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लखन : (थोडे गुस्सेमे) ये सब क्या हे..? हाथमे तो दर्द हो रहाथानां..? तो फीर..?
सृती : (मुस्कुराते रीक्वेस्ट करते) लखन भैया.. प्ली..ज.. खालोनां मेरे हाथसे.. मे तो मजाक कर रही थी..
लखन : (सामने देखते) दीदी.. अैसा मजाक मत कीया करो.. मुजे अच्छा नही लगता.. अेक तो हाथमे दर्द हे.. ओर..
सृती : (आंख गीली करते) ओह.. सोरी.. सोरी.. सोरी.. अब नही करुगी.. लेकीन खालो तो सही..
लखन : (मुस्कुराते सृतीका नीवाला खाते धीरेसे) भाभीमां सही केह रही थी.. जीतो चाहता हे अेक खीचके कानके नीचे लगाउ.. सारा मजाक भुल जाओगी..
सृती : (मुस्कुराते अपना चहेरा आगे करते) हंम.. तो फीर खीचके अेक मारलो.. हम अभी होस्पीटलमे ही हे.. मे गालपे भी मलम पटी लगवा लुगी.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते) आप नही सुधरोगी.. अब आप मेरी भाभी नही बडी दीदी हो.. तो अब अैसा मजाक मत कीया करो.. अब देख क्या रही हो..? खीलाओ मुजे.. क्या आप सुरुसे ही अैसी हे..?
सृती : (कामुक नजरोसे मुस्कुराते) नही.. जब आप मेरे सामने होतो.. मुजे आपके साथ मस्तीया करनेमे बहुत मजा आता हे.. पता हे मे आपकी कौन लगती हु..?
लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. पुनो दीदीने सब कुछ बताया मुजे.. आप भी मेरी बहेन होनां..?
सृती : (मुस्कुराते खाना खीलाते) हां.. अब मुजे दीदी ही कहेना.. अब आपकी भाभी आपकी भुमी आंटी हे.. समजे..? मे तो अब आपको भाइ ही कहुगी..
लखन : (मुस्कुराते) फीर देखना.. अगर बहेन होगइ तो फीर फस जाओगी.. आपको तो हमारे खानदानके बारेमे.. आपको सब पता हेनां..?
सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) हां.. पता हे.. कोइ बात नही.. मे फसनेके लीये तैयार हु.. फसा लीजीये मुजे..
लखन : (मुस्कुराते) फसनेके लीये तैयार हो..? फसनेका मतलब भी जानती होनां..?
सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हां.. बहुत अच्छी तराह.. जैसे पुनो दीदीको फसालीया हे.. आपको पता हे..? आपकी भाभीमां.. तुम दोनोकी सादी करवाना चाहती हे..
लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. अभी अभी पुनो दीदीने बताया मुजे.. दीदी.. आप भाइकी अमानत थी.. तो अेक डरसा लग रहा था.. तभी तो उस दिन आपको मना कीया था..
सृती : (मुस्कुराते) भाइ.. अब तो नही हुनां..? अब मे बहेन हु आपकी.. मेने देवुके साथ पती पत्नीके सारे रीस्ते खतम करलीये हे.. क्या मां ओर बेटी.. दोनो अेक ही आदमीसे रीलेशन रख सकती हे..?
लखन : (सामने देखते धीरेसे) हां.. क्यु नही..? भाभीमां.. ओर नीर्मला आटी.. उनकी अच्छी मीसाल हे.. क्या वो दोनो मां बेटी भाइकी बीवीया नही हे..?
सृती : (मुस्कुराते) होगी.. लेकीन मे अैसा रीलेशन रखना नही चाहती.. मुजे अब मेरे इस भाइसे मतलब हे.. रीलेशन रखुगी तो मेरे इस क्युट भाइसे वरना सारी जींदगी अैसे अकेले काटलुगी..
लखन : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. मेरे साथ रीलेशन रखना हेतो अेक बार फीर सोचलो.. क्युकी अब मे आपकी नाराजगी ओर नही जेल सकता..? कोइ मुजसे रुठता हे तो बहुत दुख होता हे..
सृती : (मुस्कुराते हाथ थामते) सोरी भाइ.. मेने सबकुछ सोच समजके फैसला लीया हे.. अब अैसा कभी नही होगा.. आइ प्रोमीस.. हम दोनो बहेने रेडी हे.. अपनालो हमे.. मे फसनेके लीये तैयार हु.. लेकीन इस बार अैसा फसाना.. की मे कही छुट ना पाउ.. प्यार होगया हे मुजे आपसे.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु..
लखन : (मुस्कुराते) इतना प्यार करती हो मुजसे..?
सृती : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हां.. कोइ सक..? मेरी जानसे भी ज्यादा.. प्लीज.. कबुल करलो मेरा प्यार.. आइ प्रोमीस.. मे जींदगी भर आपका साथ नही छोडुगी.. फीर चाहे कुछ भी होजाये..
लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. मे इस बारेमे पुनो दीदी ओर भाभीमासे पहेले बात करलेता हु.. अगर दोनो मुजे परमीशन देगी.. तो फीर मुजे कोइ अेतराज नही..
सृती : (मनमे खुस होते मुस्कुराते) ठीक हे भाइ.. पुछलेना.. मे आपके जवाबका इन्तजार कर लुगी..
कहेते सृती खुस होगइ.. ओर लखनको अपने हाथोसे खीलाने लगी.. क्युकी सृतीको खुसीतो इस बातकी थी.. की अब लखन उनके साथ बोलने लगा था.. ओर उसे अपनानेको भी तैयार था.. तो दुसरी ओर पुनम ओर मंजु भी इन दोनोके उपर नजर जमाये हुइ थी.. तो सृती लखनका प्यार देखकर मंजु भी मुस्कुराने लगी.. फीर अैसे ही साम होगइ.. सृतीको पंद्नह दिन बीस्तरसे ना उठनेकी ओर अेक हप्तेके बाद दीखानेकी सुचना देकर होस्पीटलसे छुटी देदी गइ.. तो इधर लखनने टेक्सी करली.. ओर सृतीको गोदमे उठालीया..
सृती : (मुस्कुराते रीक्वेस्ट करते) लखन भैया.. प्ली..ज.. खालोनां मेरे हाथसे.. मे तो मजाक कर रही थी..
लखन : (सामने देखते) दीदी.. अैसा मजाक मत कीया करो.. मुजे अच्छा नही लगता.. अेक तो हाथमे दर्द हे.. ओर..
सृती : (आंख गीली करते) ओह.. सोरी.. सोरी.. सोरी.. अब नही करुगी.. लेकीन खालो तो सही..
लखन : (मुस्कुराते सृतीका नीवाला खाते धीरेसे) भाभीमां सही केह रही थी.. जीतो चाहता हे अेक खीचके कानके नीचे लगाउ.. सारा मजाक भुल जाओगी..
सृती : (मुस्कुराते अपना चहेरा आगे करते) हंम.. तो फीर खीचके अेक मारलो.. हम अभी होस्पीटलमे ही हे.. मे गालपे भी मलम पटी लगवा लुगी.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते) आप नही सुधरोगी.. अब आप मेरी भाभी नही बडी दीदी हो.. तो अब अैसा मजाक मत कीया करो.. अब देख क्या रही हो..? खीलाओ मुजे.. क्या आप सुरुसे ही अैसी हे..?
सृती : (कामुक नजरोसे मुस्कुराते) नही.. जब आप मेरे सामने होतो.. मुजे आपके साथ मस्तीया करनेमे बहुत मजा आता हे.. पता हे मे आपकी कौन लगती हु..?
लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. पुनो दीदीने सब कुछ बताया मुजे.. आप भी मेरी बहेन होनां..?
सृती : (मुस्कुराते खाना खीलाते) हां.. अब मुजे दीदी ही कहेना.. अब आपकी भाभी आपकी भुमी आंटी हे.. समजे..? मे तो अब आपको भाइ ही कहुगी..
लखन : (मुस्कुराते) फीर देखना.. अगर बहेन होगइ तो फीर फस जाओगी.. आपको तो हमारे खानदानके बारेमे.. आपको सब पता हेनां..?
सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) हां.. पता हे.. कोइ बात नही.. मे फसनेके लीये तैयार हु.. फसा लीजीये मुजे..
लखन : (मुस्कुराते) फसनेके लीये तैयार हो..? फसनेका मतलब भी जानती होनां..?
सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हां.. बहुत अच्छी तराह.. जैसे पुनो दीदीको फसालीया हे.. आपको पता हे..? आपकी भाभीमां.. तुम दोनोकी सादी करवाना चाहती हे..
लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. अभी अभी पुनो दीदीने बताया मुजे.. दीदी.. आप भाइकी अमानत थी.. तो अेक डरसा लग रहा था.. तभी तो उस दिन आपको मना कीया था..
सृती : (मुस्कुराते) भाइ.. अब तो नही हुनां..? अब मे बहेन हु आपकी.. मेने देवुके साथ पती पत्नीके सारे रीस्ते खतम करलीये हे.. क्या मां ओर बेटी.. दोनो अेक ही आदमीसे रीलेशन रख सकती हे..?
लखन : (सामने देखते धीरेसे) हां.. क्यु नही..? भाभीमां.. ओर नीर्मला आटी.. उनकी अच्छी मीसाल हे.. क्या वो दोनो मां बेटी भाइकी बीवीया नही हे..?
सृती : (मुस्कुराते) होगी.. लेकीन मे अैसा रीलेशन रखना नही चाहती.. मुजे अब मेरे इस भाइसे मतलब हे.. रीलेशन रखुगी तो मेरे इस क्युट भाइसे वरना सारी जींदगी अैसे अकेले काटलुगी..
लखन : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. मेरे साथ रीलेशन रखना हेतो अेक बार फीर सोचलो.. क्युकी अब मे आपकी नाराजगी ओर नही जेल सकता..? कोइ मुजसे रुठता हे तो बहुत दुख होता हे..
सृती : (मुस्कुराते हाथ थामते) सोरी भाइ.. मेने सबकुछ सोच समजके फैसला लीया हे.. अब अैसा कभी नही होगा.. आइ प्रोमीस.. हम दोनो बहेने रेडी हे.. अपनालो हमे.. मे फसनेके लीये तैयार हु.. लेकीन इस बार अैसा फसाना.. की मे कही छुट ना पाउ.. प्यार होगया हे मुजे आपसे.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु..
लखन : (मुस्कुराते) इतना प्यार करती हो मुजसे..?
सृती : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हां.. कोइ सक..? मेरी जानसे भी ज्यादा.. प्लीज.. कबुल करलो मेरा प्यार.. आइ प्रोमीस.. मे जींदगी भर आपका साथ नही छोडुगी.. फीर चाहे कुछ भी होजाये..
लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. मे इस बारेमे पुनो दीदी ओर भाभीमासे पहेले बात करलेता हु.. अगर दोनो मुजे परमीशन देगी.. तो फीर मुजे कोइ अेतराज नही..
सृती : (मनमे खुस होते मुस्कुराते) ठीक हे भाइ.. पुछलेना.. मे आपके जवाबका इन्तजार कर लुगी..
कहेते सृती खुस होगइ.. ओर लखनको अपने हाथोसे खीलाने लगी.. क्युकी सृतीको खुसीतो इस बातकी थी.. की अब लखन उनके साथ बोलने लगा था.. ओर उसे अपनानेको भी तैयार था.. तो दुसरी ओर पुनम ओर मंजु भी इन दोनोके उपर नजर जमाये हुइ थी.. तो सृती लखनका प्यार देखकर मंजु भी मुस्कुराने लगी.. फीर अैसे ही साम होगइ.. सृतीको पंद्नह दिन बीस्तरसे ना उठनेकी ओर अेक हप्तेके बाद दीखानेकी सुचना देकर होस्पीटलसे छुटी देदी गइ.. तो इधर लखनने टेक्सी करली.. ओर सृतीको गोदमे उठालीया..