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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २७२
उस रात लखनने रजीया ओर राधीकाकी दो दो बार जमकर बजाइ.. फीर सृतीको लगातार तीन बार जमकर चोदलीया ओर बाथरुममे भी खडे खडे सृतीकी चुतका भुरता बनादीया.. तो सृतीकी हालत बीगड गइ.. फीर पुनमको जमकर दो बार पेला.. ओर उनसे चीपकके सो गया.. तब कीसीको पता नही थाकी लखनका लंड अब भी पुनमकी चुतमे हे.. दोनो अपने वादेके मुताबीक सो गये.... अब आगे
रात ओर दुसरे दीन भी धिरेन आराम करते करते नीलमको चोदता रहा.. फीर सामके चार बजे वो नीलमको फीरसे जल्द मीलनेका वादा लेकर घरके पास छोडकर चला गया.. नीलम आरामसे चलकर घरमे आगइ.. तो रजीया ओर पुनमको देखकर खुब सरमाइ ओर हसने लगी..
पुनम : (हाथ पकडकर सोफेपे बैठ गइ) हां नीलु.. क्या हुआ..? उनको सक तो नही हुआ..?
नीलम : (सरमाते धीरेसे) नही दीदी.. होना क्या था.. जैसे आपने कहा था अैसा ही कीया.. तो सक कहासे करेगा..? कमीनेने पुरी रात गोलीया खा खाकर सोने नही दीया.. मेतो इतनीसी नुनीके साथ खेलते खेलते तंग होगइ..
पुनम : (हसते धीरेसे) अरे मजा भी तो कीया तुमने..?
नीलम : (सरमाते धीरेसे) अरे क्या खाक मजा कीया..? अब तो उनका अंदर कुछ फील भी नही हो रहा.. बस.. माथे चडा नही ओर कुछ ही देरमे खतम.. अभी भी अैसा ही हे.. जो बात जीजुमे हे वो उनमे कहा..? अब तो जुजीके आलावा कीसीसे मीलनेका मन ही नही होता..
पुनम : (मुस्कुराते) कमीनी तुमने अपने जीजुसे मांग भरवाइ हे फीर भी जीजु..? चल कोइ बात नही.. इधर तेरा पहेला पती तो हेही.. तुजे पता नही तेरी जींदगीके कौन आयेगा.. वो सब फीर कभी बताउगी.. अभी समय नही हे.. जा आराम कर..
नीलम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. उसने मुजे फीरसे मीलनेको कहा हे..
पुनम : (मुस्कुराते) हां तो क्या हुआ..? तु हर सेटरडे सन्डे उनके पास चली जाना ओर उनको केहना तुजे संन्डे सामको इधर छोडदे..
नीलम : (मुस्कुराते) लेकीन.. कभी मम्मी पापा इधर आगये तो..?
पुनम : (मुस्कुराते) वो मे सब सम्हाल लुगी.. तब तुजे उनके पास नही भेजुगी..
नीलम : (हसते) जी दीदी.. सब समज गइ..
तो उधर गांवमे भी देवायत मंजु लता ओर दयाकी लाइफ अच्छेसे गुजरने लगी.. लेकीन चंदा देवायतसे भावनात्मक लीहाजसे काफी दुर हो चुकी थी.. सेक्स ना मीलनेकी वजहसे वो बैचेन रहेने लगी थी.. उनका बहुत मन कर रहा था.. लेकीन देवायत उनको कभी कभार ही चोदता था.. क्युकी अब वो विजयको लेकर अलग दुसरे रुममे सोने लगी थी..
तो इधर बसंतीने ब्रीन्दाको जयश्रीसे हुइ बात बतादी.. जीसे सुनकर ब्रीन्दा बहुत खुस हुइ.. ओर हसने लगी.. फीर बसंतीने बरखा मुनाके साथ मीलकर जो प्लान बनाया था.. इस बारेमे बसंतीने ब्रीन्दाको बता दीया.. फीर दोनोने कुछ ओर बाते की.. ओर बात लखनपे आगइ..
बसंती : (सरमाते हसते धीरेसे) कमीनी.. श्रीधर जयश्रीकी सादीमे तो तुमने खुलकर उसे नीमंत्रण दीया था.. तो फीर बादमे कुछ बात हुइ की नही..?
ब्रीन्दा : (सरमाते धीरेसे) हा..ये.. क्या बताउ.. वो कीतना हेन्डसम हेनां..? उनमे कीतना आकर्सण हे.. मेतो उनको देखते ही अपना कंट्रोल खो देती हु.. मे ये भी भुल जाती हुकी श्रीधर मेरा पती हे.. ओर वो उनका दोस्त.. बस.. दुबारा मीलनेका मौका ही नही मीला..
बसंती : (जोरोसे हसते धीरेसे दबी आवाजमे) तु पकी वाली रंडी होगइ हे.. लगता हे तुजे मौका मीला तो तु जरुर उनसे चुदवा लेगी.. हें..हें..हें..
ब्रीन्दा : (सरमाते हसते धीरेसे) ओर नही तो क्या..? देखा नही उनका कीतना बडा हे..? बसंती जींदगीका हर मजा लेना चाहीये.. मेतो कहेती हु तुजे भी मौका मीले तो तुभी अेक बार उनसे चुदवाले.. क्या पता हमारी कीस्मतमे उनका ही अंस लीखा हो..
बसंती : (सरमाते धीरेसे) नही.. मुजे नही चुदवाना उनसे.. तुही चुदवाले.. मेरे लीये तो मेरा मुना ही ठीक हे.. वो आज भी मेरी हालत खराब कर देता हे.. बस.. अेक बार उनसे सादी होजाये..
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) सादी..? अब जयश्री खुद चाहती हेतो श्रीधरसे सादीतो करनी ही पडेगी..
बसंती : (मुस्कुराते) कमीनी इसीलीये तो यहा आइ हु.. तु अेक बार जयश्रीसे बात तो करले..
दोनो सादीके बारेमे बात करने लगी.. ब्रीन्दा बडी दुवीधामे थी.. की वो सामनेसे जयश्रीसे कैसे बात करे.. फीर दोनोने मीलकर इस बारेमे जयश्रीसे खुलकर बात करनेका फैसला कीया.. इस वक्त श्रीधर भी घरपे नही था.. तो बसंतीने जयश्रीको जोरोसे आवाज देकर बुलाया.. तो जयश्री आगइ..
अध्याय - २७२
उस रात लखनने रजीया ओर राधीकाकी दो दो बार जमकर बजाइ.. फीर सृतीको लगातार तीन बार जमकर चोदलीया ओर बाथरुममे भी खडे खडे सृतीकी चुतका भुरता बनादीया.. तो सृतीकी हालत बीगड गइ.. फीर पुनमको जमकर दो बार पेला.. ओर उनसे चीपकके सो गया.. तब कीसीको पता नही थाकी लखनका लंड अब भी पुनमकी चुतमे हे.. दोनो अपने वादेके मुताबीक सो गये.... अब आगे
रात ओर दुसरे दीन भी धिरेन आराम करते करते नीलमको चोदता रहा.. फीर सामके चार बजे वो नीलमको फीरसे जल्द मीलनेका वादा लेकर घरके पास छोडकर चला गया.. नीलम आरामसे चलकर घरमे आगइ.. तो रजीया ओर पुनमको देखकर खुब सरमाइ ओर हसने लगी..
पुनम : (हाथ पकडकर सोफेपे बैठ गइ) हां नीलु.. क्या हुआ..? उनको सक तो नही हुआ..?
नीलम : (सरमाते धीरेसे) नही दीदी.. होना क्या था.. जैसे आपने कहा था अैसा ही कीया.. तो सक कहासे करेगा..? कमीनेने पुरी रात गोलीया खा खाकर सोने नही दीया.. मेतो इतनीसी नुनीके साथ खेलते खेलते तंग होगइ..
पुनम : (हसते धीरेसे) अरे मजा भी तो कीया तुमने..?
नीलम : (सरमाते धीरेसे) अरे क्या खाक मजा कीया..? अब तो उनका अंदर कुछ फील भी नही हो रहा.. बस.. माथे चडा नही ओर कुछ ही देरमे खतम.. अभी भी अैसा ही हे.. जो बात जीजुमे हे वो उनमे कहा..? अब तो जुजीके आलावा कीसीसे मीलनेका मन ही नही होता..
पुनम : (मुस्कुराते) कमीनी तुमने अपने जीजुसे मांग भरवाइ हे फीर भी जीजु..? चल कोइ बात नही.. इधर तेरा पहेला पती तो हेही.. तुजे पता नही तेरी जींदगीके कौन आयेगा.. वो सब फीर कभी बताउगी.. अभी समय नही हे.. जा आराम कर..
नीलम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. उसने मुजे फीरसे मीलनेको कहा हे..
पुनम : (मुस्कुराते) हां तो क्या हुआ..? तु हर सेटरडे सन्डे उनके पास चली जाना ओर उनको केहना तुजे संन्डे सामको इधर छोडदे..
नीलम : (मुस्कुराते) लेकीन.. कभी मम्मी पापा इधर आगये तो..?
पुनम : (मुस्कुराते) वो मे सब सम्हाल लुगी.. तब तुजे उनके पास नही भेजुगी..
नीलम : (हसते) जी दीदी.. सब समज गइ..
तो उधर गांवमे भी देवायत मंजु लता ओर दयाकी लाइफ अच्छेसे गुजरने लगी.. लेकीन चंदा देवायतसे भावनात्मक लीहाजसे काफी दुर हो चुकी थी.. सेक्स ना मीलनेकी वजहसे वो बैचेन रहेने लगी थी.. उनका बहुत मन कर रहा था.. लेकीन देवायत उनको कभी कभार ही चोदता था.. क्युकी अब वो विजयको लेकर अलग दुसरे रुममे सोने लगी थी..
तो इधर बसंतीने ब्रीन्दाको जयश्रीसे हुइ बात बतादी.. जीसे सुनकर ब्रीन्दा बहुत खुस हुइ.. ओर हसने लगी.. फीर बसंतीने बरखा मुनाके साथ मीलकर जो प्लान बनाया था.. इस बारेमे बसंतीने ब्रीन्दाको बता दीया.. फीर दोनोने कुछ ओर बाते की.. ओर बात लखनपे आगइ..
बसंती : (सरमाते हसते धीरेसे) कमीनी.. श्रीधर जयश्रीकी सादीमे तो तुमने खुलकर उसे नीमंत्रण दीया था.. तो फीर बादमे कुछ बात हुइ की नही..?
ब्रीन्दा : (सरमाते धीरेसे) हा..ये.. क्या बताउ.. वो कीतना हेन्डसम हेनां..? उनमे कीतना आकर्सण हे.. मेतो उनको देखते ही अपना कंट्रोल खो देती हु.. मे ये भी भुल जाती हुकी श्रीधर मेरा पती हे.. ओर वो उनका दोस्त.. बस.. दुबारा मीलनेका मौका ही नही मीला..
बसंती : (जोरोसे हसते धीरेसे दबी आवाजमे) तु पकी वाली रंडी होगइ हे.. लगता हे तुजे मौका मीला तो तु जरुर उनसे चुदवा लेगी.. हें..हें..हें..
ब्रीन्दा : (सरमाते हसते धीरेसे) ओर नही तो क्या..? देखा नही उनका कीतना बडा हे..? बसंती जींदगीका हर मजा लेना चाहीये.. मेतो कहेती हु तुजे भी मौका मीले तो तुभी अेक बार उनसे चुदवाले.. क्या पता हमारी कीस्मतमे उनका ही अंस लीखा हो..
बसंती : (सरमाते धीरेसे) नही.. मुजे नही चुदवाना उनसे.. तुही चुदवाले.. मेरे लीये तो मेरा मुना ही ठीक हे.. वो आज भी मेरी हालत खराब कर देता हे.. बस.. अेक बार उनसे सादी होजाये..
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) सादी..? अब जयश्री खुद चाहती हेतो श्रीधरसे सादीतो करनी ही पडेगी..
बसंती : (मुस्कुराते) कमीनी इसीलीये तो यहा आइ हु.. तु अेक बार जयश्रीसे बात तो करले..
दोनो सादीके बारेमे बात करने लगी.. ब्रीन्दा बडी दुवीधामे थी.. की वो सामनेसे जयश्रीसे कैसे बात करे.. फीर दोनोने मीलकर इस बारेमे जयश्रीसे खुलकर बात करनेका फैसला कीया.. इस वक्त श्रीधर भी घरपे नही था.. तो बसंतीने जयश्रीको जोरोसे आवाज देकर बुलाया.. तो जयश्री आगइ..