Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 74 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

लखन : (थोडे गुस्सेमे) ये सब क्या हे..? हाथमे तो दर्द हो रहाथानां..? तो फीर..?

सृती : (मुस्कुराते रीक्वेस्ट करते) लखन भैया.. प्ली..ज.. खालोनां मेरे हाथसे.. मे तो मजाक कर रही थी..

लखन : (सामने देखते) दीदी.. अ‍ैसा मजाक मत कीया करो.. मुजे अच्छा नही लगता.. अ‍ेक तो हाथमे दर्द हे.. ओर..

सृती : (आंख गीली करते) ओह.. सोरी.. सोरी.. सोरी.. अब नही करुगी.. लेकीन खालो तो सही..

लखन : (मुस्कुराते सृतीका नीवाला खाते धीरेसे) भाभीमां सही केह रही थी.. जीतो चाहता हे अ‍ेक खीचके कानके नीचे लगाउ.. सारा मजाक भुल जाओगी..

सृती : (मुस्कुराते अपना चहेरा आगे करते) हंम.. तो फीर खीचके अ‍ेक मारलो.. हम अभी होस्पीटलमे ही हे.. मे गालपे भी मलम पटी लगवा लुगी.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) आप नही सुधरोगी.. अब आप मेरी भाभी नही बडी दीदी हो.. तो अब अ‍ैसा मजाक मत कीया करो.. अब देख क्या रही हो..? खीलाओ मुजे.. क्या आप सुरुसे ही अ‍ैसी हे..?

सृती : (कामुक नजरोसे मुस्कुराते) नही.. जब आप मेरे सामने होतो.. मुजे आपके साथ मस्तीया करनेमे बहुत मजा आता हे.. पता हे मे आपकी कौन लगती हु..?

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. पुनो दीदीने सब कुछ बताया मुजे.. आप भी मेरी बहेन होनां..?

सृती : (मुस्कुराते खाना खीलाते) हां.. अब मुजे दीदी ही कहेना.. अब आपकी भाभी आपकी भुमी आंटी हे.. समजे..? मे तो अब आपको भाइ ही कहुगी..

लखन : (मुस्कुराते) फीर देखना.. अगर बहेन होगइ तो फीर फस जाओगी.. आपको तो हमारे खानदानके बारेमे.. आपको सब पता हेनां..?

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) हां.. पता हे.. कोइ बात नही.. मे फसनेके लीये तैयार हु.. फसा लीजीये मुजे..

लखन : (मुस्कुराते) फसनेके लीये तैयार हो..? फसनेका मतलब भी जानती होनां..?

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हां.. बहुत अच्छी तराह.. जैसे पुनो दीदीको फसालीया हे.. आपको पता हे..? आपकी भाभीमां.. तुम दोनोकी सादी करवाना चाहती हे..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. अभी अभी पुनो दीदीने बताया मुजे.. दीदी.. आप भाइकी अमानत थी.. तो अ‍ेक डरसा लग रहा था.. तभी तो उस दिन आपको मना कीया था..

सृती : (मुस्कुराते) भाइ.. अब तो नही हुनां..? अब मे बहेन हु आपकी.. मेने देवुके साथ पती पत्नीके सारे रीस्ते खतम करलीये हे.. क्या मां ओर बेटी.. दोनो अ‍ेक ही आदमीसे रीलेशन रख सकती हे..?

लखन : (सामने देखते धीरेसे) हां.. क्यु नही..? भाभीमां.. ओर नीर्मला आटी.. उनकी अच्छी मीसाल हे.. क्या वो दोनो मां बेटी भाइकी बीवीया नही हे..?

सृती : (मुस्कुराते) होगी.. लेकीन मे अ‍ैसा रीलेशन रखना नही चाहती.. मुजे अब मेरे इस भाइसे मतलब हे.. रीलेशन रखुगी तो मेरे इस क्युट भाइसे वरना सारी जींदगी अ‍ैसे अकेले काटलुगी..

लखन : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. मेरे साथ रीलेशन रखना हेतो अ‍ेक बार फीर सोचलो.. क्युकी अब मे आपकी नाराजगी ओर नही जेल सकता..? कोइ मुजसे रुठता हे तो बहुत दुख होता हे..

सृती : (मुस्कुराते हाथ थामते) सोरी भाइ.. मेने सबकुछ सोच समजके फैसला लीया हे.. अब अ‍ैसा कभी नही होगा.. आइ प्रोमीस.. हम दोनो बहेने रेडी हे.. अपनालो हमे.. मे फसनेके लीये तैयार हु.. लेकीन इस बार अ‍ैसा फसाना.. की मे कही छुट ना पाउ.. प्यार होगया हे मुजे आपसे.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु..

लखन : (मुस्कुराते) इतना प्यार करती हो मुजसे..?

सृती : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हां.. कोइ सक..? मेरी जानसे भी ज्यादा.. प्लीज.. कबुल करलो मेरा प्यार.. आइ प्रोमीस.. मे जींदगी भर आपका साथ नही छोडुगी.. फीर चाहे कुछ भी होजाये..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. मे इस बारेमे पुनो दीदी ओर भाभीमासे पहेले बात करलेता हु.. अगर दोनो मुजे परमीशन देगी.. तो फीर मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

सृती : (मनमे खुस होते मुस्कुराते) ठीक हे भाइ.. पुछलेना.. मे आपके जवाबका इन्तजार कर लुगी..

कहेते सृती खुस होगइ.. ओर लखनको अपने हाथोसे खीलाने लगी.. क्युकी सृतीको खुसीतो इस बातकी थी.. की अब लखन उनके साथ बोलने लगा था.. ओर उसे अपनानेको भी तैयार था.. तो दुसरी ओर पुनम ओर मंजु भी इन दोनोके उपर नजर जमाये हुइ थी.. तो सृती लखनका प्यार देखकर मंजु भी मुस्कुराने लगी.. फीर अ‍ैसे ही साम होगइ.. सृतीको पंद्नह दिन बीस्तरसे ना उठनेकी ओर अ‍ेक हप्तेके बाद दीखानेकी सुचना देकर होस्पीटलसे छुटी देदी गइ.. तो इधर लखनने टेक्सी करली.. ओर सृतीको गोदमे उठालीया..

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लखन : (गोदमे उठाते) ओ बापरे.. दीदी आप कीतनी भारी भरखम हो.. मेरी तो कमर टुट जायेगी..

सृती : (हसते गलेमे हाथ डालते) तो क्या हुआ..? आप मेरी सेवा करना.. मे तुम्हारी कमरकी मालीस करते तुम्हारी सेवा कर दुगी.. आखीर आप मेरे बोयफ्रेन्ड जो हो गये हो.. तो गर्लफ्रेन्ड इतना तो कर सकती हे..

लखन : (मुस्कुराते) देखना बोयफ्रेन्ड गर्लफ्रेन्डके चकरमे कुछ गलत ना होजाये..

सृती : (गाल चुमते) होजाने दो.. मे इसके लीये रेडी हु..

लखन : (सरमाते धीरेसे टेक्सीमे बीठाते) दीदी.. आपतो बडी फास्ट जा रही हो.. पहेले घरपे तो चलो.. कहा छोडदु..? आपके घरपे या हमारे घरपे.. हें..हें..हें..

सृती : (जुठा गुस्सा करते) ताने मार रहे हो..? मेरे बोयफ्रेन्डके घरपे छोडदो.. अब वही मेरा घर हे..

लखन : (साथ बैठते) बडी जल्दी अकल आगइ मेरी गर्लफ्रेन्डको.. चलो..

फीर लखन भी अपनी बाइक वही छोडकर सृतीके साथ टेक्सीमे बैठ जाता हे.. ओर अपने घरपे आजाता हे.. फीर टेक्सीका कीराया देकर वापस सृतीको गोदमे उठाकर सीधा उपरकी मंजीलपे उनके रुममे छोड देता हे.. ओर फोन करके देवायतको बता देता हे.. की वो सृतीको लेकर घरपे आगया हे.. तबतक चंदाका भी सभी रीपोर्ट आगया था.. तो अ‍ेम आइ आर मे भी कोइ खास तकलीफ नही नीकली..

ओर तारण ये नीकलाकी चंदाको गहेरे सदमेकी वजहसे ये सब हुआ हे.. फीर डोक्टरने उनको दिमागको ज्यादा ट्रेस ना देनेकी सुचना देकर होस्पीटलसे डीस्चार्ज करदीया.. ओर अ‍ेक घंटेके बाद देवायत भी सबको लेकर लखनके घरपे आगया.. ओर सबलोग अंदर आजाते हे.. रजीया राधीका ओर नीलम भी सबको देखकर चंदाकी खबर पुछते हे..

तो मंजु नीर्मला ओर भुमीका राधीकाको देखते ही उनको गले लगाते हे.. राधीका भी सबके पैर छुकर सरमाते हसती रहेती हे.. फीर सबलोग होलमे सोफेपे बैठ जाते हे.. तो नीर्मला भुमीका मंजु ओर देवायत आपसमे बाते करने लगे.. रजीया राधीका ओर नीलम तीनो मीलकर खाना बनानेकी तैयारीया करने लगी.. फीर कुछ देरके बाद लखन ओर देवायत अपनी कार लेकर बहार चले गये..

लखनने होस्पीटलसे अपनी बाइक लेली.. फीर दोनो सृतीकी कारका अ‍ेक्सीडन्ट हुआ था वहा चले गये.. तो देवायतने फोन करके कीसी मीकेनीकको बुला लीया.. फीर मीकेनीकल दुसरी कारके पीछे बांधकर अपने गेरेजपे लेगया.. तो लखन देवायत वापस घरपे आगये.. घर आते ही कल देवायतने लखनको दुसरी कार लेनेको कहा.. दोनो चले गये तब इसी बीच रजीयाने सबको राधीकाकी मम्मीके बारेमे बताया..

तो सुनते ही मंजु नीर्मला ओर भुमीका उनका हाल चाल पुछने रुममे चले गये.. ओर उनके पास बैठे ही थे.. तब राधीकाकी मम्मी नीर्मला ओर भुमीकाको देखकर चोंक गइ.. ओर गभराते उनकी ओर देखने लगी.. नीर्मला ओर भुमीकाने भी उनकी ओर देखते गौर कीया.. तो वो दोनो भी राधीकाकी मम्मीको देखकर पहेचान गइ.. तो मंजु सब कुछ समज गइ.. नीर्मला ओर भुमीका उनको गले लग गइ..

ओर राधीकाकी मम्मी खुसीके मारे आंसु बहा रही थी.. ओर तीनो बाते करने लगी.. तब बातो ही बातोमे राधीकाकी मम्मी दोनोको उनके अतीतके बारेमे राधीकाको ना कहेनेकी मनते करने लगी.. तो तीनोने भी कीसीको कुछ नही बतानेका वादा कीया.. फीर तीनो हस हसके अपने अतीतकी बाते करती रही.. मंजुने अपनी शक्तिओके माध्यमसे राधीकाके अतीतके बारेमे सबकुछ जानलीया..

तभी वहा राधीका भी अपना हाथ पोछते आगइ.. तो नीर्मलाने उनसे अपनी बेटी मंजुका परीचय करवाया.. मंजुने राधीकाकी मम्मीके पैर छुलीये.. तो राधीकाकी मम्मीने मंजुको देखकर आंसु बहाते हाथ जोड लीये.. जीसे देखकर राधीकाकी आंखोमे खुसीके आंसु आगये.. सबलोग राधीकाकी मम्मीसे बाते कर रहे थे.. तभी मंजु सबकी नजर बचाते धीरेसे उपरकी मंजीलपे चली गइ..

ओर सीधे सृतीके कमरेमे जाकर दरवाजा बंध कर लेती हे.. तो सृती लेटे आराम कर रही थी.. मंजुको देखते ही बेडपे बैठ गइ.. ओर मंजु सृतीके पास आकर बैठ जाती हे.. तो सृती मंजुको देखते ही आंसु बहाने लगी.. ओर हाथ जोडकर मंजुसे माफी मांगने लगी.. मंजुने भी सृतीको जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. तो सृती फुटफुटके रोने लगी.. तो मंजुने उनको जटसे सांत कीया....

कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २४०

ओर सीधे सृतीके कमरेमे जाकर दरवाजा बंध कर लेती हे.. तो सृती लेटे आराम कर रही थी.. मंजुको देखते ही बेडपे बैठ गइ.. ओर मंजु सृतीके पास आकर बैठ जाती हे.. तो सृती मंजुको देखते ही आंसु बहाने लगी.. ओर हाथ जोडकर मंजुसे माफी मांगने लगी.. मंजुने भी सृतीको जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. तो सृती फुटफुटके रोने लगी.. तो मंजुने उनको जटसे सांत कीया.... अब आगे

सृती : (धीरेसे रोते) दीदी.. बस अ‍ेक बार माफ करदो मुजे.. मे आइन्दा अ‍ैसी गलती कभी नही करुगी..

मंजुला : (सृतीके सरको सहेलाते) बस.. बस.. अब चुप होजा.. चल जा.. माफ करदीया तुजे.. कमीनी.. देख तुमने क्या हालत करली अपनी.. इतना गुस्सा करना भी ठीक नही हे..

सृती : (अ‍ेक हाथसे आंसु पोछते) दीदी.. मे नादान हु.. पुनो दीदी समय समयपे मुजे आगाह करती हे.. फीर भी मे आप लोगोकी बात नही समज पाती.. तो क्या करु..? ओर अप भी तो मुजे कुछ नही बताती..

मंजुला : (मुस्कुराते गाल सहेलाते) हंम.. सुन.. आज तुजे सब कुछ साफ साफ बताती हु.. सृती.. तेरी ओर पुनोकी मंजील हमारा देवु नही हे.. मेरा बेटा हे.. मेरा लखन.. जब तुजे सब सही लगे.. तब तु लखनके साथ जाकर कीसी मंदीरमे सादी कर लेना.. मे लखनसे बात करलुगी.. देवु सीर्फ मेरा हे.. मेरी मम्मीका हे.. तेरी मम्मीका हे..

सृती : (सामने देखते) तो फीर उसने हम दोनोसे सादी क्युकी..? हम दोनोको प्रेगनेन्ट तक करदीया..

मंजुला : (मुस्कुराते) सृती.. मजबुरी थी.. कुछ अंस पानेके लीये.. उसने पुनमसे सादी करली पडी.. तुमतो जानती हेना.. मुजे लताको ओर पुनोको ओर कोइ प्रेगनेन्ट नही कर सकता..

सृती : (सामने देखते धीरेसे) दीदी आप तीनोकी बात तो समजमे आती हेकी आप तीनोको सीर्फ देवु ही प्रेगनेन्ट कर सकता हे.. लेकीन में..? मे तो दुसरे मर्दसे भी मां बन सकती हु.. तो फीर मेरी मांका पती होनेके बाोजुद आपने मेरी सादी देवुसे क्यु करवाइ..? करवा देती लखन भैयासे..?

मंजुला : (अ‍ेक नजरसे सामने देखते) क्यु..? तु भी देवुसे प्यार नही करती थी..? ओर आंटी भीतो वही चाहती थी.. की मेरी बेटीकी सादी देवुसे होजाये.. तो हमने क्या गलत कीया..? अबतो तुम दोनोके उदरमे उनका अंस पल रहा हे.. ओर कुछ बाते हे मे तुजे बता नही सकती.. तुजे दुख होगा..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) मंजुदी.. अब क्या दुख होगा..? इतना कुछ तो होगया.. आप अभी भी मुजसे खुलकर बाते नही करती.. मानाकी पुनोदीसे अंस पानेके लीये उसने सादीकी.. ओर उसे प्रेगनेन्ट करदीया.. तो फीर मुजे प्रेगनेन्ट क्यु कीया..? हम दोनोतो उनको कीतना प्यार करती थी..? ओर वो भी हमे कीतना प्यार करते थे.. तो फीर क्या ये प्यार नही था..? कमसे कम लखन भैयाके साथ धोखातो नही होता.. मे क्या कहुगी लखन भैयाको..?

मंजुला : (मुस्कुराते) मेरा बेटा बहुत समजदार हे.. इस बारेमे मे उनसे बात करलुगी.. रही बात देवुसे सादीकी.. तो कुछ बाते थी जो अब तुजे बतानी ही पडेगी.. सृती.. वो प्यारसे ज्यादा अ‍ेक आकर्सण था.. तेरे पीछले जन्मकी कामना थी.. ओर तुम उस राजासे पेगनेन्ट तक होगइ.. ओर मेरे बेटेको धोखा दीया था.. अब वोही आकर्सण मेरे लखनमे हे.. उनसे प्रेगनेन्ट तो तु अनायास ही होगइ हे.. जो अ‍ेक छलावा हे.. इनसे आगे नही बताउगी.. तुजे दुख होगा..

सृती : (आंसु बहाते) क्या..? मेने आपके बेटेको धोखा दीया था..? मेरा ये प्रेगनेन्ट होना अ‍ेक छलावा हे..? दीदी.. ओर कीतने दुख जेलने पडेगे मुजे..? आप अभी भी खुलकर नही केह रही.. आपके कौनसे बेटेको मेने धोखा दीया हे..? मेने तो इस बच्चेको गीराने तक सोचलीया था.. जब उस इन्सानसे रीस्ता ही खतम करलीया हे तो फीर उनके बच्चेका क्या करुगी मे..? लेकीन मेरे लखनको देखकर ये विचार भी त्याग दीया.. वो कीतने अच्छे हे.. दीदी.. मे उसे प्यार करने लगी हु..

मंजुला : (मुस्कुराते) सृती.. तुम हर जन्ममे प्यारमे आकर भावनाओमे बहेक जाती हो.. प्यारतो मेरे बेटेको करती हो.. ओर सादीके बाद कीसी ओरकी होजाती हो.. ओर उनसे गलत वादा करलेती हो.. ये सब इन्हीका नतीजा हे.. सुन.. अभी सीर्फ इतना केह सकती हु.. तेरा संसार सीर्फ मेरे बेटे तक सीमीत हे.. तेरे जो भी बच्चे होगे सीर्फ मेरे लखनके होगे.. बस.. इनसे आगेमे तुजे कुछ नही बता सकती..

सृती : (आंसु पोछते) क्यु नही..? दीदी मुजे सबकुछ सच जाना हे.. की मे क्या गलथी करती हु.. दीदी.. अब मे अ‍ैसी गलती दोबारा करना नही चाहती.. मे सीर्फ मेरे लखन भैयाकी अमानत हु.. मेरे लखनकी.. अब मुजे ओर कीसीकी नही होना.. मुजे मेरा भाइ देदो.. अब मेरा देवुसे कोइ वास्ता नही हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) सृती.. देवु तुम दोनोकी मंजील कभी थाही नही.. तुम तो सुरुसे ही मेरी लखनकी बीवीया हो.. जो कभी अ‍ेक जमानेमे उनकी बीवीया हुआ करती थी.. जो आज मेरा बेटा हे.. लखन.. जो उस जमानेमे भी मेरा बेटा था.. मेरा बबलु था.. पुनो भी तो वही हे.. उनकी पीयु.. भुल गइ उस कीताबको..?

सृती : (आस्चर्यसे सामने देखते) दीदी.. तो फीर मे कौन थी..? आप कहेती होना तब मेभी उनकी बीवी थी..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती.. वो तुम ही थी.. मेरे बबलुकी पहेली बीवी.. मालीनी.. मेरी सबसे बडी बेटी.. ओर मेरे बबलुकी बहेन.. जो दोनो भाइ बहेन प्यार करते थे.. ओर बादमे मेरी पीयुको छोडके सबकी सब उन राजाकी रानीया होगइ थी.. इसीलीये तुम देवुकी बीवीया हो.. क्या अब भी मेरी बातोपे यकीन नही होता..?

सृती : (आंख गीली करते मंजुको गले लगाते) तो क्या आप भी मेरी मां हो..? तो फीर मुजे पहेले बताया क्यु नही..? क्या मुजे मेरी मांका दर्शन नही करवाओगी..? पुनोदीको तो करवा दीया..

मंजुला : (पीठको सहेलाते) मेरी बच्ची.. कैसे बताती..? तो फीर तुम दोनो देवुसे सादी थोडीना करती..? ओर रही बात दर्शनकी.. तो करवाउगी.. जरुर करवाउगी.. लेकीन इस बातके लीये अभी काफी वक्त हे.. मेरे जानेका समय आयेगा तब मे सबको अपनी पहेचान करवाके जाउगी..
 
सृती : (आंसु बहाते पहेली बार) अब मे आपको कभी दीदी नही कहुगी.. आप मेरी मां हो.. आप जानेकी बात मत करो.. अ‍ेक माने तो धोखा दे दीया हे.. कमसे कम आपतो मत दो.. दिल गभरा जाता हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) मेरी बच्ची.. तुजे कीसीने भी धोखा नही दीया.. ओर मे अभी कहा जा रही हु.. ओर जाना तो सबको हे.. कोइ पहेले तो कोइ बादमे.. हम सबको अ‍ेक बार फीर जन्म लेकर वापस भीतो आना हे.. तुजे मेरे बबलुको पुनोको.. तब हमारे स्वामी जवा होगे.. हम सबको अपनी पुरानी पहेचान करवायेगे.. हम सब वो ही अनुभुती करेगे.. जो कभी उस जमानेमे करते थे.. बस.. अब सीर्फ उनके आनेकी देरी हे..

सृती : (मुस्कुराते) मोम.. तो फीर हमारी मंदाकीनी कहा हे..? क्या आप मुजे बता सकती हो..

मंजुला : (मुस्कुराते) सृती.. सबके बारेमे मत पुछ कुछ राज राज ही रहेनेदे.. बस.. इतना जानले.. उनका जन्म अभीतक नही हुआ हे.. लेकीन होगा.. उनका तालुक भी तेरी सौतनसे हे.. जो आजकल तेरी खास सहेली हे.. तु समज गइनां..?

सृती : (मुस्कुराते) येस मोम.. मोम.. प्लीज.. मुजे सीर्फ अ‍ेक बार आपके दर्शन करवादो.. मे ओर इन्तजार नही कर सकती.. आजसे मे हमेसा आपको मोम ही कहुगी.. फीर आपको कुछ नही पुछुगी.. अब मुजे यकीन हो गया हे.. की हम सब कौन हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) ठीक हे.. लेकीन मत कर दर्शन.. अगर तुम मुजे असली रुपमे देखलोगी तो तु ओर कामी होजायेगी.. ओर तेरी कामाग्नी बढ जायेगी.. फीर तुम मेरे लखनके बगैर नही रेह पायेगी.. सोचले..

सृती : (सरमाते गले मीलते धीरेसे) मोम.. मे मेरे लखनके बगैर रहेना भी नही चाहती.. मेने सब सोच लीया हे.. मे ओर पुनो दीदी.. मतलब.. हम दोनोने डीसाइड करलीया हे.. अब हम हमारे नये पतीको पुर्ण समर्पीत होजायेगी.. ओर मे वादा करती हु.. अब मे इस घरसे कभी नही जाउगी.. अब यही मेरा ससुराल हे.. आइ प्रोमीस.. प्लीज.. करादो दर्शन.. प्ली..ज..

मंजुला : (दरवाजेकी ओर देखते मुस्कुराते) ठीक हे.. तो फीर आज रातको तैयार रहेना.. आज हम सब यही रुकने वाले हे.. तो आज मे तेरे साथ सोउगी.. सीर्फ हम दोनोही होगे.. क्युकी अब तु अकेली कैसे रहोगी..?

सृती : (मुस्कुराते) मोम.. इस बोरेमे मेने लखन भैयासे बात भी करली हे.. वो आपकी ओर पुनो दीदीकी परमीशन चाहते हे.. तो फीर उनको मुजे अपनानेमे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. मोम.. तो फीर देवु.. आइ मीन.. वो.. आपके पती.. क्युकी आपको तो पता हे मेने लखन भैयासे क्या बातेकी..

मंजुला : (समज गइ) हंम.. हां पता हे.. सुन.. तु देवुकी फीकर मत कर.. मेरी दोनो सौतने साथमे आइ हेनां..? मतलब.. आज तेरी ओर मेरी मम्मी हेनां.. उनको सम्हाल लेगी.. बेचारीकी अपने पतीको मीलनेकी बहुत कम बारी आती हे.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते) मोम.. हमारी दुनीयामे कीतना अजीब हेनां..? कल तक जो मेरा पती था.. आज वो मेरा पीता होगया.. ओर जो मेरा देवर था.. आज वो मेरा भाइ हे..

मंजुला : (जोरोसे हसते) तु फीकर मत कर.. वो बहुत जल्द तेरा पती भी होजायेगा.. ओर देवु तेरा ससुर भी होजायेगा.. हें..हें..हें.. बीटु.. हमारी दुनीया अ‍ैसे ही चलती हे.. यहा तो फीर भी रीस्ते नाते हे.. लेकीन वहा..? हमारी उस दुनीयामे कोइ रीस्ते नाते नही..

सृती : (मुस्कुराते) मोम.. मुजे हमारी उस दुनीयाके बारेमे थोडा बहुत बताओनां..

मंजुला : (मुस्कुराते) हाये.. सृती क्या बताउ तुजे.. कीतनी हसीन दुनीया हे हमारी.. ना कमानेकी चीन्ता ना खाने पीनेकी चीन्ता.. सबलोग अपनी मस्तीमे जी रहे हे.. तुमने कीताब (ये केसी अनुभुती) मे पडाथानां.. मे उस राजाके साथ तीन दिन सोइ थी.. हमने लगातार तीन दिन ओर रात सेक्स कीया.. ओर सबको अनुभीती करवाइ.. वहाकी हर हेक परीया ओर अप्साको प्रेगनेन्ट करवाया.. होर हमारी उसी महेनत रंग लाइ.. ओर आज वहा हमारी संख्या कीतनी बढ गइ हे.. ओर यहा भी बहुत बदल जायेगा..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते) क्या मोम.. आपभीनां.. मुजे तो बहुत सर्म आ रही हे.. यहा भी सब कुछ कीतना जल्दी बदल गया.. ओर हमारे घरमे तो रीस्तो जैसा कुछ बचा ही नही हे..

लखन : (दरवाजा खोलकर अंदर आते) अरे.. भाभीमां.. आप इधर हो..? चलो खाना रेडी हो गया हे.. दीदीका खाना अभी रजु इधर लेकर आ रही हे.. तो इनको खीला देगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) दी..दी..? अच्छा.. तो फीर तुजे सब पता हे..? हें..हें..हें.. क्या सब पुनोने बतायानां..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) हां भाभीमां..

सृती : (सरमाते धीरेसे) मोम.. मुजे बाथरुम जाना हे.. ओर डोक्टरने अभी पैरको नीचे रखनेको मना कीया हे.. तो इनको कहीयेनां मुजे अंदर लेजाये..

मंजुला : (सामने देखते) कीसको..?

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) इनको.. आपके लाडलेको..

मंजुला : (जोरोसे हसते) क्या..? अभीसे नाम लेना भी बंध कर दीया.. हें..हें..हें.. (लखनकी ओर देखते) बीटु.. जरा इनको बाथरुममे लेजा.. अब इनकी सेवा तुजे ही करनी हे.. ओर वो भी हमेसाके लीये.. हें..हें..हें..

लखन : (सृतीको उठाते अंदरकी ओर लेजाते) ओ बापरे.. कीतनी भारी भरखम हे.. पता नही भुमी आंटीने इनको कोनसी चकीका आटा खीलाया हे..

मंजुला : (जोरोसे हसते) लखन.. अब वो आंटी नही हे तेरी.. तेरी भाभी होगइ हे.. हें..हें..हें.. ओर तेरी वो भाभी नीचे ही हे.. जा जाकर पुछले..

कहातो सृती सरमाते हसने लगी.. ओर अ‍ेक हाथमे प्लास्टर था तो दुसरे हाथसे लखनके सीनेमे मुका मारने लगी.. जीसे देखकर मंजु भी जोरोसे हसने लगी.. फीर लखनने सृतीको बाथरुममे कमोडपे बीठा दीया ओर बहार नीकल गया.. ओर मंजुके पास आकर बैठ गया.. तो मंजु प्यारसे लखनके गालको सहेलाते सामने देखकर मुस्कुराने लगी.. तब लखनने पुछ ही लीया....
 
लखन : (धीरेसे) भाभीमां.. मेने सुना.. ये दीदी आपको मोम.. क्यु केह रही हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) वो कुछ ही दिनमे तुजे भी पता चल जायेगा.. सुन.. क्या तुभी तो मुजे भाभीमां कहेता हे.. तो इनकी जगह मुजे सीर्फ मोम नही केह सकता..? तुजे तो पता हेना मे भी तेरी मां हु..

लखन : (मुस्कुराते) येस.. मोम.. आइ अ‍ेम सोरी.. अबसे मे भी आपको मोम ही कहुगा.. सबकुछ कीतना बदल गया.. कास पहेले पता होता.. तो मे पहेलेसे ही आपको मम्मी कहेकर बुलाता..

मंजुला : (मुस्कुराते) सुन लखन.. क्या अभी कीसीको सृतीके बारेमे पता हे..? की वो इधर हे..

लखन : (मुस्कुराते) नही मोम.. भाइने मना कीया था तो अभी कीसीको नही बताया..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. अच्छा कीया.. हम अभी खाना खाकर सबको बता देते हे.. बीटु.. अब जबतक सृती ठीकसे चल नही पाती.. इनका ख्याल तुजे ही रखना पडेगा.. क्युकी रजीया ओर राधीकातो इसे उठा नही सकते..

लखन : (मुस्कुराते) हां मोम.. तभी तो इनको यही मेरे कमरेके सामने रखा हे.. रजु इनके साथ सोजायेगी.. ओर जरुरत पडनेपे मुजे बुला लेगी..

मंजुला : (धीरेसे) बीटु.. आज तो मे हु.. तो रजुको यहा सोनेकी जरुरत नही हे.. कलसे सुला देना.. सुन.. अब सृती ओर पुनोका खयाल तुजे ही रखना हे.. वो भी हमेसा हमेसाके लीये.. अगर रजुकी जगाह तुम भी यहा रहोगे तो भी कोइ दिकत नही.. तु समज गयानां..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) जी मोम.. मुजे आपसे इसी बारेमे बात करनी थी..

मंजुला : (मुस्कुराते गाल सहेलाते) पता हे मुजे.. तुजे पुरी परमीशन हे.. अपनाले दोनोको.. क्या यही बात करनीथीनां..?

लखन : (सरमात मुस्कुराते धीरेसे) येस मोम.. आपको ओर पुनो दीदीको तो सब पता चल जाता हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) सुन बेटा.. बहुत जल्द तेरी पुनोदीकी सादी भी तुमसे करवा दुगी..

तभी सृतीने आवाज लगाइ तो लखन सृतीको गोदमे लेकर बेडपे सुला देता हे.. सृती सीर्फ लखनको ही देख रही थी.. फीर मंजु ओर लखन नीचे चले गये.. ओर सब लोग डाइनींग टेबलपे बैठ गये.. तबतक रजीया ओर राधीकाने अपनी मम्मी ओर चंदाको खाना खीला दीया था.. अब रजीयाने पुरी तराह घरको सम्हाल लीया था.. जीसे देखकर मंजु नीर्मला ओर भुमीका भी खुस होगइ..

तो मंजुने आज राधीकाको अपने पास बीठा दीया.. तो राधीकाको पता नही सबलोग उनको इतना प्यार क्यु दे रहे हे.. जबसे सबलोग आये हे तबसे नीर्मला ओर भुमीका उनके पास ही बैठी रही.. ओर अपने यतीतकी बाते करती रही.. राधीकाकी मम्मीने दोनोको राधीकाको अतीतके बारेमे बतानेको मना कीया.. लेकीन मंजु ओर पुनम उनके बारेमे सबकुछ जानती थी.. तभी खाना खाते..

नीर्मला : सृती भीनां.. कीतनी नादान हे.. अगर हमारी बात समजतती तो आज वो भी हमारे साथ होती..

मंजुला : (मुस्कुराते) मोम.. फीकर मत करो.. सृती यही हे.. उनको अपनी गलतीका अहेसास हो गया हे..

भुमीका : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? सृती इधर हे..? लेकीन कहा हे वो..? दीखाइ नही देती..

मंजुला : (लखनकी ओर देखते) भुमी मौसी.. वो.. दरसल.. सृती जब वहा आइ थी.. तो वापस जाते वक्त उनका छोटासा अ‍ेक्सीडन्ट होगया था.. लेकीन आप उनकी फीकर मत करो.. वो ठीक हे.. उनको कुछ नही हुआ.. बस.. थोडीसी मामुली चोट आइ हे.. तो उपर आराम कर रही हे.. आप लोग सांतीसे खाना खालो.. फीर उनको उपर जाकर मील लेनां..

भुमीका : (थोडी परेसान होते) हे भगवान.. ये लडकी भीनां.. कीतनी लापरवाह हे.. हमारी कोइ बात नही मानती.. बहुत जीद्दी हे.. ओर कार भी कीतनी तेज चलाती हे..

नीर्मला : (लखनकी ओर देखते) अच्छा.. तभी लखन बेटा दिखाइ नही दे रहा था.. क्या तुम वहा थे..?

लखन : (मुस्कुराते) जी नानीजी.. आप लोग उनकी चीन्ता मत कीजीये वो बीलकुल ठीक हे..

देवायत : (मुस्कुराते) हां.. मुजे भी लखनका फोन आया था.. तो मेने ही इनको तुम सबको बतानेको मना कीया था.. ताकी आप लोग उनकी चीन्ता ना करे..

नीर्मला : (मुस्कुराते) लखन बेटा.. लेकीन तुम आज मुजे अचानक नानीजी क्यु केह रहा हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) मोम.. क्युकी लखन अब मेरा देवर नही मेरा बेटा हे.. इसीलीये.. ओर अब सृतीकी चीन्ता छोडो.. अब वो हमेसाके लीये यही रहेने वाली हे.. मे अभी उनसे बात करके आइ हु.. ओर चंदा दीदीको भी कुछ नही हे.. तो उनकी भी चीन्ता नही करनी.. वो भी कुछ दिनोमे ठीक हो जायेगी.. बस.. अब घर जाकर अ‍ेक ही चीन्ता करनी हे.. मेरी पुनो ओर मेरे बेटे लखनकी सादीकी..

नीर्मला : (मुस्कुराते) हां बेटी.. ये तुमने सही नीर्णय लीया हे.. पुनो हमारी नजरके सामने तो रहेगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) मोम.. सीर्फ नजरके सामने नही रहेगी.. बल्की लखनके साथ सादी करके वो इस खानदानकी महारानी भी होजायेगी.. मेरी उतराधीकारी..

इतना सुनतेही लखन सरमा गया ओर नीचे देखकर खाने लगा.. अ‍ैसे ही सबने डीनर करलीया.. तो सबलोग उपरकी ओर चले गये.. ओर सृतीको मीलकर उनका हाल चाल पुछने लगे.. सृती सीर्फ भुमीकाको ही देखती रही.. ओर उनकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. तभी भुमीकाने उसे गले लगालीया ओर सृती जोरोसे रोते उनकी माफी मांगती रही.. फीर उसने देवायतकी भी माफी मांगली..

सब लोग नीचे आगये ओर कुछ देर होलमे बैठकर बाते करते रहे.. इसी दौरान सबलोग राधीकाको सबकुछ पुछते जानकारीया लेते रहे.. ताकी उनको ना लगेकी उनको कोइ नही जानता.. ओर इस खानदानकी जानकारीया देते रहे.. जीसे सुनकर राधीका भी सरमा जाती थी.. ओर खुसभी हो रहीथी.. की उनकी सादी अ‍ेक रोयल फेमीलीमे हुइ हे.. वो आज मंजुको अपनी सासुमांके रुपमे देखकर बहुत खुस थी..

राधीकाकी फेमीलीके बारेमे जानकर सबको पता चला उनकी फेमीलीमे अब उनकी मम्मीके सीवा कोइ भी नही हे.. सबलोग उनका होसला बढाते उनके साथ होनेकी तसली देते रहे.. जीसे सुनकर राधीका भी बहुत खुस होगइ.. ओर सबलोग सोनेके लीये जाने लगे.. तो मंजुने नीर्मलाको इसारा करते देवायतको साथ लेजानेको कहा तो नीर्मला सरमा गइ.. आज राधीका अपनी मम्मीके साथ सोगइ..

क्युकी कल उनकी ओर लखनकी सुहागरात थी तो पुरी रात लखन उनकी चुतमे धमाका करता रहा.. जीनकी वजहसे आज राधीकाकी हालत इतनी अच्छी नही थीकी वो लखनके साथ सो सके.. फीर मंजुने लखन ओर रजीयाको उनके रुममे भेज दीया.. ओर वो खुद सृतीके पास चली गइ.. चंदाको दवाइ दीथी तो वो सो गइ थी.. मंजुने आज नीलमको चंदाका ध्यान रखनेको कहेकर उनके साथ सुला दीया..
 
आज पुरा दिन सबलोग होस्पीटलकी दोडधाम करते रहे.. इसी बीच मंजु ओर पुनमके अलावा कीसीको पता नही थाकी आज नीलमके साथ क्या हुआ था.. वो सुबह अकेली ही स्कुलपे चली गइ.. तो वहा सुबह सुबह धिरेन उनका स्कुलके गेटपे ही इन्तजार कर रहा था.. वो सीर्फ नीलमको मीलनेके लीये ओर उनसे सब बाते करनेके लीये ही आया था.. की कल उनकी लखनके साथ ओर उनकी मम्मीके साथ क्या बाते हुइ..

नीलमने धिरेनको सबकुछ बता दीया.. तो धिरेन समज गयाकी आज इसीलीये नीलम अकेली आइ हे.. तभी उसने नीलमको अपने साथ आनेके लीये कहा.. तो पहेलेतो नीलम ना नुकुर करती रही.. फीर भी धिरेन उनको समजा बुजाके अपने नये घरपे ले गया.. जहा नीलम पहेले भी घर देखनेके लीये आ चुकी थी.. ओर दोनो घरका ताला खोलकर अंदर चले गये.. तो धिरेनने दरवाजा लोक करदीया..

नीलम बहुत ही सरमाने लगी.. तभी धिरेनने उनको अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर नीलमको गोदमे उठाकर बेडरुमकी ओर लेजाता हे.. नीलमको आज पहेली बार अच्छा नही लग रहा था.. क्युकी कहीना कही उनके दिलमे अब लखनने जगाह लेली थी.. वो मन ही मन अब लखनसे प्यार करने लगी थी.. फीर भी उनको पता थाकी सादी तो धिरेनसे ही करनी पडेगी.. नीलमने अपने बारेमे बहुत कुछ सोच लीया था..

धिरेन : (मुस्कुराते) देखले नीलु.. अब यही हमारा आसीयाना हे.. तुम इस घरकी मालकीन हो.. अब हमे यही रहेना हे..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) धिरेन.. क्या सचमे तुमने नोकीनेशनमे मेरा नाम डाला हे..? तो फीर पुनोदी..?

धिरेन : (गुस्सेमे) तु नाम ना ले उस रंडीका.. ना जाने मेरी पीठके पीछे कीनका बीस्तर गरम करती थी.. ओर मेरी मां..? वो भी जीजुके पीछे पागल थी.. तुजे पता हे..? वो उनकी सादीसे पहेले ही जीजुके साथ फीजीकल रीसेशनमे थी.. अब मेरा उन दोनोसे कोइ वास्ता नही..

नीलम : (मुस्कुराते) तो फीर गांवका घर..? आपकी तो खेतीबाडी भी हेनां..?

धिरेन : हां.. सबकुछ था.. लेकीन अब नही.. मां हमारे डीवोर्सकी वजहसे मुजसे बहुत नाराज हे.. वो सब अब पुनोके नाम करदेगी.. नही चाहीये मुजे उनका कुछ.. मेरी अच्छी खासी नोकरी हे.. हमारा गुजारा आरामसे चल जायेगा.. अब हम यही रहेगे.. चल बाते बादमे करेगे.. पहेले मेरी इस बीवीसे प्यार तो करलु..

नीलम : (सामने देखते) अ‍ेक मीनीट.. क्या प्यार करलु..? धिरेन तुजे पता हेना मेरी भी कुछ नीड हे.. मुजे सोपींग.. घुमना कीतना पसंद हे.. तुजे सब पता हेनां..? मेरा खर्चा उठा पाओगे..?

धिरेन : अरे हां यार.. मेने तुम्हारा बारेमे भी सोचा हे.. सब मेनेज होजायेगा.. तु टेन्शन मत ले.. बता कीतने पैसे चाहीये तुजे.. मे देता हु..

नीलम : (सामने देखते) पचीस हजार.. हे तेरे पास..? क्युकी मुजे कुछ कपडे ओर मेकअपका सामान लेना हे..

धिरेन : (मुस्कुराते) हां.. अभी जाते वक्त अ‍े टी अ‍ेमसे नीकालके देता हु.. जो लेना हो ले लेना.. आखीर तुम मेरी होने वाली बीवीजो हो.. तो अब मे मेरी बीवीसे थोडासा प्यार करलु..?

नीलम : (हग करते) अलेले.. मेरे बेबीको प्यार करना हे..? चल आजा..

फीर धिरेन उनको बेडरुममे लेजाते ही उनको प्यार करने लगा.. तो नीलम भी उतेजीत होने लगी.. ओर वो भी धिरेनका साथ देने लगी.. दोनो ही चुमाचाटी करते अपने बेडपे आगये.. धिरेन नीलमके स्कर्टको उचा करते नीकरको साइडमे करदेता हु.. ओर उनकी चुतको सहेलाने लगा.. तब नीलम मदहोस होने लगी.. धिरेन नीलमकी चुतको सहेलाते उनके होठोको चुमने लगा..

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दोनोके उपर वासनाका नसा चढने लगा.. तो धिरेनने फटाफट अपने कपडे नीकाल दिये.. ओर नीलमके कपडे भी नीकालते उनको भी नंगा करदीया फीर दोनो बेडपे आकर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर धिरेन नीलमके बुब्सको मसलते उनके होटोको चुमने लगा.. तो नीलम भी मदहोसीमे आंखे चडाते धिरेनका साथ देने लगी.. धिरेन नीलमके उपर चड गया.. ओर लंडको पकडकर नीलमकी चुतपे सेट करने लगा..

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जब सेट हो गया तो धिरेनने पुस कीया तो लंड फीसलके नीलमकी जांगोमे चला गया.. नीलम आज भी धिरेनके अनाडीपनपे जोरोसे हसने लगी.. तो धिरेन थोठा चीडचीडा हो गया.. ओर लंड पकडकर दुबारा चुतमे घुसानेकी कोसीस करने लगा.. इस बार नीलमने हाथ नीचे लेजाते धिरेनके लंडको थामलीया ओर अपनी चुतके लव होलमे सेट करके धिरेनको जोरोसे बाहोमे भीचलीया..

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तो धिरेन कमरको जटका मारते लंडको चुतमे घुसा देता हे.. नीलमकी हल्कीसी आहे नीकल गइ.. ओर वो आंखोकी पुतलीया पलटते धिरेनको लखन समजकर बाहोमे भीच लेती हे.. धिरेन धीरे धीरे कमर हीलाते नीलमको चोदने लगा.. दोनो चुदाइ करते अपने चरमोपे पहोंचनेकी कोसीस करने लगे.. लेकीन ये तो धिरेन था.. वो नीलमको अपने चरमपे पहोचाये इनसे पहेले ही वो नीलमकी चुतमे जड गया..

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तो नीलम धिरेनके कंधेको पकडकर अपनी चुतको आगे पीछे ओर साइडमे घीसते जडनेकी कोसीस करने लगी.. ओर बडी मुस्कीलसे अपने चरणोपे पहोच पाइ.. अ‍ेक बार फीर मनही मन धिरेनको कोसने लगी.. तभी उसे अपने मनमे लखनका खयाल आया.. ओर उसने अ‍ेक बार फीर लखनसे मीलन करनेका इरादा मजबुत करलीया.. नीलम जीतनी बार धिरेनसे चुदवाती उतनी ही बार लखनकी ओर ढल रही थी..

फीर दोनो बाथरुममे चले गये.. ओर सही होकर वापस बेडपे आगये.. तो धिरेनने नीलमको अपने कपडे नही पहेनने दिये.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार होगइ.. दोनो नंगे ही अ‍ेक दुसरेसे लीपटके बाते करने लगे.. धिरेनने नीलमको लखनसे हुइ बात ओर उनकी मम्मीसे हुइ बातके बारेमे सबकुछ नीलमको बता दीया.. लेकीन नीलमने धिरेनको कुछ नही बतायाकी उनकी मम्मीको यहा होस्पीटल लेकर आये हे..

दोनो काफी देर तक बाते करते रहे.. धिरेनने फोन करके वही दोनोका खाना भी मंगवालीया.. तो कुछ देरके बाद खाना आगया.. तो धिरेनने कपडे पहेनकर खाना लेलीया.. फीर दोनोने नंगे ही खाना खाया.. इसी बीच काफी टाइम नीकल गया.. बादमे धिरेनने नीलमको घोडी बनाकर अ‍ेक बार फीर चोद लीया.. इस बार चुदाइ थोडी लंबी चली.. तो नीलमको अपने चरमपे पहोंचनेमे इतनी तकलीफ नही हुइ..

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फीर दोनोने अपने अपने कपडे पहेन लीये.. आज धिरेनकी वजहसे नीलमने स्कुलको बंक कीया.. लेकीन इसके बदले आज पहेली बार नीलमने धिरेनको लुट भी लीया.. उनके लीये पचीस हजार कोइ छोटी मोटी रकम नही थी.. वो मन ही मन खुस होने लगी.. धिरेनने नीलमको कल स्कुल आते वक्त अपने डोक्युमेन्ट लेआनेको कहा ताकी वो कल कोर्टमे अपनी सादीकी अ‍ेप्लीकेशन डाल सके..

फीर धिरेन नीलमको लेकर अ‍ेक अ‍ेटी अ‍ेम सेन्टरपे ले गया ओर उनमेसे पचीस हजार नीकालकर नीलमको देदीया.. नीलम बहुत खुस होगइ.. फीर धिरेन नीलमको स्कुलके बजाये सीधा लखनके घरके पास थोडी दुर छोड देता हे.. तो नीलम पैदल ही अपने घरपे आगइ.. रजीयाके पुछनेपे उसने स्कुलसे जल्दी छुटीकी बात की.. ओर वो अपने कमरेमे चली गइ..

तो दुसरी ओर बीच बीचमे जब भी टाइम मीलता.. लखन ओर पुनम भी फोनपे चेट करते बात कर लेते.. अब पुनम ओर लखनके बीच प्यारका परवाना बराबर चढा हुआ था.. तो पुनम भी लखनको लेकर काफी अ‍ेक्साइटेड थी.. वो लखनके प्यारमे ओर कामी होने लगी थी.. दोनो फोनपे खुलकर चेट करने लगे थे.. ओर बात फोन सेक्स तक आगइ.. पुनम लखनका फोन आते ही फोनपे बाते करते बाथरुममे घुस जाती.. ओर अंदर जाकर विडीयो फोन चालु करदेती..

ओर लखनसे विडीयो कोलपे सेक्सकी बाते करते अपनी चुतमे उगली करने लगती.. ओर लखन जैसा कहे करती जाती.. पुनम अपने तनका हर जलवा लखनको दीखा चुकी थी.. लखन उनसे फोनपे बाते करते ही जडा देता.. दोनो प्यारकी बाते करते बहुत आगे बढ चुके थे.. बातो ही बातोमे पुनमने लखनको सृतीको मीलनेके लीये भी केह दीया.. तो लखनने सृतीके साथ हुइ बात भी पुनमको बतादी..

इस रात कभी ना थंभने वाली रात जैसी थी.. देवायत भुमीका ओर नीर्मलाके बीच थ्रीसमका खेल चल रहा था.. देवायत बारी बारी नीर्मला ओर भुमीकाकी धमाकेदार चुदाइ करता रहा.. तो लखन भी रजीयाकी चुतमे धमाका करता रहा.. रजीयाभी बीस्तरमे लखनकी रंडी होजाती.. ओर उछल उछलके लखनको चुदवानेमे साथ दे रहीथी.. उनको नही पता थाकी कुछ ही दिनमे उनके भी अच्छे दिन आने वाले थे.. लेकीन इन सबके बीच..

आज सोसायटीमे भी आजु बाजुके बंगलोपे वासनाका तांडव मचा हुआ था.. सभी मर्द अपनी बीवीया या फीर जीनके साथ उनके अफैर चल रहेथे सबलोग उनकी चुदाइ कर रहे थे.. ओर ये सबकी असली वजह थी मंजु.. जो आज अपना असली रुप सृतीको दिखाने जा रहीथी.. मंजुने सृतीके पास जाते ही दरवाजा लोक करलीया.. ओर खुदके कपडे नीकालकर सृतीको भी नंगा करदीया..

फीर वो नहाने चली गइ.. सृती सीर्फ उनको देखती ही रही.. फीर कुछ देरके बाद मंजु अ‍ैसे ही नहाकर बहार नीकली.. सृती उनको देखते ही रेह गइ.. क्युकी मंजु आज कुछ अलग ही लग रही थी.. सृतीने मंजुका अ‍ैसा रुप पहेले कभी नही देखा था.. वो पुरी तराह नंगी थी.. उन्होने अपना बदन भी नही पोछा था.. वो नहाकर सीधी ही नीकली थी.. ओर अ‍ेक लोटेमे जल लेकर सृतीके बेडपे चली गइ.. फीर उसने सृतीको बेडपे बीठा दीया ओर खुद भी उनके सामने सटकर बैठ गइ....

कन्टीन्यु
 
रस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २४१

फीर वो नहाने चली गइ.. सृती सीर्फ उनको देखती ही रही.. फीर कुछ देरके बाद मंजु अ‍ैसे ही नहाकर बहार नीकली.. सृती उनको देखते ही रेह गइ.. क्युकी मंजु आज कुछ अलग ही लग रही थी.. सृतीने मंजुका अ‍ैसा रुप पहेले कभी नही देखा था.. वो पुरी तराह नंगी थी.. उन्होने अपना बदन भी नही पोछा था.. वो नहाकर सीधी ही नीकली थी.. ओर अ‍ेक लोटेमे जल लेकर सृतीके बेडपे चली गइ.. फीर उसने सृतीको बेडपे बीठा दीया ओर खुद भी उनके सामने सटकर बैठ गइ.... अब आगे

मंजुला : (मुस्कुराते) मेरी बच्ची.. तुजे दो बार लखनको मीलनेका मौका मीला था.. पता हे तुम ओर लखन आगे क्यु नही बढ पा रहे थे..?

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) नही मोम..

मंजुला : (मुस्कुराते) क्युकी तुम अभी तक मेरे देवुके बंधनमे बंधी थी.. तुजे दोनो बार गील्टी फील हुइ हे.. की मे मेरे पतीको धोखा दे रही हु.. क्या ये सच हेनां..?

सृती : (नजरे जुकाते धीरेसे) येस मोम.. आपकी बात सही हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) मेरी बच्ची.. सुन.. तुमने वहासे जाते वक्त अ‍ेक काम अच्छा कीया.. की तुमने तेरा मंगलसुत्र तोडकर देवुके हाथमे थमा दीया.. तब ही तुम मेरे देवुसे आजाद होगइ थी.. अब अगली बार मेरे बेटेसे मीलनेमे तुजे कोइ संकोच नही होगा.. अब तुम ओर पुनो सीर्फ मेरे लखनकी सुहागन होगी.. अब उनके नामका ही मंगल सुत्र पहेनोगी.. उन्हीके नामका अपनी मांगमे सीदुर लगाओगी.. चल अपने सभी कपडे नीकालदे..

सृती : (सरमाकर कपडे नीकालते मुस्कुराते) जी मोम.. जैसा आप कहे.. क्या ये जरुरी हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) हां सृती.. तभी तो मे तेरे अंदरके कामको जगा सकुगी.. क्युकी तुम अ‍ेक बार मेरा ये रुप देखलोगी तो फीर तेरे अंदरका काम जाग जायेगा.. ओर तु बहुत कामी होजायेगी.. फीर देखती हु.. तुम कीतने दिनो तक मेरे लखनसे दुर रेह सकती हो..

सृती : (सरमाते मुस्कुराते) जी मोम.. नीकालती हु..

जब सृती भी नंगी होगइ तब मंजुने थोडासा जल अपने हाथोमे लेलीया.. ओर आंख बंध करते कुछ मंत्र मनमे बोलने लगी.. तो सृती मंजुकी हर मुवमेन्टको देखती रही.. जैसे उनके वसमे होगइ हो.. वो मंजुको बीना पलको जुकाये थोडी देर देखती रही.. तभी अनायास ही उनकी आंखे भारी होने लगी.. तो वोभी आंख बंध करके मंजुके सामने बैठ गइ.. फीर जैसे ही जलको सृतीके उपर छीडका सृतीको तनमे अ‍ेक जटका लगा..

ओर वो अपना होस गवां चुकी.. अ‍ैसे ही मंत्रमुघ्त होते अ‍ेक नजरसे मंजुको देखती रही.. उसे मंजुके अंदर अ‍ेक दिव्य प्रकाश दिखने लगा.. ओर धीरे धीरे करते मंजुका असली रुप सृतीको दिखने लगा.. फीर अचानक मंजुने सृतीका हाथ पकड लीया.. तो सृतीको अ‍ेक जटका ओर लगा.. उनकी आंखोके सामने प्रकाश छा गया.. उसे कुछ दिखाइ नही दे रहा था..

फीर कुछ देरके बाद धीरे धीरे प्रकाश कम होता गया.. ओर सृतीको मंजुका पुर्ण नग्न स्वरुप दीखाइ दिया.. जो उसने पुनमको दिखाया था.. मंजु पुर्ण रुपसे नंगी थी.. मंजुके तनमे दस भुजाये थी.. उनके कठोर ओर लचीले बुब्स उनकी कामुक्तामे चार चांद लगा रहे थे.. उनकी दोनो आंखे मनमोहक थी.. जो कीसी भी पुरुषको अ‍ेक ही बार देखते उनके अपने वसमे करने काफी थी..

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मंजुकी नाजुक बदाम जैसी चुत अंदर बहार होते फडफडा रही थी.. मंजुका रुप बहुत ही कामुक दिख रहा था.. जैसे वो कोइ रतीका रुप हो.. मंजुका ये रुप देखकर सृतीके अंदरका काम जाग गया.. सृतीकी चुत भी ये सब देखते फडफडाने लगी.. ओर चुतसे लगातार पानी बहेने लगा.. सृती बहुत ही कामातुर होने लगी.. उनको अपनी चुत फडफडाते महेसुस होने लगी.. तभी..

मंजुला : (मुस्कुराते) देखले बच्ची.. मे ही तेरी मां हु.. सबकी जननी.. मेरी योनीसे ही तुम सबका संसार सुरु होता हे.. ओर यहीसे खतम.. मे ही तुम सभी ओरतोमे काम वासना जगाती रहेती हु.. ओर मेरा स्वामी सभी पुरुषमे.. यही सचाइ हे.. ओर यही हम सबका कर्तव्य हे.. हमे बस हमारे स्वामीकी सीर्फ सेवा करनी हे.. उनको खुस रखना ही हमारा कार्य हे.. तुजे ओर कुछ देखना हे..?

सृती : (मदहोसीमे) मोम... मुजे हमारी जनतका दर्शन भी करादो.. जहा हमारी दुनीया बसी हुइ हे.. जहाकी आप रानी हो.. ओर मेरे पीता जहाके राजा हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे.. देखले.. मे ही सबकी रानी हु.. हमारे स्वामीसे ही मे सबको जन्म देती हु.. तुम सभी मेरे अंस हो.. ओर जीतने भी पुरुष हे मेरे स्वामीके अंस हे.. जो तुम सभी परीया ओर अप्सराओका दाइत्व हे.. की हमारे सभी अंसोको योन सुख प्रदान करो.. इसीसे हमारी दुनीया चलती हे..

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सृती : (मदहोसीमे) मोम.. मुजे भाइको देखना हे.. मेरा बबलु.. कैसा दिखता हे वो..

मंजुला : (आंख बंध रखते धीरेसे) बेटी.. तेरा बबलु तो तेरे पास ही हे.. तु उसे नही पहेचान पाइ.. मेरा लखन ही तो तेरा बबलु हे.. ले देखले उसे भी.. यही उनका असली स्वरुप हे..

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जैसे ही सृतीने बबलुको देखा उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. उनको पता नही थाकी लखन ही उनका बबलु हे.. फीर मंजुने सृतीको पुरी परी लोककी परीया दीखाइ जो यहा कीसीना कीसी रुपमे आइ हे.. वहा भी रानी परीके रुपमे उसे मंजु दिखाइ दी.. अब सृतीको पुरा यकीन हो चुका थाकी वो भी परी हे.. ओर उसे मंजु ओर पुनमकी सभी बातोमे सचाइ नजर आने लगी.. ओर मंजुने सृतीका हाथ छोड दीया..
 
सृतीको धीरे धीरे होस आने लगा.. होंस आते ही उनको अकेसास हुआ की कोइ उनके दोनो स्तनोके साथ खेल रहा हे.. जैसे जैसे उनके स्तनोपे हाथ घुमने लगा सृतीको अ‍ेक नया जोस ओर नसा छाने लगा.. वो आंख बंध करके इस पलको अ‍ेन्जोय करने लगी.. फीर अचानक पीछे मुह करके देखा तो मंजु मुस्कुराते सृतीके पीछेसे उनके बुब्सको मसल रही थी.. जीसे देखकर सृतीकी हसी नीकल गइ..

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सृती : (सरमाते धीरेसे) मोम.. आखीर तुम अपनी हरकतोसे बाज नही आओगी.. मे बेटी हु तुम्हारी..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. तभी तो मेरी बेटीको प्यारका पाठ सीखा रही हु.. जो अब भुल गइ हे..

सृती : (मुस्कुराते) मोम.. मे कहा भुली हु..? मे प्यार करते आपके पतीसे प्रेगनेन्ट भी.. हो गइ हु..

मंजुला : (मुस्कुराते) बेटी.. अब वो तेरा पती नही हे.. भुलजा इस प्रेगनन्सीको.. जो अ‍ेक छलावा हे.. तब मेरे बबलुकी गलती थी.. जो वो भटक गया था.. इसीलीये तुम ओर मेरा मंदमकीनी भी तो भटक गइ थी.. जो तुमने उस राजाको अपनालीया था.. मेरे बबलुसे धोखा देकर उस राजासे प्रेगनेन्ट हुइ थीनां..? ओर इस जन्ममे भी तुमने वो ही गलती की.. तुम मेरे स्वामीकी नही.. मेरे बेटे बबलुकी बीवी हो..

सृती : (मुस्कुराते सरमाते) मोम.. तुम्ही तो हो.. जो हमारा जीवन चलाती हो.. तो फीर क्यु हमे आपके पतीके पास भेज दीया..? मंदाकीनीने भी तो वही कीया था..

मंजुला : (मुस्कुराते) बेटी.. मानाकी हम सबके जीवन चलाते हे.. लेकीन तुम सबकी कामनाके आगे हब दोनो आपकी इच्छा पुरी करनेके लीये वीवस हे.. तो फीर तुम ही क्यु अ‍ैसी कामना करती हो..? मेरी मंदमकीनीतो बहुत कुछ जानती थी.. तो वोतो तबही मेरे बबलुको छोड चुकी थी.. जो अब हमेसाके लीये उस राजाकी रानी हो गइ थी..

सृती : (मुस्कुराते) मोम.. आपकी बात समज गइ.. अब हम अ‍ैसी गलती दुबारा कभी नही करेगे.. अब इस बार मे नही भटकुगी.. अब मे मेरे बबलुको पाकर ही रहुगी..

मंजुला : (मुस्कुराते बुब्सको मसलते) तो फीर हर बार मेरे बेटेको डांटकर क्यु भगा देती हो..? क्या वो तेरा भाइ नही हे..? क्या वो तेरा होने वाला पती नही हे..? मेरा लखन ही तेरा बबलु हे..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) मोम.. तब मुजे कहा पता थाकी मेरी मंजील मेरा भाइ हे.. ओर मे लखनको पहेचानती भी तो नही थी.. की यही मेरा बबलु हे.. सोरी मोम.. लेकीन अब मे उस गलतीको दोहराना नही चाहती.. मे अब उसे नही छोडुगी..

मंजुला : (मुस्कुराते आगे आते) हां सृती.. अब उसे छोडना भी मत.. अपनाले मेरे बेटेको.. मे बस इसीलीये तो आज यहा आइ थी.. तुजे तेरी ओर लखनकी पहेचान जो करवानी थी..

सृती : (मंजुसे गले लगते) मोम.. आइ अ‍ेम सोरी.. आज मेरी पढाइका सारा घमंड उतर गया.. मुजे पुरा यकीन होगयाकी हम सब कौन हे.. अब आपको सीकायतका अ‍ेक भी मौका नही मीलेगा.. मे ओर पुनोदीदी हमारे लखनको सम्हाल लेगे.. वो जैसा चाहेगे वैसा मे करुगी.. मोम.. मे मम्मीसे भी कल दुबारा माफी मांग लुगी.. अब मुजे कीसके भी रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही.. क्या वो अभी नीर्मला मम्मीके साथ हेनां..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. अभी मेरे पतीके नीचे लेटी हुइ हे.. ओर वो उन दोनोके साथ अपनी रतीक्रीडा मे मस्त हे.. सुन.. अब उनसे माफी मांगनेकी कोइ जरुरत नही हे.. तु अ‍ेक बार तो मांग चुकी हे.. अब भुमी आंटी ओर मम्मी हमेसाके लीये साथ ही रहेगी.. वो दोनो अब मेरी सौतन हे.. ओर कुछ ही दिनमे हमारे वाले घरपे चली जायेगी.. वही भुमी आंटी अपनी बच्चीको जन्म देगी.. बस.. तु ओर पुनो अब सीर्फ लखनपे ध्यान दे..

सृती : (गले लगाते) मोम.. आज मे बहुत.. बहुत खुस हु.. बस आप मेरे लीये कामना करे.. की मुजे मेरा भाइ बबलु जल्द मील जाये.. ओर वो भी हमेसा हमेसाके लीये.. हमारे हर जन्मके लीये..

मंजुला : (सृतीके गलेमे दोनो हाथ डालते) हां मेरी बच्ची.. बस.. तुम थोडीसी कोसीस करो.. मेरा बबलु तुजे बहुत जल्द मील जायेगा..

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फीर दोनो ही अ‍ेक दुसरेको प्यार करने लगी.. आज मंजुने सृतीके सामने बहुत कुछ राज खोल दीया था.. उसने सरला काकीसे लेकर चंपाकाकी तक सबके बारेमे बतादीया.. इन सोर्ट मंजुने सृतीको बता दीयाकी इस घरके मर्दके साथ जीनका भी रीलेशन हे वो सभी यातो परीया हे या फीर अप्सराये.. ओर इतनी ओरतोको सम्हालनेके लीये अभी सीर्फ दो मर्द ही हे.. अ‍ेक देवायत.. ओर दुसरा बबलु..

तो वो दोनो भाइके कीसी भी रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज ना करे.. ओर सृती मंजुकी सभी बाते अच्छी तराह समज गइ.. अब सृतीका लखनके बारेमे सोचने ओर देखनेका नजरीया भी बदल चुका था.. वो अब लखनको अपने पतीके रुपमे देखने लगी.. जो कभी उस जमानेमे उनका भाइ था.. अ‍ेक प्रेमी था.. ओर दोनोने उनकी सादीसे पहेले ही कइ रात रंगीन की थी.. तभी सृतीने मंजुका दुध पीनेकी इच्छा प्रगटकी..

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सृती : (मुस्कुराते) मोम.. मुजे मेरी मांका मीन्स.. आपका दुध पीना हे..

मंजुला : (मुस्कुराते ब्रा नीकालते) ले मेरी बच्ची.. पीले.. आज अपनी ये इच्छा भी पुरी करले.. देखना मेरे दुधमे बहुत ताकत हे.. फीर तु बहुत कामी होजायेगी.. तेरे पतीके बीना नही रेह पाओगी..

सृती : (मुस्कुराते बुब्सकी ओर मुह लेजाते) मोम.. मे भाइके बीना रहेना भी नही चाहती.. चाहे कुछ भी हो.. मुजे आपका दुध पीना हे.. क्या पुनो दीदीको पीलाया हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. उसी दिन जब उनको भी मेरा परीचय करवाया था.. तभी तो वो इतनी कामी हे.. जो उनको सम्हालनेके लीये धिरेनके बसका काम नही था.. तभी तो उसे लखनसे मीलवा रही हु.. ओर उसे बहुत कुछ देना हे.. जो मेरे पोतेके लीये होगा.. ले पीले मेरा दुध..

कहातो सृती मंजुकी गोदमे सर रख देती हे.. ओर अपना मुह मंजुके बुब्सपे लगा लीया.. वो अ‍ेक छोटी बच्चीकी तराह मंजुका दुध पीने लगी.. जैसे जैसे वो मंजुका दुध पी रही थी.. उसे अपना पीछला जन्म याद आने लगा.. ओर साथ ही साथ उनकी काम शक्ति भी बढने लगी.. सृती अपने आपको अ‍ेक कवारी लढकीकी तराह महेसुस करने लगी.. मंजु ये सब जान बुजके कर रही थी.. जो कभी यही काम शक्ति उसने पुनमको शक्तिया देते बढाइ थी..

इस रात सृतीके कमरेमे देर रात तीन बजे तक लेस्बीयनका खेल चला.. जो दोनोने अपनी चुतको आपसमे रगडते अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट कीया.. फीर मंजुने सृतीको उनके कपडे पहेना दीये ओर खुदने भी पहेन लीये.. फीर दोनो अ‍ेक ही बीस्तरपे सो गइ.. मंजुने सृतीके हाथ ओर पैरका बहुत खयाल रखा.. सृतीको ताजुब हुआकी इतना कुछ करनेके बावजुद उनके हाथ पैरमे दर्द क्यु नही हुआ..?

क्युकी अ‍ेक अनजान शक्तिकी वजहसे सृतीके हाथ पैरमे जटसे रीकवरी होने लगी थी.. लेकीन उसने इस बारेमे मंजुको कुछभी नही पुछा.. क्युकी उनको यकीन हो गयाथा की मंजु कुछ भी कर सकती हे.. फीर दोनो गहेरी नींद सो गइ.. सृतीको सीर्फ यही सपने आने लगे.. जो उसने कभी मालतीके रुपमे अपने भाइ बबलुके साथ कइ राते रंगीन की थी.. तब अ‍ेक बार फीर सृतीकी चुत लखनके लीये फडफडाने लगी..

तो दुसरी ओर पुनमको भी सब पता चल गयाकी सृतीको उनके पीछले जन्मकी पहेचान करवादी गइ हे.. आज उनके साथ पहेली बार विजय सो रहा था.. पुनमको पता थाकी विजय कैसे सोयेगा.. वो विजयको थोडी देर तो अ‍ेक नजरसे देखती रही.. वो जानती थीकी विजय भी कामका अंस हे.. फीर धीरेसे अपना टोप उचा करते अपनी ब्राको भी उठालीया.. ओर विजयके मुहमे अपने बुब्सकी नीपलको देदी.. तो विजय उनको चुसने लगा..

जैसे जैसे विजय पुनमके बुब्सको चुमने लगा.. पुनमके मनमे अ‍ेक नसा छाने लगा.. वो अपनी आंखोकी पुतलीया पलटते मदहोस होने लगी.. ओर अ‍ेक हाथ नीचेकी ओर लेजाते अपने नीकरमे हाथ घुसा देती हे.. ओर दो उंगलीसे अपनी चुतको रगडने लगी.. तब उनके मनमे सीर्फ लखनका खयाल ही आ रहा था.. ओर वो धीरेसे मनमे बडबडाते चुतमे उगलीको अंदर बहार करने लगी.. ओर स्खलीत होगइ..

अ‍ैसे ही रात बीत गइ.. आज सुबहका सुरज कुछ अलगही दीख रहा था.. जैसे उनको भी पता होगया हो.. की आजसे कइ लोगोकी जींदगी बदलने वाली हे.. आज अ‍ेक नइ सुरुआत होने जा रही थी.. सुबह सबलोग थोडा देरसे जागे.. लेकीन चंदा अब भी गुमसुम बैठी थी.. मंजुने उनको नहेलाया फीर कंपलीट करवाके चाइ नास्ता दीया.. ओर दवाइ पीलादी..

अब चंदा सांत हो चुकी थी.. वो बस बैठी रही.. उनका कीसीभी बातमे मन नही लग रहा था.. तभी राधीकाने उनकी मम्मीको तो रजीयाने सृती को भी कंपलीट करवाके चाइ नास्ता करवा दीया.. फीर सबलोग कंपलीट होकर आगये तो सब चाइ नास्ता करने बैठ गये.. आज देवायत मंजु सबलोग जाने वाले थे.. तो राधीकाको भी अपने घरपे जाना था.. तो उसने धीरेसे मंजुकी ओर देखते बातको छेडदी..

राधीका : (सरमाते धीरेसे) भाभीमां.. मे सोच रही थी अब मम्मी भी काफी ठीक हो गइ हे.. ओर हमारी होस्टेलपे भी कोइ नही हे.. तो सोच रही हु अब मे भी घरपे चली जाउ..

मंजुला : (मुस्कुराते) राधु.. ये बात तो तुम अपने पतीको भी केह चुकी हो.. फीर भी सुनना चाहती होतो सुन.. अब यही तेरा ससुराल हे.. तुम यहीसे अपनी होस्टेल आती जाती रहेना.. क्या हेनां.. वहा तेरे घरपे तो तेरी मम्मी अकेली होगी.. ओर वहा रजु.. नीलु.. सब हे.. तो उनको भी अच्छा लगेगा.. ओर उनका सबसे बाते करते समय नीकल जायेगा.. ओर उनकी देखभाल भी होती रहेगी.. तो तुजे कही जानेकी जरुरत नही हे..

लखन : (सामने देखकर हसते) सुनलीया..? लो करली भाभीमांसे बात.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते) हां राधीका.. तुम अब यही रहोगी.. ओर सुनो.. वहा अपने घरपे सब सामान अक रुममे रखकर लोकर करदो.. ओर घरको कीरायेपे देदो.. बाकी यहा छे छे रुम हे.. तो फीकर करनेकी जरुरत नही हे..

नीर्मला (हसते) ले.. अब तो तेरे जेठजीका भी ओर्डर आ गया.. तो तुजे कही जानेकी जरुरत नही हे..

राधीका : (लखनकी ओर सरमाकर देखते हसते) जी मांजी.. लेकीन आज मे होस्टेल जाना चाहती हु..

रजीया : (सरमाते हसते) हां राधु दीदी.. तो सामको जल्दी आजाना.. वरना मुजे ओर नीलुको स्कुटर सीखायेगे कौन..? हें..हें..हें..

राधीका : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन अब तो तुम दोनो अकेले चला लेती हो.. मेरी क्या जरुरत हे..? फीर भी जल्दी आजाउगी..

भुमीका : (हसते) क्या.. रजीया ओर नीलु स्कुटर सीख रही हे..? हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) हां आंटी.. अब रोज रोज तो मे दोनोकी सेवा नही करुगानां.. अब मुजे भी हमारी ओफीसपे जाना हे.. मे कीतने दिन नीलुको छोडने लेने जाउगा.. ओर रजुको भी कुछ सब्जी बब्जी लेने जाना होतो अकेली जा सकती हे.. तो हमने अ‍ेक स्कुटर लेलीया हे..

मंजुला : (जोरोसे हसते) लखन बेटा.. अब अ‍ेक कार भी लेलो.. सृतीने तो उनकी कार ठोकदी हे.. हाथमे तो मामुली चोट हे.. तो कुछ दिनमे वहाका प्लास्टर नीकल जायेगा.. तो वो भी वहा अकेली बोर होजायेगी.. तो कुछ दिन तुजे ही उनको छोडने लेने जाना पडेगा.. क्युकी वहा उनका पेसन्टका भीतो देखना हे..

लखन : (हसते) हां.. अब तो मेरा यही काम रेह गया हे.. ठीक हे.. लेलुगा.. वो.. पुनोदी.. कुछ कारका सजेस कर रही थी.. तो सोचा.. वो यहा आयेगी तो दोनो साथमे ले आयेगे..

नीर्मला : (जोरोसे हसते) हां भइ.. अब तो नइ बीवी कहेगी वोही लेगे.. हें..हें..हें..

कहातो सबलोग लखनकी ओर देखते जोरोसे हसने लगे.. तो लखन भी सरमाके हसने लगा.. फीर सब लोगोने चाइ नास्ता करलीया तो सबलोग जानेकी तैयारीया करने लगे.. तभी मंजुने सबसे छुपकर लखनको तीन चार दिनोके बाद पुनम ओर भावना दयाको सादीकी खरीदारी करने यहा भेजनेकी बात कही.. तो लखन सुनकर सरमा गया.. ओर हसने लगा.. जीसे देखकर मंजु भी हसने लगी..
 
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