Incest kahani - Shikari Ki Bimari - Page 3 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest kahani - Shikari Ki Bimari

अपडेट 15
कोई 2 सप्ताह बाईट होंगे , मैं कॉलेज नहीं गया था , सुबह से शाम तक बस अखाड़े में म्हणत करता रहता और रत को चाचियों के साथ मजे करता , मेरे घर में अखाडा जाने की परंपरा सदियों से चली आ रही थी इसलिए घर वालो को पता था की एक पहलवान की डाइट क्या होनी चाहिए , मेरी पूरी डाइट hi चेंज कर दी गयी थी और माँ ने सही कहा था अखाड़े में vargis(exercise) करने से मेरे अंदर कुछ अलग hi परिवर्तन हो रहे थे , मैं अपनी हवस में काबू प् रहा था लेकिन वही स्टैमिना और भी ज्यादा बढ़ने लगा था, मैं अपने अंदर खून के परवाह को भी महसूस कर सकता था (जो लोग रेगुलर एक्सरसाइज करते है वो इससे इत्तेफाक रखते होंगे, नशो में खून का बहाना भी पता चलता है हैवी वेट एक्सरसाइज के बाद )

जेने का अपना अलग hi मजा आ रहा था , और मेरे मसल्स भी तेजी से बाद रहे थे , ऐसे पिता जी के कारण मैं बचपन से hi एक्सरसाइज करता आ रहा था लेकिन अब मैं रूल्स को भी फॉलो करने लगा था जैसा की यंहा के पहलवान करते थे , और मेरे परिवार के मायनो में वो पहलवान योद्धा कहलाते थे ..

सुबह सुबह का वक़्त था मैं परिमल के साथ कुस्ती लड़ रहा था, ऐसे तो मैं 2 सप्ताह में hi अच्छे अच्छे पहलवानो को पास्ट कर दे रहा था लेकिन परिमल भी काम नहीं था उसने तो बचपन से hi इसकी ट्रेनिंग ली थी इसलिए वो मेरे सामने टिक पता था ..

एक दूसरे को उठा कर पटकने में हमें बहुत मजा आता , शरीर मिटटी से सना हुआ था और पसीने से भीगा हुआ , ये अखाडा मंदिर के पास hi था और वही थोड़ी दूर में गजराज चाचा का घर था , हमें एक गाड़ी उनके घर की और जाते हुए दिखाई दी ..

सभी की नज़ारे उस गाड़ी पर थी ..

“ये तो रिद्धिमा की गाड़ी है “ किसी ने कहा और हम सभी की निगाहे उस और चली गयी , गाड़ी तेजी से वंहा से निकल गयी , उसमे रिद्धिमा के अलावा एक अधेड़ उम्र की ायरत भी बैठी हुई थी जो हमें hi घूरे जा रही थी ..

हमने इस और जयदा ध्यान नहीं दिया और फिर से अपने काम में लग गए , वही थोड़ी देर बाद hi मैंने देखा की वो अधेड़ उम्र की ायरत हमसे कुछ दूर पर hi कड़ी है और हमें hi देखे जा रही है , थोड़ी hi देर बाद रिद्धिमा भी वंहा आयी और आते hi मुझे और परिमल को देखकर उसने हाथ हिलाया , मैंने भी जवाब में हाथ हिलाया ,इसे देखकर उस ायरत ने रिद्धिमा से कुछ पूछा और फिर उसके चेहरे के भाव अचानक से बदलने लगे , मैं और परिमल उसकी और hi जा रहे थे लेकिन अब वो ायरत दरी हुई लगने लगी , मेरी निगाहे उसके जिस्म में चली गयी थी और मेरे अंदर का हवस भी जगाने लगा था , लेकिन वो ायरत ऐसे भागी जैसे कोई भूत देख लिया हो ..

“हे भगवन मुझे बचा ले , ये मुझसे क्या हो गया ..”

वो बार बार यही चिल्ला रही थी , उसकी बात को सुनकर न सिर्फ हम लोग बल्कि रिद्धिमा भी उसे अजीब निगाहो से देख रही थी …….

वो दौड़ते हुए सीधे कार में जा घुसी ..

“ये कौन है और इसे क्या हो गया “

परिमल बोल उठा था

“ये हमारे घर की नौकरानी है लेकिन मेरी माँ जैसी है , जमुना काकी “

रिद्धिमा ने हलके आवाज में कहा , उसकी निगाहे मेरे शरीर कोई घर रही थी , मैं मिटटी में सना हुआ था और पसीने से नहाया हुआ था , मेरे शरीर पसीने से चमकने लगा था , रिद्धिमा की आँखों से hi पता चल रहा था की मेरा शरीर उसके अंदर कुछ बदल रहा है ..

“मुझे भी चलना चाहिए “ वो भी तेजी से पलटी और कार की और भागी , पीछे से गजराज काका चिल्लाते रहे लेकिन फिर कार तेजी से वंहा से निकल गयी थी …….

“इन दोनों को क्या हो गया , ऐसा लगा की कोई भूत देख लिया हो “परिमल चिंतित दिख रहा था

“हम दोनों भूत से काम भी कहा दिख रहे है “ मेरी बात सुनकर परिमल जोरो से हंस पड़ा था …

इधर

रिद्धिमा रोज hi कॉलेज जाती लेकिन उसे न तो परिमल दिखाई देता न hi अजय , न hi राखी रेखा न देवनद और न hi शिरीन उसे दिखाई दी ,उसे अजय के हेल्थ की चिंता होने लगी थी ..

अजय के हॉस्पिटल में भर्ती कराये 2 सप्ताह हो चुके थे , उसने हॉस्पिटल में पता किया था तो उसे पता लगा की अजय को उसी दिन रात तक छुट्टी मिल गयी थी …

रिद्धिमा ने गजराज के घर जाकर राखी रेखा से मिलने की सोची , शायद उससे उसे अजय के बारे में पता चल सके ..

वो जमुना काकी को लेकर गजराज के घर की और निकल पड़ी , रिश्ते में उन्हें वो अखाडा दिखाई दिया जिसमे पहलवान वर्गीस कर रहे थे , और एक दूसरे के साथ कुश्ती खेल रहे थे ..

“वह कैसे मस्त मस्त जवान और ताकतवर लोग है , इनमे से एक कोई मिल जाए तो चुड़ैलों की दी गयी ताकत का इस्तमाल कर लू , मजा hi आ जायेगा “

जमुना ने अखाड़े की और देखते हुए कहा ..

“क्या काकी आप भी जब देखो बस यही सब बाटे “

रिद्धिमा का दिमाग ऐसे भी ख़राब था और अब जमुना की बाटे सुनकर वो और भी चिढ गयी थी

“अरे बेटी तुझे भी समझ आएगा , एक बार जब तेरा कौमार्य भांग होगा तो तुझे भी समझ आएगा की प्रेम का मिलान क्या होता है , और उसका सुख क्या है .. फिर तू भी उसके पीछे भागेगी :डी “

जमुना की बात सुनकर रिद्धिमा बुरी तरह से चिढ गयी ..

“छियई आप hi करो ये सब , और अगर आपने फिर से ऐसी बात की न तो देखना मैं आपसे बात hi नहीं करुँगी “

जमुना रिद्धिमा के गुस्से को समझ गयी थी इसलिए वो चुप रह गयी ..

जमुना को कभी एक चुड़ैल ने एक सकती दी थी की वो किसी भी एक मर्द को अपनी और आकर्षित कर सकती है और इससे वो मर्द उसके लिए दीवाना हो जायेगा उसकी हर बात मानेगा , जमुना ने इसका प्रयोग करके सुलभ फंसा लिया था , इसके बदले उसे एक लड़की को चुड़ैल बनाना था जो जमुना ने रिद्धिमा के जरिये पूरा कर दिया , इससे चुड़ैल फिर से खुस होकर उसे फिर से वो सकती दे दी थी की वो फिर से किसी एक लड़के को अपनी और आकर्षित कर सकती थी ..

जमुना ने जब उन मर्दो को लड़ते हुए देखा तो उसके साइन में दबी वो इक्छा फिर से अंगड़ाई लेने लगी,

रिद्धिमा गजराज के घर के अंदर थी वो जमुना अखाड़े तक आ गयी और अपने सपनो के राजकुमार की तलाश करने लगी , उसने अब कोई जवान मर्द को फ़साने की सोच ली , और सामने दो जवान मर्द एक दूसरे से लड़ रहे थे मिटटी और पसीने में बीज हुए उनके बदन को देखकर जमुना के योनि में पानी आने लगा था , वो उनके शरीर की लचक और बाजुओं की ताकत को देखकर hi मचल रही थी ..

लेकिन वो दोनों में फैसला नहीं कर प् रही थी की वो किसे चुने दोनों hi मस्त लग रहे थे ..

तभी उसे दोनों में से एक का वो देव पसंद आ गया जिसमे उसने सामने वाले को पूरा उठा कर जमीं में पटका था ..

“आह क्या ताकत है इसकी और शरीर , वाह इसके शरीर में आया हुआ पसीना देख कर hi मेरा मन दोल रहा है , यही वो जवान मर्द है जिसे मुझे फंसना है “

जमुना ने तय कर लिया था और उसने मंत्र का प्रयोग करके जादू चला दिया , एक बार उस लड़के ने जमुना की और देखा ,

जमुना खुश हो गयी थी की उसे उसका साथी मिल गया जो उसकी हर प्यास को भुझायेगा , लेकिन तभी उसे पता नहीं क्यों दिल में एक घबराहट सी होने लगी , वो समझ नहीं पा रही थी की उसे ऐसा क्यों हो रहा है , ऐसा लगा जैसे वो खुद उस मर्द की तरफ त्रिवरा आकर्षण से भर रही है ,

तभी उन दोनों मर्दो ने अपना हाथ उठाया , जमुना जब पीछे देखि तो रिद्धिमा उन्हें hi हाथ दिखा रही थी , रिद्धिमा भी उस तक पहुंची ..

“तुम इन दोनों को जानती हो “

“है ये गजराज काका का बीटा परिमल है … और वो …”

रिद्धिमा की नज़ारे अजय के जिस्म पर पद चुकी थी , उसका दबा हुआ आकर्षण फिर से जाग गया था उसे अपने hi आप शर्म सी आने लगी थी ..

उसके जिस्म का हर कटाव देख कर रिद्धिमा अजय के बांहो में जाने के लिए मचलने लगी थी

“अरे वो दूसरा कौन है जल्दी बता …”

जमुना की सांसे जैसे रुक सी गयी थी

“अरे वही तो है अजय तुम उसे नहीं जानती क्या ???”

“क्या ..?? “ जमुना अवाक् रह गयी थी उसने अजय को फिर से एक बार ध्यान से देखा , उसने पिछली बार जब अजय को देखा था तब वो छोटा था अब तो वो पूरा मर्द बन गया था वो भी तगड़ा मर्द जिसे देखकर उसकी वासना तक जाग गयी थी …

वही अजय भी उसे वासना से भरी निगाहो से देख रहा था , जमुना को समझ आ चूका था की उसके हवस की आग ने उसे फंसा दिया है , वो आने वाले वक़्त की सोचकर बुरी तरह से घबरा गयी थी

“हे भगवन मुझे बचा ले , ये मुझसे क्या हो गया ..”

वो रट हुए भागी ..

“अरे इसे क्या हो गया ..” परिमल और अजय कुछ समझने की कोशिस करने लगे , वही रिद्धिमा भी जमुना के इस व्यवहार से विचलित हो उठी थी ……….

परिमल और अजय रिद्धिमा के नजदीक आ चुके थे , रिद्धिमा अजय के नंगे जिस्म को देखकर बस खो सी गयी थी , उसे पसीने और मिटटी से भरे अजय के बदन की खुशबू पागल कर रही थी , वो यंहा उसकी सलामती जानने hi आयी थी लेकिन फिर भी वो अजय से कोई बात नहीं कर प् रही थी ..

अगर थोड़ी देर वो और वंहा रुक जाती तो शायद खुस को कण्ट्रोल hi नहीं कर पति और अजय से चिपक जाती ..

उसने जल्दी से वंहा से निकलना hi ठीक समझा और जाकर कार में घुस गयी और तेजी से कार चला दिया …

“काकी क्या बुरी चीज में फंसा दिया तुमने , जब जब अजय के सामने होती हु तो पता नहीं क्या हो जाता है “

रिद्धिमा गाड़ी चलते हुए अपनी सांसो को सम्हाल रही थी , लेकिन जमुना चुप hi बैठी थी

“क्या हो गया काकी तुम ऐसे मुर्दो जैसे क्यों बैठी हो और वंहा से ऐसे चिल्लाते हुए क्यों भागी जैसे तुम्हारा सब कुछ लूट गया हो “

जवाब में जमुना रोने लगी थी , उसे रट हुए देख कर रिद्धिमा बुरी तरह से दर गयी

“क्या हुआ काकी बताओ तो सही “

लेकिन जमुना का रोना बंद नहीं हुआ ..

“मेरी वासना ने मुझे बर्बाद कर दिया बेटी , मैं अब उस शिकारी की गुलाम बन जाउंगी वो मुझे जैसे चाहे वैसे उपयोग में लाएगा , मुझसे अपनी वासना शांत करेगा “

जमुना के चेहरे में पूरा दर फ़ैल गया था, वही रिद्धिमा ने जोरो से ब्रेक लगा दिया

“मतलब … मतलब तुमने उस सकती का उपयोग अजय के ऊपर किया “

जमुना ने हां में सर हिलाया और रिद्धिमा जोरो से हंस पड़ी ,हंस हंस कर उसके पेट में दर्द उठाने लगा था ,

जमुना उसे पागलो की तरह हसते हुए देख रही थी लेकिन उसके चेहरे में कोई भी परिवर्तन नहीं था ..

जमुना के चेहरे पर फैले दर्द को देखकर रिद्धिमा ने खुद को रोका

“तो फ़िक्र क्यों कर रही हो , तुम तो यही चाहती थी न की कोई तुम्हारे साथ ऐसा करे वैसा करे , ये तो अच्छा hi हुआ न , अब तो अजय तुम्हे पूरी तरह से संतुस्ट कर देगा ..”

रिद्धिमा ने उसे छेड़ा , लेकिन जमुना के चेहरे पर अब भी ख़ुशी नहीं थी

“मैंने अपनी ताकत का गलत उपयोग किया है बीटा इसलिए मुझे ये सजा मिली है , जीवन भर एक शिकारी की गुलाम बनने की सजा , अगर मैं किसी दूसरे की ऊपर ये इस्तमाल करती तो वो मेरा गुलाम बन जाता लेकिन वो एक शिकारी है और चुड़ैलों का जादू शिकारी पर काम नहीं करता वो उल्टा hi पद जाता है और मैं कोई चुड़ैल भी नहीं हु की इस जादू से पीछा छुड़वा पाव ..

मैंने अपने जिस्म की वासना को मिटने के लिए क्या क्या नहीं किया, शुलभ के जाने के बाद से मैं तड़फ रही थी , इसलिए मैंने ये फैसला किया और तुम्हे ….”

इतना बोल कर वो अचानक से चुप हो गयी

रिद्धिमा अब भी उसे घर रही थी ..

“और मुझे क्या काकी , तुमने अपनी हवस मिटाने के लिए मेरा इस्तमाल किया ??? तुमने इस सकती को पाने के लिए मुझे चुड़ैल बनवा दिया ???”

रिद्धिमा की आवाज गुस्से और दर्द से भर गयी थी , जमुना को अपनी गलती का अहसास हो गया था उसने रिद्धिमा के सामने अपने हाथ जोड़ लिए

“मुझे माफ़ कर दो बेटी , एक तो मैं पहले से hi एक कर्ज में बंधी हुई थी और फिर सुलभ का जाना , मैं कमजोर हो गयी थी बेटी , मैं अंधी हो गयी थी … “ जमुना का रोना बढ़ गया था

“तुमने अपना कर्ज चुकाने और अपनी हवस पूरी करने के लिए मुझे बलि पर चढ़ा दिया … काकी मैंने तुम्हे अपनी माँ मन था और तुमने मेरे hi जीवन के साथ खेला “

“नहीं बेटी , तुझे भी तो इसकी जरुरत थी न “

“तुमने अजय को देखा , तुम्हे लगता है की वो कभी बदला लेगा .. तुमने मेरे दिमाग में ये डाला था की वो बदला लेगा , तुमने मुझे डराया था तुमने मेरे दिमाग से खेला , मेरे जस्बातो से खेला और मुझे ये सोचने पर मजबूर कर दिया “

“मुझे इसकी सजा मिल गयी बेटी ,मैं अब जीवन भर एक शिकारी की गुलाम बन कर रहूंगी “

जमुना की बात सुनकर रिद्धिमा जोरो से हंस पड़ी लेकिन उसकी उस हंसी में भी दर्द था ..

“शिकारी की गुलाम , या वैश्य .. और तुम्हे तो इसमें भी मजा hi आएगा ,तुम यही तो चाहती थी न की कोई तुम्हारे जिस्म की प्यास बुझाये , तुम्हारी तो ऐश हो गयी काकी , जाओ जाओ अपने मालिक के पास बन जाओ उसकी रंडी , रखैल या जो भी तुम बनना चाहो .. जाओ यंहा से “

रिद्धिमा चिल्ला उठी थी उसने कार का दरवाजा खोल दिया था

जमुना बस सुबकते हुए उसे देख रही थी ..

“काकी इससे पहले की मैं गुस्से में आकर कुछ गलत कर जाऊ , चले जाओ यंहा से … तुमको मैंने अपनी माँ की तरह मन है इसलिए मैं तुम्हे कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहती , भला इसी में है की अभी मेरी नजरो से दूर हो जाओ “

रिद्धिमा की आंखे जल रही थी , गुस्सा उसकी आँखों से hi दिखाई दे रहा था ……

जमुना रट हुए निचे उतर गयी थी और रिद्धिमा ने गाड़ी तेजी से वंहा से निकाल दी ……
 
अपडेट 16
‘ये दिल ये पागल दिल मेरा क्यों बुझ गया आवारगी , ये दिल ..’

गुलाम अली की मीठी आवाज मेरे कानो में घुल रही थी ,सामने अंगूर रखे थे और रेवती चची उन अंगूरों को मेरे मुँह में दाल रही थी , रेवती और रानी चची दोनों hi नग्न मेरी सेवा में माँगन थी , एक हाथो में रेड वाइन था और दूसरे में रेवती चची के बूब्स , मैं उन्हें मसलता हुआ , गुलाम अली के गजलों में खोया हुआ रेड वाइन के मजे ले रहा था ..

“कभी कभी तो ऐसा लगता है की साला अपुन hi भगवन है “

मैंने धीरे से कहा , और रेवती चची हंस पड़ी ..

वही रानी चची मेरे खड़े हुए लिंग को अपने होठो से सहला रही थी , और उसे अपने योनि में डालने के लिए गिला करके तैयार कर रही थी..

रानी चची धीरे से मेरे ऊपर बैठने लगी , मेरा पूरा लिंग उनकी योनि की गहराई में समां गया , और रानी चची की आँखे बंद हो गयी ..

“आठ ..” उनके मुँह से एक सिसकी निकल पड़ी , मेरी नजर उनके hi ऊपर थी , उनकी आंखे बंद थी जैसे वो मेरे लिंग को अपनी योनि में पूरी तरह से महसूस करना चाहती हो , और उसके आनद में डूब चुकी हो ..

उन्होंने फिर से कमर उठाई और फिर से बैठ गयी

“आह बीटा … “उन्होंने आंखे बंद कर एक मादक सिसकी ली

उनकी ये उत्तेजना देखकर मैं और भी उत्तेजित हो गया , मेरा लिंग मेरे दोनों चाचियों का पसंदीदा खिलौना बन चूका था , वो हर समय बस इससे hi खेलती रहती थी ..

“इस रंडी को तो देखो कैसे बीटा बीटा बोलकर मजे ले रही है “

रेवती चची ने मेरे कानो में कहा और हम दोनों hi हलके से हंस पड़े .. हमारे रिश्तो की दीवारे इस चारदीवारी में आकर ख़त्म हो जाती थी , हम बहार की दुनिया के लिए रिश्तो में बंधे हुए थे लेकिन इस कमरे में हम सभी नंगे थे , हर रिश्ता भुला कर बस हवस का खेल खेला करते थे …

रानी चची फिर से उछली और मेरी भी आंखे बंद हो गयी ..

मैंने उन्हें निचे पटक दिया और खुद उनके ऊपर आ गया ,सभी को पता चल गया था की अब ये धीरे धीरे वाला खेल ख़त्म हो गया , अब मैं उनकी कमर तोड़ डालने वाला हु , लेकिन मेरे इस कृत्या से रानी चची की मुस्कान और भी गहरी हो गयी , जैसे वो यही चाहती थी ..

मैंने एक जोर का धक्का लगाया और मेरा पूरा लिंग उनकी योनि की गहराइयों में समां गया ..

“आह बीटा …”

रानी चची उत्तेजना में जोरो से सिसकी ..

वही रेवती चची की भी हालत ख़राब हो रही थी वो अपने hi योनि को सहलाने में लगी हुई थी .. मैंने उन्हें भी अपने पास खींच लिया और उनके मुँह में अपनी जीभ दाल दी ..

खेल शुरू हो चूका है और बरी बरी से मैं दोनों ओउरतो की चढ़ाई कर रहा था , मेरे छूटने के बाद वो दोनों hi मुर्दो की तरह बिस्तर में गिर गयी थी ..

*******

“अरे ये कौन है ..”

कुछ आवाजों से मेरी नींद टूटी , देखा तो सुबह के 5 hi बजे थे , लेकिन घर के बहार हल्ला गुल्ला हो रहा था , दोनों चचिया घोडा बेचकर सो रही थी , रत भर की ठुकाई के बाद बेचारियो के शरीर में इतनी ताकत भी तो नहीं बचती ..

मैं उठा और कपडे पहन कर बहार आ गया ..

“क्या हुआ माँ “मैं ऊपर अपने कमरे के बहार से hi चिल्लाया

“एक ायरत हमारे घर के बहार दरवाजे में सोई हुई थी .. तुमसे मिलने की बात कर रही है ??”

मैं आश्चर्य में पद गया था , मैंने वही से झाँका तो सामने वही ायरत थी जो की कल रिद्धिमा के साथ दिखी थी ..

“मैं आता हु ..”

मैं निचे उतर गया ..

“तुम तो साहनपुर से हो न ?? मैंने तुम्हे कल रिद्धिमा के साथ देखा था … यंहा क्या कर रही हो और मुझसे क्या काम है तुम्हे ??”

मैं गरजते हुए आवाज में बोलै ..

वो थोड़ी सहमी , उसकी हालत बहुत hi ख़राब दिख रही थी लग रहा था जैसे कुछ खाया पिया भी नहीं हो , वो उसी कपड़ो में थी जिसमे मैंने उसे कल देखा था ..

मुझे उसपर थोड़ी दया आयी ..

“माँ एक काम करो इसे कुछ खिला पीला दो , इसकी हालत थोड़ी अच्छी नहीं लग रही है , मैं अखाड़े में जा रहा हु आ कर बात करता हु इससे “

मेरा इतना बोलना था की वो ायरत मेरे पॉ में गिर गयी ..

“मुझे बचा लो मालिक , मुझे अपने पास शरण दे दो .. “

उसकी इस हरकत से मेरे साथ साथ वंहा मौजूद सभी लोग थोड़े चौक गए ..

“ये क्या बोल रही हो तुम तो रिद्धिमा के साथ थी फिर ..??”

“उसने मुझे निकाल दिया , अब मैं बेसहारा हो गयी हु ..”

वो सुबकते हुए बोली , सभी उसे संदेह की निगाहो से देख रहे थे ..

“आखिर क्यों ..??”

“वो मैं सिर्फ आपको बता सकती हु , और किसी को नहीं ..”

मैंने माँ की और देखा उन्होंने सहमति में सर हिलाया ..

“ठीक है अभी अपना हुलिया थोड़ा सुधर लो , काकी (ये फूलवन्ती काकी थी जो घर के बहार बने कमरों में बाकि नौकरो के साथ रहती थी , जो दर्जा रिद्धिमा के घर जमुना का हुआ करता था वही दर्जा हमारे परिवार में फूलवन्ती और उसके परिवार का था, वही थी जिसने सबसे पहले जमुना को घर के बहार देखा था ).. काकी इसे लेजाकर नहला धुला दो और कुछ खिला पीला दो … मैं आकर इससे बात करता हु “

“ठीक है बबुआ ..”

उन दोनों के घर से बहार जाने के बाद माँ मुझे देखने लगी ..

“ये भला यंहा क्या कर रही है ,कही रिद्धिमा ने इसे अपना जासूस बना कर तो नहीं भेजा है “

माँ की बात सुनकर मैं जोरो से हंस पड़ा

“क्या माँ आप भी , हम 10 साल में बस एक बार hi लड़ते है वो भी सीधे अखाड़े में , ये सब करने की क्या जरुरत है ??”

माँ का चेहरा थोड़ा गंभीर हो गया ..

“3no गांव में जो आपसी शांति तू देख रहा है वो हमेशा से नहीं था , वो तो तेरे दादा जी और रिद्धिमा के दादा जी दोस्त थे इसलिए उनके और तेरे पिता और तारा सिंह के प्रयासों से अभी इतनी शांति फ़ैल गयी है …वरना .. वर्ण पहले तो दोनों गांव के लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हुआ करते थे , वो तो स्कूल और कॉलेज जाने लगे लोग तो थोड़ी शांति आयी , वर्ण अखाड़े में रोज hi लड़ाईया होती है अखाड़े भी 3 थे , तुम्हारे दादा ने hi सभी को समझा कर 3no गांवो के लिए एक अखाडा बनवाया था … जिसमे अब सभी आकर व्यायाम करते है “

“है माँ सब जनता हु मैं , बचपन से यही सब तो सुनते आ रहा हु , लेकिन अब तो शांति है न “

“पता नहीं बीटा ये कब तक की है , अभी भी सुलभ जैसे मानसिकता के लोग जिन्दा है जो की नफरत से भरे हुए है … इसलिए अच्छा है की अपनी सुरक्षा अपने हाथो में रखो “

मैंने बस हां में सर हिला दिया …….

अखाड़े में दिन भर म्हणत करने बाद मैं और परिमल थोड़ा सुस्ता रहे थे ..

“अरे यार कब तक हम यु hi दिन भर अखाड़े में पसीना बहते रहेंगे ,कॉलेज जाना है की नहीं , बहनो को भी मन कर रखा है …”

“हम्म कल से चलते है , सुन एक बात करनी है “

“क्या ??”

“कल यद् है एक ायरत थी रिद्धिमा के साथ ….”

मैंने कहना सुरु किया

“है वो .. शायद उसका नाम जमुना है , रिद्धिमा की खास है वो “

“है लेकिन आज वो मेरे घर आयी हुई है …”

मैंने पूरी बात परिमल को बता दी , वो भी चौक गया था …

“यार ये थोड़ी अजीब बात नहीं है …”

“है तो , बात करके देखता हु की आखिर उसके आने का मकसद क्या है .. मुझे नहीं लगता की रिद्धिमा मेरी जासूसी करवाएगी ..”

परिमाल ने मेरी आँखों में झाँका .. और हंस पड़ा

“सेल शिकारी , तेरे आँखों में रिद्धिमा का नाम लेते hi चमक आ जाती है … कोई चक्कर तो नहीं है तुम दोनों के बिच “

उसकी बात सुनकर मैं बस मुस्कुराया था ,अब उससे क्या कहता की हमारे बिच क्या चक्कर है , उस आकर्षण का पता तो मुझे भी नहीं था, वो इतना तीव्र आकर्षण था की उसके छूने मात्रा से मेरी सांसे तेज हो गयी थी , मैं मौत के मुँह से बचकर वापस आ गया था , लगता था की उसमे कुछ तो ऐसा है जो मुझे बचपन से hi उसकी और खींचता है ..

“क्या हुआ मजनू कहा खो गया तू … कही वो हमारे शिकारी की चुड़ैल तो नहीं है “

परिमल जोरो से हंस पड़ा ,

“भाग मादरचोद “ मैंने एक तेज मुक्का उसके पेट में मार दिया, और जोर से हसंता हुआ खड़ा हो गया ..

परिमल दर्द से तिलमिला गया था और थोड़ा सम्हाल कर मेरे ऊपर टूट पड़ा , हम दोनों फिर से वही पर लड़ना शुरू कर दिया था , वो अखाड़े दे दाव पेन्स में माहिर था लेकिन मेरी ताकत के सामने नहीं टिक पता लेकिन परिमल में कभी न हरने वाला जूनून भी था ..

हम यु hi हसंते रहे और एक दूसरे से गुथम घुठ्ठी होकर लड़ते रहे …….
 
अपडेट 17
मैं अपने कमरे में बैठा हुआ था तभी फूलवन्ती काकी जमुना को लेकर मेरे पास आयी , जमुना की उम्र मेरे चाचियों की hi जीतनी थी और मादकता भी काम न थी , माध्यम उम्र की उस ायरत की देह मुझे उत्तेजित करने के लिए काफी था , वो साफ सुधरी सी और साड़ी में लिपटी हुई थी , एक पुराणी सी साड़ी लेकिन लेकिन फिर भी दिखने में मादक थी , जिस्म का भराव उसकी मादकता को और भी बढ़ा रहा था ..

वो सर झुकाये मेरे सामने कड़ी हो गयी मैं उसके सामने एक कुर्शी में बैठा हुआ उसके जिस्म का निरक्षण कर रहा था , मैंने फूलवन्ती काकी को वंहा से जाने के लिए कह दिया..

जमुना कुछ सहमी सी दिख रही थी ..

“अब हम अकेले है बोलो क्या बोलना था तुम्हे “

मेरी आवाज में एक मरदाना सी गरजा थी ,मुझे खुद यकीं नहीं हो प् रहा था की मैं इस ायरत के पास होते hi ऐसा क्यों फील कर रहा हु , मुझे एक मालिक जैसा फील हो रहा था , जो बहुत hi पॉवरफुल हो ..

पावर मेरे पास सभी तरीके की थी , पैसे , शरीर और ओहदे की भी लेकिन आज तक मैंने इसे कभी फील नहीं किया था लेकिन आज मुझे सब एक साथ hi महसूस होनी शुरू हो गई थी ..

“मालिक मैं आपसे वो बाटे कहना चाहती हु जो अनजाने में hi सही लेकिन आपसे जुडी हुई है ..”

मैं उसकी बातो को समझ नहीं पा रहा था ..

“साफ साफ बोलो की तुम बोलना क्या चाहती हो ..”

उसने अपना गाला साफ़ किया और बोलना शुरू किया

“मेरा नाम जमुना है और मैं तारा सिंह (रिद्धिमा के पिता) के घर नौकर थी ….”

वो आगे बोलते गयी , कैसे उसके पति ने उसे प्रताड़ित किया और कैसे वो जंगलो में एक चुड़ैल से मिली ..

चुड़ैल का नाम सुनते hi मेरे कान खड़े हो गए थे , मैं उसके एक एक शब्द को ध्यान से सुन रहा था , उसने बताया की कैसे उसने चुड़ैल से एक वरदान लिया और उसके बदले एक लड़की को चुड़ैल बनाने की शर्त हुई , और फिर कैसे उसने सुलभ को अपने जाल में फंसा लिया और उसके साथ मजे करने लगी ..

पहला chapter तो सुखद hi रहा , लेकिन फिर बात शुरू हुई सुलभ के मरने से , मेरी उत्त्सुकता और भी बढ़ने लगी थी ..

सुलभ के मरने के बाद और मुझे शिकारी बाबा के दवारा बचाये जाने के बाद के फैले हुए दर के माहौल का वर्णन उसने किया और फिर कैसे रिद्धिमा के मन में वो दर घर कर गया ..

वो रुक गयी थी , मैं उसे देख रहा था, शायद उसके मन में यही उथल पुथल चल रही थी की वो आगे बोले की नहीं ..

थोड़ी देर चुप रहने के बाद उसने बोलना शुरू किया ..

की कैसे उसने रिद्धिमा को चुड़ैल बनने के लिए मनाया , और आगे की बाटे .. कैसे उसने अपने hi पति की बलि दे दी और रिद्धिमा के द्वारा उन लड़को का दिल निकाल लेना और फिर मुझे सांसे देना और मेरे प्रति आकर्षित होना , मैं उसकी बात सुनकर पूरी तरह से स्तब्ध था , मन में कोई भी हलचल नहीं हो रही थी ……..

फिर उसने कल की बात कही जब वो परिमल के घर आये थे उसका मुझे पसंद करना और जादू का चलना और उगलते hi फंस जाना , वो बोलते हुए कंपनी लगी थी , फिर रिद्धिमा से हुई वो बात चित और फिर रिद्धिमा के उसे निकाल देना और उसका मेरे घर पर आना ……

वो बोलते हुए रो रही थी लेकिन मेरी आँखों में गुस्सा उतरने लगा था ..

‘चटाक ‘

मैंने खींचकर एक तमाचा उसके गाल पर मार दिया , वो थोड़ी दूर जा गिरी लेकिन फिर से उठाकर कड़ी हो गयी …….

“मादरचोद तूने अपनी हवस के लिए एक मासूम सी लड़की को इस जाल में फंसा दिया “

मैं उठ खड़ा हुआ था मेरे सामने बस रिद्धिमा का मासूम सा चाहता घूम रहा था , मैंने जमुना के बालो को पकड़कर उसे बिस्टेर में फेंक दिया …..

“तू मुझे फंसकर अपने हवस की भूख मिटाना चाहती थी न ,लेकिन अब मैं तुझसे अपनी हवस शांत करूँगा , तुझे उसकी सजा मिलेगी जो पाप तूने किया है “

मैं उसके ऊपर झपट पड़ा था उसके गले को पीछे से बड़ा कर मैंने उसके साड़ी को उसके जांघो तक उठा दिया , जोर लगाकर उसकी कच्ची फाड़ डाली ..

“मुझे माफ़ कर दो मालिक ,मैं अब से आपकी hi गुलाम हु , जो बोलोगे वो करुँगी मैं “ वो रोने लगी थी लेकिन मेरे मन में उसके लिए कोई भी दया नहीं आयी ,

मैंने एक बार फिर उसके गलो को अपने सामने किया और एक खींचकर तप्पड़ उसके गलो में लगा दिया , उसका पूरा चेहरा लाल हो चूका था …

मेरे अंदर अब हवस नहीं बल्कि एक गुस्सा था जिसे मुझे शांत करना था इतना गुस्सा मुझे कभी भी नहीं आया था लेकिन आज रिद्धिमा के साथ हुए इस कृतय को सुनकर मेरे खून में मनो उबाल आने लगा था ..

मैंने अपने निचे पहने वस्त्र हटाए और एक hi बार में अपना लिंग उसके योनि में घुसा दिया , वो बिलकुल भी गीली नहीं थी ..

“आठ मर गयी ..” वो चिल्ला पड़ी थी

“मादरचोद “मैंने फिर से एक झापड़ उसके गाल में लगा दिया ..

और अपनी कमर को तेजी से चलने लगा

“बीटा ये क्या कर रहा है छोड़ इसे ..”

रेवती चची बहुत hi घबराई हुई दिखी, फूलवती ने दरवाजा बंद नहीं किया था और इसके और मेरे चिल्लाने की आवाज सुनकर रेवती चची अंदर आ गयी थी शायद घर के और लोग भी इसे सुन रहे थे लेकिन मेरे कमरे में अब मेरी दोनों चाचियों के अलावा कोई भी अंदर नहीं आता था ..

“आप जाओ चची ..”

मैं गुस्से में भरा हुआ बोलै

“बीटा तू इसका बलात्कार कर रहा है ..” वो मुझे झंझोरने लगी

“नहीं चची मैं बस इसे इसके किये की सजा दे रहा हु … यकीं नहीं आता तो इससे hi पूछ लो .. क्यों रे रैंड मैं तेरा बलात्कार रहा हु ..”

मैंने जुर्राटे हुए जमुना से कहा

“नहीं मालिक , आप तो मेरे मालिक हो , मेरे साथ जो चाहे कर सकते हो “

वो रट हुए बोली , उसकी बात सुनकर चची के चेहरे में अपार आश्चर्य फ़ैल गया था , मैं फिर से उसके गालो पर एक जोर का तमाचा जाड और अपनी कमर को तेजी से चलने लगा ,मैंने अपने हाथो से उसका गाला दबा रखा था जब जब उसका डैम घुटने के करीब होता तो मैं उसे छोड़ देता वो एक गहरी साँस लेती और मैं फिर से उसके गले को दबा देता ..

रेवती चची बस मूर्ति बने वही कड़ी रह गयी थी , मैं जमुना के ऊपर झुका और उसके कंधे में अपने दन्त देगा दिए और जोरो से चबाने लगा ..

“आआ मालिक माफ़ कर दो .. दर्द हो रहा है …”

उसके कंधे से खून आने लगा था , उसे जितना दर्द होता मुझे उतना hi मजा आता , मैं उसके बालो को पकड़ा कर खींचते हुए उसे घोड़ी बना कर पीछे प्रहार करने लगा ,

थोड़ी hi देर हुए थे की जमुना की योनि में पानी आने लगा था ..

मैंने उसे वही पटक दिया ..

“साली रैंड मैं तेरे मजे के लिए तुझे नहीं छोड़ रहा “

और मैं रेवती चची के ऊपर टूट पड़ा , वो हड़बड़ा गयी थी लेकिन फिर जैसे कुछ समझ गयी और हंसती हुई मेरे बांहो में झूल गयी ..

“नहीं मालिक मुझे ऐसे मत छोडो मैं मर जाउंगी आप hi मुझे संत कर सकते हो , मालिक .. “

वो हाथ जोड़ कर वही बैठ गयी थी ..

“तूने अपनी हवस मिटने के लिए ये पाप किया था न , अब जलती रह तू इस हवस की आग में , मैं तेरा हवस जागकर तुझे छोड़ दिया करूँगा “

मेरे होठो में एक कामिनी सी मुस्कान आ गयी थी , और उसका चेहरा मेरी बातो को सुनकर लाल हो गया था , मैं अब फिर से पहले वाले अजय की तरह रेवती चची से खेलने लगा था , जमुना वही एक कोने में सिमट कर बैठी हुई आंसू बहा रही थी , अब मुझे समझ आया था की मालिक होना क्या होता है और गुलाम होना किसे कहते है , वो चाहकर भी मेरे विरुद्ध नहीं जा प् रही थी , मेरा आदेश उसके लिए जैसे अंतिम हो …….
 
अपडेट 18
कॉलेज पहुंचते hi पहले दर्शन सोनी और हिना के हो गए , वो उसी पेट के निचे बैठी थी जंहा उनका अड्डा हुआ करता था , उनके साथ उनके कुछ चेले काम गुंडे थे , लेकिन उनके महफ़िल में वो रौनक नहीं थी जो कभी उनके भाइयो के होने पर थी ..

हमारी नज़ारे मिली तो जैसे उनके होश hi उड़ गए ..

मैं उनके और hi बढ़ गया और उनके सामने जाकर खड़ा हो गया ,साथ hi मेरे दोस्त भी थे ..

कुछ देर तक हम एक दूसरे को hi देखते रहे

“बड़ी कुट्टी चीज है तू , इतना धोया लेकिन अभी भी जिन्दा खड़ा है “

हिना ने बड़े hi तिरिस्कार के साथ कहा लेकिन साथ hi वो भी थोड़े आश्चर्य में थी , कॉलेज में शायद hi किसी को पता हो की मेरा हल क्या था क्योकि मुझे बहुत hi बुरे हालत में रिद्धिमा ने हॉस्पिटल पहुंचाया था , उसके बाद से न मैं कॉलेज आया था और न hi मेरा कोई दोस्त ..

“जानेमन मैं भी खड़ा हु और मेरा भी खड़ा है “

मैंने इस अंदाज से कहा की मेरे सरे दोस्त जोरो से हंस पड़े वही हिना और सोनी का चेहरा पीला पद गया था …

शायद उन्हें वो दिन याद आ गया जब उन्होंने मेरी अजीब सी हवस देखि थी ..

मेरी बात सुनकर उनके गुंडे आगे बढे , लेकिन उसके साथ hi मेरे साथ आये मेरे दोस्त भी आगे बढ़ गए ..

जब से उन्होंने मुझे किडनैप करके धोया था और फेक कर गए थे तब से मेरे दोस्तों के अंदर एक गुस्सा भरा हुआ था, वो अब मरने मरने को तैयार खड़े थे ,लेकिन मैंने उन्हें इशारे से रोक लिया ..

“बहुत जयदा चढ़ गए हो तुम , भूल गए की उस दिन तुम्हारे साथ हमने क्या किया था “

इस बार सोनी गरजी थी ..

लेकिन उसकी बार सुनकर मेरे होठो में एक मुस्कान आ गयी

“मैं कहा चढ़ा हु , तुम लोग तो चढ़ाने hi नहीं देते … और शायद तुम भूल रही हो की उस दिन क्या हुआ था “

मेरे होठो में एक कामिनी सी मुस्कान आ गयी ..

वो दोनों बुरी तरह से झेप गए वही उसका एक गुंडा जो की पूरा सैंड था आगे आ गया ..

“सेल बहुत बोल रहा है “

उसने महज एक हाथ घुमाया था और परिमल ने उसे उठा कर पटक दिया , और कुस्ती के देव लगता हुआ उसके हाथो को मरोड़ दिया ..

“बोल सेल हाथ तोड़ दू “

परिमल गुर्राया , मैंने उसे इशारे से शांत करवाया ..

“देखो हमें यंहा झगड़ा नहीं चाहिए , मैं तो बस प्यार करना जनता हु , कभी मौका दो हमें भी , कसम से बहुत प्यार करूँगा “

मैंने हिना के जुलते हुए वक्षो को देखते हुए कहा , मेरा लिंग अकड़ने लगा था …

“यू…” हिना चिल्लाने के लिए मुँह hi खोली थी की परिमल चिल्ला पड़ा

“ शिकारी को न जगाओ , वर्ण इसका शिकारी अगर जाग गया न तो तुम लड़कियों की खैर नहीं ,फिर तुम्हारा बाप क्या किसी का बाप तुम दोनों को नहीं बचा पायेगा “

मेरे सभी दोस्त हंस पड़े थे ..

“शिकारी ???”

हिना और सोनी एक दूसरे का चेहरा देखने लगे

“है शिकारी ..” इससे पहले परिमल और कुछ बोलता मैंने उसके कंधे को थाम लिया और आँखों से hi उसे चुप रहने के लिए कह दिया , शायद इसे हिना ने देख लिया था , वो दोनों hi चुप हो गए और हम आगे बढ़ गए …

जाते जाते बस मैंने उन्हें आंख मार दी , वो झल्लाए तो जरूर लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं कहा …..

कैंटीन के बहार मैं परिमल से बात कर रहा था की मेरी आंखे एक पारी पर ठहर गयी , वही पारी जिसके लिए मेरा दिल धड़कता था …

वो भी मुझे देखकर एक बार के लिए रुक गयी ..

मैंने परिमल को इशारा किया और वो वंहा से खसक लिया ..

अब मैं और रिद्धिमा आमने सामने थे ..

हम दोनों hi चुप थे बस हमारी सांसे तेज थी जिसका अहसास हम दोनों hi कर सकते थे..

“जमुना काकी तुम्हारे पास आयी ??”

उसने चुप्पी को तोड़ते हुए कहा , उसकी सांसे सच में बहुत तेज थी

“आयी भी और सब कुछ बता भी दिया “

मेरी बात सुनकर वो छौक्कर मुझे hi देखने लगी , कितना मासूम सा चेहरा था उसका , मासूमियत उसके आँखों से छलक रही थी ,कोई कैसे कह सकता था की यही वो लड़की है जिसने 4 लोगो को मार कर उसका दिल खा लिया :ो

“सब कुछ ?? सब कुछ बता दिया “

“है सब कुछ ..”

न जाने क्यों मेरे चेहरे में एक मुस्कान सी आ गयी वही रिद्धिमा के चेहरे में आया पसीना ..

“मैंने ये जानबूझ कर नहीं किया “

“जिसने गलती की उसे सजा मिल चुकी है रिद्धिमा , तुम्हारे साथ जो जमुना ने किया उसकी सजा उसे उम्र भर मिलेगी “

इस बार मेरे आवाज एक थोड़ा गुस्सा आ गया था ..

“नहीं अजय , उन्होंने जो किया उसकी सजा उन्हें मिल चुकी है , वो मेरी माँ जैसी है , लेकिन क्या करू जो उसने किया उसके लिए मैं उन्हें माफ़ hi नहीं कर प् रही , काम से काम तुम उसे माफ़ कर दो “

रिद्धिमा का मासूम चेहरा थोड़ा उदास हो चला था ..

“उसने तुम्हारे साथ बुरा किया है रिद्धिमा और मैं ये कभी सहन नहीं कर सकता “

मेरी आवाज थोड़ी तेज हो गयी

“क्यों ???” रिद्धिमा हलके हलके मुस्कुरा रही थी

मेरे नयना उसके नयनो से मिल गए और जैसे हम दोनों hi खो गए ..

“क्योकि तुम मेरी हो, मेरे लिए हो “ मेरे मुँह से अनायास hi निकल गया था

“ये एक भरम है अजय , ये मेरी गलती थी ,ये जमुना काकी की गलती थी जिसके कारन ये हो गया .. हमें तो पास भी नहीं आना चाहिए वर्ण “

वो कहते कहते रुक गयी थी

“वर्ण क्या रिद्धि … “

मैंने उसे रिद्धि कहा था , ये मेरे मुँह से अनायास hi निकला था

“कुछ गलत हो जायेगा अजय नहीं “

वो जाने लगी और मैंने उसके हाथो को थम लिया

“ये आकर्षण अभी का नहीं है रिद्धि , ये शिकारी होना या चुड़ैल होना ये सब तो महज बहाने है .. मैं तो तुम्हे बचपन से चाहता हु “

ये मैं क्या बोल गया था मुझे खुद पता नहीं लेकिन जो भी मैं बोल रहा था वो सीधे मेरे दिल से आ रहा था ..

“नहीं अजय (उसकी आँखों में पानी थे) नहीं .. मैं भी तुम्हे … नहीं अजय मुझे जाने दो “

वो मनो गिड़गिड़ाई वो अपने दिल को समझने की कोशिस कर रही थी

“बोल भी दो रिद्धि “

“नहीं अजय तुम्हे पता है की मैं क्या बोलना चाहती हु , क्या तुमने बचपन से मेरी आँखों में वो नहीं देखा है “

“देखा है शायद इसी का नतीजा है की हम शिकारी और चुड़ैल होते हुए भी जिस्मानी बंधन से दूर है “

उसने झटके से अपना हाथ मेरे हाथो से छुड़ा लिया

“और कभी हम इसमें बंधेंगे भी नहीं .. हमारे प्रेम का यही अंजाम था अजय , यही हमारी नियति थी की हम अलग रहे ,शायद इसीलिए हमें ये अभिश्राप मिला है “

वो अपनी आँखों का पानी पूछते हुए मुड़ी

“ये अभिश्राप नहीं वरदान है रिद्धिमा ..” मैंने थोड़ी अच्छी आवाज में कहा , वो वही रुक गयी और मुझे मुड़कर देखने लगी

“है रिद्धि ये वरदान है ताकि हम वो कर सके जो हमारे पिता नहीं कर पाए … ताकि हम दोनों एक हो सके “

रिद्धिमा के होठो में एक फीकी सी मुस्कान आ गयी , उस मुस्कान में दर्द hi दर्द था

“हमारे एक होने का मतलब है की मैं तुम्हारी गुलाम बन जाउंगी “

उसने हलकी आवाज में कहा था ……

“प्रेम में गुलामी कैसी रिद्धि , मैं भी तो तुम्हारा गुलाम हु “

वो जोरो से हंस पड़ी लेकिन उसमे हसी में हंसी नहीं बल्कि महज दर्द था ..

“मजाक अच्छा कर लेते हो अजय … “

“लेकिन ..”

“लेकिन कुछ नहीं अजय , साफ़ है , हम दोनों जानते है की हम कौन है और ये भी हम एक दूसरे को कितना चाहते है .. लेकिन फिर भी हम तभी एक हो सकते है जब तुम तुम रहो और मैं मैं राहु ..

तू बस अजय रहो न की को शिकारी और मैं बस रिद्धिमा राहु न की कोई चुड़ैल “

“लेकिन रिद्धि ये कैसे संभव है”

“तुम्हरे पास आना मेरे लिए खतरनाक है अजय , मेरी मजबूरी को समझो .. मैं भी जानती हु की ये संभव नहीं है इसलिए … इसलिए हमें दूर hi रहना होगा “

वो तेजी से आगे बढ़ गयी

“रिद्धि रुको तो , सुनो तो ..”

मैं थोड़ा आगे गया लेकिन मैंने देखा की सभी हमें hi देख रहे थे , मैं बस वही रुका हुआ अपने प्यार को जाते हुए देखने लगा , मुझे लगा था की ये ताकत मेरे प्यार से मुझे मिलाने के लिए मिली है लेकिन इस ताकत के दुष्प्रभाव ने मुझे मेरे प्यार से दूर कर दिया था , और ये समझने के बाद दूर किया था की वही मेरा प्यार थी … मेरी रिद्धि …
 
अपडेट 19

न खाने का मन करे न पिने का और साला न hi जीने का , एक चुदाई का मन करता था वो भी रिद्धिमा का चेहरा सामने आने पर भाग जाता ..

मैं बेचैन था और साथ hi बेचैन थी मेरी दोनों चाहिए..

“क्या हुआ अजय तू तो बस इधर से उधर किये जा रहा है , आज तुझे कुछ भी मन नहीं कर रहा ..”

रत हो चुकी थी इस समय मैं रोज चाचियों से अपनी सेवा करवाता रहता था लेकिन आज सेवा और मेवा दोनों hi भुला हुआ मैं उस जानलेवा खतरे में उलझा हुआ था जिसे लोग प्यार कहते है ..

“मेरे मालिक को इश्क़ का रंग चढ़ गया है “ बिस्तर के पास जमीं में बैठी हुई जमुना बोल उठी , ये अब जमुना का घर था मेरे बिस्टेर के निचे वो दिन भर बैठी रहती थी , मैं जो बोलता बस वो करती लेकिन अभी तक मैंने उसे कुछ भी नहीं कहा था ,

मैंने जमुना के चेहरे को देखा वो हलके हलके मुस्कुरा रही थी , वही मेरी दोनों चाहिए उसे किसी पहेली की तरह देख रही थी ..

“इश्क़ और वो भी एक शिकारी को ??? और ऐसा क्या ये इश्क़ है की इसकी बीमारी hi गायब हो रही है “रेवती चची बड़े hi आश्चर्य से जमुना की और देखने लगी

“इश्क़ भी हुआ तो किस्से एक चुड़ैल से “

जमुना खिलखिलाकर हँसाने लगी , मेरा माथा उसकी बात सुनकर गरम हो गया था मैंने एक खींच कर झापड़ उसके गाल में लगाया , वो दूर जा गिरी लेकिन फिर भी उसके होठो की मुस्कान नहीं गयी जैसे वो मुझे चिढ़ा रही हो ..

“मुँह बंद रख वर्ण मार डालूंगा तुझे “

मैं चिल्लाया

“आपकी hi हजूर जो चाहे कर लो ..”

वो बड़ी अदा से बोलने लगी ..

मैं धाम से आकर बिस्तर में गिर गया , माथे पर पसीना था मेरी दोनों चचिया मेरे चेहरे पर आये पसीने को अपने पल्लू से पांच रही थी ..

“क्या हुआ बीटा तेरी तबियत तो ठीक है न और ये रैंड क्या बोल रही है “ रेवती चची अभी भी दुविधा में पड़ी हुई थी

“कुछ नहीं चची आज आप लोग थोड़ा आराम कीजिये मैं कुछ देर अकेले रहना चाहता हु “

मेरी बात सुनकर दोनों चाचियों का मुँह hi खुला का खुला रह गया

“क्या सच में ??”

“है चची “

दोनों एक दूसरे को देखने लगी

“ठीक है बीटा अगर हमारी जरुरत हो तो हमने दरवाजा खुला रखा हुआ है तुम आ जाना , और ऐसे अब ये रैंड भी है तुम्हे ठंडा करने के लिए … आज हम भी आराम कर लेंगी “

इतना बोल कर वो दोनों वंहा से निकल गयी ..

जमुना अब भी पैरो को मोड हुए वही बैठी थी , जैसे उसका होना या न होना कोई मतलब नहीं रखता था ..

मैं कुछ देर तक यु hi शांत बैठा रहा

“जमुना मुझे इतना अजीब क्यों लग रहा है “

“ये इश्क़ है हजूर , हवस नहीं .. काश आप दोनों एक दूसरे से प्रेम न करते तो शायद अभी तक आप एक हो चुके होते “

मैंने उसके तरफ देखा , मुझे रिद्धिमा की बात याद आयी की ये उसकी माँ जैसी है …

तो क्या मैं अपनी सासु माँ को … :lol1:

मैं थोड़ा सा हंस पड़ा था ..

“जमुना तुमने बड़ा बुरा फंसाया है “

मैंने पहली बार जमुना से थोड़ी नरमी से बात की ..

“ये तो किस्मत थी मालिक वर्ण ना आप शिकारी बनते न hi मैं अपनी फूल सी बेटी को चुड़ैल बनती … न hi सुलभ जाता और न hi मैं हवस में अंधी होती “

उसके आँखों में एक आंसू आ गए , मुझे उससे कोई फर्क तो नहीं पड़ा लेकिन फिर भी मैंने उसे अपने पास आने का इशारा किया और उसे बिस्टेर में बिठा दिया ..

वो ठीक मेरे बाजु में सर गड़ाए बैठी थी ..

“तू क्या कर सकती है मेरे लिए ..”

ये कैसा प्रश्न था ये मैं भी समझ नहीं पा रहा था लेकिन उस समय ऐसे भी मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था

“जो आप कहो ..”

उसने बड़ी hi सहजता से कहा था

“तो मुझे इन सबसे बहार आने का कोई राष्ट बता “

वो मुझे घूरने लगी

“आपके पास क्या नहीं है , इस सकती से आप क्या नहीं कर सकते ,आप चाहे तो रिद्धिमा को भी पा सकते हो , बस थोड़ा जोर लगाना पड़ेगा , वो आपकी गुलाम बन जायेगी जैसे मैं बन गयी हु “

मैं थोड़ा सा हंसा

“मुझे उसे गुलाम नहीं अपने दिल की रानी बनाना है .. लेकिन वो मैंने को तैयार भी नहीं है “

“फिर तो कुछ नहीं हो सकता , आप उसपर जोर आजमाईस करोगे नहीं और वो आपकी होगी नहीं “

“यही तो बोल रहा हु ,मुझे मेरा प्यार चाहिए .. और इससे तेरा भी तो फायदा है , तू तो अपने फायदे के लिए क्या कुछ नहीं करती , तो बता ृशता और खुद भी गुलामी की इस जंजीर से आजाद हो जा “

जमुना की आँखों में जैसे चमक hi आ गया

“मालिक इसका राष्ट तो जांगले में hi पता चलेगा, जंहा शिकारी रहते है “

मैंने एक साँस छोड़ी

“मतलब तू बोल रही है की मुझे जांगले के अंदर जाना होगा , किसी शिकारी से मिलना होगा , साली कुटिया अगर उनके पास राष्ट होता तो क्या वो खुद आम जिंदगी नहीं जीते , जांगले में क्यों फिर रहे होते “

“मालिक लेकिन एक है जिसके बारे में कहा जाता है की उसने अपनी सकती पर विजय प् ली है .. और वो जांगले के अंदर hi मिलेगा “

“अच्छा और ये किसने कहा “

“चुड़ैलों ने …”

मेरे कान अचानक hi खड़े हो गए

“क्या कहा उन्होंने “

“यही की सिर्फ एक hi शिकारी है जिसने अपने ताकत पर विजय पायी है वो भी बिना किसी चुड़ैल के , लेकिन ये आसान नहीं था उसने इसके लिए बहुत तपश्या की थी “

मैं चुप hi रहा मैं बस जमुना को देख रहा था और ये जानने की कोशिस कर रहा था की कही ये मुझे भी तो फ़साने के फ़िराक में नहीं है …

और उसने जैसे मेरी नजरो को पहचान लिया

“नहीं मालिक आप गलत सोच रहे हो , मैं तो आपकी गुलाम हु मैं छह कर भी आपसे झूठ नहीं बोल सकती “

मैंने बस सहमति में सर हिला दिया

“मालिक आपको ठंडा कर दू क्या “

उसने बड़ी hi उम्मीद से पूछा था लेकिन आज तो मेरा मन भी बड़ा अजीब हो रहा था , जिसके बिना मैं रह नहीं सकता था वही वासना के कीटाणु दूर दूर तक भी मुझमे दिखाई नहीं दे रहे थे ..

“तू सो जा जरुरत पड़ी तो देख लूंगा “

मेरी बात सुनकर वो मुस्कुराई और जमीं में आकर लेट गयी , मैं बस अपनी सोच में hi गम हो गया था ..और मेरी आंखे लग गयी ..

मैंने तो सोचा था की आज मैंने प्रेम के कारण अपनी वासना पर विजय प् ली है लेकिन मैं गलत था , जब भूखे hi सो जाओगे तो रत को भूख लग सकती है और वो भी बड़ी तेज ..

मेरी नींद खुली तो मेरा लिंग अपने काबू में नहीं था , आज रत मैंने इससे संतुष्टि भी नहीं किया था इसलिए वो अपने फटने वाले अंदाज में खड़ा हुआ मुझसे कह रहा था की मुझे भोजन दो ,मैंने मोबाइल से समय देखा अभी सुबह के 4 बज रहे थे , मैं थोड़ा बेचैन सा हो गया था मैंने बिस्टेर के निचे सोई हुई जमुना पर नजर डाली , मन तो किया की इसे अभी बिस्टेर में पटक दू लेकिन फिर कुछ सोचकर मैं वही घूमने लगा , तभी निचे से कोई खटखट की आवाज ने मेरा ध्यान आकर्षित किया था ..

मैं तुरंत hi निचे चला गया और मैंने वंहा जो देखा उसे देख कर मेरी सांसे hi रुक सी गयी ..

निचे किचन में मेरी माँ सुलेखा कड़ी थी ,महज एक झीनी सी निघ्त्य पहने , उनकी पीठ मेरी और थी और मैं उनके जिस्म को निहारता hi रह गया ..

पहले hi मेरे अंदर हवस की अंधी सी चल रही थी , उनके भरे हुए जिस्म में वो झीने से कपडे को देखकर मेरे अंदर मनो हवस का सुनामी hi आ गया , लिंग अपने पुरे आकर में तना हुआ था सांसे तेज हो गयी थी , मेरी नज़ारे सीधे उनके कूल्हों पर गयी , वो उभरे हुए कूल्हे मुझे खुद को चूसने का आमंत्रण दे रहे थे , मैंने अपनी दन्त उसमे गदा देना चाहता था , उनका गोरा रंग उस काली रंग की निघ्त्य से झांक कर मुझे बेचैन करने लगा था , मैं उनके और भी पास आ गया जिससे मेरी सांसे उनके कंधो को छूने लगी , मेरा हाथ सीधे उनके खुल्हो पर गया और मैं पुरे हवस से भरे हे उन्हें दबोचने लगा ..

“आह कौन है .. अजय???”

वो मुड़ी और बुरी तरह से चौक गयी , मेरी आंखे लाल थी और सांसे तेज , माथे पर पसीने की बुँदे आ रही थी ,माँ मेरी होटल देख कर hi घबरा गयी थी ऐसा लग रहा था जैसे मुझे बुरी तरह से बुखार आया हो , मेरा जिस्म गर्म था और उसकी गर्मी वो भी महसूस कर सकती थी ..

लेकिन उनका पलटना मेरे लिए और भी जान लेवा था , उनके वो बड़े बड़े वक्ष मेरे साइन से आकर टकरा गए , मेरी नज़ारे उनके वक्षो की उस घाटी में चली गयी , मैं उन उरोजों के लिए बेताब हो उठा था जिससे मैंने बचपन में ममता का घुट पिया था , मेरे हाथ अनायास hi ममता से भरे उन उरोजों की और बढ़ गए थे , मेरे हाथो में मेरी माँ के कोमल वक्ष थे जिसे मैंने बड़े hi आराम से सहलाया , और उन्हें अपनी और खींच लिया , मेरी गर्म सांसे उनके चेहरे पर पढ़ रही थी , उनकी आंखे आश्चर्य से बड़ी हो चुकी थी और माथे पर पसीना आ गया था , मेरा लिंग उनके पेट में चुभने लगा था ..

“बीटा ये क्या कर रहा है तेरी चचिया कहा है ..”

वो कुछ बोल पति उससे पहले hi मैंने उसके खुले हुए कंधे पर अपने होठो रख दिए ..

मैं मर्यादाओ को भूलकर उनके कंधे को चूसने लगा था .

“अजय छोड़ बीटा होश में आ “

उन्होंने मुझे पूरी ताकत से हटाने की कोशिस की लेकिन मेरी पकड़ मेरी हवस जितनी hi मजबूत थी , मेरे हाथ उनके कूल्हों को दबोचने लगे थे ..

“छोड़ दे कमीने “ माँ रो पड़ी थी , उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगा दी और मुझे खुद से अलग किया और

‘चटाक ..’

एक जोरदार झापड़ मेरे गलो में पड़ा ..

“कमीने हवस में ऐसा भूल गया की तुझे तेरी माँ भी दिखाई नहीं दे रही है “

वो रट हुए बोली लेकिन मेरी आँखों में उनके आंसू नहीं बल्कि उनका मादक जिस्म था , मैं एक बार फिर से किसी कटपुतली की तरह हवस की आग में जलता हुआ उनकी और बड़ा और फिर से

‘चटाक ..’ उन्होंने पूरा डैम लगा कर मेरे गलो पर वार किया था लेकिन मेरे लिए वो मनो कोई फूल की मार hi थे

“होश में आ अजय होश में आज मैं तेरी माँ हु , जा अपनी चाचियों के पास जा या उस जमुना के पास जा “

वो अपना गाला फाड़ कर चिल्लाई ..

लेकिन मैंने उन्हें फिर से अपनी बांहो में कास लिया था और उनके कंधे को चूसने लगा था ..

“मालिक इन्हे छोड़ दीजिये .. मालिक “

माँ की आवाज सुनकर जमुना भी निचे आ गयी थी , लेकिन उसकी आवाज का मुझपर जैसे कुछ असर hi नहीं पड़ा , मैं जनता था की मैं क्या कर रहा हु लेकिन मेरे सामने अभी मेरी माँ नहीं बल्कि एक जिस्म था जिसे मैं भोगना चाहता था ..

“मालिक ..”

जमुना ने मेरा चेहरा अपनी और कर लिया और मेरी आंखे जमुना पर hi जैम गयी वो मार्जात नग्न थी , उसने अपने सरे कपडे खोल दिए थे ..

मैं उसे देखकर उसपर टूट पड़ा था ,अपने जिस्म से कपड़ो को फेक कर रसोई में hi उसे लिटा दिया था और उसके ऊपर चढ़ पड़ा , जब मैंने पहली बार उसके योनि में अपना लिंग घुसाया तब जाकर मुझे थोड़ा होश आया ..

“करिये मालिक अपनी हवस शांत करिये .. सुलेखा तुम यंहा से चली जाओ “

मेरी माँ मुझे और जमुना के इस खेल को बड़े hi आश्चर्य से देख रही थी , ये पहली बार था जब मैं अपने कण्ट्रोल से बहार गया था …

“सुलेखा तुम जाओ “

जमुना ने पुरे अधिकार से कहा था , इतने अधिकार से जैसे वो मेरी माँ को पहले से जानती हो ..

लेकिन उस समय तो मेरे दिमाग में बस हवस का कीड़ा नाच रहा था मैं जमुना के योनि में अपने लिंग का प्रहार करता गया और उस मजे में डूबता गया …

मेरी माँ वंहा से भागते हुए अपने कमरे में चली गयी थी …

सुलेखा अपने अपने बेटे की इस हालत को देखकर न सिर्फ दुखी थी बल्कि एक तरह से टूट चुकी थी , उसे जमुना के कहे वो शब्द याद आये थे जब उसने कहा था की जब अजय का सामना हवस के तूफ़ान से होगा तो वो अपनी माँ को भी नहीं छोड़ेगा ..

सुलेखा के आँखों में आंसू की बुँदे थी , उसे अपने बचपन का वो समय याद आ रहा था जब वो जमुना के साथ खेला करती थी ..

सुलेखा की सबसे अच्छी सहेली थी जमुना जिसे आज उसका hi बीटा उसके hi घर में उसकी hi आँखों के सामने राउंड रहा था …..
 
अपडेट 20
सुलेखा के सामने वो दिन वापस आने लगे थे ,

सुलेखा घुघर के मुखिया के परिवार से थी , रिश्ते में गजराज की दूर की बहन होती थी , और उसी के घर में जमुना का परिवार नौकर हुआ करता था , दोनों एक hi उम्र की होने के कारन दोनों में दोस्ती हो गयी ..

लेकिन फिर जमुना की शादी साहनपुर में और सुलेखा की लखनपुर के मुखिया के बेटे से हुई ,

सुलेखा जंहा लखनपुर के मुखिया की बीबी बानी वही जमुना साहनपुर के मुखिया के घर hi नौकर बन गयी ..

कभी मायके में दोनों मिला करती थी दोस्ती अब भी वही थी लेकिन दोनों के बिच बहुत hi गहरी खाई थी सामाजिक दिवार जो दोनों को अलग किये हुए थी , फिर भी सुलेखा जमुना को अपनी सबसे अच्छी सहेली मानती थी , मायके में जब भी दोनों अकेले होते तो साथ खूब गप्पे लड़ाया करते , अपना सुख दुःख बताया करते , उन्ही दौरान एक बार जमुना ने सुलेखा को बताया था की वो चुड़ैलों से मिली और उसे एक सकती मिली है जिससे उसने सुलभ को अपने जाल में फंसा लिया ..

सुलेखा को कभी उसकी बात पर यकीं नहीं आया लेकिन जब उसने पता करवाया तो ये बात सही निकली की सुलभ जैसा इंसान जमुना के आगे पीछे डोलता रहता है .. ये बात भी आयी गयी हो गयी लेकिन वक़्त ने एक मोड़ लिया और सुलेखा को दोराहे पर लेकर खड़ा कर दिया बेटे की जान और परिवार की इज्जत दोनों अब सुलेखा के सामने चुनौती सी बन गयी थी , वो तो भला हो की उसकी देवरानियों ने उसके बेटे को सम्हाल लिया था लेकिन इसी दौरान उसे जमुना की याद आयी , उसके कहे बात की , उस वेड की जो जमुना ने चुड़ैलों से किया था एक लड़की को चुड़ैल बनाने का वडा ……

सुलेखा को इस वेड में अपने सभी तकलीफो का समाधान दिखा , उसे लगा की अगर जमुना किसी लड़की को चुड़ैल बना पाए और वो लड़की अगर अजय की संगनी बन जाये तो अजय की साडी तकलीफो का इलाज उसे मिल जायेगा ..

सुलेखा ने जमुना से मदद मांगी उसे वो वडा याद दिलाया की उसे एक लड़की को चुड़ैल बनाना था , जमुना ने खूब सोचा और उसके दिमाग में जो नाम निकल कर आया उससे तो सुलेखा भी चौक गयी..

जमुना ने रिद्धिमा को अपनी बेटी की तरह पला था , लेकिन अजय के लिए अगर को सबसे सही संगी थी तो वो रिद्धिमा hi थी , सुलेखा ने भी जमुना की है में है मिला दिया , लेकिन उसे क्या पता था की तकदीर फिर से एक खेल खेलेगा , जमुना को फिर से वही ताकत मिली और उसने उसका प्रयोग अजय के ऊपर hi कर डाला , ये बात सुलेखा को तब पता चली जब वो उसके घर में आयी …….

अपनी सहेली को इस हालत में देखना अब सुलेखा की मजबूरी बन गयी थी , उसे पता चला की उसका बीटा रिद्धिमा से कितना प्यार करता है और आज रत की बातचीत को सुनकर उसके माथे में चिंता की और भी लकीरे खींच गयी ..

सुबह अजय ने जो किया उससे वो काँप hi गयी , उसने कभी नहीं सोचा ता की उसका बीटा वासना का इतना अँधा हो जायेगा की रिश्तो को भी भूल जायेगा , लेकिन वो अजय की मजबूरी को भी समझती थी ..

अब उसके दिमाग में बस एक hi बात आ रही थी , किसी भी तरह अजय को इस दर्द से मुक्ति दिलाना , या फिर रिद्धिमा को मानना , ये काम जमुना कर सकती थी लेकिन अब रिद्धिमा के मन से जमुना का विस्वाश hi उठ चूका था , वो क्या करे वो बस इसी उधेड़बुन में बैठी रही ……..

िदःर

सोनी और हिना अपने hi खयालातों में दुबे हुए थे ,

“क्या वो सच में एक शिकारी है “हिना ने अपनी बात राखी

“जैसा हमने देखा था मुझे तो उस लड़के की बात सच hi लगती है , वर्ण इतना मार खाने के बाद कोई कैसे जिन्दा रह सकता है “

“हमें भाइयो और पापा को बता देना चाहिए ??”

“मुझे नहीं पता ऐसे भी वो जाफर और कुंदन की मौत से बड़े hi परेशां है , उनके कातिल का भी अभी तक कोई पता नहीं चला “

“क्या वो जाय hi कातिल हो सकता है ??”

“मुझे तो नहीं लगता, ऐसे भी इंस्पेक्टर ने कहा था की पोस्टमॉर्टेम की रिपोर्ट से लगता है की उन्हें किसी शारित कातिल ने मारा है , ये आम इंसान का काम नहीं हो सकता कोई भी साबुत नहीं मिला , और कतल का तरीका वैसा hi है जैसा गांवो की कहानियो में चुड़ैल के लिए बोलै जाता है , जरूर वो चुड़ैल hi होंगी “

“लेकिन ये सब सच कैसे हो सकता है यार “ हिना के चेहरे पर अजीब सी उदासी छ गयी

“क्यों नहीं हो सकता अगर शिकारी हो सकता है तो फिर चुड़ैल भी जरूर होगी “

“लेकिन क्या ये शिकारी वाली कहानी सही होगी ,उसके गांव के तो सभी लोग यही कहते है की अजय को किसी शिकारी बाबा ने बचाया है और उसके बाद वो भी एक शिकारी बन गया है लेकिन …….”

“लेकिन क्या हिना , तूने देखा नहीं उस दिन जब हम उसे डंडे से मार रहे थे लेकिन उसका वो तो … मैं तो अभी भी सोच कर सिहर जाती हु की ये कैसा आदमी है … लेकिन अब समझ आ रहा है ये शिकारी hi है और शिकारी चुड़ैल की कहानिया भी सही है … और हमारे दोनों भाई को किसी चुड़ैल ने hi मारा है “

“हमें क्या करना चाहिए सोनी “

“मेरे ख्याल से हमें सबको बता देना चाहिए की उनका मुकाबला इस बार किनसे है “

सोनी की बात सुनकर हिना ने भी हां में सर हिलाया …

इधर

मैं जमुना से अपनी हवस भुझाने के बाद अपने बिस्टेर में पड़ा था दिन निकल चूका था लेकिन मैं बिस्टेर को छोड़ने को तैयार नहीं था ,ऐसा नहीं था की मैं नींद में था, मैं रत भर से जगता रहा था लेकिन दिमाग में अजीब सी बाटे चल रही थी ..

हवस का तूफ़ान ख़त्म हो जाने के बाद से hi मैं बस इसी सोच में था की क्या मैं इसे कभी काबू कर पाउँगा ..??

आज मैं हवस में डूबकर इतना अँधा हो गया की दुनिया के सबसे पवित्र रिश्ते को भी ख़त्म करने में तुला था ..

इस हवस ने मुझसे क्या नहीं छीन लिया , मेरे रिश्ते, मेरा प्यार सब इसकी भेट चढ़ गए थे ,मैं खुद में काबू भी नहीं कर पा रहा था , मुझे ायरत बस एक जिस्म सी दिखाई देती है , नहीं मुझे अपने इस बीमारी से निजात पाना hi होगा , मुझे उस शिकारी को ढूंढना hi होगा …

लेकिन कैसे ..??????

मेरे दिमाग में एक नाम गूंजा जो कभी पिता जी के अच्छे दोस्त हुआ करते थे , और पिता जी ने उनके बारे में मुझे बताया था ..

मुझे याद आया की पिता जी ने उनका no. मेरे मोबाइल में सेव किया था ,

मैंने तुरंत hi अपना मोबाइल निकला और टाइप किया उनका नाम मेरे सामने था …. डॉ. चुटिया ….
 
अपडेट 21
हम नॉएडा के फिल्मसिटी के बहार खड़े थे तभी एक चमचमाती सी कार हमारे सामने आ कर रुकी ..

मैं और परिमल डॉ. चुटिया के बताये अनुसार यंहा पहुंच गए थे ,मैंने परिमल को भी अपने साथ ला लिया था उसे मैंने उतनी hi बाटे बताई थी जितनी उसको जननी जरुरी थी , मैं जमुना को भी अपने साथ hi लाया था लेकिन उसे होटल में hi छोड़ कर हम यंहा आये थे .. जमुना के बारे में मैंने परिमल से बस इतना कहा था की वो मेरे शिकारी को शांत रखेगी , उसके आगे परिमल को कुछ भी समझने की जरुरत नहीं पड़ी , वो मेरे साथ मेरे और रिद्धिमा की लव स्टोरी की वजह से था …

हम अभी अभी यंहा पहुंचे थे और थोड़ी hi देर में वो कार हमें लेने आ गयी , कार से एक बेहद hi सूंदर और मादक ायरत बहार आयी ,उसका शरीर उस काळा रंग की ड्रेस में और भी हसीं बन पड़ा था , आँखों में काळा गूगल थे , ड्रेस जिस्म से चिपकी हुई थी जिससे उसके जिस्म का हर कटाव उभर कर सामने आ रहा था , ऐसा लगा जैसे सनी लीओन सामने आ कर कड़ी हो गयी हो , रंग भी नृ जैसा hi था , वो न तो पूरी भारतीय लग रही थी न hi पूरी विदेशी ….

उसके कटाव को देखकर मेरे लिंग में सुरसुरी सी उठाने लगी थी , वो तो भला हो की मैं कुछ देर पहले hi जमुना के अंदर ठंडा होकर आया था , मैंने तुरंत अपना ध्यान दूसरी और किया …

“hello मेरी मार्लो “

उसने अपना हाथ हमारी और बढ़ाया , परिमल की आंखे hi जैसे चमक गयी थी , हम दोनों ने एक दूसरे के चेहरे को देखा और परिमल ने झट से अपना हाथ आगे बढ़ा दिया ..

“क्या सच में ..??” वो आश्चर्य और ख़ुशी के साथ बोल उठा

“है मेरी मार्लो “

परिमल ने अपना मुँह मेरे कानो के पास टिका दिया …

“भाई ये बड़े शहर की ओउरते भी कमाल है अभी अभी मिले और सीधे मरने की बात कर रही है , मैं तो इसकी जैम कर मरूंगा “

परिमल एक्ससिटेमेंट में बावला गया था

“कहा ..??”

“व्हाट कहा , ी ऍम मैरी मार्लो , मैं डॉ. साहब की सेक्रेटरी हु “

“इसकी माँ का पोहा जलेबी , कैसे कैसे नाम रखते है ये लोग “परिमल थोड़ा गुस्से में आ गया वही मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाया ……

थोड़ी hi देर में हम लोग एक फिल्म के सेट पर थे ..

“मरोल जी हम यंहा क्या कर रहे है “

“डॉ. साहब ने फिल्म प्रोडक्शन कंपनी खोली है उसी के तहत पहली फिल्म बन रही है भवर नाम से उसी की शूटिंग चल रही है “

“ओह्ह ..”

मैंने पहली बार किसी फिल्म के सेट पर आया था ये वैसा नहीं था जैसा मैंने सोचा था , चारो और कई लोग खड़े थे और किसी को किसी से कोई मतलब hi नहीं था म तभी मैरी ने एक आदमी की और इशारा किया वो भी हमें देखकर हाथ हिलने लगा, कोयले जैसे काळा रंग के उस पतले दुबले आदमी को देखकर ऐसा लगता था की किसी नर कंकाल में बस थोड़ा मांस चढ़ा दिया हो , और उसके बिखरे हुए बल और बड़ी दाढ़ी, आँखों में लगा चस्मा उसे और भी अजीब दिखने वाला बनता था , ये थे डॉ. चुटिया महँ साइकोलोजिस्ट और फिलोसोफर..

जितने किस्से हमने इनके सुने थे देखने से तो नहीं लगता था की ये सब इन्होने hi अंजाम दिए होंगे ..

“स्वागत है लखनपुर वासियो “

उन्होंने हाथ बढ़ाते हुए कहा ..

“जी ये लखनपुर से है मैं तो घुघर से हु “

डॉ. ने परिमल पर एक नजर डाली ..

“गजराज के बेटे हो ??”

“जी, आपको कैसे पता चला ?? “

“चेहरा मिलता है और तुम हो अजय , विनय चौधरी के सुपुत्र “ वो मेरी और मुड़े

“जी डॉ. साहब … “

“तुम दोनों से मिलकर ख़ुशी हुई , सालो हो गए मुझे उधर गए हुए , कैसे है तुम्हारे पिता जी और तुम्हे मुझसे क्या काम है ..??”

मैं कुछ बोलता उससे पहले hi एक आवाज वंहा गूंज गयी ..

“तेरी माँ को करवा मरू , लाइट का एंगल 45.123 डिग्री नार्थ रखने को बोलै था न तूने 44.99 डिग्री में सेट किया है सुधर इसे , और कैमरा 60.001 डिग्री ईस्ट से होता हुआ आएगा अप्सयू पर फोसोउस, थान एंगल चेंज एंड 35.36 डिग्री वेस्ट से होता हुआ साँची और एमी का क्लोज़अप लेता हुआ सीधे नंदनी के ऊपर जायेगा , सभी के चेहरे में शॉक का एक्सप्रेशन होना चाहिए लेकिन अप्सयू मुस्कुरा रहा है वही आरव बस लावणी को देखे जा रहा है और लावणी शर्मा रही है , दोनों का क्लोज उप … ोकक ोकक एक और टेक करते है “

डॉ. ने एक नजर उस और देखा ..

“ये साला सोचा था साइंटिस्ट टाइप के राइटर डायरेक्टर को लाऊंगा तो अच्छी Si-Fi मूवी बनाएगा , लेकिन सोचा नहीं था की ये इतना परफेक्शनिस्ट निकल जायेगा , हर चीज इसे बिलकुल परफेक्ट चाहिए “

“ये कौन डायरेक्टर है सर ..”

मैं उस आदमी की तरफ देख कर कहा जो की डायरेक्टर की टोपी पहने डायरेक्टर चेयर में बैठे हुए स्क्रीन पर कुछ देख रहा था ..

“अरे वही जो रोमांस बोलकर एक्शन और Si-fi लिखते है हॉलीवुड टाइप की मूवीज का राइटर “

“क्रिस्टोफर नोलन??? इन्सेप्शन वाले “ परिमल चिल्लाया

“अरे नहीं उसकी मूवी में रोमांस कहा होता है ये तो रोमांस भी डालते है न मूवी में ..”

“ओह्ह जेम्स कमरों तो नहीं टाइटैनिक वाले “

परिमल फिर से बोल पड़ा , लेकिन इस बार डॉ. ने उसे गुस्से से देखा

“ये क्या तुझे विदेशी दिखते है ??”

परिमल चुप हो गया

“देखो बच्चो मैंने सोचा था की आराम से पैसे लगाऊंगा, फिल्म हिट होगी तो मजे करूँगा लेकिन यंहा तो डायरेक्टर के नखरे hi अलग है , हर चीज में साइंस घुसा देते है , मेरा जेब खली होने वाला है , अभी तक तो दिल्ली में थे अब इन्हे आगे की मूवी शूट करने उसे जाना है, कभी पहाड़ की वादियों में चले जाते है ,कभी आश्रम जलवा देते है, और उसपर भी कोई सेक्स सन नहीं यार , ऐसा कैसे चलेगा ..उससे अच्छा तो वो किम्मो भैया( ) hi ठीक थे जो पूरी मूवी एक कमरे एक घर और एक बगीचे में बना रहे है , बस बैठे रहो नए नए रिलेशन्स पर बात करो और फलसफा छोड़ो बैठकर वही सही था ”

तभी सामने से वो शख्स आया ..

“इनसे मिलो ये है हमारे फिल्म के डायरेक्टर एंड राइटर नैनो भाई उर्फ़ “

“hello बच्चो … ये बॉकचोड़ा कैमरा मन सही एंगल नहीं लगा रहा है डॉ. “

डॉ. का चेहरा छोटा हो गया था

“जी मैंने सुना , नैनो भाई मैं क्या सोच रहा था स्टोरी में थोड़ा मसाला होना चाहिए न “

“तो एक्शन तो है न .. और रोमांस भी तो है “

“नहीं वो तो है , मैं बोल रहा था थोड़ा सेक्स…” डॉ. ने थोड़ा धीरे से कहा लेकिन नैनो जी भड़क उठे

“इसीलिए हम तुम जैसे पेरवर्टेड लोगो के साथ काम नहीं करते, अरे यार हम यंहा साफ सुथरी पारिवारिक मूवी बना रहे है और आपको उसमे भी मसाला चाहिए इन्सेक्ट दाल दे क्या , कहो तो सुलेखा को बाजवा दे आरव से, या सुलेखा और नंदनी को लेस्बो बना दे “

“सुलेखा … ??” मैं बुरी तरह से चौक गया , डॉ. ने अपनी नजरो से मुझे चुप करवाया

“वो इनके फिल्म की करैक्टर है “

मैं थोड़ा शांत हुआ

“देखिये नैनो भाई वो सब तो ठीक है लेकिन काम से काम अप्सयू और एमी का तो कोई सन दाल सकते हो न या फिर आरव या लावणी का .. थोड़ा इंटिमेट वाला“ डॉ. ने फिर से उन्हें समझते हुए कहा

लेकिन नैनो भैया का गुस्सा शांत नहीं हुआ था

“देखो डॉ. इंटिमेट सन चलेगा लेकिन कम्बल के निचे चलेगा , हम अश्लील चीजे नहीं लिखते ,और किश तो दिखा hi रहे है न ,ऐसे भी बिहार में दारू नहीं मिलती न जो पि के लिख दे कुछ भी “

बोलते बोलते नैनो भाई की आँखों में आंसू आ गए थे, चमकदार चेहरा अचानक से उदास हो चला था , डॉ. ने बड़े hi प्यार से उनके कंधे पर हाथ रखते हुए उन्हें सांत्वना दिया …

“ठीक है नैनो भाई , और आपने कहा था न की एक स्पेस शिप और एलियन मंगवाने है तो एलियन तो नहीं मिले लेकिन नासा वालो से बात करके शिप जुगाड़ कर रहा हु “ डॉ. ने फिर से दबी आवाज में कहा

“हुउउम्म ठीक है वो हमारी दूसरी मूवी के लिए चाहिए था , उसमे आदमी शेर बन जाता है , नहीं शेर आदमी बनकर सेक्स करता है , लेकिन वो एलियन होते है न तो सेक्स करके लड़की को मार देते है “

“ठीक है ठीक है नैनो भाई आप अपना काम कीजिये मैं थोड़ा बच्चो से बात कर लू “

“बिलकुल जाते जाते मैं तुम लोगो को अपनी लिखी एक कविता सुना देता हु ..” नैनो भाई हमारी और मुद गए

“दिल में दर लगता है …

ध्यान से सुनियेगा बहुत गहरी कविता है …


दिल में दर लगता है

जंहा तुम और मैं, मैं और तुम

गुजरते है 9.81 मीटर प्रति सेकंड की गति से गिरते हुए 300 कग के जनरेटर के निचे से 4.1मीटर पार्टी सेकंड की रफ़्तार से ..

मन को ख़ुशी मिलती है

जंहा तुम और मैं , मैं और तुम

कुदत है 20तह फ्लोर से , बिना पैराशूट बंधे हुए,15.369 कम मोठे तार के सहारे …

इस जंहा में सब अपने लगते है


जंहा तुम और मैं, मैं और तुम ….”

“बस नैनो भाई हो गया …” डॉ. ने हाथ जोड़ते हुए कहा

“अरे सुनो तो ये नयी लाइन है “

“मैं सुनौ क्या अपना , कमरिया पकड़ के लगाए रे सैया ढाका धक् ..”

“चुप रहो तुम , साला अश्लील है ये लौंडा , जाता हु कर लो बात ?

अरे ये कोरियोग्राफर कहा है , उसे बोलै था की अप्सयू को सालसा सीखा दे वो उसे दारू पिलवा कर नागिन डांस करवा रही है , साला हॉलीवुड hi ठीक है यंहा तो किसी को कदर hi नहीं है “

नैनो भाई चिल्लाते हुए आगे बाद गए …

“देखा देखा तुम लोगो ने यार सब परफेक्ट चाहिए इन्हे, अब मैं एलियन कहा से लाऊंगा “

“अरे सर जादू या पक को फ़ोन कर दीजिये न “

परिमल हसंते हुए बोलै लेकिन डॉ. के गुस्से देखने पर वो चुप हो गया …

“तुम बताओ अजय क्या काम था मुझसे “

“सर वो , थोड़ा अकेले में चैलेंज “

उन्होंने मैरी को इशारा kiya,aur मेरी परिमल की तरफ मुड़ी

“आजा तुझे जन्नत दिखाउंगी “

“क्या ?? “ परिमल के चेहरे में पसीना आ गया था वही मैरी की अदा देखकर मेरे लिंग में सुरसुराहट सी होने लगी , मैंने तुरंत डॉ. को देखा उनके भयानक चेहरे को देखकर सुरसुराहट तुरंत hi शांत हो गयी

“जन्नत मूवी का सेट लगा है न “ मैरी ने बड़ी ऐडा से कहा …

*************

“बोलो अजय .. क्या बात है “

हम पास के hi एक बार में बैठे हुए थे , डॉ. साहब ने अपने ों थे रॉक्स वाले पैक को चुसकियाँ लगाकर पि रहे थे

मैं घुघर की लड़ाई से लेकर अभी तक की हर चीज डॉ. को बतानी शुरू की , ये भी की कैसे मैं अपनी चाचियों के साथ इन्वॉल्व हुआ, कैसे रिद्धिमा चुड़ैल बानी और अब कैसे उन 4 लड़को का क़त्ल हुआ कैसे उनके परिवार वालो से मेरी दुश्मनी हुई , कैसे जमुना मेरे पास आयी और अब कैसे मैं अपने प्यार के लिए इस ताकत से छुटकारा पाना चाहता हु ..

सब सुनने के बाद डॉ. का चेहरा गंभीर हो उठा था ..

“देखो अजय शिकारी को ढूँढना तो हमसे न हो पायेगा , लेकिन तुम्हारा प्यार दिलाने के लिए मैं कुछ कर सकता हु “

“सर आप तो बहुत बिजी लग रहे है मुझे लगता है की मैंने यंहा आकर गलती कर दी “

मैं थोड़ा दुखी हो गया था , लेकिन डॉ. ने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा

“यार यंहा अपनी सुनता कौन है, डायरेक्टर कोई फिल्म बनाने दो हम चलते है तुम्हारे गांव … वर्ण पता चला मुझे hi कभी हेलीकाप्टर से फेक देंगे और बोलेंगे ..

जंहा तुम और मैं ,मैं और तुम

उड़ाते है पंछियो की तरह .. :lol1: “

डॉ. की बात सुनकर मैं भी हंस पड़ा था
 
अपडेट 22
“कैसा लगा जन्नत “

एक जबरदस्त फिल्म का सेट परिमल के सामने था , वो आंखे फाडे हुए उसे देख रहा था , ऐसा लग रहा था जैसे पूरा का पूरा शहर hi बसा दिया गया हो …

बड़े बड़े शाही इमारते दिख रही थी और साथ hi छोटा सा बगीचा और तालाब भी बनाया गया था जो की बेहद hi सूंदर था ..

“वाओ , इसमें तो बहुत पैसा खर्च हुआ होगा न “

“है मल्टीस्टार वाली फिल्म है 100 करोड़ से जयदा का तो बजट hi होगा इसका “

परिमल मैरी के साथ घूमकर बहुत hi खुश दिख रहा था , जब दोनों घूम घूम कर थक चुके थे तब डॉ. का फ़ोन आया , परिमल के कहने पर डॉ. ने अजय को भी वही भेज दिया ……

“वह अद्भुत , अतुलनीय ..”

मैं बस उस फिल्म सेट के बहार खड़ा हुआ hi मोहित सा उसे देखता रह गया

“ये फिल्म सुपरहिट हुई थी इसलिए इसके सेट को हटाया नहीं गया है बल्कि परियातन के लिए खोल दिया गया है “

मैरी मुस्कुराते हुए कहने लगी , बहुत देर हो गयी थी और मुझे भूख लगने लगी थी , खासकर मैरी जैसी हसीं और मादकता से भरपूर महिला जब सामने हो तो वासना की धार शरीर में उतरना कोई अस्वाभाविक बात नहीं होती , सरे अंगो को प्रदर्शित करते हुए उसके वो कपडे जो और खुले हुए बदन के वो हिस्से मुझे उकसा रहे थे ..

मैरी जैसे मेरी नजरो को पढ़ प् रही थी , उसके होठो में एक अर्थपूर्ण मुस्कान आ गयी ..

“क्या देख रहे हो मर. अजय ..”

“बस देख रहा हु जन्नत बहार से इतना सूंदर है तो अंदर से कैसा होगा “

मैरी हंस पड़ी वही परिमल बोल उठा

“भाई गजब का है , एक बार अंदर तो जा के देख “

परिमल के बात सुनकर मैरी की मुस्कान हंसी में बदल गयी , परिमल को कोई भी आईडिया नहीं था की मैं किस बारे में बात कर रहा हु ..

“देखेंगे भाई , अंदर जा कर , घुसकर सब करके देखेंगे अगर मैडम की इजाजत हो तो “

“अरे मैडम hi दिखाएगी तुम्हे “

“क्या सच में मैडम , आप दिखाओगी …? जल्दी करो अब वेट नहीं हो रहा है ..”

मैरी की आंखे मुझसे मिल गयी थी और जैसे मुझे सहमति मिल गयी ..

“परिमल मैं मैरी जी के साथ जाकर जन्नत देखता हु , तो होटल चले जा मैं थोड़े देर में आऊंगा “

“अबे मैं क्यों जाऊ , मैं एक बार और जन्नत देखूंगा “

उसकी बात सुनकर मैंने मैरी की तरफ देखा, उसकी मुस्कान और भी कातिलाना हो गयी थी , मेरी हवस उसे देख कर बढ़ने लगी थी , लिंग ने अपना पूर्ण रूप दिखा दिया था और अब वो दर्द करने लगा था , मुझे उसे जल्द hi बहार निकलना था और किसी हलके गर्म लेकिन चिपचिपाहट से भरे हुए स्थान में घुसना था :डी

“फ़िक्र मत करो मैं तुम दोनों को एक साथ जन्नत दिखा दूंगी .. बहुत एक्सपीरियंस है मुझे “

मैरी इठलाते हुए बोली और मैंने उसे जोर से अपनी बांहो में कास लिया , मेरी ये हरकत देख कर मैरी के साथ साथ परिमल भी भौचक्का रह गया था …

“जो दिखाना है जल्दी दिखाओ अब अगर देर हुई तो मेरा फैट जायेगा ..”

परिमल ने जैसे अपना थूक गतका हो

“भाई ये क्या कर रहा है तू “

“चुप कर बे ..चलो जल्दी से “

मैंने मैरी के नितम्भो को जोरो से दबा दिया , उसके मुँह से भी एक सिसकी निकल गयी ..

उसने मेरा हाथ पकड़ा और खींचते हुए सेट के अंदर बने एक महल में ले गयी , वो बहार से महल सा दिखने वाला मकान असल में बहार से hi ऐसा था अंदर कोई खास जगह नहीं थी , लेकिन एक कमरा दिख गया ..

“ये फिल्म की हेरोइन का कमरा था जो एक जमींदार की बेटी थी “मर्री ने एक बड़े एक्ट्रेस का नाम लिया जिसने वो किरदार निभाया था ..

पर्याटक अभी भी वंहा पर मौजूद थे सभी बस फोटो निकलने में व्यस्त थे , और हम उस कमरे में दाखिल हो गए जो की पहले मेल में था , एक दादा सा किंग साइज बीएड वह लगा था , कई झरोखे भी बने हुए थे लेकिन कोई भी किसी काम का नहीं था , वंहा से बहार के नज़ारे के स्थान में बस हरा पर्दा दिख रहा था , हरा पर्दा इसलिए लगाया जाता है ताकि एडिटिंग में उसमे से जो भी दिखाना है वो दिखाया जा सके , या वफ़ष का इफ़ेक्ट डाला जा सके , मैंने उसी बिस्टेर में मैरी को पटक दिया और उसके ऊपर कूद पड़ा ..

“भाई ये क्या कर रहे हो , यंहा कई लोग है “

“दरवाजा बंद कर और बहार जा कर खड़े हो जा ,कोई आये तो सम्हाल लेना बताना मत “

मैं इतना बोलकर फिर से मैरी के तरफ देखने लगा , परिमल हड़बड़ाया हुआ कमरे से बहार आया और दरवाजा बंद हो गया..

“मैंने इतना उतावला आदमी आज तक नहीं देखा “

मैरी हँसाने लगी ..

“अभी तो उतावला पैन बस देखा है , आगे जो देखोगी वो भी आज तक कभी नहीं देखा होगा “

मैं झटके से उसके कपडे उसके शरीर से निकलने लगा ,

“थोड़ा साबरा करो मैं खुद निकाल देती हुई तुम तो फाड़ hi डालोगे “

“जल्दी कर जानेमन आज तो तेरी फाड़ hi दूंगा “

मैं उसके गले को चुम रहा था , और मेरे हाथ धीरे धीरे उसके शरीर पर चल रहे थे , उस किंग साइज एक बिस्टेर में बिछे उस नरम गद्दे में गर्म गर्म मैरी का जिस्म मुझे पागल बना रहा था ..

मेरे होठ उसके वक्षो पर चले गए जिसे मैंने जी भर कर चूसा लेकिन अपने लिंग के तनाव के आगे मजबूर होकर मुझे उसे छोड़ना hi पड़ा , मैं नग्न हो चूका था वही मैरी के जिस्म में बस एक पंतय के रूप में आखरी वस्त्र बचा था …मेरा लिंग उस पंतय के ऊपर से hi उसकी जानदार योनि में घिस रहा था , योनि के रिसाव से वो मुलायम कपडे की बानी पंतय का वो हिस्सा गिला हो चूका था और उससे रगड़ खाने के कारन उसका वो चिपचिपा द्रव्य मेरे लिंग में लगता हुआ मुझे और भी उत्तेजित कर रहा था मैंने हलके से उसके पंतय को उसकी कमर से निचे किया ..

“आअह्ह्ह “

वो बस इसी अहसास से सिहर उठी की उसका अंतिम वस्त्र भी उसके जिस्म से अलग हो रहा है ,

“वह क्या जिस्म है “

उसके गोर रंग में लिपटी काली पंतय जब उसके नितम्भो से सर्कि तो मेरा मुँह से अनायास hi निकल गया ..

मैं उसके नितम्भो की कोमलता और आकर में खो सा गया था , पंतय अभी उसके जांघो में फांसी थी और मैं उसके कोमल नितम्भो पर टूट पड़ा , मैंने उसके गद्देदार नितम्ब के एक हिस्से में अपने होठ लगा दिए , मैं अपने गलो को रगड़कर उसकी कोमलता का आभास करने लगा … और चाट चाट कर थूक से उसे भर दिया , मैरी के हाथ मेरे बालो में कास गए थे ..

“आह अजय , अब करो न “

उसकी इस बात ने जैसे आग में घी दाल दिया हो , मैंने उसे बुरी तरह से दबोच लिया अभी भी पंतय जांघो में फांसी थी जिससे उसकी जंघे पूरी तरह से अलग नहीं हो प् रही थी , मैं उसके होठो में होठ डालकर उसकी जांघो को अलग करने का प्रयास कर रहा था , उसने खुद अपने जिस्म से उस पंतय को अलग कर दिया और अपनी जंघे फैला दी , मेरे होठ उसके होठो पर लगे हुए थे ..

मैंने पहला वार किया जो की उसके पेट की तरफ फिसल गया ..

वो हलके से हंसी और अपने हाथो को निचे लेट हुए मेरे लिंग को पकड़ कर अपने जन्नत के द्वार पर ले आयी , हलके हलके धक्को के साथ मेरा लिंग उसके योनि में पूरी तरह से समां चूका था ..

“आआह्ह्ह्ह अपने जन्नत का दरवाजा तुम्हारे लिए खोल दिया है राजा अब ले लो मजा “

वो मादकता से भरी हुई आवाज में बोली और मैं उत्तेजित होकर उसके जिस्म का मजा लेने लगा , ऐसी योनि मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी , ये जितनी टाइट थी वैसी hi कोमल और लचीली भी , पूरी तरह से गीली थी और गहरी इतनी की मेरा पूरा लिंग घुसाने के बाद भी मैं उसकी गहराई नहीं नाप प् रहा था ..

बिस्टेर में सिसकियों और गुर्राहट का दौर चल पड़ा था , हम एक दूसरे में मस्त हो गए थे , ये मेरे जीवन की पहली ायरत थी जो मेरी हवस को आसानी से सम्हाल भी रही थी और खुद भी मजे में डूबी हुई थी , न जाने कितनी बार मैंने उसके शरीर में और उसने मेरे शरीर में अपने दन्त गड़ाए थे , नाख़ून गदा कर उसने मेरे पीठ से खून तक निकाल दिया लेकिन हवस शांत न हुई …

“आआअह्ह्ह्ह “

वो बुरी तरह से जहर गयी , मैं अब भी पागलो की तरह उसे धक्के लगा रहा था ..

“थोड़ा रुको …”

उसने अपनी पंतय से अपनी योनि को साफ़ किया और खुद hi पलट गयी . उसके कोमल और अच्छे नितम्भ देख कर मैं पागल हुआ जा रहा था , मैंने उसके जांघो की जोड़ में फिर से अपने लिंग को घुसाया इस बार पीछे से , वो अभी अभी झरि थी लेकिन थकी बिलकुल भी नहीं थी ..

वो आहे भर रही थी और मैं जोरो से उसके धक्के मरे जा रहा था , मेरी कमर उसके नितम्भो से टकराकर एक मादक आवाज पैदा कर रही थी , मैं अपने कमर में उसके नितम्भो की कोमलता का आभास कर पा रहा था …

न जाने वो कितनी बार झरि और हमने कितने पोसिशन्स बदल डेल , अंत में मैंने खुद को उसके अंदर हुई खली कर दिया …

हम दोनों hi हांफते हुए बिस्टेर में पड़े थे ……..

“मजा आ गया … मैंने न जाने कितनो को ठंडा किया है लेकिन ऐसे लोग बहुत काम हुए जिन्होंने मुझे ठंडा किया हो , लेकिन तुम उन सबसे जयदा ताकतवर हो … “

मैरी मेरे साइन में खुद को टीकाकार मेरे होठो को चूमने लगी ..

“अउ डॉ. ने .. क्या उन्होंने तुम्हे ठंडा नहीं किया ??”

मैरी अचानक से उठ बैठी

“पागल हो गए हो क्या , डॉ. तो मेरे पिता सामान है ?? “

मैंने उसे आश्चर्य से देखा , मुझे लगा था की मैरी डॉ. के लिए किसी रखैल की तरह होगी …

“ओह्ह्ह माफ़ करना , डॉ. की शादी हो गई ??”

मेरे सवाल को सुनकर मैरी का चेहरा hi उतर गया ..

“बेचारे दिलजले है , उस रंडी के कारण …”

“कौन ??”

“है एक तुम जानकर क्या करोगे , लेकिन उस रंडी के कारन डॉ. आज भी कभी कभी उदास रहते है रंडी को याद करते है …”

“तुम उसे बार बार रंडी क्यों बोल रही हो , इतना गुस्सा उसके लिए “

मेरी बात सुनकर मैरी जोरो से हंस पड़ी ..

“बाद में बताउंगी लेकिन अभी चलो , बहार से इतनी आवाजे क्यों आ रही है …”

उसने बहार से आती हुई आवाजों पर ध्यान देते हुए कहा , मुझे भी परिमल की और उसके साथ कई आवाजे आयी ….

काम कपडे पहन कर जब बहार निकले तो बहार मजमा लगा हुआ था ..

कई चिनेसे लोग बहार खड़े थे और वो परिमल से बात कर रहे थे ..

“सी ी टोल्ड यू ..”

हमारे बहार निकलते हुए परिमल बोल उठा ..

सभी लोग हमें hi देखने लगे , और हमारी फोटो उतरने लगे ..

“वाओ , नमस्कार लौड़े के राजा , नमस्कार छूट की रानी “ एक चिनेसे हाथ जोड़े हुए पुरे 90 डिग्री के एंगल में झुकता हुआ बोलै , सके साथ बाकि लोग भी यही दोहरा रहे थे ..

मैंने और मैरी आश्चर्य से भरकर परिमल को देखा वो हमें देखकर मुस्कुरा रहा था ..

“नाउ यू कैन जो इनसाइड , एंड सी थे बीएड वेयर राजा एंड रानी मेड लव ..”

परिमल की बात सुनकर हमारे होठो में मुस्कान आ गयी वही बाकि चिनेसे लोग अंदर जाकर बिस्टेर की फोटो उतरने लगे ..

“वाओ सी आईटी .. वत्स थिस “

एक लड़की एक बिस्टेर में गिरे मेरे वीर्य और मैरी के काम रास के मिश्रण को देखकर बोली .. लेकिन बाकियो ने जब उसे देखा तो उनके चेहरे के भाव कुछ बदलने लगे

“चल भाग अब यंहा से वर्ण मार खाएंगे , और जो पैसे इन्होने तुम लोगो से मिलवाने के दिए है वो भी जाते रहेंगे “परिमल ने की बात सुनकर हम दोनों हसंते हुए वंहा से भागे …

“ये क्या बकचोदी पेल रहा था बे तू वंहा “

“अबे ये सेल चिनेसे दुनिया को चुटिया बनाते है तो मैंने सोचा क्यों न इन्हे चुटिया बनाया जाये , ये मूवी चीन में भी ब्लॉकबस्टर थी , इसमें राजा रानी दिखाए गए है जो एक खास महल के खास कमरे में लव मेकिंग करते है , मैंने इन्हे बस ये बोल दिया की ये वही कमरा है और मैं उन्हें उन लोगो से मिलवा दूंगा , उसके लिए पैसे लगेंगे , और थोड़े देर में वो एक सीक्रेट गेट से बस उन लोगो के लिए कमरे के अंदर पहुंच जायेंगे , तुम दोनों के नाम भी बता दिए की जब उन्हें देखोगे तो ये बोलना , अच्छे पैसे मिले भाई … छूट की रानी और लावड़ो के राजा को दिखने के “

परिमल की बात सुनकर हंस हंस कर हमारे पेट में दर्द होने लगा था ……
 
अपडेट 23
रिद्धिमा दो दिनों से अखाड़े में आ रही थी लेकिन उसे न तो परिमल दिखा न hi अजय , जिज्ञाषा के कारन वो रेखा और रानी से मिलने चली गयी ..

“कौन डॉ. चुटिया ??”

रिद्धिमा उनकी बात सुनकर थोड़ा चौकी ..

“अरे वो हमारे पिता जी दोस्त हुआ करते थे, सुना है बहुत बड़े साइकोलोजिस्ट और फिलोसोफर है साथ hi जासूस भी ..”

“जासूस ???”

रिद्धिमा की आंखे बड़ी और कान खड़े हो गए

“है मशहूर जासूस काजल को तो जानती होगी , वो उसके गुरु है “

रिद्धिमा ने काजल के बारे में कभी कभी पेपर में पढ़ा था ..

“काजल के गुरु ??”

वो आश्चर्य में भर कर बोली

“है , पिता जी ने बताया मुझे “ रेखा बोल उठी

“लेकिन वो दोनों उनसे मिलने क्यों गए है ??”

“मुझे क्या पता , होगा कोई काम “

रिद्धिमा के चेहरे में पसीना सा आ गया , उसे किसी अनहोनी की आहात होने लगी थी , रिद्धिमा ने अजय का प्यार ठुकराया था, क्या अजय इस बात से भड़क गया होगा …?? नहीं मेरा अजय ऐसा तो नहीं है ..

लेकिन फिर उसे जमुना की याद आयी ..

“वो दोनों अकेले hi गए है ??”

“नहीं वो तुम्हारी जमुना काकी भी तो साथ गयी है , आज कल वो अजय के घर में रहती है , माजरा क्या है “

रानी ने अपने चंचल नैना मटकाये

“कुछ नहीं बस उनसे थोड़ी लड़ाई हो गयी थी , वो छोडो ये बताओ की कब तक आएंगे वो लोग “

“हमें क्या पता , परिमल बोल रहा था की कोई बहुत जरुरी काम है “

“गजराज काका ने कुछ बताया?? “

“नहीं वो तो बस डॉ. साहब की बड़ाई hi करते रहते है , उन्ही के किस्से कहानिया सब .. “रेखा बोल hi रही थी की रानी बोल उठी

“अरे आज तो परिमल ने फ़ोन किया था की डॉ. और उनकी सेक्रेटरी उनके साथ hi यंहा आएंगे , सेक्रेटरी का नाम सुनते hi बापू के चेहरे में एक अजीब सी ख़ुशी आ गयी थी , मैंने अपनी आँखों से देखा “ रानी की बात सुनकर रिद्धिमा का शक और भी गहरा गया ..

वो लोग डॉ. को पकड़ कर क्यों आ रहे है , एक जासूस को अपने साथ लेन का क्या प्रयोजन हो सकता है , मेरा अजय तो ऐसा नहीं करेगा ,मेरे साथ कुछ गलत नहीं करेगा लेकिन ये जमुना ..

ये जमुना जरूर कोई साजिस रच रही होगी , आखिर उसके कारन hi मैं यंहा फंस गयी हु ..

रिद्धिमा के मन में न जाने कितनी बाटे चलने लगी थी

“क्या हुआ रिद्धिमा ऐसे किस सोच में पढ़ गयी “

“सोच रही हु की कही अजय इस डॉ. को मेरी बर्बादी ले लिए तो नहीं ला रहा है “

“मतलब ..अजय भैया ऐसे कैसे कर सकते है ” दोनों बहाने एक साथ चौक गयी

“मतलब साफ है , मेरा जमुना से बहुत झगड़ा हुआ ,हो सकता है ये अजय की नहीं बल्कि उस जमुना की कोई चाल हो , उसे भी तो मुझसे बदला लेना होगा न … और ऐसे भी अजय ने मुझे प्रोपोज़ किया था मैंने मन कर दिया, क्या इसी बात को लेकर जमुना ने उसे भड़काया होगा “

रिद्धिमा की बात सुनकर दोनों बहाने अवाक् रह गयी

“तूने अजय भैया को मन कर दिया , पागल है क्या रे तू ,कितने हैंडसम है वो और अब तो शिकारी भी है , सुना है शिकारी बहुत सेक्सी होते है “रानी रिद्धिमा को छेड़ते हुए बोली

“चुप कर बेशर्म , और मैंने उसी के कारण उसे मन किया वो एक शिकारी है पता नहीं कहा कहा मुँह मरता होगा “

रिद्धिमा चिढ़ाते हुए बोली

“खास मुझे प्रोपोज़ कर लेता “ एक सिसकी सी लेते हुए रानी एक्टिंग करते हुए बोलने लगी , रेखा ने उसे हलकी सी चपत लगाई

“साली भाई बोलती है उन्हें और ऐसे सोच रही है …”

“अरे तो क्या दिन में भैया रत में शैया , सुना नहीं है क्या “ रानी खिलखिलाने लगी वही रिद्धिमा और रेखा दोनों ने उसे मुँह बिगड़ते हुए गुस्से से देखा

“छियई कितनी गन्दी हो गयी है ये “ दोनों एक साथ बोल उठे थे ..

“रिद्धिमा तू सही कह रही है ये हो भी सकता है , क्योकि पिता जी बता रहे थे की डॉ. को कोई छोटे मोठे काम के लिए याद भी नहीं करता जरूर कहानी में कोई ट्विस्ट लाना होगा तभी डॉ. यंहा आ रहे है “

रेखा की बात सुनकर रिद्धिमा सोच में पद गयी ..

“अगर ऐसा है रेखा तो तुम दोनों किसी तरफ रहोगे , अगर अजय मेरे या साहनपुर के खिलाफ कुछ करे तो “

दोनों लड़कियों ने पहले तो एक दूसरे के चेहरे को देखा और फिर रिद्धिमा से जा लिपटी

“पागल है क्या ? हमेशा तेरी तरफ है हम , तू हमारी बेस्ट फ्रेंड है “ दोनों एक साथ बोल उठी …

उनके प्यार को देखकर रिद्धिमा के होठो में मुस्कान तो आ गयी लेकिन वो अभी भी इस सोच में थी की अगर कुछ ऐसा सिचुएशन बनता है तो फिर उसे कैसे हैंडल किया जाए , जंहा एक और अजय गांव की जिम्मेदारियों से बहुत दूर हो चूका था वही उसके विपरीत रिद्धिमा गांव की जिम्मेदारी को अपना कर्तव्य मानती थी, और उसकी सोच भी किसी मुखिया की तरह होने लगी थी …

“क्या सोच रही है तू फिर से ??”

“यही की अगर अजय ने डॉ. चुटिया का उपयोग हमारे खिलाफ किया तो हम क्या करेंगे “

रानी उसकी बात सुनकर जोरो से हंस पड़ी रिद्धिमा उसे न समझने के भाव से देख रही थी

“अरे बहुत सिंपल है रंडी को बुला लो “

“व्हाट ??” रिद्धिमा बुरी तरह से चौकी …

“ये क्या बक रही है तू ..”रिद्धिमा ने थोड़ा चिल्लाते हुए कहा

“ये सही कह रही है रिद्धिमा हमने सुन रखा है की डॉ. चुटिया को अगर कोई मात दे सकता है तो वो है डॉ. रंडी “

“डॉ. रंडी ??? ये कैसा नाम है ??”

“वैसा hi जैसे ये डॉ. चुटिया है मतलब डॉ. चुन्नीलाल तिवारी यरवडावले , वैसे hi डॉ. रंडी है डॉ. रानी नाजिया डिसूजा “

“रानी नाजिया डिसूजा ??? ये कैसा नाम हुआ “ रिद्धिमा बहुत hi कंफ्यूज हो रही थी

“अरे असल में उन्हें उनके 3 मां ने पला है जो की उनकी माँ के मुँह बोले भाई थे, तो तीनो ने अपने हिसाब से नाम रख दिया, अब डॉ. साहिबा को अपने मामाओं से इतना प्यार था की वो सभी नाम का उपयोग करती है …”

“ओह्ह लेकिन ये हमारी मदद करेगी …??” रिद्धिमा ने अपनी शंका जताई

“बिलकुल , पिता जी कह रहे थे की अगर बात डॉ. चुटिया का सामना करने की हो तो ये हमेशा तैयार रहती है .. ऐसे भी तेरे पास भी तो कारन है न की तू इनकी मदद ले , और ये हमारे और तुम्हारे पिता की दोस्त भी थी जब हमारे पिता जी , तुम्हारे पिता जी , अजय के पिता जी और डॉ. चुटिया दोस्त हुआ करते थे … मुझे तो लगता है की तुम्हारी बात सुनकर वो जरूर तुम्हारी मदद करेगी “

रिद्धिमा के चेहरे में थोड़ी रहत के भाव आये

“तो फिर कल hi चलते है इनसे मिलने ……..” रिद्धिमा बोल उठी …

***************************

रिद्धिमा और रेखा रानी एक क्लिनिक के सामने पहुंचे जिसके बोर्ड में लिखा था डॉ. रंडी (M.B.B.S. , M.D.(Gynecology))

बहार कुछ जयदा भीड़ नहीं थी बस एक दो पेशेंट बैठे हुए थे , थोड़ी hi देर में सभी अंदर थे …

“जी बताइये हम आपकी क्या मदद कर सकते है “

एक दूध सी गोरी साड़ी में लिपटी हुई नारी आँखों में चस्मा लगाए वंहा बैठी हुई थी ,एक नजर उठाकर उसने 3no को देखा, आंखे बड़ी बड़ी और बहुत hi आकर्षक थी , उनके बाजु में उनका कोई असिस्टेंट टाइप का आदमी खड़ा था , उसकी भुजाये उसके t-shirt में फड़क रही थी , वो कोई असिस्टेंट काम और बॉडी गुर्द जयदा लग रहा था ..

“मैडम मैं साहनपुर से आयी हु “ रिद्धिमा ने बड़े hi आदर से वंहा बैठते हुए कहा

“साहनपुर से इतनी दूर ??”

“जी मैं तारा सिंह की बेटी हुई , और ये दोनों गजराज जी की बेतिया है “

रिद्धिमा की बात सुनकर जैसे डॉ. साहिबा उछाल पड़ी

“इतने दिनों के बाद , कैसे है वो दोनों , और अगर मेरे पास तुम लोग आये हो मतलब कुछ तो गड़बड़ होगा .. तो सीधा मुद्दे पर आते है बताओ क्या प्रॉब्लम है “

रिद्धिमा ने उसे बताना शुरू किया , किस्सा शुरू हुआ घुघर की मैदान में चल रही उस लड़ाई से और फिर सुलभ का कांड और अजय का शिस्कारि बनना , रिद्धिमा का दर (रिद्धिमा ने चुड़ैल वाली बात को छिपा दिया) , कॉलेज की लड़ाईया और फिर अजय का रिद्धिमा को प्रोपोज़ करना और रिद्धिमा का मन करना , जमुना की किसी बात पर रिद्धिमा से ladai(yanha किस बात पर उसे रिद्धिमा ने छिपा दिया बस ये कहा की उसने मुझे धोखा दिया ) और फिर जमुना का अजय से जा मिलना और फिर अजय का जमुना और परिमल के साथ डॉ. चुटिया के पास चले जाना ….

रिद्धिमा ने अपना दर बताया की हो न हो अजय डॉ. चुटिया की मदद से कुछ तो गड़बड़ करने वाला है , और लगता है की ये सब जमुना का दिमाग होगा ..

डॉ. चुटिया का नाम सुनकर डॉ. रंडी उछाल पड़ी थी

“वो कमीना चुटिया …. साला चुन्नीलाल उसे तो मैं इस बार नहीं छोडूंगी , बड़े गाड़ी निकालो हम आज hi साहनपुर के लिए रवाना होंगे , तुम फ़िक्र मत करो बेटी वो अजय और वो चुटिया दोनों मिलकर भी तुम्हारा और तुम्हारे गांव का कुछ नहीं बिगड़ पाएंगे …”

डॉ. की बात सुनकर रिद्धिमा खुश हो चुकी थी ..

“है इससे मिलो ये मेरा असिस्टेंट है बड़े .. बड़े लैंडवाले “

तीनो लड़किया बुरी तरह से चौकी ..

“लैंडवाले ..??”

रानी चूकते हुए बोली , जिसपर डॉ. हँसाने लगी

“है जब डॉ. चुटिया हो सकते है और उसकी सेक्रेटरी मेरी मार्लो हो सकती है तो लैंडवाले क्यों नहीं , असल में लैंडवाले इनका सुर्नामे है और बड़ेलाल इसका नाम है , तो हम इसे बड़े hi कहते है “

“ोुह्ह्ह्ह” तेनू एक साथ बोली

“बड़े गली निकाल असला बारूद रख ले , इस बार सेल चुटिया को वही भुञ्ज देंगे “

डॉ. बोली लेकिन बड़े जैसे किसी ख्याल में गम था ..

“बड़े , बड़े “

वो बाद दीवाल को hi देख रहा था , डॉ. उठी और उसके गलो में एक जोर का तमाचा मार दिया , वो हड़बड़ाया

“जी मैडम ..”

“सेल तू चुटिया का नाम सुनते hi मार्लो की याद में खो गया , सोच ले अगर तूने उसे नजर उठा कर देखा भी तो “

बड़े के चेहरे में मसयूसी के बदल छ गए थे , वो बस अपने गलो को सहलाता हुआ है में सर हिला रहा था ……….
 
अपडेट 24
4 कार गजराज के घर के पास पचची , 2 नॉएडा से आ रही थी तो 2 डॉ. रंडी को लेकर ..

चारो एक साथ आमने सामने कड़ी हो गई थी , दरवाजा खुला लोग उतरे और सबकी नज़ारे एक दूसरे पर तिकी रह गयी …….

जंहा अजय की आंखे रिद्धिमा को घर रही थी वही रिद्धिमा कभी अजय और जमुना को घर रही थी , जंहा अजय की आँखों में रिद्धिमा के लिए प्रेम hi प्रेम दिख रहा था वही रिद्धिमा के आँखों में मनो सोला जल रहा हो … लेकिन जब वो अजय को देखती तो वो सोला शबनम में परिवर्तित हो जाता ..

वही डॉ. चुटिया की दिल की धड़कने hi जैसे थम सी गयी , सामने उनका बिछड़ा हुआ प्यार था , डॉ. रंडी की आंखे चुटिया को ऐसे घर रही थी मनो वो अभी उन्हें खा जाएँगी…

मार्लो और बड़े लांवाले एक दूसरे को बस घूरे जा रहे थे , मार्लो की आँखों में जंहा शरारत नाच रही थी वही बड़े बस मैरी के चेहरे में खोया हुआ उसे देख रहा था ..

“रंडी … “ डॉ. बांहो को फैलाये हुए डॉ. रंडी की तरफ बढ़ रथे वो दोनों hi नजदीक आ चुके थे तभी ,

“ोोू हुऊ “

डॉ. रंडी ने अपने शरीर को पूरा घुमाया और एक पेअर उठाकर सीधे डॉ. चुटिया के गाल में दे मारा ..

डॉ. एक hi वॉर में चीत्त वो ऐसे निचे गिरे जैसे कोई पुतले के धकेल दिया गया हो ..

अजय दौड़ता हुआ आकर उन्हें सम्हालता है … डॉ. रंडी अजय को देखते हुए बोली

“सुन लड़के जब ये चुटिया जगे तो इसे समझा देना की तुम सब मिलकर रिद्धिमा का बाल भी बांका नहीं कर सकते अब मैं आ गयी हु ,और अब जंग शुरू हो चुकी है …”

अजय को उसकी कोई भी बात समझ नहीं आयी , लेकिन बिना देरी किये डॉ. रंडी रानी और रेखा की और मुद गयी

“हम गजराज से मिलकर तुरंत यंहा से निकल जायेंगे ,चलो ..”

वो थोड़ा आगे बढ़ी थी लेकिन बड़े अभी भी वही खड़ा था , डॉ. ने उसे घुरा और उसके सामने आकर एक जोरदार तमाचा उसके गलो में दे मारा ..

“सेल उसने तुझे न जाने कितने बार चुटिया बनाया है लेकिन तेरे छूट का भूत अभी तक नहीं उतरा “

रंडी की आवाज सुनकर बड़े थोड़े होश में आया और सर गड़ाए चुपचाप उसके पीछे जाने लगा …

*************

“कहा गयी वो “

तब डॉ. चुटिया एक बिस्टेर में लेते थे , वो हड़बड़ा कर उठा ..

“वो कौन थी डॉ. और आपकी क्या लगती है ??”

परिमल के सवाल पर डॉ. का चेहरा hi उतर गया

“कैसे बताऊ मैं तुम्हे की वो मेरे लिए क्या है ,

वो मेरे लिए बहार है , खुमार है , मेरा पहला प्यार है , जैसे नीबू का आचार है …

वो गीत है , मनमीत है , संगीत है , मेरी प्रीत है ,

मैं भूल जाऊ कैसे उसे वो आरजू ,वो खवाहिश है, वो चाहत है , वो मन्नत है , वो फ्री की दावत है ..

वो रूह की ताजगी , मेरी आवारगी , बेताबी, खवाब , सपना , …”

“वो रंडी है “मैरी बोली और हलके से हँसाने लगी , उसकी हंसी से जैसे डॉ. अपने खवाब से बहार आये ..

“छी छी मैरी ये कैसी बाटे कर रही हो तुम , मेरी रंडी के लिए ऐसे गलत शब्दों का प्रयोग मत करो “

“डॉ. रंडी को रंडी न बोलू तो क्या बोलू” मर्री थोड़े गुस्से में बोली

“मर्री खबरदार जो मेरी रंडी को तुमने रंडी कहा तो … मेरी रंडी तो बहुत hi प्यारी है “

उनकी बात सुनकर मैं और परिमल जंहा एक दूसरे का मुँह देख रहे थे वही पास कड़ी हुई रेखा और रानी हलके हलके हंस रहे थे ..

“तुम लोग क्या हंस रहे हो , और डॉ. साहब ये क्या बोल रहे हो आप , देख नहीं रहे सामने मेरी दो जवान बहाने कड़ी है “परिमल थोड़े गुस्से में आ गया .. डॉ. ने हम सबको देखा

“ओह्ह सॉरी लेकिन तुम जैसा सोच रहे हो वैसा कुछ नहीं है , जैसे मैं चुटिया हु लेकिन चुटिया नहीं हु वैसे hi वो रंडी है लेकिन रंडी नहीं है …”

मैं और परिमल इस पहेली में बुरी तरह से उलझ गए थे और एक दूसरे का चेहरा hi देख रहे थे ..

“अरे यार जैसे मैं चुटिया हु ठीक है न लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं की मैं चुटिया हु , मैं चुटिया नहीं हु , वैसे hi वो रंडी है लेकिन रंडी नहीं है .. वो कोई रंडी नहीं लेकिन इस चूतिये का प्यार मेरी रंडी है “

“डॉ. बऊरा गए हो क्या उसकी मार खा कर क्या बाके जा रहे हो “

डॉ. की बात सुनकर मेरा भी माथा गरम हो गया था , इन सबके बिच गजराज जोरो से हंस पड़ा ..

“डॉ. तुम तो रहने hi दो ,मैं समझाता हु , राणा साहब ठीक hi कहते थे तुम रंडी प्रेमी चुटिया हो …” गजराज हँसाने लगा

“कौन राणा साहब “ मेरे और परिमल के मुँह से एक साथ निकल गया

“अरे है एक हमारे मित्र वो छोडो , असल बात ये है की जैसे डॉ. चुन्नीलाल तिवारी यरवदा वाले का शार्ट नाम डॉ. चुटिया है वैसे hi डॉ. रानी नाजिया डिसूजा को शार्ट में डॉ. रंडी कहा जाता है :डी”

“ओह्ह्ह लेकिन वो इनसे इतने गुस्से में क्यों मिली “ परिमल के सवाल पर डॉ. के चेहरे का रंग hi उड़ने लगा था ..

“उसे लगता था की डॉ. ने उसे धोखा दिया है , अपने hi दोस्त की बीबी के साथ अफेयर करके “ मैरी बोल पड़ी

“अरे तो समझाना था न उसे “ मुझे इस स्टोरी में इंट्रेस्ट जाग रहा था

“अरे ये तो उनके प्यार में इतने दीवाने थे की उसके सामने इनका मुँह hi नहीं खुलता था , और मेरा अफेयर तो मेरे बड़े लैंडवाले के साथ था , उस रंडी ने पूरा इल्जाम डॉ. के ऊपर लगा दिया जबकि ये मेरे पिता सामान hai,ha कभी कभी कुछ हो गया था हमारे बिच लेकिन वो बस कासुअल hi था बस थोड़ा मोड़ा सेक्स वगैरह टाइप बाकि डॉ. मेरे पिता सामान hi है ,और उस रंडी ने खुद मेरे बड़े लैंडवाले को मुझसे दूर कर दिया ..”

मर्री की बात सुनकर परिमल का गुस्सा सातवे आसमान पर चढ़ गया ..

“तुम दोनों क्या दन्त दिखा रही हो यंहा खड़े होकर चलो अंदर जाओ , और आप लोग को क्या बात करने की तमीज नहीं है दो जवान लड़की यंहा कड़ी है और आप लोग …”

“भैया हम उस बड़े लैंडवाले को जानते है ये वो है जो डॉ. रंडी के साथ आया है “

रानी ने हसते हुए कहा लेकिन इससे परिमल का गुस्सा और भी बढ़ गया .. गजराज ने उसे शांत किया

“कोई बात नहीं बीटा ये तो बस उसका नाम ले रही है , उसका नाम है बड़े और लैंडवाले उसका सुर्नामे है “

“ये कैसे कैसे नाम रख लेते है लोग, चलो यंहा से इन लोगो को बात करने दो “परिमल झल्ला गया था अपनी बहनो के साथ घर में घुस गया ..

वही डॉ. मुझे देखने लगे

“बीटा तुम्हारा तो काम अब भूल जाओ , जब तब नाजिया यंहा पर है तुम्हारा काम तो होने से रहा “

“डॉ. साहब कौन सा काम “

इस बार गजराज आश्चर्य में था

“इसे रिद्धिमा चाहिए , लेकिन डॉ. रंडी के रहते ऐसा तो हो नहीं पायेगा वो तो मेरे खून की प्यासी है , अब मुझे भी यहाँ से निकल लेना चाहिए “

डॉ. ने मायूसी से कहा, इस पर गजराज मुस्कुराया ..

“अरे इतनी सी बात मैं रिद्धिमा से बात करू लूंगा उसमे क्या है , और ये तो बड़ी अच्छी बात है की तुम दोनों ने एक दूसरे को पसंद किया, तुम्हारे पिता भी यही चाहते थे की तुम दोनों की शादी हो तो दोनों गांव की दुश्मनी ख़त्म हो जायेगी ,बस इससे पहले तुम दोनों को अपनी गद्दी सम्हालना होगा ताकि तुम्हारी शादी पर कोई सवाल न उठा सके , अब मुखिया hi एक दूसरे के होंगे तो फिर गांव तो अपने आप hi साथ हो जायेगा न “

गजराज के चढ़े में चमक आ गयी ..

“अगर इतना hi आसान होता गजराज तो मैं यंहा नहीं होता .”

इससे पहले डॉ. कुछ और बोलते मैं डॉ. के सामने खड़ा हो गया

“डॉ. साहब आपने मुझे वचन दिया है की आप मेरी और रिद्धिमा की सेटिंग करवाओगे तो बस अपना वडा आपको अब पूरा करना hi पड़ेगा मैं आपको कही जाने नहीं दूंगा ..”

“यार मुँह तो तोड़ दिया है उसने अब क्या जान लेकर hi मानोगे मेरी “

“अरे डॉ. साहब आप कब से डरने लगे , बड़े बड़े अपराधियों से अपने पन्गा लिया है , नेताओ की सत्ता गिरायी है , कई समुग्गलेरस को पकड़वाया है , ये तो छोटा सा काम है आपके लिए “

गजराज ने डॉ. की तारीफ में कसीदे पढ़ दिए लेकिन डॉ. के चेहरे में भाव अब भी नहीं बदले ..

“ये सब डॉ. रंडी के सामने जीरो थे गजराज , उसने जंग का ऐलान कर दिया है मतलब की समझो जंग तो होगी hi …”

**********

डॉ. और मर्री मेरे hi घर पर ठहरे थे , रात में मैंने जमुना और मर्री दोनों की एक साथ ले ली …. :lol1:

मेरे लिए अब इस घर में 4 जुगाड़ हो गए थे , मैं खुश था लेकिन डॉ. की बातो से थोड़ा डरा हुआ भी था जब डॉ. किसी को खतरनाक कह रहे है तो उसमे कोई बात तो होगी hi … मतलब जंग शुरू हो चुकी है , लेकिन कैसे ???

सुबह ब्रेकफास्ट के समय हमारे लोकल टीवी में चल रहे न्यूज़ से मेरे पुरे परिवारों के साथ साथ डॉ. के भी होश उड़ गए ..

“3 मर्डर के आरोपी और उम्र कैद की सजा काट रहे सुलभ सींग बादलखेड़ा सेंट्रल जेल से फरार ……”

हम सभी बस एक दूसरे का चेहरा देख रहे थे ……..

 
Back
Top