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चंदाने अंदर जाकर पीसाब कीया.. ओर अपनी चुतको पानीसे साफ कीया.. फीर अपने पर्ससे लीप्सीट नीकाली ओर अपना मेकअप सही करने लगी.. उसने अपना बाल भी सही कीया.. फीर मुस्कुराते बहार नीकली तो लखन उनका इन्तजार करते बहार खडा मुस्कुरा रहा था..
चंदा : (मुस्कुराते पास आते) अब घर चलो.. कोइ फील्म नही देखनी.. हम फीर कभी आयेगे..
लखन : (मुस्कुराते) इतनी जल्दी घर..? अभी तो साडे ग्याराह बजे हे..
चंदा : (लखनकी कोनीमे बाहे डालते) घर पहोचते बाराह बज जायेगे.. दो कोल्ड्रीन्स हेनां.. चलो इनके साथ सेन्डवीच खाते हे.. फीर घर चलेगे..
फीर दोनो केन्टीनमे चले गये.. ओर दो सेन्डवीच लेली.. दोनो प्यार भरी बाते करते आरामसे खाते रहे.. बाते करते भी चंदा लखनकी ओर कामुक नजरोसे हसती रही.. फीर कारकी ओर चल पडे.. कार नीचे पार्कींगमे थी.. चंदाने लखनका हाथ थामे रखा.. ओर दोनो पार्कींगमे चले गये.. वहा कोइ नही था..
तो लखनने चंदाको खीचकर दीवालके सहारे खडा कर दीया.. ओर दोनो हाथोके पंजोमे उंगलीया फसाकर दीवालसे सटा दीया.. फीर चंदाके होठोको चुमने लगा.. तो चंदा भी उनका साथ देने लगी.. उसने अपना हाथ छुडाकर लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..
चंदा : (धीरेसे फुसफुसाते) जानु.. यहा नही.. कोइ आजायेगा.. चलो घर.. आज पुरी रात चंदा तुम्हारी हे.. आज मे आपको उपर नही जाने दुगी.. सीर्फ हम दोनो.. पुरी रात सीर्फ प्यार.. चलो..
चंदा अब लखनसे खुलकर बाते ओर प्यार करने लगी थी.. ओर ये सब उसीका नतीजा था.. जो उनको मंजुने अबतक देवायतसे दुर रखा था.. चंदा बीना प्यार पागल जैसी होगइ थी.. ओर वही कारण था जो वो आज लखनसे खुलकर प्यार कर रही थी.. दोनो घरपे आगये..
तो घरपे सनाटा छाया हुआ था.. बहार पुरी तराह अंधेरा छाया हुआ था.. लखनने गेट खोलकर कार अंदर लेली.. फीर पार्क करके गेटको बंध करने चला गया.. चंदा घरके दरवाजेके पास खडी रही.. लखनने आकर चाबीसे दरवाजा खोला ओर दोनो अंदर चले गये..
होलमे अंधेरा था.. कोइ आवाज नही.. सबलोग सो चुके थे.. लखनने जैसे ही दरवाजा बंध कीया चंदाने जोरोसे लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. तो लखनने थोडा जुकते चंदाको अपनी गोदमे उठालीया.. ओर उनके रुमकी ओर चल पडा.. फीर दोनो रुममे चले गये..
पुरे रुममे अंधेरा छाया हुआ था.. चंदाने लाइट जलाइ.. तो रुममे देखते ही दोनो दंग रेह गये.. क्युकी चंदाका पुरा बेड फुलोसे सजा हुआ था.. ओर साइडके छोटे टेबलपे दो बडे ग्लास बादाम वाले दुधसे ढके हुअे पडे थे.. चंदाने सर्मसार होते दरवाजा बंध करदीया..+
चंदा : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. लगता हे हम दोनोके बारेमे सबको पता हे.. पुनोदीने सब इन्तजाम करके रखा हे.. क्या सचमे उन्होने हमे..
लखन : (बाहोमे थामते) हां चंदा.. दीदीने दोपहोरको ही मुजे सब बता दीया था.. की आज हम दोनोकी सुहागरात होगी.. क्या तुम तैयार हो..
चंदा : (आंग गीली करते) हां.. लखन.. मे तुम सब लोगोको समज ही नही पाइ.. ना मंजुको ओर नाही पुनो दीदीको.. सब लोग कीतने अच्छे हे.. सबकी भावनाओका बराबर खयाल रखते हे..
लखन : (गोदमे उठाकर बेडकी ओर लेजाते) तो अब सुरु करे..? आजसे आप हमेसाके लीये मेरी होजाओगी..
चंदा : (गलमे दोनो हाथ डालते) हंम.. आपकी तो मे उसी दीन होगइ थी.. जब आपने मुजे पहेला कीस कीया था.. ओर जब बाबाने कहा तब ही मेने अपने आपको आपको समर्पीत कर दीया था.. लेकीन अेक ही अफसोस रहेगा.. मे आपकी बीवी नही बन पाउगी.. क्युकी मे आपके भाइकी अमानत हु..
लखन : (बेडपे लीटाते) चंदा.. अब कोइ फर्क नही पडता.. क्युकी अब मे ओर भाइ अेक ही हे.. मंजुमोमने अैसे ही सब बदलाव नही कीया.. क्युकी मुजे ओर भाइने मीलकर उसीके लीये भुमीका तैयार करनी हे.. जो मंजुमोमके उनके नये जन्ममे उनकी कोखसे जन्म लेगा..
कहेते लखन चंदाके उपर छागया.. ओर उनके दोनो हाथोके पंजेको कसके पकडते उनके होठोको चुमने लगा.. चंदा मुह खोलते लखनका साथ उनके होठोको चुमते देने लगी.. दोनो प्यारमे इतने मसगुल होगयेकी अेक अेक करते दोनोके तनसे कपडे कब नीकल गये दोनोको पता ही नही चला..
चंदाके तनपे लखनने गीफ्ट दी हुइ सीर्फ ब्रा ओर पेन्टी थी.. ओर लखन सीर्फ नीकरमे ही रेह गया.. चंदाके खुले बाल उनके सरके नीचे फैले हुअे थे.. जीसे चंदा बहुत ही खुबसुरत अप्सरा जैसी दीख रही थी.. बस.. चंदाका यही रुप लखनको पागल करनेके लीये काफी था..
धीरे धीरे करते दोनोके अंतर वस्त्र भी नीकल गये.. ओर लखन चंदाके अेक अेक अंगके साथ खेलने लगा.. जब लखनने उनकी चुतपे मुह लगाया तब चंदाने जोरोसे चदरको मुठीमे पकडली.. ओर अपनी कमर पटकते अेक मछलीकी तराह छटपटाने लगी.. पुरे कमरा चंदाकी सीसकारीयोसे गुंजने लगा..
अेक बार दोनोने सीक्स नाइन पोजीसनमे अेक दुसरेको संतुस्ट कीया.. फीर दोनो सावर लेने चले गये.. ओर अेक दुसरेके तनको मसलते छेडखानीके साथ दोनोने पुरे दीन घुमनेकी थकावटको दुर कीया.. फीर अेक दुसरेके तनको पोछकर बहार आगये.. ओर अेक दुसरेने पुनमने रखा दुध पीलाया.. ओर फीर सुरु हुआ असली खेल....
कन्टीन्यु
चंदा : (मुस्कुराते पास आते) अब घर चलो.. कोइ फील्म नही देखनी.. हम फीर कभी आयेगे..
लखन : (मुस्कुराते) इतनी जल्दी घर..? अभी तो साडे ग्याराह बजे हे..
चंदा : (लखनकी कोनीमे बाहे डालते) घर पहोचते बाराह बज जायेगे.. दो कोल्ड्रीन्स हेनां.. चलो इनके साथ सेन्डवीच खाते हे.. फीर घर चलेगे..
फीर दोनो केन्टीनमे चले गये.. ओर दो सेन्डवीच लेली.. दोनो प्यार भरी बाते करते आरामसे खाते रहे.. बाते करते भी चंदा लखनकी ओर कामुक नजरोसे हसती रही.. फीर कारकी ओर चल पडे.. कार नीचे पार्कींगमे थी.. चंदाने लखनका हाथ थामे रखा.. ओर दोनो पार्कींगमे चले गये.. वहा कोइ नही था..
तो लखनने चंदाको खीचकर दीवालके सहारे खडा कर दीया.. ओर दोनो हाथोके पंजोमे उंगलीया फसाकर दीवालसे सटा दीया.. फीर चंदाके होठोको चुमने लगा.. तो चंदा भी उनका साथ देने लगी.. उसने अपना हाथ छुडाकर लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..
चंदा : (धीरेसे फुसफुसाते) जानु.. यहा नही.. कोइ आजायेगा.. चलो घर.. आज पुरी रात चंदा तुम्हारी हे.. आज मे आपको उपर नही जाने दुगी.. सीर्फ हम दोनो.. पुरी रात सीर्फ प्यार.. चलो..
चंदा अब लखनसे खुलकर बाते ओर प्यार करने लगी थी.. ओर ये सब उसीका नतीजा था.. जो उनको मंजुने अबतक देवायतसे दुर रखा था.. चंदा बीना प्यार पागल जैसी होगइ थी.. ओर वही कारण था जो वो आज लखनसे खुलकर प्यार कर रही थी.. दोनो घरपे आगये..
तो घरपे सनाटा छाया हुआ था.. बहार पुरी तराह अंधेरा छाया हुआ था.. लखनने गेट खोलकर कार अंदर लेली.. फीर पार्क करके गेटको बंध करने चला गया.. चंदा घरके दरवाजेके पास खडी रही.. लखनने आकर चाबीसे दरवाजा खोला ओर दोनो अंदर चले गये..
होलमे अंधेरा था.. कोइ आवाज नही.. सबलोग सो चुके थे.. लखनने जैसे ही दरवाजा बंध कीया चंदाने जोरोसे लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. तो लखनने थोडा जुकते चंदाको अपनी गोदमे उठालीया.. ओर उनके रुमकी ओर चल पडा.. फीर दोनो रुममे चले गये..
पुरे रुममे अंधेरा छाया हुआ था.. चंदाने लाइट जलाइ.. तो रुममे देखते ही दोनो दंग रेह गये.. क्युकी चंदाका पुरा बेड फुलोसे सजा हुआ था.. ओर साइडके छोटे टेबलपे दो बडे ग्लास बादाम वाले दुधसे ढके हुअे पडे थे.. चंदाने सर्मसार होते दरवाजा बंध करदीया..+
चंदा : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. लगता हे हम दोनोके बारेमे सबको पता हे.. पुनोदीने सब इन्तजाम करके रखा हे.. क्या सचमे उन्होने हमे..
लखन : (बाहोमे थामते) हां चंदा.. दीदीने दोपहोरको ही मुजे सब बता दीया था.. की आज हम दोनोकी सुहागरात होगी.. क्या तुम तैयार हो..
चंदा : (आंग गीली करते) हां.. लखन.. मे तुम सब लोगोको समज ही नही पाइ.. ना मंजुको ओर नाही पुनो दीदीको.. सब लोग कीतने अच्छे हे.. सबकी भावनाओका बराबर खयाल रखते हे..
लखन : (गोदमे उठाकर बेडकी ओर लेजाते) तो अब सुरु करे..? आजसे आप हमेसाके लीये मेरी होजाओगी..
चंदा : (गलमे दोनो हाथ डालते) हंम.. आपकी तो मे उसी दीन होगइ थी.. जब आपने मुजे पहेला कीस कीया था.. ओर जब बाबाने कहा तब ही मेने अपने आपको आपको समर्पीत कर दीया था.. लेकीन अेक ही अफसोस रहेगा.. मे आपकी बीवी नही बन पाउगी.. क्युकी मे आपके भाइकी अमानत हु..
लखन : (बेडपे लीटाते) चंदा.. अब कोइ फर्क नही पडता.. क्युकी अब मे ओर भाइ अेक ही हे.. मंजुमोमने अैसे ही सब बदलाव नही कीया.. क्युकी मुजे ओर भाइने मीलकर उसीके लीये भुमीका तैयार करनी हे.. जो मंजुमोमके उनके नये जन्ममे उनकी कोखसे जन्म लेगा..
कहेते लखन चंदाके उपर छागया.. ओर उनके दोनो हाथोके पंजेको कसके पकडते उनके होठोको चुमने लगा.. चंदा मुह खोलते लखनका साथ उनके होठोको चुमते देने लगी.. दोनो प्यारमे इतने मसगुल होगयेकी अेक अेक करते दोनोके तनसे कपडे कब नीकल गये दोनोको पता ही नही चला..
चंदाके तनपे लखनने गीफ्ट दी हुइ सीर्फ ब्रा ओर पेन्टी थी.. ओर लखन सीर्फ नीकरमे ही रेह गया.. चंदाके खुले बाल उनके सरके नीचे फैले हुअे थे.. जीसे चंदा बहुत ही खुबसुरत अप्सरा जैसी दीख रही थी.. बस.. चंदाका यही रुप लखनको पागल करनेके लीये काफी था..
धीरे धीरे करते दोनोके अंतर वस्त्र भी नीकल गये.. ओर लखन चंदाके अेक अेक अंगके साथ खेलने लगा.. जब लखनने उनकी चुतपे मुह लगाया तब चंदाने जोरोसे चदरको मुठीमे पकडली.. ओर अपनी कमर पटकते अेक मछलीकी तराह छटपटाने लगी.. पुरे कमरा चंदाकी सीसकारीयोसे गुंजने लगा..
अेक बार दोनोने सीक्स नाइन पोजीसनमे अेक दुसरेको संतुस्ट कीया.. फीर दोनो सावर लेने चले गये.. ओर अेक दुसरेके तनको मसलते छेडखानीके साथ दोनोने पुरे दीन घुमनेकी थकावटको दुर कीया.. फीर अेक दुसरेके तनको पोछकर बहार आगये.. ओर अेक दुसरेने पुनमने रखा दुध पीलाया.. ओर फीर सुरु हुआ असली खेल....
कन्टीन्यु