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शालिनी जी ........ एक बार महेंद्र भाई साहब से बात कर लीजिये इस बारे में उन्हें पता होगा की कहा से इतने कपडे लेने चाइये ताकि कोई दिकत न हो उनके मॉल के चलते उन्हें इस बारे में अच्छे से पता होगा ज्यादा होने पे हमारे किसी काम के तो होंगे नहीं ऐसे में उन्हें वापिस भी करना पद सकता है तो वो ुशी हिसाब से अपने वाटपारी दोस्तों से बात कर लेंगे
शिव ...... हम्म्म थी है मैं उनके साथ साथ पापा से भी इस बारे में बात करता हु क्या पता उन्होंने पहले से ऐसा कुछ सोच रखा हो तो
शालिनी जी ....... जी ठीक है
शिव ....... तुम आराम करो मैं भी कुछ देर रेस्ट करता हम
शिव वो कॉपी लिया वह से दूसरे रूम में चले गए आवर फ्रेश हो कर कुछ देर हिसाब किताब लगा कर लेट गए .......
अब आगे ..........
परीलोक .......... सूर्य किरण मानसी सुक्रलोक की यात्रा पूर्ण कर तीनो सूर्यगढ़ न जा कर सीधा परीलोक गुरुदेव से मिलने परीलोक पहुँचता है
जैसे हे सूर्य किरण मानसी ड्रैगन से उतर रानी महल की आवर भड़ते है महल की रक्षा में महल की सुरक्षा में तैनात सही सैनिक आवर परिया तीनो को विनम्रता से जुख कर उनका सम्मान करते है
रानी पारी को जब सूर्य किरण मानसी के लौटने की खबर मिलती है तो रानी पारी भी अपने कक्ष से निकल कर अपनी सेविकाओं के साथ महल के मध्य भाग में बने बड़े से खूबसूरत सही हॉल में पहुँचती है
परिधि को भी सूर्य किरण मानसी के आने की खबर अपनी सेविका से मिल चुकी थी जो इस वक़्त अपने कक्ष में किसी से हैश हैश कर बाते कर रही थी
परिधि ........ हमें भी चलना चाइये सायद उन्हें तुम्हारा यहाँ होने का पता नहीं है
लड़की ........ पहले न पता हो सखी पैर अब उन्हें जरूर इस बारे में पता चल गया होगा सायद उन्हें यहाँ मेरी ऊर्जा का आभाष हो चूका है
परिधि ...... ठीक है फिर तुम मेरे पीछे हे रुकना देखते है उन्हें कितना पता चला है तुम्हारे बारे में
परिधि अपनी उस सखी के साथ साथ अपनी 4 खाश सेविकाओं के साथ बहार सूर्य की आवर चल देती है
सूर्य किरण मानसी को सकुशल देख रानी पारी को रहत मह्सुश होती है
उनके मन में सूर्य की सुक्रलोक की यात्रा से एक अंजनी चिंता बानी हुई थी जो सूर्य को सुरक्षित आवर सही सलामत देखने के बाद हे दूर हुई
सूर्य किरण मानसी रानी पारी को देखते हे उनकी आवर बढे आवर तीनो ने एक साथ उनके चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेते है
सूर्य किरण मानसी ........ परनाम रानी माँ
रानी पारी ....... आयिष्मान भाव पुत्र साधा सौभाग्यवती भाव पुत्रियों
रानी पारी बरी बरी से किरण सूर्य आवर मानसी से गले लग कर मिलती है
रानी पारी को मानसी की ऊर्जा में काफी बदलाव मह्सुश होता है
रानी पारी ....... पुत्री मानसी तुम्हारी ऊर्जा में काफी बदलाव हुए है सुक्रलोक जाने के बाद
मानसी ....... जी रानी माँ मैं पहले से काफी ऊर्जावान मह्सुश कर रही हूँ खुद को ये सब कुंवर जी के कहने पे हुआ है
रानी पारी ...... ये तो अच्छी बात है पुत्री पैर कभी भी अपनी सक्तियो को स्वयं पे हावी मत होने देना किसी भी सकती या ऊर्जा का सदैव उचित उपयोग हे करना अन्यथा यही सकतिया हमारे पतन का कारन भी बन जाती है
तभी चारो के कानो में पारिजात की मीठी आवाज पड़ती है
पारिजात ........ रानी माँ अभी अभी तो ये इतने लम्बे सफर से लौटे है आवर आप अभी से इन्हें समजने बेथ गई है हमें भी तो अपनी बाँहों से मिलने दीजिये
रानी पारी ....... हमने कब आपको रोका है मिल लीजिये अपने कुंवर जी से
सूर्य की नजर बार बार पारिजात के पीछे जा रही थी
परिधि ......... क्या हुआ आप किसी आवर की प्रतीक्षा कर रहे है क्या
सूर्य ...... नहीं नहीं वो हमें आपके आस पास की ऊर्जा जिनि की ऊर्जा जैसे मह्सुश हुई पैर सायद ...
अभी सूर्य आगे कुछ बोलता की तभी उसे फिर से वही ऊर्जा मह्सुश हुई
सूर्य पारिजात के सामने पहुँचता है आवर उस से गले लग कर मिलता है
सूर्य ...... कैसी है आप परिधि आवर घर से कब आई आप
सूर्य परिधि से गले मिलने के बाद जब अलग होता है तो परिधि के बालो में लगी नीली तितली को वह से निकल लिया है
सूर्य ........जिनिशा सामने आ जाओ मैं तुम्हे इस रूप में भी देख सकता हूँ भले हे तुम पहले से काफी शक्तिशाली हो गई हो
वो तितली अगले हे पल सूर्य के हाथ से निकल कर कुछ हे दुरी पे देखते हे देखते पहले ऊर्जा में फिर जिनिशा के वास्तविक रूप में आ जाती है
पारिजात ..... हमें नहीं लगा था की आपको इतनी जल्दी पता चल जायेगा जिनिशा के विषय में
सूर्य ...... है सायद ये पहले वाली जिनिशा होती तो सायद मैं भी चूक जाता पैर अब जिनिशा महाजिन बनने के बहुत करीब है
रानी पारी ...... क्या ये सत्य है पुत्री जिनिशा
जिनिशा ...... जी रानी माँ हमें भी अभी कुछ दिन पहले हे पता चला पैर आपको कैसे पता अभी तो पिता श्री को भी इस विषय में हमने कुछ नहीं बताया है आवर न उन्हें इस बारे में पता चला है
किरण आवर मानसी भी परिधि आवर जिनिशा से बड़े हे प्यार से गले लग कर मिलती है जैसे चारो भने हो
तभी महल में विधि आवर गायत्री भी अपना अभ्यास कर पहुँचती है उन्हें सूर्य के यहाँ होने के बारे में बिलकुल भी पता नहीं थी
दोनों के कदम वही रुक गए जब दोनों की नजर सूर्य पे पड़ी
किरण ....... क्या हुआ विधि गायत्री आप दोनों वही क्यों रुक गई
किरण की आवाज से दोनों आने चेतना में लौटी
विधि आवर गायत्री भी वही आ पहुंची
रानी पारी ...... तुम सब आराम से बाते करो फिर हम सब साथ में भोजन करते है पुत्र सूर्य आप जरा हमारे साथ आओ
सूर्य ......जी रानी माँ
सूर्य रानी पारी के पीछे पीछे एक कक्ष में पहुँचता है
रानी पारी ........ पुत्र सूर्य सुक्रलोक में कोई परेशानी तो नहीं हुई न तुम सब को
सूर्य ...... नहीं रानी माँ कुछ खाश नहीं अब ये तो आप भी जानती है थोड़ा बहुत होने का अंदेशा तो था हे है पैर निर्भयासुर ने पहले हे असुरगुरु सुक्रयाचार्य के हाथ बांड कर उन्हें कुछ भी न कर पाने के लिया विवश कर दिया थे ऐसे में वो ज्यादा कुछ कर नहीं पाए थे
रानी पारी ........... ऐसा क्या किया निर्भया ने जिसके चलते असुरो के गुरु शुक्राचार्य जैसे तेज चालक बूढी के धनि शुक्राचार्य भी विवश हो गए
सूर्य .......... उम्मीद तो मुझे भी नहीं थी की ऐसा हो सकता है पैर यही सच है आवर जैसा गुरुदेव ने कहा था उनसे सावधान रहने का वो भी उचित कहा था गुरुदेव ने उनके विषय में जब वो खुद कुछ न कर पाने में विवश हो गए तो उन्होंने अपनी पुत्री देवी देवयानी जी को इस कार्य पे लगा दिया
रानी पारी ......कैसा कार्य पुत्र आवर देवयानी ने कुछ अनुचित तो नहीं किया न तुम्हारे साथ
सूर्य ........ माँ आप काफी चिंता करती है आपका पुत्र इतना सक्षम हो चूका है बूढी आवर बल दोनों से हे को सामने वाले की मन को समाज सके
रानी पारी सूर्य के मुँह से माँ सुन कर काफी खुश थी
रानी पारी ...... हेहेहे पुत्र वो असुरो के गुरु है गुरु शुक्राचार्य उन्हें समाज पाना इतना सरल नहीं तुम सवयं को बल आवर बूढी में परिपक्व समाज सकते हो किन्तु योध में केवल बल आवर बूढी का हे प्रयोग नहीं होता है आवर खाश कर जब सामने असुर या दानव हो तब तो बिलकुल भी नहीं ये लोग बल बूढी से ज्यादा चाल का प्रयोग करते है इस लिया इनसे सदैव सचेत रहो वैसे देवयानी को किस कार्य का भर सौंपा था असुरगुरु ने
सूर्य ...... असुरगुरु शुक्राचार्य ने देवी देवयानी जी को मेरी वास्तविकता का पता करने का कार्य दिया गया था
रानी पारी ....... क्या तो क्या देवयानी इस में सफल हो पायी
सूर्य ....... आपकी क्या लगता है माँ इतनी आसानी से अपनी वास्तविकता का किसी को भी पता चलने दे सकता हूँ क्या उन्होंने दो बार कोशिश की पैर एक बार निर्भयासुर ने आवर एक बार किरण ने उनकी सरीर योजनाओ पे पानी फेयर दिया मुझे अपनी सकती का प्रदर्शन करने की जरुरत हे नहीं पड़ी तो उनके हाथ भी कुछ नहीं लगा
रानी पारी एक गहरी साँस लेती है आवर फिर सूर्य को मानसी की बदली हुई ऊर्जा के बारे में पूछती है जिस पैर सूर्य उन्हें सुक्रलोक की नाड़ी के विषय में आवर व्योमासुर द्वारा दी पुस्तक का प्रयोग किया जाना सब विस्तार से बताया
रानी पारी ...... इसका मतलब पुत्र तुम आवर पुत्री किरण को भी वह से ऊर्जा प्राप्त हुई है
सूर्य ..... है आपने सायद ध्यान नहीं दिया है पैर मेरे सरीर में उस ऊर्जा से काफी बदलाव हुए है जैसे की मेरे सरीर के तव्चा काफी सख्त हो चुकी है आवर हड़िया भी पहले से काफी मजबूत हो चुकी है बाकि असर कैसा है कुछ समय में पता चल हे जायेगा
रानी पारी ...... उचित है पुत्र चलो चल कर भोजन करते है गुरुदेव भी महल की आवर निकल गए है
सूर्य ...... क्या वो ध्यान से बहार आ गए है
रानी पारी ...... है आवर गुरुदेव अभी महल पहुंचने वाले है
सूर्य रानी पारी दोनों करीब आधे घंटे बात करने के बाद बहार निकलते है
कुछ देर बाद गुरुदेव भी वह आ जाते है
सभी गुरुदेव से आशीर्वाद लेते है
कुछ देर बाद सभी भोजन करते है सूर्य भोजन के बाद गुरुदेव के साथ मंदिर पहुँचता है
गुरुदेव को ध्यान के माध्यम से सुक्रलोक में जो कुछ भी सूर्य के साथ हुआ था उसका पता पहले से हे गुरुदेव को था
सूर्य ....... गुरुदेव क्या असुरगुरु शुक्राचार्य मेरे वास्तविकता परिचय से परचित होंगे
गुरुदेव ....... नहीं पुत्र अभी तो नहीं पैर ये उनके लिया कोई कठिन कार्य नहीं है आज नहीं तो कल वो कोई न कोई ऐसा मार्ग निकल हे लेंगे जिस से उन्हें तुम्हारे दिव्या अंश होने का पता चल जायेगा वो ज्ञानी ऋषि है उनके ज्ञान के भंडार को कमतर आंकना उचित नहीं पुत्र न जाने कोण कोण से गुप्ती ज्ञान को उन्होंने अपने ज्ञान रूपी भंडार में छुपा रखे है ऐसे में उन्हें ज्यादा समय नहीं लगेगा पुत्र हमारे पक्ष में जो सबसे उत्तम हुआ वो है निर्भयासुर का पूर्व जनम में उनका शिष्य होना आवर उस से शुक्राचार्य का आदिक लगाव आवर दूसरा है नरकासुर के लिया उनके मन में देवेश ( शत्रुता ) के भाव जिसके चलते अगर उन्हें तुम्हारी आवर पुत्री किरण की वास्तविकता का ज्ञान हुआ भी तो वो तुम्हारे मार्ग में कोई बढ़ा नहीं बनेंगे पुत्र
सूर्य ...... आप इस बात को ले कर इतने संतुष्ट कैसे है गुरुदेव
आप कुछ आवर भी जानते है उनके बारे में जिसके चलते आप निश्चिन्त है
गुरुदेव ........ है ये सत्य है पुत्र किन्तु ये बात इस समय मायने नहीं रखती पुत्र तुम्हारे पास जो दिव्या मायावी मणि है उसे बहार निकालो
सूर्य ......दिव्या मायावी मणि
गुरुदेव ....... पुत्र सूर्य भूलो नहीं हम भी आद्यात्मिक रूप में सुक्रलोक में तुम्हारे साथ यात्रा पर थे
सूर्य ........ जी गुरुदेव
सूर्य आवर मानसी को जो सुक्रलोक की नाड़ी में हलके लाल रंग का जो रतन मिला था जिसे सूर्य ने मानसी के स्पर्श करने से पूर्व हे उसे लाल कपडे से पकड़ कर बॉक्स में बंद कर दिया था उसे प्रकट करता है आवर गुरुदेव के सामने करता है
गुरुदेव के हाथ के इसारे पे वो बॉक्स खुल जाता है आवर उस से वो रतन नुमा लाल मणि अपने आप हे हवा में ऊपर उठने लगती है
सूर्य ........ गुरुदेव क्या ये रतन या मायावी मणि नकारात्मक ऊर्जा का स्त्रोत है
गुरुदेव ........ नहीं पुत्र सूर्य है इस्पे आसुरी ऊर्जा का प्रभाव अवश्य है किन्तु इसे नस्ट किया जा सकता है
आसुरी ऊर्जा के संपर्क में आने से कुछ प्रभाव अवश्य हुआ है इस्पे
सूर्य ......... क्या उस आसुरी ऊर्जा के प्रभाव से इसे मुक्त किया जा सकता है गुरुदेव मानसी सायद इसे दर्जन करना चाहती है
गुरुदेव ......... है पुत्र सूर्य इस्पे से आसुरी ऊर्जा का प्रभाव समाप्त किया जा सकता है इसके सुधिकरण के बाद पुत्री मानसी इसे दर्जन कर सकती है इस से पुत्री मानसी को अपनी मायावी सक्तियो में निपुणता प्राप्त करने में बहुत सहायक सिद्ध होगी ये दिव्या मायावी मणि
सूर्य ........ जी गुरुदेव
गुरुदेव ....... अब तुम महल लौट जाओ पुत्र सभी तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे है
सूर्य ........ जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश गुरुदेव मैं सूर्यौदय के साथ हे पृथ्वीलोक के लिया निकल जाऊंगा मेरे लिया आवर कोई आदेश
गुरुदेव ........ नहीं पुत्र अभी तुम अपने परिवार में कुछ समय दो फिर तुम्हे ड्रैगन लोक भी निकलना होगा पूजा पे भेंट होगी पुत्र
सूर्य ....... जी गुरुदेव आज्ञा दीजिये परनाम गुरुदेव
गुरुदेव ......... अवश्य पुत्र ईश्वर तुम्हारा कल्याण करे
सूर्य गुरुदेव से कुछ देर बात कर महल लौट आता है सभी 6 लड़किया परिधि के रूम में सुक्रलोक की हे चर्चा कर रही थी
सूर्य ....... तुम सब अभी तक सोये नहीं क्या
परिधि ....... हम आपका हे इन्तजार कर रहे थे
किरण ........ मानसी हमें चल कर आराम करना चाइये
मानसी किरण का इसरा समाज कर उसके साथ जाने के लिया कड़ी हो जाती है
दरशल किरण चाहती थी की सूर्य कुछ वक़्त जिनिशा परिधि विधि आवर गायत्री के साथ भी वक़्त बिताये
सूर्य ...... स्वीटी हम सुबह जल्दी हे घर के लिया निकालेंगे
किरण ........ ठीक है कुंवर जी
किराम मानसी के जाते हे विधि आवर गायत्री भी वह से निकल गयी
परिधि सूर्य का हाथ पकड़ कर अपने साथ बीएड पे बैठा लेती है
सूर्य ....... परिधि क्या तुम लोग थोड़ा आवर इन्तजार करोगे
परिधि ......... ठीक है हम आपका इन्तजार करेंगी पैर ज्यादा देर मत कीजियेगा
सूर्य पारधी के गाल को प्यार से सहला कर एक कक्ष को छोड़ कर दूसरे कक्ष में चला जाता है जहा गायत्री अकेली हे बैठी हुई थी
सूर्य को देख गायत्री झट से कड़ी हो जाती है
सूर्य ......हाहाहा क्या हुआ गायत्री तुम इस तरह से चौंक क्यों गई आराम से बैठो तुम्हारा अपना रूम है ये न की मेरा
तभी विधि अपने रात के कपड़ो में बाथरूम से बहार निकलती है
गायत्री ....... आप यहाँ बैठो मैं कपडे बदल कर आती हूँ
विधि पहले रूम को लॉक करती है आवर फिर सूर्य के सामने आ कर कड़ी हो जाती है
सूर्य विधि का हाथ पकड़ कर अपने नजदीक करता है
सूर्य. ....... आप दोनों का अभ्यास कैसा चल रहा है मन लगा कर अभ्यास रो कर रही है न आप दोनों
विधि ........ जैसा गुरुदेव ने बताया हम ुशी तरह से कर रहे है कभी कभी पारिजात दीदी तो कभी सिद्धू दीदी हमें तलवारबाज़ी आवर तीरंदाज़ी भी सिखाती है
सूर्य. ........ तुम दोनों को यहाँ अच्छा तो लग रहा है न
तभी बाथरूम से बहार निकलती गायत्री बोलती है
गायत्री ......... ऐसे जगह किसी पसंद नहीं आएगी ऐसे जगह में रहना तो हर इंसान का सपना होता है थैंक यू आपका जो आपने हमारे लिया इतना कुछ किया
सूर्य ....... मैंने तुम दोनों को पहले भी कहा था न की ये मैंने अपने लिया किया न की तुम दोनों के लिया
सूर्य विधि को लिया बीएड पे लेट जाता है आवर दोनों से काफी देर बात करता है
विधि बार बार सूर्य के चेहरे को देख रही थी वो जैसे किसी कसमकश में हो
गायत्री पहले से कफ समझदार हो गयी थी वो विधि के चेहरे को देख अच्छे से समाज गई थी की विधि क्या सोच रही है
गायत्री ......... चुटकी अब इतना भी न सोच की सोच सोच में हे रात निकल जाये
सूर्य ........ क्या हुआ विधि कुछ कहना है क्या
गायत्री .......कहना नहीं है इसे आपको किश करना है पैर हिमायत नहीं कर प् रही है सायद मेरे सामने
गायत्री की बात सुन विधु सरम से अपना चेहरा सूर्य के बाजु के पीछे छुपा लेती है
सूर्य ........ हाहाहा क्या इतनी देर से यही सोच रही थी विधि तुम
सूर्य डेरी से विधि का चेहरा अपने सामने करता है जिसने काश कर अपनी आँखे बंद कर राखी ठु आसाराम से विधि का चेहरा गुलाबी हो रखा था
विधि को इस तरह देख सूर्य को उसके काफी प्यार आता है
सूर्य विधि को अपने ऊपर लेते हुए बड़े प्यार से विधि के नाजुक होंठ चूसने लगता है डेरी डेरी विधु भी सूर्य के होंठ चूसने लगती है
सूर्य विधु की मीठी जुबान को चुस्त है जिस से विधि अपने हाथ सूर्य के बालो में फिरने लगती है
गायत्री . ........ अरे चुटकी अब बस भी कर कुछ मेरे लिया भी छोड़ दे मेरी बहन मैं भी यही हूँ
गायत्री की बात सुन विधि झट से सूर्य से अलग हो जाती है
सूर्य गायत्री के ऊपर आ उसे किश करने लगता है
गायत्री के कड़क निप्पल्स सूर्य को अपने सीने में हलके चुब्ते हुए मह्सुश होते है
सूर्य का हाथ कब गायत्री को किश करते हुए उसकी कमर से होता हुआ नंगे पेट पे फिसलता हुआ गायत्री की राइट चुकी पे जा पहुँचता है
.गायत्री का अपने सीने पे किसी पुरुष का पहला नंगा स्पर्श था सूर्य पुर विधि के किश को देख वो पहले से हे एक्ससिटेड थी ऊपर से सूर्य के हाथ अपने 34 की कोमल सॉफ्ट बूब्स से मह्सुश कर मज़े में गायत्री की आँखे बंद हो जाती है आवर खुद से सूर्य का हाथ अनजाने में हे गायत्री अपने बूब्स दबाने लगती है 4से 5 मिनट्स बाद एक के बाद एक झटका खा कर गायत्री निढाल हो लम्भी लम्भी सांसे लेने लगती है
सूर्य कुछ आवर समय दोनों के साथ बिता कर उन्हें गुड नाईट विश कर रूम से निकलता है आवर परिधि आवर जिनिशा के साथ जा कर लेट जाता है तीनो कुछ देर मस्ती करते है ी मैं किश वगेरा फिर दोनों सूर्य के साथ चैन की नींद सो जाती है ...........
सूर्यगढ़ ..........
सुबह सुबह सूर्यौदय के साथ हे किरण मानसी सूर्य तीनो हवेली लौट आये थे
सभी ने किरण मानसी सूर्य से सुक्रलोक की यात्रा के विषय में पूछा सूर्य ने सभी को कुछ बाते बता दी आवर कुछ छुपा लिया
शिव ........ चलो अच्छी बात है बीटा की तुम तीनो सकुसल आवर समय से लौट कल की पूजा है आवर तुम्हारे सूर्यकांत सर भी पुरे परिवार के साथ इस पूजा में शामिल होने आ रहे है
सूर्य ....... ये तो अच्छी बात है पापा मेरी भी राधिका भाबी से बात हुई थी उन लोगो की 10 बजे की फ्लाइट है तो वो लोग करीब साढ़े 11 के आस पास लेंड करेंगे
शिव ....... अब तुम आ गए हो तो ये लोग कार्गो लिस्ट ये सामान भी ुशी फ्लाइट से आ रहा ये भी लेते आना आवर सूर्यकांत जी की फॅमिली को भी साथ लेते आना मैं बाकि के काम देख लेता हूँ तुम्हारे फूफा जी के साथ
सूर्य ....... जी पापा जैसा आप कहे मैं वयोम को साथ ले जाता हूँ एक कार काम पड़ेगी
दादा जी ...... है ये ठीक रहेगा पैर अभी आराम से नास्ता करो अभी 9 हे बजे है बीटा आराम से चले जाना
सूर्य ....... जी दादा जी
अभी ये लोग नास्ता कर हे रहे थे की बहार से कोई कार हवेली में इंटर करती है
किरण ....... ये तो बड़े पापा की कार है
शालिनी जी ....... है ये जोरावर भाई सा की हे कार है
तभी कुछ बैग्स के साथ जोरावर जी हवेली के अंदर आते है
जोरावर जी दादा जी आवर दादी जी को परनाम कर एक चिर खींच कर उसपे बेथ जाते है आवर सामने राखी चंडी की थाल को अपने सामने रखते हुए खाना डालने का इशारा करते है
महेंद्र जी ....... क्यों भाई सुबह सुबह भुखड़ो की तरह क्यों पेश आ रहे हो
जोरावर जी .......... यार बड़ी जोरो की भूख लगी है जयपुर से सीधा ीदार हे आ रहा हूँ
दादी जी जोरावर जी के कान को कीचते हुए कहती है
दादी जी ........ बीटा काम जरुरी है पैर इतना भी नहीं की टाइम से खाना भी न खा सको तो फिर इतनी म्हणत का क्या फायदा आराम से खाना खो आवर कुछ देर आराम करो उसके बाद हे कुछ आवर करने की सोचना शालू बेटी अपने बड़े भाई सा को नास्ता प्रोशो बेटी
शालिनी जी ........ जी माँ सा
सूर्य ........ वैसे मां जी सुबह सुबह इतनी जल्दी किस बात की है कोई परेशानी है क्या
जोरावर जी ....... नहीं बीटा ऐसा कुछ नहीं है जयपुर कुछ काम था तो उसे पूरा कर सुबह जल्दी हे निकल लिया रस्ते में आँख लगने भूख लगी नहीं तो बिच में कुछ खा पि भी नयी पाए बीटा जरा बहार सिक्योरिटी वालो को भी नास्ता दे दो वो भी सुबह जल्दी हे बिना खाये मेरे साथ निकले है
सूर्य जो अपना नास्ता पूरा कर चूका था उसने 4,5 प्लेट नास्ते की लगवाने कर जोरावर जी के सिक्योरिटी वालो को एक एक प्लेट नास्ते की दे दी वो लोग बहार लोने में खुर्शियो पे बे थे
सूर्य गेराज से 2 कार्स बहार निकलता है आवर नोकरो को साफ करने के लिया बोलता है
जोरावर जी ....... उसकी जरुरत नहीं है बीटा मेरी कार्स बहार हे उनमे से ले जाओ तुम्हे कही जाना हे है तो
सूर्य ...... वो मां जी 2 कार्स की जरुरत पद सकती है दिल्ली से कुछ मेहमान आ रहे है आवर फिर िंहकी भी धूल मिटटी साफ हो जाएगी तो कभी भी जरुरत के वक़्त काम आ सकती है
जोरावर जी ........कोई बात नहीं बीटा इन्हें नौकर साफ कर देंगे तुम मेरी वाली ले जाना पैर पहले मुझे कुछ बात करनी है तुमसे
सूर्य ..... जी मां जी
सूर्य जोरावर जी वह से कुछ दूर पे जा कर बात करने लगते है
करीब आधे घंटे बाद दोनों तपिश हविली की तरफ आते है
सूर्य ........ वैसे तो ये सरकारी काम है आप खुद भी तो कर सकते थे
जोरावर जी ...... बात तो तुम्हारी ठीक है पैर अभी जो हमारी पार्टी की सर्कार है उसमे से काफी लोग विपक्ष के नेताओ से संत गांठ करे हुए है वो सब भरोशे के लोग नहीं हमारी सर्कार भी गिर सकती है ऐसे में हमें कुछ तो ऐसा करना होगा जिस से जनता खुद हमारे पक्ष में हो
सूर्य ....... वैसे फ़िलहाल तो मेरी खाश बड़े बुसिनेस्स्में से जान पहचान नहीं है पैर कुछ लोग है जिन्हे अगर सर्कार की मदद मिलती है तो वो अपना बिज़नेस कंपनी आवर प्लांट यहाँ लगाने के लिया राज़ी हो जायेंगे वैसे इस बारे में पापा आवर फूफा जी से बात करना आप ताकि वो भी अपनी एक ब्रांच यहाँ खोल सके
जोरावर जी ...... है इस लिया हे तो सीधा यहाँ आया हूँ
सूर्य . .......... ः मंत्री वाली चल चलने लगे है आप भी मां जी अंदर सभी सोच रहे है आप हमसे मिलने आये है पैर ये किसी को नहीं पता की इसकी दूसरी वजह भी है खेर छोड़िये मैं अभी तो नहीं पैर जल्द हे कॉलेज जाने लग जाऊंगा तब आपका काम कर दूंगा
जोरावर जी ........ चलो अंदर चलते है 10 बजने वाले है तुम्हे भी निकलना होगा न बीटा
सूर्य .....जी मां जी
कुछ देर बाद सूर्य अपनी कार लिया जोरावर जी के 2 कार्स के साथ जैसलमेर की आवर निकल जाता है
करीब सवा 11 बजे सूर्य एयरपोर्ट की पार्किंग में कार्स लगा कर दोनों सिक्योरिटी ड्राइवर के साथ एयरपोर्ट के अंदर चल देता है करीब 10 मिनट्स बाद दिल्ली की फ्लाइट लेंड करती है
उसमे से सूर्यकांत जी उनकी वाईफ गोविन्द जी मधु जी राधिका दीप्ती माया सोफिया सुनिधि सानिया निकल कर बहार की आवर भड़ती है
सामने हे उन्हें सूर्य नजर आ जाता है जो दो स्पेशल सिक्योरिटी वालो के साथ उनकी तरफ हे भाड़ रहा था
सूर्य ........ Hi अंकल hi आंटी जी कैसे है आप सफर में कोई परेशानी तो नहीं हुई
सूर्यकांत जी ....... हम सब अच्छे है बीटा आवर 1:30 घंटे के सफर में कैसी परेशानी बीटा इनसे मिलो इन्हें तो तुम जानते हो ये राधिका बेटी की माँ है मधु जी आवर ये राधिका के डैड mr.govind
सूर्य ...... Hi अंकल जी hi आंटी जी
गोविन्द जी ....... Hello बीटा सूर्य बहुत सुना है तुम्हारे बारे में तुम्हारे सूर्यकांत उन्सेल से तुम बिलकुल वैसे हे हो
मढ़ी जी ....... दामाद जी कहते हुए सरम आ रही है क्या आपको
सूर्य तो ये सुन कर हड़बड़ा गया की ये मधु आंटी क्या बोल रही है वो भी सभी के बिच
गोविन्द जी ..... हाहाहा अब दामाद है तो है भाई इसमें शर्माने की क्या बात है क्यों भाई साहब
सूर्यकांत जी ....... बिलकुल सही भाई अब जब छोटा दामाद मान लिया तो कबूलने में कैसी सरम
सूर्य तो कभी दीप्ती की देख तो कभी मुस्कुराती राधिका को की आखिर ये सब चल क्या रहा है
तभी मधु जी आगे बढ़ सूर्य से गले लग कर मिलती है आवर डेरी से सूर्य के कान में बोलती है
मधु जी .......... हेहेहे उन्हें कुछ नहीं पता किरण को बेटी आवर तुम्हे दामाद स्वीकार किया है भले हे सबकी नजरो में मेरी दोनों बेटीये के पति अलग है पैर मैं हे जानती हूँ की राधिका तुम्हे किस रूप में मानती है
अब जा कर सूर्य को थोड़ी चैन की साँस आई की इनका ये मतलब था एक पल को तो उसकी भी धड़कन बढ़ा दी थी मधु जी ने
सूर्य हलके से घर कर राधिका को देखता है जो फ़ौरन दीप्ती के पीछे दुबक जाती है
सूर्य ....... बेबी के लिया कॉंग्रट्स भाबी जी आने में कोई परेशानी तो नहीं हुई न आवर आपने पहले क्यों नहीं बताया की माया सानिया आवर सुनिधि भी आ रहे है
सुनिधि ......... क्यों हमारे आने से प्रॉब्लम है क्या मर. सूर्य
सूर्य ....... हाहाहा पागल हो क्या वो तो मैं इस लिया पूछ रहा था ताकि एक्स्ट्रा कार ले आता खेर कोई बात तीन कार्स है तो प्रॉब्लम नहीं होगी
दीप्ती ....... वैसे ये स्पेशल सिक्योरिटी किस लिया है आवर तुम्हे इनकी जरुरत कब से पड़ने लगी है
सूर्य दोनों को कार्गो की डिटेल लिस्ट देता है आवर उन्हें कुछ समजा कर भेज देता है
सूर्यकांत जी ........ बीटा तुम्हे इन सबकी जरुरत कब से पड़ें लगी शेर को भी अब सिक्योरिटी की जरुरत पड़ने लगी है क्या
सूर्य. ....... ऐसा कुछ नहीं है उन्सेल वो दरशल दिल्ली से कुछ सामान आया है फ्लाइट से तो वो भी साथ लेना था ऐसे में मां जी ने अपनी कार्स साथ में भेज दी ताकि परेशानी न हो चलिए वो लोग भी आ गए है .
कुछ हे देर में 4 बड़े कार्गो बैग के साथ दोनों सिक्योरिटी वाले भी आ जाते है
सूर्य सबको ले कर पार्किंग में पहुँचता है
सूर्य सभी का सामान कार्स की डिकी में रखवा देता है
एक कार में सूर्यकांत जी माया सानिया आवर आंटी जी बेथ जाते है
दूसरी कार में मधु जी गोविन्द जी आवर सुनिधि
सूर्य की कार में पहले हे राधिका आगे की सीट पे जा बैठी थी
दीप्ती ...... चलो सोफिया हम पीछे की सीट पे बेथ जाते है
सफिया आवर दीप्ती पीछे की सीट पे बेथ जाती है
सूर्य अपनी कार आगे बढ़ा देता है
जल्दी हे तीनो कार्स जैसलमेर से बहार की आवर निकल जाती है
दीप्ती ........ मैंने तो सुना था तुम काम से बहार हो
सूर्य ....... है वो मैं सुबह हे घर पंहुचा था वह पता चला की कल की पूजा है आवर आप सब आ रहे तो पापा ने कहा की तुम हे सभी को ले आओ तो मैं हे आप सभी को लेने आ गया
दीप्ती ....... वैसे तुम चाचा बनने वाले हो बहुत जल्द
सूर्य......... हाहाहा साथ में पापा भी
राधिका सूर्य की बात सुन मुस्कुराते हुए पीछे की सोफिया की आवर इसरा करती है
दीप्ती ...... है ये भी बिलकुल सही है
राधिका ....... दीदी आप भी इनके साथ मजाक कर रही है
दीप्ती ........ इसमें मजाक कैसा स्वीटी भी तो प्रेग्नेंट है
सोफिया ...... भाबीजां आप बात को गलत समाज गई
अब सोफिया की कोण बताये की राधिका भी सही है अपनी जगह
सूर्य ....... हाहाहा बिलकुल सही कहा सोफी तुमने
दीप्ती ........ सोफी
सोफिया ........ वो हमारे दोस्त है न तो वो हमें इशू नाम से बुलाते है
दीप्ती ........ हेहेहे ये सिर्फ दोस्ती हे है न या कुछ आवर तो नहीं तुम दोनों देख कर लगता तो कुछ आवर हे है
सूर्य को बात पलटना हे सही लगा
सूर्य ....... वैसे भाबी रोहन भाई नहीं आये आपके साथ
राधिका ....... उन्हें चुटी नहीं मिली आवर सायद एक लम्बे समय तक मिलने की उम्मीद भी नहीं है
दीप्ती ......... वैसे यार तुम सच में बड़े तेज निकले
सूर्य ....... अब मैंने क्या कर दिया दीप्ती जी
दीप्ती ........ रोहन को ये कारनामा करने में इतना टाइम लगा तुमने तो 2 महीने भी नहीं लिया पापा बनने में हेहेहे
सूर्य ........ अब इसमें भी मेरी हे गलती है क्या जब जिसकी किस्मत में जो लिखा होता है तभी उसे मिलता है
दीप्ती ......... हेहेहे किस्मत के साथ साथ इंसान को म्हणत भी करनी पड़ती है
सोफिया ........ दीदी ये आप कैसी बाते कर रही है
सूर्य ...... हम मंजिल पे पहुंच गए है
सूर्य अपनी कार सीधा हवेली में गेराज के सामने लगता है
उसके पीछे पीछे हे दोनों कार्स भी आ कड़ी होती है हवेली पहुंचते पहुंचते साढ़े 12 बज गए थे
सूर्य उतर कर डिकी से सारा सामान निकलता है आवर नौकर सारा सामान हवेली में पंहुचा देते है
सूर्य सभी को लिया भीतर चल देता है दादा जी दादी जी के साथ जोरावर जी महेंद्र जी शिव विजय जी भी वही बे थे बाते कर रहे थे
सूर्यकांत जी आगे बढ़ शिव महेंद्र जोरावर जी से हेल्थ मिलते है आवर दादा जी आवर दादी जी के पेअर छूटे है
दादा जी दादी जी .......... जीते रहो बीटा
सूर्यकांत जी ....... बाउजी ये राधिका बेटी के माता पिता है
दादा जी ......... मतलब की ये भी हमारा लिए तो बीटा आवर बहु है
गोविन्द जी आवर मढ़ी जी दोनों एक साथ दादा जी के पेअर छूटे है
दादा जी ....... ईश्वर आपकी जोड़ी बनाये रखे बीटा
शिव. ....... कोमल बीटा सभी को रूम दिखा दो ताकि सब फ्रेश हो जाये फिर लंच कर आराम से बाते करो या रेस्ट करो
राधा आवर मेर्री जी सभी के लिया ठंडा शरबत ले कर आती है
आवर सरबाट के साथ साथ सभी का परिचय हो जाता है आवर एक दूसरे से बाते करने लगते है ................
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स..........
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ....................
दोस्तों ये अपडेट उम्मीद अनुसार नहीं है इसके लिया माफ़ी चाहता हूँ ..........
शालिनी जी ........ एक बार महेंद्र भाई साहब से बात कर लीजिये इस बारे में उन्हें पता होगा की कहा से इतने कपडे लेने चाइये ताकि कोई दिकत न हो उनके मॉल के चलते उन्हें इस बारे में अच्छे से पता होगा ज्यादा होने पे हमारे किसी काम के तो होंगे नहीं ऐसे में उन्हें वापिस भी करना पद सकता है तो वो ुशी हिसाब से अपने वाटपारी दोस्तों से बात कर लेंगे
शिव ...... हम्म्म थी है मैं उनके साथ साथ पापा से भी इस बारे में बात करता हु क्या पता उन्होंने पहले से ऐसा कुछ सोच रखा हो तो
शालिनी जी ....... जी ठीक है
शिव ....... तुम आराम करो मैं भी कुछ देर रेस्ट करता हम
शिव वो कॉपी लिया वह से दूसरे रूम में चले गए आवर फ्रेश हो कर कुछ देर हिसाब किताब लगा कर लेट गए .......
अब आगे ..........
परीलोक .......... सूर्य किरण मानसी सुक्रलोक की यात्रा पूर्ण कर तीनो सूर्यगढ़ न जा कर सीधा परीलोक गुरुदेव से मिलने परीलोक पहुँचता है
जैसे हे सूर्य किरण मानसी ड्रैगन से उतर रानी महल की आवर भड़ते है महल की रक्षा में महल की सुरक्षा में तैनात सही सैनिक आवर परिया तीनो को विनम्रता से जुख कर उनका सम्मान करते है
रानी पारी को जब सूर्य किरण मानसी के लौटने की खबर मिलती है तो रानी पारी भी अपने कक्ष से निकल कर अपनी सेविकाओं के साथ महल के मध्य भाग में बने बड़े से खूबसूरत सही हॉल में पहुँचती है
परिधि को भी सूर्य किरण मानसी के आने की खबर अपनी सेविका से मिल चुकी थी जो इस वक़्त अपने कक्ष में किसी से हैश हैश कर बाते कर रही थी
परिधि ........ हमें भी चलना चाइये सायद उन्हें तुम्हारा यहाँ होने का पता नहीं है
लड़की ........ पहले न पता हो सखी पैर अब उन्हें जरूर इस बारे में पता चल गया होगा सायद उन्हें यहाँ मेरी ऊर्जा का आभाष हो चूका है
परिधि ...... ठीक है फिर तुम मेरे पीछे हे रुकना देखते है उन्हें कितना पता चला है तुम्हारे बारे में
परिधि अपनी उस सखी के साथ साथ अपनी 4 खाश सेविकाओं के साथ बहार सूर्य की आवर चल देती है
सूर्य किरण मानसी को सकुशल देख रानी पारी को रहत मह्सुश होती है
उनके मन में सूर्य की सुक्रलोक की यात्रा से एक अंजनी चिंता बानी हुई थी जो सूर्य को सुरक्षित आवर सही सलामत देखने के बाद हे दूर हुई
सूर्य किरण मानसी रानी पारी को देखते हे उनकी आवर बढे आवर तीनो ने एक साथ उनके चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेते है
सूर्य किरण मानसी ........ परनाम रानी माँ
रानी पारी ....... आयिष्मान भाव पुत्र साधा सौभाग्यवती भाव पुत्रियों
रानी पारी बरी बरी से किरण सूर्य आवर मानसी से गले लग कर मिलती है
रानी पारी को मानसी की ऊर्जा में काफी बदलाव मह्सुश होता है
रानी पारी ....... पुत्री मानसी तुम्हारी ऊर्जा में काफी बदलाव हुए है सुक्रलोक जाने के बाद
मानसी ....... जी रानी माँ मैं पहले से काफी ऊर्जावान मह्सुश कर रही हूँ खुद को ये सब कुंवर जी के कहने पे हुआ है
रानी पारी ...... ये तो अच्छी बात है पुत्री पैर कभी भी अपनी सक्तियो को स्वयं पे हावी मत होने देना किसी भी सकती या ऊर्जा का सदैव उचित उपयोग हे करना अन्यथा यही सकतिया हमारे पतन का कारन भी बन जाती है
तभी चारो के कानो में पारिजात की मीठी आवाज पड़ती है
पारिजात ........ रानी माँ अभी अभी तो ये इतने लम्बे सफर से लौटे है आवर आप अभी से इन्हें समजने बेथ गई है हमें भी तो अपनी बाँहों से मिलने दीजिये
रानी पारी ....... हमने कब आपको रोका है मिल लीजिये अपने कुंवर जी से
सूर्य की नजर बार बार पारिजात के पीछे जा रही थी
परिधि ......... क्या हुआ आप किसी आवर की प्रतीक्षा कर रहे है क्या
सूर्य ...... नहीं नहीं वो हमें आपके आस पास की ऊर्जा जिनि की ऊर्जा जैसे मह्सुश हुई पैर सायद ...
अभी सूर्य आगे कुछ बोलता की तभी उसे फिर से वही ऊर्जा मह्सुश हुई
सूर्य पारिजात के सामने पहुँचता है आवर उस से गले लग कर मिलता है
सूर्य ...... कैसी है आप परिधि आवर घर से कब आई आप
सूर्य परिधि से गले मिलने के बाद जब अलग होता है तो परिधि के बालो में लगी नीली तितली को वह से निकल लिया है
सूर्य ........जिनिशा सामने आ जाओ मैं तुम्हे इस रूप में भी देख सकता हूँ भले हे तुम पहले से काफी शक्तिशाली हो गई हो
वो तितली अगले हे पल सूर्य के हाथ से निकल कर कुछ हे दुरी पे देखते हे देखते पहले ऊर्जा में फिर जिनिशा के वास्तविक रूप में आ जाती है
पारिजात ..... हमें नहीं लगा था की आपको इतनी जल्दी पता चल जायेगा जिनिशा के विषय में
सूर्य ...... है सायद ये पहले वाली जिनिशा होती तो सायद मैं भी चूक जाता पैर अब जिनिशा महाजिन बनने के बहुत करीब है
रानी पारी ...... क्या ये सत्य है पुत्री जिनिशा
जिनिशा ...... जी रानी माँ हमें भी अभी कुछ दिन पहले हे पता चला पैर आपको कैसे पता अभी तो पिता श्री को भी इस विषय में हमने कुछ नहीं बताया है आवर न उन्हें इस बारे में पता चला है
किरण आवर मानसी भी परिधि आवर जिनिशा से बड़े हे प्यार से गले लग कर मिलती है जैसे चारो भने हो
तभी महल में विधि आवर गायत्री भी अपना अभ्यास कर पहुँचती है उन्हें सूर्य के यहाँ होने के बारे में बिलकुल भी पता नहीं थी
दोनों के कदम वही रुक गए जब दोनों की नजर सूर्य पे पड़ी
किरण ....... क्या हुआ विधि गायत्री आप दोनों वही क्यों रुक गई
किरण की आवाज से दोनों आने चेतना में लौटी
विधि आवर गायत्री भी वही आ पहुंची
रानी पारी ...... तुम सब आराम से बाते करो फिर हम सब साथ में भोजन करते है पुत्र सूर्य आप जरा हमारे साथ आओ
सूर्य ......जी रानी माँ
सूर्य रानी पारी के पीछे पीछे एक कक्ष में पहुँचता है
रानी पारी ........ पुत्र सूर्य सुक्रलोक में कोई परेशानी तो नहीं हुई न तुम सब को
सूर्य ...... नहीं रानी माँ कुछ खाश नहीं अब ये तो आप भी जानती है थोड़ा बहुत होने का अंदेशा तो था हे है पैर निर्भयासुर ने पहले हे असुरगुरु सुक्रयाचार्य के हाथ बांड कर उन्हें कुछ भी न कर पाने के लिया विवश कर दिया थे ऐसे में वो ज्यादा कुछ कर नहीं पाए थे
रानी पारी ........... ऐसा क्या किया निर्भया ने जिसके चलते असुरो के गुरु शुक्राचार्य जैसे तेज चालक बूढी के धनि शुक्राचार्य भी विवश हो गए
सूर्य .......... उम्मीद तो मुझे भी नहीं थी की ऐसा हो सकता है पैर यही सच है आवर जैसा गुरुदेव ने कहा था उनसे सावधान रहने का वो भी उचित कहा था गुरुदेव ने उनके विषय में जब वो खुद कुछ न कर पाने में विवश हो गए तो उन्होंने अपनी पुत्री देवी देवयानी जी को इस कार्य पे लगा दिया
रानी पारी ......कैसा कार्य पुत्र आवर देवयानी ने कुछ अनुचित तो नहीं किया न तुम्हारे साथ
सूर्य ........ माँ आप काफी चिंता करती है आपका पुत्र इतना सक्षम हो चूका है बूढी आवर बल दोनों से हे को सामने वाले की मन को समाज सके
रानी पारी सूर्य के मुँह से माँ सुन कर काफी खुश थी
रानी पारी ...... हेहेहे पुत्र वो असुरो के गुरु है गुरु शुक्राचार्य उन्हें समाज पाना इतना सरल नहीं तुम सवयं को बल आवर बूढी में परिपक्व समाज सकते हो किन्तु योध में केवल बल आवर बूढी का हे प्रयोग नहीं होता है आवर खाश कर जब सामने असुर या दानव हो तब तो बिलकुल भी नहीं ये लोग बल बूढी से ज्यादा चाल का प्रयोग करते है इस लिया इनसे सदैव सचेत रहो वैसे देवयानी को किस कार्य का भर सौंपा था असुरगुरु ने
सूर्य ...... असुरगुरु शुक्राचार्य ने देवी देवयानी जी को मेरी वास्तविकता का पता करने का कार्य दिया गया था
रानी पारी ....... क्या तो क्या देवयानी इस में सफल हो पायी
सूर्य ....... आपकी क्या लगता है माँ इतनी आसानी से अपनी वास्तविकता का किसी को भी पता चलने दे सकता हूँ क्या उन्होंने दो बार कोशिश की पैर एक बार निर्भयासुर ने आवर एक बार किरण ने उनकी सरीर योजनाओ पे पानी फेयर दिया मुझे अपनी सकती का प्रदर्शन करने की जरुरत हे नहीं पड़ी तो उनके हाथ भी कुछ नहीं लगा
रानी पारी एक गहरी साँस लेती है आवर फिर सूर्य को मानसी की बदली हुई ऊर्जा के बारे में पूछती है जिस पैर सूर्य उन्हें सुक्रलोक की नाड़ी के विषय में आवर व्योमासुर द्वारा दी पुस्तक का प्रयोग किया जाना सब विस्तार से बताया
रानी पारी ...... इसका मतलब पुत्र तुम आवर पुत्री किरण को भी वह से ऊर्जा प्राप्त हुई है
सूर्य ..... है आपने सायद ध्यान नहीं दिया है पैर मेरे सरीर में उस ऊर्जा से काफी बदलाव हुए है जैसे की मेरे सरीर के तव्चा काफी सख्त हो चुकी है आवर हड़िया भी पहले से काफी मजबूत हो चुकी है बाकि असर कैसा है कुछ समय में पता चल हे जायेगा
रानी पारी ...... उचित है पुत्र चलो चल कर भोजन करते है गुरुदेव भी महल की आवर निकल गए है
सूर्य ...... क्या वो ध्यान से बहार आ गए है
रानी पारी ...... है आवर गुरुदेव अभी महल पहुंचने वाले है
सूर्य रानी पारी दोनों करीब आधे घंटे बात करने के बाद बहार निकलते है
कुछ देर बाद गुरुदेव भी वह आ जाते है
सभी गुरुदेव से आशीर्वाद लेते है
कुछ देर बाद सभी भोजन करते है सूर्य भोजन के बाद गुरुदेव के साथ मंदिर पहुँचता है
गुरुदेव को ध्यान के माध्यम से सुक्रलोक में जो कुछ भी सूर्य के साथ हुआ था उसका पता पहले से हे गुरुदेव को था
सूर्य ....... गुरुदेव क्या असुरगुरु शुक्राचार्य मेरे वास्तविकता परिचय से परचित होंगे
गुरुदेव ....... नहीं पुत्र अभी तो नहीं पैर ये उनके लिया कोई कठिन कार्य नहीं है आज नहीं तो कल वो कोई न कोई ऐसा मार्ग निकल हे लेंगे जिस से उन्हें तुम्हारे दिव्या अंश होने का पता चल जायेगा वो ज्ञानी ऋषि है उनके ज्ञान के भंडार को कमतर आंकना उचित नहीं पुत्र न जाने कोण कोण से गुप्ती ज्ञान को उन्होंने अपने ज्ञान रूपी भंडार में छुपा रखे है ऐसे में उन्हें ज्यादा समय नहीं लगेगा पुत्र हमारे पक्ष में जो सबसे उत्तम हुआ वो है निर्भयासुर का पूर्व जनम में उनका शिष्य होना आवर उस से शुक्राचार्य का आदिक लगाव आवर दूसरा है नरकासुर के लिया उनके मन में देवेश ( शत्रुता ) के भाव जिसके चलते अगर उन्हें तुम्हारी आवर पुत्री किरण की वास्तविकता का ज्ञान हुआ भी तो वो तुम्हारे मार्ग में कोई बढ़ा नहीं बनेंगे पुत्र
सूर्य ...... आप इस बात को ले कर इतने संतुष्ट कैसे है गुरुदेव
आप कुछ आवर भी जानते है उनके बारे में जिसके चलते आप निश्चिन्त है
गुरुदेव ........ है ये सत्य है पुत्र किन्तु ये बात इस समय मायने नहीं रखती पुत्र तुम्हारे पास जो दिव्या मायावी मणि है उसे बहार निकालो
सूर्य ......दिव्या मायावी मणि
गुरुदेव ....... पुत्र सूर्य भूलो नहीं हम भी आद्यात्मिक रूप में सुक्रलोक में तुम्हारे साथ यात्रा पर थे
सूर्य ........ जी गुरुदेव
सूर्य आवर मानसी को जो सुक्रलोक की नाड़ी में हलके लाल रंग का जो रतन मिला था जिसे सूर्य ने मानसी के स्पर्श करने से पूर्व हे उसे लाल कपडे से पकड़ कर बॉक्स में बंद कर दिया था उसे प्रकट करता है आवर गुरुदेव के सामने करता है
गुरुदेव के हाथ के इसारे पे वो बॉक्स खुल जाता है आवर उस से वो रतन नुमा लाल मणि अपने आप हे हवा में ऊपर उठने लगती है
सूर्य ........ गुरुदेव क्या ये रतन या मायावी मणि नकारात्मक ऊर्जा का स्त्रोत है
गुरुदेव ........ नहीं पुत्र सूर्य है इस्पे आसुरी ऊर्जा का प्रभाव अवश्य है किन्तु इसे नस्ट किया जा सकता है
आसुरी ऊर्जा के संपर्क में आने से कुछ प्रभाव अवश्य हुआ है इस्पे
सूर्य ......... क्या उस आसुरी ऊर्जा के प्रभाव से इसे मुक्त किया जा सकता है गुरुदेव मानसी सायद इसे दर्जन करना चाहती है
गुरुदेव ......... है पुत्र सूर्य इस्पे से आसुरी ऊर्जा का प्रभाव समाप्त किया जा सकता है इसके सुधिकरण के बाद पुत्री मानसी इसे दर्जन कर सकती है इस से पुत्री मानसी को अपनी मायावी सक्तियो में निपुणता प्राप्त करने में बहुत सहायक सिद्ध होगी ये दिव्या मायावी मणि
सूर्य ........ जी गुरुदेव
गुरुदेव ....... अब तुम महल लौट जाओ पुत्र सभी तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे है
सूर्य ........ जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश गुरुदेव मैं सूर्यौदय के साथ हे पृथ्वीलोक के लिया निकल जाऊंगा मेरे लिया आवर कोई आदेश
गुरुदेव ........ नहीं पुत्र अभी तुम अपने परिवार में कुछ समय दो फिर तुम्हे ड्रैगन लोक भी निकलना होगा पूजा पे भेंट होगी पुत्र
सूर्य ....... जी गुरुदेव आज्ञा दीजिये परनाम गुरुदेव
गुरुदेव ......... अवश्य पुत्र ईश्वर तुम्हारा कल्याण करे
सूर्य गुरुदेव से कुछ देर बात कर महल लौट आता है सभी 6 लड़किया परिधि के रूम में सुक्रलोक की हे चर्चा कर रही थी
सूर्य ....... तुम सब अभी तक सोये नहीं क्या
परिधि ....... हम आपका हे इन्तजार कर रहे थे
किरण ........ मानसी हमें चल कर आराम करना चाइये
मानसी किरण का इसरा समाज कर उसके साथ जाने के लिया कड़ी हो जाती है
दरशल किरण चाहती थी की सूर्य कुछ वक़्त जिनिशा परिधि विधि आवर गायत्री के साथ भी वक़्त बिताये
सूर्य ...... स्वीटी हम सुबह जल्दी हे घर के लिया निकालेंगे
किरण ........ ठीक है कुंवर जी
किराम मानसी के जाते हे विधि आवर गायत्री भी वह से निकल गयी
परिधि सूर्य का हाथ पकड़ कर अपने साथ बीएड पे बैठा लेती है
सूर्य ....... परिधि क्या तुम लोग थोड़ा आवर इन्तजार करोगे
परिधि ......... ठीक है हम आपका इन्तजार करेंगी पैर ज्यादा देर मत कीजियेगा
सूर्य पारधी के गाल को प्यार से सहला कर एक कक्ष को छोड़ कर दूसरे कक्ष में चला जाता है जहा गायत्री अकेली हे बैठी हुई थी
सूर्य को देख गायत्री झट से कड़ी हो जाती है
सूर्य ......हाहाहा क्या हुआ गायत्री तुम इस तरह से चौंक क्यों गई आराम से बैठो तुम्हारा अपना रूम है ये न की मेरा
तभी विधि अपने रात के कपड़ो में बाथरूम से बहार निकलती है
गायत्री ....... आप यहाँ बैठो मैं कपडे बदल कर आती हूँ
विधि पहले रूम को लॉक करती है आवर फिर सूर्य के सामने आ कर कड़ी हो जाती है
सूर्य विधि का हाथ पकड़ कर अपने नजदीक करता है
सूर्य. ....... आप दोनों का अभ्यास कैसा चल रहा है मन लगा कर अभ्यास रो कर रही है न आप दोनों
विधि ........ जैसा गुरुदेव ने बताया हम ुशी तरह से कर रहे है कभी कभी पारिजात दीदी तो कभी सिद्धू दीदी हमें तलवारबाज़ी आवर तीरंदाज़ी भी सिखाती है
सूर्य. ........ तुम दोनों को यहाँ अच्छा तो लग रहा है न
तभी बाथरूम से बहार निकलती गायत्री बोलती है
गायत्री ......... ऐसे जगह किसी पसंद नहीं आएगी ऐसे जगह में रहना तो हर इंसान का सपना होता है थैंक यू आपका जो आपने हमारे लिया इतना कुछ किया
सूर्य ....... मैंने तुम दोनों को पहले भी कहा था न की ये मैंने अपने लिया किया न की तुम दोनों के लिया
सूर्य विधि को लिया बीएड पे लेट जाता है आवर दोनों से काफी देर बात करता है
विधि बार बार सूर्य के चेहरे को देख रही थी वो जैसे किसी कसमकश में हो
गायत्री पहले से कफ समझदार हो गयी थी वो विधि के चेहरे को देख अच्छे से समाज गई थी की विधि क्या सोच रही है
गायत्री ......... चुटकी अब इतना भी न सोच की सोच सोच में हे रात निकल जाये
सूर्य ........ क्या हुआ विधि कुछ कहना है क्या
गायत्री .......कहना नहीं है इसे आपको किश करना है पैर हिमायत नहीं कर प् रही है सायद मेरे सामने
गायत्री की बात सुन विधु सरम से अपना चेहरा सूर्य के बाजु के पीछे छुपा लेती है
सूर्य ........ हाहाहा क्या इतनी देर से यही सोच रही थी विधि तुम
सूर्य डेरी से विधि का चेहरा अपने सामने करता है जिसने काश कर अपनी आँखे बंद कर राखी ठु आसाराम से विधि का चेहरा गुलाबी हो रखा था
विधि को इस तरह देख सूर्य को उसके काफी प्यार आता है
सूर्य विधि को अपने ऊपर लेते हुए बड़े प्यार से विधि के नाजुक होंठ चूसने लगता है डेरी डेरी विधु भी सूर्य के होंठ चूसने लगती है
सूर्य विधु की मीठी जुबान को चुस्त है जिस से विधि अपने हाथ सूर्य के बालो में फिरने लगती है
गायत्री . ........ अरे चुटकी अब बस भी कर कुछ मेरे लिया भी छोड़ दे मेरी बहन मैं भी यही हूँ
गायत्री की बात सुन विधि झट से सूर्य से अलग हो जाती है
सूर्य गायत्री के ऊपर आ उसे किश करने लगता है
गायत्री के कड़क निप्पल्स सूर्य को अपने सीने में हलके चुब्ते हुए मह्सुश होते है
सूर्य का हाथ कब गायत्री को किश करते हुए उसकी कमर से होता हुआ नंगे पेट पे फिसलता हुआ गायत्री की राइट चुकी पे जा पहुँचता है
.गायत्री का अपने सीने पे किसी पुरुष का पहला नंगा स्पर्श था सूर्य पुर विधि के किश को देख वो पहले से हे एक्ससिटेड थी ऊपर से सूर्य के हाथ अपने 34 की कोमल सॉफ्ट बूब्स से मह्सुश कर मज़े में गायत्री की आँखे बंद हो जाती है आवर खुद से सूर्य का हाथ अनजाने में हे गायत्री अपने बूब्स दबाने लगती है 4से 5 मिनट्स बाद एक के बाद एक झटका खा कर गायत्री निढाल हो लम्भी लम्भी सांसे लेने लगती है
सूर्य कुछ आवर समय दोनों के साथ बिता कर उन्हें गुड नाईट विश कर रूम से निकलता है आवर परिधि आवर जिनिशा के साथ जा कर लेट जाता है तीनो कुछ देर मस्ती करते है ी मैं किश वगेरा फिर दोनों सूर्य के साथ चैन की नींद सो जाती है ...........
सूर्यगढ़ ..........
सुबह सुबह सूर्यौदय के साथ हे किरण मानसी सूर्य तीनो हवेली लौट आये थे
सभी ने किरण मानसी सूर्य से सुक्रलोक की यात्रा के विषय में पूछा सूर्य ने सभी को कुछ बाते बता दी आवर कुछ छुपा लिया
शिव ........ चलो अच्छी बात है बीटा की तुम तीनो सकुसल आवर समय से लौट कल की पूजा है आवर तुम्हारे सूर्यकांत सर भी पुरे परिवार के साथ इस पूजा में शामिल होने आ रहे है
सूर्य ....... ये तो अच्छी बात है पापा मेरी भी राधिका भाबी से बात हुई थी उन लोगो की 10 बजे की फ्लाइट है तो वो लोग करीब साढ़े 11 के आस पास लेंड करेंगे
शिव ....... अब तुम आ गए हो तो ये लोग कार्गो लिस्ट ये सामान भी ुशी फ्लाइट से आ रहा ये भी लेते आना आवर सूर्यकांत जी की फॅमिली को भी साथ लेते आना मैं बाकि के काम देख लेता हूँ तुम्हारे फूफा जी के साथ
सूर्य ....... जी पापा जैसा आप कहे मैं वयोम को साथ ले जाता हूँ एक कार काम पड़ेगी
दादा जी ...... है ये ठीक रहेगा पैर अभी आराम से नास्ता करो अभी 9 हे बजे है बीटा आराम से चले जाना
सूर्य ....... जी दादा जी
अभी ये लोग नास्ता कर हे रहे थे की बहार से कोई कार हवेली में इंटर करती है
किरण ....... ये तो बड़े पापा की कार है
शालिनी जी ....... है ये जोरावर भाई सा की हे कार है
तभी कुछ बैग्स के साथ जोरावर जी हवेली के अंदर आते है
जोरावर जी दादा जी आवर दादी जी को परनाम कर एक चिर खींच कर उसपे बेथ जाते है आवर सामने राखी चंडी की थाल को अपने सामने रखते हुए खाना डालने का इशारा करते है
महेंद्र जी ....... क्यों भाई सुबह सुबह भुखड़ो की तरह क्यों पेश आ रहे हो
जोरावर जी .......... यार बड़ी जोरो की भूख लगी है जयपुर से सीधा ीदार हे आ रहा हूँ
दादी जी जोरावर जी के कान को कीचते हुए कहती है
दादी जी ........ बीटा काम जरुरी है पैर इतना भी नहीं की टाइम से खाना भी न खा सको तो फिर इतनी म्हणत का क्या फायदा आराम से खाना खो आवर कुछ देर आराम करो उसके बाद हे कुछ आवर करने की सोचना शालू बेटी अपने बड़े भाई सा को नास्ता प्रोशो बेटी
शालिनी जी ........ जी माँ सा
सूर्य ........ वैसे मां जी सुबह सुबह इतनी जल्दी किस बात की है कोई परेशानी है क्या
जोरावर जी ....... नहीं बीटा ऐसा कुछ नहीं है जयपुर कुछ काम था तो उसे पूरा कर सुबह जल्दी हे निकल लिया रस्ते में आँख लगने भूख लगी नहीं तो बिच में कुछ खा पि भी नयी पाए बीटा जरा बहार सिक्योरिटी वालो को भी नास्ता दे दो वो भी सुबह जल्दी हे बिना खाये मेरे साथ निकले है
सूर्य जो अपना नास्ता पूरा कर चूका था उसने 4,5 प्लेट नास्ते की लगवाने कर जोरावर जी के सिक्योरिटी वालो को एक एक प्लेट नास्ते की दे दी वो लोग बहार लोने में खुर्शियो पे बे थे
सूर्य गेराज से 2 कार्स बहार निकलता है आवर नोकरो को साफ करने के लिया बोलता है
जोरावर जी ....... उसकी जरुरत नहीं है बीटा मेरी कार्स बहार हे उनमे से ले जाओ तुम्हे कही जाना हे है तो
सूर्य ...... वो मां जी 2 कार्स की जरुरत पद सकती है दिल्ली से कुछ मेहमान आ रहे है आवर फिर िंहकी भी धूल मिटटी साफ हो जाएगी तो कभी भी जरुरत के वक़्त काम आ सकती है
जोरावर जी ........कोई बात नहीं बीटा इन्हें नौकर साफ कर देंगे तुम मेरी वाली ले जाना पैर पहले मुझे कुछ बात करनी है तुमसे
सूर्य ..... जी मां जी
सूर्य जोरावर जी वह से कुछ दूर पे जा कर बात करने लगते है
करीब आधे घंटे बाद दोनों तपिश हविली की तरफ आते है
सूर्य ........ वैसे तो ये सरकारी काम है आप खुद भी तो कर सकते थे
जोरावर जी ...... बात तो तुम्हारी ठीक है पैर अभी जो हमारी पार्टी की सर्कार है उसमे से काफी लोग विपक्ष के नेताओ से संत गांठ करे हुए है वो सब भरोशे के लोग नहीं हमारी सर्कार भी गिर सकती है ऐसे में हमें कुछ तो ऐसा करना होगा जिस से जनता खुद हमारे पक्ष में हो
सूर्य ....... वैसे फ़िलहाल तो मेरी खाश बड़े बुसिनेस्स्में से जान पहचान नहीं है पैर कुछ लोग है जिन्हे अगर सर्कार की मदद मिलती है तो वो अपना बिज़नेस कंपनी आवर प्लांट यहाँ लगाने के लिया राज़ी हो जायेंगे वैसे इस बारे में पापा आवर फूफा जी से बात करना आप ताकि वो भी अपनी एक ब्रांच यहाँ खोल सके
जोरावर जी ...... है इस लिया हे तो सीधा यहाँ आया हूँ
सूर्य . .......... ः मंत्री वाली चल चलने लगे है आप भी मां जी अंदर सभी सोच रहे है आप हमसे मिलने आये है पैर ये किसी को नहीं पता की इसकी दूसरी वजह भी है खेर छोड़िये मैं अभी तो नहीं पैर जल्द हे कॉलेज जाने लग जाऊंगा तब आपका काम कर दूंगा
जोरावर जी ........ चलो अंदर चलते है 10 बजने वाले है तुम्हे भी निकलना होगा न बीटा
सूर्य .....जी मां जी
कुछ देर बाद सूर्य अपनी कार लिया जोरावर जी के 2 कार्स के साथ जैसलमेर की आवर निकल जाता है
करीब सवा 11 बजे सूर्य एयरपोर्ट की पार्किंग में कार्स लगा कर दोनों सिक्योरिटी ड्राइवर के साथ एयरपोर्ट के अंदर चल देता है करीब 10 मिनट्स बाद दिल्ली की फ्लाइट लेंड करती है
उसमे से सूर्यकांत जी उनकी वाईफ गोविन्द जी मधु जी राधिका दीप्ती माया सोफिया सुनिधि सानिया निकल कर बहार की आवर भड़ती है
सामने हे उन्हें सूर्य नजर आ जाता है जो दो स्पेशल सिक्योरिटी वालो के साथ उनकी तरफ हे भाड़ रहा था
सूर्य ........ Hi अंकल hi आंटी जी कैसे है आप सफर में कोई परेशानी तो नहीं हुई
सूर्यकांत जी ....... हम सब अच्छे है बीटा आवर 1:30 घंटे के सफर में कैसी परेशानी बीटा इनसे मिलो इन्हें तो तुम जानते हो ये राधिका बेटी की माँ है मधु जी आवर ये राधिका के डैड mr.govind
सूर्य ...... Hi अंकल जी hi आंटी जी
गोविन्द जी ....... Hello बीटा सूर्य बहुत सुना है तुम्हारे बारे में तुम्हारे सूर्यकांत उन्सेल से तुम बिलकुल वैसे हे हो
मढ़ी जी ....... दामाद जी कहते हुए सरम आ रही है क्या आपको
सूर्य तो ये सुन कर हड़बड़ा गया की ये मधु आंटी क्या बोल रही है वो भी सभी के बिच
गोविन्द जी ..... हाहाहा अब दामाद है तो है भाई इसमें शर्माने की क्या बात है क्यों भाई साहब
सूर्यकांत जी ....... बिलकुल सही भाई अब जब छोटा दामाद मान लिया तो कबूलने में कैसी सरम
सूर्य तो कभी दीप्ती की देख तो कभी मुस्कुराती राधिका को की आखिर ये सब चल क्या रहा है
तभी मधु जी आगे बढ़ सूर्य से गले लग कर मिलती है आवर डेरी से सूर्य के कान में बोलती है
मधु जी .......... हेहेहे उन्हें कुछ नहीं पता किरण को बेटी आवर तुम्हे दामाद स्वीकार किया है भले हे सबकी नजरो में मेरी दोनों बेटीये के पति अलग है पैर मैं हे जानती हूँ की राधिका तुम्हे किस रूप में मानती है
अब जा कर सूर्य को थोड़ी चैन की साँस आई की इनका ये मतलब था एक पल को तो उसकी भी धड़कन बढ़ा दी थी मधु जी ने
सूर्य हलके से घर कर राधिका को देखता है जो फ़ौरन दीप्ती के पीछे दुबक जाती है
सूर्य ....... बेबी के लिया कॉंग्रट्स भाबी जी आने में कोई परेशानी तो नहीं हुई न आवर आपने पहले क्यों नहीं बताया की माया सानिया आवर सुनिधि भी आ रहे है
सुनिधि ......... क्यों हमारे आने से प्रॉब्लम है क्या मर. सूर्य
सूर्य ....... हाहाहा पागल हो क्या वो तो मैं इस लिया पूछ रहा था ताकि एक्स्ट्रा कार ले आता खेर कोई बात तीन कार्स है तो प्रॉब्लम नहीं होगी
दीप्ती ....... वैसे ये स्पेशल सिक्योरिटी किस लिया है आवर तुम्हे इनकी जरुरत कब से पड़ने लगी है
सूर्य दोनों को कार्गो की डिटेल लिस्ट देता है आवर उन्हें कुछ समजा कर भेज देता है
सूर्यकांत जी ........ बीटा तुम्हे इन सबकी जरुरत कब से पड़ें लगी शेर को भी अब सिक्योरिटी की जरुरत पड़ने लगी है क्या
सूर्य. ....... ऐसा कुछ नहीं है उन्सेल वो दरशल दिल्ली से कुछ सामान आया है फ्लाइट से तो वो भी साथ लेना था ऐसे में मां जी ने अपनी कार्स साथ में भेज दी ताकि परेशानी न हो चलिए वो लोग भी आ गए है .
कुछ हे देर में 4 बड़े कार्गो बैग के साथ दोनों सिक्योरिटी वाले भी आ जाते है
सूर्य सबको ले कर पार्किंग में पहुँचता है
सूर्य सभी का सामान कार्स की डिकी में रखवा देता है
एक कार में सूर्यकांत जी माया सानिया आवर आंटी जी बेथ जाते है
दूसरी कार में मधु जी गोविन्द जी आवर सुनिधि
सूर्य की कार में पहले हे राधिका आगे की सीट पे जा बैठी थी
दीप्ती ...... चलो सोफिया हम पीछे की सीट पे बेथ जाते है
सफिया आवर दीप्ती पीछे की सीट पे बेथ जाती है
सूर्य अपनी कार आगे बढ़ा देता है
जल्दी हे तीनो कार्स जैसलमेर से बहार की आवर निकल जाती है
दीप्ती ........ मैंने तो सुना था तुम काम से बहार हो
सूर्य ....... है वो मैं सुबह हे घर पंहुचा था वह पता चला की कल की पूजा है आवर आप सब आ रहे तो पापा ने कहा की तुम हे सभी को ले आओ तो मैं हे आप सभी को लेने आ गया
दीप्ती ....... वैसे तुम चाचा बनने वाले हो बहुत जल्द
सूर्य......... हाहाहा साथ में पापा भी
राधिका सूर्य की बात सुन मुस्कुराते हुए पीछे की सोफिया की आवर इसरा करती है
दीप्ती ...... है ये भी बिलकुल सही है
राधिका ....... दीदी आप भी इनके साथ मजाक कर रही है
दीप्ती ........ इसमें मजाक कैसा स्वीटी भी तो प्रेग्नेंट है
सोफिया ...... भाबीजां आप बात को गलत समाज गई
अब सोफिया की कोण बताये की राधिका भी सही है अपनी जगह
सूर्य ....... हाहाहा बिलकुल सही कहा सोफी तुमने
दीप्ती ........ सोफी
सोफिया ........ वो हमारे दोस्त है न तो वो हमें इशू नाम से बुलाते है
दीप्ती ........ हेहेहे ये सिर्फ दोस्ती हे है न या कुछ आवर तो नहीं तुम दोनों देख कर लगता तो कुछ आवर हे है
सूर्य को बात पलटना हे सही लगा
सूर्य ....... वैसे भाबी रोहन भाई नहीं आये आपके साथ
राधिका ....... उन्हें चुटी नहीं मिली आवर सायद एक लम्बे समय तक मिलने की उम्मीद भी नहीं है
दीप्ती ......... वैसे यार तुम सच में बड़े तेज निकले
सूर्य ....... अब मैंने क्या कर दिया दीप्ती जी
दीप्ती ........ रोहन को ये कारनामा करने में इतना टाइम लगा तुमने तो 2 महीने भी नहीं लिया पापा बनने में हेहेहे
सूर्य ........ अब इसमें भी मेरी हे गलती है क्या जब जिसकी किस्मत में जो लिखा होता है तभी उसे मिलता है
दीप्ती ......... हेहेहे किस्मत के साथ साथ इंसान को म्हणत भी करनी पड़ती है
सोफिया ........ दीदी ये आप कैसी बाते कर रही है
सूर्य ...... हम मंजिल पे पहुंच गए है
सूर्य अपनी कार सीधा हवेली में गेराज के सामने लगता है
उसके पीछे पीछे हे दोनों कार्स भी आ कड़ी होती है हवेली पहुंचते पहुंचते साढ़े 12 बज गए थे
सूर्य उतर कर डिकी से सारा सामान निकलता है आवर नौकर सारा सामान हवेली में पंहुचा देते है
सूर्य सभी को लिया भीतर चल देता है दादा जी दादी जी के साथ जोरावर जी महेंद्र जी शिव विजय जी भी वही बे थे बाते कर रहे थे
सूर्यकांत जी आगे बढ़ शिव महेंद्र जोरावर जी से हेल्थ मिलते है आवर दादा जी आवर दादी जी के पेअर छूटे है
दादा जी दादी जी .......... जीते रहो बीटा
सूर्यकांत जी ....... बाउजी ये राधिका बेटी के माता पिता है
दादा जी ......... मतलब की ये भी हमारा लिए तो बीटा आवर बहु है
गोविन्द जी आवर मढ़ी जी दोनों एक साथ दादा जी के पेअर छूटे है
दादा जी ....... ईश्वर आपकी जोड़ी बनाये रखे बीटा
शिव. ....... कोमल बीटा सभी को रूम दिखा दो ताकि सब फ्रेश हो जाये फिर लंच कर आराम से बाते करो या रेस्ट करो
राधा आवर मेर्री जी सभी के लिया ठंडा शरबत ले कर आती है
आवर सरबाट के साथ साथ सभी का परिचय हो जाता है आवर एक दूसरे से बाते करने लगते है ................
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स..........
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ....................
दोस्तों ये अपडेट उम्मीद अनुसार नहीं है इसके लिया माफ़ी चाहता हूँ ..........

