Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 27 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट. 213

अजय ........मुझे सब मंजूर है मम्मी आपको कोई ऐसा मौका नहीं दूंगा जिस से आपको फिर कभी मेरी वजह से तकलीफ हो

गीता ठाकुर ..........राणा इसे हवेली के पीछे बने रूम में छोड़ आओ आवर इसका इलाज भी करवा देना ठीक होते हे इसकी जिम्मेदारी तुम पे होगी आज से ये जब तक खुद को बदल नहीं लेता एक नौकर की तरह हर वो काम करेगा जो करना चाइये

राणा .......जी ठकुराइन जैसा आप कहे

राणा अजय को ले कर चला जाता है

ीदार गीता ठाकुर भी रुक्मणि को साथ ले ऊपर रूम चल देती है .....

अब आगे ..........

सूर्य हवेली से सीधा u.s.a किरण राधिका जी के पास लौट गया

तीनो ने मिल कर लोने में खूबसूरत फूल पौधे लगाए

किरण ........ इन पुष्पों से अब ये घर हमेशा महकता रहेगा

राधिका .जी ......बिलकुल ठीक कहा स्वीटी तुमने फूल पोज भी तो प्रकर्ति का एक अभिन अंग है परिवार में जैसे माता पिता के जीवन में बचो का महत्त्व होता है वैसे हे हर घर परिवार में इन पल पोधो का होता है सुबह सुबह इनकी भीनी भीनी खुसबू मन को जो सन्ति देती है उस से दिन भर मन प्रफुलित रहता है

सूर्य .......ये को स्वीटी ये कार्य तो हो गया बाकि कोई आवर हुकुम है तो फरमाइए

किरण ....... अभी कोई हुकुम नहीं है अभी चलिए फ्रेश हो जाइये फिर खाने को तयारी करते है

सूर्य .......नहीं लांच हम बहार करते है आप त्यार हो जाइये

किरण ......ठीक है कुंवर जी

तीनो घर के भीतर चल देते है बहार हाथ पैरों की मिटटी साफ करने के बाद

राधिका जी अपने रूम में चल देती है वही सूर्य किरण को अपनी गौड़ में उठा सीधा बाथरूम ले जाता है

जहा दोनों मस्ती करते हुए एक दूसरे के अंगो को सहलाते हुए बाथ लेने लगते है





किरण ........ मेर्री जी की प्यास बुझा आये आप

सूर्य ...... ुण्णं हम पे नजर राखी जा रही है चोरी छुपे

किरण ......उम्मम्मम्हा नजर नहीं रख रख रहे हम चाहते की आप राधिका भाबी की इच्छा भी पूरी कर दो वो भी तो आपसे प्यार करती है

सूर्य ........ ठीक है आज नाईट के लिया उनने त्यार कर दीजिये

सूर्य किरण की जांघो के बिच उन नरम हलके फुल्ले हुए लिप्स बिच निकल रही कस्तूरी गंध को सूंघते हुए अपना मुँह योनि पटल पे चिपका देता है





किरण ......उम्मम्मम्हा कुंवारी जी काटिये मत उम्मम्मम्हा अपनी हे बीबी को अपने लिया किसी आवर को त्यार करने को उम्मम्मम्हा कह रहे है आप

सूर्य ......उम्म्म्म अब आप हे उनका पक्ष ले रही है तो आपको हे करना होगा

किरण ......उम्म्म्म ठीक है आपके लिया ये भी करेंगे तब तक आप जेनी से किया वडा पूरा कर आइये हम लांच से हे बहार गम कर आयेंगे

सूर्य .......ok मैं आपके साथ लांच कर वही से कॉलेज चला जाऊंगा जेनी से मिलने

ीदार सूर्य आवर किरण मस्ती करते हुए नहाते है

वही राधिका जी शावर के निचे कड़ी उस ठन्डे पानी के निचे अपनी आँखे बंद किये अपने शरीर की गर्मी संत करने में लगी थी





काफी मसकत के बाद राधिका जी अपने योनि से उस तरल को निकलने में कामयाब रही

कुछ देर सुस्ताने के बाद अच्छे से बहा कर राधिका जी नुदे हे बाथरूम से निकल त्यार होने लगती है

कुछ देर बाद तीनो हे त्यार हो लैंड के लिया निकल गए राधिका कुछ उदाश लग रही थी तो किरण ने हे वजह जानने की कोशिश की

किरण ....... क्या हुआ भाबी आप ठीक तो है न कोई प्रॉब्लम हुई है क्या जो आप इस तरह उदाश हो

राधिका .......वो माँ का कॉल आया था उन से कुछ कहा सुनी हो गई आवर कुछ नहीं

सूर्य ......वो आपकी माँ है भाबी आपको सन्ति से उनकी बात सुन्नी चाइये थे आवर वो आपकी माँ है उनके गुस्से या दन्त में भी आपके लिया फ़िक्र आवर प्यार छुपा रहता है

राधिका जी .....मैं जानती हूँ देवर जी पैर मैं भी क्या करती मुझे भी गुस्सा आ गया

किरण ......कोई बात नहीं भाबी हम मंच के बाद बात करते है इन्हें कही जाना है लांच के बाद तब बात करते है

राधिका जी ......देवर जी कही किसी गफ से तो नहीं मिलने जा रहे हो

किरण ......है भाबी इनकी कोई गफ है यहाँ जेनी करके के

सूर्य .....ऐसा कुछ नहीं है भाबी वो बस फ्रेंड है आवर मेनका बुआ की मेडिसिन कंपनी संभालती है

राधिका ......अच्छा तो कोई लेडी है

किरण .....नहीं भाबी काफी मॉडर्न लड़की है

कुछ देर बाद तीनो एक अच्छे से ओपन एयर रेस्टोरेंट पहुंचे वह तीनो ने लांच किया

सूर्य ......मैं जल्दी हे लौट आऊंगा स्वीटी

किरण ......आप हमारी चिंता न करे आवर आराम से आना हम भी गम फिर कर साम को घर आएंगे

सूर्य ......ok bye स्वीटी bye भाबी

सूर्य कार के के राधिका को दे कर वह से पैदल हे निकल जाता है

क्युकी यहाँ से पास में हे जेनी की कॉलेज था

कुछ हे देर में सूर्य जेनी के कॉलेज के सामने था

सूर्य वह से जेनी की कॉलेज कैंटीन में चला जाता है क्यों की ज्यादातर गर्ल्स बॉयज वही पे मौजूद थे

काफी सरे गर्ल्स बॉय वाइट कोट में भी गम रहे थे

सूर्य सीधा कैंटीन जा एक चेयर पे बेथ जाता है

काफी लड़के लड़कियों की नजर सूर्य पे थी चेहरे से क्यूट सरीर से बॉडीबिल्डर जैसा जो लग रहा था सूर्य

कुछ देर बाद एक खूबसूरत सी लड़की एक हाथ में कॉफ़ी मग लिए आवर दूसरे हाथ के बाजु पे वाइट कोट डेल सूर्य के सामने वाली ुशी टेबिल की चेयर पे आ बैठी

लड़की कुछ देर तक सूर्य को देखती रही

लड़की .....hi ी ऍम एलीना एंड यू

सूर्य ...... Hi एलीना ी ऍम सूर्य ठाकुर हाउ अरे यू

एलीना ...... इनदिन हो

सूर्य ......आपको कैसे पता की मैं इंडियन हूँ एंड आप इतनी अच्छी हिंदी कैसे बोल लेती है

एलीना ......बिकॉज़ माय डैड बोर्न तो इंडिया

सूर्य ....... मीन्स आप अमेरिकन इनदिन मिक्स ब्लड हो

एलीना .....यह that's राइट कैन यूयू ज्वाइन विथ कॉफ़ी

सूर्य ......no थैंक्स फॉर योर ऑफर एलीना

सूर्य एलीना की कॉफ़ी से एक शिप ले कर तपिश कर देता है

सूर्य....... मैंने सोचा इतनी खूबसूरत लड़की के ऑफर को रिजेक्ट नहीं करना चाइये लांच किया है अभी अभी तो इतना हे कर सकता हूँ

एलीना ...... लाइन मार रहे हो क्या मर.

सूर्य ......क्या मुझे ऐसा करने की जरुरत है

एलीना ...... मर .मन की अमेरिका बहुत फ़ास्ट है बूत तुमने अभी अभी मुझे मिक्स ब्लड कहा तो जितनी अमेरिकन हूँ उतनी इनदिन भी इतनी जल्दी हाथ नहीं आने वाली

सूर्य ........ मैं पहले से हे सदी सुधा हूँ मुझे जरुरत भी नहीं ऐसा कुछ करने की

एलीना सूर्य की सदी सुधा वाली बात सुन कुछ उदाश तो हुई पैर जल्दी हे मुस्कुराने लगी

एलीना ...... फिर यहाँ क्या कर रहे हो

तभी सूर्य की नजर जेनी पे पादरी है जिसके साथ दो आवर लड़किया थी आवर उसके पीछे हे उसके 2,3 बॉडीगार्ड भी

सूर्य ......उसका वेट कर रहा हूँ जो सामने से आ रही है

एलीना ......... तुम्हारा मतलब उस ग्रुप से

सूर्य .....आप जानती है क्या

एलीना ...... यस मैं इनकी सीनियर हूँ कॉलेज में

सूर्य वही बैठे बैठे जेनी को थोड़ा जोर से आवाज देता

एलीना ......शोर क्यों कर रहे हो

उदार जेनी अपना नाम सुन उदार उदार देखती है

सूर्य भी एलीना को साथ लिए जेनी के पास जा पंहुचा आवर सीधा जेनी को गले लगा लेता है

जेनी तो सूर्य को इस तरह यहाँ देख खुद शॉकेड थी ऊपर से ऐसे गले मिलने पे आवर ज्यादा हो गई

पैर सिक्योरिटी वाले ने गलत समाज सूर्य को पीछे रखेल कर उसपे अपनी रिवाल्वर तान दी

सूर्य कुछ करता उस से पहले हे जेनी ने सिक्योरिटी वाले के दोनों गाल लाल कर दिए वो तो आवर मरने वाली थी पैर सूर्य ने हे उसने रोक दिया

सूर्य ......... जेनी संत हो जाओ वो सिर्फ अपनी ड्यूटी कर रहा है तुम्हारी सुरक्षा के लिया उसने ऐसा किया

सिक्योरिटी गरुड़..... सॉरी मेम सॉरी सर

सूर्य ...... It's ok तुम लोग घर जाओ हम लोग आते है

सिक्योरिटी गरुड़ जेनी की तरफ देखता है

जेनी ......इन्होने जो कहा वही करो

सिक्योरिटी गरुड़ ......... बूत मेम ये है कोण

जेनी ....... जो सेल्लेरी तुम्हे मिलती है वो इन hi से मिलती है मेरी सुरक्षा के लिया

सिक्योरिटी गरुड़ वाले चुप चाप सूर्य को सॉरी बोल वह से निकल जाते है

जेनी. ...... आप यहाँ कैसे वो भी कॉलेज में मुझे कॉल कर दिया होता

सूर्य ....... सोचा जब यहाँ हूँ तो खुद हे मिलने चला आया

एलीना. ......ok मर सूर्य ठाकुर मैं चलती हूँ

सूर्य ...... ओह सॉरी जेनी मीट माय नई फ्रेंड एलीना

जेनी .....hi मेम ी ऍम जेनी

एलीना ......hi जेनी ी क्नोव यू अरे माय जूनियर कॉलेज स्टूडेंट

सूर्य .....चलो कही बेथ कर बात करते है एलीना फिर चली जाना

सूर्य जेनी एलीना के साथ साथ उन दोनों लड़कियों की भी साथ ले जहा पहले बे थे वही आ बैठा

जेनी ....... आप कब आये इंडिया से सूर्य

सूर्य ....... सॉरी जेनी पैर मुझे 3.4 रोज हो गया यहाँ आये हुए

जेनी ....... आवर मुझसे अब मिलने का तिने मिला आपको

सूर्य .....वो मैं अकेला नहीं आया हूँ साथ में मेरी वाइफ भी है

जेनी ......क्या पायल से सदी भी हो गई तुम्हारी आवर मुझे पता तक नहीं

सूर्य ...... नहीं पायल से नहीं किरण से सदी हुई है मेरी वो सब घर पे समजा दूंगा मैं तुम्हे

जेनी ....... पैर आप तो पायल से प्यार करते हो न

एलीना ......ये क्या चाकर है मर. प्यार किसी आवर से सदी किसी आवर से

सूर्य ...... उस से भी होगी बूत अभी टाइम है

जेनी ...... मुझे आपकी वाइफ से मिलना है आवर अपना प्रॉमिस भी पूरा करना है आपको याद है न

सूर्य ...... है याद है जाने से पहले पूरा कर दूंगा वैसे कंपनी कैसे चल रही है जेनी

जेनी ....... बहुत अच्छी सूर्य अब तो हमारी कंपनी की मेडिसिन पहले से काफी सेल्ल हो रही है साथ हे कंपनी के शेयर वेलु भी भाड़ गई है

सूर्य ...... अच्छा है जेनी अभी मैंने यहाँ फ्री ऑफ कॉस्ट हॉस्पिटल खोलने की सोची है जहा सभी का फ्री में इलाज हो तुम जल्दी हे हे अच्छी जगह देख हॉस्पिटल का कार्य सुरु करो

जेनी ...... सॉरी ये मुझसे नहीं होगा सूर्य मैं पहले हे कॉलेज आवर कंपनी में बहुत बिजी हूँ मैं एक आवर जिम्मेदार अभी नहीं ले सकती

सूर्य .....हम्म्म ठीक है मैं देखता हूँ वैसे एलीना तुम्हारी कॉलेज कब ख़तम होगी

एलीना .....ये मेरा लास्ट इयर्स है उसके बाद मुझे डिग्री मिल जाएगी फिर कोई अच्छा सा हॉस्पिटल ज्वाइन कर लुंगी

सूर्य ......उसकी जरुरत नहीं है जो नया हॉस्पिटल बनाने वाला हूँ उसे तुम संभालोगी बन कर त्यार होगा तब तक तुम्हारी स्टडी भी पूरी हो जाएगी

एलीना ..... मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है पैर मुझे एक्सपीरियंस नहीं है

सूर्य .....वो जेनी सामना देगी आपको अब मैं चलता हूँ चले जेनी तुम्हे किया प्रॉमिस भी पूरा करना है

जेनी ......क्या सच में आज हे

सूर्य ....है जेनी 2 दिन बाद मैं तपिश इंडिया जा रहा हूँ

एलीना ......... क्या मुझे तुम्हारा कांटेक्ट no. मिलेगा

सूर्य एलीना की अपना no. दे कर जेनी आवर उसकी एक फ्रेंड्स जो जेनी के साथ रहती है उसने ले कर जेनी की कार से पायल के घर को आवर निकल गया

ीदार सूर्य के जाने के बाद किरण राधिका को ले कर गुमने निकल जाती है

किरण ......क्या बात है भाबी आप इतनी उदाश क्यों है अब पूरी बात बताओ मुझे

राधिका जी ..... कुछ नहीं स्वीटी

किरण ......देखो भाबी अगर अपना समझती हो तो अपने दिल की बात कह सकती हो अक्सर ऐसा करने से दिल हल्का मह्सुश करता है

राधिका जी ..... कहना क्या स्वीटी वही बच्चे को ले कर माँ कह रही थी अब बचा पैदा करना मेरे अकेले के हाथ में थोड़े हे है

किरण ...... बस इतनी से बात सॉरी मेरा मतलब आप चिंता न करो आज आपकी सभी इच्छा पूरी होने वाली है

राधिका जी .....क्या मतलब

किरण ......मतलब की आज आपके देवर जी आपके साथ हनीमून मानाने वाले है आवर आपको त्यार करने की जिम्मेदार मुझे मिली है आपके देवर जी की आवर से

राधिका जी तो ख़ुशी के मरे किरण के चेहरे को हे घूमने लगती है

किरण .....अरे अरे भाबी मैं किरण हूँ न की आपका देवर जितना चूमना है उन्हें आवर उनके उसको चूमना जो आपकी इच्छा पूरी करने वाला है अभी एक्सीडेंट करवा देंगी आप ऐसे चूमेंगे तो

राधिका जी ....सॉरी वो.....

किरण ..... हेहेहे जानती हूँ आपकी ख़ुशी अब आपके लिया कुछ हॉट एंड सेक्सी ड्रेस पर्चेस कर ले नाईट के लिया वैसे तो आपको बिना कपड़ो के देख कर उनने ज्यादा अच्छा लगेगा

राधिका जी ...... तुम भी क्या कुछ भी बोलती हो स्वीटी पहले तो तुम ऐसे नहीं थी

किरण .....हेहेहे भाबी अभी आपने जाना हे कहा है मुझे वैसे कल रात का छोटा सा किश कैसा लगा आपको

राधिका जी ....छोड़ो न स्वीटी वैसे वो गए कहा है आवर ये जेनी कोण है

किरण ......वह वह क्या बात देवर से वो हो गए अभी से

आपको बताया न जेनी बुआ सा कंपनी संभालती है वो भी लट्टू हो गई थी उन्हें देख कर तब नेक्स्ट टाइम का वादा किया था वही पूरा करने गए है

राधिका जी .....कैसा वादा स्वीटी

किरण .....वही जो आपके साथ करने वाले है रात में अभी दिन में जेनी के साथ ताकि वो अपने वादे से मुक्त हो सके

राधिका जी .....तुम्हे इन सब से दुःख नहीं होता स्वीटी

किरण ......... न कहूँगी तो गलत होगा भाबी पैर ये भी सच है की वो सबके साथ ऐसा नहीं करते आवर मुझसे कुछ भी नहीं छुपाते सब मुझे आ कर बताते है आपसे दूर रहने की वजह भी यही थी वो नहीं चाहते थे की मुझे दुःख हो पैर जब मैंने उन्हें संजय तब वो मने चलिए मॉल भी आ गया है

किरण कार पार्क कर राधिका के साथ मॉल में शॉपिंग करने चल देती है

उदार सूर्य जेनी आवर उसकी फ्रेंड्स के साथ गर पंहुचा

जेनी सीधा सूर्य को अपने रूम में ले गई उसे ये भी पर्व नहीं थी की उसकी फ्रेंड्स भी उस घर में मौजूद है

जेएनय रूम में गुस्ते हे सूर्य पे किसी भूखी शेरनी सी टूट पड़ी आवर किस करने लगी

सूर्य .....अरे कुछ पल बैठने तो दो कुछ बात तो करने दो मुझे जेनी

जेनी ........ वो सब बाद में करना अभी मुझे जो करना है करने दो

जेनी फिर से सूर्य को किश करने लगती है सूर्य समाज जाता है इसे पहले ठंडी करनी होगी तभी ये कुछ सुनेगी

किश करने के बाद जेनी सूर्य को अपना लाल स्कर्ट उठा कर घूमते हुए अपनी गोरी गोरी सफ़ेद कूल्हे दिखती है





सूर्य ...... क्या बात है जेनी यहाँ से भी वर्जिन नहीं हो क्या

जेनी ....... हेहेहे नहीं यहाँ से अभी तक वर्जिन हूँ तुम चाहो तो तरय कर सकते हो ी don't मंद

सूर्य जेनी को अपनी आवर खींच कर उसकी गांड को अपने हठी के पन्नो में भर लेता है





सूर्य ......दिल तो मेरा भी है पैर किसी से वादा किया है पहले उसकी हे ओपन करूँगा फिर सायद तुम्हारी

जेनी .....उम्मम्मम्हा ok प्रॉमिस करती हूँ तुम्हारे इस से पहले यहाँ ऊँगली भी नहीं जाएगी ुम्मम्हा

सूर्य जेनी को वही पास में पड़े सोफे पे ले जाता है आवर उसके गर्दन के पीछे बंदी कपडे की डोर खुल जेनी की दोनों निर्वस्त्र चूचियों को थम उन्हें मसलने लगता हैं





जेनी सूर्य के शर्ट के बटन खोल सीने को सहलाते हुए पेण्ट में हाथ दाल सूर्य के नागराज का फैन पकड़ लेती है

सूर्य ...... संभल कर गलत चीज़ पकड़ ली है तुमने

जेनी ...... बहुत इन्तजार किया है आज जा कर पकड़ में आया है





जेनी सूर्य को खड़ा कर उसकी पेण्ट आवर अंडरवियर उतर देती है

अपनी आँखों के सामने जुलते सूर्य को लिंग को थामे में जेनी एक पल नहीं लगाती आवर उसे सीधा अपने मुँह में भर लोल्लिपोप के जैसे चूसने लगती है

सूर्य फिर से सोफे पे बेथ जाता है जेनी अपने अपना हाथ सूर्य के सीने पे पुस कर उसे लेते का इशारा करती सूर्य बिना किसी विरोध के लेट जाता है





जेनी सूर्य की आँखों में देखते हुए बड़े हे कमुख अंदाज में सूर्य के लंग वह अंडकोष के साथ साथ सूर्य के गुदा द्वार को भी अपनी जुबान से कुरेदने लगती है

इस क्रिया से सूर्य के पेट में रह रह कर खिचाव होता है डेरी डिग्री सूर्य के सरीर में जाटव उभरने लगते है





कुछ देर बाद सूर्य जेनी को पलट सोफे पे लिटा उसके अकड़े हुए चूचक अपनी जीब से कुरेदते हुए पिने लगता है

जेनी के मुँह से कामुक सिसकारियां निकलने लगती है

सूर्य बिच बिच में जेनी के निप्पल्स को अपनी ऊँगली तो में पकड़ कीच भी देता जिस कारन जेनी को मज़े के साथ हलके हलके दर्द को भी सहना पद रहा था

पैर जेनी को इसमें भी अलग हे मज़ा आ रहा था

जेनी का ये पहला सम्बन्ध था जो वो किसी मेल के साथ कर थे वर्ण लड़कियों आवर डिलडो तो काफी आर तरय कर चुकी थी





सूर्य केन्ने के दोनों नार्मल साइज के बूब्स कुश कुश कर लाल कर देता है आवर पीट को चूमते हुए जेनी की हलकी लाल योनि पे अपने होंठ रख चूसने लगता है

जेनी का एक तो पहला अनुभव ऊपर से इतने देर से सूर्य के लिंग को चूसना आवर अपनी बूब्स छुड़वाने से वो बहुत ज्यादा गरम हो चुकी थी सूर्य के एक दो बार जुबान फिरने पे जेनी की योनि से एक हलकी पिसाब की गुहार सी निकलो जो सूर्य के चेहरे को उस चिकने पानी से भिगो चुकी थी

जेनी खुद सूर्य के चेहरे पे लगे अपने योनि राश को चाट चुम कर पूरा साफ कर देती है

सूर्य जेनी को वही सोफे पे घोड़ी बना कर अपने लंग पे अपना थूक लगा जेनी के छूट के लिप्स से सत्ता कर सखा मर देता है





बिना किसी मुश्किल के सूर्य का मोटा सूपड़ा जेनी की छूट को फैलते हुए उस गरम गुफा में प्रवेश कर चूका था

जेनी ....उम्मम्मम्म अह्हह्ह्ह्ह सूर्य प्लेसेस सलौली सलौली पूत योर डिक इन माय पुसी

सूर्य .....don't वीर्य जेनी रिलेक्स योर पुसी मसल्स

सूर्य जेनी को बाटी में उल्का कर डेरी डेरे सखे मरने लगता है





कुछ देर ऐसे हे डेरी डेरी सूर्य जेनी की गुफा को अपने लैंड के लिया खोल देता है

अब जेनी को भी मज़ा आ ने लगता है तो वह सूर्य को तेज तेज फ़क करने को बोलती है

सूर्य जेनी की इच्छा अनुसार चुदाई करने लगता है

ीदार जेनी की फ्रेंड्स सूर्य आवर जेनी को के हॉल से लाइव चुदाई देख अपनी छूट में ऊँगली डेल गेट पे हे अपनी छूट से कमरष टपका रही थी

जैसे जैसे सूर्य की स्पीड भांति उदार जेनी की फ्रेंड्स की उँगलियाँ उतनी हे तेजी से उसकी गीली छूट में अंदर बहार होती

जेनी के झरते हे सूर्य जेनी को सोफे पे सीधा लिटा कर फिर से पम्पिंग करना सुरु कर देता है





जेनी न जानने क्या क्या इंग्लिश में बढ़ाये जा रही थी

सूर्य ब्रेक जेनी के अंगो को मसल ते हुए उस लाल योनि को अपने रखो से अपनी लैंड की रागश से आवर लाल करने में लगा हुआ था

3,5 मिनट्स बाद हे एक बार फिर जेनी अपनी छूट को बहाने लगती है

पैर इस बार सूर्य रुका नहीं बल्कि ुशी तरह जेनी के पैरो को छोड़ा कर जेनी को किश कर चूमते हुए छूट को पेलता रहा





हर झटके के साथ जेनी को अपनी नाभि तक सूर्य के मोटा लिंग मुंड मह्सुश होता

जब भी लिंगमुं जेनी के गर्भाशय को खोल उसके इंटर करता जेनी के सरीर में कपकपी से चुत जाती

जेनी खुद को आसमान में उड़ते हुए मह्सुश करने लगती

लगातार एक हे पोज़ में अब जेनी को प्रॉब्लम होने लगी थी आवर जेनी 3 बार झाड़ चुकी थी जिस बझा से अब उसकी योनि में गीलापन ख़तम होने से अब जलन सुरु हो गयी थी

जेनी ........ सूर्य प्लेसेस स्टॉप मेरी पुसी में जलन हो रही है

सूर्य जेनी की तकलीफ देख अपना लैंड बहार निकल लेता है

जेनी सोफे से उठ कर सूर्य के लैंड की चूसै करने लगती है कुछ देर की म्हणत के बाद सूर्य अपना वीर्य जेनी में मुँह में भर खुद को संत करता है

सूर्य साम तक जेनी से बात कर घर के लिया निकल गया

जेनी इस चुदाई से थक कब ऐसे हे नंगी सो गई उसे भी पता नहीं चला रात से कुछ पहले जेनी की फ्रेंड्स ने हे उसे खाने के लिया उठाया तब जा कर जेनी उठी आवर फ्रेश होने बाथरूम में गुस्स गई

वही जेनी की फ्रेंड जेनी क ब्लैक पेंटी उठा सूंघने लगती है जिस से सूर्य ने अपने लैंड का बचा हुआ वीर्य साफ किया था आवर जेनी ने अपने चेहरे पे लगे वीर्य को जेनी फ्रेंड्स कुछ देर सूंघने के बाद जेनी की उसे पेंटी को वही खड़े कगाड़े पहन लेती है ...........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .............
 
अपडेट 214

जेनी सोफे से उठ कर सूर्य के लैंड की चूसै करने लगती है कुछ देर की म्हणत के बाद सूर्य अपना वीर्य जेनी में मुँह में भर खुद को संत करता है

सूर्य साम तक जेनी से बात कर घर के लिया निकल गया

जेनी इस चुदाई से थक कब ऐसे हे नंगी सो गई उसे भी पता नहीं चला रात से कुछ पहले जेनी की फ्रेंड्स ने हे उसे खाने के लिया उठाया तब जा कर जेनी उठी आवर फ्रेश होने बाथरूम में गुस्स गई

वही जेनी की फ्रेंड जेनी क ब्लैक पेंटी उठा सूंघने लगती है जिस से सूर्य ने अपने लैंड का बचा हुआ वीर्य साफ किया था आवर जेनी ने अपने चेहरे पे लगे वीर्य को जेनी फ्रेंड्स कुछ देर सूंघने के बाद जेनी की उसे पेंटी को वही खड़े खड़े पहन लेती है ...........

अब आगे ............

आज की सुबह अजय के लिया काफी कस्त्दायी थी

एक तो रात भर वो ठीक से सो नहीं पाया अपने अतीत में की गई गलतियों को याद करता रहा

जो इंसान बिना किसी म्हणत के 8.9 बजे तक आराम से a.c में बिस्तर तोडा रहता था आज उसकी सुबह कुछ ज्यादा हे जल्दी हो गई थी

नौकर ....अजय बाबू उठ जाइये मालकिन का हुकुम है आपके लिया

अजय लाचारी से खटिया से उठा किसी तरह हाथ मुँह दो कर नौकर के साथ हवेली में चल देता है

सामने हे रुक्मणि जी आवर गीता ठाकुर से अजय की भेंट हो जाती है जिन्हे देख अजय की नजरे जुख जाती है

गीता ठाकुर ......... ऐसे काम हे क्यों करते हो जिस से तुम अपनी नजरे तक न मिला सको

अजय ......मुझे नाफ्फ कर दीजिये बड़ी मम्मी

गीता ठाकुर ........ बड़ी मम्मी नहीं मालकिन कहो ये हक़ तुम खो चुके हो अजय बड़ी मम्मी कहने का हक़ तुम्हे खुद को एक अच्छे इंसान में बदल कर फिर से कामना होगा तभी तुम फिर से मुझे बड़ी मम्मी कह सकते हो

इन सब कड़वी बातो से अजय की आँखे नाम हो जाती है जिन्हे देख रुक्मणि जी की ममता पिघलने लगती है पैर वो जानती थी अगर उसने एक कदम भी ममता का अजय की आवर भदया तो अजय कभी खुद में बदलाव नहीं कर पायेगा

रुक्मणि जी .....दीदी मैं विधि आवर गायत्री को उठा कर आती हूँ

गीता ठाकुर ....... सोने दे उन्हें वो कल रात लेट तक जगहि हुई थी

आवर तुम अजय खेत पे जाओ जब तक ठीक नहीं होते काम करने की जरुरत नहीं है पैर सब पे नजर रखो आवर देखो की कैसे म्हणत की जाती है ठीक होने के बाद तुम्हे भी वही सब करना है इसे नास्ता दो आदत नहीं है भूखे पेट रहने की

अजय .....जी मालकिन

गीता ठाकुर ने इतना कुछ अजय को दिल पे पत्थर रख सुना तो दिया था पैर अंदर हे अंदर खु भी रो रही थी पैर जब अजय ने ..जी मालकिन ... कहा तो उनकी लाख कोशिशों के बाद भी दो बून्द टपक हे आई जिन्हे जल्दी हे साफ कर लिया पैर पास बैठी रुक्मणि जी ने सब देखा था

घर में काम करने वाली अजय को नास्ता ला कर देती है भूख तो पहले हे मर चुकी थी पैर सरीर को ताकत भी चाइये थी

अजय वही निचे बेथ नास्ता करने लगता है अजय के गले में खाना फास्ट देख रुक्मणि उठने को हुई पैर गीता ठाकुर ने उसके हाथ को पकड़ लिया

अपनी लाचारी में रुक्मणि जी चुप चाप भीगी आँखों से अजय को देखती रही आखिर माँ थी वो भी पुत्र कुपुत्र निकल सकता है पर माता कुमार नहीं

नौकरानी पानी का मैग ला कर रखती है अजय गता गाठ आधा मग खली कर देता है खाने से उसकी आँखों में आंसू तक आ गए थे

अजय नास्ता कर गीता ठाकुर वह रुक्मणि के पेअर चउथा है अनजाने हे सही पर दोनों के हाथ अजय के सर पे पहुंच जाते है

अजय को भी आज मह्सुश हो रहा था की परिवार के होते हुए भी वो कितना अभागा है जिसने आज तक कभी इस परिवार की इस प्यार की कदर नहीं की

जहा पहले अजय की आँखों में दुःख के आंसू थे वही आँखे अभी भी भीगी हुई थी पैर चेहरे पे वो दर्द गायब था जैसे रुक्मणि जी गीता ठाकुर के अजय के सर पे हाथ रखते हे गायब हो गया हो

अजय चुप चाप खेत की तरफ निकल पड़ा

रुक्मणि जी ....... दीदी मुझसे ये सब नहीं देखा जायेगा

गीता ठाकुर ......... तुम्हे क्या लगता है रुक्मणि मुझे अच्छा लग रहा था ऐसा करते हुए उसे इस तरह बड़ी माँ कहने का अधिकार छींटे हुए मेरा दिल मेरी आत्मा हे जानती है की मैंने कैसे अपने दिल पे पत्थर रख उसे ये सब कहा मैं अपने एक बेटे को खो चुकी हूँ अब इसे नहीं खो सकती इसे खुद को बदल एक अच्छा इंसान बनना होगा सोने ( गोल्ड ) को भी मनचाहा आकर देने से पहले अग्नि में पिघलाया जाता है तभी उसे मनचाहा आभूषण त्यार होता है

रुक्मणि जी ......मैं जानती हूँ दीदी पैर का से काम उसे मेरी आँखों के सामने तो रहने दीजिये

गीता ठाकुर ......नहीं रुक्मणि अगर वो ऐसे हे हमारे आस पास हमारी आँखों के सामने रहा तो मैं सायद खुद को रोक लूँ पैर तुम खुद को नहीं रोक पाओगी मैं भी ज्यादा दिन इसे सजा नहीं दूंगी जैसे जैसे इसमें बदलाव होगा इसकी सजा काम होती जाएगी

रुक्मणि जी ......विक्रम का कुछ पता चला दीदी

गीता ठाकुर ....... वो फार्महाउस पे बस इतना हे पता है मुझे आवर कुछ जानना भी नहीं है जिसने अपने हे घर की ेजात पे हाथ डाला हो वो मेरे लिया मर चूका है मैंने पहले भी उसे उसकी ऐसे हरकत के लिया माफ कर दिया था सोचा सुधर जायेगा चुड़ैल भी 7 घर छोड़ कर वॉर करती है पैर इसने तो अपने हे घर को नहीं छोड़ा गलती की जो उस दिन उसे सूर्य से कह नाफ्फ कराया साधने देना था जेल में

रुक्मणि जी .....पहले भी माफ किया मतलब विक्रम आपके साथ भी ऐसा कुछ...

गीता ठाकुर ....... है वो मेरी भी ेजात पे हाथ डालने की कोशिश कर चूका था

उदार विक्रम जैसे हे फार्महाउस से बहार निकला उसे सामने रस्ते में एक बुजुर्ग खड़ा मिला

विक्रम ........... कोण हो तुम आवर इस तरह मेरा रास्ता क्यों रोका है तुमने हटो मेरे रस्ते से

बुजुर्ग ........ असुर अंश तो प् लिया पैर ये नहीं जानते की उसका प्रयोग सकती रूप में कैसे करना है

विक्रम .....ये क्या बकवाश कर रहे हो तुम हटो मेरे रस्ते से वर्ण जान से मर दूंगा वैसे भी मरने वाले हो क्यों मेरे हाथ खून से रग्न चाहते हो

बुजुर्ग .....कोशिश कर के देख लो बचे

विक्रम गुस्से में कार से बहार निकलता है आवर उस बुजुर्ग को ाड़खा मरता है विक्रम बुजुर्ग को पीछे देखला तो बहुत दूर उसके सरीर को बिका तक नहीं पाया

बुजुर्ग ........ तुम अपनी मर्दानगी केवल स्त्री को भोग कर उसपे हे दिखा सकते हो

विक्रम पूरी कोशिश करता है पैर बुजुर्ग किसी लोहे के स्थाम सामान खड़ा था

विक्रम ......कोण हो तुम मेरी इतनी कोशिश के बाद भी तुम्हे पीछे देखेलना तो दूर तुम्हारी इस बूढ़े सरीर को भी नहीं हिला पाया

बुजुर्ग ........... सब बताऊंगा पैर यहाँ नहीं मेरे साथ चलो

विक्रम ....... चलिए मेरी कार में बैठिये आवर कहा चलना है रास्ता बताइये

बुजुर्ग ...... हाहाहा अपने इस वहां की आव्सय्कता नहीं है वह जाने की इसे विहिप छोड़ दो जहा से ले कर आये हो अगर इसकी जरुरत नहीं है तो बताओ मैं पंहुचा देता हूँ

विक्रम ......नहीं नहीं अभी इसकी जरुरत है मुझे

विक्रम कार को स्टार्ट कर बैक से हे फिर से फार्महाउस में लगा देता है

बुजुर्ग ......घबराना नहीं

विक्रम कुछ पूछता उस से पहले हे बुजुर्ग उसका हाथ थम गायब हो गया

दोनों के गायब होते हे इन पे नजरे रखे दो आँखे थी वो भी वह से गायब हो जाती है

u.s.a ......

सूर्य के घर पहुंचने तक राधिका आवर किरण दोनों हे नहीं लूटी थी सूर्य मानसिक संपर्क कर किरण से बात करता है किरण कुछ देर आवर लगने का बोल कर सूर्य से सम्पर्क तोड़ लेती है

सूर्य ......... अब क्या कृ अकेले बैठे बैठे

चलो घर पे देखता हूँ की क्या चल रहा है

सूर्य यही हॉल में आँखे बंद कर ध्यान लगाने हे जा रहा था की तभी उसे किसी की आवाज सुनाई पड़ती है

सूर्य जब आँखे खोलता है तो सामने रकत सन्देश हवा में जल रहा था

सूर्य .....ओह तुम हो मुझे लगा कोण है जो पुकार रहा है

R.sandesh ...... आपके लिया असुरगुर का महत्व पूर्ण सन्देश है

सूर्य .....वो तो तुम्हे यहाँ देख कर हे समाज गया था मैं कहो क्या सन्देश है असुरगुरु का

R.sandesh ......पुत्र काल मैं तुमसे भेंट करना चाहता हूँ आवर पुत्री मानसी से भी पुत्री मानसी को ले कर स्थान सु निश्चित कर मुझे सन्देश दो पुत्र

सूर्य ....... अब असुरगुरु का आदेश है तो जाना हे पड़ेगा चल बीटा काल हो जा त्यार

सूर्य रकत सन्देश में जहा पहली मुलाकात हुई ुशी स्थान को सु निश्चित कर असुरगुरु को सन्देश भेज देता है

सूर्य किरण से सम्पर्क कर असुरगुरु से मिलने जाने की बात बताता है आवर सूर्यगढ़ मानसी को संपर्क कर उसे असुरगुरु का सन्देश देता है

सूर्य अपना रूप परिवर्तित कर असुरगुरु से मिलने के लिया निकल जाता है

असुर कबीला फारेस्ट ........ सूर्य के पहुंचने हे असुरगुरु आवर मानसी दोनों हे वह पहुंच जाते है

सूर्य .....परनाम गुरुवार

असुरगुरु ....... आयुष्मान भाव पुत्र काल

मानसी ......परनाम बाबा

असुरगुरु .......... इच्छित वर प्राप्ति अस्तु पुत्री

सूर्य ...... आप कैसे है गुरुवार

असुरगुरु ....... नियति के मायाजाल से अभी अभी निकला हूँ पुत्र

सूर्य .....जनता हूँ गुरुवार मैं छह कर भी आपकी कोई सहायता नहीं कर सकता था

असुरगुरु ....... तुमने उचित किया पुत्र काल जीवन में कुछ घटनाक्रम होने पहले से हे नियति द्वारा निर्धारित किये जा चुके होते है जिसमे जिस की भूमिका न हो उसका हस्तक्षेप करना उचित नहीं

मानसी .....आप दोनों किस विषय पे चर्चा कर रहे है पिता श्री

असुरगुरु ......कुछ नहीं पुत्री अभी तुम्हारा सत्य जानना उचित नहीं पुत्र काल मुझे तुम्हारा सन्देश प्राप्त पुत्री मानसी वह तुम्हारे विवाह तिथि के साथ

सूर्य .....जी गुरुवार गुरुदेव ने हे मानसी आवर मेरे विवाह की तिथि निर्धारित की है

असुरगुरु ......उचित है पुत्र तुम दोनों के विवाह में 8 रोशनियाँ शेष है

सूर्य .....जी गुरुवार आपको हे इस विवाह को पूर्ण करवाना है गुरुवार क्यों की गुरुदेव ने पहले हे इसके लिया आपका चयन किया है

असुरगुरु ......... मुझे ख़ुशी होगी पुत्र अपनी पुत्री के विवाह का दायित्व पूर्ण करने में

पुत्र काल क्या तुम्हे घात है असुर लोक से असुरराज नरकासुर द्वारा पृथ्वीलोक पे भेजे सभी गुप्तचरों का किसी ने वध कर दिया है आवर वो कोई कन्या थी

मानसी .....इनको सब पता है बाबा ये इनका आवर दीदी का किया हुआ है सब

असुरगुरु ....... कोण दीदी पुत्री मानसी

मानसी ......जिनसे इनका विवाह हुआ है इनकी प्रथम पत्नी बाबा

असुरगुरु ......अथार्त पुत्र कल तुम्हारा विवाह हो गया आवर पुत्री भी दिव्या सकती सम्पन है कितने हे पर्यटनो के बाद भी मैं पूर्ण सत्य पता नहीं कर पाया सब किसी अभेद्य कवच में छुपा हो जैसे

सूर्य ....... ऐसा करना पड़ा गुरुवार मैं नहीं चाहता की किसी के समक्ष हमारी वास्तविकता आये

असुरगुरु .....किन्तु इस से तो नरकासुर का ध्यान पूर्ण रूप से परतविलोक पे आ जायेगा

सूर्य ....... ऐसा नहीं होगा गुरुवार क्युकी जिनलोक आवर नागलोक से भी नरकासुर के गुप्तचर मारे जा चुके है

असुरगुरु ........ किन्तु इस विषय में मुझे तो कोई सुचना नहीं मिली पुत्र काल

सूर्य ............ गुरुवार सिगरा हे आपको इसकी सुचना प्राप्त होगी किन्तु उनकी मृत्यु कैसे हुई इसका किसी को भी बहन नहीं होगा नरकासुर को पृथ्वीलोक से दूर रखने का यही एक मार्ग था मेरे पास गुरुवार

अभी ये लोग बात कर हे रहे थे की वह वयोम प्रकार होता है

वयोम .....परनाम गुरुवार

असुरगुरु ......कल्याण हो पुत्र वयोम किन्तु ये क्या वयोम पुत्री मानसी को बहन मन किन्तु हमें गुरुवार कह कर सम्बोधित कर रहे हो

मानसी ......आपने भाई के साथ जो किया उसके बाद भी बाबा

सूर्य ......मानसी ये क्या कह रही हो जानती भी हो न तुम

असुरगुरु ....... नहीं पुत्र काल पुत्री मानसी उचित कर रही है फिर हृद्या से जो भाव प्रकट हुआ वही पुत्र वयोम ने कहा इसमें कुछ भी अनुचित नहीं आवर पुत्री हम तुमसे कसंहा मांगते अपने किये की किन्तु हम तुम्हारे पिता होने के साथ साथ असुरगुरु भी है

मानसी .....हमें कसंहा करे बाबा हमने केवल हाश्य रूप में ऐसा कहा था आवर आप भी हमारी अभद्रता के लिया माफ कर दीजिये

असुरगुरु .....हम जानते है पुत्री किन्तु इस से सत्य नहीं बदल जायेगा

सूर्य .....गुरुवार आप पिता पुत्री बात कीजिये मैं अभी आता हूँ

असुरगुरु .....अवश्य पुत्र काल

सूर्य वयोम को ले कर असुरगुरु वह मानसी से कुछ दुरी पे बात करने लगता है

सूर्य .....है वयोम कहो क्या बात है

वयोम ......भाई वो किसी बुजुर्ग के साथ गायब हो गया मैं उसका पता नहीं कर पाया केवल उसकी आसुरी ऊर्जा को हे मह्सुश कर पाया

सूर्य ....... लगता है कोई आवर भी असुर पृथ्वीलोक पे मौजूद है किन्तु उसे विक्रम से क्या काम कही ये वही तो नहीं जिस से विक्रम को असुर अंश की प्राप्ति हूँ

वयोम .....नहीं ये वो नहीं था उसकी बातो से तो यही लगा की वो विक्रम के अंदर मौजूद असुर अंश को जान चूका है किन्तु उनकी भेंट पहली बार हुई थी

सूर्य ...... आवर कुछ पता चला वह पे लगता है विक्रम को मौका दे कर गलती करदी वैसे आपने समय रहते मल्टी आवर उसके परिवार को सुरक्षित कर बहुत अच्छा किया

वयोम ......... सुझाव तो आपका हे था उस वक्त मन टी किया विक्रम को जिन्दा जला दूँ पैर मजबूर था आपने जो रोका हुआ था

सूर्य ...... चिंता नहीं करो विक्रम को जीते जी हर दर्द भोगा होगा इतना आसान मौत थोड़ी न दूंगा उसे

वयोम ....... उन दोनों का क्या करना है जनहोने विधि आवर गायत्री के मान सम्मान से खेलने की सोची थी आवर विक्रम के इरादे कुछ ठीक नहीं लगे मुझे असुर अंश की वजह से मैं उसके मंद में तो नहीं गुस्स पाया पैर मुझे लगता है विधि आवर गायत्री पे उसकी नियत ख़राब है

सूर्य .......... उन दोनों की चिंता न करो वयोम वो दोनों परिवार का हईशा है आवर परिवार की तरफ बुरी नजर डालने वाले को जिन्दा जला डालूंगा

तुम विक्रम का पीछा छोड़ो आवर हवेली की हर गति विधि पे नजर रखो

वयोम .....आवर ये वो तस्वीर है जो उन दोनों ने विक्रम दी थी पैर ये सब नकली है कंप्यूटर से त्यार की हुई

सूर्य .......... जब दोनों से मेरा ऐसा कोई सम्बन्ध बना हे नहीं तो तस्वीरें सच कैसे हो सकती है

जहा ये तस्वीर निकली उसे उठाओ आवर थोड़ी खातिर दरी करो

वयोम ....ठीक है मैं चलता हूँ

वयोम वह से निकल जाता है आवर सूर्य तपिश असुरगुरु के पास चला जाता है

असुरगुरु .....क्या सन्देश ले कर आया था पुत्र वोयोम

सूर्य .......... वयोम किसी असुर की जानकारी देने आया था गुरुवार जहा वयोम से पहली बार भेंट हुई ुशी के पास के कसबे में वयोम ने उस असुर सकती धारक को देखा

असुरगुरु ....वो सायद मेरा हे शिष्य 1 है पुत्र जो मेरी आज्ञा की आज्ञा कर तुम्हारी वास्तविकता जानने निकला है

सूर्य ....... उसने पहले हे गलती कर दी आवर अब गुरु आज्ञा का उलंघन कर अपने भाग्य में काल को आमंत्रित किया है आपसे निवेदन है की आप इन सब के बिच......

असुरगुरु .....नहीं पुत्र काल जो जैसा करम करेगा वैसा फल पायेगा जो तुम्हे उचित लगे वही करो पुत्र

सूर्य ......आज्ञा दीजिये गुरुवार परनाम

असुरगुरु ......... कल्याण हो पुत्र काल

मानसी .....आज्ञा दीजिये बाबा परनाम

असुरगुरु ..... अवश्य पुत्री साधा सुखी रहो पुत्री

सूर्य मानसी को ले वह से सूर्यगढ़ निकल गया वह मानसी के साथ थोड़ी मस्ती कर छठ पे से हे u.s.a निकल गया

किरण ...... बहुत समय लगा दिया आपने कुंवर जी

सूर्य ....... वो वयोम से कुछ जरुरी बात करने में समय लग गया

किरण ......वयोम से मानसी से उन सब को पता चला की आप वह गेट आवर बिना मिले हे चले आये तो सोचा है वो सब मिल कर क्या करेंगी

सूर्य ...... जनता हूँ ऐसा कुछ होनेवका खतरा है इस लिया मैं पहले हे अपनी ऊर्जा को रक्षित कर लेता हूँ जब बिना मिले निकलना हो पैर तुम से नहीं बच सकता

किरण ....... अछि बात है किसी को तो पता होना चाइये न

आज आपने बहुत म्हणत की है जा कर एक अच्छा सा बाथ ले लीजिये तब तक हम खाना लगते है

सूर्य .....वैसे भाबी कहा है वो दिखाई नहीं दे रही है

किरण .....वो अभी रात के लिया रेस्ट कर रही है खाने पे जी भर के देख लेना फिर पूरी रात जो चाहे वो करना

सूर्य ......... पहले तुम बाद में भाबी सामजी आवर नाईट में परीलोक चली जाना या फिर घर पे ok

किरण .....उम्म्म्मः आज कल आपके आदेश कुछ ज्यादा हे भाड़ गए है आवर मैं सपना दी के पास चली जाउंगी आवर सुबह जल्दी लौट आउंगी अब जाइये

सूर्य ......... तुम भी चलो न एक छोटा सा राउंड हो जाये

किरण .....जाइये नहीं तो यही कपडे उतर दूंगी

सूर्य ......... अच्छा है उतर दो टाइम बचेगा

किरण ....... मैं माँ को कॉल करने वाली हूँ देख लीजिये फिर

सूर्य .....अच्छा बाबा जा राग हूँ एक किश तो मिलेगा न

किरण .....अब. वो सब रात को हे ुम्मम्हा

सूर्य ....ये क्या था

किरण .....ये मेरी तरफ से था कुंवर जी

किरण सूर्य को देखेलते हुए रूम में लॉक कर देती है

किरण ........ फ्रेश हो कर त्यार होने के बाद हे रूम खुलेगा अब

सूर्य ....जो हुकुम स्वीटी जी ..............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................

राधिका सूर्य का सेक्स सीन भी ऐड करता पैर अपडेट में वर्ड लिमिट ख़त्म हो जाती अधूरे में हे इस लिया नेक्स्ट अपडेट में राधिका सूर्य का फर्स्ट मिलान लिखूंगा

थैंक दोस्तों गुड नाईट .......
 
अपडेट 215

किरण .....उम्म्म्मः आज कल आपके आदेश कुछ ज्यादा हे भाड़ गए है आवर मैं सपना दी के पास चली जाउंगी आवर सुबह जल्दी लौट आउंगी अब जाइये

सूर्य ......... तुम भी चलो न एक छोटा सा राउंड हो जाये

किरण .....जाइये नहीं तो यही कपडे उतर दूंगी

सूर्य ......... अच्छा है उतर दो टाइम बचेगा

किरण ....... मैं माँ को कॉल करने वाली हूँ देख लीजिये फिर

सूर्य .....अच्छा बाबा जा राग हूँ एक किश तो मिलेगा न

किरण .....अब. वो सब रात को हे ुम्मम्हा

सूर्य ....ये क्या था

किरण .....ये मेरी तरफ से था कुंवर जी

किरण सूर्य को देखेलते हुए रूम में लॉक कर देती है

किरण ........ फ्रेश हो कर त्यार होने के बाद हे रूम खुलेगा अब

सूर्य ....जो हुकुम स्वीटी जी ..............

अब आगे ............

रात में सूर्य किरण राधिका जी तीनो ने मिल कर डिनर किया

आज राधिका जी काफी खूबसूरत लग रही थी आखिर लगे भी क्यों न एक तो पहले से हे खूबसूरत थी ऊपर से आज उन्होंने ब्यूटिशियन से ट्रीटमेंट जो लिया था

राधिका जी खाना कहते हे रूम की आवर नक़ल गयी वही सूर्य किरण के साथ फर्स्ट राउंड मार कर किरण की सूरजगढ़ के लिया विधा कर दिया

राधिका जी को अब बस सूर्य के आने का इन्तजार था

सूर्य रात 11 बजे के करीब राधिका जी के रूम की आवर भाषा

सूर्य अपनी पावर से दूर के उस पर देखता है जहा राधिका जी लाल सलवार सुइट में सोफे पे बैठे बैठे डोर की आवर देख कभी सरमाती तो कभी मुस्कुराती





सूर्य ........ चल बीटा सूर्य उतर जा मैदान में आवर करले फ़तेह भाबी की छूट को अपने नाम पे

सूर्य जैसे हे दूर नॉक करता है राधिका जी तेजी से उठ खुदी हो दूर के पास पहुंची फिर कुछ पल रुक दूर खोलती है एक बार सूर्य को देख शरमाते हुए साइड हैट गई

सूर्य ...... ये ड्रेस आप के गोर रंग पे बहुत खूबसूरत लग रही है भाबी जैसे कोई लाल पारी हो

सूर्य खुद से हे दूर को सत्ता कर सोफे पे जा बैठा जहा पहले राधिका जी बैठी हुई थी

सूर्य ......अब वही खड़े रहना है यहाँ आइये आपसे कुछ बात करनी है

राधिका जी बिना कुछ कहे साढ़े हुए कदमो के साथ सूर्य के बगल में आ बैठी अपनी गर्दन उन्होंने वैसे हे जुखाइये हुई थी

सूर्य ........ मैं जनता हूँ आपने बहुत कुछ सहा है भाबी जी

राधिका ......राधिका

सूर्य .....ok राधिका रोहन भाई अभी भी ठीक हो सकते है पैर आपको उनसे माँ बनने का सुख फिर भी नहीं मिल सकता है है आपकी शारीरिक जरुरत वो अवश्य पूरी कर सकते है क्या अब भी आप चाहती है की मैं आगे भादू

राधिका ......... मैं अपने दिल की बात कहना चाहती हूँ आवर प्लेसेस उसके बाद आप ज्यादा बात मत कीजियेगा मुझे कुछ टाइम दीजिये ताकि मैं ......

सूर्य .......ok ok मैं आपकी स्थिति जनता हूँ आप अपने दिल की बात कहो भाबी जी

राधिका ......... भाबी जी नहीं राधिका कहो एकेले में जब आपसे पहली बार मिली थी तब कब आपको देख आकर्षित हुई थी फिर डेरी डेरी आपके बारे में पता चला की आप कैसे इंसान है मुझे खुद पता नहीं चला की कब मैं आपसे प्यार करने लगी आपके भाई रोहन से में जितना प्यार करती उनसे कही ज्यादा आपसे करती हूँ पैर उनकी पत्नी होने के कारन अपने दिल की बात कह नहीं सकती थी फिर मुझे आपके पुरुषार्थ का पता चला सानिया आवर माया से जिन्होंने आपका सम्बन्ध देखा था मेर्री जी के साथ तब मैंने सोच लिया की मेरी कोख से आपके हे बचे का जनम होगा किसी आवर के बचे को मैं जनम नहीं दूंगी इसमें दीप्ती दीदी ने मेरा पूरा साथ दिया आवर माँ को भू मैंने कुसी तरह त्यार किया ये मैं हे जानती हूँ आपके भाई ने भी आपको हे चुना इसके लिया

सूर्य ...... ये सब छोड़िये अब आपका क्या फैसला है क्युकी ये आखरी फैसला होगा मेरे साथ इस रिश्ते में आगे भढना या यही पे रुकना है

राधिका बोलने की जगह उठ कर सूर्य के बोध में बेथ गले से लग जाती है

सूर्य राधिका की तेज चलती धड़कन की आवाज अच्छे से सुन प् रहा था साथ हे अपनी गर्दन पे उन महकती गरम सांसो का जो सूर्य के गर्दन के रोये खड़े कर चुकी थी

सूर्य अपने होंठ राधिका की गर्दन पे चिपका चिकने लगता है

इतना काफी था सूर्य की आवर से इशारा मिलते हे राधिका सूर्य के छोड़े सीने से किसी अमरबेल के तरह िपत जाती है

सूर्य राधिका की सूट को गर्दन के पास से पकड़ कर चीरते हए पीछे से पूरा ऊपर से निचे तक फाड् देता है

राधिका ....ये आपने क्या किया इसे तो मैं हमेशा इस पल को याद करने के लिया रखना चाहती थी

सूर्य राधिका को थोड़ा पीछे कर सामने से भी वैसे फाड् कर अलग कर देता है

सूर्य .....इस से खूबसूरत तोफहा आपको देना वाला हूँ आज रात जो आपका हमेशा ख्याल रखेगा फिर इस बेजान वस्त्र से कैसे यादें कैसे पल

राधिका सूर्य की बात का मतलब समाज खुद से सूर्य के होंठ आपने हों तो में कैद कर लेती है

अब सूर्य किश करते हुए राधिका की लाल बारे में कैद उन सफ़ेद गोलों को सायला रहा था जहा रोहन ने थोड़ी बहुत म्हणत कर उन्हें कुछ नरम किया था पैर अपने अस्तित्व को बरक़रार रखे हुए सर उठाये खड़े थे

कुछ देर किश करने के बाद सूर्य राधिका को कड़ी कर अपने हाथ से सलवार का नाडा भी तोड़ देता है सलवार अगले हे पल जमीं पे बिच कालीन पे थी आवर सामने राधिका का जानलेवा कमुख जिसम जिसकी तपिश सूर्य भी मह्सुश कर रहा था





ब्रा से बहार झांकती उन गोलाइयों पे जैसे सूर्य की नजर ातक हे गई थी

पेंटी से वो दोनों उभरे हुए होंठ हलके हलके नजर आ रहे थे

राधिका सूर्य को इस तरह अपने अंगो में खोया देख खुद को सरम से सिमटने से रोक नहीं पाई पैर उन्हें क्या पता था ऐसा करने से वो लाल पिंजरे में कैद गोल गोल चूचिया कुछ ज्यादा हे उभर कर सामने आ जाएँगी





राधिका .....ऐसा न देखो मुझे सरम आ रही है

सूर्य आगे भाड़ राधिका को पीछे से बहो में भर उन खुले बालो को हटा गर्दन चिकने लगा

राधिका की रीद की हदी में मनो किसी ने नंगा वैर चूहा दिया हो

सूर्य पीठ को चुम्बनों से बार अब ब्रा की लेस को निचे कर गर्दन के अगले हिस्से पे जुबान फिरने लगा





राधिका को इस से गुदगुदी हो रही थी वही उसे इन सब में मज़ा भी मिल रहा था

रोहन ने इस तरह कभी उसे प्यार नहीं किया रोहन बस कुछ पल किश कर उसकी चूचियों को पिने के बाद सहला कर चुदाई सुरु कर देता था

सूर्य ब्रा को उतर का उन गोल गोल चूचियों मुँह में भर पिने लगता है साथ हे अपना हाथ उस लाल अंतिम वस्त्र में दाल राधिका की पनियाई हुई छूट में एक ऊँगली दाल अंदर बहार करने लगता है

राधिका .....उम्मम्मम्हा अह्हह्ह्ह्ह इस्स्स्सस्शह्ह्ह्ह

सूर्यक कभी दायी तो कभी बायीं चूचियों को चूस छूट का लाल करने लगता है राधिका के निप्पल्स जो पहले चने के दाने के सामान थे वही अब फूल का मूंगफली की डेन जितने बड़े आवर नुकीले हो चुके थे

जैसे हे सूर्य उन्हें कुसी छोटे बचे जैसा अपने दांतो में पकड़ हल्का सा कीचता वैसे हे राधिका की योनि सूर्य की ऊँगली पे अपनी पकड़ टाइट करती देखते हे देखते राधिका जी की छूट से गरम तरह सूर्य के हथेली को भिगो कर पेंटी को भोगने लगा

सूर्य राधिका को निचे अपने घुटनो पे बैठने का इशारा करता है

राधिका काँटी हुई उंगलियों से सूर्य की पेण्ट का भूख खोल कर अपनी नरम ुंगकियो से पेण्ट आवर अंडरवियर को निचे खिसखती है तो सूर्य का नागराज मामूली अकड़न के साथ बहार खुली हवा में राधिका की आँखों के सामने जुलने लगता है





राधिका .....ओह माय गॉड ये क्या है सूर्य

इतना तो उनका खड़ा होने पे नहीं होता

सूर्य .......मेरा तो ऐसा हे है बाकि आप देख लो अभी भी मौका है पीछे हटने का

राधिका हाथ में पकड़ कर सूर्य के लिंग को दबती है वो जैसे हे दबती उल्टा उतना हे वो ठोस होता गया

राधिका .....पता नहीं स्वीटी ने कैसे इसे झेला होगा

सूर्य ....क्यों आपने चेक नहीं किया था क्या

राधिका ....किया था पैर मुझे नहीं लगा था ये इतना खतरनाक है

सूर्य ....... अब इसे प्यार कीजिये आपको तो पसंद है न





राधिका एक बार अपना नाक लैंड के सूपड़ा के पास कर गहरी सां अंदर लेती है आवर फिर उस फुले हुए लिंग के अगले शीशे को अपनी जुबान से टेस्ट कर मुँह में भर चूसने लगती है





जितना आराम से राधिका अपने मुँह के भीतर ले प् रही थी उतना हे सूर्य आगे पीछे कर रहा था

राधिका को लैंड चूसना पसंद था आज उसे मनचाहा खिलाना मिला था राधिका ने सोचा था को आज वो मलाई खा कर रहेगी पैर बिखरी को क्या पता था की सूर्य बिना छूट में जाये ठंडा नहीं होता

काफी देर बाद राधिका की हमर जबाब दे गौ सूर्य उसे वही निचे लिटा राधिका की पेंटी आवर अपने सरे कपडे निकल राधिका की योनि पे टूट पड़ा कभी जुबान अंदर दाल उन गरम भांप चिश्ती दीवारों को अपनी जुबान से कुरेदता तो कभी डेन पे अपने डंडी से चपलता जल्दी हे राधिका स्खलन के करीब पहुंची तो सूर्यक वह से हैट गया राधिका को गुस्सा तो आया पैर जब अपनी योनि पे गरम सकद रोड महसूसक की तो उसकी गर्माहट से हे राधिका मज़े से दोहरी होने लगी





सूर्य लिंग को अच्छे से सेट कर राधिका के जिसम पे काबू करते हुए एक तेज प्रहार करता है

सूर्य लैंड सर सराफा हुआ आधा अंदर जा गुस्सा

राधिकक्मा चुकती उस से पहले हे सूर्य अपने होंटो से राधिका के मुँह को बंद कर चूका था

राधी को बहुत दर्द hi रहा था वर्जिन न होने के बाद भी कारन था रोहन से सम्बन्ध न बन पाना जो एक्सीडेंट के बाद बिलकुल बंद हो चूका था

सूर्य ुशी स्वस्थ में दूसरा झटका मार कर लग भाग पूरा लिंग राधिका की योनि में पेल चूका था





राधिका को दर्द से उभरने में करीब 5,6 मिनट्स लगे

राधिका .....आपने तो जान हे निकल दी कोई ऐसे भी करता है क्या मुझे तो लगा आज आखरी समय आ गया मेरा

सूर्य ........ ये करना जरुरी था वर्ण आपकी बच्चेदानी तक रास्ता बनाते बनाते आपको बहुत दर्द सहना पड़ता अब देखो लगभग पूरा अंदर जा चूका है राधिका को यकीं नहीं हुआ आवर जैसे हे उसने अपने योनि पे हाथ रख देखा तो लिंग बस 1इंच से कुछ हे बहार था पैर साथ हे उसे अपनी योनि पे गीलापन भी मह्सुश हुआ

हाथ को देखा तो उसपे खून लगा था





राधिका ......आपने तो फिर से मुझे खून दिखा दिया

सूर्य .....उम्मम्मम्हा राधिका जान आज आपकी फिर से सुहागरात है तो इतना तो बनता है गिफ्ट में बचा आवर ये चादर दोनों आपकी

राधिका .......उम्म्म्मः कुंवर जी यही कहती है न स्वीटी आज से एकांत में यही हमारा तीस्ता है सबके सामने आपकी भाबी अकेले जो आपको अच्छा लगे





सूर्य 2 ,3 बार पुरे लिंग की बहार निकल अंदर डालता तो राधिका का मुँह भी ऐसे हे खुलता बंद होता

जैसे कोई उनके हवा भर राग हो आवर वो मुँह से निकल रही हो

कुछ देर बाद राधिका के कहने पे सूर्य उन्हें घोड़ी बना कर फिर से चढ़ गया घुड़सवारी करने





सूर्य लगातार बिना रुके राधिका जी को छोड़ता रहा वो तभी रुका जब राधिका की योनि में अपना भाड़ा वीर्य भर नहीं दिया

राधिका को पता भी नहीं चला कब वो वीर्य की गरम तपिश अपनी बच्चेदानी में मह्सुश करते करते गहरी नींद में चली गई

राधिका की आँखे सुबह के करीब 3 बजे के आसपास खुली वो भी अपनी छूट में दर्द मह्सुश करके के

जब आँखे खुली तो अपनी योनि में सूर्य का डंडा मह्सुश कर उसकी नींद कफ्फूर हो गई कुछ देर फोरप्ले के बाद राधिका भी सुबह सुबह इस मज़े में दुभि सूर्य के लिंग





को अपनी छूट में जकड ते हुए उसे अंदर बहार करने लगती है

राधिका .....उम्मम्मम्हा आप मुझे उठा दिए होते

सूर्य .......तुम्हे इतने सुकून से सोया हुआ देख खुद को रोक नहीं पाया फिर तुम्हे जल्द से जल्द माँ भी तो बना है वैसे भी जल्दी हे हमें वॉश इंडिया भी तो लौटना है उम्मम्मम्हा

राधिका ......... आपके वीर्य को मह्सुश करते करते न जाने कब कटनी सुकून भरी नींद आई की आता नहीं चला वो यो आपके इसने डांक मार दिया तो दर्द हुआ तभी आँखे खुली आवर कुछ दिन आवर रुकते है न यहाँ पे

सूर्य राधिका को उठा कर बीएड पे कुटिया बना फिर से लैंड दाल छोड़ने लगता है





सूर्य ........ आप चिंता न करो कुछ दिन दिल्ली रह कर आपके साथ फिर हवेली जाऊंगा आवर वैसे भी दिल्ली दूर हे कितनी है

राधिका ....तोडा जोर से कीजिये उम्मम्मम्हा आआह्ह्ह्हह ऐसे हे सरीर की साडी नशो कॉल दीजिये

राधिका ......जब तक बच्चा नहीं होता आपको समय समय पे खुराख देनी होगी वार्ना बचा हेअल्थी नहीं होगा हेहेहे

सूर्य .........उम्मम्मम्हा हाहाहा बचा आवर बचे को माँ दोनों को खुराख मिलते रहेगी समय से पहले सब मिलेगा





राधिका ........अह्हह्ह्ह्ह माँ मैं फिर से झाड़ रही हूँ

अह्ह्ह्हह्हह बस दुःख इस बात का है की वो आपको पापा नहीं कह पायेगा

सूर्य ........ ये सही भी है राधिका भटके हे वो पापा न कहे पैर तुम तो जानती हो की वो किसका खून है बस इतना काफी है मेरा लिया

ऐसे हे भिवष्य की बात करते हुए सूर्य एक बार फिर से उस लम्भी काल गुफा को सफ़ेद घड़े पानी से भर राधिका को बहो में भर लेट जाता है दोनों एक दूसरे की बहो में निर्वस्त्र सुकून से सो जाते है

सुबह किरण अपने समय से लौट कर अपने रूम में लेट जाती है

सूर्य की ये अहसास होते हे फ्रेश हो रूम में पंहुचा आवर किरण को बहो में भर प्यार करने लगता है कुछ देर बाद सूर्य परीलोक के लिया निकल जाता है

दो दिन सूर्य दिन आवर रात जब भी मौका मिलता राधिका की बच्चेदानी अपने वीर्य से भाड़ देता

राधिका अब काफी खुल चुकी थी किरण के सामने हे वो कभी कभी सूर्य को किश कर देती आवर कभी कभी लिंग भी सहला देती किरण भी ऐसा मस्ती भरा काहिल इंजॉय करती इन दो दिनों में सूर्य किरण राधिका को कुछ जगह गुमा फिर कर लता है आवर डिस्को पब में एन्जॉय करवाता है

रोहन को वॉश लौटने के बारे में बता दिया था सूर्य ने

रोहन उन्हें एयरपोर्ट पे हे मिला साम को चारो फ्लाइट से इंडिया के लिया निकल गए राधिका मौका देख एक बार प्लेन में भी बच्चेदानी फुल करवा लेती है

राधिका इन चाँद दिनों में पूरी तरह बदल चुकी थी

जैसे उसने एक नयी राधिका का जनम हुआ हो जो बिलकुल चुलबुली हरदम मस्ती में रहने वाली

सुबह जैसे हे फ्लाइट लेंड हुए एयरपोर्ट के बहार हे दीप्ती आवर सुनिधि इनको लेने के लिया त्यार कड़ी थी

दीप्ती दो उड़ते हुए राधिका से गले मिलती है

दीप्ती ..... राधिका ख़ुशख़बरी है की नहीं

रोहन ......कैसे खुसखबरी दीप्ती

दीप्ती ....कुछ नहीं भैया वो हमारी कुछ पर्सनल बात है

राधिका डेरी से दीप्ती को कुछ कहती है जिसे सुन दीप्ती सूर्य को आँखों हे आँखों से थैंक्स कहती

सूर्य .....hello दीप्ती दी hello सुनिधि

सुनिधि .......ऐसे hi hello नहीं चलेगा समजे साम को घर चलना है mom.ne इन्विते किया है

सूर्य ........ ये डिपार्टमेंट इनका है क्यों रोहन भाई अब सदी सुधा लोगो की बीबी के आगे कहा चलती है

सुनिधि ........ फिर तो रेडी रहो क्यों स्वीटी

किरण ..... बिलकुल सुनिधि साम को चलेंगे अभी तो घर चलो

सूर्य किरण राधिका रोहन चारो दीप्ती सुनिधि के साथ उनके घर की तरफ निकल गए जहा सानिया मोना सोफिया भी इनका इन्तजार कर रही थी ..................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ................
 
अपडेट 216

राधिका डेरी से दीप्ती को कुछ कहती है जिसे सुन दीप्ती सूर्य को आँखों हे आँखों से थैंक्स कहती

सूर्य .....hello दीप्ती दी hello सुनिधि

सुनिधि .......ऐसे hi hello नहीं चलेगा समजे साम को घर चलना है mom.ne इन्विते किया है

सूर्य ........ ये डिपार्टमेंट इनका है क्यों रोहन भाई अब सदी सुधा लोगो की बीबी के आगे कहा चलती है

सुनिधि ........ फिर तो रेडी रहो क्यों स्वीटी

किरण ..... बिलकुल सुनिधि साम को चलेंगे अभी तो घर चलो

सूर्य किरण राधिका रोहन चारो दीप्ती सुनिधि के साथ उनके घर की तरफ निकल गए जहा सानिया मोना सोफिया भी इनका इन्तजार कर रही थी ..................

अब आगे .............

सूर्यगढ़ ........ जब से जूलिया यहाँ आई है तब से शालिनी जी के साथ हे ज्यादातर समय वयतीत करती बेसक सोना उसका राधा के साथ हे होता था या फिर कभी कोमल के साथ भी jo.aajkal अलीना उर्फ़ प्रिय के साथ हर वक़्त कंप्यूटर पे लगी कुछ न कुछ नया सिखने में लगी रहती थी

किरण ने सुबह हे शालिनी जी को कॉल कर दिल्ली आने का बता दिया था

शालिनी जी को बहुत ख़ुशी हुई की सूर्य उसके पास लौट आएगा पैर जब उन्हें पता चला की सूर्य एक दो दिन दिल्ली रह कर सूर्यगढ़ आएगा तो उनकी चेहरे के रौनक हे गायब हो गई थी आजकल शिव भी शालिनी जी से दूर हे रहता था क्यों की उन्हें भी शालिनी का गुमसुम रहना बिलकुल भी पसंद नहीं था

फिर काम काज के चलते वो रात में भी पहले की तरह शालिनी जी को ख़ुशी नहीं दे प् रहे थे जहा मर्दो का इस ढलती उम्र में सम्भोग की इच्छा काम होती है वही स्त्री की इच्छा भढने लगती है

आवर जब कोई उसे संत न कर पाए तो सवभाव में भी चिड़चिड़ापन ुधाशी ये सब होने लगता है न चाहते हुए भी यही शालिनी जी के साथ हो राग था भले हे वो गुस्सा नहीं करती थी संत एकेले रहना पसंद करती थी

जूलिया ....... क्या हुआ मम्मी आप आज फिर उदाश है

शालिनी जी ......कुछ नहीं बेटी बस हल्का सर दर्द है

जूलिया ........ आपने पहले क्यों नहीं बताया मम्मी

जूलिया एक अच्छी बहु सामान शालिनी जी का सर अपनी गौड़ में रख अपने हलके हाथो से दबाने लगती है

शालिनी जी .......अरे बेटी ये सब करने की जरुरत नहीं है

जूलिया ......जरुरत क्यों नहीं है मम्मी आपको आराम मिलेगा तो मुझे भी ख़ुशी होगी आवर आपको भी अच्छा लगेगा बेटी भी बोलती हो आवर अपनी माँ की सेवा करने से भी रोक रही है ये तो गलत है न माँ

शालिनी जी ......... एक बार तेरे उनको आने दे फिर बताती हूँ इतनी बड़ी ख़ुशी की बात मुझसे हे छुपाई उसने आने दे फिर देख कैसे उसके कान खिचड़ी हूँ में

जिलूया ........ मम्मी ऐसा न करना वर्ण वो नाराज हो जायेंगे उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया जरूर कुछ कारन रहा होगा

शालिनी जी .....हेहेहे चल ठीक है कण नहीं खिचड़ी उसके पैर डाँटूगी जरूर उसे आवर उसने तुम्हे कुछ कहा तो देख फिर मैं क्या करती हूँ उसके साथ

जूलिया ....... हेहेहे कोमल बता रही थी मम्मी आपने कुछ दिन पहले हे उन्हें पिट दिया था

शालिनी जी ....... नहीं बेटी ऐसा नहीं है वो मेरे जिगर का टुकड़ा है उसे कैसे पिट सकती हूँ जब वो पास नहीं होता है तो सब अधूरा अधूरा लगता है सबके होते हुए भी जब वो कोमा में था एक साल तब मैं हे जानती हूँ कैसे मैंने खुद को संभाला था उसे उस हालत में देख गुस्से में एक बार मारा था वो भी यहाँ आने के बाद बिना उसकी कोई गलती के उस दिन मैं खून के आंसू रोई थी पहली बार मारा वो भी बिना गलती के

जूलिया ....... वो आपका बीटा है उनपे हर हक़ आपका सबसे पहले है मम्मी क्या हुआ मार दिया तो उन्हें इस दुनिया में पहचान देने वाली भी तो आप हे है ये क्या मम्मी आप रो रही है

शालिनी जी उस दिन को याद कर भावुक हो उठी जब दुर्जन सिंह के गांव में सूर्य पे गुस्से में हाथ उठाया था

शालिनी जी जल्दी से अपने आंसू पॉच लेती है

जूलिया ...... आपको पता है मम्मी मैंने अपनी माँ के साथ ज्यादा वक़्त नहीं बिताया मुझे मेरे पिता जी ने हे पल पॉश कर बड़ा किया उन्होंने मेरी हर ख़ुशी का ख्याल रखा पैर फिर भी कभी कभी एकांत में मुझे अपनी माँ की याद आ हे जाती थी जब पहली बार हमें उन्होंने अपने अपने साथ ले कर परीलोक आये तब जब आपको देखा तो बस आपको हे देखते रह गए आप जिस तरह उन्हें प्यार कर रही थी मेरा भी दिल हुआ की दौड़ कर आपके सीने से लग जाओ पता नहीं क्यों पैर आपको देखा तो जैसे मुझे फिर से मेरी माँ मिल गई

तब बस एक हे ख्याल था की आप मुझे बेटी कह कर एक बार सीने से लगा ले पैर उपरवाले ने मुझे कुछ ज्यादा हे मेहरबानी कर दी जो जीवन भर आपकी सेवा का मौका दे दिया अगर इनसे सदी भी न होती तो मैं आपको छोड़ कर नहीं जाने वाली थी

शालिनी जी ........ जैसे मेरे लिया कोमल किरण सपना पायल प्रीती है वैसे हे बाकि सब बेतिया है उनके तुम भी हो पैर पता नहीं ये तुम्हारे बचे का बाप कहा जा कर रुकने वाला है अब तो उसने विधि आवर गायत्री बेटी को भी लाइन में खड़ा कर दिया है लोगो से एक ठीक से नहीं संभालती आवर ये यहाँ एक के बाद एक ला रहा है कही अब u.s.a या दिल्ली से आवर न ले आये

जूलिया .......अच्छा हे है माँ हमें भी थोड़ी रहत रहेगी वार्ना एक दो से वो संत नहीं होने वाले

शालिनी जी....... क्या मतलब बेटी

जूलिया ......वो वो मेरा मतलब था की आपके लिया हे अच्छा है इतनी बहुये होंगी तो सब आपकी सेवा करेंगे न मिल कर के

शालिनी जी .......... हेहेहे बेटी जिसकी तुम बात कर रही हो उसे मैंने हे जनम दिया है उसके बारे में मुझसे बेहतर तो उसके पिता शिव भी नहीं जानते

जनम से पहले का तीस्ता जुड़ा है उसका इस दिल से जहा आज ये पल रहा है ( जुली के पेट पे हाथ रख कर ) उसे यही पल पल भड़ते मह्सुश किया है मैंने जैसे तुम इसे मेरे छोटे सूर्य को मह्सुश करती ठीक वैसे हे इस लिया मुझे उल्लू न बना उम्र आवर अनुभव दोनों में बड़ी हूँ

जूलिया ......सॉरी मम्मी वो बस ऐसे हे

शालिनी जी ....... चल यहाँ लेट मुझे अपने बेटे से बात करनी है

जूलिया को कुछ समाज तो नहीं आया पैर शालिनी जी के कहे अनुसार वो लेट जाती है शालिनी जी आहिस्ता से जूलिया के पेट पे जहा बच्चेदानी होती वह कान लगा लेती है

शालिनी जी को क्या मह्सुश हुआ क्या नहीं ये तो वही जाने पैर उनके चेहरे के बदलते भाव बहुत कुछ दर्शा रहे थे जूलिया बड़ी खामोशी से शालिनी जी के चेहरे पे होते बदलाव देख रही थी वह कभी बड़ी से मुस्कान होती तो कभी ऐसे भाव जैसे शालिनी जी कुछ समझने की कोशिश कर रही है

जूलिया ......क्या हुआ मम्मी आप इस था क्यों मुस्कुरा रही है

शालिनी जी .......कुछ नहीं बेटी बस उसे मह्सुश कर रही हूँ तुम संत रहो आवर हमें डिस्टर्ब न करो

जूलिया आँखे बंद कर बीएड से तेग लगा अपने पेट पे ध्यान करती ये सोच की उसे कुछ अलग मह्सुश होता है की नहीं

ीदार बहार से रेखा जी किसी काम से अंदर आती है तो सामने का नजारा देख उनके कदम वही गेट पे हे रुक जाते है कुछ देर देखने के बाद वो डेरी से बीएड के नजदीक आ कर शालिनी जी को बिलारी है तभी उन्हें हल्का सा झटका लगता है

रेखा जी .....आई माआ

शालिनी जी .....क्या हुआ दीदी आपको आप इस तरह छिलाई क्यों

जूलिया .....क्या हुआ बड़ी मम्मी

रेखा जी ..... शालिनी तुम्हे टच किया तो मुझे करंट लगा इस लिया चिलायी पैर ये हुआ कैसे आवर तुम ये क्या कर रही थी तुम कोई बची थोड़ी हो हद होती है बचपने की

शालिनी जी ........ उदार आइये आपके लादले बेटे ने कांड कर दिया है

रेखा जी .....क्या किया मेरे बेटे ने देख तू उस दिन भी उसे चांटा मर दिया था बिना वजह हे

शालिनी जी ......पहले ीदार आइये दीदी तुम लेटो वापिस

जूलिया ......... रहने दीजिये न मम्मी

शालिनी जी ...... कहा न मैंने

शालिनी जी रेखा को अपने जगह लेट वैसा हे करने को कहती है

रेखा जी को पहले तो कुछ भी मह्सुश नहीं हुआ पैर कुछ देर बाद उन्हें कुछ हलकी हलकी बचे की हसने जैसे आवाज सुनाई दे तो उन्हें बड़ा ताजुब हुआ

रेखा ......ये क्या शालिनी मुझे किसी छोटे बचे की हसने जैसे आवाज क्यों सुनाई दे रही है जूलिया के पेट से

शालिनी जी .......क्युकी आपके लादले ने सदी से पहले हे मेरे बेटी को घरबदरं करवा दिया

रेखा जी ......क्याआआ जूलिया प्रेग्नेंट है मैं दादी बनने वाली हूँ मैं अभी सबको बताती हूँ

शालिनी जी ....... संत संत दीदी ज्यादा खुश न हो आपके लादले ने किसी को भी बाटने से मना किया है वो तो मुझे पता चल गया तो आपको भी बता दिया वर्ण आप मुझे हे नजर होती

रेखा जी .......आज से तुम कोई काम नहीं करोगी जुली आवर तुम इसका ख्याल रखना शालिनी

जूलिया .....बड़ी मम्मी मेरी बात सुनिए पहले आप

फिर जुली घरबबंदन के विषय में सब बताती है जो किरण ने उसे बताया था

रेखा जी ........ ठीक है फिर भी तुम कोई काम नहीं करोगी मैं आज हे उन्हें बोल कर काम करने के लिया कामवाली रखवाती हूँ तुम मेरे साथ या शालिनी मेनका दीदी के साथ रहोगी ज्यादा समय बचो के साथ मस्ती में चौथ लग सकती है बचे को

शालिनी जी ......सुन लिया अपनी बड़ी मम्मी की बात अब वही करना जो कहा है

रेखा जी .....तू लेट जा मुझे फर से उसकी हंसी सुन्नी है

जूलिया बेचारी वंश चुकी थी रेखा जी फिर से आँखे बंद कर कान लगा देती है

तभी उसे फिर वही हंशी की आवाज सुनाई देती है पैर इस बार कुछ आवर भी सबद थे

रेखा जी .....शालिनी इसने मुझे बड़ी माँ कहा

शालिनी जी .....क्या इसने बड़ी माँ कहा आवर मुझे दादी ये क्या बात हुई भला इसने तो एक हे पल में मुझे बूढी कर दी

दिल्ली ........

सूर्य किरण राधिका रोहन दीप्ती सुनिधि जैसे हे कार से उतरे सामने हे सूर्यकांत सर आवर आंटी खड़े थे

सूर्य किरण आगे भाड़ दोनों के पेअर छठे है

अंकल आंटी दोनों को आशीर्वाद आवर प्यार देते है

रोहन राधिका भी एक साथ जोड़े से आशीर्वाद लेते है

आंटी ....... गम आये बचो कोई परेशानी तो न हुई न वह

राधिका .....जी नहीं मम्मी कोई परेशानी नहीं हुई हमें

सूर्यकांत सर .......अरे बेगम बचे इतनी लम्भी फ्लाइट से आये है इन्हे अंदर तो ले चलो

आंटी जी ......एक मिनियत तुम लोग यही रुको मैं आरती का थल ले कर आती हूँ

चारो को वही मैं गेट पे खड़ा कर पूजा घर से पूजा थल ले कर आती है

राधिका जी ......माँ पहले देवर जी आवर स्वीटी का तिलक करो एक तो िनत की नयी नयी सदी हुई है आवर पहली बार दोनों सदी के बाद घर में एक साथ आ रहे है

सूर्यकांत सर .....बिलकुल ठीक कहा बेटी राधिका आप भी अपने छोटे बेटे आवर बहु का तिलक कर ग्रहपरवेश कराओ भाई

आंटी जी हस्ते हुए दोनों का तिलक कर उन्हें अंदर लेती है फिर राधिका आवर रोहन का भी तिलक करती है

सुनिधि ....... वो सब कहा गई आंटी

आंटी ......बेटी वो तीनो सूर्य वाले घर में है साफ सफाई कर रही होंगी जब से चाबी मिली है सभी वही तो रहती है दिन रात पार्टी मौज मस्ती करती रहती है

रोहन ......माँ बछिया है इस उम्र में नहीं करेंगी तो कब करेंगी आवर फिर यहाँ सब सेफे भी तो है बाकियो की तरह बहार फन नाईट क्लब उन सब से तो

आंटी जी ........ समझदार हो गया है लगता है भाई का असर हो रहा है खुद रात रात भर बहार घूमता रहता था तब नहीं सोचा था तूने चलो बीटा जा कर फ्रेश हो जाओ तब तक वो भी आती होंगी

सोनिया ......आती नहीं होंगी आंटी हम तो आ भी गई है hello स्वीटी

किरण .....hi सोनिया दी मैंने सुना आजकल आप लोग कुछ ज्यादा हे पार्टी करते हो एक दो मेंबर्स की जगह है क्या आपके क्लब में हहहहए

सोनिया .......... हमारे क्लब में फीमेल केंडिडेट हे ज्वाइन कर सकता है मेल नॉट अल्लोव

सूर्य ......घर का मालिक भी नहीं आ सकता क्या

सोफिया ......वो तो अब स्वीटी है न क्यों स्वीटी

सूर्यकांत जी ...... बीटा यहाँ इस मामले में कोई सपोर्ट नहीं करेगा सब वीमेन पावर का कमल है

सूर्य ....... कोई बात नहीं अंकल कभी न कभी तो ुण्ठ पहाड़ के निचे आएगा hi

रोहन ....... पैर भाई यहाँ ुण्ठ नहीं सब शेरनिया है .....

आगे कुछ बोलता उस से पहले हे राधिका जी ने अपने हील वाले पेअर रोहन के पेअर पे दे मारा

बेचारा एक पेअर पे नाचने लगा

रोहन .......सॉरी सॉरी गलती हो गई

सूर्यकांत जी ......तू गधा का गधा हे रहेगा कहा क्या बोलना चाइये ये भी पता नहीं

सूर्य ........ अंकल हैश ख़ुशी के माहौल में कभी कभी मुँह से निकल जाता है जैसे दोस्तों के बिच अच्छी मजाक होता है बस इन्होने ठीक से माहौल को सामना नहीं

सूर्यकांत जी ......रात को पार्टी है तो सब लोग तयारी करलो

सुनिधि ......पैर साम को तो स्वीटी आवर सूर्य को घर ले जाना डिनर पे

सूर्यकांत जी ..... तो क्या हुआ डिनर हे करना है सबके साथ में तो वो यहाँ कर लेंगे बेटी तुम्हारे माँ डैड को मैंने कॉल कर दिया है साम की पार्टी के लिया

दीप्ती ......ok मैं चलती हूँ मेरी ड्यूटी है सैम को मिलती हूँ आवर भाबी जरा आप आना मेरे साथ

सूर्य .....अंकल अगर कोई प्रॉब्लम न हो तो मैं उस घर जॉन

आंटी जी ......नहीं साम को पार्टी ुशी घर में है तबहिबवाहा जायेंगे तब तक कोई नहीं जायेगा वह जिसको जो लाना है अभी ले आये

सूर्य किरण को एक रूम मीका जहा दोनों फ्रेश हो निचे आ गए कुछ देर सभी से वह की बाते करने के बाद सबके मिल कर खाना खाया

सूर्य किरण को ले कर रूम में आ आराम करने लगता है

ीदार बहार एक रूम में चारो गर्ल्स की अलग हे खिचड़ी पाक रही थी रात की पार्टी को ले कर के

वही सूर्य के घर में खुद आंटी जी अपनी देख देख में सब तयारी कर रही थी

सूर्यकांत सर आर्मी हेडक्वार्टर्स निकल गए थे साम की जल्दी लौट कर आने का बोल कर आवर कुछ अपने दोस्तों को पार्टी में इन्विते करने

सक्तिपुर ...........

अजय को आज खेत में जाते हुए 4 दिन हो चुके थे

दिन भर खेत में मजदूरों के साथ काम करता आवर उनपे नजर रखता सुरु के दो दिन तो अजय की हालत बहुत बुरी रही जैसे हे खेत से घर लौट कर आराम करता उसका पूरा सरीर दर्द तकन से चूर चूर होने लगता था

जहा पहले अजय को a.c. में भी नींद नहीं आती थी अब बहार की खुली हवा में भी उस खटिया पे उसे सुकून की नींद आती थी

न कही बहार जाना आवारा गुमनाम फिर न बस घर से खेत. खेत से घर यही दिन चर्या रही अजय की जिसे देख गीता ठाकुर का विश्वाश आवर भाड़ गया अपने फैसले पे वही रुक्मणि जी भी खुश थी अजय के बदलाव से

जहा पहले अजय नोकरो से बतमीज़ी से पेश आता था जैसे वो कोई कीड़े मकोड़े हो वही अब सभी से सामान पुराण पेश आता था

गांव में भी जो भी मुक्त उसे ेजात से पेश आता जिसने देख गांव वाले भी अजय से प्रेम से बात करते भले पहले कोई भी हवेली की लोगो की बात नहीं टालता था पैर उनकी आँखों में हवेली में रहने वाले लोगो के लिया प्रेम नहीं था

अजय साम को दल मिटटी में भर घर लौट रहा था की चौपाल पे कुछ युवा आवर कुछ बुजुर्ग बैठे हुए थे

अजय ....... उन्हें हाथ जोड़ परनाम करता है

उनमे से एक बुजुर्ग अपने हाथ के इसारे से पास बैठने का इशारा करता है

अजय भी चुप चाप वह जा कर बेथ जाता है

बुजुर्ग ...... डेब्यू ( देवेंद्र ) बीटा जा थोड़ा पानी ले आ ठन्डे घड़े का

उन युवाओ में से एक लड़का उठ कर पास में रखे गर्मी में ठन्डे पानी के मायके से पानी का लोटा भर कर उन बुजुर्ग को देता है

बुजुर्ग उस पानी में कुछ मिला कर अजय को देता है

अजय ......ये क्या है बाबा आवर आप मुझे क्यों दे रहे है

बुजुर्ग....... गैब्रो न बीटा ये कोई गलत चीज़ या कोई नशा नहीं है तुम कुछ दिन से बहुत म्हणत कर रहे हो मैं तुम्हे पिछले 4 दिन से लगातार देख रहा हूँ आज पता चला की तुम खेतो में काम करने जाते हो इसमें कोई आराम की बात नहीं बेटे हर इंसान को म्हणत करनी चाइये ये जो मैंने पानी में मिलाया है इस ये तुम्हारे सरीर को दूप से बचने में सहायक होगी आवर साथ थकावट भी काम होगी जनता हूँ तुमने अपनी जिंदगी में पहले इतनी म्हणत नहीं की है पहले मुझे भी लगा की तुम जल्दी हे हर मन जाओगे बस देखना था की कब तक म्हणत के रस्ते पे चलते हो पैर आज दूप में काम करते देख तुम्हारी मदद करने से खुद को रोक नहीं पाया हर साम को लौट ते वक़्त मुझसे से ले जाना यही मिलता हूँ इस वक़्त

अजय. .......धन्यवाद बाबा आपका मैंने सुना है था की आपको जड़ी बूटियों का बहुत ज्ञान है आवर साथ हे कुस्ती का भी क्या आप मुझे शिखाएँगे अभी नहीं जब मैं खेत के कामो से फ्री हो जाऊंगा तब .

बुजुर्ग. ....... पहले म्हणत से अपने सरीर को त्यार करो बाकि मई कल हवेली आता हूँ ठकुराइन से मिलने फिर सिखाऊंगा कुस्ती

अब जाओ आवर कुछ देर आराम कर गरम पानी से नहाना सरीर से सारा दर्द गायब हो जायेगा आवर अच्छी नींद आएगी ताकि कल फिर उतनी म्हणत कर सको तुम में बदलाव देख कर ाचा लगा बीटा फिर से उन गलत रास्तो पे मत निकल जाना जहा केवल अँधेरा फरेबी दुश्मनी है

अजय ....... जी बाबा आपसे मिल कर ाचा लगा बाबा चलता हूँ

जाते जाते अजय ने वो काम किया जो सायद हवेली में रहने वालो में से किसी ने किया होगा

अजय जाते हुए उन बुजुर्ग आवर उनके साथ 2,4 आवर बुजुर्ग लोगो के पेअर छू कर गया दूर खड़ा राणा ये देख मुस्कुराये बिना न रह सका

राणा. ...... अच्छा बदलाव है चलो कोई तो ऐसा निकला जो इस हवेली पे लगे बदनुमा दाग मिटने की कोशिश कर रहा है देखना ये है की कितना सफल होता है इसमें

अजय हवेली पहुंचने के बाद गीता ठाकुर को खेत की विस्तृत जानकारी देता है की क्या क्या काम हुआ आवर कितने मजदुर थे किस चीज़ की जरुरत बताओ आदि बता कर अजय पीछे नोकरो की तरफ निकल गया आजकल वही तो टिकना था उसका

कुछ देर बाद राणा हवेली पंहुचा आवर गीता ठाकुर रुक्मणि को सब कह सुनाया जिसने सुन रुक्मणि के साथ साथ गीता ठाकुर भी बहुत खुश हुई

गीता ठाकुर ........ये तो बहुत अच्छी खबर सुनाई राणा मैं भी चाहती सक्तिपुर केबड़े बुजुर्ग लोगो के साथ अजय उनकी सांगत में कुछ समय रहे ताकि फिर वो उन गलत रास्तो की तरफ देखे भी न एक काम करो मैं उन काका जी से मिलना चाहती हूँ जिनके साथ अजय रुका था

राणा ......वो कल आपसे मिलने हवेली आएंगे उन्होंने खुद कहा जब अजय ने कुस्ती सीखने के लिया कहा

गीता ठाकुर ....... ठीक पैर ये कुस्ती क्यों सीखना चाहता है

राणा ......मेरे ख्याल से उसे सिखने दीजिये अभी 4,6 महीने जितना ये व्यस्त रहेगा उतना वो गलत रास्तो से दूर रहेगा बाकि आपको जो ठीक लगे

रुक्मणि जी ......दीदी राणा जी ठीक कह रहे है उसे अपने मन की करने दीजिये जब तक वो कुछ भी गलत न करे या रास्ता न भटके इन सब में बिजी रहेगा तो उसके दिमाग में वो सब पुराने ख्याल नहीं आएंगे

गीता ठाकुर .......ठीक हाउ राणा पैर तब तक तुम्हे उसपे नजर रखनी होगी

राणा ....जी अब मैं चलता हुमूर खेत में कुछ सामान चैया था जो मैं कल भिजवा दूंगा

राणा वह से निकल जाता है वही पीछे गीता आवर रुक्मणि दोनों काफी देर तक अजय को ले कर बात करती रही ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ......................
 
स्फोरम से जुड़े सभी मुस्लिम भाइयो को खुशियों भरी

🌹🌹🌹 ईद मुबारक 🌹🌹🌹
 
अपडेट 217

राणा ......मेरे ख्याल से उसे सिखने दीजिये अभी 4,6 महीने जितना ये व्यस्त रहेगा उतना वो गलत रास्तो से दूर रहेगा बाकि आपको जो ठीक लगे

रुक्मणि जी ......दीदी राणा जी ठीक कह रहे है उसे अपने मन की करने दीजिये जब तक वो कुछ भी गलत न करे या रास्ता न भटके इन सब में बिजी रहेगा तो उसके दिमाग में वो सब पुराने ख्याल नहीं आएंगे

गीता ठाकुर .......ठीक है राणा पैर तब तक तुम्हे उसपे नजर रखनी होगी

राणा ....जी अब मैं चलता हुमूर खेत में कुछ सामान चैया था जो मैं कल भिजवा दूंगा

राणा वह से निकल जाता है वही पीछे गीता आवर रुक्मणि दोनों काफी देर तक अजय को ले कर बात करती रही ............

अब आगे ...........

दिल्ली ....... सुनिधि के माँ डैड आवर एक छोटा भाई पार्टी में आ चुके थे आवर अंकल के कुछ दोस्त भी जिन्हे इन्विते किया था सूर्यकांत अंकल ने इस पार्टी में जो की अंकल के फ्रेंड्स भी थे आवर आर्मी से भी

कुछ हे देर बाद सूर्य आवर किरण को लिया सोफिया आवर राधिका भाबी जी पार्टी में पहुंची

सूर्य .......क्या बात है भाबी घर का तो पूरा नक्शा हे बदला हुआ है

राधिका ......ये सब माँ जी ने खुद सामने रह कर सब कराया है

सूर्यकांत सर ......बर्खुदार खुद की पार्टी में हे लेट पहुंचने रहे हो

सूर्य .....इसमें मेरी कोई गलती नहीं अंकल ये सब आपकी दोनी बहुओ का किया धरा है साथ में इन खूबसूरत मोहतरमा का इन्होने हे मुझे फिर से त्यार किया वर्ण मैं तो कब का आ चूका होता

आंटी जी .......कुछ गलत तो नहीं किया दोनों की जोशी बहुत अच्छी लग रही है आवर इसके साथ में तुम दोनों भी बहुत पायरी लग रही हो

सूर्यकांत सर ....... इनहींहै देख कर लगता है की जैसे एक राजा अपनी तीन रानियों के साथ सभा में पधार रहा हो

सूर्य ....... क्या अंकल कुछ भी राज पात गए अब बस नाम बचे है उनके मैं ठाकुर हे भला

आंटी जी आप इन्हें मेहमानो से मिलाओ मैं बाकि सब तयारी देखता हूँ

सूर्यकांत सर .......चल बेटे तुम भी आओ बेटी अपने सभी दोस्तों से तुम दोनों को इंट्रो करवाता हूँ

सूर्यकांत सर दोनों को ले एक तरफ जहा म्यूजिक चल रहा था उस तरफ चल दिए

सूर्यकांत सर वह से मिक ले सभी से मुखातिब होते है

सूर्यकांत सर ....... Hello लेडीज एंड जेंटलमैन अटेंशन प्लेसेस आप सभी मेरे इनविटेशन पे यहाँ आये उसके लिया सभी को धन्यवाद आप सभी को मैंने पार्टी में इन्विते किया बूत इस पार्टी का कारन नहीं बताया तो कारन ये है की ये है मेरा बीटा सूर्य ठाकुर आवर ये है मेरी छोटी बहु किरण सूर्य ठाकुर दोनों की अभी कुछ दिन पहले हे सदी हुई है इनके यहाँ पहली बार आने आवर सदी की ख़ुशी में ये छोटी से पार्टी राखी

आंटी जी ...... चलो बचो चल कर केक कट कर पार्टी सुरु करो

सूर्यकांत सर ...... इतनी भी क्या जल्दी है अभी सर नहीं आये है कुछ आवर इन्तजार कर लो

आंटी जी किरण को अपने साथ ले गई आवर महिलाओ आवर लड़कियों से उसका परिचय अपनी बेटी के रूप में देने लगी ख़ुशी ख़ुशी सबसे परिचय कराया जैसे किरण उनकी कोख से जन्मो बेटी हो

सूर्य .....अंकल अब कोण आना बाकि है

सूर्यकांत सर ....... आर्मी चीफ भी आ रहे है पहले तो मन कर रहे थे फिर जब उन्हें तुम्हारी सदी के बारे में पता चला तो वो भी आने को त्यार हो गए पैर लगता है आ नहीं पाएंगे

सूर्य ...... आ गए वो देखिये

सूर्यकांत सर ...... ओह फॅमिली के साथ आये है तभी इतना वक़त लगा दिया चल उनसे मिलने के बाद केक कट करते है

सूर्यकांत सर आवर सूर्य उनकी आवर भाड़ गए

सूर्य आगे भाड़ आर्मी चीफ के पेअर चउथा है तो वो भी सनेह वश सूर्य को गले लगा लेते है

आर्मी चीफ ....... बेटे इतनी क्या जल्दी थी सदी की अभी तो काफी वक़्त था

सूर्य ........ क्या करता सर सब ने मिल कर करवा दी सदी नमस्ते आंटी जी

आंटी जी .......जीते रहो बीटा तुम कुछ खाश हो क्या बीटा

सूर्य ....... नहीं तो आंटी जी आपको ऐसा क्यों लगा

आंटी जी ....... क्युकी ये फॅमिली को बहुत काम मोको पे पार्टी में शामिल होने देते है पैर तुम्हारे इनविटेशन पे फ़ौरन हमें फ़ोन कर साम की पार्टी के लिया कहा

सूर्यकांत सर ...... सच कहा मेम आपने मेरा बीटा कुछ तो खाश है क्यों सर

आर्मी चीफ ....... यहाँ मैं कोई आर्मी चीफ बन कर नहीं आया हूँ जो मेम आवर सर कह रहे हो

आंटी जी ........ जी भाई साहब आप भाबी जी कह सकते है ये है मेरा बड़ा बीटा अशोक आवर ये है इसकी वाइफ समय आवर ये है विक्रांत छोटा बीटा आवर ये मेरी लाड़ली बेटी निधि

( यहाँ इन आंटी जी को n.mom कहूंगा आवर सूर्यकांत सर की वाइफ को d.mom ताकि कोई कन्फ्यूज्ड न हो )

d.mom ........ क्या आपके वो मेहमान आये भी की नहीं काफी टाइम हो गया है

सूर्यकांत सर ...... चलिए भाई साहब पार्टी सुरु करते है बस आपका हे वेट हो रहा था

d.mom सूर्य आवर किरण को साथ ले बहार लोने में ले आती है जहा एक छोटा स्टेज त्यार किया था

दो वेटर वह के मेज सजा रागे थे वही पे एक बड़ा सा केक ला कर रखा जिसपे लिखा था ........ विश यू हैप्पी मैरिड लाइफ सूर्य +किरण .....

किरण आवर सूर्य दोनों मिल कर केक कट करते है दोनों एक दूसरे को खिला कर वह मौजूद 4,5 छोटे बचे आवर बच्चियों को सबसे पहले केक खिलते है

सूर्य केक का टुकड़ा उठा राधिका को खिलता है फिर दीप्ती को जो शरमाते हुए सूर्य की उँगलियाँ भी कुश गई

सूर्य ....... तुम वह क्यों कड़ी हो सुनिधि ीदार आओ सॉरी आंटी बुरा न मन्ना आपकी बेटी मेरी दोस्त भी है

सुनिधि माँ ...... जानती हूँ बीटा आवर कोई बुरा नहीं मन रहा है जाओ बेटी

सुनिधि ख़ुशी ख़ुशी सूर्य के हाथ से केक कहती है ीदार बाकि लड़किया भी देख रही की उन्हें भी सूर्य खिलता है की नहीं

किरण ....... दीदी आप तीनो को अलग से थोड़े न कहना पड़ेगा मैं किसी को नहीं खिलने वाली इन नन्हे मस्तीखोरो के अलावा आप जानो आवर आपके दोस्त काने जयतर बड़े पार्टी का आनंद लेने लगे थे ीदार बस ये हम उम्र लड़के लड़किया हे थे जो मस्ती कर रहे थे

माया आगे भाड़ केक ले सूर्य के दोनों गलो पे लगा देती भाई सूर्य भी वैसा हे करता है आवर केक खिला देता है सोनिया ने कोई शरारत नहीं की

किरण एक केक का टुकड़ा ले सोफिया को खिलाती है

ऐसा करते देख दीप्ती सोनिया सुनिधि माया निधि पाछो किरण के पुरे चेहरे पे केक मसल देती है

राधिका ......ये आप सब ने क्या किया पूरा मेकउप ख़राब कर दिया

सूर्य ......भाबी करने दीजिये बस मस्ती कर रही है वैसे भी मेरी बीबी को मेकउप की जरुरत नहीं वो नेचुरल ब्यूटी क्वीन है बस आँखों का ख्याल रखना

सोनिया ....... क्या हम न्यूरल ब्यूटी नहीं लगती आपको

सूर्य ...... किसने कहा आप नहीं हो पैर यहाँ स्वीटी को छोड़ 2 हे न्यूट्रल ब्यूटी है जिन्होंने कोई मेकउप नहीं क्या है वो है सोफी आवर निधि जी यकीं न हो तो खुद से पूछ को इनसे

निधि .......आपको कैसे पता की मुझे मेकउप करना पसंद नहीं मेरी स्किन सेंसिटिव है

राधिका ........ देवर जी नजरे बहुत तेज है निधि सामने वाले की आँखों में देख दिल दिमाग को पढ़ लेते है

सोफिया ......स्वीटी चलिए चेहरा साफ कर कर लीजिये

सूर्य .....मैं भी चलता हुँहुँ मेरा भी चेहरा पूरा केक से ख़राब कर दिया है

राधिका ......आज आज के लिया थे अपनी बीबी को छोड़ दीजिये देवर जी

सूर्य .....छोड़ नहीं सकता हूँ भाबी जी बस कुछ देर आप लोगो के बिच रख सकता हूँ बस इतने आप चलिए आवर ये रोहन भाई कहा है दिखाई नहीं दिए साम से

राधिका ......सॉरी वो आपको बिताना भूल गई वो अपनी ड्यूटी पे जा चुके है

सूर्य ....ये क्या बात हुई बिना मिले हे चले गए वो भी इतनी जल्दी

राधिका ......उनका जाना जरुरी था पापा जी ने बात की तब उन्होंने हे जाने को कहा था

डेरी डेरी सभी मेहमान घर की आवर निकलने लगे थे करीबन 12 बजते बजते सब लौट गए पार्टी अभी भी सुरु थी पैर अब पार्टी घर के अंदर चल रही थी जहा दीप्ती राधिका सोफिया सानिया माया सुनिधि निधि समय किरण सूर्य हे थे

सूर्यकांत सर d.mom अपने वाले घर जा चुके थे सुनिधि के mom.dad आवर भाई भी घर लौट गए थे

सूर्य ....... आप लोग एन्जॉय कीजिये मैं छठ पे जा राग हूँ सोने के लिया ताकि आप सब अपनी गर्ल्स पार्टी एन्जॉय कर सको बूत ज्यादा ड्रिंक न करना आवर म्यूजिक भी नार्मल हे रखना

राधिका जी ....... अभी कहा चले देवर जी आपकी पार्टी से आप हे गायब हो रहे हो

सूर्य ...... इन सब शेरनियों के बिच मैं क्या करूंगा भाई शेर कितना भी ताकतवर हो शेरनी के सामने उसकी नहीं चलती यहाँ तो इतनी साडी है

समय ....... पैर आपकी तो एक हे है न देवर जी

सूर्य ........ है भाबी जी पैर ये ग्रुप तो शेरनियों का हे है न जिसने खुद ऊपरवाला बना कर नहीं समाज पाया फिर मेरी एक एकेले की क्या बिसात

किरण ....... कुंवर जी आप जा कर रेस्ट कीजिये हम लोग भी एन्जॉय करते है

सूर्य ......ok bye एवरीवन ज्यादा न पीना तुम

राधिका ......या पिने के लिया कुछ भी तो नहीं है

सूर्य ........माया आवर दीप्ती जी ने बताया नहीं क्या स्टोर रूम में कितना स्टॉक रखा है

सूर्य रूम से एक गड्ढा आवर तकिया ले ऊपर चल दिया

राधिका ......दीप्ती दी क्या ये सच है

दीप्ती .....है राधिका पैर हमने तो सब छुपा कर लॉक किया था रूम को उन्हें कैसे पता चला स्वीटी

किरण ....... मुझे क्या पता दीदी कुंवर जी का वही जाने वैसे उन्होंने मना तो नहीं किया है

राधिका ......माया चलो फिर अपनी पार्टी सुरु करते है

सभी डांस करते हुए मज़े से बेयर वोदका आदि का मज़ा लेती रही रात करीब तीन बजे जब नशे ने सबको रुकने पे विवश कर दिया तब जा कर जहा जगह मिली ुशी रूम में जा कर लेट गए

राधिका सब चेक कर जा पहुंची ऊपर जहा सूर्य आराम से सोया हुआ था

राधिका सीधा सूर्य के शार्ट को निचे खिश्का उस सोये हुए नाग के फैन को थम सहलाते हुए मुँह में भर लेती है

सूर्य ......आपको यहाँ नहीं आना चाइये था इस वक़्त निचे इतने लोग है

राधिका .......बस एक बार संत कर दीजिये मुझे

राधिका जल्दी से अपना लाऊंगा उठा पेंटी निकल उस गीले लिंग को अपनी योनि में भर उछाल ने लगती है

कुछ देर बाद सूर्य उसे पालक कर उसे तरह ऊपर आ चुदाई सुरु कर देता है ीदार सीढ़ियों से सुनिधि आवर दीप्ती दोनों इस दृष्टि को देख रही थी

सुनिधि ....... देखा दीदी मैंने कहा था की आज भाबी कुछ जरूर करेगी

दीप्ती ......तुम्हे पता है न राधिका ये सब क्यों कर रही है

सुनिधि ......उनका समाज में आता है पैर आप क्यों इनके पीछे है

दीप्ती ....... क्या मतलब सुनिधि

सुनिधि ......दीदी मैं जानती हूँ आप भाबी को इनके निचे आपने हे पहुंचाया है मैंने हवेली में सब सुना था आपका प्लान पैर चिंता न कीजिये मैंने न अभी तक किसी को बताया है आवर न आगे कुछ बताउंगी

दीप्ती ......मतलब तुम भी वहीँ चाहती हो सुनिधि ......हम दोनों की मंजिल एक हे है दीदी जिंदगी भर इनका का साथ तो मुश्किल है पैर कुछ लम्हे तो ......

सुनिधि ........वो देखो कैसे राधिका भाबी की साड़ी कर रहे है

सूर्य ीदार राधिका के लहंगे को कमर से ऊपर कर पीछे से सखे मरते हुए राधिका के कण में कुछ कह भी रहा था एक पल को तो राधिका के माथे पे सिकन उबरी पैर फिर उसके होंटो पे मुस्कान दौड़ गई

ीदार दोनों अपने शार्ट आवर निघ्त्य में सामने के कमुख दृश्य को देख खुद के अंगो को मसलने से रोक नहीं पायी जब सूर्य राधिका की गांड उठाये अपना वीर्य भरते हुए बिखर भरी तब दोनों जल्दी से निचे की तरफ लपकी

सूर्य ....... मैंने कहा था न आपको की साधन रहना

राधिका .......उम्म्म्मममः अब तो आप दो आवर कुंवारी छूट खोलने की तयारी करो वैसे आपको पता कैसे चला की रहा दीप्ती दीदी आवर सुनिधि हमें देख रहे है

सूर्य ......क्यों की मेरी आँखे आवर कान बहुत तेज है वो दिखी तो नहीं पैर उनकी बात जरूर सुन ली थी आवर सुनिधि आपके प्लान को हवेली में हे सुन चुकी है

राधिका ........ अब देखिये कैसे ये दोनों आपके निचे आती है पैर आराम से करना

सूर्य .......... आपको कुछ करने की जरुरत नहीं बस संत रहना जैसे आपको कुछ पता हे न हो आवर एक बात आपके घरब में बचा ठहर चूका है जल्दी हे सूर्यगढ़ आ कर कुल देवी के दर्शन कर लेना

राधिका .....क्या सच में ुम्मम्हा ुम्मम्हा मैं बता नहीं सकती कितनी खुश हूँ मई

सूर्य ......अपने आंसू पांच लीजिये 9 महीने बाद आप एक खूबसूरत प्यारे से बेटे को जनम देंगी जो आपको माँ कहेगा

राधिका .....आवर आपको पापा भले हे छोटे पापा क्यों न कहे पैर हमारा बीटा हमेशा अपने पापा को पापा कहेगा अब देखिये कैसे मैं माँ सा को बोल कर सूर्यगढ़ आती हूँ इसे भी तो अपने असली खंडन परिवार से मिलना है

सूर्य ......ये कुछ ज्यादा हे आवर जल्दी नहीं हो रहा एक गलती से सब बर्बाद हो जायेगा सन्ति से सोच समाज कर करना जो भी करो आवर अब निचे जाओ इस से पहले कोई आवर आये

राधिका .....उम्मम्मम्हा थैंक यू कुंवर जी इस ख़ुशी के लिया

राधिका सावधानी से निचे चल देती है आवर ीदार सूर्य भी फिर से सो गया

सुबह करीब 5 बजे सूर्य की अचानक से चीख के साथ आँखे खुल जाती है सभी तो नशे में चूर हो सोये थे पैर किरण आवर सोफिया की आँखे इस चीख से खुल गई किरण अगले हे पल सूर्य के सामने थे आवर ीदार सोफिया गब्रहत में तेजी से ऊपर की आवर भागी

किरण ......क्या हुआ कुंवर जी आप इस तरह चिकने क्यों कोई बुरा सपना देखा क्या

सूर्य ......वयोम सकती सामने आओ

अगले हे पल वयोम आवर सकती दोनों सूर्य के सामने खड़े थे अपने वास्तविक रूप में

सकती .......क्या हुआ भाई आपने इस वक़्त याद किया

सूर्य ...... घर की सुरक्षा भद्दा दो वयोम आवर तुम सकती परीलोक से कुछ योद्धाओ को बुलाओ जो परिवार के हर एक सदस्य के साथ रहे अदृश्य रूप में आवर उसकी सुरक्षा करे

सकती .....जी भाई अभी बुलाता हूँ

सकती कहने के साथ हे कुछ मंत्र बोलता सामने एक रौशनी का द्वार उत्पन्न हुआ आवर उसके से 10.12 इंगले निकल कर सामने आ जाते है

वयोम ......भाई मैंने घर के साथ साथ सूरतगढ़ के आवर सूरजगढ़ सक्तिपुर में भी कुछ जिन तैनात कर दिए है पैर आपने बताया नहीं इन सब की जरुरत क्या है

किरण ......कुंवर जी आखिर बात क्या है आवर इतनी सुरक्षा किस से हो रही है

सूर्य ....... पता नहीं स्वीटी वो कोण है जिस से खतरा है पैर माँ को लहूलुहान देखा मैंने अभी अभी

किरण ........ हम अभी घर चलते है

वयोम ......भाई कही ये खतरा वही तो नहीं है जिसके साथ विक्रम है

सूर्य ....पता नहीं मैं ज्यादा कुछ देख नहीं पाया पैर ये जो कोई भी है बहुत बुरी मौत मरेगा

सोफिया ........आप कोण हो

सोफिया की गाब्री हुई आवाज सुन सूर्य आवर किरण के साथ साथ वयोम आवर सकती का ध्यान भी उस आवर गया

किरण ......सोफी तुम यहाँ क्या कर रही हो

सोफिया ........ मैं इनकी चीख सुन ऊपर आई पैर यहाँ इतने एंगेल्स आवर ये जिन

वयोम .....भाई इन्होने सब देख लिया है

किरण ........ वयोम सोच समाज कर बोलै करो भूलो मत ये भी अपना हे परिवार है

सोफिया .....मुझे कुछ मत करना प्लेसेस

सूर्य ......यहाँ आओ सोफी कोई कुछ नहीं करेगा आवर तुम लोग जाओ आवर मैं भी जल्दी हे घर पंहुचा हूँ

सकती वयोम ..... जी भाई

वयोम सकती के साथ साथ बाकि ऐंगल्स भी गायब हो जाते है

सूर्य ......जबरन की जरुरत नहीं है सोफी आवर न हमसे तुम्हे कोई खतरा है

सोफिया ......क्या आप दोनों भी एंगेल हो

किरण ......हेहेहे है हम दोनों भी एंगेल है पैर तुम अभी भी इतना दर क्यों रही हो

सोफिया ......मैं सुना था एंजेल अच्छे होते है पैर जिन बुरे यहाँ तो दोनों हे थे

सूर्य ......लगता है ये बहुत कन्फ्यूज्ड है इसकी यादें मिटानी हे पड़ेगी (मज़ाक )

किरण ........ कोई जरुरत नहीं है ये सब करने की क्यों सोफी ये सब अपने तक हे रखना चलो चल कर सोते है

सोफिया ....... क्या मैं कुछ देर इनके साथ

किरण .....ठीक है पैर संभल कर ये जिन आवर एंगेल के होए वाले राजा है

किरण यहाँ से तो हस्ते हुए निकल गई पैर रूम जाते हे अपना क्लोन त्यार कर गायब हो गयी जिसका पता सूर्य को भी नहीं चला

सोफिया .....क्या स्वीटी सच कह रही थी की आप

सूर्य .....है ये सच है सोफी मैं कोई सदर्न इंसाने नहीं हूँ न हे स्वीटी है हमारे परिवार के अलावा तुम पहली हो जो इस सच को जान पाई हो की हमारे पास दिव्या सकतिया है हम सामान्य इंसान नहीं है

सोफिया ....... दीदी आपसे प्यार करती है

सूर्य .......क्याआ

सोफिया .......सोनिया दीदी आपसे प्यार करती है आपको पता है

सूर्य ......तुम क्या सुन्ना चाहती हो

सोफिया ....सच फिर चाहे वो कैसा भी हो

सूर्य .........प्यार तो तुम भी कर्त हो मुझसे फिर अपनी दीदी का जीकर क्यों किया

सोफिया की नजरे फ़ौरन जुख जाती है

सूर्य ....... मैं जनता हूँ तुम अपनी दीदी से बहुत प्यार करती हो सोफी पैर मैं उस से निनक नहीं कर सकता क्युकी पहले से हे मेरी बहुत से पत्निया निर्धारित है जिनसे विवाह होना है किरण बस सुरुहत है अंत कहा होगा मुझे भी नहीं पता

सोफिया .......क्या आप मुझसे प्यार करते है

सूर्य .......पहले मेरे साल का जबाब दो की तुम मुझसे प्यार करती हो की नहीं

सोफिया है में गर्दन हिला अपना सर जुखा लेती है सूर्य दो कदम आगे भाड़ उस मासूम से चेहरे को अपने हाथो में थम ऊपर करता है पैर सोफिया अपनी आँखे बंद किये हुए थी जिनमे इस चांदनी रात में हलकी नमी देखि जा सकती थी किनारो पे

सूर्य सोफिया की दोनों आँखों को चुम लेता है

सोफिया किसी मृगनयनी से उन खूबसूरत बुरी आँखों की पलके खिलती है तो सामने सूर्य का चेहरा देख उसकी आँखों में खो जाती है

सूर्य उन आँखों में खोया कब सोफिया के कम्पन करते होंटो पे अपने होंठ टिका देता है

सोफिया के होंटो से जैसे सूर्य ने उसकी आत्मा को हे चुम लिया हो

सोफिया सब कुछ भूल बैश सूर्य के आग़ोश में किसी मासूम से बची के जैसे समां गई

सूर्य भी उसे ुशी तरह लिया हुए अपने बिस्तर पे अपने सीने पे ले उसकी पीठ सहलाने लगा

दूर कही एक घने जंगल में जिसमे दिन में भी रात जैसा अँधेरा आवर सनता पास्ता रहता है

जहा इंसान जाने की सोच भी नहीं सकता वही पुराने सैमसन के बीचो बिच विक्रम किसी हवं के सामने बैठा था आवर उसमे खून की आहुति दे रहा था साथ हे कच्चे मांस की भी सामने बैठा शिष्य 1 जोर जोर से तामसिक मंत्र उच्चारण कर रहा था

उनसे कुछ दुरी पे एक बचे का निर्जीव सरीर वह साथ में कुछ जानवरो कंकाल जिसने देख साफ पता चल रहा था की कुछ देर पहले बचा आवर वो जानवर दोनों हे जीवित थे

सायद इन्हे के रकत आवर सरीर की आहुति उस तामसिक हवन में दी जा रही थी डेरे डेरी हवं की आग पर चाँद रूप ददन करती है

किन्तु जहा विक्रम खुश हो रहा था वही शिष्य 1 की मस्तिष्क पे चिंता की रेखाएं उभर आई जब उसकी नजर ख़तम होते रकत आवर मांस पे पादरी है

शिष्य.1 अच्छे से जनता था की अगर हवं बिच में रुका तो खंडित हो जायेगा आवर खंडित होते हे उसे इसका दंड भी मेलगा

शिष्य 1 .....विक्रम हवं सामग्री ख़तम हो रही है उस बचे का सरीर ले कर आओ अन्यथा पूजा खंडित हुई तो दंड भुगतना होगा

विक्रम तेजी से उस बचे के शव को उठा कर लता है

शिष्य 1 किसी हृद्या विहीन असुर सामान उस बचे के सरीर के टुकड़े टुकड़े कर हवं में डालने लगता है किन्तु रकत की अभी भी कमी थी

शिष्य 1 .....विक्रम हमारा हवं अंतिम पड़ाव पे है तुम्हे अपना रकत अर्पित करना होगा क्यों की हवं से जो सकती उत्पन्न होगी वो तुम्हे प्राप्त होगी हवन पूर्ण होते हे तुम्हारा सरीर पूर्ववत पहले से भी आदिल सकती साली होगा

विक्रम बिना कुछ सोचे समझे अपने हाथ की कलाई पे वॉर करता है एक भयानक चिक के साथ हे उसकी कलाई का हाथ अलग हो जाता है जो सीधा हवं में जा गिरा कटा हुआ हाथ रकत पत्र में दाल रकत पत्र में एकता करने लगा

कुछ 20 मिनट्स में हे विक्रम बेहोश हो गया

ीदार शिष्य 1 ने विक्रम के दूसरे हाथ के साथ भी वही किया जैसे हे हाथ हवं में गिरा उसके से काली वह लाल मिक्स ऊर्जा निकल विक्रम को घेर लेती है

देखते हे देखते विक्रम का सरीर पूरी तरह से उस काली वह लाल ऊर्जा से कवर हो जाता है

शिष्य 1 ......विक्रम हमारी पूजा पूर्ण हुई

अब तुम पूरी तरह असुर बन चुके हो मुखौटा केवल मनुष्य का है

साडी काली वह लाल ऊर्जा विक्रम के भीतर सम्माहित हो जाती है विक्रम का सरीर पुती तरह से बदल चूका था उसकी आँखे भी पूरी तरह से लाल थी जैसे आँखे न हो कर जलता हुआ अंगार हो

विक्रम ........हाहाहा अब देखता हूँ तुम इस असुर विक्रम ठाकुर से कैसे बचते हो सूर्य ठाकुर आ रहा हूँ बहुत जल्द तुम्हारी मौत बन के

शिष्य 1 .......अब इस आसुरी सकती को आवर आदिक भदानी है तो अपने हे रकत से जुडी कन्या का कौमार्य तुम्हे उसकी इच्छा से भोगा होगा विक्रम किन्तु ज्ञात रहे ये कन्या सवयं त्यार हो तुम अपनी सकती या बल से उसे भोग नहीं सकते अगर ऐसा हुआ तो तुमसे तुम्हारी सभी सकतिया चीन जाएगी आवर उस कन्या को प्राप्त हो जाएगी

विक्रम ....... मेरे हे में तो केवल मेरे दोनों भने है जो कुंवारी है आपने हे तो बताया था न की वो तस्वीर जूठी थी

शिष्य 1 ......हमने असत्य नहीं कहा किन्तु वो दोनों क्यों त्यार होंगी

विक्रम .......हाहाहाहा भले हे उनपे बल प्रयोग नहीं कर सकता किन्तु किसी आवर पे तो कर हे सकता हूँ जिसके जान बचने के लिया खुद मेरे सामने से अपना कौमार्य भोगने देंगी

शिष्य 1 विक्रम के साथ फार्महाउस लौट आता है सुबह होने हे वाली थी ..........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..................
 
अपडेट. 218

विक्रम ....... मेरे हे में तो केवल मेरे दोनों भने है जो कुंवारी है आपने हे तो बताया था न की वो तस्वीर जूठी थी

शिष्य 1 ......हमने असत्य नहीं कहा किन्तु वो दोनों क्यों त्यार होंगी

विक्रम .......हाहाहाहा भले हे उनपे बल प्रयोग नहीं कर सकता किन्तु किसी आवर पे तो कर हे सकता हूँ जिसके जान बचने के लिया खुद मेरे सामने से अपना कौमार्य भोगने देंगी

शिष्य 1 विक्रम के साथ फार्महाउस लौट आता है सुबह होने हे वाली थी ..........

अब आगे ...........

परीलोक ........ किरण परतविलोक दिल्ली से गायब हो सीधा परीलोक मंदिर पहुंची जहा गुरुदेव सनान आदि कार्य पूर्ण कर बस अभी परबु पूजा आराम करने हे वाले थे

किरण ....... परनामी गुरुदेव

गुरुदेव ........ साधा सौभाग्यवती भाव पुत्री सिगरा पुत्र प्राप्ति अस्तु

गुरुदेव ........ क्या बात है पुत्री तुम बहुत चिंतित आवर उग्र क्यों हो

किरण ....... क्या आपको कुछ भी पता नहीं गुरुदेव या फिर मुझसे हे जानना चाहते है आप

गुरुदेव किरण को गुस्से में देख समाज जाते है की बात कुछ बहुत महत्वपूर्ण है जिसने किरण के रूद्र क्रोध को जागृत कर दिया है

गुरुदेव ........ संत पुत्री किरण क्रोध किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता पुत्री आवर हम वास्तविकता में कुछ नहीं जानते है ( गुरुदेव रानी पारी को मानसिक संपर्क कर सिगरा मंदिर आने को कहते है )

किरण ....... बाबा शालिनी माँ पे कोई खतरा आने वाला है आवर आप जानते है उनकी कुंवर जी की जिंदगी में क्या अहमियत है

रानी पारी ....... पुत्री किरण चिंतित न हो शालिनी जी की कुछ नहीं होगा उन्हें कोई खतरा छू भी नहीं सकता है

किरण ......रानी माँ यहाँ आवर आप कैसे कह सकती उन्हें कोई खतरा नहीं

रानी पारी किरण को गले से लगा थोड़ा संत करती है

रानी पारी .......पहले पूजा करले पुत्री बात में बात करते है

गुरुदेव ....... है पुत्री किरण सब चिंता परबु पे छोड़ दो वो जो करेंगे अच्छा करेंगे तुम जा कर सरकार में सनान करो पुत्री तुम्हारा चित संत हो जायेगा

किरण चुपचाप मंदिर के पीछे बने सरकार की आवर निकल गयी

रानी पारी ........ क्या हुआ गुरुदेव क्या आप इस विषय में जानते है की शालिनी जी को किसी से खतरा है परन्तु कैसे आपके आदेश पे मैंने उन्हें एक पारी जितनी सकतिया सौंपी है फिर ऐसा कोण है जिस से उन्हें खतरा हो सकता है

गुरुदेव ....... आपने उन्हें परीलोक की सकतिया प्रदान की किन्तु पुत्री शालिनी ने उन्हें अभी तक जागृत नहीं किया है रानी पारी जब तक वो सबहिंसकतिया जागृत नहीं होती तब तक सरीरी बल के अलावा पुत्री शालिनी को कोई लाभ नहीं होगा उन सक्तियो का

रानी पारी ....... आपको हे कोई मार्ग निकलना होगा गुरुदेव जहा तक मैं जानती आवर आप भी की पुत्र सूर्य जितना प्रेम अपनी सकती पुत्री किरण से करता है उतना हे शालिनी जी से ऐसे में उन्हें कुछ हुआ तो पुत्र सूर्य तबाही मचा देगा इस बार उसके पास उसकी सभी भावी पत्नियों की सकती भी है चाहे फिर वो अंश रूप में हे क्यों न हो

गुरुदेव ........ हम जानते है आवर हमें भी चिंता है पर साथ हे विश्वास भी की पुत्र सूर्य कुछ गलत नहीं करेगा न कुछ गलत होने देगा पुत्री किरण ुशी बात से चिंतित है तो इस का एक हे अर्थ निकलता है पुत्र सूर्य भी इस विषय में जान चूका है आवर उसने सभी की सुरक्षा भाषा दी होगी

रानी पारी .......सायद इस लिया सकती ने कुछ विशेष योद्धाओ को पृथ्वीलोक आने का आदेश दिया

गुरुदेव. ........... सकती ने उचित किया जो समय रहते सभी की सुरक्षा सु निश्चित कर दी भले हे वो सब इस योग्य है की खुद की सुरक्षा कर सकती है

उदार किरण सरकार के पवित्र nirmal.swach जल में सनान कर कुछ देर जल सकरी में ध्यान लगा खुद को संत कर मंदिर लौट आई

गुरुदेव रानी पारी किरण तन्नो ने मिल परबु की पूजा पूर्ण भक्ति भाव से की

गुरुदेव ....... पुत्री जो घटनाये भिवष्य में पहले हे निर्धारित की जा चुकी है उन्हें बदल नहीं सकते न कोई हस्तक्षेप कर सकते है

किरण ........ आप जानते है न गुरुदेव जो दृश्य कुंवर जी ने देखा वो अगर सत्य हुआ तो आप या मैं भी उन्हें संभल नहीं पाएंगे कुंवर जी आवर हमारा सम्बन्ध जनम से है किन्तु शालिनी माँ आवर कुंवर जी का सम्बन्ध जनम से पूर्व का है जहा हम उनकी सकती है वही शालिनी माँ उनकी एक मात्रा कमजोरी है

गुरुदेव ....... पुत्री हम पहले से इस रहश्य को जानते है आवर जिस घटना का तुम उल्लेख कर रही हो हमने पहले हे उसका उपाय कर दिया है किन्तु हमसे एक चूक हुई है पुत्री

किरण ....... हम सामने नहीं गुरुदेव

रानी पारी .......पुत्री किरण हम बताते है तुम्हे .गुरुदेव इस खतरे के विषय मर बहुत पहले जब तुम सब यही परीलोक में थे तभी जान गए थे आवर गुरुदेव ने इसका उपाय भी हमें बताया था किन्तु हमसे चूक हुई

किरण .......कैसे चूक आवर कैसा उपाय रानी माँ

रानी पारी ......हमने बहन शालिनी जी को पारी की सकतिया पड़सँ की गुरुदेव के आदेश पे किन्तु हम उन्हें जागृत नहीं कर पाए शालिनी जी में सकतिया तो मौजूद है किन्तु जागृत न हो पाने के कारन वो सकतिया सुप्त स्वस्थ में जा चुकी है उन्हें या तो गुरुदेव या फिर हम हे जागृत कर सकते है

किरण .......फिर समय क्यों बर्बाद करना गुरुदेव आप mom.ki सकतिया जागृत क्यों नहीं करते

गुरुदेव ....... नहीं कर सकता पुत्री किरण अगर ऐसे हुआ तो सकतिया का विपरीत प्रभाव पुत्री शालिनी जी पे पड़ेगा अब केवल एक हे मार्ग

किरण ...... कैसा मार्ग गुरुदेव आप मुझे बताइये

गुरुदेव ........ केवल पुत्र सूर्य हे उन सकतिया को जागृत कर सकता है पुत्री क्युकी उन्ही सक्तियो के प्रभाव से पुत्र सूर्य की उन्मुख ( सेक्स ऊर्जा ) ऊर्जा पुत्री शालिनी में सम्माहित हुई है जिसके विषय में तुम भली भाटी जानती हो पुत्री इस लिया हे अभी तक हम उन सक्तियो को जागृत नहीं कर पाए जब हमें उन सक्तियो के सुप्त स्वस्थ में जाने का ज्ञान हुआ तब तक बहुत देर हो चुकी थी पुत्री हम परतविलोक आये भी थे उस रात्रि किन्तु तब तक पुत्र सूर्य योग के माध्यम से उस उन्मुख ( सेक्स ऊर्जा ) का त्याग कर चूका था आवर वह ऊर्जा पुत्री शालिनी में मौजूद ऊर्जा से आकर्षित हो उनके सम्मानित हो गई

किरण ......हमें माफ करे गुरुदेव ये सब हमारी वजह से हुआ है

गुरुदेव ......नहीं पुत्री इसमें किसी का दोष नहीं पुत्री समय की चल कोई नहीं समाज सकता है आवर पुत्री शालिनी की चिंता न करो उन्हें कुछ नहीं होगा

किरण ....... जी गुरुदेव धन्यवाद आपका जो आपने मेरी सभी चिंताए दूर कर मन को संत कर दिया

गुरुदेव ...... पुत्री किरण पुत्र सूर्य को तुम्हे रोकना होगा पुत्री शालिनी पे हमला होते समय ये तुम कैसे करती हो ये तुम्हे समझना होगा किन्तु उस समय पुत्र सूर्य या तुम में से कोई भी पुत्री शालिनी के साथ न हो

किरण ......ये आप क्या कह रहे है गुरुदेव जभी आप जानते है की कुंवर जी को सब पता है पूर्व से हे

गुरुदेव ...... हम वचन देते है पुत्री तुम्हे पुत्री शालिनी को एक हवा का झोखा भी नहीं छू पायेगा

रानी पारी ......किन्तु आप उन्हें रोक क्यों रहे है गुरुदेव

गुरुदेव ......क्यों की इस घटना से किसी आवर घटनाक्रम का अंत होना लिखा है हम सब जानते है की वो कोण है जो पुत्री शालिनी पे पर्वत करने वाला है आवर कहा पुत्री शालिनी पे पर्वत कर वो पुत्र सूर्य को छोटू पहचाना चाहता है ताकि वो पुत्र सूर्य का अंत कर सके किन्तु वो ये नहीं जनता की उसने अपने काल को निमंतरण दिया है हम

किरण .......कोण है गुरुदेव जो ऐसा दशांश कर रहा है

गुरुदेव .......हम इस से ज्यादा नहीं बता सकते है पुत्री किन्तु हमने वचन दिया है पुत्री शालिनी को या किसी आवर को कोई ाहित नहीं होगा पुत्र सूर्य को तुम्हे रोकना होगा बस उस पल तक जा ये घटना करम आराम से अंत न हो

किरण ....... किन्तु कैसे गुरुदेव आप जानते है हम जैसे हे उनके समीप जायेंगे वो सब जान जायेंगे आवर अगर हमने उन्हें इस घटना में हस्तक्षेप करने से साफ साफ रोका तो हम उनकी हे नजरो में गिर जायेंगे

गुरुदेव ....... ये को पुत्री जब हमारा संकेत प्राप्त हो तब इस रतन को पुत्र सूर्य के मस्तिष्क से चूहा देना जब तक उस घटना का अंत नहीं होगा पुत्र सूर्य मूर्छित रहेगा

किरण ........ ठीक है गुरुदेव हम जानते है हम उनके साथ गलत कर रहे है किन्तु कोई आवर मार्ग भी तो नहीं है

किरण वो रतन ले कर गुरुदेव आवर रानी पारी को परनामी कर वह से पृथ्वीलोक लौट गई

रानी पारी ...... गुरुदेव आपके आदेश ने एक पत्नी को अपने हे पति से चाल करने पे विवश कर दिया

गुरुदेव ...... आपको क्या लगता है हमें ऐसा मार्ग अपना कर ख़ुशी हो रही है महारानी जी आपने केवल हमारा आदेश सुना किन्तु उस के पीछे छुपी दर्द भरी सिसकियाँ नहीं सुन पायी इस भारमंद में हमें कोई सवार्धिक प्रिय है तो वो है पुत्री किरण आवर पुत्र सूर्य हमारी पुत्री रिद्धि का स्थान भी उनके बाद है ऐसे में पुत्री किरण को विवश कर हमें कैसे ख़ुशी मिल सकती है

ये समाज लीजिये ये एक गुरु शिष्य आवर पति पत्नी के रिश्ते की परीक्षा है इसमें कोण सफल होता है आवर कोण वाइटल ये केवल पुत्र सूर्य के विचारों पे निर्भर करता है

दिल्ली ........

सूर्य की जब 5 बजे रोज वाले समय पे आँखे खुली तो अपने निर्वस्त्र छोड़े सीने पे सुकून से सोई हुई सोफिया पे पादरी है जो किसी छोटी बची किले जैसे सूर्य के सीने को बकरे हुए सो रही थी जैसे सूर्य सूर्य न हो कर सोफी का कोई प्यारा खिलौना हो जिसने खुद से कभी अलग नहीं करती इस दर से की कही कोई उसे ले न जाये

सूर्य ......... तुमसे से भला कोई क्यों प्यार न करे तुम्हारी खूबसूरती तुम्हारी मासूमियत आवर ये पहाड़ी से दिल में उतर कर ठंडक देने वाली मुस्कान ुम्मम्हा

सूर्य डेरी से सोफिया को पलट कर अपने स्थान पे लिटा देता है एक बार सोफिया हलकी से कुनमुनाई तो सूर्य ने प्यार से उसके सर को थप की देना सुरु कर दिया जैसे छोटे बचे को सुला ने के लिया अक्सर माये करती है सोफया करवार बदल कर आराम से सो जाती है

सूर्य जादू से एक तालिका ला कर सोफिया के दोनों हठी के बिच लगा देता है सोफिया उसे गए अपना खिलौना या सूर्य समाज कर अपने सीने से लगा लेती है

सूर्य ...... अच्छा है ये सो गयी मैं भी नाहा कर फ्रेश हो कर ध्यान करता हूँ

सूर्य निचे आता है तो सभी में लड़किया सोये हुए थे

सूर्य .....क्या कृ कपडे भी लेने है आवर नहाना भी है

किरण ......उठ गए कुंवर जी

सूर्य पीछे पलट कर देखता है तो सामने किरण कड़ी थी हाथ में सूर्य का टॉवल साबुन कपडे बर्ष आदि के साथ

सूर्य ......स्वीटी कहा है

किरण ....मैं हे तो स्वीटी हूँ

सूर्य ...... तुम एक अंश हो मेरी स्वीटी कहा है

किरण ......वो परीलोक गई है उन्होंने मुझे बनाया आवर परीलोक गुरुदेव से भेंट करने चली गई

सूर्य ..... ठीक है लाओ कपडे दो मैं नहाने जा रहा हूँ

सूर्य किरण से कपडे ले पास के रूम में जा पंहुचा जहा राधिका भाबी दीप्ती निधि तीनो सोये हुए थे

सूर्य चुपचाप बाथरूम में का ब्रश टॉयलेट आदि कर नहाने के लिया त्यार था कपडे निकल सूर्य नहाना सुरु कर देता है पूरी बॉडी पे साबुन लगाने के बाद अपने नागराज को नहलाने लगता है जो सुबह सुबह अपना फैन उठाये खड़ा था सूर्य के साबुन लगाने वह सहलाने से उसकी आकद में कुछ आवर वृद्धि हो गयी

कुछ देर सहलाने के बाद सूर्य बहा कर अपने सरीर को टॉवल से पांच कर कपडे लेने के लिया पत्ता तो उसे हलकी से चाररर... करके आवाज सुनाई दी सूर्य ने चेहरा साफ कर गेट की तरफ देखा तो गेट भी बंद नजर आ रहा था

सूर्य ने सब इग्नोर कर शार्ट निकर आवर बनियान दाल गेट की तरफ बढ़ा जैसे हे लॉक को घुमाया तो वो पहले से खुला था

सूर्य .....मैंने तो इसे ठीक से बंद किया था ताकि कोई गलती से से अंदर न आ जाये

सायद मैं हे भूल गया होगा या फिर किसी ने खोल कर अंदर आने की कोशिश की हो कही वो आवाज

सूर्य जल्दी से दूर खोल रूम में देखता है तो वह से दीप्ती आवर निधि दोनों हे गायब थी

सामने से किरण कॉफ़ी लिया सूर्य के पास पहुंची

सूर्य ......मिल आई स्वीटी गुरुदेव से

किरण ....... तो आपको पता चक गया आपसे कुछ मांगू मन नहीं करोगे न

सूर्य ...... मानगो क्या मांगना है स्वीटी

किरण अपना हाथ आगे बढ़ा कर वादा करने की कहती है

सूर्य ......ठीक है मैं वादा करता हूँ

किरण ........ जब तक मैं न कहु आप किसी के ख्याल नहीं पढ़ेंगे

फिर चाहे वो मैं हूँ या कोई भी आवर

सूर्य ...... तुम जानती हो न की मैं ये जानबुज कर नहीं करता

किरण .....है पैर ये भी जानती हूँ की आप इसे रोक सकते है

सूर्य .....ठीक है अभी से बंद कर देता हूँ सूर्य आँखे बंद कर एक मंत्र दोहराता है जिस से उसकी ये पावर सुप्त स

अवस्था में चली जाती है

किरण ......थैंक यू

सूर्य ........ वो स्वीटी यार अभी मैं नाहा रहा था तो बाथरूम लॉक किया था पैर जब बहार आया तो लॉक खुला था पता नहीं कोण थी वो सायद दीप्ती या निधि हो क्यों की वही उस रूम से गायब थी

किरण ......ठीक है मैं पता कर लुंगी उनका ( पता नहीं इनकी किस्मत अच्छी है या इनके नागराज की जब देखो कोई न कोई आ हे जाती है )

सूर्य .....क्या हुआ स्वीटी कहा खो गई तुम मैं छठ पे जा राग ध्यान करने ok

किरण ......ok आप जाइये मई नास्ता त्यार करती हूँ आपके लिया

सूर्य आज अपने समय से काफी लेट था ध्यान में बैठने में

सूर्य ऊपर जाते हे एक नजर सोफिया को ुशी तरह सोया देख दिवार के पास लगे वृक्ष के पास मेट बिछड़ ध्यान में लीन हो जाता है

काफी दिनों बाद आज सूर्य ध्यान में बैठा था उसे अपने भीतर अलग अलग सकतिया का अहसास हो रहा था

सूर्य एक के बाद एक सकती को सिद्ध करता हुआ बहुत गहराई में चला जाता है सूर्य की सांसे न के बराबर चल रही थी अभी अगर कोई बहार से सूर्य की सांसे चेक करे तो यही कहेगा की वो जिन्दा नहीं है

उदार सूर्य अपने सभी चाकरी को खोल ब्रह्माण्ड के किसी अँधेरे कोने में जा पंहुचा चारो आवर घोर अंडकार हे अंडकार था

( यहाँ सूर्य जो भी बात करेगा वो ध्यान में करेगा अंतर्मन में )

सूर्य ........ ये मैं कहा आ गया यहाँ तो चारो आवर घोर अंधकार हे अंधकार है जैसे जीवन शुन्य हो ( 0 ) ये अंधकार मई स्थान कोई लोक है या ये अंतरिक्ष है

सूर्य कुछ देर उदार से उदार बहुत तेज गति से दौड़ता है पैर सिवाय एंड कर के उसे कुछ नहीं नजर आया

सूर्य .....ये कैसा स्थान है आवर मैं यहाँ क्यों हूँ मेरी इतने प्रयाश के बाद भी कोई सफलता प्राप्त नहीं हुई मुझे ध्यान से बहार आना होगा पता नहीं यहाँ क्यों आया

सूर्य जैसे हे ध्यान से बहार निकलने का पर्यटन करता है तो उसे झटका लगता है ये जान कर की वो ध्यान से बहार नहीं निकल प् रहा है

सूर्य निरंतर प्रयाश करता है किन्तु सफल नहीं हो अब सूर्य को चिंता भी हो रही थी आवर गुस्सा भी आ रहा था खुद पे

सूर्य ....... स्वीटी से सम्पर्क करता हूँ सायद वो कोई सहायता कर पाए सूर्य किरण से सम्पर्क करने की कोशिश करता है किन्तु यहाँ भी उसे सफलता हाथ लगती है

तभी सूर्य के मस्तिष्क में गुरुदेव की आवाज सुनाई देती है

गुरुदेव ....... खुद को संत करो पुत्र समस्या का संहदन तुम्हारे पास हे है अपने क्रोध आवर चिंता में तुम उसे देख नहीं प् रहे हो अपनी सकती को मह्सुश करो अपने वाइट ऊर्जा को जागृत करो मार्ग तुम्हारे सामने होगा

सूर्य ...... गुरुदेव मैंने अपनी सम्पूर्ण ऊर्जा को जागृत किया हुआ है किन्तु कोई लाभ नहीं हो रहा

फिर से सूर्य को गुरुदेव की आवर से कोई मार्गदर्शन प्राप्त नहीं हुआ कैसे उन्होंने सम्पर्क ख़तम कर लिया हो या ख़तम हो गया हो

ीदार बहार सोफिया सूर्य को देख रही थी साथ हे पल पल बदलते भाव भी उसे चिंता थी सूर्य की किन्तु उसे ये भी पता था की सूर्य सदर्न मानव नहीं है जरूर कोई कारन होगा सूर्य के बदलते भावो के पीछे

ीदार किरण को भी कुछ अजीब से बेचैनी हो रही थी जिसका मूल कारन वो भी नहीं समाज प् रही थी

इसी तरह सूर्य को ध्यान में बे थे हुए 3 घंटे हो गए

किरण ....... 9 बज गए है आवर ये अभी तक निचे नहीं आये

राधिका समय सिंधी भी उठ चुकी थी

किरण जब छठ पे पहुंची तो उसकी नजर सबसे पहले सोफिया पे पड़ी

किरण .....सोफी तुम ऊपर हे सो गई ठु क्या

सोफिया ....है वो पता नहीं कब नींद आ गई आँख खुली तो इनको देखा ऐसे हे बे थे है कब से

किरण ......वो ऐसे हे नहीं बे थे है वो ध्यान कर रहे है ताकि अपनी सक्तियो को ताकत वॉर आवर नियंत्रण में रख सके पैर आज इन्होने काफी टाइम लिया मैं देखती हूँ इन्हें

किरण जैसे हे सूर्य के पास पहुंची उसे गब्रहत होने लगी

किरण जल्दी से सूर्य की सांसे चेक करती है जो न के बराबर चल रही थी

किरण ......कुंवर जी ध्यान से बहार आइये सोफी जल्दी से पानी ले कर आओ जाओ जल्दी

किरण को इस तरह गबराते देख सोफी जल्दी से निचे जा पानी की बोतल ले कर आती है

किरण सूर्य के मुँह पे पानी मरती है किन्तु कोई फायदा नहीं होता

किरण ...... कुंवर जी मेरी आवाज सुनिए

सोफी ......स्वीटी इन्हें कहा हुआ है आवर आपने तो कहा था की ये ध्यान कर रहे है

किरण ......सोफिया किसी को ऊपर मत आने देना मैं इनके पास जा रही हूँ चाहे कुछ भी हो जाये हमारे आस पास कोई नहीं आएगा

सोफिया ......मुझे दर लग रहा है

किरण ....... कुछ नहीं होगा तुम्हे या किसी को बस कोई आस पास न आ पाए मैं ध्यान में बेथ रही हूँ

अभी किरण ने इतना हे बोलै था की तभी आकाश में एक जोरदार दहाड़ के साथ बदलो को चीरते हुए वाइट ड्रैगन आता हुआ दिखाई दिया

किरण .......तुम यहाँ क्या कर रहे हो वाइट ड्रैगन तुम्हे तो नागलोक में होना चाइये था न

वाइट ड्रैगन ...... जी गोल्डन प्रिंसेस मैं नागलोक में हे था पैर कुचले 2 घंटे से मैं मालिक से सम्पर्क नहीं कर प् रहा था

सोफिया ......आप किस से बात कर रही है स्वीटी

किरण ......अभी नहीं सोफिया बाद में है मुझे भी अभी पता चला सायद वो कही किसी मुसीबत में है किसी मायाजाल में या फिर किसी सकती के कैद में

वाइट ड्रैगन ........ मैं जनता हूँ वो कहा है इस वक़्त मुझे आपके साथ चलना होगा मुझे आज्ञा दीजिये की मैं फिर से इन में ऊर्जा रूप में प्रवेश कर सकू

किरण ....... आज्ञा है तुम कुंवर जी के सरीर में प्रवेश कर सकते हो वाइट ड्रैगन सुनहरी ड्रैगन मेरे पास आओ आवर मुझे समां जाओ

किरण के आदेश पे वाइट ड्रैगन ऊर्जा रूप में सूर्य में सम्माहित हो जाता है आवर जिनलोक से सुनहरी ड्रैगन ऊर्जा रूप में निकल किरण में सम्माहित हो जाती है

किरण ध्यान में बेथ सूर्य की ऊर्जा का पीछा करते हुए सूर्य तक पहुँचती है

ीदार दोनों ड्रैगन को ऊर्जा सकती में बदलते हे ब्लैक ड्रैगन की ऊर्जा अनियंत्रित होने लगी जिस से मानसी को भी कुछ गलत होने का अहसास होता है

मानसी तेजी से जूलिया के पास पहुंची जो इस वक़्त शालिनी जी के साथ लोने में नंगे पांव गम रही थी जिस तरह शालिनी जी सामना रही थी

मानसी ......जुली जरा मेरा साथ आना सॉरी मम्मी जरुरी है

शालिनी जी ..... ठीक है बीटा जाओ जुली

जुली .....क्या हुआ दीदी आप कुछ परेशान है

मानसी ....... मेरा ड्रैगन कुछ अजीब बर्ताव कर रहा है जुली मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा तुम्हे इस बारे में मुझसे ज्यादा पता है

जुली .....दीदी आपका ड्रैगन विशेष है मेरे वाले से उसके विषय में मैं क्या बता सकती हूँ आपको

मानसी ........पता नहीं कुछ बुरा होने के संकेत मिल रहे है जैसे ब्लैक ड्रैगन की ऊर्जा उसके नियंत्रण में नहीं है

जूलिया .......आपने ये पहले क्यों नहीं बताया मुझे आप फ़ौरन वाइट ड्रैगन को याद कीजिये जरूर कुछ हुआ उनके साथ ब्लैक ड्रैगन की ऊर्जा को वही संतुलन में बनाये रखते है उन्हें कुछ हुआ होगा तभी ब्लैक ड्रैगन खुद को नियंत्रित नहीं कर प् रहे है

मानसी ...... इसका मतलब सूर्य

जुली .....नहीं नहीं उन्हें कुछ नहीं होगा

मानसी ......तुम चिंता न करो मैं अभी जा रही हूँ

तुम सभी का ख्याल रखना

मानसी वह से हवेली में अपने रूम में पहुंची आवर वह से सीधा दिल्ली जहा सूर्य किरण ध्यान में थे

सोफिया. .....दीदी आप भी मैजिक जानती हो

मानसी ......तुम यहाँ क्या कर रही हो सोफिया

मानसी तेजी से किरण की आवर भड़ी तो सोफिया दोनों हाथ फैला कर जैसे मानसी का रास्ता रोकती है

मानसी ......हटो सोफिया सामने से

सोफिया ......स्वीटी ने किसी को भी इनके पास आने से मन किया है वो सूर्य को लेन के लिया हे गई है अगर आपकी वजह से कुछ गड़बड़ हुई तो

मानसी ......तुम्हारा क्या मतलब है लेन गए से सोफिया

सोफिया .....मुझे ज्यादा कुछ समाज में नहीं आया पे उनकी बातो से लगा की सूर्य ध्यान में हे किसी मायाजाल फर्श गए जहा से वो बहार नहीं निकल पाए

अभी मानसी कुछ बोलती उस से पहले हे किरण आवर सूर्य जोर जोर से साँस लेते हुए छठ के फर्श पे लेट जाते है

मानसी आवर सोफिया उनकी आवर बढे तो सूर्य ने हाथ के इसारे से दूर रहने का इशारा किया

सूर्य ....... वाइट ड्रैगन बहार निकलो आवर इस नकारात्मक ऊर्जा को कैद करो इस से पहले की ये किसी आवर के सरीर को वश में करे

सूर्य के कहते हे वाइट ड्रैगन सूर्य के सरीर से बहार निकलता है आवर किरण आवर सूर्य के सरीर में मौजूद सकारात्मक ऊर्जा का आंखरी करता तक निकल कर उसे वाइट ऊर्जा में कैद कर देता है

वाइट ड्रैगन ........ ये नकारात्मक ऊर्जा बहुत ताकतवर है इसे लम्बे समय तक कैद में नहीं रखा जा सकता है

उस ऊर्जा को देख मानसी उसकी आवर आकर्षित होती है अनजाने में हे वह उस की आवर भाषी है तभी तेजी से सूर्य मानसी का हाथ पकड़ उसे उस ऊर्जा से दूर करता है

सूर्य ....... मानसी उस आवर न देखि वो ऊर्जा तुम्हे अपनी आवर आकर्षित करेगी तुम्हे जल्दी हे सूरतगढ़ लौटना होगा जाओ अभी मैं बाद में बाटता हूँ तुम्हे

मानसी ......जी ठीक है ....बोल कर मानसी वह से गायब हो गई

सूर्य ......सुनहरी ड्रैगन तुम कुछ समय स्वीटी में हे रहो ताकि स्वीटी खुद की ऊर्जा को रे- कवर कर सके सोफिया किरण के साथ हे रहना मैं अभी आता हूँ

सूर्य उस ऊर्जा पुंज को ले को फिर से खुद में सम्मानित कर वह से गायब हो जाता है

परीलोक .........

सूर्य .......गुरुदेव ये कैसे ऊर्जा है जिसने मुझे हे कैद कर लिया आवर मुझे पता भी नहीं चला

गुरुदेव ........ हम नहीं जानते पुत्र की इतनी नकारात्मक ऊर्जा भी भारमंद में मौजूद है कही उचित किया तुमने पुत्र जो बूढी से कार्य को पूरा किया

सूर्य. ......आपके आदेश को समझने में समय लग गया गुरुदेव

गुरुदेव .......कैसा आदेश पुत्र मैंने तो कोई आदेश नहीं दिया था तुम्हे

सूर्य ......क्या पैर ये कैसे हो सकता है गुरुदेव आपने हे उस अंधकार में मुझसे मानसिक समपरक कर मुझे संत रह कर अपनी वाइट ऊर्जा का जागृत करने का आदेश दिया था

गुरुदेव....... नहीं पुत्र हमने तुमसे किसी तरह का कोई सम्पर्क नहीं किया था हमें तो इस विषय में कुछ भी घ्यात नहीं है

सूर्य ......फिर वो कोण थे जिन्होंने मेरी सहायता की थी वह

गुरुदेव .......परबु की लीला वही जाने पुत्र अवश्य तुम्हारे वह पहुंचने में उनकी हे लीला थी अवश्य भिवष्य में कुछ होने वाला है जिसका सम्बन्ध इस घटना से है

गुरुदेव ......सायद यही कारन हो सकता है गुरुदेव क्यों की वह मैं अपनी इच्छा से नहीं गया था मैं तो ध्यान में अपने चक्रो जागृत करते करते कब वह पंहुचा पता भी नहीं चला वो तो उचित समय पे किरण ध्यान में मेरे ऊर्जा का पीछा करते हुए मुज तक पहुंचने गई

आवर हम दोनों ने अपने ऊर्जा आवर ड्रैगन की सहायता से उस अंतहीन अंधकार को अपने भीतर कैद करने में सफल हुए

थोड़ा पीछे चलते है .......

किरण ध्यान लगा सूर्य की ऊर्जा का पीछा करते हुए जब सूर्य तक पहुंची तो सूर्य चारो आवर से किसी काली ऊर्जा से घिरा हुआ था

किरण ......कुंवर जी आप ठीक है न

सूर्य ........... स्वीटी तुम यहाँ क्या कर रही हो तुम्हे यहाँ नहीं आना चाइये था

किरण .......आप किसी मुसीबत में रहो आवर मैं आपको अकेला छोड़ दूँ ऐसा हो नहीं सकता

सूर्य ......मैंने बहुत कोशिश की पैर यहाँ कोई मार्ग हे नहीं दिख रहा है इतना अँधेरा है

किरण ......आप हमेशा मुझे हे कहते है न को सन्ति से से सोचो तो हर समशुअ का संहदन मिलता है फिर आज आप इतने क्रोध में क्यों है

वाइट ड्रैगन .......मालिक मैं लौट आया हूँ बस आप मेरी सम्पूर्ण ऊर्जा को मुक्त कर दीजिये इस अंडकार को मैं अपनी रौशनी से नस्ट कर दूंगा

सूर्य ......तुमने ठीक कहा स्वीटी गुरुदेव ने भी कहा था संत से अपनी वाइट ऊर्जा को जागृत कृ मार्ग मिल जायेगा पैर तब समाज नहीं नहीं आया था की अँधेरे को मिटाना है तो रौशनी की जरुरत होगी

सूर्य ुशी स्थान पे ध्यान लगा अपनी सम्पूर्ण ऊर्जा को जागृत कर उसे उस अंधकार ने अंनियंत्री खिला छोड़ देता है

इसी तरह किरण भी अपनी ऊर्जा को आवर सुनहरी ड्रैगन की ऊर्जा को रेलिएस कर देती है

देखते हे देखते वह का अँधेरा गायब होने लगता है चारो तरफ व्हीट आवर गोल्डन रौशनी थी

कुछ हे देर में सब साफ हो चूका था ये एक गरबा था जो चटानो से भरा था केवल पहाड़ आवर काली जमीं के अलावा कुछ नहीं था

सूर्य आवर किरण की ऊर्जा कुछ हे देर में पुरे गरबा में मौजूद उस अंधकार को एकत्रित कर वापिस सूर्य आवर किरण में सम्माहित होने लगे जैसे जैसे दोनों की ऊर्जा लौट रही थी वैसे वैसे वह ग्रह भी हरा भरा होने लगा पेड़ पौधे फल फूल नदी तालाब जैसे प्रकर्ति उस गाढ़ा पे विशेष कृपा दृस्टि कर दी हो

सूर्य ......... स्वीटी हमारी ऊर्जा के साथ साथ यहाँ मौजूद नकरात्मसक ऊर्जा भी हम में सम्माहित हो चुकी है जो हमारे विचारों को प्रभावित करे उस से पहले हमें लौटना होगा आवर इस ऊर्जा को बहार निकल कैद करना होगा

किरण .......आपने बिलकुल सही कहा चलिए

सूर्य किरण का हाथ थम अभी ध्यान से निकलने हे वाला था की तभी उनके सामने कोई ऊर्जा आ कर रुकी

ऊर्जा ....... रुकिए मुझे अपनाये बिना आप इस लोक से नहीं लौट सकते है

सूर्य ....... आप कोण है

ऊर्जा ....... मैं रूद्रकवच हूँ हजारो साल पहले जब मैं योद्धा हुआ करता था तब मैंने कठोर तप कर एक दिव्या कवच प्राप्त किया था एक ऐसा कवच जिसपे देव आवर दानव मानव गन्धर्व यक्ष सभी के अस्त्र शास्त्र निस्किरया रहे कभी ये गाढ़ा खुशियों से जुटे नाचते गेट जीवो से पारी पूर्ण हुआ करता था पैर मेरे उस एक वरदान ने सब नस्ट कर दिया देवसेना ने वो कवच प्राप्त करना चाहा पैर मैंने उन्हें नहीं दिया

फिर एक दिन रात्रि इस लोक पे किसी ने आकर्मण किया असुर दानव पिशाच न जाने कितने विचित्र जिव जानवरो ने एक हे रात्रि में इस हस्ते खेलते हरे भरे गाढ़ा को बर्बाद कर दिया केवल मेरे इस कवच के लिया सभी मरे गए केवल मैं बचा रहा इस कवच के कारन मैंने बिना थके उन पापी सेना को लगभग ख़तम कर दिया बाकि बचे हुए यहाँ से भाग निकले किन्तु मैं जीत कर भी अपना सब कुछ हर गया अपने किये पाप के लिया मैंने खुद को ख़तम कर लिया

जब उस सेना के सेनानायक को पता चला की मैंने स्वयं आत्महत्या कर ली तब वह वापिस आया इस कवच के लिया किन्तु ये कवच मेरे आत्मा से जुड़ चूका था एक बार फिर से निराश होने पे यहाँ पे उसने अपने गुस्से का कहर बरपाया आवर इस गाढ़ा को बर्बाद कर दिया

मैंने वचन लिया था की जो भी इस गाढ़ा को इस अंधकार से मुक्त कर इसे जीवन देगा मैं उसे अपना कवच भेंट स्वरुप प्रदान करूंगा आज से ये गधा आवर ये दिव्या कवच आपका हुआ दोनों पे केवल आपका अधिकार होगा क्या आप मुझे अपनाएंगे

किरण ....... कुंवर जी आपको अवश्य अपनायेगे

रूद्रकवच से एक ऊर्जा निकली जो वही दिव्या कवच था

रूद्र ...... अब मैं केवल रूद्र हूँ रूद्रकवच नहीं

सूर्य .......अब हमें आज्ञा दीजिये

रूद्र ........ अवश्य आपको मुझसे आज्ञा मांगने की आव्सय्कता नहीं बस आपने सम्मानित उस नकारात्म ऊर्जा का सदुपयोग करना आपके लिया बहुत लाभकारी सिद्ध होगा

सूर्य .......जी उचित है चले स्वीटी

किरण ......जी कुंवर जी

सूर्य किरण के वह से लौटने के बाद

रूद्र ऊर्जा से बदल कर एक परछाई एक आत्मा का रूप लेता है आवर जहा सूर्य किरण खड़े थे वह उनके पदचिन्हो पे मुख कर जैसे ारीवाद ले रहा हो

रूद्र ........ आपका कोटि कोटि धन्यवाद परबु जो आपके आशीर्वाद से मैं इस कैद से मुक्त भी हुआ आवर अपने भावी माता पिता के दर्शन भी प्राप्त हुए

तभी वह एक आवाज गूंजती है

आवाज ........ सिगरा हे वो समय आएगा जब तुम्हे पर्विलोक अपनी माता के गर्भ में स्तन प्राप्त होगा पुत्र रूद्र तुम्हारे हजारो वर्ष किये तप का फल तुम्हे प्राप्त होने वाला है

रूद्र .......... आपको कोटि कोटि नमन परबु जो आपने अपने एक भक्त पे दया दृस्टि की

रूद्र तो ख़ुशी से अंदर हे अंदर ख़ुशी से नाचने लगता है

वह सूर्य परीलोक से लौट सभी के साथ नास्ता करता है

सुनिधि के कहने पे सूर्य सभी को शॉपिंग करवाता है आवर वही से से दोपहर के कन्ने पे सुनिधि के घर निकल जाता है सभी के साथ

साम की सूर्य ने पहले फ्लाइट बुक कर राखी थी जैसलमेर केर लिया ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..................
 
अपडेट 219

आवाज ........ सिगरा हे वो समय आएगा जब तुम्हे पर्विलोक अपनी माता के गर्भ में स्तन प्राप्त होगा पुत्र रूद्र तुम्हारे हजारो वर्ष किये तप का फल तुम्हे प्राप्त होने वाला है

रूद्र .......... आपको कोटि कोटि नमन परबु जो आपने अपने एक भक्त पे दया दृस्टि की

रूद्र तो ख़ुशी से अंदर हे अंदर ख़ुशी से नाचने लगता है

वह सूर्य परीलोक से लौट सभी के साथ नास्ता करता है

सुनिधि के कहने पे सूर्य सभी को शॉपिंग करवाता है आवर वही से से दोपहर के कन्ने पे सुनिधि के घर निकल जाता है सभी के साथ

साम की सूर्य ने पहले फ्लाइट बुक कर राखी थी जैसलमेर केर लिया ...............

अब आगे ............

सूर्य किरण सभी से ढेरो उपहार के साथ दिल्ली से विदा लेते है

राधिका भाबी ने जल्दी हे सूर्यगढ़ आने का वादा भी किया वैसे तो सभी लड़किया कुछ उदाश थी पैर सोफिया सबसे ज्यादा दुखी थी

किरण ने एकांत में उसे कुछ संजय तो वो भी खुश हो गई जैसे सोफिया को जा चाइये वो मिल गया हो

सूर्य किरण 4पं की फ्लाइट से जैसलमेर की आवर रवाना हो गए

सूर्य ......... फाइनली हम घर जा रहे है

किरण ............ है कुंवर जी अब आगे जहा कही भी जाना हो आप अकेले जाना या फिर अपनी किसी प्रेमिका को साथ ले जाना वैसे भी जहा भी आप जाते हो एक न एक प्रेमिका तो मिल हे जाती है

सूर्य ......क्यों क्या हुआ स्वीटी तुम मना क्यों कर रही हो

किरण ....... अब मैं आपकी पत्नी होने के साथ साथ हवेली की बहु बेटी भी हूँ मुझे अपनी जिम्मेदारी भी सँभालने होगी

सूर्य ....... ये भी ठीक है मुझे तुम्हारी इच्छा का मन भी रखना चाइये आवर उनको भी साथ में समय बिताने का मीका देना चाइये उनकी भी कुछ खवाहिश है मुझे ले कर

किरण .....काफी समझदार हो गए हो आप अच्छा है

वैसे एक बात पूछनी थी आपसे

सूर्य .....तुम कब इजाजत मांगने लगी स्वीटी तुमसे कुछ भी तो नहीं छुपा है

किरण ........ आप मुझसे कितना प्रेम करते है

सूर्य ......... ऐसा सवाल क्यों स्वीटी मुझसे बेहतर तुम मुझे जानती हो फिर भी

किरण .......है फिर भी मैं जानना चाहती हूँ कुंवर जी क्या कभी मैंने बिना आपकी सहमति के कोई कदम उठाया तो क्या आप मुझे माफ कर देंगे

सूर्य ....... स्वीटी एक बार मैं खुद अपने निर्णय पे संदेह कर सकता हूँ पैर तुम्हारे निर्णय पे नहीं मैं जनता हूँ ऐसा कुछ है जो तुम कहना चाहती हो पैर कह नहीं प् रही हो आवर न मैं तुमसे इस बारे में कोई सवाल करूँगा

किरण ....... अगर मेरी वजह से किसी अपने की जान खतरे में हो क्या तब भी

सूर्य ......हाहाहा मेरी किरण किसी निर्दोष का न खुद अहित करेगी न होने देगी जो निर्णय तुम कर चुकी हो उसपे विश्वाश रखो स्वीटी जो हो रहा है अच्छे के लिया हो रहा है आवर जो भविष्य में होगा वो भी अच्छा हे होगा

किरण सूर्य की बात सुन फ़ौरन उसके गले से लग जाती है

( किरण ......मुझे माफ करना कुंवर जी मुझे गुरुदेव की आज्ञा माननी हे होगी )

करीब सवा 5 बजे किरण सूर्य दोनों जैसलमेर एयरपोर्ट पे उतरे जहा सकती सूर्य का इन्तजार कर रहा था

सूर्य किरण ने काफी शॉपिंग की थी पुरे परिवार के लिया कुछ u.s.a से तो कुछ दिल्ली से भी आवर आते वक़्त दीप्ती फॅमिली आवर सुनिधि की फॅमिली से मिले हुए गिफ्ट भी थे सूर्य किरण के लग्गेड के अलावा शॉपिंग के 4.5 बैग हो गए थे

सकती .......सफर कैसा रहा भाई

सूर्य ......अच्छा था सकती भाई घर पे सब ठीक है न

सकती ........ सब ठीक है चिंता की कोई बात नहीं है सभी की सुरक्षा में एक एक जिन आवर परीलोक के विशेष योद्धाओ को नियुक्त कर दिया है

सूर्य सकती के साथ सामान कार में रखता है

सकती ड्राइविंग सीट संभल लेता है आवर सूर्य आगे की सीट पे सकती के साथ किरण पीछे की सेण्टर सीट पे बेथ जाती है

तीनो जैसलमेर से सूरतगढ़ की आवर निकल गए

ीदार किरण की चिंता भने लगती है जब हाथ में पकड़ा हुआ रतन चमक ने लगता है

जैसे जैसे ये लोग सूर्यगढ़ की सीमा के नजदीक पहुंच रहे थे वैसे वैसे चमक आवर तेज होने लगती है

सूर्यगढ़ ...........

उदार सूर्यगढ़ हवेली में दोपहर को हे शालिनी जी ने जूलिया को साम को कुलदेवी मंदिर चलने को कह दिया था

शालिनी जी ने फ़ोन कर पहले हे पुजारी जी को पूजा के लिया सन्देश दे दिया था जहा पुजारी जी पूजा की पूरी तयारी कर चुके थे

शालिनी जी ....... माँ सा हम लोग जल्दी हे लौट आएंगे

कोमल ...... मम्मी वो आ रहे है आवर आप पूजा के लिया जा रही है कल भी तो ये पूजा हो सकती है न

शालिनी जी ....... अभी से उसकी पूरी खबर रखने लगी है

कोई बात नहीं उसे घर आने दे फिर देख कैसे उसके कान खुचटी हूँ मई आवर साथ में तुम्हारे भी

कोमल ...... हुन्न्न मैंने क्या किया है मम्मी जो मेरे कान खींचने वाली हो

शालिनी जी. ...... अब तुम हे उसका इतना पलाश ले रही हो तो उसकी सजा तुम्हे भी तो मिलनी चाइये न

कोमल....... मैं तो आपकी तरफ हूँ न मम्मी

जूलिया ..... चले मम्मी जी

शालिनी जी. ..... चलो बेटी आवर हम लोग जल्दी हे लौट आएंगे बस छोटी से पूजा है

कोमल .....मम्मी मैं भी चालू क्या आपके साथ

शालिनी जी....... अभी नहीं जब तेरा वक़्त आएगा तो तुझे भी ले जाउंगी बेटी

कोमल .....ok मम्मी bye जल्दी आना

शालिनी जी जूलिया दोनों बहार निकल जहा ड्राइवर पहले हे कार साफ कर रेडी था

शालिनी जी ........आप रहने दीजिये कार मैं ड्राइव करुँगी आप यही रुकिए काका

काका ......पैर ठकुराइन ने तो कहा की मुझे आपको ले कर जाना है मंदिर

शालिनी जी ........ माँ सा को मैंने बोल दिया हैं उनकी चिंता न कीजिये काका आप

शालिनी जी ड्राइविंग सीट पे बेथ स्टीयरिंग संभालती है जूलिया कुछ पूजा की वस्तुओ के साथ उनकी बगल वाली सीट पे जा बैठी

शालिनी जी बड़ी दकसता से कार ड्राइव करते हुए सक्तिपुर की साइड निकल गयी कुछ 2 कम बाद एक कच्चे रस्ते कार को उतर ते हुए कोई 1 कम से कुछ आगे चलने पे दूर से हे वो प्राचीन मंदिर दिखाई देने लगता है

जूलिया ....... मम्मी जी क्या यही वो मंदिर है जो दायी तरफ दिखाई दे रहा है

शालिनी जी ....... है बेटी यही हमारी कुलदेवी का मंदिर है सूर्यगढ़ सक्तिपुर आवर सूरजगढ़ ये तीनो की कुल देवी है आवर यही कुल मंदिर है यहाँ हर 3 साल में एक मेला लगता है विशेष थिति पे दूर दूर से काफी आदिक लोग आते है

जूलिया ......... हमारे यहाँ ड्रैगन लोक में ऐसा नहीं होता माँ वह केवल पर्तिस्पर्धा होती है ड्रैगन आवर राइडर्स की मैंने यहाँ पे आने के बाद परतविलोक के विषय में जो भी जाना है वो मुझे बहुत अच्छा लगा बस कुछ बातो को छोड़ कर

शालिनी जी ...... अच्छे आवर बुराई हमेशा साथ चलती है बेटी जैसे दिन आवर रात का होना अगर हमेशा दिन हे रहेगा तो उसका कोई महत्व नहीं आवर अगर ुशी तरह हमेशा रात रहेगी तो भी कोई महत्व नहीं

दिन का पूरक रात है आवर रात का दिन दोनों के एक सामान गतिमान होने पे हे दिवश ( दिन ) बनता है

जूलिया ......यहाँ पे तो कोई दिखाई हे नहीं दे रहा है माँ मैंने तो सुना था देवालयों में हमेशा भीड़ रहती है

शालिनी जी ...... चल उस तरफ कार लगा देती हूँ फिर चलते है अंदर अभी गर्मी का समय है न तो यहाँ इतने लोग नहीं है जैसे जैसे सूर्यदेव की तपिश काम होगी वैसे हे लोग भी आने लगेंगे इस वक़्त भीड़ काम होती है इस लिया हम इस वक़्त आये है पूजा करने

ये लोग अभी बात कर हे रहे थे की ठीक इनके पास में एक आवर कार आ कर रूकती है ये कार दूसरे रस्ते से आई थी जो की सक्तिपुर से आता था मंदिर तक

कार रुकते हे उसने से विधि आवर गायत्री उत्तरी

विधि ...... आंटी जी आप यहाँ वो भी इस वक़्त

शालिनी जी ........ पहले साँस तो ले ले विधि बेटी कैसे हो रुक्मणि जीजी आवर आपके सर पे ये चौथ कैसे

शालिनी जी भाववश रुक्मणि जी के सर पे बंदी उस पट्टी को देख उनके समीप जा पहुंची

रुक्मणि जी ...... मैं ठीक हूँ शालिनी बहन बस ये मामूली से छोटू है काम करते वक़्त लग गई

शालिनी जी विधि को देखती है जो अपनी नजरे चुरा रही थी

शालिनी जी .....विधि बीटा क्या हुआ आपकी माँ को सच बताना बीटा अगर तुमने जूठी बोलै तो फिर साम को सूर्य को भेजती हूँ हवेली पे

विधि ......क्या वो आ गए मेरा मतलब छोटे ठाकुर आ गए आवर माँ को छोटू अपने आप नहीं लगी विक्रम भाई सा ने माँ को मारा था आंटी जी

शालिनी जी .....चलिए मंदिर में चल कर बात करते है

शालिनी जी रुक्मणि जी को अपने साथ ले गई मंदिर में विधि आवर जूलिया भी इनके पीछे पीछे बाते करते हुए चल दी

शालिनी जी .....बेटी जुली पुजारी से कह कर पूजा आराम करो क्यों की पूजा तुम अकेली को करनी है ये

जूलिया .....जी मम्मी जी विधि तुम भी आओ

विधि .....जी दीदी चलिए

रुक्मणि जी ..... ये प्यारी से बची कोण है शालिनी बहन पहले तो नहीं देखा इसे

शालिनी जी ....... मेरी हे बेटी समाज लीजिये आप आवर अब साफ साफ पूरा सच बताइये की आखिर ये सब क्या हो राग हवेली में विक्रम तो ऐसा लड़का नहीं था

रुक्मणि जी ...... विक्रम सदा से ऐसा हे है शालिनी जी पैर पिछले कुछ समय से वो बहुत हे ज्यादा बदल गया है एक रोज सुबह जब मैं किचन में कुछ काम कर रही थी तो उसने पीछे से मुझे जकड लिया दर आवर हड़बड़ाहट में मैंने उसे चांटा मर दिया बिना देखे हे तब उसने गुस्से में मुझे मरना सुरु कर दिया ुशी वक़त मेरा सर किसी चीज़ से टकरा गया

शालिनी जी ...... इतना सब हो गया आवर आपने कुछ बताया भी नहीं क्या अभी आप लोग हमें दुसमन समझते है

रुक्मणि जी ....नहीं नहीं आप ऐसा बोलिये बड़ी मुश्किल से सब भूकर कर कुछ खुशियां मिली है फिर वो सब सगण नहीं होगा

शालिनी जी ...... अभी भी आपने पूरा सच नहीं बताया है

रुक्मणि जी .....क्या बताऊ की विक्रम ने दिन दहाड़े मेरी ेजात पे हैट डाला या फिर ये बताऊ की उसने गीता दीदी तक पे अपनी गन्दी नजर डाली आवर अपनी हे माँ की ेजात लूटनी छायी

रुक्मणि जी का खुलाशा सुन शालिनी जी के पैरो के निचे से जैसे जमीं हे खिसक गई

शालिनी जी ....... ची कितना घटिया लड़का है ये तो पूरा शैतान निकला सोचा था की बीटा बाप के कदमो पे नहीं चलेगा बाप ने जहा गांव भर की बहु बेटियों की ेजात लूटी वही बीटा अपने घर की ेजात तार तर करने चला है

रुक्मणि जी ....... ये सब हमारे हे किये पाप है जो हमारी परछाई बन हमारे साथ चल रहे है

शालिनी जी ....... क्या उसकी गन्दी नजर विधि आवर गायत्री पे भी है अगर उन दोनों को कुछ भी हुआ तो विक्रम सूर्य के गुस्से से बच नहीं पायेगा पहले कह देती हूँ मैं

रुक्मणि जी .......क्या मतलब. शालिनी बहन

शालिनी जी ....... मैं जानती हूँ की विधि आवर गायत्री सूर्य से प्यार करती है आवर सायद आप भी जानती हो क्यों की गीता दीदी सब जानती है तो आपको कैसे पता नहीं होगा

सूर्य .....आज हे लौट रहा है उस से कुछ नहीं छुपेगा मुझे दर है की कही वो विक्रम को जान से न मर दे

रुक्मणि जी .....अच्छा है उस हवन से काम से काम छुटकारा तो मिलेगा उसने हवेली छोड़ दी पता नहीं फार्महाउस पे क्या करता है

शालिनी जी .....अजय को दूर रखो उस से अजय भी उसके हे रस्ते कदम पे न निकल पड़े

रुक्मणि जी ...... हमें भी यही दर था फिर दीदी ने जो कदम उठाया उस से उम्मीद तो यही है की वो सुधर जायेगा

शाकिनी जी ......चलिए बच्चियों के साथ पूजा कर ले

उदार फार्महाउस में विक्रम आवर शिष्य 1 किसी बात को ले कर चर्चा कर रहे थे

विक्रम ......... आप जो कह रहे है वो सही है किन्तु मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहता हूँ अगर विधि ने अपनी इच्छा से मेरा साथ नहीं दिया तो सायद मेरी साडी सकतिया चीन सकती है

शिष्य 1 ....... है ये सत्य है अगर उस कन्या ने मन से इस क्रिया की पूर्ण नहीं किया तो तुमसे सभी सकतिया चीन कर उसे प्राप्त हो जाएगी

विक्रम ......इसी लिया मैंने पहले उस सूर्य ठाकुर का खत्म करने का फैसला किया है मुझे पता चला है की विधि उसे चाहती है आवर गायत्री भी अब सूर्य को ढल बना कर विधि को विवश करूँगा गायत्री बच कर कहा जाएगी पैर उस से पहले सूर्य को कुछ जख्म देने है जिसके लिया उसने मेरे पिता आवर चाचा की बलि दी उसे हे दर्द दूंगा

शिष्य1 ........ क्या वो इतना ताकतवर है की उसके लिया इतना सब करना पद रहा तुम अब सामान्य इंसान नहीं हो तुम चाहो तो अकेले सभी वध कर सकते हो

विक्रम अभी आगे कुछ बोलता उस से पहले हे उसकी जेब में रखा फ़ोन बज उठा

विक्रम no. देखा कर मुस्कुराते हुए फ़ोन उठता है

विक्रम ......क्या खबर है

सामने से ......मालिक छोटी ठकुराइन आवर विधु इस व्वक्त कुलदेवी मंदिर आई हुई है

आवर यहाँ सूर्यगढ़ की छोटी बहु अभी है साथ में एक खूबसूरत लड़की भी है

विक्रम..... अगर ये खबर सच है तो तुम्हे मुह्मांगा इनाम मिलेगा आवर झूट हुआ तो बिच बाजार तेरी बीबी बेटी की छूट फाड़ूंगा

सामने से .....नहीं मालिक मैं खुद उन्हें यहाँ ले कर आया हूँ अभी वो चारो मंदिर में हे है

विक्रम .....ठीक है मैं अभी वह पहुँचात हूँ कुछ भी कर के उन्हें जाने मत देना मैं अभी आया

शिष्य 1 .....तो दोनों शिकार एक साथ है एक हे स्थान पर

विक्रम .....है सायद किस्मत भी यही चाहती है की मेरा दुसमन आज हे मेरे हाथो मरे

शिष्य 1 .....फिर देर किस बात की चलो चलते है मैं भी तो देखु की आखिर ये सूर्य ठाकुर है क्या चीज़

विक्रम ......ठीक है पैर ये कार्य मैं अकेला करूँगा आप बस मुझे वह पंहुचा दीजिये आवर बाकि सब मुझे छोड़ दीजिये

शिष्य 1 विक्रम का हाथ पकड़ मंदिर के लिया गायब हो गया

उदार सूर्य जैसे हे सूर्यगढ़ की सीमा में गुस्सा वैसे हे किरण ने बड़ी सावधानी से सूर्य के माथे से उस रतन को चूहा दिया

सकती .....ये आपने क्या किया

किरण ....सकती भाई ये ये जरुरी है बस आप कार को यही रोके रखिये जब तक मैं न कहूं

सकती ........ ठीक है पैर ये उठेंगे तब क्या कहेंगे आप आवर आपने ऐसा क्यों किया

किरण .......क्यों की यही गुरुदेव का आदेश था इन्हें उस घटना से दूर रखना आवशयक है सकती भैया

सकती ......गुरुदेव ने ऐसा करने को कहा है तो अवश्य कोई कारन रहा होगा

उदार जैसे हे शालिनी जी जूलिया विधि रुक्मणि जी चारो मंदिर से बहार निकल अपनी कार तक पहुंची

विक्रम आवर शिष्य 1 दोनों हे इनसे कुछ दुरी पे आ खड़े हुए

ीदार पुजारी जी भी तेजी से बहार की आवर निकले पर तब तक विक्रम ने शालिनी को निशाना बना अग्नि पुंज शालिनी जी पे छोड़ दिया था

जुली जो शालिनी जी के पीछे हे थी वो फ़ौरन सामने आ उस अग्नि पुंज को रोक लेती है

जुली ......तुम्हारी हिम ात कैसे हुई मेरी माँ सा पे प्रहार करने की जुली उस अग्नि पूजन को उस से बे तेज गति से विक्रम पे दे मरती है ज्यादा कुछ तो असर न हुआ पर विक्रम 2,3 कदम पीछे की आवर खिसक गया उस पत्थर से

( यहाँ जुली की आवाज पूरी तरह मरदाना थी जैसे जुली में किसी मर्द की आत्मा गेस गई हो )

शिष्य 1 ....... ये कन्या कोण है कोई सदर्न कन्या नहीं है

विजडम ......माँ छुड़ाए जो कोई भी हो

इस बार विक्रम एक के बाद एक अग्नि पर्वत करता है जिसमे से एक दो शालिनी जी की कार पे फिरते है जिनसे कार की काफी बुरी हालत हो चुकी थी

जुली गुस्से में उन अग्नि पुंज को दूसरी दिशा में उनका पर्वत निष्फल करते हुए विक्रम के सामने जा कड़ी हुई विक्रम कुछ करता उस से पहले हे जुली ने विक्रम की गर्दन आवर पेअर पकड़ के हवा में उठा जमीं पे दे मारा

जैसे विक्रम उठा जुलु ने तेजी से विक्रम की पसलियों में एक तेज वॉर करती है जिस से विक्रम के मुँह से खून आवर दर्द भरी चिक निकल जाती है

ीदार विधि रुक्मणि शालिनी जी तीनो इस दृश्य को देख रही थी जहा रुक्मणि आवर विधु घबरा रही थी वही शालिनी जी मुस्कुरा रही थी .

विधि .....आंटी जी ये साब क्या है आवर ये जुली दीदी की आवाज

शालिनी जी ...... जुली कुछ खाश है बेटी विधि

शिष्य 1 पीछे से जुली पे वॉर करता है जिस से कुकी थोड़ी लड़खड़ा जाती है

जुली .....कायर पीछे से वॉर करता है

जुली वही से जैमप मर सीधा शिष्य 1 के सीने पे दे मरती है प्रहार कुछ ज्यादा हे तेज था जो शिष्य 1 सीधा विधि के पैरो के पास का गिरा उसके भी मुँह से खून निकल रहा था पैर वह जल्दी हे उठ खता होता है आवर विधि रुक्मणि दोनों का हाथ पकड़ वह से गया हो गया

शालिनी जी ........जूलिया बेटी विधि को बचो उस से

वो डस्ट विधि आवर रुक्मणि को ले गया है

ीदार जूलिया का ध्यान भांग हुआ उदार शिष्य 1 विक्रम को ले गायब हो गया

जुली ....... माँ हमें उन्हें खबर करनी होगी

पुजारी जी ...... तुमने उचित कहा पुत्री जूलिया पुत्री शालिनी घर जाओ आवर सब पुत्र सूर्य को बता कर निश्चित हो जाओ

शालिनी जी ....... आप कोण है है आवर आप ये सब कैसे जानते है

तभी पुजारी जी अपना भेष बदलते है तो सामने गुरुदेव खड़े थे

गुरुदेव ....... पुत्री समय नहीं है सिगरा घर जाओ आवर पुत्र सूर्य को इस विषय में बताओ

शालिनी जी .....क्या उसे घात नहीं है गुरुदेव

गुरुदेव .....घ्यात है किन्तु वो अभी मूर्छित है मैंने हे पुत्री किरण को ऐसा करने का आदेश दिया था वो तुम्हे रस्ते में हे मिल जायेगा ये को रतन इसे सुर्यबके मस्तिष्क से चूहा देना उसकी मिर्धा भांग हो जाएगी अब जाओ पुत्री

शालिनी जी ........ गुरुदेव अभी अभी जूलिया के साथ जो हुआ वो क्या था

गुरुदेव ...... ये वही अंश है जो पुत्री जूलिया के गर्भ में है बेसन सरीर जूलिया का था किन्तु लाल आपका पोता रहा था जब उसकी माँ सा पे संकट आया तो खुद मैदान में उतर गया आपकी सुरक्षा के लिया

शालिनी जी आवर जूलिया वह से निकल गई

गुरुदेव ......... एक आखरी कार्य कर मुझे भी परीलोक लौटना होगा

गुरुदेव वह से गायब हो सीधा फार्महाउस पहुंचे आवर उसे सुरक्षा घेरे में बंद वह से परीलोक लौट गए

शिष्य 1. ....... देख लिया तुम्हारी मूर्खता का परिणाम वो एक अकेली कन्या हम दोनों असुरो को दल छठा दी

रुक्मणि जी ...... कोण हो तुम दोनों हमें यहाँ क्यों लाये हो जाने दो हमें यहाँ से

विक्रम. ........ चाताआकककक ...... चुप कर साली छीनल रंडी चची मैं तेरा यार विक्रम हूँ पहचाना नहीं मुझे

शिष्य 1 .....विक्रम हमें यहाँ से निकलना चाइये इस से पहले की वो कन्या यहाँ पहुंचे

विक्रम ......कैसे असुर हो tum.jo एक लड़की को संभल नहीं सके खुद को असुर योद्धा कहते हो असुरगुरु के पत्तन शिष्य बने फिरते हो

शिष्य 1 अपने ऐसे बाते सुन गुस्से में में विक्रम को उठा दिवार पे दे मरता है

शिष्य 1 .....सेल हरामी मेरी वजह से इतनी सकती प्राप्त हुई आवर मुझे हे आँखे दिखा रहा है

विक्रम ...... अह्हह्ह्ह्ह माँ मर गया रे माफ कर दो गुस्से में अह्ह्ह्हब मुँह से निकल गया

रुक्मणि ......तुम हमें यहाँ क्यों लाये हो हमें जाने दो विक्रम वार्ना सूर्य तुम्हे जिन्दा नहीं छोड़ेगा

विक्रम ........ बच गया साला वर्ण आज उस शालिनी को तो ऊपर भेज हे देता पता नहीं साली वो कुटिया कहा से आ गई बिच में

विधि ........ अभी भी वक़्त है भाई सा हमें यहाँ से मुक्त कर कही दूर चले जाओ सायद आप जिन्दा बच जाओगे

विक्रम ......चुप कर कुटिया अपने दुश्मन से इश्क़ लड़ती है

विधि ......थू ... आप जैसे लोगो की सोच भी आपके जैसे हे है गठिया

शिष्य 1 ....... विक्रम आखरी मौका है मैं इस स्थान को सुरक्षा कवच प्रदान कर रहा हूँ इस बिच तुम्हे वो क्रिया पूरी करनी होगी

विक्रम ......ठीक है मैं अभी तयारी करता हूँ

शिष्य 1 अपनी काली ऊर्जा का घेरा बनाने लगता है आवर उदार विक्रम जमीं पे कीच बनाने लगता है देखने से किसी तामसिक क्रिया का चिन्ह परतीत हो रहा था

कुछ हे देर में कुछ आवर सामग्री वह रख विक्रम विधि के हाथ पेअर खोलता है

विक्रम ......अगर इस रंडी को जिन्दा देखना चाहती हो तो जैसा कहु वैसा हे करना वार्ना इसे जान से मर दूंगा

रुक्मणि जी .......विधि तुम इस हरामी की बात मत सुन्ना मुझे कुछ भी हो जाये तुम इसकी बात मत मन्ना इस बार विक्रम की जगह शिष्य 1 आगे भाड़ रुक्मणि जी ब्लाउज खिंच कर फाड् देता रुक्मणि जी की भरी भरकम 36 की चूचियों विधि आवर विक्रम की आँखों के सामने आ चुकी थी विधि ने तो फ़ौरन आँखे बंद कर ली पैर विक्रम आगे भाड़ रुक्मणि की चूचियों जोर से दभा देता है

जिस से रुक्मणि जी की जोरदार चिक उस हॉल में गूंज उठी आवर आँखों से आंसू

विधि .....माँ को छोड़ दो प्लेसेस

विक्रम ......तो चुप चाप खुद से अपने कपडे उतर आवर यहाँ बेथ

रुकमणी ......हरामी गन्दी नाली के कीड़े वो तेरी बहन है

विक्रम ......मेरी न कोई माँ है न कोई बहार वो विक्रम मर चूका है ये अब तुम्हारे सामने जो है राक्षस विक्रम है जिसके कोई रिश्ते नहीं कोई नंदन नहीं

रुक्मणि .....बेटी तुम्हे प्यार सूर्य की सहोगान्ड जो तुम्हे इस हरामी की बात मणि तो

विक्रम आगे भाड़ विधि के कंडे से सुते पकड़ कर खींचता है जो चायररर की आवाज के साथ एक तरफ का हईशा फैट जाता है

विधि ......सूउऊरररयाआ मुझे बचा को

विक्रम ........वो यहाँ कभी नहीं पहुंच सकता है चीला आवर जोर से मैं भी तो देखु कैसे आता है वो यहाँ चुप चाप अपने कपडे उतर आज तुम्हारा को मर्या भोगूँगा मैं अपने इस दानवी लैंड से

विक्रम अपनी पेण्ट खोल बहार निकल हे था अपने लैंड को के एक हवा का जोखा उस के पास से गुजरा

विक्रम .....कोण है यहाँ सामने आओ

सूर्य ........ तुमने हे तो अपनी मौत को दावत दी है विक्रम जरा निचे भी देख ले जिसपे तू गमन कर रहा था

विक्रम जैसे हे निचे देखता उसका हाथ पूरा खून से भीगा हुआ था आवर उसका डालनी लैंड फर्श पे गिरा हुआ अंतिम सांसे ले रहा था जैस छिपकली की कटी हुई पंच हिलती है न कुछ देर वैसे हे

विकरक ........ आआअह्हह्ह्ह्हह माँ मर गया रे सेल ने मारा लैंड हे काट दिया

विक्रम चिकटे हुए वही फर्श पे गुर कर तड़प ने लगता है

शिष्ट 1 ......कोण हो तुम सामने आओ तुम मेरा सुरक्षा कवच को कैसे पार कर यहाँ आ गए

तभी सूर्य सामने आता है रुक्मणि जी आवर विधि की नजर सूर्य पे पादरी है सूर्य चुटकी बजा रुक्मणि जी के आवर विधि के वस्त्र ठीक करता है

आवर रुक्मणि जी को रखियो से आज़ाद विधि दौड़ कर सूर्य के सीने से लग जोर जोर से रोने लगती है रुक्मणि जी भी सूर्य से चिपके हुए आंसू बहाने लगती है

सूर्य .....मैंने तुम्हे कहा था दूसरी बार नजर मत आना पैर तुम नहीं मने मेरी वास्तविकता जानना चाहते थे न तुम असुरगुरु शिष्य 1 देखो ये है काल की वास्तविकता तुमने स्वयं अपने भाग्य में काल को आमंत्रित किया है

शिष्य 1 ......क्या तुम काल हो नहीं ये नहीं हो सकता

सूर्य ....... वैसे भी मरने वाले हो तुम तो तुम्हे सच दिखा हे देता हूँ सूर्य विधि आवर रुक्मणि को अलग कर काल में पारवती होता है

अपने सामने काल को देख शिष्य 1 भय से 2,3 कदम पीछे हो जाता है

शिष्य 1 .....मुझे माफ कर दीजिये काल मुझसे भूल हुई

सूर्य ......भूल अनजाने होती है न की जानते हुए तुमने गुरूअवज्ञा की है अपने गुरु के वचन की खिलाफ जा कर दूसरा तुमने एक डस्ट मानव को असुर बना दिया तीसरी गलती तुमने मेरी जूलिया पैर प्रहार किया एक बचे की बलि दे कर तुमने इस डस्ट पापी इंसान को तम्सिन सकतिया दिलवाई

अंतिम आवर सबसे बड़ी गलती गलती नहीं पाप किया जो तुमने मेरी चची के वस्त्र हरण किया

शिष्य 1 जल्दी से रुक्मणि जी विधि पे पैरो में घिर कर माफी मांगने लगता है पैर दोनों हे उसके मुँह पे लत मर दूर हो जाती है

ीदार विक्रम चूकते चीखते बेहोश हो गया सूर्य उसके सरीर से बहा रकत फिर से उसके सरीर में जाने का इशारा करता है आवर कुछ लाल चीटिया वह छोड़ देता जैसे हे चीटियों को खून की खुसबो मिली वो सब विक्रम के कटे हुए लिंग के उस भाग को काटने लगी विक्रम चिकटे हुए बेहोशी से बहार निकल उदार उदार दौड़ने लगता है

सूर्य .......इन से बच कर नहीं जा सकते विक्रम तुम अरे रुकू चची आप क्यों कड़ी है वह आराम से बेथ कर इनके कर्मो का भुगतान होते देखिये

रुक्मणि जी चुपचाप सोफे पे जा कर बेथ गई

सूर्य शिष्य 1 को उस्ता दिवार से लगा उसे हठी में गरम किले थोक देता है ऐसा हे वो पैरो के साथ करता

शिष्य 1 ......गुरुदेव मुझे बचा लीजिये मुझे क्षमा कर दीजिये गुरुदेव

सूर्य .......उन्हें कास्ट क्यों देते हो उन्होंने पहले तुम्हारा भाग्य मुझे सोंफ दिया है

सूर्य शिष्य 1 की सरीर को पूरा निर्वस्त्र कर देता है केवल एक शार्ट निकर उसके सरीर पे था

सूर्य मंत्र सकती से एक बॉक्स ले कर आता है उसे खोल शिष्य 1 को दिखता है

जिसे देखते हे भय के मारे शिष्य1 की चिकने गूंजने लगती है साथ hi निकर में से टैंगो से होते हुए पिसाब निचे गिरने लगता है

सूर्य .....ची ची गंदे कही के

शिष्य 1 ........ मुझे जान से मर दो पैर इन्हें मुझसे दूर रखो

सूर्य. ...... इतनी आसान मौत कैसे दे सकता हूँ तुम्हे तुमने जिसपे प्रहार किया जानते हो उसके गरब में मेरा बीटा पल रहा है तुम्हे उसे चोट पंहुचा

सूर्य उस को शिष्य 1 के सर पे खली कर देता है जिस में से बहुत अजीब बड़े बड़े डांक वाले दो मुझे कीड़े निकलते है जो शिष्य के सरीर पे अपने डांक मार मार कर उसके सरीर को काटने खाने लगते है

इन कीड़ो की विसेसता ये है की एक लिमिट में खाने के बाद ये दो मुँह वाले कीड़े एक से दो हो जाते है आवर दो से चार

शिस्य 1 केवल अपना सर हिला सकता था बाकि पूरा हईशा उन किलो ने दिवार से चिपका रखा था शिक्षा 1 की चीखो से रुक्मणि विधि को अपने कान बंद करने पड़े सूर्य ने उसका मुँह हे बंद कर दिया

रुक्मणि ...... बीटा तुम यहाँ कैसे पहुंचे

सूर्य ...... अभी भी आप नहीं सामजी चची जी

विधि सोफे से उठ कर सूर्य की गौड़ में आ बैठी

रुक्मणि जी .......कुछ तो आसाराम कर ले विधि

विधि ....... आप सब जानती है मम्मी फिर क्यों रोक रही है

सूर्य ......उनका कहना उचित है विधि भले हे उन्हें सब पता है पैर बड़ो का सम्मान हमें हमेशा करना चाइये

विधि ......ठीक है पैर मैं यही बेठुंगी

सूर्य ....... ठीक है पैर कोई शरारत नहीं

विधि ......ठीक है

सूर्य ........ चची जी बहुत कुछ है जो आप नहीं जानती मेरे बारे में आप क्या कोई भी नहीं जनता मेरे परिवार के अलावा अब आप भी उस परिवार का हईशा हो तो आपका हक़ भी है कन्ने का मैं कोई सदर्न इंसान नहीं हूँ ये मेरा दूसरा जनम है

अभी सूर्य आगे कुछ बोलता तभी वह सकती मल्टी सुमन मल्टी सास के साथ आ पंहुचा

सकती .....भाई इन्हें ले आया हूँ

सूर्य ...... नमस्ते दादी जी चची जी

m.saas .......जीते रहो बीटा क्या तुमने हे हमें उस हवन से बचाया बीटा

सूर्य .....जी नहीं दादी जी जिसने आपको बचाया उनमे से एक आपके सामने है आवर एक कही आवर है वो भी आ जायेगा

सकती ......दादी जी इनके कहने पे हे हमने आपके परिवार को बचाया था

सूर्य .......आपने सब देखा है दादी जी आवर उस दर्द को भी मह्सुश किया है जो यहाँ पे आपके अंश ने भोगा है इस लिया उसे दंड देने का हक़ सबसे पहले आपका है

दादी जी ........अगर मैं औरत न होती आवर एक मर्द होती तो उसके साथ भी वही करती

सूर्य ......... ठीक है फिर आपकी इच्छा मैं पूरी कर देता हूँ

सूर्य चुटकी बजता है यो दादी जी एक लम्बे तगड़े मर्द में बदल जाती है

सूर्य .......आवर आप दोनों क्या चाहती है

सुमन ........ मुझे भी मर्द बना दीजिये बड़ा वाला

सूर्य ........हाहाहाहा जी बिलकुल

सूर्य तीनो को मर्द बना देता है आवर उदार सकती वयोम को ग्रसित कर बहार लता है जो एक रूम खोद को बंद कर बचने की कोशिश कर रहा था

सूर्य .......तुमने अपनी हवश में अपनी हे बहन को बर्बाद करना चाहा आज तुम्हे पता चलेगा की कैसा लगता है जब तुम किसी की ेजात तर तर करते थे

सूर्य विक्रम को लड़की बना उन तीनो के हवाले कर देता है

सूर्य ......... क्या बात है बड़ी सोहनी लग रही है तू तो ले जाओ इसे आवर रात भर अपना गुस्सा अपना दर्द उसपे निकालो तुम्हे कौमार्य भोगना था न तो अब तुम हर बार उस दर से गुजरोगे जो पहली बार हर लड़की स्त्री बनते वक़्त भोगती है

तीनो फीमेल विक्रम को उठा कर एक रूम में ले जाते है आवर लॉक कर तीनो फीमेल विक्रम के तीनो छेड़ो में एक साथ उन 8,8 ,9,9 इंची मोठे काळा नीग्रो लैंड से चुके करना सुरु कर देते है साथ हे उसके मोठे मोठे चुके आवर कूल्हों को थपडो से लाल करने लगते है

विक्रम चीख भी नहीं सकता था क्यों की वह मेल मल्टी ने लौड़ा घुसाया हुआ था पीछे से मेल दादी लगी हुई थी छूट पे मेल सुमन अपने 10 इंची का लोंदा ठोके जारी थी बड़ी तेजी से

रुक्मणि जी .......ये सब क्या है बीटा आवर ये तो हमारे यहाँ काम करने वाले लोग है न

सूर्य ........ है चची जी पैर आपको नहीं पता विक्रम ने इनके साथ क्या करने वका था वो तो मैंने विक्रम पे नजर रखैल हुई थी तो समय रहते इन्हें सुरक्षित कर उनके अंश यहाँ छोड़ दिए

विधि .....मतलब की आप क्लोन भी बना सकते है

सूर्य .........है पैर क्लोन आवर अंश अलग अलग होता है अंश हमेशा हमसे सरीर आवर मानसिक रूप अहसास भावनाये इनसे जुड़ा रहता है वही क्लोन हमारे दिमाग से जुड़ा रहता है

सूर्य रुक्मणि जी को इन तीनो के साथ जो कुछ हुआ वो दृश्य दिखाए जिन्हे देख वो खुद को रोने से रोक नहीं पायी

रुक्मणि जी ......कोई इंसान इतना निर्दयी कैसे हो सकता है बीटा

सूर्य. .....पहली बात विक्रम इंसान सरीर से है बूढी आवर उसकी आत्मा आसुरी हो चुकी है जब वयोम विधि आवर गायत्री को विवाह के लिया लेने आया था तभी विक्रम के बारे में मुझे बताया था तब से मैंने वयोम को विक्रम की हर गतिविधि पे नजर रखवाली सुरु कर दी

रुक्मणि जी .......ये इसे क्या हो रहा बीटा

सूर्य ....... सायद इसकी सहन सकती ख़तम हो गई चची जी

रुक्मणि जी ......बीटा इसे ख़तम कर दो बाकि सजा इसे नरक में मिल जाएगी

सूर्य ........ठीक है चची जी

सूर्य एक रौशनी शिष्य 1 पे छोड़ता है जिस से उसका सरीर जलने लगता है

शिष्य1 ......आपका बहुत बहुत धन्यवाद जो आपने मुझे मुक्ति दी इस असुर योनि से

कुछ हे पल में वह केवल रख बची थी जो कुछ हे पल में वह से गायब हो गई

सूर्य........ वयोम उन दोनों को भी ले आओ जरा

सूर्य की कहने भर की हे देर थी वतन अजय के दोनी दोस्त 2,3 को वह ला पटका जोर से

सूर्य .......विधि ये तुम्हारे गुनहगार है जिसने तुमपे अपनी बुरी नजर डाली तुम इन्हें आसान मौत दे सकती हो अगर मैंने सुरु किया तो तड़पा तड़पा कर मरूंगा इन सबको

विधि सूर्य की तलवार उठाने हे वाली थी की सूर्य ने उसे रोक दिया

सूर्य. ....... इसे तुम नहीं छू सकती विधि ये तुम्हे हे चौथ पंहुचा देगी

विधि .... ऐसा क्यों

सूर्य .......क्यों की ये जादुई तलवार है इसे वही लोग उठा सकते जो मुझसे जुड़े हो आवर जादुई सकती धारक हो

विधि आगे भाड़ उस तलवार के सामने हाथ जोड़ उसे उठाने हे वाली थी की सूर्य तेजी से उस सोर्ड को बदल उसकी हे जैसे सदर्न सोर्ड वह रख देता है

विधि आराम से सोर्ड को उठाने पे बहुत खुश हो जाती है

सूर्य .....क्या बात है तुमने तो उठा ली सोर्ड अब इन दोनों के पेअर काट दो

विधि .......क्या ये मुझसे नहीं होगा

दोस्त ....2 हमें माफ कर दो गलती हो गई

दोस्त........ मैंने बोलै था सेल मत पन्गा ले मरवा दिया नहीं

सूर्य ........ वयोम ये लोग सुंदरनने वाले नहीं है इनके गुथनो के पास से पेअर काट दो आवर इनका प्रिवेट अंग भी आवर दोनों को फेंकू आओ उनके घर पे पैर सब भुला कर

वयोम .....जी भाई वो आपको घर पे सब वेट कर रहे है

सूर्य .......... Ok मैं जाता हूँ वैसे भी फीमेल विक्रम की तो अभी सजा सुरु हुई है उसने मेरे अपनों पे बुरी नजर डाली है

विधि तो इतने में खुश हो सूर्य के चेहरे पे चुम्बन करने लगती है

सूर्य .......देख रही हो रुकी चची आपकी लड़की की हरकत

रुक्मणि .......तुम जानो आवर ये जाने मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है बस तुम सब खुश रहो

सूर्य ........ चलिए आप लोग भी आज हमारी हवेली चलिए

रुक्मणि जी ........ पैर वो दीदी अकेले

सूर्य ........चिंता न करो सुबह मैं आपको ले चलूँगा हवेली वो भी खुश हो जाएँगी आवर विक्रम के बारे में या मेरी सचाई किसी को भी नहीं बतानी है

विधि ......अभी तक आपने पूरा बताया हे कहा है

सूर्य .....चलो सब बताऊंगा कल वाइट ड्रैगन कहा हो सामने आओ

कुछ हे देर में वो खूबसूरत वाइट ड्रैगन तीनो के सामने था

सूर्य .......ये है मेरा वहां मेरा वाइट ड्रैगन

सूर्य विधि आवर गायत्री को ले वाइट ड्रैगन के साथ अदृश्य हो सूर्यगढ़ निकल गया वाइट ड्रैगन पे दोनों को बैठना के पीछे सूर्य का एक उद्देश्य था की वो इन दोनों के दिलो दिमाग से बुराई को पूरी तरह मिटा दे आवर हुआ भी ऐसा हे सूर्य दोनों को ले हवेली की छठ पे उतरा आवर दोनों को पीछे से ला कर हवेली में आ गया जहा सभी लोग खाना खाने की तयारी में थे

शालिनी जी विधि आवर रुक्मणि जी को सकुशल देख बहुत खुश हुई विधि को आवर रुक्मणि जी को गले लगाने के बाद विधि को कोमल के साथ आवर खुद रुक्मणि जी को ले कर चली गई फ्रेश करवाने

सूर्य .......... लगता है माँ कुछ ज्यादा हे नाराज है इस जुली की बची ने मुझे हे फसवा दिया ये जरूर उसने हे कोई शेरनी की है अभी से बाप की गांड लाल करवाने पे तुला है अपने दादी के हाथो चल बीटा आयल लगा कर त्यार करले अपना पिछवाड़ा लाल करवाने के लिया ...............

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सूर्य .......ये है मेरा वहां मेरा वाइट ड्रैगन

सूर्य विधि आवर गायत्री को ले वाइट ड्रैगन के साथ अदृश्य हो सूर्यगढ़ निकल गया वाइट ड्रैगन पे दोनों को बैठना के पीछे सूर्य का एक उद्देश्य था की वो इन दोनों के दिलो दिमाग से बुराई को पूरी तरह मिटा दे आवर हुआ भी ऐसा हे सूर्य दोनों को ले हवेली की छठ पे उतरा आवर दोनों को पीछे से ला कर हवेली में आ गया जहा सभी लोग खाना खाने की तयारी में थे

शालिनी जी विधि आवर रुक्मणि जी को सकुशल देख बहुत खुश हुई विधि को आवर रुक्मणि जी को गले लगाने के बाद विधि को कोमल के साथ आवर खुद रुक्मणि जी को ले कर चली गई फ्रेश करवाने

सूर्य .......... लगता है माँ कुछ ज्यादा हे नाराज है इस जुली की बची ने मुझे हे फसवा दिया ये जरूर उसने हे कोई शेरनी की है अभी से बाप की गांड लाल करवाने पे तुला है अपने दादी के हाथो चल बीटा आयल लगा कर त्यार करले अपना पिछवाड़ा लाल करवाने के लिया ...............

अब आगे ............

सभी ने दीनार कर कुछ देर एक दूसरे से बात चित जो की ये रोज का काम था

सूर्य अपने रूम में जुली के साथ कुछ वक़्त बिता रहा था

जुली ........ आपको पता है आज वह क्या हुआ

सूर्य ...... है माँ ने मुझे बताया भने से याद आया तूने मुझे मरवा दिया न जुली मैंने मना किया था न अभी कुछ बाटने से

जुली ......मैं क्या करती ये सब इसका किया धरा है बाबा मुझे यहाँ छोड़ कर चले गए पैर आप एक बार भी मिलने नहीं आये मुझे खुद पता नहीं चला कब ये मुझे हावी हो कर ये कांड कर दिया

सूर्य ...... अभी जनम भी नहीं लिया आवर अभी से अपने हे बाप बजने में लगा

जुली ......ये आप कैसे बात कर रहे है

सूर्य ....... वह वह देखो तो जरा अभी जनम भी नहीं लिया आवर अभी से उसका पक्ष ले रही हो जानती भी हो न माँ का रवैया किस तरह का था आज ऊपर से स्वीटी ने वादा लिया है की मैं किसी का मंद रीड न कृ वैसे ये है कहा स्वीटी

जुली ....... हेहेहे आज वो नहीं आने वाली यहाँ वो विधि के साथ रुकी है

सूर्य ......... Ok कोई बात नहीं वैसे भी आज मुझे माँ के साथ सोना है उन्हें मानना भी तो कोई नहीं कल बात करता हूँ सुबह 5 बजे त्यार रहना

जुली ........ किश लिया

सूर्य ........ कल सुबह से सभी की ट्रेनिंग सुरु होने वाली है योग ध्यान अस्त्र शास्त्र की

जुली ...... इतनी सुबह

सूर्य ....... इतनी सुबह से क्या मतलब अगर तुमने खुद की इन्द्रिय को जागृत नहीं किया तो ये नन्हा शैतान तुम्हारे जरिये रोज मेरी बजायेगा ये ऐसा है तो पता नहीं स्वीटी से जो होगा वो कैसा होगा वो तो आवर ज्यादा नटखट चंचल मस्तीखोर है

जुली ........ हेहेहे अच्छा है यही आपको सुधर सकते है

सूर्य ...... क्या यार मैं कहा बिगड़ा हुवा हूँ जो ये सुधरेंगे

मानसी रूम में आते हुए

मानसी .....क्या बाते हो रही है अकेले अकेले में

सूर्य मानसी को भी खींच कर अपने बराबर लेता लेता है

जुली ...... हम तो कुछ कर नहीं सकते दीदी पैर आपका no. लगने वाला है जल्दी हे

मानसी ........ इस मामले में तुम हम सब से आगे हो जुली

सूर्य मानसी को पलट कर अपने ऊपर ले लेता

जुली .....आप ोग लगे रहो मैं कपडे चेंज करके आती हूँ

सूर्य मानसी को किश करते हुए आज खुद से मानसी की 34 साइज की नरम घोष से भरी चूचियों भी दबाने लगता है

ऐसा पहली बार मानसी की साथ हुआ था की सूर्य खुद से किश से आगे भाड़ा था मानसी आसाराम आवर उत्तेजना के मिले जुले मज़े में न जाने कब सूर्य की कमर पे बेथ इलास्टिक वाली पजामी के साथ हे सूर्य के नागराज पे अपनी कोमल कोमल नाजुक निचे के दोनों लिप्स रगड़ते हुए झड़ने लगती है

उदार जूलिया कपडे चेंज करने के बाद बाथरूम के दूर से ये सब देख मुस्कुरा रही थी

कुछ हे देर में मानसी चरम सुख प्राप्त कर निढाल हो गई सूर्य के सीने पे

जुली ...... वह वह क्या बात है दीदी आपने तो किश में हे पूरा मज़ा ले लिया

मानसी जुली की आवाज सुन तेजी से उठ बाथरूम में जा गुस्सी जुली की नजर सूर्य के शार्ट पे पादरी है जो पूरी तरह से उभरा हुआ था आवर मानसी की योनि राश से आगे का कुछ हिस्सा भीगा हुआ था

जुली ...... इस चेंज कर लीजिये आवर अब जाइये बाकियो से भी मिल लीजिये

सूर्य ......जरा अलमारी से दूसरा शार्ट देना तो

सूर्य वही कड़े खड़े अपना शार्ट उतर देता है निचे खुश पहना नहीं था जैसे हे जुली पलटी उसकी नजर हवा में अंगड़ाई लेते नागराज पे पादरी है

जुली ...... ची बचे के सामने कैसे खड़े हो

सूर्य .....मैं तो अपने होने वाली बीबी के सामने खड़ा हूँ

जुली ......ये लीजिये जल्दी से पहन लीजिये

सूर्य शार्ट पहन जुली को एक छोटा सा किश कर जाते जाते उसकी मुनिया को भी सहला जाता है

जुली ......इस्स्स्सस्साःह्ह्ह्ह क्या करते हो जी

सूर्य .....चेक कर रहा हूँ की भीगी है सुखी है पैर ये तो भीगी हुई है

सूर्य हस्ते हुए बहार निकल गया सामने हे कोमल आवर अलीना मिल गई जिन्हे किस कर सुबह के बारे में बता कर राधा मेर्री जी से मिल सूर्य विधि आवर किरण से कुछ देर बात चित कर किरण को किस कर जाने लगा तो किरण ने हे उसे रोक कर इशारा किया तो देखा की विधि बड़े प्यार से सूर्य की आवर देख रही है

किरण ........ जाइये कुंवर जी

किरण का इशारा समाज सूर्य विधि के पास जाता है

सूर्य को अपने पास देख विधि पीछे खिसकने लगती है

किरण ......मैं पानी ले कर आती हूँ

किरण के बहार निकलते हे सूर्य विधि को गौड़ में उठा कर बीएड पे लिटा खुद उसके ऊपर आ जाता है आवर अपने होंठ विधि के कांपते होंटो से लगा देता है

विधि सरम से अपनी आँखे बंद कर लेती है

सूर्य किश योर विधि को देखता है

सूर्य ......आँखे खोलो विधि वार्ना मैं किश नहीं करूँगा

विधि न में गर्दन हिला देती है आवर अपने दोनों हाथो में सूर्य का चेहरा थम खुद से हे अपनी होंठ सूर्य के होंटो से लगा देती है कुछ देर किश करने के बाद सूर्य गुड नाईट बोल निकल गया

विधि ुशी तरह आँखे बंद किये लेती आवर उसके होंठ ुशी तरह चल रहे थे हवा में जैसे वो अब्बी भी सूर्य को किश कर रही हो

किरण .....ुह्ह्ह्ह ुण्णं वो जा चुके है अब सपनो की दुनिया से बहार आ जाओ विधि

विधि .....वो वो

किरण ....... मुझे सब पता है विधि तुम छह रही थी की वो तुम्हे भी किश करे पैर तुम मेरी वजह से दर रही थी की मैं क्या सो सोचूंगी तो मुझे सब पता है जो भी लड़की इनके जीवन में आती है तुम या गायत्री अकेली नहीं हो जुली मानसी सपना दी राधा बुआ अलीना दी कोमल दी पायल दी प्रीती दी सोफिया सब उनसे प्यार करती है आवर भी जो लोग परीलोक जिनलोक आवर प्रेतलोक में है

विधि ........क्या इतनी साडी आवर आपको सब पता है

किरण ....... प्यार पाने का हक़ सभी को होता है विधि तुम्हे मना करने का एक कारन ये भी था इनका

इनको लगा की तुम या गायत्री इनकी सचाई जान कर इन्हें हे गलत समजेंगी न तो ये कोई सासाराम इंसान है आवर न हम सब जिनके बारे में बताया है तुम्हे

विधि ....... मुझे बस इनका थोड़ा सा प्यार चाइये दीदी आवर कुछ नहीं चाहे ये मुझसे सदी भी न करे बस एक दासी की तरह अपने साथ रखे तो भी बहुत है मेरे लिया

किरण...... इनके कुछ समय दो खुद से इन्हें फैसला करने दो जो भी करेंगे अच्छा हे करेंगे चलो अब सो जाओ वैसे भी कल वो हवेली जा रहे है न तुम्हारे साथ

विधि .....जी दीदी

उदार सूर्य अपनी माँ के रूम में पंहुचा तो वह रुक्मणि जी आवर मेनका जी भी मौजूद थी

सूर्य ......hello बुआ डार्लिंग अभी तक आप सोई नहीं क्या आवर रुकी चची जी आप भी जग रही है

मेनका जी ....... देख रही हो शालिनी ये मुझे बुआ डार्लिंग बोल रहा है तुम्हारे सामने हे

शालिनी जी ...... वो जाने या आप जानो दीदी मुझे कोई मतलब नहीं

सूर्य ....... ये क्या बात हुई बुआ डार्लिंग आपकी छोटी भाबी आपके बर्फ से कुछ ज्यादा हे नजर है

शालिनी जी ........ उदार आ जरा तू

सूर्य .......नहीं आप फिर मुझे मारेंगी माँ

मेनका जी ......फिर तुम ऐसे काम करते हे क्यों हो की तुम्हारी पिटाई हो

सूर्य .......आपको कल देखता हूँ बुआ सा मैं यहाँ माँ को मन रहा हूँ आवर आग है की आवर गुस्सा दिला रही है इन्हें

सूर्य मेनका जी को साइड कर उनकी जगह बेथ सीधा अपने माँ को गेम लगा लेता है

शालिनी जी कुछ देर चटपटे फिर संत हो गई जैसे उन्हें यकीं हो गया की वो सूर्य की जकात से निकल नहीं सकती

संत तो हो गई पैर भी भी उन्होंने कुछ बोलै नहीं था

सूर्य उन्हें मानाने की लिया उनके माथे पे किश करता है पैर कोई असर नहीं सूर्य एक गाल को चूमता है तो शालिनी जी के चेहरे पे हलकी चमक उभरी सूर्य जैसे हे दूसरे गाल पे किश करता है शालिनी जी आना चेहरा गुमा लेती है आवर यही सूर्य के होंठ आधा गाल पे आवर आधा शालिनी जी के होंटो पे किश हो जाता है शालिनी जी के पुरे सरीर में सनसनी से दौड़ गई

सूर्य ....... माँ सॉरी न अब माफ भी कर दो न देखो कान पकड़ता हूँ

शालिनी जी ......ये मेरे कान है अपने पकड़

सूर्य ......वो तो आप हे पकड़ सकती है

सूर्य मस्ती करते हुए अपने कान उनके नजदीक करता है पैर शालिनी जी जैसे पहले से त्यार थी फ़ौरन सूर्य के कण खींच देती है

सूर्य .....ोुक्कवह माँ दर्द होता है

शालिनी जी ....... आगे से ऐसा कभी करेगा बोल

सूर्य ..... सॉरी न माँ पैर ये जरुरी था अगर आपने मुझे माफ किया तो आपको आवर कुछ भी बताऊंगा

शालिनी जी .......आवर अगर नहीं किया तो नहीं बताएगा क्या बोल

रुक्मणि जी .....बहन जी छोड़ दीजिये सूर्य को दर्द हो रहा होगा

सूर्य रुक्मणि जी को ना में इशारा करता है की प्लेसेस कुछ मत बोलिये

मेनका जी भी डेरी से हाथ सभा उन्हें संत रहने का इशारा करती है

शिव जी ......अरे भाई आप सब यहाँ पे आवर तुम क्या कर रहे हो बर्खुदार

सूर्य ......आप यहाँ क्या कर रहे है आज आप गेस्ट रूम में देख लीजिये अपने सोने की जगह

शिव ....... अरे यार मैं तो अपने नाईट के कपडे लेने आया हूँ

शालिनी जी .....रुकिए मैं देती हूँ आपको

शिव .....नहीं तुम रहने दो शालू मैं निकल लूंगा

सूर्य ......वो डैड आपसे कुछ जरुरी बात करनी थी

शिव ......क्या बात है बीटा

सूर्य ........डैड वो मैंने माँ के नाम पे एक फ्री चैरिटेबल हॉस्पिटल खोलने का सोचा है

शिव .......ये तो अच्छी बात है बीटा कहा खोलने को सोची है

सूर्य ......डैड वो u.s.a में आपके काफी कांटेक्ट है तो कोई सिटी में अच्छी जगह हो जहा हॉस्पिटल खोला जा सके

शालिनी जी .......क्या u.s.a में पागल हो क्या पता भी है कितना पैसा लगेगा वह हॉस्पिटल खोलने में

सूर्य ......जनता हूँ माँ काफी पैसा लगेगा उसकी चिंता नहीं है बस हॉस्पिटल ा1 हो आवर अच्छी जगह पे हो

शिव ....... तो तुमने सब सोच लिया है तो ये भी सोचा होगा की होगा कितना अमाउंट खरच होगा एक ा1 हॉस्पिटल पे

सूर्य ....जी डैड आवर पैसो की चिंता नहीं है पैर साथ में हे एक चैरिटेबल ट्रस्ट्स भी खोलना है जिस से लोग हॉस्पिटल में दोनेतितों आदि दे सके

सूर्य एक पेन पीपर ले उसपे कुछ लिख कर शिव को देता है

शिव ......ये किसका अकाउंट है

सूर्य ....... मेरा हे है डैड इसमें काफी अमाउंट है जितना खर्च हो उसे में को आवर बाकि जो भी बचे उस का किसी आवर अच्छे काम में उसे कर सकते है

शिव वही अलमारी से लेपटॉप निकल अकाउंट चेक करता है तो उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है

शिव ....... इतना बड़ा अमाउंट

सूर्य ......सब उसे में लेना है हॉस्पिटल अनाथ आश्रम वृद्धा आश्रम आदि में बाकि आप देखो चाहो तो फिर से बिज़नेस स्टार्ट कर सकते है कोई भी जिसके प्रॉफिट से ये सभी फ्री सेवागे सभी को मिलती रहे

मेनका जी ......ठीक है फिर जो हमारी कंपनी है वह उसका भी रउरा प्रॉफ़िट्स इन्हें अच्छे कामो के लिया उसे करो

शालिनी जी ....... आप मेरे नाम की जगह माँ सा या भौजी का नाम से ये सब काम सुरु करवाई ये

सूर्य ......हॉस्पिटल पे आपका नाम हे रहेगा बाकि जगह डैड बड़े पापा आवर बड़ी मम्मी का होगा यहाँ इंडिया में जो भी ऐसा काम होगा वह दादा जी दादी जी बुआ जी इन सभी का अब आप सब लोग जाइये मुझे नींद आ रही है

शालिनी जी ......तो जा न अपने रूम में

सूर्य ......... मैं यही सोने वाला हूँ माँ

कुछ देर आवर बात चित के बाद शिव मेनका जी रुक्मणि जी तीनो सोने चले गए

शालिनी जी भी नाईट ड्रेस बदलने बाथरूम में चल दी ीदार सूर्य रूम को लॉक कर अपनी t-shirts निकल शार्ट में आराम से लेट जाता है

कुछ 15 मिनट्स बाद शालिनी जी नाहा कर बहार निकली





शालिनी की नजर सूर्य पे पड़ी जो आराम से लेता हुआ छठ को देख राग था

शालिनी जी .....अभी तो कह रहे थे की नींद आ रही है

सूर्य ......वो माँ नींद तो आ रही है पैर आप साथ सोना है मुझे काफी दिन हो गए आपके साथ चैन से सोये हुए

शालिनी जी ......ठीक है तुम उस तरफ मुँह करो

सूर्य ......क्या हुआ माँ

शालिनी जी .....कहा न उस तरफ मुँह करो जब तक मैं न कहूं ीदार मत देखा

सूर्य वैसा हे करता है ीदार शालिनी जी अच्छे से चेहरे हाथ पैरो पे कोई क्रीम लगाती है

एक बार सूर्य को पलट कर देखती तो सूर्य का मुँह दूसरी तरफ देख सामने से निघटजोन की दूर खुल अपनी ब्रा को ऊपर कर अपनी 36 की चूचियों पे सच्चे से क्रीम लगा पेट आवर जांघो के जोड़ पे क्रीम लगा कर ऊपर की दो डोर बंद लेती

है

आवर बालो में कुछ लगा कर बड़ी लाइट हैंड कर सूर्य के बगल में जा कर लेट जाती भाई आवर बीएड लैम्प्स जला देती है जिस से हलकी रौशनी पुरे रूम में फ़ैल जाती है

सूर्य शालिनी जी के बीएड पे लेट ने के साथ हे अपने जगह से खिसक कर अपने माँ शालिनी जी से चिपक जाता है अभी अभी लगाई क्रीम की खुसबू शालिनी जी के पुरे बदन को महका रही थी

सूर्य ......उन्न्नन्न्न्नन

शालिनी जी ......क्या हुआ सूर्य

सूर्य ......... कुछ नहीं माँ आपने जो क्रीम लगाई उसकी खुसबू बहुत प्यारी है

शैलिंज जी ......चुप चाप लेट जा

सूर्य ......सॉरी न माँ मैं क्या करता गुरुदेव का आदेश था की जब तक विवाह नहीं होता ये बात गुप्त रहनी चाइये की जुली प्रेग्नेंट है

शालिनी जी ......मुझे तो बता सकते थे न मैं किसी को थोड़े बताने वाली थी

सूर्य ...... अच्छा फिर बड़ी मम्मी को किसने बताया इस बारे में

शालिनी जी .....वो तो दीदी उस वक़्त आ गई तो मुझे सच बताना पड़ा वर्ण मैं क्या जबाब देती उन्हें की मैं ऐसे बचो के जैसे क्या कर रही थी

सूर्य ......पता है वो कितनी नाराज हुई कैसे उन्हें मान्य

शालिनी जी ....... तुम आवर कुछ भी बताने वाले थे न

सूर्य .....मैंने ऐसा कब कहा

शालिनी जी .....बताते हो या अभी कान खीचू तुम्हारे

सूर्य ........ वो आपको एक सच आवर बताना था पैर

शालिनी जी .......पैर क्या

सूर्य ....... वो राधिका भाबी मेरे बचे की माँ बनने वाली है

शालिनी जी ......क्याआ कहा तुमने

सूर्य .......पहले मेरी बात सुन लीजिये पूरी

सूर्यक अपनी माँ को पूरी घटना बाटता है की क्यों उसे ऐसा करना पड़ा आवर क्यों वो ये सब बता रहा है

दरशल राधिका की खवाहिश थी की बच्चा यही हवेली में हो आवर सबसे पहले शालिनी जी हे उसे गौड़ में ले

शालिनी जी ...... एक तरह से तुमने राधिका बेटी को जीवन भर की खुशियां दी है पैर रोहन का नहीं सोचा तुमने जब जब वो तुम्हारे बेटे को देखेगा उसे अहसास होगा की वो उसका बीटा नहीं है

सूर्य ....... इसका भी मैंने सोचा है माँ मैंने वयोम को बोल कर इस बच्चे से जुडी सभी यादें रहन भाई की मितवा दी है आवर उन्हें ठीक भी कर दिया है

शालिनी जी .....ये क्या किया तुमने अब अगर उसने राधिका बेटी से सम्बन्ध बनाये तो मैं पहले कह देती हूँ मुझे मेरे पोते में मिलावट नहीं चाइये

बात करते करते न जाने कब शालिनी के हाथ सूर्य की नंगी पीठ पे चलने लगे जिस से सूर्य का नाग भी हल्का हल्का सुरूर में आ रहा था पैर अभी दोनों का ध्यान उस आवर नहीं था

सूर्य ...... उसका इंतेज़ाम मैंने कर दिया है माँ रोहन भाई को छुट्टी नहीं मिलने वाली जब तक राधिका भाबी बचे को जनम न दे दे

शालिनी जी ...... एक बात बता तुम्हारे सम्बन्ध मेनका दीदी से भी है न आवर मेर्री से भी

सूर्य ...... वो वो माँ

शालिनी जी .....मैं नाराज नहीं हूँ पैर सच बता मुझे की ये सब हुआ कैसे

सूर्य ......जब हमें हरे पिछले जनम की यादें मिली थी तब उन्हें ये भी पता चल गया की पिछले जनम में मेरे आवर उनके शारीरिक सम्बन्ध बने थे

मेर्री जी वो पहले लड़की थी जिनके साथ मैंने ये सम्बन्ध बनाये ये उनकी हे जिद थे की वो अपना को मर्या मुझे सौंपे मेरा आवर उनका दोनों का पहली बार दिल्ली में मिशन लॉयलटने के बाद सम्बन्ध बना था

शालिनी जी .......तो वो मेरी थी जिसने तुम्हे लड़के से मर्द बनाया वैसे बहुत पहाड़ी बची है

सूर्य ......वो विजय मां जी से प्यार करती है माँ आपको हे मेर्री से बात कर इनकी सदी करवाई है

शालिनी जी .....बेचारा मेरा भाई खजाना भांजे ने पहले हे लूट लिया मां हाथ हिलता रह गया

सूर्य .....इसमें मैं क्या करता माँ उनकी हे जिद थे अब उनकी सदी मुझे तो हो नहीं सकती ऐसे में उन्होंने अपने प्यार प्याने का यही रास्ता निकला पैर मैं भी चाहता हूँ की उनकी सदी हो पैर उनकी इच्छा से वो 33 साल की हो चुकी है

शालिनी जी .......ठीक है मैं बात करती हूँ उम्म्म्म गुड नाईट इस्स्स्सस्छ्हःहः

जैसे शालिनी जी सूर्य से चिपक उश्के माथे पे किश करती है ठीक उसे वक़्त उनकी योनि पे सूर्य के लिंग मुंड का दबाव पड़ता है

अनजाने में शालिनी जी निचे हाथ ले जा कर देखती है तो सूर्य के नागराज का फैन उनके हाथो में था

सूर्य आवर शालिनी जी दोनों के मुँह से सिसकारी निकल जाती है

शालिनी जी सूर्य के लिंग को एक दो बार दबा कर देखती है पैर जैसे हे दबती है वैसे हे वो आवर फुफकारता है

ीदार सूर्य भी जैसे किसी सम्मोहन में बंद शालिनी जी के होंटो से अपने होंठ जोड़ देता है जैसे हे सूर्य निचले होंठ को अपने होंटो में भर खींचा है एक अदृश्य तरंग होंटो से होते हुए शालिनी जी की योनि पे पर्वत करती है शालिनी जी की कमर अपने आप हे आगे हो अपनी योनि को लिंगमुंड से सत्ता देती है.

कुछ देर बाद शालिनी जी सूर्य को अपने ऊपर खींच लेती है

दोनों को कोई होश नहीं था की वो क्या कर रहे है

शालिनी जी निरंतर सूर्य की जुबान चुस्त हुए अपने हाथ से सूर्य की कमर को अपनी योनि पे दभा रही थी थी

सूर्य का हाथ न जाने कब उस रेशमी गाउन पे फिसलते हुए डोरी को खींच शालिनी जी की मुलायम पेट पे थिरकने लगता है

अपने नंगी नाभि पे सूर्य के मरदाना हाथ को मह्सुश कर शालिनी जी सूर्य के कूल्हों पे से हाथ हटा उसकी शार्ट में दाल उन संकट खुले को दबाते हुए अपने हलके नाख़ून से कुरेदने लगते है

अनजाने में शालिनी जी के उँगलियाँ सूर्य के गुदा द्वार को कुरेद देती है

सूर्य का हाथ सीधा शालिनी जी की ब्रा में कैद 36 की चूचियों पे जा कसबे अब खुद सूर्य अपने कमर चलते हुए अपने लिंग का पर्वत गीली योनि पे कर रहा था साथ हे उन कोमल स्तनों का मर्दन भी

शालिनी जी की संशे उखाड़ने लगी तो उन्होंने किश गौड़ दिया पैर सूर्य रुका नहीं बल्कि वो शालिनी जी की गर्दन को चूमते हुए हलके हलके काटने लगा शालिनी जी कमुख आहे भर्ती हुई सूर्य को आवर काश लेती है

आवर खुद से निचे की डोरी खोल सूर्य के हाथ को अपनी योनि पे ले जा कर रख देती है

जहा कुछ आदिक गीलेपन की वजह से वो नरम कपडे के पेंटी पूरी चिपकी हुई शालिनी की की योनि के उभर को दर्शक रही थी

सूर्य पेंटी में हाथ दाल योनि लिप्स का जायजा ले अपने बिच वाली ऊँगली जैसे हे शालिनी जी की योनि में डालता है एक हलकी कछ्छछ्ह कर के आवाज होती है आवर अगले हे पल शालिनी जी के दन्त सूर्य की गर्दन पे किस वैम्पायर के जैसे गधे हुए थे शालिनी जी का पूरा बदन सूखे पते की तरह कैंप रहा था

जैसे हे शालिनी जी के दांतो से सूर्य को दर्द हुआ सूर्य फ़ौरन होश में आ गया वास्तविकता का अहसास होते हे वो पीछे हटने लगा पैर शालिनी जी के मजबूत पका से बहार नहीं निकल पाया

जब तक शालिनी जी मल्टिपल ओर्गास्म का पूर्ण मज़ा न ले पायी

जैसे हे पकड़ ढीली हुई सूर्य फ़ौरन बीएड से उठ खड़ा हुआ

सूर्य ......सॉरी माँ मुझे माफ कर दीजिये पता नहीं मैं कैसे खुद को रोक नहीं पाया मुझे माफ कर दीजिये

शालिनी जी बीएड से उठ सूर्य के सामने जाती है जिसके हाथ जुड़े हुए थे आवर गर्दन जुख़ी हुई थी

शालिनी जी सूर्य के हाथ अलग कर उसका चेहरा ऊपर करती है तो सूर्य का पूरा चेहरा आंसुओ से भीगा हुआ था

शालिनी जी ...... देख जो कुछ भी हुआ उसके तुम्हारे अकेले की गलती नहीं है

सूर्य ....नहीं माँ ये सब मेरी गलती है मैंने खुद को रोका नहीं पता नहीं मुझे क्या हो गया था

शैलिंज जी .......प्यार क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करते ीदार देखो मेरी आँखों में

सूर्य गर्दन न में हिला देता है

शालिनी जी सूर्य का चेहरा ऊपर कर उसके बहते हुए आंसू पे जाती है आवर खुद अपने होंठ सुर्यबके होंठ से लगा देती है सूर्य पीछे हटने की कोशिश करता है पैर हैट नहीं पता सूर्य को ये बड़ा अजीब भी लग राग था वही शालिनी जी द्वारा किश करना अच्छा भी लग रहा था

शालिनी जी ..... चल बीएड पे लेट जा आवर सब कुछ भूल जा क्यों की मैं भी यही चाहती हूँ तुम मुझे भी जैसा प्यार अपनी बुआ से करते वैसे हे मुझे करो अब एक सबद नहीं

सूर्य चिप चाप जा कर बीएड पे लेट जाता है शालिनी जी उसे फिर से अपने चिपका सर सहलाने लगती है

ीदार रम के बहार से कोई साया जो इन्हें देख रहा था वो गायब हो गया

परीलोक .........

गुरुदेव ....... माफ करना पुत्र सूर्य तुम्हे इस तरह विवश करने के लिया परतु यही एक मार्ग है पुत्री शालिनी को हमेशा के लिया तुम्हारे साथ रखने का

पुत्री किरण तुम्हारी सबसे बड़ी सकती है वही पुत्री शालिनी तुम्हारी सबसे बड़ी कमजोरी

रानी पारी ....... मुझे कुछ ठीक नहीं लग राग गुरुदेव मैंने पुत्र सूर्य को जिस तरह अपनी सकती से विवश किया शालिनी जी के साथ मिलान के लिया क्या ये इतना आवशयक है

गुरुदेव ....... मैं जनता हूँ आपने जो किया अभी अभी आप उस से आहात है किन्तु ये आवशयक है पुत्र सूर्य अपनी सभी कमजोरियों पे विजय प्राप्त कर चूका है किन्तु ये एक ऐसे कमजोरी है जिसने मिटाया तो खुद पुत्र सूर्य मिट जायेगा या फिर वो कुछ ऐसा कर बैठेगा जिसके चलते नियति खुद उसे मिटा देगी

रानी पारी .......ये सब मेरी गलती है गुरुदेव अगर मैंने अपना कार्य ठीक से किया होता तो ये सब घटनाक्रम आरम्भ हे न हुआ होता

गुरुदेव ...... नहीं ये सत्य नहीं है रानी पारी आप केवल निमित मात्रा है जो होना है वो हो कर हे रहता है उसे हम रोक नहीं सकते

आप महल लौट जाइये सुबह मैं पुत्र सूर्य से भेंट करने परतविलोक जा रहा हूँ वही इस विषय पे कुछ निर्णय लूंगा आप भी पुत्री शालिनी से इस विषय में बात कीजिये आप एक स्त्री है आप उनसे खुल कर बात कर सकती है जो की मेरे गरिमा की विपरीत है

रानी पारी .......जी गुरुदेव वैसे भी पुत्री रिद्धि आवर पुत्री पारिजात परतविलोक जाने की जिद कर रही है

गुरुदेव .....उचित है उन्हें भी अपने बहनो से मिलने की अधिकार है उनकी भी इच्छा पूर्ण हो जाएगी

रानी पारी गुरुदेववसे आज्ञा ले लूट गई रानी महल

वही रात में सूर्य के सोने के बाद कुछ देर बाद शालिनी जी भी वैसे हे सो गयी सूर्य से लग कर .............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ................

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ......................
 
अपडेट. 221

आप महल लौट जाइये सुबह मैं पुत्र सूर्य से भेंट करने परतविलोक जा रहा हूँ वही इस विषय पे कुछ निर्णय लूंगा आप भी पुत्री शालिनी से इस विषय में बात कीजिये आप एक स्त्री है आप उनसे खुल कर बात कर सकती है जो की मेरे गरिमा की विपरीत है

रानी पारी .......जी गुरुदेव वैसे भी पुत्री रिद्धि आवर पुत्री पारिजात परतविलोक जाने की जिद कर रही है

गुरुदेव .....उचित है उन्हें भी अपने बहनो से मिलने की अधिकार है उनकी भी इच्छा पूर्ण हो जाएगी

रानी पारी गुरुदेववसे आज्ञा ले लूट गई रानी महल

वही रात में सूर्य के सोने के बाद कुछ देर बाद शालिनी जी भी वैसे हे सो गयी सूर्य से लग कर .............

अब आगे .............

परीलोक ......... आज परीलोक के पारी महल में सूर्यौदय से पूर्व हे हलचल होने लगी थी

रिद्धि किसी नवविवाहिता के जैसे सजी हुई थी वही पारिजात अभी भी अपनी मुख्या दसियो के संग सामने स्वर्ण में लगी हुई थी

जिनिशा जीनत दोनों अपने अपने लोक में थी अन्यथा ज्यादातर समय उनका भी पारी महल में या फिर सूर्य महल में हे वयतीत होता था

रानी पारी ......... पुत्री पारिजात मन की जहा हम जा रहे है वो ससुराल है तुम्हारा किन्तु अभी उसके समय है

अभी से इतनी सज सजा की आव्सय्कता नहीं पुत्री

पारिजात ........ रानी माँ हम जानते है किन्तु हम पहली बार वह जा रहे है क्या इतना श्रृंगार करना उचित नहीं हमारा

रानी पारी ........ पुत्री हम केवल परिहास कर रहे है किन्तु सिगरता करो पुत्री

पारिजात ........ जी रानी माँ गुरुद्गुरुदेव महल पधार चुके है क्या

रानी पारी ....... वो अभी परबु की पूजा पूर्ण कर पधारे हे होंगे पुत्री

कुछ हे देर में पारिजात उर्फ़ परिधि अपने कक्ष से निकलती है जो बहुत हे पहाड़ी लग रही थी वाइट ड्रेस में

( पारिजात के स्थान पे कोई आवर होती तो अवश्य ुश्कि खूबसूरती की तुलना पारी से करता किन्तु यहाँ तो खुद पारी थी उसकी तुलना किस से कृ हाहाहा )

रानी पारी पारिजात रिद्धि तीनो आज पहली बार कही एक साथ जा रही थी वो भी बिना अपने अंगरक्षकों के बिना सेविकाओं के

कुछ हे देर में गुरुदेव भी पूजा आदि पूर्ण कर पारी महल आ पहुंचे

चारो वह से गायब हो निकल गए सूर्यगढ़ की आवर

सूर्यगढ़ .........

सुबह के कोई 5 बजे सूर्य की आँखे खुली तो अपने सीने पे उसे हल्का बजन मह्सुश हुआ जब गौर से देखा तो ये शालिनी जी थी जो पूरी तरह सूर्य को अपनी बहो में बकरे हुए थी आवर उनका एक पेअर सूर्य के प्राइवेट part के ऊपर से सूर्य को जकड़े हुआ था

सूर्य हलके से शालिनी जी के माथे को चुम उनकी बहो से मुक्त हो उन्हें आराम से बिना उनकी नींद में किसी तरह की खलल के उन्हें लिटा क्र उनके बहार निकल चूचियों को अंदर कर निघ्त्य की डोरिया फिर से बांड उनपे पतली चादर दाल हलके से होंठ चुम कर फ्रेश होने बाथरूम की आवर चल दिया

सूर्य के अंदर जाते हे शालिनी जी अपनी आँखे खोल एक बार बाथरूम की आवर देखती जिसने बंद देख उनके होंटो पे हलकी मुस्कान आती

एक बार अपने सीने को सहला कर शालिनी जी पास में पड़े पिलो को उठा अपनी दोनों जंगो के बिच अपनी योनि से सत्ता कर फिर से मुस्कुराते हुए आँखे बंद कर लेती है

सूर्य फ्रेश हो किरण कोमल पायल प्रीती अलीना राधा मेर्री जी मंडी जूलिया को उठा उन्हें फ्रेश हो ध्यान करने के लिया बोलता है आवर सीधा सूरजगढ़ जा पंहुचा प्रिय जी के रूम में

जहा प्रिय जी उठ चुकी सूर्य ने गौर किया तो बाथरूम से आती आवाज सुन वो समाज गया की बड़ी ममी जी अंदर है किन्तु इन सब से बेखबर सपना अभी भी चैन से सोये हुए

सूर्य बिना किसी आवाज के बीएड पे जा पंहुचा आवर आहिस्ता से सपना को सीधा किया जो करवट ले कर सोई हुई थी

कुछ देर सपना को निहारने के बाद सूर्य उसके चेहरे पे जयकहता हुआ जैसे हे सपना के होंटो से अपने होंठ चूसने वाला था सपना ने उसकी गर्दन में अपने बहे कस्ते हुए सूर्य को किश करने लगी

कुछ देर बाद सपना ने हे किश योर कर अपनी झील से गहरी आँखों से सूर्य को निहारने लगी

सूर्य ....... गुड मॉर्निंग सपना

सपना ......... उम्मम्मम्हा गुड मॉर्निंग जान आज सुबह सुबह हमारी बहो में कैसे आना हुआ जीजा श्री

सूर्य भी मस्ती करते हुए सपना की घोष उभर पे हाथ रख

सूर्य .....सोचा बीबी का तो सब चेक कर लिया अब बीबी की बहन का भी कर लूँ क्या कहती हो

सपना ........ इतनी भी क्या जल्दी है पीछे आपकी बड़ी सास कड़ी है

सूर्य जल्दी से सपना के ऊपर से उठ कर पीछे देखता है तो वह कोई नहीं था

सूर्य .......सपना की बची रुक तू जरा

सूर्य अभी सपना की फिर से दबोच ने हे वाला था की तभी बाथरूम का डोर खुला आवर उसने से प्रिय जी निघ्त्य में अपने बालो को टॉवल से सिखाते हुए बहार निकली

सूर्य ....... गुड मॉर्निंग बड़ी मम्मी

प्रिय जी .......गुड मॉर्निंग बीटा सुबह सुबह यहाँ पे कैसे बीटा

सूर्य आगे भाड़ प्रिय जी को प्रेम से गले लगता है आवर उनके दोनों गलो को चुम लेता है जिसमे केवल माँ बेटे जैसा प्यार था कोई गलत भावनाये नहीं

सूर्य ....... वो बड़ी मम्मी सपना को लेने आया हूँ अब से हर रोज इशू समय इसे लेके जाया करूँगा क्यों की इसे अपनी बाकि बाँहों के साथ ध्यान अस्त्र शास्त्र की शिक्षा भी लेनी है

प्रिय जी .......ठीक है बीटा दोपहर को मैं घर आती हूँ स्वीटी को लेने के लिया अब वो कुछ दिन यही रहने वाली है

सूर्य ......जी बड़ी मम्मी जैसा आप ठीक समजे आवर आप जरा जल्दी से फ्रेश हो जाये वो सब भी त्यार है

ीदार सपना बाथरूम में फ्रेश होने चली जाती है आवर सूर्य कुछ देर प्रिय जी से बात चित करने लगता

कुछ देर बाद सपना त्यार हो कर सूर्य के साथ सूर्यगढ़ निकल गई

जहा पहले हे सब लोग त्यार थे सपना को देख सभी खुश होते है आवर सब एक एक कर गले मिलते है

सूर्य ........ यहाँ सभी का एक साथ ध्यान करना संभव नहीं हम सब वही ढकते है जहा मैंने ध्यान लगाना सुरु किया था

किरण ....... है वो जगह काफी संत आवर खूबसूरत भी है

सूर्य सभी को ले जंगल की आवर निकल गया

सूर्य सभी को समजा कर ध्यान लगाने को कहा जिसमे किसी को कोई खाश प्रॉब्लम नहीं हुई थी सिवाय मानसी आवर जुली के क्यों की बाकियो ने परीलोक में ध्यान लगाना शिख लिया था

ीदार सूर्य के हवेली से निकलते हे गुरुदेव रानी पारी पारिजात रिद्धि चारो हवेली आ पहुंचे

गुरुदेव ...... पुत्री पारिजात यही है पुत्र सूर्य का प्यारा संसार जिसने देखने की तुम्हारी बड़ी इच्छा थी

पारिजात .......किन्तु वो तो यहाँ है हे नहीं गुरुदेव

गुरुदेव ........ केवल सूर्य हे नहीं बाकि सभी तुम्हारी भने भी नहीं है वो सब जंगल में है जहा पुत्र सूर्य ने अपनी पहली शिक्षा आरम्भ की थी

गुरुदेव को देखते हे लोने में नंगे पांव टहल रहे दादा जी फ़ौरन उनकी तरफ लपके आवर उन्हें परनाम किया

दादा जी ........ आप सभी का इस गरीब की कुटिया में स्वागत है गुरुदेव रानी पारी जी

गुरुदेव ......... इतना बहुमूल्यवान खजाना आपके पास है ठाकुर जी फिर आप कैसे गरीब हुई हाहाहा

दादा जी ........ ये तो आपने उचित कहा गुरुदेव हमारा हस्ता कुत्ता भरा पूरा परिवार किसी भामूल्यवान खजाने से काम नहीं चलिए आप सब भीतर चलिए

दादा जी गुरुदेव रानी पारी परिधि पारिजात चारो को ले हवेली में पहुंचे जहा दादी जी अभी अभी अपनी पूजा पूर्ण कर बहार निकल थी

दादी जी आगे भाड़ गुरुदेव के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेती है

गुरुदेव .......... आपका कल्याण हो देव परबु आप पे सदैव अपने कृपा दृस्टि बनाये रखे

दादी जी ........ गुरुदेव आप सब आने वाले थे हमें सुचना तो कर देते ताकि हम आपके उचित सेवा सत्कार की तयारी कर लेते

पारिजात ....... सेवा उनकी की जाती है माँ सा जो मेहमान हो हम तो अपने हे परिवार में आये है फिर सेवा सत्कार किस लिया

दादी जी ....... ीदार आओ तुम दोनों मेरी बछिया बहुत प्यारी लग रही है किसी की नजर न लगे कहते हुए दादी जी ने दोनों के कान के पीछे काजल की बिंदी बना देती है आवर कुलदेवी की पूजा से माथे पे सिंदूर बिंदी कर देती है ऐसा हे रानी पारी के माथे पे सिंदूर बिंदी तिलक लगा देती है

बहार की आवाज सुन मेनका जी रुक्मणि जी रेखा जी भी अपने अपने कक्ष से बहार निकल आयी

वैसे भी रेखा जी इस समय उठ जाया करती है किन्तु आज मेनका जी भी जल्दी उठ गई ौतमर रुक्मणि जी नए स्थान के कर समय पे उठ गई

मेनका जी ......परनाम गुरुदेव

गुरुदेव ......कल्याण हो पुत्री मेनका

मेनका जी ........ रानी पारी को मेनका का परनाम हेहेहे

रानी पारी ....... हम यहाँ कोई रानी पारी बन कर नहीं आये है मेनका बहन हम यहाँ ससरन इंसानी के तरह अपने परिवार से मिलने आये है

रानी पारी खुद से मेनका जी रेखा जी के साथ साथ रुक्मणि जी से भी गले लग कर मिलती है

रेखा जी ........ दीदी उनको भो उठा दीजिये आवर देवर जी को भी मैं सब के लिया कॉफ़ी बनती हूँ

शालिनी जी ......दीदी आप बैठिये मैं बनती हूँ सभी की टिया कॉफ़ी

शालिनी जी रानी पारी से गले लग मिलती है आवर माँ सा आवर भौजी के पेअर चूक कर गुरुदेव से भी ासुरवाद लेती है

पारिजात ...... रानी माँ हम लोग वह जा सकते है

गुरुदेव ....... ठीक है जो पुत्री किन्तु उनके ध्यान में विघ्न न डालना

रिद्धि ......जी पिता श्री

रिद्धि आवर पारिजात दोनों हे वह से बहार निकल गायब हो गई

गुरुदेव ...... पुत्री रुक्मणि तुम्हारे मन में बहुत से सवाल उठ रहे है की हम कोण है

रुक्मणि जी ...... जी वो मैं

रेखा जी ..... ये सूर्य के गुरुदेव है रुक्मणि बहन आवर ये परीलोक की रानी रानी पारी मुझे पता है सूर्य ने अभी आपको पूरा सच नहीं बताया है इस लिया आपको इन सब के बारे में पता नहीं है

गुरुदेव ....... अपनी पुत्री की चिंता त्याग दो पुत्री रुक्मणि परबु ने कुछ अच्छा हे सोच रखा है पुत्री विधि आवर गायत्री के लिया

इतने में शालिनी जी सभी के लिया टिया कॉफ़ी ले आती है आवर गुरुदेव के लिया ढूढ क्यों की वो टिया कॉफ़ी नहीं पिटे

सभी कुछ देर वही बाते करते रहे फिर गुरुदेव ने सभी से आज्ञा ले सूर्य से मिलने जंगल की आवर निकल गए वही रानी पारी जा पंहुचा शालिनी जी के रूम में जहा अभी केवल शालिनी जी आवर रानी पारी हे थे

रेखा जी आवर रुक्मणि जी सभी के हस्ते की त्यार कर रहे थे

रिद्धि आवर गायत्री सभी को ध्यान करते देख रही थी तो वो भी वही ध्यान करने बेथ जाती है

कुछ देर बाद सूर्य ध्यान से बहार आ गया आवर वही पास की चयन पे बेथ वो पुस्तक का आह्वान करता है जो गुरुदेव ने उसे दी थी

सूर्य उसने लिखे मंत्रो को याद करने लगता है सूर्य निरंतर एक के बाद एक मंत्र याद करता रहा उसका ध्यान तब भांग हुआ जब गुरुदेव ने उसके कंधे पे हाथ रखा

सूर्य .......परनाम गुरुदेव आप यहाँ पृथ्वीलोक पे

गुरुदेव .......... यशश्वी भाव पुत्र हम तुमसे हे भेंट करने आये है पुत्र

सूर्य पुस्तक को परनाम कर उसे बंद कर देता पुस्तक अपने आप गायब हो जाती है

गुरुदेव ........पुत्र तुमसे कुछ आवशयक विषय पे चर्चा करनी है एकांत में

सूर्य...... जी गुरुदेव जैसे आपकी इच्छा

सूर्य गुरुदेव के साथ वह से कुछ दुरी पे एक हरे भरे वृक्ष के निचे बेथ बातचीत करने लगते है

गुरुदेव ........ कल पुत्री किरण ने जो तुम्हारे साथ किया क्या उस से तुम पुत्री किरण से नाराज हो पुत्र

सूर्य ...... नहीं गुरुदेव किरण ने जो किया उसके पीछे अवश्य को वजह रही होगी गुरुदेव भले हे हमारा सरीर अलग है किन्तु हमारी आत्मा एक हो चुकी है गुरुदेव आवर अगर बात परिवार की ख़ुशी की उसकी सुरक्षा की हो तो स्वीटी मुझसे बेहतर निर्णय लेती है

फिर भल उसपे संदेह करना या क्रोधित होना उसके प्रेम आवर विश्वाश के संदेह करना होगा जो मैं कभी नहीं करूँगा

गुरुदेव ......उत्तम विचार पुत्र सूर्य क्या पुत्री किरण ने तुम्हे इसके पीछे का कारन बताया

सूर्य .....जी नहीं गुरुदेव आवर न मैंने अभी तक कुछ पूछा किन्तु मुझे यकीं है की वो खुद से मेरे बिना पूछे हे मुझे सब बता देगी

गुरुदेव ....... पुत्री किरण को ऐसा करने के लिया हमने हे कहा था पुत्र सूर्य हमने हे विवश किया था पुत्री किरण को तुम्हे मूर्छित करने के लिया क्यों की अगर तुम मूर्छित नहीं होते तो अवश्य वह समय से पूर्व पहुंचने कर उस घटना करम की दिशा बदल देते जो उचित नहीं था हम ये भी जानते है पुत्र की तुम अपनी माता से बहुत प्रेम करते हो पैर तुम सभी से करते हो जहा बाकि सब तुम्हारी ताकत है वही पुत्री शालिनी तुम्हारी एक मात्रा कमजोरी उन्हें कुछ हो जाता तो तुम अपना नियंत्रण खो देते इस लिया हम उनकी सुरक्षा के लिया स्वयं वह उपस्थित थे

किन्तु हमें कुछ करने की आव्सय्कता हे नहीं पड़ी तुम्हारे अंश से पुत्री जूलिया के माध्यम से सभी को सुरक्षित रखा बिना घटना करम को प्रभावित किये

सूर्य ...... अथार्त आपके हे आदेश पे स्वीटी ने ये सब किया आवर मुझसे वादा ले कर मुझसे अपनी हे सकतिया बणान्दन में करवा दी

गुरुदेव ...... तुम्हारी सक्तियो को बंदन में रखने का सुझाव हमारा नहीं पुत्री किरण का था सायद उसे दर हो की कही तुम उसके विचार न पद लो

सूर्य ....... सायद यही हुआ हो गुरुदेव किन्तु हम अभी भी एक बात नहीं समाज पाए की इस घटना में हमारा हस्तक्षेप करने से क्या परिवर्तन हो जाता

गुरुदेव ....... पुत्र इस घटनाक्रम का आराम विक्रम से जुड़ा था विक्रम द्वारा पुत्री विधि आवर पुत्री रुक्मणि के साथ किये दुराचार उसके अंत का आखरी दुराचार था ये समाज को की विक्रम के पाप की मटकी भर चुकी थी पुत्री विधि आवर रुक्मणि के साथ जो दुराचार किया जो पाप किया वो उस पाप की मटकी को तोड़ने वाला अंतिम पत्थर था

अगर तुम उस घटना करम में शामिल हुए होते तो विक्रम पुत्री विधि आवर पुत्री रुक्मणि के साथ ये दुराचार नहीं कर पता आवर उसकी मरीतु एक बार फिर से ताल जाती जो भविष्य में बहुत से घटनाओ को प्रभावित करती

गुरुदेव ........ एक बार आवर से क्या मतलब गुरुदेव

गुरुदेव .......... विक्रम की मरीतु योग एक बार पहले भी बना था पुत्र किन्तु पुत्री गीता के प्रेम ने विक्रम को नया जीवन दिया उसे केवल कुछ समय की पीड़ा हे भोगी हुई किन्तु जब पुत्री गीता के साथ विक्रम ने दुराचार करने का पर्यटन किया तो जो प्रेम विक्रम के लिया पुत्री गीता के मन में था वो नफरत घृणा में बदल गया

सूर्य ....... अथार्त गुरुदेव जो भी होता है अच्छे के लिया हे होता है

अगर उस दिन विक्रम की मृत्यु हो जाती तो विक्रम मर कर भी एक माँ के दिल में अपने बेटे के पार्टी प्रेम रम में जीवित रहता

गुरुदेव ....... पुत्र समय की चल को समाज पाना इतना आसान नहीं हम स्वयं इस योग्य नहीं वो तो परबु ने अपने इस तूच भक्त पे अपना आशीर्वाद बनाये रखा है जो समय की चल को कुछ हद तक समाज पते है

सूर्य ......जी गुरुदेव उचित कहा आपने

गुरुदेव ....... पुत्र हम किसी आवर विषय में तुमसे बात करना चाहते थे किन्तु हमें समाज नहीं आ रहा है की कैसे चर्चा आरम्भ करे

सूर्य ....... गुरुदेव हम भी आपसे कुछ पूछना चाहते है

गुरुदेव ...... कहो पुत्र

सूर्य ...... गुरुदेव कल रात्रि पता नहीं कैसे मैं खुद को रोक नहीं पाया माँ के साथ न चाहते हुए भी उस रिश्ते को कलंकित करने वाला था जहा एक माँ बेटे का पवित्र रिस्ता था एक हे पल में सब तहश नहश हो चूका होता

गुरुदेव ........ हम जानते है पुत्र आवर इसी विषय पे हम तुमसे बात करना चाहते थे तुम्हे पुत्री शालिनी के समीप जाना होगा पुत्र क्युकी पुत्री शालिनी ने तुम्हारी उन्मुख ( सेक्स ऊर्जा ) को अपनाया है जो निरंतर बढ़ती जा रही जिसे केवल तुम हे उसे संत कर सकते आवर पुत्री शालिनी के बाकि सकतिया भी इस कारन शॉट स्वस्थ में जा चुकी है तुम्हारी ऊर्जा के कारन

सूर्य ...... क्या मतलब गुरुदेव माँ के पास आवर कोनसी सकतिया है

गुरुदेव ...... पुत्र सूर्य पुत्री शालिनी के पास एक पारी की सकती है

सूर्य ....... पर ये कैसे हो सकता है गुरुदेव किसने उन्हें अपनी सकतिया दी गुरुदेव मन की रानी पारी ऐसा कर सकती है किन्तु वो भी किसी इंसान को पारी नहीं बना सकती पूर्ण रूप से

गुरुदेव ........ है पुत्री शालिनी को उन्होंने हे सक्तियक प्रदान की किन्तु

सूर्य ...... किन्तु क्या गुरुदेव माफ कीजिये गुरुदेव किन्तु आज पहली बार मुझे आप पे संदेह हो रहा है ऐसा कुछ है माँ के विषय में जो आप मुझसे छुपा रहे है

गुरुदेव ......तुम्हारा संदेह उचित है पुत्र क्युकी पुत्री शालिनी कोई सदर्न स्त्री नहीं है उन्होंने कठिन तप कर तुम्हे प्राप्त किया था प्रभु से वरदान फलसवरूप कोई भी सदर्न स्त्री परबु अंश को दर्जन नहीं कर सकती तुम्हे पाने के लिया उन्होंने बहुत कुछ खोया है किन्तु अभी ये सत्य जानने का समय नहीं आया है पुत्र सूर्य

सूर्य तो ये सुन कर हे कही खो गया था जैसे वो इस समय कही आवर पहुंचने गया हो

गुरुदेव ...... पुत्र तुम्हे पुत्री शालिनी को अपनी ऊर्जा से मुक्त करना होगा तभी पुत्री शालिनी अपने भीतर समाहित पारी की सक्तियो को जागृत कर उन्हें दर्जन कर पायेगी

सूर्य .......क्या कोई आवर मार्ग नहीं है गुरुदेव

गुरुदेव. ....... नहीं पुत्र अगर तुमने ऐसा नहीं किया तो तुम भविष्य में पुत्री शालिनी को हमेशा के लिया खो चुके होंगे फिर सायद भिवष्य में तुम कभी उनके प्रेम को नहीं प् सकोगे पुत्री शालिनी भी तुम्हारे समीप आना चाहती है एक प्रेमिका के रूप में पुत्री शालिनी दो भागो में बात चुकी है प्रेमिका आवर माता के रूप में अब ये तुम्हे तय करना है को दोनों को जीवित रखना है या हमेशा के लिया दोनों से दूर होना है

सूर्य ....... नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता उन्हें कुछ नहीं होने दूंगा मैं उन्हें कुछ हुआ तो पूरी दुनिया को आग लगा दूंगा

सूर्य की आँखे गुस्से से लाल थी पैर उन्ही आँखों से तप तप गिरते आंसू देख खुद गुरुदेव आगे बढ़ सूर्य को गले से लगा लेते है

गुरुदेव ...... पुत्र यही विवस्ता है तुम्हारे इस गुरु की जो अपने पुत्र की कोई सहायता भी नहीं कर सकता है मुझे क्षमा करना पुत्र इसमें मैं भी तुम्हारा दोषी हूँ

किरण ........कुंवर जी कुंवर जी क्या हुआ आपको

गुरुदेव ...... पुत्री किरण पुत्र सूर्य व्यथित है उसे सम्भालो

गुरुदेव अपनी नाम आँखों को साफ कर वह से परीलोक के लिया गायब हो गए

वही किरण सूर्य को दिलाशा देने लगती है सूर्य कुछ देर आंसू बहाने के बाद किसी तरह खुद पे काबू करता है पैर उसके चेहरे की रौनक गायब हो चुकी थी किरण को भी सूर्य के दुःख का अंदाजा हो चूका था जैसे

किरण ........चलिए कुंवर जी आपसे मिलने आपकी रिद्धि आवर परिधि दोनों आयी है

सूर्य किरण के साथ चल तो रहा था पैर उसके भीतर कोई तूफान उठ चूका था

सूर्य देखते हे रिद्धि दौड़ कर सूर्य के गले लग जाती है

सूर्य जूठी मुस्कान के साथ रिद्धि को टेक से लगा लेता है

पैर ये भूल गया था की रिद्धि भी ुशी का एक निशा है

रिद्धि को सूर्य के सीने से लगते हे पता चक गया की सूर्य अवसाद ( दुःख )/में है

रिद्धि अपना चेहरा ऊपर कर सूर्य की आँखों में देखती है जहा हलकी नमी अभी भी मौजूद थी

परिधि ......दीदी मुझे भी मिलना है इनसे

रिद्धि न चाहते हुए भी पीछे हैट गई रिद्धि जहा सूर्य से मिलने की ख़ुशी में पहले काफी खुश थी वही अब उसका नूरानी चेहरा भी मुरझाने लगा था

परिधि जैसे हे सूर्य को किस कर हटी तो सूर्य की आँखों में आज उसे पहली बार सूनापन किसी को खोने का दर देखा था जहा पहले हर पल हरदम उन आँखों में चमक होती थी मस्तीभरी

परिधि ........ क्या हुआ आपको आज आपका सरीर तो यहाँ है पैर आत्मा जैसे कही आवर कुछ हुआ है क्या

सूर्य ......बोलने को जगह न में गर्दन हिला देता है

किरण .....हमें घर चलना चाइये 9 बज गए सब इन्तजार कर रागे होंगे

किरण का इशारा समाज बिना कोई भी सवाल के सब हवेली के लिया निकल गए

उदार शालिनी जी के रूम में रानी पारी ने शालिनी जी से बहुत सी बात की जिसमे कल रात का भी जीकर था

आवर साथ हे सूर्य की ऊर्जा के विषय में शालिनी जी को पता चला वही रानी पारी से प्राप्त पारी की ऊर्जा सकती को जागृत करने के लिया सूर्य आवर शालिनी जी का मिलान होना आवशयक था

ये सब जान कर जहा बहार से शालिनी जी मायुशि दिखा रही थी वही अंदर हे अंदर हे काफी खुश थी

पैर वो ये भूल गयी की जिसके सामने वो एक्टिंग कर रही है वह उनकी एक्टिंग काम नहीं आने वाली

एक घंटे तक दोनों की गॉसिप्स चाकरी रही दादी जी के पुकारने पे रानी पारी आवर शालिनी जी रूम से बहार निकली

ीदार बाकि सभी भी हवेली आ चुके थे आवर सब फ्रेश होने में लगे हुए थे

सूर्य अपनी हे सोच में खोया हुआ कब शालिनी जी की रूम में जा गुढ़ा आवर कपडे निकल सीधा बाथरूम के ठन्डे पानी के निचे खड़ा हो गया

किरण को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा सूर्य को ऐसे देख कर बाकियो का भी हल कुछ ऐसा हे था

किरण ...... मम्मी वो कुंवर जी काफी परेशान है

शालिनी जी ...... क्या हुआ बेटी सूर्य को

किरण ......पता नहीं मम्मी वो गुरुदेव से बात करते करते अचानक से गुस्से में हो गए जब मुझे पता चला आवर मैं वह पहुंची तो देखा वो गुरुदेव के गले लग कर रो रहे थे

शालिनी जी ..... तुम सब नास्ता करो मैं देखती हूँ

किरण ......मैं उनके कपडे ले कर आती हूँ

शालिनी जी जब रूम में पहुंची तो देखा की सूर्य के कपडे जगह जगह जमीं पे घिरे पड़े है शालिनी जी सभी कपड़ो को उठा कर डुलने वाले कपड़ो में दाल देती है

ीदार किरण सूर्य के साफ कपडे ले कर आप पहुंची

किरण ......लीजिये मम्मी आवर उनकी किसी तरह से ुधाशी दूर कीजिये

शालिनी जी .......तुम चिंता न कर मेरी बची थोड़ी देर में वो पहले की तरह होगा बस तुम रेखा दीदी को यहाँ भेज दो

किरण .....जी मम्मी

कोई आधे घंटे बाद भी जब सूर्य बहार नहीं आया तो शालिनी जी ने दूर नोक किया जो खुला हे था पैर यहाँ रेखा जी भी थी तो उसे लॉक कर फिर से 3,4 बार नॉक किया आउट आवाज लगाई तब जा कर सूर्य को होश आया अंदर सिर्फ एक हे टॉवल था जो उसकी माँ का था उस से हे सरीर साफ कर सूर्य उसे लपेट कर बहार आया तो अपनी माँ को देखते हे फिर से आँखे नाम हो गई

रेखा जी ....... क्या हुआ बीटा तुम्हे तुम्हारी आँखे क्यों भीगी हुई है

सूर्य ...... कुछ नहीं बड़ी मम्मी बस ऐसे हे

रेखा जी ....... देख बीटा मैं ये नहीं पूछूँगी की इन आँखों में आंसू आने का कारन क्या है पैर मेरी एक बात हमेशा याद रखना हम सब तुमसे बहुत प्यार करते है ये इस लिया भी नहीं की तुम्हारी असलियत क्या है वो इस लिया की तुम में हम सभी की जान बस्ती है बीटा

तुम्हे खुश देख हम सभी के चेहरों पे ख़ुशी रहती है

अगर तुम हे इस तरह मुजरा जाओगे तो हम सब क्या क्या हल होगा तुमने सोचा सब खुश होने का दिखावा करते हुए हाश्मी का मुखौटा ौड लेंगे पैर अकेले तुम्हे ऐसे देख आंसू बहती रहेंगे क्या तुम्हे इस से ख़ुशी मिलेगी बीटा हमारा न सही इतनी बछिया जो तुमसे इतना प्यार करती है उनके दिल पर इस वक़्त क्या बिट रही है सोचा तुमने उनके गले से एक निवाला तक नहीं उतर रहा है कारन चाहे फिर कुछ भी रहा हो तुम्हारी आँखों में आने वाले इन आसुओं का

रेखा जी इतना सब बोल वह से निकल गया कहने तो उन्होंने ये सब मन मजबूत कर बोल दिया पैर वो भी अच्छे से जानती थी की सूर्य इस तरह किसी छोटी बात पे तो रोने वाला नहीं

शालिनी जी ....... कपडे बदल को बीटा आवर जा कर नास्ता करो सभी तुम्हारे इन्तजार में है किसी ने एक गुनत पानी तक की न पि है सुबह से

सूर्य .......पैर माँ

शालिनी जी ....... मैं जानती हूँ तुम किस वजह से परेशान हो बीटा हम इस पैर रात में बात करेंगे अभी अपनी ये ुदशी भागो वर्ण मुझे हे कुछ करना होगा जो सैयफ तुम्हे पसंद न आये

सूर्य. ..... ऐसा क्या करने वाली है आप

रेखा जी .....ये .उम्मम्मम्हा

रेखा जी .......ऐसे मुँह फाडे क्या देख रहे हो अब आदत दाल लो ये सब तुम्हारे कारन हे हो रहा है तो ठीक भी तुम्हे हे करना पड़ेगा

सूर्य .......मतलब आपको सब पता है

रेखा जी ......है मुझे पता है की तुम्हारी कोनसी ऊर्जा मुझे सनई है आवर उसका क्या असर हो रहा है

सूर्य ......सॉरी माँ मुझे अंदाजा नहीं था की ऐसा कुछ हो जायेगा

शालिनी जी ........ बीटा एक बात हमेशा याद रखना कभी कभी हम अनजाने में ऐसा कुछ कर देते है जिसका हमें भी पता नहीं चलता की ये हमने क्यों किया जिसका असर हम पे कभी अच्छा तो कभी बुरा भी होता है पैर अगर हमारी मनसा ( सोच विचार इच्छा ) गलत नहीं तो ईश्वर भी उस गलती को भूल समाज माफ कर देता है बस हमारा मन आवर आत्मा निस्चल होनी चाइये

सूर्य ........ मैं अभी भी कुछ सामना नहीं माँ.

शालिनी जी ...... समाज जाओगे डेरी डेरी अब जाओ आवर सबके साथ नास्ता करो उम्मम्मम्हा

सूर्य .....माँ आप कल से कुछ ज्यादा हे नहीं बदल गई हो

शालिनी जी ........हेहेहे बदलाव अच्छा हो तो अपना लेना चाइये वैसे तुम्हारी बुआ जब ऐसा करती है तब तो तुम खुश होते हो आवर मेरा ऐसा करने पे नखरा कर रहे हो

सूर्य ...... सॉरी उम्मम्मम्हा ok आप भी आ जाये जल्दी से

सूर्य खुद को त्यार कर बहार निकल जाता है रेखा जी का इस तरह से सीरियस तरीके से आंजना आवर शालिनी जी का इस तरह का चंचल रूप सूर्य को काफी हद तक ुदशी से बहार निकल चूका था

सूर्य सभी के साथ थोड़ी मस्ती थोड़ी मज़ाक के साथ नास्ता कर 11 बजे के आसपास सक्तिपुर निकल गया विधि रुक्मणि जी के साथ ...........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ......................
 
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