अपडेट - 5 ~ सिस्टम एक्टिवेशन
अब तक...
पर, किसी को नहीं पता था...
-की जब उसकी सांसें जाने hi वाली थी...
तब, उसके अंदर एक आवाज़ गूंजी थी...
जो किसी को सुनाई नहीं दी थी...
और उस आवाज़ के बोल थे...
*डिंग*
[System has been activated.]
अब आगे...
वीर के एक्सीडेंट के कुछ घंटो बाद hi जब बृजेश का फ़ोन बजा था और स्क्रीन पर वीर नाम जब उसने देखा था तोह पता नहीं क्यों बृजेश ने कॉल नहीं उठाया.
शायद कुछ देरर पहले उसने खुद hi अपने बेटे को धक्के मार के घर से बाहर निकाला था इस कारणवश? या फिर वो अभी वीर के मुँह से कोई भी बात नहीं sunn'na चाहता था. कुछ था जो उसे रोक रहा था वीर से बात करने के लिए.
-की तभी उसके फ़ोन पर फिरसे कॉल आया पर ये उसके खुद के व्यक्ति का था.
बृजेश : Hello?
आदमी : साहब! वीर जी का कार से एक्सीडेंट हुआ है. अभी वो xxxxxxxxxx हॉस्पिटल में भर्ती है.
और, यह सुनते hi बृजेश उठ खड़ा हुआ. और, फौरन hi हॉस्पिटल के लिए जाने लगा.
***
अगले दिन काव्य कॉलेज में अपनी सोच में घूम थी.
'वीर भैया का कॉल उसके बाद से आया hi नहीं. क्या करू? कॉल बैक करू? इसके पहले उन्होंने कभी मुझे कॉल नहीं किया फिर अचानक कल क्यों? कही कोई दिक्कत तोह नहीं? कल उनके बीच में कॉल न कर सकीय थी...'
और, यह सोच वो कॉल लगाती है पर कॉल नहीं लगा. कैसे लगता? वार्ड बॉय ने वीर की सिम वापस से उसके फ़ोन में जो दाल दी थी.
अंत में काव्य उसके व्हाट्सप्प पर मैसेज दाल देती है ये पूछने की वो ठीक है या नहीं?
इधर निधि दिन में hi वीर के घर गयी थी ताकि वह जान सके की क्यों उसके घरवालों ने कॉल नहीं उठाया था.
जब वो वह पहुंची और जैसा रवैया उसने देखा बृजेश, श्वेता और बाकी घर वालो का वीर के प्रति ये देख के उसे इतना गुस्सा आया की वह खुद को कण्ट्रोल न कर सकीय.
निधि एक माँ भी थी. उसकी खुद की बेटी अभी छोटी थी और ऐसे में वह जानती थी की एक पैरेंट होना क्या होता है. ऐसे में जब उसने बृजेश और श्वेता का बेहेवियर देखा तोह बस वो भड़क उठी.
निधि : कैसे maa-baap हो आप लोग? आपका बीटा वह अपनी ज़िन्दगी से लड़ रहा है और आप लोगो को कोई चिंता hi नहीं है? यहाँ तक की आपने उसे अपने घर से बाहर hi निकाल दिया!?
बृजेश : देखिये, मैडम! वीर अब इस परिवार का हिस्सा नहीं है. रही बात पैसे की तोह उसके मेडिकल खर्चो की भरपाई में कर चूका हु पर इसके बाद अब वह जाने की वह कहा रहेगा, कैसे रहेगा... और, आप हमारे पारिवारिक मामलो से दूर रहे तोह hi अच्छा होगा.
निधि : भूल से भी ऐसे maa-baap न दे भगवन किसी को...
और, निधि अपनी नम्म आँखें लिए वह से भाग आयी. उसे वीर के लिए वाक़ई बहुत बुरा लग रहा था. कहा वो खुद को बदक़िस्मत समझती थी पर अब वीर को देख उसे महसूस हुआ की काम से काम उसे maa-baap का प्यार तोह मिल रहा था पर वीर को तोह वो भी नहीं मिला.
न जाने kya-kya सहा होगा उस बेचारे ने अब तक?
न जाने kaise-kaise दिन बिठाये होंगे वीर ने उनके बीच रहके?
इधर, हॉस्पिटल में अभी शाम के वक़्त वीर को होश आ चूका था.
"ारररह्ह्ह!" एक कराह के साथ उसकी आँख खुली.
आँखों से धुंधलापन हटा, सामने का नज़ारा नज़र आया.
उसने देखा की वह हॉस्पिटल में है. आँखें उसकी जल रही थी. उसे सब कुछ जैसे याद आने लगा.
क्या हुआ था?
हाँ! और, कल की साड़ी वारदात फ्लैशबैक की तरह उसके दिमाग में मंडराने लगी. उसने अपना सर पकड़ लिया. आँखों से ासु बहने लगे.
अभी वह सोच hi रहा था की इतने में उसके अंदर एक आवाज़ गूंजी जिसके चलते उसके रौंगटे खड़े हो गए.
[System has been activated. You are now the owner of the system.]
वीर (घबराते हुए) : हँ? कौन? कौन है?
आवाज़ से मानो वीर बेचारा डर hi गया. उसने अपना सर्र idhar-udhar हिलाते हुए देखा पर वो आवाज़ कहा से आयी उसे कुछ भी पता न चला.
[Name the System!]
वीर (चिल्लाते हुए) : कौन है? में पूछता हु कौन है?
और, फिरसे एक आवाज़ उसके दिमाग में गूंजी.
[Analyzing Hindi language from owner's mind...
Processing...
Process completed.
Hindi Language has been recognised.]
वीर (चिल्लाते हुए) : कौन है? सामने आओ... किसकी आवाज़ है ये जो मेरे सर्र में गूँज रही है...!?
तभी, वही आवाज़ फिरसे उसके मैं में गूंजी.
परन्तु, इस बार उसके बोल अलग भाषा में थे.
[Shaant! Mein System hu. Aur, ab se tum mere master ho.]
वीर (दररते हुए) : कौन बोल रहा है? मुझे तुम दिखाई क्यों नहीं दे रहे?
[Maine kaha na shaant! Mein ek system hu. Meri koi physical body nahi hai. Mein tumhare andar hu.]
वीर (घबराते हुए) : M-Mere अंदर?
[Haan! Kya tumhe yaad hai kal tumhare saath kya hua tha? Tumhara accident hua tha. Aur, tum marrte-marrte bache ho, tumhe pata hai? Agar maine samay par madad nahi ki hoti toh tum zinda nahi bachte.]
वीर (चिल्लाते हुए) : कैसी मदद? तुम मेरे अंदर कैसे हो? बाहर आओ!
[Arey! Itni zor se mat chillao. Andar mann me hi kaho jo kuchh bhi kehna hai. Mein tumhare mann, dil, dimag sab se jud chuki hu. Aur, tumhare mann ki baat sunn sakti hu. Aise chillaoge toh log tumhe pagal samjhenge.]
और, उस विचित्र मैं की आवाज़ सुन्न वीर अपने मैं में hi बात करने लगा.
वीर : मेरी... मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है. ये सब क्या चल रहा है?
[I know! Abhi tumhe samajhne me time lagega. Bas itna samajh lo ki mein tumhe koi nuksaan nahi pahuchaane wali. Ulta mein tumhari madad ke liye yaha hu.]
वीर : मेरी मदद?
वीर ने कापते हुए पूछा.
[Haan! Tumhari madad! Mein tumhari madad karungi. Humesha tum apni kismat ko koste the na? Ab mein tumhara saath dungi aur tum apni kismat palat ke rakh doge.]
वीर : वो... वो कैसे?
[Yahi toh mera kaam hai. Yadi mera istemaal sahi se kiya, toh tum duniya par raaj kar sakte ho.]
वीर : सच!?
[Ekdum sach.]
वीर : तोह, क्या तुम लड़की हो? क्यूंकि तुम्हारी आवाज़ लड़कियों जैसी है.
[Nahi! Mein na hi ladki hu, na hi ladka. Mein kisi bhi gender me apne aap ko dhaal sakti hu. Maine tumhaare mann me jhaank ke dekha toh pata chala tumhe ladkiya zyada pasand hai ladko ke muqaable isliye maine apni awaaz ladki ki rakhi hui hai.]
वीर (ब्लशेस) : हँ? ऑब्वियस्ली, मुझे लड़किया पसंद है. लड़के नहीं. I'm नॉट गे.
[Yadi kaho toh awaaz ladke ki rakh lu!?]
वीर : हँ? नहीं! नहीं! ऐसे hi ठीक है.
[Hehehe~]
वीर : ...
[Achha! Ab apni aankhein band karo aur mann me hi kaho ~ Status]
वीर (आँखें बंद करते हुए) : स्टेटस!
और, वीर के इतना कहते hi उसके मैं में एक विंडो खुल गयी,
[Name - Veer
Age - 20
Status - Abandoned student.
Stats :
Strength - 3/100
Intelligence - 4/100
Agility - 3/100
Endurance - 7/100
Appearance - 6/100
Talents - 0
Points - 0 ]
ये सब देख के वीर के होश hi उड़द गए.
[Baap re baap! Tumhara toh baht bura haal hai. Itne bekaar stats maine kabhi nahi dekhe apni life cycle me. Ye kya? Zero talents? Baap re!!! Tum reh kaise liye itne din? Hmm? Endurance bas zyada hai tumhara. Arey haan! Itni maar khaoge toh ye toh zaahir-si hi baat hai. Hehehe~]
वीर : उदा लो... तुम भी मेरा मज़ाक उदा लो. अब तोह मुझे आदत पद गयी है.
[Hey! Hey! Sorry! But ab tension mat lo. Mein hu na. Mein tumhe dekhna kaha se kaha pahucha dungi.]
वीर : और, तुम ऐसा क्यों करोगी? क्या मिलेगा तुम्हे ऐसा करके?
[Mera kaam hi yahi hai. Mera kaam hai logo ko sabse sarvashreshth banaana.]
वीर : तोह, तुमने मुझे hi क्यों चुना?
[Maine chuna nahi. Jab mein yaha se guzri toh tum hi paas me the aur mein tumhare shareer me pravesh kar gayi. Apne aap ko lucky keh sakte ho tum.]
वीर (शॉकेड) : यहाँ से गुज़री मतलब?
[Uss baare me mein zyaada baat nahi kar sakti.]
वीर : तोह? तोह, डॉक्टर को पता नहीं चला? की तुम मेरे अंदर हो?
[Hahaha~ Doctor kya... Tumhaari prithvi me rehne waala koi bhi insaan ye nahi bata sakta ki tumhaare andar mein maujood hu.]
और, एक और झटका वीर को. ये क्या बाला घुस गयी अचानक से उसके अंदर आके?
वीर : और, तुम्हे हिंदी कैसे आती है??
[Arey, buddhu abhi toh bataya, mein tumhare mann, dimaag aur dil se jud chuki hu. Aur, abhi-abhi toh seekhi tumhaare dimaag se hi. Isliye, jitni hindi tumhe aati hai utni hi mujhe bhi.]
वीर : ो... Okay!
[Par, tumhaare stats bahut hi bekaar hai. Mujhe khud taras aa raha hai dekh ke. Tumhe jald se jald apne stats badhaane honge.]
वीर : ये? ये स्टैट्स क्या है?
[Ye tumhari asli kshamtaaye hai. Tumhari strength 3 hai yaani ki jo taaqat hai tumhare andar use agar number se darshaaya jaaye toh woh 3 hai. Intelligence matlab tumhari buddhi, agility tumhari sphoorti, endurance tumhari sehan-sheelta aur appearance tumhare physical features yaani ki chehra, body, haath-perr ye sab.]
वीर : और, में इन्हे बढ़ा सकता हु? तोह मेरे असली शरीर में बदलाव आएँगे?
[Haan!]
वीर (शॉकेड) : बाप रे! ऐसे में तोह में फिर-
[Tabhi, toh kaha ki ab mein tumhari kismat palat ke rakh dungi.]
वीर : पर, वो पॉइंट्स कैसे बढ़ेंगे?
[Missions karke. Samay-samay par tumhe missions milenge aur jaise-jaise tum unhe complete karoge tumhe points milenge. Unn points se tum apne stats badha paoge aur saath hi saath nayi skills khareed paoge. Saath hi saath jitni uplabdhiya aur naam kamaoge tumhe points milte rahenge.]
वीर : में कुछ समझा नहीं...
[Hmm! Tumhara intelligence kam hai na isliye abhi sab kuchh tumhare bheje ke upar se jaayega. Bas itna samajh lo. Jaise-jaise tum missions poore karte jaoge, mera level aur saath hi saath tumhaara level badhta jaayega. Jiske chalte aur bhi anokhi skills unlock hoti jaayengi. Dhyaan rahe! Agar mission ko time limit me poora nahi kiya gaya, toh tum humesha-humesha ke liye mujhe kho doge.]
वीर : ो... Okay!!
[Hmm! Ek aur akhiri baat. Kabhi bhi... Kabhi bhi ghamand mat karna. Jis din tumhe ghamand aana shuru hua, uss din se hi tumhara ant bhi shuru ho jaayega.]
सिस्टम की बात सुन्न वीर के रौंगटे खड़े हो गए. अपना थूक निगलते हुए उसने फिरसे कहा.
वीर : मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा की दुनिया में ऐसी भी कोई चीज़ होती है.
[Duniya me aisi koi cheez nahi hai. Saari duniya me mein hi ek hu jo tumhare andar iss waqt maujood hu. Mein iss planet se nahi hu. Aur, planet ke baahar kaisi-kaisi cheezein maujood hai ye tum insaan soch bhi nahi sakte.]
वीर : .........
इसके पहले की वीर कुछ आगे कह पाटा, निधि उसके वार्ड में आ गयी.
दरवाज़े की आहात से जब वीर ने पलट के देखा तोह अपनी ma'am को देख कर चौंक गया.
वीर : Ma'am!?
निधि : ओह्ह गॉड! फाइनली... तुम्हे होश आ गया.
और, निधि तेज़ क़दमों के साथ आगे आयी और वीर का हाथ थाम ली.
वीर (शॉकेड) : निधि ma'am आप यहाँ!?
निधि ने फिर साड़ी बात उसे बता दी. जब उसे पता चला की बृजेश ने उसका कॉल नहीं उठाया था तोह उसके चेहरे पर दर्द भरी मुस्कराहट आ गयी. निधि उसे बेचैन भरी नज़रो से देख रही थी.
वीर : आपने मेरे लिए मेडिकल फी दी!?
निधि : मैंने तोह सिर्फ एडवांस दिया था बाद में तुम्हारे डैड ने साड़ी पाय की.
कहते हुए उसने वीर का हाथ एक बार फिर थाम लिया.
निधि (बॉहे सिकोड़ते हुए) : तुम्हे... तुम्हे बुरा लग रहा होगा न? तुम्हारे घरवाले तुम्हे देखने तक नहीं आये. जैसे मानो उन्हें कोई परवाह hi नहीं है तुम्हारी.
वीर (स्माइल्स) : इसमें कोई नयी बात नहीं है, ma'am. ये सब तोह रोज़ का है. I'm नॉट सुरप्रीसेड. ः~
उसकी वो फेक हस्सी देख पता नहीं क्यों, पर निधि को अपने दिल में अत्यंत hi दर्द महसूस हुआ. और, उसने वीर का हाथ और ज़ोर से भींच लिया.
तभी, वीर के अंदर फिरसे आवाज़ गूंजी,
[Apne mann me kaho 'Check' aur fir iss aurat ki taraf dekho.]
सिस्टम की बात सुन्न वीर ने वैसा hi किया और जैसे hi उसने चेक कहते हुए निधि को देखा तोह उसके होश hi उड़द गए.
निधि के सर के ऊपर हवा में एक विंडो मंडरा रही थी जिसमे कुछ शब्द लिखे हुए थे ~
[Name - Nidhi
Age - 30
Status - Divorce pending.
Bio - Nidhi ki ek beti hai jiska naam hai, Juhi. Saath hi ek beta hai jisey wo apne saath rakhna chaahti hai par uske pati 'Rajat' ne use apne paas rakha hua hai. Rajat se uska rishta kharaab chal raha hai jiske chalte Nidhi akeli apni beti ke saath ek ghar me rent dete hue rehti hai, kyunki wo apne mata-pita par bojh nahi banana chaahti. Uski maa ko do din pehle hi dil ka daura pada tha aur woh bhi isi hospital me bharti hai. Nidhi ki life bahut hi dukh aur pareshaniyo se bhari hui hai.
Favorability - 20
Relationship - Student-Teacher ]
ये सब कुछ वीर को निधि के सर के ऊपर नज़र आ रहा था.
वीर (घबराते हुए) : ये... ये आपके सर्र पे...
निधि : हँ? क्या हुआ? मेरे सर्र पे!?
[Arey buddhu! Ye sirf tum dekh sakte ho? Baaki koi nahi.]
वीर : नहीं, ma'am! वो में ऐसे hi...
'इतना तोह में एक साल में नहीं जान पाया, ma'am के बारे में जितना अभी जान गया. क्या कमाल चीज़ है ये.'
उसने मैं में सोचा.
'सिस्टम? ये फवोराबिलिटी 20 का क्या मतलब है?'
[Iska matlab hai ki wo tumhaare baare me kya sochti hai. Ek prakaar se uske mann me tumhare liye jo bhaav hai usko darshaata hai.]
'तोह ये 20 मतलब?'
[Matlab ki abhi wo tumhare liye sirf 20 favorability rakhti hai. Jaise-jaise tumhara aur uska relation achha hoyega ye badhta jaayega. Agar, ye 80 ke upar hai matlab ki koi tumhe chaahta hai. Agar ye 90 ke upar hai matlab ki koi tumhe dil se pyaar karta hai. Aur yadi 100 hai matlab ki dil-o-jaan se pyaar karne waala vyakti.]
'समझा!'
निधि : वीर? कहा खो गए?
जब निधि ने चुटकी बजाते हुए अपना हाथ उसके सामने हिलाया तोह वीर जैसे अपने खयालो से बाहर आया.
वीर : हाँ! वो में... Ma'am...
निधि (हाथ थामते हुए) : जस्ट फॉरगेट अबाउट एवरीथिंग वीर! और, कुछ मत सोचो. बस तुम्हे जल्द से जल्द ठीक होना है. Okay? एंड, don't थिंक तुम्हारा कोई नहीं है. I'm विथ यू okay? अभी तुम रेस्ट करो अब. में अब कल शाम को hi आउंगी. आज मैंने वैसे hi लीव ली थी. रोज़ नहीं ले सकती.
वीर : जी ma'am! थैंक यू!
निधि : थैंक यू कैसा इसमें...?? *स्माइल्स* टेक केयर, okay?
वीर : हम्म्म!
और, निधि उसके वार्ड से चली गयी. वीर केवल निधि को जाते हुए देखता रहा.
निधि 30 साल की एक ऐसी हुस्न की मल्लिका प्रतीत होती थी की मानो केहर hi ध दे. पर, लिमिटेड पैसो और दिन भर की म्हणत और थकान के चलते जैसे उसका हुस्न पूरा खिल के नहीं झलक पा रहा था. क्यूंकि, वो ध्यान hi नहीं दे पाती थी अपने ऊपर.
ये देख वीर को वाक़ई तरस आ रहा था उस पर. उसकी खुद की माँ यहाँ एडमिट थी पर उसके बावजूद निधि ने उसकी मदद की और उसके लिए एडवांस में पैसे भी भरवाए. वही दूसरी ऑर्डर उसके घरवाले जो साड़ी संपत्ति से संपन्न है उन्होंने एक क्षण भी नहीं सोचा की वो जी रहा है या मर्डर रहा है.
*डिंग*
और, अचानक hi उसके दिमाग में घंटी बजी, उसके सामने एक विंडो खुली.
[Mission : Solve Nidhi's problem.
Reward : ?? points
Time limit : 1 year ]
'हँ? मिशन?'
[Haan! Mission mil chuka hai tumhe.]
'निधि ma'am की प्रॉब्लम? Kaun-si प्रॉब्लम?'
[Ye toh tumhe khud dekhna padega.]
'ो... Okay!'
[Ab tumhara safar shuru ho chuka hai. Ya toh tum yahi ke yahi reh jaoge ya meri madad paa ke ek badshaah banoge. Toh bolo? Kaisa jeevan chahiye? Ek aam aadmi ki tarah jaisa ki tum abhi jee rahe the ya fir ek badshaah ka?]
सवाल सुन्न के वीर ने सोचा hi नहीं. उसे पता था उसे क्या जवाब देना है.
वीर (स्माइल्स) : एक बादशाह!!!!
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आज के लिए इतना hi गाइस!
धन्यवाद!