Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 107 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

लखन : (आइसक्रीम खाते) तो फीर तब भाइको सम्हालेगा कौन..? कोइ तो बीवी होगी..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. इसके लीये उनकी बीवी वहा पहोंच गइ हे.. अब भाइको वोही सम्हालेगी.. उनकी पहेली बीवी.. जो हर जन्ममे उनकी पहेली बीवी होती हे.. हमारी नीर्मला आंटी..

लखन : (सामने देखते) आपको कब जाना हे..?

पुनम : (सामने देखते) जीतनी जल्दी हो सके.. (सृतीकी ओर देखते) दीदी.. मे इनको कब मील सकती हु..?

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) डीलीवरीको काफी टाइम हो गया हे.. आप मील सकती हो..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. आज मे सृतीदीदी वाले रुममे सोउगी.. अपनी बाकी बीवीओको नीपटाकर आजाओ.. आज पुरी रात हमारी.. फीर पता नही हमे कब मीलनेका मौका मीलेगा..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? वहा आउगा तो नही मीलोगी..?

पुनम : (सरमाकर धीरेसे) अफकोर्स हम मीलेगे.. मे यहाकी बात कर रही हु.. वहा तो आप जीतनी बार मीलना चाहो हम मील सकते हे..

सृती : (सामने देखते) दीदी.. मे भी आना चाहती हु.. लेकीन कैसे.. मे आखरी दीनोमे उनके पास रहेना चाहती हु..

पुनम : (मुस्कुराते) मे आपको फोन करदुगी.. तब आजाना.. तीन चार दीन काफी होगा.. यहा हमारे पतीको भी तो सम्हालना हे..

सृती : (हसते) मे अकेली क्यु..? राधुदीदी.. रजुदी भी अभी हे.. ओर इनकी नीलुतो सदाबहार हेही.. हें..हें..हें.. ओर आजकल भाभी कोभी बहुत घुमाते हे.. वोभी तो हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) देखा..? ज्वेलेसी.. हें..हें..हें..

सृती : (जांगपे चपत लगाते) अरे.. मे क्यु जलुगी..? अब तो ये रोजका होगा.. जबसे मोमसे बात हुइ तबसे नही जलती.. मेनेतो भावीकाको भी अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. ओर पता नही ओर कीतनी आयेगी.. आप फीकर मत करो.. बस मजे करो.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) सृतीदी.. ध्यान रहे.. चंदाभाभीके सामने नीलुका जीक्र मत करना.. वो उनके बेटेकी बीवी हे.. ये बात वो बरदास्त नही करपायेगी.. जबतक धीरेन हे.. इसके बाद वोही नीलुको हमारे पतीको सम्हालनेके लीये कहेगी.. लेकीन अभी इनमे काफी टाइम हे.. अब चले..?

सृती : (मुस्कुराते) कीतना..?

पुनम : (मुस्कुराते) सायद ढाइ से तीन साल.. फीर नीलुको उनकी जोब मील जायेगी.. लेकीन अब चंदाभाभी यही रहेगी.. हमेसाके लीये.. ओर मे हवेलीपे.. आप आती जाती रहेगी..

फीर तीनो आइसक्रीम लेकर पेमेन्ट देकर बाते करते घरकी ओर नीकल गये.. घर जाकर देखा तो सब इनके इन्तजारमे बैठे थे.. कीसीने डीनर नही कीया था.. फीर सबलोग खाना खाने बैठ गये.. ओर भावीकाकी बाते करते रहे.. पुनमने कुछ बाते छोडकर बाकीका सब कुछ बता दीया..

चंदा ये सुनकर बहुत खुस होगइ की अब भावीका हमेसाके लीये गांवमे रहेते होस्पीटल सम्हालने वाली हे.. फीर सबलोग सोफेपे बैठकर आइसक्रीम खा रहे थे.. तब लखन जानबुजकर चंदासे सटकर बैठ गया.. ओर सबसे छुपकर उनको छेडता रहा.. तो चंदा बहुत ही सरमाकर मुस्कुराती रही..

दीन बीतने लगे.. इसी बीच टीना ओर लखन भी अ‍ेक कोफी शोपमे मीले.. उस दीन टीना बहुत ही सजधजके आइ थी.. दोनोकी पहेली डेट थी.. ओर कोफी पीते बाते करते रहे.. ओर बातोसे दोनोके बीच ओर घनीस्टा बढ गइ.. टीना बाते करते बार बार लखनका हाथ छु लेती थी.. ओर आखीर उसने लखनसे प्यारका इजहार करलीया..

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ओर अगली बार दुबारा बहुत ही जल्द मीलनेका वादा करके दोनो जुदा हुअ‍े.. लखन भी रेग्युलर वसुधासे चेटपे बाते करने लगा.. ओर बात बहुत आगे बढी.. लखन अगली बार गांव आये तो वसुधाने उसे घरपे अकेले मीलने लीये कहा.. ओर दोनोके अफैरके बारेमे छुपानेके लीये कहा..

तो अ‍ेक दीन मुना अपनी क्लीनीकपे बैठा था.. बरखा अपनी छोटी बच्चीकी वजहसे अभी भी छुटीपे थी.. मुनाका फोन बज उठा.. देखा तो उनकी मामी गीताका फोन था.. आम तौरपे गीता कामके वक्त दोपहोरको ही फोन करती हे.. क्युकी तब उनका पती वीनोद घरसे बहार होता हे.. मुनाने फोन उठा लीया..

मुना : (मुस्कुराते धीरेसे) हेलो गीता डार्लींग.. बात करनेका टाइम मील गया..?

गीता : (सरमाकर धीरेसे) हां.. वो अभी अभी बहार गये हे.. तो सोचा पहेले आपसे बात करलु.. जानु.. मुजे आपसे कुछ कहेना हे..

मुना : (मुस्कुराते) हंम.. बोलो.. क्या कोइ खुसखबर तो नही..?

गीता : (आस्चर्यसे मुस्कुराते) हाय राम..? आपको कैसे पता..? कीसीने कुछ कहा हे क्या..?

मुना : (हसते) अरे नही यार.. मेतो बस अ‍ैसे ही केह रहा था.. बोलो.. क्या कहेना हे..?

गीता : (सरमाकर धीरेसे) जानु.. मे.. मे प्रेगनेन्ट हु.. आपसे.. मुजे पका यकीन हे ये हम दोनोका बच्चा हे.. क्युकी इतने साल होगये.. मे उनसे इतनी कोसीसोके बावजुद कभी नही हुइ..

मुना : (धीरेसे) तो क्या उनको सक नही होगा..?

गीता : (मुस्कुराते धीरेसे) नही.. सहेरसे वापस आनेके बाद मेने उसे कहाथा की हम सहेरमे पेपर सबमीट करवाने गये.. तब मे अ‍ेक वैदजीसे मीली थी.. ओर उसने मुजे जडी बुटी दीथी.. वो काम कर गइ.. तो मान गये... ओर बहुत खुस हुअ‍े.. हें..हें..हें.. यारो दोस्तोमे पार्टीया दे रहे हे.. हें..हें..हें..

मुना : (मुस्कुराते) क्या कोइ रीस्तेदार नही हे..? मतलब.. आपके मायके वाले.. या फीर आपके ससुरालके पक्षमे.. उनको पता हे..?

गीता : (आंख गीली करते) हे.. लेकीन उन लोगोने हमारे साथ रीस्ता खतम करलीया हे.. ओर ससुरालमे भी कीसीने हमसे रीस्ता नही रखा..

मुना : (धीरेसे) क्यु..? अ‍ेक बात पुछु..? आपके ससुरालमे कौन कौन हे..

गीता : (आंख गीली करते) बताउगी.. आपको सब कुछ बताउगी.. लेकीन फोनपे नही.. कल सुबह वो अहेमादाबाद कीसी कामसे जा रहे हे.. तो क्या आप कल मीलने आओगे..?

मुना : (मुस्कुराते) नेकी ओर पुछपुछ.. जरुर आउगा.. दोनो मीलकर सेलीब्रेट करेगे.. हें..हें..हें..

गीता : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) मुजे पता हे आपका सेलीब्रेट.. हालत खराब कर देते हो.. पता नही आपके हथीयारने मुजपे क्या जादु करदीया मेतो आपकी दीवानी होगइ.. कल मीलते हे.. तब आपको सब कुछ बतादुगी.. सायद मेरे दीलका बोज भी कुछ कम होजाये..

कहेते फोन रखदीया.. मुना उनकी पुरी कहानी बसंतीके मुहसे सुन चुका था.. वो जानना चाहता थाकी गीता उनको कीतनी सचाइ बताती हे.. वो गीताको प्रेगनेन्ट करके अपना बदला लेना चाहता था.. जो उसने लेलीया.. लेकीन बदलेके चकरमे वो गीताको प्यार भी करने लगा था..

इसी दौरान भावीकाने भी अपने डीवोर्स पेपर तैयार करवा लीये.. ओर उन्होने पुनमको फोन करके बता दीया.. तब पुनमने कुछ अ‍ैसा कहा जीसे सुनकर भावीका भी चौंक गइ.. ओर उसने आज ही क्लीनीकसे डीवोर्स पेपर अपने साथ लेलीया.. वो जानती थीकी उनका ससुरतो बहार ही घुमता रहेता हे.. घरपे सीर्फ मां बेटे ही होगे.. भावीका थोडी डर भी रही थी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९३

इसी दौरान भावीकाने भी अपने डीवोर्स पेपर तैयार करवा लीये.. ओर उन्होने पुनमको फोन करके बता दीया.. तब पुनमने कुछ अ‍ैसा कहा जीसे सुनकर भावीका भी चौंक गइ.. ओर उसने आज ही क्लीनीकसे डीवोर्स पेपर अपने साथ लेलीया.. वो जानती थीकी उनका ससुरतो बहार ही घुमता रहेता हे.. घरपे सीर्फ मां बेटे ही होगे.. भावीका थोडी डर भी रही थी.... अब आगे

तो आज उसने अपना काम करलेनेका फैसला करलीया था.. भावीका घरपे पहोंच गइ.. तीनो डीनर कर रहे थे.. तब धृवकी मम्मी भावीकासे छुपकर कामुक मुस्कानके साथ कातील नजरोसे देखते धृवको उपरकी मंजीलकी ओर आंखोसे इसारा करते धृवके अंदर उतेजना पैदा कर रही थी..

ताकी देर रात सृतीके सो जानेके बाद धृव उनकी धमाकेदार चुदाइ कर सके.. पुजाकी सादीसे पहेले जबसे उनका धृवके साथ रीलेशन हुआ हे तबसे धृवकी मम्मीको हर दिन ओर रातमे धृवसे चुदवानेकी आदत हो गइ थी.. तो धृवका लंड भी उनकी मम्मीकी हरकतसे पेन्टके अंदर ही जटके मारते रस टपका रहा था..

तो दुसरी ओर धृवको भी भावीकासे ज्यादा उनकी मम्मी ओर बहेनकी चुदाइ करना ज्यादा पसंद था.. यही कारणसे धृव भावीकासे भावनात्मक तरीकेसे दुर होगया था.. भावीका टेडी नजरोसे उन मां बेटेको इसारोमे बाते करते देख रही थी.. ओर हमेसाकी तराह आज भी देर रात दोनो मीलनेके लीये इसारे कर रहे थे..

धृवकी मम्मी धृवकी ओर कातील स्माइल कर रही थी.. ओर बीच बीचमे टेडी नजरसे भावीकाको देख लेती.. की वो उनकी ओर देखतो नही रही.. फीर घरके नोकर अपना काम समेटकर चले गये.. धृव रुममे आकर भावीकासे प्यार जताने लगा.. देखा तो भावीका अ‍ेक बडी सुटकेशमे अपने कपडे समेट रही थी..

धृव : (आस्चर्यसे देखते पीछेसे बाहोमे भरते) अरे डार्लींग.. कही जा रही हो क्या..?

भावीका : (अपने आपको बाहोसे छुडाते) धृव.. अभी दुर हटो.. मुजे अ‍ेक हप्तेके लीये बोम्बे मेडीकल कोन्फरन्स ओर ट्रेनींगके लीये जाना हे.. आज कोइ प्यार ब्यार नही.. मेरा पीरीयड चल रहा हे..

धृव : (थोडा परेसान होते) क्या यार तुम भी.. जब भी मुड होता हे मना कर देती हो.. अगर पीरीयड हेतो पीछे ही देदे.. मुजे कहा आगे करना हे..

भावीका : (थोडा गुस्से) यार अ‍ेक बार कहा तो तुजे समजमे नही आता क्या..? मुजे सुबह जल्दी जाना हे.. ७ बजेकी फ्लाइट हे.. तु सोजा.. जब वापस आउ तब जीतना प्यार करना हे कर लेना..

धृव : (थोडा चीडते) क्या यार.. आजकल देख रहा हु तेरे हजार नखरे हे.. भाडमे जाओ.. सोजा..

भावीका : (गुस्से देखते) नखरे तो होगे ही.. क्युकी अभी भी तु सुधरा नही हे.. कुछ दीन पहेले तु आरतीको लेकर गयाथानां होटेल..?

धृव : (थोडा जेंपते) न..न.. नही.. तुजे सब कैसे पता चला.. आरतीने कहा क्या..?

धृव : (गुस्सेसे) वो बेचारी क्यु कहेगी..? क्या मे अंधी हु..? सबुत चाहीये तुजे..? येले.. मेने होटेलके वेइटरको पैसे दीये थे.. क्युकी तुमपे सकतो मुजे कही दीनोसे था..

कहेते भावीकाने जुठ बोलकर अपना फोन नीकाला.. ओर अ‍ेक वीडीयो क्लीप चलाइ.. जीनमे धृव आरतीको चोद रहा था.. जीसे देखते ही धृवकी सीटीबीटी गुल हो गइ.. उसे भावीकाके गुस्सेका पता था.. धृव उसे माफी मांगने लगा.. ओर गीडगीडाने लगा..

भावीका : (गुस्सेसे) धृव.. तुम्हारी इन हरकतोकी वजहसे मे तंग आ चुकी हु.. पता नही कीस मनहुस घडीमे मेने तुमसे सादी की.. इतना तो पता थाकी तुम अयास हो.. लेकीन इतना अयास होगे ये पता नही था..

धृव : (गीडगीडाते) यार बस अ‍ेक बार माफ करदे मुजे.. आइ प्रोमीस.. आइन्दा अ‍ैसी गलती नही करुगा..

भावीका : (गुस्से देखते) अब इस बार गलतीकी तो तुजे छोडुगी भी नही.. अपने बापकी रेप्युटेशनका अच्छा फायदा उठा रहा हे तु.. लेकीन याद रखना मे तुमसे डरने वाली नही हु.. ना तुजसे ओर ना तेरे बापसे.. मेने ओल रेडी मेरी दो तीन दोस्तको ओर अ‍ेक वकीलको सबुतकी कोपीया देदी हे.. अगर कुछ कीया तो समजले गया तु कामसे..

धृव : (चोंकते) क्या बक रही हो..? मत भुलो अब तक तु मेरे बापकी वजहसे ही बचती आ रही हो.. वरना कबकी जेलमे सड रही होती..

भावीका : (गुस्सेसे तील मीलाते) धमकी दे रहा हे मुजे..? जा.. मेरे उपर केश करदे.. मे कर रही हु इलीगल काम.. मेभी देखती हु तुम दोनो बाप बेटे मेरा क्या बीगाड लेते हो.. अब मेने इलीगल काम करना ही छोड दीया हे.. ओर जीतना भी कीया हेनां.. वो तुम दोनो बाप बेटेकी करतुतका कीया हे.. ताकी तुम दोनोकी इजत बची रहे.. मेरे पास पुरा रीकोर्ड हे.. जाओ.. करदो केश.. मे भी देखती हु.. कैसे तुम दोनो भी फसते हो..

धृव : (थोडे ठंडा होते) यार तु क्यु बातका बतंगड बना रही हे..? हम तेरे साथ अ‍ैसा करेगे क्या..? तु सब डीलीट करदे.. आइन्दा अ‍ैसा कुछ नही होगा.. कसमसे..

भावीका : (सामने अदब लगाते) अच्छा..? ताकी तुम दोनोकी गुलाम रहु.. मेतो डीलीट कर दुगी.. लेकीन मेरी फ्रेन्ड ओर वकीलके पास हे उसे कैसे डीलीट करवाओगे..?

धृव : (सांत लहेजेमे) देख भावु.. हमे कोइ जगडा नही करना.. तुम उनको बोलदे सब मीटादे.. हम कुछ नही करेगे.. यार हम आरामसे बैठकर बात करते हेनां..

भावीका : (सामने देखते) वसे भी तुम बाप बेटे कुछ नही कर सकते.. बाकी हम इस बारेमे वापस आउ तब बात करेगे.. अभीतो मुजे सोना हे.. सुबह जल्दी जाना हे.. ओर तेरी जानकारीके लीये बतादु.. मे इस क्लीनीकको बंध कर रही हु..

धृव : (चोंकते) व्होट..? तो फीर तुम क्या करोगी..? तु अ‍ेक डोक्टर हे..

भावीका : (सख्तीसे) नही करनी कोइ डोक्टरी.. जीतना पैसा कमाना था कमालीये.. अब तेरी बीवी हु.. अ‍ैसे ही घर सम्हालुगी तो तु मुजे अ‍ैसै ही नही खीला सकता..?

धृव : (मुस्कुराते) अफकोर्स खीला सकता हु.. लेकीन अ‍ेक बार फीर ठंडे दीमागसे सोचलेना.. अब नो अयासी.. नो धमकी.. आइ अ‍ेम सोरी.. भुलजाओ सब.. तु क्लीनीक बंध मत कर..

भावीका : (फीकी मुस्कानसे) ठीक हे.. इस बारेमे वापस आउगी तब सोचेगे.. तुजे इस बारतो माफ करती हु.. लेकीन याद रखीयो.. अब दुबारा पकडा गया तो सीधा डीवोर्स ही दे दुगी.. आइ बात समजमे..?

धृव : (गले लगते मुस्कुराते) येस डार्लींग.. सीधी गोली ही मार देना.. हें..हें..हें..

भावीका : (कातील मुस्कानसे) नौटंकीबाज.. हर बार अ‍ैसे माफी मांगकर छुट जाता हे.. चल जा.. पेकींग करनेदे.. सुबह जल्दी जाना हे..

कहा तो धृव राहतकी सांस लेते मुस्कुराते बहार नीकल गया.. भावीकाने जटसे दरवाजा बंध करने चली गइ.. देखा तो धृव होलमे टीवी देख रहा था.. भावीकाने धीरेसे दरवाजा बंध कीया ओर फोन घुमाने लगी.. उसने सीधा सृतीको फोन करदीया.. ओर उनसे कुछ बात करली..
 
भावीकाने अपने सभी कपडे ओर अपने सब डोक्युमेन्ट समेटके बेगमे भरलीये.. जब भी भावीकासे जगडा होता तब धृव कीसी भी दुसरे कमरेमे सो जाता.. ओर देर रात अपनी मम्मीके कमरेमे चला जाता.. वो धृवके बारेमे अच्छी तराह जानती थी की धृव कीतना लापरवाह हे.. ओर सायद धृव लापराह था भी..

क्युकी जब भावीका ओर नोकर चले जाते तब वो सीर्फ नीचेका मेइन डोर ही बंध करता.. ओर अपनी मांको लेकर उपरकी मंजीलपे चला जाता.. हर बार रुमका दरवाजा सीर्फ बंध ही करता.. लोक करनेकी जहेमत नही उठाता.. ओर उपरकी मंजीलको इस लीये चुनता ताकी वहा नोकरोको भी बीना इजाजत उपर जानेकी मंजुरी नही थी.. सीर्फ सफाइ करने ही जाते थे..

उसे पता थाकी उपरकी मंजीलपे उनके पापा ओर भावीका कभी नही आते.. ओर उनकी मां चुदाइके वक्त आवाज भी ज्यादा करती थी.. उनका यही कोन्फीडन्स उनपे भारी पडने वाला था.. भावीका देर रात कइ बार उन मां बेटेकी चुदाइ देखने चली जाती.. जब धृवसे उनकी बहेस होजाती या फीर उनके पीरीयड होते..

आज भावीकाने पुरी योजना बनाली थी.. कीसीको पता नही थाकी घरपे आते वक्त भी उन्होने अपनी कार बंगलोके बहार ही खडी रखी थी.. देर रात भावीकाने अपने डीवोर्स पेपर लेलीये.. ओर अपने पलुमे छुपाकर भावीकाने रुममे लाइट बंध करके अंधेरेमे धीरेसे दरवाजा खोला.. तो होलमे भी अंधेरा था..

वो अपना मोबाइल लेकर चुपकेसे दुसरे नीचेके कमरेमे देखने चली गइ.. जहा अक्सर जगडेके बाद धृव सोता था या फीर उपर अपनी मम्मीके पास चला जाता था.. तो नीचेके सभी कमरे भी खाली थे.. भावीकाके चहेरेपे कातील स्माइल आगइ.. वो दबे पांव धीरे धीरे सीडीया चडते उपरकी मंजीलमे जाने लगी.. जहा कइ बार धृव ओर उनकी सासको चुदाइ करते देख चुकी थी..

आखीर भावीका उन रुम तक पहोंच गइ.. तो कमरेमे हल्कीसी सीसकारीयोकी आवाज गुंज रही थी.. उसने जुककर की होलसे जांकके देखा.. सामने ही बेड दीखाइ दीया.. जीनपर धृव हाथके बल उचा होते जोरोसे अपनी मम्मीकी चुदाइ कर रहा था.. भावीकाने धीरेसे दरवाजेका हेन्डल घुमाया..

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दरवाजा खुल गया.. ओर भावीका दबे पांव अंदर चली गइ.. दोनो चुदाइमे इतने मसगुल थेकी अंधेरेकी वजहसे दोनोको पता ही नही चलाकी भावीका रुममे आ चुकी हे.. ओर भावीकाने हल्कीसी रोसनीमे स्वीच बोर्ड ढुंढ लीया.. ओर उसने अचानक लाइट ओन करदी..

मां बेटे दोनोही नंगे थे.. उनकी मम्मी धृवकी कमरपे पैरोकी आंटी लगाकर नीचे लेटी थी.. ओर धृव पुरा लंड उनकी चुतमे घुसाके हाथके बल चुदाइकी पोजीसनमे था.. दोनो गभरकार चुदाइ रोकदी.. ओर आंखे फाडते दरवाजेकी ओर देखने लगे.. तो सामने भावीका दोनोकी ओर गुस्सेसे देख रही थी..

भावीका : (बेडके पास आते गुस्सेसे) तो ये सब चल रहा हे.. धृव.. तु कीतना नीच आदमी हे.. अपनी मम्मीको भी नही छोडा..

धृव : (जटसे अपना लंड नीकालते खडा होगया ओर अपनी चडी ढुंढने लगा) भावु.. वो.. वो.. अ‍ैसा कुछ नही हे.. सोरी..

धृवकी मम्मी : (डरके मारे अपने उपर चदर खीचते) बेटा.. वो.. सोरी.. हम बहेक गये थे.. गलती होगइ.. पर क्या करती..? तेरे पापा तो घरपे रहेते ही नही हे.. तुतो जानती हे..

भावीका : (हाथ उठाते) बस.. मुजे कुछ नही सुनना.. आपको क्या लगता हे..? की मुजे तुम दोनोके बारेमे पता नही चलेगा..? आप काम वासनामे इतनी अंधी हो गइहो.. की मेरे घरसे नीकलते ही तुम दोनो क्या क्या करते हो मुजे नही पता..? कभी सोचा हे इस बारेमे पापाको पता चला तो क्या होगा..?

इतना सुनते ही धृवकी मम्मी चादर हटाते अ‍ेक जटकेसे बेडके नीचे आगइ.. ओर रोते हुअ‍े भावीकाके पैर पकडकर गीडगीडाने लगी.. जीसे देखकर धृवने भी डरके मारे भावीकाके पैर पकडलीये.. दोनो भुल गयेकी उनके उपर अभी भी कोइ वस्त्र नही हे.. भावीका पीछे हट गइ..

भावीका : (हटते) मम्मीजी आप क्या कर रही हो..? आप सास हे मेरी.. पहेले कपडे पहेनलो..

धृवकी मम्मी : (रोते) बेटा हमे माफ करदे.. उनको कुछ मत बताना.. वरना हम कहीके नही रहेगे.. मेरे पास मरनेके अलावा कोइ रास्ता नही होगा..

धृव : (गीडगीडाते) हां भावु.. हम सब बरबाद हो जायेगे.. ये घर बीखर जायेगा.. प्लीज.. तु जो कहेगी हम करेगे..

धृवकी मम्मी : (रोते) हां बेटी.. मेरा सबकुछ तुजे दे दुगी.. तु बोल.. क्या जाहीये तुजे..? पैसा.. गहेने..? मेरे सब गहेने तुजे दे दुगी.. बस.. उनको पता नही चलना चाहीये..

जैसे ही भावीकाने ये सुना.. उसे लगाकी अब मामला लंबा खीचनेकी जरुरत नही हे.. जीतनी जल्दी हो सके काम खतम करके यहासे नीकल जाना चाहीये.. क्युकी ये बहुत बडी पहोंच वाले लोग थे.. ओर भावीकाको भी अपनी जानको लेकर अ‍ेक डर महेसुस होरहा था.. तभी..
 
भावीका : (सामने देखते) ठीक हे.. पहेले दोनो अपने कपडे पहेन लीजीये..

धृवकी मम्मी : (फटाफट अपने कपडे पहेनते) हां बेटा बोल.. क्या चाहीये तुजे..

भावीका : (सामने देखते) मम्मीजी.. मुजे आपकी अ‍ेक फुटी कोडी भी नही चाहीये.. बस.. मे इस दलदलसे नीकलना चाहती हु.. मुजे धृवसे डीवोर्स चाहीये..

धृवकी मम्मी : (डरते सामने देखते) बेटी.. ये तु क्या बोल रही हे.. हमारी इजत मीटीमे मील जायेगी.. हम लोगोको क्या कहेगे..?

भावीका : (सख्तीसे) आपको ये सब करते लोगोका डर नही लगा..? अगर कोइ पुछे तो केह देना दोनो पती पत्नीके बीच जगडा होगया था.. ओर आपसमे नही बनती थी.. तो डीवोर्स होगया..

धृव : (अपनी पेन्ट पहेनते) तुम पागल होगइ हो क्या..? ओर पापाको..? उसे हम क्या कहेगे..?

भावीका : (गुस्सेसे देखते) तुजे अलगसे समजाना पडेगा..? सुना नही मेने क्या कहा..? ओर तेरे पापाको क्या कहेना हे ये तेरी प्रोबलेम हे.. मेरी नही.. ओर फीकर मत करो.. उनके आनेसे पहेले ही मे यहासे चली जाउगी..

धृव : (सामने देखते) भावु.. तु ये ठीक नही कर रही हे..

भावीका : (गुस्सेसे पेपर नीकालते) कमीने तुतो ना बोल तो ही अच्छा हे.. अभी नीचे क्या कहाथा तुजे.. की आइन्दा कोइ अ‍ैसी गलती कीतो सीधे डीवोर्स दे दुगी.. ओर अभी दो घंटा भी नही हुआ.. ओर अपनी माके साथ मुह काला करने लगा.. तेरी बहेनके साथ भी तेरा रीलेशन हेनां..?

धृवकी मम्मी : (थोडी सख्तीसे) भावीका.. क्या बकवास कर रही हे..?

भावीका : (फीकी मुस्कानसे) मम्मीजी आप नाही बोलो तो अच्छा हे.. ये सब आप भी जानती हेनां..? इसीलीये तो आपने अपने बेटेको अपनी जालमे फसाया हे.. जरा सोचो.. अगर उनके पतीको ये पता चला.. की दोनो बच्चे उनके नही हे.. तो पुजादीदीपे क्या बीतेगी..? इसीलीये कहेती हु.. इनको बोलो चुपचाप साइन करदे.. ताकी मे यहासे चली जाउ..

धृवकी मम्मी : (रोते गीडगीडाते) बेटी.. मेरी बेटीने क्या बीगाडा हे तेरा..? मत कर हम सबको बरबाद.. तेरे हाथ जोडती हु.. तु जो कहेगी करेगे हम.. धृव.. देख क्या रहा हे.. इसे साइन करदे..

धृव : (थोडा जीजकते) मम्मी.. वो.. वो पापा..

धृवकी मम्मी : (जोरोसे) कमीने उसे मे समजा दुगी.. पता नही कीस मनहुस घडीमे तु इसे ब्याह कर ले आया हे.. (भावीकाको) ओर क्या भरोसा करे की साइनके बाद तु अपना मुह बंध रखेगी..?

भावीका : (मुस्कुराते) मम्मीजी.. मे इस दुनीयामे अकेली हु.. मुजे भी मेरी जान प्यारी हे.. ओर मे आप सबको भी अच्छी तराह जानती हु.. इसीलीये मे मेरी जानकी खातीर मुह बंध रखुगी.. आपको मुजपे भरोसा करना ही होगा..

धृव : (सख्तीसे) अगर तुजे सब पता ही हेतो क्यु अपनी जान जोखीममे डाल रही हे..? अगर मेने साइन नही कीया तो..?

धृवकी मम्मी : (गुस्सेसे) हरामी.. क्यु इनके साथ बहेस कर रहा हे.. चुपचाप साइन करदे.. वरना बाप बेटे दोनोकी हेकडी नीकल जायेगी..

भावीका : (सामने देखते) रहेने दीजीये मम्मीजी.. इनको अपनी पोजीसनका बहुत पावर हेनां..? तो फीर ओर सबुत दीखाउ..? अ‍ेक महीने पहेले तुम दोनो तीन चार दीनके लीये कीसी रीस्तेदारसे मीलने गये थेनां..? पता हे वो रीस्तेदार कौन थी..? वो मेरी सहेली थी.. ओर हमारी सादीमे भी आइ थी.. अ‍ेबोर्सन करवाने गये थेनां दोनो..?

इतना सुनते ही धृवकी ओर उनकी मम्मीकी सीटीबीटी गुल हो गइ.. दोनो गभराते अ‍ेक दुसरेके मुहकी ओर आंखे फाडते देखने लगे.. धृवकी मम्मीको सब बाते समजमे आ गइकी की भावीका सबकुछ तैयारीया करके आइ हे.. अब उनके पास कोइ ओप्शन नही था.. तब..

धृवकी मम्मी : (अपना माथा पीटते) हे भगवान.. इस लडकीको सबकुछ पता हे.. कमीने तु जट साइन करदे..

भावीका : (मुस्कुराते) मम्मीजी.. अ‍ेक हप्ते पहेले आप ओर पापा इसी बातपे बहेस कर रहे थेनां..?

धृवकी मम्मी : (धृवको जोरोसे चीलाते) हरामी साइन करनां.. तुजे समजमे नही आता..?

कहा तो धृवने फटाफट साइन करदी.. ओर भावीकाने सब पेपर मुस्कुराते समेट लीया.. धृवकी मम्मी उसे आंखे फाडकर देखती रही.. जब साइन होगया तो भावीकाने दोनोको आस्वासन दीयाकी वो इस बारेमे कीसीको नही कहेगी.. ओर भावीका डीवोर्स पेपर लेकर फटाफट नीचे चली गइ..
 
धृवकी मम्मी ओर धृव अ‍ेक दुसरेकी ओर देखने लगे.. उनको अभी भी यकीन नही हो रहा थाकी दोनो चुदाइ करते पकडे गये.. ओर इतना कुछ हो गया.. दोनो नीरास होते बेडपे बैठ गये.. लेकीन धृवको अब भी भावीकाके उपर यकीन नही था.. ओर उसने अ‍ेक फैसला करलीया ओर अपना फोन उठाया.. फीर कीसीसे बात करने लगा.. ओर फोन रख दीया..

धृवकी मम्मी : (सामने देखते) कीसको फोन कीया..?

धृव : (सामने देखते) मोम.. अब ये हमारे लीये खतरा बन चुकी हे.. हम इनपे भरोसा नही कर सकते.. इनको अ‍ेक्सीडन्टमे..

धृवकी मम्मी : (धृवके गालपे अ‍ेक तमाचा मारते) हरामी.. तेरा बाप क्या कम था जो अब तुभी ये सब करने लगा.. तेरे बापसे तो तंग आ चुकी हु.. कमसे कम तुतो सुधरजा.. क्या तुने सुना नही उसने क्या कहा..? उसे भी अपनी जानकी परवा हे.. जब वोही डरती हे तो ये सब करनेकी क्या जरुरत हे..? उसे मना करदे.. उनको कुछ ना करे..

धृव : (सामने देखते) लेकीन मोम..

धृवकी मम्मी : (जोरोसे) अरे मना कर उसे.. तुमने सुना नही क्या..? (सांत लहेजेमे) बीटु.. मेने तेरे पापाको तो खो दीया हे.. मे तुजे खोना नही चाहती.. मेने तेरे साथ क्या क्या सपने सजाये हे.. तु कुछ मत कर.. मुजे ही कुछ सोचने दे.. कुछ अ‍ैसा.. जो साप भी ना मरे.. ओर लाठी भी टुट जाये..

धृव : (सामने देखते) मतलब..? मे कुछ समजा नही..

धृवकी मम्मी : (सामने देखते) धृव.. अ‍ेक बात बता.. तु मुजे ओर तेरी बहेनको कीतना प्यार करता हे..?

धृव : (सामने देखते) अपनी जानसे भी ज्यादा.. क्यु..?

धृव : (सामने देखते) क्या जींदगीभर मेरा साथ नीभा सकता हे..? मे ओर पुजा हम दोनो ही तुजे खुस रखेगी.. मुजसे सादी करेगा..?

धृव : (सामने देखते) येस मोम.. येतो पुजादी ओर आपके कहेने पे मेने सादी की.. वरना मे आप दोनोसे ही खुस था.. आइ प्रोमीस.. मे जीदगीभर आपका साथ नीभाउगा.. जब आप कहो मे आपसे सादी भी करलुगा.. ओर मेने आपको कइ बार कहा भी हे.. की मुजसे सादी करलो..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते गले लगते) बस.. मुजे तुमसे यही उमीद थी.. सुन.. हमने आज तक जो भी कुछ कीया उनका मुजे कोइ पछतावा नही हे.. ओर असली खतरा ये लडकी नही हे..

धृव : (आस्चर्यसे देखते) तो फीर कौन हे..?

धृवकी मम्मी : (आंखोमे देखते धीरेसे) तेरे पा..पा.. जीतना डर हमे तेरे पापाका हे इतना डर इस लडकीसे नही हे.. वो अ‍ेक डोक्टर हे.. अपनी जान जोखीममे नही डाल सकती.. देखा नही डीवोर्स पेपर पहेलेसे ही रेडी रखे थे.. वो खुद डरी हुइ हे.. अब इस लडकीको भुलजा.. हम दोनो अपनी अलग दुनीया बसायेगे..

धृव : (सामने देखते) मोम.. तो फीर क्या करे..?

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) हमे कोइ गलत कदम नही उठाना.. अब जो भी करुना हे.. मे करुगी.. तु बस.. देखता जा ओर मेरा साथ दे.. अगर सब सही हुआ.. तो आइ प्रोमीस.. हम दोनो जींदगी भर साथ रहेगे.. फीर मुजे ओर अ‍ेर्बोसन करजानेकी जरुरत भी नही पडेगी.. मे हमारे प्यारकी नीशानी इस दुनीयामे लाउगी..

धृव : (खुस होते बाहोमे भरते) मोम सच..? आइ लव यु..

धृवकी मम्मी : (होंठ चुमते) लव यु टु मेरी जान.. जा पहेले नीचे जाकर देखले.. वो क्या कर रही हे..?

धृव : (नीचेकी ओर जाते) मोम.. कल सुबह अ‍ेक हप्तेके लीये बोम्बे अपनी कोन्फरन्स ओर ट्रेनींगके लीये जाने वाली थी.. देखकर आता हु..

धृव दोडके नीचे जाता हे.. ओर अपने कमरेमे जाकर देखता हे.. अलमारी खुली थी.. भावीकाके सभी कपडे गायब थे.. उनके सभी पेपर गायब थे.. धृव समज गयाकी भावीकाने घर छोड दीया हे.. तभी उसे सीक्युरीटी गार्ड जो अ‍ेक बडी उमरका हे वो याद आगया.. वो जटसे वही चला गया..

धृव : (जटसे) दादा.. आपने भावीकाको देखा..? उनकी कार भी नही हे..

सीक्युरीटी : (थोडी परेसानीमे) बेटा क्या हुआ..? बहु रानी तो चली गइ.. कहेती थी बहारगांव जाना हे..

धृव : साथमे कोइ सामान था..?

सीक्युरीटी : (सामने देखते) हां बेटा.. दो बडे बडे सुटकेश थे.. मेने खुद अपने हाथोसे कारमे रखवाये.. आज कार भी उन्होने बहार रखी थी.. अंदर रखनेको कहा.. तो कहाकी अभी देर रात नीकलना हे..

धृव : (वापस आते) ठीक हे दादा.. आप ध्यान रखीये..

कहेते धृव वापस अपने रुममे चला गया.. इस बार सब अलमारी चेक करने लगा.. भावीकाका अ‍ेक भी सामान नही था.. वो धृवकी सभी गीफ्ट ओर उनके दीये गहेने भी वही छोडके गइ थी.. ससुरलाका अ‍ेक भी सामान नही लीया था.. तो धृव वापस अपनी मम्मीके पास चला गया..
 
धृवकी मम्मी : (सामने देखते) क्या हुआ..?

धृव : (बेडपे पास बैठते) मोम.. वो पेपर साइन होते ही अपना सब सामान लेकर घर छोडकर चली गइ.. हमारा दीया हुआ सामान छोड दीया.. गहेने भी..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) बडी खुदार लडकी हे.. ठीक हे.. भुलजा उसे.. ओर हां.. जीनको भी फोन कीया हे उसे कहेदे वो भावीकाके साथ कुछभी ना करे..

धृव : (सामने देखते) मोम.. अब क्या करे..? मतलब.. आपका नेक्स्ट प्लान..?

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) धृव.. अब जीतनी जल्दी हो सके हम दोनोका सामान दुसरी जगाह पे सीर्फट करदे.. अ‍ैसी जगह.. जहा हमे कोइ पहेचानते ना हो.. ओर पुजाके नजदीक भी हो.. मतलब अहेमदाबादके आस पास.. दुसरे सहेरमे.. तु समज गयानां..?

धृव : (सामने देखते धीरेसे) हां मोम.. हे अ‍ेक बंगलो.. पापाने अपने लीये खरीदा हे.. अहेमदाबाद ओर गांधीनगरके बीचमे.. अ‍ेक हाइप्रोफाइल सोसायटीमे.. जबभी पार्टीके कामके लीये गांधीनगर जाते थे तब वही रुकते हे..

धृवकी मम्मी : (आस्चर्यसे देखते) अच्छा.. उन्होने मुजे तो कभी नही बताया..?

धृव : (थोडा जीजकते) मोम.. पापाने अभी आपको बतानेके लीये मना कीया था.. वो.. वो अपनी पार्टी वर्करोके साथ वहा रुकते थे.. आप समज गइनां..?

धृवकी मम्मी : (अपने सरपे हाथ रखते) हे भगवान.. तुम दोनो बाप बेटे ना जाने कहा कहा अयासीया करते हो.. बस.. सीर्फ घरकी ओरत ही अच्छी नही लगती.. तुभी वहा गया हेनां..?

धृव : (मुस्कुराते धीरेसे) बस.. सीर्फ तीन चार बार ही.. पुजा दीदीको लेकर.. हें..हें..हें..

धृवकी मम्मी : (कातील मुस्कानसे) चलो.. कमसे कम मेरे सामने सच तो बोला.. अ‍ेक टाइम था.. जब वो मेरे चाचा थे.. हमारी सादी भी नही हुइ थी.. मे हाइस्कुलमे पढती थी.. तब मेरे चाचाने मेरी खुब चुदाइ की हे.. हम दोनोने छुप छुपकर तेरी तराह खुब खेल खेला हे.. ओर मुजे पेटसे करदी.. बस.. हम दोनो वहासे भागकर इधर आगये.. ओर सादी करली..

धृव : (मुस्कुराते) पुजादी वोही हेनां.. बीन ब्याह की बच्ची.. हें..हें..हें..

धृवकी मम्मी : (जोरोसे हसते) कमीने उनके सामने मत बोलना.. वरना तुजे नोच खायेगी.. हें..हें..हें.. फीर तो यहा आगये.. हम दोनो बीना डर दीन रात लगे रहेते.. कभी कभी दीनमे ही दो दो तीन तीन बार हो जाता.. तेरा बाप बहुत हवसी हे.. फीर तु आया.. बस.. तबसे मे भी हवसी होगइ हु..

धृव : (मुस्कुराते) वोतो आप अबभी हो.. हें..हें..हें.. हर दीन ओर रातमे अब भी आपको चाहीये..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) हां.. मे चुदकर होगइ हु.. तो क्या करती..? तेरे बापने आदत जो डालदी हे.. फीर तो पार्टी जोइन करली.. ओर उनको मुजमे इन्ट्रेस कम होता गया.. कम होगा भी क्यु नही..? क्युकी उनको पार्टीकी नइ नइ वर्कर जो मीलती गइ.. वो भी बेचारी क्या करती..? अपने पदोन्तीके लीये तेरे बापके नीचे लेटनेको मजबुर होगी.. ओर मे घरपे अकेली तडपती रहे गइ.. फीर अ‍ेक दीन तेरी ओर पुजाकी चुदाइ देखली..

धृव : (मुस्कुराते) अच्छा.. इसीलीये उसी रात मेरे पास आइ थी..

धृवकी मम्मी : (मुस्कुराते) नही.. फीर तो आये दीन तुम दोनोकी रासलीला देखने आजाती.. मुजे तेरा हथीयार बहुत पसंद आ गया.. बडा ओर दमदार.. ओर मेरी कामवासना फीरसे तुम दोनोने भडकादी.. अ‍ेक दीन पुजा उल्टीया कर रही थी.. ओर मेने उनसे सब सचाइ उगलवाली.. ओर उनको सादीके लीये मना लीया.. ताकी मेरा रास्ता साफ हो जाये..

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धृव : (मुस्कुराते) मोम.. आपने क्या रास्ता नीकाला हे.. लाठी भी ना टुटी.. ओर साप भी मर गया.. पुजा आज भी मेरी हे.. ओर अब तो आप भी मुजे मील गइ.. तो अब..?

धृवकी मम्मी : (कातील मुस्कानसे) धृव.. तुम जीतनी जल्दी हो सके हम दोनोका पुरा सामान वहा पहोचा दे.. हमे जीतनी जल्दी हो सके ये घर.. ये सहेर छोडना हे..

धृव : (सामने देखते) तो फीर पापा..?

धृवकी मम्मी : (रहस्य मुस्कुानसे) बेटा.. हर कर्मोका नतीजा होता हे.. इनका भी इलाज ढुंढलीया हे मेने.. बस.. तु देखता जा.. उनको अपना पद.. पोजीसन.. अपनी इजत बहुत प्यारी हे.. जैसा मे कहु करता जा..

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दोनो बाते करते फीरसे अ‍ेक होगये.. फीर नंगे ही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे सोगये.. अब तो उसे भावीकाका डर भी नही था.. इसी दौरान भावीका अपना सभी सामान लेकर देर रात ही लखनके घर आगइ.. सृती ओर लखन अपनी चुदाइके बाद भावीकाका ही इन्तजार कर रहे थे..

दुसरे दीन वहेली सुबह लखन पुनमको छोडने गांव चला गया.. पुनमने ज्यादातर अपना सामान लेलीया था.. क्युकी अब वो कभी कभार ही इस बंगलोपे आने वाली थी.. तो साथमे सृती ओर भावीका भी साथ जा रही थी.. भावीकाने अपनी कार लखनके बंगलोपे ही छोडदी.. ओर कुछ दीनके लीये अपने कपडे साथ लेलीये..

क्युकी पुनमसे लखन सृती ओर भावीका पुरी कहानी जान चुके थे.. ओर प्लानके हीसाबसे कुछ दीन भावीकाको गांवमे लखनकी हवेलीपे रहेना था.. उनहोने अपनी अ‍ेफडी की रसीदे बेन्कमे जमा करवा दीथी.. ओर कुछ रकम अपने खातोमे छोडकर फीरसे अपने नाम अ‍ेफडी करवाली..
 
तो गांवमे भी मंजु अब काफी दुबली ओर कमजोर होगइ थी.. तो लखन पुनम सृती ओर भावीकाको देखकर ही मंजु खुस होगइ.. मंजुने भावीकाको जोरोसे गले लगा लीया.. फीर सृती लखन ओर पुनमसे भी गले मीली.. फीर पुनमके हाथसे बच्चीको लेली.. ओर सब अंदर चले गये..

फीर लखन पुनम सृती सब नीर्मलाके पांव छुने लगे.. तो सृतीको देखते ही उनकी आंख गीली होगइ.. क्युकी वो अभी तक भुमीकाको नही भुली थी.. नीर्मला अब पहेलेसे ज्यादा देवायतका खयाल रखने लगी थी.. ओर मंजु भी अपनी मांका बरोबर खयाल रखती..

कमसे कम हप्तेमे दो बार वो देवायतको उनके कमरेमे भेज देती.. अब तो हवेलीमे भी सबको पता था.. ओर ये सब आम बात हो चुकी थी.. लता दया मंजु हमेसा अ‍ेक ही कमरेमे देवायतके साथ सोती.. आज फीर लखनको देखकर लता थोडी वीचलीत होगइ..

ओर वो लखनके सामने ही देखती रही.. सबलोग होलमे आकर बैठ गये.. भावीका सबकुछ देखती ही रही.. उनको यहा आकर बहुत अच्छा लग रहा था.. जैसे वो उनकी फेमीलीके बीच आइ हो.. लखन मंजुसे सटकर बैठ गया.. ओर उनके कंधेपे सर रख दीया.. तो मंजु मुस्कुराते लखनके सरको सहेलाने लगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) भावीका.. मुजे सब पता हे.. बस.. तु इसे अपना ही घर समज..

लखन : (हसते) क्या मोम.. आप तो अभीसे प्रोपर्टी बांटने लगी.. देखना ये हमेसाके लीये इधर ही ना रहे जाये..

मंजुला : (सबलोग जोरोसे हसने लगे तो मंजुने हसते हुअ‍े अ‍ेक मुका मारदीया) चुप कर बदमास.. हें..हें..हें.. अगर ये हमेसाके लीये इधर रेह जाये.. तो भी मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

सृती : (मुस्कुराते) मोम.. ये सबकुछ खतम करके आइ हे..

मंजुला : (सहेजतासे) अरे बच्ची तुम चीन्ता मत कर.. मुजे सब पता हे.. पहेले इनको कुछ खीला पीला.. फीर हमारी हवेली दीखा.. बादमे हम आरामसे बैठकर बाते करेगे..

फीर सृती ओर पुनमने मीलकर भावीकाको पुरी हवेली दीखाइ.. जीसे देखकर भावीका बहुत ही प्रभावीत होगइ.. मंजु पुनमकी बच्चीके साथ खेलने लगी.. तब लखन फोनपे कुछ टाइप करने लगा.. ओर कुछ ही देरमे रीप्लाय आगया तो लखन खुसीसे मुस्कुराने लगा.. फीर वो खेतोकी ओर चला गया..

देवायत अपनी ओफीसमे था.. ओर भानु बहार खटीया पे बैठकर बीडी पी रहा था.. लखनको देखते ही खुस होगया.. ओर उनको गले मीला.. देवायत भी फोनपे सौदे कर रहा था.. तो लखनकी आवाज सुनक वो भी बहार आगया.. लखनने उनके पांव छुअ‍े.. ओर दोनो गले मील गये..

देवायत : (मुस्कुराते) कैसा हे लखन..?

लखन : (भावुक होते) भाइ.. मे ठीक हु.. लेकीन आप कुछ ठीक नही लगते..

भानु : (चीन्तासे देखते) भाइ.. अब आप ही इनको समजाओ.. सारा दीन मंजु भाभीको लेकर आंसु बहाते रहेते हे..

लखन : (आंख गीली करते मुस्कुराते) भाइ.. क्यु चीन्ता करते हो.. इसीलीयेनां मोमने सबको बता दीया हे.. सोचो.. अगर हमे कुछ मालुम ही ना होता तो..? ओर वो वापस भीतो आ रही हे..

देवायत : (उनके कंधेपे सर रखते रोते) ल..ख..न.. मे उनको बहुत प्यार करता हु.. उनके बीना नही जी पाउगा..

लखन : (आंसु पोछते) भाइ.. हीमंत रखो.. अगर आप ही टुट जाओगे तो फीर मेरी बाकी भाभीओ.. ओर हम सबका क्या होगा..? ओर मोमने तो आंसु बहानेके लीये भी मना कीया हे..

देवायत : (आंसु पोछते मुस्कुराते) उनके सामने नही बहाता.. बस.. तुजे देखा तो अपने आपको रोक नही सका.. भानु.. वो मालती या रेणुको चाइका बोलदे.. मुजे लखनसे कुछ काम हे.. लखन.. चल अंदर..

फीर दोनो अंदर चले जाते हे.. पर्सनल बात थी तो भानु बहार ही रहेता हे.. अंदर ओफीसमे जाकर देवायत अलमारीसे दो तीन फाइल नीकालता हे.. ओर लखनके सामने रखता हे.. लखन बीना छुअ‍े देवायतकी ओर देखता रहा.. तो देवायतने अ‍ेक फाइल लखनके सामने खोलके रखदी..

लखन : (सामने देखते) भाइ.. क्या हे ये सब..? मुजे क्गु दीखा रहे हो..?

देवायत : (मुस्कुराते) चीन्ता मत कर.. तुजे सीर्फ दीखा रहा हु.. क्युकी मुजे मंजुने तुजे दीखानेके लीये कहा हे..

फीर देवायत अ‍ेक के बाद अ‍ेक फाइल दीखाता हे.. अ‍ेकमे बहुत सारी अ‍ेफडीकी रसीदे ओर सभी प्रोर्पर्टीके दस्तावेज थे.. तो अ‍ेक फाइलमे सहेरकी कइ बडी बडी नामी कंपनीओकी सुची थी.. जीनमे ये साइलन्ट पार्टनर थे.. ओर अ‍ेक फाइलमे कइ सामाजीक संस्था स्कुल कोलेज ओर होस्पीटलकी वो सुची थी.. जीनमे उनका बहुत बडा योगदान था.. ओर उनमे ट्रस्टी थे..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. मोमने कहा था.. तो समजो मेने देख लीया.. ये सबकुछ आप ही सम्हालीये.. कुछ दीनके बाद मेभी यहा आजाउगा.. फीर तो सहेर गांव आना जाना हमेसा लगा रहेगा.. जैसा आप कहोगे मे सहेरका वहीवटका पुरा काम सम्हाल लुगा.. मुजे ये कुछ भी नही देखना..

देवायत : (मुस्कुराते) मुजे पता था तु यही कहेगा.. लेकीन बेटा.. ये सब तुजे धीरे धीरे देखना ओर सीखना पडेगा..

लखन : (सामने देखते) भाइ.. वो हमारे खेतोके पीछे गडा कीया था.. हमने सीकायत कीथी.. क्या हुआ उनका..?

देवायत : (मुस्कुराते) वोतो अ‍ेक हप्तेके बाद ही मील गये थे.. मार मारके चमडी उखाडदी कमीनोकी.. अभी सब जेलमे हे.. लेकीन कीसने भेजा हे नाम नही बताया..

लखन : लेकीन वो लोग आये क्यु थे..? इतना बडा गडा खोदा..

देवायत : वहीसे सुरंग बनाने वाले थे.. वोही पुरानी बात.. सब खजाना ढुंढनेके लीये..

फीर लखन ओर देवायत बीजनेसकी बाते करते रहे.. तबतक मालती भी चाइ लेकर आइ.. ओर भानु भी अंदर आगया.. तो चाइ देते मालती लखनको बातोसे छेडने लगी.. लखन भी मालतीको कइ बार चोद चुका था.. फीर लखन ओर भानु उनका नया मकान देखने चले जाते हे.. तो मकान काफी कंपलीट हो चुका था..

तो इधर सहेरमे भी धृव अपने कुछ अंगत दोस्तोको बुलाकर सामान पेक करवाता हे.. ओर साम तक सब ट्रकमे लोड करके अपने गांधीनगर वाले बंगलेपे भेज देता हे.. तबतक उनकी मम्मी दुसरी तैयारीया करती हे.. धृवको नही पता थाकी उनकी मम्मी कीतना खतरनाक खेल खेल रही हे....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९४

तो इधर सहेरमे भी धृव अपने कुछ अंगत दोस्तोको बुलाकर सामान पेक करवाता हे.. ओर साम तक सब ट्रकमे लोड करके अपने गांधीनगर वाले बंगलेपे भेज देता हे.. तबतक उनकी मम्मी दुसरी तैयारीया करती हे.. धृवको नही पता थाकी उनकी मम्मी कीतना खतरनाक खेल खेल रही हे.... अब आगे

तो इधर गांवमे दो पहेरके खानेके बाद पुनम सृती लता ओर भावीका.. सब रश्मीके घर चले जाते हे.. वहा पुनम भावीकाको रश्मी ओर वंदनाका परीचय उनकी भाभीके रुपमे करवाती हे.. तो वंदना भी फोन करके चारु ओर नीशाको अपने घर बुला लेती हे.. आज साथमे वसुधा नही आइ..

क्युकी सुबह ही वोट्सअ‍ेप चेटके माध्यमसे लखनसे बात होगइ थी.. आज वसुधाकी दीलकी धडकन असामान्य थी.. क्युकी पीछले कइ दीनोसे वो ओर लखन चेटपे बाते करते काफी आगे बढ चुके थे.. ओर बात भावनात्मक अतरंग तक पहोंच गइ थी.. चेटके साथ दील वाला ओर कीस वाला इमोजी भेज रहे थे..

आज सुबह लखनका मेसेज आया तब ही वसुधाने उनको मीलनेके लीये घरपे अकेला बुलाया.. उन्होने अब लखनके साथ आगे बढनेका फैसला करलीया था.. उनको लखनसे मीलनेका मतलब भी पता था.. वो बीना सादी ही लखनके साथ सादीसुधा ओरतकी तराह जींदगीका हर मजा लेना चाहती थी.. ओर अच्छी कीस्मतसे आज चारु ओर नीशा भी रश्मीके घरपे चली गइ थी..

खानेके बाद वसुधा अपने आपको सवारने लगी.. उसने हल्कासा मेक अप करलीया.. क्युकी चेटपे इतनी बातोके बाद आज दोनो पहेली बार अकेले मील रहे थे.. बहार दरवाजेपे दस्तक हुइ.. वसुधाका दील तेजीसे धडकने लगा.. उनके चहेरेपे लजा छा गइ.. ओर गाल लाल होगये..

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अपने आपको सही करते जटसे दरवाजा खोलने चली गइ.. जैसे ही दरवाजा खोला सामने लखन मुस्कुराते खडा था.. वसुधा सरमके मारे पानी पानी होगइ.. ओर मुस्कुराते अ‍ेक तरफ हट गइ.. तो लखन धीरेसे अंदर चला गया.. ओर वसुधाने दरवाजा बंध करके लोक करदीया..

वसुधा कुछ समजे इनसे पहेले ही लखनने उसे गोदमे उठालीया.. तो वो सरमाकर हसते लखनकी गरदनमे हाथ डाल देती हे.. जैसे ही दोनो होलमे आगये.. ओर लखनने वसुधाको नीचे उतारा वो जोरोसे लखनकी बाहोमे समा गइ.. उनके दोनो उरोज कठोर हो गये.. ओर चुत पानी छोडने लगी..

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लखन उनकी आंखोमे देखता रहा.. तो वसुधा लजा गइ.. ओर सरमसे आंख जुकाली.. वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी.. तभी लखनने उनके होठोपे होठ रख दीये.. तो वसुधाके तनसे अ‍ेक बीजलीसी लहेर दौड गइ.. उन्होने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. फीर होंठ छुडाके लखनकी आंखोमे देखा..

दोनो अ‍ेक दुसरेको देखते रहे.. फीर अचानक दोनोने फीरसे होंठ मीला दीये.. ओर चुंबन बहुत ही अंतरंग होने लगा.. लखनने उनके संतरे जैसे बुब्सको थाम लीया.. वसुधा कांप उठी.. ओर उसने वापस जोरोसे लखनको बाहोमे भीच लीया.. तभी लखन उसे गोदमे उठाकर बेडरुममे लेगया.. ओर वसुधाको बेडपे लीटा दीया..

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वसुधा : (सरमके मारे धीरेसे) लखन.. आज नही प्लीज.. मे इसे यादगार बनाना चाहती हु..

लखन : (जानते भी आनजान बनते) कीसे..? कीसे यादगार बनाना चाहती हे..?

वसुभा : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) मजाक मत करो.. आपको सब पता हे..

लखन : (मुस्कुराते) नही.. सचमे नही पता.. बतादो.. फोनपे तो हमे बहुत बाते कीहे.. तब तो नही सरमाइ..

वसुधा : (मुस्कुराते नजरे चुराते धीरेसे) वो.. ओरत होनेके बाद ये मेरा पहेला मीलन हे.. मे हमारे पहेले मीलनको हमारी सुहागरातकी तराह मनाना चाहती हु.. क्युकी आपको भी पता हे मेरा आपसे तो क्या कीसीसे भी सादी करनेका इरादा नही हे..

लखन : (मुस्कुराते पास लेटते) पता हे मुजे.. अगर कीसी ओरसे सादी करनेके बारेमे सोचा भी तो तुजे मार डालुगा मे.. अब तुम सीर्फ मेरी हो.. सीर्फ मेरी अमानत.. ओर आज इस कामके लीये मेरे पास समय भी नही हे.. क्युकी इसके लीये कमकसे कम हमे चार पांच घंटे चाहीये.. ओर आपका पहेली बार हेनां..? तो हालत भी बीगड जायेगी..

वसुधा : (सरमाकर नजरे जुकाते) बस.. मे आपको मीलना चाहती थी.. क्युकी मे आपको अंधेरेमे रखना नही चाहती.. इसीलीये मे मेरे बारेमे आपको कुछ बताना चाहती हु.. आपको पता हे मे कोन हु..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. आपको पुरी तराह जानता हु.. आप भैयाके दोस्त डो. सुधीर हेनां..?

वसुधा : (आस्चर्यसे अ‍ेक नजरसे देखते) क्या..? आपको मेरी सचाइके बारेमे पता हे..? कैसे..?

लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? आपको मंजु मोम.. ओर पुनोके बारेमे नही पता..? मत भुलो पुनो अब मेरी बीवी हे..

वसुधा : (मुस्कुराते) ओह.. मेतो भुल ही गइ थी.. लखन.. आपको मेरा ये रुप कैसा लगा..?

लखन : (होंठ चुमते) सच कहु..? आप वाकइ बहुत खुबसुरत लग रही हो.. अ‍ेक अप्सरा.. लेकीन अ‍ेक बात पुछु..?

वसुधा : (सरमाकर मुस्कुराते) क्या आपको लगता हे हमारी चेटपे इतनी बातचीतके बावजुद आपको कोइ ओर परमीशन लेनेकी जरुरत हे..? पुछो..

लखन : (मुस्कुराते) जब हम बाते कर रहेथे तब आपको सायद नही पता होगाकी मे आपके बारेमे सबकुछ जानता था.. फीर भी मेने हमेसा वसुधासे ही बात कीहे.. बस.. यही पुछना चाहता था.. क्या आपको सचमे अ‍ेक लडकी की फीलींग आती हे..?

वसुधा : (मुस्कुराते) लखन.. सच बात बताउ..? जब मे सुधीर था तब भी मुजे अ‍ेक लडकी की फीलींग्स ही आती थी.. मुजे कभी लडकेकी फीलींन्स नही आइ.. इसीलीये तो मेने जेन्डर चेन्ज करवाया.. ताकी मे पुर्ण लडकी बनकर रेह सकु..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा.. इसीलीये आपने मुनाको चुना था.. आप सुधीर थे तब दोनोका अफैर थानां..?

वसुधा : (मुस्कुराते) ओह.. मुना..? बस.. मेरी कुछ गलत आदतोकी वजहसे उन्होने मेरी भावनाओका खुब खयाल रखा.. लेकीन मुनासे कभी प्यार नही था.. बस.. मेरी जरुरतोको पुरा करता था.. अबतो उनकी भी दो दो सादीया होगइ हे.. ओर मे नही चाहती उनके सुखी संसारपे कोइ आंच आये.. अभी तक उसे पता भी नही हेकी मेही वो सुधीर हु.. बल्की हम घरके लोगोके अलावा गांवमे कीसीको नही पता.. ओर आप कीसीको बताइअ‍ेगा भी नही.. प्लीज..
 
लखन : (मुस्कुराते) तो फीर आपका क्रस कौन था.. अगर लडकीकी फीलींग्स आती थी तो कोइ तो होगा..

वसुधा : (सरमाकर मुस्कुराते) सच कहु..? जब हम सब कोलेजमे पढते थे.. तब सीर्फ ओर सीर्फ आपके भाइ देवु.. अ‍ेक वोही था जो मेरी रक्षा करता था.. अ‍ेक वोही हे उन्होने मेरा कभी गलत फायदा नही उठाया.. बाकी सबके सब भेडीये ही हे..

लखन : (मुस्कुराते) लेकीन अब तो आप वसुधा होगइ हे.. अबतो अपनी फीलींग्सके बारेमे उसे बता देना चाहीये.. क्या पता वो चारुभाभी ओर नीशाभाभीकी तराह आपसे भी सादी करले..

वसुधा : (मुस्कुराते) पहेली बात.. मुजे आपके खानदानके बारेमे मुजे सबकुछ पता हे..

लखन : (मुस्कुराते) मतलब..?

वसुधा : (सरमाकर मुस्कुराते) मतलब मंजुदी भी हमारे साथ पढती थी.. वो भी मेरी सबसे अच्छी दोस्त हे.. उन्होने मुजे बहुत कुछ बाते बताइ हे.. जैसे की आपके खानदानमे कीतनी भी बीवीया करलो.. या फीर कीतना भी अफैर करो.. कोइ पुछने वाला या कुछ कहेने वाला नही.. मंजु दीदीने आपको कुछ छुट दीहेनां..? मुजे इस बारेमे भी सब पता हे.. की क्यु दी हे.. अ‍ेक दीन सबको आपके पास आना हे.. तो फीर मे डायरेक्ट ही आपके पास क्यु ना आउ..?

लखन : (सामने देखते) बहुत दुरकी सोचती हो.. क्या ये बात चारु भाभी ओर नीशा भाभी भी जानती हे..?

वसुधा : (मुस्कुराते) हां.. देवुकी सभी बीवीया.. क्युकी मंजुदीदीने उनकी सभी सौतनोको इस बारेमे पहेले ही सबकुछ बता दीया हे.. मुजे भी.. इसीलीये तो उस दीन चारु आपकी गोदमे बीना जीजक बैठ गइ थी.. वो दोनो जानती हेकी अब आप उनकी जींदगीमे आने वाले हो.. ओर दोनो इसके लीये मानसीक तैरपे तैयार भी हे..

लखन : (मुस्कुराते) ओर आप..?

वसुधा : (सरमाकर मुस्कुराते) सच कहु तो आप मुजे बहुत अच्छे लगते हो.. मंजुदीने कहा हे सीर्फ आप ही अ‍ेक सख्स हो जो मुजे पुरी लाइफ सम्हाल सकते हो.. ओर जबसे आपके बारेमे जाना तबसे मे सचमे आपसे प्यार करने लगी हु.. ओर मे चाहती हुकी ओरत होनेके बाद सीर्फ आपसे रीलेशन रखु..

लखन : (मुस्कुराते) तो क्या फ्युचरमे सादी करनेका इरादा नही हे..? अपने हसबन्डसे ही सब करवाती..

वसुधा : (नजरे जुकाते धीरेसे) लखन.. सीर्फ आपको बता रही हु.. मे सादी नही करुगी.. बस.. मेरी लाइफमे सीर्फ आप ही अकेले पुरुष होगे.. मुजे आपसे ही सब कुछ चाहीये..

लखन : (सामने देखते) सबकुछ मतलब..? खुलकर बतादो..

वसुधा : (सरमाकर नजर जुकाते धीरेसे) सबकुछ म..त..ल..ब.. अगर भवीस्यमे कभी जरुरत महेसुस हुइ तो आपसे बच्चा भी.. क्युकी मे अ‍ेक पुर्ण ओरत हु.. ओर मे सीर्फ आपके साथ ही रीलेशन रखना चाहती हु.. ल..ख..न.. आइ लव यु..

लखन : (बाहोमे भीचते) वसुधा.. आइ लव यु टु.. मे तुजे कभी नीरास नही करुगा..

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दोनो बाते करते अ‍ेक दुसरेको प्यार करने लगे.. वसुधा कइ दिनोसे अ‍ैसे प्यारसे वंचीत थी.. तो दोनो इतने बहेक गयेकी दोनोके उपरसे अ‍ेक अ‍ेक वस्त्र हटते गये.. लखनने वसुधाको पुरी नंगी करदी.. ओर उनके तनको देखने लगा.. वसुधा अ‍ेक काचकी पुतलीकी तराह चमक रही थी.. बहुत ही गोरी..

उनके सीनेपे संतरे जैसे मुलायम बुब्स होगये थे.. उनकी चुत भी अ‍ेक कमसीन लडकी की तराह गुलाबी कसी हुइ थी.. लखन उनको देखता ही रहा.. तब वसुधा सरमसे पानी पानी होगइ.. उसने अपने हाथोसे चुतको ढक लीया.. ओर लखनने उसे सहेलाते वहा मुह लगा दीया.. वसुधा बेडपे छटपटाने लगी..

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फीर वो भी लखनके लंडको देखकर दंग रेह गइ.. फीर दोनोने अ‍ेक दुसरेके पार्टके साथ खेलने लगे.. वसुधाने लखनको बल्यु जोब दीया.. तो लखनने भी उनका पानी नीकालकर वसुधाको संतुस्ट कीया.. फीर दोनोने साथमे सावर लीया ओर कपडे पहेनकर कंपलीट होगये.. ओर बहार आतेही दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये..

वसुधा : (सरमाते धीरेसे) लखन.. बस.. अ‍ैसे ही मीलने आया करो.. आजसे वसुधा आपकी होगइ.. कुछ ही दिनोमे मे आपके सहेरमे आ रही हु.. दो दीन कोन्फरन्स हे.. आपको होटेलका अ‍ेड्रेस ओर कमरा नंबर भेज दुगी.. सीर्फ हम दोनो.. बस.. उसी दिन हम दोनोका मीलन होगा.. प्लीज.. इस बारेमे कीसी ओरको पता ना चले..

लखन : (मुस्कुराते) लेकीन मंज ुमोम.. ओर पुनोको तो सब पता चल जाता हे..

वसुधा : (सरमाकर मुस्कुराते) मुजे पता हे उन दोनोने आपको पुरी छुट दे रखी हे.. आपकी मंजुमोमसे मेरी बात हो चुकी हे.. आपको पता हेनां हम सब साथमे पढते थे.. कीसीसे मेरा मतलब बहार वालाको.. नीशा ओर चारुभाभीने मेरा खुब साथ नीभाया हे.. उन दोनोसे मे कोइ बात नही छुपाती.. दोनोको हमारे बारेमे पता हे..

फीर ओर कुछ बाते करके लखन वहासे चला गया.. इसी बीच रश्मीके घरपे सबको पता चलाकी अब भावीका यही होस्पीटलमे सेवाके लीये आ रही हे.. तो सुनकर चारु रश्मी बहुत खुस होगये.. सभी लेडीस स्कुल होस्पीटल ओर गांवके विकासकी नइ प्लानींगके बारेमे बाते करने लगी..

क्युकी अब आने वाले दीनोमे यही सब लेडीस गांवको सम्हालने वाली थी.. चारुने भी गांवका खुब वीकास करदीया था.. गलीमे पकी सडके.. पानीकी बडी टंकी.. गांवमे हर घरमे पानीका नल.. वो सबकुछ.. जो अ‍ेक आदर्श गांवके लीये जरुरत हो.. फीर पुनम सबको लेकर हवेलीपे आगइ..

खानेकी तैयारीया हो रही थी.. सब लेडीस पुनमके कमरेमे बैठकर गप्पे लगा रही थी.. मंजुला नीर्मला होलमे पुनमकी बच्चीके साथ खेल रही थी.. ओर लखन मंजुकी कोदमे सर रखकर लेटा हुआ था.. मंजुको पता थाकी लखन उनसे कुछ बात करना चाहता हे.. लेकीन सबकी हाजरीकी वजहसे थोडा जीजक रहा था..

मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु.. चल थोडा बहार घुकर आते हे.. काफी दीन हो गया मे बहार नही गइ.. तबतक खाना भी बन जायेगा.. ओर हमारी बात भी हो जायेगी..

लखन : (खुसीसे जटसे उठते) येस मोम.. चलीये.. आप चल सकोगी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) अरे हां चल.. मे चल सकती हु.. (जैसे ही दोनो बहार नीकले) हां बीटु.. बोल.. क्या कहेना चाहता हे तु..?

लखन : (मुस्कुराते साथ चलते) मोम.. आपको पता चल गयानां..? बस.. आपसे कुछ बात डीसकस करनी थी.. सोचा नीर्णय लेनेसे पहेले अ‍ेक बार आपसे बात करलु..

मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु मुजे पता हे तुम कीस बोमे बात करना चाहता हे.. हमे तुमपे ओर पुनोपे पुरा भरोसा हे.. की तुम दोनो जो भी नीर्णय लोगे उचीत ही होगा.. फीर भी बोल..
 
लखन : (मुस्कुराते) मोम.. मे देख रहा हु.. जबसे रजु यहासे वापस आइ हे.. तबसे कुछ उखडी उखडी दीख रही हे.. अ‍ैसा लगता हे वो सीर्फ पत्नी धर्म नीभा रही हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) सही कहा तुमने.. पुनोने तुजे सब कुछ बता तो दीया.. बीटु.. वो कोइ उखडी हुइ नही हे.. बात तबकी हे जब मेरी देवुसे सादी भी नही हुइ थी.. तब वो ओर दया पहेसे ही रीलेशनमे थे.. सादीसे पहेले दोनोने कुछ वादे कीये थे.. तब अपने तनकी जरुरतोको देवुसे पुरी करती थी.. मेरी देवुसे सादीके बाद भी.. दोनोको पता नही थाकी दोनोकी सादी इसी खानदानमे हो जायेगी..

लखन : (मुस्कुराते) तब आपके पास ये शक्तिया नही थी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) थी.. लेकीन तब उनका अहेसास नही था.. फीर ये सब बाबाकी कृपासे हुआ.. जब मेने ये बात जानली तभी तो दोनोकी सादी तुम दोनो भाइसे करवाइ.. लेकीन अब सादी होगइ हे तो दोनो अपने वादोको लेकर असमजमे हे.. की अब वादेका क्या करे.. ओर रजु इधर आइ थस तब दयाने उसे अपने वादेके बारेमे याद दीलाया.. इसीलीये रजु उखडी उखडी रहेती हे.. बाकी सब तु जानता हे.. बोल क्या नीर्णय लेना चाहते हो..?

लखन : (मुस्कुरमते) मोम.. सबकुछ नही.. पुनोने कुछ बाते ही बताइ.. हम दयाभाभी ओर रजुकी भावनाओका खयाल रखेगे.. लेकीन हम उसे युही नही छोड सकते.. क्युकी वो हमारी बहेने भी हे ओर पत्नीया भी.. हम कुछ अ‍ैसा करेगे उनके नीर्णयका सन्मान भी हो.. ओर हमारी नजरोके सामने भी हो..

मंजुला : (खुस होते मुस्कुराते) गुड.. क्या करोगे तुम..?

लखन : (मुस्कुराते) मोम.. उनके बच्चे होगे.. वोभी तो हमारी जीम्वेवारी होगी.. तो मे चाहता हु.. उनके पास इतना पर्याप्त पैसा हो.. जो दोनो अपने बच्चोके साथ सामान्य जीवन जी सके.. ओर बच्चोको पढा सके.. उन दोनोको कही काम करनेकी जरुरत ना पडे.. क्या कहेती हो..?

मंजुला : (मुस्कुराते) तु बीलकुल देवुकी तराह सोचता हे.. अच्छा नीर्णय हे तेरा.. तो फीर क्या करेगा..?

लखन : (मुस्कुराते) मोम.. मे चाहता हु दोनोको रहेनेके लीये वो राधु वाला घर देदु.. अगर दोनो राधुके साथ होस्टेल सम्हालले तोभी कोइ अ‍ेतराज नही.. दोनोकी इच्छा भी पुरी होजायेगी ओर हमारे नजरके सामने भी रहेगी.. ओर हमारी सादीभी बरकरार रहेगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) तु वाकइ परीपकव ओर जीम्वेवार हो गया हे.. क्या तुमने इस बारेमे राधुसे बात करली..?

लखन : (मुस्कुराते) मोम.. वो मेरी बीवी हे.. फीर भी उनको अ‍ेक बार पुछ लुगा.. वो मेरी बात कभी नही टालती.. मुजसे बहुत प्यार करती हे..

मंजुला : बेटा.. उन दोनोको अ‍ैसे ही मत छोड देना.. कभी कभी उनको भी तुम्हारी जरुरत होगी.. तब अपना फर्ज नीभाने चले जाना.. तु समज गयानां..?

लखन : (सामने देखते) दोनोको..? मतलब..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां दोनोको.. कमीने तुजे अ‍ैसे ही अयासीके लीये जडीबुटी नही दीहे.. अब देवुकी सभी बीवीओको तुजे ही सम्हालना पडेगा..

लखन : (सरमाते धीरेसे) यस मोम.. पता हे मुजे.. ना जाने आपने ओर पुनोने कैसी जीम्वेवारी दीहे मुजे..

मंजुला : (मुस्कुराते) क्या अब चंदा दीदी खुस हे..? सब ठीक हो गयानां..?

लखन : (सरमाते धीरेसे) यस मोम.. बहुत खुस.. अब वो कंपलीट होगइ हे.. उन्होने धीरेनको भी माफ करदीया.. हम दोनो साथमे उनके घरपे गये थे..

मंजुला : (रुकते सामने देखते धीरेसे) लखन.. चल वापस.. ओर ध्यानसे सुन.. अब यही समजले देवुकी सब बीवीया तेरी बीवीया हे.. कोइ संकोच मत करना.. मुजे पता हे तुम सबको अच्छेसे सम्हाल लोगे.. इसीलीये तो तुजे वो जडी बुटी दीहे.. ओर हो सकेतो ये भावीकासे भी तु हमारे पुर्खोके मंदीरमे जाके सादी करलेना.. मे दया ओर रजुसे इस बारेमे बात कर लुगी..

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) मोम.. वो.. वो.. वसुधा..

मंजुला : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. सीर्फ वसुधा ही नही वो टीना भी हे.. हेनां..? लखन.. कोइ भी ओरत हो या लडकी.. अगर वो सामनेसे रीलेशन रखना चाहती हे तो कोइ संकोच मत कर.. आगे बढ जाना.. क्युकी इस दुनीया मे कइ ओरते ओर लडकीया दुखी हे.. कोइ संतानके लीये तो कोइ बदनामीके डरसे.. बस.. तु सबकी भावनाओका खयाल रख.. तुजे ओर कुछ नही कहेनां..

लखन : (सामने देखते सरमाते धीरेसे) मोम.. वो सबतो ठीक हे.. ले..की..न.. अब.. आपसे कैसे कहु..? कुछ बहारकी ओरते हे जो मुजसे रीलेशनके लीये कहेती हे.. चाहे अ‍ेक बार भी क्यु ना हो..

मंजुला : (जोरोसे हसते फीर धीरेसे) मे जानती हु बीटु.. लेकीन तु अ‍ेक बात समजले.. मे ओर तुम कोइ सामान्य इन्सान नही हे.. तुम दोनो भाइके संपर्कमे जीतनी भी लडकी या ओरते आइ हे.. या फीर आयेगी वोभी हम मेसे अ‍ेक होगी.. यातो वो परीया होगी.. या फीर अप्सराये.. हम सब उष्ण योनीकी हे..

ओर हमारा काम ही यही हे.. आज तुम दोनो भाइ हो.. कल विजय ओर तुम होगे.. फीर उनका लडका आयेगा.. तब सबकुछ चरमपे होगा.. तुम ही सब मर्द होगे जो सबको संतुस्ट करोगे.. तो कोइ संकोच मत कर.. यही समजले वो हम मेसे कोइ होगी.. तभी तो वो सामनेसे आयेगी.. फीर चाहे उनकी कोइ भी उमर हो.. ओर आगे तुजे खुद पता चल जायेगा..

फीर मंजु लखनको भवीस्यके बारेमे बहुत सारी बाते बताती रही.. फीर दोनो घरपे आगये.. ओर सबलोग खानेके लीये बैठ गये.. भावीकाके साथ पुनम काफी घुल मील गइ थी.. उनको भी यहा घर जैसा लगने लगा.. फीर लखन पुनम ओर भावीकाको वही छोडकर सृतीके साथ वापस सहेर चला गया..
 
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