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- Dec 5, 2013
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पुजाकी मम्मी : (सामने देखते) पुजा.. बेटी क्या हुआ..? तबीयत खराब नही हे क्या..? डोक्टरको बुलालु..?
पुजा : (जटसे थोडी गभराते) अरे नही नही.. मम्मी लगता हे खानेमे कुछ आगया होगा..
पुजाकी मम्मी : (फीकी मुस्कानसे) अच्छा..? लेकीन हर दिन तो खानेमे कुछ नही आता.. (तुका लडाकर तीर फेकते) ये दुसरी तीसरी बार उल्टीया हुइनां..? बता.. क्या हुआ हे..? चल हम डोक्टरको दीखाने जाते हे..
पुजा : (सामने देखते) मम्मी.. रहेने दोनां.. कल मे डोक्टरको दीखाकर आइ थी.. उसने कहा खानेमे कुछ आ गया होगा.. तो उसने दवाइ दी हे.. मे खा लुगी.. क्यु जीद कर रही हो..?
पुजाकी मम्मी : (मुस्कुराते धीरेसे हाथ पकडते) बेटा.. मेने दुनीयादारी देखी हे.. मे कोइ छोटी बच्ची नही हु.. जो तुम मुजे समजा दोगी.. ओर मे मान जाउगी.. मेरे सरपे हाथ रख.. ओर कसम खा.. की तुजे कुछ नही हुआ हे.. मे तेरी बात मान जाउगी..
पुजा : (नजरे चुराते जटसे) नही.. वो.. मे.. मे..
पुजाकी मम्मी : (फीकी मुस्कानसे) प्रेगनेन्ट होगइ हेनां..? सच बता.. वरना मजबुरन मुजे तेरे पापाको बताना पडेगा..
पुजा : (थोडा गुस्सेसे) मोम.. ये तुम क्या बकवास कर रही हो..? मे बीना पती कैसे प्रेगनेन्ट हो सकती हु..?
पुजाकी मम्मी : (थोडी सखतीसे) अच्छा..? बेटा.. जो खेल तु खेल रही हेनां.. मेरी जवानीमे मेभी अैसा खेल तेरे पापाके साथ खेल चुकी हु.. पता हे तेरे पापा कौन हे..? हमारा खानदान कहा हे..?
पुजा : (आस्चर्यसे देखते) नही मोम.. हमे तो पता ही नही हे.. की हमारा खानदान हे भी या नही.. क्युकी आप दोनोने कभी इसके बारेमे बात ही नहीकी.. ओर कभी आपसे पुछते तो आप बात टाल देते थे..
पुजाकी मम्मी : (आंख गीली करते) बेटी.. क्युकी हमारी लव मेरीज थी.. मेने मेरे चाचाके साथ घरसे भागकर सादी की हे..
पुजा : (चोंकते) चाचाके साथ..?
पुजाकी मम्मी : हां.. मेरे सगे चाचाके साथ.. ये जो तेरे पापा हेनां.. वो मेरे सगे चाचा हे..
पुजा : (चोंकते) व्होट..? क्या ये आपके चाचा हे..?
पुजाकी मम्मी : हां.. सुन.. हम इतने रहीस नही थे.. ये सब विरासत तेरे पापाने अपनी महेनत ओर इजत कमाकर खडी की हे.. हम अेक सामान्य फेमीलीसे हे.. तेरे पापा दो भाइ थे.. मे तेरे पापाके बडे भाइकी लडकी हु.. तेरे पापा मेरे सगे चाचा हे..
पुजा : (आस्चर्यसे) मोम.. ये आप क्या बोल रही हे..?
पुजाकी मम्मी : (हांमे गरदा हीलाते) हां.. ये सच हे.. जब मेने जवानीके दहेलीजपे कदम रखा.. मुजे अठारवा बैठा तब तेरे पापाकी उमर ३५ पार कर चुकी थी.. हमारी हालतकी वजहसे उनकी भी सादी नही हो रही थी.. ओर मे सुरुसे ही मोर्डन खयालोकी थी.. मेरे सौक अेक अमीर लडकी जैसा था.. मेरे घरवाले मेरा सौक पुरा नही कर सकते थे.. तो मेरे चाचा मेरी हर जरुरतको सबसे छुपकर पुरी करते थे..
पुजा : (सामने देखते) तो क्या आप दोनो अेक दुसरेको प्यार करते थे..? मीन्स.. दोनो मीले कैसे..?
पुजाकी मम्मी : (फीकी मुस्कानसे) नही.. तब मुजे क्या पता था.. की प्यार क्या होता हे.. मे स्कुलमे पढती थी.. मेरे चाचा ही थे.. जो मेरे महंगे महेंगे सौक पुरे करते थे.. तब मुजे कहा पता थाकी उनके मनमे क्या चल रहा हे.. हमारे स्कुलसे प्रवासकी टुर होती थी.. लेकीन हमारी पोजीसन उतनी भी अच्छी नही थी.. की मेरे घुमनेका फीजुल खर्च उठा सके.. ओर मे प्रवासमे जानेकी जीद करने लगी.. कास.. मेने उस दिन प्रवासमे जानेकी जीद ना की होती..
पुजा : मोम.. क्या हुआ था..? आपके साथ कुछ गलत हुआ था क्या..?
पुजाकी मम्मी : (मुस्कुराते) बेटा.. पता नही ये गलत था या सही.. क्युकी मेरी जवानी भी उफानपे थी.. उस टुरपे लडके भी आ रहे थे.. तीन दिन आबु हील स्टेशनका प्रवास था.. मे लडकोकी ओर आकर्शीत होने लगी थी.. सायद इसीलीये मे जीद कर रही थी..
तभी मेरे चाचाने आकर बताया.. की मेने प्रवासकी फीस भरदी हे.. ओर वो दिन भी आगया जब हमे प्रवासमे जाना था.. चाचा भी कही बहारगांव जानेकी बात करके नीकल रहे थे.. तो उसने कहा मुजे स्कुल छोडकर चले जायेगे..
पुजा : (मुस्कुराते) तो क्या आपको प्रवासके लीये स्कुल छोडकर चले गये..?
पुजाकी मम्मी : (मुस्कुराते) नही.. रास्तेमे उन्होने बतायाकी प्रवासकी संख्या फुल होगइ थी.. तो नाम नही लीखा.. इसीलीये मे तुजे वही लेजाउगा जहाका प्रवास हे.. तो मे खुस होगइ.. मे ओर चाचा ट्रेनसे आबु पहोंच गये.. वहा उन्होने कीसी सस्ते होटेलमे अेक कमरा बुक कीया..
साम तक हम दोनो घुमते रहे.. फीर हमने खाना खाया.. ओर कोलड्रींक्सकी बोटल लेकर होटेलपे आगये.. कुछ देर हम बाते करते रहे.. फीर हमने कोल्ड्रीन्कस पी.. तब मुजे नही पताथाकी चाचाने मेरे कोल्ड्रीक्समे कीसी नसीली दवाइ मीलादी हे..
पुजा : (आस्चर्यसे) व्होट..? पापाने आपके साथ अैसा कीया..?
पुजाकी मम्मी : (फीकी मुस्कानसे) हां.. कुछ ही देरमे मेरे उपर नसा हावी होने लगा.. मे बहुत ही उतेजीत होने लगी.. अैसा लगताथा की कोइ आकर मेरे तनकी आगको बुजादे.. बस.. मेरे चाचाका काम होगया.. उस रात मेरे चाचाने मेरा कौमार्य भंग कीया.. ओर पुरी रात मेरे तनसे खेलते रहे.. कौमार्य भंग कीया तब मुजे बहुत दुख हुआ.. लेकीन दुसरी बार मजा आने लगा.. ओर सुबह होते होते तो मे चाचाकी मासुका होगइ थी..
पुजा : (जटसे थोडी गभराते) अरे नही नही.. मम्मी लगता हे खानेमे कुछ आगया होगा..
पुजाकी मम्मी : (फीकी मुस्कानसे) अच्छा..? लेकीन हर दिन तो खानेमे कुछ नही आता.. (तुका लडाकर तीर फेकते) ये दुसरी तीसरी बार उल्टीया हुइनां..? बता.. क्या हुआ हे..? चल हम डोक्टरको दीखाने जाते हे..
पुजा : (सामने देखते) मम्मी.. रहेने दोनां.. कल मे डोक्टरको दीखाकर आइ थी.. उसने कहा खानेमे कुछ आ गया होगा.. तो उसने दवाइ दी हे.. मे खा लुगी.. क्यु जीद कर रही हो..?
पुजाकी मम्मी : (मुस्कुराते धीरेसे हाथ पकडते) बेटा.. मेने दुनीयादारी देखी हे.. मे कोइ छोटी बच्ची नही हु.. जो तुम मुजे समजा दोगी.. ओर मे मान जाउगी.. मेरे सरपे हाथ रख.. ओर कसम खा.. की तुजे कुछ नही हुआ हे.. मे तेरी बात मान जाउगी..
पुजा : (नजरे चुराते जटसे) नही.. वो.. मे.. मे..
पुजाकी मम्मी : (फीकी मुस्कानसे) प्रेगनेन्ट होगइ हेनां..? सच बता.. वरना मजबुरन मुजे तेरे पापाको बताना पडेगा..
पुजा : (थोडा गुस्सेसे) मोम.. ये तुम क्या बकवास कर रही हो..? मे बीना पती कैसे प्रेगनेन्ट हो सकती हु..?
पुजाकी मम्मी : (थोडी सखतीसे) अच्छा..? बेटा.. जो खेल तु खेल रही हेनां.. मेरी जवानीमे मेभी अैसा खेल तेरे पापाके साथ खेल चुकी हु.. पता हे तेरे पापा कौन हे..? हमारा खानदान कहा हे..?
पुजा : (आस्चर्यसे देखते) नही मोम.. हमे तो पता ही नही हे.. की हमारा खानदान हे भी या नही.. क्युकी आप दोनोने कभी इसके बारेमे बात ही नहीकी.. ओर कभी आपसे पुछते तो आप बात टाल देते थे..
पुजाकी मम्मी : (आंख गीली करते) बेटी.. क्युकी हमारी लव मेरीज थी.. मेने मेरे चाचाके साथ घरसे भागकर सादी की हे..
पुजा : (चोंकते) चाचाके साथ..?
पुजाकी मम्मी : हां.. मेरे सगे चाचाके साथ.. ये जो तेरे पापा हेनां.. वो मेरे सगे चाचा हे..
पुजा : (चोंकते) व्होट..? क्या ये आपके चाचा हे..?
पुजाकी मम्मी : हां.. सुन.. हम इतने रहीस नही थे.. ये सब विरासत तेरे पापाने अपनी महेनत ओर इजत कमाकर खडी की हे.. हम अेक सामान्य फेमीलीसे हे.. तेरे पापा दो भाइ थे.. मे तेरे पापाके बडे भाइकी लडकी हु.. तेरे पापा मेरे सगे चाचा हे..
पुजा : (आस्चर्यसे) मोम.. ये आप क्या बोल रही हे..?
पुजाकी मम्मी : (हांमे गरदा हीलाते) हां.. ये सच हे.. जब मेने जवानीके दहेलीजपे कदम रखा.. मुजे अठारवा बैठा तब तेरे पापाकी उमर ३५ पार कर चुकी थी.. हमारी हालतकी वजहसे उनकी भी सादी नही हो रही थी.. ओर मे सुरुसे ही मोर्डन खयालोकी थी.. मेरे सौक अेक अमीर लडकी जैसा था.. मेरे घरवाले मेरा सौक पुरा नही कर सकते थे.. तो मेरे चाचा मेरी हर जरुरतको सबसे छुपकर पुरी करते थे..
पुजा : (सामने देखते) तो क्या आप दोनो अेक दुसरेको प्यार करते थे..? मीन्स.. दोनो मीले कैसे..?
पुजाकी मम्मी : (फीकी मुस्कानसे) नही.. तब मुजे क्या पता था.. की प्यार क्या होता हे.. मे स्कुलमे पढती थी.. मेरे चाचा ही थे.. जो मेरे महंगे महेंगे सौक पुरे करते थे.. तब मुजे कहा पता थाकी उनके मनमे क्या चल रहा हे.. हमारे स्कुलसे प्रवासकी टुर होती थी.. लेकीन हमारी पोजीसन उतनी भी अच्छी नही थी.. की मेरे घुमनेका फीजुल खर्च उठा सके.. ओर मे प्रवासमे जानेकी जीद करने लगी.. कास.. मेने उस दिन प्रवासमे जानेकी जीद ना की होती..
पुजा : मोम.. क्या हुआ था..? आपके साथ कुछ गलत हुआ था क्या..?
पुजाकी मम्मी : (मुस्कुराते) बेटा.. पता नही ये गलत था या सही.. क्युकी मेरी जवानी भी उफानपे थी.. उस टुरपे लडके भी आ रहे थे.. तीन दिन आबु हील स्टेशनका प्रवास था.. मे लडकोकी ओर आकर्शीत होने लगी थी.. सायद इसीलीये मे जीद कर रही थी..
तभी मेरे चाचाने आकर बताया.. की मेने प्रवासकी फीस भरदी हे.. ओर वो दिन भी आगया जब हमे प्रवासमे जाना था.. चाचा भी कही बहारगांव जानेकी बात करके नीकल रहे थे.. तो उसने कहा मुजे स्कुल छोडकर चले जायेगे..
पुजा : (मुस्कुराते) तो क्या आपको प्रवासके लीये स्कुल छोडकर चले गये..?
पुजाकी मम्मी : (मुस्कुराते) नही.. रास्तेमे उन्होने बतायाकी प्रवासकी संख्या फुल होगइ थी.. तो नाम नही लीखा.. इसीलीये मे तुजे वही लेजाउगा जहाका प्रवास हे.. तो मे खुस होगइ.. मे ओर चाचा ट्रेनसे आबु पहोंच गये.. वहा उन्होने कीसी सस्ते होटेलमे अेक कमरा बुक कीया..
साम तक हम दोनो घुमते रहे.. फीर हमने खाना खाया.. ओर कोलड्रींक्सकी बोटल लेकर होटेलपे आगये.. कुछ देर हम बाते करते रहे.. फीर हमने कोल्ड्रीन्कस पी.. तब मुजे नही पताथाकी चाचाने मेरे कोल्ड्रीक्समे कीसी नसीली दवाइ मीलादी हे..
पुजा : (आस्चर्यसे) व्होट..? पापाने आपके साथ अैसा कीया..?
पुजाकी मम्मी : (फीकी मुस्कानसे) हां.. कुछ ही देरमे मेरे उपर नसा हावी होने लगा.. मे बहुत ही उतेजीत होने लगी.. अैसा लगताथा की कोइ आकर मेरे तनकी आगको बुजादे.. बस.. मेरे चाचाका काम होगया.. उस रात मेरे चाचाने मेरा कौमार्य भंग कीया.. ओर पुरी रात मेरे तनसे खेलते रहे.. कौमार्य भंग कीया तब मुजे बहुत दुख हुआ.. लेकीन दुसरी बार मजा आने लगा.. ओर सुबह होते होते तो मे चाचाकी मासुका होगइ थी..