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अभ अग्गे...
रवि और ख़ुशी , दानवी सेना से घिर चुके थे , दानवी सेना , जिनके पास दिल तोह था hi नै , बेरहम , दरिंदे , यह कच्चे मास्स को नोच नोच कर कहते थे ,

इनके तीन हाथ थे , पहले सबसे बड़े , फिर उससे छोटे और फिर कमर के पास सबसे छोटे , यह 6 हाथो वाले दानव किसी जानवर की तरह भागते थे , अजीब अजीब आवाज़ों में चीखते हुए ,

यह किसी शिकारी कुत्तो की तरह , अपने शिकार को झुंड में घेर कर , उसे नोच नोच कर उसकी जान ले लेते थे , बेहद वहशी , और दरिंदगी के साथ ,
दानवी सेना बोलती नै थी , यह जानवर थे , इनकी भूक कभी मरती नै थी , जितना मास्स कहते , उतना और खाने की लालसा बढ़ती जाती ,
यह जेनिथ की सेना थी , रवि यानि के प्रिंस सोनिक का सुटला भाई , जेनिथ जो रूही को पाने के लिए , किसी भी हद तक जा सकता था ,
जब से जेनिथ को पारी लोग से निकला गया था , तब से जेनिथ इस दानवी लोग का देवता बन गया था , जेनिथ की ीचा से यह दानवी सेना , अलग अलग दुनियिओं में जाकर कत्लेआम मचती थी ,
"rr...raviii ...mm...muze...bb..bacha..ll...lo.." ख़ुशी ने दर से कंपते हकलाते हुए बोलै , क्यों की दानवी सेना गुस्से से चीखती हुई , उनकी तरफ धीरे धीरे अग्गे बढ़ रही थी ,
रवि ने ख़ुशी को अपने से दूर किया और उसकी आँखों में देख बोलै ,
"ख़ुशी कन्या , हम नै जानते , अप्प , हमारी तामस हो या नै , अभ आपको लड़ना होगा , हम इनसे आपको नै बचा सकते , अभ आपको अपने विस्तार उतरने hi होंगे , इनकी संख्या बहुत अधिक है , हम लड़ते लड़ते आपको बचा नै पाएंगे..." रवि ने बेहद उदास आवाज़ में बोलै ,
"प्रिंस , mm....main इक आम लड़की हु , मेरे वस्तारु के निचे कुछ नै , मतलब है , पर उसमे कोई शक्ति नै है , अप्प hi मुझे बचा लो , प्लस..." ख़ुशी ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,
"ख़ुशी कन्या , हमारी बात सुनो , अप्प कमज़ोर नै हो , अप्प तामस हो , मदिरा में डूबी , बेहद कहकर तामस , अप्प बेहद नेकदिल भी हो , अप्प किसी को अपने हाथो से मर कर , बाद में उसे मदिरा (शराब) पिलाती थी , अप्प तामस हो , खुद को पहचानो..." रवि ने बेहद तेज़ आवाज़ में बोलै ,
अभ दानवी सेना भी रुक कर उनकी बतिअन सुन रही थी ,
"यह मक तामस कोण है , में पागल हो गई हु , और तू सेल लुटर आशिक़ , तू कहा से प्रिंस बन गया , मेरा तोह जीना मुश्किल कर दिया है ..." ख़ुशी ने गुस्से में छीलते हुए बोलै ,
"ख़ुशी कन्या , यह वाणी का जो प्रयोग अप्प कर रही हो , यह उचित नै है , इसका दंड मिलेगा आपको ..."
"आअह्ह्ह्हह , मुझे दारू दो , मदिरा दो मुझे , में पाक चुकी हु , तुम्हारी बतिअन सुन सुन कर , मदिरा दो , वार्ना , में अपने विस्तार नै उतरूंगी..." ख़ुशी ने बेहद गुस्से में अपने पेअर पटक कर बोलै ,
"यह लो मदिरा , यह पारी लोग की खास मदिरा है ..." रवि ने अपनी आँखें बंद कर खोली तोह उसके हाथ में मदिरा का बड़ा सा पियाला ा गया ,
ख़ुशी ने बिना कुछ बोले जल्दी से वोह मदिरा से भरा पियाला , रवि के हाथो से चीन और इक hi साँस में वोह इक बोतल जितना भरा पियाला पे गई ,
कुछ hi देर में ख़ुशी की आँखें नशे में और नशीली हो गई , वोह अभ नशे में झूमने लगी , और रवि की तरफ प्यार से देखने लगी ,
"उम्म्म , अभ जेक ाचा लग रहा है , बस पका दिया था , कभी अँधेरी दुनिआ , कभी जादुई जंगल , कभी दानवी लोग , अभ ायो तुम सब , इक इक को देख लुंगी ..." ख़ुशी ने दानवी सेना के करीब जाते हुए बोलै ,
वोह नशे में लड़खड़ा रही थी , तभी प्रिंस ने उसे रोका ,
"ख़ुशी कन्या , रुक जाओ..."
दानवी सेना ख़ुशी की बात सुन और भी गुस्से में चखने लगी , उनका शोर बेहद ब्यांक था ,
"चुप्प्प , क्या केएनन केईणं लगा रखा है , मुज़से लड़ना चाहते हो , जाओ पहले , प्रिंस से लाडू , अगर इक बाप की ालूड हो , तोह पहले प्रिंस को हरा दो , फिर मुज़से लड़ना , अगर सोडा मंज़ूर है तोह जोर से चिलयो..." ख़ुशी ने नशे में जुटे चीखते छीलते हुए बोलै , जैसे कोई सेनापति अपनी सेना को लड़ने के लिए उत्तेजित कर रहा हो ,
"ख़ुशी कन्या , उनको कुछ समाज नै आएगा..." अभी रवि बोल hi रहा था , के दानवी सेना जोर जोर से छिलने लगी , और ख़ुशी को छोड़ रवि की तरफ बढ़ने लगी ,
"रुकोऊ साबबबबहहह.." ख़ुशी ने जोर से छीलते हुए बोलै , तोह दानवी सेना रुक गई ,
"प्रिंस , इक और मदिरा प्लसस..." ख़ुशी ने बड़ी मासमोइयत से बोलै ,
"यह तामस भी न..." रवि ने आँखें बंद कर इक और बड़ा पियाला मदिरा का ख़ुशी को दे दिया , साडी दानवी सेना ख़ुशी को देख रही थी ,
"खड़े खड़े मेरा मोह क्या देख रहे हो , लड़ो प्रिंस से , जोऊ..." ख़ुशी ने चीखते हुए बोलै तोह दानवी सेना प्रिंस सोनिक पर टूट पढ़ी ,
"ख़ुशी कन्या , मरवा दिया अपने तोह..." रवि ने थोड़ा गुस्से में बोलै , क्यों की दानवी सेने अभ उसके बेहद करीब थी , वोह भूके कुत्तो की तरह , उसे काटने , नोचने के लिए त्यार थे ,
दानवी सेना ने जैसे hi रवि पर छलांग लगाई , रवि निचे बेथ गया , उसके पंखो ने उसे पूरी तरह से कवर कर दिया ,
दानवी सेना सीधा रवि के पंखो पर गिरी , और उसके पंखो को दांतो से काटने लगी ,
"याह्ह्हह्हह्ह्ह्ह..." रवि जोर से चिलता हुआ इक डैम से उठ खड़ा हुआ , जो दानवी सेना , उसके ऊपर बैठी थी , वोह उड़ती हुई दूर जा गिरी , पर इससे दुसरो पर कोई फरक न पढ़ा ,
वोह संख्या में 100 से जायदा थे , यह सेना यहाँ दानवी लोग की सीमा पर पहरा दे रही थी , तभी इनकी नज़र रवि और ख़ुशी पर पढ़ गई थी ,
"ीीिन्न्नन्नम , ीेईनंनंन्न..." दानवी सेना जोर से चीखती हुई रवि पर जपत पढ़ी , रवि भी त्यार था ,
रवि तेज़ी से गोल गोल घूमने लगा , उसकी पंख जो बेहद नोकीले थे , वोह किसी बड़े से पंखे की तरह घूमने लगे ,
दानवी सेना अग्गे बढ़ती , और रवि के पंखो से टकरा , दूर गिरती जा रही थी , रवि के नोकीले ब्लेड जैसे तीखे पंखो ने दानवी सेना के अंगु को काटना सुरु कर दिया , किसी का सार काट गया , किसी के हाथ , किसी को बेच से चीयर दिया , हर तरफ हाहाकार मच चुकी थी , हर तरफ खून hi खून पसरा हुआ था ,
कुछ hi पलु बाद , जब रवि घूमता हुआ रुका , तब वोह इक घुटना जमीन पर टिकए बेथ गया , और घुटने पर हाथ रख तेज़ तेज़ हाफने लगा ,
रवि के as-pas दानवी सेना पढ़ी हुई थी , कुछ सेना मर चुकी थी और कुछ अपने कटे अंगु के तेज़ दर्द से कराह रही थी ,
वही ख़ुशी मदिरा का पियाला हाथ में लिए आँखें फाडे , मोह खोले रवि को देख रही थी , वोह अचंबित हो चुकी थी ,
"वह , प्रिंस जी , वह , मज़ा ा गया , अभ मुझे घर छोड़ दो , जल्दी..." ख़ुशी ने मदिरा के दो तीन सिप लेते हुए बोलै , अभ वोह काफी नशे में थी ,
"ओह्ह्ह , ख़ुशी कन्या , अप्प ठीक तोह है , वैसे हमें क्यों मरवाना चाहती थी , हम प्रिंस है , और तुम अंगरक्षक , तुम हमारी रक्षा करनी थी ..." रवि ने उठ कर ख़ुशी के करीब एते हुए बोलै ,
"वोह क्या है , प्रिंस जी , मेरे विस्तार नै उतर रहे , अभ अप्प hi उतर दो , हीछ्हक्क , अप्प मेरे विस्तार उतरो , हिच्छ्ककक , फिर में आपको ऐसी शक्ति दिखाउंगी , आपके होश उड़द जायेगे , हिच्छ्ककक , उतरो मेरे विस्तार...." ख़ुशी ने मदिरा का पियाला इक hi साँस में ख़तम कर बोलै , अभ वोह बेहद नशे में थी , बिलकुल बेसुध हालत में , और बार बार हिचकियाँ ले रही थी ,
"ओह्ह हो , ख़ुशी कन्या , अप्प हमारे साथ चलो , इससे पहले और दानवी सेना ा जाये , और आपके विस्तार अप्प hi उतर सकती हो , हम नै..." रवि ने अभ अग्गे चलते हुए बोलै , अभ ख़ुशी भी लड़खड़ाते हुए उसके साथ साथ चल रही थी ,
"मादरचोद , पृथ्वी पर , तोह मेरे बोलने से पहले कपडे उतर देता था , अभ देखो शराफत का पुतला बना हुआ है , हूउउ , इक बार घर जाने दो , फिर इसकी प्रिंस गिरी निकलूंगी..." ख़ुशी ने मन hi मन बेहद गुस्से में बोलै ,
अभ रवि और ख़ुशी दानवी लोग की सीमा को पर कर काफी अंदर ा चुके थे , अभ वोह वेरियन सा मदिआं ख़तम होने लगा था , अभ उसकी जगह छोटे छोटे पहाडू ने ले ली थी ,
यह आखरी लोग था , इस लोग के आखिर पर , दो दरवाजे थे , इक दरवाजा , रवि और ख़ुशी को वापिस पृथ्वी पर ले जाता , और उसके साथ वाला दरवाजा नाराज लोग में कोमल के पास ले जाता ,
असल बात यह थी के रवि को कोमल यद् नै थी , वोह पारी लोग जाना चाहता था , पर पारी लोग तोह सदियों पहले hi पत्थर बन चूका था ,
पारी लोग तब तक पत्थर का रहता , जब तक पारी लोग की मलिका , राज सिंघासन पर न बेथ जाती , पारी लोग की मलिका रूही थी , पर अकेले रूही के बैठने से कुछ न होता , उसके साथ सुहाना , सोनिक और उनकी तीसरी बहिन को भी बैठना पढता , जो खो गई थी ,
मतलब अगर रवि दूसरे दरवाजा में घुसता तोह वोह पारी लोग ने पहुँच पता , वोह सीधा पृथ्वी पर पहुँच जाता , बिना कोमल को लिए , लेकिन कोमल को लेजाना बेहद जरुरी था , क्यों इसके बाद , रवि कभी भी इस दुनिआ में न ा पता ,
अभ यह किस्मत के हाथो में था , रवि नाराज लोग जाता या वापिस पृथ्वी लोग , अभ कोमल और रवि के प्यार की अग्नि परीक्षा थी , क्या बिना किसी की यादिओं के उस तक पहुंचा जा सकता था ,
पृथ्वी पर 2 महीने बीत चुके थे , क्यों की इक दिन पूरा कर लिया था रवि और ख़ुशी ने , ख़ुशी तोह अभ नशे में जयंती हुई , मस्ती कर रही थी ,
"ख़ुशी कन्या , अभ हम इस दानवी लोग के बेच पहुँच चुके है , जल्दी hi ें दानवी लोग की बस्तियां सुरु हो जाएगी , हमें उनसे बच कर निकलना होगा , कही हम जेनिथ के हाथ लग गए , तोह फांसी पर लटका देगा..." रवि ने तेज़ तेज़ चलते हुए बोलै , हल्का हल्का अँधेरा था , पर तारो की रौशनी में दोनों अग्गे बढ़ रहे थे ,
"हिचक्क्क , जेनिथ , यह साला ठरकी कोण है , हिचकककक , और तुम यह रूही का जप करना बंद करो , हिचककककक , और मुझे गॉड में उठाओ , हिचकककक , में थक गई हु..." ख़ुशी ने हिचकियाँ लेते हुए बोलै , वोह बार बार रवि के ऊपर गिर रही थी ,
"ख़ुशी कन्या , अप्प ऐसा hi करती हो , पहले अप्प मदिरा का सेवन करती हो , फिर हमें परेशान करती हो , हमें तोह यह समाज नै अत , अप्प हमारी अंगरक्षक हो या हमारी दुश्मन..." रवि ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,
"जाओ बढ़ में , नै जाना मुझे , में यही बेठुंगी , तुम समज़ते क्या हो खुद को , प्रिंस , हिचककककक , तुम इक नंबर के ठरकी आदमी हो , हिचककककक , जो 10-10 लड़कियाँ लेकर घूमता है , हिचकककककक , दफा हो जाओ ..." ख़ुशी ने हिचकियाँ लेते हुए वही जमीन पर बैठते हुए बोलै ,
"उफ्फ्फ ओह्ह्ह , ख़ुशी कन्या , यह क्या जिद्द है , हमारी hi गलती थी , जो तुम मदिरा का रसपान करवा दिया , अभ चलना है , या हम जाये , वार्ना वोह दानवी सेना अभी आकर , तुम बिना पकाये , कच्चा खा जाएगी..." रवि ने रुक कर पीछे पलटते हुए ख़ुशी से बोलै ,
"हिचकककक , सच में..." ख़ुशी ने थोड़ा डरते हुए बोलै ,
"हाँ..."
रवि का इतना hi बोलना था के ख़ुशी भाग कर उसके पास ा गई और मुस्कराते हुए चलने लगी , फिर वोह इक डैम से घूमी और रवि के होंठो को कास कर चुम लिया ,
"यह क्या पागलपन है ख़ुशी कन्या , तुम क्यों बहक रही हो , हम बस रूही से प्रेम करते हैं , तुम यह बात जानती हो..." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै ,
"हिचकककक , पृथ्वी पर भी तुम कोमल से प्यार करते हो , हिचककककक और साथ में मुज़से भी , मने अपने रवि को चूमा है , न के किसी अकड़ू प्रिंस को..." ख़ुशी ने थोड़ा चिढ़ते हुए बोलै ,
फिर रवि कुछ नै बोलै , दोनों अग्गे बढ़ते गए , अभ वोह उस जगह पहुँच चुके थे , यहाँ सामने इक बेहद विशाल जंगल था , ऐसी जंगल में जेनिथ का महल था , वोह खौफनाक और ब्यांक महल , जिसके किस्से पोरे ब्रह्माण्ड में मशहूर थे ,
"हिचकककक , यहाँ कितनी गर्मी है , उफ्फ्फ..." ख़ुशी ने इतना बोलते हुए अपनी कमर से अपना टॉप उठा , उसे उतर दिया ,
उफ़ ख़ुशी का लाजवाब दूध जैसा बदन , तारो की हलकी हलकी रौशनी में चमक उठा , काली ब्रा में कैद उसके बड़े बड़े खूबसूरत बूब्स , उसके अंगड़ाई लेने से , और भी दिलकश और हसन लगने लगे ,
उसके मोठे मोठे बूब्स पर उसकी काली ब्रा , बेहद कासी हुई लग रही थी , बूब्स के बेच की गहरी दरार , ख़ुशी के लाजवाब , नशीले हुसैन को देख रवि जैसे मदहोश सा हो गया ,
"ख़ुशी कन्या , अप्प विस्तार क्यों उतर रही हो..." रवि ने मदहोश सा हुए बोलै ,
"हिचककककक , मुझे अपनी शक्ति देखनी है , हिचकककककक तुम क्यों इतना घबरा रहे हो..." ख़ुशी ने अपनी ब्रा के ऊपर से hi अपने गदराये बूब्स पर हाथ फिरते हुए बोलै ,
अभी रवि कुछ बोलने hi जा रहा था , के पढ़ो के पत्ते हिलने लगे , जैसे कोई तूफान ा रहा हो , और जो सामने आया , वोह किसी तूफान से काम नै था
पृथ्वी पर 2 महीने बाद...
रवि के घर अभ 2 महीने बीत चुके थे , रवि की बहनो ने अभ हालातो के अग्गे घुटने तक दिए थे , जिंदगी की गाड़ी , धीरे hi सही , पर अग्गे चल पढ़ी थी ,
शूरति और रिमी अभ इक दूसरे के बेहद करीब ा चुकी थी , दोनों इक साथ रहती , इक साथ खाना कहती , उनकी जिंदगी में अभ जैसे इक दूसरे के बिना कोई नै था ,
यह बात नै थी के वोह रवि को भूल गई , रवि तोह उनकी जिंदगी का हम हिस्सा था , दिल टुटा था , अभ पत्थर सी हो गई थी ,
शूरति ने रिमी को सम्बल लिया और रिमी ने शूरति को , वोह कई बार पिछली बातिओं को यद् कर मुस्करती और फिर रोने लगती , कभी कभी उनको सीमा अजीब सी लगती , लेकिन यह भी तब होता , जब सीमा कही अकेली होती , और रिमी और शूरति उसे चुप कर देख रही होती ,
धीरे धीरे उनको एहसास हो रहा था , के वोह गलत थी , अपने भाई के दिए प्यार को यद् कर , उनको यह एहसास होने लगा , शयद उनका भाई सही था , उसको फसाया गया था ,
और इक दिन ऐसा भी आया जब दोनों ने सीमा के असली रूप को देख लिया , सीमा अपने रूम में थी , उसे लगा रिमी और शूरति ऑफिस जा चुकी है , पर तभी उसने अपना असली रूप धारण कर लिया , अभ वोह सुहाना के रूप में थी , तभी रिमी और शूरति ने उसे देख लिया , वोह दोनों सुहाना और किसी अनजान शक़श की बतिअन सुनने लगी , उसके रूम के के होल से अंदर ज़क कर.....
तो बे कुनिटेड....
अभ अग्गे...
रवि और ख़ुशी , दानवी सेना से घिर चुके थे , दानवी सेना , जिनके पास दिल तोह था hi नै , बेरहम , दरिंदे , यह कच्चे मास्स को नोच नोच कर कहते थे ,

इनके तीन हाथ थे , पहले सबसे बड़े , फिर उससे छोटे और फिर कमर के पास सबसे छोटे , यह 6 हाथो वाले दानव किसी जानवर की तरह भागते थे , अजीब अजीब आवाज़ों में चीखते हुए ,

यह किसी शिकारी कुत्तो की तरह , अपने शिकार को झुंड में घेर कर , उसे नोच नोच कर उसकी जान ले लेते थे , बेहद वहशी , और दरिंदगी के साथ ,
दानवी सेना बोलती नै थी , यह जानवर थे , इनकी भूक कभी मरती नै थी , जितना मास्स कहते , उतना और खाने की लालसा बढ़ती जाती ,
यह जेनिथ की सेना थी , रवि यानि के प्रिंस सोनिक का सुटला भाई , जेनिथ जो रूही को पाने के लिए , किसी भी हद तक जा सकता था ,
जब से जेनिथ को पारी लोग से निकला गया था , तब से जेनिथ इस दानवी लोग का देवता बन गया था , जेनिथ की ीचा से यह दानवी सेना , अलग अलग दुनियिओं में जाकर कत्लेआम मचती थी ,
"rr...raviii ...mm...muze...bb..bacha..ll...lo.." ख़ुशी ने दर से कंपते हकलाते हुए बोलै , क्यों की दानवी सेना गुस्से से चीखती हुई , उनकी तरफ धीरे धीरे अग्गे बढ़ रही थी ,
रवि ने ख़ुशी को अपने से दूर किया और उसकी आँखों में देख बोलै ,
"ख़ुशी कन्या , हम नै जानते , अप्प , हमारी तामस हो या नै , अभ आपको लड़ना होगा , हम इनसे आपको नै बचा सकते , अभ आपको अपने विस्तार उतरने hi होंगे , इनकी संख्या बहुत अधिक है , हम लड़ते लड़ते आपको बचा नै पाएंगे..." रवि ने बेहद उदास आवाज़ में बोलै ,
"प्रिंस , mm....main इक आम लड़की हु , मेरे वस्तारु के निचे कुछ नै , मतलब है , पर उसमे कोई शक्ति नै है , अप्प hi मुझे बचा लो , प्लस..." ख़ुशी ने थोड़ा नाम आँखों से बोलै ,
"ख़ुशी कन्या , हमारी बात सुनो , अप्प कमज़ोर नै हो , अप्प तामस हो , मदिरा में डूबी , बेहद कहकर तामस , अप्प बेहद नेकदिल भी हो , अप्प किसी को अपने हाथो से मर कर , बाद में उसे मदिरा (शराब) पिलाती थी , अप्प तामस हो , खुद को पहचानो..." रवि ने बेहद तेज़ आवाज़ में बोलै ,
अभ दानवी सेना भी रुक कर उनकी बतिअन सुन रही थी ,
"यह मक तामस कोण है , में पागल हो गई हु , और तू सेल लुटर आशिक़ , तू कहा से प्रिंस बन गया , मेरा तोह जीना मुश्किल कर दिया है ..." ख़ुशी ने गुस्से में छीलते हुए बोलै ,
"ख़ुशी कन्या , यह वाणी का जो प्रयोग अप्प कर रही हो , यह उचित नै है , इसका दंड मिलेगा आपको ..."
"आअह्ह्ह्हह , मुझे दारू दो , मदिरा दो मुझे , में पाक चुकी हु , तुम्हारी बतिअन सुन सुन कर , मदिरा दो , वार्ना , में अपने विस्तार नै उतरूंगी..." ख़ुशी ने बेहद गुस्से में अपने पेअर पटक कर बोलै ,
"यह लो मदिरा , यह पारी लोग की खास मदिरा है ..." रवि ने अपनी आँखें बंद कर खोली तोह उसके हाथ में मदिरा का बड़ा सा पियाला ा गया ,
ख़ुशी ने बिना कुछ बोले जल्दी से वोह मदिरा से भरा पियाला , रवि के हाथो से चीन और इक hi साँस में वोह इक बोतल जितना भरा पियाला पे गई ,
कुछ hi देर में ख़ुशी की आँखें नशे में और नशीली हो गई , वोह अभ नशे में झूमने लगी , और रवि की तरफ प्यार से देखने लगी ,
"उम्म्म , अभ जेक ाचा लग रहा है , बस पका दिया था , कभी अँधेरी दुनिआ , कभी जादुई जंगल , कभी दानवी लोग , अभ ायो तुम सब , इक इक को देख लुंगी ..." ख़ुशी ने दानवी सेना के करीब जाते हुए बोलै ,
वोह नशे में लड़खड़ा रही थी , तभी प्रिंस ने उसे रोका ,
"ख़ुशी कन्या , रुक जाओ..."
दानवी सेना ख़ुशी की बात सुन और भी गुस्से में चखने लगी , उनका शोर बेहद ब्यांक था ,
"चुप्प्प , क्या केएनन केईणं लगा रखा है , मुज़से लड़ना चाहते हो , जाओ पहले , प्रिंस से लाडू , अगर इक बाप की ालूड हो , तोह पहले प्रिंस को हरा दो , फिर मुज़से लड़ना , अगर सोडा मंज़ूर है तोह जोर से चिलयो..." ख़ुशी ने नशे में जुटे चीखते छीलते हुए बोलै , जैसे कोई सेनापति अपनी सेना को लड़ने के लिए उत्तेजित कर रहा हो ,
"ख़ुशी कन्या , उनको कुछ समाज नै आएगा..." अभी रवि बोल hi रहा था , के दानवी सेना जोर जोर से छिलने लगी , और ख़ुशी को छोड़ रवि की तरफ बढ़ने लगी ,
"रुकोऊ साबबबबहहह.." ख़ुशी ने जोर से छीलते हुए बोलै , तोह दानवी सेना रुक गई ,
"प्रिंस , इक और मदिरा प्लसस..." ख़ुशी ने बड़ी मासमोइयत से बोलै ,
"यह तामस भी न..." रवि ने आँखें बंद कर इक और बड़ा पियाला मदिरा का ख़ुशी को दे दिया , साडी दानवी सेना ख़ुशी को देख रही थी ,
"खड़े खड़े मेरा मोह क्या देख रहे हो , लड़ो प्रिंस से , जोऊ..." ख़ुशी ने चीखते हुए बोलै तोह दानवी सेना प्रिंस सोनिक पर टूट पढ़ी ,
"ख़ुशी कन्या , मरवा दिया अपने तोह..." रवि ने थोड़ा गुस्से में बोलै , क्यों की दानवी सेने अभ उसके बेहद करीब थी , वोह भूके कुत्तो की तरह , उसे काटने , नोचने के लिए त्यार थे ,
दानवी सेना ने जैसे hi रवि पर छलांग लगाई , रवि निचे बेथ गया , उसके पंखो ने उसे पूरी तरह से कवर कर दिया ,
दानवी सेना सीधा रवि के पंखो पर गिरी , और उसके पंखो को दांतो से काटने लगी ,
"याह्ह्हह्हह्ह्ह्ह..." रवि जोर से चिलता हुआ इक डैम से उठ खड़ा हुआ , जो दानवी सेना , उसके ऊपर बैठी थी , वोह उड़ती हुई दूर जा गिरी , पर इससे दुसरो पर कोई फरक न पढ़ा ,
वोह संख्या में 100 से जायदा थे , यह सेना यहाँ दानवी लोग की सीमा पर पहरा दे रही थी , तभी इनकी नज़र रवि और ख़ुशी पर पढ़ गई थी ,
"ीीिन्न्नन्नम , ीेईनंनंन्न..." दानवी सेना जोर से चीखती हुई रवि पर जपत पढ़ी , रवि भी त्यार था ,
रवि तेज़ी से गोल गोल घूमने लगा , उसकी पंख जो बेहद नोकीले थे , वोह किसी बड़े से पंखे की तरह घूमने लगे ,
दानवी सेना अग्गे बढ़ती , और रवि के पंखो से टकरा , दूर गिरती जा रही थी , रवि के नोकीले ब्लेड जैसे तीखे पंखो ने दानवी सेना के अंगु को काटना सुरु कर दिया , किसी का सार काट गया , किसी के हाथ , किसी को बेच से चीयर दिया , हर तरफ हाहाकार मच चुकी थी , हर तरफ खून hi खून पसरा हुआ था ,
कुछ hi पलु बाद , जब रवि घूमता हुआ रुका , तब वोह इक घुटना जमीन पर टिकए बेथ गया , और घुटने पर हाथ रख तेज़ तेज़ हाफने लगा ,
रवि के as-pas दानवी सेना पढ़ी हुई थी , कुछ सेना मर चुकी थी और कुछ अपने कटे अंगु के तेज़ दर्द से कराह रही थी ,
वही ख़ुशी मदिरा का पियाला हाथ में लिए आँखें फाडे , मोह खोले रवि को देख रही थी , वोह अचंबित हो चुकी थी ,
"वह , प्रिंस जी , वह , मज़ा ा गया , अभ मुझे घर छोड़ दो , जल्दी..." ख़ुशी ने मदिरा के दो तीन सिप लेते हुए बोलै , अभ वोह काफी नशे में थी ,
"ओह्ह्ह , ख़ुशी कन्या , अप्प ठीक तोह है , वैसे हमें क्यों मरवाना चाहती थी , हम प्रिंस है , और तुम अंगरक्षक , तुम हमारी रक्षा करनी थी ..." रवि ने उठ कर ख़ुशी के करीब एते हुए बोलै ,
"वोह क्या है , प्रिंस जी , मेरे विस्तार नै उतर रहे , अभ अप्प hi उतर दो , हीछ्हक्क , अप्प मेरे विस्तार उतरो , हिच्छ्ककक , फिर में आपको ऐसी शक्ति दिखाउंगी , आपके होश उड़द जायेगे , हिच्छ्ककक , उतरो मेरे विस्तार...." ख़ुशी ने मदिरा का पियाला इक hi साँस में ख़तम कर बोलै , अभ वोह बेहद नशे में थी , बिलकुल बेसुध हालत में , और बार बार हिचकियाँ ले रही थी ,
"ओह्ह हो , ख़ुशी कन्या , अप्प हमारे साथ चलो , इससे पहले और दानवी सेना ा जाये , और आपके विस्तार अप्प hi उतर सकती हो , हम नै..." रवि ने अभ अग्गे चलते हुए बोलै , अभ ख़ुशी भी लड़खड़ाते हुए उसके साथ साथ चल रही थी ,
"मादरचोद , पृथ्वी पर , तोह मेरे बोलने से पहले कपडे उतर देता था , अभ देखो शराफत का पुतला बना हुआ है , हूउउ , इक बार घर जाने दो , फिर इसकी प्रिंस गिरी निकलूंगी..." ख़ुशी ने मन hi मन बेहद गुस्से में बोलै ,
अभ रवि और ख़ुशी दानवी लोग की सीमा को पर कर काफी अंदर ा चुके थे , अभ वोह वेरियन सा मदिआं ख़तम होने लगा था , अभ उसकी जगह छोटे छोटे पहाडू ने ले ली थी ,
यह आखरी लोग था , इस लोग के आखिर पर , दो दरवाजे थे , इक दरवाजा , रवि और ख़ुशी को वापिस पृथ्वी पर ले जाता , और उसके साथ वाला दरवाजा नाराज लोग में कोमल के पास ले जाता ,
असल बात यह थी के रवि को कोमल यद् नै थी , वोह पारी लोग जाना चाहता था , पर पारी लोग तोह सदियों पहले hi पत्थर बन चूका था ,
पारी लोग तब तक पत्थर का रहता , जब तक पारी लोग की मलिका , राज सिंघासन पर न बेथ जाती , पारी लोग की मलिका रूही थी , पर अकेले रूही के बैठने से कुछ न होता , उसके साथ सुहाना , सोनिक और उनकी तीसरी बहिन को भी बैठना पढता , जो खो गई थी ,
मतलब अगर रवि दूसरे दरवाजा में घुसता तोह वोह पारी लोग ने पहुँच पता , वोह सीधा पृथ्वी पर पहुँच जाता , बिना कोमल को लिए , लेकिन कोमल को लेजाना बेहद जरुरी था , क्यों इसके बाद , रवि कभी भी इस दुनिआ में न ा पता ,
अभ यह किस्मत के हाथो में था , रवि नाराज लोग जाता या वापिस पृथ्वी लोग , अभ कोमल और रवि के प्यार की अग्नि परीक्षा थी , क्या बिना किसी की यादिओं के उस तक पहुंचा जा सकता था ,
पृथ्वी पर 2 महीने बीत चुके थे , क्यों की इक दिन पूरा कर लिया था रवि और ख़ुशी ने , ख़ुशी तोह अभ नशे में जयंती हुई , मस्ती कर रही थी ,
"ख़ुशी कन्या , अभ हम इस दानवी लोग के बेच पहुँच चुके है , जल्दी hi ें दानवी लोग की बस्तियां सुरु हो जाएगी , हमें उनसे बच कर निकलना होगा , कही हम जेनिथ के हाथ लग गए , तोह फांसी पर लटका देगा..." रवि ने तेज़ तेज़ चलते हुए बोलै , हल्का हल्का अँधेरा था , पर तारो की रौशनी में दोनों अग्गे बढ़ रहे थे ,
"हिचक्क्क , जेनिथ , यह साला ठरकी कोण है , हिचकककक , और तुम यह रूही का जप करना बंद करो , हिचककककक , और मुझे गॉड में उठाओ , हिचकककक , में थक गई हु..." ख़ुशी ने हिचकियाँ लेते हुए बोलै , वोह बार बार रवि के ऊपर गिर रही थी ,
"ख़ुशी कन्या , अप्प ऐसा hi करती हो , पहले अप्प मदिरा का सेवन करती हो , फिर हमें परेशान करती हो , हमें तोह यह समाज नै अत , अप्प हमारी अंगरक्षक हो या हमारी दुश्मन..." रवि ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,
"जाओ बढ़ में , नै जाना मुझे , में यही बेठुंगी , तुम समज़ते क्या हो खुद को , प्रिंस , हिचककककक , तुम इक नंबर के ठरकी आदमी हो , हिचककककक , जो 10-10 लड़कियाँ लेकर घूमता है , हिचकककककक , दफा हो जाओ ..." ख़ुशी ने हिचकियाँ लेते हुए वही जमीन पर बैठते हुए बोलै ,
"उफ्फ्फ ओह्ह्ह , ख़ुशी कन्या , यह क्या जिद्द है , हमारी hi गलती थी , जो तुम मदिरा का रसपान करवा दिया , अभ चलना है , या हम जाये , वार्ना वोह दानवी सेना अभी आकर , तुम बिना पकाये , कच्चा खा जाएगी..." रवि ने रुक कर पीछे पलटते हुए ख़ुशी से बोलै ,
"हिचकककक , सच में..." ख़ुशी ने थोड़ा डरते हुए बोलै ,
"हाँ..."
रवि का इतना hi बोलना था के ख़ुशी भाग कर उसके पास ा गई और मुस्कराते हुए चलने लगी , फिर वोह इक डैम से घूमी और रवि के होंठो को कास कर चुम लिया ,
"यह क्या पागलपन है ख़ुशी कन्या , तुम क्यों बहक रही हो , हम बस रूही से प्रेम करते हैं , तुम यह बात जानती हो..." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै ,
"हिचकककक , पृथ्वी पर भी तुम कोमल से प्यार करते हो , हिचककककक और साथ में मुज़से भी , मने अपने रवि को चूमा है , न के किसी अकड़ू प्रिंस को..." ख़ुशी ने थोड़ा चिढ़ते हुए बोलै ,
फिर रवि कुछ नै बोलै , दोनों अग्गे बढ़ते गए , अभ वोह उस जगह पहुँच चुके थे , यहाँ सामने इक बेहद विशाल जंगल था , ऐसी जंगल में जेनिथ का महल था , वोह खौफनाक और ब्यांक महल , जिसके किस्से पोरे ब्रह्माण्ड में मशहूर थे ,
"हिचकककक , यहाँ कितनी गर्मी है , उफ्फ्फ..." ख़ुशी ने इतना बोलते हुए अपनी कमर से अपना टॉप उठा , उसे उतर दिया ,
उफ़ ख़ुशी का लाजवाब दूध जैसा बदन , तारो की हलकी हलकी रौशनी में चमक उठा , काली ब्रा में कैद उसके बड़े बड़े खूबसूरत बूब्स , उसके अंगड़ाई लेने से , और भी दिलकश और हसन लगने लगे ,
उसके मोठे मोठे बूब्स पर उसकी काली ब्रा , बेहद कासी हुई लग रही थी , बूब्स के बेच की गहरी दरार , ख़ुशी के लाजवाब , नशीले हुसैन को देख रवि जैसे मदहोश सा हो गया ,
"ख़ुशी कन्या , अप्प विस्तार क्यों उतर रही हो..." रवि ने मदहोश सा हुए बोलै ,
"हिचककककक , मुझे अपनी शक्ति देखनी है , हिचकककककक तुम क्यों इतना घबरा रहे हो..." ख़ुशी ने अपनी ब्रा के ऊपर से hi अपने गदराये बूब्स पर हाथ फिरते हुए बोलै ,
अभी रवि कुछ बोलने hi जा रहा था , के पढ़ो के पत्ते हिलने लगे , जैसे कोई तूफान ा रहा हो , और जो सामने आया , वोह किसी तूफान से काम नै था
पृथ्वी पर 2 महीने बाद...
रवि के घर अभ 2 महीने बीत चुके थे , रवि की बहनो ने अभ हालातो के अग्गे घुटने तक दिए थे , जिंदगी की गाड़ी , धीरे hi सही , पर अग्गे चल पढ़ी थी ,
शूरति और रिमी अभ इक दूसरे के बेहद करीब ा चुकी थी , दोनों इक साथ रहती , इक साथ खाना कहती , उनकी जिंदगी में अभ जैसे इक दूसरे के बिना कोई नै था ,
यह बात नै थी के वोह रवि को भूल गई , रवि तोह उनकी जिंदगी का हम हिस्सा था , दिल टुटा था , अभ पत्थर सी हो गई थी ,
शूरति ने रिमी को सम्बल लिया और रिमी ने शूरति को , वोह कई बार पिछली बातिओं को यद् कर मुस्करती और फिर रोने लगती , कभी कभी उनको सीमा अजीब सी लगती , लेकिन यह भी तब होता , जब सीमा कही अकेली होती , और रिमी और शूरति उसे चुप कर देख रही होती ,
धीरे धीरे उनको एहसास हो रहा था , के वोह गलत थी , अपने भाई के दिए प्यार को यद् कर , उनको यह एहसास होने लगा , शयद उनका भाई सही था , उसको फसाया गया था ,
और इक दिन ऐसा भी आया जब दोनों ने सीमा के असली रूप को देख लिया , सीमा अपने रूम में थी , उसे लगा रिमी और शूरति ऑफिस जा चुकी है , पर तभी उसने अपना असली रूप धारण कर लिया , अभ वोह सुहाना के रूप में थी , तभी रिमी और शूरति ने उसे देख लिया , वोह दोनों सुहाना और किसी अनजान शक़श की बतिअन सुनने लगी , उसके रूम के के होल से अंदर ज़क कर.....
तो बे कुनिटेड....
































