जाओ भी.. सबलोग यहा क्यु अ‍ेकठे हुअ‍े हे.. यहा कोइ तमासा चल रहा हे क्या..? मुजे मेरे बेटेको दुध पीलाना हे.. देखो.. मेरे बीना कीतना कमजोर हो गया हे..

कहेते चंदा सारीका पलु उठाकर ब्लाउसको उचा करती हे.. ओर विजयको अपने बुब्सकी नीपल मुहमे देते सरपे सारीके पलुसे ढक देती हे.. तो सबलोग आस्चर्यसे चंदाकी ओर देखते बहार नीकल जाते हे.. सीर्फ पुनम ही चंदाके कंधेपे सर रखते पास बैठती हे.. ओर बाकी सब होलमे आकर बैठ जाते हे.. तब मंजु भी सबके पास बैठती हेतो सब उनकी ओर सवालीया नजरोसे देखने लगती हे.. तभी..

मंजुला : मोम.. पुनमका सुनकर दीदीको सदमा लगा हे.. अभी उनकी मानसीक हालत ठीक नही हे.. हमे रातमे सोते वक्त भी उनका खयाल रखना पडेगा.. अब जीतनी जल्दी हो सके.. हमे उनके दिमागसे धिरेन पुनोकी बातको नीकालनी पडेगी.. अभी कुछ दिन उनको अकेला छोडना ठीक नही हे..

नीर्मला : (थोडी नीरास होते) मंजु बेटा.. मुजे तो चंदाकी चीन्ता होने लगी हे.. चंदा महज सीर्फ सात सालकी थी.. जब मांने उनको मुजे सौपा था.. मेने ओर राजीवने उसे अपनी बेटीकी तराह पाला हे.. ये बहुत सेन्सीटीव हे.. वो कभी गलत बात बरदास्त नही करपाती.. तब उसे सम्हालना मुस्कील होजाता हे.. अगर दो तीन दिन इनकी दिमागी हालत अ‍ैसी ही रही.. तो उसे कीसी मानसीक डोक्टरको दीखाना पडेगा..

भुमीका : (चीन्तासे) हां.. देखा नही.. उनको पता हे.. अभी उनको दुध नही आ रहा.. फीर भी विजयको कैसे दुध पीलाने लगी.. अच्छा हे यहा देवु नही था.. वरना ये सब देखकर उनको भी दुख होता..

मंजुला : नही आंटी.. देवुको सब पता हे.. परसो मेने ही सबको बता दीया था.. सुनकर वोभी थोडा दुखी हो गये थे.. लेकीन चंदा दीदीकी वजहसे कुछ नही बोले.. मे सोच रही हु.. अगर अ‍ेक दो दिनमे चंदा दीदीकी हालतमे कोइ सुधार नही हआ.. तो कुछ दिनके लीये इसे लखनके पास सहेर भेज दुगी..

नीर्मला : हां बेटा.. ये तुमने सही सोचा.. अगर वो यहा रहेगी तो पुनम बीटीयाको देखकर दुखी होती रहेगी.. उनके दिमागमे घुस गया हे.. की पुनमका घर मेरी वजहसे टुटा हे..

बहार सब बाते कर रही थी.. तब धीरे धीरे भावना लता भी पुनमके रुममे चली गइ.. ओर भावना अपनी बच्चीको दुध पीलाने लगी.. लता भावनाको देवायतके बारेमे कुछ पुछना चाहती थी.. जो पुछनेसे हीचकीचा रही थी.. तो दुसरी ओर पुनम अब भी चंदाके कंधेपे सर रखते बैठी थी.. ओर चंदा विजयको दुध पीलाते पुनमके सरपे हाथ घुमा रही थी.. आखीर उनसे रहा नही गया.. ओर पुछ ही लीया....

कन्टीन्यु
 
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २३५

बहार सब बाते कर रही थी.. तब धीरे धीरे भावना लता भी पुनमके रुममे चली गइ.. ओर भावना अपनी बच्चीको दुध पीलाने लगी.. लता भावनाको देवायतके बारेमे कुछ पुछना चाहती थी.. जो पुछनेसे हीचकीचा रही थी.. तो दुसरी ओर पुनम अब भी चंदाके कंधेपे सर रखते बैठी थी.. ओर चंदा विजयको दुध पीलाते पुनमके सरपे हाथ घुमा रही थी.. आखीर उनसे रहा नही गया.. ओर पुछ ही लीया.... अब आगे

चंदा : (आंख गीली करते) दीदी.. मुजे माफ करदो.. आखीर वो कीस लडकीसे प्यार करता था..? आपको तो सब पता ही होगा..

पुनम : (सही बैठते जुठ बोलते) भाभी.. पता नही.. केह रहेथे वो सहेरमे रहेती हे.. भाभी.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? धिरेन अगर उन लडकीसे सादी भी करलेतानां.. फीर भी मुजे कोइ अ‍ेतराज नही था.. आपको तो पता हे हमारे खानदानमे भी मर्द कीतनी सादीया करते हे.. मुजे उस लडकीसे कोइ अ‍ेतराज नही था.. लेकीन उसने मेरे ओर आपके चरीत्रके बारेमे गलत बोला.. मेरे बच्चेके बारेमे गलत बोला.. जो अभी इस दुनीयामे आया भी नही..

चंदा : (आंसु बहाते) दीदी.. मुजे माफ करदो.. ये सब मेरी वजहसे हुआ हे.. आप मुजे खुलकर बताइअ‍े.. धिरेनने आपको क्या बोला..

पुनम : (आंख गीली करते) भाभी.. इसने मुजे चरीत्रहिन कहा.. कहेता था.. तेरा चकर मायकेमे कही चल रहा हे.. तभी तो मायकेमे पडी रहेती हो.. ओर ये बच्चा भी तेरे उन यारका होगा.. जीनके साथ तुमने मुह काला कीया हे.. उनके साथ मुह काला करते उनका पाप मेरे गले डाल रही हो.. ओर आपको तो पता हे.. मे यहा कीसलीये रुकी थी.. भाभी.. वो मेरे साथ रहेना ही नही चाहते थे.. तो मेने साइन कर दीया..

चंदा : (आंसु बहाते) दीदी.. धिरेनने बहुत बडी गलती करदी.. मे उसे कभी माफ नही करुगी.. पता नही अब मे देवुसे भी कैसे नजरे मीलाउगी.. मुजे बार बार याद आता रहेगा..

पुनम : भाभी.. इस बारेमे दोनो भैयाको सब कुछ पता हे.. वो आपको कुछ नही कहेगे.. आप अपने दिमागसे ये बात नीकालदो.. हमे आपसे कोइ गीला सीकवा नही.. ओर हां.. मेने धिरेनको वो साइन वाला पेपर नही दिया.. कहाथा जब भाभी आजायेगी.. तब सबकी हाजरीमे दे दुगी..

चंदा : (गाल सहेलाते) दीदी.. ये आपने सही कीया.. आनेदो उस कुतेको.. मे उनकी मार मारके चमडी उखाढ दुगी..

पुनम : (सही बेठते) नही भाभी.. आपको मेरी कसम.. आप उसे कुछ मत कहीयेगा.. माफ करदीजीये उनको.. दे देजीये उनको पेपर.. अब मुजे अ‍ैसे आदमीके साथ नही रहेना..

चंदा : दीदी.. मे कीतनी खुस नसीब हु.. जो आप जैसा परीवार मुजे मीला.. आप लोग कीतने विसाल र्हदयके हो.. आपके साथ इतना कुछ हो गया.. फीर भी उसे माफ करनेके लीये केह रही हो.. मुजसे इतनी बडी बात मुजे भुलनेके लीये केह रहे हो.. क्या ये बात कोइ इतनी आसानीसे भुल सकता हे..?

पुनम : (मुस्कुराते हग करते) भाभी.. आपको भुलना ही होगा.. मेरे खातीर.. आप मेरी प्यारी भाभी हो.. क्या अपनी ननंदकी इतनीसी बात नही मानोगी..? वरना मे आपसे बात नही करुगी..

चंदा : (जोरोसे बाहोमे भीचते) अरे नही नही.. दीदी.. आप अ‍ैसा मत बोलीये.. अगर आप मेरे साथ नही बोलोगी तो मे धुट धुटके मर जाउगी.. अ‍ैसा कभी मत करना.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु.. ठीक हे.. देखना अब जो भी करना हे मे करुगी.. उस कुतेको अब फुटी कोडी भी नही मीलेगी.. मे सबकुछ आपके नाम करदुगी..

पुनम : (जटसे अलग होते) नही भाभी.. मुजे कुछ भी नही चाहीये.. सबकुछ उनको दे दीजीये..

चंदा : (मुस्कुराते) ठीक हे.. वो सब मे बादमे देख लुगी.. की मुजे क्या करना हे..

घरपे इतना कुछ हो गया.. लखन ओर देवायत अब भी जवेरीलालके घरपे थे.. वहा भी सीर्फ घरके लोग ही रहे गये थे.. जवेरीलाल अपने घरका बटवारा देवायत ओर पंचायत सदस्योकी हाजरीमे ही नीपटा देना चाहता था.. रमेश भोजन पंडालमे सब समेटने लगा.. लखन ओर उनके दोस्तो श्रीधर जयश्री आज सादी थी.. तो सभी दोस्तो सुहागरातकी तैयारीया करनेमे जुट गये..

जवेरीलाल देवायत ओर पंचायतके दो ओर सदस्यको लेकर अपने घरमे चले गये.. ओर सबलोग होलमे आकर बेठ गये.. जवेरीलालने ब्रीन्दा वृंन्दा ओर जीतुलालाको भी बुला लीया.. तो आज ब्रीन्दाने श्रीधर ओर जयश्रीको भी अपने साथ रखा.. ओर जवेरीलालने ब्रीन्दाको घरके कागजात ओर श्रीधरके बीजनेसमे पार्टनरके रुपमे कागजात सोपे.. ओर पंचोके सामने घरका बटवारा करदीया..

तो जीतुलालने भी मौकेका फायदा उठाकर डीवोर्स पेपरपे ब्रीन्दाकी साइन करवाली.. ओर दोनो अलग हो गये.. तभी वृन्दाने कोइ बडा तीर मारलीया हो.. अ‍ैसे ब्र्रीन्दाके सामने देखकर कातील स्माइल करने लगी.. तो ब्र्रीन्दा भी वृन्दाकी ओर देखते अ‍ेक रहस्यमइ स्माइल करने लगी.. वृन्दाको पता नही थाकी ब्रीन्दाने जीतुलालके साथ क्या कांड करदीया था.. ओर उनके मनमे कीतने खतरनाक मनसुबे जन्म ले चुके थे..
 
फीर सबलोग अपने अपने घरकी ओर नीकल गये.. देवायत भी लखनको जल्दी घर आनेको कहेकर घरपे चला गया.. तो लखनके सभी दोस्त काम नीपटाकर श्रीधर जयश्रीकी टांग खीचाइ करने लगे.. फीर श्रीधरको छोडकर सभी दोस्तो चोराहेपे जाकर बैठ गये.. ओर जीतुलाल वृन्दाके चकरके बारेमे चर्चा करने लगे.. फीर लखनने साहीलसे बात करके उनके चाचा चाचीको गांवमे लानेकी आगेकी प्लानींग करली..

उस रात श्रीधरने अपनी सुहागरातकी सभी तैयारीया करली थी.. उसने मुनासे कामोतेजककी देसी गोलीया मंगवाकर खाली थी.. ओर इस रात श्रीधर जयश्रीकी पुरी रात चुदाइ करते उनकी अलग अलग पोजीसनमे बजाता रहा.. जयश्रीका अ‍ेक अ‍ेक अंग श्रीधरने तोडके रख दीया.. फीर भी श्रीधर जयश्रीको ओर चोदना चाहता था.. जयश्रीने हाथ जोडकर श्रीधरको ओर ना चोदनेकी मनते की..

तो दुसरी ओर आज सांती ओर जागृती जब अपने घरपे गइ.. तब जया दोनोका इन्तजार करते बेठी थी.. जैसे ही दोनोको देखा वो जटसे खडी होगइ.. ओर उनकी आंख गीली होगइ.. तो दोनो उसे देखती ही रही.. तभी जया सांतीका हाथ पकडकर उसे अपने रुममे ले गइ.. तो वहा बेडकी हालत देखकर सांती सबकुछ समज गइ.. ओर जयाकी ओर सवालीया नजरोसे देखने लगी.. तभी..

जया : (आंख पोछते नजरे चुराते) बेटा.. वो.. वो..

सांती : (मुस्कुराते धीरेसे) मम्मी.. जानती हुमे.. क्या रमेश अंकल आये थेनां..? अपने बेडकी चदर तो बदल देती.. देखकर कीसीको भी पता चल जायेगाकी वहा क्या हुआ हे.. कहीये.. क्या केह रहेथे वो..

जया : (धीरेसे) बेटी.. वो.. वो मे चदर बदलना भुल गइ.. सुनो.. कल वो मुजे लेजानेकी बात करने आये थे.. तो कल मे उनके साथ जा रही हु.. बस.. सीर्फ तुजे ही बताना था.. तुम बादमे जागुसे बात करलेना.. क्युकी मे उसे ये सब केह नही पाउगी..

सांती : (मुस्कुराते) नही मम्मी.. आपकी बेटी हे वो.. ओर अब तो वो भी आपको समजने लगी हे.. आपको बरखासे डरनेकी कोइ जरुरत नही हे.. ठहेरो.. मे अभी आपके सामने ही उसे बता देती हु.. (जोरोसे) जागु..

जागृती : (अंदर आते) जी भाभी.. कहीये.. कुछ काम था क्या..? मम्मी.. सब ठीक तो हेनां..?

सांती : (मुस्कुराते) हां सब ठीक ही हे.. सुन.. कल मम्मी ओर रमेश अंकल जा रहे हे.. (जयाकी ओर देखते) मम्मी.. दोनो सुबह कीतने बजे जा रहे हे..

जया : (नजरे जुकाते धीरेसे) जी.. वो.. वो सुबह चार बजे जानेका बोल रहे थे..

जागृती : (जटसे आकर जयाके गले लगते) मम्मी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मेने आपके साथ बहुत बुरा व्यवहार कीया.. आप आरामसे जाओ.. जीलो अपनी जींदगी.. हमे आपसे कोइ अ‍ेतराज नही हे..

जया : (जोरोसे बाहोमे भरते रोते) बेटी.. मुजे माफ करदे.. मे जीस रास्तेपे चल पडी हु.. वहासे वापस आना मेरे लीये बहुत मुस्कील हे.. मुजे माफ कर देना.. बस.. तुम दोनो मेरे बंसीको सम्हाल लेना..

सांती : (जागृतीकी ओर कातील मुस्कानसे) जी मम्मी.. आप आरामसे जाइअ‍े.. मे ओर जागु दोनो आपके बेटेको सम्हाल लेगी.. क्यु जागु..? हम दोनो उसे अच्छेसे समजा देगी.. वो कुछ नही कहेगे..

जया : (जटसे अलग होते) नही बेटा.. तुम दोनो खयाल रखना.. मेरे जानेकी बात अभी बंसीको मत बताना.. वरना मे जा नही पाउगी.. मेरे जानेके बाद उसे सब बता देना..

जागृती : (मुस्कुराते) ठीक हे मोम.. जैसा आप चाहो.. हम नही बतायेगे भाइको.. बस.. कभी कभी हमसे फोनपे बात करलीया करना..

जया : (प्यारसे गाल सहेलाते) ठीक हे बेटा.. मे तुम सबसे रीस्ता तोडकर थोडीना जा रही हु.. मे तुम दोनोसे बात करलीया करुगी.. अब जाओ दोनो.. सादीमे थक गइ होगी.. तो आराम करलो.. आप दोनो मेरी फीकर मत करना.. मे सुबह चली जाउगी..

कहा तो सांती ओर जागृती दोनो बारी बारी जयाको गले लगा लेती हे.. देर रात बंसीभी घरपे आजाता हे.. तबतक जया भी उनका अपने रुममे इन्तजार करते जाग रही थी.. जब बंसी घरपे आया तो वो दरवाजेके पास छुपकर बंसीको जी भरके देखने लगी.. जब बंसी अपने रुममे चला गया तो जया भी वापस अपने बीस्तपे आजाती हे.. आज जयाकी आंखोसे नींद कोलो दुर थी.. वो सुबह तीन बजे तक करवटे बदती रही.. फीर वो नहाने चली गइ..

तो बंसी भी आज दिनभर जागृती ओर जयाको देखकर बहुत उतेजीत हो चुका था.. तो वो आते ही सांतीकी गुफामे घुसकर धमाका करने लगा.. उसने सांतीको बीना नीचे उतरे ही दो दो बार चोद लीया.. फीर दोनो नंगे ही अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये.. दोनोका लाइव सो देखकर जागृती भी अपनी उंगलीसे अपने आपको सांत करके सो गइ.. जागृती ओर सांतीने दोनोने सोनेसे पहेले चार बजेका अ‍ेलार्म अपने फोनपे सीर्फ वाइबे्रटमे सेट करलीया था..

तो दुसरी ओर आज मुनाने भी दो पहोरको अपनी मां बसंतीको भी घरपे बुलाकर चोद लीया था.. ओर बसंतीकी हालत खराब करदी थी.. तो अभी इस वक्त बसंती भी घोडे बेचकर सो रही थी.. ओर मुना भी बरखाकी दो दो बार धमाकेदार चुदाइ करके उनसे चीपककर सो गया था.. तो आज साहीलने भी अपनी बडी अम्माकी गुफामे दो दो बार जमकर धमाके करलीये.. जो इस वक्त दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे सो रहे थे..
 
तो इधर हवेलीपे भी जब देवायत घरपे आया तब अ‍ेक बार फीर थोडा हंगामा हुआ.. चंदा देवायतसे लीपटकर जोरोसे रोने लगी.. ओर उनकी बार बार माफी मांगने लगी.. मंजुने देवायतको सभी बातोसे अवगत कराया.. तो देवायत भी सबकुछ समज गया.. ओर चंदाको समजाते उसे सब भुलजानेको कहेने लगा.. लेकीन फीर भी चंदा उसे सजा देनेकी बात करते माफी मांगती रही..

फीर सबने बडी मुस्कीलसे चंदाको सांत कीया.. आज उसने खाना भी नही खाया.. ओर विजयको लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर उसे दुध पीलाते गहेरी सोचमे डुब गइ.. उनकी हालत देखकर देवायतकी आंख भी गीली होगइ.. तभी लखन भी घरपे आगया ओर सब लोग डीनर करने बैठ गये.. तो बातो ही बातोमे लखनको भी सबकुछ पता चल गया.. की चंदाकी हालत क्यु खराब हे..

फीर सबलोग होलमे आकर बैठ गये.. तो देवायतने भी जवेरीलालके घरपे जो कुछ हुआ सब बता दीया.. तो लखन पुनमकी ओर कातील स्माइल करते मुस्कुराने लगा.. ओर सबसे छुपकर उनको फोनपे देखनेके बहाने मेसेज टाइप करके भेजता हे.. फीर भी पुनम अपना फोन नही उठाती ओर वो लखनकी ओर देखते मुस्कुराती हे.. फीर खडी होकर अपने रुममे चली जाती हे.. तभी..

नीर्मला : (थोडी चीन्तासे) देवु.. चंदा कैसा पागलपन करती हे.. मुजे तो इनकी बहुत चीन्ता होने लगी हे..

मंजुला : (धीरेसे) देवु.. क्या हम उसे नींदकी गोली देकर सुलादे..? तो सायद सुबह तक सब ठीक होजायेगा.. वो हमारी पुनोकी वजहसे बहुत टेन्सनमे हे.. देखो.. अभी वो कैसे विजयको लेकर अकेली रुममे बैठी हे.. अगर थोडी देर सबके साथ बैठकर बाते करती तो उनका भी मन डावर्ट होता..

देवायत : (थोडा सीरीयस होते) नही मंजु.. मुजे अ‍ैसी गोलीया देना अच्छा नही लगता.. उसे पुनमका ओर खुदके बारेमे सुनकर बडा सदमा लगा हे.. हम धिरेनको भी तो कुछ नही केह सकते..

नीर्मला : (गुस्सेसे सामने देखते) क्यु..? क्यु नही केह सकते..? कीतनी घटीया सोचवाला इन्सान नीकला.. अच्छा हुआ चंदा सादी करके इधर आगइ.. वरना इस आदमीके भरोसे उसे अकेली छोडना ठीक नही हे.. उनकी तो अब सकल देखनेका भी जी नही करता.. मेनेतो उसे अपना बेटा माना था..

लखन : भैया.. मुजे लगता हे वो अब डरके मारे इधर डीवोर्सके पेपर लेनेभी नही आयेगा..

देवायत : (लखनकी ओर देखते) लखन.. अभी पेपर पुनोके पास हेनां..? जा उसे लेकर आ.. हम सुबह जा रहे हे तो साथ लेजायेगे.. तुम उनको बेंकपे जाकर देदेनां.. उसे यहा बुलाना ठीक नही हे.. वरना उनको देखकर चंदाकी हालत ओर बीगड जायेगी..

भुमीका : नीमु.. देवु ठीक केह रहा हे.. लखन बेटा जा अभी पुनम बेटीके पास पेपर लेकर तुम्हारे पास रखले..

लखन : (मनमे खुस होते) जी बुआ..

लखन खुस होते खडा होगया ओर आरामसे चलते पुनमके रुममे चला गया.. क्युकी सबलोग होलमे थे तो उसे पताथा की पुनम इस वक्त अपने रुममे अकेली होगी.. तो इस बहाने उनसे कुछ बात होजायेगी.. वो अंदर गया तो देखा.. पुनम फोनपे मेसेज टाइप कर रही थी.. जैसे ही लखनको देखा उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. ओर वो जटसे बेडसे खडी होगइ.. ओर सरमाने लगी..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) लखन भैया आप..?

जैसे ही पुनम बेडसे उतर गइ ओर लखनको देखकर सरमा गइ तभी लखनने जटसे आकर पुनमको अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा.. पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. उसे कीसीके आजानेका डर लगने लगा.. ओर लखनकी बाहोसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करते..

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लखन : (मुस्कुराते बाहोमे भरते धीरेसे) हां.. मे मेरी गर्ल फ्रेन्डको मीलने आया हु.. सोचा थोडा मीलकर प्यार करलु.. हें..हें..हें..

पुनम : (बाहोसे छुटनेकी कोसीस छोडदी.. सर्मसार होते हसते) छोडीये मुजे.. क्या कर रहे हे..? बहार सबलोग हे.. ओर दरवाजा भी खुला छोडकर आये.. कमसे कम बंध करके तो आते..

लखन : (गालपे कीस करते धीरेसे) अच्छा.. तो अब मेरी गर्लफ्रेन्ड को अपने बोय फ्रेन्डसे प्यार करनेमे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. दीदी.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच..

पुनम : (सर्मसार होते जोरोसे बाहोमे भीचते) भाइ.. आइ लव यु टु.. मे आपसे बहुत बुहत प्यार करती हु.. बस.. थोडे दिन इन्तजार कर लीजीये.. फीर मे वहा आजाउगी.. तब आपको मुजे जीतना प्यार करना हो उतना कर लीजीयेगा.. अब मे सीर्फ आपकी हु.. भाइ.. क्या कुछ काम था..?

लखन : (मुस्कुराते) हां दीदी.. भैयाने आपके वो डीवोर्सके पेपर मंगवाये हे.. तो मुजे दे दीजीये.. मै उस कुतेके मुहपे मारुगा.. ओर देखना उनसे अ‍ैसा बदला लुगा वो जींदगी भर याद रखेगा.. क्युकी उनकी मासुका पुरी तराह मेरे बसमे होगइ हे..

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हां भाइ.. मे जानती हु.. आपने उनकी मांके साथ बीलकुल सही कीया.. भाइ.. मे जब वहा आउगी तब मे आपको अ‍ेक बात बताउगी.. आप सुनकर खुस होजायेगे..

मंजुला : (जोरोसे आवाज लगाते) पुनो.. वो लखनको तेरे पेपर दे देनां.. उसे कल लेजाना हे..

पुनम : (जटसे लखनकी बाहोसे छुटते थोडा जोरोसे) जी भाभीमां.. बस.. वो ही दे रही हु.. (धीरेसे) ये भाभीमा भीनां.. उनको सब पता चल जाता हे.. आपसे ठीकसे मीलने भी नही देती..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. कल सुबह मे जा रहा हु.. तो आज देर रात हम उपर.. मीन्स.. मेरे कमरेमे मीले..? हंम..? मे आपका इन्तजार करुगा..

पुनम : (सरमाकर गरदन हांमे मीलाते) हां भाइ.. मे आनेकी पुरी कोसीस करुगी.. लव यु..

ओर पुनम लखनकी बाहोसे छुटकर अपना पेपर बेगसे नीकालकर लखनको देती हे.. पुनमको पता था.. की मंजुने उनको क्यु आवाज देकर लखनसे अलग करदीया.. ताकी दोनो बहेकते आगे ना बढ सके.. मंजुला दोनोको अभी दुर रखते अ‍ेक दुसरेके प्रती प्रेम ओर काम वासनाको बढना चाहती थी.. ताकी दोनो अ‍ेक दुसरेके लीये तडपे.. पुनमने लखनको फटाफट पेपर नीकालकर देदीया..

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ओर जैसे ही लखन जानेको हुआ.. पुनम लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर उनके गालपे कीस करदी.. फीर लखनकी ओर कामुक स्माइल करते हसने लगी.. तो लखन भी मुस्कुराते खुस होकर बहार आ गया.. ओर पेपर देवायतके हाथोमे थमा दीया.. देवायतने पेपर देखकर वापस लखनको देदीया.. ओर उसे अपने पास रखनेको कहते सुबह चार बजे तैयार रहेनेको कहा..
 
फीर सबलोग अपने अपने रुममे चले गये.. तो मंजुभी देवायतको लेकर अपने रुममे चली गइ.. तो चंदा अ‍ैसे ही ब्लाउस उचा करके बैठी थी.. विजय तो कबका सो चुका था.. तो मंजुने उसे कंधेपे हाथ रखके हीलाया.. तो चंदा हडहबडाती तंद्नासे बहार आगइ.. ओर उनकी आंखसे आंसु नीकलने लगे.. देवायत उनके पास बैठ गया ओर चंदाको अपनी बाहोमे भीचलीया.. तो चंदा देवायतके कंधेपे सर रखके रोने लगी..

ओर मंजुने विजयको उनकी गोदसे लेकर जुलेमे सुला दीया.. तब देवायत चंदाको सांत कते उनके सरको सहेला रहा था.. ओर मंजु दरवाजा लोक करके लाइट बुजाकर बेडपे आकर दोनोके पास बैठ गइ..

मंजुला : (धीरेसे) दीदी.. अब रोना धोना बंध करके सो जाइअ‍े.. आज आपने बहुत रोलीया..

देवायत : हां चंदा.. जो होना था हो गया.. हमे तुमसे कोइ गीला सीकवा नही हे.. तो फीर तुम क्यु अपने आपको दोसी मानती हो..? सायद पुनमकी कीस्मतमे यही लीखा था..

चंदा : (सीनेपे सर रखते) नही देवु.. ना मे आपसे प्यार करती.. ओर ना मे आपसे सादी करती.. तो आज पुनम दीदीको इतनी तकलीफ नही होती.. ये सब मेरे कारण हुआ हे.. वो कमीना भी मुजे अ‍ेक रंडी समजता हे..

मंजुला : (थोडा गुस्सेसे) दीदी.. आप कीस घटीया इन्सानकी बात लेकर बैठ गइ.. अरे छोडोना उसे.. अब आपका बेटा सीर्फ हमारा विजय हे.. बस.. अब इनसे पालीये..

चंदा : मंजुदी.. अब तुम विजयकी चीन्ता मत करो.. अब मेरा सीर्फ अ‍ेक ही बटा हे.. हमारा विजय.. मे उसे पढा लीखाकर अ‍ेक काबील ओर अच्छा इन्सान बनाउगी.. देखना..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. ये हुइनां बात.. चलो अब चेन्ज करलो.. आज हमारे पतीको भी खुस करदो..

चंदा : (सरमाकर मुस्कुराते) नही मंजुदी.. आज मेरा मुड ठीक नही हे.. तुम दोनोही प्यार करलो..

मंजुला : (चंदाको खडी करते) क्या मुड ठीक नही हे..? आपका मुड ठीक करनेके लीये ही केह रही हु.. आप कहेती थीनां मुजे सजा दो.. सजा दो.. तो यही समजलो.. यही आपकी सजा हे..की हमारे पतीको सुबह तक प्यार करते खुस करदो.. हें..हें..हें..

चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे) तुम भसनां.. बहुत कीमीनी हो.. कीसी भी बातपे हमे फसा लेती हो.. ठीक हे.. देवु.. आज मुजे इतना प्यार करो.. इतना प्यार करो.. की समजलो मे सचमे अ‍ेक रंडी हु.. मुजे चोद चोदके मेरी हालत बीगाडदो.. सायद यही मेरी सजा हे..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) चंदा ये तुम क्या बोल रही हो..?

मंजुला : (देवायतकी ओर आंख मारते) हां जानु.. दीदी ठीक केह रही हे.. (चंदाकी ओर देखते) दीदी..ये हुइना बात.. जाइअ‍े.. पहेले जेन्च करके आइअ‍े.. अब तो सुबह तक देवुको आपके उपरसे उतरने ही नही दुगी.. हें..हें..हें..

कहातो चंदा सरमाकर हसते मंजुको अ‍ेक मुका मारते बाथरुममे चेन्ज करने चली गइ.. तभी मंजु देवायतके कानमे चंदाको चोद चोदके थका देनेको कहेती हे.. ताकी चंदा थककर सो जाये.. ओर इस रात देवायतने चंदाको बीना नीचे उतरे ही तीन तीन बार धमाकेदार तरीकेसे चोद लीया.. इसी बीच ना जाने चंदा कीतनी बार जडी होगी.. देवायतने चंदाको चोद चोदके उनके अ‍ेक अ‍ेक अंगको तोड दीया..

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चंदा कुछ भी नही बोली.. ओर चुपचाप अपनी सजा मानकर देवायतसे चुदवाती रही.. फीर दोनो ही दो बजे तक चुदाइ करके अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सो गये.. तब मंजु ओल रेडी सो गइ थी..

तो दुसरी ओर आज भी लखनकी हालत बीना चुदाइ पतली होगइ थी.. वो अपने रुममे जाकर चेन्ज करके बेडपे आता हे.. ओर अपना मोबाइल देखने लगता हे.. तब उनमे पुनमका मेसेज आकर पडा था..

पुनम : (मेसेज) भैया.. आइ लव यु.. मे आपके पास होते हुअ‍े भी आपको बहुत मीस करती हु..

पढकर लखन मुस्कुराता हे.. ओर फोनपे टाइप करने लगता हे..

लखन : (सेन्ड करते) दीदी.. आप सो गइ क्या..?

पुनम : (कुछ देरके बाद) नही भाइ.. आपने ये कैसी आग लगाइ हे.. आपकी यादोमे जाग रही हु.. कहीये.. नींद नही आ रही हे क्या..?

लखन : (रीप्लाय) नही दीदी.. मेरी भी हालत आपके जैसी हे.. आपकी बहुत याद आ रही हे.. तो नींद कैसे आयेगी..? सुबह तो मे चला जाउगा.. मे आपका यही इन्तजार कर रहा हु.. आइअ‍ेनां..

तभी नीचेकी ओर पुनमके रुममे पुनम ओर लता बैठे बाते कर रही थी.. तो लखनका रीप्लाय मेसेज आगया.. तो पुनम वापस फोन उठाकर देखने लगी.. ओर मेसेज पढकर स्माइल करती हे.. ओर लतासे बाते करते लखनको मेसेज टाइप करते रीप्लाय देने लगी..

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पुनम : (सरारतसे) क्यु..? क्या करेगे मीलकर..? आपको सरम नही आती.. आधी रात अपनी बहेनको अ‍ैसे अकेले अपने रुममे मीलनेका मेसेज भेजकर..

लखन : (मुस्कुराते मेसेज करते) अरे दीदी..? प्लीज.. मीलोनां.. मे मेरी दीदीको नही.. मेरी मासुकाको देखना चाहता हु.. बस.. उनसे थोडा प्यार करना चाहता हु..

पुनम : (सर्मसार होते रीप्लाय देते) भाइ.. बस थोडासा सबर करलो.. यही हाल मेरा हे.. जो अभी आपका हे.. लेकीन अभी हम नही मील सकते.. भाइ.. लता पासमे हे.. जाग रही हे.. आप समज गयेनां..?

लखन : (थोडा गुस्सा होते) दीदी.. वो कमीनी आपके पास हेनां..? देखो अपने पतीको छोडके कैसे मजेसे रेह रही हे.. यहा तो मेरी तकलीफको समजने वाला कोइ हेही नही..

पुनम : (जटसे मेसेज टाइप करते) भाइ.. उनकी भी वोही मजबुरी हे.. जो मेरी हे.. वो आपको नही मील सकती.. ओर मुजे पता हे आपको क्या तकलीफ हे.. भाइ आइ रीयली मीस यु.. बस.. वही डर सता रहा हे..

लखन : (रीप्लाय देते) दीदी.. डरो मत.. हम अ‍ैसा कोइ काम नही करगे.. जो आपको डर हे.. बस.. सीर्फ अ‍ेक कीस.. वो भी आपके गुलाबी ओर गुलाकी पंखडी जैसे होठोपे..

पुनम : (सर्मसार होते लीखते) नही भाइ.. फीर ना आप कंट्रोल करपाओगे.. ना मे.. मे आपके साथ वो हर लह्मा जीना चाहती हु.. जो कभी स्कुल टाइममे हमने कीस कीया.. भाइ.. क्या मेरे वहा आने तक कंट्रोल नही कर सकते..? हंम..

लखन : (रीप्लाय देते) दीदी.. अब आपके भाइने कंट्रोल करना सीखलीया हे.. मुजपे यकीन कीजीये.. मे अ‍ैसा कुछ भी नही करुगा.. जैसा आप सोच रही हे.. भरोसा कीजीये मुजपे..

पुनम : (कुछ देरके बाद) भाइ.. भरोस तो खुदसे भी ज्यादा हे.. लेकीन मुजे खुदपे भरोसा नही हे.. मेभी आपके पास आना चाहती हु.. मे आपके साथ वो सारी हदे पार करना चाहती हु.. जो हमाने मीस कीहे.. लेकीन मत भुलो.. भाभीमांकी नजर सीर्फ हम दोनोपे टीकी हुइ हे.. वो नही चाहती हम दोनो अभी मीले..

लखन : (मेसेज टाइप करते) लेकीन क्यु..? वो अ‍ैसा क्यु कर रही हे..? आपको तो सब पता होगा..

पुनम : (रीप्लाय) भाइ.. वो सब मे अभी आपको नही बता सकती.. मुजे लीखनेमे भी बहुत सरम आ रही हे.. प्लीज.. मान जाओ प्लीज..

लखन : (लीखते) दीदी.. मुजे सीर्फ अ‍ेक बार आपको देखना हे.. प्लीज..

पुनम : (लताकी ओर देखकर टाइप करते) ठीक हे भाइ.. मे उपर आपके कमरेमे तो नही आपाउगी.. लेकीन कुछ देरके बाद आप होलमे आजाओ.. अंधेरेमे सोफेपे बैठना.. इस वक्त होलमे कोइ नही होगा.. अभी लता दीदी सोनेकी तैयारीया कर रही हे.. वो सोजायेगी तब मे आजाउगी.. बाय..
 
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