Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 85 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

पुजाकी मम्मी : (सामने देखते) पुजा.. बेटी क्या हुआ..? तबीयत खराब नही हे क्या..? डोक्टरको बुलालु..?

पुजा : (जटसे थोडी गभराते) अरे नही नही.. मम्मी लगता हे खानेमे कुछ आगया होगा..

पुजाकी मम्मी : (फीकी मुस्कानसे) अच्छा..? लेकीन हर दिन तो खानेमे कुछ नही आता.. (तुका लडाकर तीर फेकते) ये दुसरी तीसरी बार उल्टीया हुइनां..? बता.. क्या हुआ हे..? चल हम डोक्टरको दीखाने जाते हे..

पुजा : (सामने देखते) मम्मी.. रहेने दोनां.. कल मे डोक्टरको दीखाकर आइ थी.. उसने कहा खानेमे कुछ आ गया होगा.. तो उसने दवाइ दी हे.. मे खा लुगी.. क्यु जीद कर रही हो..?

पुजाकी मम्मी : (मुस्कुराते धीरेसे हाथ पकडते) बेटा.. मेने दुनीयादारी देखी हे.. मे कोइ छोटी बच्ची नही हु.. जो तुम मुजे समजा दोगी.. ओर मे मान जाउगी.. मेरे सरपे हाथ रख.. ओर कसम खा.. की तुजे कुछ नही हुआ हे.. मे तेरी बात मान जाउगी..

पुजा : (नजरे चुराते जटसे) नही.. वो.. मे.. मे..

पुजाकी मम्मी : (फीकी मुस्कानसे) प्रेगनेन्ट होगइ हेनां..? सच बता.. वरना मजबुरन मुजे तेरे पापाको बताना पडेगा..

पुजा : (थोडा गुस्सेसे) मोम.. ये तुम क्या बकवास कर रही हो..? मे बीना पती कैसे प्रेगनेन्ट हो सकती हु..?

पुजाकी मम्मी : (थोडी सखतीसे) अच्छा..? बेटा.. जो खेल तु खेल रही हेनां.. मेरी जवानीमे मेभी अ‍ैसा खेल तेरे पापाके साथ खेल चुकी हु.. पता हे तेरे पापा कौन हे..? हमारा खानदान कहा हे..?

पुजा : (आस्चर्यसे देखते) नही मोम.. हमे तो पता ही नही हे.. की हमारा खानदान हे भी या नही.. क्युकी आप दोनोने कभी इसके बारेमे बात ही नहीकी.. ओर कभी आपसे पुछते तो आप बात टाल देते थे..

पुजाकी मम्मी : (आंख गीली करते) बेटी.. क्युकी हमारी लव मेरीज थी.. मेने मेरे चाचाके साथ घरसे भागकर सादी की हे..

पुजा : (चोंकते) चाचाके साथ..?

पुजाकी मम्मी : हां.. मेरे सगे चाचाके साथ.. ये जो तेरे पापा हेनां.. वो मेरे सगे चाचा हे..

पुजा : (चोंकते) व्होट..? क्या ये आपके चाचा हे..?

पुजाकी मम्मी : हां.. सुन.. हम इतने रहीस नही थे.. ये सब विरासत तेरे पापाने अपनी महेनत ओर इजत कमाकर खडी की हे.. हम अ‍ेक सामान्य फेमीलीसे हे.. तेरे पापा दो भाइ थे.. मे तेरे पापाके बडे भाइकी लडकी हु.. तेरे पापा मेरे सगे चाचा हे..

पुजा : (आस्चर्यसे) मोम.. ये आप क्या बोल रही हे..?

पुजाकी मम्मी : (हांमे गरदा हीलाते) हां.. ये सच हे.. जब मेने जवानीके दहेलीजपे कदम रखा.. मुजे अठारवा बैठा तब तेरे पापाकी उमर ३५ पार कर चुकी थी.. हमारी हालतकी वजहसे उनकी भी सादी नही हो रही थी.. ओर मे सुरुसे ही मोर्डन खयालोकी थी.. मेरे सौक अ‍ेक अमीर लडकी जैसा था.. मेरे घरवाले मेरा सौक पुरा नही कर सकते थे.. तो मेरे चाचा मेरी हर जरुरतको सबसे छुपकर पुरी करते थे..

पुजा : (सामने देखते) तो क्या आप दोनो अ‍ेक दुसरेको प्यार करते थे..? मीन्स.. दोनो मीले कैसे..?

पुजाकी मम्मी : (फीकी मुस्कानसे) नही.. तब मुजे क्या पता था.. की प्यार क्या होता हे.. मे स्कुलमे पढती थी.. मेरे चाचा ही थे.. जो मेरे महंगे महेंगे सौक पुरे करते थे.. तब मुजे कहा पता थाकी उनके मनमे क्या चल रहा हे.. हमारे स्कुलसे प्रवासकी टुर होती थी.. लेकीन हमारी पोजीसन उतनी भी अच्छी नही थी.. की मेरे घुमनेका फीजुल खर्च उठा सके.. ओर मे प्रवासमे जानेकी जीद करने लगी.. कास.. मेने उस दिन प्रवासमे जानेकी जीद ना की होती..

पुजा : मोम.. क्या हुआ था..? आपके साथ कुछ गलत हुआ था क्या..?

पुजाकी मम्मी : (मुस्कुराते) बेटा.. पता नही ये गलत था या सही.. क्युकी मेरी जवानी भी उफानपे थी.. उस टुरपे लडके भी आ रहे थे.. तीन दिन आबु हील स्टेशनका प्रवास था.. मे लडकोकी ओर आकर्शीत होने लगी थी.. सायद इसीलीये मे जीद कर रही थी..

तभी मेरे चाचाने आकर बताया.. की मेने प्रवासकी फीस भरदी हे.. ओर वो दिन भी आगया जब हमे प्रवासमे जाना था.. चाचा भी कही बहारगांव जानेकी बात करके नीकल रहे थे.. तो उसने कहा मुजे स्कुल छोडकर चले जायेगे..

पुजा : (मुस्कुराते) तो क्या आपको प्रवासके लीये स्कुल छोडकर चले गये..?

पुजाकी मम्मी : (मुस्कुराते) नही.. रास्तेमे उन्होने बतायाकी प्रवासकी संख्या फुल होगइ थी.. तो नाम नही लीखा.. इसीलीये मे तुजे वही लेजाउगा जहाका प्रवास हे.. तो मे खुस होगइ.. मे ओर चाचा ट्रेनसे आबु पहोंच गये.. वहा उन्होने कीसी सस्ते होटेलमे अ‍ेक कमरा बुक कीया..

साम तक हम दोनो घुमते रहे.. फीर हमने खाना खाया.. ओर कोलड्रींक्सकी बोटल लेकर होटेलपे आगये.. कुछ देर हम बाते करते रहे.. फीर हमने कोल्ड्रीन्कस पी.. तब मुजे नही पताथाकी चाचाने मेरे कोल्ड्रीक्समे कीसी नसीली दवाइ मीलादी हे..

पुजा : (आस्चर्यसे) व्होट..? पापाने आपके साथ अ‍ैसा कीया..?

पुजाकी मम्मी : (फीकी मुस्कानसे) हां.. कुछ ही देरमे मेरे उपर नसा हावी होने लगा.. मे बहुत ही उतेजीत होने लगी.. अ‍ैसा लगताथा की कोइ आकर मेरे तनकी आगको बुजादे.. बस.. मेरे चाचाका काम होगया.. उस रात मेरे चाचाने मेरा कौमार्य भंग कीया.. ओर पुरी रात मेरे तनसे खेलते रहे.. कौमार्य भंग कीया तब मुजे बहुत दुख हुआ.. लेकीन दुसरी बार मजा आने लगा.. ओर सुबह होते होते तो मे चाचाकी मासुका होगइ थी..
 
पुजा : फीर..?

पुजाकी मम्मी : (मुस्कुराते) फीर क्या..? समजोना वो तीन दिन ओर तीन राते हमारा छोटासा हनीमुन था.. फीर तो मेभी खुलकर मेरे चाचाको प्यार करने लगी थी.. हमने साथमे जीने मरनेकी कसम भी खाइ.. फीर हम घर आगये.. ओर हम दोनोके बीच प्यारका सील सीला चलने लगा.. देर रात हम दोनो घरकी छतपे मीलने लगे.. ओर हमने कइ राते रंगीन की.. फीर तो मुजे भी इनकी आदत पड गइ..

पुजा : तो फीर आप दोनोने सादी कब की..?

पुजाकी मम्मी : (मुस्कुराते) हमारे प्यारको अ‍ेक साल होगया.. इन अ‍ेक साल हमने पती पत्नीकी तराह खुब सेक्स कीया.. ओर अ‍ेक दिन मेरा पीरीयड मीस होगया.. चाचा मुजे सबसे छुपकर होस्पीटल चेक करवाने ले गये.. तो पता चला मे चाचासे प्रेगनेन्ट होगइ हु.. मेरे पेटमे दो महीनेका गर्भ पल रहा था.. ओर हम दोनोने उसी वक्त घरसे भागजानेका फैसला करलीया.. ओर रातमे हम दोनो घरसे नीकल गये..

पुजा : (मुस्कुराते) मोम.. तो फीर आप कीस गांवके थे..? जो यहा आकर बस गये..

पुजाकी मम्मी : (मुस्कुराते) नाम नही बताउगी.. इतना बता सकती हु.. महाराष्ट्रके अ‍ेक बडे गांवमे रहेते थे.. ओर हम भागकर यहा गुजरात आगये.. तबसे वही हे.. यहा आकर हमने सादी करली.. ओर सादीके छे महीनेके बाद तेरा जन्म हुआ..

तेरे पापा यहा नोकरीपे लग गये.. ओर साथ साथ पार्टी जोइन करके उनका काम भी देखने लगे.. फीर तो धृवका भी जन्म हुआ.. आज हम इस पोजीसनमे हे.. तो बेटा.. जो भी हे मुजे सच बतादे.. मे तुजे कुछ भी नही कहुगी..

पुजा : (आंसु बहाते धीरेसे) जी मम्मी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मे प्रेगनेन्ट हु.. मुजे माफ करदो.. मुजसे गलती होगइ..

पुजाकी मम्मी : (धीरेसे) माफ करदु..? तुजे पता हे मे यहा क्यु आइ थी..? क्युकी मेने ओर तेरे पापाने तेरे लीये अ‍ेक लडका देखा हे.. मे उसीकी बात करने आइ थी.. ओर तुजे क्या लगता हे तेरे बारेमे मुजे मालुम नही हे..? जबसे तु डीवोर्स लेकर यहा आइ हेनां.. तबसे मे देख रही हु.. तुम पहेले जैसी पुजा नही हे.. मे सब तेरे मुहसे सुनना चाहती हु.. बता.. इस लडकेका बाप कौन हे..?

पुजा : (नजरे जुकाते खामोस बैठी रही) ....

पुजाकी मम्मी : (सांतीसे) पुजा.. मे तुमसे कुछ पुछ रही हु.. बता.. मुजे तेरे बारेमे सबकुछ पता हे.. मेरे पास सब सबुत हे.. बस.. अ‍ेक बार तेरे मुहसे उनका नाम सुनना चाहती हु.. तुजे मेरी कसम.. बता वो कौन हे..?

पुजा : (हिंमत करके सामने देखते) मम्मी.. वो कोइ ओर नही.. धृव.. हमारा धृव हे.. मेरा पती.. ये हम दोनोके प्यारकी नीशानी हे..

पुजाकी मम्मी : (सांत लहेजेमे) पता हे मुजे.. तु जबसे यहा आइ हे तबसे तुम दोनोके बीच क्या हो रहा हे.. मे सब देख रही हु.. तेरे पापाकी रेप्युटेशनका दोनो अच्छा फायदा उठा रहे हो.. ओर उनसे सादी भी करली..? कमीनी कभी भाइ बहेनके बीच सादीया होती हे..? हमारी इजतका तो खयाल करते दोनो.. बता.. कबसे चल रहा हे ये सब..?

पुजा : (नीडर होते) मम्मी.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेको प्यार करते हे.. तबसे जब मेरी सादी भी नही हुइ थी.. पीछले पांच छे सालसे हम दोनो रीलेशनमे हे.. मे भाइके बीना नही रेह सकती.. बस.. आप लोगोकी इजतका खयाल रखके हमने गलत कदम नही उठाया.. वरना हम दोनो कबके भाग चुके होते..

पुजाकी मम्मी : (हाथ जोडते) अच्छा कीया.. तुम दोनोकी बहुत बहुत महेरबानी हमपे.. जो हमारी इजतका खयाल रखा.. अब बहुत हो चुका.. मे उस लडकेको हां केह देती हु.. ओर तेरी सादी करवा रही हु.. तुम इस बच्चेको गीरादे.. ओर कुछ नही सुनना..

पुजा : (रोते धीरेसे जटसे) नही.. मे ये कभी नही करुगी.. हम दोनोके प्यारकी नीशानी हे.. मे अ‍ेक बार अ‍ैसी गलती कर चुकी हु.. दुबारा करना नही चाहती..

पुजाकी मम्मी : हां.. येतो तुम्हारा डीवोर्स हुआ.. तब पता चलाकी दामादजी बच्चा देनेके काबील नही थे.. क्या तु तब भी धृवसे प्रगनेन्ट होकर गइ थीनां..? हमे बतायातो नही तुमने बच्चा गीरवा दीया था.. अभी कीतने दिनका गर्भ हे..?

पुजा : सायद अ‍ेक महीनेका.. मोम.. मे यहासे गइ तब प्रेगनेन्ट होकर ही गइ थी.. जब हम होस्पीटलमे दीखाने गये.. तब मुजे पता चलाकी वो बच्चा देनेमे सक्षम नही हे.. इसी बातका उनका इलाज चल रहा था.. हम दोनोकी सादी बचानेके लीये मुजे बचा गीरवाना पडा..

क्युकी वो केह रहेथे इलाज होते ही अ‍ेक सालमे हमारा बच्चा कर लेगे.. ओर अ‍ेक सालके बादभी उनका कुछ नही हुआ.. तब मजबुरन मुजे डीवोर्सका फैसला लेना पडा.. मोम.. क्या हम दोनोकी सादी नही हो सकती..? कुछ कीजीयेनां.. आपनेभी तो अपने चाचासे सादी की हे..

पुजाकी मम्मी : (आंख गीली करते) बेटा.. तब मे नादान थी.. दुनीयादारीका कोइ ज्ञान नही था.. इसका मतलब येतो नही तुम दोनो भाइ बहेन आपसमे सादी करलो.. अगर तेरे पापाकी रेप्युटेशनका खयाल नही होता.. या फीर वो खुद नही होते.. तो फीर भी मे कुछ सोचती.. लेकीन तेरे पापाकी इजतके खातीर ये सादी तो तुजे करनी ही पडेगी.. ओर फीकर मत कर.. ये सादी तेरे फायदेकी रहेगी..

पुजा : (सामने देखते) मतलब..? कैसा फायदा..?

पुजाकी मम्मी : (मुस्कुराते) पहेला फायदा.. वो बहुत अमीर हे.. बडे कारोबारी हे.. विधुर हे.. उनकी कोइ संतान नही हे.. उनकी मांके सीवा कोइ नही हे.. उनको भी वारीस चाहीये.. लेकीन लडकेकी उमर तुमसे थोडी बडी हे..

पुजा : (सामने देखते) कीतनी हे..?

पुजाकी मम्मी : ४८ साल.. मेरी कजीनका लडका हे.. अच्छा खासा पैसा कार फेक्टरी प्रोपर्टी ओर बंगलो हे..

पुजा : (आसच्र्यसे) मोम.. कही आप पागलतो नही होगइ..? मेरी उमर कीतनी ओर उनकी उमर कीतनी..? मेरी उमरसे डबल उमर हे उनकी.. क्या आपको लगता हे वो मुजे वो सुख देपायेगे..? जो हम ओरतकी जरुरत हे..

पुजाकी मम्मी : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) यही तो फायदा हे.. सोचले.. तेरे पापा भी मुजसे दो गुनी उमरके हे.. उनकोतो सीर्फ अपना वारीस चाहीये.. क्या फर्क पडता हे बच्चा कीसका हे.. ओर रही बात तेरे सुखकी.. तो तेरा पहेला पती तो हे..

ओर वैसे भी तु मायके इसीलीये तो आती थी.. तो यहासे भी आती रहेना.. ओर अब तो वो अहेमदाबादमे ही हे.. वो हेभी कीतना दुर.. दो घंटेका रास्ता हे.. तो धृव अपनी बहेनको मीलने भीतो आ सकता हे.. वैसे भी उनकी मौसीका घर हे.. हें..हें..हें..
 
पुजा : (खुस होते गले लगते) ओह मोम.. यु आर ग्रेट.. क्या रास्ता नीकाला हे आपने.. भाइ सुनेगातो खुस होजायेगे.. मोम.. प्ली..ज.. मे ये बच्चा नही गीराउगी..

पुजाकी मम्मी : (मुस्कुराते) हां ठीक हे.. तो फीर तेरी सादी हमे जल्द से जल्द करवानी पडेगी.. तु समज गइनां.. ओर अ‍ेक बात.. आज हम दोनोके बीच जोभी बात हुइ हे.. वो तुम धृवको कभी नही बताओगी.. प्रोमीस कर..

पुजा : (सरमाते मुस्कुराते हांमे गरदन हीलाते) येस मोम.. आइ प्रोमीस.. कभी नही बताउगी..

पुजाकी मम्मी : (हसते) तो फीर मे लडकेको हां कहेदु..? उसे देखना हे तुजे..? मे फोटो सेन्ड करती हु.. अ‍ेक बार देखले.. सादी जीतनी जल्दी होजाये.. ये तेरे लीये ओर हमारे लीये अच्छा हे.. ओर हां.. धृवके साथ जाकर अ‍ेक बार डोक्टरको दीखादे.. ताकी सादीमे कोइ तकलीफ नाहो..

पुजा : (सरमाकर मुस्कुराते) मोम.. वो.. मे कल ही उनके साथ जाकर दीखाकर आइ हु.. कल गोली लेना भुल गइ थी.. तो आज फीरसे उल्टी होगइ..

पुजाकी मम्मी : (हसते) तुतो धृवकी पकी वाली बीवी होगइ हे.. नाम भी नही लेती.. तो फीर अब मे तुजे क्या कहु..? बेटी या बहु.. हें..हें..हें..

पुजा : (चीडते हसते) मोम.. आपभीनां..? मे आपकी बेटी ही ठीक हु.. नही बनना मुजे बहु.. भाइको दामाद बना लीजीये.. हें..हें..हें..

पुजाकी मम्मी : (खडी होते) अच्छा चल ठीक हे.. ओर सुन.. कल वो यहा आ रहा हे.. तुजे देखने.. अ‍ेक बार मीलकर उनसे बात करले.. अभी भी देर नही हुइ.. तु इस बच्चेको जन्म दे सकती हे.. अब आराम कर.. मे चलती हु..

पुजा : (खडी होकर गले लगाते) मोम.. थेन्क्स.. मुजे ओर मेरे प्यारको समजनेके लीये..

पुजाकी मम्मी : (मुस्कुराते) चल अपनी मांको मस्का मत लगा.. मे चलती हु..

कहेते पुजाकी मम्मी चली गइ.. तब पुजाको पता नही थाकी उनकी मम्मी इतनी आसानीसे कैसे मान गइ.. उनके मनमे क्या प्लान चल रहा था..? पुजा नादान थी.. उनकी मम्मी जाते ही पुजा खुस होते दोनो हाथ उठाकर नाचने लगी..

दुसरे दिन उनकी कजीनका लडका देखने आगया.. वो पुजाकी मम्मीको पहेचानता था.. तो उनसे मौसी मौसी कहेते बाते कर रहा था.. तो उनकी मम्मीने उनका अच्छेसे आवभगत कीया.. फीर पुजाको उनके साथ घुमनेके लीये भेज दिया.. दोनो अ‍ेक बडीसी होटेलपे आगये..

साथमे डीनर कीया.. तबतक दोनोने बाते करली.. अपनी आधी उमरकी लडकी मीलेगीतो कौन कमबख्त मना करेगा.. पुजाने भी बहुत कुछ सोचते उनसे सादीके लीये हां कहेदी.. ओर दोनो घरपे आगये.. पुजाके पापा आतेही उनकी मम्मीने उनको सबकुछ बता दीया..

ओर दोनोका रीस्ता तैय करदीया.. दोनोको सादीकी जल्दी थी.. अ‍ेक हप्तेके बाद दोनोकी कोर्टमे सादी होगइ.. दोनोकी दुसरी बार सादी थी.. तो कोइ ताम जामके बगैर सादी होगइ.. ओर पुजा अहेमादाबादमे अपने ससुराल चली गइ..

वो वीदायके वक्त धृवसे गले मीलकर खुब रोइ.. ओर उनके रोनेकी वजह सीर्फ धृव ओर उनकी मम्मी ही जानते थे.. पहेली रातमे ही उनके पतीने पुजाको खुब रगडा.. हालाकी उनका हथीयार धृवसे काफी छोटा था.. सादीसे पहेले अ‍ेक हप्तेमे दोनो भाइ बहेनने खुब चुदाइ कीथी..

ओर लास्ट दो रात तो पुजा ओर धृव पुरी रात जागे थे.. पुजाने धृवको सबकुछ समजा दीया था.. सादीके बाद पुजा हर महीने घरपे आती.. ओर धृवकी पत्नीका हक अदा करते चली जाती.. वहा पुजाको अ‍ेक कार दे रखी थी.. उनको कही आने जानेकी कोइ पाबंदी नही थी..

उनका पती सारा दिन अपने बीजनेशपे लगा रहेता.. तो महीनेमे दो बार धृव पुजाको मीलने चला जाता.. ओर अ‍ेक होटेलमे कमरा बुक करके पुजाको बुला लेता.. दोनो भाइ बहेन सुबहसे लेकर साम तक खुब मजे करते.. ओर अ‍ैसेही समय बीतते आठ महीनेके उपर होगया..

पुजाने अ‍ेक बच्चेको जन्म दीया.. कभी कभी प्री मेच्योर डीलीवरी होजाती हे.. यही समजकर उनकी सांस ओर पती लडका होनेसे बहुत खुस होगये.. डीलीवरीके बाद पुजा दो महीना अपने मायकेमे रही.. दोनो भाइ बहेन ओर उनकी मम्मीके अलावा कीसीको पता नही चलाकी ये बच्च दोनो भाइ बहेनका हे..

इन दो महीनेमे धृवने पुजा ओर अपने बच्चेका बहुत खयाल रखा.. दोनो भाइ बहेन अकेले होते तब पुजा हसते हुअ‍े अपने बच्चेको मामाकी जगाह धृवकी पापा होनेकी पहेचान करवाती.. ओर इस बातका उनकी मम्मीको भी पता था.. दो महीनेके बाद पुजा ससुराल चली गइ..

अब धृव फीरसे अकेला होगया.. पुजा भी धृवको सादी करलेनेका फोर्स करने लगी थी.. लेकीन उनको क्या पताकी धृवने अपनी अयासीया कम करदी थी.. छोडी नही थी.. उनके पापाको मीलने पार्टीके बहुत लोग घरपे मीलने आते.. उनमे ओरते ओर लडकीया भी पार्टी वर्कर होती..

तो अ‍ेक दो लडकीको धृवने सेट करलीया था.. ओर अ‍ेक उनके बीजनेसकी यंग अ‍ेकाउन्ट जो सादी सुधा थी.. उनके साथ भी रीलेशनमे था.. तीनोको बारी बारी होटेलपे बुलाकर उनकी जमकर बजाता.. इसी चकरमे उनकी अ‍ेकाउन्टको प्रेगनेन्ट तक करदीया..

ओर लास्ट बार उसीका अ‍ेबोर्सन करजाने भावीकाके पास गयाथा.. ओर इसी सील सीलेमे बार बार भावीकाको मीलते भावीका उनके मनमे बस गइ.. उसने भावीकाके बारेमे सबकुछ जानलीया.. बस फीर क्या.. अ‍ेक ही हप्तेके बाद भावीका उनके नीचे थी..

उस दिन होटेलमे धृवने भावीकाको दो बार चोद लीया.. तो भावीकाको भी धृवका लंड पसंद आगया.. ओर दोनोने सादी करली.. अब धृवकी अयासीया भावीकाने बंध करवादी थी.. लेकीन उनको आज तक बहेन भाइके बीच रीस्तेका पता नही चला..

ओर अ‍ेक रीस्ता अ‍ैसा होगया था.. की इस बारेमे उनकी बहेन ओर भावीकाको भी पता नही था.. इस रीस्तेके बारेमे सीर्फ वो दोनो ही जानते थे.. जीनके बीच ये रीस्ता था.. अ‍ेक था खुद धृव.. ओर दुसरी उनकी खुदकी मां..

पुजाने धृवको आज तक नही बताया था.. की उन दोनो भाइ बहेनके रीस्तेके बारेमे मांको पता चल गया हे.. जो खुद उनकी मम्मीने धृवको बतानेको मना कीया था.. ओर यही वजह थी.. की उनकी मम्मी धृवके साथ रीलेशन बनाना चाहती थी.. जब पुजा सादी करके ससुराल चली गइ.. ओर उनके पती भी अ‍ेक हप्तेके लीये विदेस गये थे.. तब अ‍ेक रात धृवकी मम्मीको धृवको अकेले मीलनेका मौका मील गया..

उसी देर रात धृवकी मम्मी हल्कासा शींगार करते अपना सेक्सी नाइट गाउन पहेनकर बीन्दास्त धृवके कमरेमे घुस गइ.. धृव मोबाइल देखते सोनेकी तैयारीया कर रहा था.. तो अपनी मम्मीको देखकर बैडपे बैठ गया.. ओर उनकी मम्मी भी दरवाजा लोक करके उनके पास जाकर बैठ गइ.. तो धृवको दरवाजा लोक करनेसे आस्चर्य हुआ.. ओर उनकी मम्मीकी ओर सवालीया नजरोसे देखते....

कन्टीन्यु
 
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २५८

उसी देर रात धृवकी मम्मी हल्कासा शींगार करते अपना सेक्सी नाइट गाउन पहेनकर बीन्दास्त धृवके कमरेमे घुस गइ.. धृव मोबाइल देखते सोनेकी तैयारीया कर रहा था.. तो अपनी मम्मीको देखकर बैडपे बैठ गया.. ओर उनकी मम्मी भी दरवाजा लोक करके उनके पास जाकर बैठ गइ.. तो धृवको दरवाजा लोक करनेसे आस्चर्य हुआ.. ओर उनकी मम्मीकी ओर सवालीया नजरोसे देखते.... अब आगे

धृव : (बेडपे बैठते) अरे मम्मी आप..? इस वक्त..? कुछ काम था क्या..?

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते पास आकर बेडपे बैठते धीरेसे) हां.. बहुत खास काम था.. आज तुमसे अकेले मीलनेका मौका मीला हे..

धृव : (थोडा गभराते धीरेसे) हां मम्मी.. कहीये.. क्या काम हे..?

धृवकी मम्मी : धृव.. सच बताना.. पुजा ओर तुम्हारे बीच ये सब कबसे चल रहा हे..?

धृव : (थोडा गभराते) क..क्या..? क्या चल रहा हे..?

धृवकी मम्मी : (कातील मुस्कुराते अपना फोन दीखाते) अच्छा..? तो फीर ये देखले..

धृव : (पुजा ओर उनकी चुदाइकी क्लीप देखते ही) मम्मी.. वो.. वो.. सोरी.. उस दिन हम दोनो बहेक गये थे.. तो सब होगया.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे माफ करदो.. अब अ‍ैसा नही होगा..

धृवकी मम्मी : (सामने देखते) अच्छा..? उस दिन बहेक गयेथेनां..? तो ओर तीन दिनकी भी क्लीप हे इनमे.. वो भी सब देखले.. फीर आरामसे बतानां..

धृव : (सभी क्लीप देखकर फोन वापस देते) मोम.. सोरी.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेको प्यार करते हे..

धृवकी मम्मी : (सांत लहेजेमे धीरेसे) तुजे पता हे हमे पुजाकी सादी इतनी जल्दी क्यु करवानी पडी..? क्युकी वो प्रेगनेन्ट हो गइ थी.. ओर तुमही तो उनको लेकर होस्पीटल चेक करवाने गया था.. इतना प्यार करता हे अपनी बहेनसे..? की उनको प्रेगनेन्ट तक करदीया..?

धृव : (सर जुकाते खामोस बैठा रहा) ......

धृवकी मम्मी : (थोडा सखतीसे) धृव.. मे तुमसे कुछ पुछ रही हु.. जवाब दे मुजे..

धृव : (नजरे चुराते धीरेसे) सोरी मोम.. मुजसे गलती होगइ..

धृवकी मम्मी : (सामने देखते) गलती..? इनसे पहेले भी तु ये गलती कर चुका हे.. ओर सायद यही गलतीकी वजहसे पुजाका डीवोर्स हुआ हे.. क्या लास्ट टाइम दुबइसे आइ तब वो तुमसे प्रेगनेन्ट होनेके लीये आइ थीनां..?

धृव : (हां मे गरदन हीलाते) येस मोम.. सादीके दो साल बाद भी उनको बच्चा नही हो रहा था.. तो दीदीके कहेनेपे.. सोरी मोम..

धृवकी मम्मी : पुजाने कहा तो तुमने उनको पेटसे कर दीया.. ये भी नही सोचाकी ये तेरी बहेन हे.. वो जीद कर रही थी.. की ये तुम दोनोके प्यारकी नीशानी हे.. अ‍ेक बार बच्चा गीरानेकी गलती कर चुकी हु.. तो इस बार बच्चा नही गीराउगी.. इसीलीये हमे उनकी सादी जल्दी करवानी पडी..

धृव : (सर जुकाते) सोरी मोम.. अब अ‍ैसी गलती दुबारा नही होगी.. मे बहेनसे दुर रहुगा..

धृवकी मम्मी : (कातील मुस्कानसे) अपनी बहेनसे तो दुर रहेगा.. क्या अपनी बीवीसे दुर रेह पायेगा..? तुम दोनोने सादी करली हेनां..? इसीलीये तो पुजा अपनी डबल उमरके लडकेसे सादी करनेको राजी होगइ.. ताकी वो अपनी प्यास अपने पहेले पतीसे बुजवाती रहे..

धृव : (सर जुकाते खामोस बैठा रहा) ......

धृवकी मम्मी : ओर बहार भी तेरा कइ लडकीयोसे अफेर हेनां..? अबतक कीतनी लडकीओका अ‍ेबोर्सन करवा चुका हे..? इतना बडा दम हे तुजमे..? अपने बापकी रेप्युटेशनका अच्छा फायदा उठा रहा हे.. तेरे पापाको सब बताना पडेगा..

धृव : (पांव पकडते) मोम.. अब बस भी करो.. माफ करदो मुजे.. अगर पापाको पता चल गया तो मुजे मार डालेगे.. प्लीज.. उनको मत बताना.. मे ये सब अ‍ैयासीया छोड दुगा.. बहेनको भी..

धृवकी मम्मी : (कातील मुस्कानसे) हंम.. पता हे मुजे.. उनको तो अपनी पार्टी ओर पदसे प्यार हे.. घरपे क्या हो रहा हे उनकी तो परवाह ही नही हे.. येभी नही की चलो.. कुछ घंटे बीवीके साथ बीताये..

धृव : (सर जुकाते खामोस बैठा रहा) ......

धृवकी मम्मी : ओर क्यु बीतायेगे..? पार्टीकी कइ जवान ओरते ओर लडकीया हेनां उनके साथ समय बीतानेके लीये.. उनको बीवीकी क्या जरुरत हे..? चल ठीक हे.. नही बताती.. लेकीन मेरी भी अ‍ेक सर्त हे.. अगर तु मानता हेतो ठीक हे.. वरना मुजे मजबुरन तेरे पापाको सब बताना पडेगा..

धृव : (सामने देखते गीडथीडाते) मोम.. प्लीज.. पापाको मत बताना..

धृवकी मम्मी : (कातील मुस्कानसे) अगर बता दीया तो ये घर टुट जायेगा.. ओर इसका जीम्वेवार सीर्फ तुम होगे.. अब तुजे देखना हेकी तु मेरी सर्त मानता हेकी नही..

धृव : (पैरमे पडते) मोम.. प्लीज.. मुजे आपकी हर सर्त मंजुर हे.. ये घर बचालो.. वरना मे जी नही पाउगा.. बोलो.. क्या सर्त हे आपकी.. आपकी जोभी बात हो मे मानुगा..

धृवकी मम्मी : (कातील मुस्कानसे) धृव.. तुजे पता हे तेरे पापा कौन हे..? मुजसे १७ साल बडे हे.. हमने घरसे भागकर सादी कीथी.. तेरे पापा मेरे सगे चाचा हे.. जो अब बुढे हो चुके हे.. अब मुजे वो सुख देनेमे सक्षम नही रहे.. जो अ‍ेक पत्नीको चाहीये.. आज मे ३८ सालकी हु.. अभी भी जवान हु.. सोचले..
 
धृव : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) मोम.. ये आप क्या बोल रही हे..? मे कुछ समजा नही.. मतलब..?

धृवकी मम्मी (फीकी मुस्कानसे) बेटा.. तु इतना भी भोला नही हे जो मेरी बातका मतलब ना समज सके.. ओर वो भी लडकीयोकी बात.. मतलब.. अगर तु अपनी बहेनके साथ रीलेशन रख सकता हे.. तो फीर अ‍ेक मांके साथ क्यु नही..?

धृव : (आस्चर्यसे देखते) व्होट..?

धृवकी मम्मी : (सामने देखते धीरेसे) अ‍ैसे चोंक क्यु रहा हे..? देखले.. मे अभी भी जवान हु.. खुबसुरत हु.. तुजे बीस्तरमे वो हर सुख दे सकती हु.. जो अ‍ेक जवान लडकी दे सकती हे.. जो हमारी पुजा दे सकती हे..

धृव : (आस्चर्यसे सोक्ट होते) मोम.. ये आप क्या बोल रही हे..? आप मेरी मां हे.. मे ये नही कर सकता..

धृवकी मम्मी : (सामने देखते) क्यु..? क्यु नही कर सकता..? जब अपनी बडी बहेनके साथ सबकुछ कर सकता हे तो फीर मेरे साथ क्यु नही..? भुलजा मे तेरी मां हु.. मे तेरे लीये सीर्फ अ‍ेक ओरत हु.. जो कही महीनोसे काम वासनामे जल रही हु..

धृव : (सामने देखते) मोम.. प्लीज.. दीदीके साथ मेने सादी कीहे.. वो बीवी हे मेरी..

धृवकी मम्मी : (खडी होते धीरेसे) अच्छा..? बहेनको बीवी भी बनालीया.. ओर उसे प्रेगनेन्ट भी करदीया..? ओर वो भी दो दो बार..? ठीक हे.. चल मुजसे भी सादी करले.. फीर तो कोइ दिकत नही हेनां..?

धृव : (गीडगीडाते) मोम.. प्लीज.. आप मेरी मां हे..

धृवकी मम्मी : (खडी होकर बहारकी ओर जाते) तो फीर ठीक हे.. मे जा रही हु.. आजके बाद मेरी सकल नही देख पाओगे..

धृव : (धृवकी मम्मी वापस जाती हे तब) मोम.. प्लीज.. रुक जाइअ‍े.. अ‍ेक बार मेरी बात सुनलीजीये..

धृवकी मम्मी : (रुकते पीछे मुडकर आंसु बहाते) बेटा.. अब मे तुमसे नजरे कैसे मीलाउगी..? तेरे पापाने कभी नही सोचा.. की ये मेरी भतीजी हे.. जब हमने सादीकी.. मेरी उमरसे दो गुनी उमरके थे.. क्युकी वो मुजसे प्यार करते थे..

तुमने भी नही सोचाकी पुजा मेरी बडी बहेन हे.. क्युकी तुम उसे प्यार करते थे.. ओर मे तुमसे कहा प्यार करनेको केह रही हु..? सीर्फ अपनी जरुरतको पुरी करने तो आइ थी.. क्या मे बहार कीसी पराये मर्दके साथ रीलेशन रखती.. तो तुजे अच्छा लगता..?

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धृव : (खडा होकर पास जाते हाथ थामते) मोम.. मे आपकी बात समज गया.. मुजे आपकी हर सर्त मंजुर हे.. चलीये.. अब आपकी तकलीफको मे दुर करुगा.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) ठीक हे.. लेकीन अ‍ेक वादा करना पडेगा..

धृव : (मुस्कुराते) अब कौनसा वादा..? बताइअ‍े..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) बेटा.. मे चाहती हु हम दोनोके रीलेशनके बारेमे कभी कीसीको पता ना चले.. पुजाको भी नही.. कल अगर तेरी सादी होजाती हे तो तेरी बीवीको भी नही.. इस घरके नोकर नोकरानीओको भी नही.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच रहेगी.. बोलो.. मंजुर हे..?

धृव : (हाथ थामते) येस मोम.. आइ प्रोमीस.. जैसा आप चाहोगी अ‍ैसाही होगा.. चलीये..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते धीरेसे) वैसे मुजसे मीलनेमे अभी भी कोइ संकोच हो रहा हे तो रुक.. मे सींदुर लेकर आती हु.. भरदे मेरी मांग.. तुजे अपनी बीवी वाली फीलींग आयेगी..

धृव : (जोरोसे बाहोमे भरते) नही मोम.. इनकी कोइ जरुरत नही.. मेरी भी कुछ फेन्टासी हे.. बीवीके ज्यादा बहेन ओर आपके साथ रीलेशन रखनेमे बहुत मजा आता हे..

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धृवकी मम्मी : (हसते) कमीना कहीका.. आगयानां अपनी असली ओकातपे..

कहा तो धृव हसते हुअ‍े उनकी मम्मीसे अलग हो गया.. ओर उनके दोनो हाथ थामते उनकी आंखोमे अ‍ेक नजरसे देखने लगा.. उनकी मम्मी सरमा गइ.. ओर अपनी नजरे जुकाली.. आज पहेली बार धृवको अपनी मांके अंदर अ‍ेक ओरत नजर आइ..

उसे अपनी मां मे अ‍ेक कामदेवकी मुरत नजर आने लगी.. ओर धृवका हथीयार अंगडाइ लेकर खडा होने लगा.. धृव वहीसे उनकी माको अपनी गोदमे उठा लेता हे.. ओर अपने बेडपे जाकर लीटा देता हे.. उनकी मां भी कातील नजरोसे मुस्कुराते धृवको हाथ खीचकर अपने उपर गीरा देती हे..

पता नही दोनोके होठो कब मील गये.. उनकी मांकी आखे नसीली होने लगी.. उनकी आंखोमे वासनाके डोरे मंडराने लगे.. ओर अ‍ेक अ‍ेक करते दोनो अ‍ेक दुसरेके कपडे नीकालते नंगे होगये.. धृव उनकी मांके उपर छा गया..

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तो उनकी मांको अपनी चुतपे धृवका बडा लंड ठोकर मारते महेसुस हुआ.. जो उनके नये बीलमे घुसनेके लीये मचल रहा था.. ओर कुछ ही देरमे धृवके लंडने अपने बीलका रास्ता ढुंढ लीया.. ओर अ‍ेक ही जटकेमे धृवने पुरा लंड चुतमे घुसा दीया तो उनकी मांकी चीख नीकल गइ..

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जो धृवने फौरन उनके मुहपे हाथ रख दीया.. उनकी मांकी आंखोसे आंसु नीकल रहे थे.. ओर वो धृवकी ओर देखते मुस्कुरा रही थी.. जैसे कोइ कीलेको फतेह करलीया हो.. धृव धीरे धीरे कमर हीलाते अपनी मांको चोदने लगा.. उनकी मांभी नीचेसे कमर हीलाते धृवका साथ देने लगी..

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आखीर उनकी मांने धृवको अपने वसमे कर ही लीया.. जो इस वक्त उनकी चुतमे अपना बेटा धमाका कर रहा था.. दोनो मां बेटे सुबह चार बजे तक मजे लुटते रहे.. आज धृवने उनकी मांको चोद चोदके उनकी सारी गर्मी मीटादी.. उनका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया.. तब उसे पता चलाकी पुजा अ‍ैसे ही धृवके पीछे पागल नही थी.. ओर आज वो खुद धृवकी दिवानी हो चुकी थी..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) बेटा.. थेन्क्स.. आज तुमने मेरी सारी तमना पुरी करदी.. तु वादा कर मुजे हमेसा अ‍ैसे ही खुस रखेगा..

धृव : (होंठ चुमते) मोम.. मुजे भी आपके साथ सेक्स करनेके बहुत मजा आया.. आइ प्रोमीस.. अबसे आपका खयाल मे ही रखुगा.. मोम.. आप गोली खालेना..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) हंम.. पता हे मुजे मेने पहेलेसे ही सब इन्तजाम करके रखा हे.. क्युकी तुमने पुरी रात लोटा भर भरके मेरी आगको सांत कीया हे.. तु फीकर मत कर.. बस.. मेरा खयाल रखना..

फीर तो उनका पती विदेससे वापस नही आया तबतक वो हर रात अपने बेटेका बीस्तर गरम करती रही.. ओर अ‍ैसे ही दिन नीकलने लगे.. दिनमे भी दोनो मां बेटेको जब भी मौका मीलता अ‍ेक होजाते.. धृवने अपनी मांकी हर अ‍ेंगलसे चुदाइ की.. घरका अ‍ेक कोना भी बाकी नही रखा..

हां.. जब पुजा आती तो दोनो मां बेटे हो जाते.. ओर उनकी मम्मी दोनो भाइ बहेनको मीलनेका पुरा मौका देती.. फीर धृवने भी भावीकासे सादी करली.. धृवके पास अब तीन तीन चुतोका इन्तजाम हो चुका था.. ओर वो उनकी बीवी भावीकाके पीछवाडेके पीछे पागल था..

वो जबभी चलती अपना पीछवाडा मटकते चलती.. धृव तो क्या सभी मर्द उनके पीछवाडेको ही देखते रहेते.. इनमे उनके ससुर भी बाकात नही थे.. ओर धृव हमेसा भावीकाके पीछे ही लगा रहेता.. हांलाकी कभी कभी भावीका उसे आगेसे करनेकी जीद करती तो वो आगेसेभी उनको चोद लेता..

इन सबसे छुपकर अ‍ेक रीस्ता अ‍ैसा भी हो गया था जो आजतक कीसीको पता नही चला.. भावीका इलीगल अ‍ेबोर्सनका काम करती थी.. वो धृवसे सादी करके इस घरमे आइ तो कुछ दिनमे वो अपने ससुरकी नजरको पहेचान गइ थी.. ओर उसने बहुत ही सोच समजके अपनी सेफ्टीके लीये फैसला कर लीया..

क्युकी इलीगल बीजनेसमे फसनेपे सीर्फ उनके ससुर ही काम आने वाले थे.. ओर नतीजेके फल स्वरुप अबतक भावसका भी दो बार अपने ससुरका बीस्तर गरम कर चुकी थी.. हालांकी अपनी सेफ्टीके लीये उसने अ‍ेक विडीथो क्लीप बनाली थी.. सब अपने अपने रीस्तेको नीभाते खुस थे.. तो ये थी धृवके परीवारकी कहानी..

धृव : (मुस्कुराते) भाइ.. तो येथी मेरी कहानी.. मे ओर पुजा आज भी रीलेशनमे हे.. ओर वो अपना असली पती आज भी मुजे ही मानती हे.. भाइ.. लाइफ अच्छेसे सेट होगइ हे.. भावीकाको आज भी हम दोनोके रीलेशनके बारेमे नही पता..

लखन : (मुस्कुराते) चलो अच्छा हुआ.. तुम ओर पुजा खुस हो यही मेरे लीये काफी हे.. अब तो मुजे भी पुनोका प्यार मील गया हे.. हम भी सादी कर हे..

धृव अपनी मां बेटेके रीस्तोके बारमे छोडकर लखनको उनके ओर पुजाके बीचकी सभी बाते बता देता हे.. भावीकाको आज तक मां बेटे ओर भाइ बहेनके रीस्तोके बारेमे नही पता.. तो पुजाको भी धृव ओर उनकी मम्मीके बारेमे पता नही चला.. फीर सबलोग खडे होगये.. ओर अ‍ेक दुसरेको गले मीलने लगे.. तभी भावीका लखनकी ओर देखते..

भावीका : (हसते) हां तो लखनजी.. आप तो घरके नीकले.. आप लोगोके बारेमे काफी कुछ जाना.. अब अ‍ेक दिन सबको लेकर घरपे आइअ‍े.. अबतो आपके भाइका घर हे.. हमे भी अच्छा लगेगा.. क्युको यहा हमारे भी ओर कोइ रीस्तेदार नही हे..

लखन : (हसते) जी भाभीजी.. जरुर आयेगे.. सहेरमे आकर मे भी अकेला हो गया हु.. भाभीजी.. अब तो मुलाकात होती रहेगी..

भावीका : (सरमाते हसते) अच्छा..? तो अब भावीकाजीसे सीधा भाभीजी..?

धृव : (हसते) हांतो लखन मेरा यार हे.. भाइसे भी बढकर.. तो तुजे भाभी ही कहेगानां..?

भावीका : (लखनकी ओर कातील नजरोसे हसते) ठीक हे.. तो देवरजी.. अपने भाइ भाभीको अपने घरपे नही बुलाओगे..? मुजे आपका घर देखना हे.. सृती भी वही हेनां..?

लखन : (हसते) हां भाभी.. कभी भाइ भाभीको अपनोके घर आनेके लीये पुछना नही पडता.. आजाते हे..

भावीका : (हसते) ठीक हे.. तो अब देखती हु आपके भाइ कब मुजे आपके घर लेकर आते हे..

सृती : (दोनोकी बाते सुनते ज्वेलेसीसे) देवरजी.. तो अब हम चले..? हमे बहुत देर होगइ हे..

पुनम : (जोरोसे हसते) हां भाइ.. चलो बहुत देर होगइ हे..

फीर सब लोग सामन लेकर अपनी कारमे बैठ जाते हे.. तो धृव ओर भावीका भी सबको बाय करते नीकल जाते हे.. कारमे बैठते ही सृती दांत पीसकर लखनको मुके मारने लगी.. तो सबलोग जोरोसे हसने लगे.. क्युकी असली वजह सीर्फ सृती ही जानती थी.. वो भावीकासे अच्छी तरह वाकेफ थी.. की वो लखनका उभार देखते उनसे ललचाइ नजरोसे देख रही थी..

लखन : (जोरोसे हसते) यार मुजे मार क्यु रही हो..? अब मैने क्या कीया..?

सृती : (दांत पीसते अ‍ेक मुका मारते) क्या कीया..? अब तो पुनोदीदी भी आगइ हे.. दोनो मीलकर आपकी खुब पीटाइ करेगी.. कैसे उस कुतीसे चीपक रहे थे.. अब तो इतनी सारी बीवीआ आगइ हे.. अभी भी आपका यहा वहा मुह मारते जी नही भरा..?

पुनम : (जोरोसे हसते) हां दीदी.. मेरी ओरसे भी अ‍ेक दो लगादो.. वरना ये सुधरेगे नही..

लखन : (जोरोसे हसते) अरे.. मैने क्या कीया..? सीर्फ उनसे बाते हीतो कर रहा था.. हें..हें..हें..

सृती : (बडी आंख करते) अच्छा सीर्फ बाते करते थे..? ओर वो कमीनी आपको कैसे घुर रही थी..? हमे नही पता क्या..? मे उनको अच्छी तराह जानती हु.. आजके बाद उनसे अकेलेमे मीलेनां.. तो आपकी खैर नही..

लखन : (सामने देखकर हसते) देखा दयाभाभी..? अभी दोनो बीवी नही हुइ तो मेरा ये हाल हे.. जब बीवी होजायेगी तो मेरा क्या हसर करेगी..?

सृती : (सरमाते देखते) मार मारके सुधार दुगी.. बीवीओके अलावा दुसरी ओरतके सामने देखोगे भी नही..

दोनोका जगडा देखते सब हसती रही.. ओर अ‍ैसे ही लडाइ करते सब लोग घरपे आगये.. रजीयाने घरका ताला खोला तो लखन दोडकर सीधाही बाथरुममे धुस गया.. तो सभी लेडीस जोरोसे हसने लगी.. ओर सामान लेकर होलमे सोफेपे बैठ गइ.. सबकी उत्सुक्ता बढ गइ.. की लखनने सबके लीये क्या खरीदा हे.. ओर सभी लेडीस सब सामान बहार नीकालकर देखने लगी..
 
दया : (खुस होते हसते नाइटी देखकर) ओहो.. देवरजीने तो अपनी होने वाली बीवीका बहुत लेटेस्ट गाउन लीया हे.. उतारनेकी जरुरत ही नही पडेगी.. हें..हें..हें.. देखो.. सभी बीवीओके लीया हे.. क्या मस्त हे..

पुनम : (समरमाते धीरेसे दो गाउन देते) दीदी.. देखीये आप दोनोके लीये भी लीया हे.. पुरा लेटेस्ट सेट..

भावना : (हसते) कीतने कमीने हे.. मे भीतो साथमे थी.. मुजे तो पता ही नही चला.. की हमारे लीये भी लीया हे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. सबके लीये लीया होगा.. हम सबकी खरीदी भैया ही करते हे..

दया : (ब्रा पेन्टी देखते) दीदी.. ये तो मेरा नाप हे.. आपका भी यही नाप हे क्या..? की सृती दीदीके लीये हे.. रजुकातो ये नाप नही..

सृती : (हसते) दया बहेन आपके लीये ही होगा.. बडे कमीने हे वो..

दया : (मुस्कुराते सरमाते) लेकीन उनको मेरा नाप कहासे पता चला..?

रजीया : (हसते) मेने बताया.. हें..हें..हें.. मुजे पुछकर गये थे..

दया : (सरमाते हसते अ‍ेक मुका मारते) कमीनी कहीकी.. दोनो मीया बीवी अ‍ेक ही हो..

लखन : (आकर पुनम सृतीके बीच बैठते) अरे.. सब आज ही देखलोगी क्या..? सबके लीये लीया हे.. अब सोना नही हे..?

सृती : (सरमाते जांगपे मुका मारते धीरेसे) सोनेकी बडी जल्दीहे आपको..? आज नइ बीवीको मीलनेके लीये उतावले हो रहे हो क्या..?

भावना : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) सादीसे पहेले..? मे कोइ मीलने बीलने नही दुगी.. दीदीने इसीलीये हम दोनोको साथ भेजा हे..

लखन : (भावनाकी गरदन दबोचते) दीदी.. लगता हे इनका कुछ इलाज करना पडेगा..

भावना : (जोरोसे हसते) अरे छोडो.. मेतो मजाक कर रही थी.. हें..हे..हें..

सृती : (हसते) भावना दी.. रहेने दीजीये.. ये आपसे या मेरे रुकवानेसे रुकेगे नही.. करनेदो दोनोको मजे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते कानमे धीरेसे) हां.. तुम भी साथ चलना.. तीनो मजे करेगे..

सृती : (सरमाते जुठा गुसा करते अ‍ेक चपत लगाते कानमे) बडे बेसर्म हो आप.. पुरी रात.. ओर सुबह भी करलीया.. मेरी हालत बीगाडके भी जी नही भरा क्या..? नही आज नइ बीवी हे तो अकेले ही मीललो..

भावना : (हसते) अरे.. दोनो अ‍ेक दुसरेके कानमे क्या खुसर पुसर कर रहे हो.. हमे भी सुनाओ..

लखन : (जोरोसे हसते) मेरे साथ सोनेकी बात कर रही हे.. आपको भी सोना हे क्या..? हें..हें..हें..

इतना सुनतेही सृती ओर भावना बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर जुठा गुस्सा करते दोनो लखनको मारने लगी.. तो लखन जटसे दोनोसे बचते उपर भाग गया.. ओर साथमे ज्वेलेरी बोक्ष भी लेता गया.. तो बाकी तीनो जोरोसे ठहाका मारते हसने लगी.. सृती ओर भावना भी सर्मीन्दा होते हसती रही.. फीर सबने साडीया ओर सबके अंडर गारमेन्ट देख लीये..

भावना : (हसते) अरे.. ज्वेलेरी बोक्ष कीधर गये..? अभी तो थे यहा..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. लखन भैया लेगये हे.. तीन मंगलसुत्र हे.. मेरे लीये.. लता दीदी ओर वंदुके लीये..

भावना : (आस्चर्यसे) यार वंदुका तो समजी.. क्या लताके लीये भी..?

सृती : (धीरेसे) दीदी.. अब तो मंजु मोमने सबको छुट दे रखी हे.. तो फीर लताकी सादी हमारे जेठजीसे करनेकी क्या जरुरत हे..? वो अ‍ैसे ही बच्चा दे सकते हे..

पुनम : (मुस्कुराते) नही दी.. बात बच्च.की नही हे.. मुजे भी बडे भैयासे सादी करनी पडी थी.. मम्मी कभी नही चाहती की बच्चा नाजायज ओलाद कहेलवाये.. इसीलीये सादी करना जरुरी हे.. ओर मत भुलो.. लता लखन भैयासे नही बडे भैयासे प्यार करती थी..

सृती : (मुस्कुराते) ओह.. अब समजी.. चलो तो फीर अब सोते हे.. आज तो थक गइ.. वहा भी दोनो बाते करते बैठे थे तो बहुत देर होगइ.. वैसे दोनो क्या बाते करते होगे..? दीदी.. आपको तो सब पता हेनां..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. वही.. जो आजकल हमारे घर ओर गांवमे होने लगा हे.. अबतो सहेरमे भी इनकी हवा लग चुकी हे.. यहा भी घर घरमे ये सब होने लगा हे.. जो हमारे गांवमे हो रहा हे.. दीदी.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. चलो अब मुजे तो नींद आ रही हे.. सोते हे..

भावना : (जोरोसे हसते) अच्छा..? आप सोजायेगी क्या..? लखन भैया आपको सोने देगे..?

पुनम : (सरमसे पानी पानी होते अ‍ेक मुका मारते) हां सोजाउगी.. यहा मे सुहागरात मनाने नही आइ हु समजी..?

फीर सब लोग सामान यही छोडके उपर जाने लगे.. तो रजीया सब लाइट बंध करके लखनको आवाज देकर नीचे बुलाती हे.. तो भावना बच्चीको तो दया जुला साथ लेजाती हे.. ओर लखन आकर सृतीको गोदमे उठाकर उपर लेगया..

रजीयाने भावना ओर सृतीको अपने रुममे सोनेको कहा.. ओर वो खुद आज दयाके साथ सोना चाहती थी.. क्युकी दोनो कीतने दिनोके बाद मील रही थी.. तो गांवमे भी नीर्मला ओर भुमीका सोने चली गइ.. तो मंजु चंदाको लेकर अपने रुममे चली गइ..
 
वहा देवायत मंजुकी चुतमे धमाका करने लगा.. चंदा उन दोनोको देखती रही.. लेकीन अब वो सामनेसे कभी नही कहेती की मुजे भी चुदवाना हे.. तो मंजुने चंदाकी दिमागी हालत सही करनेके लीये कुछ ओर ही सोच लीया था..

वो चंदाको दिखानेके लीये जोरोसे कामुक तरीकेसे सीसकारीया करते मजेसे चुदवाती रही.. तबतक चंदा भी काफी गरम हो चुकी थी.. ओर वो सोते हुअ‍े अपनी चुतको मसल रही थी.. जब देवायतने मंजुको चोद लीया तो देवायत मंजुके सीनेपे ढेर होगया..

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मंजुने धीरेसे देवायतके कानोमे कुछ अ‍ैसा कहा.. की देवायत मुस्कुराने लगा.. फीर बाथरुममे जाकर सही होगया.. ओर मंजुने उसे उपर लताके पास भेज दीया.. तो चंदा देवायतको जाते देखती ही रेह गइ.. उसे लगाकी देवायत मंजुके बाद उसे भी चोदेगा..

लेकीन आज पहेल बार देवायत उनके सामने देखे बीना उपर लताके पास चला गया.. तो चंदा ओर पागल जैसी होने लगी.. ओर नाराज होते अ‍ैसे ही करवट लेकर सोगइ.. देवायत उपर लताके रुममे चला गया.. वहा लता देवायतके इन्तजारमे अ‍ैसे ही लेटे पडी थी..

जैसे ही देवायत आया लता जटसे बेडपे बैठ गइ.. उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. ओर वो बहुत ही सर्मसार होने लगी.. जीस तराह लता देवायतसे मीलनेके लीये मचल रही थी उसी तराह देवायत भी लताको मीलनेके लीये मचल रहा था..

दोनोको दो तीन बार मीलन करनेका मौका मीला.. लेकीन हर बार मंजुने दोनोके मीलनमे बाधा डालदी.. ताकी जब दोनो मीले तो अ‍ेक दुसरेसे मीलन करनेमे पागल हो जाये.. जीस तराह लता देवायतको मीलनेके लीये पागल होर रही थी उसी तराह देवायत भी लताके साथ मीलन करनेके लीये पगला गया था..

क्युकी वो जानता थाकी लता भी उनकी बहेन हे.. आग दोनो ओरसे लगी हुइ थी.. ओर आखीर दोनोके लीये वो वक्त आही गया.. लता अपने पहेले प्यारके साथ मीलन करने जा रही थी.. लता बेडसे उतरते दोडकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तो देवायतने भी लताको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..

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लता : (देवायतके चहेरेके पागलोकी तराह चुमते) भाइ.. आइ लव यु.. आइ लव यु..

देवायत : (मुस्कुराते बाहोमे भीचते) लता.. बस कर.. लव यु टु.. आखीर हम मील गये..

लता : (सरमाते सामने देखते मुस्कुराते) हां भाइ.. आपको पानेके लीये मेने क्या क्या नही कीया.. जबसे जवानीके दहेलीजपे कदम रखा.. ओर आप मांको मीलने आते थे.. तबसे मे आपको प्यार करने लगी थी..

देवायत : (मुस्कुराते गोदमे उठाते) तो क्या तुजे बुरा नही लगता था..? वो मां हे तेरी..

लता : (मुस्कुराते) भाइ.. ये साली आग ही अ‍ैसी हे.. छोटे बडेका कोइ लीयाज नही करती.. ओर मां तो अकेली हे.. वो अपनी जरुरत पुरी करनेके लीये कहा जायेगी..? इनसे तो अच्छा हे आपहीके साथ अपनी प्यास बुजाती हे.. तबसे मे आपको बहुत प्यार करती हु.. भाइ.. अ‍ेक बात पुछु..?

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. पुछ..

लता : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) भाइ.. क्या अब भी आपका रीलेशन मांके साथ हे..?

देवायत : (बेठपे लीटाते) नही.. जबसे तुम्हारी सादी लखनसे हुइ हे तबसे मेने उनको मीलना छोड दीया हे.. अब वो समधन हे मेरी.. अगर तुम मुजसे प्यार करती थी तो फीर तुमने लखनके साथ सादीके लीये क्यु हां कहेदी..? करलेती मुजसे सादी..

लता : (मुस्कुराते हाथ खीचते अपने पास बीठाते) भाइ.. इस बारेमे मेने बहुत सोचा.. अ‍ेकतो उमरमे आपसे काफी छोटी थी..ओर उपरसे आपकी भी दो तीन सादीया हो चुकी थी.. तो सोचा लखनके साथ सादी करके कमसे कम आपके साथ तो रेह सकुगी.. यही सोचते लखनके साथ सादी करली.. ओर आखीर आज मुजे आप मील गये.. भाइ.. मेने अपनी मंजील हासील करली..

देवायत : (मुस्कुराते पास लेटते) लेकीन तेरी सादीकी उमर होगइ तब तो बताना चाहीयेनां..? खैर छोड ये बात.. ये बता अगर हमारे रीलेशनसे लखन तुमसे नाराज हो गया तो..?

लता : (मुस्कुराते बाहोमे भरते) भाइ.. उसे तो मे कभी भी मना लुगी.. वो भी मुजसे बहुत प्यार करते हे.. ओर वोभी तो पुनो दीदीको प्यार करते थे..

देवायत : (होंट चुमते) लता.. अगर मुजे पता होताकी लखन पुनोसे प्यार करता था.. तो मे पुनोकी सादी धिरेनसे कभी नही करवाता.. ओर खुद भी उनसे सादी नही करता.. मेने पुनोसे सादी करके बहुत बडी गलती की..

लता : (होंठ चुमते) नही भाइ.. पुनोके साथ आपकी सादी जरुरी थी.. बाबाने उसे कहा था.. क्युकी पुनोदी ओर मेरी कोखमे आपका बच्चा जरुरी था.. चलीये आज ओर कोइ बाते नही.. मुजे पुरी रात आपका प्यार चाहीये.. भाइ.. आज सबकुछ होजाने दो.. मुजे भी आपका अंस चाहीये.. ओर मेरा समय भी सही चल रहा हे.. इसीलीये तो मेने लखनको हाथ भी लगाने नही दीया..

दोनो ही बाते करते अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमते प्यार करने लगे.. लताको पता ही नही चला देवायत उनके बुब्सको मसलते कब उनके कपडे नीकालने लगा.. देवायतने लताके सभी कपडे नीकाल दीये.. ओर उसे पुरी तराह नंगी करदी.. तो लताने भी देवायतके कपडे नीकालकर उनको नंगा करदीया.. लता देवायतका लंड देखकर बहुत ही सरमा गइ.. बीलकुल लखन जैसा लंड था.. लेकीन लखनसे थोडा छोटा..

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लता : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. बहुत बडा हे.. लखनका भी बहुत बडा हो गया हे.. लेकीन जबसे उनको जडी बुटी दी गइ हे.. तबसे मेने लखनको हाथ भी लगाने नही दीया.. तो प्लीज.. इतना बडा मे पहेली बार ले रही हु.. तो जरा ध्यानसे..

देवायत अब बहुत फोरप्लेय मे रुची नही रखता था.. क्युकी उनकी इतनी सारी बीवीओकी वजहसे उनके पास समय भी नही होता था.. ओर लताको लखनके साथ चुदाइ करते ये सब चीजोकी (फोरप्लेय) आदत होगइ थी.. लेकीन इस बारेमे वो देवायतसे कुछ ना केह सकी..
 
देवायत थोडी देर प्यार करते लताके पैरोके बीच आ गया.. ओर अपना लंड पकडके लताकी चुतपे घीसते लंडको गीला करने लगा..जब लंड गीला हो गयातो धीरेसे लताकी चुतके लव होलमे फसा दीया.. ओर हाथसे पकडकर धीरे धीरे अंदरकी ओर पुस करने लगा..

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लताने जोरोसे आंख बंध करते तकीयेको मुहमे ठुस लीया ताकी उनकी चीखे बहार ना नीकले.. ओर देवायत लताकी चुतमे लंड फसाकर लताके उपर जुक गया.. ओर दोनो हाथोके पंजेको कसके पकड लीया.. फीर लताके मुहसे तकीया हटाते उनसे लीपलोक करलीया..

लता अब देवायतका लंड खानेके लीये पुरी तराह तैयार थी.. तभी देवायतने अ‍ेक जटका मारा.. तो उनका आधा लंड लताकी चुतको चीरते अंदर घुस गया ओर लताकी जोरोसे चीख नीकलते देवायतके मुहमे दब गइ.. लता छट पटाते आंसु बहाने लगी..

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अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी.. वो देवायतसे मुह छुडानेकी कोसीस कर रही.. की तभी देवायतने अ‍ेक ओर जटका मारा..ओर पुरा लंड लताकी चुतमे जडतक घुसादीया.. तो लता जोरोसे चीखते बेहोस होगइ.. उनकी आंखसे आसु बहेने लगे.. लताकी चुतसे थोडा खुन नीकल गया..

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जैसे पहेली बार कीसीने उनका कौमार्य भंग कीया हो.. आज वो पहेली बार इतना बडा लंड अपनी चुतमे लेरही थी.. तो देवायतने देर ना करते लीपलोक छुडा लीया ओर हाथके बल उचा होते जोरोसे कमर हीलाते लताको चोदने लगा..

तो गांवमे आज बंसीकी सादी भी उनकी बहेन जागृतीसे हो गइ थी.. देर साम ही श्रीधर मुना ओर साहीलने बंसीके बेड ओर रुमको सजा लीया था.. बरखा जयश्री ओर सांतीने मीलकर जागृतीको अपनी सुहागरातके लीये सजा दीया था..

आज सांती दोनोको अकेले सुहागरात मना देना चाहती थी इसीलीये उन्होने आजकी रात बरखा ओर जयश्रीको भी अपने साथ दुसरे रुममे सोनेके लीये रोक लीया.. इसके लीये सांतीने दोनोके पतीसे इजाजत मांगी.. तो दोनोने मनमे खुस होते यहा रुकनेकी इजाजत देदी..

क्युकी मुना ओर श्रीधर दोनो आज अपनी मांके साथ मजे करना चाहते थे.. देर रात सबलोग खाना खाकर कुछ देर बाते करते रहे फीर मुना साहील ओर श्रीधर अपने घरपे चले गये.. तो बरखा सांती ओर जयश्रीने मीलकर जागृतीको बंसीके रुममे घुंघटमे बीठा दीया ओर तीनो जागृती वाले रुममे सोने चली गइ..

इस रात बंसी ओर जागृतीने फीरसे अपनी सुहागरात मनाइ.. तो मुना भी देर रात अपनी मां बसंतीको अपने रुममे बुला लेता हे.. ओर श्रीधर तो सीधा उनकी मां ब्रीन्दाके कमरेमे ही सोने चला गया.. दोनो कामोतेजक गोलीया खाकर अपनी अपनी मांके उपर कीसी भुखे भेडीयेकी तराह टुट पडे..

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दोनो अपने बेटेसे छुटनेकी मनते करती रही.. लेकीन आज दोनो अपनी मांको छोडनेके मुडमे नही थे.. ओर सुबह तक दोनोने अपनी मांकी हालत खराब करदी.. दोनोने उनको सुबह बीस्तरसे उठने लायक नही छोडा.. तो बंसी भी सुबह चार बजे तक जागृतीको अलग अलग पोजीसनमे चोदता रहा..

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जागृती बंसीकी स्टेमीनाकी कायल होगइ.. इस रात वो लखनको भी भुल गइ.. ओर खुलकर अपने भाइका साथ देती रही.. सुबह चार बजे तक बंसीने जागृतीके अ‍ेक अक अंगको तोडके रख दीया था.. बाथरुममे जाते वक्त भी उनके पैर लडखडाने लगे थे..

इधर हवेलीपे लताने कल्पना नही कीथीकी देवायतसे चुदवाते वो बेहोस होजायेगी.. देवायत उनको होस आनेसे पहेले सबकुछ करलेना चाहता था.. कुछ देरकी घमासान चुदाइके बाद लताको होंस आने लगा.. तो देवायत अपने लंडको लताकी चुतमे जड तक घुसाते उनपे जुक गया..

वो लताके होठो ओर उनके बुब्सको चुमने लगा.. लताने धीरेसे अपनी आंखे खोलदी.. देवायत उनके बुब्सको मसलते उनके होठोको चुम रहा था.. लताको बेहोसीकी वजहसे दर्दका पता ही नही चला.. अभी उसे मामुली दर्द हो रहा था.. ओर आंखसे आंसु बेह रहे थे..

इस मामलेमे लता काफी अनुभवी हो चुकी थी.. तो कुछ देरके बाद वो भी देवायतका साथ देने लगी.. उतेजनामे देवायतकी पीठ सहेलाते पीठमे नाखुन से खरोचने लगी.. ओर देवायत फीरसे धीरे धीरे कमर हीलाते लताको चोदने लगा..

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लता जबभी जडनेकी कगारपे होती देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते लीपलोक कर लेती.. ओर सुस्त होजाती.. लेकीन देवायत अपनी चुदाइ जारी रखता.. ओर कुछ देरके बाद लता फीरसे उतेजीत होजाती ओर मदहोस होकर अपनी कमर उछालते देवायतका चुदवानेमे साथ देने लगती..

अ‍ैसे ही लताको दो बार जडाते देवायतका लावा फुट पडा.. उसने कमर हीलाना छोडके लताकी चुतमे जड तक लंड घुसा दीया.. ओर लताको अपनी बाहोमे भीचते उनके गलेमे मुह डालते अपने गाढे पानीकी पीचकारीया लताकी बच्चेदानीपे छोडने लगा..

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लताको पहेली बार अपनी बच्चेदानीपे गरमाहट महेसुस हुइ.. ओर वो भी उतेजनासे कांपने लगी.. वोभी देवायतके साथ जडते उनके लंडको भीगोने लगी.. लता आधी आंख चडाते जैसे स्वर्गमे पहोंच गइ.. फीर दोनो सांत होगये.. ओर लता धीरे धीरे देवायतकी पीठ सहेलाती रही..

लताको अपनी चुतपे देवायतका लंड अब भी सख्त महेसुस हो रहा था.. वो देवायतके नीचे लेटी हुइ थी.. दोनो पसीनेसे भीगे हुअ‍े थे.. लता देवायतसे नजरे चुराने लगी.. उनकी सांसे अब भी तेज चल रही थी.. जीसकी वजहसे उनके दोनो उभार उपर नीचे हो रहे थे..

जबसे देवायत उनकी मां सरलाको चोदनेके लीये आता.. लता तबसे देवायतके लंडको देख रही थी.. ओर उनकी ओर आकर्सीत होगइ थी.. उसने तब ही तैय करलीया थाकी अ‍ेक दिन मेभी इस लंडसे चुदवाउगी.. लता जानती थी.. की देवायत ओर उनका बाप अ‍ेक ही हे..

देवायतको वो अपना भाइ मानती थी.. ओर आज अपने भाइसे चुदवानेकी उनकी मनकी मुराद पुरी होगइ.. देवायतका लंड अब भी लताकी चुतमे था.. ओर देवायत उनके बुब्स ओर होठोको चुम रहा था.. कुछ देरके बाद दोनो फीरसे उतेजीत होगये ओर दोनोके बीच वापस घमासान चुदाइ होने लगी.. तो इधर सहेरमे लखनके घर भी सभी लोग घरके दरवाजे ओर लाइट बंध करके उपर सोने चले गये.. तब....

कन्टीन्यु
 
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