Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery - Page 2 - SexBaba
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Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery

बोहत से लोगो को डाउट है की कहानी पूरी तरह से बदलने वाली है या फिर हीरो में कोई शक्तिया आने वाली है और अब ये कहानी रियलिटी से दूर होती जाएगी. ये वीर क्या bann'ne वाला है? रोबो बॉय या कुछ और? यदि आप सभी ऐसा सोच रहे हो तोह ये गलत है. ऐसा कुछ भी नहीं है. कहानी में केवल एकमात्र चीज़ hi इस एअर्थ के लॉज़ के अगेंस्ट है और वो है ये सिस्टम. बाकी पूरी कहानी रियल लॉजिक्स पर बेस्ड है. और वीर हमेशा की तरह इंसान hi रहेगा. कोई पावर्स नहीं आणि वाली उसके पास जो एअर्थ के लॉज़ के अगेंस्ट है. जो कुछ भी होगा बोहत hi यूनिक वे में होगा. और कहानी आपको ऐसा बिलकुल भी नहीं लगने देगी की यह फंतासी वर्ल्ड में हो रहा है.

अब ज़्यादा कुछ नहीं बताऊंगा!

धन्यवाद!!
 
अपडेट - 5 ~ सिस्टम एक्टिवेशन

अब तक...

पर, किसी को नहीं पता था...

-की जब उसकी सांसें जाने hi वाली थी...

तब, उसके अंदर एक आवाज़ गूंजी थी...

जो किसी को सुनाई नहीं दी थी...

और उस आवाज़ के बोल थे...

*डिंग*

[System has been activated.]


अब आगे...

वीर के एक्सीडेंट के कुछ घंटो बाद hi जब बृजेश का फ़ोन बजा था और स्क्रीन पर वीर नाम जब उसने देखा था तोह पता नहीं क्यों बृजेश ने कॉल नहीं उठाया.

शायद कुछ देरर पहले उसने खुद hi अपने बेटे को धक्के मार के घर से बाहर निकाला था इस कारणवश? या फिर वो अभी वीर के मुँह से कोई भी बात नहीं sunn'na चाहता था. कुछ था जो उसे रोक रहा था वीर से बात करने के लिए.

-की तभी उसके फ़ोन पर फिरसे कॉल आया पर ये उसके खुद के व्यक्ति का था.

बृजेश : Hello?

आदमी : साहब! वीर जी का कार से एक्सीडेंट हुआ है. अभी वो xxxxxxxxxx हॉस्पिटल में भर्ती है.

और, यह सुनते hi बृजेश उठ खड़ा हुआ. और, फौरन hi हॉस्पिटल के लिए जाने लगा.

***

अगले दिन काव्य कॉलेज में अपनी सोच में घूम थी.

'वीर भैया का कॉल उसके बाद से आया hi नहीं. क्या करू? कॉल बैक करू? इसके पहले उन्होंने कभी मुझे कॉल नहीं किया फिर अचानक कल क्यों? कही कोई दिक्कत तोह नहीं? कल उनके बीच में कॉल न कर सकीय थी...'

और, यह सोच वो कॉल लगाती है पर कॉल नहीं लगा. कैसे लगता? वार्ड बॉय ने वीर की सिम वापस से उसके फ़ोन में जो दाल दी थी.

अंत में काव्य उसके व्हाट्सप्प पर मैसेज दाल देती है ये पूछने की वो ठीक है या नहीं?

इधर निधि दिन में hi वीर के घर गयी थी ताकि वह जान सके की क्यों उसके घरवालों ने कॉल नहीं उठाया था.

जब वो वह पहुंची और जैसा रवैया उसने देखा बृजेश, श्वेता और बाकी घर वालो का वीर के प्रति ये देख के उसे इतना गुस्सा आया की वह खुद को कण्ट्रोल न कर सकीय.

निधि एक माँ भी थी. उसकी खुद की बेटी अभी छोटी थी और ऐसे में वह जानती थी की एक पैरेंट होना क्या होता है. ऐसे में जब उसने बृजेश और श्वेता का बेहेवियर देखा तोह बस वो भड़क उठी.

निधि : कैसे maa-baap हो आप लोग? आपका बीटा वह अपनी ज़िन्दगी से लड़ रहा है और आप लोगो को कोई चिंता hi नहीं है? यहाँ तक की आपने उसे अपने घर से बाहर hi निकाल दिया!?

बृजेश : देखिये, मैडम! वीर अब इस परिवार का हिस्सा नहीं है. रही बात पैसे की तोह उसके मेडिकल खर्चो की भरपाई में कर चूका हु पर इसके बाद अब वह जाने की वह कहा रहेगा, कैसे रहेगा... और, आप हमारे पारिवारिक मामलो से दूर रहे तोह hi अच्छा होगा.

निधि : भूल से भी ऐसे maa-baap न दे भगवन किसी को...

और, निधि अपनी नम्म आँखें लिए वह से भाग आयी. उसे वीर के लिए वाक़ई बहुत बुरा लग रहा था. कहा वो खुद को बदक़िस्मत समझती थी पर अब वीर को देख उसे महसूस हुआ की काम से काम उसे maa-baap का प्यार तोह मिल रहा था पर वीर को तोह वो भी नहीं मिला.

न जाने kya-kya सहा होगा उस बेचारे ने अब तक?

न जाने kaise-kaise दिन बिठाये होंगे वीर ने उनके बीच रहके?

इधर, हॉस्पिटल में अभी शाम के वक़्त वीर को होश आ चूका था.

"ारररह्ह्ह!" एक कराह के साथ उसकी आँख खुली.

आँखों से धुंधलापन हटा, सामने का नज़ारा नज़र आया.

उसने देखा की वह हॉस्पिटल में है. आँखें उसकी जल रही थी. उसे सब कुछ जैसे याद आने लगा.

क्या हुआ था?

हाँ! और, कल की साड़ी वारदात फ्लैशबैक की तरह उसके दिमाग में मंडराने लगी. उसने अपना सर पकड़ लिया. आँखों से ासु बहने लगे.

अभी वह सोच hi रहा था की इतने में उसके अंदर एक आवाज़ गूंजी जिसके चलते उसके रौंगटे खड़े हो गए.

[System has been activated. You are now the owner of the system.]

वीर (घबराते हुए) : हँ? कौन? कौन है?

आवाज़ से मानो वीर बेचारा डर hi गया. उसने अपना सर्र idhar-udhar हिलाते हुए देखा पर वो आवाज़ कहा से आयी उसे कुछ भी पता न चला.

[Name the System!]

वीर (चिल्लाते हुए) : कौन है? में पूछता हु कौन है?

और, फिरसे एक आवाज़ उसके दिमाग में गूंजी.

[Analyzing Hindi language from owner's mind...

Processing...

Process completed.

Hindi Language has been recognised.]

वीर (चिल्लाते हुए) : कौन है? सामने आओ... किसकी आवाज़ है ये जो मेरे सर्र में गूँज रही है...!?

तभी, वही आवाज़ फिरसे उसके मैं में गूंजी.

परन्तु, इस बार उसके बोल अलग भाषा में थे.

[Shaant! Mein System hu. Aur, ab se tum mere master ho.]

वीर (दररते हुए) : कौन बोल रहा है? मुझे तुम दिखाई क्यों नहीं दे रहे?

[Maine kaha na shaant! Mein ek system hu. Meri koi physical body nahi hai. Mein tumhare andar hu.]

वीर (घबराते हुए) : M-Mere अंदर?

[Haan! Kya tumhe yaad hai kal tumhare saath kya hua tha? Tumhara accident hua tha. Aur, tum marrte-marrte bache ho, tumhe pata hai? Agar maine samay par madad nahi ki hoti toh tum zinda nahi bachte.]

वीर (चिल्लाते हुए) : कैसी मदद? तुम मेरे अंदर कैसे हो? बाहर आओ!

[Arey! Itni zor se mat chillao. Andar mann me hi kaho jo kuchh bhi kehna hai. Mein tumhare mann, dil, dimag sab se jud chuki hu. Aur, tumhare mann ki baat sunn sakti hu. Aise chillaoge toh log tumhe pagal samjhenge.]

और, उस विचित्र मैं की आवाज़ सुन्न वीर अपने मैं में hi बात करने लगा.

वीर : मेरी... मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है. ये सब क्या चल रहा है?

[I know! Abhi tumhe samajhne me time lagega. Bas itna samajh lo ki mein tumhe koi nuksaan nahi pahuchaane wali. Ulta mein tumhari madad ke liye yaha hu.]

वीर : मेरी मदद?

वीर ने कापते हुए पूछा.

[Haan! Tumhari madad! Mein tumhari madad karungi. Humesha tum apni kismat ko koste the na? Ab mein tumhara saath dungi aur tum apni kismat palat ke rakh doge.]

वीर : वो... वो कैसे?

[Yahi toh mera kaam hai. Yadi mera istemaal sahi se kiya, toh tum duniya par raaj kar sakte ho.]

वीर : सच!?

[Ekdum sach.]

वीर : तोह, क्या तुम लड़की हो? क्यूंकि तुम्हारी आवाज़ लड़कियों जैसी है.

[Nahi! Mein na hi ladki hu, na hi ladka. Mein kisi bhi gender me apne aap ko dhaal sakti hu. Maine tumhaare mann me jhaank ke dekha toh pata chala tumhe ladkiya zyada pasand hai ladko ke muqaable isliye maine apni awaaz ladki ki rakhi hui hai.]

वीर (ब्लशेस) : हँ? ऑब्वियस्ली, मुझे लड़किया पसंद है. लड़के नहीं. I'm नॉट गे.

[Yadi kaho toh awaaz ladke ki rakh lu!?]

वीर : हँ? नहीं! नहीं! ऐसे hi ठीक है.

[Hehehe~]

वीर : ...

[Achha! Ab apni aankhein band karo aur mann me hi kaho ~ Status]

वीर (आँखें बंद करते हुए) : स्टेटस!

और, वीर के इतना कहते hi उसके मैं में एक विंडो खुल गयी,

[Name - Veer

Age - 20

Status - Abandoned student.

Stats :

Strength - 3/100

Intelligence - 4/100

Agility - 3/100

Endurance - 7/100

Appearance - 6/100

Talents - 0

Points - 0 ]

ये सब देख के वीर के होश hi उड़द गए.

[Baap re baap! Tumhara toh baht bura haal hai. Itne bekaar stats maine kabhi nahi dekhe apni life cycle me. Ye kya? Zero talents? Baap re!!! Tum reh kaise liye itne din? Hmm? Endurance bas zyada hai tumhara. Arey haan! Itni maar khaoge toh ye toh zaahir-si hi baat hai. Hehehe~]

वीर : उदा लो... तुम भी मेरा मज़ाक उदा लो. अब तोह मुझे आदत पद गयी है.

[Hey! Hey! Sorry! But ab tension mat lo. Mein hu na. Mein tumhe dekhna kaha se kaha pahucha dungi.]

वीर : और, तुम ऐसा क्यों करोगी? क्या मिलेगा तुम्हे ऐसा करके?

[Mera kaam hi yahi hai. Mera kaam hai logo ko sabse sarvashreshth banaana.]

वीर : तोह, तुमने मुझे hi क्यों चुना?

[Maine chuna nahi. Jab mein yaha se guzri toh tum hi paas me the aur mein tumhare shareer me pravesh kar gayi. Apne aap ko lucky keh sakte ho tum.]

वीर (शॉकेड) : यहाँ से गुज़री मतलब?

[Uss baare me mein zyaada baat nahi kar sakti.]

वीर : तोह? तोह, डॉक्टर को पता नहीं चला? की तुम मेरे अंदर हो?

[Hahaha~ Doctor kya... Tumhaari prithvi me rehne waala koi bhi insaan ye nahi bata sakta ki tumhaare andar mein maujood hu.]

और, एक और झटका वीर को. ये क्या बाला घुस गयी अचानक से उसके अंदर आके?

वीर : और, तुम्हे हिंदी कैसे आती है??

[Arey, buddhu abhi toh bataya, mein tumhare mann, dimaag aur dil se jud chuki hu. Aur, abhi-abhi toh seekhi tumhaare dimaag se hi. Isliye, jitni hindi tumhe aati hai utni hi mujhe bhi.]

वीर : ो... Okay!

[Par, tumhaare stats bahut hi bekaar hai. Mujhe khud taras aa raha hai dekh ke. Tumhe jald se jald apne stats badhaane honge.]

वीर : ये? ये स्टैट्स क्या है?

[Ye tumhari asli kshamtaaye hai. Tumhari strength 3 hai yaani ki jo taaqat hai tumhare andar use agar number se darshaaya jaaye toh woh 3 hai. Intelligence matlab tumhari buddhi, agility tumhari sphoorti, endurance tumhari sehan-sheelta aur appearance tumhare physical features yaani ki chehra, body, haath-perr ye sab.]

वीर : और, में इन्हे बढ़ा सकता हु? तोह मेरे असली शरीर में बदलाव आएँगे?

[Haan!]

वीर (शॉकेड) : बाप रे! ऐसे में तोह में फिर-

[Tabhi, toh kaha ki ab mein tumhari kismat palat ke rakh dungi.]

वीर : पर, वो पॉइंट्स कैसे बढ़ेंगे?

[Missions karke. Samay-samay par tumhe missions milenge aur jaise-jaise tum unhe complete karoge tumhe points milenge. Unn points se tum apne stats badha paoge aur saath hi saath nayi skills khareed paoge. Saath hi saath jitni uplabdhiya aur naam kamaoge tumhe points milte rahenge.]

वीर : में कुछ समझा नहीं...

[Hmm! Tumhara intelligence kam hai na isliye abhi sab kuchh tumhare bheje ke upar se jaayega. Bas itna samajh lo. Jaise-jaise tum missions poore karte jaoge, mera level aur saath hi saath tumhaara level badhta jaayega. Jiske chalte aur bhi anokhi skills unlock hoti jaayengi. Dhyaan rahe! Agar mission ko time limit me poora nahi kiya gaya, toh tum humesha-humesha ke liye mujhe kho doge.]

वीर : ो... Okay!!

[Hmm! Ek aur akhiri baat. Kabhi bhi... Kabhi bhi ghamand mat karna. Jis din tumhe ghamand aana shuru hua, uss din se hi tumhara ant bhi shuru ho jaayega.]

सिस्टम की बात सुन्न वीर के रौंगटे खड़े हो गए. अपना थूक निगलते हुए उसने फिरसे कहा.

वीर : मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा की दुनिया में ऐसी भी कोई चीज़ होती है.

[Duniya me aisi koi cheez nahi hai. Saari duniya me mein hi ek hu jo tumhare andar iss waqt maujood hu. Mein iss planet se nahi hu. Aur, planet ke baahar kaisi-kaisi cheezein maujood hai ye tum insaan soch bhi nahi sakte.]

वीर : .........

इसके पहले की वीर कुछ आगे कह पाटा, निधि उसके वार्ड में आ गयी.

दरवाज़े की आहात से जब वीर ने पलट के देखा तोह अपनी ma'am को देख कर चौंक गया.

वीर : Ma'am!?

निधि : ओह्ह गॉड! फाइनली... तुम्हे होश आ गया.

और, निधि तेज़ क़दमों के साथ आगे आयी और वीर का हाथ थाम ली.

वीर (शॉकेड) : निधि ma'am आप यहाँ!?

निधि ने फिर साड़ी बात उसे बता दी. जब उसे पता चला की बृजेश ने उसका कॉल नहीं उठाया था तोह उसके चेहरे पर दर्द भरी मुस्कराहट आ गयी. निधि उसे बेचैन भरी नज़रो से देख रही थी.

वीर : आपने मेरे लिए मेडिकल फी दी!?

निधि : मैंने तोह सिर्फ एडवांस दिया था बाद में तुम्हारे डैड ने साड़ी पाय की.

कहते हुए उसने वीर का हाथ एक बार फिर थाम लिया.

निधि (बॉहे सिकोड़ते हुए) : तुम्हे... तुम्हे बुरा लग रहा होगा न? तुम्हारे घरवाले तुम्हे देखने तक नहीं आये. जैसे मानो उन्हें कोई परवाह hi नहीं है तुम्हारी.

वीर (स्माइल्स) : इसमें कोई नयी बात नहीं है, ma'am. ये सब तोह रोज़ का है. I'm नॉट सुरप्रीसेड. ः~

उसकी वो फेक हस्सी देख पता नहीं क्यों, पर निधि को अपने दिल में अत्यंत hi दर्द महसूस हुआ. और, उसने वीर का हाथ और ज़ोर से भींच लिया.

तभी, वीर के अंदर फिरसे आवाज़ गूंजी,

[Apne mann me kaho 'Check' aur fir iss aurat ki taraf dekho.]

सिस्टम की बात सुन्न वीर ने वैसा hi किया और जैसे hi उसने चेक कहते हुए निधि को देखा तोह उसके होश hi उड़द गए.

निधि के सर के ऊपर हवा में एक विंडो मंडरा रही थी जिसमे कुछ शब्द लिखे हुए थे ~

[Name - Nidhi

Age - 30

Status - Divorce pending.

Bio - Nidhi ki ek beti hai jiska naam hai, Juhi. Saath hi ek beta hai jisey wo apne saath rakhna chaahti hai par uske pati 'Rajat' ne use apne paas rakha hua hai. Rajat se uska rishta kharaab chal raha hai jiske chalte Nidhi akeli apni beti ke saath ek ghar me rent dete hue rehti hai, kyunki wo apne mata-pita par bojh nahi banana chaahti. Uski maa ko do din pehle hi dil ka daura pada tha aur woh bhi isi hospital me bharti hai. Nidhi ki life bahut hi dukh aur pareshaniyo se bhari hui hai.

Favorability - 20

Relationship - Student-Teacher ]

ये सब कुछ वीर को निधि के सर के ऊपर नज़र आ रहा था.

वीर (घबराते हुए) : ये... ये आपके सर्र पे...

निधि : हँ? क्या हुआ? मेरे सर्र पे!?

[Arey buddhu! Ye sirf tum dekh sakte ho? Baaki koi nahi.]

वीर : नहीं, ma'am! वो में ऐसे hi...

'इतना तोह में एक साल में नहीं जान पाया, ma'am के बारे में जितना अभी जान गया. क्या कमाल चीज़ है ये.'

उसने मैं में सोचा.

'सिस्टम? ये फवोराबिलिटी 20 का क्या मतलब है?'

[Iska matlab hai ki wo tumhaare baare me kya sochti hai. Ek prakaar se uske mann me tumhare liye jo bhaav hai usko darshaata hai.]

'तोह ये 20 मतलब?'

[Matlab ki abhi wo tumhare liye sirf 20 favorability rakhti hai. Jaise-jaise tumhara aur uska relation achha hoyega ye badhta jaayega. Agar, ye 80 ke upar hai matlab ki koi tumhe chaahta hai. Agar ye 90 ke upar hai matlab ki koi tumhe dil se pyaar karta hai. Aur yadi 100 hai matlab ki dil-o-jaan se pyaar karne waala vyakti.]

'समझा!'

निधि : वीर? कहा खो गए?

जब निधि ने चुटकी बजाते हुए अपना हाथ उसके सामने हिलाया तोह वीर जैसे अपने खयालो से बाहर आया.

वीर : हाँ! वो में... Ma'am...

निधि (हाथ थामते हुए) : जस्ट फॉरगेट अबाउट एवरीथिंग वीर! और, कुछ मत सोचो. बस तुम्हे जल्द से जल्द ठीक होना है. Okay? एंड, don't थिंक तुम्हारा कोई नहीं है. I'm विथ यू okay? अभी तुम रेस्ट करो अब. में अब कल शाम को hi आउंगी. आज मैंने वैसे hi लीव ली थी. रोज़ नहीं ले सकती.

वीर : जी ma'am! थैंक यू!

निधि : थैंक यू कैसा इसमें...?? *स्माइल्स* टेक केयर, okay?

वीर : हम्म्म!

और, निधि उसके वार्ड से चली गयी. वीर केवल निधि को जाते हुए देखता रहा.

निधि 30 साल की एक ऐसी हुस्न की मल्लिका प्रतीत होती थी की मानो केहर hi ध दे. पर, लिमिटेड पैसो और दिन भर की म्हणत और थकान के चलते जैसे उसका हुस्न पूरा खिल के नहीं झलक पा रहा था. क्यूंकि, वो ध्यान hi नहीं दे पाती थी अपने ऊपर.

ये देख वीर को वाक़ई तरस आ रहा था उस पर. उसकी खुद की माँ यहाँ एडमिट थी पर उसके बावजूद निधि ने उसकी मदद की और उसके लिए एडवांस में पैसे भी भरवाए. वही दूसरी ऑर्डर उसके घरवाले जो साड़ी संपत्ति से संपन्न है उन्होंने एक क्षण भी नहीं सोचा की वो जी रहा है या मर्डर रहा है.

*डिंग*

और, अचानक hi उसके दिमाग में घंटी बजी, उसके सामने एक विंडो खुली.

[Mission : Solve Nidhi's problem.

Reward : ?? points

Time limit : 1 year ]

'हँ? मिशन?'

[Haan! Mission mil chuka hai tumhe.]

'निधि ma'am की प्रॉब्लम? Kaun-si प्रॉब्लम?'

[Ye toh tumhe khud dekhna padega.]

'ो... Okay!'

[Ab tumhara safar shuru ho chuka hai. Ya toh tum yahi ke yahi reh jaoge ya meri madad paa ke ek badshaah banoge. Toh bolo? Kaisa jeevan chahiye? Ek aam aadmi ki tarah jaisa ki tum abhi jee rahe the ya fir ek badshaah ka?]

सवाल सुन्न के वीर ने सोचा hi नहीं. उसे पता था उसे क्या जवाब देना है.

वीर (स्माइल्स) : एक बादशाह!!!!

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आज के लिए इतना hi गाइस!


धन्यवाद!
 
अपडेट किंग वीथिन मिनट्स...
 
अपडेट - 6 ~ ा नई होम

अब तक...

[Ab tumhara safar shuru ho chuka hai. Ya toh tum yahi ke yahi reh jaoge ya meri madad paa ke ek badshaah banoge. Toh, bolo? Kaisa jeevan chaahiye? Ek aam aadmi ki tarah jaisa ki tum abhi jee rahe the ya fir ek badshaah ka?]

सवाल सुन्न के वीर ने सोचा hi नहीं. उसे पता था उसे क्या जवाब देना है.

वीर (स्माइल्स) : एक बादशाह!!!!


अब आगे...

काफी दिन यु गुज़र चुके थे. और, आज वीर को हॉस्पिटल से लीव मिलने वाली थी. ऐसा एक भी दिन नहीं था जिस दिन निधि उसे देखने न आयी हो. और, ऐसा एक भी दिन नहीं था जिस दिन गलती से भी उसके घरवालों में से कोई उसे देखने आया हो.

कितनी अजीब बात थी.

पर, थी तोह सच्ची बात.

घर में असल में बृजेश ने कुछ नहीं बताया था. वीर के एक्सीडेंट की बात केवल बृजेश और उसकी सौतेली माँ, श्वेता को hi पता थी.

जब मनोरथ ने वीर के बारे में दुबारा पूछा तोह बृजेश ने झूठ बोल ये कह दिया की वीर अपने दोस्त के घर में ठहरा हुआ है.

पर, ऐसा तोह बिलकुल भी नहीं था. क्यूंकि उसका कोई दोस्त hi नहीं था.

यहाँ इन् कुछ दिनों में वीर ने सिस्टम के बारे में बड़ी hi बारीकी से जाना.

उसे पता चला की jaise-jaise वो मिशंस कम्पलीट करेगा या उपलब्धिया हासिल करेगा या इज़्ज़त कमायेगा, अपना फेम बढ़ाएगा waise-waise उसे एक्सपीरियंस (ऍक्स्प) मिलेगा.

और, यही एक्सपीरियंस जब इखट्टा होता जाएगा waise-waise hi उसके सिस्टम का लेवल बढ़ता जाएगा.

सिस्टम से उसे फ्री में 10 पॉइंट्स भी मिले थे जो सिस्टम ने उसे उसके ओनर बनाने के लिए गिफ्ट के रूप में दिए थे. और, वीर अब इसी सोच में था की किस स्टेट में वो पॉइंट्स ऐड करे.

'में स्ट्रेंथ में ऐड करता हु. सही रहेगा न?'

[Mein tumhe suggest karungi ki pehle tum apna ye bheja sahi karo. Ahem! Yaani ki apna intelligence badhao.]

'हम्फ! तोह फिर अभी में ऐड नहीं करना चाहता.'

[Are you sure? Dhyaan rahe! Tum jo bhi changes karoge apne stats me wo raat bhar lenge change hone me. Matlab yadi tum apni strength abhi badhaate ho toh wo abhi nahi badhegi. Tumhe uska result agle din dekhne ko milega.]

'ी सी!! हम्म! तोह एक काम करो. 7 पॉइंट्स मेरी स्ट्रेंथ में डालो. 2 मेरे इंटेलिजेंस में और 1 मेरे अपीयरेंस में.'

[Are you sure!?]

'हाँ!'

[Well okay!]

और तभी एक घंटी बजी...

*डिंग*

[7 points have been added to strength.

2 points have been added to intelligence.

1 point has been added to appearance.]

और उसके बाद hi वीर के स्टैट्स बदल चुके थे. पर उसका इफ़ेक्ट अगली सुबह से उससे देखने को मिलने वाला था.

स्टैट्स :

स्ट्रेंथ - 10/100

इंटेलिजेंस - 6/100

अगिलिटी - 3/100

ेंदुराने - 7/100

अपीयरेंस - 7/100

'गुड!! वैसे... सिस्टम!?'

[Hmm!??]

'तुमने कहा था की तुमने मेरी जान बचाई? क्या तुम एक मर्रे हुए व्यक्ति को भी ज़िंदा कर सकती हो?!'

[Nahi! Mene sirf apni urja ka istemaal kiya tha. Yahi kaaran hai ki mein ek din tak shut down thi. Aur tum khud bhi behosh the isliye tumhe pata nahi chala.]

'वाओ! तोह ऐसे में तोह तुम मुझे हर्र वक़्त खतरों से बचा सकती हो है न?'

[Bilkul bhi nahi! Aisa sochna bhi mat. Wo urja keval ek baar hi istemaal karne ke liye praapt thi mujhe.]

'ओह्ह मुझे और बताओ न इस बारे में.'

[Pehle mera level badhao. Abhi tumhe inn baato ko jaan'ne ka haq nahi hai.]

'Okay!'

[Aur haa! Mujhse zyaada baatein mat kiya karo. Jab zaroori ho keval tabhi...]

'क्यों?'

[Kyuki bolte waqt mujhe energy chaahiye. Aur ye energy mein tumhaare hi shareer se leti hu.]

'फ़क!!! और तुम मुझे ये अब बता रही हो!? तभी में सोचु मुझे इतनी थकान क्यों महसूस होती थी.'

[ :आईज2: ]

***

अब शाम का टाइम हो चूका था और वीर को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया था.

अभी वो वही एक बेंच पर बैठा हुआ था की निधि सारे कागज़ी काम करते हुए उसके पास आयी और बगल से बैठ गयी.


निधि





निधि : वीर!? साड़ी फॉर्मलिटीज हो चुकी है. अब तुम्हे हॉस्पिटल से छुटकारा मिला.

निधि ने मुस्कुराते हुए कहा.

वीर : थैंक यू Ma'am! में ज़िन्दगी भर आपका आभारी रहूँगा.

निधि : ये तुम किसी बातें कर रहे हो वीर? एक टीचर होने के नाते ये तोह मेरी ड्यूटी है की में अपने स्टूडेंट की हेल्प करू.

वीर : फिर भी Ma'am! आज कल तोह घर के अपने साथ नहीं देते और आपने सिर्फ मेरी टीचर होने के नाते इतना किया. उसके लिए थैंक्स तोह बनता hi है न?

इस बार वीर ने स्माइल करते हुए कहा. पर उसकी स्माइल देख एक बार फिर निधि की बॉहे सिकुड़ी और उससे अंदर hi अंदर एक अजीब सा दर्द हुआ.

निधि : अब... अब तुम कहा जाओगे वीर? तुम्हारे घरवाले तोह...

वीर : हम्म? मुझे नहीं पता Ma'am. देखता हु. कुछ न कुछ कर hi लूंगा.

निधि : नहीं! पर ऐसे कहा जाओगे तुम? तुम्हे अभी भी रेस्ट की ज़रुरत है. कहा रहोगे? क्या खाओगे? और कॉलेज का क्या?

वीर : कॉलेज? मुझे कुछ नहीं पता Ma'am. जो भी होएगा, देखा जाएगा.

वो इतना कह के वह से उठा hi था की निधि ने उसका हाथ थाम लिया.

निधि : नहीं! में तुम्हे ऐसे जाने नहीं दे सकती. बिलकुल भी नहीं! कहा जाओगे और तुम? कहा भटकोगे ऐसी हालत में? तुम... तुम मेरे साथ चलो.

वीर (शॉकेड) : हँ?

निधि : हां! आज से... आज से तुम मेरे साथ रहोगे.

कितनी hi आसानी से कह दी निधि ने ये बात.

और कितनी hi आसानी से बृजेश ने वो बात कही थी ~ "निकल जाओ इस घर से."

दोनों में कितना अंतर था.

और किस्मत का खेल तोह देखो. की उसके घर से उससे यु निकाल दिया गया था और आज निधि जो की सिर्फ उसकी टीचर थी वो यु उससे अपने घर ले जाने तैयार थी.

और यही देख के वीर की आँखों में ासु आ गए. उसने निधि का स्टेटस देखा था. वो जानता था की निधि खुद कितना कष्ट भरा जीवन व्यतीत कर रही थी.

पर इसके बावजूद उसने वीर को अपने घर पर रहने के लिए कह दिया.

वीर (नम्म आँखों से) : नहीं! Ma'am! ये आप... ये आप क्या कह रही हो? में आपको पहले hi बोहत कष्ट दे चूका हु, अब और मुझे मुश्किल में मत डालिये ma'am.

निधि : चुप रहो एकदम! और चलो मेरे साथ.

वीर : Ma'am...

निधि : मेने कहा न चुप रहो. आज से तुम मेरे साथ hi रहोगे. और आगे एक शब्द नहीं कहोगे तुम.

उसने अपना हाथ वीर के होंठो पर रख दिया. निधि के कोमल हाथो का स्पर्श अपने होंठो पे पाते hi वीर वही खड़ा का खड़ा रह गया. जब निधि को भी ध्यान आया की उसने एकदम से क्या किया उसने फौरन hi अपना हाथ पीछे ले लिया और उसका हाथ पकड़ के उससे ले जाने लगी.

वीर के लाखो मनाने के बाद भी निधि ने उसकी एक न सुनी और उससे लाके अपनी स्कूटी पर पीछे बैठा दिया.

निधि : अच्छे से पकड़ के बैठना okay?

उसके बोलते hi वीर के हाथ निधि की पतली कमर पे लिपट गए. एक पल के लिए तोह निधि को भी एक झटका सा लगा जैसे hi वीर के हाथ उसकी कमर पर बंधे.

वो इस वक़्त नेवी ब्लू साड़ी और काला ब्लाउज पहनी हुई थी. और पीछे से उसके आधे नग्न कंधे साफ़ नज़र आ रहे थे जो हर्र पल वीर को मदहोश कर रहे थे. वो खुले बाल और वो नशीली आँखें जो किसी भी वक़्त आदमी को अपना दीवाना बना दे.

ठंडी हवाओ से दोनों का शरीर ठंडा ज़रूर हो रहा था पर साथ hi साथ एक अजीब सी गर्मी भी थी जो दोनों के hi शरीर में इस वक़्त कही दबी हुई थी.

'चेक' वीर ने मैं में निधि को पीछे से hi देखते हुए कहा तोह फौरन hi निधि के सर के ऊपर वही विंडो फिरसे खुल गयी.

सब कुछ शामे hi था पहले की तरह सिवाए एक चीज़ के. और वो थी...

[Favourability - 30]

निधि की फवौराबिलिटी वीर के प्रति 10 पॉइंट्स से बढ़ गयी थी. और क्यों न बढ़ती? वो रोज़ वीर से मिलने शाम के वक़्त आया करती थी. रोज़ रोज़ यदि आप किसी से भी बात करो, आपको थोड़ा बोहत इंटरेस्ट उनमे आ hi जाता है. ऐसा hi हाल कुछ निधि का भी था.

वीर उसका स्टूडेंट था और इस से पहले कभी भी निधि ने ऐसे अपने किसी भी स्टूडेंट से मुलाक़ात नहीं की थी. न hi इतनी बातें करि थी. और तोह और वो अब वीर को अपने घर ले जा रही थी. तोह भला दोनों के बीच फ्रेंडशिप गहरी कैसे नहीं होती?

वीर के मैं में निधि के प्रति जो रेस्पेक्ट थी वो अब कई गुना बढ़ चुकी थी.

कितनी hi आसानी से उसने वीर को अपने घर रहने को कह दिया. वीर जानता था की वो अकेली अपनी बेटी के साथ रेंट से रहती है उसके बावजूद निधि ने उसपर इस हद्द तक भरोसा कर लिया की वो उसके साथ रह ले. उसने एक बार भी नहीं सोचा की वीर को अपने घर पर रखना ठीक है या नहीं? उसने ये नहीं सोचा की उसके घर की ओनर कैसे रियेक्ट करेगी ये देख के?

और इसलिए वीर की नज़रो में निधि किसी देवी से काम नहीं थी.

वीर कस के उसकी पतली कमर को अपने दोनों हाथो से थामे हुए था. और निधि भी वीर के हाथो को भली भाति फील कर पा रही थी. न चाहते हुए भी उसकी धड़कन नार्मल से थोड़ी तेज़्ज़ हो चुकी थी.

इस से पहले केवल उसके हस्बैंड ने hi उससे ऐसे टच किया था. और उससे हुए भी 2 साल हो चुके थे. और आज वही फीलिंग वो महसूस कर रही थी.

पर फ़र्क़ ये था की उसकी कमर को थामने वाला इस वक़्त उसका हस्बैंड नहीं बल्कि उसका स्टूडेंट वीर था. जो की उस से 10 साल छोटा था.

और यही बात निधि को सत्ता रही थी. वो नहीं चाहती थी की वीर जो की उसके छोटे भाई जैसा है उसके टच से वो ऐसा महसूस करे. पर इन् सब के बावजूद उसकी धड़कने स्लो होने का नाम hi नहीं ले रही थी.

2 सालो से ये पहली बार था जब उसने किसी मर्द को इतनी पास से महसूस किया था. और उससे नहीं पता था की एक अजीब सी अनुभूति ने उसके अंदर जन्म ले लिया है.

कुछ hi देरर में जब घर आया, निधि ने उससे ध्यान से उतरवाया और गाडी पार्क की.

वो एक फ्लैट में रेंट से रहती थी. उसका फ्लैट 2ंद फ्लोर पर था. वीर को लिफ्ट में ले जाते हुए वो 2ंद फ्लोर पर पहुची और जैसे hi अपने फ्लैट के पास आयी तोह चौंक गयी.

फ्लैट का ताला खुला हुआ था. उसने फौरन hi बेल्ल बजायी तोह कुछ सेकण्ड्स में hi दरवाज़ा खुल गया.

और अंदर से उसकी बेटी जो की अभी अभी स्कूल जाना शुरू की थी वो दौड़ते हुए आयी और उसके पेर्रो से लिपट गयी, "ममममममियययय... मम्मी आ गयी!"

हैरान होते हुए निधि सोच में पद गयी. वो तोह फ्लैट में ताला लगा के अपनी बेटी जूही को बगल वाले फ्लैट यानी की पड़ोस में चोरर के गयी थी. फिर ये सब क्या था?

की तभी अंदर से एक और शख्स बाहर आया. और उससे देख निधि के चेहरे पे हैरानी, फिर कन्फूसिओं, और फिर ख़ुशी झलकने लगी.

एक सुन्दर सी लड़की आगे बढ़ते हुए उसके गले से लग गयी, "डीई!!"

निधि (गले लगते हुए) : श्रेया तू? यहाँ?

श्रेया





श्रेया : क्यों?! नहीं आ सकती?

निधि : मेरा मतलब वो नहीं था तू जानती है.

श्रेया : ी क्नोव! एंड यस! में यहाँ. हहै~ और अब से में यही रहूंगी आपके साथ.

निधि (हैरानी में) : क्याआ?

श्रेया : हां! इतना शॉकेड क्यों हो? आप नहीं चाहती क्या की में यहाँ राहु?

निधि : नहीं! में बस ये सोच रही हु की अचानक से तुम यहाँ.

श्रेया : हम्म! क्युकी माँ पापा ने खुद कहा है.

वीर खड़े खड़े इतना तोह जान गया था की सामने कड़ी लड़की निधि Ma'am की छोटी बहिन थी. फिर भी उसने चेक करना hi सही समझा.

वीर (मैं में) : चेक!

और श्रेया के सर के ऊपर तभी वही विंडो खुल गयी और उसपे लिखे शब्द वीर को नज़र आने लगे.

[ नाम - श्रेया

आगे - 24

स्टेटस - मेडेन इन सर्च फॉर ट्रू लव.

बायो - श्रेया निधि की सगी छोटी बहिन है. उसका मैं पढ़ाई में शुरू से hi नहीं लगता था और इसलिए आज वो एक यूटूबेर है. यूट्यूब पे स्ट्रीम करते हुए गेम्स खेलना और व्लॉगस बनाना उससे पसंद है. अभी ज़्यादा सब्सक्राइबर्स न होने के कारण वो ज़्यादा बिजी नहीं रहती. अपनी बहिन निधि से बोहत ज़्यादा प्यार करती है. उसका सपना है एक बोहत बड़ी यूटूबेर bann'na. सच्चे प्यार की तलाश में है. पर कोई मिला नहीं है अभी. श्रेया लव ात फर्स्ट सिघ्त पर बिलीव करती है.

फवौराबिलिटी - 0

रिलेशनशिप - स्ट्रॉन्गेर्स.]

श्रेया के बारे में जानते hi वीर थोड़ा हैरान था. उससे देख के कोई नहीं कह सकता था की वो एक यूटूबेर थी.

'हम्म! इंटरेस्टिंग... इंटरेस्टिंग!'

[Sapne dekhna chorr do master!]

'हँ? क्यों??'

[Nahi degi!]

'व्हाट थे..!?'

[Master aapne dekha na? Wo love at first sight par believe rakhti hai. Pehli nazar me pyaar. Aur aapko abhi dekh ke koi bhi ladki aapke pyaar me nahi padne waali.]

इसके पहले की वीर सिस्टम को जवाब दे पाटा. श्रेया की आवाज़ उसके कानो में पड़ी.

श्रेया : ये कौन है?!

निधि : ये है वीर! मेरा स्टूडेंट.

श्रेया : ओह्ह! तोह? ट्यूशन शुरू कर दी क्या आपने?

निधि : नहीं! आज से ये मेरे साथ hi रहेगा.

पल भर के लिए मानो सन्नाटा सा छ गया और तभी श्रेया एकदम से चिल्लाई,

श्रेया : व्हाआआआत्तत्त??

निधि : हआ!

श्रेया : क्या कहा आपने? ये... ये आपके साथ रहेगा?

निधि : हम्म! लम्बी कहानी है.

श्रेया : वेट! व्हाट? बूत क्यों? आप ऐसे कैसे किसी को भी अपने घर में...!?

निधि : सष्ठ! अंदर चलो पहले.

अंदर ले जाते हुए निधि ने श्रेया को वीर के बारे में सब कुछ बता दिया, जिससे सुन्न श्रेया का दिल भी थोड़ा पसीज गया और वो वीर को रखने के लिए तैयार हो गयी. अभी निधि वाशरूम गयी हुई थी की तभी श्रेया उसके पास आयी...

श्रेया : देखो! हम तुम्हे यहाँ रख रहे है क्युकी मेरी दी बड़ी hi भोली है और सबकी मदद करती है. और हम तुम्हे यहाँ रखने के लिए तैयार है. पर मेरी दी के बारे में कोई भी गलत ख़याल मत लाना समझे? हम्फ! I'm वाचिंग यू...

और वो दो ऊँगली वीर की आँखों की तरफ करते हुए मुद के अपनी गांड मटकाते हुए अंदर चली गयी.

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आज के लिए इतना hi गाइस!


धन्यवाद!

लिखे ज़रूर कीजियेगा यदि पसंद आये. नेक्स्ट अपडेट से शठोरय में एक्शन और मसाला आना शुरू होएगा.
 
अपडेट - 7 ~ बस्टेड

अब तक...

श्रेया : देखो! हम तुम्हे यहाँ रख रहे है क्युकी मेरी दी बड़ी hi भोली है और सबकी मदद करती है. और हम तुम्हे यहाँ रखने के लिए तैयार है. पर मेरी दी के बारे में कोई भी गलत ख़याल मत लाना समझे? हम्फ! I'm वाचिंग यू...

और वो दो ऊँगली वीर की आँखों की तरफ करते हुए मुद के अपनी गांड मटकाते हुए अंदर चली गयी.

अब आगे...

एक बड़े से बंगलो में इस वक़्त एक बड़े से रूम में एक बेहद hi ख़ूबसूरत लड़की अपनी कम्फर्टेबले चेयर पर बैठी हुई थी. और कुछ ज़रूरी कागज़ी काम कर रही थी. घर इतना आलिशान था की पूछो मत.

तभी उसके रूम का दरवाज़ा खुला और अंदर एक मिडिल एज्ड आदमी ने आकर उसके सामने एक फाइल राखी और बोलै,

आदमी : मैडम! ये रही फाइल.

लड़की : जी!

आदमी : वो... मैडम!

लड़की : हम्म?

आदमी : वो... क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स कंपनी हमारे साथ डील करना चाहती है. एक बार फिरसे मुझे उनका कॉल आया था.

लड़की (लम्बी सास लेते हुए) : मेने कितनी बार आपको कहा है की उन्हें मन कर दीजिये पर आप उल्टा उनको लटका रहे हो? मुझे नहीं करनी कोई भी डील उनके साथ.

आदमी : पर मैडम इसमें गलत क्या है? एक अच्छी कंपनी है और उल्टा हमे hi फायदा है. आप भला ये डील क्यों नहीं करना चाहती? बुराई क्या है?

लड़की : आप जानते है न? में मीटिंग के वक़्त इस कंपनी के मालिक से मिली थी. एंड, ी कैन तेल्ल he's नॉट ट्रस्टवर्ती.

आदमी : पर मुझे तोह उनका रवैय्या एकदम पसंद आया. मुझे नहीं लगता की...

लड़की : आप नहीं जानते. में भला कभी गलत हुई हु?

आदमी : नहीं! पर...

लड़की : थें भरोसा रखिये! और उस काम का क्या जो मेने आपको सौपा था!?

आदमी : जी... वो में... जल्द hi डिटेल्स पता लग जाएंगी मैडम.

लड़की : इतना सा काम करने में इतना टाइम लग रहा है?

आदमी : शहर बड़ा है मैडम. थोड़ा सा टाइम लगेगा. और अब इस काम के लिए में सीबीआई में तोह नहीं जाऊंगा न? पर आप निश्चिन्त रहिये. जल्द हो जाएगा.

लड़की : हम्म!

और वो आदमी बाहर निकल गया. इधर वो लड़की अपने अंगूठे को जोरर से अपने दातो टेल दबाते हुए किसी सोच में पद गयी. न जाने क्या सोच रही थी वो इस वक़्त. पर उसके चेहरे पर आशा, जिज्ञासा और तनाव के मिले जुले भाव उत्पन्न हो रहे थे.

***

निधि का घर...

वीर को अपने घर में लाते hi सबसे पहले निधि ने अपने कपडे बदले और उसने अपनी साड़ी उतार के एक रेड नाईट गाउन दाल लिया. वो भली भाति जानती थी की अब वो अकेली नहीं है, एक नौजवान लड़का भी उसके साथ उसके घर में रहने वाला है पर इसके बावजूद उसने गाउन पहना. जैसे उससे विश्वाश था की वीर कोई भी उत् पटांग हरकत नहीं करेगा.

उसकी छोटी बहिन भी यही मौजूद थी. यदि निधि चाहती तोह इस वक़्त सेफ्टी के डर से वो वीर को ये कह के अपने घर से निकाल सकती थी की अब उसकी छोटी बहिन आ गयी है तोह जगह नहीं है घर में ठहरने की, या ये कह सकती थी की अब उसकी बहिन आयी हुई है और ऐसे में वो वीर को अपने साथ नहीं रख सकती. वो कुछ भी कह सकती थी.

पर निधि बिलकुल भी पीछे न हटी. और उससे इतना तोह विश्वाश था की वीर कोई भी गलत हरकत नहीं करेगा उसके साथ.

इस वक़्त रेड गाउन में वो क़यामत लग रही थी. पूरी आग का शोला. वीर तोह बस यही सोच रहा था की कितना बड़ा मुर्ख होगा निधि का पति जो ऐसी औरत को अपने हाथ से जाने दे रहा था.

बाहर निकलते हुए निधि ने वीर को नहाने के लिए कहा, क्युकी इतने दिनों से वो हॉस्पिटल में था और ऐसे में ज़ाहिर सी बात थी की उससे एक बाथ की सख्त ज़रुरत थी. पर दिक्कत थी अंडरवियर और कपड़ो की. वीर तोह खाली हाथ घर से निकला था. भला अब चड्डी कहा से लाए वो? न उसके पास एक्स्ट्रा कपडे थे, न hi वो कोई डोरेमोन था.

हॉस्पिटल में जो कपडे उससे मिले थे वही वो इस वक़्त पहना हुआ था. क्युकी उसकी कॉलेज की ड्रेस तोह खून से पहले hi खराब हो चुकी थी. और अभी वो इसी दुविधा में था की क्या किया जाए,

वीर : उम्... Ma'am में नाहा तोह लू बूत वो...

कहते वक़्त उसका चेहरा हल्का लाल पद गया तोह निधि ने कन्फ्यूज्ड होते हुए पूछा.

निधि : क्या दिक्कत है वीर?

वीर : वो... मेरे कपडे? और अंडरवियर!? मेरे पास नहीं है...

बोलते hi वो ब्लश करने लगा. आखिर उसने बोल भी कैसे दिया ये? मैं में वो खुद से hi सवाल कर रहा था.

और ये सुन्न निधि के बोल भी थोड़ा लड़खड़ा गए,

निधि : ओह्ह! हां! अरे... वो... में भी न... में एक काम करती हु... वीर! तुम नहाओ... में शॉपिंग मार्ट जाती हु... और उधर से ले आउंगी... कुछ कपडे भी ले आउंगी डेली उसे के लिए.

उसकी बात सुन्न पल भर के लिए वीर एकदम मौन हो गया.

'दीद शी रियली साइड तहत? Ma'am मेरे लिए कपडे और अंडरवियर लेने जा रही है?'

और ये सोचते hi उसके शरीर में एक अजीब सी हलचल हुई अंदर hi अंदर.

वीर : Ma'am ये आप क्या कह रही हो? आप रहने दीजिये... में मैनेज कर लूंगा...

निधि : अरे क्या मैनेज कर लोगे? दुबारा से वही पहनोगे क्या? तुम ये बकेट में कपडे उतार के रख देना, में वाशिंग मशीन में धो दूंगी.

और इतना कहते hi वो मुद के जाने लगती है की तभी उससे याद आता है की उसने साइज तोह पूछा hi नहीं.

निधि : वो!! तुम्हारा साइज वीर? कपड़ो का?

वीर : Ma'am टी शर्ट मुझे म साइज की फिट आती है. बाकी...

निधि : Okay! और नीचे के लिए में लोअर ले आउंगी ठीक?

वीर : जीई!

वो फिर से मुद के जाने वाली थी की तभी उससे फिरसे कुछ याद आया और वो सोचते hi उसके गाल एकदम सुर्ख लाल पद गए.

वो पलटी और वीर को देख बड़ी hi धीमी आवाज़ में बोली,

निधि (ब्लश) : वो... वो... तुम्हारी... अंडरवियर का साइज?

ये सवाल सुनते hi वीर खुद स्तब्ध सा खड़ा रहा.

अब बताना तोह पड़ेगा hi...


उसने अपना थूक निगलते हुए शर्माते हुए बताया,

वीर (ब्लश) : Ma'am... वो... मेरा... 85 है...

निधि (ब्लश) : 8... 85!?

वीर (ब्लश) : 85 कम.

निधि (ब्लश) : ो... Okay!

और निधि तेज़्ज़ कदमो के साथ बाहर निकल के भाग गयी. वीर ने एक राहत की सास लेते हुए बाथरूम में प्रवेश किया. पहली बार कोई लड़की उसके लिए ये सब चीज़े खरीद रही थी. बड़ा hi अजीब सा लग रहा था उससे.

कुछ देरर बाद...

निधि शॉपिंग कर के आ चुकी थी और वीर के लिए वो कुछ कपडे खरीद के ले आयी थी साथ hi साथ उसके उन्देर्गर्मेन्ट्स भी. पूरी तरह से जब वीर तैयार होक बाहर आया तोह देखा की निधि के हाथ फुर्ती में किचन के कामो में लगे हुए थे.

निधि खुद इस वक़्त बड़ा hi शर्मा रही थी. इस से पहले उसने अपने पति तक की भी कभी अंडरवियर न खरीदी थी. और आज वो पहली बार किसी मर्द के लिए अंडरवियर खरीदने गयी थी और वो भी उसके अपने hi स्टूडेंट की.

पास आते हुए वीर किचन में hi साइड के प्लेटफार्म से टिक के खड़ा हो गया और निधि को देखने लगा जो इस वक़्त रोटी बेलने में बिजी थी.

वीर की आहात पा के hi उसने एक बार वीर को मुद के देखा उसके बाद वापस से रोटी बेलनी लगी और धीरे धीरे खुद hi बात करने लगी,

निधि : फटाफट रोटी सेक देती हु और वीर मेने ये फ्राई दाल और मिक्स वेग सब्ज़ी बना दी है. तुम खा लोगे न? देखो तोह... आज पहला दिन है और में कुछ भी स्पेशल न बना पायी. कल पक्का कुछ स्पेशल बनाउंगी. तुम्हे क्या पसंद है वीर? जो तुम बोलोगे कल वही बनेगा... आज न जल्दी में थी और हॉस्पिटल से आते आते काफी थक गयी... थोड़ा रेस्ट करुँगी न तोह कल एकदम फ्रेश महसूस करुँगी... फिर कल हम सभी एकसाथ स्पेशल डिनर करेंगे... लैंडलैद्य को भी इन्फॉर्म करना है की अब से तुम मेरे साथ रहोगे... यदि वो रेंट बढ़ाती है तोह बढ़ा दे... वो देख लुंगी में... उसकी टेंशन मत लेना तुम हां?

इतना सब कुछ वो बोलती जा रही थी, उसके हाथ इतनी स्पीड में चल रहे थे की जितनी बार वो रोटी बेलती उसकी चूडियो की खनक उतनी hi बार और तेज़्ज़ शोर करती. रोटी बेलने के कारण उसके हाथ एक रयथ्म में हिल रहे थे और उसी रयथ्म से उसके कानो में लगी हुई बाली भी हिल रही थी.

निधि को जैसे hi एहसास हुआ की उसने इतना सब बोलै पर वीर ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तोह वो पलटी और वीर को देखि.

और उसने देखा की वीर केवल अपने हाथ बांधे प्लेटफार्म से ठीके उससे hi निहार रहा था. उससे अपने प्रति ऐसे देख उसके गालो पर हलकी लाली छा गयी.

निधि (ब्लश) : ऐसे... ऐसे क्या देख रहे हो वीर!?

वीर : देख रहा हु की आप कितनी म्हणत करती हो Ma'am.

निधि (स्माइल्स) : म्हणत तोह करनी hi पड़ती है सबको. तभी तोह ज़िन्दगी चलती है.

वीर (स्माइल्स) : हम्म!

और वो वापस से अपने काम में लग गयी पर कुछ देरर बाद hi उसके कानो में वीर की आवाज़ पड़ी,

"आपने इतना सब कुछ क्यों किया मेरे लिए ma'am?"


और ये सवाल सुनते hi निधि जिसके हाथ अभी रोटी बेलने में लगे हुए थे वो अचानक hi रुक गए.

उसने पलट के वीर को देखा और बोलने hi वाली थी की फिरसे वीर की आवाज़ ने उससे रोक दिया.

वीर : में जानता हु की आप यही कहेंगी की ये आपका एक टीचर होने के नाते फ़र्ज़ था. पर आपने मेरे लिए एक फ़र्ज़ से कही ज़्यादा किया है Ma'am. और अभी भी कर रही हो. ये सब कपडे, ये मेरा यहाँ रहना, हॉस्पिटल में वो एडवांस्ड फीस, मुझे रोज़ देखने आना, हालचाल पूछना, क्यों???

वीर की बात सुन्न निधि ने एक गहरी सास ली और बोली,

निधि : क्युकी में जानती हु तुम केसा फील कर रहे हो वीर. में जानती हु अकेलापन केसा होता है. केसा होता है घर से बाहर निकलना. केसा महसूस होता है. इसलिए में ये सब कर रही हु. और... भले hi कॉलेज में हमारी ज़्यादा बात नहीं हुई वीर. बूत मेरी नज़र अपने हर्र एक स्टूडेंट पर रहती है. मुझे पता है की कोण केसा है. में जानती थी की तुम्हारा कोई दोस्त नहीं है. और ऐसे में तुम कहा जाते? मेने वही किया जो मुझे सही लगा.

वीर : और ये जानते हुए भी की आप एक लड़के को अपने घर ला रही हो, ये जानते हुए भी की आपकी लैंडलैद्य और आस पड़ोस के लोग क्या सोचेंगे इस बारे में? ये जानते हुए भी की आपकी बहिन भी यही रहती है आपके साथ और इसके बावजूद आप एक अनजान लड़के को यु रहने दे रही है अपने घर में?

निधि (स्माइल्स) : यस! बिकॉज़ ी बिलीव यू!

और इतना सुनते hi वीर का शरीर सिहर उठा.

वीर : क्योऊ???

निधि : तुम्हे क्या लगता है वीर? तुम्हे क्या लगता है की ी don't क्नोव? क्या मुझे नहीं पता की लोग मुझे किन नज़रो से देखते है? घर से कॉलेज, कॉलेज से घर, इतने लोगो की नज़र मुझपे पड़ती है. कुछ जान पहचान के तोह कुछ अनजान. तुम्हे क्या लगता है की मुझे नहीं पता वो किन नज़रो से मुझे घूरते है? क्या चलता है उनके मैं में? यहाँ तक की कॉलेज के स्टूडेंट्स जो न जाने कितने साल छोटे है उम्र में...

कहते वक़्त उसके होंठ थार था रहे थे और वीर ने नोटिस किया की उसकी आँखें हलकी भीग चुकी थी.

निधि : ी क्नोव.... ी क्नोव एवरीथिंग वीर! ी क्नोव एवरीथिंग.

उसने जोरर से कस के अपने गाउन का एक हिस्सा भींच लिया और नज़रे नीचे कर ली. आज पहली बार वीर को खुद किसी के लिए इतना बुरा लग रहा था. उसका खुद का दिल तड़प रहा था निधि की ऐसी हालत देख.

निधि : बूत तुम...

उसने नज़रे उठाते हुए दुबारा बोलना शुरू किया. और इस वक़्त वीर भली भाति देख सकता था उन् आसुओ को जो निधि की पलकों पर सजे हुए थे.

निधि : तुम्हारी आँखें कभी भी नहीं भटकी... एंड that's व्हाई... ी बिलीव यू!

निधि के बोल सुनते hi वीर के शरीर के रोये खड़े हो गए.

वो समझ चूका था निधि क्या बात बता रही थी. यही की कैसे लोग उससे ताड़ते है और खा जाने वाली नज़रो से घूरते है. यहाँ तक की कॉलेज के स्टूडेंट्स भी जो उससे ऐसे घूरते थे की मानो कभी भी उसपे टूट पड़ेंगे. पर वीर ने आजतक कभी भी निधि को वैसी नज़रो से नहीं देखा था.

जब जब निधि उस से बात करती, या तोह वो नज़रे झुका के बात करता था या फिर उसके चेहरे में देखते हुए. ना की उसके शरीर पे नज़र मारते हुए. और ये बात निधि भली भाति जानती थी. लोगो की नज़रो और उनके इरादों से वो हर्र तरह से परिचित थी. यही कारण था की उससे वीर पे विश्वाश था. उसके इरादों और उसकी आँखों पर उससे विश्वाश था.

"देखो तोह... में भी न... क्या बोरिंग बातो को लेकर बैठ गयी. और तुम ये मत सोचना बिलकुल भी वीर की तुम्हे अब काम नहीं करना पड़ेगा. बोहत काम करवाउंगी तुमसे समझे!?"

निधि ने अपने ासु को हलके हाथ से पोछते हुए एक स्माइल के साथ मज़ाकिया ढंग में कहा, तोह वीर भी बदले में मुस्कुरा दिया,

वीर : आपका हुकुम सर आँखों पर ma'am.

अभी उसने बोलै hi था की तभी निधि की ऊँगली धोके से गरम गरम दाल से भरे पैन पर लग गयी और उसके मुँह से एक आह निकल गयी...

"आअह्ह्ह्ह!!! सससस.... आउच!!!"

और अगले hi पल वीर ने आगे बढ़ निधि की जाली हुई ऊँगली अपने मुँह में भर ली...

*सन्नाटा*

अब भर तोह लिई ऊँगली मुँह में जोश जोश में...

पर अब वीर को ख़याल आया की उसने क्या कर दिया.

यदि इस वक़्त कोई गाना वीर की सिचुएशन को डेस्क्रिबे कर सकता था तोह वह था~

लौड़े लग गए...


इधर निधि हक्की बक्की सी कड़ी वीर को देख रही थी. उसकी आँखों में अचंभव साफ़ नज़र आ रहा था. उसका मुँह हल्का खुल चूका था.

वीर की जुबां और अंदर से मुँह का गरम तापमान वो भली भाति अपनी ऊँगली पर महसूस कर पा रही थी. जलन और दर्द तोह जैसे वो भूल hi चुकी थी.

दोनों एक दूसरे की आँखों में आँखे दाल देख रहे थे.

की तभी...

"तुरुरु तुरुरु तुरुरु रुरु रुरु... ाः! ये शाम को लेट नहाने में मज़ा hi आ जाता है."

श्रेया फ्रिज में से ऑरेंज जूस की बोतल से जूस पीते पीते किचन में आ गयी... और उसने जो सामने देखा...

*Phhhhhhuuuuuuuuuuuu*

सारा का सारा जूस उसके मुँह से निकल के नीचे ज़मीन पर जा गिरा. उसकी आँखें ऐसी फैली हुई थी मानो जैसे बेचारी ने भूत देख लिया हो. मुँह खुला का खुला...

वीर उसकी बड़ी बहिन की ऊँगली अपने मुँह में डाले हुए खड़ा था. अब बस तीनो एक दूसरे को देख रहे थे और एक खामोशी सी छा गयी.

वीर : ....

निधि : ......

श्रेया : .....

[:पॉपकॉर्न:]

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आज के लिए इतना hi गाइस!

सॉरी! इस अपडेट से एक्शन स्टार्ट होने वाला था स्टोरी पेस पकड़ती बूत मुझे लगा एक ये अपडेट ज़रूरी था. अब नेक्स्ट अपडेट से वीर अपने स्टैट्स बढ़ने निकलेगा. लिखे ज़रूर करना पसंद आये तोह.


धन्यवाद!
 
मेगा अपडेट

अपडेट - 8 ~ ा नई मिशन?

अब तक...

वीर उसकी बड़ी बहिन की ऊँगली अपने मुँह में डाले हुए खड़ा था. अब बस तीनो एक दूसरे को देख रहे थे और एक खामोशी सी छा गयी.


वीर : ....

निधि : ......

श्रेया : .....

[ :पॉपकॉर्न: ]


अब आगे...

इस वक़्त टेबल के सामने सोफे पर निधि और वीर दोनों hi एकसाथ बैठे हुए थे और दोनों की hi नज़रे नीचे थी. वही उनकी दूसरी तरफ श्रेया सिंगल सीट सोफे पर विराजमान थी.

उसकी नज़रे दोनों के hi चेहरों पर तिकी हुई थी. खासकर वीर पर. वो तोह उससे खा जाने वाली नज़रो से घर रही थी.

की तभी वीर के मैं में घंटी बजी...

*डिंग*

[2 points have been rewarded.]

'2 पॉइंट्स? ये किसलिए?'

[Uplabdhi ke liye!]

'किसी उपलब्धि?'

[Ek shadi shuda khubsoorat aurat ki ungli ko apne muh me bhar bhar ke uska lutf liya. Ye ek uplabdhi se kam hai kya?]

'व्हाट थे...!?'

[Add karne hai points master?! Changes subah dekhne milenge!]

'हम्म! ऐड थम तो माय इंटेलिजेंस.'

[Sure!?]

'एस्सस!'

*डिंग*

[2 points have been added to intelligence.]

[ स्टैट्स :

स्ट्रेंथ - 10/100

इंटेलिजेंस -8/100

अगिलिटी - 3/100

ेंदुराने - 7/100

अपीयरेंस - 7/100]

'गुड! यदि सिर्फ ऊँगली मुँह में भरने से 2 पॉइंट्स मिले है तोह यदि में... फ़क! वीर किसी किसी बातें सोचने लगा तू!?'

अभी इस से पहले वो और बातें कर पाटा सिस्टम से श्रेया की आवाज़ उससे होश में लायी,

श्रेया : अब बताओगे की क्या था वो सब?

निधि : श्रेया... जैसा तू सोच रही है वैसा कुछ भी नहीं है.

श्रेया : आप चुप रहिये दी! में इस से पूछ रही हु. ओह्ह hello~ बताओगे कुछ? या नहीं?

वीर : वेट! ी कैन एक्सप्लेन.

श्रेया (आगे झुक कर) : तोह बताइये जनाब!!!

वीर : वो... वो तोह... वो बस... Ma'am का हाथ अचानक hi जल गया तोह मेने उससे वो... ऐसे अचानक से उससे ठंडा करने के लिए मुँह में भर लिया... एक रिफ्लेक्स एक्शन था... बस... और कुछ नहीं!

श्रेया : अच्छा बच्चू?? तोह मान लो की मेरी ऊँगली भी यदि जल गयी तोह उससे भी मुँह में भर लोगे?

वीर : हां!

श्रेया : व्हाआआआत्तत्त??

वीर : No! मेरा मतलब...

श्रेया (ऊँगली दिखाते हुए) : माय गॉड! सुनो! एकदम कान खोल के. मेरी दी से एकदम दूर रहना समझे? यदि मेने ज़रा भी देखा न की तुम दी के पास फट्ट्या रहे हो तोह फिर देखना.

वीर : ो... Okay!

निधि : श्रेया! किसी बातें कर रही है तू? वीर ऐसा नहीं है.

श्रेया : आप तोह बोलिये hi मत. बड़े अच्छे से मुँह में ऊँगली दिए कड़ी थी आप तोह...

निधि (ब्लश) : श्रेयययआआअ!!!

श्रेया : हम्फ! चलो डिनर करे!

और ये मामला सेटल होते hi डिनर शुरू हो गया.

वीर ने एक बार फिरसे दोनों को चेक किया तोह पाया की निधि की फवौराबिलिटी 5 अंक से बढ़ चुकी थी और अब 35 पर थी. वही श्रेया की जहा जीरो थी वह अब 5 अंक नज़र आ रहा था.

डिनर के वक़्त उसके बगल से निधि बैठी थी तोह वही उसके सामने श्रेया और उसकी गॉड में जूही बैठी हुई थी.

और दोनों hi कुछ खुसपुसाते हुए वीर को घूरते हुए बातें कर रही थी...

'ये दोनों... क्या बातें कर रही है ये मुझे देख देख के...!?'

श्रेया और जूही आपस में किसी खुसुर पुसुर में लगे हुए थे.

श्रेया : जूही!!

जूही : हम्म!

श्रेया : ये भैया जब भी तुम्हारी मम्मी के पास जाए न, मुझे बताना ठीक!

जूही : हम्म्म हम्म्म! पर दीदी... ये भैया कौन है?

श्रेया : ये तुम्हारी मम्मी के छोटे भाई है. हहै~ इनको मां कहा करो okay?

जूही : हम्म! हम्म्म!

तभी जूही श्रेया की गॉड से उतर वीर को देखने लगी और बोली,

"मां! अब से आप यही रहोगे?"

*कुघ कुघ*

ऐसा फन्दा शायद hi वीर को खाते टाइम कभी लगा होगा.

'क्या मेने सही सुना? मां?'

[Haa! Mama! Haha~ Abhi boht mehnat karni baaki hai master!]

निधि : अरे वीर? क्या हुआ? आराम से खाओ...

बोलते हुए, निधि उसकी पीठ सहलाने लगी.

श्रेया : हाहाहाःहाहा~

निधि : हस्स क्यों रही हो?

श्रेया : जूही ने इससे मां बुलाया तोह इसको खासी आ गयी. हाहाहाहा~

निधि : ज... जूही!??

जूही : हां मम्मी! अब ये मां अपने साथ hi रहेंगे?

श्रेया : हाहाहाहा~ एक नंबर जूही...

निधि (ब्लश) : उम्म्म... हां बीटा!

और इन्ही सब हस्सी मज़ाक में ये डिनर समाप्त हुआ.

वीर इस वक़्त बाहर hi सोफे पर सो रहा था तोह वही श्रेया के संग जूही और निधि तीनो अंदर बैडरूम में स्थित बीएड पर सो रही थी.

जब सवेरा हुआ और वीर अपनी नींद से बाहर आया तोह सबसे पहले वो बाथरूम में गया फ्रेश होने.

और जाते hi उसकी नज़र मिरर में अपने आप पर पड़ी. कुछ सेकण्ड्स तोह वो यु hi अपने आप को देखता रहा और फिर एक झटका लगा उससे.

'फ़क!!!!'

[You feel different right?]

'हाँ! में... स्ट्रांग महसूस कर रहा हु. चेहरे में वैसे कुछ समझ नहीं आ रहा. महसूस तोह हो रहा है की कुछ बदला है बूत दिखाई नहीं दे रहा.'

[Appearance me ek hi point add kiya tha. Kya hi samajh aaega Master?]

'तोह! कल मुझे Ma'am की ऊँगली मुँह में लेने से 2 पॉइंट्स मिले थे. तोह यदि में... किसी और लड़की के साथ ऐसा करू तोह!?'

[Better quality! Better points!]

'क्या मतलब?'

[Matlab jitni acchi ladkiya, jitna zyaada unka status, utne hi acche points.]

'क्या पर्तिअलिटी है.'

[Master! Aapne abhi tak mujhe naam nahi diya. Isliye, please! Name the system.]

'नाम?'

[Haa master!]

'हम्म! वैसे... तुमने मेरी जान बचाई है. तुम जब आयी हो जब में इस दुनिया से जाने वाला था. तुमने मुझे सहारा दिया. सच कहु तोह में वाक़ई खुशकिस्मत हु जो तुम्हारा साथ मिला. कभी किसी ने मुझसे इतनी साड़ी बातें नहीं की होंगी. हां तुम्हारा रवैय्या थोड़ा ऐटिटूड वाला था शुरू में बूत अभी ठीक है. मेरी लाइफ में तुम किसी एंजेल की तरह आयी हो. इसलिए... आज से तुम्हारा नाम... पारी.'

[System's default name has been changed to Pari!]

'पारी?? ठीक है न नाम!?'

[Yes! Master! Ab se aap mujhe Pari kehke hi sambodhit karna.]

'Okay पारी!'

अभी वीर ब्रश hi कर रहा था की वही घंटी उसके दिमाग में फिरसे बजी,

*डिंग*

[Mission : Lose your virginity.

Rewards : ?? Points.

Time limit : 18 hours.]

और मिशन पढ़ते hi वीर की हवा टाइट हो गयी. उसके मुँह से टूथ ब्रश छुटक के बेसिन में hi गिर पड़ा.

'व्हाट थे हेलल????? पारी??? कह दो की तुम ने प्रैंक किया है.'

[Master! Koi prank nahi hai. Ye missions randomly generate hote hai. Mera control nahi hai isme kuch.]

'अरे पर अभी निधि Ma'am का भी तोह मिशन मिला था न मुझे? फिर ये अलग एकदम से?'

[Zaroori nahi hai ki ek baar me ek hi mission mile master.]

'रियली? फ़क! टाइम लिमिट 18 घंटे? व्हाट थे हेलल? अरे यू किडिंग में? कहा से लूज़ करू अपनी विर्जिनिटी? 18 घंटे में लड़की कहा से धुंडु अब में? खुद को hi छोडूंगा क्या? और ये कोई छोटी सी बात नहीं है. में कैसे अपनी विर्जिनिटी को यु खो सकता हु?'

[Virginity ka toh nahi pata master, par yadi aapne mission time pe poora nahi kiya toh aap mujhe zaroor kho doge.]

'दमन आईटी!!'

खीजते हुए उसने अपने हाथ बेसिन पे पटक दिए.

[Aapko kese bhi apni virginity khoni hai.]

'No वे! पारी!! अरे इसमें तोह रिवार्ड्स भी नहीं दिखा रहा है.'

[Mein kuch nahi kar sakti Master!]

'फ़क थिस!!!'

[Fuck a woman instead Master!]

'शट उपपपप!!!'

[I can't help you with this master.]

'क्या में पूछ सकता हु मेरी प्यारी पारी की इस टाइप का मिशन मुझे क्यों मिला है?'

[Mujhe nahi pata master. But jaha tak mera andaaza hai, ye isliye hai taaki aap maturity ki duniya me kadam rakho. Khud ko mature banao.]

'वाह! क्या बात है! अध्भुत!'

***

शाम के 7:30 बज रहे थे. और वीर निधि के घर से 5 बजे का निकला हुआ था. लड़की छोड़ने के लिए. यानी की अपनी विर्जिनिटी खोने. एक लड़के से आदमी बन्न ने. ढाई घंटे से वो इधर से उधर बस फट्ट्या रहा था. पर लड़की को दूर दूर तक नामो निशाँ नहीं था. उससे एक ऐसी लड़की चाहिए थी जो सुन्दर भी हो, खुद राज़ी भी हो और सेक्स के बाद कोई लफड़ा भी न हो. पर ऐसी लड़की मिलना तोह जैसे खेत में सुई ढूंढ़ने के बराबर था.

उसकी कुछ समझ नहीं आ रहा था. घर पे वो श्रेया को ये कह के जल्दी निकल गया की वो दोस्त के यहाँ जा रहा है. निधि उस वक़्त कॉलेज से लौटी नहीं थी. वर्ण निधि तोह उस से 100 सवाल करती. क्युकी वो जानती थी की उसके कोई दोस्त नहीं है.

'हम पिछले एक घंटे से इस बेंच पे बैठे हुए है.'

[Hmm! Baithe toh hue hai. :approve:]

'और मुझे अपनी विर्जिनिटी लूज़ करनी है.'

[Hmm! Karni toh hai.:approve:]

'और नहीं की तोह में तुम्हे खो दूंगा.'

[Hmm! Kho toh doge.:approve:]

और वो चिल्लाया...

'फुक्कककककककक थीइइइइइस्सस्सस्स मिश्नण...'

[I told you to hire a slut. But aapko karna hi nahi hai uske saath...]

'ऑफ़ कोर्स! में अपना पहली बार ऐसे कैसे खो सकता हु?'

[Go to Club then. Waha koi pasand aa jaaye aapko?]

'हम्म? क्लब्स में मिलेगी मुझे कोई? उनको रेडी कैसे कराऊंगा?'

[Ye toh aap pe depend karta hai.]

'फाइन!!'

घूमते फिरते वीर भैया पहुँच गए एक क्लब के बाहर. पब hi था एक प्रकार से बूत विथ लक्ज़री रूम्स. दारु पियो, लड़की पटाओ, ठोको, और बाहर.

समय समय ऐसी जगहों पर राईड्स भी पड़ती रहती थी. पर इंसान तोह होते hi हरामी है. एक बार पकडे गए अगली बार से फिर वही काम.

[Aapke paas paise toh hai na?]

'हम्म? पैसे? नहीं! मेरे पास तोह फूटी कौड़ी भी नहीं है.'

[What the hell? Toh andar kese jaoge?]

वीर जेब में हाथ डाले क्लब के बाहर अपनी पॉकेट्स टटोल रहा था. तभी उसके कानो में एक मधुर आवाज़ पड़ी,

"यू don't हैवे मनी!?"

उसने जैसे hi पलट के देखा तोह उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी.

सामने एक बेहद hi ख़ूबसूरत लड़की कड़ी हुई थी. इतनी ख़ूबसूरत की उससे देख बेचारे वीर का मुँह खुला का खुला hi रह गया.

एक काली जांघ तक आती ओने पीेछे ड्रेस जो उसके गोर बदन से एकदम कस के चिपकी हुई थी. उसके स्तन के उभार की आकृति वो भली भाति देख पा रहा था.

उसके खुले काले बाल जो सिर्फ कंधो तक थे. हल्का make-up, होंठो पे वो हलकी गुलाबी लिपस्टिक, कानो में लम्बी स्टाइलिश बाली, हर्र जगह से वो सौंदर्य की प्रतिमा लग रही थी.

वीर बेचारे की बोलती बंद हो गयी थी. वो शायद अब तक की सबसे खूबसूरत लड़की थी जो वीर ने देखि थी.





वीर : वो...

लड़की : यू don't हैवे मनी राइट?

उसकी आवाज़ सुन्न वीर ने हां में सर हिला दिया.

लड़की : थें, के विथ में. I'll पाय फॉर यू.

वीर : हँ???

वीर ने नोटिस किया की उस लड़की के पीछे 2 हट्टे काटते बोडीगार्ड्स भी थे जो काला सूट और काला चश्मा लगाए हुए थे.

और वीर को मन करना ठीक न लगा. वैसे भी उससे अंदर तोह जाना hi था. जैसे भी एंट्री मिले.

एंट्री मिलते hi अंदर का नज़ारा देखते hi वीर की आँखें hi चौंधिया गयी.

एक तोह धेरर साड़ी डिस्को लाइट्स, ऊपर से हाई वॉल्यूम पे म्यूजिक, स्टेज पे लड़किया ऐसे नाच रही थी की मानो स्टेज hi तोड़ देंगी.

न कोई होश, न कोई ठिकाना बस कही पे भी नाचे जा रही थी. लड़के भी उन्ही के साथ कमर मटकाने में लगे हुए थे तोह कुछ लोगो के तोह अलग hi सन चल रहे थे.

वीर ने देखा की साइड में कई सारे लक्ज़री सोफे लगे हुए थे जिनपे बैठ के लड़का लड़की किसिंग में डूबे थे. ये सारा नज़ारा वीर अपनी ज़िन्दगी में पहली बार देख रहा था.

'दमन!!!'

[Welcome to the world of Adults.]

दारु तोह ऐसे पी रहे थे लोग, अरे पी क्या कुछ तोह हवा में फेक रहे थे और नीचे लौंडे लौंडिया मुँह खोले बियर की बूँद अपने मुँह में लेने की कोशिश कर रहे थे.

जैसे मानो वो अमृत हो उनके लिए. ये सब सन देख के वीर की बॉहे सिकुड़ गयी. क्या इन्ही सब में इन्हे मज़ा आता है? वो सोच में डूब गया.

सामने के साइड बार था जहा लेडीज और गेट्स दोनों hi हवा में बोतल उछालते हुए बियर व्हिस्की सब कुछ सर्वे कर रहे थे तोह वही साइड में किचन था जहा से खाने पीने का सामान भी टेबल्स पे सर्वे किया जा रहा था.

वीर ने देखा की जगह जगह हुक्का के पाइप्स भी रखे हुए थे जिससे लड़किया बड़ी hi छोड़ और मज़े से पी रही थी. कुछ तोह बेसुध से नशे में डूबे इधर उधर पड़े हुए थे. न hi उन्हें कोई उठाने वाला था और न hi उनका साथ देने वाला.

[Dekha master! Ye hai adults ki duniya. Shayad isliye aapko ye mission mila hai. Taaki aap mature bano.]

'हम्म! देख रहा हु पारी!! देख रहा हु...'

वीर चलते चलते उस लड़की के साथ सामने बार की सीट्स पर बैठ गया.

पर अभी बड़ा hi अटपटा लग रहा था उससे. उसके सर के पीछे दो बोडीगार्ड्स ऐसे खड़े थे की मानो यदि वीर ने गलती से भी उस लड़की को टच किया तोह वो दोनों बॉडीगार्ड वीर के उसी वक़्त दो टुकड़े कर देंगे.

और एक चलने के बावजूद उससे ये सोचते hi पसीना आने लगा.

तभी अचानक उस लड़की ने उन् दोनों बोडीगार्ड्स को देखते हुए कहा,

"यू बोथ जो आउटसाइड. ी नीड सम टाइम अलोन."

और ये सुनते hi दोनों बोडीगार्ड्स दुविधा में पद गए.

बॉडीगार्ड 1 : सॉरी मिस! आपको यहाँ अकेला चोरर हम कही नहीं जा सकते.

लड़की : ी टोल्ड यू न... जो आउटसाइड!

बॉडीगार्ड 1 : I'm सॉरी मिस!

लड़की (घूरते हुए) : जाते हो या नहीं? मुझे बार बात कहना पसंद नहीं. It's ान आर्डर.

बॉडीगार्ड 1 : मिस! I'm सॉरी! बूत बड़े मालिक का कहना है...

लड़की : बड़े मालिक को में समझा दूंगी. अब जाओ. Don't वोर्री! यदि कोई भी गड़बड़ हुई ी विल कॉल यू. जस्ट जो आउटसाइड.

बॉडीगार्ड 1 : बूत मिस...

बॉडीगार्ड 2 : ठीक है मिस! पर आप किसी भी मुश्किल में हो, बस एक कॉल कर दीजियेगा. हम जस्ट बाहर hi है. चलो रघु!

रघु : पर जस्सी...

जस्सी : चलो... मिस को अकेला रहने दो कुछ देरर...

लड़की : थैंक्स जस्सी...

जस्सी : It's okay मिस!

और जस्सी रघु को लेके वह से बाहर निकल गया.

अब केवल वीर और वो लड़की hi साथ में अगल बगल बैठे हुए थे.

तभी एक लेडी बारटेंडर उनके पास आयी और उनसे उनका आर्डर पूछी...

लड़की : ओने कॉस्मोपॉलिटन...

बारटेंडर : सूरे Ma'am! एंड यू सर?

वीर : हँ?

[Order do Master!]

'बूत मेने कभी शराब नहीं पी पारी! फ़क! मुझे तोह नाम भी नहीं आते. वो साइड में क्या रखा है... ऑरेंज ऑरेंज सा... ऑरेंज जूस लग रहा है. बोल दू क्या?'

[Hahaha~ bol dijiye master!!]

वीर : उम्... वो... ओने ऑरेंज जूस...

बारटेंडर बेचारी वीर का आर्डर सुन्न बड़ा hi अजीब सा मुँह बनायी और उससे ऊपर से नीचे तक देखि फिर पीछे चली गयी.

'फूऊखककक! शी वास् लाफिंग... शी फूकिंग लौघड़... ी सॉ हेर...'

[Of course! Hahahaha~]

'पारी मेने कभी बियर नहीं पी, यदि अभी पियूँगा तोह नशा तोह चढ़ेगा hi... और तुम जानती हो न. हम यहाँ मिशन पे है. तुम्हे तोह मेरी मदद करनी चाहिए.'

[Sorry Master! But it was... It was just too funny hahahahaha~]

इस से पहले की वो पारी को डाट पाटा उस लड़की के बोल उससे सुनाई दिए.

लड़की : सो? व्हाई अरे यू हेरे?

वीर : हँ!? में वो... कुछ काम था मुझे...

लड़की : ओह्ह्ह!

वीर को बड़ा hi अजीब लग रहा था. ये लड़की थी तोह एकदम अप्सरा जैसी, पर उसके चेहरे पर कोई भी भाव नहीं थे. एकदम एक्सप्रेशनलेस. शुरू से अंत तक वीर ने उसके चेहरे में कोई बदलाव नहीं देखा. न कोई उत्साह, न कोई जोश, न कोई ख़ुशी, न कोई दुःख... कुछ भी नहीं!

तभी बारटेंडर उनकी ड्रिंक्स लायी और उन्हें सर्वे करि. जहा वो लड़की अपनी ड्रिंक पी रही थी वही वीर ऑरेंज जूस पी रहा था. अब उससे खुद को शर्म आ रही थी.

'एक न एक दिन में भी बियर पीने लगूंगा. हम्फ! उसमे इतनी बड़ी बात नहीं है कुछ...'

लड़की : तोह?

वीर : हम्म?

लड़की : कैन ी आस्क यू समथिंग?

वीर : हम्म! सूरे!

लड़की (वीर को देखते हुए) : व्हाट दो यू थिंक ऑफ़ लाइफ?

वीर : लाइफ?

लड़की : हम्म्म्म!

ये सवाल सुनते hi वीर को अपने अतीत की याद आ गयी. वो लम्हे...

जिसमे उसने दर्द सहा, उससे प्रताड़ित किया गया, उससे फसाया गया, उसका अपमान किया गया, न कोई प्यार और न hi कोई प्यार करने वाला.

कैसे उससे घर से बाहर निकाला गया, कैसे दर बदर वो भटकता रहा, वो एक्सीडेंट...

सब कुछ एक पल में जैसे फ्लैशबैक की तरह उसके मैं में आया और फिर अगले hi पल गायब हो गया.

उसने मुस्कुराते हुए अपने बगल में उस लड़की को देखा जो उसके उत्तर का वेट कर रही थी और फिर वो बोलै,

"लाइफ इस मर्सिलेस. ज़िन्दगी को गम देना बखूबी आता है. जितना इस ज़िन्दगी से दोस्ती करना चाहोगे न, ये उतना hi दूर भागती है. कुछ लोगो के पास काबिलियत होती है तोह वो अपनी ज़िन्दगी बदल लेते है. कुछ के पास काबिलियत होती है पर हालात उन्हें अपनी ज़िन्दगी न बदलने पर मजबूर कर देते है. और जिनके पास काबिलियत नहीं होती वो बस किस्मत के लिए बैठे रहते है. की किसी न किसी दिन उनकी किस्मत चमकेगी."

वो लड़की बड़े hi गौर से वीर की बातें सुन्न रही थी.

"एक समय ऐसा भी आता है, जब आपके पास सब कुछ होता है, पर जीने की तमन्ना hi नहीं रहती. ऐसा लगता है मानो की बस ये ज़िन्दगी अपने आप hi थम जाए. खुद को मारने की हिम्मत भी नहीं होती कभी. बस तलाश रहती है तोह कुछ ऐसी चीज़ की जो सब कुछ बदल के रख दे. और पता... बाद में वो मिलता भी है. वो किसी भी रूप में मिल सकता है, एक इंसान के रूप में, या एक जानवर, या फिर कुछ और... जो आपको एक राह दिखाता है, खुशिया देता है, एक नया जीवन देता है. बस उसका इंतज़ार करना पड़ता है. और जब उस से मुलाक़ात होती है, तब पता चलता है की लाइफ क्या चीज़ है."

वीर ने मुस्कुराते हुए अपने खयालात रखे. उसके बोल दिल से निकले थे. वो बताते बताते खो गया था और भूल गया था की वो खुद अपना अतीत व्यक्त कर रहा था इस वक़्त.

और इंदिरेक्ट्ली वो पारी की बात कर रहा था. क्युकी वही तोह आयी थी उसके जीवन में एक फरिश्ता बन्न के. भले hi इंसान नहीं थी पर आखिर कुछ तोह थी. जो उसका साथ देने तैयार थी.

[ :ब्लश2: इडियट! हु टोल्ड यू तो गेट सो इमोशनल?]

पारी की बात सुन्न वीर कुछ न बोलै बस मुस्कुराता रहा.

जब उसने वापस से उस लड़की की ऑर्डर देखा तोह दांग रह गया. उस लड़की का मुँह हल्का खुला हुआ था और वो स्तब्ध सी बस वीर को hi देखे जा रही थी. पहली बार वीर ने फाइनली उसके चेहरे पर कोई भाव देखे. अचंभव और हैरानी साफ़ नज़र आ रही थी उसके चेहरे पर.

उसने कुछ बोलना चाहा पर शब्द नहीं निकले उन् गुलाबी होंठो से. और वो होंठ वापस से बंद हो गए.

उसने वीर से नज़रे हटाई और अपने गिलास जो की आधा खाली हो चूका था उस पर गौर किया. फिर एक बड़ी hi धीमी सी आवाज़ में वो बोली,

"इंतज़ार...... हँ!???"

वीर : हम्म?

लड़की : सो... यू मैं... यदि उस शख्स का इंतज़ार करो तोह वो मिलेगा...! राइट!?

वीर : हँ? येह! ज़रूर! समय आने पर...

लड़की : ी सी!!!

और बिना कुछ दुबारा कहे... वो ड्रिंक पे ड्रिंक लेती गयी. वीर उससे देख के दांग रह गया. न जाने कितना अल्कोहल कसमे कर चुकी थी वह. और उसकी हालत देख वीर को अब थोड़ा तरस आ रहा थे उस पर.

वीर : हे!! अरे यू okay??

लड़की : एस्सस!! *हइच* ी ऍम...

'फ़क! ये तोह तंत्र हो गयी!'

लड़की : हेय्य! के विथ में...

उसने आगे बढ़ के वीर की कालर पकड़ी और उससे खींचते हुए वो कही ले जाने लगी.

वीर : हैययय! वेट! रुको... अरे....

पर उसकी बातो को अनसुना कर वो बस आगे बढ़ती रही जब उन् दोनों के कानो में एक आवाज़ पड़ी,

"कहा जा रही हो छम्मक छल्लो? इधर तोह देखो ज़रा..."

सामने की ऑर्डर देखा तोह 2 आदमी उनके सामने खड़े हुए थे. बोहत शराब पी राखी थी उन् दोनों hi ने. शकल से hi बद्तमीज़ दिख रहे थे.


"ऐसा माल तोह आज तक नहीं देखा बहनचोद!!"

उनमे से एक ने बोलै. तोह दूसरा भी शामिल हो गया,

"सही कहा. ैय्ये लड़के! तुम जाओ और जाके बाहर खेलो, यहाँ हम मर्दो का काम है बस हाहाहा~ और ऐसा टंच माल तोह केवल हम hi संभल सकते है."

कहते हुए उसने एक सीटी मारी.

उन् दोनों के बोल सुनते hi वीर का पारा चढ़ गया. वो कुछ कहता की तभी वो लड़की वीर के पीछे आयी और उस से कस के लिपट गयी. अपनी नशीली आवाज़ में उसने वीर के कानो में कहा,

"बीट थम! सी! थे अरे हरसिंग में..."

'दमन आईटी!!!'

उस लड़की की नरम नरम छुछिया वीर की पीठ पर धसी हुई थी. उससे तोह खुद को खुशकिस्मत मान न चाहिए था की वो लड़की उस से इस कदर यु लिपटी थी. न जाने कितने लोगो को ये अनुभव प्राप्त हुआ होगा.

और ज़ाहिर सी बात थी, वो ये सब नशे में कर रही थी. पूरी टल्ली नहीं हुई थी वह, पर काफी हद्द तक नशा चढ़ चूका था उसमे.

ये पहली बार था जब वीर को किसी स्त्री के उरोजों का एहसास अपनी पीठ पर हुआ था. और उससे ये एहसास बेहद hi मदहोश कर रहा था. वो गरम गरम, नरम नरम, गोल गोल स्तन उसकी पीठ पर दबे हुए थे.

'ी थिंक नाउ ी अंडरस्टैंड की क्यों ये सारे लड़के लड़किया ये सब कर रहे है. आठ! आईटी फीलस गुड!'

[Master! Ye maza baad me lena. Filhaal inn dono ko raaste se hatao.]

पारी की बात सुन्न वीर ने हामी भरी पर तभी वो आदमी ने आगे बढ़ वीर की छाती पर लिपटे उस लड़की के हाथ को थाम लिया.

लड़की : लुक! थे इवन दरद तो टच में. No मन... No मन है एवर तौचेड में विथाउट माय परमिशन... किल थम... किल थम नाउ...

लड़की की बातें सुन्न वीर के होश hi उड़द गए. ये क्या बोल रही है ये? किल थम?

'सहित! कहा फस्स गया में पारी?'

उस लड़की की गरम गरम सासें वीर को सताये जा रही थी.

और वीर से भी रहा न गया. उसने उस आदमी का हाथ थामा और जोरर से उससे धक्का दिया तोह वो पीछे की ऑर्डर धड़ाम से जा गिरा.

दूसरे ने ये देखते hi गुस्से में अपना हाथ उठाया पर उस से पहले hi वीर ने उसकी कनपटी पे एक झापड़ रसीद दिया और बस...

सुनननननन की आवाज़ उस आदमी के कान में गूंजने लगी.

"हाहाहाहाहा ~ दिए यू फुकेर..."

लड़की हस्ते हुए वीर के हाथ को थाम ली.

मौका देखते hi वीर उस लड़की को भगा कर स्टैर्स लेके ऊपर आया.

पर ऊपर आते hi उससे अलग hi दृश्य देखने को मिला. अगल बगल बस रूम्स hi रूम्स थे. और कुछ रूम्स के अंदर से बड़ी hi तेज़्ज़ तेज़्ज़ सिसकियों की आवाज़ आ रही थी.

[Yahi hai mauka! Maar do chauka!]

लड़की : हैययय! Let's जो तेरे...

और वो लड़की खींचते हुए उससे वही एक काउंटर के पास ले गयी,

लड़की : ी वांट ा रूम!

आदमी : जी!

और पल भर में hi वीर उस लड़की के साथ रूम में था.

उसने वीर को यु धक्का देके लिटाया और उसके ऊपर आके बैठ गयी,


लड़की : Don't यू वांट में??

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आज के लिए इतना hi गाइस!!

धन्यवाद!


Don't फॉरगेट तो लिखे एंड शेयर योर कमैंट्स डाउन बिलो.
 
अपडेट - 9 ~ फर्स्ट टाइम

अब तक...

लड़की : हैययय! Let's जो तेरे...


और वो लड़की खींचते हुए उससे वही एक काउंटर के पास ले गयी,

लड़की : ी वांट ा रूम!

आदमी : जी!

और पल भर में hi वीर उस लड़की के साथ रूम में था.

उसने वीर को यु धक्का देके लिटाया और उसके ऊपर आके बैठ गयी,


लड़की : Don't यू वांट में??

अब आगे...

जब वीर शाम को निधि के घर से निकला था, उसके कुछ शान बाद hi निधि घर आ चुकी थी. वो काफी थकी हुई थी और थके भी क्यों न? कॉलेज की भगा दौड़ी hi ऐसी रहती है की स्टूडेंट्स क्या टीचर्स खुद थक जाते है.


जब वो लौटी तोह उससे श्रेया द्वारा पता चला की वीर कही गया हुआ है और वो बता के भी नहीं गया की कहा गया है. बस! इसी बात पे निधि बेचैन हो उठी.

"अरे! श्रेया! तूने उससे रोका क्यों नहीं? अरे पूछना तोह चाहिए था ात लीस्ट. उसका कोई फ्रेंड नहीं है श्रेया."

वो बॉहे सिकोड़ते हुए बोली. उसका ऐसा रवैय्या देख श्रेया भी हैरान रह गयी. ये आखिर उसकी बहिन को अचानक क्या हो गया? क्यों वीर के लिए वो इतना टेंशन ले रही है?

श्रेया : अरे बूत... अब उसने बोलै की उससे कुछ काम है और जाना है तोह मेने ज़्यादा नहीं पूछा. हो सकता है अपने घर गया हो?

निधि : नाहीईई!!! वो अपने घर नहीं जाएगा. तुम्हे पता है न उसके घरवालों ने उससे घर से निकाल दिया है. तोह फिर क्यों जाएगा वो घर? और ऐसा क्या काम आ गया उसको एकदम से? शाम के 7:30 हो रहे है श्रेया और अभी तक उसका कुछ पता नहीं है.

श्रेया : चिल दी! आप इतना क्यों तेनसेद हो रही हो? गया होगा कही. आ जाएगा.

निधि : अरे उसका फ़ोन भी बिगड़ा हुआ है श्रेया. न hi उसके पास कोई पैसे है और न hi कोई फ़ोन, कही भटक गया तोह? मेरे ख़याल से वो भटक hi गया है. न जाने कहा घूम रहा होगा अभी...

श्रेया : सहित! मुझे लगा उसके पास फ़ोन और पैसे होंगे...

निधि : कहा से होंगे? कल से वो हमारे साथ है. मुझे उससे कुछ पैसे दे देने चाहिए थे, इमरजेंसी के लिए.

उसकी बात सुन्न श्रेया उससे घर के देखने लगी तोह निधि ने सवालिया नज़रो से उस से पूछा,

"क्या हुआ? ऐसे क्या देख रही हो?"

श्रेया : देख रही हु की आप कुछ ज़्यादा hi परवाह कर रही हो उसकी. यहाँ तक की आप अपनी लाइफ की प्रोब्लेम्स तक को नेग्लेक्ट कर रही हो...

निधि : I'm... I'm नॉट नेग्लेक्टिंग माय प्रोब्लेम्स श्रेया. मुझे पता है में क्या कर रही हु. एंड रही बात वीर की तोह... ी क्नोव हाउ आईटी फीलस... बस इसलिए में उसकी मदद कर रही हु. नथिंग ेल्स. ऐसा कुछ भी नहीं है जैसा तुम सोच रही हो.

श्रेया : वेल! िफ़ यू से सो...

निधि : में गाडी लेके देख के आती हु उससे. हो सकता है आस पास hi हो.

श्रेया : No वे दी! आप यही रहिये, थक गयी हो आप, जूही के साथ रहिये... में जाती हु देखने.

और श्रेया निधि की स्कूटी लिए वीर को ढूंढ़ने निकल पड़ी. एक तरफ जहा निधि के मैं में बेचैनी थी तोह वही दूसरी तरफ श्रेया के मैं में केवल गालिया hi निकल रही थी वीर के लिए.

'सहित! पता नहीं कहा निकल गया ये भी बिना बताये. इसके कारण मुझे घूम घूम के ढूंढ़ना पद रहा है. कोई बच्चा भी घूमता है तोह जल्दी मिल जाता है पर ये जनाब तोह... ये दी भी बोहत भोली है. आने दो उसको... ऐसा मज़ा चखाउंगी न...'

और वो यही सोचते सोचते आस पास की गलियों में चक्कर लगाने लगी. पर वीर का कोई अत पता न लगा.

***

इधर वीर उस कमरे में बीएड पे पसरा हुआ था और उसके ऊपर वही लड़की बैठी हुई थी.

वीर उसकी सुंदरता इतने पास से देख के hi मंत्रमुग्ध हो गया. क्या hi सुंदरता थी. वो हसीं चेहरा, पूरी उत्तमता से तराशा गया वो बदन, वो नैन नक्श जो एक झलक में किसी की जान लेले.

ऐसी सुन्दर लड़की उसके ऊपर बैठी हुई थी. पर ये बात भी सच थी की वो इस वक़्त पूरे होश में नहीं थी अपने. यदि वो होश में होती तोह क्या वो लड़की उसके साथ ऐसा व्यवहार करती? शायद नहीं!?

'ी थिंक ी don't डेसेर्वे हेर. She's तू ब्यूटीफुल.'

[What the hell? Apni ahamiyat mat bhulo master. You have me inside your body. I mean... Ahem! Mein aapke andar hu. Aapki value ab pehle jese nahi rahi.]

'रियली? दमन! बूत ये होश में नहीं है. ी don't वांट तो टेक एडवांटेज ऑफ़ हेर.'

'चेक'

वीर ने उससे चेक करना hi बेहतर समझा. पर जैसे hi उसने उस लड़की को चेक किया. सामने विंडो में रिजल्ट देख उससे एक ज़ररदार झटका लगा. हैरानी के मारे उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी.

उस लड़की के सर पर विंडो खुली तोह उसमे लिखा था ~

[System is unable to access this person's identity.]

'व्हाट थे हेलल पारी? मुझे इसका स्टेटस क्यों नहीं दिख रहा?'

[Ahem! Mein apne shabd waapas leti hu. This girl is more than I expected.]

'व्हाट दो यू मैं पारी? में उससे चेक क्यों नहीं कर पा रहा?'

[Aisa ek hi kaaran se hota hai master.]

'और क्या है वो?'

[Wo ye hai ki mera level low hai. Aur ye ladki ka status lagta hai boht high hai. Jab kisi ka pad aur status boht high hota hai aur mera level low toh uss maamle me aap unn logo ki jaankari nahi dekh paoge master. Aur ye ladki kisi boht bade gharaane se lagti hai. Aapki toh lottery lag gayi!]

'लाटरी लग गयी? फ़क! मेरी गांड मरने वाली है. Didn't यू सी ठोस तवो बोडीगार्ड्स? यदि गलती से भी इसने बता दिया तोह मुझे ज़िंदा नहीं चोररेंगे वो लोग. I'm लीविंग! ी कन्नोत दो आईटी विथ हेर.'

[Nahi! Master! Ye kya keh rahe ho. Aapke paas time kam hai. Aur aisi ladki aapko fir kabhi nahi milegi. Aap usse force nahi kar rahe. See! Wo khud aapke upar baithi hui hai.]

'पारी! यू don't अंडरस्टैंड...'

[System is going in sleep mode. Enjoy your first time master.]

'व्हाट थे हेलल?? पारी!? हे!!! फुसक्कककककक!!'

वीर को उसके हाल चोरर पारी तोह स्लीप मोड में जा चुकी थी. अब सब कुछ वीर के ऊपर था की वो क्या करने वाला था.

तभी वो लड़की नीचे झुकी और वीर के चेहरे के पास अपना चेहरा लायी. उसकी गरम गरम सासें वीर के चेहरे पर पद रही थी जो उससे कुछ गलत करने पर मजबूर करती जा रही थी.

उसने बड़े hi प्यार से वीर के गाल पर अपना एक अंगूठा फिराया और उसके चेहरे को निहारने लगी,

"यू क्नोव? No ओने... No ओने है एवर तौचेड में. यू अरे थे फर्स्ट ओने."

वीर : हँ??

लड़की : नेवर एवर ी हैवे किस्ड एनीवन.





वीर (ब्लश) : .......

और अगले hi पल उसने झुकते हुए वीर के होंठ अपने गुलाबी होंठो में भर लिए.

दोनों के होंठ आपस में मिलते hi एक जोर्डरर झटका दोनों के hi शरीर को लगा. ये दोनों की hi पहली किश थी.

वीर को जहा लड़किया देख के इग्नोर कर दिया करती थी, आज वीर को ऐसी लड़की अपने नीचे लिटाये उसके होंठ चूम रही थी.

ये किसी सपने से काम नहीं था उसके लिए. ये अध्भुत एहसास वीर कभी नहीं भूल पाएगा.

शायद अब उससे समझ आ चूका था की क्यों वो लड़के लड़किया नीचे ऐसे एक दूसरे को चूम रहे थे. ये अनुभव था hi ऐसा की किसी को भी इसकी लत्त लग जाए.

वीर ने जी भर के उस लड़की के होंठ चूमे. वो नहीं चाहता था की वो कभी भी इस फीलिंग को भूले. क्या पता उससे ऐसी लड़की दुबारा मिले भी या नहीं?

आज वीर खुद को बोहत hi लकी मान रहा था जो ऐसी खूबसूरती की बाला उस से चिपक के उसके साथ चुम्बन कर रही थी.

और इसलिए उसने जी भर के उस लड़की के होंठ चूसे. जब दोनों के होंठ एक दूसरे से अलग हुआ तोह दोनों की सासें एक दम तेज़्ज़ थी. लड़की पूरी तरह से अब नशे में लग रही थी.

उसने वीर का हाथ पकड़ा और उससे रास्ता दिखाते हुए वो अपने स्तनों पर ले आयी.

"टच में...!!"

उसने बड़ी hi कामुक आवाज़ में बोलै.

ये पहली बार था जब वीर किसी लड़की के दूध को अपने हाथो में फील कर रहा था. और ये कहना गलत नहीं होगा की लड़कियों के दूध अब उसकी पसंदीदा चीज़ बन्न चुके थे.

बिना समय गवाए और बिना हिचकिचाते हुए वीर ने उस लड़की के स्तनों को ड्रेस के ऊपर से hi जोरर से भींचते हुए उन्हें निचोड़ना शुरू कर दिया.

"आह्ह्ह्हन्न्न... मममममममम"

और वो लड़की लम्बी लम्बी सिसकिया लेने लगी.

वीर ने उससे पकड़ते हुए अपने ऊपर से हटा के उससे लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया. उससे शर्म भी बोहत आ रही थी क्युकी ये सब वो पहली बार कर रहा था और वो भी इतनी सुन्दर लड़की के साथ.

पर साथ hi साथ उससे जोश भी उतना hi चढ़ा हुआ था. लड़का था आखिर. जवानी में कदम रख चूका था और अब उसके अंदर के जंगली भेड़िये को संभालने के लिए एक लड़की चाहिए थी जो की ठीक उसके सामने थी.

नीचे सर झुकाते हुए उसने उस लड़की की गोर नंगे कंधो को चूमना शुरू कर दिया और धीरे धीरे ऊपर जाते हुए वो उसकी गर्दन को अपनी चुम्मियो से गीला करने लगा.

"आआअह्ह्ह्णण!"

उससे पता था की ये सही नहीं है. क्युकी वो लड़की नशे में थी पर वो ज़बरदस्ती भी नहीं कर रहा था एक प्रकार से. वो लड़की खुद उससे यहाँ लेकर आयी थी.

'सॉरी! बूत ी हैवे तो दो आईटी.'

उसने मैं में hi अपने आप से माफ़ी मांगी क्युकी वो अब इस लड़की के साथ सम्भोग करने जा रहा था.

अपने हाथो का इस्तेमाल करते हुए पल भर में hi वीर ने उस लड़की की वो काली ड्रेस उसके बदन से अलग कर दी. और अब उसके सामने वो लड़की केवल एक ब्लैक पंतय में थी.

ब्रा तोह उसने पहनी hi नहीं थी जिस कारण उसकी गोरी नरम छूछीयो के दर्शन वीर को हो गए.

अपने गले में थूक का निवाला निगलते हुए वो आगे बढ़ा और उन् नरम छूछीयो को उसने जी भर के पहले देखा उसके बाद उन्हें धीरे से मगर प्यार से छुआ और फिर अगले hi पल उसने अपना मुँह खोल एक छूछा मुँह में भर लिया.

"आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह!!!"

लड़की सिसकी लेते हुए अपने हाथो को वीर के सर के पीछे लपेट ली और उसके बालो में अपनी उंगलिया फेरर उससे अपनी ऑर्डर खींचते हुए अपने स्तनों पर उसका सर रख दबाव बढ़ाने लगी.

जैसे कहना चाह रही हो की चुसो इन्हे. जी भर के चुसो.

और वीर ने भी जैसे उसके मैं की बात सुन्न ली थी. उसने ठीक वही किया. ये अध्भुत एहसास वो कभी नहीं भूल पाएगा. उन् नरम नरम छूछीयो को उसने जी भर के चूसा, उन्हें निचोड़ा, दबाया और निप्पल्स के साथ खेला.

कभी वो उन्हें kaat'ta तोह कभी उनपे जीभ फिराता, कभी मुँह में भरता तोह कभी दातो टेल दबा के उससे खींचता.

और हर्र प्रहार पर लड़की सिहर के रह जाती. वो वीर की गर्दन ऐसे चूस रही थी मानो जैसे खा hi जाएगी.

पल भर में देखते देखते hi दोनों hi नग्न हो चुके थे. जब वीर ने उस लड़की की योनि के दर्शन किये तोह शान बाहर के लिए तोह वो स्तब्ध बस देखता hi रहा. क्या अध्भुत दृश्य था.

वो चिकनी पतली सी गोरी छूट उससे उसका रही थी. कह रही थी की आओ और चुसो इससे. तबाह कर दो इससे.

इतनी पतली गुलाबी छूट उससे हर पल मदहोश करती जा रही थी.

वीर ने पोर्न देखि थी, पर असली में वो एक लड़की को यु नग्न पहली बार देख रहा था.

लड़की भी उससे इतनी नशीली आँखों से देख रही थी जो वीर को बेकाबू कर रहा था.





पसीने के मारे उस लड़की के बाल भी भीग चुके थे.

वीर अपना चेहरा उस छूट के पास ले गया और पहले उसने एक बार जोरर से उस मादक खुसबू को सुंघा और फिर अपना मुँह खोल उस छूट को अपने मुँह में भर लिया.

"Aaaaaaaaaaaaaa..."

उस लड़की की आँखें फटी की फटी रह गयी और उसने अपनी टांगें जोरर से वीर के सर पर इर्द गिर्द कस ली.

ऐसा एहसास उससे आज तक नहीं हुआ था. वो तोह जैसे अलग hi दुनिया में जा चुकी थी.

कुछ hi मिनट की चुसाई के बाद उसकी छूट रस चौररने लगी और स्खलित होते हुए वो लड़की झटके पे झटके लेने लगी.

'थिस इस थे टाइम...'

वीर ने सोचते हुए अपना लुंड उसकी छूट रस से भिगोया और उसकी छूट के द्वार पर दस्तक देते हुए वो अपना लुंड मलने लगा. उसका लुंड तैयार था अंदर की गुफा को खोजने के लिए.

अपना लिंग छूट के द्वार पर सेट करते हुए उसने एक ज़ररदार धक्का मारा और उसका टोपा झट से छूट में प्रवेश कर गया.

दर्द के मारे बेचारी लड़की इसके पहले की जोरर से चिल्ला पाती, वीर ने उसके मुँह पर हाथ रख उसकी आवाज़ को रोक दिया.

'सहित! ायर्घ्हहह...'

हल्का दर्द तोह उससे भी हो रहा था. पर उस लड़की के दर्द के सामने उसका दर्द कुछ भी नहीं था.

कुछ देरर बाद उसने फिर दो धक्के मारे और वीर का लुंड उसकी छूट की गहराइयो में जा चूका था.

हलके हलके ासु उस लड़की की कोमल पलकों को भिगोने लगे थे. वीर को अब वाक़ई बुरा लग रहा था. वो तोह इस लड़की का नाम तक नहीं जानता था. कहा से आयी है, किस घर से है, क्या नाम है, क्या काम करती है, वीर कुछ भी नहीं जानता था.

उससे बस इतना पता था की यदि उसने अभी ये काम नहीं किया तोह वो पारी को खो देगा और वो ऐसा बिलकुल भी नहीं चाहता था. पारी इन् कुछ दिनों में उसकी ज़िन्दगी का अहम् हिस्सा बनती जा रही थी.

कुछ देरर यु hi बिना हिले डुले वो अपना लुंड उसकी योनि के अंदर hi रखा रहा. और जब लड़की शांत हुई तोह वीर ने हौले हौले hi अपने लिंग को आगे पीछे करना शुरू कर दिया.

"Aahhnnnn...mmmmmm"

"सहित!!!!! डमनणणन..."

छूट अंदर से इतनी गर्म थी की ऐसा लग रहा था मानो वीर का लुंड उसी वक़्त अंदर hi पिघल जाएगा.

किसी भट्टी से काम नहीं थी वो. ये अलौकिक और अनूठा एहसास वो कभी नहीं भूल पाएगा.

छूट इतनी टाइट थी की उसका लुंड बड़ी hi मुश्किल से अंदर बाहर हो रहा था.

छूट के अंदर की त्वचा की दीवारे उसके लुंड को कस के जकड़े हुए थी और अपने तापमान से उसके लुंड को किसी गरम लोहे की रोड में परिवर्तित कर रही थी.

*थप* *थप*

की आवाज़ कमरे में फेल गयी और इस अद्भुत चुदाई के बाद वीर अब स्खलित होने के नज़दीक था.

'में अंदर नहीं गिरा सकता. कही ये प्रेग्नेंट हो गयी तोह दिक्कत हो जाएगी. सहित! बूत ी वांट तो छुम इन हेर सो बाद... नूवो! बाहर वीर... बाहर!!'

और अगले hi पल उसने अपना लुंड बाहर निकाल अपने वीर्य की एक तेज़्ज़ पिचकारी छोर्री, जो सीधा उस लड़की की नंगी छूछीयो, उसकी छाती, और उसके पेट पर जाके गिरी.

अपनी आँखें बंद कर वीर इस पल को अपने dil-o-dimaag में उतारने लगा. ताकि ये पल उससे हमेशा याद रहे.

जब कुछ सेकण्ड्स बाद उसने नीचे देखा तोह एक झटका और लगा उससे.

नीचे बेडशीट पर और उसके लुंड पर खून लगा हुआ था. यहाँ तक की लड़की की योनि में भी खून लगा हुआ था.

'फ़क!!! ये भी वर्जिन थी????? गया... में गया अब! थे विल किल में.... परीइ?? अरे यू तेरे?'

पर पारी का कोई जवाब न आया.

'शीत्तत्त!!!'

उसने उठते हुए उस लड़की को यही नग्न अपनी बाहो में लेके उठाया और फौरन hi बाथरूम में ले गया.

लड़की बेहोश हो चुकी थी. वीर ने फटाफट उसकी छूट और अपने लुंड को अच्छे से साफ़ किया. लड़की के शरीर पर लगा वीर्य भी उसने साफ़ किया.

और उससे बाहर लाके दुबारा बिस्तर पर लिटा दिया.

उसने खुद के कपडे पहने और सबसे पहले उसने बेडशीट का वो टुकड़ा फायदा जहा खून लगा हुआ था और उस कपडे को अपने जेब में रख लिया.

अभी वो उस लड़की को कपडे पहना hi रहा था की तभी...

*बंग*

एक तेज़्ज़ आवाज़ उसके कानो में पड़ी. और उससे कुछ शोर भी सुनाई देने लगा.

ये आवाज़ नीचे से आ रही थी.

पर वीर के शरीर के रुए इस वक़्त खड़े हुए थे. क्युकी वो जानता था...

की जो आवाज़ उसने सुनी...

वो किसी और चीज़ की नहीं बल्कि...

एक गुनशॉट की थी...

इस मामले में वो कभी गलत नहीं हो सकता था. उसने पहले भी रियल लाइफ में ये साउंड सुना हुआ था और वो भली भाति इस आवाज़ से परिचित था. वो आवाज़...

वो गलत हो hi नहीं सकता था.

वो आवाज़ पक्के से एक गुनशॉट की थी...

उसके बाद वो शोरगुल...

ज़रूर नीचे कुछ हुआ था. और ये शोर ज़रूर गुनशॉट के बाद मची अफरा तफरी का था.

'ओह्ह! नूवो!!!'

उसके अंदर एक डर उमड़ना शुरू हो चूका था. अपना थूक निगलते हुए उसने फौरन hi उस लड़की को कपडे पहनाये और वो उससे देखने लगा. उससे ध्यान आया की उसके हाथ में आते वक़्त एक बैग भी था.

वीर ने फौरन hi वो बैग खोला तोह उसमे बस कुछ कॅश था और 2 क्रेडिट कार्ड्स. और एक छोटी सी डायरी जो की एकदम खाली थी. साथ hi एक पेन भी था...

वीर ने एक पन्ना फायदा और उसमे अपना नाम और मोबाइल नंबर लिख उसके बैग के अंदर hi दाल दिया.

'ी क्नोव की जब तुम होश में आओगी तब तुम मुझे हेट करोगी... शायद तुम मुझे मारना भी चाहो. और में मानता हु मेने तुंहरे साथ गलत किया है. इसलिए में अपना नंबर चोरर रहा हु. बाद में तुम जो चाहे मेरे साथ करना चाहोगी मुझे मंज़ूर रहेगा...'

मैं में सोचते हुए वो उस लड़की को उठाके बाहर निकलने के लिए तैयार था.

'मुझे एक फ़ोन जल्द hi लेना पड़ेगा.'

सोचते हुए उसने उस लड़की को अपनी पीठ पर उठा लिया.

पर वो ये नहीं जानता था की नीचे क्या घटना घटित हुई है.

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आज के लिए इतना hi गाइस!


धन्यवाद!!
 
इलेक्शन में नाम दाल दू अपना क्या गाइस???

:पॉपकॉर्न:
 
अपडेट -10 ~ ऑलमोस्ट डीएड

अब तक...

मुझे एक फ़ोन जल्द hi लेना पड़ेगा.'

सोचते हुए उसने उस लड़की को अपनी पीठ पर उठा लिया.

पर वो ये नहीं जानता था की नीचे क्या घटना घटित हुई है.

अब आगे...


जब वीर उस लड़की के साथ उस रूम में प्रवेश किया था तब उससे नहीं पता था की नीचे क्या चल रहा था. वो उन् सभी बातो से अनभिज्ञ था.

उस वक़्त रघु और जस्सी, उस लड़की के दोनों बॉडीगार्ड क्लब के बाहर hi नीचे खड़े हुए थे.

दोनों वाक़ई बोहत वफादार थे. और अपनी ड्यूटी के प्रति पूरी तरह से समर्पित थे. यही कारण है की वो अपनी मिस को यु अकेला उस क्लब में चोरर बाहर नहीं आना चाहते थे.

"जस्सी! मिस ठीक तोह होंगी न? सिर्फ तेरे कहने पे hi बाहर आया हु में. वर्ण मिस को ऐसे अकेला नहीं चोररटा में. यदि उन्हें कुछ हुआ न तोह बड़े मालिक को में जवाब नहीं देने वाला."

रघु ने थोड़ा बेचैन होते हुए कहा. उससे ये डर सत्ता रहा था की कही उनकी मिस को कुछ हो न जाए. वर्ण क्या मुँह दिखाएंगे वो अपने बड़े मालिक को?

"तुम टेंशन मत लो. मेरे होते हुए मिस को कुछ नहीं होगा. इनफैक्ट, में उनपे एक खरोच तक नहीं आने दूंगा. किसी की हिम्मत है जो मिस को छू के दिखा सके?"

जस्सी ने अपनी छाती थप तपाते हुए कहा.

पर उससे क्या पता था की जिस मिस की वो बात कर रहा था की कोई उन्हें छू तक नहीं सकता, उसी वक़्त ऊपर वीर उनकी मिस की छूट में लुंड डाले धक्के पेल रहा था.

विडंबना देखो!

रघु और जस्सी दोनों hi एकदम हट्टे काटते बॉडीबिल्डर थे और फाइट लेने में एकदम आगे. जहा रघु जुडो सीखा हुआ था तोह वही जस्सी करते में ब्लैक बेल्ट था.

किसी की हिम्मत है जो उन् दोनों के होते हुए उनकी मिस को कोई हाथ भी लगा सके?

सिवाए वीर के...

अभी वो दोनों आपस में यु hi बात कर रहे थे की कुछ देरर बाद hi उन्हें एक तीव्र आवाज़ सुनाई पड़ी...

*बंग*

और आवाज़ सुनते hi दोनों के hi आँखें फैल गयी.

आवाज़ अंदर से आयी थी, और अंदर hi उनकी मिस थी.

और इस आवाज़ को दोनों hi बड़ी अच्छी तरीके से पहचानते थे. एक गन शॉट की आवाज़.

दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा और अगले hi पल दोनों अपनी पूरी गति के साथ भागते हुए अंदर पहुचे...

अंदर पॅहुचते hi उन्होंने जो देखा तोह उनके होश hi उड़द गए.

जिस बात का डर था, वही हुआ.

अंदर चारो तरफ अफरा तफरी मची हुई थी. शोर और चीखो से क्लब में उथल पुथल फेल गयी

लोग डर के मारे घबराये हुए दुबक के बैठे हुए थे तोह कुछ सोफे के नीचे छुपे हुए थे.

और सामने दो आदमी रिवाल्वर लिए खड़े हुए थे. उन्ही में से किसी एक ने गोली चलाई थी लगता.

रघु और जस्सी के अंदर आते hi उन् दो आदमियों की नज़रे उन् पर गयी.

और उन्हें देखते hi वह आदमी चौकन्ने हो गए.

फौरन hi उनपे रिवाल्वर तान वो उन् दोनों को सरेंडर करने कहने लगे. और यही हुआ भी.

रघु और जस्सी दोनों को hi अपने हाथ खड़े करने पड़े. तनाव उनके चेहरे पर साफ़ नज़र आ रहा था. क्युकी न तोह उन्हें उनकी मिस कही दिखाई दे रही थी और न hi ऐसी स्थिति में वो उन्हें ढूंढ़ने जा सकते थे.

पसीने की बूंदे दोनों के चेहरों पर सजी हुई थी. और अंदर से दोनों घबराये भी हुए थे.

क्या उनकी मिस सही सलामत होंगी या नहीं? कही उन्हें कुछ हुआ तोह नहीं होगा न?

ऐसे अनेको सवाल से उनके मैं में उथल पुथल मची हुई थी.

रघु (धीमी आवाज़ में) : जस्सी! ये उसके hi आदमी लग रहे है.

जस्सी : हम्म्म!

रघु : हमे जल्द hi कुछ करना होगा. देखो! मिस वह बैठी हुई थी पर वो नहीं है अब वह. न जाने किधर गयी है.

जस्सी : शायद वो ऊपर होंगी...

रघु : ऊपर? ऐसे में तोह... यदि उसके आदमी ऊपर पहुँच गए तोह दिक्कत हो जाएगी जस्सी! जल्दी, कुछ करना होगा...

रघु की आवाज़ में चिंता और घबराहट थी.

वो जानता था की यदि गलती से भी मिस को कुछ हुआ, तोह बड़े मालिक न जाने क्या कर देंगे.

रघु : क्या कहते हो जस्सी? में... शूट करू?

जस्सी : नहीं!!!

उन् दोनों के पास भी रेवॉल्वर्स थे. पर ये बात वो दो आदमी अभी नहीं जानते थे. उन्हें लगा था ये दो क्लब के बोडीगार्ड्स होंगे और ये सोच वो दोनों बस उन्हें सरेंडर करने के लिए कहने लगे.

रघु : शायद ये दोनों हमे नहीं पहचानते जस्सी. तोह क्या ये दोनों उसके आदमी नहीं है?

जस्सी : या तोह ये दोनों नए है या फिर जैसा की तुमने कहा, की ये दोनों उसके आदमी नहीं है.

रघु और जस्सी किस आदमी की बात कर रहे थे, ये तोह वही दोनों जानते थे. पर इनकी खुसपुसाहट उन् दो आदमियों को कुछ रास न आयी.

आदमी : ैय्ये! तुम दोनों... यदि एक भी आवाज़ आयी न अब, तोह सीधा उड़ा दूंगा.

दोनों को बात करते देख उन् दो आदमियों में से एक बोलै.

भले hi रघु और जस्सी को उसकी बात से असर न हुआ हो पर आम जनता को ज़रूर हुआ था. कापते हुए वो सभी नीचे दुबके पड़े थे.

डिस्को लाइट्स जल ज़रूर रही थी क्लब में पर डिस्को जैसा कोई माहौल नहीं था वह.

जहा थोड़ी देरर पहले मज़े किये जा रहे थे, खान पान हो रहा था, नाच गाना चल रहा था वही जगह अब एकदम से शांत सी पद गयी थी.

ये डर था लोगो का अपनी जान खोने के प्रति. भला किसे अपनी जान प्यारी नहीं रहती?

रघु : इसकी तोह...

जस्सी : शठ! शांत!

अभी जस्सी रघु को शांत रहने के लिए हिदायत दे hi रहा था की तभी...

*बंग*

एक और गुनशॉट की आवाज़ आयी...

इस बार ये आवाज़ ऊपर से आयी थी.

और ये आवाज़ सुनते hi दोनों का hi शरीर सिहर उठा.

ऊपर उनकी मिस हो सकती थी. कही ये गुनशॉट!?

सोचते hi दोनों एकदम घबरा गए...

रघु : तुमने सुना न जस्सी? वो ऊपर पहुँच गए है. अब तोह में दावे के साथ कह सकता हु ये उसके hi आदमी है.

जस्सी ने बिना कुछ बोले hi धीरे से सर अपना हां में हिलाया. इस वक़्त वो खुद काफी घबराया हुआ था. उससे अपनी जान की परवाह नहीं थी. परवाह थी की कही उनकी मिस को कुछ हो न जाए.

रघु : इसलिए!! इसलिए में कह रहा था की मिस को अकेला नहीं चोरर्ण चाहिए... अब देखा न...

जस्सी : ये समय उन् सब बातो का नहीं है रघु...

रघु : फाइन....!! अब बस और नहीं! जस्सी! में शूट कर रहा हु. तुम दूसरे वाले को शूट करना... परर ठीक?

जस्सी : ठीक!

हामी भरते हुए इस बार जस्सी भी रघु की बात से सहमत हो गया. दोनों hi एक दूसरे का इशारा समझ गए थे.

और अगले hi पल...

पालक झपकते hi दोनों ने अपनी पंत के पीछे खुसे रिवाल्वर एक झटके में निकाले और...

*बंग*

*बंग*

दोनों ने रिवाल्वर का ट्रिगर दबाते हुए सीधा प्रहार उन् दो आदमियों के पेर्रो पर किया.

अचानक से हुए इस हमले की उन् आदमियों को न hi उम्मीद थी और न hi वो इसके लिए तैयार थे. और नतीजा वही...

बुलेट्स उनकी चमड़ी को फाड़ते हुए उनके पेर्रो के अंदर समां गयी और तेज़्ज़ चींख के साथ दोनों वही गिर पड़े...

केवल वही नहीं, वह मौजूद बाकी सभी जनता भी चींखने लगी. शोर मचाते हुए वो अपनी जान की गुहार लगाने लगे.

डर के मारे उनके शरीर काँप रहे थे. पर अगले hi पल जैसे उनकी मुराद पूरी हो गयी,

रघु : जाओ! निकलो फटाफट... बैठे क्या हो... भागो!!

ये बात सुन्न जैसे लोगो की जान में जान आ गयी. और किसी ने भी एक शान नहीं गवाया वह से भागने में.

गिरते पड़ते वो हड़बड़ी में फौरन hi बाहर की ऑर्डर भागे. न hi उन् ने पलट के पीछे देखा और न hi इस बात की चिंता करि की कही वह कोई सामान भूल तोह नहीं रहे अंदर?

इस वक़्त लोगो के मैं में जो था, वो था अपनी जान बचाना. जो की सही भी था.

और पल भर में साड़ी जनता वह से भाग गयी.

"फेव!!"

सास लेते हुए रघु आगे बढ़ा जहा जस्सी था. जस्सी ने उन् दो आदमियों के गिरते hi उनके रेवॉल्वर्स हथिया लिए थे.

अब केवल वो दो आदमी, रघु, जस्सी, और क्लब का मैनेजर hi नीचे बचे हुए थे.

जस्सी : तुम!! इधर आओ!!

जस्सी ने फौरन hi मैनेजर को बुलाया. वो बेचारा दररते हुए धीरे धीरे आगे आया.

जासी : देखो! एम्बुलेंस बुलाओ और इनको भिजवाओ पर ध्यान रहे... यदि कोई भी तुमसे जानकारी ले तोह तुम यही कहोगे की तुमने कुछ नहीं देखा. कहना की तुम डर के मारे छुपे हुए थे. और इस कारण तुम कुछ भी नहीं देख पाए. ठीक?

मैनेजर ने सहमे हुए हां में गर्दन हिलायी और दोनों , रघु जस्सी ऊपर की ऑर्डर जाने लगे.

***

जब रघु और जस्सी नीचे उन् हालातो में फसे हुए थे तब वीर के साथ ऊपर कुछ और hi कठिन परिस्थिति बानी हुई थी.

जब वो लड़की को कपडे पहना कर उससे अपनी पीठ पर टाँगे बाहर निकल रहा था.

दरवाज़ा खोलते hi उससे एक जोरर का झटका लगा...

जैसे hi उसने दरवाज़ा खोल के मुंडी अपनी दायी तरफ कॉरिडोर में डाली तोह उसने देखा...

करीब 4 से 6 आदमी तीजी से सीढ़ियों से ऊपर आये और हर्र एक के हाथ में एक रिवाल्वर था.

सब के सब ऊपर तेज़्ज़ कदमो के साथ आये और उनके हाथो में गन देखते hi वह बैठे काउंटर पे आदमी की हवा टाइट हो गयी.

ये वही आदमी था जो रूम्स देता था.

वीर ने देखा की वो सभी आदमी आये और एक ने उस काउंटर वाले आदमी की कल्लोर पकड़ के उससे हिलाने लगा और कुछ पूछने लगा.

वीर का रूम स्टैर्स से दूर था जिस कारण उससे कुछ भी सुनाई न दिया. और फिर वो हुआ जिससे देख उसके परर लड़खड़ाने लगे.

*बंग*

एक आदमी ने काउंटर के ऊपर लगे कक्तव कैमरा को एक झटके में उदा दिया.

ये वही आवाज़ थी जो रघु और जस्सी को नीचे सुनाई पड़ी थी.

और उसके बाद तोह जैसे अफरा तफरी मच गयी...

उन् आदमियों ने आगे बढ़ रूम्स के दरवाज़े तोड़ते हुए थोक पीट के खोले और अंदर से कपल्स घबराते हुए बाहर आके हाहाकार मचाने लगे. चींखने लगे, चिल्लाने लगे...

कुछ तोह अधनंगी अवस्था में थे...

वीर को पहले लगा था की ये कोई पुलिस की राइड थी शायद पर उसका वो विचार सामने इस दृश्य को देख उड़द चूका था.

और केवल यही बस नहीं था. अभी जैसे उससे झटके पे झटके लग्न बाकी थे.

अपने परर आधे खुले दरवाज़े के पीछे जमाये उसने अपना सर निकाल दायी ऑर्डर नज़र मारते हुए देखा की कोई ऊपर आ रहा है वही सीढ़ियों से.

और तभी वीर को एक माउथ ऑर्गन की ध्वनि सुनाई दी.

सीढ़ियों से ऊपर आहिस्ता आहिस्ता आते हुए एक इंसान दिखाई दिया.

सफ़ेद हैट, सफ़ेद पंत, सफ़ेद कोट, अंदर एक लाल शर्ट और कोट की ब्रैस्ट पॉकेट में एक गुलाब का फूल.

कुछ इस प्रकार की ड्रेस पहने वह आदमी अपने एक हाथ से माउथ ऑर्गन बजा रहा था और दूसरे हाथ में वो एक हॉकी की स्टिक लिया हुआ था.

जहा बूढ़े बुज़ुर्ग लाठी का इस्तेमाल करते थे चलने के लिए वही ये आदमी लाठी की जगह हॉकी स्टिक का इस्तेमाल कर रहा था.

और उससे देखते hi वीर के बदन में एक सिहरन से मच गयी. उसका शरीर काँप उठा.

उससे देख के उतना डर नहीं लग रहा था, जितना उसके माउथ ऑर्गन की वो ध्वनि सुन्न कर लग रहा था.

ऊपर से वो हॉकी के सहारे चलने का ढंग.

अपना थूक निगलते हुए वीर कुछ सोच hi रहा था की तभी उसके सामने वो हुआ जिसके चलते उसका दिमाग काम करना hi बंद कर दिया.

उस सफ़ेद कोट वाले आदमी ने अपनी ध्वनि बजाना बंद करि और, काउंटर पे बैठे आदमी को देख वो उस से पूछा.

आदमी : केसा था? पसंद नहीं आया न?

और वो काउंटर वाले आदमी ने डर के मारे न में सर्र हिला दिया.

ये सवाल hi ऐसा था. यदि वो पूछता की केसा लगा? तोह बेशक वो काउंटर वाला बाँदा हां में hi सर हिलाता. ये सवाल उससे फसाने के लिए hi पूछा गया था.

और जैसे hi उसने अपना सर ना में हिलाया. उसके अगले सेकंड hi उससे अपने जीवन का सबसे बड़ा पछतावा हुआ.

क्युकी अगले hi पल उस सफ़ेद कोट पहने आदमी ने बड़ी hi शैतानी सी मुस्कराहट दी और धीरे से अपना माउथ ऑर्गन अपने जेब में रखा.

फिर पीछे से एक पिस्तौल निकाली और बिना कोई समय गवाए hi सीधे उस काउंटर वाले की खोपड़ी उड़ा दी...

*बंग*

बुलेट खोपड़ी में घुसी, और काम तमाम...

खून के छींटे यु निकलते हुए ज़मीन पर बिखर गए...

"Aaaaaaaaaaaaaaaa...."

और कॉरिडोर में फिरसे कोहराम मच गया. चींखे गूंजने लगी...

आदमी : मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं है जब कोई मेरी बजायी गयी धुन्न का मज़ाक उड़ाए...

ये नज़ारा देख लोग तोह भयभीत थे hi पर जो सबसे ज़्यादा भयभीत था वो था वीर.

उसके परर काँप रहे थे. वो न hi आगे बढ़ पा रहा था न hi पीछे जा पा रहा था. दरवाज़े के कारण उसका शरीर छुपा हुआ था. केवल मुंडी hi बाहर थी.

और उसकी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था.

कुछ आये समझ में या न आये पर एक बात वो भली भाति जानता था...

और वो ये की वो ये दृश्य कभी नहीं भूल पाएगा...

न hi उस सफ़ेद कोट वाले आदमी को...

और न hi उस ध्वनि को...

उसकी पकड़ पसीने के मारे लड़की पर से छूठ रही थी. पर उसके बावजूद वो अपने मैं में एक संकल्प लिए उससे अपनी पीठ पर लादा रहा.

यदि वो चाहता, तोह इसी शान लड़की को रूम में चोरर अपनी जान बचा के भाग सकता था पर उसने ऐसा नहीं किया.

कारण?

कारण था वो लड़की... उस लड़की के कारण hi वो पारी को खोते खोते बचा था.

उसी लड़की के कारण आज वो एक लड़के से मर्द बन चूका था.

और सबसे बड़ी बात...

उसने उस लड़की के साथ ये सब उसके नशे में किया था. ग्लानि के भाव तोह ज़रूर थे वीर के मैं में. तोह भला कैसे वो ऐसे में उससे यु चोरर भाग सकता था?

क्लब में ऊपर जाने के लिए दो रास्ते थे. एक था दायी तरफ जहा से वीर खुद आया था और जहा से अभी ये आदमी लोग आ रहे थे.

और एक था उसकी बायीं तरफ.

ज़ाहिर सी बात थी, की वीर बायीं तरफ का रास्ता hi चुनन ने वाला था.

क्युकी दायी तरफ जाना तोह खुद की मौत को आमंत्रण देना था.

ये डीडे करते hi वो किसी भी वक़्त बस मौका देख के भागने का वेट करने लगा.

तभी उस आदमी ने अपने चलो से बोलै,

"यही कही होगी! किसी रूम में! सारे चेक करो!"

और बस...

सभी शुरू हो गए...

एक बार फिरसे अफरा तफरी मच गयी...

और कॉरिडोर में लोगो के इधर उधर होने से भीड़ सी मच गयी. जब वीर ने देखा की उसके सामने और अगल बगल के रूम्स से लोग निकल रहे है और भाग रहे है, तोह यही मौका देख वो फौरन hi तेज़्ज़ कदमो के साथ बायीं ऑर्डर भागा जहा नीचे जाने के लिए सीढिया थी.

अब या तोह इससे किस्मत कहे, या इत्तेफ़ाक़ पर वीर उन् आदमियों की नज़रो से बचने में सफल था.

पर एक मुसीबत ताली नहीं, दूसरी उसके सामने थी.

नीचे जाती सीढ़ियों पर पहले से hi एक आदमी रिवाल्वर लिए खड़ा हुआ था.

और जैसे hi उसने वीर को नीचे आते देखा, उसने फौरन hi अपनी गन वीर पर तान दी...

आदमी : ेयी...?! नीचे... नीचे रख लड़की को...

वीर : क... क्यों??

आदमी : सवाल जवाब करता है साले? नीचे रख! और चुप चाप यहाँ से निकल ले वर्ण भेजा उड़ा दूंगा समझा?

इस से पहले वीर कुछ कह पाटा, उसकी नज़र नीचे से आते रघु और जस्सी पर गयी...

उस आदमी का चेहरा वीर की तरफ था तोह उससे नहीं पता था की उसके पीछे से कौन आ रहा है.

और इधर अपनी मिस को वीर की पीठ पर देख रघु एकदम भड़क उठा. वो ये सोच रहा था की वीर ने उसकी मिस को किडनैप किया है.

पर जस्सी के मैं में कुछ और hi था.

एक झलक में hi उसने भांप लिया था की माजरा क्या है.

और इस से पहले की रघु कोई गलत कदम उठाता, जस्सी ने उसका हाथ थाम लिया.

जस्सी के ऐसा करते hi रघु की भी फिर समझ आ गया की बात क्या थी.

और इशारो hi इशारो में बात करते हुए रघु और जस्सी पीछे से उस आदमी पर टूट पड़े...

पर हमला होते hi उसके हाथो में गन का ट्रिगर डाब गया...

और बुलेट निकल के ठीक वीर के कानो से थोड़ी दूर से गुज़रते हुए पीछे दिवार में समां गयी.

टैकल करते हुए रघु ने उस आदमी को दबोच लिया और गर्दन पे वार कर उससे बेहोश कर दिया.

जस्सी ने फौरन आगे बढ़ वीर की पीठ से अपनी मिस को थामा...

वीर : वो... वो... एक सफ़ेद कोट और सफ़ेद पंत में एक आदमी... शायद इन्हे hi ढूंढ रहा है...

उसने कापते हुए कहा तोह जस्सी ने अगले hi पल रघु को देखा...

रघु को पता था उससे क्या करना है...

उससे गाडी निकालने को कह रहा था जस्सी...

'ये वही है... दमन आईटी!!!'

मैं में सोच जस्सी ने एक आखिरी नज़र वीर पर डाली और बोलै,

"थैंक्स! I'll रेमेम्बेर थिस... ी होप तुम यहाँ से साफल्य निकल जाओगे."

और बिना फिर पीछे मुड़े वो तेज़्ज़ कदमो के साथ नीचे भाग गया.

वीर वह खड़े खड़े सब कुछ देखता रहा.

उसने देखा सामने वो आदमी जिसने गन चलाई थी वो बेहोश डाला हुआ था.

उसने पलट के देखा जहा दीवार पर बुलेट से होल हो चूका था.

और ये देख उसके शरीर के रुए खड़े हो गए...

'ी... ी ऑलमोस्ट डीएड!!'

.

.

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.

.

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.

आज के लिए इतना hi गाइस!


धन्यवाद!!
 
अपडेट - 11 ~ निधि इस डिस्प्लेस्ड?

अब तक...

वीर वह खड़े खड़े सब कुछ देखता रहा.

उसने देखा सामने वो आदमी जिसमे गन चलाई थी वो बेहोश डाला हुआ था.

उसने पलट के देखा जहा दीवार पर बुलेट से होल हो चूका था.

और ये देख उसके शरीर के रुए खड़े हो गए...

'ी... ी ऑलमोस्ट डीएड!!'


अब आगे...



क्लब में जो कुछ भी हुआ था, उससे देख के वीर सेहम चूका था.

जहा रघु और जस्सी उस लड़की को लेके निकल चुके थे, वीर भी इस वक़्त अपने कदमो का इस्तेमाल करते हुए भागे जा रहा था.

रात के 8:30 बज रहे थे. न जाने कितने घंटो से वो बाहर था. ऊपर से निधि न जाने कितनी परेशान हो गयी होगी.

यही सोचते सोचते वो बस भागा जा रहा था. उसका दिल ज़र्रों से धड़क रहा था. जो मंज़र उसने अभी थोड़ी देरर पहले देखा था, वही सब कुछ उसके दिमाग में घूम रहा था.

वो मरर्ते मरर्ते बचा था. यदि वो बुलेट, ज़रा सी भी उसके चेहरे की ऑर्डर होती, तोह उसी पल वो मौत के घात उतर जाता.

और ये सोचते hi उसका शरीर काँप उठा. मौत को छू के वापस आया था वह.

भागते भागते थकते हुए वो एक जगह रुका. उसने अपनी हथेलिया खोली और उन्हें देखा...

देखा कैसे उसके हाथ थार थार काँप रहे थे. और क्यों न कापते? उसने अपनी आँखों से एक इंसान को दूसरे इंसान की जान लेते देखा था.

उस आदमी ने hi उन्हें थोड़ी देरर पहले रूम दिया था और कुछ देरर बाद hi उस सफ़ेद कोट वाले आदमी ने उसकी खोपड़ी एक झटके में उड़ा दी थी.

वीर ने देखा था की कैसे उसकी खोपड़ी से खून के छींटे निकले और अगले hi पल वो ज़मीन पर धेरर था.

ये सन वीर कभी नहीं भूल पाएगा. खासकर वो सफ़ेद पंत कोट वाला आदमी.

और उसकी वो माउथ ऑर्गन की ध्वनि...

वीर ने पहले कही ये ध्वनि सुनी हुई थी. उससे नहीं याद था की कहा उसने सुनी है और कब सुनी थी. पर इतना ज़रूर पता था की वो ध्वनि कही न कही उससे सुनी सुनाई सी लग रही थी.

'हे किल्ड हिम... हे...'

अपने कापते हुए हाथो को कण्ट्रोल कर वो फिरसे भागने लगा. जितना जल्दी हो सकता था वो घर पहुचना चाहता था. निधि परेशान होगी उसके लिए.

अभी वो भाग hi रहा था की उसके मैं में एक जानी पहचानी आवाज़ गुंजी...

*डिंग*

[60 points have been rewarded.]

[System has reached Level - 2]

[Congratulations master!!! Hahaha~ Ab aap mard chuke ho. Woohoo~]

'हँ? पारी??? तुम अब जाग रही हो? व्हाट थे हेलल? तुम्हे पता भी है मेरे साथ क्या हुआ था? ी ऑलमोस्ट डीएड. और तुम ऐसे वक़्त पे कैसे मुझे चोरर सकती हो? में... में मरर्ते मरर्ते बचा हु...'

अपने मास्टर की बात सुनते hi इस बार पारी भी थोड़ी सीरियस हो गयी.

[Araam se bataiye master. Mein sleep mode me thi. Aur mene time limit ek ghante ki set kari hui thi. Toh ek ghante tak mein sleep mode se baahar nahi aa sakti thi. Aur na hi mujhe kuch pata tha ki aapke saath kya ho raha hai.]

उसके बाद वीर ने साड़ी घटना पारी को बता दी, जिससे सुन्न पारी खुद हैरान रह गयी.

[I'm sorry master. Mujhe nahi pata tha ki mere sleep mode me jaane ke baad aisa kuch ho jaega. Warna mein nahi jaati. But aapko privacy dene ke liye mene aisa kiya tha.]

'अगली बार से जब में कहु, तभी स्लीप मोड में जाना पारी!'

[Okay master!]

'मुझे तोह लगा था मेने मिशन सही ढंग से नहीं किया और तुम्हे खो दिया...'

[No master! Aapne mission bhi poora kiya hai aur aapko points bhi mile hai aur saath hi saath mera level bhi badh chuka hai. Ab aap shop ko access kar sakte ho.]

पर पारी की बात सुन्न वीर ने कोई रिप्लाई नहीं दिया.

जब पारी ने इस बात पर गौर किया तोह उससे और भी हैरानी हुई. उसके मास्टर के हाथ ज़र्रों से काँप रहे थे. अभी तक वीर अपने आप को ठीक से शांत नहीं कर पाया था. और ये देख के hi पारी को पता नहीं क्यों पर एक बेचैनी सी हुई. क्युकी वो वीर से जुडी हुई थी और उसके दिल में चल रही घबराहट को वो अच्छी तरह से महसूस कर सकती थी.

[Master! Don't worry! Mein hu na. Mere rehte koi aapka baal bhi baaka nahi kar sakta. Dekho! Aapko kitne saare points mile hai. So, don't worry!]

उसने वीर को सपोर्ट देते हुए कहा. ताकि उसका कॉन्फिडेंस बढ़ सके.

'हम्म? थैंक्स पारी! शॉप और ये सब पॉइंट्स के बारे में हम बाद में बात करेंगे... अभी मुझे घर पहुचना है.'

[Okay Master!]

और पारी शांत हो गयी.

जैसे तैसे वीर हफ्ते हुए घर पहुचा. और जैसे hi उसने दूर बेल्ल बजायी, कुछ hi सेकण्ड्स के अंदर दरवाज़ा खुल गया.

श्रेया ने दरवाज़ा खोल जैसे hi वीर को देखा तोह पहले तोह वो शॉक हो गयी, उसके बाद उससे थोड़ी राहत महसूस हुई और फिर अगले hi पल उससे गुस्सा चढ़ गया.

"ोये महान आदमी!!! कहा घूम रहे थे इतनी देरर तक? कुछ अकाल वकाल भी है या नहीं? गाडी लेके गयी हु तुम्हे ढूंढ़ने पर कही नहीं मिले तुम... और मुझसे झूठ बोलने की हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी हाँ? क्या बोले थे? अपने दोस्त के घर जा रहा हु? दी ने बताया मुझे की तुम्हारे दोस्त नहीं है... फिर कहा गए थे? घर तोह जाओगे नहीं तुम... बोलो! जवाब दो! वर्ण साड़ी रात आज घर के बाहर रखूंगी देख लेना..."

वीर को बिना अंदर आने के लिए बोल, श्रेया वही दरवाज़े पर hi उसकी गांड मारने में लग चुकी थी.

सवाल पे सवाल खड़े कर दिए थे उसने.

पर इस से पहले की वीर अपना मुँह खोल पाटा, तभी अंदर से दुआडी हुई निधि आयी और वीर को देखते hi उससे एक अत्यंत hi राहत सी महसूस हुई. उसका घबराया हुआ चेहरा एकदम से ख़ुशी से भर गया.

आगे बढ़ते हुए उसने वीर की ब्याह पकड़ी और बोली,

"कहा चले गए थे? हम सब कितनी टेंशन में आ गए थे. काम से काम बता के तोह जाना चाहिए था वीर."

वीर : वो... वो... कुछ काम था Ma'am.

उसने झूठ तोह बोल दिया ये सोच के की निधि से बच जाएगा. पर अगले hi पल निधि की नज़रे उसकी कल्लोर के पास गले में पद गयी.

और जो उसने देखा, उससे देखते hi उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी.

निधि की नज़रे अचानक hi नीचे झुक गयी, "तुम हाथ मुँह धो लो, में खाना लगाती हु."

बस! इतना बोल वो सर झुकाए फौरन hi अंदर चली गयी.

वीर बेचारा इस सोच में पद गया की निधि Ma'am को अचानक से क्या हो गया. क्यों भला उनका बर्ताव एकदम से बदल गया?

तभी श्रेया ने भी उससे देखा और उसका भी वही रिएक्शन था. गन्दा सा रिएक्शन देते हुए वो बोली,

"यहाँ हम तुम्हे इतनी देरर से न जाने कहा कहा धुंध रहे थे और तुम न जाने किसके पास से मुँह मार के आ रहे हो. में अरे ऑलवेज ट्रैश! हम्फ!"

वीर बेचारा स्तब्ध सा बस दरवाज़े पर hi खड़ा रहा. उसकी तोह समझ hi नहीं आ रहा था की ये अचानक से उसके साथ दोनों निधि और श्रेया ऐसा बेहवे क्यों करने लगी?

'व्हाट थे हेलल? पारी? व्हाई थे अरे एक्टिंग लिखे थिस? ये दोनों ऐसा क्यों बेहवे कर रही है पारी?'

[I don't know master! Mein bhi wahi dekh sakti hu jo aap dekh sakte ho. Mujhe nahi pata.]

'चेक'

वीर ने जैसे hi श्रेया को चेक किया तोह एक और झटका लगा उससे. श्रेया की फवौराबिलिटी जो बड़ी मुश्किल से 5 पर थी वो गिर के 2 पे आ चुकी थी.

और ये देखते hi वीर घबरा गया. यदि श्रेया की फवौराबिलिटी उसके प्रति घाट गयी है तोह इसका मतलब निधि...!?

और ये सोचते hi वो फौरन hi बाथरूम में जाने के लिए किचन से गुज़रा, पर गुज़रते हुए उसने निधि को देखा और अपने मैं में 'चेक' किया.

और एक बार फिर उससे एक ज़ररदार झटका लगा.

निधि की फवौराबिलिटी जो उसके प्रति 35 अंक पर थी वो घाट के 25 पे आ चुकी थी.

टेंशन के मारे वीर बाथरूम में घुसा और जैसे hi उसने मिरर पे अपने आप को देखा तोह सब कुछ उसकी समझ में आ गया.

उससे समझ में आ गया था की क्यों निधि और श्रेया की फवौराबिलिटी यु अचानक घाट गयी.

'ओह्ह! सहित!!!!'

उससे अब इस वक़्त अपना माथा पीटने का मैं कर रहा था.

उसने देखा मिरर में की उसके गले में जगह जगह लिपस्टिक भरी होंठो के निशाँ थे.

[You fucked up master.]

उसने अपना हाथ अपने माथे पर दे मारा.

'मेने सहसा hi नहीं था इस बारे में... दमन आईटी!'

[It's okay master! Don't worry! Dheere dheere badh jaegi unki favourability. Jese jese aap unse accha vyavhaar karoge dekhna kese badhti hai fir...]

'हम्म! अब बताओ पारी... पॉइंट्स और शॉप के बारे में.'

[Okay! Master... Aapko 60 points mile hai. Aapne uss anjaan ladki ke saath apni virginity khoyi uske liye ye 60 points.]

'ी सी! ये तोह काफी ज़्यादा है.'

[Hmm! Boht zyaada! Par master...]

'हम्म?'

[Aap... Wo... Aapne andar hi cum kiya tha na?]

'हँ? नहीं...'

[What? Tabhi... Yadi andar karte toh... Toh aur bhi zyaada points milte...]

'ओह्ह! बूत कोई नहीं. में रिस्क नहीं लेना चाहता था. यदि वो प्रेग्नेंट हो जाती तोह दिक्कत हो जाती. और वैसे भी... मेने उसके साथ जो किया है उसकी वो हालत पर... वो मुझे माफ़ नहीं करेगी.'

[Haha~ Uska bhi solution ab available hai master.]

'क्या मतलब?'

[Ek ladki tabhi pregnant hoti hai jab mardo ka sperm unke egg se jaake fuse hota hai.]

'हां! ये में जानता हु पारी! पर अब ज़्यादा बायोलॉजी में मत घुसना... में बायो स्टूडेंट नहीं हु.'

[I know master. Saral bhaasha me samjhaati hu. Basically, aapka sperm yadi ladki ke andar jaega aur ladki ka yadi safe din nahi rahega toh wo pregnant ho jaegi.]

'हां! ये पता है.'

[Par kya aapne kabhi socha hai ki yadi aapke sperm me maujood unn padaarth ko nishkreeya kar diya jaaye toh?]

'क्या... क्या मतलब?'

[Matlab ki... Aapke sperm me jo aham cheez hai, jis se bacche paida hote hai, yadi usse hi inactive kar diya jaaye toh?]

पारी की बात सुनते hi वीर के शरीर में एक सिहरन दौड़ गयी. वो भली भाति समझ चूका था पारी क्या कहना चाह रही थी.

'No! ये इम्पॉसिबल है. ऐसा कैसे हो सकता है?'

[Fufu~ Master! Ye aap keh rahe ho? Ye jaante hue ki mein ek system aapke andar hu, aapse baat kar sakti hu, aapke stats badha sakti hu aur fir bhi aap aisi baatein kar rahe ho.]

'पर... ये सब...'

[Possible hai.]

पारी की बात सुन्न वीर कुछ देरर मौन रहा. उससे एक के बाद एक झटके लगते जा रहे थे. ये किसी ज़िन्दगी हो गयी है उसकी? शान्ति से सास तक नहीं ले पा रहा था वो. कुछ न कुछ होता hi रहता था उसके साथ.

'पर कैसे? पारी...!?'

[Yahi pe toh ye shop kaam aati hai master. Ab mein level 2 par aa chuki hu. Toh ab aap ye shop ko access kar sakte ho. Shop khul chuki hai.]

'और इस से क्या होगा?'

[Mann me kahiye Master ~ 'Shop']

'शॉप'

और उसके इतना कहते hi उसके मैं में एक विंडो खुल गयी जिसके ऊपर बड़े बड़े अक्षरों में शॉप लिखा हुआ था.

साथ hi साथ एक सर्च बार भी मौजूद था वही.

'ये क्या है पारी?'

[Search bar pe jaaiye aur waha mann me hi boliye~ Sex protection.]

अपने मैं में hi वीर ने एक माउस पॉइंटर इमेजिन करते हुए वो उससे सर्च बार में ले गया और उधर जाते hi उसने मैं में hi कहा ~ सेक्स प्रोटेक्शन.

और तभी सिस्टम ने सर्च करते हुए उसके सामने एक रिजल्ट रख दिया.

[Skill : Sex protection.

Ability : Shukraano me maujood aham padaarth ko nishkreeya karne me saksham. Athaarth, sambhog ke baad bhi aurat garbhvati nahi ho paegi chaahe kitne bhi shukraano andar kyu na chorr diye jaaye.

Ye ek pragatisheel virudhh skill hai. Na hi iska level badhaaya jaa sakta hai aur na hi ghataaya. Istemaal karne ke liye mann me hi Sex protection on ya sex protection off kehna hoga.

Price : 50 points]

सब कुछ पढ़ने के बाद वीर का दिमाग hi घूम गया. ये क्या विचित्र माया थी? केसा जादू था ये?

'यानी... यदि में इससे ों कर लू... तोह में चाहे जितना भी पानी अंदर गिरा लू, लड़की प्रेग्नेंट नहीं होएगी?'

[Yes master!]

'व्हाट थे हेलल? ये किसी किसी स्किल्स मौजूद है.'

[Aisi jinhe aap imagine bhi nahi kar sakte. Par abhi mein level 2 pe hu isliye zyaada skills nahi khuli hai. Luckily, ye level 2 pe khul jaati hai. Isliye available hai. Toh master? Khareedna hai?]

'हम्म? कितने की है? वेट! 50 पॉइंट्स?! व्हाट थे फ़क!!? इतनी महंगी!'

[Free me kuch nahi milta master. Kisi cheez ko paane ke liye uski ahamiyat ke jitni rakam bhi chukaani padti hai. Aur ye toh fir bhi sabse sasti skills me se ek hai.]

पारी की बात सुन्न वीर ने अपना थूक निगला. क्या कहा पारी ने? ये सबसे सस्ती स्किल्स में से एक है? इसका मतलब इस से और भी महंगी स्किल्स मौजूद है?

[Toh bataiye? Khareedni hai master!?]

वीर ने सोचा की कैसे आज वो लड़की उससे यु कमरे में ले गयी थी और उसके साथ सेक्स करि. यदि वीर ने उस वक़्त अपना पानी उसके गर्भ में चोर्रा होता तोह ज़ाहिर है की वो प्रेग्नेंट हो सकती थी. और ऐसे में बाद में उसी की गांड मार्र्टी. वैसे अभी भी उसकी गांड मर्डर सकती थी, क्युकी उससे नहीं पता था होश आने के बाद केसा रियेक्ट करेगी वो लड़की.

'हम्म! खरीदना है मुझे...'

और बस फिर क्या था...

*डिंग*

[Sex protection skill is available to use now.]

[Master! Jab bhi aap chaahe isse on ya off kar sakte ho.]

'मेरे... वो... छुम को कुछ होएगा तोह नहीं?'

[Kuch nahi hoga master. Sab kuch pehle jesa hi rahega. Aapko tension lene ki koi zaroorat nahi!]

'हाश!!'

वीर ने एक राहत की सास भरी.

'तोह इस्तेमाल कैसे करना है इससे पारी? बस बोलना है?'

[Haa master! Kahiye sex protection on.]

और वीर ने वही कहा. अउ अगले hi पल आवाज़ आयी,

*डिंग*

[Sex protection has been turned on.]

अब जब जब वीर अपना पानी किसी भी औरत के गर्भ में गिराएगा उसके बाद भी वो औरत गर्भवती नहीं होएगी. यही तोह जादू था इस स्किल का.

बाथरूम से बाहर आते हुए वो, निधि, श्रेया और जूही समेत डिनर करने लगा.

पर इस वक़्त माहौल बड़ा hi तंग था. कोई कुछ भी नहीं बोल रहा था और माहौल इतना ावक्वार्ड हो गया था की अब तोह खाना खाने में भी उन्हें अजीब लग रहा था. शान्ति इतनी की उनके मुँह से चबाने तक की आवाज़ साफ़ साफ़ सुनाई दे रही थी.

तभी जूही की आवाज़ वीर के कानो में पड़ी,

"मां! आप कहा गए थे? दीदी ढूंढ़ने गयी थी आपको."

"पफ्फफ्टत्त~ हाहाहाःहाहा!!!"

न चाहते हुए भी श्रेया की हस्सी चूत गयी और जूही के वीर को मां बुलाने से पल भर में hi वो तंग माहौल khush-haal हो उठा.

जूही की बात सुन्न निधि ने भी एक नज़र उठा के वीर पर डाली और वीर ने भी वही किया.

पर दोनों की hi नज़रे आपस में मिलते hi दोनों ने नज़रे फेरर ली.

निधि ने नज़रे फ्री थी उसका कारण तोह वो खुद नहीं समझ पा रही थी. जबसे उसने वो निशाँ वीर के गले पर देखे थे तब से hi वो कुछ अलग सा महसूस कर रही थी. उससे बस इतना पता था की वो अभी वीर का सामना नहीं करना चाहती थी और शायद इसलिए वो उससे अवॉयड कर रही थी.

और वीर ने नज़रे इसलिए फ्री थी क्युकी वो निधि की नाराज़गी नहीं देख पा रहा था. उससे पता था की निधि उस से नाराज़ है क्युकी वो इतने समय तक बाहर था बिन बताये और जब लौट के आया तोह उसके गले पे निशाँ थे होंठो के. ज़ाहिर सी बात थी निधि उसकी हरकत पे नाराज़ थी.

जो की सच भी था.

पर असल सच तोह इस से बढ़ के था...

जो न hi वीर जानता था और न hi निधि...

की भला क्यों इस वक़्त निधि ऐसा बर्ताव कर रही थी.

वीर : में काम से गया था जूही...

वीर बेचारा फिरसे झूठ तोह नहीं बोलना चाहता था पर अब जूही के सामने तोह बोलना hi था...

उसका ये जवाब सुन्न दोनों hi निधि और श्रेया उससे पल भर के लिए देखि जैसी मानो कहना चाह रही हो की, 'भगवान् से तोह डर... बच्ची से तोह मत झूठ बोलो'

वीर ने ावक्वार्डली फेक स्माइल दी और फौरन hi टॉपिक बदल दिया,

"वैसे! जूही... आप इन्हे दीदी क्यों बुलाती हो? ये तोह आपकी मौसी हुई न?"

जूही : हां! पर ये दीदी मेको खुद बोलती है की में इनको दीदी बुलाऊ... कहती है वो की अभी उनकी उम्र hi क्या है और मौसी सिर्फ आंटी जैसे लोगो को बुलाया जाता है. इसलिए...

"पफ्फफ्टत्त~ हाहाहाहा!!!!"

इस बार वीर की बारी थी हस्सन की.

श्रेया मुँह फुलाये शर्मिंदा होते हुए जूही को देख रही थी...

'ये जूही भी न... सब कुछ पोक देती है...'

मैं में सोचते हुए वो केवल वीर को हस्ते हुए hi देख सकती थी.

जूही की बातो से आज के ये तंग माहौल तोह कुछ हद्द तक सुधर गया था पर आगे क्या होने वाला था? ये तोह कोई नहीं जानता था.

***

अगली सुबह चिडियो की cheh-chahaahat से और साथ hi साथ फ़ोन पर बज रही हलकी ध्वनि की रिंगटोन से एक ख़ूबसूरत सी लड़की की आँख खुली.

वो अपने घर में एक किंग साइज बीएड पर लेती हुई थी.

घर क्या बांग्ला कहना सही होगा. और ये एक बांग्ला थोड़ी था उसका, न जाने कितने घर बंगले और न जाने क्या क्या था उसके पास रहने को.

उसने बॉहे सिकोड़ते हुए फ़ोन उठाया और अलार्म बंद किया. फिर वो उठी hi थी बिस्तर से की तभी उसके एक तेज़्ज़ दर्द हुआ अपने गुप्तांग में...

"आअह्ह्ह!!!"

और वो अगले पल hi वापस से बिस्तर पर बैठ गयी.

जी हां! ये वही लड़की थी, जिसके साथ वीर ने अपनी विर्जिनिटी खोयी थी.

उससे चलने में दिक्कत आ रही थी. ज़ाहिर सी बात थी जब विर्जिनिटी लूज़ हो तोह अगले दिन चलने में थोड़ी दिक्कत होती hi है.

उसका सारा हैंगओवर सोने के बाद ख़तम हो चूका था. अब जैसे उससे कल रात की साड़ी वारदाते याद आ रही थी.

कैसे वो बेकार से मूड में बाहर निकली थी...

कैसे उसका मैं हुआ था की वो लोकल क्लब्स को एक्स्प्लोर करेगी...

कैसे वो क्लब के बाहर उस अनजान लड़के से मिली थी...

कैसे उस से बातें करते करते उससे लाइफ के बारे में कितनी कुछ बातें पता चली...

कैसे वो उसके साथ रूम में गयी थी...

उसके बाद उससे कुछ याद तोह नहीं था पर उससे समझने में देरर न लगी की आगे क्या हुआ होगा उसके साथ.

'सो... ी लॉस्ट आईटी हँ... माय विर्जिनिटी!!'

पर वो सब jaan'ne के बावजूद उसके चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नहीं थे.

वो केवल बैठी hi रही, किसी और hi सोच में डूबी हुई थी.

उसने गौर किया की वो अभी अपने कल के कपड़ो में नहीं थी. बल्कि उसके कपडे बदल दिए गए थे.

उससे जैसे पता था की कपडे किसने बदले होंगे. घर की हेड माइड ~ जूलिया.

वही साड़ी मैड्स को संभालती थी और वही अपनी मिस की देख भाल करती थी.

अगले hi पल उसकी नज़र अपने बीएड पे रखे पर्स पर गयी. और उसकी चैन खोलते hi उससे वीर के द्वारा लिखी गयी एक पेपर की स्लिप मिली.

उसमे उसका नाम और उसका फ़ोन नंबर लिखा हुआ था.

'वीर...' उस नाम को देखते हुए वो धीरे से बुदबुदायी...

और उसका नंबर उसने अपने फ़ोन में उसी नाम से फीड कर लिया.

तभी उसके कमरे में रघु दौड़ता हुआ घुसा...

"मिस आपको होश आ गया..."

कहते हुए उसने ख़ुशी से झूमते हुए एक फूलो का गुलदस्ता उसके हाथो में थमा दिया...

तभी रघु के गले को किसी ने पीछे से अपनी ब्याह में दबोचा और बोलै,

"तेरे को कितनी बार मन किया है की बिना पूछे मिस के कमरे में नहीं घुसा कर. यदि वो ड्रेस चेंज कर रही होती तोह? तेरी हड्डी पसली तोड़ देता में."

"अबे यार जस्सी! चोरर मुझे... देख... चोक करना मेको भी आता है... ोई...."

जस्सी के चोररटे hi रघु लम्बी लम्बी सासें लेने लगा.

जस्सी : माफ़ करना मिस! इसको में बाद में देख लूंगा.

लड़की : It's okay!

और दोनों hi देख के फिरसे उदास हो गए. उनकी मिस के चेहरे पर कोई मुस्कान नहीं थी.

जस्सी : आपको कुछ बताना है मिस.

लड़की : हम्म??

उसके बाद जस्सी ने कल रात की पूरी बातें अपनी मिस को बता दी. की कैसे वीर ने उससे बचाया और कैसे उन् दोनों ने वीर के हाथो से उससे लेकर यहाँ लाये.

और ये सुनते hi वो लड़की हैरत में पड़ गयी.

लड़की : इतना सब कुछ हो गया और मुझे होश hi नहीं था...

रघु : मिस! आप उस लड़के के साथ ऊपर क्या कर रही थी? कही उसने आपके साथ कुछ गलत तोह नहीं किया न? यदि उसने किया होगा न तोह खाल उखाड़ दूंगा उसकी में...

जस्सी : ोये! शांत!

रघु : हम्फ!

रघु की बात सुन्न वो लड़की थोड़ी सोच में पद गयी और फिरर उसने ना में सर हिला दिया.

रघु : हाश! चलो अच्छा है! वर्ण मेरे हाथो माररता...

जस्सी : कल रात वो सब उसी के आदमी थे मिस.

लड़की : ओह्ह!

जस्सी (बॉहे सिकोड़ते हुए) : आप लापरवाह हो रही हो मिस.

लड़की : हँ?

जस्सी : वो आदमी खुद आया था वह पे...

रघु : ोये जस्सी! मिस को क्यों बोल रहा है? उनका मैं था इसलिए वो गयी थी. और रही बात उस आदमी की तोह वो साला सिर्फ उस स्लोगन के कारण इतना उछाल रहा है. यदि बड़े मालिक चाहे तोह यु उसको उड़वा दे... पर स्लोगन hi है जो साला... दिक्कत दे देता है. और उसी के कारण ये ऐसे ऐसे उछालने लगे है.

जस्सी : वो जो भी हो... फैक्ट ये है की कल वो आया था. और आपको ले जाने में कामयाब भी हो जाता यदि वो लड़का अपनी चतुराई से उसकी नज़रो से बचकर आपको बाहर नहीं लाता.

लड़की : ी सी...

जस्सी : आप अपनी केयर नहीं कर रही हो मिस!

लड़की : हँ?

जस्सी (बॉहे सिकोड़ते हुए) : थोड़ा ध्यान दीजिये अपने ऊपर...

जस्सी की बात सुन्न वो लड़की धीरे से हां में सर हिलायी और फिर जस्सी रघु को खींचते हुए बाहर ले गया.

वो लड़की कमरे में बैठे बैठे hi कुछ कुछ सोच रही थी. न जाने क्या चल रहा था उसके दिमाग में.

उसने एक आखिरी झलक फिरसे अपने फ़ोन में नए कांटेक्ट वीर पर डाली और फिर अपना फ़ोन बंद कर वो बाथरूम में घुस गयी.

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!


लिखे कर देना पसंद आये तोह!
 
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