सृती : (कातील नजरोसे धीरेसे सरमाते) भाइ.. मेरा बर्थडे गीफ्ट..?
लखन : (मुस्कुराते) हां बोलो.. क्या चाहीये..?
सृती : (कातील नजरोसे मुस्कुराते धीरेसे) आजकी रात.. आप यही रुकजाइअेनां.. सुबह चले जाना..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. देखलो.. फीर कुछ गलत होजायेगा.. हें..हें..हें..
सृती : (हसते धीरेसे) होजानेदो.. भाइ.. मुजे मेरा बर्थडे गीफ्ट चाहीये.. अभी.. देदो मुजे..
लखन : (मुस्कुराते पास बैठते) हंम.. मागलो.. क्या गीफ्ट चाहीये आपको..?
सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) भाइ.. गीफ्ट मे.. हमारी सुहागरात.. देदो मुजे वो सुख.. जीसके लीये मे कइ दिनोसे आपसे मीलनेके लीये तडप रही हु.. भाइ.. मुजे अपनालो.. यही मेरी गीफ्ट हे..
लखन : (मुस्कुराते दरवाजेकी ओर जाते) ठीक हे दीदी.. मे अभी आया..
सृती : (जटसे) भाइ.. आप कहा जा रहे हो..? रुक जाइअेनां..
लखन : (पीछे मुडकर मुस्कुराते) अरे पहेले दरवाजा तो बंध करलेनेदो.. मे चेन्ज करके आता हु..
सृती : (मुस्कुराते) भाइ रहेने दोना.. यहा कौन आयेगा..? सबको पता हे.. आप सीर्फ चेन्ज करके आजाओ..
कहेते सृती सरमाके हसने लगी.. लखन चेन्ज करने चला गया तो इधर सृतीके दिलकी धडकन बढने लगी.. उनको उमीद नही थी.. की लखन आज उनके साथ रुकेगा.. वो लखनको पुरी तराह समर्पीत होजाना चाहती थी.. सृती तो पहेलेसे अपनी नाइटी पहेनकर सोइ हुइ थी.. फीर कुछ देरके बाद लखन आ गया.. ओर फीर भी दरवाजा खाली बंध करदीया.. सृती बहुत ही सरमाने लगी..
ओर लखन उनके पास आ गया तो सृती थोडी साइडमे खीसक गइ.. लखनको अपने पास बैठनेके लीये जगहदी.. तो लखन सृतीसे सटकर बैठ गया.. ओर उनकी कमरमे हाथ डालकर सृतीको अपनी आगोसमे लेलीया.. तो सृती हसने लगी.. ओर लखनकी कमरमे हाथ डालकर उनके कंधेपे सर रखके बैठ गइ.. दोनोने अेक दुसरेकी कमरपे हाथ रखा था.. तभी लखनने सृतीके होठोको चुम लीया..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. आज हम दोनोके बीच अेक नये रीस्तेकी सुरुआत हो रही हे.. कैसा लगेगा आपको..?
सृती : (जोरोसे बाहोमे भीचते) भाइ.. इस पलका मे कइ दिनोसे इन्तजार कर रही थी.. आज मे बहुत खुस हु.. थेन्क्स.. आज आपने मुजे वाकइ बहुत बडी सरप्राइज दी हे.. थेन्क्यु सो मच..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. कहीये.. ओर क्या गीफ्ट चाहीये आपको..?
सृती : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. आज हम दोनोका मीलन होगा.. यही तो मेरी गीफ्ट हे.. फीर भी आप देना चाहते हो मे जो मांगु वो गीफ्ट दोगे मुजे..?
लखन : (मुस्कुराते गाल चुमते) हंम.. आइ प्रोमीस.. अेक बार मांगके तो देखो..?
सृती : (लखनकी बाहोमे सरमाते धीरेसे) भाइ.. आज मुजे हमेसाके लीये अपनी रानी बनालो.. करलो मुजसे सादी.. मे पुरा जीवन आपकी अर्धागींनी बनकर बीताना चाहती हु..
लखन : (होंठ चुमकर) दीदी.. सादीतो होही जायेगी.. आप ओर पुनोदी तो कबसे मेरी रानी होगइ हो.. जब भाभीमांने कहा था.. कुछ ओर मांगलो.. उनसे भी बढकर..
सृती : (सर्मसार होते धीरेसे मुस्कुराते) भाइ.. मुजे ओर कुछ भी नही चाहीये.. मुजे सीर्फ मेरा भाइ चाहीये.. जो मुजे बेइम्तहा प्यार करे.. भाइ.. यही समजलो आज हम दोनोकी सुहागरात हे..
लखन : (मुस्कुराते) हंम.. वोतो यहा आया तब ही पता था.. की आज आपके इरादे कुछ नेक नही हे.. हें..हें..हें.. दीदी.. याद हे आपको..? मेने आपको कुछ कहा था.. जब आपने मेरा टेस्ट कीया था..
सृती : (लखनकी ओर हसते देखते) क्या..? आपने..? हें..हें..हें.. मुजे तो कुछ याद नही.. बताइअेनां..?
लखन : (हसते) अच्छा..? याद कीजीये.. मेने आपको कुछ चेलेन्ज दीया था.. देखलो.. भाइकी सभी बीवीयोमे पहेली आप हो.. जो आज मे आपसे मीलन करुगा.. हें..हें..हें..
सृती : (थोडी दुर होते सामने देखते हसते) अरे हां यार.. मे तो उस बातको भुल ही गइ थी.. आपकी बात सच होगइ.. हें..हें..हें.. लेकीन भाइ.. फीर भी आप गलत हो.. क्युकी अब मे आपके भाइकी बीवी नही हु.. क्युकी आपके भाइके साथ मेरा सादीका रीस्ता खतम होचुका हे.. ओर दुसरी बात.. तब आप मेरे देवर थे.. तो मे मेरे देवरसे नही.. मे मेरे भाइसे मीलन कर रही हु.. तो आपकी बात जुठ साबीत हुइ.. हें..हें..हें..
लखन : (बाहोमे लेते) दीदी.. आपका पैर.. कही दर्द होने लगातो..?
सृती : (मुस्कुराते) अरे कुछ नही होगा.. आप इनकी परवाह मत करो.. अब दर्द नही हे.. अब कोइ बहाना नही चलेगा.. हां.. आज मे कुछ नही करुगी.. जो भी करना हे आपको ही करना पडेगा.. मे अैसे ही लेटी रहुगी.. बस.. अेक बार मुजे ठीक होजाने दीजीये.. फीर देखना मे आपको कीतना प्यार दुगी..
कहातो लखन मुस्कुराने लगा.. ओर खडा होकर सृतीको बेडपे लीटा दीया ओर खुदभी उनकी बगलमे लेट गया.. तो सृती सरमाकर लखनकी ओंखोमे देखने लगी.. ओर लखनके हाथोमे उंगलीया फसाली.. लखनने सृतीकी ओर करवट लेली.. तो सृती भी लखनकी ओर करवट लेकर उनके सामने होगइ.. दोनो अेक दुसरेकी आंखोमे देखने लगे.. ओर धीरे धीरे करते दोनोके चहेरे नजदीक आगये....
कन्टीन्यु