Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 33 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट . 263

शालिनी जी ........ एक बार महेंद्र भाई साहब से बात कर लीजिये इस बारे में उन्हें पता होगा की कहा से इतने कपडे लेने चाइये ताकि कोई दिकत न हो उनके मॉल के चलते उन्हें इस बारे में अच्छे से पता होगा ज्यादा होने पे हमारे किसी काम के तो होंगे नहीं ऐसे में उन्हें वापिस भी करना पद सकता है तो वो ुशी हिसाब से अपने वाटपारी दोस्तों से बात कर लेंगे

शिव ...... हम्म्म थी है मैं उनके साथ साथ पापा से भी इस बारे में बात करता हु क्या पता उन्होंने पहले से ऐसा कुछ सोच रखा हो तो

शालिनी जी ....... जी ठीक है

शिव ....... तुम आराम करो मैं भी कुछ देर रेस्ट करता हम

शिव वो कॉपी लिया वह से दूसरे रूम में चले गए आवर फ्रेश हो कर कुछ देर हिसाब किताब लगा कर लेट गए .......

अब आगे ..........

परीलोक .......... सूर्य किरण मानसी सुक्रलोक की यात्रा पूर्ण कर तीनो सूर्यगढ़ न जा कर सीधा परीलोक गुरुदेव से मिलने परीलोक पहुँचता है

जैसे हे सूर्य किरण मानसी ड्रैगन से उतर रानी महल की आवर भड़ते है महल की रक्षा में महल की सुरक्षा में तैनात सही सैनिक आवर परिया तीनो को विनम्रता से जुख कर उनका सम्मान करते है

रानी पारी को जब सूर्य किरण मानसी के लौटने की खबर मिलती है तो रानी पारी भी अपने कक्ष से निकल कर अपनी सेविकाओं के साथ महल के मध्य भाग में बने बड़े से खूबसूरत सही हॉल में पहुँचती है

परिधि को भी सूर्य किरण मानसी के आने की खबर अपनी सेविका से मिल चुकी थी जो इस वक़्त अपने कक्ष में किसी से हैश हैश कर बाते कर रही थी

परिधि ........ हमें भी चलना चाइये सायद उन्हें तुम्हारा यहाँ होने का पता नहीं है

लड़की ........ पहले न पता हो सखी पैर अब उन्हें जरूर इस बारे में पता चल गया होगा सायद उन्हें यहाँ मेरी ऊर्जा का आभाष हो चूका है

परिधि ...... ठीक है फिर तुम मेरे पीछे हे रुकना देखते है उन्हें कितना पता चला है तुम्हारे बारे में

परिधि अपनी उस सखी के साथ साथ अपनी 4 खाश सेविकाओं के साथ बहार सूर्य की आवर चल देती है

सूर्य किरण मानसी को सकुशल देख रानी पारी को रहत मह्सुश होती है

उनके मन में सूर्य की सुक्रलोक की यात्रा से एक अंजनी चिंता बानी हुई थी जो सूर्य को सुरक्षित आवर सही सलामत देखने के बाद हे दूर हुई

सूर्य किरण मानसी रानी पारी को देखते हे उनकी आवर बढे आवर तीनो ने एक साथ उनके चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेते है

सूर्य किरण मानसी ........ परनाम रानी माँ

रानी पारी ....... आयिष्मान भाव पुत्र साधा सौभाग्यवती भाव पुत्रियों

रानी पारी बरी बरी से किरण सूर्य आवर मानसी से गले लग कर मिलती है

रानी पारी को मानसी की ऊर्जा में काफी बदलाव मह्सुश होता है

रानी पारी ....... पुत्री मानसी तुम्हारी ऊर्जा में काफी बदलाव हुए है सुक्रलोक जाने के बाद

मानसी ....... जी रानी माँ मैं पहले से काफी ऊर्जावान मह्सुश कर रही हूँ खुद को ये सब कुंवर जी के कहने पे हुआ है

रानी पारी ...... ये तो अच्छी बात है पुत्री पैर कभी भी अपनी सक्तियो को स्वयं पे हावी मत होने देना किसी भी सकती या ऊर्जा का सदैव उचित उपयोग हे करना अन्यथा यही सकतिया हमारे पतन का कारन भी बन जाती है

तभी चारो के कानो में पारिजात की मीठी आवाज पड़ती है

पारिजात ........ रानी माँ अभी अभी तो ये इतने लम्बे सफर से लौटे है आवर आप अभी से इन्हें समजने बेथ गई है हमें भी तो अपनी बाँहों से मिलने दीजिये

रानी पारी ....... हमने कब आपको रोका है मिल लीजिये अपने कुंवर जी से

सूर्य की नजर बार बार पारिजात के पीछे जा रही थी

परिधि ......... क्या हुआ आप किसी आवर की प्रतीक्षा कर रहे है क्या

सूर्य ...... नहीं नहीं वो हमें आपके आस पास की ऊर्जा जिनि की ऊर्जा जैसे मह्सुश हुई पैर सायद ...

अभी सूर्य आगे कुछ बोलता की तभी उसे फिर से वही ऊर्जा मह्सुश हुई

सूर्य पारिजात के सामने पहुँचता है आवर उस से गले लग कर मिलता है

सूर्य ...... कैसी है आप परिधि आवर घर से कब आई आप

सूर्य परिधि से गले मिलने के बाद जब अलग होता है तो परिधि के बालो में लगी नीली तितली को वह से निकल लिया है

सूर्य ........जिनिशा सामने आ जाओ मैं तुम्हे इस रूप में भी देख सकता हूँ भले हे तुम पहले से काफी शक्तिशाली हो गई हो

वो तितली अगले हे पल सूर्य के हाथ से निकल कर कुछ हे दुरी पे देखते हे देखते पहले ऊर्जा में फिर जिनिशा के वास्तविक रूप में आ जाती है

पारिजात ..... हमें नहीं लगा था की आपको इतनी जल्दी पता चल जायेगा जिनिशा के विषय में

सूर्य ...... है सायद ये पहले वाली जिनिशा होती तो सायद मैं भी चूक जाता पैर अब जिनिशा महाजिन बनने के बहुत करीब है

रानी पारी ...... क्या ये सत्य है पुत्री जिनिशा

जिनिशा ...... जी रानी माँ हमें भी अभी कुछ दिन पहले हे पता चला पैर आपको कैसे पता अभी तो पिता श्री को भी इस विषय में हमने कुछ नहीं बताया है आवर न उन्हें इस बारे में पता चला है

किरण आवर मानसी भी परिधि आवर जिनिशा से बड़े हे प्यार से गले लग कर मिलती है जैसे चारो भने हो

तभी महल में विधि आवर गायत्री भी अपना अभ्यास कर पहुँचती है उन्हें सूर्य के यहाँ होने के बारे में बिलकुल भी पता नहीं थी

दोनों के कदम वही रुक गए जब दोनों की नजर सूर्य पे पड़ी

किरण ....... क्या हुआ विधि गायत्री आप दोनों वही क्यों रुक गई

किरण की आवाज से दोनों आने चेतना में लौटी

विधि आवर गायत्री भी वही आ पहुंची

रानी पारी ...... तुम सब आराम से बाते करो फिर हम सब साथ में भोजन करते है पुत्र सूर्य आप जरा हमारे साथ आओ

सूर्य ......जी रानी माँ

सूर्य रानी पारी के पीछे पीछे एक कक्ष में पहुँचता है

रानी पारी ........ पुत्र सूर्य सुक्रलोक में कोई परेशानी तो नहीं हुई न तुम सब को

सूर्य ...... नहीं रानी माँ कुछ खाश नहीं अब ये तो आप भी जानती है थोड़ा बहुत होने का अंदेशा तो था हे है पैर निर्भयासुर ने पहले हे असुरगुरु सुक्रयाचार्य के हाथ बांड कर उन्हें कुछ भी न कर पाने के लिया विवश कर दिया थे ऐसे में वो ज्यादा कुछ कर नहीं पाए थे

रानी पारी ........... ऐसा क्या किया निर्भया ने जिसके चलते असुरो के गुरु शुक्राचार्य जैसे तेज चालक बूढी के धनि शुक्राचार्य भी विवश हो गए

सूर्य .......... उम्मीद तो मुझे भी नहीं थी की ऐसा हो सकता है पैर यही सच है आवर जैसा गुरुदेव ने कहा था उनसे सावधान रहने का वो भी उचित कहा था गुरुदेव ने उनके विषय में जब वो खुद कुछ न कर पाने में विवश हो गए तो उन्होंने अपनी पुत्री देवी देवयानी जी को इस कार्य पे लगा दिया

रानी पारी ......कैसा कार्य पुत्र आवर देवयानी ने कुछ अनुचित तो नहीं किया न तुम्हारे साथ

सूर्य ........ माँ आप काफी चिंता करती है आपका पुत्र इतना सक्षम हो चूका है बूढी आवर बल दोनों से हे को सामने वाले की मन को समाज सके

रानी पारी सूर्य के मुँह से माँ सुन कर काफी खुश थी

रानी पारी ...... हेहेहे पुत्र वो असुरो के गुरु है गुरु शुक्राचार्य उन्हें समाज पाना इतना सरल नहीं तुम सवयं को बल आवर बूढी में परिपक्व समाज सकते हो किन्तु योध में केवल बल आवर बूढी का हे प्रयोग नहीं होता है आवर खाश कर जब सामने असुर या दानव हो तब तो बिलकुल भी नहीं ये लोग बल बूढी से ज्यादा चाल का प्रयोग करते है इस लिया इनसे सदैव सचेत रहो वैसे देवयानी को किस कार्य का भर सौंपा था असुरगुरु ने

सूर्य ...... असुरगुरु शुक्राचार्य ने देवी देवयानी जी को मेरी वास्तविकता का पता करने का कार्य दिया गया था

रानी पारी ....... क्या तो क्या देवयानी इस में सफल हो पायी

सूर्य ....... आपकी क्या लगता है माँ इतनी आसानी से अपनी वास्तविकता का किसी को भी पता चलने दे सकता हूँ क्या उन्होंने दो बार कोशिश की पैर एक बार निर्भयासुर ने आवर एक बार किरण ने उनकी सरीर योजनाओ पे पानी फेयर दिया मुझे अपनी सकती का प्रदर्शन करने की जरुरत हे नहीं पड़ी तो उनके हाथ भी कुछ नहीं लगा

रानी पारी एक गहरी साँस लेती है आवर फिर सूर्य को मानसी की बदली हुई ऊर्जा के बारे में पूछती है जिस पैर सूर्य उन्हें सुक्रलोक की नाड़ी के विषय में आवर व्योमासुर द्वारा दी पुस्तक का प्रयोग किया जाना सब विस्तार से बताया

रानी पारी ...... इसका मतलब पुत्र तुम आवर पुत्री किरण को भी वह से ऊर्जा प्राप्त हुई है

सूर्य ..... है आपने सायद ध्यान नहीं दिया है पैर मेरे सरीर में उस ऊर्जा से काफी बदलाव हुए है जैसे की मेरे सरीर के तव्चा काफी सख्त हो चुकी है आवर हड़िया भी पहले से काफी मजबूत हो चुकी है बाकि असर कैसा है कुछ समय में पता चल हे जायेगा

रानी पारी ...... उचित है पुत्र चलो चल कर भोजन करते है गुरुदेव भी महल की आवर निकल गए है

सूर्य ...... क्या वो ध्यान से बहार आ गए है

रानी पारी ...... है आवर गुरुदेव अभी महल पहुंचने वाले है

सूर्य रानी पारी दोनों करीब आधे घंटे बात करने के बाद बहार निकलते है

कुछ देर बाद गुरुदेव भी वह आ जाते है

सभी गुरुदेव से आशीर्वाद लेते है

कुछ देर बाद सभी भोजन करते है सूर्य भोजन के बाद गुरुदेव के साथ मंदिर पहुँचता है

गुरुदेव को ध्यान के माध्यम से सुक्रलोक में जो कुछ भी सूर्य के साथ हुआ था उसका पता पहले से हे गुरुदेव को था

सूर्य ....... गुरुदेव क्या असुरगुरु शुक्राचार्य मेरे वास्तविकता परिचय से परचित होंगे

गुरुदेव ....... नहीं पुत्र अभी तो नहीं पैर ये उनके लिया कोई कठिन कार्य नहीं है आज नहीं तो कल वो कोई न कोई ऐसा मार्ग निकल हे लेंगे जिस से उन्हें तुम्हारे दिव्या अंश होने का पता चल जायेगा वो ज्ञानी ऋषि है उनके ज्ञान के भंडार को कमतर आंकना उचित नहीं पुत्र न जाने कोण कोण से गुप्ती ज्ञान को उन्होंने अपने ज्ञान रूपी भंडार में छुपा रखे है ऐसे में उन्हें ज्यादा समय नहीं लगेगा पुत्र हमारे पक्ष में जो सबसे उत्तम हुआ वो है निर्भयासुर का पूर्व जनम में उनका शिष्य होना आवर उस से शुक्राचार्य का आदिक लगाव आवर दूसरा है नरकासुर के लिया उनके मन में देवेश ( शत्रुता ) के भाव जिसके चलते अगर उन्हें तुम्हारी आवर पुत्री किरण की वास्तविकता का ज्ञान हुआ भी तो वो तुम्हारे मार्ग में कोई बढ़ा नहीं बनेंगे पुत्र

सूर्य ...... आप इस बात को ले कर इतने संतुष्ट कैसे है गुरुदेव

आप कुछ आवर भी जानते है उनके बारे में जिसके चलते आप निश्चिन्त है

गुरुदेव ........ है ये सत्य है पुत्र किन्तु ये बात इस समय मायने नहीं रखती पुत्र तुम्हारे पास जो दिव्या मायावी मणि है उसे बहार निकालो

सूर्य ......दिव्या मायावी मणि

गुरुदेव ....... पुत्र सूर्य भूलो नहीं हम भी आद्यात्मिक रूप में सुक्रलोक में तुम्हारे साथ यात्रा पर थे

सूर्य ........ जी गुरुदेव

सूर्य आवर मानसी को जो सुक्रलोक की नाड़ी में हलके लाल रंग का जो रतन मिला था जिसे सूर्य ने मानसी के स्पर्श करने से पूर्व हे उसे लाल कपडे से पकड़ कर बॉक्स में बंद कर दिया था उसे प्रकट करता है आवर गुरुदेव के सामने करता है

गुरुदेव के हाथ के इसारे पे वो बॉक्स खुल जाता है आवर उस से वो रतन नुमा लाल मणि अपने आप हे हवा में ऊपर उठने लगती है

सूर्य ........ गुरुदेव क्या ये रतन या मायावी मणि नकारात्मक ऊर्जा का स्त्रोत है

गुरुदेव ........ नहीं पुत्र सूर्य है इस्पे आसुरी ऊर्जा का प्रभाव अवश्य है किन्तु इसे नस्ट किया जा सकता है

आसुरी ऊर्जा के संपर्क में आने से कुछ प्रभाव अवश्य हुआ है इस्पे

सूर्य ......... क्या उस आसुरी ऊर्जा के प्रभाव से इसे मुक्त किया जा सकता है गुरुदेव मानसी सायद इसे दर्जन करना चाहती है

गुरुदेव ......... है पुत्र सूर्य इस्पे से आसुरी ऊर्जा का प्रभाव समाप्त किया जा सकता है इसके सुधिकरण के बाद पुत्री मानसी इसे दर्जन कर सकती है इस से पुत्री मानसी को अपनी मायावी सक्तियो में निपुणता प्राप्त करने में बहुत सहायक सिद्ध होगी ये दिव्या मायावी मणि

सूर्य ........ जी गुरुदेव

गुरुदेव ....... अब तुम महल लौट जाओ पुत्र सभी तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे है

सूर्य ........ जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश गुरुदेव मैं सूर्यौदय के साथ हे पृथ्वीलोक के लिया निकल जाऊंगा मेरे लिया आवर कोई आदेश

गुरुदेव ........ नहीं पुत्र अभी तुम अपने परिवार में कुछ समय दो फिर तुम्हे ड्रैगन लोक भी निकलना होगा पूजा पे भेंट होगी पुत्र

सूर्य ....... जी गुरुदेव आज्ञा दीजिये परनाम गुरुदेव

गुरुदेव ......... अवश्य पुत्र ईश्वर तुम्हारा कल्याण करे

सूर्य गुरुदेव से कुछ देर बात कर महल लौट आता है सभी 6 लड़किया परिधि के रूम में सुक्रलोक की हे चर्चा कर रही थी

सूर्य ....... तुम सब अभी तक सोये नहीं क्या

परिधि ....... हम आपका हे इन्तजार कर रहे थे

किरण ........ मानसी हमें चल कर आराम करना चाइये

मानसी किरण का इसरा समाज कर उसके साथ जाने के लिया कड़ी हो जाती है

दरशल किरण चाहती थी की सूर्य कुछ वक़्त जिनिशा परिधि विधि आवर गायत्री के साथ भी वक़्त बिताये

सूर्य ...... स्वीटी हम सुबह जल्दी हे घर के लिया निकालेंगे

किरण ........ ठीक है कुंवर जी

किराम मानसी के जाते हे विधि आवर गायत्री भी वह से निकल गयी

परिधि सूर्य का हाथ पकड़ कर अपने साथ बीएड पे बैठा लेती है

सूर्य ....... परिधि क्या तुम लोग थोड़ा आवर इन्तजार करोगे

परिधि ......... ठीक है हम आपका इन्तजार करेंगी पैर ज्यादा देर मत कीजियेगा

सूर्य पारधी के गाल को प्यार से सहला कर एक कक्ष को छोड़ कर दूसरे कक्ष में चला जाता है जहा गायत्री अकेली हे बैठी हुई थी

सूर्य को देख गायत्री झट से कड़ी हो जाती है

सूर्य ......हाहाहा क्या हुआ गायत्री तुम इस तरह से चौंक क्यों गई आराम से बैठो तुम्हारा अपना रूम है ये न की मेरा

तभी विधि अपने रात के कपड़ो में बाथरूम से बहार निकलती है

गायत्री ....... आप यहाँ बैठो मैं कपडे बदल कर आती हूँ

विधि पहले रूम को लॉक करती है आवर फिर सूर्य के सामने आ कर कड़ी हो जाती है

सूर्य विधि का हाथ पकड़ कर अपने नजदीक करता है

सूर्य. ....... आप दोनों का अभ्यास कैसा चल रहा है मन लगा कर अभ्यास रो कर रही है न आप दोनों

विधि ........ जैसा गुरुदेव ने बताया हम ुशी तरह से कर रहे है कभी कभी पारिजात दीदी तो कभी सिद्धू दीदी हमें तलवारबाज़ी आवर तीरंदाज़ी भी सिखाती है

सूर्य. ........ तुम दोनों को यहाँ अच्छा तो लग रहा है न

तभी बाथरूम से बहार निकलती गायत्री बोलती है

गायत्री ......... ऐसे जगह किसी पसंद नहीं आएगी ऐसे जगह में रहना तो हर इंसान का सपना होता है थैंक यू आपका जो आपने हमारे लिया इतना कुछ किया

सूर्य ....... मैंने तुम दोनों को पहले भी कहा था न की ये मैंने अपने लिया किया न की तुम दोनों के लिया

सूर्य विधि को लिया बीएड पे लेट जाता है आवर दोनों से काफी देर बात करता है

विधि बार बार सूर्य के चेहरे को देख रही थी वो जैसे किसी कसमकश में हो

गायत्री पहले से कफ समझदार हो गयी थी वो विधि के चेहरे को देख अच्छे से समाज गई थी की विधि क्या सोच रही है

गायत्री ......... चुटकी अब इतना भी न सोच की सोच सोच में हे रात निकल जाये

सूर्य ........ क्या हुआ विधि कुछ कहना है क्या

गायत्री .......कहना नहीं है इसे आपको किश करना है पैर हिमायत नहीं कर प् रही है सायद मेरे सामने

गायत्री की बात सुन विधु सरम से अपना चेहरा सूर्य के बाजु के पीछे छुपा लेती है

सूर्य ........ हाहाहा क्या इतनी देर से यही सोच रही थी विधि तुम

सूर्य डेरी से विधि का चेहरा अपने सामने करता है जिसने काश कर अपनी आँखे बंद कर राखी ठु आसाराम से विधि का चेहरा गुलाबी हो रखा था

विधि को इस तरह देख सूर्य को उसके काफी प्यार आता है

सूर्य विधि को अपने ऊपर लेते हुए बड़े प्यार से विधि के नाजुक होंठ चूसने लगता है डेरी डेरी विधु भी सूर्य के होंठ चूसने लगती है

सूर्य विधु की मीठी जुबान को चुस्त है जिस से विधि अपने हाथ सूर्य के बालो में फिरने लगती है

गायत्री . ........ अरे चुटकी अब बस भी कर कुछ मेरे लिया भी छोड़ दे मेरी बहन मैं भी यही हूँ

गायत्री की बात सुन विधि झट से सूर्य से अलग हो जाती है

सूर्य गायत्री के ऊपर आ उसे किश करने लगता है

गायत्री के कड़क निप्पल्स सूर्य को अपने सीने में हलके चुब्ते हुए मह्सुश होते है

सूर्य का हाथ कब गायत्री को किश करते हुए उसकी कमर से होता हुआ नंगे पेट पे फिसलता हुआ गायत्री की राइट चुकी पे जा पहुँचता है

.गायत्री का अपने सीने पे किसी पुरुष का पहला नंगा स्पर्श था सूर्य पुर विधि के किश को देख वो पहले से हे एक्ससिटेड थी ऊपर से सूर्य के हाथ अपने 34 की कोमल सॉफ्ट बूब्स से मह्सुश कर मज़े में गायत्री की आँखे बंद हो जाती है आवर खुद से सूर्य का हाथ अनजाने में हे गायत्री अपने बूब्स दबाने लगती है 4से 5 मिनट्स बाद एक के बाद एक झटका खा कर गायत्री निढाल हो लम्भी लम्भी सांसे लेने लगती है

सूर्य कुछ आवर समय दोनों के साथ बिता कर उन्हें गुड नाईट विश कर रूम से निकलता है आवर परिधि आवर जिनिशा के साथ जा कर लेट जाता है तीनो कुछ देर मस्ती करते है ी मैं किश वगेरा फिर दोनों सूर्य के साथ चैन की नींद सो जाती है ...........

सूर्यगढ़ ..........

सुबह सुबह सूर्यौदय के साथ हे किरण मानसी सूर्य तीनो हवेली लौट आये थे

सभी ने किरण मानसी सूर्य से सुक्रलोक की यात्रा के विषय में पूछा सूर्य ने सभी को कुछ बाते बता दी आवर कुछ छुपा लिया

शिव ........ चलो अच्छी बात है बीटा की तुम तीनो सकुसल आवर समय से लौट कल की पूजा है आवर तुम्हारे सूर्यकांत सर भी पुरे परिवार के साथ इस पूजा में शामिल होने आ रहे है

सूर्य ....... ये तो अच्छी बात है पापा मेरी भी राधिका भाबी से बात हुई थी उन लोगो की 10 बजे की फ्लाइट है तो वो लोग करीब साढ़े 11 के आस पास लेंड करेंगे

शिव ....... अब तुम आ गए हो तो ये लोग कार्गो लिस्ट ये सामान भी ुशी फ्लाइट से आ रहा ये भी लेते आना आवर सूर्यकांत जी की फॅमिली को भी साथ लेते आना मैं बाकि के काम देख लेता हूँ तुम्हारे फूफा जी के साथ

सूर्य ....... जी पापा जैसा आप कहे मैं वयोम को साथ ले जाता हूँ एक कार काम पड़ेगी

दादा जी ...... है ये ठीक रहेगा पैर अभी आराम से नास्ता करो अभी 9 हे बजे है बीटा आराम से चले जाना

सूर्य ....... जी दादा जी

अभी ये लोग नास्ता कर हे रहे थे की बहार से कोई कार हवेली में इंटर करती है

किरण ....... ये तो बड़े पापा की कार है

शालिनी जी ....... है ये जोरावर भाई सा की हे कार है

तभी कुछ बैग्स के साथ जोरावर जी हवेली के अंदर आते है

जोरावर जी दादा जी आवर दादी जी को परनाम कर एक चिर खींच कर उसपे बेथ जाते है आवर सामने राखी चंडी की थाल को अपने सामने रखते हुए खाना डालने का इशारा करते है

महेंद्र जी ....... क्यों भाई सुबह सुबह भुखड़ो की तरह क्यों पेश आ रहे हो

जोरावर जी .......... यार बड़ी जोरो की भूख लगी है जयपुर से सीधा ीदार हे आ रहा हूँ

दादी जी जोरावर जी के कान को कीचते हुए कहती है

दादी जी ........ बीटा काम जरुरी है पैर इतना भी नहीं की टाइम से खाना भी न खा सको तो फिर इतनी म्हणत का क्या फायदा आराम से खाना खो आवर कुछ देर आराम करो उसके बाद हे कुछ आवर करने की सोचना शालू बेटी अपने बड़े भाई सा को नास्ता प्रोशो बेटी

शालिनी जी ........ जी माँ सा

सूर्य ........ वैसे मां जी सुबह सुबह इतनी जल्दी किस बात की है कोई परेशानी है क्या

जोरावर जी ....... नहीं बीटा ऐसा कुछ नहीं है जयपुर कुछ काम था तो उसे पूरा कर सुबह जल्दी हे निकल लिया रस्ते में आँख लगने भूख लगी नहीं तो बिच में कुछ खा पि भी नयी पाए बीटा जरा बहार सिक्योरिटी वालो को भी नास्ता दे दो वो भी सुबह जल्दी हे बिना खाये मेरे साथ निकले है

सूर्य जो अपना नास्ता पूरा कर चूका था उसने 4,5 प्लेट नास्ते की लगवाने कर जोरावर जी के सिक्योरिटी वालो को एक एक प्लेट नास्ते की दे दी वो लोग बहार लोने में खुर्शियो पे बे थे

सूर्य गेराज से 2 कार्स बहार निकलता है आवर नोकरो को साफ करने के लिया बोलता है

जोरावर जी ....... उसकी जरुरत नहीं है बीटा मेरी कार्स बहार हे उनमे से ले जाओ तुम्हे कही जाना हे है तो

सूर्य ...... वो मां जी 2 कार्स की जरुरत पद सकती है दिल्ली से कुछ मेहमान आ रहे है आवर फिर िंहकी भी धूल मिटटी साफ हो जाएगी तो कभी भी जरुरत के वक़्त काम आ सकती है

जोरावर जी ........कोई बात नहीं बीटा इन्हें नौकर साफ कर देंगे तुम मेरी वाली ले जाना पैर पहले मुझे कुछ बात करनी है तुमसे

सूर्य ..... जी मां जी

सूर्य जोरावर जी वह से कुछ दूर पे जा कर बात करने लगते है

करीब आधे घंटे बाद दोनों तपिश हविली की तरफ आते है

सूर्य ........ वैसे तो ये सरकारी काम है आप खुद भी तो कर सकते थे

जोरावर जी ...... बात तो तुम्हारी ठीक है पैर अभी जो हमारी पार्टी की सर्कार है उसमे से काफी लोग विपक्ष के नेताओ से संत गांठ करे हुए है वो सब भरोशे के लोग नहीं हमारी सर्कार भी गिर सकती है ऐसे में हमें कुछ तो ऐसा करना होगा जिस से जनता खुद हमारे पक्ष में हो

सूर्य ....... वैसे फ़िलहाल तो मेरी खाश बड़े बुसिनेस्स्में से जान पहचान नहीं है पैर कुछ लोग है जिन्हे अगर सर्कार की मदद मिलती है तो वो अपना बिज़नेस कंपनी आवर प्लांट यहाँ लगाने के लिया राज़ी हो जायेंगे वैसे इस बारे में पापा आवर फूफा जी से बात करना आप ताकि वो भी अपनी एक ब्रांच यहाँ खोल सके

जोरावर जी ...... है इस लिया हे तो सीधा यहाँ आया हूँ

सूर्य . .......... ः मंत्री वाली चल चलने लगे है आप भी मां जी अंदर सभी सोच रहे है आप हमसे मिलने आये है पैर ये किसी को नहीं पता की इसकी दूसरी वजह भी है खेर छोड़िये मैं अभी तो नहीं पैर जल्द हे कॉलेज जाने लग जाऊंगा तब आपका काम कर दूंगा

जोरावर जी ........ चलो अंदर चलते है 10 बजने वाले है तुम्हे भी निकलना होगा न बीटा

सूर्य .....जी मां जी

कुछ देर बाद सूर्य अपनी कार लिया जोरावर जी के 2 कार्स के साथ जैसलमेर की आवर निकल जाता है

करीब सवा 11 बजे सूर्य एयरपोर्ट की पार्किंग में कार्स लगा कर दोनों सिक्योरिटी ड्राइवर के साथ एयरपोर्ट के अंदर चल देता है करीब 10 मिनट्स बाद दिल्ली की फ्लाइट लेंड करती है

उसमे से सूर्यकांत जी उनकी वाईफ गोविन्द जी मधु जी राधिका दीप्ती माया सोफिया सुनिधि सानिया निकल कर बहार की आवर भड़ती है

सामने हे उन्हें सूर्य नजर आ जाता है जो दो स्पेशल सिक्योरिटी वालो के साथ उनकी तरफ हे भाड़ रहा था

सूर्य ........ Hi अंकल hi आंटी जी कैसे है आप सफर में कोई परेशानी तो नहीं हुई

सूर्यकांत जी ....... हम सब अच्छे है बीटा आवर 1:30 घंटे के सफर में कैसी परेशानी बीटा इनसे मिलो इन्हें तो तुम जानते हो ये राधिका बेटी की माँ है मधु जी आवर ये राधिका के डैड mr.govind

सूर्य ...... Hi अंकल जी hi आंटी जी

गोविन्द जी ....... Hello बीटा सूर्य बहुत सुना है तुम्हारे बारे में तुम्हारे सूर्यकांत उन्सेल से तुम बिलकुल वैसे हे हो

मढ़ी जी ....... दामाद जी कहते हुए सरम आ रही है क्या आपको

सूर्य तो ये सुन कर हड़बड़ा गया की ये मधु आंटी क्या बोल रही है वो भी सभी के बिच

गोविन्द जी ..... हाहाहा अब दामाद है तो है भाई इसमें शर्माने की क्या बात है क्यों भाई साहब

सूर्यकांत जी ....... बिलकुल सही भाई अब जब छोटा दामाद मान लिया तो कबूलने में कैसी सरम

सूर्य तो कभी दीप्ती की देख तो कभी मुस्कुराती राधिका को की आखिर ये सब चल क्या रहा है

तभी मधु जी आगे बढ़ सूर्य से गले लग कर मिलती है आवर डेरी से सूर्य के कान में बोलती है

मधु जी .......... हेहेहे उन्हें कुछ नहीं पता किरण को बेटी आवर तुम्हे दामाद स्वीकार किया है भले हे सबकी नजरो में मेरी दोनों बेटीये के पति अलग है पैर मैं हे जानती हूँ की राधिका तुम्हे किस रूप में मानती है

अब जा कर सूर्य को थोड़ी चैन की साँस आई की इनका ये मतलब था एक पल को तो उसकी भी धड़कन बढ़ा दी थी मधु जी ने

सूर्य हलके से घर कर राधिका को देखता है जो फ़ौरन दीप्ती के पीछे दुबक जाती है

सूर्य ....... बेबी के लिया कॉंग्रट्स भाबी जी आने में कोई परेशानी तो नहीं हुई न आवर आपने पहले क्यों नहीं बताया की माया सानिया आवर सुनिधि भी आ रहे है

सुनिधि ......... क्यों हमारे आने से प्रॉब्लम है क्या मर. सूर्य

सूर्य ....... हाहाहा पागल हो क्या वो तो मैं इस लिया पूछ रहा था ताकि एक्स्ट्रा कार ले आता खेर कोई बात तीन कार्स है तो प्रॉब्लम नहीं होगी

दीप्ती ....... वैसे ये स्पेशल सिक्योरिटी किस लिया है आवर तुम्हे इनकी जरुरत कब से पड़ने लगी है

सूर्य दोनों को कार्गो की डिटेल लिस्ट देता है आवर उन्हें कुछ समजा कर भेज देता है

सूर्यकांत जी ........ बीटा तुम्हे इन सबकी जरुरत कब से पड़ें लगी शेर को भी अब सिक्योरिटी की जरुरत पड़ने लगी है क्या

सूर्य. ....... ऐसा कुछ नहीं है उन्सेल वो दरशल दिल्ली से कुछ सामान आया है फ्लाइट से तो वो भी साथ लेना था ऐसे में मां जी ने अपनी कार्स साथ में भेज दी ताकि परेशानी न हो चलिए वो लोग भी आ गए है .

कुछ हे देर में 4 बड़े कार्गो बैग के साथ दोनों सिक्योरिटी वाले भी आ जाते है

सूर्य सबको ले कर पार्किंग में पहुँचता है

सूर्य सभी का सामान कार्स की डिकी में रखवा देता है

एक कार में सूर्यकांत जी माया सानिया आवर आंटी जी बेथ जाते है

दूसरी कार में मधु जी गोविन्द जी आवर सुनिधि

सूर्य की कार में पहले हे राधिका आगे की सीट पे जा बैठी थी

दीप्ती ...... चलो सोफिया हम पीछे की सीट पे बेथ जाते है

सफिया आवर दीप्ती पीछे की सीट पे बेथ जाती है

सूर्य अपनी कार आगे बढ़ा देता है

जल्दी हे तीनो कार्स जैसलमेर से बहार की आवर निकल जाती है

दीप्ती ........ मैंने तो सुना था तुम काम से बहार हो

सूर्य ....... है वो मैं सुबह हे घर पंहुचा था वह पता चला की कल की पूजा है आवर आप सब आ रहे तो पापा ने कहा की तुम हे सभी को ले आओ तो मैं हे आप सभी को लेने आ गया

दीप्ती ....... वैसे तुम चाचा बनने वाले हो बहुत जल्द

सूर्य......... हाहाहा साथ में पापा भी

राधिका सूर्य की बात सुन मुस्कुराते हुए पीछे की सोफिया की आवर इसरा करती है

दीप्ती ...... है ये भी बिलकुल सही है

राधिका ....... दीदी आप भी इनके साथ मजाक कर रही है

दीप्ती ........ इसमें मजाक कैसा स्वीटी भी तो प्रेग्नेंट है

सोफिया ...... भाबीजां आप बात को गलत समाज गई

अब सोफिया की कोण बताये की राधिका भी सही है अपनी जगह

सूर्य ....... हाहाहा बिलकुल सही कहा सोफी तुमने

दीप्ती ........ सोफी

सोफिया ........ वो हमारे दोस्त है न तो वो हमें इशू नाम से बुलाते है

दीप्ती ........ हेहेहे ये सिर्फ दोस्ती हे है न या कुछ आवर तो नहीं तुम दोनों देख कर लगता तो कुछ आवर हे है

सूर्य को बात पलटना हे सही लगा

सूर्य ....... वैसे भाबी रोहन भाई नहीं आये आपके साथ

राधिका ....... उन्हें चुटी नहीं मिली आवर सायद एक लम्बे समय तक मिलने की उम्मीद भी नहीं है

दीप्ती ......... वैसे यार तुम सच में बड़े तेज निकले

सूर्य ....... अब मैंने क्या कर दिया दीप्ती जी

दीप्ती ........ रोहन को ये कारनामा करने में इतना टाइम लगा तुमने तो 2 महीने भी नहीं लिया पापा बनने में हेहेहे

सूर्य ........ अब इसमें भी मेरी हे गलती है क्या जब जिसकी किस्मत में जो लिखा होता है तभी उसे मिलता है

दीप्ती ......... हेहेहे किस्मत के साथ साथ इंसान को म्हणत भी करनी पड़ती है

सोफिया ........ दीदी ये आप कैसी बाते कर रही है

सूर्य ...... हम मंजिल पे पहुंच गए है

सूर्य अपनी कार सीधा हवेली में गेराज के सामने लगता है

उसके पीछे पीछे हे दोनों कार्स भी आ कड़ी होती है हवेली पहुंचते पहुंचते साढ़े 12 बज गए थे

सूर्य उतर कर डिकी से सारा सामान निकलता है आवर नौकर सारा सामान हवेली में पंहुचा देते है

सूर्य सभी को लिया भीतर चल देता है दादा जी दादी जी के साथ जोरावर जी महेंद्र जी शिव विजय जी भी वही बे थे बाते कर रहे थे

सूर्यकांत जी आगे बढ़ शिव महेंद्र जोरावर जी से हेल्थ मिलते है आवर दादा जी आवर दादी जी के पेअर छूटे है

दादा जी दादी जी .......... जीते रहो बीटा

सूर्यकांत जी ....... बाउजी ये राधिका बेटी के माता पिता है

दादा जी ......... मतलब की ये भी हमारा लिए तो बीटा आवर बहु है

गोविन्द जी आवर मढ़ी जी दोनों एक साथ दादा जी के पेअर छूटे है

दादा जी ....... ईश्वर आपकी जोड़ी बनाये रखे बीटा

शिव. ....... कोमल बीटा सभी को रूम दिखा दो ताकि सब फ्रेश हो जाये फिर लंच कर आराम से बाते करो या रेस्ट करो

राधा आवर मेर्री जी सभी के लिया ठंडा शरबत ले कर आती है

आवर सरबाट के साथ साथ सभी का परिचय हो जाता है आवर एक दूसरे से बाते करने लगते है ................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ....................

दोस्तों ये अपडेट उम्मीद अनुसार नहीं है इसके लिया माफ़ी चाहता हूँ ..........
 
अपडेट 264

दादा जी ......... मतलब की ये भी हमारा लिए तो बीटा आवर बहु है

गोविन्द जी आवर मढ़ी जी दोनों एक साथ दादा जी के पेअर छूटे है

दादा जी ....... ईश्वर आपकी जोड़ी बनाये रखे बीटा

शिव. ....... कोमल बीटा सभी को रूम दिखा दो ताकि सब फ्रेश हो जाये फिर लंच कर आराम से बाते करो या रेस्ट करो

राधा आवर मेर्री जी सभी के लिया ठंडा शरबत ले कर आती है

आवर सरबाट के साथ साथ सभी का परिचय हो जाता है आवर एक दूसरे से बाते करने लगते है ................

अब आगे ..........

सूर्यगढ़ हवेली में आज सभी समय से पहले हे अपने अपने बिस्टरो का त्याग कर चुके थे अभी 4 ऍम हे हुआ था की लगभग सभी बड़ो के साथ बचे भी अपने अपने बिस्तर का त्याग कर चुके थे

दादा जी दादी जी आज समय से पहले हे त्यार हो कर हवेली में बने पूजा रूम में पूजा कर चुके थे

रेखा जी अभी अपने ससुर जी के लिया टिया ले कर आई थी जो इस वक़्त बहार लोने में सूर्यौदय की प्रतीक्षा में थे

रेखा जी ......... बाउजी आपकी चाय ( टिया )

दादा जी ......... रेखा बेटी महेंद्र शिव उठ गए क्या या अभी बह सोये हुए है

रेखा जी ....... बौ जी सभी लोग उठ गए है बस अभी त्यार हो रहे है आते हे होंगे

दादा जी ....... सूर्य कहा है बेटी वो उठा की नहीं

तभी पीछे से सूर्य अपने दादा जी को गले से लगता है

सूर्य ....... गुड मॉर्निंग बौ जी किये कुछ काम था क्या

दादा जी ....... है बीटा काम तो बहुत है अरे तुम अभी तक त्यार नहीं हुए क्या

सूर्य ....... बाउजी पूजा का मुहूर्त 10 :15 का है आवर अभी तो 6 हर का टाइम है

दादा जी .......... बीटा एक बार वह मंदिर में भी सब देखना होगा की कुछ कमी तो नहीं है

सूर्य ......... आप चिंता न करे बाउजी सकती भाई आवर वयोम भाई रात से वही है सब देख रेख करने के लिया

दादा जी ........ ठीक है बीटा सारा सामान तो कल हे पंहुचा दिया है कुछ बचा तो नहीं है न

सूर्य ........ बाउजी अभी कुलदेवी के आभूषण नहीं आये है

दादा जी ........ मेरी बात हुई थी कल रात सुनार ( सोने का कार्य करने वाला ) से उसने सुबह जल्दी आने को कहा था तुम एक काम करो एक बार उनसे मिल आओ आवर आभूषण त्यार हो गए है तो लेते आना

सूर्य ...... जी बाउजी जैसा आप कहे वैसे गुरुदेव वही मंदिर हे पहुंचेंगे सीधा आवर रानी माँ बाकि सभी के साथ यही पे आने वाली है कुछ समय में

दादा जी ......... ठीक है बीटा तुम जाओ आवर जा कर त्यार हो जाओ आवर निकलो काम से

सूर्य उठ कर फिर से हवेली के भीतर त्यार होने चल देता है

अपने रूम में जब पहुंचा तो वह पहले से किरण सोफिया मौजूद थी किरण एक बेहद खूबसूरत गुलाबी राजपुताना पोशाक पहन रही थी आवर सोफिया उसकी हेल्प कर रही थी

किरण ....... आप अभी तक त्यार नहीं हुए कुंवर जी

सूर्य ...... मेरे कपडे निकल दो मैं नहाने हे जा रहा हूँ

किरण ....... आप किसी आवर रूम में त्यार हो जाइये अभी सोफिया को भी त्यार होना है सोफिया अलमारी में एक बैग है उसमे इनके पूजा के कपडे है वो निकल दो जरा

सोफिया ....... जी दीदी मैं निकल देती हूँ

सोफिया एक बड़ा सा बेग निकलती है आवर सूर्य की आवर बढ़ा देती है

सूर्य जब बॉक्स खोल कर देखता है तो उसमे धोती शेरवानी के साथ साथ एक जोड़ी राजस्थानी मोजड़ी ( जुटी ) थी

सूर्य ........ क्या मेरी फिर से सदी हो रही है

किरण ........ ये सदी के लिया नहीं पूजा के लिया है बड़े पापा .पापा .आवर फूफा जी के भी आपके जैसे हे है आज तो दादा जी भी ऐसे हे त्यार होंगे

सूर्य ........ ठीक है इन्हें अभी के लिया वापिस रख दो आवर मेरे नार्मल कपडे निकल दो जाते समय बदल लूंगा अभी कुछ काम से जाना है

सोफिया उन्हें वापिस अलमारी में रख देती है आवर सूर्य के लिया jean's शर्ट बनियान सेठ निकल कर सूर्य को देती है

सूर्य अपने कपडे लिया ऊपर बने रूम की आवर निकल जाता है उसे लगा ऊपर के रूम में कोई नहीं होगा

सूर्य रूम का दूर खोल अंदर आता है आवर रूम को लॉक कर देता है पूरा रूम खली पड़ा था बीएड की साइड में एक बैग रखा हुआ था पैर सूर्य की नजर उस पे नहीं पड़ती है वो अपने कपडे निकल कर बीएड पे रखता है आवर टॉवल कंडे पे रख बाथरूम की आवर बढ़ता है जैसे दूर के नोब को पकड़ कर खोलने के लिया हाथ बढ़ता है उस से पहले हे बाथरूम का दूर खुल जाता है ऐसे अचानक से दूर खुलने से सूर्य दो कदम पीछे होता है

सामने वाला भी अपने सामने किसी को देख चौंक जाता है

उसकी नजरे अपने सामने खड़े लड़के पे पादरी है जो कंडे पे टॉवल लिया हुए अंडरवियर में खड़ा शॉक से उन्हें देख रहा था

सूर्य ........ ी ऍम सू सू सॉरी आंटी जी मुझे लगा रूम में कोई नहीं है

सूर्य जल्दी से कंडे पे रखा टॉवल अपनी कमर में लपेट लेता है

सामने वो आंटी अभी भी सूर्य को देख रही थी तभी रूम का दूर नॉक होता है

मधु जी जो अभी तक अपने सीने से जांघो के थोड़ा ऊपर तक पिंक लॉन्ग टॉवल में थी वो फ़ौरन बाथरूम का दूर बंद करती है आवर सूर्य को दूर पे कोण है देखने को बोलती है

सूर्य जादू से अपने पुराने कपडे पहनता है आवर रूम का दूर खोलता है

सामने राधिका थी जो कुछ बॉडी लोशन की बॉटल्स लिया कड़ी थी

राधिका ......... आप यहाँ क्या कर रहे है

सूर्य ............ कुछ नहीं वो मेरे रूम में स्वीटी आवर सोफिया त्यार हो रही है तो मैं ये बाथरूम उसे करने आया था पैर आप यहाँ कैसे

राधिका ....... आपको पता नहीं क्या यहाँ माँ आवर मैं रात में रुके थे इस रूम में माँ अभी तो रूम में हे थी

सूर्य ......... ओह्ह्ह सायद वो बाथरूम में है

तभी मधु जी की आवाज सुनाई देती है

मधु जी ...... रइधू बेटी कोण है

हलाकि मधु जी ने हल्का दूर खोल कर देख लिया था की रूम में राधिका आवर सूर्य है जो दोनों रूम के अंदर एक दूसरे से बात कर रहे थे

राधिका ........ जी माँ वो देवर जी है

मधु जी अब बाथरूम से बहार निकल आई थी आवर उनके सरीर पे पहले की तरह केवल टॉवल नहीं था बल्कि उनकी सरीर पे अब विमेंस रॉब था आवर बालो में चौथा टॉवल बंधा हुआ था

मधु जी ........ अरे बीटा आप आप कब आये कोई काम था क्या

सूर्य अपने मन में सोचता है की आंटी जी ने तो पूरी बात हे पलट दी खेर अच्छा हे है राधिका की पता नहीं

सूर्य ......जी आंटी जी मैं यहाँ त्यार होने आया था मुझे पता नहीं था की आप आवर भाबी इस रूम में रुके है आप लोग त्यार हो जाइये मैं दूसरा रूम उसे कर लेता हूँ

मधु जी ........ कोई बात नहीं बीटा राधिका ने हे इस रूम में रुकने का मन था

सूर्य ........ आप लोग त्यार हो जाइये मैं चलता हूँ आंटी जी

सूर्य दोनों को बे बोल कर सीधा निचे चल देता है आवर अपनी बड़ी मम्मी के रूम में गेस जाता है रूम तो काफी थे हवेली में पैर सभी की साफ सफाई नहीं की हुई थी आवर अपनी बड़ी मम्मी को किचन में देख उनके रूम में हे त्यार होना ठीक समजा

सूर्य अपने कपडे बीएड पे रख बाथरूम में नहाने लगता है 15 मिनट्स बाद जब बहार आया तो वह रेखा जी थी जो सूर्य के कपडे अपनी अलमारी में रख रहे थी

सूर्य ....... बड़ी मम्मी वो मेरे कपडे है मुझे पहनने है

रेखा जी ....... माँ सा ने पूजा के लिया दूसरे कपडे दिया है वही पहनो ये नहीं

कहते हुए वही बॉक्स सामने रखती है जो सोफिया ने दिए थे

सूर्य ...... अभी क्या जरुरत थी मम्मी बाद में पहन लेता

रेखा जी सूर्य को उसके कपडे देती है जिसने सूर्य चुप चाप पहनने लगता है

रेखा जी अपनी अलमारी में कुछ देखने लगती है आवर जल्दी हे उन्हें सायद वो चीज़ भी मिल जाती है जिनकी उन्हें तलाश थी

रेखा जी के हाथ में एक छोटा सा बॉक्स था उसे निकलने के बाद रेखा जी अलमारी बंद करती है

आवर सूर्य के सामने बॉक्स को ओपन करती है जिसमे एक बहुत हे खूबसूरत गोल्ड ब्रेसलेट था





रेखा जी ........ ये मेरे बेटे के लिया है आज से अच्छा मौका क्या होगा ये तुम्हे देने के लिया

सूर्य ....... मम्मी ये तो बहुत हे प्यारा ब्रेसलेट है इतना खर्चा करने की क्या जरुरत थी

रेखा जी ........ क्यों क्या मैं अपने बेटे के लिया अपने मन से कुछ जाना भी नहीं सकती क्या

सूर्य ब्रेसलेट को अपने हाथ में ले कर देखता है





सूर्य ............ थैंक यू मम्मी ये वाकई में बहुत प्यारा है बिलकुल आपके दिल के जैसे खूबसूरत मैं हमेशा इसे पहने रखूँगा इस से मुझे हमेशा ख्याल रहेगा की आपका प्यार पुर आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ है

रेखा जी ........... फिर से थैंक यू बोलै न तो कान लाल कर दूंगी बड़ा आया थैंक यू बोलने वाला चल मुझे दे मैं पहनती हु अपने हाथ से

रेखा जी सूर्य से वो गोल्ड ब्रेसलेट ले कर सूर्य की कलाई में पहना देती है

गेट पे कड़ी दादा जी ये सब देख रही थी उन्हें ये देख कर बहुत अच्छा लगा था की रेखा जी आवर सूर्य के बिच कितना प्रेम है

माँ सा ........ रेखा बेटी तू न इसकी आदत ख़राब कर रही है इतना लाड करेगी तो ये बिगड़ जायेगा आवर बाकि सबको कोण लाड करेगा बाकि सब तुमसे नाराज हो जाएँगी

रेखा जी .......... माँ सा आप कब आई कुछ काम था क्या

माँ सा ........ है बेटी ये कुलदेवी के आभूषण है इन्हें अच्छे से बैग में रख लेना

सूर्य ........ क्या सुनार आभूषण ले आया बाउजी तो मुझे वह भेज रहे थे

माँ सा ......... है बीटा अभी अभी आभूषण दे कर गया है अब तुम्हे कही जाने की जरुरत नहीं है

सूर्य ....... ठीक है मैं बहार बाउजी के पास जा रहा हूँ

दादा जी रेखा जी आवर सूर्य के सर पे हाथ फिर कर बहार की आवर चल देती है

रेखा जी अपनी आँखों से काजल निकल सूर्य के कान के पीछे बिंदी बना देती है

सूर्य अब तक त्यार हो चूका था लाल रेशमी धोती आवर सफ़ेद सुनहरी चोग़े के साथ सुनहरी मारवाड़ी मोजड़ी

रेखा जी आभूषण बेग में रखने लगती है

सूर्य रेखा जी के गाल को चुम कर मुस्कुराते हुए बहार निकल गया

रेखा जी मुस्कुराते हुए अपने गाल को सहलाते हुए सूर्य को बहार जाता हुए देख रही थी

रेखा जी ......... जब तक तुम नहीं आये थे बीटा तब तक ये सिर्फ एक हवेली थी तुम्हारे आने के बाद इन दीवारों में जान आई आवर ये हवेली एक हस्ता खेलता घर बना हे देवी माँ इस परिवार पे ऐसे हे अपनी दया दृस्टि बनाये रखना इस परिवार की ख़ुशी के अलावा आपसे कुछ नहीं मांगूंगी

सूर्यकांत जी .......बरखुरदार कहा थे अब तक तुम अपना रूटीन बिगड़ रहे हो

सूर्य ........ गुड मॉर्निंग अंकल जी वो मैं उठ तो जल्दी हे गया था अंकल पैर त्यार होने में वक़्त लग गया

दादा जी ........ बीटा इतना वक़्त तो महिलाएं भी त्यार होने में नहीं लगाती फिर तुम्हे इतना टाइम कैसे लग गया

सूर्य ........ वो मेरे रूम में स्वीटी आवर सोफिया त्यार हो रही थी जब ऊपर गया तो वह मधु आंटी आवर राधिका भाबी त्यार हो रही थी फिर बड़ी मम्मी के रूम में त्यार होने में वक़्त लग गया

दादा जी ........ कल हे कुछ लोगो से बोल कर पूरी हवेली के रूम त्यार करवा देते है जल्दी हे सदी है ऐसे में फिर से मेहमान आएंगे तो परेशानी नहीं होगी

सूर्यकांत जी ........ बाउजी हम क्या इतने पराये है जो हमें सदी में इन्विते हे नहीं किया वैसे सदी किसकी है

दादा जी ........... सूर्यकांत बीटा ऐसी बात नहीं है अभी सदी में कुछ वक़्त है सदी मेरी छोटी बेटी आवर आपकी अफसर मेर्री बिटिया की है विजय के साथ

सूर्यकांत जी ........ अच्छी जोड़ी है बौ जी दोनों हे आर्मी से है आवर मेर्री बेटी को अपनी बेटी मान आप दोनों का विवाह कर रहे है ये तो और भी अच्छी बात है बेटी का कन्यादान धरम अनुसार सबसे बड़ा धरम है बाउजी

दादा जी .......... तुम्हारी बात सही है बीटा पैर मेरे भाग्य में मेर्री बेटी का कन्यादान करना नहीं लिखा है

गोविन्द जी ......... क्या मतलब बाउजी फिर कोण कर रहा है कन्यादान

सूर्यकांत जी ........ ये तो मुझे भी समाज नहीं आया क्या शिव या महेंद्र में से कोई कर रहा है

सूर्य ......... नहीं अंकल न बाउजी कर सकते है आवर न पापा या बड़े पापा कर सकते है

सूर्यकांत जी ....... ऐसा क्यों बीटा

सूर्य ....... गुरुदेव ने इसके लिया मना किया है की हमारे परिवार में से मेर्री जी का कन्यादान कोई भी नहीं कर सकता है आवर अगर गुरुदेव ने ऐसा कहा है तो जरूर कोई वजह है

सूर्यकांत जी ........ अगर आपको बुरा न लगे बाउजी तो ये शोभाग्य मुझे मिल सकता है मैं मेर्री बेटी का कन्यादान करना चाहता हूँ अगर इसमें गुरुदेव को या आपको कोई आपत्ति न हो तो

दादा जी ....... मुझे कोई आपत्ति नहीं है बीटा पैर इसका फैसला गुरुदेव हे करेंगे आज वो पूजा में आ रहे है उनसे इस बारे में बात करते है

सूर्यकांत जी ....... क्या वो भी आएंगे पूजा में

दादा जी ....... है बीटा उनके हाथो हे ये पूजा सम्पन होगी

तभी एक के बाद एक करके 4.5 कार्स हवेली में आती है जिसमे सूर्य के नाना नानी का परिवार था साथ हे गीता जी आवर रुक्मणि जी विधि आवर गायत्री थी

सूर्य दोनों को देखते हे समाज गया की ये वास्तविक विधि आवर गायत्री है न की उनका अंश

सूर्य आगे बाद अपने नाना जी नाना जी दोनों मां ममी से गले लग कर मिलता है

उसके बाद सपना से भी जो सभी के सामने थोड़ा शर्मा रही थी

सूर्य गीता जी आवर रुक्मणि से भी ुशी प्रेम भाव से मिलता है आवर विधि आवर गायत्री से हाथ मिलता है

सूर्य ............ अजय तुम कार में अंदर क्या कर रहे हो भाई बहार आ जाओ

अजय ........ वो वो मैं माँ आवर चची जी को छोड़ने आया था मुझे वापिस जाना है

सूर्य ....... चुप चाप बहार आओ भाई तुम्हे भी पूजा में शामिल होना है क्या तुम खुद को इस परिवार का हिस्सा नहीं मानते हो या अभी भी मुझसे नाराजगी है

अजय ....... नहीं नहीं भाई मैं भला क्यों आप नाराज रहूँगा गलतिया मैंने की है न की आपने

सूर्य ........ चची जी आप हे कहो न सायद आपकी बात मान जाये

गीता जी ....... अजय बीटा सूर्य सही कह रहा है काम बाद में भी होते रहेंगे ऐसे मोके पे परिवार में होना जरुरी है

अजय कार से बहार निकल आता है

दरशल गीता जी ने पहले अजय को यहाँ रुकने के लिया नहीं कहा था इशू लिया वो काम का बहाना कर रहा था

सूर्य बिना किसी संकोच के अजय से गले लग कर मिलता है आवर उसके कान में डेरी से बोलता है

सूर्य ........ अजय जो बिट चूका है उसे भूल कर तुमने प्रायश्चित कर कुढ़ में बदलाव किये है वो बहुत अच्छे है ये बदलाव एक अच्छे इंसान एक अच्छे भाई आवर बेटे के रूप में देख कर मुझे बहुत ख़ुशी हुई तुम भी मेरे भाई हो भले हे भूतकाल में हमारा रिस्ता कुछ भी रहा है इस हवेली के दरवाजे हमेशा तुम्हारे लिए खुले रहेंगे जब तक तुम अपना रास्ता नहीं भटकते हो कोई भी कभी कैसी भी जरुरत हो बस एक बार याद कर लेना

दादा जी ....... अरे भाई तुम दोनों भाई किस मंतार्ण में लग गए

सूर्य ........चल भाई अंदर बाकि सब से भी मिल लो फिर पूजा के लिया निकलते है

सब के अंदर जाने के बाद बहार जोरावर जी महेंद्र जी विजय जी दादा जी गोविन्द जी सूर्यकांत जी नाना जी हे बहार बचे थे

सूर्यकांत जी ........ बाउजी ये तो सक्तिपुर से ठाकुर दुर्जन सिंह का परिवार है न क्या इनसे दुश्मनी ख़तम हो गई

दादा जी एक लम्भी साँस लेते हुए अपने सम्बन्धी अपने दोस्त विक्रम जी ( नाना जी ) को देखते है

दादा जी ....... बीटा देखा जाये तो दुश्मनी थी हे नहीं सब एक ग़लतफ़हमी के सीकर थे सूर्य ने वो ग़लतफ़हमी दूर कर दी तो दुश्मनी भी ख़तम हो गई अब वो भी अपना हे परिवार है

सूर्यकांत जी .......... दुर्जन सिंह आवर सकती सिंह अगर समझदारी से काम लेते तो सायद दोनों की बलि न चढ़ती सूर्य के हाथो

गोविन्द जी ......... क्या मतलब भाई साहब

अब जब बात खुल हे गयी थी तो जोरावर सिंह जी ने सब सच बिताना हे बेहतर समजा

आवर गोविन्द जी को पूरी बात बताते है

गोविन्द जी ........ यकीं नहीं होता की सूर्य ऐसा भी कर सकता है

जोरावर जी ......... अगर बात परिवार पे आये तो वो यहाँ बैठे किसी की नहीं सुनता हम सब मिल कर भी उसके सामने एक मिनट्स नहीं ठहर सकते वो न गलत करता है आवर न आँखों के सामने गलत होता देख सकता है फिर चाहे सामने कोई भी क्यों न हो

सूर्यकांत जी ........ अभी बहुत कुछ ऐसा है जो आपको आपके दामाद के बारे में पता नहीं है

जोरावर जी चौंकते हए सूर्यकांत जी की आवर देखते है

सूर्यकांत जी ........ हाहाहा भाई जोरावर सिंह आपकी बेटी किरण को हमारी संदन ने बेटी मन लिया है तो सूर्य इनका भी दामाद बन गया है अब आपका तीस्ता इनके साथ भाई का है हाहाहा

जोरावर जी ............ ये तो अच्छी बात है सूर्यकांत जी

दादा जी ....... महेंद्र बीटा सब सामान रखो 9 बजने वाले है

महेंद्र जी ....... जी बाउजी

थोड़ी देर में सभी तयारी पूरी कर लेते है आवर सब एक एक कर कार में बैठने लगते है

सूर्य अपनी कार बहार निकलता है आवर उसकी चाबी अलीना को दे देता है फिर अपनी बाइक निकलता है

दादा जी ....... तुम इस पे आ रहे हो क्या बीटा

सूर्य ....... है बाउजी काफी दिनों से चलाई नहीं है न

माया ....... सूर्य मैं तुम्हारे साथ चालू क्या तुम्हारी बाइक पे

सूर्य अब क्या जबाब देता अपने दादा जी के सामने

दादा जी ........ अरे बेटी इसमें पूछने की क्या बात है सूर्य आराम से आना संभल कर

सूर्य जी ...... दादा जी

एक एक कर कार का काफिला हवेली से बहार निकलता है बहार सूर्यगढ़ की हे कुछ कार्स आवर इनके साथ जुड़ गई जो सूर्य के दादा जी के साथ मेल जॉल रखने वाले लोगो की हे थी

सूर्य ........ चलिए माया जी बेथ जाइये हम लोग भी चलते है वैसे आप बहुत खूबसूरत लग रही है इन लाऊंगा चोली में पैर बाइक पे बैठने में इन में प्रॉब्लम हो सकती है आपको

माया ....... मुझसे खूबसूरत तो आपकी सुनिधि लग रही है आवर कोई प्रोब्लेम्स नहीं होगी बस हल्का सा लहंगा ऊपर कर आराम से बेथ सकती हूँ

सूर्य ........ ठीक है जैसे ाको मर्जी पैर ये मेरी सुनिधि से क्या मतलब है

माया .......ज्यादा भोले न बनो जैसे कल रात कुछ हुआ हे न हो छठ पे केवल तुम आवर सुनिधि हे नहीं मैं भी थी उस समय

सूर्य ....... हम्म्म तो ये बात है वैसे मुझे जलने की भू आ रही है

माया ....... यू तुम न सच में बहुत चालू हो सूर्य

सूर्य ........ जमाना भू तो चालू लोगो का है वैसे मैं सच णता देता हूँ मन में कोई गलत फहमी मत पाल लेना मैंने कल रात पहली बार सुनिधि को किस किया था वो भी मैंने पहल नहीं की थी आवर न उस से ज्यादा कुछ हुआ था हमारे बिच

माया सूर्य के पीछे दोनों तरफ बाइक पे पेअर कर के बेथ जाती है जिस से उसके बिना बाजु के काशी हुए ब्लाउज में बंद मौसमी अनार सूर्य की पीठ पे हलके हलके वो मुलायम अहसास होता है

सूर्य बाइक आगे बढ़ा देता है आवर हवेली से बहार निकल जाता

आवर 15 मिनट्स बाद सूर्य माया दोनों मंदिर पहुंचते है

माया ........ यहाँ इतने लोग कैसे है आवर इतनी पुलिस भी है

सूर्य ....... लोगो का तो समाज सकता हूँ की सूरतगढ़ सक्तिपुर आवर सूरजगढ़ के अलावा भी आस पास के कसबे के लोग है पैर ये पुलिस किस लिया है यहाँ चलो अंदर चल कर देखते है

सूर्य अपनी बाइक बाकि कार्स के साथ लगा कर माया को लिए अंदर की आवर चल देता है अपने परिवार के पास

तभी अचानक से परिधि सूर्य के सामने आ जाती है

परिधि ...... आप अब आ रहे है हम कब से यहाँ आपका इन्तजार कर रहे है

सूर्य ........ इसमें मेरी क्या गलती है परिधि मुझे तो सन्देश मिला था की आप लोग हवेली आने वाले है पैर आप सब तो सीधा यहाँ आ गए

परिधि ......... Hi माया जी

माया ...... Hello परिधि जी

सूर्य ........ रानी माँ कहा है ी मैं माँ कहा है

परिधि ....... वो बड़ी मम्मी आवर माँ सा के साथ चलिए मैं ले चलती हूँ आपको

सूर्य बाते करते हुए अपने परिवार के बिच आ पहुँचता है

आवर सीधा रानी पारी के पेअर चूक कर उनसे गले लग कर मिलता है

रानी पारी ........ कैसे हो बीटा आप

सूर्य ....... मैं अच्छा हूँ माँ पैर आप तो हवेली आने वाली थी न

रानी पारी ....... है पैर फिर हम सब सीधा गुरुदेव के साथ सीधा यही आ गए

सूर्य गुरुदेव कहा है रानी पारी एक आवर इशारा कर देती है

सूर्य ........ माँ हम बाकि बात हवेली में करते है मैं गुरुदेव से मिल कर आता हूँ

सूर्य जिनिशा को बाद में मिलने का इशारा देता है वो भी हलकी सी है में गर्दन हिला कर जबाब देती है

सूर्य गुरुदेव से मिलने के कुछ देर बाद पूजा की तयारी पूरी हो जाती है तो गुरुदेव दादी जी शालिनी मधु जी के साथ जूलिया किरण राधिका सूर्य को गर्हब गाढ़ा में बुलाते है जहा पूजा होनी थी आने वाले नए मेहमानो को ले कर के

दादा जी सभी बड़ो को ले कर के एक तरफ आवर पूजा की तयारी कर राखी थी उस आवर चल दिए

गोविन्द जी ........ बाउजी क्या हम सब पूजा में शामिल नहीं होंगे

दादा जी ....... गोविन्द बीटा उस पूजा में हम सब शामिल नहीं हो सकते है हम इस पूजा में शामिल होंगे बचे भी कुछ देर में इस पूजा में शामिल हो जायेंगे

अंदर गुरुदेव पूजा आरम्भ कर चुके थे जिसमे एक तरफ सूर्य था उसके एक तरफ राइट साइड किरण आवर जुली बेथ गई थी दूसरी तरफ लेफ्ट साइड राधिका का तीनो हे एक जैसी गुलाबी वस्त्रो में बहुत खूबसूरत लग रही थी

हलाकि जूलिया आवर किरण के लिया पहले हे एक जैसे वस्त्र लिए गए थे पैर जब राधिका के बारी में पता चला तब शालिनी जी ने हे खुद रिद्धि की मदद से किरण जूलिया जैसे कपडे राधिका के लिया मंगवाए थे भले हे राधिका सूर्य की पत्नी नहीं ठु पैर उसके अंश को दर्जन किया था तो शालिनी जी के लिया वो भी उनकी बहु थी फिर वो राधिका के साथ कैसे भेद भाव करती उसके घराब में भी तो उनका पोता था भले हे दुनिया कज नजर में उसकी सचाई कुछ आवर थी

मधु जी ......... शालिनी जी ये दूसरी बच्ची भी माँ बनने वाली है क्या

शालिनी जी अपनी सास की आवर देखती है

शालिनी जी ....... इस बारे में हम बाद में बात करेंगे अभी इतना समाज लीजिये की जैसे राधिका बेटी इस पूजा में सूर्य के साथ है वैसे हे जूलिया बेटी भी है

शालिनी जज ने ये बात बहुत डेरी से कही थी जो केवल मधु जी को हे सुनाई दी थी पैर गुरुदेव भी मंद मंद मुस्कुरा उठे

मधु जी का पूरा चेहरा सफ़ेद पड़ें लगा उनके माथे से पसीने की बुँदे उभरने लगी

शालिनी जी ने उनका हाथ थम उन्हें संत रहने का इशारा किया

शालिनी जी ......... राधिका मेरी भी बहु होने के साथ साथ बेटी भी है जो आप जानती है वो मैं भी जानती हूँ चिंता न कीजिये ये बात यही ख़तम हो गई

मधु जी ....... क्या हम इस बारे में

शालिनी जी ......घर पे बात करेंगे अकेले में

ीदार गुरुदेव पूजा आरम्भ कर चुके थे पहली आहुति गुरुदेव ने पूजा हवन में डाली उसके बाद सूर्य किरण जुली राधिका चारो ने मिल कर

करीब आधे घंटे बाद गुरुदेव ने पूजा पूर्ण होने की पुष्टि की आवर कुलदेवी को प्रसाद चढ़ा कर पूजा का अंतिम पड़ाव पूरा किया

गुरुदेव .......... माँ की पूजा पूर्ण हुई अब बचो पे माँ की कृपा से कोई भी बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा फिर गुरुदेव ने माँ के चरणों से एक मोली का धागा लेते हुए राधिका के हाथ पे बंद दिया इस दौरान वो निरंतर माध्यम आवाज में मंत्र पद रहे थे किरण आवर जूलिया को भी मोली का धागा बाँदा गया राधिका को इस लिया ताकि उसे माँ का आशीर्वाद भी मिले आवर बचे पे कोई अनिष्ट आये तब भी सुरक्षित रहे हलाकि जूलिया आवर किरण दोनों के बचे स्वयं को सुरक्षित रख सकते थे फिर भी माँ के आशीर्वाद के रूप में दोनों को मोली बंद दी गई

सभी को लिए गुरुदेव कुलदेवी मंदिर से बहार निकले आवर पुजारी जी को दूसरी पूजा आरम्भ करने को कहा

वही शिव आवर महेंद्र जोरावर संजय जी को सभी के लिया पार्षद वितरित करने को कहा

गुरीदेव की बात सुन सभी के लिया भंडार गाढ़ा खुलवा दिया गया करीब 11 बजने को आया था तो सभी को भोजन करवाना सुरु करवा दिया था

पुजारी जी ने दूसरी पूजा सुरु कर दी थी जिसमे दादा जी दादी जी नाना जी नानी जी बैठे थे आवर उनके साथ किरण आवर सूर्य

बाकि सभी परिवार के लोग भी खड़े थे

पायल ...... माँ ये पूजा किस लिया है आवर इसमें केवल सूर्य आवर स्वीटी हे नाना जी लोगो के साथ बैठे है

मेनका जी ....... तुम लोगो का घर में ध्यान होता है की नहीं

कोमल ....... क्या मतलब बुआ सा

मेनका जी ........ ये पूजा इस लिया राखी है ताकि आज सूर्य को सूर्यगढ़ आवर सूरजगढ़ का वरिष्ठ घोषित किया जा सके इस पूजा के बाद सूर्य ठाकुर बन जायेगा आवर किरण ठकुराइन

पायल .......सूर्य तो पहले से हे ठाकुर है न माँ

मेनका जी ........ ही बागवान पता नहीं इसको अकाल कब आएगी

शालिनी जी ......... दीदी गुस्सा क्यों करती है आप पायल बीटा मैं बताती हम तुम्हे सरल शब्दों में मान लो बाउजी हमारे परिवार के राजा है आवर सूर्य हमारे परिवार का राजकुमार वरिष्ठ घोषित करना मतलब सूर्य को यूवराज बनाना साफ शब्दों में कहु तो मतलब की भावी राजा के लिया उसका चुनाव करना मतलब इस पूजा के बाद पापा आवर बाउजी दोनों हे सूर्य सूर्यगढ़ का आवर सूरजगढ़ का विधु पूर्वक वरिष्ठ घोषित कर देंगे

पायल ........ मतलब की नाना जी अपनी ठाकुर की पद्वी के लिया सूर्य को चुना है आवर उस पूजा के बाद दोनों नाना जी की पद्वी का हक़दार सूर्य होगा

मेनका जी ........ चलो शुक्र समाज तो आई बात

पायल ......पैर हमें किसी ने बताया हे नहीं आवर सायद इस बारे में सूर्य को भी नहीं पता है

शालिनी जी ....... हमें खुद कुछ देर पहले पता चला है तो तुम लोगो को कैसे पता चलता

कुछ देर बाद जोरावर जी प्रिय जी संजय सन्ति जी के साथ साथ शिव शालिनी जी महेंद्र रेखा जी भी इस पूजा में शामिल होते है वैसे तो बाकि परिवार के लोग भी शामिल थे पैर विधि के अनुरूप मुख्या लोग यही इस पूजा में शामिल थे

अंत में पूजा पूर्ण हुई तो तो सूर्य के नाना जी ने अपना खानदानी कड़ा ( कंगन ) निकल कर सूर्य को पहना दिया अब सूर्य राणा परिवार का ऑफिसियल वरिष्ठ बन चूका था दादा जी ने भी अपने गले से वो मोती सी पुराणी गोल्ड चैन निकल कर सूर्य को पहना दी जिसमे कुलदेवी की प्रतिमूर्ति थी

सूर्य ........ मैं नहीं जनता आप लोगो ने ये क्यों किया आवर किस लिया अभी तो मैं ये खानदानी निसानिया पहन रहा हूँ पैर घर पे आपको वापिस लौटा दूंगा वरिष्ठ बनना स्वीकार है पैर अभी मैं इसका दायित्व नहीं निभा सकता बाउजी नाना जी जिस दिन मैं अपना उद्देश्य पूरा कर लूंगा मैं खुद इनकी मांग करूँगा तब तक आप हे इन पूर्वजो की धरोहर को सम्भालिया

दादा जी आवर नाना जी मिल कर सूर्य को सूरजगढ़ आवर सूर्यगढ़ का आदिकारिक रूप से घोषणा करते है

साथ हे साथ 101 कन्याओ के विवाह की विवाह में होने वाले सम्पूर्ण खर्च के साथ उनके विवाह का दायित्व लेते है

जोरावर जी भी गाँवो के विकाश के लिया कुछ योजनाओ को पूरा करवाने का आश्वासन देते है

जैसे की पानी की समश्याओ का निदान अच्छी सड़के सरकारी स्कूल का सुधर हॉस्पिटल्स में अच्छी मेडिकल आवर अच्छे स्टाफ आदि की वय्वस्ता का

इस इलाके के दूर फराज इलाको में सबसे ज्यादा तो सड़के आवर पानी की समस्या होती है

दादा जी ........ अब आप सब भोजन कीजिये भोजन के बाद बिना वस्त्र लिया कोई भी न जाये आवर किसी को कोई समस्या है तो वह अपनी समस्या भी रखे हर संभव कोशिश होगी आपकी मदद करने की भविष्य में भी बिना किसी संकोच के आप अपनी समश्याओ के लिया कभी भी हवेली पे आ सकते है

दादा जी के वह से जाने के बाद सभी लोग पंडाल में माँ का प्रसाद गठन करने चले जाते है

सूर्य किरण मानसी राधिका जूलिया कोमल अजय दीप्ती सानिया उन लोगो को कपडे देते है जो लोग भोजन के बाद अब निकलने लगे थे

सभी ख़ुशी ख़ुशी भोजन करने के बाद नए अच्छे कपडे मिलने से आवर ज्यादा ख़ुशी से बच्चों को दिल से दवा दे कर अपने अपने घर की आवर निकल जाते है

दादा जी ....... बच्चों अब तुम सब भी खाना खा लो काफी समय हो गया है तुम्हारे पापा लोग देख लेंगे

सूर्य ....... जी दादी जी

सूर्य सभी को भोजन करने लिया साथ ले कर मंदिर के प्रागण में आ गया जहा बाकि परिवार के लोग भो मौजूद थे

सभी कतारबद्व बेथ कर भोजन करने लगते है केवल कुछ बड़ो को छोड़ कर

डेरी डेरी लोग आते जा रहे थे आवर भोजन कर अपने अपने घर भो जा रहे थे

जोरावर जी .......पापा आप लोग घर जाइये 4 बजने को आये है बचे भी सुबह जल्दी उठे थे थक गए होंगे यहाँ का हम सब देख लेंगे

नाना जी ....... ठीक है बीटा हम लोग भी अब घर जा हे रहे है तुम लोग भी भोजन कर लो बाकि सब काम बाद में कर लेना

जोरावर जी ..... जी पापा

कुछ देर बाद शिव महेंद्र जोरावर संजय जी वयोम सकती के साथ सूर्यगढ़ आवर सूरजगढ़ के कुछ लोग हे बचे थे जो यगा की वय्वस्ता देख रहे थे

गीता जी आवर रुक्मणि जी अजय के साथ यही से निकल गई सक्तिपुर के लिया विधि आवर गायत्री कल आने का बोल कर सूर्यगढ़ बाकि सभी के साथ निकल गए थे

सभी घर पहुंचने के बाद अपने कपडे बदलते है क्यों की भरी कपड़ो ने सबकी हालत ख़राब कर दी थी

सभी ने शावर ले कर नार्मल कपड़ो में कुछ देर आराम किया आवर कुछ लोग गैप सैप करने लगे

सूर्य राधिका के साथ सबकी नजरो से बच कर दोनों ऊपर वाले रूम में पहुंच जाते है

दीप्ती ........ अभी तो साम हो गयी है क्यों न निचे हॉल में चल कर बात करते है सब के साथ ऐसे अकेले में मज़ा नहीं आ रहा

राधिका ....... चलिए सब निचे हे चलते है

दीप्ती इन सभी को यहाँ से निचे ले कर जाना चाहती थी क्यों की उन्होंने राधिका को सूर्य के साथ जाते हुए देख लिया था

वो नहीं छाती थी की किसी के भी नजरो में ये लोग आये

ीदार ऊपर जैसे हे दोनों रूम में पहुंचने रूम को खली देख राधिका फ़ौरन रूम को अंदर से लॉक कर देती है

राधिका ......... आपको नहीं पता मैं कब से आपके साथ अकेले में मिलने का इन्तजार कर रही थी .

सूर्य ......... जनता हूँ राधिका पैर सभी लोगो के बिच में इतना आसान नहीं न कभी भी कोई भी आ सकता है

राधिका अपनी एड़ी पे कड़ी हो कर सूर्य के होंठ चूसने लगती है

सूर्य भी राधिका की तरफ समझते हुए उसे किश करने लगता है इस बात से अनजान की इन दोनों प्रेमी युगल के अलावा भी कोई आवर इन्हें खुली आँखों से इनकी प्रेम क्रीड़ा को देख रही है .................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .........................
 
अपडेट. 265

ीदार ऊपर जैसे हे दोनों रूम में पहुंचने रूम को खली देख राधिका फ़ौरन रूम को अंदर से लॉक कर देती है

राधिका ......... आपको नहीं पता मैं कब से आपके साथ अकेले में मिलने का इन्तजार कर रही थी .

सूर्य ......... जनता हूँ राधिका पैर सभी लोगो के बिच में इतना आसान नहीं न कभी भी कोई भी आ सकता है

राधिका अपनी एड़ी पे कड़ी हो कर सूर्य के होंठ चूसने लगती है

सूर्य भी राधिका की तरफ समझते हुए उसे किश करने लगता है इस बात से अनजान की इन दोनों प्रेमी युगल के अलावा भी कोई आवर इन्हें खुली आँखों से इनकी प्रेम क्रीड़ा को देख रही है .................

अब आगे ...........

सूर्य राधिका को पूरी तरह से संतुष्ट करने के बाद करीब एक घंटे बाद उस रूम से अकेला बहार निकला आवर निचे चल दिया

राधिका तो उसकी माँ तो रात में ुशी रूम में ठहर थी तो एक तरह से फ़िलहाल ये राधिका का रूम भी था तो वह राधिका का होने पे किसी को कोई संदेह नहीं होगा पैर अगर सूर्य को इस रूम में कोई आवर देखता तो उसे राधिका आवर सूर्य को ले कर कोई न कोई संदेह जरूर हो जाता

ीदार राधिका अभी भी आँखे बंद किये बीएड पे लेती थी उसकी छूट कुछ गहरी लाल रंग की हो चुकी थी आवर छूट के लिप्स काफी हद ताज फूल कर आपस में चिपके हुए थे जिनके थोड़ा निचे छूट के चढ़ से अभी भी रुक रुक कर साँस के साथ वो सफ़ेद तरल बहता हुआ राधिका की गुड्डा द्वार के चढ़ को भिगोता हुआ बेडशीट को गिला कर रहा था जहा पहले से काफी जगह गीली थी

बाथरूम में अभी वी महिला अपनी सर्रे को उठाये टेसू पीपर से अपनी हलके बालो से भरी मोटी छूट की फंखो को साफ कर रही थी उनके चेहरे पे अभी भी पसीने की कुछ बुँदे टपक कर उनकी गर्दन से होते हुए उनकी दोनों बूब्स के जोड़ में कही गायब हो रही थी

ीदार राधिका बीएड से उठ कर बाथरूम की आवर नंगी हे हलकी बदली हुई चल के साथ हलके कदमो के साथ चल पड़ी इस बात से अनजान की बाथरूम में कोई आवर भी हो सकता है जो सूर्य आवर राधिका की प्रेम लीला को लाइव देख रहा था बिना किसी ब्रेक के

जैसे हे राधिका बाथरूम के दूर को खिलती है उसकी आँखे हैरत आवर शॉक से खुली की खुली रह गयी

ऐसा हे हाल सामने वाली महिला मधु जी का था

बाथरूम से जो सूर्य पुर राधिका की प्रेम लीला का लाइव शो देख रही थी वो दो आँखे किसी आवर की नहीं मधु जी राधिका की हॉट माँ थी जो इस वक़्त गेले टॉवल से अपनी दोनों 36 के साइज की सर उठाये चूचियों को गेले टॉवल से वह का पसीना साफ़ कर रही थी वो चाहती तो फिर से कहा सकती थी पैर उस से राधिका को किसी का बाथरूम में होने का पता चल जाता पैर मधु जी जिस बात से दर रही थी वही हुआ आवर माँ बेटी का सामना हो हे गया

राधिका की तो हवइया हे ुधि हुई थी अपनी माँ को सामने देख कर

भले हे सूर्य आवर राधिका का कैसा रिस्ता है इसके बारे में पता था पैर न राधिका अपनी माँ के सामने सूर्य से हमबिस्तर होना चाहती थी आवर न मधु जी की कोई ऐसी इच्छा थी कज वो अपनी बेटी आवर उसके प्रेमी को हम बिस्तर होता देखे

मढ़ी जी की नजर जब राधिका के चेहरे पे पड़ी थी उनका भी दिल बेथ गया क्यों की राधिका का पूरा चेहरा पीला पद चूका था आवर उसकी आँखों से आंसू चालक पड़े थे

मधु जी आगे भाड़ राधिका को ुशी हालत में गले से लगा लेती है

मधु जी ........... सॉरी बीटा मुझे पता नहीं था की तुम दोनों यहाँ आने वाले थे आवर जब तक तुम दोनों को रोकती तब तक तुम दोनों काफी आगे भाड़ गए थे मैं तुम दोनों को शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी इस लिया तुम दोनों का यहाँ से जाना का इन्तजार करने लगी ताकि तुम दोनों को कुछ भी पता न चले

राधिका ..... ी ऍम सॉरी माँ. मुझे माफ कर दीजिये

राधिका को लगा की उसकी माँ ने सूर्य के साथ सेक्स करते हुए देख लिया है

मधु जी ..... स्स्स्सस्शह्ह्ह संत हो जाओ बेटी रोना बंद करो आवर भूल जाओ सब कुछ मैंने कुछ नहीं देखा

मधु जी राधिका को खुद से अलग कर उसके आंसू पूछती है अभी भी राधिका का चेहरा उतरा हुआ था

मधु जी भी समाज गई की उनकी बेटी अभी भी सर्मिन्दा है जिस से वो उदाश है

मधु जी ........ अब क्या अपनी माँ के सामने ऐसे हे पुरे दिन नंगी कड़ी रहोगी

अब जा कर राधिका को अपने नंगे सरीर का आभाष हुआ आवर वो जल्दी से अपनी वीर्य से गीली योनि आवर बूब्स को अपने दोनों हाथ से कवर करती है

मधु जी ....... हेहेहे वैसे मुझे पता नहीं था की मेरी ये बेटी इतनी हिम्मत वाली भी है जो इतनी दिलेर हो सकती है

मैं बहार जा रही हूँ तुम आराम से फ्रेश हो जाओ आवर थोड़ा रेस्ट कर लेना सोच लेना मैंने कुछ नहीं देखा

मधु जी खुद को ठीक कर बाथरूम से निकल कर थोड़ा अपने चेहरा ठीक रूम से बहार निकल गयी

राधिका फ़ौरन रूम को अंदर से बंद कर देती है आवर लम्बी लम्बी सांसे लेने लगती है जैसे सीने से बहुत बड़ा बीज उतर गया हो

राधिका एक बार फिर से बाथरूम में आती है आवर पलट कर बाथरूम बंद करने लगती है तभी उसकी नजर बाथरूम से सीधी बीएड पे पड़ती है जो पूरा साफ साफ नजर आ रहा था बाथरूम के दूर से

राधिका ......... क्या माँ ने सच में यहाँ से सब देखा है सायद उन्होंने सब कुछ देख लिया है

तभी राधिका की नजर टॉयलेट सहित में आवर पास में पड़े तिसु पीपर पे पड़ती है आवर राधिका को पूरा माजरा समाज आ जाता है

राधिका ......... अब जो हो गया उसे बदला नहीं जा सकता माँ को पहले से हे सब पता है बस उनके सामने ये सब करना नहीं चाहती थी

राधिका तिसु पीपर से अपनी योनि को साफ कर नहाने लगती है

ीदार मधु जी निचे पहुंचते हे शालिनी जी को खोजने लगती है उन्हें उनसे बात जो करनी थी

कुछ देर बाद शालिनी जी उन्हें सूर्यकांत जी की वाइफ के साथ कॉफ़ी पिटे हुए बात करती नजर आयी

शालिनी जी ......... आइये मधु जी बैठिये काफी टाइम लगा दिया आपने तो फ्रेश होने में

मधु जी ...... .... है वो राधिका के साथ कुछ बात करने में टाइम लग गया

(मधु जी ...... अब आपको क्या कहु शालिनी जी इतनी देर से आपके बेटे आवर मेरी बेटी की चुदाई देख देख कर बाथरूम में ऊँगली कर रही थी )

आंटी जी .......... आप दोनों संदन बात कीजिये मैं मजी से कुछ बात करके आती हूँ

शालिनी जी ....... जी जरूर मधु जी आप मेरे रूम में चलिए वही बात करते है

मधु जी है में सर हिला कर मुस्कुरा देती है

शालिनी जी मधु जी दोनों शालिनी जी के रूम में पहुंच गई शालिनी जी रूम को अंदर से लॉक कर देती है ताकि कोई आवर उनके बिच की बात न सुन पाए

मधु जी आवर शालिनी जी दोनों एक दूसरे के सामने रूम में रखे सोफे पे बेथ जाती है

मधु जी हिम्मत कर अपनी बेटी के बारी में बात करने तो आ गई थी पैर कहा से आवर कैसे बात की सुरुहत करे उन्हें ये समाज नहीं आ रहा था

कुछ देर की ख़ामोशी को आखिर कर शालिनी जी ने हे भांग किया

शालिनी जी ...... मधु जी मैं जानती हूँ आप राधिका बेटी को ले कर चिंतित है उसके भविष्य को आवर उसके बच्चे को ले कर भी

मधु जी ........ क्या आप सब सचाई जानती है

शालिनी जी ....... है मुझे पता है राधिका बेटी के पेट में जो अंश है वो ठाकुर खंडन का है मेरे बेटे सूर्य आवर राधिका का अंश है इशू लिया तो राधिका सूर्य के साथ उस पूजा में शामिल हुई थी जिसमे बचे का बाप शामिल हो सकता है

शालिनी जी ने बिना बात को गुमाये स्पष्ट कर दिया था की वो राधिका आवर सूर्य के रिश्ते से पूरी तरह परिचित है आवर ये भी की राधिका के पेट में पल रहे अंश का वास्तविक पिता कोण है

मधु जी .......... मैं पहले से जानती थी शालिनी जी इस बारे में आवर कही न कही राधिका आवर सूर्य के बिच बने इस सम्बन्ध को मैंने भी सहमति दी थी सम्बन्ध बनने से पहले हे क्या करती माँ हूँ न अपनी बेटी को इस तरह से तो नहीं देख सकती भले हे कमजोरी रोहन में है पैर दोष सभी राधिका को देते बहन जी बहुत अच्छे दिल की है जो उन्होंने आज तक राधिका को कभी इसका जिमेवार नहीं मन पैर बहरी लोगो का मुँह तो बंद नहीं किया जा सकता न

शालिनी जी ......... ये तो हमारे समाज की घृणित सोच है मधु जी कमी चाहे पुरुष में हे हो पैर दोषी स्त्री को मन जाता है गलती ुशी की निकली जाती

मधु जी थड़ा आगे खिसक कर शालिनी जी का हाथ अपने हाथ में ले लेती है

मधु जी ......... मैं नहीं जानती की आपको किस तरह पता चला ये सब पैर आपसे उम्मीद करती हूँ की आप ये बात अपने तक हे रखेगी वर्ण मेरी बची का जीवन बर्बाद हो जायेगा

शालिनी जी ........ ये आप कैसी बात कर रही है मधु जी राधिका मेरे लिया भी बेटी आवर बहु दोनों है भले हे पत्नी वो रोहन की है पैर उसके पेट में जो अंश है वो मेरे अंश का अंश है मेरा पोता या पोती इस लिया आप इस बात से निश्चिन्त रहे वो भी ठाकुर खंडन का खून है

मधु जी ....... थैंक यू शालिनी जी आपने ये बात कह कर बहुत बड़ी परेशानी हल कर दी नहीं तो जीवन भर मुझे राधिका की चिंता लगी रहती

शालिनी जी ........ इस रिश्ते से हम दोनों संदन है मधु जी पता नहीं ये सूर्य कहा कहा झंडे गाड़ रहा है पैर मुझे ख़ुशी भी है की उसने राधिका बेटी को माँ बना कर उसे समाज के तानो से बचाया आवर एक ख़ुशी दी

मधु जी ........ ये आपने सही कहा पैर आपको अजीब नहीं लगा जब आपको इस बारे में पता चला था

शालिनी जी ........ माँ के रूप कहु तो अपने बेटे को ले कर अजीब लगा पैर एक औरत के नजरिये से देखा जाये तो सूर्य ने जो कुछ किया उस से मुझे ख़ुशी है उसने राधिका के जीवन में खुशियां लौटे है

एक औरत का माँ न बन पाना उसके जीवन में सबसे बड़ा दुःख होता है सूर्य ने वही दुःख दूर किया है

मधु जी आवर शालिनी जज के बिच काफी टाइम तक सूर्य राधिका को ले कर बाते होती रही थी जिस से मधु जी के मन का दर भी दूर हुआ आवर सूर्य के बारे में बहुत कुछ जानने को मौका मिला

मधु जी ....... मैंने सुना है आप सब यहाँ से दिल्ली सिफत हो रहे है पर इतनी बड़ी हवेली इतनी अच्छी जगह छोड़ कर वह सिफत होना समाज नहीं आया

शालिनी ......... हम दिल्ली जरूर काम आवर बच्चों की वजह से सिफत हो रहे है पैर इसका ये मतलब नहीं की हवेली को छोड़ रहे है ये हमारे पूर्वजो का आशीर्वाद है इसे कैसे छोड़ सकते है

मधु जी ........ वैसे हमने भी अब इंडिया सिफत होने का सोच लिया है गोविन्द जी भी यहाँ आने से पहले बोल रहे थे की अब वो अपना बिज़नेस इंडिया सिफत कर लेंगे आवर ज्यादा से ज्यादा वक़्त राधिका को देंगे

शालिनी जी ....... ये तो अच्छी बात है इस से आप ज्यादा से ज्यादा समय अपनी बेटी आवर नाती के साथ बिता पाएंगी

मधु जी ........ चलिए बहार चलते है काफी टाइम हो गया है

शालिनी जी ने घडी की आवर देखा तो वैकै काफी टाइम हो गया था करीब 8 बजने को आये थे

शालिनी जी आवर मधु जी बहार आये तो किचन में रेखा जी मेनका जी प्रिय जी आवर सन्ति जी लगे हुए थे

सूर्य के नाना जी का परिवार आज यही रुकने वाला था

सुक्रलोक ...........

सूर्य किरण मानसी के लौट जाने के बाद देवयानी जी ने असुरगुरु शुक्राचार्य को सब कुछ विस्तार से बता दिया जो कुछ भी देवयानी ने देखा आवर सूर्य के साथ मह्सुश किया था

देवयानी जी ........... पिता श्री हम इस मनुष्य को समाज नहीं पाए आखिर ऐसा क्या है सूर्य में जो उसकी इतने प्रयाश के पश्चात भी उसकी वास्तविकता जान न पाए हम

असुरगुरु ......... हम सवयं इसमें असमर्थ रहे है पुत्री देवयानी किन्तु इतना अवस्य समाज गए है की सूर्य कोई सामान्य मनुष्य नहीं है उसमे सकारात्मक आवर नकारात्मक दोनों हे सकतिया प्रचुर मात्रा में है

देवयानी जी ........ पैर ये कैसे संभव है पिता श्री नकारात्मक आवर सकारात्मक सकतिया तो अच्छे आवर बुराई के प्रतीक है दोनों सकतिया एक हे मनुष्य के पास होना संभव नहीं है

असुरगुरु ............ पुत्री ये भारमंद हमारी सोच से बहुत विशाल है इसमें छुपे रहश्यो को त्रिदेव के अलावा कोई समाज नहीं सकता

देवयानी जी ........ आपके तर्क का सूर्य से क्या समानता है पिता श्री कभी कभी हम खुद आपके मंतव्य को समाज नहीं पते है पिता श्री

असुरगुरु के चेहरे पे एक कुटिल मुस्कान थी जैसे उन्हें ऐसे प्रतिउत्तर की अपेक्षा थी देवयानी से

असुरगुरु ......... सूर्य सदर्न मनुष्य नहीं है पुत्री अवश्य उसे किसी देव का आशीर्वाद प्राप्त है जो दिव्या आवर आसुरी दोनों हे सक्तियो को दर्जन करने में सक्षम है

देवयानी जी ........ क्या सूर्य की वास्तविकता जानना आपके लिया इतना जरुरी है पिता श्री

असुरगुरु ......... पहले इतना आवशयक नहीं था पुत्री किन्तु अब आवशयक हो गया है जब हमें ज्ञात हुआ की पुत्र निर्भयासुर सूर्य का असुर अंश है जब निर्भयासुर अकेला असुरलोक को गुथनो पे ला सकता है तो उसका मूल अक्ष सूर्य की सक्तियो का अनुमान लगाना भी संभव नहीं है

देवयानी जी ........ सूर्य ने हमें पृथ्वीलोक आने को आमंत्रित किया है पिता श्री

असुरगुरु ........ हम पृथ्वीलोक पे कदम नहीं रख सकते किन्तु आप पृथ्वीलोक पहले भी जा चुकी है तो निमंत्रण को स्वीकार करना चाइये पुत्री....

अभी असुरगुरु कुछ आवर बोलते तभी उन्हें अपने शिष्य की आवाज सुनाई देती है

p.shishya ......गुरुदेव असुरलोक से राक्षस कुमार कंटकासुर की अर्धागिनी देवी वातापी अपने दोनों पुत्रो के साथ आसाराम आये है आवर वो आपसे भेंट करने के इच्छुक है

असुरगुरु ....... उन्हें सर सम्मान ये ले आओ

p.shishya ......जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश

कुछ देर बाद वातापी अपने दोनों पुत्रो के साथ असुरगुरु शुक्राचार्य के समक्ष थी

वातापी ....... असुरगुरु शुक्राचार्य को मयासुर पुत्री वातापी का परनाम

असुरगुरु ....... कल्याण हो पुत्री वातापी हमें पूर्व हे सन्देश मिल चूका था आप तीनो के आने का अभी रात्रि हो चुकी है अभी आप तीनो विश्राम करे हम कल प्रथा बात करेंगे पुत्री

वातापी ....... जी गुरुदेव जैसा आप उचित समजे

गुरुदेव ......... शिष्य दोनों रक्ष कुमारो को भोजन कराओ आवर उन्हें विश्राम स्थल तक पंहुचा दो पुत्री देवयानी आप पुत्री वातापी को अपने साथ रखो

देवयानी जी ......... जी पिता श्री वातापी आप हमारे साथ आइये

देवयानी जी वातापी को अपने साथ लिया आसाराम के पश्चिमी भाग में बने कक्ष की आवर भाड़ गई

देवयानी आवर वातापी के असुरगुरु के कक्ष से निकलने के बाद असुरगुरु अकेले हे कक्ष में मौजूद थे तभी वह

व्योमासुर जी परगट होते है आवर असुरगुरु को परनाम करते है

व्योमासुर जी ........ गुरुदेव आपने हमें स्मरण किया

असुरगुरु ....... है पुत्र व्योमासुर हमें तुमसे अतिविशेष कार्य है इस लिया तुम्हे याद किया

व्योमासुर जी ........... आज्ञा करे गुरुदेव आपके किसी कार्य को पूर्ण करने का शोभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है ये जान कर मुझे अति पर्शान्ता होगी गुरुदेव

असुरगुरु ......... पुत्र व्योमासुर तुम्हे आवर हमारे प्रमुख शिष्य को पुत्री देवयानी का सहयोग करना होगा हम कुछ समय के एकांत में जा रहे है एक विशेष पूजा के लिया

व्योमासुर जी ........ विशेष पूजा गुरुदेव

असुरगुरु ......... है पुत्र व्योमासुर हम इस पूजा को गुप्त रखना चाहते है गुरुदेव

व्योमासुर जी ........ जी गुरुदेव हम समाज गए

असुरगुरु........ हम 2 दिवश बाद आश्रम से एकांत में पूजा के लिया निकालेंगे असुरलोक की गतिविदियों के लिया हमारे विशेष गुप्तचर असुरलोक पे नजर बनाये हुए है

व्योमासुर जी ......... जी गुरुदेव

कुछ देर बाद देवयानी वापिस आती है तब असुरगुरु देवयानी जी आवर अपने शिष्य को भी एकांत में जाने के बात बताते है

तीनो असुरगुरु की बात मान है में सर हिला देते है

वही आश्रम से काफी दूर एक विशालकाय जंगल में नाड़ी किनारे एक नकाबपोश बड़ी तेजी से जंगल के अंदर की आवर भाड़ रहा था

उस घनघोर अँधेरी रात के अँधेरे ने मनो उस नकाबपोश को पूर्णतया अपने भीतर समां लिया हो उस अँधेरे में केवल उसकी दो आँखे चमक रही थी

उस घनघोर अँधेरे या उस भयानक जंगल का जैसे उस इंसान पे कोई असर हे नहीं हो रहा था वो be-khof बड़ी तेजी से नाड़ी किनारे जल की विपरीत धरा में भाड़ रहा था

काफी लम्बे समय के बाद एक बड़े से पहाड़ के सामने पहुंचने पे वो इंसान रुकता है

इस पहाड़ के गुफा जैसे मुँह से हे इस नाड़ी का जैसे उद्गम ( आरम्भ ) हो रहा हो

नकाबपोश ........ तो आखिर मैं इस नाड़ी के उद्गम स्थान तक पहुंच हे गया यही मेरी मंजिल है

वो नकाबपोश कुछ देर चारो तरफ नजर घूमता है आवर फिर उस गुफा के अंदर की आवर भड़ता है

तभी किसी अदृश्य सकती से टकरा कर वो नकाबपोश इंसान तेजी से गुफा से दूर जा कर गिरता है

नकाबपोश ........... ये क्या यहाँ कोई अदृश्य सकती है जो मुझे गुफा के भीतर प्रवेश करने से रोक रही है

एक बार फिर से वो नकाबपोश अपनी तलवार लिया आगे बढ़ता है उसकी तलवार इस घनघोर अँधेरे में किसी प्रकाश पुंज की तरह चमक रही थी जिसका असर आसपास भी हो रहा था जिस से सामान्य आँखे भी आसपास का खौफनाक मंजर देख सकती थी

आसपास अनगिनत इंसानी असुर आवर विशालकाय जानवरो के नर कंकाल पड़े हुए थे

जैसे यहाँ अनगिनत यौद्धा योध में मरे गए हो

नकाबपोश बड़ी तेजी से अपनी तलवार का वॉर करते हुए आगे भड़ता है पैर एक बार फिर से वही दृश्य दोहराया जाता है

नकाबपोश .......... तुम जो कोई भी सकती हो मेरा सामने आओ अन्यथा मैं सब कुछ नस्ट कर दूंगा

इतना बोलते हुए नकाबपोश अपना नकाब हटा कर अपनी ऊर्जा को तलवार में भेजने लगता है

ये नकाबपोश कोई आवर नहीं बल्कि निर्भयासुर था डेरी डेरी निर्भयासुर की ऊर्जा से उसकी तलवार जो पहले वाइट रौशनी से चमक रही थी वही अब डेरी डेरी वाइट से खून की तरह लाल होने लगी थी

तभी गुफा से एक ग्रीन किरण निकल कर निर्भयासुर के माथे के बीचों बिच आ लगती है

देखते हे देखते निर्भयासुर संत होने लगता है आवर उसकी ऊर्जा फिर से उसके सरीर में जाने लगती है

कुछ हे पालो में चारो तरफ बिलकुल सन्ति च गई थी

निर्भयासुर ुशी स्थान पे आँखे बंद कर ध्यान की अवस्था में जाने लगता है देखते हे देखते निर्भयासुर कस सरीर गायब होने लगता है आवर वह वाइट रेड ऊर्जा का मिक्सड ऊर्जा पुंज बन जाता है जो अगले हे पल नाड़ी के अंदर से गुफा के भीतर चला जाता है

जैसे हे निर्भयासुर उस ऊर्जा पुंज के रूप में अंदर जाता है गुफा के बहार असुरगुरु शुक्राचार्य पहुंचते है

असुरगुरु. ........... हमें इसी स्थान से वो ऊर्जा संकेत प्राप्त हुए थे किन्तु यहाँ तो कोई भी असुर योद्धा नहीं है क्या उसका भी अंत हो चूका है जैसे इन बाकि सभी योद्धाओ का ( अपने चारो तरफ नर कंकाल देखते हुए बोलते है ) अंत हुआ है

तभी असुरगुरु की नजर जमीं पे बने पधचप ( पैरों ) के निसानो पे पड़ती है

जैसे असुरगुरु उन्हें चुने की कोशिश करते है वो नीसाण पल भर में वह से गायब हो जाते है

जिसे देख असुरगुरु के चेहरे पे विचित्र भाव उभर आते है जैसे कुछ है जो उनसे चुप रहा है या छुपाया जा रहा है

असुरगुरु गुफा की आवर देखते है फिर खुद से हे कुछ बुदबुदाने लगते है आवर थोड़ी देर वह रुकने के बाद लौट जाते है

अंदर अनंत गुफा में निर्भयासुर ऊर्जा पुंज के रूप में बड़ी तेजी से जल में विपरीत दिशा में भाड़ रही थी जैसे कोई लोहे की वास्तु चुम्बक की आवर खींची चली जाती है

अंत में ऊर्जा पुंज एक विशाल पत्थर पे रखे खूबसूरत दिव्या प्रकाश भिखेरते कमंडल के सामने आ कर रूकती है

इसी कमंडल से सुक्रलोक में इस नाड़ी की उत्पत्ति हुई थी इसी कमंडल से नाड़ी बाह रही थी

वो ऊर्जा पुंज कुछ समय उस कमंडल के चारो तरफ चाकर लगता है जैसे वो उस कमंडल की परिक्रमा कर रहा हो तभी एक सफ़ेद ऊर्जा से बानी रस्सी जैसे किरण बहार निकलती है आवर उस ऊर्जा पुंज को अपने भीतर मतलब की उस कमंडल में खींच लेती है

एक पल को तो उस जल से भरे कमंडल में भंवर सा बना जैसे दो ऊर्जा आपस में टकरा रही हो फिर कुछ देर में सब सामान्य हो गया

कमंडल की ऊर्जा कुछ पल तो इतनी तेजी से चमक ने लगी की वो अनंत गुफा भी उस रौशनी से जगमगा उठी

सब संत होने के बात बस उस कमंडल से कुछ मंत्री दौनी की आवाज आने लगी जो बहुत हे धीमी थी

उदार आश्रम में 2 दिन से असुरगुरु किसी गहन चिंता में थे आवर देवयानी जी आवर व्योमासुर जी भी ये देख प् रहे थे उन दोनों ने हे काफी प्रयाश भी किये थे असुरगुरु से उनकी चिंता का कारन जानने का लेकिन वो सफल न हुए

अंत में वो समय भी आ गया जब असुरगुरु को एकांत के लिटा निकलना था

असुरगुरु ......... पुत्री देवयानी पुत्र व्योमासुर मेरा एकांत में जाने का समय हो गया है ज्ञात नहीं इस पूजा में कितना समय लगेगा इस दौरान भूल से भी मुज से सम्पर्क करने का पर्यटन न करना किसी भी इस्थिति में

देवयानी जी ...... जी पिता श्री

असुरगुरु ......... सुक्रलोक में हमारी अनुपस्थिति में तुम तीनो का दायित्व है की सुक्रलोक की part एक गतिविधि आवर कार्यकलाप पे ध्यान रखने का असुरलोक हमने सन्देश पंहुचा दिया है की हम एकांत में जा रहे है ऐसे में हमारे स्थान पे कोई भी निर्णय ा लेने का अधिकार पुत्री देवयानी आवर पुत्र व्योमासुर का होगा

व्योमासुर जी ......... गुरुदेव क्या असुरलोक से आपके द्वारा निष्कासित किये जाने के बाद भी मेरा निर्णय असुर मान्य करेंगे आप तो सब जानते है

असुरगुरु .........है पुत्र व्योमासुर हम सब जानते है आवर समझते है पुत्र किन्तु पुत्री देवयानी आवर p.shishya से विचार विमर्श के बाद हे तुम इनकी सहमति से आदेश दे सकते हो जो सभी को मान्य होगा

असुरगुरु तीनो को समजा कर आश्रम से एकांत के लिया निकल चुके थे

पीछे से आश्रम का दायित्व व्योमासुर देवयानी जी आवर असुरगुरु के प्रमुख शिष्य को सुपुर्द करके ..............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ................

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........................

कल अपडेट न दे पाने के लिया आवर इन्तजार करवाने के लिया सॉरी दोस्तों ..............
 
अपडेट 266

व्योमासुर जी ......... गुरुदेव क्या असुरलोक से आपके द्वारा निष्कासित किये जाने के बाद भी मेरा निर्णय असुर मान्य करेंगे आप तो सब जानते है

असुरगुरु .........है पुत्र व्योमासुर हम सब जानते है आवर समझते है पुत्र किन्तु पुत्री देवयानी आवर p.shishya से विचार विमर्श के बाद हे तुम इनकी सहमति से आदेश दे सकते हो जो सभी को मान्य होगा

असुरगुरु तीनो को समजा कर आश्रम से एकांत के लिया निकल चुके थे

पीछे से आश्रम का दायित्व व्योमासुर देवयानी जी आवर असुरगुरु के प्रमुख शिष्य को सुपुर्द करके ..............

अब आगे ...............

असुरलोक राजमहल .......... नरकासुर परेशान इस्थिति में असुर सभा में उदार से उदार तायल रहा था

सभा में नरकासुर के मंत्रीगण सेनापति आदि असुर योद्धा भी मौजूद थे उनके मुख मंडल पे भी चिंता की लकीर उभरी हुई थी

तभी सभा में एक असुर से निक प्रवेश करता है

सैनिक ......... असुरराज महाराज नरकासुर की जय हो असुरराज सुक्रलोक से असुरगुरु शुक्राचार्य का दूत आपसे भेंट करना चाहता है असुरगुरु सुक्राचाये के सन्देश के साथ

सैनिक की बात सुन नरकासुर के चेहरे पे चिंता की लकीर आवर ज्यादा उभर जाती है

नरकासुर ........... दूत को आदर पूर्वक सभा में पेश करो

नरकासुर अपने चेहरे के भाव छुपाते हुए अपने राज सिंघासन पे विराजमान हो जाता है

कुछ हे पालो में सैनिक एक असुर योद्धा को आदर से अपने साथ लिया सभा के बिच पहुँचता है

दूत ........ असुरराज महाराज नरकासुर को दूत का परनाम

नरकासुर ......... गुरुदेव का हमारे लिया क्या सन्देश है दूत

दूत नरकासुर की आज्ञा ले असुरराज नरकासुर को असुरगुरु शुक्राचार्य का सन्देश बिच सभा में बुलंद आवाज में सुनाता है

असुरगुरु का सन्देश ........... असुरराज नरकासुर हमने तुम्हे पूर्व में भी सावधान किया था आवर क्षमा किया था किन्तु तुमने फिर से दशांश कर अपने गुप्त असुर सेना का प्रयोग कर सुक्रलोक में हमारी हे अनुमति के बिना हमारे आमंत्रित अथिति पे आक्रमण करने का दशांश किया इसका दंड अवश्य भोगना होगा तुम्हे हमारे अत्यंत वश से लौटने पे

हम कुछ समय के लिया एकांत में तप के लिया जा रहे है हमारा सम्पूर्ण दायित्व पुत्री देवयानी पुत्र व्योमासुर आवर हमारा पिरया शिष्य निभाएंगे असुरलोक किसी भी परिस्थित में उनके निर्णय के खिलाफ जाता है तो हमारे खिलाफ मन जायेगा पुत्री वातापी हमारे लौटने तक हमारे आश्रम में हे रहेगी असुरलोक से कोई भी ऐसे पहल न हो की पुत्री देवयानी के क्रोध के पत्र निर्दोष असुरवीर हो जाये अंत हमारा आदेश है की असुरसेना को भविष्य में होने वाले योध की तयारी में अपना ध्यान आवर ऊर्जा केंद्रित करो न की किसी अन्य कपट योजना में ......

दूत द्वारा बुलंद आवाज में सन्देश सुनाये जाने के बाद पूरी सभा में जैसे मातम सा च गया था

ये कोई सन्देश नहीं था बल्कि साफ साफ असुरगुरु का आदेश था की अगर फिर से कोई कपट योजना नरकासुर ने बनाई तो उसे देवयानी द्वारा दण्डित होना पड़ेगा साथ हे नरकासुर की गुप्त असुर सेना द्वारा कायरतापूर्ण उनके आमंत्रित अतिथि पे आक्रमण करने का दंड भी उसे असुरगुरु द्वारा भोगना होगा

नरकासुर असुरगुरु के आदेश से अंदर हे अंदर बुरी तरह से तिलमिला उठा था जिस तरह असुरगुरु ने उसे सन्देश के माध्यम से झाड़ लगाई थी एक पल में हे नरकासुर आसमान की बुलंदी से जमीं पे आ गिरा था

सबसे ज्यादा गुस्सा उसे इस बात का था की असुरगुरु के सन्देश को उसके के मंत्री महामंत्री आवर सेनापति के बिच जिस तरह से सुनाया गया था उस से उसके हे मंत्रीगणों के बिच उसकी ताकत उसका घमंड उसकी इज्जत सब दल में मिल चुकी थी पैर वो विवश था असुरगुरु के आदेश को मैंने को

नरकासुर दूत को जाने का इशारा कर के अपने बाकि मंत्रियो की भी सभा से जाने का इशारा करता है

सभी मंत्री चुप चाप निकलने में हे अपनी भलाई समझते है

नरकासुर की मनोयस्थित इस समय कैसी हो सकती है इस बात से वो सभी भली भाटी परिचित थे

सभी के जाने के बाद नरकासुर गुस्से में चिंघाड़ते हुए अपना पेअर जोर से जमीं पे दे मरता है एक पल के लिया तो पूरा असुरमहल हिल जाता है

जैसे असुरलोक में हलके भूकम के एक के बाद एक भटके लगे हो

सभज मंत्री भी इसकी वजह समाज चुके थे की इसके पीछे का कारन क्या है

नरकासुर. .......... मैं असुरराज महाराज नरकासुर हूँ आपने हिम्मत भी कैसे की भरी सभा में इस तरह से मेरा अपमान करने की

गुस्से में नरकासुर का भयानक असुरसरूप बहार निकलने लगता है चारो तरफ अनियंत्रित रूप से काली ऊर्जा भने लगती है

अपने कक्ष से अग्निमुखासुर के साथ बहार निकलती द्वारिका को समझते देर नहीं लगती की ये दहाड़ नरकासुर के गुस्से की है आवर उसकी ऊर्जा उसके नियंत्रण से बहार हो रही है

द्वारिका ......... पुत्र अग्नि सिगरता से अपने पिता श्री को उनके गुप्त कक्ष में ले कर पहुँचो हम अभी आते है

अग्निमुखासुर....... जी माता श्री जैसा आपका आदेश

अग्निमुखासुर तेजी से सभा की आवर भाग्य है उदार द्वारिका फ़ौरन गायब हो जाती है

अग्निमुखासुर जब सभा में पंहुचा तो नरकासुर का लगभग आने विशाल असुररूप में पहुंचने चूका था पैर अग्निमुखासुर भी काम सक्तिसाली नहीं था नरकासुर के बाद अगर कोई उसके करीब सक्तिसाली था तो वो अग्निमुखासुर हे था

अग्निमुखासुर ......... पिता श्री संत हो जाइये अपने क्रोध को नियंत्रित कीजिये पिता श्री

नरकसुर गुस्से में अग्निमुखासुर को उठा कर दूर दिवार पे मरता है

अग्निमुखासुर जल्दी से खड़ा हो कर कुछ महावीर मंत्रो का उच्चारण करने लगता है

महल में फैली नरकासुर की ऊर्जा डेरी डेरी संत हो फिर से नरकासुर के सरीर में आने लगती है ऊर्जा तो नियंत्रण में आ गई थी पैर नरकासुर अभी भी क्रोध में था बार बार उसके मस्तिष्क में दूत के कहे सबद सुनाई दे रहे थे

अग्निमुखासुर ........... लगता है मुझे मायावी पाश का प्रयोग कर के हे पिता श्री को गुप्त कक्ष में ले कर जाना होगा मुझे क्षमा करे पिता श्री पैर मुझे मायावी पाश का प्रयोग करने के लिया आपने हे विवश किया है जनता हूँ ये मायावी पाश आपको ज्यादा समय रोक नहीं सकता है

कहते हुए अग्निमुखासुर नरकासुर पे अपना सबसे सक्तिसाली मायावी पाश का प्रयोग करता है जिसने देखते हे देखते नरकासुर को पूरी तरह से बंद चूका था

नरकसुर के पाश में बंडे हे अग्निमुखासुर नरकासुर को लिया गायब हो मायावी गुप्त कक्ष में पहुँचता है जहा जहा न जाने कितनी असुर आवर दानवी कन्याये द्वारिका सामने विलाप कर रहम की भीख मांग रही थी

द्वारिका ........ अग्निमुखासुर ये तुमने क्या किया

अग्निमुखासुर .....क्षमा करे माता श्री मेरे पास पिता श्री को यहाँ लेन का कोई आवर मार्ग नहीं था

द्वारिका गुस्से में अग्निमुखासुर को देखती है आवर उसे कक्ष से जाने को कहती है

अग्निमुखासुर के बहार जाते हे नरकासुर मायावी पाश से मुक्त हो चूका था

द्वारिका....... स्वामी संत हो जाये देखिये आपके भोग के लिया हमें कोमल कोमल असुर आवर दानवी कन्याओं का पारबन्द किया है

द्वारिका फ़ौरन सभी लड़कियों के वस्त्र गायब कर नरकासुर के सामने उन्हें नग्न कर देती है जैसे वो लड़किया न हो कर केवल नरकासुर के भीगने कज वास्तु हो

अग्निमुखसुर वह से जा चूका था पैर अपने मायावी दृस्टि ुशी कक्ष में पहले हे छोड़ चूका था जिस से उसे वह हो रही घटना आराम से देख प् रहा था

नरकसुर लड़कियों को नग्न देख खुद पे काबू को कर उनपे टूट पढ़ते है देखते हे देखते 10 से ज्यादा लड़कियों के वक्ष स्थल को खा चूका था जैसे वो नरभक्षी जानवर हो लड़कियों के सरीर से बाह रहे गरम खून को जिस तरह से वो चाट रहा था पि रहा था उसे देख कुछ लड़किया तो मूर्छित हो गयी कुछ तो इतना दर गयी की कब दर के मरे कांपते हुए उनका खड़े खड़े हे मूत्र त्याग हो गया

वो जो भयानक मंजर अगले आड़े दिन चला उस ने उन सभी लड़कियों के कौमार्य हे नहीं भोगा था नरकासुर ने बल्कि उन सभी लड़कियों के सरीर से रकत के एक एक बूँद तक पि चूका था जब भी उसका मन नहीं भरा तो उन मृत कन्याओं के कोमल अंगो को कच्चा हे खाने लगा

अग्निमुखासुर अपने कक्ष में बैठा इस भयानक दृशयो को देख नरकासुर आवर द्वारिका के इस कृत्या से बहुत ज्यादा हैरान था तभी अपनी दृस्टि के सामने द्वारिका को अपनी आवर देखते वो सपकपा जाता है पैर अगले हे पल उसे कक्ष के भीतर का दृश्य दिखाई देना बंद हो जाता है

द्वारिका की जैसे हे अग्निमुखासुर की मायावी दृस्टि का पता चला उसने उसकी मायावी दृस्टि को नस्ट कर दिया

अग्निमुखासुर ........ पिता श्री आवर माता श्री का ये भव्य रूप तो हमने आज से पूर्व कभी नहीं देखा क्या इसी लिया पिता श्री आवर माता श्री उस कक्ष में जाते है आज तक उन्होंने हम में से किसी को उस गुप्त मायावी कक्ष में जाने नहीं दिया

उदार सारिका नरकासुर को संत करने में कामयाब हो चुकी थी भले हे इसमें उसने न जाने कितने जीवन नस्ट कर दिए हो

इस वकत द्वारिका आवर नरकासुर दोनों एक दूसरे को भोगते हुए असुरगुरु के सन्देश पे चर्चा कर रहे थे

द्वारिका ....... तो आखिर आपको समाज आ गया की क्यों मैं उस डस्ट व्योमासुर से आपको हर पल सचेत करती थी ये सब ुशी की कोई योजना है आपसे प्रतिशोद लेने की

नरकासुर ....... तुम उचित थी द्वारिका हमसे हे भूल हुई उसे समझने की किन्तु अभी हम कुछ कर भी नहीं सकते है उसका इस समय वो सुक्रलोक में है अभी हम कुछ भी उसके खिलाफ करते है तो शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी के क्रोध का भागी बनना होगा साथ हे शुक्राचार्य का भी

द्वारिका ........ सुक्रलोक में वो तभी तक है जब तक असुरगुरु वह न पहुंचने पैर डीके समय उसे पृथ्वीलोक लौटना होगा तब उसका अंत हे कर दीजिये न शुक्राचार्य स्वयं को मिले श्राप के चलते उसकी पृथ्वीलोक पे कोई सहायता कर सकते है आवर उन्होंने कोशिश की भी तो उनकी कोई भी सकती पृथ्वीलोक पे कार्य नहीं करेगी

नरकासुर ......... उचित कहा तुमने द्वारिका शुक्राचार्य पृथ्वीलोक पे कदम रखने में असमर्थ है उन्हें श्राप जो मिला है किन्तु देवयानी को ऐसा कोई श्राप नहीं मिला है इस लिया ऐसा कार्य करने से पूर्व सभी सम्भावनाओ पे घंटा से विचार करना आवशयक है

दोनों इसी तरह के षड़यंत्र आवर भोग विलाश में बहुत समय तक डूबने रहते है अग्निमुखासुर अपने माता पिता के इस रूप को देख अलग हे विचारों में दुभा हुआ अपने कक्ष में बैठा हुआ था ...

सूर्यगढ़ ...........

ीदार सूर्यगढ़ में सूर्य सुबह अपने नियमित समय पे ध्यान वह योध अभ्यास कर जंगल से हवेली पहुँचता है

पूरी तरह से पसीने में आवर धूल मिटटी से सना हुआ पुरे कपडे पसीने से भीगे हुए थे

जैसे हे सूर्य हवेली पहुँचता है बहार लोने में बैठे सौभा की चाय कॉफ़ी की चुस्किया लेते उसके दादा जी नाना जी पापा मां सूर्यकांत जी गोविन्द जी आदि की नजर उसपे पड़ती है

सूर्यकांत जी ......... बीटा इतनी सुबह सुबह कहा से खुलती खेल कर आ रहे हो

सूर्य पास में लगी पानी के नल से अपना हाथ मुँह धोता है आवर अपनी t-shirts निकल कर वह रखे टॉवल से अपनी बॉडी से पसीना साफ करता है

सूर्य ........ अंकल जंगल गया था कुछ दिन से ट्रेनिंग नहीं की थी तो आज बाकि दिनों से कुछ ज्यादा हे म्हणत कर ली जंगल में

सूर्यकांत जी ........ ये तो अच्छी बात है बीटा पैर सरीर की भी एक लिमिट होती है ट्रेनिंग सहने की कुछ दिन ट्रेनिंग न की इसका मतलब ये नहीं की जितने टाइम ट्रेनिंग न की उतनी एक हे दिन में एक हे बार में करो

सूर्य ......... जी अंकल मैं भी समझता हूँ ये बात हर सरीर की अलग अलग लिमिट होती है आवर मैं भी अपने सरीर के अनुरूप हे ट्रेनिंग करता हूँ अंकल बस आज जंगल से ट्रेनिंग के बाद आराम न कर के रनिंग करते हुए हवेली आया इस कारन पसीना नहीं सूखा पाया

दादा जी ........ बीटा अब कब तक ऐसे हे पसीने की दुर्गंद में रहोगे जाओ जा कर नाहा लो आवर नास्ता कर लो

जोरावर जी. ....... बाउजी बिलकुल सही कह रहे है अब इतनी म्हणत की है तो उस हिसाब से सरीर की खुराक भी मिलनी चाइये

सूर्य ......जी मां जी

सूर्य अपने सरीर पे टॉवल डेल हवेली के अंदर सीधा अपने रूम में पहुँचता

कोमल ......... ये क्या आप इस तरह से कहा से आ रहे है

सूर्य ........कुछ नहीं कोमल वो जंगम गया था तो वही से आ रहा हूँ जरा मेरे कपडे निकल देना मैं नहाने जा रहा हूँ

कोमल ......... ठीक है आप नाहा लीजिये मैं आपके कपडे निकल देती हूँ

सूर्य सीधा बाथरूम में गुस्स जाता है आवर अच्छे से बहा कर टॉवल बन्दे बहार निकलता है कपडे स्त्री किया बीएड पे रखा हुआ था साथ हे मोबाइल रुमाल आदि भी सूर्य सब एक साथ व्यवस्थित देख मुस्कुराने लगता है

रूम को लॉक देख सूर्य समाज गया की कोमल बहार जा चुकी है

सूर्य अपना टॉवल हटा अपने गीले बाद पूछते हुए कपडे उठाने के लिया आगे बढ़ा तभी सूर्य का फ़ोन बजने लगता है

सूर्य जब फ़ोन उठा कर देखता है तो वो उसके दोस्त सोहेल का था

कुछ देर दोनों बात करते है फिर जल्द हे मिलने का बोल कर सूर्य कॉल कट कर देता है

तभी रूम खुलता है आवर कोमल के साथ साथ सोफिया रूम में आती है सूर्य फ़ौरन अपनी अंडरवियर के ऊपर से टॉवल बंद कर अपना शर्ट पहनने लगता है

कोमल ....... आप अभी त्यार नहीं हुए मुझे लगा आप त्यार है

सूर्य ....... वो त्यार हो हे रहा था की सोहेल का कॉल आ गया ुशी से बात करने लगा था

सोफिया जो सूर्य को उस तरह देख दूसरी तरफ मुँह कर के कड़ी थी उसके कान फ़ौरन सूर्य की बात से खड़े हो गए थे

सूर्य ने जब सोफिया की आँखों में देखा तो उसे किसी बात को ले कर चिंता थी पैर सूर्य के पलके जपकाने से सोफिया ने चैन की साँस ली

सोफिया आवर सानिया दोनों ने हे सोहेल से जूथ कहा था की वो दिल्ली है

जबकि वो दोनों तो पिछले तीन दिन से यहाँ थी उसे दर था की कही सूर्य ने सोहेल को कुछ बता तो नहीं दिया है

सूर्य कोमल आवर सोफिया के साथ निचे आ जाता है बाकि सभी नास्ता कर चुके थे सिवाय सूर्य के

सूर्य को निचे आता देख शालिनी जी राधिका को सूर्य की नास्ते की प्लेट लगाने को कहती है

राधिका आवर शालिनी जी के बिच इन दो दिनों में काफी नजदीकया आ गयी थी मधु जी भी ये देख प् रही थी आवर राधिका की सास भी पैर दोनों के दिमाग में अलग अलग वजह थी इसकी

किरण सूर्य की बगल वाली चेयर पे बेथ सूर्य की प्लेट से नास्ता करने लगती है जिसने देख राधिका किरण के लिया दूसरी प्लेट लगाने वाली थी पैर सूर्य ने उन्हें रोक दिया

सूर्य ....... क्या हुआ स्वीटी तुमने अभी तक नास्ता नहीं किया क्या

किरण एक बार चारो तरफ देखती है जहा कुछ हे दुरी पे उसकी दादी माँ मधु जी मेनका जी बे थी बात कर रही थी आवर साथ हे ीदार भी देख रही थी बिच बिच में

किरण ......... वो माँ ने मुझे जूलिया आवर भाबी को नास्ता पहले हे करवा दिया पैर मुझे आपके साथ करना था आवर आपसे कुछ बात भी करनी थी

सूर्य ........ क्या हुआ स्वीटी कुछ जरुरी बात है क्या

किरण ....... वो माँ बोल रही थी की मैं कुछ दिन उनके पास राहु क्या मैं जा सकती हूँ

सूर्य ........ इसमें मेरी परमिशन लेने की क्या जरुरत है स्वीटी

किरण ........ वो बात नहीं हमें जूलिया के साथ भी तो जाना है आवर माँ को जबसे जुली के बारे में पता चला है वो कह रही है की जुली भी हमारे साथ चले

सूर्य ....... जुली के विषय में माँ से बात करो स्वीटी इस बारे में मैं कुछ नहीं कहने वाला आवर रही बात हम लोगो का जुली के साथ जाने की तो अभी गुरुदेव ने कुछ कहा नहीं है

मानसी ........ मैं भी दीदी के साथ इन्हें यहाँ जा रही हूँ आवर माँ ने भी है कह दिया वो भी हमारे साथ हे सूरजगढ़ जा रही है

सूर्य ........ हम्म्म समाज गया सुबह सुबह मुझे हे उल्लू बना जा रहा है सब प्लानिंग पहले से कर के बैठी हो तुम सब ठीक है फिर मेरी तरफ से पूरी आजादी है माँ साथ जा रही है तो तुम तीनो भी जाओ आवर गुरुदेव का सन्देश मिलते हे मैं तुम लोगो को कॉल करता हूँ

सूर्य की परमिशन मिलते हे मानसी आवर किरण खुश होते हुए सूर्य को नास्ते का निवाला खिला कर ऊपर की आवर त्यार होने चल देती है

दादी जी ....... तो तुमने परमिशन देदी

सूर्य .......... आपको क्या लगता है माँ सा मुझे कुछ पता नहीं आपने आवर माँ ने पहले हे उन्हें परमिशन दे दी है आवर वैसे भी सब खुश तो मैं भी खुश इसी बहाने माँ भी एक दो दिन नाना जी नानी जी आवर मामियो के साथ वक़्त बिता पाएंगी आप भी तो यही चाहती है न

दादी जी ......... तू तो बड़ा समझदार हो गया है ये ले कार्ड तेरे दादा जी ने दिया है जो सूर्यगढ़ नहीं जा रहे है उन्हें ले कर सहर जा आवर सभी को उनकी पसंद की शॉपिंग करवा कर ले आ

सूर्य ........ क्या इन सब की शॉपिंग माँ सा क्यों मुझे मरवाने पे तुली है इन सब के बिच मेरी क्या हालत होगी आप अंदाजा भी नहीं लगा सकती हूँ

दादी जी ......... तू सब संभल लेगा आवर है जाते हुए सक्तिपुर से विधि आवर गायत्री को भी लेते जाना

सूर्य ........ आपको न जरा भी तराश नहीं आता न मुझे माँ सा

दादी जी ....... अब नौटंकी पूरी हो गयी है तो त्यार हो जा कल सब बछिया वापिस लौट जाएँगी अपने सहर

सूर्य ........ ठीक है माँ सा जैसा आप कहे सब को बोल दीजिये त्यार होने के लिया

कुछ देर बाद किरण मानसी जूलिया शालिनी जी चारो सूरजगढ़ जाने के लिया त्यार थी

चारो सभी से मिल कर नाना जी मन जी के साथ सूरजगढ़ की आवर निकल जाते है

वैसे तो किसी को भी इनका जाना अच्छा नहीं लग रहा था पैर इतने लोगो के हवेली में मौजूद होने से ज्यादा कमी भी नहीं खाल रही थी किसी की

सूर्य ........ आप सब लोग त्यार हो जाये हम लोग सहर चलते है शॉपिंग के लिया दोपहर का लंच भी वही करेंगे आंटी जी आप लोग भी त्यार हो जाये

आंटी जी ....... थैंक्स बीटा पैर तुम सब बचे लोग हे जाओ हम बूढी औरतो का तुम सब जवान बचो के बिच क्या काम

सूर्य ......... हाहाहा किसने कहा आंटी जी की आप बूढी हो गई है आप तो अभी भी बहुत खूबसूरत है

मेनका जी मुस्कुराते हुए सूर्य की बात को समर्थन देती है

मधु जी ......... कोई शॉपिंग पे जाये या न जाये मैं तो अपने दामाद की जेब खली करने से पीछे नहीं हटने वाली

दीप्ती ......... ये हुए न बात आंटी जी वैसे भी सूर्य पे हम सब की पार्टी बाकि है पापा बनने की फ़िलहाल शॉपिंग से हम काम चला लेंगे

सानिया ........ दीदी अभी शॉपिंग से काम चला लेते है पार्टी बाद में जब बेबी होगा तब लेंगे

माया ........ ऐसे में तो राधिका भाबी की तरफ से भी पार्टी बाकि है पैर बचे के पापा रोहन भाई तो यहाँ है नहीं तो उनसे हम जब वो आएंगे तब पार्टी ले लेंगे

राधिका सूर्य की आवर देखती है उसकी नजरो में कुछ अजीब से भाव थे आवर हलकी मायूसी भी

दीप्ती हलके से राधिका की कमर में चिकोटी काट कर उसे जगह आवर माहौल की वास्तविकता में लती है

सूर्य ........माया जी रोहन भाई यहाँ नहीं है तो क्या हुआ मैं भी तो बचे का चाचा लगता हूँ मेरा भी तो उतना हे हक़ है बचे पे तो ये पार्टी भी मेरी तरफ से क्यों आंटी जी कुछ गलत तो नहीं कहा चाचा भी तो पिता के सामान हे हक़ रखता है

मधु जी ........ ये तो तुमने सच कहा बीटा क्यों माँ जी आवर वैसे भी तुम्हारा रिस्ता सिर्फ चाचा भतीजे या भतीजी का हे नहीं है बल्कि किरण बेटी को बेटी मन है तो उस रिश्ते से किरण मस्सी हुई मतलब माँ सामान आवर उस रिश्ते से तुम पिता सामान अब तो दो दो रिश्ते है

मधु जी की बात सुन राधिका की आँखे भी चमक उठी साथ आंटी जी भी हस्ते हुए सूर्य के सर पे हाथ फिर देती है

आंटी जी ........ बिलकुल सही कहा मधु तुमने सूर्य भी मेरा उतना हे बीटा है जितना रोहन फरक सिर्फ इतना है की रोहन को मैंने जनम दिया आवर सूर्य को शालिनी ने सूर्य का भी उतना हे हक़ है जितना रोहन का क्या पता सूर्य हमारी जिंदगी में न आता तो ये दिन सायद नसीब भी न होता न हमारी सूर्य से मुलाकात होती आवर न हम सभी यहाँ आते तो ये खुशियां भी सायद नसीब न होती

दीप्ती ........ वह क्या बात कही माँ आपने पापा तो रोहन से ज्यादा सूर्य को मानते है आवर उनकी तो इच्छा भी यही है की बेटी हो तो बिलकुल राधिका के जैसे आवर बीटा हो तो सूर्य के जैसा हेहेहे

दादी जी ......... बहुत हो गई मस्ती मजाक अब तुम सब को शॉपिंग के लिया निकलना चाइये

मधु जी ........ मैं अभी त्यार हो कर आती हूँ बचो आप में से कोई आवर चल रहा है क्या

मेनका जी रेखा जी आंटी जी दादी जी चारो न में सर हिला देती है

कुछ हे देर में मधु जी सूर्य राधिका कोमल राधा माया सुनिधि सानिया सोफिया दीप्ती सभी 10 लोग त्यार हो कर बहार निकलते है नौकर पहले हे सूर्य की कार के साथ साथ एक आवर बड़ी कार की साफ सफाई कर चमका चुके थे

सूर्यकांत जी ....... बीटा संभल कर जाना आवर सबका ख्याल रखना

गोविन्द जी ....... मधु तुम भी बचो के साथ जा रही हो शॉपिंग के लिया

मधु जी ....... है इस बहाने बच्चों का ख्याल भी रख पाऊँगी आवर यहाँ के सहर भी देख लुंगी

दादा जी ....... गोविन्द बीटा चिंता की कोई बात नहीं है सहर में अपना शॉपिंग मॉल है

गोविंद जी ....... बात वो नहीं है बाउजी सब लड़किया है कुछ उचित नीच

दादा जी ....... हाहाहाहा बीटा सूर्य के होते हुए कोई भी हिमायत नहीं करेगा सायद हे कोई ऐसा होगा जो सूर्य शिव ठाकुर के नाम से परिचित न हो आवर फिर महेंद्र भी आज मॉल में है

गोविन्द जी ......... जी बौ जी

सूर्य ........ दीप्ती जी आप ड्राइव कर लेंगी न

दीप्ती ....... है बिलकुल हम सब को ड्राइविंग आती है बहुत अच्छे से

सूर्य. ....... ठीक है तो आप मेरी कार ड्राइव कीजिये मैं बड़ी वाली ड्राइव करता हूँ सक्तिपुर से विधि पुर गायत्री को लिया हम सब सीधा सहर चलते है मैंने कॉल कर दिया है वो दोनों भी त्यार मिलेंगी

सभी लोग दोनों कार्स में बेथ सक्तिपुर की आवर निकल गए ...............

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रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ....................
 
अपडेट. 267

दादा जी ....... हाहाहाहा बीटा सूर्य के होते हुए कोई भी हिमायत नहीं करेगा सायद हे कोई ऐसा होगा जो सूर्य शिव ठाकुर के नाम से परिचित न हो आवर फिर महेंद्र भी आज मॉल में है

गोविन्द जी ......... जी बौ जी

सूर्य ........ दीप्ती जी आप ड्राइव कर लेंगी न

दीप्ती ....... है बिलकुल हम सब को ड्राइविंग आती है बहुत अच्छे से

सूर्य. ....... ठीक है तो आप मेरी कार ड्राइव कीजिये मैं बड़ी वाली ड्राइव करता हूँ सक्तिपुर से विधि पुर गायत्री को लिया हम सब सीधा सहर चलते है मैंने कॉल कर दिया है वो दोनों भी त्यार मिलेंगी

सभी लोग दोनों कार्स में बेथ सक्तिपुर की आवर निकल गए ...............

अब आगे ...........

सूर्य सक्तिपुर में कुछ देर रुक्मणि जी आवर गीता जी से बात कर विधि आवर गायत्री को अपने साथ शॉपिंग चलने को कहता है दोनों ख़ुशी ख़ुशी त्यार हो जाती है अजय के वह मौजूद होने पे सूर्य अजय को भी अपने साथ शॉपिंग के लिया चलने को कहता है

गीता जी आवर रुक्मणि जी से अजय को परमिशन मिलने के बाद अजय भी त्यार हो जाता

कार्स में तीन लोगो की जगह नहीं थी आवर आते हुए अलीना पायल प्रीति को भी अपने साथ सिटी 1 से ले कर आना था इस लिया सूर्य अजय को एक आवर कार ले कर चलने को कहता है

कुछ हे देर में विधि गायत्री अजय की कार में सूर्य के साथ सिटी 1 की आवर निकल चले

मधु जी भी सूर्य के ऐसे मिलनसार आवर बिना भेद भाव के सभी के साथ सम्मान भाव के व्यव्हार से बहुत खुश थी

आधे घंटे बाद तीनो कार्स सिटी 1 सहर पहुँचता है महेंद्र जी का मॉल सिटी के अंदर बना हुआ था

जल्दी हे तीनो कार्स मॉल के बहार रूकती है

सभी कार्स से निकल कर सूर्य के साथ मॉल के अंदर की तरफ भड़ते है महेंद्र जी अपने ऑफिस में बे थे कुछ काम कर रहे थे तभी तभी अलीना ऑफिस में पहुँचता है

अलीना ....... पापा वो सब लोग शॉपिंग के लिया आ गए है

आज पहली बार था जब अलीना ने महेंद्र जी को पापा कह कर सम्बोधित किया था एक पल को तो महेंद्र जी भी चौंक गए पैर फिर जल्दी हे उनके चेहरे पे एक बहुत पहाड़ी मुस्कान उभर आती

महेंद्र जी आने सभी काम चढ़ कर खड़े होते है आवर प्यार से अलीना के सर को सहलाते हुए अलीना को लिया बहार की आवर निकल जाते है

ीदार जैसे सूर्य मॉल में इंटर करता है उनकी नजर अलीना आवर महेंद्र जी पे पड़ती है जो दोनों एक साथ उनकी आवर हे भाड़ रहे थे

महेंद्र जी .......... मधु जी आप भी बचो क्र साथ शॉपिंग पे आई है अच्छा लगा देख कर के आप सबका स्वागत है

दरशल मधु जी की खूबसूरती के चलते महेंद्र जी मधु जी की तरफ कुछ खिचाव मह्सुश करते थे आवर ये बाद मधु जी भी जानती थी आवर उन्हें ये अच्छा भी लगता है

आवर लगे भी क्यों नहीं भला ऐसी कोण स्त्री होगी जिसे अपनी खूबसूरती की तारीफ सुन्ना पसंद नहीं भले हे महेंद्र जी उनकी तरफ बोल कर नहीं करते थे पैर उनकी आँखों में साफ साफ नजर आता था पैर अपनी मर्यादा में रहते हुए

मधु जी .......... आपका मॉल तो काफी खूबसूरत है महेंद्र जी आवर सिटी के हिसाब से भी काफी बड़ा है है दिल्ली जैसे सिटी से अभी काफी पीछे है

महेंद्र जी ....... हाहाहा आपने बिलकुल सही कहा मधु जी आप सब ऑफिस में चलिए पहले चाय कॉफ़ी या ठंडा लीजिये फिर आप सब शॉपिंग करना

सूर्य सब तरफ देखता है फ़िलहाल ज्यादा भीड़ नहीं थी मॉल में

सभी महेंद्र जी के साथ ऑफिस की तरफ चल देते है

सूर्य ....... अलीना पायल आवर प्रीति कहा है वो भी तो तुम्हारे आवर बड़े पापा के साथ आई थी न

अलीना ........ वो दोनों ऊपर हे है सूर्य अभी दोनों ब्यूटी पारलर में है

सूर्य ...... तुम नहीं गई क्या

अलीना. ....... मैं ऐसी हे ठीक हु वैसे दीदी की सदी में देखूंगी कुछ करवाने हुआ तो

सभी ऑफिस में पहुंच चुके थे a.c की ठंडक में सभी चैन से वह रखे सोफे पे बेथ जाते है हलाकि सोफे काम हे थे इस लिया अभी भी कुछ लोग खड़े हे थे

कुछ हे देर में सभी के लिया कॉफ़ी आवर ठंडा गन्ने जूस लिया 2 लड़के ऑफिस में इंटर करते है

महेंद्र जी ........ बच्चो अपना मॉल समाज कर शॉपिंग करना जो भी पसंद आये जिजाकना बिलकुल भी नहीं

मधु जी ...... भाई साहब इनको खुली चुत दे कर आप खुदका हे नुक्सान करवा रहे है

सूर्य ........ हाहाहा ये बात आपने बिलकुल ठीक कही आंटी जी लड़कियों तो शॉपिंग के पीछे वैसे हे पागल रहती है आवर बड़े पापा आप तो उन्हें फुल परमिशन दे रहे है

महेंद्र जी ........ कोई बात नहीं मधु जी बच्चियों के लिया हे तो इतनी म्हणत करते है अगर वही खुश नहीं तो फिर इतनी धन दौलत का क्या फायदा अंत समय में सब यही रह जायेगा खली हाथ दुनिया में आये थे खली हाथ चले जाना है

सूर्य ....... ये क्या बात हुई बड़े पापा आप ऐसा सोच भी कैसे सकते है

सूर्य महेंद्र जी को थोड़े रूखे सवार में बोलता है

महेंद्र जी ....... हाहाहा बीटा इसमें गलत क्या है ये बात तो सोलह आने सच है

सूर्य ......... तो क्या ये बात अभी करनी जरुरी है देखिये आपकी बात सुन कर सबके चेहरे कैसे मुर्जा गए है

महेंद्र जी ने जब सबके चेहरे देखे तो उनके चेहरे पे पीड़ा आवर ुदशी नजर आ रही थी भले हे उन्होंने कुछ भी गलत या जूठी नहीं कहा था पैर जाने अनजाने उनकी बातो ने सभी के चेहरों पे ुदशी ला दी थी

महेंद्र जी .......... सॉरी बचो मैंने तुम सभी का मूड ख़राब कर दिया नैना बेटी सभी को उनकी पसंद की शॉपिंग की जिम्मेदार तुम्हारी है मेरो बच्चियों को कोई भी परेशानी न हो

नैना ....... जी सर किसी को कोई परेशानी नहीं होगी

मधु जी ....... जाओ बचो तुम सब शॉपिंग करो मैं भी कुछ देर बाद तुम सब को ज्वाइन करती हूँ

महेंद्र जी ....... सूर्य बीटा तुम यही रुकना कुछ काम है तुमसे

सूर्य ......... जी बड़े पापा कोमल राधा तुम सबका ध्यान रखना आवर सभी को उनकी पसंद से शॉपिंग करवाना मैं कुछ देर में आता हूँ अजय तुम सब का ध्यान रखना

अजय ........ ठीक है भाई आप चिंता न करे

सब लोग जा चुके थे अब ऑफिस में केवल 3 लोग हे बचे थे सूर्य मधु जी आवर महेंद्र जी

महेंद्र जी ऑफिस से बानी सेफे से कुछ फाइल्स निकलते है आवर सूर्य के सामने रख देते है

सूर्य ....... ये क्या है बड़े पापा

महेंद्र जी ......... ये वो फाइल्स है जो तुम्हारे बड़े मां का आदमी कुछ देर पहले दे कर गया था तुम्हारे लिया

सूर्य ........ मेरे लिया पैर मुझे तो मां जी ने कुछ बताया भी नहीं इस बारे में

सूर्य उनमे से एक फाइल उठा कर खोलता है जिसमे एक फोटो के साथ उस आदमी की जानकारी थी दूसरे पेज के साथ कुछ पिछ आवर कुछ पीपर थे

दूसरी फेल्ड में भी ऐसा हे कुछ था बस आदिम दूसरा आवर उसकी बिज़नेस जानकारी थी

कुल मिला कर तीन फाइल्स थी तीनो में अलग अलग इंसान की पूरी जानकारी दर्ज थी छोटी से छोटी जानकारी

सूर्य फाइल्स पद कर मुस्कुराने लगता है

महेंद्र जी आवर मधु जी बहुत गौर से सूर्य को देख रहे थे

महेंद्र जी पहले हे फाइल्स देख चुके थे इस लिया वो पहले से जानते थे की इन फाइल्स में क्या है

मधु जी ........ क्या हुआ सूर्य ऐसा क्या है इन फाइल्स में जो तुम इतने ध्यान से देख रहे हो

सूर्य ......... कुछ नहीं आंटी जी कुछ नामचीन लोगो की जनम कुंडली है वही देख रहा था बड़े पापा आपको क्या लगता है

महेंद्र जी ......... मुझे नहीं लगता की इनके पीछे तुम्हे जाने की जरुरत है इनके लिया वयोम ठीक रहेगा

सूर्य ......... है मुझे भी लगता है वैसे भी अभी मैं बिलकुल भी फ्री नहीं हूँ इन सब के लिया मैं वयोम को बोल देता हूँ वो इन सब से डील कर लेगा सायद हे मेरी जरुरत पड़े

मधु जी सूर्य की बात सुन कुछ कुछ तो माजरा समाज गई थी फिर भी पूरी तरह से समझने के लिया उन्होंने सूर्य के सामने राखी फाइल्स को उठा कर पढ़ना सुरु कर दिया

गोविंद जी के साथ इतने सालो से अपने बिज़नेस को सँभालने वाली मधु जी को ज्यादा देर न लगी समझते हुए की मामला क्या है आवर कितना संगीन

मधु जी ......... तुम इन सब से दूर रहो सूर्य ये लोग बेहद हे शातिर आवर मक्कार किसम के लोग है इनके सर पे राजनीतिक लोगो का हाथ है

सूर्य ........ हम्म्म मैं इनसे दूर हे रहूँगा आंटी जी वैसे आपका भी बहुत बढ़िया बिज़नेस है न आंटी जी आपने कभी सोचा है इंडिया में अपना बिज़नेस सुरु करना का

सूर्य ने अचानक से पूरी बात हे पलट दी

मधु जी ........ पहले तो नहीं सोचा था पैर अब गोविन्द जज भी दिल्ली हे सिफत होने को कह रहे है आवर मैं भी अब अपने बेटी राधिका को ज्यादा से ज्यादा समय देना चाहती हूँ इस लिया हम लोग दिल्ली सिफत हो जायेंगे

सूर्य ........आवर आपका दो विदेश में बिज़नेस है उसका क्या सोचा है

मधु जी ......... सोचना क्या है हेड ऑफिस दिल्ली में बना कर यही से बिज़नेस को कण्ट्रोल करेंगे यहाँ की मेटिंग मैं बंडल करुँगी आवर कोई जरुरी गेटिंग विदेश में हुए तो गोविन्द जी अटेंड कर लेंगे

सूर्य ......... अच्छा आईडिया है बड़े पापा फूफा जी आवर पापा भी दिल्ली आवर जयपुर से बिज़नेस स्टार्ट कर रहे है तो आप चाहो तो इनके साथ कोई आवर बिज़नेस भी partnership'me स्टार्ट कर सकती है

महेंद्र जी ........ बिलकुल सही कहा सूर्य ने मधु जी दिल्ली ब्रांच को मैं आवर संजय किरण के पापा संभालेंगे आवर साथ हे सूर्य भी

सूर्य ........ बड़े पापा मैंने कब बिज़नेस ज्वाइन करने का कहा है अभी तो मैंने कॉलेज भी पूरा नहीं किया पूरा करना तो दूर अभी तक कॉलेज में कदम तक नहीं रखा है

मधु जी ........ अगर सूर्य दिल्ली हेड ऑफिस संभालता है तो मैं गोविन्द जी से इस बारे में बात करुँगी

सूर्य ........ आंटी जी आप भी मुझे तो बिज़नेस का ' बी' भी नहीं आता है

मधु जी ........कोई बात नहीं दामाद जी मैं हूँ न मैं आपको गाइड करुँगी

राधिका अंदर आते हुए सीधा सूर्य आवर अपनी माँ का हाथ पकड़ उन्हें खींचते हुए बहार ले कर जाने लगती है

मधु जी ......... रइधू बेवखूफ़ लड़की सदी हो गई माँ बनने वाली है पैर अभी भी बचपना नहीं गया तुम्हारा

राधिका ........ कब से हम सब आपका वेट कर रहे है पैर आप तो जब देखो तब बिज़नेस के बाटी में उलझी रहती है आप यहाँ हमारे साथ शॉपिंग के लिया आई है न की बिज़नेस मीटिंग अटेंड करने

सूर्य ......... बिलकुल सही कहा राधिका भाबी आपने ये तो मुझे भी बिज़नेस ज्वाइन करने का ऑफर दे रहे है

राधिका ........ अभी तो आपने कॉलेज ज्वाइन किया है अभी से बिज़नेस आप न इन बड़े लोगो से दूर हे रहा करो देवर जी

सूर्य आवर मधु जी राधिका की नौटंकी देख मंद मंद मुस्कुराते हुए बाकि सब की तरफ भाड़ गए थे

सूर्य .......... तुम लोगो ने अभी तक शॉपिंग भी सुरु नहीं की

सुनिधि सूर्य का हाथ पकड़ उसे कुछ ड्रेस की आवर इशारा करती है

सूर्य ....... नैना जी क्या ये सब नया स्टॉक है

नैना न में सर हिला देती है

सूर्य ........ फिर आप इन सब को ये सब क्यों दिखा रही है आवर वैसे भी ये जीन्स टॉप t-shirts ये सब तो अपनी पसंद से ये लग दिल्ली से कभी भी ले सकती है

सूर्य की बात सुन नैना उसकी आवर असमंजश से देखते हुए कहती है

नैना ...... वो राधा जी ने तो यही सब दिखने को कहा मुझे

सूर्य ........आप एक काम कीजिये हमारे राजस्थान खाश कारीगरी वाले साड़ी बरी बेष लगा चोली ये सब दिखाए

मधु जी ........ बिलकुल सही ये जीन्स टॉप सलवार सुते तो हर जगह मिल जायेंगे तुम सब को यहाँ पे ऐसे शॉपिंग करनी चाइये जो यहाँ की खासियत हो वैसे भी राजस्थानी हाथ से कड़ाई की गई सरिया आवर यहाँ के सदी विवाह में पहने जाने वाले लहंगा चोली असंद करने चाइये कुछ दिनों बाद तुम सब को उनकी जरुरत पढ़ने वाली है मेर्री की सदी में

सूर्य ........ बिलकुल सही आवर फिर कोई आधुनिक कपडे पसंद भी आते है तो वो भी पसंद कर सकती है अब आप सब शॉपिंग करो मैं जरा माँ आवर बाकि सभी के लिया साड़ी पसंद करता हूँ

सूर्य एक बार सब को नैना के साथ ऊपर के फ्लोर पे भेज देता है आवर खुद अपनी माँ दादी बुआ मामियो के लिया उनके हिसाब की साड़ी पसंद करने लगता है एक एक साड़ी आवर एक एक लहगा चोली सेठ पसंद कर सभी को पैक करने का बोल बाकि सभी की मदद करने चला जाता है

करीब 2 घंटे के बाद सबने एक एक सेट साड़ी एक एक लहंगा चोली फूल सेट लेने के बाद कुछ टॉप स्कर्ट जीन्स t-shirts टॉप्स पसंद किया

सभी के हठी में 4,से 5 शॉपिंग बजे थे

उनके साथ हे सूर्य ने किरण मानसी जूलिया के लिया भी अपनी पसंद से शॉपिंग की अजय भी अपने लिया अपनी पसंद से शॉपिंग कर चूका था

इन सब में काफी टाइम लग गया आवर दोपहर के 01:30 पं हो चूका था मॉल के बहार हे साइड में बने होटल में सब ने जैम कर खाना खाया आवर सब मॉल की तरफ आ रहे थे तभी सूर्य की नजर पार्किंग की तरफ गयी जहा 3,4 लड़के ग्रुप में किसी को घेरे खड़े थे

सूर्य ......... अजय देखो जरा वह क्या हो रहा है

अजय जब पास जा कर देखता है तो ये 6 लड़के थे जो 2 लड़कियों को छेद रहे थे

अजय ...... भाई वह कॉलेज के 6 लफंगे है जो 2 लड़कियों को परेशान कर रहे है

सूर्य ........ अलीना कोमल जाओ आवर जा कर उनकी हदी पसली एक कर दो पैर ध्यान रहे की कोई मर न जाये

मधु जी ......... बीटा वो 6 लोग है आवर कोमल आवर अलीना 2 तुम्हे खुद जाना चाइये

राधा ........ वो दो भी ज्यादा है उन 6 के लिया तो अलीना या कोमल आकिलि हे काफी है आंटी जी

ीदार अलीना आवर कोमल सूर्य की बात सुनते हे तेज कदमो के साथ उन 6 लड़को की तरफ चलती है

अलीना ....... अपनी खैरियत चाहते हो तो फ़ौरन दोनों लड़कियों के पेअर पकड़ कर माफ़ी मानगो आवर चुपचाप निकल लो

अपने पीछे से आती आवाज सुन कर जब उन लड़को की नजर कोमल आवर अलीना पे पड़ी तो अपने पीछे कड़ी इन दो खूबसूरत लड़कियों को देख उनके मुँह से लार टपकने लगती है

लड़का 1 ...... वह क्या किस्मत है इतना खूबसूरत माल खुद हे चल कर हमारी झोली में आ गिरा ये तीखी विदेशी मिर्च का सवाद तो सबसे पहले मैं हे चखूँगा

लड़का एक अलीना की आवर इशारा करके कहता है

अभी भी 4 लड़के उन दो लड़कियों के हाथ को पकडे खड़े थे

पैर लड़के 1 के साथ जो दूसरा लड़का खड़ा था वो बड़े हे ध्यान से कोमल को देख रहा था

जैसे वो कुछ जानने की कोशिश कर रहा था

उसका चेहरा एक डैम से सफ़ेद पड़ने लगता माथे से पसीना टपकने लगता है वो अपनी जगह खड़ा खड़ा हे सूखे पते की तरह करने लगता है

अलीना ........ सेल कमीने आज तुझे ये तीखी विदेशी मिर्च ऐसा मज़ा चखाएगी की आगे मिर्च खाना तो दूर मिर्च देख कर कर हे तेरी पतलूंग गीली हो जाएगी

अलीना आगे बढ़ एक करारा तफद लड़के एक को मरती है जो अभी तक अलीना को देख मुँह से लार टपका राग था अगले हे पल जमीं पे गिरा ुशी मुँह से खून बहार रहा था

कोमल अभी भी उस लड़के 2 को गुर रही थी जो कोमल के ऐसे लगातार खुद को घूरे जाने स आवर ज्यादा दर के मरे कपङे लगता है

कोमल ........ तुम्हे मैंने पहले भी कही देखा है तुम ुशी गांव से हो न उस m.l.a गुजर सिंह के गांव से

अलीना लड़के एक के सीने में जोरदार लात मर कर उन 4 लड़को की तरफ लपकती है जो उन दो लड़कियों को पकडे खड़े थे

अगले हे पल एक दर्दनाक चीख गूंज उठी वह लड़का 3 जो उन दो लड़कियों के सीने के जस्ट निचे अपना हाथ रखे खड़ा था अलीना की जोरदार लात सीधा उस लड़के के पेट में जा लगती है आवर वो 4,5 कदम पीछे चीख ते हुए अपने पेट को पकडे जमीं पे लौटने लगता है

कोमल लड़के 2 को गुरते हुए कहती है

कोमल ........ अगर तुम एक कदम भी अपनी जगह से हिले तो यही जिन्दा गाड़ दूंगी

लड़के 2 की तो कोमल को पहचानते हे फैट पड़ी थी रही सही कसार कोमल की चेतावनी ने पूरी कर दी

लड़का 2 अपने पैरों पे आवर ज्यादा देर खड़ा हे न रह सका आवर धड़ाम से जमीं पे गिर गया

कोमल आवर अलीना उन तीन लड़को की तरफ बढ़ी जिनमे से एक मौका देख भागने की फ़िराक में था पैर अगले हे पल कोमल के पैरों में पहनी हाई हील सेंडल का प्रहार अपने सीने पे किसी चाकू के प्रहार सा मह्सुश कर जमीं पे तड़प ने लगा

देखते हे देखते उसके सीने के सामने जा शर्ट का हिस्सा अपना रंग बदलने लगता है क्युकू कोमल की हाई हील से उसका सीना काफी जख्मी हो गया था

अब तक सूर्य जो दूर से देख रहा था बाकि सब के साथ उसे भी उस लड़के के गहरे जखम का पता चल गया था

सूर्य जल्दी से आगे आता है आवर वयोम को याद कर उसके जखम को ठीक करने को कहता है ताकि देखने से वो मामूली लगे आवर उसकी जान को कोई खतरा न हो

अब तक अलीना आवर कोमल ले उनकी हड़िया तो नहीं तोड़ी थी पैर फिर भी उनकी हालत बहुत ख़राब कर दी थी बहरी छोटे तो काम हे थी पैर उन 5 के सरीर का सायद हे कोई हिस्सा बिना मार के बचा होगा पाछो के मुँह ठफड लात गुस्सा से लाल हो चुके थे

वही जिसने कोमल ने अपनी जगह से न हिलने की हिदायत दी थी वो अपने हाथ जोड़े गुथनो पे बैठा गिड़गिड़ा रहा था जब कोमल ने उसे ध्यान से देखता तो पाया की दर के मरे उसने कब अपनी हे पेण्ट में पिसाब कर दिया सायद उसे भी पता नहीं था

कोमल जोर जोर से हसने लगती है

सुनिदि ........क्या हुआ कोमल तुम है क्यों रही हो

कोमल ....... जरा उसे देखो उसने दर के मरे अपनी हे पेण्ट में पिसाब कर दिया है हहहहए

सूर्य आगे भाड़ उस लड़के 2 को जोरदार चांटा मरता है लड़का 2 जमीं पे गिरा सूर्य के पेअर पकड़ कर माफ़ी मांगने लगता है

लड़का 2 ........ मेरी जान बक्श दीजिये ठाकुर साहब मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई

सूर्य ........ ये सब जब तुम सब मिल कर इन दो मासूमो लड़कियों को परेशान कर रहे थे तब याद नहीं आया

अब अगर तुम सब जिन्दा बचना चाहते हो तो अपने अपने परिवार को यहाँ बुलाओ वर्ण मुझे एक मिनट्स नहीं लगेगी तुम सब की जान लेने में आवर ये बात तुम इन सब में बहुत अच्छे से जानते हो

लड़का जल्दी से अपना फ़ोन निकल कर किसी को कॉल करता है

सूर्य ......... तुम सब क्या देख रहे अपने अपने घर फ़ोन करो आवर पुरे परिवार के साथ ययः आने को कहो तभी तुम सब जिन्दा बच सकते हो

मधु जी ...... जाने दो सूर्य बीटा हम सूरजगढ़ चलते है इनके लिया इतना काफी है

दीप्ती .....है सूर्य खामखा पुलिस का लगदा होगा

अजय जो काफी देर से चुप था वो जनता था की सूर्य की बात इन्होने नहीं मणि तो कोई कुछ भी कर ले इनका बचना मुश्किल हे नहीं नामुमकिन है

सुनिधि ...... दीप्ती दीदी आप पुलिस में हो पैर आप नहीं जानती इनका नाम हे काफी पुलिस को पीछे हटाने के लिया सूर्य शिव ठाकुर नाम सुनते हे पुलिस भी इन्हें रोकने से डर्टी है

सूर्य का पूरा नाम सुन कर उन 5 लड़को की आँखों में सूर्य के रूप में अपनी मौत नजर आने लगती है

सूर्य ....... अजय इन्हें अपने साथ ले कर आओ

लड़को के फ़ोन करने के कुछ आधे पौने घंटे बाद वह उन सब के परिवार भी आ पहुंचे थे सभी को अजय अपने साथ एक तरफ ले कर आता है जहा उन सब के बच्चे मार खाये गुथनो पे बे थे थे

अपने बच्चों की ऐसे हालत देख सब माँ बाप भाई बागान अपने अपने बही बेटे की आवर बढे

लड़का 1 ...... पापा हमें बच्चा लीजिये वो हमें मर देगा

लड़के 1 का बाप अपने बेटे की इस हालत को देख गुस्से में आ गया था आवर चीख ते हुए बोलता है किसकी इतनी हिमत है जिसने मेरे बेटे को मारा

तभी एक आवाज उन सब के कानो में pad-ti है है

सूर्य ........ मैंने मारा है आपके बेटे आवर उसके साथियो को

आदमी उस दिशा में देखता है जहा से सूर्य अजय महेंद्र जी मधु अलीना कोमल दीप्ती के साथ वो दो लड़किया भी थी

आदमी 1 ....... ठाकुर साहब आपने मारा है मेरे बेटे को पैर क्यों इसका कसूर क्या है

सूर्य ....... अपने बेटे से हे पूछ लीजिये आवर अगर इसने झूट बोलै तो मैं इसे यही जान से मार डालूंगा

आदमी ......... नहीं नहीं ठाकुर साहब जरूर मेरे हे नालायक बेटे की गलती रही होगी उसे नाफ्फ कर दीजिये

उस लड़के की माँ सूर्य के सामने हाथ जोड़ने लगती है

सूर्य उनके हाथ खोल कर उन्हें संत करता है

सूर्य .......... अब तुम लोग अपना मुँह खोलते हो या मैं खोली तुम सबका मुँह

सूर्य की गुस्से भरी आवाज सुन सभी लड़के तोते की तरह सब सच सच बोलने लगते है

सब की बात सुन उन सब लड़को के परिवार का सर सरम से झुख जाता है

सूर्य ...... ये वो दो मासूम लड़किया है जिन्हे आपके नबाबजाड़े परेशान कर रहे थे आपकी भी तो बेतिया है वो भी खूबसूरत भी आवर जवान भी अगर मैं उन्हें इशू तरह ....

सूर्य की बात सुन उन लड़को के परिवार में से एक लड़का सरीर में थोड़ा भरी था पहलवान जैसा वो सूर्य की आवर भाड़ा पैर अगले हे पल सूर्य का झन्नाटेदार चांटा पड़ा तो सारा गुस्सा एक हे पल में दर्द में बदल गया

सूर्य ......... अपनी हद में रहो समाज गए वर्ण एक पल नहीं लगेगा मुझे तुम सब की गर्दन उखाड़ने में तुम्हारी बहन बहन है आवर किसी आवर के बहन बेटी खिलौना किसी की इज्जत आबरू बचने वाली मर्दानगी तो नहीं है तुम में पैर काम से काम किसी बागान बेटी की इजात आबरू तो ख़राब न करो

आदमी 1 ....... ठाकुर साहब हमें माफ कर दीजिये ये इनकी नहीं हमारी गलती है हमारे हे पालन पोषण में कमी थी जो हमारी औलाद अपनी हे बहन बेटियों की इज्जत न कर पाए इनसे ज्यादा हम इन बच्चियों के गुनहगार है आप इनकी सजा हमें दीजिये ताकि इन्हें भी तो पता चले की इनके किये की सजा इनका परिवार इनके अपने भोग रहे है

सूर्य ........ अगर मैं इन्हें सजा देता तो अब तक इनकी लाशे भी आपको देखने की नहीं मिलती अभी भी वक़्त है हो सके तो इन्हें सही रस्ते पे ले आइये इन्होने इन दो लड़कियों को बे - आबरू करने की कोशिश की है अगर ये इन दोनों लड़किया के पेअर पकड़ कर माफ़ी मांगते है आवर ये इन्हें माफ करती है तो समाज लेना मैंने इन्हें माफ कर दिया पैर दुबारा इनके द्वारा ऐसा हे वाक्य मेरे सामने आया तो समाज लेना इनकी लाश तक आपको देखने को नहीं मिलेगी

सभी 6 लड़को के साथ साथ उनके माँ बाप भी उन दो लड़कियों से हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगते है

लड़को के माता पिता आवर बहनो को हाथ जोड़े देख वो लड़किया भी उन्हें हाथ जोड़े कर माफ कर देती है

सभी 6 लड़को के सर सर्मिंदगी से मुझे हुए थे खाश कर इस बात को ले कर कज आज उनके माता पिता के सामने उनका ऐसा घिनोना चेहरा सामने आ गया आवर उनकी वजह से उनके माता पिता भाई बहनो को शर्मिंदा होना पड़ा

सूर्य ........ आप लोग इन्हे ले जा सकते है आवर जरा इसे ( लड़के 1 ) तीखी मिर्ची ठीक से खिलाना विदेशी तो नसीब न हुई देशी भी सोच समाज कर खाना ये मेरा परिवार ( अलीना की आवर ऊँगली कर के ) अगर मैं पहले वाला सूर्य होता तो सायद तुम्हारे अलीना को कहे शब्दों के कारन इतने टुकड़े करता की डॉक्टर भी उन्हें सील नहीं पता भूल कर भी दुबारा मेरी नजरो में मत पड़ना

सभी लोगो के जाने के बाद महेंद्र जी ने मुँह खोला

महेंद्र जी ....... मुझे दर था की कही तुम गुस्से में उनकी जान न ले लो

सूर्य ....... हाहाहाहा नहीं पापा अब मैं अपने गुस्से को कण्ट्रोल कर सकता हूँ नहीं तो सायद अभी तक वो सब पतियों में जिंदगी आवर मौत के बिच हॉस्पिटल के किसी बीएड पे पड़े होते मैं बस उनके परिवार को उनका असली चेहरा दिखाना चाहता था ताकि उन्हें अपनी गलती की सजा भी मिले आवर उनके सुधर भी हो उन्हें जान से मरने का मेरा कोई इरादा नहीं था गरम जवान खून है ऐसी गलतिया हो जाती है पैर उन्होंने अपनी लिमिट क्रॉस की तो मुझे उन्हें इस तरह सजा देनी पड़ी की उन्हें सजा भी मिले आवर शिख भी

दोनों लड़किया सूर्य के सामने हाथ जोड़े देती है

लड़की 1 ....... ठाकुर साहब आपका बहुत बहुत सुखरिया हमारी मदद करने के लिया

सूर्य ....... मेरा नाम सूर्य शिव ठाकुर है तुम मुझे मेरे नाम से बुला सकती हो हम ham-humar है आवर एक बात खुद की रक्षा करना शिख लो हर बार जरुरी नहीं की कोई तुम लोगो की मदद करने आ जाये हर लड़की हर आवर को खुद की रक्षा करना आना चाइये ताकि इन जैसे हवश के भेडियो को मुँह tou'd जबाब दे सके

नैना दो पैकेट सूर्य को देती है जिनमे स्पोर्ट ट्रीकज सूरे थे आवर स्पोर्ट बूट्स भी

सूर्य .......ये तुम दोनों के लिया है सुबह सुबह इन्हें पहन कर रनिंग

एक्सरसाइज करना स्टार्ट करो ताकि तुम जरुरत पे खुद की रक्षा कर सको अब तुम लोग जाओ

महेंद्र जी ....... बीटा सूर्य तीन बजने को आये है अब तुम सब को भी हवेली के लिया निकलना चाइये

सूर्य सब को अपने साथ लिया सिटी 1 से निकला आवर विधि गायत्री अजय को सक्तिपुर छोड़ गीता जी आवर रुक्मणि जी को उनके लिया शॉपिंग की सरिया दे सीधा सूर्यगढ़ आ पहुँचता हवेली पहुंचते पहुंचते साम के 4 से कुछ टाइम ऊपर हो गया था

दादा जी ने जब इतना लेट आने की बात पूछी तो राधा ने मिर्च मसाला लगा कर वह जो कुछ हुआ वो सब कह सुनाया

सूर्य ....... मैं फ्रेश हो कर थोड़ा आराम करूँगा इस लिया कोई भी 2 घंटे डिस्टर्ब न करे

दादी जी ....... बीटा शालिनी ने फ़ोन किया था तुमने उसका फ़ोन नहीं उठाया

सूर्य जब अपना फ़ोन चेक करता है तो वो साइलेंट था आवर उसमे उसके मां जी आवर शालिनी जी के अलावा विजय आवर रोहन स्वीटी का भी फ़ोन आया हुआ था

सूर्य सभी को उनके लिया शॉपिंग किये बैग्स दे कर किरण मानसी जूलिया शालिनी जी का बेग लिया अपने रूम की आवर चल दिया

मधु जी ........... क्या सूर्य ने अपने लिया शॉपिंग नहीं की हमें तो लगा वो सब अपने लिया शॉपिंग की है

दादा जी ....... वो ऐसा हे है मधु बेटी जो भी करता है दिल से करता है मेरा शेर बीटा क्यों कोमल बेटी सूर्य के लिया कितनी ड्रेस पसंद की

दादा जी की बात सुन कोमल मुस्कुराते हर अपने शॉपिंग बेग काश कर पकड़ लेती है

दादी जी ....... हेहेहे उसे पता था की उसकी बहने उसके लिया खुद से अपनी पसंद के कपडे लेंगी इस लिया उसने कुछ भी पसंद नहीं किये

कोमल ...... मैं सूर्य को उसकी ड्रेस दे कर आती है

कोमल अपने बेग लिया फ़ौरन अपने रूम की तरफ दौड़ गई बाकि सब भी अपने अपने रूम की आवर चल दिया सभी को फ्रेश जो होना था ................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........................,
 
अपडेट. 268

दादा जी ....... वो ऐसा हे है मधु बेटी जो भी करता है दिल से करता है मेरा शेर बीटा क्यों कोमल बेटी सूर्य के लिया कितनी ड्रेस पसंद की

दादा जी की बात सुन कोमल मुस्कुराते हर अपने शॉपिंग बेग काश कर पकड़ लेती है

दादी जी ....... हेहेहे उसे पता था की उसकी बहने उसके लिया खुद से अपनी पसंद के कपडे लेंगी इस लिया उसने कुछ भी पसंद नहीं किये

कोमल ...... मैं सूर्य को उसकी ड्रेस दे कर आती है

कोमल अपने बेग लिया फ़ौरन अपने रूम की तरफ दौड़ गई बाकि सब भी अपने अपने रूम की आवर चल दिया सभी को फ्रेश जो होना था ................

अब आगे ...........

रात का डिनर कर जब सूर्य ऊपर अपने रूम में आया तो उसके कुछ देर बाद हे राधिका आवर दीप्ती सूर्य के रूम में आ पहुंची

सूर्य दोनों को एक साथ आया देख उन्हें बैठने का इशारा करता है क्यों की उसे भी पता चल गया था की वो लोग कल दोपहर बाद दिल्ली वापिस लौटने वाले है

सूर्य ........ तो आप सब लोग कल वापिस दिल्ली जा रहे है

राधिका ....... हम्म्म ..कह कर अपनी गर्दन हिला देती है

दीप्ती ...... अगर तुम कहो तो राधिका को हम यही छोड़ जाते वैसे भी राधिका को यहाँ कुछ ज्यादा हे अच्छा लग रहा है क्यों राधिका

राधिका ........ मैंने ऐसा कब कहा दीदी मैंने तो ऐसा कुछ भी नहीं कहा

सूर्य ...... ओह्ह तो आपको यहाँ अच्छा नहीं लग रहा क्या राधिका

राधिका ........ नहीं नहीं मुझे तो यहाँ बहुत अच्छा लग रहा है

सूर्य आवर दीप्ती दोनों की बातो के बिच बेचारी अकेली राधिका उलझ चुकी थी उसे समाज नहीं आ रहा था की किसको क्या जबाब दे

सूर्य आवर दीप्ती की हाशि की आवाज से राधिका को समझते देर नहीं लगती की सूर्य आवर दीप्ती दोनों मिल कर उसके मज़े ले रहे है

राधिका अपना मुँह फुला कर दोनों की आवर से चेहरा गुमा लेती है जैसे वो सच में नाराज हो गई हो

दीप्ती .......अले अले मिली रइधू तो नॉलेज हो गई

दीप्ती अपनी जगह से कड़ी हो राधिका को गुदगुदी करती है

जल्दी हे राधिका की खिलखिलाती नाशी रूम में गूंजने लगती

राधिका ...... अह्ह्ह्हह बस कीजिये दीदी मैं नाराज नहीं हेहेहे प्लेसेस दीदी मुझे गुदगुदी हो रही है

सूर्य दीप्ती को रुकने का इशारा करता है भले हे अभी राधिका के बचे पे इसका कोई असर न हो पैर फिर भी सूर्य को थोड़ी चिंता हुई

दीप्ती ....... क्या बात है अभी तो अपने बच्चे का ख्याल रखा जा रहा है इतना तो कभी हमारा भी नहीं रखते तुम क्यों राधिका

राधिका ......... वो तो रखेंगे हे पापा जो है

दीप्ती ...... तुम न सच में बेवकूफ हो राधिका क्या ये बात बोलने की जरुरत है अगर किसी ने सुन लिया तो कितनी बड़ी मुसीबत आ जाएगी पता भी है

सूर्य ....... दीप्ती बिलकुल सही कह रही है राधिका भले हे एकांत में हमारा रिस्ता कुछ भी हो पैर दुनिया की नजरो में हमारा रिस्ता देवर भाबी का है भूल कर भी अपनी जुबान पे फिर से ये सब न लाना

दीप्ती ....... चल अब हम आराम करते है वैसे भी आंटी जी आज अंकल के साथ है उनका तो लम्बा प्रोग्राम चलने वाला है

राधिका ......... ची ये आप क्या बोल रही हो दीदी वो मम्मी पापा है

दीप्ती .. ...... हेहेहे उनके ऐसे प्रोग्राम से हे तुम इस दुनिया में हो हेहेहे मुझे लगता है वो दूसरी राधिका की तयारी कर रहे है

सूर्य को थोड़ा अजीब भी लग रहा था की पहले तो कभी राधिका आवर दीप्ती उसके सामने इस तरह बात नहीं करते थे फिर आज दीप्ती इस तरह की नॉनवेज बाते क्यों कर रहे है

राधिका ........ आप चलिए दीदी मैं अभी आती हूँ

दीप्ती आँख मार्के हस्ते हुए रूम से निकल जाती है आवर ऊपर छठ पे बने रूम की आवर भाड़ जाती है

दीप्ती के जाने के बाद राधिका रूम को लॉक करती है आवर सीधा सूर्य की गौड़ में आ कर बेथ जाती है

सूर्य प्यार से राधिका के गोर गुलाबी फुल्ले हुए गाल को सहला देता है

सूर्य ........ क्या हुआ राधिका कुछ कहना है क्या तुम्हे

राधिका. ......... वो वो

सूर्य ......... यहाँ हमारे अलावा कोई नहीं है खुल कर कहो जो भी कहना है

राधिका ........ वो वो दीदी आपके साथ आज रात को रुकना चाहती है

सूर्य ......क्या मतलब

राधिका ....... वो वो दीप्ती दीदी चाहती है की आप उन्हें जाने से पहले एक बार प्यार

सूर्य ....... ओह तो ये बात है वैसे मैं तो तुम्हे प्यार करने की सोच रहा था खेर कोई बात नहीं सायद तुम्हारी इच्छा नहीं है

राधिका .......मैंने कब मन किया मैं भी करुँगी

आगे कुछ कहती उस से पहले हे सूर्य ने दीप्ती के होंठो को अपने होंठ हो में कैद कर चूमने लगता है एक प्यारा सा 2 मिनट्स का चुम्बन कर राधिका सूर्य के सीने से लग जाती है

सूर्य ........ पैर एक प्रॉब्लम है राधिका

राधिका ........ कैसे प्रॉब्लम

सूर्य ....... ऊपर के रूम में तो तुम दोनों साथ में हो क्या ये ठीक रहेगा एक दूसरे के सामने

राधिका ........ आप ऐसा सोच भी कैसे सकते है मैं दीदी के सामने ऐसा कुछ नहीं करुँगी कल हे जब आप आवर मैं वो सब कर रहे थे तब माँ ने सब कुछ लाइव देख लिया वो तो वो तो उन्हें पहले से पता था इस लिया उन्होंने कुछ कहा नहीं मुझे

सूर्य .......... तो ये बात है तभी मैं सोचु वो जब भी मिलती है तो मुझे देख कर मुस्कुराने क्यों लगती है

राधिका ....... हेहेहे मुझे लगता है माँ आपको लिखे करने लगी है पैर आप उनके साथ ऐसा कुछ नहीं करेंगे समाज गए न

सूर्य ........ तुम्हे क्या लगता है मैं लड़की देखते हे पेण्ट उतरने वालो में से हु. ये तुम भी अच्छे से जानती हो राधिका की मैं खुद से ऐसी पहल नहीं करता खेर अभी तो वो ऐसा कुछ नहीं करेंगी आगे की आगे देखेंगे

राधिका ......... अब आप ऊपर जाइये दीदी आपका इन्तजार कर रही है

सूर्य ....... आवर तुम्हारा क्या राधिका

राधिका ........ मैं आपका यही इन्तजार करुँगी यही यही प्यार करेंगे

सूर्य ........ नहीं राधिका मेरी बाते तुम्हे बुरी लगे पैर मैं यहाँ अपनी बीबी के अलावा किसी आवर के साथ हमबिस्तर नहीं हो सकता मैंने स्वीटी से वडा किया है

राधिका को बुरा तो जरूर लगा था क्युकी राधिका कही न कही सूर्य को रोहन का स्थान दे चुकी थी

राधिका ......... ये कहु की ये बात सुन कर मुझे बिलकुल भी बुरा नहीं लगा है तो जूथ कहूँगी सूर्य पैर मुझे ये भी अच्छा लगा की तुम स्वीटी से इतना प्यार करते हो पैर एक बात समाज नहीं आई की जब तुम इतना प्यार स्वीटी से करते हो तो फिर दूसरी लड़कियों से सम्बन्ध

सूर्य एक गहरी साँस लेता है आवर फिर राधिका की आवर देखते हुए बोलता है

सूर्य ........ राधिका मेरे बारे में बहुत कुछ ऐसा है जो मेरी माँ आवर स्वीटी के अलावा कोई नहीं जनता मैं तुम्हे आंजना चहु तो भी तुम समाज नहीं सकती रही बात अन्य शारीरिक सम्बन्ध की तो जो मुझसे प्यार करती है मैं उन्हें खुद से दूर नहीं रख सकता ये बात स्वीटी जानती है इस लिया उसने आज तक मुझे नहीं रोका बल्कि उसका मुझे साथ हे मिला है तुम्हारे साथ जो सम्बन्ध बना है उसमे भी स्वीटी की सहमति थी तभी मैंने तुम्हारे साथ सम्बन्ध बनाया

राधिका ........ सॉरी सूर्य ये मैं पहले से जानती हूँ आवर ये भी की दीदी भी आपसे प्यार करती है जैसे सुनिधि माया सानिया सोफिया तो क्या तुम उन सब के साथ भी

सूर्य ........ मुझे नहीं पता आगे क्या होगा खेर छोड़ो ये सब तुम ऊपर जाओ मैं आता हूँ कुछ देर में

राधिका ....... पैर मैं दीदी के सामने आपके साथ कुछ नहीं करुँगी आवर न दीदी ऐसा कुछ करेगी

सूर्य ........ ठीक है फिर एक दूसरे के वक़्त रूम के बहार पहरेदारी करना हाहाहाहा

राधिका सूर्य की बात सुन हलके से उसके सीने में मुक्का मरती है

सूर्य ....... अच्छा सुनो जब मैं रूम में औ तो या तो तुम पहले बाथरूम में चली जाना या फिर दीप्ती या फिर किसी को रूम से बहार रुकना होगा अब तुम दोनों आपस में हे तय कर लो वैसे मुझे थ्रीसम में भी कोई प्रोब्लेम्स नहीं है

राधिका ....... तुममममम..... तुम सच में बहुत बेशरम हो सूर्य

राधिका सूर्य के होंटो को चुम कर ऊपर चली जाती है कुछ देर बाद फिर से सूर्य का रूम का दूर नॉक होता है तो बहार अलीना आवर राधा थी

सूर्य ....... 11 बजने को आये तुम दोनों अभी तक सोये नहीं

राधा ........... वो नींद नहीं आ रही थी हमें

सूर्य ....... अच्छा इस लिया मेरी नींद ख़राब करने चले आये ये अच्छा है

राधा ....... ज्यादा नाटक न करो आवर जा कर अपना काम करो हम यही सोने वाली है

अलीना ....... राधा दीदी इन्हें कोनसा काम आ गया इतनी रात को

राधा एक कुटिल मुस्कान के साथ सूर्य को देखती है

सूर्य ....... राधा तुमने मेरी जासूसी की न अपनी सक्तियो से ये अच्छी बात नहीं है

राधा ......... हेहेहे तुम कुछ भी करो आवर हम थोड़ी से सक्तियो का इस्तेमाल भी नहीं कर सकती क्या

सूर्य ........ इस तरह अपनी सक्तियो का गलत इस्तेमाल करना गलत है न राधा

राधा ........ इस से हम किसी को नुकसान तो नहीं पंहुचा रहे है न अब चुप चाप टीवी को ऊपर के रूम से कनेक्शन करो मुझे सब देखना है

सूर्य ....... पागल हो गई हो क्या तुम दोनों

राधा ....... मुझे कुछ नहीं पता तुम करते हो या नहीं

सूर्य ....... बिलकुल नहीं राधा मैं तुम्हारी ये बात बिलकुल नहीं मानुगा

सूर्य आँखे बंद कर किरण को याद करता है क्यों की वो जनता है की इस राधा की बची को किरण हे हेंडल कर सकती है

किरण ......... क्या हुआ मुझे कैसे याद किया

किरण के आने से पहले हे किरण की आवाज रूम में गूंज उठी

सूर्य ....... अब तुम हे हेंडल करो इस राधा को

किरण ....... आखिर बात क्या है

राधा ......कुछ नहीं स्वीटी ये सूर्य बस ऐसे हे बोल रहा है

किरण ....... राधा बात क्या सच सच बताओ

राधा किरण को राधिका आवर सूर्य की बात को मिर्च मसाला लगा कर किरण को बताती है बेचारी अलीना तो ये सुन कर शॉक हो गई उसे तो ये सब मालूम भी नहीं था

किरण ........ राधा दीदी आप जानती है की राधिका के पेट में जो बचा है वो कुंवर जी का अंश है

किरण की बात सुन राधा आवर अलीना दोनों के मुँह खुले के खुले रह गए

राधा ......ये तुम क्या कह राहु हो स्वीटी

किरण ....... है यही सच आवर ये बात माँ सा आवर शालिनी माँ के अलावा मैं दीप्ती आवर मधु आंटी हे जानते है

अलीना ....... पैर ये सब हुआ कैसे

किरण ......... वो बाद में बताउंगी पैर राधा क्या तुम्हे ये सही लगता है तुम भी तो एक लड़की हो न क्या तुम्हे ये अच्छा लगेगा जब तुम्हारे निजी पल कोई आवर देखे तुम दीप्ती राधिका आवर कुंवर जी का मिलान देखना चाहती हो अगर ऐसा तुम्हारे साथ हो तब क्या होगा आपने एक बार भी सोचा

राधा का पूरा चेहरा एक हे पल में पीला पद गया

सूर्य आगे भाड़ राधा की अपने सीने से लगा लेता है

किरण भी राधा की पीठ सहलाने लगती है

किरण ....... राधा दीदी मैं आप पे गुस्सा नहीं हूँ पैर आप से इस मामले में खुश भी नहीं हूँ पिछले जनम में मैंने भी बहुत बार इनके ऐसे पल सपना के साथ देखे थे वो मेरी बेव्खूफी आवर नादानी थी आवर हम सब को उन गलतियों की बहुत बड़ी सजा भी मिली बाकि आप समझदार है

राधा ........ सॉरी सूर्य सॉरी स्वीटी मुझे माफ कर दो

किरण ....... आपको माफ़ी मांगने की जरुरत नहीं है बुआ

राधा किरण के मुँह से बुआ सुन कर किरण के खुल्हो पे चिकोटी काट देती है

राधा ....... सूर्य देखि न ये स्वीटी की बची मुझे बुआ कह रही है

किरण ....... आप जाइये मई. कुछ देर यही हूँ इनके साथ

सूर्य ........ ठीक है मैं जल्दी हे आता हम तुम जाना नहीं

किरण ....... नहीं मुझे जाना होगा माँ अकेली है वो तो आपने बुलाया तो मैं आ गई

सूर्य किरण को कुछ देर किश करता है आवर फिर वह से ऊपर की आवर चला जाता है जहा दीप्ती आवर राधिका दोनों रूम में रुके हुए थी ...........

परीलोक ..........

इस वक़्त परीलोक में संध्या का समय था किन्तु चारो तरफ अंडकार का लेस्स मात्रा भी असर न था चारो तरफ अभी भी रौशनी फैली हुई थी

ज्यादातर समय परीलोक में ऐसा हे होता था केवल एक अमावश्या की रात्रि को छोड़ कर बाकि समय परीलोक अपनी हे ऊर्जा से जगमगाता रहता है

रानी पारी अपनी कुछ खाश दसियो के साथ संध्या के समय उद्यान में विचरण कर रही थी

तभी वह आसमान से एक सही दैनिक अपने बड़े बड़े पंख फैलाये उड़ता हुआ उनके सामने उतरता है 6 फिट से ऊपर की हिघ्त छोड़ा सीना गोरा बदन देखने में हे काफी सक्तिसाली योद्धा प्रतीत हो रहा था सरीर पे सवर्ण कवच दर्जन किये इस यौद्धा ने आदाब से अपने लेफ्ट हाथ की मुठी बंद कर अपने सीने पे रख रानी पारी के सामने जूख्ट हुए उन्हें परनाम करता है

सैनिक ......... महारानी जी के चरणों में सीमा प्रमुख नील का परनाम

रानी पारी. .......... उठो सीमा प्रमुख नील

रानी पारी की बात सुन वो सीमा प्रमुख जिसका नाम नील था वो उठ जाता है पैर नजरे अभी भी उसकी रानी पारी के पैरों में हे थी दरशल नील जो सीमा प्रमुख है उसका कार्य था की वो परीलोक की सीमाओं पे नजर रखे आवर किसी को भी परीलोक में ाप्रेसित रूप से गुस्पेट करने से रोके आवर समय रहते उसकी जानकारी परिमहल में रानी पारी गुरुदेव या सेनापति को दे

रानी पारी ........ परीलोक की सीमा में कुछ अनुचित घटना घाटी है क्या नील

नील ........ जी महारानी जी आज मध्यदिवश के पश्चात हे परीलोक के बाहरी सीमा पे कुछ असुरो योद्धाओ को देखा गया है महारानी जी आवर मुझे संदेह है की जल्द हे वो लोग परीलोक में गुस्पेट करने की कोशिस करेंगे इस लिया समय रहते आपको सूचित करना मेरा कर्त्तव्य था महारानी जी

रानी पारी .......... चिंतित होने की आव्सय्कता नहीं है सीमा प्रमुख आप पूर्ण सतर्कता से अपना कार्य करे हम इस विषय पे गुरुदेव से विचार विमर्श करते है

कहते हुए रानी पारी उसे 1 तीर कमान धनुष देती है

रानी पारी .......... जब आपको लगे की असुर परीलोक में प्रवेश कर सकते है आवर िस्थितु आपके नियंतरण से बहार हो तब इस तीर को संधान कर परिमहल की ईशा में छोड़ देना आपकी सहायता के लिया समय रहते सीना की विशेष टुकड़ी पहुंच जाएगी

नील ........ जी महारानी जी जैसी आपकी आज्ञा

नील आदाब से सलाम कर जिस तरह से वह आया ुशी तरह वह ले सीमा की आवर लौट गया

रानी पारी ........ सेविका जाओ जा कर गुरुदेव को हमारा सन्देश दो की विशेष मंतार्ण के लिया हम उनकी प्रतीक्षा परिमहल में कर रहे है

सेविका ........ जी महारानी जी

सेविका वह से सीधा गुरुदेव की आवर चल देती है रानी पारी अध्यन से परिमहल की आवर चल देती है

रानी पारी .......... सैनिक सिगरता से सन्देश वाहक प्रमुख को हमारे सामने उपस्थित करो

सैनिक ......... जो आज्ञा महारानी जी

रानी पारी कुछ देर ीदार उदार टहलती है आवर फिर कुछ हे देर में सन्देश वाहक प्रमुख दैनिक के साथ रानी पारी के समक्ष उपस्थित होता है

सन्देश वाहक प्रमुख अपनी महारानी जी को परनाम करता है तभी रानी पारी उनकी तरफ एक सुनहरा पात्र ( जैसा पुराने राजा महाराजा अपना सन्देश लिखते थे ) का बण्डल नुमा पुत्र उन्हें देती है

रानी पारी .......... इस सन्देश को सिगरा अति सिगरा जिनलोक j.king तक पंहुचा दीजिये इस कार्य के लिया आप स्वयं यथा सिगरा जिनलोक जाइये

सन्देश प्रमुख ुशी समय रानी पारी को परनाम कर गायब हो जाता है

उदार सेविका मंदिर पहुँचती है आवर गुरुदेव को रानी पारी का सन्देश देती है

गुरुदेव जो इस समय ध्यान माध्यम से अपनी ऊर्जा से उस मायावी लाल मणि का सुधाकरन कर रहे थे उन्हें अपना कार्य बिच में हे रोकना पड़ा

गुरुदेव ........ तुम जाओ पुत्री हम कुछ समय में महल पहुंचते है

सेविका ......... जी गुरुदेव

सेविका के जाते हे गुरुदेव उस लाल मायावी मणि को ुशी बॉक्स में रख परबु की प्रतिमा के सामने उनके श्री चरणों में रख देते है आवर मंदिर से किसी अदृश्य वायु की तरह परिमहल पहुंचते है

गुरुदेव .......... आपने हमें याद किया रही पारी

रानी पारी ....... परनाम गुरुदेव

गुरुदेव ........... ईश्वर आपका कल्याण करे

रानी पारी ......... गुरुदेव कुछ समय पूर्व सीमा प्रमुख नील से हमें ज्ञात हुआ की आज दोपहर के बाद से परीलोक की बहरी सीमा में असुरो को देखा गया है वो किसी योजना के तहत परीलोक में गुस्पेट करने की कोशिश अवश्य करेंगे

गुरुदेव ........ ये तो सच में गंभीर विषय है रानी पारी अचानक से असुरो का परीलोक की सीमा में दिखाई देना स्वाश्य हे इसमें असुरो की कोई योजना होगी

रानी पारी ........ हमने जिनलोक भी सन्देश भेज दिया है पता करने की वह भी किसी असुर का आगमन हुआ है या नहीं साथ हे उन्हें सीमा सुरक्षा सुदृढ़ करने के लिया भी सावधान कर दिया है

गुरुदेव ......... ये आपने उचित किया रानी पारी हम स्वयं परीलोक सीमा सुरक्षा का निरक्षण करने जा रहे है आप महल में हे रह कर सीना को यथा इस्थिति में किसी भी क्षण के योध के लिया त्यार रहने का आदेश सेनापति को दे दीजिये

रानी पारी ........ जी गुरुदेव

गुरुदेव ......... राजकुमारी पारिजात को पृथ्वीलोक से पुत्री विधि आवर गायत्री को परीलोक लेन का आदेश दीजिये

रानी पारी ........ जी गुरुदेव हम पारिजात को पृथ्वीलोक जाने का आदेश देते किन्तु क्या इस सबकी जानकारी सूर्य को देना अनुचित नहीं होगा गुरुदेव

गुरुदेव ........ जब तक हम इस्थिति का उचित अवलोकन नहीं करते इस विषय पे हम कोई निर्णय नहीं लेना चाहते रानी पारी पुत्र सूर्य को अभी अपने परिवार में रहना आवशयक है जल्द हे उसे ड्रैगन लोक की यात्रा पे जाना होगा

अभी गुरुदेव आवर रानी पारी बात कर हे रहे थे की तभी बहार से ड्रैगन की जोरदार दहाड़ सुनाई देती है

दरशल जूलिया का ड्रैगन परीलोक में हे था जबसे जूलिया सूर्य के साथ यहै थी क्यों की अभी तक जूलिया का ड्रैगन ऊर्जा रूप में बदलने में सक्षम नहीं था आवर नहीं खुद को अदृश्य करने की सकतिया उसमे थी

गुरुदेव ........ ये तो ब्लू लाइटिंग ड्रैगन की दहाड़ है

रानी पारी ........ जी गुरुदेव

गुरुदेव आवर रानी पारी दोनों महल के बहार निकलते है तो सामने ब्लू लाइटिंग ड्रैगन आवर देवसूफ़ी नियों खड़े थे

गुरुदेव ......... देवसूफ़ी नियों आप इस समय परीलोक में

नियों ......... परनाम गुरुदेव परनाम महारानी जी

गुरुदेव आवर रानी पारी ने सर हिला कर देवसूफ़ी नियों का परनाम स्वीकार किया

नियों ........ क्षमा चाहते है हम बिना सूचित किया इस तरह से आने के लिया किन्तु हम विवश थे

गुरुदेव ........ हम कुछ समजे नहीं देवसूफ़ी नियों

नियों ........... आपको तो ड्रैगन लोक की इस्थिति का ज्ञान है हे गुरुदेव की वह की इस्थिति कैसी है दिन प्रतिदिन वह की इस्थिति नियंत्रण से बहार जा रही है किन्तु हम उसके लिया नहीं आये है इस समय

गुरुदेव ........ फिर आपका यहाँ आने का उद्देश्य क्या है देवसूफ़ी नियों

नियों ........... हमें ब्लू लाइटिंग ड्रैगन का मानसिक सन्देश मिला था हम इसे ड्रैगन बूटी देने आये है

गुरुदेव रानी पारी दोनों हे देवसूफ़ी नियों की बात सुन चौंक गए थे

रानी पारी ......... ड्रैगन बूटी ये किस तरह की बूटी है आवर इसकी क्या विशेस्ता है

नियों ........... ये ड्रैगन्स के लिया एक तरह से अमृत बूटी होती है जब ड्रैगन का सरीर उनकी सकती को सँभालने में कमजोर पढ़ने लगता है तब इस ड्रैगन बूटी के सेवन से ड्रैगन का सरीर पहले से कही आदिक मजबूत आवर सक्तिसाली हो जाता है

गुरुदेव ......... ये तो अच्छी बात है की पुत्री जूलिया का ड्रैगन अपनी ऊर्जा के अगले स्तर पे पहुंच गया है हमने बुइ बहुत सुना था ड्रैगन बूटी के विषय में आपने जो भी इस बूटी के वीषय में कहा वो सत्य है

नियों कुछ ड्रैगन बूटी निकल कर ब्लू लाइटिंग ड्रैगन के सामने करता है पैर उन बूटियों को देख लाइटिंग ड्रैगन खाना तो दूर उन्हें देखते हे दो कदम पीछे हो जाता है

ये देख नियों गुरुदेव रानी पारी तीनो चौंक जाते है

गुरुदेव ....... असंभव

नियों .......... हम समाज नहीं प् रहे है की ब्लू ड्रैगन बूटी को देख खाने की बजाय पीछे क्यों हैट रहा है

गुरुदेव उन बूटियों को बड़े ध्यान से देख रहे थे दिखने में ये कुछ सुनहरी घास के जैसे हे थी इनकी पाटिया भी बूटी के अनुरूप हे थी सब कुछ सामान्य हे लग रहा था

नियों......... हमने स्वयं इन बूटियों का चयन किया है फिर भी लाइटिंग ड्रैगन इन्हें स्वीकार नहीं कर रहा है अपितु ड्रैगन इन बूटियों के लिया एक दूसरे की जान तक ले लेते है

कुछ देर पुर गौर से देखने के बाद गुरुदेव अपनी ऊर्जा उन बूटियों के तने पे डालते है जहा से उन्हें जमीं से तोडा गया था

तभी गुरुदेव को उन पतियों के डेंटल ( तने ) के अंदर की गरन्थिया ( हलके नशो के जाल जैसा ) दिखाई देती है जिनके अंदर कला रकत जैसा द्रव्य (लिक्विड ) खून के जैसे उनके अंदर घूमता हुआ नजर आता है

गुरुदेव .......... देवसूफ़ी नियों ये ड्रैगन बूटी दूषित है इसी लिया ड्रैगन इसका सेवन नहीं कर रहा है

नियों ......... ये कैसे संभव है हमने स्वयं इसका चयन किया है गुरुदेव

गुरुदेव ........ ये सत्य है की ये ड्रैगन बूटी काफी पुराणी आवर गुणकारी है किन्तु एक सत्य ये भी है की इस समय आपने जो ड्रैगन बूटी पकड़ी हुई है ये किसी अन्य ऊर्जा के प्रभाव से दूषित हो चुकी है ...

अचानक से गुरुदेव बोलते बोलते रुक गए आवर सोचने लगे उनके माथे पे पल पार्टी पल चिंता की लकीर उभरने लगी

गुरुदेव को इस तरह से विचारों में खोया देख रानी पारी आवर नियों भी कुछ समाज नहीं प् रहे थे की अचानक से गुरुदेव बोलते बोलते कहा आवर क्यों खो गए

कुछ देर बाद गुरुदेव ने एक गहरी लम्बी साँस ली आवर फिर नियों से उस ड्रैगन बूटी की कुछ पाटिया लो आवर उन्हें एक कटोरे नुमा बर्तन में दाल दिया आवर उसे हवा में इस्थिर कर अपनी जादुई छड़ी का प्रयोग कर उस बर्तन पे अग्नि वर्षा सुरु कर दी

देखते हे देखते बर्तन उन आग की लपटों से पूरी तरह से घिर गया आवर वो गरम हो कर लाल होने लगा

करीब 15 मिनट्स के बाद कबारतां में से हलकी लाल आवर काली दुहा निकलने लगी तब जा कर गुरुदेव ने उस बर्तन पे आग फेंखना बंद किया आवर डेरी डेरी तीनो उस बर्तन के पास पहुंचने तो वो पाटिया जल चुकी थी आवर उसमे कुछ लाल रंग का लिक्विड नजर आ रहा था

नियों .......... गुरुदेव इसमें तो किसी भी तरह की असुद्धि नहीं है

गुरुदेव ........ नियों कुछ पल इन्तजार कीजिये आप

तीनो की नजर ुशी बर्तन पे थी आवर कुछ देर बाद उस लाल रंग के लिक्विड में बदलाव आने लगते है

उसमे जगह जगह लाल रंग के बिच ब्लैक लिक्विड के डेन भी नजर आने लगते है जो डेरी डेरी उस लाल लिक्विड को निगल कर ब्लैक लिक्विड में बदल रहे थे

नियों ....... ये ये कैसे संभव है गुरुदेव

गुरुदेव. .......... हमें भी पहले समाज नहीं आ रहा था पैर जब ड्रैगन बूटी के अंदर के तरल को हमने देखा तो हमें इसका पता चला आवर हमें लगता है आपके ड्रैगन लोक में जो भी घटना घाट रही है उसमे हो न हो इस काळा तरल की बहुत बड़ी भूमिका है

नियों ........ हमें भी यही लग रहा है गुरुदेव जाने अनजाने ड्रैगन्स इस ड्रैगन बूटी का सेवन कर रहे है जो पहले से असुद्ध हो चुकी है आवर सायद ये कला तरल हे उनके बदले हुए व्यव्हार के पीछे का कारन है

गुरुदेव उस बर्तन के कुछ इंच ऊपर अपना हाथ गुमा कर अपनी ऊर्जा का प्रयोग करते है तब उन्हें किसी आवर ऊर्जा का आभाष उस ब्लैक लिक्विड से होता है

गुरुदेव .......... ये कला तरल किसी ऊर्जा का तरल रूप है अगर सिगरा हे आपने ड्रैगन बूटी के सेवन पे पार्टीबन्द नहीं लगाया तो समस्या आवर भी भव्य हो सकती है जब तक इस ऊर्जा के इस्त्रोत ( मुख्य बिंदु ) को खोज कर अपने नियंत्रण में न ले लिया जाये तब तक इसके सेवन पे प्रतिबन्ध लगा दीजिये

नियों ......... जी गुरुदेव हमें आज्ञा दीजिये हमें अभी ड्रैगन लोक के लिया निकलना होगा हमें लम्बी यात्रा पूर्ण करनी होगी

गुरुदेव .......... उसकी आव्सय्कता नहीं है लाइटिंग ड्रैगन आपकी सहायता करेगा जिस से आप कुछ हे पालो में ड्रैगन लोक पहुंचने जायेंगे

लाइटिंग ड्रैगन दहाड़ कर इसका आश्वासन देता है आवर ऊपर की आवर उड़ने लगता अगले हे पल एक दहाड़ के साथ ब्लू लाइट लाइटिंग ड्रैगन के मुँह से निकलती है आवर वह एक लाइटिंग ब्लैक हॉल बन जाता है

नियों .......... अद्भुत लगता है ब्लू ड्रैगन अपनी नयी सक्तियो का प्रयोग करने में सक्षम है

गुरुदेव .......... सूर्य कुछ हे समय में ड्रैगन लोक पहुंचने जायेगा तब तक आप ड्रैगन बूटी को दूषित करने वाली ऊर्जा का मुख्या केंद्र खोजने की कोशिश करे ध्यान रहे इस ऊर्जा को आप नियंत्रित नहीं कर सकते है आप केवल इसे खोलने तक हे सिमित रहे बाकि सूर्य के लिया छोड़ दीजिये

नियों .......जी गुरुदेव जैसा आप कहे अब आज्ञा दीजिये परनाम गुरुदेव परनाम महारानी जी

नियों फ़ौरन एक छलांग मार उस लाइटिंग ब्लैक हॉल में प्रवेश कर जाता है जिसका दूसरा चूर ड्रैगन लोक में था

ीदार गुरुदेव कुछ देर रानी पारी से बात कर परीलोक की सीमा की आवर किसी अदृश्य हवा के जैसे गायब हो गए

रानी पारी भी वापिस महल लौट आई

ीदार लाइटिंग ड्रैगन ने लाइटिंग ब्लैक हॉल का निर्माण तो कर दिया था अपनी नयी ऊर्जा का प्रयोग कर पैर जल्दी हे इसके कारन उसको थकावट मह्सुश होने लगती है आवर वो वह से एक दूसरी दिशा में घने जंगल आवर पहाड़ो की आवर निकल जाता है

उदार पृथ्वीलोक पे सूर्य राधिका आवर दीप्ती को पूरी तरह से संतुष्ट कर रात करीब 3 बजे अपने रूम में पंहुचा जहा राधा आवर अलीना दोनों एक दूसरे के गले लगे सुकून से सोये हुए थी

सूर्य दोनों को गलो पे किस कर राधा के पीछे आराम से लेट जाता है सूर्य भी थक चूका था आखिर राधिका की मटकी में दो बार अपना मखान जो भरा था आवर एक बार दीप्ती को अच्छे तृप्त जो किया था भले हे दीप्ती की मटकी का मखान भी राधिका को हे नसीब हुहा ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ................

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ............................
 
अपडेट .......... 269

अब आगे .........
सुबह जब सूर्य की आँखे खुली तो उसे अपने सीने पे बेहद हे सुखद कोमलता का अहसास हुआ

अलीना के खूबसूरत स्थान सूर्य की आँखों के सामने आधे से अधिक be-parda थे अलीना इस बात से अनजान अपने सपनो की दुनिया जहाँ में खोये हुए थी कुछ पल तो सूर्य भी न चाहते हुए भी अलीना के उन दो खूबसूरत अधपकी हलकी गुलाबी रंगत लिया अलीना की चूचियों में खुद को खोने से नहीं रोक पाया

सूर्य उन खूबसूरत बूब्स के आकर्षण से राधा के हिलने से बहार आया आवर इस्थिति का ज्ञान होने पे खुद हे थोड़ा साईंदा भी हो गया था

सूर्य बड़ी हे सावधानी से राधा आवर अलीना की नींद में बिना खलल डेल उठा आवर अपना टॉवल लिया सीधा बाथरूम में नहाने के लिया निकल गया

कुक्सह हे देर में अपने रनिंग के कपड़ो में सूर्य तेजी से हवेली से बहार जंगल की आवर निकल गया

अभी तक दादी जी दादा जी आवर सूर्यकांत जी के अलावा कोई नहीं उठा था

एक घंटे ध्यान आवर एक घंटे योध अभ्यास करने के बाद जब सूर्य कुछ आराम कर अपने सरीर से बहते पसीने को सूखने लगता है तभी सूर्य के कानो में एक मधुर आवाज पड़ती है सूर्य जब उस आवर देखता है तो सामने सकती आवर रिद्धि दोनों हे सूर्य की आवर आ रहे थे

सूर्य ......... रिद्धि आप सुबह सुबह यहाँ अवश्य कोई जरुरी काम से आपका आना हुआ होगा

रिद्धि ........ आपको ऐसा क्यों लगता है . क्या मैं बिना किसी खाश वजह में आपसे मिलने नहीं आ सकती पृथ्वीलोक

सूर्य ......... मैंने ऐसा तो नहीं कहा खेर आप कुछ देर इन्तजार कीजिये मैं अपना अभ्यास पूरा कर लेता हूँ

सकती आवर रिद्धि सूर्य से मच दुरी पे जा जार एक पेड में निचे बेथ हेट है

ीदार सूर्य अपनी प्राचीन पुस्तक में एक बार फिट से लौट जाता है

जहा सूर्य अपने सामान सक्तिसाली अपने 4 आकाश ( रूप ) को पार्क ात कर उनके साथ योध करने लगता है

काफी समय से सूर्य खुद की क्षमता को बेहतर करने में लगा हुआ तहत जिसमे उसने काफी हद टेक सफलता भी प्राप्त कर ली थी

सूर्य अपने 1 रूप से 4 रूप तक पहुंच चूका था सुरु सुरु में सूर्य को अपने हे रूप से योध करने में बहुत ज्यादा परेशानिया हुई पैर डिग्री डिग्री सूर्य की शारीरिक आवर मानसिक सकती में बढ़ोतरी हुई आवर सूर्य आज अपने 4 अक्ष रूपों में साथ एक साथ योध करने में सक्षम हो चूका

प्राचीन पुस्तक में करीब 1 दिन लगातार अपने. 4 अक्ष में साथ योध करने में बाद सूर्य प्राचीन पुस्तक से बहार निकलता है

बहरी समय पे इसका कोई असर नहीं हुआ हिज समय सूर्य अंदर गया उसजे फॉर ान बाद हे सो बहार निकल आया था पैर ये सूर्य हे जनता था की सो अंदर लगभग एक दिन नीना रूल अभ्यास करता रहा है

सूर्य में बहार आते हे सो प्राचीन पुस्तक पक्ष पुंज में बदल कर सूर्य में सरीर में चली जाती है

सूर्य रिद्धि आवर सकती में समक्ष चला जाता है

सूर्य को इतनी जल्दी इस तरह पसीने में भीगा देख रिद्धि कुढ़ से जादुई रुमाल का प्रयोग कर सूर्य में माथे से बालो से टपक रहे पसीने को साफ करती है

ये नजारा देख सकती खुद को हसने से रोक नहीं पता है

सूर्य ........ क्या हुआ सकती भाई आप अच्चानक से इस तरह से क्यों हसने लगे

सकती ......... कुछ नहीं सूर्य कुछ बाईट हुए पल याद आ गए जब रिद्धि जी साध्वी के रूप में आपको प्रशिक्षण दे रही थी तब में आवर आज में इनमे कितना अंतर आ चूका है

सूर्य ......... इस लिया हे तो आपको कहता रहता हूँ की आप भी किसी प्यारी सी पारी को पता हे लीजिये मुझे भी एक प्यारी से भाबी मिल जाएगी क्यों मैंने सही कहा न रिद्धि जी

रिद्धि ......... इनके पास इतना समय कहा है हर वक़्त या तो अपने शास्त्रों के साथ योध अभ्यास में लगे रहते है या फिर परीलोक मर एकांत में झील किनारे पता नहीं क्या गुनगुनाते रहते है

सूर्य ........ वैसे सकती भाई मंटा हूँ की परियो की उम्र लम्भी होती है हम मनुष्यो से कही ज्यादा ान आपको भी अपना उचित जीवन साथी का चुनाव कर लेना चाइये

सकती .......... अभी टाइम नहीं आया है जब टाइम आएगा तो विवाह भी कर लूंगा अभी मैं आपको शिल्पकार का सन्देश देने आया हूँ

सूर्य .......... जहा तक मुझे पता है अभी तहत बैनर में करीब 10 से 15 दिन आवर लग जायेंगे

सकती ........ है इतना टाइम तो लग हे जायेगा वैसे मुझे एक बात समाज नहीं आ रही की आपने भूमि के अंदर इतने कक्ष वो भी विशेष मायावी रूप में क्यों बनवाये है जिनका गुरुत्वाकर्षण इतना आदिक

सूर्य ......... ये आवशयक था जैसे जैसे सभी का योध कौशल बढ़ेगा उनके साथ हे उनकी ऊर्जा भी अपने परचंड सवरूप में आने लगेंगे आइडे में सुरक्षित आवर प्रभावी स्थान की भविष्य में आदिक आव्सय्कता पड़ेगी जहा सभी अपनी अपनी क्षमता के अनुसूर अपनी ऊर्जा का प्रयोग योध कौशल को भढने में कर सके

सकती .......... वैसे क्या सो कक्ष तुम्हारी ऊर्जा की प्रचंडता को संभल सकते है

रिद्धि ......... आपको सायद पता नहीं है उन कक्ष में हिज ऊर्जा का प्रयोग लिया है उसकी कुछ खाश विशेस्तए है जितना आदिक वह ऊर्जा का बहाव होगा सो उतनी हे अधिक सुदृढ़ ( मजबूत ) होगी

सूर्य .......... बिलकुल सही कहा आपने रिद्धि जी वैसे आप सायद गुरुदेव का कोई सन्देश ले कर आई थी पैर बातो बातो में आपको ध्यान नहीं रहा

रिद्धि ........ है पिता श्री ने आपको सिगरा हे परीलोक आने का आदेश दिया है

सूर्य ........ क्या परीलोक में कुछ अनुचित घटना घाटी है रिद्धि

रिद्धि ....... इतना विस्तार से नाम ज्ञात नहीं है पैर कल परीलोक की सिम्स के बहरी क्षेत्र में असुरो की गतिविधि को देखा गया है जब रानी माँ आवर पिता श्री को इस विषय में जानकारी मिल्क तो सवयं पिता श्री सिम्स निरिक्षण करने गए थे तब से वो ठोस चिंतित है

सूर्य ......... हम्म. चलिए हम लोग अभी परीलोक चलते है समस्या गंभीर लगती है चलिए सकती भाई आप भी चैलये साथ फ़िलहाल आप भी कुछ समय गुरुदेव के साथ हे परीलोक के सुरक्षा वह अन्य आवश्यक कार्यो में अपना योगदान दीजिये यहाँ ऐसा कुछ नहीं होगा जहा आपको आव्सय्कता पड़े

सूर्य रिद्धि आवर सकती के साथ परीलोक के लिया निकल जाता है

सूर्य रिद्धि सकती तीनो पारी महल में पहुंचते है

जहा पहले से हे गुरुदेव j.king जिनिशा प्रेतराज जीनत रानी पारी परिधि मौजूद थी

सूर्य सभी को परनाम कर उनका आशीर्वाद लेता है आवर वही उनके साथ बेथ जाता है

गुरुदेव ......... पुत्र सूर्य पुत्र निर्भयासुर को सुक्रलोक से लौटने में कितना समय लगने वाला है

सूर्य ........ क्षमता चाहता हूँ गुरुदेव किन्तु मुझे इसका पता नहीं मेरा उस से सम्पर्क नहीं हो प् रहा है

सूर्य की बात सुन गुरुदेव के साथ साथ सभी चौंकते हुए सूर्य को देखते है

गुरुदेव ........ किन्तु ये कैसे संभव है पुत्र सूर्य .पुत्र निर्भयासुर तुम्हारा अंश है तुम्हे उसके विषय में समपर्ण ज्ञान होना चाइये कही वो किसी संकट में तो नहीं है सुक्रलोक में

सूर्य ............ नहीं गुरुदेव वो सुरक्षित है सुक्रलोक में किन्तु किसी अन्य आयाम में है हिज कारन मेरा उस से संपर्क नहीं हो प् रहा है उसके साथ कुछ भी अनिष्ट नहीं हो सांता ये आप भी जानते है गुरुदेव

रानी पारी ........ किन्तु पुत्र आपने पुत्र निर्भयासुर को सुक्रलोक में छोड़ने की आव्सय्कता क्यों हुई

सूर्य गुरुदेव को देखता जो सूर्य को हे देख रहे थे सूर्य के मन के भावो ko.samaj गुरुदेव ने अपनी पलके जपका कर है में सहमति दी

सूर्य ........ रानी माँ निर्भयासुर को सुक्रलोक में छोड़ने के पीछे दो कारन थे एक था निर्भयासुर वह रह कर वह की गतिविधयों पे नजर बनाये रखे क्युकी मुझे संदेह था की हमारा सुक्रलोक से आने के बाद अवश्य किसी सडयंत्र की रचना होगी सुक्रलोक में

प्रेतराज ........ आवर दूसरा कारन पुत्र सूर्य

सूर्य ............. दूसरा कारन था सुक्रलोक के कल्कि नाड़ी की ऊर्जा जो सुक्रलोक की ऊर्जा से विपरीत अथार्त जिसका सुक्रलोक की ऊर्जा से कोई मेल नहीं खाना

मैंने निर्भयासुर को उस ऊर्जा के इस्त्रोत के मुख्या बिंदु तक पहुंचने आवर उसकी जानकारी बुटान के लिया निर्भयासुर को वह सुक्रलोक छोड़ा था

गुरुदेव .......... यथार्थ तुम्हारी दोनों संकाय उचित थी

रिद्धि ...... आपका
मतलब क्या है पिता श्री

गुरुदेव .......... पितृ हमारा तात्पर्य है की पुत्र सूर्य की दोनों सम्भावनाये उचित थी सुक्रलोक से पुत्री मानसी किरण आवर पुत्र सूर्य के लौटने के बाद अवश्य इनके विरुद्ध सडयंत्र रचा जायेगा आवर नाम संदेह है की परीलोक के बहरी सीमा में जो मायावी असुर देखे गए है वो ुशी सडयंत्र के तहत यहाँ है आवर पुत्र निर्भयासुर उस ऊर्जा के केंद्र तक पहुंच चूका है सायद ुशी ऊर्जा के प्रभाव के चलते पुत्र सूर्य निर्भयासुर से सम्पर्क स्थापित नहीं कर प् रहा है

सूर्य .......... इसका एक मार्ग है गुरुदेव हम अभी बाबा से इस विषय पे बात करते है

परिधि ........ बाबा से क्या मतलब है आपका

गुरुदेव ......... भूतपूर्व असुरगुरु व्योमासुर जी मानसी के पिता होने पे सूर्य के ससुर श्री भी है पुत्री पारिजात पुत्र सूर्य उन्हें बाबा कह कर सम्बोदित करता है

सूर्य ......... जी गुरुदेव

सूर्य आँखे बंद कर रकत सन्देश को याद करता है जो कुछ हे पल में सूर्य की आँखों के सामने था पैर सूर्य के अलावा कोई भी उसे देख नहीं प् रहा था इसका कारन था की ये उन्ही के समक्ष आ सांता है जिसके रकत से इसका नार्मन हुआ है या रकत सम्बंद है जैसे की सूर्य के रकत से व्योमासुर जी हे अपने रकत का मिश्रण कर इनका नार्मन लिया था गुप्त सन्देश के लिया

रकत सन्देश ........ आदेश कीजिये मेरे लिया क्या सन्देश है

सूर्य ......... बाबा व्योमासुर जी को हमारा सन्देश दो की हम उनसे पृथ्वीलोक में भेंट करना चाहते है जितनी सिगरा वो हमसे भेंट करने पहुंच सकते है पहुंचे मैं आवर गुरुदेव उनका उनके हे आश्रम में उनकी प्रतीक्षा करेंगे

सूर्य द्वारा सन्देश प्राप्त होते हे रकत सन्देश वह से गायब हो जाता है

सूर्य ........... गुरुदेव नाम सिगरा हे उनका की आवर से सन्देश प्राप्त हो जायेगा हमें उनके आश्रम में चलना चाइये

गुरुदेव ........ अवश्य पुत्र सूर्य j.king प्रेतराज आप भी हमारे साथ चलिए आपका भी उनसे परिचय हो जायेगा किन्तु ज्ञात रहे वो असुर अवश्य है साथ हे पुत्र सूर्य के ससुर श्री पुत्री मानसी के पिता भी

j.king प्रेतराज ..... जी गुरुदेव हम समाज गए

गुरुदेव में उन्हें दाभे सब्दो में साम्बा दिया था की वो असुर अवश्य है किन्तु उनका सम्मान उन्हें भी करना होगा

गुरुदेव सूर्य j.king प्रेतराज चारो परीलोक से व्योमासुर जी के आश्रम की आवर निकल गए

पारिजात ........ रानी माँ आपको क्या लगता है क्या असुरगुरु शुक्राचार्य इस तरह की निति का प्रयोग करेंगे

रानी पारी ....... जितना हमने उनके विषय में ज्ञान है वो ऐसा करता नहीं कर सकते किन्तु हम सवयं इस समय कोई भी आकलन करने में समक्ष नहीं है

जिनिशा .......... वो भी तो असुर है न रानी माँ जिनके रकत में हे चाल कपट जैसे दुसित विचार पनपते रहते है

रानी पारी ........ नहीं पुत्री जिनिशा असुरगुरु शुक्राचार्य असुरो के गुरु अवश्य किन्तु वो कोई असुर नहीं है वो रिद्धि कुल से है पुत्री किन्तु भूतकाल की गाथाओ के अनुसार उनके साथ चाल हुआ था इस लिया उन्होंने असुरगुरु पद को स्वीकार लिया किन्तु उनका ज्ञान अद्भुत है पुत्री हमने तो यहाँ तक सुना था कज उनके साथ चाल न हुआ होगा तो वो देवगुरु के पद के योग्य दावेदार थे

जीनत ........ जज रानी माँ हमने भी इस विषय काफी कुछ सुना था असुरगुरु शुक्राचार्य के विषय में वो एक मात्रा ऐसे गुरु है जिनके पास परबु द्वारा दी मृत संजीवनी विषय है जिसके प्रयोग से किसी को भी जीवित लिया जा सकता है

उदार जब गुरुदेव j.king प्रेतराज आवर सूर्य आश्रम पहुंचे तो वह असुरगुरु व्योमासुर के प्रथम शिष्य असवासुर में उनका सामान पूर्वक आदर सत्कार किया आवर उन्हें व्योमासुर जी की कुटिया में ले गया


असवासुर .......... गुरुदेव आप सभी का स्वागत है आप सभी कुछ समय विश्राम कीजिये हम आपके लिया सात्विक जल पैन की व्यवस्था करते है

गुरुदेव ............ इसकी आव्सय्कता नहीं है पुत्र असवासुर हम आपके गुरुदेव व्योमासुर से भेंट करने यहाँ आते है इनसे मिलो ये है जिनलोक के सम्राट .जोकिंग आवर ये है प्रेतलोक के स्वामी प्रेतराज

असवासुर j.king आवर प्रेतराज के समक्ष हाथ मोड उन्हें परनाम करता है

j.king आवर प्रेतराज को ये देख कर आश्चर्य हुआ था क्युकी दोनों की नजरो में असुर असभ्य क्रूर अहंकारी होते थे

कुछ देर बाद व्योमासुर जी भी आश्रम लौट आते है

सूर्य ........ परनाम बाबा

व्योमासुर .......... कृतिमान भाव पुत्र परनाम गुरुदेव

गुरुदेव ........ इस्वर आप पे अपनी कृपा दृस्टि बनाये रखे आइये आसान ग्रहण कीजिये हम आपकी हे प्रतीक्षा में थे ये है प्रेतलोक के स्वामी प्रेतराज आवर ये जिनलोक के सम्राट .j.king पुत्र सूर्य के भावी ससुर श्री

व्योमासुर ............ आप दोनों राजन का कमहमारे आश्रम में स्वागत है

गुरुदेव व्योमासुर को विस्तृत जानकारी देते है जिसे सुन व्योमासुर भी चौंक गए

व्योमासुर जी ....... क्षमा करे गुरुदेव किन्तु ये सत्य नहीं हो सकता असुरगुरु शुक्राचार्य अपने किसी गुप्त अनुष्ठान के लिया पहले हे अज्ञानतवश में एकांत में जा चुके है इस समय सुक्रलोक का सम्पूर्ण दायित्व देवी देवयानी के साथ साथ मुझपे आवर असुरगुरु शुक्राचार्य के प्रमुख शिष्य के कंदो पे है बिना हम तीनो की सहमति के कोई भी असुर सुक्रलोक के आदेश की खिलाफ नहीं जा सकता है

गुरुदेव ....... ... अथार्त ये जो मायावी असुर है वो सुक्रलोक से नहीं है हलकी असुरलोक से नरकासुर की किसी योजना का रूप है

व्योमासुर जी ......... आप निश्चिंत रहे पुत्र सूर्य आपने उचित समय पे हमें सन्देश पंहुचा दिया हम सुक्रलोक पहुंचते हे इस विषय पे देवयानी आवर परमुक शिष्य से चर्चा करते है

सूर्य ........ बाबा मैं कुछ समय के लिया ड्रैगन लुक जा रहा हूँ मुझे चिंता है की मेरे जाने के बाद जिनलोक या परीलोक पे कोई संकट आ सकता है आवर अगर ऐसा कुछ हुआ तो मुझे निर्भयासुर को केवल एक आदेश देना होगा आवर इसका कहर असुरलोक में टूटेगा ये बात अच्छे से देवी देवयानी को समजा दीजियेगा

कहने के साथ हे सूर्य की आँखों का रंग बदलने लगता है आवर सूर्य की ऊर्जा उसके सरीर से बहने लगती है

गुरुदेव ....... संत हो जाओ पुत्र सूर्य भूलो नहीं तुम्हारे सामने तुम्हारे ससुर श्री है वो पुत्री मानसी के पिता है तुम्हारी अर्धागिनी के पिता

सूर्य फॉर ान संत हो जाता है उसे भी अपनी भूल का आभाष हो जाता है


व्योमासुर जी भी समाज गए थे की सूर्य खुले सब्दो असुरो को चेतावनी दे रहा है

सूर्य ......... मेरे अज्ञानता के लिया मुझे क्षमा करे बाबा मुझे बड़ी भूल हुई जो मैं अपना नियंतरण खो कर आपके समक्ष हे क्रोध प्रकट कर बैठा

व्योमासुर जी ......... पुत्र सूर्य हम तुम्हारी भावनाये समझते है किन्तु तुम्हे अपने क्रोध पे नियंतरण रखना चाइये क्रोध से कभी किसी का लाभ नहीं हुआ है इस लिया सदैव संत मस्तिष्क से बात की गहराई को संजो आवर उसके पश्चात निर्णय लो

सूर्य ........ मुझे क्षमा करे बाबा अभी भी मेरा क्रोध मेरे नियंतरण में नहीं है मुझे इस्पे आवर अधिक ध्यान देना होगा

व्योमासुर जी ......... तुम निश्चिंत रहो पुत्र सूर्य जब तक तुम्हारा बाबा तुम्हारे साथ है तुम्हे चिंता करने की आव्सय्कता नहीं है रही बात उन असुरो की तो उन्हें कैसे नियंतरण में लाना है है ये मुझे अच्छे से पता है

सूर्य ....... जी बाबा जैसा आप कहे

व्योमासुर जी ........ गुरुदेव आपको परीलोक की सुरक्षा को ले कर चिंतित होने की आव्सय्कता नहीं है मैं सुक्रलोक हेट हे इस विषय पे देवी देवयानी आवर प .शिष्य से बात करता हूँ

लगता है नरकासुर ने गुरुदेव शुक्राचार्य के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया है उसने पहले हे सुक्रलोक में सूर्य पे आकर्मण करवा कर गुरुदेव को निराश कर चूका है जिसकज चेतावनी भी उसे मिल चुकी है

सूर्य .......... बाबा क्या आपकी निर्भयासुर से भेंट हुई हमारे आने के बाद

व्योमासुर जी ........ क्या पुत्र निर्भयासुर सुक्रलोक में है

सूर्य ........ जी बाबा एक विशेष कार्य हेतु निर्भयासुर को सुक्रलोक में छोड़ना पड़ा

व्योमासुर जी ....... पुत्र क्या ये करना आवशयक था अगर इस विषय में गुरुदेव को ज्ञात हुआ तो वो कही तुमपे क्रेडिट न हो जाये

सूर्य ....... आप चिंता न करे बाबा निर्भयासुर ऐसा कोई भी करता नहीं करेगा जिस से किसी को कोई हानि हो किन्तु मेरा उस से सम्पर्क नहीं हो प् रहा है

व्योमासुर जी ......... मैं सवयं उसकी खोज करता हूँ पुत्र

सूर्य ........ उसकी आव्सय्कता नहीं है बाबा

कहते हुए सूर्य अपने सरीर से एक वाइट एंड रेड ऊर्जा पुंज प्रकट करता है

सूर्य ........आप केवल िश ऊर्जा को सुक्रलोक में छोड़ दीजिये बाकि निर्भयासुर की खोज ये ऊर्जा अपने आप कर लेगी आवर उसे मेरा सन्देश पहुंच जायेगा आप अभी असुरो के मुद्दे पे देवी देवयानी जी से बात कीजिये

कुछ देर आवर बात चित के बाद सूर्य गुरुदेव j.king आवर प्रेत राज वापिस परीलोक लौट हेट है आवर यहाँ जो कुछ भी हुआ उसकी जानकारी देते है

गुरुदेव .......... पुत्र सूर्य कल सूर्यौदय के साथ हे तुम्हे ड्रैगन लोक की यात्रा आरम्भ करनी होगी

सूर्य ......जी गुरुदेव जैसा आप कहे

गुरुदेव ....... कुछ कहना चाहते हो पुत्र

सूर्य ....... जी गुरुदेव मुझे समाज नहीं अस रहा की आपने सवयं मुझे बाबा के समक्ष अपने क्रोध आवर ऊर्जा को अनियंत्रित करने का आदेश दिया फॉर आपने हे मुझे उनके समक्ष ऐसा करने पे दन्त भी दिया जबकि ऐसा मैं मच भी सवयं वे करने वाला नहीं तहत

गुरुदेव ........... ऐसा करना आवशयक था पुत्र सूर्य तुम्हारे ससुर श्री व्योमासुर भले हे तुम्हारे साथ है क्युकी तुम उनके दामाद हो पैर उनके माध्यम से प्रभावी रूप से तुम्हारी चेतावनी सन्देश के रूप में सुक्रलोक पहुंचने का एक मात्रा यही विकल्प था पुत्र ये भी योध निति का एक अंग है जब बिना योध के हे सत्रु के मन में भय व्याप्त कर दिया जाये सिगरा हे तुम्हे इसका उचित प्रभाव भी देखने को मिलेगा

सूर्य ......... जी गुरुदेव समाज ग

गुरुदेव ........ वैसे पुत्र ड्रैगन लोक में तुम्हे कुछ आदिक समय लग सकता है ऐसे में तुम सब को अपना अंश रूप यहाँ छोड़ कर जाना चाइये

सूर्य ....... वो मैं आपको बताना भूल गया गुरुदेव आपके द्वारा दी प्राचीन पुस्तक से अभ्यास करते करते मैं अपने 4 ऊर्जा रूप का निर्माण करने में सक्षम हो चूका हूँ जिनकी ऊर्जा सकती मेरे हे सामान है

गुरुदेव ....... उत्तम अतिउत्तम पुत्र सूर्य किन्तु उनका प्रयोग बहरी दुनिया में ज्यादा लैम्ब्स समय तक नहीं किया जा सकता वो जितने समय बहरी दुनिया में होंगे वो सब तुम्हारी ऊर्जा सकती पे जीवित रहेंगे इसका प्रभाव तुम पे होगा पुत्र इस लिया जब तक आवशयक न हो बहरी दुनिया में उनका प्रयोग न करना

सूर्य ........ जी गुरुदेव मैं समाज गया

गुरुदेव ........ मायावी मणि का सुधिकरण पूरा हो चूका है पुत्र ान पुत्री मानसी उसे दर्जन कर सकती है

सूर्य ....... इसका कोई डडूसपरभाव तो नहीं होगा न गुरुदेव

गुरुदेव ....... प्रभाव तो होगा किन्तु दुस्प्रभाव नहीं पुत्र खेर जब पुत्र मानसी उसे दर्जन करेगी तब तुम समाज जाओगे

सूर्य .....जी गुरुदेव ान आज्ञा दीजिये मैं मानसी किरण जूलिया के साथ रात्रि में परीलोक पहुँचता हूँ टेकिंग सुबह जल्दी हे ड्रैगन लोक की यात्रा सुरु कर सकू

गुरुदेव ....... उचित है पुत्र वैसे पुत्री किरण ड्रैगन लोक राजमुकुट धारण करेगी तो तुम्हे भी ड्रैगन लोक के सम्राट के रूप में राजसिंहासन पे विराजमान होना पड़ेगा ऐसे में पुत्री शालिनी को भी अपने साथ इस यात्रा पे ले जाना आवशयक हो गया है

सूर्य ........ जी गुरुदेव

गुरुदेव ........ उचित है अब जाओ पृथ्वीलोक

सूर्य ...... गुरुदेव आपसे एक बात आवर कहनी है वो सकती भाई वैद्यराज की पुत्री महिमा जी से प्रेम करते है आवर महिमा जी भी

गुरुदेव ........ ये तो बहुत हे हर्ष की बात है पुत्र सूर्य सकती मेरा शिष्य होने के साथ साथ पुत्र सामान भी है

सूर्य ....... मैं जनता हूँ गुरुदेव पैर उन्होंने ये सब से छुपा कर रखा था तो उन्हें थोड़ा सताने का अवसर तो मिलना चाइये आप इस विषय पे वैद्य राज जी से बात कीजिये सकती भाई की हालत मैं ख़राब करता हु.

गुरुदेव ....... तो तुम ान सकती के साथ शैतानी करना चाहते हो

सूर्य ...... सकती भाई को उसकी सजा तो मिलनी हे चाइये आवर साथ में महिमा जी को भी तो पता चलना चाइये की हम रिश्ते में उनके देवर लगते है इतना अदिकार तो हमारा भी बनता है

गुरुदेव ......... थिंक है पुत्र हम वैद्यराज से बात करते है इस विषय पे

सूर्य गुरुदेव से आज्ञा ले वह से निकलता है आवर जीनत जिनिशा को यही परीलोक में रात्रि को रुकने के लिया कहता है दोनों ख़ुशी खुसी इसके लिया त्यार हो जाती है

सूर्य सकती को वही छोड़ पृथ्वीलोक के लिया निकल जाता है

करीब 11 बजे सूर्य हवेली पहुँचता है किन्तु उसके साथ हे 1 जवान महिला आवर 1 जवान लड़की भी थी

सूर्य के कार से उतारते हे पीछे से दोनों महिलाये उतरती है


सूर्य की कार की आवाज से दादा जी दादी जी बहार निकलते है आवर सूर्य के साथ अनजान महिलाओ को देख कर दादी जी सूर्य से इस बारे में पूछती है

सूर्य ......... माँ सा इनसे मिलिए हे मल्टी जी है आवर हे इनकी छोटी बहन सुमन है

ये मल्टी सुमन वही दोनों महिलाये थी जिन्हे सूर्य आवर सकती ने विक्रम से बचाया था

दोनों दादा जी दादी जी को हाथ जोड़ कर अविवादन करती है

सूर्य .........वो माँ सा बाउजी अभी मेर्री जी की सदी में मच हे दिन बचे है आवर काम भी बहुत है ऊपर से इतनी बड़ी हवेली की साफ सफाई में बूत समय भी जायेगा इस लिया आप से बिना पूछे हे मैंने इन सभी को काम पे रख लिया इन्हे भी काम की जरुरत थिस आवर हमें भी हवेली में लोगो की जरुरत थी

दादा जी .......... ये तुमने बहुत अच्छा किया बीटा पैर क्या इनका परिवार इसके लिया सहमत है बिना उनके मंजूरी में हम इन्हे नहीं रख सकते काम में लिया

मल्टी जी ......... बड़े ठाकुर मेरा मेरे पति आवर मेरी इस बहन में अलावा कोई नहीं है मेरे पति है जो दूसरे सहर में नौकरी करते है उनसे छोटे ठाकुर साहब ने पहले हे बात कर ली है वो ख़ुशी ख़ुशी मान गए है

दादा जी ......... ठीक है बेटी जब तुम लोगो को कोई इतराज नहीं तो फिर हमें भी कोई दिकत नहीं है तुम लोगो को काम पे रखने में बेटी तुम काम के अलावा क्या करती हो

ये दादा जी में सुमन से पूछा था

सूर्य ......... बाउजी सुमन मल्टी जी के कामो में मदद करने के साथ साथ पढाई भी करती है आवर पढाई में काफी अच्छी भी है

दादा जी ......... शाबाश बेटी तुम बहुत मेहनती लड़की हो ऐसे हे मन लगा कर म्हणत करना बेटी अगर तुमने अच्छे से म्हणत की तो तुम्हारी पढाई का पूरा खर्च मैं उठाऊंगा आवर जब पढाई पूरी हो जाएगी तो तुम्हारी इच्छा के अनुरूप मैं नौकरी दिलाऊंगा हे मैं ठाकुर परताप सिंह तुमसे वडा करता है

सुमन ........ आपका बहुत बहुत धन्यवाद ठाकुर साहब

दादी जी ........ बीटा इन्हे पीछे के रूम की चाबी दे दो आज साम से हे हे लोग काम कर सकते है

दादी जी सूर्य को समजा कर अंदर चली गयी थी

दादा जी ........ सुमन बेटी तुम जब ज्यादा जरुरत हो तब हे करना बाकि सुबह सैम अपनी बहन की मदद के साथ तुम्हे अपनी पढाई का ध्यान भी रखा है

दादा जी की बात सुन सुमन खुश भी थी तो उदाश भी

खुश इस लिया की उसे पढ़ने के लिया टाइम मिलेगा पैर उदाश इस लिया की उसे पैसे काम मिलेंगे

सूर्य सुमन की इस्थिति समाज जाता है आवर मुस्कुराते हुए सुमन को जबाब देता है

सूर्य ......... सुमन चिंता न करो पढाई करते समय के तुम्हारे पैसे नहीं कटे जायेंगे तुम्हे 8000 रस हर महीने मिलेंगे जबकि मल्टी जी को 10000 रस हर महीने खाना पीना रहना सब फ्री है जल्दी हे तुम्हारा एडमिशन सिटी 1 से यहाँ की कॉलेज में हो जायेगा तो तुम्हे इतना लम्बा सफर भी नहीं करना होगा आवर चाहो तो अपने बाकि समय में बच्चो को पढ़ा कर तुम आवर पैसे भी कमा सकती हो

सूर्य दोनों को लिए हवेली के पीछे बने रूम की आवर चल देता है

2 रूम को खोल कर उन्हें जगह दिखता है बाकि सब सही था पैर इनमे कोई रहता नहीं था इस लिया काफी समय से साफ सफाई की जरुरत थी

लाइट पहले से हे सभी रूम में लगी हुई थी उनके रूम के साथ हे 3 रूम आवर थे जिनमे एक पहले से खुला था मतलब यहाँ कोई रहता था

सूर्य ........ ये दो रूम आप लोगो के लिया है साथ में इस तरफ टॉयलेट बाथरूम भी है अभी गर्मी है थोड़ी तो मैं मच देर में आपके लिया दोनों रूम के कालर भी भिजवा दूंगा साथ हे बिस्तर भी आपको बहार से कुछ भी खरीदने की जरुरत नहीं जो कुछ भी आपको चाइये होगा बे- जीजाक बोल दीजियेगा

सूर्य सब समजा कर वह से चल देता है पीछे से मल्टी सुमन रूम की साफ सफाई करते हुए बातो में लग जाती है

खाश कर सुमन बहुत खुश थी अब उसे न तो किसी के सामने सरब परोश्नी होगी आवर न उसे अपनी इज्जत गवाने का दर था विक्रम की घटना के बाद रुक्मणि जी में मल्टी के परिवार का बहुत अच्छे से ख्याल रखा था

यहाँ आने से पहले मल्टी ने रुक्मणि से सूर्य के साथ जाने की परमिशन जरूर ली थी रुक्मणि जी ने भी ख़ुशी ख़ुशी उन्हें जाने की इजाजत दे दी थी क्युकी वो जानती थी की सूर्य के साथ उन्हें बेहतर जिंदगी मिलेगी इस लिया उन्होंने ख़ुशी ख़ुशी है कह दी थी

ीदार सूर्य हवेली के अंदर आ कर सबसे पहले फ्रेश होता है आवर फिर शालिनी जी आवर किरण को गुरुदेव से आवर बाकि सभी घटना की जानकारी देता है

शालिनी जी जल्दी हे सूर्यगढ़ आने का बोल देती है

किरण साम से पहले वापिस जाने की बात अपने दादा जी को बताती है पैर जब ड्रैगन लोक जाने के बारे में पता चला तब उन्होंने भी जाने की इजाजत दे दी

ीदार सुबह से हे दीप्ती जी आवर राधिका के चेहरे की चमक बढ़ी हुई थी केवल राधा अलीना आवर मधु जी हे जानती थी की हे चमक राधिका पे किध वजह से है

एक रूम में सुनिधि सानिया माया बैठी हुई थी तीनो हे मॉडर्न खुले विचारो वाली थी सुनिधि सानिया आवर माया के लेस्बियन रिश्ते के बारे में पहले से जानती थी इस लिया इनके बिच कुछ भी छिपा नहीं था

सानिया ........ मुझे ऐसा क्यों लग रहा है माया की हे दीप्ती दीदी हे अपनी ओपनिंग पहले हे करवा ली है

माया ........ मुझे भी ऐसा हे लग रहा है पैर उन्हें तो आजतक किसी लड़के के साथ नहीं देखा मैंने क्या तुमने किसी के साथ देखा है कबि दीप्ती दीदी को सुनिधि

सुनिधि ........... किसी आवर के साथ तो नहीं देखा दीदी को मैंने पैर मुझे लगता है उनका सूर्य के साथ कुछ चाकर जरूर है

सुनिधि आवर दीप्ती के बिच ये बात बहुत पहले हे हो चुकी थी जब राधिका आवर दीप्ती का प्लान पिछली बार जब वो लोग यहाँ आये थे तब हे पैर सुनिधि में किसी को कुछ नहीं बताया था इस बारे में

सानिया .......... है ये हो सकता है पैर अगर कल रात सूर्य के साथ उन्होंने सेक्स किया होता तो आज सो बीएड से उठ भी नहीं सकती थी इतना मैं गारंटी से कह सकती हूँ

माया भी सानिया की बात से सहमत नोट हुए है में अपना सर हिला देती है

सुनिधि को हे जान कर थोड़ा अटपटा जरूर लगा था

सुनिधि ........ आप इतने यकीं से कैसे कह सकती है सानिया जैसे आपने पहले हे जाँच परख कर राखी हो

सुनिधि की बात से दोनों के चेहरे पे एक कुटिल मुस्कान आ जाती है

सुनिधि .......... क्या सच में तुम दोनों हे देखा है सूर्य का वो ी मैं डिक देखा है

सानिया ......... हाहाहाहा तुम्हे क्या लगता है हम बिना देखे हे ऐसे थोड़ी न दीन्हे आंक रही है

माया ....... मैंने नहीं देखा है पैर इस सानिया में सूर्य को अपने घर पे ब्लोजॉब दिया हुआ है जब एक बार सूर्य उनके यहाँ गया था आवर उसके लिंग में कुछ प्रॉब्लम से दर्द सुरु हो गया था

सुनिधि को बुरा भी लग राग था आवर साथ हे अच्छा भी

सानिया ....... क्या हुआ क्या सोच रही हो निधि

सुनिधि ....... कुछ नहीं है यू हे

माया ........... हम दोनों जानती है की तुम सूर्य को पसंद करती हो हम भी करती है

सुनिधि .......... मैंने सोच लिया है अब कुछ भी करके मुजगे हिमत करनी हे होगी

सानिया ....... आज साम को हम लोग जा रहे है सायद अगली बार तरय करना ान निचे चलो खाने का वक़्त हो गया है मैं बाथरूम हो कर आती हूँ

खाने के बाद सब लोग निचे हॉल में बेथ कर आपस में बाते करने लगते है क्युकी साम को इन लोगो को निकलना था दिल्ली के लिया

करीब 2 बेब किरण शालिनी जी मंडी जूलिया भी नाना जी नानी जी के साथ हवेली अस पहुंचे सभी में एक साथ मिल कर बहुत अच्छा टाइम बिताया

इस बिच सुनिधि में मौका देख सूर्य के सामने खुल कर अपने दिल की बात रख दी सूर्य में भी अपनी है के साथ सुनिधि के सामने अपनी बात रख दी की उनका जीवन भर का साथ संभव नहीं है दोस्ती में जब भी उसे सूर्य की जिस रूप में जरुरत होगी वो हर उस रूप में उसके पास होगा

सुनिधि समझदार लड़की थी वो पहले से जानती थी की सूर्य उसके जीवन साथी के रूप में कभी नहीं मिल सकता उसे दुःख था आवर उसकी आँखों से बाह रहे आंसू उसके दिल का हॉल बया कर रहे थे पैर उसे सूर्य का प्यार एक दोस्त के रूप में भी स्वीकार था

सूर्य में सुनिधि की ुदशी देय करने के लिया उसे किश करना सुरु कर दिया आवर कुछ देर प्यारी भरी बातो से सुनिधि की ुदशी काफी काम हो गई थी उसका मन हल्का जो हो गया था

सुनिधि बे सानिया आवर माया के बारे में भी बताया जिसे सूर्य पहले से जनता था पैर उसने चोकने का नाटक किया जिस से सुनिधि को कोई शक न हो

सूर्य बारी बारी से सभी के साथ कुछ टाइम निकलता है फ्लाइट का टाइम होते हे सूर्य वयोम आवर एक नौकर के साथ 3 कार्स से सभी को एयरपोर्ट की आवर निकल गया फ्लाइट के टाइम से कुछ पहले सभी एयरपोर्ट पहुंच गए थे

गोविन्द जी .......... बीटा तुम्हारी आंटी आवर मैंने दिल्ली सिफत होने का फैसला किया है आवर मैंने तुम्हारे पापा के साथ पार्टनरशिप्स में बुसिनेस्सेस करने का फैसला किया है

सूर्य .......... ये तो बूत ैवहि बात है अंकल इस से आप भाबी आवर अपने नहीं के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिता पाओगे

गोविन्द जी एक बार चारो तरफ देखते है जब किसी को अपने आस पास नहीं पाया तो उन्होंने सूर्य का हाथ अपने हाथ में लेते हुए सूर्य को बड़ी गंभीरता से देखा आवर कहा

गोविन्द जी ............ बीटा मधु में मुझे केवल बुसिनेस्सेस के बारे में नहीं बताया है कैसे कहु समाज नहीं आ रहा है इतना हे कहूंगा की तुम मेरे लिया राधिका से काम नहीं हो मेरी बेटी की जीवन में खुशिया भरने के लिया थैंक यू बहुत छोटा सबद है अपने बेटे का ख्याल रखना

सूर्य गोविन्द जी की बाते सुन अपनी आँखे बंद कर लेता है

जैसे वो इन बातो से बचना चाहता है

गोविन्द जी .......... बीटा मैं सर्मिन्दा हूँ पैर ये जरुरी था इस बारे में राधिका को कुछ मत बताना चलता हूँ

गोविन्द जी तो निकल गए पैर सूर्य अभी भी आँखे बंद किये खड़ा था

मधु जी .......... सूर्य मैंने हे उनसे ऐसा करने को कहा था

सूर्य ........ हे आपने अच्छा नहीं किया आंटी जी आपने अंकल आवर मुजगे एक दूसरे के सामने नंगा कर दिया ी मैं सर्मिन्दा कर दिया

मधु जी .......... नहीं बीटा वो पहले से हे रोहन की बीमारी के बारे में जानते थे ऐसे में उन्हें आज नहीं तो कल पता चल हे जाता आवर राधिका आवर तुम दोनों उनकी नजरो में गिर जाते इस लिया मैंने उन्हें सच बताया आवर उन्हें संजय तो वो भी समाज गए

सूर्य ......... ठीक है आंटी जी चलिए आपकी फ्लाइट का टाइम हो गया हम इस बारे में ान आवर कोई बात नहीं करेंगे

कुछ हे देर में उनकी फ्लाइट अपने गंतव्य के लिया उड़ान भर चुकी थी

सूर्य भी अपनी कार लिया वह से निकल गया सहर से निकलने के बाद सूर्य अपने कार गायब कर हवेली से मच दुरी पे पहुँचता है वयोम आवर ड्राइवर को सूर्य पहले हे भेज चूका था ........................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स...................

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स................................

दोस्तों आज के इस अपडेट में कुछ गलती हो गई थी

आज के अपडेट में जो मल्टी की सास का किरदार ( कांटा जी ) उनकी डेथ पहले हे हो चुकी थी आवर ये मुझे याद नहीं था क्युकी कुछ टाइम से स्टोरी से देय रहने से कुछ हिस्से दिमाग से निकल गए थे

Akil भाई के याद दिलाने पे याद आया की मल्टी की सास का किरदार पहले हे मर चूका इस लिया उसे एडिट कर चेंग करना पड़ा ...........
 
अपडेट. 270

मधु जी .......... नहीं बीटा वो पहले से हे रोहन की बीमारी के बारे में जानते थे ऐसे में उन्हें आज नहीं तो कल पता चल हे जाता आवर राधिका आवर तुम दोनों उनकी नजरो में गिर जाते इस लिया मैंने उन्हें सच बताया आवर उन्हें संजय तो वो भी समाज गए

सूर्य ......... ठीक है आंटी जी चलिए आपकी फ्लाइट का टाइम हो गया हम इस बारे में ान आवर कोई बात नहीं करेंगे

कुछ हे देर में उनकी फ्लाइट अपने गंतव्य के लिया उड़ान भर चुकी थी

सूर्य भी अपनी कार लिया वह से निकल गया सहर से निकलने के बाद सूर्य अपने कार गायब कर हवेली से मच दुरी पे पहुँचता है वयोम आवर ड्राइवर को सूर्य पहले हे भेज चूका था ..................

अब आगे ...............

सुक्रलोक ............ व्योमासुर जी कुछ समय पृथ्वीलोक पे बिता कर अपने शिष्यों के साथ वो सुक्रलोक के लिया निकल जाते है

सुक्रलोक में पहुंचते हे उन्होंने सूर्य द्वारा दिया रेड एंड वाइट ऊर्जा पुंज सुक्रलोक में छोड़ देते है

कुछ पल ऊर्जा पुंज उनके समक्ष हे रहा जैसे वो सुक्रलोक का निरक्षण कर रहा हो

फिर एक तेज चमक के साथ बड़ी हे तेजी से एक दिशा की आवर भाड़ गया

सुक्रलोक गुरुकुल में अपने ध्यान में बैठी देवयानी जी को इस ऊर्जा सकती का आभाष होते हे वो अपने ध्यान से बहार आ जाती है आवर अपनी मानसिक ऊर्जा से इस ऊर्जा सकती की खोज करने लगती है

ीदार व्योमासुर जी कुछ दूर ऊर्जा का पीछा करते है ताकि वो उस ऊर्जा की मंजिल तक यथार्थ निर्भयासुर तक पहुंचने में सफल हो सके पैर ऊर्जा पुंज की गति के सामने व्योमासुर जी की गति काम पद जाती है आवर देखते हे देखते वो ऊर्जा सकती उनकी आँखों के सामने से विलुप्त हो जाती है

ीदार देवयानी जी के भी सभी प्रयाश विफल हो जाते है जब कुछ समय बाद उन्हें उस सकती का सुक्रलोक में होने का कही भी आभाष नहीं होता तब वो भी सवयं को उस ऊर्जा की खोज करने से रोक लेती है

व्योमासुर जी असुगुरु के गुरुकुल में पहुंचते है आवर सीधा देवयानी जी के कक्ष के बहार पहुंचते है

देवयानी जी से आज्ञा ले कर वो उनके कक्ष में पहुंचते है जहा पहले से हे p.shishya आवर देवयानी जी किसी बात पे चर्चा कर रहे थे

देवयानी जी आवर p.shishya को अविवादन कर व्योमासुर जी भी उनके सामने लगे आसान पे बेथ जाते है कुछ देर देवयानी जी आवर p.shishya की बाते होती रही जो की गुरुकुल को ले कर हे थी जब उनकी बाते समाप्त हुई तब देवयानी जी ने व्योमासुर जी को देखा

देवयानी जी ........ व्योमासुर जी आप अचानक से पृथ्वीलोक के लिया निकल गए वह सब कुशल मंगल से तो है न

व्योमासुर जी ....... देवयानी जी गुरुदेव ने समस्त असुरजती का दायित्व आप को सुपुर्द किया गुरुदेव की अनुपस्थिति में ऐसे में गुरुदेव के स्थान पे आपको असुरो की परतेक गतिविधि पे नजर होनी चाइये उनकी गतिविधियों के विषय में आपको ज्ञान होना चाइये

देवयानी जी ....... आपने उचित कहा किन्तु पिता श्री ने ये दायित्व केवल हमें नहीं अपितु हम तीनो को सौंपा है क्या असुरो ने कुछ अनुचित किया है जिसका हमें कोई ज्ञान नहीं है क्या असुरो ने पृथ्वीलोक पे उत्पत्ति मचाया है क्या इशू लिया आप पृथ्वीलोक गए थे

देवयानी जी ने एक बार बोलना सुरु किया की व्योमासुर जी को बोलने का मौका तक नहीं मिला

( p.shishya ........ गुरु भरता को आप कुछ बोलने का अवसर तो दीजिये गुरु बहन आप उन्हें बोलने का अवसर हे नहीं दे रही है तो वो अपनी बात कहेंगे कैसे )

देवयानी जी को भी जैसे p.shishya की बात सुनाई दे गई हो जो वो अपने मन में सोच रहे थे किन्तु ऐसा नहीं था

व्योमासुर जी ........ देवयानी जी मुझे पुत्र सूर्य का सन्देश मिला था जिसमे उन्होंने सिगरता से भेंट करने का आग्रह किया था इस लिया हम ुशी से भेंट करने वह गए थे किन्तु उन्होंने जो जानकारी हमें दी वो कुछ अच्छी नहीं है

p.shishya ........... क्या सुक्रलोक पे कोई संकट..

व्योमासुर जी ....... नहीं ऐसा नहीं है दरशल पुत्र सूर्य ने हमें जानकारी दी की कल से कुछ महावीर असुर योद्धा परीलोक की सीमा में गुस्पेट करने की कोशिश कर रहे है आवर पुत्र सूर्य को संदेह है की उन असुरो की गुस्पेट के पीछे क्या सुक्रलोक है

देवयानी जी ....... वो ऐसा विचार भी कैसे ला सकते है अपने मन में आवर एक पल के लिया मन भी ले की ऐसा करने का आदेश हमने हे दिया हो तब भी उनका परीलोक से क्या सम्बन्ध व्योमासुर जी आप कुछ ऐसा जानते है सूर्य के विषय में जो हम नहीं जानते है

व्योमासुर जी ......... परीलोक पुत्र सूर्य की सुरक्षा क्षेत्र में आता है देवयानी जी क्युकी पुत्र सूर्य के गुरुदेव कोई आवर नहीं बल्कि परीलोक के राजगुरु है जब सूर्य को असुरो द्वारा गोपेस्ट किये जाने की जानकारी प्राप्त हुई थी उनको संदेह हुआ की इस कार्य के पीछे अवश्य सुक्रलोक का हाथ है आवर उनका सोचना अनुचित भी तो नहीं है

देवयानी जी ....... व्योमासुर जी आपने सब्दो का उचित चयन कीजिये

देवयानी जी ने ये बात थोड़ी गुस्से में कही थी

व्योमासुर जी ........ हम जानते है हमने जो कहा वो अनुचित है पैर पुत्र सूर्य के विचार अनुचित नहीं है देवयानी जी आवर इसकी वजह आप भी जानती है

देवयानी जी ......... आप हमारे क्रोध को अग्नि दे रहे है आपको जो कहना है साफ साफ कहिये

व्योमासुर जी ......... ठीक है फिर आप साफ साफ शब्दों में सुनिए देवयानी जी आवर क्षमा कीजिये कुछ कड़वे शब्दों का प्रयोग करने के लिया .. पुत्र सूर्य पुत्री किरण आवर मानसी तीनो सुक्रलोक गुरुदेव के निमंत्रण पे यहाँ आये थे वो तीनो आपके आवर सुक्रलोक के मेहमान थे किन्तु फिर भी उनपे सुक्रलोक में आकर्मण हुआ आप भी तो उनके साथ हे थी क्या किसी को अपने घर पे आमंत्रित कर उनके साथ इस तरह का व्यव्हार करना उचित था भले हे उसके पीछे मुख्या रूप से डस्ट नरकासुर का सडयंत्र था किन्तु यहाँ की सुरक्षा का सम्पूर्ण दायित्व गुरुदेव का था आवर उनके पश्चात आपका देवयानी जी क्या आप अपने दायित्व में सफल रहे बिलकुल नहीं फिर आपने भी तो पुत्र सूर्य से योध कर उनकी क्षमता जननी छायी पैर आप उसके भी वाइटल रही .है हम ये सब जानते है .ऐसे में उनके लौटने के बाद परीलोक में असुरो द्वारा गुस्पेट करने का प्रयाश करना जो की पुत्र सूर्य की सुरक्षा में है ऐसे में पुत्र सूर्य का सुक्रलोक पे संदेह करना अनुचित भी तो नहीं ये केवल हम आवर आप हे जानते है की इसके पीछे सुक्रलोक नहीं है

देवयानी जी का कुछ देर पहले जो गुस्से में तमतमाया चेहरा था वो अब संत हो चूका था जैसे किसी ने सर्दी में ठन्डे पानी से उन्हें नहला दिया हो

देवयानी जी ........ हमें हमारे शब्दों के लिया क्षमा करे

व्योमासुर जी ....... आप क्षमा न मानिये इसमें आपकी कोई गलती नहीं है पहले आपको ऐसा करने के लिया गुरुदेव ने कहा था आवर पुत्र सूर्य भी ये बात जनता था इस लिया उसने भी आपको गलत नहीं समजा आवर हमने उसने सामना दिया है की इस गुस्पेट के पीछे सुक्रलोक नहीं बल्कि डस्ट नरकासुर की कोई चल है

देवयानी जी ....... ये आपने उचित किया व्योमासुर जी किन्तु क्या सूर्य पिता श्री के एकांत के विषय में जनता है

व्योमासुर जी ....... क्षमा करे किन्तु हमसे हे उसने इस बारे में घात हुआ किन्तु हम आपको निश्चित करते है पुत्र सूर्य आवर उनके गुरुदेव से हमें कोई खतरा नहीं है गुरुदेव की अनुपस्थितक में भी अगर आव्सय्कता पड़ी तो पुत्र सूर्य हमारी सहायता के अवश्य उपस्थित होगा किन्तु आपको परीलोक आवर जिनलोक के सीमा में असुरो की गतिविधि निसद ( रोकनी ) करनी होगी अन्यथा हम स्वयं भी पुत्र सूर्य के क्रोध से असुरलोक की रक्षा नहीं कर पाएंगे हमने उनका क्रोध आवर उनकी परचंड ऊर्जा के अंश को मह्सुश किया है अभी भी वो दृश्य हमारी मस्तिष्क में उभर रहा है

सूर्य की परचंड ऊर्जा के विषय में सुन कर देवयानी जी की उत्सुकता जैसे भाड़ सी गई थी पैर व्योमासुर जी के चेहरे की रंगत देख वो भी संत हो गई

p.shishya ........ क्या सत्य में सूर्य की ऊर्जा इतनी परचंड है जितना आप बता रहे है

व्योमासुर जी ....... हम असत्य नहीं कह रहे है आप स्वयं उस दृश्य को देख लीजिये जो हमने देखा था

कुछ हे पालो में व्योमासुर जी मानसिक तरंगो के माध्यम से सूर्य का वो क्रेडिट स्वरुप दोनों के मस्तिष्क में दिखते है जो अनुभव व्योमासुर जी ने किया था वही अनुभव p.shishya आवर देवयानी जी ने महसूस किया देवयानी जी जहा थोड़ी संत पद गयी थी वही p.shishya के माथे से पसीना टपकने लगा था सांसे भी उखाड़ने लगी थी

p.shishya ........ ये कैसी प्रलयंकारी विचित्र ऊर्जा है व्योमासुर जी क्या ये सूर्य की सम्पूर्ण ऊर्जा थी

व्योमासुर जी ...... सम्भवता ये पुत्र सूर्य की ऊर्जा का अंश मात्रा था हम सवयं पुत्र सूर्य की पूर्ण सक्तियो से अनभिज्ञ है

देवयानी जी ....... P.shishya आप सवयं परीलोक की यात्रा पे जाइये आवर जो असुर आपका आदेश मन असुरलोक लौट जाते है उन्हें जाने दीजिये आवर जो लौटने के लिया त्यार नहीं है उनका वध कर दीजिये हमारा यही सुझाव है आप दोनों भी अपना अपना निर्णय बता दीजिये

व्योमासुर जी ....... हम आपसे सहमत है पैर आपको साथ हे एक सन्देश भी भेज देना चाइये सुक्रलोक की आवर से जिस से उनके मन से सुक्रलोक के पार्टी जो संसय ( शक ) है वो भी नस्ट हो जाये आवर वो आस्वस्त रहे

देवयानी जी ...... उचित कहा आपने

P.shishya ........... हम व्योमासुर जी के कथन से सहमत है साथ हे हमें असुरलोक पे अपनी पैनी नजरे भी बनाये रखनी होगी हमसे कोई चूक हुई तो सूर्य के क्रोध से हम गुरुदेव के बिना असुरलोक की रक्षा नहीं कर पाएंगे

देवयानी जी एक सन्देश पत्र त्यार कर p.shishya को देते हुए परीलोक के लिया कुछ विशेष असुर वीर भी उनके साथ भेजती है

p.shishya के जाते हे देवयानी जी व्योमासुर जी को देखने लगती है

देवयानी जी ........ क्या आप सत्य में उस ऊर्जा सकती को पहचान नहीं पाए p.shishya भले हे उस ऊर्जा को नहीं पहचाने किन्तु क्या आप भी उस ऊर्जा को पहचानने में भूल कर सकते है

व्योमासुर जी ........ हम वचन वध है देवी देवयानी जी

देवयानी जी .......... क्या आपको ज्ञात है पिता श्री एकांत में किस अनुष्ठान को पूर्ण करने गए है

व्योमासुर जी ......... हमें इस विषय में गुरुदेव ने कुछ भी नहीं बताया आवर आप भी हमें इस विषय में कुछ न बताये

देवयानी जी ........... हम जानते है सूर्य की वो ऊर्जा दिव्या नरसंघार ऊर्जा थी किन्तु हम ये नहीं जान प् रहे है की सूर्य में ऐसा क्या है विशेष है जिस से उसके वो दिव्या ऊर्जा प्राप्त हुई हम पहले तो केवल पिता श्री के लिया हे ये सब जानना चाहते थे किन्तु अब हम सवयं सूर्य के विषय में जानने को इच्छुक है पिता श्री के एकांत से आंके के बाद हम डोगरा हे पृथ्वीलोक की यात्रा पे निकालेंगे

उदार व्योमासुर जी द्वारा लाया ऊर्जा पुंज गुफा के समक्ष आ पहुंचा जहा आखरी बार निर्भयासुर पहुंचा था

कुछ देर ऊर्जा पुंज वही घूमता रहा फिर तेजी से गुफा की आवर भाड़ा पैर किसी ाधरिया दिवार से टकरा कर ऊर्जा पुंज पीछे की तरफ वापिस आ जाता हर बार जब ऊर्जा पुंज टकरा कर पीछे आता ुरमे कुछ परिवर्तन होने लगते हर बार तराने के बाद ऊर्जा पुंज में रेड ऊर्जा की भादोत्तरी होने लगती जैसे वो उस अदृश्य दिवार से तराने के बाद जब पीछे जाती है तो सवयं को वाइटल होता देख क्रोध में आ जाती हो लगातार 6,से 7 बार यही क्रिया दोहराही जाती है दरशल ये असुरगुरु शुक्राचार्य की ऊर्जा कवच था जो बार बार सूर्य की ऊर्जा को पीछे भेज रहा था पैर हर बार तराने पे वो ऊर्जा कवच भी कमजोर हो रहा था आवर एक समय आने पे वो ऊर्जा कवच एक तेज दमा के साथ टूट जाता है

सूर्य का ऊर्जा पुंज जल से होते हुए गुफा में प्रवेश करता है आवर सीधी उस कमंडल में खींचा चला जाता है

कुछ देर बाद बड़ी हे तेजी से कमंडल में भरे जल में भवर सा उठने लगता है आवर उसके से दो सेफ ऊर्जा पुंज निकलते है आवर डेरी डेरी वो किसी मनुष्य का आकर लेने लगते है

उन दो आकर में से एक निर्भयासुर था जो अब आने पूर्ण रूप में आ पहुंचा था आवर दूसरी अभी भी किसी हवा में किसी आत्मा की तरह सफ़ेद ऊर्जा रूप में कड़ी थी

निर्भयासुर ........... दिवंगत गुरु भरम ऋषि के श्री चरणों में उनका शिष्य निर्भयासुर नमन करता है गुरुदेव कृपया मेरा नमन स्वीकार करे

भ्रम ऋषि ........... कीर्तिमान भाव पुत्र निर्भय आज हमारी प्रतीक्षा का अंत हुआ पुत्र हमने अपने जीवन कल में जो भी पुण्य अर्जित किये उनका फल तुम्हे प्रदान कर चुके है अब हम इस कैद से मुक्त हो सकते है

निर्भय .......... गुरुदेव क्या भविष्य में आपका मार्गदर्शन हमें प्राप्त होगा

भरम ऋषि ........ नहीं पुत्र हमारा तुम्हारा साथ यही तक था अब हमारा मोक्ष की प्राप्ति कर परबु श्री चरणों में विलीन होने का समय आ चूका है

निर्भय ......... गुरुदेव क्या विदा लेने से पूर्व हम आपसे कुछ पूछ सकते है

भरम ऋषि ......... अवश्य पुत्र तुम्हारे मन मस्तिष्क में हो रही उथल पुथल को संत किये बिना हम यहाँ से मुक्त नहीं हो सकते है इस लिया जो तुम्हारे मन में है वो पूछो पुत्र

निर्भय .......... गुरुदेव आपके आवर काल ( महामहिम ) के मध्य जो अंतिम योध हुआ था जिसमे आपको सवयं अपनी देह को नस्ट कर सवयं को कैद करना पड़ा किन्तु क्या काल की मृत्यु हो गयी थी आपके द्वारा

भरम ऋषि .......... नहीं पुत्र काल ( महामहि ) की मृत्यु संभव नहीं है क्युकी काल का जनम किसी योनि से से नहीं हुआ है अपितु काल का जनम बुराई से हुआ है जिसका कोई अंत नहीं है काल समय समय पे शरीर बदलता रहता है शास्त्रों वर्षों में ऐसा एक समय आता है जब काल सरोद दर्जन कर सकता है आवर निकट भविष्य में

में काल का एक बार फिर से सरीर दर्जन करने का योग बन रहा है

निर्भय .......... किन्तु गुरुदेव इस बार उसे रोकने का दायित्व किसने प्राप्त हुआ है अगर उस हे रोका नहीं गया तो वो सम्पूर्ण भारमंद को अंधकार में विलुप्त कर देगा

भरम ऋषि ........ नियति की इच्छा का इन्तजार करो पुत्र काल का काल पहले हे भारमंद में जनम ले चूका है जिसके तुम अंश हो जो सवयं प्रभु का रूद्र अंश है तुम केवल निमित मात्रा हो पुत्र आवर नरकासुर का वरदान काल तक पहुंचने का माध्यम समय आने पे पुत्र सूर्य आवर काल एक दूसरे के सामने होंगे किन्तु अभी ये सत्य पुत्र सूर्य के सामने उजागर करने का समय नहीं आया है

निर्भय ........ क्या स्वामी सूर्य हे वो है जिनका जनम काल को रोकने के लिया हुआ है नरकासुर का वरदान केवल एक माध्यम है काल तक पहुंचने का

भरम ऋषि ........ है पुत्र नरकासुर का अंत तो परबु अंश सूर्य आवर माता अंश किरण किसी भी समय कर सकते है उसके लिया पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण को इतनी सकतिया प्राप्त करने की आव्सय्कता हे नहीं है किन्तु काल काली ( बुरी ) सक्तियो का अधिपति है उसे कैद करने के लिया 7 लोक की सक्तियो की आव्सय्कता होगी जो पूर्व से पुत्र सूर्य के आसपास है

निर्भय सोच में पद जाता है की 7 लोको की कोनसी सकतिया है जो सूर्य के पास है

निर्भय ...... क्षमा करे गुरुदेव किन्तु मैं अभी भी समाज नहीं पाया

भरम ऋषि ....... (1 ) परीलोक से पारी सकती ( 2 )जिनलोक से जिन सकती (3 )प्रेतलोक से प्रेत सकती (4 ) नागलोक से नाग सकती (5)

असुरलोक से असुर सकती (6 ) द्रगोंलोक से ड्रैगन सकती ( 7 ) पृथ्वीलोक से प्रेम सकती

नितभय .......प्रेम सकती इसका क्या मतलब है गुरुदेव

भरम ऋषि ........ Prem.pyaar .वात्सल्य .ममता . ये भारमंद की वो सकती है जिसके समक्ष त्रिदेव भी नतमस्तक है उन्हें भी इस प्रेम सकती से वसीभूत हो कर बार बार मनुष्य रूप में जनम लेना पड़ा ये प्रेम हे तो था उनका मनुष्य या अन्य जीवो के पार्टी किन्तु साथ हे उन्हें भी ममता रूप प्रेम चाइये क्युकी वो भी तो ा जन्मे थे

पुत्र सूर्य के जीवन में पृथ्वीलोक से इतनी जीवन संगिनिया ुशी प्रेम से तो है अन्यलोक से केवल एक जीवन संगिनी हे सूर्य के जीवन में है

निर्भय भी सोच में पद जाता है की जिन लोक से मिनिषा प्रेत लोक से जीनत नागलोक से कोमल ड्रैगन लोक से जो लिया असुरलोक से मानसी पैर परीलोक से पारिजात आवर रिद्धि 2 कैसे

निर्भय ......पैर गुरुदेव परीलोक से तो राजकुमारी पारिजात आवर रिद्धि जी है

गुरुदेव ....... रिद्धि परीलोक के राजगुरु आवर परबु के पदम् भक्त की पुत्री है परबु उनकी भक्ति से प्रश्न हो कर पुत्री रिद्धि को अपने अंश के लिया चुना था न की पुत्री रिद्धि का जनम इस उद्देश्य के लिया हुआ था किन्तु अब वो भी भविष्य में होने वालेइस महासंग्राम विनाशकारी योध का एक अभिन अंग है

निर्भय ........ जी गुरुदेव जैसे मैं नियति द्वारा बनाया एक माध्यम हूँ आपके आवर स्वामी के बिच का

भरम ऋषि ....... है पैर ये पूर्ण सत्य नहीं है समय आने पे तुम्हे तुम्हारे स्वामी इसका ज्ञान अवश्य करवाएंगे पुत्र

निर्भय .....जी गुरुदेव

भरम ऋषि अपने हाथ का इशारा करते है जिस से वो दिव्या सवर्ण कमंडल उड़ते हुए निर्भय के हठी में आ जाता है उस में से अभी भक नदी निरंतर बाह रही थी

भरम ऋषि एक बार फिर से उस पत्थर की आवर देखते है जहा पहले वो कमंडल रखा हुआ था आवर उनके हाथ से एक रौशनी किरण निकल उस पत्थर पे गिरती है अगले हे पल वह उस पत्थर पे एक बड़ा सा हॉल (चढ़ ) नजर आने लगता

भरम ऋषि ....... पुत्र निर्भय कमंडल में जो पवित्र जल है उसने वह अर्पित कर दो

निर्भय ......जी गुरुदेव

निर्भय पूरा कमंडल उस बड़े से चढ़ में खली करने लगता है अंतहीन जल न जाने कितनी देर उस कमंडल से निकलता है फिर भी जैसे उस पे कुछ फरक हे नहीं पड़ा

भरम ऋषि ....... पुत्र निर्भय तुमने पूछा था न की काल आवर मेरे मध्य हुए योध का परिणाम क्या हुआ था तो उसका जबाब ये है पुत्र

कुछ हे देर में गुफा में दिवार पे चल चित्र चलने लगते है जहा काल आवर भरम ऋषि का योध दिखाई दे रहा था अंत में भरम ऋषि द्वारा काल की देह (सरीर ) का नस्ट होना फिर अचानक से काल किसी काली परछाई सा बन भरम ऋषि के सीने से जा टकराना आवर भरम ऋषि के मुँह से जोरदार चीख निकलना कुछ पल बाद भरम ऋषि का अपने हे हाथ से अपना सीना चिर कर अपना कला होता दिल निकल कर दूर फेंक देना बस इस से आगे कुछ भी नहीं दिखाई देता है

निर्भय ....... गुरुदेव आपने ऐसा क्यों किया आपने आपने सीने से अपना दिल नहीं निकला होता तो सायद आपकी मृत्यु नहीं होती

भरम ऋषि ........अगर मैं अपना बलिदान नहीं देता तो सम्भवता बहुत बड़ा अनरथ हो जाता पुत्र क्युकी काल मेरे पबित्र सरीर पे अपना अधिकार जमा कर उसने दूषित कर चूका होता जैसे मेरे हृद्या को जिसने मैंने अपने सीने से निकल फेंका अगर काल अपने मंतव्य में सफल हो जाता तो उसका बहुत बड़ा विनङ्करि परिणाम सभी के समक्ष होते पुत्र इस लिया मुझे अपनी देह त्याग करनी पड़ी साथ हे उस हे आने तपोबल से नस्ट करना पड़ा आवर काल को अन्दर के गहराइयों में भेजने के सिवाय कोई आवर मार्ग नहीं था

निर्भय ......किन्तु आपका हृद्या तो नस्ट नहीं हुआ न गुरुदेव

भरम ऋषि ....... वो आज भी सुरक्षित है किन्तु काल की काली सकती से दूषित भी ये कमंडल अपने साथ ले जाओ आवर तुम्हारे स्वामी को सौंप देना भविष्य में जब मेरा हृद्या पुत्र सूर्य को प्राप्त हो तब उसे इस पवित्र जल से पवित्र कर देना इस जल से काल की सभी काली सक्तियो का प्रभाव नस्ट हो जायेगा

निर्भय ......जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश

भरम ऋषि पे अचानक से हे सफ़ेद रौशनी गिरने लगती है

भरम ऋषि ...... मेरे मोक्ष का समय हो चूका है पुत्र मुझसे प्राप्त ज्ञान आवर सकती को अपने स्वामी को अर्पित कर देना समय आने पे नियति तुम्हे संकेत देगी पुत्र

निर्भय ....... जी गुरुदेव आपकी आज्ञा का अक्षर सह पालन होगा गुरुदेव मुझे आशीर्वाद दे गुरुदेव

भरम ऋषि ........ ईश्वर तुम्हारी सभी मनोकानए पूर्ण करे पुत्र

भरम ऋषि की आत्मा वह से विलुप्त हो चुकी थी आवर अब वह केवल निर्भय अपने दोनों हाथो में कमंडल लिया खड़ा था

जब निर्भासुर गुफा से बहार निकला तो थोड़ा अँधेरा हो चूका था निर्भयासुर ऊर्जा में बदल कमंडल को चारो आवर से कवर कर प्रकाश को गति से सुक्रलोक के आकाश मार्ग को चीरते हुए अंतरिक्ष में खो गया जैसे की वो भी अंतरिक्ष में उन टुटहे हुए सितारों का हे एक हिस्सा हो ......................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .........................
 
अपडेट. 271

निर्भय ....... जी गुरुदेव आपकी आज्ञा का अक्षर सह पालन होगा गुरुदेव मुझे आशीर्वाद दे गुरुदेव

भरम ऋषि ........ ईश्वर तुम्हारी सभी मनोकानए पूर्ण करे पुत्र

भरम ऋषि की आत्मा वह से विलुप्त हो चुकी थी आवर अब वह केवल निर्भय अपने दोनों हाथो में कमंडल लिया खड़ा था

जब निर्भासुर गुफा से बहार निकला तो थोड़ा अँधेरा हो चूका था निर्भयासुर ऊर्जा में बदल कमंडल को चारो आवर से कवर कर प्रकाश को गति से सुक्रलोक के आकाश मार्ग को चीरते हुए अंतरिक्ष में खो गया जैसे की वो भी अंतरिक्ष में उन टुटहे हुए सितारों का हे एक हिस्सा हो ..................

अब आगे ............}

परीलोक .......... सूर्य किरण शालिनी जी मानसी सांध्यकाल के समय हे परीलोक पहुंच चुके थे

चारो ने सूर्य महल में हे रात्रि विश्राम करने को कहा जिसे रानी पारी ने थोड़ी न नुकर के बाद स्वीकार कर लिया क्युकी एक तरह से ये सूर्य का खुद का महल था अगर वो अकेला परीलोक आया होता तो वो अवश्य बाकि बार की तरह परिमहल में हे रुकता रानी पारी ने भी के साथ रात्रि भोज आवर रात्रि विश्राम के लिया आज सूर्य महल में हे रुकना तय किया

सूर्य सभी से कुछ देर बाते करने के बाद मानसी को लिया सीधा गुरुदेव के पास मंदिर पहुँचता है

सूर्य ...... परनाम गुरुदेव आशीर्वाद दीजिये

गुरुदेव .......... दीर्गौषमान भाव पुत्र

मानसी ........ परनाम गुरुदेव

गुरीदेव .......... साधा सौभाग्यवती भाव पुत्री

सूर्य मानसी दोनों हे गुरुदेव के सामने जमीं पे बेथ जाते है

गुरुदेव ......... पुत्र सूर्य ड्रैगन लोक की यात्रा के लिया पूर्ण रूप से त्यार हो पुत्र

सूर्य ........ जी गुरुदेव बस आपके आदेश की प्रतीक्षा है

गुरुदेव ....... दो दिवश बाद का बहुत हे उत्तम समय है पुत्र

पुत्री किरण आवर तुम्हारे ड्रैगन लोक के राजसिंघषण पे विराजमान होने के लिया

सूर्य ....... जैसी आपकी आज्ञा गुरुदेव गुरुदेव ...... पुत्री किरण जाओ आवर जा कर संध्या काल की पूजा के लिया पवित्र सरोवर में सनान कर आओ पूजा के बाद तुम मायावी मणि को धारण कर पाओगी जो तुम्हे सुक्रलोक से प्राप्त हुई थी

मानसी ......जी गुरुदेव जैसा आप कहे

गुरुदेव ने अपनी जादुई चढ़ी से मानसी के लिया दूसरे वस्त्र का पारबन्द कर दिया था

गुरुदेव ....... पुत्र सूर्य क्या पुत्र निर्भयासुर से तुम्हारा सम्पर्क हुआ पुत्र

सूर्य ....... जी गुरुदेव निर्भयासुर से मेरा संपर्क हो चूका है वो कुछ समय बाद परीलोक पहुंच जायेगा गुरुदेव किन्तु उसकी ऊर्जा में कुछ बदलाव मह्सुश किये है मैंने जब मैंने उस से संपर्क किया था इशू लिया मैंने उसे यहाँ परीलोक आने के लिया कहा है

गुरुदेव ......... ये तुमने उचित किया पुत्र

सूर्य ....... असुरो की क्या इस्थिति है गुरुदेव क्या वो अभी भी परीलोक की बहरी सीमा में बने हुए है

गुरुदेव ......... नहीं पुत्र अब असुरो की आवर से हम निश्चित है अवश्य तुम्हारे ससुर श्री व्योमासुर जी ने तुम्हारे बाते सुक्रलोक में सभी के समक्ष राखी है ये ुशी का प्रभाव है

कहते हुए गुरुदेव ने सूर्य को एक सन्देश पत्र दिया

सूर्य ....... ये सन्देश किसका है गुरुदेव

गुरुदेव ........ ये सन्देश पत्र असुरगुरु शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी का है पुत्र जिसने क्षमा मांगते हुए साथ हे आश्वासन भी दिया है की कोई भी असुर परीलोक की सीमा के आसपास दिखाई नहीं देगा इस लिया आप निश्चित रहे

सूर्य पत्र खोल कर पढ़ने लगता है

सन्देश पत्र ...... परीलोक की महारानी आवर राजगुरु को असुरगुरु शुक्राचार्य पुत्री देवयानी का परनाम हम आपसे क्षमा चाहते है आपके लोक की सीमा में असुरो ने गुस्पेट करने की कोशिश की उसके लिया इस गुस्पेट के पीछे सुक्रलोक किसी भी रूप में नहीं है इस घटना के पीछे असुरराज नरकासुर का कोई षड़यंत्र है किन्तु हम आपकी निश्चित करते है की सिगरा हे इसमें दोषी असुरो को उनके किया का दंड अवश्य मिलेगा आवर आगे कोई भी असुर या दानव परीलोक की सीने में गुस्पेट करने का पर्यटन नहीं करेगा

असुरगुरु पुत्री देवयानी .....

सूर्य ........ चलो अच्छा हे है की इस मामले को सवयं देवी देवयानी खुद हे देख रही है असुरगु के बाद उनके सभी दायित्व उनके हे कंधो पर जो है

गुरुदेव ........ उचित कहा तुमने पुत्र चलो प्रभु पूजा का समय हो चला है पुत्री मानसी भी आ चुकी है

कुछ आवर भी परिया मंदिर में आ चुकी थी गुरुदेव ने पूजा आरम्भ की आवर पूजा पूर्ण होने के बाद प्रभु श्री चरणों से एक बॉक्स उठा कर खोलते है जिसमे वो लाल मायावी मणि थी जो अब पूरी तरह लाल रौशनी में जग मैग कर रही थी

गुरुदेव मणि को उठा कर मानसी के मस्तिक्ष पे ठीक दोनों आँखों के बिच के स्थान पे लगा देते है

डेरी डेरी वो रौशनी मानसी के मस्तिष्क में जाने लगती है कुछ हे देर में पूरी मणि गायब हो कर मानसी के मस्तिष्क में रौशनी के रूप में जा चुकी थी

कुछ देर मानसी की आँखे उस मणि की हे तरह लाल रौशनी में जगमगा उठी

गुरुदेव ........ पुत्री मानसी ध्यान लगा कर मणि की ऊर्जा को नियंत्रित करो पुत्री

मानसी ........ जी गुरुदेव

मानसी आँखे बंद कर ध्यान करने लगती है

मानसी जैसे जैसे ध्यान की गहराई में जा रही थी वैसे वैसे जो रौशनी मानसी की शरीर से निकल रही थी वो गायब होने लगी

करीब आधे घंटे बाद मानसी ने आँखे खोली तो अब उसकी आँखे नार्मल हो चुकी थी आवर हलकी हलकी चेहरे की चमक भी बाढ़ चुकी थी

गुरुदेव ......... अब कैसा अनुभव कर रही हो पुत्री मानसी

मानसी ....... जी गुरुदेव बहुत अच्छा मह्सुश हो रहा है ऐसा लग रहा है जैसे सरीर में ऊर्जा रूपी विद्योत का संचार तीव्र गति से हो रहा है

गुरुदेव ........ उत्तम पुत्री किन्तु अभी भी तुम इस ऊर्जा पे पूर्ण रूप से नियंत्रित नहीं कर पायी हो इस लिया तुम्हे अधिक समय ध्यान करना अनिवार्य है तभी तुम इस मायावी मणि का प्रयोग अपनी इच्छा अनुरूप किसी भी माया का प्रयोग कर पाओगी

मानसी ...... जी गुरुदेव

सूर्य ......... गुरुदेव अब हमें महल चलना चाइये

गुरुदेव ....... है पुत्र वैसे भी वैद्यराज आवर उनकी पुत्री महिमा को हमने रात्रि भोज के लिया पहले हे आमंत्रित कर दिया है आवर सकती आवर महिमा के प्रेम के विषय में भी हमने उन्हें पहले हे बता दिया है

सूर्य ....... हाहाहा मतलब की सकती भाई आवर महिमा जी की सकल देखने लायक होगी जब महिमा जी के विवाह की चर्चा होगी

गुरुदेव ......... क्या ऐसा करना उचित होगा पुत्र

सूर्य ....... भले हे आपके लिया थोड़ा अनुचित लगे गुरुदेव किन्तु मैं तो ऐसा कर हे सकता हूँ

मानसी ........ कुंवर जी गुरुदेव आप किस विषय में बात कर रहे है

सूर्य ........ हम सकती आवर महिमा जी के विषय में बात कर रहे है मानसी सकती भाई वैद्यराज जी की पुत्री महिमा जी से प्रेम करते है आवर महिमा जी भी किन्तु दोनों हे ये बात अपने परिवार से कहने में संकोच कर रहे है आवर जब भी मैं सकती भाई को उनके विवाह के लिया कहता हूँ तो वो बाद के लिया ताल देते है पैर उन्होंने आज तक किसी को पता भी नहीं चलने दिया की वो किसी से पहले से हे प्रेम करते है इस लिया मैंने भी सोच लिया है उन दोनों को सताने का इस से अच्छा अवसर नहीं होगा

मानसी ......... क्या ऐसा करना ठीक रहेगा आपको तो उनका साथ देना चाइये

सूर्य ........ साथ दे रहा हूँ न पैर साथ हे सकती भाई का छोटा भाई होने के हक़ से दोनों से मजाक मस्ती करने का हक़ भी तो है आवर तुम भी उन्हें कुछ मत बताना की उन दोनों की रिश्ते की बात होने वाली है

मानसी ....... ठीक है पैर आप भी ज्यादा मत सतना उन्हें

गुरुदेव सूर्य मानसी तीनो जब तक सूर्य महल पहुंचे तब तक वैद्यराज आवर महिमा जी के साथ सकती भी सूर्य महल पहुंच चुके थे आवर सूर्य मानसी गुरुदेव का हे इन्तजार कर रहे थे भोजन पे

सूर्य ........ सकती भाई अच्छा हुआ आप मुझे यही मिल गए आपसे जरुरी बात करनी थी परनाम वैद्यराज जी आप सायद महिमा जी है वैद्यराज जी की पुत्री ( ऐसा सूर्य ने जानबुज कर कहा था वो पूर्व से हे महिमा जी से परिचित था )

वैद्यराज ....... परनाम यूवराज सूर्य

सकती ....... क्या हुआ सूर्य क्या जरुरी बात करनी थी

सूर्य ........ अरे आप अधीर न हो सकती भाई आराम से बैठिये पहले फिर बात करते है

रानी पारी ....... क्या हुआ पुत्र सूर्य ऐसी क्या विशेष बात है

सूर्य ....... रानी माँ बात तो वाकई में बहुत विशेष है दरशल मैंने बहुत बार सकती भाई से उनके विवाह को ले कर बात की थी पैर इन्होने हर बार ये कह कर बात ताल दी की जब सही समय आएगा तो विवाह भी कर लेंगे मैंने इनसे पूछा भी की यदि ये किसी आवर से प्रेम करते है तो बता दे पैर इन्होने कहा की वो किसी आवर से प्रेम नहीं करते इस लिया मैंने गुरुदेव की सहायता से इनके लिया एक पारी को पसंद किया है जो सकती भाई को बहुत पसंद आएगी आपको पता है वो भी सकती भाई को पसंद करती है

रानी पारी ...... ये तो बहुत अच्छी बात है पुत्र कोण है वो पारी हमें भी तो बताओ

ीदार सकती के विवाह की बात सुन महिमा आवर सकती दोनों की दिल की धड़कन भाड़ चुकी थी आवर दोनों के चेहरे भी कुछ उतर गए थे

महिमा गुस्से में सकती को देख रही थी आवर सकती महिमा की नजरो का सामना करने में दर रहा था

( सूर्य मानसिक सम्पर्क कर रानी पारी रिद्धि परिधि किरण शालिनी जी सभी को सब कुछ बता देता है आवर उन्हें खुद का साथ देने को कहता है जिस से सभी त्यार हो जाते है )

सूर्य ......... वो रिद्धि जी की बचपन की सखी है समय पारी उन्हें हे मैंने पुर गुरुदेव ने सकती भाई के जीवन साथी के रूप में पसंद किया है

रिद्धि जी ....... क्या मेरी सखी समय वो तो बहुत प्यारी है सकती आवर समय की जोड़ी बहुत अच्छी जमेगी

सकती ....... सूर्य वो मैं अभी विवाह नहीं करना चाहता हूँ

वैद्यराज ........ वैसे आज हे महिमा के लिया भी एक बहुत अच्छा रिस्ता आया है मैं भी रानी पारी से ुशी विषय पे भेंट करने आया था पुत्री महिमा के साथ

( महिमा अंदर हे अंदर सकती को गालिया दे रही थी बेसक किसी को सुनाई न दे पैर उनके चेहरे पे जो भाव थे उन्हें देख सभी समाज प् रहे थे की उनकी इस्थिति इस समय कैसी होगी )

किरण ........ ये तो आवर भी अच्छी बात है एक साथ तीन तीन विवाह होंगे

गुरुदेव ...... तीन तीन विवाह वो कैसे पुत्री किरण

किरण ........ गुरुदेव जल्दी हे कुंवर जी का विवाह होगा ुशी मुहूर्त पे महिमा जी आवर सकती भाई का भी करने पे एक साथ तीन तीन विवाह हे होंगे न

गुरुदेव ....... उचित कहा पुत्री तुमने हम सिगरा हे पुत्री महिमा आवर पुत्र सकती के विवाह योग के अनुसार मुहूर्त निकलते है

सूर्य ...... सकती भाई अब इतना भी न सरमाइये अभी विवाह में कुछ समय शेष है

( सकती ...... यहाँ मेरी दुनिया लूट रही है आवर सूर्य तुम्हे लग रहा की मई शर्मा रहा हूँ किस जंगल से तुम्हे ऐसा लगता है )

सकती नजरे उठा कर एक बार महिमा को देखता है जिसकी आँखे बस किसी भी पल चालक उठेंगे

शालिनी जी अपनी जग्गा से उठी आवर सीधा महिमा जी के सामने जा कड़ी हुई

शालिनी जी ....... बस बहुत हुआ तुम्हारा मजाक सूर्य अब आवर नहीं इतनी पहाड़ी बच्ची को रुला कर हे मानेगा क्या

सूर्य ....... क्या माँ आप भी न कुछ देर आवर इनको सबक मिलना चाइये था कब से मैं सकती भाई से बोल रहा था पैर इन्होने तो जैसे कसम हे क्या राखी थी की कुछ भी नहीं बोलना तो नहीं बोलना

शालिनी जी ....... सकती को अपना बड़ा भाई मानते हो फिर भी अपनी होने वाली भाबी को रुला रहे हो

सकती ...... होने वाली भाबी

शालिनी जी ......आवर नहीं तो क्या तुम्हे क्या लगता है इस हे तुम दोनों के बारे में पता नहीं होगा इस हे पहले से महिमा आवर तुम्हारे बारे में पता था

सूर्य ........ महिमा जी मुझे आपके आवर सकती भाई के प्रेम के विषय में पहले हे पता चल गया था आप से तो मैं पूछ नहीं सकता था पैर सकती भाई से मैंने बहुत बार पूछा था पैर इन्होने आपसे प्रेम करता हूँ ये कहने तक की हिमत नहीं की इस लिया मुझे गुरुदेव की सहायता से वैद्यराज जी के पास इनका रिस्ता भेजना पड़ा यहाँ भी इन्होने आपसे प्रेम की बात स्वीकार नहीं की अब मैं तो इनका छोटा भाई हूँ इस लिया इन्हे कोई सजा दे नहीं सकता हूँ

इस लिया आपको रुलाने की इन्हें क्या सजा मिलनी चाइये ये आप पे छोड़ रहा हूँ

वैद्यराज जी ......... मुझे भी पुत्री महिमा के लिया सकती वर के रूप में स्वीकार है जब गुरुदेव की आज्ञा होगी हम दोनों का विवाह कर देंगे

सूर्य ....... भाबी जी वैवाहिक जीवन के आरम्भ की इस नए रिश्ते की आपको ढेरो शुभकामनाये

सकती ....... मैं महिमा से प्रेम करता हूँ किन्तु अभी मैं विवाह नहीं कर सकता हूँ

सभी सकती की बात सुन कर चौंक जाते है

खाश कर महिमा आवर वैद्यराज जी

रानी पारी ......... क्या हुआ सकती तुम विवाह के लिया अस्वीकृति क्यों दे रहे हो जब तुम दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हो तब

सकती ......... है ये सत्य है की मैं महिमा से बहुत प्रेम करता हूँ आवर विवाह भी उन्ही से करना चाहता हूँ किन्तु मेरा प्रथम दायित्व परीलोक आवर सूर्य की सेवा आवर सुरक्षा है मैं अभी विवाह कर अपने दायित्व से विमुख नहीं हो सकता

सूर्य ........ सकती भाई क्या आपको वाकई में लगता की आप मेरी सुरक्षा करने योग्य है क्षमा करना मैं आपकी योग्यता पे सवाल नहीं उठा रहा हूँ क्युकी अगर मैं सवयं अपनी सुरक्षा नहीं कर सकता तो आप कैसे मेरी सुरक्षा कर पाएंगे है आपके परीलोक के तारक से मैं सहमत हूँ

गुरुदेव ........ पुत्र सकती सूर्य उचित कह रहा है तुम्हारी भावनाये उचित है पुत्र की तुम अपना दायित्व निभाना चाहते हो किन्तु वो सभी दायित्व तुम विवाह के उपरांत भी पूर्ण निस्ता से निभा सकते हो

सकती ....... ठीक है गुरुदेव जैसी आपकी आज्ञा .महिमा मैं तुमसे प्रेम अवश्य करता हूँ किन्तु मेरा सर्वप्रथम दायित्व परीलोक आवर यूवराज सूर्य की सेवा है उसके पश्चात हे मैं तुम्हे प्रेम आवर समय दे पाउँगा

महिमा ........ मुझे आपका निर्णय स्वीकार है सकती मैं भी आपकी भावनाओ का सम्मान करती हूँ मैं कभी भी आपके दायित्व के मध्य हस्तक्षेप नहीं करुँगी आपके परतेक उचित निर्णय में मेरा आपको सहयोग प्राप्त होगा

सकती ........ एक बार फिर से सोच विचार कर लो महिमा क्युकी मेरा ज्यादातर समय पृथ्वीलोक पे सूर्य के साथ वयतीत होता है ऐसे में हमें भेंट करने में भी लम्बे समय की प्रतीक्षा करनी पद सकती है

महिमा कुछ कहती उस से पहले हे शालिनी जी ने बोलना सुरु कर दिया

शालिनी जी ........ क्यों सकती जब तुम सूर्य के साथ पृथ्वीलोक पे रह सकते हो तो महिमा क्यों नहीं क्या तुम सूर्य आवर हमें अपना परिवार नहीं मानते

सकती ....... आप ऐसा क्यों सोचती है

सूर्य ....... माँ सही तो कह रही है सकती भाई जब मैंने आपको बड़ा भाई मन है तो उस रिश्ते से महिमा जी मेरी भाबी हुई

किरण. ........ कुंवर जी बिलकुल सही कह रहे है इस लिया आप कुंवर जी के साथ कही भी रहो महिमा जी हमारे साथ रहेगी

गुरुदेव .......... बाकि बाते बाद में कर लीजियेगा आप सब पुत्र सूर्य को कल ड्रैगन लोक की यात्रा पे निकलना है इस लिया अभी भोजन कर विश्राम करना आवशयक है

बातो का सिलसिला लम्बा चलता देख गुरुदेव ने सभी को बिच में रोकना हे उचित समजा

गुरुदेव की बाते सुन सभी का ध्यान भोजन के समय पे गया

सभी हाशि ख़ुशी भोजन कर विश्राम करने कक्ष की आवर भाड़ गए सूर्य किरण मानसी शालिनी जी जलीय को सुबह जल्दी हे ड्रैगन लोक के लिया निकलना भी था इस लिया सभी लोग जल्दी हे विश्राम काटने चले गए .............

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गुरुदेव .......... बाकि बाते बाद में कर लीजियेगा आप सब पुत्र सूर्य को कल ड्रैगन लोक की यात्रा पे निकलना है इस लिया अभी भोजन कर विश्राम करना आवशयक है

बातो का सिलसिला लम्बा चलता देख गुरुदेव ने सभी को बिच में रोकना हे उचित समजा

गुरुदेव की बाते सुन सभी का ध्यान भोजन के समय पे गया

सभी हाशि ख़ुशी भोजन कर विश्राम करने कक्ष की आवर भाड़ गए सूर्य किरण मानसी शालिनी जी जलीय को सुबह जल्दी हे ड्रैगन लोक के लिया निकलना भी था इस लिया सभी लोग जल्दी हे विश्राम करने चले गए .............

अब आगे ............

मध्य रात्रि को एक तेज प्रकाश पुंज बड़ी हे तेजी से परीलोक में प्रवेश करता है आवर सीधा परीलोक के मध्य भाग की आवर भढने लगता है

कुछ हे पल में वो ऊर्जा पुंज सूर्यमहल में प्रवेश कर एक बंद कक्ष में प्रवेश कर जाता है जहा एक जवान युवक आवर एक खूबसूरत कन्या एक दूसरे के बाहुपाश में लिपटे हुए थे

ऊर्जा पुंज उस युवा युवक में प्रवेश कर जाता है

उस ऊर्जा के प्रभाव से उस युवक ने एक बार अपनी आँखे खोली आवर एक हलकी मुस्कान के साथ फिर से आँखे बंद कर उस खूबसूरत कन्या को सीने से लगाए फिर से नींद की वादियों में खो गया

सूर्यौदय के साथ हे सूर्य किरण मानसी शालिनी जी जूलिया रानी पारी पारिजात रिद्धि गायत्री विधि महिमा सकती वैद्यराज सभी सनान आदि कर मंदिर पहुंचते है

जहा गुरुदेव पूजा की पूर्ण तयारी कर चुके थे किसी भी पल पूजा आरम्भ हो सकती थी

सभी ने मिल कर पूर्ण भक्ति भाव से पूजा पूर्ण की पूजा के बाद गुरुदेव रहश्यमयी मुस्कान के साथ सूर्य को देखते है

( गुरुदेव ....... ये पुत्र सूर्य की ऊर्जा में अचानक से परिवर्तन कैसा एक हे रात्रि में ऐसा परिवर्तन पुत्र सूर्य से जो ऊर्जा उत्पन हो रही है वो बहुत हे पवित्र आवर प्राचीन ऊर्जा है ऐसी ऊर्जा तो हजारो वर्ष के कठिन तप के बाद हे प्राप्त की जा सकती है )

गुरुदेव ........ पुत्र सूर्य अब समय आ चूका है ड्रैगन लोक की यात्रा का आरम्भ करने का किन्तु उस से पूर्व तुम्हे ड्रैगन लोक की यथा इस्थिति का ज्ञान होना आवशयक है

सूर्य ....... जी गुरुदेव मुझे ड्रैगन लोक की इस्थिति का ज्ञान है किन्तु उसका समाधान अभी भी मेरी समाज से बहार है राजसिंहासन का रिकत होना उस समस्या के पीछे का कारन नहीं है

गुरुदेव ........... है ये सत्य है पुत्र की ड्रैगन लोक में जो इस्थिति बानी हुई है उसके पीछे का पूर्ण रूप से राजसिंघासन का रिकत होना नहीं है इसके पीछे का मुख्या कारन का तुम्हे सवयं अपनी बूढी आवर ज्ञान से पता कर उसका निवारण कर ड्रैगन लोक का भावी सम्राट होने का अपना दायित्व पूर्ण करो पुत्र

सूर्य ........... जी गुरुदेव किन्तु आपके मार्गदर्शन के बिना गुरुदेव

गुरुदेव ........ है पुत्र इसमें मैं तुम्हारी कोई सहायता नहीं कर सकता इस कार्य को तुम्हे सवयं अपनी क्षमता से पूर्ण करना होगा हर स्थान पे मैं तुम्हारी सहायता या मार्गदर्शन के लिया तो उपस्थित नहीं हो सकता न पुत्र

सूर्य ......... जी गुरुदेव मैं समाज गया की आप क्या कहना चाहते

रानी पारी ......... पुत्र सूर्य गुरुदेव उचित कह रहे है भविष्य में तुम्हारे सामने अनेक ऐसी परिस्थितिया उत्पन्न होंगी जहा तुम्हे सवयं बिना किसी मार्गदर्शन या सहायता के अपने विवेक आवर बूढी से सभी समश्याओ का समाधान करना होगा स्वयं को अभी से उन परिस्थितियों के लिया अनुकूल बना लो जिस से भविष्य में तुम सभी बढ़ाओ का सामना करने सक्षम बन सको इसमें तुम्हारी अर्धागिनी तुम्हारी सहायता कर सकती है जब भी तुम्हे आव्सय्कता होगी

सूर्य ........ जी रानी माँ मैं समाज गया की आप क्या कहना चाहती है गुरुदेव अब आज्ञा दीजिये हमें

हमें ड्रैगन लोक की यात्रा आरम्भ करनी होगी सूर्यौदय हो चूका है

गुरुदेव ........ अवश्य पुत्र सूर्य ईश्वर अपनी कृपा दृस्टि तुम पे बनाये रखे आवर तुम्हारे विजय पथ को सुगम बनाये

सूर्य किरण मानसी शालिनी जी जूलिया गुरुदेव आवर रानी पारी के साथ वैद्यराज को परनाम कर उनका आशीर्वाद लेते है

गुरुदेव .......... आप सभी की यात्रा मगनकारी रहे

सूर्य सभी से विदा ले मंदिर से बहार निकलता है आवर टेलेपोर्टेशन दवार का निर्माण करता है

जल्दी हे जूलिया का ब्लू लाइटिंग ड्रैगन भी सभी के सामने आ जाता है किरण मानसी सूर्य का ड्रैगन भी उन तीनो के सामने आ कर खड़े हो जाते है

सूर्य ......... माँ आप किस ड्रैगन की सवारी करना चाहेगी

किरण ......... माँ आप कुंवर जी के साथ उनके ड्रैगन पे हे चलिए आपको किसी तरह का दर भी नहीं होगा

शालिनी जी ......... ठीक है स्वीटी अब हमें चलना चाइये

सूर्य शालिनी जी को अपने साथ लिए वाइट ड्रैगन पे स्वर हो जाता है

सभी अपने अपने ड्रैगन पे स्वर हो जाते है आवर एक के बाद एक कर चारो ड्रैगन टेलेपोर्टेशन द्वार में जाने लगते है सबसे आखरी में वाइट ड्रैगन टेलेपोर्टेशन द्वार में इंटर करता है उसके कुछ पल बाद हे टेलेपोर्टेशन द्वार बंद हो जाता है .......

ड्रैगन लोक ..........

ड्रैगन लोक की गोल्डन ड्रैगन सिटी इस समय किसी विशाल के टापू के जैसे आकाश में हवा में िस्थित थी

गोल्डन ड्रैगन सिटी मुख्या रूप से अभी तक क्वीन ( एलिज़ाबेथ ) आवर किंग ( सोलोमन ) के नियंत्रण में थी क्युकी भावी किंग एंड क्वीन वो दोनों हे थे किन्तु उनकी कोई संतान न होने आवर जूलिया को भविष्यवाणी ने भावी क्वीन के रूप में पूर्व हे चुना जाना था किन्तु अभी तक जूलिया का राजसिंघण पे विराजमान न हो पाने के कारन अभी भी ड्रैगन लोक के किंग आवर क्वीन मुख्या रूप से क्वीन एलिज़ाबेथ आवर किंग सोलोमन हे थे

देवसूफ़ी नियों ड्रैगन लोक के राजगुरु के पढ़ पे सम्मानित थे आवर वो किंग आवर क्वीन का ुचिर मार्गदर्शन कर रहे थे वही डेवलिन जी किंग की सहायक सलाहकर्ता की भूमिका निभा रहे थे

आज सूर्यौदय से पूर्व हे g.dragon सिटी में चहल पहल थी खाश कर पैलेस में हर तरफ खूबसूरत नज़ारे थे जैसे पैलेस को किसी उत्सव के लिया सुसज्जित किया हो

किंग ....... देवसूफ़ी जी सभी तयारिया अपने नियत समय से हो चुकी है प्रिंस सूर्य हमारे आदर सत्कार से प्रश्न आवर संतुष्ट तो होंगे न

देवसूफ़ी ......... आप खावमखा हे चिंतित हो रहे है सम्राट हमें विश्वाश है प्रिंस सूर्य आवर बाकि प्रिंसेस सभी बहुत प्रश्न होंगे

डेवलिन ........ देवसूफ़ी जी आपके आदेश अनुसार ड्रैगन बूटी पे पूर्ण रूप से तत्काल आयत निर्यात पे प्रतिबन्ध लगा दिया है किन्तु हमें दर है की सार्ड ऋतू ( ठंडी ) के इस समय ड्रैगन बूटी की खरीद फरोख्त पे प्रतिबन्ध लगाने से कही ड्रैगन ड्रैगन बूटी को पाने के लिया उन क्षेत्रो में गुस्पेट न करने लगे जिनमे ड्रैगन बूटी की उपज होती है

किंग ....... देवसूफ़ी जी हम भी डेवलिन जी के कथन से सहमत है क्युकी इस समय ड्रैगन्स को सबसे आदिक ड्रैगन बूटी की आव्सय्कता पड़ती क्युकी यही वो समय होता है जब सभी तरह के ड्रैगन प्रजाति के ब्लड में बदलाव होना आराम हो जाता है

देवसूफ़ी ......... हम आप दोनों से सहमत है किन्तु हमारी विवशता है की हम इसमें कुछ भी करने में सक्षम नहीं है हमने सवयं शोध ( जाँच ) किया है आवर जो असुद्ध ऊर्जा ड्रैगन बूटी से प्राप्त हुई उसे हम लाल रकत ( ड्रैगन बूटी में पाया जाने वाला दर्व्य ) से उस ऊर्जा अथार्त ब्लैक रकत को पार्थक नहीं कर प् रहे है आवर न हे हम इस ऊर्जा के पीछे के मूल कारन तक पहुंच प् रहे है आज से पूर्व हमारे समक्ष ऐसे विकार इस्थिति कभी उत्पन्न नहीं हुई अब तो केवल गुरुदेव आवर प्रिंस सूर्य हे हमारी अंतिम उम्मीद है

किंग ........ आपने बिलकुल उचित कहा देवसूफ़ी हम हर संभव कोशिश कर चुके है अब तो अंतिम उम्मीद प्रिंस सूर्य से हे है अब हमारे हाथ में ऐसा कुछ नहीं है जो हम इस इस्थिति में कर सके

डेवलिन ............ मन की हमारे समक्ष ऐसा कोई मार्ग नहीं है जिस से इस ऊर्जा के स्थोत तक पहुंचा जा सके पैर अभी भी ऐसा कुछ है जिस से हम इस इस्थिति की जाँच कर सकते है

देवसूफ़ी एंड किंग दोनों हे डेवलिन की बात सुन उनकी आवर उत्सुकता से देखने लगते है

देवसूफ़ी ......... डेवलिन जी हम आपके विचार जानना चाहते है

डेवलिन ....... देवसूफ़ी जी आवर किंग सोलोमन भले हे हम इस ब्लैक ब्लड ( ब्लैक ऊर्जा ) को ड्रैगन बूटी रेड ब्लड से पाठक करने में असफल रहे है किन्तु हम उन स्थानों को चिन्हित कर सकते है जहा ड्रैगन बूटी में इस तरह के संकेत नजर आ रहे है

इस से हमारा बहुत सा समय बच जायेगा आवर प्रिंस सूर्य को हम सटीक जानकारी दे पाएंगे जिस से उन्हें इस समस्या का समाधान करने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी

देवसूफ़ी .......... आपने बिलकुल सही कहा आवर हमने पूर्व हे इसकी जाँच गुप्त रूप से आरम्भ कर दी थी साथ हे प्रिंस सूर्य आवर प्रिंसेस के आगमन की सुचना भी चारो मैं city's को दे दी है

तीनो पैलेस के सभा कक्ष में बैठे आगे आवर भी चर्चा करते की बहार से एक सैनिक तेजी से सभा में प्रवेश करता है

किंग ....... क्या हुआ पहरेदार तुम इस तरह से सभा में

सैनिक ........ मुझे क्षमा करे सम्राट वो प्रिंस सूर्य आवर सभी प्रिंसेस

डेवलिन ........ क्या प्रिंस सूर्य पुर प्रिंसेस ड्रैगन लोक आ गए है

सैनिक ...... जी डेवलिन जी प्रिंस सूर्य आवर तीनो प्रिंसेस गोल्डन ड्रैगन सिटी पहुंच चुके है

किंग ......... देवसूफ़ी जी हमें उनके स्वागत के लिया जाना चाइये

तभी सभा में क्वीन एलिज़ाबेथ आवर उनके पीछे उनके बड़े से गौण को पकडे कुछ बहुत हे खूबसूरत दसिया सभा में आती है

क्वीन ....... हमने सुना प्रिंस सूर्य पुर तीनो प्रिंसेस ड्रैगन लोक पहुंच चुके है

किंग ....... हम उनके स्वागत के लिया हे जा रहे है एलिज़ाबेथ आप भी चलिए हमारे साथ

क्वीन ...... जी हम अवश्य आपके साथ उनका स्वागत करेंगे किन्तु हमें पृथ्वीलोक के स्वागत रीती रिवाजो के विषय में जानकारी नहीं है

देवसूफ़ी ....... ये लीजिये महारानी जी ये तिलक थल आवर दीपक है आप उनका तिलक कर स्वागत आरती कर पृथ्वीलोक के रिवाज अनुसार उनका स्वागत कर सकती है

देवसूफ़ी चलते हुए उन्हें स्वागत करने का तरीका बताते है की कैसे आवर क्या करना है

ीदार पैलेस के बहार सेना के योध मैदान में सूर्य किरण मानसी जूलिया शालिनी जी पाछो चारो ड्रैगन से निचे उतारते है

सूर्य गोल्डन ड्रैगन आवर वाइट ड्रैगन को कुछ समजता है दोनों हे ड्रैगन बुकर भरते हुए ड्रैगन लोक की दो दिशाओ में भाड़ जाते है

देवसूफ़ी ......... हम आप सभी का वर्षों उल्लाह के साथ ड्रैगन लोक में स्वागत करते है देवी शालिनी जी आपका ड्रैगन लोक में स्वागत है

शालिनी जी ........ देवसूफ़ी जी आपका धन्यवाद आपका ड्रैगन लोक बहुत खूबसूरत है खाश कर यहाँ की खूबसूरत हरे भरे जंगल झरने नदिया आवर विशालकाय जीवित जवालामुखी माउंटेन्स

जूलिया ....... मम्मी आप हमारे साथ चलना मुझे आपको यहाँ गुमान अच्छा लगेगा

सूर्य ........ जूलिया गुमनाम फिरना भी होता रहेगा पर पहले सभी से अच्छे से मिल तो लो

सूर्य देवसूफ़ी जी किंग क्वीन. आवर डेवलिन जी के चरण स्पर्श कर उन्हें परनामी करता है

क्वीन एलिज़ाबेथ नियों जी के बताये अनुसार सभी का तिलक कर उनका स्वागत करती है आवर उन्हें लिया पैलेस की आवर चल देती है

सूर्य ........ देवसूफ़ी जी मुझे dragon's आवर राइडर्स में पिछले कुछ समय से हुए बदलाव के विषय में जितना आप जानते है सब बताइये

देवसूफ़ी जी ........ अवश्य प्रिंस सूर्य किन्तु उस से पूर्व आप कुछ जल पान कर कुछ समय विश्राम कीजिये उसके पश्चात है इस विषय पे गहनता से विचार करेंगे

सूर्य ........ ये भी सही है वैसे तो हमें ब्लू ड्रैगन से बहुत कुछ पता चल गया है पैर हम जल्दबाज़ी में कोई भी कार्य नहीं करना चाहते जिस से किसी का ाहित हो इस लिया हमने गोल्डन ड्रैगन आवर वाइट ड्रैगन को कुछ जाँच करने भेज दिया है जल्दी हे किसी खाश जानकारी के साथ वो लौट आएंगे

सभी बाते करते हुए एक विशाल कक्ष में पहुंचते है

उदार दूसरी तरफ ड्रैगन लोक में वाइट ड्रैगन आकाश में किसी बिजली के भाटी बड़ी हे तेजी से आगे की आवर भाड़ रहा था इस समय वाइट ड्रैगन एक विशाल के जंगल के ऊपर से अपनी पेनी तेज दृस्टि का प्रयोग करते हुए आगे बढ़ रहा था

तभी उसकी नजर कुछ दूर जंगल में लगी भीषण आग पे पड़ती है पास जाने पे वह बहुत से ड्रैगन्स के 2 झुंड पे पड़ती है जो आपस में एक दूसरे पे हमला कर रहे थे एक दूसरे पे अग्नि वर्षा के साथ हे वो सब अपने पंजो आवर मुँह का इस्तेमाल कर जातक वॉर कर एक दूसरे को गायक कर रहे थे

तभी वाइट ड्रैगन किसी बाज़ के भाटी उनके बिच उतरता है आवर एक जोर दार दहाड़ मरता है जैसे वो इन सब पे बहुत गुस्सा हो अगले हे पल वाइट ड्रैगन के मुँह से हरी आग निकलती है आवर उन ड्रैगन के आग से जल रागे जंगल पे पड़ती है अगले हे पल वो हरी आग फ़ैल कर पहले से जल रही आग को कवर कर उसे बजाने लगती है

अपने सामने किसी अनजाने ड्रैगन को देख एक पल तो सभी ड्रैगन अपने हे स्थान पे रुक जाते है

पैर फिर जल्दी हे गुस्से में रगड़ते हुए वाइट ड्रैगन की आवर भढने लगते है

ड्रैगन के झुंड को अपनी आवर आता देख वाइट ड्रैगन गुस्से में अपनी पूछ एक विशालकाय पेड़ पे मरता है जो अगले हे पल एक झुंड पे आ गिरता है

वाइट ड्रैगन उनकी आवर जोर से गुस्से से दहाड़ मरता है इस दहाड़ में वाइट ड्रैगन की ऊर्जा भी उसके शरीर से भने लगती है जैसे जैसे वाइट ड्रैगन की ऊर्जा उन बाकि ड्रैगन से टकराती है वो सभी अपने घुटनो पे आ जाते है जैसे वो सभी वाइट ड्रैगन की ऊर्जा के प्रेस्सुरेस के आगे खड़े भी नहीं रह प् रहे हो कुछ देर बार सभी ड्रैगन हर मानते हुए वाइट ड्रैगन के सामने सर जुखा लेते है

वाइट ड्रैगन एक हलकी दहाड़ मरता है आवर सभी ड्रैगन चूहों के जैसे फ़ौरन जान बचा कर जंगल के अंदर भाग जाते है पैर वह अभी भी एक ड्रैगन रुका हुआ था जिसकी हालत कुछ ज्यादा हे ख़राब लग रही थी वो शरीर में भी काफी बड़ा था

तभी जंगल में से कुछ पैदा के पीछे से एक बुजुर्ग इंसान बहार निकलता है जिसका शरीर भी थोड़ा बहुत घायल था उसके कपडे कुछ जले हुए भी लग रहे थे

वो डरता डरता वाइट ड्रैगन के सामने आता है आवर अपनी पीठ पे बंदी गठरी नुमा कपडे में से कुछ हरी घास जैसा निकल कर सामने रखता है जो की ड्रैगन बूटी हे थी आवर वह अपने घायल ड्रैगन के पास चला जाता है आवर खड़ा हो जाता है

जैस्ड वो बुजुर्ग इंसान कह रहा हो की तुम ये सब ड्रैगन बूटी ले लो पैर उसके ड्रैगन को कोई नुकसान न पहुचाओ

वाइट ड्रैगन उन ड्रैगन बूटी को देखता है तो कभी उस बुजुर्ग आवर उसके ड्रैगन को वाइट ड्रैगन उस दूसरे ड्रैगन. को देख हलकी गुर्राहट में कुछ बोलता है जिसने सुन उस घायल ड्रैगन की हलकी बंद हो चुकी आँखे खुल कर बड़ी बड़ी हो जाती है

घायल ड्रैगन अपनी दर्द भरी गुर्राहट में वाइट ड्रैगन को कुछ कहता है जिसने सुन वो बुजुर्ग आदमी भी चौंके बिना रह नहीं सका

आदमी ....... क्या नहीं ये नहीं हो सकता मेरी इतनी म्हणत विफल नहीं हो सकती हमने इन ड्रैगन बूटियों के लिया अपनी जान जोखिम में डाली है

वाइट ड्रैगन अपने पंजे से उन ड्रैगन बूटी को रूंध कर बुजुर्ग आदमी की आवर फेंक देता है

वो बुजुर्ग आदमी रोटी हुए निचे बेथ जाता है आवर भीगी हुई आँखों से उन बूटियों देखने लगता है

वाइट ड्रैगन वह से जाने लगता है पैर कुछ कदम आगे जाने के बाद वो पलट कर ड्रैगन आवर उस आदमी को देख कर होकर भरता है

एक बार फिर से घायल ड्रैगन अपनी दर्द भरी गुर्राहट में वाइट ड्रैगन. को जबाब देता है

जिसके बाद वाइट ड्रैगन वही आस पास कुछ देर देखता है आवर कुछ घास को अपने मुँह से उखड कर उस घायल ड्रैगन के सामने रखता है

घायल ड्रैगन एक बार वाइट ड्रैगन की आँखों में देखता है आवर चुप चाप उन जड़ी बूटियों को चबाने लगता है

कुछ 10 से 15 मिनट्स के बाद डेरी डेरी उसका घायल सरीर ठीक होने लगता है

बुजुर्ग विषमय से कभी अपने ड्रैगन को देखता है तो कभी वाइट ड्रैगन को

आदमी ....... क्या वाकई में इन पोधो से ड्रैगन का इलाज़ हो सकता है पैर ये जो कुछ भी हो रहा है वो मेरी आँखों के सामने हुआ है

दरशल वाइट ड्रैगन ने जो पोज उस घायल ड्रैगन को खाने के लिया दिए थे उसके उसकी ऊर्जा आवर स्लाइवा ,( लार .थूक )था जो उस घायल ड्रैगन के शरीर में जाने के बाद उसके घावों को भरने के साथ साथ उसने कुछ ऊर्जा भी देता है जिस से जल्दी हे वो स्वस्थ हो जाता है

वाइट दर्जों कुछ देर उस ड्रैगन से बात कर वो वह से एक दिशा की आवर निकल जाता है

वाइट ड्रैगन के जाने के फ़ौरन बाद ड्रैगन अपने राइडर्स को अपनी पीठ पे बैठा कर वह से सिटी की आवर बड़ी तेजी से निकल जाता है

उदार गोल्डन ड्रैगन पैलेस में सुबह का नास्ता करने के बाद कुछ देर आराम कर सूर्य आवर देवसूफ़ी नियों गोल्डन ड्रैगन सिटी से निकलते है आवर दोनों सही ड्रैगन पे सवार हो ड्रैगन सिटी की आवर भाड़ जाते है जो की जमीं पे थी

इस समय सूर्य आवर देवसूफ़ी ड्रैगन लोक के सामान्य व्यापारी के भेष में थे

दोनों सिटी के बहरी क्षेत्र में उतारते है आवर वह से सुलक पे दो ास्वा ( घोड़े ) जैसे सिखने वाले जमीनी सवारी लेते है आवर सिटी के मुख्या रस्ते से सिटी की आवर चल देते है उनके साथ कुछ आवर ग्रामीण आवर साहिर लोग भी थी जो कुछ बेचने या खरीदने सिटी की आवर जा रहे थे

नियों .......... सूर्य मुझे समाज नहीं आ रहा की हमें इस तरह से भेष बदल कर सिटी में जाने की क्या आव्सय्कता है हम अपने असली रूप में भी तो वह जा सकते थे जो भी जानकारी हमें चाइये वो तो वैसे भी मिल सकती है

सूर्य ......... आप जो कह रहे है वो सच है नियों जी अगर हम अपने वास्तविक रूप में सभी के बिच जाते तो सभी लोगो के आकर्षण का केंद्र बन जाते जो इस समय बिलकुल ठीक नहीं था दूसरी बात हमें जो जानकारी चाइये वो इस रूप में हम जल्दी आवर आदिक मात्रा में जान सकते है

नियों ........ मुझे अभी भी आपकी पूरी बात समाज नहीं आई पैर ये बात सच है की हम अपनी असली पहचान के साथ वह जाते है तो हम सभी की नजरो का मुख्या केंद्र बन जायेंगे

सूर्य ........ हमें किसी भी तरह से ड्रैगन बूटी बेचने वाले सभी व्यपारियो की बिटिया चेक करने के साथ साथ उनकी बूटी कहा कहा से उनके पास आती है वो सब जानकारी भी चाइये तभी हम किसी नतीजे पे पहुंच सकते है

सूर्य नियों जी एक एक कर दोपहर से साम तक ड्रैगन सिटी के छोटे से छोटे व्यापारी से ले कर बड़े से बड़े व्यपारो से ड्रैगन बूटी से जुडी सभी जानकारिया जूठा ली थी

सूर्य .......... नियों जी एक मंथ से पहले जो ड्रैगन बूटी बेचने के लिया सिटी पहुंची वो अभी भी काम में ले सकते है किन्तु उसके बाद की सभी ड्रैगन बुटिया ख़राब है जैसा आपने बताया उनमे वो काले रंग का तरल मौजूद है आप उन सभी ड्रैगन बूटियों को जप्त कर लीजिये आवर जो इस्तेमाल करने लायक है उन्हें उचित कीमत से वाटपारी बेच सकते है जिस से जरुरत के लोग खरीद कर अपने ड्रैगन को खिला सके वैसे ये ब्लैक ड्रैगन सिटी कहा पे िस्थित है

नियों ........ उतर दिशा में िस्थित है ब्लैक ड्रैगन सिटी उच्च गुणवत्ता वाली ड्रैगन बूटी ुशी क्षेत्र में पति जाती है क्युकी वह का मौसम इन जड़ी बूटियों के लिया खाश है

सूर्य ....... ऐसा क्या खाश है वह की जलवायु में जो वह की जड़ी बूटियों के लिया उपयोगी है

नियों ........ ड्रैगन लोक के कुल क्षेत्रफल का 40 % निशा जल क्षेत्र में आता है बाकि 60 % में जंगल माउंटेन आवर ड्रैगन लोक के इंसान रहते है है जैसे जैसे आबादी भाड़ रही है वैसे वैसे इसका असर भी जंगल पे होता है पैर ड्रैगन आवर यहाँ के इंसान एक दूसरे से जुड़े है इस लिया जंगल आवर जानवरो की आगमियत भी समझते है ब्लैक ड्रैगन सिटी उन 4 सिटी में से एक है जो जड़ी बूटियों की गुणवत्ता के लिया जाना जाता है क्युकी की वह की जलवायु इन जड़ी बूटियों के अनुकूल है जीवित जवालामुखि बड़े बड़े पहाड़ घने विशालकाय जंगल आवर विशालकाय साफ सावच नदिया ज्वालामुखी आवर नदियों के कारन यहाँ के जंगल जड़ी बूटियों के लिया सबसे उत्तम स्थान है

सूर्य ......... आपने कहा 4 बड़ी सिटी मतलब एक तो ब्लैक ड्रैगन सिटी है बाकि तीन

नियों ........ छोटे मोठे सिटी कसबे तो बहुत है पैर उन सभी को ये 4 सिटी हे नियंत्रित करती है no.1 .ब्लैक ड्रैगन सिटी है क्युकी यहाँ पाए जाने वाले ड्रैगन 90% ब्लैक होते है इशू पे इस सिटी का नाम रखा गया था no. 2 . सिटी है निर्वाण सिटी no.3 ड्रैगन सिटी जिसका प्रतिनिधि डेवलिन जी है आवर no. 4 सिटी है आइस माउंटेन सिटी इन चारो सिटी को कण्ट्रोल करते है सम्राट सोलोमन आवर क्वीन एलिज़ाबेथ आपके सम्राट बनने के बाद सभी चारो सिटी आपके कण्ट्रोल में होगी आवर बाकि इन कितीयो के जैसा की पहले से चल रहा है वैसे हे आगे भी होगा चलिए हम सिटी पहुंच गए है

सूर्य आवर नियों जी अपने सामान्य रूप में लौट आये थे

सूर्य के आते हे वाइट ड्रैगन भी लौट आया था गोल्डन ड्रैगन पहले हे पहुंच चूका था

सूर्य कुछ देर वाइट ड्रैगन आवर गोल्डन ड्रैगन से जानकारी लेता है जो बहुत खाश थी हलाकि सूर्य ने काफी कुछ पहले हे पता कर लिया था

सूर्य ........ तुम दोनों ने बहुत अच्छा काम किया है जाओ जा कर मस्ती करो आवर चाहो तो आराम करो

सूर्य वह से सीधा अपने कक्ष में पंहुचा आवर किरण आवर शालिनी जी को सब बताता है जो कुछ भी उसे पता चला

शालिनी जी ....... ये तो किसी बीमारी की तरह लग रहा है जैसे कोई चुत की बीमारी हो बस फरक इतना है की वो बीमारी चुने से फैलती है आवर ये जैसे हवा में

किरण. ....... नहीं माँ अगर ऐसा होता तो इन ड्रैगन बूटी के सम्पर्क में आने से हे ड्रैगन पागल होने लगते पैर ऐसा है नहीं वो उनको खाने के बाद इस तरह का विहेव करते है

सूर्य ........ स्वीटी ऐसा संभव है. ी मैं ऐसा हो भी तो सकता है

किरण ....... कुंवर जी आप कहना क्या चाहते है

सूर्य ........ ी मैं मैं अभी आस्वस्थ नहीं हूँ इस थ्योरी से पैर एक पल के लिया सोचा जाये तो ये असंभव भी नहीं है भले हे इनका प्रभाव जैसा माँ ने बताया वैसा नहीं है पैर ये भी तो हो सकता है की इन जड़ी बूटियों में ये दूषित ब्लैक ब्लड जिसे ये नाम दिया गया है वो हवा के जरिये हे ड्रैगन बूटी को इफेकट कर रहा हो

शालिनी जी ....... हो सकता है पैर फिर भी हमें इसकी मुख्या जड़ तक पहुंचे बिना इसका कोई परमानेंट इलाज मुझे तो नजर नहीं आ रहा है

सूर्य ....... एक बात आवर है जब हम ी मैं मैं आवर नियों जी उन जड़ी बूटियों की जाँच कर रहे थे तब मैंने सभी बूटियों पे गौर किया वह बाकि जड़ी बूटियों पे इसका असर नहीं था सिवाय ड्रैगन बूटी के आवर सबसे ज्यादा प्रभाव ब्लैक ड्रैगन सिटी आवर उसके बाद थोड़ा काम निर्वाण सिटी से आई ड्रैगन बूटियों में था

किरण ......... मतलब की जो कुछ भी सुरु हुआ वो इन दो सिटी के आस पास से हे सुरु हुआ है कही इसके पीछे कोई असुर या ुशी पारवती का कोई डस्ट तो नहीं है

सूर्य ..... हम्म्म हो सकता है ऐसा संभव हो ये तो तभी पता चल सकता है जब हरिकी से इसकी जाँच हो

शालिनी जी ....... तुम्हे खुद इसका पता करना चाइये बिना किसी की नजर में आये आवर दूसरी बात तुम्हे ये जड़ी हे करना होगा सूर्य क्युकी तुम्हारी सदी में केवल 6 दिन हे बचे है अब

सूर्य ...... जी माँ मैं कल हे भेष बदल कर खोजबीन सुरु कर देता हूँ स्वीटी तुम भी मेरे साथ चलोगी माँ आप लोग गोल्डन ड्रैगन सिटी में हे रहेंगी

शालिनी जी ....... जब तुम दोनों हे यहाँ नहीं रहोगे तो हम यहाँ क्या करेंगे

सूर्य ....... आप लोग गम फिर लेना वैसे भी रात में हम दोनों आपके पास होंगे क्युकी गोल्डन ड्रैगन सिटी जूलिया आवर मैं कही से भी कण्ट्रोल कर अपने पास बुला सकते है

किरण ....... ठीक है हम कल सुबह इसकी खोज में निकालेंगे आप आज रात सब तयारी कर लेना चलिए अब बहार चलते है सभी के पास

सूर्य .......आप चलिए मुझे एकांत में कुछ देर रुकना है

किरण ...... ठीक है पैर जल्दी आइयेगा माँ चलिए हम चलते है बहार मानसी जूलिया के पास

दोनों के जाते हे सूर्य ध्यान में बेथ जाता है आवर आत्मा की गहराई में निर्भयासुर के सामने जा खड़ा होता है जो किसी चीज़ को पकडे हुए खड़ा था

सूर्य ....... तो आखिर तुमने वो स्थार्थ प्राप्त कर हे लिया

निर्भया ...... जी स्वामी आपके आदेशानुसार मैं सफल रहा ये दिव्या सरवन कमंडल आपके लिया है

सूर्य को कमंडल सौंपते हे निर्भयासुर से बहुत आदिक मात्रा में ऊर्जा निकलती है आवर सूर्य के चारो तरफ घेरा बना लेती है कुछ देर बाद निर्भया वह से गायब हो चूका था अब सूर्य वह मौजूद था आवर उसके हाथ में वो कमंडल

सूर्य ........ ये पवित्र जल किसी बहुत बड़े तपस्वी सिद्ध ऋषि के तपोबल से पवित्र ऊर्जा से पारी पूर्ण है ये किसी भी ा पवित्र ऊर्जा को पवित्र कर सकता है ये एक अनमोल दिव्या खजाना है इसका बहुत हे सोच समाज कर प्रयोग करना होगा अन्यथा इस दिव्या जल का दूर उपयोग हो जायेगा

सूर्य कुछ मंत्र बुदबुदाता है आवर वो कमंडल सूर्य के सीने के बीचों बिच गायब हो जाता है

सूर्य ....... ये दिव्या सुखद अहसास जैसे अतृप्त आत्मा तृप्त हो गयी हो आप जो कोई भी है या थे आपके तपोबल को मेरा साथ साथ नमन देवऋषि आपके आशीर्वाद रूपी इस दिव्या अनमोल भेंट के लिया मैं आपका ऋणी रहूँगा

सूर्य ध्यान से बहार निकलता है तो अपने सामने खड़े निर्भया को मुस्कुरा कर देखता है उसकी ऊर्जा पहले से काफी आदिक थी आवर एक पवित्र आभा प्रकार कर रही थी

निर्भयासुर ......... ये दिव्या कमंडल दिवंगत गुरुदेव भरम ऋषि के पुण्य तपोबल से पारी पूर्ण है आप इसका उचित उपयोग कीजियेगा स्वामी

सूर्य .........उन दिव्या भरम ऋषि के विषय में आवर बताओ मुझे निर्भया

निर्भया ....... ..... मुझे माफ करना पर उनका आदेश है की मैं उनके विषय में आवर कुछ भी न बताऊ आपको समय आने पे आप सब समाज जायेंगे यही कहा थस उन्होंने

सूर्य ........ ठीक है तुम्हे उनके आदेश का पालन करना चाइये आवर मैं भी तुम्हे विवश नहीं करूँगा

निर्भया ........ मैं आपके राज्य अभिषेक आवर विवाह के पश्चात असुरलोक जाने की आज्ञा चाहता हूँ

सूर्य ...... अभी नहीं निर्भया जब सही समय आएगा तो मैं तुमने नहीं रोकूंगा

कहते हुए सूर्य निर्भया को वो व्योमासुर जी द्वारा दी मायावी पुस्तक निर्भया को देता है

सूर्य ....... इसका अध्यन करो आवर इसमें लिखी गुप्त मायावी आसुरी विद्या का अभ्यास करो

निर्भया ...... जी ठीक है स्वामी

सूर्य .......ऐसे मुँह न लटकाओ बस कुछ दिन आवर फिर तुम असुरलोक जा कर नरकासुर को ऊँगली कर सकते हो मैं तुम्हे नहीं रोकूंगा बिलकुल भी पैर तब तक इस पुस्तक में लिखी सभी विधायक को अध्यन कर उनके पारंगत हो जाओ जब तुम सफल हो जाओ तो जा सकते हो

निर्भया ......... ठीक है मैं जल्द से जल्दी इन सभी विधयो में पारंगत हो जाऊंगा आप चिंता न करे .................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .................

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ........................
 
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