Incest Deewanapan... - Page 15 - SexBaba
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Incest Deewanapan...

फ्रेंड्स नेक्स्ट अपडेट रत को 10 बजे आएगा.. और फ्रेंड्स अज्ज इस थर्ड part का लास्ट अपडेट आएगा.. कोससिह की है.. इसको बेहतर लिख सकू.. और नेक्स्ट part भी जल्द hi स्टार्ट होगा . उसका प्लाट सोच लिया है.. वोह भी मैजिकल होगा.. शुक्रिया सभी का... साथ बने रहने के लिए....
 


अपडेट-61

अभ अग्गे...

सीमा बेइंतहा रो रही थी , और कोमल के मुर्दा जिस्म को देख रही थी , वोह फिर िका इक उठी , उसके आँखों में अभ बेहद ब्यांक गुस्सा था ,

"यहहहहहहहह , कोमळळ , अगर तेरी बली न दे पायी तोह क्या हुआ , तेरी पवितर जिस्म को बर्बाद कर दूंगी , तेरे मुर्दा जिस्म को पवितर नै रहने दूंगी , हूउउ , जोकर इसके मुर्दा जिस्म के साथ सहवास (सेक्स) कारु , अभी के अभी..." सीमा बेइंतहा गुस्से में बोलिई ,

बेबी और ख़ुशी ने जब यह सुना , तोह उनकी आँखें खुली की खुली रह गई , इतना कोण गिर सकता है , हैश्च , पर सीमा तोह अभ शेतीअन थी ,

बेबी की आँखें गुस्से से लाल हो गई , उसने अपनी पूरी ताकत इक जुट कर , अपने हाथो को जतका दिया , उसके जतका देते hi , वोह लोहे की जंजीर टूट कर भीकर गई ,

ख़ुशी भी बेहद गुस्से में अपनी तलवार लिए , उनकी तरफ बढ़ने लगी ,

"वही रुक जाओ , वार्ना , रवि के जिस्म को जला कर खाक कर दूंगी , इक कदम भी अग्गे मत बढ़ना , वरना , रवि किसी भी तरह , किसी भी जादू से जिन्दा नै हो पायेगा , रुक जाओ..." सीमा ने दोनों की तरफ देख चीला कर बोलै ,

"सीमा यह महापाप है , ऐसा मत करो , तुम कोमल के साथ ऐसा कैसे कर सकती हो , यह तुम्हारी बहिन है , प्लस , मत करो ऐसा..." बेबी ने रट हुए बोलै ,

"शहहह , अपनी जुबान बंद करो , और ख़ामोशी से सब देखो , जोकर , तुमने सुना नै , जो मने कहा , कोमल के साथ सहवास करो , कपडे उतरो इसके..." सीमा ने पहले बेबी और फिर जोकर की तरफ गुस्से से देख कर बोलै ,

"नै मालिक , हम बुरे जरूर हैं , पर यह पाप नै कर सकते , इसके लिए हमें नाराज में भी जगह नै मिलेगी..." लारा ने अपनी तलवार फेंक , जोकर के कदमो में बेथ रट हुए बोलै , जोकर उदास सा खड़ा था ,

"बेवकूफ लड़की , मेरे खिलाफ जोगी तुम , इसकी सजा तुम भी मिलेगी..." सीमा ने गुस्से में चीला कर बोलै , और फिर आँखें बंद कर मंत्र पढ़ने लगी ,

कुछ hi देर में सीमा की आँखें लाल रौशनी में चमक उठी , सीमा ने लारा के बदन को सर्प मायाजाल में जकड दिया , अभ लारा के जिस्म पर सांप लिपटे हुए थे , जिनकी आँखें लाल रौशनी में चमक रही थी ,

"अह्ह्ह्हह मालिक बचावू , अहह बहुत दर्द हो रहा है..." लारा ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"हहै , जोकर कुछ नै करेगा , जोकर उतरो कोमल के कपडे और उसके जिस्म का हर हिस्सा नोच डालो , इसके साथ बेरहमी से सहवास (सेक्स) करो , जल्दी कारु , वार्ना , तुम भी जला कर रख कर दूंगी..." सीमा ने जोकर के करीब जाकर बोलै ,

"नईईई , अह्ह्ह मालिक , ऐसा मत करना , प्लस..." लारा ने बेहद दर्द में चीख कर बोलै ,

"सीमा तुम ऐसा कैसे कर सकती हो , तुम भी इक लड़की हो , प्लस , यह अनरथ मत करो..." ख़ुशी भी वह से दूर कड़ी रट हुए बोली ,

"हम्म , यह तोह होगा , जोकर आखरी बार पूछ रही हु , तुम सहवास करोगे या किसी और को बुलाऊ..." सीमा ने जोकर की आँखों में ज़क कर बोलै , पर जोकर ने अपनी नज़रियन ज़ुका ली ,

"मतलब , तुम कुछ नै करोगे , नामर्द हो , ठीक है , लेकिन वोह जरूर करेगा , उसे कोमल जिन्दा मिले या मुर्दा , वोह इसके जिस्म को नोच डालेगा , हहै , जेनिथ , हाँ , तुम सब देखो , कैसे जेनिथ , अपनी सदियों पुराणी हवस शांत करता है , जेनिथ अभ ा भी जाओ , तुम नयी जिंदगी दी है मने..." सीमा ने सबकी तरफ देख वहशी हस्सी हस्ते हुए बोलै ,

"क्या जेनिथ , मतलब कुणाल जिन्दा है , लेकिन रवि ने उसे मर दिया था , वोह कैसे , उसका जिस्म तोह जल गया था..." दयना थोड़ी डरते हुए बोली ,

"में सुहाना हु , में रिंग हु , में इस ब्रह्माण्ड की सबसे बड़ी ताकत हु , में अमर हु , जब तक मेरा मकसद पूरा नै होगा , में इस ब्रह्माण्ड पर रहूगी , में कोमल की बलि देकर रहूगी , कितने जनम लेकर वोह बचेगी , इक न इक दिन , उसे मर कर hi रहूगी , कोई न कोई जनम वोह ऐसा लेगी , जब में उसकी बलि दूंगी , तब उसका यह मनहूस भाई मेरे रस्ते में नै ा पायेगा , और इक बात , कोमल के साथ मेरा जिस्म भी इस दुनिआ में जनम लेगा , हज़ारो लोग की उंगलियों से होकर में , अपने जिस्म तक पहुँच जोगी , फिर मेरा , यानि सुहाना का जनम होगा , हासष्ठ , सीमा तक पहुँचने में , नजाने सदियों तक , कितने लोग ने मुझे पहना , नजाने कितने लोग को मने मारा , और आखिर जब रवि ने मुझे पहना , तब मने सीमा को महसूस किया , सीमा hi मेरा दूसरा जनम थी , कहिअर अभ मुझे इक और जनम लेना पड़ेगा , अपना मकसद पूरा करने के लिए..." सुहाना ने अपने असली रूप में आकर अपनी सचाई बताते हुए बोलै ,

"तोह क्या अप्प रिंग में कैद हो..." दयना ने और जानने की ीचा से बोलै ,

"नयी , मेरी आत्मा , रिंग में कैद नै , वोह तोह मेरे जिस्म के साथ hi ख़तम हो गई , पर मेरी बेटी रमा ने जब मेरे अंदर की बुराई को , मेरी आखरी ीचा को , इक रिंग में दाल दिया , तेन की में तुम लोग जैसी इक दरिंदा न बन जाऊ , तब मेरी सहेतैनी ताकत उस रिंग में जीवट हो गई , क्यों की में अपने पिता शेतीअन के बेहद करीब थी , पर जैसे hi मेरी आत्मा ने नया जिस्म धारण किया , तब मुझे उसका एहसास हो गया था , वोह सीमा थी , वोह मेरे भाई सोनिक का प्यार थी , और आखिर जब सीमा मेरे अंदर आयी , रवि को बचने , तब मने उसकी परीक्षा ली , वोह हर मुश्किल से लड़ती , अमृतमयी कुंड के पास पहुँच गई , जब मेरे कहे अनुसार , उस फूल ने सीमा को उस कुंड में कूदने को कहा , तब बेवकूफ सीमा , बिना कुछ सोचे , उसमे कूद गई , वोह मेरा मायाजाल था , उस कुंड में सुहाना की यदिअण थी , सुहाना की साडी िचाईआं थी , जब कुंड से सीमा बहार आयी , तब वोह सुहाना थी , लेकिन मुझे कोमल को पाना था , मज़बूरी में मुझे रवि को जिन्दा करना पढ़ा , क्यों की नाराज लोग से कोमल को रवि hi ला सकता था , इसके लिए सबके मन में रवि के लिए जहर भरा , तेन की उसकी हर बहिन उससे नफरत करे , इसमें रमा ने मेरा साथ दिया , लेकिन अज्ज में फिर हार गई , अपने मकसद के इतना करीब आकर में हार गई..." सुहाना ने बेइंतहा गुस्से में सब बताते हुए बोलै ,

रमा खामोश कड़ी सब बतिअन सुन रही थी , उसके मन में , कुछ और hi चल रहा था , उसे रिंग चाहये थी , जो सीमा के अंदर थी , और जब तक रिंग सीमा के अंदर थी , वोह कुछ नै कर सकती थी ,

"जेनिथ कहा हो तुम , ायो , जल्दी ायो..." सुहाना ने फिर से चीखते हुए बोलै ,

तभी तेज़ हवा चलने लगी , आसमान कला पढ़ गया , सूरज की रौशनी काळा बदलो में कही चिप सा गई , और फिर आसमान से इक काली परछाई जमीन पर उतर गई , यह था , दानवी सेना का प्रिंस जेनिथ , जो बेहद वहशी लग रहा था , उसने इक ओहदा के विस्तार धारण कर रखे थे , और हाथो में इक बेहद बड़ा हथोड़ा (हैमर) था ,

जोकर , दयना , बाकि सब , जेनिथ को देख कम्प सा गए , बस सुहाना और रमा को छोड़ कर , लेकिन अजीब बात थी , अभ तक रमा ने इक शब्द नै बोलै था , जब के वोह जान चुकी थी , सुहाना ने उसका इस्तेमाल किया था ,

"जेनिथ अप्प ा गए , यह रही आपकी कोमल , अभ अपनी बरसो पुराणी हवस , अपनी ीचा पूरी कर लो , इसका लाजवाब जिस्म , आपको में तोहफे में देती हु..." सुहाना ने बेहद ख़ुशी में बोलै ,

जेनिथ चलते चलते अपने असली रूप में ा गया , अभ वोह कुणाल था , कुणाल अग्गे बाद कोमल के पास बेथ गया , और उसके खूबसूरत चेहरे पर हाथ फिरा मुस्कराने लगा , और फिर उसके गुलाबी होंठो पर अपनी उंगलियाँ फिरा मुस्कराते हुए बोलै ,

"उफ्फ्फ , लाजवाब , बेहद कामुक , हज़ारो अप्सरियों को मत देती , उम् , इसका जिस्म , अह्ह्ह्ह , शुक्रिया मलिका ..." कुणाल अपनी शर्ट उतारते हुए बोलै ,

उसने निचे झुक कोमल के होंठो को चुम लिया और फिर उसकी टीशर्ट खींच कर फाड् दी , उफ़ कोमल का लाजवाब हुसैन अभ इक काली ब्रा में कैद था , उसके खूबसूरत दूध जैसे सफेद जिस्म पर छोटू के निशान पड़े हुए थे ,

"नईईई , नयी , कुणाल ऐसा मत करूओ..." बेबी ने बेहद गुस्से में छीलते हुए बोलै ,

"शहहह , कोमल अभ मेरी है , इसका जिस्म अभ मेरा है , इसके जिस्म को अपने साथ ले जाउगा , और जब मन करेगा , इसके जिस्म से अपनी हवस शांत करुगा , हाहाहा..." कुणाल ने बेहद हस्ते हुए बोलै ,

पर तभी कुछ ऐसा हुआ , जिसकी उम्मीद किसी को नै थी , रमा ने बेइंतहा गुस्से में कुणाल की गर्दन को अपने बालो से जकड लिया , और उसे पीछे खींच लिया ,

"रमा , पागल हो गई हो..." सुहाना ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"शठ , माँ , आपका मकसद अभ भी पूरा हो सकता है , लेकिन अगर किसी ने , किसी ने भी , मेरी बहिन पर बुरी नज़र डाली , तोह विनाश कर दूंगी , सबका , अभी अप्प ने मेरा वहशी रूप देखा नै है , और इस हरामजादे ने मेरी बहिन के होंठो को चूमा , इसकी गर्दन धड़ से अलग कर दूंगी , तभी मुझे चैन मिलेगा..." रमा ने बेइंतहा गुस्से में बोलै , किसी की हिमेट नै थी , रमा के खिलाफ जाने की , सब खामोश खड़े थे ,

"अह्ह्ह्ह मलिका , इस कुटिया को बोलो , मेरी गर्दन छोड़ दे , वार्ना पहले इसका रपे करुगा , पिछली बार बच गई थी , इस बार नै बचेगी..." कुणाल ने बेहद दर्द से कहरहते हुए बोलै , कुणाल की बात सुन सुहाना ने अपना माथा पीट लिया , वोह जानती थी , अभ रमा का पूरा गुस्सा कुणाल पर निकलेगा...

"याहहहहहहह , मेरा रपे करेगा , मेरे जिसमं पारर मेरी भैई का हक्क हीी , कुटी..." रमा ने बेइंतहा गुस्से में कुणाल को अपने करीब खींच अपने बालो में जकड़ते हुए बोलै ,

रमा अभ अपने वहशी रूप में ा चुकी थी , तभी उसके माथे के बेच का मास्स फटना सुरु हो गया , मास्स के निचे , इक बेहद तेज़ रौशनी निकली , जो कुणाल के बदन पर पढ़ने लगी ,

"आह्ह्ह्हह्ह मा बचावू , अह्ह्ह्ह ..." कुणाल बेहद दर्द से तडफने लगा ,

तभी रमा ने कुछ ऐसा किया , जिसकी उम्मीद शयद किसी को नै थी , रमा ने कुणाल की पेण्ट फाड् , उसके लिंग को अपने हाथो से खींच कर उखड दिया , लिंग के साथ साथ कुणाल का मास्स भी , उतर गया , बेइंतहा खून बहने लगा ,

"हूउउ हुऊ बहुत्त घमंडद हैई टूजी अपनीइ मर्दांगीई परररर , हेही , अभह नईईई करुँगी..." रमा उसके खून से लथपथ लिंग को उसके खुले मोह में घुसते हुए बोली ,

"ागलीई बार्डर जनम्म लू तोहह औरतो की

इजाजत करना , हुऊ..." रमा ने कुणाल की दर्द से बंद होती आँखों में देख कर बोलै और फिर उसके सीने से उसके जिस्म को बेच से फाड् दिया , रमा का कला बदन खून में चमक रहा था ,

फिर रमा , कोमल के पास गई , और उसके जिस्म को उसकी टीशर्ट से धक् दिया , फिर वोह कुछ पल अपने भाई की तरफ देखती रही , और फिर सुहाना की तरफ देख कर बोली ,

"मा , अप्प इनको जिन्दा करो , आपकी रिंग , इनको जिन्दा कर सकती है , रिंग को अपने सीने से बहार निकालो , फिर इनको जिन्दा करो , अप्प कोमल की बलि दे देना और रवि को अपना गुलाम बना लेना , आपकी हर ीचा पूरी हो जाएगी..." रमा ने अपनी बातिओं में सुहाना को फसते हुए बोलै ,

"हम्म , बेटी , यह मने पहले क्यों नै सोचा , ाचा हुआ तुमने कोमल को बचा लिया , वार्ना में इसकी बलि न दे पति ..." सुहाना ने बेहद ख़ुशी में मुस्कराते हुए बोलै , जब के रमा के होंठो पर इक रहस्मयी मुस्कान थी ,

फिर सुहाना ने अपनी आँखें बंद कर ली , उसके सीने में तेज़ रौशनी उठी , और फिर वोह रिंग उसके हाथ में थी , जो सफेद रौशनी में चमक रही थी ,

सबकी आँखों में इक चमक सी ा गई थी उस रिंग को देख कर , यहाँ खड़ा हर शेतीअन , इस रिंग को पाना चाहता था ,

सुहाना ने रिंग की तरफ देखते हुए अपनी आँखें बंद कर ली , धीरे धीरे आसमान में बिजली चमकने लगी , सुहाना , भगवन के बनाये ासोलो को तोड़ रही थी , पूरी पृथ्वी पर हाहाकार मच गई थी ,

सुहाना की रिंग से चमकती लाल रौशनी निकलने लगी , जो धीरे धीरे , रवि और कोमल के सीने में समाती गई , आखिर कुछ पलु बाद वोह पूरी रौशनी रवि और कोमल के जिस्म में समां गई ,

"हहै , अभ में बलि दूंगी , कोमल की..." सुहाना ने रिंग को अपनी ऊँगली में धारण करते हुए बोलै ,

"मा , मेरी प्यारी माँ , अप्प इस दुनिआ की नै , इस ब्रह्माण्ड की मलिका हो , मेरी माँ मलिका है..." रमा ने सुहाना की बाद चढ़ कर बड़ाई करते हुए उसे अपने प्यार में बंद लिया ,

"शुक्रिया बेटी , यह सब तुम्हारे कारन हुआ , बोलो क्या मांगती हो अपनी माँ से..." सुहाना ने घमंड में चूर चूर होकर बोलै ,

"रिंग , मेरा मतलब , माँ में आपकी रिंग को छू कर देखना चाहती हु , बस इक पल के लिए , वैसे भी में इस रिंग को धारण नै कर सकती..." रमा ने थोड़ा उदास होकर बोलै ,

"ओह्ह , मेरी बेटी , यह लो रिंग , देख लो..." सुहाना ने रमा की बातिओं से , उसके प्यार में , पिगल कर रिंग अपनी ऊँगली से उतर रमा को देते हुए बोलै ,

रमा , रिंग को अपने हाथो में लेकर छू कर देखने लगी , तभी उसके करीब इक कला धुआँ सा उठा , वोह नकाबपोश औरत अभ रमा के पीछे कड़ी थी ,

"यह लो माँ रिंग..." रमा ने मुस्करा कर बोलै , जैसे hi सुहाना ने अपना हाथ अग्गे किया तब रमा बोली.." अप्प नै मलिका , में अपनी माँ से कह रही हु..." रमा ने हस्ते हुए बोलै ,

"पर तुम्हारी माँ तोह में हु..." सुहाना बेहद पछताते हुए बोली , उसने अपनी ीचा से रिंग रमा को दी थी , अभ रमा अगर अपनी ीचा से उसे रिंग देती , तभी वोह रिंग को धारण कर पति ,

"यह लू माँ ..." रमा ने घूम कर वोह रिंग उस नकाबपोश औरत को देदी , जिसने अपनी ऊँगली में वोह रिंग पहन ली , अभ वोह इस दुनिआ की सबसे ताकतवर औरत थी ,

अभ रवि और कोमल को होश ऐनी लगा था , अभ रिंग की आधी ताकत रवि में थी और आधी कोमल में , अभ वोह बेहद ताकतवर हो चुके थे , उन दोनों की खुली आँखें लाल रौशनी में चमक रही थी , अभ वोह वैम्पायर नै थे , अभ वोह इंसान थे , और वोह भी बेहद शक्तिशाली ,

"धोकेबाज .." सुहाना ने इतना बोल रमा को मरना चाहा , पर रमा के जादुई लाल बालो ने सुहाना को जकड लिया , फिर रमा बोली ,

"मलिका अभ आपका रिंग में जाने का वख्त हो गया है , जाओ रिंग में , और मेरी इंसानी माँ को छोड़ दो , आपको क्या लगा , यह सब में आपके कहने पर कर रही थी , मेरी माँ सीमा को जो भी दर्द देगा , उसे में इस दुनिआ से मिटा दूंगी..." रमा ने बेइंतहा गुस्से में बोलै ,

"अह्ह्ह नै जोगी रिंग मी..." सुहाना ने दर्द से कहरहते हुए बोलै ,

तभी उस औरत ने रिंग की तरफ देखते हुए अपने मन में कुछ बोलै , फिर सुहाना की सोच शक्ति , सीमा के सार से निकल कर , रिंग में समां गई ,

सीमा अपने इंसानी रूप में एते hi जमीन पर गिर गई , वोह बेहद कमज़ोर दिख रही थी , रमा ने निचे बेथ , सीमा को अपनी बहु में भर लिया ,

तभी रवि और कोमल उठ कर बेथ गए , दोनों ने इक दूसरे की तरफ मुस्करा कर देखा ,

वोह नकाबपोश औरत वह से गयाब हो गई , जोकर भी वह से भाग गया , पर दयना अभ भी वह थी , वोह रिंग को पाना चाहती थी ,

रवि उठ खड़ा हुआ और दयना की तरफ बढ़ने लगा , क्या दयना अभ रवि का मुकाबला कर पति , जिसमे अभ रिंग की कई शक्तियाँ थी , जो अभ रिंग से जुड़ चूका था...

दयना वह से भागने लगी , पर रवि ने हवा से भी तेज़ , दयना को पीछे से अपनी बहु में जकड लिया , रवि ने उसकी गर्दन अपनी बहु में जकड ली , और कोमल की तरफ देख कर बोलै ,

"कोमलललल , मर्डर दू ऐसी..." रवि ने चीला कर बोलै ,

तभी कोमल ने वोह रमा के काळा जादुई टुकड़े उठा लिए , और पालक झपकते hi दयना के पास कड़ी हो गई ,

"मूज़ी मेरे भइआ से दूर किया..." कोमल ने इतना बोलै , और वोह दोनों टुकड़ो , दयना के सीने में घुसा दिए ,

"अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह शहहह..." दयना दर्द से कहरः उठी , कुछ hi पलु में उन जादुई टुकड़ो ने , दयना की पूरी शेतीआणि ताकत चूस ली , दयना का जिस्म रख बन कर उड़द गया ,

कोमल ने अपने भाई को बहु में भर लिया , और पगलू की तरह उसके होंठ चूसने लगी , रवि ने कोमल को कमर से उठा लिया , कोमल ने अपनी टंगे रवि के पेट से लपेट ली , और अपने भाई के बालो को सहलाती , उसके होंठो को चुस्ती रही , दोनों ने मन को सकूं पहुँचने तक किश किया , फिर दोनों हफ्ते हुए इक दूसरे की आँखों में देखने लगे ,

कोमल अभी निचे उतरी hi थी , के ख़ुशी भागते हुए रवि के गले लग गई , अभ ख़ुशी पगलू की तरह रवि के होंठ चूसने लगी , करीब 5 मिंट ख़ुशी , रवि के बालो में हाथ फिरती , उसके होंठो को चुस्ती रही , जब ख़ुशी का मन भरा दोनों अलग हो गए ,

अभी रवि अपनी तेज़ संसू को कण्ट्रोल कर hi रहा था , के बेबी ने उसे बहु में भर लिया , अभ बेबी वहशी रूप में एते हुए , अपने प्रेमी के होंठो को चूसने लगी , रवि की तोह बंद बज गई थी , इक के बाद इक , हमले उसके होंठो पर हो रहे थे ,

लेकिन वोह किसी को रोक नै रहा था , क्यों की वोह जनता था , सब उसे बेहद चाहती हैं , बेबी का जब मन भरा , तब वोह रवि से अलग होकर , कोमल से मिलने लगीई ,

"हासष्ठ , थककक गया मी...." रवि अभी तेज़ तेज़ सांसे ले hi रहा था , के रमा के बालो ने उसे जकड लिया , कोमल , ख़ुशी और बेबी , रमा की तरफ देखने लगी ,

"भइआए मुझे भी किश करना हैई..." रमा मुस्कराते हुए बोली , और रवि को अपने करीब खींच लिया , कोमल , ख़ुशी और बेबी हसने लगीई ,

"रमा तुम इंसानी रूप में ायो न..." रवि , रमा के काळा जिस्म की तरफ देखते हुए बोलै , पर रमा उदास हो गई , उसने अपनी नज़रियन ज़ुका ली , उसके बालो ने रवि को छोड़ दिया ,

"ओह्ह्ह मेरीए सेक्सयीय रएमाआ..." रवि मुस्कराते हुए रमा को बहु में भरता बोलै , और अपने होंठ , रमा के ब्लैक होंठो पर रख दिए , रवि बड़े प्यार से , बेहद शिदत से रमा के होंठो को चूस रहा था ,

और रमा के लाल जादुई बाल रवि के चेहरे को छू रहे थे , कुछ देर बाद दोनों अलग हुए ,

"मेरी जान तुम कैसी भी हूँ , बस मेरी हूँ , और मेरी रहुगीय..." रवि ने मुस्करा कर रमा की आँखों में देख बोलै , तोह रमा भी मुस्कराने लगी ,

"अह्ह्ह्ह मी कहा हूँ..." सीमा अपना सार दोनों हाथो में दबाते बोली ,

रवि ने भाग कर सीमा को अपनी बहु में भर लिया , उसके पोरे चेहरे को चूमने लगा , आखिर सब ठीक हो गया था , और सब साथ थे , फिर रवि की नज़र लारा पर पढ़ी ,

रवि उसके पास गया , तब लारा चेहरा ज़ुका कर बोली ,

"में बेहद बुरी हु , पर , क्या , मेरा मतलब , क्या , मतलब , वोह , क्या..." लारा अभी बोल hi रही थी के रवि ने उसके होंठो पर ऊँगली रख दी ,

"शह्ह्ह्ह , अज्ज से तुम मेरे परिवार का हिस्सा हो , ायो , में तुम अपनी बहनो से मिलवाता हु..." रवि , लारा का हाथ थामे उसे सब के पास ले आया ,

"अभ घर जाना है या नयी..." बेबी मुस्कराते हुए बोली ,

"में क्या कह रही थी , हम सब इतने दिनों बाद , इक हुए हैं , थोड़े दिन , इस खूबसूरत कबीले में रहते हैं , मस्ती करते हैं , क्यों , क्या कहते हो सब..." कोमल सबकी तरफ देख मुस्कराते हुए बोली ,

सब ने हाँ बोल दी , फिर ख़ुशी ने रवि के कहने पर , कबीले के टूटे घरो को ठीक कर दिया , और सब साथ में बतिअन करने लगे ,

फिर ख़ुशी , रेहान और बाकि कबीले वालो को गुफा से बहार ले आयी , रिमी और शूरति भी , अपने भइआ से मिल कर बेहद खुश हुई ,

"भइआ , कितना ाचा लग रहा है , हम सब साथ हैं , और खास कर , मेरी देदी सीमा को देख कर , है न सीमा देदी..." कोमल गहरी मुस्कान लिए सीमा की तरफ देख कर बोली ,

सीमा ने अग्गे बढ़ कोमल को बहु में भर लिया , और उसके चेहरे को कुछ देर चूमा , फिर उसे गले लगा , उसके कनु में धीरे से बोली ,

"कोमल अभ अपनी अस्स मरवा ले , ाचा मौका है , जंगल में तेरी चीख भी कोई नै सुनेगा..."

"धत्त्त , डीडीई , अभ भी मेरी अस्स के पीछे पढ़ी हो , लेकिन मने आपको बहुत मिस किया , ी लव ु , मेरी जान , अभ मेरे पास मेरे भइआ भी हैं , और मेरी क्यूट सी जान भी..." कोमल ने सीमा की आँखों में देखते हुए बोलै , फिर दोनों हसने लगी , और इक दूसरे को बहु में भर लिया ,

फिर सीमा , अपनी बेटी रमा के पास गई , उसे देखते hi उसकी आँखों में असनु ा गए , रमा के लाल बाल उसके असनु पोछने लगे ,

"मा , मेरीए प्यारी माँ..." रमा , सीमा को अपनी बहु में भर कर बोली ,

"मेरी प्यारी बेटी , तूने मेरी जान बचाई , मेरी बाछीइ , तू सच में , मेरी बेटी ही , में कितनी खुशनसीब हु , के तुज जैसी बेटीइ मुझे मिली , मेरी बेटी का बाल कितने खूबसूरत हैं..." सीमा , रमा के चेहरे को चूमते हुए बोली , फिर उसके बालो से खेलने लगी , जो बेहद बड़े होकर , सीमा के चेहरे को प्यार से छू रहे थे , रमा की आँखें नाम थी , उसकी माँ ने उसे इस रूप में भी इतना प्यार दिया था ,

तभी आसमान से बारिश होने लगी , सब उस बारिश में भेजने लगे , खेलने लगे , रमा भी बेहद खुश थी , और उसके जादुई लाल बाल भी.....

(आपको यह part कैसा लगा... कोण सा करैक्टर पसंद आया.. रेबु में जरूर बताना.. और निचे जो लिखा.. उसे रीड जरूर करना .. शुक्रिया)

थे एन्ड...

तोह यह था थर्ड part , कुछ मुश्किलें आयी , जब ष्प बंद हुआ , तब उम्मीद नै थी , के दुबारा स्टोरी स्टार्ट कर पाउगा , इसके लिए में लव1994 और अतुल भाई को थैंक्स बोलना चाहुगा...

अभ बात करते हैं , नेक्स्ट फोरूथ Part की , वोह में अज्ज से ठीक 3 दिन बाद स्टार्ट करुगा , वही टाइम रत को 10 बजे , तोह मिलते हैं अभ नेक्स्ट part में , यहाँ नए दुश्मन होंगे , कुछ नए सस्पेंस , और कुछ यही सस्पेंस जो अग्गे जाकर पता चल जायेगे , नेक्स्ट part में मैजिक भी होगा ,

शुक्रिया सभी प्यारे दोस्तों का .. जो इतना प्यार दिया .. दिल से थैंक्स...

तो बे कुनिटेड...

 
थैंक्स दोस्तों .. इतना प्यार देने के लिए... कल से नेक्स्ट 4रथ part स्टार्ट करुगा.. प्लाट रेडी है.. फर्स्ट अपडेट टाइप कर लिया है... और हाँ.. इक बात बता देना.. इस part में सेक्स दालु.. या नार्मल रोमांटिक, इमोशनल , रहने दू...

फ्रेंड्स नेक्स्ट अपडेट कल रत 10 बजे आएगा.. शुक्रिया...
 


अपडेट-62

नेक्स्ट PART स्टार्ट

अभ अग्गे ..

अभ तक अपने पढ़ा , रवि ने उस आखरी लड़ाई में , अपनी बहनो को बचा लिया , सुहाना फिर से रिंग में कैद हो गई , लेकिन उसका अंत नै हुआ था ,

दयना मर चुकी थी , कुणाल भी अभ जिन्दा नै था , उसे भी रमा ने मर दिया था , जोकर भाग गया था , लेकिन उसकी साथी लारा , ने अभ बुरा रास्ता छोड़ दिया था , अभ वोह रवि के परिवार से जुड़ गई थी ,

अभ सब इक साथ थे , सबके पास इंसानी जिस्म था , बस रमा को छोड़ कर , रमा ने अपना इंसानी रूप धारण नै किया था , इसका इक hi कारन था , माँ की ममता ,

रमा को अपने जीवट बालो से प्रेम हो गया था , जो उससे हर पल बात कर सकते थे , वोह सब उसके बचे थे , रमा खुद को ें जादुई लाल बालो की माँ मानती थी ,

रमा , जिसके लिए माँ शब्द का महत्व , इस दुनिआ में सबसे जायदा था , और अभ वोह खुद इक माँ थी , लेकिन इसके पीछे शयद कोई राज़ हो , आखिर रमा क्यों इंसानी रूप नै ले रही थी ,

लेकिन अभी ें बातिओं का वख्त नै था , अभ मस्ती करने का वख्त था , वोह भी ढेर साडी मस्ती ,

रवि खुश था , उसकी बहने खुश थी , बेबी खुश थी , ख़ुशी खुश थी , उसकी वाइफ सीमा खुश थी , क्यों , क्यों की सब साथ थे , जब परिवार में सब साथ हो , तब इंसान खुश दीखता है , जब परिवार टूट जाता है , तब हर इंसान दुखी रहता है ,

कई गम ए , कई धुकड़ पल ए , पर अभ सब साथ थे , रवि की जिंदगी अग्गे बढ़ रही थी , और उसका दीवानापन अपनी बहिन कोमल के लिए बढ़ता जा रहा था , क्यों , क्यों की कोमल इक ऐसा फूल थी , जिसकी खूबसूरत मुस्कान जैसी खुसबू , हर तरफ खुशियाँ भीकर देती थी ,

ख़ुशी ने रवि के कहने पर , वह रेहान के घर के साथ , अपने जादू से इक बहुत बड़ा घर बना दिया था , जिसमे अलग अलग रूम थे , वोह दो मंज़िला घर बेहद खूबसूरत था , और खास बात यह थी , के वोह कुदरत की खूबसूरती से सजा हुआ था , इक भी मोडरें चीज़ नै थी ,

पूरा घर लकड़ी का बना था , सेड्यां भी लकड़ी की बानी थी , पानी के लिए हर रूम में मिटटी के मटके रखे थे , लकड़ी के बर्तन थे , सोने के लिए बीएड लकड़ी के बने थे , दरवाजे लकड़ी के बने थे , मनो पूरी कुदरत इस घर में बस गई थी ,

उस दिन जब सब साथ हुए , तब उनका बाकि का दिन बेहद खुशनुमा गुजरा था , रवि अपनी हर चंचल बहिन को प्यार देने की कोससिह कर रहे था , बेचारा कंफ्यूज हो चूका था , किसको प्यार दे , किसके पास जाये , क्यों की सब इक से बढ़कर इक खूबसूरत थी ,

यहाँ ख़ुशी शरारती थी , रिमी चुलबुली थी , कोमल रोमांटिक थी , सीमा वैसी hi मासूम थी , शूरति बेहद शर्मीली थी , बेबी इमोशनल थी , और रमा , उसका क्या कहु , कुछ समाज नै ा रहा , पर रमा सबसे अलग थी , और रवि , जायदा से जायदा वख्त उसे दे रहा था ,

रत हुई सबने खाना खाया , अज्ज इक साथ खाने कहते , सबकी आँखें भी नाम हुई , बेहद मज़ाक मस्ती भी हुई , लेकिन अभ रत को सोने का टाइम था , और रवि की बहनो में बहस चल रही थी , क्यों , यह अप्प खुद hi देख लो ,

"भइआ अज्ज मेरे साथ सोयेगे..." रिमी ने कोमल , ख़ुशी , बेबी और शूरति की तरफ देख कर गुस्से से बोलै ,

"बड़ी आयी भइआ के शेज़ड़ी , भइआ मेरे साथ सोयेगे.." शूरति , रिमी की नक़ल उतारते हुए बोली ,

"तुम दोनों साइड में जाओ , रवि मेरे साथ सोयेगा..." ख़ुशी अपनी हसन जुल्फों पर हाथ फिरते हुए बोली ,

"हम्म , तुम जाओ अपनी हवेली , रवि मेरे साथ सोयेगा , क्यों की में उसकी प्यारी जूही हु..." बेबी , ख़ुशी की तरफ देख बनावटी गुस्से में बोली ,

"उस दिन हॉस्पिटल में बच गई तू , चुड़ैल अज्ज नै छोडूगी..." ख़ुशी ने बेबी की तरफ बढ़ते हुए बोलै ,

"चुड़ैल तू है , मदिरा में डूबी रहने वाली राक्षश , तू भूतनी है , लम्बे बालो वाली.." बेबी मुस्कराते हुए बोली ,

तभी रवि बहार से ा गया , और रमा और सीमा के बेच खड़ा होकर यह तमाशा देखने लगा , रवि ने मौका देख कर रमा के गलो को चुम लिया , रमा मुस्कराते हुए निचे की तरफ देखनी लगी , रमा के लाल बाल रवि के गलो को छू रहे थे ,

"तेरे में 36 के 36 दन्त तोड़ दूंगी..." ख़ुशी ने अपनी मुठी बंद करते हुए बोलै ,

"ख़ुशी देदी , दन्त 32 होते हैं.." रिमी मसोमीयत से बोली ,

"अच्छा , तोह 4 तेरे तोड़ दूंगी , अगर बेच में आयी तोह..." ख़ुशी ने रिमी की तरफ देख कर बोलै ,

"देदी.." रिमी डरते हुए शूरति से चिपक गई ,

"मेरे दन्त तोह दूर , तू बूढ़ी मुझे टच भी नै कर सकती..." बेबी बड़ी अड्डा से बोली ,

"हुऊ , तुझे तोह में नंगी करके जंगल के बेच फेंक डूंगीए , मुज़से पन्गा , बेबी no चंगा..." ख़ुशी भी बड़ी अड्डा से अपने बाल लहराते हुए बोली ,

लारा भी ें सबको देख रही थी , वोह बार बार रवि की तरफ देख रही थी , जिंदगी में उसने पहली बार जाना था , प्यार क्या होता है , परिवार क्या होता है , और वोह बेहद खुश थी , अभ उसे भी बेबी और ख़ुशी की नोकझोक बेहद अछि लग रही थी ,

"बूढ़ी कही की , हूँ.." बेबी इतना बोल कही और देखने लगी ,

"नकचढ़ी छिपकली कही की , हूँ.." ख़ुशी भी इतना बोल कही और देखने लगी ,

वही कोमल अपने माथे पर हाथ रखे जमीन की तरफ देखती , मुस्करा रही थी ,

"भइआ , अप्प hi बोलो , किसके साथ सोयेगे..." रिमी ने इतना बोल अपने होंठो पर हाथ रख लिया , क्यों की ख़ुशी उसकी तरफ देख रही थी , उसे दर था , अपने 4 दन्त टूटने का ,

"रावी .." ख़ुशी , रवि की तरफ गुस्से से देख कर बोली ,

"बाबू..." बेबी बड़ी मसोमीयत से मुस्कराते हुए बोली ,

रवि का गाला सुख रहा था , उसे समाज नै ा रहा था , किसे हाँ बोले , और किसे न , लेकिन कुछ तोह बोलना था , उसने बोल दिया ,

"ाचा , में क्या कह रहा था , हम्म , यार न तोह में बूढ़ी ख़ुशी के साथ सो सकता हु , और न छिपकली बेबी के साथ , तोह क्यों न , हम रमा पर यह बात छोड़ दे..." रवि उन दोनों की तरफ देख हस्ते हुए बोलै , जब के बेबी और ख़ुशी के चेहरे गुस्से से लाल हो गए ,

रमा कुछ देर सोचती रही और फिर बोली ,

"भइआ मेरे पास इक रास्ता है , मेरे बाल , ओह्ह सॉरी , मेरे बचे , जिसे पहले टच करेंगे , वही अज्ज आपके साथ सोयेगी..." रमा मुस्करा कर बोली , तोह उसके बाल उसे प्यार से चुने लगे ,

"ोह्हलूलू , मेरे प्यारे बचे मेरे पास ायो , में तुम बहुत प्यार दूंगी..." ख़ुशी ने अपनी बहे फैला मुस्कराते हुए बोलै ,

"नै , नै , मेरे बचो , मेरे पास ायो , इस बूढ़ी के मोह से गन्दी बदबू , युककक , बहुत गन्दी बदबू अति है..." बेबी सच में ऐसा चेहरा बना कर बोली , जैसे उसे बदबू ा रही हो ,

"नै , मेरे प्यारे बचो , इस गन्दी छिपकली के पास मत जाना , यह सब कुछ निगल जाती है , माखी , मचार , कॉकरोच , कुछ नै छोड़ती..." ख़ुशी भी मुस्कराते हुए बोली ,

रवि और उसकी साडी बहने , ख़ुशी और बेबी की बतिअन सुन खूब हस्स रही थी , कोमल की आँखों में तोह पानी ा गया था , हस्स हस्स कर ,

रवि अपनी कोमल को देख मुस्करा रहा था , अज्ज नजाने कितने दिनों बाद , उसने कोमल को इतना हस्ते देखा था , जब दोनों की आँखें मिली , तब दोनों इक दूसरे को देखने लगे , नज़रिओं hi नज़रिओं में , कुछ इशारे हुए , दिल की बतिअन , आँखों से होने लगी , और रमा के लाल बालो ने दोनों को यह सब करते देख लिया ,

"हूँ , गटर के पानी से पेग बना कर दारू पीने वाली बदबू दर औरत , अहह ठयऊ , मुझे तुम्हारी यह बात बिलकुल पसंद नै आयी...." बेबी ने नाटक करते हुए थूक कर बोलै ,

"हुऊ , बस्स्स , तूने मेरी मन मरियड़ा को ललकारा , मेरी पवितर दारू का अपमान किया है , छिपकली के मोह वाली औरत , अगला पेग तेरे पानी से बनाउंगी , और वोह पानी कहा से आएगा , तू भी जानती है..." ख़ुशी ने सीधा सीधा डबल मीनिंग बात करते हुए बोलै ,

"हआ , देदी गन्दी बतिअन , मुझे शर्म ा रही है..." रिमी , शूरति के सीने में चेहरा छुपा कर बोली ,

सबका हस्स , हस्स , कर बुरा हाल हो गया था , लेकिन कोई भी दोनों को रोक नै रहा था , क्यों की सबको मज़ा ा रहा था ,

सबके सब वही पढ़ी लकड़ी की कुर्सियों पर बेथ , यह लाइव शो देख रहे थे , जिसमे बस कॉमेडी थी , रमा ने अपने बालो को कुछ देर रोक लिया था ,

"देखा , कुत्तों की मौसी , बेचारी बची को शर्म ा रही है , अभ बस कर , मेरी तोह जुबान गन्दी हो गई , तुज़से बतिअन कर कर के..." ख़ुशी , रिमी की तरफ देख कर बोली ,

"अभ तुझे hi मेरे सुसु से पेग बना कर पीना था , अभी मुझे सुसु ा रही है , बोल दे , तुझे चाहये , तोह गिलास में ला देती हु...," बेबी दोनों हाथो की ताली मरते हुए हस्ते हुए बोली ,

"हुऊ , चिपकलियों की सुसु नै पति में..." ख़ुशी बड़ी अड्डा से मुस्करा कर बोली ,

"और क्या कुत्तो की सुसु पति है ..." बेबी भी बड़ी अड्डा से बोली ,

"अह्ह्ह भाई , मुझे तोह नंद ा रही है , जब तुम सब का डीडे हो जाये , मेरे रूम में ा जाना..." रवि उठते हुए बोलै ,

"ेहः वापिस बेथ , इक कदम भी चला , तोह ाचा नै होगा , बेथ , निचे..." ख़ुशी , रवि की तरफ देख गुस्से से चीला कर बोली ,

रवि उदास सा मोह लिए वापिस बेथ गया , अभ सब लड़कियाँ रवि की तरफ देख हसने लगी ,

कोमल ख़ामोशी से अपने भाई को देख रही थी , उसके होंठो पर इक मुस्कान थी , यह बात ख़ुशी और बेबी ने भी नोट कर ली ,

"देख बेबी , अगर में न रवि के साथ सोई , तोह तुझे भी नै सोने दूंगी..." ख़ुशी ने बात ख़तम कर बोलै ,

"हम्म , यह बूढ़ी ठीक बोल रही है , अभ कोमल , रवि के पास सोयेगी..." बेबी , कोमल की तरफ देख मुस्करा कर बोली ,

"बूढ़ी किसे बोलै , छिपकली ..." ख़ुशी फिर से गुस्से में लाल होते हुए बोली ,

"बूढ़ी , ला लाला ला ला बूढ़ी , सब बोलो , ख़ुशी बूढ़ी..." बेबी भी सांग गेट हुए बोली

"ेहः किसी ने इसके पीछे लग , मुझे बूढ़ी बोलै , तोह रमा को छोड़ कर सबके 6-6 दन्त तोड़ दूंगी , तुम सबके दन्त तोड़ कर 32 दन्त पोरे करुँगी..." ख़ुशी अपनी मुठी बंद करते हुए चीला कर बोली ,

"पर देदू , हम सब के 6 दन्त टूटे तोह 30 होंगे न , हम 5 हैं..." रिमी मसोमीयत से बोली ,

"ाचा , तोह तुम्हारे 8 तोड़ दूंगी , हो गए न 32 दन्त..." ख़ुशी बड़ी अड्डा से मुस्करा कर बोली ,

"देदी..." रिमी डरते हुए फिर से शूरति से चिपक गई ,

"तू बेच में क्यों बोलती है , मेरे भी दन्त तुड़वा देगी , अभ चुप रह..." शूरति , रिमी को डांटते हुए बोली ,

"बड़ी आयी , दन्त तोड़ने वाली हूँ.." बेबी बड़ी अड्डा से मुस्करा कर बोली ,

"इक मिंट , अभ में फैसला करुँगी , अज्ज भइआ कोमल देदी के साथ सोयेगे , और तुम दोनों इक साथ..." रमा यह फ़ासिला कर , अपनी माँ को साथ लेकर अपने रूम में चली गई ,

शूरति और रिमी भी चुप चाप वह से खिसक गई , उनको सोने से जायदा अपने दन्त प्यारे थे ,

ख़ुशी और बेबी ने पहले तोह इक दूसरे की तरफ गुस्से से देखा , और फिर हस्ते हुए इक दूसरे के गले लग गई ,

"चले सोने छिपकली जी..."

,"हाँ बूढ़ी जीई , चलिए..." दोनों हस्ते हुए अपने रूम में चली गई....

वही दूसरी तरफ...

सीमा बीएड पर अधलेटी हालत में बैठी थी , और रमा उसकी गॉड में सार रख , अपनी माँ को महसूस कर रही थी , सीमा भी प्यार से रमा के बालो को सेहला रही थी , और रमा के लाल जादुई बाल सीमा के हाथो में लिपट जाते , कभी उसके चेहरे को छू कर उसे गुदगुदी करने लगते ,

"माँ मेरे इस रूप से आपको दर तोह नै लगता.." रमा ने थोड़ा उदास लहजे में पूछा ,

"मेरी बची , तू इस दुनिआ में सबसे अलग है , पर रमा में तेरी माँ हु , तू चाहे जिस रूप में भी हो जाऊ , पर माँ के लिए उसके बेचे वैसे hi दीखते हैं , जैसे पहले थे..." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै , और रमा के माथे को चुम लिया ,

"माँ , अभ तोह अप्प दादी अम्मा बन गई हो , मेरे बचो की..." रमा हस्ते हुए बोली ,

"हाँ , यह बात तोह है , क्या तुम्हारे बचे तुमसे बात कर सकते हैं.." सीमा , रमा के चारो तरफ फैले लम्बे लाल चमकते बालो को देख कर बोली ,

"हाँ माँ , यह मुज़से बात भी करते हैं , और मुज़से खेलते भी हैं , माँ , आपको पता है , इनको सबसे जायदा पसंद कोण है..." रमा मुस्करा कर उठते हुए बोली ,

"हम्म , तेरे भइआ..."

"नै माँ , अप्प , मेरे बचो को अप्प सबसे अछि लगती हो , बाद में भइआ , उसके बाद कोमल देदी , फिर शूरति और रिमी , फिर बेबी और ख़ुशी , इक मिंट माँ , हम्म , बोलो , सुन रही हु , क्या , नै बचो , अभी सोने का वख्त है , चलो सो जाओ..." रमा पहले सीमा से और फिर अपने जीवट बालो से बात करती हुई बोली ,

"क्या बोल रहे हैं..." सीमा ने उत्सुकता वश पूछा ,

"माँ , यह बोल रहे हैं , इनको बेबी और ख़ुशी को फिर से लड़ते देखना है , हहै , पोरे बदमाश हैं..." रमा हस्ते हुए बोली और फिर सीमा भी हसने लगी , फिर रमा ने अपनी माँ को बहु में भर लिया , फिर दोनों सो गई , मतलब सीमा , रमा कभी नै सोती थी , उसका रूप hi ऐसा था , वोह अपनी माँ को देखती रही , रत भर , और जब रमा सुपत अवशता में जाती थी , फिर कई महीने गुजर जाते थे , वैसे भी उसने पिछले 6 महीने सुपत अवशता में जाकर , अपनी कई सालो की नंद पूरी कर ली थी....

तभी वह उस रूम में रमा को इक कला साया दिखा , शयद यह वही नकाबपोश औरत थी , उसके हाथ में वोह रिंग सफेद रौशनी में चमक रही थी , जिसमे इनका बीता हुआ कल कैद था , और वोह बीता हुआ कल था , सुहाना....

तो बे कुनिटेड....

 


अपडेट-63

अभ अग्गे....

रवि और कोमल इक hi बीएड पर लेते हुए थे , कोमल बेहद शर्मा रही थी , वोह सीधी लेती चाट की तरफ देख रही थी , और उसका भाई उसे देख रहा था ,

"कोमल..."

"हूँ..."

"मेरे करीब ायो न , मेरी बहु में..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"नै जी , हम नै ऐनी वाले..." कोमल वैसे hi चाट की तरफ देख मुस्कराते हुए बोली ,

"तुम ा रही हो , या में आयु तुम्हारे ऊपर..." रवि ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,

"हम नै आएंगे , हाँ , अगर आपको एना है , तोह ा जाओ..." कोमल ने मुस्करा कर अपनी आँखें बंद करते हुए बोलै ,

"ाचा , हम क्यों ए , जिसे जरुरत होगी , वोह ा जायेगा..." रवि भी सीधा लेटता हुआ बोलै ,

"हमें किस चीज़ की जरुरत होगी..." कोमल वैसे hi मुस्करा कर बोली ,

"है कुछ , बेहद कीमती चीज़ , तुम्हारे काम की , उससे खेलना चाहुगी..." रवि अपने खड़े लम्बे लुंड को अपनी शार्ट निकर के ऊपर से hi मसलते हुए बोलै ,

"ाचा , हमारे पास भी इक कीमती चीज़ है , जिसको जरुरत होगी , वोह लेलेगा आकर..." कोमल भी शरमाते हुए बोली , उसकी गोर गाल शर्म से लाल हो गए ,

"कोमल तुमने कभी गाओं का गणना चूसा है.."

"नै भइआ , हम तोह बचपन में hi शहर ा गए थे , आपके पास है , गाओं का गणना..." कोमल अपने भाई की तरफ करवट लेते हुए बोली ,

"हाँ , है न , पर बेहद लम्बा और मोटा है , तुम चूस पाउगी..." रवि , कोमल की आँखों में देखते हुए अपने खड़े लुंड को मसलता हुआ बोलै ,

"ाचा जी , आपके गन्ने को तोह में निचोड़ कर रख दूंगी , पूरा रास निचोड़ लुंगी.." कोमल अपने रसीले गुलाबी होंठो पर जीभ फिरते हुए बोली ,

"हम्म , पर इस गन्ने का रास तुमसे आसानी से नै निकलेगा , जरा छू कर देखो ऐसे..." रवि ने कोमल का नाज़ुक नरम हाथ अपने लुंड पर रखते हुए बोलै , उफ़ लम्बे मोठे लुंड को अपने हाथ में पकड़ते hi कोमल के बदन में इक सिरहन सी दौड गई ,

वोह लुंड को हाथ में पकड़े उसे थोड़ा दबा दबा कर महसूस करने लगी , उसकी सांसे थोड़ी तेज़ होने लगी ,

"ाचा गणना है , पर मेरी मशीन (छूट) में यह चल पायेगा..." कोमल अपने भाई को आँख मरते हुए बोली , और उसने अपने भाई के लुंड को कास कर दबा दिया ,

"ोुछ्ह अह्ह्ह्हह , तुम्हारी मशीन (छूट) में यह इतना चलेगा , इतना रास छोड़ेगा , बस अह्ह्ह पुछु मत..." रवि मस्ती से आँखें बंद करता हुआ बोलै , कोमल के नरम हाथ की उंगलियाँ उसके खड़े सख्त लुंड को ऊपर से निचे तक सेहला रही थी ,

"भइआ मेरी मशीन बेहद छोटी है , और आपका यह लम्बा गणना , उसकी दैयां उड़ा देगा , आपको नै पता , मने अपनी मशीन को कितना सम्बल कर रखा है , कितना चमका कर रखा है..." कोमल अपने होंठो को जीभ फिरा खूब गीला करती बोली ,

"ाचा जी , अह्ह्ह्ह मेरी जान , लेकिन अभ मेरा गणना (लुंड) मानेगा नै , ऐसे तोह अभ मशीन चाहये..." रवि , कोमल के करीब होकर उसके मोठे मोठे मम्मो को हाथ में पकड़ कास कर दबाता हुआ बोलै ,

"ोुछःह ढेरी , अप्प मेरी मशीन अह्ह्ह , मेरी मशीन के बोटों क्यों दबा रहे हो , अगर मशीन स्टार्ट हो गई तोह..." कोमल मस्ती में आँखें बंद करती बोली ,

"अहह होने दो , तुम्हारी स्टार्ट मशीन को बंद कर दूंगा , अपनी मशीन को गरम करो , फिर यह गणना आराम से घुस जायेगा..." रवि , कोमल के करीब होकर उसके होंठो को जीभ से छत्ता हुआ बोलै ,

"अह्ह्ह उम्म्म भइआ अभ सेहन नै होता , मशीन पूरी गरम है , घुसा दो अपना गणना , और निकल दो अपना रास..." कोमल भी अपने भाई के होंठो को जीभ फिरा छत्ते हुए बोली ,

फिर दोनों अपनी जीभ निकल , इक दूसरे की जीभ को चुने लगे , फिर रवि ने लपक कर , कोमल की रसीली जीभ अपने मोह में भर ली , और अपने होंठ , कोमल के रसीले गुलाबी होंठो से मिला दिए ,

कोमल अपनी जीभ से अपने भाई के मोह के अंदर का कोना कोना महसूस करने लगी , जब उसकी जीभ अपने भाई की जीभ से लड़ने लगती , तब उसे बेहद मज़ा अत ,

रवि अभ धीरे धीरे कोमल की कमर पर हाथ फिरता , उसके गुलाबी होंठो को चूसने लगा , होंठो का नरम नरम मास्स , जब रवि चुस्त , तब उसके बदन में इक मेथा सा एहसास दौड जाता ,

रवि अभ बड़े प्यार से कोमल के दोनों होंठो को चूस रहा था , उसके होंठो में कभी कोमल का निचला नरम होंठ होता , कभी ऊपर वाला , उफ़ गुलाबी होंठो का नरम मास्स , रवि के होंठो में पिस्ता जा रहा था ,

रवि का इक हाथ कमर से सरकता हुआ , कोमल की मखमली चूतड़ों पर पहुँच चूका था , रवि प्यार से कोमल के उठे हुए मोठे चूतड़ों को सहलाने लगा ,

कोमल ने इक पतली सी कापरी पहन राखी थी , उसकी मोती गांड , उस कापरी में बेहद दिलकश लगती थी , कापरी उसकी गांड से पूरी चिपकी हुई थी , जब वोह कमर मटका कर चलती थी , तब उसकी गांड से चिपकी कापरी में उसके दोनों चूतड़ आपस में घिसने लगते , उफ्फ्फ कोमल की मोती गांड और चोदे मोठे चूतड़ों की थिरकन , किसी के भी लुंड का पानी वही निकल दे ,

रवि खुद पागल था , कोमल की मस्त , लाजवाब गांड ने उसे पागल कर रखा था , उसका बस चलता , तोह वोह कब का , कोमल को उल्टा लिटा , उसकी मखमली माखन जैसी छूट से पहले , उसकी गांड में अपना लुंड घुसा देता ,

रवि और कोमल अभ दोनों इक दूसरे के होंठो को चूसते चूसते पागल सा हो गए थे , अभ तोह कोमल भी आँखें बंद किये , कास कास कर अपने भाई के होंठो का रसपान कर रही थी ,

जब से कोमल को अपने भाई का हाथ अपने मोठे मोठे चूतड़ों पर महसूस हुआ था , तब से कोमल की छूट खूब पनिया गई थी , छूट की लाल फैंको से उसका नमकीन मेथा रास बहने लगा था ,

रवि ने प्यार से कोमल के चूतड़ों को सहलाते सहलाते , इक बार कास कर उसके चूतड़ों का मास्स अपनी मुठी में भर लिया , इतनी नरम गांड , अह्ह्ह इक बार कोई अपना लुंड घुसा दे , पागल हो जाये ,

"ोुछःह भइआए..." कोमल अपने भाई के होंठो को छोड़ आँखें खोल मेथे मेथे दर्द से सिसकते हुए बोली ,

"अह्ह्ह कोमल , डौगी मुझे..." रवि , अभ कास कास कर कोमल के मखमली चूतड़ों को मसलता , दबाता हुआ बोलै ,

"ोुछः ढेरी भइआए..." कोमल मस्ती में सिसकते हुए थोड़ा चीला कर बोली ,

"क्या धीरे..." रवि मुस्कराते हुए बोलै ,

"ोुछःह गंदे कही के , जो अप्प कर ोुछहहहह धीरे कारु..." कोमल मेथे मेथे दर्द में सिसकते हुए बोली , जब की उसका भाई , अभ उसके चूतड़ों का मास्स खूब अपनी मुठी में भर भर कर मसल रहा था ,

फिर रवि ने कोमल की कापरी थोड़ी निचे कर , उसकी गांड को नंगी कर दिया , कोमल और रवि अभ भी इक दूसरे की तरफ करवट लेकर , बेहद करीब , इक दूसरे से चिपक कर लेते हुए थे ,

रवि का हाथ फिर से कोमल की नंगी मखमली गांड पर पहुँच चूका था , उफ्फ्फ कातिलाना गांड , इक डैम गदराई हुई , इक डैम कुवारी , उफ्फ्फ रवि अभ कोमल की नंगी गांड पर प्यार से थपड मरने लगा , जैसे hi रवि कोमल के मलाई जैसे सफेद चूतड़ों पर थपड मरता , चूतड़ों का मास्स कम्पनी लगता ,

"ोुछःह भइआए अह्ह्ह..." कोमल मज़े से सिसकते हुए बोली ,

"कोमल लुंड लोगी मेरा , अह्ह्ह अपनी मखमली गदरायी गांड में..." रवि दोनों चूतड़ों को कास कर मसलता हुआ बोलै ,

"ोुछहहहहह नयी फाड् डोज अप्प्प..." कोमल मेथे मेथे दर्द से मुस्कराते हुए बोली ,

"कोमल इक बार लुंड गांड में लोगी तोह रोज़ अपनी गांड मरवाने ायोगीइ ..." रवि दोनों चूतड़ों की गहरी दरार में अपना हाथ फिरते हुए बोलै ,

"उम्म्म अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह देदू ..." कोमल मस्ती में सिसकते हुए , अपने भाई के चेहरे को चूमते हुए बोली ,

"सच में अह्ह्ह बोलो ना..." रवि अपनी शार्ट निकर निचे करता हुआ बोलै , उसका खड़ा लुंड फनफनाता हुआ उछलने लगा ,

"हाँ , अह्ह्ह्ह घुसा दो , भइआए फाड़ दो मेरी गांड को , पर पहले मुज़से शादी कारु..." कोमल अपने भाई की आँखों में देखते हुए बोली ,

"कर लूंगा..." रवि , अपनी बहिन के होंठो को चूस कर बोलै ,

"नई , भइआ मुज़से शादी करो , फिर अपनी गांड तोह क्या , में अपना सब कुछ आपको अर्पण कर दूंगी..." कोमल थोड़ा घम्बिर होकर बोली ,

"हस्सश्ठ ठीक है , में कल तुमसे कबीले के मंदिर में शादी करुगा..." रवि , कोमल का माथा चुम कर बोलै ,

"भइआ , क्या माँ सहमत होगी , हम दोनों के रिश्ते से..." कोमल फिर से घम्बिर आवाज़ में बोली ,

"ओह्ह्ह , फिर से , माँ , माँ , आखिर प्रॉब्लम क्या है तुम्हारी , पिछले जनम में भी मर गया , बिना तुमसे प्यार किये , और इस जनम में , तुम साथ हो , मुज़से प्यार करती हो , पर फिर से वही माँ..." रवि उठ कर बैठते हुए बोलै , दोनों अपने कपडे ठीक कर चुके थे ,

"भइआ अप्प जानते हो मा ..." कोमल अभी बोल hi रही थी के रवि बेच में बोल पढ़ा ,

"जनता हु , पिछले जनम में भी , माँ हमारे रिश्ते के बेच आयी और इस जनम में भी , हस्सश्ठ , क्या करो में , मुझे कुछ समाज नै ा रहा , माँ नै मानेगी , हम दोनों जान भी देदे , तब भी नै मानेगी..." रवि ने नाम आँखों से कोमल की आँखों में देख कर बोलै ,

"भइआ , हमने उनको कसम दी थी , पिछले जनम में , उनकी ीचा के बिना कुछ नै करेंगे , और इस जनम में भी , भइआए में आपसे वादा करती हु , में मानयोगी माँ को , इक दिन वोह खुद मेरा हाथ , आपके हाथ में देगी , तब में आपसे इतना प्यार करुँगी , इतना प्यार करुँगी , बस पूछो मत..." कोमल अपने भाई को बहु में भरते हुए बोली ,

"ठीक है , में तुमसे प्यार करता हु , न के तुम्हारे जिस्म से , अगर इतना इंतज़ार किया है , तोह थोड़ा इंतज़ार और सही , में तुम 1 साल का वख्त देता हु , या तुम माँ से हाँ बुलवाओ , या अपने हाथो से मुझे मर दो , वादा करो मुज़से..." रवि ने बेहद गुस्से में अपना हाथ अग्गे करते हुए बोलै ,

"वादा किया , 1 साल से पहले hi , में आपकी हो जोगी , वादा किया , आपसे हर रत प्यार करुँगी , में जानती हु , माँ बेहद ताकतवर है , पर अप्प भी वादा करो , अगर माँ से लड़ना पढ़ा तोह पीछे नै हटोगे..." कोमल ने मुस्करा कर अपना हाथ अपने भाई के हाथ पर रखते हुए बोलै ,

"ठीक है , वादा रहा , माँ से लडूगा , जान देकर भी तुम अपना बनाऊगा , लेकिन अभ क्या करे..." रवि , कोमल को आँख मर कर बोलै ,

"भइआ ओरल सेक्स , उसमे भी इक अलग hi मज़ा हैई ..." कोमल अपने भाई के होंठो को चूसते हुए बोली ,

दोनों मुस्कराने लगे , चाहे उनकी माँ , उनके रिश्ते के बेच कड़ी थी , पर क्यों , क्या कारन था , क्या राज़ था , क्या बात हुई थी , कोमल और उसकी माँ के बेच ,

क्या उनकी माँ इतनी ताकतवर थी , के वोह दोनों खुद भी उससे डरते थे , पर क्यों , रवि ने रमा से प्यार किया , रेखा से प्यार किया , रिमी , शूरति , कविता , सीतल , सबके साथ , पर उसकी माँ ने कुछ नै कहा , पर जब बात कोमल की अति थी , तब उनकी माँ हर बार बेच में ा जाती थी ,

और अभ कहा थी उनकी माँ , आखरी बार सीमा से उनकी माँ की बात हुई थी , 3 साल होने को थे , पर उनमे से किसी ने भी , अपनी माँ का चेहरा तक नै देखा था ,

उनकी माँ क्यों कोमल को hi पवितर रखना चाहती थी , वोह अछि थी , या बुरी , हासष्ठ यह तोह ऐनी वाले वख्त में पता चलना था....

वही दूसरी तरफ.....

रिमी और शूरति इक दूसरे की तरफ करवट लेकर लेती हुई थी , रिमी अपनी बहिन शूरति की आँखों में देख रही थी ,

"क्या देख रही हो..." शूरति मुस्कराते हुए बोली ,

"देदू , अज्ज में बहुत खुश हु , हम सब साथ हैं..." रिमी भी मुस्करा कर बोली ,

"हाँ रिमी , में भी बहुत खुश हु , और इस बात से जायदा खुश हु , हम बहनो में प्यार बहुत अधिक बढ़ा है , हम जिंदगी भर साथ रहेगी , कभी अलग नै होंगे..." शूरति थोड़ा नाम आँखों से बोली ,

"हाँ देदी , यह अपने ठीक बोलै , उन दो सालो में , हम पर बेइंतहा जुल्म हुए , पर हम दोनों कभी अलग नै हुई , इक साथ रही , हम अभ भइआ की बंद भी साथ में बजाएगी , हहै..." रिमी हस्ते हुए बोली ,

"मतलब थ्रीसम..." शूरति मुस्करा कर बोली ,

"यस देदी .." रिमी अपनी बहिन शूरति के गले लगते हुए बोली ,

"फिर तोह मज़ा आएगा .." शूरति भी अपनी छोटी सी गुडिअ को बहु में कस्ती बोली ,

"देदू गुड़ नाईट..." रिमी आँखें बंद करती बोली ,

"गुड़ नाईट मेरी गुडिअ..." शूरति , रिमी का माथा चुम कर बोली , और फिर दोनों सोने लगी , और आखिर इक दूसरे से चिपकती दोनों सो गई....

वही दूसरी तरफ...

रमा बीएड से उठ कड़ी हुई , उसने देखा उसकी माँ सीमा अभ सो रही थी , वोह बहुत गहरी नंद में थी , रमा अपनी माँ के मासूम चेहरे को देख मुस्करा पढ़ी ,

तभी उसके सामने वही नकाबपोश औरत कड़ी थी , जिसका जिस्म बस अँधेरे से बना था , पर वोह थी कोण ,

"मेरीए बाछीइ , कैसी ही तू..." उस औरत ने रमा को बहु में भरते हुए बोलै , जब के रमा के लाल जादुई बाल अभ शांत हो चुके थे , उनमे जरा सी भी हलचल नै थी ,

"माँ , में ाची हु , अप्प कैसे आयी मिलने , यहाँ मत आया करो , किसी ने आपको देख लिया तोह , मुझे बोल दिया करो , में ा जाया करुँगी , आपके पास..." रमा उस नकाबपोश औरत के चेहरे को चूमते हुए बोली ,

"बेटी , इस दुनिआ में तू hi तोह मेरी अपनी ही , और कोई नई , मेरा दिल किया , तुमसे मिलने ा गई..." वोह नकाबपोश औरत उदास आवाज़ में बोली ,

"ओह्ह्ह मेरी प्यारीय माँ..." रमा बेहद खुश होते हुए बोली ,

"हम्म , रवि और कोमल इक साथ , नई , यह नै हो सकता , उनको दूर करना होगा , वार्ना , मेरा मकसद कैसे पूरा होगा , कोमल और रवि का मिलान नै होने डूंगीए , मेरा मकसद पूरा होने तक , वोह मैप मेरा है , सदियों तक उसे ढूंढ़ती रही..." वोह औरत रिंग की ताकत से रवि और कोमल को महसूस करते हुए मन में hi बोली , क्यों की रवि और कोमल रिंग से जुड़े हुए थे ,

"मेरीए बाछीइ , में जातीय हु , फिर ायुगी मिलने..." इतना बोल वोह नकाबपोश औरत गयाब हो गई , उसके जाते hi रमा के लाल जादुई बाल फिर से हवा में उड़ने लगे , उसके चेहरे को चुने लगे , फिर रमा भी अपनी माँ सीमा के साथ लेट गई , उसे बहु में भर कर....

तो बे कुनिटेड....

 
फ्रेंड्स अज्ज लास्ट अपडेट दूंगा... में नै चाहता .. के वोह लिखा अपडेट फ़ज़ल जाये.. इक hi बात कहुगा.. म सॉरी.. अपना ख्याल रखना अप्प सब... शयद फिर न मिल पाए...
 


अपडेट-64

अभ अग्गे... ओने लास्ट अपडेट...

वही दूसरी तरफ...

ख़ुशी और बेबी अपने रूम में पहुँच चुकी थी , दोनों बेहद खुश थी , दोनों इक साथ बतिअन करती हुई ा रही थी , फिर दोनों रूम में आकर बीएड पर बेथ गई ,

"छिपकली जी अभ सो जाये..." ख़ुशी अपने लम्बे खूबसूरत बालो को सहलाते हुए बोली ,

"हाँ , बूढ़ी जी , सो जाते हैं..." बेबी ने मुस्करा कर इतना बोलै , के तभी उसका फ़ोन बज उठा ,

बेबी ने नंबर देखा तोह काट का फ़ोन था , पहले तोह बेबी उससे बात नै करना चाहती थी , पर काट ने जो सब किया था , वोह उसके लिए किया था , बेबी ने काट को माफ़ कर दिया था , बेबी ने फ़ोन पिचकूप कर लिया ,

"हलो , बेबी कहा हो , कितने दिन हो गए , मुझे बता कर तोह जाती , पता है , में कितना परेशान थी..." काट ने नाम आँखों से बोलै ,

"ओह्ह सॉरी काट , वोह में , हसश , तुम क्या बताऊ , ाचा , मेरी बात सुनो , कल अपना और फर्जी का सामान पैक कर लेना , इक सरप्राइज है तुम दोनों के लिए..." बेबी मुस्कराते हुए बोली ,

"ाचा , लेकिन अभ तोह मुझे छोड़ कर नै जोगी न , बेबी तुम पता है , में तुम्हारे बिना नै जी सकती..." काट ने रट हुए बोलै ,

"इक मिंट , इक मिंट , उफ़ तुमने ड्रिंक किया न.." बेबी बीएड से उठते हुए थोड़ा गुस्से में बोलै ,

"नई.." काट वैसे hi रट हुए बोली ,

"मेरी कसम खा कर बोलो , तुमने ड्रिंक नै किया.."

"हाँ , हाँ , किया है , लेकिन तुम इससे क्या , पिछले 1 साल से कर रही हु , तुम कोनसी मेरी चिंता है , अगर में मर भी जाऊ , तुम क्या फरक पड़ेगा , तुम्हारे लिए तोह तुम्हारा रवि इम्पोर्टेन्ट है..." काट ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"यह ..mm..mane..kk..kya...kk..kar...dd..diya...." बेबी बेहद रट हुए बोली ,

"नै बेबी , इसमें तुम्हारी कोई गलती नै , गलती तोह मेरी थी , जो रवि को तुमसे दूर किया , पर , पर क्या करती , तुम रट हुए , तड़फते हुए नै देख पायी में...." काट ने बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"हॉशह्ह्ह , में पागल हो गई थी , रवि के प्यार में , जो अपनी हमसफ़र को अकेला छोड़ दिया , प्लस माफ़ कार्डो काट , प्लस..." बेबी ने घुटनो के बल बैठते रट हुए बोलै ,

"बब्यीय , प्लस रोना मत , प्लस , में कल ा जोगी , प्लस , ाचा , रवि मिला तुम , उससे माफ़ी मांगना चाहती हु , उसका दिल ढुकाया मने , वोह , वोह , बेबी , ी लव रवीए , मुझे , उफ्फ्फ , बेबी , मुझे..." काट अभी बोल hi रही थी के बेबी बेच में बोल पढ़ी ,

"हाँ , हाँ , बोलो मर्दो से नफरत करने वाली जलाद औरत , हहै , में सुन रही हु..." बेबी जोर जोर से हस्ते हुए बोली , तोह काट शर्माने लगी ,

"क्या बेबी , में नै बताऊगी..." काट शरमाते हुए बोली ,

"ाचा , सॉरी , अभ बोलो.." बेबी अपनी हस्सी पर कण्ट्रोल करते हुए बोली ,

"वोह , वोह , बेबी , mm...muze , रवि से प्यार हो गया है , पता नै क्या है उसमे , उसने मेरा दिल जीत लिया , में , में , खुद को रोक न पायी , मने बहुत दारू पी , पर जो नशा रवि की बहु में मुझे महसूस हुआ , वोह अलग था , पर , क्या वोह मुझे..." काट बोलते बोलते रोने लगी ,

"क्या मतलब , अग्गे बोलो..." बेबी भी थोड़ी चिंता में बोली ,

"मेरा मतलब , मने उसे मारा था , उसे जलील किया , उसका अपमान किया , क्या वोह मुझे फिर अपना पायेगा..." काट फिर से रट हुए बोली ,

"मेरी जान , रवि का दिल बहुत बड़ा है , वोह सबसे अलग है , वोह , वोह , जब किसी को अपने दिल में जगह दे देता है , तब चाहे कुछ भी हो जाये , वोह न तोह उसे कभी अपने से दूर होने देता है , और न खुद दूर होता है , तुम में कल लेने ायुगी , bye जान.." बेबी ने मुस्कराते हुए बोलै , और फिर फ़ोन कट कर दिया ,

बेबी फ़ोन कट कर पलटी तोह ख़ुशी बीएड पर पीठ लगाए बैठी , मुस्कराते हुए उसे hi देख रही थी , उसके हाथ में शराब की बोतल थी ,

"हे राम , बूढ़ी , तू फिर सुरु हो गई.." बेबी अपने माथे पर हाथ मरती बोली , और ख़ुशी के साथ बेथ गई ,

"क्या करू , जब से तामस बानी हु , तब से दारू पीने के बहुत मन करता है , तू अपनी गर्लफ्रेंड काट से बात कर रही थी न..." ख़ुशी बोतल से छोटे छोटे सिप लेते बोली ,

"हम्म , मेरी जान काट , उसका फ़ोन था.." बेबी मुस्करा कर बोली ,

"हम्म , अज्ज कल चिपकलियों को भी प्यार होने लगा है..."

"हाँ भाई , जब बेवड़े लोग प्यार कर सकते है , तोह हम क्यों नै.."

"हैश्च , मेरा दिल करता है , तुम पीट दू , पर फिर कभी , हआ , अभी मुझे नंद ा रही है , गुड़ नाईट..." ख़ुशी चुटकी बाज़ा लम्बी साँस लेते बोली और फिर सो गई ,

बेबी भी मुस्कराते हुए लेट गई , उसे भी जल्द hi नंद ा गई , पर अभी थे , कोई दो दीवाने जो जग रहे थे ,

वही दुसि तरफ..

रवि अपनी खूबसूरत , चंचल बहिन कोमल को बहु में लेकर लेता हुआ था , दोनों इक दूसरे की आँखों में खोये हुए थे ,

"कोमल , तुम बेइंतहा खूबसूरत हो..." रवि ने कोमल के दूध से भी सफेद चेहरे को देखते हुए बोलै ,

"क्या भइआ , में भी आम लड़कयों जैसी हु..." कोमल नज़रियन ज़ुका कर बोली ,

"नै तुम आम नै हो , तुम बेहद खास हो , में , में तुम पाना चाहता हु , तुमसे जिंदगी भर प्यार करना चाहता हु , पता नै वोह दिन कब आएगा ..." रवि ने कोमल की आँखों में देख बोलै , कोमल को महसूस हो गया , उसका भाई अंदर से कितना उदास है , उसकी भी आँखें नाम हो गई ,

"भइआए , क्यों , क्यों , मेरा दिल ढुका देते हो , में भी आपसे प्यार करना चाहती हु , जानते हो , मुझे पिछले जनम में किसने मारा था.." कोमल ने रट हुए बोलै ,

"जनता हु , सुहाना ने..." रवि बीएड पर उठ कर बैठते हुए बोलै ,

"नै , उसने नै , किसी और ने , मुझे सब यद् है , मुझे किसने मारा था , अपना कण ेहडेर करो..." कोमल अपने असनु साफ करते हुए बोली , फिर कोमल ने रवि के कण में सच बोल दिया ,

"क्याआ , पर क्यों..." रवि इक डैम चौंक कर बोलै ,

"हाँ , भइआ उसी ने मारा था , अगर हम इक हुए , वोह फिर मर देगी , उसने बोलै था , में आपको खोना नै चाहती , हाँ , अगर वोह मुझे मरने का कहती , तोह में आपसे कब का प्यार कर , अपनी जान दे देती , पर उसने , मुज़से बोलै के इस बार आपको मर देगी , वोह सिर्फ सुहाना की बात मानती है..." कोमल ने अपने भाई के गले लग सुबकते हुए बोलै ,

"शहहह , हम कोई न कोई रास्ता निकल लेंगे , तुम सो जाओ ..." रवि अपनी कोमल का माथा चुम कर बोलै ,

कोमल लेट गई तोह रवि उसके पास लेट , उसका चेहरा देखने लगा , कोमल के होंठ कम्प रहे थे , वोह बेहद दरी हुई थी ,

"उफ्फ्फ , वोह औरत आखिर है कोण , माँ या कोई और , लेकिन माँ , वोह मुझे नै मर सकती , फिर कोण होगी वोह औरत , हष्ठ , उसे डुंडा होगा , इस से पहले वोह मेरी बहनो की जिंदगी नाराज बना दे , पर माँ कहा है..." रवि अपने मन में यह बतिअन सोचता परेशान सा होकर बोलै ,

"क्या सोच रहे हो जणू भइआ.." कोमल मुस्कराते हुए अपने गुलाबी होंठो को जीभ फिरा गीला करते हुए बोली ,

रवि सब समाज गया , उसने कोमल के ऊपर झुक , उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए , और प्यार से उसके होंठो को चूसने लगा , धीरे धीरे यह किश बढ़ता गया , और वाइल्ड होता गया , कोमल इतनी गरम थी के वोह अपने भाई के होंठो को हल्का हल्का दांतो में दबा काटते हुए चूसने लगी , रवि को इक मेथा मेथा दर्द होने लगा ,

रवि का इक हाथ कोमल के मोठे मोठे चुचु पर पहुँच चूका था , रवि उनको धीरे धीरे दबाता हुआ , कोमल के होंठो को चूस रहा था , कोमल के दूध इतने बड़े थे , के रवि के हाथ में नै समां रहे थे ,

रवि प्यार से कोमल के मोठे मम्मो को सेहला रहा था , कोमल के बदन में इक मस्ती से भर गयी थी ,

फिर रवि ने कोमल के होंठो को छोड़ उसकी गर्दन को चूमने लगा , अभी रवि ने कोमल की टीशर्ट ऊपर की hi थी , के किसी अनजान शक्ति ने उसे इक ढाका सा दिया ,

रवि बीएड से उड़ता हुआ , सामने लकड़ी की दीवार से जा टकराया ,

"भइआएए..." कोमल इक डैम से बीएड से उठते हुए बोली , तभी उसके कनु में आवाज़ सुनाई दी ..."कोमळळ , मेरी बची , तुम यह नै कर सकतीई , अभ तोह बिलकुल भी नईईई , अभ ागररर , तुम अपने भाई के करीब गयी , में तुम्हारे भैई का विनाश कर डूंगीए , मुझे मैप दो..." कोमल ने जब यह सुना , उसके कदम वही जैम गए , वोह उससे लड़ भी नै सकती , आखिर वोह उसकी....

रवि दीवार का सहारा लेकर खड़ा हुआ और वापिस आकर बीएड पर बेथ गया , उसे इतना गुस्सा ा रहा था , जिसका शबदो में वर्णन नै किया जा सकता , पर वोह भी उस पर हाथ नै उठा सकता था , आखिर वोह उसकीय...

"भइआ मने बोलै था , वोह ायेगीइ , में , में आपकी जान खतरे में नै दाल सकती..." कोमल रट हुए नज़रियन ज़ुका कर बोली ,

"हासष्ठ , आखिर वोह है कोण , कोमल डरो मत , उसमे इतनी हिमेट नै , के वोह सामने आकर , आँखों में आँखें दाल मुज़से लड़ सके , अभ में उसे दंड कर , उसका विनाश कर दूंगा..." रवि बेहद गुस्से में बोलै , उसकी आँखें लाल रौशनी में चमक उठी ,

"भइआ , उसे भी वही मैप चाहये , जो बस आपके दिमाग है , अपने hi उस मैप को आखरी बार देखा था , क्या हम उसे वोह मैप नै दे सकते..." कोमल ने उदास आवाज़ में , असनु भेजी आँखों से बोलै ,

रवि खामोश हो गया , बस इस दुनिआ में अभ , रवि hi जनता था , उस मैप का राज़ , उसके इक तरफ कोमल थी , तोह दूसरी तरफ मैप ,

मंज़िल कहथिन थी , रास्ता उलझा हुआ , इक तरफ प्यार था , और इक तरफ वोह मनहूस मैप , जिसके कारन पूरा पारी लोग खाक में मिल गया था , और अभ यह खूबसूरत पृथ्वी खतरे में थी ,

रवि जनता था , युद्ध होगा , लाशे बिष जाएगी , कत्लेआम होगा , अगर मैप का राज़ खुल गया तोह ,

"कोमल , में तुमसे पूरी जिंदगी दूर रह लूंगा , तुम मर जाओ , तब भी में टूट कर , भीकर कर , अपनी जिंदगी गुजर लूंगा , लेकिन वोह मैप , इस दुनिआ में किसी को नै दूंगा , तुम भी नै , जब पारी लोग जैसी बेइंतहा ताकतवर दुनिआ जल कर रख हो गई , तोह जान लो इस दुनिआ का क्या होगा , भूल जाओ उस मैप को..." रवि ने बेहद खामोश आवाज़ में बोलै ,

"भइआ , अप्प मुझे भी उस मैप के लिए भुला डोज , अगर में मर भी जाऊ , तब भी आपको कोई फरक नै पड़ेगा , क्या यही प्यार है हमारा..." कोमल ने बेहद रट हुए बोलै ,

"हाँ , हाँ , तुम मर जाओ , तब भी मुझे कोई फरक नै पड़ेगा , कोमल , वोह मैप नै , इस दुनिआ का अंत है , में इक कोमल के लिए , पूरी इंसानियत को खतरे में नै दाल सकता , पूरी इंसान प्रजाति का विनाश नै होने दूंगा , सिर्फ तुम hi नै , इस दुनिआ में कोई भी मेरा अपना , अगर मर जाये , मेरी माँ मर जाये , मेरी बेटी फर्जी मर जाये , तब भी , तब भी , उस मैप को मेरे दिमाग से कोई नै निकल सकता , भूल जाओ उस मैप को , अगर तुमने कभी मुज़से प्यार किया हो , तोह जिंदगी भर कभी , उस मैप का नाम भी मत लेना..." रवि ने बेइंतहा गुस्से में बोलै , और उठ कर बालकोनी में ा गया , और सामने विशाल जंगल , और आसमान में चमकते सितारों को देखने लगा , तभी उसकी नज़र कबीले के लकड़ी के पल के दूसरी तरफ , इक औरत के साये पर पढ़ी , जो उसे hi देख रही थी..

दोनों इक दूसरे को देख रहे थे , इक मैप पाना चाहता था , तोह दूसरा छुपाना , ें दोनों की जिंदगी , इक ब्यांक युद्ध की तरफ बाद रही थी ,

इक मैप के लिए अपना सब कुछ त्याग करने को त्यार था , और दूसरा उस मैप के लिए , किसी को भी मरने को त्यार था , लेकिन मैप में था क्या....

रवि और वोह औरत काफी देर तक इक दूसरे को देखते रहे , फिर रवि ने पीछे पलट कर देखा , कोमल करवट लेकर लेती हुई रो रही थी , रवि को इस बात से बेहद गुस्सा ा गया ,

रवि उस बालकोनी से निचे कूद गया , और धीरे धीरे उस नकाबपोश औरत की तरफ बढ़ने लगा , धीरे धीरे रवि उसके करीब पहुँचता गया , और आखिर वोह वख्त भी आया जब दोनों इक दूसरे के सामने खड़े थे , बेहद करीब ,

"रवीए..." उस नकाबपोश औरत ने बेहद धीमी आवाज़ में बोलै..." वोह मैप देदो मुझे..."

"अप्प , पर क्योऊ..." रवि ने बेइंतहा दर्द और गुस्से में बोलै , क्या रवि उसे पहचान गया था , पर वोह थी कोण....

तो बे कुनिटेड....[Note- i quit xf , for my family reasons , but , hassh , i am miss you all , everyday, everytime.

but ik rasta hai , agar me week me 1 update du , par muze yeh acha nai lagega.. kyu ki story behad lambi hai , or wakht behad kam , phir bhi kossih karuga , week me update dene ki , thanks friends.. abh nai kahuga , aise hi sath bane rehna , i will crying but i have no other choice.

 
शुक्रिया सभी दोस्तों का... मेरी वाइफ की हेल्थ अभ बेहतर है... पिछले कुछ दिनों से वोह ठीक नै था..

जब मुझे लिवर कैंसर हुआ था.. तब उसने मुज़से शादी की.. मने मन भी किया.. बूत वोह नै मणि... मेरे छोटे भाई ने मुझे अपना लिवर डोनेट किया... अभ मेरी वाइफ को जरा सी भी तकलीफ होती है.. तोह मुज़से सेहन नै होता... इस लिए.. मैं अपडेट नै लिख सका...

लेकिन इतने दिन अपडेट न दिया.. तोह मने अग्गे की कहानी के बारे में बहुत सोच लिया.. कुछ नए सस्पेंस , कुछ नए इमोशंस , और फ्रेंड्स कल रत से स्टोरी कंटिन्यू करुगा... अगर कल न कर पाया.. तोह शयद फिर कभी न कर पाव..

आपके खूबसूरत रेप्लीस के जवाब भी कल दूंगा.. शुक्रिया, मेरी मज़बूरी समज़ने के लिए.. दिल से थैंक्स सभी का...
 


अपडेट-65

अभ अग्गे....

रवि और वोह औरत इक दूसरे की आँखों में देख रहे थे , उस रहस्मयी औरत का मकसद , वही था , जो बाकि सब का था , मैप , उसे भी वही मैप चाहये था ,

रवि कुछ समाज नै प् रहा था , वोह क्या जवाब दे , वोह औरत काफी देर रवि के बोलने का इंतज़ार करती रही , जब रवि कुछ न बोलै , तोह वोह औरत बेहद गुस्से में बोली ,

"हम्म , तोह तुम मुझे वोह मैप नै डोज , हैश्च , इक बात कहु , सदियाँ गुजर गई , ज़माने बीत गए , मैं , मैं अंधेरो में तड़फती रही , सड़ती रही , किसके लिए , बस उस मैप के लिए , इक बार और सोच लो , में तुम 7 दिन का वख्त देती हु..." वोह नकाबपोश औरत बेइंतहा गुस्से में बोली ,

"अगर न दिया तोह..." रवि बेहद ख़ामोशी से बोलै ,

"चीन लुंगी , तुम्हारी बहने , तुम्हारा इक इक अपना इंसान , तुम्हारा सब कुछ , तुम्हारी यह प्यारी खूबसूरत दुनिआ , सब कुछ तबाह कर दूंगी , पर वोह मैप लेकर रहूगी..." वोह औरत , रवि के करीब होकर , उसकी आँखों में ज़क कर बोली ,

"चीन लो , मर दो मेरी बहनो को , सबसे पहले कोमल को मर देना , इस दुनिआ को भी मिटा दो , लेकिन वोह मैप , भूल जाओ..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"खीयकहीईई , कोमल को मर दू , ाचा मज़ाक है , वोह मर गई , तोह तुम भी मर जाओगे , खीयकहीईई , तोह ठीक है , तुम्हारी यह ीचा में जरूर पूरी करुँगी , ठीक 7 दिन बाद , अगर मैप न मिला तोह , सबसे पहले कोमल hi मारेगीइ..." वोह औरत अपनी वहशी हस्सी हस्ते हुए बोली ,

इतना बोल वोह औरत वह से गयाब हो गई , रवि पता नै क्यों , उस पर हाथ न उठा पाया , कोण थी वोह औरत , के रवि के हाथ थम गए ,

रवि ने पीछे पलट कर देखा , रमा उसकी तरफ ा रही थी , उसका जिस्म तोह अँधेरे से गुलमिला था , पर उसके बाल बेहद अधिक रौशनी में चमक रहे थे ,

"हूँ , तोह वोह रमा को देख कर भाग गई..."

अभ रमा इक डैम रवि के सामने कड़ी थी , पोरे कबीले में शांति थी , रत के 2 बज रहे थे , किसी घर में हलकी हलकी रौशनी दिख रही थी , थोड़ी थोड़ी ठंडी हवा चल रही थी , आसमान में टारे चमक रहे थे , पर चाँद की रौशनी पृथ्वी की सतह पर नै पहुँच प् रही थी , अज्ज शाम को तेज़ बारिश हुई थी , और हलके हलके बदलो ने आसमान धक् रखा था , लेकिन जब भी कोई बदल हवा में तैरता हुआ , चाँद के अग्गे अत , वोह बदल भी हलकी रौशनी में चमक उठता , बेहद कमल का करिश्मा था , कुदरत का ,

"भइआ , अप्प यहाँ क्या कर रहे हो..." रमा ने सब जानते हुए भी अनजान बन कर बोलै ,

"kk..kuch नै , बस नंद नै ा रही थी , तोह यहाँ घूमने ा गया..." रवि बेहद मसोमीयत से बोलै ,

"ओह्ह्ह , मुझे भी नंद नै ा रही , हम घूम कर एते हैं , थोड़ा जंगल में..." रमा अपने भाई के करीब होकर उसकी आँखों में आँखें दाल बोली ,

रवि को कुछ अजीब नै लगा , आखिर रमा उसकी बहिन थी , उसने मुस्कराते हुए रमा को देखा और उसका ब्लैक हाथ पकड़ जंगल के अंदर की तरफ जाने लगा , लेकिन रमा खामोश थी ,

जंगल में दोनों साथ साथ चल रहे थे , लेकिन दोनों खामोश थे , रमा के लाल बाल कभी कभी रवि के चेहरे को छू लेते ,

"भइआ यहाँ कितनी शांति है , ऐसा लग रहा , जैसे में अपने गाओं के , हसन खेतो में घूम रही हु..." रमा ने इस ख़ामोशी को तोड़ते हुए बोलै ,

"हाँ मेरी जान , हम इक दिन अपने गाओं जायेगे , मुझे मेरे खेतो की बहुत यद् अति है , में इस दुनिआ में अपनी उस 2 बईगा जमीन को बेइंतहा प्यार करता हु , क्यों की उस जमीन ने मेरे परिवार को दो वख्त का खाना दिया..." रवि ने गाओं में बीती अपनी जिंदगी को यद् करते हुए बोलै ,

"भइआ यद् है आपको , हहै , मने आपको चिलम लगते हुए पकड़ा था , और बाद में अपने हमारी झोपड़ी में चिलम लगा कर दिखाई थी , और बाद में..." रमा यह बोलते बोलते शर्माने लगी , उसे सब यद् था ,

"बाद में क्या , रमा चिलम पीने के बाद मने क्या किया था..." रवि मुस्कराते हुए बोलै , अभ दोनों जंगल में उस नदी के पास पहुँच गए थे , यहाँ रवि ने इक बार कोमल के साथ प्यार करने की कोससिह की थी ,

"मुझे नै पता..." रमा शरमाते हुए बोली ,

"ओह्ह तुम यद् नै , तुमने मुझे छोड़ा था.."

"अरे नै भइआ , अपने मुझे छोड़ा था..." रमा यह बोलते hi चेहरे पर हाथ रख शर्माने लगी ,

"ओह्ह मेरी रमा , ी लव ू , उस दिन के बाद मेरी जिंदगी बदल गई , नजाने कितनी लड़कयों को छोड़ दिया , पर जो मज़ा उस दिन तुम्हारे साथ आया , उम् , उसका एहसास hi अलग था..." रवि ने रमा के सामने आकर उसके चेहरे से हाथ हटा उसकी आँखों में ज़क कर बोलै ,

"भइआ , क्या अभ भी अप्प मुज़से प्यार करोगे , मतलब मेरे इस रूप में ..." रमा उदास आवाज़ में नज़रियन ज़ुका कर बोली ,

"शहहह , तुम बहुत खूबसूरत हो , जानती हो क्यों , क्यों की तुम मेरी गाओं वाली पगली रमा हो , और जब तुम कहुगी , में तुमसे बेपनाह प्यार करुगा..." रवि ने रमा को अपनी बहु में भर उसके होंठो को चूमते हुए बोलै ,

"भइआ मुझे कुछ पूछना था.." रमा अपने भाई से दूर होकर उस बहती नदी के पानी की तरफ देखते हुए बोली ,

नदी की पानी अपनी इक hi रफ़्तार से बेहटा जा रहा था , उसकी इक hi रफ़्तार थी , जैसे जिंदगी की होती है , पता नै कितनी चटानो , कितनी रुकावटों , ने उसका रास्ता होगा , ऐसी hi जिंदगी होती है , कदम कदम पर मुश्किलें अति हैं , धोके मिलते हैं , दिल टूट जाते हैं , लेकिन जो ें मुश्किलों को इक चैलेंज मन कर अग्गे बढ़ते हैं , वोह अमर हो जाते हैं , इस दुनिआ की नज़र में , हाँ तोह में कहा था ,

"हाँ रमा पूछ लो , क्या पूछना था..." रवि वही खड़ा रमा की तरफ देख कर बोलै ,

"भइआ , वोह , वोह , मतलब , वोह , अह्ह्ह , कैसे बोलू , मतलब क्या अप्प मुझे , वोह , मैप दे सकते हो..." रमा ने अपनी hi बातिओं में उलज़ते हुए बोलै ,

"हाहाहा , तुम भी , मैप चाहये , मुझे इतनी दूर लायी , गाओं की पुराणी बतिअन यद् दिला इमोशनल किया , सिर्फ मैप के लिए , मने सोचा , तुम सच में मुज़से प्यार है , तभी तुम वोह सब यद् कर रही हो..." रवि ने बेइंतहा हस्ते हुए बोलै ,

"हाँ , हाँ , मुझे वोह मैप चाहये , में उस मैप के लिए अपने परिवार को खतरे में नै दाल सकती , भइआ ..." रमा बेहद नरम आँखों से दर्द भरी आवाज़ में बोली ,

"हाँ बोलो , में सुन रहा हु..." रवि ख़ामोशी और गुस्से के मिले जुले रूप में बोलै ,

"भइआ , माँ को मैप देदो , प्लस , बस उस इक दिन के वास्ते , जब हम दोनों ने बेइंतहा प्यार किया था , प्लस..." रमा घुटनो के बल बेथ रट हुए बोली ,

"मैप देदू , तुम पागल हो गई हो , जानती हो उस मैप में क्या है , हैश्च , तुम कोनसा पता होगा , वोह माँ नै शेतीअन है , और में शेतीआनो के अग्गे कभी नै ज़ुकता..." रवि बेहद गुस्से में बोलै ,

"भइआ , अप्प उनसे नै लड़ सकते , वोह बहुत ताकतवर है , सबको मर देगी वोह..." रमा ने वैसे hi रट हुए बोलै ,

"मर दे , सबको मर दे , लेकिन मैप उसे कभी नै मिलेगा , ाचा हुआ वोह मैप खुद बा खुद नष्ट हो गया , वार्ना में उसे जला देता , और रही बात उनकी , में लडूगा , आखरी साँस तक लडूगा , मौत ऐनी तक लडूगा , लेकिन ज़ुकूगा नै..." रवि बेहद गुस्से में यह सब बोल जाने लगा ,

"भइआ , अप्प बहुत नेकदिल हो , में आपका इम्तेहान ले रही थी , पर अप्प नै झुके , में भी लड़ुँगी आपके साथ..." रमा इतना बोल मुस्कराते हुए रवि के गले लग गई , उसे महसूस हो गया था , उसे कोई और रास्ता अपनाना होगा ,

"ओह्ह मेरी रमा , तुमने मुझे डरा दिया था..." रवि भी मुस्कराते हुए बोलै , लेकिन उसकी आँखें लाल रौशनी में चमक रही थी ,

"भइआ , उस लड़ाई का अंजाम बेहद दर्दनाक होगा , मैप तोह में आपसे लेकर रहूगी , आखिर मेरी माँ ने जो कहा है..." रमा मन hi मन सोचते हुए बोली , उसने अपने भाई को कास कर बहु में दबा लिया....

"रमा चले घर..." रवि मुस्करा कर बोलै , लेकिन उसके मन में हज़ारो बतिअन चल रही थी ,

"हाँ भइआ..." रमा अपने भाई का हाथ पकड़े घर की तरफ जाने लगी ,

रमा थोड़ी चिंता में थी , उसे प्यार था , अपनी माँ से , अपने भाई से , अपनी बहनो से , पर मैप , अगर मैप न मिलता , तोह हर तरफ उसकी माँ तबाही मचा देती , लेकिन वोह थी कोण , और रमा उसके लिए अपने भाई से क्यों लड़ना चाहती थी ,

दोनों घर के मैं गेट के पास पहुँच रुक गए , रवि , अभ रमा की आँखों में देख रहा था , जब के रमा अपनी नज़रियन ज़ुका रही थी ,

"में जनता हु , में समज़ता हु , तुम क्या सोच रही हो , मेरी सेक्सी रमा , मने तुमसे वादा किया था , और अभ भी करता हु , जब भी मौत आयी , तुम्हारी बहु में आएगी , क्यों की तुम मेरे लिए बेहद स्पेशल हो..." रवि दिल की गहराई से यह शब्द बोलै और रमा को अपनी बहु में भर लिया ,

रमा के बदन से वही खुसबू उसे महसूस हो रही थी , जो पहले दिन हुई थी , जब दोनों के जिस्म , दोनों की आत्मा , दोनों के जज्बात , दर्द , खुशियाँ , सब इक हो गए थे ,

"भइआए , में आपको नै मर पाउगीयी , में चाहे जितनी भी कोससिह कर लू , पर मेरा दिल , मेरा मन , मेरा पवितर प्यार , मुझे रोक लेगा , में आपसे बेइंतहा प्यार करती हु , अभ भी , सॉरी भइआ , में आपको कुछ बता भी नै सकती .." रमा ने मन hi मन यह बोलै , उसकी आँखों से असनु बहने लगे , लेकिन आँखों से बेहटा पानी कला था ,

क्यों की रमा इक रहस्मयी लड़की थी , उसकी शक्तियाँ रहस्मयी थी , उसके बाल रहस्मयी थे , लेकिन जजबातो के बंदन से जकड़ी रमा , क्या कोई गलत कदम उठा पति , हआ , यह तोह ऐनी वाले वख्त में छुपा था ,

रवि ने नाम आँखों से रमा के होंठो को चूमा , वोह रुका नै , बस चूमता रहा , चूमता रहा , पर रमा खामोश थी , लेकिन उसका भाई इस कदर उसके होंठो को चुम रहा था , के उसके जिस्म में इक वासना का तूफान सा उठने लगा था , रमा की आँखें बंद थी , होंठ अपने भाई के होंठो से मिले हुए थे , उसे महसूस हो गया था , उसका भाई , किस कदर उसे प्यार करता है , किस कदर उसके लिए पागल है , क्यों की रमा किसी के भी जज्बात पढ़ सकती थी , उसमे असीम शक्तियाँ थी....

"बस भइआ , रुको , में और नै सेह सकती , क्यों , आखिर क्यों , अप्प मुज़से इतना प्यार करते हो , जब के आपको पता है , में शेतीअन हु , कभी भी आपको धोका दे सकती , क्यों ..." रमा बेइंतहा रट हुए बोलै ,

"शहहह , इक बार सागर ने पूछा , मेरी लेहरो में कितना डैम है , मने कहा , मेरा प्यार से काम है , रमा , सागर चाहे जितना भी गहरा क्यों न हो , पर मेरे दिल की गहराई उससे बढ़कर है , रमा , में चाहे कोमल को कितना भी प्यार करू , पर कोमल तुम्हारी जगह कभी नै ले सकती , तुम मेरे जिस्म का आधा हिस्सा हो , मेरा पहला प्यार हो तुम , और मने कई शेतीआनो को पिगलते देखा है , प्यार की तपश में , तुम भी पिगल जोगी , ी लव ु..." रवि बेहद नाम आँखों से बोलै , रमा रट हुए घर के अंदर चली गई , बिना कुछ बोले...

रवि वही मैं गेट के पास लकड़ी की सेडीईओं पर बेथ गया , उसकी जिंदगी ुलाज़ सी गई थी , उसे कुछ समाज नै ा रहा था , वोह क्या करे , क्या न करे ,

रवि किस्मत पर काम विश्वास रखता था , क्यों की किस्मत , इक ऐसा नाम है , जो जिंदगी में हमें बस मौका देती है , सही और गलत रास्ता चुनने को , रमा उसकी जिंदगी में आयी , यह उसकी किस्मत नै थी , उसने रमा को खुद हासिल किया था , हाँ , इक बात कह सकते हैं , किस्मत ने रवि को मौका दिया , के वोह रमा को अपना बना सके ,

रवि की सोच थी , कभी किस्मत के सहारे मत बैठो , हर इंसान में इक सामान दिमाग की शक्ति होती है , कोई इंसान कमज़ोर नै होता , अज्ज तक जिनते भी लोग जिंदगी में किसी मुकाम पर पहुंचे , उन सब ने तपस्या की है , वोह दर्द , तन्हाई , गरीबी से लड़कर , उस मुकाम पर पहुंचे हैं ,

अभ रवि भी उस मुकाम पर पहुँच चूका था , यहाँ वोह किस्मत के सहारे बेथ कर , सब कुछ तबाह होने का इंतज़ार करता , नई , वोह अपनी किस्मत खुद बनता , क्यों अगर हम जिंदगी से लड़ना सिख ले , लोग से मुकाबला करना सुरु कर दे , तोह यही किस्मत हज़ारो रस्ते खोल देगी , और अप्प खुद बा खुद इक अचे मुकाम तक पहुँच जाओगे , और रवि ने उन 7 दिनों में क्या क्या करना था , यह सोच लिया था....

तो बे कुनिटेड....

 


अपडेट-66

अभ अग्गे...

सुबह के 7 बज रहे थे , रवि , कोमल के साथ लेता हुआ था , उसे बहु में भरके ,

रवि रत रमा से बतिअन करने के बाद , कुछ पल घर के बहार सेडीईओं पर बैठा रहा , उसने बहुत कुछ सोच लिया था ,

फिर वोह उठ कर अपने रूम में आकर कोमल के साथ लेट गया था , कोमल का चेहरा देख , रवि के मन में इक दर्द सा उठा था ,

उसके गोर गोर मुलाम गाल काफी रोने से लाल हुए पढ़े थे , लगता था , वोह बेइंतहा रोई थी , उसका दर्द , रवि समज़ता था ,

लेकिन अभी उसके पास इस दर्द का कोई इलाज नै था , क्यों की अभी सही वख्त नै आया था ,

रवि ने जैसे hi लेट कर कोमल को बहु में भरा , कोमल नंद में कसमसाते हुए करवट लेकर , उसके सीने में अपना चेहरा छुपा फिर से सो गई ,

फिर रवि भी अपनी मोह्हबत की बहु में दो पल सकूं की नंद सो गया , उसकी जिंदगी में चाहे हज़ार दर्द थे , हज़ारो कटे बिशे थे राहु पर , पर दो पल के आराम के लिए , उसके पास जानत सी गॉड थी ,

सुबह करीब 8 बजे सीमा सबसे पहले उठी , और किचन में जाकर सबके लिए छाए बनाई , यह उसकी आम सी इक आदत थी , लेकिन पिछले 3 सालो का उसे जायदा कुछ यद् नै था ,

फिर इक इक करके सीमा ने सबको नंद से उठाया और छायी दी ,

सीमा मुस्कराते हुए सेड्यां चढ़ कोमल और रवि के रूम में पहुँच गई , यहाँ उसके दो दो प्यार करने वाले सकूं की नंद सो रहे थे ,

"कोमल , रवि , उठो सुबह हो गई है..." सीमा ने छाए के कप पास hi पड़े इक छोटे से टेबल पर रखते हुए बोलै ,

सीमा की आवाज़ सुन कोमल ने धीरे धीरे अपनी आँखें खोली , उफ़ जैसे hi कोमल को एहसास हुआ , वोह अपनी भाई की बहु में सोई थी , उसकी आँखें नाम हो गई , प्यार के हसन जज्बात , आँखों से बह निकले , दिल धड़कना भूल गया , वोह खो सा गई , अपने भाई के मासूम चेहरे में ,

उसे यद् न रहा , सीमा उसे देख रही है , पर सीमा तोह सीमा थी , सब जान गई , सब समाज गई , उसे एहसास हो गया , दो प्रेमी रत को रूठे थे , और फिर ख़ामोशी से इक दूसरे से लिपट कर सो गए थे , सीमा जानती थी , रवि , कोमल से प्यार नै कर पाया , और कोमल भी उसकी जुदाई में अभ असनु बहा रही थी ,

"कोमल , अपने भाई को उठा देना , में अति हु..." सीमा ने अपने बहते असनु साफ किये , और पलट कर रूम से बहार चली गई , और अपने पीछे छोड़ गई , दो रूठे , दो टूटे , इस दुनिआ से अलग दो प्रेमी ,

सीमा के जाने के बाद कोमल अपने भाई को देखने लगी , वोह देखती रही , देखती रही , वख्त गुजरता गया ,

"उफ्फ्फ , मेरा भाई , मेरी जान , रत को बोल रहा था , मैप के लिए मुझे कुर्बान कर देगा , यह सब बोलने के बाद , मेरा भाई कितना तड़फा होगा , अंदर से , क्यों भाई , क्यों , जब अप्प मेरे बिना इक पल नै रह सकते , तोह क्यों वोह सब बोलै , जिस्मानी प्रेम तोह पूरी दुनिआ करती है , लेकिन हमने तोह रूहानी प्रेम किया , हैश्च , कभी न कभी वोह वख्त आएगा , जब हम दोनों इक होंगे , ी लव ु भइआए..." कोमल नाम आँखों से जज्बातो में बहकर बोलती गई ,

फिर कोमल उठ कर जाने लगी , तभी रवि ने उसका हाथ कलाई से पकड़ लिया , कोमल ने पलट कर पीछे देखा , और लिपट गई अपने भाई से , दोनों की धड़कने इक हो गई , जज्बात इक हो गए , आँखों से बेहटा पानी इक हो गया , और जल्द hi होंठ भी इक हो गए ,

फिर दोनों प्यार की असीम गहराई से , आपस में मिले होंठो को , धीरे धीरे आपस में रगड़ने लगे , होंठो का मुलाम मास्स , आपस में रगड़ खता गया , फिर कोमल को अपने निचले होंठ में कुछ गीलापन महसूस , तभी उसने महसूस किया , उसका निचला होंठ , उसके भाई ने अपने मोह में भर रखा है , दांतो में दबा रखा है , वोह मुस्कराने लगी , और खुद भी बेहद शिदत , बेहद सकूं से , अपने होंठ चुसवाने लगी ,

होंठो के प्यार भरे एहसास से जब दोनों अलग हुए , तब कोमल ने शर्मा कर , अपने चेहरा अपने भाई के सीने में छुपा लिया ,

"सॉरी कोमल , मने कल रत कुछ जायदा hi बोल दिया.." रवि बेहद प्यार से कोमल के बालो को सेहला कर बोलै ,

"भइआ , मुझे भी माफ़ कर दो , अपने जो कहा , उसका इक इक अल्फ़ाज़ सच था , हम अपने जिस्मानी प्यार के लिए , इस बेपनाह सूंदर दुनिआ को क्यों तबाह होने दे , में आपसे वादा करती हु , कोमल अज्ज भी आपकी है , और हमेशा आपकी रहेगी , चाहे उसकी मौत भी हो जाये , ी लव उउउ , मेरा भाई , मेरा प्यारा भैई..." कोमल दिल की गहराई में दुब कर कुछ हसन शबदो में बोली , उसके इक इक लफ़ज़ में असीम दर्द था , और वोह हल्का हल्का रो भी रही थी ,

"शठ , हम इक होंगे , कभी न कभी , वोह वख्त भी आएगा.. " रवि ने मुस्करा कर कोमल के असनु भेजी गालो को जीभ से छत्ते हुए बोलै ,

"भइआ , छाए पे लो , ठंडी हो जायगी.." कोमल मुस्कराते हुए बीएड से उठते हुए बोली , और रवि भी मुस्करा दिया ,

करीब इक घंटे बाद , दिन के 9 बजे , सभी घर के हॉल में बैठे बतिअन कर रहे थे , कुछ दिल से खुश थे , कुछ गहरी चिंता में दुबे हुए थे ,

कोमल सोच रही थी , उसे फिर से त्याग करना होगा , रवि सोच रहा था , उसे फिर से जलना होगा कोमल की जुदाई में , रमा सोच रही थी , कैसे वोह अपने भाई से वोह मैप ले सके , सीमा सोच रही थी , कैसे वोह रवि और कोमल को इक कर सके , ख़ुशी सोच रही थी , उसकी माँ और उसके पिता का क्या हाल हुआ होगा , पिछले 3 सालो में , बेबी सोच रही थी , वोह काट को रवि का प्यार जल्द से जल्द दिलवा दे , रिमी और शूरति कुछ जायदा नै सोच रही थी , वोह बस इक दूसरे की तरफ देख हल्का हल्का मुस्करा रही थी , सब के सब बेहद घम्बिर सोचु थे , लेकिन इनकी सोच , इनका असीम प्यार था ,

"ाचा , अभ अज्ज का क्या प्लान है.. " सीमा सबकी सोचु का अंत करते हुए बोली ,

"देदी जो भइआ कहेगे , वही कर्ज..." कोमल मुस्कराते हुए बोली ,

"भइआ बताओ न , क्या करे अज्ज के दिन.." शूरति भी रिमी की तरफ देख मुस्करा कर बोली ,

"अहह , सोच रहा हु..." रवि , शूरति की आवाज़ सुन , इक डैम से हड़बड़ा कर बोलै ,

"रवि , मुझे शहर जाना है , काट और फर्जी को लेन , में जाती हु..." बेबी इतना बोल उठ कर चली गई ,

"रवि , क्या में अपनी माँ से मिल आयु , पता नै क्या हाल हुआ होगा , अपनी बेटी से बिछड़ कर , मेरी माँ ने मेरी जुदाई को कैसे बर्दाश्त किया होगा , रवि में जाऊ , में खुद को रोक नै प् रही हु..." ख़ुशी ने बेइंतहा रट हुए बोलै , सीमा उठ कर उसे अपनी बहु में भर शांत करने लगी ,

"हाँ खुशु , तुम जाओ , लेकिन अपनी सचाई मत बताना , तुम समज़ती हो..." रवि ने उठ कर ख़ुशी के पास जाकर बोलै ,

"हाँ , समज़ती हु , में भी जाती हु..." ख़ुशी इतना बोली और समाये चाकर को जीवट कर , उस में घुस गई , जो सीधा हवेली के बहार जाकर खुलता था ,

"रवि , क्या करे अज्ज..." सीमा अभ रवि की तरफ देख कर बोली , रवि अभी कुछ बोलने hi जा रहा था , के सूजी भागते हुए आयी , उसकी आँखों में असनु थे , किसी अपने के दर्द के ,

"सूजी क्या हुआ , सब ठीक तोह है न..." कोमल बेहद चिंता में बोली ,

"kk..komal , माँ को फिर से डोरा पढ़ा है , वोह , वोह हॉस्पिटल में एडमिट हैं , माँ..." सूजी बेइंतहा रट हुए भाग कर कोमल के गले लग गई ,

"सूजी की माँ , ओह्ह्ह मतलब dr.nelam , अह्ह्ह , कैसे भूल गया उनको में , उफ्फ्फ मुझे जाना होगा , अभी के अभी..." रवि मन hi मन dr.nelam को यद् कर , उससे मिलने को तडफता हुआ बोलै ,

"भइआ , भइआए ..." कोमल अपने भाई को जोर से आवाज़ देते हुए बोली , जो किसी सोच में खो सा गया था ,

"अहं कोमल..." रवि फिर से हड़बड़ा कर बोलै ,

"भइआ अप्प रेहान के साथ जाओ , सूजी की माँ को कुछ नै होना चाहये , जाओ उनको यहाँ लेकर ायो , वार्ना मुज़से कभी बात मत करना..." कोमल बेहद उदास और दर्द से डूबी आवाज़ में बोली , उसकी आँखें लाल रौशनी में चमक उठी ,

पर रवि कुछ न बोलै , वोह चल पढ़ा , इक और प्रेमी को सकूं देने , dr.nelam के साथ बिताये कुछ प्यार भरे पलु को यद् करता ,

रवि घर से बहार आया , तोह रेहान गाड़ी में बेथ उसका इंतज़ार कर रहा था , रवि भी उसके साथ बेथ गया , हाला की उसके चेहरे की मायूसी बता रही थी , उसे कितनी चिंता है , dr.nelam की , क्या क्या बीता होगा , उन 4 सालो में ,

"भाई चले , हॉस्पिटल..." रेहान ने गाड़ी स्टार्ट करते हुए बोलै , रवि ने बस अपना चेहरा हाँ में हिला दिया , रेहान भी कुछ न बोलै , और गाड़ी निकल पढ़ी , शहर के गोवत हॉस्पिटल की और ,

जंगल से बहार जाने तक रवि खामोश रहा , लेकिन वोह अपने जज्बातो को जायदा रोक न पाया , और उसने पूछ hi लिया रेहान से ,

"ाचा रेहान इक बात बताओ..."

"हाँ पूछो रवि भइआ.."

"नीलम जी को हुआ क्या है , मतलब तुम समाज रहे हो न..." रवि बेहद चिंता में बोलै ,

"भइआ , जब अप्प और आपका परिवार यहाँ से चला गया , तोह सासु माँ , कई बार यहाँ आयी , वोह आपसे इक बार मिलना चाहती थी , लगातार 1 साल तक , हर महीने वोह यहाँ अति रही , फिर उनहोनु यहाँ एना छोड़ दिया , करीब 2 साल पहले , हमें खबर मिली , के उनके हस्बैंड इक कार एक्सीडेंट में चल बेस , बस तब से वोह टूट गई , उनहोनु अपनी जॉब छोड़ दी , बहुत जायदा मानसिक तनह उनके दिल में बेथ गया , इस मानसिक बीमारी के चलते , वोह ढेर साडी मेडिसिन खाने लगी , में और सूजी कई बार उनसे मिल एते , हमने बहुत कोससिह की , के वोह यहाँ हमारे पास ा जाये , बूत वोह नै मणि , ढेर साडी मेडिसिन खाने के कारन , उनको डोरे पढ़ने लगे , उनका दिमागी संतुलन हिल गया , बस जब वोह थोड़ा होश में रहती , आपका और आपके परिवार का पूछ लेती , भइआ , हमें उनको बचाना होगा , वार्ना वोह मर जाएगीइ..." रेहान ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

रवि खामोश सा हो गया , वोह क्या बोलता , यह सब उसके कारन hi हुआ था , जाने अनजाने में dr.nelam के करीब जाकर , उसने गलती कर दी , जब उनके पति की डेथ हुई , तब शयद उनको रवि की सबसे जायदा जरुरत थी , पर रवि खुद मुसीबतों से घिर चूका था ,

करीब 2 घंटे बाद , रवि और रेहान , शहर के गोवत हॉस्पिटल पहुँच चुके थे , यह वही हॉस्पिटल था , यहाँ dr.anju , ख़ुशी , और dr.nelam की कई यदिअण उसके दिल में बसी हुई थी ,

रवि खुद को त्यार कर रहा था , dr.nelam से मिलने के लिए , आखिर लम्बा वख्त गुजर चूका था , रवि इक बार , बस इक बार , dr.nelam के गले लग , उसे बहु में भर , बेइंतहा रोना चाहता था ,

वही दूसरी तरफ...

ख़ुशी हवेली के बहार पहुँच चुकी थी , हवेली का बड़ा सा दरवाजा अभी बंद था , ख़ुशी बेहद उत्सुक थी , अपनी माँ से मिलने के लिए ,

ख़ुशी ने फिर से समाये चाकर का निर्माण किया , वोह सीधा हवेली में , अपने रूम में पहुँच गई , बेहद खूबसूरत था , उसका अपना खुद का सजाया हुआ रूम , इक इक चीज़ वैसी की वैसी थी , जैसे वोह छोड़ कर गई थी ,

ख़ुशी ने आँखें बंद कर दयँ लगा कर देखा , उसके पिता जी घर के हॉल में बैठे हुए थे , वोह बेहद उदास थे , उनका बीटा कुणाल और उनकी बेटी , पिछले ढाई सालो से लापता थे , इक बाप को इस से बढ़कर सजा क्या मिल सकती है , ख़ुशी उनकी बतिअन सुनने लगी ,

"दसप साब , अप्प कुछ कर भी सकते हो या नै , पिछले 3 साल से मेरी बेटी कहा हैं , कुछ पता नै चल रहा , आपकी पुलिस कुछ कर भी सकती है या नै..." ठाकुर जी देव ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"ठाकुर साब , हम पूरी कोससिह कर रहे हैं , अभी तक आपकी बेटी का कुछ पता नै चला , बस इक बार वोह लड़का रवि मिल जाये , आपकी बेटी खुद बा खुद मिल जाएगी..." दसप शमशेर सिंह ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"हम्म , रवि , इक बार मिल जाये , जिन्दा गड दूंगा उसे में..."

"ठाकुर साब , हमारे आदमी , इस शहर के छपे छपे पर नज़र रखे हुए हैं , अप्प चिंता मत करो , कभी न कभी , रवि का पता चल hi जायेगा..."

"तुमने कमिश्नर राजेश से पूछा , वोह रवि का दोस्त था..."

"कई बार , लेकिन उसे भी कुछ नै पता..." अभी शमशेर सिंह , ठाकुर जी देव से बात कर hi रहा था , के उसका फ़ोन बज उठा , उसने जल्दी से कॉल पिचकूप कर ली ,

"हाँ रामसाय बोलो..."

"सर , रवि का पता चल गया है , वोह गोवत हॉस्पिटल में है , हम राइड करने जा रहे हैं , सोचा आपसे बात कर ले..." इंस्पेक्टर रामसे ने बेहद खुश होते हुए बोलै ,

"हम्म , पकड़ लो , लेकिन मरना मत , क्यों ख़ुशी कहा है , यह सिर्फ वही जनता है , जल्दी से राइड करो , में भी पहुँचता हु..." दसप शमशेर सिंह ने फ़ोन कट करते हुए बोलै ,

"ठाकुर साब , रवि मिल गया है , में पोरे शहर की पुलिस उसके पीछे लगा दूंगा , लेकिन अज्ज शाम तक वोह जेल में बंद होगा , में चलता हु..." शमशेर सिंह इतना बोल उठ कर चलने लगा ,

"दसप साब , वोह लड़का बहुत तेज़ है , उसे कमज़ोर करके पकड़ो..." ठाकुर जय देव मुस्कराते हुए बोलै ,

"जी ठाकुर साब..." शमशेर सिंह इतना बोल वह से चला गया ,

ख़ुशी ें बातिओं को सुन टूट सा गई , वोह अपनी ीचा से रवि के साथ गई थी , न की जबरदस्ती , ख़ुशी आँखों में असनु , दिल में गुस्से का तूफान लिए , हॉस्पिटल पहुँच गई , उसे रवि को बचाना था...

वही दूसरी तरफ...

रवि और रेहान हॉस्पिटल के अंदर आकर , रिसेप्शनिस्ट से dr.nelam के रूम का पता पूछने लगे , रिसेप्शनिस्ट ने रूम no.206 बता दिया , जो सेकंड फ्लोर पर था ,

रवि के मन में आया , dr.anju से भी मिल लू , उसे भी रवि पिछले 2 साल से नै मिला था ,

लेकिन पहले रवि , dr.nelam को मिलना चाहता था , dr.nelam hi इक औरत थी , जिसने पाक़िआ और काली को पकड़वाने में रवि की हेल्प की थी ,

रेहान ने रवि को उस रूम में जाने के लिए बोलै , और खुद वही बहार खड़ा हो गया , क्यों की रेहान , रवि की ताकत जनता था , उसे यकीन था , रवि hi dr.nelam को ठीक कर सकता है , रवि इक डैम से रूम के अंदर घुस गया , वह उसने जब dr.nelam को देखा , उसकी आँखें नाम सी हो गई.... और हॉस्पिटल के बहार अभ तक पोरे शहर की पुलिस पहुँच चुकी थी , इक अकेले रवि को पकड़ने के लिए , चारो तरफ से हॉस्पिटल घिर चूका था , क्या ख़ुशी , रवि को बचा पति , या पुलिस रेहान के कबीले पर अटैक करती ,

अभ रवि अगर अरेस्ट न होता , तोह उसकी ताकत पूरा शहर जान जाता , लेकिन अभी तोह उसे , किसी अपने का दर्द काम करना था , dr.nelam को इस हालत में देख , रवि अंदर से कमज़ोर हो गया था , और शयद पुलिस के लिए यह बात अछि होती....

कोई था मुकदर में , जो हमसे रूत गया ,

अज्ज पागल है हम किसी की यद् में ,

इक सोने जैसे दिल था , जो हमसे टूट गया...

dr.nelam की दर्दनाक हालत ने , रवि को घुटनो पर ज़ुका दिया ,

आँखों में असनु थे , पर रंग लाल था ,

मने कल hi कहा था , मने प्यार की तपश में पिगलते देखा है शेतीअन को ,

अज्ज रिंग की बुरी ताकतों का मालिक , घुटनो पर बेथ रो रहा था ,

अज्ज खुद शेतीअन अपने किये पाप धो रहा था..

रवि के मन की हालत को बयान करते कुछ शब्द हैं , जो मने लिख दिए...

वोह मर्द नै होता , जो औरत के दर्द को देख रो न सके ,

किस्से कहंयीओं में मर्द को हीरो बता कर , उसे बेदर्द दिखते हो ,

यह वही मर्द हैं , जो किसी अपने की यद् में , दुनिआ से चिप कर असनु बहते हैं ,

हम मर्दो में भी दिल होता है , केहदो इस ज़माने में ,

हम अंदर से टूटे चाहे लाख हो , लेकिन भाई , पति , बाप , बेटे का रिश्ता टा उम्र निभाते हैं...

(मेरे सभी दोस्तों के लिए , दिल से निकले कुछ अल्फ़ाज़ , हम मर्दो का दिल भी नरम और कमज़ोर होता है , हमें प्यार की जरुरत है , धोके और एहसान की नै , शुक्रिया और ऐसे hi साथ देते रहे , हैप्पी नई ईयर सभी को , मेरे प्यारे रीडर्स को , और जो दुनिआ से चिप कर ख़ामोशी में स्टोरी रीड करते हैं , उन प्यारे विएवेर्स को भी हैप्पी नई ईयर... हम इस साल भी साथ बने रहे.. बस यही दुआ करुगा...)

तो बे कुनिटेड....
 
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