अपडेट - 23 ~ काम्प्लेक्स फीलिंग्स
अब तक...
वीर का इतना sunn'na था की...
उसके अंदर गुस्से का वो ज्वालामुखी ट्रिगर हो गया.
और उसके होंठो एकदम धीमी आवाज़ में बस कुछ शब्द निकले...
"Don't यू डरे टच हेर!!!!"
और अगले hi पल फिर वो हुआ जिससे देख के वह मौजूद सबकी आँखें फटी की फटी रह गयी.
अब आगे...
बिना एक पल गवाए वीर इतनी स्पीड में आगे बढ़ा और उसने सबसे पहले रजत का हाथ जो जूही को पकडे हुए थे उससे जोरर से थाम के उसकी मुट्ठी अपने बाहुबल से खोल जूही को चर्राया. जूही के छूटते hi, श्रेया ने जूही को पकड़ के पीछे खींच लिया.
वीर ने रजत का फिर दूसरा हाथ, जो निधि के सुन्दर काले केशो को भींचे हुए था उससे पकड़ के एकदम से मरोड़ दिया,
"आआअह्हह्ह्ह्ह!"
हाथ मरुद जाने पर अगले hi पल, रजत दर्द से कराह और उसकी पकड़ निधि के बालो से चूत गयी.
पर इसके पहले की वो संभल पाटा और अपने दूसरे हाथ का प्रयोग कर पाटा...
*पूंऊऊववववव*
एक ज़ोरदार घुसा उसके निचले जबड़े में आके पड़ा और वो उस घुसे के इम्पैक्ट से hi पीछे की ऑर्डर जाके धड़ाम से गिर पड़ा.
ये सब कुछ इतनी जल्दी हुआ की वह खड़े लोग बस हैरत में देखते रह गए. जैसे उन्हें समझ hi नहीं आया की एकदम से क्या हो गया.
पल भर में वीर आया, उन्हें चर्राया और अगले hi पल रजत ज़मीन पे था. सब कुछ इतनी जल्दी हुआ था की वो सभी सामने हो रहे एक्शन को प्रोसेस hi नहीं कर पाए.
अपने जबड़े को मलते हुए जैसे hi रजत ज़मीन से उठा, तभी वीर ने आगे बढ़ उसकी कल्लोर को दोनों हाथो से जकड़ा और उससे हवा में उठाते हुए पीछे दीवार में भेद दिया.
*बंग*
अब सन कुछ ऐसा था की वीर के दोनों हाथ रजत की कल्लोर पर थे और रजत हवा में दीवार से चिपके वीर की गिरफ्त में लटका हुआ था.
"Don't यू डरे टच हेर यू पीेछे ऑफ़ सहित..."
वीर ने वापस से अपने शब्द दोहराये. उसकी आँखों में इतना गुस्सा था, और इतनी लाल थी मानो अभी अभी वो रजत का यही खून कर देगा.
"ुघठ... चुररर... साली..." रजत कराहते हुए छूटने का प्रयास करने लगा. पर कोशिश बेकार थी. वीर की स्ट्रेंथ रजत से ज़्यादा जो थी.
एक आम आदमी की स्ट्रेंथ 30 से 50 के बीच hi रहती है अक्सर. ज़्यादा ज़े ज़्यादा रजत की 40 के करीब होगी. और पेशे से वैसे hi वो एक लॉयर था कोई गुंडा मवाली नहीं, जिसका लड़ना रोज़ का काम हो.
ज़ाहिर सी बात थी की वीर की पकड़ से छूटने में वो नाकामयाब था.
पर पीछे कड़ी उसकी माँ, छाया ने जैसे hi ये सब देखा वो चिल्लाते हुए आगे बढ़ी,
"राजट्ट्ट!"
घबराते हुए वो आगे तेज़्ज़ क़दमों के साथ आयी और वीर के हाथो को जोरर से पकड़ के खींचने का प्रयास करने लगी.
निधि बेचारी आँखें फाड़े सब कुछ देख रही थी पर कुछ भी बोल नहीं पा रही थी. मानो जैसे ये सब कुछ बोहत ज़्यादा था उसके लिए. रजत का उससे प्रताड़ित करना और फिर अचानक से उसकी बहिन और बेटी का आ जाना, साथ hi साथ वीर का यु रजत को पकड़ के मारना. निधि की कुछ समझ में नहीं आ रहा था. वो बस स्तब्ध सी कड़ी हुई थी.
जैसे hi श्रेया ने देखा की छाया वीर के हाथो को पकड़ के खींच रही है, पर खींच नहीं पा रही, श्रेया जूही को वही पर चोरर आगे बढ़ी और उसने पीछे से जोरर से वीर को हुग कर लिया.
"वीर... चोर्रो... Veeeeeeeeeerrrr.... चोर्रो उससे... प्लीज!!! प्लीज वीरर!! लेट हिम गोऊ..." श्रेया उससे पीछे से जकड़े हुए आग्रह करते हुए बोली.
और कुछ hi पल में जैसे श्रेया की वाणी ने वीर को फाइनली कण्ट्रोल कर लिया.
न चाहते हुए भी, वीर के हाथ ढीले पद गए.
*क्रैश*
और रजत जो दीवार से सत्ता हुआ था वो धड़ाम से नीचे गिर गया.
*कुघ* *कुघ*
खासते हुए उसने अपने गले को माला, और फिर अचानक hi हस्सन लगा.
रजत : हाहाहाहाहा~
बगल में कड़ी उसकी माँ छाया ने उससे संभाला और उससे नीचे बैठाल के पकडे रही. और इधर श्रेया भी वीर को पकडे पीछे की ऑर्डर खींचते हुए ले आयी.
रजत की हस्सी कुछ देरर में रुकी और फिर उसने अपना सर्र ऊपर कर निधि समेत सभी को देखा. उसके चेहरे पे एक कुटिल मुस्कान थी. जैसे वो बताना चाह रहा था की अब तुम लोगो का खेल ख़तम है.
रजत : हाहाहा~ मा! तूने देखा!? ये देखो... अपने पति से अभी तलाक लिया नहीं इसने की यहाँ अगला बॉयफ्रेंड हाज़िर है.
उसकी बात सुन्न, निधि ने इस बार बॉहे सिकोड़ी और आगे बोलने के लिए अपना मुँह खोला पर इसके पहले की वो कुछ कह पाती, वीर बोल पड़ा.
वीर : I'm नॉट हेर बॉयफ्रेंड यू बास्टर्ड... I'm हेर स्टूडेंट.
उसने गुर्राते हुए बोलै और आगे एक बार फिर वो बढ़ने वाला था की श्रेया ने उससे और कस के थाम लिया.
रजत : हाहाहा~ तुझसे यही उम्मीद थी निधि... यही उम्मीद थी... अपनी बच्ची को भी यही संस्कार डौगी है न!??
"यू...." जोरर से चिल्लाते हुए वीर एक बार फिर तेज़्ज़ी से आगे बढ़ा, इस बार भी श्रेया वीर को रोकने के लिए उससे जकड़ी पर वीर की स्ट्रेंथ के चलते वो इस बार हार गयी.
वो खुद उसके साथ खींची चली गयी और जब उसने देखा की वीर रजत को वाक़ई फिरसे मारने वाला है वो जोरर से चिल्लाई,
"न्यूऊऊऊ... Veeeeeeeeeeerrr!!"
उसकी चींख से जैसे वीर को ध्यान आया और उसके कदम वही ठहर गए.
श्रेया (क्रिस) : प्लीज!!! Let's जो... चोर्रो उससे... और चलो वीर... प्लीज... ी बेग यू...
श्रेया जो अब तक अपने आसुओ के बाँध को रोके हुए थी वो आखिर खुल hi गया. और तेज़्ज़ी के साथ उसके ासु उसके गालो से होते हुए बहने लगे. उसने अपने हाथो से वीर के सीने में शर्ट को भींच लिया.
वो उस से एक निवेदन कर रही थी जैसे. उसने बोहत कुछ देख लिया था. वो नहीं चाहती थी अब और कुछ हो और बात आगे बढे.
वो खींचते हुए वीर और निधि समेत जूही को बाहर ले जाने लगी.
रजत : देख लूंगा साले तुझे... वीर है न तेरा नाम!? बताता हु तुझे भी. एक एक को देख लूंगा. खासकर निधि तुम्हे मेरी जान...
वो अंदर hi कमरे से चिल्लाता रहा पर उसकी बातें सुने बजर्र hi श्रेया सभी को बाहर ले आयी.
श्रेया : दी... घर चलिए... जल्द से जल्द... वीर तुम दी को गाडी में बैठा के ले जाओ, में जूही को लेके आ जाउंगी.
वीर : नहीं! बल्कि, आप तीनो जाओ गाडी में... में आ जाऊंगा...
ये दोनों आपस में hi लगे हुए थे की अचानक निधि भयभीत होते हुए रोने लगी,
निधि : हे भगवाआनं....
वो नीचे गिरते हुए रोने लगी, तोह वीर और श्रेया ने फौरन hi उससे उठाया...
निधि : श्रेयाआ...
श्रेया : डीई....
निधि : श्रेया... ये सब क्या हो गया!? ये बिलकुल भी अच्छा नहीं हुआ श्रेया... श्रेया वो पक्का कुछ न कुछ करेगा अब... न्यूऊऊ! थिस wasn't सुप्पोसेद तो हैपन श्रेया... ी... ी....
अपनी बहिन की ये हालत देख श्रेया को उस पे इतना तरस आ रहा था की वो बया नहीं कर सकती थी. उसने निधि को कंधे से पकड़ते हुए झंझोरा और उससे होश में लाया.
श्रेया : डीई... डीई... लुक ात में... नथिंग विल हैपन... Okay!!? नथिंग विल हैपन!
निधि : नहीं... नहीं... श्रेया... वो... वो...
श्रेया : लुक ात में दी, आप सही सलामत हो. जूही सही सलामत है. किसी को कुछ नहीं हुआ. और वो कुछ नहीं करेगा. हम्म? Okay!? हे can't दो एनीथिंग. जब तक टाइम पीरियड ख़तम नहीं हो जाता वो कुछ नहीं कर सकता. हम्म? एंड, आप देखना जल्द से जल्द ध्रुव आपके और हमारे पास होगा...
कहते हुए उसने निधि को जोरर से अपनी बाहो में खींच लिया और निधि बेचारी फुट फुट कर रोने लगी.
सिसकी लेते हुए निधि अपनी बहिन के सीने से लग बिलखते हुए रो रही थी. पीठ पर हाथ फरते हुए और उससे पुचकारते हुए श्रेया ने उससे समझाया और उससे चुप कराने लगी.
"मुम्ममइय्य्य्यय्य!"
इधर जूही अपनी माँ को ऐसे रोटा देख खुद भी जोरर जोरर से रोने लगी. बच्चे अपनी माँ को जब रोटा देखते है तोह भला खुद कैसे शांत रह सकते है? वो भी रोना शुरू कर दी. बेचारी श्रेया को अब समझ नहीं आ रहा था की पहले किसको चुप कराये. वो खुद रोने की कगार पे आ गयी थी.
तभी...
उसने देखा...
वीर ने आगे बढ़ते हुए जूही को अपनी गॉड में उठाया और उसके प्यारे गालो से ासु पोछते हुए उसने जूही के दोनों गालो पे पप्पी ली और टहलते हुए उससे चुप कराने लगा.
"वीएएलललल मामुउउउउ..."
रट रट जूही अपने ासु वीर की शर्ट में उसके कंधे पर रगड़ रही थी. और वीर उसकी पीठ सहलाते हुए उससे चुप करवा रहा था.
जूही : वीएलल मआमऊ...
वीर : हम्म्म!?
जूही : पापा डंडे है...
वीर : क्या है!?
जूही (क्रिस) : ग... गंदे...
वीर : हम्म! अच्छा उन्हें चोर्रो... जूही... चॉकलेट खाएगी!? हम्म? चलो वीर मामू आपको मस्त वाली चॉकलेट दिलाएंगे.
जूही : मममममम
वीर : जूही खाएगी न??
जूही (रट हुए) : हम्म्म्म...
वीर : पर उसके लिए... पहले रोना बंद करना पड़ेगा.
जूही : ममम...
धीरे धीरे सिसक कर जूही जैसे तैसे चुप हुई तोह वीर ने मुस्कुराते हुए एक बार फिर उसके गाल चूम लिए, बदले में जूही ने भी उसके गाल चूम लिए.
वीर : ये हुई न बात, अब देखना वीर मामू तुम्हे मस्त चॉकलेट दिलाएंगे...
[Hehe~ Master!? Really? Paise hai aapke paas!?]
'ये बोलना ज़रूरी था तुम्हारा पारी? शट उप!'
[Hehehe~ I wonder aap Juhi ko chocolate kese dilaenge fir? Aur wo bhi mast waali? Paise toh hai nahi. Kyuki jab wo Sonia madam paise haatho me dhar ke jaa rahi thi toh mere master ko mahaan bann'na tha. Thukra diye wo paise. Ab chocolate toh kya uska wrapper bhi nahi khareed paenge.]
'पारी! यू don't अंडरस्टैंड. एक दिन देखना, आज तुम्हे मेरा ये डिसिशन भले hi गलत लग रहा हो, पर आगे चल के तुम्ही बोलोगी की मास्टर. आपने सही किया था जो सोनिआ से पैसे नहीं लिए.'
[Hmm! Well master, I'll wait for that to happen.]
'एक दिन देखना, में जूही के लिए पूरी चॉकलेट की फैक्ट्री खुलवा दूंगा.'
[Hmm.. hmm.. I'll wait!]
पारी से बातें करने के बाद वीर जूही को लेके घूमने लगा पर वो अपने पीछे हो रहे दृश्य से अनजान था. श्रेया और निधि दोनों hi आश्चर्यचकित और अचंभित एकदम वही कड़ी हुई वीर को पीछे से घर रही थी.
श्रेया सुरप्रीसेड निगाहो से वीर को देख रही थी. जो लड़का कुछ देरर पहले hi इतना आग बबूला था, जिससे संभालना भी उसके लिए इतना मुश्किल था, वही लड़का इस वक़्त नन्ही सी जूही को गॉड में उठाये उससे इतने प्यार से चुप करवा रहा था. दोनों hi बर्तावों में ज़मीन आसमान का अंतर था, पर दोनों hi बर्ताव वीर के hi थे.
श्रेया को ज़्यादा उम्मीद नहीं थी की वीर की उसकी कुछ ज़्यादा मदद कर पाएगा. पर कुछ देरर पहले जो भी कुछ हुआ, उससे देखने के बाद, वीर की एक नयी छवि उसके दिल और दिमाग में बन्न गयी थी.
'जस्ट व्हाट काइंड ऑफ़ गाए थिस इस...!?'
इधर निधि के साथ कुछ और hi था. वो तोह जानती hi थी वीर की अच्छी पर्सनालिटी को. और इसी के चलते तोह वह उससे अपने घर में साथ रखने के लिए राज़ी हुई थी.
पर आज...
आज जो भी कुछ उसने देखा...
वो सब नया था उसके लिए. वीर का वो रूप, वो गुस्से वाला रूप जिसमे उसने रजत की खटिया कड़ी कर दी थी, उस रूप को देख निधि डर गयी थी.
पर अंदर hi अंदर उससे एक अजीब सी फीलिंग सत्ता रही थी. वो फीलिंग कही से भी बुरी नहीं थी. इन फैक्ट, उससे अंदर से अच्छा महसूस हो रहा था.
वीर को उसके प्रति चिंता व्यक्त करते देख, उसकी आँखों में वो गुस्सा जब उसने रजत के हाथो को उसके बाल पकडे हुए देखा था, वो गुस्सा जब वीर ने जूही को रट हुए देखा, ये सब देख कही न कही निधि को अंदर से इतना अच्छा महसूस हो रहा था की वो शब्दों में बता नहीं सकती थी. आज तक उसके लिए ऐसा किसी ने नहीं किया था. पर आज...
आज वीर ने जो उसके लिए किया, उससे देख के वो अंदर hi अंदर बेहद खुश थी पर साथ hi साथ एक डर भी उससे सत्ता रहा था.
डर था की रजत के साथ जो कुछ भी हुआ, अब रजत क्या करेगा? वो शांत तोह बिलकुल भी नहीं रहेगा क्युकी निधि भली भाति रजत को जानती थी.
वो ज़रूर कुछ न कुछ करेगा. और जो भी कुछ करेगा वो उसके और उसके परिवार के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं होगा. बस यही एक डर उससे खाये जा रहा था.
वो देख पा रही थी वीर को, अपनी बच्ची को, जो उसकी गॉड में इस वक़्त खिल खिला के हस्स रही थी.
कितना खुश देख रही थी जूही वीर की गोदी में. वही कितना रो रही थी वो रजत उसके पिता के हाथो में बंधे...
कहा उसका अपना पति, जो उसके साथ ऐसा व्यवहार किया और उसकी बच्ची के हाथ को मरोड़ उससे रुला दिया था तोह कहा वीर जो उससे बचाने आया, रजत को मार के उससे चर्राया, और उसकी बच्ची को यु गोद में उठाये उसपे प्यार बरसा रहा था. दोनों hi व्यक्तियों में कितना अंतर था. जबकि रजत उसका पति था, और वीर केवल उसका स्टूडेंट जो बस अभी कुछ hi हफ्ते पहले से उस से फेमिलिअर हुआ था.
'वीर... तुम... कितने अच्छे हो...' वो वीर और जूही को देखते हुए मैं में बोली और तभी उससे ध्यान आया की वो क्या सोचने लगी थी.
अपने सर्र को हिलाते हुए उसने अपने ासु पोछे और वीर को आवाज़ लगायी,
निधि : वीर!!
वीर (पलट कर) : हम्म?
निधि (स्माइल्स) : चलना होगा यहाँ से...
वीर : हम्म्म...
वीर उनके करीब आया तोह निधि बोली,
"श्रेया... तुम जाओ!"
श्रेया : व्हाट? कहा जाऊ? और आप लोग?
निधि : तुम मेरी गाडी लो और ये छवि भी. घर जाके गेट खोलो... और... तब तक... में वीर और जूही आते है.
श्रेया : व्हाट? बूत में अकेले...!? और छवि है मेरे पास आलरेडी...
निधि : ठीक है! तोह तुम घर जाओ, मेरी गाडी लेके... हम आते है... Don't वोर्री! में ठीक हु अब.
श्रेया : अरे यू सूरे!?
निधि : हां श्रेया! जो don't वोर्री!
श्रेया : ो... Ok
वो कहते हुए निधि की गाडी उठा के वह से चली गयी. अब केवल वीर, निधि और जूही hi बचे हुए थे.
वीर : हमे भी चलना चाहिए Ma'am.
निधि : हम्म्म...
अभी वो आगे hi बढ़ती की उसके पहले hi वीर ने उससे रोक दिया,
वीर : रुकिए Ma'am.
निधि : ???
वीर अचानक hi उसके करीब आया और उसने जूही को नीचे उतारा. निधि सवालिया नज़रो से उससे घूर रही थी.
वीर : थोड़ा सा दर्द होगा.
कहते हुए उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया, निधि कुछ समझ पाती की तभी...
उसके नग्न पेट पर वीर का हाथ आया और...
अचानक hi...
"आअह्ह्ह!" एक हलकी दबी सी आह उसके मुँह से निकली.
उसने आँखें खोल देखा तोह पाया की...
वीर ने उसके नग्न पेट से कुछ खींच के निकाला. उसने देखा की वीर के हाथो में मोमबत्ती का वो वैक्स का टुकड़ा था जो निधि के पेट पर चिपका हुआ था.
उसके गाल शर्म के मारे हलके गुलाबी पद गए थे. वो कहना चाहती थी की वो खुद से निकाल लेगी और ऐसे वीर का यु उसके पेट पर से वो सब निकालना अच्छा भी नहीं लगता. पर बेचारी निधि शर्म के मारे कुछ कह hi नहीं पा रही थी. क्युकी वीर उसके हिट के लिए hi ये सब कर रहा था. वो तोह चिंता के मारे ये कर रहा था.
हलाकि एक सवाल ज़रूर आया उसके मैं में की क्या वीर को भी इस वक़्त शर्म आ रही होगी अपने हाथो को उसके पेट पर स्पर्श करते हुए?
यही देखने के लिए की वीर के चेहरे पर क्या एक्सप्रेशंस थे निधि ने धीरे धीरे अपनी नज़रे उठायी और वीर को देखा.
पर जैसे hi उसने देखा तोह उससे एक झटका सा लगा...
अचंभित भी थी वो और कन्फ्यूज्ड भी...
वीर की आँखों में अत्यंत hi गुस्सा था, साथ hi साथ एक दर्द और चिंता भी. निधि लोगो को उनकी आँखों को देख उन्हें पहचान ने में माहिर थी. और जैसे hi उसने वो सारे भाव वीर के चेहरे और उसकी आँखों में देखे तोह पता नहीं क्यों पर पल भर के लिए उसकी धड़कने तेज़्ज़ हो गयी.
वो कुछ कह पाती की उस से पहले hi फिरसे वीर का हाथ उसके नंगे पेट पर लगा...
"आठ!"
उसने एक सिसकी भरी और फिर वीर ने बाकी वैक्स के टुकड़ो को भी धीरे धीरे करके निकाल दिया.
वीर ने भले hi आराम से निकाल दिए वैक्स के टुकड़े पर इधर बेचारी निधि की हालत खराब हो चुकी थी. हल्का फुल्का दर्द तोह था पर उससे दर्द की चिंता नहीं थी. इस वक़्त उसका सीना ज़र्रों से ऊपर नीचे हो रहा था.
जितनी बार वीर का हाथ उसके नग्न पेट से स्पर्श होता, उतनी बार उसकी सासें तेज़्ज़ हो जाती. अंत में खुद को संभालने के लिए उसने वीर के सीने में उसकी शर्ट को अपने दोनों हाथो से भींच लिया.
और उसके इस एक्शन से इस बार वीर भी शर्मा गया...
वीर (ब्लशेस) : वो... हो गया Ma'am.
निधि (ब्लशेस) : आठ!? ओह्ह्ह... हम्म्म्म.
निधि ने अपने हाथ ढीले किये, अपने पेट पर फेरे और वीर से थोड़ा दूर हो गयी. उसके हटते hi जूही फिरसे गोदी में आने की ज़िद्द करने लगी. वीर ने उससे वापस से अपनी गोदी में लिया और चलने के लिए कहा तोह निधि ने भी हामी भरी और दोनों hi वह से निकल पड़े.
वो अभी पैदल hi चल रहे थे की वीर ने अचानक hi शान्ति तोड़ी,
वीर : ये सवाल थोड़ा पर्सनल है, पर यदि आपकी परमिशन हो तोह क्या में पूछ सकता हु?
निधि : हम्म? हां पूछो न वीर.
वीर : मेरी समझ में नहीं आता की, जब आपके हस्बैंड ऐसा बेहेवियर आपके साथ करते है तोह आप कंप्लेंट क्यों नहीं करती? पुलिस में जाइये और...
निधि : जितना आसान दीखता है उतना आसान है नहीं वीर. लम्बी कहानी है... और... में मजबूर हु.
वीर : हम्म! ी होप आपको जल्द hi कोई सलूशन मिलेगा. और... आप मुझसे कभी भी कोई भी हेल्प मांग सकती हो, आपको पता है न?
निधि (ग्लान्सेस ात हिम) : ी... ी क्नोव
कुछ देरर यही चलने के बाद उसने फिरसे वीर को देखा और बोली,
निधि : तुमने लंच किया!?
वीर : नौपे! में लंच के पहले कही काम से गया हुआ था.
निधि (मैं में) : मतलब उन् दो लड़कियों के साथ... शुड ी आस्क!? No. It's हिज पर्सनल मटर. ी... ी... Shouldn't...
वीर : क्या आपने किया!?
निधि : हँ? ओह्ह! Na...nahi... में लंच के पहले hi कॉलेज से निकल आयी थी वीर.
वीर : ओह्ह! थें हम दोनों ने hi नहीं किया...
निधि : Let's...
वीर : हम्म!?
निधि : Let's जो तो ा होटल. वह... वह खा लेंगे कुछ!?
वीर : अरे यू सूरे?
निधि (मैं में) : में तोह कुछ भी खा लू, एंड ी रियली shouldn't स्पेंड मनी लिखे थिस... बूत... हे दीद सो मच फॉर में... थें मुझे इतना तोह कंसीडर करना hi होगा उसके लिए... राइट!?
निधि : उम्... यस! I'm सूरे वीर! चलो... देखो वो रही... होटल...
वीर : वो?? काफी महंगी लग रही है...
निधि : हँ? It's... It's okay! Let's जो...
वीर : O...okay!
और कुछ hi देरर में वीर और निधि दोनों hi होटल के अंदर थे.
निधि : एक्सक्यूज़ में... उम्... वे...
रिसेप्शनिस्ट : यू नीड ा टेबल फॉर तवो Ma'am!?
निधि : अहह! यस...
रिसेप्शनिस्ट : और मय्बे थ्री!?
वो जूही को वीर की गॉड में देखते हुए पूछी.
वीर : यस!
रिसेप्शनिस्ट : Okay! शिवानी!? Ma'am एंड सर को टेबल पे ले जाओ...
शिवानी : आइये Ma'am!
निधि : हम्म!
और वो शिवानी वही होटल में काम करने वाली वीर और निधि को होटल में एक एरिया में ले गयी, जहा कई साड़ी राउंडेड टेबल्स लगी हुई थी और लक्ज़री सोफे थे बैठने के लिए.
शिवानी : सर, Ma'am थिस इस योर टेबल. प्लीज हैवे ा सीट.
निधि : उम्म्म.. थैंक यू!
शिवानी : It's okay Ma'am!
और वो वह से चली गयी. साड़ी लड़किया वह पे काम करने वाली माइड टाइप की ब्लैक एंड वाइट ड्रेस पहनी हुई थी और सभी एक से बढ़ के एक थी. इससे कहते है बिज़नेस स्ट्रेटेजी.
आदमी 2 की जगह 4 रोटियां खा के जाए यदि ऐसी सर्वे करने वाली हो. भले बाद में घर जाके पेट ख़राब हो जाए.
निधि : पसंद आयी गयी क्या वीर कोई? हम्म? फुफु~
वो वीर को छेड़ते हुए बोली, क्युकी काफी देरर से वो देख रही थी की वीर उन् लड़कियों को देखे जा रहा था.
वीर : हम्म? No! No ओने इस बेटर थान यू...
वो इतना कहके वापस से उन्हें देखने लगा जैसे मानो और कोई ढूंढ रहा हो की शायद कोई निधि की खूबसूरती की टक्कर की कोई दिख जाए.
पर इधर निधि के ये सुनते hi कान खड़े हो गए.
और उसके दिल की धड़कन एक बार फिर तेज़्ज़ हो गयी... वो आँखें फाड़े वीर को देख रही थी जो कही और अपनी नज़रे घुमाने में बिजी था.
'वेट! इस हे??... दीद हे जस्ट!? दीद हे जस्ट फ़्लर्ट विथ में?'
उसने सोचते हुए अपने अगल बगल नज़रे घुमाई तोह उसकी आँखें और फटी की फटी रह गयी जब उससे रीलीज़ हुआ...
रीलीज़ हुआ की वो अभी कहा पर बैठे हुए थे.
टेबल पर hi जहा तिसुएस रखे थे उसके बगल से hi एक छोटा सा स्टैंड था जिसपर एक बोर्ड लगा हुआ था. और उस बोर्ड पर लिखा हुआ था...
वेडनेसडे ~ Couple's स्पेशल.
अगल बगल उनके सारे कपल्स hi कपल्स बैठे हुए थे. कुछ मैरिड, तोह कुछ बॉयफ्रैंड्स और गिर्ल्फ्रेंड्स. कोई एक दूसरे के हाथो में हाथ लिए थे तोह कोई प्यार भरी बातें कर रहे थे, तोह कोई खाने में लगे हुए थे.
और जैसे hi निधि को ये रीलीज़ हुआ उसकी शर्म की कोई सीमा नहीं थी. एकदम गुलाबी गाल लिए वो नीचे नज़रे कर अपने हाथो की उंगलियों को टटोल रही थी.
निधि : अहह! ये... ये....
'ये कहा ले आयी वो हमे!?? वे अरे नॉट कपल्स. He's माय स्टूडेंट.'
पर इसमें अब उस शिवानी की क्या गलती थी भला?? निधि थी एक ख़ूबसूरत औरत. साथ में वीर जो निधि से हल्का सा हाइट में आलरेडी बड़ा था और ऊपर से उसकी गॉड में थी जूही. भला कोई भी देख के कंफ्यूज हो जाए और उन्हें पति पत्नी hi मान ले.
वो अभी कुछ कह पाती की तभी, आर्डर लेने वेटर आ गया.
वेटर : यस सर! यू आर्डर!?
निधि : उम्... वो...
वीर : जूही!? क्या खाओगी तुम!?
जूही : जो आप खाओगे... और चॉकलेट भी...
वीर : हम्म!!!
निधि (मैं में) : वेट... ओह माय गॉड... हे doesn't इवन क्नोव... उससे पता hi नहीं है की हम कहा बैठे है. ओह्ह गॉड... थिस इस... सो...
वीर : Ma'am से पूछिए...
वेटर (नॉड्स) : Ma'am योर आर्डर!?
निधि : ेहठ!? ओह्ह्ह! हां... उम्...
जैसे तैसे निधि ने आर्डर दिया और कुछ hi देरर में खाना भी आ गया.
वीर अपने हाथो से कभी जूही को खिलाता तोह कभी खुद खाता. और उसके सारे एक्शन्स निधि ऑब्सेर्वे कर रही थी.
'He's सुच ा जेंटलमैन. He'll बे ा वैरी गुड हस्बैंड...'
वो वीर को देख सोचते सोचते अपने खयालो में डूब गयी. पर जैसे hi उससे ध्यान आया की वो क्या सोच रही थी उससे खुद पे हैरानी हुई और एक शॉक भी लगा.
'में... में क्या सोचने लगी अचानक!? No वैयय...'
खाना खाने के बाद hi जूही बेचारी इतनी थकान और अन्न के नशे के बाद अपने वीर मामू के कंधे पर सर्र रख के नींद की वादियों में जा चुकी थी.
अभी वो उठाने hi वाले थे की वेटर आया और उन्हें 3 बड़ी चॉकलेट्स एक ट्रे में सर्वे किया.
वेटर : वेडनेसडे स्पेशल है सर, Ma'am.
और इतना बोल वो चला गया.
[Ab isse kehte hai kismat master.]
'हाहाहा~ अब बोलो!? बूत वाक़ई... एक दिन... एक दिन में जूही के लिए पूरी चॉकलेट की फैक्ट्री खरीदूंगा.'
[I'll wait!]
निधि : श्रेया के लिए भी पैक करवा लेते है कुछ.
वीर : जी!
वो दोनों बाहर बिल पाय करने के बाद बाहर निकले और कुछ hi देरर में अपने घर की ऑर्डर पहुँच चुके थे.
वीर ने जूही को बीएड पे लिटाया hi था की...
*डिंग*
[Mission ~ Go on a date with Nidhi has been completed.]
[30 points have been rewarded.]
'हँ!? वेट.... Whaaaaaaaaaaaatttt!?'
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आज के लिए इतना hi गाइस!
धन्यवाद!