Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery - Page 4 - SexBaba
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Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery

फ्रंट पेज पे मेने कवर बदल दिया है. जो एंड चेक आईटी आउट. 😁
 
मेगा अपडेट

अपडेट - 21 ~ थे ट्रुथ

अब तक...

लड़की : प्रकाश अंकल!?

आदमी : जी!?

लड़की : जाइये...

आदमी : जी मैडम!!!


और अगले hi पल प्रकाश कैंपस से अंदर कॉलेज की बिल्डिंग में जाने लगा.

अब आगे...

कल रात जब रागिनी समेत दिनेश अपने घर लौटे तोह अंदर घर में प्रवेश करते hi उन्हें एक बड़ा झटका लगा था. घर के बाहर गेट पे जो गार्ड उनकी रखवाली के लिए खड़ा रहता था, वो इस वक़्त खुद अंदर hi पिलर से चिपके हुए रस्सियों से बंधा हुआ था.

उसकी ये हालत देख भागते हुए रागिनी और दिनेश उसके पास पहुचे और जैसे hi उसकी रस्सिया खोली तोह उसने बताया,

"साहब! साहब... अंदर... अंदर भाभी जी..."

और बस उसका इतना कहना था की दोनों रागिनी और दिनेश दौड़ते हुए अंदर गए जहा पहुँच के उन्हें दूसरा झटका लगा.

रागिनी की माँ~ रोहिणी, सिंगल सीट वाले सोफे पर बंधी हुई बेहोश पड़ी थी. घबराते हुए दोनों ने उससे चर्राया और उससे होश में लाया उसके बाद रोहिणी ने साड़ी बातें बतायी की कैसे कुछ गुंडे उनके घर में आके उससे बाँध के चले गए, जिस कारण से न hi वो पुलिस में कंप्लेंट कर पायी न hi किसी का फ़ोन उठा पायी और न hi लगा पायी.

रागिनी : इसका मतलब... शायद इसलिए उधर घर में मेरे बारे में किसी को नहीं पता था... शायद इसलिए काव्य ने ये कह दिया था की में यहाँ घर पे हु... क्युकी हमारे साथ वह क्या हो रहा था, किसी को उसकी खबर hi नहीं थी...

सोचते हुए वो एक गहरे चिंतन में डूब गयी. उसके लिए खतरा टाला था या फिर और मुसीबते आने वाली थी!? ये तोह वक़्त hi बताने वाला था. पर आज उससे इतना ज़रूर समझ आ चूका था की दुनिया में कैसे कैसे लोग रहते है और क्या क्या कर सकते है. शायद अब... शायद अब वो समझ चुकी थी की कुछ लोगो से क्यों नहीं भिड़ना चाहिए.

***

इधर वीर को कल रात में hi पारी के द्वारा मिशन कम्पलीशन पर 40 पॉइंट्स मिल चुके थे. जिससे उसने अपने स्टैट्स में इन्वेस्ट कर लिए थे. और इतना hi नहीं, उसकी पारी भी अब लेवल 3 पर आ चुकी थी.

अब वो बाकी लोगो के स्टैट्स दिखाने में भी सक्षम हो चुकी थी. साथ hi साथ कुछ सवाल थे जो वीर के मैं में, उन्हें भी वो आंसर करने वाली थी.

वीर ने अपने स्टैट्स में, 5 पॉइंट्स अपनी स्ट्रेंथ में डाले, इंटेलिजेंस में उसने इस बार सीधे 15 पॉइंट्स भर डाले, वही बचे हुए 20 पॉइंट्स उसने 5-5 करके अपनी अगिलिटी, और ेंदुराने में डाले और अपीयरेंस में लास्ट में आखिरी 10 पॉइंट्स जो बचे थे वो दाल दिए. अब उसके स्टैट्स कुछ इस प्रकार थे...

[ स्टैट्स :

स्ट्रेंथ - 50/100

इंटेलिजेंस - 35/100

अगिलिटी - 15/100

ेंदुराने - 15/100

अपीयरेंस - 22/100]

कल वीर ने सारे hi पॉइंट्स उपयोग कर लिए थे और अब उसके पास स्किल शॉप से खरीदने के लिए कोई पॉइंट्स नहीं बचे थे. स्किल्स देख के वो इतना चक्र गया था की उसकी समझ में hi नहीं आया कोण सी स्किल वो खरीदे और वैसे भी, अभी उससे स्किल्स की इतनी कोई ज़रुरत नहीं थी, ऐसा सोच उसने सारे पॉइंट्स अपने स्टैट्स में डालना hi बेहतर समझा.

अभी वह बैठे बैठे खयालो में hi डूबा हुआ था की तभी निधि उसकी क्लास में अंदर आयी. क्यूंकि पहला लेक्चर उसी का था.

वीर को देखते hi वो मुस्कुरायी और बोर्ड पे उसने एक क्वेश्चन लिखा जिससे सभी स्टूडेंट्स सोल्वे करने में लग गए. वीर भी बड़े मैं लगा के पढ़ रहा था.

कल उसने अपीयरेंस में 10 पॉइंट्स ऐड किये थे, उसका असर आज सुबह hi श्रेया समेत निधि को भी दिखा था, आज दोनों ने hi उस से कहा था की वो स्मार्ट दिख रहा है पहले से...

यहाँ तक की काव्य भी अभी कुछ देरर पहले यही बात बोल के गयी थी. पर उन्हें क्या पता था...

की ये कमाल तोह अपीयरेंस स्टेट का था.

वीर को यु पढता देख, निधि मैं hi मैं मुस्कुरायी. कल न केवल वीर ने उस से साड़ी बातें सांझा की थी बल्कि इतना सब कुछ होने के बाद भी वो कॉलेज आने के लिए बिलकुल भी न कतराया.

वो वीर के लिए सच्चे मैं से खुश थी. वो आज कितना आगे आ चूका था अपनी पिछले दिनों की ज़िंदगी से, जिधर निधि ने उससे बस एक टूटे हुए इंसान के रूप में hi देखा था.

आज वापस से उसके अंदर आत्मविश्वाश, निष्ठां और प्रेरणा देख निधि बेहद खुश थी. उससे ऐसा फील हो रहा था जैसे उसके कुछ योगदान के कारण किसी का जीवन उजड़ते उजड़ते बच गया.

और वीर को उस स्थिति से बाहर लाने के लिए वो बेहद खुश थी. वो खुद पर प्राउड महसूस कर रही थी.

धीरे धीरे उसके कदम वीर की तरफ अपने आप hi बढ़ गए और उससे खुद पता न चला की कब वो वीर के बगल से आके कड़ी हो गयी.

आहात पाते hi जैसे hi वीर ने अपना सर्र उठा के देखा तोह पाया की निधि उसके बगल से कड़ी उससे hi घूर रही थी.

अपने होंठो पे मुस्कान लाते हुए वीर ने उससे एक स्माइल पास की तोह निधि भी बदले में मुस्कुरा बैठी.

उसने वीर की कॉपी देखि, और उसकी ख़ुशी और भी बढ़ गयी. वीर ने सलूशन एकदम सही ढंग से सोल्वे किया था.

निधि मैं hi मैं मुस्कुरायी, 'इसका मतलब वीर वाक़ई ध्यान दे रहा है... मुझे लगा था उसका बाहर जाना, अपनी गफ से मिलना जुलना और... इन् सब के मारे उसका ध्यान पढ़ाई में नहीं रहेगा. पर शायद में गलत थी...'

निधि अब भी यही सोचती थी की वीर की कोई गफ ज़रूर है जिस से मिलने वो जाता रहता था. भले hi वीर ने कल उससे सब कुछ सच बता दिया था पर उस दिन उसके गले में लगे वो होंठो के निशाँ के पीछे की सचाई अभी तक बया न करि थी उसने.

और शायद यही कारण था, जिसके चलते निधि यही ासुमे करती थी की कोई न कोई गफ ज़रूर है वीर की.

अगले hi पल जैसे निधि को कुछ याद आया तोह उसने अभी hi बताना सही समझा,

"वी... वीर!?" उसने धीमी आवाज़ में वीर को पुकारा.

वीर : हँ!?

निधि : वीर... आज मुझे... वो...

वीर : क्या हुआ Ma'am!?

निधि (धीमी आवाज़ में) : वीर! आज मुझे 1 बजे थोड़ा काम से एक जगह जाना है. मतलब में, ब्रेक में hi कॉलेज से निकल जाउंगी. बूत... बूत don't वोर्री, में डिपार्चर होने से पहले तुम्हे लेने आ जाउंगी, okay!?

वीर : कुछ... कुछ ज़रूरी काम है क्या Ma'am!?

वीर के सवाल से hi निधि एकदम चुप पद गयी, उसने एक गहरी सांस ली और बोली,

निधि : हम्म! मुझे काम है वीर. इसलिए, मुझे थोड़ा जाना है. Okay!? में डिपार्चर के पहले आ जाउंगी. इसलिए, मेने सोचा तुम्हे बता दू, कही तुम मुझे ढूंढ़ने न लगो.

वीर (स्माइल्स) : Okay Ma'am!

निधि (स्माइल्स) : हम्म!

और इतना बोल निधि पलट के बोर्ड की तरफ जाने लगी. पर उसके palat'te hi वीर के होंठो पे जो मुस्कान थी वो अगले पल hi गायब हो गयी और वो निधि को पीछे से जाते हुए बस घूरता रहा.

'She's हिडिंग समथिंग.'

[Kese master!?]

'तुमने देखा नहीं पारी!? वो कहते वक़्त अपनी उंगलिया चटका रही थी, उनकी नज़रे मेरी आँखों में नहीं थी, बल्कि इधर उधर hi दौड़ रही थी. और खासकर वो फेक स्माइल... ी कैन तेल्ल की वो डेफिनिटेली एक फेक स्माइल थी.'

[Nice observation master.]

'उनकी फवौराबिलिटी कितनी है अब!?'

[48 master!]

'हम्म! पर ऐसी क्या बात है जिसके चलते वो मुझसे झूठ बोल रही है!? शायद वो मेरे साथ ये शेयर नहीं करना चाहती!? मय्बे ये उनका निजी मामला हो शायद इसलिए!?'

[Maybe master... Nidhi thodi reserved hai. Aapko khud uske muh se nikalwana padega yadi aap kuch jaan'na chaahte ho toh. Kyuki wo khud se nahi bataegi.]

'हम्म! आल्सो, पारी... मुझे अब उस सवाल का जवाब चाहिए. अब तुम लेवल 3 पे हो, तोह मुझे कोई बहाना नहीं चाहिए.'

[Konsa sawaal master!? If you're qualified, then I'll tell you.]

'तुमने कहा था की तुम सिर्फ वही देख सकती हो, जो में देख सकता हु. राइट!?'

[Exactly master.]

'तोह फिर उस दिन तुम्हे ये कैसे पता चला था की रागिनी भाभी कहा पे है!? तुमने वो कैसे देख लिया!? मिशन देते वक़्त तुमने मुझे उनकी लोकेशन भी दी थी. मुझे ये बात समझ में नहीं आ रही.'

[Hmmm! Fine! I'll tell you. Master! Mein abhi bhi keval utna hi dekh sakti hu jitna aap dekh sakte ho.]

'थें...!?'

[Samjhaati hu. Imagine kariye ki aasmaan se dherr saari balls gir rahi hai.]

'हम्म!'

[Ab aap apne aap ko maaniye ki aap system hai aur wo saari balls missions hai.]

'ोकायययय!'

[Hmm! Toh kya aap ko abhi pata hai ki wo saari jo balls gir rahi hai unme kaun kaun se missions hai!?]

'नहीं!?'

[Ab maan lijiye aapka haath apne aap aage badhta hai aur aap ek ball ko pakad lete ho jisme mission ki saari details dii hui hai. Toh ab toh aapko pata chalega na ki kaun sa mission mila hai!?]

'हाँ बिलकुल! यदि उस बॉल में सब कुछ लिखा है मिशन से रिलेटेड... वेट... इसका मतलब...'

[That's right master. Mujhe nahi pata rehta ki mission kon sii location par hai, aur missions kaun se hai. Ye sab kuch randomly aate hai jinhe mein show karti hu.]

'हम्म! ये तोह एकदम hi अलग निकला मेरी एक्सपेक्टेशंस से. मतलब तुम्हारे हाथ में नहीं है ये कण्ट्रोल करना. सारे मिशंस रैंडम्ली अपने आप आते है.'

[Yes master!]

'हम्म! और ये कैसे होता है...!?'

[You're not qualifi...]

'फ़क थिस!!'

[I cannot help it master.]

***

अभी तीसरा लेक्चर hi चल रहा था की तभी वीर की क्लास में एक अनजान आदमी आया और टीचर को एक पर्ची थमाया और कुछ बोलै.

पर्ची देखते hi, टीचर ने उसकी बात सुन्न आवाज़ लगाई,

"वीर!? है कोई!?"

वीर : यस सर!

टीचर : जो... समवन वांट्स तो टॉक तो यू.

वीर : हँ!?

कंफ्यूज होते हुए वीर ने अनजान आदमी पर नज़र डाली, जो की दिखने में 45 कुछ का लग रहा था और कपडे वगैरह काफी अच्छे पहने हुए था.

'हु इस थिस गाए!??' अपनी बॉहे सिकोड़ते हुए वीर मैं में चिंतन कर धीरे धीरे उस आदमी की तरफ आगे बढ़ा, जो मुस्कुराते हुए उससे hi देख रहा था.

क्लास से जैसे hi दोनों बाहर आये तोह वीर ने सवाल किया,

"दो ी क्नोव यू!? कौन हो आप!?"

आदमी : में!? ः~ मुझे भी जान जाओगे... पर पहले... नीचे क्यों नहीं चलते!? हम्म? कोई और है जो तुमसे मिलने के लिए इंतज़ार कर रहा है.

वीर : मुझसे मिलने के लिए!?

'कौन हो सकता है भला!?'

[ 🤷🏻‍♂️ ]

'पारी कही ये लोग...'

[I don't know master.]

'दमन आईटी!'

आदमी : तोह चले!?

उसने अपना एक हाथ फैलाते हुए चलने का इशारा किया तोह वीर ने हां में गर्दन हिला दी.

जैसे hi दोनों सीढ़ियों से नीचे जा रहे थे, वही साइड की एक क्लास में निधि की नज़र अचानक hi इत्तेफ़ाक़ से वीर पर पड़ गयी और ये देखते hi वो विचार में पद गयी.

'वीर!???? ये आदमी कौन है उसके साथ!? कोई घर का सदस्य!?'

पता नहीं निधि को क्या हुआ की वो क्लास में 5 मिनट में आने का इंस्ट्रक्शन देके बाहर आ गयी और उन् दोनों के पीछे पीछे जाने लगी.

जैसे hi वीर और वो आदमी कैंपस में आये, वीर की आँखें फटी की फटी रह गयी.

कैंपस में साइड में एक ब्लैक रोल्स रोये है कड़ी हुई थी. और जैसे hi उसकी नज़रे बगल से कड़ी दो लड़कियों पर गयी तोह उससे एक और झटका लगा.

कुछ hi पालो में वीर और वो आदमी उन् दो लड़कियों के सामने थे...

'Don't तेल्ल में की ये दोनों मुझसे मिलने आयी है. ओह मन!! थिस गर्ल... She's... तू ब्यूटीफुल... जस्ट लिखे हेर...'

जैसे hi वीर ने क़रीब से उन् दोनों को देखा तोह उसके होश hi उड़द गए. केवल वही नहीं, कैंपस में जो भी लोग मौजूद थे वो सभी उन् दोनों को hi ताड़ रहे थे.

उन् दोनों के ऊपर से लोगो की नज़रे हट hi नहीं रही थी. यहाँ तक की कैंटीन के वर्कर्स और गार्ड्स तक ताड़ने में लगे हुए थे.

पर इन् दोनों में से, एक ज़्यादा ख़ूबसूरत थी. और वो थी जिसने प्रोफेशनल ऑउटफिट पहना हुआ था. साड़ी वाली महिला भी ख़ूबसूरत थी पर उतनी नहीं जितनी वो यंग वाली लड़की लग रही थी.

वीर की बोलती hi बंद हो गयी थी. यदि उस क्लब वाली लड़की की सुंदरता को कोई मैच कर सकता था तोह वह यही लड़की थी, जो इस वक़्त उसके सामने कड़ी थी.

अब तक वीर यही सोचता था की क्लब वाली लड़की अब तक सबसे खूबसूरत लड़की थी जो उसने देखि थी पर अब ये कहना थोड़ा मुश्किल था. क्युकी ये लड़की भी उस क्लब वाली की सुंदरता को टक्कर दे सकती थी.

जैसे hi उस लड़की ने वीर को देखा, अपने आप hi उसकी आँखों में एक चमक आ गयी. वो मुस्कुराते हुए उससे देखने लगी. उसकी नज़रे वीर की आँखों में hi तिकी हुई थी जिसके चलते बेचारे वीर को शर्म आ रही थी, क्युकी वो थी hi इतनी अट्रैक्टिव.

पर जैसे hi उसने वीर के चेहरे और हाथो में लगी जगह जगह बन्दागेस और एक दो पट्टी देखि, उसकी मुस्कान गायब हो गयी और एक चिंता उसके चेहरे पर आ गयी.

लड़की : अरे यू okay!?

और उस लड़की की मधुर आवाज़ वीर के कानो में पड़ी. इतनी प्यारी आवाज़ जो किसी भी कठोर से कठोर आदमी को यु पिघला दे... उस अनोखी आवाज़ का अनुभव वीर एकदम सामने से कर पा रहा था. और सबसे बड़ी बात... वो लड़की उस से उसकी हालत के बारे में पूछ रही थी. कितना लकी होना पड़ेगा लोगो को ऐसा अनुभव पाने के लिए?? वीर मैं में खुद से पूछ रहा था...

वीर : हँ!? में!? यस...

लड़की : ये चोट...

अचानक hi उसने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए वीर के गाल पे रख दिया जहा बैंडेज लगी हुई थी. और उन् कोमल हाथो का स्पर्श पाते hi जैसे वीर मानो जन्नत में पहुँच गया था.

'फुककककककक! हेर हैंड... इतना... इतना सॉफ्टट!???'

वीर (ब्लशेस) : ओह्ह!? ये!? ये... कल... वो... फाइट में... अहःअहः~

लड़की : ओह्ह्ह!!

वीर (ब्लशेस) : येह...

इधर निधि उन्हें फॉलो करके नीचे आ चुकी थी और वही बिल्डिंग के पास से सामने चल रहे सन को भली भाति देख पा रही थी.

उसने देखा की एक बेहद hi ख़ूबसूरत लड़की वीर के गालो को थामे उससे निहार रही थी. साथ hi साथ एक और ख़ूबसूरत महिला बगल से कड़ी हुई थी और यहाँ तक की इतनी लुक्सुरिओउस गाडी उनके साइड से कड़ी थी जो साफ़ बतला रही थी की वो किसी बड़े घराने से थी.

पर...

पता नहीं क्यों...

वीर को ऐसे यु उस लड़की के साथ देख...

निधि को अंदर hi अंदर कुछ तोह हो रहा था. जिससे वो या तोह समझना नहीं चाहती थी या उस फीलिंग से अनजान थी.

'कौन है ये सभी!? वीर के घर से!? रिलेटिव्स!? हां! वही होने चाहिए... इतने प्यार से तोह घरवाले hi पेश आते है. शायद ये अच्छे लोग है जो वीर से प्रेम करते है? या नहीं!? एक मिनट!!! कही ये वीर की गिर्ल्फ्रिए....!?? हँ!?!??! इस शी रियली....!?'

और निधि बेचारी न जाने क्या क्या सोचने लगी थी. पर इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी. सन hi ऐसा था.

इधर वीर शर्म के मारे उस लड़की से नज़रे नहीं मिला पा रहा था.

'फुकककककककक! व्हाई इस शी स्टेरिंग ात में लिखे तहत पारी!??? It's मेकिंग में उनकंफर्टबले... मुझे शर्म आ रही है...'

[Hang on master...]

लड़की : दो यू क्नोव में!?

वीर : हम्म? ओह्ह हां! में यही पूछने वाला था. क्या आप मुझसे मिलना चाहती है!?

लड़की (स्माइल्स) : Mmm-hmmm!

वीर : पर... में तोह आपको नहीं जानता. और... ी don't थिंक की आप भी मुझे जानती हो!? हम एक दूसरे से पहले कभी नहीं मिले है...

लड़की (स्माइल्स) : मिले है...

वीर (सुरप्रीसेड) : हहहह!?

लड़की : ी मैं काइंड ऑफ़... हहै~

वीर : ी... ी don't गेट आईटी...

तभी उस लड़की ने अपना हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ाया और बोली,

"I'm सोनिआ!!"

वीर (हाथ मिलाते हुए) : एंड... I'm...

सोनिआ (स्माइल्स) : वीर... ी क्नोव...

वीर (शॉकेड) : हहहहहहह!??? आपको... कैसे....!?

सोनिआ : व्हाई don't वे जो समवेयर ेल्स एंड टॉक अबाउट आईटी!?

इस से पहले वीर कुछ कह पाटा, पीछे से वो दूसरी लड़की जिसने साड़ी पहनी हुई थी वो वीर के पास आयी और उससे घर के देखने लगी...

वीर : उम्... !??

सोनिआ (स्माइल्स) : यह राइट! She's सुहाना... माय एल्डर सिस्टर.


सुहाना





वीर : उम्... Hello!?

पर सुहाना न तोह कुछ बोली और न hi कुछ किया उसने... वो बस अपनी आँखें सिकोड़े वीर को घर घर के देख रही थी. और अगले hi पल वो पलटी, और कार की ऑर्डर जाते हुए बोली,

"सोनू!! यू विल लूज़ थे बेट. अपना वादा याद रखना."

वीर : हँ??

*थुड़*

और कार का दरवाज़ा बंद कर वो अंदर बैठ गयी.

इधर सोनिआ अपनी बड़ी बहिन की ये हरकत देख अपनी आँखें घुमाते हुए ना में सर्र हिलायी.

सोनिआ : वेल... सो!? वीर!? शॉल वे!?

वीर इस से पहले कोई जवाब दे पाटा, सोनिआ ने उसका हाथ थामा और उससे खींचते हुए कार के अंदर ले गयी...

इधर सुहाना और प्रकाश सोनिआ की इस हरकत पर थोड़ा अचंभित रह गए.

सुहाना (मैं में) : सोनू!??? सोनू ने... उसका हाथ पकड़ा!? कुछ देरर पहले भी उसके गाल पे... हाउ कैन शी...!?

सोनिआ ने कार में घुसते hi वीर को अपनी साइड से बैठाया.

उसके शरीर से आती खुशबू वीर को पागल किये जा रही थी.

'क्या लगाती है यार ये लड़किया!? कोण से तालाब में दुब के आती है!? इतनी सुगंध क्यों आती है इनसे!? फुक्कखकक! मुझे कुछ कुछ हो रहा है पारी...'

[ :ब्लश:]

कार में सुहाना विंडो के पास थी, बीच में सोनिआ खुद थी और उसके बगल से वीर था.

कार ड्राइव तोह प्रकाश hi करने वाला था, उसकी ड्राइविंग स्किल्स पर सोनिआ बेहद भरोसा जो करती थी.

*वरोउम*

और अगले hi पल कार जितनी जल्दी वह आयी थी उतनी hi जल्दी वह से निकल गयी...

पीछे कड़ी निधि बस हैरानी और थोड़ी दुविधा में सब कुछ घटित हो रहे सन को देखती रही. मैं में ढेर्रो सवाल थे जिन्हे वो वीर से पूछना चाहती थी. पर अभी सही समय नहीं था. उससे खुद कुछ देरर में अपने काम के लिए निकलना था और इसलिए, अपने सवालिया मैं को थोड़ी देरर शांत कर वो अंदर वापस चली गयी.

***

इधर वीर जहा कॉलेज से निकला तोह वो अब शहर की सबसे महंगी 5 स्टार होटल में से एक होटल में बैठा हुआ था.

वो बस एक पोकर फेस बनाये एक hi जगह देखते जा रहा था. कुछ hi मिनट्स के अंदर उसने इतनी साड़ी अय्याशी वाली चीज़े देख ली थी की इन् सबको हज़म करने में उसका टाइम तोह लगने hi वाला था.

रोल्स रोये की अंदर की वो लक्ज़री और कम्फर्ट, उसके बाद इतनी बड़ी आलिशान होटल में लगे वो बड़े बड़े झूमर, ऐसा लग रहा था मानो वो किसी पैलेस में आ गया हो.

वही सुहाना और सोनिआ इतना कम्फर्टेबली बैठी हुई थी मानो जैसे ये उनका रोज़ का रूटीन था.


सोनिआ





सोनिआ : दो यू क्नोव हु ी ऍम?

वीर : एक्चुअली, अभी आपके नाम के अलावा ी don't क्नोव एनीथिंग.

सोनिआ (गिगल्स) : फुफु~ यू क्नोव ****** मोटर्स!?

वीर : हँ!? सारे देश में मशहूर है ये कंपनी. इसके बारे में कौन नहीं जानता!?

सोनिआ (स्माइल्स) : ओह्ह थैंक यू सो मच! मेरे ग्रेट ग्रांडफादर फाउंडर थे इसके. अभी डैड ओनर है. और में सीईओ थी... बूत अभी मेने वो पोजीशन किसी और को दे दी है. अब में सीओओ हु.

मानो एक बम सा फोड़ दिया था सोनिआ ने वीर के ऊपर. क्या कहा!? ***** मोटर्स की सीईओ थी ये लड़की पहले!? ग्रेट ग्रांडफादर फाउंडर थे!? बाप ओनर है!? सोच के hi वीर जो पहले hi ावक्वार्ड महसूस कर रहा था, उसका शरीर ये सुनते hi एयर स्टिफ हो गया.

वीर : क्याआ!??? You're जोकिंग राइट!?

सोनिआ (गिगल्स) : I'm नॉट...

वीर : वाओ! ी मैं... वऊववव!

सोनिआ (स्माइल्स) : थैंक यू! तोह शुरू करे!?

वीर : हँ!? अहह... सूरे... सूरे... थैंक्स!

'हँ? थैंक्स!? फुसक्कककककक.... हु था फ़क सेक्स थैंक्स? थैंक्स के बदले में hi थैंक्स बोल दिया मेने!? पारी... हेल्प में... मेरे मुँह से उत् पटांग शब्द निकल रहे है... I'm गेटिंग ऐम्बर्रेस्सेड...'

[ 🤷🏻‍♂️]

सोनिआ (सुरप्रीसेड) : थैंक्स? किसलिए!?

वीर (ब्लशेस) : उम्म्म... वो...

सोनिआ : इन फैक्ट, थैंक्स तो यू... वीर!

सोनिआ ने बोलते हुए अचानक hi उसके हाथ पर अपना हाथ रख दिया, जिसके चलते एक बार फिर ये जेस्चर सुहाना और प्रकाश की नज़रो से न चूका.

अचानक hi सोनिआ की आवाज़ धीमी हो गयी, और वो बड़े hi प्यार से वीर को देख रही थी. साथ hi साथ कुछ ऐसा था जो उसकी आँखें बया कर रही थी. ग्लानि!??

वीर (सुरप्रीसेड) : थैंक्स!!? Mu...mujhe!? वो किस लिए भला!?

सोनिआ (स्माइल्स) : यू don't रेमेम्बेर!?

वीर : हम्म?

सोनिआ : यू सेव्ड में...

वीर : हनन?

सोनिआ : तहत डे... रेमेम्बेर... यू हद ा कार एक्सीडेंट!?

एक्सीडेंट शब्द सुनते hi वीर को दुबारा से वही मंज़र याद आने लगा, वो पल, वो दिन...

अजय के साथ लड़ाई... वो बारिश... शरीर में जगह जगह वो घाव... उसके हाथो से फ्लावर वैसे का टूटना... बृजेश का उससे घर से निकालना... उसके परिवार वालो की वो निर्दयी आँखें... दर बदर भटकना... और...

और वो रास्ते में कार से एक्सीडेंट.

अगले hi पल वीर का सर्र उन् सब बातो को याद कर झुक गया. ज़ख्म गहरे थे... भरने में समय तोह लग्न hi था.

पर क्या पता...

वो ज़ख्म भर भी रहे थे या और गहरे हो रहे थे!?

वीर : हम्म्म... ी रेमेम्बेर.

सोनिआ अभी आगे बोलनी hi वाली थी की तभी बगल में खड़ा प्रकाश अचानक hi सर्र झुका लिया और वीर से बोलै,

"वो हमारी मैडम की hi कार थी. और में hi उससे ड्राइव कर रहा था. जो कुछ भी हुआ, उसमे मेरी गलती थी. उसके लिए में आपसे माफ़ी मांगता हु."

प्रकाश की बात सुन्न एक बड़ा झटका सा लगा वीर को. और उससे जैसे रीलीज़ हुआ.

वीर : ओह्ह्ह्ह! सो... इसलिए...

[Aaahhh! So that's what happened. Master! These people won't harm you. You can lower your guard.]

सोनिआ : प्रकाश अंकल! में बात कर रही हु न.

प्रकाश : सॉरी मैडम!

सोनिआ : और गलती केवल आपकी नहीं थी. कार में में भी थी, कार मेरी थी, मेरे कारण hi आप स्पीड में थे.

प्रकाश : मैडम! इसमें आप की कोई गलती नहीं थी... गलती साड़ी...

सुहाना : स्स्स्सस्छ्हःहःह! पहले उससे समझाओ फिर आपस में बहस करना.

सोनिआ (ब्लशेस) : आह! राइट! वीर...

वीर : J...jii!?

सोनिआ : एक्चुअली... ये लम्बी कहानी है. बूत, में सिर्फ तुम्हे उतना hi बताउंगी जितना तुम्हारा jaan'na ज़रूरी है.

वीर : Okay!

सोनिआ : दरअसल, उस दिन में प्रकाश अंकल के साथ कही से लौट रही थी, हम बोहत जल्दी में थे. बारिश के कारण ड्राइव करने में भी दिक्कत आ रही थी और ऊपर से रात का वक़्त...

वीर केवल चुप चाप साड़ी बात सुनता जा रहा था.

सोनिआ : और... कोई है जो मेरी जान के पीछे पड़ा हुआ था.

वीर (शॉकेड) : हँ!??

सोनिआ : यस! उस रात... प्रकाश अंकल मुझे बचाने के लिए तेज़्ज़ रफ़्तार में गाडी चला रहे थे. वो लोग... हमारे पीछे hi थे... उनका बस एक hi टारगेट था... वो थी में... और जैसे hi मोड़ आया, अचानक से सामने तुम आ गए थे. जिसके चलते वो हादसा हुआ...

वीर (सुरप्रीसेड) : ी... ी सी...

वीर का रिएक्शन देख, सोनिआ ने उसका हाथ एक बार फिर थाम लिया.

सोनिआ : ी... I'm सो सॉरी वीर! I'm सो सॉरी!

वीर की समझ में hi नहीं आ रहा था वो क्या करे और क्या hi कहे. आप का एक्सीडेंट हुआ, आप कुछ दिनों बाद उस हादसे से उभरे पर अचानक hi आपको पता चलता है की आपके साथ वो हादसा करने वाली एक बेहद hi ख़ूबसूरत लड़की है जो आपसे मिलने कई दिनों बाद आयी है और आपसे सच बता के माफ़ी मांग रही है.

उस वक़्त क्या करेंगे आप!? क्या कहेंगे!? क्या उस लड़की को दोष देंगे!? उस से मेडिकल फीस का खर्चा मांगेगे!? उसके खिलाफ कंप्लेंट दर्ज करेंगे!? या माफ़ कर देंगे!?

इन्ही सवालों में वीर फसा हुआ था. उसकी समझ में hi नहीं आ रहा था की क्या बोले पर इस वक़्त उसके पास और भी कुछ था जो हमारे में से किसी के पास नहीं था...

वो थी पारी...

अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करते हुए पारी ने अगले पल hi वीर को सुग्गेस्टिव दिया,

[Master! Forgive her. I think ye hamaare boht kaam aaenge aage chal ke. Also, ye Sonia guilty feel kar rahi hai. Make her feel more guilt. Forgive her.]

'अस यू से थें.'

वीर : It's okay! मेने आपको माफ़ किया... जो भी बातें थी वो पिछली बातें थी... और उन् दिनों को में भुला चूका हु... हॉस्पिटल में होश आने के बाद से hi... जो भी यादें बना रहा हु, बस उन्हें hi याद रखना चाहता हु.

उसकी बात सुन्न, सोनिआ कुछ पल वीर को यु hi देखती रही. पहले तोह उससे विश्वाश hi नहीं हुआ की वीर ने उससे ऐसे hi माफ़ कर दिया. शामे हाल प्रकाश और सुहाना का भी था. उन्हें यकीन hi नहीं हुआ की वीर ने ऐसे hi आसानी से मामला रफा दफा कर दिया.

उसके बाद सोनिआ के साथ वही हुआ जिसका संकेत पारी ने किया था. उसकी ग्लानि के भाव बढ़ गए...

सोनिआ : ी... ी... में तुमसे मिलना तक न आ सकीय. भले hi तुम्हारा मेरी गाडी के सामने एक इत्तेफ़ाक़ था, पर वीर...

वीर : ?

सोनिआ : तुम्हारे बीच में आने से hi... उस रात मेरी जान बची थी. एक्सीडेंट के बाद जो शोर वह हुआ था और भीड़ जमा हुई थी... तहत सेव्ड में... उस कारण से वो लोग हमारी कार को कैच न कर पाए...

वीर (स्माइल्स) : ये तोह... अच्छी बात है न!?

उसकी मुस्कान देख, सोनिआ ने अपना निचला होंठ दातो टेल दबा लिया, "पर... तुमसे एक बार भी मिलने न आ सकीय में... मुझे वही उतर के सबसे पहले तुम्हे हॉस्पिटल ले जाना चाहिए था पर में... में खुद की जान की परवाह कर, तुम्हे यु वह अकेला रास्ते में चोरर के चली गयी. I'm... I'm सॉरी वीर."

वीर : It's okay!

सोनिआ (तेज़्ज़ आवाज़ में) : नूवो! It's नॉट okay!

सोनिआ : ी मैं... ी... जो कुछ भी हुआ. उसमे मेरी गलती थी. और इसलिए...

सुहाना : इसलिए, बोलो कितने चाहिए!? 1 लाख? 2 लाख? 5 लाख? 10 लाख? कितने...!?

वीर : हहहह!?

सुहाना के मुँह से शब्द सुनते hi वीर को अचंभव हुआ. और वो स्तब्ध निगाहो से उससे देखता रहा. फिर उसने, सोनिआ को देखा जो एक आस लिए उससे देख रही थी.

सारा मामला जैसे hi वीर को समझ आया तोह वह गुस्से से उठ खड़ा हुआ...

वीर : आप मुझे यहाँ इसलिए लायी थी!?

सुहाना : वेल! हां! मेने तोह कहा था की तुमसे मिलने की कोई ज़रुरत नहीं है. जो कुछ भी था केवल एक इत्तेफ़ाक़ था और मुझे नहीं लगता की तुमसे बात करने की कोई ज़रुरत थी पर मेरी छोटी बहिन बड़ी hi भोली है और ज़िद्दी भी. उसका maan'na है की गलती उसकी है और इसलिए उसकी भरपाई वो ऐसे करना चाहती है. तुम अपनी मांग रखोगे तोह सोनू के ऊपर से थोड़ी गिल्ट गायब हो जाएगी... तोह बताओ... कितने!? 5 लाख ? 10 लाख? कितने!? जल्दी से बताओ तोह ये मटर क्लोज करे.

सोनिआ (चिल्ला कर) : डीई!?? ये कैसे बोल रही हो आप!? He'll मिसुन्दरस्तंड में...

सुहाना के घमंड से भरे शब्द जब वीर के कानो में पड़े तोह उसका मूड और भी बिगड़ गया.

कही न कही... सुहाना की छवि उसके पिता बृजेश से मेल खा रही थी. वैसे toot'te वक़्त भी उसके पिता उस समय वैसे की कीमत पर ज़्यादा ध्यान दे रहे थे न की उसकी छोटो पर.

उन् बातो को याद कर वीर जाने के लिए पलटा पर उसने एक बार पीछे देखा और बोलै,

"यदि केवल एक बार हॉस्पिटल में मुलाक़ात करने आ जाती, तोह उस से बड़ी चीज़ मेरे लिए कुछ न होती. इन फैक्ट, अभी भी माफ़ी मांगने के बाद मेने आपको माफ़ आलरेडी कर hi दिया. पर एक गलती कर दी...

पैसो को बीच में ले आयी आप...

इवन थौघ मेरे पास पैसे नहीं है. इसका मतलब ये नहीं की में ऐसे पैसो को अपनाने लगा. पैसो का गुरूर, कभी सही नहीं होता. याद रखना!"

और बिना कुछ आगे कहे वीर वह से चल दिया.

"वीईईएएर.... वआईईटत्त!!" सोनिआ चिल्लाई पर उसका चिल्लाना बेमतलब था. क्युकी न hi वीर पीछे मुदा और न hi उसने सोनिआ के चिल्लाने पर कोई रिस्पांस दिया. वो कुछ hi देरर में उसकी आँखों से ओझल हो चूका था.

एक गहरी सास लेते हुए सोनिआ वापस से अपनी कुर्सी पर बैठ गयी और फिर शुरू हो गयी,

"व्हाट इस रॉंग विथ यू दी!? मतलब ग्रेट... अब वो मुझे एक घमंडी पैसो वाली लड़की समझ रहा होगा."

सुहाना : व्हाट इस रॉंग विथ में!? अरे... व्हाट इस रॉंग विथ यू??

सोनिआ : हाँ?

सुहाना : जस्ट हाउ मान्य टाइम्स यू तौचेड हिम!? तुम, जिसके पीछे लड़के खाली एक झलक पाने के लिए मरते है, इतने बड़े बड़े घरानो के लड़के तुम्हारे पास रिश्ता लेके आते है, जो तुमसे बात करने के लिए तरसते है ऐसे लोगो को तुमने आज तक भाव न दिया. और वो लड़का... यू तौचेड हिम तरीके. ी नोटिसद आईटी. तुम कब से ऐसे लोगो से बाते करने लगी सोनू!? हे doesn't इवन डेसेर्वे तो टॉक विथ यू... जिन्हे पैसो की औकात के बारे में नहीं पता वो कभी पैसा नहीं कमा पाते. He's ा फूल... जाने दो उससे... यहाँ में सोच रही थी, की वो सभी लोगो की तरह लालची निकलेगा और पैसो की मांग करेगा... और फिर में तुमसे लगी शर्त जीत गयी होती पर... नहीं! ये तोह और भी बड़ा वाला बेवक़ूफ़ निकला... हाथ में आ रहे पैसो को लात मार के चला गया वाह...

सोनिआ : दी! He's माय बेनेफैक्टर. उसी के कारण आज में तुम्हारे सामने हु. भले hi वो इत्तेफ़ाक़ था पर है तोह फैक्ट hi. यदि वो उस वक़्त सामने न आता, तोह आज पता नहीं में कहा होती? होती भी या नहीं!?

सुहाना : तुम उससे उसकी ज़रुरत से ज़्यादा क्रेडिट दे रही हो. और तुम्हे कुछ नहीं हुआ होता. एक तोह यहाँ उससे कॉलेज से उठा के यहाँ तक लाये और उसके बाद भी अकड़ तोह देखो उसकी... उससे पता भी है की वो किसके साथ बैठ के बाते कर रहा था!? मैं तोह कर रहा था एक बार में उसको उसकी औकात दिखा दू. पर तुम जो थी साथ में... फिर तुम्हे बुरा लग जाता...

सोनिआ : मुझे अकेले hi आना चाहिए था. न जाने वो क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में...

सुहाना : सोनऊ!?? तुम कब से ये सब सोचने लगी!?? की दूसरे तुम्हारे बारे में क्या सोचते है? वो कोई तुम्हारा लवर नहीं है सोनू, न hi कोई सेलिब्रिटी या क्रश है जिसके लिए तुम इतना सोच रही हो. अरे उससे तोह खुश होना चाहिए उल्टा और हमे थैंक यू कहना चाहिए. उससे पहली बार रोल्स रोये में बैठने का मौका मिला, और पक्के से पहली बार इतनी बड़ी होटल में आया होगा. फिर भी अकड़ तोह देखो उसकी... हम्फ! ी हेट सुच में.

एक आह भरते हुए, सोनिआ अपनी बहिन के बर्ताव पर सर्र हिलाते हुए सीट से उठी और बाहर कार की ऑर्डर चल दी.

'विल यू हेट में नाउ!? वीर!?'

***

*क्लिक*

गाडी में से छवि निकालते हुए निधि अपनी स्कूटी से उत्तरी. सामने एक बड़ा घर था. आज उससे यहाँ बुलाया गया था. कॉलेज में रेसस्स के वक़्त hi वो निकल गयी थी और अपनी मंज़िल पर पहुँच चुकी थी.

वीर और उस लड़की की छवि अभी भी कही न कही उसके मैं में मंडरा रही थी. उससे बस jaan'na था की वो लड़की कौन थी. और, वीर की क्या लगती थी.

आगे कदम बढ़ाते हुए निधि घर की एंट्रेंस की तरफ बढ़ी. वो दीवारे जो हलकी पीले रंग की थी, वो रंग जो अक्सर खुशियों को दर्षात है.

परन्तु, इस वक़्त निधि की बॉहे सिकुड़ी हुई थी, चेहरे पर शिकन और चिंता थी. और उसके दिल की धड़कने नार्मल से कई गुना तेज़्ज़ हो चुकी थी.

जैसे तैसे कदम बढ़ाते हुए वो एंट्रेंस पर आयी और उसने दूर बेल्ल बजायी,

*डिंग* *डाँग*

और कुछ देरर के अंदर hi दरवाज़ा खुला और एक जाना माना एक औरत का चेहरा उसकी नज़रो में पड़ा.

औरत ने देखते हुए उससे अंदर आने के लिए रास्ता दिया...

*थुड़*

और गेट बंद कर दिया.

***

"दमन आईटी! दमन आईटी!! अरे यही छवि तोह थी... लग जा ताला..." इधर श्रेया घर में अपने हाथो में स्पेयर छवियों का गुच्छा लिए फ़्रस्ट्रेशन निकाल रही थी.

उसके साथ में hi जूही कड़ी हुई थी जिससे श्रेया खुद स्कूल जाके जल्दी लेके आ गयी थी.

जूही : मासी!?? हम कहा जा रहे है!?

श्रेया : तुम्हारी मम्मी के पास...

जूही : हम्म? मम्मी कहा गयी है!?

श्रेया : सब पता चल जाएगा जूही... आओ...

और श्रेया जूही की ऊँगली पकड़ फौरन से घर से निकल एक टैक्सी कर चल पड़ती है.

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!


लिखे मार देना..😁
 
अपडेट विल के टुनाइट!
 
अपडेट - 22 ~ Don't यू डरे टच हेर!

अब तक...

उसके साथ में hi जूही कड़ी हुई थी जिससे श्रेया खुद स्कूल जाके जल्दी लेके आ गयी थी.

जूही : मासी!?? हम कहा जा रहे है!?

श्रेया : तुम्हारी मम्मी के पास...

जूही : हम्म? मम्मी कहा गयी है!?

श्रेया : सब पता चल जाएगा जूही... आओ...


और श्रेया जूही की ऊँगली पकड़ फौरन से घर से निकल एक टैक्सी कर चल पड़ती है.

अब आगे...

होटल में वीर के नाराज़ होक चले जाने के बाद, सोनिआ और सुहाना गाडी में बैठ वापस अपने अपने कामो की तरफ जा रही थी.

जहा सुहाना का मूड ये बया कर रहा था की उससे किसी बात की कोई चिंता hi नहीं थी वही दूसरी तरफ उसकी छोटी बहिन, सोनिआ विंडो से बाहर नज़रे गड़ाए किसी चिंता में डूबी हुई थी जिससे सुहाना ने भांप लिया था.

सुहाना : ओह c'mon सोनू!? रियली!? यू अरे स्टिल थिंकिंग अबाउट हिम!? ऐसा क्या ख़ास देख लिया तुमने उसमे!?

सोनिआ अपनी बहिन की बात सुन्न पलट के उससे देखती है.

सोनिआ : फाइन थें... I'll तेल्ल यू!

सुअहना : हम्म!?

सोनिआ : यू रेमेम्बेर पुष्कर राइट!?

सुहाना : हम्म! उससे कैसे भूल सकती हु. तुम्हारा चाइल्डहुड फ्रेंड.

सोनिआ : यस! दी...

सुहाना : !??

सोनिआ : आप जानती है न!? पुष्कर की डेथ का कारण!?

इस बार उसने बड़ा hi सीरियस होते हुए कहा. ये टॉपिक कितना सेंसिटिव था ये बात सुहाना भी भली भाति जानती थी और इसलिए वो भी सीरियस हो गयी.

सुहाना : हम्म! उसका घरवालों से झगड़ा हो गया था, फिर उसने घर चोरर दिया था. तुमने बोहत मनाया था उससे, बेचारा गलत राह पकड़ लिया था वह. और वही राह उससे ले के चली गयी इस दुनिया से...

सोनिआ : हम्म! वीर के साथ भी ऐसा hi कुछ है दी...

सोनिआ की बात सुन्न इस बार सुहाना को रीलीज़ हुआ. उससे सब समझ में आ गया था की क्यों सोनिआ ऐसा बेहवे कर रही थी उसके सामने. सोनिआ ने अपने मित्र पुष्कर को खोया था. और वीर के हालात भी शामे hi थे. ये समझने में देरर न लगी सुहाना को की क्यों सोनिआ इतना डेस्पेरेट थी होटल में.

सुहाना : ओह्ह! तोह ये बात है...

सोनिआ : हम्म! उसके घरवालों ने उससे घर से निकाल दिया है. कर्रेंटली he's लिविंग विथ हिज टीचर. एंड जिस रात वो मेरी कार से भिड़ा था... उस रात hi उससे घर से बाहर निकाला गया था. हे वास् प्रॉबब्ली सर्चिंग फॉर ा प्लेस तो स्टे. पर किस्मत देखो... उसका एक्सीडेंट हो गया मेरे हाथो. ी don't वांट हिम तो लूज़ थे ट्रैक... ी क्नोव उसके पास पैसे नहीं होंगे, ी कैन गेस... में नहीं चाहती मेरी वजह से वो पुष्कर की तरह... इसलिए, मैंने उससे आज बुलाया था.

सुहाना : और तुम्हे ये सब कैसे पता चला!?

सुहाना के सवाल पर गाडी ड्राइव कर रहे प्रकाश ने एक पल के लिए पीछे देखा और मुस्कुराया,

"यू अरे वेलकम मैडम!!!"

सुहाना : ओह्ह्ह! तोह आपने डिटेल्स लाके दी साड़ी उसकी!?

सोनिआ : हम्म्म!

सुहाना : वेल! में समझ सकती हु तुम्हारे इमोशंस को बूत देखो... उसने हमारे सामने पैसे रिजेक्ट किये है. अब इसमें में भला क्या करू!? मुझे नहीं पता था वो इतना बेवक़ूफ़ होगा. उसके कारण मेरी बेट चली गयी... हम्फ!

सोनिआ : Don't वोर्री! आपकी बेट... I'll स्टिल कम्पली विथ आईटी. आपको वो दिखाना है न अपनी फ्रेंड्स के सामने!? I'll रिक्वेस्ट डैड...

सुहाना अपनी बहिन की बात सुन्न इतना खुश हो जाती है की अगले hi पल उससे अपनी बाहो में भर लेती है और उसके गाल को चूम लेती है,

सुहाना : ओह माय गॉड! रियली!? सोनू!? तुम... तुम सच में!? में तोह बेट हार गयी... उसके बाद भी!?

सोनिआ (स्माइल्स) : हम्म!

सुहाना : यू अरे थे बेसटटटटट!!!

वो उससे और जोरर से हुग कर लेती है. न जाने क्या बेट लगी थी इन् दोनों बहनो के बीच. पर जो भी था, देख के तोह यही लग रहा था की सुहाना जो चाह रही थी वो करने के लिए सोनिआ राज़ी हो चुकी थी.

***

इधर वीर होटल से बाहर निकलने के बाद अपने कॉलेज की ऑर्डर hi जा रहा था पर रास्ते भर पारी उसके पीछे hi पद गयी थी.

[Maaaasssttteeerrrr!??? Aapne aisa kyu kiyaaa!? Why did you rejected that money!?]

'व्हाई!? पारी!? ये तुम पूछ रही हो?? तुमने देखा नहीं? उस औरत में कितना गुरूर था पैसो को लेकर. वो पैसे ऐसे दे रही थी मुझे जैसे मानो...'

[Maano kya...!?]

'नथिंग...'

[Master! Hume toh paiso se matlab hai. Wo kitna guroor rakhti hai uss se nahi. Also, mene kaha tha na wo lady aapke kaam aa sakti hai. She's damn rich master. Aapko connections banaane hi honge. Initial phase me aap akele kuch nahi kar sakte master.]

'ी क्नोव व्हाट I'm दोंग पारी. ी क्नोव ी नीड मनी. पर ऐसे नहीं... वो पैसे ऐसा लग रहा था मानो फेके हुए हो. और मुझे बटोरने के लिए कह रही हो वह. एक न एक दिन उसका गुरूर ज़रूर तोडूंगा में.'

[*सिघ* वेल... ऑलराइट मास्टर. बूत यदि वो सोनिआ आपसे फ्यूचर में फिरसे बात करना चाहे थें मन मत करना. She's ा गुड लेडी ी थिंक. आल्सो, आपने चेक क्यों नहीं किया उन् दोनों को!?]

'अहह!? ओह... वेल... उम्...'

[Hmmm! I see! They were too beautiful and you forgot to check them.]

पारी की बात सुन्न न चाहते हुए भी वीर के गाल शर्म से लाल हो hi गए.

वो अपने कॉलेज पहुँच चूका था और उसने पता किया की निधि भी अपने किसी काम के लिए निकल चुकी थी.

'लुक्स लिखे उन्हें कोई अर्जेंट काम है!?'

सोचते हुए वो अपनी क्लास में चला गया. आज का लंच भी उसका मिस हो चूका था.

***

यहाँ निधि जैसे hi उस घर के अंदर कदम राखी, तोह उसकी नज़र अचानक hi वही सोफे पर बैठी एक महिला पर गयी, जिसकी गॉड में एक नन्हा सा बच्चा था और वो महिला एक बोतल में दूध लिए उस नन्हे से बच्चे को मुँह में लगा के पीला रही थी.

"ध्रुववववव......... मेराआ बच्चहाए!!!!"

निधि जोरर से चिल्लाई और तेज़्ज़ कदमो के साथ भागते हुए उस महिला की तरफ भागी और उसके हाथो से अपना बच्चे लेके अपनी गॉड में उठा ली.

वो महिला उठी और मकान मालकिन की तरफ देखि.

औरत : पी लिया उसने!?

महिला : जी मालकिन. थोड़ा सा पिया है.

औरत : तुम जा सकती हो अब. और कल काम पे जल्दी आ जाना.

महिला : जी मालकिन.

कहते हुए वो महिला बाहर निकल गयी. ये महिला इस घर में काम काज संभालती थी पर साथ hi साथ निधि के बच्चे को कभी कभी दूध पिलाना भी उसी की ज़िम्मेदारी थी.

अपने प्यारे से बच्चे को देख निधि की आँखों में ासु आ गए. वो उसका चेहरा चूमते हुए उसके गालो से अपने गाल सहलाने लगी, पुचकारने लगी.

एक बच्चा जन्म के बाद अपनी माँ का दूध पीटा है, पर यहाँ उसका बच्चे को ये सुख भी नसीब नहीं हो पा रहा था. पति पत्नी के रिश्ते के बीच की दरार के चलते बेचारा उसका ध्रुव इस सुख से तक वंचित था और साथ hi साथ निधि भी. ऐसा नहीं था की कभी निधि ने अपने बच्चे को स्तनपान नहीं करवाया था पर एक माँ जो रोज़ रोज़ अपने बच्चे को अपनी गॉड में बैठा के प्यार से उससे स्तनपान करवा के लोरी गए के उससे सुलाती है, इस सुख से दोनों hi निधि और उसका बच्चा वंचित थे.

रट रट निधि वही बैठ गयी और अगले hi पल उसने अपने ब्लाउज को खोल अपना एक स्तन बाहर निकाला और ध्रुव के मुँह को उस से लगा लिया.

जैसे hi उसके बच्चे ने उसके स्तन से दूध पीना शुरू किया तोह कुछ देरर में hi उसके स्तनों से दूध रिसने लगा. बेचारी निधि की आँखों में ासु और भी ज़्यादा उमड़ आये. वो प्यार से पुचकारते हुए, उसके सर्र को सहलाते हुए अपना दूध पीला रही थी. मानो जैसे कोई कभी भी उस से उसका ध्रुव छीन लेगा.

सिसक सिसक के रट हुए चुप चाप वो बस अपने बच्चे को दूध पीला रही थी और वो औरत भी चुप चाप बैठे हुए निधि को घर रही थी.

जैसे hi ध्रुव ने दूध पिया, कुछ शान बाद hi उससे नींद आ गयी और वो अपनी माँ की गॉड में hi सो गया. और अगले hi पल वो औरत उठी, निधि के पास आयी और उसकी गॉड से ध्रुव को उठाने लगी.

निधि ने अपने हाथ कस्ते हुए ध्रुव को पकड़ा और कुछ बोलना चाहा पर शब्द बीच में hi कही अटक के रह गए, और वो औरत निधि से ध्रुव को छिना के अपने साथ लेके बिस्तर पर बैठ गयी.

अपने ब्लाउज को ठीक कर निधि ने अपने दोनों गालो से ासु पोछे और अपने बच्चे के सोते चेहरे को निहारने में लग गयी.

इस वक़्त ध्रुव का सोता प्यारा चेहरा देख वो खुश तोह बोहत थी, पर साथ hi साथ एक अत्यंत hi दर्द भरी पीड़ा उसको अंदर से तोड़ते जा रही थी.

पल भर के लिए अपने बेटे को थामने का वो सुख जैसे उस से यु छीन लिया गया था.

अभी वो ध्रुव के चेहरे में खोयी hi हुई थी की उस औरत की आवाज़ उसके कानो में पड़ी और वो होश में आयी,

औरत : यदि, चुप चाप औरत की तरह रहती तोह आज ये दिन नहीं देखना पड़ता. हम्फ! जाओ अंदर अब... कमरे में... वो आता hi होगा नाहा के.

ये औरत और कोई नहीं बल्कि उसकी सास छाया थी. पता नहीं ऐसा क्या हुआ था इन् सब के बीच जो ऐसी दरारे बानी हुई थी रिश्तो में.

निधि न चाहते हुए भी जैसे तैसे हिम्मत करके उठी, और पलट पलट के ध्रुव को देखते जा रही थी. न जाने कितना और तड़पना पड़ेगा उससे अपने बच्चे को वापस से थामने के लिए.

वो कमरे में गयी, जिस कमरे से वो भली भाति परिचित थी. इस कमरे में hi तोह वो दुल्हन बन्न के आयी थी. पर शादी के बाद से hi जैसे उसके कष्ट शुरू हो गए थे.

सब कुछ पहले की hi तरह प्रतीत हो रहा था कमरे में. वो फोटो फ्रेम्स, वो दीवार का रंग, वो जगह जगह रखा सामान, सब कुछ. एकदम पहले जैसा hi था.

अभी वो बीएड पर बैठी अपनी साड़ी के भाग को हाथ से जोरर से भींचे हुए थी. अंदर से उसके दिल की धड़कन कई दफा तेज़्ज़ हो चुकी थी और अगले hi पल...

*क्लिक*

रूम में hi मौजूद बाथरूम की चटकनी खुलने की आवाज़ आयी और निधि का बदन सिहर उठा.

अंदर से एक आदमी सिर्फ एक लोअर पहने बाहर कमरे में आया और निधि को देखते hi उसके चेहरे पर एक गन्दी सी मुस्कान आ गयी.

आदमी : आ गयी!? 5 मिनट लेट हो तुम...

उसने घडी में देखते हुए कहा.

पर निधि कुछ न बोली, बस शांत बैठी रही जैसे hi निधि ने उस आदमी को देखा, उसकी छाती पर बिखरे बालो को देख निधि ने अपनी नज़रे फेरर ली.

वो आदमी धीरे धीरे निधि के बगल से गुज़रा और दरवाज़े के पास आके उसने...

*क्लिक*

दरवाज़ा अंदर से लॉक कर दिया. और उस आवाज़ को सुनते hi निधि के कान खड़े हो गए. वो अचानक hi पीछे पलटी और पाया की उस आदमी ने दूर अंदर से hi बंद कर दिया है.

आँखें फाड़े निधि उसकी ये हरकत देख रही थी और अपनी साड़ी को और जोरर से उसने भींच लिया.

ये आदमी कोई और नहीं उसका hi पति था ~ रजत.

रजत : क्या हुआ? ः~ प्राइवेसी रहे इसलिए बंद किया हु. तुम्हे क्या लगा!?

कहते हुए वो अजीब ढंग से मुस्कुराया जिसके चलते निधि और चिंता में आ गयी. सेहमते हुए उसकी उंगलियों में पसीना आने लगा और उसकी साड़ी का भाग हाथ में कैसे होने के कारण गीला सा पद गया.

रजत उसके पास आया और फिर उसने बीएड पे एक टीशर्ट उठा के पहन ली. वो बगल से बैठा और निधि को देखा,

रजत : डर लग रहा है!?

पर निधि कुछ न बोली.

रजत : मेने पूछा डर लग रहा है!?

निधि ने इस बार सेहमते हुए माँ में सर्र हिला दिया.

रजत (स्माइल्स) : ओह! तोह डर नहीं लगता तुम्हे मुझसे!? फिर क्या प्रॉब्लम है मेरे साथ रहने में हां?

निधि : मु... मुझे... मुझे किस लिए बुलाया है यहाँ!?

रजत : हम्म! देखो! में जानता हु तुम कभी कामयाब नहीं हो पाओगी. सीधे तरीके से मान जाओ, एक औरत की तरह मेरे घर में रहो, और सब कुछ...

निधि (चिल्लाते हुए) : औरत की तरह!?? या गुलाम की तरह????

वो तेज़्ज़ स्वर में चिलायी और रजत को घूरने लगी. उसके बोल में न जाने कितनो दिनों का गुस्सा भरा पड़ा था जो अब बाहर आ रहा था.

रजत : गुलाम? नहीं! कोण से गुलाम को उसका मालिक इतनी साड़ी चीज़े लाके देता है? गुलाम का मतलब भी पता है तुम्हे? गुलाम की तरह रखता तोह ज़िंदा भी न बचती तुम... इसलिए...

निधि (स्क्रीम्स) : ी don't वांट तो...

रजत एक आह भरते हुए बिस्तर से उठा और बगल में लगे कप्बोर्ड के ऊपर राखी कैंडल्स के पास से लाइटर उठाया.

*फ्लिक* *फ्लिक*

लाइटर को जलाते हुए वो कैंडल्स को जलाने लगा जो वही राखी हुई थी. और ये देखते hi मानो जैसे निधि को सांप सूंघ गया.

उसका दिल ज़र्रों से धक् धक् करने लगा. इतना डर शायद hi उससे कभी लगा होगा.

अपने दोनों हथेली को मुट्ठी बना के उसने अपने दूसरे हाथ से उससे जोरर से भींच लिया.

रजत ने जैसे hi निधि का ये रिएक्शन देखा उसके होंठो पे एक क़ातिल मुस्कान फेल गयी.

रजत : गेटिंग प्टसड? हँ? ः~

वो धीरे धीरे उसके पास आगे बढ़ा और निधि सरकते हुए थोड़ा पीछे हो गयी. उसका सीना तेज़्ज़ सासो के चलते ज़र्रों से ऊपर नीचे हो रहा था.

रजत : देखो! में चाहु तोह अभी इसी वक़्त तुम्हे तुम्हारी औकात दिखा दू. पर मेने तुम्हे एक मौका दिया. क्यों? क्युकी मुझे पता है... तुमसे कुछ नहीं होने वाला. हाहाहा~ और अंत में जब तुम गिड़गिड़ाओगी मेरे सामने, फिर वापस से पहले की तरह रहोगी... वो देखने लायक होगा. है की नहीं?

और वो निधि की तरफ फिरसे बढ़ने लगता है...

***

इधर श्रेया और जूही टैक्सी में बैठे निकल चुके थे तभी श्रेया कुछ सोच के वीर को कॉल लगा देती है.

वीर : Hello?

श्रेया : तुम कॉलेज में हो इस वक़्त!?

वीर : कॉलेज गया था तोह कॉलेज में hi रहूँगा न!?

श्रेया : बकवास मत करो और ये बताओ की दी निकल चुकी है न? कॉलेज में नहीं है न वो अभी?

वीर : वो तोह ब्रेक में hi निकल गयी थी. ब्रेक ओवर हो चूका है अब.

श्रेया : Okay!

वीर : कुछ बात है क्या!? यदि कोई परेशानी हो तोह में हेल्प कर दूंगा.

श्रेया (मैं में) : क्या करू? इससे बताऊ या नहीं? ये हमारे घर का निजी मामला है, दी कही चिल्ला न दे मुझे. पर... पर वह दी... में अकेली पद जाउंगी... बुला hi लेती हु. एक से भले दो सही. दी को बाद में समझा दूंगी...

श्रेया : हां ज़रा सुनो...

वीर : हम्म?

श्रेया : में तुम्हे एड्रेस भेज रही हु, उस एड्रेस पे जितनी जल्दी पहुँच सकते हो पहुँचो...

वीर : ो... Okay! वैसे... सब कुछ ठीक तोह है न?

पर वीर की बात सुने बिना hi श्रेया बीच में hi फ़ोन काट देती है.

'दमन! थिस गर्ल...'

[Master...]

'ी क्नोव! Let's जो!'

***

श्रेया कुछ hi मिनट की दुरी तय करने के बाद रजत के घर पहुचती है, और अंदर जूही को लेके वो जैसे hi घर में प्रवेश करती है उससे निधि की सासु माँ छाया दिखाई दे जाती है जो बिस्तर पे बैठी हुई थी और उसके hi बगल से निधि का बच्चा ध्रुव सो रहा था.

जूही : छोटू भाआईई!!

जूही दौड़ते हुए अपने छोटे से भाई के पास जाके उसके गाल टटोलने लगती है तोह छाया उससे दांत के पीछे कर देती है.

छाया : ाररी! दिख नहीं रहा क्या? सो रहा है वह. जैसी माँ, वैसी लड़की... उधमी एकदम...

श्रेया : जुहीई! इधर आओ...

श्रेया जूही को लेके पीछे हो गयी और इधर उधर नज़र फिराई पर कही पर भी उससे निधि नज़र नहीं आ रही थी.

श्रेया : मेरी दी कहा है?

छाया : हम्म? अंदर बात कर रही है.

और श्रेया हां में सर्र हिला के वही सोफे पर बैठ जाती है.

पर अभी कुछ देरर hi हुई थी उससे बैठे हुए की तभी उससे...

"आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह"

एक दबी सी चींख सुनाई देती है...

और ये सुनते hi श्रेया हड़बड़ा के कड़ी हो गयी.

श्रेया : ये... ये आवाज़... !? दी कहा है? अंदर से आयी है न ये आवाज़? क्या चल रहा है?

छाया : तुम क्यों इतना परेशां हो रही हो? दोनों पति पत्नी है, आपस में बात कर रहे है. भूलो मत की अभी पेपर पर ना hi निधि ने सिग्न किया है और न hi मेरे बेटे ने. दोनों अभी भी पति पत्नी है. सिग्न भी तब hi होंगे जब निधि हमारी मांग को पूरा कर के दिखा पाएगी...

श्रेया : ी don't केयर... मेरी दी कहा है इतना बताइये मुझे...

छाया : क्यों?

श्रेया : बताआईईए जल्दी...

छाया : क्यों बताऊ? तुम कौन होती हो यहाँ मिया बीवी के बीच हो रही बातो में आने की? हँ?

श्रेया : वो मेरी बड़ी बहिन है. इस से पहले की में पुलिस को बुलाऊ...

छाया : हाहाहाहा~ बुला लो फिर. में भी देखती हु. क्या करती है पुलिस. तुम्हारी यादाश्त सही है या नहीं? मेरा बीटा शहर के मशहूर लॉयर्स में से एक है और उसी के घर पे तुम पुलिस बुलाने की धमकी दे रही हो.

छाया के बोल सुनते hi इस बार श्रेया की बोलती hi बंद हो गयी. बात एकदम सही थी. पुलिस बुलाने का कोई मतलब भी नहीं था और ऊपर से ये घर का मामला था. पर वो इतनी बड़ी दुविधा में पद चुकी थी की उसका दिमाग काम करना बंद हो चूका था. वो इतनी ज़्यादा बेचैन हो चुकी थी की उसकी समझ नहीं आ रहा था कुछ.

वो जूही की ऊँगली पकड़ आगे बढ़ी और अंदर एक कमरे के पास गयी, जहा से आवाज़ आयी थी.

और अगले hi सेकंड एक बार फिर वही दबी सी आवाज़ आयी जिससे सुन्न श्रेया को कन्फर्म हो गया की अंदर पक्के से उसकी दी थी.

अंदर क्या हो रहा था, ये सोच के hi उसकी धड़कने तेज़्ज़ हो गयी.

और वो दरवाज़ा पीटने लगी,

श्रेया : खोलूवू.... डीईई!? अरे यू इन तेरे??? डीईई??

इधर काउच पर बैठे छाया सारे नज़ारे को बड़े hi लुत्फ़ लेके देख रही थी. जैसे उससे पता था की श्रेया की कोशिशों का कोई फायदा नहीं होने वाला.

श्रेया : में कहती हो खोलो.... खोलो दरवाज़ा...

जूही : मुम्ममइय्य्यी... मुम्ममइय्य्यी...

बेचारी जूही भी श्रेया को देख और उसके चेहरे की टेंशन को देख दरवाज़ा पीटने लगी. बच्चे मैं के सच्चे होते hi है. जूही को इतना समझ आ गया था की उसकी मासी बोहत hi बेचैन है और चिंता में है, इसलिए वो भी दरवाज़ा पीटने लगी.

और अगले hi पल...

*क्लिक*

अचानक से दरवाज़ा खुला...

और अंदर का नज़ारा देख श्रेया की आँखें फटी की फटी रह गयी...

रजत (स्माइल्स) : ओह्ह्ह्हह! तोह साली साहिबा भी आयी है? आइये आइये... और ये क्या? मेरी मूंगफल्ली भी आयी है?

रजत झुकते हुए जूही को थामने hi वाला रहता है की जूही भागती हुई अंदर जाती है और निधि से जाके चिपक जाती है. नन्हे हाथो को आगे बढ़ाते हुए वो निधि के ासु पोछने लगती है और खुद भी ासु बहाने लगती है.

फिर वो बड़े hi गुस्से में रजत को देखती है,

जूही : आप गंदे होऊ....

रजत : हाहाहा~ ऐसे बात नहीं करते बीटा...

जूही (चिल्लाते हुए) : आप गंदे हूऊऊ...

और इस बार जूही की तेज़्ज़ आवाज़ सुन्न, रजत के चेहरे से मुस्कान गायब हो जाती है.

रजत : अभी से तुमने अपने संस्कार दे दिए लगता इससे हां!?

श्रेया : दूर रहो... दूर रहो मेरी दी से... दी चलिए

रजत : अभी भी मौका है निधि. जैसा में कह रहा हु वैसा करो और अपना जीवन जियो. सुखी रहोगी...

निधि (चिल्लाते हुए) : ी विल नेवररररर... नेवरररर...

रजत (फ्रोंस) : तुममम....

वो आगे बढ़ इस बार निधि के बालो को जोरर से भींच लेता है,

"आआआह्ह्ह्हह्ह!!"

और नन्ही जूही ये देखते hi रजत के दूसरे हाथ को थामते हुए अपने दातो से काटने लगती है.

रजत : ये.... बच्चीई....

वो खीजते हुए जूही का हाथ जोरर से थाम लेता है जिसके चलते बेचारी जूही रोने लगती है. श्रेया सब कुछ अचानक से पनपे दृश्य को देख अगले hi पल रजत का हाथ पकड़ उसकी गृप को लूसे करने लगती है ताकि जूही को चुर्रा सके.

सभी आपस में भिड़े रजत से छूटने का प्रयत्न कर रहे थे.

की तभी उनके कानो में एक आवाज़ पड़ी...

एक जानी मानी आवाज़...

"Ma'am!?"

ये सुनते hi निधि, श्रेया, जूही और रजत की नज़रे फौरन hi दरवाज़े पर गयी.

पाया की वीर उन्हें स्तब्ध निगाहो से देख रहा था.

साथ hi साथ एकदम से भागते हुए वीर के पीछे hi छाया आयी और वो भी सब कुछ हो रहे दृश्य को देखने लगी.

पर अगले hi पल...

वीर की नज़रे निधि पर गयी...

उसने देखा की निधि का एक गाल लाल था...

उसके हाथो और पेट पे मोमबत्ती की वैक्स लगी हुई थी....

उन् कोमल आँखों में धेरर सारे ासु...

वो सुन्दर सुन्दर केश किसी की जब्त में थे...

उसने देखा जूही को जो नीचे hi कड़ी हुई थी...

जूही के गुलाबी गालो से आसुओ की बुँदे बहते हुए गिर रही थी...

उसका नन्हा सा हाथ किसी की जब्त में था...

उसने देखा श्रेया को जिसके चेहरे पर भयानक डर था...

दोनों हाथ उसके जूही को चुर्राने के लिए लगे हुए थे...

तभी उसके कानो में आवाज़ पड़ी,

"वीएररर मामुउउउउ..."

और बस...

वीर का इतना sunn'na था की...

उसके अंदर गुस्से का वो ज्वालामुखी ट्रिगर हो गया.

और उसके होंठो से एकदम धीमी आवाज़ में बस कुछ शब्द निकले...

"Don't यू डरे टच हेर!!!!"

और अगले hi पल फिर वो हुआ जिससे देख के वह मौजूद सबकी आँखें फटी की फटी रह गयी.

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!


Don't फॉरगेट तो लिखे.
 
अपडेट विल के टुनाइट!
 
अपडेट - 23 ~ काम्प्लेक्स फीलिंग्स

अब तक...

वीर का इतना sunn'na था की...

उसके अंदर गुस्से का वो ज्वालामुखी ट्रिगर हो गया.

और उसके होंठो एकदम धीमी आवाज़ में बस कुछ शब्द निकले...

"Don't यू डरे टच हेर!!!!"


और अगले hi पल फिर वो हुआ जिससे देख के वह मौजूद सबकी आँखें फटी की फटी रह गयी.

अब आगे...

बिना एक पल गवाए वीर इतनी स्पीड में आगे बढ़ा और उसने सबसे पहले रजत का हाथ जो जूही को पकडे हुए थे उससे जोरर से थाम के उसकी मुट्ठी अपने बाहुबल से खोल जूही को चर्राया. जूही के छूटते hi, श्रेया ने जूही को पकड़ के पीछे खींच लिया.

वीर ने रजत का फिर दूसरा हाथ, जो निधि के सुन्दर काले केशो को भींचे हुए था उससे पकड़ के एकदम से मरोड़ दिया,

"आआअह्हह्ह्ह्ह!"

हाथ मरुद जाने पर अगले hi पल, रजत दर्द से कराह और उसकी पकड़ निधि के बालो से चूत गयी.

पर इसके पहले की वो संभल पाटा और अपने दूसरे हाथ का प्रयोग कर पाटा...

*पूंऊऊववववव*

एक ज़ोरदार घुसा उसके निचले जबड़े में आके पड़ा और वो उस घुसे के इम्पैक्ट से hi पीछे की ऑर्डर जाके धड़ाम से गिर पड़ा.

ये सब कुछ इतनी जल्दी हुआ की वह खड़े लोग बस हैरत में देखते रह गए. जैसे उन्हें समझ hi नहीं आया की एकदम से क्या हो गया.

पल भर में वीर आया, उन्हें चर्राया और अगले hi पल रजत ज़मीन पे था. सब कुछ इतनी जल्दी हुआ था की वो सभी सामने हो रहे एक्शन को प्रोसेस hi नहीं कर पाए.

अपने जबड़े को मलते हुए जैसे hi रजत ज़मीन से उठा, तभी वीर ने आगे बढ़ उसकी कल्लोर को दोनों हाथो से जकड़ा और उससे हवा में उठाते हुए पीछे दीवार में भेद दिया.

*बंग*

अब सन कुछ ऐसा था की वीर के दोनों हाथ रजत की कल्लोर पर थे और रजत हवा में दीवार से चिपके वीर की गिरफ्त में लटका हुआ था.

"Don't यू डरे टच हेर यू पीेछे ऑफ़ सहित..."

वीर ने वापस से अपने शब्द दोहराये. उसकी आँखों में इतना गुस्सा था, और इतनी लाल थी मानो अभी अभी वो रजत का यही खून कर देगा.

"ुघठ... चुररर... साली..." रजत कराहते हुए छूटने का प्रयास करने लगा. पर कोशिश बेकार थी. वीर की स्ट्रेंथ रजत से ज़्यादा जो थी.

एक आम आदमी की स्ट्रेंथ 30 से 50 के बीच hi रहती है अक्सर. ज़्यादा ज़े ज़्यादा रजत की 40 के करीब होगी. और पेशे से वैसे hi वो एक लॉयर था कोई गुंडा मवाली नहीं, जिसका लड़ना रोज़ का काम हो.

ज़ाहिर सी बात थी की वीर की पकड़ से छूटने में वो नाकामयाब था.

पर पीछे कड़ी उसकी माँ, छाया ने जैसे hi ये सब देखा वो चिल्लाते हुए आगे बढ़ी,

"राजट्ट्ट!"

घबराते हुए वो आगे तेज़्ज़ क़दमों के साथ आयी और वीर के हाथो को जोरर से पकड़ के खींचने का प्रयास करने लगी.

निधि बेचारी आँखें फाड़े सब कुछ देख रही थी पर कुछ भी बोल नहीं पा रही थी. मानो जैसे ये सब कुछ बोहत ज़्यादा था उसके लिए. रजत का उससे प्रताड़ित करना और फिर अचानक से उसकी बहिन और बेटी का आ जाना, साथ hi साथ वीर का यु रजत को पकड़ के मारना. निधि की कुछ समझ में नहीं आ रहा था. वो बस स्तब्ध सी कड़ी हुई थी.

जैसे hi श्रेया ने देखा की छाया वीर के हाथो को पकड़ के खींच रही है, पर खींच नहीं पा रही, श्रेया जूही को वही पर चोरर आगे बढ़ी और उसने पीछे से जोरर से वीर को हुग कर लिया.

"वीर... चोर्रो... Veeeeeeeeeerrrr.... चोर्रो उससे... प्लीज!!! प्लीज वीरर!! लेट हिम गोऊ..." श्रेया उससे पीछे से जकड़े हुए आग्रह करते हुए बोली.

और कुछ hi पल में जैसे श्रेया की वाणी ने वीर को फाइनली कण्ट्रोल कर लिया.

न चाहते हुए भी, वीर के हाथ ढीले पद गए.

*क्रैश*

और रजत जो दीवार से सत्ता हुआ था वो धड़ाम से नीचे गिर गया.

*कुघ* *कुघ*

खासते हुए उसने अपने गले को माला, और फिर अचानक hi हस्सन लगा.

रजत : हाहाहाहाहा~

बगल में कड़ी उसकी माँ छाया ने उससे संभाला और उससे नीचे बैठाल के पकडे रही. और इधर श्रेया भी वीर को पकडे पीछे की ऑर्डर खींचते हुए ले आयी.

रजत की हस्सी कुछ देरर में रुकी और फिर उसने अपना सर्र ऊपर कर निधि समेत सभी को देखा. उसके चेहरे पे एक कुटिल मुस्कान थी. जैसे वो बताना चाह रहा था की अब तुम लोगो का खेल ख़तम है.

रजत : हाहाहा~ मा! तूने देखा!? ये देखो... अपने पति से अभी तलाक लिया नहीं इसने की यहाँ अगला बॉयफ्रेंड हाज़िर है.

उसकी बात सुन्न, निधि ने इस बार बॉहे सिकोड़ी और आगे बोलने के लिए अपना मुँह खोला पर इसके पहले की वो कुछ कह पाती, वीर बोल पड़ा.

वीर : I'm नॉट हेर बॉयफ्रेंड यू बास्टर्ड... I'm हेर स्टूडेंट.

उसने गुर्राते हुए बोलै और आगे एक बार फिर वो बढ़ने वाला था की श्रेया ने उससे और कस के थाम लिया.

रजत : हाहाहा~ तुझसे यही उम्मीद थी निधि... यही उम्मीद थी... अपनी बच्ची को भी यही संस्कार डौगी है न!??

"यू...." जोरर से चिल्लाते हुए वीर एक बार फिर तेज़्ज़ी से आगे बढ़ा, इस बार भी श्रेया वीर को रोकने के लिए उससे जकड़ी पर वीर की स्ट्रेंथ के चलते वो इस बार हार गयी.

वो खुद उसके साथ खींची चली गयी और जब उसने देखा की वीर रजत को वाक़ई फिरसे मारने वाला है वो जोरर से चिल्लाई,

"न्यूऊऊऊ... Veeeeeeeeeeerrr!!"

उसकी चींख से जैसे वीर को ध्यान आया और उसके कदम वही ठहर गए.

श्रेया (क्रिस) : प्लीज!!! Let's जो... चोर्रो उससे... और चलो वीर... प्लीज... ी बेग यू...

श्रेया जो अब तक अपने आसुओ के बाँध को रोके हुए थी वो आखिर खुल hi गया. और तेज़्ज़ी के साथ उसके ासु उसके गालो से होते हुए बहने लगे. उसने अपने हाथो से वीर के सीने में शर्ट को भींच लिया.

वो उस से एक निवेदन कर रही थी जैसे. उसने बोहत कुछ देख लिया था. वो नहीं चाहती थी अब और कुछ हो और बात आगे बढे.

वो खींचते हुए वीर और निधि समेत जूही को बाहर ले जाने लगी.

रजत : देख लूंगा साले तुझे... वीर है न तेरा नाम!? बताता हु तुझे भी. एक एक को देख लूंगा. खासकर निधि तुम्हे मेरी जान...

वो अंदर hi कमरे से चिल्लाता रहा पर उसकी बातें सुने बजर्र hi श्रेया सभी को बाहर ले आयी.

श्रेया : दी... घर चलिए... जल्द से जल्द... वीर तुम दी को गाडी में बैठा के ले जाओ, में जूही को लेके आ जाउंगी.

वीर : नहीं! बल्कि, आप तीनो जाओ गाडी में... में आ जाऊंगा...

ये दोनों आपस में hi लगे हुए थे की अचानक निधि भयभीत होते हुए रोने लगी,

निधि : हे भगवाआनं....

वो नीचे गिरते हुए रोने लगी, तोह वीर और श्रेया ने फौरन hi उससे उठाया...

निधि : श्रेयाआ...

श्रेया : डीई....

निधि : श्रेया... ये सब क्या हो गया!? ये बिलकुल भी अच्छा नहीं हुआ श्रेया... श्रेया वो पक्का कुछ न कुछ करेगा अब... न्यूऊऊ! थिस wasn't सुप्पोसेद तो हैपन श्रेया... ी... ी....

अपनी बहिन की ये हालत देख श्रेया को उस पे इतना तरस आ रहा था की वो बया नहीं कर सकती थी. उसने निधि को कंधे से पकड़ते हुए झंझोरा और उससे होश में लाया.

श्रेया : डीई... डीई... लुक ात में... नथिंग विल हैपन... Okay!!? नथिंग विल हैपन!

निधि : नहीं... नहीं... श्रेया... वो... वो...

श्रेया : लुक ात में दी, आप सही सलामत हो. जूही सही सलामत है. किसी को कुछ नहीं हुआ. और वो कुछ नहीं करेगा. हम्म? Okay!? हे can't दो एनीथिंग. जब तक टाइम पीरियड ख़तम नहीं हो जाता वो कुछ नहीं कर सकता. हम्म? एंड, आप देखना जल्द से जल्द ध्रुव आपके और हमारे पास होगा...

कहते हुए उसने निधि को जोरर से अपनी बाहो में खींच लिया और निधि बेचारी फुट फुट कर रोने लगी.

सिसकी लेते हुए निधि अपनी बहिन के सीने से लग बिलखते हुए रो रही थी. पीठ पर हाथ फरते हुए और उससे पुचकारते हुए श्रेया ने उससे समझाया और उससे चुप कराने लगी.

"मुम्ममइय्य्य्यय्य!"

इधर जूही अपनी माँ को ऐसे रोटा देख खुद भी जोरर जोरर से रोने लगी. बच्चे अपनी माँ को जब रोटा देखते है तोह भला खुद कैसे शांत रह सकते है? वो भी रोना शुरू कर दी. बेचारी श्रेया को अब समझ नहीं आ रहा था की पहले किसको चुप कराये. वो खुद रोने की कगार पे आ गयी थी.

तभी...

उसने देखा...

वीर ने आगे बढ़ते हुए जूही को अपनी गॉड में उठाया और उसके प्यारे गालो से ासु पोछते हुए उसने जूही के दोनों गालो पे पप्पी ली और टहलते हुए उससे चुप कराने लगा.

"वीएएलललल मामुउउउउ..."

रट रट जूही अपने ासु वीर की शर्ट में उसके कंधे पर रगड़ रही थी. और वीर उसकी पीठ सहलाते हुए उससे चुप करवा रहा था.

जूही : वीएलल मआमऊ...

वीर : हम्म्म!?

जूही : पापा डंडे है...

वीर : क्या है!?

जूही (क्रिस) : ग... गंदे...

वीर : हम्म! अच्छा उन्हें चोर्रो... जूही... चॉकलेट खाएगी!? हम्म? चलो वीर मामू आपको मस्त वाली चॉकलेट दिलाएंगे.

जूही : मममममम

वीर : जूही खाएगी न??

जूही (रट हुए) : हम्म्म्म...

वीर : पर उसके लिए... पहले रोना बंद करना पड़ेगा.

जूही : ममम...

धीरे धीरे सिसक कर जूही जैसे तैसे चुप हुई तोह वीर ने मुस्कुराते हुए एक बार फिर उसके गाल चूम लिए, बदले में जूही ने भी उसके गाल चूम लिए.

वीर : ये हुई न बात, अब देखना वीर मामू तुम्हे मस्त चॉकलेट दिलाएंगे...

[Hehe~ Master!? Really? Paise hai aapke paas!?]

'ये बोलना ज़रूरी था तुम्हारा पारी? शट उप!'

[Hehehe~ I wonder aap Juhi ko chocolate kese dilaenge fir? Aur wo bhi mast waali? Paise toh hai nahi. Kyuki jab wo Sonia madam paise haatho me dhar ke jaa rahi thi toh mere master ko mahaan bann'na tha. Thukra diye wo paise. Ab chocolate toh kya uska wrapper bhi nahi khareed paenge.]

'पारी! यू don't अंडरस्टैंड. एक दिन देखना, आज तुम्हे मेरा ये डिसिशन भले hi गलत लग रहा हो, पर आगे चल के तुम्ही बोलोगी की मास्टर. आपने सही किया था जो सोनिआ से पैसे नहीं लिए.'

[Hmm! Well master, I'll wait for that to happen.]

'एक दिन देखना, में जूही के लिए पूरी चॉकलेट की फैक्ट्री खुलवा दूंगा.'

[Hmm.. hmm.. I'll wait!]

पारी से बातें करने के बाद वीर जूही को लेके घूमने लगा पर वो अपने पीछे हो रहे दृश्य से अनजान था. श्रेया और निधि दोनों hi आश्चर्यचकित और अचंभित एकदम वही कड़ी हुई वीर को पीछे से घर रही थी.

श्रेया सुरप्रीसेड निगाहो से वीर को देख रही थी. जो लड़का कुछ देरर पहले hi इतना आग बबूला था, जिससे संभालना भी उसके लिए इतना मुश्किल था, वही लड़का इस वक़्त नन्ही सी जूही को गॉड में उठाये उससे इतने प्यार से चुप करवा रहा था. दोनों hi बर्तावों में ज़मीन आसमान का अंतर था, पर दोनों hi बर्ताव वीर के hi थे.

श्रेया को ज़्यादा उम्मीद नहीं थी की वीर की उसकी कुछ ज़्यादा मदद कर पाएगा. पर कुछ देरर पहले जो भी कुछ हुआ, उससे देखने के बाद, वीर की एक नयी छवि उसके दिल और दिमाग में बन्न गयी थी.

'जस्ट व्हाट काइंड ऑफ़ गाए थिस इस...!?'

इधर निधि के साथ कुछ और hi था. वो तोह जानती hi थी वीर की अच्छी पर्सनालिटी को. और इसी के चलते तोह वह उससे अपने घर में साथ रखने के लिए राज़ी हुई थी.

पर आज...

आज जो भी कुछ उसने देखा...

वो सब नया था उसके लिए. वीर का वो रूप, वो गुस्से वाला रूप जिसमे उसने रजत की खटिया कड़ी कर दी थी, उस रूप को देख निधि डर गयी थी.

पर अंदर hi अंदर उससे एक अजीब सी फीलिंग सत्ता रही थी. वो फीलिंग कही से भी बुरी नहीं थी. इन फैक्ट, उससे अंदर से अच्छा महसूस हो रहा था.

वीर को उसके प्रति चिंता व्यक्त करते देख, उसकी आँखों में वो गुस्सा जब उसने रजत के हाथो को उसके बाल पकडे हुए देखा था, वो गुस्सा जब वीर ने जूही को रट हुए देखा, ये सब देख कही न कही निधि को अंदर से इतना अच्छा महसूस हो रहा था की वो शब्दों में बता नहीं सकती थी. आज तक उसके लिए ऐसा किसी ने नहीं किया था. पर आज...

आज वीर ने जो उसके लिए किया, उससे देख के वो अंदर hi अंदर बेहद खुश थी पर साथ hi साथ एक डर भी उससे सत्ता रहा था.

डर था की रजत के साथ जो कुछ भी हुआ, अब रजत क्या करेगा? वो शांत तोह बिलकुल भी नहीं रहेगा क्युकी निधि भली भाति रजत को जानती थी.

वो ज़रूर कुछ न कुछ करेगा. और जो भी कुछ करेगा वो उसके और उसके परिवार के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं होगा. बस यही एक डर उससे खाये जा रहा था.

वो देख पा रही थी वीर को, अपनी बच्ची को, जो उसकी गॉड में इस वक़्त खिल खिला के हस्स रही थी.

कितना खुश देख रही थी जूही वीर की गोदी में. वही कितना रो रही थी वो रजत उसके पिता के हाथो में बंधे...

कहा उसका अपना पति, जो उसके साथ ऐसा व्यवहार किया और उसकी बच्ची के हाथ को मरोड़ उससे रुला दिया था तोह कहा वीर जो उससे बचाने आया, रजत को मार के उससे चर्राया, और उसकी बच्ची को यु गोद में उठाये उसपे प्यार बरसा रहा था. दोनों hi व्यक्तियों में कितना अंतर था. जबकि रजत उसका पति था, और वीर केवल उसका स्टूडेंट जो बस अभी कुछ hi हफ्ते पहले से उस से फेमिलिअर हुआ था.

'वीर... तुम... कितने अच्छे हो...' वो वीर और जूही को देखते हुए मैं में बोली और तभी उससे ध्यान आया की वो क्या सोचने लगी थी.

अपने सर्र को हिलाते हुए उसने अपने ासु पोछे और वीर को आवाज़ लगायी,

निधि : वीर!!

वीर (पलट कर) : हम्म?

निधि (स्माइल्स) : चलना होगा यहाँ से...

वीर : हम्म्म...

वीर उनके करीब आया तोह निधि बोली,

"श्रेया... तुम जाओ!"

श्रेया : व्हाट? कहा जाऊ? और आप लोग?

निधि : तुम मेरी गाडी लो और ये छवि भी. घर जाके गेट खोलो... और... तब तक... में वीर और जूही आते है.

श्रेया : व्हाट? बूत में अकेले...!? और छवि है मेरे पास आलरेडी...

निधि : ठीक है! तोह तुम घर जाओ, मेरी गाडी लेके... हम आते है... Don't वोर्री! में ठीक हु अब.

श्रेया : अरे यू सूरे!?

निधि : हां श्रेया! जो don't वोर्री!

श्रेया : ो... Ok

वो कहते हुए निधि की गाडी उठा के वह से चली गयी. अब केवल वीर, निधि और जूही hi बचे हुए थे.

वीर : हमे भी चलना चाहिए Ma'am.

निधि : हम्म्म...

अभी वो आगे hi बढ़ती की उसके पहले hi वीर ने उससे रोक दिया,

वीर : रुकिए Ma'am.

निधि : ???

वीर अचानक hi उसके करीब आया और उसने जूही को नीचे उतारा. निधि सवालिया नज़रो से उससे घूर रही थी.

वीर : थोड़ा सा दर्द होगा.

कहते हुए उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया, निधि कुछ समझ पाती की तभी...

उसके नग्न पेट पर वीर का हाथ आया और...

अचानक hi...

"आअह्ह्ह!" एक हलकी दबी सी आह उसके मुँह से निकली.

उसने आँखें खोल देखा तोह पाया की...

वीर ने उसके नग्न पेट से कुछ खींच के निकाला. उसने देखा की वीर के हाथो में मोमबत्ती का वो वैक्स का टुकड़ा था जो निधि के पेट पर चिपका हुआ था.

उसके गाल शर्म के मारे हलके गुलाबी पद गए थे. वो कहना चाहती थी की वो खुद से निकाल लेगी और ऐसे वीर का यु उसके पेट पर से वो सब निकालना अच्छा भी नहीं लगता. पर बेचारी निधि शर्म के मारे कुछ कह hi नहीं पा रही थी. क्युकी वीर उसके हिट के लिए hi ये सब कर रहा था. वो तोह चिंता के मारे ये कर रहा था.

हलाकि एक सवाल ज़रूर आया उसके मैं में की क्या वीर को भी इस वक़्त शर्म आ रही होगी अपने हाथो को उसके पेट पर स्पर्श करते हुए?

यही देखने के लिए की वीर के चेहरे पर क्या एक्सप्रेशंस थे निधि ने धीरे धीरे अपनी नज़रे उठायी और वीर को देखा.

पर जैसे hi उसने देखा तोह उससे एक झटका सा लगा...

अचंभित भी थी वो और कन्फ्यूज्ड भी...

वीर की आँखों में अत्यंत hi गुस्सा था, साथ hi साथ एक दर्द और चिंता भी. निधि लोगो को उनकी आँखों को देख उन्हें पहचान ने में माहिर थी. और जैसे hi उसने वो सारे भाव वीर के चेहरे और उसकी आँखों में देखे तोह पता नहीं क्यों पर पल भर के लिए उसकी धड़कने तेज़्ज़ हो गयी.

वो कुछ कह पाती की उस से पहले hi फिरसे वीर का हाथ उसके नंगे पेट पर लगा...

"आठ!"

उसने एक सिसकी भरी और फिर वीर ने बाकी वैक्स के टुकड़ो को भी धीरे धीरे करके निकाल दिया.

वीर ने भले hi आराम से निकाल दिए वैक्स के टुकड़े पर इधर बेचारी निधि की हालत खराब हो चुकी थी. हल्का फुल्का दर्द तोह था पर उससे दर्द की चिंता नहीं थी. इस वक़्त उसका सीना ज़र्रों से ऊपर नीचे हो रहा था.

जितनी बार वीर का हाथ उसके नग्न पेट से स्पर्श होता, उतनी बार उसकी सासें तेज़्ज़ हो जाती. अंत में खुद को संभालने के लिए उसने वीर के सीने में उसकी शर्ट को अपने दोनों हाथो से भींच लिया.

और उसके इस एक्शन से इस बार वीर भी शर्मा गया...

वीर (ब्लशेस) : वो... हो गया Ma'am.

निधि (ब्लशेस) : आठ!? ओह्ह्ह... हम्म्म्म.

निधि ने अपने हाथ ढीले किये, अपने पेट पर फेरे और वीर से थोड़ा दूर हो गयी. उसके हटते hi जूही फिरसे गोदी में आने की ज़िद्द करने लगी. वीर ने उससे वापस से अपनी गोदी में लिया और चलने के लिए कहा तोह निधि ने भी हामी भरी और दोनों hi वह से निकल पड़े.

वो अभी पैदल hi चल रहे थे की वीर ने अचानक hi शान्ति तोड़ी,

वीर : ये सवाल थोड़ा पर्सनल है, पर यदि आपकी परमिशन हो तोह क्या में पूछ सकता हु?

निधि : हम्म? हां पूछो न वीर.

वीर : मेरी समझ में नहीं आता की, जब आपके हस्बैंड ऐसा बेहेवियर आपके साथ करते है तोह आप कंप्लेंट क्यों नहीं करती? पुलिस में जाइये और...

निधि : जितना आसान दीखता है उतना आसान है नहीं वीर. लम्बी कहानी है... और... में मजबूर हु.

वीर : हम्म! ी होप आपको जल्द hi कोई सलूशन मिलेगा. और... आप मुझसे कभी भी कोई भी हेल्प मांग सकती हो, आपको पता है न?

निधि (ग्लान्सेस ात हिम) : ी... ी क्नोव

कुछ देरर यही चलने के बाद उसने फिरसे वीर को देखा और बोली,

निधि : तुमने लंच किया!?

वीर : नौपे! में लंच के पहले कही काम से गया हुआ था.

निधि (मैं में) : मतलब उन् दो लड़कियों के साथ... शुड ी आस्क!? No. It's हिज पर्सनल मटर. ी... ी... Shouldn't...

वीर : क्या आपने किया!?

निधि : हँ? ओह्ह! Na...nahi... में लंच के पहले hi कॉलेज से निकल आयी थी वीर.

वीर : ओह्ह! थें हम दोनों ने hi नहीं किया...

निधि : Let's...

वीर : हम्म!?

निधि : Let's जो तो ा होटल. वह... वह खा लेंगे कुछ!?

वीर : अरे यू सूरे?

निधि (मैं में) : में तोह कुछ भी खा लू, एंड ी रियली shouldn't स्पेंड मनी लिखे थिस... बूत... हे दीद सो मच फॉर में... थें मुझे इतना तोह कंसीडर करना hi होगा उसके लिए... राइट!?

निधि : उम्... यस! I'm सूरे वीर! चलो... देखो वो रही... होटल...

वीर : वो?? काफी महंगी लग रही है...

निधि : हँ? It's... It's okay! Let's जो...

वीर : O...okay!

और कुछ hi देरर में वीर और निधि दोनों hi होटल के अंदर थे.

निधि : एक्सक्यूज़ में... उम्... वे...

रिसेप्शनिस्ट : यू नीड ा टेबल फॉर तवो Ma'am!?

निधि : अहह! यस...

रिसेप्शनिस्ट : और मय्बे थ्री!?

वो जूही को वीर की गॉड में देखते हुए पूछी.

वीर : यस!

रिसेप्शनिस्ट : Okay! शिवानी!? Ma'am एंड सर को टेबल पे ले जाओ...

शिवानी : आइये Ma'am!

निधि : हम्म!

और वो शिवानी वही होटल में काम करने वाली वीर और निधि को होटल में एक एरिया में ले गयी, जहा कई साड़ी राउंडेड टेबल्स लगी हुई थी और लक्ज़री सोफे थे बैठने के लिए.

शिवानी : सर, Ma'am थिस इस योर टेबल. प्लीज हैवे ा सीट.

निधि : उम्म्म.. थैंक यू!

शिवानी : It's okay Ma'am!

और वो वह से चली गयी. साड़ी लड़किया वह पे काम करने वाली माइड टाइप की ब्लैक एंड वाइट ड्रेस पहनी हुई थी और सभी एक से बढ़ के एक थी. इससे कहते है बिज़नेस स्ट्रेटेजी.

आदमी 2 की जगह 4 रोटियां खा के जाए यदि ऐसी सर्वे करने वाली हो. भले बाद में घर जाके पेट ख़राब हो जाए.

निधि : पसंद आयी गयी क्या वीर कोई? हम्म? फुफु~

वो वीर को छेड़ते हुए बोली, क्युकी काफी देरर से वो देख रही थी की वीर उन् लड़कियों को देखे जा रहा था.

वीर : हम्म? No! No ओने इस बेटर थान यू...

वो इतना कहके वापस से उन्हें देखने लगा जैसे मानो और कोई ढूंढ रहा हो की शायद कोई निधि की खूबसूरती की टक्कर की कोई दिख जाए.

पर इधर निधि के ये सुनते hi कान खड़े हो गए.

और उसके दिल की धड़कन एक बार फिर तेज़्ज़ हो गयी... वो आँखें फाड़े वीर को देख रही थी जो कही और अपनी नज़रे घुमाने में बिजी था.

'वेट! इस हे??... दीद हे जस्ट!? दीद हे जस्ट फ़्लर्ट विथ में?'

उसने सोचते हुए अपने अगल बगल नज़रे घुमाई तोह उसकी आँखें और फटी की फटी रह गयी जब उससे रीलीज़ हुआ...

रीलीज़ हुआ की वो अभी कहा पर बैठे हुए थे.

टेबल पर hi जहा तिसुएस रखे थे उसके बगल से hi एक छोटा सा स्टैंड था जिसपर एक बोर्ड लगा हुआ था. और उस बोर्ड पर लिखा हुआ था...

वेडनेसडे ~ Couple's स्पेशल.

अगल बगल उनके सारे कपल्स hi कपल्स बैठे हुए थे. कुछ मैरिड, तोह कुछ बॉयफ्रैंड्स और गिर्ल्फ्रेंड्स. कोई एक दूसरे के हाथो में हाथ लिए थे तोह कोई प्यार भरी बातें कर रहे थे, तोह कोई खाने में लगे हुए थे.

और जैसे hi निधि को ये रीलीज़ हुआ उसकी शर्म की कोई सीमा नहीं थी. एकदम गुलाबी गाल लिए वो नीचे नज़रे कर अपने हाथो की उंगलियों को टटोल रही थी.

निधि : अहह! ये... ये....

'ये कहा ले आयी वो हमे!?? वे अरे नॉट कपल्स. He's माय स्टूडेंट.'

पर इसमें अब उस शिवानी की क्या गलती थी भला?? निधि थी एक ख़ूबसूरत औरत. साथ में वीर जो निधि से हल्का सा हाइट में आलरेडी बड़ा था और ऊपर से उसकी गॉड में थी जूही. भला कोई भी देख के कंफ्यूज हो जाए और उन्हें पति पत्नी hi मान ले.

वो अभी कुछ कह पाती की तभी, आर्डर लेने वेटर आ गया.

वेटर : यस सर! यू आर्डर!?

निधि : उम्... वो...

वीर : जूही!? क्या खाओगी तुम!?

जूही : जो आप खाओगे... और चॉकलेट भी...

वीर : हम्म!!!

निधि (मैं में) : वेट... ओह माय गॉड... हे doesn't इवन क्नोव... उससे पता hi नहीं है की हम कहा बैठे है. ओह्ह गॉड... थिस इस... सो...

वीर : Ma'am से पूछिए...

वेटर (नॉड्स) : Ma'am योर आर्डर!?

निधि : ेहठ!? ओह्ह्ह! हां... उम्...

जैसे तैसे निधि ने आर्डर दिया और कुछ hi देरर में खाना भी आ गया.

वीर अपने हाथो से कभी जूही को खिलाता तोह कभी खुद खाता. और उसके सारे एक्शन्स निधि ऑब्सेर्वे कर रही थी.

'He's सुच ा जेंटलमैन. He'll बे ा वैरी गुड हस्बैंड...'

वो वीर को देख सोचते सोचते अपने खयालो में डूब गयी. पर जैसे hi उससे ध्यान आया की वो क्या सोच रही थी उससे खुद पे हैरानी हुई और एक शॉक भी लगा.

'में... में क्या सोचने लगी अचानक!? No वैयय...'

खाना खाने के बाद hi जूही बेचारी इतनी थकान और अन्न के नशे के बाद अपने वीर मामू के कंधे पर सर्र रख के नींद की वादियों में जा चुकी थी.

अभी वो उठाने hi वाले थे की वेटर आया और उन्हें 3 बड़ी चॉकलेट्स एक ट्रे में सर्वे किया.

वेटर : वेडनेसडे स्पेशल है सर, Ma'am.

और इतना बोल वो चला गया.

[Ab isse kehte hai kismat master.]

'हाहाहा~ अब बोलो!? बूत वाक़ई... एक दिन... एक दिन में जूही के लिए पूरी चॉकलेट की फैक्ट्री खरीदूंगा.'

[I'll wait!]

निधि : श्रेया के लिए भी पैक करवा लेते है कुछ.

वीर : जी!

वो दोनों बाहर बिल पाय करने के बाद बाहर निकले और कुछ hi देरर में अपने घर की ऑर्डर पहुँच चुके थे.

वीर ने जूही को बीएड पे लिटाया hi था की...


*डिंग*

[Mission ~ Go on a date with Nidhi has been completed.]

[30 points have been rewarded.]

'हँ!? वेट.... Whaaaaaaaaaaaatttt!?'

.

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आज के लिए इतना hi गाइस!


धन्यवाद!
 
अपडेट - 24 ~ टेक केयर

अब तक...

वीर ने जूही को बीएड पे लिटाया hi था की...

*डिंग*

[Mission ~ Go on a date with Nidhi has been completed.]

[30 points have been rewarded.]


'हँ!? वेट.... Whaaaaaaaaaaaatttt!?'

अब आगे...

'यू अरे किडिंग राइट!?'

वीर ने हैरानी में पारी से पूछा. उससे यकीन hi नहीं हो रहा था की निधि के साथ डेट पे जाने वाला मिशन इतनी आसानी से हो चूका था.

'थिस can't बे... पारी!! ये डेट थी!? वे जस्ट हद लंच... ी मैं...'

[Master! But sach toh yahi hai ki mission ho chuka hai. Uska reason maybe ye ho sakta hai ki shayad Nidhi ke mann me wese vichaar aaye the jab wo aapke saath lunch kar rahi thi. Maybe she was thinking about date and all... Isliye, ye mission complete hua. Otherwise nahi hota.]

'निधि ma'am वास् थिंकिंग अबाउट डेट...!? अब जब तुम ने ये कहा है तोह मुझे याद आ रहा है की उन्होंने बताया था की वो कभी डेट पे नहीं गयी. और न hi में. डस तहत काउंट्स अस ा फर्स्ट डेट फॉर बोथ ऑफ़ उस?'

[Yes!]

'वेल... ी can't बिलीव की मेरी पहली डेट निधि Ma'am के साथ हुई... ये तोह सपने जैसा था. आल्सो, ी गोत 30 पॉइंट्स.'

[Do you want to invest master!?]

'हम्म! बूत में सोच रहा हु कोई स्किल्स ली जाए. क्या कहती हो?'

[Mein yahi suggest karungi ki aap pehle apne saare stats atleast 50 tak kare. Appearance utna important nahi hai but baaki sabhi important hai. Uske baad hi aap skills par dhyaan de. But marzi aapki hai, aap chaahe toh shop me se skills dekh sakte hai. But aapko yaad hai na? Skills ki minimum keemat 50 points hai.]

'ी क्नोव... शॉप ओपन करो.'

और वीर के कहते hi उसके मैं में एक विंडो खुल गयी और एक सर्च बार सामने आ गया.






'ये सर्च बार हटाओ मुझे पूरी स्किल लिस्ट दिखाओ.'

और उसके बोलते hi सामने स्किल्स की लम्बी चौड़ी लिस्ट हाज़िर हो गयी.

[Basic Subjects Learning.


बेसिक मार्टिकल आर्ट्स.

बेसिक सिंगिंग टैलेंट.

बेसिक डांसिंग टैलेंट.

बेसिक कुकिंग.

.

.

.

.

.

.

]

न जाने कितनी साड़ी बेसिक की स्किल्ल्स थी जो उसकी शॉप में अवेलेबल हो चुकी थी.

'इतनी साड़ी पारी!? ये सब बेसिक्स है!? हम्म! लेवल बढ़ेगा तोह और अच्छी स्किल्स भी अनलॉक होती जाएंगी है न!?'

[Yes master! I'm currently at level 3.]

'हम्म! ये साड़ी स्किल्स वैसे तोह... इनमे से कुछ मुझे लगेंगी बूत... ी don't वांट तो वास्ते माय पॉइंट्स ों थम. इस से अच्छा है की में स्टैट्स में hi लागू अभी पॉइंट्स.'

[That is the actual way master. Pehle stats par dhyaan dijiye.]

'ऑलराइट! पारी! शो में माय स्टैट्स.'

[There you go master...]

[ स्टैट्स :

स्ट्रेंथ - 50/100

इंटेलिजेंस - 35/100

अगिलिटी - 15/100

ेंदुराने - 15/100

अपीयरेंस - 22/100]

'मेरी अगिलिटी और ेंदुराने बोहत काम है. हम्म! पारी...! दोनों में 15-15 पॉइंट्स ऐड कर दो.'

[Are you sure master!?]

'हम्म! लास्ट टाइम... उस रंगा नाम के लड़के से फाइट करते वक़्त ी हद ा हार्ड टाइम... मुझे स्पीड और दर्द सहने की क्षमता, दोनों hi और चाहिए.'

[Okay!]

*डिंग*

[15 points have been added to agility.


15 पॉइंट्स हैवे बीन एडेड तो ेंदुराने.]

''गुड!'

***

रात का समय हो चूका था और वीर और बाकी सभी खाना खा चुके थे. दिन में जो कुछ भी रजत के घर हुआ था उससे अभी तक वो भुला नहीं पाए थे.

जूही बीएड पे लेत सो चुकी थी और बेचारी अपनी चॉकलेट खाना भी भूल गयी थी. उसके बगल से बैठी निधि उसके सर्र पर प्यार से हाथ फेरर रही थी और सोच रही थी...

की वीर ने उससे और बाकी सब को कैसे बचाया था. कितना अच्छा मोमेंट था वो. अभी वो इन्ही खयालातों में अपने होंठो पे मुस्कान लिए घूम थी की तभी उसका मोबाइल विबरते हुआ और किसी का मैसेज आया.

और मैसेज पढ़ते hi उसके होंठो से मुस्कान गायब हो गयी. वो हड़बड़ा के उठी और अपने फ़ोन को अपनी मुट्ठी में कस ली...

स्क्रीन पर लिखे शब्द उससे भली भाति दिख रहे थे...

"तुम्हे क्या लगा तुमने आज जो भी करवाया, वो सब करवाने के बाद में बस बैठे बैठे देखता रहूँगा!? बताता हु तुम्हे मेरी डार्लिंग निधि. बताता हु... अच्छे से.... और उस वीर नाम के लड़के को भी देख लूंगा. कुछ ज़्यादा hi क्लोज लग रहे हो तुम दोनों... तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई निधि मेरे अलावा किसी और के साथ इतना क्लोज आने की? लगता है तुम्हे कड़ी पनिशमेंट देनी पड़ेगी मेरी डार्लिंग... है न!?"

ये मैसेज किसी और का नहीं बल्कि उसके पति, रजत का था.

निधि चिंता के मारे उठी और अपने कमरे में hi इर्द गिर्द टहलने लगी...

'हे भगवान्! ये क्या हो गया! मुझे पता था ज़रूर कुछ न कुछ करेगा वो... अब वीर भी बीच में आ गया है... नूवो! ऐसा कुछ भी नहीं होना चाहिए था... थिस इस सो बाद... क्या करूण!??? वीर को नहीं आना चाहिए था वह...'

वो सोचते हुए अचानक hi बाहर निकल के आती है, जहा वीर सोफे पे hi बैठा हुआ था...

निधि : वीर!

वीर : हम्म? क्या हुआ Ma'am!?

निधि : वीर... तुम कॉलेज में थे न? हु कॉल्ड यू तेरे? क्या श्रेया थी!? क्या उसने तुम्हे बुलाया था? तुम दोनों साथ में नहीं आये थे, है न? तेल्ल में...

वीर : ओह्ह! हां! उन्होंने मुझे बुलाया था कॉल कर के... कोई प्रॉब्लम है क्या!?

निधि : वीर... यू don't अंडरस्टैंड वीर... बोहत बड़ी प्रॉब्लम क्रिएट हो चुकी है... तुम्हारे वह आने से... नूवो! It's नॉट गोइंग वेल ात आल... तुम्हे वह नहीं आना चाहिए था... थिस इस सो बाद...

वो तेज़्ज़ सासें लेते हुए एकदम hi तेनसेद हो गयी.

वीर : Ma'am कलम डाउन. और मेरे वह आने से अच्छा hi तोह हुआ न? ी मैं... आपके वो हस्बैंड... न जाने और क्या करते आपके साथ...

निधि : No वीर... तुम्हारे आने से मामला और भी बिगड़ गया है... में नहीं चाहती थी तुम कही से भी इस मटर में आओ... बूत अब तुम आ चुके हो... एंड he'll डेफिनिटेली दो समथिंग... ओह्ह्ह गॉड!!

वीर : Ma'am चिल! मेरे आने से hi हे couldn't दो एनीथिंग ेल्स... और क्यों न औ में!? आप मेरी Ma'am है... यदि आपके साथ ऐसा कोई बेहवे करेगा तोह...

निधि (ुचि आवाज़ में) : बिकॉज़ it's माय पर्सनल मटर वीर...

वीर : ी क्नोव Ma'am बूत... ऐसे आपके साथ वो सब... आखिर में कैसे देख सकता हु? इवन िफ़ he's योर हस्बैंड... काम से काम उन्हें...

वीर ने निधि को समझाने का प्रयास किया पर उसके बोल इस वक़्त निधि को कलम करने की जगह उल्टा और टेंशन में दाल रहे थे.

निधि (चिल्लाते हुए) : नूवो वीर!!!! क्यों आओगे तुम बीच में!?? तुम्हे नहीं आना था वह... तुम्हे नहीं होना चाहिए था वह पे... It's माय पर्सनल मटर... तोह भला क्यों आओगे मेरे और मेरे हस्बैंड के बीच में?? क्या hi लगते हो तुम!??

निधि ने ये सब बोल तोह दिया...

पर अगले hi पल...

उसका मुँह खुला का खुला रह गया. उससे जैसे ध्यान आया की उसने ये क्या कह दिया.

निधि : व्... वीर?

वीर (स्माइल्स) : यह! राइट! क्या hi लगता हु में आपका!? ः~ ी फॉरगॉट... में... में भी... कैसे भूल गया...!? की कोई नहीं है मेरा... घरवालों ने निकाल दिया... स्टिल ी कीप थिंकिंग की... राइट! राइट! सॉरी... रियली सॉरी...

बिना निधि से नज़रे मिलाये, वीर फुर्ती में पलट के हॉल के गेट की तरफ जाता है, और गेट खोल के तेज़्ज़ कदमो के साथ बाहर निकल जाता है.

निधि : नूवो.... वीइरररर! मेरा वो मतलब नहीं था... वेट! वीइरररर!!? कहा जा रहे हो!?? वीररर?? तुम जानते हो वीर... मेरा वो मतलब नहीं था... प्लीज! लिसेन तो में... ऐसा कुछ भी नहीं है जैसा तुम सोच रहे हो... वीइररररर...

निधि दौड़ती भागती हुई वीर के पीछे पीछे भागी पर तब तक वीर आलरेडी लिफ्ट में घुस चूका था और लिफ्ट बंद कर वो नीचे पॅहुचते जा रहा था.

निधि ऊपर hi अपनी फ्लोर पर खड़े अपना सर्र पकड़ रोने लगी. ये क्या कर दिया उसने पल भर में!?

फिर जैसे उससे कुछ ध्यान में आया तोह वो फ्लोर के hi करिडोरर की तरफ भागी जहा से नीचे का सारा दृश्य दीखता है.

नीचे जैसे hi उसने देखा तोह पाया की वीर सोसाइटी से बाहर निकल के कही जा रहा है.

"Veeeeeeeeeeeeeeeeeeerrrrr!"

निधि से जितना हो सकता था उतना उसने अपना गाला फाड़ते हुए चिल्लाया. पर वीर के कानो में जैसे जू तक न रेंगी. वो बिना कुछ कहे, बिना पीछे मुड़े बस निकलता गया.

निधि भागते हुए वापस से अपने फ्लैट में आयी, उसके चेहरे पर शिकन, चिंता और घबराहट तीनो hi मौजूद थी. साथ hi साथ उन् आँखों में आसुओ की बूंदे अथवा ग्लानि भी...

अंदर आते hi उससे श्रेया नज़र आयी. वो ऐसे कड़ी थी जैसे मानो उसका hi वेट कर रही हो...

श्रेया : अब पछता रही हो आप...!?

निधि : श्रेया... वीर... वो...

श्रेया : हम्म! सुना मेने अंदर से क्या हुआ.

निधि फौरन hi आगे बढ़ श्रेया के हाथो को भींच लेती है,

निधि (क्रिस) : यू क्नोव आईटी श्रेया... राइट!? यू क्नोव न? मेरा वो मतलब नहीं था... में कभी भी उस से वो नहीं कहना चाहती थी... और न hi कभी कहना चाहूंगी... ी जस्ट... पता नहीं kese...Wo सब निकल गया मेरे मुँह से... श्रेया... वीर... कहा गया होगा? प्लीज! बुलाओ उससे... ी मस्ट एक्सप्लेन तो हिम... न जाने कितना बुरा लगा होगा उससे मेरी बातो का... ी नेवर मैंट तो से तहत तो हिम... अभी अभी तोह वो उभारना शुरू किया था एंड ी... प्लीज...! श्रेयाआ

श्रेया को झंझोरते हुए निधि उस से विनती करने लगी. बेचारी निधि की ये हालत देख... श्रेया अपनी बॉहे सिकोड़े मैं में केवल एक hi शख्स को गाली दिए जा रही थी.

रजत...

'It's आल बिकॉज़ ऑफ़ तहत दमन फुकेर...'

श्रेया : इसलिए कहती हु आप से दी. टेंशन ज़्यादा मत लिया करो...

निधि (क्रिस) : कैसे न लू टेंशन श्रेया? कैसे न लू?? मेरा बच्चा ध्रुव... मेरे आलिंगन से कोसो दूर है... तड़पती हु में उससे देखने भर के लिए. वीर ने आज आके मेरी मदद hi की थी, उसका कोई गलत इंटेंशन नहीं था... स्टिल ी... देखो मेने क्या कह डाला उससे श्रेया... मेने उसके पुराने ज़ख्मो पे जैसे नमक छिड़क दिया... ये काम किया है मेने... हे मस्ट बे सो हर्ट... क्यूँउउ!?? क्यों मेरी लाइफ में इतनी प्रोब्लेम्स आती है श्रेया!? क्योऊ?? क्यू?? थक गयी हु में श्रेया... थक गयी हु... प्रोब्लेम्स पे प्रोब्लेम्स...

श्रेया (फ्रोंस) : डीई...

निधि (क्रिस) : ी हेट थिस लाइफ... श्रेया... क्यों...!?? क्या मुझे खुश रहना का हक़ नहीं है श्रेया!? यदि नहीं है तोह क्योऊ?? क्यों भगवान् मेरे साथ ऐसा करता है? में जितना अच्छा करती हु... उतना hi बुरा होता चला जाता है मेरे साथ... ी... ी...

और अगले hi पल उसके थार ठहराते होंठ दातो टेल डब्ब गए और वो जोरर जोरर से बिलखते हुए रोने लगती है. श्रेया उससे अपनी बाहो में खींच उसकी पीठ सहलाते हुए उससे चुप कराने लगी. न जाने कब से इतना सब कुछ भरे हुए थी निधि अपने अंदर. और आज साड़ी रुलाई जैसे बाहर आ रही थी.

श्रेया : Don't वोर्री! लो... आपके सामने में उससे कॉल लगाती हु okay!?

निधि किसी बच्ची की तरह हां में अपना सर्र हिलाते हुए एक आस लेके श्रेया को देखने लगती है.

और श्रेया इधर वीर को फ़ोन लगाती है. कुछ देरर बात करने के बाद hi वो फ़ोन कट करती है और निधि को वापस से देखती है.

निधि : क... क्या बोलै उसने!? आ रहा है न? किधर है??

श्रेया : चिल! हे जस्ट वेंट आउट फॉर ा वाक.

निधि : सो... He'll के राइट!?

श्रेया : ऑफ़ कोर्स!

और उसका जवाब सुन्न इस बार निधि एक चेन्न की सास लेती है.

पर उसका ये चेन्न भी जैसे कुछ देरर बाद छिन्न गया जब कई घंटो तक वीर नहीं लौटा.

रात के 11:30 बज चुके थे और वीर का कोई अत पता नहीं था. निधि बार बार श्रेया से उससे कॉल लगाने बोलती, और खुद भी लगाती पर इस बार वीर ने किसी के कॉल का जवाब नहीं दिया और उसका ये करना निधि को और भी ज़्यादा टेंशन में दाल रहा था.

न जाने कैसे कैसे विचार आ रहे थे निधि के मैं में. कही उसका फिरसे एक्सीडेंट न हो गया हो? कही वो गलत जगह तोह नहीं जा रहा है? टेंशन के चलते वो बेचारी वो सब भी सोचने लगी जो उससे बिलकुल भी नहीं सोचना चाहिए था.

श्रेया : आप सो जाइये... वो आ जाएगा... में जाग रही हु... आएगा तोह में लॉक लगा दूंगी.

निधि : में कैसे सो सकती हु अभी...

श्रेया : मेने कहा न... सो जाइये... अंदर जूही बार बार उठ रही है. दिन में जो भी हुआ उस से वो डर गयी है शायद. आप उसके बगल से लेत के सोइये तोह उससे नींद सही से आएगी... मेने अभी तकिया रख दिया है उसके बगल से बूत फिर भी वो बीच बीच में झटका लेके उठ जाती है और फिर रोटी है...

निधि : हम्म... पर...

श्रेया : मेने कहा न... में इधर hi हु.

निधि : हम्म!

और श्रेया की बात मानते हुए निधि अपने बैडरूम में जूही के साथ सोने चली जाती है. बेचैनी में उससे नींद नहीं आ रही थी, पर पंखे की मंद मंद हवा और थकान के चलते उसकी आँखें कुछ देरर बाद बंद हो hi गयी.

***

समय 12:15 हो चूका था और श्रेया अभी तक जाग रही थी.

की तभी अचानक hi दूर को बाहर से वीर ने धक्का दिया और वो अंदर आया.

अंदर आते hi उसके कानो में आवाज़ पड़ी,

"सो!? हाउ वास् योर वाक??"

वीर ने पलट के देखा तोह पाया श्रेया हाथ में हाथ बांधे दीवार से ठीके खड़े हुए थी मानो उसका hi वेट कर रही हो.

वीर : गुड... ी गेस?

श्रेया : यू क्नोव की दी का वो मतलब नहीं था राइट?

वीर : ऑफ़ कोर्स.

श्रेया : शी... वो बोहत hi क्रिटिकल सिचुएशन में है. खासकर मेंटली...

वीर : में देख सकता हु.

श्रेया : सो येह... उनका तुम्हे हर्ट करने का कोई मकसद नहीं था... वो ऐसा कभी किसी के साथ नहीं करती...

वीर : येह! ी... ी क्नोव तहत.

श्रेया : यू वेरे राइट.

वीर : हम्म?

श्रेया : यदि तुम नहीं आते तोह वो भेड़िया न जाने क्या क्या और कर सकता था दी के साथ.

वीर : मेने वही किया, जो मुझे उस वक़्त सही लगा था.

श्रेया : ी क्नोव. में जानती हु. और में ये नहीं कह रही की तुम गलत हो. में बस ये कहना चाह रही हु की, तुम दी को गलत मत समझना बस कभी.

वीर : Ma'am को में कभी गलत नहीं मानता.

श्रेया : शी हैवे हेर रेअसोंस.

वीर : ....

श्रेया : यू क्नोव... क्यों वो तुम्हे इतना सब कह गयी? वो नहीं चाहती थी की तुम्हे कोई नुक्सान पहुचे या कोई प्रॉब्लम आये. तुम्हारे वह आने से अब उस आदमी की नज़र तुमपे भी है.

वीर : ....

श्रेया : वीर! वो चाह के भी कुछ नहीं कर सकती. मजबूर है वह. तुम यही सोच रहे होंगे की क्यों वो इतना सब बर्दाश्त कर रही है!? राइट!?

वीर : ी... हम्म...

श्रेया : उसके पीछे कई सारे कारण है. मुझे पहले लगा नहीं था की... में तुमपे ट्रस्ट कर सकती हु. बूत आज जो कुछ भी हुआ... उसके बाद से...

कहते हुए श्रेया अचानक hi उसके करीब आयी और उसका हाथ थाम ली.

वीर : ??

श्रेया : ी... ी ट्रस्ट यू नाउ. इसलिए... I'll तेल्ल यू...

वीर : हम्म?

श्रेया : दी मजबूर है वीर. वो रजत... He's ा मणिअक वीर... ा मणिअक... पागल इंसान है वह. एक सैडिस्ट है वह.

वीर : हे... व्हाट!?

श्रेया : हम्म! बताती हु... ये बात लगभग 4 साल पुरानी है वीर. दी की नयी नयी शादी हुई थी. सब कुछ अच्छा चल रहा था. उसके बाद जूही हुई... और... उसके बाद से hi उस आदमी का रवैय्या बदल गया... उससे हमेशा से एक लड़का चाहिए था... उसके पिता नहीं है, केवल माँ और वो hi है. उससे बस एक लड़का चाहिए था ताकि वो संतुष्ट हो जाए... जूही के हो जाने से... जैसे एक धक्का सा लगा था दोनों माँ बेटे को...

वीर : आज के ज़माने में ऐसी थिंकिंग...!?

श्रेया : होती है वीर... होती है... लोग इतने सारे है दुनिया में... सब कुछ पॉसिबल है. जूही के होने के बाद से hi... वो दी को इतना प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. शुरू में काम था... पर धीरे धीरे... और फिर जब ध्रुव हुआ... तोह उसने जैसे जूही को प्यार देना hi बंद कर दिया... दी इसका विरोध करती... पर बदले में केवल उन्हें मार मिलती या प्रताड़ित किया जाता...

वीर : तोह पुलिस में...!?

श्रेया : नहीं कर सकते... पहली बात... वो खुद एक लॉयर है. इतना दबदबा है उसका, कहा नहीं है उसकी पहचान!? दूसरी बात, 3 साल पहले डैड का जब एक्सीडेंट हुआ था तोह अर्जेंट पैसो की मदद उसने hi की थी. मेरे बड़े भैया की नौकरी भी उसी ने लगवाई है. अभी कुछ हफ्ते पहले जब माँ को हार्ट अटैक आया था तब उसने भी काफी पैसे दिए थे...

वीर : ये...

श्रेया : यस! मेरी माँ एक हाउसवाइफ रही है शुरू से, डैड केवल एक प्राइवेट कंपनी में काम करते रहे. ऊपर से दो लड़किया और एक लड़का. क्या hi सेविंग्स कर पाएंगे वो!? जितना कुछ किया, वो शादी में निकल गया. और फिर आज की महंगाई और... ऊपर से उस दरिंदे का क़र्ज़...

वीर : तोह..!?

श्रेया : इसलिए... इसलिए वीर... दी के लिए ये जॉब बोहत इम्पोर्टेन्ट है. वो पैसे सेव कर रही है, न सिर्फ उस दरिंदे को लौटाने के लिए बल्कि...

वीर : बल्कि...!?

श्रेया एक झूठी मुस्कराहट देते हुए बोली,

श्रेया : बल्कि अपने बच्चे ध्रुव को वापस से अपने पास लाने के लिए.

वीर : हँ!?

श्रेया : तुमने दिन में दी के पेट में वो वैक्स के टुकड़े तोह देखे hi होंगे. यही है उस हैवान की सच्चाई. जब उस रजत ने दी को बोहत hi कष्ट देना शुरू कर दिया तब दी ने ठान लिया की वो डाइवोर्स देंगी उससे और अकेले अपना जीवन व्यतीत करेंगी केवल अपने बच्चो के साथ पर...

वीर : पर!?

श्रेया (ग्लान्सेस) : पर जैसे ये होना मुमकिन नहीं था. वकील गिरी के दो पेंच लगाते हुए उसने ध्रुव को अपने पास रख लिया, ये कहके की उसके घर में कोई संतान नहीं है. आगे उसकी माँ का ध्यान कौन रखेगा!? पर दी नहीं मानी और अदि रही, तोह उसने एक शर्त रख दी...

वीर : ?

श्रेया : की... यदि दी का बैंक बैलेंस 50 लाख पोहचता है, उस दिन hi वो ध्रुव को वापस से दी के पास लौटा देगा. उसने ये शर्त राखी की उसके बच्चे की परवरिश एकदम अच्छे से होनी चाहिए. और परवरिश के लिए क्या लगता है!? पैसा...!? तोह यदि दी का बैंक बैलेंस 50 लाख होगा, तभी वो ध्रुव को लौटाएगा... और इसलिए... इसलिए दी... पैसे सेव करती है... एक होप में... एक होप में...

वीर अपनी नज़रे नीचे किये सब सुन्न रहा था. पर उससे सुनाई दिया... की अचानक hi श्रेया की आवाज़ में thar-tharaahat आ चुकी है. और उसने जैसे hi नज़रे ऊपर कर श्रेया को देखा तोह पाया की...

उसका चेहरा आसुओ से भीगता जा रहा था. वीर का मुँह हल्का खुला रह गया जब अचानक अगले hi पल श्रेया आगे बढ़ उसके गले से लग गयी...

श्रेया (क्रिस) : She's लिविंग विथ ा फालसे होप वीर... एक झूठी आस लेके जी रही है वह... शी कनौस... उन्हें पता है वीर... मुझे भी पता है... माँ डैड भैया भाभी सभी को पता है की... एक साल के अंदर वो कभी भी 50 लाख इखट्टा नहीं कर सकती... कभी नहीं... अभी अभी तोह बड़ी मुश्किल से उन्होंने उस आदमी का क़र्ज़ चुकाया है... स्टिल...

वीर ने हौले से उसकी पीठ पर हाथ रखा...

श्रेया : वो बस इसी झूठी आस लेके जी रही है... की एक साल में वो पैसा इखट्टा करके अपने ध्रुव को वापस ले आएंगी... हम सभी उन्हें... उन्हें सांत्वना देते है की सब कुछ ठीक हो जाएगा... बूत... डीप डाउन... डीप डाउन वे क्नोव वीर... की कुछ सही नहीं होने वाला...

बिलखते हुए वो वीर की बाहो में उससे कस के थामे रोने लगती है...

श्रेया (क्रिस) : आईटी हुर्ट्स में तो सी हेर लिखे तहत... दी विरोध नहीं कर सकती... वर्ण वो आदमी मेरे भैया की नौकरी भी हटवा देगा और पता नहीं क्या क्या करेगा!? कुछ भी आरोप लगा सकता है वह. ी हेट माइसेल्फ... एक में hi हु जो उसेलेस हु... में पढ़ाई में शुरू से hi अच्छी नहीं थी. एकदम गाढ़ी हु में... Haha~Hai न!? तोह नौकरी पे कभी ध्यान hi नहीं दिया...

वीर को अब सब समझ आ रहा था...

की कितना hi बिखरा परिवार था निधि का भी...

और कितना hi टूटी हुई थी निधि भी और श्रेया भी...

बिलकुल उसी की तरह...

उसने श्रेया को देखा जो नकली मुस्कान और आँखों में ासु लिए उस से चिपकी हुई थी. वीर जैसे सब कुछ पढ़ पा रहा था.

श्रेया के अगले बोल ने उससे जैसे होश में लाया,

"सो येह! थैंक यू वीर! थैंक यू फॉर सेविंग हेर टुडे."

निधि का ध्यान आते hi उससे जैसे अब रीलीज़ हुआ...

आज दिन में वो होटल जाते टाइम जब उसने कहा था, 'ये होटल काफी महंगी लग रही है.'

पर निधि 'It's okay बोल के उससे साथ में ले गयी थी.'

वो तोह पैसे सेव कर रही थी. फिर क्यों किया उसने ये सब उसके लिए!? क्यों लायी वो उससे अपने घर में!?

उसके कपडे, उसका खाना पीना, उससे अपनी गाडी में कॉलेज ले जाना, क्या नहीं कर रही थी वह...

"तुम चलो वीर. तुम... तुम मेरे साथ रहोगे."

"आज हम स्पेशल डिनर करेंगे...!"

"वीर!? तुम्हारा वो... *ब्लशेस* कपडे का साइज क्या है!?"

"पढ़ाई मत चोरर्ण कभी वीर okay!?"

"क्या हुआ वीर!? कोई पसंद आ गयी क्या? फुफु~"

एक एक करके निधि के साथ गुज़ारे पल और उसकी बातें वीर के dil-o-dimaag में घूमने लगी.

और न चाहते हुए भी, उसके ासु निकल hi आये.

बिना कुछ बताये निधि उस के लिए इतना सब कुछ कर रही थी. कितनी टूटी हुई थी वो अंदर से. उससे तोह बस एक प्यार करने वाला व्यक्ति चाहिए था जो उससे अपनी बाहो में भर के रखे और उससे खूब प्यार दे. पर उससे मिला क्या? आदमी के नाम पे एक हैवान.

ये जानते हुए भी की पैसा कितना इम्पोर्टेन्ट है उसके किये इस वक़्त. जहा ऐसे समय में आदमी एक एक रुपये तक बचाये और दूसरे पर खर्च न करे. वह निधि वीर को अपने साथ रख रही थी. उसकी हर्र ज़रुरत मंद चीज़ो को ध्यान रख रही थी.

ये सोचते hi वीर खुद को रोने से न रोक पाया. और अब... उससे ग्लानि से भरे भाव आना शुरू हो चुके थे.

श्रेया के बोल उससे जैसे फिरसे होश में लाये,

"चलो... बोहत रो लिया अब... जाओ! जाके आराम करो. एंड don't तेल्ल हेर की मेने तुम्हे सब बताया है. मारेंगी वर्ण वो मुझे ः~ Okay!?"

अपना सर्र हां में हिलाते वीर वही खड़ा रहा और श्रेया उससे वही चोरर निधि के बैडरूम में चली गयी.

वीर आहिस्ता आहिस्ता आगे बढ़ा और वो दरवाज़े की देहलीज़ पे hi खड़े श्रेया, जूही और निधि को देख रहा था, जिनके चेहरे नाईट बल्ब की रौशनी में चमक रहे थे. वो देख पा रहा था, निधि के मासूम चेहरे के पीछे छुपे कष्ट और पीड़ा को.

अगले पल hi वो वह से निकला और अपने बिस्तर पे चला गया.

***

सुबह हुई और निधि की नींद आज कुछ देरर से खुली क्युकी कल की थकान ने उससे आज जल्दी उठने hi नहीं दिया. उठाते हुए उसने नज़रे दौड़ाई तोह देखा जूही उसके बगल में लेती हुई थी और जूही के hi बगल से श्रेया ीैती हुई थी जो काफी गहरी नींद में लग रही थी.

अभी वो अपनी आँखें मॉल hi रही थी की उससे कल की हुई घटना के बारे में याद आया...

और फिर वीर के बारे में...

और ये ध्यान में आते hi वो फौरन फुर्ती में उठी और तेज़्ज़ कदमो के साथ बाहर आयी,

"वीएएएएएरररर!?"

उसने आवाज़ लगायी पर...

हॉल में कोई नज़र नहीं आया. वो बॉहे सिकोड़ते हुए किचन की ऑर्डर गयी.

पर उधर भी कोई नाज़ा नहीं आया...

उसने बाथरूम चेक किया. पर उधर भी वीर का कोई अत पता नहीं मिला.

'वेट!? कल वो आया भी था या नहीं...!?'

ये सोच निधि फौरन hi अंदर श्रेया के पास गयी और उससे टटोलते हुए उसके कान में आवाज़ लगाते हुए पूछी,

"श्रेया!? श्रेया!? ोू श्रेया!? सुन्न! सुन्न जल्दी... कल वीर घर आया था न!?"

श्रेया जो नींद में hi थी वो बस हम्म करके निधि को जवाद देती है.

निधि : तोह कहा गया!? वो बाहर नहीं है...

श्रेया (नींद में) : होगा वही कही...

उसकी ये बात सुन्न निधि एक बार फिर बाहर जाती है पर कोई नहीं दीखता तभी उसकी नज़र टेबल पर पड़ती है. जहा एक कागज़ रखा हुआ था और उसके ऊपर पेपर वेट रखा हुआ था.

अपने घबराये मैं को नियंत्रित कर वो आगे बढ़ पेपर को उठाती है और उसमे लिखी गयी लिखावट उसकी नज़रो में पड़ती है,

'Ma'am! यदि आप ये पढ़ रही हो तोह सबसे पहले मुझे माफ़ कर देना, कल के लिए. आपका गुस्सा होना लाज़मी था और आपने जो कुछ भी कहा वो गुस्से में कहा था. आपकी उन् बातो का मेने बिलकुल भी बुरा नहीं माना है. आप निश्चिन्त रहिये. मुझे माफ़ कर देना जो में िम्मातुरित्य दिखाते हुए घर से यु निकल गया था. आपने मेरे लिए इतना कर दिया है ki...ki अब एक छत के नीचे रहने में मुझे ग्लानि महसूस होती है. आपके हालातो और पूरी कहानी के बारे में में जान गया हु. श्रेया जी को मत डाटियेगा, उन्होंने मुझे वो सब बताना ज़रूरी समझा इसलिए बताया था शायद.


आपने मेरे लिए क्या नहीं किया!? जितना अपने नहीं करते आपने वो किया मेरे लिए. में ये कभी नहीं भूलूंगा. पर... पर अब में आपके साथ रह के आपकी परेशानी अब और नहीं बढ़ाना चाहता Ma'am. मेरा अंतर्मनन अब ये सच jaan'ne के बाद कभी भी ऐसे मुझे रहने नहीं देगा... इसलिए... इसलिए I'm गोइंग नाउ... थैंक यू सो मच Ma'am, जो कुछ भी आपने मेरे लिए किया. एंड ी प्रॉमिस इसका तेन टाइम्स में आपको लौटाऊंगा.

और हां! ः~ कल बेचारी जूही चॉकलेट खाये बिना hi सो गयी थी. में अपनी चॉकलेट भी उसके लिए चोरर के जा रहा हु. फ्रिज में है वह. उस से कहना की उसके वीर मामू उसके लिए एक दिन बोहत बड़ी चॉकलेट की फैक्ट्री खुलवाएंगे.

श्रेया जी को मेरा थैंक्स कहना. फॉर टेलिंग में थे ट्रुथ. एंड लास्तलय...

आप वैसे hi मुस्कुराया करो... अच्छी लगती हो आप.

एंड Ma'am...

टेक केयर!'

ये पढ़ते hi निधि की आँखों से ासु बहना शुरू हो गए और वो वही बैठी सिसक सिसक के रोने लगी.

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!


वीर निकल चूका है अपनी प्रोग्रेस पर. नेक्स्ट अपडेट से Aatish's अर्च शुरू हो रहा है. जल्द hi एक नया करैक्टर देखने को मिलेगा.

Don't फॉरगेट तो लिखे. 😁
 
अपडेट - 25 ~ मिस्फोरटूने ों इतस वे.

[Master...]

'हम्म!'

[Kya wo sahi tha!?]

'क्या!?'

[Aapka Nidhi ke ghar se nikal aana!? I mean... Aap bhule toh nahi ho na? You have a mission. Solve Nidhi's problem.]

'ी क्नोव! बूत में ऐसे उनके साथ नहीं रह सकता. उन्होंने बोहत कर दिया है मेरे लिए. अब मेरी बारी है.'

[But aise me yadi uspe koi musibat aati hai ya wo kisi pareshani me padti hai then...!?]

'I'll प्रोटेक्ट हेर फ्रॉम थे शादौस.'

[Oh!]

'हम्म! उनका साया बांके रहूँगा में. कोई परेशानी नहीं आने दूंगा उनपे.'

[That's... That's such a romantic way to express your love, master.]

'हँ? वेल! शी मीन्स ा लोट तो में, पारी! She's नॉट जस्ट माय टीचर.'

[I can see that. Toh aapne isliye Shreya ke phone me wo message bheja? Ki jab bhi koi pareshani hoye wo aapko call kar de?]

'हम्म!'

वीर निधि के घर से निकले अभी रास्ते में hi पारी से बातें करते हुए चला जा रहा था. सुबह hi वो 8 बजे करीब निकल गया था घर से और निधि क्युकी आज लेट उठी थी उससे केवल एक कागज़ में लिखा पात्र hi मिला था वीर का...

वीर नहीं...

अभी वीर चल hi रहा था की उसका पेट अचानक hi गुड़गुड़ किया और उसके कदम वही ृक्क गए.

[You are hungry.]

'येह!'

[Kal raat me bhi aapne bhar pait khaana nahi khaaya tha. I can feel it. You are really hungry. Tension me bhi ho aap kaafi. Dherr saari cheeze chal rahi hai aapke mann me.]

'ः~ तुम तोह मेरी पर्सनल डॉक्टर hi बन्न गयी.'

[That I am.]

'हम्म!'

[Fir!? Kya plan hai master!? You don't have money. No home. No place to stay. What now!?]

'ी don't क्नोव. खाने के लिए पैसे चाहिए. एंड पैसे के लिए कुछ काम करना पड़ेगा. ऐसे फ्री में तोह कोई देगा नहीं खाना.'

वो सोचते सोचते एक जगह बैठ गया जहा बगल से लगे ठेलो और दुकानों में सुबह नाश्ता बिक रहा था और काफी भीड़ जमा हो गयी थी लोगो की.

'पारी!'

[Hmm?]

'पता बचपन में मेरे पास पैसा नहीं था, पर सुकून काफी था ज़िन्दगी में.'

[....]

'पैसा तोह आज भी नहीं है, पर वो सुकून भी जैसे छीन गया है.'

वीर की बात सुन्न पारी थोड़ी देरर मौन रह गयी. वो उसके अंदर चल रही टेंशन को फील कर पा रही थी. थोड़ी देरर बाद उसने अपनी चुप्पी तोड़ी,

[Sometimes life can be hard master.]

'लाइफ इस ऑलवेज हार्ड पारी.'

[Don't worry master! I'll support you! I'm here for you!]

पारी की बात सुन्न वीर मुस्कुरा उठा.

अभी वो बैठा hi हुआ था की तभी उसका फ़ोन बज उठा.

स्क्रीन पे देखा तोह किसी अननोन नंबर से कॉल आ रहा था. उसने कॉल उठा के अपने कानो में लगाया तोह एक जानी पहचानी सी आवाज़ उसके कानो में पड़ी,

"वीर!? में बोल रही हु. रागिनी! तुम्हारी... तुम्हारी भाभी!"

रागिनी की आवाज़ सुनते hi वीर कुछ देरर तक शांत रह गया.

'व्हाई इस शी कालिंग में नाउ!? काव्य बतायी थी की भाभी ने उस से मेरा नंबर लिया है. में hi डायरेक्ट पूछ लेता हु.'

वीर : जी!? कहिये!

रागिनी : वीर! क्या... क्या तुम मुझसे मिल सकते हो?

वीर : क्या इसलिए आपने मुझे कॉल किया है?

रागिनी : ह... हां!

वीर (शिघ्स) : मुझे कुछ नहीं सुन्न न है भाभी! उस दिन जो भी हुआ, उस स्थिति से मेने आपको निकाला, बात वही ख़तम हो गयी. अब उस बारे में मुझे कोई भी बात नहीं करनी है.

रागिनी : वीर... नहीं! सुनो! प्लीज! बात उस बारे में नहीं है. इन फैक्ट, थैंक यू सो मच वीर. यदि... यदि तुम नहीं होते तोह पता नहीं क्या होता उस दिन. मेने तुमसे माफ़ी मांगने या अपने आप को दूध का धुला बताने के लिए नहीं किया है कॉल वीर. It's रियली अर्जेंट. तुमसे कुछ बातें करनी है. वाक़ई! वो बोहत ज़रूरी बातें है वीर. इसलिए, क्या... क्या तुम आ सकते हो?

वीर (फ्रोंस) : किसी बातें?

रागिनी : वो बातें फ़ोन पे नहीं हो सकती वीर. आमने सामने बैठ कर hi हो सकती है.

वीर : ी don't थिंक की में वापस से उस घर में कदम रखूं...

रागिनी : नहीं! तुम्हे उस घर में जाने की कोई ज़रुरत नहीं है वीर. I'm... I'm समवेयर ेल्स.

वीर : हम्म? आप कहा हो!?

रागिनी : में... में अपने पर्सनल होम में हु वीर इस वक़्त.

वीर : पर्सनल होम?

रागिनी : हम्म! में तुम्हे तुम्हारे फ़ोन पर मैसेज कर के एड्रेस भेज रही हु. प्लीज, आ जाना वीर. I'm वेटिंग... It's रियली अर्जेंट. तुम्हारे लिए hi है वो सब.

वीर (शिघ्स) : फाइन!

न चाहते हुए भी वीर ने हामी भर hi दी. कारण था की रागिनी ने कहा था बात अर्जेंट है. और उस से रिलेटेड है.

[So? Aapne apni Bhabhi ko maaf kar diya!?]

'हम्म!? माफ़ कर दिया? किसलिए!?'

[I mean jesa unhone ab tak aapke saath behave kiya hai uske liye?]

'No! ी don't लिखे हेर... बूत... ी don't हेट हेर ऐथेर. उन्होंने वैसा कुछ भी नहीं किया जिसके चलते में उनसे एकदम नफरत करने लागु. हां बेशक वो मुझसे बात नहीं करती थी, और कोई मदद नहीं करती थी न hi कभी मेरे लिए कुछ किया उन्होंने. तोह उसके लिए, ी don't लिखे हेर. लेकिन ये कहना की में एकदम उनसे नफरत करता हु, उन्हें देखते hi मेरा खून खौल उठता है, ये थोड़ा ज़्यादा होगा.'

[I see!]

'येह... Let's जो!'

***

कुछ देरर का सफर तय करने के बाद hi वीर रागिनी के भेजे गए एड्रेस पर पहुँच चूका था. और वो घर देख के हैरान था. घर बंगलो तोह नहीं था पर काफी हद्द तक बड़ा था.

'भाभी का अपना पर्सनल घर भी है? व्हेन दीद शी...!?'

अभी वो सोच hi रहा था की तभी ऊपर घर की बालकनी में रागिनी आयी और उससे नीचे खड़े देखते hi उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी.

रागिनी : वीर!! तुम आ गए... रुको! में आती हु नीचे.

वो फौरन तेज़्ज़ कदमो के साथ भागते हुए नीचे आयी और कुछ hi पालो में वो वीर के सामने थी.

उसने दरवाज़ा खोला तोह वीर का चेहरा पास से उसकी नज़रो के सामने आया. उस दिन उसने रात के अँधेरे में देखा था वीर को. और वो भी जब वो चोटिल था.

आज उससे फिरसे एकदम फ्रेश हालत में देख, रागिनी आश्चर्यचकित थी. क्या ये वही वीर है?? उसके मैं में ये सवाल मंडरा रहा था. पर वो एकदम चुप्पी बांधे बस ऐसे hi उससे tak-taki लगाए देखे जा रही थी.

वीर : एहम...

रागिनी (होश में आते हुए) : हँ? ओह्ह! हाँ! वीर... मुझे... मुझे नहीं लगा था तुम इतनी जल्दी आ जाओगे.

वीर : हम्म? थें!? शुड ी...!?

उसका इशारा समझते हुए रागिनी ने फौरन hi अपना हाथ आगे बढ़ा के उसके हाथ को पकड़ लिया और उससे अंदर खींचते हुए लाने लगी. वीर की नज़र एक बार उसके अपने हाथ पर गयी जो की रागिनी की गिरफ्त में था पर वो बोलै कुछ नहीं.

रागिनी : ओह्ह No No... में तोह खुश हु की तुम जल्दी आ गए. आओ न वीर...

'शी सिम्स हैप्पी अबाउट आईटी...'

[Hmm! Master! Do you think ki ye ab waqai badal gayi hai!?]

'ी कन्नोत तेल्ल पारी.'

[Even I can't tell.]

'चेक!'

[Name - Ragini.

Age - 27

Bio - Ragini ek boht hi passionate


यंग लेडी है. अपने माता पिता से बेहद प्रेम करती है. फिलहाल अभी इमोशनल ट्रामा और गिल्ट से गुज़र रही है और इस वक़्त उससे अपने जीवन का कोई भी लक्ष्य दिखाई नहीं दे रहा है. उससे अब क्या करना है, क्या नहीं कुछ नहीं पता.

फवौराबिलिटी : 47

रिलेशनशिप : Sister-in-law.]

वीर ने जैसे hi रागिनी का स्टेटस देखा सबसे पहले वो फवौराबिलिटी देख के चौंका. 47 की फवौराबिलिटी. वीर जानता था की 47 अंक का मतलब क्या होता है. निधि की फवौराबिलिटी उसके प्रति 45 के आस पास थी आज की तारिख में. और यहाँ रागिनी की आलरेडी 47 पहुँच चुकी थी.

हैरानी तोह उससे बोहत हो रही थी इस वक़्त. भला उसकी भाभी जिसने आज तक उस से बात करने का प्रयास तक नहीं किया उसके अंदर भला उसके प्रति इतनी फीलिंग्स कैसे जाग गयी!?

वीर को फटाफट अंदर लाते हुए रागिनी ने उससे सोफे पर hi बैठा दिया. घर काफी बड़ा था. केवल नीचे hi नहीं बल्कि ऊपर भी एक फ्लोर था और सब कुछ फर्निश्ड था. 6 तोह बेड्स hi थे. नीचे तीन और ऊपर तीन. 4 बाथरूम्स और न जाने क्या क्या.

अपनी नज़रो को इधर उधर घुमाते हुए वीर अंदर से hi घर की खूबसूरती को निहार रहा था.

उससे ऐसे देख रागिनी एक बार फिर मुस्कुरायी और किचन से एक ट्रे में वो काच के गिलास में उसके लिए पानी लायी.

उसने कल रात की hi इस वक़्त लैवेंडर कलर की निघ्त्य पहनी हुई थी. सुन्दर तोह वो थी hi शुरू से. उसकी सुंदरता पे आखिर कैसे कोई मदहोश होने से खुद को रोक सकता था!?

झुकते हुए जैसे hi उसने ट्रे में पानी सर्वे किया, वीर को जो नहीं देखना चाहिए था वो दिख hi गया आखिर. उस लैवेंडर निघ्त्य के पीछे छिपे एकदम मखमली गोरी त्वचा के वो दो रसीले आम जो झुकने के कारण अपना आधा दर्शन दे रहे थे. उस दृश्य की झलक वीर की नज़रो ने पल भर के लिए अपने ज़ेहन में क़ैद कर ली.

रागिनी एक औरत होने के नाते, तुरंत hi वीर की नज़रो को पकड़ ली. पर इसके पहले की वो वीर की आँखों में देख उससे पकड़ पाती, वीर ने अपनी नज़रे फौरन hi हटा ली.

पानी लेते हुए उसने दो सिप पिया और साइड रख वो चुप चाप बैठा रहा.

रागिनी भी उसके बगल से बैठ गयी और फिर उसने खामोशी तोड़ी.

रागिनी : तुम... तुमने नाश्ता किया वीर!?

वीर : जी नहीं!

रागिनी : तोह... तोह क्यों न हम पहले नाश्ता कर ले? बातें लम्बी होने वाली है...!?

उसने अपनी आशाभरी नज़रो से देखते हुए वीर से कहा.

वीर : जी नहीं! इसकी कोई ज़रूर...

पर इसके पहले की वो अपनी बात रख पाटा,

*गुड़गुड़*

उसके पेट ने अपनी बात रख दी.

'फुसक्ककककक!!'

[:लाफिंग: ी टोल्ड यू की आप को भूख लगी है.]

एक अजीब सी शान्ति फेल गयी कमरे में.

पर अगले पल hi रागिनी किलकारी लेते हुए हस्सी. वो अपने हाथ के पिछले हिस्से से अपना मुँह ढ़ाके वीर को देख खिलखिला के हस्स रही थी.

और न चाहते हुए भी वीर उससे केवल देखता रहा, थोड़ा शर्मिंदा भी हो गया.

उठाते हुए रागिनी ने उसके कंधे पर हाथ रख थोड़ा दबाव दिया और बोली,

"तोह तय रहा. पहले पेट पूजा, फिर बातें. में अभी गरमा गरम पोहा बना के लाती हु वीर. Okay!?"

वीर (फ्रोंस) : आपने तोह कहा था की बात अर्जेंट है!? यदि बातें ज़रूरी है तोह फिर ये...!?

रागिनी : बात अर्जेंट hi है वीर. पर, नाश्ता तोह कर hi सकते है न हम? यदि तुम्हे अभी कोई काम नहीं है तोह...!?

वीर (शिघ्स) : फाइन!

रागिनी (स्माइल्स) : बस अभी लाती हु... Okay!?

वो कहते हुए अंदर किचन में चली गयी और कुछ देरर में hi बर्तनो की खत पैट आवाज़ें आना शुरू हो गयी वीर को.

किचन बगल से hi था, तोह रागिनी अंदर से वीर को देख पा रही थी. वो बीच बीच में उससे देखती और अपनी सोच में पद जाती. न जाने क्या चल रहा था उसके मैं में.

थोड़े समय में hi वो गरमा गरम अपने हाथो से पोहा बना के लायी और वीर को सर्वे करते हुए वो भी उसके बगल से एक प्लेट लेके बैठ गयी.

पोहा देखते hi वीर के मुँह में पानी आ गया. उसने स्पून उठा के जैसे hi पोहा टास्ते किया तोह उसकी आँखें बंद हो गयी और वो उस स्वाद में डूब सा गया.

रागिनी : केसा है वीर!? कुछ गड़बड़ तोह नहीं हुई न मुझसे बनाने में...

वीर : It's... It's परफेक्ट.

बिना रागिनी की तरफ देखे वो खाने में मग्न हो गया. ये स्वाद वही था. जब से रागिनी उनके घर में आयी थी. सुबह नाश्ता वो hi बनाती थी. और वीर भली भाति इस स्वाद से परिचित था. वो कई बार तारीफ भी करता था पर तब रागिनी उसकी बात सुन्न उससे इग्नोर कर दिया करती थी.

पर आज सन कुछ ऐसा था की रागिनी खुद उसके लिए पोहा बना के उस से खुद पूछ रही थी की उसके हाथो का बना खाना केसा है. समय बदलते देरर नहीं लगती.

वीर सभी बातो से अनजान बस खाने में लगा हुआ था. उससे नहीं पता था की रागिनी इस वक़्त उससे बड़े hi प्यार से मुस्कुराते हुए देख रही थी.

खर्र! इनकी पेट पूजा जैसे hi समाप्त हुई, वीर वापस से अपने वही रवैय्ये में आ गया.

वीर : अब बताइये!

रागिनी (शिफ्ट्स क्लोज़र) : वीर! जो में बताने जा रही हु, वो एकदम सच बातें है. तोह ध्यान से sunn'na और फिर एक्ट करना. Okay!?

वीर : हम्म!

रागिनी : सबसे पहली बात. तुमने जब उस दिन मुझे और बाकी सभी को बचाया था. उस दिन के बाद से hi में घर नहीं गयी हु. अपने वाले घर!?

वीर (सुरप्रीसेड) : हँ!?

रागिनी : हम्म! उस दिन के बाद से hi मेरे और तुम्हारे बड़े भाई विवेक की बीच अन्न बन्न होने लगी है. मुझे भी कुछ समय अकेले बिताना था, इसलिए मेने डैड से कहके इस घर की के लेली. ये मेरा hi घर है वीर.

वीर : पर...!?

रागिनी : बताती हु. तुम्हे नहीं पता शायद वीर. पर उस दिन... उस दिन वो जो गैंग का बॉस था. उसने विवेक के सर्र पर गन तानते हुए एक सवाल पूछा था. की बताओ... किसे बचाओ!? तुम्हे या तुम्हारी बीवी को!? और तुम जानते हो उसने क्या जवाब दिया था?

वीर : ??

रागिनी : उसने... उसने अपनी जान बचाने की भीख मांगी थी. यदि वही सवाल उस आदमी ने उस वक़्त मुझसे पूछा होता तोह मेरा जवाब यही रहता की मेरे पति को कुछ मत करना चाहे मेरी जान लेलो. पर... पर विवेक ने...

बोलते बोलते रागिनी की आवाज़ thar-tharaane लगी और उसकी आँखों से ासु बहने लगे. वो आगे बढ़ी और वीर के हाथ के ऊपर अपना हाथ रख उसकी हथेली को जोरर से भींच ली. वीर, उनकंफर्टबले ज़रूर फील कर रहा था रागिनी के इतने क्लोज होने के कारण पर वो चुप बैठा रहा.

रागिनी : उस दिन मुझे पता चला था वीर... की... में कितने बड़े अन्धकार में जी रही थी. में जिस आदमी को प्यार करती आयी वो तोह मुझे उस हद्द तक भी प्यार नहीं करता. तब मुझे समझ आया वीर... मेने कितना गलत किया था तुम्हारे साथ.

वीर : .....

रागिनी : में तुम्हे इग्नोर कर दिया करती थी. कितनी बड़ी बेवक़ूफ़ थी न में!? तबसे hi... तब से hi में घर नहीं गयी हु. घर का माहौल भी बोहत बिगड़ा हुआ है. सभी को बात पता चल चुकी है. और वो सभी विवेक को अब कोस रहे है, जिसके चलते विवेक अपना गुस्सा मेरे सर्र निकाल रहा है. एक और नया रंग देखने को मिला मुझे उसका. शुरू में तोह वो माफ़ी मांग मांग के मुझे बहलाता रहा, पर जब में न मानी तोह अब गुस्से में मुझे घर लौटने को कह रहा है. कैसे...!? ऐसे व्यक्ति से में प्यार कर बैठी भला!? हाँ? वीर??

[She's telling the truth master.]

'आईटी सिम्स सो.'

रागिनी : अब तुम्हे बताती हु दूसरा सच. तुम्हे घर से बाहर निकालने के पीछे उस प्रांजल और मेरे पति यानी की तुम्हारे अपने बड़े भाई विवेक का हाथ है.

रागिनी के ये बोल मुँह से निकलते hi मानो एक बम सा गिरा वीर के सर्र पे. प्रांजल के बारे में तोह वो जानता hi था की वो किस किस्म का व्यक्ति था. पर वीर को इस बात से झटका लगा था की उसका बड़ा भाई विवेक भी इस हद्द तक मिला हुआ था.

रागिनी : हां वीर! ये सच है. उस दिन... जब तुम फ्लोर पर गिरे थे. वो सारा किया धरा प्रांजल का था. आयल की मदद से उसने फ्लोर को स्लिपरी बना दिया था जिस कारण तुम गिरे और वो वैसे टूटा...

वीर : हँ...!?

रागिनी : हां! सच सच कहूँगी वीर! में भी इस में बाद में शामिल हुई थी... पर जब तुम्हारी वो हालत देखि थी तोह अंदर से मुझे वो सही नहीं लगा था. पर हां... में भी दोषी हु वीर. इसलिए तुम मुझसे नाराज़ रह सकते हो. में जानती हु में गलत हु. इसलिए में अपनी मिस्टेक्स को सुधारने की पूरी कोशिश कर रही हु. और में कोशिश करती रहूंगी... की एक दिन तुम मुझे माफ़ कर डोज...

वीर : क्या यही है साड़ी सच्चाई!?

रागिनी : हम्म!

और अगले hi पल वीर अपना बैग उठा के उठने लगता है. इस बैग में काव्य द्वारा दिए गए उसके कपडे थे जिससे वो ले आया था. बाकी सब कुछ वो निधि के घर hi चोरर आया था.

उससे यु उठता देख रागिनी खुद भी फौरन उठ जाती है.

रागिनी : कहा!? कहा जा रहे हो!?

वीर : हम्म? आपने बात बता दी. बात ख़तम हो गयी. उसके लिए थैंक्स. अब मेरा काम यहाँ ख़तम है सो, I'm गोइंग नाउ.

रागिनी : वही पूछ रही हु... कहा जा रहे हो? तुम आये कैसे थे? पैदल? और ये बैग!?

वीर : ी don't हैवे अन्य व्हीकल. पैदल आया था तोह पैदल hi जाऊंगा न!? और रही बात कहा जा रहा हु!? तोह वो तोह मुझे खुद नहीं पता.

बोलते हुए वो बाहर निकलना लगता है तोह रागिनी एक बार फिर उसका हाथ थाम उससे रोक लेती है.

रागिनी : क्या मतलब? पैदल आये थे!? यू don't हैवे मनी!? और क्या मतलब की नहीं पता कहा जा रहा हु...

वीर : ी don't थिंक की... मुझे ये सब बातें आपको बताने की ज़रुरत है!?

रागिनी (लैंस फॉरवर्ड) : वीर! पास्ट में जो कुछ भी हुआ वो हुआ. बूत... अभी इस वक़्त... There's no वे की में तुम्हारा कभी भी बुरा चाहूंगी... इसलिए... प्लीज! मुझे बताओ.

वो एक आस लिए उससे देखते हुए बोली. उसकी पकड़ वीर के बाइसेप्स को जोरर से जकड़े हुए थी. इस बार वीर देख सकता था, उन् आँखों में एक चिंता था, डर भी और बेचैनी भी. वो ऐसे उससे देख रही थी जैसे मानो अभी रो देगी.

वीर (शिघ्स) : ी don't हैवे ा प्लेस तो स्टे. इसलिए वही देख रहा हु... सो...

पर इसके पहले की वो आगे बात रख पाटा, रागिनी उसके होंठो पे अपना हाथ रख उससे चुप करवा देती है,

रागिनी : थें यू अरे स्टेइंग विथ में. No क़ुएस्तिओन्स. तुम्हे मेरी कसम वीर. प्लीज! में नहीं पूछूँगी की तुम कहा थे, कैसे रह रहे थे अभी तुम इस हाल में क्यों हो. बूत... प्लीज! अब यहाँ से... मेरे साथ रहना... मुझे भी सपोर्ट रहेगा. क्या तुम अपनी भाभी को इतने बड़े घर में अकेले ऐसे चोरर के जाओगे वीर!? यदि उस दिन की तरह वो गैंग वाले आ गए तोह क्या होगा? क्या तुम्हे मेरी ज़रा भी फिक्र नहीं है वीर!? में जानती हु... तुम्हारे अंदर मेरे लिए घृणा नहीं है. आखिर इसलिए तोह तुम मुझे बचाने आये थे न? क्यू? बोलो... जवाब दो.

उस से पूछते हुए रागिनी उसके होंठो से अपने हाथ को हटा लेती है. पर वीर कुछ नहीं कहता. केवल देखता रहा.

[Damn! You got lucky again master. It's a good choice actually master. Say yes to her.]

रागिनी : तुम्हारी चुप्पी बता रही है की में सही हु वीर. तोह अब चलो मेरे साथ अंदर.

वो वीर को घुमाते हुए उससे पीठ पर धक्का देते हुए घर के अंदर कर देती है.

रागिनी : जो भी रूम तुम्हे लेना हो... वीर!

वो उससे प्यार से धकेलते हुए अंदर जाने को कहती है, पर वीर के चेहरे पर कोई भाव नहीं था.

अंत में वो ऊपर की ऑर्डर जाने लगता है पर आखिरी सीढ़ी पर परर रखते hi वो रुकता है और केवल कुछ hi शब्द निकलते है उसके मुँह से.

"I'm नॉट प्रोमिसिंग एनीथिंग."

और इतना बोल वो ऊपर चला जाता है.

इधर नीचे एक राहत भरी सास लेते हुए रागिनी मुस्कुराने लगती है और फौरन hi अपने पिता, दिनेश को कॉल लगाती है.

बात करने के बाद वो फ़ोन कट करती है पर उसके होंठो पे बोहत hi प्यारी सी मुस्कान सजी हुई थी इस वक़्त. और यु hi मंद मंद मुस्कुराते हुए वो अंदर अपने कमरे में चली जाती है.

***

शहर में hi एक बेहद hi बड़ी सी ज्वेलरी शॉप के अंदर इस वक़्त दो लड़किया बैठी हुई थी और किसी से बात कर रही थी. ये और कोई नहीं, सोनिआ और सुहाना hi थी.

सोनिआ : तोह कब तक आने वाला है!?

सोनिआ ने वही बैठे ज्वेलरी शॉप के ओनर से पूछा. सभी इस वक़्त उसके केबिन के अंदर बैठे हुए थे.

ओनर : मैडम! सर से तोह डेट पता चली hi होगी न आपको? दो दिन बाद उन्होंने मंगवाया है. कल तक आ जाएगा.

सोनिआ : मतलब आपकी शॉप में कल आ रहा है न?

ओनर : जी मैडम!

सोनिआ : तोह... तोह आप डैड को मत बताना. मुझे दे देना. में सरप्राइज दूंगी उन्हें.

ओनर : उम्... ये... पर सर ने तोह कहा है की उनको दो दिन बाद चाहिए और ऐसे में में आपकी बात...

सोनिआ : में तोह उनकी hi बेटी हु न. तोह फिर आपको क्या दिक्कत है इसमें!?

ओनर : बात वो नहीं है मैडम! सर से हमारे पुराने सम्बन्ध है. आपको भला कौन नहीं जानता? बस... दिक्कत ये है की... बाद में यदि कुछ हुआ तोह ब्लामे मुझपे न आये. में सर की दांत नहीं sunn'na चाहता.

सोनिआ : आप उसकी चिंता मत करिये. यहाँ से वो ले जाने के बाद साड़ी ज़िम्मेदारी मेरी रहेगी. Okay!? अब तोह ठीक है न?

ओनर : उम्....

सोनिआ : घबराइए मत. में अपने वाडे की एकदम पक्की हु. और में पलटूँगी नहीं. मेरी ज़िम्मेदारी यानी की मेरी ज़िम्मेदारी. आपको डैड कुछ नहीं कहेंगे. अब तोह बताइये...!?

ओनर (शिघ्स) : जी ठीक है. पर आप अपना वादा ज़रूर रखना मैडम. वर्ण मेरी शामत आ जाएगी.

सोनिआ (स्माइल्स) : थैंक यू! एंड आप बिलकुल भी टेंशन मत लीजिये.

और सोनिआ और सुहाना दोनों hi बाहर आके अपनी कार में बैठ जाती है. और बैठते hi सुहाना आगे बढ़ के सोनिआ को जोरर से अपने गले से लगा लेती है.

सुहाना : ओह माय गॉड सोनू!! ी can't बिलीव तुम उस बेट का रिवॉर्ड देने के लिए राज़ी हो गयी इवन थौघ में वो बेट हार चुकी थी.

सोनिआ (शिघ्स) : इतना लिघ्टलय मत लीजिये दी. में आपकी बेट का रिवॉर्ड आपको दे रही हु बूत आपको याद है न? No मिस्टेक्स... एंड...

सुहाना : येह येह! No मिस्टेक्स एंड no रएग्रेट्स. ी क्नोव सोनू. तुम खामखा इतनी टेंशन ले रही हो.

सोनिआ : बात को समझा करिये दी!

सुहाना : दुह! फाइन! फाइन!

और वो कार में बैठे वह से रवाना हो जाते है.

***

वही दूसरी ऑर्डर देश से कोसो दूर एक दूसरे देश में किसी जगह पर एक बोहत hi बड़ी कंपनी के मालिक के बेटे की शादी थी जिसके चलते उसने कई इम्पोर्टेन्ट गेस्ट्स को बुलाया हुआ था.

वेन्यू इतना भव्य और बड़ा था की लोग देखते रह जाए. एकदम फूलो और सजावट की चीज़ो से सजा हुआ था.

बाहर एंट्रेंस में लाल कारपेट बिछा हुआ था और धेरर सारे फोटोग्राफर्स थे जो अंदर आते हुए गेस्ट्स की फोटोज ले रहे थे.

यही फोटोग्राफर्स इस वक़्त एक बेहद hi ख़ूबसूरत लड़की की फोटोज निकलने में लगे हुए थे जो अभी अभी वेन्यू में आयी थी.

"देख! कैसे सब भेडियो टाइप लाइन लगा के मिस की फोटो ले रहे है."

एक आदमी ने बगल में खड़े आदमी से कहा.

"अबे तुझे इसमें भी दिक्कत है रघु!? वो अपना काम कर रहे है. और क्यों न ले फोटो!? मिस है hi इतनी ख़ूबसूरत."

रघु : हम्म! ये तोह सही कहा तूने जस्सी.

रघु और जस्सी वही दो बॉडीगार्ड थे जो वीर को उस क्लब वाली लड़की के साथ दिखे थे. और बेशक, सामने कारपेट के पास कड़ी जो लड़की अपनी फोटोज क्लिक करवा रही थी वो और कोई नहीं बल्कि क्लब वाली लड़की hi थी.

जस्सी : साला ये बाउ टाई मेरे से नहीं पहनी जाती.

रघु : हाहाहा~ आदत दाल लो भाई! मेरी शादी में तोह यही पह्नवाऊँगा तुझे.

जस्सी : तेरी शादी!? किस लड़की ने तुझे पसंद कर लिया भला!?

रघु (खोये हुए) : मिस करेंगी न...!

जस्सी : हाहाहाहा~ साले! ख़याली पुलाव पकाएगा अब!? मिस और तुझे पसंद करेगी!? अबे जोके तोह ढंग का मार...

रघु : हम्फ!.... तू क्या जाने... देख! मिस कितनी ख़ूबसूरत है... हाय... कितनी खुश लग रही है वह.

जस्सी : ख़ूबसूरत तोह वो बोहत है. पर यदि तूने उन्हें ऐसे देखना बंद न किया न तोह तेरी आँखें फोड़ दूंगा.

रघु : जस्सी तू भी बे... बिलकुल भी मज़ा नहीं आता तेरे साथ.

इन् दोनों की बातें तोह चल रही थी. पर ये दोनों नहीं जानते थे की जिन मिस के बारे में सोच रहे थे वो अंदर hi अंदर क्या सोच रही थी इस वक़्त.

क्या वो खुश भी थी?






यु पोज़ देते हुए वो पिक्स तोह खिचवा रही थी. फ़्लैश बार बार चमक के उसके हुस्न को और भी चमका रहा था.

पर उसके अंदर के भावो को भला उसके अलावा और कौन जान सकता था!? उन्हें नहीं पता था की इस वक़्त वो अंदर से केसा महसूस कर रही थी.

'It's अगेन जस्ट अस ी एक्सपेक्टेड. ी फील नथिंग.'

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!

Don't फॉरगेट तो लिखे.
 
अपडेट - 26 ~ ा लेसन तो बे तौह्त (1)

अब तक...

यु पोज़ देते हुए वो पिक्स तोह खिचवा रही थी. फ़्लैश बार बार चमक के उसके हुस्न को और भी चमका रहा था.

पर उसके अंदर के भावो को भला उसके अलावा और कौन जान सकता था!? उन्हें नहीं पता था की इस वक़्त वो अंदर से केसा महसूस कर रही थी.

'It's अगेन जस्ट अस ी एक्सपेक्टेड. ी फील नथिंग.'


अब आगे...

"तुम्हे पता है तुम्हारी गलती क्या थी!?"

सामने बैठे चेयर पे एक आदमी ने अपने सामने मौजूद कई लड़को में से एक से कहा.

टेबल पे दोनों परर रखे हुए वो बड़े hi गुस्से में सभी को देख रहा था. और उसके खौफ के चलते, उसकी आँखों में गुस्सा देख वो सभी लड़के अपना सर्र झुकाये खड़े हुए थे.

"भौ... आगे से ऐसी गलती नहीं होगी."

सामने खड़े लड़के ने कहा. ये और कोई नहीं बल्कि रंगा था जो वीर के हाथो उस दिन धेरर हो गया था और वीर रागिनी समेत बाकी सभी को उसके चंगुल से चुर्राने में कामयाब था.

उस दिन की वारदात जब आतिश को पता चली थी तोह वो इतना आग बबूला था की यदि रंगा वही उसकी आँखों के सामने होता तोह पक्के से आतिश उसके हाथ परर तोड़ देता.

पर शायद रंगा की किस्मत अच्छी थी, वीर ने जो पॉकेट नाइफ उसकी पसली में मारी थी उसके चलते उसके साथी फौरन hi हॉस्पिटल में ले जाके उसका इलाज़ करवाए थे जिस कारण वो आतिश के गुस्से से बच गया था.

पर आज आतिश उसके सामने था. इस वक़्त भी रंगा की पसलियों में पत्तिया बंधी हुई थी. और अब उससे अपने भौ को जवाब देना था.

आतिश : तुमने यही बात पहले भी कही थी रंगा. जब वो क्लब से लड़की हमारे चंगुल से निकल कर चली गयी थी.

रंगा : में जानता हु भौ. में...

आतिश : मुझे तोह अब भी विश्वाश नहीं हो रहा की एक लड़का... एक लड़का तुम तीन लोगो को चकमा देके वह से सभी को चुर्रा के ले गया.

रंगा : भौ... में...

आतिश : क्या तुमने उसके बारे में पता किया या अभी भी गुमनामी में चल रहे हो!? बताना पड़ेगा मुझे...!?

रंगा : नहीं भौ! मेने... सब पता लगा लिया है. वीर नाम है उसका. और वो उसी परिवार का हिस्सा है जिसकी कंपनी हम हथियाने वाले थे. उस विवेक का hi छोटा भाई है वो. क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स कॉलेज में पढता है. साथ hi उसकी दो बहने जिनका नाम आरोही और काव्य है वो भी जाती है. एक प्रांजल नाम का भाई भी है जो उनके साथ उसी कॉलेज में जाता है. सब पता लगा लिया है.

आतिश : वीर हां!? हम्म्म! तोह!? क्या करोगे अब तुम!?

रंगा : आपकी सिखाई हुई हर्र एक बात याद है भौ. यदि कोई चूहा बीच रास्ते में आये तोह उससे कैसे रौंदना है ये मेने आपसे बोहत अच्छे से सीखा हुआ है. उस वीर से तोह बदला लूंगा hi में... ताकि उससे पता चल सके की गलत लोगो से कभी क्यों पन्गा नहीं लेना चाहिए.

आतिश : चलो कुछ तोह अकाल है तुम में. और!? क्या खबर लाये हो!?

रंगा : भौ! खबर कुछ ख़ास तोह नहीं है. बस दो hi खबर है.

आतिश : बोलो!

रंगा : पहली ये की वो क्लब वाली लड़की देश से बाहर है इस वक़्त. और दूसरी...

आतिश : हम्म!?

रंगा : दूसरी कुछ ख़ास नहीं है भौ...

आतिश : ख़ास है या नहीं वो में डीडे करूँगा. तुम खबर बताओ.

रंगा : दूसरी ये की... वो सोनिआ की बड़ी बहिन सुहाना...

और धीरे धीरे रंगा पूरी खबर आतिश को सुनाता है जिससे सुन्न आतिश के चेहरे पे मुस्कराहट आने लगती है और आँखों में चमक.

रंगा : हाहाहाहा~ रंगा, यही तोह असली खबर है. तुमने सोच भी कैसे लिया की ये खबर फ़ालतू है. मुझे पता है अब क्या करना है... सुनो...

***

न जाने क्या प्लानिंग हुई आतिश और उसकी गैंग के बीच उस रात पर अगली सुबह हो चुकी थी. वीर कल से रागिनी के साथ hi उसके घर रुका हुआ था. एक लड़के का अपनी भाभी के साथ यु अकेले रहना, सोसाइटी में कई सवाल उठाता है.

पर रागिनी के लिए ये बात अच्छी थी की उसका घर किसी सोसाइटी में नहीं था. अलग से उसने ज़मीन लेके ये घर बनवाया था जिसके चलते लोगो की प्रश्न भरी नज़रो से और उनके सवालों से बची हुई थी. जो लोग थे भी आस पास तोह उनसे रागिनी की कोई पहचान नहीं थी क्युकी वैसे hi उसका ये घर अक्सर खाली रहता था और हफ्ते में एक नौकर आके सफाई करके चला जाता था.

वीर के घरवालों को केवल यही पता था की रागिनी अकेले अपने घर में रह रही है और वीर अपनी Ma'am के घर. वो सभी विवेक को वापस से रागिनी को घर लाने के लिए उससे फाॅर्स करते जा रहे थे जिसके चलते विवेक अब किसी भी दिन रागिनी के घर आ सकता था. और यदि रागिनी ने तब भी उससे मन किया तोह ज़ाहिर सी बात है की सुमित्रा और करुणेश दोनों को hi बीच में आना पड़ेगा और मामला सुलझाना पड़ेगा. पर फिलहाल के लिए विवेक ने उनसे समय माँगा हुआ था की वो ये मामला जल्द hi खुद सोल्वे कर लेगा.

पर सवाल था की क्या अब रागिनी के मैं में विवेक के लिए वही पुरानी फीलिंग्स मौजूद है!? या...!?

खर्र! रात तोह बड़ी hi शान्ति से उसके घर में गुज़री पर अगली सुबह यही बात निधि के घर के लिए नहीं कही जा सकती थी.

इस वक़्त निधि सोफे पे बैठी हुई थी, बॉहे चिंता के मारे सिकुड़ी हुई थी. और उसके सामने जूही मुँह फुलाये कड़ी उससे घूर रही थी.

निधि : बीटा! तंग मत करो मुम्मा को. स्कूल के लिए लेट हो रही हो आप. वन आने वाली है बीटा...

जूही (मुँह फुलाये) : वीर मामू कहा हैईईई!??? आपने बोलै था माहामु कल आएंगी...

वो जोरर जोरर से चिल्लाते हुए निधि की जांघ पे अपने हाथ पटकने लगी और निधि बेचारी उससे समझा समझा के थक चुकी थी. वो खुद हैरान थी की उसकी बच्ची जूही, वीर से कितना अटैच्ड हो चुकी थी.

पर उस से भी ज़्यादा हैरानी उससे इस बात से हुई थी की वो खुद वीर से कितना अटैच्ड थी. वीर के जाने के बाद, उसका वो लेटर पढ़ने के बाद वो इतना रोई थी की कल वो कॉलेज तक नहीं गयी थी. श्रेया हर्र थोड़ी देरर में उसके साथ बैठ उस से बात करती, उससे समझाती और उससे चुप करवाती.

भला इतना कैसे जुड़ गयी वो अपने एक स्टूडेंट के साथ!? कुछ hi हफ्ते तोह वीर रहा था उसके साथ. फिर ये अजीब सी पीड़ा क्यों हो रही थी उससे सुबह उसका चेहरा न देखने पर!? हर्र रोज़ वो उसका चेहरा देखती थी, और उससे महसूस होता था की वीर अपनी पुरानी ज़िन्दगी से उभर रहा है. और ये देख के वो बेहद खुश हो जाती थी.

उससे प्राउड महसूस होता था की वो वीर के इतना काम आयी. वो एक टूटे हुए दिल को जैसे जोड़ रही थी और वीर को पनपता देख उससे अपने आप में hi बोहत ख़ुशी होती थी. किसी जीत से काम नहीं रहती थी वो हर्र सुबह जिस दिन वीर का खिला हुआ चेहरा वो देखती थी. जूही और उसके बीच का वो अटूट रिश्ता वो अपनी आँखों से भली भाति देख पाती थी.

कैसे उसकी बच्ची के होंठो पे वो प्यारी सी मुस्कान फेल जाती थी जब भी वो वीर के आस पास होती थी. श्रेया का खुद का ऐटिटूड बदलने लगा था वीर के साथ रह रह के. वो अब उतनी हुघटय नहीं थी. वो मातुरे हो रही थी और भी ज़्यादा. उनकी नोक झोक भी अलग hi मज़े की होती थी जिससे देख निधि को बेहद प्यार आता था उन् दोनों पे hi.

पर अब...

अब जैसे सब कुछ ख़तम हो चूका था. वो शख्स अब जा चूका था. वीर अब उनके बीच नहीं था. जो लड़का उसके घर के वातावरण को पूरी तरह से बदल के इतनी खुशिया और पाजिटिविटी उसके घर में लाया था, उसके जाने से जैसे साड़ी चीज़े जा चुकी थी. और ये सब बातें...

निधि को अंदर से इतना तोड़ रही थी की उस से कभी कभी बोलै भी नहीं जा रहा था.

अभी वो वीर के hi बारे में सोच रही थी की क्या जवाब दे अपनी नन्ही सी बच्ची को!? कल तोह उसने बहाना बना के कह दिया था की उसके वीर मामू कल आ जाएंगे. पर आखिर ये झूठ कब तक चलता रहेगा!?

अभी वो खोयी हुई hi थी की तभी उसके बगल से श्रेया की आवाज़ उसके कानो में पड़ी,

"जूही! तुंहरे वीर मामू काम से बाहर गए हुए है. उनको आने में थोड़ा टाइम लगेगा. और वो तुम्हारे लिए गिफ्ट लेके आएँगे! चलो, अब जल्दी से तैयार हो जाओ."

जूही (क्रिस) : नईईईईई... वीर मामू चाहिए...

गिफ्ट नीईई...

अपनी बच्ची को ऐसे देख, निधि के ासु उसके गालो से फिसल गिरने लगे. उन्हें जल्दी से पोछते हुए वो कुछ सोच के बोलती है,

निधि : वीर मामू तुम्हारे गंदे है. वो बिना बताये कही चले गए है. अभी देखना, मम्मी उनके कान पकड़ के खींच के घर में लाएगी! अभी कॉलेज में आएँगे न वीर मामू. तोह देखना कैसे मम्मी पकड़ के लाती है. अब खुश!? अब तोह रेडी हो जाओ, वर्ण मम्मी नहीं लाएगी फिर.

जूही : हम्म्म!

जैसे तैसे निधि ने उसको मनाया और उससे स्कूल भेजा और खुद भी रेडी हो गयी कॉलेज जाने के लिए.

निधि : में निकल रही हु श्रेया.

श्रेया : हम्म! एंड...

निधि : !??

श्रेया : व्हाट िफ़ हे doesn't वांट्स तो के!?

निधि : ी.... कैसे नहीं आएगा. I'll ब्रिंग हिम बैक.

श्रेया (स्माइल्स) : गुडलुक.

निधि (स्माइल्स) : ममम!

और निधि श्रेया को चोरर कॉलेज की ऑर्डर निकल जाती है. पहला लेक्चर क्लास में उसका hi रहता था तोह वो एकदम टाइम के पहले hi आ गयी आज.

न जाने कितने मेस्सगेस और कॉल्स किये होंगे उसने वीर को जिनका एक भी रिप्लाई वीर ने नहीं दिया था उससे अब तक और यही बात उससे अंदर से खाये जा रही थी. उससे बेचैन कर रही थी.

वो बड़ी hi आस लिए अंदर आते स्टूडेंट्स को परमिट कर रही थी बैठने के लिए. कई सारे लेट स्टूडेंट्स आये और लेक्चर शुरू हुए 15 मिनट हो भी चुके थे पर अब तक...

वीर का कोई अत पता नहीं था.

जिस बात का उससे डर था कही वही न हो जाए. वो आस लिए बार बार दरवाज़े की तरफ देखती की काश कही से वीर उससे करिडोरर में दिख जाए और वो आके अपनी सीट पर बैठे. वो उससे पढ़ाये, उससे देखे वापस से क़ुएस्तिओन्स सोल्वे करते हुए, वापस से वीर उसके साथ गाडी में बैठ के उसके साथ घर जाए, फिरसे वो दोनों पहले की तरह शॉपिंग पर जाए...

पर...

पर जैसे कुछ hi पालो बाद जैसे निधि की साड़ी उमीदें टूट चुकी थी जब वीर लेक्चर के अंत तक कही नज़र नहीं आया. इस वक़्त अंदर से वो इतना बेचैन थी की उसके गले से उसका थूक था नहीं उतर रहा था.

'विययय!??? व्हाई didn't हे चामे!??? कहा है वो!?? कुछ बता के नहीं गया... वो मुझे अपना मानता भी है या नहीं!? क्या एक बार भी उसने मुझे बताना सही न समझा की वो कहा पर है!? उससे ये ध्यान क्यों नहीं आ रहा की में कितनी टेंशन में रही हूँगी. वियययय!? मेने तोह कहा था न उस से... की पढ़ाई मत चोरर्ण... थें... थें वियय!??'

वो अपनी साड़ी के भाग को निचोड़े गहरे चिंतन में डूब गयी. किसी भी वक़्त उसकी रुलाई चूत सकती थी.

पर वो इस वक़्त कुछ नहीं कर सकती थी. न hi उसके पास वीर का कोई पता था और न hi उसकी वीर से कोई बात हो पा रही थी. और इतना वो जानती थी की वीर अपने घर पर तोह बिलकुल भी नहीं होगा.

***

नींद से देरर से जागते हुए वीर जब उठ के फ्रेश होक नीचे आया तोह उसने देखा की उसकी भाभी रागिनी किचन में व्यस्त थी और गुनगुना रही थी.

इस वक़्त भी वो निघ्त्य में hi मौजूद थी. एक रेड कलर की आकर्षक निघ्त्य.

'उन्हें ऐसे कपड़ो में मेरे सामने नहीं होना चाहिए. राइट पारी!? ी मैं... वैसे hi उनका रिलेशनशिप सही नहीं चल रहा और ऊपर से में उनका देवर उनके साथ अकेले यु रह रहा हु...'

[She trust you that is why she's wearing that. Par aapke iraade kya hai master!? Hehe~]

'व्हाट थे फ़क पारी!? ी मैं तो से की उन्हें कुछ डेन्सी रखनी चाहिए मेरे सामने. आल्सो, She's तू तोची.'

[You don't like being touched by her!?]

'मेने ऐसा तोह नहीं कहा.'

[Hehe~ toh aapko pasand hai jab wo aapko touch karti hai!?]

'व्हाट थे...!? पारी!!? सुबह सुबह मेरी टांग खींचने का मूड बनाया है क्या आज!?'

[Haha~ I was just joking. But yeah, it's a fact master. Wo aapke saamne itna open hai because she trusts you completely. Aur kyu nahi hoga trust!? Jis bande se usne aaj tak baat nahi kii, sahi se pesh nahi aayi wo banda uski jaan bachaane aaya, na ki uska apna pati jo uski jaan ki baazi laga diya tha wahi. Toh aise me toh obviously wo aankh band kar ke aap pe bharosa karegi.]

'बूत...'

[Don't think too much. She's good now. Usse apni galti ka realization ho chuka hai aur she wants to do things for you. Toh karne do usse aur thoda cooperative bhi rehna. She's rich master. Don't forget...]

'मुझे समझ जाना चाहिए था की तुम्हारी नज़र उनके पैसे पर है...'

[Hehehe~ Money is important master.]

वीर के कदमो की आहात पाते hi रागिनी ने उससे स्पॉट किया और मुस्कुराते हुए उससे देखि.

रागिनी : गुड मॉर्निंग वीर!

वीर : गुड... मॉर्निंग!?

रागिनी : क्या नींद ठीक से आयी!?

वीर : जी!

रागिनी : कोई दिक्कत तोह नहीं गयी न!?

वीर : जी.. नहीं...

रागिनी : ऐसे... ऐसे इतना फॉर्मल मत पेश आओ वीर. में तुम्हारी भाभी हु न!? खुल के बाते करो. और ये घर भी तुम्हारा hi है. बीती बातें जो भी थी, उन् गलतियों का पश्चाताप तोह में करुँगी hi. पर... ऐसे पेश न आओ वीर... प्लीज! मुझे... मुझे अच्छा नहीं लगता है.

वीर : अस ी साइड... I'll तरय एंड... No प्रॉमिसेस.

उसकी बात सुन्न रागिनी अपना निचला होंठ दातो टेल दबाये उससे देखती है. वीर का उससे माफ़ कर देना शायद अभी बोहत दूर था. पर वो अपना प्रयास करती रहेगी. एक न एक दिन वीर उससे माफ़ ज़रूर करेगा.

यही आस लिए वो अपने चेहरे से चिंता के भावो को हटाते हुए उस से बोली,

"अच्छा चलो! बैठो! मेने आज ब्रेकफास्ट में सैंडविचेज़ बनाये है."

नाश्ता बनाने में तोह रागिनी का कोई जवाब नहीं था. खाना भी वो बेहद अच्छा बनाती थी पर वीर को याद है, सबसे अच्छा खाना उसके घर में उसकी चची सुमित्रा और उसकी सौतेली माँ, श्वेता hi बनाती थी. श्वेता तोह होटल की मालकिन थी. न जाने कितनी डिशेस वो जानती थी.

उसकी बहिन भूमिका भी खाना बनाने की रेस में शामिल थी पर यदि श्वेता और सुमित्रा से कपड़े किया जाए तोह भूमिका काफी पीछे थी अभी. न चाहते हुए भी वीर को घर के खाने का स्वाद याद आ गया.

पर वो जानता था. उस घर में उसकी अब कोई जगह नहीं है और न hi वो खुद अब जाना चाहता था वापस.

वो इस वक़्त दिन गुजरने के बाद डिनर करते हुए अपने रूम में आ चूका था और लेत के अपने फ्यूचर के बारे में सोच रहा था की अचानक hi उसका फ़ोन विबरते हुआ और उसने मैसेज चेक किया.

उसने देखा की किसी अननोन नंबर से मैसेज आया हुआ है. जैसे hi चाट खोली उसमे कुछ मेस्सगेस डेल हुए थे.

Hi वीर!

ी क्नोव तुम्हारे अंदर धीर सारे क़ुएस्तिओन्स है.

बूत प्लीज, में तुमसे एक बार और मिलना चाहती हु.

ी होप तुम आओगे!

कल क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स होटल में. प्लीज!

मैसेज करने वाली और कोई नहीं बल्कि जानी मानी लेडीज में से एक थी, सोनिआ.

सोनिआ ने ुपत के उससे मैसेज किया था. ये बात चौंका देने वाली थी.

'जस्ट... व्हाई डस शी वांट्स तो मीट में अगेन!? उनके पास इतना पैसा है उसके बाद मुझ जैसे आम से लड़के के पीछे क्यों पड़ी हुई है वह!? ी don't गेट आईटी. एंड तहत होटल... सहित!'

[You cannot turn her down master like that. Wo ek badi hasti hai. Abhi tak jitne bhi logo ko aap jaante ho unme se. So aapko jaana padega.]

'दमन आईटी!'

और मजबूरन वीर को मिलने के लिए राज़ी होना पड़ा.

आज का दिन बस यही गुज़रा. वीर कॉलेज नहीं गया था. उसने जैसे अब डीडे कर लिया था की क्या करना है.

***

अगली सुबह जब वो नीचे आया तोह उससे रागिनी कही दिखाई नहीं दी. वो किचन में आया तब भी रागिनी की कोई झलक न मिली उससे.

पर अभी जैसे hi वो पलटने वाला था की तभी...

अचानक से उसकी आँखों के सामने अँधेरा छ गया. दो मखमल से कोमल हाथो का स्पर्श उसकी आँखों पर हुआ. और अगले hi पल दो बड़ी hi सॉफ्ट सी चीज़े उसकी पीठ पर आके डब्ब गयी.

और वीर को समझने में देरर न लगी की वो क्या थी.

और ये परखने में भी देरर नहीं लगी की उसकी आँखें बंद करे उसके पीछे कौन खड़ा हुआ था.

रागिनी उसके पीछे उसकी आँखें अपने हाथो से बंद किये उस से एकदम चिपक के कड़ी हुई थी. जिसके चलते उसके स्तन एकदम वीर की पीठ में जाके धस्स चुके थे.

उन् निप्पल्स का एहसास वीर को भली भाति उसकी पीठ पर हो रहा था. और न चाहते हुए भी उसके लुंड ने एक झटका मार hi दिया.

और क्यों न मारता!? वीर अब वर्जिन नहीं था. एक बार लड़की के यौवन का स्वाद चख लेने के बाद तोह अब उसमे जैसे और भी आग जाग चुकी थी. न जाने कब से उसने सेक्स नहीं किया था. और ऐसे में ये छोटे छोटे हमले न चाहते हुए भी उससे अपनी hi भाभी के प्रति ऐसा रिएक्शन देने पर मजबूर कर रहे थे.

"गुड मॉर्निंग वीर! ी हैवे ा सरप्राइज फॉर यू!"

रागिनी की मनमोहक आवाज़ उसके कानो में पड़ी, उसके हाथ एकदम गर्म थे या यु कहे की वो खुद hi आग का शोला थी. अभी अभी कुछ देरर पहले hi वो नाहा के बाहर आयी थी जिसके चलते उसके गीले बालो और उसके बदन से आती वो उत्तेजित कर देने वाली सुगंध वीर की नाक में पद रही थी.

वीर को इस वक़्त खुद पे शर्मिंदगी हो रही थी क्युकी वो अरूसेड फील कर रहा था. इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी. गलती तोह रागिनी की भी नहीं थी. बस सिचुएशन की थी.

"बह... भाभी!?"

थोड़ा ावक्वार्डली उसने जवाब दिया. वो एकदम स्टिफ खड़ा हुआ था. रागिनी के हाथो का और पीछे उसके दो ामो का स्पर्श उससे पागल कर रहा था.

वो धकेलते हुए उससे बाहर ले जाने लगी,

वीर : बह... भाभी!? कहा ले जा रही हो!?

वो चाहता तोह था की इसी वक़्त उसके हाथो को हटा दे पर ऐसा करने के लिए उससे रागिनी के हाथो को थामना पड़ता और शायद अभी उसमे इतनी हिम्मत नहीं थी और ये शायद सही भी नहीं था.

कुछ hi पालो में वीर रागिनी के द्वारा बाहर आ चूका था और थोड़ी देरर में hi रागिनी ने अपने उसकी आँखों से अपने हाथ हटाए और वीर को सामने का नज़ारा नज़र आया.

सामने देखते hi उसकी आँखें धीरे धीरे आश्चर्य के मारे फैलती गयी.

उसके सामने पोर्च में एक बेहद hi नयी अपाचे रत्र कड़ी हुई थी. एकदम नयी.

वीर : ये!??

रागिनी : मेने मंगवाई है. तुम्हारे लिए. मेरी तरफ से तुम्हारे लिए गिफ्ट है वीर. कल तुमने कहा था न!? तुम्हारे पास कोई व्हीकल नहीं है. और किसी होती!? घर से तुम... कुछ भी लेके नहीं गए थे. इसलिए, परसो मेने डैड से कह के उनके शोरूम से... ये मंगवाई है. कई... कैसी है वीर!? तुम्हे पसंद तोह आयी न!?

वीर की बोलती बंद हो चुकी थी. इतना बड़ा तोहफा आज तक उससे किसी ने नहीं दिया था. पर अभी वो खुश नहीं था. बल्कि दुविधा में था. की भला रागिनी उसके लिए इतना क्यों कर रही है और दूसरी बात की भला उससे ये गिफ्ट एक्सेप्ट करनी चाहिए या नहीं!?

रागिनी (चिंता में) : क्या तुम्हे पसंद नहीं आयी वीर!?

वीर : ी... ी don't थिंक की... मुझे ये रखना चाहिए.

अभी शब्द उसके मुँह से निकले hi थे की रागिनी ने जोरर से उसका हाथ थाम लिया.

वीर (सुरप्रीसेड) : हँ!?

रागिनी : प्लीज don't से तहत वीर. प्लीज! आज तक घर में तुम्हारा b'day सेलिब्रेट नहीं किया गया था. आज भले hi तुम्हारा b'day न हो. पर आने hi वाला है राइट!? सो, अस ान एडवांस गिफ्ट hi समझ लो!? आज तक मेने तुम्हे तुम्हारे b'day पर कोई गिफ्ट न दिया. इन फैक्ट तुम्हारे b'day में मौजूद तक नहीं रहती थी तुम्हारे आस पास. उन् सब बातो को याद करके hi... ी फील सो... सो बाद... वीर! रोना आता है मुझे. प्लीज! एक्सेप्ट थिस. ये मेरे डैड की तरफ से भी है. उस दिन तुमने उनकी जान भी बचाई थी वीर. यदि मेरी नहीं sunn'na तोह काम से काम उनकी तोह सुन्न लो.

वीर : ी...

[Accept it master.]

'एक्सेप्ट आईटी!? पेट्रोल क्या तुम्हारे चाचा आके डलवाएंगे पारी!?'

रागिनी : एंड पेट्रोल की चिंता मत करना वीर. तुम्हारे लिए, टैंक विल ऑलवेज बे फुल. में सर्वेंट से कहके भरवा दूंगी. उसे आईटी अकॉर्डिंग तो योर नीड. तुम्हे काम आएगी वीर. प्लीज एक्सेप्ट आईटी.

[Hahaha~ Ye lo. Ho gaya kaam.]

'दमंत्र!!'

रागिनी का चेहरा और वो आँखें जो किसी भी वक़्त ासु बहाने के लिए रेडी थी, वो देखते हुए फाइनली वीर ने एक आह भरी और बोलै,

"फाइन! मुझे वैसे hi आज कही जाना था. एंड... थैंक यू! आपको भी और... आपके डैड को भी."

रागिनी को पता नहीं क्या हुआ पर अगले hi पल वो इतनी खुश हो गयी की वो वीर की छथि में कूद पड़ी और उसके जोरर से गले लग गयी.

एकदम स्तब्ध वीर वही खड़ा रहा, न कुछ कर सका और न कुछ बोल सका. पर रागिनी बिना कुछ रीलीज़ किये की अभी अभी उसने क्या किया, वो नाश्ता बनाने का बोल अंदर चली गयी.

दिन का समय हुआ और वीर रेडी था होटल जाने के लिए. सोनिआ से उसने मिलने का कह के जो रखा था. अब जाना तोह पड़ेगा hi.

अपनी नयी बाइक उठाये वीर निकल पड़ा होटल की तरफ.

आज कितने दिनों बाद उससे कोई बाइक चलाने का मौका मिल रहा था. खुश तोह था वो अंदर से पर और भी ख़ुशी होती यदि ये बाइक उसके अपने पैसो की होती.

कोई बात नहीं, जल्द hi वो अपनी बाइक भी लेगा.

ऐसा सोच वो कुछ hi देरर में पहुँच चूका था होटल के सामने.

बाइक को पार्किंग में लगा कर वो अंदर जाने के लिए रेडी था पर अभी भी उसके कदम रुके हुए थे.

अंदर जाने से वो कटरा रहा था.

एक गहरी सास लेते हुए वो फाइनली अंदर गया.

होटल बेहद hi शानदार थी. और अंदर घुसते hi उससे साइड वाले एरिया में सोनिआ बैठी हुई नज़र आ गयी.

वो एरिया थोड़ा महंगा एरिया था. जहा बैठने के लिए ज़्यादा पैसे देने पड़ते थे.

अभी वो अंदर जाने hi वाला था की दूर पे hi कड़ी एक लेडी ने उससे रोक दिया.

लेडी : सर! योर रिजर्वेशन!?

वीर : रिजर्वेशन!?

लेडी : यस! सर! थिस इस ा स्पेशल एरिया. यू मस्ट हैवे ा रिजर्वेशन तो एंटर हेरे. दो यू हैवे आईटी!?

वीर : ी...

लेडी : सॉरी सर! िफ़ यू don't हैवे आईटी. वे can't अल्लोव यू तो एंटर.

वो लेडी मुस्कुराते हुए उससे देखि. पर उसकी मुस्कान जैसे बया कर रही थी की साले औकात में आया करो. जब औकात नहीं है तोह क्यों घुस रहे हो!?

कुछ ऐसे hi शब्द उसकी मुस्कान बया करना चाह रही थी जिससे वीर भांप चूका था.

वो अभी पलट के जाने hi वाला था की किस्मत से सोनिआ की नज़र उस पे पड़ी और वो फौरन hi उठ के दूर की तरफ आयी,

लेडी : सर! प्लीज लीव...

वीर : फाइन!

वीर पलट चूका था जब अचानक उसके कानो में आवाज़ पड़ी,

"वीईईएररर!"

और पलट के देखा, तोह सोनिआ उसके सामने थी.

सोनिआ : अंदर क्यों नहीं आ रहे है!?

वीर : वेल! शी टोल्ड में ी can't... एंड टोल्ड में तो लीव सो...

सोनिआ (सुरप्रीसेड) : शी टोल्ड यू व्हाट!??

अब बेचारी उस लेडी की पहात रही थी. उससे पता था की आगे क्या होने वाला था.

सोनिआ : मेने तुमसे कुछ देरर hi पहले कहा था न!? ा जेंटलमैन मई के अन्य्तिमे एंड यू हैवे तो रइवे हिम. क्या ऐसे hi ऑर्डर्स फॉलो करती हो? शुड ी कम्प्लेन और व्हाट!?

लेडी : I'm सो सॉरी! Ma'am! I'm सो सॉरी! मुझे लगा था कोई...

कहते हुए वो वीर के कपड़ो की तरफ देखि जो केवल एक सिंपल वाइट शर्ट और ब्लू जीन्स में था.

और उसने जैसे hi सोनिआ को देखा तोह डर के मारे उसकी नज़रे नीचे हो गयी.

सोनिआ भांप चुकी थी की वो लेडी क्या कहना चाह रही थी. उससे अभी इतना तेज़्ज़ गुस्सा आ रहा था पैर जैसे तैसे उसने खुद को कण्ट्रोल किया.

सोनिआ : रेमेम्बेर! कपड़ो से आदमी की पहचान नहीं होती समझी!? यू don't इवन क्नोव हु हे इस. He's माय बेनेफैक्टर. और अहिंदा से... यहाँ के स्टाफ में से किसी ने भी मेरे गेस्ट के साथ इस तरह बेहवे किया न... I'll सूए थम.

लेडी : I'm सॉरी! Ma'am! I'm रियली सॉरी!

सोनिआ : हम्फ! वीर! आओ...

वो वीर को अपनी टेबल के पास ले गयी. बैठते हुए उसने अपना कॉफ़ी का मग उठाया और वीर को आर्डर करने के लिए कहा.

पर वीर ने कुछ भी आर्डर न किया.

सोनिआ : यहाँ की कॉफ़ी अच्छी है वीर. इसलिए यहाँ अक्सर आती रहती हु.

कहते हुए उसने एक झलक वापस से उस लेडी को देखा और अपनी कॉफ़ी पीने लगी.






वीर : ी... ी सी! तोह!? किस लिए बुलाया है आपने!? यदि फिरसे वही पैसे...

सोनिआ : नूवो वीर!! ऐसा कुछ भी नहीं है..

असल में...

पर अभी वो अपनी बात कह पाती उसके पीछे से एक आवाज़ आयी,

"सॉरी! Ma'am! में आपको पर्सनली रइवे करने नहीं आ पायी. वेलकम तो आवर होटल अगेन."

एक जानी मानी आवाज़ वीर के कानो में पड़ी. और जिस बात से वो अंदर आने के लिए कटरा रहा था आखिर वो हो hi गयी.

पीछे एक बेहद hi ख़ूबसूरत लड़की कड़ी हुई थी. उसने सोनिआ को देख मुस्कुराते हुए उसका स्वागत किया. पर जैसे hi उसकी नज़रे सोनिआ के साथ बैठे शख्स पर गयी पहले तोह वो कुछ पल उससे देखि और फिर उसकी आँखें असिचार्य के मारे फेल गयी.

वीर (मैं में) : भूमिका... दी...

भूमिका (मैं में) : व्... वीईएर!!!???

दोनों एक दूसरे को देख रहे थे. वीर के चेहरे पे जहा कोई भाव नहीं थे तोह वही भूमिका एकदम स्तब्ध सी कड़ी उससे hi देख रही थी. सबसे पहला सवाल मैं में यही था. क्या ये वही वीर है!?

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आज के लिए इतना hi गाइस!

धन्यवाद!


Don't फॉरगेट तो लिखे.
 
थोड़ी देरर में आएगा. थोड़ा सा काम बचा है. जैसे hi कम्पलीट होता है I'll पोस्ट आईटी. वेट टिल थें.
 
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